िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 2 अग्रहायण 1944 (श0) सं(cid:201)या 47 पटना, बुधवार, ———————— 23 नवम्बर 2022 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-26 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 27-28 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 29-29 पूरक
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पूरक-क
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2 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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पथ निर्माण विभाग
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अधिसूचनाएं
14 जुलाई 2022
सं॰ प्र॰2/स्था॰-नियुक्ति-01-01/2021 (खंड संचिका)-3697(s)--पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या-368 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-369 (एस), दिनांक 03.02.2022 द्वारा सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर नियुक्ति के पश्चात विभाग में योगदान करने वाले निम्नांकित-6 सहायक अभियंताओं को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-6 में वर्णित स्थान पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है :-
| क्र॰ सं॰ | अनुक्रमांक | सहायक अभियंता का नाम, | जन्मतिथि | ग ृह जिला | प्रस्तावित पदस्थापन का स्थान |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 | 222457 | श्री निलेश कुमार सिंह | 12.12.1995 | गया | राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मोतिहारी -2, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी। |
| 2 | 200256 | श्री विनय केसरवानी | 23.05.1994 | प्रतापगढ़ (उ॰प्र॰) | सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, मधेपुरा, पथ प्रमंडल, मधेपुरा । |
| 3 | 207351 | श्री विवेक कुमार | 17.04.1991 | वैशाली | सहायक अभियंता,पथ अवर प्रमंडल सं0-2, सहरसा, पथ प्रमंडल, सहरसा। |
| 4 | 221834 | श्री रंजन किशोर | 12.12.1994 | बक्सर | सहायक अभियंता (अनुश्रवण)-1, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। |
| 5 | 220229 | श्री सौरभ राय | 20.12.1992 | उत्तर प्रदेश | प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, मोतिहारी। |
| 6 | 224254 | श्री दीप्ति झा | 26.10.1994 | मधुबनी | सहायक अभियंता (अनुश्रवण)-2, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। |
अन्य अधिसूचना/कार्यालय आदेश/निदेश विलोपित समझे जायेंगे।
3. उक्त सभी नव नियुक्त सहायक अभियंताओं को पदस्थापित स्थान का प्रभार ग्रहण करने की तिथि से वेतनादि देय होगा।
4. पदस्थापित स्थान पर योगदान देने/प्रभार ग्रहण हेतु कोई यात्रा/दैनिक भत्ता देय नहीं होगा। 5. पूर्व वृत सत्यापन (पुलिस भेरिफिकेशन) प्रतिकूल पाये जाने पर अस्थायी नियुक्ति तुरन्त समाप्त कर दी जायगी।
6. मूल प्रमाण-पत्र जाँच के क्रम में अवैध पाये जाने की स्थिति में नियुक्ति रद्द कर दी जायगी। 7. नव नियुक्त ऐसे सहायक अभियंता (असैनिक) जो वर्तमान में यदि किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/सरकारी उपक्रम में कार्यरत है, उन्हें प्रभार ग्रहण के समय संबंधित विभाग का त्याग पत्र/ विरमन आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
8. यदि इस अधिसूचना में कोई भूल अथवा टंकण आदि की त्रुटि परिलक्षित हो तो सीधे उप सचिव (प्र॰को॰), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को आवेदन संबोधित कर शुद्धि पत्र निर्गत करने का अनुरोध किया जाय।
9. (क) संबंधित नव नियुक्त सहायक अभियंता अपने पदस्थापित स्थान पर अविलंब प्रभार ग्रहण करेंगे।3 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 (ख) पदस्थापित स्थान पर प्रभार मिलने में अगर कोई कठिनाई हो तो विभागीय उप सचिव (प्र॰को॰) से सीधे सम्पर्क स्थापित कर वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत करायेंगे।
(ग) इन पदाधिकारियों को पदस्थापन जहाँ किया जा रहा है, उन प्रमंडल/अंचलों के प्रभारी कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता यह सुनिश्चित करेंगे कि पदस्थापित सहायक अभियंता को तत्काल प्रभार दिलाया जाय। (घ) पदस्थापन आदेश के अनुपालन में किसी प्रकार की कोताही या विलंब अनुशासनहीनता मानी जायगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।
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14 जुलाई 2022
सं0 1/स्था॰ (यांत्रिक)-01/2020-3710(s)--कार्यपालक अभियंता, यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, भागलपुर को अपने कार्यो के अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता, कर्मशाला यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, खगड़िया के रूप में कार्य करने के लिए अगले आदेश तक के लिए प्राधिकृत किया जाता है।
आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।
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25 जुलाई 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-मुक॰-37/2018-3830(s)--श्री देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, दरभंगा से प्राप्त प्रशासनिक अनियमितता/वित्तीय अनियमितता बरतने संबंधी प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय संकल्प संख्या- 5681 (एस) दिनांक-14.09.1993 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। श्री सिन्हा, सहायक अभियंता की सेवानिवृति दिनांक-30.06.2001 के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही संकल्प ज्ञापांक- 7169 (एस) दिनांक- 13.10.2001 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत् सम्परिवर्तित किया गया।
2. श्री सिन्हा, सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान ही कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, जयनगर के आदेश संख्या- 598 दिनांक- 30.07.1996 द्वारा इस आशय की सूचना दी गयी कि अंकेक्षण दल द्वारा दिये गये अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या- 18 वर्ष 1995-96 के भाग- 2 की कंडिका-1 के निष्कर्ष के आधार पर श्री सिन्हा को अग्रिम दी गयी राशि रू॰ 12,22,643.24 की वसूली रू॰ 3000/- प्रतिमाह की दर से किए जाने एवं शेष राशि सेवानिवृति लाभों से वसूल कर ली जायेगी।
विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उनके विरूद्ध गठित 7 आरोप पूर्णतः अथवा अंशतः प्रमाणित पाए गये, जिसमें आरोप संख्या- 2 से संबंधित रू॰ 11,60,417.24 की राशि के असमायोजन का आरोप भी प्रमाणित पाया गया।
3. श्री सिन्हा द्वारा कार्यपालक अभियंता के उपर्युक्त वसूली आदेश संख्या- 598 दिनांक-30.07.1996 के विरूद्ध माननीय पटना उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-6146/97 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक- 16.12.1997 को पारित आदेश निम्नवत् हैंः-
In that view of matter, this court does not find any error on the part of the respondent authorities in trying to recover the advance money which was paid to the petitioner. No interference is thus called for in the writ petition. The same is therefore dismissed. No cost.
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त आदेश में यह भी अंकित किया गया कि- "Therefore the respondent can not be held to be in error if they have decided to recover the balance amount from the petitioner. In such cases where money was admittedly paid to an employee, charge sheet is not required to be filled for recovery of the said amount whether the work has been completed or not, it is for the Departmental authority to Judge."
चूँकि जाँच प्रतिवेदन पूर्व में ही प्राप्त हो चुका था अतएव अग्रिम के विरूद्ध असमायोजित राशि के बिन्दु पर कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, जयनगर से आवश्यक प्रतिवेदन की मांग की गयी, जो उनके पत्रांक-537 (अनु॰) दिनांक-12.07.2002 द्वारा प्राप्त हुआ। कार्यपालक अभियंता के प्रतिवेदन के आधार पर श्री सिन्हा, सहायक अभियंता के विरूद्ध कुल लंबित रोकड़ 12.27 लाख के विरूद्ध उनके द्वारा रू॰ 6,78,475.43 का लेखा समर्पित किया गया। इस प्रकार रू॰ 5,48,737.81 का लेखा/अभिश्रव श्री सिन्हा द्वारा समर्पित नहीं किया गया। तद्ालोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक- 480 (एस) दिनांक- 20.01.2003 द्वारा रू॰ 5,48,737.81 की वसूली श्री सिन्हा, सहायक अभियंता के सेवानिवृत लाभों यथा उपादान, अवकाश के बदले समतुल्य नकद राशि से एक मुश्त करने तथा शेष राशि उनके पेंशन से करने का आदेश दिया गया था। पुनः याचिका संख्या-12791/02 दिनांक-27.03.2003 को पारित आदेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निदेश दिया गया कि-4 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 "The impugned order as contained in Annexure- "A" to the counter affidavit is set aside. The respondent authorities, however will be at liberty to proceed with the proceeding in terms of Rule 43 (B) of the Bihar Pension Rules."
4. उक्त न्यायादेश के आलोक में विभागीय आदेश संख्या- 6096 (एस) दिनांक-24.07.2003 द्वारा विभागीय आदेश संख्या- 480 (एस) दिनांक-20.01.2003 द्वारा निर्गत दण्डादेश को रद्द कर दिया गया तथा माननीय न्यायालय के आदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक-6682 (एस) दिनांक-16.08.2003 द्वारा श्री सिन्हा से द्वितीय कारण पृच्छा मांगी गयी। श्री सिन्हा, सेवानिवृत सहायक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर दिनांक- 15.09.2003 प्राप्त हुआ।
श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि श्री सिन्हा ने राशि अग्रिम के रूप में कनीय अभियंता को देने की बात कही है, परन्तु उसका कोई सबूत उनके द्वारा नहीं दिया गया। इन्होंने सेवानिवृति के उपरान्त मूल रोकड़ लेखा, कोषागार प्रेषण बही अथवा हस्तरसीद प्रमंडल में उपलब्ध नहीं कराया और दावा किया कि उनके आलमीरा से कागजात चोरी हो गयी। इस प्रकार इनके द्वितीय कारण पृच्छा में कोई नया तथ्य नहीं पाया गया, जिस पर नये सिरे से विचार कर निर्णय लिया जा सके।
5. अतएव श्री सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध बिहार पेंशन नियम के 43 (बी) के तहत् संचालित विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जाँच प्रतिवेदन/द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2208 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-2209 (एस) दिनांक-02.03.2006 के द्वारा इनके विरूद्ध लंबित अग्रिम की राशि रू॰ 5,48,737.81 की वसूली इनकी सेवानिवृति लाभों से यथा उपादान, उपार्जित अवकाश के समतुल्य नकद राशि से एक मुश्त तथा इसके बाद शेष राशि की वसूली इनके पेंशन से किये जाने का दण्ड संसूचित किया गया।
6. विभागीय अधिसूचना संख्या- 2208 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-2209 (एस) दिनांक-02.03.2006 द्वारा संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा ने CWJC No.- 8382/2006 देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा बनाम बिहार राज्य एवं अन्य माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर किया। उक्त वाद में दिनांक-29.08.2018 को माननीय न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के तहत् याचिका को Dismiss कर दिया गया।
7. श्री सिन्हा के द्वारा CWJC No.-8382/2006 देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक- 29.08.2018 को पारित न्यायादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में LPA No.- 1460/2018 देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा LPA No.- 1460/2018 में दिनांक- 07. 03.2022/29.03.2022 को न्यायादेश पारित किया गया, जिसका कार्यशील अंश निम्नवत् हैः-
The learned counsel for the appellant has brought to our notice, a communication dated 05.01.2019 issued by the Public Relations Officer-cum-Technical Advisor of the Road Construction Department ratifying that the balance amount of Rs. 5,70,626/- has already been recovered from the aforesaid Junior Engineer, namely, Hema Nand Pathak, the then Junior Engineer, Road Division, Jainagar after his retirement.
We would otherwise have remitted the matter to the learned Single Judge for taking into account the aforesaid development in the case but considering the fact that the entire amount due to the Government has already been recovered from the erring official, we do not intend to keep the aforesaid issue alive.
For the reasons afore-stated, the order dated 29.08.2018 passed in CWJC No.- 8382 of 2006, is set aside. Resultantly, we also quash the notification dated 02.03.2006, whereby the sum of Rs. 5,48,737.81/- is sought to be recovered from the appellant.
