िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 21 वैशाख 1944 (श0) सं(cid:201)या 19 पटना, बुधवार, ———————— 11 मई 2022 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-129 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।
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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 130-131 पूरक
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पूरक-क 132-1352 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचना 29 अप्रील 2022
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)(2)-21/1998-1434/प॰व॰--भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 के नियम-3(I)(B)(ii) तथा भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पत्रांक-20019/01/2000 आई॰एफ॰एस॰-II, दिनांक-22.12.2000 द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश के आलोक में भारतीय वन सेवा के वरीय वेतनमान में प्रोन्नत निम्नांकित पदाधिकारियों को उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से भारतीय वन सेवा के कनिष्ठ प्रशासनिक कोटि (Junior Administrative Grade) वेतन स्तर-12 में प्रोन्नति दी जाती है :-
| क्र॰ | पदाधिकारी का नाम | आवंटन वर्ष | कनिष्ठ प्रशासनिक कोटि में प्रोन्नति की तिथि | अभ्युक्ति |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 01. | श्री शशिकान्त कुमार | 2013 | 01.01.2022 | |
| 02. | श्री गौरव ओझा | 2013 | 01.01.2022 |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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बिहार विधन सभा सचिवालय ------
अध्सिूचना
28 अप्रील 2022
सं0 02स्था-209/2021-791/विस।--श्री संजय कुमार सिंह, उप निदेशक ;जनसंपर्कद्ध, बिहार विधन सभा सचिवालय जो वेतन स्तर-11 में 96,600/- रुपये प्रतिमाह वेतन पाते हैं, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एल.टी.सी. नियमावली-1986 तथा इस संबंध् में वित्त विभाग, बिहार सरकार द्वारा निर्गत पत्रा संख्या-4252, दिनांक 22.06.2000 की कंडिका-20 एवं संकल्प संख्या-8043, दिनांक 11.10. 2017 की कंडिका-G के अन्तर्गत ब्लॉक वर्ष 2018-21 के विस्तारित अवध् िमें एल.टी.सी. सुविध के तहत दिनांक 01.05.2022 से 07. 05.2022 तक पटना से लेह लद्दाख ;जम्मू कश्मीरद्ध एवं लेह लद्दाख ;जम्मू कश्मीरद्ध से पटना की यात्राा के लिए दिनांक 02.05.2022, 04.05.2022, 05.05.2022 एवं 06.05.2022 को आकस्मिक अवकाश तथा दिनांक 01.05.2022, 03.05.2022 एवं 07.05.2022 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है ।
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
अभय शंकर राय, अवर सचिव।
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सामान्य प्रशासन विभाग
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अधिसूचनाएं
20 अप्रील 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0-6029--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को विभिन्न जिलों में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की स्वी—ति प्रदान की जाती है।3 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, म ुंगेर के पत्रांक-12 दिनांक 01. 04.2022 के संलग्न सूची मं े अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-20 | 04.04.2022 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-2022 के चुनाव कार्य | कार्यपालक दंडाधिकारी | मुंगेर |
| 2 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- जिलाधिकारी, सारण, छपरा के पत्रांक-55/मु0 दिनांक 02.04.2022 के स लग्न ं सूची मं अंकित कार्मिक। े | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 04.04.2022 | बिहार विधान परिषद् के द्विवार्षिक चुनाव-2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | सारण, छपरा |
| 3 | निर्वाची पदाधिकारी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-सह-जिला पदाधिकारी, प र्णियाँ ू क े पत्रांक-374 दिनांक 03.04. 2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 04.04.2022 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की द्विवार्षिक-2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | पूर्णियाँ |
| 4 | निर्वाची पदाधिकारी, 22- मधुबनी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र-सह-जिला पदाधिकारी, मधुबनी क े पत्रांक-1045 दिनांक 01. 04.2022 के संलग्न सूची मं े अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 04.04.2022 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | मधुबनी |
| 5 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-30 दिनांक 02.04.2022 के स लग्न ं सूची मं अंकित कार्मिक। े | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन- 2022 के निर्वाचन अवधि | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-2022 के चुनाव कार्य | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | मुजफ्फरपुर |
| 6 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, रोहतास, सासाराम के पत्रांक-04 दिनांक 02.04.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-20 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन- 2022 के निर्वाचन अवधि | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-2022 के चुनाव कार्य | कार्यपालक दंडाधिकारी | रोहतास, सासाराम |
| 7 | जिला पदाधिकारी एवं समाहर्ता, मधेपुरा क े पत्रांक-965 दिनांक 21.03. 2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | दिनांक 01.04.2022 से 30.09.2022 तक (छः माह के लिए) | विधि व्यवस्था | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | मधेपुरा |
| 8 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी -सह-जिलाधिकारी, खगड़िया के पत्रांक-54 दिनांक 29.03.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-20 | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन- 2022 के निर्वाचन अवधि | बिहार विधान परिषद् के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-2022 के चुनाव कार्य | कार्यपालक दंडाधिकारी | खगड़िया |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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27 जनवरी 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-01/2020 सा0प्र0 983--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिक को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं और निदेश देते हैं कि उक्त कार्मिक भागलपुर जिले में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिलाधिकारी, भागलपुर के पत्रांक-01 दिनांक 05.01. 2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | वर्ष 2022 हेतु | विधि व्यवस्था एवं अन्य प्रयोजनों हेतु 2022 | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | भागलपुर |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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11 फरवरी 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-01/2020 सा0प्र0 1793--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। निदेशानुसार उक्त कार्मिकों को समस्तीपुर जिले में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की स्वी—ति प्रदान की जाती है।5 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर क े पत्रांक-323 दिनांक 17.01.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | दिनांक 01.01.2022 से 31.12.2022 तक | विधि व्यवस्था | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | समस्तीपुर |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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4 फरवरी 2022
सं0 7/शक्ति प्र0-13-01/2020 सा0प्र0 1345--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिक को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं और निदेश देते हैं कि उक्त कार्मिक नालन्दा जिले में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला पदाधिकारी, नालन्दा क े पत्रांक-246 दिनांक 13.01.2022 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | दि0 01.01. 2022 से दि0 31.12. 2022 तक | विधि व्यवस्था एवं अन्य प्रयोजनों हेतु | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | नालन्दा |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
30 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(वीर0)07-08/2011-705--श्री अशोक कुमार शर्मा (आई0डी0-4488) तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के विरूद्ध पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र में 58 से 66 कि0मी0 तटबंध के सड़क डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में सुरक्षित नहीं रखने संबंधी बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प-2652 दिनांक 27.12.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी -
"पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्राधीन पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 58.0 से 66.0 कि0मी0 तक मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वीरपुर द्वारा दिनांक 29.01.2010 को किये गये स्थल निरीक्षण के दौरान तटबंध के उपर सड़क डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर इसे सुरक्षित रखने का निदेश दिया गया, जिसका अनुपालन6 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 इनके द्वारा नहीं किया गया। इससे सरकार को वित्तीय क्षति होना परिलक्षित है। इस प्रकार वरीय पदाधिकारी के निदेश के बावजूद डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट/टुकड़ो को सरप्लस लेखा में नहीं लेने के लिए दोषी प्रतीत होते हैं।"
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1300 दिनांक 17.12.20 द्वारा श्री शर्मा से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई।
श्री शर्मा से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :- बचाव बयान- श्री शर्मा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब का मुख्य अंश निम्नवत है :- "प्रश्नगत कार्य के कार्य मद सं0-एक में Dismentling of Flexible pavement ETC के कार्य की मात्रा शून्य है। स्पष्ट है कि सड़क Dismentling से किसी भी तरह की ईंट प्राप्ति का प्रश्न ही नहीं उठता है। मुख्य अभियंता द्वारा कार्य के निरीक्षण के क्रम में तटबंध के सड़क Dismentling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर सुरक्षित रखने का निदेश था जो एक सामान्य/सभी अभियंता के लिए था न कि इनसे सीधे रूप से था। इस संबंध में तत0 मुख्य अभियंता, श्री चन्द्रशेखर पासवान से दूरभाष पर वार्ता भी की गयी थी। जिसे उनके द्वारा सामान्य निदेश की ही पुष्टि की गयी। जहाँ तक लुजनिंग कार्य से ईंट प्राप्त होने की बात कही जा रही है, वो बिल्कुल ही Non Technical है एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा तकनीकी पहलू को ध्यान में नहीं रखते हुए आरोप प्रमाणित किया गया है, क्योंकि लुजनिंग कार्य तटबंध के स्लोप में कर तटबंध का उच्चीकरण एवं सुदृढीकरण, कार्य का प्राक्कलन/एकरारनामा तैयार किया गया है। तटबंध के स्लोप में ईंट बिछाई का प्रश्न ही नहीं उठता है। मुख्य अभियंता द्वारा तटबंध के सड़क Dismentling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में लेने का निदेश है जिसका कार्यमद स्वीकृत प्राक्कलन में कही जिक्र नहीं है और न ही MB में दर्ज है। संचालन पदाधिकारी को सारे साक्ष्य यथा स्वीकृत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन अंतिम विपत्र का मापपुस्त की प्रति समर्पित कर दिया गया था। संचालन पदाधिकारी को कार्यपालक अभियंता द्वारा किसी भी तरह का ईंट, सड़क Dismentling से प्राप्त नहीं होने का पत्र समर्पित कर दिया गया था। जिसे उनसे संतुष्ट नहीं होकर बिना कारण उसे मनमाने ढंग से नकार दिया गया। इस तरह तटबंध के सड़क कार्य मद में सड़क Dismentling कार्य की मात्रा शून्य है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार की किसी तरह की वित्तीय क्षति नहीं हुई है। लुजनिंग कार्य मद में ईंट प्राप्त होने की संभावना भी शून्य है। जिससे स्पष्ट है कि सरकार का कोई वित्तीय क्षति का प्रश्न ही नहीं उठता है। इस तरह इस आधार पर आरोप प्रमाणित करना बिल्कुल ही मनगढ़त एवं Non Technical है। पूर्वी कोशी तटबंध के स्लोप में ब्रीक पिचिंग का प्रावधान इनके कार्य क्षेत्र में नहीं है। संवेदक का एकारानामा बंद कर दिया गया है। अंतिम मापी में भी किसी भी कार्य मद में ईंट की संख्या दर्ज नहीं है। विभागीय समीक्षा- संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है :-
आरोपी पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि कार्य क्षेत्र में स्वीकृत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन/एकरारनामा में Dismentling कार्य मद सम्मिलित नहीं है अर्थात Dismentling कार्य कराया नहीं नहीं गया है। पूर्वी तटबंध के कि0मी0 40 से 84 कि0मी0 के बीच कराये गये अग्रिम कार्य का अंतिम विपत्र मापपुस्त सं0-1352 के पेज सं0-09 से 15 तक में दर्ज है, जिसमें कहीं भी Dismantling कार्य मद की मापी/भुगतान अंकित नहीं है तथा कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के पत्रांक-1864 दिनांक 17.11.2011 के कंडिका सं0-1 के आधार पर दिया गया तर्क स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि यह एक सर्वविदित तथ्य है कि स्थलीय परिस्थिति के आलोक में उच्च पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है। लुजनिंग के क्रम में भी ईंट प्राप्त हो सकते है, जिसके आधार पर तत0 मुख्य अभियंता द्वारा आदेश दिया गया होगा। श्री शर्मा द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता द्वारा कार्य निरीक्षण के क्रम में सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर सुरक्षित रखने का आदेश एक सामान्य एवं सभी अभियंता के लिए था न कि सिर्फ इनके लिए था। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन में पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अधीन कि0मी0 58.0 से 66.0 तक का निरीक्षण करते हुए तटबंध के सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा से प्राप्त कर सुरक्षित करने का निदेश दिया गया है। इनके द्वारा स्वयं कहा गया है कि इनका कार्यक्षेत्र पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 58.0 से 66.0 तक था।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि लुजनिंग कार्य मद तटबंध के स्लोप में कर तटबंध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का प्राक्कलन/एकरारनामा तैयार किया गया है और तटबंध के स्लोप में ईंट बिछाई का प्रश्न ही नहीं उठता है। तत0 मुख्य अभियंता द्वारा तटबंध के सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में लेने का निदेश है। उक्त कार्य मद का न तो अंतिम मापी ही ली गयी है एवं न ही मापपुस्त में दर्ज है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि कार्य के दौरान स्थल निरीक्षण के क्रम में स्थलीय स्थिति के अनुसार उच्च पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है। लुजनिंग सड़क Dismantling से ईंट प्राप्त हो सकते है।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा भी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा किसी भी तरह का ईंट, सड़क Dismantling से प्राप्त नहीं होने का पत्र संचालन पदाधिकारी को दिया गया था। परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना कारण उसे मनमाने ढंग से नकार दिया गया। जो बिल्कुल ही7 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 न्यायसंगत नहीं है। जबकि अधीक्षण अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा के जाँच प्रतिवेदन में अंकित है कि पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र कि0मी0 58 से 66 तक मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक 29.01.2010 को की गयी स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि स्थल पर ई0 अशोक कुमार शर्मा एवं कनीय अभियंता उपस्थित थे जिन्हें तटबंध के सड़क Dismnatling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर इसे सुरक्षित रखने का निदेश दिया गया। इसके बावजूद भी पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र के इस भाग में ईंट/ईंट के टूकड़ों को सरप्लस लेखा में नहीं रखना संदेहात्मक प्रतीत होता है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किये गये मंतव्य से सहमत होते हुए गठित आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।
वर्णित स्थिति में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए सरकार के स्तर पर निम्न दंड देने का निर्णय लिया गया है :-
"तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उपर्युक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1474 दिनांक 22.11.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गयी। उक्त के आलोक में पत्रांक-3876 दिनांक 16.03.22 के द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया।
वर्णित स्थिति में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता को निम्न दंड संसूचित किया जाता है- "तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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2 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(वीर)07-03/2016-737--श्री अरूण कुमार चौधरी (आई0डी0-3618) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, राघोपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा अपने पदस्थापन काल में सिंचाई प्रमंडल, राघोपुर के अन्तर्गत इमामगंज लघुनहर के वि0दू0 6.05 (बायाँ) से निसृत जलवाहा पर सड़क निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गयी। बरती गई अनियमितता की विभागीय समीक्षोपरांत निम्न आरोप के लिए श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-90 दिनांक 12.01.18 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
आरोप -"C.W.J.C No. 15161/2015 करूणाकांत झा बनाम बिहार सरकार एवं अन्य के मामले में दायर वाद के विरूद्ध प्रतिशपथ पत्र दायर करने हेतु कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, राघोपुर द्वारा प्रतिवेदित तथ्यात्मक विवरणी से पथ निर्माण विभाग द्वारा इमामगंज लघु नहर के वि0दू0 6.05 बायाँ से निसृत जलवाहा के वि0दू0 1.50 से वि0दू0 5.50 के बीच बगैर NOC प्राप्त किये मिट्टी भरकर सड़क निर्माण कराये जाने का मामला प्रकाश में आया। साथ ही उक्त जलवाहा के रेखांकण पर वर्ष 2010-11 में ग्रामीण सड़क भी बनाया गया। इस प्रकार करीब चार हजार फीट में जलवाहा पर सड़क निर्माण कराये जाने से करीब पचास एकड में सिंचाई सुविध बाधित हुआ। परन्तु आपके उक्त पूर्व निर्मित ग्रामीण सड़क के संदर्भ में उच्चाधिकारियों को सूचित नहीं किया गया। साथ ही पथ निर्माण विभाग द्वारा आपके पदस्थापन अवधि में निर्माण कराये जा रहे सड़क की ससमय रोकथाम एवं उच्च पदाधिकारी को ससमय सूचित किये जाने की कार्रवाई नहीं किया गया। इस प्रकार आपके पदस्थापन अवधि में जानकारी के बावजूद बिना NOC प्राप्त किये पथ निर्माण विभाग/अन्य विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए जलवाहा को मिट्टी से भरकर अनुपयोगी बनाया जाना विभागीय कार्य के प्रति स्पष्टतः आपकी निष्क्रियता, लापरवाही एवं निरीक्षण/पर्यवेक्षण में कमी दर्शाता है।" श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता दिनांक 31.01.19 को सेवानिवृत हुए। फलस्वरूप इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय आदेश सं0-81 दिनांक 02.07. 19 द्वारा सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जवाब की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-145 दिनांक 14.01.2019 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई। श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :- श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता का जवाब - "चूँँकि मामला माननीय उच्च न्यायालय, पटना में विचारधीन था तथा उक्त मामले में अग्रेत्तर कार्रवाई करने हेतु उच्चाधिकारी/विभागीय पदाधिकारी का स्पष्ट निदेश प्राप्त नहीं हो पा रहा था जिसके कारण तत्काल अग्रेत्तर कार्रवाई नहीं किया जा सका। परन्तु जिलान्तर्गत कृषि टास्क फोर्स की बैठक में उक्त मामला को जिला पदाधिकारी के समक्ष रखा गया, जिसके आलोक में उक्त जलवाहा को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु सिंचाई अवर प्रमंडल, राघोपुर के पत्रांक-194 दिनांक 28.08. 2016 द्वारा अंचलाधिकारी, राघोपुर को संबंधित अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध अतिक्रमणवाद दायर करने का अनुरोध किया गया तथा उक्त जलवाहा के जीर्णोद्धार हेतु पत्रांक-723 दिनांक 17.09.18 से जिला कृषि पदाधिकारी, सुपौल को विहित्त प्रपत्र में कार्य योजना तैयार कर समर्पित किया गया। ऐसे में मेरे उपर लगाये गये आरोप निराधार है।8 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 विभागीय समीक्षा - संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्य के आलोक में आरोप आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है -
(1) कोशी त्रासदी के पश्चात वर्ष 2008 के बाद पूर्वी कोशी नहर प्रणाली का संदर्भित भाग प्रभावित हुआ। जलवाहा अतिक्रमित हो गया एवं इस पर आवागमन का उपयोग होने लगा। विभागीय प्रभारी पदाधिकारी द्वारा सम्यक रूप से अपेक्षित कार्रवाई ससमय नहीं की गई। आरोपित पदाधिकारी त्रासदी से लगभग छह वर्ष बाद संदर्भित प्रमंडल में पदस्थापित हुए। वर्णित जलवाहा के मामले में पदस्थापन के पूर्व की स्थिति यथावत जारी रही एवं नहर की भूमि पर पक्की सड़क निर्माण यथावत जारी रही एवं नहर की भूमि पर पक्की सड़क निर्माण का मामला उजागर होने पर लगभग एक वर्ष बाद क्रियाशील हुए। अतएव ससमय निरीक्षण/पर्यवेक्षण नहीं करने के कारण आरोप आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। (2) आरोप पत्र एवं अभिलेखों के अवलोकन करने से स्पष्ट होता है कि CWJC No- 15161/2015 करूणाकांत झा बनाम राज्य सरकार में दाखिल विभागीय प्रतिशपथ पत्र सं0-10397 दिनांक 15.12.15 से ज्ञात होता है कि पूर्वी कोशी नहर प्रणाली के अन्तर्गत इमामगंज वितरणी से 5.5RD (5500 फीट) लंबी जलवाहा निसृत है। इस नहर से पचास एकड़ भूमि में सिंचाई सुविधा प्राप्त थी। कोशी त्रासदी (2008) के पश्चात यह जलवाहा अतिक्रमित हो गया एवं इसके अंतिम चार हजार फीट से मनरेगा से वर्ष 2010-11 में भरकर कच्ची सड़क का रूप दे दिया गया। वर्ष 2015 में पथ निर्माण विभाग द्वारा जलवाहा के चार हजार फीट की लंबाई में पक्की सड़क का निर्माण प्रारंभ किया गया। जिसके विरूद्ध CWJC No.- 15161/2015 दाखिल किया गया। वाद की दाखिला के पश्चात वर्णित जलवाहा में बिना NOC के सड़क निर्माण कार्य आदि के मामले की गंभीरता पूर्वक कार्रवाई अपेक्षित था। श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा के अवलोकन से स्पष्ट है कि इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में लगभग वही तथ्य एवं साक्ष्य दिये गये है जो इनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिसकी सम्यक विश्लेषण कर संचालन पदाधिकारी द्वारा ससमय स्थल निरीक्षण/पर्यवेक्षण नहीं करने के आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। इनके द्वारा वस्तुस्थिति की जानकारी विभागीय उच्च पदाधिकारी को देने के संदर्भ में न तो कोई नया तथ्य ही दिया गया न ही कोई साक्ष्य ही दिया गया। अतएव ससमय वस्तुस्थिति की सूचना विभागीय पदाधिकारी को नहीं देने के लिए श्री चौधरी दोषी हैं। उपरोक्त की सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत श्री अरूण कुमार चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - "पेंशन से पाँच प्रतिशत (5%) की कटौती एक वर्ष के लिए।" उक्त वर्णित स्थिति में श्री अरूण कुमार चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- "पेंशन से पाँच प्रतिशत (5%) की कटौती एक वर्ष के लिए।" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-612 दिनांक 28.06.21 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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6 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-06/2016-782--श्री देवराज रजक (आई0डी0-4574) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा पूर्णियाँ के विरूद्ध वर्ष 2014-15 में पक्का प्रक्षेत्र सिंचाई नाला निर्माण योजना में लाभुक कृषकों का आवंटन के अनुपलब्धता के बावजूद कुल 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये का भुगतान कर वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1666 दिनांक 04.08.2016 से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री रजक से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नही पाते हुए निम्न आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-148 दिनांक 31.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आरोप सं0-1- आपके प्रमंडलाधीन वर्ष 2014-15 में ली गई योजनाओं से संबंधित योजनावार लाभुक कृषकों को वास्तविक रूप से अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापन कराया जाना अनिवार्य किये जाने के बावजूद भी विगत 9 माह से दर्जनों निदेश/स्मार पत्र को आपके द्वारा अनदेखी करके बिना सत्यापन कराये माह मार्च 2016 में बिना राशि आवंटन के ही मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया, जो पूर्णतः अवैध/अनियमित और बरती गई वित्तीय अनुशासनहीनता को दर्शाता है। आरोप सं0-2- कराये गये कार्यों के विरूद्ध भुगतान हेतु राशि का आवंटन संबंधी आपके अधियाचना पत्र पर मुख्यालय से राशि का आवंटन विमुक्त नहीं किये जाने की स्थिति में आपके द्वारा सक्षम, प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये बिना ही कराये गये कार्य मद में भुगतान कर दिया गया है जो सक्षम प्राधिकार एवं आयुक्त-सह-अध्यक्ष के आदेश से निर्गत स्पष्ट आदेश का अवहेलना, अनुशासनहीनता एवं घोर वित्तीय अनियमितता तथा दुस्साहस का परिचायक है।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :-
9 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022आरोप सं0-1 के लिए संचालन पदाधिकारी का मंतव्य -आरोपी कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध खेत विकास प्रमंडल, काडा, पूर्णियाँ के अन्तर्गत वर्ष 2014-15 में ली गई योजनाओं से संबंधित योजनावार लाभुक कृषकों को वास्तविक रूप से अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापन कराया जाना अनिवार्य किये जाने के बावजूद भी विगत 9 माह से दर्जनों निदेश/स्मार पत्र को कार्यपालक अभियंता द्वारा अनदेखी करके बिना सत्यापन कराये माह मार्च, 2016 में बिना राशि आवंटन के ही मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया है, के क्रम में आरोपी पदाधिकारी द्वारा वर्णित किया गया है कि "सचिव, कोशी काडा, सहरसा के पत्रांक-505 दिनांक 04.08.2015 से प्राप्त निदेश जो योजनाओं से संबंधित योजनावार लाभुक कृषकों को वास्तविक रूप से अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापन कराया जाना अनिवार्य से संबंधित था के आलोक में कराये गये कार्यों के सत्यापन हेतु अंचलाधिकारी, कृष्णानगर, बनमनखी, बड़हरा कोठी एवं पूर्णियाँ को पत्रांक-222 दिनांक 20.09.2015, पत्रांक-258 दिनांक 09.10.2015, पत्रांक-268 दिनांक 15.10.2015 पत्रांक-289 दिनांक 06.11.2015, पत्रांक-323 दिनांक 30.12.2015 एवं पत्रांक-124 दिनांक 07.04.2016 द्वारा अनुरोध किया गया, परन्तु अंचलाधिकारी, बड़हरा कोठी को छोड़कर किसी भी अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापन कार्य में अभिरूची नहीं लिया गया। अंचलाधिकारी, बनमनखी के पत्रांक-575 दिनांक 19.03.2016 द्वारा सूचित किया गया कि "पूर्व में अभियान बसेरा एवं दखल दिहानी कार्य में व्यस्त रहने तथा वर्तमान में पंचायत चुनाव में राजस्व कर्मचारियों के व्यस्त रहने के कारण उपर्युक्त कार्य निष्पादन नहीं किया जा सका है। पंचायत चुनाव समाप्ति के उपरांत उक्त कार्य प्राथमिकता के आधार पर यथाशीघ्र कर दिया जायेगा।" परन्तु (कार्यपालक अभियंता) द्वारा बार-बार स्मारित करने के बावजूद भी अंचलाधिकारी के द्वारा उक्त कार्य को गंभीरता से नहीं लिया गया फलतः सत्यापन प्रतिवेदन अप्राप्त रहा। सचिव, कोशी काडा, सहरसा के पत्रांक-198 दिनांक 28.03.2016 द्वारा भी अंचालधिकारी को उक्त सत्यापन हेतु निदेश दिया गया था, परन्तु फलाफल शून्य रहा। आरोपी पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य संलग्न किया गया है, किन्तु अंचलाधिकारी के स्तर से सितम्बर 2015 से मार्च 2016 तक सत्यापन नहीं किये जाने के कारण कराये गये कार्यों के विरूद्ध भुगतान करने का मामला बनता है। विदित हो कि इस भुगतान हेतु आवंटन उपलब्ध नहीं था एवं आवंटन प्राप्त करने हेतु भी कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, पूर्णियाँ के द्वारा विभाग से अनुरोध किया गया था एवं विभागीय पत्रांक-740 दिनांक 16.10.2015 तथा पत्रांक-120 दिनांक 23.02.2016 (सचिव/प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग के हस्ताक्षर से निर्गत) जो प्रमंडलीय आयुक्त-सह-अध्यक्ष, कोशी कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, सहरसा को संबोधित पत्र में विभागीय पत्रांक-65 दिनांक 28.1.2015 एवं पत्रांक-149 दिनांक 23.02.2015 पत्रांक-740 दिनांक 16.10.2015 एवं ज्ञापांक-840 दिनांक 09.12.2015 का उल्लेख करते हुए अंकित किया गया कि "प्रबंध निदेशक, कोशी काडा, सहरसा के पत्रांक-78 दिनांक 08.02.2016 द्वारा सूचित किया गया कि लाभुक कृषक प्रतिनिधियों द्वारा अपने लंबित भुगतान हेतु धरना प्रदर्शन एवं आमरण अनशन किया जा रहा है। उक्त पत्र द्वारा सूचित किया गया है कि विभिन्न जाँच दल द्वारा कार्य की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया जा चुका है फिर भी कराये गये कार्यों के लंबित भुगतान हेतु कोशी काडा, सहरसा के स्तर से आवंटन विमुक्त नहीं हो सका है और आवंटन के अभाव में प्रगति पूर्णतः अवरूद्ध है जबकि विभाग द्वारा 2014-15 में ही आवंटन उपलब्ध कराया गया है। अनुरोध है कि कराये गये कार्यों के भुगतान हेतु शीघ्र नियमानुकूल कार्रवाई करने की कृपा किया जाय।"
उक्त से स्पष्ट होता है कि लाभुक कृषक प्रतिनिधियों के द्वारा धरना प्रदर्शन एवं आमरन अनशन किया जा रहा था। पूर्व से उपलब्ध राशि जो भुगतानित कार्य हेतु नहीं था उक्त राशि से लाभुक कृषक द्वारा कराये गये कार्य के विरूद्ध आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया। आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा लाभुक कृषक प्रतिनिधियों द्वारा आन्दोलन के क्रम में विभागीय प्रक्रिया को बिना अपनाये एवं उक्त भुगतान हेतु अतिरिक्त आवंटन प्राप्त किये, बगैर ही भुगतान किया गया है।
अतएव खेत विकास प्रमंडल, काडा, पूर्णियाँ के अन्तर्गत वर्ष 2014-15 में ली गई योजनाओं से संबंधित योजनावार लाभुक कृषकों को वास्तविक रूप से अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापन कराया जाना अनिवार्य किये जाने के बावजूद भी विगत 9 माह से दर्जनों निदेश/स्मार पत्र को आपके द्वारा अनदेखी करके बिना सत्यापन कराये माह मार्च 2016 में बिना राशि आवंटन के ही मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया है, जो अवैध/अनियमित और बरती गई वित्तीय अनुशासनहीनता मानते हुए आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2 के लिए संचालन पदाधिकारी का मंतव्य -इस आरोप हेतु भी आरोप सं0-1 में वर्णित तथ्य से ही संबंध होने का जिक्र आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा किया गया है। कार्यपालक अभियंता के स्तर से समर्पित साक्ष्य में पाया गया कि उक्त भुगतान हेतु विभाग से आवंटन उपलब्ध कराने हेतु कार्यपालक अभियंता द्वारा अनुरोध किया गया था, किन्तु सक्षम प्राधिकार के स्तर से आवंटन उपलब्ध नहीं हो सका। कार्यपालक अभियंता द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि कुल-7(सात) योजनाआें का पार्ट भुगतान तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा कर कुल रू0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) मात्र का दायित्व पूर्व से सृजित रहने के कारण लाभुक कृषक प्रतिनिधियों के द्वारा भुगतान हेतु आंदोलन/अक्रामक रूप लेकर जान मारने की धमकी दिये जाने के कारण जान बचाने की नीयत से तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा कराये गये कार्य के विरूद्ध सृजित विभागीय दायित्व के क्रम में समरूप कार्य हेतु प्रमंडल में उपलब्ध राशि (वर्ष 2010-11 से 2013-14) तक से कुल मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया है। विभागीय स्तर से सभी संबंधित पदाधिकारी यथा सचिव, कोशी काडा, सहरसा, प्रबंध निदेश, कोशी काडा, सहरसा को लाभुक कृषक प्रतिनिधियों के द्वारा धरना प्रदर्शन एवं आमरन अनशन किये जाने की सूचना थी जैसा कि प्रधान सचिव महोदय के हस्ताक्षर से निर्गत पत्र में भी वर्णित है। अगर कार्यपालक अभियंता के अधियाचना के आलोक में आवंटन उपलब्ध10 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 हो गया होता तो शायद यह परिस्थति उत्पन्न नहीं होती, परन्तु बिना आवंटन प्राप्त हुए ही आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा पूर्व से उपलब्ध राशि जो भुगतानित कार्य हेतु नहीं था उक्त राशि से लाभुक कृषक द्वारा कराये गये कार्य के विरूद्ध मो0 31,14,999.00 (एकतीस लाख चौदह हजार नौ सौ निन्यानवे) रूपये मात्र का भुगतान कर दिया गया है। अतएव उपर्युक्त वर्णित कराये गये कार्यों के विरूद्ध भुगतान हेतु राशि का आवंटन संबंधी अधियाचना पत्र पर मुख्यालय से राशि का आवंटन विमुक्त नहीं किये जाने की स्थिति में भी सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये बिना ही कराये गये कार्य मद में भुगतान आरोपी पदाधिकारी द्वारा कर दिया गया है, जो सक्षम प्राधिकार एवं आयुक्त-सह-अध्यक्ष के आदेश से निर्गत आदेश/निदेश का अवहेलना/अनुशासनहीनता/ वित्तीय अनयिमितता परिलक्षित होता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री रजक से विभागीय पत्रांक-2539 दिनांक 09.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री रजक द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया, जिसमें श्री रजक द्वारा मुख्य रूप से उन्हीं बातों का उल्लेख किया गया है जिनका उल्लेख उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष किया गया है, द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में श्री रजक द्वारा किसी भी नये तथ्य का उल्लेख साक्ष्य के साथ नहीं किया गया है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री देवराज रजक से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा को अस्वीकृत करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :- "कालमान वेतन में एक प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति, भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" उक्त प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा भी पत्रांक-931 दिनांक 15.07.2021 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है। अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री देवराज रजक (आई0डी0-4574) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल, अम्बा को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -
"कालमान वेतन में एक प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति, भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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6 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-783--श्री चकलेश्वर खरवार (आई0डी0-जे 9042) तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, मुरलीगंज को सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अन्तर्गत सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 पर निर्माणाधीन सी0डी0 संरचना के Structural Safety, Stability and Utility के कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1472 दिनांक 09.07.18 द्वारा निलंबित किया गया। तत्पश्चात विभागीय संकल्प 1936 दिनांक 11.09.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री खरवार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री खरवार को निलंबन से मुक्त करते हुए कपितय दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री चकलेश्वर खरवार, सहायक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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10 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(मुक0)सम0-19-19/2018-803--वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, झंझारपुर अन्तर्गत कमला-बलान नदी के पश्चिमी तटबंध में रिसाव होने की स्थिति में स्थल से अनुपस्थित रहने एवं जिला पदाधिकारी, दरभंगा एवं पुलिस अधीक्षक, दरभंगा द्वारा खोजबीन करने पर कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने, विभागीय निदेश के बावजूद आक्रम्य स्थलों पर बाढ़ सुरक्षा हेतु सामग्रियों का भंडारण नहीं करने, आपात स्थिति में मानव बल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करने जैसे आरोपों के लिए श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर को विभागीय अधिसूचना सं0-1615 दिनांक 14.09.17 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1677 दिनांक 20.09.17 द्वारा श्री राम के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1539 दिनांक 19.07.18 द्वारा श्री राम को सेवा से बर्खास्त किया गया।
उक्त दण्ड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 05.02.20 द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में मामले के पुनः सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-788 दिनांक 11.06.20 द्वारा श्री राम के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी"11 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संबंधी निर्गत दण्डादेश को निरस्त करते हुए "दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किया गया एवं साथ श्री बिजेन्द्र कुमार राम को सेवा में पुनस्र्थापित किया गया।
बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के तहत श्री राम को सेवा से बर्खास्तगी की तिथि 19.07.18 से सेवा में पुनस्र्थापित किये जाने से संबंधित अधिसूचना सं0-788 दिनांक 11.06.2020 निर्गत किये जाने की तिथि तक यथा 10.06.2020 तक (दिनांक 19.07.18 से 10.06.20 तक) निलंबित माना जायेगा तथा सेवा से बर्खास्तगी की तिथि के पूर्व दिनांक 14.09.17 से किये गये निलंबन के कारण, निलंबन की सम्पूर्ण अवधि दिनांक 14. 09.17 से दिनांक 10.06.20 तक मानते हुए दिनांक 11.06.20 से "निलंबन मुक्त" करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर सम्प्रति श्री बिजेन्द्र कुमार राम, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी को दिनांक 11.06.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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12 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-825--श्री अर्जुन चौधरी (आई0डी0-4666) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अन्तर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गई अनियमितता की जाँच, उड़नदस्ता अंचल, पटना एवं छः सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री चौधरी को विभागीय अधिसूचना सं0-1473 दिनांक 09.07.18 द्वारा निलंबित करते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-1935 दिनांक 11.09.19 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(1) (क) सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मोटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित से 25.75% छड की कमी एवं बैरल बॉल के कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में औसत 41.80% तक की कमी पायी गई है। साथ ही संरचना के अपस्ट्रीम एण्ड डाउन स्ट्रीम के सीट पाईल की रूपांकित गहराई 4.50मी0 के बदले अपस्ट्रीम में 1.1मी0 तथा डाउनस्ट्रीम में 0.70 मी0 पायी गई है। जो रूपांकित गहराई से क्रमशः 3.40मी0 एवं 3.80मी0 कमी पाई गयी है। सीट पाईल में पायी गयी कमी की सूचना आपको कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी। किन्तु निर्माण कार्य में अनियमितता प्रतिवेदित किये जाने के बाद भी संवेदक के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे आपके द्वारा विपत्र तैयार नहीं करने के लिए सहायक अभियंता/कनीय अभियंता पर FIR करा दी गई। इससे स्पष्ट स्थापित होता है कि न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन एवं रूपान्तरण के विपरीत कार्य होने में आपकी एवं संवेदक की मिली भगत से घटिया कार्य कराया गया। जिससे उक्त संरचना का स्थायित्व एवं उपयोगिता प्रभावित हुई है। अतएव संरचना का निर्माण में निम्न विशिष्टि के कार्य कराने एवं स्वीकृत प्राक्कलन रूपांकण एवं एकरारनामा के विपरीत कार्य कराने के लिए आप दोषी है।
(ख) अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Rein forcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का छड़ उपयोग किया गया है। साथ ही अर्द्धनिर्मित संरचना के बैरल के फाउन्डेशन के एलाइनमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के अन्य तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है, क्योंकि इनके सामने नदी का भाग न होकर किसानो का रैयती जमीन का भाग आता है। ग्रामीणों द्वारा भी इस त्रुटि के कारण जमीन के नष्ट होने की आशंका व्यक्त की गई है। CD संरचना के रूपांकित नक्शा से स्पष्ट है कि U/s एवं D/s में Wing Wall एवं Return wall का प्रावधान नहीं किया गया है, जो कि संरचना एवं नहर बाँध के स्थायित्व के लिए आवश्यक था। उपरोक्त त्रुटि/अनियमितता के कारण छः सदस्यीय समिति द्वारा अर्द्धनिर्मित संरचना में आगे कार्य कराये जाने को कार्यहित में Structural Safety, stability and Utility के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है। साथ ही इसके स्थान पर एक नये सी0डी0 संरचना का निर्माण कराने की अनुशंसा की गई। इस प्रकार इस संरचना पर किया गया कुल व्यय तेरह लाख तैतालिस हजार बियालिस रूपया का अपव्यय होने एवं सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने के लिए आप दोषी है।
(ग) उक्त संरचना के कार्यान्वयन के दौरान कनीय अभियंता द्वारा प्रावधानित लंबाई से कम लंबाई का सीट पाईल का उपयोग किये जाने की सूचना, गुणवत्ता विहिन चिप्स का उपयोग करने की सूचना देने के बावजूद कार्य के रेकर्ड इन्ट्री मापीपुस्त में अंकित कराते उसकी जाँच आपके द्वारा नहीं की गई। यहाँ तक की आपके द्वारा विपत्र उपस्थापित नहीं करने के लिए कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR दर्ज किया गया। फर्स की मोटाई एवं छड़ के उपयोग प्रावधान से कम तथा कंक्रीट मिक्स की गुणवत्ता निम्न विशिष्टि का पाया जाना यह दर्शाता है कि विशिष्टि के अनुरूप संरचना का निर्माण नहीं कराया गया एवं भुगतान भी किया गया। इस प्रकार निर्माण कार्य में गड़बड़ी होने के बावजूद कुछ पदाधिकारी से तथ्य छुपाये रखना एवं स्वयं स्तर से सुधार नहीं कराने एवं रेकर्ड इन्ट्री की जाँच नहीं करना दर्शाता है कि आपके द्वारा ससमय कार्य का पर्यवेक्षण नहीं कर संवेदक से मिली भगत कर सरकारी राशि को क्षति पहुँचाया गया है जिसके लिए आप दोषी हैं।12 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (2) श्री अर्जुन चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता के द्वारा उपर्युक्त कंडिका-1 में बरती गई अनियमितताओं के कारण प्रश्नगत संरचना का कोई उपयोगिता नहीं रह गयी एवं इस पर किया गया कुल व्यय तेरह लाख तैतालिस हजार बैयालिस रूपये मात्र अपव्यय की श्रेणी में आ जाता है। जो बिहार वित्त नियमावली के निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। (3) उक्त से स्पष्ट है कि श्री अर्जुन चौधरी द्वारा निजी स्वार्थ के कारण प्रश्नगत योजना (सी0डी0 संरचना) का निर्माण प्राक्कलन, रूपांकण एवं एकरारनामा के विपरीत न्यून विशिष्टि का कराया गया है। फलतः संरचना की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है एवं अर्द्धनिर्मित संरचना पर किया गया व्यय अपव्यय की श्रेणी में आने के कारण कुल तेरह लाख तैतालिस हजार वियालिस रूपये सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित है। जो बिहार वित्त नियमावली के नियम विहित्त प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है।
श्री चौधरी को दिनांक 31.12.19 को सेवानिवृत होने पर वि0अ0सं0-226 दिनांक 10.02.20 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का वि0 आदेश सं0-13 दिनांक 10.02.21 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी में सम्परिवर्तित किया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री अर्जुन चौधरी से अभ्यावेदन की माँग की गई। श्री चौधरी से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये है :-
आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान ः-किसी भी गड़बड़ी कार्य का मापी मापपुस्त में जब अंकित हो जाता है अथवा उसका भुगतान हो जाता है तो उसके लिए अभियंता दोषी है न तो गडबड़ी के लिए संवेदक दोषी है। यहाँ मापपुस्त में किसी प्रकार की कोई प्रविष्टि नहीं की गई है एवं ना ही कोई भुगतान किया गया है। जहाँ तक Sheet pile में कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी तो संवेदक पर कार्रवाई के रूप में तत्क्षण पत्रांक-429 दिनांक 21. 04.16 द्वारा संवेदक को एक कड़ा पत्र लिखा गया एवं स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उसके बाद कनीय अभियंता द्वारा सूचना दी गयी कि कम लंबाई का सीट पाईल हटाकर सही लंबाई का सीट पाईल लगाकर आगे का कार्य कराया जा रहा है जो बाद में गलत साबित हुआ। उसके बाद एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए संवेदक के सुरक्षित जमा राशि पत्रांक-563 दिनांक 09.07.18 द्वारा 12,90,000/-जब्त कर लिया गया, कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन के कई बार दूरभाष पर दिये गये आदेश के आलोक में दर्ज किया गया एवं पत्र की प्रति अभियंता प्रमुख को भी दी गई।
(ख) जब छड़ लगाया जा रहा था तो किसी ने सूचना नहीं दी। कार्य में गड़बड़ी होने के कारण इसका मापी मापपुस्त में अंकित नहीं की गई एवं न ही भुगतान किया गया। दिनांक 16.02.16 को सुखासन सी0डी0 संरचना का एकरारनामा हुआ था और फरवरी 2016 में ही अन्य उपयोजनाओं का एकरारनामा हुआ था। इस प्रकार बहुत व्यस्तता के कारण जितना संभव हुआ उतना समय सुखासन वितरणी में निर्माणाधीन सी0डी0 संरचना को दिया गया।
अर्द्धनिर्मित संरचना के वैरल के फाउनडेशन का एलाईनमेंट दिया गया। जहाँ तक साईड के तीन बैरल निष्प्रभावी होने का है तो शुरू से जाँच समिति के आने तक कभी भी कोई किसान लिखित अथवा मौखिक रूप से शिकायत नहीं की है।
(ग) मिट्टी कार्य मद में संवेदक को सिर्फ रू0 1,85,671/- का भुगतान किया गया, जो नींव खुदाई में किया गया है। इसके अतिरिक्त Secured Advance के रूप में कुल रू0 1343042/- का ही भुगतान किया गया है। जो SBD के Clause 10(b) के नियमानुसार है सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 पर अर्द्धनिर्मित संरचना की कोई उपयोगिता नहीं होने की बात छः सदस्यीय समिति द्वारा प्रतिवेदित किये जाने के आलोक में इनके द्वारा भुगतान की कुल राशि मिट्टी कार्य मद एवं Secured Advance सहित रू0 1528713/- की वसूली संवेदक के सुरक्षित जमा राशि सूद सहित रू0 12,90000318644=1608644 कर ली गई है। इस प्रकार कुल रू0 1528713/- का नुकसान हुआ एवं संवेदक से कुल 1608644-1528713=79913/- रूपये का लाभ हुआ।
विभागीय समीक्षा - संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- अर्द्धनिर्मित संरचना फर्श की मुटाई में 75mm की कमी, वैरल वॉल में छड़ में 25.75% तक की कमी, अर्द्धनिर्मित संरचना में 40.41% से 41.11% तक सीमेंट की कमी एवं सीट पाईल की गहराई रूपांकित 4.5मी0 के बदले U/S में 1.10मी0 तथा D/S में 0.70मी0 जो रूपांकित गहराई क्रमशः 3.4मी0 एवं 3.80 मी0 की कमी के संबंध में किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। Sheet pile में पायी गयी कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी परन्तु अनियमितता प्रतिवेदित किये जाने के बाद भी संवेदक के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई न कर इनके द्वारा विपत्र तैयार नहीं करने के लिए FIR दर्ज कर लिया गया। इस संदर्भ में गृह विभाग का पत्रांक-6211 दिनांक 09.06.2008 का जिक्र किया गया है साथ ही इनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन द्वारा दूरभाष पर दिये गये आदेश के आलोक में FIR दर्ज किया गया। इस संदर्भ में किसी भी प्रकार का साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है।
इनके द्वारा कहा गया है कि गडबड कार्य का न तो मापपुस्त में कोई प्रविष्टि नहीं की गई है न भुगतान ही किया गया है। जहाँ तक सीट पाईल में कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गई है तो संवेदक को तत्क्षण पत्रांक-429 दिनांक 21.04.16 द्वारा संवेदक को पत्र दिया गया तथा संवेदक के जमा राशि को पत्रांक-563 दिनांक 09.07.1813 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 द्वारा कुल रू0 12,90,000/- जब्त कर लिया गया है। कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन के आदेश पर किया गया है। वस्तुस्थिति यह है कि कार्य के Secured Advance के रूप में संवेदक को कुल रू0 13,43,042/- का भुगतान किया गया है। प्रश्न है कि जब कार्य के प्रारंभ में ही सीट पाईल में गड़बड़ी की गयी थी तो संवेदक को भुगतान क्यों किया गया एवं उसके उपर संरचना के फर्स एवं वैरल का कार्य कैसे कराया गया। यहाँ तक की गड़बड़ी कार्य का विपत्र तैयार नहीं किये जाने पर कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता पर FIR दर्ज क्यों किया गया। इससे श्री चौधरी की मंशा संदिग्ध प्रतीत होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए गलत ढंग से कार्य कराने एवं उसका विपत्र तैयार करने हेतु दबाव दिये जाने के लिए दोषी प्रतीत होते है।
(ii) इनके द्वारा कहा गया है कि अन्य कार्य में व्यस्तता के कारण प्रश्नगत कार्य पर बहुत समय दिया जाना संभव नहीं हो सका स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि प्रश्नगत संरचना एक महत्वपूर्ण संरचना था। इनके द्वारा ऐसा कोई अभिलेख नहीं दिया गया है, जिससे परिलक्षित हो सके की एक बार भी प्रश्नगत संरचना का निरीक्षण किया गया है। इसके अतिरिक्त संरचना के तीन वैरल निष्प्रभावी होने के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य प्रारंभ से जाँच समिति के आने तक कोई भी किसान लिखित या मौखिक रूप से शिकायत नहीं की है; स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि जाँच में तीन वैरल सरकारी जमीन पर नहीं होकर रैयती जमीन पर बना हुआ पाया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप का प्रथम एवं द्वितीय भाग तथा गैर विशिष्टि का छड़ लगाने तथा त्रुटिपूर्ण एलाईनमेंट पर कार्य करने का आरोप प्रमाणित पाया गया है परन्तु रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में Wing wall एवं Return Wall का प्रावधान नहीं करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है।
भुगतान के संदर्भ में श्री चौधरी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक को कार्य मद में कुल रू0 185671/- मात्र मिट्टी कार्य मद में किया गया है। इसके अतिरिक्त Secured Advance के रूप में कुल रू0 1343042/- का भुगतान किया गया है प्रश्नगत संरचना की कोई उपयोगिता नही होने की बात छः सदस्यीय समिति द्वारा प्रतिवेदित किये जाने के आलोक में उनके द्वारा भुगतान की कुल राशि रू0 1528713/- में से संवेदक सुरक्षित राशि से रू0 1290000/- की वसूली कर ली गयी। इनके द्वारा कहा गया है कि इनके द्वारा भुगतान की गयी कुल राशि रू0 1528713/- की गयी है जिसके विरूद्ध सुरक्षित जमा राशि सूद सहित रू0 1290000 318644 =1608644/- वसूली कर ली गई है अर्थात (रू0 1608644-1528713=79913/-) का विभाग को लाभ हुआ है। इस कथन की पुष्टि तो होती है परन्तु विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराने का आरोप बनता प्रतीत होता है।
उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप सं0-01 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-02 एवं 03 को आंशिक प्रमाणित माना गया है।
उक्त वर्णित स्थिति में सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है -
"बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्ष के लिए।" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर BPSC का सहमति प्राप्त है। अतः श्री अर्जुन चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- "बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्ष के लिए।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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12 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-826--श्री चकलेश्वर खरवार (आई0डी0-जे 9042) तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अन्तर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना एवं छः सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री खरवार को विभागीय अधिसूचना सं0-1472 दिनांक 09.07.18 द्वारा निलंबित करते हुए श्री खरवार के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-1936 दिनांक 11.09.19 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(1) सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मुटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित से 25.75% छड की कमी एवं वैरल वाल में कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में 41.80% तक की कमी पायी गयी। साथ ही संरचना के U/s एवं D/s में सीट पाईल के रूपांकित गहराई से क्रमशः 3.40मी0 एवं 3.80मी0 की कमी पायी गयी, जिसका संसूचन कनीय अभियंता द्वारा दी गई। इससे स्पष्ट है कि न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन/रूपांकण के विपरीत कार्य कराया गया, जिससे उक्त संरचना का स्थायित्व एवं उपयोगिता प्रभावित हुई।
(2) अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Rein forcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का छड़ उपयोग किया गया। साथ ही वैरल के एलाइमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है। क्योंकि इसके सामने नदी का भाग न होकर किसानो का रैयती14 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 जमीन का भाग आता है, जिसके कारण रैयती जमीन नष्ट होने की आशंका व्यक्त की गई। CD संरचना के रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में Wing Wall एवं Return wall का प्रावधान नहीं किया गया, जो संरचना के स्थायित्व के लिए आवश्यक था। उपरोक्त त्रुटि/अनियमितता के कारण छः सदस्यीय समिति द्वारा संरचना पर आगे का कार्य कराये जाने को कार्यहित में Structural Safety, ability and Utility के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है।
(3) संरचना के कार्यान्वयन के दौरान कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 18.04.16 को प्रावधानित लंबाई से कम सीट पाईल का उपयोग होने की सूचना, गुणवत्ता विहिन चिप्स के उपयोग होने की सूचना देने के बावजूद वास्तविक कार्य मापी की जाँच नहीं की गयी। दिनांक 07.03.17 को संवेदक प्रतिनिधि एवं दिनांक 09.03.17 को कार्यपालक अभियंता को कार्य में उपरोक्त त्रुटियों की सूचना दी गयी तथा फर्स की मुटाई एवं छड़ के उपयोग प्रावधान से कम कंक्रीट मिक्स में सिमेंट की कमी पाया जाना दर्शाता है कि विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया। इस प्रकार कार्य में गडबडी होने के बावजूद अन्य पदाधिकारी से तथ्य को छिपाये रखना एवं स्वयं स्तर से सुधार नहीं कराने एवं मापी की जाँच नहीं करना दर्शाता है कि आपके द्वारा समय पर कार्यों का पर्यवेक्षण नहीं किया गया एवं लापरवाही बरती गयी है। साथ ही पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार से विभागीय पत्रांक-03 दिनांक 06.01.20 से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। श्री खरवार, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त अभ्यावेदन की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :-
आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान :-(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा यह प्रतिवेदित किया गया है कि जिस समय Sheet Pile का कार्य चल रहा था, उसी समय संवेदक के विरूद्ध उचित कार्रवाई करनी चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया के संबंध में कहना है कि संवेदक बिना सूचना दिये अचानक sheet pile का कार्य रातो-रात करा दिया। यानि Sheet pile का कार्य चल नहीं रहा था। Sheet pile के टुकड़े-टुकडे कर रातो-रात गला दिया गया था। सूचना मिलने पर तुरंत इनके द्वारा कार्रवाई की गयी, कार्रवाई का साक्ष्य आरोपित पक्ष का बचाव बयान क्रमशः 2b, c, d, e, f, g, h, i पर देखा जा सकता है। संवेदक को पत्र लिखते हुए कार्यपालक अभियंता को सूचना दिये जाने के बावजूद भी कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक पर प्राथमिकी दर्ज करने या एकरारनामा के तहत कार्रवाई करने का कोई निदेश नहीं दिया गया। उल्टे कार्यपालक अभियंता द्वारा गलत कार्य विपत्र तैयार करने Record Entry करने आदि का दवाब दिये जाने लगा। अंततः इनके विरूद्ध कार्य0 अभि0 द्वारा FIR दर्ज करा दिया गया।
(ii) कार्य के दौरान छड़ की जाँच की गई थी, परन्तु छड़ विशिष्टियों के अनुरूप नहीं था, न ही P.C.C/R.C.C निदेशानुसार दिया जा रहा था। संवेदक द्वारा किये गये अनियमित कार्य का विपत्र नहीं बनाया गया। दिनांक 18.04.16 को कनीय अभियंता द्वारा सूचित किये जाने के बाद वे स्वयं स्थल पर कनीय अभियंता के साथ गये। संदेहास्पद स्थिति की सूचना कार्यपालक अभियंता को मोबाईल पर दी गयी। संवेदक के प्रतिनिधि को सीट पाईल कार्य की सत्यापन के लिए JCB लाने हेतु बार-बार अनुरोध किया गया। परन्तु टाल-मटोल कर समय व्यतीत करने लगे। तत्पश्चात अपने पत्रांक-65 दिनांक 16.05.16 द्वारा संवेदक के प्रतिनिधि को पत्र लिखा एवं उसकी प्रति कनीय अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को दिया गया। (iii) अर्द्धनिर्मित संरचना के Reinforcement यथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि के छड़ TORKON छड़ के उपयोग के आधार पर छड़ न्यून विशिष्टि का निष्कर्ष सही नहीं है क्योंकि TORKON छड़ की Quality के जाँच के बिना इसे अस्वीकृत किये जाने का आधार औचित्य नहीं है।
अर्द्धनिर्मित संरचना के वैरेल के फाउनडेशन के एलाईनमेंट त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के अन्य तीन वैरल निष्प्रभावी होने के संदर्भ में कहा गया है कि बिना नदी के भाग के जमीन का मापी कराये वगैर यह निष्कर्ष के तीन वैरल किसानों के रैयती जमीन में आता है, मंतव्य देना उचित नहीं है।
(iv) संवेदक द्वारा विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं करने पर इनके द्वारा प्रारंभ में ही अनेक पत्राचार कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक को किया गया है एवं मनमानी करने पर संवेदक पर कार्रवाई के लिए उच्च पदाधिकारी को सूचित किया गया एवं संवेदक द्वारा किये गये गैर विशिष्टि के कार्यों की तरजीह नहीं दी गयी तथा Record Entry नहीं किया गया, न ही विपत्र बनाया गया, न ही भुगतान किया गया। इस प्रकार सरकारी राशि का अपव्यय से बचाया गया है। विभागीय समीक्षा - संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- (1) अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा कार्य के गुणवत्ता के संबंध में काफी पत्राचार किया गया है, परन्तु इनके द्वारा रूपांकण के विपरीत ले आउट दिया गया एवं पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गई इस बात से भी स्पष्ट होता है कि जिस सीट पाईल का कार्य चल रहा था उस समय संवेदक के विरूद्ध उचित कार्रवाई करना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया और न ही कार्य के दौरान छड की जाँच किया गया। सहायक अभियंता के रूप में कनीय अभियंता के द्वारा दिनांक 18.04.16 को सूचित करने के पश्चात भी कार्य में संवेदक के द्वारा की जा रही त्रुटि में सुधार हेतु अपेक्षित कार्रवाई ससमय नहीं करने के कारण कार्य न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन एवं रूपांकण के विपरीत कार्य किया गया।
इनके द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट है कि इनके द्वारा इस आरोप के संदर्भ में न तो कोई नया तथ्य दिया गया है। इनके द्वारा बचाव-बयान में वही तथ्य दिया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान15 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संचालन पदाधिकारी को दिया गया है जिसका विशलेषण संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में करते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।
(2) अर्द्धनिर्मित संरचना के Reinforcement की जाँच से स्पष्ट हुआ है कि संरचना में राज्य स्तरीय अनुसूचित दर निर्धारण समिति के निर्णयानुसार अनुसूचित दर पुस्तिका में प्रावधानित छड़ यथा TATA, SAIL, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि के छड़ TORKON का उपयोग किया जाना, साथ ही संरचना के वैरल के फाउनडेशन के एलाइनमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है क्योंकि इसके सामने नदी का भाग न होकर किसानों के रैयती जमीन का भाग आता है। इनके द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य में उपयोग किये गये TORKON छड़ की Quality के जाँच किये बिना ही इसे अस्वीकार करना उचित नहीं है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि TORKON की छड़ की गुणवत्ता के संदर्भ में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया हैं। जबकि TATA, SAIL, RINL एवं SHAYAM STEEL मार्क के छड़ का उपयोग करना था। इसके अतिरिक्त इस आरोप के संदर्भ में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है, कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए गैर विशिष्टि के छड का उपयोग करने तथा त्रुटिपूर्ण एलाइनमेंट पर संरचना का निर्माण कराने के लिए दोषी माना जा सकता है। परन्तु रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में WING WALL एवं RETURN WALL का प्रावधान नहीं करने के लिए इन्हें दोषी माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
(3) इनके द्वारा कहा गया है कि कार्य के प्रारंभ से ही संवेदक के द्वारा मनमानी करने पर संवेदक पर कार्रवाई हेतु उच्च पदाधिकारी को सूचित किया गया है संवेदक के द्वारा गैर विशिष्टि के कार्य को तरजीह दी गयी।
उक्त कार्य का रेकर्ड इन्ट्री नहीं किया गया न तो विपत्र बनाया गया है। यदि कार्यपालक अभियंता एवं उच्च पदाधिकारी द्वारा FIR करने का आदेश देते तो संवेदक के विरूद्ध FIR संवेदक के विरूद्ध किया जाता। परन्तु उच्च पदाधिकारी द्वारा केवल विपत्र बनाने हेतु दवाब दिया जाता रहा स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। क्याेंकि संवेदक द्वारा कार्य के प्रारंभिक अवस्था यथा सीट पाईल प्रावधान से कम लंबाई में कार्य कराया गया तो उसके उपर वैरल के फर्स एवं Wall का कार्य कैसे कराया गया। इससे स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा कार्य का पर्यवेक्षण सही ढ़ग से नहीं किया गया है। अगर संवेदक द्वारा मनमानी किया जा रहा था तो इनका दायित्व था कि कार्य को बन्द कराते, इसके बावजूद संवेदक द्वारा कार्य बन्द नहीं किया जा रहा था तो FIR कराते। FIR दर्ज कराने के लिए ये स्वयं सक्षम प्राधिकार थे। जहाँ तक रेकर्ड इन्ट्री नहीं करने का प्रश्न है तो मापपुस्त के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रश्नगत कार्य के तहत मिट्टी कटाई कार्य का प्रथम विपत्र के रूप में भुगतान किया गया है तथा द्वितीय चालू विपत्र के माध्यम से सीट पाईल एवं Reinforcement sand एवं Jhama मेटल का भुगतान किया गया है, जब कार्य के प्रारंभ से ही संवेदक द्वारा मनमानी की जा रही थी तो सीट पाईल, छड, बालू एवं झामा मेटल का भुगतान क्यों की गयी। उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि उपरोक्त सामग्री के भुगतान में इनकी सहभागिता रही है।
उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01 को प्रमाणित माना जा सकता है तथा आरोप सं0-02 एवं 03 को आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है। उक्त वर्णित स्थिति में उक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री चकलेश्वर खरवार, तत0 सहायक अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है -
"चार वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर BPSC का सहमति प्राप्त है। अतः श्री चकलेश्वर खरवार, तत0 सहायक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- "चार वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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18 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(दर0)16-03/2014-865--श्री मनोज कुमार (आई0डी0-5205) तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-2037 दिनांक 16.11.17 द्वारा श्री कुमार से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया।
आरोप सं0-1- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं माप पुस्त से स्पष्ट होता है कि दोनो एकरारनामा यथा 1SBD/2008-09 एवं 2SBD/2008-09 का क्रमशः 6वें एवं 9वें चालू विपत्र 30.03.11 के कार्यपालक अभियंता द्वारा पारित करते हुए भुगतान किया गया है। स्पष्टतः जून 2010 तक कराये गये सारे कार्यों की मापी लेकर ही मार्च 2011 में दोनों एकरारनामा के कार्यों का विपत्र तैयार किया गया है तो जुलाई 2013 में बिना कार्य कराये ही बिना मापी लिए एवं बिना अंतिम विपत्र तैयार किये ही जून 2010 तक कराये गये कार्य की मात्रा में बढोतरी कैसे संभव है ?
16(cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 इससे स्पष्ट है कि आप के द्वारा बिना कार्य कराये ही जुलाई 2013 में मनमाने ढंग से निजी स्वार्थवश संवेदक को लाभ पहुँचाने के लिए जून 2010 के पूर्व कराये गये कार्यों के विभिन्न मदों में बढ़ा-चढ़ाकर तुलनात्मक विवरणी समर्पित किया गया। जिसके लिए आप दोषी है।
आरोप सं0-2-कार्यपालक अभियंता के द्वारा विभागीय निदेश के आलोक में आपको बार-बार कार्य की अंतिम मापी लेकर अंतिम विपत्र समर्पित करने का निदेश दिया जाता रहा परन्तु आपके द्वारा अंतिम विपत्र समर्पित नहीं किया गया। फलतः आपके द्वारा समर्पित तुलनात्मक विवरणी को कार्यपालक अभियंता द्वारा सही मानकर जमानत की राशि एवं समयवृद्धि मद में काटी गयी राशि को विमुक्त कर दिया गया। जो अनियमित है। अतएव उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने एवं सरकारी राशि के गबन की साजिश करने तथा कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं। श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का प्रतिउत्तर विभाग में समर्पित किया गया। विभागीय निदेश के आलोक में कार्यपालक अभियंता द्वारा बार-बार निदेश देने के बावजूद भी दोनों एकरारनामा के तहत कराये गये कार्यों का अंतिम मापी लेते हुए अंतिम विपत्र तैयार नहीं करने के संबंध में कहा गया है कि दोनों एकरारनामा के कार्यों में पायी गयी त्रुटियों का निराकरण Defect Liability Period के तहत संवेदक को कराना था। परन्तु बार-बार निदेश के बावजूद संवेदक द्वारा निराकरण नहीं करने के कारण अंतिम विपत्र तैयार किया जाना संभव नहीं था। स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि जून 2010 के पश्चात कार्य बन्द था। जबकि अंतिम मापी लेकर अंतिम विपत्र तैयार करने का आदेश वर्ष 2013 में दिया गया। ऐसी स्थिति में त्रुटिपूर्ण कार्य को छोड़कर विशिष्टि के अनुरूप कराये गये कार्यो की मापी लेकर अंतिम विपत्र तैयार करना इनका दायित्व था। जिसका पालन नहीं किया गया। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि अवर प्रमंडल में उपलब्ध मापपुस्त में पन्ना खाली नहीं रहने एवं कार्यपालक अभियंता से मापपुस्त निर्गत करने के अनुरोध करने के बावजूद भी मापपुस्त निर्गत नहीं होने के कारण अंतिम विपत्र तैयार नहीं किया जा सका। यह एक बहानाबाजी प्रतीत होता है क्योंकि इनके द्वारा मापपुस्त सं0-700 के पेज 55 तक ही 7वाँ चालू विपत्र तैयार किया गया है जिससे परिलक्षित होता है कि मापपुस्त सं0-700 में पृ0 56-से पृ0 100 तक के पेज खाली था। कार्यपालक अभियंता द्वारा मापपुस्त निर्गत नहीं किये जाने की स्थिति में अवर प्रमंडल से लेवल बुक निर्गत कर पोस्ट लेवल लेकर प्रमंडल में समर्पित करना इनका दायित्व था। ऐसे भी इनके द्वारा अवर प्रमंडल से निर्गत सभी मापीपुस्त का विवरणी नहीं दिया गया है। फलतः श्री कुमार द्वारा दिये गये तर्क कि मापपुस्त के अभाव में कार्य का अंतिम मापी लेकर अंतिम विपत्र तैयार नहीं किया जा सका। स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। अतः विभागीय पत्रांक-1283 दिनांक 04.10.13 में निहित निदेश एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा बार-बार दिये गये आदेश का उल्लंघन करते हुए अंतिम विपत्र समर्पित नहीं करने के लिए श्री कुमार दोषी पाए गये।
उक्त प्रमाणित आरोप के लिए मामले के सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध "एक (01) वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री मनोज कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-5205) पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खुटौना के विरूद्ध "एक (01) वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किया जाता है। उक्त दण्ड श्री कुमार को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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26 अगस्त 2021
सं0 22/नि॰सि॰(ल॰सिं0)-05-04/2014/925--श्री सुदर्शन सिंह (आई0डी0-1775), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध परिवादी श्री पवन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान से 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई की टीम द्वारा दिनांक 26. 03.2014 को मुजफ्फरपुर स्थित उनके कार्यालय से रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के फलस्वरूप कदाचार, भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी आदि आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग के अधिसूचना सं0-2311 दिनांक-22.05.2014 द्वारा दिनांक 26. 03.2014 के प्रभाव से निलम्बित किया गया। तत्पश्चात लघु जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 6320 दिनांक 06.11. 2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। श्री सिंह के सेवानिवृति दिनांक 31.12.2014 के पश्चात संचालित विभागीय कार्यवाही को आदेश संख्या-208 दिनांक-08.06.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। साथ ही विभागीय अधिसूचना संख्या-1341 दिनांक-15.06.2015 द्वारा श्री सुदर्शन सिंह को उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक-31.12. 2014 के प्रभाव से घटनोत्तर निलंबन मुक्त किया गया । श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा यह पाए जाने पर कि श्री सिंह, जल संसाधन विभाग संवर्ग के अभियंता हैं, संबंधित विभागीय कार्यवाही के समस्त अभिलेखों को अग्रेतर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराया गया।
श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत्त से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उार की समीक्षा में निम्नांकित तथ्य पाये गये :-
श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान की लिखित शिकायत पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/14 दिनांक 26.03.14 अन्तर्गत धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियमत 1988 संस्थित किया गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा आरोप लगाया गया था कि श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता द्वारा रिश्वत के रूप में उनसे 10,000/-रु017 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 की माँग की गई। इसकी शिकायत कार्यपालक अभियंता द्वारा आर्थिक अपराध इकाई से की गई। आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना ने शिकायत के जाँचोपरांत श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता को 10,000/- रु0 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध इकाई-3 बिहार, पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इस मामले में जाँच आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल से विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका 10 में श्री सिंह के विरूद्ध 10,000/- रु0 रिश्वत लिये जाने के आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सिंह से लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई, जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है :- (i) पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान के द्वारा झूठा लिखित शिकायत आर्थिक अपराध थाना में किया गया था कि दिनांक 26.03.2014 को मैं पवन कुमार से 10,000/- (दस हजार रुपया) लिया था। चूँकि पवन कुमार ने प्रथम इत्तिला रिर्पोट में लिखा है मुझसे टायर खरीदने के नाम पर दस हजार रुपया का माँग करते है यह तथ्य बिल्कुल गलत एवं मनगढंत है। टायर खरीदने के लिए विभाग द्वारा आवंटन उपलब्ध कराया जाता है। पवन कुमार के द्वारा ऐसा कोई चिट या पेपर नहीं प्रस्तुत किया गया है, जिसमें साबित हो कि मैं पवन कुमार से टायर खरीदने के लिए दस हजार रुपया का माँग किया था। (ii) पु0 अ0 नि0 विजय कुमार मेरे आवास पेठिया बाजार थाना-खगौल, जिला-पटना कभी नहीं आये थे। उन्होंने केश डायरी पारा 4 में जिस बात का उल्लेख किया है, वह बिल्कुल झुठा एवं मनगढंत है कि मैं पवन कुमार से टायर खरीदने के लिए 10,000/- (दस हजार) रुपया का माँग किया था। (iii) यह बात सत्य है कि न तो मैं सत्यापनकर्त्ता के सामने दस हजार रुपया का माँग किया था ना ही मेरे हाथ दस हजार का नोट रिकभरी हुआ था। (iv) मैं बिल्कुल निर्दोष हूँ। मुझे इस कांड में झूठा फँसाया गया है। चूँकि इस घटना के पहले मैं पवन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान पर विभागीय स्तर पर आरोप लगाया था। अतः बदला लेने की नियत से नियोजित ढंग से आर्थिक अपराध इकाई, पटना के साथ साजिश के तहत षडयंत्र कर झूठा केश में फँसाया गया है। (v) मैं सरकारी सेवा में लगभग 33 वर्ष, कार्य किया था लेकिन एक भी आरोप हम पर नहीं लगा था ना ही इस केश के पहले हम पर कोई केश था, मैं जितना दिन सरकारी सेवा में थे इमानदारी से कार्य किया हूँ और हमको समय समय पर पदोन्नति मिलता गया। (vi) हम पर झूठा रिश्वत लेने का आरोप लगाकार हमारे खिलाफ झूठा प्री0 ट्रैप एवं पोस्ट ट्रैप मेमोरेण्डम पुलिस उपाधीक्षक-सह-अनुसंधानकर्त्ता के द्वारा तैयार किया गया है। यह भी आरोप गलत है कि धावा दल के सदस्य के समक्ष रिश्वत की माँग किया था। (vii) घटना के पूर्व पत्रांक नं0 192 दिनांक 17.02.2014 पत्रांक-214 दिनांक 01.03.2014 मेरे द्वारा श्री पवन कुमार राम जो तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नलकूल प्रमंडल, सिवान थे से तथाकथित वित्तीय अनियमितता के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गई थी। इसी कारण बदले की भावना से दिनांक 26.03.2014 को झूठा आरोप लगा कर इस कांड में फँसा दिया गया। समीक्षा :- श्री सिंह के विरूद्ध मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने अपने कार्यपालक अभियंता श्री पवन कुमार से 10,000/- रु0 रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया। इस कृत्य के लिए उनके विरूद्ध आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/14 दिनांक 26.03.2014 अन्तर्गत धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। श्री सिंह ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में इस आरोप का खंडन करते हुए 10,000/- रु0 रिश्वत लेने के आरोप को निराधार एवं बेबुनियाद बताया है। साथ ही श्री सिंह ने अपने अभ्यावेदन में इस बात का भी उल्लेख किया है कि श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता से उन्होंने वित्तीय अनियमितता के लिए स्पष्टीकरण की माँग की थी, जिसके कारण दुर्भावना से ग्रसित होकर श्री पवन कुमार से आर्थिक अपराध इकाई से सांठ-गांठ कर दस हजार रुपया रिश्वत लेने का झूठा आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया गया। अभ्यावेदन के साथ ऐसा कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है जो श्री सिंह के कथन की पुष्टि करता है। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह द्वारा अपने बचाव-बयान में इसी तर्क को प्रस्तुत किया गया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा सम्पूर्ण तथ्यों के विश्लेषणोपरांत निष्कर्षित किया गया है कि श्री सिंह के विरूद्ध श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता से दस हजार रुपया रिश्वत लिए जाने का आरोप प्रमाणित होता है। उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं०-1162 दिनांक 23.09.2020 द्वारा "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन (Review Petition) समर्पित किया गया है, जिसमें श्री सिंह के द्वारा मुख्य रूप से निम्न बिन्दुओ का उल्लेख किया गया है :- (i) The Order Of punishment dated 23-09-2020 is based on the enquiry report submitted by the conducting officer which is merely on table enquiry as neither by any witness was examined nor any documents relating to the charges was produced during enquiry in18 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 order to charge leveled against me. Although I requested to provide list of witness and also requested to produce the then executive engineer, Pawan Kumar Ram as witness but neither list of witness was provided nor any witness was examined in support of the charges leveled against me.
(ii) The charge leveled in the departmental proceeding is as same as the charged leveled in the criminal proceeding and as per the law laid down by the Hon'ble High Court, Patna as well as by the apex court if the charges are same and similar in the criminal proceeding sa well as in the departmental proceeding, Departmental Proceeding can be suspended till disposal of the criminal proceeding as per the order dated 23.09.2010 pased in CWJC No. 12527 of 2010.
(iii) The order of punishment dated 23.09.2020 by which hundred percent pension has been stopped permanently which is much excessive and also against the mandate of article 21 of the constitution of India as no body can be deprived from the right to life. I am the retired employee and only source of my livelihood is my pension but due to the present order order punishment i have been deprived my right to life as granted under the article 21 of the constitution of India.
(iii) The Hon'ble Apex Court as well as the Hon'ble High Court, Patna have held in so many dicisions that 100% Pension of the employee under section 43(B) of the Bihar pension Rules Cannot be with held.
(iv) The charges leveled against me there is/ was pecuniary loss to the Government and as such the order of punishment with holding 100% pension permanently is out and out illegal and bad in law and also against the mandate of law as settled by the Hon'ble High Court, Patna in the case of Ram Singhasan rai vs the state of bihar vide CWJC No. 12840 of 2000. Also it is violative of article 300(A) of the constitution of India.
(v) The finding given by the conducting officer holding me guilty is based only upon surmises and conjecture as neither any enqury was conducted in my presence nor any evidence was adduced in support of alleged charges.
(vi) I was implicated in economic offence p.s. case no. 19 of 2014 at the instace of the executive engineer namely pawan kumar ram against whom i submitted report regarding defalcation of huge amount of Government money. On the basis of my report enquiry was conducted against him and charges was found to be proved against him and finally he was punished vide order contained in memo no. 3336 dated 06-08-2018 passed by Deputy Secretary, Minor Irrigation, Department, Government of Bihar, Patna. But even then this aspect of the matter was neither consider by the conducting officer during enquiry nor consider by the department.
