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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 20 October 2022

Published 20 October 2022

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2022-10-20.886
Languages
English, Hindi

(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध

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28 ;बपकरू435द्ध 1944 ;0द्ध

(0 886) ए ;बपकरू232द्धए 20 ;बपकरू200द्ध 2022

सं॰ ૦૮ક્રુત્ત્jત્ત્sજ્ઞ્&૦૧&૨૯ક્૨૦૧૯ શ્રત્ત્૦જ્ઞ્દ્ય૦&૧૮૨૯૯ सामान्य प्रषासन विभाग ——— ladYi 13 vDrwcj 2022

श्री सुखदेव प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-662/11 (सम्प्रति सेवानिवृत्त), तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक के पद पर पदस्थापन काल में इन्दिरा आवास योजना के कार्यान्वयन में अनियमितता बरतने, जानबुझकर लापरवाही एवं कोताही बरतने तथा सरकारी राशि के दुर्विनियोग करने संबंधी आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा के पत्रांक-114 दिनांक 14.08.2019 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

जिला पदाधिकारी से प्राप्त आरोप पत्र को विभागीय स्तर पर पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-15416 दिनांक 14.11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी॰) के तहत श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। स्मारोंपरांत श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा। तदुपरांत पूरे मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत मामला माननीय लोकायुक्त द्वारा पारित आदेश से अच्छादित रहने के कारण विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6372 दिनांक-30.06.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी।

आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 647 दिनांक 02.04.2022 द्वारा जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 7054 दिनांक 11.05.2022 द्वारा श्री प्रसाद से अभ्यावेदन/लिखित अभिकथन की मांग की गयी। उक्त क्रम में श्री प्रसाद द्वारा अपना लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (दिनांक 24.05.2022) समर्पित किया गया।2 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 20 ;बपकरू200द्ध 2022 श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं उक्त जांच प्रतिवेदन पर श्री प्रसाद से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि जांच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री दास के विरूद्ध आरोपो को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष/मंतव्य में मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि श्री प्रसाद द्वारा तत्कालीन विभागीय आदेश को नजरअंदाज कर चयनित योजनाओं का भौतिक सत्यापन किये बिना ही द्वितीय किस्त का भुगतान कर दिया गया है, जिसके कारण कुल 32 योजनाएँ अपूर्ण रही है। तत्कालीन प्र0वि0पदा0 होने के नाते श्री प्रसाद का यह दायित्व था कि अपने क्षेत्राधीन सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक इंदिरा आवास योजना के सफलता हेतु चयनित योजनाओं का भौतिक सत्यापन के पश्चात्‌ ही राशि विमुक्त किया जाता तथा योजना अपूर्ण रहने की स्थिति में लाभुकों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई की जाती, परन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया है, जो सरकार की की महती योजना के प्रति उनकी उदासीनता, विभागीय नियमों की अनदेखी तथा स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा जॉंच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी, किसी भी सुनवाई की तिथि को उपस्थित नहीं हुए । आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 26.08.20 को अपना लिखित स्पष्टीकरण इस कार्यालय के स्तर पर उपलब्ध कराया गया । इसी क्रम में दिनांक 15.02.21 को आरोपित पदाधिकारी द्वारा Video Conferencing (Zoom App) तथा मोबाईल फोन के माध्यम से अपना पक्ष रखा गया है । परन्तु साक्ष्य परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु कतिपय बार सूचित करने के पश्चात्‌ भी आरोपित पदाधिकारी उपस्थित नहीं हुए। विभागीय पत्रांक-7054 दिनांक 11.05.22 द्वारा जॉंच प्रतिवेदन पर श्री प्रसाद से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की मॉंग की गयी। जिसके क्रम में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा जॉंच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में कुछ भी अंकित नहीं किया गया है, बल्कि मात्र यह उल्लेख किया गया है कि उनके विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43'बी' के तहत्‌ संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही गैर नियम, औचित्यविहीन एवं कालबाधित है। सरकार द्वारा बनाये गये नियम की अवहेलना, उपेक्षा एवं उसकी अनदेखी सही नहीं है, न ही ऐसा करने का अधिकार किसी को है । नियम-43'बी' के तहत्‌ संचालित विभागीय कार्यवाही में तय मापदंडों का अनुपालन नहीं किया गया है। अतएव विभागीय कार्यवाही समाप्त करते हुए सेवान्त लाभ का भुगतान किया जाय।

श्री प्रसाद से प्राप्त अभ्यावेदन पर सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि यह मामला मा0 लोकायुक्त से संबंधित है । कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-3/एम0-192/06 का0-3406 दिनांक 08.10.07 की कंडिका-3(iii) के अनुसार "लोकायुक्त के जॉंचाधीन, किन्तु सेवानिवृत्ति के मामलों में चूॅंकि लोकायुक्त के स्तर पर पूर्व से ही कार्रवाई शुरू कर दी गयी होती है, अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के अन्तर्गत निर्धारित चार साल की अवधि की शर्त्त लागू नहीं होगी । इस संबंध में इस विभाग के पत्रांक-3448 दिनांक 02.12.16 के तहत्‌ स्पष्ट किया जा चुका है कि चार वर्ष की गणना उस तिथि से की जायेगी, जब विभाग को संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध आरोप की जानकारी होती है । अतः लोकायुक्त के जॉंचाधीन मामलों में चार साल की शर्त्त लागू नहीं होगी।"

श्री प्रसाद के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोप का वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 है। मा0 लोकायुक्त के न्यायालय में यह मामला वर्ष 2012 से जॉंचाधीन था । श्री प्रसाद दिनांक 31.10.16 को सेवानिवृत्त हुए । उक्त नियमावली से स्पष्ट है कि इस मामले में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत्‌ चार वर्ष की निर्धारित समय-सीमा लागू नहीं3 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 20 ;बपकरू200द्ध 2022 होगी, क्योंकि श्री प्रसाद के विरुद्ध मा0 लोकायुक्त के न्यायालय में मामला वर्ष 2012 से चल रहा था एवं विभाग को इसकी जानकारी वर्ष 2019 में हुई।

श्री प्रसाद द्वारा अपने लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया है तथा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत्‌ उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही का संचालन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-3/एम0-192/06 का0-3406 दिनांक 08.10.07 की कंडिका-3(iii) के आलोक में किया गया है।

अतएव श्री प्रसाद द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत्‌ उनके ''पेंशन से 5ः राशि की कटौती दो वर्षो तक करने" का दंड संसूचित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित उक्त दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 9716 दिनांक 16.06.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग की दिनांक 06.09. 2022 को आहूत पूर्ण पीठ की बैठक में श्री प्रसाद के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित उक्त दंड प्रस्ताव (यथा पेंशन से 05 (पांच) प्रतिशत राशि की कटौती दो वर्षो तक करने) पर सहमति व्यक्त किया गया। उक्त मंतव्य/सहमति बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2391 दिनांक 26.09.2022 द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुखदेव प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-662/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को प्रमाणित आरोपो के लिए बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी0) के संगत प्रावधानों के तहत पेंशन से 05 (पांच) प्रतिशत राशि की कटौती दो वर्षो तक करने का दंड अधिरोपित/संसूचित किया जाता है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में

प्रकाशित किया जाय तथा सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, सरकार के अवर सचिव।

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Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 20 October 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2022-10-20.886/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2022-10-20.886.