िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 11 कार्तिक 1944 (श0) सं(cid:201)या 44 पटना, बुधवार, ———————— 2 नवम्बर 2022 (ई0)
विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-4 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
---
भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।
---
भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 5-44 पूरक
---
पूरक-क 45-452 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
—————
सामान्य प्रशासन विभाग
-----
अधिसूचनाएं
18 जुलाई 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0-12080--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में संसूचित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को सीवान जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला दंडाधिकारी, सीवान क े ज्ञापांक-1302 दिनांक 07.07.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 10.07.2022 एवं 11.07.2022 | बकरीद के अवसर पर विधि व्यवस्था | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | सीवान |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
-----
11 अगस्त 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0-14080--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को औरंगाबाद जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी (स0स0)-सह-जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के पत्रांक-5349 दिनांक 18. 07.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | मत्स्यजीवी सहयोग समिति निर्वाचन, 2022 मतदान कार्य अवधि हेतु | मत्स्यजीवी सहयोग समिति निर्वाचन, 2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | औरंगाबाद |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।3 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022
29 जुलाई 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0-13038--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को सहरसा जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला दण्डाधिकारी, सहरसा के पत्रांक-72-1 सप्रत्र दिनांक 14.07.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 19.07.2022 | बिहार मत्स्यजीवी सहयोग समिति प्रबंधारिणी निर्वाचन, 2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | सहरसा |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
-----
24 अगस्त 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0-14766--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को औरंगाबाद जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
अनुसूची
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला दण्डाधिकारी, औरंगाबाद क े ज्ञापांक-1973 दिनांक 04.08.2022 के संलग्न परिशिष्ट-''क'' में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 08.08.2022 से 10.08.2022 अथवा स्थिति सामान्य होने तक | विधि व्यवस्था | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | औरंगाबाद |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
-----
14 अक्तूबर 2022
सं0 12/छु0(मू0को0)-20001/16 सा0प्र0-18464--श्री अनुग्रह नारायण सिंह, बि0प्र0से0 (को0 क्र0-746/19), जिला पंचायत राज पदाधिकारी, समस्तीपुर के द्वारा उनके प्रथम संतान क जन्म हेतु दिनांक-11.05.2021 से दिनांक-25.05. 2021 तक कुल-15 (पन्द्रह)दिनों का उपभोग किये गये अवकाश को वित्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2498, दिनांक-12.04.
4(cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 2007 एवं वित्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1187, दिनांक-10.02.2011 के आलोक में पितृत्व अवकाष के रूप में घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल क आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव।
------
गृह विभाग (विषेष शाखा)
------
अधिसूचना
28 अक्तूबर 2022
सं॰ एल/एच॰जी॰-14-19/2019-12091--महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा का कार्यालय, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना के पत्रांक-5364, दिनांक-07.10.2022 द्वारा प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में विभागीय आदेश सं॰-11714, दिनांक-17.10.2022 के द्वारा श्री अनुज कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, खगड़िया को दिनांक-02.11.2022 से 31.12.2022 तक कुल 60 (साठ) दिनों का उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की गयी है। 2. श्री अनुज कुमार के स्वीकृत उपार्जित अवकाश की उक्त अवधि के दौरान श्री मनीष कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, बेगूसराय को जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, खगड़िया का अतिरिक्त प्रभार प्रदान किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।
------
गृह विभाग
(विषेष शाखा)
------
आदेश
17 अक्तूबर 2022
सं॰ एल/एच॰जी॰-14-19/2019-11714--महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा का कार्यालय, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना के पत्रांक-5364, दिनांक-07.10.2022 द्वारा प्राप्त प्रस्ताव एवं विा (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1013(23), दिनांक-08.09.2022 द्वारा प्रतिवेदित अवकाश आदेयता के आलोक में श्री अनुज कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, खगड़िया को बिहार सेवा संहिता के नियम-227, 230 एवं 248(क) के तहत दिनांक-02.11.2022 से 31.12.2022 तक कुल 60 (साठ) दिनों का उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. इस आदेश में अपर मुख्य सचिव का अनुमोदन प्राप्त है।
आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।
------ गन्ना उद्योग विभाग ----- 25 अक्तूबर 2022 प्रभार प्रतिवेदन सं0 1951--अधोहस्ताक्षरी मैं, गिरिवर दयाल सिंह, भा॰प्र॰से॰ (2008), ईखायुक्त, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना उपार्जित अवकाष (दिनांक-08.10.2022 से 24.10.2022 तक) का उपभोग करने के उपरांत दिनांक-25.10.2022 के पूर्वाहन से ईखायुक्त, बिहार का पदभार ग्रहण करता हूँ। (सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/ अ॰-04/2010-सा॰प्र॰- 17157 दिनांक-20. 09.2022 द्रष्टव्य)। ह॰/-अस्पष्ट, भारमुक्त पदाधिकारी।
ह॰/-अस्पष्ट, भारग्राही पदाधिकारी।
आदेश से, (ह॰)/अस्पष्ट, अवर सचिव।
—————
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 33—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
5 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
—————
lwpuk
&&&&&&&
No. 1186---I, Nilofer Imam W/o Syed Masrooque Alam R/o- Flat No. – 205, Silver Nargis Residency, Khajpura Baily Road Near Shiv Mandir Rukanpura, Patna Bihar 800014 declare vide affidavit No. 21671 dated 15.09.2022 do solemnly declare that in my Daughter's Mahewash Mariyam Alam Original Certificate Vide Registration No.- P615/08240/0390, Roll No- 7157934 My name has been wrongly mentioned as Nilofer Alam but my correct name is Nilofer Imam.
Nilofer Imam.
&&&&&&& बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद् विद्यापति मार्ग, पटना-800001 ------ अधिसूचनाएं 18 अप्रील 2022
सं0 142--झखड़ा मठ, ग्राम-झखड़ा, पोस्ट वो थाना-पिपराकोठी, जिला-पूर्वी चम्पारण पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 130 है।
दिनांक 11.10.2021 को ग्रामीण मौजे लाल साह द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि झखड़ा मठ की भूमि को बाबा टेकमल दास द्वारा अवैध रूप से असामाजिक तत्वों को हस्तानान्तरण किया जा रहा है। पर्षद की निबंधन रजिस्टर से स्पष्ट होता है कि उक्त मठ को सार्वजनिक धार्मिक न्यास पाते हुए इसका निबंधन किया गया है, जिसकी निबंधन संख्या-130 है। निबंधन के समय इसके महंत श्री टहल दास जी थे, जिसमें 12 बीघा लगभग जमीन का उल्लेख किया था। इस मठ के संस्थापक महाराजा चैन साह, बेतिया राज द्वारा भूमि दान देकर की गयी है। एक अन्य ग्रामीण सूधीर कुमार ंिसंह द्वारा दिनांक 25.11.2021 को प्रार्थना पत्र दिया गया और कथन किया गया कि उक्त मठ में लगभग 42 ए0 जमीन है तथा वर्ष 1988 में जो समिति का गठन किया गया था, उसमें आवेदक उसमें सचिव थे और अध्यक्ष, अंचलाधिकारी थे तथा अधिकांष सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है और कुछ व्यक्तियों के नामों को उल्लेख किया जो वर्त्तमान में मठ की देख-भाल करते है। साथ ही खतियान की प्रति दाखिल की गयी, जिसमें थाना नं0-211 खाता नं0-398 की कुल 12 खेसरा में कुल 11 बी 10 क0 03 धुर जमीन का उल्लेख है।
अंचलाधिकारी द्वारा उक्त मठ की व्यवस्था हेतु नयी न्यास समिति हेतु 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव जिला पदाधिकारी को भेजा और उक्त प्रस्ताव की एक प्रति जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण ने अपने पत्र दिनांक 12.03.2022 द्वारा पर्षद को उपलब्ध कराया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि उक्त मठ की व्यवस्था हेतु एक आमसभा की बैठक दिनांक 21. 01.2022 को किया गया था, जिसमें प्रस्ताव संख्या-2 के रूप में 09 सदस्यों के नामों का प्रस्ताव पास हुआ है और प्रस्तावित व्यक्तियों में से किसी के द्वारा मठ की भूमि का अतिक्रमण नहीं किया गया है और न ही प्रस्तावित व्यक्तियों के विरूद्ध किसी प्रकार का कोई आपराधिक पृष्ठभूमि है, जैसा की अंचलाधिकारी के पत्र दिनांक 11.03.2022 के साथ संबंधित थाना की रिपोर्ट प्रस्तावित व्यक्तियों के चरित्र सत्यापन रिपोर्ट संलग्न है।
चूंकि पिछले कई वर्षो से उपरोक्त मठ के संबंध में किसी प्रकार का कोई सूचना पूर्व न्यास समिति सदस्यों द्वारा कभी नहीं दी गयी है और न ही किसी प्रकार का कोई पत्राचार, आय-व्यय विवरण, बजट आदि दाखिल किया है और मठ की भूमि के अतिक्रमण की सूचना प्राप्त हो रही है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त मठ की नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग तथा परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु जिला पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों की न्यास समिति गठन किया जाता है। बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक नवीन न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए झखड़ा मठ, ग्राम-झखड़ा, पोस्ट6 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 वो थाना-पिपराकोठी, जिला-पूर्वी चम्पारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए 10 सदस्यीय न्यास समिति का गठन आदेष दिनांक 15. 03.2022 के आलोक में की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''झखड़ा मठ, ग्राम-झखड़ा, पोस्ट वो थाना-पिपराकोठी, जिला-पूर्वी चम्पारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''झखड़ा मठ, ग्राम-झखड़ा, पोस्ट वो थाना-पिपराकोठी, जिला-पूर्वी चम्पारण न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण - पदेन अध्यक्ष 2. श्री संतोष कुमार शर्मा, पुत्र चौधरी केदार नाथ शर्मा - उपाध्यक्ष 3. श्री सुधिर कुमार सिंह, पुत्र स्व0 रामएकबाल सिंह - सचिव 4. श्री गौरीषंकर साह, पुत्र स्व गोरख साह - कोषाध्यक्ष 5. श्री योगी मांझी, पुत्र श्री ज्योति माँझी - सदस्य 6. श्री लक्ष्मीलाल सहनी, पुत्र श्री प्रसाद सहनी - सदस्य 7. श्री जगरनाथ प्रसाद यादव, पुत्र स्व0 देवनन्दन प्रसाद यादव - सदस्य 8. श्री कर्पुरी ठाकुर, पुत्र स्व0 रामाश्रय ठाकुर - सदस्य 9. श्री लखिचन महतो, पुत्र स्व0 बाबुलाल महतो - सदस्य 10. श्री मुकेष ठाकुर, पुत्र स्व0 सुन्दरदेव ठाकुर - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में न्यास के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (झखड़ा मठ, ग्राम-झखड़ा, पोस्ट वो थाना-पिपराकोठी, जिला-पूर्वी चम्पारण) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।7 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 उपरोक्त न्यास समिति का गठन पाँच वर्ष के लिए किया जाता है जो अधिसूचना पर हस्ताक्षर की तिथि से मान्य होगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
29 मार्च 2022
सं0 5750--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (बौसी मठ) ग्राम- बौसी, पो0थाना- रानीगंज, जिला- अररिया पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या- 4480/2018 है। इस न्यास की संचिका पर्षद में वर्ष 1985 से संधारित है। इस में में कुल 34.19 एकड़ भूमि है। उक्त न्यास के निमित पूजा-पाठ, राग-भोग आदि कार्य बहुत पूर्व समय से ही श्री उमल दास द्वारा की जाती रही है। उनके द्वारा पर्षद में समय-समय पर उक्त मठ की भूमि की सुरक्षा, अतिक्रमण से मुक्त कराने के संबंध में बराबर पत्राचार किया जाता रहा है। अंचल अधिकारी, रानीगंज के पत्रांक- 2110, दिनांक- 31.12.2003 में उल्लेख किया गया था कि न्यास की भूमि में से 2.1 एकड़ सिकमी है, 3.5 एकड़ में पेड़ और मठ है तथा 2.30 एकड़ जमीन में रैयत बसे है। शेष 26.38 एकड़ भूमि की बंदोबस्ती की गयी है। उक्त रिपोर्ट में वर्ष 1988-89 से 1992-93 में बंदोबस्ती से हुयी आय का उल्लेख किया गया है। चूंकि प्रारंभ से ही मठ की भूमि पर बंदोबस्ती आदि अंचल अधिकारी द्वारा अनुमंडकल पदाधिकारी की देख-रेख में की जाती रही है तथा री उमल दास को पूजा-पाठ, राग-भोग, प्रसाद आदि के लिए समय-समय पर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा ही राषि निर्धारित कर भुगतान किया जाता रहा है। पर्षदीय पत्रांक- 2354 दिनांक- 19.08.2006 द्वारा अंचलाधिकारी, रानीगंज से उक्त मठ की पिछले वर्ष हुई आमदनी का खर्च आदि के विवरण की मांग की गयीं अंचलाधिकारी ने रिपोर्ट पत्रांक- 809 दिनांक- 12.09.2006 द्वारा सूचित किया कि वर्ष 2006-07 में जमीन की बंदोबस्ती से राषि 27,110/-रूपयें तथा वर्ष 1991- 92 से 2005-06 की अवधि में मंदिर की कुल भूमि की बंदोबस्ती से कुल राषि 256,352/- रूपयें प्राप्त हुआ था जिमममें 95,042/-रू0 विभिन्न मदों पूजा-पाठ आदि में खर्च किया गया है और शेष राषि 161,909 रूपयें खाते में जमा है। अंचल पदाधिकारी ने पत्रांक- 1419 दिनांक- 19.12.1985 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया को यह सूचित किया कि उक्त मठ की बंदोबस्ती आदि अंचल अधिकारी के स्तर से की जाती है और उक्त राषि उनके पास सुरक्षित है। अंचलाधिकारी, रानीगंज ने पत्रांक- 1381 दिनांक- 02.08.2017 द्वारा पर्षद को सूचित किया कि 33 एकड़ भूमि में से 28 एकड़ भूमि पर प्रति एकड़ 2000/- रूपयें की दर से अस्थायी बंदोबस्ती की जाती है तथा पुजारी को मानदेय 900/- रूपयें की दर से भुगतान किया जाता है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों का उल्लेख करते हुए पर्षद द्वारा दिनांक- 25.01.2020 को एक विस्तृत आदेष पारित किया गया था कि मंदिर की भूमि काी बंदोबस्ती अंिचल अधिकारी द्वारा की जाती है और बंदोबस्ती कीर राषि अपने पास सुरक्षित रखी जाती है, जबकि उमल दास द्वारा बार-बार यह षिकायत की जा रही थी कि मंदिर की स्थिति जर्जर होती जा रही है और मंदिर की मरम्मती, रंगाई-पोताई आदि किसी प्रकार का कार्य नहींकिया जा रहा है। इस संबंध में में वर्ष 2017 से 2020 तक 05 निबंधित डाक द्वारा अंचल अधिकारी को पत्र लिखकर जवाब की मांग की गयी थी कि मंदिर की मरम्मती आदि का कार्य क्यों नहीं किया जा रहा है चूंकि आपके पास पर्याप्त राषि बंदोबस्ती से प्राप्त होती है और उसका विवरण भी वर्ष 2006-07 के बाद से नहीं दिया गया है। वर्णित तथ्यों के आलोक में पर्षदीय आदेष पत्रांक- 2716 दिनांक- 07.02.2020 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया को न्यास का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। साथ ही पर्षदीय पत्रांक- 2794 दिनांक- 11.02.2020 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया से मठ की व्यवस्था हेतु अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव मांगा गया तथा मंदिर के पवुजारी श्री उमल दास को 2000/- रू0 पारिश्रमिक तथा पूजा-पाठ हेतु भुगतान करनते का भी निर्देष दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया ने अपने पत्रांक- 955 दिनांक- 20.11.2021 पर्षद को प्रेषित किया जिसमें उल्लेख किया कि मठ में कुल 34.19 एकड़ जमीन है जिसमें 02.00 डि0 भूमि सिकमी है, 3.50डी0 में बाग तथा मठ है, 2.30 डी में रैयत बसे हुए है, शेष 26.38 डी0 जमीन अस्थायी बंदोबस्ती की गई है। यह भी उल्लेख किया कि उक्त मठ में 343,356/- रू0 रोकड़ बही में दर्ज है। साथ ही मठ के संचालन हेतु ग्रामीणों द्वारा एक बैठक दिनांक- 18.11.2021 को पारित प्रस्ताव जिसमें 21 व्यक्तियों के नाम प्रस्तावित कर भेजा है। पुजारी उमल दास द्वास द्वारा पर्षद में एक प्रार्थना पत्र दिनांक- 02.08.2016 को दाखिल किया गया था जिसमें मंदिर की भूमि की मालगुजारी रसीद तथा 07 व्यक्तियों की सूची दाखिल की थी जिनके नाम क्रमषः हैं- 1. फूचकन चौधरी, 2. बनवारी चौधरी, 3. छोटी कॉठ, 4. श्री नगर डोढ़ी, 5. मैनी मोसमात, 6. शीतल चौबें, 7. जनक सिंह सिपाही द्वारा मंदिर में कुल 33 एकड़ 46 डि0 जमीन दान किया गया है। अतः पर्षद के माननीय सदस्य महंत विजय शंकर गिरि की उपस्थिति में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43(द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-25.02.2022 द्वारा ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (बौसी मठ), ग्राम- बौसी, पो0थाना- रानीगंंज, जिला- अररिया''के सुचारू प्रबंधन एवं सर्वांगीण विकास हेतु निम्नलिखित योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसके कार्यान्वय एवं संचालन हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया एवं श्री उमल दास द्वारा दिये गये नामों की सूची पर विचारोपरान्त मंदिर में नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग एवं न्यास भूमि की सुरक्षा के लिए एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए किया जाता है।8 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 योजना 1. अधिनियम की धारा 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामजानकी ठाकुरबाड़ी (बौसी मठ), ग्राम- बौसी, पो0थाना- रानीगंज, जिला- अररिया'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (बौसी मठ), ग्राम- बौसी, पो0थाना- रानीगंज, जिला- अररिया न्यास समिति'' होगा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने बंधक रखने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर ली जाय। साथ ही न्यास समितिके सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जायेगी। 3. न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
4. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा और आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा। 5. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 6. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन करता है तो उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा। इसी प्रकार न्यास समिति को मंदिर के विकास या संरचना मद में 10 लाख रूपयें या उससे अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उस अनुमानित खर्च का विवरणी प्रस्तुत कर पूर्वानुमति न्यास समिति को पर्षद से प्राप्त करना अनिवार्य है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी इसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी।
7. न्यास समिति अधिनिम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालने करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त एवं पर्षद शुल्कआदि ससमय सम्यक् रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी।
8. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित करेंगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
9. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
10. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्त्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित हाेंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अहर्ता स्वतः समाप्त हो जागेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित 07 सदस्यों की न्यास समिति को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठन किया जाता है :- 01. अनुमंडल पदाधिकारी, अररिया - पदेन अध्यक्ष 02. श्री अनिल कुमार चौधरी, पिता- सत्यदेव चौधरी - उपाध्यक्ष 03. श्री रामानंद चौबे, पिता- श्री सत्यनारायण चौबे - सचिव 04. श्री अषोक मंडल, पिता- श्री उमल दास - कोषाध्यक्ष 05. श्री जनक सिंह सिपाही - सदस्य 06. श्री पवन कुमार पासवान - सदस्य 07. श्री सच्चिदानंद विष्वास, पिता- स्व0 कृत्यानंद विष्वास - सदस्य
उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (बौसी मठ), ग्राम- बौसी, पो0थाना- रानीगंज, जिला- अररिया, के नाम में किसी प्रकार से कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति के पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदिपर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्रूास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
8 जून 2022
सं0 913--श्री ललित धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना-सिंहेष्वर, जिला-मधेपुरा,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3671है।
उक्त धर्मषाला की देख-रेख एक न्यास समिति द्वारा की जा रही थी, जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसी बीच पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि उक्त धर्मषाला की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है, जिसमेें अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा9 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 अपने प्रतिवेदन पत्रांक- 642, दि॰- 09/12/20 को पषर्द को समर्पित की थी, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि एन॰एच॰- 107 पर मुख्य बाजार में धर्मषाला अवस्थित है, जिसका निर्माण वर्ष 1977 र्ईं में किया गया था, जिसमें 13 कमरें और 17 दुकानें हैं और धर्मषाला की कुल 210 फीट लम्बा और 106 फीट चौड़ा है। आगे उल्लेख किया है कि धर्मषाला की स्थिति जर्जर है और कुछ कमरों की छत कभी भी गिर सकती है, जान-माल का नुकसान हो सकता है तथा अपने प्रतिवेदन के समर्थन में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी ने कार्यपालक अभिलंता एन॰आर॰ई॰पी॰ के प्रतिवेदन पत्रांक- 49, दि॰- 08/08/06 समर्पित किया है, जिसमें जांच के क्रम में स्थिति खराब होने का उल्लेख किया गया है तथा उल्लेख किया है कि छत का सिलिंग प्लास्टर गिर गया है। छत का जंग लगा हुआ छड़़ भी दिखाई देता है और किसी भी समय दुकान गिर सकता है, दुर्घटना हो सकती है। आगे यह भी उल्लेख किया गया था कि कमरें और दुकानों की आय-व्यय विवरणी का निरीक्षण नहीं कराया गया है तथा दुकानों के आगे बरामदा जो एन॰एच॰- 107 की तरफ खुलती है तथा कथन किया कि उक्त दुकानों का किराया भी 03 से 04 हजार रू॰ वर्तमान बाजार दर होना चाहिए, जबकि समिति को मात्र 375 रू॰ मासिक किराया प्राप्त होता है। आगे यह भी अनुषंसा किया कि धर्मषाला का जीर्णोद्धार आवष्यक है। छत कभी भी गिर सकता है और प्रतिवेदन के समय न्यास के खाता में लगभग 10 लाख रू॰ जमा है। सभी दुकानदारों से यदि अग्रिम के रूप में कुछ राषि प्राप्त की जाय, तो लाखों रू॰ प्राप्त हो सकते हैं और उन्हीं दुकानों के उपर तले पर भी दुकान बनवा दिया जाय तो कई गुणा राषि मिल सकती है, जिसमें दुकानों का जीर्णोद्धार किया जा सकता है तथा दुकानों का किराया भी कम-से-कम 03 हजार रू॰ मासिक बताया है, होना चाहिए।
उपरोक्त प्रतिवेदन के बावजूद भी कुछ कारण व परिस्थितिवष कोई आदेष पर्षद द्वारा पारित नहीं किया गया, इसी बीच दि॰- 17/08/15 को न्यास समिति के सचिव, श्री अषोक कुमार द्वारा एक प्रार्थना-पत्र समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया कि उक्त धर्मषाला की आय का स्रोत यात्री भाड़ा और दुकान भाड़ा है। वर्तमान में धर्मषाला बिल्कुल क्षतिग्रस्त हो गया है। कोई यात्री ठहरने नहीं आते हैं और बैठक दि॰- 23/10/13 को निर्णय लिया गया कि उसका जीर्णोद्धार कराया जाय। इस संबंध में पर्षद को पत्र दि॰- 26/07/14 को भेजा गया और स्थानीय अभियंता द्वारा जीर्णोद्धार का प्राक्कलन भी मंगाया गया तथा उक्त पत्र में उल्लेख किया गया है कि धर्मषाला के नाम पर 17 लाख रू॰ जमा है और अपने पत्र के साथ भवन के जीर्णोद्धार हेतु प्राक्कलन राषि की प्रति तथा बैठक की प्रति भी समर्पित की है। पुनः दि॰- 09/11/17 को एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त धर्मषाला पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है। यात्रियों का ठहरना बंद है। चूंकि छत का एक भाग टृट कर गिर चुका है और कभी भी दुघर्टना हो सकता है। अतः उल्लेख किया कि धर्मषाला के खाता में 18,42,000/- रू॰ जमा है और प्राक्कलन के अनुसार जीर्णोद्धार में लगभग 55 लाख रू॰ वर्ष 2013 में बताया गया था, जो महंगाई के कारण कुछ बढ़ चुकी है।
इसी बीच राजेष कुमार भगत व कुछ अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुआ कि वर्ष 1975 में धर्मषाला का निर्माण किया गया था, जिसमें सभी स्थानीय समाज के लोगों ने सहयोग दिया था और वर्तमान में धर्मषाला की आर्थित क्षति और पूर्ण रूप से दयनीय स्थिति है तथा न्यास समिति के सदस्यों को धर्मषाला के विकास की कोई चिंता नहीं है। आगे उल्लेख किया कि न्यास समिति ने दुकान सं॰- 10 वर्ष 1976 में सुषीला देवी के नाम से आवंटन किया गया था और वर्ष 2013 में सचिव द्वारा उक्त दुकान को साजिष कर अपने परिचित के नाम से दुकान किराया की रसीद जारी कर दिया है तथा प्रार्थना किया कि उसकी जांच करायी जाय तथा वर्तमान न्यास समिति के उपाध्यक्ष, सचिव, सदस्यगण को मुक्त कर एक नयी न्यास समिति का गठन किया जाये। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी से उपरोक्त पत्र संलग्न करते हुए तथा नयी न्यास समिति गठन किये जाने के संबंध में दि॰- 27/02/21, दि॰- 27/03/21, दि॰- 15/09/21 को उनसे नामों की मांग तथा अपने मंतव्य की मांग की गयी, उपरोक्त पत्र के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 2787, दि॰- 18/11/21 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया। उपरोक्त प्रस्तावित नामों के विरूद्ध राजेष कुमार भगत व कुछ अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दि॰- 04/01/22 को पर्षद में प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया कि धर्मषाला की दयनीय स्थिति के कारण का मुख्य श्रेय सचिव, अषोक भगत का है और उनके नाम की ही अनुषंसा अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा पुनः की गयी है, जो उचित नहीं है। आगे उल्लेख किया गया कि अनुमंडल पदाधिकारी, मधेपुरा के अतिरिक्त किसी अन्य पदाधिकारी को जो स्वच्छ छवि के हों, से नामों की मांग की जाय। उपरोक्त षिकायत-पत्र को पुनः अनुमंडल पदाधिकारी के पास भेजते हुये उस पर उनका मंतव्य और प्रस्तावित नामों में कोई संषोधन आवष्यक हो, तो करके भेजने के लिए दि॰- 12/02/22 को पत्र लिखा गया, जिस पर विचारोपरांत अनुमंडल पदाधिकारी ने अपना प्रस्ताव पत्रांक- 1216, दि॰- 01/02/22 द्वारा पर्षद को भेजा, जिसमें उल्लेख किया है कि दुकान नं॰- 10 में सुषीला देवी ने उसे अन्य व्यक्ति को किराया पर दे दिया है। इसके प्रतिउत्तर में राजेष कुमार भगत का कथन है कि वर्ष 1976 में दुकान नं॰- 10 तत्कालीन समिति द्वारा प्रार्थी की माँ श्रीमति सुषीला देवी का स्वर्गवास हो चुका है और दि॰- 10/06/95 को प्रार्थी राजेष भगत ने उक्त दुकान पर प्रभुनाथ भगत के साथ कपड़े का व्यवसाय करने के संबंध में साझेदारीनामा किया था और उक्त साझेदारीनामा की प्रति प्रार्थी द्वारा समर्पित की गयी, जो 3 के स्टांप पर अंकित है। उक्त साझेदारीनामा साझेदारी अधिनियम के अन्तर्गत न तो निबंधित है और न उक्त साझेदारीनामा धर्मषाला के दुकान नं॰- 10 की किरायेदार सुषीला देवी द्वारा निष्पादित किया गया है तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ दि॰- 21/02/19 को नोटरी द्वारा प्रमाणित एक शपथ-पत्र समर्पित किया, जिसमें सुषीला देवी द्वारा उल्लेख किया गया कि उपरोक्त दुकान नं॰- 10 पर उनके पुत्र भगत कपड़े का व्यवसाय करते हैं तथा कथन किया कि किराया का भुगतान रसीद इसी पुत्र के नाम से किया जायेगा। उक्त शपथ-पत्र में साझेदार इकरारनामा या साझेदार के व्यवसाय करने का कोई उल्लेख नहीं किया है। आगे कथन करते हैं कि वर्ष 2013 से लगातार निबंधित द्वारा न्यास समिति के सचिव से पत्राचार तथा उपराक्त कागजात भेजे गये, परंतु उनके द्वारा लेने से10 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 अस्वीकार किया गया और सब वापस प्राप्त हुआ तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ वर्ष 2010 तक 1100/- रू॰ प्रतिमाह के रूप में जमा किये गये किराया की 2 रसीद भी समर्पित की।
जबकि इसके विपरित न्यास समिति के सचिव का कथन है कि उक्त दुकानदार सुषीला देवी के 3 पुत्र हैं और तीनों पुत्रों द्वारा दुकान का दावा किया जा रहा है और चुंकि किरायेदार की मृत्यु हो चुकी है, उनकी कोई पैत्रिक सम्पत्ति नहीं है। आगे कथन करते हैं कि न्यास समिति की बैठक दि॰- 23/10/13 में प्रस्ताव पास किया गया था कि धर्मषाला की पूर्ण रूप से मरम्मत की आवष्यकता है तथा दुकानों का किराया जो 275/- रू॰ कम है, उसे सभी दुकानदारों से समझौता के आधार पर 1,000/- रू॰ प्रतिमाह के दर से तय किया गया, जिसमें यह भी प्रस्ताव पास किया गया कि उक्त सूचनायें सभी दुकानदारों को दी जाय तथा कार्यालय या बैंक जमा पर्ची के साथ किराया की राषि जमा करें। आगे समिति के उपाध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव दिया गया कि बहुत से दुकानदार अपने नाम से दुकान को दुसरे के नाम सबलेट कर चुके हैं, जिस पर विचारोपरांत यह निर्णय लिया गया कि ''ऐसे दुकानदारों से जो वर्तमान में दुकान कर रहे हैं, उनसे कुल अग्रिम राषि व बकाया जमा करा कर शपथ-पत्र व एकरारनामा बनाकर दुकान आवंटित कर दिया जाय, जिसकी स्वीकृति सर्वसम्मति से दी गयी। धर्मषाला के उन दुकानदारों से जिन्होंने अपना दुकान दूसरे को भाड़ा पर लगाया है। उन दुकानदारों से उस माह से आज तक का भाड़ा नये दर से वसूल किया जाय।
उपरोक्त सभी तथ्योें से स्पष्ट होता है कि अनुमंडल पदाधिकारी, द्वारा प्रस्तावित नामों के विरूद्ध जो राजेष भगत द्वारा षिकायत किया गया, वह केवल सचिव के विरूद्ध है तथा अन्य कोई स्पष्ट आरोप सचिव के विरूद्ध नहीं है, बल्कि उनका आरोप केवल यह है कि जो वर्ष 2013 में जो प्रस्ताव पास किया गया; उसकी सूचना उनको नहीं प्रदान की गयी और प्रभुदयाल भगत से ही किराया की राषि ली जा रही है, जो स्पष्ट करता है कि वर्ष 2013 से षिकायतकर्त्ता का कब्जा उक्त दुकान पर नहीं है और चूंकि कार्यपालक अभियंता तथा अनुमंडल पदाधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि धर्मषाला और दुकान पूर्ण रूप से जर्जर हो चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं तथा कोई भी दुघर्टना हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में उसका जीर्णोद्धार भी किया जाना आवष्यक है। प्रस्तावित नामों के विरूद्ध कोई और आरोप नहीं होने के कारण तथा वर्तमान में भी मंदिर / धर्मषाला के खाता में लगभग 26,00,000/- रू॰ की राषि जमा है, जो स्पष्ट करता है कि किराया की राषि का समिति के सदस्यों द्वारा दुरूपयोग नहीं किया गया है, बल्कि वह खाता में सुरक्षित है।
उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से करने तथा धर्मषाला संचालन जीर्णोद्धार, मरम्मति आदि हेतु एक योजना का निरूपण करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीयआदेष दिनांक-02/05/2022 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री ललित धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना- सिंहेष्वर, जिला- मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री ललित धर्मषाला न्यास योजना, ग्रामपोस्टथाना- सिंहेष्वर, जिला- मधेपुरा होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री ललित धर्मषाला न्यास समिति, ग्रामपोस्टथाना- सिंहेष्वर, जिला- मधेपुरा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।11 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समितिअस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, मधेपुरा - अध्यक्ष। 2. श्री अषोक कुमार भगत - सचिव। 3. श्री विष्वनाथ प्राणसुखा - उपाध्यक्ष। 4. श्री राजेष कुमार सर्राफ - कोषाध्यक्ष। 5. श्री मनीष सरार्फ पिता- स्व॰ विमल कुमार सरार्फ - सदस्य। 6. श्री राजीव कुमार बबलू - सदस्य। 7. श्री बजरंग टेकरीवाल - सदस्य। 8. श्री मुकेष कुमार पिता- श्री उपेन्द्र नारायण यादव - सदस्य। 9. श्री लखन मंंडल पिता- स्व॰ नकछेदी मंडल - सदस्य। 10. श्री गंगा दास तांती - सदस्य। 11. श्री चंदन राम - सदस्य। पता-श्री ललित धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना- सिंहेष्वर, जिला- मधेपुरा। उक्त आदेष के आलोक मेेंश्री ललित धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना- सिंहेष्वर, जिला- मधेपुराके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
26 मई 2022
सं0 737--श्री राम जानकी मन्दिर, सिंघिया बुजुर्ग (उत्तर), जिला-समस्तीपुर,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3632/2005है।
उक्त मन्दिर को निजी होने का दावा इंजिनियर श्री मदन गोपाल द्वारा किया जाने लगा। इस संबंध में इनको लगभग 25 तिथियों की नोटिस जारी की गयी और प्रत्येक तिथि पर ये कतिपय कारणों से समय की मांग करते रहे है और निजी होने के दावे के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई साक्ष्य / प्रमाण दाखिल नहीं किया। जबकि पत्राचार पर उपलब्ध खतियान की प्रति, अंचलाधिकारी की प्रतिवेदन तथा सुनवाई के उपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक- 01/11/2021 द्वारा इंजिनियर मदन गोपाल को अंतिम अवसर देते हुए दिनांक- 31/01/2022 की तिथि निर्धारित की गयी। उक्त आदेष में पत्राचार पर उपलब्ध सभी दस्तावेजों की विस्तृत रूप से चर्चा की गयी। दिनांक- 31/01/2022 को जानबुझकर उपस्थित नहीं हुए और पिछले लगभग 12-15 वर्षो से मामले का लम्बित करते हुए मन्दिर में स्थित दुकान आदि से अवैध रूप से किराये की वसूल मदन गोपाल द्वारा की जाती रही है। इस बिन्दु पर ग्रामीणों में काफी आक्रोष था और पूर्व पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति द्वारा भी किराया आदि पर रोक लगाये जाने के संबंध में तथा मन्दिर में शांति व्यवस्था और धार्मिक व्यवस्था के संबंध में आदेष पारित करने के लिए बार-बार आग्रह किया जाता रहा है।
पर्षद द्वारा एक न्यास समिति का गठन किये जाने हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी से नामों की मांग की गयी। संचिका पर अनुमण्डल पदाधिकारी की रिपोर्ट दिनांक- 13/02/2008, अंचलाधिकारी की रिपोर्ट दिनांक- 19/06/2005 जिसका विस्तृत उल्लेख पर्षद के आदेष दिनांक- 31/01/2022 में किया गया है। इससे प्रथम दृष्टया स्पष्ट होता है कि लगभग 100 वर्ष पूर्व से खाता संख्या- 644 पर मन्दिर का निर्माण है और जो सभी ग्रामीणों द्वारा पूजा-दर्षन, चंदा, चढ़ावा आदि देते है, उसमें देख-भाल, राग-भोग, चलता है और श्री गोपाल का निजी होने के दावे के संबंध में पर्याप्त अवसर दिया गया है। इंजिनियर मदन गोपाल द्वारा आज की तिथि की जानकारी दुरभाष से ली गयी, लेकिन आज की तिथि की जानकारी होने के पश्चात् भी पर्षद के समक्ष सुनवायी हेतु उपस्थित नहीं हुए।12 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 अनुमण्डल पदाधिकारी के पत्रांक- 519, दिनांक- 28/03/2022 द्वारा प्राप्त प्रस्ताव में वर्णित नामों का चरित्र सत्यापन भी प्राप्त हो चुका है।
