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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 January 2022

Published 05 January 2022

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2022-01-05.1
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार }kjk प्रकाशित

भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-7 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 8-8 पूरक

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पूरक-क 9-20

2 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

27 दिसम्बर 2021

सं0 6/गो0-34-05/2016-2627--वाणिज्य-कर विभाग के राज्य-कर सहायक आयुक्त कोटि के निम्नलिखित पदाधिकारियों को उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-6 में अंकित पद एवं स्थान पर अगले आदेष तक प्रतिनियुक्त किया जाता है :-

क्र0 स 0 ं पदाधिकारी का नाम ब ैच गृह जिला पदस्थापित कार्यालय का नाम प तिनियुक्ति कार्यालय ्र का नाम
1 2 3 4 5 6
1 श्री उमापति नारायण, राज्य-कर सहायक आयुक्त 53वीं0-55वीं0 रोहतास सहरसा अंचल अंकेक्षण पूर्णियॉ प ्रमंडल, पूर्णियॉ।
2 श्री ज्ञानदेव प्रभाकर, राज्य-कर सहायक आयुक्त 53वीं0-55वीं0 पटना भागलपुर अंचल अंकेक्षण भागलपुर प ्रमंडल, भागलपुर।
3 कुमारी अनु सोनी, राज्य-कर सहायक आयुक्त 56वीं0-59वीं0 सीवान सारण अंचल अंकेक्षण सारण प्रमंडल, छपरा।
4 श्रीमती रंजना कुमारी वर्मा, राज्य-कर सहायक आयुक्त 56वीं0-59वीं0 नालन्दा नवादा अंचल अंकेक्षण मगध प्रमंडल, गया।

2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरूण कुमार मिश्रा, विशेष सचिव।

------ कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ------ अधिसूचना 23 दिसम्बर 2021

सं0 3/वि.04-01/2021-1000--श्रीमती बन्दना प्रेयषी, भा0प्र0से0, सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग को, श्री दिनेष सिंह बिष्ट, भा0पु0से0, महानिदेषक, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की सेवा निवृति के फलस्वरूप रिक्त पद पर अपने कार्यों के अतिरिक्त महानिदेषक, बिहार खेल राज्य प्राधिकरण के कार्यों का अगले आदेष तक संपादित करने के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-19/एस.9-01/89-353, दिनांक-05.05.2005 के आलोक में प्राधिकृत किया जाता है। यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, मो0 तारिक इकबाल, संयुक्त सचिव।

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शिक्षा विभाग

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अधिसूचना

21 नवम्बर 2021

सं0 3/आ02-02/2014-631--श्री मनोज कुमार वर्मा, तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, (योजना एवं लेखा) बेगुसराय, सम्प्रति वरीय कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड, पटना को बेगुसराय जिलान्तर्गत योजना एवं लेखा, शाखा, कार्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी, बेगुसराय से अवैध निकासी एवं गबन संबंधी आरोप में अधिसूचना संख्या-84 दिनांक 13.02.2014 द्वारा तत्कालीन प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही के अधीन किया3 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 गया तथा संकल्प सं0-227 दिनांक 25.04.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। अधिसूचना सं0-467 दिनांक 31.07.2019 द्वारा श्री वर्मा को निलंबन मुक्त किया गया। 2. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर प्रमाणित आरोपों के लिए श्री वर्मा से कारण पृच्छा की मांग की गयी। 3. श्री वर्मा द्वारा इसी मामले में माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका सी0डब्ल्यू0जे0सी0-22410/2018 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक-08.07.2019 को आदेश का कार्यान्वयन बिन्दु निम्नवत्‌ हैः- ".............Considering the aforesaid, keeping the patitioner under suspension is abuse of the power. In the peculiar facts of this case, the Court is constrained ot allow the writ application. The order of suspension dated 13-02-2014, contained in Annexure 4 is, accordingly Quashed. The respondents are directed to take final decision on the enquiry report within a period of one month from today. Failing which, the departmental proceeding shall also come to an end and thereafter the petitioner shall be entitled to all consequential benefuts as if there was no deoartmental proceeding against him. With the aforesaid, the present writ petition is disposed of." श्री वर्मा से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षारोपरान्त वस्तुस्थिति से बिहार लोकसेवा आयोग को अवगत कराते हुए दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श/सहमति की मॉग पत्रांक-466 दिनांक 31.07.2019 द्वारा की गयी। सचिव बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1840 दिनांक 30.10.2019 द्वारा परामर्श उपलब्ध कराया गया। 4. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श एवं सी0डब्ल्यू0जे0सी0 सं0-22410/2018 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक 08.07.2019 को पारित आदेश के समीक्षोपरान्त श्री वर्मा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशील कुमार, निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव।

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अधिसूचनाएं

17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी1-02/2013 खण्ड-II गृ0आ0-10271--डॉ0 अभिनव कुमार, भा0पु0से0 (TN:2009), पुलिस अधीक्षक, सिवान की बिहार राज्य में उनकी अंतः संवर्गीय प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के फलस्वरूप उन्हें अपने पैतृक संवर्ग (तमिलनाडु राज्य संवर्ग) में योगदान हेतु विरमित करते हुए उनकी सेवाएँ तमिलनाडु राज्य संवर्ग को सौंपी जाती है। 2. डॉ0 अभिनव कुमार अपने पैतृक संवर्ग (तमिलनाडु राज्य संवर्ग) में अपना योगदान समर्पित कर योगदान प्रतिवेदन की एक प्रति इस विभाग को प्रस्तुत करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी1-02/2013 खण्ड-II गृ0आ0-10272--श्री शैलेश कुमार सिन्हा, भा0पु0से0 (2012), पुलिस अधीक्षक (डी0), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक पुलिस अधीक्षक, सिवान के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।4 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-01/2020 गृ0आ0-10273--श्री अमरेन्द्र कुमार अम्बेदकर, भा0पु0से0 (1992) को अपर पुलिस महानिदेशक कोटि से पुलिस महानिदेशक कोटि [वेतन संरचना का वेतन स्तर-16 (रू0 2,05,400 - 2,24,400/-)] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है।

2. श्री अम्बेदकर को उक्त प्रोन्नति दिनांक 01.01.2022 अथवा प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन की अधिसूचना निर्गत होने के पश्चात्‌ प्रभार ग्रहण करने की तिथि, जो बाद में हो, से देय होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-01/2020 गृ0आ0-10274--भारतीय पुलिस सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 के नियम 8(5) के आलोक में सम्प्रति केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित निम्नांकित भा0पु0से0 के पदाधिकारियों को अपर पुलिस महानिदेशक कोटि से पुलिस महानिदेशक कोटि [वेतन संरचना का वेतन स्तर-16 (रू0 2,05,400 - 2,24,400/-)] में प्रोफार्मा प्रोन्नति प्रदान की जाती है :-

क्र0 पदाधिकारी का नाम/बैच
1 2
1. श्री प्रवीण वशिष्ट, भा0पु0से0 (1991)
2. श्रीमती प्रीता वर्मा, भा0पु0से0 (1991)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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20 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-01/2020 गृ0आ0-10325--केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित श्री प्रवीण वशिष्ट, भा0पु0से0 (1991) एवं श्रीमती प्रीता वर्मा, भा0पु0से0 (1991) को अपर पुलिस महानिदेशक कोटि से पुलिस महानिदेशक कोटि (वेतन स्तर-16) में प्रोफार्मा प्रोन्नति हेतु विभागीय अधिसूचना संख्या-10274 दिनांक 17.12.2021 निर्गत की गयी है।

2. उक्त अधिसूचना द्वारा प्रदा प्रोफार्मा प्रोन्नति भा0पु0से0 (वेतन) नियमावली, 2016 के नियम 8(6) के आलोक में उनके कनीय पदाधिकारी द्वारा उक्त ग्रेड में प्रोन्नति के फलस्वरूप प्रभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-04/2019 गृ0आ0-10277--भारतीय पुलिस सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को पुलिस उप-महानिरीक्षक कोटि से पुलिस महानिरीक्षक कोटि वेतनमान [वेतन संरचना का वेतन स्तर-14 (रू0 1,44,200- 2,18,200/-)] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है :-

