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;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
30 ;बपकरू91द्ध 1944 ;0द्ध
(0 990) ए ए 21 ;बपकरू224द्ध 2022
सं॰ 2/आरोप-01-16/2015-सा0प्र0/18304
सामान्य प्रषासन विभाग
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ladYi
13 अक्तूबर 2022
श्री चन्द्रशेखर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 745/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास के विरूद्ध अपने उारदायित्वों का निर्वहन नहीं करने, भ्रामक एवं अस्पष्ट प्रतिवेदन प्रेषित कर उच्चाधिकारियों को भ्रमित करने तथा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, रोहतास के पत्रांक 853 दिनांक 15.04.2015 द्वारा आरोप-पत्र गठित कर उपलब्ध कराया गया। विभागीय पत्रांक 7125 दिनांक 15.05.2015 द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री झा के पत्रांक 2938 दिनांक 23.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री झा के स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 16892 दिनांक 07.12.2015 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 211 दिनांक 15.01.2020 द्वारा श्री झा के स्पष्टीकरण पर राज्य खाद्य निगम से प्राप्त मंतव्य सहित विभागीय मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री झा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं माना गया।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा विभागीय मंतव्य की समीक्षोपरान्त श्री झा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4345 दिनांक 28.04.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 716/स्था0 दिनांक 08.07.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप संख्या-01 को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-02 को अंशतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। 2 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू224द्ध 2022 ➢ धान की खरीदारी का कार्य दिनांक 15.04.2014 को समाप्त हो चुका था। निगम मुख्यालय के पत्रांक 4165 दिनांक 03.05.2014 के माध्यम से बिहार प्रदेश जनता दल का परिवाद-पत्र प्राप्त हुआ। अतएव अधिप्राप्ति धान की गुणवत्ता जाँच हेतु FCI से पत्राचार करने का निदेश प्रबंध निदेशक द्वारा दिये जाने पर FCI से अनेकों पत्राचार के बावजूद भी असहयोगात्मक रवैये की जानकारी देने पर प्रबंध निदेशक महोदय द्वारा अधिप्राप्ति धान के गुणवत्ता की जाँच CMR गुणवत्ता नियंत्रकों से कराने का निदेश दिया गया।
➢ CMR गुणवत्ता नियंत्रकों द्वारा अधिप्राप्ति धान के गुणवत्ता की जाँच कराई गई। निगम कार्यालय का पत्रांक 1337 दिनांक 13.06.2014 द्वारा प्रबंध निदेशक महोदय को जाँच प्रतिवेदन भेजते हुए निदेश मांगा गया। अचानक स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण वे दिनांक 17.07.2014 से चिकित्सा कराने हेतु अवकाश में प्रस्थान कर गये। उनके उत्तरवर्ती जिला प्रबंधकों द्वारा निगम कार्यालय के निदेशानुसार क्रय केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध वैधानिक/विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की गई।
➢ ''CMR गुणवत्ता नियंत्रकों'' द्वारा अकोढ़ीगोला क्रय केन्द्र में क्रय किये गये धान की गुणवत्ता को निर्धारित मापदण्ड से निम्न स्तर की पाये जाने पर मेरे द्वारा कार्रवाई नहीं किये जाने का एक मात्र कारण यह है कि खराब स्वास्थ्य के कारण मैं दिनांक 17.07.2014 से ही अवकाश में प्रस्थान कर गया एवं एक लम्बी अवधि के बाद अवकाश से लौटने के बाद मैंने पुनः रोहतास जिला प्रबंधक के रूप में जाने के बाद उत्तरवर्ती जिला प्रबंधकों द्वारा क्रय केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध वैधानिक/विभागीय कार्रवाई की गई।
श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री झा के लिखित अभिकथन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री झा को जिला प्रबंधक होने के नाते यह सम्पूर्ण जिम्मेवारी थी कि अच्छी गुणवाा के धान क्रय हो एवं ससमय अधिप्राप्ति की गयी धान को मिलिंग हेतु मिलर को उपलब्ध कराया जाय। अकोढ़ीगोला क्रय केन्द्र पर निम्न गुणवाा के धान के खरीदारों की सूचना प्राप्त होने के बावजूद भी श्री झा द्वारा इसे नहीं रोका गया तथा इसे ससमय जाँच नहीं कराया गया, जिसके कारण निम्न गुणवाा का धान क्रय करने का क्रम जारी रहा। श्री झा द्वारा जो धान मानक के अनुरूप थे, उसे भी अस्पष्ट एवं भ्रामक प्रतिवेदन भेजकर सम्पूर्ण धान निम्न गुणवाा को बताकर मिलरों को उपलब्ध नहीं कराया गया। इस प्रकार अकोढ़ीगोला क्रय केन्द्र पर निम्न गुणवाा के धान क्रय की सूचना के बावजूद भी आरोपित पदाधिकारी श्री झा द्वारा संबंधित क्रय केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी, जिससे निगम को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। श्री झा का यह आचरण एक वरीय पदाधिकारी के दायित्वों के प्रति लापरवाही, र्काव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है, जिसके कारण सरकारी राशि की हानि हुई। श्री झा का यह —त्य आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक श्री चन्द्रशेखर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 745/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास सम्प्रति बन्दोवस्त पदाधिकारी, मधेपुरा के लिखित अभिकथन को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं (ii) दो वर्षों से अनाधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दंड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री चन्द्रशेखर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 745/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास सम्प्रति बन्दोवस्त पदाधिकारी, मधेपुरा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में प्रावधानों के तहत निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15),
(ii) दो वर्षों से अनाधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में
निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दंड।
आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में
प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, सरकार के अवर सचिव।