उपरोक्त परिस्थिति में मन्दिर की नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग और मन्दिर के प्रांगण में व्यवसाय कर रहे व्यवसायियों से किराया आदि के संबंध में कोई विवाद या अप्रिय घटना न हो जाए, इस हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी, रोसड़ा को संरक्षक नियुक्त करते हुए एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति गठन का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय विस्तृत संधारण आदेष दिनांक- 27/04/2022 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मन्दिर, सिंघिया बुजुर्ग (उत्तर), जिला-समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री राम जानकी मन्दिर न्यास योजना, सिंघिया बुजुर्ग (उत्तर), जिला-समस्तीपुर होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री राम जानकी मन्दिर न्यास समिति, सिंघिया बुजुर्ग (उत्तर), जिला-समस्तीपुर जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री अषोक कुमार अग्रवाल, पिता- स्व0 हरिराम अग्रवाल - अध्यक्ष पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 6, समस्तीपुर। 2. श्री ओम प्रकाष महतो, पिता- स्व0 महेन्द्र महतो - सचिव पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 7, समस्तीपुर। 3. श्री संजीव कुमार पिता- स्व0 देवेन्द्र प्रसाद सिंह - कोषाध्यक्ष पता- सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण, वार्ड सं॰- 8, समस्तीपुर।13 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 4. श्री मनोज कुमार बैठा पिता-स्व0 योगेन्द्र बैठा - सदस्य
पता- सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण, वार्ड सं॰- 9, समस्तीपुर। 5. श्री रामाषीष राम पिता-स्व0 जोगेष्वर राम - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 5, समस्तीपुर। 6. श्री मनोज कुमार पिता-स्व0 फिरंगी महतो - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 7, समस्तीपुर। 7. श्री मुरारी प्रसाद गुप्ता, पिता- श्री राम नारायण साह - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 7, समस्तीपुर। 8. श्री रंजीत ठाकुर, पिता- स्व0 रामराजी ठाकुर - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 10, समस्तीपुर। 9. श्री प्रवीण कुमार, पिता- श्री सतेन्द्र प्र0 सहनी - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰-10, समस्तीपुर। 10. श्री दिलीप प्रसाद, पिता- श्री रामचन्द्र शर्मा - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 10, समस्तीपुर। 11. श्री शंकर प्रसाद साह, पिता- स्व0 रामचन्द्र प्रसाद साह - सदस्य पता- सिंघिया बुजुर्ग उत्तर, वार्ड सं॰- 7, समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेेंश्री राम जानकी मन्दिर, सिघिंया बुजुर्ग (उत्तर), जिला-समस्तीपुरके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
26 मई 2022
सं0 735--श्री शेषनाथ भगवान मंदिर, ग्राम- शाहपुर बराट (बेरी), अंचल- मोहिउद्दीननगर, थाना- मोहनपुर (ओ॰पी॰),जिला-समस्तीपुर,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1765है।
उक्त न्यास के संबंध में पर्षद के पूर्व आदेष दिनांक- 01/02/2022 के आलोक में श्री अषोक कुमार सिंह द्वारा स्वयंभू न्यास समिति गठित कर मंदिर आदि की व्यवस्था की गयी। इस संबंध में विगत 05 वर्षों की आय-व्यय विवरणी मंदिर के विकास हेतु किये गये कार्य तथा उसमें व्यय की गयी अनुमानित राषि पर्षद के समक्ष उपस्थापित की गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त समिति द्वारा मंदिर के विकास हेतु संतोषजनक कार्य किया जाता है।
इससे पूर्व जो वर्ष 1998 में न्यास समिति का गठन किया गया था, उसमें से अधिकांष सदस्यों का स्वर्गवास हो गया है और कुछ सदस्यों द्वारा अपना त्याग-पत्र दे दिया गया है। इस संबंध में एक नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचलाधिकारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी से बारम्बार नामों की मांग की जाती रही। आम सभा द्वारा प्राप्त नामों का चरित्र-सत्यापन थाना द्वारा प्राप्त हो चुका है। प्रस्तावित व्यक्ति वही हैं, जिनके द्वारा स्वयंभू न्यास समिति गठित कर मंदिर की सुरक्षा, प्रबंधन आदि की जा रही है। यद्यपि उक्त नामों के संबंध में अंचलाधिकारी से उनका मंतव्य तथा यदि कुछ नामों को जोड़ना या हटाना चाहते हों, तो उस संबंध में दिनांक- 18/09/2021 एवं दिनांक- 28/12/2021 को निबंधित डाक द्वारा पत्र प्रेषित किया गया, परंतु उसका कोई प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
अतः पर्षदीय विस्तृत संधारण आदेष दिनांक- 28/04/2022 के आलोक में पर्षद को प्रस्तावित नामों की सूची एवं पर्षद के मा॰ सदस्य के प्रस्तावानुसार न्यास समिति गठन तथा अन्य जो नाम समाज एवं ग्रामीणों से प्राप्त हुआ है, उस पर विचारोपरांत बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री शेषनाथ भगवान मंदिर, ग्राम- शाहपुर बराट (बेरी), अंचल- मोहिउद्दीननगर, थाना- मोहनपुर (ओ॰पी॰),जिला- समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री शेषनाथ भगवान मंदिर न्यास योजना, ग्राम- शाहपुर बराट (बेरी), अंचल- मोहिउद्दीननगर, थाना- मोहनपुर (ओ॰पी॰),जिला- समस्तीपुर होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री शेषनाथ भगवान मंदिर न्यास समिति, ग्राम- शाहपुर बराट (बेरी), अंचल- मोहिउद्दीननगर, थाना- मोहनपुर (ओ॰पी॰),जिला- समस्तीपुर जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।14 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री अजय कुमार सिंह (पूर्व मुखिया, धरनी पट्टी)- -अध्यक्ष पिता- स्व॰ शंभू शरण सिंह, रसलपुर, मोहनपुर, जिला- समस्तीपुर। मो॰- 9973115453 2. श्री विजय प्र॰ सिंह पिता- स्व॰ चन्द्रषेखर प्र॰ सिंह उपाध्याय, मो॰- 9572010411 -उपाध्यक्ष 3. डॉ॰ अषोक कु॰ सिंह पिता- सूर्यनारायण सिंह- मो॰-9570437536 -सचिव 4. श्री मुकेष कुमार सिंह पिता- पंचानन्द सिंह, मो॰- 7352109006 -कोषाध्यक्ष 5. श्री राकेष प्र॰ सिंह पिता- नन्दकिषोर सिंह, मो॰- 7050410170 -सदस्य 6. श्री ओम प्रकाष सिंह पिता- स्व॰ महेष्वर प्रसाद सिंह, मो॰- 9931400709 -सदस्य 7. श्री दीप नारायण सिंह पिता- स्व॰ राजो प्रसाद सिंह, मो॰- 8229802673 -सदस्य 8. श्री इन्दु भुषण सिंह पिता- स्व॰ योगेन्द्र सिंह, मो॰- 9934617820 -सदस्य 9. श्री विनोद कुमार सिंह पिता- स्व॰ विक्रम बहादुर सिंह, मो॰- 9771864476 -सदस्य 10. श्री ब्रजेष कुमार सिंह पिता- गंगेष्वर प्रसाद सिंह, मो॰- 8873760839 -सदस्य 11. श्री मनोज कुमार सिंह पिता- स्व॰ राम उद्दगार सिंह, मो॰- 9525299149 -सदस्य क्रम सं॰- 2 से 11 का पता-ग्राम- शाहपुर बराट(बेरी), था॰- पटोरी मोहनपुर (ओ॰पी॰), जिला- समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेेंश्री शेषनाथ भगवान मंदिर, ग्राम- शाहपुर बराट (बेरी), अंचल- मोहिउद्दीननगर, थाना- मोहनपुर (ओ॰पी॰),जिला- समस्तीपुरके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।15 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022
6 जून 2022
सं0 882--श्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर, ग्राम-फुलौत, अंचलप्रखंडथाना-चौसा, जिला-मधेपुरा,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4580/21है। उक्त मंदिर की नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग तथा सम्पत्ति की सुरक्षा के उद्देष्य से एक न्यास समिति गठित किये जाने के संबंध में अंचलाधिकारी से ग्रामीणों की बैठक दिनांक- 02/01/2020 के प्रस्ताव पर उनका मंतव्य की मांग की गयी थी, जिसपर अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्र दिनांक- 20/11/2021 द्वारा उन नामों की अनुषंसा की गयी थी। इसी बीच चूंकि निबंधित समर्पणनामा में सेवायत रामधारी मोदी के तीनों पुत्रों को समपर्णकर्त्ता में नामित किया था। अंचलाधिकारी या उक्त बैठक में मोदी परिवार के किसी व्यक्ति का नाम अंकित नहीं किया गया था। इसलिए विलेख में नामित तीनों व्यक्ति को निबंधित डाक द्वारा नोटिस भेजकर आदि के संबंध में उनसे मंतव्य मांग की गयी थी। पर्षद के पत्र के आलोक में उपरोक्त तीनों व्यक्ति दिनांक- 02/05/2022 को उपस्थित हुए थे तथा उन्होंने भी न्यास समिति में रखे जाने के बिन्दु पर अपनी सहमति प्रदान की थी।
अंचलाधिकारी द्वारा ग्रामीणों की बैठक दिनांक- 05/05/2022 में प्रस्तावित नामों पर सहमति प्रदान करते हुए पत्र लिखा है, जिसकी फोटोप्रति दाखिल की गयी। उक्त प्रस्तावित नामों में पूर्व में जो प्रस्ताव था, जिसपर अंचलाधिकारी से सहमति थी। एक मात्र नाम बीरेन्द्र कुमार सिंह का है, बाकी सभी नाम नया है और पर्षद के समक्ष ग्रामीणों की आमसभा दिनांक- 02/01/2020, दिनांक- 05/05/2022 में प्रस्तावित 11 नाम है और सभी नामों पर अंचलाधिकारी द्वारा अपनी सहमति प्रदान की गयी है। सेवायत परिवार तथा आमसभा की बैठक में प्रस्तावित नामों के कुछ लोग पर्षद के समक्ष उपस्थित हुये।
उपरोक्त परिस्थिति में विचारोपरान्त उक्त मन्दिर के लिए सम्यक विकास एवं कुषल प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक अस्थायी न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए करने हेतु निर्णय लिया गया। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-07/05/2022 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर, ग्राम- फुलौत, अंचलप्रखंडथाना- चौसा, जिला- मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर न्यास योजना, ग्राम- फुलौत, अंचलप्रखंडथाना- चौसा, जिला- मधेपुरा होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर न्यास समिति, ग्राम- फुलौत, अंचलप्रखंडथाना- चौसा, जिला- मधेपुरा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।16 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति 01 वर्ष के लिए अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री रामदेव मेहता - अध्यक्ष 2. श्री बब्लू ऋषिदेव पिता- भोला ऋषिदेव - उपाध्यक्ष 3. श्री बीरेन्द्र कुमार सिंह पिता- रामस्वरूप सिंह - सचिव 4. श्री षिवेन्द्र प्रसाद मोदी - कोषाध्यक्ष 5. श्री रमेष मोदी पिता- लखी मोदी - सह-सचिव 6. श्री राम प्रवेष मोदी पिता- तेज नारायण मोदी - सदस्य-सह- पुजारी 7. श्री अंकित कुमार पिता- दिनेष कुमार मोदी - सदस्य-सह-पुजारी 8. श्री सुरेष पंडित - सदस्य 9. श्री विषुनदेव रजक - सदस्य 10. श्री सुनील राम - सदस्य 11. श्री अखिलेष यादव - सदस्य
पता-श्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर, ग्रा॰- फुलौत, अं॰प्र॰था॰- चौसा, मधेपुरा।
उक्त आदेष के आलोक मेेंश्री श्री 108 वैष्णवी माँ दुर्गाजी मंदिर, ग्राम- फुलौत, अंचलप्रखंडथाना- चौसा, जिला- मधेपुराके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
30 दिसम्बर 2021
सं0 4357--श्री मुरली मनोहर ठाकुरवाड़ी, ग्राम-महथी उत्तर, थानाअंचल-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर पर्षद के अन्र्तगत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-57 है।
उक्त न्यास में लगभग 17 विगहा 9 कट्ठा 19 धूर भूमि है। पूर्व में मंदिर के न्यासधारी महंत राम श्रेष्ठ दास थे, परन्तु उनके द्वारा न तो नियमित रूप से पूजा-पाठ, राग-भोग किया जाता था और न ही पर्षद में सम्पत्ति के आय-व्यय विवरणी का ब्यौरा दिया जाता था। स्पष्टीकरण के उपरान्त दिनांक-13.08.98 को श्री राम श्रेष्ठ दास को अपसारित करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी, विभूतिपुर को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी के अनुरोध पर अंचलाधिकारी विभूतिपुर को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया, परन्तु अंचलाधिकारी द्वारा भी मंदिर के आय-व्यय के संबंध में कोई सूचना नहीं दी। इसी बीच मंदिर की देखभाल आदि का कार्य श्री शंकर सिंह करने लगे।
श्री हेमन्त कुमार, शेखर कुमार व अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना पत्र दिनांक-18.01.2011 को प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया गया कि मंदिर में लगभग 20 विगहा जमीन है और एक लाख रुपया से अधिक की आय होती है। पुजारी और महंत की नियुक्ति नहीं होने के कारण अवैध रूप से लोगों का कब्जा है, उक्त षिकायत पर अंचलाधिकारी से रिपोर्ट की माँग की गई। इसी बीच महंत घनष्याम दास द्वारा स्वयं को महंत बनाए जाने हेतु एक प्रार्थना पत्र तथा मंदिर में कुछ फोटोग्राफ्स प्रस्तुत किया। ग्रामीणों द्वारा षिकायत प्राप्त हुआ कि महंंत घनष्याम दास तीन और मठ के महंत है और वहॉ भी सम्पत्ति अवैध रूप से बेच रहे है।
उपरोक्त परिस्थितियाँ स्पष्ट करती है कि प्रारंभ से ही मंदिर के पूर्व महंत रामश्रेष्ठ दास के स्वर्गवाष के पश्चात मठ की सम्पत्ति जर्जर होती जा रही है तथा सारी भूमि को अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है तथा गामीणों ने मंदिर तथा मंदिर की सुरक्षा हेतु एक आम बैठक कर समिति बनाई तथा कुछ चन्दे आदि से मंदिर का जीर्णोद्धार किया तथा अंचलाधिकारी की उपस्थिति में दिनांक-08.02.2021 को एक बैठक कर 5 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव किया गया, जिसे अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्र पत्रांक-317 दिनांक-08.02.2021 द्वारा पर्षद को उपलब्ध कराया। प्रस्तावित व्यक्तियों का चरित्र सत्यापन हेतु थाना विभूतिपुर को पर्षद में निबंधित डाक दिनांक-24.03.2021, 16.06.2021 एवं दिनांक-14.09.2021 को भेजा जा चुका है, परन्तु थाना द्वारा पर्षद के उपरोक्त पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसी परिस्थिति में मंदिर तथा मंदिर की सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु कमिटि गठन को आगे लंम्बित रखना उचित प्रतीत नहीं होता है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक 29.10.2021 के आलोक में पर्षद की बैठक दिनांक-22.12.2021 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद् को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए श्री मुरली मनोहर ठाकुरवाड़ी, ग्राम-महथी उत्तर, थानाअंचल-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों17 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 की सुरक्षा तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपन तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री मुरली मनोहर ठाकुरवाड़ी, न्यास योजना, ग्राम-महथी उत्तर, थानाअंचल-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री मुरली मनोहर ठाकुरवाड़ी, न्यास समिति, ग्राम-महथी उत्तर, थानाअंचल-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए अंचलाधिकारी विभूतिपुर द्वारा प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में निम्न 05 सदस्यी समिति को अस्थायी रूप से मान्यता दी जाती है :-
1. श्री शषिभूषण सिंह पुत्र स्व0 जयषरण सिंह - अध्यक्ष 2. श्री संजीत कुमार सिंह पुत्र स्व0 कार्तिक प्रसाद सिंह - सचिव 3. श्री सुनील कुमार सिंह पुत्र स्व0 जगदीष प्रसाद सिंह - सदस्य 4. श्री कृष्ण बल्लभ सिंह पुत्र स्व0 धीरज प्रसाद सिंह - सदस्य 5. श्री ललन प्रसाद सिंह पुत्र स्व0 राम लोचन सिंह - सदस्य सभी ग्रामीण :-महथी (उत्तर) अंचल, थाना-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख मेंं संबंधित भूमि ''श्री मुरली मनोहर ठाकुरवाड़ी, ग्राम-महथी उत्तर, थानाअंचल-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर '' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।18 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 30 दिसम्बर 2021 सं0 4361--सद्गुरू कबीर मठ, ग्राम-चिगरी, थानाअंचल-कुषेष्वर स्थान, जिला-दरभंगा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4402 है। उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु न्यास समिति गठन के लिए विगत 05 वर्षों से प्रयास किया जा रहा है। अंचलाधिकारी द्वारा ग्रामीणों की आमसभा द्वारा दिनांक- 20/03/2016 को बन्नी कबीर मठ, के महंत रघुनंदन दास की अध्यक्षता में एक बैठक आहुत कर 11 नामों का प्रस्ताव भेजा गया, इस संबंध में अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन द्वारा प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन की मांग संबंधित थाना से की गयी। इसी बीच दिनांक-10/02/2017 को महंत रघुनंदन गोस्वामी के नाम को विलोपित करते हुए शेष 10 व्यक्तियों को थानाध्यक्ष को पत्र लिखा गया और दिनांक-17/05/2021 में प्रतिवेदित किया कि घनष्याम यादव व भंगी यादव मुहचोर प्रवृत्ति के हैं तथा घनष्याम यादव के विरूद्ध थाना काण्ड संख्या-39/09 दर्ज है, जिसमें अंतरिम रिपोर्ट दिनांक-31/09/2009 को दाखिल है तथा भंगी यादव के विरूद्ध थाना काण्ड संख्या-136/04 दर्ज है, जिसमें भी चार्जषीट दिनांक-05/04/2015 को समर्पित की जा चुकी है। प्रस्तावित नाम तथा थाना की रिपोर्ट को पुनः अंचलाधिकारी को भेजकर प्रस्ताव की मांग की गयी, जो दिनांक-21/08/2021 को पत्रांक-1393 द्वारा प्राप्त हुआ।
इस न्यास की संचिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि राजस्व अभिलेख में खाता संख्या-234 पर षिव भगत बैरागी, कबीर मठ तथा खाता संख्या-235, षिव गोसाईं चेला बालदेव गोसाईं के नाम पर इन्द्राज है। इस पर ग्रामीणों द्वारा षिकायत दिनांक-27/08/2001 को प्राप्त हुआ कि षिवभगत द्वारा फर्जी तरीके से अपने नाम का इन्द्राज करा लिया है तथा मठ की सुरक्षा हेतु एक नयी समिति गठितकी जाए। आम बैठक दिनांक-24/06/2012 को ग्रामीणों द्वारा करके 11 सदस्यों के नामों का प्रस्ताव भेजा गया। सम्पत्ति बेचने के आरोप के संबंध में अंचलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की गयी। इसी बीच दिनांक-20/12/2012 को उक्त महंत षिव भगत का स्वर्गवास हो गया।
पुनः दिनांक-04/01/2015 को बन्नी कबीर मठ के महंत रघुनंदन गोस्वामी की अध्यक्षता में एक बैठक की गयी, जिसमें 11 व्यक्तियों की न्यास समिति गठित किये जाने हेतु प्रस्ताव पारित कर पर्षद को भेजा गया तथा महंत रघुनंदन गोसाई अपने पत्र दिनांक-18/08/2015 के साथ उक्त महंत षिव भगत द्वारा उपरोक्त खाता 234 की कूल भूमि 08 बी0 07 क0 10 धुर का दानपत्र सद्गुरू कबीर साहब के नाम से निष्पादित किया गया है, की प्रति भी समर्पित की गयी, जिसमें सेवायत के रूप में रघुनंदन गोस्वामी तथा महंत लाल बिहारी गोस्वामी को बनाया गया है।