क्र0सं0 पदाधिकारी का नाम आवंटित बैच
1 2 3
1. श्री विनय कुमार 2004
2. श्री प्राणतोष कुमार दास 2004
3. श्री पंकज सिन्हा 2004
4. श्री ललन मोहन प्रसाद 2004
5. श्री जितेन्द्र मिश्रा 2004

2. पदाधिकारियों को उक्त प्रोन्नति दिनांक 01.01.2022 अथवा प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन की अधिसूचना निर्गत होने के पश्चात्‌ प्रभार ग्रहण करने की तिथि, जो बाद में हो, से देय होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-05/2019 गृ0आ0-10279--श्री विवेकानन्द, भा0पु0से0 (2008) को दिनांक 01.01.2021 के प्रभाव से भारतीय पुलिस सेवा की कनीय प्रशासनिक कोटि से प्रवर कोटि वेतनमान [वेतन संरचना का वेतन स्तर-13 (रू0 1,23,100 - 2,15,900/-) ] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है।5 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 2. इस प्रोन्नति के फलस्वरूप श्री विवेकानन्द का वर्तमान पदस्थापन प्रभावित नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-05/2019 गृ0आ0-10280--भारतीय पुलिस सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को कॉलम-4 में अंकित तिथि से कनीय प्रशासनिक कोटि से प्रवर कोटि वेतनमान [वेतन संरचना का वेतन स्तर-13 (रू0 1,23,100 - 2,15,900/-)] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है :-

क्र0 पदाधिकारी का नाम आवंटित बैच प्रोन्नति का प्रभाव
1 2 3 4
1. श्री नवीन चन्द्र झा 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
2. श्री बाबू राम 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
3. श्री जयंत कांत 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
4. श्री मानवजीत सिंह ढ़िल्लों 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
5. श्रीमती हरप्रीत कौर 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
6. श्री मो0 अब्दुल्लाह 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से
7. श्री बिनोद कुमार 2009 दिनांक 01.01.2022 के प्रभाव से

2. इस प्रोन्नति के फलस्वरूप किसी भी पदाधिकारी का वर्तमान पदस्थापन प्रभावित नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-06/2019गृ0आ0-10278--भारतीय पुलिस सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को प्रवर कोटि से पुलिस उप-महानिरीक्षक कोटि वेतनमान [वेतन संरचना का वेतन स्तर-13 ए (रू0 1,31,100 - 2,16,600/-)] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है :-

क्र0 पदाधिकारी का नाम बैच आवंटन वर्ष
1 2 3
1. श्री सुनील कुमार 2004
2. श्री उपेन्द्र कुमार शर्मा 2008
3. श्री सत्य वीर सिंह 2008
4. श्री विकास बर्मन 2008
5. श्रीमती निताशा गुड़िया 2008
6. श्रीमती किम 2008
7. श्री मनोज कुमार 2008
8. श्री संजय कुमार 2008
9. श्री विकास कुमार 2008
10. श्री दिलीप कुमार मिश्रा 2008
11. श्री अश्विनी कुमार 2008
12. श्री अमजद अली 2008
13. श्री अरविन्द ठाकुर 2008

2. क्रमांक-01 पर अंकित पदाधिकारी को उक्त प्रोन्नति प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन की अधिसूचना निर्गत होने के पश्चात्‌ प्रभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगी। शेष पदाधिकारियों को यह प्रोन्नति दिनांक 01.01.2022 अथवा प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन की अधिसूचना निर्गत होने के पश्चात्‌ प्रभार ग्रहण करने की तिथि, जो बाद में हो, से देय होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-07/2019 गृ0आ0-10275--भारतीय पुलिस सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को पुलिस महानिरीक्षक कोटि से अपर पुलिस महानिदेशक कोटि वेतनमान [Pay Level-15 in the Pay Matrix (रू0 1,82,200 - 2,24,100/-)] में प्रोन्नति प्रदान की जाती है :-

6 बिहार गजट, 5 tuojh 2022
क्र0 पदाधिकारी का नाम बैच आवंटन वर्ष
1 2 3
1. श्री अजिताभ कुमार 1997
2. श्री संजय सिंह 1997

के पश्चात्‌ प्रभार ग्रहण करने की तिथि, जो बाद में हो, से देय होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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17 दिसम्बर 2021

सं0 1/पी04-07/2019 गृ0आ0-10276--भारतीय पुलिस सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 के नियम 8(5) के आलोक में सम्प्रति केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित श्री ओ0एन0 भाष्कर, भा0पु0से0 (1997) को पुलिस महानिरीक्षक कोटि से अपर पुलिस महानिदेशक कोटि वेतनमान [Pay Level-15 in the Pay Matrix (रू0 1,82,200 - 2,24,100/-)] में प्रोफार्मा प्रोन्नति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।

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(cid:356)ामीण कवािस कवभाग

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अकधसूचना

20 दिसम्बर 2021

सं0 (cid:356)ा0वि0-14(सा0)सि0-04/2020-673369--(cid:373)ी अशोक कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, बड़ह(cid:303)रया, सिवान सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, ं ठपुर (गोपालगंज) के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)भारी बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, बड़ह(cid:303)रया (सिवान) के पद पर बैकु रहते (cid:352)ये मई, 2019 म(cid:336) टी0एच0आर0/एच0सी0एम0 वितरण नही ं करने के आरोप म(cid:336) समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के प(cid:361)ांक-2369 दिनांक-22.06.2021 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त है ।

समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ी कु मार का स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया जिसम(cid:336) उनके (cid:554)ारा स्पष्ट किया गया है कि आई0सी0डी0एस0 निदे शालय (cid:554)ारा विलंब से आवंटन उपलब्ध कराने एवं उसकी ससमय जानकारी बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी काया(cid:330)लय को नही ं दिये जाने के कारण माह मई, 2019 म(cid:336) टी0एच0आर0/एच0सी0एम0 वितरण नही ं हो सका ।

समाज कल्याण विभाग (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप एवं आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गई । समीक्षोपरान्त पाया गया कि (cid:373)ी कु मार के (cid:554)ारा काय(cid:330) म(cid:336) थोड़ी लापरवाही बरती गयी है ।

अतएव सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी अशोक कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास ं ठपुर (गोपालगंज) (cid:554)ारा कर्तव्य प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, बड़ह(cid:303)रया, सिवान सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बैकु म(cid:336) बरती गई उक्त लापरवाही के लिए इन्हें 'चेतावनी' का दं ड अधिरोपित किया जाता है।

उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।

------ गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------ अधिसूचना 22 दिसम्बर 2021 सं0 7/सी0सी0ए0-1024/2001(खंड-II)गृ0आ0-10441--बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1981 (7/81) के अध्याय-2 की धारा-12 (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल, राज्य के सभी जिला दण्डाधिकारियों को उपर्युक्त अधिनियम की धारा-12 (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का अपने जिला के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के एतद्‌ विषयक अधिसूचना संख्या-7004, दिनांक 13.09.2021 के क्रम में अगले तीन महीनों के7 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 लिए अर्थात दिनांक 01.01.2022 से 31.03.2022 (एक जनवरी दो हजार बाईस से एकतीस मार्च दो हजार बाईस) तक प्रयोग करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग

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अधिसूचना

18 दिसम्बर 2021

सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-108/2021-4986--श्री मणिरंजन, जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर के विरूद्ध अप्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में विषेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना द्वारा विषेष निगरानी इकाई कांड संख्या-06/2021 धारा-13 (1) (B) r/w 13 (2) r/w 12 पी0सी0 एक्ट 1988 एवं I.P.C.की धारा-120(B) के अधीन दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। अतएव श्री मणिरंजन, जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 (1)(ग) के अधीन तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री मणिरंजन का मुख्यालय जिला अवर निबंधन कार्यालय, कैमूर निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री मणिरंजन को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के तहत्‌ अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता भुगतेय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजय कुमार सिंह, अवर सचिव।

