(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
13 ;बपकरू207द्ध;बपकरू231द्ध 1944 ;0द्ध
;0 333द्ध , ;बपकरू272द्ध, 3 2022 सं॰ 2/आरोप-01-38/2017-542/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 14 जनवरी 2022
श्री आषीष नारायण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1195/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, चकिया, पूर्वी चम्पारण के विरूद्ध स्थानान्तरित स्थान पर पदस्थापन नहीं करने एवं विभागीय आदेष का अवहेलना करने संबंधी आरोप के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 487(3)/रा0 दिनांक 12.09.2017 द्वारा आरोप-पत्र उपलब्ध कराया गया।
श्री नारायण के विरूद्ध आरोप निम्नलिखित है :-
1. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना सं0-301(3)/रा0, दिनांक 28.06.2017 के द्वारा श्री नारायण भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, चकिया, पूर्वी चम्पारण के पद से स्थानान्तरित करते हुए भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, धमदाहा, पूर्णियां के पद पर पदस्थापित किया गया। विभागीय अधिसूचना सं0-301 दिनांक 28.06.2017 की कंडिका-5 में इनको स्पष्ट आदेष दिया गया था कि अपने वर्तमान पद का प्रभार शीघ्र सौंप कर स्तम्भ-5 में अंकित अधिसूचित पदस्थापन स्थान पर योगदान करना सुनिष्चित करेंगे। उपर्युक्त आदेष की अवहेलना करते हुए इनके द्वारा अधिसूचित पद का प्रभार अभी तक ग्रहण नहीं किया गया है।
2. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना सं0-342(3)/रा0, दिनांक 13.07.2017 के द्वारा स्थानान्तरित पदाधिकारियों को प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बिना दिनांक 15.07.2017 तक स्थानान्तरित स्थल पर योगदान करने का आदेष दिया गया था। उक्त आदेष में यह भी स्पष्ट अंकित किया गया था कि उक्त तिथि के पश्चात् स्थानान्तरित पदाधिकारियों का वेतन नव पदस्थापित कार्यालय से ही भुगतेय होगा एवं राजस्व अधिनियमों के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग वे अपने नव पदस्थापित स्थान पर ही कर सकेंगे, लेकिन श्री नारायण द्वारा उपर्युक्त विभागीय आदेष की अवहेलना करते हुए राजस्व अधिनियमों के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग अवैध ढंग से दिनांक 15.07.2017 के बाद भी किया गया है, जो आदेष की अवहेलना एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।
3. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना सं0 403(3)/रा0, दिनांक 09.08.2017 के द्वारा श्री नारायण को दिनांक 11.08.2017 के प्रभाव से स्वतः विरमित करते हुए दिनांक 11.08.2017 के बाद आपको कोई भी कार्य सम्पादित नहीं किये जाने का आदेष दिया गया। साथ ही स्वतः विरमित किये2 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 3 2022 जाने की तिथि के बाद इनके द्वारा किये गये कार्यों को अवैध मानते हुए आपके विरूद्ध कार्रवाई का स्पष्ट आदेष निर्गत किया गया। लेकिन श्री नारायण द्वारा उक्त आदेष की अवहेलना करते हुए राजस्व एवं राजस्व न्यायालय से संबंधित कार्यों का सम्पादन दिनांक 11.08.2017 के बाद किया गया है, जो अवैध है। श्री नारायण का उपर्युक्त वर्णित —त्य विभागीय आदेषों के प्रतिकूल है। पुनः राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आदेष सं0 463(3)/रा0, दिनांक 04.09.2017 द्वारा श्री नारायण को नव पदस्थापन से संबंधित कार्यालय का प्रभार दिनांक 05.09.2017 तक ग्रहण करने का आदेष निर्गत किया गया, जिसकी भी अवहेलना करते हुए इनके द्वारा दिनांक 05.09.2017 तक नव पदस्थापन से संबंधित कार्यालय का प्रभार ग्रहण नहीं किया गया।
विभागीय पत्रांक 8519 दिनांक 10.08.2021 द्वारा श्री नारायण के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण की गयी। श्री नारायण के पत्रांक 4290 दिनांक 28.08.2021 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें श्री नारायण का कहना है कि :-
''भूमि सुधार उप समार्हाा, चकिया अनुमंडल, पूर्वी चम्पारण पदस्थापन अवधि से संबंधित आरोप पर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने हेतु निदेष संसूचित किया गया है। संसूचित प्रासंगिक पत्र के साथ संलग्न राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना द्वारा गठित आरोप-पत्र में मुख्य रूप से अधोहस्ताक्षरी पर लगाए गए कतिपय आरोप स्थानांतरण होने के पश्चात् नव पदस्थापन स्थान एवं पद पर योगदान नहीं देने से संबंधित है।
इस संबंध में कहना है कि दिनांक 28.06.2017 को स्थानांतरण की अधिसूचना प्रकाषित होने के पश्चात् अधोहस्ताक्षरी के प्रतिस्थानी द्वारा अनुमंडल कार्यालय, चकिया में भूमि सुधार उप समार्हाा, चकिया के पद पर योगदान नहीं दिया गया। ऐसी परिस्थिति में अधोहस्ताक्षरी को जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा विरमित नहीं किया गया। तत्पष्चात् वर्ष 2017 में माह अगस्त के प्रथम सप्ताह में पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी जिला में भीषण बाढ़ आ गई और बाढ़ के राहत कार्याें में अधोहस्ताक्षरी को भी विभिन्न दायित्व सौंपे गए क्योंकि अधोहस्ताक्षरी उस समय पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी जिला समाहरणालय के नजारत उप समार्हाा के भी प्रभार में थे। ऐसी परिस्थिति में अनुरोध किए जाने के बावजूद समार्हाा, मोतिहारी द्वारा बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधोहस्ताक्षरी को विरमित किया जाना उचित नहीं समझा गया।
