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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 September 2022

Published 07 September 2022

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2022-09-07.36
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 16 भाद्र 1944 (श0) सं(cid:201)या 36 पटना, बुधवार, ———————— 7 सितम्बर 2022 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-34 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---

भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 35-85 पूरक

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पूरक-क 86-932 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचना 31 अगस्त 2022

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-10/2021-3790/प॰व॰--श्री कमलजीत सिंह, भा॰व॰से॰, (BHः2004), वन संरक्षक, कार्य नियोजना अंचल पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन उनसे ठीक कनीय श्री हेमकान्त राय, भा॰व॰से॰, (BHः2004) को मुख्य वन संरक्षक कोटि में दी गयी प्रोन्नति की तिथि से मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-14) में प्रोन्नति दी जाती है एवं तद्‌नुसार बकाया वेतन एवं भत्तों के भुगतान की स्वीकृति भी दी जाती है।

2. श्री सिंह द्वारा मुख्य वन संरक्षक कोटि का प्रभार ग्रहण किये जाने की तिथि से उनके द्वारा धारित वर्त्तमान पद को उनके पदस्थापन अवधि तक के लिए मुख्य वन संरक्षक कोटि में उत्क्रमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

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बिहार विधन सभा सचिवालय

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अध्सिूचनाएं

1 सितम्बर 2022

सं0 1स्था-88/2022-1788/विस।--मंत्रिामंडल ;संसदीय कार्यद्ध सचिवालय विभाग की अध्सिूचना सं-928, दिनांक 23.09.2006 द्वारा अध्सिूचित बिहार विधन मंडल के पदाध्किारी ;वेतन एवं भत्तेद्ध नियमावली, 2006 के नियम-3;कद्ध सहपठित बिहार के मंत्राी ;वेतन एवं भत्तेद्ध नियमावली-2006 के निजी कर्मियों के सुविध संबंध्ति नियम में दिये गये अनुसूची-1 के नोट-III में निहित प्रावधन के अध्ीन माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आप्त सचिव ;बाह्‌यद्ध के पद पर श्री कृष्ण मुरारी, पिता-स्व रामप्रीत भगत, ग्राम-घेघटा, पोस्ट-गोविन्दचक, थाना-सोनपुर, जिला-सारण ;बिहारद्ध को वेतन स्तर-9 में अंके-53,100/-रूपये प्रतिमाह नियत वेतन एवं समय-समय पर स्वीकृत अन्य अनुमान्य भत्ता के साथ दिनांक 26.08.2022 ;अपद्ध से वर्त्तमान माननीय अध्यक्ष महोदय के कार्यकाल या उनके प्रसाद पर्यन्त जो भी पहले हो, तक अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाता है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

प्रवीन कुमार श्रीवास्तव, अवर सचिव।

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26 अगस्त 2022

क्रम सं॰ नाम / पदनाम योगदान की तिथि जिस पद पर संपुष्ट किया जाना है संपुष्टि की तिथि
1 2 3 4 5
1. श्री पुलकित, प्रतिवेदक 02.03.2020 प्रतिवेदक 02.03.2022
2. श्री हेमन्त शर्मा, प्रतिवेदक 26.02.2020 प्रतिवेदक 26.02.2022
3 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022
क्रम सं॰ नाम / पदनाम योगदान की तिथि जिस पद पर संपुष्ट किया जाना है संपुष्टि की तिथि
3. श्रीमती संगीता कुमारी, प्रतिवेदक 06.03.2020 प्रतिवेदक 06.03.2022
4. श्री राहुल कुमार यादव, प्रतिवेदक 27.02.2020 प्रतिवेदक 27.02.2022
5. श्री यानपति, प्रतिवेदक 18.05.2020 प्रतिवेदक 18.05.2022
6. श्री मुकुल कुमार, प्रतिवेदक 26.02.2020 प्रतिवेदक 26.02.2022
7. श्री सुरज कुमार, प्रतिवेदक 16.03.2020 प्रतिवेदक 16.03.2022
8. श्री धिरेन्द्र गौरव, प्रतिवेदक 03.03.2020 प्रतिवेदक 03.03.2022
9. श्री अभिनीत कुमार, प्रतिवेदक 04.03.2020 प्रतिवेदक 04.03.2022
10. सुश्री अंजली कुमारी, प्रतिवेदक 02.03.2020 प्रतिवेदक 02.03.2022

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

अभय शंकर राय, अवर सचिव।

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5 अगस्त 2022

सं0 02 स्था-52/2022-1644/विस।--श्रीमती सुजाता मिश्रा, उप निदेशक, पुस्तकालय, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना जो वेतन स्तर-11 मे प्रतिमाह 96,600/- रू॰ वेतन पाती है, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एल॰टी॰सी॰ नियमावली 1986 के अनुसरण में ब्लॉक वर्ष 2022-25 के लिए वित्त विभाग, बिहार सरकार के संकल्प सं॰-8043, दिनांक-11.10.2017 के कंडिका-3 'G

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

प्रवीन कुमार श्रीवास्तव, अवर सचिव।

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5 अगस्त 2022

सं0 02 स्था-173/2022-1633/विस।--श्री मध्ुप कुमार, वरीय प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को बिहार सेवा संहिता के भाग-2 के परिशिष्ट-13 ;1द्ध ;खद्ध के तहत दिनांक- 12.07.2022 से 15.07.2022 तक निरोध अवकाश स्वीकृत की जाती है तथा उक्त संहिता के नियम 159 के तहत दिनांक-16.07.2022 एवं 17.07.2022 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति दी जाती है ।

आदेश से,

अभय शंकर राय, अवर सचिव।

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4 अगस्त 2022

सं0 1स्था-163/2021-1612/विस।--श्री प्रभात चन्द्र, माननीय उपाध्यक्ष के आप्त सचिव ;सरकारीद्ध, बिहार विधन सभा, जो वेतन स्तर-11 ;67,700-208,700द्ध रूपये में प्रतिमाह 85,800/- रू वेतन पाते हैं, को बिहार राज्य सरकारी सेवक लीव ट्रेवल कन्सेशन नियमावली-1986 के तहत ब्लॉक वर्ष-2022-2025 में वित्त विभाग के संकल्प संख्या-8043, दिनांक-11.10.2017 की कंडिका 3;G

4 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

को आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है तथा दिनांक-19.08.2022, को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । साथ ही दिनांक- के संध्याकाल से दिनांक- तक मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति प्रदान की जाती है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

प्रवीन कुमार श्रीवास्तव, अवर सचिव।

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जल संसाधन विभाग

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अधिसूचनाएं

1 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2021-1260--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-4029), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, सालमारी को गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा के अधीन केन्द्रीय भंडार एवं प्रमंडलीय भंडार में भौतिक सत्यापन के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों की कमी पाये जाने एवं सुनियोजित ढंग से इस अपराधिक कृत्य को करने के आरोप के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-39 दिनांक-11.01.2022 द्वारा निलंबित किया गया है।

जल संसाधन विभाग का पत्रांक-42 दिनांक-11.01.2022 द्वारा उक्त मामले में विस्तृत जाँच हेतु अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना को निदेशित किया गया। जिसके आलोक में अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-08 दिनांक-04.04.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध करायी गयी। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षोपरांत आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करने की कार्रवाई की जा रही है।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(7) के तहत आरोप पत्र गठित किये जाने के लिए उक्त निलंबन को अगले चार माह तक के लिए नवीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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1 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2021-1261--श्री कुणाल किशोर (आई0डी0-5502), तत0 सहायक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण रूपांकण प्रमंडल-3, पटना को गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा के अधीन केन्द्रीय भंडार एवं प्रमंडलीय भंडार में भौतिक सत्यापन के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों की कमी पाये जाने एवं सुनियोजित ढंग से इस अपराधिक कृत्य को करने के आरोप के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-40 दिनांक-11.01.2022 द्वारा निलंबित किया गया है।

जल संसाधन विभाग का पत्रांक-42 दिनांक-11.01.2022 द्वारा उक्त मामले में विस्तृत जाँच हेतु अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना को निदेशित किया गया। जिसके आलोक में अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-08 दिनांक-04.04.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध करायी गयी। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षोपरांत आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करने की कार्रवाई की जा रही है।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(7) के तहत आरोप पत्र गठित किये जाने के लिए उक्त निलंबन को अगले चार माह तक के लिए नवीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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1 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(ल0सि0)-05-05/2018-1266--श्री बालकृष्ण गुप्ता (आई0डी0-1422) तत्का0 कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत (सेवानिवृति की तिथि-31.05.2004) के विरूद्ध लघु जल संसाधन विभाग में पदस्थापन के दौरान कतिपय आरोपों के लिए निलंबित करते हुए लघु जल संसाधन विभाग द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत लघु जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-132 सहपठित ज्ञापांक-2491 दिनांक 27.06.2005 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गया :- 1. पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिए शत-प्रतिशत रोक। 2. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त शेष राशि देय नहीं होगी।5 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 3. रू0 80,300/- मात्र की वसूली।

उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री गुप्ता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-10040/2007 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 25.04.2012 को उक्त याचिका निरस्त कर दिया गया। पुनः श्री गुप्ता द्वारा एल0पी0ए0 सं0-1596/2012 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 29.01.2016 को न्याय निर्णय पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय के अनुपालनार्थ लघु जल संसाधन विभागीय संकल्प सं0-1889 दिनांक 29.04.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री गुप्ता का पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग होने के कारण उनके समस्त मामले को लघु जल संसाधन विभागीय पत्रांक-1962 दिनांक 23.05.2018 द्वारा अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग को प्रेषित किया गया, जिसके आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1411 दिनांक 08.07.2019 द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध "पेंशन से 15% की स्थायी रूप से कटौती" का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया।

श्री गुप्ता द्वारा उपर्युक्त दण्डादेश के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं होने के कारण इसे अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-539 दिनांक 29.06.2021 द्वारा पूर्व से संसूचित दण्ड को यथावत रखा गया है।

विभागीय पत्रांक-537 दिनांक 29.06.2021 द्वारा श्री गुप्ता को निलंबन अवधि के सेवा का विनियिमन एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में अभ्यावेदन समर्पित करने हेतु नोटिस निर्गत किया गया।

उक्त के आलोक में श्री गुप्ता द्वारा बचाव बयान समर्पित किया गया है, जिसकी समीक्षा निम्नवत्‌ है-

बचाव बयान- श्री बाल कृष्ण गुप्ता, सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने बचाव बयान में अंकित किया गया है कि वे दिनांक-18.10.2003 से 31.05.2004 तक निलंबन अवधि में रहें। लघु जल संसाधन विभागीय आदेश सं0-132 दिनांक-27.06. 2005 द्वारा "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त शेष राशि देय नही होगा" का आदेश निर्गत किया गया। लघु जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-197, दिनांक-14.09.2018 द्वारा आदेश सं0-132 को निरस्त किया गया, जिसमें "देय राशि नहीं मिलेगा" लिखा हुआ था। उक्त के आलोक में इनके द्वारा दिनांक-18.10.2003 से 31.05.2004 तक शेष राशि के भुगतान का अनरोध किया गया है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि 14 वर्षो तक पेंशन नहीं मिलने से इनकी स्थिति काफी दयनीय हो गई है। समीक्षा- श्री गुप्ता द्वारा अपने आवेदन में अंकित किया गया है की आदेश सं0-132 दिनांक-27.06.2005 को निरस्त किए जाने के फलस्वरूप इन्हें दिनांक-18.10.2003 से 31.05.2004 तक श्ेाष राशि का भुगतान किया जाय। परंतु अपने अभ्यावेदन में इनके द्वारा आरोपों के संदर्भ में कोई तथ्य अथवा साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव इनका विनियमन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्ष- सम्यक समीक्षोपरांत श्री बालकृष्ण गुप्ता, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में आरोपों से संदर्भित कोई नया तथ्य अथवा साक्ष्य नहीं रहने के फलस्वरूप, इनका अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है।

फलतः श्री बालकृष्ण गुप्ता के निलंबन अवधि (दिनांक 18.10.2003 से दिनांक 30.05.2004 तक) का विनियमन निम्नरूपेण किए जाने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है।

"निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।"

उक्त निर्णय श्री बाल कृष्ण गुप्ता (ID-1422), तत0 कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत्त को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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6 जून 2022

सं0 22/नि॰सि॰(बिहा॰)28-05/2019-1339--कार्य प्रमंडल, लखीसराय अन्तर्गत लखीसराय सदर प्रखंड के साबीकपुर पंचायत लोदियाग्राम में मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत पुल निर्माण मे अनियमितता बरतने के आरोप में श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध ग्रामीण कार्य विभाग के संकल्प ज्ञापांक-1849 दिनांक-25.06.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। तत्पश्चात संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-30 दिनांक-16.03.2015 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिंदु पर ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-730 दिनांक-20.03.2019 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। चूँकि श्री राम स्वारथ सिंह, सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता का पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग है। अतः ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-340 दिनांक 29.11.2019 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में कई बार स्मारित करने के बावजूद द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में यह मानते हुए कि उन्हें द्वितीय कारणपृच्छा के संबंध में कुछ नहीं कहना है एवं आरोप को प्रमाणित मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-225 दिनांक-04.02.2022 द्वारा "पेंशन से पाँच प्रतिशत की मासिक कटौती अगले पाँच वर्षों तक" का दण्ड संसूचित किया गया।6 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुर्नविचार अभ्यावेदन दिनांक-04.03.2022 समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा में उनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में निम्न तथ्यों का उल्लेख उनके द्वारा किया गया है :-

(1) जल संसाधन विभाग के पत्रांक 564 दिनांक 20.04.2020 एवं स्मार सं॰ 1306 दिनांक 18.12.2020 के संबंध में कहना है कि उपर्युक्त अवधि में सेवानिवृत के पश्चात्‌ पत्नी के असाध्य रोग (ब्लड कैंसर) के ईलाज हेतु मैं अधिकतम समय चेन्नई अपने पुत्र के साथ रहता था।

जहाँ तक मेरी जानकारी है। उपर्युक्त पत्र मेरे संज्ञान में नहीं आया है। इस कारण जानकारी नहीं रहने के कारण ही द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित नहीं किया गया। आरोपवार स्पष्टीकरण निम्नवत्‌ है :- (i) आरोप सं॰-1 :- स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को तोड़ने का प्रावधान प्राक्कलन में किया गया था, लेकिन इस मद को परिमाण विपत्र (B.O.Q.) में शामिल नहीं किया गया।

आरोप सं॰-1 का स्पष्टीकरण :- निवेदन है कि उपर्युक्त आलोच्य पुल के प्राक्कलन का गठन दिनांक 28.10.2009 को कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा किया गया है एवं इसकी तकनीकी स्वीकृति तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 06.11.2009 को प्रदान की गई है जबकि मेरे द्वारा ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय में कार्यपालक अभियंता के रूप में दिनांक 12.02.2011 को पदभार ग्रहण किया गया है जो परिशिष्ट-1 के रूप में संलग्न प्रभार प्रतिवेदन से स्वतः स्पष्ट है एवं दिनांक 12.07.2010 को परिमाण विपत्र (B.O.Q.) की स्वीकृति प्रदान किया गया था।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं॰-1 मेरे संदर्भ में पूर्णतः अप्रासंगिक है एवं किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेश मात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। (ii) आरोप सं॰-2 :- स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को बिना आदेश निर्गत किए किसी गलत व्यक्ति द्वारा तोड़वाया गया एवं तोड़ी गई वस्तु को स्थल पर से हटवाया गया। आरोप सं॰-2 का स्पष्टीकरण ः- निवेदन है कि आरोप की अवधारणा पूर्णतः आधारहीन है। आरोप सं॰-1 के अवलोकन से यह स्वतः स्पष्ट है कि पुराने पुल को तोड़ने का प्रावधान परिमाण विपत्र (B.O.Q.) में नहीं था, फलतः इसका समावेश एकरारनामा में नहीं होना स्वाभाविक था।

अंकनीय है कि मेरे पूर्वाधिकारी द्वारा ही मेरे पदभार ग्रहण करने के पूर्व आलोच्य पुल के निर्माण के लिए निविदा देने वाले एकल निविदाकार के पक्ष में अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल, मुंगेर द्वारा निविदा का निस्तार होने के बाद एकल निविदाकार के माध्यम से ही पुराने पुल को तोड़वाया गया था। ऐसी स्थिति में गलत व्यक्ति से पुराने पुल को तोड़वाने का लांछन लगाने का कोई औचित्य नहीं है। पुराने पुल को तोड़ने से प्राप्त काम लायक ईंट (Serviceable Bricks) की गिनती कर एकल निविदाकार को सौंप दिया गया एवं इसके लिए उनसे हस्तरसीद प्राप्त कर लिया गया। एकल निविदाकार द्वारा पुराने स्थल से प्राप्त ईंटों को सुरक्षित स्थान पर रखने के उद्‌ेश्य से स्थल से हटवा दिया गया था, जो उचित था।

उपर्युक्त निवेदित तथ्यों से यह स्वतः स्पष्ट है कि पुराने पुल को तोड़ने की कार्रवाई एवं काम लायक ईंटों को स्थल से हटाने का कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय के मेरे पूर्वाधिकारी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के कार्यकाल में ही मेरे पदभार ग्रहण की तिथि दिनांक 12.02.2011 के पूर्व सम्पन्न हो चुका था।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं॰-2 मेरे संदर्भ में पूर्णतः अप्रासंगिक है एवं किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। (iii) आरोप सं॰-3 ः- तोड़ी गई सामग्रियाें को स्थल लेखा में नहीं लिया गया तथा नियमानुकूल निष्पादन नहीं कर सरकार को वित्तीय क्षति कराई गई। आरोप सं॰-3 का स्पष्टीकरण ः- निवेदन है कि पूर्वगामी कंडिका 4.2.2 में आरोप सं॰-2 के संदर्भ में निवेदित स्पष्टीकरण में निवेदित तथ्यों से स्वतः स्पष्ट है कि पुराने पुल को तोड़ने एवं इससे प्राप्त काम लायक ईंटों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थल से हटवाने का कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय में मेरे पदभार ग्रहण की तिथि दिनांक 12.02.11 के पूर्व सम्पन्न हो चुका था। संवेदक से हस्त रसीद लेने के उपरान्त सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे स्थल से तत्काल संवेदक द्वारा हटवा लिया गया था जिसमें कोई अनियमितता नहीं है क्योंकि उनके द्वारा हस्तरसीद विभागीय पदाधिकारी को दिया जा चुका था।

पुराने पुल को तोडने से प्राप्त काम लायक सामग्री (मात्र काम लायक ईंट) को स्थल लेखा में लेेने की कोई प्रासंगिकता नहीं है अपितु इसे Surplus A/C Site लेखा में लेने की अनिवार्यता थी जो तत्कालीन कनीय अभियंता द्वारा लिया गया था एवं सरप्लस साईट लेखा से इसे संवेदक द्वारा दिए गए हस्तरसीद के आधार पर संवेदक को निर्गत भी किया जा चुका था।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं॰-3 मेरे संदर्भ में पूर्णतः अप्रासंगिक है एवं किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेश मात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। (iv) आरोप सं॰-4 :- एकरारनामा की प्रति एवं कार्यादेश प्राप्त किए बगैर संवेदक से कार्य प्रारम्भ करा दिया गया। आरोप सं॰-4 का स्पष्टीकरण ः- निवेदन है कि इस आरोप की परिकल्पना मेरे संदर्भ में पूर्णतः आधारहीन है। ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय में कार्यपालक अभियंता के रूप में मेरे द्वारा दिनांक 12.02.2011 को पदभार ग्रहण के पूर्व ही मेरे पूर्वाधिकारी द्वारा आलोच्य पुल के निर्माण के लिए एकल निविदाकार के पक्ष में निविदा निस्तारोपरान्त एकरारनामा करने के पूर्व ही कार्यादेश दिया जा चुका था एवं संवेदक द्वारा कार्य प्रारम्भ कर दिया गया था। मेरे द्वारा दिनांक7 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 28.02.2011 को एकरारनामा किया गया। विशेष परिस्थिति में एकरारनामा के पूर्व कार्यहित में कार्यादेश Letter of Intent के रूप में निर्गत किया गया है। यह प्रचलन अभी कार्य विभागों में है जिसे औपबंधिक कार्यादेश की संज्ञा दी जा रही है। उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं॰-4 मेेरे संदर्भ में पूर्णतः अप्रासंगिक है एवं मेरे विरूद्ध किसी भी रूप में लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। पूर्वगामी कंडिकाओं में निवेदित आरोपवार स्पष्टीकरण के आलोक में उपर्युक्त सभी चारों आरोप मेरे संदर्भ में पूर्णतः अप्रासंगिक है एवं किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है।

मैं दिनांक 30 नवम्बर 2013 को सेवानिवृत हो चुका हूँ। अतः निवेदन है कि मेरे अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मुझे संसूचित दण्ड को निरस्त करने की कृपा की जाय।

समीक्षा :- श्री सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध द्वितीय कारण पृच्छा में प्रथम आरोप स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को बिना आदेश निर्गत किये तोड़वाने एवं तोड़ी गई सामग्री को स्थल से हटवाने का है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है कि मामले में एकल निविदा होने के कारण कार्यहित में कार्य प्रारम्भ करने हेतु निविदाकार को कार्य स्थल पर पूर्व से निर्मित पुल को तोड़कर अलग किये जाने का निदेश दिया गया। उल्लेखनीय है कि एकल निविदा होने के बावजूद इस निमित आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित था परन्तु बिना आदेश निर्गत किये पूर्व निर्मित पुल को तोड़वाना अनाधिकृत एवं अनियमित है। अतः इस बिन्दु पर श्री सिंह का पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रतिवेदित बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।

द्वितीय आरोप पूर्व निर्मित पुल को तोड़ी गई सामग्रियों को स्थल लेखा में नहीं लिये जाने तथा नियमानुकूल निष्पादन नहीं किये जाने का है। संचालन पदाधिकारी द्वारा तोड़े गये पुल से प्राप्त काम लायक ईंटों को सरप्लस एकांउट में लिये जाने के आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया कि इसे मापी पुस्त में भी अंकित किया गया है। यद्यपि श्री सिंह द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन के Surplus A/C में लिये गये सामग्रियों से संबंधित अभिलेख की छायाप्रति तथा निर्गत किये गये सामग्रियों का हस्तरसीद संलग्न किया गया है (पृ॰ 151-150/प॰द्र॰) परन्तु उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में श्री सिंह का अभ्यावेदन उक्त वर्णित द्वितीय आरोप के संदर्भ में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

तृतीय आरोप एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये बिना कार्य को संवेदक से प्रारम्भ करा दिये जाने का है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त योजना में कार्य करने का निदेश श्री सिंह के दिनांक 12.02.2011 के प्रमंडल में योगदान देने के पूर्व में ही दिये जाने के आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है। उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत कार्य का एकरारनामा एवं कार्य प्रारम्भ की तिथि 28.02.2011 है। परन्तु इसके पूर्व ही संवेदक द्वारा कार्य प्रारम्भ कर दिया गया, जो नियमानुकूल नहीं है। अतएव, श्री सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में उपरोक्त बिन्दु पर प्रतिवेदित बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत नहीं हुआ जा सकता है। अतएव इस बिन्दु पर श्री सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का अभ्यावेदन उपरोक्त के संदर्भ में नहीं है। अतः समीक्षोपरांत श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में यह पाया गया कि श्री राम स्वारथ सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा पुर्नविचार अभ्यावेदन में पुनः उन्ही तथ्यों को दोहराया गया है, जिसकी समीक्षा ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा असहमति के बिंदुओं के निर्धारण के क्रम में किया गया था तथा इन तथ्यों को अस्वीकृत करते हुए आरोपों को प्रमाणित पाया था। अतः श्री राम स्वारथ सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग के द्वारा समर्पित पुर्नविचार के अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं करने के कारण इनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।

अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं0-225 दिनांक-04.02.2022 द्वारा संसूचित दण्ड ''पेंशन से पाँच प्रतिशत की मासिक कटौती अगले पाँच वर्षों तक'' को यथावत्‌ रखते हुए पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है। उक्त निर्णय में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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8 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1359--श्री संजय कुमार (आई0डी0-5379), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में बरती गई अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1611, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1684, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-2142 दिनांक 25.09.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए तत्पश्चात बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1260 दिनांक 25.06.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः -

"08(आठ) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।"8 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 श्री संजय कुमार, तत0 सहायक अभियंता द्वारा उक्त दण्ड के विरूद्ध विभाग में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसके सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-969 दिनांक 21.07.2020 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश को यथावत रखा गया :-

"08(आठ) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।" बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) में निहित प्रावधान के आलोक में निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किये जाने पर सेवा तथा वेतनभत्ता की अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक-954 दिनांक 27.08.2021 द्वारा नोटिस निर्गत करते हुए श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पत्रांक-0 दिनांक 26.10.2021 में कहा गया है कि निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनेटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया गया था जहां इनके द्वारा प्रतिदिन उपस्थिति पंजी में उपस्थिति बनाया गया। श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि इनके विरुद्ध गठित आरोप को संपुष्ट करने वाला विभाग की तरफ से एकमात्र साक्ष्य मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर का पत्रांक 1 (c) दिनांक 15.08.2017 इनके निलंबन की तिथि 14.09.2017 के पूर्व ही विभाग को प्राप्त हो चुकी थी इसलिये निलंबन के स्थान पर स्थानांतरण के विकल्प पर विचार किया जा सकता था।

श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि यदि इनका निलंबन आदेश न्यायोचित था, तो भी बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 27 (1) के तहत निर्गत निलंबन आदेश की पुष्टि किया जाना था जो कि नहीं किया गया। इन्हें विभाग द्वारा एक वर्ष से अधिक समय तक निलंबित रखा गया जबकि सामान्य प्रशासन विभाग, पटना का पत्रांक-3/एम0-27/2014 सा0प्र0 2763 दिनांक 26.02.2014 की कंडिका-2 के अनुसार विभागीय कार्यवाही का निष्पादन 12 माह के अंदर कर लिया जाना चाहिए था। अर्थात 12 माह से अधिक किसी भी सरकारी सेवक को निलंबित नहीं रखा जा सकता। इनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में अपील दायर किये जाने का भी उल्लेख किया गया है। उक्त के आलोक में इनके द्वारा आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है जिसपर विचार किया जा सके। इनके द्वारा निलंबन की कार्रवाई एवं अवधि को प्रावधानों के अनुरुप नहीं होने तथा माननीय उच्च न्यायालय पटना में अपील दायर किये जाने का उल्लेख किया है। अतः श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता का विनियमन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय लिया गया -

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री संजय कुमार (आई0डी0-5379) तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा सम्प्रति सहायक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-02, पटना के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किया जाता है :-

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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8 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1360--श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में जानमाल की व्यापक क्षति सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1608, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1691, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-2141 दिनांक 25.09.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए तत्पश्चात बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1258 दिनांक 25.06.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः -

"कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी।" श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता द्वारा उक्त दण्ड के विरूद्ध विभाग में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसके सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-970 दिनांक 21.07.2020 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश को यथावत रखा गया :-

"कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी।" बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) में निहित प्रावधान के आलोक में निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किये जाने पर सेवा तथा वेतनभत्ता की अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक-949 दिनांक 27.08.2021 द्वारा नोटिस निर्गत करते हुए श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी।9 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पत्रांक-04 दिनांक 01.11.2021 में कहा गया है कि निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय-मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनेटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया गया था जहाँ इनके द्वारा प्रतिदिन उपस्थिति पंजी में उपस्थिति बनाया गया। श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि इनके विरूद्ध गठित आरोप को संपुष्ट करने वाला विभाग की तरफ से एकमात्र साक्ष्य मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर का पत्रांक-1(C) दिनांक 15.08.2017 इनके निलंबन की तिथि 14.09.2017 के पूर्व ही विभाग को प्राप्त हो चुकी थी इसलिए निलंबन के स्थान पर स्थानांतरण के विकल्प पर विचार किया जा सकता था।

श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि यदि इनका निलंबन आदेश न्यायोचित था, तो भी बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 27(1) के तहत निर्गत निलंबन आदेश की पुष्टि किया जाना था जो कि नहीं किया गया। उन्हें विभाग द्वारा एक वर्ष से अधिक समय तक निलंबित रखा गया जबकि सामान्य प्रशासन विभाग, पटना का पत्रांक-3/एम0-27/2014 सा0प्र0 2763 दिनांक 26.02.2014 की कंडिका-2 के अनुसार विभागीय कार्यवाही का निष्पादन 12 माह के अंदर कर लिया जाना चाहिए था। अर्थात 12 माह से अधिक किसी भी सरकारी सेवक को निलंबित नहीं रखा जा सकता। इनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील दायर किये जाने का भी उल्लेख किया गया है।

उक्त के आलोक में इनके द्वारा आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है, जिसपर विचार किया जा सके। इनके द्वारा निलंबन की कार्रवाई एवं अवधि को प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने तथा उच्च न्यायालय पटना में अपील दायर किये जाने का उल्लेख किया है। अतः श्री सतीश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का विनियमन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय लिया गया -

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (निलंबित) मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किया जाता है :-

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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8 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1361--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4366), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण बलुआ ग्राम, सपही ग्राम एवं फुलवरीया ग्राम में हुए टूटान सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1609, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1686, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-2144 दिनांक 25.09.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए तत्पश्चात बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1259 दिनांक 25.06.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः -

"कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

श्री अरूण कुमार, तत0 सहायक अभियंता द्वारा उक्त दण्ड के विरूद्ध विभाग में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसके सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-968 दिनांक 21.07.2020 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश को यथावत रखा गया :-

"कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) में निहित प्रावधान के आलोक में निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किये जाने पर सेवा तथा वेतनभत्ता की अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक-950 दिनांक 27.08. 2021 द्वारा नोटिस निर्गत करते हुए श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पत्रांक-0 दिनांक 22.10.2021 श्री अरूण कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा अपने विनियमन अभ्यावेदन में आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया है। इनके द्वारा मात्र कहा गया है कि विभागीय कार्यवाही के दौरान इन्हें मांगे गये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया तथा आरोप को प्रमाणित करने हेतु किसी भी गवाह को प्रस्तुत नहीं किया। अपने उपर संसूचित दण्ड के विरुद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-9386/2020 दायर किया गया।

अपने विनियमन अभ्यावेदन पर अंतिम निर्णय लेने हेतु उक्त न्यायनिर्णय की प्रतीक्षा किये जाने का अनुरोध श्री कुमार द्वारा किया गया है।10 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 माननीय उच्च न्यायालय में दायर उक्त रिट याचिका में अद्यतन माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित नहीं है (माननीय उच्च न्यायालय के अधिकारिक साईट पर दिनांक-27.05.2022 के स्थिति के अनुसार)।

उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है जिसपर विचार किया जा सके। अतएव इनका विनियमन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय लिया गया -

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4366) तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, A-21, सचिवालय कॉलोनी, पत्रकार नगर, कंकडबाग, पटना-20 के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किया जाता है :-

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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8 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1362--श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई0डी0-5335), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में बरती गई अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1610, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1683, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-2143 दिनांक 25.09.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए तत्पश्चात बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1261 दिनांक 25.06.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः -

"08(आठ) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।"

श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत0 सहायक अभियंता द्वारा उक्त दण्ड के विरूद्ध विभाग में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसके सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-967 दिनांक 21.07.2020 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश को यथावत रखा गया :-

"08(आठ) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।" बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) में निहित प्रावधान के आलोक में निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किये जाने पर सेवा तथा वेतनभत्ता की अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक-948 दिनांक 27.08.2021 द्वारा नोटिस निर्गत करते हुए श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पत्रांक-0 दिनांक 25.10.2021 श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, द्वारा अपने बचाव वयान में कहा गया है कि निलंबन अवधि में मेरा मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनेटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया गया था जहां इनके द्वारा प्रतिदिन उपस्थिति पंजी में उपस्थिति बनाया गया।

श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि इन पर गठित आरोप को संपुष्ट करने वाला विभाग की तरफ से एकमात्र साक्ष्य मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर का पत्रांक 1 (c) दिनांक 15.08.2017 इनके निलंबन की तिथि 14.09.2017 के पूर्व ही विभाग को प्राप्त हो चुकी थी। इसलिए निलंबन के स्थान पर स्थानांतरण के विकल्प पर विचार किया जा सकता था।

श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि यदि इनका निलंबन आदेश न्यायोचित था, तो भी बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 27(1) के तहत निर्गत निलंबन आदेश की पुष्टि किया जाना था। किन्तु इस संदर्भ में भी किसी प्रकार का कोई विभागीय निदेश/पत्र निर्गत नहीं किया गया। इन्हें विभाग द्वारा एक वर्ष से अधिक समय तक निलंबित रखा गया जबकि सामान्य प्रशासन विभाग, पटना का पत्रांक-3/एम0-27/2014 सा0प्र0 2763 दिनांक 26.02. 2014 की कंडिका-2 के अनुसार विभागीय कार्यवाही का निष्पादन 12 माह के अंदर कर लिया जाना चाहिए था। अर्थात 12 माह से अधिक किसी भी सरकारी सेवक को निलंबित नहीं रखा जा सकता।

उक्त के आलोक में श्री कुमार उक्त के आलोक में इनके द्वारा आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है जिसपर विचार किया जा सके। श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन में निलंबन की कार्रवाई एवं अवधि को प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने का उल्लेख किया है। अतः श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत0 सहायक अभियंता का विनियमन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय लिया गया -11 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 "निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई0डी0-4045) तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद सम्प्रति सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किया जाता है :-

"निलंबन अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 24.09.2018 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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13 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(वीर0)-07-06/2013/1397--श्री रास बिहारी सिन्हा (आई0डी0-5094), तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प सं0-1533 दिनांक 05.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

आरोप निम्न है :- (1) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं बिटुमिनस सड़क निर्माण कार्य (एकरारनामा सं0-01SBD/2010) के लिए निरीक्षण भवन, भपटियाही के प्रांगन में अवस्थित जी0टी0एस0 बेंच मार्क के आधार पर पूर्वी कोशी तटबंध के 40कि0मी0 के पास मंदिर के स्लैव के टॉप पर टी0बी0एम0 60.341मी0 उड़नदस्ता जाँच में सही पाया गया जबकि पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा निर्धारित टी0बी0एम0 57.925मी0 जाँच में सही नही ंपाया गया। तटबंध के कि0मी0 52.00 पर दो अवर प्रमंडलों के मिलान बिन्दु पर प्री-लेवल में अंतर पाया गया है, जिससे त्रुटिपूर्ण लेवल लिया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण लेवल लिये जाने के कारण पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत रू0 5,32,38,572.70 अधिकाई भुगतान त्रिसदस्यीय समिति के जाँच में पाया गया है।

उच्चाधिकारियों द्वारा GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल सुधार हेतु पत्राचार किये जाने के बाद भी प्री-लेवल मेें सुधार नहीं किये जाने से अधिकाई भुगतान की स्थिति बनी रही। पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत कि0मी0 40. 00 से 84.00 तक प्री-लेवल लेने एवं जाँच करने में आपकी सहभागिता-संलिप्तता परिलक्षित है। जिससे उक्त विषयक कार्य का त्रुटिपूर्ण टी0बी0एम0 Carry करने एवं प्री-लेवल लेने/जाँच के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। (2) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं बिटुमिनस सड़क निर्माण में पूर्व कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 के बीच कुल 54,29,152.02 घन मी0 मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया है। जबकि त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा कुल 50,82,823.303 घन मी0 मिट्टी कार्य पाया गया है। इस प्रकार कुल 346334.717 घन मी0 के लिए एकरारित दर पर कुल राशि रू0 53238572.70 (रॉयल्टी राशि को छोड़कर) संवेदक को अधिक भुगतान होना परिलक्षित होता है। उक्त कार्य में अपने कार्यक्षेत्र अन्तर्गत कार्य के क्रियान्वयन एवं विपत्र तैयार करने से आप संबंधित रहे है। अधीक्षण अभियंता पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा द्वारा लेवल में विसंगति के निराकरण हेतु कई पत्राचार किये जाने के बाद भी GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल की जाँच नहीं किये जाने से संवेदक को अधिकाई भुगतान होने की स्थिति बनी रही। इस प्रकार उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं करते हुए त्रुटिपूर्ण प्री-लेवल के आधार पर कार्य कराने एवं विपत्र तैयार किये जाने से रू0 53238572.70 संवेदक को अधिकाई भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री रास बिहारी सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1101 दिनांक 08.09.2020 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गयी।

श्री रास बिहारी सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा अपने अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-

श्री सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि मैं पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सहरसा (कि0मी0 64.00 से 76.00 तक) अवर प्रमंडल पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित था। कार्य प्रारंभ के पूर्व मुख्य अभियंता, वीरपुर द्वारा गठित असम्बद्ध टीम (गुण नियंत्रण प्रमंडल, वीरपुर) द्वारा कोशी बराज पर अवस्थित शून्य बिन्दु से B.M. को Carry किया गया एवं प्री लेवल लिया गया। असम्बद्ध टीम द्वारा पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 64.00 पर स्थापित T.B.M. के अनुरूप मेरे द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में मिट्टी कार्य कराया गया।

अधीक्षण अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा के पत्रांक-1208 दिनांक 02.10.11 द्वारा T.B.M. में अंतर आने के फलस्वरूप इसके निराकरण हेतु पूर्वी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर एवं सुपौल के कार्यपालक अभियंता से अपने समक्ष कि0मी0 40.00 पर स्थित T.B.M. Accuracy जाँच का निदेश दिया गया जिसके पश्चात 07.11.12 को असम्बद्ध टीम द्वारा पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 64.00 पर स्थापित T.B.M के अनुरूप मेरे द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में मिट्टी कार्य कराया गया।12 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 अधीक्षण अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा के पत्रांक-1208 दिनांक 02.10.11 द्वारा T.B.M. में अंतर आने के फलस्वरूप इसके निराकरण हेतु पूर्वी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर एवं सुपौल के कार्यपालक अभियंता से अपने समक्ष कि0मी0 40.00 पर स्थित T.B.M. Accuracy जाँच का निदेश दिया गया, जिसके पश्चात 07.11.12 को असम्बद्ध टीम द्वारा पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 64.00 पर T.B.M. स्थापित किया गया। इनके द्वारा T.B.M. में कराये गये अंतर आने के करीब चार माह पूर्व दिनांक 14.06.11 को ही कि0मी0 64.00 से कि0मी0 76.00 के बीच कराये गये मिट्टी कार्य की मापी का रिकार्ड मापपुस्त में दर्ज किया गया तत्पश्चात इस भाग में किसी प्रकार का मिट्टी कार्य नहीं कराया गया। T.B.M. हमेशा ही असम्बद्ध टीम द्वारा ही Carry किया जाता रहा, अधोहस्ताक्षरी के स्तर से अलग से प्रयास नहीं किया गया। अधोहस्ताक्षरी के क्षेत्राधीन कराई गयी मिट्टी कार्य की मात्रा जाँच टीम द्वारा दिनांक 08.06.16 को आकलित की गई। जिसमें कमी का मुख्य कारण T.B.M. नहीं बल्कि मापी के करीब पाँच वर्षों बाद मिट्टी की मात्रा में 4.59% का ही अंतर जो कि स्वभाविक है। इस संदर्भ विभागीय पत्रांक-947 दिनांक 01.04.15 का भी अवलोकन किया जा सकता है जिसमें पूरे बिहार के विभिन्न जिलों में निर्मित जमींदारी बाँध हेतु जिलावार तथा वर्षवार क्षरण का निर्धारण किया गया, लगभग सभी जिलों में तटबंध निर्माण के बाद प्रथम वर्ष ही औसत क्षरण 3% से अधिक रखी गयी जबकि वर्षों बाद औसत क्षरण 7% से भी ज्यादा है। जबकि अधोहस्ताक्षरी के क्षेत्राधीन निर्मित बाँध में पाँच वर्षों में क्षरण मात्र 4.59% ही हुआ।

श्री रास बिहारी सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये है :-

आरोप सं0-1 के संदर्भ में श्री सिन्हा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि इनका कार्य क्षेत्र पूर्वी कोशी तटबंध का कि0मी0 64.00 से 76.00 तक था। कार्य प्रारंभ के पूर्व मुख्य अभियंता, वीरपुर द्वारा गठित असम्बद्ध दल द्वारा कोशी बराज पर अवस्थित शून्य से BM को Carry किया गया एवं प्री लेवल लिया गया। असम्बद्ध दल द्वारा कि0मी0 64.00 पर स्थापित T.B.M. के अनुरूप इनके द्वारा कार्य कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी इनके इस तथ्य को स्वीकार किया गया है। अतः त्रुटिपूर्ण T.B.M. Carry करने के लिए इन्हें दोषी माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। परन्तु पूर्वी तटबंध के कि0मी0 64.00 से 76.00 के बीच लिए गये प्री-लेवल कार्य में इनके संलग्न रहने का उल्लेख संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में किया गया है जिसकी त्रुटिपूर्ण पाये जाने के लिए इन्हें दोषी माना गया है। इनके द्वारा कहा गया है कि T.B.M. हमेशा असम्बद्ध दल द्वारा Carry किया जाता रहा एवं इनके द्वारा अलग से प्रयास नहीं किया गया जो स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।

13 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

झंझारपुर में दिनांक-15.08.2014 को कमला-बलान तटबंध के कि0मी0 70.80 पर पाईपिंग के कारण तटबंध में हुए टुटान के लिए प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में निहित प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-727 दिनांक-31.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-343 दिनांक 31.07.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें आरोप को अप्रमाणित बताया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमती के बिन्दु पर श्री सिंह से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। तदालोक में श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा का जवाब दिया गया, जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत उनके द्वितीय कारण-पृच्छा का उार स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। फलस्वरूप श्री मिथिलेश कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-2, झंझारपुर को प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-277 दिनांक-09.02.2018 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' उल्लेखनीय है कि श्री सिंह के विरूद्ध एक अन्य मामले (अन्य संचिका में) (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-2, झंझारपुर) में कार्यपालक अभियंता के रूप में वर्ष 2017 में कमला-बलान नदी के दायाँ तटबंध के बिन्दु 73.50 एवं 74.60 कि0मी0 पर हुए टुटान के मामले में मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद भी टुटान के कट इंड को होल्ड करने में आवश्यकतानुसार अभिरूचि नहीं लेने, उच्चाधिकारियों के निदेशों की अवहेलना करने जैसे आरोपों के लिए श्री सिंह को निलंबित कर, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में निहित प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक-19.07.2018 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड संसूचित किया गया।

श्री सिंह के विरूद्ध निर्गत दण्ड ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' के पूर्व ही श्री सिंह को 2017 में कमला-बलान नदी के दायाँ तटबंध में हुए टुटान के मामल में विभागीय अधिसूचना सं0-1613 दिनांक-14.09.2017 द्वारा दिनांक-14.09.2017 से निलंबित किये जाने एवं तत्पश्चात्‌ उक्त मामले में विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक-19.07. 2018 द्वारा ''सेवा से बर्खास्त'' किये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना सं0-277 दिनांक-09.02.2018 द्वारा निर्गत दण्ड ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड का कार्यान्वयन नहीं होने संबंधी महालेखाकार कार्यालय, बिहार, पटना से एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें उल्लेख किया गया है कि श्री सिंह के अन्य मामले में निलंबन के उपरांत ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड संसूचित होने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-277 दिनांक-09.02.2018 द्वारा निर्गत दण्ड ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है। तदालोक में मामले की पुनः समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-277 दिनांक-09.02.2018 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' के दण्ड को निरस्त करते हुए उक्त मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही को श्री सिंह के सेवानिवृत होने के कारण बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43बी में सम्परिवर्तित करने एवं मामले के समीक्षोपरांत पूर्व में अधिरोपित किये गये दण्ड के समतुल्य दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव वर्णित संदर्भ एवं सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-277 दिनांक-09.02.