आम सभा दिनांक-20/03/2016, दिनांक-24/06/2012, चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन दिनांक-17/05/2017 तथा अंचलाधिकारी की रिपोर्ट पुनः कुछ नामों में संषोधन करते हुए 11 व्यक्तियों का प्रस्ताव पत्रांक-1393, दिनांक-21/08/2021 के आलोक में कबीर संत महंत रघुनंदन गोस्वामी को सम्मिलित करते हुए एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति के गठन की आवष्कता प्रतीत होती है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक- 28/10/2021 के आलोक में पर्षदीय बैठक दि0-22/12/2021 में अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जोबिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''सद्गुरू कबीर मठ, ग्राम-चिगरी, थानाअंचल-कुषेष्वर स्थान, जिला- दरभंगा''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''सद्गुरू कबीर मठ न्यास योजना, ग्राम-चिगरी, थानाअंचल-कुषेष्वर स्थान, जिला- दरभंगा''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''सद्गुरू कबीर मठ न्यास समिति, ग्राम-चिगरी, थानाअंचल-कुषेष्वर स्थान, जिला- दरभंगा'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
3. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (कोषाध्यक्ष एवं अध्यक्ष / सचिव) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। यदि पूर्व से न्यास का खाता है तो उसका भी संचालन न्यास समिति के उक्त पदाधिकारियों द्वारा सुनिष्चित किया जायेगा। 4. मठ परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी / महंत की अर्हता का निर्धारण की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।19 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
16. न्यास समिति के सभी सदस्यगण एक-दुसरे का सहयोग कर, मिलकर कार्य करेंगे तथा जिस भूमि के संबंध में धार्मिक न्यास न्यायाधिकरण में न्यास के पक्ष में निर्णय दिया गया है, जो भूमि खाली पड़ी है, उसमें खुली डाक द्वारा उसकी बंदोवस्ती करेंगे।
17. मंदिर के जीर्णाेद्धार के लिए सभी पक्ष आपस में मिलकर सहयोग करेंगे; उसकी स्थिति ठीक करेंगे तथा जो मंदिर से संबंधित तालाब एवं फुलवारी है, उसकी भी खुली डाक द्वारा बंदोवस्ती करेंगे।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की निम्न न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित जाती हैः-
1. महंत रघुनंदन गोस्वामी - अध्यक्ष वर्तमान पता- कबीर मठ, ग्राम- बन्नी, पो0- बाबूबगीचा, था0- महेषखुंट, खगड़िया। 2. श्री अरूण कुमार अरूण - उपाध्यक्ष 3. श्री शषीभूषण शास्त्री पिता- जयबलभ यादव - सचिव 4. श्री इन्द्रदेव कुमार यादव पिता- मायाराम यादव - कोषाध्यक्ष 5. श्री विनोद यादव पिता-गणेष यादव - सह-सचिव 6. श्री ठको शर्मा पिता-कोकाई शर्मा - सदस्य 7. श्री लखन ठाकुर पिता-सरयुग ठाकुर - सदस्य 8. श्री विलोखन राम पिता-रघुनी राम - सदस्य 9. श्री भंगी पासवान पिता-श्री राम किषुन पासवान - सदस्य 10. श्री घनष्याम यादव पिता-राम शरण यादव - सदस्य 11. श्री रूदल यादव पिता- बहादुर यादव - सदस्य क्रमांक- 2-10 का पता- ग्रा0- चिगरी, था0अं0- कुषेष्वर स्थान, जिला- दरभंगा। उक्त आदेष के आलोक मेें ''सद्गुरू कबीर मठ, ग्राम- चिगरी, थानाअंचल- कुषेष्वर स्थान, जिला- दरभंगा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज (तीन वर्षों से अधिक) आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
30 दिसम्बर 2021
सं0 4359--श्री राम जानकी मंदिर, मोरवाड़ा, अंचल-सिंधिया, जिला-समस्तीपुर,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4568 है।
उक्त न्यास के संबंध में मोरवाड़ा ग्राम के ग्रामीणों द्वारा लिखित प्रार्थना-पत्र तथा खाता सं0- 25, खेसरा सं0- 1582, 1577, 1578, 1576, 1580, 1585 एवं 1589 तथा खाता सं0- 126, खेसरा सं0- 1583 पर अवस्थित श्री षिव मंदिर तथा खाता सं0- 126, 311 एवं 25 के खतियान की प्रति, जिसमें खाता सं0- 311 अनाबाद सर्वसाधारण धर्मषाला पुस्तकालय, खाता सं0- 125, पोखर, 1577 में भींड आदि के इन्द्राज और अंचलाधिकारी का प्रतिवेदन दि0- 07/02/2020 को पर्षद के निरीक्षक द्वारा स्थल जांच का प्रतिवेदन दि0- 06/11/2020 को किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि उक्त स्थल पर लगभग 100 वर्ष प्राचीन मंदिर है। मंदिर का जीर्णोद्धार ग्रामीणोें के सहयोग से किया गया है। गर्भ गृह एवं कमरे आदि प्राचीन प्रतीत होते हैं और सभी लोग बिना रोक-टोक के पूजा-पाठ आदि करते हैं तथा मंदिर से संबंधित20 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 छायाचित्र आदि पर विचारोपरांत मंदिर को सार्वजनिक घोषित करते हुए न्यास का निबंधन किया गया एवं मंदिर की सुरक्षा हेतु न्यास समिति गठन के लिए अंचलाधिकारी से नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी।
अंचलाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन दि0- 30/01/2021 द्वारा ग्रामीणों के प्रस्ताव को मान्यता प्रदान करते हुये पर्षद में न्यास समिति गठन हेतु 17 नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया। इस पर अंचलाधिकारी से अधिकतम 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी तथा अंचलाधिकारी द्वारा उक्त 17 नामों में से 11 नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। उक्त नामों का चरित्र सत्यापन भी थाना से प्राप्त हो गया है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक- 28/10/2021 के आलोक में पर्षदीय बैठक दि0-22/12/21 में अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जोबिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी मंदिर, मोरवाड़ा, अंचल- सिंधिया, जिला-समस्तीपुर''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास योजना, मोरवाड़ा, अंचल- सिंधिया, जिला-समस्तीपुर'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास समिति, मोरवाड़ा, अंचल- सिंधिया, जिला-समस्तीपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
3. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (कोषाध्यक्ष एवं अध्यक्ष / सचिव) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। यदि पूर्व से न्यास का खाता है तो उसका भी संचालन न्यास समिति के उक्त पदाधिकारियों द्वारा सुनिष्चित किया जायेगा। 4. मठ परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी / महंत की अर्हता का निर्धारण की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
16. न्यास समिति के सभी सदस्यगण एक-दुसरे का सहयोग कर, मिलकर कार्य करेंगे तथा जिस भूमि के संबंध में धार्मिक न्यास न्यायाधिकरण में न्यास के पक्ष में निर्णय दिया गया है, जो भूमि खाली पड़ी है, उसमें खुली डाक द्वारा उसकी बंदोवस्ती करेंगे।
17. मंदिर के जीर्णाेद्धार के लिए सभी पक्ष आपस में मिलकर सहयोग करेंगे; उसकी स्थिति ठीक करेंगे तथा जो मंदिर से संबंधित तालाब एवं फुलवारी है, उसकी भी खुली डाक द्वारा बंदोवस्ती करेंगे।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की निम्न न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित जाती हैः-
1. श्री राम नरेष सिंह पिता- स्व0 महावीर सिंह - अध्यक्ष 2. श्री सुमन सिंह पिता- स्व0 बमबहादुर सिंह - सचिव21 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 3. श्री नरेन्द्र प्रसाद लाल पिता- स्व0 नवल किषोर लाल - कोषाध्यक्ष
4. श्री सरोज कुमार सिंह पिता- राम नगीना सिंह - सदस्य 5. श्री सुरेष सिंह पिता- राम विलाष सिंह - सदस्य 6. श्री लालटुन सदा पिता- स्व0 सुरेष सदा - सदस्य 7. श्री भोला महतो पिता- स्व0 पुरन महतो - सदस्य 8. श्री अरविन्द साह पिता- सिंधेष्वर साह - सदस्य 9. श्री षिवषंकर महराज पिता- राजेन्द्र महराज - सदस्य 10. श्री सीताराम राउज(यादव) पिता- स्व0 मोती लाल राउत - सदस्य 11. श्री गंगा राम मुखिया पिता- बहारे मुखिया - सदस्य पता-श्री राम जानकी मंदिर, मोरवाड़ा, अंचल-सिंधिया, जिला-समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री राम जानकी मंदिर, मोरवाड़ा, अंचल-सिंधिया, जिला-समस्तीपुर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज(तीन वर्षों से अधिक) आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
3 जनवरी 2022
सं0 4469--भवानीपुर राजधाम ठाकुरबाड़ी, जिला-पूर्णियाँ पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-2247 है। दिनांक-16.11.2021 को उक्त न्यास के संबंध में श्री जयप्रकाष जादुका, राजकुमार यादुका, विमल कुमार यादुका, अषोक कुमार यादुका पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए और कथन किया कि श्री श्री ठाकुर जी सीताराम के नाम से भवानीपुर में थाना नं0-182/2 संज्ञान सुंदर थाना नं0 211 के विभिन्न खेसरा की जमीन स्थित है परंतु वर्त्तमान में भवानीपुर मौजा के खाता नं0-363 खेसरा 3106 रकबा 52 डिसमिल तथा खाता नं0 2560 रकबा 05 डी0 भूमि जो धर्मषाला एवं ठाकुरबाड़ी का मंदिर भवन के रूप में इन्द्राज है। शेष भूमि अवैध रूप से अतिक्रमण में है। खाता नं0-363 रकबा 52 डि0 जमीन जो धर्मषाला के रूप में इन्द्राज है परंतु वास्तव में धर्मषाला का निर्माण केवल कुर्सी तक ही किया जा सका और शेष निर्माण अधूरा रह गया। आगे कथन किया गया कि मठ के देखभाग महंत रामजी महाराज उर्फ शर्मा जी करते थे उनका स्वर्गवाष दिनांक-14.03.2005 को हो चुका है। संचिका से यह स्पष्ट होता है कि पर्षद द्वारा दिनांक-12.09.1995 को महंत राम जी महाराज उर्फ शर्मा को न्यासधारी नियुक्त किया परंतु पर्षदीय आदेष के अनुपालन में विफल रहने पर अधिनियम की धारा 28(2)(एच) के तहत अपसारित करते हुए अंचल अधिकारी को मंदिर का अस्थायी न्यासधारी बनाया गया। किन्तु उनके द्वारा मंदिर का प्रभार ग्रहण नहीं किया गया। इस बीच अंचलाधिकारी से पर्षद द्वारा पत्र भेजकर मंदिर की वर्त्तमान स्थिति, चल-अचल सम्पत्ति, प्रबंधन आदि के संबंध में रिपोर्ट की मांग की जाती रही। परंतु प्रतिवेदन अप्राप्त रहा। दिनांक-18.06.2021 को अंचलााधिकारी नें अपने पत्रांक-663 दिनांक-06.04.2021 द्वारा ग्यारह व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया जिसके साथ जयप्रकाष यादुका द्वारा प्रस्तावित 11 नामों की छायाप्रति, पर्षद के पत्र दिनांक-23.08.2016 तथा एक शपथ पत्र दिनांक-06.04.2021 की छायाप्रति तथा दिनांक-01.09.2021 को श्री जयप्रकाष यादुका द्वारा एक प्रार्थना पत्र तथा श्री सीताराम जी मंदिर का मालगुजारी रसीद दाखिल किया और उसमें 52 डि0 जमीन पर धर्मषाला निर्माण तथा उसी पर अग्रसेन भवन के निर्माण का प्रस्ताव दिया। दिनांक-16.11.2021 को माननीय सदस्य महंत विजय शंकर गिरि की उपस्थिति में मा0 अध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से सुनवाई कर अंचलाधिकारी द्वारा दिनांक-03.04.2021 को दिये गये प्रस्ताव के आलोक मंदिर तथा धर्मषाला आदि की व्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए न्यास समिति के गठन का आदेष पारित किया गया है। अतः दिनांक-16.11.2021 को सुनवाई में पारित निर्णय एवं पर्षद की बैठक दिनांक 22.12.2021 द्वारा अनुमोदन के पष्चात् बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास, अधिनियम, 1950 की धारा 32 में पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''भवानीपुर राजधाम ठाकुरबाड़ी जिला-पूर्णियाँ आदि के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास एवं धर्मषाला निर्माण हेतु निम्नलिखित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए किया जाता है :- योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''भवानीपुर राजधाम ठाकुरबाड़ी जिला-पूर्णियाँ'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''भवानीपुर राजधाम ठाकुरबाड़ी जिला-पूर्णियाँ'' होगा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।22 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोकर जमा किया जायेगा ओर आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को मंदिर की भूमि को बेचने या बंधक रखने का अधिकार नहीं होगा। 6. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नही कर ली जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित 11 सदस्यों की न्यास समिति को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए मान्यता प्रदान की जाती है :-
01. श्री जयप्रकाष यादुका - अध्यक्ष 02. श्री कैलाष अग्रवाल - उपाध्यक्ष 03. श्री राजकुमार यादुका - सचिव 04. श्री विमल कुमार यादुका - कोषाध्यक्ष 05. श्री रोहित कुमार केडिया - सदस्य 06. श्री संजय कुमार केडिया - सदस्य 07. श्री अजय कुमार गोपालिका - सदस्य 08. श्री विनोद केडिया - सदस्य 09. श्री राजीव कुमार यादुका - सदस्य 10. श्री कन्हैया अग्रवाल - सदस्य 11. श्री दीपक कुमार यादुका - सदस्य सभी ग्रामपो0थाना- भवानीपुर, जिला-पूर्णियाँ, पिनकोड-854204। उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''भवानीपुर राजधाम ठाकुरबाड़ी जिला-पूर्णियाँ'' के नाम में किसी प्रकार से कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण /बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते है तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
3 जनवरी 2022
सं0 4471--श्री श्री 108 भगवती दुर्गा महारानी मंदिर, फुलवरिया, पो0-मड़वा, थाना-कोढ़ा, जिला-कटिहार पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-3639 है। न्यास समिति को विगत कई सालों से बजट, विवरण एवं पर्षद शुल्क आदि दाखिल करने हेतु पत्र दिया जाता रहा है। दिनांक-13.08.2021 को न्यास समिति के सचिव श्री कुमोद झा एवं को कोषाध्यक्ष द्वारा अपने लिखित प्रार्थना पत्र दिनांक-0.8.2021 दाखिल किये और कथन किया कि कमिटी बनने के बाद दान की गयी सारी सम्पत्ति के संबंधमें सेवायतकर्त्ता द्वारा एक स्वत्व वाद 90/95 दाखिल किया गया और न्यास समिति को इससें विपक्षी बनाया गया। जिसमें पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय द्वारा वर्त्तमान स्थिति (स्टेटस-को) बनाये रखने का आदेष दिया। उक्त आदेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सेवायत देवेन्द्र नारायण मिश्रा के द्वारा मिस0 अपील 386/2006 तथा न्यास समिति के सदस्यों द्वारा मि0 अपील 10/2007 दाखिल की गयी है। उक्त दोनों अपील को मा0 उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई के उपरांत दिनांक-10.1.2007 को निस्तारित करते हुए दिवानी न्यायायल के आदेष को23 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 निरस्त कर यह निर्देष दिया कि अपील 386/06 अपीलकर्त्ता को मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग व अन्य क्रिया-कलाप करेंगे। समिति द्वारा उक्त आदेष के विरूद्ध मा0 उच्चतम न्यायालय में एस0एल0पी0 संख्या-16908, 16909/08 दाखिल किया और मा0 उच्चतम न्यायालय ने दिनांक-05.01.2009 को निस्तारित करते हुए यह निर्देष दिया कि विचाराधिन न्यायालय मामले का शीघ्र निस्तारण करें। आगे कथन किया कि न्यायालय के आदेष से न्यास की सभी भूमि पर सेवायत का कब्जा है और उनलोगों के द्वारा 05 एकड़ भूमि पर मकान बना लिया है। ग्रामीणों ने अपने प्रयास से 05 ए0 21.5 डी0 भूमि अपने अधिपत्य में लेकर चंदा की राषि से मंदिर का निर्माण किया हैं । साथ ही 76डी0 भूमि पर तालाब का निर्माण कराया हैं। यह भी प्रस्ताव दिया कि 21 सदस्य के स्थान पर 11 सदस्य को समिति में रखा जाए । दिनांक-13.08.2021 को पर्षद के माननीय सदस्य श्री रत्नेष सादा और माननीय अध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से सुनवाई कर आदेष पारित किया कि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत भी अधिकतम 11 सदस्यों की समिति बनाये जाने का प्रावधान है। अतः दिनांक-13.08.2021 को सुनवाई में पारित निर्णय एवं पर्षद की बैठक दिनांक-22.12.2021 द्वारा अनुमोदन के पश्चात् बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में पर्षद् को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 भगवती दुर्गा महारानी मंदिर, फुलवरिया, पो0-मड़वा, थाना-कोढ़ा, जिला-कटिहार''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु अग्रलिखित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लि एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री श्री 108 भगवती दुर्गा महारानी मंदिर, फुलवरिया, पो0-मड़वा, थाना-कोढ़ा, जिला-कटिहार''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 भगवती दुर्गा महारानी मंदिर, फुलवरिया, पो0-मड़वा, थाना-कोढ़ा, जिला-कटिहार''होगा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोकर जमा किया जायेगा ओर आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. किसी भी पक्ष को चाहे वह श्री देवेन्द्र मिश्रा सेवायत का दावा करने वाले तथा न्यास समिति के किसी भी सदस्य को मंदिर की भूमि को बेचने या बंधक रखने का अधिकार नहीं होगा।
6. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्य वृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी। 7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नही कर ली जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से विचाराधिन मुकदमा का निस्तारण अपने अधिवक्ता से सम्पर्क कर शीघ्र निस्तारण कराये और यदि आपके अधिवक्ता की राय हो तो इस संबंध में समय सीमा निर्धारित करते हुए माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर कर सकते हैं। पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित 11 सदस्यों की न्यास समिति को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए मान्यता प्रदान की जाती हैः-
01. श्री राज कुमार - अध्यक्ष 02. श्री षिवनाथ झा, पिता- स्व0 जगन्नाथ झा - उपाध्यक्ष 03. श्री काशी मुखिया - उपाध्यक्ष 04. श्री कुमोद झा, पिता-स्व0 अनन्त झा - सचिव24 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 05. श्री कृष्ण कुमार साह, पिता-स्व0 सत्यनारायण साह - कोषाध्यक्ष 06. श्री निरंजन कुमार रंजन, पिता- श्री रतिमोहन झा - सदस्य 07. श्री प्रदीप पासवान, पिता- श्री रामदेव पासवान - सदस्य 08. श्री ललितेष्वर झा - सदस्य 09. श्री मनोज मुखिया - सदस्य 10.श्री मदनमोहन झा, पिता-स्व0 चन्द्रकिषोरझा - सदस्य 11. श्रीमती मणिप्रभा देवी - सदस्य सभी ग्राम-फुलवरिया, पो0-मड़वा, जिला-कटिहार। उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108भगवती दुर्गा महारानी मंदिर, फुलवरिया, पो0-मड़वा, थाना-कोढ़ा, जिला-कटिहार'' के नाम में किसी प्रकार से कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण /बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते है तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
