िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 7 पौष 1944 (श0) सं(cid:201)या 52 पटना, बुधवार, ———————— 28 दिसम्बर 2022 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-72 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 73-73 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं
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इत्यादि।
पूरक
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पूरक-क 74-782 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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नगर विकास एवं आवास विभाग ------ अधिसूचनाएं 16 दिसम्बर 2022
सं0 03/AMRUT-03-20/2022-5337--अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन-2.0 (AMRUT-2.0) योजना की मार्गदर्शिका की कंडिका- 15.3.2 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4909 दिनांक-23.11.2022 के आलोक में राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) का गठन करने का प्रावधान है। यह समिति DPR का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करने के लिए जिम्मेदार होगी। उक्त के आलोक में राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (State Level Technical Committee -SLTC) का गठन निम्नवत् किया जाता हैः-
i. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव अध्यक्ष
(नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार)
ii जल-संसाधन विभाग, बिहार सरकार के प्रतिनिधि सदस्य iii लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, सदस्य बिहार सरकार के प्रतिनिधि iv ऊर्जा विभाग, बिहार सरकार के प्रतिनिधि सदस्य v वित्त विभाग, बिहार सरकार के प्रतिनिधि सदस्य vi राज्य मिशन निदेशक, (नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार द्वारा नामित) सदस्य vii अभियंता प्रमुख, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार सदस्य सचिव viii प्रबंध निदेशक, बुडको सदस्य
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुनील कुमार यादव, अपर सचिव।
------ 16 दिसम्बर 2022
सं0 03/AMRUT-03-20/2022-5338--अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन-2.0 (AMRUT-2.0) योजना की मार्गदर्शिका की कंडिका- 15.3.1 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4909 दिनांक-23.11.2022 के आलोक में राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय उच्च शक्ति प्राप्त संचालन समिति (State High Powered Steering Committee - SHPSC) के गठन का प्रावधान है। उक्त आलोक में राज्य स्तरीय उच्च शक्ति प्राप्त संचालन समिति (SHPSC) का गठन निम्नवत् किया जाता हैः-
i. मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष ii. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सदस्य (वित्त विभाग) iii. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सदस्य सचिव (नगर विकास एवं आवास विभाग) iv. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सदस्य (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग) v. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सदस्य (ग्रामीण विकास विभाग) vi. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि सदस्य vii. आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, सदस्य भारत सरकार के प्रतिनिधि viii. राज्य मिशन निदेशक, सदस्य (नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा नामित)
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुनील कुमार यादव, अपर सचिव।3 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------ अधिसूचना 19 दिसम्बर 2022 सं0 7/सी0सी0ए0-1024/2001(खंड-II)गृ0आ0-12854--बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1981 (7/81) के अध्याय-2 की धारा-12 (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल, राज्य के सभी जिला दण्डाधिकारियों को उपर्युक्त अधिनियम की धारा-12 (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का अपने जिला के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के एतद् विषयक अधिसूचना संख्या-9367 दिनांक-15.09.2022 के क्रम में अगले तीन महीनों के लिए अर्थात दिनांक 01.01.2023 से 31.03.2023 (एक जनवरी दो हजार तेईस से एकत्तीस मार्च दो हजार तेईस) तक प्रयोग करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
1 अगस्त 2022
सं०-22/नि0सि0(पू0)-01-14/2009-1867--श्री श्याम बिहारी राम (आई0डी0-3489), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ के पदस्थापन अवधि के दौरान मधेपुरा जिला के कुमारखण्ड प्रखंडान्तर्गत ललकुरिया चौर में ननपट्टी एवं लक्ष्मीपुर भगवती गाँव के पास बनाई गई पुल तथा गोरधुआ धार पर कुंजर टोली एवं सोने महाराज के समीप बनाई गई पुल पर बरती गयी अनियमितता के लिए श्री विजय कुमार सिंह, पूर्व स0वि0स0 से प्राप्त परिवाद की जाँच उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में निम्न आरोप प्रमाणित पाये गये हैं :-
(i) स्थल से संग्रहित नमूनों के जाँचफल के आधार पर गोरधुआ धार के कुंजरटोली एवं सोने महाराज के नजदीक एक पथीय सेतु कार्य में सीमेंट एवं बालू की मात्रा का अनुपात निर्धारित विशिष्टियों के अनुरूप नहीं पाये गये।
(ii) ईंट के नमूने के जाँचफल से घटिया ईट का प्रमाण मिलना जो विशिष्टियों के अनुरूप नहीं है। (iii) खुली आँखो से सेतु के Super Structure में लोकल बालू व्यवहार में लाने का प्रमाण मिलना। (iv) कुंजरटोली पर निर्मित सेतु का ध्वस्त हो जाने का एक मात्र कारण घटिया सामग्री का व्यवहार एवं निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं दिया जाना।
उपरोक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री श्याम बिहारी राम, तत0 अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षोपरांत दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, न्यून विशिष्टि का कार्य होने, गुण नियंत्रण में कमी होने के आरोप के लिए श्री श्याम बिहार राम, तत0 अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, पूर्णियाँ को विभागीय अधिसूचना सं0-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
"दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री श्याम बिहारी राम, तत0 अधीक्षण अभियंता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन दिया गया। श्री राम से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1400 दिनांक 03.11.2021 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखा गया।
उक्त अधिरोपित दण्ड के कार्यान्वयन के संबंध में महालेखाकार कार्यालय, बिहार, पटना द्वारा विभागीय मंतव्य की माँग की गयी, महालेखाकार कार्यालय द्वारा सूचित किया गया कि दण्डादेश के आलोक में जुलाई 2015 एवं जुलाई 2016 को आदेय वेतन वृद्धि रोकी गयी है, परन्तु दण्ड का प्रभाव खत्म होने के पूर्व ही श्री श्याम बिहारी राम दिनांक 30.11.2016 को सेवानिवृत हो गये, जिस कारण रोकी गयी वेतनवृद्धि विमुक्त नहीं की जा सकी, इससे दण्ड का प्रभाव असंचयात्मक के स्थान पर संचयात्मक हो रहा है जिसका प्रभाव पेंशन पर भी पड़ रहा है।
महालेखाकार कार्यालय से प्राप्त पत्र के समीक्षोपरांत श्री श्याम बिहारी राम (आई0डी0-3489), तत0 अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1357 दिनांक 16.06.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को संशोधित करते हुए प्रतिस्थानी दण्ड के रूप में पूर्व के दण्ड के समरूप निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"कालमान वेतन में संचयी प्रभाव के बिना दो प्रक्रम पर अवनति एक वर्ष के लिए"। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री श्याम बिहार राम (आई0डी0-3489) तत0 अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अंचल, पूर्णियाँ को उक्त दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।4 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 23 अगस्त 2022 सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2003--श्री विजय कुमार पाल (आई0डी0-5104) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1601 दिनांक 25.07. 2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-2155 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गई।
श्री पाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में अपने निलंबन के विरूद्ध CWJC No-19055/2021 दायर किया गया। जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 07.02.2022 को पारित आदेश एवं MJC No-1281/2022 में दिनांक 03.08.2022 को पारित आदेश के अनुपालन में श्री विजय कुमार पाल, सहायक अभियंता (निलंबित) के मामले की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री पाल को निलंबन से मुक्त करने एवं उनके निलंबन के 12 माह के पश्चात निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% वृद्धि (अर्थात कुल 62.5%) किये जाने एवं इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री विजय कुमार पाल (आई0डी0-5104) निलंबित सहायक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं इनके निलंबन के 12 माह के पश्चात के निलंबन अवधि के लिए CCA Rules 2005 के नियम-10(1) के आलोक में इन्हें प्रथम 12 माह के निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% की वृद्धि की जाती है। श्री पाल के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के निमित्त संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2004--श्री प्रेमचन्द राम (आई0डी0-5111) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1606 दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-2150 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गई।
श्री प्रेमचन्द राम, सहायक अभियंता (निलंबित) से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी, समीक्षोपरांत श्री राम को निलंबन से मुक्त करने एवं उनके निलंबन के 12 माह के पश्चात निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% वृद्धि (अर्थात कुल 62.5%) किये जाने एवं इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रेमचन्द राम (आई0डी0-5111) निलंबित सहायक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं इनके निलंबन के 12 माह के पश्चात के निलंबन अवधि के लिए CCA Rules 2005 के नियम-10(1) के आलोक में इन्हें प्रथम 12 माह के निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% की वृद्धि की जाती है। श्री प्रेमचन्द राम के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के निमित्त संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2005--श्री सुरेश चन्द्र झा (आई0डी0-J 7577) तत्कालीन कनीय अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर5 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1602 दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-2153 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गई।
श्री सुरेश चन्द्र झा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी, समीक्षोपरांत श्री झा को निलंबन से मुक्त करने एवं उनके निलंबन के 12 माह के पश्चात निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% वृद्धि (अर्थात कुल 62.5%) किये जाने एवं इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेश चन्द्र झा (आई0डी0- J 7577) निलंबित सहायक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं इनके निलंबन के 12 माह के पश्चात के निलंबन अवधि के लिए CCA Rules 2005 के नियम-10(1) के आलोक में इन्हें प्रथम 12 माह के निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% की वृद्धि की जाती है। श्री सुरेश चन्द्र झा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के निमित्त संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2006-श्री सुधीर कुमार (आई0डी0-4478) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1605 दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय अधिसूचना सं0-2467 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-1488 दिनांक 22.06. 2022 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई।
श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुधीर कुमार (आई0डी0-4478), निलंबित कार्यपालक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। श्री कुमार से संबंधित दण्डादेश अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2007-श्री जवाहर लाल मंडल (आई0डी0-4456) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि अन्य आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1608 दिनांक 25. 07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2469 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्रवाई के क्रम में ही श्री मंडल दिनांक 31.03.2022 को सेवानिवृत हो गये। श्री मंडल के सेवानिवृति के उपरांत इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित करते हुए उन्हें दिनांक 31.03.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री जवाहर लाल मंडल (आई0डी0-4456) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को दिनांक 31.03.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उनके6 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/2008--श्री अरूण कुमार पाण्डेय (आई0डी0-जे 8134) तत्कालीन कनीय अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल सम्प्रति सहायक अभियंता को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में अनियमितता बरतने, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि अन्य आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1603 दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2466 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्रवाई के क्रम में ही श्री पाण्डेय दिनांक 31.12.2021 को सेवानिवृत हो गये। श्री पाण्डेय के सेवानिवृति के उपरांत इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित करते हुए उन्हें दिनांक 31.12.2021 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार पाण्डेय (आई0डी0-जे 8134) तत्कालीन कनीय अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल सम्प्रति सहायक अभियंता को दिनांक 31.12.2021 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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24 अगस्त 2022
सं0 22/नि0सि0(गया)-17ए-05/2008-2056--श्री राम तव्वकल सिंह (आई0डी0-1397), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पदस्थापन काल में दानु बिगहा से कचनावाँ सबदलपुर तक दरधा नदी के बायाँ एवं दायाँ जमींदारी बाँध का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों की औचक जाँच तकनीकी परीक्षा कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा किये जाने के उपरांत पायी गई अनियमितताओं के लिये उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1556, दिनांक-21.12.2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43 (बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त सह संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों में से आरोप संख्या-01 एवं 02 आंशिक प्रमाणित, आरोप संख्या-03, 04 एवं 06 प्रमाणित तथा आरोप संख्या-05 को अप्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिये श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। तदालोक में श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के लिये विभागीय अधिसूचना संख्या-351 दिनांक-15.03.2013 द्वारा निम्न दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया । "40 (चालीस) प्रतिशत पेंशन पर 10 वर्षों तक के लिये रोक"
विभागीय अधिसूचना संख्या-351 दिनांक-15.03.2013 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राम तव्वकल सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC NO.-8589/2014 दायर किया गया, जिसमें दिनांक-23.11.2017 को पारित न्याय निर्णय का कार्यकारी अंश (Operative Part) निम्नवत हैः- "From bare perusal of sub-rule(14) and different subrules of Rule 17, it is crystal clear that the legislature has prescribed the procedures for holding departmental inquiry in the prescribed manner. It is needless to say that violations of the procedure meant for holding departmental proceeding amounts to violation of natural justice and if inquiry is held in contravention of any provisions of Rule 17 meant for holding departmental inquiry, the inquiry report as well as the punishment thereon shall be vitiated. It is evident that the proceeding was initiated on the basis of the inquiry report of Technical Committee of the Vigilance Department. The petitioner was served with the article of charge containing six charges on the basis of the inquiry report of the Technical Committee. The petitioner submitted his detailed show cause but the disciplinary authority did not satisfy with the show cause of the petitioner and ordered for initiation of a proceeding under Rule 43(b) of the Bihar Pension Rules. The disciplinary7 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 authority appointed Additional Inquiry Commissioner to hold the inquiry. The inquiry report(Annexure-5) shows that the Inquiry Officer considered the show cause and the submissions of the Presenting Officer but it does not appear that the Presenting Officer during the course of inquiry brought on record any documentary evidence in accordance with law as required under sub-rule(14) of Rule 17. The Presenting Officer is bound to bring on any document in accordance with law and that should have been marked as exhibit. Without bringing the documents on record in accordance with law, the same cannot be treated as legal evidence. It further appears that the Presenting Officer did not even examine the member of the Committee who held preliminary inquiry on the basis of which the proceeding under Rule 43(b) of the Pension Rules was initiated against the petitioner. Unless the author of the report is examined and petitioner was allowed to cross-examine, the author of the report on the basis of which the proceeding was initiated, the finding of the Inquiry Officer with regard to guilt and punishment on such report by the disciplinary authority in my view is absolutely illegal and not sustainable. Having considered the facts aforesaid, I find that the order dated 15.03.2013, as contained in Notification No.351, is illegal and accordingly, it is set aside. The writ petition is allowed. The respondents are directed to pay the entire arrears of pension to the petitioner within two months from the date of receipt of this order." CWJC NO.- 8589/2014 में पारित आदेश के विरूद्ध विभाग द्वारा विधि विभाग के माध्यम से LPA NO. 571/2018 दायर दिया गया, जिसमें दिनांक-17.07.2018 को माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश निम्नवत हैः-
"Issue notice to the respondent through ordinary post as well as registered cover with A.D. for which requisites etc. be filed within one week. Notice also on I.A. No. 3189 and 3190 of 2018.
In the meanwhile, operation of the order dated 23.11.2017 passed by the Writ Court in C.W.J.C. No. 8589 of 2014 shall remain stayed till the next date."
CWJC NO.- 8589/2014 में पारित आदेश का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में वादी श्री राम तव्वकल सिंह द्वारा MJC 231/2019 (राम तव्वकल सिंह, बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) दायर किया गया । जिसमें विभाग की ओर से कारण पृच्छा ओथ संख्या-15518, दिनांक-11.03.2019 द्वारा दायर किया गया। MJC 231/2019 में दिनांक 14.07.2022 को माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश निम्नवत है :- "Let this case be listed after disposal of L.P.A. No. 571 of 2018."
इसी बीच LPA NO. 571/2018 (बिहार राज्य एव अन्य बनाम राम तव्वकल सिंह) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-14.07.2022 को पारित न्याय निर्णय की प्रति विभाग को प्राप्त हुआ है , जिसका operative part (कार्यकारी अंश) निम्नवत हैः- "In the light of aforesaid decisions and the fact that the penalty order has been set aside by the learned Single Judge on technicality and further there is alleged financial irregularities stated to have been committed by the respondent. In the light of these facts and circumstances, order of the learned Single Judge is modified to the aforesaid extent in remanding the matter to the inquiring authority to commence inquiry from the defective stage and complete within a period of four months from the date of receipt of this order, failing which it is held that inquiry stands abated. The respondent is hereby directed to co-operate in conclusion of the inquiry from the defective stage. In this regard, inquiring/disciplinary authority is hereby directed to issue notice in advance for his appearance from time to time in order to complete inquiry within four months. With held pension amount shall be released in favour of Respondent within four months. Liberty to impose afresh penalty in the event of proving alleged charges.