2016 द्वारा संसूचित ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' के दण्ड को निरस्त किया जाता है एवं उक्त मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43बी में सम्परिवर्तित किया जाता है। उक्त मामले में पुनः समीक्षोपरांत पूर्व में अधिरोपित दण्ड के समतुल्य दण्ड अधिरोपित करने हेतु अलग से आदेश निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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16 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(डि0)14-05/2019-1411--श्री सुखदेव राम (आई0डी0-4483), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा (भोजपुर) के विरूद्ध पदस्थापन अवधि में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के द्वारा आरोप पत्र गठित कर पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग को समर्पित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत श्री राम से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण जवाब पर योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की माँग की गई। योजना एवं विकास विभाग का पत्रांक-1335 दिनांक 22.04.2020 द्वारा मंतव्य समर्पित किया गया, जिसमें श्री राम द्वारा कार्य में समुचित पर्यवेक्षण नहीं करने एवं निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता को नजरअंदाज करने के दायित्वहीनता का मंतव्य प्रतिवेदित करते हुए स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। विभागीय समीक्षोपरांत उक्त आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1108 दिनांक 08.09.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत श्री सुखदेव राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप निम्न है - आरोप सं0-(1) - भोजपुर (आरा) जिलान्तर्गत आरा सदर प्रखंड के ग्राम जमीरा में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा में पदस्थापन काल में निर्मित पंचायत सरकार भवन की14 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 जाँच के क्रम में Plaster एवं Punning तथा Parapet कमजोर एवं Finishing Work की गुणवत्ता निम्न स्तर की पायी गई। जगह-जगह जल जमाव, दिवाल एवं अनेक स्थानों पर क्रैक दृष्टिगोचर होना, खिड़कियों में शीशे का न होना, तथा भवन के अन्य क्षतिग्रस्त भाग निर्माण कार्य में हुई अनियमितता को दर्शाते हैं। पंचायत सरकार भवन के निर्माण एवं Finishing Work में श्री राम के द्वारा समुचित ध्यान न देकर अपने कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती गई। फलतः निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए श्री राम उत्तरदायी हैं। आरोप सं0-(2) - समुचित पर्यवेक्षण एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन न किए जाने के श्री राम के इस कृत्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1)(2) एवं (3) का उल्लंघन हुआ है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1118 दिनांक 17.09.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गई। श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री राम द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा /अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है - इनके द्वारा कहा गया कि उक्त वर्णित कार्य की देख रेख में कोई कमी नहीं थी। रख-रखाव के अभाव एवं पंचायतों के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। दिवाल पर गोबर पाथने का कार्य किया जाता था। इसकी चर्चा मुख्य अभियंता के प्रतिवेदन में भी गोबर गोइठा रखन की चर्चा की गई है। जिसके कारण प्लास्टर गोबर पाथने से खराब हो गया था। कार्य की क्वालिटी को आई इस्टिमिसेन से खराब नहीं कहा जा सकता है। आई इस्टिमिसेन से देखने में खराब लग सकता है। प्लास्टर की क्वालिटी की जाँच कराई गई थी; जो संतोषप्रद था। हर चीज के लिए अभियंता को दोषी ठहराना उचित प्रतीत नहीं होता है। क्योंकि स्थल पर रहकर मेरे द्वारा कार्य कराना संभव नहीं हो सकता है। प्रमंडल में योजनाओं की संख्या ज्यादा रहती है। निविदा के कार्य में संवेदक भी जिम्मेवार होता है। उसी के लिए Defect Liability Period प्रावधानित किया जाता है, जो किया गया है। मेरे द्वारा कोई भी गलती नहीं की गई है। यदि मैं Nill Bill पारित कर दिया होता तो उसके लिए दोषी माना जाता एवं तब तो संवेदक के द्वारा कार्य नहीं कराया जाता। मैं अपने कर्त्तव्यों के प्रति कृतज्ञ रहा हूँ। विभाग के हर नियम का पालन करने का प्रयास किया जाता है। जिला में अतिरिक्त कार्यों एवं कर्त्तव्यों का अनुपालन यथासंभव किया जाता था। लापरवाही नहीं की गयी थी। कार्य की क्वालिटी के प्रतिवेदन पर भी ध्यान देना चाहिए था। क्योंकि क्वालिटी के प्रतिवेदन के अनुरूप ही आगे की कार्यवाही की जाती रही है। रख-रखाव पंचायत के द्वारा नहीं करने के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के लिए मुझे दोषी मानना न्यायोचित नहीं होगा। उक्त के आलोक में श्री राम द्वारा स्थिति एवं परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए समरूप आरोप-1 एवं 2 में लगे आरोप प्रमाणिकता को समाप्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री राम से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई, जो मुख्य रूप से निम्नवत हैः- (1) श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि देख-रेख के अभाव में पंचायत सरकार भवन के दिवाल पर गोबर पाथना एवं इसमें प्लास्टर का खराब होना बताया गया है। उपरोक्त कार्य के संबंध में मुख्य अभियंता के द्वारा जिन त्रुटियों को उद्धृत किया गया है वह सामान्य त्रुटियाँ हैं, जो देख रेख के अभाव में संभव है। उक्त सभी त्रुटियों का निराकरण Defect Liability Period में संवेदक द्वारा कर दिया गया है जैसा कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है। लेकिन दिवाल एवं अन्य स्थानों पर Crack का दृष्टिगोचर होना निर्माण के समय समुचित रूप से पर्यवेक्षण नहीं किये जाने के कारण हो सकता है। फलतः निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता एवं समुचित पर्यवेक्षण नहीं करने के लिए श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी है। अतएव आरोप सं0-1 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। (2) समुचित पर्यवेक्षण एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन न किए जाने से श्री राम के इस कृत्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1), (2) एवं (3) का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर आरोप सं0-2, आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा के विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है -

(i) निन्दन (ii) संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में चार प्रक्रम पर अवनति। उक्त के आलोक में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, कैमूर (भभुआ) को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -

(i) निन्दन (ii) संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में चार प्रक्रम पर अवनति।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।15 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

20 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-15/2018-1466--श्री राज कुमार सिंह (आई0डी0-जे 8806) तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे, तो उनके विरूद्ध NH-98 चैनपुर से मोरीपावां सड़क के मरम्मति कार्य में अनियमितता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र गठित किया गया। आरोप पत्र में वर्णित आरोपों की जाँच हेतु श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1611 दिनांक 25.07.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप- (1) श्री राज कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-02, पटना के विरूद्ध NH-98 चैनपुर से मोरीपावां पथ के निर्माण में बरती गई अनियमितता के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर स्पष्टीकरण किया गया। स्पष्टीकरण में समर्पित जवाब में कहा गया कि उक्त पथ का कार्य गुणवत्ता पूर्वक एवं विशिष्टियों के साथ करवाया गया है तथा संवेदक को भुगतान किए गए कार्यों के अनुरूप ही किया गया है। श्री रामाशीष पासवान, कार्यपालक अभियंता, निगरानी प्रमंडल-01, पटना द्वारा दिनांक 24.06.2011 द्वारा की गई स्थल की जाँच प्रतिवेदन में निम्न आरोपों के लिए श्री सिंह दोषी है -

(i) वर्णित पथ में पी0सी0सी0 वाले भाग के प्लैंक में मिट्टी नहीं पाया गया। मापीपुस्त में अंकित मिट्टी के अनुसार स्थल पर मिट्टी नही पाया गया।

(ii) वर्णित पथ के पी0सी0सी0 भाग का उपरी सतह जहाँ-तहाँ उखड़ा हुआ तथा एक जगह पर पथ में क्रैक पाया गया है।

(2) उक्त से स्पष्ट है कि श्री सिंह द्वारा NH-98 चैनपुर से मोरीपावां पथ के मरम्मति कार्य में अनियमितता बरती गई है जिससे सरकारी राशि का अपव्यय हुआ है। जो बिहार वित्तीय नियमावली के नियम के प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के प्रावधानों का उल्लंघन है। उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी का पत्रांक-3781 दिनांक 02.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षा-श्री राज कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध ग्रामीण कार्य विभाग, पटना का पत्रांक-968 दिनांक 03. 05.2018 से प्राप्त प्रपत्र-'क' के आलोक में जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय संकल्प निर्गत कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप पत्र के दोनों आरोपों में उल्लेखित कार्याें का आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं कराए जाने के आधार पर आरोप को आरोपी के संदर्भ में अप्रमाणित पाया है परन्तु कार्यपालक अभियंता, निगरानी प्रमंडल सं0-1 (गु0), ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के द्वारा जिस कार्य की जाँच कर अपने पत्रांक-308(अनु0) दिनांक 28.06.2011 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। जबकि जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-2 के संदर्भ में पी0सी0सी0 भाग का उपरी सतह जहाँ-तहाँ उखड़ा होने तथा पथ में क्रैक पाए जाने का आरोप अप्रमाणित बताया गया है। उक्त से स्पष्ट होता है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के कार्य से संबद्ध नहीं रहने के कारण दोनों आरोप अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। चूँकि उक्त पथ का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग, पटना द्वारा कराया गया है एवं श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप पत्र एवं साक्ष्य के आधार पर संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को अप्रमाणित करने की स्थिति में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त मंतव्य पर विभागीय पत्रांक-412 दिनांक 27.02.2020 से स्पष्ट मंतव्य की मांग की गई। जिसके आलोक में उप सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-675 दिनांक 09.04.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। प्राप्त मंतव्य की पुनः तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित पाया गया। इसी क्रम में श्री सिंह दिनांक 28.02.2021 को सेवानिवृत हो गए। उनके सेवानिवृति के उपरांत उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-45 सह ज्ञापांक-675 दिनांक 27.07.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी में सम्परिवर्तित कर दी गई। ग्रामीण कार्य विभाग से प्राप्त मंतव्य के समीक्षोपरांत श्री राज कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप सं0-01 एवं आरोप सं0-02 को प्रमाणित मानते हुए विभागीय पत्रांक-677 दिनांक 27. 07.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री सिंह द्वारा अपना जवाब पत्रांक-0, दिनांक 06.09.2021 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा विभाग स्तर पर की गई। जो निम्न है - समीक्षा- जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के अनुसार श्री सिंह के विरूद्ध गठित आराप NH-98 चैनपुर से मोरीपावां पथ के निर्माण में बरती गई अनियमितता से संबंधित है। जिसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में भी किया गया है। परन्तु ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में योजना का नाम "Repair to Road from NH-98, Chainpur to arap village (Naubatpur)" अंकित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप पत्र में उल्लेखित पथ के नाम एवं ग्रामीण कार्य विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन में अंकित योजना में भिन्नता के कारण अभिलेखीय आधार पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप पत्र के अन्तर्गत प्रश्नगत कार्य नहीं16 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 कराए जाने संबंधी बचाव-बयान को सही मानते हुए आरोप सही प्रतीत नहीं होने का मंतव्य दिया है, परन्तु कार्यपालक अभियंता, निगरानी प्रमंडल-1(गु0), ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के द्वारा जिस कार्य की जाँच कर अपने पत्रांक-308 (अनु0) दिनांक 28.06.2011 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है इस कार्य अन्तर्गत मिट्टी कम पाए जाने के संबंध में आरोप सही प्रतीत होते हैं। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रश्नगत कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, पटना से संबंधित होने के कारण विभागीय पत्रांक-412 दिनांक 27.02.2020 द्वारा ग्रामीण कार्य विभाग, पटना से मंतव्य की मांग की गई। उप सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराए गए मंतव्य से अधीक्षण अभियंता गुणवत्ता प्रबंधन की समीक्षा में प्रश्नगत मामला मूलतः पटना जिला के NH-98 चैनपुर (नौबतपुर) से मोरिपावां पथ में अराप पुल (विक्रम) से टंडवा (नौबतपुर) तक करीब 1.5कि0मी0 सड़क निर्माण से संबंधित बतलाया गया है जो कि जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित योजना NH-98 चैनपुर से अराप ग्राम तक (लंबाई 4.2कि0मी0) सड़क का अंश परिलक्षित होता है। उक्त समीक्षा में निगरानी प्रमंडल सं0-1, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा किए गए जाँच के आधार पर पी0सी0सी0 भाग में फ्लैंक में मिट्टी नहीं पाए जाने तथा पी0सी0 भाग का उपरी सतह जहाँ-तहाँ उखड़ जाने एवं इसमें क्रैक पाए जाने फलस्वरूप निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण नहीं कराए जाने का मंतव्य दिया गया है। अधीक्षण अभियंता, गुणवत्ता प्रबंधन द्वारा समीक्षोपरांत प्रश्नगत कार्य में आरोपी श्री सिंह की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्राप्त मंतव्य में श्री राज कुमार सिंह, तत0 सहायक अभियंता को उक्त अनियमितता पूर्ण कार्य में संलिप्तता की पुष्टि की गई है। श्री राज कुमार सिंह, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के संदर्भ में समर्पित जवाब में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है। अतएव श्री राज कुमार सिंह, तत्का0 सहायक अभियंता के द्वारा प्राप्त जवाब को अस्वीकृत करते हुए इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप सं0-01 एवं आरोप सं0-02 प्रमाणित होता है। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया -

"पेंशन से 10% की कटौती पाँच (05) वर्षों के लिए"। उक्त निर्णीत दंड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री सिंह के विरूद्ध उक्त अनुमोदित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का पत्रांक-819 दिनांक 06.06.2022 द्वारा सहमति व्यक्त की गई है।

अतः श्री राज कुमार सिंह (आई0डी0-जे 8806) तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2 सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध निम्न अनुमोदित दंड को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "पेंशन से 10% की कटौती पाँच (05) वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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29 जून 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-08/2018-1529--श्री मदन मोहन द्विवेदी (आई०डी०-3608), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, लालगंज के विरूद्ध उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वित्तीय वर्ष 2017-18 में उक्त प्रमंडल को आवंटित राशि के अतिरिक्त छद्‌मपूर्ण आवंटन द्वारा अधिकाई व्यय किये जाने के मामले में अभियंता प्रमुख (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण जल संसाधन विभाग) पटना द्वारा, आरोप पत्र साक्ष्य सहित प्रेषित करते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गयी। अभियंता प्रमुख से प्राप्त पत्र के आलोक में ं विभागीय पत्रांक 2597 दिनांक 14.12. 2018 द्वारा श्री द्विवेदी से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री द्विवेदी से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प-65 दिनांक 21.01.2021 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (i) आपके द्वारा विपत्र कोड 49-4711010510209 में प्राप्त आवंटन रू॰ 30.00 करोड़ राशि के विरूद्ध रूपये 6.0 करोड़ का चेक (चेक सं॰ 670319 दि॰ 22.05.2017) BTC फार्म 60 के साथ संलग्न कर कोषागार कार्यालय लालगंज को समर्पित किया गया। उक्त BTC फार्म 60 के आधार पर CTMIS में विपत्र कोड की प्रविष्टि की जाती है जिसमें आपके द्वारा Major Head 49-4711010510309 गलत अंकित किया गया जबकि उक्त चेक विपत्र कोड 49-4711017890104 से संबंधित था। अतएव जिला पदाधिकारी वैशाली एवं कोषागार पदाधिकारी लालगंज द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से यह स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा प्रस्तुत किये गये BTC फार्म 60 में गलत विपत्र कोड अंकित होने के कारण राशि का विचलन हुआ। (ii) मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से प्राप्त प्रतिवेदन के साथ संलग्न आपका पत्रांक 173 दि॰ 05.03.18 के अनुलग्नक से स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा चेक सं॰ 670319 दि॰ 22.05.17 से संबंधित BTC फार्म 60 में वर्णित विपत्र कोड 49-4711010510309 (जिसे मूल रूप में कोषागार कार्यालय लालगंज को समर्पित किया गया था) को काटकर/बदलकर 49-4711017830104 अंकित करते हुए एवं वास्तविक स्थिति को छुपाते हुए विभाग को गलत प्रतिवेदित किया गया। जिला17 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 पदाधिकारी, वैशाली द्वारा गठित जाँच टीम द्वारा अपने प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया है कि आपके द्वारा कोषागार कार्यालय लालगंज को समर्पित BTC फार्म 60 के Major Head 49-4711010510309 की गलत प्रविष्टि की गयी। जिसकी सूचना कोषागार लालगंज को नही दी गयी। उक्त 6 करोड़ की राशि का चेक विपत्र कोड 49-4711017890104 से संबंधित था, जिसे विपत्र कोड 49-4711010510209 में पारित किया गया है। उक्त चेक सं॰ 670319 दि॰ 22.05.17 पर आपका हस्ताक्षर है, जिससे स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा वित्तीय अनियमितता पर शीर्ष 49-4711010510209 में प्राप्त आवंटन के छद्‌मपूर्ण अतिरिक्त आवंटन 26A में प्रविष्टि कर उसके विरूद्ध 9749119.00 की निकासी कर अधिकायी व्यय किया गया। (iii) विपत्र कोड सं॰ 49-4711010510209 में अधिकायी व्यय CTMIS में परिलक्षित होने पर आपको विभागीय पत्रांक 3783 दि॰ 17.11.17 के द्वारा सूचित किये जाने के बाद भी आपके द्वारा उक्त शीर्ष में रू॰ 50.6182 लाख का Further व्यय कर दिया गया। CTMIS में प्रदर्शित उक्त छद्‌मपूर्ण अतिरिक्त आवंटन 26A के प्रविष्टि एवं उसके विरूद्ध 97,49,119 लाख की निकासी कर अधिकायी व्यय किया गया। वित्तीय वर्ष 17-18 में उक्त शीर्ष 49-4711010510209 में उपलब्ध कुल वजट प्रावधान से 160.63 लाख का आवंटन अन्य कार्य हेतु निर्गत नहीं किया जा सका। जिसकेे कारण वित्तीय वर्ष 2017-18 में उक्त शीर्ष में उपलब्ध कुल वजट प्रावधान का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा सका। (iv) श्री मदन मोहन द्विवेदी, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, लालगंज द्वारा गलत शीर्ष में आवंटन प्रविष्टि कर उसके विरूद्ध आवंटित राशि से अधिक व्यय करने से सरकार को वित्तीय क्षति होना परिलक्षित होता है। (v) श्री मदन मोहन द्विवेदी, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, लालगंज द्वारा बिहार वित्त नियमावली के सुसंगत नियमों का अनुपालन नहीं हुआ है। आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के प्रतिकुल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न बातें कही गई हैः- आरोप सं0- (i) ः- आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान के कंडिका 1.3 में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि चेक सं0-670319 दिनांक-22.05.2017 के साथ BTC Form 60 में विपत्र कोड 49-4711010510309 अंकित किया गया है। परन्तु यह चेक जिस कार्य से संबंधित है उसका विपत्र कोड 49-4711017890104 है एवं इस कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति एवं आवंटन भी विपत्र कोड 49-4711017890104 में ही प्राप्त है। इसी परिणाम स्वरूप कोषागार पदाधिकारी द्वारा गलत शीर्ष में विपत्र पारित किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा कंडिका 1.3 में यह भी अंकित किया है कि उनके द्वारा शेष BTC Form 59 को सही ढंग से भरा गया है। परंतु आरोप पत्र के साथ संलग्न अनुलग्नक मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-839 दिनांक-13.03.2018 द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के साथ संलग्न अनुलग्नक कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, लालगंज के पत्रांक-173 दिनांक-05.03.2018 द्वारा कोषागार लालगंज/वैशाली से प्राप्त BTC Form 59 में भी भारित शीर्ष 49-4711010510309 ही अंकित है। पुनः आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव के साथ परिशिष्ट-9 भी संलग्न किया गया है। दूसरी ओर आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उनके कार्यालय में उपलब्ध BTC Form 59 में आवंटन एवं भुगतान में 49-4711017890104 अंकित है। इस प्रकार चेक के साथ कार्यालय की Entry एवं कोषागार के लिए की गई प्रविष्टि में भिन्नता है (अपने बचाव बयान के साथ परिशिष्ट-8)। कोषागार पदाधिकारी द्वारा भी मनमाने ढंग से गलत विपत्र कोड-49-4711010510309 को न लौटाकर इसे काटकर दूसरे विपत्र कोड 4711010510209 में पारित करना एवं इसकी सूचना कार्यपालक अभियंता को नहीं देना भी नियम की अनदेखी है। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिया गया बचाव बयान स्वीकार्य योग्य नहीं माना जा सकता है। आरोपी के द्वारा भी अपने स्तर पर की गयी भूल को स्वीकार कर लिया गया है। आरोप सं0- (ii) :- चेक सं0-670319 दिनांक-22.05.2017 से संबंधित BTC Form 60 में आरोपी पदाधिकारी द्वारा गलत प्रविष्टि के कारण एवं कोषागार पदाधिकारियों/कर्मियों के वित्त विभाग के सुसंगत नियमों की अवहेलना कर विपत्र कोड 49-4711017890104 के बदले 49-4711010510209 में भुगतान किया गया है। आरोपी के बचाव बयान की कंडिका 2.1 में अंकित किया गया है कि माह मई 2017 समाप्ति के पश्चात्‌ मासिक लेखा बनाने के क्रम में आरोपी पदाधिकारी को ज्ञात हुआ कि BTC Form 60 में विपत्र कोड 49-471101789014 के बदले 49-47110510309 अंकित है। प्रमंडलीय कार्यालय में रोकड़पाल एवं कोषागार मैसेन्जर प्रमंडल एवं कोषागार के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। प्रमंडलीय लेखा में किसी भी प्रकार की गलत प्रविष्टि पर अविलम्ब उसकी जानकारी कोषागार से प्राप्त की जा सकती है, परंतु आरोपी पदाधिकारी द्वारा मनमाने ढंग से बिना विस्तृत जानकारी प्राप्त किये अपने कार्यालय के अभिलेख में Post Facto सुधार लिया गया है। तथापि मासिक लेखा एवं उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन गलत ढंग से प्रेषित की गयी है। इन तथ्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी पदाधिकारी को मई 2017 समाप्त होने के पश्चात कोषागार द्वारा गलत ढंग से विपत्र पारित किया गया है, की जानकारी प्राप्त थी एवं दोनों कार्यालय के आपसी मिलीभगत से छद्‌मपूर्ण अतिरिक्त आवंटन सं0 26A को प्रविष्टि कराकर रूपये 9749119.00 रूपये का अधिकायी व्यय किया गया। आरोपी पदाधिकारी के बचाव बयान से सहमत नहीं हुआ जा सकता है। आरोप सं0- (iii) ः- मई 2017 समाप्ति के बाद मासिक लेखा बनाने के क्रम में BTC Form 60 में गलत प्रविष्टि की सूचना प्राप्त होने के बावजूद आरोपी पदाधिकारी द्वारा न तो अपने अभिलेखों को कोषागार से सत्यापित कराये और न ही विभाग को इन सारी जानकारियों से अवगत कराया। विभाग द्वारा विभागीय पत्रांक-3783 दिनांक 17.11.2017 द्वारा सूचित करने के बावजूद आरोपी पदाधिकारी द्वारा कार्य के दबाव एवं अन्य बहाना बनाकर इसके बाद भी 5061482.00 रूपये का18 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 भुगतान करना, आरोपी पदाधिकारी द्वारा सारे नियमों, एवं विभागीय आदेशों की अवहेलना करना है। इसका कुफल यह हुआ कि शीर्ष 49-4711010510209 में बजट उपबंध रहते हुए भी उपलब्ध आवंटन अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सका। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिया गया बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। आरोप सं0- (iv) ः- आरोपी पदाधिकारी द्वारा संलग्न परिशिष्ट-19 में अभियंता प्रमुख (मुख्यालय), जल संसाधन विभाग, पटना को संबोधित कोषागार पदाधिकारी, वैशाली के पत्र के अवलोकन से स्पष्ट है कि कोषागार पदाधिकारी द्वारा शीर्ष 49-4711017890104 के बदले शीर्ष 49-471101051209 में अतिरिक्त 6.00 करोड़ के भुगतान के फलस्वरूप शीर्ष 49-471101051209 के अन्य कार्य हेतु आवंटन की अनुपलब्धता के स्थिति में कोषागार पदाधिकारी द्वारा छद्‌मपूर्ण आवंटन पत्र अंकित कर शीर्ष 49-4711017890104 से रूपये 1.5883319 करोड़ को प्रत्यार्पण कर शीर्ष 49-471101051209 में आवंटन के उतने ही राशि को CTMIS में दर्शाया गया है जिसमें कार्यपालक अभियंता की कोई भूमिका नहीं होता है। यह सभी आरोपी पदाधिकारी द्वारा शीर्ष 49-4711017890104 के बदले शीर्ष 49-4711010510309 लिखने एवं तत्पश्चात्‌ कोषागार द्वारा शीर्ष बदलकर 49-4711010510209 करने के कारण हुआ है। यद्यपि इससे किसी प्रत्यक्ष वितीय हानि का मामला नहीं होता है तथापि आरोपी पदाधिकारी के शिथिलता के कारण उपलब्ध आवंटन का उपयोग अन्य कार्य में नहीं हो सका तथा राशि का सदुपयोग नहीं हुआ। इस प्रकार आरोपी के बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप सं0- (v) :- आरोपी पदाधिकारी द्वारा शीर्ष 49-4711017890104 के बदले शीर्ष 49-4711010510309 BTC Form 60 में गलत भरने के कारण कोषागार पदाधिकारी द्वारा शीर्ष 49-4711017890104 के आवंटन शीर्ष को 49-4711010510209 में भुगतान करने के कारण गलतियों का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। आरोपी पदाधिकारी का यह दायित्व था कि यदि भूलवश शीर्ष में गड़बड़ी हो भी गयी तो माह मई 2017 का मासिक लेखा जमा कराने के क्रम में प्रकाश में आई गड़बड़ी की जाँच व्यक्तिगत रूप से कोषागार पदाधिकारी से मिलकर करते तथा सारी बातों की जानकारी प्राप्त करते हुए विभागीय वरीय पदाधिकारियों को देते परंतु ऐसा नहीं कर प्रमंडलीय अभिलेख को सुधार कर वरीय पदाधिकारी/विभाग को वस्तुस्थिति से अवगत नहीं कराया गया एवं आगे राशि खर्च की गई। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यदि जून 2017 के प्रारम्भ में ही सारे तथ्यों से अवगत कराते हुए सभी संबंधित पदाधिकारियों को इन गलतियों की तरफ ध्यान में लाया जाता तो तत्काल उसमें सुधार किया जा सकता था एवं ऐसी विकट स्थिति नहीं आती। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी के स्तर पर घोर लापरवाही की गई है एवं उनके बचाव बयान को मान्य नहीं किया जा सकता है। अतएव उपरोक्त के आधार पर आरोपी पर अधिरोपित आरोप 1-5 पूर्ण रूप से सिद्ध होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1393 दिनांक 02.11.2021 से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई।

उक्त के आलोक में श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 22.02.2022 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैंः-

बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के उप नियम 14 में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा दस्तावेजी साक्ष्य जिसके आधार पर आरोप साबित करना प्रस्तावित हो, को जाँच पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा, साक्ष्यों का परीक्षण करेगा तथा आरोपित सरकारी सेवक द्वारा दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का प्रतिपरीक्षण किया जाएगा लेकिन श्री तिमिर कान्ति भादुरी, मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन दिनांंक-07.08.2021 से स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा आरोप से सम्बन्धित कोई साक्ष्य या दस्तावेज एवं साक्षी जो विभाग द्वारा साक्षी की सूची में दिया गया है, को जाँच पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत ही नहीं किया गया है, जिससे आरोप से सम्बन्धित दस्तावेज का परीक्षण एवं साक्ष्यों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया है।

श्री द्विवेदी द्वारा कहा गया है कि दिनांक 28.06.2021 को मेरे द्वारा दिये गये बचाव बयान में वर्णित तथ्यों पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विचार नहीं किया गया और ना ही सम्बन्धित साक्ष्यों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण किया गया। श्री द्विवेदी द्वारा कहा गया है कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के उपनियम 19 के अनुसार आरोपित पदाधिकारी को सुनवाई का मौका देने का प्रावधान है, लेकिन मुझे उक्त अवसर से वंचित कर दिया गया।

श्री द्विवेदी द्वारा कहा गया है कि जाँच पदाधिकारी को जाँच के क्रम में प्रत्येक आरोप के मद के सम्बन्ध में साक्ष्य का निर्धारण सरकारी सेवक के आरोप के विरूद्ध प्रतिवाद (opportunity of cross examination) एवं प्रत्येक आरोप के सम्बन्ध में निष्कर्ष एवं कारण स्पष्ट करना है जो नियम 17 के उपनियम 23(1) से स्पष्ट हो सकेगा लेकिन मेरे मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया है।

श्री द्विवेदी द्वारा कहा गया है कि विभागीय संकल्प सह पठित ज्ञापांक 65 दिनांक 21.01.2021 के अधीन संचालित बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के अधीन विभागीय कार्यवाही उक्त आरोप के विरुद्ध की गई है जिसमें वित्तीय क्षति का मामला नहीं है।

श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) के जवाब की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गईं, जिसमे निम्न तथ्य पाये गये :-

19 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने बचाव बयान में आरोप से संदर्भित किसी तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। श्री द्विवेदी द्वारा उल्लेखित सभी तथ्य इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के प्रक्रियाओं से संबंधित है, जिसके संदर्भ में स्थिति निम्नवत हैः- (i) संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन (अधिगम) के साथ संधारित आदेश फलक (Order sheet) पर आरोपी पदाधिकारी का हस्ताक्षर क्रमशः दिनांक-09.03.2021, 25.03.2021 तथा 31.07.2021 के तिथि में अंकित है। उक्त से यह स्पष्ट होता है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में, आरोपी पदाधिकारी (श्री मदन मोहन द्विवेदी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत) उक्त तिथियों को संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे है। (ii) आदेश फलक में अंकित कार्यवाही (25.03.2021) से यह परिलक्षित होता है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में, आरोपी पदाधिकारी द्वारा माँगी गयी सूचना उन्हें प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया गया है। (iii) आदेश फलक में दिनांक-31.07.2021 के कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी का स्टेटमेंट निम्नवत अंकित किया गया हैः-

"आरोपी पदाधिकारी द्वारा कहा गया कि पूर्व में लिखित बयान दिये गये है, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं कहना है"। (iv) जिन तिथियों में आरोपी पदाधिकारी, संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुये है, उन तिथियों को आरोपी पदाधिकारी के द्वारा साक्षियों का प्रतिपरीक्षण कराये जाने का अनुरोध संचालन पदाधिकारी से किये जाने का कोई साक्ष्य आदेश फलक में अंकित नहीं है। उक्त से यह परिलक्षित होता है कि आरोपी पदाधिकारी को विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में सुनवाई का/उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला है। श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता ने द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युतर में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित पाए जाने के संदर्भ में बचाव के बिंदु पर कोई भी तथ्य उल्लिखित नहीं किया है। समीक्षोपरांत श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है एवं इनके विरूद्ध आरोप पत्र में गठित सभी पाँचों आरोप को प्रमाणित पाया जाता है। अतएव उपरोक्त वर्णित स्थिति में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मदन मोहन द्विवेदी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, लालगंज सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है :- ''पेंशन से 12% की कटौती दस वर्षों के लिए।'' सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मदन मोहन द्विवेदी सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1187 दिनांक 24.05.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1058 दिनांक 22.06.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है।

अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मदन मोहन द्विवेदी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता, 179, पाटलिपुत्रा कॉलोनी, पटना-800013 को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

''पेंशन से 12% की कटौती दस वर्षों के लिए।''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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30 जून 2022

सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-27/2017/1547--श्री शैलेन्द्र कुमार (आई0डी0-3803), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पद पर पदस्थापन काल में इनके विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत बाढ़ 2017 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-567 दिनांक-15.03.2019 द्वारा आरोप पत्र गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री कुमार दिनांक-29.02.2020 को सेवानिवृत हो गए हैं। अतएव श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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30 जून 2022

सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-27/2017/1546--श्री सुभाष सिंह (आई0डी0-जे 7681), तत्कालीन सहा क अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पद पर पदस्थापन काल में इनके विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत बाढ़ 2017 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-564 दिनांक-15.03.201920 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 द्वारा आरोप पत्र गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री सिंह दिनांक-31.12.2020 को सेवानिवृत हो गए हैं। अतएव सुभाष सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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30 जून 2022

सं0 22/नि॰सि॰ (पट॰)03-20/2018-1548--श्री जीवनेश्वर रजक (आई0डी0-4569), तत्कालीन उप सचिव-1(प्र0), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पदस्थापन अवधि में विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद बिना स्वच्छता देखे बगैर कनीय अभियंता से सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति दिए जाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया। आरोप पत्र में वर्णित आरोपाें की जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-551 दिनांक 12.03.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप :-

1. श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1 (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग में पदस्थापन अवधि में श्री सुरेश नारायण, तत्का॰ कनीय अभियंता को विभागीय आदेश संख्या-223-सह पठित-ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद बिना स्वच्छता को देखे बगैर कनीय अभियंता (असै॰) से सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति दिए जाने के लिए दोषी हैं।

2. श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा, प्रशाखा-22, निगरानी प्रशाखा से निगरानी स्वच्छता की गहन छानबीन नहीं किए जाने के कारण श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को सहायक अभियंता के पद पर दिनांक-09.08.2016 को आयोजित प्रोन्नति समिति की बैठक में प्रोन्नति योग्य मानते हुए अनुशंसित किया गया जिसके आलोक में प्रोन्नति दिया गया। प्रशाखा-7 के वरीय पदाधिकारी होने के नाते दिनांक-15.09.2016 को औपबंधिक प्रोन्नति अधिसूचित करने के पूर्व प्रशाखा-22 (निगरानी) से प्रोन्नति योग्य की अनुशंसा प्राप्त अभियंताओं के संबंध में स्वच्छता की अद्यतन सूचना नहीं प्राप्त करने के लिए दोषी हैं।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य अंकित किया गया कि- "विभागीय कार्यवाही के दौरान बहस, आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित साक्ष्य सहित मौखिक/ लिखित बचाव बयान, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा रखे गए विभागीय पक्ष, विभाग द्वारा आरोप पत्र के साथ संलग्न सभी अभिलेखों, विभागीय पत्रांक-22/नि॰सि॰(पट॰) 03-20/2018-1342 (अनु॰) दिनांक-04.07.2019 एवं पत्रांक सं॰-7/विविध 12-1004/2018-1310 दिनांक-05.07.2019 द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी साक्ष्यों/अभिलेखों की सम्यक्‌ विवेचना की गई, जिससे प्रतीत होता है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधित आदेश सं॰-223-सह पठित ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 उनको या उनके प्रशाखा में उपलब्ध नहीं कराया गया तथा सरकार के संयुक्त सचिव, निगरानी कोषांग का गैर सरकारी प्रेषण सं॰-20(अनु॰), दि॰-17.01.2018 द्वारा प्राप्त सूचना के अनुपालन में उनके द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रोन्नति अधिसूचना सं॰-874, दि॰-15.07.2016 के कंडिका-5 में निहित प्रावधान के तहत्‌ श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को दी गई प्रोन्नति विभागीय अधिसूचना सं॰-7/प्रो॰-03-1003/10-138 दिनांक-19.01.2018 द्वारा रद्‌द कर दी गई।" उक्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य के आलोक में श्री जीवनेश्वर रजक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित माना गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-441, दि॰-04.03.2020 द्वारा असहमति के निम्न बिंदुओं पर कारण पृच्छा की गई- 1. विभागीय पत्रांक-7/प्रो 03-1002/13-58/DS, दिनांक-09.08.2016 द्वारा श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1(प्र॰), जल संसाधन विभाग द्वारा अध्यक्ष, बिहार लोक सेवा आयोग, पटना एवं अन्य को जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता (असै॰) को 28% कोटा के तहत्‌ सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति हेतु अद्यतन बैठक सामग्री एवं अद्यतन स्वच्छता के आधार पर प्रोन्नति समिति की बैठक में विचार करने हेतु अनुरोध किया गया है। 2. उक्त पत्र के कंडिका-2 में स्पष्ट उल्लेखित है कि आज की तिथि तक अद्यतन निगरानी स्वच्छता (विभागीय कार्यवाही रूल-17,रूल-19, प्रपत्र-क, स्पष्टीकरण, निलंबन) आदि की जाँच की गई है। अद्यतन स्वच्छता विवरणी भी संलग्न की जा रही है।

3. उल्लेखनीय है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का आदेश दिनांक-18.07.