The appeal stands allowed accordingly. 8. अतएव उपर्युक्त के आलोक में LPA No.- 1460/2018 देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा बनाम बिहार राज्य एवं अन्य (CWJC No.- 8382/2006 से उद्भुत) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-07.03.2022/29.03.2022 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना संख्या-2208 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-2209 (एस) दिनांक 02.03.2006 को निरस्त किया जाता है।
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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28 जुलाई 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-14/2021-3921(s)--पथ प्रमंडल, समस्तीपुर अन्तर्गत OPRMC-II के पैकेज संख्या-10A के तहत् संधारित 15 पथों के सेवा स्तर की जाँच विशेष निरीक्षण दल के द्वारा दिनांक-29.10.2020 से 31.10. 2020 तक की अवधि में किया गया। विशेष निरीक्षण दल का जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-15.11.2020 द्वारा मुख्य5 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 अभियंता, पथ संधारण उपभाग को समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन एवं आलोच्य पथों के दिनांक- 01.10.2020 से 28.10. 2020 तक क्षेत्रीय अभियंताओं के द्वारा समर्पित Non-Compliance की Online Reporting की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में निरीक्षित पथों के सेवा स्तर में गंभीर त्रुटियाँ पायी गयी, जैसे कि निरीक्षित कुल 101.67 कि॰मी॰ पथांश में से 4.00 कि॰मी॰ में Pot holes, 16.00 कि॰मी॰ में Crust में अन्य Defect, 44.00 कि॰मी॰ में Road Marking, 16.00 कि॰मी॰ में Sinage तथा 34.00 कि॰मी॰ में Painting से संबंधित गंभीर Defect पाये गये। साथ ही तथ्य के विपरीत Online Reporting, पथों के संधारण में OPRMC के अन्तर्गत संविदा प्रबंधन के सुसंगत नियमों का पालन नहीं किये जाने, नियमानुसार पथों के सेवा स्तर का नियमित अनुश्रवण तथा Contractual Defaults पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किये जाने इत्यादि संबंधी अनियमितता भी पायी गयी।
2. उक्त के आलोक में पायी गयी त्रुटियों/अनियमितताओं के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक- 3016 (एस) अनु॰ दिनांक-29.06.2021 के द्वारा श्री अशोक कुमार, तदेन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ-1 से स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसमें उत्तर समर्पित करने हेतु उन्हें 15 दिनों का अवसर दिया गया। श्री कुमार का उत्तर अप्राप्त रहने की स्थिति में उन्हें पत्रांक- 4721 (एस) दिनांक 17.09.2021 द्वारा 07 दिनों का अवसर देते हुए पुनः स्मारित किया गया। परन्तु इनका उत्तर निर्धारित अवधि में अप्राप्त रहा। 3. उक्त से स्पष्ट है कि श्री कुमार के द्वारा स्वेच्छाचारिता अपनाते हुए विभागीय निदेश की अवहेलना की गयी एवं स्पष्टीकरण उत्तर स्मारोपरांत निर्धारित अवधि में समर्पित नहीं किया गया, जो आलोच्य पथों में पायी गयी त्रुटियों सहित इनके द्वारा OPRMC के तहत् संधारित पथों के संधारण में OPRMC के अन्तर्गत तथ्य के विपरीत Online Reporting करने, पथों के सेवा स्तर का नियमानुसार नियमित अनुश्रवण तथा Contractual Defaults पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किये जाने एवं संविदा प्रबंधन के सुसंगत नियमों का पालन नहीं किये जाने संबंधी गठित आरोप की पुष्टि करता है। यह भी स्पष्ट है कि इनके द्वारा Defects को Application Table (C4.1.1 से C4.7.1) समय सारणी के अनुरूप Reporting Time में पूरा नहीं करने के कारण नियमानुसार GC Clause 33.2 के अनुरूप समुचित कार्रवाई नहीं की गयी, जो श्री कुमार के कर्त्तव्यहीनता, विभागीय निदेश की अवहेलना एवं उदासीनता का द्योतक है।
अतः आलोच्य मामले में प्रमाणित आरोपों के लिये श्री अशोक कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ-1 को समानुपातिक रूप से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 14 (v) के तहत् निम्न लघु दंड संसूचित किया जाता हैः-
( i ) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।'' प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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29 जुलाई 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-14/2021-3973(s)--पथ प्रमंडल, समस्तीपुर अन्तर्गत OPRMC-II के पैकेज संख्या- 10A के तहत् संधारित 15 पथों के सेवा स्तर की जाँच विशेष निरीक्षण दल के द्वारा दिनांक- 29.10.2020 से 31.10. 2020 तक की अवधि में किया गया। विशेष निरीक्षण दल का जाँच प्रतिवेदन पत्रांक- शून्य दिनांक- 15.11.2020 द्वारा मुख्य अभियंता, पथ संधारण उपभाग को समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन एवं आलोच्य पथों के दिनांक- 01.10.2020 से 28.10. 2020 तक क्षेत्रीय अभियंताओं के द्वारा समर्पित Non-Compliance की Online Reporting की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में निरीक्षित पथों के सेवा स्तर में गंभीर त्रुटियाँ पायी गयी, जैसे कि निरीक्षित कुल 101.67 कि॰मी॰ पथांश में से 4.00 कि॰मी॰ में Pot holes, 16.00 कि॰मी॰ में Crust में अन्य Defect, 44.00 कि॰मी॰ में Road Marking, 16.00 कि॰मी॰ में Sinage तथा 34.00 कि॰मी॰ में Painting से संबंधित गंभीर Defect पाये गये। साथ ही तथ्य के विपरीत Online Reporting, पथों के संधारण में OPRMC के अन्तर्गत संविदा प्रबंधन के सुसंगत नियमों का पालन नहीं किये जाने, नियमानुसार पथों के सेवा स्तर का नियमित अनुश्रवण तथा Contractual Defaults पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किये जाने इत्यादि संबंधी अनियमितता भी पायी गयी।
2. उक्त के आलोक में पायी गयी त्रुटियों/अनियमितताओं में से श्री दीपक कुमार मिश्रा, सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर से उनके प्रभाराधीन 06 (छः) पथों के संबंध में आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक- 3019 (एस) अनु॰ दिनांक- 29.06.2021 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसमें उत्तर समर्पित करने हेतु उन्हें 15 दिनों का अवसर दिया गया। श्री मिश्रा का उत्तर अप्राप्त रहने की स्थिति में उन्हें पत्रांक- 4485(एस) दिनांक-07.09.2021 द्वारा 07 दिनों का अवसर देते हुए पुनः स्मारित किया गया। परन्तु इनका उत्तर निर्धारित अवधि में अप्राप्त रहा।
3. उक्त से स्पष्ट है कि श्री मिश्रा के द्वारा स्वेच्छाचारिता अपनाते हुए विभागीय निदेश की अवहेलना की गयी एवं स्पष्टीकरण उत्तर स्मारोपरांत निर्धारित अवधि में समर्पित नहीं किया गया, जो इनके प्रभाराधीन पथों में पायी गयी त्रुटियों सहित इनके द्वारा OPRMC के तहत् संधारित पथों के संधारण में OPRMC के अन्तर्गत तथ्य के विपरीत Online6 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 Reporting करने, पथों के सेवा स्तर का नियमानुसार नियमित अनुश्रवण तथा Contractual Defaults पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किये जाने एवं संविदा प्रबंधन के सुसंगत नियमों का पालन नहीं किये जाने संबंधी गठित आरोप की पुष्टि करता है। यह भी स्पष्ट है कि इनके द्वारा Defects को Application Table (C4.1.1 से C4.7.1) समय सारणी के अनुरूप Reporting Time में पूरा नहीं करने के कारण नियमानुसार GC Clause 33.2 के अनुरूप समुचित कार्रवाई नहीं की गयी, जो श्री मिश्रा के कर्त्तव्यहीनता, विभागीय निदेश की अवहेलना एवं उदासीनता का द्योतक है।
अतः आलोच्य मामले में प्रमाणित आरोपों के लिये श्री दीपक कुमार मिश्रा, सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर को समानुपातिक रूप से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 14 (v) के तहत् निम्न लघु दंड संसूचित किया जाता हैः- ( i ) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।''
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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5 अगस्त 2022
सं0 01/स्था॰-06/2021-4178(s)--पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत मंत्रिपरिषद की स्वीकृति से भू-अर्जन कोषांग का गठन करते हुए संविदा के आधार पर नियुक्त करने हेतु मुख्य भू-अर्जन विशेषज्ञ का 01 (एक) पद एवं भू-अर्जन विशेषज्ञ का 02 (दो) पद सृजित किया गया है। विभागीय अधिसूचना संख्या-3737 (एस) दिनांक 04.08.2021 द्वारा श्री प्रभु राम, भा0प्र0से0, सेवा निवृत्त निदेशक (प्रशासन)-सह-संयुक्त सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना को भू-अर्जन विशेषज्ञ के पद पर 01 (एक) वर्ष अथवा 65 वर्ष उम्र पूरी होने में जो पहले हो तक के लिए संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया था। जिसके आलोक में श्री राम द्वारा दिनांक 06.08.2021 को योगदान दिया गया है। श्री प्रभु राम, भू-अर्जन विशेषज्ञ, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त अनुरोध पत्र के आलोक में सम्य्क विचारोपरान्त भू-अर्जन विशेषज्ञ के पद पर दिनांक 06.08.2022 से अगले एक वर्ष अथवा 65 वर्ष की उम्र पूरी होने तक में जो पहले हो के लिए सेवा विस्तार दी जाती है।
2. भू-अर्जन विशेषज्ञ को सेवा निवृत्ति के समय अपुनरीक्षित वेतनमान् में प्राप्त मूल वेतन एवं ग्रेड-पे तथा पुनरीक्षित वेतनमान् में प्राप्त मूल वेतन तथा उस पर तत्समय देय महंगाई भत्ता का योगफल में से मूल पेंशन (Commutation सहित) एवं उस पर सेवा निवृत्ति की तिथि को देय मंहगाई राहत का योगफल घटाने पर जो राशि आयेगा, वही राशि मानदेय/संविदा वेतन के रूप में अनुमान्य होगा, परंतु पेंशन पर महंगाई राहत मिलता रहेगा।
3. सेवा विस्तार की अवधि/अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा। 4. उक्त प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।
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17 अगस्त 2022
सं0 निग/सारा-02 (परिवाद)-23/2018-4277 (एस)--श्री रामानन्द महतो, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, दरभंगा को पथ अंचल, दरभंगा के पदस्थापन काल में बरती गयी गंभीर अनियमितता के संबंध में श्री किशोर कुमार, कनीय अभियंता, पथ प्रशाखा बेनीपट्टी, पथ प्रमंडल, मधुबनी के द्वारा समर्पित शिकायत पत्र दिनांक-08.06.2018 पर मुख्य अभियंता, उत्तर बिहार उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03, पथ निर्माण विभाग द्वारा जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार पथ प्रमंडल, मधुबनी अन्तर्गत OPRMC के तहत संधारित किये जा रहे पथों में PM कार्य में रोड मार्किंग (Road Marking) के लिए पैकेज संख्या-11, 12 एवं 13 में अनियमित रूप से Supplementary Agreement कर PM मद में संवेदक को 3,56,85,323/- (तीन करोड़ छप्पन लाख पचासी हजार तीन सौ तेईस) रुपये का दोबारा भुगतान किये जाने संबंधी आरोपाें के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या- 9093 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक- 9094 (एस) दिनांक- 11.10.2019 के द्वारा निलंबित किया गया। इस मामले में श्री महतो के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9220 (एस) दिनांक- 17.10.2019 के द्वारा गठित आरोपों के संदर्भ में जाँच आयुक्त, बिहार के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित है।
2. श्री महतो द्वारा आवेदन पत्रांक- 06 दिनांक- 24.12.2021 एवं पत्रांक- 03 दिनांक-02.05.2022 के द्वारा मुख्य रूप से वर्ष-2019 से संचालित विभागीय कार्यवाही में हो रहे अप्रत्याशित विलंब को आधार बनाया गया है एवं उल्लेख किया गया है कि मार्च-2021 में ही इन्होने अपना बचाव बयान संचालन पदाधिकारी को समर्पित कर दिया है तथा विलंब के लिये इनका कोई दोष नही है। श्री महतो द्वारा समर्पित उक्त अभ्यावेदनों की समीक्षा में पाया गया कि ये अक्टूबर, 2019 से7 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 निलंबित हैं और इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन अप्राप्त है। अतएव, विभागीय कार्यवाही में हो रहे विलंब को दृष्टिगत रखते हुये श्री रामानन्द महतो, अधीक्षण अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। 3. श्री महतो निलंबन मुक्त होने के फलस्वरूप पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में योगदान समर्पित कर पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे।
4. निलंबन से मुक्त होने के बावजूद श्री महतो के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा और वह पूर्ववत् संचालित रहेगा।
5. श्री महतो के निलंबन अवधि का विनियमन उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर लिया जायेगा। 6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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17 अगस्त 2022
सं0 निग/सारा-02 (परिवाद)-23/2018--4283(s)--श्री संजय चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधुबनी को पथ प्रमंडल, मधुबनी के पदस्थापन काल में बरती गयी गंभीर अनियमितता के संबंध में श्री किशोर कुमार, कनीय अभियंता, पथ प्रशाखा बेनीपट्टी, पथ प्रमंडल, मधुबनी के द्वारा समर्पित शिकायत पत्र दिनांक-08.06.2018 पर मुख्य अभियंता, उत्तर बिहार उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03, पथ निर्माण विभाग द्वारा जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार पथ प्रमंडल, मधुबनी अन्तर्गत OPRMC के तहत संधारित किये जा रहे पथों में PM कार्य में रोड मार्किंग (Road Marking) के लिए पैकेज संख्या-11, 12 एवं 13 में अनियमित रूप से Supplementary Agreement कर PM मद में संवेदक को 3,56,85,323/- (तीन करोड़ छप्पन लाख पचासी हजार तीन सौ तेईस) रुपये का दोबारा भुगतान किये जाने संबंधी आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या- 9095 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक- 9096 (एस) दिनांक- 11.10.2019 के द्वारा निलंबित किया गया। इस मामले में श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9261(एस) दिनांक- 18.10.2019 के द्वारा गठित आरोपों के संदर्भ में जाँच आयुक्त, बिहार के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित है।
2. श्री चौधरी द्वारा आवेदन पत्रांक- शून्य दिनांक- 31.12.2021 एवं पत्रांक-03 दिनांक-02.05.2022 के द्वारा मुख्य रूप से वर्ष-2019 से संचालित विभागीय कार्यवाही में हो रहे अप्रत्याशित विलंब को आधार बनाया गया है एवं उल्लेख किया गया है कि मार्च-2021 में ही इन्होने अपना बचाव बयान संचालन पदाधिकारी को समर्पित कर दिया है तथा विलंब के लिये इनका कोई दोष नही है। श्री चौधरी द्वारा समर्पित उक्त अभ्यावेदनों की समीक्षा में पाया गया कि ये अक्टूबर, 2019 से निलंबित हैं और इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन अप्राप्त है। अतएव, विभागीय कार्यवाही में हो रहे विलंब को दृष्टिगत रखते हुये श्री संजय चौधरी, कार्यपालक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। 3. श्री चौधरी निलंबन मुक्त होने के फलस्वरूप पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में योगदान समर्पित कर पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे।
