(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
29 ;बपकरू274द्ध 1944 ;0द्ध
(0 1094) ए ए 20 ;बपकरू464द्ध;बपकरू224द्ध 2022
जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
9 सितम्बर 2022
सं॰ 22/नि0सि0(औ0)17-09/2017/2188—श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (आई0डी0-3365) सोन नहर प्रमण्डल, खगौल द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता की जॉच विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा कि गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर कि गई। सम्यक समीक्षोपरांत निम्न आरोप के संबंध मेंं विभागीय पत्रांक-65 दिनांक-14.02.17 द्वारा श्री रमण से स्पष्टीकरण किया गयाः- आरोप-
(i) विभागीय भूमि पर अवैध रूप से सामुदायिक भवन के निर्माण की सूचना सामाजिक कार्यकर्त्ता श्री प्रेम प्रकाश द्वारा दायर परिवाद द्वारा विभाग को दिनांक-02.02.16 को प्राप्त हुई उक्त अवैध निर्माण के प्रति आपने कोई संज्ञान नही लिया तथा इसके विरूद्ध आपके स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नही की गई।
(ii) उक्त अवैध निर्माण की सूचना आंशिक रूप से अधीक्षण अभियंता को काफी विलंब से पत्रांक 291 दिनांक-18.02.16 द्वारा दी गई।
(iii) आपने विभागीय भुमि पर अवैध निर्माण कार्य बंद कराने को जो पत्रांक-1525 दिनांक-23.09.14 स्थानीय थाना को प्रेषित किया है उसमें भूमि की विवरण का अभाव है।
(iv) अवैध निर्माणाधीन भूमि के भूस्वामित्व संबंधी साक्ष्य नगर परिषद द्वारा पत्रांक-342 दिनांक- 06.04.16 द्वारा मांगने पर भी ठोस साक्ष्य आपके द्वारा उपलब्ध नही कराया गया।
श्री संजय रमण द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण का मुख्य अंशः- श्री रमण द्वारा अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया कि अवर प्रमंडल पदाधिकारी नौबतपुर के पत्रांक-24 दिनांक-08.02.18 द्वारा मामले की जानकारी उन्हे दी गई। तत्पश्चात, अंचलाधिकारी, दानापुर, नगर कार्यपालक पदाधिकारी, खगौल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दानापुर, अनुमण्डलाधिकारी, दानापुर एवं थाना प्रभारी, खगौल से अवैध2 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 20 (cid:465)दस(cid:224)बर 2022 निर्माण कार्य पर रोक लगाने हेतु अनुरोध किया। साक्ष्य के रूप में दिनांक 09.02.16 से दिनांक-04.07.16 तक निर्गत विभिन्न पत्रों का उल्लेख किया गया है।
श्री रमण ने स्पष्टीकरण में अंकित किया कि प्रमंडलीय पत्रांक-254 दिनांक-11.02.16 जो कार्यपालक अभियंता उड़नदस्ता प्रमंडल सं0-04 अनिसाबाद, पटना को संबोधित हैं, की प्रति अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को भी प्रेषित की गई। प्रमंडलीय कार्यालय में जमीन संबंधी अभिलेख उपलब्ध नही होने की बात का उल्लेख श्री रमण द्वारा किया गया।
उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन, श्री रमण के विरूद्ध गठित आरोप पत्र एवं श्री रमण द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण कि समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि अवैध रूप निर्माण कराये जा रहे सामुदायिक भवन की सर्वपथम सूचना विभाग को परिवादी से प्राप्त हुआ। जबकि कार्यपालक अभिंयता श्री रमण द्वारा अतिक्रमण संबंधी सूचना पूर्व मे ही विभाग को दिया जाना चाहिए था, जो नही दिया गया। जबकि अतिक्रमित भूमि कार्यपालक अभियंता के कार्यालय के समीप है एवं पूर्व में भी जल मीनार का निर्माण अतिक्रमण कर किया गया था। कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद खगौल से केशर-ए- हिन्द भूमि जल संसाधन विभाग का है, का दावा करते हुए उन्ही से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग करनी चाहिए थी एवं इसकी सम्पुष्टि अंचलाधिकारी से भी करानी चाहिए थी जो नही की गई।