2016 को निर्गत किया गया। जिससे परिलक्षित होता है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को बिना स्वच्छता देखे बगैर प्रोन्नति दी गई है।

उक्त बिंदुओं के संदर्भ में श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा अपने पत्रांक-747, दि॰-03.08.2021 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया है। जो निम्न है -21 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 1. जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता को 28% कोटा अंतर्गत प्रोन्नति हेतु आकलित रिक्ति-272 के विरूद्ध 427 कनीय अभियंता के नामों को प्रोन्नति हेतु विचारण सूची में समाहित किया गया था, जिसमें से एक श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता का नाम भी समाहित था।

बिहार लोक सेवा आयोग, पटना को विभागीय सहमति के पश्चात्‌ अंतिम रूप से प्रोन्नति की बैठक हेतु भेजे गए अद्यतन बैठक सामग्री के भेजने के पूर्व प्रशाखा-07 एवं उपसचिव-01, प्रबंधन कोषांग को प्राप्त सभी निगरानी स्वच्छता को समाहित कर ही आयोग को भेजी गई थी।

2. B.P.S.C को बैठक हेतु भेजी गई बैठक सामग्री प्रेषण तिथि तक प्रशाखा-7 एवं उपसचिव-01 प्रबंधन कोषांग को प्राप्त सभी निगरानी स्वच्छता आदि की जाँच की गई थी। तदनुसार अद्यतन स्वच्छता विवरणी संलग्न की गई थी। 3. श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की तथा कथित निर्गत आदेश दिनांक-18.07.2016 प्रशाखा-07 एवं उपसचिव-1 (प्रबंधन) कोषांग को प्रोन्नति की अधिसूचना निर्गत तिथि 15.09. 2016 तक अप्राप्त थी। उक्त प्रोन्नति वाली अधिसूचना सक्षमता अंतर्गत हर स्तर पर छानबीन कर निर्गत की गई थी। जिसकी प्रति प्रशाखा-07, 08, 12 एवं 22 सहित अन्य संबंधित पदाधिकारियों को प्रेषित की गई थी। परन्तु श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधित तथा कथित आदेश की जानकारी अथवा आदेश की प्रति किसी भी स्तर से प्राप्त नहीं हो सका था। इस संबंध में सर्वप्रथम निगरानी कोषांग के गैर सरकारी प्रेषण सं॰-20, दिनांक-17.01.2018 द्वारा प्रोन्नति की वर्णित अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से लगभग-16 माह बाद प्राप्त हुई। जिसके आलोक में त्वरित कार्रवाई करते हुए श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को दी गई प्रोन्नति निदेशानुसार प्रोन्नति की अधिसूचना के कंडिका-05 में निहित प्रावधान के आलोक में प्रोन्नति को रद्‌द कर दिया गया था।

चूँकि प्रोन्नति का मामला काफी दिनों से प्रक्रियाधीन होने के कारण एवं विभागीय एवं बाह्‌य निगरानी स्वच्छता तथा चारित्री आदि प्राप्त होने में काफी समय लगने तथा इस दौरान भी कोई नया कार्यवाही चलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है तथा उसकी सूचना ससमय संबंधित पटल को प्राप्त नहीं हो सकती है। इसे स्वीकार करते हुए प्रोन्नति की अधिसूचना निर्गत करने के समय विभागीय सक्षम प्राधिकार की सहमति से कंडिका-05 को समाहित कर ही प्रोन्नति अधिसूचना निर्गत की जाती थी।

श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता, जो 427 कनीय अभियंता की सूची में एक थे के ही विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चल रही की जानकारी प्राप्त करना श्री जीवनेश्वर रजक के सक्षमता से बाहर की बात थी क्योंकि जबतक संबंधित पटल द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराया जाता है तबतक इसकी जानकारी होना संभव नहीं है। प्रशाखा-07 के माध्यम से बार-बार स्वच्छता की माँग करके ही प्रोन्नति हेतु कार्रवाई की गई थी जिसकी सम्पुष्टि प्रोन्नति की संचिका में हुए पत्राचार से किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता की प्रोन्नति प्राप्त निगरानी स्वच्छता की सूची में उनके विरूद्ध संबंधित विभागीय कार्यवाही की प्रति प्राप्त नहीं होने के कारण हुआ है।

श्री जीवनेश्वर रजक के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के संदर्भ में समर्पित जवाब की समीक्षा विभाग स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत निम्न बिन्दु निष्कर्षित किया गया कि -

"श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा बिना अद्यतन निगरानी स्वच्छता देखे बगैर जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता (असै॰) को 28% कोटा के तहत सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति हेतु अद्यतन बैठक सामग्री बिहार लोक सेवा आयोग, पटना को प्रोन्नति समिति की बैठक में विचार करने हेतु अनुरोध किया गया। इसी क्रम में श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध विभागीय आ॰ सं॰-223-सह ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद श्री नारायण को प्रोन्नति दी गई। जो श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1 (प्र॰) के लापरवाही एवं कार्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।"

अतएव श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा समर्पित जवाब को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित मानते हुए निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया -

"कालमान वेतनमान में दो प्रक्रम पर सदा के लिए अवनति"।

श्री जीवनेश्वर रजक के विरूद्ध उक्त निर्णीत दण्ड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग का पत्रांक-1059 दिनांक 22.06.2022 द्वारा सहमति व्यक्त की गई है।

अतएव श्री जीवनेश्वर रजक (आई0डी0-4569) तत्कालीन उप सचिव-1 (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, भोरे के विरूद्ध गठित आरोपों के प्रमाणित होने के कारण अनुमोदित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जात है -

"कालमान वेतनमान में दो प्रक्रम पर सदा के लिए अवनति"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।22 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 30 जून 2022 सं0 22/नि॰सि॰(सम॰)02-22/2009-1549--श्री जैनेन्द्र कुमार (आई0डी0-3789), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-01, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध तटबंधों के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में वर्ष 2007-08 एवं 2009-10 के बीच अस्थायी भू-अर्जन एवं फसल मुआवजा के भुगतान में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-1747 दिनांक-03.10.2017 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में समीक्षोपरांत उनके जवाब की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत उनके जवाब को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1774 दिनांक-21.08.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43 (बी) के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

जाँच के क्रम में अस्थाई भूमि एवं फसल मुआवजा से संबंधित प्रमाणकों के सत्यापन के क्रम में पाया गया कि उडै़न जमींदारी बाँध के अस्थाई भूमि एवं फसल मुआवजा के भुगतान से संबंधित प्रमाणक पर किसानों का हस्ताक्षर संबंधित कनीय अभियंता द्वारा करते हुए भुगतान किया गया हैं एवं उक्त विपत्र एवं प्रमाणक को आपके द्वारा सत्यापित कर भुगतान की कार्रवाई की गयी हैं। कई खेत मालिक जिनके नाम से विपत्र बना हैं, उन्हें भुगतान की कार्रवाई की गयी हैं। साथ ही कई खेत मालिक जिनके नाम से विपत्र बना हैं उन्हें भुगतान न कर दूसरे व्यक्ति का हस्ताक्षर कराकर राशि का बंदरबाँट किया जाना परिलक्षित होता हैं। इस प्रकार आपके अनियमित कृत के कारण इस जमींदारी बाँध में अस्थाई भूमि/फसल मुआवजा में किये गये कुल भुगतान 426230/- रूपये का अनियमित भुगतान होना सथापित होता हैं। इस प्रकार उक्त सरकारी राशि के क्षति पहुँचाने में आपकी सहभागिता मानी जा सकती हैं। जिसके लिए आप दोषी हैं।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-407 दिनांक 23.06.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें आरोप को आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उनके मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-913 दिनांक 25.08.2021 द्वारा श्री कुमार से लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा अपना बचाव-बयान समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा निम्न तथ्य का उल्लेख किया गया :-

संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि "प्रमाणक सं0-335 एवं 336 दिनांक 31.03.2008 के जाँच के क्रम में पाया गया कि उड़ैन जमींदारी बाँध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में अस्थायी भूमि एवं फसल मुआवजा के भुगतान में कई लाभुकों जिनके नाम से विपत्र बना है, उस व्यक्ति का हस्ताक्षर/अंगूठा के निशान के आधार पर कनीय अभियंता द्वारा भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। परन्तु कई लाभुक ऐसे है, जिनके नाम से विपत्र बना है, उन्हें भुगतान न कर अन्य व्यक्ति का हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान के आधार पर कनीय अभियंता द्वारा भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है एवं उक्त विपत्र एवं प्रमाणक को आरोपित पदाधिकारी श्री जैनेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा सत्यापित कर भुगतान की कार्रवाई की गयी है।" जिससे स्वतः स्पष्ट है कि कनीय अभियंता द्वारा भुगतान की कार्रवाई की गयी है।

सहायक अभियंता द्वारा कभी संभव नहीं है कि अपने समक्ष मुआवजा का वितरण कराये। यह कनीय अभियता का दायित्व है। कनीय अभियंता को दिये गये अस्थायी अग्रिम का समायोजन करने के क्रम में उनके द्वारा समर्पित अभिश्रव को प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना नियमानुसार है।

सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 1893 दिनांक 14.06.2011 कंडिका 16 में अंकित है कि माननीय पटना उच्च न्यायालय की खंड पीठ के द्वारा सी०डब्लू०जे०सी० नं०-12943/09 (उर्मिला शर्मा बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में दिनांक 10.05.10 को पारित आदेश के तहत स्पष्ट रूप से व्याख्या कर दी गयी है कि बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के अंतर्गत चार वर्षों की गणना, घटना की तिथि से होगी, न कि घटना की जानकारी की तिथि से, अतः कदाचार का आरोप जिस घटना से संबंधित है अगर कार्यवाही संस्थित करने की तिथि से चार वर्ष से पहले का है, तो ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही नहीं चल सकती है, क्योंकि ऐसा आरोप कालबाधित की श्रेणी में आयेगा।

श्री कुमार से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (बचाव-बयान/द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब) की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी जो निम्नवत है :-

श्री जैनेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, झंझारपुर द्वारा कहा गया है कि भुगतान की कार्रवाई कनीय अभियन्ता द्वारा की गयी है। इनके द्वारा यह भी उल्लेखित किया गया है कि सहायक अभियंता द्वारा कभी संभव नहीं है कि अपने समक्ष मुआवजा का वितरण कराये। इनके द्वारा भी कनीय अभियंता को दिये गये अस्थायी अग्रिम का समायोजन करने के क्रम में उनके द्वारा समर्पित अभिश्रव को प्रतिहस्ताक्षरित किया गया है। परन्तु अभिश्रवों को प्रतिहस्ताक्षरित किये जाने के पूर्व उसकी शुद्धता की जांच इनके स्तर से की जानी चाहिये थी, जो नहीं की गयी।

इनके द्वारा प्रश्नगत मामले को कालबाधित की श्रेणी में कहा गया है जबकि इनके विरुद्ध आरोप पत्र का गठन कर, आरोप पत्र के साथ विभागीय पत्रांक 1747 दिनांक 03.10.2017 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया है। श्री जैनेन्द्र कुमार की सेवानिवृत्ति की तिथि 31.12.2017 है। चुकि श्री जैनेन्द्र कुमार से इनके सेवानिवृत्ति के पूर्व आरोप पत्र गठित करते हुए आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पुछने की कार्रवाई की गयी है। अतएव बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43(बी) के स्पष्टीकरण-(क) के आलोक में इनके विरूद्ध मामला कालबाधित की श्रेणी में नहीं है।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता का बचाव-बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार श्री जैनेन्द्र कुमार, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध उडै़न जमींदारी बाँध के अस्थायी भूमि एवं फसल मुआवजा में किये गये अनियमित भुगतान के कारण सरकारी राशि का क्षति पहुँचाने में इनकी सहभागिता संबंधी आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार को23 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 "दो (02) वर्षों के लिए पेंशन में दस प्रतिशत की कटौती" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। साथ ही, उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री जैनेन्द्र कुमार (आई0डी0-3789) तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-01, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है-

"दो (02) वर्षों के लिए पेंशन में दस प्रतिशत की कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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5 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2018/1565--श्री नंद किशोर ओझा (आई०डी०-जे 7837), तत्कालीन सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर, को उनके नगर निगम, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन अवधि के दौरान NIT No- 03/2017-18 के अंतर्गत 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु ई-निविदा मे बरती गयी अनियमितता के लिए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-427, दिनांक-02.03.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

1. नगर निगम, मुजफ्फरपुर द्वारा NIT No-03/2017-18 के अंतर्गत 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु ई0-निविदा प्रकाशित की गई थी। उक्त प्रकाशित निविदा में तीन निविदादाताओं द्वारा निविदा में भाग लिया गया था। तीनों निविदादाता तकनीकी बीड में योग्य पाये गये थे। तदोपरांत इनका वित्तीय बीड खोला गया। इसमें न्यूनतम दर मे0 तिरहुत ऑटोमोबाईल्स का 7,65,999/- प्रति टिपर (With AMC) था, परन्तु क्रय समिति की दिनांक 17.10.2017 की बैठक में न्यूनतम दर वाले निविदादाता मे0 तिरहुत ऑटोमोबाइल्स से दर वार्ता नहीं कर एल0 2 फर्म मे0 मौर्या मोटर्स, पटना से दर वार्ता कर 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश दिया गया।

2. उल्लेखनीय है कि पी0डब्लू0डी0 कोड की कंडिका 164 में यह प्रावधान है कि न्यूनतम दर देने वाले निविदाकार से ही दर वार्ता किया जा सकता है। परन्तु क्रय समिति द्वारा पी0डब्लू0डी0 कोड का अनुपालन नहीं कर एल0-2 फर्म मे0 मौर्या मोटर्स, पटना से दर वार्ता कर 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश दिये जाने का निर्णय लिया गया। समिति का यह निर्णय नियम विरूद्ध है तथा निविदा की निष्पक्षता को समिति द्वारा प्रभावित किया गया। समिति का यह कृत्य जान-बूझकर सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबांट को प्रमाणित करता है।

3. श्री नंद किशोर ओझा, सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर उक्त समिति के सदस्य थे तथा जिम्मेवार एवं तकनीकी पदाधिकारी के हैसियत से इस प्रकार के अनियमित निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था, परन्तु इनके द्वारा समिति के सदस्य के रूप में नियम विरूद्ध निर्णय पर सहमति दी गई। श्री सिंह का यह कृत सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने एवं जानबूझकर वित्तीय अनियमितता होने देने तथा सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबांट को प्रमाणित करता है। 4. उक्त से स्पष्ट है कि श्री नंद किशोर ओझा, सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर उपर्युक्त कंडिका में वर्णित आरोपों के लिए जिम्मेवार है एवं उनका यह कृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(i) का उल्लंघन है।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री ओझा के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिंदु पर श्री ओझा से विभागीय पत्रांक-831 दिनांक-12.08. 2021 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की माँग की गई। आरोप सं0-1-संचिका में रक्षित अभिलेख से स्पष्ट है कि दिनांक 17.10.2017 को ऑटो टिपर के क्रय से संबंधित तकनीकी बीड पर निर्णय लेते हुए तीनों निविदादाता के तकनीकी बीड को मान्य करने का निर्णय लिया गया। जिस पर आपका हस्ताक्षर भी अंकित है अर्थात यह माना गया कि इसमें आपकी सहमति रही है। वित्तीय बीड पर निर्णय हेतु दिनांक 17.10. 2017 को ही आहूत बैठक की कार्रवाई पर आपका हस्ताक्षर होने से समिति के निर्णय में आपकी सहभागिता रही है। उक्त तकनीकी बीड एवं वित्तीय बीड का निष्पादन एक ही दिन दिनांक 17.10.2017 को किया गया है जिसमें तकनीकी बीड में तीनों निविदादाता को सफल घोषित किया गया है जबकि वित्तीय बीड में निर्णय लिया गया कि निगम द्वारा दिये गये specification की समीक्षा के क्रम में L2 में तिरहुत ऑटोमोबाईल, मुजफ्फरपुर नगर निगम द्वारा दिये गये Technical specification के अनुसार आपूर्ति हेतु आर्हता नहीं रखते हैं जबकि L2 में मौर्या मोटर्स, पटना टिपर आपूर्ति हेतु आर्हता रखते हैं। इससे स्पष्ट है कि समिति द्वारा विरोधाभाषी निर्णय लेते हुए L2 से दर वार्ता के उपरांत टिपर आपूर्ति का आदेश दिया गया जो PWD कोड के कंडिका-164 के विपरीत है। उक्त से स्पष्ट होता है कि समिति के उपरोक्त गलत निर्णय में आपकी सहमति रही है क्योंकि आपके द्वारा दोनों बैठकों में भाग लिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए गलत ढंग से निविदा निष्पादन होने का आरोप प्रमाणित होता है। आरोप-2- गलत तरीके से निविदा निस्तार कर ऑटो टिपर क्रय किया गया तथा आपूरित ऑटो टिपर के मूल्य का भुगतान मेसर्स मौर्या मोटर्स, पटना को किया गया। निविदा निष्पादन की गलत प्रक्रिया अपनाने के फलस्वरूप तत्कालिक रूप से24 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 अवश्य ही सरकारी राशि का दुरूपयोग हुआ है क्योंकि प्रक्रिया की इस त्रुटि के कारण अनावश्यक समय बर्बाद हुआ और संभव है कि इस विलंब के कारण मूल्य वृद्धि आदि कारणों से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। लेकिन, चूँकि भुगतान की गई राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर के कोष में जमा कराया जा चुका था इसलिए सरकारी राशि के बंदरबांट का आरोप परिलक्षित नहीं होता है परन्तु तत्कालिक रूप से सरकारी राशि के दुरूपयोग के कारण सरकारी राशि के अपव्यय संबंधी आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

उक्त के आलोक में श्री नंद किशोर ओझा, सहायक अभियंता, नगर विकास प्रमंडल, जहानाबाद द्वारा अपने पत्रांक-10 दिनांक 19.09.2021 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) का जवाब विभाग में समर्पित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

श्री ओझा द्वारा पूर्व से समर्पित अपने बचाव के आलोक में कहा गया है कि नगर निगम, मुजफ्फरपुर द्वारा NIT NO- 03-2017-18 के अधीन 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु प्रकाशित निविदा में 3 निविदादाताओं द्वारा भाग लिया गया था। सभी तीनों निविदादाता तकनीकी बीड मे योग्य पाये गये। तदुपरांत उनके वित्तीय बीड को खोलने पर मे० तिरहुत ऑटो मोबाईल्स द्वारा प्रति टिपर AMC सहित 7,65,999/- रुपये उद्वृत दर न्यूनतम था। तदुपरांत दिनांक 20.10.2017 को मे० मौर्या मोटर प्रा० लि०, पटना द्वारा एक आवेदन पत्र नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर को संबोधित एवं समर्पित कर प्रति टिपर 7,65,000/- रुपये (AMC सहित) में आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की गयी जिस पर नगर आयुक्त महोदय द्वारा स्वी—त लिखकर अपना हस्ताक्षर कर दिया गया तथा नगर आयुक्त महोदय के हस्ताक्षर से मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके ही पत्रांक 683 दिनांक 20.10.2017 द्वारा 7,65,000/- प्रति टिपर की आपूर्ति हेतु एकरारनामा निष्पादित करने का आदेश दिया गया। इनके द्वारा स्वीकार किया गया है कि टिपर के क्रय के मद में निविदादाताओं से प्राप्त वित्तीय बीड को खोलने के क्रम में निविदा समिति के अन्य सदस्यों सहित इनका भी लघु हस्ताक्षर है, परन्तु प्राप्त वितीय बीड के आधार पर न तो कोई तुलनात्मक विवरणी और न तो दर वार्ता या L2 के साथ वार्ता कर दर के अनुमोदन में नगर आयुक्त द्वारा लिये गये निर्णय में इनकी कोई लिखित अथवा मौखिक सहभागिता रही है। प्रश्नगत निविदाओं के निष्पादन हेतु इसके आरंभ से लेकर अंत तक नगर आयुक्त महोदय द्वारा ऐसी कोई भी समिति गठित नहीं की गयी थी, जिसमें इन्हें किसी भी रूप में शामिल किया गया हो। दिनांक 17.10.2017 को 11ः30 बजे जब तकनीकी बीड पर निर्णय लेने हेतु बैठक आहूत की गयी तो इसमें नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही निर्णय लेकर अन्य पदाधिकारियों सहित इन पर दबाव डालकर हस्ताक्षर करवा लिया गया। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि नगर निगम, मुजफ्फरपुर के अधीन टिपर के क्रय हेतु शुरु से लेकर अंत तक सिर्फ नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही सभी प्रक्रियाओं पर निर्णय लिया गया है, जिसमें मेरी कोई भूमिका नही रही है। इनके द्वारा कहा गया है कि निगम कार्यालय के पत्रांक 634 दिनांक 21.10.2018 के आलोक में 24 अदद ऑटो टिपर की आपूर्ति का विपत्र भुगतान की कार्रवाई की गयी है। पुनः मे० मार्या मोटर प्रा0 लि0 को उनके द्वारा आपूरित 24 अदद ऑटो टिपर के विरुद्व भुगतान प्राप्त की गयी राशि 152.70848 लाख रुपये को लटाते हुए उन्हे सभी 50 अदद ऑटो टिपर वापस लेने का निर्देश दिया गया तथा आपूर्तिकर्ता के पत्रांक शुन्य दिनांक 17.03.2020 द्वारा बैंक ड्राफ्टों के माध्यम से यह राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर को वापस भी कर दी गयी। यद्यपि इस पूरे प्रकरण में मेरी कोई भूमिका नहीं रही, फिर भी आपूर्तिकर्ता को भुगतान की गयी राशि नगर निगम के कोष में वापस लौटा दिये जाने की स्थिति में सरकारी राशि का अपव्यय अथवा बंदरबांट करने का आरोप असत्य है।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में इनके द्वारा अपने उपर गठित आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री नंद किशोर ओझा, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, नगर विकास प्रमंडल, जहानाबाद से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-

(1) क्रय समिति की दिनांक 17.10.2017 की बैठक में न्यूनतम दर देने वाले निविदादाता से दर वार्त्ता नहीं कर दूसरे न्यूनतम दर दाता (L2) मे॰ मौर्या मोटर्स से दर वार्ता कर रूपये 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश निर्गत किये जाने के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है, कि मे० मौर्या मोटर प्रा० लि०, पटना द्वारा एक आवेदन पत्र नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर को संबोधित एवं समर्पित कर प्रति टिपर 7,65,000/- रुपये (AMC सहित) में आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की गयी जिस पर नगर आयुक्त महोदय द्वारा स्वी—त लिखकर अपना हस्ताक्षर कर दिया गया तथा नगर आयुक्त महोदय के हस्ताक्षर से मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके ही पत्रांक 683 दिनांक 20.10.2017 द्वारा 7,65,000/- प्रति टिपर की आपूर्ति हेतु एकरारनामा निष्पादित करने का आदेश दिया गया। इनके द्वारा स्वीकार किया गया है कि टिपर के क्रय की कार्रवाई में निविदादाताओं से प्राप्त वितीय बीड को खोलने के क्रम में निविदा समिति के अन्य सदस्यों सहित इनका भी लघु हस्ताक्षर है। परन्तु प्राप्त वितीय बीड के आधार पर न तो कोई तुलनात्मक विवरणी और न तो दर वार्ता या L.2 के साथ वार्ता कर दर के अनुमोदन में नगर आयुक्त द्वारा लिये गये निर्णय में इनकी कोई लिखित अथवा मौखिक सहभागिता रही है, जिसे स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।

श्री ओझा द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत निविदाओं के निष्पादन हेतु दिनांक 17.10.2017 को 11ः30 बजे जब तकनीकी बीड पर निर्णय लेने हेतु बैठक आहूत की गयी तो इसमें नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही निर्णय लेकर अन्य पदाधिकारियों सहित इन पर दबाव डालकर हस्ताक्षर करवा लिया गया। अतः श्री ओझा का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है एवं आरोप प्रमाणित होता है।

(2) गलत तरीके से निविदा के निष्पादन के फलस्वरुप सरकारी राशि के दुरुपयोग के कारण सरकारी राशि के अपव्यय संबंधी आरोप के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि निगम कार्यालय के पत्रांक 634 दिनांक 21.10.2018 के25 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 आलोक में 24 अदद ऑटो टिपर की आपूर्ति का विपत्र भुगतान की कार्रवाई की गयी है। पुनः मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके द्वारा आपूरित 24 अदद ऑटो टिपर के विरुद्व भुगतान की गयी राशि 1,52,70,848/- रुपये को लौटाते हुए, उन्हे सभी 50 अदद ऑटो टिपर वापस लेने का निर्देश दिया गया तथा आपूर्तिकर्ता के पत्रांक शुन्य दिनांक 17.03.2020 द्वारा बैंक ड्राफ्टों के माध्यम से यह राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर को वापस भी कर दी गयी। इस पूरे प्रकरण में आपूर्तिकर्ता को भुगतान की गयी राशि नगर निगम के कोष में वापस लौटा दिये जाने की स्थिति में, सरकारी राशि का अपव्यय अथवा बंदरबांट करने का आरोप असत्य परिलक्षित होता है। परन्तु गलत तरीके से निविदा निष्पादन किये जाने के कारण विभागीय उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकी, जिसके फलस्वरुप तत्कालिक रूप से सरकारी राशि के दुरूपयोग के कारण सरकारी राशि का अपव्यय संबंधी आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री नंद किशोर ओझा, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, नगर विकास प्रमंडल, जहानाबाद को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-

"कालमान वेतनमान में एक वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति"।

सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में नंद किशोर ओझा, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-714 दिनांक 31.03.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1119 दिनांक 27.06.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है।

अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री नंद किशोर ओझा, सहायक अभियंता, नगर विकास प्रमंडल, जहानाबाद पिन-804408 को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

"कालमान वेतनमान में एक वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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7 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(दर0)-16-13/2019/1601--श्री मनोज कुमार, (आई०डी०-4437) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना के विरुद्ध मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, दरभंगा से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 2384 दिनांक 20.11.2019 द्वारा श्री मनोज कुमार से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, जिसमें उनके प्रत्युत्तर को अस्वीकार योग्य पाया गया। स्पष्टीकरण के सम्यक समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प सहपठित ज्ञापांक-530 दिनांक 25.06.2021 द्वारा श्री मनोज कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना के विरुद्ध गठित आरोप निम्नवत हैः- आरोप सं0-1 - श्री मनोज कुमार, कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना के रूप में अपने पदस्थापन काल में विभागीय पत्रांक 12 दिनांक 06.06.2016 एवं पत्रांक 1375 दिनांक 15.07.2019 सह मुख्य अभियन्ता का पृष्ठांकित ज्ञापांक 1219 दिनांक 12.07.2019 आदि पत्रों के द्वारा सरकारी मोबाईल (CUG) हमेशा चालू रखने के आदेश/निदेश का उल्लंघन किया गया। इनके द्वारा अक्सर सरकारी मोबाईल बन्द रखा जाता है। मोबाईल चालू रहने एवं रिंग होने पर भी वार्ता नहीं की जाती है। आरोप सं0-2 - विभाग एवं मुख्य अभियंता द्वारा विभिन्न पत्रों से पश्चिमी कोशी नहर परियोजना के अवशेष कार्यों को कराने हेतु प्राक्कलन/डी०पी०आर० तैयार करने/एल०ए० प्लान तैयार करने/पंचाटिवार भू-अर्जन की जाने वाली भूमि का विवरणी समर्पित करने/पंचाटियों से मिलकर वास्तविक समस्या जानने एवं इसे दूर करने हेतु नियम के अनुसार पंचाटियों को समझाने आदि कार्यो में लापरवाही बरती गई। सरकारी मोबाईल चालू करने में लापरवाही बरती गई। अपने दायित्वों का निर्वाहन न कर बिना अनुमति के स्वेच्छा से मुख्यालय से बाहर चले जाते है। दिनांक 16.03.2019 को इनकी यही प्रवृति पाई गई। आरोप सं0-3 - इन्हें इनके द्वारा बरती गयी लापरवाही को लेकर कार्यशैली में सुधार लाने की चेतावनी के साथ निदेश दिया गया। परन्तु ये कोई सुधार नहीं लाये। इनकी कार्य में लापरवाही, स्वेच्छापूर्ण अनुपस्थिति, सरकारी मोबाईल बन्द रखने आदि के लिए इनसे पत्रांक 428 दिनांक 28.05.2019, पत्रांक 1123 दिनांक 05.07.2019 एवं पत्रांक 1624 दिनांक 05.09.2019 से स्पष्टीकरण पूछा गया परन्तु इनके द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा अधिगम समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य अंकित किया गया :- श्री कुमार के विरुद्ध आरोप संख्या-1 प्रमाणित पाया जाता है। श्री कुमार के विरुद्ध आरोप-2 आंशिक रूप से प्रमाणित पाया जाता है। श्री कुमार के विरुद्ध आरोप संख्या-3 प्रमाणित पाया जाता है।26 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, जिसमें संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुये, प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री मनोज कुमार से अभ्यावेदन प्राप्त करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1006, दिनांक-02.05.2022 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन की माँग की गयी।

उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। अपने अभ्यावेदन में श्री मनोज कुमार के द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव बयान में अंकित बिंदुओं के अतिरिक्त आरोपों के संदर्भ में निम्न कथन अंकित किया गया :-

संचालन पदाधिकारी के समीक्षा एवं मंतव्य वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित नहीं है। जिन व्यक्तियों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण किया गया, उनसे क्या प्रश्न किये गये एवं उनसे क्या उत्तर प्राप्त किया गया इसका कोई उल्लेख उक्त समीक्षा में नही है अतः उक्त साक्ष्य, साक्ष्य अधिनियम के तहत ग्राह्‌य नहीं है।

संचालन पदाधिकारी की समीक्षा एवं मंतव्य से स्पष्ट है कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब पूर्व में दिया गया था। अतः आवेदक सही है आरोप सं०-02 में भी जिन पदाधिकारियों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण किया गया है। उनसे क्या प्रश्न पूछे गये एवं क्या उत्तर प्राप्त हुआ अंकित नहीं है, न्याय के दृष्टि से सही नहीं है। अतः आरोप निराधार है। संचालन पदाधिकारी की समीक्षा एवं मंतव्य जल संसाधन विभाग की ओर झुका हुआ प्रतीत होता है मेरे द्वारा प्रस्तुत सभी कथनों एवं साक्ष्यों को अनदेखा कर दिया गया है। परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण करने वाले पदाधिकारियों से क्या प्रश्न पूछे गये एवं प्रतिपरीक्षण में क्या उत्तर दिया गया, को अंकित किये बगैर इस निष्कर्ष पर पहूँचना कि आवेदक (आरोपित पदाधिकारी) के विरूद्ध सभी आरोप प्रमाणित पाया जाता है, नैसर्गिक न्याय सिद्धांत के विरूद्ध है।

उक्त अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। अभ्यावेदन के सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी श्री मनोज कुमार द्वारा अपने अभ्यावेदन में आरोपो के संदर्भ में कोई नया तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। अभ्यावेदन में उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी को दिये गये बचाव बयान में इनके द्वारा अंकित किया गया है। अभ्यावेदन में इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में त्रुटियों का उल्लेख करते हुये, इनके विरूद्ध लगाये गये आरोपों को असत्य एवं निराधार बताते हुये, आरोप मुक्त किये जाने का अनुरोध किया गया है, परंतु इसके संदर्भ में कोई ठोस साक्ष्य आरोपी द्वारा अपने अभ्यावेदन के साथ संलग्न नहीं किया गया हैै। अभ्यावेदन में आरोपों के संदर्भ में कोई नया तथ्य/साक्ष्य आरोपी द्वारा नहीं दिये जाने के कारण, अभ्यावेदन का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

वर्णित स्थिति में प्रमाणित आरोपों के लिये श्री मनोज कुमार, (आई०डी०-4437) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया :-

(i) भावी देय प्रोन्नति पर रोक। (ii) असंचयात्मक प्रभाव से तीन (03) वेतन वृद्धि पर रोक। उक्त निर्णय के आलोक में श्री मनोज कुमार, (आई०डी०-4437) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -

(i) भावी देय प्रोन्नति पर रोक। (ii) असंचयात्मक प्रभाव से तीन (03) वेतन वृद्धि पर रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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15 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/1691--श्री अनिल कुमार (आई0डी0-5112) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, कटिहार को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1597 दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय अधिसूचना सं0-2461 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-1497 दिनांक 20.06. 2022 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गईै।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री अनिल कुमार, सहायक अभियंता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में अपने निलंबन के विरूद्ध CWJC No-986/2022 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 11.02. 2022 को आदेश पारित किया गया।

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री अनिल कुमार, सहायक अभियंता (निलंबित) के मामले की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति के परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करने27 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 एवं संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री कुमार की भूमिका को देखते हुए उनके निलंबन के 12 माह के पश्चात निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% वृद्धि (अर्थात कुल 62.5%) किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री अनिल कुमार (आई0डी0-5112) निलंबित सहायक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं इनके निलंबन के 12 माह के पश्चात के निलंबन अवधि के लिए CCA Rules 2005 के नियम-10(1) के आलोक में इन्हें प्रथम 12 माह के निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% की वृद्धि की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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15 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(डि0)-14-05/2015/1692--श्री संजय कुमार सिंह (आई0डी0-3283) तत0 कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत श्री गोविन्द प्रसाद, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती दायाँ तट नहर अवर प्रमंडल सं0-3, मल्हीपुर शिविर-चेनारी के दुर्गावती मुख्य नहर के सर्वेक्षण कार्य में रू0 1.90 लाख (एक लाख नब्बे हजार) की अनियमितता संबंधी अभ्यावेदन की उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरांत संकल्प ज्ञापांक-882 दिनांक 11.04.2018 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप निम्नांकित है - (1) दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत दुर्गावती दायाँ मुख्य नहर की वर्ष 2012-13 में सर्वेक्षण कार्य हेतु रू0 1,90,000/- के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिनांक 23.03.2013 एवं 791 अद्‌द मजदूरों के लिए श्रमशक्ति की स्वीकृति 30.03.13 को प्राप्त हुई। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7.1.0 एवं अन्य के आलोक में प्राक्कलन एवं श्रमशक्ति स्वीकृति के पूर्व दिनांक 19.03.2013 को दैनिक नामावली पंजी से एक मुश्त 12 अद्‌द निर्गत दैनिक नामावली पर दिनांक 25.11.2012 से 22.03.2013 की अवधि में मात्र एक ही कनीय अभियंता द्वारा मजदूरों को नियोजित किए जाने एवं उसकी उपस्थिति जाँचित नहीं होने सर्वेक्षण से संबंधित कार्यक्षेत्र चार अवर प्रमंडलों के अन्तर्गत होने, दिनांक 20.03. 2013 को बिना प्रमाणक के सेल्फ चेक से रू0 2,67,000/- की निकासी किये जाने, दिनांक 05.01.2013 को नौ सदस्यीय सर्वेक्षण टीम गठित किए जाने, कनीय अभियंता को सीधे अग्रिम दिये जाने, दो दूरस्थ स्थानों पर रहते हुए प्रमाणकों पर कनीय अभियंता द्वारा हस्ताक्षर किए जाने, मार्च, 13 के अंतिम दिनों में अस्थायी अग्रिम देने हेतु पहल करने, सर्वेक्षण कार्य संभव नहीं होने की स्थिति में सहायक अभियंताओं द्वारा अस्थायी अग्रिम लेने से इन्कार किए जाने, एवं दिनांक 31.03.13 को ही रू0 190479/- का विपत्र पारित करते हुए कनीय अभियंता के अग्रदाय रोकड़बही से समायोजित किये जाने से बिना सर्वेक्षण कार्य कराए रू0 190479/- का गबन/अनियमित भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है। अधीनस्थ पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर उक्त गबन/अनियमित भुगतान में आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अतएव उक्त कृत्य के लिए प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(2) दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत दुर्गावती दायाँ मुख्य नहर का वर्ष 2012-13 में सर्वेक्षण कार्य हेतु रू0 190,00/- के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिनांक 23.03.13 को प्राप्त हुई। जाँच प्रतिवेदन कंडिका 7.2.0 एवं अन्य के आलोक में प्राक्कलन स्वीकृति के पूर्व एवं बिना श्रम शक्ति के दिनांक 20.10.12 से 24.10.12 की अवधि में सादे कागज पर तैयार, वाऊचर के माध्यम से कनीय अभियंता के व्यक्तिगत राशि से रास्ता समतलीकरण में रू0 17,270/- का व्यय कनीय अभियंता द्वारा किया जाना परिलक्षित होता है। जबकि श्रमशक्ति की स्वीकृति के उपरांत निर्गत दैनिक नामावली के माध्यम से व्यय किया जाना नियमानुकूल होता है। कार्य का उद्‌देश्य, मापी कार्य स्थल का उल्लेख एवं नियोजित मजदूरों की उपस्थिति की जाँच किया जाना परिलक्षित नहीं है। इस तरह का वाउचर से भुगतान संदेहास्पद, अनियमित एवं गबन की श्रेणी में होने का मामला बनता प्रतीत होता है। बिना जाँच-पड़ताल किए दिनांक 31.03.2013 को उपरोक्त रू0 172270/- का वाऊचर पारित एवं समायोजित आपके द्वारा किया गया है, जिससे आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अतएव उक्त कृत्य के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है।

(3) दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत भूमि-अर्जन कार्य में वर्ष 2012-13 में रू0 23318.00 व्यय दिनांक 28.10.12 से 08.03.13 की अवधि में किया गया है। भूमि अर्जन कार्य में लगाये गये मजदूरों एवं अमीनों की उपस्थिति सहायक अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँचित नहीं होने, श्रमशक्ति की अधियाचना में उक्त राशि को शामिल नहीं किए जाने, दो दूरस्थ स्थलों पर उपस्थित रहते हुए कार्य कराने एवं भुगतान किए जाने तथा अधियाचना हेतु संदर्भित मापीपुस्त में पारित प्रमाणक अंकित नहीं पाये जाने से इस मद में किया गया कुल भुगतान रू0 23318/- संदेहास्पद प्रतीत होता है जिसे गबन/अनियमित भुगतान की श्रेणी में माना जा सकता है। आपके द्वारा उपरोक्त व्यय से संबंधित अस्थायी अग्रिम दिये जाने एवं संबंधित प्रमाणकों को पारित कर समायोजित किया जाना परिलक्षित होता है। जिससे आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। जिससे भूमि अर्जन मद में व्यय किये कुल रू0 23518/- के गबन/अनियमित भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये हैं।

(4) दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत वर्ष 2012-13 में परिमाण विपत्र तैयार करने में रू0 5933.

