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ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध
;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू12द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू13द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू14द्ध
2 ;बपकरू4द्ध;बपकरू19द्ध;बपकरू20द्ध 1;बपकरू23द्ध43 ;बपकरू26द्ध;बपकरू27द्ध;बपकरू28द्ध
;बपकरू29द्ध;बपकरू27द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू31द्ध3;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध 21 2;बपकरू27द्ध22
08/आरोप-01-55/2016 सा0प्र0-519 सं॰सं॰सं॰सं॰ 08/आरोप-01-55/2016 सा0प्र0-519 08/आरोप-01-55/2016 सा0प्र0-519 08/आरोप-01-55/2016 सा0प्र0-519 सामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासन विभागविभागविभागविभाग ——— ladYiladYiladYiladYi 13131313 tuotuotuotuojh 2022jh 2022jh 2022jh 2022
श्री सुनील कुमार तिवारी, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1051/11 तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, राजनगर (मधुबनी) के विरूद्ध इन्दिरा आवास आवंटन में अनियमितता बरतने, इन्दिरा आवास प्रतीक्षा सूची तोड़कर लाभार्थियों को लाभान्वित करने, अनुश्रवण नहीं करने एवं उत्तरदायित्व के प्रति घोर लापरवाही बरतने संबंधी आरोप से आच्छादित आरोप, प्रपत्र-'क' जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 558 दिनांक 22.11.2016 द्वारा उपलब्ध कराया गया।
2. जिलाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त आरोप पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 2300 दिनांक 27.02.2017 द्वारा श्री तिवारी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री तिवारी से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 6543 दिनांक 31.05.2017 द्वारा जिलाधिकारी, मधुबनी से मंतव्य की मांग की गयी। जिलाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त मंतव्य (पत्रांक 77 दिनांक 31.03.2018) में श्री तिवारी के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं बताया गया। 3. श्री तिवारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उक्त स्पष्टीकरण पर जिलाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8095 दिनांक 19.06.2018 द्वारा श्री तिवारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।2 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 2;बपकरू27द्ध22 4. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक-582 दिनांक 05.07.2019 द्वारा श्री तिवारी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-18 (2) के तहत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच प्रतिवेदन से निम्न बिन्दुओं पर असहमति व्यक्त की गयी :-
''बी॰पी॰एल॰ की स्थायी प्रतीक्षा सूची में पाया गया कि एक ही कोटि के अन्तर्गत आने वाले लाभुकों ''बी॰पी॰एल॰ की स्थायी प्रतीक्षा सूची में पाया गया कि एक ही कोटि के अन्तर्गत आने वाले लाभुकों ''बी॰पी॰एल॰ की स्थायी प्रतीक्षा सूची में पाया गया कि एक ही कोटि के अन्तर्गत आने वाले लाभुकों ''बी॰पी॰एल॰ की स्थायी प्रतीक्षा सूची में पाया गया कि एक ही कोटि के अन्तर्गत आने वाले लाभुकों में, जिस लाभुक को क्रमानुसार इन्दिरा आवास का लाभ पहले मिलना था, उसको उस वित्तीय वर्ष में नहींर् ा में नहींर् ा में नहींर् ा में नहीं में, जिस लाभुक को क्रमानुसार इन्दिरा आवास का लाभ पहले मिलना था, उसको उस वित्तीय वष् में, जिस लाभुक को क्रमानुसार इन्दिरा आवास का लाभ पहले मिलना था, उसको उस वित्तीय वष् में, जिस लाभुक को क्रमानुसार इन्दिरा आवास का लाभ पहले मिलना था, उसको उस वित्तीय वष् देकर बाद के वित्तीय वर्ष में लाभ दिया गया तथा अभ्युक्ति में पंचायत सचिव द्वारा उक्त लाभुक को उक्त देकर बाद के वित्तीय वर्ष में लाभ दिया गया तथा अभ्युक्ति में पंचायत सचिव द्वारा उक्त लाभुक को उक्त देकर बाद के वित्तीय वर्ष में लाभ दिया गया तथा अभ्युक्ति में पंचायत सचिव द्वारा उक्त लाभुक को उक्त देकर बाद के वित्तीय वर्ष में लाभ दिया गया तथा अभ्युक्ति में पंचायत सचिव द्वारा उक्त लाभुक को उक्त वित्तीय वर्ष में नहीं दिये जाने का कारण नहीं दर्शाया गया। कई लाभूको के मामले में बिना किसी कारण े के मामले में बिना किसी कारण//// वित्तीय वर्ष में नहीं दिये जाने का कारण नहीं दर्शाया गया। कई लाभूका े के मामले में बिना किसी कारण े के मामले में बिना किसी कारण वित्तीय वर्ष में नहीं दिये जाने का कारण नहीं दर्शाया गया। कई लाभूका वित्तीय वर्ष में नहीं दिये जाने का कारण नहीं दर्शाया गया। कई लाभूका ता है कि इन्दिरा आवास के क्रम में उलट-फेर हुई है।'' अभ्युक्ति को दर्शार्य जाने के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि इन्दिरा आवास के क्रम में उलट-फेर हुई है।'' अभ्युक्ति को दर्शार्य जाने के कारण ऐसा प्रतीत हो ता है कि इन्दिरा आवास के क्रम में उलट-फेर हुई है।'' ता है कि इन्दिरा आवास के क्रम में उलट-फेर हुई है।'' अभ्युक्ति को दर्शार्य जाने के कारण ऐसा प्रतीत हो अभ्युक्ति को दर्शार्य जाने के कारण ऐसा प्रतीत हो