8 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022Accordingly, the Letters Patents Appeal No. 571 of 2018 stands allowed in part." मामले के सम्यक समीक्षोपरांत LPA NO. 571/2018 (बिहार राज्य एव अन्य बनाम राम तव्वकल सिंह) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-14.07.2022 को पारित न्याय निर्णय का अनुपालन करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-351 दिनांक-15.03.2013 द्वारा श्री राम तव्व्कल सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध अधिरोपित दण्ड "40 (चालीस) प्रतिशत पेंशन पर 10 वर्षों तक के लिये रोक" को निरस्त करने एवं उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई (Defective Stage से) करने हेतु संपूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी, तत्कालीन विभागीय जाँच आयुक्त सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग बिहार पटना को Remand Back करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में -
1. विभागीय अधिसूचना संख्या-351 दिनांक-15.03.2013 द्वारा श्री राम तव्व्कल सिंह, तत0 कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध अधिरोपित दण्ड "40 (चालीस) प्रतिशत पेंशन पर 10 वर्षों तक के लिये रोक" को निरस्त करते हुये उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई (Defective Stage से) करने हेतु संपूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी, तत्कालीन विभागीय जाँच आयुक्त सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग बिहार पटना को Remand Back किया जाता है। 2. उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभाग/सरकार का पक्ष रखने हेतु पूर्व से नियुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, कुमार वीरेन्द्र, तत0 कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल-15 के सेवानिवृत (सेवानिवृति तिथि-28.02.2013) हो जाने के कारण उनके स्थान पर श्री प्रशांत कुमार (आई0डी0-5082), कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार), योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल-6, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।
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1 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-06/2015-2124--श्री अनिल कुमार शर्मा (ID-3301) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा मुजफ्फरपुर के उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान एकरारनामा सं0-1/GR/2009-10 के तहत पैकेज सं0-45 के अन्तर्गत तिरहुत मुख्य नहर के वि0दू0 760 से 790 के बीच कराये गये पुनस्र्थापन यथा मिट्टी कार्य, लाईनिंग कार्य तथा सरंचना निर्माण/मरम्मति कार्य में बरती गई अनियमितता की जांच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए आरोप प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-2056 दिनांक 11.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जवाब के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों में प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प-1923 दिनांक 31.08.16 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप सं0-1-उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन में कंडिका-6.2.0 एवं 8.0 (iii) के अनुसार स्थल निरीक्षण के दौरान नहर बाधों के Contry side slope भाग में मिट्टी कम पायी गयी है। इससे स्पष्ट होता है कि नहर बांध में मिट्टी भराई का काम रूपांकित सेक्सन में (प्राक्कलन के अनुरूप) कराये बिना ही भुगतान किया गया है। जिसे अनियमित माना गया है एवं जिसके लिए श्री शर्मा प्रथम दृष्टया दोषी है। आरोप सं0-2-उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन की कंडिका 8.0 (x) एवं एकरारनामा के Technical Specification के कंडिका 10(2)(B) के अनुसार नहर बांध में मिट्टी भराई कार्य में 1/9th for un compacted Earth एवं 1/9th for compacted earth by seep foot roller Settlement के रूप में काटकर मिट्टी कार्य का भुगतान करना है परन्तु मापपुस्त से स्पष्ट होता है कि बिना सेटलमेंट काटे ही मिट्टी भराई कार्य का भुगतान किया गया है। फलतः संवेदक को वास्तविक भुगतेय मात्रा से अधिक भुगतान हो गया है। अतः उक्त अनियमित भुगतान के लिए श्री शर्मा प्रथम दृष्टया दोषी हैं। विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता द्वारा निम्न बातें कही गई :- आरोप सं0-1 का बचाव बयान- तिरहुत मुख्य नहर में पैकेज 45 अन्तर्गत मे0 नागार्जुन कन्सट्र्रक्शन कम्पनी लि0 द्वारा पुनस्र्थापन कार्य वर्ष 2009-10 से प्रारंभ था। मेरी पदस्थापना उक्त प्रमंडल में वर्ष 2012 में हुई जिसका प्रभार मैंने दिनांक 09. 07.12 में लिया। मेरे प्रभार ग्रहण करने के पूर्व से ही पैकेज संख्या-45 के अन्तर्गत उक्त रीच में (वि0दू0 760 से 790 के बीच) मिट्टी कार्य कराए जा रहे थे जो उड़नदस्ता दल की जांच के क्रम में भी पाया गया। मेरे predecessors द्वारा भी 2009 से 2012 के बीच कराये गए मिट्टी फिलिंग कार्य हेतु चालू विपत्रों के माध्यम से 2012 के पूर्व में भुगतान किया जा चुका है। मे0 नागार्जुन द्वारा किए गए एकरारनामा के तहत नहर बांध को रूपांकित सेक्शन में लाना था। उक्त बिन्दू 761.85 पर रूपांकित सेक्शन के रूप में संलग्न किया जा रहा है। रूपांकित सेक्शन के अवलोकन से यह स्पष्ट होगा कि नहर का9 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 10 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 (3) विभागीय पत्रांक-948 दिनांक 29.08.2014 द्वारा 13.08.14 को राज्यस्तरीय बैठक में 31.03.15 तक कार्य पूर्ण किए जाने का निर्देश निर्गत था, तथा मेरे उपर कार्य को विभागीय Milestone के अन्तर्गत पूर्ण करने की बाध्यता उस समय थी।
(4) वर्ष 2009 से 2012 के बीच मिट्टी कार्य की प्रगति बिल्कुल संतोषजनक नहीं थी। ऐसा अभियंता प्रमुख (द0) के पत्रांक-62 दिनांक 06.01.2015 से स्पष्ट है एवं उक्त अवधि में प्रमंडल में पदस्थापित पांच कार्यपालक अभियंताओं द्वारा भी कार्य को ससमय पूर्ण कराने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की गई न ही सेटलमेंट मद में कोई कटौती की गई।
(5) मेरा कार्यकाल 2012 से 2015 तक रहा। उक्त अवधि में कार्य की धीमी प्रगति को पुनः बहाल कर Milestone के अनुरूप त्वरित गति से कार्य समाप्त कराने की बाध्यता मेरे कार्यकाल में मुझपर थी जो परिस्थितिवश 2013, 2014 से ही निरंतर कायम रही जिसे सफलतापूर्वक मेरे द्वारा पूरा कराने का प्रयास किया गया।
(6) संवेदक पर अनेकों दबाव बनाकर मिट्टी एवं लाईनिंग कार्य को ऐसी परिस्थिति में पूर्ण कराना प्रथम प्राथमिकता थी तथा केन्द्रपोषित योजना होने के चलते शत प्रतिशत व्यय, गुणवतापूर्ण कार्य कराने तथा किसी भी परिस्थिति में केन्द्रपोषित निधि (AIBP/BRGF) का प्रत्यर्पण (Surrender) नहीं होने का मनोवैज्ञानिक दबाव भी अद्योहस्ताक्षरी पर था।
(7) ऐसी परिस्थिति में चालू विपत्र से अन्य आवश्यक कटौती SD+VAT+LT+CESS+OIS+QTR Royalties etc हेतु (40%) कटौती के साथ सेटलमेंट हेतु कटौती करने से कार्य की प्रगति पर पड़नेवाले नकारात्मक प्रभाव (Negative approach) को ध्यान में रखकर सेटलमेंट नहीं काटा जाना तथा कार्य पूर्ण होने के अंतिम समय में एकमुश्त सेटलमेंट की राशि काटा जाना श्रेयस्कर कदम लगा।
(8) इसी कार्य नीति के तहत 2012 से 2015 के बीच चालू विपत्रों से सेटलमेंट की कटौती नहीं की गयी जिससे चल रहे कार्य की निरंतरता बरकरार रहे तथा Fund rotation भी होता रहे एवं कार्य की प्रगति में बाधा उत्पन्न न हो तथा विभाग द्वारा निर्धारित अंतिम Milestone के अन्तर्गत कार्य को पूर्ण किया जा सके, ऐसा मेरा भरपूर प्रयास रहा।
(9) कार्य की प्रगति में बाधा होने से केन्द्र प्रायोजित निधि का अंतिम वर्ष होने के कारण प्रत्यर्पण (Surrender) की संभावना प्रबल होती तथा आवंटित राशि का शत प्रतिशत सदुपयोग नहीं होने की स्थिति में वर्ष 2015-16 मे ंराज्य सरकार पर वित्तीय अधिभार बढने की भी प्रबल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था।
(10) वर्ष 2015-16 में सेटलमेंट की कटौती के साथ 41वां चालू विपत्र प्रमंडल कार्यालय में पारित किए जाने हेतु समर्पित है तथा वर्ष 2015-16 में निधि 489 लाख भी उपलब्ध थी। यदि वर्तमान में पदस्थापित कार्यपालक अभियंताओं द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए विपत्र पारित किया गया होता तो सामंजन हो जाता जबकि इसके विपरीत प्राप्त आवंटन का प्रत्यार्पण कर दिया गया।
(11) संवेदक द्वारा अंतिम विपत्र पारित करने हेतु प्रमंडल कार्यालय को समर्पित है (Annex-C) जिसको वर्तमान में पदस्थापित कार्यपालक अभियंताओं को अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए इस विपत्र की जांच कराकर एवं लंबित सारे कटौतियों का सामंजन करते हुए एकरारनामा को बंद करने की कार्रवाई करनी चाहिए थी जो कि अभी तक लंबित है जिसके लिये मेरी कोई जिम्मेवारी नहीं बनती है।
अतः अंतिम विपत्र के पारित न होेने की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता जिम्मेवार होंगे क्योंकि उनके द्वारा टाल-मटोल की नीति अपनाकर तथा अपने पदीय दायित्वों को निर्वहन नहीं किया जाना एक प्रकार से असहयोगात्मक एवं नकारात्मक कदम ही माना जायेगा। इसकी समीक्षा विभाग द्वारा होनी चाहिए कि जब निधि मांग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपलब्ध करा दिया गया था तो फिर प्रत्यर्पण का क्या कारण था, तथा अंतिम विपत्र पारित होने के पहले ही मेरे द्वारा किए गए भुगतान को अनियमित की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। साथ ही मेरे द्वारा बचाव बयान पत्रांक-365 दिनांक 02.11.2016 तथा पत्रांक-373 दिनांक 11.11.2016 (निबंधित डाक द्वारा)आपको समर्पित किया जा चुका है। कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य महालेखाकार (लेखा परीक्षा) बिहार, पटना का तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा का Audit Report (आंकेक्षण प्रतिवेदन सं0-33/2015-16) संलग्न करते हुए आग्रह करना है कि प्रमंडल का (2002 से 2015 तक) 13 वर्षों का लेखा का आंकेक्षण प्रतिवेदन के Para-1&2 (A), 2(B), 2(C) से पूर्णतः स्पष्ट है कि प्रमंडल में मेरे पदस्थापन के पूर्व ही मिट्टी कार्य के मद में अनियमित भुगतान एवं अन्य कटौती मद में प्रथम चालू विपत्र एवं द्वितीय चालू विपत्र वर्ष 2010-11 में अनियमितता हुई थी। जिसका रिकभरी मेरे द्वारा 39वीं विपत्र के माध्यम से 28.03.15 को वर्ष 2014-15 में किया गया। यह तथ्य अंकेक्षण प्रतिवेदन (Audit Report) द्वारा स्थापित हो रहा है। अतः उपरोक्त दोनों आरोप निराधार है तथा मुझे इससे दोषमुक्त करने की कृपा की जाय।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में निम्न बातें कही गयी है।11 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 आरोप सं0 1- उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन में वि0दू0 768-790के बीच रैण्डम जांच (वि0दू0 761.85) में नहर बैंक Undersection कार्य में पूर्ण सेक्सन कार्य का अनियमित भुगतान का मामला नहीं पाया है। इनके द्वारा जांच के समय (दिनांक 07.04.15 को) मात्र Country Side slope में मिट्टी कार्य कम पाया गया, अर्थात रूपांकन स्लोप 1ः2 नहीं पाया गया जिसके कारण और मिट्टी कार्य की आवश्यकता बताई गई। श्री शर्मा का बचाव बयान बिना कार्य कराये ही रूपांकित सेक्सन का अनियमित भुगतान को लेकर दिया है। जबकि उनपर आरोप है कि बिना रूपांकित सेक्सन में कार्य कराये ही संवेदक को भुगतान किया गया है। श्री शर्मा पर लगे आरोप को श्री शर्मा अपने बचाव बयान में स्वीकार करते हुए कहते है कि उनके पूर्ववर्ती अभियंताओं द्वारा भी इसी तरह भुगतान किया गया। यही प्रक्रिया उनके द्वारा भी अपनायी गयी है, यह नियमानुकूल नहीं है। उन्हें चाहिए था कि वे इस प्रक्रिया/अनियमितता को रोकते तथा संवेदक के द्वारा कम से कम पूर्ण सेक्सन में हर लेयर में कार्य करने पर ही भुगतान करते। अभियंता प्रमुख द्वारा दिनांक 13.08.14 को समीक्षात्मक बैठक की कार्यवाही पत्रांक-950 दिनांक 29.08.14 (बचाव बयान पत्रांक-365 दिनांक 02.11.16 का अनुलग्नक परि0-P) की सामान्य निर्देश की कंडिका-2 में कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया गया था कि मिट्टी कार्य में सुधारात्मक कार्य के बाद ही मिट्टी कार्य की भुगतान किया जाय, परन्तु श्री शर्मा द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया गया तथा संवेदक को भुगतान किया गया। श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता अपने बचाव बयान में स्पष्ट करते है कि संवेदक द्वारा 1ः1.5 स्लोप में कार्य किया गया तथा अन्य पारामीटर का कार्य रूपांकित नक्सा के अनुसार हुआ है। यह उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन से भी स्पष्ट होता है। ऐसी स्थिति में 1ः1ः5 के स्लोप को 1ः2 के स्लोप में कैनाल बैंक को लाने हेतु अतिरिक्त मिट्टी का कार्य कराने पर वांछित Compaction Efficiency प्राप्त नहीं हो सकता तथा वर्षा के कारण अत्याधिक बड़े-बडे रेन कट्स हो जाते है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही कुछ Over Section में कार्य करा कर नियमानुसार कम्पैक्शन किया जाता है तथा इसके बाद रूपांकित सेक्सन में Slope की Trimming की जाती है। गुण नियंत्रण मैनुअल-1990 की कंडिका 5.03(4) (ann-2)में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रत्येक लेयर रूपांकित सेक्सन की सीमा से कम से कम 1 फीट अधिक होना चाहिए। इस प्रकार श्री शर्मा द्वारा मिट्टी कार्य मद में पूर्ण सेक्सन में कार्य कराये बगैर ही संवेदक को अनियमित भुगतान किया गया। अतः श्री शर्मा के विरूद्ध आरोप-1 प्रमाणित होता है। आरोप सं0 2-इस आरोप के विरूद्ध श्री शर्मा द्वारा दिये गये बचाव बयान में भी आरोप को स्वीकार किया गया है कि वर्ष 14-15 तक चालू विपत्र से सेटलमेंट मद में उनके द्वारा कटौती नहीं की गई थी। इसके लिए उनके द्वारा कारण बताया गया कि यदि विपत्र से आवश्यक कटौतियां सेटलमेंट सहित की जाती तो संवेदक को कम भुगतान होता, Cash Flow एवं कार्य की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता, प्रगति की निरंतरता बरकरार नहीं रहती, आवंटन राशि प्रत्यार्पित होती है। इनका यह भी कहना है कि चालू विपत्र से भुगतान अग्रिम भुगतान (Advance payment) होता है। यदि कोई कटौतियां रह जाती है तो उसे अंतिम विपत्र में सामंजस्य कर लिये जाने का अवसर होता है। श्री शर्मा द्वारा स्थानांतरण के फलस्वरूप अपना प्रभार दिनांक 28.07.15 को अपने प्रतिस्थानी को सौंप दिया जिसके फलस्वरूप उनका कहना है कि अभियंता प्रमुख के पत्रांक-1069 दिनांक 05.08.15 (बचाव बयान पत्रांक-365 दिनांक 02.11.16) का अनुलग्नक परि0-W) के निदेश के आलोक में प्रतिस्थानी कार्यपालक अभियंता अंतिम विपत्र से शेष सभी कटौतियां कर सकते है। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा अपने उपर लगे आरोप के बचाव में तथ्यपरक नियमानुकूल तथ्य से ज्यादा अपने पूर्ववर्ती कार्यपालक अभियंता एवं प्रतिस्थानी कार्यपालक अभियंता पर दोषरोपण कर अपना बचाव करने का असफल प्रयास किया गया। श्री शर्मा, आरोपित पदाधिकारी के बचाव बयान एवं उक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा स्वयं निर्णय लेकर एकरारनामा एवं विशिष्टि के विरूद्ध जाकर तेरहवें चालू विपत्र से सेटलमेंट की कटौती संबंधित विपत्र से नहीं की गई। दिनांक 20.12.12 को पारित विपत्र तथा संवेदक को भुगतान कर तत्काल अतिरिक्त लाभ पहुंचाया गया। अनियमितता उजागर होने पर तथा उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन में अनुशंसा पर अभियंता प्रमुख को पत्रांक-1069 दिनांक 05.08.15 (बचाव बयान पत्रांक-365 दिनांक 02.11.16 के अनुलग्नक का परि0-W) से चालू विपत्र/अंतिम विपत्र से सेटलमेंट की कटौती का आदेश देना पड़ा। इस उत्पन्न स्थिति के लिए श्री शर्मा उत्तरदायी एवं दोषी होते। उल्लेखनीय है कि यदि आरोपकत्र्ता द्वारा पत्रांक-0 दिनांक 07.01.14 से अनियमितता उजागर नहीं करते एवं विभाग इसकी जांच नहीं करता तो इस अनियमितता का पता चलता ही नहीं। यह श्री शर्मा के कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं अनियमितता है जिसे कार्य के प्रगति, आवंटन के व्यय आदि के नाम पर जायज ठहराने का प्रयास श्री शर्मा किये है, जो कि एकरारनामा एवं विशिष्टि का उल्लंघन है। अतः श्री शर्मा के विरूद्ध आरोप-2 प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-651 दिनांक 13.03.2018 से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की मांग की गई। इसी बीच श्री शर्मा के दिनांक 30.04.2018 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-72 सह ज्ञापांक-1517 दिनांक 18.07.18 से बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-199 दिनांक 09.04.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं-12 13 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 रहती एवं आवंटन प्रत्यर्पित होता। अभियंता प्रमुख के पत्रांक 1869 दि॰ 05.08.15 के निदेश के आलोक में स्वीकार योग्य मानते हुए संवेदक को अतिरिक्त लाभ पहुँचाया जाना माना गया है एवं कहा गया है कि अनियमितता उजागर होने तथा उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में अनुशंसा कर अभियंता प्रमुख को पत्रांक 1069 दि॰ 05.08.15 से सेटलमेंट की कटौती का आदेश देना पड़ा। जो कार्य के प्रति घोर अनियमितता है जिसे कार्य की प्रगति, आवंटन व्ययगत आदि के नाम पर जायज ठहराने का प्रयास किया जाना एकरारनामा का उल्लंघन है, के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में इस आरोप के संदर्भ में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। कहा गया है कि कार्यहित में Cash flow को बनाये रखने एवं कार्य की समानुपातिक प्रगति को देखते हुए चालू विपत्र द्वारा पूर्व के कार्यपालक अभियंता के द्वारा किये गये भुगतान के तरह ही भुगतान किया गया है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि एकारारनामा के साथ संलग्न Technical Specification के कंडिका 10.2(B) के अनुसार मिट्टी भराई कार्य में सेटलमेंट की कटौती नियमानुसार करने के पश्चात ही भुगतान किया जाना है। यहाँ तक कि अभियंता प्रमुख के दिनांक 13.08.14 को किये गये समीक्षात्मक बैठक की कार्यवाही के कंडिका 2 के अनुसार मिट्टी कार्य में सुधारात्मक कार्य कराने के बाद ही भुगतान करने का निदेश है। इसके बावजूद बिना सेटलमेंट की कटौती किये ही संवेदक को लाभ पहुँचाने हेतु भुगतान की कार्रवाई किया गया है जो नियम एवं एकरारनामा के विपरीत है। अतएव इनका बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है एवं आरोप प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत वर्णित समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अनिल कुमार शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप-1 एवं 2 यथा बाँध के C/S Slope में बिना रूपांकित सेक्सन (1ः2) में कार्य कराये ही अनियमित भुगतान करने तथा विपत्र से नियमानुसार एवं एकारारनामा के अनुरूप बिना सेटलमेंट की कटौती किये ही अधिकाई भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार के द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-923 दिनांक 26.06.2020 से निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
''पन्द्रह प्रतिशत (15%) पेंशन की कटौती पांच वर्षों के लिए''। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री शर्मा द्वारा पुनर्विचार याचिका विभाग को ई-मेल के माध्यम से समर्पित किया गया। श्री शर्मा से प्राप्त पुनर्विचार याचिका में उल्लेखित निम्न कानूनी एवं तकनीकी तथ्यों की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई, जो निम्नवत है :- (।) कानूनी विश्लेषण :- (1) विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए सभी दंडादेश क्रमशः 468 दिनांक- 18.02.2015, 1721 दिनांक-26.09.2017, 2055 दिनांक-13.09.2018 एवं 2126 दिनांक-24.09.2018 जो प्रमाण स्वरूप संलग्न किए गए है, उनके अवलोकन से स्पष्ट है कि इन सभी में एक ही व्यक्ति का नाम कॉमन है वो है श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई॰डी॰-3476), जिन्हें विभाग ने पहले उपरोक्त वर्णित चार विभिन्न मामलों में आरोपी बनाया, फिर कालांतर में उन्हें दोषी पाए जाने के फलस्वरूप दंडित भी किया। इनमें से एक सबसे गंभीर एवं सनसनीखेज मामला था, गंडक प्रोजेक्ट अन्तर्गत बिहार नेपाल हितकारी योजना-2009 के अन्तर्गत पश्चिमी मुख्य गंडक नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गई घोर अनियमितता के फलस्वरूप 2014 में श्री चौधरी संग विभाग के अन्य कई पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया था और वे दंडित भी किए गए थे। 2016 में ऐसी कौन सी विशेष परिस्थिति थी कि मेरे मामले में प्रपत्र 'क' के गठन के समय बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की धारा-17 के तहत पूर्व से आरोपी घोषित श्री चौधरी की आयोग्यता पर बिना विचार किए उन्हें संचालन पदाधिकारी नियुक्त कर दिया गया। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-15548 दिनांक-06. 12.2017 में निहित मार्गदर्शी नियमों के आलोक में अपनाई गई विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण की श्रेणी में आता है, फलतः इसे रद्द किया जाना चाहिए। (2) विभाग द्वारा कानून की अनदेखी का यह सिलसिला 2016 के बाद भी नहीं थमा बल्कि 2017,2018,2019, और 2020 में भी जारी रहा तथा सिस्टम से जुड़े किसी व्यक्ति ने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। सितम्बर 2017 में श्री चौधरी (vide letter no-1721dt.26.9.2017) द्वारा सज़ायाफ्ता घोषित किए गए। इसके बाद भी उन्हें मेरे मामले में संचालन पदाधिकारी के दायित्व से मुक्त नहीं किया गया, बल्कि सज़ायाफ्ता होने के उपरांत उनके द्वारा मार्गदर्शन के अनुरोध को ठुकरा कर विभाग ने महज दो माह के अंदर ही उन्हें दिनांक 18.11.2017 को संचालन पदाधिकारी के पद पर बरकरार रखते हुए उन्हें जाँच मंतव्य प्रतिवेदन भी समर्पित करने हेतु संबंधित केस संचिका में अनुमोदन प्रदान किया गया।
(3) जनवरी 2018 में श्री चौधरी ने एक मुज़रिम/ सज़ायाफ्ता की हैसियत से तैयार किया गया जॉच प्रतिवेदन (पत्रांक -25 दिनांक 19.1.2018)द्वारा विभाग में समर्पित किया, जिसपर विभाग ने इसकी समीक्षा के दौरान आँख मूंद कर बिना इसकी कानूनी प्रमाणिकता की जांच किये इस पर सहमति भी जता दी और मुझसे कारण पृच्छा की गई। मैंने अपने प्रत्युत्तर प्रतिवेदन में इस बात पर सवाल भी उठाए कि एक मुज़रिम/सज़ायाफ्ता व्यक्ति से नैसर्गिक एवं निष्पक्ष न्याय पाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? क्या एक अपराधी की हैसियत से दिया गया अभिमत क़ानूनन सही दस्तावेज़ है ? न्याय निर्णय देते समय भी विभाग द्वारा इसे अनसुनी कर दिया गया, न ही कोई प्रतिक्रिया दी गई । एक सज़ायाफ्ता व्यक्ति की विश्वसनीयता क़ानूनन कैसे बरकरार रहेगी इस पर मुझे शंका है ?