29 मार्च 2022
सं0 5752--श्री रामजानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी, ततमा टोली, भट्ठा बाजार, जिला- पूर्णियॉ पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या- 3100/1988 है। न्यास के सुप्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु एक न्यास समिति का गठन महामंडलेष्वर श्री महंत प्रेम दास महात्यागी की अध्यक्षता में अधिसूचना पत्रांक- 1772 दिनांक- 04.09.2015 द्वारा किया गया । इस न्यास समिति का कार्यकाल 05 वर्षो का था। न्यास समिति द्वारा पर्षद में होने वाली आय, व्यय, बजट आदि दाखिल नहीं किया जा रहा था। इस संबंध में न्यास समति से बार-बार पत्राचार किया गया तथा पर्षद के पत्र के आलोक में न्यास समिति के सचिव संत मुरारी दास त्यागी द्वारा उपस्थित होकर 03 वर्षो की आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी और कथन किया कि मंदिर के निर्माण में अधिकांष राषि खर्च हो गयी है।अतः पर्षद शुल्क में विषेष छूट दी जाए, जिसपर विचारोपरान्त दिनांक- 02.03.2021 आदेष पारित किया गया और निर्देष दिया गया कि 01 माह के अंदर सभी आय-व्यय विवरणी (वर्ष- 2018-19 एवं 2019-20) दाखिल करें। सचिव द्वारा कथन किया गया कि न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लिहाजा नयी न्यास समिति का गठन किया जाए और दिनांक- 19.02.2021 को हुए आाम सभा में प्रस्तावित 21 नामों का प्रस्ताव उनके द्वारा दिया गया। जिसमें से 11 नामों की सूची संत श्री मुरारी दास त्यागी द्वारा दिनांक- 11.07.2021 को दिया गया जिसे पर्षदीय पत्रांक- 2312 दिनांक- 28.07.2021 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ से प्राप्त 11 नामों की सूची की छायाप्रति संलग्न करते हुए वर्णित नामों में कुछ नाम जोड़ना या हटना हो, इस संबंध में प्रतिवेदन की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने ज्ञापांक- 1246 दिनांक- 20.9.2021 द्वारा 15 व्यक्तियों का चयन कर पर्षद को सूची भेजी, जिसे मंदिर के महंत महामंडलेष्वर प्रेम दास त्यागी द्वारा उपरोक्त 15 में से11 व्यक्तियों का चयन कर पर्षद से अनुमोदन हेतु प्रार्थना की गयी परन्तु प्रस्तावित सूची में किसी प्रषासनिक पदाधिकारी को स्थान नहीं दिया गया था। अतः पर्षद के माननीय सदस्य महंत विजय शंकर गिरि की उपस्थिति में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-08.02.2022 द्वारा ''श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी, ततमा टोली, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ'' के सुचारू प्रबंधन, परिसम्पत्तियों की सुरक्षा एवं सर्वांगीण विकास हेतु निम्नलिखित योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है। थाना से चरित्र सत्यापन प्राप्त होने के पष्चात् न्यास समिति के स्थायी किये जाने पर विचार किया जा जायेगा।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी, ततमा टोली, भट्ठा बाजार पूर्णियॉ'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी, ततमा टोली, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ, न्यास समिति'' होगा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्, संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा और आवयष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा। इसी प्रकार न्यास समिति को मंदिर के विकास या संरचना मद में 10 लाख रूपये या उससे अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उस अनुमानित खर्च25 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 का विवरणी प्रस्तुत कर पूर्वानुमति न्यास समितिको प्राप्त करना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी।
6. न्यास समिति किसी भी सदस्य को मंदिर की भूमि बेचने या बंधक रखने का अधिकार नहीं होगा। 7. न्यास समिति अधिनियम एवं उप- विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 8. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
9. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जोगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
10. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
12. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 13. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वार निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित 11 सदस्यों की न्यास समिति को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए मान्यता प्रदान की जाती है :-
01. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ - पदेन सदस्य 02. महामण्डलेष्वर श्री प्रेम दास महात्यागी - कार्यवाहक अध्यक्ष 03. श्री मनोज कुमार सिंह - उपाध्यक्ष पुत्र- श्री दयाल सिंह, षिवपूरी, पूर्णियॉ। 04. श्री कृष्णानंद महतो, - उपाध्यक्ष पिता- स्व0 सूर्यनारायण महतो, मधुबनी, पूर्णियॉ। 05. संत मुरारी दास त्यागी - सचिव शिष्य श्री प्रेमदास महात्यागी 06. श्री राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता - कोषाध्यक्ष पिता- स्व0 रामानन्द साह, रामलखन चौक, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ। 07. श्री प्रसाद महतो - सदस्य पिता- स्व0 सरयु महतो, सर्वाेदय नगर, पूर्णियॉ। 08. श्री बेनी प्रसाद पटोदिया - सदस्य पिता- स्व0 नाहरमल, कोषी ऑटो, विकास नगर, पूर्णियॉ। 09. श्री रामाकांत झा - सदस्य पिता- स्व0 भोला नाथ झा, आजाद कॉलोनी, ठाकुरबाड़ी, पूर्णियॉ। 10. प्रो0 निर्भय यादव - सदस्य पिता - देवसुन्दर यादव, चित्रवाणी, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ। 11. श्री उदय प्रसाद गुप्ता - सदस्य पिता- स्व0 दुर्गा साह, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ।
उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी, ततमा टोली, भट्ठा बाजार, पूर्णियॉ'' के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
21 मई 2022
सं0 664--श्री सिल्हौड़ी षिव मंदिर, ग्राम-सिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में वर्ष 1952 से निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-56 है। इस न्यास में 07 बीघा 16 कट्ठा 04 धुर भूमि है। पूर्व में26 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 उक्त मंदिर की देखभाल महंत/न्यासधारियों द्वारा की जाती रही है। आखिरी न्यासधारी के रूप में षिवानंद गिरि द्वारा देखभाल किया जाता रहा, परन्तु वर्ष 1995 से षिवानंद गिरि के विरूद्ध ग्रामीणों द्वारा मंदिर के जमीन को बिक्रय करने, मंदिर में असमाजिक तत्वों का अड्डा बनाने तथा मंदिर के अंदर शराब और जुआ आदि खेलने के आरोप लगते रहे। इस संबंध में बार-बार उक्त न्यासधारी षिवानंद गिरि को नोटिस जारी किया गया तथा स्पष्टीकरण की मांग की गयी और उनके द्वारा वर्ष 2001 से कोई आय-व्यय विवरणी, बजट, शुल्क आदि नहीं दाखिल किया जाता रहा। लगाये गये आरोपों के संबंध में पर्षद द्वारा एक स्थल निरीक्षण की जांच भी करायी गयी और जांच में भी यह पाया गया कि अधिकांष समय षिवानंद गिरि मंदिर में नहीं रहते हैं और मंदिर की जो आय है वह सभी अपने निजी रूप में उपयोग करते हैं तथा पूरा मंदिर कूप्रबंधन का षिकार है। षिवानंद गिरि के विरूद्ध अधिनियम की धारा 28 (2) के अन्तर्गत स्पष्टीकरण की मांग पर्षद के पत्र दिनांक 28.04.12, 26. 06.2012, 30.12.2012 एवं 30.10.2013 द्वारा किया गया, जिसके आलोक में दिनांक 02.11.2013 को स्पष्टीकरण दाखिल किया गया, जिसे बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास पर्षद की बैठक में विचार हेतु दिनांक 06.03.2014 को रखा गया। जिसमें सर्वसम्मति से उनके स्पष्टीकरण को अपर्याप्त पाते हुए न्यासधारी के पद से अपसारित किये जाने का निर्णय लिया गया, तदोपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक 04.09.2014 द्वारा उक्त मंदिर की देखभाल करने हेतु अंचल अधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया।
उपरोक्त के आलोक में अंचल अधिकारी द्वारा बैठक कर ग्रामीणों की न्यास समिति का गठन किया तथा स्वयंभू न्यास समिति ने वर्ष 2014-15 की मंदिर की आय-व्यय विवरणी दाखिल किया, जिसमें दिनांक 25.05.2015 तक मंदिर से आय 1,25,170/-रू0 दिखाया गया है। इस संबंध में पर्षद के पत्र दिनांक 21.08.2015 द्वारा अंचल अधिकारी को पत्र लिखा गया कि आपकी अध्यक्षता में कोई विकास समिति कार्य कर रही है, जबकि अधिनियम के अनुसार न्यास समिति का गठन पर्षद द्वारा मान्यता प्राप्त होने पर किया जाता है। अतः 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। पुनः पर्षद के पत्र दिनांक 13.06.2017 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, मढ़ौरा से न्यास समिति गठन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। इसी बीच अवसारित षिवानंद गिरि द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में CWJC NO-22029/14 दाखिल किया गया, जो दिनांक 06.09. 2017 को निष्तारित करते हुए सक्षम न्यायालय में याची को जाने के लिए निर्देष दिया गया। अंचल अधिकारी द्वारा या अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा न्यास समिति गठन हेतु कोई नामों का प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुआ तो पर्षद द्वारा दिनांक 07.01.2019 को जिला पदाधिकारी, सारण को पत्र लिखा गया कि अपने स्तर से उक्त पदाधिकारियों को न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों का प्रस्ताव भेजने का निर्देष दें। स्वयंभू न्यास समिति द्वारा पर्षद शुल्क के रूप में दिनांक 14.03.2016 दिनांक 11.06.2016 तथा दिनांक 09.06.2016 चेक के माध्यम से जमा कराया।
प्रभुदेव द्विवेदी द्वारा एक प्रार्थना-पत्र पर्षद में दिनांक 21.06.2019 को प्राप्त कराया जिसमें उल्लेख किया कि गांव में दिनांक 01.01.2019 को एक बैठक कर षिवानंद गिरि को महंत तथा नन्हक गिरि को पूजा-पाठ, सफाई आदि की जिम्मेदारी दी गयी है तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ दिनांक 01.01.2019 को जवाहर प्रसाद की अध्यक्षता में बैठक की फोटोप्रति भी दाखिल की। दूसरी तरफ स्वयंभू न्यास समिति के सदस्यों द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिनांक 28.06.2019 को पर्षद में उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि षिवानंद गिरि के पुत्र और नौकर नन्हक गिरि असमाजिक तत्वों के साथ मिलकर के मंदिर के नाम से फर्जी रसीद काट रहे हैं तथा जोर जबरदस्ती कर मंदिर के कमरे में ताला लगा दिया है। दान-पत्र में भी ताला लगा दिया गया है और भक्तों का शोषण किया जा रहा है। अपने प्रार्थना-पत्र के साथ अंचल अधिकारी के पत्र ज्ञापांक 357 दिनांक 19.06.2019 जो संबंधित थानाध्यक्ष को लिखा गया था भी सलंग्न किया है। उसमें अंचल अधिकारी द्वारा थानाध्यक्ष को मंदिर के प्रांगण के कमरों में बंद ताला को खुलवाने तथा अनाधिकृत रूप से फर्जी रसीद काट कर वसूली करने के संबंध में नन्हक गिरि व अन्य के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराये जाने का उल्लेख किया है साथ में स्वयंभू न्यास समिति के पत्र जो पु0 अधीक्षक, सारण को दिनांक 27.06.2019 को भेजा गया था, संलग्न किया तथा एक अन्य पत्र जो अंचल अधिकारी को पत्रांक 100 दिनांक 12.03.2015 को जिला जन षिकायत कोषांग को भेजा गया जिसमें उल्लेख किया गया है कि अंचल अधिकारी के अध्यक्षता में गठित समिति दिनांक 02.03.2015 से कुषलतापूर्वक दैनिक पूजा-पाठ, रागभोग आदि का कार्य कर रही है और मंदिर के नाम से पंजाब नेषनल बैंक में खाता भी है। नन्हक गिरि का मूल नाम नन्हक बिंद है जो पूर्वी चम्पारण के निवासी हैं और विवाहित व्यक्ति हैं तथा जोर-जबरदस्ती से मंदिर की आय को अपने पारिवारिक रूप में खर्च करते हैं। वह कभी मंदिर के पुजारी नहीं रहे हैं। उपरोक्त दोनों षिकायत-पत्र को पर्षद के पत्र दिनांक 09.07.2019 द्वारा जिला पदाधिकारी को भेजकर जांच करवाने तथा न्यास समिति गठन किये जाने हेतु 11 व्यक्तियों के नामों के प्रस्ताव की मांग पुनः की गयी।
ग्रामीण भीमसेन राय द्वारा स्वयंभू न्यास समिति के 06 सदस्यों के विरूद्ध परिवाद पत्र-2061/2019 मंदिर की विभिन्न मुर्ति चोरी आदि के संबंध में दर्ज कराया। जिला पदाधिकारी को पुनः पर्षद द्वारा स्मार-पत्र दिनांक 14.11.2019 एवं 29.02. 2020 भेजा गया कि नन्हक गिरि व अन्य द्वारा बिना किसी अधिकार के मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर सभी अन्य कमरों में ताला बंद करने के संबंध में, मंदिर में असमाजिक तत्वों से खाली करने का काम, मंदिर के नाम से फर्जी रसीद काट कर वसूली करने का पत्र आ0 अधीक्षक को दिनांक 02.01.2021 को पुनः लिखा गया। न्यास समिति गठन प्रस्ताव की पुनः मांग दिनांक 06.04.2021 को अनुमंडल पदाधिकारी से की गयी।
उपरोक्त तथ्य यह स्पष्ट करते हैं कि पूर्व से मंदिर कि सम्पति का क्रय-बिक्रय तथा उसकी आय को निजी उपयोग में न्यासधारी षिवानंद गिरि द्वारा किया जाता रहा। उनको अपसारित कर अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया। अंचलाधिकारी ने अपने अध्यक्षता में एक न्यास समिति का गठन कर लिया, परन्तु उसकी कोई सूचना पर्षद को नहीं दी गयी और बार-बार न्यास समिति गठन किये जाने हेतु पर्षद से अंचलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी को पत्र लिखा जाता रहा और यह भी स्पष्ट होता है कि वर्ष 2019 में उक्त षिवानंद गिरि, नन्हक गिरि व कुछ अन्य असमाजिक27 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 तत्वों के द्वारा बलपूर्वक मंदिर में कब्जा कर लिया गया और तब से वहां अपना अधिपत्य बना लिया है, जबकि निष्कासित षिवानंद गिरि द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल किया गया जो निरस्त हुआ। दीवानी न्यायालय में मिस0 वाद सं0-97/21 दाखिल किया जो सब ए0डी0जे0-7 के न्यायालय द्वारा षिवानंद गिरि का वाद भी दिनांक 25.01.2022 को खारिज हो गया और पर्षद के आदेष को उचित ठहराया गया और उक्त वाद में स्वयंभू न्यास समिति के सदस्यों को भी पक्षकार बनाया गया था। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा न्यास समिति बनाये जाने हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पहली बार पर्षद में दिनांक 30.07.2021 को समर्पित किया। जिस पर सभी पक्षों को आज सुनवाई का अवसर देते हुए उपस्थित होने का निर्देष दिया गया। जिस आलोक में नन्हक गिरि तथा स्वयंभू न्यास समिति के सदस्य एवं प्रस्तावित न्यास समिति के सदस्य उपस्थित हैं।
नन्हक गिरि का कथन है कि वह 35 वर्षों से मंदिर में पूजा-पाठ आदि का कार्य कर रहे हैं, परन्तु इस संबंध में उनके द्वारा कोई भी कागजात दाखिल नहीं किया गया। आज दिनांक 26.03.2022 को एक शपथ-पत्र दाखिल किया गया कि वह 40 वर्षों से सेवा कर रहे हैं तथा आम सभा की बैठक दिनांक 08.07.2021 फोटोप्रति भी दाखिल की। जिसमें उक्त बैठक में लगभग 20 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने हेतु प्रस्तावित है तथा परिवाद-पत्र सं0-2061/19 जो मुर्ति चोरी के संबंध में दाखिल किया गया था उसके आदेश की प्रति दिनांक 26.09.2020 भी दाखिल की है जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त वाद में षिवानंद गिरि, नन्हक गिरि और कालिका राय द्वारा परिवाद के समर्थन में बयान दिया गया है जो स्पष्ट करता है कि नन्हक गिरि व उक्त षिवानंद गिरि जिनको पर्षद द्वारा विरमित किया जा चुका है और जिनका दावा माननीय उच्च न्यायालय तथा विविध वाद अपर जिला जज के यहां से भी निरस्त किया जा चुका है। उक्त व्यक्तियों के विरूद्ध भी अंचलाधिकारी तथा स्वयंभू न्यास समिति द्वारा वर्ष 2019 में हीं षिकायत की थी कि वह जोर-जबरदस्ती से मंदिर के प्रांगण में कब्जा कर ताला बंद कर दिया है। जिस बात को आज पर्षद के समक्ष नन्हक गिरि द्वारा स्वीकार भी किया गया है। पर्षद ने पृच्छा कि वर्ष 2019 से आजतक लगभग 03 वर्षों में मंदिर की आय-व्यय विवरणी उसका हिसाब क्या है? उस संबंध में उनका कथन है कि वह कोई हिसाब-किताब नहीं रखते हैं और जो पैसा आया वह खर्च हो गया है। संचिका में कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जो नन्हक गिरि द्वारा शपथ-पत्र के आलोक में 40 वर्षों से सेवा में हैं, सत्य प्रतीत नहीं हो, क्योंकि सर्वप्रथम उनका नाम वर्ष 2019 में ही षिकायत के रूप में आया है। स्वयंभू न्यास समिति द्वारा वर्ष 2015 से 2019 में मंदिर के विकास के संबंध में जो कार्य किया गया उसका विस्तृत विवरणी तथा मंदिर का फोटोग्राफ भी दाखिल किया गया है। जिससे उक्त अवधि में मंदिर की स्थिति, साफ-सफाई, मंदिर का जीर्णोद्धार आदि स्पष्ट प्रतीत हो रहा है तथा उक्त अवधि में किये गये विकास कार्याें के संबंध में उल्लेख किया है कि पत्थर की खण्डित 05 मुर्तियों को अंचल अधिकारी के निर्देष से हीं बदलकर नयी मुर्तियों का पूजा-पाठ और प्राण-प्रतिष्ठा किया गया। जिसमें लगभग 60,000/-रू0 की राषि खर्च हुई। पुराने धर्मषाला को नये सिरे से निर्माण किया गया जिसमें लगभग 8,00,000/-रू0 खर्च किये गये, जो चंदे आदि से प्राप्त हुआ। उक्त धर्मषाला में 70/40 का टाइल्स लगाया गया जो दान-पेटी से प्राप्त राषि से खर्च किया गया। गर्भगृह तथा दक्षिण दिषा में 110/35 का फर्ष टाइल्स तथा कमरे में टाइल्स लगाया गया जिसमें लगभग 2,50,000/-रू0 का खर्च हुआ जो मंदिर में चंदे व दान की राषि से खर्च किया गया। 8/10 के 08 कमरे जो शादी-विवाह आदि के काम में आते हैं उसे 1,50,000/-रू0 खर्च कर बनाया गया। इंजिनियर दीनदयाल साह द्वारा 1,50,000/-रू0 दाने में दिया गया जिसे गर्भगृह में लगाया गया। कार्यालय हेतु 10/12 का कमरा बनाया गया जिसमें 1,10,000/-रू0 खर्च हुआ तथा 20 ऐसे व्यक्तियों के नामों की सूची है जो मुख्य रूप से दानकर्ता उक्त कार्याें में रहे। स्वयंभू न्यास समिति द्वारा 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति में रखे जाने हेतु दिया गया।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री सिल्हौड़ी षिव मंदिर, ग्राम-सिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन आदेष दिनांक 26.03.2022 के आलोक में करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सिल्हौड़ी षिव मंदिर, ग्राम-सिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री सिल्हौड़ी षिव मंदिर, ग्राम-सिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।28 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे गंभीर आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगी तो उनकी अर्हता समाप्त की जा सकती है।