5. उक्त असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-10746 दिनांक 16.09.2021 द्वारा श्री तिवारी से अभ्यावेदन की माँग की गयी, जिसके क्रम में श्री तिवारी द्वारा असहमति के बिन्दुओं पर अपना अभ्यावेदन/ स्पष्टीकरण उपलब्ध कराया गया, जिसमें उनके द्वारा पारिवारिक सर्वेक्षण सूची के अवक्रम भंग होने के कारणों को दर्शाते हुए मुख्य रूप से कहा गया है कि अलग-अलग काल खंड में भिन्न-भिन्न पारिवारिक सर्वेक्षण सूची को जाँच पदाधिकारी द्वारा अनदेखी कर मार्च 2008 के बाद प्रवृत्त पारिवारिक सर्वेक्षण सूची की भूतलक्षी प्रभाविता दर्शायी गयी है, जो सभी दृष्टिकोण से सर्वथा गलत एवं दोष पूर्ण है। पारिवारिक सर्वेक्षण सूची का सत्यापन वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत सेवक, संबंधित पंचायत के पर्यवेक्षकीय पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जाँच दल द्वारा कराने के पश्चात ही इन्दिरा आवास का लाभ दिया गया है। किसी लाभार्थियों के अवक्रम को अतार्किक रूप से नहीं तोड़ा गया है। सत्यापन प्रतिवेदन में लाभार्थी के परिवार के बाहर प्रवास में रहने, अविवाहित रहने, भूमि उपलब्धता नहीं रहने तथा अयोग्य श्रेणी में रहने की स्थिति में तत्कालीन समय में आवास योजना का लाभ नहीं दिया गया था। राजनगर प्रखंड में पदस्थापन के दौरान परिवादी, श्री हरेराम मंडल द्वारा वार्ड सदस्यों को धमकी दिये जाने के आरोप में उनके स्तर से राजनगर थाना कांड सं॰-168/08 दर्ज कराये जाने के प्रतिक्रिया स्वरूप मा॰ लोकायुक्त के समक्ष यह परिवाद लाया गया है, जो पूर्णतः तंग करने की नीयत एवं असद्भाव से किया गया है। उनके द्वारा इंदिरा आवास की प्रतीक्षा सूची को अतार्किक रूप से अवक्रम तोड़कर किसी भी लाभार्थी को लाभान्वित नहीं किया गया है।
6. श्री तिवारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं जांच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दुओं पर श्री तिवारी से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि यद्यपि कि संचालन पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य के अभाव में आरोप के स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होने का उल्लेख करते हुए आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया है, किन्तु श्री हरेराम मंडल द्वारा लोकायुक्त कार्यालय में वाद सं॰-01/लोक॰(ग्रा॰वि॰-12/10) दायर किये जाने के उपरान्त मा॰ सदस्य, लोकायुक्त द्वारा जिला3 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 2;बपकरू27द्ध22 पदाधिकारी, मधुबनी से जाँच प्रतिवेदन की माँग की गयी। जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री हरेराम मंडल द्वारा मा॰ लोकायुक्त के समक्ष परिवाद पत्र दायर किया गया था कि तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, राजनगर, श्री सुनील कुमार तिवारी द्वारा बी॰पी॰एल॰ प्रतीक्षा सूची को तोड़कर इन्दिरा आवास का लाभ दिया गया है। इस मामले में अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, मधुबनी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदनानुसार श्री सुनील कुमार तिवारी, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, राजनगर द्वारा अपने कार्यकाल में इन्दिरा आवास प्रतीक्षा सूची में क्रम को तोड़ते हुए आवंटन करने संबंधी प्रथम द्रष्ट्या आरोप प्रमाणित पाया गया है। आरोप पत्र के साथ संलग्न जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि ''बी॰पी॰एल॰ की स्थायी प्रतीक्षा चयन सूची में पाया गया कि एक ही कोटि के अन्तर्गत आनेवाले लाभुकों, जिस लाभुक को क्रमानुसार इन्दिरा आवास का लाभ पहले मिलना था, उनको उस वित्तीय वर्ष में नहीं देकर बाद के वित्तीय वर्ष में लाभ दिया गया तथा अभ्युक्ति में पंचायत सचिव द्वारा उक्त लाभुक को उक्त वित्तीय वर्ष में नहीं दिये जाने का कारण (यथा-तत्समय घर पर उपलब्ध नहीं होना, जमीन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराना, पूर्व में प्राप्त होना, पक्का मकान होना, सरकारी नौकरी में होना, अविवाहित होने की दशा में पिता के परिवाद में ही सम्मिलित एवं मृत्यु आदि) नहीं दर्शाया गया। कई लाभुकों के मामले में बिना किसी कारण/अभ्युक्ति को दर्शाये जाने के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि इन्दिरा आवास के क्रम में उलट-फेर हुई है।''
7. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुनील कुमार तिवारी, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1051/11 तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, राजनगर (मधुबनी) सम्प्रति आप्त सचिव, माननीय अध्यक्ष, बिहार विधान सभा, पटना का अभ्यावेदन/स्पष्टीकरण अस्वीकृत करते हुए इंदिरा आवास प्रतीक्षा सूची में क्रम को तोड़ते हुए आवंटन करने संबंधी प्रमाणित आरोपो के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) निदंन (वर्ष-2009-10)
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंंधित को भेज दी जाय। प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंंधित को भेज दी जाय। प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंंधित को भेज दी जाय। प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मोमोमोमो0 सिराजु0 सिराजु0 सिराजु0 सिराजुद्दीन अंसारी,द्दीन अंसारी,द्दीन अंसारी,द्दीन अंसारी, सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।