(4) सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या 15548 दिनांक 06.12.2017 की नियमावली की कंडिका (5) अंतर्गत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जारी नियमावली 17(3) एवं 17(4) के आलोक में मेरे मामले मेे संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्षित (जॉच-प्रतिवेदन) प्रभावित हो रहा है ,इसमें दो मत नहीं की यह कानून सम्मत नहीं है। इस कारण यह विभागीय14 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 कार्यवाही (vide letter no-1923 dt-31-08-2016) त्रुटिपूर्ण तरीके से संचालित एक जांच प्रक्रिया प्रतीत होता है और इस आधार पर इसे रद्द किया जाना चाहिए।
(5) सामान्य प्रशासन विभाग की अधि०स०-6727 दि. 08.07.2020 की कंडिका (4) के अलोक मेे सज़ायाफ्ता संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित अभिमत को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दूषित एवं कानून विरोधी मानकर उसे निरस्त किया जाना उचित एवं न्यायसंगत होगा। अतः श्री चौधरी द्वारा समर्पित प्रतिवेदन रद्द करने की —पा की जाय।
(6) माननीय उच्च न्यायालय पटना में श्री चौधरी द्वारा दायर याचिका CWJC no.16258/2017 के संदर्भ ग्रहण से साफ है कि 2017 मेे अपने पद पर कार्यरत रहते हुए श्री चौधरी (वादी) ने अदालत में चुनौती दी और दूसरी तरफ विभाग (प्रतिवादी) की भूमिका निभाते हुए कटघरे में खड़ी थी, यह अजीब विडंबना है। परन्तु मेरे मामले मेे जनवरी 2018 में विभाग ने श्री चौधरी (वही सज़ायाफ्ता व्यक्ति) द्वारा समर्पित जॉच मंतव्य प्रतिवेदन को निरस्त करने के बजाय उसे स्वीकार कर उस पर सहमति भी जताई थी, यह विभाग का दोहरा मापदंड (double standard) नहीं तो और क्या है।
(7) माननीय उच्च न्यायालय पटना मेे दायर जनहित याचिका CWJC no-20472/2019 के संदर्भ ग्रहण से एक बात स्पष्ट है कि प्रश्नगत एकरारनामा 1GR/2009-10 अभी तक अंतिम तौर पर निस्तारित भी नहीं हुआ प्रतीत होता है, और अभी यह मामला SUBJUDICE भी है तो दिनांक 26.06.2020 को विभाग द्वारा दिया गया फैसला PREJUDICE होकर लिया गया दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है, जिसे रद्द किया जाना चाहिए। (ठ) तकनीकी विश्लेषण :-
R.T.I के तहत जो सूचना विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी ने उपलब्ध कराई है उससे उड़नदस्ता अंचल द्वारा ही खुद उड़नदस्ता अंचल के जांच की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा होता हैं। नहर के बाहरी स्लोप में मिट्टी कार्य संबंधी के जांच की कलई खुलती है। (8) सूचना के अधिकार के तहत उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक 219 दिनांक 20.4.2018 द्वारा जो जानकारी उपलब्ध कराई गई जिसमें विभागीय पत्रांक 124 दिनांक 9.3.2017 द्वारा नहर बांध में मिट्टी फिलिंग कार्य की जांच हेतु जो मानदंड निर्धारित थे उसके अनुसार कम से कम तीन स्थलों पर स्लोप की जांच करना अनिवार्य था। ऐसा नहीं कर उड़नदस्ता ने केवल 30R-D/(9.15 km) लम्बे बाहरी स्लोप में मात्र एक बिन्दु (R-D 761.85) पर जॉच कर विभाग के स्थापित मापदंड का उल्लंघन किया । जब जांच ही गलत तरीका अपना कर किया, तो फिर उनके द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन त्रुटिपूर्ण कैसे नहीं माना जाएगा, जिसके आधार पर स्लोप में कम मिट्टी पाए जाने का आरोप लगाना बेमानी लगता है। क्या जाँचकर्ता त्रिकालदर्शी थे जो एक ही बिंदु पर खड़े रहकर पूरे 9.15 km लंबे बाहरी स्लोप में मिट्टी की मात्रा की जांच "thumb rule" से कर लिए, और इस प्रकार गलत रिपोर्टिंग भी अपने समर्पित जांच प्रतिवेदन मे विभाग को किए। उड़नदस्ता द्वारा स्लोप के मिट्टी की जांच में इस्तेमाल "thumb rule" वाला फ़ॉर्मूला (mode of measurement) एक तकनीकी जांच की प्रक्रिया नहीं हैं। यह बिल्कुल गलत असंभव तथा हास्यास्पद है। तकनीकि –ष्टिकोण से यह स्वीकार्य नहीं है।
(9) पुनः उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक 180 दिनांक 6.4.2018 द्वारा R.T.I द्वारा प्राप्त सूचनानुसार जब विभाग के पास नहर के बाहरी स्लोप से वर्षा अवधि के पश्चात मिट्टी के क्षरण को जाँचने के लिए कोई मानक या अनुज्ञेय सीमा निर्धारित ही नहीं है, तो फिर उड़नदस्ता द्वारा जांच प्रतिवेदन में नहर के बाहरी स्लोप में मिट्टी की मात्रा कम पाए जाने का आरोप लगाना कितना तर्कसंगत है। उड़नदस्ता के जांच प्रतिवेदन में जांचोपरांत नहर के बाहरी स्लोप में कितनी मिट्टी की मात्रा (घनमीटर) में कम पाई गई, इस बात का कोई जिक्र भी नहीं है।यह तो तथ्यों को छिपाकर मिथ्या आरोप लगाना हुआ, इस प्रकार समर्पित जांच प्रतिवेदन सिर्फ झूठ का पुलिंदा है। इसके आधार पर लगा आरोप भी बेबुनियाद हैं। जब विभाग के पास नहर के बाहरी स्लोप से मिट्टी के क्षरण को जाँचने हेतु कोई यार्ड स्टिक ही नहीं है तो बिना इसके स्लोप मेे कम मिट्टी पाए जाने का आरोप लगाना कहां तक तकनीकि –ष्टिकोण से युक्तिसंगत है।
(10.) यह बात भी जाहिर है कि आरोपों की जॉच भी पूरी हो गई, और चार वर्ष बीतने के बाद जो न्याय निर्णय 26.
6.2020 को आया वह भी संपुष्ट आंकड़ों के आधार पर नहीं हो कर speculation के आधार पर आया । अभियंत्रण कार्यों की जांच को संपुष्ट करने वाले आंकड़ों के आधार पर होना जरूरी है। विभागीय ज्ञापांक- 22/नि०सि०(विविध)21-65/2016-36/ पटना दिनांक 13.01.2017 की कंडिका (4) एवं (7) अंतर्गत माननीय मंत्री महोदय द्वारा दिए जांच संबंधी गाइड लाइन का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है।
(11) इस न्याय निर्णय मेे conclusive detas like final total cumulative quantity of earthwork done in filling v/s total aggremented quantity of earthwork in filling of canal embankment's comparative statement of final status, total profit v/s loss ke final status report related कोई भी Narrative नहीं देना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह निर्णय technically as well as legally acceptable नहीं है।
(12) प्रश्नगत एकरारनामा की तार्किक परिणति होने से पूर्व इससे संबंधित न्याय निर्णय का आना यह दर्शाता है कि लिया गया फैसला पूर्वाग्रह से प्रेरित है।
अंततः मेरा विभाग से अनुरोध है कि मेरे मामले में त्रुटिपूर्ण विभागीय कार्यवाही के नाम पर जो आर्थिक, शारीरिक तथा मानसिक प्रताड़ना मुझे झेलनी पड़ी है एवं पिछले चार वर्षों से जो INJUSTICE मेरे साथ होता चला आया है उस पर विराम लगे। इस फैसले से मेरे साथ विश्वासघात हुआ है तथा न्याय पाने के मेरे मौलिक अधिकार का हनन हुआ है। न्याय पाने के लिए भविष्य मेे मुझे अब न्यायालय पर ही भरोसा बचा है।15 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 समीक्षा :- 1. श्री अनिल कुमार शर्मा द्वारा पुनर्विचार याचिका के तकनीकी विश्लेषण के कंडिका-8 में यह उल्लेख किया गया है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा 30 R.D. (9.15KM) के लम्बे बाहरी स्लोपों में मात्र एक बिन्दु (RD 761.85) पर जाँच कर विभाग द्वारा स्थापित मापदंड का उल्लंघन किया है, जिससे की गई जाँच त्रुटिपूर्ण है। उक्त कथन के संदर्भ में यह तथ्य विचारणीय है कि श्री शर्मा द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में खुद स्वीकार किया गया है कि जाँच की तिथि को उक्त जाँच बि॰दू॰ पर Slope 1ः2 के स्थान पर 1.1.5 पाया गया था। श्री शर्मा के विरूद्ध आरोप बिना रूपांकित सेक्शन में कराये गये मिट्टी के कार्य के हीं प्रावधानित भुगतान किये जाने से संबंधित है। एकरारनामा के Techinical Specification के प्रावधान के कंडिका-10.1 Measurement से संबंधित निदेश, उप कंडिका-(b) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि ''No payment (either Interim or final) will be done for any portion of work where section of both canal bed and banks are not completed as per design and drawing (with specified) allowance for settlement in case of banks. This means that even interim payment will be made only from works completed in all respect as per drawing and specifications.'' अतः उपरोक्त कंडिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विषयांकित मामले में श्री शर्मा द्वारा किया गया भुगतान Techinical Specification को ध्यान में रखकर नहीं किया गया। श्री शर्मा द्वारा अपने बचाव-बयान में आरोप से संबंधित, कोई नया अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है, जिसके फलस्वरूप स्थल निरीक्षण के दौरान नहर बाँध के C/S Slope भाग में मिट्टी कम पाये जाने से बिना रूपांकित सेक्शन में कराये गये कार्य के हीं अनियमित भुगतान का आरोप प्रमाणित होता है।
2. श्री शर्मा द्वारा पुनर्विचार याचिका के कंडिका संख्या-09 में उल्लेख किया गया है कि जब विभाग के पास नहर के बाहरी स्लोप से वर्षा अवधि के पश्चात् मिट्टी के क्षरण को जाँचने के लिए कोई मानक नहीं है तो फिर उड़नदस्ता द्वारा जाँच प्रतिवेदन में नहर के बाहरी स्लोपों में मिट्टी की मात्रा कम पाए जाने का आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है तथा तकनीकी दृष्टिकोण से युक्ति संगत नहीं है। Technical Specification के कंडिका 10.2 (B) के अनुसार नहर बाँध में मिट्टी भराई कार्य में 1/9th for uncompacted earth (done either by manual or Tractor) and 1/49th for compacted earth (by sheep foot roller) के रूप में Settlement काटकर भुगतान करने का प्रावधान है। इस मामले में मिट्टी भराई कार्य में Settlement के रूप में 1/49th काटकर भुगतान करना है। दोनों पदाधिकारियों द्वारा स्वीकार किया गया है कि मिट्टी भराई कार्य में Settlement मद में कोई कटौती नहीं की गयी है एवं कहा गया है कि चूंकि कार्य चालू अवस्था में है इसी परिप्रेक्ष्य में संवेदक को किया गया भुगतान Advance Payment के रूप में दिया गया है, ताकि कार्य की गति बरकरार रहे तथा अभियंता प्रमुख (उत्तर) के पत्रांक 1069 दिनांक 05.08.2015 के अनुपालन में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 1117 दिनांक 18.12.15 जिसमें अंकित है कि अगली विपत्र में Settlement मद के तहत कटौती कर ली जायेगी के आधार पर अनियमित भुगतान नहीं पाया गया है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है, क्योंकि एकरारनामा के साथ संलग्न Technical Specification के अनुसार Settlement की कटौती कर ही भुगतान की प्रक्रिया अपनाना है जबकि माप पुस्त से किसी भी विपत्र में Settlement की कटौती नहीं किया जाना परिलक्षित करता है कि उक्त कंडिका का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करते हुए भुगतान की गयी है एवं अधिक भुगतान होना स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है। वर्त्तमान कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1117 दिनांक 18.12.15 में उल्लेखित है कि अगले विपत्र से Settlement के रूप में कटौती कर ली जायेगी से भी ध्वनित होता है कि संवेदक का Settlement के रूप में की गयी अधिकाई भुगतान की कटौती प्रतिवेदन की तिथि तक नहीं हो सका है। उल्लेखनीय है कि वर्त्तमान कार्यपालक अभियंता का उक्त पत्र उड़नदस्ता जाँच के बाद की तिथि में विभागीय निदेश के पश्चात निर्गत है। अर्थात् अगर मामला प्रकाश में नहीं आता तो निश्चित रूप से किये गये अधिकाई भुगतान की वसूली की दिशा में कोई कारवाई नहीं हो पाती।
विभागीय समीक्षा के क्रम में यह परिलक्षित होता है कि श्री अनिल कुमार शर्मा (आई0डी0-3301), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा, मुजफ्फरपुर द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिना किसी ठोस साक्ष्य/अभिलेख के त्रुटिपूर्ण बताया गया है, जबकि श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति के आलोक में संचालित की गयी है।
उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री शर्मा के द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में आरोपों से संबंधित कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य/अभिलेख, अपने बचाव हेतु समर्पित नहीं किये जाने के कारण, श्री शर्मा का पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।
मामले के समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री शर्मा द्वारा समर्पित पुवार्विलोकन अभ्यावेदन में आरोपों से संदर्भित कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण पुवार्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री अनिल कुमार शर्मा (आई0डी0-3301), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित पुवार्विलोकन अभ्यावेदन को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा16 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 अस्वीकृत किये जाने के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-923 दिनांक 26.06.2020 द्वारा संसूचित दण्ड ''पन्द्रह प्रतिशत (15%) पेंशन की कटौती पांच वर्षों के लिए'' को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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2 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-09/2015-2144--श्री महेश प्रसाद सिंह, तत0 प्रशाखा पदाधिकारी, प्रशाखा-22, सम्प्रति प्रशाखा पदाधिकारी, प्रशाखा-20, जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्ध एजेण्डा सं0-98/333 के तहत ईस्माइलपुर बिन्द टोली ग्रामो के बीच बाढ़-2009 के पूर्व कटाव निरोधक कार्य में हुयी अनियमितता से संबंधित संचिकाओं के उपस्थापन में हुए अनावश्यक विलंब के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-1413 दिनांक 05.11.2021 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री सिंह से प्राप्त बचाव बयान के आलोक में वस्तुस्थिति निम्नवत है :-
बचाव-बयान ः-उनके द्वारा अपने बचाव बयान में अंकित किया गया है कि मामले से संबंधित पहली संचिका-22/नि0सि0(भाग0)09-12/2012 एवं 22/नि0सि0(भाग0)09-06/2012, उनके निगरानी प्रशाखा में प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर वर्ष 2015 में पदस्थापन के पूर्व ही श्री रमाशंकर सिंह, तत0 तकनीकी पदाधिकारी को दिनांक 21.01. 2014 को पृष्ठांकित की गई थी, जो तकनीकी पदाधिकारी के द्वारा दिनांक 24.01.2019 को वापस की गई है। अतः इस प्रथम संचिका के विषय में मुझे जानकारी नहीं थी। मामले में संबंधित दूसरी संचिका 22/नि0सि0(भाग0) 09-09/2015 (जो वर्तमान संचिका है) बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप पत्र एवं सुसंगत साक्ष्यों के आलोक में दिनांक 24.06.2015 को खोली गई एवं दिनांक 01.07.2015 को संबंधित पदाधिकारियों/कर्मियों का बायोडाटा मांगने के पश्चात संचिका के प्रभारी सहायक श्री युगल किशोर मिश्र द्वारा कभी भी उपस्थापित नहीं किया गया। श्री मिश्र द्वारा दिनांक 01.07.2015 के बाद उक्त संचिका को कभी भी उपस्थापित नहीं किये जाने से उन्हें अथवा वरीय पदाधिकारियों को इस संचिका के विषय में स्वाभाविक रूप से जानकारी नहीं हो पायी। यहीं नहीं, बल्कि श्री मिश्र के द्वारा भागलपुर परिक्षेत्र के 120 (एक सौ बीस) चालू संचिकाओं का प्रभार अपने प्रतिस्थानी को दिनांक 10.04.2017 को दिया गया और प्रभार प्रतिवेदन की एक प्रति उन्हें भी दी गई परन्तु प्रभार में दिये गये उक्त चालू संचिकाओं में यह संचिका नहीं दी गई। इस संचिका को शेष निष्पादित संचिकाओं में शामिल करते हुए चालू संचिकाओं के प्रभार सौंपने के 03 माह बाद दिनांक 28.06. 2017 को इसका प्रभार सौंपा गया, जिससे यह पता लगाना और कठिन हो गया कि यह संचिका भी चालू संचिका है। समीक्षा :- श्री महेश प्रसाद सिंह, तत0 प्रशाखा पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव-बयान में अंकित किया गया है कि पहली संचिका, जो दिनांक 21.01.2014 को तकनीकी पदाधिकारी को पृष्ठांकित की गई थी, उस समय उनका पदस्थापन निगरानी प्रशाखा में नहीं था। अतएव इस संचिका के दब जाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। श्री सिंह का यह कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। जहाँ तक संचिका सं0-22/नि0सि0 (भाग0)09-09/2015 के उपस्थापन का प्रश्न है, इस संचिका के अवलोकन से स्पष्ट है कि दिनांक 01.07.2015 के पश्चात श्री युगल किशोर मिश्र, कार्यवाह सहायक द्वारा संचिका प्रशाखा पदाधिकारी अथवा वरीय पदाधिकारियों के समक्ष कभी उपस्थापित नहीं किया गया। इस संदर्भ में यह तथ्य भी विचारणीय है कि कार्यवाह सहायक श्री मिश्र द्वारा इस संचिका को, अपने प्रतिस्थानी को दिनांक 10.04.17 को दी गई 120 (एक सौ बीस) चालू संचिकाओं के साथ नहीं दिया गया, जबकि फरवरी, 2017 में विभाग से विरमित होने के क्रम में संभवतः श्री मिश्र द्वारा सभी संचिकाओं की प्रभार सूची/प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया होगा। इस संचिका को जानबूझकर 03 माह बाद दिनांक 28.06.2017 को निष्पादित संचिकाओं के साथ प्रभार सूची में देने से श्री सिंह, प्रशाखा पदाधिकारी को पता लगाना और कठिन हो गया कि उक्त संचिका में कोई कार्रवाई भी अभी शेष है। अतएव उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।
निष्कर्षः- श्री महेश प्रसाद सिंह, प्रशाखा पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग से प्राप्त बचाव बयान/स्पष्टीकरण की समीक्षा के आलोक में उनका बचाव बयान स्वीकार योग्य पाया गया है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री महेश प्रसाद सिंह, प्रशाखा पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर को स्वीकार योग्य पाते हुए उन्हें आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेश प्रसाद सिंह, प्रशाखा पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
6 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-06/2022-2161--श्री अभय कुमार चंदन (ID-5108) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा के विरूद्ध दिनांक 02.07.2022 को करीब 10ः00 बजे माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग के आवास पर अपने नव पदस्थापन स्थान को बदलने हेतु, अनुरोध करने पहुँचने संबंधी आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1584 दिनांक 06.07.2022 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री अभय कुमार चंदन, कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा द्वारा स्पष्टीकरण के जवाब में, घबराहट में आकर और जानकारी के अभाव में, माननीय मंत्री महोदय के आवास पर चले जाने की बात कही गयी है। इसके लिए उनके द्वारा क्षमा मांगते हुए आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया।17 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 श्री चंदन से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत वस्तुस्थिति निम्नवत है :-
सरकारी सेवकों के स्थानांतरण/पदस्थापन के संबंध में नीति एवं प्रक्रिया का निर्धारण मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के संकल्प सं0-434 दिनांक 01.03.2007 द्वारा किया गया है। उक्त संकल्प की कंडिका-1(ग) एवं 1(घ) निम्नवत है :-
कंडिका-1(ग)-यदि कोई पदाधिकारी अपने स्थानांतरण/पदस्थापन के संबंध में बाह्य व्यक्ति से सिफारिश कराते हैं या प्रभाव डालने का प्रयास करते हैं तो उन्हें अपने आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण का मौका देकर, यह बात उनके चरित्र पुस्ति में दर्ज कर दी जायेगी।
कंडिका-1(घ)-सरकारी सेवकों द्वारा सीधे विभागीय मंत्री को स्थानांतरण/पदस्थापन के संबंध में प्रार्थना पत्र संबोधित किये जाने की पद्धति अनियमित है एवं इसे अमान्य कर दिया जाय।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा निर्गत उपर्युक्त संकल्प की कंडिका-1(ग) एवं 1(घ) के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि श्री अभय कुमार चंदन, कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा द्वारा किया गया कृत्य अनियमित एवं अनुशासनहीनता का परिचायक है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री चंदन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर को अस्वीकार योग्य पाते हुए उन्हें "चेतावनी" (जिसकी प्रविष्टि उनके चरित्र पुस्ति में दर्ज की जायेगी) संसूचित करने का निर्णय लिया गया है।
अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री अभय कुमार चंदन (ID-5108) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा को "चेतावनी" (जिसकी प्रविष्टि उनके चरित्र पुस्ति में दर्ज की जायेगी) संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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6 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-03/2014-2164--श्री सुरेन्द्र कुमार (ID-J 7720) सहायक अभियंता के विरूद्ध लोअर बाजार थाना कांड सं0-55/2018 (GR Case No- 946/18) दर्ज होने की सूचना डॉ0 के०के० पंडित से प्राप्त पत्र (दिनांक 21.03.2022) द्वारा होने के उपरांत श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-989 दिनांक 29.04.2022 द्वारा कारण पृच्छा की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण (पत्रांक-43 दिनांक 12.05.2022) अस्वीकार योग्य पाये जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-1468 दिनांक 20.06.2022 द्वारा आरोप पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के लिए श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी।
श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र मेें अवचार या कदाचार के लांछन का सार निम्नवत हैः- "श्री सुरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 7720) तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, बिहारशरीफ द्वारा उनके विरूद्ध दायर आपराधिक वाद से संबंधित तथ्यपरक सूचना विभाग को नहीं दिया गया। उनका उक्त आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।"
उक्त के आलोक में श्री सुरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 7720) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, अररिया का स्पष्टीकरण (पत्रांक-618 दिनांक 04.07.2022) प्राप्त हुआ, जिसमें निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