00 व्यय दो प्रमाणकों द्वारा दर्शाया गया है। जिसका भुगतान दिनांक 19.01.2013 को कनीय अभियंता द्वारा पटना में दर्शाया28 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 गया है। जबकि उक्त तिथि को कनीय अभियंता द्वारा उप प्रमाणक सं0-53 दिनांक 31.03.2013 से सर्वेक्षण कार्य में उपस्थिति दर्शायी गयी है। इस प्रकार दो दूरस्थ स्थानों पर रहते हुए कार्य में संलग्नता एवं व्यक्तिगत राशि से भुगतान किया जाना संदेहास्पद प्रतीत होता है। उक्त प्रमाणकों के 31.03.13 को मापी में प्रविष्टि के पूर्व राशि की निकासी भी नियमानुकूल नहीं होता है। इस प्रकार किया गया कुल 5933.00 का भुगतान अनियमितता की श्रेणी में माना जा सकता है। आपके द्वारा इस प्रकार के प्रमाणकों को दिनांक 31.03.13 को पारित कर समायोजित करने, अस्थायी अग्रिम की निकासी किया जाना परिलक्षित होता है जिसमें आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। जिससे परिमाण विपत्र तैयार करने में व्यय रू0 5933/- के गबन/अनियमित भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये हैं।

(5) दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अन्तर्गत वर्ष 2012-13 में भाड़े पर रखे गये निरीक्षण वाहन के ईंधन मद में 26880/- एवं किराया मद में रू0 23120/- कुल रू0 50,000/- भुगतान दर्शाया गया है। भाडे़ के भुगतान के लिए एक ही Handwriting में वाउचर तैयार किये जाने से इसकी सत्यता संदेहास्पद हो जाता है। साथ ही दिनांक 06. 12.2012 से 11.12.2012 एवं 09.12.12 से 14.12.2012 की अवधि के लिए एक ही वाहन का भुगतान किए जाने से दोबारा भुगतान का मामला बनता है। ईंधन मद से संबंधित प्रमाणकों के मुद्रित क्रमांक तिथिवार क्रमिक नहीं होने से ईंधन मद में किया गया कुल भुगतान रू0 26880/- संदेहास्पद की श्रेणी में प्रतीत होता है। उक्त संदेहास्पद भुगतान को मापीपुस्त में 31.03.13 को प्रविष्टि किये जाने से इस मद में इसके पूर्व निकासी भी नियम संगत प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार निरीक्षण वाहन मद में भाड़ा एवं ईंधन पर दर्शाये गये कुल रू0 50,000/-से संबंधित प्रमाणकों को दिनांक 31.03.13 को पारित एवं कनीय अभियंता के अग्रदाय रोकड़बही के माध्यम से समायोजित आपके द्वारा किया गया है, जो गबन एवं अनियमित भुगतान की श्रेणी में होना स्पष्ट होता है। अतएव निरीक्षण वाहन मद में रू0 50,000/- के गबन/अनियमित भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है।

उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-01, आरोप सं0-02, आरोप सं0-03 एवं आरोप सं0-05 को प्रमाणित तथा आरोप सं0-04 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-48 दिनांक 13.01.2020 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। आरोप सं0-1 - दुर्गावती दायाँ तट नहर का बिना सर्वेक्षण कार्य कराये रू0 1,90,479/- का अनियमित भुगतान एवं गबन किये जाने से संबंधित है। श्री सिंह के बचाव बयान में प्रतिवेदित किया गया है कि दुर्गावती तट नहर का पूर्व के संवेदकों का विपत्र नकारात्मक, मामला न्यायालीय/विवाचन के होने की स्थिति में Variation Statement तैयार करने के विभागीय निदेश के आलोक में सर्वेक्षण कार्य करने हेतु सहायक अभियंता/कनीय अभियंता को निदेशित किया गया जिसमें मात्र श्री दिनेश प्रसाद सिंह, कनीय अभियंता द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया। प्रमंडलाधीन अभियंताओं द्वारा अभिरूचि नहीं लिये जाने की स्थिति में समिति का गठन किया गया एवं सर्वेक्षण कार्य उनकी जानकारी में कराया गया। प्रमंडलाधीन अभियंताओं के कार्य में अभिरूचि एवं अग्रिम नहीं लिये जाने की प्रवृति की स्थिति में सर्वसम्मति से श्री दिनेश प्रसाद सिंह, कनीय अभियंता को सीधे अग्रिम देते हुए सर्वेक्षण कार्य कराकर उससे संबंधित विपत्र दिनांक 31.03.13 को पारित करते हुए सर्वेक्षण से संबंधित लेवल बुक श्री अजय कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी को हस्तगत करा दिया गया।

जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7.1.0 में की गई समीक्षा से सर्वेक्षण कार्य नहीं कराया जाना परिलक्षित होता है। परन्तु श्री सिंह द्वारा साक्ष्य के रूप में संलग्नित दुर्गावती दायाँ तट नहर के सर्वेक्षण कार्य का लेवल बुक का हस्तपावती पर एवं जाँच पदाधिकारी को श्री अजय कुमार सिंह द्वारा दिये गये लिखित बयान पर किये गये हस्ताक्षर में समानता प्रतीत होता है, जिससे दुर्गावती दायाँ तट नहर का सर्वेक्षण कार्य होने एवं उससे संबंधित लेवल बुक श्री अजय कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त करने का मामला परिलक्षित होता है।

सर्वेक्षण कार्य के भुगतान के संबंध में श्री सिंह द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि सर्वेक्षण कार्य के प्राक्कलन एवं श्रमबल की स्वीकृति प्राप्त है एवं सभी प्रमाणकों को संबंधित लेखा लिपिक एवं वरीय लेखा पदाधिकारी द्वारा पास ऑडर लगाये जाने के उपरांत उनके द्वारा विपत्र पारित किया गया है।

जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.0.0 के विभिन्न उप कंडिकाओं से स्पष्ट होता है कि (i) आलोच्य प्राक्कलन की स्वीकृति 23.03.13, श्रमबल की स्वीकृति 30.03.13 एवं विपत्र का समर्पण 31.03.13 एवं पारित 31.03.13 को किया गया है जिससे 30.03.13 के पूर्व का मास्टर रौल निर्गत किया जाना एवं सर्वेक्षण कार्य कराया जाना तथा 31.03.13 के पूर्व अस्थायी अग्रिम की निकासी किया जाना नियमानुकूल नहीं माना जा सकता है। जाँच प्रतिवेदन एवं उसके साथ संलग्नित साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दिनांक 20.03.13 को रू0 2,67,000/- की निकासी सेल्फ चेक के माध्यम से की गई। दिनांक 19.03.13 को एकमुश्त मास्टर रौल निर्गत किया गया एवं दिनांक 25.11.12 से सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ कर 22.03.13 को समाप्त किया गया तथा मास्टर रौल पर अलग-अलग तिथियों में 24.11.12 से 19.03.13 की अवधि कुल बारह हस्ताक्षर किये गये। इस प्रकार अस्थायी अग्रिम की निकासी किये जाने, मास्टर रौल निर्गत किये जाने तथा सर्वेक्षण कार्य कराये जाने में विभागीय मापदण्डों, संहिता के प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जाना परिलक्षित होता है।

(ii) दैनिक नामावली पर कार्य कराने के लिये कनीय अभियंता के स्तर से Daily Labour Report (D.L.R) कार्यपालक अभियंता को भेजी जाती है एवं मजदूरों की उपस्थिति की जाँच सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा29 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 की जाती है। प्रस्तुत मामले में न तो DLR भेजी गई है और न सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता स्तर से जाँचित है, जिसकी पुष्टि मास्टर रौल से होती है।

(iii) कनीय अभियंता के अस्थायी अग्रिम अभ्यावेदन में उल्लेखित मापपुस्त के संगत पृष्ठों पर प्रविष्टि उड़नदस्ता जाँच में नहीं पाया गया, जिससे अस्थायी अग्रिम दिये जाने में अनियमितता का बोध होता है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि प्राक्कलन एवं श्रमशक्ति की स्वीकृति के पूर्व ही दिनांक 19.03.2013 को एकमुश्त 12 अद्‌द निर्गत नामावली जो सीधे श्री दिनेश प्रसाद सिंह, कनीय अभियंता को निर्गत किया गया था। उक्त दैनिक नामावली में दिनांक 25.11.2012 से 22.03.2013 तक की अवधि में मजदूरों को नियोजित करने के आधार पर बिना विधिवत पारित प्रमाणकों के विरूद्ध राशि की निकासी कर श्री दिनेश प्रसाद सिंह को देना नियमसंगत नहीं था। ऐसी स्थिति में श्री सिंह पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2- प्रस्तुत आरोप वर्ष 2012-13 में कनीय अभियंता के मिलीभगत से रास्ता समतलीकरण मद में रू0 17,270/-का अनियमित भुगतान एवं गबन से संबंधित है। श्री सिंह का कहना है कि 36 कि0मी0 नहर के अधिकांश भाग में कटीले जंगल एवं घनी झाड़ी होने की स्थिति में सर्वेक्षण कार्य सुचारू रूप से करने के लिये सर्वेक्षण कार्य से जुडे आकस्मिक कार्य से अल्प समय में समतलीकरण का कार्य कराया गया। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 7.2.0 एवं समतलीकरण से संबंधित प्रमाणक से जाँच पदाधिकारी के कथन कि 20.10.12 से 24.10.12 तक नियोजित मजदूरों के लिए सादे कागज पर बनाये प्रमाणकों पर कार्य की मापी स्थल विशेष की जानकारी एवं उपस्थिति की जाँच नहीं की गयी है, की पुष्टि होती है। विभागीय कार्य में दैनिक मजदूरों की उपस्थिति की जाँच सहायक अभियंता/कार्यपालक अभियंता से की जाती है एवं कार्य की मापी अंकित की जाती है। प्रस्तुत मामले में श्री सिंह द्वारा इस कार्य से संबंधित न तो मास्टर रौल संलग्न/उल्लेख किया गया और न श्रमबल की स्वीकृत्यादेश संलग्नित किया गया है। उपर्युक्त से स्पष्ट होता है कि बिना श्रमबल के स्वीकृति एवं मास्टर रौल का उपयोग किये तथा कार्य की मापी एवं उपस्थिति जाँच किये सादे कागज पर बने प्रमाणकों के विरूद्ध कनीय अभियंता द्वारा किया गया भुगतान नियम संगत/संहिता के प्रावधान के अनुकूल प्रतीत नहीं होता है एवं श्री सिंह द्वारा रू0 17270/- के उक्त विपत्रों को नियम/संहिता के प्रावधान के आलोक में बिना जाँच किये भुगतान किया गया है, जो अनियमित श्रेणी में होना परिलक्षित होता है। इस प्रकार श्री सिंह का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अतः श्री सिंह पर आरोप सं0-2 प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप सं0-3- प्रस्तुत आरोप वर्ष 2012-13 के दौरान भूमि अर्जन मद में रू0 23,318/-का अनियमित भुगतान एवं गबन से संबंधित है। श्री सिंह द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि भू अर्जन प्लान समर्पित किये जाने से स्पष्ट है कि प्रस्ताव तैयार करने हेतु सर्वेक्षण किए जाने एवं अन्य सम्बद्ध कार्यों पर व्यय किया गया। श्री सिंह द्वारा कझाँव वितरणी, आलमपुर वितरणी, रामपुर लघु नहर एवं बबूरा वितरणी का भू-अर्जन प्लान, भू-अर्जन पदाधिकारी को उपलब्ध कराये जाने का साक्ष्य संलग्न किया गया है। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 7.3.0 के तालिका-2 से स्पष्ट होता है कि भूमि अर्जन हेतु प्रस्ताव तैयार करने में रू0 23318/- का व्यय किया गया है। व्यय किये गये सम्बद्ध प्रमंडलों से निम्न तथ्य की पुष्टि होती है - (i) दिनांक 25.02.13, 08.03.13, 13.03.13 एवं 21.01.13 को तालिका-1 एवं 2 के अनुसार सर्वेक्षण कार्य कराते हुए पटना में सर्वे मैप की खरीद एवं छायाप्रति पर कनीय अभियंता के मार्फत उसी तिथि को किया गया भुगतान से संबंधित विपत्र को श्री सिंह द्वारा बिना जाँच पड़ताल किये ही पारित किया गया जिससे अनियमित श्रेणी का भुगतान होना परिलक्षित होता है। (ii) दिनांक 01.11.12 से 20.11.12 की अवधि में अमीन एवं मजदूरों पर किया गया रू0 14060/- के भुगतान से संबंधित विपत्र को पारित किया गया जो अनियमित श्रेणी के भुगतान में होना परिलक्षित होता है क्योंकि प्रमाणक सादे कागज पर तैयार किया गया है एवं न तो वरीय अभियंता द्वारा उपस्थिति जाँचित है और न श्रमबल की स्वीकृति मास्टर रौल उपलब्ध है जबकि भुगतान मास्टर रौल के माध्यम से श्रमबल की स्वीकृति उपरांत किया जाना चाहिए था। (iii) उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा भूमि अर्जन मद के प्रस्ताव तैयारी में किये गये कुल व्यय 23,318.00 को गलत निकासी एवं दुरूपयोगों का मामला माना गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि भू-अर्जन कार्य में लगाए गए मजदूर हेतु सक्षम पदाधिकारी से श्रमशक्ति स्वीकृति कराने के उपरांत सभी पहलुओं को जाँचित कर ही प्रमाणकों को पारित कर अग्रिम हेतु राशि को निकासी एवं अग्रिम दिया जाना चाहिए था। कराये गये कार्य एवं प्रमाणकों का सत्यापन करने के बाद ही अग्रिम का समायोजन किया जाना उचित था जो श्री सिंह द्वारा नहीं किया गया। अतः आरोप सं0-3 प्रमाणित होता है। आरोप सं0-4- प्रस्तुत आरोप वर्ष 2012-13 में परिमाण विपत्र तैयार करने के मद में रू0 5933/- का अनियमित भुगतान एवं गबन से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन कंडिका 7.4.0 एवं संबंधित प्रमाणक से दिनांक 19.01.13 को परिमाण विपत्र के Typing Binding एवं Xerox के लिए रू0 5993/- का भुगतान श्री दिनेश प्रसाद सिंह, कनीय अभियंता द्वारा पटना में रहकर किये जाने एवं दिनांक 31.03.13 को पारित किये जाना परिलक्षित होता है, जबकि तालिका-1 से कनीय अभियंता, दुर्गावती30 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 दायाँ तट नहर के सर्वेक्षण कार्य में उपस्थित रहे है। इस प्रकार 31.03.13 के पूर्व निकासी नियम संगत नहीं होने एवं एक ही व्यक्ति (कनीय अभियंता) द्वारा दो दूरस्थ स्थल पर रहकर कार्य/भुगतान किये जाने से संबंधित श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता द्वारा पारित विपत्र के माध्यम से किया गया भुगतान अनियमित भुगतान की श्रेणी में होना परिलक्षित होता है। अतः यह आरोप भी श्री सिंह पर आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोप सं0-5- प्रस्तुत आरोप वर्ष 2012-13 के दौरान निरीक्षण वाहन के भाड़े के भुगतान एवं ईंधन मद में रू0 50,000/- के अनियमित भुगतान एवं गबन से संबंधित है। श्री सिंह द्वारा भू-अर्जन प्रस्ताव समर्पित किये जाने के परिप्रेक्ष्य में सर्वेक्षण हेतु निरीक्षण वाहन रखे जाने एवं उसके भाड़े तथा ईंधन पर श्री दिनेश प्रसाद सिंह, कनीय अभियंता के माध्यम से व्यय करते हुए विपत्र पारित करने को प्रतिवेदित करते हुए बिना कार्य के भुगतान किये जाने के आरोप से मुक्ति करने का उल्लेख किया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन कंडिका 7.5.0 तालिका-3 से जीप सं0-BR-26A-6523, BR-24B-8089, BR- 24P-8286 एवं BR-24P-4286 के भाडा मद में रू0 23120/- एवं ईधन मद में रू0 26880/- कुल 50,000/- व्यय किया जाना परिलक्षित होता है। साथ ही भाड़े के जीप का लॉगबुक मांगे जाने पर कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-51 दिनांक 16.01.15 से स्थानांतरित रोकड़पाल द्वारा लॉगबुक लेते जाने की सूचना दिये जाने को अंकित किया गया है। श्री नवीन कुमार मिश्रा, रोकड़पाल द्वारा अपने बचाव बयान के साथ उक्त वाहनों के लॉगबुक का प्रभार श्री रंगनाथ सुदर्शन, कनीय लेखा लिपिक (वर्तमान रोकड़पाल) को दिनांक 16.01.14 को दिये जाने को उल्लेखित करते हुए साक्ष्य संलग्न किया गया है। श्री सिंह द्वारा भी लॉगबुक की छायाप्रति संलग्न की गयी है, जिसे भाड़े पर वाहन रखे जाने उसके भाड़े एवं ईंधन पर व्यय किया जाना माना जा सकता है। परन्तु तालिका-3 से वाहन सं0-BR-24B-8089 के 06.12.12 से 11.12.12 एवं 09.12.12 से 14.12.12 अवधि के लिए भुगतान किये जाने एवं ईधन के प्रमाणकों पर मुद्रित क्रमांक तिथिवार क्रमवार नहीं होने का बोध होता है, जिससे किया गया व्यय संदेहास्पद प्रतीत होता है। उपरोक्त वाहन मद के कुल प्रमाणकों को 31.03.13 को श्री सिंह द्वारा बिना जाँच पड़ताल के ही पारित किया गया है जिससे 31.03.13 के पूर्व इस मद में की गयी निकासी का नियमानुकूल नहीं कहा जा सकता है। साथ ही उक्त अंकित त्रुटियों की स्थिति में बिना जाँच पड़ताल किये विपत्राें को पारित किया जाना एवं किए गए भुगतान को अनियमित श्रेणी में माना जा सकता है। अतएव श्री सिंह पर आरोप सं0-5 प्रमाणित होता है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्ष :- उपरोक्त समीक्षा, आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्यों के आलोक में श्री संजय कुमार ंिसंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी का आरोप सं0-01 से 05 तक के संदर्भ में उनका द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं प्रतीत होता है। अतएव उक्त आरोप सं0-01, 02, 03 एवं 05 प्रमाणित एवं आरोप सं0-04 अंशतः प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है -

(1) दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) देय प्रोन्नति पर स्थायी रोक।

उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। उक्त निर्णय/सहमति के आलोक में श्री संजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी का निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है - (1) दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) देय प्रोन्नति पर स्थायी रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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18 जुलाई 2022

सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1699--श्री सुनील कुमार (आई0डी0-जे 7740) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृत के पदस्थापन अवधि के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगडिया के अन्तर्गत बाढ़ 2018 के पूर्व एजेण्डा संख्या-126/2016 के तहत गंगा नदी के बाँये तट पर 0.00 कि0मी0 से 7. 30 कि0मी0 (मथार दियारा से मुंगेर घाट-टिकरामपुर 4.77कि0मी0) के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1546 दिनांक 22.07.2019 द्वारा निलंबित कर विभागीय पत्रांक-2078 दिनांक 26.09.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया। तदालोक में श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के जवाब को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-07 दिनांक 07.01.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को अप्रमाणित होना का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध आरोप31 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 प्रमाणित नहीं होने के कारण उन्हें विभागीय अधिसूचना सं0-1214 दिनांक 30.09.2021 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री कुमार के सम्पूर्ण निलंबन अवधि 22.07.2019 से 29.09.2021 तक के विनियमन के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :-

"निलंबन अवधि कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी एवं इस अवधि का पूर्ण वेतनादि का भुगतान (पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों को घटाकर) किया जायेगा"।

सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया उपर्युक्त निर्णय श्री सुनील कुमार (आई0डी0-जे 7740), तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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7 जुलाई 2022

सं0 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1700--श्री अजय कुमार (आई0डी0-3949) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (कार्यकारी प्रभार), पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी के पदस्थापन अवधि के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगडिया के अन्तर्गत बाढ़ 2018 के पूर्व एजेण्डा संख्या-126/2016 के तहत गंगा नदी के बाँये तट पर 0.00 कि0मी0 से 7.30 कि0मी0 (मथार दियारा से मुंगेर घाट-टिकरामपुर 4.77कि0मी0) के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1547 दिनांक 22.07.2019 द्वारा निलंबित कर विभागीय पत्रांक-2295 दिनांक 06.11.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के जवाब को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-08 दिनांक 07.01.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को अप्रमाणित होना का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण उन्हें विभागीय अधिसूचना सं0-1213 दिनांक 30.09.2021 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री कुमार के सम्पूर्ण निलंबन अवधि 22.07.2019 से 29.09.2021 तक के विनियमन के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :-

"निलंबन अवधि कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी एवं इस अवधि का पूर्ण वेतनादि का भुगतान (पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों को घटाकर) किया जायेगा"।

सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया उपर्युक्त निर्णय श्री अजय कुमार (आई0डी0-3949) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (कार्यकारी प्रभार), पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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22 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-08/2013/1761--श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह (आई0डी0-2035), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, काढ़ागोला के विरूद्ध किशनगंज जिला अन्तर्गत एजेण्डा सं0-113/97 पोड़लाबाड़ी एवं एजेण्डा सं0-115/10 पुरन्दाहा स्थल पर बाढ़ 2012 के पूर्व कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता से संबंधित आरोपो की जाँच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जाँच-प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1107 दिनांक 13.09.13 द्वारा निम्न गठित आरोपों के लिए श्री सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। आरोप सं0-1- पोड़लाबाड़ी स्थल परक्यूपाईन के प्रत्येक मेम्बर में प्राक्कलन के अनुसार 6mm डाया के 20 अदद रींग का प्रावधान था जिसके विरूद्ध 11" के स्पेसिंग पर 12 अदद रींग जाँच में पाया गया जो प्रावधानित रिंग से काफी कम था। परक्यूपाईन मेम्बर में 1ः1.5ः3 अनुपात की ढलाई में सीमेंट एवं बालू के निर्धारित अनुपात 1ः1.5 के स्थान पर 1ः3.9 का उपयोग किया गया है, साथ ही ढलाई में Vibrator का उपयोग नहीं किया गया है। प्राक्कलन में Coarse sand एवं पाकुड़ चीप्स के प्रावधान के विरूद्ध Local sand एवं सिल्लीगुडी चीप्स का उपयोग किया गया है, सभी परक्यूपाईन में झांकी भरा हुआ नहीं पाया गया है। विशेष जाँच दल के पाँचवे निरीक्षण का अनुपालन नहीं किया गया है। आरोप सं0-2- पुरन्दाहा स्थल परक्यूपाईन लेईंग का कार्य दो Row में ही 300 मी0 में Deflectors सहित किया जाना था, परन्तु कार्य एक Row में अनुशंसित लंबाई से भिन्न लंबाई में कराया गया है। परक्यूपाईन के प्रत्येक मेम्बर में 6mm डाया का 20 रींग लगाया जाना था जिसके स्थान पर 8" Spacing पर 15 रींग पाये गये। किसी भी परक्यूपाईन में झांकी नहीं पाया गया है। प्राक्कलन में Coarse sand एवं पाकुड़ चीप्स के प्रावधान किया गया है, परन्तु कार्य में Local Sand एवं32 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 सिल्लीगुड़ी चीप्स का उपयोग किया गया है। परक्यूपाईन ढालने में 1ः1.5ः3 अनुपात में सीमेंट एवं बालू के निर्धारित अनुपात 1ः1.5 के स्थान पर 1ः2.8 का उपयोग किया गया है, कार्य में Vibrator का उपयोग नहीं किया गया है। प्रावधानित लंबाई में परक्यूपाईन लेईंग का कार्य नहीं किया गया है। अतः स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप मिट्टी कार्य नहीं कराया गया है। श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय समीक्षोपरांत उड़नदस्ता अंचल का मंतव्य प्राप्त किया गया। उड़नदस्ता से प्राप्त मंतव्य की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत उपरोक्त आरोप के लिए दोषी पाते हुए श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, काढ़ागोला को विभागीय अधिसूचना सं0-1577 दिनांक 27.10.2014 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- "कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर दो वर्षों के अवधि के लिए असंचयात्मक प्रभाव से अवनति"। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया, विभागीय समीक्षोपरांत अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं रहने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-644 दिनांक 16.03.2015 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड को यथावत रखा गया। श्री सिंह को संसूचित दण्ड के कार्यान्वयन के संबंध में महालेखाकार कार्यालय द्वारा विभागीय मंतव्य की माँग किया गया कि श्री सिंह दिनांक 31.10.2014 को सेवानिवृत हो चुके है इस स्थिति में असंचयात्मक दण्ड का प्रभाव संचयात्मक हो जायेगा तो दण्ड किस प्रकार रिस्टोर होगा। महालेखाकार कार्यालय से प्राप्त पत्र के समीक्षोपरांत दण्ड को पुनरीक्षित कर प्रतिस्थानी दण्ड दिये जाने की स्थिति नहीं रहने के कारण विकल्पहीनता की स्थिति में श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह (आई0डी0-2035) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को विभागीय अधिसूचना संख्या-1577 दिनांक 27.10.2014 द्वारा निर्गत दण्डादेश को निरस्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजीव नयन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को विभागीय अधिसूचना संख्या-1577 दिनांक 27.10.2014 द्वारा संसूचित दण्ड को निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।

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25 जुलाई 2022

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-13/2022-1780--श्री मनोज रंजन (आई0डी0-5449) तत0 सहायक अभियंता, पटना प्रमंडल (पश्चिमी) के द्वारा अपने पदस्थापन काल में DIET, SASARAM के भवन निर्माण के पर्यवेक्षण में बरती गई अनियमितता के लिए प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड का पत्रांक-4435 दिनांक 09.06.2022 द्वारा उनके सेवा को पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग को वापस करते हुए निलंबित कर अनुशासनिक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है। 2. उक्त पत्र के विभागीय स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में श्री मनोज रंजन, तत0 सहायक अभियंता, पटना प्रमंडल (पश्चिमी) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के संगत प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री मनोज रंजन, सहायक अभियंता का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री रंजन को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

4. इनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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27 जुलाई 2022

सं॰ 22/नि॰सि॰(भाग0)-09-08/2016/1798--श्री हरेन्द्र प्रसाद (आई0डी0-3413), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, काडा, बाँका सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध किउल बदुआ चांदन कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, भागलपुर के अन्तर्गत कराये गये कार्यो में बरती गई अनियमितता के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने पर आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर की समीक्षोपरान्त विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरान्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के उपरांत समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत वस्तुस्थिति निम्नवत है :-

33 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

औसत अनुपात प्रावधानित अनुपात से 80 प्रतिशत ज्यादा एवं चिप्स का औसत अनुपात प्रावधानित अनुपात से 46.08 प्रतिशत कम पाये जाने से पी॰सी॰सी॰ का Over all mix richer होते हुए भी Aggregate (Fine/Course) Particle Size Distribution विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया जिसके लिए न्यून विशिष्टि का कार्य कराने के लिए आप दोषी परिलक्षित होते है।

इनका उपर्युक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार निमयावली के नियम 3(1) का उल्लंघन है। आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान :- चांदन परियोजना प्रमंडल काडा, बांका, भागलपुर अन्तर्गत वर्ष 2014-15 में पक्का सिंचाई नाला FC-1 नारायणपुर फील्ड चैनल निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के आरोप का प्रत्युार इनके द्वारा पूर्व में समर्पित किया गया है। श्री हरेन्द्र प्रसाद संबंधित कार्यालय में दिनांक 23.03.2014 से 22.07.2014 तक पदस्थापित रहे हैं। इस दौरान इस कार्य का क्रियान्वयन नहीं कराया गया है। श्री हरेन्द्र प्रसाद से संबंधित प्रमंडल से इस कार्य के प्रथम चालू विपत्र के माप पुस्त के अवलोकन से पता चलता है कि इस कार्य के प्रथम चालू विपत्र का भुगतान 18.10.2014 को किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री प्रसाद 22 जुलाई को भारमुक्त हो चुके हैं।

विपत्र में कनीय अभियंता का हस्ताक्षर के साथ 20 जुलाई की तिथि अंकित की गई है। जुलाई माह में मानसून के अत्यधिक सक्रियता के कारण निर्माण कार्य संभव नहीं है। वास्तव में वर्षा के उपरान्त कार्य कराकर भुगतान किया गया है। Time Extension हेतु कटौती से बचाने के उद्‌देश्य से कनीय अभियंता द्वारा Back dating की गई है। सरकारी नियमानुसार कार्य कराकर 15 दिन पर संवेदक को भुगतान सुनिश्चित किया जाना है। विपत्र अगर वास्तव में जुलाई में तैयार होता है तो C&P एवं भुगतान तीन माह बाद क्यों किया जाएगा? वर्षा कार्य के क्रियान्वयन में बाधा डाल सकती है। इस कार्य के एकरारनामा की प्रति जाँच पत्र के साथ उपलब्ध कराई गई थी। इस कार्य के चालू अथवा तृतीय एवं अंतिम किसी भी विपत्र में मेरी संलिप्तता नहीं है। क्योंकि मैं 2014 के जून माह में हुए स्थानान्तरण के फलस्वरूप 22 जुलाई 2014 को प्रभार सौंप चुका था।

समीक्षा ः- चान्दन परियोजना प्रमंडल काडा, बांका, भागलपुर में वर्ष 2014-15 में पक्का सिंचाई नाला FC-1 नारायणपुर फिल्ड चैनल निर्माण कार्य प्रयुक्त ईंटों का औसत Compressive Strength 56.97 Kg/Cm2 पाया जाना एवं इसी प्रकार प्रयुक्त पी॰सी॰सी॰ के नमूने में बालू का औसत अनुपात प्रावधानित अनुपात से 80 प्रतिशत ज्यादा एवं प्रयुक्त चिप्स का औसत अनुपात प्रावधानित अनुपात से 46.08 प्रतिशत कम पाये जाने का आरोप है।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि वे संबंधित कार्यालय में दिनांक 23.03.14 से 22.07.14 तक पदस्थापित रहे हैं एवं इस दौरान कार्य का क्रियान्वयन नहीं कराया गया है।

अभिलेखों के अवलोकन से पता चलता है कि श्री प्रसाद के द्वारा ना तो मापपुस्त पर कार्य की जाँच की गयी है ना ही कोई भुगतान किया गया है। माप पुस्त पर भी कार्यपालक अभियंता द्वारा की गयी जाँच को ही उनके द्वारा कार्य का पर्यवेक्षण किया गया माना जा सकता है। इनके द्वारा समर्पित बचाव बयान में यह भी उल्लिखित है कि कनीय अभियंता द्वारा इनके प्रभार छोड़ने के बाद कार्य कराया गया एवं विपत्र पूर्व की तारीख अर्थात्‌ 20.07.2014 अंकित किया गया एवं भुगतान की कार्रवाई दिनांक-18.10.2014 को की गई। श्री प्रसाद का कथन मान्य किया जा सकता है क्याेंकि आज की तिथि में यह साबित करना कठिन है कि इनके समय में वास्तव में कार्य का कार्यान्वयन हुआ अथवा नहीं। चूँकि श्री प्रसाद के द्वारा न तो माप पुस्त में कोई माप की जाँच की गई है और ना ही कोई भुगतान की कार्रवाई की गई है।

वर्णित स्थिति में श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर लगाया गया आरोप अप्रमाणित परिलक्षित होता है। निष्कर्ष ः- उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में श्री हरेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, बाँका, भागलपुर के विरूद्ध गठित आरोप अप्रमाणित है।

अतएव उपर्युक्त समीक्षा एवं निष्कर्ष के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री हरेन्द्र प्रसाद (ID-3413), तत0 कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, काडा, बांका संप्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध अप्रमाणित आरोप होने के कारण इन्हें आरोपमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री हरेन्द्र प्रसाद (ID-3413), तत0 कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, काडा, बांका संप्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को आरोप मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

----- Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya -------------- Office Order The 31st August 2022

No.VII-रा0-02/2018-3560---In the light of proposal received from District Magistrate, Arwal vide letter no.- 59, dated- 18.08.2022, The power of certificate officer have been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

34 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022
Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Sri Kumar Vinod (B.A.S.) District Land Acquition Officer, Arwal District Level
2 Sri Praveen Kumar (B.A.S.) Deputy Collector Land Reforms, Arwal District Level

By Order, Sd./Illegible, Secretary to Commissioner, Magadh Division, Gaya

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय (cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त। (cid:464)बहार गजट, 25—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in35 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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No. 977—I, Sumit Kumar Singh S/o Narendra Singh R/O Vill-Pakri, P.O-Bhour, P.s- Khaira, Dist-Jamui, (Bihar), do hereby solemnly affirm and declare as per Affidavit no. 27 dated- 19.04.2022. That my actual name is Sumit Kumar Singh, which is written in my Aadhar Card No. 581640948314, but I am also known in the name of SUMIT KUMAR, both are same and one person. That Sumit Kumar and Sumit Kumar Singh is the same and one person.

Sumit Kumar Singh.

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सं0 979—मैं श्याम बिहारी सुलनितया पिता स्व0 गजानन्द सुल्तानिया पता-305 दीप लिला कॉम्पलेक्स, ज्ञान गंगा बुक डिपो के पीछे कदमकुऑं, पटना 800003 शपथ पत्र संख्या 5689 दिनांक 20.07.22 के अनुसार घोषणा करता हूं कि शेयर प्रमाण पत्र में मेरा नाम गलती से श्याम बिहारी लिखा गया है। श्याम बिहारी सुल्तानिया और श्याम बिहारी दोनों एक व्यक्ति है। मेरा सही नाम श्याम बिहारी सुल्तानिया है।

श्याम बिहारी सुलनितया।

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No. 980— I, SHATAKSHI D/O Sanjeev Kumar Singh R/o 205 Gauri Appt., Rukanpura Ambedkar Path, Bailey Rd. PS- Rupaspur Patna Declare that Vide Afd. No. 14997 Dt- 15.07.2022 Shall be known as Shatakshi Singh for all purposes.

SHATAKSHI.

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No. 981— I, Vikash Kumar S/o Mr. Brajendra Prasad Singh, R/o Sai Tulip Apartment, Patna- 800014 Solemnly affirm that. In my son Divyansh Singh class 10th marks sheet my name has been wrongly mention as Vikash Kumar Singh instead of Vikash Kumar which is correct vide affidavit no. 156 dated 23-07-2022.

Vikash Kumar.

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सं0 988—मैं जुलेखा खातुन पति मो0 शहिद अयूब खान साकिन शरीफ कॉलोनी, गया रोड, पो0+थाना+जिला-नवादा (बिहार) शपथ सं0 12547 दिनांक 04.08.2022 द्वारा घोषणा करती हूँ कि मुझे जुलेखा खातून के नाम से जाना जाता है और भविष्य में भी मुझे जुलेखा खातुन के नाम से ही जाना जायेगा। मेरी पुत्री अला शाहिद, जिनके बारबहीं (12वीं) कक्षा के अंकपत्र व प्रमाण पत्र में भूलवश माता का नाम 'जुलेखा नईम' अंकित हो गया जबकि सही नाम 'जुलेखा खातुन' है।

जुलेखा खातुन। No. 988—I, Zulekha Khatoon W/o Md. Shahid Ayub Khan R/0 Sharif Colony Gaya Road, P.O.+P.S.+Dist-Nawada (Bihar) by affidavit No. 12547 Dated 04.08.2022 declare that I am known by Zulekha Khatoon and in future will known Zulekha Khatoon too. My Daughter Alaa Shahid her in class Twelve (XII) Marks Sheet and Certificate. Wrongly Mentioned Mother's name ZULEKHA NAYEEM. Correct Name is ZULEKHA KHATOON.

