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13 ;बपकरू207द्ध;बपकरू231द्ध 1944 ;0द्ध
;0 332द्ध , ;बपकरू272द्ध, 3 2022 सं॰ 2/आरोप-01-19/2019-4809/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 29 मार्च 2022
श्री अविनाश कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन प्रभारी काराधीक्षक मंडल कारा, औरंगाबाद सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, औरंगाबाद के विरूद्ध कारा एवं सुधार सेवाएँ, गृह विभाग (कारा), बिहार, पटना के पत्रांक 8270 दिनांक 24.09.2019 द्वारा आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) उपलब्ध कराया गया।
श्री सिंह के विरूद्ध आरोप है कि :- ''विधि विभाग, बिहार, पटना के संकल्प 7789/जे0 दिनांक 18.09.2018 की कंडिका-6 में वर्णित प्रावधान का उल्लंघन करते हुए बंदी पवन कुमार सिंह, पे0-रामकुमार सिंह के विरूद्ध जेल में मोबाईल रखने के आरोप में नगर थाना कांड सं0 211/18 दर्ज होने के बावजूद उसे विशेष परिहार का लाभ देकर छोड़ने का गलत प्रस्ताव दिया गया। इस प्रकार श्री सिंह द्वारा बंदी पवन कुमार सिंह को विशेष परिहार का लाभ प्रदान करते हुए अवैध प्रस्ताव देकर उसे न्यायालय द्वारा दी गयी सजा पूर्ण करने के पहले ही दिनांक 11.10.2008 को कारा से मुक्त कर दिया गया। श्री सिंह का यह —त्य अपरिवर्तनीय (irreversible) प्र—ति का है। साथ ही उनका यह —त्य बंदी को नियम विरूद्ध अनुचित लाभ पहुँचाने का है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के सर्वथा प्रतिकूल है।''
कारा एवं सुधार सेवाएँ, गृह विभाग (कारा) से प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 14919 दिनांक 04.11.2019 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री सिंह के पत्रांक 1016 दिनांक 17.10.2020 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री सिंह का साक्ष्य सहित अपने स्पष्टीकरण में कहना है कि :- इनके द्वारा संकल्प सं0 7789/जे0 दिनांक 18.09.2018 की कंडिका-6 का कोई उल्लंघन नहीं किया गया 2 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 3 2022 पास भी भेजा गया था, जिसके बाद भी बंदी के विरूद्ध कोई रिर्पोट/प्रतिवेदन मंडल कारा को नहीं मिला। अपराध कारा अधिनियम, 1894 की धारा- 5.2 के उपबंधों से साबित होता है कि माननीय न्यायालय द्वारा ही दंड देने का प्रावधान, जिसमें माननीय न्यायालय का विचारण चल रहा है। बंदी को सभी लंबित वादों में मुक्ति आदेष प्राप्त होने के उपरान्त दिनांक 11.10.2018 को छोड़ा गया। सभी कदम नियमानुकूल है तथा न्यायालय के आदेषों का पालन है। अगर इसमें कदम नहीं उठाया जाता तो मानवाधिकार का मामला बनता।
श्री सिंह के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के पत्रांक 5382/गो0 दिनांक 07.09.2021 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसके निष्कर्ष में उल्लेखित किया गया है कि :-
श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनका स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद से प्राप्त मंतव्य की समीक्षोपान्त पाया गया श्री सिंह के द्वारा स्थापित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए बंदी पवन कुमार सिंह पे0-रामकुमार सिंह के विरूद्ध जेल में मोबाईल फोन रखने के आरोप में नगर थाना काण्ड संख्या 211/18 दर्ज होने के बावजूद उसे विशेष परिहार का लाभ देकर छोड़ने का गलत प्रस्ताव दिया गया। उक्त के आलोक में बंदी पवन कुमार सिंह को विशेष परिहार का लाभ प्रदान करते हुए अवैध प्रस्ताव देकर उसे न्यायालय द्वारा दी गयी सजा पूर्ण करने के पहले ही दिनांक 11.10.2018 को कारा से मुक्त कर दिया गया। विधि विभाग के संकल्प के अनुसार केवल ऐसे सजावार बंदियों को विशेष परिहार का लाभ देकर रिहा किया जा सकता है, जिसका संसीमन अवधि के दौरान आचरण लगातार अच्छा रहा हो। उल्लेखनीय है कि बंदी पवन कुमार सिंह के विरूद्ध जेल में मोबाईल फोन रखने के आरोप में नगर थाना काण्ड संख्या 211/18 दर्ज था। जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा भी गठित आरोप पर श्री सिंह के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया है। स्पष्टतया श्री सिंह का यह आचरण र्काव्यहीनता, लापरवाही एवं अनुशासनहीनता का द्योतक है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में प्रतिवेदित आरोप की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए श्री सिंह के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधान के तहत (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2018-19) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से चार वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अविनाश कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन प्रभारी काराधीक्षक मंडल कारा, औरंगाबाद सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, औरंगाबाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2018-19), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से चार वेतनवृद्धि पर रोक।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रचना पाटिल, सरकार के अपर सचिव।