4. निलंबन से मुक्त होने के बावजूद श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा और वह पूर्ववत् संचालित रहेगा।
5. श्री चौधरी के निलंबन अवधि का विनियमन उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर लिया जायेगा।
6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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17 अगस्त 2022
सं0 निग/सारा-02 (परिवाद)-23/2018-4285(s)--श्री सत्येन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल अवर प्रमंडल संख्या-01, पथ प्रमंडल, मधुबनी को पथ प्रमंडल, मधुबनी के पदस्थापन काल में बरती गयी गंभीर अनियमितता के संबंध में श्री किशोर कुमार, कनीय अभियंता, पथ प्रशाखा बेनीपट्टी, पथ प्रमंडल, मधुबनी के द्वारा समर्पित शिकायत पत्र दिनांक-08.06.2018 पर मुख्य अभियंता, उत्तर बिहार उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना एवं कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03, पथ निर्माण विभाग द्वारा जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार पथ प्रमंडल, मधुबनी अन्तर्गत OPRMC के तहत संधारित किये जा रहे पथों में PM कार्य में रोड मार्किंग (Road Marking) के लिए पैकेज संख्या-11, 12 एवं 13 में अनियमित रूप से Supplementary Agreement कर PM मद में संवेदक को 3,56,85,323/- (तीन करोड़ छप्पन लाख पचासी हजार तीन सौ तेईस) रुपये का दोबारा भुगतान किये जाने संबंधी आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या- 9097 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक- 9098 (एस) दिनांक- 11.10.2019 के द्वारा निलंबित किया8 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 गया। इस मामले में श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9260(एस) दिनांक-18.10.2019 के द्वारा गठित आरोपों के संदर्भ में जाँच आयुक्त, बिहार के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित है।
2. श्री प्रसाद द्वारा आवेदन पत्रांक- शून्य दिनांक- 31.12.2021 एवं पत्रांक- शून्य दिनांक- 29.04.2022 के द्वारा मुख्य रूप से वर्ष-2019 से संचालित विभागीय कार्यवाही में हो रहे अप्रत्याशित विलंब को आधार बनाया गया है एवं उल्लेख किया गया है कि मार्च-2021 में ही इन्होने अपना बचाव बयान संचालन पदाधिकारी को समर्पित कर दिया है तथा विलंब के लिये इनका कोई दोष नही है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित उक्त अभ्यावेदनों की समीक्षा में पाया गया कि ये अक्टूबर, 2019 से निलंबित हैं और इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन अप्राप्त है। अतएव, विभागीय कार्यवाही में हो रहे विलंब को दृष्टिगत रखते हुये श्री सत्येन्द्र प्रसाद, तदेन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
3. श्री प्रसाद निलंबन मुक्त होने के फलस्वरूप पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में योगदान समर्पित कर पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे।
4. निलंबन से मुक्त होने के बावजूद श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा और वह पूर्ववत् संचालित रहेगा।
5. श्री प्रसाद के निलंबन अवधि का विनियमन उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर लिया जायेगा।
6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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22 अगस्त 2022
सं0 निग/सारा- (निगम)- आरोप-04/2022 -4324(s)--प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक-3941 (अनु0) दिनांक-09.12.2021 एवं पत्रांक-70 अनु॰ दिनांक-05.01.2022 के द्वारा सूचित किया गया है कि श्री सिकन्दर पासवान दिनांक-10.11.2021 से कार्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित थे। साथ ही वरीय परियोजना अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, आरा के पत्रांक-807 दिनांक-28.12.2021 द्वारा श्री पासवान का आवेदन दिनांक-27.12.2021 को संलग्न करते हुए सूचित किया गया है कि श्री पासवान को दिनांक-24.12. 2021 को माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय, बेगूसराय से जमानत मिलने के उपरान्त दिनांक-27.12.2021 को कार्य प्रमंडल, आरा में योगदान समर्पित किया है। श्री पासवान का आवेदन दिनांक-28.01.2022 के साथ विद्वान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-ix, बेगूसराय का आदेश दिनांक-24.12.2021 में [Case N0. BA 1582/2021 (arising out of, Begusrai town PS case no. 608/2021, Gr. 3080/2021)] पारित आदेश की प्रति संलग्न कर उपलब्ध कराया गया है। उक्त आदेश में श्री पासवान को 45 (पैतालीस) दिनों के लिए औपबंधिक जमानत दिया गया। तदोपरांत विद्वान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-ix, बेगूसराय का आदेश दिनांक-09.02.2022 में पूर्व में निर्गत provisional Bail Order को Confirmed किया गया।
2. उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रश्नगत मामले की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि बेगुसराय नगर थाना कांड संख्या- 608/2021 संजु देवी बनाम सिकन्दर पासवान के तहत् उन्हें दिनांक-10.11.2021 को गिरफ्तार कर दिनांक-11.11.2021 को मंडल कारा, बेगूसराय में भेज दिया गया था। दिनांक-24.12.2021 को विद्वान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-ix, बेगूसराय से जमानत मिलने के उपरान्त उन्होंने दिनांक-27.12.2021 को अपना योगदान प्रतिवेदन वरीय परियोजना अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, आरा में समर्पित किया है।
3. श्री पासवान का उक्त कृृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम 3 (i)(ii)(iii) यथा पूरी शीलनिष्ठा रखेगा, कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा रखेगा, और ऐसा कोई काम न करेगा जो सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय हो, का उल्लंघन है। अतएव श्री सिकन्दर पासवान, परियोजना अभियंता (सहायक अभियंता), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लि॰, कार्य प्रमंडल, आरा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9 (2) (क) के अन्तर्गत कारा में संसीमित अवधि (दिनांक-11.11.2021 से दिनांक-26.12.2021 तक) के लिए निलंबित किया जाता है। 4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9 (3) (i) के प्रावधान के आलोक में श्री पासवान के द्वारा दिनांक-27.12.2021 को योगदान किये जाने की तिथि से निलंबन मुक्त करते हुए उनके योगदान को स्वीकृत किया जाता है।
5. श्री पासवान के कारावास में बितायी गयी अवधि से उद्भूत निलंबन (दिनांक-11.11.2021 से दिनांक-26.12.2021 तक) का विनियमन नियमानुसार उनके विरूद्ध दर्ज बेगूसराय नगर थाना कांड संख्या- 608/2021 के निष्पादन के उपरान्त उसके फलाफल के आधार पर किया जायेगा।
6. निलंबन अवधि (कारा में संसीमन की अवधि) में श्री पासवान को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 10 में उपबंधित नियमों के अनुसार मात्र जीवन निर्वाह भत्ता अनुमान्य होगा। 7. इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए अलग से नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी। 8. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।9 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022
2 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-(एन॰एच॰) मुक॰-12/2021-4554(s)--श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के द्वारा दिनांक-17.03.2020 को Social Networking Site (Facebook) पर तस्वीर के साथ दो अलग-अलग पोस्ट में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्र पोस्ट अपलोड किया गया। यह कृत्य इनके सरकारी कर्मी होने के नाते अशोभनीय एवं अमर्यादित आचरण है।
2. श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद से उक्त कृत्य हेतु पत्रांक-2335 (एस) अनु॰ दिनांक-25.03.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। तत्पश्चात श्री कुमार के द्वारा दिनांक 07.05.2020 को उक्त मामले के संदर्भ में थाना को सूचित किया गया। श्री कुमार के संज्ञान में मामला आने के पश्चात् भी 43 दिनों के बाद थाना को सूचित करना उनकी गलत मंशा का परिचायक है।
3. इस प्रकार, स्पष्ट है कि श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद द्वारा सरकारी कर्मी के रूप में अमर्यादित आचरण किया गया एवं गलत तथ्यों के आधार पर विभाग को गुमराह करने का प्रयास किया गया। इनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 (1) (iii) के प्रतिकूल पाये जाने एवं इस हेतु दोषी पाये जाने के कारण इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-269 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-270 (एस) दिनांक 14.01.2021 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
4. उक्त निलंबनादेश के विरूद्ध श्री कुमार के द्वारा मान्नीय उच्च न्यायालय में CWJC No-8730/2021 दायर किया गया, जिसमें मान्नीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 22.12.2021 को आदेश पारित किया गया। पारित आदेश का कार्यशील अंश निम्नवत् है :-
" 3. Petitioner was placed under suspension on 14.01.2021 on certain allegations and charge-memo was issued on 15.03.2021 i.e. almost more than one year from the date of allegations. Apex Court in the case of Ajay Kumar Chaudhary V. Union of India reported in (2015) 7 SCC 291 held that if charge-memo is not filed within a period of three months, in that event, the competent authority was required to revoke the suspension while reviewing the order of suspension, in avoiding prolonged suspension and paying subsistence allowance without extracting work.
4. In the light of Apex Court's decision read with petitioner's representation, the Suspending Authority is hereby directed to undertake review of suspension and revoke the suspension, subject to outcome of disciplinary proceedings. Disciplinary proceedings shall also be concluded within a period of four months from the date of receipt of this order. Above exercise shall be completed in respect of suspension within a period of one month from the date of receipt of this order.
5. At this juncture, learned counsel for the petitioner submitted that petitioner was not paid subsistence allowance.
6. If the subsistence allowance is not paid, the same shall be paid to the petitioner within a period of two weeks from the date of receipt of this order, failing which petitioner is entitled to interest @ 6% per annum on arrears of subsistence allowance".
5. उल्लेखनीय है कि श्री कुमार को वर्त्तमान में नियमित रूप से जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जा रहा है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (7) में निहित प्रावधान के आलोक में श्री कुमार का निलंबन की तिथि 14.01.2021 से तीन माह के अन्दर अर्थात् 12.03.2021 को आरोप पत्र का गठन कर विभागीय संकल्प संख्या-1799 (एस), दिनांक 17.03.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। इस बिन्दु पर कोई वैद्यानिक अड़चन नहीं है।
6. श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता का निलंबन के संबंध में विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी पर विभागीय कार्य में लापरवाही या गबन संबंधित आक्षेप नहीं है। इनको निलंबन से मुक्त किये जाने से विभागीय जाँच पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। अतः सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
7. निलंबन से मुक्त होने के उपरांत श्री कुमार पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे। 8. श्री कुमार का निलंबन अवधि का विनियमन नियमानुसार उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर किया जायेगा।
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।10 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 7 सितम्बर 2022 सं॰ 1/स्था॰-13/2002/(खण्ड-II)-4607(s)--श्री पंकज कुमार पाल, (भा॰प्र॰से॰) तत्कालीन अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के स्थानांतरण के फलस्वरूप श्री संदीप कुमार आर॰ पुडकलकट्टी, भा॰प्र॰से॰, अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को उक्त निगम के अंशधारी के रूप में मनोनित किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप-सचिव (प्र॰को॰)।
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8 सितम्बर 2022
सं0 प्र॰2/स्था॰-वृ॰उ॰-21-01/2020-4651(s)--राज्य कर्मियों को सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन का लाभ प्रदान करने संबंधी वित्त विभाग के अधिसूचना संख्या-3/एम॰-2-5-वे॰पु॰-28/99/4685 (वि॰)-2, दिनांक 25.03.2003 द्वारा अधिसूचित "बिहार राज्य कर्मचारी सेवाशर्त्त (सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना) नियमावली-2003" दिनांक 09.08.1999 के प्रभाव से प्रवृत किया गया। जिसके प्रावधान के अनुसार 12/24 वर्ष की लगातार संतोषप्रद सेवा पूर्व होने पर देा वित्तीय उन्नयन प्रोन्नति के पदसोपान में अनुमान्य है। वित्त विभाग के अधिसूचना संख्या-6068, दिनांक 16.06.2013 द्वारा सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन येाजना दिनांक 12.07.2010 तक प्रभावी किया गया। षष्टम् केन्द्रीय वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में केन्द्रीय प्रावधान को अपनाते हुये वित्त विभाग के संकल्प संख्या-7566 दिनांक 14.07.2010 द्वारा राज्य के कर्मचारियों के लिए रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन, 2010 दिनांक 01.01.2009 से प्रभावी किया गया। इस योजना के प्रावधान के अनुसार तीन (क्रमशः 10, 20 और 30 वर्षों की सेवा पुरी करने पर) वित्तीय उन्नयन वेतन-बैंड/ग्रेड पे के सोपान में अनुमान्य है। सप्तम वेतन पुनरीक्षण के उपरान्त वित्त विभाग के पत्रांक-3ए-2-वे॰पु॰-08/2017-8928/वि॰, दिनांक 15.11.2017 के कंडिका-2 (ii) द्वारा यह प्रावधान किया गया है, कि वैसे राज्य सेवा के पदाधिकारी, जिनका मूल कोटिय वेतनमान PB- 2+4800/- अथवा PB-2+5400/- स्वीकृत रहा तथा उन्हें चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर in-situ उत्क्रमण के तहत PB-3+5400/- का वेतनमान अनुमान्य किया गया है, को दिनांक 01.01.2016 के प्रभाव के वेतन स्तर-9 में वेतन पुनरीक्षण किया जायेगा। चार वर्ष की सेवा पूरी होने तथा सेवा सम्पुष्टि के उपरान्त PB-3+5400/- में in-situ उत्क्रमण, जिसे पूर्व में एम॰ए॰सी॰पी॰ के तहत एक वित्तीय उन्नयन माना गया था, को अनदेखी की जायेगी तथा ऐसे पदाधिकारी को नियुक्ति की तिथि से 10 वर्ष अथवा दिनांक 01.01.2016, जो बाद मेें हो, से प्रथम एम॰ए॰सी॰पी॰ वेतन स्तर-11 के अनुमान्य होगा। 2. उपरोक्त प्रावधानों तथा इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत परिपत्रों के आलोक में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा संवर्ग-2 के अन्तर्गत सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर सीधे नियुक्त संलग्न सूची में अंकित पदाधिकारियों को सम्यक विचारोपरान्त कालावधि के अनुसार उनके नाम के सामने कॉलम-6 (B) में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान् में प्रथम सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन/रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन, कॉलम-7 (B) में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान् में द्वितीय सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन/रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन एवं कॉलम-8 (B) में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान् में तृतीय रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन स्वीकृत किया जाता है।