Zulekha Khatoon.

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(cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 No. 989—I, PRIYANSHU S/o Ravindra Kumar R/o 1B Nirmala Apartment, SaraswatiVihar Colony, Ambedkar path, Bailey Road, Patna, PO- B.V. College, PS-Rupaspur, Patna declare that vide affid. no. 14506 dated 05.07.2022 shall be known as Priyanshu Chauhan.

PRIYANSHU.

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No. 997—I, AISHWARYA Sharma D/o Ram Vinod Sharma R/o C/2 J.P. Nagar, Digha Patna declare aff. no. 10706/26.07.22 AISSE & AISSCE my name is Aishwarya, B.F.SC. Aishwarya Ram Sharma. M.F.SC-Aishwarya Sharma all are same and one person. I will be known as Aishwarya Sharma for all purposes.

AISHWARYA Sharma.

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No. 998—I, JYOTI SHREE D/o Prem Nath R/o Maa Sharda Store, Gupta Market Corner, Raja bazar, Pillar No. 53 B.V.College, Patna- 800014 in my share certificates my name by mistake has been wrongly mention as Jyoti Kumari instead of JYOTI SHREE. Affidavit no. 427 Dated 08/08/2022.

JYOTI SHREE.

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सं0 999—जगदीश कुमार खेमका उर्फ जगदीश प्रसाद खेमका, पिता स्व0 बनवारी लाल खेमका, पता- 404 मनप्रभा अपार्टमेन्ट, जीपीओ, उारी बोरिंग कैनाल रोड़, फुलवारी, पटना-800001 शपथ पत्र संख्या 4265 दिनांक 23.07.22 के अनुसार घोषणा करता हूँ कि जगदीश कुमार खेमका एवं जगदीश प्रसाद खेमका दोनो एक ही व्यक्ति हैं। भविष्य में मैं जगदीश प्रसाद खेमका के नाम से जाना जाऊंगा।

जगदीश कुमार खेमका उर्फ जगदीश प्रसाद खेमका।

&&&&&&& la0 996] fnukad 5 flrEcj 2022 बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) (संषोधन) विनियामवली, 2022 ------ अधिसूचना 22 अगस्त 2022

सं0 01/बिहार/रेरा 2022/सामान्य विनियमावली संषोधन 2022--भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 85 सहपाठित धारा 34 एवं धारा 38 के अधीन प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, बिहार एतद्‌ द्वारा राजकीय e-gazette में संख्या-780 दिनांक 09 अगस्त 2021 में प्रकाषित 'बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2021' के संषोधन हेतु निम्नलिखित संषोधन विनियमावली बनाता हैः- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, और लागू होनाः-

(i) यह विनियमावली बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) (संषोधन) विनियमावली, 2022 कही जा सकेगी।

(ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (iii) विनियमावली, 2021 में ये संषोधन राजपत्र में इसकी अधिसूचना प्रकाषन की तिथि से प्रवृत्त होंगे। 2. विनियम संख्या 2 ''परिभाषाएं'' में संषोधन-

(i) बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2021 (इसके बाद मूल विनियमावली के रूप में संदर्भित) के विनियम सं0 2 (1) (ii) के शब्दों ''आवेदन से अभिप्रेत है अधिनियम तथा उसके अधीन बने नियमों तथा विनियमों के प्रावधानों के अनुपालन में समर्पित करने हेतु अपेक्षित सभी ब्योरे तथा सभी दस्तावेजों के साथ धारा 4 या धारा 9 के स्थान पर'' आवेदन से अभिप्रेत है अधिनियम तथा उसके अधीन बने नियमों तथा विनियमों के प्रावधानों के अनुपालन में समर्पित करने हेतु अपेक्षित सभी ब्योरे तथा सभी दस्तावेजों के साथ धारा 4, या धारा 6 या, धारा 9 प्रतिस्थापित किया जाएगा।

(ii) मूल विनियमावली के विनियम सं0 2 (1) (iii) के शब्दों '' प्राधिकरण अथवा न्याय निर्णयन पदाधिकारी द्वारा इस अधिनियम की धारा 31 सहपठित धारा 71 के अधीन प्राप्त षिकायत'' के स्थान पर '' प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम की धारा 31 एवं न्याय निर्णयन पदाधिकारी द्वारा इस अधिनियम की धारा 31 सहपठित धारा 71 के अधीन प्राप्त षिकायत'' प्रतिस्थापित किया जाएगा।

3. विनियम संख्या 3 में अंकित फाम्र्स में संषोधनः-

मूल विनियमावली के विनियम संख्या 3 में अंकित फाम्र्स 1, 2 एवं 3 आंषिक रूप से संषोधित किये जाएगें जैसा कि इस विनियमावली के साथ संलग्न हैं।37 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 4. विनियम संख्या 5 ''आवेदन का समर्पण'' में संषोधनः-

(1) मूल विनियमावली के विनियम 5 (1) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः- '' 5 (1) (a) इस अधिनियम की धारा 4, धारा 6 और धारा 9 के अधीन प्राधिकरण को प्रस्तुत किये जाने वाले सभी आवेदन हार्ड कॉपी में सभी ब्यौरा के साथ संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित फीस के साथ-साथ प्राधिकरण को ऑनलाईन जमा किये जायेगें।

(2) मूल विनियमावली के विनियम 5(1)(a) के प्रथम पाराग्राफ के बाद, पाराग्राफ नं0 5(1)(b) के रूप में निम्नवत अंकित किया जाएगाः-

''5(1)(b) प्रोमोटर पंजीकरण के लिए आवेदन के साथ एक शपथ पत्र प्रस्तुत करेगा जिसमें वैसे फ्लैट, दुकानों, अपार्टमेंट, टावरों, पार्किंग, गैरेज या अन्य कोई यदि हो और भूखंड जो प्रोमोटर के हिस्से में विक्रय हेतु आते है के शेयर वितरण का उल्लेख किया जाएगा। तत्संबंधी विवरण को प्राधिकरण द्वारा जारी किये जाने वाले निबंधन प्रमाण पत्र में अंकित किया जाएगा।''

(3) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 5(2) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः- ''5(2) प्रोमोटर या एजेंट जैसा भी मामला हो, जो सभी प्रासंगिक दस्तावेजों को जमा करने में विफल रहता है या अधिनियम, नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अनुसार पंजीकरण की अन्य आवष्यकताओं का पालन प्राधिकरण द्वारा मामले की योग्यता के अनुसार निर्दिष्ट अवधि में सभी को सुधारने का अवसर दिये जाने के बावजूद नहीं करता है, तो आवेदन को अपूर्ण माना जाएगा और खारिज किए जाने के लिए उत्तरदायी होगा।''

(4) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 5(3) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः- ''5(3) यदि आवेदन में दोष बना रहता है और आवेदन अधिनियम, नियमों और विनियमों के प्रावधान के अनुसार नहीं है तो इसे अधिनियम की धारा 5(1)(बी) के प्रावधान के अनुसार अनुपालन के लिए ईमेल अनुरोध से 7 दिनों की अवधि की अग्रिम सूचना दिए जाने के बाद आवेदक को मामले में सुनवाई का अवसर देते हुए आवेदन को खारिज किया जाएगा। (5) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 5(4) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः- ''5(4) उपर्युक्त (3) के आलोक में यदि आवेदन अस्वीकृत किया जाता है तो प्रोमोटर या एजेन्ट, जैसा भी हो, शुल्क के साथ पुनः आवेदन कर सकता है, जैसे कि यह निबंधन हेतु नया आवेदन हो''

(6) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 5(4) के बाद निम्नलिखित विनियम संख्या 5(5) एवं 5(6) जोड़ा जाएगाः- 5(5) प्रोमोटर द्वारा परियोजना के निबंधन के तत्काल पष्चात्‌ रेरा, बिहार के वेबसाइट के अपने वेबपेज पर परियोजना की चरण वार समय तालिका, माइल स्टोन सारिणी के रूप में अपलोड की जाएगी जिसमें भवन/टावर/ब्लौक वार कार्यो के विभिन्न मदों का वर्णन किया गया हो।

5(6) प्रोमोटर परियोजना के निबंधन की पूर्णता तिथि के अवधि विस्तार के लिए बिहार भू-सम्पदा (विनियमन), 2017 में निर्धारित प्रपत्र 'ई' में आवेदन के साथ संषोधित पूर्णता तिथि के भीतर पूरा करने हेतु परियोजना के विकास कार्य की संषोधित माइल स्टोन समय सारणी प्रस्तुत करेगा तथा रेरा, बिहार के वेबसाइट के अपने वेबपेज पर अपलोड करेगा। 5. विनियम संख्या 6 में संषोधनः-

मूल विनियमावली के विनियम संख्या 6 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः-

''6. प्रोमोटर या आवंटी के रूप में भूमि मालिकः- (1) प्राधिकरण या न्यायनिर्णायक अधिकारी, जैसा भी मामला हो, अधिनियम की धारा 31(1) के तहत आवेदनों का निपटान करते समय यह तय करेगा कि भूमि मालिक, जिसने प्रोमोटर के साथ विकास समझौता किया है, को षिकायत के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर जो उसके सामने रखे जा सकते है, आवंटी के रूप में माना जाएगा या एक प्रामोटर के रूप में,

स्पष्टीकरण 1ः अधिनियम की धारा 2 (जेड के) में उल्लेखित परिभाषा, के अनुसार चूँकि भूमि मालिक ''एक परियोजना के निर्माण होने का कारण है'', वह प्रोमोटर के साथ, अनुबंध में उल्लिखित आवंटियों के दायित्वों को पूरा करने के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेवार होगा, अगर,

(ए) विकास समझौते में विषेष रूप से उल्लेख किया गया है कि भूमि मालिक प्रोमोटर के साथ परियोजना के निर्माण या विकास में सक्रिय रूप से भाग लेगा; या (बी) विकास समझौता जो फ्लैटों या विकसित भूखंडों के हिस्से के अलावा मुनाफे और राजस्व के हिस्से के वितरण का विवरण हो; या (सी) भूमि मालिक परियोजना पूरी होने से पहले अपने हिस्से के अपार्टमेंट का विपणन, विज्ञापन या बिक्री करता है। स्पष्टीकरण 2ः अधिनियम की धारा 18(2) के अनुसार जिस भूमि पर परियोजना विकसित की जा रही है, उस भूमि केे दोषपूर्ण हक के मुआवजे के लिए दायर मामलों में, न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा तय किए गए मुआवजे के भुगतान के लिए भूस्वामी संयुक्त रूप से जिम्मेदार होगा।''

स्पष्टीकरण 3ः पृथक खाते से राषि की निकासी के प्रयोजनार्थ निबंधित भू-संपदा परियोजना की प्रगति को प्रमाणित करने वाला चार्टर्ड एकाउन्टेंट, उस चार्टर्ड एकाउन्टेंट से जो प्रोमोटर का वैधानिक लेखापरीक्षक हो, से भिन्न होना चाहिए। स्पष्टीकरण 4ः चार्टर्ड एकाउन्टेंट, जो प्रोमोटर के वैधानिक लेखा परीक्षक से भिन्न हो, यदि प्रोजेक्ट वास्तुविद्‌, अभिंयता या चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा निर्गत फार्म 4 के प्रमाण-पत्र में, यह प्रकट करता है कि अभिहित बैंक खाते से निधि की38 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 निकासी के लिए मिथ्या या अषुद्ध जानकारी दी गई है और प्रोजेक्ट विषेष के लिए संग्रहित राषि का उपयोग उस प्रोजेक्ट के लिए नहीं किया गया है और राषि की निकासी, इस प्रोजेक्ट की पूर्णता की प्रतिषत के अनुपालन में नही की गई है तो प्राधिकरण, अधिनियम और नियमावली में यथा अनुध्यात दांडिक कार्रवाई करने के अतिरिक्त, स्वविवेक से भी वास्तुविद्‌, अभियंता या चार्टर्ड एकाउन्टेंट से संबधित व्यावसायिक विनियामक निकाय के समक्ष इस विषय को, उस व्यवसायी की सदस्यता के निबंधन के रद्दीकरण सहित, उसके विरूद्ध आवष्यक दण्डात्मक कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएगा। 6. विनियम संख्या-7 में संशोधनः- (1) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 7(1) (ii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा :- (ii) परियोजना निबंधन के आवेदन, जो निबंधन के पूर्व या निबंधन के बाद दिया गया हो, में आवश्यक परिवर्तन हेतु शुल्कः-

(2) मूल विनियमावली के विनियम संख्या (1) (iii) विलोपित किया जाएगा। 7. विनियम संख्या-8 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 8 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा :- 8- डिसप्ले बोर्डः-

(1) प्रोमोटर परियोजना स्थल पर 5 फीट x 4 फीट के न्यूनतम आकार का एक डिसप्ले बोर्ड, जो सभी मौसमों में सुरक्षित रहे, स्थापित करेगा जिसमें परियोजना का नाम और पंजीकरण संख्या, पंजीकरण की तारीख, परियोजना के चरणों, टावरों की संख्या, मंजिलों की संख्या (टावर-वार), स्वीकृत ले आउट योजना, मंजिल-वार स्वीकृत योजना, परियोजना षुरू करने की तिथि और पूरा होने की प्रस्तावित तिथि, मोटे और सुपाठ्‌य अक्षरों में, इस प्रकार अंकित रहे कि यह जानकारी परियोजना के पूर्ण होने तक प्रदर्षित होती रहे। (2) प्लॉट विकास परियोजना के मामले में उपविनियम (1) में वर्णित डिसप्ले बोर्ड जो प्रोमोटर द्वारा परियोजना के स्थल पर स्थापित किया जाएगा में, अनुमोदित साइट योजना जिसमें परियोजना के संपूर्ण क्षेत्र यथा सड़कें, जलापूर्ति, वाह्‌य सेवाएं, परियोजना की भूमि का राजस्व विवरण यथा प्लॉट संख्या, खाता संख्या, थाना संख्या तथा ले-आउट योजना जो राजस्व मानचित्र पर यथा स्थान अंकित हो, मोटे और सुपाठ्‌य अक्षरों में इस प्रकार अंकित रहे कि जानकारी परियोजना के पूर्ण होने तक प्रदर्षित होती रहे। (3) प्रोमोटर की वेब साइट सहित प्रोमोटर के अधिकृत प्रतिनिधि का नाम और संपर्क विवरण भी उपविनियम (1) में अंकित डिसप्ले बोर्ड पर अंकित किया जाएगा।

8. विनियम संख्या-8 क में अंतःस्थापनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 8 के बाद निम्नलिखित विनियम संख्या 8क अंतः स्थापित की जायेगीः - ''8क- प्रोमोटर द्वारा वेबसाइट पर अपलोड करने योग्य सूचना/दस्तावेज (1) बिहार भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2017 के नियम 16(1)(c)(ii) अन्तर्गत किसी विषेष वर्ष के आगामी 30 सितम्बर तथा समर्पित किये जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन के अतिरिक्त प्रोमोटर रेरा, बिहार के वेबसाइट पर अपने वेबपेज में, वैसे चार्टर्ड एकाउण्टेंट जो प्रेक्टिस मे है तथा प्रोमोटर के प्रतिष्ठान का अंकेक्षक नहीं है द्वारा प्रमाणित एवं हस्ताक्षरित परियोजना की लेखा विवरणियॉ (स्टेटमेंट ऑफ एकाउण्टस) संषोधित प्रपत्र 4 (धारा 4 (2)(l)(D) के तृतीय परन्तुक के अनुसार जारी) अपलोड करेगा। (2) भू-सम्पदा परियोजना के प्रोमेाटर/विकासक द्वारा कंपनी के निदेषक मंडल/किसी फर्म के पार्टनर में किसी परिवर्तन (जुड़ना/हटना) के घटित होने के एक माह के अंदर रेरा, बिहार के वेबसाइट पर अपने वेबपेज में अपलोड करेगा। (3) प्रोमोटर प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपने वेबपेज में प्रत्येक त्रैमास की समाप्ति के 15 दिनों के अंदर संषोधित प्रपत्र 7 जो इस विनियमावली के साथ संलग्न है, में त्रैमासिक प्रगति प्रतिवेदन अपलोड करेगा। (4) प्रोमोटर प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपने वेबपेज में निम्नलिखित भी अपलोड करेगाः

(i) असैनिक अभियन्ता, वास्तुविद एवं चार्टर्ड एकाउण्टेंट, जो प्रैक्टिस में हो, द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि गत त्रैमास तक बैंक से निकासी की गई राषि, परियोजना के भौतिक प्रगति के अनुरूप है।

(ii) वास्तुविद एवं असैनिक अभियन्ता द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि परियोजना की प्रगति, प्रोमोटर द्वारा समर्पित माइल-स्टोन सारणी के अनुरूप है।

(iii) माइल स्टोन सारणी/बार सारणी/गैन्ट सारणी जिसमें भवन/टावर/ब्लौक वार निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों को दर्षाया गया हो जिसमें यह इंगित किया गया हो कि परियोजना की प्रगति समय सारणी के अनुरूप है या पीछे है।

(5) यदि प्रोमोटर निर्धारित समय के भीतर तिमाही प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने में विफल रहता है, तो वह अधिनियम की धारा 61 के प्रावधान के आलोक में नीचे दिए गए विवरणी के अनुसार विलम्ब की अवधि तक प्रत्येक दिन हेतु दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।39 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

परियोजना का प्रकार विलम्ब से प्रस्तुत करने के लिए दंड की राषि की दर-
आवासीय परियोजनाएं (ए) 1000 वर्ग मीटर से कम के लिए 500 (पाँच सौ) रूपये प्रति दिन
(बी) 1000 वर्ग मीटर और अधिक के लिए 1000 (एक हजार) रूपये प्रति दिन
मिश्रित परियोजनाएं (ए) 1000 वर्ग मीटर से कम के लिए 1500 (एक हजार पाँच सौ) रूपये प्रति दिन
(बी) 1000 वर्ग मीटर और अधिक के लिए 2000 (दो हजार) रूपये प्रति दिन
व्यावसायिक परियोजना (ए) 1000 वर्ग मीटर से कम के लिए 2000 (दो हजार) रूपये प्रति दिन
(बी) 1000 वर्ग मीटर और अधिक के लिए 2500 (दो हजार पाँच सौ)रूपये प्रति दिन
प्लॉट की गई परियोजना किसी भी क्षेत्रफल की 500 (पाँच सौ) रूपये प्रति दिन

9. विनियम संख्या 12 में संषोधनः - (i) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 12 के शीर्षक को विलोपित करते हुए को ''सचिव के कार्य'' से प्रतिस्थापित किया जाएगाः

(ii) मूल विनियमावली के उप विनियम संख्या 12(1) एवं 12(2) को विलोपित किया जायेगा। (iii) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 12 के उप विनियम संख्या (3) से (7) को ''उप विनियम संख्या संख्या (1) से (5 ) के रूप में पूनर्संख्यांकित किया जाएगा।

10. विनियम संख्या-14 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 14 को विलोपित करते हुए निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा : - ''14. बिहार भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) नियम 2017 के नियम 36 के साथ पठित अधिनियम की धारा 31 के तहत प्राधिकरण के समक्ष समर्पित षिकायत वाद और अधिनियम की धारा 3 के तहत स्वः प्रेरण वाद की न्याय निर्णयन प्रक्रिया/सुनवाई, सामान्य या विषिष्ट आदेष के माध्यम किसी विषिष्ट मामले या मुद्‌दे की सुनवाई और निर्णय एक सदस्य या अध्यक्ष की एकल पीठ या प्राधिकरण के दो सदस्यों के साथ या अध्यक्ष के साथ एक सदस्य की द्विसदस्यीय न्यायपीठ द्वारा करने का अध्यक्ष निदेष दे सकते हैं।

11. विनियम संख्या 15 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 15 के पहले परंतुक की दूसरी पंक्ति में वर्णित "फॉर्म 6" षब्द "फॉर्म 5" षब्द से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

12. विनियम संख्या 17 में संषोधनः - (i) मूल विनियमावली के विनियम संख्या 17 के उपनियम (2) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा : - (ii) अध्यक्ष, उन निबंधनों और शर्तो के अध्यधीन, जो अध्यक्ष समुचित समझे, किसी व्यक्ति के द्वारा संषोधित फार्म 6 में आवेदन दिये जाने पर, प्राधिकार के पास उपलब्ध आदेषों, दस्तावेजो तथा कागजातों की प्रमाणित प्रतियाँ अध्यक्ष द्वारा यथा निर्धारित अपेक्षित फीस, के भुगतान पर तथा अध्यक्ष द्वारा निर्देषित शर्त्ताें का अनुपालन करने पर आपूर्ति कर सकेगा। अध्यक्ष दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों की आपूर्ति के लिए प्राप्त अनुरोध को अनुरोध की प्राप्ति से 14 (चौदह) कार्य-दिवस के भीतर सुनिष्चित करने हेतु किसी अधिकारी को पदाभिहित करेंगे।40 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 (3) अध्यक्ष आदेष द्वारा निदेषित कर सकेगा कि प्राधिकरण द्वारा संधारित कोई जानकारी/ दस्तावेज/कागजात/सामग्री गोपनीय या विषेषाधिकार प्राप्त होगी और निरीक्षण के लिए या प्रमाणित प्रतियों की आपूर्ति के लिए उपलब्ध नहीं होगी और अध्यक्ष यह भी निदेष दे सकेगें कि ऐसे दस्तावेज, कागजात या सामग्री को, किसी भी तरह उपयोग में नही लाया जाए जब तक कि अध्यक्ष द्वारा विनिर्दिष्ट रूप से प्राधिकृत नहीं किया जाए।

13. विनियम संख्या-20 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 20 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः - "20-आदेष का संषोधनः - कोई भी व्यक्ति अधिनियम की धारा 31 के तहत पारित आदेष के संदर्भ में 100 रूपये की फीस के साथ अधिनियम की धारा 39 के प्रावधान के अनुसार संषोधन याचिका दायर कर सकता है।" 14. विनियम संख्या- 22 क का अंतः स्थापनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 22 के पष्चात्‌ निम्नलिखित विनियम संख्या 22क अंतःस्थापित किया जाएगाः - "22क परियोजना के पूरा होने पर प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजः - परियोजना के पूर्ण होने पर प्रोमोटर निम्नलिखित दस्तावेज जमा करेगे -

(i) अधिभोग प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए गए पूर्णता प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति और इसके तहत समर्पित नोटिस की प्रति यदि अधिभोग प्रमाण निर्गत नहीं हुआ है। (ii) परियोजना पर व्ययीत पूर्ण निधि संबंधी चार्टर्ड एकाउंटेंट का प्रमाण पत्र। (iii)परियोजना की वर्तमान तस्वीर जो सामने का, साइड का एवं पीछे का दृष्य हो। (iv) प्रोमोटर के हिस्से से निष्पादित बिक्री अभिलेखों की संख्या। (v) प्रोमोटर के द्वारा निष्पादित शपथ पत्र जिसमें कहा गया हो कि प्रोमोटर ने बिक्री इकरारनामा, प्रॉस्पेक्टस और ब्रोषर के अनुसार सभी सेवाएं प्रदान की हैं और उसमें प्रोमोटर के खिलाफ लंबित षिकायत मामलों की संख्या भी अंकित करेगें। प्राधिकरण, इस तरह के दस्तावेजों के आधार पर संतुष्ट होने के बाद कि परियोजना पूरी हो गई है प्रोमोटर के लिखित आग्रह पर, संबंधित बैंक को, जहाँ परियोजना का खाता संधारित है, को पत्र की प्रति देते हुए प्रोमोटर को लिखित सूचना दे सकते हैं कि धारा 4(2)(एल)(डी) के अनुसार प्रोमोटर पर लागू सभी जिम्मेदारियों से उनको मुक्त किया जाता है।

15. विनियम संख्या-24 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 24 को विलोपित करते हुए निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः - 24-"आदेषों का क्रियान्वयन" "प्राधिकरण या न्याय निर्णायक अधिकारी द्‌वारा पारित किसी भी आदेष का पालन निर्धारित समय के भीतर किया जाएगा और यदि प्रोमोटर आदेष का पालन करने में विफल रहता है, तो ऐसे समय के भीतर, षिकायतकर्ता 250 (दो सौ पचास मात्र) रूपये के षुल्क या जैसा अध्यक्ष द्वारा विनिर्धारित किया गया हो, के साथ क्रियान्वयन याचिका - इस विनियमन के साथ संलग्न संषोधित प्रपत्र 8 में प्राधिकरण या न्याय निर्णायक अधिकारी, जैसा भी मामला हो, के समक्ष दायर कर सकता है।

16. विनियम संख्या-31 में संषोधनः- मूल विनियमावली के विनियम संख्या 31 को विलोपित करते हुए निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगाः - 31. सामान्य सुविधाएँः- (1) प्राधिकार महिला विवादियों/ अधिवक्ताओं एवं प्राधिकरण की महिला कर्मचारियों के लिए यथा संभव षिषुगृह (क्रेच) एवं कॉमन रूम की सुविधा उपलब्ध करेगा।

प्राधिकरण के आदेष से, नवीन वर्मा, अध्यक्ष, भू सम्पदा विनियामक प्राधिकरण।

फार्म संख्या 1

[(cid:874)व(cid:467)नयम 3 देख(cid:581)]

वा(cid:232)तुकार का (cid:292)माण प(cid:287) (चल रहे (cid:292)ोजे(cid:200)ट के पंजीकरण के समय और ना(cid:871)मत खाते से पैसे (cid:467)नकालने के (cid:871)लए जमा (cid:873)कया जाना है)

(cid:465)दनांक------------------

सेवा में,

——————————— (प्रोमोटर का नाम और पता), ________________________________________ ________________________________________41 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 (cid:874)वषय: प(cid:464)रयोजना म(cid:581) (cid:467)न(cid:231)पा(cid:465)दत काय(cid:91) के (cid:292)(cid:467)तशत का (cid:292)माण प(cid:287) ..........भवन (भवन(cid:585)) क(cid:551) सं(cid:201)या/ ---------------------

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1. (cid:467)न(cid:224)न(cid:871)ल(cid:872)खत तकनीक(cid:551) पेशेवर(cid:585) को मा(cid:871)लक / प्रोमोटर (cid:622)वारा (cid:467)नयु(cid:200)त (cid:873)कया जाता है:-- (i) मेसर्स/(cid:302)ी/(cid:302)ीमती। ————————————————जैसा एल.एस. / आ(cid:873)क(cid:91) टे(cid:200)ट;

(ii) मेसर्स /(cid:302)ी /(cid:302)ीमती। ——————————————— संरचना(cid:215)मक सलाहकार के (cid:510)प म(cid:581)

(iii) मेसर्स /(cid:302)ी /(cid:302)ीमती। —————————————— यां(cid:466)(cid:287)क/(cid:874)व(cid:622)युत/नलसाजी सलाहकार (एमईपी) के (cid:510)प म(cid:581) (iv) मेसर्स /(cid:302)ी /(cid:302)ीमती। ——————————————— साइट पय(cid:91)वे(cid:162)क के (cid:510)प म(cid:581)

ं उपरो(cid:200)त भू-सम्पदा प(cid:464)रयोजना के (cid:292)(cid:215)येक भवन/(cid:874)वंग के संबंध म(cid:581), साइट (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण के आधार पर, म(cid:583) (cid:292)मा(cid:872)णत करता हू (cid:873)क इस (cid:292)माण प(cid:287) क(cid:551) (cid:467)त(cid:876)थ के अनुसार, भू-सम्पदा प(cid:464)रयोजना के (cid:292)(cid:215)येक भवन/(cid:874)वंग के (cid:871)लए (cid:873)कए गए काय(cid:91) का (cid:292)(cid:467)तशत इस (cid:292)कार है। (cid:466)बहार रेरा _____________ सं(cid:201)या के तहत पंजीकृ त नीचे ता(cid:871)लका 'क' के अनुसार है। पूरे चरण क(cid:551) (cid:292)(cid:215)येक ग(cid:467)त(cid:874)व(cid:876)ध के संबंध म(cid:581) (cid:467)न(cid:231)पा(cid:465)दत काय(cid:91) का (cid:292)(cid:467)तशत ता(cid:871)लका 'ख' म(cid:581) (cid:874)व(cid:232)तृत है।

टेबल-'क'

भवन/(cid:874)वंग नंबर_____(प(cid:464)रयोजना के (cid:292)(cid:215)येक भवन/(cid:874)वंग के (cid:871)लए अलग से तैयार (cid:873)कया जाना है)

Đम संÉया काय[ / गǓतͪवͬध ͩकए गए काय[ का ĤǓतशत
1 ख ुदाई
2 .................. बेसमɅट और िÜलंथ कȧ संÉया
3 ................. पोͫडयम कȧ संÉया
4 िèटãट Ýलोर
5 ................ सुपर èĚÈचर के èलैब कȧ संÉया
6 आंतǐरक दȣवारɅ, आंतǐरक Üलाèटर, Ýलैट/पǐरसर के भीतर फश[, Ĥ×येक मंिजल के èतर पर Ĥ×येक Ýलैट/पǐरसर के दरवाजे और ͨखड़ͩकयां।
7 फ्लैट/परिसर के भीतर सेनेटरी फिटिंग, फ्लैट/ परिसर के भीतर विद्युत फिटिंग
8 सीǑढ़याँ, ͧलÝट का घेरा और लॉबी, सीǑढ़याँ और ͧलÝट, ओवरहेड और भूͧमगत पानी कȧ ट ंͩकयाँ।
9 बाहरȣ Üलंǒबंग और बाहरȣ Üलाèटर, ऊं चाई, भवन/ͪवंग के वॉटरĤूͩफं ग के साथ छतɉ का पूरा होना।
10 संबंͬधत ͪवभाग से एनओसी के अनुसार ͧलÝट, वाटर पंप, अिÊनशमन ͩफǑटंग और उपकरण कȧ èथापना, सामाÛय ¢ेğɉ मɅ ͪवɮयुत ͩफǑटंग, इलेÈĚो, मैके Ǔनकल उपकरण, पया[वरण कȧ शतɟ का अनुपालन / सीआरजेड एनओसी, Ĥवेश लॉबी / िÜलंथ सुर¢ा के ͧलए ͩफǓनͧशंग भवन/ͪवंग, कं पाउं ड वॉल और अÛय सभी आवæयकताओं से जुड़े ¢ेğɉ का फ़श[, जैसा ͩक åयवसाय / पूण[ता ĤाÜत करने के ͧलए आवæयक हो सकता है
42 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

टेबल-'ख'

संपूण(cid:91) पंजीकृ त चरण के संबंध म(cid:581) आंत(cid:464)रक और बाहर(cid:547) (cid:874)वकास काय(cid:91)।

Đमांक सामाÛय ¢ेğ और सुͪवधाएं Ĥèताͪवत सुͪवधाएं (हां/नहȣं) ͩकए गए काय[ का ĤǓतशत ͪववरण
1 आंतǐरक सड़कɅ एवं फुटपाथ
2 जल आपूǓत[
3 सीवरेज (चैàबर, लाइन, सेिÜटक ट ɇक,एसटȣपी)
4 त ूफान जल नाͧलयाँ
5 भूǓनमा[ण एवं वृक्षारोपण
6 èĚȣट लाइǑटंग
7 सामुदाǓयक भवन
8 सीवेज और गंदे पानी का उपचार और Ǔनपटान
9 ठोस अपͧशçट Ĥबंधन एवं निस्तारण
10 जल संर¢ण, वषा[ जल संचयन।
11 ऊजा[ Ĥबंधन
12 अिÊन सुर¢ा और अिÊन सुर¢ा आवæयकताएं
13 विद्युत मीटर क¢, उपके Ûġ, ǐरसीͪवंग èटेशन।
14 अÛय (अͬधक जोड़ने का ͪवकãप)।
43 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

आपका आभार(cid:547),

ह(cid:232)ता(cid:162)र

एल.एस/वा(cid:232)तुकार के ह(cid:232)ता(cid:162)र और नाम (अंग्रेजी के बड़े अ(cid:162)र(cid:585) म(cid:581)) (पंजीकरण सं(cid:201)या/लाइस(cid:581)स सं(cid:201)या …………….)

फार्म संख्या 2

[(cid:874)व(cid:467)नयम 3 देख(cid:581)]

इंजी(cid:467)नयर का (cid:292)माण प(cid:287)

(चल रह(cid:547) प(cid:464)रयोजना के पंजीकरण के समय और प(cid:464)रयोजनावार ना(cid:871)मत खाते से राशि निकासी के (cid:871)लए (cid:292)(cid:232)तुत (cid:873)कया जाना है)

(cid:465)दनांक :-------------------

सेवा में,

——————————— (प्रोमोटर का नाम और पता), ________________________________________ ________________________________________44 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 (cid:874)वषय: सी.एस.सं./खाता सं(cid:201)या/सव(cid:566)(cid:162)ण वाले (cid:220)लॉट पर ि(cid:232)थत _________ चरण ((cid:466)बहार रेरा पंजीकरण सं(cid:201)या) के __________ भवन (ओं)/__________ के (cid:467)नमा(cid:91)ण के (cid:871)लए [प(cid:464)रयोजना का नाम]_______________ के (cid:874)वकास के (cid:871)लए (cid:873)कए गए लागत का (cid:292)माण प(cid:287) नं./थाना नं./ तौज़ी नं../ (cid:220)लॉट नं.______________ इसक(cid:551) सीमाओं (अं(cid:467)तम (cid:466)बंदुओं का अ(cid:162)ांश और देशांतर) (cid:622)वारा सीमां(cid:873)कत ______ गाँव________ (cid:222)लॉक ________ (cid:875)डवीजन__ िजला __________ (cid:874)पन ___________ मापने वाला __________ वग(cid:91)। एमट(cid:547)एस [प्रोमोटर] [(cid:292)वत(cid:91)क]_____________________________________________

(cid:622)वारा (cid:874)वक(cid:871)सत (cid:873)कया जा रहा (cid:162)े(cid:287)

संदभ(cid:91): (cid:466)बहार रेरा पंजीकरण सं(cid:201)या _____________

(cid:302)ीमान,

म(cid:583)ने/हम........................................................................................................................................................