(vii) The Order of punishment is bad in law as well as on fact and also very disproportionate and on this ground alone the order of punishment may be reviewed and set aside. समीक्षा :- श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्य रूप से उन्हीं तथ्यों को दुहराया गया है जिनका उल्लेख उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में किया गया था, और जिसके समीक्षोपरांत में "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया है। इनके द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में मामले से संबंधित किसी नये तथ्य का समावेश नहीं किया गया है, जिस पर पुनर्विचार किया जा सके।
अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत किए जाने तथा विभागीय अधिसूचना संख्या-1162 दिनांक-23.09.20 द्वारा संसूचित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" को यथावत रखे जाने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उपर्युक्त संसूचित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।19 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022
26 अगस्त 2021
सं॰ 22/नि॰सि॰(ल॰सिं0)-05-01/2019/926--श्री नलिनी रंजन प्रसाद (आई0डी0-3335), तत्कालीन सहायक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग के विरूद्ध लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद अन्तर्गत उतरावाँ तालाब एवं पईन कार्य योजना में अनियमितता बरते जाने के कारण लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक-260 दिनांक-16.01.2020 द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए उनके पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग को नियमानुसार अग्रेत्तर कार्रवाई करने हेतु अनुशंसा की गयी। उक्त के आलोक में जल संसाधन विभाग के स्तर पर आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-714 दिनांक-21.05.2020 से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के उत्तर के आलोक में वस्तुस्थिति निम्नवत है :- आरोप :- (i) लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद अन्तर्गत उतरावाँ तालाब एवं पईन कार्य योजना में मिट्टी एवं P.C.C कार्य में कुल रु॰ 7,76,221/- का वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान किया गया। जाँच प्रतिवेदन के अनुसार उक्त कार्य काफी लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद पूर्ण नहीं किया जा सका, जिससे उक्त योजना पर खर्च की गयी राशि का कोई उपयोग सिद्ध नहीं हो रहा है एवं किसान को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। (ii) तालाब से निकाली गयी कुल मिट्टी के तीस (30%) प्रतिशत मिट्टी को याँत्रिक विधि से ढ़ुलाई दिखाया गया है, जबकि इसकी मापी ली जानी चाहिए थी। ढ़ुलाई की दूरी एवं मात्रा की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा प्रदान नहीं किया गया है। (iii) पईन में कुल 10 अद्द 1'0'' dia HP का आउटलेट बनाया गया है तथा उसका भुगतान भी मापीपुस्त के पृष्ठ सं॰-28 पर की गयी है। जबकि स्थल जाँच के क्रम में चेन सं॰-0 से चेन सं॰-2.90 तथा चेन सं॰-4.10 पर बने हुए तीन अद्द आउटलेट के फाउनडेशन में P.C.C. किया गया है तथा तीन अद्द आउटलेट चेन सं॰-26, चेन सं॰-26.5 एवं चेन सं॰-44.30 पर जाँच की गयी तो फाउनडेशन एवं पाईप के निचे P.C.C कार्य किया हुआ नहीं पाया गया। बचाव-बयान :- एकरारनामा के अनुसार कार्यारंभ की तिथि 12.12.2011 एवं कार्य समाप्ति की तिथि 11.06.2012 थी। सहायक अभियंता के रूप में पदस्थापन अवधि में उक्त कार्य को पूर्ण करने का हर संभव प्रयास किया गया, परन्तु संवेदक द्वारा कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं लायी गयी। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कारणों यथा नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने, उत्तरांवा गाँव से रंगदारी माँगने एवं संवेदक के प्रतिनिधि के साथ मारपीट करने जैसे कारणों से समय-समय पर कार्य बाधित होता रहा है। कार्यपालक अभियंता के स्तर से जिला पदाधिकारी एवं पुलीस अधीक्षक, अरवल से बाधांओं को दूर करने हेतु अनुरोध किया गया। इस प्रकार कार्य समय पर पूर्ण नहीं होने के लिये स्थलीय स्थिति के साथ-साथ संवेदक पूर्णरूपेण जिम्मेवार है। योजना में शामिल सीढ़ी निर्माण कार्य को छोड़कर सभी कार्य पूर्ण कर लिया गया था तथा सीढ़ी निर्माण नहीं होने से सिंचाई क्षमता पर असर नहीं पड़ता है। विभिन्न वर्षाें में उतरावां पईन तालाब से किसानों को खरीफ सिंचाई का लाभ प्राप्त हुआ है।
जाँच दल द्वारा कुछ स्थलों पर लम्बाई चौड़ाई एवं गहरायी की मापी लेकर मिट्टी की मात्रा को आकलित की गई है, जो PWD Code में निहित प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। नियमानुसार मिट्टी कार्य की गणना Pre Level तथा Post Level के आधार पर Cross sectioned area आकलित कर किया जाता है। Pre Level तथा Post Level की प्रविष्टि मापपुस्त में दर्ज है। इसके आधार पर ही Graph Paper पर Cross sectional area Plot कर Analytical Method से मिट्टी की गणना की गयी है एवं तदनुरूप मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया है। इस प्रकार कम जगहों पर मापी लेकर औसत मिट्टी की गणना करना सही प्रतीत नहीं होता है। (ii) स्वीकृत प्राक्कलन मे तालाब से काटी गयी मिट्टी की 30% मात्रा का 150 मी॰ से 1/2km दूरी के बीच याँत्रिक संसाधन से ढ़ुलाई कर Disposal करने का प्रावधान था। तालाब के किनारे पर जितनी मिट्टी रखना संभव था, उतनी मिट्टी किनारे में रखने के बाद अवशेष मात्रा का Disposal याँत्रिक विधि द्वारा 1/2 km दूरी के अधीन किया गया है। तालाब से काटी गयी मिट्टी का याँत्रिक साधन से 1/2km की दूरी के अन्तर्गत किये गये Disposal को ग्रामीण नक्शे पर दिखाते हुए Disposal Plan/lead Plan स्वीकृति हेतु प्रमंडलीय कार्यालय में ससमय समर्पित कर दिया गया था। कार्य की मापी लेकर विपत्र तैयार करना सहायक अभियंता/कनीय अभियंता की जिम्मेवारी है, परन्तु नियमानुसार कार्य का भुगतान करना कार्यपालक अभियंता/प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी एवं प्रमंडलीय लेखा लिपिक का दायित्व है। समर्पित विपत्र भुगतान से पूर्व कार्यपालक अभियंता को समर्पित लीड प्लान की सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति प्राप्त कर लनी चाहिए थी। इस प्रकार लीड प्लान/Dispoal Plan की स्वीकृति प्राप्त नहीं किये जाने से इनका कोई दोष नहीं है। जल संसाधन विभाग के पत्रांक-198 दिनांक-14.03.2016 से स्पष्ट है कि स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधानित लीड के अन्तर्गत मिट्टी की ढ़ुलाई की जाती है तो उसके लिये लीड प्लान की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। (iii) प्रश्नगत कार्य के कार्यान्वयन अवधि में लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत 10 से अधिक स्थलो पर एक साथ कार्य चल रहा था तथा प्रमंडलाधीन कुल दो अवर प्रमंंडल में एक मात्र सहायक अभियंता के रूप में पदस्थापन के कारण इनके द्वारा विभिन्न स्थलों पर चल रहें कार्याें का प्राथमिकता के आधार पर पर्यवेक्षण किया जाता था। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने, उतरांवा गाँव में आपसी विवाद के कारण कार्य के कार्यान्वयन में लगे मजदूरों से मारपीट करने तथा असमाजिक20 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 तत्वों द्वारा संवेदक से रंगदारी माँगने आदि कारणों से संवेदक द्वारा अपनी सुविधानुसार कभी दिन में तो कभी रात में कार्य कराया जाता था। संभव है कि रात्रि में कार्य करने का लाभ लेकर संवेदक द्वारा 3 (तीन) अद्द आउटलेट के फाउनडशन में P.C.C कार्य नहीं किया गया होगा। इस बात को संज्ञान में आने के तत्काल बाद संवेदक के लंबित विपत्र से तीनों आउटलेट की कुल लागत राशि की कटौती कर ली गयी। उक्त कटौती के पश्चात् भी संवेदक को 33730.0 का भुगतान शेष है। आउटलेट निर्माण में प्रयुक्त सामग्रियों का गुणवता भी विशिष्टि के अनुरूप पायी गयी है, जो संलग्न गुणवता रिपोर्ट से स्पष्ट है। चालू विपत्र के रूप में संवेदक को किया गया भुगतान अग्रिम भुगतान माना जाता है तथा इसे अगले चालू विपत्र में समायोजित करने का प्रावधान है एवं पूर्व के चालू विपत्र में किसी प्रकार की त्रुटि परिलक्षित होने पर अगले विपत्र में इसे सुधार लिया जाता है। इस कारण तीन अद्द आउटलेट का चतुर्थ चालू विपत्र में किये गये भुगतान को अगले विपत्र से कटौती कर समायोजन कर लेने से अधिकाई भुगतान का मामला नहीं बनता है। पूरक बचाव बयान-जाँच दल द्वारा 10 अद्द हयुम पाईप कलर्भट के जाँच के क्रम में तीन अद्द आउटलेट के फाउनडेशन में P.C.C. नहीं किया गया प्रतिवेदित है। बिहार लोक निर्माण सेवा संहिता के अपेण्डिक्स-6 के अनुसार सहायक अभियंता को मापी पुस्तिका में दर्ज मापी का 50% मापी की जाँच की जानी है। जाँच दल को 10 अद्द हयुम पाईप आउटलेट के निर्माण में से तीन अद्द आउटलेट में P.C.C. कार्य दृष्टिगोचर नहीं हुआ था, जो कुल 10 अद्द का 30% है। एकरारनामा के क्लाउज-7 के अनुरूप चालू विपत्रों का भुगतान संवेदक को अग्रिम के तौर पर होता है, जिसकी वसुली उसके अन्तिम विपत्र से किये जाने का प्रावधान है। इस मामले में उक्त कार्य मद की कटौती भी की जा चुकी है। अतः किसी प्रकार की सरकारी राशि की हानि नहीं हुई है। मिट्टी कार्य में वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान हुआ है यह भी तकनीकी दृष्टिकोण से मान्य नहीं है क्याेंकि मिट्टी के कार्य अस्थायी प्रकृति के होते है। सम्पादित कार्य के एक वर्ष बाद जाँच के क्रम में मापी करने पर उसमें अन्तर परिलक्षित होना स्वभाविक है। इस स्थिति में यह कहा जाना कि बिना कार्य के भुगतान सरकारी राशि के गबन दुरूपयोग एवं अपराधिक षडयंत्र की श्रेणी है, साक्ष्य विहीन है। मिट्टी कार्य में याँत्रिक विधि से मिट्टी का ढ़ुलाई दिखलाया गया है। ढ़ुलाई की दूरी एवं मात्रा की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा नहीं लिया गया है, के क्रम में कहना है कि स्वीकृत प्राक्कलन में जिस लीड से एवं मात्रा स्वीकृत था, उक्त के आलोक में ही मापी पुस्तिका में दर्ज मापी के जाँचोपरांत मापी पुस्तिका कार्यपालक अभियंता को अग्रसारित की गयी थी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण से स्पष्ट होगा कि वर्ष 2013 के मामले में वर्त्तमान में आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण पूछा जाना विधि संगत नहीं है के साथ-साथ संलग्न सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निदेश के विपरीत है। इनके द्वारा सहायक अभियंता के पदीय दायित्वों का निर्वहन उचित ढ़ंग से किया गया है। अतएव सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए स्पष्टीकरण स्वीकार करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- आरोप-(i) :- उतरांवा तालाब एवं पईन योजना में मिट्टी एवं P.C.C. कार्य में कुल 7,76,221/- रुपये का वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान किया जाना तथा कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण योजना पर खर्च की गयी राशि का कोई उपयोग नहीं हो रहा है एवं किसान को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
जाँच प्रतिवेदन में प्रश्नगत कार्य के कार्यान्वयन में मिट्टी कटाई एवं आउटलेट के निचे P.C.C. कार्य नहीं कराये जाने के आलोक में कुल 7,76,221/- रुपये का अनियमित भुगतान होना बताया गया है। श्री प्रसाद तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि जाँच दल द्वारा कुछ स्थलों पर लंबाई, चौड़ाई एवं गहरायी की मापी लेकर मिट्टी की मात्रा का आकलन किया गया है, जो PWD Code में निहित प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। नियमानुसार मिट्टी कार्य की गणना Pre Level तथा Post Level के आधार पर Cross sectioned area के आधार पर आकलित किया जाना है एवं उसी के अनुरूप Graph Paper पर Cross sectional area Plot कर Analytical Method से मिट्टी की गणना करते हुए भुगतान किया गया है। कम जगहों पर मापी लेकर औसत मिट्टी की गणना करना सही नहीं है। प्राक्कलन के मद सं॰-1 के अनुसार कराये गये मिट्टी कटाई की गणना sectional मापी के आधार पर किये जाने का प्रावधान है एवं नियमानुसार भी किसी तरह से मिट्टी कार्य की गणना Pre Level एवं Post Level के आधार पर Cross sectional area निकालकर मिट्टी की मात्रा का गणना किया जाना है। प्रस्तुत मामले में रक्षित मापपुस्त से स्पष्ट होता है कि मिट्टी कार्य की गणना Cross sectional area के आधार पर किया गया, जिसे नियमानुकूल माना जा सकता है। जाँच प्रतिवेदन में मिट्टी कार्य की गणना लम्बाई, चौड़ाई एवं गहरायी के औसत मापी के आधार पर किया जाना परिलक्षित होता है, जिसे नियमानुकूल माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत कार्य के तहत सिढ़ी निर्माण कार्य को छोड़कर शेष तालाब एवं पईन का कार्य करा देने से सिंचाई कार्य बाधित नहीं हुआ है, एवं किसानों को पानी का लाभ भी मिल रहा है। आरोप-(ii) :- तालाब से निकाली गयी कुल मिट्टी के 30 प्रतिशत मिट्टी का याँत्रिक विधि से ढ़ुलाई दिखाया गया है, जबकि उसकी मापी ली जानी चाहिए थी एवं मिट्टी ढ़ुलाई की दूरी एवं मात्रा की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा प्राप्त नहीं की गयी। श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि स्वीकृत प्राक्कलन में तालाब से काटी गयी मिट्टी का 30% मात्रा 150मी॰ से 1/2 कि॰मी॰ की दुरी के बीच याँत्रिक विधि से ढ़ुलाई कर Disposal करने का प्रावधान है।21 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 तालाब के किनारे पर जितना मिट्टी रखना संभव हो सका, उतनी मिट्टी तालाब के किनारे पर रखने के बाद शेष मिट्टी का Dispoal याँत्रिक विधि से 1/2 कि॰मी॰ की दुरी के अधीन किया गया। मिट्टी Disposal को ग्रामीण नक्शा पर दिखाते हुए Disposal Plan (Lead Plan) स्वीकृत करने हेतु प्रमंडल कार्यालय को ससमय समर्पित कर दिया गया था। कार्य की मापी लेकर विपत्र तैयार करना सहायक अभियंता/कनीय अभियंता की जिम्मेवारी है, परन्तु नियमानुसार कार्य का भुगतान करना कार्यपालक अभियंता, प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी एवं लेखा लिपिक का दायित्व है। बिल भुगतान से पूर्व कार्यपालक अभियंता को समर्पित लीड प्लान की सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति प्राप्त कर लेनी चाहिए थी। उपलब्ध लीड प्लान से स्पष्ट है कि इनके द्वारा दिनांक-28.03.2012 को तालाब से काटी गयी मिट्टी के Disposal से संबंधित ग्रामीण नक्सा पर Lead Plan तैयार कर कार्यपालक अभियंता को समर्पित किया गया है, जिस पर कार्यपालक अभियंता द्वारा हस्ताक्षर भी किया गया है, जिसके अनुसार 150 मी॰ से 1/2 km के बीच कुल 8125 घन मी॰ मिट्टी Disposal किया जाना परिलक्षित है एवं मापपुस्त के अनुसार याँत्रिक विधि से कुल 8120.22 घन मीटर मिट्टी का 150मी॰ से 1/2 km के दूरी के बीच Disposal किये जाने का समावेश है, जो लीड प्लान में अंकित मात्रा के अधीन है। ऐसी स्थिति में यह कहा जाना कि श्री प्रसाद द्वारा बिना लीड प्लान की स्वीकृति प्राप्त किये ही भुगतान किया गया, उचित प्रतीत नहीं होता है। क्योंकि श्री प्रसाद के स्तर से लीड प्लान भुगतान की तिथि 31.07.2013 के पूर्व ही प्रमंडल में समर्पित कर दिया गया था। उक्त के परिप्रेक्ष्य में कार्यपालक अभियंता एवं प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी का दायित्व बनता है कि इस की स्वीकृति सक्षम पदाधिकारी से प्राप्त कर भुगतान की कार्रवाई किया जाता। जहाँ तक मापी लेने का प्रश्न है, यह स्पष्ट है कि तालाब से काटी गई मिट्टी की गणना Cross Sectional area के आधार पर किया जाना परिलक्षित होता है, उक्त मात्रा का 30% मात्रा को याँत्रिक विधि से ढ़ुलाई करने की गणना की गयी है, जो प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप है। आरोप-(iii)ः- पईन निर्माण कार्य में 10 अद्द आउटलेट बनया गया है तथा उसका भुगतान मापपुस्त के पृष्ठ-28 पर की गयी। जबकि जाँच के क्रम में चेन सं॰- 0.00, चेन सं॰-2.90 तथा चेन सं॰-4.10 पर बने हुए तीन अद्द आउटलट के फाउनडेशन में P.C.C पाया गया तथा तीन अद्द आउटलेट चेन सं॰-26.0, चेन सं॰-26.50 एवं चेन सं॰-44.30 के फाउन्डेशन के निचे P.C.C. कार्य नहीं पाया गया। इनके द्वारा कहा गया है कि उतरावां गाँव में आपसी विवाद के कारण कार्य में लगे मजदूरों से मारपीट करने तथा असमाजिक तत्वों द्वारा संवेदक से रंगदारी माँगने आदि कारणों से संवेदक द्वारा अपनी सुविधानुसार कभी दिन में तो कभी रात में कार्य कराया जाता था। संभव है कि रात्रि में कार्य कराने का लाभ लेकर संवेदक द्वारा तीन अद्द आउटलेट के फाउनडेशन में P.C.C. कार्य नहीं कराया गया है। संज्ञान में आने के तत्काल बाद संवेदक के लंबित विपत्र से तीनों आउटलेट की कुल लागत राशि की कटौती कर ली गयी है। मापपुस्त सं॰-466 के पेज सं॰-69 से 79 तक में तैयार किये गये 4th Bill से स्पष्ट होता है कि उक्त तीन अद्द आउटलेट का मदवार कटौती की गयी है। अतएव आरोपी का कथन की उक्त तीन अद्द आउटलेट के कुल राशि की कटौती कर ली गयी है, की सम्पूष्टि होती है। फलतः अनियमित भुगतान करने का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है। कार्य की गुणवत्ता के संबंध में कहा गया है कि आउटलेट में प्रयुक्त सामग्रियों का गुणवत्ता भी विशिष्टि के अनुरूप पायी गई है। गुणवत्ता जाँचफल के अनुसार गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी है।
उक्त समीक्षा के आलोक में श्री नलिनी रंजन प्रसाद (आई॰डी॰-3335), तत्कालीन सहायक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग के विरूद्ध गठित तीनों आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है।
अतएव उपर्युक्त समीक्षा एवं निष्कर्ष के आलोक में सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णयानुसार श्री नलिनी रंजन प्रसाद (आई0डी0-3335), तत्कालीन सहायक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग के द्वारा आरोपों के संदर्भ में समर्पित किये गये स्पष्टीकरण को स्वीकृत करते हुए इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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26 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(वीर0)07-16/2019-927--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-5295) तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली, सुपौल के पद पर पदस्थापित थे तब इनके विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वीरपुर द्वारा पे्रेषित पत्र के इनके विरूद्ध प्रकाशित समाचार को अत्यंत गंभीर एवं सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रतिकूल पाते हुए सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-50 दिनांक 16.01.20 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय पत्रांक-940 दिनांक 03.07.20 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री कुमार को विभागीय अधिसूचना सं0-1151 दिनांक 21.09.20 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, वीरपुर से प्राप्त मंतव्य प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध मामले का आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में विभागीय अधिसूचना सं0-405 दिनांक 08.04.21 द्वारा संचिकास्त कर दिया गया।22 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उपरोक्त के समीक्षोपरांत श्री राजेश कुमार के निलंबन अवधि (दिनांक 16.01.20 से दिनांक 20.09.20 तक) का विनियमितीकरण (निरूपण) निम्नरूपेण करने का निर्णय लिया गया है :-
"निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनो के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी तथा निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा।"
अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश कुमार (आई0डी0-5295) सहायक अभियंता (अवर प्रमंडल पदाधिकारी) के निलंबन अवधि (दिनांक 16.01.20 से दिनांक 20.09.20 तक) का विनियमितीकरण (निरूपण) निम्नरूपेण किया जाता है :-
"निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी तथा निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जाय।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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26 अगस्त 2021
सं0 22नि0सि0(पट0)-03-04/2017/928--श्री उमेश सिंह (आई0डी0-3680), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, पटना के पद पर पदस्थापित थें तो उनके विरूद्ध 14.01.2017 को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुई नाव दुर्घटना के दिन प्रतिनियुक्ति स्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति, कर्तव्य में लापरवाही एवं अनुपस्थित के कारण विधि व्यवस्था के संधारण में हुई कठिनाई का आरोप गठित कर जिलाधिकारी, पटना के पत्रांक-1419 दिनांक-20.03.2017 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया। जिसके आलोक में श्री सिंह को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1032 दिनांक-27.06.2017 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1033 दिनांक-28.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप ः- जिला नियंत्रण कक्ष, पटना के संयुक्तादेश ज्ञापांक-160/जि0नि0क0 दिनांक-13.01.2017 द्वारा पतंग उत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिनांक-14.01.2017 से 17.01.2017 तक के लिए श्री उमेश सिंह, दण्डाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्ति हुए। पतंग उत्सव कार्यक्रम के दौरान दिनांक-14.01.2017 की संध्या में नाव दुर्घटना की घटना घटित हुई। इस घटना की जाँच हेतु सरकार की ओर से दो सदस्यीय जाँच दल का गठन किया गया। जाँच दल द्वारा उच्च स्तरीय जाँच करते हुए मोबाईल फोन के टॉवर लोकेशन के आधार पर समर्पित प्रतिवेदन में श्री सिंह को प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थिति रहने के आलोक में दोषी पाया गया है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-3091 दिनांक-15.03.2017 के आधार पर चिन्हित पदाधिकारियों जो अनुपस्थित रहे हैं, जिनमें श्री सिंह भी सम्मिलित हैं, के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में आरोप गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार को भेजने का निदेश प्राप्त हुआ है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री सिंह अपने प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थित थें। श्री सिंह द्वारा अपनी अनुपस्थिति के संबंध में न तो कोई अनुमति ली गई अथवा इसकी सूचना ही वरीय पदाधिकारियों को दी गई। यह विधि व्यवस्था संबंधी संवेदनशील मामले में आदेश की अवहेलना सहित अनधिकृत अनुपस्थिति एवं कर्तव्य में लापरवाही का द्योतक है तथा श्री सिंह के इस अनुपस्थिति के कारण विधि व्यवस्था संधारण में कठिनाई हुई है। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी का पत्रांक-2801 दिनांक-06.11.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह की उपस्थिति के संबंध में कहा गया कि श्री सिंह पुलिस बल के लिए जारी कमान एवं अन्य दंडाधिकारियों द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्र के आधार पर स्वंय को कार्यस्थल पर उपस्थित होने का साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है। जाँच पदाधिकारी द्वारा कहा गया कि जिस साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र गठित किया गया वह अपूर्ण है। मोबाईल लोकेशन के आधार पर ही श्री सिंह को दिनांक-14.01.2017 को अनुपस्थित मानते हुए निलंबित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। परन्तु उपलब्ध कराए गए साक्ष्य कॉल डिटेल में श्री सिंह का मोबाईल नं0 का डिटेल अंकित नहीं है। जाँच पदाधिकारी द्वारा उक्त आधार पर श्री सिंह को आरोप से मुक्त पाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-1427 दिनांक-02.07.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिंह द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक-04.07.2018 द्वारा जवाब समर्पित किया गया। जिसमें श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि मोबाईल गाड़ी में छूट जाने के कारण मोबाईल लोकेट नहीं हुआ। वाहन चालक द्वारा अपने शपथ पत्र में भी उल्लेख किया गया है कि श्री सिंह का मोबाईल गाड़ी में छूट गया था। फेरी की व्यवस्था अच्छी नहीं होने के कारण दियारा में जाना संभव नहीं था। उपर्युक्त अभिकथन की समीक्षा से ऐसा प्रतीत होता है कि घटना के बाद अपने बचाव के उद्देश्य से श्री सिंह द्वारा अपने मोबाईल को गाड़ी में छूट जाने की बात कहकर एक नयी कहानी बनाई गई है। यूँ भी विधि व्यवस्था के संधारण में वरीय पदाधिकारियों से संपर्क करने तथा अन्य व्यक्तियों के संपर्क में बने रहने के लिए मोबाईल अपने पास रखना आवश्यक था। अगर एक क्षण के लिए मान भी लिया जाए कि मोबाईल गाड़ी में छूट गया, तो यह भी उनकी गंभीर लापरवाही का द्योतक है। इसलिए उनके इस तर्क को सहज रूप से स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। उनका यह कृत्य दंडनीय है। श्री सिंह दिनांक-31.10.2018 को सेवानिवृत हो गए। श्री सिंह को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2333 दिनांक-31. 10.2018 द्वारा सेवानिवृत होने के तिथि 31.10.2018 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया तथा उक्त विभागीय कार्यवाही को उनके सेवानिवृत होने के कारण बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में सम्परिवर्तित किया गया।23 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अतएव श्री उमेश सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता संप्रति सेवानिवृत को उक्त आरोप को प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप के लिए श्री उमेश सिंह को विभागीय अधिसूचना सं०-1976 दिनांक 13.09.19 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया - ''अगले पाँच (05) वर्षों के लिए श्री सिंह के पेंशन की राशि से 20% की कटौती।'' इसी क्रम में श्री उमेश सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि दिनांक 27.06.2017 से दिनांक 30.10.18 के संदर्भ में महालेखाकार, बिहार, पटना का पत्रांक-GN131020200502880 द्वारा विभागीय निर्णय लेने का अनुरोध किया गया। श्री सिंह के निलंबन अवधि के निरूपण एवं वेतनभत्ता के अनुमान्यता पर निर्णय लेने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के निहित प्रावधान के तहत विभागीय पत्रांक-2498 दिनांक 03.12.19 द्वारा श्री सिंह को नोटिस दिया गया। परन्तु निर्धारित अवधि के उपरांत श्री सिंह द्वारा कोई भी जवाब विभाग को समर्पित नहीं किया गया। अतएव श्री सिंह के जवाब की अनुपलब्धता के कारण विभाग में उपलब्ध साक्ष्य/अभिलेख के समीक्षोपरांत श्री उमेश सिंह के विरूद्ध गठित आरोप एवं उनके निलंबन को औचित्यपूर्ण मानते हुए निलंबन अवधि 27.06.17 से 30.10.18 के विनियमन पर निम्न निर्णय लिया गया - "श्री उमेश सिंह, तत्का0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त के निलंबन अवधि 27.06.17 से 30.10.2018 तक को कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि के रूप में विनियमित नहीं करते हुए तथा इस अवधि को पेंशन प्रदायी नहीं मानते हुए तथा इस शर्त्त पर कि यह अवधि सेवा में टूट नहीं मानी जाएगी।" उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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26 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(गोपा0)27-04/2017-929--श्री विजय कुमार सिंह (आई0डी0-3516) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना के अन्तर्गत सी0आर0एल0 के बिन्दु 0.88 कि0मी0 से 0.98 कि0मी0 के बीच दिनांक 15.08.2017 को प्रातः 4 बजे पाईपिंग के कारण बाँध क्षतिग्रस्त होने की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को नहीं देने, कार्य स्थल पर उपस्थित नहीं रहने, बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण कार्य के प्रति उदासीनता एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने आदि आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1612 दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया। तत्पश्चात उक्त मामले में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1672 दिनांक 20.09.17 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1540 दिनांक 19.07.2018 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया।
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय पटना उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-13155/2018 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 08.07.2019 को पारित आदेश के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" संबंधी उक्त निर्गत दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना सं0-660 दिनांक 11.05.2020 द्वारा निरस्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सिंह को सेवा में पुनस्र्थापित किया गया एवं इस मामले में अब प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में श्री सिंह के विरूद्ध "कालमान वेतनमान में दो प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति एवं भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के तहत श्री सिंह को "सेवा से बर्खास्तगी" की तिथि 19.07.2018 से सेवा में पुनस्र्थापित किये जाने से संबंधित अधिसूचना सं0-660 दिनांक 11.05.2020 निर्गत किये जाने की तिथि अर्थात दिनांक 19.07.2018 से 10.05.2020 तक निलंबित किया हुआ समझा जायेगा तथा "सेवा से बर्खास्तगी" की तिथि से पूर्व दिनांक 14.09.2017 से किए गए निलंबन के कारण निलंबन की संपूर्ण अवधि दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 10.05.2020 तक मानते हुए दिनांक 11.05.2020 सेे निलंबन मुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री विजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी (पूर्णियाँ) को दिनांक 11.05.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के प्रावधान के तहत श्री सिंह से निलंबन अवधि में देय वेतनादि के संबंध में अलग से नोटिस निर्गत करते हुए अभ्यावेदन की मांग की जा रही है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।24 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 26 अगस्त 2021 सं0 22/नि0सि0(राँँ0)15-03/2009-930--श्री शशिभूषण पाण्डेय, (ID-1994) तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बरही (झारखंड) प्रमंडल के पदस्थापन अवधि के दौरान पंचखेरो जलाशय योजना के अन्तर्गत एप्रोच चैनल की मिट्टी कटाई हेतु वास्तविकता से 13342 घन मीटर मिट्टी की अधिक मात्रा अंकित कर गलत प्राक्कलन तैयार करने एवं निविदा आमंत्रित कर गलत प्राक्कलन तैयार करने एवं निविदा आमंत्रित कर कार्य आवंटन करते हुए रू0 13,47,185/- का अधिक भुगतान करने जैसी अनियमितता से संबंधित अभिलेख जल संसाधन विभाग, झारखंड, रांची द्वारा श्री पाण्डेय का कैडर बिहार आवंटित होने के कारण उपलब्ध कराया गया है। जल संसाधन विभाग, झारखंड, रांची से प्राप्त अभिलेखों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत श्री पाण्डेय के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाया गया। तदालोक में प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-964, दिनांक 05.09.2012 द्वारा जेल अवधि दिनांक 20.03. 12 से 16.05.12 तक निलंबित किया गया। तत्पश्चात मामले के समीक्षोपरांत श्री पाण्डेय के विरूद्ध सरकारी राशि के गबन का आरोप रहने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-967, दिनांक 06.09.2012 द्वारा पुनः निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-972, दिनांक 09.06.2012 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में श्री पाण्डेय के दिनांक 31.05.2016 को सेवानिवृत होने के कारण विभागीय आदेश सं0-211, सह पठित ज्ञापांक-1159, दिनांक 23.06.2016 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-628. दिनांक 23.05.2014 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। तदालोक में श्री पाण्डेय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया जो निम्नवत है :- (i) बरही थाना कांड सं0-7/10 जी0 आर0 42/10 एप्रोच चैनल से संबंधित नहीं है और न जल संसाधन विभाग, झारखंड द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है।
(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा मेरे बचाव-बयान के बिना सूक्ष्म विश्लेषण के दिनांक 30.11.12 से एक वर्ष तक बिना किसी सुनवायी एवं गवाही के अटकलबाजी एवं संदेह के आधार पर दिनांक 10.12.13 को प्रतिवेदन दिया गया जो Conducting Enquiry के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है जिससे इस अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया से मुझे यथोचित न्याय नहीं मिल सका।
(iii) उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन से यह स्थापित नहीं होता है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा जांच के दौरान उपस्थित रहने का निदेश नहीं दिया गया जिसे मेरे द्वारा Ignore कर जांच के समय उपस्थित नहीं हुआ गया, जो स्पष्ट करता है कि मेरे अनुपस्थिति में लेवल लिया गया। जब उड़नदस्ता दल के द्वारा स्थल निरीक्षण की सूचना मुझे दी ही गई, तो संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना किसी प्रमाण के इसे सही मानकर जांच में सहयोग नहीं दिये जाने का निष्कर्ष निकालकर आरोपित किया गया है।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता, झारखंड के पत्रांक-22, दिनांक 17.01. 2017 द्वारा निर्गत पत्र से स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता, बरही द्वारा कनीय अभियंता एवं वाहन जांच दल को उपलब्ध नहीं कराया गया तो जांच दल स्थल पर कैसे पहुंचा ? यह भी स्पष्ट होता है कि सहायक अभियंता/कनीय अभियंता स्थल पर उपस्थित ही नहीं हुए तो जांच दल को लेवल लेने के आवश्यक वस्तुओं एवं अन्य संसाधन कहां से एवं कैसे उपलब्ध हुआ। विभागीय जांच में इन प्रश्नों का उत्तर प्राप्त किये बिना लेवल की जांच में किसी प्रकार का विरोधाभाष नहीं होना प्रतिवेदित किया जाना एकपक्षीय निर्णय प्रतीत होता है जिसे विवेकपूर्ण न्याय का द्योतक नहीं माना जा सकता है।
(iv) जांच दल द्वारा दिनांक 18.01.2007 को स्थल जांच करने एवं संदर्भित अभिलेख दिनांक 01.03.07 को कार्यपालक अभियंता द्वारा उपलब्ध कराये जाने की स्थिति में संचालन पदाधिकारी जांच दल द्वारा अभिलेख उपलब्ध होने के बाद अपने पूर्व जांच/मापी से संतुष्ट होकर आरोप स्थापित किये जाने के प्रतिवेदन के संदर्भ में कहना है कि- संचालन पदाधिकारी के पास पूर्ण संतुष्टि के लिए कोई साक्ष्य नहीं था कि जांच दल द्वारा स्थल का सीमांकन, उसके अनुसार लेवल मापी, प्राक्कलन के Reference point एवं Bench Mark के अनुरूप था। इस संदर्भ में सूचना का अधिकार के तहत मांगी गयी विषयांकित जांच का विस्तृत लेवल के लेवल बुक, Bench Mark एवं Datum की सूचना के क्रम में लेवल बुक उपलब्ध नहीं रहने को सूचित किया गया जिससे स्पष्ट है कि लिये गये स्थल एवं लेवल को पूर्ण रूप से प्राक्कलित लेवल से तुलना की योग्यता नहीं रखता है। यहां स्पष्ट करना है कि Reservoir side से एक छोटा-मोटा Hillock पानी के निकाल के लिए अवरोधक था जिसे काटकर एप्रोच चैनल बनाने की आवश्यकता हुई। इस स्थिति में थोड़ा-मोड़ा फर्क भी Derived level में काफी फेरबदल ला सकता है। अतः जांच दल द्वारा स्वतः लिया गया लेवल Reference point एवं Bench Mark की अनियमितता में Derived लेवल पर विश्वास कर दोषी करार दिये जाने की औचित्य पर विचार किया जाय जिससे न्याय मिल सके।
(v) विवादास्पद प्रस्तावित तल की चौड़ाई 80 मीटर के विरूद्ध जांच दल द्वार 72 मीटर की चौड़ाई मानकर की गई गणना को साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराये जाने के आधार पर अमान्य करार दिये जाने के संदर्भ में कहना है कि जल25 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संसाधन विभाग, झारखंड को दी गई मेरा बचाव बयान दिनांक 28.06.07 जल संसाधन विभाग, बिहार एवं संचालन पदाधिकारी को दी गई बचाव बयान क्रमशः दिनांक 14.01.2011 एवं 30.11.2012 में तल की चौड़ाई 80 मीटर बतायी गयी। परन्तु उक्त बयान को बिना संज्ञान में लिये एवं इसकी सत्यता जांच कराये बिना किसी यर्थेष्ठ प्रमाण के मेरे 80 मीटर के प्रतिवेदन को अमान्य कर दिया गया। इस संदर्भ में सूचना के अधिकार के तहत एप्रोच चैनल के प्राक्कलन मांग की गयी जो प्राप्त नहीं हो सका। इसी क्रम में परोक्ष रूप से प्रमाणित करने हेतु प्रमंडलीय लेवल के आधार पर 80 मीटर चौड़ाई के लिए ग्राफ आधारित गणना स्वीकृत Average Depth पर आधारित गणना से काफी नजदीक है। जो अप्रत्यक्ष रूप से 80 मीटर चौडाई होने को प्रमाणित करता है। इसी मामले में श्री उदय नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध झारखंड में संचालित विभागीय कार्यवाही में 80 मीटर तल चौड़ाई के लिए आधारित गणना को संचालन पदाधिकारी एवं जल संसाधन विभाग, रांची द्वारा स्वीकार किया गया है।
(vi) कंडिका-4 एवं 5 से मेरा सीधा संबंध नहीं है परन्तु आरोप का मुख्य आधार जांच दल द्वारा स्वतः स्थल को चिन्हित कर बगैर किसी Reference Point एवं Bench Mark को Indicate किये एक पहाडीनुमा स्थल का Derived level परिस्थतिजन्य साक्ष्य के आधार पर स्वीकार किया जाना न्यायोचित नहीं होगा।
(vii) जांच में पाये गये सभी दोषी अभियंता (मुझे छोडकर) को जल संसाधन विभाग, झारखंड द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोपमुक्त किया जा चुका है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी सूचना अप्राप्त रहने की स्थिति में अन्य स्रोतों से प्राप्त श्री उदयनारायण, श्री अर्जुन प्रसाद सिंह एवं श्री गोपाल प्रसाद सभी कनीय अभियंता को संचालन पदाधिकारी द्वारा स्थल का पहाडीनुमा होने के अनुमान के आधार पर रेखांकन कर लेवल लिये जाने का संचालन पदाधिकारी द्वारा सही नही बताया गया एवं आरोप अप्रमाणित पाया गया।
(viii) अंत में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत पर तथा Equality before law के Fundamental rights के तहत समुचित न्याय प्रदान करने का अनुरोध किया गया। श्री पाण्डेय से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा विभाग के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाया गया :-
पृच्छा-1- इस पृच्छा का संबंध जांच दल को जांच के समय आरोपित पदाधिकारी द्वारा असहयोग करने से संबंधित है। उड़नदस्ता जांच दल द्वारा अपने जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्णित कार्य की जांच दिनांक 29.11.2006 को निर्धारित की गई एवं संबंधित अभिलेखों की मांग कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बरही से पत्रांक-538, दिनांक 22.11.2006 द्वारा करते हुए तत्संबंधी सूचना संबंधित मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, रांची एवं अधीक्षण अभियंता, जलपथ अंचल, हजारीबाग को भी अपने स्तर से संबंधित अभिलेख भेजने का निदेश दिये जाने का अनुरोध किया गया। परन्तु संबंधित कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक-11.12.2006 के बाद जांच हेतु तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया गया, जिसके आलोक में जांच दल द्वारा पत्रांक-551 दिनांक 30.11.2006 द्वारा संबंधित कार्यपालक अभियंता से दूरभाष पर विचारो विमर्श उपरांत दिनांक 18.12.2006 को तिथि निर्धारित करते हुए संबंधित अभिलेख विशेषदूत से भेजने का अनुरोध किया गया। पुनः पत्रांक-554 दिनांक 12.12.2006 को तृतीय स्मार दिया गया। इतने प्रयास के उपरांत भी अभिलेख जांच दल को प्राप्त नहीं कराया गया। तत्पश्चात पत्रांक-01, कैम्प रांची दिनांक 18.11.16 द्वारा संबंधित कार्य0 अभि0 ने कुछ कठिनाईयों का जिक्र करते हुए जनवरी, 2007 के तृतीय सप्ताह में जांच करने का अनुरोध किया गया। जांच दल द्वारा अपने पत्रांक-22 दिनांक 11.01.2007 से संबंधित कार्य0 अभि0, जलपथ प्रमंडल, बरही को मुख्य अभियंता, रांची के मार्फत चतुर्थ स्मार देते हुए संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के साथ-साथ दिनांक 18.01.17 को स्थलीय जांच की तिथि निर्धारित कर सूचित किया गया जिसमें जांच दल को दिनांक 17.01.2007 के अपराह्न 4 बजे तक वाहन एक कनीय अभियंता के साथ उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। इसके बावजूद भी कार्य से संबंधित पदाधिकारी जांच के दौरान उपस्थिति सुनिश्चित नहीं कर सके।
आरोपी का यह बयान कि कार्य0 अभि0, बरही द्वारा विभिन्न तिथियों में स्थल जांच के संदर्भ में लिखित सूचना दिया जाना स्थापित नहीं होने का बचाव बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। चूंकि आरोपी श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता के रूप में कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, बरही के ही अधीनस्थ पदस्थापित थे एवं एक जिम्मेवार राजपत्रित पदाधिकारी होने के नाते कार्यपालक अभियंता द्वारा अभिलेख एवं स्थल जांच में टाल-मटोल करने के स्थिति में श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता को सभी अभिलेखों को उपलब्ध कराते हुए उड़नदस्ता जांच दल को स्थल जांच करने हेतु अनुरोध पत्र लिखकर सहयोग दिया जाना चाहिए था परन्तु ऐसा नहीं कर इनकी अनुपस्थिति में उड़नदस्ता जांच दल द्वारा लिये गये लेवल पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना उचित प्रतीत नहीं होता है एवं जांच कार्य में असहयोग का मामला परिलक्षित होता है।
पृच्छा-2-इस पृच्छा का संबंध जांच दल द्वारा कार्य से संबंधित अभिलेख मिलने के पूर्व जांच किये जाने से संबंधित है। जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि कई स्मार के बाद कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, बरही जो स्वयं आरोपित थे, टाल-मटोल के उपरांत दिनांक 01.03.2007 को संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराया गया। यद्यपि स्थलीय जांच दिनांक 18.01. 2007 को की गई परन्तु जांच प्रतिवेदन संबंधित अभिलेख उपलब्ध होने के उपरांत ही अभिलेखों से संतुष्ट होने के पश्चात जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया। जिसमें आरोपी का यह बयान की संचालन पदाधिकारी के पास पूर्ण संतुष्टि के लिए कोई साक्ष्य नहीं था, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा मिट्टी कटाई से संबंधित कमी का आकलन सही प्रतीत होने का मंतव्य उचित प्रतीत होता है।26 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 पृच्छा-3, 4 एवं 5-इस पृच्छा का संबंध तल की चौडाई 80 मी0 होने संबंधी साक्ष्य उपलब्ध कराने से है तथा मिट्टी कटाई की मात्रा वास्तविकता से 13342.43 घनमीटर राशि रू0 13.47,185/- अधिक की निविदा आमंत्रित किये जाने से है। जांच प्रतिवेदन में संबंधित कार्यपालक अभियंता, बरही द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों के आधार पर दिये गये प्रतिवेदन में तल की चौडाई 72मी0 एवं लंबाई 95 मी0 ली गई है।
जांच प्रतिवेदन में स्थल पर लिये गये लेवल के आलोक में की गई गणना के आधार पर प्राक्कलन में एप्रोच चैनल के औसत एन0एस0एल0 से औसतन 1.699 मी0 अधिक दर्शाया गया है। इस प्रकार मात्र 11557.57 घनमीटर की कटाई की गई जबकि प्राक्कलन में 24900 घनमीटर गणना कर निविदा आमंत्रित की गई। संचिका के अवलोकन एवं आरोप से स्पष्ट होता है कि 13342 घनमीटर राशि रू0 13,47,185/- अधिक का प्राक्कलन गठन कर स्वीकृति प्रदान की गई। 26 लाख को कुल स्वीकृति प्राक्कलित राशि के विरूद्ध 15% (पन्द्रह प्रतिशत) कम दर पर करीब 22 लाख रूपये का एकरारनामा कर कार्य पूरा करते हुए करीब 20 (बीस) लाख रूपये का एकरारनामा कर कार्य पुरा करते हुए करीब 20 (बीस) लाख रूपये का भुगतान भी हो चुका है।
जांच प्रतिवेदन में जल पथ प्रमंडल, बरही द्वारा तैयार किये गये प्राक्कलन के आधार पर अंकित लेवल एवं आरोपी पदाधिकारी के बचाव बयान में बेड की चौडाई 72 मी0 के जगह 80मी0, स्लोप 1:1 एवं 349.00 मी0 तक प्रस्तावित कटिंग लेवल का उल्लेख है। इस प्रकार मिट्टी कटिंग का अंतर क्रमशः 1.61M, 2.43M, 3.36M, 3.65M, 4.30M, 4.84M, 3.93M, 3.74M एवं 1.73M आता है, जिसका औसत मिट्टी कटिंग 3.373M होता है।
इस प्रकार 80M तल की चौड़ाई के आधार पर मिट्टी की कुल मात्रा (B+D)DxL गणना के आधार पर (80+3.373)x3.373x95=26715.6 घनमी0 जबकि 72मी0 तल की चौडाई के आधार (72+3.373)x3.373x95=24152 घनमीटर आता है।
उक्त गणना से स्पष्ट है कि प्राक्कलन/निविदा में प्रावधानित मात्रा 24900 घनमीटर 72मी0 के आधार पर आकलित कुल मिट्टी की मात्रा 24152 घनमीटर के सन्निकट है जिससे आरोपी द्वारा बिना पर्याप्त साक्ष्य संलग्न किये Indirect विधि से संलग्न की गणना के आधार पर तल की चौड़ाई 80मी0 प्रमाणित करना स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार जांच प्रतिवेदन में मात्रा 11557.57 घनमीटर मिट्टी की कटाई के विरूद्ध 13342.43 घनमीटर अधिक मिट्टी यानि राशि 1347185/- रूपये अधिक का प्राक्कलन गठन कर निविदा करने एवं भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है, जिसकी पुष्टि कार्य के भुगतान 22 लाख के विरूद्ध 20 लाख रूपये हो जाने का उल्लेख से भी होता है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य में आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदन किये जाने एवं आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त स्पष्टीकरण पर जल संसाधन विभाग, झारखंड से मंतव्य की मांग की गई। तदालोक में जल संसाधन विभाग, झारखंड, रांची द्वारा प्रमाणित आरोपों से सहमत होने का मंतव्य दिया गया है। जिससे भी आरोपी का बचाव बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
प्राक्कलन का गठन कनीय अभियंता के द्वारा स्थलीय सर्वेक्षणोपरांत मापी/लेवल लेकर प्राक्कलन का गठन किया जाता है जिसकी जांच सहायक अभियंता (प्रस्तुत मामले में श्री शशिभूषण पाण्डेय आरोपित तत0 सहायक अभियंता) द्वारा करते हुए प्राक्कलन की स्वीकृति हेतु वरीय पदाधिकारी को उपस्थापित किया जाता है। स्वीकृत्योपरांत एवं वांछित प्रक्रिया पूरी करते हुए कार्यावंटन के अनुसार कार्य का कार्यान्वयन किया जाता है एवं कराये गये कार्य का कनीय अभियंता द्वारा मापी अंकित की जाती है, जिसकी जांच सहायक अभियंता स्तर से किये जाने के उपरांत विपत्र के साथ कार्यपालक अभियंता को उपस्थापित किया जाता है। प्रस्तुत मामले में प्राक्कलन गठन कर मापी की जांच के कारण 13342 घनमीटर मिट्टी की अधिकाई भुगतान के मामले में श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता (सेवानिवृत) के विरूद्ध जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित होने से सहमत होने का मंतव्य जल संसाधन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा दिया गया है। इस प्रकार उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन तथा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित करने के मंतव्य पर झारखंड सरकार का मंतव्य एवं उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में श्री पाण्डेय, तत0 सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, बरही सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वितीय कारण पृच्छा पर प्राप्त प्रतिउत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से पंचखेरों जलाशय योजना अंतर्गत एप्रोच चैनल की मिट्टी कटाई हेतु वास्तविकता से 13342 घनमीटर मिट्टी की अधिक मात्रा का गलत प्राक्कलन गठन करते हुए निविदा उपरांत 13,47,185/- का अधिक भुगतान करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। तत्पश्चात सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-672 दिनांक 13.05.2020 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया गया :-
"10 (दस) वर्षों के लिए 50% पेंशन की राशि की कटौती'
उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री शशिभूषण पाण्डेय द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में दी गयी जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत पाया गया कि पुनर्विलोकन अर्जी में पूर्वी से समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर से अलग कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य उल्लेखित नहीं किया गया है। इस प्रकार श्री पाण्डेय के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार योग्य पाया गया है। तदालोक में सरकार द्वारा श्री पाण्डेय के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया है। सरकार के स्तर पर लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री शशिभूषण पाण्डेय (आई0डी0-1994) तत0 सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बरही, झारखंड सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा विभाग में समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी27 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-672 दिनांक 13.05.2020 द्वारा निर्गत दण्ड '10 (दस) वर्षों के लिए 50% पेंशन की राशि की कटौती' यथावत रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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27 अगस्त 2021
सं0 22/नि0सि0(बिहा0)28-09/2018-956--श्री राम प्रवेश पासवान (आई0डी0-4599), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, उदेरास्थान के विरूद्ध नव पदस्थापित पद पर योगदान नहीं करने संबंधी आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-2704 दिनांक 31.12.2018 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0-314 दिनांक 18.02.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री पासवान के विरूद्ध गठित आरोपो को प्रमाणित पाया गया। जिसके आलोक में विभागीय पत्रांक-1534 दिनांक 19.07.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी एवं प्राप्त जवाब के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-2002 दिनांक 17.09.2019 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए "असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।
निलंबन अवधि (दिनांक 31.12.2018 से 16.09.2019) के विनियमन के संबंध में श्री राम प्रवेश पासवान, तत्का0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, उदेरास्थान से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत विभागीय पत्रांक-2277 दिनांक 31.10.2019 द्वारा नोटिस भेजा गया। जिसके आलोक में उनके द्वारा जवाब समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
1. श्री राम प्रवेश पासवान, तत0 सहायक अभियंता Balanitis रोग से ग्रसित होने के कारण इलाजरत थे फिर भी उनके द्वारा सम्पूर्ण प्रभार श्री अरविन्द कुमार सहाय को दिनांक 28.12.2018 को सौंप दिया गया। असहाय पीड़ा और Transit Period के कारण ससमय बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, सिउड़ीघाट (रोसड़ा) में योगदान नहीं कर पाये। 2. वह नव पदस्थापित पद पर योगदान देने हेतु प्रयासरत थे। परन्तु वरीय पदाधिकारी द्वारा विशेष कार्यहित में उन्हें विरमित नहीं किया गया एवं उनके स्थानांतरण पर पुनः विचार करने का अनुरोध किया।
3. निलंबन आदेश निर्गत होते ही उनके द्वारा अस्थायी मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी में दिनांक 01.01.2019 के अपराह्न में योगदान समर्पित किया गया। उक्त अवधि का जीवन यापन भत्ता आवंटन प्राप्त नहीं होने के कारण आर्थिक तंगी ईलाज संबंधी व्यय एवं परिवार के भरण-पोषण सही ढंग से नहीं हो पाने का उल्लेख किया गया।
श्री राम प्रवेश पासवान, तत्का0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, उदेरास्थान सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मैरवा के द्वारा समर्पित जवाब की समीक्षा मे पाया गया कि इनके द्वारा कोई भी नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है एवं इनके विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित पाते हुए ही "असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक" का दण्ड संसूचित किया गया है।
समीक्षोपरांत श्री पासवान के निलंबन अवधि (दिनांक 31.12.2018-16.09.2019) को निम्न प्रकार से विनियमित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि (दिनांक 31.12.2018-16.09.2019) कर्त्तव्य अवधि नहीं मानी जाएगी तथा इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता को छोड़कर अन्य कुछ भी भुगतान नहीं किया जाएगा तथा इस अवधि की गणना पेंशन प्रायोजनार्थ की जाएगी"। अतः वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राम प्रवेश पासवान, तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, उदेरास्थान सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मैरवा के निलंबन अवधि की सेवा का विनियमन एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में निम्न निर्णय संसूचित किया जाता है :-
"निलंबन अवधि (दिनांक 31.12.2018-16.09.2019) कर्त्तव्य अवधि नहीं मानी जाएगी तथा इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता को छोड़कर अन्य कुछ भी भुगतान नहीं किया जाएगा तथा इस अवधि की गणना पेंशन प्रायोजनार्थ की जाएगी"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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2 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-02/2017/985--विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0-1- 001/2016-04 दिनांक-23.01.2017 के आलोक में समीक्षोपरांत श्री अजय कुमार गुप्ता (आई0डी0-5198), सहायक अभियंता, सिकहरना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-954 दिनांक-14.06.2017 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गयी :- (1) सिकहरना तटबंध अवर प्रमंडल सं0-02, मोतिहरी के अधीन योगदान के बाद प्रायः कार्यपालक अभियंता के अनुमति के बिना उनका मुख्यालय से अनुपस्थित रहना। प्रायः 11ः00 बजे से 12ः00 बजे के बीच कार्यालय आना एवं 3ः00 बजे से 04ः00 बजे के बीच में कार्यालय छोड़ देना।28 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (2) सौंपे गये कार्य के लिए दिए गये आदेश का अनुपालन नहीं करना। जैसे-गंडक शिविर सं0-02 एवं उसमें अवस्थित कार्यपालक अभियंता के आवास की चहारदिवारी की मरम्मति का प्राक्कलन समर्पित करने का आदेश दिया गया, परन्तु उनके द्वारा कार्य लंबित रखा गया।
मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के मुख्यालय कार्यालय, वाल्मीकिनगर से ई-टेन्डरिंग संबंधी अभिलेख (अग्रधन अन्य अभिलेख) लाने हेतु निदेशित किये जाने के बावजूद उनके द्वारा निदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
(3) तत्कालीन प्रमंडलीय प्राक्कलन पदाधिकारी के स्थानांतरण के कारण उनको कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1096 दिनांक-22.10.2013 के द्वारा प्राक्कलन पदाधिकारी का प्रभार लेने हेतु आदेशित किया गया परन्तु उनके द्वारा अनावश्यक पत्राचार कर प्रभार नहीं लिया गया।
(4) उनके द्वारा स-समय दायित्वों का निर्वहन नहीं किये जाने यथा निरीक्षण भवन का सम्पोषण मद की राशि का व्ययन लंबित रहने, स्वीपर, माली आदि का भुगतान नहीं किये जाने पर उनको अंतिम रूप से सख्त हिदायत दी गयी एवं पदनुरूप कार्रवाई नहीं करने पर उनके वेतन भुगतान अवरूद्ध करने की चेतावनी दी गई।
(5) सिकरहना बायाँ तटबंध के 22-23 आर0डी0 के बीच सरोग ग्राम में एजेण्डा सं0-125/74 एकरारनामा सं0-12F2/14-15 के द्वारा उनके द्वारा जनवरी 2015 के पूर्व कटाव निरोधक कार्य शुरू किया गया। दिनांक-12. 02.2015 को कार्यपालक अभियंता के साथ स्थल का निरीक्षण किया गया, जिसमें वे एवं कनीय अभियंता अनुपस्थित पाये गये। निरीक्षण के उपरांत वे स्थल पर आए।
उनसे Laying Register स्थल आदेश पंजी, निरीक्षण पंजी आदि की माँग की गयी, जिसे उनके द्वारा स्थल पर उपलब्ध नहीं कराया गया। सीमा के अनुरूप कार्य की प्रगति समानुपातिक नहीं ब्ल्कि काफी धीमी पाई गयी।
दिनांक-03.03.2015 को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा उक्त कटाव निरोधक स्थल का निरीक्षण किया गया। लगभग दो माह बाद भी कार्य की प्रगति 10% पायी गयी एवं कार्य भी गुणवाा के अनुरूप नहीं थें।
दिनांक-22.03.2015 को कार्यपालक अभियंता के द्वारा स्थल का निरीक्षण किया गया। बालू भरे जियो बैग में से सैम्पल के रूप में पाँच जियो बैग का वजन उनके समक्ष किया गया, वजन मानक से कम पाया गया। सभी जियो बैग को खोलकर मानक के अनुरूप लोकल बालू भरने का निर्देश संवेदक, कनीय अभियंता एवं उनको दिया गया। दिनांक-23.03.2015 को पुनः निरीक्षण के क्रम में कार्य की गुणवाा में सुधार नहीं किया गया।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-367 दिनांक-24.03.2015 के द्वारा अधीक्षण अभियंता को सूचित किया गया कि जब भी कार्यपालक अभियंता या उच्चाधिकारियों द्वारा कार्य का निरीक्षण किया गया, कार्य में त्रुटि पाई गयी एवं इसमें उनके द्वारा सुधार नहीं किया गया। साथ ही प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गयी। कार्यपालक अभियंता के द्वारा सन्देह व्यक्त किया गया कि उनके रहते विशिष्टि एवं गुणवाा के अनुरूप स-समय कार्य करा पाना संभव प्रतीत नहीं हो पा रहा है, ऐसी स्थिति में उनको हटाकर किसी दुसरे सहायक अभियंता को उक्त कार्य स्थल पर प्रतिनियुक्ति हेतु अनुशंसा की गयी।
मुख्य अभियंता से विमर्शोपरांत उनकी सहमति से अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-266 दिनांक-24.03.2015 के द्वारा उनको उक्त स्थल से हटाकर दुसरे सहायक अभियंता, श्री नवप्रकाश भारती को प्रतिनियुक्ति किया गया। श्री भारती द्वारा पूर्व के त्रुटिपूर्ण कार्य में सुधार कर शेष सम्पूर्ण कार्य को स-समय पूरा किया गया। आवंटन प्राप्त रहने एवं संवेदक द्वारा स-समय कार्य करा लेने पश्चात संवेदक को भुगतान हेतु कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-497 दिनांक-25.04.2015 एवं 549 दिनांक-11.05.2015 द्वारा पूर्व में निर्गत मापीपुस्त प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित करने हेतु अनेक पत्राचार किये जाने के पश्चात भी कार्य में व्यवधान उत्पन्न की नियत से उनके द्वारा मापी पुस्ति समर्पित नहीं की गई। कार्यहित में नया मापी पुस्त निर्गत कर मापी लेकर संवेदक को कराये गये कार्य का भुगतान किया गया।
(6) तटबंधो पर दरार, क्षरण, कटाव, चुहा एवं अन्य जानवरो से निर्मित छिद्र, रेनकट्स आदि भागों की मरम्मति हेतु कार्यपालक अभियंता एवं उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए सख्त निदेशों के बावजूद आपके द्वारा तटबंधों का सम्पोषण कार्य नहीं कराया गया।
(7) नगरपालिका, मोतिहारी द्वारा वांछित होल्डिंग टैक्स के निर्धारण हेतु निर्देश दिये जाने के बावजूद उनके द्वारा संबंधित कोई कार्य नहीं किया गया।
(8) बाढ़ 2014 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में मिट्टी ढुलाई स्थानीय बालू ढुलाई एवं बाढ़ 2014 में सरोगढ़ स्थल एवं गुलाब खॉ स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में ढुलाये गये स्थानीय बालू का लीक प्लान अनेक स्मार के बावजूद भी समर्पित नहीं किया गया।
(9) सरोगढ़ स्थल पर चल रहे कटाव निरोधक कार्य का मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये निरीक्षण के दौरान कार्य की प्रगति धीमी रहने के विरूद्ध दिए गये सरल निर्देशों दिनांक-12.02.2015 को कार्य स्थल से अनुपस्थित रहने पर रोके गये वेतन के विरूद्ध उनके द्वारा दिनांक-28.05.2015 को 11ः00 बजे पूर्वाहन में कार्यपालक अभियंता के कार्यालय कक्ष में जबरन घुसकर उनके साथ अभद्र व्यवहार के साथ29 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 गाली-गलौज एवं उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इस तरह का अभद्र व्यवहार इनके द्वारा पूर्व में भी किया गया था। इसके विरूद्ध स्थानीय थाना प्रभारी, नगर थाना, मोतिहारी मे प्राथमिकी भी दर्ज की गयी जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को भी दी गयी।
(10) तटबंध पर हुए अतिक्रमण को हटाने हेतु ठोस एवं कारगर कार्रवाई करने के लिए उनको निदेशित किया गया परन्तु उनके द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
(11) परिसम्पति का ब्योरा माँग किये जाने के बावजूद आपके द्वारा समर्पित नहीं किया गया। (12) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-763 दिनांक-24.06.2015 द्वारा सभी अवर प्रमंडल पदाधिकारी को तटबंध एवं तटबंध पर उपस्थित संरचनाओं की निगरानी करने का आदेश दिया गया जिसके लिए भी उनके द्वारा दिनांक-24. 06.2015 को कार्यपालक अभियंता के कार्यालय कक्ष में आकर गाली-गलौज किया गया तथा जान से मारने की धमकी दी गयी।
इस प्रकार सरकारी कार्य/दायित्वों का निर्वहन स-समय निष्पादित नहीं करने, कार्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता अकर्मण्यता, अनुशासनहीनता, उच्चाधिकारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट करना एवं जान से मारने की धमकी देने के लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी हैं। उक्त आलोक में श्री गुप्ता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधीनस्थ कनीय अभियंता से किये गये पत्राचार का उल्लेख करते हुए कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता पर कई आरोप लगाते हुए अपने को निर्दोष बताया गया। चूँकि श्री गुप्ता के विरूद्ध मुख्य अभियंता से प्राप्त आरोप पत्र एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में आरोप गठित कर स्पष्टीकरण की माँगी की गयी। फलतः श्री गुप्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-1160 दिनांक-23.05.2018 से मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से मंतव्य की माँग की गयी। जिसके अनुपालन में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-2566 दिनांक-25.08.2018 से श्री गुप्ता के बचाव बयान तथा आरोपों से संबंधित मामले के समीक्षोपरांत आरोपवार मंतव्य उपलब्ध कराया गया। मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये आरोपवार मंतव्य में उनके द्वारा मामले के समीक्षोपरांत श्री गुप्ता, सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01, 02, 03, 05, 08, 11 एवं 12 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-04, 06, 07 एवं 10 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। आरोप सं0-09 के संबंध में मंतव्य अंकित किया गया कि आरोपी द्वारा भी अपने बचाव-बयान में कार्यपालक अभियंता के उपर गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी दिये जाने का उल्लेख किया गया है। दोनों ही पदाधिकारी द्वारा एक दुसरे के विरूद्ध संबंधित थाना को लिखित रूप से आवेदन दिया जाना परिलक्षित है। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के प्रतिपरीक्षण होने के पश्चात स्थिति स्पष्ट हो सकता है। वर्णित तथ्यों के आलोक में मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री गुप्ता के विरूद्ध आरोप सं0-01, 02, 03, 05, 08, 11 एवं 12 यथा बिना अनुमति के बराबर मुख्यालय से अनुपस्थित रहना, आदेश के बावजूद प्राक्कलन समर्पित नहीं करना, अनावश्यक पत्राचार करना, कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने के कारण कटाव निरोधक कार्य की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तथा कार्य में व्यवधान उत्पन्न करना, कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का लीड प्लान स्मार के बाद भी समर्पित नहीं करना, कार्यपालक अभियंता के साथ अभद्र व्यवहार करना, अनुशासनहीनता, अकर्मण्यता आदि आरोप प्रमाणित माना गया। मामले के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अजय कुमार गुप्ता (ID- 5198), तत0 सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-800 दिनांक 16.04. 2019 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया :-
"दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है जिसका मुख्य अंश निम्नवत हैः- आरोप सं०-1 :-उनके द्वारा सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के अधीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल सं०-2, मोतिहारी के पद पर दिनांक 24.03.2012 को योगदान किया गया। पुनः आवास आवंटन समिति द्वारा गंडक कॉलोनी सं0-3, मोतिहारी के अन्तर्गत आवास सं० डी/10 आवंटित हुआ। वे सपरिवार इस आवास में दिनांक 14.06.2018 तक रहे। योगदान की तिथि 24.03.2012 से विरमन की तिथि 13.04.2018 तक, जब कभी मुख्यालय छोड़ा तो आकस्मिक अवकाश लेकर अथवा कार्यपालक अभियंता का आदेश/अनुमति के लेकर। कार्यपालक अभियंता का पत्रांक 673 दिनांक 20. 07.2012 का स्पष्टीकरण इस कार्यालय के पत्रांक 107 दिनांक 20.07.2012 द्वारा, पत्रांक 798 दिनांक 11.08.2012 का स्पष्टीकरण पत्रांक 129 दिनांक 13.08.2012 द्वारा कर दिया गया था। उन्होने उल्लेखित किया है कि उन्हे मुख्यालय के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में भी जाना होता है। आरोप सं०-2 :-वे इस अवर प्रमंडल में योगदान की तिथि 24.03.2012 से विरमन की तिथि 13.04.2018 तक रहे। वे अपने मूल कार्यों के अतिरिक्त सौंपे गये कार्यों के लिए दिये गये आदेशों का अनुपालन सदा करते रहे। परन्तु हमेशा ध्यान रखा कि कोई भी आदेश का अनुपालन विभागीय नियम या कोड्ल प्रोविजन के विरुद्ध नहीं हो। उनकेे द्वारा अनुपालन किये गये कार्यों के कुछ उदाहरण इस प्रकार है :- (1) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 149 दिनांक 05.02.2013 के अनुपालन में अवर प्रमंडल-4 में हो रहे कटाव निरोधक कार्य 2013 के असम्बद्ध अभियंता के रूप में सफलता पूर्वक कार्य किये।30 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (2) जिला स्तरीय पदाधिकारियों की साप्ताहिक बैठक एवं अन्य बैठकों में भाग लेने हेतु कार्यपालक अभियंता द्वारा वर्ष 2012 एवं वर्ष 2013 में केवल फोन द्वारा सूचना देकर उन्हें जाने हेतु कहा जाता था। कभी-कभी प्राधि—त भी कर दिया जाता था। परन्तु किसी प्रकार का प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया जाता था। (3) कार्यपालक अभियंता द्वारा निविदा आमंत्रण सूचना 02/2014-15 के अन्तर्गत दिनांक 04.12.2014 से दिनांक 10.12. 2014 तक परिमाण विपत्र की बिक्री हेतु प्राधि—त किया गया। इस सौंपे गये कार्य का उन्होंने सफलता पूर्वक अनुपालन किया। (4) कार्यपालक अभियंता के आदेश के अनुपालन में सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अभियंताओं के साथ बाढ़ निरोधक फाटकों/स्लूईश गेटों का संयुक्त निरीक्षण कर प्रतिवेदन पर दिनांक 20.09.2014 एवं 10.11.2014 को हस्ताक्षर किया। (5) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 581 दिनांक 18.06.2015 के अनुपालन में आपदा राहत से संबंधित बाढ़ पूर्व तैयारी से संबंधित बैठक में भाग लिया। (6) कार्यपालक अभियंता के आदेश दिनांक 01.08.2015 के अनुपालन में उनके द्वारा कनीय अभियंता श्री अरूणेश कुमार के साथ दिनांक 04.08.2015 को जितौरा ग्राम में बूढ़ी गंडक बायाँ तटबंध से 31-32 कि०मी० के बीच सूखा जामुन के गिरे पेड़ का निलामी हेतु अग्रेतर कार्रवाई के लिए मापी लिया ताकि इसकी निलामी की जा सके। (7) कार्यपालक अभियंता के द्वारा निर्देशित होकर दिनांक 15.06.2015 से दिनांक 18.06.2015 Training of Trainer का प्रशिक्षण किया। (8) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 507 दिनांक 02.05.2015 के अनुपालन में समाहरणालय, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी स्थित आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा विडियों कान्फ्रेंसिंग कार्यक्रम में भाग लिया। (9) तटबंधों के सुरक्षा हेतु प्रतिनियुक्त कनीय अभियंता एवं गृहरक्षकों का मोबाईल संख्या को संकलित कर अपने पत्रांक 136 दिनांक 22.07.2015 के द्वारा कार्यपालक अभियंता के आदेशों का अनुपालन किया गया।
कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक 1316 दिनांक 11.12.2015 द्वारा अपने आवासीय शिविर के उत्तर तरफ गिरे चाहर दिवारी की मरम्मति से संबंधित प्राक्कलन की माँग की। यह आवास गंडक शिविर-2 के अधीन है। यह शिविर जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी, सी०आर०पी०एफ० एवं जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के पदाधिकारियों के बीच हुए समझौते के तहत् सी०आर०पी०एफ० को सुपूर्द कर दिया गया। अतः कार्यपालक अभियंता को समझौते के आलोक में उक्त आवास को सी०आर०पी०एफ० के लिए छोड़ना पड़ा। प्राक्कलन की एक रफ कॉपी तैयार की गई थी। परन्तु कार्यपालक अभियंता गंडक कॉलोनी-03 के आवास सं०-सी०/2 में आवासित हुए। उस समय उन्होंने कहा कि आवास सी०आर०पी०एफ० को दिया गया है, अतः इसका प्राक्कलन छोड़ दिया जाय। पुनः दिनांक 07.09.2015 को उनकी कार्यालय कक्ष में हुए वार्तालाप के क्रम में उन्होंने उक्त चाहर दिवारी की मरम्मति का प्राक्कलन बनाने का निर्देश दिया। तदनुसार श्री अरूणेश कुमार, कनीय अभियंता द्वारा प्राक्कलन बनाया गया और समर्पित किया गया।
कार्यपालक अभियंता ने मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के मुख्यालय कार्यालय वाल्मीकिनगर से ई०-टेन्डरिंग संबंधी अभिलेख (अग्रधन एवं अन्य अभिलेख) लाने हेतु निर्देशित किये। कार्यपालक अभियंता से सरकारी वाहन की मांग अथवा आने-जाने हेतु अग्रिम राशि की मांग की गई। उन्होंने दोनों में से कोई एक भी देने से मना किया और कनीय अभियंता को लाने हेतु भेज दिया। इनके द्वारा स्थानान्तरण भत्ता का भुगतान (इस कार्यालय के पत्रांक 30 दिनांक 06.03.2014) द्वारा आग्रह करने पर भी नहीं किया गया, जबकि उन्होंने अपना स्वयं एवं अन्य अभियंताओं का स्थानांतरण भत्ता का भुगतान कर दिया। बहुत समय बाद यह भुगतान किया गया, जबकि मैं घोर आर्थिक तंगी में था। आरोप सं०-3 :- तत्कालीन प्रमंडलीय प्राक्कलन पदाधिकारी श्री दीपक कुमार के स्थानान्तरण के कारण उनको कार्यपालक अभियंता से पत्रांक 1096 दिनांक 22.10.2013 के द्वारा प्रभार लेने का आदेश प्राप्त हुआ। तत्क्षण उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता से भेंट कर कहा कि आपके द्वारा मुझे बहुत सारे कार्य सौपे गये हैं, जैसे जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के साप्ताहिक मिटिंग, विडियो कान्फ्रेसिंग में भाग लेना, बीस सूत्री के मिटिंग एवं जिला परिषद् के मिटिंग में भाग लेना, जिला अतिथि गृह में आयोजित होने वाले विभिन्न उपसमितियों के मिटिंग में भाग लेना। इसका कारण यह था कि मैं स्थाई रूप से गंडक कॉलोनी संख्या 3 आवास सं०-डी-10 में रहता था। पुनः अवर प्रमडल पदाधिकारी (मुख्यालय) होने के कारण चार-चार कॉलोनियों का प्रभारी था। दूसरी तरफ मेरी पत्नी गर्भवती थी। मेरी दूसरी बच्ची का जन्म दिसम्बर 2013 में होने वाला था और उसका जन्म 5 दिसम्बर 2013 को हुआ भी। इस सारी बातों से कार्यपालक अभियंता को उनपर क्षणिक सहानुभूति हुई। वे उस वक्त नवनियुक्त सहायक अभियंता (2008 बैच) थे एवं 2012 में प्राक्कलन पदाधिकारी से अवर प्रमंडल पदाधिकारी के रूप में प्रभार लिये थे। इस क्रम में कार्यपालक अभियंता द्वारा उन्हें आश्वासन भी दिया गया और कार्यालय आदेश संख्या 1096 दिनांक 22.12.2013 भी तैयार हो चुका था कि अवर प्रमंडल पदाधिकारी-5, श्री रामसेवक शर्मा को प्राक्कलन पदाधिकारी का प्रभार सौंपा जायेगा। किन्तु एकाएक उनके नाम का आदेश कर दिया गया। इसके दूसरे पहलू पर भी श्रीमान् का ध्यान आ—ष्ट करना चाहता हूँ। वर्ष 2013 में आवास सं०-सी०टी०/1 गंडक कॉलोनी संख्या-1 मोतिहारी की मरम्मति एंव सम्पोषण का कार्य बिना किसी निविदा किये अथवा सक्षम प्राधिकार के आदेश के कार्यपालक अभियंता द्वारा जैसे-तैसे करने हेतु कहा गया। क्योंकि आवंटन आने के पहले ही लगभग 5.00 लाख रूपये का कार्य करा लिया गया था, जो एक वित्तीय अनियमितता का मामला था। उनके द्वारा एवं संबंधित कनीय अभियंता, श्री अरुणेश कुमार के द्वारा विभागीय नियम के विरुद्ध कार्य होने की बात कही गयी। कार्यपालक अभियंता ने दबाव बनाने हेतु विभागीय कार्रवाई कराने का पत्र उनको दे दिया गया। उनकी दूसरी बच्ची का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाला था और इसकी सूचना कार्यपालक31 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अभियंता को दी गई थी। फिर भी दबाव बनाने के लिए ताकि वे उनके मनोनुकूल कार्य करें, नवम्बर 2013 से तीन महीना वेतन अवरुद्ध रखा गया। आरोप सं०-5 :- इस संबंध में कहना है कि अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान अंचल, मोतिहारी के पत्रांक 224 दिनांक 16.02.2015 द्वारा उनके एवं तत्कालीन कनीय अभियंता श्री अरूणेश कुमार का वेतन दिनांक 12.02.2015 (एक दिन) का अनुपस्थित मानते हुए अवरूद्ध किया गया था। श्री अरूणेश कुमार का दिनांक 12.02.2015 का एक दिन का अवरुद्ध वेतन अधीक्षण अभियंता के द्वारा रिलीज कर दिया गया। उनका वेतन माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा केस संख्या 7656 वर्ष 2015 के न्याय निर्णय के आलोक में अधीक्षण अभियंता जल निस्सरण अनुसंधान अंचल मोतिहारी ने अपने पत्रांक 175 दिनांक 13.02.2021 के द्वारा कार्यपालक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल मोतिहारी को न्याय निर्णय का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया तथा उन्होंने लिखा कि वेतन भुगतान करने में कोई impediment नहीं है। तद्नुसार कार्यपालक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी ने अपने पत्रांक 264, दिनांक 24.02.2021 द्वारा कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, हथौड़ी को उक्त तिथि का वेतन भुगतान करने के लिए लिखा। आरोप सं०-8 :- बाढ़ वर्ष 2014 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में मिट्टी ढुलाई, बालू दुलाऐ गए एवं बाढ़ वर्ष 2014 में सरौगढ़ एवं गुलाब खाँ स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में ढुलाई गयी स्थानीय बालू का लीड प्लान से संबंधित पत्र कार्यपालक अभियंता द्वारा पत्रांक 595 दिनांक 22.05.2015 एवं पत्रांक 462 दिनांक 16.04.2015 दिये गये। इसकी प्रतिलिपि उनके कार्यालय में पत्रांक 82 दिनांक 23.05.2015 के द्वारा कनीय अभियंता को अविलम्ब कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया। पुनः कार्यपालक अभियंता का पत्रांक 823 दिनांक 06.07.2015 की प्रतिलिपि भी कनीय अभियंता को अविलम्ब कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई। पूर्व में कार्यपालक अभियंता का पत्रांक 808 दिनांक 09.08.2014 उनको एवं कनीय अभियंता श्री अरुणेश कुमार को संबोधित कर आया था। इसके अनुपालन में इसकी प्रतिलिपि/सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु श्री अरूणेश कुमार, कनीय अभियंता को लिखी गई। परन्तु लीड प्लान बनाने में एक व्यवहारिक कठिनाई थी। वह कठिनाई यह थी कि ग्रामीण नक्शा का उपलब्ध नहीं होना। इस बारे में कार्यपालक अभियंता को हमेशा मौखिक सूचना दी गई। अन्त में इन साईटों का ग्रामीण नक्शा नहीं उपलब्ध होने की सूचना लिखित रूप से कनीय अभियंता के पत्रांक शून्य दिनांक 10.07.2015 के द्वारा उनको दी गई। उन्होंने इसकी लिखित सूचना अपने पत्रांक 125 दिनांक 11.07.2015 के द्वारा कार्यपालक अभियंता को दी। पुनः उन्होंने कार्यपालक अभियंता को ग्रामीण नक्शा हेतु संवेदक/संबंधित ग्राम के कर्मचारी से नक्शा उपलब्ध कराने के लिए आग्रह किया। बड़ा गोविन्द ग्राम से संबंधित नक्शा उपलब्ध हो गया जबकि गुलाब खाँ एवं सरौगढ़ ग्राम से संबंधित नक्शा अनुपलब्ध रहा। बड़ा गोविन्द ग्राम से संबंधित लीड प्लान संबंधित कनीय अभियंता बनाकर समर्पित करने वाले थे। दूसरी तरफ सरौगढ़ एंव गुलाब खाँ दोनों ग्रामों में कराये गये कार्य से संबंधित ग्रामीण नक्शा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता रहा । सरौगढ़ का नक्शा मिलते ही उक्त लीड बनाकर प्रमंडलीय कार्यालय में जमा करा दिया गया। इस प्रकार यह सामूहिक उतरदायित्व से संबंधित कार्य है। विदित हो कि अन्य अवर प्रमंडलों में दो किलो मीटर से कम दूरी का लीड से संबंधित कार्य का भुगतान बिना लीड के स्वी—ति के ही कार्यपालक अभियंता द्वारा कर दिया गया है और वर्तमान में भी बिना लीड का ही भुगतान हेतु निर्देशित किया गया है। आरोप सं०-11 :- इस आरोप में उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा परिसम्पति का ब्यौरा समर्पित नहीं किया गया है। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 477 दिनांक 17.04.2015 विभागीय परिसम्पतियों की अद्यतन एवं विस्तृत विवरणी उपलब्ध कराने से संबंधित है। जबकि पत्रांक 490 दिनांक 18.04.2015 (सही दिनांक 24.04.2015) जल संसाधन विभाग के अतिक्रमित भूमि का ब्यौरा एवं अतिक्रमणवाद का ब्यौरा उपलब्ध कराने से है। पुनः पत्रांक 515 (सही पत्रांक 516) दिनांक 02.05.2015 द्वारा परिसम्पति की विवरणी उपलब्ध कराने के संबंध में एक अतिरिक्त पत्रांक 478 दिनांक 17.04.2015 द्वारा विभागीय खाली भूमि का अद्यतन एवं विस्तृत आंकडा विभाग द्वारा मांगी गई। परिसम्पति से संबंधित विवरण का अनुपालन इस कार्यालय के पत्रांक 94 दिनांक 01.06.2015 द्वारा किया गया है। पुनः खाली पड़े जमीन का विवरण इस कार्यालय के पत्रांक 177 दिनांक 05.09.2015 द्वारा कर दिया गया।
विदित हो कि विभागीय अधिसूचना संख्या-22/नि०सि० (मोति0) 08-02/2017-803 दिनांक 16.04.2019 के आरोप कंडिका (4) पर उल्लेखित इसी आरोप में श्री विद्यानन्द प्रसाद (ID 4517) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी को आरोप मुक्त कर दिया गया है, जबकि अधिसूचना संख्या-22/नि०सि० (मोति0) 08-02/2017-800 दिनांक 16.04.2019 के आरोप कंडिका 11 पर उल्लेखित इसी आरोप में आरोपित/दोषी बना दिया गया है। आरोप सं०-12 ः- इस आरोप में उल्लेख किया गया है कि कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 763 दिनांक 24.06.2015 के निर्गत होने के पहले से ही तटबंध पर उपस्थित संरचनाओं की निगरानी एवं चौकसी की जा रही थी। तटबंध और उस पर अवस्थित संरचनाओं की पैदल निगरानी एवं चौकसी बरतने के बाद ही उससे संबंधित खैरियत प्रतिवेदन भेजा जाता था। त्वरित निरीक्षण हेतु कार्यपालक अभियंता से प्रमंडलाधीन निरीक्षण वाहन की माँग की गई। परन्तु कार्यपालक अभियंता द्वारा दो निरीक्षण वाहन बी०पी०ई0-70 और बी०आर०ई०-9545 उपलब्ध होते हुए भी इसे किसी अवर प्रमंडल पदाधिकारी को उपलब्ध नहीं कराया जाता था। इस संबंध में जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा दिनांक 22.07.2015 की मिटिंग में कार्यपालक अभियंता को मौखिक निर्देश दिया गया। तबसे निरीक्षण वाहन उपलब्ध होने लगा और इस आशय का पत्रांक 975 दिनांक 01.08.2015 निकला। कार्यपालक अभियंता से वे बार-बार V.P.N. मोबाईल की माँग करते रहे, जो अप्राप्त था। निरीक्षण वाहन को चक्रीय पद्धति द्वारा उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं रहा। इस कार्यालय में खैरियत प्रतिवेदन हस्तगत करने हेतु कोई अनुसेवक तक नहीं था। खैरियत प्रतिवेदन पहुँचाने हेतु बाढ़ अवधि 2015 के लिए एक अनुसेवक की माँग इस कार्यालय के पत्रांक 142 दिनांक 25.07.2015 एवं पत्रांक 144 दिनांक 30.07.2015 द्वारा की गई। श्री बाबूनन्द प्रसाद,32 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अनुसेवक, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल-4 की प्रतिनियुक्ति बाढ़ से संबंधित कार्य करने हेतु इस अवर प्रमंडल में हुई। परन्तु श्री बाबूनन्द प्रसाद दिनांक 12.08.2015 से लगातार इस अवर प्रमंडल में कभी नहीं आये। परन्तु कार्यपालक अभियंता इसकी सूचना बार-बार देने के बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाये। प्रमंडलीय बाढ़ कोषांग मात्र दो पाली में चलता था। इन सभी विपरीत परिस्थितियों में भी उनके द्वारा पूर्ण मनोयोग से अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए ससमय खैरियत प्रतिवेदन भेजा जाता रहा। खैरियत प्रतिवेदन, तटबंध एवं उस पर अवस्थित संरचनाओं तथा आक्रम्य स्थलों की निगरानी और चौकसी करने के उपरान्त ही भेजी गयी।
कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक 774 दिनांक 25.06.2015 द्वारा उन पर, जो आरोप लगाया है कि गुप्ता द्वारा दिनांक 24.05.2015 को उनके कार्यालय कक्ष में जाकर गाली-गलौज किया और जान से मारने की धमकी दी, यह पूर्णतः गलत और निराधार है। इस आरोप/लांछन का स्पष्टीकरण कार्यपालक अभियंता को इस कार्यालय के पत्रांक 117 दिनांक 27.06.2015 द्वारा दिया गया। चूँकि वे तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री योगेन्द्र प्रसाद सिह के प्रताड़ना से परेशान होकर माननीय उच्च न्यायालय, पटना के शरण में गये थे, इस कारण वे क्षुब्ध/कुपित होकर मुझ पर यह आरोप लगा दिये। सारांशतः वे कहना चाहते हैं कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, सिकहरना तटबंध प्रमंडल मोतिहारी द्वारा मुझ पर लगाये गये सारे आरोप/लांछन/दोष निराधार, सत्य से परे एवं गलत है। उनके द्वारा सरकारी कार्य/दायित्व का निर्वहन ससमय निष्पादित किया जाता था। समीक्षा :-
श्री गुप्ता तत्कालीन सहायक अभियंता के विरुद्ध सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के अन्तर्गत पदाधिकारियों के बीच उत्पन्न आपसी समन्वय की कमी के फलस्वरूप संबंधित पूरे मामले की जाँच उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं मुख्य अभियंता, मोतिहारी से प्राप्त आरोप पत्र को समेकित रूप से समीक्षोपरान्त श्री गुप्ता से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता मुजफ्फरपुर से मंतव्य की माँग की गयी। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से प्राप्त मंतव्य के समीक्षोपरान्त श्री गुप्ता को प्रमाणित आरोपों के लिये "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया है।
उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री गुप्ता द्वारा अपना पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है। उक्त पुनर्विलोकन अर्जी में दिये गये अधिकांश तथ्य लगभग वही तथ्य है जो इनके द्वारा पूर्व में पूछे गये स्पष्टीकरण में दिया गया है जिस पर मुख्य अभियंता से मंतव्य प्राप्ति के पश्चात विभागीय स्तर पर समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए उपरोक्त दण्ड संसूचित किया गया है। इनके द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी के आरोप सं॰ 11 के द्वितीय अंश में श्री विद्यानन्द प्रसाद को उक्त आरोप से मुक्त किये जाने का उल्लेख है। मुख्य अभियंता से प्राप्त मंतव्य के क्रम सं॰ 4 के आलोक में श्री प्रसाद को समरूप आरोप से मुक्त किया गया है। जबकि मुख्य अभियंता के मंतव्य के क्रम सं॰ 11 में मुख्य अभियंता द्वारा श्री गुप्ता के स्पष्टीकरण से असहमति व्यक्त की गयी है। इस प्रकार श्री गुप्ता का यह तर्क विचार योग्य नहीं है। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य/साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव इनका पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है। मामले के समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अजय कुमार गुप्ता (आई0डी0-5198) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य/साक्ष्य नहीं होने के कारण इनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री अजय कुमार गुप्ता (आई0डी0-5198) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-800 दिनांक 16.04.2019 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए उक्त अधिसूचना द्वारा संसूचित दण्ड यथा "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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3 सितम्बर 2021
सं॰ 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-03/2020/1003--श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई॰डी॰-5335) तदेन सहायक अभियंता, (अवर प्रमंडल पदाधिकारी) पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, दरभंगा के विरूद्ध पदस्थापन अवधि में स्वेच्छा पूर्वक कार्यालय से अनुपस्थित रहने, कार्यालय में उपस्थित अवधि में भी कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करने एवं अनुशासहिनता के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा द्वारा श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, सहायक अभियंता के विरूद्ध साक्ष्य सहित आरोप पत्र गठित कर अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु विभाग में समर्पित किया गया।
मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा से श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, सहायक अभियंता के विरूद्ध प्राप्त आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत सरकार के स्तर से आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-820 दिनांक-18.06.2020 द्वारा श्री कुमार से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के अनुपालन में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित किये गये स्पष्टीकरण में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार के द्वारा उनके उपर आरोप पत्र में गठित आरोपों को निराधार एवं असत्य बताते हुए यह उल्लिखित किया गया कि उनके द्वारा किसी प्रकार की कोई लापरवाही, आदेशों की अवहेलना एवं अनुशासनहीनता नहीं बरती गयी है। श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब पर मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा से मंतव्य प्राप्त किया गया।33 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 आरोप का सार :- आरोपः- 01- श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, दरभंगा द्वारा पदस्थापन अवधि (दिनांक-17.12.2018 से आरोप पत्र गठित होने की तिथि तक) में दिनांक-17.12.2018 से 28.12.2018 एवं 26.06.2019 से 01.10.2019 तक ही कार्य पर उपस्थित रहें हैं। शेष पदस्थापन अवधि में स्वेच्छापूर्वक कार्यालय से अनुपस्थित रहते हुए बीमार रहने का आवेदन निबंधित डाक से भेजते रहे हैं। आरोपः- 02- श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, दरभंगा कार्यालय में उपस्थित अवधि में भी कार्य के प्रति लापरवाह, उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना एवं अनुशासनहीनता के आदी रहें है। इसके लिए इन्हें बार-बार चेतावनी दी गई परन्तु इसका इन पर कोई असर नहीं हुआ। उक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंघन है। समीक्षा :- 1. पहला आरोप इनके पदस्थापन काल (17.12.2018) से आरोप गठन की तिथि (14.02.2020) के बीच मात्र 17.12.2018 से 28.12.2018 एवं 26.06.2019 से 01.10.2019 तक ही उपस्थित रहने एवं शेष अवधि यानि 29.12.2018 से 25.06.2019 तथा 02.10.2019 से 14.02.2019 तक स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने से संबंधित है। लांछन के अभिकथन में कार्यपालक अभियंता द्वारा इन्हें दिनांक-03.09.2019, 20.09.2019 एवं 21.09.2019 को भी कार्य से अनुपस्थित पाये जाने का उल्लेख किया गया है एवं कार्यपालक अभियंता का पत्रांक-633 दिनांक-03.09.2019 तथा पत्रांक-696 दिनांक 21.09.2019 उक्त के साक्ष्य के रूप में समर्पित किया गया।
श्री कुमार के द्वारा अपने स्पष्टीकरण में दिनांक-28.12.2018 को आकस्मिक अवकाश से संबंधित आवेदन अपने प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित करने एवं चिकित्सक के परामर्श के अनुसार समय-समय पर अवकाश का विस्तार करने संबंधी आवेदन डाक द्वारा भेजने का उल्लेख किया गया साथ ही, माह सितम्बर 2019 में 03, 20 एवं 21वीं तारीख को उन्होने कार्य स्थल का भ्रमण करने के संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-746 दिनांक-14.10.2019 की कंडिका-04 में कार्यपालक अभियंता ने उक्त तिथि को कार्य क्षेत्र का भ्रमण करने संबंधी सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण का उल्लेख किया। हालाँकि 20.09.2019 एवं 21.09.2019 की अनुपस्थिति के संबंध में प्रतिउत्तर अप्राप्त रहने का उल्लेख किया गया।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-727 दिनांक-03.10.2019, पत्रांक-728 दिनांक-03.10.2019 एवं पत्रांक-735 दिनांक-09.10.2019 द्वारा इन्हें दिनांक-01.10.2019 के अपराह्न से मुख्यालय से अनुपस्थित रहने संबंधित पत्राचार किये जाने का उल्लेख किया गया।
श्री कुमार सहायक अभियंता के द्वारा दिनांक-03.10.2019 को चिकित्सक से इलाज हेतु घर जाने का आवेदन निबंधित डाक से दिनांक-10.10.2019 को कार्यालय में प्राप्त कराये जाने का उल्लेख किया गया है, जिसे अस्वीकृत किया गया।
कार्यपालक अभियंता द्वारा श्री कुमार के दिनांक-28.12.2018 को समर्पित दो दिनों (29.12.2018 एवं 30.12.2018) का आकस्मिक अवकाश का आवेदन अस्वीकृत किया गया।
उक्त से यह ज्ञात होता है कि सहायक अभियंता द्वारा बिना अनुमति प्राप्त किये हुए आकस्मिक अवकाश के लिए प्रस्थान करने के उपरांत आवेदन पत्र समर्पित करना एवं डाक द्वारा अवकाश विस्तार करने संबंधी आवेदन किया जाता रहा। समान्यतः 12 (बारह) दिनों की अवधि ही आकस्मिक अवकाश की अधिकतम सीमा होती है। श्री कुमार के मामले में आकस्मिक अवकाश का आवेदन स्व्ीकृत भी नहीं किया गया तथा वे 12 दिनों से ज्यादा अवधि तक मुख्यालय से लगातार बाहर रहें जिसके लिए समुचित अवकाश हेतु विहित प्रपत्र में अभ्यावेदन विभाग को भेजना चाहिए था। जो श्री कुमार द्वारा नहीं किया गया। 2. आरोप के इस खण्ड में भी श्री कुमार पर स्वीकृत कार्यक्रम के अनुसार प्राक्कलन तैयार नहीं करने, निदेश के बाद भी अंतिम विपत्र समर्पित नहीं करने, आवंटित आवास में प्रवेश नहीं करने, दिनांक-19.09.2019 को निरीक्षण भवन में लोकायुक्त के पदाधिकारी के आगमन पर व्यवस्था नहीं करने एवं 19.09.2019 को संध्या में मुख्यालय छोड़कर चले जाने, दुर्गापूजा के अवसर पर दिनांक-05.10.2019 से 08.10.2019 तक रोस्टर ड्यूटी नहीं करने, अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण पर कोई जवाब नहीं देने आदि से संबंधित है।
उल्लेखनीय है कि अधीक्षण अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, दरभंगा के पत्रांक-651 दिनांक-01.10.2019 द्वारा इनसे स्पष्टीकरण माँगा गया था। स्पष्टीकरण के कंडिका (च) में श्री कुमार द्वारा उक्त पत्र अप्राप्त रहने के बारे में सूचना दी गई, जिसेे इनके कार्य से अनुपस्थित रहने का प्रमाण पाया गया।
श्री कुमार, सहायक अभियंता द्वारा कंडिका-2 (क) में प्राक्कलन तैयार करने के लिए बाढ़ का पानी जमा रहने एवं अग्रिम उपलब्ध नहीं कराने का उल्लेख किया गया, जो कहीं न कहीं कार्य के प्रति टाल-मटोल के रवैया को दर्शाता है क्योंकि जो सच्चाई थी उसे कार्यपालक अभियंता के संज्ञान में इन्हें लाना था परन्तु एक तरफ बाढ़ का पानी रहने, दुसरी तरफ अग्रिम नहीं दिये जाने को प्राक्कलन नहीं तैयार करने का कारण बताया गया, जिसे समीक्षा में अस्वीकार योग्य पाया गया।
कंडिका (ख) में अंतिम विपत्र तैयार नहीं होने का कारण, एकरारनामा की प्रति उपलब्ध नहीं रहना बताया गया। जो स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि एकरारनामा की प्रति उपलब्ध करने के लिए इन्हें हर संभव प्रयास करना चाहिए था। जो कि श्री कुमार द्वारा नहीं किया गया।34 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कंडिका (ग) यदि आवंटित आवास रिक्त नहीं था तो इसकी सूचना इन्हें नियंत्री पदाधिकारी को देनी चाहिए थी परन्तु इस तरह का कोई पत्राचार नहीं कर प्राप्त आदेश पर चुप्पी साध लेना सहायक अभियंता स्तर के पदाधिकारी के लिए उचित नहीं है।
कंडिका (घ) यदि निदेश पर कार्रवाई कर दी गई थी तो कार्यपालक अभियंता के संज्ञान में दे देना चाहिए था। संभवतः उन्हें सूचना नहीं दी गई या हो सकता है कि श्री कुमार द्वारा इस संबंध मे कोई कार्रवाई ही नहीं की गई। कंडिका (ड) इस कंडिका में इन्हें दिनांक-30.10.2019 को कार्य से अनुपस्थित रहने, दिनांक-05.10.2019 से 08.10. 2019 तक दुर्गापूजा में रोस्टर डूयूटी पर नहीं आने से संबंधित लांछन को असत्य एवं निराधार बताया गया है। इन्होंने खुद बताया है कि वे दिनांक-01.10.2019 तक ही उपस्थित थे एवं दिनांक-02.10.2019 को अवकाश था। इस बिन्दु का स्पष्टीकरण स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया।
कंडिका (च) अधीक्षण अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, दरभंगा के पत्रांक-651 दिनांक-01.10.2019 अप्राप्त रहने का सीधा मतलब यही होता है कि दिनांक-01.10.2019 के बाद ये उपस्थित ही नहीं रहें हो क्योकि यदि श्री कुमार कार्यालय में उक्त तिथि को उपस्थित रहते तो इन्हें पत्र अवश्य प्राप्त होता।
मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा द्वारा पत्रांक-651 दिनांक 24.05.2021 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाने का मंतव्य दिया गया। निष्कर्ष :-श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण के जवाब पर मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री कुमार के विरूद्ध पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, दरभंगा के पद पर पदस्थापन अवधि में स्वेच्छा पूर्वक कार्यालय से अनुपस्थित रहने, कार्यालय में उपस्थित अवधि में भी कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करने एवं अनुशासनहीनता का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।
उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार तदेन सहायक अभियंता (आई0डी0-5335) पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार तदेन सहायक अभियंता (आई0डी0-5335) पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा को निम्न दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है :-
"दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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9 सितम्बर 2021
सं॰ 22/नि॰सि॰(बिहा॰)-28-08/2018/1065--श्री महेन्द्र कुमार सिंह (आई0डी0-4007), तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल, शेखपुरा में पदस्थापन के दौरान उनके विरूद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-982 दिनांक 29.07.2020 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई :- 1. श्री महेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, शेखपुरा में पदस्थापित रहने के दौरान वर्ष 2016-17 में बिना कार्य कराए कनीय अभियंता द्वारा प्रस्तुत फर्जी विपत्र पर हस्ताक्षर कर पारित करने हेतु प्रमंडल कार्यालय को भेज दिया गया।
2. श्री सिंह द्वारा उपर्युक्त कंडिका 1 में वर्णित अनियमितता करते हुए बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता में उल्लेखित सहायक अभियंता द्वारा शत-प्रतिशत विपत्रों की जाँच संबंधी प्रावधान का उल्लंघन किया गया।
3. श्री सिंह द्वारा सहायक अभियंता के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है। उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा उनके पत्रांक-496 दिनांक 27.09.2020 समर्पित बचाव बयान में निम्नलिखित बातों का उल्लेख किया गया :- 1. प्रश्नगत योजना "प्रखण्ड बरबीघा, पंचायत सामसखुर्द के ग्राम बलावापर मुख्य सड़क से अयोध्या यादव के घर से होते हुए रामप्रवेश यादव के घर तक पी॰सी॰सी॰ सड़क निर्माण कार्य" माननीय विधान पार्षद, श्री संजय प्रसाद द्वारा अनुशंसित योजना है। इस योजना का पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण श्री सिंह द्वारा कराये जाने का आदेश कार्यपालक अभियंता के स्तर से निर्गत था एवं श्री कमल किशोर प्रसाद, कनीय अभियंता (संविदा) के द्वारा इस योजना का विपत्र संधारित कर समर्पित किया गया था।
