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आपदा प्रबंधन विभागआपदा प्रबंधन विभागआपदा प्रबंधन विभागआपदा प्रबंधन विभाग ——— अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 14 अक्तूबर, 202214 अक्तूबर, 202214 अक्तूबर, 202214 अक्तूबर, 2022
सं॰ 01/प्रा0आ0(सुखाड़)-63/2022/4981498149814981/आ0प्र0--वर्ष 2022 में राज्य में मॉनसून की वर्षा की स्थिति अत्यधिक दयनीय है। वर्षा की कमी के फलस्वरूप कई जिलों के बहुत सारे प्रखण्डों में खरीफ फसल की रोपनी/बुआई प्रतिवर्ष औसत रोपनी क्षेत्र से कम हो पाई है। जिन क्षेत्रों में रोपनी/बुआई की गई है, वहाँ भी अल्प वर्षापात के कारण उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त आँकड़ों एवं कृषि विभाग, बिहार से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार इस वर्ष राज्य में वर्षापात की स्थिति अत्यंत खराब है। माह जुलाई, 2022 में राज्य में 340.5 मि0मी0 औसत वर्षापात के विरूद्ध मात्र 134.6 मि0मी0 वर्षा ही हो पाई, जिससे जुलाई में वर्षापात में औसतन 60% की कमी पाई गई। इसी प्रकार, माह अगस्त, 2022 में राज्य में 271.9 मि0मी0 औसत वर्षापात के विरूद्ध मात्र 170.2 मि0मी0 वर्षा ही हो पाई। वर्षापात भी अनियमित रहा। इस प्रकार, 01 जून से 31 अगस्त, 2022 तक वर्षापात में औसतन 39 प्रतिशत की कमी पाई गई। 01 जून से 10 सितम्बर तक औसत सामान्य वर्षापात 851.2 मि0मी0 के विरूद्ध आलोच्य अवधि में मात्र 546 मि0मी0 वर्षा हो पाई है, जो औसतन 36 प्रतिशत की कमी है। कई जिलों में वर्षापात की कमी 40 से 64% तक दर्ज की गई है।
राज्य में 10 सितम्बर, 2022 तक 35 जिलाें में अल्प वर्षापात की स्थिति रही। कई जिलों यथा जहानाबाद, गया, औरंगाबाद, शेखपुरा, नवादा, मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, बाँका, जमुई एवं नालन्दा की कई पंचायतों एवं ग्रामों में धान का आच्छादन 70% से भी कम रहा।
आपदा के प्रभाव के न्यूनीकरण हेतु तथा खरीफ फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग के द्वारा पटवन/सिंचाई के लिए डीजल अनुदान दिया जा रहा है। आकस्मिक फसल योजना के अन्तर्गत वैकल्पिक बीज का वितरण उन क्षेत्रों में किया गया है जहाँ फसल का आच्छादन नहीं या कम हो पाया है। इसी प्रकार नहरों से भी अन्तिम छोर तक सिंचाई उपलब्ध करायी जा रही है। जलाशयों में उपलब्ध संचित जल से भी सिंचाई का प्रबंध कराया गया है तथा राजकीय एवं निजी नलकूपों के द्वारा भी सिंचाई करायी जा रही है। कृषि उपयोग हेतु बिजली की भी निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा माह अगस्त में अच्छी वर्षापात का पूर्वानुमान किया गया था, जिससे लगाई गई फसलों को बचाया या परती भूमि में फसल लगाई जा सकती थी। परन्तु, माह अगस्त, 2022 में वर्षापात2 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू2द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू3द्ध;बपकरू4द्ध 1;बपकरू24द्ध ख्ःिं 2;बपकरू27द्ध22 की अत्यधिक कमी के कारण वर्त्तमान में जिलों से यह सूचना प्राप्त हो रही है कि कई जिलों के बहुत से पंचायतों/ग्रामों में खरीफ फसल की रोपनी नहीं हो पायी तथा कुछ प्रखण्डों/पंचायतों में जहाँ खरीफ फसलों की रोपनी हो चुकी है, वहाँ वर्षापात की कमी तथा जलाशयों में जल संचित नहीं रहने से सिंचाई हेतु जल की अनुपलब्धता के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना अवश्यम्भावी है।