उपरोक्त सभी तथ्यों पर विचार करते हुए मंदिर में पूजा-पाठ, रागभोग नियमित रूप से चले तथा मंदिर की सम्पति की सुरक्षा हो सके इस उद्देष्य से अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्राप्त सूची तथा स्वयंभू न्यास समिति द्वारा प्राप्त सूची पर विचार कर निम्न 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए किया जाता है जो हस्ताक्षर की तिथि से मान्यत होगा तथा मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है :-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, मढ़ौरा - पदेन अध्यक्ष 2. पंडित सर्वेष्वर उपाध्याय, पिता-स्व बीरेन्द्र उपा0 - उपाध्यक्ष 3. डॉ0 जितेन्द्र कुमार, पिता-स्व0 राजेष्वर प्र0 - सचिव 4. श्री सुरेन्द्र सिंह - कोषाध्यक्ष 5. श्री ब्रजकिषोर सिंह, पिता-श्री षिवनारायण सिंह - सदस्य 6. श्री अनिल कुमार सिंह, पिता-श्री दषरथ सिंह - सदस्य 7. श्री वीरकुंवर सिंह - सदस्य 8. श्री भुपेष प्रसाद - सदस्य 9. श्री गोविदा कुमार - सदस्य 10. श्री संजय पासवान - सदस्य 11. श्री राधा राय - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री सिल्हौड़ी षिव मंदिर, ग्राम-सिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण), पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
तथा मंदिर में पूजा-पाठ आदि का कार्य धर्मेन्द्र कुमार उपाध्याय पिता-श्री मधुनाथ उपा0 द्वारा किया जायेगा, जिन्हें न्यास समिति पूजा-पाठ, रागभोग आदि के लिए एक निर्धारित राषि तय कर प्रतिमाह भुगतान करेगी तथा कार्यालय को निर्देष दिया जाता है कि उपरोक्त सदस्यों में जिन व्यक्तियों का चरित्र सत्यापन प्राप्त नहीं है, उनका नाम संबंधित थाने में भेजकर चरित्र सत्यापन प्राप्त करें। उपरोक्त नामित व्यक्तियों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को न्यास समिति के कार्यकलाप में किसी भी प्रकार का अवरोध करने या मंदिर में किसी प्रकार के अवरोध उत्पन्न करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उनके विरूद्ध संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी जा सकेगी। भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
20 मई 2022
सं0 634--श्री राम जानकी सह षिव पार्वती मंदिर, थाना-साढ़ी, ग्राम-खजुरिया, पो0-रामप्रसौन, जिला-पष्चिमी चम्पारण पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3116 व 3117 है। दिनांक 28.03.2022 को पर्षद में हुये सुनवायी में पारित आदेष के आलोक में अनील कुमार, रामटहल दास, अखिलेष तिवारी की ओर से अधिवक्ता आलोक कुमार सिन्हा ने समर्पणनामा दिनांक-14.03.1972 में उल्लेखित न्यास समिति के सदस्य की तरफ से केषव भगत, किरण शंकर प्रसाद अपने अधिवक्ता महाष्वेता चटर्जी उपस्थित है। प्रथम पक्ष का कथन है कि सी0 एस0 खतियान में खाता संख्या-102 खेसरा संख्या-1038, 1039 एवं 27 रामदास चेला गुदर दास और खेसरा संख्या-1038 में ठाकुरबाड़ी का इन्द्राज है। आगे कथन किया कि खाता संख्या-177 का खेसरा संख्या-117, 151 रामदास उर्फ मुसद्दी लाल का नाम इन्द्राज है। तथा खाता संख्या-14/07, एवं 180 का खेसरा संख्या-21, 28, एवं 120 भी रामदास29 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 चेला गुदर दास के नाम का उल्लेख है और उक्त सभी भूमि वर्त्तमान में भी मन्दिर के आधिपत्य में है तथा कथन किया कि उक्त भूमि खेसरा संख्या-1038 ठाकुरबाड़ी के नाम इन्द्राज है, जो स्पष्ट करता है कि राम जानकी मन्दिर काफी प्राचीन समय से चला आ रहा है और जो प्रार्थी अनील वर्मा के पूर्वज रामदास उर्फ मुसद्दी लाल थें। अपने तर्क के समर्थन में एक शपथ-पत्र पर वंषावली दाखिल किया है। साथ ही कथन करते है कि प्रार्थी के परिवार को भी न्यास समिति में रखा जाए तथा अपने कथन के समर्थन में सी0 एस0 खतियान की प्रति भी दाखिल की गयी। द्वितीय पक्ष का कथन है कि रामेष्वर दास ने दिनांक-01.06.1962, 14.02.1962 एवं 18.09.1963 को लगभग 07 बिक्रय पत्र के माध्यम से अयोध्या प्रसाद, चंडी प्रसाद, रामअध्योध्या प्रसाद, रामजी एवं जयंती देवी तथा कृष्णा झा उक्त भूमि मौजा-हरदी, अमोलवा बलुआ तथा इनरबा में है। तथा कथन किया कि उक्त भूमि क्रय करने के पश्चात् रामेष्वर दास तथा बाबा अवध किषोर दास ने दिनांक-24.03.1972 को दो लिखित समर्पणनामा द्वारा भूमि मन्दिर में दान दी और उक्त समर्पणनामा दिनांक-24.03.1972 जो बाबा अवध किषोर दास द्वारा समर्पण किया गया, उसमें उल्लेख किया कि लगभग 10 वर्ष पूर्व षिव पार्वती मन्दिर, बांके मौजा मठ, खजुरिया में स्थापित किया तथा एक अन्य समर्पणनामा रामेष्वर दास द्वारा जो निस्पादित किया गया, उसमें उल्लेख किया कि लगभग 10 वर्ष पूर्व महावीर जी मन्दिर बांके मौजा-खजुरिया में स्थापित किया तथा उक्त समर्पणनामा में उल्लेखित भूमि की आय से मन्दिर के नियमित पूजा-पाठ, देख-भाल आदि के लिए समर्पित किया गया। तथा एक अन्य समर्पणनामा जो संत भगत, के पुत्र चंडी भगत, अयोध्या भगत, रामजी प्रसाद द्वारा 03 बी0 12 क0 04 धुर जमीन दिनांक-11.04.1945 को समर्पित किया है। जो श्री राम जानकी महाराज के पक्ष में है।
पूर्व समर्पणनामा दिनांक-24.03.1972 के आलोक में श्री महावीर जी एवं शंकर पार्वती मन्दिर के नाम से दो अलग-अलग संचिका का निबंधन पर्षद में किया गया था, जिसकी निबंधन संख्या-3116 एवं 3117 है। स्थल निरीक्षण तथा अन्य तथ्यों से यह पाया गया कि राम जानकी मन्दिर के साथ-साथ षिव पार्वती तथा महावीर मन्दिर एक ही स्थान पर स्थित है। अतः दोनों निबंधन को एक में शामिल करते हुए मन्दिर के नाम में परिवर्तन करके राम जानकी, षिव पार्वती एवं महावीर मन्दिर संषोधित पर्षद के आदेष दिनांक-11.02.2020 द्वारा किया जा चुका है। उक्त मन्दिर तथा मन्दिर की सम्पत्ति की सुरक्षा, देख-भाल व संचालन व्यवस्था हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी से 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी, जिस आलोक में रिपोर्ट दिनांक-19.09.2020 को प्राप्त हुआ है। जिसमें सी0 एस0 खतियान में खाता नं0-102, 177 आदि की भूमि का दान करने वाले परिवार है, उनमें किसी का नाम नहीं है। अतः उनमें से भी एक व्यक्ति का नाम न्यास समिति शामिल करते हुए न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है।
उपरोक्त परिस्थति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्र्तगत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतित होेता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी सह षिव पार्वती मंदिर, थाना-साढ़ी, ग्राम-खजुरिया, पो0-रामप्रसौन, जिला-पष्चिमी चम्पारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन आदेष दिनांक 28.03.2022 के आलोक में किया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी सह षिव पार्वती मंदिर, थाना-साढ़ी, ग्राम-खजुरिया, पो0-रामप्रसौन, जिला-पष्चिमी चम्पारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी सह षिव पार्वती मंदिर, थाना-साढ़ी, ग्राम-खजुरिया, पो0-रामप्रसौन, जिला-पष्चिमी चम्पारण न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।30 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे गंभीर आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगी तो उनकी अर्हता समाप्त की जा सकती है।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- 1. अनुमण्डल पदाधिकारी, नरकटियागंज - पदेन अध्यक्ष 2. श्री अनील कुमार वर्मा - उपाध्यक्ष 3. श्री केषव भगत - सचिव 4. श्री किरण शंकर प्रसाद - कोषाध्यक्ष 5. श्री विवेक वर्मा - सदस्य 6. श्री राम स्नेही प्रसाद - सदस्य 7. श्री अमिताभ चन्द - सदस्य 8. श्री ध्रुव नारायण साह - सदस्य 9. श्री जयनारायण यादव - सदस्य 10. श्री नरेन्द्र यादव - सदस्य 11. श्री शंकर शरण सिंह - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी सह षिव पार्वती मंदिर, थाना-साढ़ी, ग्राम-खजुरिया, पो0-रामप्रसौन, जिला-पष्चिमी चम्पारण), जिला-पष्चिमी चम्पारण पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है। उक्त न्यास समिति को किसी भी प्रकार की मन्दिर की भूमि को क्रय-बिक्रय, बंधक, रेहन करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा। केवल बन्दोबस्ती अधिक से अधिक दो वर्ष तक करने का अधिकार रहेगा और उक्त अवधि समाप्त होने के पश्चात् पुनः नये सिरे से बन्दोबस्ती की जाए। तथा 10,000/-से अधिक की राषि का खर्च बैंक के माध्यम से ही किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
21 मई 2022
सं0 671--सिद्धीदात्री महामाया बबनेष्वर महादेव ब्रह्मस्थान, ग्रामअंचल-मझौलिया, पो0-मुजफ्फरपुर, थाना-मुजफ्फरपुर सदर, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 4602 है।
अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन मंदिर का फोटोग्राफ तथा निवासियों के कथन आदि के अधार पर सार्वजनिक धार्मिक संस्था घोषित करते हुए निबंधन किया गया था। निवासियों द्वारा आम बैठक दिनांक 28.11.2021 को आयोजित की गयी, जिसमें मंदिर के प्रबंधन हेतु 13 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पास किया। जिसकी प्रति पर्षद को दिनांक 21.11.2021 को उपलब्ध कराया गया। प्रस्तावित नामों से चरित्र सत्यापन हेतु संबंधित थाना को पर्षद के पत्र दिनांक 12.01.2022 द्वारा भेजा गया, परन्तु प्रतिवेदन अभी भी अप्राप्त है तथा प्रस्तावित नामों में 03 पुलिस पदाधिकारी, जिसमें सेवा0नि0डी0जी0पी0, बिहार सरकार आरक्षी उपाधीक्षक पूर्वी मुजफ्फरपुर एवं अनुमंडल पदाधिकारी, को रखा गया है। उक्त मंदिर की स्थिति आदि पर विचारोपरान्त यह उचित प्रतीत नहीं होता है कि पुलिस के 03 बड़े पदाधिकारियों को एक साथ एक मंदिर के लिए रखा जाय और उन अधिकारियों की किसी भी प्रकार की कोई सहमति अभी भी पर्षद को प्राप्त नहीं है और अधिकतम 11 सदस्यों की न्यास समिति बनायी जा सकती है। इसपर विचारोपरान्त अनुमंडल पदाधिकारी, पूर्वी को अध्यक्ष बनाते हुए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता है तथा एक योजना का निरूपण किया जाता है। चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति को स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए सिद्धीदात्री महामाया बबनेष्वर31 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 महादेव ब्रह्मस्थान, मुजफ्फरपुर, मझौलिया, मुसहरी, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए 03 सदस्यीय न्यास समिति आदेष दिनांक 24.03.2022 के आलोक में गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''सिद्धीदात्री महामाया बबनेष्वर महादेव ब्रह्मस्थान, मुजफ्फरपुर, मझौलिया, मुसहरी, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''सिद्धीदात्री महामाया बबनेष्वर महादेव ब्रह्मस्थान, मुजफ्फरपुर, मझौलिया, मुसहरी, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नांकित न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए की जाती है :-
1. अनुमंंडल पदाधिकारी, पूवी, मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री लक्ष्मण मिश्रा, सेवा नि0, रेल स्टेषन अधीक्षक - उपाध्यक्ष 3. प्रोफेसर सवलिया बिहारी वर्मा, मेजर अंषदाता, षिवपुरी, वार्ड 27 - सचिव 4. श्री रतन कुमार गुप्ता, मंदिर के सामने - कोषाध्यक्ष 5. श्री मनोज कुमार, अधिवक्ता, पटना हाई कोर्ट, आवास, षिवपुर, वार्ड 27 जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 6. ई0 सुधीर राजवंष, जे0ई0, कुढ़नी, अंचल-मुजफ्फरपुर आवास रेलवे गुमटी सं0 5 के निकट - सदस्य 7. श्री कृष्ण कुमार प्रसाद चौधरी उर्फ राणाजी, से0नि0 पदाधिकारी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया - सदस्य32 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 8. श्री दीपक कुमार सिंह, लेन नं0 02, पंचवटी कॉलोनी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 9. श्री अभिमन्यु कुमार चौहान, वार्ड पार्षद 10, जयप्रभा नगर, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 10. श्री रवि रंजन सिंह, एम0 सिंह साइन्स कॉलेज के पष्चिम, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 11. श्री रामाषंकर प्रसाद, सेवा नि0 विष्वविद्यालय कार्यालय आवास षिवपुरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में न्यास के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (सिद्धीदात्री महामाया बबनेष्वर महादेव ब्रह्मस्थान, ग्रामअंचल-मझौलिया, पो0-मुजफ्फरपुर, थाना-मुजफ्फरपुर सदर, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है। न्यासधारी श्री शम्भूनाथ दूबे को निर्देष दिया जाता है कि जो बकाया पर्षद शुल्क है, उसे भी 03 (तीन) माह में जमा करें।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
9 मई 2022
सं0 475--श्री राम जानकी मंदिर (ठाकुरवाड़ी), ग्रामपो0-तेपरी, थाना-पियर, अंचल-बन्दरा, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 4252 है।
उक्त न्यास समिति के गठन के बिन्दु पर निर्णय लिया जाना है, इस मंदिर की पूर्व में चन्देष्वर दास द्वारा किया जाता रहा, परन्तु चन्देष्वर दास मंदिर की सम्पत्ति का बिक्रय करने लगें तथा ग्रामीणों द्वारा जब मंदिर की सम्पत्ति से होने वाली आय आदि के संबंध में बैठक बुलाकर पूछ-ताछ की गयी तो उन्होंने किसी भी प्रकार का हिसाब-किताब देने से मना कर दिया। वर्ष 2005 में वह मंदिर से चले गयें। तत्पष्चात मंदिर की देखभाल रघुनाथ ठाकुर द्वारा की जाती है, परन्तु उक्त चन्देष्वर दास द्वारा 2012 में 08 गट्ठा 03 धुर भूमि अवैध रूप से बिना अनुमति के योगेन्द्र राय के पक्ष में बिक्रय कर दिया। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी मिलने पर 05 लोगों की समिति में उक्त बिक्रय-पत्र को निरस्त कराने हेतु हकीयत वाद सं0-1233/2013 दाखिल किया गया। जिसमें वादी के रूप में क्रमषः रघुनाथ ठाकुर, रामभवन ठाकुर, रामानन्द ठाकुर, अरूण ठाकुर एवं राजेेष ठाकुर वादी है। उक्त मुकदमें में वादों की तरफ से साक्ष्य लिया जा चुका हैं तथा कथन करते हैं कि मोहन शर्मा तथा कृष्णनंदन कुमार अवैध रूप से मंदिर की भूमि का बिक्रय करना चाहते थें तथा कुछ भूमि पंचायत भवन बनाना चाहते थे, जिसमें प्रार्थीगण तथा ग्रामीणों द्वारा आपत्ति की गयी तब वह कार्रवाही रूक गयी। उपरोक्त व्यक्तियाें द्वारा ही पर्षद में गलत सूचना दी गयी।
प्रार्थीगण द्वारा ही सर्वप्रथम पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर मंदिर का निबंधन कराया गया तथा राजस्व अभिलेख में वर्त्तमान में लगभग 07 बीघा जमीन हैं, जिसमें 01 बीघा जमीन नदी में कट गयी है और मौके पर 5 से 6 बीघा जमीन है, जिसमें कुछ भूमि पर अतिक्रमण है और लगभग 05 एकड़ जमीन अभी भी प्रार्थीगण के कब्जे में है। अतः निवेदन करते है कि न्यास समिति का गठन कर दिया जाय, जिसमें उपरोक्त हकीयतवाद में नियमित रूप से कार्रवाई की जा सके तथा मंदिर की भूमि की रक्षा की जा सके।
पर्षद में आम सभा के माध्यम से दिनांक 02.09.2021 को 11 नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ तथा एक अन्य 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव आम सभा दिनांक 24.01.2021 के माध्यम से प्राप्त हुआ। उक्त दोंनों सूची को संबंधित थाना को भेजा गया और थाने की रिपोर्ट दिनांक 14.01.2021 को प्राप्त हुई जिसमें उल्लेख किया गया है कि सत्यदेव पाण्डेय की अध्यक्षता में जो समिति कार्य कर रही है, उसका कार्य संतोषजनक और सहुलियतपूर्वक कर रही है। कुछ समाज के लोगों द्वारा उक्त समिति को भंग कर मनमाने ढंक से नया रूप-'रेखा बनाकर चलाना चाह रहे है तथा मंदिर की जमीन तथा सैरात, पेड़-पौधा पर कब्जा करना चाहते है। यह रिपोर्ट किया है कि सत्यदेव पाण्डेय अध्यक्ष हैं तथा जो प्रस्ताव आया है उसमें से भाग्यषरण पाठक का स्वर्गवास हो चुका है। पुलिस की उपरोक्त रिपोर्ट तथा दोनों प्रस्तावित नामों में से निम्न न्यास समिति गठन किया जाता है तथा एक योजना का निरूपण किया जाता है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर (ठाकुरवाड़ी), ग्रामपो0-तेपरी, थाना-पियर, अंचल-बन्दरा, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए 11 सदस्यीय न्यास समिति आदेष दिनांक 28.03.2022 के आलोक में गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर (ठाकुरवाड़ी), ग्रामपो0-तेपरी, थाना-पियर, अंचल-बन्दरा, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर (ठाकुरवाड़ी), ग्रामपो0-तेपरी, थाना-पियर, अंचल-बन्दरा, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।33 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- 1. श्री सत्यदेव पाण्डेय - अध्यक्ष 2. श्री संतोष कुमार - उपाध्यक्ष 3. श्री रामभवन ठाकुर - सचिव 4. श्री रामलखन सिंह - कोषाध्यक्ष 5. श्री रघुनाथ ठाकुर - पुजारी 6. श्री अरूण कुमार - सदस्य 7. श्री रामचन्द्र राय - सदस्य 8. श्री कार्तिकेष कुमार - सदस्य 9. श्रीमती जानकी देवी - सदस्य 10. श्री देवनारायण ठाकुर - सदस्य 11. श्री अषोक पासवान - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मंदिर (ठाकुरवाड़ी), ग्रामपो0-तेपरी, थाना-पियर, अंचल-बन्दरा, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति का गठन हस्ताक्षर के तिथि से एक वर्ष के लिए किया जाता है।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
11 मई 2022