------- जल संसाधन विभाग ------- आवश्यक सूचना 23 दिसम्बर 2021 विषय- पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य हेतु रब्बी सिंचाई 2021-22 के दौरान नहरों में जलश्राव बंद रखने के संबंध में । सं0 सिं0 को0-01/2001 पार्ट-IV-354--मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान के परिक्षेत्राधीन पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली के पुनस्र्थापन कार्य हेतु नहरों मेंरब्बी सिंचाई 2021-22 के दौरान जलापूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया गया है ।

अतः सारण मुख्य नहर एवं इससे निःसृत नहर प्रणालियों के कमाण्ड क्षेत्र के कृषकों को सूचित किया जाता है कि रब्बी सिंचाई 2021-22 के दौरान इन नहरों में जलापूर्ति नहीं की जा सकेगी। उनसे अनुरोध है कि उक्त अवधि में रब्बी सिंचाई हेतु वैकल्पिक व्यवस्था से पटवन करने का कष्ट करेंगे। उपरोक्त कार्य में किसानों का भरपूर सहयोग प्रार्थित है ।

आदेश से, अरूण कुमार द्विवेदी, संयुक्त सचिव (अभियंत्रण)। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 38—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in8 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————

सूचना -----

No. 1268--I Tarun Kumar Paul, Father- Late Janki Nath Paul, Resident- Salimpur Ahra, Dwarika Nath Lane, Gali No.-3, Kadamkuan Post- Kadamkuan P.S- Gandhi Maidan, Distt- Patna (Bihar), Affidavit No.- 344/27.11.2021 Declares That Sourabh Paul is my son & his Father's name is Mentioned wrong which is Tarun Paul is 10th and 12th Mark sheet/ Certificate, but Correct Name is Tarun Kumar Paul. After this Affidavit, I Shall always known as Tarun Kumar Paul.

Tarun Kumar Paul.

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No. 1267--I, Anupama Kumar W/o Abhishek Kumar R/o Flat No.-204, Karpura Pratibha Palace, Road No.-2 Nehrunagar, Patna-13 do hereby solemnly affirm and declare that Anupama Kumar, Anupama and Anupama Chaurasia are all three name same and only one person. now I will be known as Anupama Kumar in every where. Affid. No. 518 Dt: 18.10.2021.

Anupama Kumar.

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No. 01--I, JUHI D/O Birendra Kumar R/o 402 Sarvadaya Kamla Apt., 32 A.N. Path North S.K.Puri, Patna declare vide aff.no. 16262 dtd. 04.10.21 from that I will be known as Juhi Trehaan.

JUHI.

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सं0 02--मैं, बिनोद कुमार, पुत्र स्व0 अशोक ठाकुर, निवास-ग्रा0पो0-सिरियापुर, वायाः-खिरहर, थाना-बासोपट्‌टी, जिला-मधुबनी। शपथ पत्र संख्या- 19196, दिनांक- 13.12.2021 द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि अब मैं बिनोद कुमार ठाकुर के नाम से जाना एवं पहचाना जाऊँगा।

बिनोद कुमार। No. 02--I, Binod Kumar, S/o Late Ashok Thakur, R/o Vill+P.O.- Siriyapur, Via- Khirhar, P.S. Basopatti, Dist.- Madhubani vide Affidavit No. 19196, Dt. 13-12-2021, I will be known as Binod Kumar Thakur.

Binod Kumar.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 38—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in9 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी }kjk प्रकाशित

—————

सं0 8/आ0 (राज0उ0)-02-06/2021-5246 मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ------ संकल्प 29 दिसम्बर 2021 श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, पूर्णियाँ सम्प्रति दरभंगा के विरूद्ध जिला पदाधिकारी एवं समाहर्त्ता, पूर्णियाँ से प्राप्त अनुशंसा एवं अनुमंडल पदाधिकारी, बायसी द्वारा पुलिस अधीक्ष्ज्ञक पूर्णियाँ को समर्पित प्रतिवेदन के आलोक में दालकोला चेकपोस्ट पर शराब के साथ पकड़े गये आरोपी से रूपये लेन-देन कर उन्हें छोड़ने, कार्य के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं मनमानी पूर्ण रवैया तथा मद्य निषेध नीति एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3(1) के उल्लंघन आदि आरोप विनिर्दिष्ट है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है। उक्त विनिर्दिष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु संकल्प सं0-4974 दिनांक-18.12.2021 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी एवं प्रशाखा पदाधिकारी 8 ए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया था।

2. उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय जाँच आयुक्त से वापस लिया जाता है तथा उपायुक्त मद्य निषेध (आ0भ0) को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

3. श्री प्रकाश के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8ए, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4. श्री प्रकाश से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेश-आदेश दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप पत्र के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

------- सं0 प्र0-01-रा0(आ0)-02/2021-3971 खान एवं भूतत्व विभाग ------ संकल्प 28 दिसम्बर 2021 गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना के पत्रांक 3966 दिनांक 09.07.2021 से प्राप्त आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक 184/गो0 दिनांक 09.07.2021) के अनुसार श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक निदेशक, मुख्यालय (सम्प्रति निलंबित) के विरूद्ध अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर बालू के अवैध उत्खनन/परिवहन में संलग्न लोगों को मदद पहुँचाने एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त पाये गये हैं। इसके अतिरिक्त पत्रांक 363 दिनांक 05.02.2021 से आदेशित 'K' अनुज्ञप्ति के लंबित आवेदनों के ससमय निष्पादन हेतु उनके द्वारा भी अनुश्रवण नहीं किया गया।

2. आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के जाँच प्रतिवेदन तथा 'K' अनुज्ञप्ति के लंबित आवेदनों के ससमय निष्पादन हेतु अनुश्रवण नहीं करने के आलोक में श्री संजय कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक10 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 3234 दिनांक 28.10.2021 से लिखित अभिकथन की माँग की गई। श्री संजय कुमार द्वारा दिनांक 09.11.2021 को अपना लिखित अभिकथन उपलब्ध कराया गया। 3. उनके लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि आर्थिक अपराध इकाई द्वारा मोबाइल नम्बरों का अनुश्रवण/सी0डी0आर0 विश्लेषण, स्थानीय एवं स्थलीय जाँच तथा आसूचना के आधार पर श्री कुमार के अवैध उत्खनन/ परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों को मदद पहुँचाने एवं स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त रहने का साक्ष्य पाया गया है। इसके अतिरिक्त श्री कुमार द्वारा पत्रांक 363 दिनांक 05.02.2021 से आदेशित 'K' अनुज्ञप्ति के लंबित आवेदनों के ससमय निष्पादन हेतु अनुश्रवण भी नहीं किया गया। अतः श्री कुमार का स्पष्टीकरण स्वीकार करने योग्य नहीं पाया गया।

4. अतएव श्री कुमार का स्पष्टीकरण अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वगीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) के प्रावधानों के तहत आरोपों की वृहद जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना तथा प्रस्तुतीकरण/उपस्थापन पदाधिकारी, उप सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग होंगे।

5. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपना बचाव/पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखेंगे एवं जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

चित्रगुप्त कुमार, उप-सचिव।

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सं0 27/आरोप-01-42/2021-सा0प्र0-15055