अल्प वर्षापात के कारण राज्य के सतही जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं। राज्य के कई भागों में जलाशयों के जलस्तर में गंभीर कमी आयी है तथा सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध नहीं है। कृषि एवं जल संसाधनों के अतिरिक्त सूखे का कुप्रभाव पशु संसाधन एवं रोजगार पर भी पड़ने की प्रबल संभावना है। खरीफ फसल के नुकसान होने तथा माह जुलाई, अगस्त एवं सितम्बर, 2022 में वर्षा की कमी के कारण रबी फसल के भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। इस प्रकार कुल मिलाकर राज्य में कृषि उत्पादन में कमी की स्थिति बन गई है, जिसका सीधा कुप्रभाव कृषि के ऊपर पड़ेगा। साथ ही, सूखाग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों का जीवन-यापन भी प्रभावित हो रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री, बिहार की अध्यक्षता में अल्प वर्षा के कारण उत्पन्न सुखाड़ की स्थिति की लगातार समीक्षा की गई है तथा कृषि विभाग को प्रभावित पंचायतोें, प्रखण्डों को चिन्हित करने तथा स्थानीय निरीक्षण कर प्रभावित ग्रामों व पंचायतों को सूचीबद्ध करने का निदेश दिया गया। तदालोक में कृषि विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक-5859 दिनांक-13.10.2022 से प्राप्त विस्तृत प्रतिवेदनानुसार राज्य के 11 जिले यथा जहानाबाद, गया, औरंगाबाद, शेखपुरा, नवादा, मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, बाँका, जमुई एवं नालन्दा के कुल 96 प्रखण्डों के 937 पंचायतों के 7841 राजस्व ग्रामों में सूखे का प्रभाव है तथा वर्षापात में 30% से अधिक कमी एवं फसल आच्छादन 70% से कम है जिससे उपज की उत्पादकता में कमी सम्भावित है। इन पंचायतों में वर्षापात की कमी 30% से ज्यादा रही तथा माह जुलाई एवं माह अगस्त में कई लम्बे Dry Spell भी रहे। नहरों एवं जलाशय में पानी की कमी के कारण पटवन भी सुचारू रूप से नहीं हो पाया है। प्रखण्डों में खेती की गई जमीनों में दरारें उत्पन्न हो गई हैं अथवा फसलों में मुरझाने (wilting) का प्रभाव है अथवा उपज में 33 प्रतिशत या उससे अधिक कमी सम्भावित है। इसके आलोक में राज्य के 11 जिले के कुल 96 प्रखण्डों के 937 पंचायतों के 7841 राजस्व ग्रामों एवं इसके अन्तर्गत राज्य के 11 जिले के कुल 96 प्रखण्डों के 937 पंचायतों के 7841 राजस्व ग्रामों एवं इसके अन्तर्गत राज्य के 11 जिले के कुल 96 प्रखण्डों के 937 पंचायतों के 7841 राजस्व ग्रामों एवं इसके अन्तर्गत राज्य के 11 जिले के कुल 96 प्रखण्डों के 937 पंचायतों के 7841 राजस्व ग्रामों एवं इसके अन्तर्गत आने वाले सभी गाँव, टोलों तथा बसावटों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है, आने वाले सभी गाँव, टोलों तथा बसावटों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है, जिनकी समेकित सूची अनुलग्नक अनुलग्नक अनुलग्नक अनुलग्नक आने वाले सभी गाँव, टोलों तथा बसावटों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है, आने वाले सभी गाँव, टोलों तथा बसावटों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है, 'क''क''क''क' पर संलग्न है।