3. स्कीम के अधीन वित्तीय उन्नयन होने पर कर्मचारी का वेतन निर्धारण वित्त विभाग के संकल्प संख्या-630, दिनांक 21.01.2010 के कंडिका-12 में अथवा वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-3ए॰-2-वे॰पु॰-09/2016-3590, दिनांक 24.05.2017 की कंडिका-11 एवं वित्त विभाग के पत्रांक-3ए॰-2-वे॰पु॰-08/2017-8928/वि॰, दिनांक 15.11.2017 में निहित प्रावधान के अनुसार किया जायेगा।
4. यह वित्तीय उन्नयन, व्यक्तिगत होगा जिसका पारस्परिक वरीयता से कोई संबंध नहीं होगा। 5. यदि पूर्व में सामान ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति दी गयी है तो उसे इस हद तक संशोधित समझा जाय। (उदाहरण के रूप में यदि किसी अभियंता को प्रथम ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति पूर्व में दी गयी है तथा इस अधिसूचना में भी प्रथम ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ स्वीकृत की गयी है तो इस अधिसूचना के हद तक उक्त ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ संशोधित समझी जायेगी)
6. उपर्युक्त किसी भी पदाधिकारी के संबंध में भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर उन्हें प्रदत्त वृत्ति उन्नयन योजना के लाभ से संबंधित ओदश को रद्द/संशोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हें भुगतान की गई राशि की वसूली उनसे कर ली जायेगी।
प्रस्ताव पर विभागीय स्क्रींनिग समिति के अनुशंसा के उपरान्त सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप-सचिव (प्र॰को॰)।11 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022
| क्र॰ | सहायक अभियंता का नाम | वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक | जन्म तिथि/ सेवा निवृत्ति की तिथि | प्रथम योगदान की तिथि/ सेवा सम्पुष्टि की तिथि | प्रथम सुनिश्चित/ रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन | द्वितीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन | तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन | अभ्युक्ति | |||
| द य तिथि े से पूर्व का वेतनमान | द य तिथि े एवं वेतनमान | द य तिथि े से पूर्व का वेतनमान | द य तिथि े एवं वेतनमान | द य तिथि से े पूर्व का वेतनमान | द य तिथि एवं े वेतनमान | ||||||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6A | 6B | 7A | 7B | 8A | 8B | 9 |
| 1 | श्री इन्द्रजीत कुमार SE-30-07- 2008 | 28 SE | 10-01-1963 31-01-2023 | 16-06-1987 22-02-2007 | - | - | - | - | Level-13 | 16-06-2017 Level-13A | |
| 2 | श्री ईश्वरी प्रसाद सिंह SE-27-08- 2009 | 55 SE | 04-01-1964 31-01-2024 | 25-07-1989 22-02-2008 | - | - | - | - | Level-13 | 25-07-2019 Level-13A | |
| 3 | श्री जनार्दन प्रसाद सिंह कश्यप SE-17-06- 2016 | 201 EE | 03-01-1962 31-01-2022 | 23-06-1987 08-01-2003 | - | - | - | - | Level-13 | 23-06-2017 Level-13A | |
| 4 | श्री लक्ष्मी नारायण सिंह SE-17-06- 2016 | 258 EE | 24-09-1963 30-09-2023 | 08-07-1987 03-07-2004 | - | - | - | - | Level-13 | 08-07-2017 Level-13A | |
| 5 | श्री राजेश कुमार SE-22-12- 2016 | 15 AE | 15-01-1960 31-01-2020 | 16-06-1987 08-01-2003 | - | - | - | - | Level-13 | 16-06-2017 Level-13A | |
| 6 | श्री एकबाल अहमद | 842 (2000) | 04.01.1943 31.01.2001 | 16-07-1974 अधि॰-448 (एस) दिनांक 09-01- 1979 | - | - | वेतनमान 10000- 325- 15200/- | 09-08- 1999 वेतनमान 14300- 400- 18300/- | - | - | |
| 7 | श्री गंगेश्वर प्रसाद शर्मा | 1268 (2000) | 01.06.1948 31.05.2008 | 06-07-1976 अधि॰-117 (एस) दिनांक 09-01- 1987 | - | - | वेतनमान 10000- 325- 15200/- | 06-07- 2000 वेतनमान 14300- 400- 18300/- | - | - | |
| 8 | स्व॰ अली असगर | 1260 (…….) | 22-11-1946 30-11-2004 | 1. अभियंता सहायक- 29.11.1973 2. सहायक अभियंता- 07.05.1976 3. सेवा सम्पुष्टि अधि॰ स ॰-2901 ं (एस) दिनांक 02.08.1984 | - | - | वेतनमान 10000- 325- 15200/- | 07-05- 2000 वेतनमान 14300- 400- 18300/- | - | - | |
| 9 | श्री नवल किशोर शरण | 29 EE | 02-12-1955 31-12-2015 | 13-12-1980 21-10-1987 | - | - | - | - | PB-4+ Grade Pay 8700/- | 13-12-2010 PB- 4+Grade Pay 8900/- | |
| 10 | श्री रामानन्द मंडल | 309 EE | 15-07-1958 31-07-2018 | 06-10-1987 06-08-2005 | - | - | PB-3+ Grade Pay 6600/- | 01-01- 2009 PB- 3+Grade Pay 7600/- | - | 06-10-2017 Level-13 | |
| 11 | श्री अजय कुमार सिंह | 1 EE (Mech.) | 10-02-1968 20-02-2028 | 20-05-1997 01-12-2006 | - | - | Level- 11 | 01-07- 2017 Level-12 | द्वितीय एम॰ए॰सी ॰पी॰ की देय तिथि 20.05. 2017 किन्तु स सूचित ं दंड के प्रभाव की समाप्ति की तिथि स द्वितीय े एम॰ए॰सी ॰पी॰ स्वीकृत। | ||
| 12 | श्री बाल कृष्ण सिंह | 209 EE | 01-06-1960 30-06-2020 | 10-07-1987 03-07-2004 | - | - | - | - | Level-12 | 10-07-2017 Level-13 | |
| 13 | श्री इम्तियाज अहमद | 226 EE | 10-01-1962 31-01-2022 | 03-07-1987 03-07-2004 | - | - | - | - | Level-12 | 03-10-2020 Level-13 | |
| 14 | श्री अवधेश कुमार | 414 EE | 05-10-1961 31-10-2021 | 25-07-1989 22-02-2007 | - | - | - | - | Level-12 | 25-07-2019 Level-13 | |
| 15 | श्री अनील कुमार गुप्ता | 417 EE | 01-07-1962 30-06-2022 | 21-07-1989 22-02-2008 | - | - | - | - | Level-12 | 21-07-2019 Level-13 | |
| 16 | श्री सुनील कुमार मांझी | 432 EE | 15-02-1960 28-02-2020 | 26-10-1989 19-05-2009 | - | - | - | - | Level-12 | 26-10-2019 Level-13 | |
| 17 | श्री अखिलेश कुमार | 447 EE | 18-09-1962 30-09-2022 | 25-07-1989 22-02-2007 | - | - | - | - | Level-12 | 01-04-2021 Level-13 | तृतीय एम॰ए॰सी ॰पी॰ की देय तिथि 25.07. 2019 किन्तु स सूचित ं दंड के प्रभाव की समाप्ति की तिथि स तृतीय े एम॰ए॰सी ॰पी॰ स्वीकृत। |
| 18 | श्री अरूण कुमार | 67 AE | 06-08-1963 31-08-2023 | 21-10-1991 22-02-2008 | - | - | - | - | Level-12 | 21-10-2021 Level-13 | |
| 19 | श्री अंशुमान कुमार सिंह | 69 AE | 09-12-1965 31-12-2025 | 01-11-1991 04-10-2007 | - | - | - | - | Level-12 | 01-11-2021 Level-13 | |
| 20 | श्री विनय कुमार | 72 AE | 16-03-1962 31-03-2022 | 21-10-1991 22-02-2008 (वरीयता सूची में योगदान की तिथि 02.11.1991) | - | - | - | - | Level-12 | 21-10-2021 Level-13 | |
| 21 | श्री अमलेन्दु कुमार रंजन | 73 AE | 22-09-1963 30-09-2022 | 24-10-1991 04-10-2007 | - | - | PB- 3+Grad e Pay 6600/- | 24-10- 2011 PB- 3+Grade Pay 7600/- | - | 24-10-2021 Level-13 | |
| 22 | श्री उमेश कुमार राय | 80 AE | 16-01-1965 31-01-2025 | 26-10-1991 22-02-2007 | - | - | - | - | Level-12 | 01-07-2022 Level-13 | तृतीय एम॰ए॰सी ॰पी॰ की देय तिथि 26.10. 2021 किन्तु स सूचित ं दंड के प्रभाव की समाप्ति की तिथि स तृतीय े एम॰ए॰ सी॰पी॰ स्वीकृत। |
| 23 | श्री मदन प्रसाद सिंह | 250 AE | 15-09-1960 30-09-2020 | 20-04-1998 11-08-2010 (वरीयता सूची में योगदान की तिथि 25.05.1998) | - | - | Level- 11 | 20-04- 2018 Level-12 | - | - | |
| 24 | श्री विनोद प्रसाद गुप्ता EE-2016 | 380 AE | 06-11-1960 30-11-2020 | 11-11-1999 13-10-2009 | Level-9 | 11-11- 2009 Level- 11 | - | - | - | - | |
| 25 | चेतन कुमार मारकन SE- 23.09.2006 | 908/ 2004 | 01-07-1948 30-06-2008 | 20-08-1974 | - | - | वेतनमान 10000- 325- 15200/- | 09-08- 1999 वेतनमान 14300- 400- 18300/- | - | - |
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12 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ) पु॰भ॰नि॰ (नि॰वि॰)-03/2015-4696(s)--श्री जीवेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पुलिस भवन निर्माण निगम, मुजफ्फरपुर, सम्प्रतिः सेवा से बर्खास्त के द्वारा पुलिस भवन निर्माण निगम, मुजफ्फरपुर प्रमंडल के पदस्थापन काल में परिवादी से रिश्वत लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूराें, पटना के गठित धावा दल द्वारा दिनांक-16.07.2015 को रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने तथा निगरानी थाना कांड संख्या-56/15 दिनांक-16.07.15 धारा-7/13 (2) सहपठित धारा-13 (1) (डी) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज किये जाने संबंधी आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-8001 दिनांक 24.08.2015 द्वारा हिरासत में लिये जाने की तिथि दिनांक 16.07.2015 के प्रभाव से निलंबित करते हुए एतद्् संबंधी आरोपों के लिए प्रपत्र-''क'' गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8441 (एस) अनु॰, दि॰ 04. 09.2015 के द्वारा अपर विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
2. श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के तहत् ही पुलिस भवन निर्माण निगम के अन्तर्गत राजगीर प्रमंडल के पदस्थान काल के दौरान उनके विरूद्ध राजगीर, तेलहाड़ा, कतरीसराय एवं हिलसा में हेलीपैड के निर्माण के क्रम में स्वीकृत स्थल के बदले परिवर्तित स्थल पर बिना सक्षम पदाधिकारी से आदेश प्राप्त किये तथा स्थल चित्र का जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से बिना अनुमोदन कराये कार्य कराये जाने संबंधी कुल-4 आरोप भी पूरक आरोप के रूप में गठित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-10247, दिनांक-06.11.2015 द्वारा शामिल किया गया।
3. उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-452/गो॰, दिनांक-06.08.2019 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध गठित पूरक आरोप, जो राजगीर, तेलहाड़ा, कतरीसराय एवं हिलसा में हेलीपैड के निर्माण के क्रम में स्वीकृत स्थल के बदले परिवर्त्तित स्थल पर बिना सक्षम पदाधिकारी से आदेश प्राप्त किये तथा स्थल चित्र का जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से बिना अनुमोदन के कार्य कराये जाने से संबंधित है- के बिन्दु पर यह निष्कर्ष दिया गया है कि आरोपी पदाधिकारी ने कुल चार जगहों पर हेलीपैड का निर्माण कराये जाने के प्रकरण में स्थल परिवर्त्तन के कारणों का उल्लेख किया है तथा संबंधित पदाधिकारी से सहमति प्राप्त कर ही निर्माण स्थल बदला गया। तद्नुसार संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध गठित पूरक आरोपों को अप्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया है।
4. इसके अतिरिक्त श्री सिंह के विरूद्ध गठित मूल आरोप के बिन्दु पर संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के तहत निष्कर्ष दिया गया है कि संवेदक श्री सुनील कुमार के द्वारा सिवान जिला के बसंतपुर थाना भवन का निर्माण कराये जाने के मामले में कोई विपत्र श्री सिंह के स्तर पर C & P (Check & Pass) हेतु लंबित नहीं था। इस बिन्दु पर श्री सिंह के विरूद्ध दोष प्रमाणित नहीं होता है। परन्तु निगरानी अन्वेषण ब्यूरों की टीम (धावा दल) द्वारा रिश्वत्् लेते पकड़ेे जाने के बिन्दु पर संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के तहत यह निष्कर्ष दिया गया है कि संवेदक द्वारा किये गये कार्य की नापी कराने तदोपरांत अन्तिम भुगतान के पूर्व श्री सिंह द्वारा रिश्वत्् की मांग की गयी एवं निगरानी धावा दल द्वारा श्री सिंह को साक्षात रिश्वत् लेते हुए पकड़ा गया। इसलिए श्री सिंह के विरूद्ध रिश्वत्् लेने का आरोप प्रमाणित होता है। 5. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोंपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा मूल आरोप एवं पूरक आरोपों के संदर्भ में दिये गये निष्कर्ष से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-10085 (एस) अनु॰ दिनांक-21.11.2019 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिंह के पत्रांक-01/कैम्प, दिनांक- 03.01.2020 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की सम्यक समीक्षा में श्री सिंह द्वारा प्रस्तुत किये गये तर्क को सुसंगत तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित नहीं पाया गया। फलतः श्री सिंह के विरूद्ध रिश्वत् लेने का आरोप प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में श्री सिंह के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को विचारणीय नहीं पाते हुए अस्वीकृत करने एवं गंभीर कदाचार का दोषी पाते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007 के14 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 नियम-14 (xi) के तहत् सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार के रूप में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त किया गया।
6. सरकार का उक्त निर्णय वृहद दंड की श्रेणी में होने की स्थिति में एतद् संबंधी अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-2430 (एस) दिनांक-24.04.2020, द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अपने पत्रांक-1068 दिनांक-18.08.2020 द्वारा श्री सिंह को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया।