सं0 537--श्री राम जानकी मठ ग्राम-रतवारा टोले, बैंरिया, पो0-रतबारा, बिन्दवारा, थाना-औराई, जिला-मुजफ्फरपुर, जिसकी संचिका पर्षद में वर्ष 1987 से संचालित है और पूर्व में न्यासधारी द्वारा पर्षद के आदेषों का पालन34 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 नहीं करने के फलस्वरूप पर्षद के आदेष दिनांक-20.01.1993 द्वारा न्यासधारी का अपसारित करते हुए अंचलाधिकारी को अगले आदेष तक अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। उपरोक्त तथ्य यह स्पष्ट करते है कि उक्त मन्दिर के सार्वजनिक धार्मिक पाते हुए पर्षद द्वारा कार्रवाई की जा रही थी, परन्तु निबंधन का औपचारिक आदेष पारित नहीं किया गया था। अतः उक्त त्रुटी को दूर करते हुए, पर्षद के आदेष दिनांक-14.01.2022 द्वारा इसके निबंधन किये जाने का निर्देष दिया गया। संचिका पर उपलब्ध खतियान की प्रति से यह स्पष्ट होता है कि खाता संख्या-1128, जिसमें 10 खाते है, जिसका कुल रकबा 05 ए0 36 डी0 है तथा खेसरा संख्या 4616 में 04 डी0 जमीन अंकित है, जबकि नक्षे और कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल 2.89 ए0 है तथा खाता 3662 जो सेवायत झुरी दास चेला महंत रामानुजाचार्य बैरागी के नाम का इन्द्राज है, जिसमें दो खेसरा कुल 1.17 ए0 है। इस प्रकार उक्त मन्दिर के नाम कुल 6 ए0 63 डी0 का खतियान उपलब्ध है। संचिका पर पूर्व महंत राम जी दास द्वारा श्री कृष्ण दास के नाम से निष्पादित वसीकानामा दिनांक-18.12.1983 उल्लेख है कि भूमि राम जानकी जी सेवायत के तौर पर कृष्ण दास को नामित किया है। पर्षद में चन्देष्वर राय व कुछ अन्य ग्रामीणों द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया था कि उक्त मन्दिर में लगभग 12 ए0 जमीन है, जिसमें 1962 में सर्वे में मन्दिर के नाम हो चुका है और समाज के सभी लोग एकत्रित होकर मन्दिर में परिमार्जित करते रहे है। कुछ लोगों द्वारा कुचक्र कर मन्दिर की भूमि कब्जा करने का प्रयास किया गया है और सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए न्यास समिति का गठन किया जाए। इस संबंध में दिनांक-07.06.2019 को मन्दिर के सेवायत हेतु दावा करने वाले कृष्ण दास द्वारा भी प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसमें खतियान की प्रति संलगन करते अग्रेत्तर कार्रवाई किये जाने की प्रार्थना की गयी है और उक्त प्रार्थना-पत्र के साथ मन्दिर के नाम से थाना संख्या-105 खाता संख्या-1128, 3463 कुल 6 ए0 53 डी0 जमीन का उल्लेख किया है तथा दिनांक-19.08.2019 को चन्देष्वर राय व अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि ग्रामीणों की एक बैठक दिनांक-10.08.2019 को आयोजित की गयी, जिसमें मन्दिर की दैनीय दषा पर चर्चा हुई और तदोपरान्त श्री बिकाउ दासको ग्रामीणों द्वारा प्रस्ताव रखा गया कि एक कुषल व योग्य और अनुभवी साधु रखा जाय जिस पर जिसपर श्री बिखम दास को महंत बनाये जाने का प्रार्थना किया गया। इसी बीच अचंलाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु भी नामों के प्रस्ताव की मांग दिनांक-06.09.2019 द्वारा की गयी तथा अंचलाधिकारी से भूमि के संबंध में रिपोर्ट की मांग की गयी, जिसमें अंचलाधिकारी ने अपने पत्रांक-792 दिनांक-10.10.2020 द्वारा स्थल निरीक्षण कर अंचल अमीन से प्राप्त रिपोर्ट को उपलब्ध कराया है। यह उल्लेख किया गया है कि थाना संख्या-105 में खेसरा संख्या-3005 एवं अन्य 12 खेसराओं का मापी किया जिसका कुल रकबा-540 डी0 है तथा साथ ही खाता संख्या-1128 और 3563 की कुछ भूमि किन व्यक्तियों के अतिक्रक्रण में है, उसका उल्लेख किया है। उपरोक्त रिपोर्ट के आलोक में सभी अतिक्रमणकारियों को निर्देष पर्षद द्वारा दिनांक-26.11.2020 को अपना पक्ष रखने हेतु जारी की गयी, जिसपर दिनांक-28.12.2020 को सभी पक्ष (अतिक्रमणकारी) उपस्थित हुए और कथन किया कि लगभग 80 वर्षो से उक्त जमीन पर है, उनके कच्चे पक्के मकान बने हुए है तथा कब्जे के संबंध में दस्तावेज दाखिल करने के लिए 03 माह के समय की मांग लिखित प्रार्थना-पत्र द्वारा की गयी।
दिनांक-28.12.2020 को सुरेष दास द्वारा कथन किया गया कि पूर्व महंत रामकिषन दास द्वारा प्रार्थी के पक्ष में एक दस्तावेज दिनांक-22.05.2001 को निष्पादित किया है और तब से वह उक्त भूमि की देख-भाल कर रहे है और भीक्षाटन आदि करके 04 ए0 41 डी0 जमीन बंधक से मुक्त कराया है। आगे कथन किया कि 1.5 बी0 जमीन उनके कब्जे में है, बाकी जमीन दबंगों द्वारा कब्जा कर रखा है और मन्दिर में कितनी जमीन है, उसे उन्हें जानकारी नहीं है। 03 माह में अतिक्रमणकारियों द्वारा कोई प्रत्योत्तर व दस्तावेेज नहीं दाखिल करने पर पुनः दिनांक-08.03.2021 को सभी पक्षों को निबंधित डाक द्वारा सूचना भेजी गयी। पुनः दिनांक-09.08.2021 को नोटिस जारी की गयी। दिनांक-08.09.2021 को देवेन्द्र साह उपस्थित हुए और कथन किया कि प्रार्थी का मकान खेसरा संख्या-1957, 1958 पर है। जिसका नया खाता संख्या-1128 खेसरा संख्या-4897 है। जिसका कुल रकबा 12 डी0 है जिसमें 03 डी0 जमीन पर उनका मकान है और इनके दादा भैरव साह को पूर्व महंत झुरी दास द्वारा पंचायतनामों के तहत प्राप्त हुआ है।
न्यास समिति बनाये जाने हेतु भी प्रस्ताव ग्रामीणों द्वारा बैठक में पारित कर दिया। जिसे अंचलाधिकारी को उनके मंतव्य तथा कुछ अन्य नाम जिसे जोड़ना या हटाने के संबंध में पत्र दिनांक-24.01.2022 को सूची संलग्न करते हुए भेजी गयी, परन्तु अंचलाधिकारी द्वारा पर्षद के पत्र का कोई प्रत्योत्त नहीं प्राप्त हुआ है, जबकि अंचलाधिकारी की प्रतिवेदन दिनांक 10.10.20 से स्पष्ट है कि मन्दिर की भूमि पर लोगों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है और सेवायत का दावा करने वाले सुरेष दास तथा पूर्व महंत कृष्णा दास द्वारा कभी भी पर्षद में मन्दिर के संबंध में, मन्दिर की भूमि के संबंध में तथा अतिक्रमणकारियों के संबंध में किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गयी है और न पत्राचार किया और न ही अधिनियम की धारा 59, 60, 70 के तहत बजट, आय-व्यय विवरणी ही दिया गया, जो स्पष्ट करता है कि पूर्व सेवायत द्वारा मन्दिर की भूमि को अवैध रूप से अतिक्रमण किये जाने में पुर्ण रूप से सहयोग किया और मन्दिर की भूमि पर अपना आधिपत्य बनाते हुए उसका दुरूपयोग निजी हित में किया गया।
अतः ऐसी परिस्थिति में एक न्यास समिति का बनाया जाना आवष्यक प्रतीत होता है और अंचलाधिकारी को प्रस्तावित नामों की सूची भेजी गयी, परन्तु कोई प्रत्योत्तर नहीं प्राप्त हुआ।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मठ ग्राम-रतवारा टोले, बैंरिया, पो0-रतबारा, बिन्दवारा, थाना-औराई, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की35 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मठ ग्राम-रतवारा टोले, बैंरिया, पो0-रतबारा, बिन्दवारा, थाना-औराई, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मठ ग्राम-रतवारा टोले, बैंरिया, पो0-रतबारा, बिन्दवारा, थाना-औराई, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे गंभीर आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगी तो उनकी अर्हता समाप्त की जा सकती है।
अतः अंचलाधिकारी के प्रत्योत्तर का इन्तजार किये जाने मन्दिर की जमीन में और बाधा उत्पन्न करने की समस्या और हो सकती है। अतः प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए बनाया जाता है तथा एक योजना का निरूपण किया जाता है। इसके सदस्य निम्न होगे :-
1. अंचलाधिकारी, औराई, जिला-मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री चन्देष्वर राय - सचिव 3. श्री अजय मंडल - उपाध्यक्ष 4. श्री अषोक राय - कोषाध्यक्ष 5. श्री सुरेष दास - सदस्य 6. श्री षिवनाथ साह - सदस्य 7. श्री अषर्फी राय - सदस्य 8. श्री रजनीष कुमार निराला - सदस्य 9. श्री देवेन्द्र कुमार - सदस्य 10. श्री षिवनाथ साह - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मठ ग्राम-रतवारा टोले, बैंरिया, पो0-रतबारा, बिन्दवारा, थाना-औराई, जिला-मुजफ्फरपुर), पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। अंचलाधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त होने पर या थाना से चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट प्राप्त होने पर सूची में बदलाव या स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।36 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 न्यास समिति जितनी भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है, उन सब से वार्तालाप करके यदि उनका पुराना मकान भूमि पर बना हुआ है तो उन्हें किरायेदार के रूप में रखने पर विचार कर सकती है, जो खेती की भूमि है, उसकी बन्दोबस्ती स्वयं खुली डाक द्वारा नये सिरे से करेंगे।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
21 अक्तूबर 2021
सं0 3587--श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर, जिला-सीतामढ़ी पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-2535 है।मन्दिर में लगभग वर्ष 1997-98 की आय-व्यय विवरणी में कूल भूमि 08 ए0 34 डी0 अंकित है। जबकि संचिका पर उपलब्ध समर्पणनामा दिनांक-31.05.1912 में कूल 17 बी0 15 क0 जमीन का उल्लेख है। मो0 दरमन कुंअर जौजे चन्द्रदीप प्रसाद राधाकृष्ण मन्दिर की स्थापना कर भूमि मन्दिर के नाम दान दी। पूर्व के सेवायत द्वारा न्यास की कुछ भूमि का बिक्रय किया गया था। पर्षद द्वारा अंचलाधिकारी से दिनांक-16.01.1991 को मन्दिर की भूमि के संबंध में रिपोर्ट की मांग की गयी थी, अंचलाधिकारी द्वारा पत्रांक-347, दिनांक-31.07.1997 द्वारा यह सूचित किया गया कि महंत धनुषधारी की मृत्यु पूर्व में हो चुकी है। वर्त्तमान पुजारी जानकी दास चेला प्रभु दास राग-भोग आदि करते हैं।जानकी दास द्वारा पर्षद की नोटिस के उपरान्त एक प्रार्थना-पत्र दिनांक-09.11.1998 को दाखिल किया, जिसमें प्रार्थना की कि प्रार्थी को मंदिर की जमीन वापस लाने हेतु मुकदमा दायर करने की अनुमति दी जाए। जानकी दास द्वारा हकियत वाद 86/99-2000 अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध दाखिल किया। उक्त वाद में पर्षद को पक्षकार नहीं बनाया गया। दिनांक-22.07.2006 को एक प्रार्थना-पत्र दिया कि मन्दिर की सभी जमीन अतिक्रमण में है और लोग तरह-तरह की धमकी दे रहे है और मन्दिर में एक न्यास समिति का गठन किया जाए तथा प्रार्थी की सुरक्षा का भी प्रबंध किया जाए।वर्ष 2019 में श्री एल0पी0 सिन्हा द्वारा पर्षद को सूचित किया गया कि मठ की भूमि को अवैध रूप से बिक्री कर दिया गया है। अंचलाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी एवं पुजारी से इस संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी परंतु कोई रिपोर्ट पर्षद को प्राप्त नहीं हुआ। आदेष ज्ञापांक-3002, दिनांक-26.02.2020 को अनुमण्डल पदाधिकारी, सीतामढी को अस्थायी न्यासधारी बनाते हुए उनके अधिनस्थ कर्मी द्वारा स्थल निरीक्षण कर एक विस्तृत रिपोर्ट तथा समिति गठन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। श्री कृष्ण चेतना परिषद के सदस्यों द्वारा सूचना दी गयी कि आम लोगों के सहयोग से लगभग 70 लाख रुपया खर्च कर मन्दिर का जीर्णोद्धार कर उसमें धर्मषाला, सभा भवन का कार्य किया जा रहा है तथा जयपुर से राधाकृष्ण की मूर्त्ति भी मंगवाई गयी है और उक्त मन्दिर के पुजारी सपरिवार मन्दिर में निवास करते है, जिससे मन्दिर का विकास कार्य में तथा भक्तों को तरह-तरह से परेषानीयाँ हो रही है। दिनांक-07.09.2021 को पर्षद द्वारा इस संबंध में सुनवाई की गयी। सूचना के बावजूद श्री जानकी दास आज पर्षद में उपस्थित नहीं हुए । इस सुनवाई में पर्षद के माननीय सदस्य जो स्वयं महंत हैं और सीतामढ़ी के निवासी हैं के द्वारा भी प्रस्तावित नामों पर स्वीकृति देते हुए एवं एक अन्य व्यक्ति श्री रामानंद दास को भी समिति में रखे जाने का प्रस्ताव दिया। उपर्युक्त वर्णित परिस्थिति में श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर, जिला-सीतामढ़ी की भूमि वो सम्पत्तियो की सुरक्षा, सम्यक प्रबंधन, विकास आदि के न्यास समिति का गठन आवष्यक है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक- 07.09.2021 द्वारा लिए गये निर्णय के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर, जिला-सीतामढ़ी''की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए के न्यास समिति एक वर्ष के लिए गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर,(लक्ष्मी हाई स्कूल के पास)पो0जिला-सीतामढ़ी'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नामश्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर,(लक्ष्मी हाई स्कूल के पास)पो0जिला-सीतामढ़ी''होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा । बचत खाता का संचालन संयुक्त रूप से दो सदस्याें कोषाध्यक्ष एवं अध्यक्ष या सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
3. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 4. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
7. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करनेका अधिकार नहीं होगा अगर वे ऐसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी37 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 कार्रवाई की जायेगी।साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
8. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
9. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
10. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
12. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
13. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. श्री सीताराम यादव पिता-स्व0 रघुनंदन यादव - अध्यक्ष ग्रामपो0-नया टोला, थाना-नानपुर, जिला-सीतामढ़ी। 2. श्री रामानंद दास - उपाध्यक्ष 3. इं0 हरेराम यादव, पिता- स्व0 जीवेष्वर यादव - उपाध्यक्ष ग्रामपो0थाना-सीतामढ़ी (लक्ष्मी किषोरी स्कूल के पास)। 4. श्री मदन प्रसाद (भगत), पिता- श्री सुकदेव प्रसाद - सचिव ग्रामपो0-सीतामढ़ी। भगत हार्डवेयर मेन रोड, सीतामढ़ी। 5. श्री सुरेन्द्र प्रसाद यादव, पिता- श्री राजदेव प्रसाद यादव - कोषाध्यक्ष ग्रामपो0-सहियारा, बथनाहा, जिला-सीतामढ़ी। 6. श्री मुन्ना यादव पिता-स्व0 नागेन्द्र प्रसाद यादव - सदस्य ग्रामपो0-चकमहिला, थाना-सीतामढ़ी। 7. श्री अमीरी राय, पिता- श्री षिवकरण राय - सदस्य ग्रामपो0-मोहनपुर, थानाजिला-सीतामढ़ी। 8. श्री रामप्रवेष राय पिता- श्री रामवृक्ष राय - सदस्य ग्रामपो0-चकमहिला, थाना-सीतामढ़ी। 9. श्री विनोद राय पिता- स्व0 रामवृक्ष राय - सदस्य ग्रामपो0-सरदलपट्टी, परिहार, सीतामढ़ी, हाल मुकाम-ऑफिसर कोलोनी, थाना-डुमरा (डुमरा थाना से दक्षिण)। 10. श्री चितरंजन प्रसाद यादव पिता- श्री ब्रहमदेव राय - सदस्य ग्रामपो0-फतहपुर, थानाजिला-सीतामढ़ी। 11. श्री राजेष कुमार, पिता-स्व0 बैद्यनाथ यादव - सदस्य ग्रामपो0थाना-सीतामढ़ी (थाना रोड, वैष्णा देवी मंदिर के पास)।
उक्त के अतिरिक्त निम्न को विषेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उपरोक्त न्यास समिति चाहे तो बैठक में आमंत्रित कर सकते हैंः- इं0 राज किषोर नारायण यादव, श्री राम स्वार्थ राय पिता- जौजे राय, श्री बजरंगी लाल गाड़िया पिता-स्व0 काषीनाथ गाड़िया। पुजारी जानकी दास को मन्दिर में पुजा करने का पुर्ण अधिकार रहेगा। वह अन्य पुजारी के साथ मन्दिर का पूजा-पाठ आदि करेंगे। समिति इस एवज में पुजारी को 6000/- रुपये प्रतिमाह देंगे तथा मन्दिर में जो मूर्त्ति पर फल, फूल, मिठाई या चढ़ावा (रुपया दो रुपया) आता है, उसपर जानकी दास व अन्य पुजारी जो समिति द्वारा नियुक्त किया गया हो, आपस में बाँटकर लेंगे।
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर, जिला-सीतामढ़ी''पर ही रहेगा,किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।38 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 19 मई 2022 सं0 628--श्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा, बिहार शरीफ, जिला-नालन्दा,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3190/93है।
उक्त न्यास में पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। नयी न्यास समिति का गठन किया जाना है। इस संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी से नामों की मांग की गयी थी। अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 1277, दिनांक-04/10/2021 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया है। जिसमें कार्यरत न्यास समिति के सदस्यों को सामिल किया गया; जिसमें अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा राज किषोर प्रसाद का नाम क्रम संख्या- 02 पर प्रस्तावित किया गया; जबकि कार्यरत न्यास समिति द्वारा अपने प्रस्ताव दिनांक- 16/08/2021 में उल्लेख किया था कि राज किषोर प्रसाद काफी वृद्ध हो गये है और उनके स्थान पर नये व्यक्ति के नाम का प्रस्ताव दिया गया तथा किये गये विकासात्मक कार्यो के संबंध में एक प्रतिवेदन पर्षद में दिनांक- 18/01/2022 को समर्पित की गयी थी, जिसमें मुख्य रूप से 09 कमरे का धर्मषाला निर्माण, तालाब का जीर्णोद्धार, बाबा की समाधी का जीर्णोद्धार, परिक्रमा पथ का निर्माण, षिवालय में टाईल्स, छत की मरम्मति आदि मुख्य कार्य है।
न्यास समिति के उपरोक्त प्रस्ताव तथा किये गये विकास कार्य के विरूद्ध उक्त मन्दिर के पूर्व सचिव, महेष कुमार द्वारा घोर आपत्ति की गयी और कथन किया गया कि वर्त्तमान समिति वर्ष 2007-08 से कार्यरत है वर्ष 2007-08 में समिति द्वारा लगभग 09 लाख से अधिक की आय और 05 लाख बैंक खाते में दिखलाया गया है, परन्तु 12 वर्षों के अन्तराल के पश्चात् भी समिति के द्वारा आय बहुत कम दिखलायी जा रही है, जबकि वास्तविकता कुछ और है और एक फोटो दिखलाया गया कि अभी भी गर्भगृह के एक तरफ जर्जर अवस्था में है, जिसे कार्यरत न्यास समिति के सचिव द्वारा स्वीकार भी किया गया है तथा आरोप लगाया गया कि मन्दिर की भूमि को बाउण्ड्री के पश्चात समिति के सदस्य के षडयंत्र से चाहरदिवारी के अन्दर मकान का निर्माण किया जा रहा था। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी, नालन्दा को दिनांक- 22/12/2021 को दिया गया। प्रत्योत्तर में न्यास समिति के सचिव द्वारा कथन किया जा रहा है कि किये जा रहे निर्माण पर रोक लगाया जा चुका है और न्यास समिति ने भी इसकी पूर्व सूचना अनुमण्डल पदाधिकारी को उक्त निर्माण की सूचना दी थी और वर्त्तमान में मन्दिर के चाहरदिवारी के अन्दर मात्र एक मकान जो दो मंजिला मकान है, जो पूर्व से बना हुआ है और कोई भवन बाउण्ड्र्री के अन्दर नहीं है।