2. सूखाग्रस्त जिलों के प्रभावित प्रखण्डों के प्रभावित पंचायतों/ग्रामों के सभी प्रभावित परिवारों को जिला पदाधिकारी की अनुशंसा पर विशेष सहायता के रूप में आनुग्रहिक राहत (GR) की राशि 3500 रुपये (तीन हजार पाँच सौ रुपये) प्रति परिवार की दर से PFMS के माध्यम से सीधे लाभुकों के बैंक खाते में अन्तरित (DBT) की जाएगी।
3. प्रतिवेदित जिलों में सुखाड़ से निपटने हेतु विशेष सहायता के रूप में दी जाने वाली आनुग्रहिक राहत (GR) की राशि का व्यय SDRF साहाय्य मानदर में अनुमान्य राशि तक राज्य आपदा रिस्पौंस कोष (SDRF) से तथा शेष राशि का व्यय राज्य निधि से किया जाएगा। इस प्रकार, राज्य आपदा रिस्पाैंंस कोष (SDRF) से 3360 रुपये तथा राज्य संसाधन से 140 रुपये (कुल 3500 रुपये) विकलनीय हाेंगे।
4. कृषि विभाग से कृषि इनपुट सब्सिडी का प्रस्ताव प्राप्त होने पर आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा कृषि विभाग को आवंटन दिया जाएगा।
5. कृषि विभाग के द्वारा आवश्यकतानुसार फसल की सुरक्षा एवं बचाव के लिए चलाई जा रही कृषि इनपुट के रूप में डीजल सब्सिडी की व्यवस्था एवं आकस्मिक फसल योजना को भी तेजी से कार्यान्वित किया जाएगा। 6. ऊर्जा विभाग के द्वारा कृषि एवं संबंधित अन्य कार्यों हेतु सुखाड़ से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
7. अनुश्रवणअनुश्रवणअनुश्रवणअनुश्रवण
क. जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में सुखाड़ साहाय्य कार्य चलाए जाएँगे। जिला पदाधिकारी के अधीन गठित टास्कफोर्स सुखाड़ से उत्पन्न स्थिति एवं इसके निवारण हेतु किए जा रहे प्रयासों का लगातार अनुश्रवण करेगा।
ख. राज्य मुख्यालय में आपदा प्रबंधन विभाग में राहत कार्य के अनुश्रवण हेतु गठित नियंत्रण कक्ष निरंतर क्रियाशील रहेगा।
ग. कृषि विभाग के द्वारा स्थिति का निरंतर अनुश्रवण एवं निगरानी की जाएगी।3 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू2द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू3द्ध;बपकरू4द्ध 1;बपकरू24द्ध ख्ःिं 2;बपकरू27द्ध22 घ. राज्य स्तर पर गठित आपातकालीन प्रबंधन समूह (Crisis Management Group) निरंतर क्रियाशील रहेगा तथा सुखाड़ग्रस्त जिलों में राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का सतत् अनुश्रवण करेगा।
8. इस वर्ष राज्य के कुछ जिलों के कुछ प्रखण्डों के गाँवों/टोलों/बसावटों में बाढ़ की स्थिति भी उत्पन्न हुई है बाढ़ के कारण उक्त क्षेत्रों में लगाए गए फसल का नुकसान हुआ है, जिसका सर्वेक्षण कराया जा रहा है। सर्वेक्षण के उपरान्त प्रभावित किसानों को आवश्यकतानुसार कृषि इनपुट सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।
9. उपर्युक्त के आलोक में संबंधित विभाग अपने-अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई कर आदेश निर्गत करेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से बिहार-राज्यपाल के आदेश से,,,, बिहार-राज्यपाल के आदेश से बिहार-राज्यपाल के आदेश से संजय कुमार अग्रवालसंजय कुमार अग्रवालसंजय कुमार अग्रवालसंजय कुमार अग्रवाल,,,, सचिव।सचिव।सचिव।सचिव।