7. तद्ालोक में श्री जीवेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पुलिस भवन निर्माण निगम, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित पाये जाने के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के अनुसार इन्हें सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव पर मंत्री परिषद् की स्वीकृति प्राप्त की गयी। उक्त स्वीकृति के आलोक में अधिसूचना सं0-5648 (एस) दिनांक-28.09. 2020 के द्वारा श्री जीवेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पुलिस भवन निर्माण निगम, मुजफ्फरपुर को उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए ''तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त'' किये जाने का दंड संसूचित किया गया।
8. उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री सिंह के पत्रांक-शून्य दिनांक-26.02.2021 के माध्यम से पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसकी विभागीय समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह पुनर्विचार अभ्यावेदन में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के द्वारा रू0 50,000/- रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किये जाने के मूल आरोप के बिन्दु पर ऐसा कोई ठोस तथ्य/तर्क एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके आधार पर उनके विरूद्ध पूर्व में निर्गत दण्डादेश को क्षान्त करने पर युक्तिसंगत ढंग से विचार किया जा सके।
उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-26.02.2021 संतोषजनक नहीं पाये जाने के आलोक में इसे अस्वीकृत किया जाता है। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।
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13 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-72/2018-4741(s)--श्री प्रमोद कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा के विरूद्ध योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-6471 दिनांक-04.12.2018 द्वारा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए आवश्यक कार्रवाई हेतु इस विभाग को उपलब्ध कराया गया। योजना एवं विकास विभाग के द्वारा प्रतिवेदित आरोप निम्नवत है :-
(i) श्री विजय कुमार खेमका, माननीय स॰वि॰स॰ से प्राप्त तारांकित प्रश्न संख्या-च- 10 उत्तर प्रतिवेदन में सही तथ्य को छिपाकर गलत प्रतिवेदन दिया गया यथा आई0टी0आई0 कॉलेज के छात्रों का छात्रावास निर्माण कार्य 84 प्रतिशत तथा पूर्णियाँ कॉलेज, पूर्णियाँ में छात्रों का छात्रावास निर्माण कार्य 76 प्रतिशत पूर्ण था, जबकि कार्यपालक अभियंता स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ के रूप में आपके द्वारा 90 प्रतिशत पूर्ण बताया गया था, जो गलत था। आपके द्वारा गलत सूचना उपलब्ध कराना दायित्वों के निर्वहन में बरती गयी लापरवाही का द्योतक है, तथा सदन को गुमराह करना दंडनीय अपराध है। साथ ही यह बिहार सरकारी सेवक अचार नियमावली 1976 के नियम-12 (क) का उल्लंघन है
(ii) पूर्णियाँ जिला अन्तर्गत उक्त दोनों छात्रावास का निर्माण कार्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत अल्पसंख्यक बहुक्षेत्रीय विकास योजना (एम॰एस॰डी॰पी॰) मद का है। जिसका एकरारनामा कार्यपालक अभियंता, एन॰आर॰ई॰पी॰, पूर्णियाँ एवं इंडियन प्रोगेसिव कंसट्रक्सन प्रा॰लि॰, आस्थगीता देवी, कास्टर टाउन, देवघर (झारखंड) के बीच वर्ष-2011-12 में हुआ था। एन॰आर॰ई॰पी॰ विघटन के पश्चात यह कार्य स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, बनमनखी, पूर्णियाँ क्षेत्राधीन आ गया। एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 04.09.2012 में निर्धारित थी, परन्तु अभी तक कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इस प्रकार आपके द्वारा कार्यपालक अभियंता के रूप में अपने कत्तव्यों का निर्वहन नहीं किया गया है।
2. योजना एवं विकास विभाग द्वारा उक्त प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय पत्रांक-7289 (एस) अनु0 दिनांक-07.08.2019 के द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। तदालोक में श्री कुमार के पत्रांक-01 दिनांक-20. 08.2019 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर विभाग को समर्पित किया गया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोप सं0 (i) के संबंध में इन्होने कहा है कि दो योजना का औसत प्रगति (गणना चार्ट के अनुसार) 84.33 प्रतिशत होता है, जो उनके द्वारा बताए गये 90 प्रतिशत के करीब है। समयाभाव के कारण बिना अभिलेख अवलोकन के उनके द्वारा प्रगति 90 प्रतिशत प्रतिवेदित किया गया था। श्री कुमार का उतर इस हद तक15 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 स्वीकार योग्य नही है, क्योकि विधान सभा के पटल पर माननीय स0वि0स0 के तारांकित प्रश्न का उतर बिना अभिलेखीय साक्ष्य के दिये जाने के कारण ही सभा में उतर पर प्रश्न चिन्ह लगाकर कार्य की जाँच कराने की आवश्यकता पड़ी। उप विकास आयुक्त, पूर्णियाँ की अध्यक्षता में किये गये जाँच में भी प्रतिवेदन के प्रतिकूल प्रगति मे अपेक्षाकृत कमी पायी गयी है। इसके साथ ही आरोप संख्या (ii) के संबंध में इनके द्वारा रखे गये तर्क समर्थित साक्ष्यों के आलोक में स्वीकार योग्य पाया गया।
अतएव उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में श्री प्रमोद कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा पत्रांक-01 दिनांक-20.08.2019 द्वारा आरोप सं0-(i) के संबंध में समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए बरती गई लापरवाही को दृष्टिगत रखते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत निम्न दंड अधिरोपित किया जाता है :-
(क) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' । प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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15 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-(एन॰एच॰) आरोप-20/2020-4789(s)--श्री विनय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में, के द्वारा दिनांक- 17.03.2020 को Social Networking Site (Facebook) पर तस्वीर के साथ दो अलग-अलग पोस्ट में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्र पोस्ट अपलोड किया गया।
2. श्री कुमार का यह कृत्य इनके सरकारी कर्मी होने के नाते अशोभनीय एवं अमर्यादित आचरण पाये जाने के लिए उनसे विभागीय पत्रांक- 2335 (एस) अनु॰ दिनांक-25.03.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। तत्पश्चात श्री कुमार के द्वारा दिनांक 07.05.2020 को उक्त मामले के संदर्भ में थाना को सूचित किये जाने संबंधी आवेदन संलग्न किया गया। जब विभाग द्वारा प्राथमिकी के साक्ष्य की मांग की गयी तो श्री कुमार के द्वारा इसी आवेदन को दिनांक 28.07.2020 की तिथि में डेहरी नगर थाना में प्राप्त कराने का प्रमाण दिया गया। इस प्रकार श्री कुमार के संज्ञान में मामला आने के पश्चात् भी 43 दिनों के बाद थाना को सूचित करना उनकी गलत मंशा का परिचायक पाया गया। 3. उक्त के आलोक में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-269 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-270 (एस) दिनांक 14.01.2021 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। तत्पश्चात् श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-1799, दिनांक 17.03.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। 4. उक्त निलंबनादेश के विरूद्ध श्री कुमार के द्वारा मान्नीय उच्च न्यायालय में CWJC No-8730/2021 दायर किया गया, जिसमें मान्नीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 22.12.2021 को पारित आदेश के आलोक में श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता का निलंबन के संबंध में विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी पर विभागीय कार्य में लापरवाही या गबन संबंधित आक्षेप नहीं है। इनको निलंबन से मुक्त किये जाने से विभागीय जाँच पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। अतः सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार को विभागीय अधिसूचना संख्या-4554 (एस), दिनांक 02.09. 2022 के द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया। 5. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में मुख्य अभियंता (उत्तर), राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2088, अनु॰ दिनांक 07.09.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें समीक्षा एवं निष्कर्ष के तहत आरोपी श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित पाये जाने का अधिगम दिया गया। 6. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी एवं समीक्षा में पाया गया कि आरोपी कर्मी के सनहा को डेहरी नगर थाना के द्वारा संज्ञान लिया गया है। आपराधिक अनुसंधान के बाद आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। तद्ालोक में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन से तत्काल सहमत होते हुए निम्न निर्णय लिया जाता है :- (i) श्री विनय कुमार, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोपों से उन्हें आरोप मुक्त किया जाता है। (ii) श्री कुमार का निलंबन अवधि दिनांक 14.01.2021 से 01.09.2022 को पूर्ण वेतन के साथ विनियमित किया जाता है। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।16 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 15 सितम्बर 2022 सं0 निग/सारा-(एन0एच0)-उड़नदस्ता-29/2018 -4791(s)--श्री कांति भूषण, तत्कालीन सहायक अभियंता, तकनीकी कोषांग, उड़नदस्ता प्रशाखा, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, बेनीपुर, द्वारा तकनीकी कोषांग, उड़नदस्ता प्रशाखा, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पदस्थापन काल में संचिका संख्या- निग/सारा-(एन॰एच॰)- उड़नदस्ता-29/2018 को लगभग 24 महीनों के अतिशय विलंब से उपस्थापन किये जाने, जिसके फलस्वरूप इस संचिका में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मधेपुरा अंतर्गत एन॰एच॰-107 के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं के लिए संबंधित सरकारी सेवकों के विरूद्ध की जाने वाली कार्रवाई कालबाधित हो गया, के लिए विभागीय पत्रांक-7405 (एस) दिनांक-25.09.2018 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
2. श्री कांति भूषण, के द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक-09.07.2019 द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर विभाग को समर्पित किया गया है। उक्त समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर के अन्तर्गत मुख्यतः निम्नलिखित तथ्य/तर्क रखे गये हैंः-
(i) विभाग द्वारा तकनीकी कोषांग (उड़नदस्ता प्रशाखा) मेंं प्रतिनियुक्त किये जाने के आलोक में उनके द्वारा दिनांक 30.04.2014 को योगदान किया गया।
(ii) योगदान करने के पश्चात उड़नदस्ता प्रशाखा एवं निगरानी प्रशाखा की समेकित रूप से सैंकड़ों संचिकायें, जो तकनीकी समीक्षा हेतु लंबित था, उन्हें पृष्ठांकित कर दी गयी।
(iii) तकनीकी कोषांग से संबंधित उड़नदस्ता प्रमंडल के जॉच प्रतिवेदन से उद्भूत मामले की समीक्षा में लगभग 8 से 10 पृष्ठों को टंकित टिप्पणी तैयार करना पड़ता था, क्योंकि सामान्यतः ऐसेे प्रत्येक मामले में कम-से-कम 7-8 आरोप के बिन्दु होते हैं और कम-से-कम 6-7 आरोपी (यथा-कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, गुण नियंत्रण सहायक शोध पदाधिकारी एवं संवेदक) से किये गये स्पष्टीकरण/कारण-पृच्छा एवं उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर अंकित तथ्यों के आलोक में इसकी गहनता से समीक्षा करने में अमूमन अधिक समय की आवश्यकता पड़ती है।
साथ हीं विशेष अभियान के तहत OPRMC के अन्तर्गत संधारित सभी पथों की जॉच उड़नदस्ता प्रमंडलों द्वारा की गयी, इससे उत्पन्न संचिका का निष्पादन त्वरित गति से करना था, जिससे अन्य संचिकाओं के निष्पादन करने का समय नहीं मिल पाता था।
(iv) आरोपित पदाधिकारी श्री रामावतार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के सेवानिवृत (दिनांक-30.04.
2014) होने के कुछ महीने बाद संचिका दिनांक-03.06.2014 को श्री भूषण के पास आयी, जो उनके संज्ञान में नहीं था। इसलिए मामला कालबाधित होने का सीधा दायित्व श्री भूषण पर परिलक्षित नहीं होता है।
(v) इसके अतिरिक्त अन्य परिस्थितिजन्य कारण यथा-जहाँ पर श्री भूषण बैठते थे वहाँ सिलिंग ए॰सी॰ लगा हुआ था, जिसे गर्मी के दिनों में उससे पानी लिकेज होने लगने से संचिकाओं को यत्र-तत्र रखकर बचाना पड़ता था, जिसके कारण भी संचिका पथभ्रष्ट हो गया, जिसके फलस्वरूप विलम्ब हो गया।
3. श्री कांति भूषण के द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर के अन्तर्गत रखे गये तथ्यों की विभागीय समीक्षा की गयी। विभागीय समीक्षोपरान्त पाया गया श्री भूषण के द्वारा अपने बचाव में मुख्य रूप से कार्य बोझ की अधिकता होने एवं सिलिंग ए॰सी॰ से गर्मी के दिनों में पानी लिकेज होने के कारण संचिका के पथभ्रष्ट हो जाने जैसे संभावना आधारित तर्क दिया गया है, जिसे पूर्णतः प्रमाणित एवं ठोस तर्क/तथ्य नहीं माना जा सकता है। 4. तद्नुसार प्रश्नगत मामले की विभागीय समीक्षा के उपरांत श्री कांति भूषण, तत्कालीन सहायक अभियंता, तकनीकी कोषांग, उड़नदस्ता प्रशाखा, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, बेनीपुर, के स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुऐ सम्यक विचारोपरांत उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (V) के तहत निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) "एक (01) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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16 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-1 (पथ)आरोप-43/2017--4816(s)--श्री बैरिस्टर राम, तत्कालिन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शेरघाटी संप्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संघटन, कार्य प्रमंडल-01, समस्तीपुर के पथ प्रमंडल शेरघाटी पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4564(एस),दिनांक-09.09.2021 के द्वारा ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक " के संसूचित दंडादेश के विरुद्ध उनके द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया हैं।17 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 2. पथ प्रमंडल शेरघाटी अंतर्गत इमामगंज-कोठी-सलैया पथ के निर्माण कार्य में स्थल पर सामग्री की मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित किये बगैर अनियमित तरीके से संवेदक को अग्रिम दिए जाने के मामले में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-556 (एस), दिनांक-17.01.2018 द्वारा श्री राम के विरुद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित किया गयाः-