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

15 दिसम्बर 2021

श्री प्रीतेश्वर प्रसाद, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-655/11, अपर समार्हाा, बक्सर के विरूद्ध लगभग छः माह से स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सा अवकाश को विस्तारित करने एवं स्वास्थ्य जांच हेतु चिकित्सक दल के समक्ष उपस्थित नहीं होने के आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, बक्सर के पत्रांक-01-1071/स्था0, दिनांक-04.06.2021 द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा इस विभाग को उपलब्ध करायी गयी। 2. जिला पदाधिकारी, बक्सर से प्राप्त पत्र की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। अनुमोदित आरोप पत्र संलग्न करते हुए श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-11779 दिनांक-05.10.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक-23.10.2021 से स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। 3. श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री प्रसाद सिविल सर्जन, बक्सर की अध्यक्षता में गठित 'मेडिकल बोर्ड' के समक्ष सूचना प्राप्ति के बाद भी उपस्थित नहीं हुए, जो उनके र्काव्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। अतः सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री प्रीतेश्वर प्रसाद, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-655/11, अपर समार्हाा, बक्सर के स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करने एवं र्काव्य के प्रति लापरवाही बरतने तथा छः माह से अधिक समय से बिना स्वीकृति के अनुपस्थित रहने के लिए उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के अन्तर्गत (क) निन्दन तथा (ख) एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्व रखने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। 5. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रीतेश्वर प्रसाद, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-655/11, अपर समार्हाा, बक्सर के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के अन्तर्गत (क) निन्दन (आरोप वर्ष-2020) तथा (ख) एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्व रखने की शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित की जाती है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।11 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

सं0 27/आरोप-01-93/2021,सा॰प्र॰,--14311

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1 दिसम्बर 2021

श्री मृत्युंजय कुमार, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-266/19), सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई थाना काण्ड संख्या-04/21 दिनांक-25.11.2021, u/s 13(1)(b) r/w 13(2) r/w 12 of PC Act 1988 and 120(B) of IPC के तहत मामला दर्ज होने एवं उक्त काण्ड के अनुसंधान के क्रम में उनके कटिहार, पटना एवं अररिया स्थित आवास की तलाशी करने पर आय से अधिक की सम्पाि बरामद होने की सूचना देते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

उक्त प्रतिवेदन में प्रतिवेदित आरोपों की गम्भीरता के आलोक में सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(1)(क) एवं (ग) में निहित प्रावधानों के तहत श्री मृत्युंजय कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-266/19 को संकल्प निर्गत की तिथि से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।

निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है। इन्हें निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

श्री मृत्युंजय कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की वृहद जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही का आदेश अलग से निर्गत किया जायेगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 27/आरोप-01-47/2020-सा0प्र0--13978

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25 नवम्बर 2021

श्री पवन कुमार मंडल, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1181/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बारसोई (कटिहार) सम्प्रति वरीय उप समाहर्त्ता, समस्तीपुर के विरूद्व सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा आयोजित विडियो कॉफ्रेंस (दिनांक-10.04.2020) में राशन कार्डो के आवेदन पत्रों के स्वीकृति/अस्वीकृति के संबंध में गलत सूचना देने के आरोप के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2554 दिनांक-19.06.2020 द्वारा आरोप पत्र इस विभाग को उपलब्ध कराया गया।

2. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में विभागीय पत्रांक-10578 दिनांक-06.11.2020 द्वारा श्री मंडल से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री मंडल के द्वारा पत्रांक-1238 दिनांक-01.12.2020 से अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री मंडल के स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-805 दिनांक-12.01.2021 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना तथा जिला पदाधिकारी, कटिहार से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा पत्रांक 2717 दिनांक-17.07.2021 से मंतव्य उपलब्ध कराया गया 3. जिला पदाधिकारी द्वारा गठित आरोप पत्र, श्री मंडल के स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री मंडल के स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाये जाने पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। अनुमोदित आरोप पत्र के आलोक में श्री मंडल से विभागीय पत्रांक-11298 दिनांक-27.09.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री मंडल के द्वारा पत्रांक-3003 दिनांक-16.10.2021 से स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

4. श्री मंडल के स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री मंडल द्वारा अपने स्पष्टीकरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विडियों कॉफ्रेंसिंग के दौरान उनके द्वारा सही तथ्यगत स्थिति प्रतिवेदित की गयी थी अथवा नहीं। स्पष्टीकरण समर्पित नहीं करने संबंधी आरोप के संदर्भ में इनका कहना है कि इनके कार्यालय कर्मियों द्वारा इनके समक्ष संबंधित पत्र ससमय उपस्थापित नहीं किये गये। यह कहीं न कहीं अपने कार्यालय पर इनके नियंत्रण के अभाव को दर्शाता है।

अतः श्री पवन कुमार मंडल, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1181/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बारसोई (कटिहार) सम्प्रति वरीय उप समाहर्त्ता, समस्तीपुर के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित के नियम-14 के अन्तर्गत (क) निन्दन तथा (ख) असंचायात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि अवरूद्व रखने की शास्ति देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

5. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री पवन कुमार मंडल, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1181/11, तत्कालीन तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बारसोई (कटिहार) सम्प्रति वरीय उप समाहर्त्ता, समस्तीपुर के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित के नियम-14 के अन्तर्गत (क) निन्दन तथा (ख) असंचायात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि अवरूद्व रखने की शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।12 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 27/आरोप-01-83/2021-सा0प्र0--13595

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18 नवम्बर 2021

श्री प्रमोद कुमार, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 998/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मुंगेर के विरूद्ध स्वेच्छाचारिता, र्काव्यहीनता, लापरवाही, जनहित- निगमहित तथा नियमानुसार कार्य नहीं करने, जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को तंग करने, अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने संबंधी आरोपों के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-7405 दिनांक-14.09.2015 द्वारा विहित प्रपत्र-''क'' में आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया।

2. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप पत्र के आधार पर इस विभाग के स्तर से आरोप गठित कर उसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। तदोपरांत विभागीय पत्रांक-3820 दिनांक-11.03. 2016 द्वारा श्री प्रमोद कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। वांछित स्पष्टीकरण कई स्मारों के बावजूद अप्राप्त रहने पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरांत प्रस्तुत मामले की विस्तृत जांच हेतु बिहार सरकार सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) के प्रावधानों के तहत श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

3. श्री प्रमोद कुमार के विरूद्ध संचालित इस विभागीय कार्यवाही में आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी/उपस्थापन पदाधिकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी होंगे।

4. श्री कुमार से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु संचालन पदाधिकारी के आदेशानुसार उनके समक्ष उपस्थित हाेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।

------- सं0 08/आरोप-01-14/2020,सा॰प्र॰--14078 ------ 26 नवम्बर 2021 श्री शशि भूषण सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-692/08, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मनीगाछी, दरभंगा के विरूद्ध फर्जी अग्रिम दिखाकर सरकारी राशि का गबन करने संबंधित प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4669 दिनांक 25.05.2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी॰ के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही संचालन के पूर्व ही एक अन्य आरोप प्रकरण में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2256 दिनांक 23.03.2009 द्वारा श्री सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्त करा दिया गया था। विभागीय कार्यवाही के क्रम में श्री सिंह द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत एवं विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप वर्ष-1996-97 होने के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही को काल बाधित मानते हुए आदेश-सह-ज्ञापांक-6540 दिनांक 24.04. 2013 द्वारा स्थगित करने का निर्णय इस शर्त्त के साथ लिया गया कि :- ''श्री सिंह द्वारा अपने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एक समादेश याचिका सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-11868/2012 दायर की गयी है, जो माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अतएव माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा उक्त याचिका में न्यायादेश पारित होने तक श्री सिंह के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को स्थगित किया जाता है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा श्री सिंह के अनिवार्य सेवानिवृत्ति संबंधी आदेश के प्रतिकूल आदेश पारित होने पर प्रस्तुत मामले पर विचार किया जा सकेगा।'' अनिवार्य सेवानिवृत्ति संबंधी मामले में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 26.04.2019 को आदेश पारित करते हुए श्री सिंह के अनिवार्य सेवानिवृत्ति संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए नये सिरे से जाँच हेतु मामला उचित प्राधिकार को वापस किया गया। उक्त न्यायादेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9135 दिनांक 09.07.2019 द्वारा श्री सिंह को सेवा में वापस लेते हुए नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित कर संकल्प ज्ञापांक-12772 दिनांक 28.10.2021 द्वारा श्री सिंह के पेंशन से 25 प्रतिशत राशि की कटौती 05 वर्षो तक करने का दंड संसूचित किया गया है। श्री सिंह के विरूद्ध दिनांक 25.03.2009 को संसूचित ''अनिवार्य सेवानिवृत्ति'' का दंड वापस लिये जाने के उपरांत दिनांक 25.03़.2009 से 30.09.2018 तक सेवा में माने जाने तथा वार्द्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि 30.09.2018 होने के फलस्वरूप प्रस्तुत मामले में अग्रेत्तर कार्रवाई के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता का परामर्श प्राप्त किया गया, जिसका मुख्य कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