लोअर बाजार, थाना कांड सं0-55/2018 (GR Case No- 946/18) राँची, झारखंड जो उनके पुत्रवधू श्रीमती राशि कृष्णा के द्वारा उनके और उनके परिवार के विरूद्ध लगाया गया आरोप है, उसमें वे जमानत पर है, इसके बारे में पूर्व में आदेशफलक के द्वारा अवगत करा चुके हैं, जो पूर्णरूप से पारिवारिक विवाद है। उपरोक्त विवाद राँची, झारखंड में विचारणीय रहने एवं उनका आवास पटना, बिहार में रहने के कारण उक्त वाद में आरोप पत्र/संज्ञान के बारे में उन्हें जानकारी ससमय नहीं हो पाया। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8334 दिनांक 15.09.2020 के बारे में उन्हें जानकारी कारण पृच्छा किये जाने के पश्चात मिला, जिसका उनके द्वारा ससमय लिखित विवरणी समर्पित किया गया।
साथ ही अंकित किया गया है कि चूँकि उक्त आरोप सं0-09/20 दिनांक 21.01.2020 के बारे में जानकारी देने का सवाल है, तो उन्हें 2018 में उक्त वाद में अग्रिम जमानत मिल गया था और उनके विरूद्ध आरोप पत्र 2020 में न्यायालय में समर्पित किया गया था, जिसके बाद कोरोना महामारी के कारण न्यायालय का कार्य स्थगित हो जाने एवं आने-जाने पर प्रतिबंध लग जाने के कारण वाद में प्रगति का ज्ञान ससमय नहीं हो पाया। अतएव उनपर लगाया गया आरोप न्यायसंगत नहीं परिस्थतिवश है।
श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार द्वारा समर्पित उक्त स्पष्टीकरण से उनके द्वारा अपने विरूद्ध दायर आपराधिक वाद से संबंधित तथ्यपरक सूचना विभाग को नहीं दी गयी, बल्कि डॉ0 के0 के0 पंडित से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में जब विभागीय पत्रांक-989 दिनांक 29.04. 2022 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया, तब उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण (पत्रांक-43 दिनांक 12.05.2022) में उनके विरूद्ध आपराधिक वाद दायर होने का उल्लेख किया गया है। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8334 दिनांक 15. 09.2020 की कंडिका-5(1) के आलोक में सरकारी सेवक के सेवाकाल में उनके विरूद्ध दायर आपराधिक वाद अथवा किसी आपराधिक वाद में दायर आरोप पत्र से संबंधित तथ्यपरक सूचना सरकारी सेवक द्वारा प्रशासी विभाग को दिया जाना अनिवार्य है। ऐसा नहीं किया जाना संबंधित सरकारी सेवक का कदाचार माना जायेगा। श्री सुरेन्द्र कुमार द्वारा आपराधिक वाद दायर होने तथा आपराधिक वाद में आरोप पत्र दायर होने की सूचना विभाग को ससमय नहीं दिया गया तथा तथ्यों को18 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 छिपाने का प्रयास किया गया। श्री कुमार का उक्त आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर को अस्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 में वर्णित प्रावधानों के तहत (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2020-2021) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया ।
अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सुरेन्द्र कुमार (ID-J 7720) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) सिंचाई प्रमंडल, अररिया को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष-2020-2021) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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13 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुक0)मोति0-19-33/2018-2202--श्री प्रवीण कुमार (आई0डी0-5066) तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0-002/2014-12 दिनांक 25.03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-71, दिनांक 18.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा में प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (कोर्स एग्रीगेट) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है जो कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- (एक करोड़ निन्यानवे लाख इकहत्तर हजार सात सौ सतहत्तर) रूपये मात्र बताया गया। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान करने के लिए वे दोषी है। (2) इस योजना के तहत एस0एल0आर0 ब्रिज एवं स्नान घाट के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमूनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि स्नान घाट के निर्माण कार्य में प्रावधानित पी0सी0सी0 में सीमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में पी0सी0सी0 में सीमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। पी0सी0सी0 में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है, जिसके लिए वे दोषी हैं। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1327, दिनांक 16.08.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1780 दिनांक 22.08.2019 द्वारा उनके विरूद्ध 'सेवा से बर्खास्तगी' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उक्त मामले में श्री प्रवीण कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 दायर किया गया । उक्त वाद में दिनांक-09.05.2022 को माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित न्यायनिर्णय के कंडिका-3,4,5 एवं 6 में अंकित न्याय निर्णय का Operative Part निम्नवत् है -
"3. Petitioner was subjected to disciplinary proceedings in framing charges on 18.01.2017 based on certain investigation report or preliminary report. Such initiation was not only against petitioner who is holding the post of Assistant Engineer and it was initiated against other officials like Arjun Prasad, Junior Engineer. Ultimately petitioner was punished with major penalty of dismissal from service on 22.08.2019 during pendency of the present petition. Thus, the petitioner has filed interlocutory application19 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 and it was allowed in respect of challenge to the dismissal order dated 22.08.2019 (as contained in Annexure 7). 4. Learned Counsel for the petitioner submitted that the present matter is covered by earlier decision rendered in the case of Arjun Prasad in CWJC NO.-10733 of 2019 decided on 16.12.2021. 5. Learned counsel for the state has not disputed that the present petition is covered by the earlier decision passed in CWJC No.-10733 of 2019. In the light of the aforesaid submission on behalf of the respondents counsel the present matter stands disposed of in terms of the order dated 16.12.2021 passed in CWJC No.-10733 of 2019 read with CWJC No. 16258 of 2017 and LPA No.-1161 of 2019. Whatever directions given in the aforesaid matter, it is applicable to the present case. 6. Accordingly order dated 22.08.2019 stands set aside. The concerned authority shall take note of earlier decisions before taking any further action in the matter." सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-09.05.2022 के विरूद्ध एल०पी०ए० दायर किये जाने के बिंदु पर विधि विभाग के माध्यम से विद्धान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श निम्नवत् है :-
Earlier the undersigned has opined for filing of appeal against order dt. 09.05.2022 passed by Hon'ble court in CWJC No. 21850/2018 (Pravin kumar Vrs. State of Bihar and ors.) "In light of opinion of Learned Advocate General, in the matter of Arjun Prasad (Judgement dt. 16.12.2021 passed in CWJC 10733/2019) for the sake of consistency the Administrative Department may proceed afresh by the enquiry officer as per the provisions of CCA Rules."
सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-10733/2019 (अर्जुन प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-16.12.2021 के विरूद्ध एल०पी०ए० दायर किये जाने के संदर्भ में विधि विभाग के माध्यम से विद्धान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श निम्नवत् है-
"Form the record it appears that C.W.J.C. No. 16258 of 2017 dated 04.12.2018, which has been referred to in the judgment, the Hon'ble Court had quashed the enquiry report as well as the order passed thereafter dated 26.09.2017 with a direction to conduct enquiry as per the law explained in the said judgment. The aforesaid decision was rendered by the Hon'ble High Court on the ground inter alia that the author of the enquiry report of the Vigilance which has been relied upon by the Inquiry Officer, in disciplinary proceeding, the authority thereof has not been examined nor witnesses have been produced for examination and cross examination. Thus on technical ground came to be quashed.
Now a days the law has been settled that if the provisions with respect to conduct of disciplinary proceeding as stipulated under Bihar Civil Services (Classification, Control & Appeals) Rules 2005, if has not been complied with, as in the instant case, matter is remanded back for initiation of fresh proceeding from the stage such illegality has cropped up and if liberty has been granted to proceed afresh after remanding back the matter, then there is precedent of awarding cost after challenging such order.
In view of the above the undersigned is of the view that in this case also L.P.A. ought not to be filed and the enquiry be proceeded afresh by the Inquiry Officer as per CCA rules.
I opine accordingly.
सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 09.05.2022 को पारित आदेश के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किया जाना संभव नहीं होने के कारण मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक 20.11.2018 के आलोक में वित्त विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग के परामर्श/सहमति के उपरांत उक्त न्यायादेश का अनुपालन किये जाने के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के विचारार्थ मामले को रखा गया।20 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 विधि विभाग के ज्ञापांक-7755 दिनांक 09.09.2022 द्वारा संसूचित मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक की कार्यवाही द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 09.05.2022 को पारित न्यायादेश का अनुपालन किये जाने को दृष्टिपथ में रखते हुए समिति द्वारा सम्यक विचारोपरांत निम्न अनुशंसा की गयी :- "(i) सेवा से बर्खास्तगी संबंधी प्रशासी विभाग के अधिसूचना ज्ञापांक-1780 दिनांक 22.08.2019 को निरस्त कर उक्त आदेश निर्गत करने की तिथि अर्थात दिनांक 22.08.2019 से ही श्री कुमार को सेवा में पुनः बहाल करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई हेतु सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया जाय। (ii) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के प्रावधान के तहत दिनांक 22.08.2019 के प्रभाव से श्री कुमार को अगले आदेश तक के लिए निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही का निष्पादन सुनिश्चित किया जाय। (iii) निलंबन अवधि के लिए नियमानुसार श्री कुमार को जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जाय। यह सिर्फ याचिकाकर्त्ता के संदर्भ में ही प्रभावी होगा।"
अतः वर्णित तथ्यों के आलोक में सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-09.05.2022 को पारित न्यायादेश एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित निर्णय लिया गया है :-
1. श्री प्रवीण कुमार (आई0डी0-5066), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-1780, दिनाक-22.08.2019 द्वारा ''सेवा से बर्खास्तगी'' के अधिरोपित दण्ड को निरस्त करते हुए उक्त अधिसूचना निर्गत करने की तिथि अर्थात दिनांक 22.08.2019 से श्री कुमार को सेवा में पुनः बहाल करते हुए उनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई हेतु, संपूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया जाता है।
2. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 को नियम-9(5) में वर्णित प्रावधान के आलोक में श्री प्रवीण कुमार, सेवा से बर्खास्तगी की तिथि 22.08.2019 से निलंबित समझे जायेंगे एवं अगले आदेश तक निलंबनाधीन रहेंगे। उक्त निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता का कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया जाता है।
3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के तहत निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. श्री प्रवीण कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में पूर्व से नियुक्त संचालन पदाधिकारी श्री राजेश कुमार, अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना के सेवानिवृत हो जाने को कारण पदनाम के साथ मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, नालन्दा बिहारशरीफ को संचालन पदाधिकारी एवं पूर्व के प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने के कारण श्री बिजेन्द्र कुमार (आई०डी०-5122) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार), बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, एकंगरसराय को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
5. उक्त निर्णय एल०पी०ए० संख्या-1161/2019 में पारित न्यायनिर्णय के फलाफल से प्रभावित/आच्छादित होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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16 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(सम0)02-15/2017-2228--श्री संदीप कुमार, (आई0डी0-5324), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-02, मु0-बेतिया द्वारा रेलवे सेवा से बिना विधिवत विरमित हुए रेलवे सेवा में स्टाइपेंड के तहत प्राप्त किये गये राशि के नियमानुसार बिना लौटाये जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर नियुक्ति के कारण दिनांक 26.02.2014 को योगदान दिये जाने के फलस्वरूप पूर्व मध्य रेल से प्राप्त पत्रों के क्रम में श्री संदीप कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा के विरूद्ध आरोप पत्र के साथ विभागीय पत्रांक-482 दिनांक 21.02.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। तदालोक में श्री कुमार द्वारा विभाग में जवाब समर्पित किया गया एवं समीक्षोपरांत श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। तत्पश्चात श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2373 दिनांक 16.11.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (i) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर इनकी नियुक्ति की तिथि 26.02. 2014 है। ये रेलवे से बिना विधिवत विरमित हुए एवं रेलवे सेवा में स्टाइपेण्ड के तहत प्राप्त किये गये राशि नियमानुसार बिना लौटाये, जल संसाधन विभाग में दिनांक 26.02.2014 को योगदान किये है।
(ii) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर नियुक्ति हेतु समर्पित सत्यापन प्रपत्र में रेलवे की सेवा संबंधी तथ्य छिपाया गया है एवं विभागीय आदेश का अनुपालन इनके द्वारा नहीं किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को आंशिक प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा तकनीकी पदाधिकारी द्वारा की गयी21 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य (आंशिक प्रमाणित) से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-456 दिनांक 16.04.2021 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा जवाब समर्पित किया गया, जो निम्नवत है :- श्री कुमार द्वारा अपने बचाव-बयान में उल्लेखित किया गया है कि, सत्यापन प्रपत्र में निहित कंडिकाओं एवं स्थानों को नवनियुक्ति के उपरांत उपलब्ध स्थान के अन्तर्गत स्पष्ट एवं सही रूप में दर्शाने की पूर्णतः कोशिश इनके द्वारा की गयी। जहाँ तक केन्द्र सरकार की सेवा को छुपाने का प्रश्न है, इनके द्वारा कहा गया है कि भारतीय रेल के अधीन इनकी सेवा महज Trainee के रूप में ही समाप्त हो गयी। भारतीय रेल के पूर्व में सैन्य अभियंत्रण सेवायें जो भारत सरकार के अधीन है, में कनीय अभियंता (असैनिक) के पद पर 11(ग्यारह) महीने के लिए उतरी कमान उधमपुर के अधीन पदस्थापित थे, जिन सेवाओं के उल्लेख कंडिका में "हाँ" के रूप में करते हुए प्रपत्र समर्पित किया गया। सत्यापन प्रपत्र समर्पित करने के उपरांत उपस्थित पदाधिकारियों तथा उसके उपरांत इस संबंध में कोई मांग/पृच्छा नहीं किये जाने से प्रविष्टियों को यथावत सत्यापित इनके स्तर से किया गया। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि पूर्व में कार्यरत किसी भी संगठन में मेरे उपर कोई भी आरोप/कार्यवाही संचालित नहीं किया गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) के बचाव-बयान की समीक्षा विभाग के स्तर पर किया गया, जो निम्नवत है :- श्री कुमार द्वारा जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में योगदान के करीब आठ माह पूर्व रेलवे सेवा छोडी गयी थी। इस प्रकार विधिवत विरमित होकर दूसरी सेवा में योगदान करना तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है। श्री कुमार द्वारा सत्यापन प्रपत्र के कंडिका-11(क) में अपूर्ण सूचना दी गयी। जबकि कंडिका 11(ख) एवं कंडिका 11(ग) में सही सूचना अंकित की गयी है। रेलवे सेवा के Deed of Indemnity के आलोक में प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त स्टाइपेंड की राशि 12.5% Interest के साथ लौटाया जाना अपेक्षित था। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य में श्री कुमार द्वारा रेलवे सेवा के दौरान प्राप्त किये गये राशि को रेलवे को वापस किये जाने के संबंध में Indemnity Bond के प्रावधान के आलोक में Arbitration के माध्यम से वसूल किये जाने का परामर्श दिया गया है, जिससे सहमत होते हुए श्री कुमार से उक्त विधि से राशि वसूल किये जाने का परामर्श रेलवे को देने का निर्णय लिया गया है। जिसके लिए अलग से पत्र निर्गत किया जाएगा। साथ ही श्री कुमार के विरूद्ध सत्यापन प्रपत्र में तथ्य छुपाने का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोप के लिए श्री कुमार को "असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दण्ड" अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-02, मुख्यालय-बेतिया को विभागीय अधिसूचना सं0-476 दिनांक 04.03.2022 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया गया।
"असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्वि पर रोक"। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया, जो निम्नवत है :- 1. आंशिक रूप से सिद्ध आरोप जिसके तहत प्रशिक्षु के रूप में कार्यरत कार्यकाल को सत्यापन प्रपत्र में क्रमानुकाल करने की स्थिति में नही दर्शाया जाना, महज तार्किक तथा संयोगवश माना जा सकता है। चुँकि प्रपत्र में स्थान समुचित नहीं था।
2. सरकारी विभाग को 05 वर्षाें की निरंतर सेवा देने का प्रावधान Indemnity bond पर के स्थान पर 08 वर्षाें की सेवा वह भी उच्चत्तर वेतनमान पर दिया जा चुका है।
अतः उपरोक्त तथ्यों के आलोक में कही से भी सरकारी विभाग को दिये गये सेवा तथा सत्यापन प्रपत्र से समर्पित तथ्यों से कार्य के प्रति निष्ठा एवं अखंडता भंग नहीं प्रदर्शित होता है, जिसके क्रम में पुनः पुनर्विलोकन करते हुए आरोपों से मुक्त करने की कृपा की जाय।
श्री कुमार द्वारा दिये गये उपर्युक्त बचाव-बयान की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई, जो निम्नवत है :- समीक्षा-01 :- श्री संदीप कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि रेलवे सेवा में प्रशिक्षु के रूप में कार्यरत, कार्यकाल को सत्यापन प्रपत्र में क्रमानुकाल भरने की स्थिति में नहीं दर्शाया जाना महज तार्किक एवं संयोगवश माना जा सकता है। क्याेंकि प्रपत्र में स्थान समुचित नहीं था। उक्त कथन से स्पष्ट होता है कि श्री कुमार द्वारा सरकारी सेवक से अपेक्षित आचरण का उल्लंघन करते हुए बिना गंभीरता से विचार किये ही जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना में सहायक अभियंता के पद पर नियुक्ति हेतु सत्यापन प्रपत्र भरा गया, जिसमें श्री कुमार द्वारा रेलवे की सेवा संबंधित तथ्य को छिपाया गया एवं विभागीय आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। श्री कुमार द्वारा जल संसाधन विभाग के सत्यापन प्रपत्र में अन्य सेवा का तथ्य छिपाया जाना किसी भी प्रकार से तार्किक एवं संयोगवश प्रतीत नहीं होता है। समीक्षा-02 :- श्री कुमार द्वारा पुर्नविलोकन अभ्यावेदन की कंडिका-02 में उल्लेख किया गया है कि सरकारी विभाग को 05 वर्षाें की निरंतर सेवा देने के प्रावधान का Indemnity Bond पर के स्थान पर 08 वर्षाें की सेवा वह भी उच्चत्तर वेतनमान पर दिया जा चुका है। यहाँ पर यह तथ्य अवलोकनीय है कि श्री कुमार को रेलवे सेवा के Deed of Indemnity के आलोक में प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त स्टाईपेड की राशि 12.5% के साथ रेलवे को लौटाया जाना अपेक्षित था। संचालन22 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य में श्री कुमार द्वारा रेलवे सेवा के दौरान प्राप्त किये गये राशि को रेलवे को वापस किये जाने के Indemnity Bond के प्रावधान के आलोक में Arbitration के माध्यम से वसूल किये जाने का परामर्श दिया गया, जिससे सहमत होते हुए श्री कुमार से उक्त विधि से राशि वसूल किये जाने का परामर्श रेलवे को दिये जाने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया। चुँकि श्री कुमार द्वारा Indemnity Bond रेलवे की सेवा से सबंधित था ना कि अन्य सेवा/विभाग के उच्चत्तर वेतनमान पर की गयी सेवा से। इस प्रकार श्री कुमार के द्वारा प्रमाणित आरोपों के संदर्भ अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई ठोस कारण/ठोस साक्ष्य अंकित नहीं करने के फलस्वरूप पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। वर्णित तथ्यों के संदर्भ में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है, जिसपर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल सं0-2, बेतिया के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-476 दिनांक 04.03.2022 द्वारा संसूचित दण्ड "असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक" को यथावत रखा जाता है।