2. कनीय अभियंता द्वारा विपत्र समर्पित करने के पश्चात् श्री सिंह द्वारा इस योजना के स्थल निरीक्षण की इच्छा व्यक्त की गयी जिसके उपरान्त कनीय अभियंता ने धोखे से पंचायत की एक अन्य योजना को दिखाकर विपत्र को श्री सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता से हस्ताक्षरित करवा लिया। लेकिन जैसे ही श्री सिंह को यह पता चला कि जिस योजना को दिखाकर विपत्र हस्ताक्षरित कराया गया है वह पंचायत की योजना है तथा संबंधित योजना में काम ही नहीं हुआ है तो उसी दिन दिनांक 09.03.2016 को ही उक्त योजना के प्रमाणकों को पारित नहीं करने एवं भुगतान को स्थगित करने का पत्र श्री सिंह द्वारा कार्यपालक अभियंता को दिया गया। जिस पर कार्यपालक अभियंता द्वारा प्राप्त निदेश के आलोक में श्री सिंह द्वारा स्थल जाँचोपरान्त विस्तृत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया।
3. उक्त प्रतिवेदन में श्री सिंह द्वारा उक्त योजना के प्रमाणकों को पारित नहीं करने, फर्जी विपत्र को पूरी तरह से रद्द करने एवं कनीय अभियंता, श्री प्रसाद के एकरारनामा को रद्द करने की अनुशंसा की गयी।35 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 4. श्री सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा यह भी कहा गया है कि पूरे मामले को वस्तुतः सबसे पहले जाँचोपरान्त उन्होंने ही पकड़़ा एवं सरकारी धनराशि का राजकोष से अवश्यम्भावी निकासी को उनके द्वारा ही रोका गया। विभागीय समीक्षा :- (1) श्री महेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल शेखपुरा द्वारा प्रश्नगत योजना से संबंधित रू॰ 1,11,346/- का विपत्र (प्रमाणक) प्रमंडलीय कार्यालय को समर्पित किया गया जो कि दिनांक 11.02.2016 को हस्ताक्षरित है तत्पश्चात् दिनांक 09.03.2016 को श्री सिंह द्वारा उक्त प्रमाणकों का भुगतान स्थगित करने एवं दिनांक 10.03.2016 को समर्पित विस्तृत जाँच प्रतिवेदन में स्थल पर इस योजना अन्तर्गत कार्य का नहीं होना उल्लेखित है। मुख्य अभियंता के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उक्त योजना वर्ष 2014-15 की अनुशंसित योजना थी जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति दिनांक 13.03.2015 को दी गयी थी एवं 19.03.2015 को कार्यादेश निर्गत किया गया। इस कार्य के प्रमाणक दिनांक 11.02.2016 को हस्ताक्षरित है जो कि कार्यादेश के लगभग 11 (ग्यारह) माह बाद का है। दिनांक 09.03.2016 को श्री सिंह द्वारा उल्लेखित किया गया है कि कनीय अभियंता श्री प्रसाद द्वारा धोखे से पंचायत की किसी अन्य योजना का स्थल निरीक्षण कराकर इन प्रमाणकों पर हस्ताक्षर करा लिया है जबकि इस योजना में कोई कार्य नहीं कराया गया है। साथ ही यह भी उल्लेखित है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा इसकी सूचना मुख्य अभियंता को दी गई एवं उक्त विपत्र को पास नहीं किया गया। इस कारणवश इन पर कोई वित्तीय मामला नहीं बनता है। मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निर्मित पी॰सी॰सी॰ सड़क की औसत चौड़ाई 8'-0" एवं औसत मुटाई (cid:2869)
4
(cid:2872)
" पायी गयी है जिसे प्राक्कलन के अनुरूप अंकित किया गया है। इस प्रकार स्थल पर करया गया कार्य प्राक्कलन के अनुरूप पाया गया। मापी पुस्त के अनुसार यह कार्य 13.03.2016 को आरम्भ हुआ है एवं दिनांक 19.09.2016 को समाप्त हुआ है। स्थल पर अवस्थित ग्रामीण से कार्य के संबंध में पूछ-ताछ की गई तो उन्होंने कार्य को सही ढंग से होना बताया है। कार्यपालक अभियंता द्वारा पूर्व के विपत्र को रोक दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी पर आरोप सं॰-1 प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। (2) मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में कहा गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा माप पुस्त सं॰ 391 पर दि॰ 13.03.2016, 21.03.2016, 11.05.2016, 27.08.2016, 08.09.2016 एवं 09.09.2016 में हस्ताक्षर अंकित है। अर्थात् विपत्र समर्पित करने के पूर्व श्री सिंह द्वारा इसकी शतप्रतिशत जाँच की गयी थी। अतः उक्त से स्पष्ट है कि आरोप सं॰ 2 नहीं बनता है।
श्री महेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, बिक्रमगंज ने कनीय अभियंता द्वारा प्रस्तुत फर्जी विपत्र पर हस्ताक्षर कर प्रमंडलीय कार्यालय में भेजा था, पर तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा ही पत्र लिखकर कार्यपालक अभियंता से इस विपत्र को कनीय अभियंता द्वारा गलत ढंग से प्रस्तुत करने के कारण रद्द करने तथा इसे गलत विपत्र बताकर वित्तीय अनियमितता को रोकने का कार्य किया गया। इससे आरोप सं॰-1 एवं आरोप सं0-2 प्रमाणित नहीं होता है, पर साक्ष्य के अभाव के कारण आरोप सं॰-3 जो दायित्व के निर्वहन में की गई लापरवाही से संबंधित है, प्रमाणित पाया गया। अतः समीक्षोपरांत श्री महेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, बिक्रमगंज को प्रमाणित आरोप के लिए संगत वर्ष के लिए "निन्दन" संसूचित करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णित दण्ड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। अतः श्री महेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, बिक्रमगंज को संगत वर्ष के लिए निन्दन (वर्ष 2016-17) का दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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10 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(पट0)-03-01/2017/1067--श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570), तत्का0 कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत जब तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद के पद पर पदस्थापित थे, तो उनके विरूद्ध सरकारी आदेशों का अनुपालन नहीं करना, स्वेच्छापूर्वक अनधिकृत अनुपस्थित रहना, विभाग से अनावश्यक पत्राचार करते रहना, प्रभार ग्रहण से लेकर अब तक अनधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने, स्वेच्छाचारिता, हठधर्मिता एवं अनुशासनहीनता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' संयुक्त सचिव (प्रबंधन) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का गै0स0प्रे0सं0-327 दिनांक 13.04.2017 द्वारा साक्ष्य सहित उपलब्ध कराया गया। आरोप-
1. विभागीय अधिसूचना सं०-3526 दिनांक 30.06.2013 के द्वारा कार्यपालक अभियंता, जल विज्ञान प्रमंडल (मध्य) पटना से श्री ईश्वर सहाय राम का स्थानांतरण तकनीकी सलाहकार, पश्चिमी कोशी नहर अंचल-1, दरभंगा किया गया। दिनांक 12.07.13 के पूर्वाह्न में कार्यपालक अभियंता सम्प्रति उप निदेशक, जल विज्ञान प्रमंडल (मध्य) पटना का36 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 प्रभार सौंपकर तकनीकी सलाहकार, पं0 कोशी नहर अंचल-1, दरभंगा का प्रभार ग्रहण करने जा रहा हूँ का उल्लेख उनके द्वारा प्रभार प्रतिवेदन में किया गया लेकिन उक्त पद का प्रभार ग्रहण नहीं किया गया।
2. श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा बिना किसी आदेश के मुख्यालय में दिनांक 12.07.2013 को योगदान करने संबंधी आवेदन समर्पित किया गया। जिसे विभागीय पत्र सं०-4288 दिनांक 06.08.2013 के द्वारा दिनांक 12.07.2013 के प्रभाव से योगदान संबंधी आवेदन को अस्वीकृत करते हुए इनके गृह पता पर निबंधित डाक से भेजा गया, जो बिना प्राप्ति के वापस आ गया। विभागीय पत्रांक-5420 दिनांक 07.10.2013 द्वारा अविलंब स्थानांतरित पद का प्रभार ग्रहण करने का निदेश के साथ गृह पता (निबंधित डाक) पर पत्र भेजा गया, जो बिना प्राप्ति के वापस आ गया। इस प्रकार आप स्वेच्छापूर्वक उक्त पद का प्रभार ग्रहण नहीं किए तथा लगभग एक वर्ष तक (दिनांक 12.06.2013 से दिनांक 01.07.2014 तक) अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे है, जो स्वेच्छाचारिता, सरकारी आदेश की अवहेलना एवं हठधर्मिता का परिचायक है।
3. विभागीय अधिसूचना संख्या-3058 दिनांक 30.06.2015 द्वारा जलपथ प्रमंडल, मोहनियाँ से स्काडा प्रमंडल, डिहरी के पद पर स्थानांतरित करते हुए पदस्थापन किया गया। सोन कमांड क्षेत्र विकास एजेंसी स्काडा, पटना के द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ में पदस्थापन किया गया। भभुआ पदस्थापन के समय श्री दिनेश चन्द्र राम, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, कर्मनाशा के बीच सामंजस्य का अभाव एक दूसरे पर दोषारोपण सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल होने के कारण इनको अकार्य कोटि के पद पर पदस्थापन विभागीय आदेश सं0-3023 दिनांक 01.06.2016 के द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ से स्थानांतरित करते हुए तकनीकी सलाहकार (अकार्य कोटि) उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद के पद पर पदस्थापन किया गया। सचिव, सोन कमांड क्षेत्र विकास एजेंसी, पटना का कार्यालय आदेश सं0-70 दिनांक 13.06.2016 का अनुपालन इनके द्वारा नहीं किया गया। जिसके कारण दिनांक 13.06.2016 को श्री वृन्दा प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, स्काडा प्रमंडल, डिहरी द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ का स्वतः प्रभार ग्रहण किया गया। इनके द्वारा स्थानांतरित पद का प्रभार ससमय ग्रहण नहीं किया गया एवं अनावश्यक रूप से स्थानांतरण आदेश को रद्द करने के लिए विभाग से अनावश्यक पत्राचार किया जाता रहा।
4. अंततः इनके द्वारा विभागीय आदेश संख्या-3023 दिनांक 01.06.2016 के आलोक में उक्त पद का प्रभार (तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद) दिनांक 15.02.2017 (प्रभार प्रति की छायाप्रति संलग्न) को ग्रहण करना किया गया। जो लंबे समय तक अनावश्यक रूप से स्वेच्छापूर्वक अनधिकृत अनुपस्थित रहना, सरकारी आदेश का अनुपालन नहीं करना, विभाग से अनावश्यक पत्राचार करते रहना इनके स्वेच्छाचारिता, हठधर्मिता एवं अनुशासनहीनता का परिचायक है। साथ ही प्रभार से लेकर अब तक अनधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने का प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होता है।
उक्त आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1028 दिनांक 23.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी-सह-अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-114/सिं0, दिनांक 03.08.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया।
इसी क्रम में एक अन्य मामले में विभागीय अधिसूचना सं0-22/नि0सि0(डि0)14-13/ 2016-1444 दिनांक 10.07.2019 द्वारा आदेश निर्गत तिथि से अनिवार्य सेवानिवृत का दण्ड अधिरोपित किया गया। जिसके फलस्वरूप श्री ईश्वर सहाय राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना सं0-2722 दिनांक 13.12.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित कर दिया गया।
श्री ईश्वर सहाय राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1881 दिनांक 30.08.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा पत्रांक-1620 दिनांक 21.12.2018 द्वारा जवाब विभाग को समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई।
| आरोप | संचालन पदाधिकारी का मंतव्य | द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब |
| आरोप-1 विभागीय अधिसूचना संख्या-3526, दिनांक 30.06.2013 के द्वारा कार्यपालक अभियंता, जल विज्ञान प्रमंडल, पटना से आपका स्थानांतरण तकनीकी सलाहकार, प0 कोशी नहर अंचलसं0-01, दरभंगा किया गया। दिनांक 12.07.13 के पूर्वाह्न में कार्यपालक अभियंता सम्प्रति उप निदेशक, जल विज्ञान | इस आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य अंकित किया गया कि श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा विभागीय अधिसूचना संख्या-3526, दिनांक 30.06.13 के अनुपालन में स्थानांतरित पद का प्रभार ग्रहण नहीं किया गया तथा निरर्थक असंगत तथ्य उच्च पदाधिकारी को समर्पित किया गया। आरोपी पदाधिकारी को आदेश का अनुपालन करते हुए समस्याओं को | उक्त के संदर्भ में श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा अपने जवाब में उल्लेखित किया गया है कि विभागीय अधिसूचना सं०-3526, दिनांक 30. 06.13 के आलोक मे तकनीकी सलाहकार ं पश्चिमी कोशी नहर अंचल सं०-01, दरभंगा में योगदान करने पर पूरे परिवार की हत्या होने की प ्रबल संभावना की जानकारी पत्रांक-351, दिनांक 01.07.2013 से दी गई थी (पृ0 150-148/प0 संलग्न फोल्डर)। |
| प्रमंडल (मध्य), पटना का प्रभार सौंपकर तकनीकी सलाहकार, प0 कोशी नहर अंचल स 0-01, ं दरभंगा का प्रभार करने जा रहा हूँ का उल्लेख आपके द्वारा प्रभार प्रतिवेदन मे किया गया लेकिन ं उक्त पद का प्रभार ग्रहण नहीं किया गया। | सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था, जो आरोपी पदाधिकारी को आदेश का अनुपालन करते हुए समस्याओं को सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था, जो आरोपी पदाधिकारी द्वारा नहीं किया गया। आरोप प्रमाणित किया गया। | |
| आरोप-2 बिना किसी आदेश के मुख्यालय में दिनांक 12.07.2013 को योगदान करने संबंधी आवेदन समर्पित किया गया। जिसे विभागीय पत्र-4288, दिनांक 06. 08.2013 के द्वारा दिनांक 12.07. 13 के प्रभाव से योगदान संबंधी आवेदन अस्वीकृत करते हुए आपके गृह पता पर निबंधित डाक से भेजा गया, जो बिना प्राप्ति के वापस आ गया। विभागीय पत्रांक-5420, दिनांक 07.10.13 द्वारा अविलंब स्थानांतरित पद का प्रभार ग्रहण करने का निदेश के साथ गृह पता (निबंधित डाक) पर भेजा गया, जो बिना प्राप्ति के वापस आ गया। इस प्रकार आप स्वेच्छा पूर्वक उक्त पद का प्रभार ग्रहण नहीं किए तथा लगभग एक वर्ष तक (दिनांक 12.06.13 से दिनांक 01.07.2014 तक) अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे हैं, जो आपके स्वेच्छाचारिता सरकारी आदेश की अवहेलना एवं हठधर्मिता का परिचायक है। | आरोप सं0-2 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा बिना किसी स्थानांतरण संबंधी आदेश के दिनांक 12.07.2013 को संयुक्त सचिव (प्र0), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अधीन योगदान कर लिया गया। जिसे विभागीय पत्रांक-4288, दिनांक 06.08.13 के द्वारा दिनांक 12.07.13 के प्रभाव से अस्वीकृत करते हुए उनके गृह पता पर उक्त पत्र वापस भेजा गया, जो बिना प ्राप्ति के वापस आया। दिनांक 16.06.2013 से दिनांक 01. 07.14 तक अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के समर्थन मे कोई ं ठोस अभिलेखीय साक्ष्य या संतोषप्रद कारण आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। यदि आरोपी पदाधिकारी को उनका हत्या का अनदेशा था तो उन्हें विभागीय आदेश के अनुपालन में योगदान करते हुए संभावित खतरे को स्थानीय प्रशाखा एवं प्रधान सचिव के संज्ञान में लाना चाहिए था, किन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। इस प्रकार अनधिकृत अनुपस्थिति एवं सरकारी आदेश के अनुपालन नहीं करने के संबंध में कोई ठोस कारण एवं अभिलेखीय साक्ष्य आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। जो आरोप प्रमाणित पाया गया। | श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा कहा गया है कि श्री अनिल कुमार, प्रतिस्थानी कार्यपालक अभियंता के योगदान के पश्चात विभागीय अधिसूचना-3526, दिनांक 30.06.2013 के अनुपालन में उप निदेशक, जल विज्ञान प्रमंडल (मध्य), पटना का प्रभार दिनांक 12. 07.13 को सौंपा गया। दरभंगा योगदान करने पर हत्या की प्रबल संभावना को देखते हुए संशोधित आदेश निर्गत की प्रत्याशा में संयुक्त सचिव (प्र0) को उसी दिन दिनांक 12.07.2013 को योगदान किया गया। विभागीय आदेश सं0-4288, दिनांक 06. 08.13 योगदान अस्वीकृति का पत्र गृह पते पर भेजना तथा डाकिया द्वारा लिफाफे पर घर पर नहीं रहते उल्लेखित कर वापसी प्राप्त होने के पश्चात भी पत्रांक-4708, दिनांक 29.08.2013 एवं बार-बार भेजना और लौटने का मतलब समझ से परे है। श्री इ र्श्वर सहाय राम द्वारा उल्लेखित किया गया कि उनके द्वारा विभाग को दी गई सूचना के आधार पर कोई सार्थक कार्रवाई नही की गई। अतएव उक्त आरोप पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाए। |
| आरोप-3 विभागीय अधिसूचना संख्या-3058, दिनांक 30.06.2015 द्वारा जलपथ प्रमंडल, मोहनियाँ से स्काडा प्रमंडल, डिहरी के पद पर स्थानांतरित करते हुए पदस्थापन किया गया। सोन कमांड क्षेत्र विकास एजेन्सी, स्काडा, पटना द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ मे ं पदस्थापन किया गया। भभुआ पदस्थापन के | इस आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में उल्लेखित किया गया ह ै कि विभागीय आदेश संख्या-3023, दिनांक 01.06.2016 द्वारा भभुआ में पदस्थापित अवर प ्रमंडल पदाधिकारी, कर्मनाशा के साथ सामंजस्य के अभाव एवं एक दूसरे पर दोषारोपण की स्थिति के कारण आरोपी पदाधिकारी को तकनीकी सलाहकार (अकार्यकोटि) उत्तर | उक्त के संदर्भ में श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा अपने जवाब में कहा गया है कि हत्या होने के डर से ससमय नए पद स्थापित पद पर प्रभार ग्रहण नहीं किया गया है। |
| समय श्री दिनेश चन्द्र राम, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, कर्मनाशा के बीच सामंजस्य का अभाव एक-दूसरे पर दोषारोपण सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल होने के कारण आपको अकार्य कोटि क े पद पर पदस्थापन विभागीय आदेश सं०-3023, दिनांक 01.06.2016 द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ से स्थानांतरित करते हुए तकनीकी सलाहकार (अकार्य कोटि) उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद के पद पर पदस्थापन किया गया। सचिव, सोन कमांड क्षेत्र विकास एजेन्सी, पटना का कार्यालय आदेश सं0-70, दिनांक 13.06.2016 का अनुपालन आपके द्वारा नहीं किया गया। जिसके कारण दिनांक 13.06.2016 को भी श्री वृन्दा प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, स्काडा प्रमंडल, डिहरी द्वारा स्काडा प्रमंडल, भभुआ का स्वतः प्रभार ग्रहण किया गया। आपके द्वारा स्थानांतरित पद का प्रभार ससमय ग्रहण नहीं किया गया एवं अनावश्यक रूप से स्थानांतरण आदेश को रद्द करने के लिए विभाग से अनावश्यक पत्राचार किया जाता रहा है। अंततः आपके द्वारा विभागीय आदेश संख्या-3023, दिनांक 01. 06.2016 के आलोक में उक्त पद का प्रभार (तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद) दिनांक 15.02.2017 को ग्रहण किया गया। जो लंबे समय तक अनावश्यक रूप से स्वेच्छापूर्वक अनधिकृत अनुपस्थित रहना, सहकारी आदेश का अनुपालन नहीं करना, विभाग से अनावश्यक पत्राचार करते रहना आपके स्वेच्छाचारिता, हठधर्मिता एवं अनुशासनहीनता का परिचायक है। साथ ही प्रभार ग्रहण से लेकर अब तक अनधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने का प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होता है। | कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद के पद पर स्थानांतरित किया गया। जिसका अनुपालन आरोपी पदाधिकारी द्वारा किए जाने के बजाए स्थानांतरण आदेश को रद्द करने के लिए अनावश्यक पत्राचार किया जाना सार्थक नहीं है साथ ही स्थानांतरण आदेश का अनुपालन न कर लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रहना भी दायित्व निर्वहन के प्रति लापरवाही का द्योतक है। इस संबंध में भी आरोपी पदाधिकारी द्वारा कोई ठोस कारण/आधार/अभिलेखीय साक्ष्य अपने बचाव ह तु उपलब्ध नहीं े कराया गया। |
विभागीय आदेश संख्या-3023, दिनांक 01.06.2016 द्वारा भभुआ में पदस्थापित अवर प्रमंडल पदाधिकारी, कर्मनाशा के साथ सामंजस्य के अभाव एवं एक-दूसरे पर दोषारोपण की स्थिति के कारण आरोपी पदाधिकारी को तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद के पद पर स्थानांतरित किया गया। जिसका अनुपालन आरोपी पदाधिकारी द्वारा किए जाने के बजाए स्थानांतरण आदेश को रद्द करने के लिए अनावश्यक पत्राचार किया जाना सार्थक नहीं है, साथ ही स्थानांतरण39 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 आदेश का अनुपालन न कर लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रहना भी दायित्व निर्वहन के प्रति लापरवाही का द्योतक है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा कोई ठोस कारण/अभिलेखीय साक्ष्य अपने बचाव हेतु उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उक्त वर्णित स्थिति में श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत के विरूद्ध गठित आरोपों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। साथ ही इनके द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव बयान से समीक्षोपरांत असहमत होते हुए निम्न दंड विभागीय अधिसूचना सं0-360 दिनांक 26.03.2021 द्वारा अधिरोपित किया गया।
5% (पाँच प्रतिशत) पेंशन पाँच वर्षों तक रोक"।
उक्त दंड के विरूद्ध श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग को समर्पित किया गया है। जिसमें उनके द्वारा निम्न बिंदुओं को अंकित किया गया है :- 1. यह कि विभागीय कार्यवाही चलाने हेतु ज्ञापांक-1028 दिनांक-23.06.2017 के साथ मात्र प्रपत्र 'क' दिनांक-20. 06.17 की प्रति उपलब्ध कराई गई जबकि अनुलग्नक के रूप में दूसरा दस्तावेज का वर्णन किया गया है कि आरोप आधारित साक्ष्यों/अभिलेखों की छायाप्रति उपलब्ध नहीं कराया गया। 2. यह कि उनके द्वारा समर्पित लिखित बचाव बयान पर प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा प्रतिकार नहीं किया गया। 3. यह कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने कोई भी गवाह प्रस्तुत नहीं किए। इस प्रकार आरोप को प्रमाणित नियमानुसार नहीं किया जा सका। 4. यह कि जिस दस्तावेज के आधार पर आरोपों को प्रमाणित करना था उसे प्रमाणित करने के लिए उस दस्तावेज के गवाह को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया जिसके चलते आरोप संबंधी दस्तावेज को प्रमाणित नहीं किया जा सका। 5. यह कि विभागीय कार्यवाही के दौरान मुझे प्रतिपरिक्षण करने हेतु कोई भी मौका नहीं दिया गया और न तो मुझे किसी की गवाही कराने का मौका दिया गया। 6. यह कि जाँच प्रतिवेदन दिनांक-03.08.2018 को पढ़ने से स्पष्ट जो जाएगा कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने कोई भी गवाह आरोप को प्रमाणित करने के लिए प्रस्तुत नहीं किया। 7. यह कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना मंतव्य मनमाने ढंग से अंकित किया गया। 8. यह कि मेरे द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव बयान लंबित रखा गया। बाद में बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी में सम्परिवर्तित कर ज्ञापांक-360, दिनांक-26.03.21 द्वारा दंड संसूचित किया गया। 9. यह कि द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब पर कोई विचार नहीं किया गया। 10. यह कि जब आरोप को नियमानुसार प्रमाणित नहीं किया गया है तो ऐसी स्थिति में द्वितीय कारण पृच्छा एवं दंडादेश पारित करना नियमानुसार कानूनन गलत है। श्री ईश्वर सहाय राम, आई0 डी0-4570, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत्त द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में अपने विरूद्ध लगे आरोप के संदर्भ में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है। अतएव श्री ईश्वर सहाय राम, आई0 डी0-4570, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत्त द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के समीक्षोपरांत अस्वीकृत किया जाता है। उक्त निर्णय पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। अतएव उक्त अनुमोदित प्रस्ताव श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570), तत्का0 कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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13 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2017/1082--सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा अन्तर्गत शेखपुरा वितरणी के वि0दू0 0.00 से वि0दू0 6.00 तक वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कराये गये पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य के स्लोप में कई स्थलों पर उत्पन्न क्रैक की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़दस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-22 दिनांक 05.07.2017 से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री रमेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 9047), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मढ़ौरा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत पायी गयी अनियमितता के संबंध में इनके विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया।
श्री कुमार के विरूद्ध आरोप-पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों की वृहद जाँच हेतु अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-502 दिनांक 07.03.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें श्री हरिश कुमार, प्राध्यापक, जल संसाधन अभियंत्रण, वाल्मी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया :- (1) उड़नदस्ता द्वारा प्रश्नगत नहर में लाईनिंग कार्य से एकत्रित नमूनों के जाँचफल से स्पष्ट है कि लाईनिंग कार्य में प्रावधानित सिमेंट की मात्रा में 19.06% से 33.78% की कमी पायी गयी है, जो न्यून विशिष्टि के P.C.C लाईनिंग कार्य40 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कराया जाना स्थापित करता है। परन्तु प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने से अधिकाई भुगतान होने का मामला बनता है, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता दर्शाता है। (2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.0.0 एवं 11.0.0 (3) से स्पष्ट है कि P.C.C लाईनिंग कार्य में व्यवहृत कंक्रीट में दरार होने का एक कारण PROPER CURING का अभाव होना माना गया है एवं कहा गया है कि नहर के स्लोप भाग में EVAPORATION LOSS को पर्याप्त क्यूरिंग करते हुए नियंत्रण नहीं किया गया। फलतः दरार उत्पन्न होना स्वाभाविक है। अतएव सम्पादित कार्य में समुचित CURING कार्य को अनदेखी करते हुए CURING की ठोस व्यवस्था नहीं की गयी। (3) आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता करते हुए न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अधिक भुगतान किया गया तथा CURING जैसे महत्वपूर्ण कार्य में उदासीनता बरती गयी, जिसके कारण P.C.C LINING कार्य में दरार उत्पन्न हुआ है, जो उनके द्वारा वित्तीय अनियमितता बरतना, लापरवाही बरतना एवं कार्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है। उक्त अनियमितता से बिहार वित्त नियमावली के नियमाें के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम- 3(1) का उल्लंघन है। प्राध्यापक, सिंचाई, जल संसाधन अभियंत्रण, वाल्मी, पटना-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-150 दिनांक 10.02. 2020 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें गठित आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के समेकित निष्कर्ष में अंकित मंतव्य निम्नवत है :-
"आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान में अंकित अभिकथन प्रयोगशाला जाँच के प्रतिफल के समक्ष तथ्यहीन हाने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है। इतना ही नहीं सुनवाई में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं प्रस्तुत किया गया, जो उनके अभिकथन को प्रतिपादित करता है। जहाँ तक की दिनांक-16.01.2020 को अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी लाईनिंग कार्य में CURING से संबंधित कोई साक्ष्य स्वरूप फोटोग्राफ दिखाने में विफल रहे। अतः इनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होते है।"
जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक-798 दिनांक 16.06.2020 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-
41 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022समेकित निष्कर्ष की अंतिम पंक्ति में यह निष्कर्ष अंकित है कि दिनांक-06.01.2020 को अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी LINING कार्य में CURING संबंधी कोई साक्ष्य स्वरूप फोटोग्राफ दिखाने में विफल रहे। अंतिम सुनवाई के पूर्व की सुनवाई में फोटोग्राफ CURING के समर्थन में प्रस्तुत करने का निदेश नहीं दिया गया था फलतः एकाएक दिनांक-16.01.2020 को अंतिम सुनवाई में फोटोग्राफ नहीं दिखाया जा सका। LINING के समुचित CURING के संदर्भ में उपलब्ध कतिपय फोटोग्राफ की प्रति संलग्न की जा रही है। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी के प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार के बचाव बयान की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-
संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये बचाव बयान एवं पूरक बचाव बयान तथा उपलब्ध अभिलेखों की समुचित रूप से विश्लेषणोपरांत निष्कर्ष अंकित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान में अंकित अभिकथन प्रयोगशाला जाँच के प्रतिफल के समक्ष तथ्यहीन होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है। इतना ही नही सुनवाई में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं प्रस्तुत किया गया, जो उनके अभिकथन को प्रतिपादित करता है। जहाँ तक की दिनांक-16.01.2020 की अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी लाईनिंग कार्य में CURING से संबंधित कोई साक्ष्य स्वरूप PHOTOGRAPH दिखाने में विफल रहे। अतः इनकेे विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा गठित आरोप के संदर्भ में लगभग वही साक्ष्य एवं तथ्य दिया गया है, जो इनके द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। नये साक्ष्य के रूप में मात्र CURING कार्य से संबंधित कुछ फोटोग्राफ संलग्न किया गया है। उक्त फोटोग्राफ के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि नहर लाईनिंग कार्य के तहत स्लोप में जुट का बोरा से कंक्रीटिंग को ढ़का गया है तथा नहर बेड में WATER POUNDING किया गया है। अर्थात माना जा सकता है कि P.C.C लाईनिंग कार्य के तहत CURING की व्यवस्था की गयी है। अतएव समुचित CURING की व्यवस्था नहीं करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। परन्तु आलोच्य कार्य में न्यून विशिष्टि के किये गये P.C.C कार्य के संदर्भ में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। जबकि उड़नदस्ता जाँच में P.C.C कार्य में सिमेंट की मात्रा में 19.06% से 33.78% तक की कमी पायी गयी है एवं भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने के कारण अनियमित भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव आरोप सं॰-02 यथा P.C.C LINING कार्य में PROPER CURING की व्यवस्था नहीं करने का आरोप अप्रमाणित होता है एवं आरोप सं॰-1 तथा आरोप सं॰-3 यथा न्यून विशिष्टि के P.C.C का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करना तथा कार्य में उदासीनता तथा लापरवाही बरतने का आरोप प्रमाणित होता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया। अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री रमेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 9047), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मढ़ौरा सम्प्रति सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-3, घोषी, जहानाबाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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13 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2017/1083--सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा अन्तर्गत शेखपुरा वितरणी के वि0दू0 0.00 से वि0दू0 6.00 तक वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कराये गये पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य के स्लोप में कई स्थलों पर उत्पन्न क्रैक की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़दस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-22 दिनांक 05.07.2017 से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री वीरेन्द्र प्रसाद (आई0डी0-जे 7578), तत्कालीन कनीय अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल, मढ़ौरा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत पायी गयी अनियमितता के संबंध में इनके विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप-पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों की वृहद जाँच हेतु अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-503 दिनांक 07.03.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें श्री हरिश कुमार, प्राध्यापक, जल संसाधन अभियंत्रण, वाल्मी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया :- (1) उड़नदस्ता द्वारा प्रश्नगत नहर में लाईनिंग कार्य से एकत्रित नमूनों के जाँचफल से स्पष्ट है कि लाईनिंग कार्य में प्रावधानित सिमेंट की मात्रा में 19.06% से 33.78% की कमी पायी गयी है, जो न्यून विशिष्टि के P.C.C लाईनिंग कार्य कराया जाना स्थापित करता है। परन्तु प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने से अधिकाई भुगतान होने का मामला बनता है, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता दर्शाता है।42 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.0.0 एवं 11.0.0 (3) से स्पष्ट है कि P.C.C लाईनिंग कार्य में व्यवहृत कंक्रीट में दरार होने का एक कारण PROPER CURING का अभाव होना माना गया है एवं कहा गया है कि नहर के स्लोप भाग में EVAPORATION LOSS को पर्याप्त क्यूरिंग करते हुए नियंत्रण नहीं किया गया। फलतः दरार उत्पन्न होना स्वाभाविक है। अतएव सम्पादित कार्य में समुचित CURING कार्य को अनदेखी करते हुए CURING की ठोस व्यवस्था नहीं की गयी। (3) आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता करते हुए न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अधिक भुगतान किया गया तथा CURING जैसे महत्वपूर्ण कार्य में उदासीनता बरती गयी, जिसके कारण P.C.C LINING कार्य में दरार उत्पन्न हुआ है, जो उनके द्वारा वित्तीय अनियमितता बरतना, लापरवाही बरतना एवं कार्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है। उक्त अनियमितता से बिहार वित्त नियमावली के नियमाें के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम- 3(1) का उल्लंघन है। प्राध्यापक, सिंचाई, जल संसाधन अभियंत्रण, वाल्मी, पटना-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-149 दिनांक 10.02. 2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें गठित आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के समेकित निष्कर्ष में अंकित मंतव्य निम्नवत है :-
"आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान में अंकित अभिकथन प्रयोगशाला जाँच के प्रतिफल के समक्ष तथ्यहीन हाने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है। इतना ही नहीं सुनवाई में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं प्रस्तुत किया गया, जो उनके अभिकथन को प्रतिपादित करता है। जहाँ तक की दिनांक-16.01.2020 को अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी लाईनिंग कार्य में CURING से संबंधित कोई साक्ष्य स्वरूप फोटोग्राफ दिखाने में विफल रहे। अतः इनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होते है।"
जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक-797 दिनांक 16.06.2020 द्वारा श्री प्रसाद से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-
43 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022दिखाने में विफल रहे। अंतिम सुनवाई के पूर्व की सुनवाई में फोटोग्राफ CURING के समर्थन में प्रस्तुत करने का निदेश नहीं दिया गया था फलतः एकाएक दिनांक-16.01.2020 को अंतिम सुनवाई में फोटोग्राफ नहीं दिखाया जा सका। LINING के समुचित CURING के संदर्भ में उपलब्ध कतिपय फोटोग्राफ की प्रति संलग्न की जा रही है। श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी के प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री प्रसाद के बचाव बयान की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-
संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये बचाव बयान एवं पूरक बचाव बयान तथा उपलब्ध अभिलेखों की समुचित रूप से विश्लेषणोपरांत निष्कर्ष अंकित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान में अंकित अभिकथन प्रयोगशाला जाँच के प्रतिफल के समक्ष तथ्यहीन होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है। इतना ही नही सुनवाई में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं प्रस्तुत किया गया, जो उनके अभिकथन को प्रतिपादित करता है। जहाँ तक की दिनांक-16.01.2020 की अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी लाईनिंग कार्य में CURING से संबंधित कोई साक्ष्य स्वरूप PHOTOGRAPH दिखाने में विफल रहे। अतः इनके विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा गठित आरोप के संदर्भ में लगभग वही साक्ष्य एवं तथ्य दिया गया है, जो इनके द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। नये साक्ष्य के रूप में मात्र CURING कार्य से संबंधित कुछ फोटोग्राफ संलग्न किया गया है। उक्त फोटोग्राफ के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि नहर लाईनिंग कार्य के तहत स्लोप में जुट का बोरा से कंक्रीटिंग को ढ़का गया है तथा नहर बेड में WATER POUNDING किया गया है। अर्थात माना जा सकता है कि P.C.C लाईनिंग कार्य के तहत CURING की व्यवस्था की गयी है। अतएव समुचित CURING की व्यवस्था नहीं करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। परन्तु आलोच्य कार्य में न्यून विशिष्टि के किये गये P.C.C कार्य के संदर्भ में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। जबकि उड़नदस्ता जाँच में P.C.C कार्य में सिमेंट की मात्रा में 19.06% से 33.78% तक की कमी पायी गयी है एवं भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने के कारण अनियमित भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव आरोप सं॰-02 यथा P.C.C LINING कार्य में PROPER CURING की व्यवस्था नहीं करने का आरोप अप्रमाणित होता है एवं आरोप सं॰-1 तथा आरोप सं॰-3 यथा न्यून विशिष्टि के P.C.C का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करना तथा कार्य में उदासीनता तथा लापरवाही बरतने का आरोप प्रमाणित होता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया। अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री वीरेन्द्र प्रसाद (आई0डी0-जे 7578), तत्कालीन कनीय अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल, मढ़ौरा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-01, रतवारा, शेरपुर, गंडक कॉलोनी, पो0-MIC बेला, मुजफ्फरपुर, पिन-842005 को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित दण्ड संसूचित किया जाता है -
"एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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17 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(पू0)-01-07/2016/1114--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, कटिहार के परिक्षेत्राधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के पदस्थापन अवधि के दौरान एजेण्डा सं0-133/201 एवं 133/202 के तहत कोशी नदी के दाँये तट पर क्रमशः सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर वर्ष 2016 बाढ़ पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता द्वारा करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत बरती गयी अनियमितता के लिए श्री अवधेश कुमार झा (आई0डी0-3219), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1542 दिनांक 27.07.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1089 दिनांक 21.05.2018 द्वारा श्री अवधेश कुमार झा (आई0डी0-3219) तत्का0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया :-
"कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर अवनति तथा दो भावी वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं तीन वर्षों तक प्रोन्नति की देय तिथि से प्रोन्नति पर रोक"।
उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री झा द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें लगाये गये आरोप/दण्ड से मुक्त करने का अनुरोध उनके द्वारा किया गया।
श्री झा से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :-
44 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 समीक्षा :-आरोप-1 :- सहोरा एवं मदरौना की स्थलपर बोल्डर रिभेटमेंट कार्य में मानक Voids 20% से अधिक Voids पाया जाना अर्थात न्युन विशिष्टि के कार्य कराये जाने के बाद भी प्रावधान के अनुरूप अधिकाई भुगतान किये जाने से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-3.0.1 से स्पष्ट होता है कि उड़नदस्ता द्वारा सहोरा एवं मदरौना स्थल पर SAND REPLACEMENT METHOD से BOULDER PITCHING कार्य की VOIDS जाँच में VOID 28.59% एवं 26. 40% पाया गया है। इनके द्वारा IS CODE 14262-1995 के CLAUSE 3.2 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि VOIDS का CALCULATION उक्त कोड के अनुसार होना चाहिए था। जबकि उड़नदस्ता द्वारा VOIDS CALCULATION के लिये SAND REPLACEMENT METHOD अपनाया गया है। उड़नदस्ता द्वारा अन्य स्थल पर VOIDS की जाँच में तकनीकी रूप से मान्य विधि यथा ACTUAL FIELD TEST के आधार पर VOIDS CALCULATION कर अधिकांश प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। उक्त कथन की पुष्टि अन्य स्थल के जाँच प्रतिवेदन से होती है। यह जाँच प्रतिवेदन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया में ही बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य से संबंधित है। विभागीय उड़नदस्ता का जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-18 दिनांक-15.06.2017) के अनुसार BOULDER की DENSITY 2004kg/m3 मानते हुए प्रश्नगत कार्य में ACTUAL FIELD TEST के आधार पर प्रश्नगत स्थल पर उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की जाँच में पाये गये बोल्डर की मात्रा को आधार मानते हुए इनके द्वारा VOIDS का CALCULATION की गयी है, जो निम्नवत् है :- मदरौना स्थल पर :- उड़नदस्ता द्वारा पायी बोल्डर की मात्रा एक क्रट में 4688.95kg
(cid:2872)(cid:2874)(cid:2876)(cid:2876).(cid:2877)(cid:2873)(cid:3038)(cid:3034)
Volume of boulder found in one crate =
(cid:2870)(cid:2868)(cid:2868)(cid:2872)(cid:3038)(cid:3034) (cid:3040)(cid:2871) = 2.339 𝑚3
Gross Volume of one crate (3m x 1.5m x 0.6 m) = 2.7m3
45 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022गणना कर भुगतान योग्य मात्रा का निर्धारण किया गया है एवं VOIDS 20% से कम पाया गया है, जो स्थल आदेश पंजी पर अंकित है। इसके अतिरिक्त विभागीय पत्रांक-406 दिनांक-21.01.2016 से कटाव निरोधक कार्य का अनुवीक्षण एवं गुणवत्ता की जाँच हेतु विशेष जाँच दल नियुक्त किया गया था उनके द्वारा समर्पित 10 जाँच प्रतिवेदनों में इस कार्य की गुणवता संतोषजनक बताया गया एवं VOIDS पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी है। विभागीय पत्रांक-87 दिनांक-19.02.2016 द्वारा गठित उड़नदस्ता की टीम द्वारा भी कार्य के दौरान स्थल जाँचोपरांत, जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। जिसमें कार्य को संतोषप्रद बताया गया है। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय उच्च पदाधिकारी द्वारा भी अनेको बार स्थल का निरीक्षण किया गया एवं किसी पदाधिकारी द्वारा VOIDS पर आपति दर्ज नहीं किया गया है। उक्त कथन की पुष्टि संचिका में उपलब्ध अभिलेखों से होती है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता द्वारा दो स्थलों की जाँच में एक में SAND DISPLACEMENT METHOD से एवं उसी प्रमंडलान्तर्गत के दूसरे कार्य में MASSDENSITY METHOD से VOIDS की गणना की गयी है। इस संदर्भ में उड़नदस्ता से मंतव्य की माँग करने पर दोनों METHOD को सही बताया गया है। चुकि प्रश्नगत मामले में MASS DENSITY METHOD से VOIDS की गणना करने पर VOIDS क्रमशः 12.85% एवं 13.37% आता है, जो मानक VOIDS 20% से कम है ऐसी स्थिति में प्रश्नगत कार्य में कराये गये बोल्डर पिचिंग कार्य को प्रावधान के अनुरूप मानते हुए इस आरोप के संदर्भ में श्री झा का बचाव-बयान स्वीकार योग्य पाया गया है। आरोप-2 :- बाढ़ 2016 के पूर्व सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कराये गये कटाव निरोधक कार्य में UNDER SIZE एवं OVER SIZE बोल्डर का उपयोग करने से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.0.2 (ii) के अनुसार उड़नदस्ता द्वारा बोल्डर का मानक वजन 40Kg से 54.4Kg माना गया है एवं स्थलीय जाँच में मदरौनी स्थल पर 52.2% UNDER SIZE एवं 71.03% OVER SIZE बोल्डर का उपयोग होना बताया गया है तथा सहोरा स्थल पर 51.59% UNDER SIZE एवं 10.33% OVER SIZE बोल्डर का उपयोग होना बताया गया है। इनके द्वारा कहा गया है कि IS CODE 14262-1995 एवं CENTRAL WATER COMMISION की HANDBOOK FOR FLOOD PROTECTION, ANTI EROSION & RIVER TRAINING WORK में उल्लेखित कंडिकाओं के अनुसार कराये गये कार्य का तकनीकी दृष्टिकोण से ठीक मानते हुए इस कार्य में किये गये भुगतान को सही माना गया है क्योंकि बोल्डर का कीमत एवं ढ़ुलाई का दर सभी आकार के बोल्डर का एक ही है।
इनके द्वारा कहा गया है कि विभागीय उड़नदस्ता का अन्य जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-18 दिनांक-15.06.2017) में अंकित बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के ही बाढ़ 2016 के पूर्व गंगा नदी के बाँये किनारे स्पर सं॰-UN2 निर्माण कार्य पर उड़नदस्ता द्वारा स्थल पर पाये गये UNDER SIZE एवं OVER SIZE बोल्डर के संबंध में विभागीय पत्रांक-1086 दिनांक-21.05.2018 से पुछे गये स्पष्टीकरण पर उनके द्वारा IS CODE 14262-1995 एवं अन्य कोड के आधार पर स्पष्टीकरण का जवाब स्वीकार करते हुए आरोप मुक्त किया गया है एवं सदृश आरोप एवं जवाब में विभाग द्वारा वृहत दण्ड दिया गया है। उल्लेखनीय है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के अन्तर्गत इस्माईलपुर बिन्दटोली स्थल पर कराये गये कार्याें की जाँच उड़नदस्ता द्वारा किया गया एवं जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-18 दिनांक-15.06.2017 से समर्पित किया गया। तथा कार्य में OVER SIZE एवं UNDER SIZE BOULDER के उपयोग करने के लिये संचिका सं॰-22/नि॰सि॰(कटि॰)-25-3/2017 से स्पष्टीकरण की माँग की गयी तथा उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के क्रम में उड़नदस्ता के द्वारा OVER SIZE BOULDER एवं UNDER SIZE BOULDER के उपयोग के क्रम में विभागीय निर्णय लेने की अनुशंसा के क्रम में संचिका अभियंता प्रमुख (बाढ़) से मंतव्य के लिये पृष्ठांकित किया गया तथा अभियंता प्रमुख (बाढ़) द्वारा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, पटना से मंतव्य प्राप्त करने का दिये गये मंतव्य के आलोक में संचिका मुख्य अभियंता केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, पटना को पृष्ठांकित की गयी के आलोक में मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, पटना द्वारा मंतव्य समर्पित किया गया। केन्द्रीय रूपांकण संगठन के द्वारा कहा गया है कि क्रेटस में VOIDS को सीमा में रखने के लिये विभिन्न साईज एवं वजन में बोल्डर (WELL GRADED THROUGH OUT LAYER THICKNESS) के आलोक में 6" MESH SIZE क्रेटस की दशा में 175mm से 300mm साईज के बोल्डर का उपयोग तकनीकी दृष्टिकोण से सही होने का मंतव्य दिया गया है। महतम साईज के BOULDER 5% over size का प्रावधान रखा जा सकता है एवं न्युनतम Size के लिये, अन्डर साईज के लिये 5% का प्रावधान इस शर्त के साथ रखा जा सकता है कि मेस साईज से छोटे होने पर इसका उपयोग क्रेट/गैबियन के EXPOSED SURFACE पर नहीं किया जायेगा। केन्द्रीय रूपांकण संगठन के उपरोक्त मंतव्य से स्पष्ट है कि बोल्डर क्रेटिंग कार्य में 150mm x150mm मेस साईज के बी॰ए॰ वायर क्रेट में 175mm से 300mm Size के बोल्डर का उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तुत मामले में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में बोल्डर कार्य में मदरौनी एवं सहोरा स्थल पर उपयोग किये गये अधिकांश बोल्डर का न्युनतम वजन 5.638kg से ज्यादा पाया गया है, जिसका साईज 175mm से बड़ा होता है, जो मेस साईज 150mm से बड़ा है तथा46 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त दोनों स्थल पर 54.40kg से मात्र 8 अदद बोल्डर बड़ा साईज का पाया गया है। ऐसी स्थिति में केन्द्रीय रूपांकण संगठन द्वारा दिये गये मंतव्य की 150mm x 150mm क्रेट के मेस साईज में 175mm से 300mm साईज का बोल्डर का उपयोग किया जा सकता है के अधीन माना गया है। अतएव उक्त कार्य में छोटे एवं बड़े आकार का बोल्डर का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराने के आरोप के लिए श्री झा के बचाव बयान को स्वीकार योग्य पाया गया है। आरोप 3ः- सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर न्यून विशिष्टि का GI WIRE CRATE का व्यवहार किये जाने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-3.0.3 के अनुसार स्थालीय जाँच में क्रेट साईज प्रावधान के अनुरूप 3m x 1. 5m x 0.6m पाया गया है परन्तु मेस साईज 150mm x 150mm के स्थान पर 150mm से 200mm x 150mm से 200mm पाया गया। इस प्रकार मेस की संख्या-20 x 10 x 4 के स्थान पर अधिकांशतः 18 x 9 x 4 एवं कहीं-कही 16 x 8 x 4 पाया गया है। स्पष्टतः कार्य में विशिष्टि के अनुरूप GI WIRE CRATE नहीं होना बताया गया है। श्री झा द्वारा कहा गया है कि विभागीय पत्रांक-20 दिनांक-04.01.2013 एवं 198 दिनांक-14.03.2016 के अनुसार इस कार्य के गुण नियंत्रण का भार एवं उत्तरदायित्व शोध संस्थान खगौल, पटना के पास निहित है। उक्त के अनुपालन में शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं॰-1, खगौल, पटना के दो अलग-अलग कार्यपालक अभियंताओं की टीम के द्वारा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान कुल आठ बार CRATED BOULDER PITCHING में क्रेट एवं क्रेट के मेस साईज की जाँच की गयी है एवं सभी का गुणवता जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें कार्य में प्रयुक्त क्रेटों के साईज 3m x 1.5m x 0.6m एवं मेस साईज 150mm x 150mm पाया गया है जो पूर्णतः विशिष्टि के अनुरूप है। उक्त कथन की पुष्टि गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन से होती है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि कार्य के दौरान विभागीय निदेश के अनुपालन में उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा कुल 8 अदद क्रेटों की जाँच की गयी। उनके द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि कार्य में प्रयुक्त क्रेट का साईज 3m x 1.5m x 0.6m एवं मेस साईज 150mm x 150mm पाया गया है, जो विशिष्टि के अनुरूप है उड़नदस्ता जाँच दल के जाँच प्रतिवेदन से उपरोक्त कथन की पूष्टि होती है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि विभागीय पत्रांक-406 दिनांक-21.01.2016 से कटाव निरोधक कार्याें का अनुवीक्षण एवं गुणवत्ता जाँच हेतु गठित विशेष जाँच दल द्वारा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान 5 बार सहोरा एवं 5 बार मदरौनी स्थल का स्थल निरीक्षण किया गया तथा विभाग को अपना जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। विशेष जाँच दल के द्वारा समर्पित 10 प्रतिवेदनों में गुणवता संतोषप्रद प्रतिवेदित की गयी है, जिसमें क्रेट की साईज एवं क्रेट के मेस साईज के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी है। यहाँ तक कि एकरारित कार्य समाप्ति के बाद भी दिनांक-23.05.2016 को विशेष जाँच दल के द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें भी कार्य की गुणवत्ता संतोषप्रद बताई गयी है। श्री अवधेश कुमार सिंह, मोतिहारी को सूचना के अधिकार के तहत विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेख से स्पष्ट है कि कटाव निरोधक कार्य के लिये विभाग द्वारा गठित विशेष जाँच दल को कार्य की गुणवत्ता एवं विशिष्टि का पालन करवाना एवं कार्यरत पदाधिकारी का मार्ग दर्शन कराने का दायित्व सौपा गया है। अतः विशेष जाँच दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदनों के आधार पर इस कार्य की गुणवता एवं विशिष्टि संतोषप्रद मान्य किया जा सकता है। विशेष जाँच दल के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि कराये गये कार्य संतोषप्रद बताया गया है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि कार्य के दौरान 32 बार विभागीय वरीय पदाधिकारी द्वारा किये गये स्थल निरीक्षण में क्रेट साईज एवं मेस साईज के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अतिरिक्त ऐसा कोई साक्ष्य संचिका में संलग्न नहीं है, जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि कार्य में न्युन विशिष्टि के क्रेट का उपयोग किया गया है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि इस कार्य में कुल 15339 अदद् क्रेटों का निर्माण मजदूरों द्वारा किया गया है, जिसमें पूर्ण सावधानी के बाद भी 1 से 2 क्रेट की बुनाई विशिष्टि के अनुसार नहीं पाया जा सकता है उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता द्वारा स्थल जाँच के दौरान मात्र एक-एक क्रेट क्रमशः सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर जाँच की गयी है। ऐसी स्थिति में मात्र एक क्रेट की जाँच के आधार पर पूरे कार्य में प्रयुक्त क्रेटों को न्युन विशिष्टि कहा जाना उचित नहीं है। स्वीकार योग्य पाया गया है। उड़नदस्ता के प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि कार्य के दौरान समय-समय पर गुण नियंत्रण संगठन द्वारा समर्पित गुण नियंत्रण प्रतिवेदन जिसमें Crate के संदर्भ में गुणवता जाँच प्रतिवेदन संतोषप्रद है। कार्य के दौरान उड़नदस्ता का प्रतिवेदन, उच्च पदाधिकारी एवं अनुवीक्षण दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदन को संज्ञान में लेते हुए आरोप-3 के संदर्भ में सहानुभूति पूर्वक विचार करने का मंतव्य दिया गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्प्ष्ट है कि कार्य के कार्यान्वयन के दौरान गुणवत्ता जाँच से संबंधित सक्षम प्राधिकार, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल, खगौल का 8 जाँच प्रतिवेदन, विभागीय उड़नदस्ता जाँच दल का 4 प्रतिवेदन, विभागीय विशेष जाँच दल का 10 प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिन सभी प्रतिवेदनों में प्रयुक्त क्रेट का साईज 3m x 1.5m x 0.6m एवं मेस साईज 150mm x 150mm ही पाया गया है, जो विशिष्टि के अनुसार है एवं 32 बार वरीय पदाधिकारी के जाँच में भी क्रेट पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं है दुसरे तरफ उड़नदस्ता जाँच में दोनों स्थलों पर एक एक क्रेट की जाँच में मेश साईज प्रावधान के विपरीत 150mm x 150mm के स्थान पर 150mm से 200mm x 150mm से 200mm पाया जाना47 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 परिलक्षित है एवं क्रेट का साईज प्रावधान के अनुरूप 3m x 1.5m x 0.6m पाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि क्रेट बुनाई पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोप संख्या-03 को आंशिक रूप से प्रमाणित माना गया है। आरोप-4 :- आरोप सं॰-4 के तहत निम्न आरोप के लिये दण्ड संसूचित किया गया है। (i) कार्य विलम्ब से पूर्ण होने के संदर्भ में उदासीनता बरतना। (ii) मुख्य अभियंता के दिनांक-08.04.2016 के निदेश का अनुपालन दिनांक-11.05.2016 को किये जाने की स्थिति में अतिरिक्त कार्य में अभिरूचि की कमी पाया जाना।
आरोप के प्रथम खंड के संदर्भ में कहा गया है कि चालू एकरारनामा के तहत अतिरिक्त कार्य कराने का प्रस्ताव दिनांक-14.03.2016 को ही अधीक्षण अभियंता को दिया गया। अधीक्षण अभियंता द्वारा पत्रांक-367 दिनांक-02.04.2016 से प्रस्ताव मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। परन्तु मुख्य अभियंता द्वारा अतिरिक्त कार्य का प्रस्ताव दिनांक-11.05.2016 को विभाग में समर्पित किया गया तथा 15 दिन के बाद दिनांक-26.05.2016 को विभागीय मोनिटरिंग द्वारा विलम्ब से अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति प्रदान किया जाना ही कार्य के कार्यान्वयन में विलम्ब का कारण है क्याेंकि संवेदक द्वारा अपना मूल एकरारित कार्य दिनांक-15.05.2016 को पूर्ण करने के उपरांत सभी साजो सज्जा एवं स्टाफ को स्थल से हटा लिया गया। तथा मई महिने में कोशी नदी के जलस्तर में वृद्धि होना सभी पदाधिकारी एवं विभाग को भलींभाँति पता था फिर भी दिनांक-24.04.2016 से 25.06.2016 तक का समय अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति में बरबाद किया गया है। इसका प्रभाव पड़ा कि कार्य LWL से 0.6मी॰ उपर से कार्य करना पड़ा एवं Scope of work में बदलाव करने का आदेश मुख्य अभियंता को देना पड़ा। यह भी कहा गया है कि अतिरिक्त कार्य को पूर्ण करने हेतु विभाग द्वारा कोई तिथि निधारित नहीं किया गया था इसके बावजूद अतिरिक्त/ विस्तारित कार्य की स्वीकृति के बाद से ही रात-दिन एक कर कार्य अविलम्ब पूरा कराने का प्रयास किया गया है। विभागीय पत्रांक-1764 दिनांक-26.05.2016 से स्पष्ट है कि कार्य पूर्ण करने की कोई तिथि निर्धारित नहीं की गयी है। यह भी कहा गया कि उक्त दोनों स्थल पर मूल एकरारनामा के तहत 600 एवं 700 मी॰ में किये गये कार्य के लिये करीब 3.5 माह का समय मिला था जिसके अनुसार मदरौनी स्थल पर प्रत्येक महीना औसतन 172 मी॰ एवं सहोरा स्थल पर प्रत्येक महिना 200 मी॰ का कार्य कराया गया था, तथा कार्य समय से पूर्ण किया गया। उपरोक्त परिपे्रक्ष्य में 200 मी॰ का विस्तारित कार्य के लिए बढ़ते जल स्तर की समस्या एवं NH 80 से बोल्डर की ढ़ुलाई की परेशानियों को देखते हुए एक माह का समय दिया जाना उचित था, तथा दिनांक-28.05.2016 से 30.06.2016 के बीच कार्य पूर्ण कराया गया। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विस्तारित कार्य विलम्ब से समाप्त होने का मूल कारण विलम्ब से यथा दिनांक-26. 05.2016 को स्वीकृत्यादेश निर्गत किया जाना एवं NH-80 से बोल्डर की ढुलाई में होने वाली परेशानियाँ होना है। आरोप का दुसरा अंश यथा मुख्य अभियंता के दिनांक-08.04.2016 के आदेश का अनुपालन दिनांक-15.05.2016 को किये जाने एवं अतिरिक्त/विस्तारित कार्य में रूचि की कमी पाये जाने के संबंध में कहा गया है कि :- (a) इनके द्वारा बाढ़ 2015 के समाप्ति के बाद स्थल स्थिति के अनुसार सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कुल 1500 मी॰ में बोल्डर रिभेटमेंट का प्रस्ताव दिनांक-10.10.2015 को ही TAC में स्वीकृति हेतु रखा गया था परन्तु समिति द्वारा मात्र 1300 मी॰ में ही कार्य कराने की स्वीकृति दी गयी। इस तरह 200मी॰ लम्बाई में कार्य की कटौती TAC द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किये ही कर दिया गया। (b) प्रशासनिक स्वीकृति के आलोक में एकरारनामा के उपरांत स्थल के अनुसार पुनः प्रमंडल के पत्रांक-301 दिनांक-14.03.2016 से 200 मी॰ से अतिरिक्त कार्य कराने का प्रस्ताव अधीक्षण अभियंता को दिया गया एवं प्रति मुख्य अभियंता को भी दी गयी। अधीक्षण अभियंता द्वारा भी अपने प्रत्रांक-367 दिनांक-02.04.2016 से प्रस्ताव मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया परन्तु मुख्य अभियंता के स्तर से कोई आदेश प्राप्त नहीं हो सका। (c) मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक-08.04.2016 को स्थल निरीक्षण किया गया तथा इनके द्वारा स्थल की स्थिति के अनुसार स्थल आदेश पंजी पर SCOPE OF WORK में बदलाव करते हुए अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव दिया गया, जिस पर मुख्य अभियंता द्वारा आदेश दिया गया कि अतिरिक्त कार्य कराया जाय लेकिन किसी भी स्थिति में प्रशासनिक स्वीकृति की राशि के अन्तर्गत ही कार्य कराया जाय। उक्त आदेश के अनुपालन में सभी शर्ताें को पुरा करते हुए प्राक्कलन एवं नक्शा बनाने हेतु सहायक अभियंता को निदेश दिया गया तथा उक्त आदेश के तहत अतिरिक्त कार्य का प्राक्कलन पत्रांक-486 दिनांक-28.04.2016 के साथ संलग्न करते हुए संवेदक को निदेश दिया गया कि मूल एकरारनामा के साथ-साथ अतिरिक्त कार्य को भी दिनांक-15.05.2016 तक पूरा करें, एवं प्राक्कलन की प्रति अधीक्षण अभियंता को देते हुए अनुरोध किया गया कि वास्तविक रूप से कराये जाने वाले कार्य की स्वीकृति प्रदान की जाय एवं प्रति मुख्य अभियंता को दी गयी। परन्तु अधीक्षण अभियंता ने अपने पत्रांक-477 दिनांक-29.04.2016 से निदेश दिया कि कटाव निरोधक कार्य के लिये प्रतिनियुक्त उड़नदस्ता की टीम से विषयांकित कार्य के लिये स्थल आदेश पंजी पर आदेशित कार्य के लिये परामर्श प्राप्त कर अग्रेत्तर कार्रवाई की जाय। इस निदेश के आलोक में उड़नदस्ता टीम के द्वारा दिनांक-03.05.2016 को स्थल निरीक्षण किया गया एवं परामर्श दिया गया कि अतिरिक्त लम्बाई में कार्य को स्वीकृत प्राक्कलन के प्रावधानों के अनुसार ही कराना उचित होगा। उक्त सुझाव के आलोक में प्रमंडल के पत्रांक-520 दिनांक 04.05.2016 से अधीक्षण अभियंता को अवगत कराया गया48 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 एवं इस परिस्थिति में अतिरिक्त कार्य के कार्यान्वयन हेतु अविलम्ब आदेश देने का अनुरोध अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता से किया गया परन्तु किसी तरह का आदेश प्राप्त नहीं हुआ।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि इनके द्वारा दिनांक-10.10.2015 से 04.05.2016 के बीच अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव, प्राककलन एवं अनुरोध उच्चाधिकारियों को समर्पित कर प्रयास किया जाना परिलक्षित होता है, लेकिन दिनांक-04.05.2016 के बाद कोई प्रयास किया जाना परिलक्षित नहीं होता है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में आरोप सं॰-4 को आंशिक प्रमाणित पाया गया है। निष्कर्षः- उपरोक्त समीक्षा के आलोक मे श्री झा का आरोप सं॰-1 एवं 2 यथा बोल्डर क्रेटिंग कार्य में मानक से अधिक VOIDS पाया जाना एवं कार्य में UNDER SIZE एवं OVER SIZE बोल्डर का उपयोग किये जाने के संबंध में पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। आरोप सं॰-3 एवं 4 यथा न्युन विशिष्टि के GI WIRE CRATE का उपयोग करने एवं विस्तारित कार्य में रूचि नहीं लेने के संदर्भ मे आंशिक रूप से दोषी प्रतीत होते है।
इस प्रकार श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप सं0-1 एवं 2 यथा बोल्डर क्रेटिंग कार्य में मानक से अधिक VOIDS पाया जाना एवं कार्य में UNDER SIZE एवं OVER SIZE बोल्डर का उपयोग किये जाने के आरोप के संबंध में पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाया गया है। आरोप सं0-3 एवं 4 यथा न्यून वशिष्टि के GI WIRE CRATE का उपयोग करने एवं विस्तारित कार्य में रूचि नहीं लेने के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया।
श्री झा से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन के सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1089 दिनांक 21.05.2018 द्वारा पूर्व में अधिरोपित दण्डादेश "कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर अवनति तथा दो भावी वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं तीन वर्षों तक प्रोन्नति की देय तिथि से प्रोन्नति पर रोक" को संशोधित करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"कालमान वेतनमान में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति तथा एक वर्ष तक प्रोन्नति की देय तिथि से प्रोन्नति पर रोक"।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अवधेश कुमार झा (आई0डी0-3219), तत्का0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।
"कालमान वेतनमान में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति तथा एक वर्ष तक प्रोन्नति की देय तिथि से प्रोन्नति पर रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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23 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(भाग॰)-09-09/2016/1144--श्री प्रेम शंकर तिवारी (आई0डी0-3439), तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, खड़गपुर, तारापुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध मकवा शांतिनगर R.E.O पथ से सरौन पथ तक सम्पर्क पथ के निर्माण में बरती गयी अनियमितताओं के लिए ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-1879 दिनांक 10.06.2016 द्वारा प्रेषित आरोप पत्र प्रपत्र-क के आलोक में समीक्षोपरांत जल संसाधन विभाग द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-865 दिनांक 07.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व श्री प्रेमशंकर तिवारी (आई0डी0-3439) को दिनांक 28.02.2018 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को आदेश सं0-93 सह पठित ज्ञापांक-1901 दिनांक 31.08.2018 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी के तहत सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा के आलोक में वस्तुस्थिति निम्नवत है - आरोप :- मकवा शांति नगर R.E.O पथ से सरौन पथ तक सम्पर्क पथ में कार्यान्वयन को कनीय अभियंता द्वारा ली गयी त्रुटिपूर्ण मापी को आपके द्वारा तथ्यों को देखे बिना जाँचित/हस्ताक्षरित किया गया। स्पष्ट है कि आपके द्वारा दायित्वों का निर्वहन नियमानुसार नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- किये गये कार्य का चेनेजवार वास्तविक मापी लेकर अंतिम विपत्र के पूर्व या अंतिम विपत्र में इसका समाशोधन की कार्रवाई करने में दिये गये सुझाव के अनुरूप श्री तिवारी द्वारा परिवाद जाँच के पूर्व ही समाशोधन करने की कार्रवाई के मद्देनजर श्री तिवारी के स्तर से हुई गैर इरादतन प्रक्रियात्मक त्रुटि को स्वयं समाशोधन कर लिया गया है जिससे इनकी मंशा में कोई खोट परिलक्षित नहीं होता है। साथ ही सरकार को कोई वित्तीय हानी भी नहीं हुई है ऐसी स्थिति में श्री तिवारी पर दायित्वों का निर्वहन नियमानुसार नहीं करने के आरोप से उन्हे मुक्त किया जा सकता है। ग्रामीण कार्य विभाग का मंतव्य :- ग्रामीण कार्य विभाग, विभाग, पटना द्वारा अधीक्षण अभियंता, गुणवत्ता प्रबंधन, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना का मंतव्य संलग्न कर उससे सहमति व्यक्त करते हुए मंतव्य प्रतिवेदन में उल्लेख है कि कनीय अभियंता द्वारा द्वितीय चालू विपत्र हेतु WBM Gr II की मापी अंकित करने में प्रथम बार भूल तो की गई किन्तु विपत्र के भुगतान के पूर्व ही उक्त प्रक्रियात्मक त्रुटि को संज्ञान में लेकर उसका सूधार कर लिया गया। यह कार्य तकनीकी परीक्षक कोषांग की जाँच के लगभग 6 महीने49 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 पूर्व में ही कर लिया गया। इससे यह परिलक्षित होता है कि आरोपी पदाधिकारी की कोई गलत मंशा नहीं थी। चेनेजवार अंकित WBM Gr II एवं Gr III की मापी की जाँच सहायक अभियंता के रूप में श्री तिवारी द्वारा की गई। चूँकि कार्य अभी शेष है एवं अन्तिम विपत्र भी नहीं बना है। इस प्रकरण में सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई है तथा साथ ही कोई अनियमित भुगतान भी नहीं हुआ है। इस प्रकार श्री प्रेम शंकर तिवारी, तदेन सहायक अभियंता द्वारा गैर इरादन हुई प्रक्रियात्मक त्रुटि को जाँच के पूर्व ही समाशोधित कर लिया गया। अतः इन्हें आरोप मुक्त करने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य का आधार :- संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है :- (i) कनीय अभियंता के द्वारा दिनांक-15.10.12 के WBM Gr-II की मापी अंकण करने के पूर्व दिनांक-09.08.12 से 06.09.12 तक अन्य कार्य मद की मापी का अंकण चेनेज वार किया गया है तदनुसार सहायक अभियंता श्री तिवारी द्वारा भी चेनेजवार जाँच किया जाना जिसकी पुष्टि मापी पुस्त से होती है। (ii) अगली मापी में दिनांक-15.10.2012 को (द्वितीय चालू विपत्र हेतु) कनीय अभियंता द्वारा WBM Gr-II की मापी चेनेजवार नहीं की गयी जिसे प्रक्रियात्मक त्रुटि माना जा सकता है। (iii) चुकि पूरे लम्बाई में WBM Gr-II की मापी 3.75 मीटर चौड़ाई एवं 0.075 मीटर चौड़ाई के अनुसार पायी गयी इसलिये श्री तिवारी को भी मापी जाँच के समय कनीय अभियंता द्वारा मापी में चेनेज अंकित नहीं करने संबंधी प्रक्रियात्मक त्रुटि संज्ञान में नहीं आ सका। (iv) प्रक्रियात्मक त्रृटि का संज्ञान होने पर तृतीय विपत्र में पूर्व कनीय अभियंता के द्वारा WBM Gr-II दिनांक-15.12. 12 को पुनः चेनेजवार मापी ली गयी एवं तदनुसार सहायक अभियंता श्री तिवारी द्वारा कार्य मद की जाँच की गई। चुँकि प्रक्रियात्मक त्रुटि का निराकरण तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा परिवाद के जाँच के पूर्व करने से स्पष्ट है कि इनके द्वारा चेनेजवार मापी अंकित नहीं करने के प्रक्रियात्मक त्रुटि इरादतन नहीं की गयी है। (v) तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच में न ही गुणवता एवं मात्रात्मक कमी पायी गयी है। एवं इस त्रुटि के कारण कोई अनियमित भुगतान नहीं होने का उल्लेख जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.2.4 (ग) से होती है। (vi) चुकि अभिलेख कार्य के विरूद्ध अभिलेखीय भुगतान हुए है। अतः किसी प्रकार का अनियमित भुगतान अभिलेख आधारित नहीं हुआ माना जा सकता है। समीक्षा :- श्री प्रेम शंकर तिवारी, तदेन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, खड़गपुर, तारापुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग (सेवानिवृत्त) के विरूद्ध तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में मकवा शांतिनगर से सरौन पथ में कनीय अभियंता द्वारा ली गई त्रुटिपूर्ण मापी को श्री तिवारी, तत्कालीन सहायक अभियंता के रूप में बिना तथ्यों को देखे/ जाँचे हस्ताक्षरित करने से दायित्वों का निर्वहन नहीं करने का आरोप है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त कार्य से संबंधित द्वितीय चालू विपत्र की मापी दिनांक-15.10.2012 को कनीय अभियंता द्वारा WBM Gr- II की मापी चेनेजवार नहीं किये जाने को प्रक्रियात्मक त्रुटि माना गया है जिसे ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-2410 दिनांक-20.08.2019 के मंतव्य प्रतिवेदन में भी द्वितीय चालू विपत्र हेतु अंकित किये गये मापपुस्त में चेनेज अंकित नहीं किये जाने को प्रक्रियात्मक त्रुटि बताते हुए मापी की जाँच करते समय सहायक अभियंता श्री प्रेमशंकर तिवारी द्वारा इस त्रुटि को संज्ञान में नहीं लिया जाना बताया गया है। इस प्रकार मापी अंकित करने में प्रथम बार की गई भूल को कार्य की तकनीकी परीक्षक कोषांग की जाँच के लगभग 6 महीने पूर्व यानि 05.12.2012 को तृतीय चालू विपत्र में सुधार कर लिये जाने से आरोपी पदाधिकारी की कोई गलत मंशा का नहीं होने, गैर इरादन हुई प्रक्रियात्मक त्रुटि को जाँच पूर्व समाशोधित कर लिये जाने, सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं होने एवं कोई अनियमित भुगतान नहीं होने का मंतव्य संचालन पदाधिकारी के साथ-साथ ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा भी दिया गया है। चूँकि कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा कराया गया है एवं श्री तिवारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' गठित कर कार्रवई हेतु भेजा गया है, जिससे संचालन पदाधिकारी के साथ-साथ ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा भी आरोप मुक्त करने का मंतव्य दिया गया है, जो स्वतः स्पष्ट है। निष्कर्ष :- श्री प्रेम शंकर तिवारी, तदेन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग (सेवानिवृत्त) के विरूद्ध मकवा शांतिनगर आर॰ई॰ओ॰ पथ निर्माण कार्य की द्वितीय चालू विपत्र में त्रुटिपूर्ण मापी को तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना की जाँच प्रतिवेदन के लगभग 6 महीने पूर्व तृतीय चालू विपत्र में सूधार कर लिये जाने से आरोपी पदाधिकारी की कोई गलत मंशा नहीं होने, गैर इरादन हुई प्रक्रियात्मक त्रुटि को जाँच पूर्व समाशोधित कर लिये जाने, सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं होने तथा कोई अनियमित भुगतान नहीं होने का मंतव्य संचालन पदाधिकारी के साथ-साथ ग्रामीण कार्य विभाग, पटना द्वारा भी दिया गया है। यद्यपि द्वितीय चालू विपत्र के मापपुस्त अंकित करने में प्रक्रियात्मक त्रुटि हुआ है, जिसे तृतीय चालू विपत्र में ससमय समाशोधित कर लिया गया है।
चूँकि उक्त कार्य ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा कराया गया है एवं प्रपत्र 'क' गठित कर कार्रवाई हेतु भेजा गया है, जिसमें संचालन पदाधिकारी के साथ-साथ ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा भी आरोप मुक्त करने का मंतव्य दिया गया है।50 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष/मंतव्य, तदनुसार ग्रामीण कार्य विभाग के मंतव्य एवं उसके आलोक में की गयी विभागीय तकनीकी समीक्षा में वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री प्रेमशंकर तिवारी तदेन सहायक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग को आरोपमुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रेमशंकर तिवारी (आई0डी0-3439) तत0 सहायक अभियंता, कार्य प्रमंडल, खड़गपुर, तारापुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को आरोप मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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23 सितम्बर 2021
सं0 22नि0सि0(सिवान)-11-03/2011/1145--श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह (ID-3883), तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा के विरूद्ध सारण बांध मगरपाल छड़की सड़क निर्माण कार्य से संबंधित लेखा समीक्षा (दिसम्बर 2010) द्वारा पायी गयी विसंगतियां तथा उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों के आलोक में आरोप पत्र (प्रपत्र-'क') गठित किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-356 दिनांक 16.02.2018 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें डॉ0 राजीव कुमार, संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-145 दिनांक 17.07.2018 से श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी का जांच प्रतिवेदन में की गई समीक्षा निम्नवत है :-
आरोप :-एकरारनामा सं0-01SBD/07-08 के तहत टूल्स एवं प्लांट मद में SBD के कंडिका-10(बी) के उपकंडिका (iii) में निहित प्रावधान का उल्लंघन कर संवेदक द्वारा उपलब्ध कराये गये बैंक गारंटी के आधार पर कुल 87.10 लाख का अग्रिम का विपत्र आपके द्वारा तैयार कर अनियमित भुगतान में सहयोग करने हेतु उपस्थापित किया गया। जबकि उक्त प्रावधान के अनुसार कार्य स्थल पर संवेदक द्वारा लाये गये टूल्स एवं प्लांट के विरूद्ध अग्रिम दिया जाना है। फलतः आपके उक्त कृत्य के कारण सरकार को राशि की क्षति होना परिलक्षित है, जिसके लिए आप दोषी हैं। जाँच पदाधिकारी की समीक्षा :-सारण नहर प्रमंडल, छपरा के अधीन नाबार्ड सम्पोषित तटबंध सड़क योजनान्तर्गत मगरपाल छड़की के कि0मी0 0.00 से 16.0 एवं सारण तटबंध के कि0मी0 20.37 से 35.26 कि0मी0 के बीच उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं शीर्ष पर पक्की सड़क निर्माण कार्य का एस0बी0डी0 एकरारनामा आर0पी0 राय इस्टेट प्रा0 लि0, मैरवा रोड, सिवान के साथ किया गया। इसका एकरारनामा सं0-01SBD/07-08 दिनांक 08.02.2008, प्राक्कलित राशि 1742.01386 लाख रू0 एवं कार्य समाप्ति की तिथि 31.05.2009 थी। उक्त कार्य में श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा के विरूद्ध आरोप मशीन अग्रिम से संबंधित है। SBD के कंडिका-10(बी) (iii) के अनुसार संवेदक द्वारा स्थल पर लाये गये संयंत्र एवं मशीनरी के विरूद्ध एकरारित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत अग्रिम के रूप में भुगतान किये जाने का प्रावधान है। संवेदक द्वारा मशीन अग्रिम के लिए क्रमशः रू0 27,10,100/-, 30,00,000/- एवं 30,00,000/- तथा मोबिलाईजेशन अग्रिम के लिए 35,00,000/- 35,00,000/- 35,00,000/-, 35,00,000/- एवं रू0 34,20,139/- दिनांक 07.02.2008 को निर्गत गारंटी समर्पित किया गया। शाखा प्रबंधक, सेन्ट्र्रल बैंक ऑफ इंडिया, अम्बारा चौक, छपरा के पत्रांक-BM/BG/2007-08/94 दिनांक 13.03.2018 द्वारा उपरोक्त बैंक गारंटी के निर्गत किये जाने की सम्पुष्टि की गयी। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-486 दिनांक 18.03.2018 द्वारा तत्कालीन सहायक अभियंता श्री सिंह को एकरारनामा की राशि के 5 प्रतिशत तक अग्रिम का विपत्र यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी के प्रमाण पत्र के साथ समर्पित करने का निदेश दिया गया। सहायक अभियंता द्वारा पत्र पर ही अग्रिम का विपत्र समर्पित करने का निर्देश कनीय अभियंता को दिया गया। तत्पश्चात दिनांक 18.03.2018 को सत्यापित बैंक गारंटी के विरूद्ध कनीय अभियंता द्वारा तैयार किये गये मशीन अग्रिम के लिए 87.10 लाख के विपत्र को अनुशंसा के साथ सहायक अभियंता द्वारा कार्यपालक अभियंता को समर्पित किया गया एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा विपत्र को उसी दिन पारित कर दिया गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी के प्रमाण पत्र के साथ विपत्र मांगे जाने के बावजूद बिना प्रमाण पत्र के विपत्र के पारित किये जाने से कार्यों की शुरूआती प्रगति एवं स्थल पर कार्यों की प्रगति के लिए मौजूद यंत्र-संयंत्र से संतुष्ट होना माना जा सकता है। तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान द्वारा दिनांक 09.08.2010 को निर्गत तार्किक आदेश में कहा गया है कि विभागीय पैसे से क्रय किये गये यंत्र-संयंत्र को कार्य स्थल से हटाकर संवेदक द्वारा कार्य को बन्द कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि संवेदक को दिनांक 26.02.2018 को मोबिलाईजेशन अग्रिम के रूप में 150.00 लाख रू0 एवं दिनांक 18.03.2018 को मोबिलाईजेशन अग्रिम के रूप में शेष 24.20139 लाख तथा मशीन अग्रिम के रूप में 87.10लाख रू0 दिया गया था। अतः मुख्य अभियंता के तार्किक आदेश से स्थल पर यंत्र-संयंत्र का होना परिलक्षित होता है। संलग्न अभिलेख के अनुसार 46632.61 घनमीटर मिट्टी का कार्य राजस्थानी ट्र्रैक्टर से कराया गया है। 990 वर्गमीटर प्रारंभिक रॉलिंग का कार्य भी किया गया है। इससे मशीन का कार्य में उपयोग किया जाना परिलक्षित है। लेकिन आरोपित पदाधिकारी51 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 श्री सिंह द्वारा SBD के कंडिका-10 (बी)(iii) के अनुसार स्थल पर उपलब्ध यंत्र-संयंत्र का Valuation तथा बैंक गारंटी की तुलना करते हुए मशीन अग्रिम का भुगतान किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया है। यह एक प्रक्रियाधीन त्रुटि है। कार्य में गति प्रदान करने के लिए ही मोबिलाईजेशन एवं मशीन अग्रिम का प्रावधान एस0बी0डी0 की कंडिकाओं के तहत किया गया है। अतः सहायक अभियंता श्री सिंह द्वारा बिना यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी के प्रमाण पत्र के साथ अनुशंसित किया गया मशीन अग्रिम का विपत्र कार्य में प्रगति प्रदान करने के लिए कार्यहित में लिया गया निर्णय माना जा सकता है। संवेदक द्वारा दिये गये बैंक गारंटी का सत्यापन शाखा प्रबंधक द्वारा किये जाने के बावजूद बैंक गारंटी फर्जी निकल गया। बैंक गारंटी फर्जी नहीं होता या संवेदक द्वारा कार्य को पूर्ण कर लिया जाता तो दिये गये अग्रिम की पूर्ण वसूली संवेदक के विपत्रों से कर ली जाती, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन के कंडिका 4.50 के अनुसार मात्र बैंक ऑफ बड़ौदा, फ्रेजर रोड शाखा पटना द्वारा दिनांक 02.01.2009 को निर्गत किये गये 87.105 लाख रूपये के बैंक गारंटी को ही भुनाकर सरकारी खजाने में जमा किया जा सका। इस प्रकार संवेदक के दिये गये पूर्ण अग्रिम की वसूली नहीं हो सकी। उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन की कंडिका 4.60 के अनुसार बैंक गारंटी के फर्जी निकलने के मामले में कार्यपालक अभियंता ने दोषियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा द्वारा एकरारनामा सं0-1SBD/07-08 के तहत टुल्स एवं प्लांट मद में SBD के कंडिका-10 (बी) (iii) में निहित प्रावधान का उल्लंघन कर संवेदक द्वारा उपलब्ध कराये गये बैंक गारंटी के आधार पर कुल 87.10 लाख का अग्रिम का विपत्र तैयार कर अनियमित भुगतान करने हेतु उपस्थापित किया जाना न होकर एक प्रक्रियात्मक त्रुटि परिलक्षित है। बैंक गारंटी के फर्जी निकलने से सरकारी राजस्व की क्षति से बैंक एवं संवेदक की भूमिका परिलक्षित है। निष्कर्ष :- श्री सिंह के विरूद्ध आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन पर श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-1745 दिनांक 13.08.2018 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। जिसके क्रम में श्री सिंह के पत्रांक-1447 दिनांक 14.12.2018 से द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर (अभ्यावेदन) प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख करते हुए आंशिक आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया :- मामला वित्तीय अनियमितता का न होकर मात्र प्रक्रियात्मक त्रुटि से संबंधित है। कार्यों की शुरूआती प्रगति एवं स्थल पर कार्यों की प्रगति के लिये मौजूद यंत्र-संयंत्र की स्थल पर उनके द्वारा एवं कार्यपालक अभियंता के द्वारा निरीक्षण की सम्पुष्टि के पश्चात कनीय अभियंता के विपत्र पर अनुशंसा की गयी एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा उसी दिन संतुष्ट होने के कारण यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी के प्रमाण पत्र के बिना ही उनके द्वारा उसी दिन विपत्र पारित कर दिया गया। यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी एवं प्रर्याप्त बैंक गारंटी जो तत्कालीन शाखा प्रबंधक द्वारा सत्यापित की गयी थी एवं कार्यो की शुरूआती प्रगति एवं कार्यों में तेजी लाने के मकसद से यंत्र-संयंत्र अग्रिम दी गयी थी परन्तु अग्रिम लेने के पश्चात संवेदक द्वारा कार्यों में अकर्मण्यता की गयी जिस कारण उनके द्वारा भी कार्य धीमा करने एवं गुणवतापूर्वक कार्य नहीं करने का पत्र कार्यपालक अभियंता को दिया गया था। वस्तुतः अगर संवेदक के द्वारा कार्य कार्यक्रम के अनुसार कर दिया गया होता तो स्वभाविक रूप से T&P मदों के अग्रिम की वापसी हो गयी होती। यह विशेष परिस्थिति में संवेदक के कार्य नहीं करने के कारण उत्पन्न हुई। दिये गये T&P अग्रिम की वसूली पूर्व में ही कर ली गयी है। उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-29 दिनांक 27.08.11 के पृ0 4 के 4.50 पर अंकित है कि क्रमांक 11 पर दिया गया बैंक ऑफ बड़ौदा, फ्रेजर रोड शाखा, पटना का बैंक गारंटी सही पाया गया। जिसे कार्यपालक अभियंता, सारण प्रमंडल, छपरा के द्वारा इनभोकेट कर सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया है। मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा निर्गत तार्किक आदेश स0-2280 दिनांक 09.08.10 में वर्णित है कि विभागीय पैसे से लाये गये यंत्र-संयंत्र को कार्यस्थल से हटाकर संवेदक द्वारा कार्य बन्द कर दिया गया है। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं उनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर/लिखित अभिकथन की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :- संचालन पदाधिकारी ने मुख्य अभियंता के तार्किक आदेश (दिनांक 09.08.10 को निर्गत) में कहा गया है कि विभागीय पैसे से क्रय किये गये यंत्र-संयंत्र को कार्य स्थल से हटाकर संवेदक द्वारा कार्य बन्द कर दिया गया, के आलोक में माना है कि मशीन का कार्य में उपयोग किया जाना परिलक्षित है लेकिन श्री सिंह द्वारा SBD के कंडिका 10 (b)(iii) के अनुसार स्थल पर उपलब्ध यंत्र-संयंत्र का Valuation तथा बैंक गारंटी की तुलना करते हुए मशीन अग्रिम का भुगतान होना चाहिए था, जो नहीं किया गया। जिसे प्रक्रियात्मक त्रुटि माना गया है तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा यह भी कहा गया है कि संवेदक द्वारा दिये गये बैंक गारंटी फर्जी नहीं होता या संवेदक द्वारा कार्य पूर्ण कर लिया जाता तो दिये गये अग्रिम की पूर्ण वसूली विपत्रों से कर ली जाती लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। उक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। उल्लेखनीय है कि SBD के कंडिका 10 (b)(iii) के अनुसार संवेदक के द्वारा स्थल पर लाये गये यंत्र-संयंत्र के विरूद्ध अधिकतम एकरारित राशि के 5 प्रतिशत अग्रिम के रूप में भुगतान करने का प्रावधान है। प्रस्तुत मामले में संवेदक द्वारा यंत्र-संयंत्र मद में अग्रिम भुगतान हेतु दिनांक 07.02. 08 को कुल 87.10 लाख का बैंक गारंटी आवेदन के साथ कार्यपालक अभियंता को दिया गया तथा कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-486 दिनांक 18.03.08 से श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता को एकरारनामा की राशि का 5 प्रतिशत तक अग्रिम का विपत्र स्थल पर यंत्र-संयंत्र की मौजूदगी का प्रमाण पत्र के साथ समर्पित करने का निदेश दिया गया। जिसके अनुपालन में आरोपी द्वारा अपने पत्रांक-13 दिनांक 18.03.08 से कनीय अभियंता, श्री जितलाल मंडल को विपत्र52 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 तैयार कर प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। तत्पश्चात दिनांक 18.03.08 को बैंक गांरटी की राशि के समतुल्य कुल 87.10 लाख का अग्रिम भुगतान हेतु विपत्र की अनुशंसा की गयी। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो पूर्व में उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया था। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सिंह द्वारा स्थल पर उपलब्ध यंत्र संयंत्र का आकलन किये बिना ही एवं SBD के कंडिका-10 (b) (iii) के विपरीत कार्यपालक अभियंता के निदेश का उल्लंघन करते हुए बिना प्रमाण पत्र अंकित किये ही मात्र संवेदक द्वारा उपलब्ध कराये गये बैंक गांरटी को ही प्रमाणक मान कर कनीय अभियंता द्वारा तैयार किये गये विपत्र को भुगतान हेतु अनुशंसा किया जाना परिलक्षित होता है। अतएव श्री सिंह का द्वितीय कारण पृच्छा स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त तथ्यों के आलोक में श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर/अभ्यावेदन को स्वीकार्य योग्य नहीं पाते हुए इसे अस्वीकृत किया गया तथा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए उनके विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना सं0-922 दिनांक 25.06.2020 द्वारा ''कालमान वेतनमान में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी'' का दंड संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (पत्रांक-01 दिनांक 12.03.2021) समर्पित किया गया। जिसमें मुख्यतः निम्न तथ्य अंकित किया गया है :- कार्यपालक अभियंता द्वारा उनके पत्रांक-486 दिनांक 18.03.2008 द्वारा एकरारनामा की राशि के 5 प्रतिशत यंत्र-संयंत्र एडभांस एवं 10 प्रतिशत मोबेलाइजेशन एडभांस का बकाया राशि का विपत्र अंकित कर यंत्र-संयंत्र के मौजूदगी के प्रमाण-पत्र के साथ विपत्र समर्पित करने का निर्देश दिया गया था, जिसके आलोक में उसी तिथि को उनके द्वारा भी कनीय अभियंता को विपत्र समर्पित करने का निर्देश दिया गया था। कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्तिका सं0-2166 में दिनांक 18.03. 2008 को ही विपत्र दर्ज किया गया, जिसे उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के समक्ष उक्त तिथि को ही अग्रसारित किया गया, जिसे कार्यपालक अभियंता द्वारा भी विपत्र 18.03.2008 को पारित किया गया। वे सहायक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे एवं भुगतान का दायित्व कार्यपालक अभियंता का था। अगर उनके द्वारा दिये गये आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो उन्हें यह चाहिए था कि उक्त विपत्र को पारित नहीं करते। मार्च का अंतिम पखवारा होने एवं अत्यधिक कार्य बोझ के साथ-साथ यंत्र-संयंत्र के संवेदक के कैम्प ऑफिस एवं कार्य स्थल जो लगभग 22कि0मी0 में था, में यंत्र एवं संयंत्र के रहने के साथ-साथ समय की महत्ता को देखते हुए कनीय अभियंता द्वारा प्रस्तुत मापी पुस्तिका पर उल्लेखित बैंक गारंटी के आधार पर कार्यपालक अभियंता को उसी दिन विपत्र समर्पित किया गया था। समीक्षा :- श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिये गये अधिकांश तथ्य लगभग वही तथ्य है जो इनके द्वारा पूर्व में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में उल्लेखित है जिस पर विभागीय स्तर पर समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है। श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव इनका पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह (ID-3883), तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-01 दिनांक 12.03.2021 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-922 दिनांक 25.06.2020 द्वारा संसूचित दण्ड ''कालमान वेतनमान में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी'' को यथावत् रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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23 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(देव0)-10-01/2017/1146--श्री शत्रुघ्न सिंह, (आई0डी0-जे 7876) तत्कालीन कनीय अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, साहेबगंज (झारखंड) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, नहर एवं नहर संरचना रूपांकण प्रमंडल-04, अनिसाबाद, पटना के विरूद्ध उनके पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता के संबंध में जल संसाधन विभाग (झारखंड) राँची के पत्रांक-4837 दिनांक 03.01.2017 द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-593 दिनांक 23.01.2018 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के समीक्षोपरांत श्री सिंह से स्पष्टीकरण पूछा गया। तत्पश्चात मामले के समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2264 दिनांक 30.10.2019 द्वारा निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
नहर के बेड लेवल 14.00 R.D एवं 31.90 R.D से 38.00 R.D करीब 1'5" से 5'11" तक रूपांकित बेड लेवल से ऊँचा पाया गया, जिसमें बचाव-बयान के अनुसार श्री सिंह के कार्यक्षेत्र 14 R.D से 19.50 R.D में भी अधिकतम 2'1" तक रूपांकित बेड लेवल से ऊँचा बेड का लाईनिंग कार्य पाया गया। पक्का नहर में (Lined Canal) में रूपांकित बेड लेवल से ऊँचा बेड लेवल का निर्माण किया जाना भयंकर भूल है। इसी कारण से नहर में जलश्राव 14 R.D से आगे जाने से पहले ही नहर का बाँध टूटने लगा। चूँकि आपके द्वारा पूर्व में कराये गये लाईनिंग एवं मिट्टी कार्य का अंतिम मापी लिये जाने का53 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उल्लेख किया गया है जिसके लिए मिट्टी एवं लाईनिंग कार्य का मापी लेकर अंतिम विपत्र बनाने के लिए प्रथम दृष्टया श्री सिंह को जिम्मेवार एवं दोषी माना गया।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-290 दिनांक 20.08.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को अप्रमाणित पाया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री सिंह के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री सिंह के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण आरोप मुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है, जिस पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
अतएव विभाग द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री शत्रुघ्न सिंह (आई0डी0-जे 7876), तत्कालीन कनीय अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, साहेबगंज (झारखंड) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, नहर एवं नहर संरचना रूपांकण प्रमंडल-04, अनिसाबाद, पटना को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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30 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(मुक॰)सम0-19-30/2018/1190--वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर अंतर्गत कमला-बलान नदी के दायाँ तटबंध के टूटान स्थल 73.50 एवं 74.60 कि0मी0 पर मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद भी टूटान के कट इण्ड को होल्ड करने में आवश्यकतानुरूप अभिरूची नहीं होने, उच्चाधिकारियों की निदेशों की अवहेलना करने जैसे आरोपों के लिए श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई0डी0-3611), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर को विभागीय अधिसूचना सं०-1613, दिनांक 14.09.17 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1678, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपी के बचाव-ब्यान एवं विभागीय अभिमत के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-1111 दिनांक-22.05.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की मांग की गयी। तत्पश्चात विभागीय पत्रांक-1252, दिनांक 08. 06.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित करने हेतु स्मारित भी किया गया। किन्तु इसके बावजूद भी द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब नहीं दिया गया। विभाग द्वारा यह माना गया कि द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब प्राप्त न होना इस बात का परिचायक है कि प्रपत्र-'क' में गठित आरोप सही है। इस प्रकार प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक-19.07.2018 द्वारा ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-17810/2018 दायर किया गया जिसमें दिनांक-12.11.2020 को पारित न्यायादेश में कार्यकारी अंश (ऑपरेटिव पार्ट) निम्नवत है :- ''I find that enquiry report of the enquiry conducting authority is based on no evidence and no punishment can be inflicted on such report of the Enquiry Officer based on no evidence on the proceedee. The Disciplinary Authority on the basis of such enquiry report dismissed the petitioner from service, therefore I find that order of dismissal from service of the petitioner is not sustainable in the eye of law.