13 बिहार गजट, 5 tuojh 2022

"Accordingly, in my opinion, the said 2nd departmental proceeding, which was initiated vide redolution dated 25-05-09 at page 62-61/C, would be deemed to have been issued against Sri Singh as if while in service, by virtue of the said Patna High Court order and thus the bar under proviso (a)(ii) would not be attracted. In other words, if the date of retirement of Sri Singh stands altered to 30-09-2018 instead of 25-05-2009, the departmental proceeding so instituted by resolution date 25-05-2009 would obviously be deemed to have been instituted while Sri Singh was in service. Therefore, the bar as prescribed under proviso (a)(ii) does not get attracted as the controlling clause for the application of bar is "if not instituted while the govt. servant was in service." Thus proceeding kept in abeyance can be revived." विधि विभाग से प्राप्त उक्त परामर्श के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-4669 दिनांक 25.05.2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 ''बी॰'' के प्रावधानों के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही, जिसे काल बाधित होने के कारण स्थगित किया गया था, को (तत्समय श्री सिंह को सेवा में मानते हुए) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत तत्कालीन प्रभाव से पुनर्जीवित किया जाता है। साथ ही चूँकि श्री सिंह की वार्द्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि परिवर्तित होकर 30.09.2018 हो गयी है, अतएव उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 ''बी॰'' के प्रावधानों के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना तथा प्रस्तुतीकरण/उपस्थापन पदाधिकारी जिला पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा नामित कोई वरीय पदाधिकारी होगें। श्री सिंह से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।

------- सं0 08/आरोप-01-05/2018,सा॰प्र॰--16258 ------ 21 दिसम्बर 2021 श्री सुशील कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-554/11, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य भंडार निगम, पटना के विरूद्ध सहकारिता विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3238 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गयी। प्राप्त आरोप पत्र मे श्री कुमार के विरूद्ध तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य भंडार निगम, पटना के पदस्थापन अवधि वर्ष 2015 में श्री अजीत कुमार पाण्डेय पर आरोप रहते हुए उन्हें संविदा पर अनियमित रूप से नियोजित करने, संविदा नियमों की अनदेखी करने आदि आरोप प्रतिवेदित किया गया। सहकारिता विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरेाप पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकर के अनुमोदनोंपरात विभागीय पत्रांक-3951 दिनांक 20.03.2019 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार ने अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-05/नि॰प्र॰को॰ दिनांक 09.05.2019) समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-11560 दिनांक 21.08.2019 द्वारा सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की माँग की गयी। सहकारिता विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3810 दिनांक 21.10.2019 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं बताया गया। तदुपरांत सम्यक विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-16322 दिनांक 02.12.2019 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-849 दिनांक 28.10.2021 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों को प्रमाणित नहीं होने संबंधी मंतव्य/निष्कर्ष दिया गया। श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री सुशील कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-554/11, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य भंडार निगम, पटना सम्प्रति निदेशक, भू-अर्जन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।14 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 सं0 08/आरोप-01-86/2017,सा॰प्र॰--15068

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15 दिसम्बर 2021

श्री सुरेश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1369/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई के विरूद्ध दशहरा एवं मुहर्रम, 2017 के अवसर पर विधि व्यवस्था संधारण में लापरवाही बरते जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी, जमुई के पत्रांक-1339 दिनांक 04.11.2017 द्वारा आरोप प्रतिवेदित करते हुए स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया। उक्त क्रम में जिला पदाधिकारी, जमुई से श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र की माँग की गयी, परन्तु स्मारित किये जाने के बावजूद जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहा।

जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहने के फलस्वरूप उनके द्वारा प्रतिवेदित आरोप/अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोंपरांत विभागीय पत्रांक-16142 दिनांक 28. 11.2019 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जिसके क्रम में श्री प्रसाद द्वारा अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-149-2 दिनांक 14.12.2019) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा लगाये गये आरोपों को निराधार बताते हुए आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-966 दिनांक 20.01.2020 द्वारा जिला पदाधिकारी, जमुई से उनके स्पष्टीकरण पर मंतव्य की माँग की गयी। स्मारोपरांत मंतव्य अप्राप्त रहा। श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पत्र एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9673 दिनांक 13.10.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।

आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के पत्रांक-262 दिनांक 09.09.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11672 दिनांक 04.10.2021 द्वारा श्री प्रसाद से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी।

उक्त के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनके द्वारा विस्तृत रूप से स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोपों को निराधार एवं सत्य से परे बताया गया है एवं उल्लेख किया गया है कि दशहरा एवं मुहर्रम के अवसर पर विधि-व्यवस्था में उनके स्तर से कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है।

श्री प्रसाद द्वारा अपने लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन में उन्हीं सारी बातों का उल्लेख किया गया है, जिसका उल्लेख उनके द्वारा स्पष्टीकरण/विभागीय कार्यवाही संचालन के दौरान लिखित अभिकथन में किया गया था। उनके द्वारा कोई ऐसा नया तथ्य नहीं रखा गया है, जिसपर विचार किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि प्रतिवेदित आरोप के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, तथा श्री प्रसाद के लिखित अभिकथन के समीक्षोपरांत ही संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ''दिनांक 30.09.2017 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस में अनुमंडल पदाधिकारी की उपस्थिति के बावजूद घटना घटित होने पर आरोपी पदाधिकारी का वक्तव्य कि 'उक्त स्थल पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी द्वारा किसी भी तरह के तनाव की बात नहीं बतायी गयी थी, घटना स्थल पर पूर्व में किसी प्रकार की घटना घटित नहीं हुई थी, धटना स्वतः स्फूर्त थी', दर्शाता है कि श्री प्रसाद द्वारा कार्य में बरती गयी लापरवाही को छिपाने का प्रयास है। उनकी उपस्थिति में उक्त घटना घटित होना, जुलूस के पूर्व पर्याप्त तैयारी के कमी स्पष्ट परिलक्षित करता है। दिनांक 30.07.2017 की रात्रि में हुई घटना के पश्चात उच्चाधिकारी द्वारा जमुई मुख्यालय में कैम्प किया गया, जिनके दिशा-निर्देश पर विधि-व्यवस्था संधारण संबंधी अग्रेत्तर कार्रवाई की गयी, जबकि समाहरणालय, जमुई द्वारा निर्गत संयुक्तादेश में व्यवस्था का सम्पूर्ण प्रभार अनुमंडल पदाधिकारी को दिया गया था। पर्व के अवसर पर व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी आरोपी पदाधिकारी की थी।