........................................(cid:873)क (cid:220)लाट असर/सीट(cid:547)एस सं(cid:201)या/सव(cid:566)(cid:162)ण सं./(cid:220)लॉट सं(cid:201)या पर ि(cid:232)थत _______________ चरण के ___________भवन(cid:585)/ ___________ (cid:874)वंग (ओं) के रेरा, (cid:466)बहार के तहत पंजीकृ त (cid:874)वषय भू-सम्पदा प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए (cid:292)मा(cid:872)णत लागत का असाइनम(cid:581)ट (cid:873)कया है। . _______ गांव का_________ (cid:222)लॉक -------------

मंडल_______________िजला_______________(cid:874)पन _______________ वग(cid:91) को मापता है। एमट(cid:547)एस [(cid:232)वामी/(cid:292)वत(cid:91)क] (cid:622)वारा (cid:874)वक(cid:871)सत (cid:873)कया जा रहा (cid:162)े(cid:287)

1. मा(cid:871)लक/(cid:292)वत(cid:91)क (cid:622)वारा (cid:467)न(cid:224)न(cid:871)ल(cid:872)खत तकनीक(cid:551) पेशेवर(cid:585) क(cid:551) (cid:467)नयुि(cid:200)त क(cid:551) जाती है:-- (i) सुश्री /(cid:302)ी/(cid:302)ीमती ___________________ एल.एस. / आ(cid:873)क(cid:91) टे(cid:200)ट के (cid:510)प म(cid:581);

(ii) सुश्री /(cid:302)ी/(cid:302)ीमती ___________________________ (cid:232)(cid:282)(cid:200)चरल कं स(cid:227)ट(cid:581)ट के (cid:510)प म(cid:581)

(iii) एमईपी सलाहकार के (cid:510)प म(cid:581) सुश्री /(cid:302)ी/(cid:302)ीमती ___________________

(iv) मा(cid:287)ा सव(cid:566)(cid:162)क के (cid:510)प म(cid:581) सुश्री /(cid:302)ी/(cid:302)ीमती ____________________'

2. हमने प(cid:464)रयोजना के भवन (भवन(cid:585)) के (cid:871)स(cid:874)वल, एमईपी और संब(cid:622)ध काय(cid:607) के (cid:229)यवसाय (cid:292)माण प(cid:287) / पूण(cid:91)ता (cid:292)माण प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त करने के (cid:871)लए पूरा होने क(cid:551) लागत का अनुमान लगाया है। हमार(cid:547) अनुमा(cid:467)नत लागत गणना दर(cid:585) क(cid:551) अनुसूची (दर(cid:585) क(cid:551) अनुसूची का नाम) ---------- और (cid:874)वकासकता(cid:91) और सलाहकार(cid:585) के संदभ(cid:91) म(cid:581) प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए हम(cid:581) उपल(cid:222)ध कराए गए (cid:876)च(cid:287)/योजना और मा(cid:287)ा पर आधा(cid:464)रत ह(cid:583)। डेवलपर/इंजी(cid:467)नयर (cid:622)वारा (cid:467)नयु(cid:200)त _____________ मा(cid:287)ा सव(cid:566)(cid:162)क (cid:622)वारा गणना (cid:873)कए गए संपूण(cid:91) काय(cid:91) के (cid:871)लए, और साम(cid:274)ी, (cid:302)म और डेवलपर (cid:622)वारा (cid:873)कए गए अ(cid:219)य इनपुट क(cid:551) लागत और हमारे (cid:622)वारा (cid:873)कए गए साइट (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण क(cid:551) धारणा।

3. हम अनुमान के तहत पूव(cid:574)(cid:200)त प(cid:464)रयोजना के भवन (भवन(cid:585)) के पूरा होने क(cid:551) कु ल अनुमा(cid:467)नत लागत (cid:509)पये के (cid:510)प म(cid:581) अनुमान लगाते ह(cid:583)। ______________________ (टेबल क और ख का कु ल) प(cid:464)रयोजना क(cid:551) अनुमा(cid:467)नत कु ल लागत (cid:871)स(cid:874)वलए एमईपी और संब(cid:622)ध काय(cid:607) के संदभ(cid:91) म(cid:581) है, िजसे ____________________ से भवन (भवन(cid:585)) के (cid:871)लए (cid:229)यवसाय (cid:292)माण प(cid:287) / पूण(cid:91)ता (cid:292)माण प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त करने के उ(cid:622)दे(cid:230)य से पूरा करने क(cid:551) आव(cid:230)यकता है, िजसके अ(cid:876)धकार (cid:162)े(cid:287) म(cid:581) उपरो(cid:200)त प(cid:464)रयोजना है। (cid:873)(cid:272)याि(cid:219)वत (cid:873)कया जा रहा है।

4. अब तक क(cid:551) गई अनुमा(cid:467)नत लागत क(cid:551) गणना (cid:509). _________ (टेबल क और ख का कु ल) । अनुमा(cid:467)नत लागत क(cid:551) रा(cid:871)श क(cid:551) गणना कु ल अनुमा(cid:467)नत लागत क(cid:551) रा(cid:871)श के आधार पर क(cid:551) जाती है।

5. ________________________ (योजना (cid:292)ा(cid:876)धकरण) से (cid:229)यवसाय (cid:292)माण प(cid:287) / पूण(cid:91)ता (cid:292)माण प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त करने के (cid:871)लए (cid:874)वषय प(cid:464)रयोजना के भवन (भवन(cid:585)) के (cid:871)स(cid:874)वल, एमईपी और संब(cid:622)ध काय(cid:607) को पूरा करने क(cid:551) शेष लागत का अनुमान (cid:509)0 ___________________ (टेबल क और ख का कु ल) ।45 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 ं (cid:873)क उ(cid:200)त प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए (cid:871)स(cid:874)वल, एमईपी और संबद्ध काय(cid:91) क(cid:551) लागत जैसा (cid:873)क इस 6. म(cid:583) (cid:292)मा(cid:872)णत करता हू (cid:292)माण प(cid:287) क(cid:551) (cid:467)त(cid:876)थ को पूरा (cid:873)कया गया हैए जैसा (cid:873)क नीचे टेबल क और ख म(cid:581) (cid:465)दया गया है:

टेबल 'क'

(cid:466)बि(cid:227)डंग / (cid:874)वंग (cid:466)बय(cid:464)रंग नंबर_____ या _____________ कहा जाता है

भू-सम्पदा प(cid:464)रयोजना के (cid:292)(cid:215)येक भवन/(cid:874)वंग के (cid:871)लए अलग से तैयार (cid:873)कया जाना है)

Đम संÉया ͪववरण राͧश
1 पंजीकरण कȧ Ǔतͬथ __________ को भवन/ͪवंग कȧ क ु ल अनुमाǓनत लागत ǽ.______________
2 ____________ के अनुसार खच[ कȧ गई लागत (अनुमाǓनत लागत के आधार पर) ǽ. ______________
3 ĤǓतशत मɅ ͩकया गया काय[(अनुमाǓनत लागत के ĤǓतशत के Ǿप मɅ) ______________%
4 शेष राͧश खच[ कȧ जानी है(अनुमाǓनत लागत के आधार पर) ǽ. ______________
5 अǓतǐरÈत/अǓतǐरÈत मदɉ पर ........................को शाͧमल नहȣं कȧ गई (अनुलÊनक क) अनुमाǓनत लागत ǽ. ______________

टेबल ख

(भु-सम्पदा प(cid:464)रयोजना के पूरे पंजीकृ त चरण के (cid:871)लए तैयार रहना)

Đम संÉया ͪववरण राͧश
1 पंजीकरण कȧ तारȣख __________ को लेआउट मɅ सुͪवधाओं और सुͪवधाओं सǑहत आंतǐरक और बाहरȣ ͪवकास कायɟ कȧ कु ल अनुमाǓनत लागत ǽ. _______________
2 ___________ को खच[ कȧ गई लागत (अनुमाǓनत लागत के आधार पर)। ǽ._______________
3 ĤǓतशत मɅ ͩकया गया काय[ (अनुमाǓनत लागत के ĤǓतशत के Ǿप मɅ)। ______________%
4 शेष राͧश खच[ कȧ जानी है (अनुमाǓनत लागत के आधार पर)। ǽ. ______________
5 अǓतǐरÈत/अǓतǐरÈत मदɉ पर लगने वालȣ लागत _______________ को अनुमाǓनत लागत (अनुलÊनक ए) मɅ शाͧमल नहȣं है। ǽ. _______________
46 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

आपका विश्वासी,

इंजी(cid:467)नयर के ह(cid:232)ता(cid:162)र। (लाइस(cid:581)स सं(cid:201)या …………….) '(cid:465)ट(cid:220)पणी:

1. काय(cid:91) का दायरा समय-समय पर (cid:232)वीकृ त (cid:284)ाइंग के अनुसार संपूण(cid:91) भू-सम्पदा (cid:292)ोजे(cid:200)ट को पूरा करना है ता(cid:873)क ऑ(cid:200)यूप(cid:581)सी स(cid:465)ट(cid:91)(cid:873)फके ट / कं (cid:220)ल(cid:547)शन स(cid:465)ट(cid:91)(cid:873)फके ट (cid:292)ा(cid:220)त (cid:873)कया जा सके । 2. (3) मा(cid:287)ा सव(cid:566)(cid:162)ण इंजी(cid:467)नयर के काया(cid:91)लय (cid:622)वारा (cid:873)कया जा सकता है या एक (cid:232)वतं(cid:287) मा(cid:287)ा सव(cid:566)(cid:162)क (cid:622)वारा (cid:873)कया जा सकता है, िजसक(cid:551) गणना क(cid:551) गई मा(cid:287)ा के (cid:292)माण प(cid:287) पर इंजी(cid:467)नयर (cid:622)वारा भरोसा (cid:873)कया जा सकता है। (cid:874)वकासकता(cid:91) (cid:622)वारा (cid:232)वतं(cid:287) मा(cid:287)ा सव(cid:566)(cid:162)क क(cid:551) (cid:467)नयुि(cid:200)त के मामले म(cid:581), नाम का उ(cid:227)लेख (cid:876)चि(cid:233)नत (cid:232)थान (*) पर (cid:873)कया जाना है और य(cid:465)द मा(cid:287)ा क(cid:551) गणना इंजी(cid:467)नयर के काया(cid:91)लय (cid:622)वारा क(cid:551) जा रह(cid:547) है, तो इंजी(cid:467)नयर के काया(cid:91)लय म(cid:581) उस (cid:229)यि(cid:200)त का नाम, जो िज(cid:224)मेदार है गणना क(cid:551) गई मा(cid:287)ा के (cid:871)लए (cid:876)चि(cid:233)नत (cid:232)थान (*) पर उ(cid:227)लेख (cid:873)कया जाना चा(cid:465)हए। ं(cid:873)क यह एक अनुमा(cid:467)नत लागत है, अचल संप(cid:874)(cid:419) प(cid:464)रयोजना के (cid:874)वकास के (cid:871)लए आव(cid:230)यक मा(cid:287)ा म(cid:581) (cid:873)कसी भी 3. अनुमा(cid:467)नत लागत म(cid:581) संपूण(cid:91) काय(cid:91) करने के (cid:871)लए आव(cid:230)यक सभी (cid:302)म, साम(cid:274)ी, उपकरण और मशीनर(cid:547) शा(cid:871)मल ह(cid:583)। 4. चू (cid:874)वचलन के प(cid:464)रणाम(cid:232)व(cid:510)प खच(cid:91) क(cid:551) गई / होने वाल(cid:547) लागत म(cid:581) संशोधन होगा।

5. (cid:874)व(cid:467)नद(cid:566)श(cid:585) के साथ काम के सभी घटक सांके (cid:467)तक ह(cid:583) और संपूण(cid:91) नह(cid:547)ं ह(cid:583)

अनुल(cid:202)नक

लागत के साथ (cid:467)न(cid:231)पा(cid:465)दत अ(cid:467)त(cid:464)र(cid:200)त/अ(cid:467)त(cid:464)र(cid:200)त मद(cid:585) क(cid:551) सूची (जो कु ल लागत के मूल अनुमान का (cid:465)ह(cid:232)सा नह(cid:547)ं थे)

फार्म संख्या 3

[(cid:874)व(cid:467)नयम 3 देख(cid:581)]

चाट(cid:91)ड(cid:91) एकाउं ट(cid:581)ट का (cid:292)माण प(cid:287) (लेटर हेड पर)

(प(cid:464)रयोजना के पंजीकरण और उसके बाद धन क(cid:551) (cid:467)नकासी के (cid:871)लए)

भू-सम्पदा प(cid:464)रयोजना क(cid:551) लागत__________________________

(cid:466)बहार रेरा पंजीकरण सं(cid:201)या___________

Đमांक ͪववरण राͧश (रू0 ) अनुमाǓनत åयय
1. भूͧम कȧ लागत : क. भूͧम कȧ अͬधĒहण लागत या ͪवकास अͬधकार, लȣज Ĥीͧमयम, लȣज रɅट, Þयाज लागत या भूͧम लागत और कानूनी लागत पर देय। ख. èथानीय Ĥाͬधकरण या राÏय सरकार या ͩकसी सांͪवͬधक Ĥाͬधकरण से डीसीआर के तहत ͪवकास अͬधकार, एफएसआई, अǓतǐरÈत एफएसआई, वैकिãपक ¢ेğ, और कोई अÛय Ĥो×साहन ĤाÜत करने के ͧलए देय Ĥीͧमयम कȧ राͧश। ग. टȣडीआर कȧ अͬधĒहण लागत (यǑद कोई हो) घ. राÏय सरकार या स¢म Ĥाͬधकारȣ या राÏय या कɅ ġ सरकार के ͩकसी अÛय वैधाǓनक Ĥाͬधकरण को èटाàप शुãक, हèतांतरण शुãक, पंजीकरण शुãक आǑद के ͧलए देय राͧश; तथा
ड. साव[जǓनक Ĥाͬधकरणɉ के èवाͧम×व वालȣ भूͧम के पुनͪव[कास के ͧलए वाͪष[क दरɉ के ͪववरण (एएसआर) के अनुसार देय भूͧम Ĥीͧमयम। च. पुनवा[स योजना के तहत: (i) पुनव[सन भवन कȧ अनुमाǓनत Ǔनमा[ण लागत िजसमɅ साइट ͪवकास और आधारभूत संरचना शाͧमल है, जैसा ͩक इंजीǓनयर ɮवारा Ĥमाͨणत ͩकया गया है। (ii) पुनव[सन भवन के Ǔनमा[ण कȧ खच[ कȧ गई वाèतͪवक लागत सीए ɮवारा स×याͪपत लेखा पुèतकɉ के अनुसार । नोट: (Ǔनमा[ण कȧ कु ल लागत के ͧलए, Ûयूनतम (i) या (ii) पर ͪवचार ͩकया जाना है)। (iii) कानूनी/अवैध कÞजेदारɉ को हटाने कȧ लागत, अèथायी पारगमन आवास Ĥदान करने कȧ लागत या Ěांिजट आवास के बदले ͩकरायाए ओवरहेड लागत सǑहत सभी या ͩकसी भी भार कȧ भूͧम कȧ Ǔनकासी कȧ लागत, (iv) एएसआर से जुड़े Ĥीͧमयम कȧ लागत, फीस, शुãक और सुर¢ा जमा या रखरखाव जमा, या पुनवा[स कȧ पǐरयोजना के ͧलए और ͩकसी भी Ĥाͬधकरण को देय कोई भी राͧश। भूͧम लागत का उप-योग
Đमांक ͪववरण राͧश (₹) अनुमाǓनत åयय
1. ͪवकास लागत/Ǔनमा[ण कȧ लागत : क.(i) इंजीǓनयर ɮवारा Ĥमाͨणत Ǔनमा[ण कȧ अनुमाǓनत लागत। (ii) सीए ɮवारा स×याͪपत खातɉ कȧ पुèतकɉ के अनुसार Ǔनमा[ण कȧ वाèतͪवक लागत। नोट: (Ǔनमा[ण कȧ कु ल लागत को जोड़ने के ͧलए, Ûयूनतम (i) या (ii) पर ͪवचार ͩकया जाना है)। (iii) उपरोÈत (i) या (ii) के अनुसार Ǔनमा[ण कȧ लागत को छोड़कर, यानी वेतन, सलाहकार शुãक, साइट ओवरहेɬस, ͪवकास काय[, सेवाओं कȧ लागत (पानी, ǒबजलȣ, सीवरेज, जल Ǔनकासी, लेआउट सड़कɉ आǑद), मशीनरȣ और उपकरणɉ कȧ लागत, इसके ͩकराए और रखरखाव कȧ लागत, उपभोÊय सामͬĒयɉ आǑद सǑहत। (i) पंजीकृ त पǐरयोजना के पूरे चरण के Ǔनमा[ण को पूरा करने के ͧलए सीधे तौर पर खच[ कȧ गई सभी लागतɅ। ख. ͩकसी भी वैधाǓनक Ĥाͬधकरण को कर, उपकर, शुãक सेवा, शुãक, Ĥीͧमयम, Þयाज आǑद का भुगतान। ग. ͪवƣीय संèथानɉ, अनुसूͬचत बɇकɉ, गैर-बɇͩकं ग ͪवƣीय संèथान (एनबीएफसी) या साहूकारɉ को Ǔनमा[ण Ǔनͬध या Ǔनमा[ण के ͧलए उधार
लȣ गई धनराͧश पर देय मूलधन और Þयाज; ͪवकास लागत का उप-योग
2. ǐरयल एèटेट पǐरयोजना कȧ कु ल अनुमाǓनत लागत [1(i) +1(ii)] अनुमाǓनत कॉलम कȧ।
3. अचल संपͪƣ पǐरयोजना कȧ कु ल लागत [1(i) +1(ii)] उपगत कॉलम कȧ
4. Ǔनमा[ण काय[ का % समापन (ĤोजेÈट आͩक[ टेÈट सǑट[ͩफके ट के अनुसार)
6. भूͧम लागत पर खच[ कȧ गई लागत का अनुपात और क ु ल अनुमाǓनत लागत के ͧलए Ǔनमा[ण लागत। (3/2%)
राͧश िजसे नाͧमत खाते से Ǔनकाला जा सकता है कु ल अनुमाǓनत लागत * खच[ कȧ गई लागत का अनुपात (क्रमांक 2 और क्रमांक 5)
7. घटाएं: खातɉ कȧ पुèतकɉ और बɇक èटेटमɅट के अनुसार इस Ĥमाण पğ कȧ Ǔतͬथ तक Ǔनकालȣ गई राͧश।
8. श्षुद्ध राͧश जो इस Ĥमाण पğ के तहत नाͧमत बɇक खाते से Ǔनकालȣ जा सकती है। यह Ĥमाणपğ कं पनी [Ĥमोटर का नाम] के ͧलए रेरा अनुपालन के ͧलए जारȣ ͩकया जा रहा है और यह मेरे सामने पेश ͩकए गए ǐरकॉड[ और दèतावेजɉ और कं पनी के Ĥबंधन ɮवारा मुझे Ĥदान ͩकए गए èपçटȣकरण पर आधाǐरत है।
47 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 48 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

आपका आभार(cid:547),

चाट(cid:91)ड(cid:91) एकाउं ट(cid:581)ट के ह(cid:232)ता(cid:162)र (सद(cid:232)यता सं(cid:201)या………….)

नाम________________________________ (चल रह(cid:547) प(cid:464)रयोजनाओं के (cid:871)लए अ(cid:467)त(cid:464)र(cid:200)त जानकार(cid:547))

Đमांक ͪववरण राͧश (₹) अनुमाǓनत åयय
1. पǐरयोजना को पूरा करने के ͧलए अनुमाǓनत शेष लागत (कु ल अनुमाǓनत पǐरयोजना लागत घटा लागत का अंतर) (फॉम[ IV के अनुसार गणना)
2. ब ेचे गए अपाट[मɅट से ĤाÜय राͧश कȧ शेष राͧश (इस Ĥमाणपğ के अनुबंध क के अनुसार (चाट[ड[ ɮवारा Ĥमाͨणत) ल ेखाकार जैसा ͩक अͧभलेखɉ और लेखा पुèतकɉ से स×याͪपत है)
3. (i) शेष अन ǒबके ¢ेğ (Ĥबंधन ɮवारा Ĥमाͨणत ͩकया जाना है और सीए ɮवारा ǐरकॉड[ और खातɉ कȧ पुèतकɉ से स×याͪपत ͩकया जाना है) (ii) ǒबके के संबंध मɅ ǒबĐȧ कȧ अनुमाǓनत राͧश अपाट[मɅट (एएसआर के अनुसार पǐरकͧलत अनǒबके ¢ेğ से गुणा ͩकया गया Ĥमाण पğ कȧ Ǔतͬथ के अनुसार, गणना और Ĥमाͨणत ͩकया जाना है सीए ɮवारा) इस Ĥमाणपğ के अनुलÊनक क के अनुसार
4. चल रहȣ पǐरयोजना कȧ अनुमाǓनत ĤाÜय राͧश 2(ii) + 3(ii) का योग
5. नाͧमत खाते मɅ जमा कȧ जाने वालȣ राͧश - 70% या 100% यǑद 4, 1 से अͬधक है, तो ĤाÜय शेष राͧश का 70% चल रहȣ पǐरयोजना कȧ राͧश नाͧमत खाते मɅ जमा कȧ जाएगी यǑद 4, 1 से कम है, तो ĤाÜय शेष राͧश का 100% चल रहȣ पǐरयोजना कȧ राͧश नाͧमत खाते मɅ जमा कȧ जाएगी
49 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

यह (cid:292)माणप(cid:287) कं पनी [(cid:292)मोटर का नाम] के (cid:871)लए रेरा अनुपालन के (cid:871)लए जार(cid:547) (cid:873)कया जा रहा है और यह मेरे सामने पेश (cid:873)कए गए (cid:464)रकॉड(cid:91) और द(cid:232)तावेज(cid:585) और कं पनी के (cid:292)बंधन (cid:622)वारा मुझे (cid:292)दान (cid:873)कए गए (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण पर आधा(cid:464)रत है।

आपका आभार(cid:547),

चाट(cid:91)ड(cid:91) एकाउं ट(cid:581)ट के ह(cid:232)ता(cid:162)र,

(सद(cid:232)यता सं(cid:201)या-------------------)

नाम______________________

अनुल(cid:202)नक क

चल रहे (cid:464)रयल ए(cid:232)टेट (cid:292)ोजे(cid:200)ट क(cid:551) (cid:466)ब(cid:272)(cid:551) से (cid:292)ाि(cid:220)तय(cid:585) क(cid:551) गणना के (cid:871)लए (cid:874)ववरण

Đमांक Ýलैट नं. कालȣन ¢ेğ (वग[ मीटर मɅ) अनुबंध के अनुसार इकाई ͪवचार/आबंटन पğ ĤाÜत राͧश शेष राͧश

((cid:466)बना (cid:466)बके माल का मू(cid:227)यांकन)

(cid:292)माण प(cid:287) क(cid:551) (cid:467)त(cid:876)थ के अनुसार रेडी रेकनर दर आवासीय/वा(cid:872)णि(cid:207)यक प(cid:464)रसर क(cid:551) (cid:509). _________ (cid:292)(cid:467)त वग(cid:91) मीटर।50 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

Đमांक Ýलैट नंबर कालȣन ¢ेğ(वग[ मीटर मɅ) र े डी रेकनर के अनुसार इकाई मुल्य

फार्म संख्या 4

[(cid:874)व(cid:467)नयम 6(1) देख(cid:581)]

चाट(cid:91)ड(cid:91) एकाउं ट(cid:581)ट के प(cid:287) शीष(cid:91) पर (जो सां(cid:874)व(cid:876)धक लेखापर(cid:547)(cid:162)क नह(cid:547)ं है

(cid:292)मोटर क(cid:551) कं पनी/फम(cid:91) का)

खात(cid:585) के (cid:874)ववरण पर वा(cid:874)ष(cid:91)क (cid:464)रपोट(cid:91)

को [प्रोमोटर का नाम और पता]

(cid:874)वषय: (cid:466)बहार रेरा के संबंध म(cid:581) _______ से _____ तक क(cid:551) अव(cid:876)ध के (cid:871)लए [प्रोमोटर] (cid:622)वारा प(cid:464)रयोजना (cid:467)न(cid:876)ध के उपयोग और (cid:467)नकासी पर खात(cid:585) के (cid:874)ववरण पर (cid:464)रपोट(cid:91)। सं(cid:201)या___________________________________ 1. यह (cid:292)माण प(cid:287) (cid:466)बहार भू-सम्पदा ((cid:874)व(cid:467)नयमन और (cid:874)वकास) (cid:467)नयम, 2017 के साथ प(cid:465)ठत भू-सम्पदा ((cid:874)व(cid:467)नयमन और (cid:874)वकास) अ(cid:876)ध(cid:467)नयम, 2016 के (cid:292)ावधान(cid:585) के अनुसार जार(cid:547) (cid:873)कया जाता है। 2. म(cid:583)ने/हमने अपनी लेखापर(cid:547)(cid:162)ा के दौरान कं पनी से सभी आव(cid:230)यक जानकार(cid:547) और (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)ा(cid:220)त (cid:873)कए ह(cid:583), जो मेरे/हमार(cid:547) राय म(cid:581) इस (cid:292)माणप(cid:287) के (cid:292)योजन के (cid:871)लए आव(cid:230)यक ह(cid:583)।

3. म(cid:583)/हम एत(cid:622)(cid:622)वारा पुि(cid:231)ट करते ह(cid:583) (cid:873)क म(cid:583)ने/हमने ________ को समा(cid:220)त अव(cid:876)ध के (cid:871)लए (cid:467)नधा(cid:91)(cid:464)रत रिज(cid:232)टर(cid:585), पु(cid:232)तक(cid:585)

ं (cid:873)क:

और द(cid:232)तावेज(cid:585) और [(cid:292)मोटर] के (cid:292)ासं(cid:876)गक (cid:464)रकॉड(cid:91) क(cid:551) जांच क(cid:551) है और एत(cid:622)(cid:622)वारा (cid:292)मा(cid:872)णत करता हू i. मेसस(cid:91) _______________ (प्रोमोटर) ने _____________ (नाम) शीष(cid:91)क वाल(cid:547) प(cid:464)रयोजना (cid:466)बहार रेरा सं.

_____________________ जो ________________ पर ि(cid:232)थत है का ________% पूरा कर (cid:871)लया है ii. इस प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए वष(cid:91) के दौरान एक(cid:287) क(cid:551) गई रा(cid:871)श (cid:509). ___________ और अब तक एक(cid:287) क(cid:551) गई रा(cid:871)श (cid:509). _______________

iii. इस प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए वष(cid:91) के दौरान (cid:467)नकाल(cid:547) गई रा(cid:871)श (cid:509). _________ और अब तक (cid:467)नकाल(cid:547) गई रा(cid:871)श (cid:509). _____________________

ं/करते ह(cid:583) (cid:873)क [(cid:292)वत(cid:91)क का नाम] ने प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए एक(cid:466)(cid:287)त रा(cid:871)श का उपयोग के वल 4. म(cid:583)/हम (cid:292)मा(cid:872)णत करता हू

उस प(cid:464)रयोजना के (cid:871)लए (cid:873)कया है और उ(cid:200)त प(cid:464)रयोजना के ना(cid:871)मत ब(cid:583)क खाते (खात(cid:585)) से आहरण (cid:292)(cid:467)तशत के अनुपात के अनुसार (cid:873)कया गया है प(cid:464)रयोजना म(cid:581) काय(cid:91) का (cid:467)न(cid:231)पादन।

(य(cid:465)द नह(cid:547)ं, तो कृ पया पा(cid:287) रा(cid:871)श या (cid:873)कसी अ(cid:219)य अपवाद से अ(cid:876)धक आह(cid:464)रत रा(cid:871)श (cid:467)न(cid:465)द(cid:91)(cid:231)ट कर(cid:581))।

(ह(cid:232)ता(cid:162)रकता(cid:91) सीए के ह(cid:232)ता(cid:162)र और मुहर/मुहर)

(cid:232)थान: ह(cid:232)ता(cid:162)रकता(cid:91) का नाम:

(cid:465)दनांक:

पूरा पता:

सद(cid:232)यता सं:

संपक(cid:91) नंबर:

ईमेल:

51 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

फार्म संख्या 5

[(cid:874)व(cid:467)नयम 15 देख(cid:581)]

(cid:466)बहार भू-सम्पदा विनियामक (cid:292)ा(cid:876)धकरण,

पटना म(cid:581)।

(cid:292)ा(cid:876)धकरण / वकालतनामा

रेरा/(cid:871)शकायत/(cid:232)व-(cid:292)ेरणा/काया(cid:91)(cid:219)वयन सं.____________________ के मामले म(cid:581)

……………………………………… ……………………………………….या(cid:876)चकाकता(cid:91)/(cid:871)शकायतकता(cid:91) बनाम

……………………………………… ....................................................(cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547)(ओं)/(cid:874)वपर(cid:547)त प(cid:162)(ओं)

(cid:292)ा(cid:876)धकरण का (cid:163)ापन

मै/हम--------------------------------------------------------------------------------------------------उपरो(cid:200)त ना(cid:871)मत या(cid:876)चकाकता(cid:91)/(cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) ---------------------------------------------------------------------------------- अ(cid:876)धव(cid:200)ता/लाइस(cid:581)स सं(cid:201)या -------------------------------------------------------------------------------------, बैठने का (cid:232)थान और मोबाइल नं - --------------------- ईमेल आईडी:---------------------------- उपरो(cid:200)त मामले म(cid:581) मेर(cid:547)/हमार(cid:547) ओर से काय(cid:91) करने, पक्ष रखने और पेश होने के (cid:871)लए एत(cid:622)(cid:622)वारा ना(cid:871)मत, (cid:467)नयु(cid:200)त और ग(cid:465)ठत करते ह(cid:583). इसके सा(cid:234)य म(cid:581), म(cid:583)ने/हमने इस पर इस लेखन के (cid:871)लए मेरे/हमारे हाथ सेट और स(cid:222)स(cid:272)ाइब (cid:873)कए ह(cid:583) ------------------------------------------------------------के (cid:465)दन ------------------------------

(अ(cid:876)धव(cid:200)ता के ह(cid:232)ता(cid:162)र) ((cid:274)ाहक के ह(cid:232)ता(cid:162)र)

स्थान------------

तार(cid:547)ख------------

फार्म नंबर 6

[(cid:874)व(cid:467)नयम 17 (2) देख(cid:581)]

(cid:466)बहार भू-सम्पदा विनियामक (cid:292)ा(cid:876)धकरण के सम(cid:162)

द(cid:232)तावेज(cid:585)/अ(cid:871)भलेख(cid:585) के (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण/(cid:292)(cid:467)तयां (cid:292)ा(cid:220)त करने के (cid:871)लए आवेदन

म(cid:583) उपरो(cid:200)त मामले म(cid:581) (cid:467)न(cid:224)न(cid:871)ल(cid:872)खत द(cid:232)तावेज(cid:585)/अ(cid:871)भलेख(cid:585) के (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण/(cid:292)(cid:467)तयां (cid:292)ा(cid:220)त करने क(cid:551) अनुम(cid:467)त देने के (cid:871)लए ं जिसका (cid:874)ववरण (cid:467)न(cid:224)नानुसार ह(cid:583):

एत(cid:622)(cid:622)वारा आवेदन करता हू 1. द(cid:232)तावेज(cid:585)/अ(cid:871)भलेख(cid:585) के (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण/(cid:292)(cid:467)तयां (cid:292)ा(cid:220)त करने क(cid:551) अनुम(cid:467)त मांगने वाले (cid:229)यि(cid:200)त का नाम और पता__________________________________________________

2. चाहे वह मामले का प(cid:162)कार हो या वह (cid:873)कसी प(cid:162) का अ(cid:876)धकृ त (cid:292)(cid:467)त(cid:467)न(cid:876)ध हो। [आव(cid:230)यक (cid:874)ववरण (cid:292)(cid:232)तुत कर(cid:581)] _______________________________

3. (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण के (cid:871)लए मांगे गए कागजात/द(cid:232)तावेज(cid:585) का (cid:874)ववरण/आव(cid:230)यक (cid:292)(cid:467)तयां____________________ 4. मांगे गए (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण क(cid:551) (cid:467)त(cid:876)थ और अव(cid:876)ध_______________________

5. देय शु(cid:227)क क(cid:551) रा(cid:871)श ((cid:292)ासं(cid:876)गक (cid:874)व(cid:467)नयम(cid:585) के अनुसार) और भुगतान का तर(cid:547)का

ह(cid:232)ता(cid:162)रः

नाम:

पता:

दूरभाष संख्या :

52 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

काया(cid:91)लय के उपयोग के (cid:871)लए

___________ को (cid:467)नर(cid:547)(cid:162)ण (cid:232)वीकृ त / अ(cid:232)वीकृ त __________ पर द(cid:232)तावेज(cid:585) क(cid:551) (cid:232)वीकृ त (cid:292)(cid:467)तयां/अ(cid:232)वीकृ त (cid:292)ा(cid:876)धकरण के स(cid:876)चव / अ(cid:876)धकार(cid:547) / ना(cid:871)मती————————————————————————

_________________________________________________________________________________

अ(cid:218)य(cid:162), रेरा, (cid:466)बहार के आदेश से

स(cid:876)चव, रेरा, (cid:466)बहार, पटना

फार्म -7

[(cid:874)व(cid:467)नयम-9]

I. पǐरयोजना का ͪववरण
प ǐरयोजना पंजीकरण संÉया पǐरयोजना का नाम/पंजीकृ त पǐरयोजना का चरण
Ĥमोटर का नाम पǐरयोजना का पता
सह-Ĥवत[क का नाम
पǐरयोजना पंजीकरण की वैद्यता
पǐरयोजना कȧ आरंभ Ǔतͬथ या पǐरयोजना का चरण
पǐरयोजना का Ĥकार या पǐरयोजना का चरण 1. आवासीय 2. वाͨणिÏयक 3. आवासीय-सह- वाͨणिÏयक 4. Üलॉटेड ĤोजेÈट
स¢म Ĥाͬधकारȣ ɮवारा मानͬचğ कȧ वैधता कȧ अवͬध
I I. बेचे गए/बुक ͩकए गए अपाट[मɅटɉ कȧ सूची का Ĥकटȣकरण
Ǔनमा[ण खंड संÉया अपाट[मɅट Ĥकार कालȣन ¢ेğ èवीकृ त अपाट[मɅट कȧ क ु ल संÉया अपाट[मɅट कȧ क ु ल संÉया - 1. बुक ͩकया गया/ आवंǑटत - 2. बेचा -
1. 1 बीएचके . . 2. 2 बीएचके 3. 3 बीएचके - 4. दुकान - 5. बंगला - 6. Üलॉट आǑद-
I II. गैरेजɉ कȧ बेची गई / बुक कȧ गई सूची का Ĥकटȣकरण
भवन/Þलॉक संÉया èवीकृ त कȧ कु ल संÉया गैरेज गैरेज कȧ कु ल संÉया: 1. बुक/आवंǑटत - 2. बेची गई
I V. भवन अनुमोदन का ͪववरण (यǑद पंजीकरण आवेदन के साथ पहले हȣ दाͨखल कर Ǒदया गया हैए तो आगे दाͨखल करने कȧ कोई आवæयकता नहȣं है)
Đ .सं. अनुमोदन/एन.ओ.सी./अनुमǓत/Ĥमाण पğ का नाम जारȣ करने वाला Ĥाͬधकार आवेदन करने कȧ Ǔतͬथ जारȣ करने कȧ Ǔतͬथ अनुलÊनक संÉया संलÊन है
1. पया[वरण के ͧलए एनओसी
2. फायर एन.ओ.सी.
3. जल आपूǓत[ कȧ अनुमǓत
4ण् एयरपोट[ अथॉǐरटȣ ऑफ इंͫडया से एनओसी
5 पǐरयोजना के ͧलए आवæयक अÛय अनुमोदन, यǑद कोई हो।
. पǐरयोजना कȧ Ǔनमा[ण ĤगǓत
1. Üलान के स नंबर ______________ (Ĥ×येक भवन / ͪवंग के ͧलए अलग से संलग्न किया जायें )
Đमांक (1) काय[ / गǓतͪवͬध (2) ͩकए गए वाèतͪवक काय[ का ĤǓतशत (Ĥमाण पğ कȧ Ǔतͬथ के अनुसार) (3)
1. उ×खनन (यǑद कोई हो
2. ब ेसमɅट (यǑद कोई हो)
3. पोͫडयम (यǑद कोई हो)
4. िÜलंथ
5. िèटãट Ýलोर
6. सुपर èĚÈचर के èलैब
7. Ýलैट/पǐरसर के भीतर आंतǐरक दȣवारɅ, आंतǐरक Üलाèटर, फश[, दरवाजे और ͨखड़ͩकयां।
8. Ýलैट/पǐरसर के भीतर सेनेटरȣ ͩफǑटंÊस, इलेिÈĚकल ͩफǑटंÊस Ýलैट/पǐरसर के भीतर
9. Ĥ×येक तल èतर पर सीǑढ़याँ, ͧलÝट का घेरा और लॉबी, ओवरहेड और भूͧमगत पानी कȧ टंͩकयाँ।
10. बाहरȣ Üलंǒबंग और बाहरȣ Üलाèटर, ऊ ं चाईए भवन/ͪवंग के वॉटरĤूͩफं ग के साथ छतɉ का पूरा होना।
11. ͧलÝटɉ, पानी के पंपɉ, अिÊनशमन ͩफǑटंगɉ कȧ èथापना और सीएफओ एनओसी के अनुसार उपकरण, ͪवɮयुत ͩफǑटंगए यांǒğक उपकरणए पया[वरण कȧ शतɟ का अनुपालन / सीआरजेड एनओसी, ए ंĚɅस लॉबी/एस, िÜलंथ ĤोटेÈशन, ǒबिãडंग/ͪवंग, कं पाउं ड वॉल से जुड़े ¢ेğɉ कȧ फ़ͧशɍग और अÛय सभी आवæयकताओं के अनुसार पǐरयोजना को पूरा करने के ͧलए मेरȣ आवæयकता है ǒबĐȧ के समझौते मɅ ǓनǑद[çटȣकरण। कोई अÛय गǓतͪवͬधयाँ।
Đमांक प्रस्तावित हॉ/नहीं वास्तविक कृत कार्य का प्रतिषत (प्रमाण की तिथि को)
(1) (2)
1. आंतरिक पथ एवं फूट पथ
2. जल आपूर्ति
3. सिर्वेरेज चैम्बर, सेप्टिक टैंक
4. नालियाँ
5. उद्यान, लैन्ड स्कैपिंग एवं वृक्षारोपण
6. स्ट्रीट लाइटिंग
7. मल एवं गंदे पानी का उत्सर्जन/निपटान
8. जल संरक्षण/वर्षा संचयन
9. उर्जा प्रबंधन
I. सुͪवधाएं और सामाÛय ¢ेğ और बाहरȣ बुǓनयादȣ ढांचा ͪवकास काय[) NaN
Đमांक सामाÛय ¢ेğ और सुͪवधाएं Ĥèताͪवत (हां/नहȣं) ͩकए गए वाèतͪवक काय[ का ĤǓतशत (Ĥमाणपğ कȧ Ǔतͬथ क े अनुसार) ͪववरण NaN
(1) (2) (3) (4) (5) NaN
1. आंतǐरक सड़कɅ और फु टपाथ NaN
2. जलापूǓत[ NaN
3. सीवरेज (चैàबर, लाइन, सेिÜटक टɇक, एसटȣपी) NaN
4. त ूफान जल नाͧलयाँ NaN
5. भूǓनमा[ण और वृ¢ारोपण NaN
6. सड़क पर रौशनी/स्ट्रीट लाईट NaN
7. सामुदाǓयक भवन NaN
8. सीवेज और गंदे पानी का उपचार और Ǔनपटान NaN
9. ठोस अपͧशçट Ĥबंधन और Ǔनपटान NaN
10. जल संर¢ण / वषा[ जल संचयन NaN
11. ऊजा[ Ĥबंधन NaN
12. अिÊन सुर¢ा और अिÊन सुर¢ा आवæयकताएँ NaN
13. बंद पाͩकɍ ग NaN
14. ख ुलȣ पाͩकɍ ग NaN
15. ͪवɮयुत मीटर क¢, सब-èटेशन, ǐरसीͪवंग èटेशन NaN
16. अÛय (जोड़ने का ͪवकãप अͬधक) NaN
V II. पǐरयोजना के (Ĥ×येक Þलॉक) का भू-ͬचिéनत और Ǒदनांक फोटो NaN
( क) Đमांक NaN
1. सामने कȧ ऊं चाई NaN
2. ǐरयर ऊं चाई NaN
3. साइड एͧलवेशन NaN
(ख) Ĥ×येक मंिजल कȧ तèवीर NaN
III. पǐरयोजना कȧ ͪवƣीय ĤगǓत
Đमांक (1) ͪववरण (2) राͧश (ǽपये मɅ) (3)
1. पǐरयोजना खाता संÉया
2. पǐरयोजना के Ĥारंभ मɅ भूͧम कȧ लागत सǑहत पǐरयोजना कȧ अनुमाǓनत लागत
3. Ǔतमाहȣ के दौरान ĤाÜत राͧश
4. Ǔतमाहȣ के दौरान कȧ गई वाèतͪवक लागत
5. Ǔतमाहȣ के अंत मɅ शुɮध राͧश
6. पǐरयोजना पर अब तक का कु ल åयय
7. संबंͬधत Ǔतमाहȣ के अंत तक एकǒğत संचयी Ǔनͬध
8. ͪवचाराधीन Ǔतमाहȣ के अंत तक ͩकया गया संचयी åयय
I X. बंधक या शुãक का ͪववरण यǑद कोई बनाया गया है
53 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 54 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 55 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 56 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

X. (cid:874)व(cid:874)वध57 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

। कानूनी मामलɉ कȧ सूची (यǑद कोई हो)
1. वाद संÉया
2. पक्षकाराें का नाम
ख ǒबĐȧ/ǒबĐȧ के ͧलए समझौता Ǔतमाहȣ के दौरान
1. ǒबĐȧ ͪवलेख
2. ǒबĐȧ के ͧलए समझौता
XI. माईलस्टोन चाट[ के साथ कार्य का ĤǓतशत
मौसम पǐरयोजना ĤगǓत पर है समय साǐरणी के अनुसार या ͪपछड़ रहा हैघ्