उक्त निर्णय श्री संदीप कुमार को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-12/2015-2305--श्री कुबेर प्रसाद (आई0डी0-जे 5450) तत्का0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृति के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमंडल, आरा अन्तर्गत पूर्व से कराये जा रहे कार्यों में अनियमितता कर सरकारी राशि का लूट-खसोट करने एवं प्रमंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार से संबंधित श्री भगवान सिंह, अध्यक्ष जैतपुर वितरणी कृषक समिति, अगिआँव (भोजपुर) के परिवाद की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2239 दिनांक 18.12.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - आरोप सं0-1- सोन नहर प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में शिविर एवं नहर सम्पोषण मद में कम राशि (प्रायः रू0 1.00लाख से कम) का निविदा स्थानीय स्तर पर अवर प्रमंडल पदाधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रायः दो निविदाकारों द्वारा आपसी तालमेल से प्रत्येक निविदा में निविदा किया जाना परिलक्षित होता है। सभी निविदाओं में अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा पर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यावंटन किया गया। निविदा का प्रचार प्रसार ईमानदारी पूर्वक करते हुए एवं छोटे-छोटे कार्यों को समेकित कर प्रमंडल स्तर से निविदा आमंत्रित किए जाने पर निविदाकारों द्वारा अंकित दर ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता एवं सरकारी राशि की बचत संभावित होती। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया परिलक्षित होता है, जिससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि की क्षति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार निविदाकार से साँठ-गाँठ कर छोटे-छोटे निविदा आमंत्रित कर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि के संभावित वित्तीय क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उक्त आरोप में आरोपी सहायक अभियंताओं द्वारा लोक निर्माण विभाग की कंडिका-296 में सहायक अभियंता को एक लाख रूपए की दिनांक 30.03.1982 के भाग 2(क) में प्रति सप्ताह निविदा/कोटेशन प्राप्त करने का प्रावधान संबंधित अधीक्षण अभियंता, आरा के पत्रांक-188 दिनांक 06.02.2013 में तीन दिनों के अंतराल पर निविदा सम्पन्न कराने का निदेश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा छोटे-छोटे कार्यों को समेकित करने संबंधी कार्यपालक अभियंता से किसी प्रकार का दिशा निदेश प्राप्त नहीं होने एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं होने के मंतव्य के आलोक में सहायक अभियंताओं के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। आरोप सं0-2-सोन नहर प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2014-2015 में शिविर एवं नहर संपोषण मद में कम राशि (प्रायः रू0 1.00 लाख से कम) का निविदा स्थानीय स्तर पर अवर प्रमंडल पदाधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रायः दो निविदाकारों द्वारा आपसी तालमेल से प्रत्येक निविदा में निविदा दिया जाना परिलक्षित होता है। सभी निविदाओं में अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा पर अधिकतम मान्य दर/अनुसूचित दर पर कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यावंटन किया गया। निविदा का प्रचार-प्रसार ईमानदारी पूर्वक करते हुए एवं छोटे-छोटे कार्यों को समेकित कर प्रमंडल स्तर से निविदा आमंत्रित किए जाने पर निविदाकारों द्वारा अंकित दर ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता एवं सरकारी राशि की बचत संभावित होती। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया परिलक्षित होता है जिससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने के फलस्वरूप सरकारी राशि के संभावित क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।23 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 संचालन पदाधिकारी द्वारा सहायक अभियंताओं के विरूद्ध लगे आरोप को अप्रमाणित बताया गया है, जिसकी विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0-2 अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। उपरोक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप अप्रमाणित होने के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपमुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री कुबेर प्रसाद (आई0डी0-जे 5450) तत्का0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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23 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-12/2015-2306--श्री कुणाल किशोर (आई0डी0-5502) तत्का0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण रूपांकण प्रमंडल-3, पटना के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमंडल, आरा अन्तर्गत पूर्व से कराये जा रहे कार्यों में अनियमितता कर सरकारी राशि का लूट-खसोट करने एवं प्रमंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार से संबंधित श्री भगवान सिंह, अध्यक्ष जैतपुर वितरणी कृषक समिति, अगिआँव (भोजपुर) के परिवाद की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-164 दिनांक 18.01.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - आरोप सं0-1- सोन नहर प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में शिविर एवं नहर सम्पोषण मद में कम राशि (प्रायः रू0 1.00लाख से कम) का निविदा स्थानीय स्तर पर अवर प्रमंडल पदाधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रायः दो निविदाकारों द्वारा आपसी तालमेल से प्रत्येक निविदा में निविदा किया जाना परिलक्षित होता है। सभी निविदाओं में अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा पर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यावंटन किया गया। निविदा का प्रचार प्रसार ईमानदारी पूर्वक करते हुए एवं छोटे-छोटे कार्यों को समेकित कर प्रमंडल स्तर से निविदा आमंत्रित किए जाने पर निविदाकारों द्वारा अंकित दर ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता एवं सरकारी राशि की बचत संभावित होती। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया परिलक्षित होता है, जिससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि की क्षति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार निविदाकार से साँठ-गाँठ कर छोटे-छोटे निविदा आमंत्रित कर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि के संभावित वित्तीय क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उक्त आरोप में आरोपी सहायक अभियंताओं द्वारा लोक निर्माण विभाग की कंडिका-296 में सहायक अभियंता को एक लाख रूपए की दिनांक 30.03.1982 के भाग 2(क) में प्रति सप्ताह निविदा/कोटेशन प्राप्त करने का प्रावधान संबंधित अधीक्षण अभियंता, आरा के पत्रांक-188 दिनांक 06.02.2013 में तीन दिनों के अंतराल पर निविदा सम्पन्न कराने का निदेश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा छोटे-छोटे कार्यों को समेकित करने संबंधी कार्यपालक अभियंता से किसी प्रकार का दिशा निदेश प्राप्त नहीं होने एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं होने के मंतव्य के आलोक में सहायक अभियंताओं के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। उपरोक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप अप्रमाणित होने के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपमुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री कुणाल किशोर (आई0डी0-5502) तत्का0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण रूपांकण प्रमंडल-3, पटना को आरोपमुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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23 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-12/2015-2307--श्री अशोक कुमार वर्मा (आई0डी0-3453) तत्का0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृति के पदस्थापन अवधि में सोन नहर प्रमंडल, आरा अन्तर्गत पूर्व से कराये जा रहे कार्यों में अनियमितता कर सरकारी राशि का लूट-खसोट करने एवं प्रमंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार से संबंधित श्री भगवान सिंह, अध्यक्ष जैतपुर वितरणी कृषक समिति, अगिआँव (भोजपुर) के परिवाद की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-967 दिनांक 20.04.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -24 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 आरोप- सोन नहर प्रमंडल, आरा के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में शिविर एवं नहर सम्पोषण मद में कम राशि (प्रायः रू0 1.00लाख से कम) का निविदा स्थानीय स्तर पर अवर प्रमंडल पदाधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रायः दो निविदाकारों द्वारा आपसी तालमेल से प्रत्येक निविदा में निविदा किया जाना परिलक्षित होता है। सभी निविदाओं में अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा पर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यावंटन किया गया। निविदा का प्रचार प्रसार ईमानदारी पूर्वक करते हुए एवं छोटे-छोटे कार्यों को समेकित कर प्रमंडल स्तर से निविदा आमंत्रित किए जाने पर निविदाकारों द्वारा अंकित दर ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता एवं सरकारी राशि की बचत संभावित होती। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया परिलक्षित होता है, जिससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि की क्षति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार निविदाकार से साँठ-गाँठ कर छोटे-छोटे निविदा आमंत्रित कर अधिकतम मान्य दर (अनुसूचित दर) पर कार्यावंटन किए जाने से सरकारी राशि के संभावित वित्तीय क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उक्त आरोप में आरोपी सहायक अभियंताओं द्वारा लोक निर्माण विभाग की कंडिका-296 में सहायक अभियंता को एक लाख रूपए की दिनांक 30.03.1982 के भाग 2(क) में प्रति सप्ताह निविदा/कोटेशन प्राप्त करने का प्रावधान संबंधित अधीक्षण अभियंता, आरा के पत्रांक-188 दिनांक 06.02.2013 में तीन दिनों के अंतराल पर निविदा सम्पन्न कराने का निदेश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा छोटे-छोटे कार्यों को समेकित करने संबंधी कार्यपालक अभियंता से किसी प्रकार का दिशा निदेश प्राप्त नहीं होने एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं होने के मंतव्य के आलोक में सहायक अभियंताओं के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। उपरोक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप अप्रमाणित होने के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपमुक्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री अशोक कुमार वर्मा (आई0डी0-3453) तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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23 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(मोति0)08-04/2022-2312--मो० अजहरूल हक (आई0डी0-5127), सहायक अभियंता के बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, बड़हिया में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक-20.12.2017 से दिनांक-11.01.2018 तक (कुल-23 दिन) उमराह (तीर्थ यात्रा) के लिये सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये बिना विदेश यात्रा (सउदी अरब) किये जाने के आरोप के लिये उनके विरूद्ध आरोप-पत्र गठित करते हुये विभागीय पत्रांक-986, दिनांक-28.04.2022 द्वारा आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में मो० अजहरूल हक, सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उल्लेखित किया गया कि उनके द्वारा दिनांक-23.08.2017 को पासपोर्ट हेतु ऑनलाईन आवेदन दिया गया एवं दिनांक-14.09.2017 को पासपोर्ट कार्यालय द्वारा कागजात सत्यापन के क्रम में Annexure 'H' (Intimation letter) जमा करने का निर्देश दिया गया। अवर सचिव (प्रबंधन) से उनके पत्रांक-182, दिनांक-25.09.2017 द्वारा Annexure -H निर्गत करने का अनुरोध किया गया। बार-बार मौखिक रूप से अनुरोध के बावजूद भी Annexure-H निर्गत नही हुआ। Annexure-H निर्गत नही होने के कारण पुलिस सत्यापन के बाद उनका पासपोर्ट दिनांक-14.12.2017 को निर्गत किया गया। पासपोर्ट निर्गत करने में काफी विलंब हुआ। इसी बीच उनके द्वारा उमराह जाने हेतु खर्च Travel Agency को जमा कर दिया गया था। वह किसी भी हाल में पैसे वापस करने के लिये तैयार नहीं हुआ। उनके पत्रांक-228, दिनांक-14.12.2017 द्वारा कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बख्तियारपुर को सूचित करते हुये यथाशीघ्र विदेश यात्रा की अनुमति हेतु अनुरोध किया गया। उक्त पत्र की प्रति अवर सचिव (प्रबंधन) एवं संयुक्त सचिव, प्रभारी सहायक अभियंता (स्थापना) कोषांग को भी समर्पित किया गया। उनके पत्रांक-233, दिनांक-18.12.2017 के क्रम में कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बख्तियारपुर के पत्रांक-1442, दिनांक-19.12.2017 के आलोक में श्री कन्हैया प्रसाद, सहायक अभियंता/प्राक्कलन पदाधिकारी को दिनांक-19.12.2017 के अपराह्न में अवर प्रमंडल का प्रभार सौपा गया, तथा दिनांक-12.01.2018 को पूर्वाह्न में वापस प्रभार ग्रहण किया गया एवं इसकी सूचना कार्यपालक अभियंता को दी गयी। उक्त के पश्चात पत्रांक-251, दिनांक-14.12.2018 द्वारा उचित माध्यम से 23 दिनो के उपार्जित अवकाश स्वीकृति हेतु विधिवत आवेदन समर्पित किया गया, जो मुख्य अभियंता पटना के पत्रांक-400, दिनांक-08.02.2019 द्वारा विभाग में समर्पित है। पुनः पत्रांक-20, दिनांक-29.01.2021 द्वारा विदेश यात्रा की घटनोत्तर स्वीकृति हेतु अनुरोध किया गया। मुख्य अभियंता सिंचाई सृजन जल संसाधन विभाग मोतिहारी के पत्रांक-269, दिनांक-15.02.2022 के द्वारा इस विदेश यात्रा की घटनोत्तर स्वीकृति की अनुशंसा के साथ पत्र विभाग को भेजा गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में उनके द्वारा आरोप मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया।25 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 समीक्षा :- मो० अजहरूल हक, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण में अंकित सूचनाओं तथा संलग्न अभिलेखों से यह परिलक्षित है कि मो० अजहरूल हक के द्वारा उमराह (तीर्थ यात्रा) के लिये दिनांक-20.12.2017 से 11.01.2018 के अवधि में सउदी अरब की विदेश यात्रा सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये बिना की गयी है। कार्यपालिका नियमावली के नियम-21 के अधीन चतुर्थ अनुसूची में विदेश यात्रा (कर्मी के निजी खर्च पर) के संबंध में निर्णय लेने हेतु सक्षम प्राधिकार विभागीय मंत्री हैं। घटनोत्तर स्वीकृति के प्रत्याशा में मो० हक द्वारा उमराह (तीर्थ यात्रा) हेतु विदेश यात्रा किया जाना उनकी स्वेच्छाचारिता का परिचायक है, तथा उनका यह कृत्य प्रावधानों के प्रतिकुल है। इस प्रकार मो० अजहरूल हक द्वारा समर्पित किया गया स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।
मामले के सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये बिना दिनांक-20.12.2017 से 11.01.2018 के अवधि में उमराह (तीर्थ यात्रा) हेतु सउदी अरब की विदेश यात्रा किये जाने संबंधी प्रमाणित पाये गये आरोप के लिये मो० अजहरूल हक (आई०डी०-5127), सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत निम्न लघु दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतनवृद्धियों पर रोक"।
अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में मो० अजहरूल हक (आई०डी०-5127), सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया के विरूद्ध निम्न लघु दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है - "संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतनवृद्धियों पर रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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27 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-07/2018-2331--श्री प्रभांशु शेखर (आई0डी0-3926), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा अन्तर्गत कराये गये सिंचाई योजना कार्य की गुणवत्ता एवं टेन्डर के निष्पादन में बरती गई अनियमितता से संबंधित प्राप्त परिवाद की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल से कराये जाने के पश्चात प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होने पर आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-989 दिनांक 29.07.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री शेखर से प्राप्त बचाव बयान के आलोक में वस्तुस्थिति निम्नवत है :- आरोप :-सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा परिक्षेत्राधीन एकरारनामा सं॰ SBD03/2017-18 के तहत अपर किउल घाटी योजना अन्तर्गत निर्मित सेवा पथ (Black Top) सड़क निर्माण कार्य में प्रत्युक्त GSB (Grade-1) को स्वीकृत प्रमाण विपत्र के अनुसार वांछित विशिष्टि एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MORT & H), भारत सरकार के द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप पाया गया परन्तु WBM (Grade-II) एवं WBM (Grade-III) कार्य में न तो स्वीकृत परिमाण विपत्र में प्रावधानित विशिष्टि के आकार का कोई भी एग्रीगेट अवयव पाया गया और न ही सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORT & H) भारत सरकार के गाईड लाईन में निर्धारित मानक के अनुरूप पाया गया अर्थात् जाँचफल में पाये गये सभी एग्रीगेट का आकार (साईज) स्वीकृत परिमाण विपत्र में प्रावधानित आकार/सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORT & H), भारत सरकार के द्वारा निर्धारित विशिष्टि के न्यून आकार (साईज) का पाया गया। जबकि Premix Carpeting में Bitumen की मात्रा का प्रतिशत प्रावधानित/अपेक्षित प्रतिशत मात्रा में Richer पाया गया। उक्त सड़क निर्माण कार्य के Base Component/Sub base Component में प्रत्युक्त WBM (Grade-II) एवं WBM (Grade-III) कार्य को गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया, जिससे निम्न गुणवत्ता एवं न्यून विशिष्टि का कार्य कराने के लिए दोषी प्रतीत होता है। बचाव बयान :- मैं सिंचाई अवर प्रमंडल सं॰-03 में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत हूँ। मेरे द्वारा सिर्फ मंजोष वितरणी से संबंधित कार्य कराया गया है। उड़नदस्ता अंचल के द्वारा मंजोष वितरणी से संबंधित कार्य पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई है। प्रमंडल द्वारा अवर प्रमंडल सं॰-03 एवं अवर प्रमंंडल सं॰-04 के लिए कार्यो की मापी की हेतु अलग-अलग मापीपुस्त उपलब्ध कराया गया था। मापपुस्त सं॰ 1931 अवर प्रमंडल सं॰ 03 को निर्गत किया गया था। उड़नदस्ता अंचल के द्वारा अपर किउल मुख्य नहर के चेन सं॰ 460 से चेन सं॰ 637 के बीच चेन सं॰ 574, 580 तथा 584 पर जाँच की गई। उक्त कार्य मापपुस्त सं॰ 1925 में अंकित है तथा यह मापपुस्त श्री रघुवंश प्रसाद, सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल सं॰-04, सिकन्दरा के नाम से निर्गत है। उपर्युक्त कार्य सिंचाई अवर प्रमंडल सं॰ 04 से संबंधित है जिसके सहायक अभियंता श्री रघुवंश प्रसाद है। उक्त कार्य न तो मेरे द्वारा कराया गया और न ही मापी पर कोई हस्ताक्षर है। उपर्युक्त कार्य में मैं संलग्न नहीं हूँ। समीक्षा :-आरोपी पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि वे सिंचाई अवर प्रमंडल सं॰-03 में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। इस अवर प्रमंडल में सिर्फ मंजोष वितरणी का कार्य इनके द्वारा कराया गया था। शेष सारा कार्य अवर प्रमंडल सं॰ 04 से संबंधित था एवं इस अवर प्रमंडल सं॰ 04 के सहायक अभियंता श्री रघुवंश प्रसाद थे। उड़नदस्ता अंचल के द्वारा अपर किउल मुख्य नहर के चेन सं॰ 460 से चेन सं॰ 637 के बीच चेन सं॰ 574, 580 तथा 584 पर जाँच की गई। उक्त कार्य माप पुस्त26 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 सं॰ 1925 में अंकित है तथा यह माप पुस्त श्री रघुवंश प्रसाद, सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल सं॰ 4, सिकंदरा के नाम से निर्गत है। उक्त कार्य न तो इनके द्वारा कराया गया है और न ही मापी पर कोई हस्ताक्षर है। उक्त तथ्य के आधार पर इन पर लगाया गया आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्ष ः-उपर्युक्त समीक्षा से स्पष्ट है कि श्री प्रभांशु शेखर, तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकंदरा प्रमंडल, सिकंदरा पर लगाया गया आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत श्री प्रभांशु शेखर, तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा के विरूद्ध आरोप अप्रमाणित पाये जाने के कारण उन्हें आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रभांशु शेखर, तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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27 सितम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(वीर0)07-04/2021-2332--श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045) तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली के पद पर पदस्थापित थे तब मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, वीरपुर परिक्षेत्राधीन पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली के अन्तर्गत दिनांक 22.07.2021 के रात्रि में डगमारा मार्जिनल बाँध के कि0मी0 1.50 के समीप (S-1 एवं S-2 के बीच) हुए टूटान के मामले की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत मामले में संलिप्तता पाते हुए श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता को बाँध टूटान संबंधी आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-680 दिनांक 28.07.2021 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही श्री कुमार के विरूद्ध अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना से आरोप पत्र की माँग की गयी। अभियंता प्रमुख से प्राप्त आरोप पत्र की समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1700 दिनांक 30.12.2021 द्वारा श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जवाब पर अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना से मंतव्य की माँग की गयी। अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाया गया है :-
