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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 03 June 2022

Published 03 June 2022

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2022-06-03.334
Languages
English, Hindi

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ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध

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13 ट्ठ;बपकरू21द्ध;बपकरू22द्ध 1;बपकरू24द्ध44 ;बपकरू26द्ध;बपकरू27द्ध;बपकरू28द्ध

;बपकरू29द्ध;बपकरू27द्ध ;बपकरू4द्ध 334;बपकरू4द्ध ;बपकरू11द्ध;बपकरू12द्ध;बपकरू2द्ध ;बपकरू27द्ध3 2;बपकरू27द्ध22

सं॰ 2/सं॰ 2/सं॰ 2/सं॰ 2/सी॰-1028/2011-सा॰प्र॰-3847सी॰-1028/2011-सा॰प्र॰-3847सी॰-1028/2011-सा॰प्र॰-3847सी॰-1028/2011-सा॰प्र॰-3847 सामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 14141414 मार्चमार्चमार्चमार्च 2022202220222022

श्री अरविन्द कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 750/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक, नालंदा सम्प्रति बन्दोबस्त पदाधिकारी, बांका के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, नालन्दा के पत्रांक 490 दिनांक 10.03.2011 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :-श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :-श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :-श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :-

1. सांसद मद अन्तर्गत ग्राम-रूपसपुर में स्वास्थ्य उपकेन्द्र में बरामदा सहित दो कमरों का निर्माण विाीय वर्ष 2001-02 में कराया गया, जिसका अभिलेख संख्या 91/02 वर्ष 2001-02 है और उसका प्राक्कलित राषि 2,19,000/-(दो लाख उन्नीस हजार रूपये) है। स्थल जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उक्त योजना का कार्य अत्यंत खराब एवं घटिया पाया गया है एवं निर्मित दीवार में दरार पायी गई तथा अधिकांष जगह फर्ष टूटा हुआ पाया गया। इसके बावजूद अधिकांष राषि का भुगतान अभिकर्त्ता को कर दिया गया।

2222.... विधायक मद के अंतर्गत दुर्गापुर के पूरब-उत्तर वाली पाईन की खुदाई एवं पुलिया निर्माण कार्य जिसकी योजना सं0 766/24 वर्ष 2001-02 है और उसकी प्र्राक्कलित राषि 1,00,000/-(एक लाख) रू0 है। जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मापी पुस्तिका में तृतीय एवं अंतिम विपत्र अंकित है, जिसमेें 2000 (दो हजार) रू0 रेकटिफिकेषन के लिए काट कर कुल 98,950/-(अनठानवे हजार नौ सौ पचास) रू0 का भुगतान किया गया है, यदि काम खराब हुआ था तो उक्त कार्य का कोई विपत्र ही नहीं बनाया जाना था। जाँच में यह भी पाया गया है कि एक पुलिया जिसकी राषि 22,270/-(बाईस हजार दो सौ सत्तर) रू0 है, स्थल पर निर्मित नहीं पाया गया है। उक्त योजनाओं में घटिया कार्य तथा इसके विरूद्ध गलत मापी पुस्तिका में प्रवृष्टि एवं नजायज भुगतान के लिए जाँच के आधार पर श्री कुमार दोषी पाये गये हैं और इन योजनाओं में सरकारी राषि का बंदर-बांट किया गया है। श्री कुमार का उपर्युक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों का उल्लंघन है।

उक्त आरोपों के लिए श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, नालंदा से मंतव्य प्राप्त की गयी, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकार प्रतिवेदित किया गया।2 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र पर पुनः श्री कुमार से स्पष्टीकरण की गयी। श्री कुमार द्वारा आरोपवार समर्पित स्पष्टीकरण मेंं कहना है कि :-