घोषणा

म(cid:583)/हम स(cid:215)य(cid:467)न(cid:231)ठा से पुि(cid:231)ट करते ह(cid:583), करते ह(cid:583) और वचन देते ह(cid:583) (cid:873)क ऊपर व(cid:872)ण(cid:91)त सभी (cid:874)ववरण मेर(cid:547) जानकार(cid:547) के अनुसार स(cid:215)य ह(cid:583) और यहां कु छ भी मह(cid:215)वपूण(cid:91) अप्रकट नह(cid:547)ं किया गया है। म(cid:583)/हम उपरो(cid:200)त सभी क(cid:551) स(cid:215)यता को (cid:292)मा(cid:872)णत करने के (cid:871)लए और (cid:292)ा(cid:876)धकरण को ऐसे त(cid:216)य(cid:585) से अवगत कराने के (cid:871)लए और साथ ह(cid:547) इस उप(cid:272)म के अ(cid:219)य कानूनी उ(cid:622)दे(cid:230)य(cid:585) के (cid:871)लए भी हम (cid:467)न(cid:231)पा(cid:465)दत कर रहे ह(cid:583), जैसा (cid:873)क उ(cid:227)लेख (cid:873)कया गया है ।

प्रोमोटर के ह(cid:232)ता(cid:162)र

नाम:

(cid:465)दनांक:

(फार्म 8)

[विनियम-24]

क्रियान्वयन फार्म

[सी.पी.सी. आदेश 21, रेरा अ(cid:876)ध(cid:467)नयम, 2016 की धारा 40 एवं बिहार रेरा (cid:467)नयम 2017 25/26 देख(cid:581) ]

(cid:292)ा(cid:876)धकरण/ न्यायनिर्णयन पदाधिकारी के सम(cid:162) क्रियान्वयन मामला क्रियान्वयन के (cid:871)लए आवेदन ।

धारा 40 साथ प(cid:465)ठत (cid:467)नयम 25/26 के तहत क्रियान्वयन वाद

विनियामक (cid:292)ा(cid:876)धकरण (काया(cid:91)लय(cid:585)) के काया(cid:91)लय के उपयोग के (cid:871)लए: दा(cid:872)खल करने क(cid:551)

(cid:467)त(cid:876)थ:_______________________________

ऑनलाइन फाइ(cid:871)लंग के मा(cid:218)यम से रिज(cid:232)(cid:282)(cid:547) (cid:622)वारा (cid:292)ाि(cid:220)त क(cid:551) (cid:467)त(cid:876)थ: ___________

क्रियान्वयन मामला सं(cid:201)या:_____________________मूल (cid:871)शकायत सं(cid:201)या: _______________ ह(cid:232)ता(cid:162)र:_____________________________________

रिज(cid:232)(cid:282)ार:________________________________________

विनियामक (cid:292)ा(cid:876)धकरण के काया(cid:91)लय म(cid:581) ((cid:232)थान का नाम).................................. ........... (cid:871)शकायतकता(cid:91) (ओं) बनाम ________________________________________________________________________ (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547)58 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 1. (cid:871)शकायतकता(cid:91) (ओं) का (cid:874)ववरण (i) (cid:871)शकायतकता(cid:91) का नाम

(ii) (cid:871)शकायतकता(cid:91) के मौजूदा काया(cid:91)लय/(cid:467)नवास का पता______________________________ (iii) सभी नो(cid:465)टस(cid:585) क(cid:551) तामील के (cid:871)लए पता:

(iv) संपक(cid:91) (cid:874)ववरण (फोन नंबर, ई-मेल, फै (cid:200)स नंबर आ(cid:465)द):_________________________

2. (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) का (cid:874)ववरण

(i) (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) का नाम

(ii) (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) के काया(cid:91)लय का पता

(iii) सभी नो(cid:465)टस(cid:585) क(cid:551) तामील के (cid:871)लए पता:

(iv) संपक(cid:91) (cid:874)ववरण (फोन नंबर, ई-मेल, फै (cid:200)स नंबर आ(cid:465)द):____________________________

3. काय(cid:91)कार(cid:547) िजला मिज(cid:232)(cid:282)ेट (डीएम)/(cid:292)धान (cid:871)स(cid:874)वल कोट(cid:91) का अ(cid:876)धकार (cid:162)े(cid:287) ___________ (य(cid:465)द आव(cid:230)यक हो)। (cid:871)शकायतकता(cid:91) घो(cid:874)षत करता है (cid:873)क दावे क(cid:551) (cid:874)वषय व(cid:232)तु _______________ के अ(cid:876)धकार (cid:162)े(cid:287) म(cid:581) आती है 4. मूल आदेश/आदेश(cid:585) के त(cid:216)य और तार(cid:547)ख [आदेश का सं(cid:879)(cid:162)(cid:220)त प(cid:464)रचालन भाग द(cid:581)]____________________________________________ _____________________________________________________________________________________________ ___________________________

5. मांगी गई राहत:

उपरो(cid:200)त पैरा(cid:274)ाफ 4 म(cid:581) उि(cid:227)ल(cid:872)खत त(cid:216)य(cid:585) को (cid:218)यान म(cid:581) रखते हुए, (cid:871)शकायतकता(cid:91) धारा/एस के तहत (cid:467)न(cid:224)न(cid:871)ल(cid:872)खत राहत/राहत(cid:585) के (cid:871)लए (cid:292)ाथ(cid:91)ना करता है। _____________________________________________________________________________________________ _______________________________________________________________________________ ______________________________________________________________________________________ 6. (cid:467)न(cid:231)पादन का मामला (cid:873)कसी अ(cid:219)य (cid:219)यायालय आ(cid:465)द म(cid:581) लं(cid:466)बत है।

(cid:871)शकायतकता(cid:91) आगे घोषणा करता है (cid:873)क िजस मामले के संबंध म(cid:581) यह क्रियान्वयन या(cid:876)चका क(cid:551) गई है वह (cid:873)कसी भी (cid:219)यायालय या (cid:873)कसी अ(cid:219)य (cid:292)ा(cid:876)धकरण या (cid:873)कसी अ(cid:219)य (cid:219)याया(cid:876)धकरण के सम(cid:162) लं(cid:466)बत नह(cid:547)ं है।

7. (cid:466)बहार (cid:464)रयल ए(cid:232)टेट ((cid:874)व(cid:467)नयमन और (cid:874)वकास) (cid:467)नयम, 2017 के (cid:467)नयम 25/26 के अनुसार शु(cid:227)क के संबंध म(cid:581) [(cid:875)डमांड (cid:284)ा(cid:221)ट/ब(cid:583)कस(cid:91) चेक या ऑनलाइन भुगतान] (cid:219)यायालय शु(cid:227)क का (cid:874)ववरण। (i) रा(cid:871)श - (cid:509)।

(ii) देय ब(cid:583)क का नाम - खाता सं(cid:201)या 296800101053609, IFSC - PUNB 0296800

(iii) ऑनलाइन भुगतान (cid:874)ववरण (आईएफएससी कोड और खाता सं(cid:201)या) -

8. संल(cid:202)नक(cid:585) क(cid:551) सूची: (i) अं(cid:467)तम आदेश क(cid:551) (cid:292)(cid:467)तयां िजस पर (cid:871)शकायतकता(cid:91) (cid:622)वारा भरोसा (cid:873)कया गया था और (cid:467)न(cid:231)पादन मामले म(cid:581) संद(cid:871)भ(cid:91)त (cid:873)कया गया था।

(ii) द(cid:232)तावेज(cid:585) का एक सूचकांक। (iii) (cid:467)न(cid:231)पादन मामले के साथ संल(cid:202)न अ(cid:219)य द(cid:232)तावेज।

(cid:871)शकायतकता(cid:91) (ओं) के ह(cid:232)ता(cid:162)र।

स(cid:215)यापन

I________________________________________ (पूरे बड़े अ(cid:162)र(cid:585) म(cid:581) नाम), _________________________________________________ का बेटा / बेट(cid:547) गांव / मोह(cid:227)ला (cid:467)नवासी -

____________________, पी.एस. - ___________, िजला - ________________, रा(cid:207)य - __________, रेरा/59 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 शि0वा0/............/....... म(cid:581) (cid:871)शकायतकता(cid:91), एत(cid:622)(cid:622)वारा स(cid:215)या(cid:874)पत और स(cid:215)य(cid:467)न(cid:231)ठा से करते ह(cid:583) पुि(cid:231)ट करता है (cid:873)क उपरो(cid:200)त अनु(cid:205)छेद(cid:585) क(cid:551) साम(cid:274)ी मेरे सव(cid:574)(cid:419)म (cid:163)ान और (cid:874)व(cid:230)वास के अनुसार सह(cid:547) है और म(cid:583)ने (cid:873)कसी भी भौ(cid:467)तक त(cid:216)य (त(cid:216)य(cid:585)) को दबाया नह(cid:547)ं है।

(cid:232)थान:

(cid:465)दनांक:

(cid:871)शकायतकता(cid:91) (ओं) के ह(cid:232)ता(cid:162)र। (cid:467)नद(cid:566)श:

(1) (cid:292)(cid:215)येक (cid:467)न(cid:231)पादन मामला अं(cid:274)ेजी/(cid:465)हंद(cid:547) म(cid:581) दायर (cid:873)कया जाएगा और य(cid:465)द यह (cid:873)कसी अ(cid:219)य भारतीय भाषा म(cid:581) हैए तो इसके साथ अं(cid:274)ेजी/(cid:465)हंद(cid:547) म(cid:581) अनुवा(cid:465)दत एक (cid:292)(cid:467)त होगी और यह (cid:467)न(cid:231)प(cid:162) और (cid:232)प(cid:231)ट (cid:510)प से टाइप-(cid:871)ल(cid:872)खतए (cid:871)लथो(cid:274)ाफ या मु(cid:465)(cid:289)त होगी। मानक या(cid:876)चका प(cid:287) के एक तरफ डबल (cid:232)पे(cid:871)संगए शीष(cid:91) पर लगभग चार स(cid:581)ट(cid:547)मीटर चौड़ाई के आंत(cid:464)रक मािज(cid:91)न के साथ और 2.5 सेमी पर दाएं मािज(cid:91)न के साथ, और 5 सेमी के बाएं मािज(cid:91)न के साथ, पेपर बुक फॉम(cid:91) म(cid:581) (cid:874)व(cid:876)धवत, अनु(cid:272)(cid:871)मत और (cid:871)सले हुए। (2) (cid:292)(cid:215)येक (cid:467)न(cid:231)पादन मामले को एक खाल(cid:547) फ़ाइल आकार के (cid:871)लफाफे के साथ (cid:292)(cid:232)तुत (cid:873)कया जाएगा िजसम(cid:581) (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) का पूरा पता होगा और जहां उ(cid:419)रदाताओं क(cid:551) सं(cid:201)या एक से अ(cid:876)धक है, तो (cid:292)(cid:215)येक (cid:292)(cid:467)तवाद(cid:547) के पूरे पते वाले अ(cid:467)त(cid:464)र(cid:200)त खाल(cid:547) फ़ाइल आकार के (cid:871)लफाफे पया(cid:91)(cid:220)त सं(cid:201)या म(cid:581) ह(cid:585)गे (cid:871)शकायत को (cid:292)ाथ(cid:871)मकता देने वाले प(cid:162) (cid:622)वारा (cid:292)(cid:232)तुत (cid:873)कया गया।

The 22nd August 2022 BIHAR REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY (GENERAL) REGULATIONS (Amendment), 2022 NOTIFICATION

No. 01-Bihar/RERA 2022/General Regulation Amendment 2022-- Inexercise of the powers conferred under Sub-Section 2 of section 85, read with Sections 34 and Section 38, of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016, the Bihar Real Estate Regulatory Authority, Bihar, hereby amends 'Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Regulation, 2021' published in State e-gazette vide no 780 dated 09th August 2021 as follows :-

1. Shorttitle, extent,commencementandapplication: (i) These Regulations may be called the Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Regulations (Amendment), 2022.

(ii) This amendment in Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Regulations 2021 shall come into force on the date of its Gazette Notification in the Official Gazette.

2. Amendment in Regulation No. 2 "Definition": (i) In Regulation No 2(1)(ii) of the Bihar Real Estate (General) Regulations 2021 (herein after referred to as Principal Regulation), the words "Application means the full, correct and complete application made under section 4 or section 9 of the Act" shall be substituted by "Application means the full, correct and complete application made under section 4 or section 6 or section 9 of the Act"

(i) In Regulation No. 2(1)(iii) of Principal Regulation the words "complaints received by the Authority or the Adjudicating Officer under section 31 read with section 71 of the Act;, shall be substituted by "complaints received by the Authority under section 31 of the Act or the Adjudicating Officer under section 31 read with section 71 of the Act;"60 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 3. Amendment in Forms as mentioned in Regulation No.3:

Form 1, 2 and 3 as mentioned in Regulation No.3 of Principal Regulation shall be partially amended as attached with this Regulation.

4. Amendment in Regulation 5 "Submission of Application: (1) Regulation No.5 (1) of the Principal Regulation shall be deleted and substituted with following: -

"5(1) (a)Every application under Section 4 or Section 6 or Section 9 of the Act shall be submitted to the Authority online with all the details, relevant documents and stipulated fees."

(2) After paragraph No.1 (a) of the principal Regulation 5(1), a new paragraph No. 1 (b) shall be inserted, which is as follows:

5 (1) (b)"The promoter shall submit an application for registration along with an affidavit stating there in that the share distribution of flats, shops, apartments, towers including parking/garage, others, if any, and plots are exclusively within his/her share available for marketing and same will be mentioned in the registration certificate to be issued by the Authority".

(3) Regulation No. 5(2) of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted with the following provisions:

5(2)"The promoter or agent as the case may be, who fails to submit all relevant documents or does not comply with other requirement of registration as per the provisions of the Act, Rules and Regulations even after an opportunity is given to the applicant to rectify the deficiency in a period as specified by the Authority depending on the merit of the case, shall be treated as incomplete and would be liable to be rejected."

(4) The Regulation No. 5 (3) of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted with the following provisions;

5 (3)"If the defect in application persists and the application is not as per provision of the Act, Rules and Regulations, it shall be liable to be rejected in accordance with the provision of Section 5(1) (b) of the Act, after an opportunity is given to the applicant of being heard in the matter, after being served an advance notice of a period of 7 days from the date of the Email request for compliance."

(5) Regulation No. 5 (4) shall be substituted as follows: - 5(4)"In case an application is rejected as per (3) above, the Promoter or Agent, as the case may be, may make a fresh application to the Authority along with the fee as if it is a new/fresh application for registration".

(6) After Regulation No. 5(4) of the Principal Regulation, a new provision as Regulation No. 5(5) and 5(6) shall be inserted as follows:

5(5) "Stage-wise time schedule of the completion of the project in the form of milestone chart describing the important items of work, Building/Tower/Block-wise of the project shall be uploaded by the promoter on the webpage of promoter on website of RERA, Bihar, just after registration of the project."

5(6)"The promoter shall submit details of revised milestones of the development work of the project to be completed within the revised completion date along with application for extension of registration of the project in Form 'E' as prescribed in Bihar Real Estate (Regulation & Development) Rules61 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 2017and upload the same on the webpage of Promoter on the website of RERA, Bihar."

5. Amendment in Regulation No.6 Regulation No.6 of Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted as follows: -

"6. Landowner to be Treated as Promoter or Allottee (1) The Authority or the Adjudicating Officer, as the case may be, while disposing of applications under Section 31(1) of the Act, would decide whether the landowner, who has entered into a Development Agreement with the promoter, would be considered as an allottee or as a promoter, depending upon the facts and circumstances of the complaint that may be placed before it.

Explanation-1: Since the landowner 'causes a project to be constructed' as defined in Section 2 (zk) of the Act, he along with the promoter would be jointly responsible for fulfilling the obligations to the allottees as mentioned in the Agreement to Sale, if;

(a) The Development Agreement specifically mentions that the landowner has to actively participate in the construction or development of the project as that of the promoter; or

(b) The Development Agreement, which states the distribution of share of profits and revenues in addition to the share of flats or developed plot; or (c) The landowner markets, advertises or sells his/her share of apartments before the project is completed.

Explanation-2: In matters filed for compensation for defective title of the land, on which the project is being developed as mentioned in Section 18(2) of the Act, the landowner would be jointly responsible for the payment of compensation, as may be decided, by the Adjudicating Officer.

Explanation-3: The Chartered Accountant certifying the progress of the registered real estate project for the purpose of withdrawal of amounts from the separate account should be a "different entity" than the Chartered Accountant, who is the Statutory Auditor of the promoter's enterprise.

Explanation-4: If the Form No.4 issued by the Chartered Accountant, in Practice, who is not the Statutory Auditor of the promoter's enterprise, reveals that any certificate issued by the project Architect, Engineer or the Chartered Accountant for withdrawal of funds from the designated bank account has false or incorrect information and the amounts collected for a particular project have not been utilized for the project and the withdrawal has not been in compliance with the proportion to the percentage of completion of the project, the Authority, in addition to taking penal actions as contemplated in the Act and the Rules, may in its discretion also take up the matter with the concerned regulatory body of the Architect, Engineer or Chartered Accountant, for necessary penal action against the said professionals, which may include cancellation of registration of membership for practice.

62 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

6. Amendment in Regulation No. 7

(1) Regulation No.7 (1) (ii) of the Principal Regulation shall be substituted as under:

(ii) Fee for changes required to be made in the application for registration, before or after registration.

(2)Regulation No.7 (1) (iii) of the Principal Regulation shall be deleted. 7. Amendment in Regulation No. 8 Regulation No. 8 of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted as follows: -

8. Display Boards: (1) The promoter shall erect a weather proof Display Board of the minimum size of 5'x4' at the project site with the information regarding the name and registration number of the project, date of registration, phases of the project, number of towers, number of stories (tower-wise) etc. in bold letter and legible language, so that the information may be visible throughout the season/ year i.e., till completion of the project.

(2) In the case of plotted development, Promoter shall erect Display Board as mentioned in Sub Regulation (1) above regarding the approved Site Plan indicating the entire area of the projects i.e., roads, water supply, external services, the revenue details of the land of the project i.e., Plot Number, Khata Number, Thana Number and Lay-out Plan superimposed on the Revenue Map, in bold and legible letters such that the information remains displayed till completion of the project.

(3) Name and contact details of the authorised representative of the promoter including the website of promoter, shall also be displayed on the Board as mentioned in Sub Regulation (1) above.

After the Regulation No.8 of the Principal Regulation, Regulation No. 8A shall be inserted which is as follows: -

8A. Information/Documents to be Uploaded by Promoter on the Website

(1) In Addition to annual report required under rule 16(1)(c)(ii) of Bihar Real Estate (Regulation and Development) Rules,2017of a particular financial year till 30th September of the succeeding financial year, the promoter shall upload on the website of the RERA, Bihar in his webpage the statement of accounts of the project(s) in Amended Form 4 (issued in accordance with third proviso to section 4(2)(l)(D) of the Act,) duly certified and signed by the Chartered accountant in practice who is not auditor of the promoter enterprise. (2) All promoter/developers of a Real Estate Project shall upload on the website of RERA, Bihar in his webpage about any change (addition/deletion) in the board of Directors of the company/ Partners of the firm within a month of occurrence."

(3) The promoter shall upload on its web page in the Authority's website Quarterly Progress Report in Amended Form-7 appended with this Regulation within 15 days of expiry of preceding quarter.

(4) The promoter shall also upload on its web page in the Authority's website the following:

(i) Certificate given by a Civil Engineer, Architect and Chartered Accountant in practice, that the amount withdrawn from the bank up to the63 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 end of the quarter in question is commensurate with the physical progress of the project.

(ii) Certificate given by the Architect and Civil Engineer that the progress of the project is as per the milestone chart submitted by the promoter.

(iii)Milestone Chart/Bar Chart/Gantt Chart depicting progress of Block/Tower/Building-wise various level of construction clearly indicating whether the project in progress is as per time schedule or lagging behind.

(5) In case the promoter fails to upload Quarterly Statements as prescribed in Sub-Regulation (1) within stipulated time, he shall be liable to pay penalty per day of late submission as prescribed below in the light of provision of Section 61 of the Act.

Type of Project Rate of the Penalty for late submission
Residential Projects (A) For less than 1000 sq. meter Rs.500/- (Rupees five hundred) per day
(B) For 1000 sq. meter and more Rs.1,000/- (Rupees one thousand) per day
Mixed Projects (A) For less than 1000 sq. meter Rs.1,500/- (Rupees one thousand five hundred) per day.
(B) For 1000 sq. meter and more Rs.1,500/- (Rupees one thousand five hundred) per day.
Commercial Project (A) For less than 1000 sq. meter Rs.2,000/- (Rupees two thousand) per day
(B) For 1000 sq. meter and more Rs.2,500/- (Rupees two thousand) per day.
Plotted Project Any Size (Area) RS.500/- (Rupees five hundred) per day

8. Amendment in Regulation No. 12

(i) Heading of Regulation No. 12 of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted as follows: -64 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 "Functions of Secretary''

(ii) Sub Regulation 12(1) and 12(2) of Principal Regulation shall be deleted.

(iii) Regulation No. 12(3) to (7) of Principal Regulation shall be renumbered as "Sub Regulation No. 12(1) to (5).''

9. Amendment in Regulation No. 14 Regulation No. 14 of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted as follows: -

14. "For Adjudication Proceedings with respect to complaint filed with the Authority Under Section31 of the Act read with Rule 36 of the Bihar Real (Regulation and Development) Rules 2017, and Suo Motu Cases Under Section 3 of the Act, the Chairperson may, by general order or specific order, direct that specific matter or issues shall be heard and decided by a Single Bench of Chairperson or Member or Double Bench of either the Chairperson or any Member or Members of the Authority."

10. Amendment in Regulation No. 15 In second line of first Proviso of Principal Regulation No. 15 the word "Form 6'' shall be deleted and it shall be substituted with the word "Form 5''.

11. Amendment in Regulation No. 17 (i) Sub regulation No. (2) of Regulation 17 of the Principal Regulation shall be deleted and substituted as follows:

"(2) The Chairperson shall on such terms and conditions as he considers appropriate provide for supply of certified copies of orders, documents and papers available with the Authority to any person, applying in Amended Form 6, subject to the payment of requisite fee as may be decided by the Chairperson from time to time and compliance with such terms as the Chairperson may direct. The Chairperson shall designate an Officer for ensuring timely response to request received for supplying certified copies of document within a period of 14 working days from the date of receipt of request."

(ii) Sub Regulation (3) of Regulation 17 of Principal Regulation shall be deleted and substituted as follows: -

(6) The Chairperson may, by order, direct that any information, documents and papers/materials maintained by the Authority shall be confidential or privileged and shall not be available for inspection or supply of certified copies, and the Chairperson may also direct that such documents, papers or materials shall not be used in any manner, except as specifically authorised by the Chairperson.

12. Amendment in Regulation No. 20

Regulation No. 20 of the Principal Regulation along with its heading shall be deleted and it shall be substituted as follows: -

"20-Rectification of Order'' Any person may file rectification petition in reference to order passed under Section 31 of the Act as provided in Section 39 of the Act along with a fee of Rupees 100/ (Rupees one hundred only)."65 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 13. Addition of Regulation 22A

After the Regulation No. 22 of the Principal Regulation, Regulation No. 22A shall be inserted, which shall be as follows: - "22-A Documents to be submitted on Completion of Project" On Completion of project, the Promoter shall submit following documents: - (i) Authenticated copy of Completion Certificate submitted before competent Authority for issuance of the Occupancy Certificate including the notice submitted thereunder, in case Occupancy Certificate is not issued.

(ii) The Certificate of Chartered Accountant clearly indicating the total fund spent on the project.

(iii) Current photograph of the project showing front, side and back elevation.

(iv) Number of Sale Deed(s) executed from the share of the Promoter. (v) An Affidavit stating that the Promoter has provided all the services as per the Agreement for Sale, prospectus and brochure and also mentions the number of complaint cases pending against the promoter in this Affidavit. The Authority after being satisfied on the basis of such documents that the project is complete, may issue a letter to the promoter discharging him from all the responsibilities as per Section 4(2)(l)(D) with intimation to the concerned bank where the designated account of the project is being maintained on the written request of promoter.

14. Amendment in Regulation No. 24

The Regulation No. 24 of the Principal Regulation along with heading shall be deleted and it shall be substituted as follows: -

24- "Execution of Orders" Any Order(s) passed by the Authority or Adjudicating Officer shall be complied within stipulated time and in case the respondent/Promoter fails to comply with the order, within such time, the complainant may file execution petition accompanied by fee Rs.250/- (Rupees two hundred and fifty only) or as may be prescribed by the Chairperson, before the Authority or Adjudicating Officer, as the case may be, in Amended Form 8 appended with the Regulation. 15. Amendment in Regulation No. 31 The Regulation 31 of the Principal Regulation shall be deleted and it shall be substituted as follows: - "31. Common facilities: The Authority shall provide for a common room with separate crèche facility as far as practicable, which may be used by female litigants/advocates and woman employees of the Authority.

By Order of Authority, Naveen Verma, Chairman, Real Estate Regulatory Authority (RERA).

66 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

FORM No. 1

[See Regulation 3]

ARCHITECT'S CERTIFICATE (To be submitted at the time of Registration of Ongoing Project and for withdrawal of Money from Designated Account)

Date------------------

To, The —————————— (Name & Address of Promoter), ________________________________________________ ________________________________________________

Subject: Certificate of Percentage of Work executed in the project having------------------ No. of Building(s)/------------------- Wing(s) of the Phase ----- -----bearing the registration no. [Bihar RERA Registration Number]------ -----and being developed on the Plot bearing CS No…../khata no……/Survey No……/ Plot No. -------------------demarcated by its boundaries (latitude and longitude of the end points) of the land----------- -----situated in ------------ village ----------------Block---------------- division --- District ------------------------ PIN ----------------------------- admeasuring --------------------- sq.mts., area being developed by the Promoter[Name]----------------------------------

Sir, I/ We ----------------------------------------- have undertaken assignment as Architect /Licensed Surveyor of certifying Percentage of execution of Work of the ---------------------------------------- ------ Building(s)/---------------------------Wing(s) of the ------------------------ Phase of the Project, situated on the plot bearing C.S. no……/Survey No……/ Plot No. ------------------------------------ of Village --------------------------Block ----------------division ------------ District -------------------- ------------ PIN ------------------------- admeasuring -------------------------- sq.mts.area being developed by [Promoter's Name]------------------------------------------------------------------------- 1. Following technical professionals are appointed by Owner / Promoter: ––

(i) M/s/Shri/Smt. ——————————————as L.S. / Architect; (ii) M/s /Shri / Smt. —————————————— as Structural Consultant (iii) M/s /Shri / Smt. —————————————— as Mechanical/Electrical/Plumbing Consultant (MEP) (iv) M/s /Shri / Smt. —————————————— as Site Supervisor

Based on Site Inspection, with respect to each of the Building/Wing of the aforesaid Real Estate Project, I certify that as on the date of this certificate, the Percentage of Work done for each of the building/Wing of the Real Estate Project as registered vide number _____________under Bihar RERA is as per table A herein below. The percentage of the work executed with respect to each of the activity of the entire phase is detailed in Table B.

TABLE-A

Building /Wing Number_____ (to be prepared separately for each Building /Wing of the

Sr. No. Tasks/Activity Percentage of work done
1 Excavation
2 Number of Basement(s) and Plinth
3 Number of Podiums
4 Stilt Floor
5 Number of Slabs of Super Structure
6 Internal Walls, Internal Plaster, Floorings within Flats/Premises, Doors and Windows to each of the Flat/Premises.
7 Sanitary Fittings within the Flat/Premises, Electrical Fittings within the Flat/Premises.
8 Staircases, Lifts Wells and Lobbies at each Floor level connecting Staircases and Lifts, Overhead and Underground Water Tanks.
9 The external plumbing and external plaster, elevation, completion of terraces with waterproofing of the Building/Wing.
10 Installation of lifts, water pumps, Fire Fighting Fittings and Equipment as per NOC from the concerned department, Electrical fittings to common Areas, electro, mechanical equipment, Compliance to conditions of environment/CRZ NOC, finishing to entrance lobby/s, plinth protection, paving of areas appurtenant to Building/Wing, Compound Wall and all other requirements as may be required to obtain Occupation/ Completion Certificate.
67 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

TABLE-B Internal and External Development Works in respect of the entire Registered Phase.

Sr. No. Common areas and Facilities, Amenities Proposed (Yes/No) Percentage of work done Details
1 Internal Roads & Foot- paths.
2 Water Supply
3 Sewerage (chamber, lines, Septic Tank, STP)
4 Storm Water Drains
5 Landscaping & Tree Planting.
6 Street Lighting
7 Community Buildings
8 Treatment and disposal of sewage and sullage water
9 Solid Waste management & Disposal.
10 Water conservation, Rain water harvesting.
11 Energy management
12 Fire protection and fire safety requirements
13 Electrical meter room, sub-station, receiving station.
14 Others (Option to Add more).
68 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

Signature & Name (IN BLOCK LETTERS) of L.S/ Architect (Registration No./License No. ………….) FORM No. 2 [Regulation 3] ENGINEER'S CERTIFICATE (To be submitted at the time of Registration of Ongoing Project and for withdrawal of Money from Designated Account- Project wise)

Date: ------------------- To,

The —————————— (Name & Address of Promoter), ________________________________________________ ________________________________________________

Subject : Certificate of Cost Incurred for Development of[Project Name]_______________________________ for Construction of __________ building(s)/_______Wing(s) of the _________Phase ( Bihar RERA Registration Number) situated on the Plot bearing C.S.No…../Khata No……/Survey no……../Thana No……/ Tauzi No….../ Plot No.______________ demarcated by its boundaries ( latitude and longitude of the end points) ______ Village________ Block________Division__ District __________ PIN ___________admeasuring __________sq. mts. area being developed by [Promoter]_________________________________________

Ref: Bihar RERA Registration Number _____________________

Sir,

I/ We__________________________________________ have undertaken assignment of certifying Cost for the Subject Real Estate Project registered under RERA, Bihar of______________Building(s)/ ___________________ Wing(s) of the _______________ Phase situated on the plot bearing /CTS No./Survey No./ Plot No. ______________ of ------------Division Village____________ Block _______________District_______________PIN_____________admeasuring __________sq.mts. area being developed by [Owner/Promoter]

1. Following technical professionals are appointed by Owner / Promoter: ––

i. M/s /Shri/Smt ___________________________as L.S. / Architect; ii. M/s /Shri/Smt ___________________________ as Structural Consultant iii. M/s /Shri/Smt ________________________ ___as MEP Consultant iv. M/s /Shri/Smt ____________________________as Quantity Surveyor *

2. We have estimated the cost of the completion to obtain Occupation Certificate/ Completion Certificate, of the Civil, MEP and Allied works, of the building(s) of the project. Our estimated cost calculations are based on the Schedule of rates (name of the schedule of Rates) ----------and69 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 Drawings/plans made available to us for the project under reference by the Developer and Consultants and the quantity for the entire work as calculated by ____________________ Quantity Surveyor* appointed by Developer/Engineer, and the assumption of the cost of material, labour and other inputs made by developer, and the site inspection carried out by us.

3. We estimate Total Estimated Cost of completion of the building(s) of the aforesaid project under reference as Rs. ______________________ (Total of Table A and B). The estimated Total Cost of project is with reference to the Civil, MEP and allied works required to be completed for the purpose of obtaining occupation certificate / completion certificate for the building(s) from the ____________________ being the Planning Authority under whose jurisdiction the aforesaid project is being implemented.

4. The Estimated Cost Incurred till date is calculated at Rs. ---------------------(Total of Table A and B). The amount of Estimated Cost incurred is calculated on the base of amount of Total Estimated Cost.

5. The Balance cost of Completion of the Civil, MEP and Allied works of the building(s) of the subject project to obtain Occupation Certificate / Completion Certificate from________________________ (planning Authority) is estimated at Rs. _____________ (Total of Table A and B).

6. I certify that the Cost of the Civil, MEP and allied work for the aforesaid Project as completed on the date of this certificate is as given in Table A and B below:

TABLE A Building /Wing bearing Number_____ or called ____________________ (To be prepared separately for each Building /Wing of the Real Estate Project)

Sr. No. Particulars Amounts
1 Total Estimated cost of the building/wing as on __________ date of Registration is Rs.____________
2 Cost incurred as on ____________ (Based on the Estimated cost) Rs.____________
3 Work done in Percentage (As Percentage of the estimated cost) ____________%
4 Balance Cost to be Incurred (Based on Estimated Cost) Rs.____________
5 Cost Incurred on Additional /Extra Items as on _____________not included in the Estimated Cost (Annexure A) Rs.____________

TABLE B (To be prepared for the entire registered phase of the Real Estate Project)

Sr. No. Particulars Amounts
1 Total Estimated cost of the Internal and External Development Works including amenities and Facilities in the layout as on __________________ date of Registration is Rs. _______________
2 Cost incurred as on ___________________ (Based on the Estimated cost). Rs. _______________
3 Work done in Percentage (As Percentage of the estimated cost). ______________ %
4 Balance Cost to be Incurred (Based on Estimated Cost). Rs. ______________
5 Cost Incurred on Additional /Extra Items as on _______________not included in the Estimated Cost (Annexure A). Rs. _______________
70 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

Yours Faithfully, Signature of Engineer.(License No. ………….) * Note:

1. The scope of work is to complete entire Real Estate Project as per drawings approved from time to time so as to obtain Occupancy Certificate/Completion Certificate.

2. (*) Quantity survey can be done by office of Engineer or can be done by an independent Quantity Surveyor, whose certificate of quantity calculated can be relied upon by the Engineer. In case of independent Quantity Surveyor being appointed by Developer, the name has to be mentioned at the place marked (*) and in case quantity are being calculated by office of Engineer, the name of the person in the office of Engineer, who is responsible for the quantity calculated should be mentioned at the place marked (*).

3. The estimated cost includes all labour, material, equipment and machinery required to carry out entire work.

4. As this is an estimated cost, any deviation in quantity required for development of the Real Estate Project will result in amendment of the cost incurred / to be incurred.

5. All components of work with specifications are indicative and not exhaustive.

Annexure A List of Extra/Additional Items executed with Cost

(Which were not part of the original Estimate of Total Cost)

FORM No. 3 [Regulation 3] CHARTERED ACCOUNTANT'S CERTIFICATE (On Letter Head) (FOR REGISTRATION OF A PROJECT AND SUBSEQUENT WITHDRAWAL OF MONEY) Cost of Real Estate Project__________________________ Bihar RERA Registration Number___________________

Sr. No. Particulars Amount (₹) Estimated Incurred
1.i Land Cost: a. Acquisition Cost of Land or Development Rights, Lease Premium, lease rent, interest cost incurred or payable on Land Cost and legal cost. b. Amount of Premium payable to obtain development rights,
FSI, additional FSI, fungible area, and any other incentive under DCR from Local Authority or State Government or any Statutory Authority. c. Acquisition cost of TDR (if any) d. Amounts payable to State Government or competent authority or any other statutory authority of the State or Central Government, towards stamp duty, transfer charges, registration fees etc.; and e. Land Premium payable as per annual statement of rates (ASR) for redevelopment of land owned by public authorities. f. Under Rehabilitation Scheme: (i) Estimated construction cost of rehab building including site development and infrastructure for the same as certified by Engineer. (ii) Actual Cost of construction of rehab building incurred as per the books of accounts as verified by the CA. Note: (for total cost of construction incurred, Minimum of (i) or (ii) is to be considered). (iii) Cost towards clearance of land of all or any encumbrances including cost of removal of legal/illegal occupants, cost for providing temporary transit accommodation or rent in lieu of Transit Accommodation, overhead cost, (iv) Cost of ASR linked premium, fees, charges and security deposits or maintenance deposit, or any amount whatsoever payable to any authorities towards and in project of rehabilitation. Sub-Total of Land Cost _ ________________
S r. No. Particulars Amount (₹) Estimated Incurred
Ii Development Cost/ Cost of Construction: a. (i) Estimated Cost of Construction as certified by Engineer. (ii) Actual Cost of construction incurred as per the books of accounts as verified by the CA. Note: (for adding to total cost of construction incurred, Minimum of (i) or (ii) is to be considered). (iii) On-site expenditure for development of entire project excluding cost of construction as per (i) or (ii) above, i.e., salaries, consultants' fees, site overheads, development works, cost of services (including water, electricity, sewerage, drainage, layout roads etc.), cost of machineries and equipment including its hire and
maintenance costs, consumables etc. All costs directly incurred to complete the (i) construction of the entire phase of the project registered. a) Payment of Taxes, cess, fees, charges, premiums, interest etc. to any statutory Authority. b) Principal sum and interest payable to financial institutions, scheduled banks, non-banking financial institution (NBFC) or money lenders on construction funding or money borrowed for construction; Sub-Total of Development Cost
2. Total Estimated Cost of the Real Estate Project [1(i) + 1(ii)] of Estimated Column.
3 Total Cost Incurred of the Real Estate Project [1(i) + 1(ii)] of Incurred Column.
4 % Completion of Construction Work (As per Project Architect's Certificate)
5 Proportion of the Cost incurred on Land Cost and Construction Cost to the Total Estimated Cost. (3/2 %)
6 Amount Which can be withdrawn from the Designated Account. T otal Estimated Cost * Proportion of cost incurred (Sr. number 2 * Sr. number 5)
7 Less: Amount withdrawn till date of this certificate as per the Books of Accounts and Bank Statement.
8 Net Amount which can be withdrawn from the Designated Bank Account under this certificate. This certificate is being issued for RERA compliance for the Company [Promoter's Name] and is based on the records and documents produced before me and explanations provided to me by the management of the Company.
71 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 72 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

Yours Faithfully,

Signature of Chartered Accountant (Membership Number………….)

Name________________________________

(ADDITIONAL INFORMATION FOR ONGOING PROJECTS)

Sr. No. Particulars Amount (₹) Estimate Incurred
1. Estimated Balance Cost to Complete the Real Estate Project (Difference of Total Estimated Project cost less Cost incurred) (Calculated as per the Form IV)
2. Balance amount of receivables from sold apartments (As per Annexure A to this certificate (as certified by Chartered Accountant as verified from the records and books of Accounts)
3. (i) Balance Unsold area (to be certified by Management and to be verified by CA from the records and books of accounts) (ii) Estimated amount of sales proceeds in respect of unsold apartments (calculated as per ASR multiplied to unsold area as on the date of certificate, to be calculated and certified by CA) as per Annexure A to this certificate
4. Estimated receivables of ongoing project. Sum of 2 + 3 (ii)
5. Amount to be deposited in Designated Account – 70% or 100% If 4 is greater than 1, then 70 % of the balance receivables of ongoing project will be deposited in designated Account If 4 is lesser than 1, then 100% of the of the balance receivables of ongoing project will be deposited in designated Account
73 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

This certificate is being issued for RERA compliance for the Company [Promoter's Name] and is based on the records and documents produced before me and explanations provided to me by the management of the Company.