प्रमंडल में उपलब्ध अभिलेख के आधार पर कार्यपालक अभियंता द्वारा नगर परिषद के पत्रांक-115, दिनांक-18.03.2009 एवं विभागीय पत्रांक-1362 दिनांक-13.08.1991 की जानकारी पहले ही नगर परिषद, थाना प्रभारी, अंचलाधिकारी, एवं अन्य अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी जो कि नही किया गया।
विभागीय भुमि पर अवैध रूप से निर्माण किये जा रहे सामुदायिक भवन के संबंध में खगौल थाना में देर से सूचना दिये जाने एवं विधिवत् प्राथमिकी नही दर्ज कराने के लिए श्री रमण उत्तरदायी पाये गए।
कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद खगौल के द्वारा निर्माण कराये जा रहे सामुदायिक भवन जमीन से संबंधीत/भू स्वामित्व से संबंधित साक्ष्य उपलबध कराने की मांग कार्यपालक अभियंता से की गई थी। इस संदर्भ मे सोन काडा को विषयांकित भुमि 10 वर्षाे के लिए लीज पर हस्तान्तरित करने हेतु विभागीय स्वीकृति को भू-स्वामित्व के साक्ष्य के रूप में नही प्रस्तुत करने के लिए कार्यपालक अभियंता श्री संजय रमण उत्तरदायी पाये गए।
जल मीनार निर्माण के पश्चात् बचे हुए भू-भाग जिसपर नगर परिषद द्वारा अवैध रूप से सामुदायिक भवन इत्यादि का निर्माण किया जा रहा था, को धेराबंदी कर भविष्य में होने वाले अतिक्रमण से बचाने हेतु श्री रमण द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नही ंकी गई।
वित्तीय वर्ष 2016-17 की अवधि में कृषि हेतु नहर चाट की बन्दोवस्ती नहीं किये जाने के फलस्वरूप विभाग को राजस्व की हानि हुई । जिसके लिए श्री संजय रमण उत्तरदायी पाये गए।
इस प्रकार श्री रमण के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री रमण के विरूद्ध ''निन्दन की सजा एवं एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय रमण तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल को विभागीय अधिसूचना सं0-1602 दिनांक 29.07.2019 द्वारा निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया गया-
(i) निन्दन की सजा। (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त दण्ड के आलोक में महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), बिहार, पटना के पत्रांक-GN2002920190505363, GEN No-2970/2019-2020 द्वारा विभाग को सूचित किया गया कि श्री रमण दिनांक 30.06.2020 को सेवानिवृत हो रहे हैं। ये सेवाकाल में देय अंतिम वेतनवृद्धि दिनांक 01.07.2019 को अर्जित कर चुके हैं। अब सेवानिवृति तक श्री रमण को कोई वेतन वृद्धि देय नहीं है, जिसे रोका जा सके। स्पष्टतः, वेतनवृद्धि रोकने के दण्डादेश का अनुपालन संभव नहीं है। साथ ही संशोधित दण्ड निर्गत करने का अनुरोध किया गया।
महालेखाकार, बिहार, पटना के उक्त अनुरोध के आलोक में मामले की समीक्षा की गई। सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री रमण के विरूद्ध उक्त अधिरोपित दण्ड के बदले प्रतिस्थानी दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (आई0डी0-3365) सोन नहर प्रमण्डल, खगौल के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1602 दिनांक 29.07.2019 द्वारा संसूचित दण्ड को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-29 के प्रावधान के आलोक में श्री रमण के विरूद्ध उक्त अधिरोपित दण्ड के बदले निम्न प्रतिस्थानी दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -3 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 20 (cid:465)दस(cid:224)बर 2022 (1) निन्दन संगत वर्ष के लिए। (2) 11 (ग्यारह) माह के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में एक प्रक्रम पर अवनति। वरीय लेखा अधिकारी, महालेखाकार, बिहार, पटना को संबोधित सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-7574 दिनांक 04.06.2019 के अनुसार पुनरीक्षण के फलस्वरूप निर्गत प्रतिस्थानी दण्ड उसी तिथि से प्रभावी होगा, जिस तिथि को मूल दण्डादेश निर्गत किया गया है।
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, सरकार के अवर सचिव।