उपरोक्त परिस्थिति में न्यास समिति द्वारा किये गये विकासात्मक कार्य तथा अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों में से राजकिषोर प्रसाद के नाम को छोड़कर न्यास समिति का गठन तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक योजना का निरूपण करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक- 30/04/2022 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुयेश्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा, बिहार शरीफ, जिला-नालन्दा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा न्यास योजना, बिहार शरीफ, जिला-नालन्दा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा न्यास समिति, बिहार शरीफ, जिला-नालन्दा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।39 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति 05 वर्ष के लिएगठित की जाती हैः-
1. अनुमण्डल पदाधिकारी, बिहार शरीफ, - अध्यक्ष 2. श्री अमर कान्त भारती, - उपाध्यक्ष 3. श्री शकलदेव वात्सयायन - सचिव 4. डॉ0 प्रदीप गुप्ता - कोषाध्यक्ष 5. थानाध्यक्ष, बिहार थाना, बिहार शरीफ - सदस्य 6. अंचल अधिकारी, बिहार शरीफ - सदस्य 7. श्री सतीष कुमार - सदस्य 8. श्री विपीन कुमार - सदस्य 9. श्री रंजीत कुमार - सदस्य 10. श्री प्रकाष कुमार यादव - सदस्य 11. श्री रवि रंजन गुप्ता - सदस्य पता-श्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा, बिहार शरीफ, जिला- नालन्दा। उक्त आदेष के आलोक मेें''श्री बाबा मणिरामजी अखाड़ा, बिहार शरीफ, नालन्दा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
8 जून 2022
सं0 915--श्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम-महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना-महिषी, जिला-सहरसा,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1553है।
उक्त मंदिर के संबंध में विस्तृत इतिहास पर्षद के आदेश दिनांक- 05/12/2020 में वर्णित किया गया है। उक्त मंदिर में एक भंडार, धर्मशाला, मकान, जो ग्रामीणों के सहयोग से निर्मित है तथा एक यात्रिशाला, जो विधायक निधि से निर्मित है। वर्तमान में दुध, चूड़ा, अरवा चावल आदि चढ़ता है तथा मंदिर में दान-पेटी भी है।
उक्त मंदिर के अधीनस्थ 3.24 एकड़ जमीन का दस्तावेज संचिका पर उपलब्ध है। निबंधन के समय उक्त स्थल की देखभाल सेवायत बूची खिरहरी द्वारा की जाती रही है, परन्तु पर्षद द्वारा बार-बार पत्र दिये जाने के बावजूद भी न तो स्वयं कभी उपस्थित हुए और न हीं कोई प्रति-उत्तर दाखिल किया गया और मंदिर की स्थिति के बारे में दिनांक 23/01/1996 को कबीर मठ के महंत रामस्वरूप शास्त्री द्वारा पर्षद में एक षिकायत पत्र दाखिल किया गया कि मंदिर में लूट-पाट मचा हुआ है, कोई देखभाल करने वाला नहीं है। दिनांक- 21/09/2005 को तनुक लाल खिरहरी द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि वह पूर्व सरपंच हैं और उनको उस मंदिर की प्रबंधन हेतु अधिकृत किया जाए। इसी बीच वर्ष 2006 में षिवनंदन खिरहरी द्वारा उक्त मंदिर की देखभाल करने तथा महंत होने का दावा करने और न्यासधारी बनाये जाने की प्रार्थना की। पर्षद की संचिका में वर्ष 2006-07 से उपरोक्त शिवनंदन खिरहरी द्वारा ही आय-व्यय विवरणी दिनांक- 13/06/2008 को समर्पित किया गया। तत्पश्चात मंदिर के संबंध में कोई जानकारी पर्षद में नहीं दी गयी।
उपेन्द्र दास खिरहरी द्वारा स्वयं को सेवायत का दावा करते हुए एक स्वत्व सूट नं0- 125/06 सब जज सहरसा, में दाखिल किया, जिसमें शिवनंदन खिरहरी व अन्य के विरूद्ध दाखिल किया। संचिका पर वर्ष 2019 में न्यास समिति का गठन किये जाने हेतु एक आम सभा द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था, जिस पर अध्यक्ष और सचिव के रूप में40 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 प्रस्तावित व एक अन्य सदस्य के विरूद्ध आपराधिक केस होने की सूचना थाने द्वारा दी गयी तथा कुछ ग्रामीणों द्वारा आपति भी दाखिल की गयी। अतः पर्षद द्वारा अपने आदेश दिनांक- 05/12/2020 में ही न्यास समिति गठन किये जाने का निर्णय लेकर अनुमंडल पदाधिकारी से 11 व्यक्तियों के नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी जो प्राप्त हो चुका है। तदनुसार एक न्यास समिति का गठन एवं इसके कार्यान्वयन हेतु एक योजना का गठन करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-04/05/2022 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री कारू खिरहरी स्थान न्यास योजना, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री कारू खिरहरी स्थान न्यास समिति, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत 03 सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत, विकासात्मक कार्य की पूर्ण जानकारी आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति 01 वर्ष के लिए अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, सहरसा अध्यक्ष 2. श्री उपेन्द्र खिरहर उपाध्यक्ष 3. श्री वैद्यनाथ खिरहर सचिव 4. श्री तारणी खिरहर सह-सचिव 5. श्री अरूण सिंह कोषाध्यक्ष 6. श्री मिथलेश खिरहर सदस्य 7. श्री संजीत खिरहर सदस्य41 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 क्रम सं॰- 02 से 07 का पता-ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, सहरसा।
उक्त आदेष के आलोक मेेंश्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसाके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
18 अप्रील 2022
सं0 144--श्री रामेष्वर नाथ महादेव मंदिर, ग्रामपो0-मटियार, थाना-मांझी, जिला-सारण पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 125 है।
उक्त मठ में लगभग 08 बी0 भूमि, जिसके न्यासधारी श्री शम्भुनाथ दूबे है। श्री दूबे द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया है कि मंदिर बांध के नजदीक है, लिहाजा लगभग 04 बी0 जमीन नदी में है और 04 बी0 जमीन में खेती होती है, जिसमें से 02 बी0 जमीन में खेती बन्दोबस्ती के माध्यम से करायी जाती है और 02 बी0 खेती की जमीन 07 नामित व्यक्तियों द्वारा रख लिया गया है। पूर्व में ये लोग बन्दोबस्ती की राषि देते थे, परन्तु पिछले 05 वर्षो से किसी प्रकार की कोई बन्दोबस्ती की राषि का भूगतान नहीं कर रहे हैं तथा प्रार्थना करते हैं कि मंदिर की भूमि के सरुक्षा के लिए अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष तथा श्री रामनिवास सिंह को रखकर न्यास समिति बना दिया जाए, क्योंकि प्रार्थी शारिरीक रूप से कमजोर है और अकेल कार्य करने में असमर्थ हो रहे है। प्रार्थी द्वारा मंदिर के फोटो भी दाखिल किया।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री रामेष्वर नाथ महादेव मंदिर, ग्रामपो0-मटियार, थाना-मांझी, जिला-सारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए 03 सदस्यीय न्यास समिति आदेष दिनांक 24.03. 2022 के आलोक में गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामेष्वर नाथ महादेव मंदिर, ग्रामपो0-मटियार, थाना-मांझी, जिला-सारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामेष्वर नाथ महादेव मंदिर, ग्रामपो0-मटियार, थाना-मांझी, जिला-सारण न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।42 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए 03 सदस्यीय न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से की जाती है :-
1. अंचल अधिकारी, मांझी, छपरा (सारण) - पदेन अध्यक्ष 2. श्री शम्भुनाथ दूबे (न्यासधारी) - सचिव 3. श्री राम निवास सिंह - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में न्यास के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री रामेष्वर नाथ महादेव मंदिर, ग्रामपो0-मटियार, थाना-मांझी, जिला-सारण) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है। न्यासधारी श्री शम्भूनाथ दूबे को निर्देष दिया जाता है कि जो बकाया पर्षद शुल्क है, उसे भी 03 (तीन) माह में जमा करें।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
संषोधित अधिसूचना
2 नवम्बर 2021
सं0 3767--श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनौरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, जिला-सीतामढ़ी पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-05 है। न्यास के सुप्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु स्थानीय विधायक तथा जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी को संरक्षक बनाते हुये अपर समहर्त्ता, रेवन्यू, सीतामढ़ी की अध्यक्षता में 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन अधिसूचना पत्रांक-834 दिनांक-17.06. 2021 द्वारा किया गया है। इस न्यास समिति में श्री पी0एन0 सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया गया । श्री सिंह ने अधिक उम्र हो जाने के कारण कार्य करने में अपनी असहमति व्यक्त करते हुए त्याग-पत्र दे दिया। उक्त को पर्षद की बैठक दिनांक-24.09. 2021 में रखा गया। श्री पी0एन0 सिंह के त्याग पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया। साथ ही पर्षद के दो माननीय सदस्य श्री हरिभूषण ठाकुर ''बचौल'' एवं महंत शुकदेव दास को समिति में संरक्षक के रूप में एवं महंत राम उदार दासजी, श्री रामजानकी मंदिर भवदेवपुर, सीतामढ़ी को न्यास समिति में सदस्य के रूप में रखे जाने का प्रस्ताव महंत शुकदेव दासजी द्वारा दिया गया। जिसे सर्वसम्मति से पर्षद की बैठक स्वीकार किया गया। अतः पर्षद की बैठक दिनांक-24.09.2021 में लिए गये निर्णयानुसार 1.श्री हरिभूषण ठाकुर ''बचौल''- माननीय सदस्य बिहार विधान सभा 2. श्री शुकदेव दास जी, महंत, बगही मठ, सीतामढ़ीको न्यास समिति में सरंक्षक 3. महंत राम उदार दासजी, श्री रामजानकी मंदिर भवदेवपुर, सीतामढ़ी-सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है एवं 4. श्री संजय कुमार गुप्ता को न्यास समिति के कोषाध्यक्ष के रूप में न्यास समिति के अवषिष्ट अवधि के लिए मान्यता प्रदान की जाती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------
अधिसूचनाएं
29 दिसम्बर 2021
सं0 4328--विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-1666 है जिसमें लगभग 11 एकड़ भूमि है। पूर्व में इस संस्था का संचालन स्वंयभू न्यास समिति द्वारा किया जाता रहा है। दिनांक-08.7.2020 को श्री देवेन्द्र मिश्र द्वारा एक प्रार्थना पत्र न्यास समिति के गठन हेतु नामों का प्रस्तााव पर्षद को भेजा साथ ही अनुरोध किया कि उसकी मान्यता प्रदान की जाय। उक्त पत्र के आलोक में श्री देवेन्द्र मिश्र को पत्रांक-1202 दिनांक-11.9.2020 द्वारा दिनांक-14.10.2020 को पर्षद में उपस्थित होने की सूचना दी गयी। दिनांक-14.10.2020 को स्वयंभू न्यास समिति के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र मिश्र द्वारा वर्ष 2016-17 से वर्ष 2019-20 तक का न्यास का आय-व्यय विवरण दाखिल किया। दाखिल विवरणी से स्पष्ट होता है कि मंदिर की आय-व्यय विवरणी सही रूप से दाखिल नहीं की गयी है। मंदिर की भूमि वर्ष 1993 से 2020 तक सामान थी परंतु होने वाली आय में भिन्नता है। पर्षदीय पत्रांक-2203 दिनांक-16.12.202 द्वारा अंचलाधिकारी, सकरा से मंदिर की प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों43 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 की सुरक्षा हेतु न्यास समिति गठन वास्तु 11 हिन्दू सज्जनों के नाम की मांग करते हुए श्री देवेन्द्र मिश्र द्वारा प्र्रस्तावित नामों की जो सूची उपलब्ध करायी गयी थी उसपर मंतव्य की मांग की गयी।
26 जून 2021 को श्री अंजनी कुमार झा द्वारा एक प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिनांक-05.06.2021 हो देवेन्द्र मिश्र का स्वर्गवाष होने और दिनांक- 08.6.2021 को स्वयंभू न्यास समिति द्वारा बैठक कर श्री ललित कुमार राय को अध्यक्ष पद पर नामित एवं नये सदस्य के रूप में श्री राम कुमार मिश्र के नाम को जोड़ते हुए 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त हुआ। अंचलाधिकारी ने पत्रांक-544 दिनांक-21.6.2021 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों की सूची प्राप्त हुआ उस सूची में भी उन्हीं व्यक्तियों के नाम है जो स्वयं भू न्यास समिति द्वारा दाखिल की गयी है।
संचिका से स्पष्ट होता है कि मंदिर काफी प्राचीन है और लगभग 50 वर्ष पूर्व इसका निबंधन किया गया है परंतु विषम परिस्थितिवष आज तक इस मंदिर की देखभाल हेतु न्यास समिति का गठन नहीं किया जा सका। यहीं कारण है कि आजतक इस मंदिर का विकास पर्याप्त रूप में नहीं हो सका।
उपर्युक्त वर्णित परिरिस्थति में विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर की भूमि वो सम्पत्तियो की सुरक्षा, सम्यक प्रबंधन, विकास आदि के न्यास समिति का गठन आवष्यक हैं ।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए मैं अखिलेष कुमार जैन ''विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर'' की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतुएक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए प्रस्तावित 11 व्यक्तियों की एक न्यास समिति गठन आदेषदिनांक- 01.09.2021 के आलोक में एक वर्ष के लिए गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुरन्यास समिति''होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा । बचत खाता का संचालन संयुक्त रूप से दो सदस्याें कोषाध्यक्ष एवं अध्यक्ष या सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
3. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 4. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
7. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी।साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
8. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
9. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
10. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
12. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
13. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
01.श्री ललित कुमार राय, पिता- श्री ईष्वर राय, पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - अध्यक्ष44 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022 02. श्री उपेन्द्र ठाकुर, पिता-स्व0 राम सागर ठाकुर, पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - उपाध्यक्ष 03. श्री दिलिप कुमार झा, पिता- स्व0 पंचानन झा पता- एम्बैसडर पैलेस, कलमबाग चौक, जिला-मुजफ्फरपुर - सचिव 04. श्री नकुल कुमार शर्मा, पिता- स्व0 जगेष्वर शर्मा, पता-एम्बैसडर पैलेस, कलमबाग चौक, जिला-मुजफ्फरपुर - कोषाध्यक्ष 05. श्री संजीत कुमार, पिता- हरिलाल ठाकुर पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 06. श्री अरविंद कुमार मिश्र, पिता- स्व0 रणवीर प्रसाद, पता- मझौली पचदही, बघनगरी के निकट, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 07. श्री अजय कुमार तिवारी, पिता- स्व0 विष्णुदेव तिवारी, पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 08. श्री राम कुमार झा, पिता- स्व0 कामेष्वर झा पता- सीहो, मुजफ्फरपुर - सदस्य 09. श्रीमती सोनामती मूर्मू, पिता- स्व0 गणेष चौरे, पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 10. श्री मनोज राम, पिता-श्री रामानंद राम, पता- विष्णुपुर, बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य 11. श्री राम कुमार मिश्रा, पिता-स्व0 देवेन्द्र मिश्र, पता- विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर - सदस्य
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम ''विषनपुर बघनगरी (षिवोत्तर ट्रस्ट), ग्रामपो0-विष्णुपुर बघनगरी, जिला-मुजफ्फरपुर''पर ही रहेगा,किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
—————
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 33—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
45 (cid:464)बहार गजट, 2 नवम्बर 2022बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
—————
सं0 प्र0-01-रा0(आ0)-10/2022-5346/एम0 खान एवं भूतत्व विभाग ------ संकल्प 21 अक्तूबर 2022 महालेखाकार (लेखा परीक्षा) के पत्रांक 15 दिनांक 29.04.2022 से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार श्री प्रमोद कुमार, खनिज विकास पदाधिकारी द्वारा प्रभारी सहायक निदेशक, जिला खनन कार्यालय, भोजपुर के पदस्थापन के दौरान उक्त जिला में बालूघाटों की दिनांक 01.01.2020 के बाद विस्तारित अवधि के लिए बंदोबस्तधारी से प्रतिभूति राशि नहीं ली गई। बंदोबस्तधारी द्वारा विस्तारित अवधि के बीच में नियम का उल्लंघन करते हुए बंदोबस्ती की किस्त का भुगतान किये बिना दिनांक 01.05.2021 से बंदोबस्ती छोड़ दी गई। बंदोबस्तधारी की प्रतिभूति राशि जमा रहने पर वसूलनीय राशि में इसका समायोजन किया जा सकता था। श्री कुमार के इस नियम विरूद्ध कृत्य से राजस्व की क्षति हुई।
2. श्री प्रमोद कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 2877 दिनांक 21.06.2022 से उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जिसके क्रम में श्री कुमार का स्पष्टीकरण दिनांक 08.07.2022 को प्राप्त हुआ।
3. श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अपने पदस्थापन के दौरान भोजपुर जिलान्तर्गत बालूघाटों की दिनांक 01.01.2020 के बाद विस्तारित अवधि के लिए बंदोबस्तधारी से प्रतिभूति राशि नहीं ली गई। बंदोबस्तधारी की प्रतिभूति राशि जमा नहीं रहने के कारण वसूलनीय राशि में इसका समायोजन नहीं किया जा सका, जिससे सरकार को हुई राजस्व की क्षति में श्री कुमार प्रथम दृष्टतया दोषी प्रतीत पाये गये हैं। अतएव श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इसकी वृहद जाँच की आवश्यकता प्रतीत होती है।
4. अतएव श्री कुमार का स्पष्टीकरण अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वगीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) के प्रावधानों के तहत आरोपों की वृहद जाँच कराने का निर्णय लिया गया है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच, भोजपुर (आरा) तथा प्रस्तुतीकरण/उपस्थापन पदाधिकारी, खनिज विकास पदाधिकारी, भोजपुर को नियुक्त किया जाता है।
5. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपना बचाव/पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखेंगे एवं जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दे, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजेश कुमार, संयुक्त सचिव।