Yours Faithfully,

Signature of Chartered Accountant,

(Membership Number--------)

Name___________________

Annexure A Statement for calculation of Receivables from the Sales of the Ongoing Real Estate Project

Sold Inventory

Sr. No. Flat No. Carpet Area (in sq.mts.) Unit Consideration as per Agreement/Letter of Allotment Received Amount Balance Receivable
74 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

(Unsold Inventory Valuation) Ready Reckoner Rate as on the date of Certificate of the Residential/Commercial premises Rs. _________ per sq.mts.

Sr.No. Flat No. Carpet Area (Insq.mts.) Unit Consideration as per Read Reckoner

FORM No. 4 [Regulation 6 (1)] ON THE LETTER HEAD OF CHARTERED ACCOUNTANT (WHO IS NOT STATUTORY AUDITOR OF THE PROMOTER'S COMPANY/FIRM) ANNUAL REPORT ON STATEMENT OF ACCOUNTS

To [NAME AND ADDRESS OF PROMOTER]

SUBJECT: Report on Statement of Accounts on project fund utilization and withdrawal by [Promoter] for the period from _______ to ______with respect to Bihar RERA Reg. Number___________________________________75 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 1. This certificate is issued in accordance with the provisions of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 read along with the Bihar Real Estate (Regulation and Development) Rules, 2017.

2. I/We have obtained all necessary information and explanation from the Company, during the course of our audit, which in my/our opinion are necessary for the purpose of this certificate. 3. I/We hereby confirm that I/We have examined the prescribed registers, books and documents, and the relevant records of [Promoter] for the period ended ________ and hereby certify that:

i. M/s______________________ (Promoter) have completed ________% of the project titled _________________________(Name) BiharRERA Reg. No._________________located at ________________________

ii. Amount collected during the year for this project is Rs. ___________________ and amounts collected till date is Rs. _______________________

iii. Amount withdrawn during the year for this project is Rs. _________________ and amount withdrawn till date is Rs. _____________________

4. I/We certify that the [Name of Promoter] has utilized the amounts collected for____________________________ project only for that project and the withdrawal from the designated bank account(s) of the said project has been in accordance with the proportion to the percentage of execution of work in the project.

(If not, please specify the amount withdrawn in excess of eligible amount or any other exceptions).

(Signature and Stamp/Seal of the Signatory CA)

Place: Name of the Signatory: Date: Full Address:

Membership No: Contact No: Email:

FORM No. 5

[Regulation 15]

IN,

THE BIHAR REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY, AT PATNA. Authorization/ Vakalatnama For RERA/ Complaint/ Suo-Motu/Execution No.____________________

In the matter of

.......................................................................................................................Petitioner(s)/Complain ant

V/s

..........................................................……………………………...…Respondent(s)/ Opposite Party(s)76 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 Memo of Authorization

I /We-------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----- the petitioner/respondent above named do hereby nominate, appoint and constitute------------ ----------------------------------------------------------------------------Advocate/s bearing License No--- -----------------------------------------------------------------------------------,Place of sitting and Mobile No----------------Email ID:--------------------------------------------to act, plead and appear on my/our behalf in the aforesaid matter. IN WITNESS WHERE OF, I/We have set and subscribed my/ our hands to this writing on this -- ----------------------------------------------------------day of ------------------------------

(Signature of Advocate) (Signature of Client)

Place ____________ Date_________

FORM No. 6

[Regulation 17 (2)]

BEFORE THE BIHAR REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY Application for inspection/obtaining copies of documents/records

I hereby apply for grant of permission to inspect/obtain copies of the following documents / records in the above case. The details are as follows:

1. Name and Address of the person seeking permission to inspect/obtain copies of the documents/records. __________________________________________________

2. Whether he is party to the case or he is the authorized representative of any party. [Furnish necessary particulars] ________________________________________

3. Details of papers/documents sought to be inspected/copies required. __________ 4. Date and duration of the inspection sought_______________________________ 5. The amount of fee payable (as per relevant Regulations) and the mode of payment

Place : Date:

Signature Name: Address: Mob. No:

Office Use

Granted inspection on __________________ / Rejected

Granted copies of documents on __________/Rejected

Secretary / Officer/ Nominee of the Authority

——————————————————————————————————————

By order of The Chairman, RERA, Bihar

Secretary, RERA, Bihar, Patna77 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 FORM-7

[REGULATION-9]

Quarterly progress report for quarter ending March/June/sept/December of _______ (year)

I . PARTICULARS OF PROJECT
Project Registration Number Name of Project/Phase of Registered Project
Name of Promoter Project Address
Name of Co-promoter
Project Registration isvalid up to
Starting date of Project or Phase of the Project
Type of Project or Phase of the Project 1.Residential 2. Commercial 3. Residential- cum- Commercial 4, Plotted project
Period of validity of map by the Competent Authority
II. DISCLOSURE OF SOLD/BOOKED INVENTORY OF APARTMENTS
Building/Block Number Apartment Type Carpet Area Total Number of sanctioned apartments Total Number of Apartments –
1. 1 BHK -
2. 2 BHK, - 3. 3 BHK - 4. Shop - 5. Bungalow- 6. Plot etc. - 1. Booked/ Allotted - 2. Sold -
III. DISCLOSURE OF SOLD / BOOKED INVENTORY OF GARAGES
Building / Block Number Total Number of Sanctioned Garages Total Number of Garages: 1. Booked/Allotted - 2. Sold -
IV. DETAILS OF BUILDING APPROVALS (If already filed along with Registration Application, then there is no need of further filing)
S. No. Name of the Approval / N.O.C./ Permission / Certificate Issuing Authority Applied Date Issuance Date Enclosed as Annexure No.
1. NOC for Environment
2. Fire N.O.C.
3. Water Supply Permission
4. NOC from Airport Authority of India
5. Other Approval(s), if any, required for the Project.
V. Construction Progress of the Project
1. Plan Case No. ______________ (To beaded for each Building / Wing)
S. No. (1) Tasks / Activity (2) Percentage of Actual Work Done (As on date of the Certificate) (3)
1. Excavation (if any)
2. Basements (if any)
3. Podiums (if any)
4. Plinth
5. Stilt Floor
6. Slabs of Super Structure
7. Internal walls, Internal Plaster, Floorings, Doors and Windows within Flats /Premises.
8. Sanitary Fittings within the Flat/Premises, Electrical Fittings within the Flat/Premises
9. Staircases, Lifts Wells and Lobbies at each Floor level, Overhead and Underground Water Tanks.
10. External plumbing and external plaster, elevation, completion of terraces with waterproofing of the Building/Wing.
11. Installation of Lifts, water pumps, Fire Fighting Fittings and Equipment as per CFO NOC, Electrical fittings, Mechanical
Equipment, compliance to conditions of environment/CRZ NOC, Finishing to entrance lobby/s, plinth protection, paving of areas appurtenant to Building/Wing, Compound Wall and all other requirements as me be required to complete project as per Specifications in Agreement of Sale. Any other activities.
V I. Amenities and Common Area and External Infrastructure Development Works) NaN
S. No. Common Areas and Facilities Proposed (Yes/No) Percentage of actual Work Done (As on date of the Certificate) Details NaN
(1) (2) (3) (4) (5) NaN
1. Internal Roads & Footpaths NaN
2. Water Supply NaN
3. Sewerage (Chamber, Line, Septic Tank, STP) NaN
4. Storm Water Drains NaN
5. Landscaping & Tree Planting NaN
6. Street Lighting NaN
7. Community Buildings NaN
8. Treatment and Disposal of Sewage and Sullage Water NaN
9. Solid Waste Management & Disposal NaN
10. Water Conservation / Rain Water Harvesting NaN
11. Energy Management NaN
12. Fire Protection and Fire Safety Requirements NaN
13. Closed Parking NaN
14. Open Parking NaN
15. Electrical Meter Room, Sub-Station, Receiving Station NaN
16. Others (Option to Add More) NaN
VI A EXTERNAL AND INTERNAL DEVELOPMENT WORKS IN CASE OF PLOTTED DEVELOPMENT NaN
PROPOSED YES/NO. PERCENTAGE OF ACTUALWORK DONE (As on date of certificate) Details NaN
1. Internal Roads and foot paths NaN
2. Water Supply NaN
3. Sewerage Chambers Septic Tank NaN
4 Drains NaN
5. Parks, Land Scaping and Tree Planting NaN
6. Street Lighting NaN
7. Disposal of sewage & sullage water NaN
8. Water conservation/Rain Water Harvesting NaN
9. Energy Management NaN
VII. GEO TAGGED AND DATE PHOTOGRAPH OF(EACH BLOCK) OF THE PROJECT NaN
(A) Sr. No. NaN
1. Front Elevation NaN
2. Rear Elevation NaN
3. Side Elevation NaN
(B) Photograph of each floor NaN
VIII. Financial Progress of the Project
S. No. (1) Particulars (2) Amount (In Rs.) (3)
1. Project Account No.
2. Estimated Cost of the Project including land cost at the start of the Project
3. Amount received during the Quarter
4. Actual Cost Incurred during the Quarter
5. Net amount at end of the Quarter
6. Total expenditure on Project till date
7. Cumulative fund collected till the end of Quarter in question
8. Cumulative expenditure done till the end of Quarter in question
I X. Details of Mortgage or Charge if any created
. MISCELLANEOUS
A List of Legal Cases (if any)
1. Case No.
2. Name of Parties
B Sale/Agreement for Sale during the Quarter
1. Sale Deed
2. Agreement for Sale
XI. PERCENTAGE OF WORK ALONG WITH MILESTONE CHART
Weather the project in progress is as per time schedule or lagging behind?
78 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 79 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 80 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 81 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 82 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 83 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

Undertaking: I/we solemnly affirm, declare and undertake that all the details stated above are true to the best of my knowledge and nothing material has been concealed here from. I am/we are executing this undertaking to attest to the truth of all84 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 the foregoing and to apprise the Authority of such facts as mentioned as well as for whatever other legal purposes this undertaking may serve.

Signature of Promoter Name:

Date:

(Form 8) [Regulation No. 24] EXECUTION FORM [See Order 21 CPC, Section 40 of RERA Act, 2016 & Rule 25/26 of Bihar RERA Rules,2017.] APPLICATION FOR EXECUTION BEFORE AUTHORITY/ADJUDICATING OFFICER Execution Case Under Section 40 read with Rule25/26.

For use of Regulatory Authority(s) office: Date of filing: _____________________________ Date of receipt by the Registry through online filing:__________________ Execution Case No.: _____________________Original Complaint No: _______________________ Signature: _____________________________________ Registrar: _____________________________________ IN THE REGULATORY AUTHORITY'S OFFICE (Name of Place) ................................................... __________________________________________________________Complainant (s) Between

_________________________________________________________Respondent(s) 1. Particulars of the Complainant (s)______________________________________________ (i) Name (s) of the Complainant ________________________________________________ (ii) Address of the existing office/residence of the Complainant_______________________ (iii) Address for service of all notices: ____________________________________________ (iv) Contact Details (Phone Number, E-mail, Fax Number etc.): ______________________ 2. Particulars of the Respondent (s) ________________________________________________ (i) Name (s) of Respondent ___________________________________________________ (ii) Office address of the Respondent ___________________________________________ (iii) Address for service of all notices: ____________________________________________ (iv) Contact Details (Phone number, E-mail, Fax Number etc.): ______________________ 3. Jurisdiction of the Executing District Magistrate (DM)/ Principal Civil Court ___________________ (if required). The complainant declares that the subject matter of the claim falls within the jurisdiction of the ___________________________________________ District Magistrate (DM)/ Principal Civil Court.

4. Facts & Date of Original Order/s._____________________________________________ [Give a concise operating part of Order] ________________________________________ ___________________________________________________________________________ ___________________________________________________________________________ ___________________________________________________________________________ ___________________________________________________________________________85 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 5. Relief(s) sought:

relief/s

In view of the facts mentioned in paragraph 4 above, the Complainant prays for the following under Section/s_________________________________________________________________ 6. Execution Case pending with any other court, etc.:

The complainant further declares that the matter regarding which this execution petition has been made is not pending before any court of law or any other authority or any other tribunal(s)

7. Particulars of [demand draft/bankers' cheque or online payment] Court Fee in respect of the fee in terms of Rule 25/26 of the Bihar Real Estate (Regulation & Development) Rules, 2017. (i) Amount - Rs. (ii) Name of the bank payable at - Account No. 296800101053609, IFSC – PUNB0296800

(iii) Online payment details (IFSC Code & Account No.)-

8. List of enclosures:

(i) Copies of the Final Order relied upon by the Complainant and referred to in the Execution Case.

(ii) An index of documents. (iii) Other documents as annexed along with the Execution Case.

Signature of the Complainant(s).

Verification I________________________________________ (name in full block letters), Son/Daughter of _____________________________________________ resident of village/Mohalla - _________________, P.S. - ___________________, District - _____________, State - __________________, complainant in RERA/CC/.............../..........., do hereby verify and solemnly affirms that the content of the aforementioned paragraphs are true to the best of my knowledge and belief and that I have not suppressed any material fact(s). Place: Date:

Signature of theComplainant(s).

Instructions: (1) Every Execution case shall be filed in English/Hindi and in case it is in some other Indian language, it shall be accompanied by a copy translated in English/Hindi and shall be fairly and legibly type- written, lithographed or printed in double spacing on one side of standard petition paper with an inner margin of about four centimetres width on top and with a right margin on 2.5 cm, and left margin of 5 cm, duly paginated, indexed and stitched together in paper book form.

(2) Every Execution case shall be presented along with an empty file size envelope bearing full address of the respondent and where the number of respondents are more than one, then sufficient number of extra empty file size envelopers bearing full address of each respondent shall be furnished by the party preferring the complaint.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 25—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

86 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं02/सी0-3-30143/1997-सा0प्र0-11544

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

11 जुलाई 2022

श्री जयमंगल पासवान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 45/08, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिहियां, भोजपुर सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा के पत्रांक 2781 दिनांक 20.10.1993 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री पासवान के विरूद्ध कुल 13 (तेरह) आरोप प्रतिवेदित है, जो अनियमित ढंग से अग्रिम भुगतान कर सरकारी राशि का गबन करने, बिना अंतरिम मापी प्राप्त किये अग्रिम का भुगतान करने, योजना संख्या 29/87-88 में कार्य से अधिक अग्रिम भुगतान करने, योजना संख्या 06/88-89 में अग्रिम का भुगतान करने में नियम का उल्लंघन करने, योजना संख्या 05/88-89 में प्राक्कलित राशि से अधिक भुगतान करने, योजना संख्या 28/87-88 के कार्यान्वयन में नियमों का उल्लंधन कर सरकारी राशि का गबन करने, योजना संख्या 35/86-87 में अनियमित रूप से अग्रिम का भुगतान करने, बिना सक्षम पदाधिकारी के स्वी—ति प्राप्त किये योजनाओं को प्रारंभ करने, योजनाओं के विरूद्ध मनमानी ढंग से अग्रिम का भुगतान करने एवं निजी नलकूप योजना के अन्तर्गत पाईपों के वितरण में अनियमितता करने संबंधी आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2726 दिनांक 01.04.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना (सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त) को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। मुख्य जाँच आयुक्त के ज्ञापांक 51 दिनांक 22.01.2021 द्वारा सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग-सह-जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग को विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु हस्तांतरित किया गया। सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग-सह-जाँच आयुक्त के पत्रांक 143/प्र0स0गो0को0 दिनांक 21.06.2022 द्वारा सूचित किया गया है कि श्री जयमंगल पासवान, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिहियां, भोजपुर सम्प्रति सेवानिवृा की मृत्यु दिनांक 08.06.2022 को हो गई। मृत्यु प्रमाण-पत्र उनके पुत्र श्री रवि रंजन कुमार पता-उारी श्री—ष्णापुरी, तिलक मार्ग, मकान सं0-6बी/26, बोरिंग रोड, पटना, बिहार-13 द्वारा प्रेषित किया गया।

उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 8811 दिनांक 18.07.2017 के प्रावधान के तहत यदि किसी सरकारी कर्मी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित है और विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में उक्त सरकारी कर्मी की मृत्यु हो जाती है तो उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही समाप्त माना जायेगा।

उपर्युक्त वर्णित प्रावधानों के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री जयमंगल पासवान के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संख्या 31/2020 की संचिका (अभिलेख सहित) मूल में वापस की गयी तथा श्री पासवान के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2726 दिनांक 01.04.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया।

अतः श्री जयमंगल पासवान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 45/08, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिहियां, भोजपुर सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2726 दिनांक 01.04.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।87 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 सं0 2/आरोप-01-06/2018-सा0प्र0-10867

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1 जुलाई 2022

श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 5285 दिनांक 13.10.2017 द्वारा गठित आरोप-पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित किया गया, जिसपर अनुषासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

श्री हुसैन के विरूद्ध आरोप है कि :- आरोप सं0-01 :- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अन्तर्गत राजस्व जिला भागलपुर को प्राप्त खाद्यान्न का आवंटन के विरूद्ध भारतीय खाद्य निगम से क्रय विमुक्ति आदेश में सन्निहित खाद्यान्न की मात्रा का शत्‌ प्रतिशत उठाव नहीं कराकर अनुदानित खाद्यान्न को वययगत कराने का आरोप है।

आरोप सं0-02 :- आपके द्वारा अक्टूबर, 2016, नवम्बर, 2016 एवं जनवरी, 2017 में कुल 40227.20 क्विंटल गेहूँ एवं 15430.90 क्विंटल चावल भारतीय खाद्य निगम से उठाव नहीं करा कर व्ययगत करा दिया गया। फलस्वरूप सरकार द्वारा निर्धारित मानदण्ड के अनुसार चयनित लाभार्थियों को मासिक रूप से खाद्यान्न मुहैया नहीं कराया जा सका एवं निगम को हानि पहुँचाई गई। अतः निगम निदेशों का अनुपालन नहीं करने, आपके द्वारा अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन नहीं करने लाभार्थियों को अनुदानित खाद्यान्न से वंचित रखने एवं निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिये पूर्ण रूप से जवाबदेह है। आरोप सं0-03 :- आपका यह —त्य अनुशासनहीनता, आवंटित कार्यों में लापरवाही एवं खाद्यान्न व्ययगत कर निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने के दोषी हैं एवं बिहार आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों का उल्लंघन है।

उक्त आरोपों के लिए श्री हुसैन के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4346 दिनांक 28.04.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के पत्रांक 95/गो0 दिनांक 27.04.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँचोपरांत निम्नलिखित मंतव्य समर्पित किया गया है :-

श्री हुसैन भागलपुर जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर के पद पर दिनांक 23.08.2016 से पदस्थापित थे। राजस्व जिला भागलपुर के खाद्यान्न मुहैया कराने हेतु 51390.00 क्वीं0 गेहूँ एवं 77085.00 क्वीं चावल का मासिक रूप से खाद्यान्न उपावंटित किया गया है। श्री हुसैन के द्वारा माह-अक्टूबर, 2016, नवम्बर, 2016 तथा जनवरी, 2017 में कुल 40227. 20 क्वीं0 गेहूँ एवं 15430.90 क्वीं0 चावल भा0खा0नि0 से उठाव नहीं कराकर व्ययगत करा दिया गया। जबकि इस सम्बन्ध में खाद्यान्न के उठाव हेतु निगम के मुख्यालय से दो चरणों में अवधि विस्तार करवाया गया एवं विभिन्न पत्रांकों से शत-प्रतिशत उठाव कराने हेतु निदेशित भी किया गया।

इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी श्री हुसैन द्वारा अपने बचाव पत्र में उल्लेख किया है कि इनके भागलपुर जिला में प्रभार ग्रहण करने के पश्चात प्रमुख चुनौती उठाव हेतु पी0डी0एस गोदामों से खाद्यान्न डीलरों को वितरण कर गोदामों की भंडारण बढ़ाना एवं अतिरिक्त परिवहन अभिकर्ता (मुख्य एवं डी0एस0डी0) की जल्द से जल्द नियुक्ति करना।

आरोपी पदाधिकारी श्री हुसैन द्वारा अपने स्पष्टीकरण में भा0खा0नि0 से उठाव पूर्णतः बाधित रहने, बंद रहने, खाद्यान्न उपलब्ध नहीं रहने आदि तथ्य प्रतिवेदित किया गया है, लेकिन इस संबंध में श्री हुसैन द्वारा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

उपरोक्त वस्तुस्थिति के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि श्री हुसैन के द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन ससमय नहीं किये जाने से राजस्व जिला भागलपुर को उपावंटित खाद्यान्न का शत प्रतिशत उठाव नहीं हो सका और भा0खा0नि0 से उपावंटित खाद्यान्न व्ययगत हो गया। जिससे सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अनुसार चयनित लाभार्थियों को मासिक रूप से खाद्यान्न मुहैया नहीं कराया जा सका एवं निगम को हानि पहुँचाई गई।

अतः निगम के निदेशों का अनुपालन नहीं करने, अपने दायित्वों का निर्वहन ससमय नहीं करने, आवंटित कार्यो में लापरवाही बरतने, लाभार्थियों को अनुदानित खाद्यान्न से वंचित रखने एवं निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए श्री हुसैन पूर्ण रूप से उत्तरदायी है।

इस प्रकार निगम तथा विभाग के मंतव्य से सहमत होते हुए उक्त मामले में आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध लगाए गए आरोप संख्या-01, 02 एवं 03 सभी आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।

विभागीय पत्रांक 11137 दिनाक 22.09.2021 द्वारा श्री हुसैन से संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री हुसैन के पत्रांक 2478 दिनाक 14.12.2021 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में किया गया था। कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।

प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का मंतव्य एवं श्री हुसैन से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया की संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। उल्लेखनीय है कि राजस्व जिला भागलपुर के खाद्यान्न मुहैया कराने हेतु 51390.00 क्वींटल गेहूँ एवं 77085.00 क्वींटल चावल का मासिक रूप से खाद्यान्न उपावंटित किया गया था, किंतु श्री हुसैन के द्वारा माह-अक्टूबर, 2016, नवम्बर, 2016 तथा जनवरी, 2017 में कुल-40227.20 क्वीं गेहूँ एवं 15430.90 क्वीं0 चावल भा0खा0नि0 से उठाव नहीं कराकर व्ययगत करा दिया88 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 गया। जबकि खाद्यान्न के उठाव हेतु निगम के मुख्यालय से दो चरणों में अवधि विस्तार करवाया गया एवं विभिन्न पत्रांकों से शत-प्रतिशत उठाव कराने हेतु निदेशित भी किया गया, किन्तु श्री हुसैन द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। श्री हुसैन द्वारा अपने स्पष्टीकरण में भा0खा0नि0 से उठाव पूर्णतः बाधित रहने, बंद रहने, खाद्यान्न उपलब्ध नहीं रहने आदि तथ्य प्रतिवेदित किया गया है, लेकिन इस संबंध में श्री हुसैन द्वारा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।

स्पष्टतया श्री हुसैन के द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन ससमय नहीं किये जाने से राजस्व जिला भागलपुर को उपावंटित खाद्यान्न का शत प्रतिशत उठाव नहीं हो सका और खाद्यान्न व्ययगत हो गया। इसके फलस्वरूप जनता के कल्यानार्थ निर्धारित मापदण्ड के अनुसार चयनित लाभार्थियों को मासिक रूप से खाद्यान्न मुहैया नहीं कराया जा सका। श्री हुसैन निगम के निदेशों का अनुपालन नहीं करने, अपने दायित्वों का निर्वहन ससमय नहीं करने, आवंटित कार्यो में लापरवाही बरतने, लाभार्थियों को अनुदानित खाद्यान्न से वंचित रखने एवं निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी है।

श्री हुसैन का यह —त्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने के दोषी एवं बिहार आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके बचाव अभ्यावेदन एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त श्री हुसैन के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के आलोक में लिखित अभिकथन को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2016-17) एवं (ii) संचयात्मक प्रभाव से चार वेतनवृद्धि पर रोक का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।

श्री हुसैन के विरूद्ध विनिश्चित वृहत दंड पर विभागीय पत्रांक 1252 दिनांक 02.02.2022 एवं पत्रांक 5864 दिनांक 18.04.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श/सहमति की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 818/लो0से0आ0 दिनांक 06.06.2022 द्वारा विनिश्चित दंड पर परामर्श/सहमति व्यक्त की गयी, जिसमें आयोग का कहना है कि :-

''आरोपित पदाधिकारी के द्वितीय कारन पृच्छा प्रत्युत्तर की सम्यक समीक्षा प्रासाशी विभाग द्वारा नहीं की गयी है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव ब्यान के सम्यक विचारोपरांत आयोग की अभिमत है कि विभागीय दंण्ड प्रस्ताव अधिक होने के कारण समानुपातिक नहीं है।''

उल्लेखनीय है कि श्री हुसैन द्वारा जाँच प्रतिवेदन पर समर्पित लिखित अभिकथन में संचालन पदाधिकारी के जाँच पर टिप्पणी की गयी है। जाँच के क्रम में श्री हुसैन को संचालन पदाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखे जाने का पूर्ण मौका दिया गया। विदित हो कि विभागीय कार्यवाही अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया है। श्री हुसैन को जाँच के क्रम में अपनी बात संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा जाना चाहिए था। प्रतिवेदित आरोप के आलोक में जाँचोपरांत श्री हुसैन के विरूद्ध आरोप पूर्णतया प्रमाणित पाया गया है। श्री हुसैन के लिखित अभिकथन में बचाव हेतु कोई ठोस तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतः वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के मंतव्य से असहमत हुआ जा सकता है एवं श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर सम्प्रति जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जहानाबाद के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2016-17), (ii) संचयात्मक प्रभाव से चार वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-03/2022-सा0प्र0-10084

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21 जून 2022

श्री अरविन्द कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 819/11, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णियां के विरूद्ध जमीन से संबंधित मुआवजा राशि के भुगतान किये जाने हेतु 1,30,000/- (एक लाख तीस हजार) रू0 रिश्वत लेते हुए दिनांक 23.07.2021 को निगरानी धावादल द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। साथ ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा श्री भारती के विरूद्ध धारा-7(a)/7(c)/12 भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित, 2018) एवं 120(बी) भा0द0वि0 के अन्तर्गत कांड दर्ज किया गया।

श्री भारती को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के दिनांक 23.07.2021 के प्रभाव से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 296 दिनांक 07.01. 2022 द्वारा अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया।89 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 श्री भारती द्वारा दिनांक 02.03.2022 को न्यायिक हिरासत से जमानत पर रिहा होने के उपरान्त दिनांक 03.03.2022 को जिला पदाधिकारी, पूर्णियां के कार्यालय में योगदान समर्पित किया गया एवं जिला पदाधिकारी, पूर्णियां द्वारा इनका योगदान स्वी—त किया गया।

मामले की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। श्री भारती के विरूद्ध रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने से संबंधित गंभीर आरोप प्रतिवेदित है। इस मामले में इनके विरूद्ध आपराधिक कार्यवाही एवं विभागीय कार्यवाही विचाराधीन है। समीक्षोपरान्त श्री भारती द्वारा दिनांक 03.03.2022 को जिला पदाधिकारी, पूर्णियां के कार्यालय में समर्पित योगदान को स्वी—त करते हुए इनका निलंबन बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के संगत प्रावधानों के तहत जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 819/11, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णियां का बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के संगत प्रावधानों के तहत जारी रखा जाता है एवं निलंबन अवधि में श्री भारती का मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है।

निलंबन अवधि में श्री भारती को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के संगत प्रावधानों के तहत जीवन निर्वाह भाा देय होगा। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-03/2022-सा0प्र0-10083

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21 जून 2022

श्री अरविन्द कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 819/11, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णियां के विरूद्ध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1025 दिनांक 28.12.2021 द्वारा सूचित किया गया कि दिनांक 23.07.2021 को परिवादी श्री नितेश कुमार राज से जमीन से संबंधित मुआवजा राशि के भुगतान किये जाने हेतु 1,30,000/- (एक लाख तीस हजार) रू0 रिश्वत लेते हुए निगरानी धावादल द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। साथ ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा श्री भारती के विरूद्ध धारा-7(a)/7(c)/12 भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित, 2018) एवं 120(बी) भा0द0वि0 के अन्तर्गत कांड दर्ज किया गया।

श्री भारती को उक्त —त्य के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 296 दिनांक 07.01.2022 द्वारा निलंबित किया गया। जिला पदाधिकारी, पूर्णियां के पत्रांक 238/स्था0 दिनांक 03.03.2022 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप-पत्र एवं संचिका में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के लिए श्री भारती से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध आरोपों की वृहत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानोंं के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 819/11, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पूर्णियां सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानोंं के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, पूर्णियां द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, पूर्णियां को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे। श्री भारती से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, सचिव।90 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 सं0 2/आरोप-01-23/2016-सा0प्र0-11435

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8 जुलाई 2022

श्री अनुराग कौशल सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1067/11, जिला परिवहन पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध अंचल अधिकारी, दरौंदा, सिवान पदस्थापन अवधि में अंचल दरौंदा के गैर मजरूआ भूमि की बंदोबस्ती की गलत अनुशंसा किये जाने संबंधी आरोप के लिए गठित आरोप-पत्र में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 7154 दिनांक 12. 05.2022 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी।

श्री सिंह के पत्रांक 268 दिनांक 27.05.2022 द्वारा आरोपों के संदर्भ में स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए आरोप की वृहत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, सिवान को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री सिंह से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, सचिव।

----- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-01/2020--9156 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ----- संकल्प 1 सितम्बर 2022

श्री रमेष प्रसाद, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, दाउदनगर के विरूद्ध उनके मंडल कारा, हाजीपुर में पदस्थापन के दौरान दिनांक 03.01.2020 को विचाराधीन बंदी मनीष कुमार उर्फ तेलिया, पे0-अमरेन्द्र कुमार सिंह को कारा के अन्दर एक अन्य संसीमित बंदी द्वारा गोली मार कर हत्या कर दिये जाने की घटना एवं दिनांक 03.01.2020 तथा 05.01.2020 को जिला प्रषासन द्वारा कारा में की गई औचक छापेमारी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-357 दिनांक 14.01.2020 द्वारा श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर को निलंबित किया गया तथा निलंबनावस्था में उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया। उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6159 दिनांक 11.09.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. संचालन पदाधिकारी-सह-संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना के पत्रांक-1052/स्था0, दिनांक-22.11.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री रमेष प्रसाद के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल 05 आरोपों में से आरोप संख्या-01 को प्रमाणित तथा शेष 04 आरोपों को अंषतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। 3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 10805 दिनांक 30.12.2021 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री रमेष प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। 4. तद्‌आलोक में श्री रमेष प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिनांक 20.01.2022 के विश्लेषणोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5815 दिनांक 25.05.2022 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया :- '' संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''।

5. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5815 दिनांक 25.05.2022 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री रमेष प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 09.07.2022 समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोप सं0-01 को प्रमाणित तथा अन्य आरोप सं0-02, 03, 04 एवं 05 को अंषतः प्रमाणित माना गया है। इस प्रकार प्रमाणित एक आरोप तथा अंषतः प्रमाणित चार आरोपों के लिए उनपर अधिरोपित91 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 दण्ड ''पाँच वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक'' में समानुपातिक दण्ड के सिद्धांत का पालन नहीं हुआ है। संचालन पदाधिकारी द्वारा मात्र कार्यालय प्रधान होने के आधार पर आरोपों को अंषतः प्रमाणित मान लिया गया है। घटना की तिथि 03.01.2020 के पूर्व वे लगभग दो माह के स्वीकृत अर्जित अवकाष पर थे तथा दिनांक 02.01.2020 को अंतिम रूप से कर्त्तव्य पर अपराह्‌न में योगदान किये थे। इस कारण कारा में रचे जाने वाले षड्‌यंत्र से वाकिफ नहीं थे। उनका कहना है कि गोली काण्ड की घटना के बाद पुलिस अधीक्षक, हाजीपुर द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में घटना को कुछ बंदियों एवं कारा कर्मी श्री राजकुमार के षड्‌यंत्र का कारण बताया गया है। कारा गेट में गेट वार्डर/दफा प्रभारी द्वारा तलाषी किये जाने के संबंध में उनका कहना है कि मंडल कारा, हाजीपुर में योगदान के उपरांत से ही उनके द्वारा समीक्षा किया गया और समय-समय पर संबंधित पदाधिकारियों/कर्मियों को आवष्यक निर्देष देते रहे। श्री प्रसाद द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में अधिरोपित दण्ड को निरस्त/लघुकृत करने का अनुरोध किया गया है।

6. श्री रमेष प्रसाद के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत स्पष्ट है कि इस घटना में कारा के मुख्य प्रवेश द्वार से अवैध रूप से प्रवेश पाये पिस्टल से कारा के अन्दर गोली मारकर एक बंदी की हत्या एक अन्य बंदी द्वारा कर दी गई, जो कारा की सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रमाण है। अधीनस्थ कर्मियों के कार्यों पर सतत्‌ निगरानी एवं पर्यवेक्षण रखने की जवाबदेही काराधीक्षक के रूप में श्री प्रसाद की ही थी; जिसका निर्वहन उनके द्वारा नहीं किया गया। कारा के अति सुरक्षित क्षेत्र में पिस्टल जैसी आपत्तिजनक सामग्री एवं मोबाईल फोन सहित भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों का प्रवेश होना श्री प्रसाद की कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही एवं अकर्मण्यता का द्योतक है। श्री प्रसाद द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में पुनः उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जिसका उल्लेख उन्होंने पूर्व में अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में किया था। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को सम्यक्‌ विष्लेषणोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वीकृत करते हुए विनिष्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत्‌ प्रक्रिया का पालन करते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध दण्ड अधिरोपित किया गया है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री रमेश प्रसाद द्वारा पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई है। परिणामस्वरूप कारा के अति सुरक्षित क्षेत्र में पिस्टल से गोली मारकर एक बंदी द्वारा दूसरे बंदी की हत्या कर दी गई एवं इस घटना के बाद लगातार दो तिथियों को जिला प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में बड़ी मात्रा में मोबाईल फोन सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्रियाँ बरामद हुई है। इसके लिए विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रसाद को ''संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड'' अधिरोपित किया गया है।

7. श्री रमेष प्रसाद, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, दाउदनगर के विरूद्ध गठित आरोप की प्र—ति एवं गंभीरता पर विचार करने के उपरांत बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त कर समेकित रूप से उन्हें दिया गया दण्ड न्यायोचित है एवं इसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः इनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किया जाता है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-11/2018--9157

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संकल्प

1 सितम्बर 2022

श्री संजय कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मुंगेर सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मुंगेर में पदस्थापन के दौरान दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रषासन, मुंगेर द्वारा मंडल कारा, मुंगेर में की गई औचक छापेमारी में 14 मोबाइल फोन, 06 मोबाइल चार्जर, 15 सिम एवं भारी मात्रा में अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी की घटना में बरती गई लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता के आरोप के लिए गठित प्रपत्र 'क' के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1568 दिनांक 20.02.2019 द्वारा श्री संजय कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मुंगेर सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई, जिसमें आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, मंडल कारा, मुंगेर को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया । 2. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर द्वारा अपने पत्रांक 3242 दिनांक 09.09.2021 के माध्यम से विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 9234 दिनांक 29.10.2021 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री संजय कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।92 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 4. तद्‌आलोक में श्री संजय कुमार द्वारा पत्रांक 5042 दिनांक 30.11.2021 के माध्यम से समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के विश्लेषणोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6594 दिनांक 15.06.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :- '' संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''।

5. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6594 दिनांक 15.06.2022 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री संजय कुमार द्वारा अपने पत्रांक 4253 दिनांक 28.07.2022 के माध्यम से पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा पूर्व में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में अंकित तथ्यों का ही पुनः उल्लेख किया गया है। श्री कुमार द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में अधिरोपित दण्ड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। 6. श्री संजय कुमार के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रशासन द्वारा की गई औचक छापेमारी में कारा के अन्दर से 14 मोबाईल फोन सहित भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामंिग्रयों की बरामदगी से स्पष्ट है कि कारा के अन्दर सघन जाँच/तलाशी तथा अपने अधीनस्थों के बीच आवश्यक समन्वय एवं सामंजस्य रखने में काराधीक्षक के रूप में श्री कुमार पूर्णतः विफल रहे हैं। कारा के अति सुरक्षित क्षेत्र में मोबाईल फोन सहित भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों का प्रवेश होना, श्री कुमार की कर्त्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता का द्योतक है। श्री कुमार द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में पुनः उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जिसका उल्लेख उन्होंने पूर्व में अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में किया था, जिसे सम्यक्‌ विश्लेषणोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वी—त करते हुए विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत्‌ प्रक्रिया का पालन करते हुए दण्ड अधिरोपित किया गया है।

7. उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री संजय कुमार द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई है, परिणामस्वरूप कारा के अति सुरक्षित क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी में बड़ी मात्रा में मोबाईल सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्रियाँ बरामद हुई है। इसके लिए विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार को ''संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड'' अधिरोपित किया गया है।

8. श्री संजय कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मुंगेर सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर के विरूद्ध गठित आरोप की प्र—ति एवं गंभीरता पर विचार करने के उपरांत बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त कर समेकित रूप से उन्हें दिया गया दण्ड न्यायोचित है एवं इसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः इनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किया जाता है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-09/2022--9158

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संकल्प

1 सितम्बर 2022 चूँकि बिहार राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि दिनांक 06.09.2021 को मंडल कारा, नवादा के विचाराधीन बंदी गुड्‌डु कुमार, पे0-उपेन्द्र सिंह की मृत्यु की घटना में श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति निलंबित) द्वारा इस आपराधिक कृत्य में गहरी संलिप्तता एवं अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरती गई है, जिसके कारण बंदी की असामयिक मृत्यु हुई है।

श्री पाण्डेय का यह कृत्य बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (i), (ii) एवं 797 (iii) तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1) (2) के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।

2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति निलंबित) संलग्न विषेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार93 (cid:464)बहार गजट, 7 सितम्बर 2022 सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।

3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17(2) के तहत आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, गया को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4. श्री पाण्डेय से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

5. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। 6. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव पर माननीय मुख्य (गृह) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 25—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 September 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2022-09-07.36/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2022-09-07.36.