In the result, this writ petition is allowed and the impugned Letter No. 1538 Dated 19- 07-2018 (Annexure-1) is set aside. The matter is remitted to the Enquiry Officer to hold the enquiry afresh in accordance with law and submit its report within six months.''
2. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित वर्णित न्याय निर्णय के संदर्भ में विधि विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से प्राप्त विद्वान महाधिवक्ता के परामर्श के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निर्णय के अनुपालन में मामले की विभागीय समीक्षोपरांत श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई0डी0-3611), तत्का0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-02, झंझारपुर के विरूद्ध ''सेवा से बर्खास्तगी'' संबंधी निर्गत दण्डादेश (विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक 19.07.2018 द्वारा निर्गत) को निरस्त करने एवं साथ ही श्री सिंह के सेवानिवृत (सेवानिवृति की तिथि 31.01.2021) होने के कारण माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 12.11.2020 को पारित न्याय निर्णय (The matter is remitted to the enquiry officer to hold the enquiry afresh in accordance with law) के अनुपालन हेतु पूर्व में संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43बी में सम्परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। 3. उक्त निर्णय के उपरांत श्री मिथिलेश कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" संबंधी निर्गत दण्डादेश (विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक 19.07.2018 द्वारा निर्गत) के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-17810/2018 में पारित न्यायादेश के आलोक में निरस्त करने संबंधी संलेख/प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1014 दिनांक 07.09.2021 द्वारा राज्य मंत्रिपरिषद हेतु भेजा गया। राज्य मंत्रिपरिषद की दिनांक 22.09.2021 को सम्पन्न बैठक में मद सं0-2 के रूप में सम्मिलित करते हुए उक्त संलेख/प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की गई।54 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 4. (i) श्री मिथिलेश कुमार सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1538 दिनांक 19.07.2018 द्वारा निर्गत "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड निरस्त किया जाता है।
(ii) श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) में वर्णित प्रावधानों के आलोक में उनकी सेवानिवृति की तिथि 31.01.2021 होने के कारण उनको बर्खास्त करने की तिथि 19.07.2018 से पूर्व दिनांक 14.09.2017 से किये गये निलंबन के कारण निलंबन की सम्पूर्ण अवधि दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 30.01. 2021 तक मानते हुए, दिनांक 31.01.2021 से निलंबन मुक्त किया जाता है।
(iii) श्री सिंह के सेवानिवृत (सेवानिवृति की तिथि 31.01.2021) होने के कारण माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 12.11.2020 को पारित न्याय निर्णय (The matter is remitted to the enquiry officer to hold the enquiry afresh in accordance with law) के अनुपालन हेतु पूर्व में संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43बी में सम्परिवर्तित किया जाता है।
(iv) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में नियमानुसार Afresh enquiry हेतु श्री सिंह के विरूद्ध पूर्व में संचालित विभागीय कार्यवाही में नियुक्त संचालन पदाधिकारी डॉ0 राजीव कुमार, तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के सेवानिवृत होने के कारण, अधीक्षण अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण अंचल, खगौल, पटना को विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संचालन पदाधिकारी एवं मो0 साजिद इकबाल (आई0डी0-5274) सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-01, खगौल, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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30 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1213--श्री अजय कुमार (आई0डी0-जे 3949) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगड़िया के पदस्थापन अवधि के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगडिया के अन्तर्गत बाढ़ 2018 के पूर्व एजेण्डा संख्या-126/16 के तहत गंगा नदी के बाँये तट पर 0.00 कि0मी0 से 7.30 कि0मी0 (मथार दियारा से मुंगेर घाट-टिकरामपुर 4.77कि0मी0) के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य से संबंधित जाँच प्रतिवेदन उड़नदस्ता अंचल-01, पटना द्वारा उलब्ध कराया गया। जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1547 दिनांक 22.07.2019 द्वारा निलंबित कर विभागीय पत्रांक-2295 दिनांक 06.11.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के जवाब को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-08 दिनांक 07.01.2021 द्वारा निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(i) प्रश्नगत कार्य के प्राक्कलन में एप्रोन से काटी गयी मिट्टी/लोकल बालू की मात्रा में से ही जियो बैग भरने में लगने वाले बालू की मात्रा 135454.06 घनमी0 के लिए अनुसूचित दर के मद सं0- 5.1.27 E/W in Excavation एकरारनामा के मद सं0-5 के दर प्रावधानित किया गया। जबकि एकरारनामा के मद सं0-5 के दर विशलेषण के दूसरे Event for Carrying and desposal of excavated earth, So obtained to a distance upto 50 mtr. and lift of 1.5 mtr. के लिए 6 अद्द Unskilled Labour का प्रावधान है, को बिना हटाये ही प्राक्कलन तैयार किया गया एवं प्राक्कलन की स्वीकृति भी उसी रूप में प्रदान किया गया तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप ही बिना वास्तविक रूप से कराये गये कार्य की मात्रा का भुगतान करने के कारण कुल 73,81,585.00 रूपये का अधिकाई भुगतान किया गया। (ii) एकरारनामा के मद सं0-04 एवं 05 के तहत बिना मिट्टी कार्य कराये ही कुल 5,13,92,391/- रूपये का गलत ढंग से अधिकाई भुगतान करना। (iii) प्रश्नगत कार्य में वांछित चौड़ाई 21.60 मी0 में एप्रोन कराये जाने के लिए निम्न विशिष्टि के एप्रोन लेईंग का कार्य (E/W in Excavation) कराने के उपरांत Firm Land पर नहीं कराकर नदी के तरफ आगे बढ़कर अधिक भाग Filled Earth पर कराने से लगभग 4700 मी0 में कराया गया रिभेटमेंट कार्य उपयोगी सिद्ध नहीं हो सका। क्योंकि प्रथम बाढ़ 2018 में ही अधिकांश लम्बाई लगभग 3730 मी0 में कराया गया कार्य क्षतिग्रस्त हो गया एवं कार्य पर किया गया व्यय निष्फल होना परिलक्षित होता है। (iv) प्राक्कलन में कुल 7,66,422 घनमी0 मिट्टी काटने का प्रावधान किया गया है एवं प्राक्कलन में Unskilled मजदूर से सम्पूर्ण मिट्टी कटाई कराए जाने का प्रावधान है जिसका दर रु॰ 114.80 घनमी0 मिट्टी दिया गया है। प्राक्कलन में प्रावधानित 766422 घनमी0 मिट्टी की कटाई अल्प अवधि मात्र 2 से 3 माह में मजदूर से कराया जाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे कार्यों में मिट्टी कटाई मशीन (Excavator) से करायी जाती है। मशीन से मिट्टी काटने का Schedule Rate में दर 56.80 प्रति घनमी0 है। इस प्रकार संवेदक को अनियमित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से योजना के प्रारम्भ से ही गलत प्राक्कलन का निर्माण किया गया।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें सभी आरोप को अप्रमाणित पाया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन55 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है जिस पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
अतएव वर्णित तथ्यों के संदर्भ में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री अजय कुमार(आई0डी0-जे 3949), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया को निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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30 सितम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1214--श्री सुनील कुमार (आई0डी0-जे 7740) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगड़िया के पदस्थापन अवधि के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1, खगडिया के अन्तर्गत बाढ़ 2018 के पूर्व एजेण्डा संख्या-126/16 के तहत गंगा नदी के बाँये तट पर 0.00 कि0मी0 से 7.30 कि0मी0 (मथार दियारा से मुंगेर घाट-टिकरामपुर 4.77कि0मी0) के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य से संबंधित जाँच प्रतिवेदन उड़नदस्ता अंचल-01, पटना द्वारा उलब्ध कराया गया। जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1546 दिनांक 22.07.2019 द्वारा निलंबित कर विभागीय पत्रांक-2078 दिनांक 26.09.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के जवाब को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-07 दिनांक 07.01.2021 द्वारा निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(i) प्रश्नगत कार्य के प्राक्कलन में एप्रोन से काटी गयी मिट्टी/लोकल बालू की मात्रा में से ही जियो बैग भरने में लगने वाले बालू की मात्रा 135454.06 घनमी0 के लिए अनुसूचित दर के मद सं0-5.1.27 E/W in Excavation एकरारनामा के मद सं0-5 के दर प्रावधानित किया गया। जबकि एकरारनामा के मद सं0-5 के दर विशलेषण के दूसरे Event for Carrying and desposal of excavated earth, So obtained to a distance upto 50 mtr. and lift of 1.5 mtr. के लिए 6 अद्द Unskilled Labour का प्रावधान है, को बिना हटाये ही प्राक्कलन तैयार किया गया एवं प्राक्कलन की स्वीकृति भी उसी रूप में प्रदान किया गया तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप ही बिना वास्तविक रूप से कराये गये कार्य की मात्रा का भुगतान करने के कारण कुल 73,81,585.00 रूपये का अधिकाई भुगतान किया गया। (ii) एकरारनामा के मद सं0-04 एवं 05 के तहत बिना मिट्टी कार्य कराये ही कुल 5,13,92,391/- रूपये का गलत ढंग से अधिकाई भुगतान करना। (iii) प्रश्नगत कार्य में वांछित चौड़ाई 21.60 मी0 में एप्रोन कराये जाने के लिए निम्न विशिष्टि के एप्रोन लेईंग का कार्य (E/W in Excavation) कराने के उपरांत Firm Land पर नहीं कराकर नदी के तरफ आगे बढ़कर अधिक भाग Filled Earth पर कराने से लगभग 4700 मी0 में कराया गया रिभेटमेंट कार्य उपयोगी सिद्ध नहीं हो सका। क्योंकि प्रथम बाढ़ 2018 में ही अधिकांश लम्बाई लगभग 3730 मी0 में कराया गया कार्य क्षतिग्रस्त हो गया एवं कार्य पर किया गया व्यय निष्फल होना परिलक्षित होता है। (iv) प्राक्कलन में कुल 7,66,422 घनमी0 मिट्टी काटने का प्रावधान किया गया है एवं प्राक्कलन में Unskilled मजदूर से सम्पूर्ण मिट्टी कटाई कराए जाने का प्रावधान है जिसका दर रु॰ 114.80 घनमी0 मिट्टी दिया गया है। प्राक्कलन में प्रावधानित 766422 घनमी0 मिट्टी की कटाई अल्प अवधि मात्र 2 से 3 माह में मजदूर से कराया जाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे कार्यों में मिट्टी कटाई मशीन (Excavator) से करायी जाती है। मशीन से मिट्टी काटने का Schedule Rate में दर 56.80 प्रति घनमी0 है। इस प्रकार संवेदक को अनियमित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से योजना के प्रारम्भ से ही गलत प्राक्कलन का निर्माण किया गया।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें सभी आरोप को अप्रमाणित पाया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है जिस पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
अतएव वर्णित तथ्यों के संदर्भ में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री सुनील कुमार (आई0डी0-जे 7740), तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया को निलंबन मुक्त करते हुए आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।56 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 5 अक्तूबर 2021 सं0 22/नि0सि0(पट0)03-07/2005-1235--श्री रियाज अहमद आतिश, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) के विरूद्ध उक्त पदस्थापन अवधि में विभिन्न आरोपों के संबंध में तीन अलग-अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसका सार निम्नवत है :-
(क) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-07/2005 -श्री आतिश के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला (नवादा) में पदस्थापन काल से संबंधित श्री रामदेव प्रसाद सिंह, सहायक अभियंता, सेवानिवृत से प्राप्त परिवाद पत्र की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत प्रथम द्रष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी :-
(I) व्यक्तिगत दूरभाष सं0-25090 के कॉल शुल्क 5,934/- (पाँच हजार नौ सौ चौतीस रूपये) का भुगतान सरकारी मद से करना।
(II) अधीनस्थ सहायक अभियंता के एक ही वेतन को दो बार निकासी करने के फलस्वरूप उस अधिकारी विशेष के सामान्य भविष्य निधि मद में 660/- (छः सौ साठ रू0) की कटौती राशि करवाकर सरकार को इतनी ही राशि का वित्तीय घाटा लगवाना।
(III) अनुसेवकों को वर्दी आपूर्ति में घोटाला करना। दस (10) व्यक्तियों को 2,817/- (दो हजार आठ सौ सतरह रू0) की देय वर्दी आपूर्ति पर 10,000/- (दस हजार) रू0 का भुगतान दिखाना। इस तरह सरकार को 7,183/- (सात हजार एक सौ तिरासी रू0) की वित्तीय क्षति पहुँचाना।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड हेतु श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं उक्त तीनों आरोपों में से मात्र दो आरोप सं0-(I) एवं (III) प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए पाँच (5) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
(ख) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-09/2006 -श्री आतिश के विरूद्ध दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ (रोहतास) स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में कतिपय अनियमितता बरतने का आरोप है। तत्संबंधी प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री आतिश के विरूद्ध निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पाये गये :-
(I) वर्ष 2003-04 में दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन हेतु निविदाओं के निस्तार में अनियमितता बरतने, दर निर्धारण में गडबड़ी करने एवं विभागीय क्रय समिति के समक्ष पूर्ण तथ्यों को नहीं रखने के पीछे सरकार को वित्तीय क्षति पहुँचाने की आपराधिक मंशा थी रू0 4,99,777/-के स्थान पर रू0 6,55,544/-प्रति सेट की दर इन्होंने अनुमोदित किया एवं अतिरेक भुगतान कराया।
(II) जाँच पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य है कि दिनांक 17.12.03 को आयोजित क्रय समिति के लिए तैयार संलेख में पूर्व के आमंत्रित दो निविदाओं के दर को उद्धत नहीं करना एवं मौखिक रूप से इसकी जानकारी क्रय समिति को नहीं देना इनके आपराधिक मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकर्त्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुँचाना था। इस कारण मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकर्त्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुँचाना था। इस कारण विभाग को प्रति सेट 1,55,000/- रू0 की दर से दो हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति पर 3,10,000/- (तीन लाख दस हजार) रू0 का घाटा विभाग को उठाना पड़ा।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभाग द्वारा दस (10) वर्षों तक शत-प्रतिशत पेंशन के भुगतान पर रोक का दण्ड प्रस्तावित किया गया।
उक्त प्रमाणित आरोपोें के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर से असहमत होते हुए पूर्व के प्रस्तावित दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।
(ग) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-11/2005- श्री आतिश, तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन को उनके पदस्थापन अवधि में निम्न आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी।
(I) मे0 केशरी वायर प्रोडक्टस प्रा0 लि0, मोगलपुरा, पटना सिटी को वर्ष 2004 में विभिन्न प्रमंडलों के लिए बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का आदेश दिया गया जिसका क्रयादेश सं0-44 दिनांक 31.01.14 था, जिसमें जल पथ प्रमंडल, गया के लिए 27मे0 टन बी0ए0 वायर की आपूर्ति 30,650/-रू0 प्रति मे0 टन की दर से करना था। उनके द्वारा इस क्रयादेश को पत्रांक-626, दिनांक 24.09.09 द्वारा आंशिक संशोधन करते हुए 17.30 मे0 टन बी0ए0 वायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर57 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्यूटी की वृद्धि करके (अर्थात रू0 1,226/- प्रति मे0 टन) कुल रू0 21,209,80 (इक्कीस हजार दो सौ नौ रू0 अस्सी पैसे) का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया, जो नियमानूकुल नहीं है।
(II) उसी फर्म को वर्ष 2004 में क्रयादेश सं0-160, दिनांक 15.06.04 द्वारा शीर्ष कार्य प्रमंडल, वीरपुर एवं गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा को 140मे0 टन बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश सं0-248, दिनांक 03.09.04 द्वारा संशोधित करते हुए 134.63 मे0 टन बी0 ए0 वायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर प्रति मे0 टन में 4 प्रतिशत अधिक एक्साईज ड्यूटी के वृद्धि करके कुल 1,64,248/-रू0 का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया जो नियमानुकूल नहीं है। इस प्रकार कुल 1,85,458.40 रू0 (एक लाख पचासी हजार चार सौ अठावन रू0 चालीस पैसे अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश उनके द्वारा दिया गया, जिसके लिए वे दोषी हैं।
जाँच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर से असहमत होते हुए कुल 1,80,937.62 (एक लाख अस्सी हजार नौ सौ सैतीस रू0 बासठ पैसे) की सरकारी क्षति की वसूली तक पेंशन से 50 प्रतिशत की राशि की वसूली तथा 5 वर्ष तक 20 प्रतिशत पेंशन पर रोक एवं एक वर्ष तक 5 प्रतिशत पेंशन पर रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
(2) उपर्युक्त तीनों संचिकाओं में अलग अलग विभागीय कार्यवाहियों के प्रतिफलों को एक साथ समेकित कर विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी और समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री आतिश द्वारा अपने सेवाकाल में मनमाने ढंग से विभागीय कार्यों का सम्पादन किया जाता रहा है एवं सरकार को इनके कृत्यों से वित्तीय क्षति पहुँची है जबकि इन्हें समय रहते हुए तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव द्वारा आगाह भी किया गया था।
(3) उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रियाज अहमद आतिश के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43बी0 में अन्तर्निहित प्रावधानों के अन्तर्गत संचालित विभागीय कार्यवाही एवं पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री आतिश के विरूद्ध सभी आरोपों को समेकित करते हुए "आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस (10) वर्षों तक रोक" का दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। विभागीय अधिसूचना सं0-1152, दिनांक 09. 09.11 द्वारा सरकार का उक्त निर्णय श्री रियाज अहमद आतिश, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को संसूचित किया गया। (4) उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री आतिश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-18651/2011 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 16.02.12 को न्याय निर्णय पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने न्यायाधीश में अंकित किया है कि -
"Considering all aspects of the matter, the court is of the considered opinion that even if there is a misconduct on the part of the petitioner causing pecuniary loss to the Government or that it may not necessarily relate to the extent of pecuniary loss only, the nature of the punishment raises a serious issue with regard to the fundamental rights of the petitioner under Article 21 of the Constitution of India. He cannot be visited with the punishment of a nature which virtually takes away his right to life. In his days of superannuation, with no source of income, he undoubtedly stands deprived of his life and liberty without any pension. It can hardly be a palliative for him that it was to be so for 10 years only. Those ten years prove so arduous that he may not survive to see the period thereafter.
न्यायालय ने न्यायादेश के अंतिम पारा में यह अंकित किया है :- The court finds it difficult to accept the submission on behalf of the petitioner that pending such a fresh decision by the respondents, they may be directed at least to pay requisite pension to him for survival. To do so by the Court at this stage may amount to pre-judging issues to the prejudice of the respondents. Liberty is given to the petitioner that he may seek such interim relief before the respondents themselves and which the court in fairness expects that respondents as a welfare state shall take a decision forthwith without any unreasonable delay and a final decision on the quantum within a maximum period of four months from the date of receipt and/or production of a copy of this order.
(5) माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा अपना अभ्यावेदन विभाग में दि0-12.03.12 को समर्पित किया गया। श्री आतिश से प्राप्त अभ्यावेदन के आलोक में उन्हें दि0- 12.04.12 को अपना पक्ष रखने का निदेश दिया गया। निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर निम्न तथ्य रखा गयाः-
(I) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय में उल्लेखित माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध आरोप साबित होने का कोई ठोस वैद्विक आधार नहीं बनता है।58 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (II) तीनों आरोपों पर अलग-अलग दंडादेश की प्रकृति, समय एवं 100 प्रतिशत पेंशन पर 10 साल तक रोक के परिमाण का प्रश्न पर माननीय उच्च न्यायालय का निदेश दि0-16.02.12 द्वारा उनके गुण दोष पर पुनर्विचार करने का अनुरोध है। यदि सरकार को वितीय क्षति हुई है, तो पेंशन से उस घाटे को आसान किस्तों में वसूला जा सकता है।
(III) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 41 की ओर माननीय उच्च न्यायालय ने ''जीने का अधिकार'' एवं 'सहायता पाने का अधिकार'' जो जीवन की संध्या में बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्ता के समय 10 साल तक 100 प्रतिशत पेंशन पर रोक ''जीने का अधिकार'' के आत्मा के खिलाफ है, जो संविधान की धारा अनुच्छेद 21 में प्रावधानों को वंचित करता है एवं न्यायालय के आंतरिक चेतना को गंभीर रूप से झिझोर कर दुखित करता है।
(Iv) जीवन की संध्या में शान्तिपूर्ण समय अन्य राजपत्रित पदाधिकारियों की तरह बिताने के लिए आदेश सं0-1152 दि0-09.09.2011 पर रोक लगाया जाय या तत्काल 95 प्रतिशत पेंशन पर से रोक हटाया जाय जबतक पुनर्विचार/पुनर्समीक्षा याचिका आवेदन पर सेवा के अधिकार के तहत समय रहते अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता है।
(6) श्री आतिश द्वारा रखे गये तथ्यों के आलोक में मामले की पुनः समीक्षा की गई तथा समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :-
(क) श्री आतिश द्वारा कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदला, नवादा में पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता से राज्य सरकार को 13,200/-रू0 की क्षति हुई।
(ख) श्री आतिश द्वारा दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 3,10,000/- की क्षति हुई।
(ग) श्री आतिश द्वारा निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन के रूप में पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 1,80,937.62 रू0 की क्षति हुई।
(7) इस प्रकार श्री आतिश के कार्यकलाप से कुल 5.04 लाख रू0 की क्षति राज्य सरकार को हुई। समीक्षा में यह पाया गया कि शत-प्रतिशत पेंशन रोकने से सेवानिवृत कर्मी को जिन्दगी जीने में कठिनाई होगी। उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी न्याय निर्णय में 100 प्रतिशत पेंशन रोकने से जीने के अधिकार से वंचित रखने की बात कही गई है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सरकार द्वारा विचारोपरांत, श्री आतिश के पक्ष मे असीम अनुकम्पा दर्शाते हुए अधिसूचना सं0-1152, दि0-9.9.11 द्वारा संसूचित आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस वर्षो तक रोक दंड को संशोधित करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-260, दिनांक- 25.02.2013 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया। 1. ''पचास प्रतिशत पेंशन पर दस वर्षो तक रोक''। उक्त दंड के विरूद्ध श्री आतिश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No -20248/2013 दायर किया गया जिसमें दिनांक-27.06.2018 को पारित न्यायादेश में निम्न निर्णय पारित किया गया- Since the petitioner has an adequats alternative statutory remedy by way of asheas/ review before the authorities under rule 24(l) of Bihar Government servants (classification, control and Atheal) rule 2015 (her in after to as" the Bihar C.C.A. Rules, 2005) the rea of sititioner may be considered by the statutory authority in light of the legal patitions as-discussed in earlies order dated 16-02-2012 hassed on the sititioner's writ sitition be aring CWJC No- 18651 of 2012." माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा अपना Review आवेदन समर्पित किया गया। जिसकी तकनीकी समीक्षा की गई। जिसके फलस्वरूप निम्न तथ्य पाये गएः- (1) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं पुनर्विलोकन आवेदन में दिए गए साक्ष्य के आलोक में फुलवरिया नहर प्रमंडल सिरदला के पदस्थापन अवधि में व्यक्तिगत दूरभाष संख्या-25090 के कॉलशुल्क के रूप में रू 5934/-(पांच हजार नौ सौ चौंबीस रूपये) भुगतान सरकारी मद से किए जाने को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अतिकारातित एवं अनियमित माना गया है। परन्तु दूरभाष का अधिष्ठापन कार्यहित में किया गया, बताया गया। व्यक्तिगत दूरभाष के कॉलशुल्क को सरकारी मद से भुगतान को सही नहीं ठहराया जा सकता। इसी प्रकार वर्दी आपूर्ति में 7183/-(सात हजार एक सौ तिरासी रूपए) का किया गया भुगतान अनियमित एवं अतिकारित माना जा सकता है। श्री आतिश द्वारा कोई नया तथ्य नहीं देने से आरोप प्रमाणित होने की पुष्टि होती है। (2) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं श्री आतिश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिए गए तथ्यों के आलोक में वर्ष 2003-04 में निदेशक क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन निदेशालय, पटना के पदस्थापन अवधि में दुर्गावती परियोजना अन्तर्गत भीतरी बांध एवं बादलगढ़ में हाइमास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन के संबंधित निविदा निष्पादन में पूर्व में कतिपय तकनीकी कारणों से रद्द किए गए निविदाआें के संबंध में संयोजक के रूप में तैयार किए गए निविदा संलेख में निविदा समिति के समक्ष नही रखने के कारण न्यूनतम निविदादाता में0 एक्सेल को प्रति हाईमास्ट रू 6,55,544/- (छः लाख पचपन हजार पांच सौ चौबालिस) का दर अनुमोदित हो गया जबकि एक माह के अन्दर इसी फर्म द्वारा प्रथम निविदा में रु0 5,98,000/- (पाँच लाख अंठानवे हजार रूपये) एवं द्वितीय निविदा में 4,97,777/- (चार लाख संतानवे हजार सात सौ सतहत्तर) का दर उद्धत किया गया जो कतिपय तकनीकी कारणों से रद्द् कर दिया गया था। उक्त दोनों निविदा में मो0 एक्सेल ही न्यूनतम निविदादाता था/ इस प्रकार आतिश द्वारा संयोजक के रूप में यदि तथ्यों को निविदा समिति के समक्ष59 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उपस्थापित किए गए संलेख में लाई गई होती तो दर वार्ता कर मे0 एक्सेल को कम दर पर निविदा दी जा सकती थी एवं सरकार को प्रतिसेट 1.55 लाख की क्षति होने से रोकी जा सकती थी। इस प्रकार कोई नया तथ्य नहीं देने से यह आरोप प्रमाणित होता है। (3) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं श्री आतिश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिए गए तथ्यों के आलोक में श्री आतिश के क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन निदेशालय में निदेशक के पद पर पदस्थापन अवधि में विभिन्न प्रमंडलों के लिए विभागीय क्रय समिति के अनुशंसा के आलोक में बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश संख्या-44, दिनांक-31.01.2004 एवं 160,दिनांक-15.06.2004 द्वारा क्रमशः 27 मी0टन एवं 140 मी0टन मेसर्स केसरी वायर प्रोडक्ट प्रा0 लि0, पटना को दिया गया, जिसके आलोक में 9 मी0टन मात्र की आपूर्ति 30.06.2004 के पूर्व निर्गत कार्यादेश के अनुमोदित दर पर लिया गया। कतिपय कारणों से अवशेष सामग्री की आपूर्ति नहीं होने के कारण उक्त तिथि के बाद एकतरफा आपूर्तिकर्त्ता के द्वारा 12% एक्साइज ड्यूटी की मांग की गई तो दुसरी तरफ नेपाली आपूर्त्तक प्रीमियर वायर प्रा0लि0 द्वारा 4% इन्ट्री टैक्स की मांग की गई। दिनांक 14.8.2004 को केन्द्रीय क्रय समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रीमियर वायर प्रा0लि0, विराटनगर, नेपाल से सम्पर्क कर दर में कोई बढ़ोतरी नही ंहोने पर उन्हीं से सामग्री प्राप्त करने के निर्णय के विपरीत मेसर्स केसरी वायर प्रोडक्टस प्रा0लि0, पटना सिटी को श्री आतिश द्वारा पूर्व क्रयादेश को बिना केन्द्रीय क्रय समिति की अनुशंसा प्राप्त किए क्रय समिति के अनुशंसित दर से 4% एक्साईज ड्यूटी के रूप में अतिरिक्त दर देने का संशोधित क्रयादेश निर्गत करने से कुल 1,85,458/-(एक लाख पचासी हजार चार सौ अंठावन रूपये) अतिरिक्त भुगतान हुआ जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अनियमित एवं अतिकारित बताया गया है। इस प्रकार श्री आतिश पर अधिरोपित उक्त आरोप प्रमाणित परिलक्षित होता है। इस प्रकार श्री आतिश ने अपने अभ्योवदन में जो वित्तीय क्षति हुई है उसकी भरपाई कर दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा श्री आतिश को दिए गए उक्त दंड के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत अपील दायर करने का निदेश दिया गया। श्री आतिश से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-454 दिनांक 01.03.2019 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है- (1) श्री आतिश द्वारा हुए वितीय क्षति मो0 5,08,575/-(पांच लाख आठ हजार पांच सौ पचहत्तर रूपये मात्र) तक की वसूली करते हुए अधिसूचना सं0-260 दिनांक-25.02.2013 में दिए गए दंड को संशोधित करते हुए 10% पेंशन की राशि पर 5 वर्षो तक रोक। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री रियाज अहमद आतिश, तत्का0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) के द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षा में यह उल्लेख किया गया है कि श्री आतिश द्वारा इनके विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है। अतएव श्री आतिश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को तकनीकी समीक्षा के आलोक में अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। अतः उक्त निर्णय श्री रियाज अहमद आतिश, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हसंतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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18 अक्तूबर 2021
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-04/2019-1340--श्री उपेन्द्र प्रसाद शर्मा (आई0डी0 सं०-जे-7916), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को सोन नहर अंचल आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्यों में बरती गयी गंभीर अनियमितता के लिए सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-1670 दिनांक 06.08.2019 द्वारा निलंबित किया गया था। तदुपरांत आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अग्रेत्तर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
श्री शर्मा दिनांक 31.05.2021 को सेवानिवृत हो चुके हैं। अतएव श्री शर्मा, सहायक अभियंता (सेवानिवृत) को सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक 31.05.2021 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री उपेन्द्र प्रसाद शर्मा, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को दिनांक 31.05. 2021 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हसंतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।60 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 18 अक्तूबर 2021 सं0 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-07/2018/1341--श्री धर्मेन्द्र कुमार (आई0डी0-4495) तदेन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंंडल-02, झंझारपुर, मधुबनी द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के संबंध में योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-यो0स्था0 04/2-29/2018/6302, यो0 वि0, दिनांक 27.11.2018 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए अनुशासनिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्णय लिया। उक्त निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय पत्रांक-538 दिनांक 11.03.2019 द्वारा श्री कुमार से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। आरोप का सार- मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना अन्तर्गत क्रियान्वित योजना का मासिक प्रगति प्रतिवेदन एवं अपूर्ण योजना का विहित प्रपत्र में फोटोग्राफ के साथ प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं करा कर विभागीय आदेशों/निदेशों का अवहेलना करना, योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-1431 दिनांक 20.03.2018 द्वारा कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, झंझारपुर से मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना अन्तर्गत माननीय सदस्य, बिहार विधान मंडल द्वारा अनुशंसित अपूर्ण योजनाओं का प्रतिवेदन प्रत्येक माह की पाँचवीं तारीख तक उपलब्ध नहीं कराये जाने के लिए स्पष्टीकरण के साथ प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। लेकिन कार्यपालक अभियंता कार्य प्रमंडल-2, झंझारपुर, मधुबनी द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। पुनः विभागीय पत्रांक-2155 दिनांक 30.04.2018 एवं पत्रांक-3009 दिनांक 20.06.2018 से स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु स्मारित भी किया गया, लेकिन कार्यपालक अभियंता स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2, झंझारपुर, मधुबनी द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। योजनाओं का ससमय प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने के कारण उन्हें पूर्ण कराने का गहन अनुश्रवण नहीं किया जा सका, जिस कारण मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना जैसी जनोपयोगी योजनाओं के कार्यान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया जिसमें योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-1906 दिनांक 16.04.18 के आलोक में दिनांक 03.05.2018 को प्रभार ग्रहण करने का वर्णन करते हुए कहा गया कि योजना एवं विकास विभाग द्वारा किया गया स्पष्टीकरण उनके पदस्थापन के पूर्व की अवधि से संबंधित था, प्रभार ग्रहण करने के उपरांत योजना एवं विकास विभाग द्वारा मांगे गये सभी योजनाओं का प्रगति प्रतिवेदन उनके द्वारा ससमय उच्चाधिकारियों को समर्पित किया जाता रहा है। श्री कुमार द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रभार प्रतिवेदन एवं भेजे गये प्रगति प्रतिवेदन की छायाप्रति भी उपलब्ध कराया गया।
मामले की सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में जल संसाधन विभाग के पत्रांक-1216 दिनांक 18.06. 19 द्वारा श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर योजना एवं विकास विभाग से मंतव्य की मांग की गई।
योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-5387 दिनांक 13.12.2019 द्वारा समर्पित मंतव्य में निम्न बातों का उल्लेख किया गया -
"श्री कुमार के विरूद्ध आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत निदेशानुसार कहना है कि उनका स्पष्टीकरण पूर्णरूपेण संतोषप्रद नहीं है। यह सही है कि उनके द्वारा कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर का प्रभार दिनांक 03.05. 2018 को ग्रहण किया गया है लेकिन उनके द्वारा दिनांक 17.05.2018, 18.05.2018 को आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में भाग लिया गया है तथा इस बैठक में जिले से प्राप्त अपूर्ण योजनाओं के प्रतिवेदन से संबंधित त्रुटि के संबंध में विभागीय पत्रांक-2499 दिनांक 23.05.2018 तथा पुनः विभागीय पत्रांक-3009 दिनांक 20.06.2018 द्वारा कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर, मधुबनी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी जो श्री धर्मेन्द्र कुमार, कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित नहीं किया गया, जिसके लिए वे दोषी है तथा उनका स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।" योजना एवं विकास विभाग से प्राप्त उक्त मंतव्य पर श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-122 दिनांक 29.01.2020 द्वारा अपना पक्ष रखने हेतु निदेशित किया गया। श्री कुमार द्वारा इस संबंध में अपना पक्ष समर्पित किया गया जिसमें लगभग पूर्व के बातों को ही पुनः वर्णित किया गया। विभागीय समीक्षा- श्री कुमार द्वारा योजना एवं विकास विभाग के मंतव्य पर अपना पक्ष रखने के क्रम में उल्लेख किया गया कि पत्रांक-2499 दिनांक 23.05.2018 द्वारा पूछा गया स्पष्टीकरण कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-01 एवं 02 को प्रेषित है। यह पत्र कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर को प्रेषित नहीं रहने के कारण उनके द्वारा स्पष्टीकरण नहीं समर्पित किया गया। परन्तु पत्रांक-3009 दिनांक 20.06.2018 से पूछा गया स्पष्टीकरण जो कार्यपालक अभियंता स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2, झंझारपुर को भी प्रेषित है का जवाब इस आधार पर देना कि उक्त पत्र पूर्व के स्पष्टीकरणों का स्मार पत्र है, स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि इस पत्र का जवाब या इस पत्र के आलोक में पूर्व के अपूर्ण योजनाओं के प्रतिवेदन से संबंधित त्रुटि का निराकरण करते हुए विभाग को प्रतिवेदन भेजने का कोई साक्ष्य श्री कुमार द्वारा अपना पक्ष रखने के क्रम में पत्र के साथ संलग्न नहीं किया गया। अतः योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-3009 दिनांक 20.06.2018 द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने के लिए श्री कुमार दोषी पाये गये। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।61 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त निर्णय के आलोक में श्री धर्मेन्द्र कुमार तदेन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2, झंझारपुर, मधुबनी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित किया जाता है :-
"एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" श्री कुमार को उक्त दण्ड संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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26 अक्तूबर 2021
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-04/2009-1369--श्री चन्द्रशेखर पासवान (आई0डी0-3159), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अन्तर्गत वर्ष 2000-01 में जानकी शाखा नहर के पुर्नस्थापन कार्य एवं सी0डी0 संरचना की मरम्मति संबंधित एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 एवं 29F2/2000-01 के तहत कराये गये कार्य का भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक श्री किशोर जयसवाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद सं0-14371/07 एवं 15090/07 दायर किया गया। उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने हेतु विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री पासवान के विरूद्ध "कार्यपालक अभियंता के द्वारा प्रेषित कार्य प्रतिवेदन को बिना जाँचे ही भुगतान हेतु आवंटन के लिए अनुशंसा के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-577, दिनांक 05.04.2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर श्री पासवान से विभागीय पत्रांक-98 दिनांक 22.01.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री पासवान द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण श्री पासवान को आरोपमुक्त करने के प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मामले की पुनः नये सिरे से जाँच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त को Remand कर दिया गया, तदोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः नये सिरे से जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री पासवान से विभागीय पत्रांक-1816 दिनांक 09.10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री पासवान से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाए जाने के फलस्वरूप बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करते हुए श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं0-280 दिनांक 11.02.2019 द्वारा "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षो तक" का दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया गया है। उपरोक्त दण्ड के विरूद्ध श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित की गयी है। पुनर्विलोकन अर्जी में दिये गये बचाव बयान का मुख्य अंश निम्नवत है :- कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अनुरोध के आलोक में नियंत्री पदाधिकारी के रूप में कार्यपालक अभियंता का पत्र को संलग्न करते हुए पत्रांक-318 पुर्णियां दिनांक 14.03.2005 द्वारा सृजित दायित्व के भुगतान हेतु अनुशंसा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियां को किया गया। आवंटन की माँग इसके पूर्व लंबित कार्यों को पुरा होने तथा भुगतान के संबंध में मुख्य अभियंता, पुर्णियाँ के माध्यम से भी विभाग को पत्राचार किए जा चुके थे। अतएव इन कार्यों हेतु आवंटन/भुगतान हेतु मेरे स्तर से भी कार्यपालक अभियंता के अनुशंसा पर मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ से अनुरोध किया गया। समीक्षा -श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री पासवान से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षों तक का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा अपना पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। उक्त पुनर्विलोकन अर्जी में दिये गये अधिकांश तथ्य वही है जो इनके द्वारा पूर्व में समर्पित बचाव बयान में उल्लेखित है जिसकी समीक्षोपरांत उन्हें दण्ड अधिरोपित किया गया है। इनके द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य/साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव इनका पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री पासवान से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-280 दिनांक 11.02.2019 द्वारा अधिरोपित दण्ड "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षों तक" को यथावत रखने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री चन्द्रशेखर पासवान (आई0डी0-3159) तत्का0 अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-280 दिनांक 11.02.2019 द्वारा अधिरोपित दण्ड "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षों तक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।62 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 29 अक्तूबर 2021 सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1383--श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी (आई0डी0-जे 8098) तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ शिविर-आरा के विरूद्ध संचिका - 01/लोक (ग्रा0का0वि0)08/2011 में दर्ज कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, जलपथ प्रमंडल, नालंदा एवं अन्य के विरूद्ध संदलपुर मौजा में मनरेगा के अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने के आरोप संबंधी परिवाद पर दिनांक 04.05.2018 को सुनवाई के दौरान माननीय सदस्य, न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया।
उक्त आदेश के आलोक में श्री द्विवेदी से आदेश में वर्णित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1444 दिनांक 06.07. 2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री द्विवेदी द्वारा जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार को पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश संख्या-120 सहपठित ज्ञापांक-2459 दिनांक 29.11.2018 द्वारा निम्न वर्णित आरोप गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
आरोप-श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी, तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ द्वारा अपने पदस्थापन काल में संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में संदलपुर मौजा अन्तर्गत बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप के उत्तरदायी है।
कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप मिट्टी कटाई नहीं कराने, संवेदक को 2 फीट से अधिक मिट्टी काटने से रोकने के प्रयास मेें असफल रहने, स्वीकृत प्राक्कलन में मिट्टी कटाई हेतु अस्थायी फसल क्षतिपूर्ति हेतु मुआवजा एवं निजी जमीन से ली जाने वाली मिट्टी कीमत का प्रावधान रहने के बावजूद परिवादी को उसका भुगतान नहीं किए जाने से माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि ₹ 85639/- के अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के कारण State Exchequer को ₹ 92117/- रुपये की वित्तीय क्षति के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1025 दिनांक 19.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा State Exchequre को हुई वित्तीय क्षति के लिए उत्तरदायी मानते हुए कुल वित्तीय क्षति 92117/- रुपये में समानुपातिक वसूली का मंतव्य भी दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2598 दिनांक 16.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री द्विवेदी द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 27.01.2018 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया।
श्री द्विवेदी द्वारा प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई कि परिवादी श्री ब्रह्यदेव प्रसाद, पिता-स्व0 बिहारी महतो, ग्राम-संदलपुर (नालंदा) द्वारा माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के समक्ष दिनांक 28.03.11 को परिवाद दायर किया गया। जबकि परिवादी द्वारा संबंधित प्रमंडलीय/अंचलीय कार्यालय को परिवाद दायर किया जाना चाहिए था ताकि परिवाद का त्वरित एवं न्यायसंगत निष्पादन किया जाता। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बयान में यह उल्लेख नहीं किया है कि परिवादी के निजी जमीन से मिट्टी नहीं ली गई या जमीन मालिक की सहमति से मिट्टी काटी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि जमींदारी बांध के निर्माण कार्य के दौरान अधिक गहराई में बिना अनुमति के निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने से परिवादी को सात वर्षों तक फसल की हानि एवं आर्थिक क्षति हुई।
जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ, नालंदा अन्तर्गत संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का एकरारनामा संख्या-8F2/2010-11 से कराए गए कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में निजी जमीन से मिट्टी कटाई एवं अस्थाई फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किए जाने से माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के कारण State Exchequer को 92117/- की हुई क्षति के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेदार है। श्री द्विवेदी द्वारा प्राप्त जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित है।
अतएव उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी (आई0डी0-जे 8098) तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ, शिविर-आरा को निम्न अनुमोदित दण्ड विभागीय अधिसूचना सं0-1174 दिनांक 29.09.2020 द्वारा संसूचित एवं अधिरोपित किया गया है - (i) निन्दन (वर्ष 2010-11 एवं 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी, तत्का0 कनीय अभियंता सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ, शिविर-आरा का पत्रांक-शून्य दिनांक 09.11.20 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। प्राप्त अर्जी की समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा कराई गई।63 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 विभागीय समीक्षा-श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में अंकित तथ्यों का विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा तकनीकी समीक्षा की गई। जिसमें श्री द्विवेदी समर्पित अर्जी को अस्वीकृत करते हुए कहा गया है कि अर्जी में कोई भी नया तकनीकी तथ्य/अभिलेख अंकित नहीं किया गया है। पूर्व में प्रस्तुत जवाब को ही अर्जी में अंकित किया गया है जिसके समीक्षा के आलोक में श्री द्विवेदी को दंड अधिरोपित किया गया है। श्री द्विवेदी द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में गैर तकनीकी बिन्दुओं का भी उल्लेख किया गया है। जिसकी समीक्षोपरांत यह मंतव्य अंकित किया गया है कि श्री द्विवेदी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत संचालित की गई एवं आरोप प्रमाणित होने पर विधि सम्मत दण्ड अधिरोपित किया गया है। उक्त समीक्षोपरांत श्री द्विवेदी के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
अतएव उक्त अनुमोदित निर्णय श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी, तत्कालीन कनीय अभियंता, सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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29 अक्तूबर 2021
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1384--श्री जफर रसीद खाँ (आई0डी0-3393) तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, भागलपुर के विरूद्ध संचिका - 01/लोक (ग्रा0का0वि0)08/2011 में दर्ज कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, जलपथ प्रमंडल, नालंदा एवं अन्य के विरूद्ध संदलपुर मौजा में मनरेगा के अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने के आरोप संबंधी परिवाद पर दिनांक 04.05.2018 को सुनवाई के दौरान माननीय सदस्य, न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया।
उक्त आदेश के आलोक में श्री जफर रसीद खाँ से, आदेश में वर्णित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1447 दिनांक 06.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह द्वारा जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार को पारित आदेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-100 दिनांक 08.01.2019 द्वारा निम्न वर्णित आरोप गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 मेें विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
आरोप-श्री जफर रसीद खाँ, तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, भागलपुर द्वारा अपने पदस्थापन काल में संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में संदलपुर मौजा अन्तर्गत बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप के उत्तरदायी है।
कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप मिट्टी कटाई नहीं कराने, संवेदक को 2 फीट से अधिक मिट्टी काटने से रोकने के प्रयास मेें असफल रहने, स्वीकृत प्राक्कलन में मिट्टी कटाई हेतु अस्थायी फसल क्षतिपूर्ति हेतु मुआवजा एवं निजी जमीन से ली जाने वाली मिट्टी की कीमत का प्रावधान रहने के बावजूद परिवादी को उसका भुगतान नहीं किए जाने से माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि ₹ 85639/- के अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के कारण State Exchequer को ₹ 92117/- रुपये की वित्तीय क्षति के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1028 दिनांक 19.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा State Exchequre को हुई वित्तीय क्षति के लिए उत्तरदायी मानते हुए कुल वित्तीय क्षति 92117/- रुपये में समानुपातिक वसूली का मंतव्य भी दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2595 दिनांक 16.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री जफर रसीद खाँ द्वारा अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी का पत्रांक-143 दिनांक 06.02.2020 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया।
श्री जफर रसीद खाँ द्वारा प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई कि परिवादी श्री ब्रह्यदेव प्रसाद, पिता-स्व0 बिहारी महतो, ग्राम-संदलपुर (नालंदा) द्वारा माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के समक्ष दिनांक 28.03.11 को परिवाद दायर किया गया। जबकि परिवादी द्वारा संबंधित प्रमंडलीय/अंचलीय कार्यालय को परिवाद दायर किया जाना चाहिए था ताकि परिवाद का त्वरित एवं न्यायसंगत निष्पादन किया जाता। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बयान में यह उल्लेख नहीं किया है कि परिवादी के निजी जमीन से मिट्टी नहीं ली गई या जमीन मालिक की सहमति से मिट्टी काटी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि जमींदारी बांध के निर्माण कार्य के दौरान अधिक गहराई में बिना अनुमति के निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने से परिवादी को सात वर्षों तक फसल की हानि एवं आर्थिक क्षति हुई।64 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ, नालंदा अन्तर्गत संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का एकरारनामा संख्या-8F2/2010-11 से कराए गए कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में निजी जमीन से मिट्टी कटाई एवं अस्थाई फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किए जाने से माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के कारण State Exchequer को 92117/- की हुई क्षति के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेदार है। प्रस्तुत मामले में जिम्मेदार आरोपित पाँच अभियंताओं से राज्य को हुई क्षति कुल 92117/- रुपये की समानुपातिक वसूली की जानी है। श्री जफर रसीद खाँ द्वारा प्राप्त जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित है।
अतएव श्री जफर रसीद खाँ (आई0डी0-3393) तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी को उक्त प्रमाणित आरोप के लिए अधिसूचना संख्या-1227 दिनांक 20.10.2020 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया गया -
(i) निन्दन (वर्ष 2010-11, 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री जफर रसीद खाँ द्वारा अधीक्षण अभियंता का कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर का पत्रांक-1513 दिनांक 28.11.2020 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त अर्जी की समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा कराई गई।
विभागीय समीक्षा-श्री जफर रसीद खाँ, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में उल्लेखित किया है कि परिवादी के खेत से मिट्टी, परिवादी के सहमति से प्राप्त की गई थी एवं सभी खेतों से काटी गई मिट्टी की गहराई से दो फीट से कम ही थी तथा परिवादी एवं उसके परिवार के सदस्यों द्वारा मिट्टी का मुआवजा की राशि काफी कम होने के कारण इसमें रूचि नहीं दिखाई गई थी।
श्री खाँ द्वारा उक्त बातों का जिक्र अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रतिउत्तर में भी उल्लेखित किया गया था। जिसमें श्री खाँ द्वारा उल्लेखित बातों को उपलब्ध जाँच प्रतिवेदनों/अभिलेखों के आलोक में स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया था। पुनर्विलोकन अर्जी में भी कोई नया साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया है बल्कि सिर्फ पूर्व की बातों को ही दोहराया गया है। उक्त परिस्थिति में पूर्व से उपलब्ध जाँच प्रतिवेदन एवं अभिलेखों के आलोक में श्री खाँ का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है।
उक्त तकनीकी समीक्षा के आलोक में श्री जफर रसीद खाँ, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय श्री जफर रसीद खाँ, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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1 नवम्बर 2021
सं0 22/नि0सि0(गया)-24-01/2015-1389--श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3320), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध उनके पदस्थापन अवधि में निलामी योग्य सामग्रियों का गलत सर्वे रिपोर्ट देने एवं सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-2168 दिनांक 28.09.2016 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विहित रीति से निम्नलिखित आरोप की जाँच के लिए विभागीय संकल्प-461 दिनांक 31.03.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज के पत्रांक-454 दिनांक 13.06.2012 से अधीक्षण अभियंता, जलपथ अंचल, गया को सामग्रियों का सर्वे रिपोर्ट में 3'' dia pipe (211 ft) का भौतिक सत्यापन करते हुए निलामी योग्य होने की अभ्युक्ति दिनांक-13.08.2012 का उनके द्वारा अंकित की गई जबकि उड़नदस्ता जाँच में उक्त सामग्री वर्ष 2011 में ही लेखा से निर्गत किया हुआ पाया गया। इसके अतिरिक्त स्टोन पिलर को निलामी योग्य अंकित किया पाया गया तथा लौह छड़ को छोड़ अन्य लौह सामग्रियों का दर संख्या के अनुसार पाया गया जबकि वजन के आधार पर अंकित होना चाहिए। उक्त से स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा सर्वे रिपोर्ट में अंकित सामग्रियों को भली भाँति जाँच किये बिना ही त्रुटिपूर्ण सत्यापन करने के लिए प्रथम द्रष्टव्या दोषी है। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-2376 दिनांक 26.08.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को प्राप्त हुआ। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में मंतव्य अंकित किया गया कि भंडार गृह में G.I. Pipe (211 Ft) था या नहीं संदेह की स्थिति में आरोप का यह अंश प्रमाणित नहीं होता है। साथ ही आरोपित पदाधिकारी द्वारा मात्र सामग्रियों को निलामी योग्य होने संबंधित65 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अभियुक्ति ही दर्ज की है अतएव लौह सामग्रियाें का वजन के आधार पर मूल्य निर्धारित नहीं करने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से आंशिक रूप से सहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसका जवाब श्री सिंह ने अपने पत्रांक-730 दिनांक 22.09.2018 द्वारा विभाग में समर्पित किया गया। श्री सिंह का दिनांक 20.04.2019 को सेवानिवृत होने के उपरांत उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को आदेश सं0-67 दिनांक 04. 06.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी में सम्परिवर्तित कर दिया गया।
श्री सिंह द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) में निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत किया गया है :-
(i) पहले विन्दू पर कहा गया है कि दिनांक-13.08.2012 को तिलैया नहर प्रमंडल वजीरगंज अन्तर्गत वजीरगंज गोदाम की जाँच के क्रम में वहाँ 3''dia G.I pipe (211 ft) भौतिक रूप से उपलब्ध पाया। उसी आधार पर निलामी हेतु अनुशंसा किया गया।
(ii) 1291 अद्द स्टोन पिलर लगभग 30 वर्षाे से बेकार पड़ा रहने के कारण जाँच के दौरान मेरे द्वारा उसे निलामी योग्य लिखा गया। मेरे द्वारा उसे क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी नहीं बताया गया है। अतः आरोप से मुक्त किया जाय। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य एवं श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का आरोपवार समीक्षा निम्नवत है :- संचालन पदाधिकारी आरोप के प्रथम विन्दु पर दो नतीजे अंकित किये है। (i) यह कि आरोपित पदाधिकारी ने बिना सत्यापन के ही प्राप्त प्रतिवेदन पर अपनी अभियुक्ति अंकित कर दी होगी।
या (ii) भंडार लेखा से वस्तुतः सामग्री निर्गत ही नहीं हुई होगी मात्र कागजी कार्रवाई की गई होगी और सामग्री यथावत गोदाम में पड़ी रह गई, जिसे सत्यापन के दौरान देखा गया।
इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा भंडारगृह में G.I. Pipe था या नहीं पूरी तरह प्रमाणित नहीं होने के कारण संदेह की स्थिति में आरोप का यह अंश प्रमाणित नहीं माना गया। बचाव बयान में आरोपित पदाधिकारी (अन्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता) द्वारा कहा गया है कि जाँच के क्रम में भौतिक रूप से वजीरगंज गोदाम में उक्त सामग्री उपलब्ध पाया। संबंधित गोदाम का भंडारपाल एवं संबंधित कार्यपालक अभियंता द्वारा भी सर्वे प्रतिवेदन पर क्रमशः 11.06.2012 एवं 13.06.2012 को हस्ताक्षर कर अग्रेतर कार्रवाई हेतु भेजा गया। निलामी की प्रक्रिया के उपरांत गोदाम के प्रभारी कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक- 588 दिनांक- 29.08.2012 द्वारा उच्चतम बोली लगाने वाले क्रेता (मो॰ उस्मान नेयाजी) को उक्त सामग्री सहित सभी सामग्री 90500 रूपये में सौंप दिया गया। क्रेता द्वारा उक्त सामग्री नहीं होने का विरोध किया गया, ऐसा कोई अभिलेख नहीं है। इस प्रकार क्रय किये गये कुल सामग्री में 3'' dia G.I. pipe भी शामिल रहा होगा। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा जाँच के क्रम में उक्त सामग्री भैतिक रूप से पाये जाने की पुष्टि, गोदाम के प्रभारी भंडार पाल एवं संबंधित कार्यपालक अभियंता तिलैया नहर प्रमंडल वजीरगंज द्वारा क्रमशः दिनांक-11.06.2012 एवं 13.06.2012 को सामग्री की सर्वे प्रतिवेदन की सूची पर हस्ताक्षर करने तथा उक्त सामग्री सहित सभी सामग्री को निलामी पश्चात क्रेता मो॰ उस्मान नेयाजी को अपने पत्रांक- 588 दिनांक- 29.08.12 द्वारा कुल 90500 रूपये जमा करने के उपरांत सामग्रियों को उठाने की अनुमति दिये जाने से गोदाम में पाये जाने की संभावना परिलक्षित होती है। इस प्रकार भौतिक रूप से बिना सामग्री निर्गत किये मात्र कागजी कार्रवाई कर सामग्री (3'' dia G.I pipe-211ft) यथावत गोदाम में रखे रहने के लिए संबंधित भंडार पाल एवं श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, संबंंधित तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी परिलक्षित होते है। इससे अन्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के रूप में श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा गोदाम में भौतिक रूप से उपलब्ध पाये गये सामग्रियों को निलामी हेतु मात्र अनुशंसा किये जाने से आरोपी के बचाव-बयान को स्वीकार योग्य मानते हुए आरोप अप्रमाणित परिलक्षित होता है। आरोप का दूसरा अंश स्टोन पिलर्स को निलामी योग्य होने की अनुशंसा आरोपी पदाधिकारी द्वारा किया गया है। इस संबंध में अपने बयान में स्टोन पिलर्स लगभग 30 वर्षो से बेकार पड़ा था जिसे निलामी योग्य होने संबंधी मात्र अभियुक्ति दर्ज की है। आने-पौने दाम में नीलामी हेतु मेरे द्वारा नहीं लिखा गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने समीक्षा में उल्लेख है कि ''कंडिका-197 में 5000 रूपये मूल्य सीमा तक भंडार को निपटाने की शक्ति अधीक्षण अभियंता को प्रदत्त है। इस मामले में स्टोन पिलर्स वर्ष 1981 से लेखा में अनुपयोगी पड़े थे। अन्य प्रमंडलों से उसे खपाने का कोई प्रस्ताव नही आने का अर्थ यह होता है कि यह खपाने लायक नहीं था। अतएव उसे बेचने या निष्पादित करने के प्रस्ताव पर कार्रवाई करना (निलामी योग्य बताना) समीचीन है एवं आरोप का अंश प्रमाणित नहीं होता है।'' सर्वे प्रतिवेदन में संबंधित भंडारपाल एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा सामग्रियों को पूर्ण रूपेण क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी बताया गया है जिसपर सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा सर्वे प्रतिवेदन पर यह अंकित किया गया है कि ''सभी सामानों की जाँच की गई। सभी सामान निलामी के योग्य है।'' इस प्रकार सभी 1291 अद्द स्टोन पिलर्स जिसका क्षय न के बराबर होता है को भंडार से संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं भंडारपाल द्वारा पूर्णरूपेण क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी करार दिये गये अभियुक्ति पर चुपचाप रहते हुए मात्र निलामी योग्य बताने से औने-पौने दाम में निलामी हेने से सामग्रियों की भलीभाँति जाँच किये बिना ही त्रुटिपूर्ण सत्यापन के लिए श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, कार्यपालक अभियंता दोषी परिलक्षित होने से द्वितीय पृच्छा का बचाव बयान अस्वीकार करते हुए आरोप के द्वितीय भाग का अंश प्रमाणित होता है।66 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, द्वितीय कारण पृच्छा पर प्राप्त बचाव बयान एवं उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया के पद पर पदस्थापित रहते हुए तिलैया नहर प्रमंडल वजीरगंज अन्तर्गत सामग्रियों के सर्वे रिपोर्ट पर अंकित सामग्रियों मे से निलामी योग्य सामग्रियों का त्रुटिपूर्ण सत्यापन किये जाने संबंधी द्वितीय कारण पृच्छा के प्रथम विन्दू के आरोप पर प्राप्त बचाव बयान स्वीकार योग्य प्रतीत होने से आरोप प्रमाणित नहीं होता है जबकि भंडार में स्थित 1291 अद्द स्टोन पिलर्स जिसका क्षय न क बराबर होता है, का भंडार से संबंद्ध अभियंताओं द्वारा पूर्णरूपण क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी करार दिये गये अभियुक्ति पर चुपचाप रहते हुए निलामी योग्य बताने से औने पौने दाम में निलामी होने से सामग्रियों की भलीभाँति जाँच किये बिना त्रुटिपूर्ण सत्यापन संबंधी आरोप के बिन्दू-2 प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्का0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-
"पेंशन से पाँच प्रतिशत राशि की कटौती तीन वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-491 दिनांक 04.05.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की मांग की गई।
उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-1889 दिनांक 22.09.2021 द्वारा श्री सिंह, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर सहमति प्रदान किया गया है।
अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्का0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से पाँच प्रतिशत राशि की कटौती तीन वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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1 नवम्बर 2021
सं0 22/नि0सि0(गया)-24-01/2015-1390--श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव (आई0डी0-2026), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध उनके पदस्थापन अवधि में निविदा निष्पादन में अनियमितता बरतने एवं सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा कराई गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-2165 दिनांक 28.09.2016 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री श्रीवास्तव से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी के तहत विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों की जाँच के लिए विभागीय संकल्प-462 दिनांक 31. 03.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप (1)-तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2008-09 एवं 2010-14 में गैर योजना शीर्ष 2701 के तहत कम से कम राशि (रू॰-1.00 लाख के कम) वाले एक-एक कार्य के लिए अल्प समय के अन्तराल पर स्थानीय निविदा यथा निविदा आमंत्रण सूचना सं॰-06/11-12 दिनांक- 01.09.2011, 07/11-12 दिनांक-09.09.2011, 08/10-11 दिनांक 10.02.2011, 09/10-11 दिनांक- 08.02.2011, 10/2010-11 दिनांक- 24.02.2011 निकाली गई जिससे निविदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं हुई जिसके कारण अधिकांश वित्तीय बिड में 01 निविदादाता का निविदित दर निविदा निष्पादन की सक्षमता का अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) एवं दूसरे का इससे अधिक अंकित किये जाने की स्थिति में अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन होने से सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय क्षति हूई जिसके लिए सम्बेदक को लाभ पहुँचाने की मंशा से ऐसा किया गया माना जा सकता है जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। आरोप (2)-तिलैया नहर प्रमंडल वजीरगंज के अन्तर्गत निविदा आमंत्रण सूचना सं॰-02/2008-09 दिनांक- 06.11.2008 (ग्रुप-1) एवं 03/08-09 दिनांक-13.01.09 (ग्रुप- 3) के क्रम में दोनों ही कार्य एक ही निविदादाता को कार्यावंटन दिनांक- 07.02.2009 को एक निविदादाता का श्रम अनुज्ञप्ति की वैधता दिनांक-06.02.2009 होने की स्थिति में भी दिनांक-11.02.2009 को एकरारनामा सं॰-(6F2/08-09 एवं 4F2/08-09) किया गया जिससे विभागीय पत्रांक-34(GC) दिनांक-10.02.2006 एवं Bihar enlishment of Contractor 1992 की कंडिका 16 का उल्ंघन परिलक्षित होता है। इस प्रकार वित्तीय बीड के मूल्यांकण में त्रुटिपूर्ण निर्णय एवं नियम के विरूद्ध निविदिदाता से एकरारनामा करने के लिए आप प्रथम द्रष्टव्य दोषी है। आरोप (3)-तिलैया नहर प्रमंडल वजीरगंज से संबंधित स्टॉक लेखा से वर्ष 2008-09 एवं अन्य वर्षाें में सीमेंट एवं लौह छड़ की आवश्यकता से अधिक उपलब्धता की पुष्टि होती है। विभागीय पत्रांक-370 दिनांक- 01.11.07 से परिस्थितिवश विभागीय सामग्री यदि उपलब्ध हो, निर्माण कार्य में लगे संवेदक को निर्गत करने से संबंधित मार्ग निर्देश निर्गत है परन्तु नहरों एवं अन्य निर्माण कार्य चलते समय विभागीय गोदाम में बचे सीमेंट एवं लौह छड़ संबेदको को ससमय निर्गत नहीं किये जाने के कारण लगभग 20.50 लाख की क्षति हुई जिसके लिए आप प्रथम द्रष्टव्या दोषी है। आरोप (4)-तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज के अन्तर्गत निलामी के योग्य सामग्रियों के निष्पादन हेतु सर्वे रिपोर्ट आपके पत्रांक-454 दिनांक-13.06.2012 द्वारा अधीक्षण अभियंता, जलपथ अंचल, गया को समर्पित किया गया। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 9.0.0(V) के अनुसार प्रमंडलाधीन निलामी योग्य अनुपयोगी सामग्रियों के निष्पादन हेतु सर्वे रिपोर्ट का67 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 मूल्यांकण, हानि का अपलेखन, मूल्य हरास संबंधी प्राक्कलन की स्वीकृति तथा इसकी सूचना प्रशासी विभाग एवं महालेखाकार को दिए जाने संबंधी सरकार का निर्णय, बिहार विा नियमावली, 2005 एवं निर्माण संहिता के प्रावधानों का अनुपालन नहीं किए जाने के कारण सरकार को राजस्व की क्षति हुई। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। आरोप (5)-आपके पत्रांक-454 दिनांक-13.06.12 से अधीक्षण अभियंता, जलपथ अंचल, गया को भेजे गये अपुनयोगी सामग्रियों के निष्पादन हेतु सर्वे रिर्पोट में लौह छड़ को छोड़कर अन्य लौह सामग्रियों की दर संख्या के अनुसार निर्धारित करते हुए क्रयमूल्य निर्धारित होने की पुष्टि होती है जिसके लिए आप प्रथम द्रष्टव्या दोषी है। आरोप (6)-निलामी सूचना संख्या-01/2012-13 (पत्रांक-571 दिनांक-14.08.12) से निकाली गई निविदा में शर्ताें में क्रेता को बिक्री कर आयकर सेस के भुगतान से संबंधित शर्ताे का उल्लेख नहीं किया गया जिसके कारण प्रतिभागी से उक्त करो की वसुली हीं नहीं की गई जिससे सरकार को प्रत्यक्ष रूप से हानि हुई। अतएव प्रथम द्रष्टया दोषी है। आरोप (7)-वाहन संख्या-BR2B-8689 को निजी वाहन के रूप में पंजीकृत रहने के बावजूद निजी वाहन को भाड़े पर वर्ष 2013-14 में सरकारी कार्य हेतु व्यवसायिक वाहन की जगह निजी वाहन रखने की पुष्टि होता है, जिसके लिए आप प्रथम प्रष्टव्या दोषी है।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-607 दिनांक 21.02.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध गठित कुल सात आरोपों में से आरोप सं0-01 आंशिक प्रमाणित, आरोप सं0-02, 03, 04 एवं 07 प्रमाणित एवं आरोप सं0-05 एवं 06 अप्रमाणित माना गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोपों के अतिरिक्त असहमति के निम्न बिन्दुआें को उद्धृत किया गया :- आरोप सं0-1-छोटे-छोटे राशि का निविदा कम समय के अन्तराल पर निकालने की अपेक्षा समेकित रूप से पुरे कॉलोनी/ गोदाम के लिए कम से कम संख्या में निविदा निकालते तो इसका प्रकाशन भी अखबार में होता तथा संवेदक के बीच प्रतिस्पर्धा होती जिससे अनुसूचि दर से कम दर पर कार्यावंटन होने से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही साथ आमंत्रित किये गये निविदा आमंत्रण सूचना की प्रति ससमय संबंधित सभी कार्यालयों में व्यापक प्रचार प्रसार हेतु उपलब्ध कराया गया या नहीं उसका साक्ष्य नहीं रहने के कारण अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को वित्तीय क्षति पहुँचाने की मंशा प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2-संचालन पदाधिकारी द्वारा निविदा की प्राप्ति की तिथि तक क्रम अनुज्ञप्ति मान्य रहने के कारण मूल्यांकण में त्रुटि का मामला परिलक्षित नहीं होने एवं एकरारनामा के पूर्व अद्यतन क्रम अनुज्ञप्ति प्राप्त किये बिना एकरारनामा करने में अनियमितता बरतने के कारण नियम के विरूद्ध एकरारनामा करने का आरोप प्रमाणित होने के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत हुआ जा सकता है। आरोप सं0-3- संचालन पदाधिकारी द्वारा सीमेंट ज्यादा पुराना हो जाने के कारण बाद में उपयोगी नहीं रह जाने के कारण आरोपित पदाधिकारी को जवबदेह नहीं माने जाने से असहमत होते हुये असहमति के निम्न विन्दु अंकित किया गया। (i) आरोपी पदाधिकारी द्वारा लेखा में पूर्व से बचे लौह छड़ मार्च 2010 तक एवं सीमेंट जूलाई 10 तक पूर्व से एकरारित कार्याें से संबंधित संबेदक को निर्गत किया गया परन्तु वैसे कार्य जिसकी एकरारनाम Finished rate पर हुआ है, के मामले में प्रमंडल के अधीन पूर्व से बचे लौह छड़ एवं सीमेंट को संरचना कार्य में उपयोग हेतु निर्गत नहीं किया गया। Finished rate वाले संबेदक को लेखा में बचे सीमेंट एवं लौह छड़ को खपत करने से इनकार करने संबंधित आरोपी पदाधिकारी एवं संबेदक का पत्राचार का प्रमाण एवं उसपर उच्चाधिकारी का निदेश नहीं पाया गया। इस प्रकार उनके द्वारा दोहरा मापदंड अपनाकर विभागीय आदेश पत्रांक-70 दिनांक-01.11.2007 के कंडिका 5ः4.8 का अनुपालन नहीं कर जूलाई 10 तक कार्य लायक निर्माण सामग्री को वर्ष 2010-11 में ही कराये जा रहे Finished rate के कार्याें में न लगाकर जून 2012 में निलामी लायक घोषित कर कवाड़ी के भाव से भी कम दाम पर निलाम कर देने एवं बिहार वित्त नियमावली के कंडिका- 192 एवं 195 के आलोक में स्टॉक में बची हुई निर्माण सामग्री को नियमानुसार ससमय अन्य प्रमंडलों मे या तो हस्तांतरित कर देना चाहीए था या उचित प्रक्रिया अपनाकर निलामी कर देने का भी प्रावधान है जिससे वाजिब मूल्य प्राप्त होता है परन्तु ऐसा नहीं कर निर्माण सामग्रियों को वर्ष 2012 तक अनुपयोगी होने तक इन्तजार किया गया जिससे कुल 20.50 लाख रूपये विभाग को हानि पहुँचाने का दोष परिलक्षित होता है।
आरोप सं0-4-संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित किये गये आरोप के अतिरिक्त आरोपी पदाधिकारी द्वारा भंडार लेखा की सामग्रियों के निष्पादन हेतु सामग्रियों का उचित मूल्यांकण एवं सर्वे प्रतिवेदन बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली 2005 के नियम 142 (i) से (iv) के अनुरूप नहीं करने के कारण सरकार को 20.50 लाख रूपये राजस्व की क्षति के लिए भी दोषी प्रतीत होते है। आरोप सं0-5-संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी द्वारा सर्वे प्रतिवेदन में अंकित सामग्रियों का मुल्य निर्धारण कम हुआ या ज्यादा की पुष्टि नहीं होने के मंतव्य से असहमत हुआ जा सकता है। असहमति के विन्दु निम्न है :- (i) सर्वे प्रतिवेदन में अंकित लौह सामग्रियों का दर निर्धारण वास्तविकता के आधार पर वजन के हिसाब से नहीं किये जाने एवं वि॰वि॰(स॰) नियमावली 142 (i) से (iv) का अनुपालन नहीं करने के कारण कम मूल्य निर्धारित होने की पुष्टि होना परिलक्षित होता है जिसके कारण सरकारी राजस्व की हानि हुई। इस हानि के लिए तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री अरूण68 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कुमाार श्रीवास्तव एवं मूल्यांकण राशि के आलोक में सर्वे प्रतिवेदन स्वीकृत करने वाले अधीक्षण अभियंता श्री राजेन्द्र प्रसाद उत्तरदायी माने जा सकते है। आरोप सं0-6- संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप पत्र के साथ संलग्न दस्तावेज के परि0-21 पर संलग्न बिहार वित्त नियमावली की कंडिका-144(ii) के आलोक में आयकर बिक्री कर संबंधी आदेता उस मामले में प्रासंगिक नहीं होने के कारण आरोप प्रमाणित नहीं माना गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के विन्दु निम्न है :- (i) बिहार वित्त नियमावली के कंडिका-144(ii) ''क'' के आलोक में निलामी संबंधित आमंत्रित निविदा के शर्ताे के रूप में आमंत्रित दस्तावेज में संदर्भित करो की आदेयता स्पष्ट रूप से वर्णित करने का प्रावधान है जिसका अनुपालन नहीं करने से उन करो की वसूली नहीं की गई जिससे सरकार को प्रत्यक्ष रूप से हानि होने का आरोप परिलक्षित होता है।
आरोप सं0-7-नियमानुसार भाड़े पर वाहन रखने की स्वीकृति के आलोक में व्यवसायिक वाहन उचित भाड़े की राशि पर रखा जाना अपेक्षित था। निजी वाहन का उपयोग सरकारी कार्य में लेने के फलस्वरूप सरकार को व्यवसायिक वाहनों से प्राप्त होने वाला Tax की प्राप्ति नहीं हुई। इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा स्वयं भी वजीरगंज जैसे स्थान में व्यवसायिक वाहन की कमी के कारण निजी वाहन उपयोग में लाये जाने की स्वीकारोक्ति दी गई है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप से सहमत हुआ जा सकता है।
संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोपों के अतिरिक्त उक्त असहमति के बिन्दुओं को दर्शाते हुए आरोपी पदाधिकारी श्री श्रीवास्तव से विभागीय पत्रांक-1980 दिनांक 06.09.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसका जवाब अनेकों बार स्मारित करने के उपरांत उनके द्वारा उपलब्ध कराया गया। श्री श्रीवास्तव द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया :-
आरोप सं0-(1) सभी निविदा पत्रों की अनुमति अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के स्तर से ली गई तथा निविदा प्रपत्र उक्त कार्यालयों में बिक्री के लिए भेजा गया। कुछ निविदायें अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में प्राप्त की गई और कुछ मुख्य अभियंता के कार्यालय में प्राप्त की गई। अगर प्रक्रिया गलत थी तो वे दोनों पदाधिकारी निविदा निरस्त कर सकते थे। निधि का आवंटन दिसम्बर, जनवरी माह में होता आया है और कम से कम प्राक्कलन की स्वीकृति से लेकर निविदा आमंत्रित करने में एक माह का समय लग जाता है। राशि उपयोग करने का समय 31 मार्च तक ही होता है। आरोप सं0-(2) जहाँ तक लेबर लाईसेंस का मामला है, निविदा के दिन तक लेबर लाईसेंस वैध था तथा भुगतान के दिन भी कार्यालय में उपलब्ध था। बीच के अवधि में लाईसेंस का नहीं होना सामान्यतः कार्य प्रणाली में बाधक नहीं होता है। ऐसा अन्य मामलों में भी विभाग सहमत हुआ है।
आरोप सं0-(3) उक्त मामले में पूर्व में उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई थी परन्तु कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वित्तीय वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 के दिसम्बर माह तक कोई निधि प्रमंडल को उपलब्ध नहीं था हो सकता है पूर्व के एकरारनामा को बन्द करते समय एकरारनामा अनुसार संवेदक को सीमेंट दिया जाना था परन्तु प्रमंडल में दूसरा कोई सीमेंट नहीं होने के कारण संवेदक को अयोग्य एवं पुराना सीमेंट निर्गत किया होगा, इसका उपयोग कार्य में नहीं कराया गया। नई निविदा होने के उपरांत पाँच साल पुराने सीमेंट को तकनीकी रूप से उपयोग करना अक्षम्य अपराध होता। विभागीय सीमेंट का दाम बाजार मूल्य से ज्यादा था इसलिए संवेदक भी सीमेंट लेने के लिए तैयार नहीं थे। जहाँ तक छड़ इत्यादि की बात है इसकी स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी से ले ली गई। जहाँ तक प्राक्कलन स्वीकृति की बात है इसे अधीक्षण अभियंता के स्तर से होना था तथा उनके स्तर से कोई पृच्छा नहीं की गई, मेरे द्वारा अज्ञानता बस इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