दं॰प्र॰सं॰-116(3) के तहत नोटिस निर्गत करने के बाद सदर थाना क्षेत्र में निरोधात्मक कार्रवाई हेतु 159 व्यक्तियों की सूची में सिर्फ 47 व्यक्तियों के विरूद्ध ही दं॰प्र॰सं॰-116(3) के तहत बंधपत्र दाखिल किया गया। दं॰प्र॰सं॰-107 के तहत निर्गत नोटिस का तामिला शत-प्रतिशत करने के संबंध में दिनांक 20.09.2017 को आयोजित शांति समिति की बैठक में जिला पदाधिकारी, जमुई द्वारा सभी थानाध्यक्ष को निदेशित किया गया, परन्तु श्री प्रसाद द्वारा अपने स्तर से तामिला के लिए थानाध्यक्ष को लिखित में निदेश देने संबंधी कोई प्रमाण नहीं दिया गया, न ही इसकी सूचना लिखित में संबंधित वरीय पदाधिकारी को ही दी गयी। इस तरह इनके कार्यो में लापरवाही स्पष्ट परिलक्षित होती है।

दिनांक 30.09.2017 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान अप्रिय घटना घटित हुई और अगले दिन मुहर्रम पर्व मनाया जाना था, जिसके मद्‌देनजर विधि-व्यवस्था के संबंध में विशेष तैयारी की आवश्यकता थी। यदि आसूचना संकलन कर समय पर तैयारी कर ली जाती तो दिनांक 01.10.2017 एवं 02.10.2017 को मुहर्रम पर्व के दौरान कोई अप्रिय घटना घटित नहीं होती। आरोपी पदाधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार की तैयारी संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है तथा ये कहना है कि वरीय पदाधिकारी के दिशा-निर्देश में विधि-व्यवस्था संधारण किया गया, उनकी उपस्थिति में अपनी जिम्मेवारी से बचने का प्रयास है, जबकि विधि-व्यवस्था संधारण की सारी जिम्मेवारी आरोपी पदाधिकारी के ही थी।

छठ पर्व के अवसर पर खैरा थानान्तर्गत भीमाईन एवं चौकीटाँड़ में दोनों समुदाय के बीच रास्ता संबंधी उत्पन्न विवाद के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का वक्तव्य कि घटना के संबंध में किसी तरह की कोई सूचना प्राप्त नहीं थी, जबकि दुर्गा पूजा एवं मुहर्रम पर्व के अवसर पर अप्रिय घटना घटित हो चुकी थी, फिर भी श्री प्रसाद द्वारा ससमय आसूचना संग्रहण15 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 नहीं कर पाना उनके प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा पर्व-त्यौहार के अवसर पर क्षेत्रीय भ्रमण कर स्थिति पर सतत्‌ निगरानी रखने के लिए आवश्यक पूर्वोपाय नहीं किया जाना, किसी अन्य श्रोत से संभावित घटना की जानकारी प्राप्त होने की आशा रखना, आसूचना संग्रहण के उद्‌देश्य तथा उसकी प्र—ति से अनभिज्ञता दर्शाता है। उपुर्यक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुरेश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1369/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन अस्वीकार करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2017-18) तथा (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।

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सं0 2/अभि0-03-19/2012-सा0प्र0--13139

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3 नवम्बर 2021

श्री डोमन राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1128/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, कटिहार सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना के विरूद्ध मुख्य आरोप है कि उनके न्यायालय में लंबित वाद संख्या-430/2008-09 धारा 48 BT Act के निष्पादन हेतु अपने पेशकार के माध्यम से अपने लिए 50,000/-रू0 की मांग करने एवं आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा जाँचोपरांत दिनांक 24.07.2012 को धावा दल द्वारा श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, पेशकार को रंगे हाथ 6,000/-रू0 घूस की रकम के साथ गिरफ्तार किये जाने तथा श्री श्रीवास्तव से बरामद रूपये के संबंध में पूछे जाने पर 5,000/-रू0 श्री डोमन राम, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के लिए तथा 1,000/-रू0 स्वयं के लिए लेने को स्वीकार किया गया। धावा दल द्वारा पेशकार, श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के पास लंबित वाद संख्या 430/2008-09 धारा 48 BT Act की संचिका बरामद कर जप्त की गयी।

श्री राम को थाना कांड संख्या 08/12 दिनांक 23.07.2012 में प्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया है तथा विधि विभाग के आदेष ज्ञापांक 25 दिनांक 28.12.2012 द्वारा इनके विरूद्ध अभियोजन स्वी—त है। उक्त आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3877 दिनांक 24.03.2014 द्वारा श्री राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3807 दिनांक 31.03.2014 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया।

प्रतिवेदित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से असहमत होते हुए समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम को निलंबन से मुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री डोमन राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1128/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, कटिहार सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/सी0-3-3059/2000 -सा0प्र0--13042

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2 नवम्बर 2021

श्री अवध बिहारी लाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 835/04, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकन्दरा, जमुई सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध योजना संख्या 02/97-98 लोहण्डा ग्राम में सरकारी तालाब की खुदाई एवं योजना संख्या 05/97-98 नैयकी आधार मरम्मति कार्य में अनियमितता बरतने, उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना करने एवं वित्तीय लापरवाही बरतने आदि आरोपों के लिए ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2620/ग्रा0वि0 दिनांक 11.04.2000 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, जमुई के पत्रांक 2195/गो0 दिनांक 06.11.1999 द्वारा गठित प्रपत्र 'क' विभाग को उपलब्ध कराया गया।

उक्त आरोपों के लिए श्री लाल के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4090 दिनांक 15.05.2002 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3705 दिनांक 04.04. 2007 द्वारा श्री लाल को ''निन्दन'' एवं ''तीन वार्षिक वेतन वृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दंड अधिरोपित किया गया।16 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री लाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0सं0 950/2009 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 28.06.2011 को पारित आदेष का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :- "There can be no two opinions that the aforesaid findings are not specific findings of guilt, but the personal opinion of the enquiry officer based on conjectures and surmises. No punishment can be founded upon the same.

In (2002) 10 SCC 351 (STATE OF BIHAR V. LAKSHMI SHANKAR PRASAD) it has been held at paragraph 3 as follows :-

"3. …After the initiation of the fresh proceeding, though an explanation was called for from the delinquent, but the impugned order of punishment indicates that the disciplinary authority has not recorded a finding about the guilt of the delinquent of different charges which were leveled against him as well as the consideration of the explanation given by the delinquent to the charges leveled against. In such circumstances,

the High Court was fully justified in interfering with the order of punishment on a conclusion that the disciplinary authority did not record a finding about the guilt of the delinquent nor has it recorded any reasoning for arriving at such conclusion."

The impugned order dated 4.4.2007 is set aside. The application is allowed." माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के अनुपालन के क्रम में श्री लाल के विरूद्ध संसूचित दंडादेश (विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3705 दिनांक 04.04.2007) को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 19352 दिनांक 20.12.2013 द्वारा निरस्त कर दिया गया एवं श्री लाल के विरूद्ध नये सिरे से साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुर्नजांच कराने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के एतदर्थ विभागीय संकल्प 19350 दिनांक 20.12.2013 द्वारा श्री लाल के विरूद्ध पुनर्जांच/अग्रेतर जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत्‌ संकल्प जारी किया गया।

आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 3330 दिनांक 15.09.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री लाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप संख्या-01 एवं 02 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। श्री लाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री लाल के विरूद्ध आरोप वर्ष 1997-98 का है एवं वे दिनांक 31.01.2008 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। साथ ही संचालन पदाधिकारी द्वारा सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। समीक्षोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री लाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री श्री अवध बिहारी लाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 835/04, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिकन्दरा, जमुई सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को संचिकास्त किया जाता है। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रचना पाटिल, अपर सचिव।

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सं0 2/परि0-06-10/2021-सा0प्र0--14822