(i) दिनांक-04.04.17 के स्थल जाँच प्रतिवेदन के अनुसार कार्य स्थल पर 7773.74 घनमीटर कम मेटेरियल पाया गया।
(ii) एकरारनामा परिमाण विपत्र की दर से 10 प्रतिशत कम पर काम किया गया, परन्तु Secured Advance के भुगतान में 10 प्रतिशत की कटौती नहीं की गयी।
(iii) कार्य स्थल पर सामग्री की विधिवत Stacking भी नहीं पायी गयी एवं मेटेरियल की आपूर्ति से संबंधित M एवं N फॉर्म तथा चालान की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
(iv) दिनांक-07.04.17 के स्थल जाँच प्रतिवेदन के अनुसार स्थल पर उपलब्ध/ बिछायी गयी सामग्री की मात्रा मापी पुस्त में अंकित सामग्री की मात्रा से 3973.22 घन मीटर कम पायी गयी।
3. संचालन पदाधिकारी का जांच प्रतिवेदन पत्रांक-1343, दिनांक-15.05.2019 में उक्त चारों आरोपों को अप्रमाणित होने संबंधी मन्तव्य प्रतिवेदित किया गया। इस जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षा के क्रम में आरोप संख्या-i एवं iv के संबंध में सहमति का निर्णय लिया गया, जबकि आरोप संख्या-ii एवं iii से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-779 (एस) दिनांक 05.02.2021 के द्वारा असहमति के बिन्दु पर श्री राम से द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। असहमति के बिन्दु निम्नवत् हैः-
आरोप संख्या-ii के संबंध में उल्लेखनीय है कि-यद्यपि श्री राम द्वारा Secured dvance की राशि के समायोजन के क्रम में 10% राशि की कटौती के साथ ही SD, IT, ST, Labour Cess एवं Royalty की भी कटौती की गयी है, तथापि Secured Advance के भुगतान के समय 10% राशि की कटौती नहीं की गयी है, जो अपेक्षित था। स्पष्ट है कि मामला के संज्ञान में आने के पश्चात् वांछित राशि की कटौती की गयी है। अतएव इस हद तक संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित होता है।
आरोप संख्या-iii के संबंध में उल्लेखनीय है कि हांलाकि श्री राम द्वारा निरीक्षण की तिथि के बाद दिनांक 08.04. 2017 को आपूर्त्ति से संबंधित M एवं N Form तथा चालान की प्रति जाँच दल को उपलब्ध करा दिया गया, परन्तु दिनांक 06.04.2017 को जांच के समय जाँच दल को वांछित कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही M Form का सत्यापन प्रारंभ में First Class Magistrate से नहीं कराकर Notary से कराया गया। हांलाकि बाद में आरोपी के द्वारा M Form का सत्यापन First Class Magistrate से भी कराया गया । इस प्रकार स्पष्ट होता है कि श्री राम द्वारा उक्त दोनों कार्रवाई ससमय नहीं किया गया। अतएव इस हद तक संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित होता है।
4. श्री राम ने पत्रांक-360, दिनांक-12.04.2021 के द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया, जिसे निम्नलिखित आधार पर अस्वी—त्त करते हुए उनके विरुद्ध दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गयाः-
4.1 आरोप संख्या-ii के संदर्भ में उल्लेखनीय है कि इस आरोप के संदर्भ में श्री राम ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मात्र उन्हीं तथ्यों को अंकित किया है, जैसा कि इस संबंध में संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में मंतव्य दिया है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य की विभागीय समीक्षोंपरांत ही विभाग द्वारा इसे असहमत होते हुए उनके विरूद्ध असहमति के बिन्दुओं को रेखांकित किया गया है।
4.2 आलोच्य कार्य स्थल की जाँच दिनांक 04.04.2017 एवं दिनांक 07.04.2017 को की गई, जिसके उपरांत Secured Advance के समायोजन के क्रम में 10% राशि की कटौती की गई। आरोपी पदाधिकारी के बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार भी इसकी पुष्टि मापी पुस्तिका सं.- 45 के पृ.- 42 एवं 59 से होती है। उक्त पृष्ठों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि यह कटौती दिनांक 01.07.2017 एवं 17.08.2017 को की गई। स्पष्ट है कि मामले के संज्ञान में आने के बाद उक्त —त्य को संपादित किया गया।
4.3 कार्यपालक अभियंता को संवेदक के किसी भी विपत्र से एकरारनामा के अनुसार कटौती करनी थी। एकरारनामा परिमाण विपत्र के दर से 10% कम पर किया गया था। अतः अग्रिम भुगतान में 10% राशि की कटौती करनी थी, जो आरोपी पदाधिकारी के द्वारा ससमय नहीं किया गया, बल्कि मामला उजागर होने के बाद किया गया। श्री राम के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-ii इस हद तक प्रमाणित होते है।
4.4 आरोप संख्या-iii के संदर्भ में उल्लेखनीय है कि श्री राम के द्वारा दिनांक 08.04.2017 को आपूर्ति से संबंधित M एवं N फॉर्म तथा चलान की प्रति जाँच दल को उपलब्ध कराया गया, परन्तु दिनांक 07.04.2017 को जाँच के समय जाँच दल को वांछित कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही M फॉर्म का सत्यापन प्रारंभ में First Class Magistrate से नहीं कराकर Notary से कराया गया और बाद में आरोपी के द्वारा M फॉर्म का सत्यापन First Class Magistrate से भी करवाया गया। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी के द्वारा ससमय वांछित कार्रवाई नहीं की गयी है।18 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 4.5 आरोपी का यह तर्क कि M एवं N फॉर्म का सत्यापन Notary से कराये जाने या First Class Magistrate से कराये जाने में कार्यपालक अभियंता की कोई भूमिका नहीं है, इस संबंध में उल्लेखनीय है कि यद्यपि M & N Form का सत्यापन First Class Magistrate से कराकर प्रमंडलीय कार्यालय में जमा करने का दायित्व संबंधित संवेदक का है, परन्तु उनके कार्यालय में उक्त Form First Class Magistrate से ही सत्यापित होकर जमा हो - की जवाबदेही कार्यपालक अभियंता के रूप में आरोपी श्री राम का ही है। यदि ऐसा न होता तो स्वंय श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शेरघाटी द्वारा पत्रांक-235, दिनांक 26.04.2017 के द्वारा इसकी अनिवार्यता को देखते हुए संवेदक को निदेश नहीं दिया जाता कि वह चालान एवं M Form को First Class Magistrate से सत्यापित कराकर कार्यालय में जमा करें। अतएव इस हद तक श्री राम के विरूद्ध आरोप संख्या-iii प्रमाणित होते है।
5. श्री राम ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य, दिनांक-11.02.2022 में आरोप संख्या-ii के संबंध में अंकित किया हैं कि Secured Advance के भुगतान में 10 प्रतिशत राशि की कटौती CMBD की कंडिका-C-10B(i)में वर्णित निदेशों के अनुसार ही संबंधित संवेदक के अधियाचना पर सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के द्वारा स्थल जांच प्रतिवेदन के आधार पर दिए गए (Requistion) अग्रिम अधियाचना के आधार पर, अधीक्षण अभियंता पथ अंचल, गया के द्वारा दिए गए सहमति पत्र के अनुरूप ही पूरी सामग्री का 75% लागत पर ही भुगतान किया गया, जिसे शुरू के दो विपत्र में ही सभी प्रकार की कटौती के साथ समायोजन कर लिया गया, जिसमे किसी तरह की अनियमितता नहीं हैं तथा यह महज संयोग हैं कि यह मामला उजागर होने के पश्चात हुआ हैं।
उक्त से स्पष्ट है कि आरोप संख्या-ii के संबंध में कंडिका-3 में अंकित असहमति के सृजित बिन्दु तथा इसपर श्री राम के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर कंडिका-4.1 से 4.3 में पूर्व में किये गए विभागीय समीक्षा के अतिरिक्त श्री राम ने मामला के संज्ञान में आने के बाद वांछित राशि के समायोजन के समबंध में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया हैं बल्कि सिर्फ इतना अंकित किया हैं कि-"महज संयोग हैं कि यह मामला उजागर होने के पश्चात हुआ हैं।"
6. पुनर्विचार अभ्यावेदन में आरोप संख्या-iii के संबंध में श्री राम के द्वारा अंकित किया गया हैं कि आपूर्ति से संबंधित M एवं N Form तथा चालान की प्रति दिनांक-08.04.2017 को जांच दल को उपलब्ध करा दिया गया अर्थात मूल आरोप संख्या- iii के संदर्भ में विभाग भी इस तथ्य को मानती हैं कि उनके द्वारा M एवं N Form जांच दल को उपलब्ध कराई गई। लेकिन M Form का सत्यापन प्रारंभ में First Class Magistrate से न कराकर Notary से कराया गया, हालांकि इसे बाद में First Class Magistrate से तत्काल करा लिया गया था। उक्त के संबंध में उल्लेखनीय हैं कि Notary से कराए गए सत्यापन का भी वैधानिक मान्यता हैं, क्योंकि Notary Act में उन्हे यह शक्ति प्रदत्त हैं। यह तथ्य सही हैं कि संवेदक द्वारा M Form का सत्यापन कर उसे प्रमंडलीय कार्यालय में जमा करना हैं तथा प्रारंभ में Notary Act में विहित प्रावधान के अनुसार Notary द्वारा सत्यापित M Form को स्वी—त्त किया गया, हालांकि संवेदक को उक्त Form को First Class Magistrate से भी सत्यापित करने का निदेश दिया गया और संवेदक द्वारा अविलंब जमा भी कर दिया गया। इस प्रकरण में उनके द्वारा कोई भी नियम विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई, अतएव आरोप संख्या—iii के संबंध में असहमति के बिन्दु का आधार यथोचित प्रतीत नहीं होता हैं।
आरोप संख्या-iii के संबंध में भी असहमति के सृजित बिन्दु (कंडिका-3) एवं इसपर श्री राम के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर पूर्व के विभागीय समीक्षा (कंडिका-4.4 एवं 4.5) के अवलोकन से स्पष्ट होता हैं कि श्री राम ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया हैं। श्री राम के उक्त अंकित तथ्यों को पूर्व में ही अस्वी—त्त कर दिया गया हैं, अतएव इसपर पुनः विचार किया जाना यथोचित नहीं होगा।
श्री बैरिस्टर राम, तत्कालिन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शेरघाटी संप्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संघटन, कार्य प्रमंडल-01, समस्तीपुर ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई ऐसा नया तथा ठोस तथ्य प्रस्तुत नहीं किया हैं, ऐसी स्थिति में श्री राम के द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को स्वीकार किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। अतः श्री राम के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वी—त्त किया जाता है
7. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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21 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-1 (पथ)आरोप-46/2020-4889(s)--श्री भरत लाल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बक्सर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, गया के पथ प्रमंडल, बक्सर के पदस्थापन काल में निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-2405 (एस0) दिनांक-27.05.2021 द्वारा श्रीलाल से स्पष्टीकरण की मांग की गई :-
1. पथ प्रमंडल, बक्सर के पथ योजनाओं का विभाग द्वारा किये गये समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री भरत लाल, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बक्सर के द्वारा दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरती जा रही है, जिसके फलस्वरूप प्रमंडल की उपलब्धि संतोषजनक नहीं है। उनके द्वारा दिनारा (एन॰एच॰-30) से जलहारा (एस॰एच॰-17) का कार्य एवं IRQP Work of Left over part of NH-84 (NHAI) road from km 0.0 to km 6.25 including road19 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 crust work, RCC drain work का कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह अनियमितता उनके पर्यवेक्षण के अभाव एवं निविदा शर्त्ताे के प्रभावी अनुश्रवण नहीं करने के कारण हुआ है। साथ ही इससे यह भी स्पष्ट होता है कि OPRMC के अन्तर्गत लक्ष्यों की उपलब्धि नहीं हो पा रही है तथा योजना मद में विभिन्न योजनाओं की प्रगति भी संतोषजनक नहीं है।
2. उक्त पायी गयी अनियमितता के लिए श्री लाल से विभागीय पत्रांक-3958 (एस) दिनांक 24.06.2020 के द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसका उत्तर श्री लाल ने पत्रांक-926, दिनांक 08.07.2020 के द्वारा समर्पित किया। इसकेे विभागीय समीक्षा में प्रमंडल के कार्य में यथोचित सुधार नजर नहीं आ रहा है। श्री लाल के समर्पित उत्तर के विभागीय समीक्षोंपरांत कंडिका-1 के आरोप के क्रम में निम्नलिखित आरोप के बिन्दु स्पष्ट होते है :-
2.1 दिनारा (एन॰एच॰-30) से जलहारा (एस॰एच॰-17) का कार्य - यह पथ कार्य दिनांक 26.10.2020 तक पूरा होना था लेकिन अधीक्षण अभियंता, भोजपुर पथ अंचल, आरा के पत्रांक-31 अनु॰, दिनांक 14.01.2021 से स्पष्ट होता है कि यह कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है।
2.2 कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है कि संवेदक द्वारा अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं किये जाने के कारण उन्हें दिनांक 04.07.2020 को debar किया जा चुका है। साथ ही प्रगति संतोषजनक नहीं रहने के कारण कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-45, दिनांक 12.01.2021 द्वारा इनके एकरारनामा को Rescind करने के लिए Notice जारी किया गया है।
कार्यपालक अभियंता के द्वारा संवेदक के विरूद्ध उक्त दोनों कार्रवाई तब की गयी जब कार्य के धीमी प्रगति के लिए विभागीय पत्रांक-3958 (एस), दिनांक 24.06.2020 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई। स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता ने अपने विहित कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरती।
2. श्री लाल द्वारा पत्रांक-715(अनु॰), दिनांक-09.06.2021 के माध्यम से स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। अपने स्पष्टीकरण उत्तर में श्री लाल द्वारा आरोपवार निम्नलिखित तथ्य अंकित किये गयेः-
आरोप संख्याः- 01- (i) आलोच्य पथ के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य प्रारंभ की तिथि 27.06.2019 तथा कार्य की समाप्ति की तिथि 26.10.202090 दिन (समयवृद्धि दी गयी) अर्थात 25.01.2021 है।
(ii) यह पथ चौसा कैनाल से निकला हुआ खीरी-रजवारा का सर्विस पथ है, जिसमें मुख्य अभियंता, सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक-1687, दिनांक 05.09.2019 द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गत होने के पश्चात संवेदक द्वारा कार्य में तेजी लाया गया। श्री लाल ने अंकित किया है कि निर्माणाधीन पथ के दोनों तरफ कैनाल रहने के कारण कृषि पटवन हेतु लगभग 10 माह कैनाल में पानी रहता है। श्री लाल ने प्रमाणस्वरूप जल संसाधन विभाग का नहरों में जल स्नाव का दैनिक बुलेटिन की छायाप्रति संलग्न किया है। उक्त के वजह से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिलने के बावजूद भी कार्य कराने में समय लगा। श्री लाल ने अंकित किया है कि उनके सघन पर्यवेक्षण में retaining wall का कार्य 10 नवम्बर 2019 से 25 दिसम्बर 2019 तक 31.20m, 20 अप्रैल 2020 से 05 जून 2020 तक 134.70m, 10 नवम्बर 2020 से 25 दिसम्बर 2020 तक 22.75m एवं 20 अप्रैल 2021 से 05 जून 2021 तक 104.5m +133m लम्बाई में कार्य कराया जा रहा है। (iii) दो-दो बार कोरोना अवधी में लॉकडाउन रहने के वजह से मजदूर के अभाव, सामग्रियों की ढुलाई एवं बालू के खनन में रोक के कारण Retaining Wall का कार्य की प्रगति धीमी रही है, फिर भी 270.40 मीटर में Retaining wall का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। श्री लाल ने अंकित किया है कि पथ निर्माण का कार्य करीब-करीब पूरा कर लिया गया है। 329.60 मीटर लांबाई में retaining wall का कार्य पूर्ण नहीं होने के वजह से पथ के 500 मीटर लंबाई में पथ का कार्य बाधित है।