आरोप सं0-(4) श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त आरोप के संबंध में कोई बचाव बयान अंकित नहीं किया गया। आरोप सं0-(5) श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त आरोप के संबंध में कोई बचाव बयान अंकित नहीं किया गया। आरोप सं0-(6) श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त आरोप के संबंध में कोई बचाव बयान अंकित नहीं किया गया। आरोप सं0-(7) तिलैया नहर वजीगंज में व्यवसायिक वाहन उपलब्ध नहीं था। दूसरे जगह से वाहन मंगाने की समस्या, ईंधन या सीमित कोटा अन्तर्गत वाहन मालिक के घर से रोज गाड़ी मंगाना विभाग के लिए अतिरिक्त बोझ होता। स्वीकृत राशि से ज्यादा भुगतान कभी भी नहीं किया गया।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य एवं श्री श्रीवास्तव से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की आरोपवार विभागीय समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं0-1-श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध वित्तीय वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 में शीर्ष 2701 के तहत एक लाख से कम की राशि के छोटे-छोटे निविदा कम अन्तराल पर निकालने एवं उसका व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण संवेदको के बीच प्रतिस्पर्द्धा नहीं होने से निविदा का निष्पादन अधिकत्तम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर आवंटन होने के कारण अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय क्षति का आरोप है। आरोप में वर्णित निविदाँए क्रमशः दिनांकः- 01.09.2011, 09.09.11, 10.02.11, 18.02.11 एवं 24.02.11 को आमंत्रित की गई एवं निविदा प्राप्ति की तिथि क्रमशः 09.09.11, 16.09.11, 24.02.11, 04.03.11 एवं 11.03.11 रखी गई। संचालन प्रतिवेदन के जाँच प्रतिवेदन में निर्गत स्थानीय निविदा आमंत्रण सूचना की प्रति जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी/ प्रखंड विकास पदाधिकारी/ थाना प्रभारी के अलावे संबंधित अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, गया को भी दिये जाने का उल्लेख है।69 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उपरोक्त सभी कार्यालयों में निविदा आमंत्रण सूचना की प्रति ससमय प्राप्त करायी गई या नही, जिससे ज्ञात हो कि व्यापक प्रचार प्रसार हुआ है, का साक्ष्य के रूप में प्राप्ति रसीद संलग्न नहीं है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-05.02. 2003 से उक्त अवधि में कुल 7 अदद निविदाओं का निष्पादन अधीक्षण अभियंता के स्तर से होना परिलक्षित होता है, जिससे अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में निविदा प्राप्त होने का बचाव-बयान स्वीकार योग्य है, परन्तु अन्य कार्यालयों को निविदा सूचना उपलब्ध कराने का साक्ष्य आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है। साथ ही साथ निविदा आमंत्रण के बीच का अंतराल एवं निविदा की सूचना निर्गत करने एवं प्राप्ति के बीच अंतराल निर्धारित अन्तराल से कम है। अल्पकालीन निविदा आमंत्रित करने हेतु सक्षम प्राधिकार से अनुमति भी नहीं ली गई प्रतीत होता है। वस्तुतः कार्यपालक अभियंता (आरोपी) द्वारा छोटे-छोटे राशि का निविदा कम समय के अन्तराल पर निकालने की अपेक्षा समेकित रूप से (विभागीय दिशा निदेश के आलोक में) पुरे कॉलोनी/ गोदाम के लिए कम से कम संख्या में निविदा निकालते तो इसका प्रकाशन भी अखबार में होता तथा संबेदक के बीच प्रतिस्पर्धा होती जिससे अनुसूचित दर से कम दर पर कार्यावंटन होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसकी पुष्टि उड़नदस्ता जाँच दल अपने जाँच प्रतिवेदन में भी किया गया है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं बचाव-बयान में उक्त आमंत्रित निविदा के संबंध में प्रचार प्रसार करने संबंधी साक्ष्य को उचित नहीं कहा जा सकता है तथा अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को वित्तीय क्षति एवं संबेदक को आरोपी द्वारा लाभ पहुँचाने की मंशा प्रामणित परिलक्षित होता है। आरोप सं0-2-श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध वर्ष 2008-09 में त्रुटिपूर्ण निविदा निष्पादन एवं एकरारनामा करने का आरोप है। निविदा आमंत्रण सूचना सं॰- 02/08-09 के ग्रुप- 1 एवं सूचना सं॰- 03/08-09 के ग्रुप (3) में निविदा पारित की तिथि क्रमशः 5.12.2008 एवं 03.02.2009 निर्धारित थी। निविदा की शर्ताें में अद्तन श्रम अनुज्ञप्ति की अभिप्रमाणित छाया प्रति संलग्न करना अनिवार्य था। संबंधित संवेदक संजीत कुमार सिंह का श्रम अनुज्ञप्ति दिनांक- 06.02.2009 तक मान्य था। जबकि आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक- 11.02.2009 को बिना अद्तन श्रम अनुज्ञप्ति के ही संवेदक के साथ एकरारनामा सम्पादित किये गये। आरोपी के बचाव-बयान में उल्लेख किया है कि निविदा के दिन लेबर लाईसेंस वैध था तथा भुगतान के दिन भी कार्यालय में उपलब्ध था, बीच की अवधि में उपलब्ध नहीं था। परन्तु विभागीय पत्रांक- 34(GC) दिनांक- 10.02. 2006 एवं आमंत्रित निविदा सूचना के अनिवार्य शर्त के रूप में अद्तन श्रम अनुज्ञप्ति की अभिप्रमाणित छायाप्रति संलग्न करने के आलोक में दिनांक- 11.02.2009 को बिना अद्तन लेवर लाइसेंस के एकरारनामा करने से त्रुटिपूर्ण निविदा का निष्पादन एवं एकरारनामा करने का आरोप प्रमाणित होता है। अतः बचाव-बयान स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप सं0-3- आरोपी का यह बयान कि वर्ष 2010 में Finished rate पर कार्य कराने का सरकार का निर्णय एवं संवेदक सीमेंट लेने को तैयार नहीं था। इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा विभागीय आदेश सं॰- 370 दिनांक- 01.11.07 के कंडिका- 5.4.8 का अनुपालन नहीं किया गया। इनके द्वारा दिनांक- 13.06.2008 में प्रमंडल का प्रभार ग्रहण करने के बाद लेखानुसार जनवरी 2008 एवं अप्रैल 2008 में क्रय किये गये शेष बचे कुल 6458 बोरा आपूर्ति सामग्रियों के बच जाने पर बिहार वित्त नियमावली के कंडिका- 192 एवं 195 के आलोक में स्टॉक में बची हूई सामग्री यथा सीमेंट एवं लौह नियमानुसार ससमय अन्य प्रमंडलों में या तो स्थानांतरित कर देना चाहिए था या उचित प्रक्रिया अपनाकर निलामी कर देने का भी प्रावधान है जिससे वाजिव मूल्य प्रदान होता परन्तु ऐसा नहीं कर निर्माण सामग्रियों (सीमेंट) को खराब होने तक प्रतीक्षा किया गया। वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक कराये गये सम्पोषण कार्याें के अनुसार कथित वर्षाें में विभिन्न व्यास के लगभग 100MT लौह छड़ों को प्रमंडल के अधीन कराये गये कार्याें में आवश्यकता थी जबकि प्रमंडल में विभिन्न व्यास में आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा मार्च 10 तक वैसे कार्याें (पूर्व के एकरारनामा जिनमें विभागीय सामग्रियाँ संवेदक को निर्गत करना है) के मामले में लौह छड़ को निर्गत किया गया परन्तु वैसे एकरारनामा जिसमें Finished rate पर कार्य करना है के मामले में प्रमंडल के अधीन पूर्व से बचे लौह छड़ को संरचना कार्याें में उपयोग हेतु निर्गत नहीं किया गया जबकि विभागीय पत्रांक-370 दिनांक-01.11.2007 के आलोक में Finished rate वाले संवेदक का भी सामग्री निर्गत की जानी चाहिए थी, जिसकी पुष्टि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से भी होती है। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी द्वारा दोहरा मापदंड अपना कर विभागीय आदेश पत्रांक- 370 दिनांक- 01.11.2007 के कंडिका- 5.4.8 का अनुपालन नहीं किया गया। इस प्रकार मार्च 2010 तक कार्य लायक छड़ो को वर्ष 2010-11 में ही कराये जा रहे finished rate के कार्याें में लौह छड़ न लगाकर जून 2012 में निलामी लायक घोषित कर कवाड़ी के भाव से भी कम दाम पर निलाम कर देने से सरकार को 12.08.2009 से प्रभावी अनुसूचित दर के आधार पर कुल 2.377 लाख रूपये का नुकसान के लिए तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी हैं। इसी प्रकार 6458 बोरा सीमेंट के क्रय को आरोपी अपने बयान में वर्ष 2006-07 में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा किया गया क्रय बताया गया जो उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका- 8.4.7 से स्पष्ट है कि गोदाम में सीमेंट की शेष मात्रा 6458 बोरा जनवरी 2008 एवं अप्रैल 2008 में क्रय किये गये भंडार का भाग पाया गया जिसे आरोपी पदाधिकारी द्वारा सर्वे प्रतिवेदन में भ्रामक तथ्य देकर निलामी कर विभाग को 2009 में प्रचलित अनुसूचित दर के हिसाब से कुल 1872820 रू॰ का हानि पहुँचाया गया। इस प्रकार सिंमेंट एवं लौह छड़ का कुल निलामी मूल्य 6458 54711 = 61169 रूपये घटाकर कुल शूद्ध किमत (18.72820 2.377 - 0.61169) = 20.4935 लाख यानि 20.50 लाख रूपये हानि के लिए दोष प्रमाणित होता है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी एवं आरोपी द्वारा सीमेंट ज्यादा पुराना हो जाने के कारण वाद में उपयोगी नहीं रह जाने के कारण आरोपित पदाधिकारी को जवाबदेह नहीं होने का उल्लेख किया है जो स्वीकार योग्य नहीं होता है,70 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 क्योंकि वर्ष 2010 फरवरी से जूलाई के बीच कुछ संवेदकों को सामग्री दिया गया जबकि Finished rate वाले संवेदकों को लौह छड़ एवं सीमेंट निर्गत नहीं किया गया। संवेदक द्वारा समग्री लेने से इनकार करने के संबंध में भी बचाव-बयान में कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया। इस प्रकार द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव-बयान स्वीकार योग्य नहीं होने से आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-4- इनके विरूद्ध भंडार लेखा के सामग्रियाें का निष्पादन हेतु उचित मूल्यांकण एवं सर्वे प्रतिवेदन नहीं करने से राजस्व की क्षति का आरोप है। द्वितीय कारण-पृच्छा में कोई बचाव-बयान अंकित नहीं है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पूर्व के बचाव बयान में उल्लेख किया गया है कि उन सभी सामग्रियों का खरीदारी वर्ष 1978-79 की है जिसमें 5% के दर से गुणवता में कमी के साथ वर्त्तमान मूल्य ऋणात्मक हो जाने तथा निलामी के कारण प्राप्त होने वाली राशि को पूर्णतः विभागीय लाभ होना प्रतिवेदित किया गया है। जो स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि धातु यथा लोहा, सोना, चाँदी, ताम्बा आदि जिसका क्षरण काफी धीमी गति से होता है एवं समय के साथ Reversible होने के कारण किमत में भी बढ़ोतरी होती है ऐसी स्थिति में निष्पादन योग्य वर्त्तमान किमत का निर्धारण किया जाना चहिए था। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में समीक्षा के क्रम में उल्लेख किया गया है कि ''नियमानुसार आरोपित पदाधिकारी को वास्तविक किमत एवं वर्त्तमान निष्पादन योग्य किमत के आधार पर प्राक्कलन तैयार कर सक्षम पदाधिकारी से उसकी स्वीकृति प्राप्त करने के उपरांत भंडार सामग्रियों का निलामी किया जाना अपेक्षित था''। इस संबंध में बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली 2005 के नियम 142 (i) से (iv) का अनुपालन कर मूल्याँकण किया गया होता तो कुल निर्धारित न्युनतम मुल्य 86416 रूपये से काफी ज्यादा मूल्याँकन की राशि आकलित होता जिससे सरकार को अधिक राजस्व की प्राप्ति होती। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अपने पत्रांक- 800 दिनांक- 14.08.2012 से सर्वे रिर्पोट की स्वीकृति प्रदान करते हुए निलामी की जाने वाली सामग्रियों का दर उन्हें उचित प्रतीत नहीं लग रहा था। फलस्वरूप उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता को दर की पुनः जाँच कर सामग्रियों का उचित दर निर्धारण कर बिहार लोक निर्माण संहिता 294 (iii) (i) के तहत अनुपयोगी सामग्रियों की निलामी करने का निर्देश दिया जिससे स्पष्ट होता है कि दर के मामले में अधीक्षण अभियंता भी संतुष्ट नहीं थे फिर भी उनके द्वारा बिना सुधार करवाये निलामी की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। अधीक्षण अभियंता को सर्वे प्रतिवेदन विधिवत विभागीय परिपत्र के आलोक में केवल अनुपयोगी सामग्रियों के लिए करना चाहिए था जिसमें बहुमूल्य सामग्री की निलामी नहीं होती। इस प्रकार भंडार लेखा की सामग्रीयों के निष्पादन हेतु सामग्रियों का पुस्त मूल्य निर्धारण एवं उसके लाभ हानि का प्राक्कलन तैयार नहीं करने का संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित किये गये आरोप से सहमत हुआ जा सकता है। साथ ही साथ बिहार वित्त संशोधन नियमावली 2005 एवं निर्माण संहिता के प्रावधानों का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण सरकार को राजस्व की क्षति के लिए आरोपी कार्यपालक अभियंता दोषी परिलक्षित होते है। आरोप सं0-5- इनके विरूद्ध अनुपयोगी सामग्रियाें के निष्पादन हेतु भेज गये सर्वे रिपोर्ट में लौह छड़ को छोड़कर शेष अन्य लौह सामग्रियों को वजन के हिसाव से दर निर्धारित नहीं करते हुए संख्या के हिसाब से किये जाने से कम राजस्व प्राप्त होने का आरोप है। द्वितीय कारण पृच्छा में कोई बचाव-बयान अंकित नहीं किया गया है। पूर्व के बचाव-बयान में आरोपी का कथन है कि लौह सामग्रियों के केस में प्रासंगिक प्रतीत नहीं होता है। सर्वे प्रतिवेदन में कई लौह सामग्रियों यथा RS joint, Tubular Truss, Purlin, Truss Tie, HT Spare आदि को संख्या में दर्शाया गया है एवं दर भी संख्या के अनुरूप तय किया गया वह भी नियम 142 (i)से (iv) का अनुपालन नहीं किया गया प्रतीत होता है। निलामी योग्य ऐसे सामग्रियों का सर्वे रिर्पोट में कुल वजन अंकित रहना चाहिए था। चूँकि कितना लौह सामग्री संख्या के आधार पर निर्गत किया गया वर्त्तमान में आकलन संभव नहीं है। परन्तु वजन के हिसाब से मुल्याँकण कर लौह सामग्रियों की निलामी की गई होती तो सरकारी को अधिक राजस्व प्राप्त होती। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा मुल्य निर्धारण कम हुआ या ज्यादा इसकी पूष्टि नहीं होने के मंतव्य से असहमत हुआ जा सकता है एवं लौह सामग्रियों का दर निर्धारण वास्तविकता के आधार पर वजन से हिसाब से नहीं किये जाने के कारण कम मुल्य निर्धारित होने की पूष्टि परिलक्षित होता है। आरोप सं0-6-इनके विरूद्ध निलामी सूचना सं॰-01/2012-13 से निकाली गई निविदा शर्त्ताें में क्रेता से बिक्री कर, आयकर, सेस के भुगतान से संबंधित शर्त्ताें का उल्लेख नहीं करने से प्रतिभागी से उक्त वसूली नहीं होने का आरोप है। द्वितीय कारण पृच्छा में कोई बचाव-बयान अंकित नहीं किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा बिहार वित्त नियमावली की कंडिका-144(ii) के आलोक में आयकर बिक्री कर सेस संबंधी आदेयता उस मामले में प्रासंगिक नहीं होने के कारण आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया जबकि इसी कंडिका-144(ii) ''क'' के अन्तिम पारा में अंकित है कि ''आमंत्रण दस्तावेज में सन्दर्भित करों की आदेयता स्पष्ट रूप से वर्णित होनी चाहिए'' इस प्रकार आरोपी द्वारा नियम 144(ii) ''क'' का अनुपालन आमंत्रित निविदा के शर्ताें के रूप में नहीं करने उन करो की वसूली नहीं की गई जिससे सरकार का प्रत्यक्ष रूप से हानि होने का आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-7- आरोपी पदाधिकारी द्वारा नियमानुसार भाड़े पर वाहन रखने की स्वीकृति के आलोक में व्यवसायिक वाहन उचित भाड़े की राशि पर रखा जाना अपेक्षित था। निजी वाहन का उपयोग सरकारी कार्य में लेने के फलस्वरूप सरकार को व्यवसायिक वाहनों से प्राप्त होने वाला Tax की प्राप्ति नहीं हुई। इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा स्वयं भी वजीरगंज जैसे स्थान में व्यवसायिक वाहन की कमी के कारण निजी वाहन उपयोग में लाये जाने की स्वीकारोक्ति दी गई है। संचालन71 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 पदाधिकारी द्वारा भी आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जिससे सहमत होते हुए द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव-बयान अस्वीकार योग्य है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव-बयान तथा उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्काीलन कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरापों एवं असहमति के बिन्दू पर की गई द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव-बयान स्वीकार योग्य नहीं होने से सभी सात आरोप प्रमाणित होता है। सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-
"पेंशन से 25% ( पच्चीस प्रतिशत ) राशि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-492 दिनांक 04.05.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की मांग की गई।
उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-1873 दिनांक 22.09.2021 द्वारा श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर सहमति प्रदान किया गया है।
अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमंडल, वजीरगंज सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 25% ( पच्चीस प्रतिशत ) राशि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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3 नवम्बर 2021
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-14/2009-1400--श्री श्याम बिहारी राम (आई0डी0-3489), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ के पदस्थापन अवधि के दौरान जल निस्सरण प्रमंडल, राघोपुर के अन्तर्गत ललपुरिया चौर में ननपट्टी एवं लक्ष्मीपुर, भगवतीपुर गाँव के पास बनाये गये पुल तथा गोरधुआ धार पर कुंजरटोली एवं सोने महाराज के समीप बनाये गये पुल में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
"दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री राम द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया हैः-
आरोप (i) - गोरधुआ धार के कुंजरटोली एवं सोने महाराज के नजदीक एक पथीय सेतु निर्माण कार्य में सीमेंट एवं बालू की मात्रा का अनुपात निर्धारित विशिष्टियों के अनुरूप नहीं पाया जाना। (ii) ईट के नमुने के जाँचफल में घटिया ईट का प्रमाण मिलना, जो विशिष्टियों के अनुरूप नही है। (iii) सेतु के Super Structure में लोकल बालू व्यवहार में लाने का प्रमाण मिलना। (iv) कुंजरटोली स्थल पर निर्मित सेतु का ध्वस्त हो जाने का एक मात्र कारण घटिया सामग्री का व्यवहार एवं निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं दिया जाना। बचाव बयानः-श्री श्याम बिहारी राम, तत्का0 अधीक्षण अभियंता से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन का मुख्य अंश निम्न है :- उनके द्वारा दिनांक 30.12.2008 को सहायक अभियंता श्री अशोक कुमार एवं कनीय अभियंता, श्री महेश प्रसाद सिंह के साथ गोरधुआ धार पर कुंजरटोली पुल का स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन भेजा गया है, ग्रामीणों से वार्ता एवं स्थल देखने से प्रतीत हुआ कि कोशी बाँध टूटने से NSL के उपर लगभग 4फीट पानी बह रहा था। इस धार में क्षमता से अधिक पानी आ जाने के कारण ही पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने का मुख्य कारण है। जाँच में भी उक्त स्थल पर 150'-200' (फीट) गहराई में पानी होना बताया गया है, इस परिस्थति में पुल का क्षतिग्रस्त होना स्वभाविक है क्योंकि रूपांकण भी फेल कर सकता है। समीक्षा :-श्री राम के पुनर्विलोकन अर्जी में उपरोक्त उद्धित आरोप सं0 (i), (ii) एवं (iii) के संदर्भ में कोई तथ्य नहीं दिया गया है मात्र आरोप सं0 (iv) यथा कुंजरटोली स्थल पर निर्मित पुल के ध्वस्त होने के संदर्भ में कहा गया है कि इनके द्वारा दिनांक 30.12.2008 को प्रश्नगत स्थल का निरीक्षण कर प्रतिवेदन दिया गया है एवं ग्रामीणों से वार्ता एवं स्थल देखने से प्रतीत हुआ कि कोशी टूटान से NSL के उपर लगभग 4फीट पानी बह रहा था, इस धारा में क्षमता से अधिक पानी आ जाने के कारण पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने का मुख्य कारण है। जाँच में भी स्थल पर 150'-200' फीट गहराई में पानी होना बताया गया है, इस परिस्थिति में पुल का क्षतिग्रस्त होना स्वभाविक बताया गया है। श्री राम द्वारा उपरोक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.2.2 के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रश्नगत स्थल पर निर्मित पुल के स्थल निरीक्षण के दौरान सेतु के Super Structure के Finishing Work में Poor Workmanship पाया गया। Railing में अनेको जगह पर लोहे का छड़ दृष्टिगोचर हो रहे थे, लोकल बालू के प्रयोग में लाने के कारण भुरभुरा Weathered होते देखा गया। स्थानीय बालू (ill Graded) देने के कारण सीमेंट एवं लोहे के साथ सही Binding72 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी। खुली आँखों से ही स्थानीय बालू (silt) साफ दिख रहे थे तथा उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 3.3.0 से भी स्पष्ट है कि कार्य में उपयोग किये गये ईट निर्धारित विशिष्टियाें के अनुरूप नहीं है तथा सीमेंट प्लास्टर के निर्धारित विशिष्टि में सीमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः4 के स्थान 1ः5.5 पाया गया है, अतएव श्री राम का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राम से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्याम बिहारी राम (आई0डी0-3489) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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22 नवम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(डि॰)-14-17/2011-1482--श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467) तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पटना के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता, कदाचार एवं अनुशासनहिनता के लिए उनसे स्पष्टीकरण उपरांत संकल्प ज्ञापांक- 707 दिनांक-02.07.2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम- 17 के अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्रवाई संचालित की गई, जिसमंें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को इस विभागीय कार्रवाई का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आरोप :-(1) विभागीय अधिसूचना सं॰- 63, 65 एवं 66 दिनांक-14.01.11 द्वारा अधिसूचना निर्गत तिथि से चालू प्रभार में कार्यरत कार्यपालक अभियंताओं को सहायक अभियंता के पद पर पदावनत कर उन्हे मुख्यालय में योगदान देने का निदेश दिया गया था तथा विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक-23.02.2011 द्वारा मुख्य अभियंता, डिहरी सहित संबंधित मुख्य अभियंताओं को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अविलम्ब स्थानीय व्यवस्था से प्रभार दिलाकर विरमित करने का निदेश दिया गया था, परन्तु आपके द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक अभियंताओं जिन्हें पदावनत किया गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा गया ताकि में न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकें तथा उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हो सकें। (2) इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक-16.06.2011 द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, परन्तु आपके द्वारा उक्त आदेश का अनुपालन न करते हुए अपना स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित नहीं किया गया। जबकि विभाग द्वारा निर्गत स्मार पत्रांक-4366 दिनांक-13.07.2011 पत्रांक-4962 दिनांक-08.08.2011 एवं पत्रांक-5487 दिनांक-02.09.2011 के द्वारा बार-बार आपकों स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद आपके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करना उचित नहीं समझा गया। इस प्रकार वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन के प्रति आपकी उदासीनता स्पष्टतः परिलक्षित होती है जिसके लिए आप प्रथम द्रष्टया दोषी है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये उक्त सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मन्तव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1376 दिनांक-18.08.2017 से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसका प्रतिउत्तर आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया गया। द्वितीय कारण पृच्छा के प्रतिउत्तर में अंकित बयान पूर्व में पूछे गये स्पष्टीकरण में प्राप्त जवाब के सदृश ही है जो संक्षिप्त में निम्नवत हैः- आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान विभागीय अधिसूचना संख्या- 65 एवं 66 दिनांक-14.01.2011 को उनके पत्रांक-215 एवं 216 दिनांक-20.01.11 से अधीक्षण अभियंता सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी, रूपांकण आयोजन एवं मोनिटरिंग अंचल, डिहरी के साथ साथ संबंधित कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराया। उक्त के क्रम में अधीक्षण अभियंता से सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी से पदावनत दो कार्यपालक अभियंताओं का प्रभार दिलाने संबंधित प्रस्ताव का अनुमोदन इनके पत्रांक-280 दिनांक-28. 01.2011 से किया एवं विभागीय अधिसूचना सं॰- 65 दिनांक-14.01.2011 के अनुपालन हेतु अधीक्षण अभियंता रूपांकण आयो॰ एवं मोनिटरिंग अंचल, डिहरी को पत्रांक-279 दिनांक-28.01.11 से निर्देश दिया गया। पुनः संबंधित कार्यपालक अभियंताओं का प्रभार श्याम नंदन कुमार द्वारा प्रभार हेतु पत्रांक-1500 दिनांक-18.05.11 एवं 1504 दिनांक-18.05.11 से निदेश देते हुए आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित अधीक्षण अभियंता को प्रति दी गई । विभागीय अधीसूचना सं॰- 65 दिनांक-14.01,2011 से पदावनत कार्यपालक अभियंता श्री श्याम नंदन कुमार द्वारा प्रभार सौंपे जाने की सूचना उनके पत्रांक-1533 दिनांक-24.05.11 से विभाग को दी गई एवं अन्य दो पदावनत कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-198 दिनांक-20.05.11 एवं 252 दिनांक-21.05.11 से माननीय उच्च न्यायालय के पारित आदेश का हवाला देते हुए मार्गदर्शन एवं यथा स्थिति बनाये रखने का अनुरोध किया गया जिसके क्रम में पत्रांक-1540 दिनांक-25.05.11 से विभाग को सूचित किया जा चुका है। यह भी कहना है कि पदावनत कार्यपालक अभियंताओं द्वारा मुकदमा दायर करने की सूचना न तो उनके स्तर से और न विभाग के स्तर से उनको थी।73 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक-16.06.11 से स्पष्टीकरण हेतु स्मार पत्र में संदर्भित पत्र 1243 दिनांक-23.02.11 जो इस कार्यालय को अप्राप्त था, अपने पत्रांक-1700 दिनांक-21.06.11 द्वारा विशेष दूत से 28.06.11 को प्राप्त किया गया । एवं इस पर पत्रांक-18 गो॰ दिनांक- 09.07.11 द्वारा संबंधित अधीक्षण अभियंता को आवश्यक कार्रवाई हेतु निदेशित किया गया। उनका यह भी कहना है कि विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक-23.02.11 जो 29.06.11 को प्राप्त हुआ, प्राप्ति के पूर्व ही उनके द्वारा ससमय यथोचित कार्रवाई की जा चुकी थी पदावनत कार्यपालक अभियंता विभागीय एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना के लिए स्वयं दोषी हैं क्योंकि विभागीय अधिसूचना सं॰- 66 दिनांक-14.01.2011 के कंडिका- 3 में उल्लेख है कि ''उपर्युक्त चालू प्रभार के पदस्थापन रद्द किये जाने के फलस्वरूप उपर्युक्त पदाधिकारियों को सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर पदस्थापन हेतु मुख्यालय में योगदान देने का निदेश दिया जाता है । स्पष्टीकरण के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि संबंधित स्पष्टीकरण पत्रांक-2453 दिनांक-10.08.2011 एवं पत्रांक-2028 दिनांक-22.06.12 से पूर्व में ही विभाग को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही कहना है कि उक्त परिपेक्ष्य में उड़नदस्ता का पत्रांक-1/शि॰ इन्द्रपुरी दिनांक-13.04.12 एवं 224 दिनांक-24.04.2012 द्वारा माँगे गये अभिलेख को भी पत्रांक-1448 दिनांक-05.05.2012 से विभाग को समर्पित किया जा चुका है। इनके द्वारा कार्य में किसी प्रकार का शिथिलता नही बरते जाने का भी उल्लेख किया गया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य मामले में उड़नदस्ता का जाँच प्रतिवेदन का कंडिका-ix में मुख्य अभियंता, डिहरी (आरोपी पदाधिकारी) का पत्रांक-280 दिनांक-28.01.11 के अनुपालन में अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा दो पदावनत कार्यपालक अभियंता के सिलसिले में विभागीय आदेश एवं तदनुसार मुख्य अभियंता का निदेश के अनुपालन में अनापेक्षित विलम्ब किये जाने का उल्लेख है। अर्थात विभागीय आदेश के अनुपालन में इनके द्वारा कोई विलम्ब नहीं किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय आदेशों का अनुपालन नहीं करने तथा संबंधित पदावनत कार्यपालक अभियंता को अपने पद पर बनाये रखने संबंधी परोक्ष या अपरोक्ष लाभ पहुँचाने जैसे कोई कार्य नहीं किया गया है। उनका यह भी कहना है कि कार्य में कोई उदासीनता नहीं बरती गई और न तत्परता में कमी किया गया और न गलत मंशा रहीं। अतएवं आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम में निम्न तथ्यों पर विचार किया गया। श्री अम्बरकर, मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा विभागीय पत्रांक-65 एवं 66 दिनांक-14.01.11 को संबंधित अधीक्षण अभियंता एवं पदावनत कार्यपालक अभियंता को अग्रसारित किया गया। जिसके क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा स्थानीय व्यवस्था से पदावनत कार्यपालक अभियंता से प्रभार दिलाने का प्रस्ताव श्री अम्बरकर मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। जिसे मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-279 एवं 280 दिनांक-28.01.11 द्वारा अनुमोदित किया गया। उक्त निदेश के आलोक में पदावनत कार्यपालक अभियंता को प्रभार सौंप कर मुख्यालय में योगदान करना चाहिऐ था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। सर्वप्रथम उनके निदेश का पदावनत कार्यपालक अभियंताआं द्वारा अनुपालन नहीं किया जाना उनके प्रशासनिक विफलता का द्योतक है। पदावनत कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रभार नहीं सौंपे जाने की स्थिति में पदभार ग्रहण करने वाले पदाधिकारी को स्वतः प्रभार प्राप्त करने एवं पदभार सौंपे जाने वाले पदाधिकारी (पदावनत कार्यपालक अभियंता) को स्वतः विरमित करने का आदेश निर्गत किया जाना चाहिये था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। साथ ही पदावनत कार्यपालक अभियंता द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने पर इनके सभी प्रदत्त शक्तियों को शिथिल करने एवं वेतनादि के भुगतान पर रोक जैसी कार्रवाई मुख्य अभियंता से अपेक्षित था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। फलतः पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अपने पूर्व पद पर बने रहने का अवसर प्राप्त हुआ इस प्रकार श्री अम्बरकर मुख्य अभियंता द्वारा पत्रांक-279 एवं 280, दिनांक-28.01.11 से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को प्रभार सौंपने का आदेश औपचारिकता मात्र है। श्री अम्बरकर, मुख्य अभियंता के पत्रांक-1500 एवं 1504 दिनांक-18.05.11 से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को प्रभार सौंपने हेतु स्मारित किये गये जो इनके पूर्व के आदेश दिनांक-28.01.2011 से करीब पौने चार माह बाद दिये जाने से अभियंताओं के पदावनत जैसे संवेदनशील विभाग के निर्णय को गंभीरता पूर्वक नहीं लिया जाना परिलक्षित होता है। फलतः पदावनत कार्यपालक अभियंता श्री लॉजिन्स मिन्ज एवं रमेश साह को न्यायालय जाने का पर्याप्त समय एवं विभागीय निर्णय के विरूद्ध स्थगन आदेश प्राप्त करने का अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार श्री अम्बरकर के विरूद्ध प्रत्यक्ष रूप से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से इन्हें विरमित करने की कार्रवाई न कर पद पर बने रहने का मौका दिया गया ताकि वे न्यायालय में मुकदमा दायर कर सके एवं अनुचित लाभ प्राप्त कर सकें का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय आदेशो का अनुपालन में टालमटोल किये जाने एवं उक्त आदेशों को वास्तविक रूप में Implement कराने के बजाय अपने अधिनस्थों को मात्र सूचित करने की औपचारिकता निभाने के कारण विभागीय आदेशों का अनुपालन नहीं होने से उक्त स्थिति पैदा होने पर लगाये गये आरोप को प्रमाणित बताया गया। अतः द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउार स्वीकार योग्य नहीं है। विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक-16.06.11 द्वारा श्री अम्बरकर से मांगे गये स्पष्टीकरण के क्रम में जवाब नहीं प्राप्त होने पर विभाग द्वारा निर्गत विभिन्न स्मार यथा पत्रांक-4386/13.07.2011, पत्रांक-4962/08.08.2011 के क्रम में इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-2453 दिनांक-10.08.11 जो कि लगभग दो माह बाद दिया गया से इनके विभागीय आदेश का सम्यक अनुपालन नहीं किये जाने का बोध होता है। पत्रांक-2028 दिनांक-22.06.2012 द्वारा विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक-16.06.11 के क्रम में स्पष्टीकरण देने का उल्लेख इस मामले में अप्रासंगिक है।74 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 इस प्रकार विभाग द्वारा बार-बार स्मार पत्र निर्गत किये जाने से सरकारी कार्याें के निष्पादन में इनके द्वारा बरती गयी उदासीनता परिलक्षित होता है संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक-16.06.2011 द्वारा माँगे गये श्री अम्बरकर से स्पष्टीकरण को Self explanatory एवं descriptive बताते हुए enclosure के रूप वाँछित पत्र 1243 दिनांक-23.02.11 को प्राप्त करने में 15 दिनों का अनावश्यक समय बर्बाद किया गया। इसके अतिरिक्त उक्त विभागीय स्पष्टीकरण सीधे मुख्य अभियंता से था जिसे अधीक्षण अभियंता का भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इस प्रकार आरोपी द्वारा जानबुझकर विभागीय अनुदेशों को टालमटोल किये जाने के कारण स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया जो आरोपी के द्वारा सकल अनुशासनहीनता दर्शाता है। इस प्रकार विभागीय आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन में उदासीनता का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है। इस प्रकार उपर्युक्त तथ्यों, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं उनके बचाव बयान से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अपने पद पर बने रहने का प्रत्यक्ष रूप से मौका देकर उन्हें माननीय न्यायालय से अनुचित लाभ प्राप्त करवाने और विभागीय आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के प्रति उदासिनता का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित प्रतीत होने से द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होता है। उक्त के आलोक में श्री ओमप्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया- ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दंड प्रस्ताव पर बी0पी0एस0सी0 के पत्रांक-1155 दिनांक- 14.08.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई। अतएव श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467) तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-2033 दिनांक 20.09.2019 द्वारा दण्ड अधिरोपत कर संसूचित किया गया- ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' उल्लेखनीय है कि पूर्व में श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत को उनके मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन अवधि के दौरान सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-22123/2014 शिवेश कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामले में ससमय तथ्य विवरणी तैयार नहीं करने एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने सहित अन्य आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1722 दिनांक 08.08.2018 द्वारा "कालमान वेतन में तीन वेतन प्रक्रम में स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी" का दण्ड संसूचित किया गया था। श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध उक्त दोनों दण्डादेशों के लागू नहीं हो पाने के कारण महालेखाकार, बिहार, पटना के पत्रांक-3504/2019-20 दिनांक 06.11.2019 एवं पत्रांक-2792 दिनांक 2020-2021 द्वारा दण्डादेश के क्रियान्वयन के संबंध में विभागीय निर्णय से अवगत कराये जाने का अनुरोध किया गया है। मामले के समीक्षोपरांत श्री अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं0-2033 दिनांक 20.09.2019 द्वारा संसूचित दण्ड "कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति" के दण्डादेश का पूर्ण क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे वेतन स्तर-13/ए, ग्रेड वेतन-8900/- से वेतन स्तर-13 ग्रेड वेतन-8700/- में चले जायेंगे जो नियमसंगत नहीं है। वर्णित स्थिति में कालमान वेतन में एक वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति का दण्ड ही लागू किया जाना संभव है। वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-28 के तहत एवं महालेखाकार कार्यालय द्वारा किए गये अनुरोध के परिप्रेक्ष्य में विभागीय अधिसूचना सं0-2033 दिनांक 20.09. 2019 द्वारा संसूचित दण्ड "कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति" को संशोधित करते हुए "कालमान वेतन में एक वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति" का दण्ड संसूचित किए जाने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया। अतएव सरकार द्वारा लिए गए निर्णयोपरांत श्री ओम प्रकाश अम्बरकर (आई0डी0-3467) तत्का0 मुख्य अभियंता, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-2033 दिनांक 20.09.2019 द्वारा संसूचित दण्ड "कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति" को संशोधित करते हुए "कालमान वेतन में एक वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति" का दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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23 नवम्बर 2021
सं0 22/नि0सि0(मुक0)भाग0-19-34/2011-1485--श्री धनंजय प्रसाद सिंह (आई0डी0-2066), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल सं0-1, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को वर्ष 2009-10 के पदस्थापन अवधि के दौरान भागलपुर जिलान्तर्गत बिक्रमशीला पुल के निम्न धार में ईस्माइलपुर से बिन्दटोली तक एजेण्डा सं0-98/333 के तहत वर्ष 2009 बाढ़ पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य से संंबंधित अभिलेखों का प्रभार पैतृक प्रमंडल बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को नहीं सौंपने के लिए मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर का प्रतिवेदन (दिनांक 30.01.2010) के आधार पर विभागीय पत्रांक-608 दिनांक 07.04.2010 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण को अस्वीकृत75 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1108 दिनांक 29.07.2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-660 दिनांक-07.06.2011 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गया :-
1. निन्दन वर्ष 2009-10 2. दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उपर्युक्त दण्डादेश के आलोक में महालेखाकार द्वारा जुलाई 2011 का वेतनवृद्धि रोकते हुए वेतन पुर्जा निर्गत किया गया। चूँकि श्री सिंह दिनांक 31.01.2012 को सेवानिवृति हुए है, ऐसे में इनके असंचयात्मक दण्ड का प्रभाव संचयात्मक दण्ड के रूप में प्रभावी हो गया है। इस परिस्थिति में वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने पर उनके पेंशन पर कुप्रभाव पड रहा है।
श्री धनंजय प्रसाद सिंह द्वारा उपर्युक्त दण्डादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-20249/2011 दायर किया गया तथा उपर्युक्त दण्ड के कुप्रभाव के कारण श्री सिंह द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-20249/2011 में आई0ए0-................/2021 दायर किया गया है।
श्री सिंह, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा उपर्युक्त दण्डादेश के विरूद्ध एक अपील दायर किया गया है। अपील/पुनर्विलोकन अर्जी में उठाये गये बिन्दु मुख्य रूप से निम्नांकित हैं :-
(i) कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल, भागलपुर के रूप में ये दिनांक 26.08.2008 से सेवानिवृति तक यथा दिनांक 31.01.2012 तक पदस्थापित थे।
(ii) विभागीय आदेश संख्या-771 दिनांक 13.03.2009 एवं 774 दिनांक 14.03.2009 द्वारा गंगा सेतु के निम्न धार में इस्माईलपुर से बिन्द टोली तक कटाव निरोधक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु अपने कार्यों के अतिरिक्त इनकी प्रतिनियुक्ति की गई थी।
(iii) कार्य में सहयोग हेतु मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर परिक्षेत्र के विभिन्न प्रमंडलों से सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता संलग्न किये गये उन सभी सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के बीच कार्य क्षेत्र का बंटवारा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के ज्ञापांक-900 दिनांक 27.03.2009 द्वारा किया गया।
(iv) कार्य का सम्पादन पुरी निष्ठा लगन एवं तत्परता से किया गया। समय-समय पर उच्चाधिकारी द्वारा निरीक्षण के दौरान दिये गये निदेश का अनुपालन करते हुए कार्य सम्पादित कराया गया। उक्त कार्य हेतु इनकी प्रतिनियुक्ति की गई थी, इसलिए ये प्रभारी कार्यपालक अभियंता के रूप में कार्य सम्पादित कर रहे थे।
(v) इनके और इनके साथ प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता/कनीय अभियंता कार्य कराकर उसकी मापीपुस्त में अंकित/जाँच कर कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया (श्री बी0 पी0 मंडल) द्वारा नियमानुसार विपत्र पारित कर संवेदक को भुगतान किया जाता था। जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-2774 दिनांक 23.11. 2009 के आलोक में इस कार्य में प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता/कनीय अभियंता को सभी मूल अभिलेखों को मूल में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को सौंपने हेतु मौखिक एवं लिखित रूप में निदेश दिया गया है। (vi) चूँकि सभी सहायक अभियंता/कनीय अभियंता को विरमित करने का आदेश मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के ज्ञापांक-3327 दिनांक 15.10.2009 द्वारा निर्गत हो चुका था, जिसके अनुपालन में वे मूल प्रमंडल में वापस हो गये।
(vii) उनके द्वारा अपने स्तर से सम्पर्क कर तथा अन्य संभव कार्रवाई कर मूल अभिलेख कनीय अभियंता/सहायक अभियंता से प्राप्त कर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को हस्तगत कराया गया।
(viii) संचालन पदाधिकारी ने निष्कर्ष में लिखा की अभिलेख समर्पित करने में विलंब हुआ अतः चेतावनी दी जा सकती है। संचालन पदाधिकारी के कार्य आरोप से संबंधित मामले की समीक्षा कर आरोपित पदाधिकारी के पक्ष या विपक्ष में तथ्यों को प्रस्तुत करना है, न कि दण्ड की अनुशंसा करना।
(ix) इनके स्तर से कृत कार्रवाई से सरकार को वित्तीय क्षति नहीं हुई है। इनके विरूद्ध "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित है। इनके दिनांक 31.01.2012 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उक्त दण्ड इनपर लागु नहीं हो सकता है। अगर ये वर्ष 2011-2012 के अन्त में सेवानिवृत होते तभी इनपर उक्त दण्ड लागु होता है तथा पूर्ण पेंशन भी सेवानिवृति के पश्चात प्राप्त होता। परन्तु महालेखाकार द्वारा मात्र एक वेतनवृद्धि रोक कर इनका वेतन निर्धारित किया गया एवं उक्त के आधार पर ही इनका पेंशन निर्धारित किया गया है। जबकि असंचयात्मक प्रभाव से वेतनवृद्धि पर रोक लागु करने पर भी इनका अंतिम वेतन यथावत रहता और पेंशन निर्धारण में कोई त्रुटि नहीं होती। महालेखाकार, बिहार द्वारा मात्र एक वेतन वृद्धि सदा के लिए रोक दिया गया है जो बिल्कुल त्रुटिपूर्ण एवं असंगत है। इस त्रुटिपूर्ण दण्डादेश एवं असंगत ढंग से लागु किये जाने के कारण इनके पेंशन निर्धारण पर कुप्रभाव पडा है। अतएव इनके द्वारा पुनर्विचार कर न्याय करने का अनुरोध किया गया है।76 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 समीक्षा - श्री धनन्जय प्रसाद सिंह, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के अपील अभ्यावेदन जिसे पुनर्विचार अभ्यावेदन के रूप में लिया जा सकता है, में उठाये गये बिन्दुओं जो कंडिका-11 (i) से (vii) तक में अंकित है, उन्हीं बिन्दुओं को उठाया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष उठाया गया था। अतएव इसमें कोई नया तथ्य का समावेश नहीं किया गया प्रतीत होता है, जिस पर पुनर्विचार किया जा सके। कंडिका-11(viii) में उठाये गये बिन्दुओं पर भी विचार किया जाना अपेक्षित प्रतीत नहीं होता है क्योंकि इसमें उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में अंकित 'निष्कर्ष' पर प्रश्न उठाया गया है। जहाँ तक श्री सिंह सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पुनर्विचार अभ्यावेदन के अंतिम कंडिका-11(ix) में उठाये गये बिन्दुओं का प्रश्न है, उस पर विचार करने की आवश्यकता प्रतीत होती है। उक्त कंडिका में इनके द्वारा उठाये गये बिन्दुओं से प्रतीत होता है कि इनके विरूद्ध अधिसूचना संख्या-660 दिनांक 07.06.2011 द्वारा संसूचित दण्ड (1) 'निन्दन' वर्ष 2009-2010 एवं (2) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक के आलोक में महालेखाकार का कार्यालय, बिहार, पटना द्वारा एक वेतन वृद्धि रोक कर ही इनकेे अंतिम वेतन के आधार पर इनका पेंशन निर्धारित कर दिया गया है, जिससे विभागीय दण्ड आदेश सं0-660 दिनांक 07.06.2011 द्वारा संसूचित "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" के दण्ड का प्रभाव संचयात्मक रूप से हो गया एवं इसका कुप्रभाव इनके पेंशन निर्धारण पर पड़ा है। अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-660 दिनांक 07.06.2011 द्वारा संसूचित दण्ड के कंडिका-2 में अंकित दण्ड "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को निरस्त करते हुए उपर्युक्त दण्डादेश को निम्नरूपेण संशोधित किए जाने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है :-
(1) 'निन्दन' वर्ष 2009-2010 उक्त निर्णय श्री धनंजय प्रसाद सिंह (आई0डी0-2066), तत0 कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल सं0-1, संप्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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15 दिसम्बर 2021
सं0 22/नि0सि0(दर0)16-04/2021-1578--श्री विनय कुमार (आई0डी0 सं०-5210) प्राक्कलन पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर-सह-कार्यपालक अभियंता (उच्चार प्रभार), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर द्वारा विपत्राें का भुगतान बाधित रखने, कार्य के प्रति लापरवाही बरतने एवं अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन नहीं करने आदि आरोप के मामले में सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय-मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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20 दिसम्बर 2021
सं0 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-08/2015/1606--मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्य में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य की गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30 दिनांक 30.07.2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पायी अनियमितताओं के लिए श्री विनय कुमार सिंह (आई0डी0-3407), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा के विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-290 दिनांक 19.02.2020 द्वारा श्री विनय कुमार सिंह से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। जिसके क्रम में श्री सिंह के पत्रांक-317 दिनांक 16.03.2020 द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत है :- (i) प्रमंडलाधीन नहर पुनस्र्थापन कार्य में पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत प्राक्कलन एवं आलेख्य के अनुरूप नहीं कराया जाना।
(ii) पी0सी0सी0 लाईनिंग के साईड स्लोप के कतिपय पैनल में हेयर क्रैक पाया जाना। श्री सिंह द्वारा समर्पित बचाव बयान निम्नवत है :- नहर लाईनिंग कार्य कनीय अभियंता, सहायक अभियंता के साथ प्राक्कलन एवं आलेख्य पर गहन विचार विमर्श कर कार्य प्रारंभ कराया गया था। समय-समय पर उच्च पदाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता रहा था एवं उनके निदेशानुसार स्वीकृत प्राक्कलन एवं आलेख्य के अनुरूप ही कार्य होता रहा। मुख्य अभियंता द्वारा भी दिनांक-04.03.2015 एवं 15.06.201577 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 को स्थल निरीक्षण किया गया। उनके द्वारा स्थल पंजी पर लिखित निदेश दिया गया था, जिसका पालन करते हुए कार्य कराया जाता रहा। प्रथम बार उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा मोनोलिथिक रूप से ढलाई न कराकर अलग-अलग ढलाई कराने की बात प्रकाश में लाया गया। उसके बाद सारे कार्य उड़नदस्ता जाँच दल के दिशा-निदेश के आलोक में कराये गए। P.C.C. Lining के साईड स्लोप के कतिपय पैनल में Hair Crack माह मई एवं जून में कराये गये कार्य में देखा गया, जो अत्यधिक तापमान के कारण हुआ था। मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक-15.06.2015 को स्थल निरीक्षण के क्रम में इस क्रैक भाग को Epoxy Grouting से मरम्मति कराने का आदेश दिया गया था। मरम्मति होने तक संवेदक का 5% राशि रोकने का भी आदेश दिया गया। जाँच दल द्वारा भी Curing हेतु जूट के बोरे को पानी से भिगोते हुए पाया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-
श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि नहर लाईनिंग कार्य का समय-समय पर उच्च पदाधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया जाता रहा था। उनके निदेशानुसार स्वीकृत प्राक्कलन एवं आलेख्य के अनुरूप कार्य होता रहा। मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक-04.03.2015 एवं 15.06.2015 को स्थल निरीक्षण किया गया तथा उनके द्वारा स्थल पंजी पर दिये गये लिखित निदेशानुसार कार्य कराया जाता रहा। प्रथम बार उड़नदस्ता दल द्वारा मोनोलिथिक रूप से ढ़लाई न कराकर अलग-अलग ढ़लाई कराने की बात प्रकाश में लाया गया। उसके बाद सारे कार्य उड़नदस्ता जाँच दल के दिशा निदेश के आलोक में कराये गये। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि कंक्रीटिंग कार्य मोनोलिथिक रूप से कराया गया है। हेयर क्रैक के संदर्भ में कहा गया है कि कतिपय पैनल में Hair Crack माह मई एवं जून में कराये गये कार्य में पाया गया है। इससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा Curing का उत्तम प्रबंध नहीं किया गया है, जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.1.2 के अनुसार जाँचित कार्य इश्वापुर अवर प्रमंडलान्तर्गत सलेमपुर वितरणी के बि॰दू॰ 17.4 तक कार्य कराया गया है। बि॰दू॰ 12.0 के पास आउटलेट के U/S एवं D/S भाग के साईड स्लोप में कई स्थलों पर Hair Crack पाया गया। बि॰दू॰ 10.0 से 14.0 के समीप लाईनिंग कार्य त्रुटिपूर्ण होने के कारण अभियंता प्रमुख द्वारा तोडकर नये सिरे से बनाने का निदेश दिया गया। इस वितरणी के बि॰दू॰17.40 के पास लाईनिंग कार्य दो चरणों में पेभर मशीन के प्रयोग से LDPE के उपर Logitudinal एवं Transvers sleeper एवं panel में Monolithic रूप से कंक्रीटिंग कार्य किया हुआ पाया गया। श्री सिंह द्वारा भी स्वीकार किया गया है कि उड़नदस्ता जाँच के पश्चात उड़नदस्ता के निदेशानुसार Longitudinal एवं Transverse sleeper के ढ़लाई के पश्चात Panel भी ढलाई की गयी है। ऐसी स्थिति में जाँच के पूर्व अनुमोदित आलेख्य के विपरीत Monolithic Casting किया जाना परिलक्षित होता है। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में स्वीकृत आलेख्य के अनुरूप कार्य नहीं होने का तो उल्लेख है परन्तु उक्त अनियमित ढंग से कार्य कराने के कारण सरकारी राशि की क्षति से संबंधित कोई विवरणी नहीं दिया गया है। दूसरे तरफ अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना के पीत पत्र सं॰-1564 दिनांक-04.12.2015 में उल्लेख किया गया है कि मुख्य अभियंता को दिये गये अनुवर्ती कार्रवाई के निदेश के आलोक में मुख्य अभियंता द्वारा पत्रांक-309 दिनांक-31.07. 2016 से उपलब्ध कराये गये अनुपालन प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उक्त प्रमंडल में जाँच के पश्चात P.C.C Lining कार्य स्वीकृत आलेख्य के अनुरूप करायी जा रही है तथा Hair Crack को रोकने के लिये स्लोप पर जूट के बोरा बिछाकर तथा Bed में Pounding कर क्युरिंग किया जा रहा है तथा Hair Crack आने पर निदेशानुसार Epoxy Compound से मरम्मति भी करायी जा रही है। वर्णित समीक्षा के आलोक में पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच के पश्चात कार्य में वाँछित सुधार करते हुए आगे का कार्य स्वीकृत आलेख्य के अनुरूप लाईनिंग कार्य कराया गया है तथा जाँच के पूर्व सलेमपुर वितरणी में कराये गये लाईनिंग कार्य में पाये गये क्रैक को Epoxy Compund से मरम्मति कराया गया है। फलतः इनके विरूद्ध सरकारी राशि का दुरूपयोग करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। परन्तु आलेख्य के अनुरूप कार्य नहीं कराकर Longitudinal एवं Transverse Sleeper के ढलाई तथा Panel की ढलाई मोनोलिथिक रूप से कराने के कारण Hair Crack होने का आरोप बनता है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के अन्तर्गत "एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णययानुसार श्री विनय कुमार सिंह (आई0डी0-3407), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, छपरा सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के अन्तर्गत "एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।78 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 30 दिसम्बर 2021 सं0 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2017/1696--सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा अन्तर्गत शेखपुरा वितरणी के वि0दू0 0.00 से वि0दू0 6.00 तक वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कराये गये पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य के स्लोप में कई स्थलों पर उत्पन्न क्रैक की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़दस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-22 दिनांक 05.07.2017 से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री राम किशोर शाही (आई0डी0-3649), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री शाही से प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय समीक्षोपरांत पायी गयी अनियमितता के संबंध में इनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र की वृहद जाँच हेतु सक्षम प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-501 दिनांक 07.03.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में श्री हरिश कुमार, प्राध्यापक, जल संसाधन अभियंत्रण, वाल्मी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री शाही के विरूद्ध आरोप पत्र में अन्तर्विष्ट आरोप निम्नांकित है :- (1) उड़नदस्ता द्वारा प्रश्नगत नहर में लाईनिंग कार्य से एकत्रित नमूनों के जाँचफल से स्पष्ट है कि लाईनिंग कार्य में प्रावधानित सीमेंट की मात्रा में 19.06% से 33.78% की कमी पायी गयी है, जो न्यून विशिष्टि के P.C.C लाईनिंग कार्य कराया जाना स्थापित करता है। परन्तु प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने से अधिकाई भुगतान होने का मामला बनता है, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता दर्शाता है। (2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.0.0 (x) एवं 11.0.0 (3) से स्पष्ट है कि P.C.C लाईनिंग कार्य में व्यवहृत कंक्रीट में दरार होने का एक कारण Proper Curing का अभाव होना माना गया है एवं कहा गया है कि नहर के स्लोप भाग में Evaporation Loss को पर्याप्त क्यूरिंग करते हुए नियंत्रण नहीं किया गया। फलतः दरार उत्पन्न होना स्वाभाविक है। अतएव सम्पादित कार्य में समुचित Curing कार्य को अनदेखी करते हुए Curing की ठोस व्यवस्था नहीं की गयी। (3) आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता करते हुए न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अधिक भुगतान किया गया तथा Curing जैसे महत्वपूर्ण कार्य में उदासीनता बरती गयी, जिसके कारण P.C.C Lining कार्य में दरार उत्पन्न हुआ है, जो उनके द्वारा वित्तीय अनियमितता बरतना, लापरवाही बरतना एवं कार्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है। उक्त अनियमितता से बिहार वित्त नियमावली के नियमाें के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम- 3(1) का उल्लंघन है। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-148 दिनांक 10.02.2020 द्वारा श्री शाही के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें गठित आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के समेकित निष्कर्ष में अंकित मंतव्य निम्नवत है :-
"आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान में अंकित अभिकथन प्रयोगशाला जाँच के प्रतिफल के समक्ष तथ्यहीन होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है। इतना ही नहीं सुनवाई में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं प्रस्तुत किया गया, जो उनके अभिकथन को प्रतिपादित करता है। जहाँ तक की दिनांक-16.01.2020 को अंतिम सुनवाई में भी प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा की गयी पृच्छाओं का भी लाईनिंग कार्य में Curing से संबंधित कोई साक्ष्य स्वरूप फोटोग्राफ दिखाने में विफल रहे। अतः इनके विरूद्ध संस्थित आरोप प्रमाणित होते हैं"।
जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-795 दिनांक 16.06.2020 द्वारा श्री शाही से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। जिसके क्रम में उनके पत्रांक-01 दिनांक 08.09.2020 के माध्यम से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-
उनके द्वारा समर्पित साक्ष्य समर्थित विस्तृत बचाव दिनांक-05.06.2019 में स्पष्ट अंकित है कि जाँच प्रतिवेदन दिनांक-04.07.2017 की कंडिका 9.0.0 में स्पष्ट उल्लेख है कि जाँच के क्रम में सील बन्द किये गये नमूनों को Coding कर उड़नदस्ता द्वारा शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-02, खगौल को गुणवता जाँच हेतु भेजा गया था। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 10. 0.0(iv) में स्पष्टतः अंकित है कि जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7.0.0(vi) पर अंकित सम्पादित कार्य की मात्रा के अवलोकन से इस तथ्य की पुष्टि होती है कि जाँच की तिथि तक वितरणी में Lining कार्य प्रारंभिक अवस्था में ही था एवं जाँच की तिथि दिनांक-27.02.2017 तक मात्र वि0दू0 0.00 से वि0दू0 6.00 तक ही Lining कार्य सम्पन्न किया जा सका था। मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के ज्ञापांक 1045 दिनांक-06.07.1992 की कंडिका-(1)(iii) में दिये गये निदेश के अनुपालन में Control sample प्रयोगशाला द्वारा भेजे जाने का कहीं कोई उल्लेख नहीं है, जिसका मूल उद्देश्य प्रयोगशाला द्वारा निकाले गये अनुपात में Testing के दौरान होने वाले मानवीय भूल-चूक का आकलन है। इस कारण Testing के दौरान होने वाले मानवीय भूल-चूक का आकलन के अभाव में प्रयोगशाला जाँच का प्रतिफल भरोसेमंद, विश्वसनीय एवं प्रमाणिक नहीं है, जिसके आधार पर उनके द्वारा समर्पित साक्ष्य समर्थित बचाव-बयान को संचालन पदाधिकारी द्वारा समेकित निष्कर्ष के प्रथम वाक्य में ही उनके बचाव-बयान को स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। संचालन पदाधिकारी का यह निष्कर्ष युक्तियुक्त एवं समीचीन नहीं है। संचालन पदाधिकारी के समेकित निष्कर्ष के द्वितीय वाक्य के संदर्भ में कहा गया है कि उनके द्वारा बचाव-बयान में निवेदित अपने दावे के समर्थन में सुसंगत साक्ष्य संलग्न किये गये है, जो विभिन्न परिशिष्टों के रूप में संलग्न है। फलतः समेकित निष्कर्ष का कोई आधार नहीं है। परिशिष्ट-5 के रूप में Cause and Control of Cracks in Concrete79 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 80 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 निर्मित सी0डी0 संरचना के मामले में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1336 दिनांक-19.06.2018 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0-1419 दिनांक-02.07.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
(1) प्रश्नगत कार्य यथा सिंचाई प्रमंडल, सहरसा के अंतर्गत सुपौल उप शाखा नहर के वि0दू0 26.00 पर अवस्थित स्क्यू हयूम पाईप, सी0डी0 संरचना के प्रोटेक्शन वॉल के निर्माण कार्य के माप पुस्त में ह्यूम पाईप के U/S एवं D/S में स्लोप प्रोटेक्शन में पी0सी0सी0 (1ः3ः6) की मोटाई 1'6'' दर्ज है। जबकि स्थल पर 3'' ब्रीक सोलिंग के उपर 2''/3'' पी0सी0सी0 किया हुआ पाया गया। फलतः खरीफ 2016 में दोनों स्लोप प्रोटेक्शन पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुआ। इस प्रकार स्थल पर कम कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान किये जाने के कारण सरकारी राशि की क्षति पहुँचायी गयी है।
(2) प्रश्नगत संरचना के निर्माण कार्य के माप पुस्त सं0-2678 से स्पष्ट है कि कट ऑफ निर्माण कार्य का भुगतान प्रावधान के अनुरूप किया गया है परन्तु स्थलीय जाँच में कट ऑफ वॉल का कार्य माप पुस्त में अंकित मापी के अनुसार नहीं पाया गया। फलतः प्रोटेक्शन क्षतिग्रस्त होने के कारण ह्यूम पाईप से लीकेज हुआ है एवं बहाव के कारण क्षतिग्रस्त होकर क्रैक कर गया। इस प्रकार इस मद में अनियमित भुगतान होना परिलक्षित है एवं संवेदक को लाभ पहुँचाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए निम्न बिन्दुओं पर अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग श्री कुमार से की गई -
(i) संचालन पदाधिकारी का कहना है कि पुराने Two vent Hume pipe के जीर्ण अवस्था के कारण Seepage/leakage हो रहा होगा। यह तथ्य संभावना के आधार पर कहा गया है न कि किसी साक्ष्य के आधार पर, अतएव बिना साक्ष्य आधारित तथ्य स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, जबकि अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, सहरसा के निरीक्षण प्रतिवेदन में स्पष्ट उद्धित है कि विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं होने से संरचना एवं नहर बाँध क्षतिग्रस्त हुआ है। (ii) संचालन पदाधिकारी का कथन कि कार्य के कार्यान्वयन के दौरान अथवा इसके बाद भी घटना घटित होने के पूर्व तक किसी भी पदाधिकारी अथवा निरीक्षण दल द्वारा कार्य की विशिष्टि पर प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं किया गया है एवं साढ़े तीन वर्षों तक इस बिन्दु पर कोई टूटान नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कार्य विशिष्टि के अनुरूप कराया गया है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि संचालन पदाधिकारी के उपरोक्त तथ्य किसी साक्ष्य पर आधारित नहीं है जबकि अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, सहरसा के पत्रांक-632 दिनांक 15.11.2016 में स्पष्ट रूप से उद्धित है कि मापपुस्त में U/s एवं D/s में स्लोप प्रोटेक्शन की मोटाई PCC (1:3:6)1'6" दर्ज है जबकि स्थल पर 2" से 3" पाया गया है। कट ऑफ कार्य भी मापपुस्त के अनुसार स्थल पर नहीं पाया गया साथ ही टूटान का कारण स्लोप प्रोटेक्शन का क्षतिग्रस्त होना तथा लीकेज होना बताया गया है।
(iii) संचालन पदाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 25.08.2016 को किए गये निरीक्षण के आधार पर कहा है कि फेस वॉल लगभग तीस फीट में तथा नहर बाँध पच्चीस फीट में टूटने के कारण सी0डी0 संरचना क्षतिग्रस्त हो गया है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि संचालन पदाधिकारी का यह कथन साक्ष्य आधारित नहीं होकर संभावना के आधार पर आधारित प्रतीत होता है, जबकि अधीक्षण अभियंता द्वारा तटबंध के टूटान एवं संरचना क्षतिग्रस्त होने को विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराना बताया गया है।
(iv) संचालन पदाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता के द्वारा दिनांक 31.08.2016 को स्थल निरीक्षण के आधार पर कहा गया है कि सीपेज Water से हो रहे अंदर माइनिंग से ह्यूम पाईप सी0डी0 एवं प्रोटेक्शन वॉल का फाउंडेशन में सेटलमेंट हुआ एवं उसके कारण दोनो मेंट क्रैक कर दो भागों में विभक्त हो गया था एवं D/s face wall क्षतिग्रस्त होने का कारण भी फाउंडेशन सेटलमेंट प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी का उपरोक्त कथन साक्ष्य आधारित प्रतीत नहीं होता है ऐसे भी आरोप का मुख्य बिन्दु है कि प्रश्नगत कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं कराया गया है जो अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-632 दिनांक 15.11.2016 से स्पष्ट रूप से स्थापित होता है।
(v) संचालन पदाधिकारी ने टूटान के पश्चात लगभग ढाई माह के पश्चात स्थल निरीक्षण किये जाने के पूर्व स्थलीय स्थिति से पूर्णतः परिवर्त्तित होने के कारण पूर्व में कराया गया कार्य Cover हो जाने की वजह से निरीक्षण के दौरान ब्रीक सोलिंग के उपर 2" 3" PCC किया हुआ पाया गया होगा के आधार पर कार्य को विशिष्टि के अनुरूप कराने का मंतव्य दिया गया है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि मापपुस्त में अंकित PCC की मोटाई 1'6" की जगह पर 2"3" स्थल पर पाया गया तथा फेस वॉल भी प्रावधान के अनुरूप नहीं पाया गया है। मात्र संभावना के आधार पर गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। श्री नुतेश कुमार का बचाव बयान -
(i) प्रश्नगत RD-26 पर CD एक पुरानी संरचना थी, जिसमें इनके पदस्थापना से पूर्व वर्ष 2012 में अन्य अभियंताओं द्वारा पुनस्र्थापन कार्य के अन्तर्गत दोनो ह्यूम पाईप के Top व साईट में PCC (1:3:6) का कार्य Wing wall, face wall Return wall, B.B pitching plaster आदि के नव निर्माण का वृहत कार्य किया गया।
वर्ष 2013 में प्रश्नगत आरोप कार्य कराया गया था जो कि इस ह्यूम पाईप के U/s एवं D/s में दोनों तरफ केवल पाँच फीट तक था। यह कार्य Foundation का कार्य था, यानि नहर के Bed Level से नीचे मिट्टी के अंदर था। इसी मापी81 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 को मापपुस्त में J.E द्वारा अंकित किया गया था। जो सही भी है चूँकि प्रश्नगत कार्य (वर्ष 2013) के पूर्व भी जलश्राव प्रवाहित होता था और इसमें बनने के चार वर्षों तक भी जलश्राव हुआ और यह कार्य Hume pipe से दूर था। अतः नहर के टूटने में इसकी कोई भूमिका नहीं है। निरीक्षण प्रतिवेदन में भी लिखा हुआ है कि पानी के बहाव से CD क्षतिग्रस्त हो गया। यहाँ तीन जगह पानी बह रहा था। (i) नहर में (ii) कोशी सिपेज यानी कटार धार एवं (iii) Hume pipe में नहर का पानी संचालक के नियंत्रण में था। जिसे समय पर बंद नहीं करने से CD क्षतिग्रस्त होता गया। घटना के समय पदस्थापित नहीं थे। प्रश्नगत CD के क्षतिग्रस्त का कारण नहर का कटान है जिसको Prima facie witness तत0 कनीय अभियंता (प्रभारी) के पत्र दिनांक 22.08.2016 एवं प्रभारी तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के पत्रांक-89 दिनांक 23.08.2016 में देखा जा सकता है। पत्र में थाना में FIR करने एवं Wing wall तथा Face wall क्षतिग्रस्त होने को रिपोर्ट किया गया है। ऐसा दिनांक 21.08.2016 की रात्री में नहर बाँध को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा काटे जाने के कारण हुआ है। इस घटना में पहले तथा तुरंत बाद विभागीय उड़नदस्ता द्वारा पूरे नहर का शुरू से अंतिम छोर तक की संरचनाओं का Sample लेकर प्रयोगशाला में इसकी जाँच की गयी। कार्य गुणवत्ता पूर्ण एवं विशिष्टि के अनुरूप पाया गया।
नहर के टूटने का कारण प्रश्नगत कार्य नहीं है एवं कार्य विशिष्टि से न्यून होने का कोई प्रमाण नहीं है। (ii) संलग्न साक्ष्य तत0 अधीक्षण अभियंता, नहर अंचल, सहरसा के निरीक्षण प्रतिवेदन 27.07.2013 के अनुसार नहर के शुरू से अंतिम छोर तक निरीक्षण किया गया है एवं Defect आदि के संबंध में टिप्पणी की गई है लेकिन प्रश्नगत कार्य के संबंध में कोई विपरीत टिप्पणी नहीं है।
(iii) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक-712 दिनांक 29.08.2016 एवं पत्रांक-780 दिनांक 15.09.2016 में भी विशिष्टि के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं है। जबकि यह घटना के तुरंत बाद का है। (iv) घटना के 2½ माह बाद कथित निरीक्षण प्रतिवेदन लिखा गया है। इस समय तक पूर्व स्थिति परिवर्तित हो चुका था।
विभागीय पदाधिकारी के प्रश्नगत आरोप कार्य का नमूना में SE द्वारा मानक प्रक्रिया से जाँच नहीं की गयी है। योजना की प्राक्कलित राशि क्या थी तथा संवेदक को कितना भुगतान किया गया, इसका उल्लेख प्रतिवेदन में नहीं है। PWD कोड के अनुसार अंतिम विपत्र को संवेदक का भुगतान माना जाता है। जिसका भुगतान इनके द्वारा नहीं की गयी है। इनके कार्य कराने के बाद नहर के अंतिम छोर तक पटवन सफलता से हुआ है। अंततः यह कार्य उपयोगी रहा है। संचालन पदाधिकारी ने पूर्व प्रक्रिया के बाद कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं हो पाया है। कार्य विशिष्टि में अनुरूप कराया गया है। इस पर कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है। विभागीय समीक्षा- इनके द्वारा कहा गया है कि प्रश्नगत 26.0RD पर CD एक पुरानी संरचना थी। जिसमें इनके पदस्थापन के पूर्व वर्ष 2012 में अन्य अभियंताओं द्वारा पुनःस्र्थापन कार्य के तहत hume pipe के Top एवं side में P.C.C का कार्य wing wall, face wall, Return wall, B.B Pitiching एवं Plaster का कार्य कराया गया था।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि वर्ष 2013 में प्रश्नगत आरोप कार्य कराया गया था, जो कि hume pipe के U/S एवं D/S में दोनों तरफ केवल पाँच फीट चौड़ाई तक था। यह कार्य नहर के वेड lebel के नीचे कराया गया था, जिसकी मापी कनीय अभियंता द्वारा अंकित किया गया था। इसके बनने के चार वर्षों तक श्राव होता रहा है। यह कार्य hume pipe से दूर था। अतः नहर टूटने में इसकी कोई भूमिका नहीं है। निरीक्षन प्रतिवेदन (अधिक्षण अभियंता) में अंकित है कि पानी के बहाव से CD क्षतिग्रस्त हुआ है। वहाँ पर पानी तीन जगहों से प्रवाहित हो रहा था (i) कटार घाट से (ii) hume pipe से (iii) नहर से, जिसे समय पर बंद नहीं करने से CD क्षतिग्रस्त हो गया। अभिलेखों से परिलक्षित हेाता है कि वि0दू0 26.0 पर CD संरचना के बाँया तरफ असमाजिक तत्वों द्वारा नहर बाँध काट दिये जाने से CD क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसकी प्राथमिकी कनीय अभियंता द्वारा रतनपुरा, (सुपौल) थाना में दर्ज कराया गया है।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि इस घटना के पहले एवं तुरंत बाद विभागीय उड़नदस्ता द्वारा पूरे नहर पर अवस्थित संरचना से Sample लेकर प्रयोगशाला में इसकी जाँच की गई एवं कार्य गुणवता पूर्ण एवं विशिष्टि के अनुरूप पाया गया है। उक्त कथन की पुष्टि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका (ii) से होती है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में माना जा सकता है कि प्रश्नगत कार्य गुणवत्तापूर्ण कराया गया है। इनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। 2. इस बिंदु के संबंध में कहा गया है कि कनीय अभियंता द्वारा P.C.C कार्य माप पुस्त 2678 के पेज सं0-01 से 3 से Hume Pipe के दोनों तरफ मात्र पाँच फीट में कार्य कराया गया है। जबकि निरीक्षण प्रतिवेदन में प्रश्नगत कार्य 6.5 फीट पाया गया है। actual कार्य जो नहर के bed के नीचे मिट्टी के अंदर foundation की था। इसे बिना खुदाई किये एवं तोड़कर देखे बिना P.C.C की मापी नहीं की जा सकती है। अधीक्षण अभियंता द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि देखा गया P.C.C कार्य आदि की मोटाई more than actual है actual कार्य के उपर cover हैं। actual कार्य को अधीक्षण अभियंता द्वारा नहीं देखा गया, जबकि सिपेज एरीया होने से कीचड़ भरा था एवं क्षतिग्रस्त हो चुके82 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संरचना का मलवा का भाग मौजूद था ऐसी स्थिति में सही मापी के लिए intact part को ही consider करना उचित है न कि क्षतिग्रस्त होकर बिखरे टुकड़े को। माप पुस्त के अवलोकन से स्पष्ट है कि hume pipe के U/S एवं D/S में स्पष्ट है कि hume pipe के U/S एवं D/S में P.C.C का कार्य पाँच फीट चौड़ाई में 47 फीट लम्बाई तथा 1'6" मोटाई में कराया गया है। अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार Hume Pipe के U/S एवं D/S में 6'6" स्लोप मे brick सोलिंग के उपर 2"/3" P.C.C पाया गया है। उससे संभावना बनती है कि अधीक्षण अभियंता द्वारा Protection Wall के नीचे P.C.C की मोटाई P.C.C के अंतिम छोर पर देखा गया होगा। लेकिन यह स्थापित करना संभव प्रतीत नहीं होता है कि वास्तव में P.C.C की ढ़लाई 1'6" कराया गया है। अतएव प्रावधान से कम मोटाई में कार्य कराकर अधिक मोटाई में P.C.C की भुगतान करने के लिए कुछ हद तक दोषी माना जा सकता है।
3. इस बिंदु के संदर्भ में कहा गया है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक-712 दिनांक-29.08.2016 एवं पत्रांक-780 दिनांक-15.09.2016 में भी विशिष्ट के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गयी है, जबकि यह पत्र घटना के तुरंत बाद का है। कार्यपालक अभियंता के उपरोक्त पत्र में कार्य की गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है एवं संरचना क्षतिग्रस्त होने के कारण के संबंध में कहा गया है कि HUME PIPE CD संरचना के U/S Country Side कोशी के Seepage Water से प्रभावित है तथा D/S face wall से सटकर कटार घाट बह रहा है जिसके कारण नहर के दोंनों बाँधों पर seepage water का दबाव बना रहता है। Seepage water flow से हो रहे Under mining से hume pipe CD तथा Protection Wall का Foundation Sattlement होना है। अतएव आरोपी का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। 4. इस बिंदु के संदर्भ मे कहा गया है कि आरोपित कार्य की जाँच किसी प्रावधानित प्रक्रिया या किसी IS Code के निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत नही किया गया है, निरीक्षण प्रतिवेदन कई विरोधाभाषी तथ्य है। P.C.C की मोटाई अनुमान की भाषा में 2"/3" लिखा गया है। यह माप का मानक तरीका नही हो सकता है। Cut off कार्य को TOE Wall के रूप में 6.5 फीट पर देखने में नही पाये जाने का प्रतिवेदन दिया गया है जो Actual में पाँच फीट पर था जो माप पुस्त में दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त कहा गया है कि संवेदक के प्रतिनिधि की उपस्थिति में नही है। जबकि एकरारनामा Runing अवस्था में था और न ही कार्य कराने वाले कनीय अभियंता श्री कमलेश कुमार को बुलाया गया, जबकि वे उसी प्रमंडल में कार्यरत थे। प्रमंडल या अंचल द्वारा उनसे स्पष्टीकरण तक नहीं पुछा गया। सीधे विभाग से प्रपत्र 'क' के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके जवाब में उनके द्वारा यह उल्लेखित किया गया है कि कार्य सही किया गया है।
अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन के अवलोकन से उपरोक्त कथन की पुष्टि होती है। 5. इस बिंदु के संदर्भ में कहा गया है कि संवेदक द्वारा कार्य कराने के बाद JE द्वारा माप पुस्त मे मापी अंकित किया गया है। AE द्वारा Running Bill के रूप में भुगतान हेतु विपत्र एवं मापपुस्त कार्यपालक अभियंता को समर्पित किया गया है। जबकि प्रश्नगत कार्य का निरीक्षण संवेदक एवं इनके प्रतिनिधि के अनुपस्थिति में की गयी है, जो एकरारनामा एवं विभागीय नियमों के प्रतिकूल है।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत आरोपित कार्य साधारण प्रकृति का है एवं इसके लिए इतनी बड़ी कम्पनी के साथ मिलकर गलत करने का कोई व्यवहारिक कारण नही है। कार्य के दौरान उच्च पदाधिकारी का निरीक्षण होता रहा है। उन लोगों के द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नही की गयी है। कार्य के नमूना से SE द्वारा मानक प्रक्रिया से जाँच नही की गयी है। उक्त कार्य कराने के बाद नहर में अंतिम छोर तक पटवन सफलता से हुआ है एवं कार्य उपयोगी रहा है क्योंकि कार्य विशिष्ट के अनुरूप कराया गया है। उपरोक्त कथन के समर्थन मे कोई साक्ष्य नही दिया गया है तथा अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट उल्लेख है कि माप पुस्त में अंकित P.C.C मोटाई 1'6" के जगह 2'/3" स्थल निरीक्षण में पाया गया है तथा पाईप के U/S तथा D/S में 6'6" स्लोप मे ब्रीक सोलिंग के उपर P.C.C पाया गया है जबकि माप पुस्त में उक्त P.C.C की चौड़ाई 5'0" दर्ज है। माप पुस्त सं0-2678 के पेज सं0-02 पर प्रश्नगत कराये गये P.C.C (1:3:6) की कुल मात्रा 0705.0 CFT अर्थात 19.70 घन मी0 है। माप पुस्त सं0-2684 के पेज सं0- 32 से स्पष्ट है कि P.C.C (1:3:6) का दर 2120.2005/M3 के दर से भुगतान की कार्रवाई की गयी है। इस प्रकार उक्त प्रश्नगत P.C.C (1:3:6) की कुल राशि 19.70x2120.o5=41764.98 रूपये का अनियमित भुगतान का होने का मामला बनता है, जिसके लिए श्री कुमार को जिम्मेदार माना जा सकता है।
उपरोक्त की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री नुतेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सहरसा को निम्न दंड देने का निर्णय लिया गया है :-
"तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" उपर्युक्त विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-636 दिनांक-19.07.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग पटना से परामर्श की माँग की गयी। उक्त के आलोक में पत्रांक-2727 दिनांक-22.12.2021 के द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव से सहमति व्यक्त किया गया।
वर्णित स्थिति में श्री नुतेश कुमार तत्कालीन सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सहरसा को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-
83 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022"तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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11 जनवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2021-39--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-4029), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, सालमारी को गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा के अधीन केन्द्रीय भंडार एवं प्रमंडलीय भंडार में भौतिक सत्यापन के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों की कमी पाये जाने एवं सुनियोजित ढंग से इस अपराधिक कृत्य को करने के आरोप के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, नालंदा, बिहारशरीफ निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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11 जनवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2021-40--श्री कुणाल किशोर (आई0डी0-5502), तत0 सहायक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण रूपांकण प्रमंडल-3, पटना को गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा के अधीन केन्द्रीय भंडार एवं प्रमंडलीय भंडार में भौतिक सत्यापन के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों की कमी पाये जाने एवं सुनियोजित ढंग से इस अपराधिक कृत्य को करने के आरोप के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री किशोर का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री किशोर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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21 जनवरी 2022
सं0 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-3)/116--श्री बीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-5139), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-12 दिनांक-25.03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-70 दिनांक-18.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा मे प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (Coarse aggregate) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है। जो Coarse Aggregate की मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त Coarse Aggregate की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- रूपये मात्र बताया गया है। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान की जानकारी होने के बावजूद भी उनके द्वारा पूर्व में कराये गये अनियमित कार्य एवं अनियमित भुगतान को बिना जाँचे परखे उनके द्वारा अगले विपत्र में समावेश करते हुए नौवाँ चालू विपत्र करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी है। फलतः पूर्व में किये गये अनियमित भुगतान की वसूली करने के बजाय अधिक भुगतान किया जाना परिलक्षित है, जिसके लिए वे दोषी है।84 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (2) इस योजना के तहत SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमुनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि Bathing Ghat के निर्माण कार्य में प्रावधानित PCC में सिमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में PCC में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। अतएव PCC में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्युन विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है। भलीभॉति अवगत होने के बावजूद भी पूर्व में कराये गये न्यून विशिष्टि के कार्य को सत्यापित करते हुए अन्य मदों में कराये गये कार्य के साथ नौवाँ चालू विपत्र में समावेश करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी है। फलतः अनियमित भुगतान के वसूली के बजाय अधिक भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है, जिसके लिए वे दोषी है।
उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-657 दिनांक-13.03.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारणपृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री कुमार से प्राप्त बचाव बयान के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-02 यथा SLR bridge एवं स्नान घाट के निर्माण में न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने का आरोप अप्रमाणित पाया गया, परन्तु आरोप सं0-01 यथा स्थानीय सामग्री का उपयोग होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। उक्त आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1436 दिनांक-09.07.2019 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया :- ''तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।'' उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 06.08.2019 समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- श्री कुमार द्वारा 9वें चालू विपत्र को मात्र बोल्डर पिचिंग, सड़क के दोनों फ्लैंक पर मिट्टी भराई एवं Sub grade तथा Geo bags Pitching कार्य का समावेश करते हुए 8वें चालू विपत्र के मात्रा को Carry Over करते हुए तैयार किया गया है। उड़नदस्ता द्वारा कार्य की जाँच मार्च, 2014 में की गयी जबकि 9वें चालू विपत्र दिनांक 21.11.2013 को तैयार किया गया है। फलतः पूर्व में हुए अनियमित भुगतान की वसूली नहीं किये जा सकने के इनके तर्क को आंशिक स्वीकार योग्य पाया गया है क्योंकि कार्य के दौरान गुण नियंत्रण संगठन द्वारा दिये गये किसी भी जाँचफल में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने एवं संरचना निर्माण में न्यून विशिष्टि के पी0सी0सी0 का उपयोग होने का कोई उल्लेख नहीं है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक 01.03.2012 से दिनांक 05.04.2012 के बीच कई निरीक्षण प्रतिवेदन निर्गत किया गया है जिसमें कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग होने का उल्लेख है। मुख्य अभियंता का निरीक्षण प्रतिवेदन श्री बीरेन्द्र कुमार को प्रमंडल से प्राप्त नहीं हो पाने की संभावना को भी स्वीकार किया गया है, क्योंकि इस संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन में कोई तथ्य उद्धृत नहीं है। उक्त के आलोक में सड़क निर्माण कार्य एवं सरंचना निर्माण कार्य जिसमें स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है, का कार्य श्री बीरेन्द्र कुमार (दिनांक 16.07.2013 को श्री प्रवीण कुमार से प्रभार ग्रहण किया गया है) के द्वारा नहीं कराये जाने परन्तु 9वें चालू विपत्र तैयार करने में 8वें चालू विपत्र में अंकित मात्रा को Carry over करने एवं उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध यह आरोप आंशिक अप्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित पाया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि श्री बीरेन्द्र कुमार द्वारा दिये गये तथ्यों को स्वीकार करते हुए पूर्व में ही इनके विरूद्ध आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य गठित किया गया था जिसके लिए दण्डादेश निर्गत किया गया है। श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में पुनः उन्हीं तथ्यों को दोहराया गया है जिसे पूर्व में ही द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर की समीक्षा के क्रम में अंशतः स्वीकार किया जा चुका है। उक्त परिपेक्ष्य में श्री कुमार के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिये गये सभी तथ्य लगभग वही है जिन पर पूर्व में विचार करते हुए इसे अंशतः स्वीकार किया जा चुका है। इनके द्वारा आरोपों से संदर्भित कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। उक्त के आलोक में उनका पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।
मामले के समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में आरोपों से संदर्भित कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री बीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-5139) तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सहायक अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 06.08.2019 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1436 दिनांक 09.07.2019 द्वारा संसूचित दण्ड "तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।85 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022
21 जनवरी 2022
सं0 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-3)/117--श्री चन्द्रभूषण प्रसाद (आई0डी0-2092), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-12 दिनांक-25. 03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-75 दिनांक-18.01.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा मे प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (Coarse aggregate) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है। जो Coarse Aggregate की मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त Coarse Aggregate की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- रूपये मात्र बताया गया है। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान करने के लिए वे दोषी है।