बाढ़ की स्थिति सामान्य होने पर जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के आदेष ज्ञापांक 886/स्था0 दिनांक 14.09.2017 के द्वारा अधोहस्ताक्षरी को विरमित किया गया। ज्ञातव्य हो कि अधोहस्ताक्षरी के प्रतिस्थानी द्वारा इस तिथि तक भी अपना योगदान पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी जिला में नहीं दिया गया था। जिसके कारण भूमि सुधार उप समार्हाा, चकिया का प्रभार अधोहस्ताक्षरी के द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया को सौंपने का आदेष जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा निर्गत किया गया। इसी आदेष में नजारत उप समार्हाा का प्रभार भूमि सुधार उप समार्हाा, मोतिहारी सदर को देने का आदेष जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा निर्गत किया गया है, जो इस बात को पुष्ट करता है कि बाढ़ के दौरान अधोहस्ताक्षरी नजारत उप समार्हाा के दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। सुलभ संकेत हेतु जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के आदेष ज्ञापांक 886/स्था0 दिनांक 14.09.2017 की छायाप्रति संलग्न है। उपरोक्त आदेष के आलोक में दिनांक 14.09.2017 को विरमित होने के पश्चात् अधोहस्ताक्षरी ने ससमय दिनांक 21.09.2017 को भूमि सुधार उप समार्हाा, धमदाहा, पूर्णियां का प्रभार ग्रहण किया, जिससे स्पष्ट है कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा विभागीय तथा जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के आदेष का अक्षरषः अनुपालन किया गया है तथा किसी भी आदेष की अवहेलना नहीं की गई है। अतः उपरोक्त आलोक में अनुरोध है कि स्पष्टीकरण स्वी—त करते हुए अधोहस्ताक्षरी को आरोपों से मुक्त करने की महती —पा की जाय।''
श्री नारायण के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा स्थानांतरण आदेष अधिसूचना संख्या 301(3) दिनांक 28.06.2017 के आलोक में स्थानान्तरित पदाधिकारियों को प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बिना दिनांक 15.07.2017 तक स्थानान्तरित स्थल पर योगदान करने का आदेष था। उक्त आदेष में यह भी स्पष्ट अंकित किया गया था कि उक्त तिथि के पश्चात् स्थानान्तरित पदाधिकारियों का वेतन नव पदस्थापित कार्यालय से ही भुगतेय होगा एवं राजस्व अधिनियमों के अन्तर्गत प्रदा शक्तियों का प्रयोग वे अपने नव पदस्थापित स्थान पर ही कर सकेंगे। पुनः पत्रांक 401(3) दिनांक 09.08.2017 द्वारा दिनांक 11.08.2017 के प्रभाव से स्वतः विरमित करते हुए दिनांक 11.08.2017 के बाद कोई भी कार्य सम्पादित नहीं किये जाने का आदेष दिया गया। विभागीय आदेष 463(3) दिनांक 04.09.2017 द्वारा नव पदस्थापन कार्यालय में दिनांक 05.09.2017 तक ग्रहण करने का आदेष दिया गया, किन्तु श्री नारायण द्वारा निर्धारित तिथि तक प्रभार ग्रहण नहीं किया गया। स्पष्टतया श्री नारायण का कार्य स्वेच्छाचारिता, विभागीय आदेषों की अवहेलना, अनुषासनहीनता का द्योतक है। उनका यह —त्य बिहार आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकारा द्वारा श्री नारायण के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए चेतावनी (चरित्रपुस्त में प्रविष्टि) सहित बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19(1) प्रावधान के तहत नियम-14 में अंकित विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11637 दिनांक 01.10.2021 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2017-18), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड संसूचित किया गया।
उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री नारायण द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 27.10.2021 समर्पित किया गया।3 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 3 2022 श्री नारायण के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की सम्यक् समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री नारायण द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में अपने बचाव में कोई नया तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया। उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित बिन्दुआें का ही पुनः उल्लेख करते हुए अधिरोपित दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री नारायण द्वारा स्वतः विरमित किए जाने हेतु भूमि सुधार विभाग के आदेश सं0 403(3)/रा, दिनांक 09.08.2017 का उल्लंघन किया गया। पुनः दिनांक 11.08.2017 के प्रभाव से स्वतः विरमित किए जाने हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया एवं नव पदस्थापित स्थान पर योगदान नहीं किया गया। राजस्व भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 463(3)/रा0 दिनांक 04.09.2017 द्वारा दिनांक 05.09.2017 तक नव पदस्थापित स्थल पर योगदान नहीं किए जाने पर उनके विरूद्ध कार्रवाई किए जाने के आदेश के बावजूद इसका अनुपालन नहीं किया गया एवं नव पदस्थापित स्थल पर दिनांक 21.09.2017 को अपना योगदान समर्पित किया गया। यह कृत्य श्री नारायण का अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता एवं विभागीय आदेशों की अवहेलना का द्योतक है। उनका यह —त्य बिहार आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकारा द्वारा श्री नारायण के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए अतः अनुशसनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री आषीष नारायण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1195/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, चकिया, पूर्वी चम्पारण सम्प्रति उप सचिव, बिहार विष्वविद्यालय, सेवा आयोग, पटना द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11637 दिनांक 01.10.2021 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2017-18) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक के दंड को पूर्वव्त बरकरार रखा जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रचना पाटिल, सरकार के अपर सचिव।