(iv) श्री लाल ने अंकित किया है कि कार्य समय पर पूर्ण नहीं करने के वजह से उनके द्वारा संवेदक को debar किया गया है एवं विपत्र से रुपये 38,34,870.00 मात्र की कटौती की गयी है। उन्होंने अंकित किया है जल संसाधन विभाग के दैनिक बुलेटिन से स्पष्ट होता है कि नहर साल में सिर्फ दो माह सूखा रहता है, उसी अवधि में Retainng wall का कार्य संभव है। कोरोना काल एवं कैनाल में पानी न रहने की अवधि देखते हुए इस कार्य को दिसम्बर 2021 तक पूर्ण कर लिया जायेगा।
आरोप संख्याः- 02- (i) संवेदक द्वारा OPRMC-2/36A का एकरारनामा दिनांक 01.06.2019 को किया गया था। एकरारनामा कार्य योजना के प्रथम वर्ष में I.R, P.M एवं M.I का कार्य समाप्ति की अवधि 31.05.2020+90 (समयवृद्धि) अर्थात कार्य समाप्ति की अवधि 30.08.2020 है।
(ii) योजना के अनुसार PM एवं MI कार्य में वांछित प्रगति नहीं रहने के कारण संवेदक को कार्यालय आदेश संख्या-156, दिनांक 04.07.2020 द्वारा Debar किया जा चुका है। Debar के पत्र प्राप्ति के बाद भी संवेदक द्वारा PM एवं MI कार्य में वांछित प्रगति नहीं रहने के वजह से पत्रांक-45, दिनांक 12.01.2021 द्वारा "Contractor Termination" हेतु नोटिस भेजा गया है। जिसके आलोक में संवेदक के पत्रांक-शून्य, दिनांक 12.01.2021 द्वारा 2.5 महीने मं सभी छूटे हुए कार्यो को पूर्ण करने हेतु आवश्वासन दिया गया है।
(iii) Constractor Termination नोटिस के पश्चात् संवेदक द्वारा MI एवं PM की प्रगति दिखाई गई। नोटिस निर्गत के पश्चात संवेदक द्वारा दिए गए आश्वासन एवं कराये जा रहे कार्य को मुख्य अभियंता, पथ संधारण कोषांग,20 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 अधीक्षण अभिंयता, भोजपुर पथ अंचल, आरा एवं मुख्य अभियंता, दक्षिण के संज्ञान में लाते हुए Contractor Termination से संबंधित मार्गदर्शन की मांग की गई है।
(iv) श्री लाल ने अंकित किया है कि कार्य समय पर नहीं पूरा करने के लिए उनके द्वारा संवेदक को कई पत्र लिखा गया है। संवेदक द्वारा MBD के एकरारनामा के शर्त्तो एवं कार्य योजना के अनुरूप कार्य पूर्ण न करने के कारण MBD के सुसंगत कंडिकाओं के अनुसार संवेदक के विपत्र से रुपये 96,69,390.00 मात्र की कटौती की गयी हैं। उन्होंने अंकित किया है कि OPRMC-2/36A के सात वर्ष के Maintenance Policy के अधीन है। दूसरे वर्ष का शेष बचे PM कार्य योजना के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के अन्दर दिनांक 30.08.2021 तक पूरा करा दिया जायेगा। MI का कार्य दिनांक 30.08.2020 तक पूर्ण कराने का लक्ष्य था। परन्तु संवेदक द्वारा कार्य में शिथिलता, कोरोना अवधि रहने से लगे लॉकडाउन के कारण मजदूर के अभाव, सामग्रियों की ढुलाई एवं बालू के खनन रोक के कारण कार्य पूर्ण नहीं कराया जा सका है। MI का कार्य एकरारनामा के सुसंगत कंडिकाओं के अनुरूप कार्रवाई करते हुए दिसम्बर 2021 तक पूरा करा लिया जायेगा।
3. श्री भरत लाल, कार्यपालक अभियंता के स्पष्टीकण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गई एवं समीक्षोपरान्त पाया गया कि आलोच्य दोनो योजना कार्य की समाप्ति की तिथि बीत जाने के बावजूद स्पष्टीकरण लिखे जाने तक योजना कार्य को शत-प्रतिशत पूर्ण नहीं किया गया है। हॉलाकि आरोपी के द्वारा योजना कार्य के विलंब की स्थिति में संबंधित संवेदक को Debar किये जाने सहित उनके विपत्र से वांछित कटौती भी की गई है, परन्तु यह भी सत्य है कि उनके द्वारा योजना कार्य को ससमय पूर्ण नहीं किया गया है, अतएव इस हद तक आरोपी श्री भरत लाल की लापरवाही परिलक्षित होता है। उपर्युक्त विभागीय समीक्षा के आलोक में सम्यक विचारोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये आरोपो के लिए श्री भरत लाल, तत्कानीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बक्सर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, गया के स्पष्टीकरण पत्रांक-715(अनु॰), दिनांक-09.06.2021 को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के स्पष्टीकरण-3 के आलोक में उनके विरूद्ध निम्न दंड संसुचित किया जाता हैः-
(क) चेतावनी की सजा, जिसकी प्रविष्टि श्री लाल के चऱित्र पुस्त में की जाएगी। 4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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26 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा (निगम)आरोप-49/2018-4953(s)--श्री बाबू लाल प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, मगध प्रमंडल, कैम्प डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पत्रांक-3005 दिनांक-30.07.2018 के द्वारा बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, मगध प्रमंडल कैम्प, डेहरी ऑन सोन के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता संबंधी मामले में प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-9006 (एस) अनु0 दिनांक-28.11.2018 के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गई।
2. श्री प्रसाद के पत्रांक-62 अनु0 दिनांक-15.01.2019 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त निर्णय लिये जाने के क्रम में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर पर प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना का मंतव्य प्राप्त करने का निर्णय लिया गया। तदालोक में विभागीय पत्रांक-7124 (एस) अनु0 दिनांक 02.08.2019 द्वारा श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण उतर की छायाप्रति अनु0 सहित संलग्न करते हुए उक्त स्पष्टीकरण उतर पर सुस्पष्ट एवं तथ्यात्मक मंतव्य उपलब्ध कराने हेतु पुलिस महानिदेशक-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना से अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में सचिव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पत्रांक-2693 अनु0 दिनांक-27.08.2020 के द्वारा अधीक्षण अभियंता, (कार्य अंचल-01), बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना का मंतव्य विभाग को उपलब्ध करया गया, जिसमे गठित आरोप के संदर्भ में श्री प्रसाद को पूर्ण रूप से दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुशंसा की गयी।
3. निगम से प्राप्त मंतव्य के आलोक में समीक्षोपरांत श्री प्रसाद के दिनांक-31.01.2019 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (ग) के तहत विभागीय पत्रांक-502 (एस) अनु0 दिनांक-11.02.2022 के माध्यम से निगम द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप पत्र, श्री प्रसाद के द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण उतर एवं स्पष्टीकरण उतर पर निगम द्वारा उपलब्ध कराये गयें मंतव्य की छायाप्रतियाँ संलग्न करते हुए नए सिरे से स्पष्टीकरण पूछा गया। निगम द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य के संबंध में श्री प्रसाद के पत्रांक-शून्य दिनांक-15.03.2022 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उतर विभाग को समर्पित किया गया, जिसकी विभाग स्तर से समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि :-
(i) इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप- किसी भी एकरारनामा में NSC का नम्बर अंकित राशि के साथ बगैर किये हुए एकरारनामा पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें अधिकांश एकरारनामा करने के पूर्व न तो लेखा सहायक और न ही लेखापाल से जाँच कराया गया और केवल एक कम्प्यूटर ऑपरेटर के साथ मिली-भगत कर एकरारनामा किया गया है-के संबंध में साक्ष्य के रूप में इनके द्वारा संबंधित एकरारनामा की प्रतियों पर अपना स्वंय के द्वारा इंगित करते हुए लेखापाल का हस्ताक्षर को दिखाने का प्रयास किया गया है, जबकि निगम से प्राप्त मंतव्य में इसका खण्डन किया गया है। उनके द्वारा21 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 एकरारनामा पर NSC का नम्बर अंकित नहीं होने के संबंध में कहा गया है कि एकरारनामा के विहित स्थान पर काफी कम जगह होने के कारण नम्बर का अंकन नहीं किया गया है। NSC का नम्बर कार्यालय कैशियर द्वारा एकरारनामावार संबंधित पंजी में संधारित किया जाता है, जिसका साक्ष्य संलग्न नहीं किये जाने के संबंध में इन्होंने अल्प अवधि में उत्तर समर्पित करने का तर्क दिया गया है। इनका उत्तर विभाग में दिनांक 21.03.2022 को प्राप्त हो चुका था। यदि वे चाहते तो अपने पूरक उत्तर के तहत भी साक्ष्य समर्पित कर सकते थे।
(ii) बिना लेखा सहायक एवं लेखापाल के अनुशंसा से NSC विमुक्त किये जाने के संबंध में इन्होंने यह तर्क दिया है कि इन्हें यह नहीं बताया गया है कि इन्होंने किस NSC को कम्प्यूटर ऑपरेटर की अनुशंसा पर विमुक्त किया है। इनका तर्क का पर्याप्त आधार नहीं हैं, क्योंकि निगम द्वारा प्रतिवेदित आरोप में स्पष्ट रूप से विभिन्न एकरारनामा का उल्लेख किया गया है।
(iii) निगम द्वारा उपलब्ध कराया गया मंतव्य कि-सत्यापन में पाया गया है कि NSC की वापसी संवेदक को कम्प्यूटर ऑपरेटर के अनुशंसा पर की गयी है तथा उसने यह भी उल्लेखित नहीं किया है कि यह NSC किस कार्य से संबंधित है के संबंध में इन्होंने कहा है कि-निगम के द्वारा उन्हें फसाने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर आरोप लगाया गया है।
(iv) संवेदक श्री राणा प्रताप सिंह द्वारा अपना अग्रधन कि जो राशि NSC वापस करने की मांग की जा रही थी, उतनी राशि का NSC उनके द्वारा जमा ही नहीं किया गया तथा कम्प्यूटर ऑपरेटर से साठ-गाठ कर एक योजना की अग्रधन की राशि (NSC) दूसरे योजना में जमा दिखा दी गयी एवं एकरारनामा कर लिया गया, के संबंध में इनके द्वारा यह कहा गया है कि विषयांकित मामले में संवेदक के निविदा को मुख्य अभियंता/प्रबंध निदेशक के स्तर पर सफल घोषित किया गया है, इसलिए इस बात का प्रमाण है कि NSC जमा किया गया है। इन्होंने निगम के द्वारा प्रकाशित विभिन्न निविदा आमंत्रण सूचना की प्रतियाँ साक्ष्य के रूप में संलग्न किया है, जो आरोप से भिन्न है तथा इनका तर्क भी यथेष्ट प्रतीत नहीं होता है।
अतएव उपर्युक्त परिपेक्ष्य में श्री बाबू लाल प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, मगध प्रमंडल, कैम्प डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (ग) के तहत पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में उनके पत्रांक-शून्य दिनांक-15.03.2022 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर संतोषजनक नहीं पाये जाने की स्थिति में इसे अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध सरकार के निर्णयानुसार बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139(ग) के तहत् निम्न दंड अधिरोपित किया जाता है :-
(क) इनके पेंशन से 5% राशि की दो (02) वर्षों तक कटौती । प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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29 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-21/2019-5019(s)--पथ प्रमंडल संख्या-01, मुजफ्फरपुर के अन्तर्गत माड़ीपुर-ओभरब्रिज-सरैयागंज टावर (मुजफ्फरपुर-रेवाघाट) पथ में कराये गये कार्य की उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 के द्वारा जाँचोपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरान्त आलोच्य पथ में निम्न त्रुटियाँ/अनियमितता पायी गयीः-
(i) पथ के कि॰मी॰ 2रे एवं 3रे में कराये गये PQC कार्य का औसत Compressive Strength 130.4722 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 (i) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।''
4. उक्त संसूचित दण्ड पर पुनर्विचार करने हेतु श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक-468 दिनांक-02.07.2019 समर्पित किया गया। श्री सिंह के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न तथ्य/तर्क समर्पित किया गयाः-
(i) Compressive Strength प्रावधान से कम पाये जाने संबंधी आरोप के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है कि अगर PQC कार्य का Compressive Strength 130.47 kg/cm2 रहता तो जाँच पदाधिकारी को सड़क क्षतिग्रस्त अवस्था में प्राप्त होता। पथ की स्थिति उचित होने का उल्लेख करते हुए कतिपय फोटोग्राफ्स भी समर्पित किये गये हैं। (ii) Cement:Sand:Chips का औसत अनुपात प्रावधान के अनुकूल नहीं पाये जाने के संबंध में इन्होंने कहा है कि औसत अनुपात 1:11.47:15.96 रहता तो सड़क का टूटना स्वभाविक था।
(iii) श्री सिंह के द्वारा कहा गया है कि पूर्व के स्पष्टीकरण में नमूने की जाँच पद्धति के संबंध में रखे गये तर्काें पर विचार नहीं किया गया है। इस संबंध में तकनीकी समिति का कोई मंतव्य अंकित नहीं है।
(iv) उक्त के अतिरिक्त श्री सिंह के द्वारा यह भी कहा गया है कि जाँच के क्रम में मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के ज्ञापांक- 1045 दिनांक- 06.07.1992 का पालन नहीं किया गया है। साथ ही इन्होंने केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा गठित तकनीकी समिति द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-1(i) में उल्लेखित टिप्पणी का भी तर्क दिया है।
5. श्री सिंह द्वारा समर्पित तथ्यों/तर्कों की समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किये गये तथ्यों/तर्कों को ही नये सिरे से प्रस्तुत किया गया है। उक्त के कारण इनके विरूद्ध पूर्व में संसूचित दंडादेश पर पुनर्विचार करने का कोई युक्ति संगत अवसर प्रतीत नहीं होता है।
6. अतएव उपर्युक्त के आलोक में सम्यक् विचारोपरान्त श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वारा आलोच्य मामले में समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक- 468 दिनांक- 02.07.2019 को अस्वीकृत किया जाता है।
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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29 सितम्बर 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-21/2019-5021(s)--पथ प्रमंडल संख्या-01, मुजफ्फरपुर के अन्तर्गत माड़ीपुर-ओभरब्रिज-सरैयागंज टावर (मुजफ्फरपुर-रेवाघाट) पथ में कराये गये कार्य की उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 के द्वारा जाँचोपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरान्त आलोच्य पथ में निम्न त्रुटियाँ/अनियमितता पायी गयीः-