(2) इस योजना के तहत SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमुनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि Bathing Ghat के निर्माण कार्य में प्रावधानित PCC में सिमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में PCC में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। अतएव PCC में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है। जिसके लिए वे दोषी हैं।
(3) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.0.0(g), 9.0.0(x) एवं 10.0.0(i) से स्पष्ट होता है कि नियम के विरूद्ध कार्य में प्रत्युक्त सामग्री का भुगतान बिना एम0 एण्ड एन0 फार्म के सत्यापन कराये ही अनियमित ढंग से भुगतान किया गया। जिसके लिए वे दोषी हैं।
उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1340 दिनांक-18.08.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री प्रसाद से द्वितीय कारणपृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री प्रसाद से प्राप्त बचाव बयान के समीक्षोपरांत श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप सं0-02 यथा SLR bridge एवं स्नान घाट के निर्माण में न्यून विशिष्टि के PCC का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने का आरोप अप्रमाणित पाया गया। परन्तु आरोप सं0-01 यथा स्थानीय सामग्री का उपयोग होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने के आरोप को आंशिक एवं आरोप सं0-03 यथा नियम के विरूद्ध बिना रॉयल्टी की कटौती किये ही एवं बिना एम0 एण्ड एन0 फार्म को सत्यापन कराये ही भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित/आंशिक प्रमाणित आरोपों के लिए श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1434 दिनांक 09.07.2019 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया :- "दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 24.07.2019 समर्पित किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी के समीक्षा में पाया गया कि उनके अभ्यावेदन में दिये गये सभी तथ्य लगभग वहीं है जिन पर पूर्व में विचार किया जा चुका है। इनके द्वारा आरोपों से संदर्भित कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। उक्त के आलोक में उनका पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है। मामले के समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में आरोपों से संदर्भित कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण उनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री चन्द्रभूषण प्रसाद (आई0डी0-2092) तत0 कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 24.07.2019 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1434 दिनांक 09.07.2019 द्वारा संसूचित दण्ड "दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।86 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 21 जनवरी 2022 सं0 22/नि॰सि॰(वीर॰)-07-09/2019/118--श्री इन्द्रजीत कुमार सिंह (आई0डी0-3502), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल-02, वीरपुर के विरूद्ध अपने अधीनस्थ पदाधिकारी ई0 कमलेश कुमार भंडारी, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सिमरी के विरूद्ध आधारहीन तथ्यों पर आधारित भ्रामक/गलत आरोप लगाने के लिए अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग से प्राप्त आरोप-पत्र के साथ श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1744 दिनांक-19.08.2019 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। साथ ही उनसे प्राप्त जवाब पर मुख्य अभियंता, वीरपुर से प्राप्त मंतव्य के आलोक में विभागीय पत्रांक-1285 दिनांक-06.10.2021 द्वारा आरोप पत्र के साथ निम्न आरोप के लिए स्पष्टीकरण पूछा गया। "श्री इन्द्रजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल-02, वीरपुर द्वारा बिहार सरकारी सेवक हेतु निर्धारित आचरण एवं व्यवहार के विपरीत अपने अधीनस्थ पदाधिकारी श्री कमलेश कुमार भंडारी, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सिमरी के विरूद्ध आधारहीन तथ्यों पर आधारित भ्रामक/गलत आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारी एवं विभाग में रिपोर्ट किया गया। मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित मंतव्य प्रतिवेदन में अंकित किया गया कि श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता द्वारा श्री भंडारी, सहायक अभियंता पर तथ्यहीन आरोप लगाया गया है एवं श्री भंडारी एक कुशल अभियंता है"। श्री सिंह द्वारा उक्त के बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न तथ्य का उल्लेख किया गया है :- श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता द्वारा अंकित किया गया है कि श्री भंडारी, अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये गये सभी आरोप अक्षरशः सत्य है। इनके द्वारा श्री भंडारी को एक अयोग्य पदाधिकारी करार दिया गया है। साथ ही इनके द्वारा यह अंकित किया गया है कि मेरे जवाब से विभाग सहमत नहीं है तथा कार्य के दरम्यान हमारी बातों से किसी को तकलीफ हुई होगी तो मैं क्षमाप्राथी हूँ भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जायेगी। विभागीय समीक्षा - श्री इन्द्रजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल-02, वीरपुर द्वारा समर्पित बचाव बयान में अपने पूर्व के बचाव बयान का संदर्भ देते हुए मात्र इतना कहा गया है कि अगर विभाग इनके पूर्व के बचाव बयान से सहमत नही है तथा कार्य के दरम्यान इनकी बातों से किसी को तकलीफ हुई हो तो इसके लिए इनके स्तर से क्षमा याचना करते हुए भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराये जाने का उल्लेख किया गया है। श्री सिंह के उक्त कथन में मात्र घटना के सत्य होने का जिक्र किया गया है अन्य किसी तथ्य/साक्ष्य का न तो उल्लेख किया गया है और न ही संलग्न किया गया है। उपरोक्त स्थिति में सरकार के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री इन्द्रजीत कुमार सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :- "निन्दन वर्ष - 2018-19" वर्णित स्थिति में श्री इन्द्रजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल-02, वीरपुर को निम्न दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :- "निन्दन वर्ष - 2018-19"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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21 जनवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-23/2013-119--श्री अवधेश प्रसाद (आई0डी0-जे 7497), तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध नगर विकास योजना 2008-09 के अन्तर्गत पटना जिला के कंकडबाग से योगीपुर संप हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ के निर्माण में अनियमितता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-892 दिनांक 12.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप -नगर विकास योजना 2008-09 के अन्तर्गत पटना जिला के कंकडबाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण में अनियमितता की जाँच संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना तथा कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता-सह-एम0क्यू0एम0यू0-08 द्वारा की गई, जिसके आधार पर दोषी माना गया है - आरोप सं0 1- इस योजना का कार्य दिनांक 01.12.2009 से प्रारंभ किया गया तथा पूर्ण करने की अवधि 01.08.2010 थी किन्तु यह कार्य अभी तक अपूर्ण है, क्योंकि पी0सी0सी0 पथ के दोनों तरफ फ्लैंक का कार्य अधूरा है, तथा जाँच के दौरान कोई कार्य नहीं होता हुआ पाया गया। आरोप सं0 2- नाले के दोनों तरफ पी0सी0सी0 की मुटाई 8 इंच है, परन्तु पथ के बीच भाग में औसतन मोटाई 6 इंच पाई गई, जो प्राक्कलन तथा मापीपुस्त की प्रविष्टि से 2 इंच कम है। पी0सी0सी0 कार्य में ढलाई के पश्चात पानी की क्योरिंग भी ठीक से नहीं किया गया है।
उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-60/AS दिनांक 17.10.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2129 दिनांक 05.12.1787 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 द्वारा श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, दानापुर से प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री अवधेश प्रसाद के अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 28.05.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त प्रत्युत्तर की तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-633 दिनांक 27.03.2019 द्वारा निम्न बिन्दु पर ग्रामीण कार्य विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया -
"श्री अवधेश प्रसाद तदेन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना के विरूद्ध 2008-09 में नगर विकास योजना अन्तर्गत पटना जिला के कंकड़बाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण में अनियमितता संबंधी आरोप सं0-2 में पी0सी0सी0 सड़क की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर 6 इंच पाए जाने एवं माप पुस्त में 8 इंच का भुगतान किए जाने से संवेदक को हुए अधिकाई भुगतान की वसूली की अद्यतन स्थिति एवं 2 इंच कम ढलाई से पी0सी0सी0 सड़क की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव"।
इसी क्रम में श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता दिनांक 31.01.2020 को सेवानिवृत्त हो गए। जिसके कारण विभागीय अधिसूचना सं0-248 दिनांक 12.02.2020 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी के तहत सम्परिवर्तित किया जा चुका है।
ग्रामीण कार्य विभाग का पत्रांक-676 दिनांक 09.04.2021 द्वारा उक्त बिन्दु के संदर्भ में वांछित मंतव्य उपलब्ध कराया गया।
"ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य में पी0सी0सी0 सड़क की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि किसी भी योजना के कार्यान्वयन में उसके Components के design dimension का ही अनुपालन किया जाता है। निरूपण में alteration बिना सक्षम पदाधिकारी का आदेश प्राप्त किए, नहीं किए जा सकते हैं। निःसंदेह 2 इंच कम ढलाई करना design dimension के साथ छेड-छाड़ करना है। पथ क्रस्ट की निरूपित मुटाई Traffic Volume एवं CBR Value पर आधारित होती है। इन दोनों Parameters में CBR Value Constant रहता है परन्तु Traffic volume में बढोतरी की ही संभावना रहती है। अतः Execution के दौरान Pavement की निरूपित मुटाई में की गई कमी Structure की Stability को प्रभावित करेगी जो किसी भी स्थिति में मान्य नहीं है। साथ ही सड़क की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर 6 इंच पाए जाने एवं मापपुस्त में 8 इंच का भुगतान किए जाने से संवेदक को हुई अधिकाई भुगतान के संदर्भ में कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, दानापुर के पत्रांक-352 दिनांक 02.03. 2021 से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार भुगतान की गई अधिकाई राशि 19,07,912 रूपये होता है, जिसमें संवेदक का एस0डी0 एवं एन0एस0डी0 के रूप में कुल राशि 9,67,869 (नौ लाख सड़सठ हजार आठ सौ उनहतर रूपये) रोक कर रखी गई तथा शेष राशि ₹ 9,40,043 (नौ लाख चालीस हजार तैतालिस) रूपये की वसूली करनी होगी।
उक्त मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत निम्न बिन्दु निष्कर्षित किया गया -
1. पटना जिला अन्तर्गत कंकडबाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण कार्य के ससमय पूर्ण नहीं होने में श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना की लापरवाही परिलक्षित होती है।
2. उक्त योजना में पी0सी0सी0 की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर औसत मुटाई 7.33 इंच यानि 8.37% कम मुटाई का पी0सी0सी0 कार्य कराकर अनियमित/अधिकाई ढंग से भुगतान करने के लिए श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता (सेवानिवृत) दोषी हैं।
अतएव ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्राप्त मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त मंतव्य के तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप सं0-1 एवं 2 प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता (आई0डी0-जे 7497) सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने को प्रस्तावित किया गया -
"20% पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए"।
उक्त दण्ड प्रस्ताव पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति भी उक्त दण्ड प्रस्ताव में प्राप्त है।
उक्त अनुमोदित दण्ड श्री अवधेश प्रसाद (आई0डी0-जे 7497) तत्का0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
"20% पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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25 जनवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(गया)24-07/2016-147--श्री सुधीर कुमार सिंह (आई0डी0-3748), तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल-1, टनकुप्पा, गया संप्रति कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत टनकुप्पा प्रखंड, गया के अन्तर्गत उच्च विद्यालय की चाहरदिवारी निर्माण में अनियमितता बरतने के मामले में विभागीय संकल्प-172 दिनांक 18.01.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।88 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय तकनीकी पदाधिकारी के समीक्षात्मक प्रतिवेदन तथा ग्रामीण कार्य विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा के आलोक में श्री सुधीर कुमार सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा करने के प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किए जाने के पूर्व इनके वर्तमान पदस्थापन (नियमित पद) से संबंधित सूचना की माँग संयुक्त सचिव (प्रबंधन) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना से की गई। उक्त के क्रम में संयुक्त सचिव (प्रबंधन) के गै0स0प्रे0 सं0-649 दिनांक 22.09.2021 द्वारा सूचित किया गया कि श्री सुधीर कुमार सिंह की दिनांक-03.12.2020 को मृत्यु हो चुकी है।
विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में दण्ड संसूचन से पूर्व ही आरोपी सरकारी सेवक की मृत्यु होने के उपरांत विभागीय कार्यवाही के निष्कर्ष के संबंध में स्पष्टीकरण संबंधी सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-8811 दिनांक-18.07.2017 की कंडिका-4 में निम्नवत् प्रावधान है :-
''विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में, विचारण के किसी भी चरण में आरोपित सरकारी सेवक की मृत्यु हो जाने की स्थिति में संबंधित सरकारी सेवक के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाएगी तथा मृत्यु की सूचना का उल्लेख करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त कर दिया जाएगा।''
चूँकि श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही द्वितीय कारण पृच्छा किये जाने के क्रम में था। इसी बीच इनकी मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है।
उक्त के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित निर्णय लिया गया है :- श्री सुधीर कुमार सिंह (आई0डी0-3748), तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल-1, टनकुप्पा, गया संप्रति मृत के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-172 दिनांक 18.01.2018 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को उनकी मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप समाप्त करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त किया जाय।
अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुधीर कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल-1, टनकुप्पा, गया संप्रति मृत के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-172 दिनांक 18.01.2018 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को उनकी मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप समाप्त करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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31 जनवरी 2022
सं0 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-1)/160--श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना-2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग करने संबंधी विाीय अनियमितता एवं जानबूझकर तथ्य छिपाने आदि अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-294, दिनांक-12.03.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 के तहत् आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
(1) नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है। तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया है कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। कार्य के निरीक्षण के दौरान उनके द्वारा स्थानीय सामग्री के उपयोग का उदघोषणा नही कर तथ्य को छिपाकर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रतिवेदित किया गया। इससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित भुगतान में उनके स्तर से सहयोग करने के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी है। श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2406, दिनांक-09.11.2016 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री चौधरी से द्वितीय कारणपृच्छा की माँग की गयी। उक्त आलोक में प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युार (अभ्यावेदन) के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप के लिए श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-681 दिनांक 28.06.2017 द्वारा प्राप्त परामर्श के उपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1721 दिनांक-26.09.2017 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- ''स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।''
उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-16258/2017 दायर किया गया। उक्त याचिका में दिनांक 04.12.2018 को पारित आदेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उनके विरुद्ध निर्गत दंडादेश को निरस्त करते हुए सम्पूर्ण मामले को Remand back किया गया।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त पारित आदेश के विरुद्ध एल०पी०ए० दायर किये जाने के बिन्दु पर विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया। विधि विभाग से प्राप्त परामर्श में कहा गया कि "प्रस्तुत मामले में एल०पी०ए० दायर करने का कोई आधार प्रतीत नहीं होता है और प्रशासी विभाग को नियमानुसार पुनः जाँच करना चाहिए।" विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं०-1721 दिनांक 26.09.2017 द्वारा निर्गत दंडादेश को89 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 विभागीय अधिसूचना संख्या-752 दिनांक 10.04.2019 द्वारा निरस्त करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-753 दिनांक 10.04.2019 द्वारा सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को भेजा गया। उक्त आलोक में विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी जाँच आयुक्त-सह-सचिव परिवहन विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित किया गया कि "सभी तथ्यों के आलोक में प्रथम –ष्टया यह प्रमाणित होता है कि आरोपी पदाधिकारी के कार्यकाल में स्थानीय सामग्री का उपयोग स्वी—त प्राक्कलन के विरुद्ध होता रहा। फलतः उसी के अनुरूप कार्य विपत्रों के आधार पर अनियमित भुगतान भी होता रहा। मुख्य अभियंता के रूप में समुचित पर्यवेक्षण के अभाव में उनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है"।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-800 दिनांक 17.06.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए उक्त के संबंध में श्री चौधरी से लिखित अभ्यावेदन की माँग की गई।
उक्त आलोक में श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युतर) का मुख्य अंश निम्नवत है :-
(i) किसी भी अनियमितता का उद्घोषणा करने हेतु उसकी जानकारी होना आवश्यक है। उन्हेें किसी भी श्रोत/पदाधिकारी से स्थानीय सामग्रियों के उपयोग की जानकारी नहीं हुई जिससे कि वे उसका उद्घोषणा करते तथा अनियमित भुगतान को रोकते। स्थानीय सामग्रियों के उपयोग एवं अनियमित भुगतान के लिए वे दोषी नहीं हैं। स्थानीय सामग्रियों का उपयोग होने देने तथा अनियमित भुगतान के लिए कनीय अभियंता से अधीक्षण अभियंता तथा गुण नियंत्रण के पदाधिकारी दोषी हैं, जिन्होंने उन्हें अवगत नहीं कराया।
(ii) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, वाल्मीकिनगर द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के कारण उनके द्वारा उन्हें विभाग के लिए नुकसानदेह बताकर विभाग से उनका स्थानान्तरण कर योग्य अधीक्षण अभियंता का पदस्थापन विभाग से करने का अनुरोध किया गया था परन्तु विभाग से नहीं होने के कारण उन्हें एक योग्य अधीक्षण अभियंता का साथ नहीं मिला अन्यथा बहुत संभव था कि उन्हें उक्त अनियमितता का पता चलता तथा वे उसका उद्घोषणा कर अनियमितता को रोक देते। श्री राम पुकार रंजन, तत्कालीन मुख्य अभियंता ने जानकारी होने पर भी अनियमितता होने दिया परन्तु उन्हें जानकारी होने पर वे उनकी तरह अनियमितता नहीं होने देते। उनके बचाव बयान में उल्लेखित उनकी कार्यशैली (उल्लेखित तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्य) इसकी पुष्टी करता है।
(iii) उन्होंने विभागीय पत्र के आलोक में अपने पत्रांक 10 दिनांक 03.01.2012 से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, वाल्मिकीनगर को निर्माण में बिना गुणवत्ता एवं विशिष्टि वाले सामग्रियों के उपयोग आदि से सम्बंधित परिवाद की जाँचकर प्रतिवेदित करने का निदेश दिया, जिससे कि वे अग्रेतर कार्रवाई करते, परन्तु लापरवाह अधीक्षण अभियंता के द्वारा उन्हें प्रतिवेदन नहीं दिया गया। इस प्रकार उन्होंने स्थानीय सामग्रियों के उपयोग/अनियमितता आदि का उद्घोषणा करने की दिशा में प्रयास किया। स्थानीय सामग्रियों के उपयोग को छिपाने आदि अनियमितता के लिए तत्कालीन अधीक्षण अभियंता दोषी हैं वे नहीं क्योंकि उन्होंने अपने दायित्व को निभाया।
(iv) उनके द्वारा विपरीत परिस्थितियों में प्रशासनिक/तकनीकी कार्य किये गये जिसमें PWD के नियम 15, 15A, 16 का पालन किया गया।
(v) उन्होंने ऐसे कोई आदेश/निदेश नहीं दिया, जो आरोपित अनियमितता/आरोप का आधार बने। श्री चौधरी से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :- श्री चौधरी द्वारा समर्पित बचाव बयान में कहा गया है कि किसी भी अनियमितता का उद्घोषणा करने हेतु उसकी जानकारी होना आवश्यक है। उन्हें किसी भी श्रोत/पदाधिकारी से स्थानीय सामग्रियों के उपयोग की जानकारी नहीं हुई जिससे कि उनके द्वारा उसकी उद्घोषणा की जाती तथा अनियमित भुगतान को रोका जाता, परन्तु आगे श्री चौधरी द्वारा यह भी उल्लेखित किया गया है कि, उन्होनें विभागीय पत्र के आलोक में अपने पत्रांक 10 दिनांक 03.01.2012 से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, वाल्मीकिनगर को निर्माण में बिना गुणवत्ता एवं विशिष्टि वाले सामग्रियों के उपयोग आदि से सम्बंधित परिवाद की जाँचकर प्रतिवेदित करने का निदेश दिया गया। जिसके फलस्वरूप उनके द्वारा अग्रेत्तर कार्रवाई की जाती परन्तु अधीक्षण अभियंता के द्वारा प्रतिवेदन नहीं दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि कार्य में प्रयुक्त सामग्रियों की गुणवत्ता संदेह के घेरे में थी, जिसकी जाँच के लिये श्री चौधरी द्वारा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, वाल्मीकिनगर को निदेशित किया गया था। परन्तु अधीक्षण अभियन्ता द्वारा जाँच नहीं किये जाने की स्थिति में श्री चौधरी के स्तर से भी कोई अग्रेतर कार्रवाई नही की गयी और प्राक्कलन में किये गये प्रावधान से अलग सामग्रियों का प्रयोग कार्य में होता रहा। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में बिना गुणवत्ता एवं विशिष्टि वाले सामग्रियों के उपयोग की बात श्री चौधरी के संज्ञान में थी। संभव था कि अगर इसकी ससमय जाँच की गयी होती तो अन्य अनियमिततायें भी उजागर हो सकती थी और स्थानीय सामग्री के उपयोग का पता भी चल सकता था। इस परिस्थिति में श्री चौधरी के स्तर से स्थानीय सामग्रियों के उपयोग/अनयिमितता आदि का उद्घोषणा करने की दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किया जाना परिलक्षित है। उक्त के आलोक में श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) का अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं है एवं श्री चौधरी के स्तर से कार्य में स्थानीय सामग्रियों के उपयोग/अनियमितता आदि का उद्घोषणा नहीं करने संबंधी आरोप प्रमाणित होता है। मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोप के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476) तत0 मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-
90 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 ''स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।''उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम, पटना के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-
''स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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31 जनवरी 2022
सं0 22/नि॰सि॰(पू॰)-01-07/2014/177--बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में बरती गयी अनियमितता से संबंधित परिवाद की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्राक्कलन के गठन में एवं कार्यमद यथा Watering and Compaction का दो बार अनुचित ढंग से प्रावधान करने तथा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान ब्रीक सोलिंग कार्य में बिना Watering and compaction का कार्य कराये ही किये गये प्रावधान के अनुरूप गलत ढंग से विपत्र तैयार कर भुगतान करने के आरोप के लिए श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3356) तत्कालीन सहायक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-2198 दिनांक 01.10.2018 द्वारा निलंबित करते हुए आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी, प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत अधिसूचना सं0-543 दिनांक 12.03.2019 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया एवं प्राक्कलन के गठन में बरती गयी लापरवाही के लिए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-450 दिनांक 04.03.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. श्री सिंह का स्वर्गवास दिनांक 13.08.2020 को हो जाने संबंधी सूचना संयुक्त सचिव (प्रबंधन) से प्राप्त हुआ। 3. उक्त सूचना के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित निर्णय लिया गया है :- (i) श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बारसोई के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-450 दिनांक 04.03.2020 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को उनकी मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप समाप्त करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त किया जाय। (ii) श्री सिंह के निलंबन अवधि दिनांक 01.10.2018 से दिनांक 11.03.2019 तक के लिए पुरे वेतन तथा भत्ता का भुगतान करने तथा उक्त अवधि सभी प्रायोजनों के लिए कर्त्तव्य पर मानी जाय। 4. अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-450 दिनांक 04.03.2020 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को उनकी मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप समाप्त करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त किया जाता है तथा श्री सिंह की निलंबन अवधि दिनांक 01.10.2018 से दिनांक 11.03.2019 तक के लिए पुरे वेतन तथा भत्ता का भुगतान करने तथा उक्त अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर मानी जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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31 जनवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(सम0)02-12/2014-178--श्री प्रदीप कुमार मंडल (आई0डी0-जे0 7576), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय सम्प्रति बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, सैदपुर, पटना-800004 के पदस्थापन अवधि में खगड़िया टाउन प्रोटेक्शन से संबंधित तटबंध निर्माण कार्य में अधिकाई भुगतान के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1159 दिनांक 11.06.2019 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2580 दिनांक 13.12.2019 द्वारा श्री मंडल के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
"खगड़िया शहर सुरक्षा योजना भाग-1 के तहत निर्माणाधीन तटबंध के निर्माण कार्य में मात्र 3.285 कि0मी0 लंबाई में कार्य किया गया, जबकि भुगतान 3.72 कि0मी0 लंबाई में किया गया, जो आपके द्वारा जानबूझकर सरकारी राशि की क्षति पहुँचाई गयी है।" विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आरोप को आंशिक प्रमाणित पाया गया। तत्पश्चात आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए श्री मंडल, तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय सम्प्रति निलंबित से विभागीय पत्रांक-178 दिनांक 08.02.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। तदालोक में श्री मंडल द्वारा अपना बचाव बयान दिया गया जो निम्नवत है :-
91 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022बचाव बयान :- "उक्त सुरक्षा तटबंध निर्माण हेतु एकरारनामा कर दिनांक 01.02.2012 को कार्यादेश दिया गया। तद्नुसार भू-अर्जन हेतु आवश्यक कागजातों को कार्यालय एवं उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से जिला भू-अर्जन कार्यालय, बेगुसराय में समर्पित कराया गया। यह तटबंध बाढ़ सुरक्षा तटबंध होने के कारण एवं उच्च पदाधिकारियों द्वारा शीघ्र कार्य प्रारम्भ एवं पूर्ण करने के दबाव के चलते तत्कालीन अंचलाधिकारी, बखरी एवं तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेगुसराय के साथ कार्य स्थल पर विभिन्न तिथियों में ग्रामीणों से वार्त्ता की गयी। अंततः बाढ़ सुरक्षा तटबंध निर्माण हेतु बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी किये ग्रामीणों द्वारा कार्य प्रारम्भ करने की सहमति दी गयी। तदनुसार चेनेज 9.69 कि॰मी॰ अप स्ट्रीम में कार्य प्रारम्भ हो सका। इस बीच सरकार के स्तर पर भू-अर्जन मुआवजा की नयी नीति एवं दर के अनुसार प्राक्कलन का पुनरीक्षण कर नये दर के अनुसार जिला भू-अर्जन कार्यालय को अतिरिक्त वांछित राशि उपलब्ध करायी गयी। भू-अर्जन की प्रक्रिया के अधीन 10 मौजा में से 5 मौजा हेतु कारवाई पंचाट निर्माण स्तर तक पहुँच गया था। परन्तु जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा एक भी किसान को मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया था। भू-अर्जन कार्य का वांछित प्रगति न होेने के कारण विभाग स्तर पर लिये गये निर्णय के अनुसार जिला भू-अर्जन कार्यालय बेगुसराय में जमा किये गये प्रस्ताव व राशि, वापस लेकर विशेष भू-अर्जन कार्यालय कोशी प्रोजेक्ट, दरभंगा में जमा किया गया है। पुनः विभागीय आदेश के आलोक में भू-अर्जन प्रक्रिया, जिला भू-अर्जन कार्यालय, बेगुसराय से कराने हेतु प्रस्ताव एवं राशि समर्पित किया गया। उक्त कथन को कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय द्वारा भी प्रतिवेदित किया गया है, जिसकी मूल प्रति विभाग में समर्पित है। इस प्रकार भू-अर्जन की प्रक्रिया दिनांक 28.05.2020 तक पूर्ण नहीं हो पाया गया है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया हेतु आवश्यक कागजातों एवं राशि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेगुसराय में समर्पित किये जाने के उपरान्त तत्कालीन उच्च पदाधिकारियों के निदेश एवं जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेगुसराय के सहमति पर ही उक्त तटबंध का निर्माण प्रारम्भ कराया गया था। ताकि दोनो एक्टिभिटी साथ-साथ चल सके। भवदीय भी सहमत होंगे कि सिर्फ एक सहायक अभियंता चाहकर भी बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया के पूर्ण हुए कार्य प्रारम्भ नहीं करा सकता है। अतः भू-अर्जन की प्रक्रिया अपूर्ण रहने के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के लिये दोषी माना जाना कदापी उचित नहीं है।
श्री प्रदीप मंडल से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा (बचाव-बयान) के जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी जो निम्नवत है :- समीक्षा :- श्री मंडल से बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया समाप्त किये ही कार्य प्रारम्भ करने के कारण किसानों द्वारा आंशिक निर्मित तटबंध के कुछ भाग को काटकर समतल किये जाने के लिये द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। इनके द्वारा कहा गया है कि भू-अर्जन की आवश्यक कागजातों को कार्यालय एवं उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से जिला भू-अर्जन कार्यालय, बेगुसराय में समर्पित कराया गया है। उक्त तटबंध के, बाढ़ सुरक्षा तटबंध होने के कारण एवं उच्च पदाधिकारी द्वारा शीघ्र कार्य प्रारम्भ व पूर्ण करने के दबाव के चलते तत्कालीन अंचलाधिकारी, बखरी एवं तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी बेगुसराय के साथ कार्य स्थल पर विभिन्न तिथियों में ग्रामीणों से वार्त्ता की गयी। अंततः बाढ़ सुरक्षात्मक तटबंध की आवश्यकता एवं उपयोगिता बताते हुए मुआवजा भुगतान किये जाने के आश्वासन पर उक्त प्रस्तावित तटबंध के निर्माण हेतु बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी किये ही किसानों की सहमति से कि॰मी॰ 9.69 के U/S में कार्य प्रारम्भ किया गया। परन्तु जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा एक भी किसान को भू-अर्जन मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया। इसी बीच भू-अर्जन मुआवजा की नयी निति एवं दर के अनुसार प्राक्कलन को पुनरीक्षण कर नये दर के अनुसार जिला भू-अर्जन कार्यालय में अतिरिक्त वांछित राशि उपलब्ध करायी गयी। भू-अर्जन की प्रक्रिया के वांछित प्रगति नहीं होने की स्थिति में विभाग स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में जिला भू-अर्जन कार्यालय बेगुसराय से प्रस्ताव एवं राशि वापस लेकर विशेष भू-अर्जन कार्यालय कोशी प्रोजेक्ट दरभंगा में जमा किया गया। पुनः विभागीय आदेश के आलोक में भू-अर्जन प्रक्रिया जिला भू-अर्जन कार्यालय बेगुसराय से कराने हेतु प्रस्ताव एवं राशि समर्पित किया गया। इस प्रकार भू-अर्जन की प्रक्रिया दिनांक 28.05.2020 तक पूर्ण नहीं हो पाया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा प्रश्नगत कार्य हेतु भू-अर्जन की प्रक्रिया सम्पन्न होने के लिये काफी प्रयास किया गया है तथा भू-अर्जन की प्रक्रिया के प्रत्याशा में बाढ़ सुरक्षा से संबंधित कार्य को उच्च पदाधिकारी के निदेश के आलोक में किसानों की सहमति से प्रश्नगत कार्य को प्रारम्भ किया गया है। ततपश्चात भू-अर्जन मुआवजा का भुगतान नहीं होने के कारण कार्य की प्रगति रूक गयी एवं लम्बी अविध तक उक्त कार्य के बन्द रहने के कारण उक्त तटबंध में कई स्थानों पर टो की मिट्टी एवं कृत कार्य बीचों-बीच एवं अंतिम सिरे में तटबंध के कुछ भाग को ग्रामीणों द्वारा समतल कर खेत में मिला लिया जाना परिलक्षित होता है उक्त कथन की पुष्टि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा कि॰मी॰ 8.0 से 8.10 एवं कि॰मी॰ 7.62 से 7.65 के बीच किसानों द्वारा तटबंध को काटकर NSL पर समतल कर लिये जाने संबंधी टिप्पणी से होती है। इसके अतिरिक्त अन्य स्थलों पर ग्रामीणों द्वारा तटबंध यथा 5.97 कि॰मी॰ से 6.22 कि॰मी॰ एवं 9.6 कि॰मी॰ से 9.69 कि॰मी॰ के बीच तथा मध्य भाग में 6.29 कि॰मी॰ से 6.63 कि॰मी॰ के बीच काटकर समतल किये जाने संबंधि दावा सही प्रतीत होता है।
स्थल निरीक्षण के क्रम में लेखा परीक्षक दल द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित प्रतिवेदन में उल्लेख है कि लगभग 2 कि॰मी॰ की लम्बाई में पूर्ण सेक्सन एवं लगभग 2 कि॰मी॰ की लम्बाई में आंशिक सेक्सन में कार्य सम्पन्न हुआ है।92 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है कि उच्च पदाधिकारी के निदेश के आलोक में बाढ़ सुरक्षा जैसी अति आवश्यक कार्य के मद्देनजर बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया कराये ही कार्य प्रारंभ किया गया। इस प्रकार श्री मंडल के विरूद्ध बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया सम्पन्न कराये ही कार्य प्रारंभ करने का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। इस प्रकार श्री मंडल का द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के संदर्भ में श्री प्रदीप कुमार मंडल, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय को निलंबन मुक्त करते हुए आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए "एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। उक्त दण्ड निर्णय पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-605 दिनांक-14.07.2021 द्वारा श्री प्रदीप कुमार मंडल, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय को निलंबन मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"
उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री प्रदीप कुमार मंडल, सहायक अभियंता, द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि उन्हें आरोप-पत्र में गठित आरोप "तटबंध के निर्माण कार्य में मात्र 3.285 कि0मी0 लंबाई में कार्य किया गया, जबकि भुगतान 3.72 कि0मी0 लंबाई में किया गया" से इत्तर "बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया संपन्न हुए कार्य कराया गया जिस कारण उक्त स्थिति उत्पन्न हुई" के लिए आंशिक रूप से दोषी माना गया। उल्लेखनीय है किसी भी कार्य को कराये जाने से पूर्व उससे संबंधित तैयारी उस कार्य का अभिन्न अंग होता है। इसलिये प्रश्नगत तटबंध का निर्माण किये जाने से पूर्व उससे संंबंधित भू-अर्जन की प्रक्रिया को पूर्ण किया जाना इस कार्य में अन्तर्निहित था। इस प्रकार बिना भू-अर्जन की प्रक्रिया को पूर्ण किये कार्य को कराये जाने के फलस्वरूप उत्पन्न इस स्थिति के लिए श्री मंडल को आंशिक रूप से दोषी पाए जाने का आधार तर्कसंगत प्रतीत होता है। अतएव श्री मंडल द्वारा यह कहा जाना कि उन पर अधिरोपित दंड का आधार गठित आरोप-पत्र से इत्तर है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता हैं। इस प्रकार श्री मंडल, तत0 सहायक अभियंता के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। अतएव सरकार द्वारा लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रदीप कुमार मंडल (आई0डी0-जे 7576) तत0 सहायक अभियंता के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-605 दिनांक 14.07.2021 द्वारा संसूचित दण्ड "एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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1 फरवरी 2022
सं0 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-05/2012-210--श्री अम्बिका प्रसाद (आई0डी0-जे 5509), तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध पूर्वी गंडक नहर प्रणाली अंतर्गत मुख्य नहर के वि0दू0 0.00 से 6.70 तक तल सफाई, सेवापथ की मरम्मती, पी0सी0सी0 लाईनिंग के कार्य मे सीमेन्ट कंक्रिट का कार्य न्यून विशिष्टि का कराने आदि प्रतिवेदित निम्नांकित आरोपों के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-15 दिनांक-22.04.2015 के आलोक में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में विहित रीति से विभागीय संकल्प ज्ञापांक-470 दिनांक-17.03.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- ''पूर्वी गंडक नहर प्रणाली अंतर्गत तिरहुत मुख्य, नहर के वि0दू0 0.00 से 6.70 तक तल सफाई, सेवा पथ की मरम्मती, पी0सी0सी0 लाईनिंग वि0दू0 0.00 पर अवस्थित शीर्ष नियामक की मरम्मती, कार्य की जाँच उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई एवं प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई। शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं0-2, खगौल, पटना से प्राप्त सीमेंट कंक्रीट के जाँचफल निम्नवत पाया गया :-
| सैम्पल सं0 | लोकेशन | प्रावधानित अनुपात प्राक्कलन के अनुसार (आयतन में) | जाँचफल अनुसार सीमेंट एवं बालू का अनुपात | प्रावधानित मात्रा से जाँचफल में सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी (आयतन) | |
| तौल | आयतन | ||||
| CH/01 | बायाँ बाँध वर्म PCC कार्य RD 0.3 पर | 1ः2ः4 | 1ः5.1 | 1ः4.9 | 29.29% |
| CH/02 | दायाँ बाँध सड़क PCC कार्य RD 0.3 पर | 1ः1.68ः3.36 | 1ः4.0 | 1ः3.8 | 25.98% |
| CH/03 | Dowel Sleep at RD 0.30 | 1ः2ः4 | 1ः4.7 | 1ः4.4 | 25.53% |
| CH/04 | बायाँ बाँध वर्म PCC कार्य RD 0.3 पर | 1ः2ः4 | 1ः4.7 | 1ः4.4 | 25.53% |
| CH/05 | दायाँ बाँध सड़क के RO 0.40 पर | 1ः1.68ः3.36 | 1ः53 | 1ः5.0 | 35.47% |
| CH/06 | Sleeper portion at RD 2.75 | 1ः2ः4 | 1ः4.2 | 1ः4.0 | 22.22% |
| CH/07 | दायाँ बाँध सड़क के RD 2.75 पर | 1ः1.68ः3.36 | 1ः2.9 | 1ः2.70 | 14.44% |
उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा उपरोक्त कार्य में सीमेंट कंक्रीट का कार्य न्यून विशिष्टि का कराया गया है, जिसके लिए वे दोषी है। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-2403 दिनांक 09.11.2016 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती के दण्ड पर अनुमोदन प्राप्त हुआ। उक्त अनुमोदित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। उक्त अनुमोदित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-2404 दिनांक 28.12.2017 द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य/निष्कर्ष के पश्चात समीक्षोपरांत आयोग के परामर्श हेतु प्रस्ताव उपलब्ध कराने का परामर्श दिया गया। उक्त आलोक में विभागीय पत्रांक-817 दिनांक 02.04.2018 एवं विभागीय पत्रांक-1789 दिनांक 21.08.2018 द्वारा श्री अमरदीप पासवान संचालन पदाधिकारी से श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों के संबंध में स्पष्ट मंतव्य उपलब्ध कराने हेतु निदेश दिया गया। तत्पश्चात संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1221 दिनांक 19.06.2019 द्वारा श्री प्रसाद से संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं पर अभ्यावेदन की मांग की गई :-
(i) जहाँ तक स्थानीय शोध प्रमंडल द्वारा निर्गत गुणवत्ता जाँचफल का प्रश्न है, शोध प्रमंडल, वाल्मीकिनगर से प्राप्त गुणवत्ता जाँचफल में प्राक्कलन में प्रावधानित पी0सी0सी0 का अनुपात 1ः1.5ः3 तथा 1ः2ः4 बताया गया है एवं किसी जाँचफल में सीमेन्ट एवं बालू में कैल्शियम कन्टेन्ट की मात्रा का उल्लेख नही किया गया है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-02, खगौल के जाँचफल में सीमेन्ट का कैल्शियम कन्टेन्ट 34.03 मानकर प्रयोगशाला में जाँचोपरांत जाँचफल दिया गया है तथा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार पी0सी0सी0 के प्राक्कलन में प्रावधानित अनुपाल 1ः2ः4 एवं 1ः1.68ः3.36 बताया गया है। जबकि स्थानीय गुण नियंत्रण जाँचफल में पी0सी0सी0 का प्रावधानित अनुपाल 1ः2ः4 एवं 1ः1.5ः3 अंकित है, जो विरोधाभाषी है। ऐसी स्थिति में स्थानीय गुण नियंत्रण जाँचफल को भरोसेमंद माना जाना उचित नही है। (ii) उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-18 दिनांक-03.05.13 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.9.0 के अवलोकन से स्पष्ट है कि जाँचदल द्वारा मुख्य पूर्वी नहर के वि0दू0 4.40 के पास अवस्थित SLR Bridge के पास से कैनाल लाईनिंग कार्य से दो अदद् नमूना तथा एक अदद् नमूना पी0सी0सी0 सड़क के संग्रह किया गया है। उक्त नमूनों के जाँचफल के अनुसार पी0सी0सी0 में सीमेन्ट एवं बालू का अनुपात उक्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.11.0 में सारणीबद्ध किया गया है। उक्त सारणी के क्रम सं0-(1) से (3) से स्पष्ट होता है कि पी0सी0सी0 में सीमन्ट एवं बालू का अनुपात 1ः2 के जगह पर 1ः3.5 एवं 1ः2.77 तथा 1ः1.5 के जगह पर 1ः1.729 पाया गया है। सारणी के अन्त में अंकित है कि तीन अदद् नमूनों में से दो अदद् नमूना का जाँचफल विशिष्टि के समतुल्य पायी गयी है। जबकि एक अदद् नमूना के जाँचफल में सीमेन्ट की मात्रा में कमी पायी गयी है। उड़नदस्ता के पत्रांक-15 दिनांक-22.04.15 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन जिसके आधार पर विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया है कि कंडिका 6.0.6 के उप कंडिका (ii) से स्पष्ट है कि विभागीय निदेश के आलोक में शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल संस्थान प्रमंडल-02 खगौल द्वारा नहर लाईनिंग कार्य एवं पी0सी0सी0 सड़क निर्माण कार्य के भिन्न-भिन्न बिन्दुओं यथा वि0दू0 0.30 बायॉ वर्म दायॉ बाँध सड़क, 0.30 डाबेल स्लीपर, 0.30 दायॉ वर्म, 0.40 दायॉ बाँध सड़क भाग से पी0सी0सी0 के कुल सात अदद् नमूने का संग्रह कर गुणवत्ता की जाँच की गयी। जाँचफल के अनुसार सात नमूनों में से पॉच अदद् नमूनों में प्रावधानित विशिष्टि से पायी गयी भिन्नता अनुमान्य सीमा 25 प्रतिशत से अधिक भिन्नता पायी गयी है तथा उक्त के आलोक में उड़नदस्ता द्वारा कार्य में न्यून विशिष्टि के पी0सी0सी0 का उपयोग होना बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल, निगरानी (तकनीकी पीरीक्षक कोषांग) से उक्त 25 प्रतिशत तक अनुमान्य सीमा के संबंध में पृच्छा करने पर निगरानी विभाग द्वारा अपना मत दिया गया है कि ऐसा कोई पत्र निर्गत नही है। चूँकि उड़नदस्ता के पत्रांक-18 दिनांक-30.05.2013 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में कुल तीन अदद् संग्रहित नमूना का स्पष्ट लोकेशन का उल्लेख नही है। जबकि उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-15 दिनांक-22.04.15 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में नमूना संग्रह का स्पष्ट लोकेशन का उल्लेख करते हुए विभिन्न स्थलों से कुल सात अदद् नमूनों का संग्रह किया गया है तथा जाँचोपरांत कार्य में न्यून विशिष्टि के पी0सी0सी0 का उपयोग होना परिलक्षित है। ऐसी स्थिति में उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-18 दिनांक-30.05.13 के आधार पर आलोच्य कार्य में विशिष्टि के अनुरूप पी0सी0सी0 के उपयोग होने के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य को स्वीकार योग्य नही माना जा सकता है। उक्त आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) का मुख्य अंश निम्नवत है :-
94(cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 स्थानीय गुण नियंत्रण जाँचफल में P.C.C का अनुपात 1ः1.5ः3 है जबकि शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल के जाँचफल में P.C.C का अनुपात 1ः1.68ः3.36 बताया गया है। विदित हो कि पी0सी0सी0 का अनुपात 1ः1.5ः3 है। उक्त कार्य में 2276.20MT अर्थात 45521 अद्द बोरा सीमेंट का उपयोग होने का प्राक्कलन में जिक्र है परन्तु जाँचदल द्वारा उपयोग में लायी गयी सीमेंट के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है।
जाँच दल द्वारा जाँचफल सैद्धान्तिक रूप से KCL सीमेंट में उपलब्ध Calcium Content को मानकर किया जाना श्रेयष्कर नहीं है। विदित हो कि उपर्युक्त कार्य में एक बोरा भी KCL का उपयोग नहीं किया गया है। प्राक्कलन के अनुसार कार्य में KCL की जगह पर OPS 43 grade सीमेंट का उपयोग किया गया है। परन्तु उपयोग में लाये गये सीमेंट में Calcium content की मात्रा का जिक्र नहीं किया गया है।
तकनीकी परीक्षक कोषांग निगरानी विभाग के पत्रांक-39/19-2961 दिनांक 03.12.1990 में सीमेंट की मात्रा में 25 प्रतिशत तक विचलन को अनुज्ञेय सीमा (Tolerance Limit) के अन्तर्गत माना गया है। विभागीय उड़नदस्ता द्वारा इस निदेश की अनदेखी की गई है।
उपरोक्त विरोधाभाष को देखते हुए जनहित में निर्दोष व्यक्ति को दण्ड नहीं मिले इसके लिए उपरोक्त कार्य की गुणवत्ता की जाँच IIT, रूड़की से कराना श्रेयष्कर होगा।
श्री प्रसाद से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेखों के समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :-
श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि कार्य में कुल 2276.2MT अर्थात 45521 सीमेंट बोरा का उपयोग करने का प्राक्कलन में जिक्र है। जाँचदल द्वारा उपयोग में लाये गये सीमेंट के नाम जिक्र नहीं किया गया है। जाँचफल में KCC सीमेंट में उपलब्ध Calcium content को मानकर नमूना का जाँच किया गया है जबकि कार्य में OPC grade 43 सीमेंट का उपयोग किया गया हैं आरोपी के उक्त कथन कि कार्य में OPC grade 43 वाले किस कम्पनी का सीमेंट उपयोग किया गया है के संदर्भ में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है।
चूँकि जाँच के समय स्थल पर कार्य में प्रत्युक्त किये गये सीमेंट का कोई अवशेष नहीं रहने के कारण सीमेंट का नमूना संग्रह नहीं किया गया है। अतएव किसी भी सीमेंट कंक्रीट में सीमेंट एवं बालू के अनुपात की गणना प्रयोगशाला में सीमेंट बालू के Calcium content के आधार पर सीमेंट एवं बालू के अनुपात की गणना की जाती है। आलोच्य कार्य में विभागीय पत्रांक-195 दिनांक 01.02.13 के अनुपालन में कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच हेतु गुण नियंत्रण जाँचदल, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल द्वारा लाये गये नमूना की जाँच हेतु जाँच दल के कनीय अभियंता द्वारा प्रयोगशाला जाँच हेतु कोडिंग करते हुए प्रेषित किया है। अतएव उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न जाँचफल को गलत नहीं माना जा सकता है।
अहसहमति के बिन्दु-2 के संदर्भ में श्री प्रसाद का कहना है कि उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-18 दिनांक 30.05. 2013 के जाँच प्रतिवेदन में लिये गये नमूनों का स्पष्ट लोकेशन का उल्लेख है, जबकि उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक-15 दिनांक 22.04.2015 के जाँच प्रतिवेदन में दो वर्ष बाद विलंब से मात्र अभिलेखों की समीक्षा के आधार पर समर्पित है। उड़नदस्ता के पत्रांक 18 दिनांक 30.05.2013 के साथ संलग्न जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि तीनों अद्द नमूना का लोकेशन तिरहुत मुख्य नहर के वि0दू0 0.0 से 6.70 अंकित है न कि किसी खास बिन्दु का उल्लेख है। उड़नदस्ता के पत्रांक-15 दिनांक 22.04.2015 जो शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल द्वारा वर्ष 2013 में संग्रहीत सात अद्द नमूना जिसमें स्पष्ट लोकेशन अंकित है, के जाँचफल के आधार पर माना गया है कि कार्य में न्यून विशिष्टि का पी0सी0सी0 का उपयोग किया गया है। अतएव आरोपी का कथन स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।
मामले के समीक्षोपरांत श्री प्रसाद का अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं पाया गया एवं प्रश्नगत कार्य में न्यून विशिष्टि के पी0सी0सी0 का उपयोग कर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने के लिये उनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाया गया।
उक्त के आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गयाः- "पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती"। तत्पश्चात विभागीय पत्रांक-19 दिनांक 09.01.2020 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गई। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3353 दिनांक 13.03.2020 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी है।
एक अन्य मामले में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के अन्तर्गत बरती गयी अनियमितता के लिए श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2628 दिनांक 19.12.2019 द्वारा "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" का दण्ड संसूचित है। उक्त दण्ड के प्रभावी रहने के कारण प्रस्तुत मामले में अनुमोदित/निर्णित दण्ड का अनुपालन किया जाना सम्प्रति संभव नहीं है।
समीक्षोपरांत एक अन्य मामले में विभागीय अधिसूचना संख्या-2628 दिनांक-19.12.2019 द्वारा श्री अम्बिका प्रसाद (आई॰डी॰-जे॰-5509), तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध ''शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक'' का दंड संसूचित रहने के कारण प्रस्तुत मामलें में उनके विरूद्ध ''पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती'' के निर्णित दंड का सम्प्रति अनुपालन संभव नहीं रहने के परिप्रेक्ष्य में इस दंड (पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती) को तत्काल स्थगित रखे जाने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है।95 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2628 दिनांक-19.12.2019 द्वारा श्री अम्बिका प्रसाद (आई॰डी॰-जे॰-5509), तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध ''शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक'' का दंड संसूचित रहने के कारण प्रस्तुत मामलें में उनके विरूद्ध ''पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती'' के निर्णित दंड का सम्प्रति अनुपालन संभव नहीं रहने के परिप्रेक्ष्य में इस दंड (पेंशन से पन्द्रह प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती) को तत्काल स्थगित रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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4 फरवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-13/2018-221--श्री आलोक कुमार (आई0डी0-5341) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी के विरूद्ध उनके पदस्थापन काल में सिंचाई प्रमंडल, डिहरी के अधीन विभागीय भूमि को व्यवसाय करने के लिए बन्दोबस्ती हेतु प्राप्त आवेदन को नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती के विभागीय नियमों एवं प्रावधानों के विरूद्ध प्रमंडलीय कार्यालय में भेजने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंघन करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1001 दिनांक 16.05.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी है - आरोपित पदाधिकारी श्री आलोक कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी ने अपने बचाव-बयान में उल्लेख किया है कि इनके द्वारा नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती हेतु प्राप्त आवेदनों को अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु कार्यपालक अभियंता के पास भेजा गया, प्राप्त आवेदनों पर अवर प्रमंडल पदाधिकारी, डिहरी के रूप में अनुशंसा नहीं की गयी थी। श्री कुमार द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, डिहरी से मंतव्य की माँग की गयी, उनके द्वारा मंतव्य दिया गया कि अवर प्रमंडल पदाधिकारी वर्णित जमीन का खुला सार्वजनिक बन्दोबस्ती संबंधी प्रार्थना पत्र समाचार पत्र अथवा सभी जगह इसकी सूचना देकर प्रार्थना पत्राें को कार्यपालक अभियंता के यहाँ भेजते तब यह ठीक ठहराया जाता। उक्त से स्पष्ट होता है कि श्री कुमार द्वारा बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2010 में निहित प्रावधानाें का अनुपालन नहीं किया गया है। समीक्षोपरांत श्री आलोक कुमार को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए दोषी पाते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :- (i) संगत वर्ष के लिए निन्दन।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री आलोक कुमार (आई0डी0-5341) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
(i) संगत वर्ष के लिए निन्दन।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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4 फरवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-13/2018-222--श्री संजय कुमार सुमन (आई0डी0-5089) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी के विरूद्ध उनके पदस्थापन काल में सिंचाई प्रमंडल, डिहरी के अधीन विभागीय भूमि को व्यवसाय करने के लिए बन्दोबस्ती हेतु प्राप्त आवेदन को नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती के विभागीय नियमों एवं प्रावधानों के विरूद्ध प्रमंडलीय कार्यालय में भेजने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंघन करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1002 दिनांक 16.05.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री सुमन से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी है - आरोपित पदाधिकारी श्री संजय कुमार सुमन, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी ने अपने बचाव-बयान में उल्लेख किया है कि इनके द्वारा नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती हेतु प्राप्त आवेदनों को अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु कार्यपालक अभियंता के पास भेजा गया, प्राप्त आवेदनों पर अवर प्रमंडल पदाधिकारी, डिहरी के रूप में अनुशंसा नहीं की गयी थी। श्री सुमन द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, डिहरी से मंतव्य की माँग की गयी, उनके द्वारा मंतव्य दिया गया कि अवर प्रमंडल पदाधिकारी वर्णित जमीन का खुला सार्वजनिक बन्दोबस्ती संबंधी प्रार्थना पत्र समाचार पत्र अथवा सभी जगह इसकी सूचना देकर प्रार्थना पत्राें को कार्यपालक अभियंता के यहाँ भेजते तब यह ठीक ठहराया जाता। उक्त से स्पष्ट होता है कि श्री सुमन द्वारा बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2010 में निहित प्रावधानाें का अनुपालन नहीं किया गया है। समीक्षोपरांत श्री संजय कुमार सुमन को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए दोषी पाते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :- (i) संगत वर्ष के लिए निन्दन।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार सुमन (आई0डी0-5089) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
(i) संगत वर्ष के लिए निन्दन।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।96 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 4 फरवरी 2022 सं0 22/नि॰सि॰(बिहा॰)28-05/2019/225--कार्य प्रमंडल, लखीसराय अन्तर्गत लखीसराय सदर प्रखंड के साबीकपुर पंचायत लोदियाग्राम में मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत पुल निर्माण मे अनियमितता बरतने के आरोप में श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध ग्रामीण कार्य विभाग के संकल्प ज्ञापांक-1849 दिनांक-25.06.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। तत्पश्चात संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-30 दिनांक-16.03.2015 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में निम्नलिखित तथ्यों का उल्लेख किया गया :- आरोप सं0-01-स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को बिना आदेश निर्गत किये किसी गलत व्यक्ति से तोड़वाया गया एवं तोड़ी गयी सामग्रियों को स्थल पर से हटवाया गया। बचाव-बयान ः- आलोच्य पुल के निर्माण के लिए मात्र एक ही निविदाकार द्वारा निविदा दी गई थी। एकल निविदकार द्वारा निविदित राशि परिमाण विपत्र की दर पर ही थी। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के स्तर से एकल निविदाकार के पक्ष में दर की स्वीकृति हेतु निविदा अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल, मुँगेर को समर्पित की गई थी। उल्लेखनीय है कि निविदा की राशि मात्र 17.31134 लाख रूपया होने के बावजूद अधीक्षण अभियंता को इसके निष्पादन हेतु लोक निर्माण विभाग संहिता की कंडिका 163 के आलोक में स्वीकृति हेतु भेजी गयी थी। कार्यपालक अभियंता को 25 लाख रूपया तक की निविदा के निस्तार की शक्ति प्रदा है, लेकिन एकल निविदा होने के कारण समुचित प्रचार एवं प्रसार सुनिश्चित होने के संदर्भ में अधीक्षण अभियंता को निविदा भेजी गयी थी। अधीक्षण अभियंता द्वारा समुचित प्रसार के संदर्भ में आश्वस्त होने के बाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को ही निविदा अपने स्तर से स्वीकृति प्रदान करने हेतु पत्रांक-657 दिनांक-25.08.2010 द्वारा लौटा दी गई थी। कार्यहित में कार्यपालक अभियंता द्वारा एकल निविदाकार के कार्य आरंभ करने कलए व्यवस्था करने हेतु निदेश दिया गया था। इसी पृष्ठभूमि में न्यूनतम एकल निविदाकार द्वारा पूर्व निर्मित पुल को तोड़ा गया। फलतः किसी गलत व्यक्ति द्वारा पुल नहीं तोड़वाया गया एवं पुराने पुल को तोड़ने पर कामलायक 700 ईंट प्राप्त हुए थें, जिन्हें सरप्लस लेख में कनीय अभियंता द्वारा तुरन्त ले लिया गया था एवं सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से संवेदक को हस्त रसीद पर निर्गत करा दिया गया था। उपर्युक्त निवेदित साक्ष्य समर्थित तथ्यों के आलोक में स्वतः स्पष्ट है कि स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को बिना आदेश का किसी गलत व्यक्ति से नहीं तोड़वाया गया एवं तोड़ी गई सामग्री को स्थल से गलत ढंग से नहीं हटाया गया अपितु पुराने पुल को तोड़ने के बाद कामलायक 700 ईंटों को नियमानुसार सरप्लस लेख में ले लिया गया था और समुचित हस्तरसीद पर सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से संवेदक को निर्गत कर दिया गया था।
आरोप सं0-02 :- तोड़ी गयी सामग्रियों को स्थल लेखा में नहीं लिया गया तथा नियामनुकूल निष्पादन नहीं कर के सरकार को विाीय क्षति करायी गयी।
बचाव-बयान :- पुराने पुल को तोड़ने से प्राप्त 700 कामलायक ईंटों को तत्काल सरप्लस लेखा में ले लिया गया था एवं समुचित हस्त रसीद पर संवेदक को ही निर्गत कर दिया गया था कि ताकि ईंट सुरक्षित रह सके एवं इसकी वसूली संवेदक के विपत्र से इसके कार्य में प्रयुक्त होने के पश्चात हो सके। साक्ष्य के रूप में परिशिष्ट 3 में सरप्लस लेखा एवं संवेदक से प्राप्त हस्त रसीद की छायाप्रति संलग्न है। इस तरह इसमें सरकार को कोई विाीय क्षति नहीं हुई है। आरोप सं0-03 :- एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये बिना कार्य को संवेदक से प्रारंभ करा दिया गया। बचाव-बयान :- तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा न्यूनतम एकल निविदाकार को कार्य प्रारंभ करने का निदेश दिया गया था। जिसके अनुपालन में संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। ऐसी स्थिति में स्वतः स्पष्ट है कि मेरे द्वारा कार्य प्रारंभ करने का निदेश नहीं दिया गया था।
संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में निम्नलिखित निष्कर्ष अंकित किया गया :-
निष्कर्ष ः- आरोप एवं बचाव-बयान के तथ्यों को समीक्षा के उपरांत यह पाया गया कि श्री राम स्वारथ सिंह आरोपित कार्यपालक अभियंता संप्रति सेवानिवृत पर आरोप सं0-01, 02 एवं 03 के लिए दोषी नहीं है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए निम्नलिखित असहमति के बिन्दु पर ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-730 दिनांक-20.03.2019 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गयीः- (i) प्रथम आरोप स्थल पर पूर्व निर्मित पुल को बिना आदेश निर्गत किये तोड़वाने एवं तोड़ी गयी सामग्री को स्थल से नहीं हटवाने का है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है कि मामले मे एकल निविदा होने के कारण कार्यहित में कार्य प्रारंभ करने हेतु निविदाकार को कार्य स्थल पर पूर्व से निर्मित पुल को तोड़़कर अलग किये जाने का निदेश दिया गया। उल्लेखनीय है कि एकल निविदाकार होने के बावजूद इस निमित आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित था, परन्तु बिना आदेश निर्गत किये पूर्व निर्मित पुल को तोड़वाना अनाधिकार एवं अनियमित है। अतः इस बिन्दु पर आपका बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।
(ii) पूर्व निर्मित पुल की तोड़ी गयी सामग्रियों को स्थल लेखा में नहीं लिये जाने तथा नियमानुकूल निष्पादन नहीं किये जाने का हैं संचालन पदाधिकारी द्वारा तोड़े गये पुल से प्राप्त कामलायक ईंटों को सरप्लस एकाउंट में लिये जाने के आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया कि इसे मापी पुस्त में भी अंकित किया गया। अतः इस बिन्दु पर आपका बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है। (iii) एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये बिना कार्य को संवेदक से प्रारंभ करा दिये जाने का है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त योजना में कार्य कराने का निदेश श्री सिंह के दिनांक-12.02.2011 के प्रमंडल में योगदान देने के पूर्व97 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 में ही दिये जाने के आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना है। उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत कार्य का एकरारनामा एवं कार्य प्रारंभ की तिथि 28.02.2011 है, परन्तु इसके पूर्व ही संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिया गया, जो नियमानुकूल नहीं है। चूँकि श्री सिंह का पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग होने के कारण सभी अभिलेख अग्रेतर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को उपलब्ध करा दिया गया। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक-564 दिनांक-20.04.2020 द्वारा श्री रामस्वारथ सिंह को द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब उपलब्ध कराने हेतु स्मारित किया गया। जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में पुनः विभागीय पत्रांक-1306 दिनांक-18.12.2020 द्वारा स्मारित किया गया परन्तु उनके द्वारा जवाब समर्पित नहीं किया गया। जबकि श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब बार-बार स्मारित करने के बावजूद समर्पित नहीं किया जा रहा है।
अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति के आलोक में श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब अप्राप्त रहने के स्थिति में यह मानते हुए की उन्हें द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में कुछ नहीं कहना है एवं लगाये गये आरोप को प्रमाणित मानते हुए श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया :-
''पेंशन से पाँच प्रतिशत की मासिक कटौती अगले पाँच वर्षों तक।'' उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है एवं उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2726 दिनांक-22.12.2021 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है।
अतएव सरकार द्वारा लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम स्वारथ सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय संप्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
''पेंशन से पाँच प्रतिशत की मासिक कटौती अगले पाँच वर्षों तक।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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8 फरवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(मुक0)पू0-19-33/2011(पार्ट)-238--श्री शम्भु शरण सिन्हा (आई0डी0-3192), तत्कालीन प्रभारी उप समाहर्त्ता (सहायक अभियंता) राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में बरती गई गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि के गबन संबंधी कतिपय आरोपों के लिए उनके विरूद्ध सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-55 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-811 दिनांक 16.07.2005 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1052 दिनांक 12.10.2019 द्वारा श्री सिन्हा को आदेश निर्गत की तिथि से "सेवा से बर्खास्त" किया गया।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0- 11259/2010 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 01.12.2011 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए दण्डादेश को निरस्त कर दिया गया एवं वादी द्वारा समर्पित किये जाने वाले द्वितीय कारण पृच्छा के स्टेज से पाँच माह के अन्दर विभागीय कार्यवाही का निष्पादन करने का आदेश दिया गया, तदोपरांत उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1052 दिनांक 12.10.2009 द्वारा श्री सिन्हा को संसूचित दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना सं0-615 दिनांक 11.06.2012 द्वारा इस शर्त्त के साथ निरस्त किया गया कि वादी (श्री सिन्हा) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब दिनांक 28.12. 2011 के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय से यह आदेश प्रभावित होगा।
श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के सम्यक समीक्षोपरांत द्वितीय कारण पृच्छा को अस्वीकृत करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं गबन के प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-356 दिनांक 15.03.2013 द्वारा श्री सिन्हा को पुनः "सेवा से बर्खास्त" कर दिया गया।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा पुनः माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 8280 दिनांक 2014 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 13.04.2018 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए उक्त विभागीय अधिसूचना सं0-356 दिनांक 15.03.2013 को निरस्त कर दिया गया एवं अनुशासनिक प्राधिकार को नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने का निदेश दिया गया।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13.04.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-356 दिनांक 15.03.2013 द्वारा अधिरोपित दण्डादेश को विभगाीय अधिसूचना सं0-2077 दिनांक 14.09.2018 द्वारा इस शर्त्त के साथ निरस्त किया गया कि श्री सिन्हा के विरूद्ध पुनः नये सिरे से विभागीय कार्रवाई के संचालनोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय से यह आदेश प्रभावित होगा।
दिनांक 13.04.2018 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री शम्भु शरण सिन्हा (सहायक अभियंता) तत्का0 प्रभारी उप समाहर्त्ता राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2076 दिनांक 14.09.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री सिन्हा दिनांक 31.01.2021 को सेवानिवृत हो गये, उनकी सेवानिवृति के उपरांत पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।98 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें श्री शंभु शरण सिन्हा (आई०डी०-3192), तत्कालीन (प्रभारी उप समाहर्ता) सहायक अभियंता, राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँँँँ के विरूद्ध गठित आरोप सं० 01, 02, 03, 04, 05, 07, 09 एवं 10 को प्रमाणित तथा आरोप सं० 06 एवं 08 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक-814 दिनांक 10.08.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- आरोप पत्र के आधार पर श्री शंभु शरण सिन्हा (आई०डी०-3192), तत्कालीन (प्रभारी उप समाहर्ता) सहायक अभियंता, राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँँँँ के विरुद्ध गठित आरोप निम्नवत हैं :- आरोप संख्या-01 - जलकर रोकड़ बही (Work cash book) एवं हस्त पावती पत्र संधारण राजस्व प्रमंडल, पूर्णियाँँँ में कार्य अवधि में नहीं किया जाना, हर माह प्राप्ति एवं व्यय मद में शून्य दर्शाया जाना व्यवहारिक तथा वैधानिक (निर्धारित) प्रक्रिया का पूर्णतः अनदेखी व अवहेलना प्रभारी रोकड़पाल एवं आपके द्वारा किया जाना, जिसके चलते विभिन्न कपटपूर्ण तरीके से रोकड़ बही के अंतशेष में हेरफेर कर कुल रू० 48,97,656/- (अड़तालिस लाख सनतानवे हजार छह सौ छप्पन रूपये) मात्र का गबन के लिए आप दोषी है। आरोप संख्या-02 - वित्तीय प्रावधानानुसार एक अस्थायी अग्रिम के रहते बिना समायोजन के दूसरा अग्रिम देय नही है। जिस माह अस्थायी अग्रिम दिया गया हो, उसी माह उसका समायोजन हो जाने के पश्चात ही दूसरा अग्रिम दिया जाना है। परन्तु आपके द्वारा ऐसा प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी और अंचल कार्यालय को अग्रिम रखते हुए भी अन्य अग्रिम दिया गया। उक्त अग्रिम के समायोजन हेतु कभी प्रयास आपके द्वारा नहीं किया गया। इस बात पर भी ध्यान नहीं रखा गया कि प्रमंडल द्वारा दिये गये अग्रिमों को अंचल कार्यालय के रोकड़ बही में दर्ज किया गया अथवा नहीं। वित्त विभाग के अंकेक्षण जाँच दल द्वारा नमूना जाँच के क्रम में पाया गया कि प्रमंडल द्वारा हस्त पावती के माध्यम से भिन्न-भिन्न अंचलों को अस्थायी अग्रिम दिया गया किन्तु उक्त अग्रिम अंचल के रोकड़बही में दर्ज नहीं था। कुछ अग्रिम अंचल कार्यालय के रोकड़ बही में दर्ज किन्तु प्रमंडलीय रोकड़बही में दर्ज नहीं था। इस प्रकार रू० 24,76,421/- (चौबीस लाख छिहत्तर हजार चार सौ एक्कीस रूपये) प्रमंडल द्वारा हस्त पावती पर अंचल कार्यालय को उपलब्ध कराया गया जो अंचल कार्यालय के रोकड़बही में दर्ज नहीं होने एवं अंचल कार्यालय द्वारा उक्त राशि को अस्वीकार करने से स्पष्ट है कि रू० 24,76,421/- (चौबीस लाख छिहत्तर हजार चार सौ एक्कीस रूपये) का गबन एवं वित्तीय नियमों के घोर उल्लंघन के लिए आप दोषी है। आरोप संख्या-03 - दिनांक 02.05.2002 को प्रमंडल द्वारा कुल बीस विपत्रों के माध्यम से 16,84,941/- (सोलह लाख चौरासी हजार नौ सौ एक्तालीस रूपये) की निकासी की गई किन्तु उक्त तिथि को रोकड़बही के प्राप्ति भाग में मात्र रू० 16,29,661/- (सोलह लाख उन्तीस हजार छः सौ इकसठ रूपये) दर्शाया गया। रू० 55,280/- रोकड़बही में कम राशि प्राप्ति दिखाकर रू० 55,280/- (पचपन हजार दो सौ अस्सी रूपये) का गबन के लिए आप दोषी है। आरोप संख्या-04 - श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह, प्रभारी उप समाहर्ता राजस्व प्रमंडल, सहरसा के नेतृत्व में एक जाँच दल द्वारा आपके कार्यालय में हुई वित्तीय अनियमितता की जाँच की गई जिसमें रू० 1,40,74,463/- (एक करोड़ चालीस लाख चौहत्तर हजार चार सौ तिड़सठ रूपये) के गबन का मामला प्रतिवेदित किया गया। जाँच दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त (वित्तीय अनियमितता के लिए आपके तथा तत्कालीन रोकड़पाल श्री शहिद अंसारी तमन्ना (से.नि.) पर स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गई। जिसका केस नं० 104/04 दिनांक-08.04.2004 है, जिसमें आई.पी.सी. धारा-409/420/467/471/120 लगया गया। जिसका अनुसंधान जारी है। अतएव रू० 1,40,74,463/- (एक करोड़ चालीस लाख चौहत्तर हजार चार सौ तिरसठ रूपये) के गबन के लिए आप दोषी हैं। आरोप संख्या-05 - उप समाहर्त्ता, राजस्व प्रमंडल, पूर्णियाँँँ के वर्ष 2003-04 के रोकड़ बही में पाया गया कि 31.03.2003 के कुल अन्त शेष की राशि रू० 2,29,24,184.44/-(दो करोड़ उन्तीस लाख चौबीस हजार एक सौ चौरासी रूपये चौआलीस पैसे) मात्र को रोकड़बही संख्या 59 से रोकड़बही संख्या 60 में 7,42,004/- (सात लाख बेयालीस हजार चार रूपये) को आरम्भ शेष के रूप में बिना यह सत्यापित किये दिनांक 01.04.2004 से 06.04.2004 तक कोई लेनदेन नहीं हुआ किया गया। दिनांक 29.04.2003 को नये उप समाहर्त्ता ने प्रभार ग्रहण किया एवं उक्त तिथि को अंतशेष के रूप में रू० 83,38,955.44 (तेरासी लाख अड़तीस हजार नौ सौ पचपन रूपये चौवालीस पैसे मात्र) था। आरोप संख्या-06 - शाहिद लतीफ अंसारी तमन्ना तत्कालीन रोकड़पाल 30.04.2003 को सेवा निवृत हुए फिर भी उनके द्वारा सेवानिवृत्ति के उपरान्त भी रोकड़ का प्रभार नये रोकड़पाल को नहीं सौपा गया, के विरूद्ध आपके द्वारा न तो कोई अनुशासनिक कार्रवाई की गई और न ही तत्कालीन रोकड़पाल के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप संख्या-07 - सिंचाई राजस्व प्रमंडल, पूर्णियाँँँ द्वारा दिनांक 07.04.2003 से 30.04.2003 तक के लिए संघारित रोकड़बही के नमूना जाँच (लेखा परीक्षा समिति) के क्रम में पाया गया कि दिनांक 07.04.2003 को विभिन्न अंचलाधिकारियों के यहां लंबित अग्रिम में से 1,45,91,294/- (एक करोड़ पैंतालीस लाख एकानवे हजार दो सौ चौरानवे रूपये) के अग्रिम का समायोजन लूज-ए-रौल के माध्यम से किया गया है। परन्तु लेखा परीक्षा को इन समायोजनों के लिए किए गए भुगतान से संबंधित लूज-ए-रौल/प्रमाणक नहीं दिखलाया गया। किस परिस्थिति में बिना प्रमाणक के उक्त राशि का समायोजन किया गया, के लिए आप दोषी हैं। आरोप संख्या-08 - भरपाई पंजी संख्या 164 का पृष्ठ संख्या 82/831 एवं 110/111 जाँच दल द्वारा सत्यापन के क्रम में गायब पाया गया। साथ ही साथ भरपाई पंजी संख्या 159 के पृष्ठ संख्या 273 से 276 तक पन्ने गायब पाये गये जिससे99 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संबंधित राशि रू० 16,500/- (सोलह हजार पाँच सौ रूपये) मात्र के भुगतान का सत्यापन नहीं हो सका, जिसके लिए आपको दोषी ठहराया जा सकता है। आरोप संख्या-09 - कोषागार से निकासी की गई राशि को रोकड़वही संख्या 59 के पृष्ठ संख्या 07 पर दिनांक 02.05.2002 को कुल 20 अदद् विपत्रों में सन्निहित राशि रू० 16,84,941/- (सोलह लाख चौरासी हजार नौ सौ एकतालीस रूपये) मात्र की जगह रू० 16,29,661/- (सोलह लाख उनतीस हजार छः सौ एकसठ रूपये) दर्ज किया गया है। इस प्रकार रू० 55,290/- (पचपन हजार दो सौ नब्बे रूपये) को रोकड़वही में दर्ज नहीं किया जो वित्तीय विपत्रों की धज्जियों उड़ाने जैसा है। चेक पंजी, विपत्र पंजी (जो बाद में तैयार किया गया) का संधारण प्रमंडल में नहीं किया गया, के लिए आपको जिम्मेवार ठहराया जा सकता है। आरोप संख्या-10 - जाँच दल द्वारा जाँचित उपसंहार में मुख्य रूप से सेवा निवृत रोकड़पाल श्री शहिद लतीफ अंसारी तमन्ना ही रहे है, जो सरकारी रोकड़ को निजी जागीर समझ कर सरकारी पैसे का निजी लाभ/व्यापार में उपयोग करते रहे है। उन्होंने अपने पदाधिकारी को भ्रम में रखकर अपना स्वार्थ साधा है। परन्तु आपने कार्यालय प्रधान होने के नाते इतनी बड़ी-बड़ी गलतियों को नजर अंदाज किया है, जिसके लिए आपको क्यों न जिम्मेवार ठहराया जाय। बचाव बयान :-
श्री शंभु शरण सिन्हा (आई०डी०-3192), तत्कालीन (प्रभारी उप समाहर्ता) सहायक अभियंता, राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँँँँ द्वारा प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में उल्लेखित बचाव बयान निम्नवत है :-
श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि आरोप सं०-3, एवं आरोप सं०-9 (जो कि स्वतः आरोप सं०-3 का पुनरावृति है), दोनों ही राशि F.I.R. से सम्बन्धित आरोप सं०-4 के F.I.R. की राशि में शामिल है। अतः आरोप सं०-3, 4 एवं 9 subjudice है। आरोप सं०-6 एवं आरोप सं०- 8, उपरोक्त प्रासंगिक पत्र द्वारा आरोप मुक्त किया गया है। विभागीय पत्रक 1052 दिनांक 12.10.2009 एवं विभागीय पत्रांक 356 दिनांक 15.03.2013 द्वारा आरोप सं० 6 एवं आरोप सं० 10 को आरोपमुक्त किया गया है। शेष आरोप सं० 1, 2, 5 एवं 7 के संदर्भ में श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि इनके द्वारा समर्पित तथ्यों एवं साक्ष्यों पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया है। आरोप सं० 7 में 1.44 लाख रुपये का सामन्यजस्य, बिना प्रमाणक के करने के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि सामन्यजस्य प्रमाणक के आधार पर ही किया गया था, जिसकी पुष्टि जाँचदल के जाँच प्रतिवेदन के पृष्ट सं० 4 पर दर्ज दिनांक 07.04.2003 के सामन्यजस्य के वर्णन से स्वतः होता है। श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि यह जाँच इनके प्रभार सौंपने की तिथि 29.04.2003 के महीनों बाद नबम्बर/दिसम्बर 2003 में किया गया था। इस आरोप के निराधार होने से आरोप सं०-5 स्वतः निराधार हो जाता है। समीक्षा :-
दिनांक 02.05.2002 को प्रमंडल द्वारा कुल बीस विपत्रों के माध्यम से रू० 16,84,941.00 निकासी के साथ रोकड़बही में रू० 16,29,661.00 अंकित करते हुए 55,280.00 के गबन से संबंधित आरोप सं० 3 में संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है कि रोकड़पाल एवं लेखापाल द्वारा की गयी इस गलती की जांच संबंधित प्रभारी पदाधिकारी के तौर पर श्री शंभु शरण सिन्हा द्वारा की जानी चाहिये थी। इस राशि के F.I.R. में सम्मिलित होने का उल्लेख भी संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया है।
कोषागार से निकासी की गई राशि को रोकड़वही संख्या 59 के पृष्ठ संख्या 07 पर दिनांक 02.05.2002 को कुल 20 अदद् विपत्रों में सन्निहित राशि रू० 16,84,941/- की जगह रू० 16,29,661/- दर्ज किये जाने एवं रू० 55,290/- को रोकड़वही में दर्ज नहीं कर वित्तीय विपत्रों की धज्जियों उड़ाने तथा चेक पंजी, विपत्र पंजी (जो बाद में तैयार किया गया) का संधारण प्रमंडल में नहीं किये जाने संबंधी आरोप सं० 9 में संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है कि रोकड़पाल एवं लेखापाल द्वारा की गयी इस गलती की जांच संबंधित प्रभारी पदाधिकारी के तौर पर श्री शंभु शरण सिन्हा द्वारा की जानी चाहिये थी। इस राशि के भी F.I.R. में सम्मिलित होने का उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया है।
रुपये 1,40,74,463.00 के गबन संबंधी आरोप सं० 4 के संदर्भ में F.I.R. दर्ज रहने के फलस्वरुप मामला न्यायालीय होने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गयी है।
उक्त से स्पष्ट होता है कि आरोप सं० 3 एवं आरोप सं० 9 दोनों से सबंधित राशि F.I.R. से सम्बंधित आरोप सं० 4 के F.I.R. की राशि में शामिल है, जिससे उक्त आरोपों में अनियमितता परिलक्षित होती है।
आरोप सं० 7 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि 1,45,91,294. 00/- के अग्रिम का समायोजन लूज-ए-रौल के माध्यम से किया जाना तथा इससे संबंधित कागजातों को सही ढंग से संधारित कर नये उप समाहर्ता को ससमय प्रभार नहीं देना श्री शंभु शरण सिन्हा की लापरवाही दर्शाता है। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा को नियमानुकूल उक्त राशि का समायोजन नहीं करने के लिये दोषी माना जा सकता है। अन्य आरोपों के संदर्भ में श्री सिन्हा द्वारा कोई भी तथ्य उल्लेखित नहीं किया है।
श्री शम्भु शरण सिन्हा, सहायक अभियन्ता, तत्कालीन प्रभारी उप समाहर्ता द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव वयान में उन्हीं तथ्यों को पुनः दोहराया गया है जिस पर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य गठित किया जा चुका है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप सं० 01, 02, 03, 04, 05, 07, 09 एवं 10 को प्रमाणित तथा आरोप सं० 06 एवं 08 को अप्रमाणित पाया गया है।100 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री शम्भु शरण सिन्हा (आई0डी0-3192) तत्कालीन सहायक अभियंता (प्रभारी उप समाहर्त्ता) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" का दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री शम्भु शरण सिन्हा (आई0डी0-3192) तत्कालीन सहायक अभियंता (प्रभारी उप समाहर्त्ता) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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10 फरवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-09/2021-299--श्री गोविन्द प्रसाद (आई0डी0-3948), कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना, अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, सिवान को गंडक नदी का सर्वेक्षण कार्य के संबंध में उच्चाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेश के बावजूद भुगतान नहीं करने, अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, स्वेच्छाचारिता पूर्वक कार्य करने तथा अनुशासनहीनता पूर्वक व्यवहार करने संबंधी आरोपों के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री गोविन्द प्रसाद का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सहरसा निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री गोविन्द प्रसाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन के निमित्त संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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18 फरवरी 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2013.-349--श्री भरत पूर्वे (आई0डी0-1894) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में आर्थिक अपराध ईकाई द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम-1988 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-138, दिनांक 27.01.2014 द्वारा श्री पूर्वे को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-281 दिनांक 07.03.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
आरोप संख्या-1-सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-946, दिनांक 24.01.11, पत्रांक-220 दिनांक 06.