आरोप संख्या-01 :- आरोप संख्या-01 :- आरोप संख्या-01 :- आरोप संख्या-01 :- (i) संबंधित योजना सांसद मद से कराया गया था। सांसद मद योजना के अंतर्गत कार्य की स्वी—ति के उपरांत उक्त योजनाओं का कार्यान्वयन एजेन्सी से कराया गया था। तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा संबंधित विषयक प्रतिवेदन उनके जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-2.7.1 में अंकित की गयी है, जिसके अवलोकन से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित कार्य में अंतिम विपत्र का निष्पादन 12.08.2004 को किया गया है। जैसा कि मैंने पूर्व में स्पष्ट किया है कि मेरा कार्यकाल 02 सितम्बर, 2002 तक ही उक्त प्रखंड में था। जाँच प्रतिवेदन से ही स्पष्ट होगा कि चतुर्थ चालू विपत्र तक का ही उपस्थापन मेरे कार्यकाल में किया गया था, जिसमें कार्यालय द्वारा दिनांक 13.08.2002 को संबंधित योजना के संचिका में आदेष पारित किया गया था। सुलभ प्रसंग हेतु उक्त आदेष फलक में अंकित है कि- ''इस योजना के अभिकर्त्ता श्री विजय पासवान, पंचायत सेवक का स्थानान्तरण हो चुका है और अभी तक इन्होंने कार्य पूरा नहीं किया है तथा योजना का कार्य अवरूद्ध है। इनके द्वारा अब तक कुल 82,500.00 रूपये प्राप्त किया जा चुका है, जिसके विरूद्ध मापी पुस्तिका के अनुसार वास्तविक कार्य 82,500.00 का किया जा चुका है। परन्तु मास्टर रौल एवं अभिश्रव नहीं दिया है, जिसे उपलब्ध कराने हेतु निदेष दिया जाता है और कार्य अवरूद्ध रखने के कारण एकरारनामा रद्द किया जाता है। योजना का कार्य पूर्ण करने हेतु श्री रामा प्रसाद, पंचायत सेवक को विभागीय रूप से अभिकर्त्ता चयन किया जाता है तथा उन्हें निदेष दिया जाता है कि योजना का कार्य दिनांक 15.09.2002 तक आवष्यक रूप से पूर्ण करा दें। कार्य प्रारंभ करने हेतु बतौर प्रथम अग्रिम के रूप में 7500.00 रूपये मात्र भुगतान की स्वी—ति दी जाती है। प्रखंड नाजिर से प्राप्ति रसीद एवं उचित पहचान पर 7500.00 रूपये मात्र का भुगतान करें।'' उक्त आदेष फलक के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि मेरे कार्यकाल में उक्त कार्य के संलग्न अभिकर्त्ता नियुक्त किया गया था। वैसे परिस्थिति में जबकि मेरे कार्यकाल में कार्य की कुल प्राक्कलित राषि 2,19,000/- रू0 के विरूद्ध मात्र 82,500/- रू0 के कार्य का ही मापी पुस्तिका उपलब्ध करायी गयी थी, तो ऐसी स्थिति में आरोप-पत्र में वर्णित कि फर्ष टूटा हुआ था एवं अन्य तरह के तकनीकी त्रुटियाँ, जिसका उल्लेख जाँच प्रतिवेदन में किया गया है, के संबंध में पर्यवेक्षण का आरोप मेरे विरूद्ध लगाना साक्ष्य आधारित नहीं है। (ii) जहाँ तक जिला पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में यह कहा गया है कि चूँकि विजय पासवान को दंडित किया गया है, ऐसी परिस्थिति में मेरे स्पष्टीकरण को अमान्य किया गया है, के क्रम में यह कहना आवष्यक है कि मेरे द्वारा मेरे कार्यकाल के संबंधित योजना के आदेष फलक के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि मेरे द्वारा ही श्री विजय पासवान को अभिकर्त्ता से हटाकर किसी दूसरे अभिकर्त्ता को नियुक्त किया गया था, जिसकी सम्पुष्टि परिषिष्ट-4 से की जा सकती है। आरोप संख्या-02 :- आरोप संख्या-02 :- आरोप संख्या-02 :- आरोप संख्या-02 :- संबंधित योजना के मापी पुस्तिका के पृष्ठ 13 का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें Deduction का कारण अंकित है। संबंधित मापी पुस्तिका में मापी कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 10.06.2002 को दर्ज की गयी थी, जिसे तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 04.07.2002 को जाँच किया गया एवं उक्त मापी पुस्तिका में ही दो हजार रूपये की कटौती मिट्‌टी कार्य में सुधार हेतु की गयी थी, तो उक्त परिप्रेक्ष्य में यह कहा जाना कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा स्थल जाँच नहीं किया गया, का कोई आधार नहीं है, क्योंकि अभियंताओं द्वारा ही दो हजार रूपये कटौती कर भुगतान करने हेतु मापी पुस्तिका को उपस्थापित किया गया था। आगे