(i) पथ के कि॰मी॰ 2रे एवं 3रे में कराये गये PQC कार्य का औसत Compressive Strength 130.4723 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 (i) Compressive Strength प्रावधान से कम पाये जाने संबंधी आरोप के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है कि अगर PQC कार्य का Compressive Strength 130.47 kg/cm2 रहता तो जाँच पदाधिकारी को सड़क क्षतिग्रस्त अवस्था में प्राप्त होता। पथ की स्थिति निर्माण के 05 साल बाद भी अच्छी होने के संबंध में कतिपय फोटोग्राफ्स समर्पित किये गये हैं।
(ii) Cement:Sand:Chips का औसत अनुपात प्रावधान के अनुकूल नहीं पाये जाने के संबंध में इन्होंने कहा है कि निर्माण के समय सीमेंट, कंक्रिट एवं बालू को सही अनुपात में मिलाया गया।
(iii) श्री कुमार के द्वारा कहा गया है कि पूर्व के स्पष्टीकरण में नमूने की जाँच पद्धति के संबंध में रखे गये तर्काें पर विचार नहीं किया गया है। इस संबंध में तकनीकी समिति का कोई मंतव्य अंकित नहीं है। (iv) उक्त के अतिरिक्त श्री कुमार के द्वारा यह भी कहा गया है कि जाँच के क्रम में मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के ज्ञापांक- 1045 दिनांक- 06.07.1992 का पालन नहीं किया गया है। साथ ही इन्होंने केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा गठित तकनीकी समिति द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-1(i) में उल्लेखित टिप्पणी का भी तर्क दिया है।
5. श्री कुमार द्वारा समर्पित तथ्यों/तर्कों की समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किये गये तथ्यों/तर्कों को ही नये सिरे से प्रस्तुत किया गया है। उक्त के कारण इनके विरूद्ध पूर्व में संसूचित दंडादेश पर पुनर्विचार करने का कोई युक्ति संगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। 6. अतएव उपर्युक्त के आलोक में सम्यक् विचारोपरान्त श्री अंजनी कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर के द्वारा आलोच्य मामले में समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक- 849 दिनांक- 02.08.2019 को अस्वीकृत किया जाता है। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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10 अक्तूबर 2022
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-25/2019--5114(s)--श्री सैयद सिकन्दर आजम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृृत्त अधीक्षण अभियंता द्वारा पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल, अररिया अन्तर्गत भारत-नेपाल सीमा पथ में सिकटी से कुँआरी के बीच कराये गये नाला निर्माण कार्य में घटिया सामग्री उपयोग करने की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-02, पथ निर्माण विभाग द्वारा दिनांक 28.01.2015 एवं दिनांक 12.02.2015 को किया गया। उनके पत्रांक-111 अनु॰, दिनांक 11.03.2015 द्वारा प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-204, दिनांक 29.04.2015 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोंपरांत निम्नलिखित त्रुटियाँ पायी गयी :-
(i) पथ के 8वें एवं 10वें कि॰मी॰ में कराये गये नाला निर्माण में RCC का औसत कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ 83.724 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 12 अक्तूबर 2022 सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-25/2019-5161(s)--श्री दिनेश्वर झा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृृत्त सहायक अभियंता द्वारा पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल, अररिया अन्तर्गत भारत-नेपाल सीमा पथ में सिकटी से कुँआरी के बीच कराये गये नाला निर्माण कार्य में घटिया सामग्री उपयोग करने की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-02, पथ निर्माण विभाग द्वारा दिनांक 28.01.2015 एवं दिनांक 12.02.2015 को किया गया। उनके पत्रांक-111 अनु॰, दिनांक 11.03.2015 द्वारा प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-204, दिनांक 29.04.2015 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोंपरांत निम्नलिखित त्रुटियाँ पायी गयी :-
(i) पथ के 8वें एवं 10वें कि॰मी॰ में कराये गये नाला निर्माण में RCC का औसत कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ 83.725 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 पत्रांक 1/विविध-20/2021-4606(s) पथ निर्माण विभाग ------
सेवा में, महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) बिहार, वीरचन्द पटेल पथ, पटना।
पटना, दिनांक 7 सितम्बर 2022 विषय :- बिहार सचिवालय सेवा के विभिन्न ग्रेड के पदों पुनर्गठन/पुनर्निधारण के फलस्वरूप पथ निर्माण विभाग में विभिन्न पदों के पुनरीक्षित सृजित स्वीकृत पदों को कर्णांकित करने के संबंध में।
आदेश : स्वीकृत।
निदेशानुसार उपर्युक्त विषय के संबंध में कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2759 दिनांक 28.02.2019 के द्वारा बिहार सचिवालय सेवा के विभिन्न ग्रेड के पदों के पुनर्गठन/पुनर्निधारण के फलस्वरूप पथ निर्माण विभागके लिए पुनरीक्षित अवर सचिव, कोटि के 05 (पाँच) पद, उप सचिव कोटि के 02 (दो) पद को सृजित किया गया है। अपर सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित त्रिसदस्यीय समिति की दिनांक 03.06.2022 की अनुशंसा के आलोक में वर्णित समेकित पदों को निम्न रूप में कर्णांकित किया जाता है :-
क्रमांक पदनाम पदों की संख्या 1 निदेशक (संयुक्त सचिव स्तर) मुख्यालय - 01
2 उप सचिव (मुख्यालय) - 04
3 अवर सचिव (मुख्यालय) - 06
4 अवर सचिव (लेखाहाउस किपींगसामग्री क्रय) - 01
5 अवर सचिव (यांत्रिक उपभागTTRI) - 01
6 अवर सचिव (रा॰उ॰पथ उत्तर) - 01
7 अवर सचिव (के॰नि॰सं॰) - 01
8 अवर सचिव (उत्तर बिहार उपभाग) - 01
9 अवर सचिव, (दक्षिण बिहार उपभाग) - 01
10 अवर सचिव, (रा॰उ॰पथ दक्षिण) - 01
11 अवर सचिव, सीमांचल उपभाग - 01
2. उपर्युक्त पदाधिकारियों के वेतनादि निकासी संबंधित मुख्यालय/उपभाग में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी द्वारा की जायेगी।
3. विभागीय पत्रांक-8683 (एस) दिनांक 01.08.2011 को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, अपर सचिव।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचना
11 नवम्बर 2022
सं0 6/नि0प्रति0नियु0-01-01/2019-वा0-कर0-3064--विभागीय अधिसूचना संख्या-1739 दिनांक 14.06.2019 द्वारा 60-62वीं बैच के 73 पदाधिकारियों का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन अप्राप्त रहने के कारण औपबंधिक रूप से नियुक्ति की गयी। उक्त नवनियुक्त पदाधिकारियों में से 13 पदाधिकारियों की औपबंधिक नियुक्ति को विभागीय अधिसूचना संख्या-1868, दिनांक 15.09.2021 द्वारा एवं 32 पदाधिकारियों की औपबंधिक नियुक्ति को विभागीय अधिसूचना संख्या-1706 दिनांक 20.06.2022 द्वारा नियमित किया जा चुका है। पुनः निम्नांकित 07 पदाधिकारियों का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है, जो अनुकूल है :-
26| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | संयुक्त मेधा क्रमांक | ग ृह जिला | जन्म तिथि | वर्त्तमान पदस्थापन |
| 1 | श्री गौरव | 158 | सहरसा | 15.01.1986 | बेतिया अंचल, बेतिया। |
| 2 | श्री रवि रंजन राज | 211 | पटना | 06.12.1989 | मुख्यालय, बिहार, पटना |
| 3 | वन्दना भारती | 329 | खगड़िया | 03.02.1986 | पटना दक्षिणी अंचल, पटना। |
| 4 | श्री अष्विनी कुमार प्रदीप | 437 | पूर्णिया | 12.10.1983 | फॉरबिसगंज अंचल। |
| 5 | श्री सोनू कुमार | 616 | रोहतास | 26.09.1992 | सहरसा अंचल। |
| 6 | श्री मृत्युंजय कुमार | 709 | पूर्वी चम्पारण | 12.06.1988 | तेघड़ा अंचल, तेघडा। |
| 7 | शालिनी प्रिया | 854 | भोजपुर | 22.02.1989 | पटना उत्तरी अंचल, पटना। |
औपबंधिक नियुक्ति को नियमित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,ह- पंकज कुमार सिन्हा, राज्य-कर अपर आयुक्त-सह-संयुक्त सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 36—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
27 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022भाग-2
बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और
नियम आदि।
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पथ निर्माण विभाग
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अधिसूचना
(शुद्धि-पत्र)
8 सितम्बर 2022
सं0 प्र॰2/स्था॰-वृ॰उ॰-21-01/2020-4649(s)--बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-II में सीधे नियुक्ति पथ निर्माण विभाग संवर्ग के अभियंताओं को विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा पूर्व में स्वीकृत ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ में कतिपय कारणों से (यथा प्रथम योगदान एवं प्रभार ग्रहण के बीच की अवधि का विनियमन, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-2910 दिनांक 28. 02.2022 द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश (अधिरोपित दंड प्रभावी होने के बीच में देय तिथि आने की स्थिति में वित्तीय उन्नयन दंड समाप्ति के पश्चात अनुमान्य होगा) एवं महालेखाकार (ले॰ एवं हक॰) बिहार, पटना/वित्त (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना द्वारा कतिपय अभियंताओं के प्रथम योगदान की तिथि त्रुटिपूर्ण होना प्रतिवेदित किये जाने) संशोधन अपेक्षित था। फलस्वरूप उक्त मामले को विभागीय स्क्रींनिग समिति की दिनांक 05.08.2022 को आहूत बैठक में रखा गया। समिति द्वारा वैसे कुल-13 अभियंताओं का योगदान की तिथि/देय तिथि/वेतनमान संशोधित करने हेतु अनुशंसा किया गया। अतः स्क्रींनिग समिति के उक्त अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित अभियंतओं को पूर्व से स्वीकृत ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ को निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है :-
1. विभागीय अधिसूचना संख्या-10871 (एस) दिनांक 27.11.2017 के क्रम संख्या-20 पर अंकित श्री बीरेन्द्र कुमार के नाम के सामने कॉलम-8 में दिनांक 01.07.2014 के स्थान पर दिनांक 01.01.2009 तथा कॉलम-9 में Level-13 के स्थान पर Level-13A पढ़ा जाय।
2. विभागीय अधिसूचना संख्या-13342 (एस) दिनांक 31.12.2012 के क्रम संख्या-276 पर अंकित श्री नन्दलाल बैठा के नाम के सामने कॉलम-7 में दिनांक 01.07.2012 के स्थान पर दिनांक 15.06.2007 (वेतनमान-PB-3 गे्रड पे-6600/- में प्रथम सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन) पढ़ा जाय।
3. विभागीय अधिसूचना संख्या-10871 (एस) दिनांक 27.11.2017 के क्रम संख्या-13 पर अंकित श्री विरेन्द्र कुमार के नाम के सामने कॉलम-8 में दिनांक 01.07.2015 PB-3 गे्रड पे-7600 के स्थान पर दिनांक 25.06.2009 PB-4 गे्रड पे-8700/- तथा कॉलम-9 में PB-4 गे्रड पे-8700/- के स्थान पर PB-4 गे्रड पे-8900/- पढ़ा जाय। 4. विभागीय अधिसूचना संख्या-10871 (एस) दिनांक 27.11.2017 के क्रम संख्या-37 पर अंकित श्री प्रभाशंकर कोकिल के नाम के सामने कॉलम-8 में दिनांक 20.06.2017 के स्थान पर दिनांक 01.07.2020 पढ़ा जाय।
5. विभागीय अधिसूचना संख्या-414 (एस) दिनांक 19.01.2021 के क्रम संख्या-25 पर अंकित श्री ललित कुमार के नाम के सामने कॉलम-7B में दिनांक 01.07.2018 Level-12 के स्थान पर दिनांक 15.06.2015 PB-3 गे्रड पे-7600/- पढ़ा जाय।
6. विभागीय पत्रांक-274 (एस) दिनांक 22.02.1995 के क्रम संख्या-37 पर अंकित श्री परमानन्द सिंह के नाम के सामने कॉलम-4 में दिनांक 02.09.1991 के स्थान पर दिनांक 27.11.1991 पढ़ा जाय तथा विभागीय अधिसूचना संख्या-7770 के क्रम संख्या-11 पर अंकित श्री परमानन्द सिंह के नाम के सामने कॉलम-6 में दिनांक 20.09.2005 के स्थान पर दिनांक 27.11.2005 पढ़ा जाय।
7. विभागीय अधिसूचना संख्या-1463 (एस) दिनांक 24.02.2020 में श्री जनार्दन प्रसाद के नाम के सामने कॉलम-6B में द्वितीय रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन दिनांक 01.01.2009 PB-3 गे्रड पे-7600/- के स्थान पर द्वितीय सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन दिनांक 09.07.2009 PB-4 गे्रड पे-8700/- पढ़ा जाय।
8. विभागीय अधिसूचना संख्या-10871 (एस) दिनांक 27.11.2017 के क्रम संख्या-104 पर अंकित श्री अजय कुमार रजक के नाम के सामने कॉलम-6 में दिनांक 07.05.1997 के स्थान पर दिनांक 03.03.1998 तथा कॉलम-8 में दिनांक 07.05.2017 के स्थान पर दिनांक 03.03.2018 पढ़ा जाय।28 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022 9. विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 के क्रम संख्या-83 पर अंकित श्री संजीत कुमार के नाम के सामने कॉलम-5 में दिनांक 11.08.2008 के स्थान पर दिनांक 01.10.2008 तथा कॉलम-6B में दिनांक 11.08.2018 के स्थान पर दिनांक 01.10.2018 पढ़ा जाय।
10. विभागीय अधिसूचना संख्या-6939 (एस) दिनांक 25.06.2009 के क्रम संख्या-29 पर अंकित श्री भारत भूषण के नाम के सामने कॉलम-4 में दिनांक 03.01.1995 के स्थान पर दिनांक 01.06.1995 तथा कॉलम-5 में दिनांक 03.01.1995 के स्थान पर दिनांक 01.06.2007 एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-10871 (एस) दिनांक 27.11.2017 के क्रम संख्या-58 पर श्री भारत भूषण के नाम के सामने कॉलम-6 में दिनांक 03.01.1995 के स्थान पर दिनांक 01.06.1995 तथा कॉलम-8 में दिनांक 03.01.2015 के स्थान पर दिनांक 01.6.2015 पढ़ा जाय।
11. विभागीय अधिसूचना संख्या-5536 (एस) दिनांक 24.09.2020 के क्रम संख्या-66 को विलोपित समझा जाय। 12. विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 के क्रम संख्या-85 पर अंकित श्री शैलेश कुमार के नाम के सामने कॉलम-5 में दिनांक 11.08.2008 के स्थान पर दिनांक 05.09.2008 तथा कॉलम-6B में दिनांक 11.08.2018 के स्थान पर दिनांक 05.09.2018 पढ़ा जाय।
13. विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 के क्रम संख्या-82 पर अंकित श्री अशोक कुमार सिंह के नाम के सामने कॉलम-5 में दिनांक 11.08.2008 के स्थान पर दिनांक 28.08.2008 तथा कॉलम-6B में दिनांक 11.08.2018 के स्थान पर दिनांक 28.08.2018 पढ़ा जाय।
पूर्व में निर्गत इससे संबंधित सभी अधिसूचनाओं को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 36—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
29 (cid:464)बहार गजट, 23 नवम्बर 2022भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
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सं0 1264--मैं अनिल कुमार, पिता-हीरा लाल राय, निवासी-ग्राम-भगवानपुर भाभा नगर, पो.-भगवानपुर, थाना-सदर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार शपथ पत्र सं. 80 दिनांक 01.09.2022 द्वारा सुचित करता हूं कि आदित्य मेरा पुत्र है वह अब आदित्य राय के नाम से जाना व पहचाना जाएगा।
अनिल कुमार।