(1) कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता सीधे तौर पर स्थल के प्रभारी की भूमिका में रहते है तथा स्थल के सभी बिन्दुओं का सुक्ष्मता से निगरानी करते हुए, कार्यपालक अभियंता के निदेशानुसार स्थल को सुरक्षित रखे जाने हेतु कार्रवाई किया जाना इनसे अपेक्षित है।
(2) कार्यपालक अभियंता का क्षेत्राधिकार वृहद होने के कारण, स्थल प्रभारी कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता के स्तर से सूचना प्राप्ति के उपरांत स्थल को सुरक्षित रखे जाने हेतु कार्यपालक अभियंता के स्तर से सीधे कार्रवाई अपेक्षित है।
उक्त बिन्दु के दृष्टिगत रखते हुए श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता को निलंबन मुक्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।
अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली को निलंबन मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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7 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2018/2369--श्री महेन्द्र सिंह (आई०डी०-4691), तत्कालीन सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके नगर निगम, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन अवधि के दौरान NIT No- 03/2017-18 के अंतर्गत 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु ई-निविदा मे बरती गयी अनियमितता के लिए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-428, दिनांक-02.03.2020 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
1. नगर निगम, मुजफ्फरपुर द्वारा NIT No-03/2017-18 के अंतर्गत 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु ई0-निविदा प्रकाशित की गई थी। उक्त प्रकाशित निविदा में तीन निविदादाताओं द्वारा निविदा में भाग लिया गया था। तीनों निविदादाता तकनीकी बीड में योग्य पाये गये थे। तदोपरांत इनका वित्तीय बीड खोला गया। इसमें न्यूनतम दर मे0 तिरहुत ऑटोमोबाईल्स का 7,65,999/- प्रति टिपर (With AMC) था, परन्तु क्रय समिति की दिनांक 17.10.2017 की बैठक में न्यूनतम दर वाले निविदादाता मे0 तिरहुत ऑटोमोबाईल्स से दर वार्ता नहीं कर एल0 2 फर्म मे0 मौर्या मोटर्स, पटना से दर वार्ता कर 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश दिया गया।
2. उल्लेखनीय है कि पी0डब्लू0डी0 कोड की कंडिका 164 में यह प्रावधान है कि न्यूनतम दर देने वाले निविदाकार से ही दर वार्ता किया जा सकता है। परन्तु क्रय समिति द्वारा पी0डब्लू0डी0 कोड का अनुपालन नहीं कर एल0-2 फर्म मे0 मौर्या मोटर्स, पटना से दर वार्ता कर 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश दिये जाने का निर्णय27 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 लिया गया। समिति का यह निर्णय नियम विरूद्ध है तथा निविदा की निष्पक्षता को समिति द्वारा प्रभावित किया गया। समिति का यह कृत्य जान-बूझकर सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबांट को प्रमाणित करता है।
3. श्री महेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत उक्त समिति के सदस्य थे तथा जिम्मेवार एवं तकनीकी पदाधिकारी के हैसियत से इस प्रकार के अनियमित निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था, परन्तु इनके द्वारा समिति के सदस्य के रूप में नियम विरूद्ध निर्णय पर सहमति दी गई। श्री सिंह का यह कृत सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने एवं जानबूझकर वित्तीय अनियमितता होने देने तथा सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबांट को प्रमाणित करता है।
4. उक्त से स्पष्ट है कि श्री महेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत उपर्युक्त कंडिका में वर्णित आरोपों के लिए जिम्मेवार है एवं उनका यह कृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(i) का उल्लंघन है।
संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिंदु पर श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-830 दिनांक-12.08. 2021 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की माँग की गई। आरोप सं0-1-संचिका में रक्षित अभिलेख से स्पष्ट है कि दिनांक 17.10.2017 को ऑटो टिपर के क्रय से संबंधित तकनीकी बीड पर निर्णय लेते हुए तीनों निविदादाता के तकनीकी बीड को मान्य करने का निर्णय लिया गया। जिस पर आपका हस्ताक्षर भी अंकित है अर्थात यह माना गया कि इसमें आपकी सहमति रही है। वित्तीय बीड पर निर्णय हेतु दिनांक 17.10. 2017 को ही आहूत बैठक की कार्रवाई पर आपका हस्ताक्षर होने से समिति के निर्णय में आपकी सहभागिता रही है। उक्त तकनीकी बीड एवं वित्तीय बीड का निष्पादन एक ही दिन दिनांक 17.10.2017 को किया गया है जिसमें तकनीकी बीड में तीनों निविदादाता को सफल घोषित किया गया है जबकि वित्तीय बीड में निर्णय लिया गया कि निगम द्वारा दिये गये specification की समीक्षा के क्रम में L2 में तिरहुत ऑटोमोबाईल, मुजफ्फरपुर नगर निगम द्वारा दिये गये Technical specification के अनुसार आपूर्ति हेतु आर्हता नहीं रखते हैं जबकि L2 में मौर्या मोटर्स, पटना टिपर आपूर्ति हेतु आर्हता रखते हैं। इससे स्पष्ट है कि समिति द्वारा विरोधाभाषी निर्णय लेते हुए L2 से दर वार्ता के उपरांत टिपर आपूर्ति का आदेश दिया गया जो PWD कोड के कंडिका-164 के विपरीत है। उक्त से स्पष्ट होता है कि समिति के उपरोक्त गलत निर्णय में आपकी सहमति रही है क्योंकि आपके द्वारा दोनों बैठकों में भाग लिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए गलत ढंग से निविदा निष्पादन होने का आरोप प्रमाणित होता है। आरोप-2- गलत तरीके से निविदा निस्तार कर ऑटो टिपर क्रय किया गया तथा आपूरित ऑटो टिपर के मूल्य का भुगतान मेसर्स मौर्या मोटर्स, पटना को किया गया। निविदा निष्पादन की गलत प्रक्रिया अपनाने के फलस्वरूप तत्कालिक रूप से अवश्य ही सरकारी राशि का दुरूपयोग हुआ है क्योंकि प्रक्रिया की इस त्रुटि के कारण अनावश्यक समय बर्बाद हुआ और संभव है कि इस विलंब के कारण मूल्य वृद्धि आदि कारणों से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। लेकिन, चूँकि भुगतान की गई राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर के कोष में जमा कराया जा चुका था इसलिए सरकारी राशि के बंदरबांट का आरोप परिलक्षित नहीं होता है परन्तु तत्कालिक रूप से सरकारी राशि के दुरूपयोग के कारण सरकारी राशि के अपव्यय संबंधी आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।
उक्त के आलोक में श्री महेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता, नगर विकास प्रमंडल, जहानाबाद द्वारा अपने पत्रांक-05 दिनांक 21.09.2021 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) का जवाब विभाग में समर्पित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-
श्री सिंह द्वारा पूर्व से समर्पित अपने बचाव के आलोक में कहा गया है कि नगर निगम, मुजफ्फरपुर द्वारा NIT NO- 03-2017-18 के अधीन 50 अदद ऑटो टिपर के क्रय हेतु प्रकाशित निविदा में 3 निविदादाताओं द्वारा भाग लिया गया था। सभी तीनों निविदादाता तकनीकी बीड मे योग्य पाये गये। तदुपरांत उनके वित्तीय बीड को खोलने पर मे० तिरहुत ऑटो मोबाईल्स द्वारा प्रति टिपर AMC सहित 7,65,999/- रुपये उद्वृत दर न्यूनतम था। तदुपरांत दिनांक 20.10.2017 को मे० मौर्या मोटर प्रा० लि०, पटना द्वारा एक आवेदन पत्र नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर को संबोधित एवं समर्पित कर प्रति टिपर 7,65,000/- रुपये (AMC सहित) में आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की गयी जिस पर नगर आयुक्त महोदय द्वारा स्वी—त लिखकर अपना हस्ताक्षर कर दिया गया तथा नगर आयुक्त महोदय के हस्ताक्षर से मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके ही पत्रांक 683 दिनांक 20.10.2017 द्वारा 7,65,000/- प्रति टिपर की आपूर्ति हेतु एकरारनामा निष्पादित करने का आदेश दिया गया। इनके द्वारा स्वीकार किया गया है कि टिपर के क्रय के मद में निविदादाताओं से प्राप्त वित्तीय बीड को खोलने के क्रम में निविदा समिति के अन्य सदस्यों सहित इनका भी लघु हस्ताक्षर है, परन्तु प्राप्त वितीय बीड के आधार पर न तो कोई तुलनात्मक विवरणी और न तो दर वार्ता या L2 के साथ वार्ता कर दर के अनुमोदन में नगर आयुक्त द्वारा लिये गये निर्णय में इनकी कोई लिखित अथवा मौखिक सहभागिता रही है। प्रश्नगत निविदाओं के निष्पादन हेतु इसके आरंभ से लेकर अंत तक नगर आयुक्त महोदय द्वारा ऐसी कोई भी समिति गठित नहीं की गयी थी, जिसमें इन्हें किसी भी रूप में शामिल किया गया हो। दिनांक 17.10.2017 को 11ः30 बजे जब तकनीकी बीड पर निर्णय लेने हेतु बैठक आहूत की गयी तो इसमें नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही निर्णय लेकर अन्य पदाधिकारियों सहित इन पर दबाव डालकर हस्ताक्षर करवा लिया गया।28 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि नगर निगम, मुजफ्फरपुर के अधीन टिपर के क्रय हेतु शुरु से लेकर अंत तक सिर्फ नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही सभी प्रक्रियाओं पर निर्णय लिया गया है, जिसमें मेरी कोई भूमिका नही रही है। इनके द्वारा कहा गया है कि निगम कार्यालय के पत्रांक 634 दिनांक 21.10.2018 के आलोक में 24 अदद ऑटो टिपर की आपूर्ति का विपत्र भुगतान की कार्रवाई की गयी है। पुनः मे० मार्या मोटर प्रा0 लि0 को उनके द्वारा आपूरित 24 अदद ऑटो टिपर के विरुद्व भुगतान प्राप्त की गयी राशि 1,52,70,848 लाख रुपये को लटाते हुए उन्हे सभी 50 अदद ऑटो टिपर वापस लेने का निर्देश दिया गया तथा आपूर्तिकर्ता के पत्रांक शुन्य दिनांक 17.03.2020 द्वारा बैंक ड्राफ्टों के माध्यम से यह राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर को वापस भी कर दी गयी। यद्यपि इस पूरे प्रकरण में मेरी कोई भूमिका नहीं रही, फिर भी आपूर्तिकर्ता को भुगतान की गयी राशि नगर निगम के कोष में वापस लौटा दिये जाने की स्थिति में सरकारी राशि का अपव्यय अथवा बंदरबांट करने का आरोप असत्य है।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में इनके द्वारा अपने उपर गठित आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री महेन्द्र सिंह, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
(1) क्रय समिति की दिनांक 17.10.2017 की बैठक में न्यूनतम दर देने वाले निविदादाता से दर वार्त्ता नहीं कर दूसरे न्यूनतम दर दाता (L2) मे॰ मौर्या मोटर्स से दर वार्ता कर रूपये 7,65,000/- प्रति टिपर (With AMC) के दर पर आपूर्ति आदेश निर्गत किये जाने के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है, कि मे० मौर्या मोटर प्रा० लि०, पटना द्वारा एक आवेदन पत्र नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर को संबोधित एवं समर्पित कर प्रति टिपर 7,65,000/- रुपये (AMC सहित) में आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की गयी जिस पर नगर आयुक्त महोदय द्वारा स्वी—त लिखकर अपना हस्ताक्षर कर दिया गया तथा नगर आयुक्त महोदय के हस्ताक्षर से मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके ही पत्रांक 683 दिनांक 20.10.2017 द्वारा 7,65,000/- प्रति टिपर की आपूर्ति हेतु एकरारनामा निष्पादित करने का आदेश दिया गया। इनके द्वारा स्वीकार किया गया है कि टिपर के क्रय की कार्रवाई में निविदादाताओं से प्राप्त वितीय बीड को खोलने के क्रम में निविदा समिति के अन्य सदस्यों सहित इनका भी लघु हस्ताक्षर है। परन्तु प्राप्त वितीय बीड के आधार पर न तो कोई तुलनात्मक विवरणी और न तो दर वार्ता या L.2 के साथ वार्ता कर दर के अनुमोदन में नगर आयुक्त द्वारा लिये गये निर्णय में इनकी कोई लिखित अथवा मौखिक सहभागिता रही है, जिसे स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।
श्री सिंह द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत निविदाओं के निष्पादन हेतु दिनांक 17.10.2017 को 11ः30 बजे जब तकनीकी बीड पर निर्णय लेने हेतु बैठक आहूत की गयी तो इसमें नगर आयुक्त महोदय के स्तर से ही निर्णय लेकर अन्य पदाधिकारियों सहित इन पर दबाव डालकर हस्ताक्षर करवा लिया गया। अतः श्री सिंह का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है एवं आरोप प्रमाणित होता है।
(2) गलत तरीके से निविदा के निष्पादन के फलस्वरुप सरकारी राशि के दुरुपयोग के कारण सरकारी राशि के अपव्यय संबंधी आरोप के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि निगम कार्यालय के पत्रांक 634 दिनांक 21.10.2018 के आलोक में 24 अदद ऑटो टिपर की आपूर्ति का विपत्र भुगतान की कार्रवाई की गयी है। पुनः मे० मौर्या मोटर प्रा0 लि0, पटना को उनके द्वारा आपूरित 24 अदद ऑटो टिपर के विरुद्व भुगतान की गयी राशि 1,52,70,848/- रुपये को लौटाते हुए, उन्हे सभी 50 अदद ऑटो टिपर वापस लेने का निर्देश दिया गया तथा आपूर्तिकर्ता के पत्रांक शुन्य दिनांक 17.03.2020 द्वारा बैंक ड्राफ्टों के माध्यम से यह राशि नगर निगम, मुजफ्फरपुर को वापस भी कर दी गयी। इस पूरे प्रकरण में आपूर्तिकर्ता को भुगतान की गयी राशि नगर निगम के कोष में वापस लौटा दिये जाने की स्थिति में, सरकारी राशि का अपव्यय अथवा बंदरबांट करने का आरोप असत्य परिलक्षित होता है। परन्तु गलत तरीके से निविदा निष्पादन किये जाने के कारण विभागीय उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकी, जिसके फलस्वरुप तत्कालिक रूप से सरकारी राशि के दुरूपयोग के कारण सरकारी राशि का अपव्यय संबंधी आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री महेन्द्र सिंह, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-
"पेंशन से 5% (पाँच प्रतिशत) की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।
सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेन्द्र सिंह, तत0 सहायक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-713 दिनांक 31.03.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2331 दिनांक 23.09.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है।
अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेन्द्र सिंह (आई0डी0-4691), तत0 सहायक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत, ग्रा0पो0-कनछेदवा, भाया-हरसिद्धि, जिला-पूर्वी चम्पारण, पिन-845442 को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 5% (पाँच प्रतिशत) की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।29 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022
7 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)03-17/2017/2376--श्री सुभाष सिंह, (आई0डी0-जे 7681), सेवानिवृत सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध भोजपुर जिला के अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों मे बरती गई अनियमितता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र गठित किया गया :- आरोप :-बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है, परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है। उसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत नहीं किए जाने क लिए दोषी है। उक्त आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1592, दिनांक-12.09.2017 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह से प्राप्त जवाब के तकनीकी समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-853, दिनांक 29.04.2019 द्वारा गठित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में अभियंता प्रमुख (सिंचाई सृजन)-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-255, दिनांक-26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :- "आरोपी पदाधिकारी पर मुख्य रूप से प्रमंडलाधीन विभिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्रियों की प्राप्ति संधारित करने परन्तु निर्गत सामग्रियों का संधारण नहीं किए जाने का आरोप है। आरोपी पदाधिकारी प्रमंडलीय भंडार के प्रभारी सहायक अभियंता है। उड़नदस्ता जाँच दल को उपलब्ध कराए गए भंडार लेखा मे निर्गत सामग्री संधारित नहीं की गई थी, जिसे त्रुटिपूर्ण माना गया है। उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा लिखित में अभिलेखों की माँग किए जाने पर भंडार लेखा का मात्र Receipt भाग का हस्तलिखित ब्योरा उपलब्ध कराया गया है, जबकि उन्हें विधिवत संधारित किए गए भ्ांडार लेखा पर Receipt एवं Issue दोनाें अंकित रहता है ससमय उपलब्ध कराना चाहिए था। आरोपी पदाधिकारी प्रमंडलीय भंडार के प्रभारी सहायक अभियंता भी है। उड़नदस्ता द्वारा मांगे गए लेखाओं/अभिलेखों को पूर्णरूपेण उपलब्ध कराया जाना इनकी जिम्मेवारी थी, जिसका निर्वहन इनके द्वारा नहीं किया गया। अतः लेखाओं को विधिवत् नहीं किए जाने का इन पर आरोप प्रमाणित होता है" संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-686, दिनांक-19.05.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री सिंह को उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। इसी क्रम में श्री सुभाष सिंह, दिनांक-31.12.2020 को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके फलस्वरूप उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना संख्या-217, दिनांक-18.02.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बीं) में सम्परिवर्तित कर दिया गया।
श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का समर्पित जवाब की तकनीकी समीक्षा विभाग स्तर पर की गई।
समीक्षा :- श्री सिंह पर आरोप है कि भंडार लेखा एवं स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया। श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि भंडार लेखा संधारण में कहीं भी गड़बड़ी नहीं की गई है। प्रत्येक माह में आगत एवं निर्गत के बाद Closing Balance किया गया है। साक्ष्य के रूप में भंडार लेखा का माह जुलाई 2016 से दिसम्बर 2017 तक की छायाप्रति संलग्न किया गया है। परन्तु स्थल लेखा के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि भंडार लेखा का विधिवत संधारण श्री सिंह द्वारा नहीं किया गया है, जिससे कि इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित होता है।
अतएव श्री सुभाष सिंह, (आई0डी0-जे 7681), सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप संबंधी दिए गए मंतव्य एवं द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की तकनीकी समीक्षा के आलोक में गठित आरोप को प्रमाणित मानते हुए निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :- "20% पेंशन पर दो वर्षों के लिए कटौती" उक्त दंड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार लोक सेवा आयोग का पत्रांक-2327, दिनांक-23.09.2022 द्वारा उक्त अनुमोदित दंड पर सहमति व्यक्त की गई है।