| क्र0 | अघोषित अचल सम्पत्ति का विवरण | अनुमानित मूल्य |
| 1 | पत्नी श्रीमती ममता पूर्वे मौजा पंटा (देहाती क्षेत्र) जिला दरभंगा डीड नं0-11636 खरीदगी की तिथि 2009 के नाम एफ0ए0एच0आई0जी0, बहादुरपुर, थाना-अगमकुँआ, जिला-पटना में खाता सं0-123 सर्वे प्लॉट सं0-802, रकवा-39.13 डिसमिल | 2,04,800 |
| 2 | पत्नी श्रीमती ममता पूर्वे मौजा पंटा (देहाती क्षेत्र) जिला दरभंगा डीड नं0-11636 खरीदगी की तिथि 2009 के नाम एफ0ए0एच0आई0जी0, बहादुरपुर, थाना-अगमकुँआ, जिला-पटना में खाता सं0-126 सर्वे प्लॉट सं0-822, रकवा-1.09 डिसमिल | 1,63,500 |
01.12 एवं पत्रांक-17521 दिनांक 21.12.12 द्वारा राज्य सरकार के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों से विहित प्रपत्र में चल अचल सम्पत्ति तथा दायित्वों की विवरणी प्राप्त कर उसे सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया। उक्त आलोक में आपके द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए विहित प्रपत्र में चल अचल सम्पत्ति एवं दायित्व विवरणी दिनांक 05.2.13 को घोषित की गयी है। उक्त विवरणी दिनांक 05.2.13 में आपने अपने पास मौजूद सम्पत्ति की सही जानकारी नहीं देकर उसे छुपाया है क्योंकि आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में आपके विरूद्ध आर्थिक अपराध थाना कांड सं0-36/13 दिनांक 13.08.13 धारा-13(2) सह पठित धारा 13(1) ई भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 दर्ज किया गया है। आर्थिक अपराध ईकाई पटना द्वारा अबतक किये गये अनुसंधान के अनुसार समर्पित प्रतिवेदन एवं आपके द्वारा घोषित चल अचल सम्पत्ति एवं दायित्व विवरणी दिनांक 05.2.13 के तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा नाजायज एवं भ्रष्ट तरीके से कई ऐसी चल अचल सम्पत्ति का अर्जन किया गया है जिसकी घोषणा उक्त विवरणी में नहीं की गई है। यह बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 19(6) के आलोक में गंभीर कदाचार है तथा सरकारी सेवक के प्रतिकूल आचरण है। इस कदाचार के लिए आप दोषी है। उक्त अघोषित चल अचल सम्पत्ति की विवरणी निम्नरूपेण है :- क्र0 अघोषित अचल सम्पत्ति का विवरण अनुमानित मूल्य 1 पत्नी श्रीमती ममता पूर्वे मौजा पंटा (देहाती क्षेत्र) जिला दरभंगा डीड नं0-11636 खरीदगी की तिथि 2009 के नाम एफ0ए0एच0आई0जी0, बहादुरपुर, थाना-अगमकुँआ, जिला-पटना में खाता सं0-123 सर्वे प्लॉट सं0-802, रकवा-39.13 डिसमिल
101 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022उक्त के अतिरिक्त पदीय कर्तव्य का दुरूपयोग कर अघोषित चल सम्पत्ति अर्जित की गई है। जिसका उल्लेख आर्थिक अपराध ईकाई के पत्र में उल्लेखित है। आरोप संख्या-2- बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 19(2) के अनुसार कोई सरकारी सेवक सरकार की पूर्व जानकारी के बिना किसी अचल सम्पत्ति का अर्जन या निबटाव अपने नाम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से पट्टे बंधक खरीद, बिक्री या प्रतिदान के द्वारा अन्यथा न करेगा।
इसी प्रकार बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-19(2) के अनुसार प्रत्येक सरकारी सेवक, सभी ऐसा संव्यवहार के संबंध में, जिसका मूल्य सरकारी सेवक के दो माहों के मूल वेतन जोड़ ग्रेड वेतन से अधिक हो, ऐसा संव्यवहार के पूर्ण होने के एक माह के अन्दर सरकार को जानकारी देगा।
परन्तु यह कि यदि ऐसा कोई संव्यवहार किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हो जिसका सरकारी के साथ पदीय कारबार चलता हो तो सरकार की पूर्व मंजूरी ली जायेगी।
आपके द्वारा अर्जित उपरोक्त अघोषित चल एवं अचल सम्पत्ति की जानकारी सरकार को पूर्व में नहीं दी गयी है जो गंभीर कदाचार है। आरोप संख्या-3-आपके विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने संबंधी थाना कांड संख्या-36/13 दिनांक 13.08.2013 में धारा-13(2) पठित धारा-13(1) ई0 भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम 1988 भी दर्ज किया गया है। अनुसंधान में पाये गये तथ्यों के अनुसार अनुमानित बचत कुल रू0-1,68,41,112/- तथा अर्जित आय के अनुसार अनुमानित बचत कुल रू0-67,00,000/- है। आपके द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति (रू0 1,68,41,112-67,00,000) रू0-1,01,41,112/- है। जो नाजायज एवं भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गयी है। यह सम्पत्ति आपके द्वारा पदीय कर्त्तव्य का दुरूपयोग कर अवैध तरीके से अर्जित की गयी है। जो घोर कदाचार है जिसके लिए आप दोषी है।
विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही दिनांक 31.03.2015 को श्री पूर्वे के सेवानिवृत हो जाने के कारण श्री पूर्वे को दिनांक 31.03.15 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना संख्या-915, दिनांक 17.04.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित तीनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई, समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-2495 दिनांक 06.12.2018 द्वारा लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।
उक्त के आलोक में श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 08.01.2019 द्वारा लिखित अभ्यावेदन का जवाब विभाग में समर्पित कराया गया। जिसकी समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
श्री पूर्वे ने अपने अभ्यावेदन में विभागीय कार्यवाही के दौरान उनके पक्ष को नहीं सुने जाने, जाँच पदाधिकारी एवं गवाही का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण नहीं किये जाने, पुलिस अनुसंधान के आधार पर आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य देने एवं विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं देनेे की बात कही गई है, किन्तु आरोप पत्र में श्री पूर्वे के विरूद्ध रू0 1,01,41,112/- (एक करोड एक लाख एकतालीस हजार एक सौ बारह रूपये) अधिक परिसंपति अर्जित करने का जो आरोप है, उसके संबंध में इनके द्वारा किसी प्रकार का खंडन नहीं किया गया है और न ही कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत किया गया जो प्रपत्र-क में गठित आरोपों को खंडित करते हो। संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) द्वारा इन्हें सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान श्री पूर्वे द्वारा समर्पित बचाव बयान की विधिवत समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा कंडिकावार की गई है। संचालन पदाधिकारी ने श्री पूर्वे द्वारा दिये गये बचाव बयान एवं इसके साथ संलग्न कागजात तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा समर्पित किये गये कागजात के समीक्षोपरांत प्रपत्र-'क' में गठित तीनों आरोपों को श्री पूर्वे को विरूद्ध प्रमाणित पाया है।
समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपाें के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री भरत पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1919, दिनांक 03.09.2019 से निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
"शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता पत्रांक-0, दिनांक 11.10.2019 से अपना पुनर्विचार अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
(i) मैं कई बार अपने पत्रों में यह उल्लेख किया हूँ कि मेरे विरूद्ध लगाया गया आरोप एक आपराधिक मामला है, इसका दस्तावेजी साक्ष्य आर्थिक इकाई द्वारा एकत्र किया गया है तथा न्यायालय में समर्पित अंतिम प्रतिवेदन उसी साक्ष्य पर आधारित है।
(ii) विभागीय कार्यवाही एवं न्यायालय में चल रही कार्यवाही दोनों का आरोप एक ही है तथा दोनों ही एक ही तरह के साक्ष्य पर आधारित है।
(iii) उसी साक्ष्य के आधार पर मैं अपना जवाब समर्पित किया हूँ। आर्थिक अपराध इकाई का जाँच प्रतिवेदन उनके द्वारा उपलब्ध किए गए साक्ष्य पर आधारित नहीं है। जिसकी जाँच न्यायालय में चल रही है।102 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (iv) विभाग को मेरे जवाब की समीक्षा के पूर्व पहले यह साक्ष्य उपलब्ध करना चाहिए था। जो नहीं किया गया। बिना साक्ष्य देखे जाँच प्रतिवेदन सही है या गलत यह कैसे समझा जा सकता है।
(v) प्रासंगिक पत्र में पुलिस के प्रतिवेदन का बार-बार उल्लेख किया गया है। परन्तु यह प्रतिवेदन कैसे तैयार किया गया उस पर एकबार भी नहीं विचार किया गया।
(vi) सरकार द्वारा विभागीय कार्यवाही की पद्धति निर्धारित है। यह एक अर्धन्यायिक प्रक्रिया है, आरोप को साबित करने के लिए गवाह एवं दस्तावेजी साक्ष्य दोनों की जाँच होनी चाहिए था।
(vii) संचालन पदाधिकारी द्वारा न दस्तावेज और न ही गवाह दोनों में से किसी की जाँच की गई। आज भी विभाग के पास वह दस्तावेज नहीं है जो आरोप को साबित करने के लिए मामले के अनुसंधानकर्त्ता द्वारा अनुसंधान के दौरान एकत्र किया गया था।
(viii) दण्ड संसूचन पत्र में केवल पुलिस जाँच प्रतिवेदन तथा मेरे जवाब का उल्लेख है उस दस्तावेज का जिक्र तक नहीं है, जिसके आधार पर यह जाँच प्रतिवेदन तथा मेरा जवाब है।
(ix) Paul Anthony Vs Bharat Gold Mines Ltd. and another माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा दिए गये निर्णय के अनुसार एक ही तरह के साक्ष्य एवं तथ्य पर आधारित विभागीय कार्यवाही स्थगित कर दिया जाना चाहिए।
(x) मेरे आय तथा सम्पत्ति की जाँच आयकर विभाग द्वारा आर्थिक अपराध इकाई के अनुरोध पर किया गया परन्तु आयकर विभाग के निर्णय को अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा देखा तक नहीं गया।
श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-
श्री पूर्वे ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में उल्लेख किया है कि इस मामले में उनके विरूद्ध आर्थिक अपराधिक इकाई द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिसका विचारण न्यायालय में चल रहा है। चूँकि एक ही मामले में आपराधिक कार्यवाही एवं विभागीय कार्यवाही साथ-साथ नहीं चल सकती है। इसलिए विभाग द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही विधि सम्मत नहीं है एवं न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। श्री पूर्वे ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में यह भी अंकित किया है कि आरोप पत्र के साथ संलग्न साक्ष्य के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया है जो सही नहीं है। श्री पूर्वे के विरूद्ध आय के ज्ञात श्रोत से 1,01,41,112/- की परिसम्पत्ति अर्जित करने के आरोप के लिए आर्थिक आपराधिक इकाई द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप पत्र में मूल आरोप यह है कि श्री पूर्वे ने अपने पदीय शक्ति का दुरूपयोग करते हुए अवैध रूप से धर्नाजन किया है। इस मामले में अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार, पटना संचालन पदाधिकारी नियुक्त थे। संचालन पदाधिकारी ने आरोप पत्र के साथ संलग्न साक्ष्य एवं श्री पूर्वे द्वारा समर्पित बचाव बयान के विस्तृत समीक्षोपरांत यह अभिमत गठित किया है कि श्री पूर्वे के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोप संख्या-1, 2 एवं 3 प्रमाणित होते है। भ्रष्ट आचरण ज्ञात श्रोत से कुल 1,01,41,112/- रू0 की परिसम्पत्ति अर्जित करना बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 के नियम-19 के प्रतिकूल है।
उक्त के आलोक में श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पुनर्विचार अभ्यावेदन को निरस्त करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-179 दिनांक 06.02.2020 द्वारा यथावत रखा गया।
"शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक"। साथ ही श्री भरत पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-2201 दिनांक 14.01.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत (निलंबन अवधि-27.01.2014 से 30.03.2015 तक) विनियमन से संबंधित निम्न बिन्दुओं पर अभ्यावेदन की मांग की गई :- "क्यों नहीं आपके निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि नहीं मानते हुए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी भुगतान नहीं किया जाय।"'
श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित अभ्यावेदन का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाये गयेः-
श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विनियमन से संबंधित विभागीय पत्र सं0-2201 दिनांक 14.01.2019 बिना तामिला के डाक विभाग द्वारा वापस लौटा दिए जाने के कारण विभाग में श्री पूर्वे द्वारा दिनांक-05.03.2020 को उक्त पत्र विभागीय प्रशाखा में आकर चपरासी बही पर हाथों-हाथ प्राप्त किया गया। श्री पूर्वे से निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित कारण पृच्छा का जबाव (अभ्यावेदन) अप्राप्त रहने के कारण विभागीय पत्रांक-295, दिनांक-05.03.2021 द्वारा अपना जवाब समर्पित करने हेतु स्मारित किया गया। परन्तु, श्री पूर्वे सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से अब तक जबाव (अभ्यावेदन) अप्राप्त रहा। उल्लेखनीय है कि निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित कारण पृच्छा (पत्रांक-2201 दिनांक-14.10.2019) में स्पष्ट रूप से यह अंकित है कि 60 (साठ) दिनों के अन्दर अभ्यावेदन समर्पित किया जाय। विलम्ब की स्थिति में विभाग उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर एक पक्षीय निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा। उक्त से यह स्पष्ट हो रहा है कि लगभग दो वर्ष तीन माह की लम्बी अवधि व्यतीत होने के पश्चात भी श्री पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा जानबूझकर निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित पूछे गये कारण पृच्छा का जवाब समर्पित नहीं किया जा रहा है।103 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री भरत पूर्वे सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" का दंड अधिरोपित है। अतएव उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री भरत पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के (निलंबन अवधि-27.01.2014 से 30.03.2015 तक) का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं इस अवधि (दिनांक-27.01.
2014 से दिनांक-30.03.2015 तक की निलंबन अवधि) की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ नहीं की जायेगी।"
अतएव अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री भरत पूर्वे, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के (निलंबन अवधि-27.01.2014 से 30.03.2015 तक) का विनियमन निम्नवत करते हुए संसूचित किया जाता है :- "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं इस अवधि (दिनांक-27.01.
2014 से दिनांक-30.03.2015 तक की निलंबन अवधि) की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ नहीं की जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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2 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(मुक0)सम0-19-19/2018-447--वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, झंझारपुर अन्तर्गत कमला-बलान नदी के पश्चिमी तटबंध में रिसाव होने की स्थिति में स्थल से अनुपस्थित रहने एवं जिला पदाधिकारी, दरभंगा एवं पुलिस अधीक्षक, दरभंगा द्वारा खोजबीन करने पर कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने, विभागीय निदेश के बावजूद आक्रम्य स्थलों पर बाढ़ सुरक्षा हेतु सामग्रियों का भंडारण नहीं करने, आपात स्थिति में मानव बल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करने जैसे आरोपों के लिए श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर का विभागीय अधिसूचना सं0-1615 दिनांक 14.09.17 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1677 दिनांक 20.09.17 द्वारा श्री राम के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1539 दिनांक 19.07.18 द्वारा श्री राम को सेवा से बर्खास्त किया गया।
उक्त दण्ड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 05.02.20 द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में मामले के पुनः सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-788 दिनांक 11.06.20 द्वारा श्री राम के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" संबंधी निर्गत दण्डादेश को निरस्त करते हुए "दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित किया गया एवं साथ श्री बिजेन्द्र कुमार राम को सेवा में पुनस्र्थापित किया गया।
बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के तहत श्री राम को सेवा से बर्खास्तगी की तिथि 19.07.18 से सेवा में पुनस्र्थापित किये जाने से संबंधित अधिसूचना सं0-788 दिनांक 11.06.2020 निर्गत किये जाने की तिथि तक यथा 10.06.2020 तक (दिनांक 19.07.18 से 10.06.20 तक) निलंबित माना जायेगा तथा सेवा से बर्खास्तगी की तिथि के पूर्व दिनांक 14.09.17 से किये गये निलंबन के कारण, निलंबन की सम्पूर्ण अवधि दिनांक 14. 09.17 से दिनांक 10.06.20 तक मानते हुए दिनांक 11.06.20 से "निलंबन मुक्त" करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर सम्प्रति श्री बिजेन्द्र कुमार राम, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी को विभागीय अधिसूचना सं0-803 दिनांक 10.08.2021 द्वारा दिनांक 11.06.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया। श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर सम्प्रति मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के निलंबन अवधि के विनियमन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत करते हुए अभ्यावेदन की मांग की गयी। तदालोक में श्री राम द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी एवं विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य सभी पावनाओं के भुगतान के संबंध में कोई आधार/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, केवल विभिन्न तिथियों में निर्गत अधिसूचनाओं एवं उनके द्वारा अनुपालन किये जाने मात्र का उल्लेख किया गया है, जो स्वीकार योग्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि श्री राम के निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया है जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :-
"निलंबन की सम्पूर्ण अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 10.06.2020 तक) को कर्त्तव्य अवधि नहीं मानते हुए उक्त अवधि की गणना मात्र पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी तथा निलंबन की अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा।"
सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया उपर्युक्त निर्णय श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871) तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर सम्प्रति मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।104 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 4 मार्च 2022 सं0 22/नि0सि0(सम0)02-15/2017-476--श्री संदीप कुमार, (आई0डी0-5324), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-02, मु0-बेतिया द्वारा रेलवे सेवा से बिना विधिवत विरमित हुए रेलवे सेवा में स्टाइपेंड के तहत प्राप्त किये गये राशि के नियमानुसार बिना लौटाये जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर नियुक्ति के कारण दिनांक 26.02.2014 को योगदान दिये जाने के फलस्वरूप पूर्व मध्य रेल से प्राप्त पत्रों के क्रम में श्री संदीप कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा के विरूद्ध आरोप पत्र के साथ विभागीय पत्रांक-482 दिनांक 21.02.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में श्री कुमार द्वारा विभाग में जवाब समर्पित किया गया एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। तत्पश्चात श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2373 दिनांक 16.11.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (i) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर इनकी नियुक्ति की तिथि 26.02.2014 है। ये रेलवे से बिना विधिवत विरमित हुए एवं रेलवे सेवा में स्टाइपेण्ड के तहत प्राप्त किये गये राशि नियमानुसार बिना लौटाये, जल संसाधन विभाग में दिनांक 26.02.2014 को योगदान किये है।
(ii) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर नियुक्ति हेतु समर्पित सत्यापन प्रपत्र में रेलवे की सेवा संबंधी तथ्य छिपाया गया है एवं विभागीय आदेश का अनुपालन इनके द्वारा नहीं किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को आंशिक प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा तकनीकी पदाधिकारी द्वारा की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य (आंशिक प्रमाणित) से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-456 दिनांक 16.04.2021 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा जवाब समर्पित किया गया, जो निम्नवत है :- श्री कुमार द्वारा अपने बचाव-बयान में उल्लेखित किया गया है कि, सत्यापन प्रपत्र में निहित कंडिकाओं एवं स्थानों को नवनियुक्ति के उपरांत उपलब्ध स्थान के अन्तर्गत स्पष्ट एवं सही रूप में दर्शाने की पूर्णतः कोशिश इनके द्वारा की गयी। जहाँ तक केन्द्र सरकार की सेवा को छुपाने का प्रश्न है, इनके द्वारा कहा गया है कि भारतीय रेल के अधीन इनकी सेवा महज Trainee के रूप में ही समाप्त हो गयी। भारतीय रेल के पूर्व में सैन्य अभियंत्रण सेवायें जो भारत सरकार के अधीन है, में कनीय अभियंता (असैनिक) के पद पर 11(ग्यारह) महीने के लिए उतरी कमान उधमपुर के अधीन पदस्थापित थे, जिन सेवाओं के उल्लेख कंडिका में "हाँ" के रूप में करते हुए प्रपत्र समर्पित किया गया। सत्यापन प्रपत्र समर्पित करने के उपरांत उपस्थित पदाधिकारियों तथा उसके उपरांत इस संबंध में कोई मांग/पृच्छा नहीं किये जाने से प्रविष्टियों को यथावत सत्यापित इनके स्तर से किया गया। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि पूर्व में कार्यरत किसी भी संगठन में मेरे उपर कोई भी आरोप/कार्यवाही संचालित नहीं किया गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) के बचाव-बयान की समीक्षा विभाग के स्तर पर किया गया, जो निम्नवत है :- श्री कुमार द्वारा जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में योगदान के करीब आठ माह पूर्व रेलवे सेवा छोडी गयी थी। इस प्रकार विधिवत विरमित होकर दूसरी सेवा में योगदान करना तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है। श्री कुमार द्वारा सत्यापन प्रपत्र के कंडिका-11(क) में अपूर्ण सूचना दी गयी। जबकि कंडिका 11(ख) एवं कंडिका 11(ग) में सही सूचना अंकित की गयी है। रेलवे सेवा के Deed of Indemnity के आलोक में प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त स्टाइपेंड की राशि 12.5% Interest के साथ लौटाया जाना अपेक्षित था। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य में श्री कुमार द्वारा रेलवे सेवा के दौरान प्राप्त किये गये राशि को रेलवे को वापस किये जाने के संबंध में Indemnity Bond के प्रावधान के आलोक में Arbitration के माध्यम से वसूल किये जाने का परामर्श दिया गया है, जिससे सहमत होते हुए श्री कुमार से उक्त विधि से राशि वसूल किये जाने का परामर्श रेलवे को देने का निर्णय लिया गया है। जिसके लिए अलग से पत्र निर्गत किया जाएगा। साथ ही श्री कुमार के विरूद्ध सत्यापन प्रपत्र में तथ्य छुपाने का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार को "असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दण्ड" अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-02, मुख्यालय-बेतिया के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है :-
"असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्वि पर रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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9 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(वीर0)07-06/2013-524--श्री कपिलमुनी सिंह (आई0डी0-4826), तत्कालीन सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प105 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 ज्ञापांक-1536 दिनांक 05.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के दरम्यान ये दिनांक 29.02.2020 को सेवानिवृत हो गये। फलतः इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-62 ज्ञापांक-1037 दिनांक 25.08.2020 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।
आरोप निम्न है :- (1) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं विटुमिनस सड़क निर्माण कार्य (एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10) के लिए निरीक्षण भवन, भपटियाही के प्रांगन में अवस्थित जी0टी0एस0 बेंच मार्क के आधार पर पूर्वी कोशी तटबंध के 40कि0मी0 के पास मंदिर के स्लैव के टॉप पर टी0बी0एम0 60.341मी0 उड़नदस्ता जाँच में सही पाया गया जबकि पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा निर्धारित टी0बी0एम0 57.925 मी0 जाँच में सही नहीं पाया गया। तटबंध के कि0मी0 52.00 पर दो अवर प्रमंडलों के मिलान बिन्दु पर प्री-लेवल में अंतर पाया गया है जिसमें त्रुटिपूर्ण लेवल लिया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण लेवल लिये जाने के कारण पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत रू0 5,32,38,572.70 अधिकाई भुगतान त्रिसदस्यीय समिति के जाँच में पाया गया है।
उच्चाधिकारियों द्वारा GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल सुधार हेतु पत्राचार किये जाने के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं किये जाने से अधिकाई भुगतान की स्थिति बनी रही। पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अंतर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 तक प्री-लेवल लेने एवं जाँच करने में आपकी सहभागिता-संलिप्तता परिलक्षित है जिससे उक्त विषयक कार्य का त्रुटिपूर्ण TBM Carry करने एवं प्री-लेवल लेने/जाँच के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
(2) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढीकरण एवं विटुमिनस सड़क निर्माण में पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 के बीच कुल 54,29,152.02 घन मी0 मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया है जबकि त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा कुल 50,82,823.303 घन मी0 मिट्टी कार्य पाया गया है। इस प्रकार कुल 346334.717 घन मी0 के लिए एकरारित दर पर कुल राशि रू0 5,32,38,572.70(रॉयल्टी राशि को छोड़कर) संवेदक को अधिक भुगतान होना परिलक्षित होता है। उक्त कार्य में अपने कार्यक्षेत्र अंतर्गत कार्य के क्रियान्वयन एवं विपत्र तैयार करने से आप संबंधित रहे है। अधीक्षण अभियंता पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा द्वारा लेवल में विसंगति के निराकरण हेतु कई पत्राचार किये जाने के बाद भी GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल की जाँच नहीं किये जाने से संवेदक को अधिकाई भुगतान होने की स्थिति बनी रही। इस प्रकार उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं करते हुए त्रुटिपूर्ण प्री-लेवल के आधार पर कार्य कराने एवं विपत्र तैयार किये जाने से रू0 53238572.70 संवेदक को अधिकाई भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1099 दिनांक-08.09.2020 द्वारा असहमति के ंिबंदु पर अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री सिंह से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं विटुमिनस सड़क निर्माण में संवेदक को अधिकाई भुगतान किये जाने संबंधी अरोप के संदर्भ में श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि इनके द्वारा 1155664.2 घन मीटर का ही भुगतान किया गया है की पुष्टि माप पुस्त सं0-1718 के पृष्ट 02 से होती है। उल्लेखनीय है कि त्रिसदस्यीय उड़नदस्ता समिति द्वारा इनके कार्यक्षेत्र में मिट्टी की मात्रा 1279079.22 घन मी0 पायी गयी है। इस प्रकार इनके द्वारा कराये गये कार्य में अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कपिलमुनि सिंह, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत्त के द्वारा कराये गये मिट्टी कार्य की मात्रा उड़नदस्ता जाँच के दौरान जाँच दल द्वारा आकलित मिट्टी की मात्रा के अंतर्गत होने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री कपिलमुनि सिंह, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है। वर्णित स्थिति में श्री कपिलमुनि सिंह, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप अप्रमाणित रहने के कारण इनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) प्रत्युत्तर स्वीकार करते हुए इन्हे आरोप मुक्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है। उक्त के आलोक मे श्री कपिलमुनि सिंह, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(गोपा0)27-04/2017-643--श्री विजय कुमार सिंह (आई0डी0-3516) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना के अन्तर्गत सी0आर0एल0 के बिन्दु 0.88 कि0मी0 से 0.98 कि0मी0 के बीच दिनांक 15.08.2017 को प्रातः 4 बजे पाईपिंग के कारण बाँध क्षतिग्रस्त होने की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को नहीं देने, कार्य स्थल पर उपस्थित नहीं रहने, बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण106 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कार्य के प्रति उदासीनता एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने आदि आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1612 दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया। तत्पश्चात उक्त मामले में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1672 दिनांक 20.09.17 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1540 दिनांक 19.07.2018 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया।
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय पटना उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-13155/2018 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 08.07.2019 को पारित आदेश के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" संबंधी उक्त निर्गत दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना सं0-660 दिनांक 11.05.2020 द्वारा निरस्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सिंह को सेवा में पुनस्र्थापित किया गया एवं इस मामले में अब प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में श्री सिंह के विरूद्ध "कालमान वेतनमान में दो प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति एवं भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के तहत श्री सिंह को "सेवा से बर्खास्तगी" की तिथि 19.07.2018 से सेवा में पुनस्र्थापित किये जाने से संबंधित अधिसूचना सं0-660 दिनांक 11.05.2020 निर्गत किये जाने की तिथि अर्थात दिनांक 19.07.2018 से 10.05.2020 तक निलंबित किया हुआ समझा जायेगा तथा "सेवा से बर्खास्तगी" की तिथि से पूर्व दिनांक 14.09.2017 से किए गए निलंबन के कारण निलंबन की संपूर्ण अवधि दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 10.05.2020 तक मानते हुए दिनांक 11.05.2020 सेे निलंबन मुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-929 दिनांक 26.08.2021 द्वारा श्री सिंह को दिनांक 11.05.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया।
बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के प्रावधानों के तहत श्री सिंह से निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता देय नहीं होने के संबंध में विभागीय पत्रांक-931 दिनांक 26.08.2021 द्वारा नोटिस निर्गत करते हुए अभ्यावेदन की मांग की गयी।
उक्त के क्रम में श्री सिंह द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 23.10.2021 की समीक्षा के उपरांत पाया गया कि इनके बचाव-बयान में वर्णित सभी तथ्य लगभग वही है जो इनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर में उल्लेखित किए गए हैं। उक्त तथ्यों की सम्यक समीक्षा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में किया जा चुका है एवं श्री सिंह के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपाें के संदर्भ में विभागीय अधिसूचना सं0-660 दिनांक 11.05.2020 द्वारा "कालमान वेतनमान में दो प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति एवं भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया है। अतएव इनका उक्त अभ्यावेदन दिनांक 23.10.2021 स्वीकार योग्य नहीं है।
वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किये जाने का निर्णय लिया गया -
"निलंबन की सम्पूर्ण अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 10.05.2020 तक) को कर्त्तव्य अवधि नहीं मानते हुए उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ नहीं की जाएगी तथा निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता देय नहीं होगा"।
अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री विजय कुमार सिंह (आई0डी0-3516) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि का विनियमन निम्नवत किया जाता है :-
"निलंबन की सम्पूर्ण अवधि (दिनांक 14.09.2017 से दिनांक 10.05.2020 तक) को कर्तव्य अवधि नहीं मानते हुए, उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ नहीं की जायेगी तथा निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता देय नहीं होगा"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-648--श्री चकलेश्वर खरवार (आई0डी0-जे 9042), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अन्तर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना एवं छह सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न अनियमितता पायी गयी :-
सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मुटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित से 25.75% छड की कमी एवं बैरल वाल के कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में 41.80% तक की कमी पायी गयी। साथ ही संरचना के अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम के सीट पाईल की रूपांकित गहराई 4.5मी0 के बदले अपस्ट्रीम में 1.1मी0 तथा डाउनस्ट्रीम में 0.70मी0 पायी गयी है। जो रूपांकित गहराई 3.40मी0 एवं 3.80मी0 की कमी पायी गयी है। अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Rein forcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का छड़ उपयोग किया गया।107 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त की समीक्षोपरांत श्री चकलेश्वर खरवार को विभागीय अधिसूचना सं0-1472 दिनांक 09.07.2018 द्वारा निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प-1936 दिनांक-11.09.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री चकलेश्वर खरवार से विभागीय पत्रांक-03 दिनांक-06.01.2020 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गई। श्री चकलेश्वर खरवार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-783 दिनांक-06.08.2021 द्वारा इन्हें निलंबन मुक्त करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-826 दिनांक-12.08. 2021 द्वारा निम्न दण्ड दिया गया :- "चार वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। श्री चकलेश्वर खरवार को विभागीय पत्रांक-857 दिनांक-17.08.2021 द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत करते हुए अभ्यावेदन की माँग की गयी। तदालोक में श्री खरवार द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त आरोप से संदर्भित किसी नये तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया है। जिसपर तकनीकी रूप से विचार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि श्री खरवार के विरूद्ध निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :- "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं इस अवधि (दिनांक-09.07. 2018 से दिनांक-05.08.2021) की गणना पेंशन प्रायोजनार्थ की जायेगी।'' सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया उक्त निर्णय श्री चकलेश्वर खरवार, तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-649--श्री चकलेश्वर खरवार (आई0डी0-जे 9042) तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अन्तर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना एवं छः सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री खरवार को विभागीय अधिसूचना सं0-1472 दिनांक 09.07.18 द्वारा निलंबित करते हुए श्री खरवार के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-1936 दिनांक 11.09.19 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(1) सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मुटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित से 25.75% छड की कमी एवं वैरल वाल में कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में 41.80% तक की कमी पायी गयी। साथ ही संरचना के U/s एवं D/s में सीट पाईल के रूपांकित गहराई से क्रमशः 3.40मी0 एवं 3.80मी0 की कमी पायी गयी, जिसका संसूचन कनीय अभियंता द्वारा दी गई। इससे स्पष्ट है कि न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन/रूपांकण के विपरीत कार्य कराया गया, जिससे उक्त संरचना का स्थायित्व एवं उपयोगिता प्रभावित हुई।
(2) अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Rein forcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का छड़ उपयोग किया गया। साथ ही वैरल के एलाइमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है। क्योंकि इसके सामने नदी का भाग न होकर किसानो का रैयती जमीन का भाग आता है, जिसके कारण रैयती जमीन नष्ट होने की आशंका व्यक्त की गई। CD संरचना के रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में Wing Wall एवं Return wall का प्रावधान नहीं किया गया, जो संरचना के स्थायित्व के लिए आवश्यक था। उपरोक्त त्रुटि/अनियमितता के कारण छः सदस्यीय समिति द्वारा संरचना पर आगे का कार्य कराये जाने को कार्यहित में Structural Safety, ability and Utility के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है।
(3) संरचना के कार्यान्वयन के दौरान कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 18.04.16 को प्रावधानित लंबाई से कम सीट पाईल का उपयोग होने की सूचना, गुणवत्ता विहिन चिप्स के उपयोग होने की सूचना देने के बावजूद वास्तविक कार्य मापी की जाँच नहीं की गयी। दिनांक 07.03.17 को संवेदक प्रतिनिधि एवं दिनांक 09.03.17 को कार्यपालक अभियंता को कार्य में उपरोक्त त्रुटियों की सूचना दी गयी तथा फर्स की मुटाई एवं छड़ के उपयोग प्रावधान से कम कंक्रीट मिक्स में सिमेंट की कमी पाया जाना दर्शाता है कि विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया। इस प्रकार कार्य में गडबडी होने के बावजूद अन्य पदाधिकारी से तथ्य को छिपाये रखना एवं स्वयं स्तर से सुधार नहीं कराने एवं मापी की जाँच नहीं करना दर्शाता है कि आपके द्वारा समय पर कार्यों का पर्यवेक्षण नहीं किया गया एवं लापरवाही बरती गयी है। साथ ही पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है।108 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार से विभागीय पत्रांक-03 दिनांक 06.01.20 से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। श्री खरवार, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त अभ्यावेदन की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :-
आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान :-(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा यह प्रतिवेदित किया गया है कि जिस समय Sheet Pile का कार्य चल रहा था, उसी समय संवेदक के विरूद्ध उचित कार्रवाई करनी चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया के संबंध में कहना है कि संवेदक बिना सूचना दिये अचानक sheet pile का कार्य रातो-रात करा दिया। यानि Sheet pile का कार्य चल नहीं रहा था। Sheet pile के टुकड़े-टुकडे कर रातो-रात गला दिया गया था। सूचना मिलने पर तुरंत इनके द्वारा कार्रवाई की गयी, कार्रवाई का साक्ष्य आरोपित पक्ष का बचाव बयान क्रमशः 2b, c, d, e, f, g, h, i पर देखा जा सकता है। संवेदक को पत्र लिखते हुए कार्यपालक अभियंता को सूचना दिये जाने के बावजूद भी कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक पर प्राथमिकी दर्ज करने या एकरारनामा के तहत कार्रवाई करने का कोई निदेश नहीं दिया गया। उल्टे कार्यपालक अभियंता द्वारा गलत कार्य विपत्र तैयार करने Record Entry करने आदि का दवाब दिये जाने लगा। अंततः इनके विरूद्ध कार्य0 अभि0 द्वारा FIR दर्ज करा दिया गया।
(ii) कार्य के दौरान छड़ की जाँच की गई थी, परन्तु छड़ विशिष्टियों के अनुरूप नहीं था, न ही P.C.C/R.C.C निदेशानुसार दिया जा रहा था। संवेदक द्वारा किये गये अनियमित कार्य का विपत्र नहीं बनाया गया। दिनांक 18.04.16 को कनीय अभियंता द्वारा सूचित किये जाने के बाद वे स्वयं स्थल पर कनीय अभियंता के साथ गये। संदेहास्पद स्थिति की सूचना कार्यपालक अभियंता को मोबाईल पर दी गयी। संवेदक के प्रतिनिधि को सीट पाईल कार्य की सत्यापन के लिए JCB लाने हेतु बार-बार अनुरोध किया गया। परन्तु टाल-मटोल कर समय व्यतीत करने लगे। तत्पश्चात अपने पत्रांक-65 दिनांक 16.05.16 द्वारा संवेदक के प्रतिनिधि को पत्र लिखा एवं उसकी प्रति कनीय अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को दिया गया। (iii) अर्द्धनिर्मित संरचना के Reinforcement यथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि के छड़ TORKON छड़ के उपयोग के आधार पर छड़ न्यून विशिष्टि का निष्कर्ष सही नहीं है क्योंकि TORKON छड़ की Quality के जाँच के बिना इसे अस्वीकृत किये जाने का आधार औचित्य नहीं है।
अर्द्धनिर्मित संरचना के वैरेल के फाउनडेशन के एलाईनमेंट त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के अन्य तीन वैरल निष्प्रभावी होने के संदर्भ में कहा गया है कि बिना नदी के भाग के जमीन का मापी कराये वगैर यह निष्कर्ष के तीन वैरल किसानों के रैयती जमीन में आता है, मंतव्य देना उचित नहीं है।
(iv) संवेदक द्वारा विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं करने पर इनके द्वारा प्रारंभ में ही अनेक पत्राचार कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक को किया गया है एवं मनमानी करने पर संवेदक पर कार्रवाई के लिए उच्च पदाधिकारी को सूचित किया गया एवं संवेदक द्वारा किये गये गैर विशिष्टि के कार्यों की तरजीह नहीं दी गयी तथा Record Entry नहीं किया गया, न ही विपत्र बनाया गया, न ही भुगतान किया गया। इस प्रकार सरकारी राशि का अपव्यय से बचाया गया है। विभागीय समीक्षा - संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- (1) अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा कार्य के गुणवत्ता के संबंध में काफी पत्राचार किया गया है, परन्तु इनके द्वारा रूपांकण के विपरीत ले आउट दिया गया एवं पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गई इस बात से भी स्पष्ट होता है कि जिस सीट पाईल का कार्य चल रहा था उस समय संवेदक के विरूद्ध उचित कार्रवाई करना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया और न ही कार्य के दौरान छड की जाँच किया गया। सहायक अभियंता के रूप में कनीय अभियंता के द्वारा दिनांक 18.04.16 को सूचित करने के पश्चात भी कार्य में संवेदक के द्वारा की जा रही त्रुटि में सुधार हेतु अपेक्षित कार्रवाई ससमय नहीं करने के कारण कार्य न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन एवं रूपांकण के विपरीत कार्य किया गया।
इनके द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट है कि इनके द्वारा इस आरोप के संदर्भ में न तो कोई नया तथ्य दिया गया है। इनके द्वारा बचाव-बयान में वही तथ्य दिया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है जिसका विशलेषण संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में करते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।
(2) अर्द्धनिर्मित संरचना के Reinforcement की जाँच से स्पष्ट हुआ है कि संरचना में राज्य स्तरीय अनुसूचित दर निर्धारण समिति के निर्णयानुसार अनुसूचित दर पुस्तिका में प्रावधानित छड़ यथा TATA, SAIL, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि के छड़ TORKON का उपयोग किया जाना, साथ ही संरचना के वैरल के फाउनडेशन के एलाइनमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है क्योंकि इसके सामने नदी का भाग न होकर किसानों के रैयती जमीन का भाग आता है। इनके द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य में उपयोग किये गये TORKON छड़ की Quality के जाँच किये बिना ही इसे अस्वीकार करना उचित नहीं है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि TORKON की छड़ की गुणवत्ता के संदर्भ में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया हैं। जबकि TATA, SAIL, RINL एवं SHAYAM STEEL मार्क के छड़ का उपयोग करना था। इसके अतिरिक्त इस आरोप के संदर्भ में लगभग109 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 वही तथ्य दिया गया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है, कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए गैर विशिष्टि के छड का उपयोग करने तथा त्रुटिपूर्ण एलाइनमेंट पर संरचना का निर्माण कराने के लिए दोषी माना जा सकता है। परन्तु रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में WING WALL एवं RETURN WALL का प्रावधान नहीं करने के लिए इन्हें दोषी माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
(3) इनके द्वारा कहा गया है कि कार्य के प्रारंभ से ही संवेदक के द्वारा मनमानी करने पर संवेदक पर कार्रवाई हेतु उच्च पदाधिकारी को सूचित किया गया है संवेदक के द्वारा गैर विशिष्टि के कार्य को तरजीह दी गयी।
उक्त कार्य का रेकर्ड इन्ट्री नहीं किया गया न तो विपत्र बनाया गया है। यदि कार्यपालक अभियंता एवं उच्च पदाधिकारी द्वारा FIR करने का आदेश देते तो संवेदक के विरूद्ध FIR संवेदक के विरूद्ध किया जाता। परन्तु उच्च पदाधिकारी द्वारा केवल विपत्र बनाने हेतु दवाब दिया जाता रहा स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। क्याेंकि संवेदक द्वारा कार्य के प्रारंभिक अवस्था यथा सीट पाईल प्रावधान से कम लंबाई में कार्य कराया गया तो उसके उपर वैरल के फर्स एवं Wall का कार्य कैसे कराया गया। इससे स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा कार्य का पर्यवेक्षण सही ढ़ग से नहीं किया गया है। अगर संवेदक द्वारा मनमानी किया जा रहा था तो इनका दायित्व था कि कार्य को बन्द कराते, इसके बावजूद संवेदक द्वारा कार्य बन्द नहीं किया जा रहा था तो FIR कराते। FIR दर्ज कराने के लिए ये स्वयं सक्षम प्राधिकार थे। जहाँ तक रेकर्ड इन्ट्री नहीं करने का प्रश्न है तो मापपुस्त के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रश्नगत कार्य के तहत मिट्टी कटाई कार्य का प्रथम विपत्र के रूप में भुगतान किया गया है तथा द्वितीय चालू विपत्र के माध्यम से सीट पाईल एवं Reinforcement sand एवं Jhama मेटल का भुगतान किया गया है, जब कार्य के प्रारंभ से ही संवेदक द्वारा मनमानी की जा रही थी तो सीट पाईल, छड, बालू एवं झामा मेटल का भुगतान क्यों की गयी। उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि उपरोक्त सामग्री के भुगतान में इनकी सहभागिता रही है।
उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01 को प्रमाणित माना जा सकता है तथा आरोप सं0-02 एवं 03 को आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है। उक्त वर्णित स्थिति में उक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री चकलेश्वर खरवार, तत0 सहायक अभियंता विभागीय अधिसूचना सं0-826 दिनांक 12.08.2021 द्वारा निम्न दण्ड दिया गया है -
"चार वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।" उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री चकलेश्वर खरवार, सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री चकलेश्वर खरवार द्वारा मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-
इनके द्वारा कहा गया है कि विभागीय कार्यवाही के दौरान इनके द्वारा मौखिक रूप से मांगे गये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। विभागीय जाँच के क्रम में इनके बचाव-बयान का प्रतिकार करने हेतु प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने कोई भी लिखित प्रतिवाद बयान समर्पित नहीं किया। आरोप को प्रमाणित करने हेतु प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने किसी भी गवाह की गवाही नहीं कराई।
इनके द्वारा कहा गया कि विभागीय कार्रवाई संचालित करने के पूर्व इनके उपर मुरलीगंज थाना कांड सं0-243/2018 दर्ज किया गया और उसी थाना कांड सं0 में लगाया गया आरोप के आलोक में इनके उपर विभागीय कार्यवाही का आरोप पत्र तैयार किया गया। मुरलीगंज थाना कांड सं0-243/18 अभी अनुसंधानरत है और उसमें न तो इनके उपर कोई आरोप पत्र तैयार किया गया। मुरलीगंज थाना कांड सं0-243/18 अभी अनुसंधानरत है और उसमें न तो इनके उपर कोई आरोप पत्र दाखिल किया गया है और न तो उस केस में इन्हें दोषी करार दिया गया है।
उक्त की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री चकलेश्वर खरवार, सहायक अभियंता द्वारा आरोप से संदर्भित किसी तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है।
वर्णित स्थिति में श्री चकेलश्वर खरवार, सहायक अभियंता द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री चकलेश्वर खरवार, सहायक अभियंता द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(सह0)26-02/2017-650--श्री अर्जुन चौधरी (आई0डी0-4666) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अन्तर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गई अनियमितता की जाँच, उड़नदस्ता अंचल, पटना एवं छः सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री चौधरी को विभागीय अधिसूचना सं0-1473 दिनांक 09.07.18 द्वारा निलंबित करते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-1935 दिनांक110 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 11.09.19 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
(1) (क) सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मोटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित से 25.75% छड की कमी एवं बैरल बॉल के कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में औसत 41.80% तक की कमी पायी गई है। साथ ही संरचना के अपस्ट्रीम एण्ड डाउन स्ट्रीम के सीट पाईल की रूपांकित गहराई 4.50मी0 के बदले अपस्ट्रीम में 1.1मी0 तथा डाउनस्ट्रीम में 0.70 मी0 पायी गई है। जो रूपांकित गहराई से क्रमशः 3.40मी0 एवं 3.80मी0 कमी पाई गयी है। सीट पाईल में पायी गयी कमी की सूचना आपको कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी। किन्तु निर्माण कार्य में अनियमितता प्रतिवेदित किये जाने के बाद भी संवेदक के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे आपके द्वारा विपत्र तैयार नहीं करने के लिए सहायक अभियंता/कनीय अभियंता पर FIR करा दी गई। इससे स्पष्ट स्थापित होता है कि न्यून विशिष्टि एवं स्वीकृत प्राक्कलन एवं रूपान्तरण के विपरीत कार्य होने में आपकी एवं संवेदक की मिली भगत से घटिया कार्य कराया गया। जिससे उक्त संरचना का स्थायित्व एवं उपयोगिता प्रभावित हुई है। अतएव संरचना का निर्माण में निम्न विशिष्टि के कार्य कराने एवं स्वीकृत प्राक्कलन रूपांकण एवं एकरारनामा के विपरीत कार्य कराने के लिए आप दोषी है।
(ख) अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Rein forcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का छड़ उपयोग किया गया है। साथ ही अर्द्धनिर्मित संरचना के बैरल के फाउन्डेशन के एलाइनमेंट के त्रुटिपूर्ण होने के कारण साईड के अन्य तीन वैरल निष्प्रभावी होना परिलक्षित है, क्योंकि इनके सामने नदी का भाग न होकर किसानो का रैयती जमीन का भाग आता है। ग्रामीणों द्वारा भी इस त्रुटि के कारण जमीन के नष्ट होने की आशंका व्यक्त की गई है। CD संरचना के रूपांकित नक्शा से स्पष्ट है कि U/s एवं D/s में Wing Wall एवं Return wall का प्रावधान नहीं किया गया है, जो कि संरचना एवं नहर बाँध के स्थायित्व के लिए आवश्यक था। उपरोक्त त्रुटि/अनियमितता के कारण छः सदस्यीय समिति द्वारा अर्द्धनिर्मित संरचना में आगे कार्य कराये जाने को कार्यहित में Structural Safety, stability and Utility के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है। साथ ही इसके स्थान पर एक नये सी0डी0 संरचना का निर्माण कराने की अनुशंसा की गई। इस प्रकार इस संरचना पर किया गया कुल व्यय तेरह लाख तैतालिस हजार बियालिस रूपया का अपव्यय होने एवं सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने के लिए आप दोषी है।
(ग) उक्त संरचना के कार्यान्वयन के दौरान कनीय अभियंता द्वारा प्रावधानित लंबाई से कम लंबाई का सीट पाईल का उपयोग किये जाने की सूचना, गुणवत्ता विहिन चिप्स का उपयोग करने की सूचना देने के बावजूद कार्य के रेकर्ड इन्ट्री मापीपुस्त में अंकित कराते उसकी जाँच आपके द्वारा नहीं की गई। यहाँ तक की आपके द्वारा विपत्र उपस्थापित नहीं करने के लिए कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR दर्ज किया गया। फर्स की मोटाई एवं छड़ के उपयोग प्रावधान से कम तथा कंक्रीट मिक्स की गुणवत्ता निम्न विशिष्टि का पाया जाना यह दर्शाता है कि विशिष्टि के अनुरूप संरचना का निर्माण नहीं कराया गया एवं भुगतान भी किया गया। इस प्रकार निर्माण कार्य में गड़बड़ी होने के बावजूद कुछ पदाधिकारी से तथ्य छुपाये रखना एवं स्वयं स्तर से सुधार नहीं कराने एवं रेकर्ड इन्ट्री की जाँच नहीं करना दर्शाता है कि आपके द्वारा ससमय कार्य का पर्यवेक्षण नहीं कर संवेदक से मिली भगत कर सरकारी राशि को क्षति पहुँचाया गया है जिसके लिए आप दोषी हैं। (2) श्री अर्जुन चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता के द्वारा उपर्युक्त कंडिका-1 में बरती गई अनियमितताओं के कारण प्रश्नगत संरचना का कोई उपयोगिता नहीं रह गयी एवं इस पर किया गया कुल व्यय तेरह लाख तैतालिस हजार बैयालिस रूपये मात्र अपव्यय की श्रेणी में आ जाता है। जो बिहार वित्त नियमावली के निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। (3) उक्त से स्पष्ट है कि श्री अर्जुन चौधरी द्वारा निजी स्वार्थ के कारण प्रश्नगत योजना (सी0डी0 संरचना) का निर्माण प्राक्कलन, रूपांकण एवं एकरारनामा के विपरीत न्यून विशिष्टि का कराया गया है। फलतः संरचना की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है एवं अर्द्धनिर्मित संरचना पर किया गया व्यय अपव्यय की श्रेणी में आने के कारण कुल तेरह लाख तैतालिस हजार वियालिस रूपये सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित है। जो बिहार वित्त नियमावली के नियम विहित्त प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है।
श्री चौधरी को दिनांक 31.12.19 को सेवानिवृत होने पर वि0अ0सं0-226 दिनांक 10.02.20 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का वि0 आदेश सं0-13 दिनांक 10.02.21 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी में सम्परिवर्तित किया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री अर्जुन चौधरी से अभ्यावेदन की माँग की गई। श्री चौधरी से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये है :-
आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान ः-किसी भी गड़बड़ी कार्य का मापी मापपुस्त में जब अंकित हो जाता है अथवा उसका भुगतान हो जाता है तो उसके लिए अभियंता दोषी है न तो गडबड़ी के लिए संवेदक दोषी है। यहाँ मापपुस्त में किसी प्रकार की कोई प्रविष्टि नहीं की गई है एवं ना ही कोई भुगतान किया गया है। जहाँ तक Sheet pile में कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी तो संवेदक पर कार्रवाई के रूप में तत्क्षण पत्रांक-429 दिनांक 21. 04.16 द्वारा संवेदक को एक कड़ा पत्र लिखा गया एवं स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उसके बाद कनीय अभियंता द्वारा सूचना दी गयी कि कम लंबाई का सीट पाईल हटाकर सही लंबाई का सीट पाईल लगाकर आगे का कार्य कराया जा रहा है111 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 जो बाद में गलत साबित हुआ। उसके बाद एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए संवेदक के सुरक्षित जमा राशि पत्रांक-563 दिनांक 09.07.18 द्वारा 12,90,000/-जब्त कर लिया गया, कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन के कई बार दूरभाष पर दिये गये आदेश के आलोक में दर्ज किया गया एवं पत्र की प्रति अभियंता प्रमुख को भी दी गई।
(ख) जब छड़ लगाया जा रहा था तो किसी ने सूचना नहीं दी। कार्य में गड़बड़ी होने के कारण इसका मापी मापपुस्त में अंकित नहीं की गई एवं न ही भुगतान किया गया। दिनांक 16.02.16 को सुखासन सी0डी0 संरचना का एकरारनामा हुआ था और फरवरी 2016 में ही अन्य उपयोजनाओं का एकरारनामा हुआ था। इस प्रकार बहुत व्यस्तता के कारण जितना संभव हुआ उतना समय सुखासन वितरणी में निर्माणाधीन सी0डी0 संरचना को दिया गया।
अर्द्धनिर्मित संरचना के वैरल के फाउनडेशन का एलाईनमेंट दिया गया। जहाँ तक साईड के तीन बैरल निष्प्रभावी होने का है तो शुरू से जाँच समिति के आने तक कभी भी कोई किसान लिखित अथवा मौखिक रूप से शिकायत नहीं की है।
(ग) मिट्टी कार्य मद में संवेदक को सिर्फ रू0 1,85,671/- का भुगतान किया गया, जो नींव खुदाई में किया गया है। इसके अतिरिक्त Secured Advance के रूप में कुल रू0 1343042/- का ही भुगतान किया गया है। जो SBD के Clause 10(b) के नियमानुसार है सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 पर अर्द्धनिर्मित संरचना की कोई उपयोगिता नहीं होने की बात छः सदस्यीय समिति द्वारा प्रतिवेदित किये जाने के आलोक में इनके द्वारा भुगतान की कुल राशि मिट्टी कार्य मद एवं Secured Advance सहित रू0 1528713/- की वसूली संवेदक के सुरक्षित जमा राशि सूद सहित रू0 12,90000318644=1608644 कर ली गई है। इस प्रकार कुल रू0 1528713/- का नुकसान हुआ एवं संवेदक से कुल 1608644-1528713=79913/- रूपये का लाभ हुआ।
विभागीय समीक्षा - संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- अर्द्धनिर्मित संरचना फर्श की मुटाई में 75mm की कमी, वैरल वॉल में छड़ में 25.75% तक की कमी, अर्द्धनिर्मित संरचना में 40.41% से 41.11% तक सीमेंट की कमी एवं सीट पाईल की गहराई रूपांकित 4.5मी0 के बदले U/S में 1.10मी0 तथा D/S में 0.70मी0 जो रूपांकित गहराई क्रमशः 3.4मी0 एवं 3.80 मी0 की कमी के संबंध में किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। Sheet pile में पायी गयी कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गयी परन्तु अनियमितता प्रतिवेदित किये जाने के बाद भी संवेदक के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई न कर इनके द्वारा विपत्र तैयार नहीं करने के लिए FIR दर्ज कर लिया गया। इस संदर्भ में गृह विभाग का पत्रांक-6211 दिनांक 09.06.2008 का जिक्र किया गया है साथ ही इनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन द्वारा दूरभाष पर दिये गये आदेश के आलोक में FIR दर्ज किया गया। इस संदर्भ में किसी भी प्रकार का साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है।
इनके द्वारा कहा गया है कि गडबड कार्य का न तो मापपुस्त में कोई प्रविष्टि नहीं की गई है न भुगतान ही किया गया है। जहाँ तक सीट पाईल में कमी की सूचना कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा दी गई है तो संवेदक को तत्क्षण पत्रांक-429 दिनांक 21.04.16 द्वारा संवेदक को पत्र दिया गया तथा संवेदक के जमा राशि को पत्रांक-563 दिनांक 09.07.18 द्वारा कुल रू0 12,90,000/- जब्त कर लिया गया है। कनीय अभियंता/सहायक अभियंता पर FIR अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन के आदेश पर किया गया है। वस्तुस्थिति यह है कि कार्य के Secured Advance के रूप में संवेदक को कुल रू0 13,43,042/- का भुगतान किया गया है। प्रश्न है कि जब कार्य के प्रारंभ में ही सीट पाईल में गड़बड़ी की गयी थी तो संवेदक को भुगतान क्यों किया गया एवं उसके उपर संरचना के फर्स एवं वैरल का कार्य कैसे कराया गया। यहाँ तक की गड़बड़ी कार्य का विपत्र तैयार नहीं किये जाने पर कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता पर FIR दर्ज क्यों किया गया। इससे श्री चौधरी की मंशा संदिग्ध प्रतीत होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए गलत ढंग से कार्य कराने एवं उसका विपत्र तैयार करने हेतु दबाव दिये जाने के लिए दोषी प्रतीत होते है।
(ii) इनके द्वारा कहा गया है कि अन्य कार्य में व्यस्तता के कारण प्रश्नगत कार्य पर बहुत समय दिया जाना संभव नहीं हो सका स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि प्रश्नगत संरचना एक महत्वपूर्ण संरचना था। इनके द्वारा ऐसा कोई अभिलेख नहीं दिया गया है, जिससे परिलक्षित हो सके की एक बार भी प्रश्नगत संरचना का निरीक्षण किया गया है। इसके अतिरिक्त संरचना के तीन वैरल निष्प्रभावी होने के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य प्रारंभ से जाँच समिति के आने तक कोई भी किसान लिखित या मौखिक रूप से शिकायत नहीं की है; स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि जाँच में तीन वैरल सरकारी जमीन पर नहीं होकर रैयती जमीन पर बना हुआ पाया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप का प्रथम एवं द्वितीय भाग तथा गैर विशिष्टि का छड़ लगाने तथा त्रुटिपूर्ण एलाईनमेंट पर कार्य करने का आरोप प्रमाणित पाया गया है परन्तु रूपांकित नक्शा में U/s एवं D/s में Wing wall एवं Return Wall का प्रावधान नहीं करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है।
भुगतान के संदर्भ में श्री चौधरी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक को कार्य मद में कुल रू0 185671/- मात्र मिट्टी कार्य मद में किया गया है। इसके अतिरिक्त Secured Advance के रूप में कुल रू0 1343042/- का भुगतान किया गया है प्रश्नगत संरचना की कोई उपयोगिता नही होने की बात छः सदस्यीय समिति द्वारा प्रतिवेदित किये जाने के आलोक में उनके द्वारा भुगतान की कुल राशि रू0 1528713/- में से संवेदक सुरक्षित राशि से रू0 1290000/- की वसूली112 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कर ली गयी। इनके द्वारा कहा गया है कि इनके द्वारा भुगतान की गयी कुल राशि रू0 1528713/- की गयी है जिसके विरूद्ध सुरक्षित जमा राशि सूद सहित रू0 1290000 318644 =1608644/- वसूली कर ली गई है अर्थात (रू0 1608644-1528713=79913/-) का विभाग को लाभ हुआ है। इस कथन की पुष्टि तो होती है परन्तु विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराने का आरोप बनता प्रतीत होता है।
उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप सं0-01 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-02 एवं 03 को आंशिक प्रमाणित माना गया है।
उक्त वर्णित स्थिति में सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता को विभागीय अधिसूचना सं0-825 दिनांक 12.08.2021 द्वारा निम्न दण्ड गया है - "बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्ष के लिए।" उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-
इनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कहा गया है कि संवेदक से 16,08,644/- रूपये की वसूली किये जाने के फलस्वरूप विभाग को कोई क्षति नहीं हुई है। संवेदक के विरूद्ध कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता से प्राप्त शिकायतों को इनके द्वारा अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ को भेजा गया था। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा आरोपों के संदर्भ में अन्य कोई बात नहीं कही गयी है। श्री चौधरी द्वारा कहा गया है कि विभागीय कार्रवाई के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्यों का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण नहीं कराया गया।
उक्त की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा आरोप से संदर्भित किसी नये तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया गया है जिस पर तकनीकी रूप से विचार किया जा सके।
वर्णित स्थिति में उक्त के आलोक में श्री अर्जुन चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया है।
अतः श्री अर्जुन चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा किये गये पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि॰सि॰(सह॰)-26-02/2017/651--श्री अर्जुन चौधरी (आई0डी0-4666) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज संप्रति सेवानिवृत द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज अंंतर्गत सुखासन वितरणी के RD 28.00 पर निर्माणाधीन संरचना में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल एवं छः सदस्यीय विभागीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के मुख्य रूप से निम्न अनियमितता पायी गयी :- सुखासन वितरणी के वि0दू0 28.00 सी0डी0 संरचना निर्माण कार्य में फर्स की मोटाई में 75mm की कमी, बैरल वाल में प्रावधानित 25.75% छड़ की कमी एवं बैरल वाल के कंक्रीट मिक्स में सीमेंट की मात्रा में औसत 41.80% तक की कमी पाई गयी। साथ ही संरचना के अपस्ट्रीम एण्ड डाउनस्ट्रीम के सीट पाइल की रूपांकित गहराई 4.5मी0 के बदले अपस्ट्रीम में 1.1मी0 तथा डाउनस्ट्रीम में 0.70मी0 पायी गयी है। जो रूपांकित गहराई 3.40मी0 एवं 3.80मी0 कमी पाई गई है। अर्द्धनिर्मित संरचना में प्रावधानित Reinforcement तथा SAIL, TATA, RINL एवं SHAYAAM STEEL के स्थान पर गैर विशिष्टि का छड़ TORKON मार्क का उपयोग किया गया। उक्त की समीक्षोपरांत श्री अर्जुन चौधरी को विभागीय अधिसूचना सं0-1473 दिनांक 09.07.2018 द्वारा निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प-1935 दिनांक-11.09.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। दिनांक 31.12.19 को इनके सेवानिवृत होने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-13 दिनांक 10.02.21 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री अर्जुन चौधरी से विभागीय पत्रांक-01 दिनांक-06.01.2020 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री चौधरी से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-226 दिनांक-10.02.2020 द्वारा इन्हें निलंबन मुक्त करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-825 दिनांक-12.08.2021 द्वारा निम्न दण्ड दिया गया :- ''20% पेंशन की कटौती पाँच वर्ष के लिए'' श्री अर्जुन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता संप्रति सेवानिवृत को विभागीय पत्रांक-858 दिनांक-17.08.2021 द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत नोटिस निर्गत करते हुए अभ्यावेदन की माँग की गयी। तदालोक में श्री चौधरी द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में जीवन113 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 निर्वाह भाा के अतिरिक्त आरोप से संदर्भित किसी नये तथ्य/साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया है। जिसपर तकनीकी रूप से विचार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि श्री अर्जुन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :- ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं इस अवधि (दिनांक-09.07. 2018 से दिनांक-30.12.2019) की गणना पेंशन प्रायोजनार्थ की जायेगी।'' सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया उक्त निर्णय श्री अर्जुन चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज संप्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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24 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-07/2016-652--श्री प्रद्युम्न शर्मा, (आई0डी0-3691), तत्कालीन तकनीकी सलाहकार, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी को उनके उक्त अंचल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष-2016 के पूर्व बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस में कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि की क्षति के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1248 दिनांक 07.06.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से आरोप पत्र में उल्लेखित निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप-1- (क) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 2.0.1 एवं 5.0.0(1) से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन मद सं॰ 4 एवं 5 (बोल्डर क्रेटिंग एवं अनक्रेटेड बोल्डर पिचिंग कार्य) में बोल्डर ढुलाई मद में एक अतिरिक्त लोडिंग एवं अनलोडिंग के लिये रूपये 145.04 प्रतिघन मी॰ का अधिक दर स्वीकृत करने के कारण कुल बोल्डर की मात्रा का एकरारित दर पर भुगतान होने के कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है। उक्त प्राक्कलन में गलत प्रावधानित दर के जाँचोपरान्त अनुमोदन/स्वीकृति हेतु आपके स्तर से अधीक्षण अभियंता को उपस्थापित किया गया। अतएव उक्त अधिकाई भुगतान मेंं आपकी सहभागिता परिलक्षित होता है। आरोप-2-श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत्कालीन तकनीकी सलाहकार द्वारा उपर्युक्त कंडिका 1(क) में वर्णित कटाव निरोधक जैसे महत्वपूर्ण कार्य में गलत दर के जाँचोपरान्त अनुमोदन हेतु उपस्थापित कर अपने पदीय दायित्वों में लापरवाही बरती गयी है। फलतः बोल्डर ढुलाई मद में कुल 6922650/- रूपये का सरकारी राशि का क्षति होना परिलक्षित है, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है। इनका उक्त अनियमित कृत्य बिहार वित्त नियमावली में प्रावधानित नियम 34 का भी उल्लंघन है। आरोप-3-उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत्कालीन सलाहकार ने प्रश्नगत स्थल पर बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक जैसे महत्वपूर्ण कार्य में अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया गया। फलतः सरकार को मात्र बोल्डर ढुलाई मद में कुल 6922650/- रूपये की क्षति हुई है। जो बिहार वित्त नियमावली में प्रावधानित नियम 34 का स्पष्ट उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है। उक्त के आलोक में विभागीय जांच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-15/(M) दिनांक 12.10. 2018 से विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें आरोपवार स्थिति निम्नवत हैः- आरोपित पदाधिकारी श्री प्रद्युम्न शर्मा के विरूद्ध आरोप पत्र, आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान विभागीय मंतव्य, सुनवाई तथा दोनों पक्षों द्वारा दिये गये साक्ष्यों/कागजात के विवेचन से निम्नलखित वस्तुस्थिति परिलक्षित होती है :-
श्री प्रद्युम्न शर्मा के विरूद्ध मुख्यतः यह आरोप है कि उनके द्वारा अपने पदस्थापन काल में चम्पारण प्रमंडल के मोतिहारी के अंतर्गत बाढ़ 2016 के पूर्व बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस स्थल पर कटाव निरोधक कार्य हेतु बोल्डर क्रेटिंग एवं बोल्डर पिचिंग कार्य में बोल्डर ढ़ुलाई मद में एक अतिरिक्त लोडिंग एवं अनलोडिंग के प्रावधान की अनुशंसा उनके द्वारा की गई, जिसके फलस्वरूप बोल्डर की मात्रा का एकरारित दर पर भुगतान होने के कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित हुआ है। विभागीय कार्यवाही की सुनवाई के क्रम में उपलब्ध कराये गये कागजातों के अवलोकन से आरोप की पृष्ठभूमि यह है कि चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत वर्ष-2016 में बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस में कराये गये कटाव निरोधक की जाँच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गई। उड़नदस्ता दल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-2.0.1 एवं 5.0.0 (01) के क्रम में प्रश्नगत कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-04 एवं 05 बोल्डर क्रेटिंग एवं बोल्डर पिचिंग कार्य में बोल्डर ढ़ुलाई मद में लोडिंग एवं अनलोडिंग के लिए 145.04 रूपये प्रति घन मीटर एवं स्टैकिंग कार्य में 39.73 मीटर रूपये प्रति घन मीटर का अधिक दर स्वीकृत किये जाने के कारण इसे अधिकाई भुगतान का मामला मानकर ऐसी अधिकाई भुगतान में आरोपित पदाधिकारी की संलिप्तता पायी गई है। इस संबंध में श्री राम विजय शर्मा, अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल संख्या-01, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-01 दिनांक-27.06.2016 द्वारा प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-2.0.1 मे मुख्य रूप से यह उल्लिखित किया गया है कि सड़क एवं रेल मार्ग से बोल्डर ढ़ुलाई का तुलनात्मक दर विश्लेषण किया है, जिसमें रेल मार्ग से ढ़ुलाई का दर कम आने से इसे Adopt किया गया है, लेकिन रेल मार्ग से ढ़ुलाई दर विश्लेषण में मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर क्वैरी से बोल्डर ढ़ुलाई एवं अनलोडिंग के बाद लोडिंग-अनलोडिंग का प्रावधान 2 Time @ 143.60 का प्रावधान किया गया है, जबकि मिर्जापुर रेलवे स्टेशन बोल्डर पहुँचने के बाद मात्र लोडिंग एवं114 115 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 के लिए 2 Times लोडिंग एवं अनलोडिंग का दर 143.60x 2 प्रति घनमीटर (सेस छोड़कर प्रावधान) किया गया है। यह दर अनुसूचित दर पुस्तिका के मद सं0-4.1 जो Loading by front loader and unloading by tipper का दर है, उसमें मैनुअली लोडिंग एवं अनलोडिंग का कोई प्रावधान नहीं है। यद्यपि विभागीय गठित मंतव्य में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के पत्रांक-378 दिनांक 23.01.2017 से प्राप्त मंतव्य को संदर्भित करते हुए कहा गया है कि प्राक्कलन में बोल्डर की ढुलाई में Originating स्टेशन एवं Destination स्टेशन पर क्रमशः मात्र एक बार ही लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान होना चाहिए परन्तु विभाग द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के साथ संलग्न साक्ष्य तालिका के अवलोकन से यह पता चलता है कि प्रासंगिक पत्रांक-378 दिनांक 23.01.2017 श्री अंशुमन ठाकुर, कार्यपालक अभियंता (निलंबित) के बचाव बयान पर मंतव्य उपलब्ध कराने से संबंधित है, जो आरोपित पदाधिकारी के संदर्भ में किस प्रकार स्वरूप संलग्न किया गया यह स्पष्ट नहीं है।
1. प्रश्नगत योजना के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा प्रदान की गयी। प्राक्कलन के मद संख्या-04 के लिए सड़क एवं रेल मार्ग से बोल्ड ढुलाई के तुलनात्मक दर विश्लेषण में रेल मार्ग से ढुलाई का दर कम आने की स्थिति में इसे Adopt कर लिया गया है। इस कार्य हेतु रेल मार्ग से ढुलाई दर विश्लेषण में मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर क्वैरी से बोल्डर ढुलाई एवं अनलोडिंग के लिए लोडिंग-अनलोडिंग का प्रावधान दो बार @463.60 रूपये का प्रावधान किया गया है और यह प्रावधान एक अतिरिक्त प्रावधान के रूप में कर दिया गया है, जिस कारण प्राक्कलन के मद सं0-04 का दर अधिक स्वीकृत हो गया है। इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने स्पष्टीकरण एवं बचाव बयान में बोल्डर की भारी मात्रा यथा 55000 घनमीटर का क्वैरी साईट से कार्य स्थल तक ढुलाई के क्रम में विभिन्न चरणों यथा मिर्जापुर रेलवे स्टैक यार्ड में बोल्डर का संग्रहण, पुनः इसे मशीन द्वारा Tipper में लोड कर रैक के समीप लाकर मैनुअली रैक में अनलोडिंग करना, बेतिया स्टेशन पर रैक से बौल्डर Tipper द्वारा लोडिंग करते हुए बेतिया यार्ड में अनलोड करना तथा बेतिया स्टैक यार्ड से कार्य स्थल तक बोल्डर का ढुलाई करने के कारण ऐसे पृथक-पृथक भागों के लिए लोडिंग एवं अनलोडिंग का क्रमशः दो-दो बार प्रावधान की अनुशंसा कराना नियमानुकूल नहीं कहा जा सकता। इस संबंध में अनुसूचित दर पुस्तिका के मद संख्या-4.1 जिसकी छायाप्रति स्वयं आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने स्पष्टीकरण के साथ परिशिष्ट-03 के रूप में संलग्न की गयी है, के अवलोकन से यह सहज स्पष्ट होता है कि इसमें Loading by front loader and unloading by Tipper का दर है, परन्तु मैनुअली लोडिंग एंव अनलोडिंग का प्रावधान नहीं है। साथ ही अनुसूचित दर के उक्त मद में ही Unforeseen Contingencies का भी प्रावधान है। ऐसी स्थिति में बोल्डर ढुलाई के मद में एक अतिरिक्त लोडिंग एवं अनलोडिंग हेतु प्राक्कलन में श्री शर्मा द्वारा की गयी अनुशंसा उचित नहीं है तथा इसके कारण 145.04 रू0 प्रति घनमीटर का अधिक दर की अनुशंसा पर अधीक्षण अभियंता द्वारा अधिक दर स्वीकृत करने के कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अधिक भुगतान में श्री शर्मा की संलिप्तता निःसंदेह परिलक्षित होती है। जहाँ तक आरोपित पदाधिकारी अपने पत्रांक-01 दिनांक 20.08.2015 द्वारा बचाव बयान में बिहार सरकार तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्रांक-2347 दिनांक 31.12.1983 की कंडिका-27 को संदर्भित करते हुए अधीक्षण अभियंता द्वारा गैर अनुसूचित मद के आधार पर बोल्डर के ढुलाई का दर विश्लेषित कर अनुमोदित किये जाने हेतु अधीक्षण अभियंता की सक्षमता का प्रश्न है, यह परिपत्र अब प्रासंगिक नहीं है, क्योंकि पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा निर्गत संकल्प ज्ञापांक-1/बी0-12/2003-26760(s)we दिनांक 15.05.2005 की कंडिका-6 में यह कहा गया है कि लोक निर्माण विभाग संहिताओं के अतिरिक्त तकनीकी परीक्षक कोषांग मं़त्रिमंडल (निगरानी) विभाग एवं सभी कार्य विभागों द्वारा समय-समय पर जारी कार्यपालक आदेशों की समीक्षा कर संबंधित विभागों द्वारा आवश्यकतानुसार पुनपर््रख्यापित (Reiterate) /संशोधित किया जाय अन्यथा तीन महीने के बाद इन कार्यपालक आदेशों का प्रभाव समाप्त समझा जायेगा।
इस प्रकार श्री शर्मा द्वारा समर्पित बचाव बयान उक्त तथ्यों के आलोक में मान्य नहीं है तथा तदनुसार श्री शर्मा के विरूद्ध गठित आरोप सं0-1 (क) में अंतर्विष्ट आरोप प्रमाणित होता है।
2. जहाँ तक आरोपित पदाधिकारी के उक्त कृत्य को बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 का उल्लंघन करने से संबंधित आरोप का प्रश्न है, इस संबंध में उक्त नियमावली के नियम-34 में अन्तर्निहित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी इस नियम के उल्लंघन हेतु दोषी सिद्ध होते है, क्योंकि बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि अगर किसी सरकारी सेवक के छल कपट या असावधानी के कारण सरकार को हानि पहुँची हो, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार ठहराया जायेगा।
3. पुनः जहाँ तक आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप पत्र की कंडिका-03 में आरोपित पदाधिकारी के आचरण को बिहार सरकारी सेवक आचार संहिता से संबंधित आरोप का प्रश्न है, इसमें विभाग द्वारा भूलवश बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के स्थान पर संहिता व्यवहृत किया गया है। बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1)(i) में यह अपेक्षित है कि हर सरकारी सेवक पूरी शीलनिष्ठा रखेगा, परन्तु उक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों से यह स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्राक्कलन में प्रावधानित दर की जाँच गलत कर अपनी अनुशंसा अपने वरीय पदाधिकारी को दी गयी, जिसके कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अधिकाई भुगतान का मामला परिलक्षित हुआ है। अतः उनके इस कृत्य को सरकारी116 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कर्तव्य के प्रति शीलनिष्ठा का अभाव कहा जायेगा तथा इस आधार पर आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र की कंडिका-03 में गठित आरोप सही प्रमाणित होता है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-2420 दिनांक 26.11.18 से श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत0 तकनीकी सलाहकार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान ही श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत0 तकनीकी सलाहकार, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी के दिनांक 29.02.2020 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-87 सह ज्ञापांक-958 दिनांक 17.07.2020 से बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।
श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत0 तकनीकी सलाहकार, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी में अपने पत्रांक-0 दिनांक 25.02.19 से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है- किसी भी योजना के तकनीकी स्वीकृति के पूर्व योजना सृजन से लेकर प्रशासनिक स्वीकृति तक के बीच कम से कम चार बार योजना प्राक्कलन की समीक्षा की जाती है। सर्वप्रथम स्थल चयन समिति की अनुशंसा के पश्चात योजना के विस्तृत प्रतिवेदन को TAC के समक्ष उपस्थापित किया जाता है। ततपश्चात TAC की अनुशंसा के उपरान्त उक्त अनुशंसा के आलोक में पुनः योजना प्राक्क्लन तैयार कर योजना समीक्षा समिति के समक्ष उपस्थापित किया जाता है। योजना समीक्षा समिति के अनुशंसा के आलोक में पुनः योजना प्राक्कलन तकनीकी अनुमोदन के साथ प्रशासनिक स्वीकृति हेतु विभाग को समर्पित किया जाता है एवं समीक्षोपरान्त प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा प्रदान की जाती है। इस प्रकार TAC, SRC एवं प्रशासनिक स्वीकृति हेतु तकनीकी अनुमोदन के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर योजना प्राक्कलन तैयार किया जाता है। उपरोक्त वर्णित तीनों स्थिति में क्षेत्रीय स्तर पर प्राक्कलन तैयार करते समय क्वैरी स्थल से कार्य स्थल तक रेल द्वारा बोल्डर ढुलाई के मद में चार बार लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान किया गया है। हर स्तर पर उच्च पदाधिकारी द्वारा उसकी मान्यता दी गयी है। उपरोक्त सभी प्रक्रियाएँ इनके तकनीकी सलाहकार के पद पर योगदान देने के पूर्व ही हो चुकी थी। उपरोक्त के बावजूद प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति के लिये प्राक्कलन की तकनीकी जाँच के दौरान इनके द्वारा उक्त बिन्दु पर संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के साथ विस्तृत रूप से चर्चा की गयी है। जिसके संबंध में इनके द्वारा पूर्व में भी अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया है। जैसा की पूर्व में उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि चर्चा के दौरान स्थलीय स्थिति एवं बेतिया यार्ड स्टैक में पर्याप्त जगह नहीं होने की बात रखी गयी। इनके लिये संदर्भित योजना के प्राक्कलन की स्वीकृति/अनुमोदन होने के कारण उसी रूप में प्राक्कलन की तकनीकी जाँच की गयी। इस प्रकार मेरे द्वारा सरकारी कार्य के प्रति किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गयी है।
श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत0 तकनीकी सलाहकार से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) के जवाब की समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-
आरोप-1-जो प्रश्नगत कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद सं॰ 4 एवं 5 यथा बोल्डर क्रेटिंग एवं बोल्डर (पिचिंग कार्य) में बोल्डर ढुलाई मद में एक अद्द अतिरिक्त लोडिंग एवं अनलोडिंग के लिये एकरारित दर 145.04/- प्रति घन मी॰ का अधिक दर स्वीकृति के कारण एकरारित दर पर भुगतान करने के फलस्वरूप कुल 6922650/- रूपये का अधिकाई भुगतान होने तथा सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने में इनकी सहभागिता होने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।