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10 दिसम्बर 2021

श्री अखिलेश कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 718/19, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, नवगछिया सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सिमरी बख्तियारपुर, सहरसा के विरूद्ध श्री राज कुमार सर्राफ द्वारा दिनांक 30.07.2021 को परिवाद-पत्र उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री सर्राफ (किरासन तेल हॉलसेलर), नवगछिया से रूपया उधार लेने एवं वापस नहीं करने इत्यादि आरोपों की जाँच जिला पदाधिकारी, भागलपुर के स्तर से गठित त्रि-सदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गयी। जाँच समिति द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि श्री अखिलेश कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, नवगछिया एवं श्री राज कुमार सर्राफ के बीच पूर्व के पदस्थापन वर्ष के समय आपसी संबंध थे एवं दोनों के बीच पैसे के लेन-देन की पुष्टि गवाह श्री मुनेश्वर पासवान, अनुमंडल पदाधिकारी, नवगछिया के वाहन के सरकारी चालक के द्वारा भी की गयी है। जिला पदाधिकारी, भागलपुर के प्रतिवेदन में श्री राज कुमार सर्राफ एवं श्री अखिलेश कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, नवगछिया के बीच विाीय लेन-देन को संदेहास्पद माना गया है।

श्री कुमार के विरूद्ध प्राप्त परिवाद-पत्र एवं साक्ष्यों के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 11155 दिनांक 23.09.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार के पत्रांक 151 दिनांक 18.10.2021 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।17 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध आरोप की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही में आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, भागलपुर द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, भागलपुर से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जाय।

श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-09/2018--10806 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 30 दिसम्बर 2021

श्री सुजीत कुमार झा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध उनके मंडल कारा, कटिहार में पदस्थापन के दौरान दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रषासन, कटिहार द्वारा मंडल कारा, कटिहार में की गई औचक छापेमारी में 11 मोबाईल फोन, 09 मोबाईल चार्जर, 02 पेन ड्राईव, अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, 19,300/- (उन्नीस हजार तीन सौ) रूपये नगद, 500 मि0ली0 विदेषी शराब, लगभग 100 ग्राम गांजा एवं भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी की घटना में बरती गई लापरवाही के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1226 दिनांक 11.02.2019 द्वारा श्री झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्रांक-1247 दिनांक 30.06.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सुजीत कुमार झा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में प्रपत्र 'क' में गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। 3. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ के जांच प्रतिवेदन के साथ संलग्न आदेष फलक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के चतुर्थ भाग में अंकित गवाहों/साक्षियों की गवाही/परीक्षण-प्रतिपरीक्षण कराये जाने का जिक्र नहीं रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(1) के प्रावधान के तहत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन में प्रक्रिया की पूर्णता के लिए साक्षियों की मौखिक गवाही आवश्यक है। फलतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक 8824 दिनांक 14.12.2020 द्वारा आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ से श्री सुजीत कुमार झा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में पुनः अग्रेतर जाँच एवं गवाही कराये जाने का अनुरोध किया गया। 4. उपर्युक्त के आलोक में आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ द्वारा विभागीय कार्यवाही की पुनः जाँच कर अपने पत्रांक 954 दिनांक 18.03.2021 के माध्यम से जाँच प्रतिवेदन तथा अभिलेख उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः उभय पक्षों को सुने जाने एवं साक्षियों की गवाही कराये जाने के उपरान्त उक्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोपों को पुनः अप्रमाणित प्रतिवेदित करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष में अंकित किया गया कि पूर्व में समर्पित जाँच प्रतिवेदन पर उनका कोई अन्यथा मंतव्य नहीं है।

5. उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(2) के प्रावधान के तहत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदनों के निष्कर्ष से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु अभिलेखित किये गये। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के तहत विभागीय ज्ञापांक 4068 दिनांक 17.05.2021 द्वारा उक्त दोनों जाँच प्रतिवेदनों की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए असहमति के अभिलेखित बिन्दुओं के आलोक में आरोपित पदाधिकारी श्री सुजीत कुमार झा से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।18 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 6. तद्‌आलोक में श्री झा के पत्रांक 1482 दिनांक 25.05.2021 से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के विश्लेषणोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9262 दिनांक 01.11.2021 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :- '' संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''।

7. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9262 दिनांक 01.11.2021 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री झा द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि उन्हें दो अलग कमिशनर महोदय द्वारा पूरी तरह आरोप मुक्त (शून्य) किया गया है। दिनांक 11.08.2018 को कारा में तलाशी के वक्त वे मौजूद नहीं थे तथा पटना हाई कोर्ट विभागीय कार्य से आये थे। किसी भी गवाह तथा उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा उनके कार्यों को अनुचित नहीं कहा गया। वस्तुतः कारा संरचना तथा अन्य कारण इसके लिए उत्तरदायी थे, जिसे उन्होंने पूर्व में विभाग तथा कमिशनर महोदय के समक्ष रखा था। कारा के दण्ड संकल्प में उल्लिखित दिनांक 17.06.2018 को उनके द्वारा कटिहार पुलिस अधीक्षक से व्यूह रचना कर कारा की तलाशी करवाई गई थी तथा दिनांक 09.07.2018 को सरकार के निर्देश पर कारा महानिरीक्षक तथा पुलिस अधीक्षक, कटिहार से वार्ता के आलोक में उनके स्तर से तलाशी में मोबाईल फोन प्राप्त की गई। उन्होंने बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (i) एवं (ii) तथा नियम-870 (iii) के दायित्व का पूर्णतः पालन किया गया है।

8. श्री झा के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत स्पष्ट है कि दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, कटिहार में की गई छापेमारी में 11 मोबाईल फोन सहित प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी एवं इसके पूर्व भी दिनांक 17.06.2018 एवं 09.07.2018 को जिला प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में मोबाईल फोन सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी हुई थी। जिससे स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी इन प्रतिबंधित सामग्रियों के कारा में प्रवेश पर रोक लगाने में विफल रहे हैं। श्री झा का कहना है कि दिनांक 17.06.2018 तथा दिनांक 09.07.2018 को उनके द्वारा अपने स्तर से तलाशी कर मोबाईल फोन जब्त किया गया था। किन्तु विभिन्न तिथियाें को जिला प्रशासन द्वारा कारा में की गई छापेमारी में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी से स्पष्ट है कि उनके द्वारा कारा में तलाशी के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जा रही थी। इस प्रकार बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (i) एवं (ii) के प्रावधान के अनुसार आरोपित पदाधिकारी सम्पूर्ण कारा के नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी के रूप में अपने अधीनस्थ कर्मियों के कार्यों का सम्यक्‌ पर्यवेक्षण एवं सतत्‌ निगरानी रखने में विफल रहे हैं। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री झा के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में अप्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(2) के तहत असहमति के बिन्दु अभिलेखित कर उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के सम्यक्‌ विश्लेषणोपरान्त बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत्‌ प्रक्रिया का पालन करते हुए दण्ड अधिरोपित किया गया है। श्री झा के विरूद्ध अपने पदीय दायित्वों के सम्यक्‌ निर्वहन में लापरवाही बरतने आदि के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा को ''संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड'' अधिरोपित किया जा चुका है।

9. श्री सुजीत कुमार झा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध गठित आरोप की प्र—ति एवं गंभीरता पर विचार करने के उपरांत बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त कर समेकित रूप से उन्हें दिया गया दण्ड न्यायोचित है एवं इसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः इनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-09/2018--9262