उनका यह भी कहना है कि जिला पदाधिकारी के मंतव्य में ही अंकित है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक के पत्रांक 1523 दिनांक 12.12.2011 को आधार बनाया गया है कि पुलिया का कोई निर्माण नहीं हुआ है और उक्त आलोक में मुझपर कार्रवाई किया जाना अपेक्षित है, का मंतव्य दिया गया है। इस संबंध में कहना है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक का उक्त पत्र लगभग 10 वर्ष पूर्व सम्पादित किये गये कार्य के संबंध में है, जिसकी जाँच उनके द्वारा वर्ष 2011 में की गयी है। इस संबंध में मैं आपका ध्यान तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-2.15.2 की ओर आ—ष्ट करना चाहता हूँ, जिसमें यह अंकित है कि-''स्थल निरीक्षण के समय उपबंधित पईन में चार पुलिया बना हुआ देखा गया, जिसके आकार में पईन के आकार के आधार पर हल्का फेरबदल किया गया है, परन्तु पाँचवा पुलिया जिसकी आकार प्राक्कलन से ज्यादा अर्थात्‌ (14'X5'X-6'') एवं लागत मात्र 22,270.00 रूपये है, स्थल पर नहीं देखा गया। उपस्थित ग्रामीण ने बताया कि बड़े पईन से उपबंधित छोटे पईन के निर्गत बिन्दु पर 5-6 साल पूर्व पुल बनाया गया था, जिसे बड़े पईन के मेढ़ (Embankment) पर सड़क बनाने के दौरान तोड़ कर हटा दिया गया तथा वहाँ पर एच0पी0 पुलिया बनाने के लिए पाईल डाल दिया गया है। तत्कालीन बताये स्थल पर एन0पी0 का ह्‌यूम पाईप डाला हुआ देखा गया। इस परिस्थिति में कार्य की समयावधि ज्यादा हो जाने के कारण सही जाँच संभव नहीं हो सका।'' जिससे स्वतः स्पष्ट होगा कि जाँच पदाधिकारी को ग्रामीणों ने जाँच की तिथि को ही यह बात प्रकाष में लाया था कि पुल निर्मित था, जिसे नया पुलिया बनाने के दौरान हटाया गया था। संबंधित जाँच पदाधिकारी द्वारा निगरानी विभाग का प्रतिवेदन दिनांक 23.03.2010 को समर्पित है, तो ऐसी परिस्थिति में प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक का पत्रांक 1523 दिनांक 12.12.2011 में यह कहा जाना कि पुल निर्मित नहीं पाया गया, का कोई आधार नहीं है क्योंकि जाँच प्रतिवेदन में ही उक्त पुलिया के नहीं पाये जाने का कारण उल्लेखित है। अतः उक्त परिप्रेक्ष्य में यह आरोप भी प्रमाणित नहीं होता है।3 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू26द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू28द्धः जहाँ तक बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन का प्रष्न है। इस संबंध में यह कहना है कि मेरे द्वारा सरकारी कार्यों का निष्पादन पूरी शीलनिष्ठा के साथ अपने सेवाकाल में किया गया है। उपरोक्त वर्णित कंडिकाओं में मैंने आरोपवार स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिससे स्पष्ट होगा कि मेरे उपर लगाये गये दोनों आरोप साक्ष्यविहीन है। संबंधित आरोप जो कि वर्ष 2001-02 के पदस्थापन अवधि के समय का है, जिसमें लगभग 10 वर्षों के बाद जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया था। आरोप के बिन्दु पर मैं वर्ष 2013 में ही अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया था। उक्त स्पष्टीकरण पर विभाग द्वारा लगभग आठ वर्षों के बाद जिला पदाधिकारी से मंतव्य प्राप्त कर मुझ से स्पष्टीकरण की मांग की गयी है, वह भी अभिलेख आधारित नहीं है।'' श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, इनके स्पष्टीकरण एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की गयी। आरोप संख्या-01 के संबंध में पाया गया कि निर्माण कार्य की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा की गयी एवं पाया गया कि सांसद कोटा से ग्राम-रूपषपुर में विाीय वर्ष 2001-02 में निर्मित स्वास्थ्य उपकेन्द्र में बरामदा सहित दो कमरों के निर्माण का कार्य अत्यंत ही खराब पाया गया। निर्मित दीवार में दरार एवं फर्श टूटा हुआ पाया गया। योजना से संबंधित प्राक्कलित राषि में से अधिकांष राषि का भुगतान अभिर्काा को किया जा चुका था। इस आरोप से संबंधित अभिर्काा, पंचायत सचिव, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता इत्यादि को दोषी पाते हुए कार्रवाई की गयी है। इस