;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध
ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध
;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू12द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू13द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू14द्ध
;बपकरू17द्ध ख्;बपकरू19द्ध;बपकरू4द्ध 1;बपकरू23द्ध44 ;बपकरू25द्ध;बपकरू26द्ध;बपकरू27द्ध
;बपकरू25द्ध;बपकरू28द्ध;बपकरू26द्ध ;बपकरू4द्ध 1;बपकरू26द्ध2;बपकरू17द्ध;बपकरू27द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू28द्ध;बपकरू4द्धरु 2;बपकरू23द्ध रु 2;बपकरू26द्ध22
सं॰ 2/आरोप-01-26/2018 सा॰प्र॰-19210सं॰ 2/आरोप-01-26/2018 सा॰प्र॰-19210सं॰ 2/आरोप-01-26/2018 सा॰प्र॰-19210सं॰ 2/आरोप-01-26/2018 सा॰प्र॰-19210 सामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 26 अक्तूबर26 अक्तूबर26 अक्तूबर26 अक्तूबर, 2022, 2022, 2022, 2022
श्री अनिल कुमार रमण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1306/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सारण के विरूद्ध जन वितरण प्रणाली की लचर व्यवस्था एवं निरीक्षण/पर्यवेक्षण का अभाव परिलक्षित होने संबंधी आरोपों के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 2535 दिनांक 25.05.2018 द्वारा आरोप प्रतिवेदित किया गया। श्री रमण के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3929 दिनांक 18.03.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1002 दिनांक 15.07.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा साक्षियों का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया। फलतः विभागीय पत्रांक 11615 दिनांक 0812.2020 द्वारा साक्षियों का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण करते हुए जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 397 दिनांक 05.03.2022 द्वारा पुनः जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री रमण के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच प्रतिवेदन से निम्नलिखित बिन्दुओं पर असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 6930 दिनांक 09.05.2022 द्वारा श्री रमण से असहमति के बिन्दु पर लिखित अभिकथन की मांग की गयी :-
''माननीय मुख्यमंत्री, बिहार के निश्चय यात्रा कार्यक्रम के क्रम में जिला स्तरीय जाँच दल द्वारा मशरक, अमनौर, बनियापुर एवं गड़खा प्रखंडों के जन वितरण प्रणाली के दुकानों की जाँच की गयी। जाँच के क्रम में पाया गया कि श्री रमण के द्वारा वर्ष, 2015 में मात्र 01 ज0वि0प्र0 विक्रेता के दुकानों का निरीक्षण किया गया, वर्ष 2016 में मात्र 06 ज0वि0प्र0 विक्रेता के दुकानों का निरीक्षण किया गया तथा वर्ष 2017 में मात्र 10 ज0वि0प्र0 विक्रेता के दुकानों का निरीक्षण किया गया। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के द्वारा निर्धारित मानक के तहत श्री रमण द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उक्त अवधि में इनके द्वारा मात्र 12 मामलों में छापेमारी की कार्रवाई कर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की गयी है, परंतु दर्ज प्राथमिकी में की गयी अद्यतन कार्रवाई/फलाफल का उल्लेख नहीं किया गया। जबकि2 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू2द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू3द्ध;बपकरू4द्ध 2;बपकरू23द्ध रु 2;बपकरू26द्ध22 जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पदीय कर्त्तव्य के निर्वहन के क्रम में इनका दायित्व था कि दर्ज प्राथमिकियों में ससमय प्रतिषपथ-पत्र दायर करते हुए मामलों को अंतिम परिणति तक पहुँचाते।
गठित जाँच दल से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जन वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश के आलोक में आरोप प्रमाणित होने के आधार पर बनियापुर प्रखंड के 07 (सात), गड़खा प्रखंड के 06 (छः), मषरक प्रखंड के 17 (सत्रह) एवं अमनौर प्रखंड के 10 दुकानों के दुकानदारों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए अनुज्ञप्ति रद्द की गई, जो कि आरोपी पदाधिकारी के र्काव्यहीनता को द्र्शाता है, यदि जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती तो जिला स्तर पर जाँच दल के गठन की आवश्यकता नहीं पड़ती।
श्री रमण द्वारा सतत् रूप से निगरानी/पर्यवेक्षण के अभाव के कारण एवं छापामारी में दर्ज प्राथमिकी में अभिरूचि नहीं लिये जाने के कारण ही सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेष 2016 तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा PUCL Vs VOL & Ors. WP (Civil) No. 196/2001 में पारित आदेष का उल्लंघन किया गया।'' असहमति के बिन्दु पर श्री रमण के पत्र दिनांक 03.06.2022 द्वारा लिखित अभिकथन समर्पित किया गया। प्रतिवेदित आरोप एवं संंबंधित अभिलेखों के आलोक में श्री रमण से असहमति के बिन्दु पर प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि माननीय मुख्यमंत्री बिहार के निष्चय यात्रा कार्यक्रम के क्रम में दिनांक 31.01.2017 को सारण जिला मुख्यालय के प्रमंडलीय समीक्षात्मक बैठक में आपूर्ति संबंधी कार्यों की समीक्षा के क्रम में दिये गये निदेष के आलोक में आपूर्ति व्यवस्था के सुदृढ़करण के उद्देेष्य से जिला स्तरीय जाँच दल द्वारा मषरक, अमनौर, बनियापुर एवं गड़खा प्रखंडों के जन वितरण प्रणाली के दुकानों की जाँच कराई गई। जाँच दल द्वारा जन वितरण प्रणाली दुकानों की जाँच कर, जाँच प्रतिवेदन मंतव्य के साथ जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा को उपलब्ध करायी गयी है। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा संबंधित जन वितरण प्रणाली के विक्रेताओं से स्पष्टीकरण कर विचारोपरांत सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेष 2016 तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा PUCL Vs Vol and ors, Civil Origional Jursdiction with Petition (Civil) No. 196 of 2001 में दिनांक 02.05.2003 को पारित आदेष का उल्लंघन करने का आरोप प्रमाणित होने के आधार पर बनियापुर प्रखंड के 07 (सात), गड़खा प्रखंड के 06 (छः), मषरक प्रखंड के 17 (सत्रह), एवं अमनौर प्रखंड के 10 दुकानों के दुकानदारों के विरूद्ध कार्रवाई की गई। अगर जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती तो जिला स्तर पर जाँच दल की गठन की आवश्यकता नहीं पड़ती एवं जन वितरण प्रणाली के दुकानों की अनुज्ञप्तियाँ रद्द नहीं करनी पड़ती। जाँच दल के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि जिला आपूर्ति पदाधिकारी के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों द्वारा अनियमितता की जा रही थी एवं जिसके फलस्वरूप लाभुकों को वांछित सुविधा ससमय प्राप्त नहीं हो पा रहा था। स्पष्टतया श्री रमण के विरूद्ध र्काव्यों के प्रति लापरवाही एवं सत्त निगरानी/ पर्यवेक्षण का अभाव पाया गया।
समीक्षोपरान्त श्री रमण के लिखित अभिकथन को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11543 दिनांक 11.07.2022 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2017-18) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का शास्ति अधिरोपित किया गया।
श्री रमण द्वारा उक्त दंड पर विचार हेतु पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 20.08.2022 दायर किया गया, जिसमें इनका मुख्य रूप से कहना है कि जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा द्वारा जाँच दल का गठन कर जिला के मषरख, अमनौर, बनियापुर एवं गड़खा प्रखंडों के जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के दुकानों की औचक निरीक्षण कराई गई एवं जाँच दल से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मषरख प्रखंड के 17, अमनौर प्रखंड के 10, बनियापुर प्रखंड के 7 एवं गड़खा प्रखंड के 6 विक्रेताओं के विरूद्ध अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई की गयी। विभागीय निदेष के अनुपालन में नियमित निरीक्षण/पर्यवेक्षण किया गया, जिसे अग्रेतर कार्यवाही हेतु अधिनियम में प्राधि—त सक्षम पदाधिकारी (अनुमंडल पदाधिकारी) को प्रतिवेदित किया गया। आरोप-पत्र के आलोक में इनका कहना है कि आरोप की अवधि में इनके जिला आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे, न कि अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में। उनका कहना है कि जन वितरण प्रणाली व्यवस्था से संबंधित कुल 57 वादों में कुल 51 वादों में प्रतिशपथ-पत्र माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल करने की कार्रवाई की गयी।
प्रतिवेदित आरोप एवं अन्य अभिलेखों के आलोक में श्री रमण के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री रमण द्वारा पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण के बिन्दुओं को पुनः अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में अंकित किया गया है। उनके विरूद्ध प्रतिवेदित अरोपों के आलोक में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है, जो उनको आरोप मुक्त किये जाने का आधार हो। उनका यह कहना कि उनके द्वारा जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों का सतत निरीक्षण की कार्रवाई की जाती रही है, सही प्रतीत नहीं होता है। अगर जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा सतत निरीक्षण की कार्रवाई की जाती तो जिला स्तर पर जाँच दल की गठन की आवश्यकता नहीं पड़ती। जाँचोपरान्त अनियमितता पाये जाने पर ही जन वितरण प्रणाली के दुकानों की अनुज्ञप्तियाँ रद्द की गयी। श्री रमण का आरोप-पत्र के आधार पर यह कहना कि अनियमितता पाये जाने पर संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी जिम्मेवार होंगे, उनके लापरवाही को ही दर्शाता है। स्पष्टतया श्री रमण द्वारा र्काव्य के प्रति लापरवाही एवं अपने दायित्वों के निवर्हन में चूक एवं निगरानी/पर्यवेक्षण में कोताही बरती गयी है। समीक्षोपरांत श्री रमण के पुनर्विलोकन को अस्वी—त करने एवं अधिरोपित दंड को पूर्ववत बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।3 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू2द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू3द्ध;बपकरू4द्ध 2;बपकरू23द्ध रु 2;बपकरू26द्ध22 अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अनिल कुमार रमण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1306/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सारण सम्प्रति अनुमंडल पदाधिकारी, शेरघाटी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक 11543 दिनांक 11.07.2022 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2017-18) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड को पूर्वव्त बरकरार रखा जाता है। आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल केराज्यपाल केराज्यपाल केराज्यपाल के आदेष से,आदेष से,आदेष से,आदेष से, शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद, सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।