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संकल्प

1 नवम्बर 2021

श्री सुजीत कुमार झा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध उनके मंडल कारा, कटिहार में पदस्थापन के दौरान दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रषासन, कटिहार द्वारा मंडल कारा, कटिहार में की गई औचक छापेमारी में 11 मोबाईल फोन, 09 मोबाईल चार्जर, 02 पेन ड्राईव, अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, 19,300/- (उन्नीस हजार तीन सौ) रूपये नगद, 500 मि0ली0 विदेषी शराब, लगभग 100 ग्राम गांजा एवं भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी की घटना में बरती गई लापरवाही के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1226 दिनांक 11.02.2019 द्वारा श्री झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्रांक-1247 दिनांक 30.06.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सुजीत कुमार झा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल19 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में प्रपत्र 'क' में गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। 3. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ के जांच प्रतिवेदन के साथ संलग्न आदेष फलक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के चतुर्थ भाग में अंकित गवाहों/साक्षियों की गवाही/परीक्षण-प्रतिपरीक्षण कराये जाने का जिक्र नहीं रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(1) के प्रावधान के तहत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन में प्रक्रिया की पूर्णता के लिए साक्षियों की मौखिक गवाही आवश्यक है। फलतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक 8824 दिनांक 14.12.2020 द्वारा आयुक्त-सह- संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ से श्री सुजीत कुमार झा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में पुनः अग्रेतर जाँच एवं गवाही कराये जाने का अनुरोध किया गया। 4. उपर्युक्त के आलोक में आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूणियाँ द्वारा विभागीय कार्यवाही की पुनः जाँच कर अपने पत्रांक 954 दिनांक 18.03.2021 के माध्यम से जाँच प्रतिवेदन तथा अभिलेख उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः उभय पक्षों को सुने जाने एवं साक्षियों की गवाही कराये जाने के उपरान्त उक्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोपों को पुनः अप्रमाणित प्रतिवेदित करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष में अंकित किया गया कि पूर्व में समर्पित जाँच प्रतिवेदन पर उनका कोई अन्यथा मंतव्य नहीं है।

5. उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(2) के प्रावधान के तहत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदनों के निष्कर्ष से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दु अभिलेखित किये गये :-

संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्व में समर्पित जाँच प्रतिवेदन में यह अंकित किया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत विभिन्न तिथियों को की गई छापेमारी में बरामद प्रतिबंधित सामग्रियों के विरूद्ध दर्ज किये गये F.I.R. की 56 पृष्ठों की छायाप्रति से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि इनके द्वारा समय-समय पर कारा की सघन तलाषी का कार्य किया जा रहा था; फलतः संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री झा के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया है, किन्तु यहाँ यह उल्लेखनीय है कि श्री झा के द्वारा अनेक बार कारा में छापेमारी की गई और हर बार कतिपय प्रतिबंधित सामग्रियाँ बरामद होती रहीं। इनकेे द्वारा प्रतिबंधित सामग्रियों का कारा में प्रवेश रोकने के लिए कोई कारगर/निरोधात्मक कदम नहीं उठाये गये। बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (i) एवं (ii) में वर्णित प्रावधान के अनुसार काराधीक्षक सम्पूर्ण कारा के नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी हैं। बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-870 (iii) के अनुसार किसी भी निषिद्ध सामग्री को कारा में आने से रोकने तथा किसी बंदी को प्राप्त नहीं होने देने का दायित्व कारा पदाधिकारी को विहित किया गया है। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी को सिर्फ इस आधार पर आरोप मुक्त किया जाना पर्याप्त नहीं होगा कि उनके द्वारा लगातार छापेमारी कर प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी की जाती रही। इन सामग्रियों को कारा के अन्दर जाने से रोकने का दायित्व भी काराधीक्षक के नाते इन्हीं का था। आरोपित पदाधिकारी कारा गेट पर सघन तलाशी तथा कारा परिसर में बाहर से प्रतिबंधित सामग्रियों के फेंके जाने पर रोक लगाने की कोई कारगर व्यवस्था स्थापित करने में विफल रहें। अतः संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त की जाती है।

6. असहमति के अभिलेखित उपर्युक्त बिन्दुओं के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के तहत विभागीय ज्ञापांक 4068 दिनांक 17.05.2021 द्वारा उक्त दोनों जाँच प्रतिवेदनों की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए आरोपित पदाधिकारी श्री सुजीत कुमार झा से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

7. तद्‌आलोक में श्री झा द्वारा अपने पत्रांक 1482 दिनांक 25.05.2021 के माध्यम से अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि उन्होंने अपने पदीय दायित्व का पूर्णतः अनुपालन किया है। उन्होंने कारा गेट से अवैध सामग्रियों के प्रवेष पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। कारा के पष्चिम और पूरब में कारा के आंतरिक पेरीमीटर से सटे हुए आम रास्ता था, जिससे सघन आबादी गुजरती थी। वहाँ से भी प्रतिबंधित सामग्री फेंके जाने से रोकने के लिए उन्होंने कारा के पेरीमीटर वॉल के भीतर एवं बाहर चक्कर राउंड के लिए कक्षपालों को ड्‌यूटी पर लगाया। साथ ही कक्षपालों की टोली बनाकर पेरीमीटर दीवार के बाहरी आम पथ का बराबर निरीक्षण वे करवाते थे। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि वे कई बार स्वयं आन्तरिक पेरीमीटर दीवार के बाहर तथा भीतर सुरक्षा जायजा लिया करते थे।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि दिन-रात कारगर गष्ती हेतु पुलिस अधीक्षक, कटिहार तथा सहायक थाना, कटिहार से व्यक्तिगत (फोन पर) तथा पत्र के माध्यम से अनुरोध उनके स्तर से किया जाता रहा है। उनका कहना है कि कारा के आन्तरिक दीवार के बाहरी भाग से प्रतिबंधित सामग्री फेंकने वाले एक शख्स को पकड़कर उनके द्वारा F.I.R. भी करवाया गया था। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि वस्तुतः आयुक्त, पूर्णियाँ-सह-संचालन पदाधिकारी ने दो अलग बार जाँच प्रतिवेदन में उन्हें पूर्णतः आरोप मुक्त किया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उन्होंने पेरीमीटर दीवार 18 फीट से 21 फीट करने तथा उस पर इलेक्ट्रिक वायर लगाने हेतु प्राक्कलन विभाग को भेजा था। साथ ही दो अतिरिक्त वॉच टावर लगाने हेतु प्रस्ताव समर्पित किया था। श्री झा का कहना है कि उनके पदस्थापन से पूर्व तथा उनके पदस्थापन के बाद भी मंडल कारा, कटिहार में प्रतिबंधित सामग्री प्राप्त होते रहे हैं। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि वे पूर्णतः अपने पदीय20 बिहार गजट, 5 tuojh 2022 दायित्व को उपलब्ध संसाधन के तहत निभाते रहे हैं। उनका कहना है कि वे दिन-रात सजग होकर कारा हित तथा अपने कारा र्काव्य का पालन करते रहे हैं।

8. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, असहमति के अभिलेखित बिन्दु एवं श्री झा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि उन्होंने कारा गेट से अवैध सामग्रियों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया था एवं उन्होंने अपने पदीय दायित्व का पूर्णतः अनुपालन किया है, किन्तु दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, कटिहार में की गई छापेमारी में 11 मोबाईल फोन सहित भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी एवं इसके पूर्व भी दिनांक 17.06.2018 एवं 09.07.2018 को जिला प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में मोबाईल फोन सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी इन प्रतिबंधित सामग्रियों के कारा में प्रवेश पर रोक लगाने में विफल रहे हैं। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि वे कक्षपालों की टोली बनाकर पेरीमीटर दिवाल के बाहरी आम पथ का बराबर निरीक्षण करवाते थे, किन्तु विभिन्न तिथियाें को जिला प्रशासन द्वारा कारा में की गई छापेमारी में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी से स्पष्ट है कि उनके अधीनस्थों द्वारा अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जा रहा था। बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (i) एवं (ii) के प्रावधान के अनुसार आरोपित पदाधिकारी सम्पूर्ण कारा के नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी के रूप में अपने अधीनस्थ कर्मियों के कार्यों का सम्यक्‌ पर्यवेक्षण एवं सतत्‌ निगरानी रखने में विफल रहे हैं। अतः श्री झा का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है।

9. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vi) के प्रावधानों के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- '' संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''। 10. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 6920 दिनांक 09.08.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2063 दिनांक 07.10.2021 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 11. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सुजीत कुमार झा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, औरंगाबाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 38—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 05 January 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2022-01-05.1/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2022-01-05.1.