अतः श्री सुभाष सिंह, (आई0डी0-जे 7681), सेवानिवृत सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध निम्न अनुमोदित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :- "20% पेंशन पर दो वर्षों के लिए कटौती"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।30 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 7 अक्तूबर 2022 सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-10/2015-2377--श्री शफी अहमद (ID-3257), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव के विरूद्ध गंगा पम्प नहर परियोजना अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 का निर्माण एकरारनामा सं0-01SBD के तहत कराये जाने के दौरान पम्प हाउस में जमे गाद का निस्तारण नहीं होने एवं पम्प हाउस का निर्माण विशिष्टि एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं कराये जाने संबंधी आरोपाें के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए श्री अहमद से बचाव बयान प्राप्त किया गया। प्राप्त बचाव बयान के सम्यक समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सं0-1180 दिनांक 19.07.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व श्री शफी अहमद, (ID-3257) के दिनांक 31.01.2021 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-59 सहपठित ज्ञापांक-863 दिनांक 18.08.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री अहमद से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन/द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं॰-1 :-गंगा पम्प नहर परियोजना (01SBD/09-10) के अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 पम्प हाउस के Expansion Joints तथा दीवारों से रिसाव के कारण पम्प हाउस में जमा गाद का निस्तारण नहीं किये जाने के कारण पम्प अधिष्ठापन कार्य प्रभावित हुआ। उक्त पम्प हाउस स्टेज-1 का निर्माण गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव द्वारा कराया गया है। आपके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन के दौरान दिनांक 17.01.2015 को माननीय विभागीय मंत्री महोदय सचिव एवं अभियंता प्रमुख (मध्य) के स्थल निरीक्षण के दौरान विभागीय रूप से गाद सफाई कराने का निदेश दिया गया। मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 443, दि॰ 05.02.2015 से एक माह के अंदर निर्माणकर्त्ता संवेदक से गाद सफाई एवं रिसाव बंद कराने का निदेश दिया गया। अभियंता प्रमुख (मध्य) के पत्रांक 246, दि॰ 02.02.2015 से गाद सफाई कार्य विभागीय रूप से Mannual या Mechanical Means से कराने का निदेश दिया गया। पुनः दिनांक 23.02.2015 को राज्य स्तरीय बैठक में गाद सफाई कार्य Mannual या Mechanical Means से कराने का अविलम्ब प्रस्ताव देकर कार्य प्रारम्भ कराते हुए 23 मार्च 2015 तक कार्य पूरा कराने का निदेश दिया गया। इस प्रकार उच्चाधिकारी/विभागीय निदेश के बावजूद आपके द्वारा न तो प्रस्ताव दिया गया और न कार्य प्रारम्भ कराया गया। अपितु कार्य में बाधा उत्पन्न करने के ख्याल से तरह-तरह का बहाना बनाते हुए अनावश्यक रूप से पत्राचार किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद ससमय उसका अनुपालन नहीं कर गाद सफाई कार्य नहीं कराने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। आरोप सं॰-2 :-गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव में विगत तीन वर्षो के आपके पदस्थापन अविध में पम्प हाउस स्टेज-1 एवं 2 का अधिकांश कार्य आपके द्वारा कराया गया। जिसमें Expansion Joints एवं दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है जो खराब Workmanship एवं विशिष्ट के अभाव के कारण ही संभव होना परिलक्षित होता है। कार्यपालक अभियंता के अपने पत्रांक 190 दि॰ 26.02.2015 से बिना किसी जाँच के नींव में नक्शा के अनुसार शीट पाईल नहीं होना प्रतिवेदित किया गया है जिससे इस तथ्य को छुपाये रखा जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार विशिष्ट एवं गुणवत्ता के अनुरूप पम्प हाउस का निर्माण नहीं किये जाने तथा नींव में नक्शा के अनुरूप शीट पाइल नहीं होने के तथ्य को छुपाया जाना परिलक्षित होता है जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) का बचाव बयान :- आरोप सं0-1-उक्त आरोप के संबंध में श्री अहमद द्वारा दिये गये बचाव बयान में अंकित बिन्दु इस प्रकार है। मेरा बचाव बयान प्रतिवेदन स्पष्ट है, फिर भी समीक्षा के मुख्य बिन्दु में असहमति प्रतिवेदित किया गया है। उल्लेखनीय है कि कार्य स्थल पर सुखा गाद नहीं था, गिला गाद था। गीला गाद एवं उँचाई अधिक होने के कारण विभागीय रूप से मजदुर से कार्य कराना जोखिम भरा था। फलस्वरूप उक्त कार्य पम्प हाउस के निर्माणकर्त्ता संवेदक मेसर्स रूंगटा इन्टरप्राईजेज, कहलगाँव द्वारा मशीन एवं चेन पुली से कराया गया है। विषम परिस्थिति में मेरे द्वारा किये गये प्रयास से कराये गये कार्य के बचाव ब्यान पर असहमति व्यक्त करते हुए विभागीय रूप से गाद सफाई नहीं कराने का आरोप लगाकर मुझे हतोत्साह किया जा रहा है। अतः मेरे बचाव बयान पर पुनः समीक्षा कर मुझे आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। आरोप सं0-2- उक्त के संबंध में भी मेरा बचाव बयान स्पष्ट है, फिर भी समीक्षा के मुख्य बिन्दु में असहमति जताया गया है। इस संदर्भ में निवेदन पूर्वक उल्लेखनीय है कि मेरे द्वारा पम्प हाउस-1 में आंशिक कार्य कराया गया है, जो मुख्यतः सुपर स्ट्रचर से संबंधित है। जनवरी-2015 में जब Entrance भाग के Expansion joint के गैप का बढ़ना दृष्टिगोचर हुआ तो नींव में कराये गये कार्य पर शंका होने के फलस्वरूप शीट पाईल के कार्य के माप-पुस्त एवं नींव के नक्शा का मिलान किया। शीट पाईल कार्य में कमी होने की जानकारी उच्चाधिकारी को तत्क्षण मेरे द्वारा दी गई। फिर भी विभाग द्वारा तथ्य छुपाने और समीक्षा के मुख्य बिन्दु में बचाव बयान पर असहमति इंगित किया गया है। इस प्रकार मेरे बचाव बयान पर असहमति इंगित कर मुझे हतोत्साह किया जा रहा है। विभागीय समीक्षा :- आरोप सं॰-1 की समीक्षा ः-आरोपी पदाधिकारी, श्री शफी अहमद द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में पूर्व से समर्पित बचाव बयान पर पुनः समीक्षा का अनुरोध किया गया है। उक्त बचाव बयान में श्री अहमद द्वारा उल्लेख किया गया है कि पम्प हाउस का फ्लोर लेवल 19.35 मीटर एवं गंगा का HFL 32.93 मीटर है। गाद सफाई के लिए इनके द्वारा भरपूर प्रयास किया गया। इस संबंध में श्री अहमद ने पत्रांक 428 दि॰ 12.06.2014 एवं पत्रांक 444 दिनांक 18.06.2014 द्वारा संवेदक31 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 को निदेशित किया। श्री अहमद द्वारा गाद सफाई हेतु कोटेशन निकाले जाने के संदर्भ में मुख्य अभियंता के पत्रांक 4021 दि॰ 31.12.2014 को उल्लेखित किया है परन्तु उक्त पत्र में एकमात्र कोटेशनदाता के चतुर्थ श्रेणी के अभिकर्त्ता होने एवं कार्य की लागत 49.994 लाख रहने के फलस्वरूप एकल कोटेशन को रद्द करने एवं इस कार्य हेतु पुनः कोटेशन आमंत्रित करने का निर्णय संसूचित है। परन्तु पुनः कोटेशन आमंत्रित किये जाने का कोई उल्लेख श्री अहमद द्वारा नहीं किया गया है। श्री अहमद द्वारा अपने बचाव बयान में पुनः पम्प हाउस के निर्माणकर्त्ता संवेदक मे॰ रूंगटा इन्टरप्राइजेज, कहलगाँव पर दबाव डाल कर गाद सफाई कार्य प्रारम्भ कराये जाने का उल्लेख है। विदित हो कि दिनांक 17.01.2015 को माननीय विभागीय मंत्री महोदय, सचिव एवं अभियंता प्रमुख (मध्य) के स्थल निरीक्षण के दौरान विभागीय रूप से गाद सफाई कराने का निदेश दिया गया था। कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने प्रतिवेदन पत्रांक 96 दि॰ 29.01.15 एवं पत्रांक 104 दि॰ 31.01.15 में पम्प हाउस-1 की सफाई कार्य को जोखिम भरा एवं कम्पलेक्श प्रकृति का बतलाया है। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 164 दि॰ 09.02.2015 में उल्लेखित है कि पम्प हाउस-1 की गाद सफाई कार्य हेतु संवेदक को राजी किया गया। परन्तु श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने पत्रांक 121 दि॰ 06.02.2015 द्वारा संवेदक को यह नोटिस थमा दिया कि उक्त कार्य का भुगतान सुखा गाद लीड और लीफ्ट के साथ हटाने के लिए जो राशि आकलित होगी, अधिकतम वही आपको भुगतेय होगी। जबकि यह मामला गिला गाद हटाने का था एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वयं इसे जोखिम भरा एवं कम्पलेक्श प्रकृति के कार्य के रूप में स्वीकार किया गया था। अधीक्षण अभियंता द्वारा इनके इस कृत्य को उक्त महत्ती कार्य की प्रगति में रोड़ा अटकाने की नीयत से किया जाना अंकित किया है। पुनः अधीक्षण अभियंता ने अपने पत्र में उल्लेखित किया है कि श्री अहमद द्वारा आमंत्रित कोटेशन में अनाप-शनाप दर अंकित किया गया है, जिसे अभियंता प्रमुख (मध्य) द्वारा मना कर दिया गया। उक्त के आलोक में श्री अहमद द्वारा पम्प हाउस-1 से गीला गाद हटाने हेतु उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद सार्थक प्रयास किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। निष्कर्ष :-उक्त समीक्षा के आलोक में उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद ससमय इसका अनुपालन नहीं कर गाद सफाई कार्य नहीं कराने के लिए श्री अहमद का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं होने के फलस्वरूप श्री अहमद इस आरोप के लिए दोषी हैं। आरोप सं॰-2 की समीक्षा :-आरोपी पदाधिकारी, श्री अहमद द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में उल्लेखित किया गया है कि इनके द्वारा पम्प हाउस-1 में आंशिक कार्य कराया गया है जो मुख्यतः सुपर स्ट्रक्चर से संबंधित है। जनवरी 2015 में जब Entrance भाग में Expansion Joint के गैप का बढ़ना दृष्टिगोचर हुआ तो नींव में कराये गये कार्य पर शंका होने के फलस्वरूप शीट पाईल के कार्य के माप पुस्त एवं नींव के नक्शा का मिलान किया गया तो ज्ञात हुआ कि नींव के शीट पाईल कार्य में कमी है। जैसे ही इस बात की जानकारी हुई श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 177 दि॰ 24.02.2015एवं पत्रांक 190 दि॰ 26.02.2015 द्वारा इसकी सूचना अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को दी गयी जिसके आलोक में मुख्य अभियंता के स्तर से एक समिति गठित कर इस मामले की जाँच की गयी जिसमें कार्यपालक अभियंता के मंतव्य से समिति द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। उक्त के आलोक में श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा संज्ञान में आते ही इस मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखते हुए इसकी जाँच कराया जाना परिलक्षित होता है। निष्कर्ष :-उक्त समीक्षा के आलोक में श्री अहमद द्वारा संज्ञान में आते ही शीट पाईल कार्य में कमी को उच्चाधिकारियाें के समक्ष रखते हुए इसकी विधिवत् जाँच कराये जाने के फलस्वरूप तथ्य को छुपाये जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। समेकित निष्कर्ष :-श्री शफी अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलागाँव द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरान्त आरोप सं॰-1 प्रमाणित एवं आरोप सं॰-2 अप्रमाणित है।
उपर्युक्त आरोपों के आलोक में सरकारी राजस्व की क्षति के आकलन के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, भागलपुर से निर्मित पम्प हाउस स्टेज-1 में भरे गाद की सफाई एवं भुगतान से संबंधित अभिलेख की मांग की गई। मुख्य अभियंता द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेख के आलोक में की गई तकनीकी समीक्षा निम्नवत है :-
मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के परिक्षेत्राधीन गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव अन्तर्गत बटेश्वर स्थान गंगा पम्प नहर परियोजना के अधीन पम्प हाउस स्टेज-1 के निर्माण एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10 के तहत संवेदक मे0 रूंगटा इन्टरप्राइजेज, कहलगाँव द्वारा कराये जाने के क्रम में पम्प हाउस स्टेज-1 में दीवार एवं Expansion Joint से रिसाव होने के कारण गाद जमा हो गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के पत्रांक-174 दिनांक 02.02.2022 द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों के अवलोकनोपरांत पम्प हाउस स्टेज-1 में जमा गाद को हटाने में कुल 34,95,029/- रू0 संबंधित संवेदक को कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव द्वारा 19th on A/c विपत्र के माध्यम से भुगतान किया गया।
उल्लेखनीय है कि आरोपित पदाधिकारी श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257) तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप सं0-1 में उल्लेख किया गया है कि गंगा पम्प नहर परियोजना (एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10) के अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 के त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण पम्प हाउस में गाद जमा हुआ। जिसके फलस्वरूप पम्प हाउस से जमा गाद हटाने में संवेदक को किया गया व्यय 34,95,029/- रूपये सरकारी राजस्व की क्षति माना जा सकता है। अतएव प्रस्तुत मामले में कुल राजस्व की क्षति 34.95029 लाख रूपये परिलक्षित होता है।32 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोप एवं उक्त प्रकरण में हुए 34,95,029/- रूपये की सरकारी राजस्व की क्षति के लिए श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257) तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '25% (पच्चीस प्रतिशत) पेंशन की स्थायी रूप से कटौती'। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-921 दिनांक 22.04.2022 तथा पत्रांक-1204 दिनांक 26.05. 2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2330 दिनांक 23.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति में श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257) तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है। '25% (पच्चीस प्रतिशत) पेंशन की स्थायी रूप से कटौती'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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7 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-16/2016-2378--श्री राम स्वारथ सिंह (ID-2600), तत0 कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध लखीसराय जिलान्तर्गत एम0आर0 योजना के तहत सिंगारपुर मोड से कारगिल मोड तक पथ मरम्मति कार्य में बरती गई अनियमितताओं के लिए ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए श्री सिंह से बचाव बयान प्राप्त किया गया। श्री सिंह से प्राप्त बचाव बयान के सम्यक समीक्षोपरांत उनका संवर्ग जल संसाधन विभाग होने के कारण, विभागीय संकल्प सं0-868 दिनांक 05.04.2018 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिंह से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन/द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं॰-1 :- लखीसराय जिलान्तर्गत सूर्यगढ़ा विधान सभा क्षेत्र के अन्तर्गत एम॰आर॰ योजना के तहत मेन सिंगारपुर मोड़ से कारगिल मोड़ तक पथ मरम्मति में अनियमितता के संबंध में जाँच कार्यपालक अभियंता, गुणवत्ता प्रबंधन-2 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त पाया गया कि कराये गये कार्य संतोषप्रद नहीं है। पथ में प्रारम्भ में ही कटाव है एवं इसके आगे कई स्थानों पर पथ में सेटलमेंट है। इसके अन्य कई स्थानों पर Premix Carpet क्षतिग्रस्त हो गया है। फ्लैंक में मिट्टी का अभाव है। आरोप सं॰-2 :- प्रावधानित प्रीमिक्स कारपेट एवं सीलकोट की संयुक्त मुटाई भी कम पायी गयी। सील कोट ढंग से नहीं किया गया है। आरोप सं॰-3 :- पथ मरम्मति का कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं कराये जाने के कारण सरकार को 1,07,690.00/- रू॰ की वित्तीय क्षति हुई है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने हेतु पैतृक विभाग (जल संसाधन विभाग) से अनुरोध किये जाने के उपरान्त जल संसाधन विभाग के प्रासंगिक पत्र द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। तदनोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त आंशिक प्रमाणित आरोपो के संबंध में आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा की गई जिसका प्रत्युत्तर आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया गया है जिसकी समीक्षा निम्नवत है - आंशिक प्रमाणित आरोप :- आरोप सं॰-2 :- प्रावधानित प्रीमिक्स कारपेट एवं सीलकोट की संयुक्त मुटाई भी कम पायी गयी। सीलकोट ढंग से नहीं किया गया है। आरोप सं॰-3 :- पथ मरम्मति का कार्य विशिष्ट के अनुरूप नहीं कराये जाने के कारण सरकार को 1,07,690/- रू॰ की वित्तीय क्षति हुई है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव बयान - आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में प्रतिवेदित किया गया है कि- आरोप सं॰-(1) :- विभागीय समीक्षोपरान्त पाया गया कि कराये गये कार्य संतोषप्रद नहीं है। पथ में प्रारम्भ में ही कटाव है एवं इसके आगे कई स्थानों पर पथ में सेटलमेंट है। इसके अन्य कई स्थानों पर प्रीमिक्स कारपेट क्षतिग्रस्त हो गया है। फ्लैंक में मिट्टी का अभाव है। आरोप सं॰ 1 का बचाव बयान - निवेदन है कि कार्य समाप्ति के बाद छः महीना तक संपादित कार्य में दृष्टिगत किसी तरह की त्रुटि का सुधार संवेदक को अपने व्यय पर करने का प्रावधान F2 एकरारनामा में Clause 16 में है। ऐसी स्थिति मेंं जाँच की तिथि दिनांक 30.08.2012 को दृष्टिगत त्रुटि के सुधार कार्य करने का दायित्व संवेदक का है तथा उसे कराने का दायित्व उस समय पदस्थापित कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता का है। सेवानिवृति की तिथि दिनांक 30.11.2013 के लगभग डेढ़ वर्ष बाद इस तरह का स्पष्टीकरण सेवानिवृत पदाधिकारी से पूछने का कोई औचित्य नहीं है। इसी क्रम में33 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 उल्लेखनीय है कि हमारी पत्नी ब्लड कैंसर से पीड़ित है, मैं अधिकांश समय इनके इलाज हेतु अपने पुत्र के पास चेन्नई में रहता हूँ। उपुर्यक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं॰ 1 का कोई अंश किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। आरोप सं॰-(2) :- प्रावधानित प्रीमिक्स कारपेट एवं सीलकोट की संयुक्त मुटाई भी कम पायी गयी। सीलकोट ढंग से नहीं किया गया है। आरोप सं॰ 2 का बचाव बयान :- निवेदन है कि संयुक्त जाँच प्रतिवेदन दिनांक 17.09.2012 कंडिका 12 में अंकित प्रीमिक्स कारपेट का मुटाई पूर्णतः विशिष्टि के अनुरूप है। चार बिन्दुओं पर पायी गयी प्रीमिक्स कारपेट की मुटाई क्रमशः 15mm, 17mm, 23mm एवं 20mm है इस तरह दो बिन्दुओं पर प्रीमिक्स कारपेट की Spot मुटाई 23mm एवं 20mm है जबकि अपेक्षित मुटाई मात्र 20mm है दो बिन्दुओं पर Spot मुटाई क्रमशः 15mm एवं 17mm है जो Spot मुटाई Reduction के अनुरूप सीमा 6mm के अन्तर्गत है। इस अनुगेय सीमा का प्रावधान I.R.C. द्वारा प्रकाशित Special Publication II के कंडिका 07.04.1 तथा M.O.R.D के Speibication of Road के टेबुल 18-1 में है। उल्लेखनीय है कि Manually Laid Wearing Coat में Spot Reduction 10mm तक अनुमान्य है। निवेदन है कि सीलकोट का कार्य पूर्णतः विशिष्टि के अनुरूप सम्पादित कराया गया था। आरोप में बहुत ही अस्पष्ट (Vage) रूप में उल्लेख किया गया है कि सीलकोट ढंग से नहीं किया गया है, जिसकी कोई प्रावैधिक प्रासंगकिता नहीं है। उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में आरोप सं॰-2 कोई अंश किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है। आरोप सं॰-(3) :- पथ मरम्मति का कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं कराये जाने के कारण सरकार को 1,07,690/- रू॰ की वित्तीय क्षति हुई है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। आरोप सं॰ 3 का बचाव बयान :- निवेदन है कि आरोप सं॰ 3 का गठन संयुक्त जाँच प्रतिवेदन दिनांक 17.09.2012 की कंडिका 18(ii) में अंकित इस निष्कर्ष पर आधारित है कि 1,07,690.00 रूपये की वित्तीय क्षति हुई है जिसका कोई प्रावैधिक औचित्य नहीं है। पूर्वगामी कंडिका 4.1.2 में आरोप सं॰ 1 के संदर्भ में निवेदित स्पष्टीकरण में सविस्तार निवेदित है कि कार्य समाप्ति के छः महीना बाद भी F2 एकरारनामा के Clause 16 के अनुसार कार्य में दृष्टिगत त्रुटि के सुधार का दायित्व संवेदक का है एवं संवेदक के माध्यम से उसे कराने का दायित्व उस समय में पदस्थापित कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता का है इसी पृष्ठभूमि में संवेदक के जमानत की राशि कार्य समाप्ति के छः माह बाद ही लौटाने का प्रावधान है। फलतः क्षतिग्रस्त प्रीमिक्स कारपेट के कारण 107690/- रूपये की वित्तीय क्षति की परिकल्पना की अवधारणा ही पूर्णतः आधारहीन है उल्लेखनीय है कि संयुक्त जाँच प्रतिवेदन दिनांक 17.09.2012 की कंडिका 18(1) में स्पष्ट मंतव्य है कि बिना कार्य कराये भुगतान करने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में आरोप सं॰ 3 किसी भी रूप में मेरे विरूद्ध लेशमात्र भी प्रमाणित नहीं होता है।
सेवानिवृति के लगभग डेढ़ वर्ष एवं घटना की तिथि से लगभग तीन वर्षो के बाद ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा इस तरह का स्पष्टीकरण पूछा जाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 को मूलभावना के विपरीत है जिसमें वृद्धावस्था में सभी भारतीय नागरिक को शांतिपूर्वक जीवन बिताने का अधिकार प्राप्त है। इसी संदर्भ में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के अनेक न्यायलयों में यह निदेशित है कि सेवानिवृति पदाधिकारी के सेवाकाल में किसी तरह के सामान्य भूल-चूक के लिए सेवानिवृति के बाद स्पष्टीकरण नहीं पूछा जाना चाहिए। अतएव विनम्र निवेदन है कि मेरे इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए मेरे संदर्भ में इस मामले को समाप्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- आरोपित पदाधिकारी द्वारा निम्न दो आंशिक प्रमाणित आरोप के संबंध में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि पथ के चार बिन्दुओं पर प्रीमिक्स कारपेट की मुटाई 15mm, 17mm, 23mm एवं 20mm पाई गई जबकि 20mm मुटाई अपेक्षित था। उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि IRC द्वारा प्रकाशित Special Publication-II के कंडिका 7.4.1 तथा M.O.R.D के Specification for road के Table 18-1 में Spot की मुटाई में Reduction की अनुज्ञेय सीमा 6mm के अन्तर्गत है उक्त आधार पर प्रीमिक्स कारपेट में मुटाई में कमी को उनके द्वारा विशिष्टि के अनुरूप ही माना गया है। यद्यपि आरोपित पदाधिकारी द्वारा उक्त से संबंधित अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है। फिर भी, संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि- WBM (Gr. II + Gr. III) के उपर बिछी प्रीमिक्स कारपेट यातायात के कारण दबने से इसकी मुटाई में कमी की संभावना बनी रहती है। अतएव, प्रीमिक्स कारपेट की मुटाई में कमी के लिए इन्हें जिम्मेवार नहीं माना जा सकता है। परन्तु साथ ही सीलकोट मापी युक्त नहीं पाये जाने के कारण इन पर लगाया गया आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उल्लेख किया गया है कि आरोप सं॰ 3 में 107690/- रू॰ का वित्तीय हानि के लिए F2 एकरारनामा के Clause-16 का जिक्र करते हुए दृष्टिगत सुधार के लिए संवेदक को उत्तरदायी ठहराते हुए उस समय पदस्थापित अभियंताओं को सुधार कार्य करवाने के लिए जिम्मेवार ठहराया है। उक्त आधार पर कार्य में क्षति के लिए 107690/- रू॰ के वित्तीय हानि को आधारहीन बताया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि- (i)सीलकोट की मुटाई कम रहने के कारण इस मद में कुल भुगतान की आधी रकम - 55857/-रू॰ (ii) 150 मी॰ की लम्बाई में Defective कालीकरण का कार्य -49383/- रू॰34 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 (iii) WBM (Gr. III) में 150' की लम्बाई में कमी की आकलित राशि - 2450/- रू॰ कुल राशि रू॰- 107690/- सीलकोट उचित तरीके से कराये बिना संवेदक को भुगतान किये जाने के लिए आरोपित पदाधिकारी दोषी है। यद्यपि, इस मद में आकलित वित्तीय क्षति 55857/- रू॰ जो इस मद के भुगतान की आधी रकम है इसका कोई तार्किक आधार नहीं है। 150 मी॰ में defective कालीकरण तथा 150 मी॰ की लम्बाई में WBM (Gr. III) की मुटाई के लिए आकलित वित्तीय क्षति का आकलन उचित नहीं प्रतीत होता है। कार्य समाप्ति के बाद हुए इस प्रकार की क्षति के लिए defective liability period की अवधि में संवेदक जिम्मेवार है। अतः आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप आंशिक रूप से प्रमाणिक प्रतीत होता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव पूर्व में संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान हू-ब-हू है। कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव, आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध उक्त दोनों आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। निष्कर्ष :- आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर एवं उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोप सं॰ (2) एवं आरोप सं॰ (3) आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम स्वारथ सिंह (आई0डी0-2600) तत0 कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए"। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1022 दिनांक 04.05.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2322 दिनांक 23.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति में श्री राम स्वारथ सिंह (आई0डी0-2600) तत0 कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है। '20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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35 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022पाया गया, जिसके चलते कार्य न्यून विशिष्टि का कराना परिलक्षित होता है। यह समीक्षा उचित नहीं है, क्याेंकि संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन में यह स्पष्ट किया है कि "पी॰सी॰सी॰ के नमूनों में पाये गये बालू एवं चिप्स का औसत अनुपात के आँकड़ा को आधार बनाया गया है, जबकि तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी का मानक निर्धारित किया गया है। विशिष्टि में कमी की तुलना निर्धारित मानक के आधार पर ही होना चाहिए। लेकिन स्पष्टीकरण में सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत की कमी का कोई जिक्र नहीं है। बालू/चिप्स की औसत अनुपात निकाला गया है लेकिन विभाग द्वारा इन दोनों अवयवों के लिए मानक/टॉलरेन्स का निर्धारण नहीं किया गया है। पी॰सी॰सी॰ की विशिष्टि का आधार के रूप में कम्पे्रसिव स्ट्रेन्थ निकालने का विभाग/कोड में किसी प्रणाली का निर्धारण नहीं किया गया है और न ही प्रचलन में है। केवल बालू एवं चिप्स के औसत अनुपात के आधार पर कार्य को पूर्णतः निम्न विशिष्टि का मानने का कोई मानक नहीं है। व्यवहारिक तौर पर उड़नदस्ता एवं विभाग द्वारा बालू एवं चिप्स के औसत अनुपात के आधार पर कराये गये कार्य को निम्न विशिष्टि का मानने का आरोपी पदाधिकारी को निम्न विशिष्टि का कार्य कराने के लिए जिम्मेवारी माना जा सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया कोड से अच्छादित नहीं है।"