इस कार्य हेतु रेल मार्ग से ढुलाई दर विश्लेषण से मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर क्वारी से बोल्डर ढुलाई लोडिंग अनलोडिंग का दो बार प्रावधान किया गया एवं यह प्रावधान एक अतिरिक्त प्रावधान के रूप में कर दिया गया, जिसके कारण प्राक्कलन में मद सं॰ 4 एवं 5 का दर अधिक स्वीकृत हो गया। मिर्जापुर रेलवे स्टैक यार्ड में बोल्डर संग्रहण कर पुनः इसे मशीन द्वारा टीपर में लोड कर रैक के समीप लाकर मैनुअली रैक में अनलोडिंग करना, बेतिया स्टेशन पर रैक से बोल्डर टिपर द्वारा लोडिंग करते हुए इसे बेतिया यार्ड में अनलोड करना तथा बेतिया स्टैक यार्ड से कार्य स्थल तक बोल्डर का ढुलाई करने के कारण ऐसे पृथक-पृथक भागों के लिए लोडिंग एवं अनलोडिंग का क्रमशः दो-दो बार प्रावधान की अनुशंसा करना नियमानुकूल नहीं कहा जा सकता है। इस संबंध में अनूसूचित दर पुस्तिका के मद सं॰ 4.1 के अवलोकन से यह सहज स्पष्ट होता है कि इसमें Loading by front loader and unloading by Tipper का दर तो है परन्तु मैनुअल लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान नहीं है। साथ ही अनुसूचित दर के उक्त मद में ही unforeseen Contigencies का भी प्रावधान है। ऐसी स्थिति में बोल्डर ढुलाई के मद में एक अतिरिक्ति लोडिंग एवं अनलोडिंग हेतु प्राक्कलन में आरोपी पदाधिकारी द्वारा की गयी अनुशंसा उचित नहीं है तथा इसके कारण 145.04 रूपये प्रति घन मी॰ का अधिक दर की अनुशंसा पर अधीक्षण अभियंता द्वारा अधिक दर स्वीकृत करने के कारण कुल रू॰ 6922650/- रूपये का अधिक भुगतान में आरोपी पदाधिकारी की संलिप्तता निःसंदेह परिलक्षित होती है। अतएव आरोप सं0-1 (क) प्रमाणित होता है। आरोप-2- जहाँ तक बिहार वित्त नियमावली के नियम 34 का उल्लंघन करने का प्रश्न है इस संबंध में उक्त नियमावली के नियम 34 में अन्तर्निहित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी इस नियम के उल्लंघन हेतु दोषी सिद्ध होते है क्योंकि बिहार वित्त नियमावली के नियम 34 में स्पष्ट प्रावधान है कि अगर किसी सरकारी सेवक के छल-कपट या असावधानी के117 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 कारण सरकार को हानि पहँचा हो तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार ठहराया जायेगा। अतएव आरोप सं0-2 प्रमाणित होता है। आरोप-3-बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1)(i) में यह अपेक्षित है कि हर सरकारी सेवक पूरी शीलनिष्ठा रखेगा, परन्तु उक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों से यह स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्राक्कलन में प्रावधानित दर की जाँच गलत कर अपनी अनुशंसा अपने वरीय पदाधिकारी को दी गयी, जिसके कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अधिकाई भुगतान का मामला परिलक्षित हुआ है। इस आधार पर आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र की कंडिका-03 में गठित आरोप सही प्रमाणित होता है।
श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा विभाग द्वारा प्रथम बार पूछे गये स्पष्टीकरण के जबाव एवं उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिसकी विस्तृत रूप से संचालन पदाधिकारी द्वारा समीक्षा करते हुए इनके द्वारा रेलवे से बोल्डर ढुलाई मद में प्रावधानित गलत दर को बिना जाँचे ही उसी रूप में जाँच कर अनुमोदन हेतु अधीक्षण अभियंता को समर्पित करने के कारण कुल 69,22,650/- रूपये का अनियमित भुगतान होने में इनकी संलिप्तता होने के लिए दोषी माना गया है। इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में न तो कोई नया तथ्य ही दिया गया है एवं न ही कोई साक्ष्य ही दिया गया है। अतएव इनके अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) को अस्वीकार किया जाता है।
समीक्षोपरांत उपरोक्त समीक्षा एवं संचालन पदधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध गठित आरोप यथा प्रश्नगत कार्य में बोल्डर ढुलाई मद (रेलवे से) लोडिंग एवं अनलोडिंग में एक अतिरिक्त प्रावधानित दर को गलत ढंग से जाँच करते हुए स्वीकृति हेतु उपस्थापित करने के कारण एकरारित दर के आधार पर कुल 69,22,650/- रूपये का अनियमित भुगतान होने तथा बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1)(i) का उल्लंघन करने का आरोप प्रमाणित होता है।
अतएव उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री प्रद्युम्न शर्मा, तत्कालीन तकनीकी सलाहकार, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, फ्लैट नं0-304, तिरूपति इन्कलेव, नजदीक साई मंदिर, P&T Road, बेला, मिठनपुरा, मुजफ्फरपुर-842002 को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित करने का निर्णय लिया गया है :-
'पेंशन से दस प्रतिशत (10%) की स्थायी कटौती'। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1473 दिनांक 19.11. 2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-3878 दिनांक 16.03.2022 द्वारा श्री प्रद्युम्न शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री प्रद्युम्न शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, फ्लैट नं0-304, तिरूपति इन्कलेव, नजदीक साई मंदिर, P&T Road, बेला, मिठनपुरा, मुजफ्फरपुर-842002 के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
'पेंशन से दस प्रतिशत (10%) की स्थायी कटौती'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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25 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-09/2022-662--श्री हरे कृष्ण प्रसाद (आई0डी0 सं०-4381), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, सिवान सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बख्तियारपुर के विरूद्ध निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना के पत्रांक-799 दिनांक 23.03.2022 द्वारा प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में निगरानी थाना कांड सं0-10/2022 दिनांक 15.03.2022 धारा-13(2) सहपठित धारा-13(1)(बी), भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित अधिनियम-2018) दर्ज किये जाने की सूचना दी गयी। विभाग के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के संगत प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री हरे कृष्ण प्रसाद, कार्यपालक अभियंता का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री प्रसाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।118 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 25 मार्च 2022 सं0 22/नि0सि0(पट0)03-08/2022-663--श्री अमित कुमार (आई0डी0 सं०-5301), सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं0-3, खगौल के विरूद्ध निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना के पत्रांक-764 दिनांक 17.03.2022 द्वारा प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में निगरानी थाना कांड सं0-08/2022 दिनांक 03.03.2022 धारा-13(2) सहपठित धारा-13(1)(बी), भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित अधिनियम-2018) एवं 109/120(बी) भा0द0वि0 दर्ज किये जाने की सूचना दी गयी। विभाग के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के संगत प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि में श्री अमित कुमार, सहायक अभियंता का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, कटिहार निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. इनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के निमित्त आरोप-पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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28 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(दर0)16-08/2017-672-मो0 कलीमुल्लाह (आई0डी0-3488), तदेन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर, मधुबनी द्वारा बरती गई अनियमितता की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा की गई। योजना एवं विकास विभाग ने अपने पत्रांक-5254 दिनांक 15.09.17 द्वारा तकनीकी परीक्षक कोषांग का जाँच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए मो0 कलीमुल्लाह तदेन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध कार्रवाई हेतु उनके पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग से अनुरोध किया गया। जल संसाधन विभाग द्वारा मामले के समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-285 दिनांक 09.02.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए मो0 कलीमुल्लाह से स्पष्टीकरण किया गया। मो0 कलीमुल्लाह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण का प्रत्युत्तर की समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाते हुए मो0 कलीमुल्लाह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1440 दिनांक 05.07.2018 द्वारा मो0 कलीमुल्लाह से बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। मो0 कलीमुल्लाह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण का जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत मो0 कलीमुल्लाह के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाये जाने के उपरांत उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प सह पठित ज्ञापांक-906 दिनांक 07.05.2019 द्वारा मो0 कलीमुल्लाह सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43बी के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप का सारः- मो॰ कलीमुल्लाह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय श्रोत अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2 झंझारपुर द्वारा अपने पदस्थापन अवधि वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में प्रमंडलाधीन पंचायत भवन एवं किसान भवन निर्माण हेतु आमंत्रित निविदा सूचना सं॰ 17/2013-14 के गु्रप सं॰-4 एवं 24/13-14 के ग्रुप सं॰ 2 एवं 6 के निष्पादन में बरती गयी अनियमितता की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा की गयी। आपसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त निविदा निष्पादन के क्रम में निम्नलिखित बरती गयी अनियमितताओं के लिये आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है :- (i) घोघरडीहा पंचायत अन्तर्गत सुदेय रतौली में पंचायत भवन निर्माण कार्य हेतु निविदा आमंत्रण सूचना सं॰ 17/2013714 के ग्रुप सं॰ 4 के निष्पादन के क्रम में निविदा कागजात को बिना जाँचे परखे गलत ढंग से तुलनात्मक विवरणी तैयार कर निष्पादन हेतु अंचल कार्यालय में समर्पित कर दिया गया। अंचल स्तर पर गठित निविदा समिति के सदस्य रहते हुए अनियमित ढंग से मे॰ श्यामा कन्स्ट्रक्शन के तकनीकी बीड को अमान्य घोषित कर दिया गया तथा Audit Report नहीं रहने के बावजूद श्री भैरव कुमार ठाकुर को तकनीकी बीड में सफल घोषित कर संवेदक को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गयी। साथ ही एक निविदादाता को योग्य करार देने के बावजूद निविदा का निष्पादन में बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम 43 बी॰ का उल्लंघन करते हुए श्री भैरव कुमार ठाकुर को कार्य आवंटित कर दिया गया। इस प्रकार गलत ढंग से किसी विशेष निविदाकार के पक्ष में निविदा निष्पादन करने में सहयोग करने एवं बिना जाँचे परखे निविदा कागजात को प्रेषित करने के लिये आप दोषी प्रतीत होते है।
(ii) उसी प्रकार लखनपुर प्रखण्ड के लौका में पंचायत भवन एवं घोघरडीहा में किसान भवन के निर्माण कार्य में निविदा आमत्रंण सूचना सं॰ 24/2013-14 के गु्रप सं॰ 2 एवं 6 के निविदा निष्पादन के क्रम में दोनों गु्रपों में दो-दो निविदाकारों को गलत ढंग से अयोग्य घोषित करने के कारण वांछित प्रतिस्पर्धा की प्राप्ति नहीं हो सकी। साथ ही, योग्य घोषित एकमात्र निविदादाता होने के बावजूद एकल निविदा नहीं मानकर एवं बिहार लोक निर्माण संहिता के119 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 नियम 63 के विरूद्ध निविदा का निष्पादन अंचल स्तर पर कर दिया गया। जिसमें आप भी एक सदस्य थे। इस प्रकार गलत ढंग से किसी विशेष निविदादाता के पक्ष में निविदा का निष्पादन करने में सहयोग करने के लिये आप दोषी प्रतीत होते है।
(iii) आपके द्वारा नियम के विरूद्ध PKI कनीय लेखा लिपिक को दिया गया। जिसका परिणाम हुआ कि उक्त लेखा लिपिक द्वारा गलत स्वयं हस्तलिखित कागजात संलग्न कर निविदा का तुलनात्मक विवरणी उपस्थापित किया गया। एवं आपके द्वारा बिना जाँचे-परखे उक्त निविदा कागजात को निष्पादन हेतु अंचल कार्यालय में समर्पित करने से अनावश्यक उलझन पैदा हुआ। जो एक गंभीर अनियमितता दर्शाता है जिसके लिये आप दोषी है।
2. श्री कलीमुल्लाह के द्वारा उपुर्यक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता के लिए नियम के विरूद्ध निजी स्वार्थ हेतु किसी विशेष/खास संवेदक को लाभ पहुँचाने की मंशा परिलक्षित है जो विभागीय नियम तथा बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम 63 के अनुरूप नहीं है। उनके द्वारा उक्त अनियमितता के क्रम में वित्त नियमावली के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया गया।
3. उक्त से स्पष्ट है कि मो॰ कलीमुल्लाह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने पंचायत भवन एवं किसान भवन निर्माण के निविदा निष्पादन में विभागीय नियमों एवं बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम 63 का उल्लंघन किया गया है। उनका यह आचररण सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3(i) का उल्लंघन है।
संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-1340 दिनांक 22.06.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया जिसमें मो0 कलीमुल्लाह के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-125 दिनांक 29.01.2021 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच अधिगम की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों के संबंध में अभ्यावेदन समर्पित करने हेतु मो0 कलीमुल्लाह से अनुरोध किया गया। मो0 कलीमुल्लाह द्वारा अपना अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया जिसमें निम्न बातों का उल्लेख किया गया :- कार्य प्रमंडल का मुख्यालय झंझारपुर था, वहाँ e-tendering upload का कार्य नहीं होने के कारण एवं Trained Computer operator नहीं होने के कारण सारे ई टेंडर का Document मुख्यालय मघुबनी में ही कराया जाता था। इस बीड में ऑडिट रिर्पोट की प्रति नहीं थी। इसकी जानकारी लेखा लिपिक संजय राय द्वारा नहीं दी गयी। स्वयं हस्तलिखित एवं अपने मन से कुछ कागजात जोड़कर प्रस्तुत किया गया। कार्य की व्यवस्तता, विभाग एवं जन प्रतिनिधि का दबाव के कारण Tender Document को अंचल कार्यालय में भेजने की शीघ्रता से पूरे कागजातों को देख नहीं पाया एवं हस्ताक्षरित कर अंचल कार्यालय में भेज दिया एवं निविदा कमिटि द्वारा इसे सही मानकर मार्किंग कर दी गयी। इस प्रमंडल में चार विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना का 717 योजना, पंचायत भवन का 29 योजना, कब्रिस्तान घेराबन्दी के 33 योजना, सीमा क्षेत्र विकास योजना का 28, राष्ट्रीय सम विकास योजना का तीन साल पहले का लंबित कार्य-16, योजना एवं सांसद मद योजना का 50 कार्य योजना थे। निष्पादन अनुश्रवण के लिये मुख्यालय से बाहर बैठक स्थल पर जाना पडता था। इस परिस्थति में सभी कागजातों का जाँच कर पाना संभव नहीं हो पाता, फिर भी जब भी त्रुटि का एहसास हुआ आवश्यक कदम उठाकर ठीक कर लिया जाता था। जहाँ तक PKI का प्रश्न है, इनके आवास झंझारपुर में था, वहाँ से 50कि0मी0 दूर मधुबनी मे ई-टेंडरिंग का कार्य कराया जाता था। अपने अधीनस्थ कर्मचारी एवं पदाधिकारी पर विश्वास करना पड़ता है। इस प्रकार ज्योंही त्रुटि का पता चला उच्च पदाधिकारी के निदेशानुसार निविदा रद्द करते हुए पुनः निविदा की कार्यवाही कर दी गयी। इस प्रकार कोई भी वित्तीय अनियमितता/गबन नहीं की गयी है। नियत में कोई खोट होती तो निविदा रद्द करने की कार्यवाही नहीं की जाती। अंचलीय कार्यालय में प्राक्कलन पदाधिकारी एवं अधीक्षण अभियंता को भी निविदा निष्पादन के पहले देखना होता है। घोघरडीहा पंचायत के आमंत्रण सूचना सं0-17/2013-14 के ग्रुप सं0-4 में निष्पादन में भी ऑडिट रिपोर्ट बगैर इनके हस्ताक्षर से लगाकर अंचलीय कार्यालय भेज दिया गया, जिससे वे अनभिज्ञ थे। निविदा निष्पादन करने की पूरी शक्ति अधीक्षण अभियंता को होती है और बतौर सदस्य कार्यपालक अभियंता समिति में हस्ताक्षर करते है। इस तरह सरकार को कोई हानि नहीं है न ही नियत में खोट था। एकल निविदा को रद्द करने या आगे अग्रसर करने की शक्ति अधीक्षण अभियंता को होती है। उसी प्रकार लौकहा पंचायत भवन एवं घोघरडीहा पंचायत भवन में भी एक मात्र निविदाकार को ही अधीक्षण अभियंता द्वारा हस्ताक्षर कराकर सफल कर दिया गया। क्योंकि उच्च पदाधिकारी के आदेश का भी ख्याल रखना पड़ता है। ग्रुप-2 जो 88.92 लाख से संबंधित ग्रुप सं0-6 राशि 108.08 लाख के संबंध में कहना है कि बीड कैपेसिटी तथा Existing commitment भी लिपिक द्वारा अपने हाथ से लिखकर निविदा में लगा दिया, जिसकी सूचना उनके द्वारा दिनांक 04.07.2014 को अधीक्षण अभियंता को दी गयी थी। फौरन ही उनके द्वारा निविदा रद्द कर सही निविदाकार को देकर कार्य करा लिया गया। इस तरह सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई। जहाँ तक ऑडिट रिपोर्ट या बीड कैपेसिटी की गणना प्रमंडलीय लेखापाल तथा संबंधित लेखा लिपिक द्वारा करना होता था और एक निविदा में लगभग 100 पृष्ट होते है। इस तरह कार्य करने में विचलन हो सकती है। लेकिन मंशा में कोई खोट नहीं है। विभागीय समीक्षा- संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कलीमुल्लाह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। मो0 कलीमुल्लाह द्वारा कहा गया कि कनीय लेखा लिपिक श्री संजय राय द्वारा स्वयं हस्तलिखित Existing Commitment एवं अन्य कुछ कागजात को जोड़कर तुलनात्मक विवरणी बना दिया गया। कार्य की व्यस्तता एवं जन120 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 प्रतिनिधियों का दबाव के कारण Tender Document को देखे बिना अंचल कार्यालय में भेज दिया गया, जिसे सही मानकर निविदा समिति द्वारा मार्किंग कर दिया गया। व्यस्तता के कारण सभी कागजातों को देखकर जाँच कर पाना संभव नहीं हो सका। फिर भी जब कभी त्रुटि का एहसास होता था, आवश्यक कदम उठाकर ठीक कर लिया जाता था, स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। क्योंकि किसी भी कार्य के कार्यान्वयन में संलग्न सभी पदाधिकारी का अपना-अपना दायित्व है एवं विभागीय नियमों का अनुपालन हर स्तर के पदाधिकारी को करना होता है। इन्हें निविदा कागजात को जाँच कर संतुष्ट होने के बाद ही तुलनात्मक विवरणी सभी कागजातों के साथ अंचल कार्यालय में निष्पादन हेतु भेजा जाना चाहिए था। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-3.0.6 एवं 3.0.8 से स्पष्ट है कि परिवाद पत्र के पश्चात निविदा सं0-17/2013-14 के ग्रुप सं0-4 के निष्पादित निविदा को अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-462 दिनांक 25.07.2014 द्वारा रद्द करते हुए इस गु्रप की पुनर्निविदा का आदेश निर्गत किया गया है। अतएव इस ग्रुप के गलत निविदा निष्पादन के कारण वित्तीय अनियमितता होना परिलक्षित नहीं होता है। निविदा सूचना 24/2013-14 के ग्रुप सं0-2 एवं 6 के निष्पादन में बरती गयी अनियमितता से संबंधित जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.1.1 से 4.0.1 से 5.0.7 में निविदा निष्पादन में बरती गयी अनियमितता के कारण वित्तीय अनियमितता हुई है अथवा नहीं, का कोई उल्लेख नहीं है। मात्र जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.0.0(2) में अंकित है कि इन दोनों ग्रुपों में दो-दो निविदादाता को गलत ढंग से अयोग्य करने एवं तत्पश्चात अयोग्य निविदादाता को योग्य घोषित किया गया। निविदाओं को एकल नहीं मानकर निविदाओं का अंचल स्तर पर नियम के विरूद्ध निष्पादन किये जाने से वांछित प्रतिस्पर्धा की प्राप्ति नहीं होती है। नियम के विपरीत PKI कनीय लेखा लिपिक को दिये जाने एवं उक्त लेखा लिपिक द्वारा गलत तरीके से उपस्थापित किये गये निविदा कागजात को बिना जाँचे परखे अंचल कार्यालय में समर्पित करने के संबंध में कहा गया है कि इनका आवास झंझारपुर में था एवं वहाँ से 50कि0मी0 दूर मधुबनी जिला मुख्यालय में ई टेडरिंग का कार्य किया जाता था। अपने अधीनस्थ कर्मचारी एवं पदाधिकारी पर विश्वास करना पड़ता है यदि वह धोखा देता है तो सरकारी कार्य में बाधा होती है। इस प्रकार ज्योंही त्रुटि का पता चला उच्च पदाधिकारी के निदेशानुसार निविदा रद्द करते हुए पुनः निविदा की कार्यवाही कर दी गयी। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1317 दिनांक 10.07.2014 से स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा अपना PKI कनीय लेखा लिपिक श्री संजय राय को सौंपा गया है। इसी का फायदा उठाकर श्री राय द्वारा निविदा कागजात में हेराफेरी किया जाना परिलक्षित है, जिसके कारण निविदा निष्पादन में अनावश्यक उलझन पैदा हुआ है तथा श्री राय द्वारा दिये गये निविदा कागजात को बिना Online जाँच किये ही अंचल कार्यालय में भेजा जाना परिलक्षित है। जाँच पदाधिकारी के द्वारा कार्यपालक अभियंता द्वारा अपना PKI किसी अन्य को दिये जाने को सही नहीं माना गया है। PKI पदाधिकारी को अपने पास रखना अनिवार्य माना गया है ताकि गैर व्यक्ति इसका दुरूपयोग नहीं करे। अगर इसका दुरूपयोग होता है तो इसकी पूरी जवाबदेही PKI धारक की होती है। इस प्रकार इनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाया गया। इसके अतिरिक्त श्री कलीमुल्लाह द्वारा वही तथ्य उद्धृत किया गया है जो इनके द्वारा पूर्व में संचालन पदाधिकारी को दिया गया है जिसकी विस्तृत समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा करते हुए गठित सभी आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।
मामले के सम्यक समीक्षोपरांत मो0 कलीमुल्लाह, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध गठित सभी आरोप यथा निविदा निष्पादन में विभागीय नियमों का अनुपालन नहीं करने, दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने, गलत ढंग से निविदा कागजात भेजने एवं गलत निविदा निष्पादन में सहयोग करने तथा नियम के विपरीत अपना PKI किसी अन्य कर्मचारी को देने के कारण उसके द्वारा गलत उपयोग किये जाने के कारण निविदा निष्पादन प्रभावित होने का आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए मो0 कलीमुल्लाह के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया -
"पेंशन से 03(तीन) वर्षों के लिए 05 (पाँच) प्रतिशत की कटौती"। सरकार के उक्त निर्णय में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है। उक्त के आलोक में मो0 कलीमुल्लाह (आई0डी0-3488), तदेन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"पेंशन से 03(तीन) वर्षों के लिए 05 (पाँच) प्रतिशत की कटौती"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।
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30 मार्च 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-17/2017-695--श्री अनिल राज (आई0डी0-जे 7913) तत्कालीन कनीय अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत के पद पर पदस्थापन अवधि में भोजपुर जिला के अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता के लिए निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-884 दिनांक 29.04.2019 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप - श्री अनिल राज, तत0 कनीय अभियंता के पदस्थापन काल में भोजपुर जिला अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता की जाँच121 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उड़नदस्ता अंचल-2, पटना द्वारा की गई। जाँच प्रतिवेदन के आलोक में इनसे की गई स्पष्टीकरण पर प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षोपरांत निम्न आरोपों के लिए दोषी है -
(i) BKG तटबंध के ग्राम बलुआ स्थल पर वर्ष 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संधारित लेईंग पंजी में दिनांक 16.08.2016 से 18.08.2016 एवं 21.09.2016 से 22.09.2016 तक कुल 409 अदद NC एवं 10979 अदद EC Bags का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। परन्तु दिनांक 17.08.2018 को लेईंग पंजी में 24 अदद, 8 अदद, 35 अदद एवं 25 अदद यानि 92 अदद NC दर्शाया गया है। इस प्रकार एक ही तिथि में एक ही स्थल पर एक ही कार्यमद का चार बार अंकित किया जाना कराए गए कार्य का संदिग्ध बनाता है। अतएव प्रथम अंकित 24 अदद NC को छोड़कर शेष 68 अदद NC तदनुसार 1700EC Bags अधिकाई कार्य दर्शाया जाना परिलक्षित होता है। जिसकी पुष्टि प्रपत्र-17 एवं 24 में अंकित खपत क्रमशः 2763 एवं 2877 अदद NC में अन्तर से होती है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
(ii) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है। परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है। इसी प्रकार स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान प्रदान पर प्रश्नचिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत नहीं किए जाने के लिए दोषी है।
उक्त आरोप के लिए किए गए विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-249 दिनांक 26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें श्री अनिल राज, तत0 कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है।
प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :- (i) दिनांक 17.08.2018 को विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के लेईंग पंजी में 24 अदद, 08 अदद, 35 अदद एवं 25 अदद यानि 92 अदद NC दर्शाया गया है। इस प्रकार एक ही तिथि में एक ही स्थल पर एक ही कार्य मद का चार बार अंकित किया जाना कराए गए कार्य को संदिग्ध बनाता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेखित किया है कि विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में झांकी एवं स्लोपिंग बेड बार का कार्य कराया जा रहा था। दिनांक 17.08.2016 को निरीक्षण के क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त बिन्दुओं पर कार्य को बन्द कर दो अदद अन्य बिन्दुओं पर teeth निर्माण कार्य करने का आदेश दिया गया। इस प्रकार दिनांक 17.04.2016 को विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के अन्तर्गत ग्राम बलुआ में ही चार बिन्दुओं पर क्रमशः 24 अदद, 08 अदद, 35 अदद एवं 25 अदद अर्थात कुल 92 अदद NC का कार्य सम्पन्न कर लेईंग पंजी में एक ही तिथि में अंकित किया गया।
एक गाँव के चार बिन्दुओं पर एक ही तिथि को बाढ़ संघर्षात्मक जैसे संवेदनशील कार्य कराया जाना एवं चारों बिन्दुओं पर कराए गए NC कार्य की अलग-अलग मात्रा को लेईंग रजिस्टर में अंकित करना संभव है। ऐसी परिस्थति में एक ही तिथि में एक ही मद को चार बार अंकित किया जाना कराए कार्य को संदिग्ध मानना सही नहीं प्रतीत होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
(ii) आरोपी पदाधिकारी पर दूसरा आरोप है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन विभिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा संधारित है परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है तथा स्थल लेखा में पाए गए त्रुटि से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है।
यह आरोप मुख्यतः प्रमंडलीय भंडार लेखा प्राप्ति एवं निर्गत से संबंधित प्रतीत होता है जो सहायक अभियंता के प्रक्षेत्र से बाहर का है। वैसे आरोपी पदाधिकारी द्वारा माह जुलाई 2016 से अक्टूबर 2016 का अवर प्रमंडल स्तर पर संधारित स्थल लेखा की छायाप्रति उपलब्ध कराया गया है। अतः आरोपी पदाधिकारी पर लेखाओं का विधिवत संधारण नहीं किए जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
उक्त मंतव्य की समीक्षा विभागीय तकनीकी समीक्षा पदाधिकारी द्वारा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अनिल राज, तत्कालीन कनीय अभियंता (आई0डी0-जे 7913) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित माना गया है।
श्री अनिल राज, तत्कालीन कनीय अभियंता (आई0डी0-जे 7913) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध गठित आरोपों को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए तकनीकी समीक्षोपरांत गठित आरोपों को अप्रमाणित मानते हुए आरोपमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय के आलोक में श्री अनिल राज (आई0डी0-जे 7913) तत्कालीन कनीय अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा को आरोपमुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।122 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 30 मार्च 2022 सं0 22/नि0सि0(पट0)03-17/2017-699--श्री अभय कुमार चौधरी (आई0डी0-5346) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पद पर पदस्थापन अवधि में इनके विरूद्ध भोजपुर जिला अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता के निम्न आरोप के विस्तृत जाँच कराने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-851 दिनांक 29.04.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप - श्री अभय कुमार चौधरी, सहायक अभियंता के पदस्थापन काल में भोजपुर जिला अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल-2, पटना द्वारा की गई। जाँच प्रतिवेदन के आलोक में की गई स्पष्टीकरण पर प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षोपरांत निम्न आरोप के लिए दोषी है -
(i) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्नचिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत संधारण नहीं किए जाने के लिए दोषी है। उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में अभियंता प्रमुख , सिंचाई सृजन-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-253 दिनांक 26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसमें निम्न मंतव्य अंकित किया गया -
(i) आरोपी पदाधिकारी द्वारा मुख्य रूप से स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किए जाने का आरोप है तथा अवर प्रमंडल सं0-2 कारीसाथ के स्थल लेखा मे अंकित 135 अदद NC ओपनिंग बैलेंस में कब से, किस कार्य स्थल लेखा से लिया गया है, कार्य का उल्लेख नहीं है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेख किया है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा अवर प्रमंडलीय लेखा की मांग एवं अवलोकन नहीं किया गया। बचाव बयान के साथ संलग्न मई 2009 में गांगी के दायें तटबंध पर पंडितपुर ग्राम के निकट कराए गए कटाव निरोधक कार्य से संबंधित स्थल लेखा उपलब्ध कराया है जिसमें 135 अदद NC Closing Balanace में दर्शाया गया है। पुनः अगस्त 2016 के अवर प्रमंडलीय Site A/c से स्पष्ट होता है कि इस Surplus A/c के 135 अदद NC को अगस्त 2016 के अवर प्रमंडलीय Site A/c के ओपनिंग बैलेंस में दर्शाया गया है अर्थात Surplus A/c से Site A/c में ट्रांसफर किया गया तथा माह अगस्त 2016 में ही बाढ़ संघर्षात्मक कार्य से संबंधित संवेदक को निर्गत कर दिया गया है। अतः आरोपी पदाधिकारी पर लेखाओं का विधिवत संधारण नहीं किए जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
उक्त जाँच प्रतिवेदन के तकनीकी समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-688 दिनांक 19.05.2020 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। असहमति के बिन्दु-
(i) श्री अभय कुमार चौधरी द्वारा बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल संख्या-2, कारीसाथ के प्रभारी परिलक्षित होते हैं। जहाँ इनके अधीन पूर्व से चले आ रहे 135 अदद NC के स्थल लेखा पर दिनांक 31.08.2009 से 31.07.2016 तक संबंधित सहायक अभियंता का हस्ताक्षर नहीं है। जबकि माह अगस्त, 2016 के स्थल लेखा पर सहायक अभियंता का हस्ताक्षर परिलक्षित होता है, जिससे उनके द्वारा स्थल लेखाओं का विधिवत संधारण किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। श्री चौधरी द्वारा उक्त के संबंध में समर्पित जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई। जो निम्नवत है :- श्री चौधरी का कहना है कि बाढ़ 2016 में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा में प्राक्कलन पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित थे। इसी अवधि में अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ के अतिरिक्त प्रभार में थे। बाढ़ के पूर्व या बाढ़ अवधि के दौरान प्रमंडलीय भंडार से प्राप्त सामग्रियों एवं कार्य के लिए निर्गत सामग्रियों का संधारण अवर प्रमंडल द्वारा सदैव किया गया। अवर प्रमंडल-2 कारीसाथ के स्थल लेखा में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है। जाँच दल पदाधिकारी द्वारा अवर प्रमंडलीय लेखा का अवलोकन नहीं किया गया है। उक्त के आलोक में आरोपमुक्त किया जाए। इनके द्वारा बाढ़ के पूर्व या बाढ़ अवधि के दौरान प्रमंडलीय भंडार से प्राप्त सामग्रियों एवं कार्य के लिए निर्गत सामग्रियों का संधारण अवर प्रमंडल द्वारा विधिवत किया गया साथ ही अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ के स्थल लेखा का भी विधिवत संधारण किया गया। उक्त समीक्षा के आलोक में श्री चौधरी, सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। श्री अभय कुमार चौधरी, सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में समर्पित जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य एवं श्री चौधरी द्वारा असहमति के बिन्दु पर दिए गए जवाब के तकनीकी समीक्षोपरांत गठित आरोप अप्रमाणित माना गया है। अतएव श्री अभय कुमार चौधरी, सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप के क्रम में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप को अप्रमाणित मानते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।123 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त निर्णय के आलोक में श्री अभय कुमार चौधरी (आई0डी0-5346), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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30 मार्च 2022
सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-17/2017/700--श्री शैलेन्द्र कुमार (ID-3803), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा संप्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापन अवधि में भोजपुर जिला के अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता के लिए निम्न आरोप प्रतिवेदित करते हुए गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-850 दिनांक-29.04.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप :- श्री शैलेन्द्र कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता के पदस्थापन काल में भोजपुर जिला अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल-2, पटना द्वारा की गई। जांच प्रतिवेदन के आलोक में की गई स्पष्टीकरण पर प्राप्त प्रत्युार की समीक्षोपरांत निम्न आरोप के लिए दोषी हैं :-
(i) BKG तटबंध के चेन सं0-695-696 स्थल पर वर्ष 2016 के दौरान कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संधारित लेईंग पंजी में विभिन्न तिथियों में प्राप्ति एवं निर्गत के अनुसार दिनांक 13.08.2016 को संवेदक के पास मात्र 20 अदद् NC उपलब्ध थें परन्तु उक्त तिथि को 246 अदद् NC उपलब्ध नहीं रहने के बावजूद भी NR प्रतिवेदित किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित होता है। साथ ही दिनांक-14.08.2016 को Over Writing कर 13.08.2016 बनाते हुए 5000 अदद् EC Bags निर्गत किया जाना संदिग्ध प्रतीत होता है। इस प्रकार Extra Reporting करने के कारण 46 अदद् NC तदनुसार 1150 अदद् EC BAgs के अधिकाई कार्य दर्शाया जाना परिलक्षित है जिसकी पुष्टि प्रपत्र 17 एवं 24 में अंकित खपत मात्रा क्रमशः 2783 एवं 2877 NC के अन्तर से होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। (ii) BKG तटबंध के ग्राम बलुआ स्थल पर वर्ष 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संधारित लेईंग पंजी में दिनांक-16.08.2016 से 18.08.2016 एवं 21.09.2016 से 22.09.2016 तक कुल 409 अदद् NC एवं 10979 अदद् EC Bags का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। परन्तु दिनांक 17.08.2018 को लेईंग पंजी में 24 अदद्, 8 अदद्, 35 अदद् एवं 25 अदद् यानि 92 अदद् NC दर्शाया गया है। इस प्रकार एक ही तिथि में एक ही स्थल पर एक ही कार्य मद का चार बार अंकित किया जाना कराए गए कार्य को संदिग्ध बनाता है। अतएव प्रथम अंकित 24 अदद् NC को छोड़कर शेष 68 अदद् NC तदनुसार 1700 EC Bags अधिकाई कार्य दर्शाया जाना परिलक्षित होता है। जिसकी पुष्टि प्रपत्र 17 एवं 24 में अंकित खपत क्रमशः 2763 अदद् एवं 2877 अदद् NC में अंतर से होती है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। (iii) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है। परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जांच किया जाना संभव नहीं हो सका है। उसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्नचिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत नहीं किए जाने के लिए दोषी हैं। उक्त आरोपों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-254 दिनांक-26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जांच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :- (i) विषयांकित स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य दिनांक-13.08.2016 से 14.08.2016 तक कराया गया था जिसमें दो संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 द्वारा कार्य कराया गया था। संबंधित अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.2016 को प्रमंडलीय गोदाम से अवर प्रमंडल को 15000 EC Bags एवं 6000 NC तथा दिनांक-13.08.2016 को 5000 EC Bags एवं 200 NC प्राप्त हुआ। इस प्रकार दिनांक-13.08.2016 तक अवर प्रमंडल को प्रमंडल से 20000 EC Bags एवं 800 NC प्राप्त हुआ था। अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.2016 को विषयांकित स्थल संबंधित संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 को क्रमशः 5000 एवं 10000 EC Bags तथा 200 एवं 300 NC निर्गत किया गया। दिनांक 13.08.2016 को पुनः संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह को 5000 EC Bags एवं 85 अदद् NC तथा रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 को 59 अदद् NC निर्गत किया गया।124 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 इस प्रकार संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह को दिनांक-13.08.2016 तक 10000 EC Bags एवं 285 अदद् निर्गत किया जा चुका था। आरोपी पदाधिकारी पर यह आरोप है कि दिनांक-13.08.2016 को संवेदक के पास मात्र 200 अदद् NC उपलब्ध रहने के बावजूद 246 NC कार्य का NR प्रतिनियुक्त किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित होता है। अवर प्रमंडलीय स्थल लेखा, हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-13.08.2016 तक संवेदक को 285 अदद् NC निर्गत किया जा चुका था। ऐसी परिस्थिति में दिनांक-13.08.2016 तक 246 अदद् NC कार्य का NR प्रतिवेदित किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित नहीं होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं होता है। (ii) आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेखित किया है कि विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में झांकी एवं स्लोपिंग बेड बार का कार्य कराया जा रहा था। दिनांक-18.08.2016 को निरीक्षण के क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त दो बिन्दु पर कार्य को बन्द कर दो अदद् अन्य बिन्दुओं पर Tenth निर्माण कार्य करने का आदेश दिया गया। इस प्रकार दिनांक-17.04.2016 को विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के अन्तर्गत ग्राम बलुआ में ही चार बिन्दुओं पर क्रमशः 24 अदद्, 08 अदद्, 35 अदद् एवं 25 अदद् अर्थात कुल 92 अदद् NC का कार्य सम्पन्न कर लेईंग पंजी में एक ही तिथि में अंकित किया गया। एक गांव के चार बिन्दुओं पर एक ही तिथि को बाढ़ संघर्षात्मक जैसे संवेदनशील कार्य कराया जाना एवं चारों बिन्दुओं पर कराये गये NC कार्य की अलग-अलग मात्रा को लेईंग रजिस्टर में अंकित किए जाने के कारण कराए गए कार्य को संदिग्ध मानना सही नहीं प्रतीत होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
(iii) आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान के साथ केन्द्रीय भंडार से संबंधित पंजी की छायाप्रति उपलब्ध कराया गया है। जिसमें जून 2016 से सितम्बर 2016 तक सामग्रियों के प्राप्ति एवं निर्गत आंकड़ा अंकित है। आरोपी पदाधिकारी पर यह आरोप है कि उड़नदस्ता द्वारा मांगे जाने पर अभिलेख में भंडार लेखा का मात्र Receipt भाग का हस्तलिखित ब्योरा उपलब्ध कराया गया। जबकि उन्हें विधिवत् संधारित किए गए भंडार लेखा जिस पर Receipt एवं Issue दोनों अंकित रहता है ससमय उपलब्ध कराना चाहिए था।
उड़नदस्ता द्वारा मांगे गए अभिलेखों/लेखाओं को पूर्णरूपेण उपलब्ध कराया जाना इनकी जिम्मेवारी थी, जिसका निर्वहन इनके द्वारा नहीं किया गया। अतः लेखाओं को विधिवत् नहीं किए जाने का इन पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होता है।
उक्त जाँच प्रतिवेदन के तकनीकी समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-687 दिनांक-19.05.2020 द्वारा सहमति/असहमति के बिन्दु पर श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।
श्री कुमार से प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई, जो निम्नवत् है :- असहमति के बिन्दु-1 :- BKG तटबंध के चेन सं0-694 से 696 स्थल पर वर्ष 2016 के दौरान कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु त्रुटिपूर्ण लेईंग रजिस्टर का संधारण किया जाने एवं लेईंग रजिस्टर में ओभर राईटिंग कर संदेहास्पद बनाए जाने से प्रक्रियात्मक त्रुटि परिलक्षित होता है।
असहमति के बिन्दु-2 ः- बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों को निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जांच किया जाना संभव नहीं हो सका है। इसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्नचिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत् नहीं किए जाने के लिए आप दोषी हैं।
असहमति के बिन्दु-1 में ओभर राइटिंग के संबंध में श्री कुमार ने स्वीकार किया है कि अत्यधिक कार्य के दबाव में भूलवश ऐसी प्रविष्टि कनीय अभियंता द्वारा हो गई होगी। इसे विभाग द्वारा प्रक्रियात्मक अनियमितता कहा गया जिसमें इनकी कोई गलत मंशा नहीं थी। अवर प्रमंडलीय लेखा एवं प्रमंडलीय लेखा के अवलोकन से निम्न तथ्य ज्ञात होता है। चूंकि प्राप्ति एवं निर्गत से संबंधित हस्त रसीद में किसी प्रकार का ओभर राइटिंग नहीं है तथा लेईंग पंजी के खपत सामग्री में कोई ओभर राइटिंग नहीं है। सिर्फ कनीय अभियंता से Miss of Pen के कारण लेईंग रजिस्टर के डाटा इन्डेक्स कॉलम में ओभर राइटिंग हो गई है। इसलिए इसे प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं माना जा सकता है।
आरोप सं0-3 के संबंध में कहा गया है कि भंडार लेखा में प्राप्ति तथा निर्गत सामग्रियों की विवरणी विधिवत संधारित दिखाया गया है। साक्ष्य के रूप में भंडार लेखा की छायाप्रति संलग्न। उक्त से स्पष्ट है कि भंडार लेखा का विधिवत् संधारण किया गया है।
श्री कुमार द्वारा प्राप्त जवाब की उक्त तकनीकी समीक्षोपरांत प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित नहीं अंकित किया गया है। अतएव श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध गठित आरोपों से संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा के संदर्भ में प्राप्त जवाब के तकनीकी समीक्षा के आलोक में आरोप अप्रमाणित होने की स्थिति में आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।125 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उक्त अनुमोदित निर्णय के आलोक में श्री शैलेन्द्र कुमार (ID-3803), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा संप्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-17/2017/701--श्री श्रीनिवास राम (ID-4629), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पदस्थापन अवधि में भोजपुर जिला के अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता के लिए निम्न आरोप प्रतिवेदित करते हुए गठित आरोप पत्र के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही विभागीय संकल्प ज्ञापांक-855, दिनांक-29.04.2019 द्वारा संचालित की गई। आरोप- श्री श्रीनिवास राम, सहायक अभियंता के पदस्थापन काल में भोजपुर जिला अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल-02, पटना द्वारा की गई। जाँच प्रतिवेदन के आलोक में की गई स्पष्टीकरण पर प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षोपरांत निम्न आरोप के लिए दोषी परिलक्षित होते है-
1. BKG तटबंध के चेन संख्या-695-696 स्थल पर वर्ष-2016 के दौरान कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संधारित लेईंग पंजी में विभिन्न तिथियों में प्राप्ति एवं निर्गत के अनुसार दिनांक-13.08.2016 को संवेदक के पास मात्र 200 अदद् NC उपलब्ध थे परन्तु उक्त तिथि को 246 अदद् NC उपलब्ध नहीं रहने के बावजूद भी NR प्रतिवेदित किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित होता है। साथ ही दिनांक-14.08.2016 को Over writing कर 13.08.2016 बनाते हुए 5000 अदद Ec Bags निर्गत किया जाना संदिग्ध प्रतीत होता है। इस प्रकार Extra reporting करने के कारण 46 अदद् NC तदनुसार 1150 अदद् Ec Bags के अधिकाई कार्य दर्शाया जाना परिलक्षित है जिसकी पुष्टि प्रपत्र-17 एवं 24 में अंकित खपत मात्रा क्रमशः 2783, 2877 NC के अन्तर से होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
2. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है। उसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान प्रदान पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत नहीं किए जाने के लिए दोषी है। उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-252, दिनांक-26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया है जिसमें निम्न मंतव्य अंकित किया गया है- (i) विषयांकित स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य दिनांक-13.08.2016 से 14.08.2016 तक कराया गया था, जिसमें दो संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 द्वारा कार्य कराया गया था। संबंधित अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.2016 को प्रमंडलीय गोदाम से अवर प्रमंडल को 15000 EC Bag एवं 6000 NC तथा दिनांक-13.08.2016 को 5000 EC Bag एवं 200 NC प्राप्त हुआ। इस प्रकार दिनांक-13.08.2016 तक अवर प्रमंडल को प्रमंडल से 20000 EC Bag एवं 800 NC प्राप्त हुआ था। अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.
2016 को विषयांकित स्थल संबंधित संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0लि0 को क्रमशः 5000 एवं 10000 EC Bag तथा 200 एवं 300 NC निर्गत किया गया। दिनांक-13.08.2016 को पुनः संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह को 5000 EC Bag एवं 85 अदद् NC तथा रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0लि0 को 59 अदद् NC निर्गत किया गया। इस प्रकार संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह को दिनांक-13.08.2016 तक 10000 EC Bag एव 285 अदद् निर्गत किया जा चुुका था।
आरोपी पदाधिकारी पर यह आरोप है कि दिनांक-13.08.2016 को संवेदक के पास मात्र 200 अदद् NC उपलब्ध रहने के बावजूद 246 अदद् NC कार्य का NR प्रतिनियुक्त किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित होता है।
अवर प्रमंडलीय स्थल लेखा, हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-13.08.2016 तक संवेदक को 285 अदद् NC निर्गत किया जा चुका था। ऐसी परिस्थिति में दिनांक-13.08.2016 तक 246 अदद् NC कार्य का NR प्रतिवेदित किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित नहीं होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकायी भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं होता है।126 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 (ii) आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान के साथ अवर प्रमंडल का माह अगस्त-2016 का स्थल लेखा की छायाप्रति उपलब्ध कराया गया है, जिसमें माह अगस्त-2016 मे कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक स्थलों से संबंधित संवेदक को निर्गत EC Bag एवं NC का आंकड़ा अंकित है जो हस्त पावती के अनुसार मिलता है।
माह अगस्त-2016 में प्रमंडलीय गोदाम से अवर प्रमंडल को प्राप्त सामग्र्री का आंकड़ा हस्त वावती कि अनुसार मिलता है। स्थल लेखा एवं हस्त पावती के मिलान में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है। अतः इन पर लगाया गया आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
उक्त जाँच प्रतिवेदनक के तकनीकी समीक्षोपरांत प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए निम्न असहमति के बिंदु पर विभागीय पत्रांक-689, दिनांक-19.05.2020 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। असहमति के बिंदु- (i) BKG तटबंध के चेन संख्या-694 से 696 स्थल पर वर्ष 2016 के दौरान कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु त्रुटिपूर्ण लेईंग रजिस्टर का संधारण किया जाने एवं लेईंग रजिस्टर में over writing कर संदेहास्पद बनाए जाने से प्रक्रियात्मक त्रुटि प्रमाणित परिलक्षित होता है।
(ii) BKG तटबंध के चेन संख्या-694 से 696 के बीच कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के लेईंग पंजी त्रुटिपूर्ण होने एवं संबंधित स्थल लेखा पंजी का ससमय विधिवत संधारण नहीं किए जाने का आरोप प्रमाणित परिलक्षित होता हैं। उक्त के आलोक में श्री श्रीनिवास राम द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा तकनीकी पदाधिकारी द्वारा कराई गई, जो निम्नवत् है- समीक्षा- (i) श्री श्रीनिवास राम, सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि कनीय अभियंता द्वारा कार्य कराने से पूर्व हस्त रसीद केे माध्यम से प्रमंडलीय गोदाम से विभिन्न तिथियों को सामग्री प्राप्त किया गया। पुनः विभिन्न संवेदको को हस्त रसीद के माध्यम से ही निर्गत किया गया। चूंकि प्राप्ति एवं निर्गत से संबंधित हस्त रसीद में किसी प्रकार का कोई ओभर राईटिंग नही है, केवल कनीय अभियंता से Miss of Pen के कारण लेईंग रजिस्टर के डाटा इन्डेक्स कॉलम मे over writing हो गई है, जबकि लेईंग पंजी के खपत सामग्री में कोई ओभर राइटिंग नही हुई है, जिससे सबकुछ सही रहने पर प्रक्रियात्मक नहीं माना जा सकता है।
(ii) इनके द्वारा कहा गया है कि उड़नदस्ता द्वारा कंडिका 5.7.0 एवं 5.7.3 से स्पष्ट है कि लेईंग रजिस्टर का अवलोकन कर निष्कर्ष के रूप मे स्थल लेखा के विधिवत संधारण पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया गया है, पर उड़नदस्ता द्वारा स्थल लेखा का अवलोकन नहीं किया गया है। भंडार लेखा का विधिवत संधारण इनके द्वारा किया गया है साथ ही स्थल लेखा का भी विधिवत संधारण किया गया है। उपरोक्त समीक्षा से स्पष्ट है कि असहमति के बिंदु-01 यथा वर्ष-2016 के दौरान कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु त्रुटिपूर्ण लेईंग रजिस्टर का संधारण किए जाने का प्रक्रियात्मक त्रुटि परिलक्षित नहीं होता है। असहमति केे बिंदु-02 यथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संबंधित स्थल लेखा पंजी का ससमय विधिवत संधारण किए जाने का आरोप प्रमाणित नहीं है। अतएव श्री श्रीनिवास राम, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित जवाब को तकनीकी समीक्षोपरांत स्वीकृत करते हुए प्रतिवेदित आरोपों को अप्रमाणित माना गया हैं।
अतः श्री श्रीनिवास राम, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, एकंगरसराय के विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में संचालित विभागीय कार्यवाही में समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं असहमति के बिंदु पर प्राप्त जवाब के तकनीकी समीक्षोपरांत जवाब को स्वीकृत करते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमादित निर्णय के आलोक में श्री श्रीनिवास राम (ID-4629), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, एकंगरसराय को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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30 मार्च 2022
सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-17/2017/702--श्री राजेश रंजन कुमार (आई0डी0-5334), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पद पर पदस्थापन अवधि में भोजपुर जिला के अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गयी अनियमितता के लिए निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-852 दिनांक-29.04.2019 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।127 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 आरोप :- श्री राजेश रंजन कमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल-2, पटना द्वारा कीं गई। जाँच प्रतिवेदन के आलोक में की गयी स्पष्टीकरण पर प्राप्त प्रत्युार की समीक्षोपरांत निम्न आरोपों के लिए दोषी हैं :- (i) BKG तटबंध के ग्राम बलूआ स्थल पर वर्ष 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संधारित लेईंग पंजी में दिनांक-16.08.2016 से 18.08.2016 एवं 21.09.2016 से 22.09.2016 तक कुल 409 अदद् NC एवं 10979 अदद् EC Bag का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। परन्तु दिनांक 17.08.2018 को लेईंग पंजी में 24 अदद्, 08 अदद्, 35 अदद् एवं 25 अदद् यानि 92 अदद् NC दर्शाया गया है। इसी प्रकार एक ही तिथि में एक ही स्थल पर एक ही कार्य मद का चार बार अंकित किया जाना कराए गए कार्य को संदिग्ध बनाता है। अतएव प्रथम अंकित 24 अदद् NC को छोड़कर शेष 68 अदद् NC तदनुसार 1700 EC Bag अधिकाई कार्य दर्शाया जाना परिलक्षित होता है। जिसकी पुष्टि प्रपत्र-17 एवं 24 में अंकित खपत क्रमशः 2763 अदद् एवं 2877 अदद् NC में अन्तर से होती है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। (ii) बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है। परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है। उसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गयी त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत् संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्नचिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत् नहीं किए जाने के लिए दोषी हैं। उक्त आरोप के लिए किए गए विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग का पत्रांक-250 दिनांक-26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें श्री राजेश रंजन कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :- (i) विषयांकित स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य दिनांक-13.08.2016 से 14.08.2016 तक कराया गया था जिसमें दो संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 द्वारा कराया गया था। संबंधित अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.2016 को प्रमंडलीय गोदाम से अवर प्रमंडल को 15000 EC Bag एवं 6000NC तथा दिनांक-13.08.2016 तथा दिनांक-13.08.2016 को 5000 EC Bags एवं 200 NC प्राप्त हुआ। इस प्रकार दिनांक-13.08.2016 तक अवर प्रमंडल को प्रमंडल से 2000 EC Bags एवं 800 NC प्राप्त हुआ था। अवर प्रमंडल के माह अगस्त 2016 के स्थल लेखा एवं हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-12.08.2016 को विषयांकित स्थल संबंधित संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह एवं मे0 रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 को क्रमशः 5000 एवं 10000 EC Bags तथा 200 एवं 300 NC निर्गत किया गया। दिनांक 13.08.2016 को पुनः संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह को 5000 EC Bag एवं 85 अदद् NC एवं रिगेन कंस्ट्रक्शन प्रा0 लि0 को 59 अदद् NC निर्गत किया गया। इस प्रकार संवेदक श्री रमेन्द्र सिंह के पास दिनांक-13.08.2016 तक 10000 EC Bag एवं 285 अदद् निर्गत किया जा चुका था। श्री कुमार पर आरोप है कि दिनांक-13.08.2016 को संवेदक के पास मात्र 200 अदद् NC उपलब्ध रहने के बावजूद 246 अदद् NC कार्य का एन0आर0 प्रतिनियुक्त किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित होता है। अवर प्रमंडलीय स्थल लेखा, हस्त पावती से स्पष्ट होता है कि दिनांक-13.08.2016 तक संवेदक को 285 अदद् NC निर्गत किया जा चुका था। ऐसी परिस्थिति में दिनांक-13.08.2016 तक 246 अदद् NC कार्य का एन0आर0 प्रतिवेदित किया जाना संवेदक को लाभ पहुँचाना परिलक्षित नहीं होता है। फलतः सरकारी राशि का अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं होता है। (ii) श्री कुमार द्वारा अपने बचाव बयान के साथ अवर प्रमंडल का माह अगस्त 2016 का स्थल लेखा की छायाप्रति उपलब्ध कराया गया है, जिसमें माह अगस्त 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक स्थलों से संबंधित संवेदक को निर्गत EC Bags एवं NC का आंकड़ा अंकित है, जो हस्त पावती के अनुसार मिलता है। माह अगस्त 2016 में प्रमंडलीय गोदाम से अवर प्रमंडल को प्राप्त सामग्री का आंकड़ा हस्त पावती के अनुसार मिलता है। स्थल लेखा एवं हस्त पावती के मिलान में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है। अतः इन पर लगाया गया आरोप-2 प्रमाणित नहीं है। उक्त मंतव्य की समीक्षा विभागीय तकनीकी समीक्षा पदाधिकारी द्वारा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त उक्त मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राजेश रंजन कुमार (आई0डी0-5334), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित माना गया है।128 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 श्री राजेश रंजन कुमार (आई0डी0-5334), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध गठित आरोपों को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए तकनीकी समीक्षोपरांत सरकार के स्तर से आरोपों को अप्रमाणित मानते हुए आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। जिसपर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश रंजन कुमार (आई0डी0-5334), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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गृह विभाग
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आदेश
6 मई 2022
सं॰ एल/एच॰जी॰-14-03/2022-4539--महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा का कार्यालय, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना के पत्रांक-2002, दिनांक 18.04.2022 द्वारा प्राप्त प्रस्ताव के आलोक में सुश्री स्नेही सोनल, परिवीक्ष्यमान जिला समादेष्टा, मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-180 एवं 196 के तहत दिनांक-10.05.2022 से 07.06.2022 तक कुल 29 (उनतीस) दिनों का असाधारण अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।
------ अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (योजना एवं विकास विभाग) ------ कार्यालय-आदेश 9 मई 2022
सं॰ का॰आ॰सं॰-अ॰सां॰नि॰/स्था03-05/2021-168--अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना के का॰आ॰सं॰-113 ज्ञापांक-580 दिनांक-30.03.2022 द्वारा नवनियुक्त अवर सांख्यिकी पदाधिकारी/प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (कनीय सांख्यिकी सहायक/प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक/अन्वेषक) को निदेशालय मुख्यालय, बिहार, पटना में योगदान के तिथि से योगदान स्वीकृत करते हुए उनके नाम के सम्मुख कॉलम 5 में अंकित कार्यालय में अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है :-
| क्र॰ | नाम/जन्म तिथि | ग ृह जिला | निदेशालय मुख्यालय में योगदान की तिथि | पदस्थापित कार्यालय |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | श्री रणधीर कुमार 01.10.1977 | सारण | 28.04.2022 (पूर्वाह्न) | लालगंज प्रखंड, वैशाली |
| 2. | श्री शैलेश कुमार सुमन 13.02.1984 | नवादा | 06.05.2022 (पूर्वाह्न) | चण्डी प्रखंड, नालन्दा |
| 3. | श्री मुकुल कुमार वर्मा 30.11.1980 | गया | 09.05.2022 (पूर्वाह्न) | हिसुआ प्रखंड, नवादा |
| 4. | श्री रणजीत कुमार 15.12.1975 | गया | 09.05.2022 (अपराह्न) | उप निदेशक(सां॰) कार्यालय, गया |
2. उपर्युक्त नवनियुक्त अवर सांख्यिकी पदाधिकारी/प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (कनीय सांख्यिकी सहायक/प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक/अन्वेषक) का योगदान कॉलम-4 में अंकित तिथि से स्वीकृत किया जाता है। उनके वेतनादि का भुगतान योगदान स्वीकृति की तिथि से उसी कार्यालय से किया जायेगा जहॉं वे पदस्थापित है। 3. पदस्थापन स्थान पर योगदान देने/प्रभार ग्रहण हेतु कोई यात्रा/दैनिक भत्ता देय नहीं होगा। 4. पूर्व वृत्त सत्यापन (Police verification) प्रतिकूल पाये जाने पर यह नियुक्ति तुरंत समाप्त कर दी जायेगी। 5. मूल प्रमाण-पत्र जॉंच के क्रम में अवैध पाये जाने की स्थिति में नियुक्ति रद्द कर दी जायेगी। 6. नवनियुक्त अवर सांख्यिकी पदाधिकारी/प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (कनीय सांख्यिकी सहायक/प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक/अन्वेषक) जो वर्तमान में किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/सरकारी उपक्रम में कार्यरत् है/थे, उन्हें129 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 प्रभार ग्रहण के समय संबंधित विभाग का त्याग-पत्र स्वीकृति/कार्य विमुक्ति/विरमन आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संबंधित कार्यालय के नियंत्री पदाधिकारी इसकी जॉंच कर आश्वस्त हो लेने के पश्चात ही प्रभार ग्रहण करायेंगे। 7. यदि इस कार्यालय आदेश में कोई भूल अथवा टंकन आदि की त्रुटि परिलक्षित हो तो सीधे संयुक्त निदेशक (प्रशासन), अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार, पटना को आवेदन संबोधित कर शुद्धि पत्र निर्गत करने का अनुरोध किया जाय।
8. उपर्युक्त कर्मियों को निदेश दिया जाता है कि वे अविलंब अपने पदस्थापन स्थान पर अपना कार्यभार ग्रहण कर लेंगे तथा अनुपालन प्रतिवेदन उचित माध्यम से निदेशालय, मुख्यालय, बिहार, पटना को भेज देगें।
9. संबंधित पदाधिकारियों से अनुरोध है कि वे अपने कार्यालय में पदस्थापित कर्मियों की योगदान की स्वीकृति स्वयं पूर्णरूपेण संतुष्ट होकर करेंगे, तथा योगदान प्रतिवेदन निदेशालय को भेजना सुनिश्चित करेंगे।
10. संबंधित नवनियुक्त अवर सांख्यिकी पदाधिकारी/प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (कनीय सांख्यिकी सहायक/ प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक/अन्वेषक) अपने पदस्थापन स्थान पर 3 (तीन) कार्य दिवस के अंदर प्रभार ग्रहण करना सुनिश्चित करेंगे।
11. पदस्थापन आदेश के अनुपालन में किसी प्रकार की कोताही या विलम्ब अनुशासनहीनता मानी जायेगी। ह॰/-
आदेश से, बैद्यनाथ यादव, निदेशक।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 8—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
130 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
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सूचना ———
No. 521---I, VARUN Kumar S/o Umesh Prasad R/o Bihari Kunj, Makhiana Kuan Road, Patna-4 declare that vide affidavit no. 490 dated 02.03.2022 shall be known Vaarun Kumaar.
VARUN Kumar.
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सं0 522---मैं, संध्या किरण, पुत्री-राम दास साव, पत्नी-अशोक कुमार आर्या, पता-शान्ति कुंज, एस0बी0आई0 कॉलोनी रोड, शान्ति नगर, दानापुर, दीघा, पटना-800012, शपथपूर्वक मैं आज पहचान पत्र के अनुसार मेरा नाम संध्या आर्या के नाम से जानी जाऊँगी। शपथपत्र-7605/02.04.2022.
संध्या किरण।
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No. 528---I, T C Venkataramana S/o T R Chalapathy, Road No. 14, House No.-61, Vijayvilla, S. K. Nagar, Kidwaipuri, Patna, Pin-800001 declare vide affidavit No. 8936 dated 5.5.22 that in my Aadhar Card issued by my name has been wrongly mentioned as Venkataramana T C My correct name is T. C. Venkataramana.
T C Venkatataramana.
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सं0 547---मैं, सृष्टि राज, पिता-श्री अशोक कुमार शर्मा, माता-रेखा कुमारी, पता-202/ए, राजपति अपार्टमेंट, मजिस्ट्रेट कॉलोनी मोड़, आशियाना रोड, थाना-राजीव नगर, पटना-800025, बिहार, शपथ-पत्र संख्या-6854, दिनांक 19.04.2022 के आलोक में अब सृष्टि राज शर्मा के नाम से जानी एवं पहचानी जाऊँगी यह सभी कार्य के लिए मान्य होगा।
सृष्टि राज। No. 547---I, SHRISTY RAJ, D/o-Ashok Kumar Sharma & Rekha Kumari, R/o-202/A, Rajpati Appt. Ashiyana Road, Magistrate Colony More, P.S.-Rajiv Nagar, Patna-800025 (Bihar), Affidavit No. 6854 on 19.04.2022 to add Surname Sharma in my name all purpose as SHRISTY RAJ SHARMA.
SHRISTY RAJ.
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No. 548---I, ANSHU D/o Ram Prakash Bhagat R/o Flat no. 306 Mandovi Apartment, Khajpura, PS- Hawaiadda, PO-B.V. College, Patna vide affidavit no. 18393 dated 27.11.21 shall be known as Anshu Prakash.
ANSHU.
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No. 549---I Avinash Kumar S/o Nagendra Kumar Jha resident Of Bahadurpur Patna have changed my name as Avinash Jha vide affidavit no. 49/7.02.2022 sworn before notary C. B. Pd. at Patna.
Avinash Kumar.
131 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022सं0 550---मैं, मो0 जफर इमाम, पिता-स्व0 अजफर आलम, पता-रोड नं0-6-ए, राजेन्द्र नगर, पटना-800016, बिहार शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि शपथ पत्र संख्या-62 दिनांक 13.01.2022 यह कि जफर इमाम चौधरी के जगह पर मो0 जफर इमाम के नाम से भविष्य में सभी कार्यों के लिए जाना एवं पहचाना जाउँगा।
मो0 जफर इमाम। No. 550---I, MD. ZAFAR IMAM, S/o Late Azfar Alam, R/o Road No. 6-A, Rajendra Nagar, Patna-800016, Bihar do hereby solemnly affirm and declare vide affidavit No. 62 dated 13.01.2022 that my name is Md Zafar Imam in place of Zafar Imam Choudhary for all future purposes.
MD. ZAFAR IMAM.
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 8—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
132 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 08/आरोप-01-86/2017, सा॰प्र॰-3980 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 15 मार्च 2022 श्री सुरेश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1369/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई के विरूद्ध दशहरा एवं मुहर्रम, 2017 के अवसर पर विधि व्यवस्था संधारण में लापरवाही बरते जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी, जमुई के पत्रांक-1339 दिनांक 04.11.2017 द्वारा आरोप प्रतिवेदित करते हुए स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया। उक्त क्रम में जिला पदाधिकारी, जमुई से श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र की माँग की गयी, परन्तु स्मारित किये जाने के बावजूद जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहा। जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहने के फलस्वरूप उनके द्वारा प्रतिवेदित आरोप/अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोंपरांत विभागीय पत्रांक-16142 दिनांक 28. 11.2019 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जिसके क्रम में श्री प्रसाद द्वारा अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-149-2 दिनांक 14.12.2019) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा लगाये गये आरोपों को निराधार बताते हुए आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-966 दिनांक 20.01.2020 द्वारा जिला पदाधिकारी, जमुई से उनके स्पष्टीकरण पर मंतव्य की माँग की गयी। स्मारोपरांत मंतव्य अप्राप्त रहा। श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पत्र एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9673 दिनांक 13.10.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के पत्रांक-262 दिनांक 09.09.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11672 दिनांक 04.10.2021 द्वारा श्री प्रसाद से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं उक्त जांच प्रतिवेदन पर श्री प्रसाद से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत आरोपो को प्रमाणित पाते हुए श्री प्रसाद को विभागीय संकल्प ज्ञापांक-15068 दिनांक 15.12.2021 द्वारा निम्न दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गयाः- (क) निन्दन (वर्ष 2017-2018)। (ख) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त अधिरोपित दंड पर पुनर्विचार हेतु श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (पत्रांक-237-2 दिनांक 02.02.2022) समर्पित किया गया। जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि विभागीय पत्रांक 4162 दिनांक 25.03.2021 की कंडिका-4(VII) के आलोक में आरेापी सरकारी सेवक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा अभिकथन/मंतव्य दिये जाने का प्रावधान नहीं है, फिर भी संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके स्पष्टीकरण पर उपस्थापन पदाधिकारी का मंतव्य प्राप्त कर आरोपों को प्रमाणित करार दिया गया है, जो नियमानुकूल नहीं है। मा0 सर्वोच्च न्यायालय के आदेश AIR 1979 SC 1022(192) Union of India V/s J. Ahmad मेें स्पष्ट आदेश के दृृष्टिगत133 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में अधिरोपित दंड नियमानुकूल नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में चार में से दो ही आरोप को प्रमाणित किया गया है, दो आरोप के संबंध में मंतव्य नहीं दिया गया है। श्री प्रसाद से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया है तथा उनके द्वारा कोई भी ऐसा तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर विचार किया जा सके।
श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य में उल्लेख किया गया है कि ''दिनांक 30.09.2017 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस में अनुमंडल पदाधिकारी की उपस्थिति के बावजूद घटना घटित होने पर आरोपी पदाधिकारी का वक्तव्य कि 'उक्त स्थल पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी द्वारा किसी भी तरह के तनाव की बात नहीं बतायी गयी थी, घटना स्थल पर पूर्व में किसी प्रकार की घटना घटित नहीं हुई थी, घटना स्वतः स्फूर्त थी', दर्शाता है कि श्री प्रसाद द्वारा कार्य में बरती गयी लापरवाही को छिपाने का प्रयास है। उनकी उपस्थिति में उक्त घटना घटित होना, जुलूस के पूर्व पर्याप्त तैयारी में कमी स्पष्ट परिलक्षित करता है। दिनांक 30.07.2017 की रात्रि में हुई घटना के पश्चात उच्चाधिकारी द्वारा जमुई मुख्यालय में कैम्प किया गया, जिनके दिशा-निर्देश पर विधि-व्यवस्था संधारण संबंधी अग्रेत्तर कार्रवाई की गयी, जबकि समाहरणालय, जमुई द्वारा निर्गत संयुक्तादेश में व्यवस्था का सम्पूर्ण प्रभार अनुमंडल पदाधिकारी को दिया गया था। पर्व के अवसर पर व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी आरोपी पदाधिकारी की थी।
दं॰प्र॰सं॰-116(3) के तहत नोटिस निर्गत करने के बाद सदर थाना क्षेत्र में निरोधात्मक कार्रवाई हेतु 159 व्यक्तियों की सूची में सिर्फ 47 व्यक्तियों के विरूद्ध ही दं॰प्र॰सं॰-116(3) के तहत बंधपत्र दाखिल किया गया। दं॰प्र॰सं॰-107 के तहत निर्गत नोटिस का तामिला शत-प्रतिशत कराने के संबंध में दिनांक 20.09.2017 को आयोजित शांति समिति की बैठक में जिला पदाधिकारी, जमुई द्वारा सभी थानाध्यक्ष को निदेशित किया गया, परन्तु श्री प्रसाद द्वारा अपने स्तर से तामिला के लिए थानाध्यक्ष को लिखित में निदेश देने संबंधी कोई प्रमाण नहीं दिया गया, न ही इसकी सूचना लिखित में संबंधित वरीय पदाधिकारी को ही दी गयी। इस तरह इनके कार्यो में लापरवाही स्पष्ट परिलक्षित होती है। दिनांक 30.09.2017 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान अप्रिय घटना घटित हुई और अगले दिन मुहर्रम पर्व मनाया जाना था, जिसके मद्देनजर विधि-व्यवस्था के संबंध में विशेष तैयारी की आवश्यकता थी। यदि आसूचना संकलन कर समय पर तैयारी कर ली जाती तो दिनांक 01.10.2017 एवं 02.10.2017 को मुहर्रम पर्व के दौरान कोई अप्रिय घटना घटित नहीं होती। आरोपी पदाधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार की तैयारी संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है तथा ये कहना है कि वरीय पदाधिकारी के दिशा-निर्देश में विधि-व्यवस्था संधारण किया गया, उनकी उपस्थिति में अपनी जिम्मेवारी से बचने का प्रयास है, जबकि विधि-व्यवस्था संधारण की सारी जिम्मेवारी आरोपी पदाधिकारी की ही थी। छठ पर्व के अवसर पर खैरा थानान्तर्गत भीमाईन एवं चौकीटाँड़ में दोनों समुदाय के बीच रास्ता संबंधी उत्पन्न विवाद के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का वक्तव्य कि घटना के संबंध में किसी तरह की कोई सूचना प्राप्त नहीं थी, जबकि दुर्गा पूजा एवं मुहर्रम पर्व के अवसर पर अप्रिय घटना घटित हो चुकी थी, फिर भी श्री प्रसाद द्वारा ससमय आसूचना संग्रहण नहीं कर पाना उनके प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा पर्व-त्यौहार के अवसर पर क्षेत्रीय भ्रमण कर स्थिति पर सतत् निगरानी रखने के लिए आवश्यक पूर्वोपाय नहीं किया जाना, किसी अन्य श्रोत से संभावित घटना की जानकारी प्राप्त होने की आशा रखना, आसूचना संग्रहण के उद्देश्य तथा उसकी प्र—ति से अनभिज्ञता दर्शाता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुरेश प्रसाद, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1369/2011 तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, जमूई, सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सुपौल का पुनर्विचार अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुए पूर्व के अधिरोपित दंड यथा ''(क) निन्दन (वर्ष 2017-2018) (ख) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' को पूर्ववत् बरकरार रखा जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
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सं0 08/आरोप-01-67/2017,सा॰प्र॰-4267
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17 मार्च 2022
श्री संतोष कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-522/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भोजपुर के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता यथा भोजपुर जिलान्तर्गत अधिप्राप्ति वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में ससमय आर॰ओ॰ के विरूद्ध सी॰एम॰आर॰ का उठाव नहीं कराने, खाद्यान्न का उचित रख-रखाव नहीं रहने के कारण चावल की गुणवत्ता हृास होने से निगम को आर्थिक क्षति होने एवं पर्यवेक्षण का अभाव संबंधी आरोपों के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक-3634 दिनांक 10.09.2020 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त आरोप पत्र को विभागीय स्तर पर पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-1485 दिनांक 03.02.2021 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा कंडिकावार स्थिति स्पष्ट करते हुए134 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 आरोप से इनकार किया गया। तदुपरांत श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-6566 दिनांक 05.07.2021 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मंतव्य की माँग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक-307 दिनांक 31.01.2022 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कॉपोरेशन लि॰, पटना के मंतव्य से सहमति व्यक्त की गयी एवं श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उक्त स्पष्टीकरण पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कॉपरोरेशन लि॰ पटना द्वारा मंतव्य में अंकित किया गया है कि गोदाम का कस्टोडियन सहायक प्रबंधक होते है, परन्तु जिला प्रबंधक अपने दायित्वों से बच नहीं सकते। जिला पदाधिकारी, भोजपुर के आदेश के आलोक में अपर समाहर्त्ता, भोजपुर द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर आरोप पत्र का गठन किया गया है। जाँच प्रतिवेदन में ंअनुशंसा की गयी थी कि ''पूरे गोदाम के निरीक्षण के क्रम में यह उजागर हुआ कि तत्कालीन जिला प्रबंधकों द्वारा न तो उक्त गोदाम का निरीक्षण किया गया और न ही CMR के उठाव हेतु कोई प्रयास किया गया। इतना ही नहीं गोदाम में बिखरे पड़े चावल के बोरे में पैक कर रखवाने हेतु जिला प्रबंधक द्वारा कोई उपाय ही नहीं किया गया। फलतः CMR में धूलकण और कीड़ा होने के लिए गोदाम प्रभारी के साथ-साथ तत्कालीन जिला प्रबंधक भी संयुक्त रूप से पूर्णतः जिम्मेवार है।'' श्री कुमार द्वारा अपने उपर लगाये गये आरोपों के लिए निगम मुख्यालय एवं अन्य पदाधिकारियों पर दोषारोपण किया जा रहा है, जो कथन सत्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये गये आरोप स्पष्ट एवं नियमानुकूल है एवं आरोपित पदाधिकारी का कथन असत्य है। अतएव उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री संतोष कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-522/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भोजपुर का स्पष्टीकरण अस्वी—त करते हुए निगम तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री कुमार द्वारा पर्यवेक्षण के अभाव/बरती गयी लापरवाही के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के संगत प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित निम्नांकित दंड उन्हें अधिरोपित/संसूचित किया जाता है :- (i) दो वर्षो से अनधिक अवधि के लिए, संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतमान में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
------ सं0 08/आरोप-01-49/2016 सा॰प्र॰-4599 ------ 26 मार्च 2022 श्री विमल कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1029/2011 के विरूद्ध भूमि सुधार उप समाहर्त्ता-सह-जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, गोपालगंज के पदस्थापन काल में विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भुगतान हेतु प्राप्त राशि को व्यय नहीं करने, भू-अर्जन पदाधिकारी के रूप में अधिसूचित होने के बावजूद भू-अर्जन संबंधी कार्यो में रूचि नहीं लेने एवं विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन के समीक्षोपरांत त्वरित गति से कार्य किये जाने का निदेश देने के पश्चात भी भू-अर्जन संबंधी कार्यो में किसी प्रकार की अपेक्षित प्रगति नहीं होने संंबंधी आरोप पत्र जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के पत्रांक 159 दिनांक 19.01.2017 द्वारा कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त प्रतिवेदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-2253 दिनांक 23.02.2017 द्वारा स्पष्टीकरण माँग की गयी। उक्त के क्रम में श्री सिंह द्वारा अपना स्पष्टीकरण पत्रांक 219 दिनांक 27.03.2017 समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 4849 दिनांक 24.04.2017 द्वारा श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के पत्रांक 4175 दिनांक 23.12.2017 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें उनके स्पष्टीकरण को विचारणीय एवं स्वीकार करने योग्य बताया गया। समीक्षोपरांत उक्त प्रतिवेदित आरोप पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र (साक्ष्य सहित) की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 6299 दिनांक 30.06.2021 द्वारा श्री सिंह से पुनः स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री सिंह का स्पष्टीकरण पत्रांक 393 दिनांक 24.07.2021 प्राप्त हुआ। श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से प्राप्त मंतव्य की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 8545 दिनांक 10.08.2021 द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 702 दिनांक 01.10.2021 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जिला पदाधिकारी गोपालगंज से प्राप्त मंतव्य पर सहमति व्यक्त किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, गोपालगंज तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती गयी। विभिन्न कार्यो के बोझ होने के कारणों का उल्लेख करते हुए भू-अर्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में गति नहीं पकड़ने एवं एक बड़ी राशि मुआवजा भुगतान हेतु लंबित रहना135 (cid:464)बहार गजट, 11 मई 2022 अपने आप में आरोपित पदाधिकारी की लापरवाही एवं सौपे गये दायित्वों के निर्वहन में अनदेखी करने के आरोप को प्रमाणित करता है। श्री सिंह ने अपने स्पष्टीकरण में अधीनस्थ कर्मियों की शिथिलता एवं स्वेच्छाचारिता को बचाव का आधार बनाया है, जो मान्य नहीं है क्योंकि ऐसे अधीनस्थ कर्मियों के विरूद्ध उन्होंने कोई अनुशासनिक कार्रवाई भी नहीं की। यह आरोपी पदाधिकारी की ही प्रशासनिक विफलता कही जाएगी। भूधारियों का भुगतान नहीं होने के कारण सरकार की कई योजनाओं का कार्य प्रभावित हुआ। इनकी शिथिलता एवं कर्त्तव्यहीनता के कारण समय पर राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण पथों का निर्माण नहीं हो सका। अतः श्री सिंह का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।
अतएव उनके विरूद्ध लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता का आरोप प्रमाणित होता है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री विमल कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1029/2011 तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता-सह-जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के संगत प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :- (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2015-16) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
------ सं0 08/आरोप-01-13/2021, सा॰प्र॰-4604 ------ 26 मार्च 2022 पुलिस उप महानिरीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के पत्रांक-5894 दिनांक 19.08.2021 द्वारा सूचित किया गया कि श्री सुनील कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-789/19, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, डिहरी, रोहतास (सम्प्रति निलंबित) के विरूद्ध अपने सेवा काल में वैध आय से अधिक परिसम्पति अर्जित करने के आरोप में आर्थिक अपराध इकाई, थाना कांड सं॰-12/21 दिनांक 11.08.2021 दर्ज किया गया है। श्री सिंह के विरूद्ध लोक सेवक के रूप में अपने सेवाकाल में ंपद का दुरूपयोग कर अवैध एवं भ्रष्ट तरीके से अपनी ज्ञात/वैध आय के श्रोत से 1,22,74,000/-रू॰ अधिक की परिसम्पत्ति अपने एवं अपनी पत्नी श्रीमती श्वेता कुमारी तथा अन्य लोगों के नाम पर अर्जित करने का आरोप प्रतिवेदित है, जो उनके ज्ञात/वैध आय से करीब 77% अधिक है। उक्त आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-10963 दिनांक 21.09.2021 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जिसके क्रम में श्री सिंह का स्पष्टीकरण दिनांक 23.02.2022 प्राप्त हुआ। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप गम्भीर प्र—ति के है। आरोपों की गम्भीरता को देखते हुए इसकी वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी। अतएव श्री सुनील कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-789/19 (619/11) सम्प्रति निलंबित (मुख्यालय, आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना का कार्यालय) के विरूद्ध गठित उक्त आरोपों की विस्तृत जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत कराने का निर्णय लिया गया है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना तथा प्रस्तुतीकरण/उपस्थापन पदाधिकारी आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा नामित कोई वरीय पदाधिकारी होगें। श्री सिंह से अपेक्षा की जाती है वे अपना बचाव बयान/पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखेंगे एवं जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दे, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।