प्रकार स्पष्ट है कि योजना के क्रियान्वयन में श्री कुमार के द्वारा पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गयी है। आरोप संख्या-2आरोप संख्या-2आरोप संख्या-2आरोप संख्या-2 के संबंध में पाया गया कि विधायक मद के अन्तर्गत दुर्गापुर के पूर्वी उार वाली पाईन की खुदाई एवं पुलिया निर्माण कार्य के संबंध में निगरानी विभाग द्वारा जाँच में कार्य प्राक्कलन की विपरीत किया हुआ पाया गया एवं पुलिया निर्माण स्थल पर निर्मित नहीं पाया गया। साथ ही तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक द्वारा स्थलीय जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि :- ''पुलिया निर्माण का कार्य प्रस्तावित स्थल पर नहीं है और न ही पुलिया का कोई निर्माण हुआ है। मापी पुस्तिका में गलत प्रविष्टि की गई है और तदोपरान्त राषि का भुगतान किया गया है।'' उक्त आरोप के आलोक में संबंधित अभिर्काा, पंचायत सचिव, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता इत्यादि को दोषी पाते हुए कार्रवाई की गयी है। इससे स्पष्ट है कि श्री कुमार के द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुकूल स्थल निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण नहीं किया गया और योजना राषि में से 2000/-रू0 की कटौती कर अधिकांष राषि का भुगतान अभिर्काा को कर दिया गया। श्री कुमार द्वारा निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक के स्थल निरीक्षण को आधारहीन एवं सत्य से परे बताया गया है। निगरानी विभाग के तकनीकी कोषांग द्वारा की गई जाँच से संबंधित जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि श्री कुमार के द्वारा सांसद/विधायक मद योजना में अनियमितता बरती गई है। उल्लेखनीय है कि सांसद मद से लोक कल्याणकारी योजनाओं का कार्य कराया जाता है। श्री कुमार द्वारा ऐसे महत्वपूर्ण योजनाओं के पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गयी, जो एक लोक सेवक के लिए र्काव्यहीनता का द्योतक है। इनका यह —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के प्रतिकूल है। समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत ''''''''02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध'' अवरूद्ध'' अवरूद्ध'' अवरूद्ध'' किये जाने के साथ-साथ ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं की शास्ति अधिरोपित किये ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं जाने का निर्णय लिया गया। अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 750/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, गिरियक, नालंदा सम्प्रति बन्दोबस्त पदाधिकारी, बांका को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत ''''''''02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध'' प्रभाव से अवरूद्ध'' प्रभाव से अवरूद्ध'' प्रभाव से अवरूद्ध'' किये जाने के साथ-साथ ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं शास्ति अधिरोपित एवं ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं ''चेतावनी (चरित्र-पुस्त में प्रविष्टि की जाएगी)''ं संसूचित किया जाता है। आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद, सरकार के अवर सचिव।

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ख्-ँः ;बपकरू14द्ध;बपकरू4द्ध ए.;बपकरू4द्धः

;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्धः ;बपकरू4द्ध ;बपकरू12द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू13द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू14द्ध म;बपकरू29द्ध ए;बपकरू1द्ध.घ्

;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू26द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू28द्ध ;बपकरू17द्ध़;बपकरू17द्ध-;बपकरू27द्ध1;बपकरू27द्ध-;बपकरू27द्धघ्

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 03 June 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2022-06-03.334/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2022-06-03.334.