जिससे स्वतः स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रचलन के आधार पर आरोप को न्यून विशिष्टि के कार्य कराने का मंतव्य दिया है, परन्तु प्रचलन के आधार पर कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता है, वह नियमामें एवं गाईड लाईन के आधार पर होना आवश्यक है।
(2) संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वयं इस बात का उल्लेख किया गया है कि कोई मानक या कोड से यह निर्धारित नहीं है, जिससे यह आरोप प्रमाणित हो। फिर भी व्यवहारिकता के आधार पर अपना मंतव्य दिया है, जो साक्ष्य आधारित नहीं हो सकता है।
(3) जहाँ तक र्इंट के गुणवत्ता का प्रश्न है। इस संबंध में कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन में यह अंकित किया है कि- "व्यवहृत होने वाले निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता जाँच कार्य सम्पादन के बाद किये जाने का IS Code में प्रावधानित होने की बात संज्ञान में नहीं है। IS Code 5454-1978 में कार्य में प्रयुक्त किये जाने वाले ईंट की जाँच कराने का प्रावधान किया गया है। निर्माण कार्य में लगे ईंट के नमूने की प्राप्ति हेतु उक्त संरचना से ईंट को निकालने में बल का प्रयोग किये जाने से उसके आंतरिक संरचना में परिवर्तन के परिणामस्वरूप कम्पे्रसिव स्टे्रन्थ में ह्ास होने से इन्कार नहीं किया जा सबकता है। ईंट में पानी सोखने की क्षमता निर्धारित 20 प्रतिशत से कम 12.58 प्रतिशत पायी गयी है, जो प्रथम श्रेणी के ईंट की गुणवत्ता को दर्शाता है।"
जिससे स्वतः स्पष्ट है कि ईंट गुणवत्ता के अनुरूप थे एवं जाँच की पद्धति त्रुटिपूर्ण थी। (4) इस संबंध में यह भी कहना है कि संबंध में मामले में अभियंता प्रमुख संचालन पदाधिकारी थे। बिहार लोक निर्माण विभागीय संहिता के आलोक में अभियंता प्रमुख सरकार के परामर्शी होते है और उनके द्वारा यह मंतव्य दिया गया है कि- "अतः निर्माण सामग्रियाें को निम्न विशिष्टि का मानने का कोई मानक आधार संचालन पदाधिकारी के पास नहीं है। पी॰सी॰सी॰ के लिए सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत की कमी का मानक (विभिन्न Limitations के साथ) निर्धारित है लेकिन स्पष्टीकरण में सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी को आधार नहीं बनाया गया है।"
36(cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 अतएव, उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्ष :- उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री अरूण प्रकाश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, बाँका भागलपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर पर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने का आरोप प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोप के लिए श्री अरूण प्रकाश (आई0डी0-4400) तत0 कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, काडा, बाँका सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - 1. संचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक। 2. 'निन्दन' (संगत वर्ष 2014-15)।
उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड सं0-1 से संबंधित प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1843 दिनांक 28.07.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2328 दिनांक 23.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति में श्री अरूण प्रकाश (आई0डी0-4400) तत0 कार्यपालक अभियंता, चांदन परियोजना प्रमंडल, काडा, बाँका सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।
1. संचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक। 2. 'निन्दन' (संगत वर्ष 2014-15)।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-01/2014-2380--श्री राजीव रंजन (ID-J7855), तत्कालीन कनीय अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध दरियापुर वीयर एवं इससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य में प्रमंडलीय लेखापाल के अभ्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं पर विभागीय निदेश के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच कराया गया। उक्त के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री रंजन के विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। तत्पश्चात सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-259 दिनांक 31.01.2019 द्वारा श्री रंजन के विरूद्ध आरोप पत्र में वर्णित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा की गई। श्री रंजन के दिनांक 31.01.2019 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-64 सहपठित ज्ञापांक-1046 दिनांक 24.05. 2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। समीक्षोपरान्त उनसे संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोप के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक-998 दिनांक 03.09.2021 द्वारा निदेशित किया गया। उक्त के आलोक में श्री रंजन द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) प्राप्त कराया गया, जिसकी समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं॰-1 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा अन्तर्गत दरियापुर वीयर एवं उससे निस्तृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य का एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11 में Price Escalation मद में Clause 10CA के बजाय 10CC के तहत किये गये 104.27989 लाख रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्पश्चात उक्त राशि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। बचाव बयान :- श्री राजीव रंजन, तत्कालीन कनीय अभियंता द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेख किया गया है कि-
(i) निर्विवाद है कि मैंने दिनांक 26.07.13 को कनीय अभियंता के रूप में Price Escalation संबंधी विपत्र तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के आदेशानुसार अंकित किया था, जिसे अनियमित मानते हुए विभागीय कार्यवाही चलायी गयी है। अतः अनियमिता/अवचार (Misconduct) की घटना निर्विवाद रूप से 26.07. 2013 है।
(ii) मेरे द्वारा दिनांक 16.04.2019 को प्रेषित अपने अभ्यावेदन में बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) को उद्धृत किया है, जिसे कृपया अवलोकन किया जाय।
उक्त नियमावली के परन्तुक (Proviso) a (ii) में उल्लिखित है कि सेवानिवृति के पश्चात के मात्र वैसे मामलों को विभागीय कार्यवाही चलायी जा सकती है, जो-
"Shall be in respect of an event which took place not more than 4 years before the institution of such preceedings"37 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 उस नियम के स्पष्टीकरण (Explanation) में लिखा है कि विभागीय कार्यवाही तभी चलायी मानी जायेगी, जब सरकारी सेवक के विरूद्ध गठित आरोप पत्र उसे निर्गत (Issue) कर दिया गया हो। (iii) अब प्रश्न उठता है कि कोई आदेश निर्गत (Issued) कब माना जायेगा। इस संबंध में मैंने सर्वोच्य न्यायालय के "Union of India Vs. S.P. Singh" के मामले में पारित न्यायदेश, जो (2008) 5 S.C.C. 438 में प्रतिवेदित है, उसकी छायाप्रति अनु॰ 10 के रूप में पूर्व अभ्यावेदन में अनुलग्न है, जिसे कृपया अवलोकित किया जाय।
(iv)(क) मैंने उक्त न्यायादेश की कंडिका 6, 7 एवं 13 का संगत अवतरण अपने 16.04.2019 के अभ्यादेश की कंडिका 13.1.2 में उद्धृत किया, जिसके गहन अध्ययन का अनुरोध है।
(ख) उक्त न्यायादेश में वैधिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है कि :-
(i) आदेश प्रभावित होनेवाले व्यक्ति को बाँधने के लिए उसे संसूचित (Communicate) किया जाना आवश्यक है।
(ii) वैधिक अनिवार्यता है किसी आदेश के प्रभावी होने के लिए उक्त आदेश को संबंधित पदाधिकारी के सही पते पर उसके प्रस्तावित सेवानिवृति की तिथि के पूर्व Dispatch कर दिया जाना आवश्यक है।
(iii) Once an order is issued and sent out (dispatched) to the Govt. Servant Concerned it must be held to have been communicated to him, no matter when he actually received it.
(v) इस तरह किसी आदेश के प्रभावी होने के लिए वैधिक/न्यायिक वाध्यता है कि वह आदेश निर्गत कर Dispatch अर्थात् (Sent Out) कर दिया जाय, न कि मात्र Issue Number और तिथि डालकर ऑफिस में ही रह न जाय। अर्थात् मेरे मामले में संकल्प Dispatch की तिथि 27.02.2019 से प्रभावी रूप से Issued/Communicated माना जायेगा। Dispatch का प्रमाण दिया जा चुका है।
(vi) इस तरह 259 दिनांक 31.01.2019 के ज्ञापांक से निर्गत विभागीय कार्यवाही का संकल्प, दिनांक 27.02. 2019 को Dispatched (Sent Out) होने के कारण दिनांक 27.02.2019 को संस्थित माना जायेगा। (vii) एक चूक यह भी है कि यह दिनांक 27.02.2019 को Dispatched संकल्प गलत पते (Address) अर्थात् सेवानिवृति के पूर्व पदस्थापन कार्यालय, सिंचाई अंचल नालंदा (बिहारशरीफ) के पते से भेजा गया था और मैं दिनांक 31.01.2019 को सेवानिवृति के बाद पटना के कंकड़बाग स्थित आवास में आ गया था। यह पता (Address) विभाग को पता था, क्योंकि मात्र एक दिन पूर्व ही 26.02.2019 को निर्गत आदेश (अभ्यावेदन के अनु॰ 8) से मेरी औपबंधिक पेंशन स्वीकृति, लोहिनयानगर, पत्रकार नगर, पटना के पते (Address) से भेजा जा चुका था। इस प्रकार भी उपरोक्त न्यायादेश के आलोक में भी 31.01.2019 को Issue no. डालकर गलत पते से 27.02.2019 को Dispatch किये जाने के कारण भी दिनांक 31.01.2019 से वैधिक रूप से सही नहीं माना जायेगा।
(viii) उपरोक्त तथ्यों एवं विश्लेषण के आधार पर 31.01.2019 के Issue no. से दिनांक 27.02.2019 को Dispatched विभागीय कार्यवाही का संकल्प दिनांक 27.02.2019 को संस्थित माना जायेगा न कि 31.01. 2019 को सेवानिवृति की तिथि से।
(ix) 27.02.2019 को Dispatche की तिथि से संस्थित विभागीय कार्यवाही अवचार/कदाचार की घटना की तिथि 26.07.2013 से लगभग 5 वर्ष 7 माह संस्थित होने के कारण 4 वर्षो की Limitation की अवधि पार कर जाने के फलस्वरूप कालातीत (Time barred) हो जाता है, क्योंकि इस बीच मैं 31.01.2019 को सेवानिवृत हो चुका था। परिमाणतः असंधारणीय हो जाने के कारण इस पर विचार किये जाने के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के बाहर हो जाता है। इसलिए मैंने अपने 16.04.2019 के अभ्यावेदन में आग्रह किया था कि सर्वप्रथम इस विभागीय कार्यवाही की संधारणीयता (Maintainability) पर विचार कर लिया जाय, जो अबतक नहीं किया गया है।
(x) यहाँ उल्लेख करना चाहूँगा कि किसी भी मुद्दे/विवाद के निपटारा करने हेतु विचार करने के लिए उस विवाद को सक्षम न्यायिक/अर्द्धन्यायिक पदाधिकारी के समक्ष संगत Act/Rule/Regulation में अंकित Limitation अवधि के अन्दर प्रस्तुत/प्रकट किया जाना आवश्यक है, तभी वह न्यायिक/अर्द्धन्यायिक प्राधिकार अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर निपटारा कर सकता है, अन्यथा Limitation Period के बाहर प्रस्तुत/प्रकट किये गये विवाद उस प्राधिकार के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के बाहर हो जाता है और उसपर विचार नहीं किया जा सकता है।
(xi) इस संबंध में मैं लक्ष्मण सिंह बनाम हजारा सिंह के मामले में सर्वोच्य न्यायालय के न्याय निर्णय, जो (2008) 5.S.C.C. 444 में प्रतिवेदित है कि कंडिका 13 का संगत अवतरण नीचे उद्धृत करना चाहूँगा :-
38(cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 "......Limitation is question of Jurisdiction Sanction 3 of the Limitation Act puts an embargo on the court to enthertain a suit if it is found to be barred by Limitation."
उक्त न्यायादेश की छायाप्रति अनुलग्न (11) के रूप में संलग्न किया जा रहा है। (xii) इस तरह मेरे विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही, उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर दिनांक 27.02.2019 को संसूचन की तिथि से संस्थित (Instituted) माने जाने के कारण Misconduct की घटना की तिथि 26.07.2013 से Limitation Period 4 वर्षो के Limitation से Cross कर जाने के कारण जब Time barred हो जाता है, तो अनुशासनिक प्राधिकार या संचालन पदाधिकारी के विचारण को क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के बाहर हो जाता है और विचार ही नहीं किया जा सकता है। ( xiii) मेरे अनुरोध के बावजूद भी संचालन पदाधिकारी ने विभागीय कार्यवाही की संधारणीयता पर विचार नहीं किया गया और मान लिया कि दिनांक 31.01.2019 के संकल्प के साथ निर्गत आरोप पत्र एवं विभागीय कार्यवाही वैध है। दूसरी ओर दिनांक 31.01.2019 के Issue Number से निर्गत विभागीय कार्यवाही संस्थित किये जाने के संकल्प को 27.02.2019 को Dispatch किये जाने के कारण इस संकल्प के कालबाधित होने के मेरे Challenge की समीक्षा का भार अनुशासनिक प्राधिकार पर डाल दिया है। (xiv) उल्लेख है कि संचालन पदाधिकारी ने दिनांक 31.01.2019 के संकल्प को मेरे द्वारा 27.02.2019 को प्राप्त होने का उल्लेख किया है, जो गलत है। 27.02.2019 की तिथि Dispatch की तिथि है, जबकि मैंने उसे 11.03.2019 को प्राप्त किया जब स्वयं वहाँ कुछ कार्यवश सेवानिवृति संबंधी भुगतान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के अनुरोध हेतु नालंदा, पटना से गया था। देखें मेरे प्रथम अभ्यावेदन की कंडिका 12.1 (xv) जब संचालन पदाधिकारी ने विभागीय कार्यवाही के कालातीत (Time barred) अर्थात् 4 (चार) वर्षो की Limitation अवधि Cross कर जाने के फलस्वरूप असंधारणीय माने जाने के मेरे अनुरोध पर विचार नहीं किया तब उन्हें विचार करने का अधिकार कहाँ से मिल गया और उन्होंने बिना सम्यक विचार किये आरोप को कैसे प्रमाणित मान लिया है। यह प्रश्न अनुशासनिक प्राधिकार के समक्ष उपस्थित है। (xvi) अनुशासनिक प्राधिकार ने भी संधारणीयता पर विचार नहीं किया है और संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आधार पर द्वितीय कारण पृच्छा कर दिया है, जो विधि सम्मत नहीं है।
(xvii) श्री राजेश्वर दयाल, तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर), जल संसाधन विभाग के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में भी श्री दयाल ने संधारणीयता पर प्रथमतः विचार कर ही आगे विचार का आग्रह किया था। इस आग्रह को उचित मानते हुए तत्कालीन मुख्य विभागीय जाँच आयुक्त सुश्री अमिता पॉल ने सम्यक विचारोपरान्त निर्णय दिया था कि कालातीत (Time barred) होने के कारण कार्यवाही असंधारणीय है और आगे विचार करने का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) नहीं होने के कारण बिना विचार किये विभाग को वापस कर दिया।
(xviii) विभाग ने भी सुश्री अमिता पॉल के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री दयाल को दोषमुक्त करने का निर्णय ज्ञापांक 514 दिनांक 23.02.2018 द्वारा संसूचित किया था। उल्लेख है कि Domestic enquiry अर्थात् Departmental Proceedings भी एक Quasi judicial proceedings (अर्द्धन्यायिक कार्यवाही) है और इस हेतु अनुशासनिक प्राधिकार एवं जाँच पदाधिकारी दोनों ही Quasi-Judicial authority है। (xx) संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार सर्वोच्य न्यायालय द्वारा घोषित न्यायादेश/विधि पूरे भारतवर्ष के अन्तर्गत सभी न्यायालयों एवं प्राधिकारियों (Authorities) पर वाध्यकारी (Binding) है, अर्थात् उसका पालन करना अनिवार्य (Mandatory) है। अतः Quasi judicial proceeding में भी सर्वोच्य न्यायालय के न्यायादेश जो S.P. Singh (अनु॰ 10) में मामले तथा लक्ष्मण सिंह (अनु॰ 11) के मामले में पारित है, उन न्यायादेशों का पालन करना वाध्यकारी है अथवा अवज्ञा माना जायेगा।
(xxi) अतः इन दोनों न्याय निर्णयों के आधार पर सर्वप्रथम विचार कर लिया जाय कि दिनांक 31.01.2019 के Issue Number से निर्गत विभागीय कार्यवाही का संकल्प, जो वस्तुतः 27.02.2019 को Dispatch किया गया है, दिनांक 26.07.2013 को Commited mistake/misconduct की घटना से पाँच वर्ष 7 (सात) माह बाद 27.02.2019 को Dispatch कर संसूचित किये जाने के कारण कालातीत (Time barred) होने के फलस्वरूप संधारणीय भी है अथवा नहीं क्योंकि इस बीच मैं 31.01.2019 को सेवानिवृत हो चुका था। ऐसा करना आवश्यक है, क्योंकि असंधारणीय होने की स्थिति में आरोप पत्र पर विचार करने का अधिकार ही समाप्त हो जाता है।
(xxii) उपरोक्त तथ्यों, परिपत्रों, न्यायनिर्णयों एवं पूर्वाेदाहरणों के मद्देनजर दिनांक 27.02.2019 को Dispatched या Communicated विभागीय कार्यवाही का, जो ज्ञापांक 259 दिनांक 31.01.2019 से निर्गत है, उसको कालबाधित (Time barred) मानते हुए मुझे दोष मुक्त करने की कृपा की जाय।39 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 समीक्षा ः- आरोपी पदाधिकारी द्वारा आरोप के संबंध में कोई भी स्पष्टीकरण/साक्ष्य नहीं दिया गया है। एकरारनामा के Schedule-F में स्पष्ट रूप से अंकित है कि विषयांकित कार्य हेतु Clause-10CC applicable नहीं है। फलस्वरूप एकरारनामा के कंडिका 10CC के तहत Price Escalation का भुगतान अनियमित है। यह आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। जहाँ तक बिहार पेंशन नियमावली 43(बी॰) में अंकित है कि- Explanation for the purpose of the Rule- (b) Departmental proceeding shall be deemed to have been instituted when the charges framed against the Govt. Servant are issued to him or if the Govt. Servant has been placed under suspension from an earlier date on such date. आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र उनके सेवानिवृति की तिथि दिनांक 31.01.2019 को निर्गत है, जो कि नियमसंगत एवं वैध है। निष्कर्ष :- आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर के समीक्षोपरान्त श्री राजीव रंजन, तत्कालीन कनीय अभियंता पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोप के लिए श्री राजीव रंजन (ID-J7855), तत्कालीन कनीय अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की 10 (दस) वर्षों तक रोक'। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1317 दिनांक 03.06.2022 तथा पत्रांक-1994 दिनांक-18.08. 2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2395 दिनांक 26.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति मे श्री राजीव रंजन (ID-J7855), तत्कालीन कनीय अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है। '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की 10 (दस) वर्षों तक रोक'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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7 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-01/2014-2381--श्री अरविन्द प्रसाद (ID-3442), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध दरियापुर वीयर एवं इससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य में प्रमंडलीय लेखापाल के अभ्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं पर विभागीय निदेश के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच कराया गया। उक्त के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। तत्पश्चात सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1041 दिनांक 23.05.2019 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र में वर्णित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा की गई। श्री प्रसाद के दिनांक 31.12.2019 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-66 सहपठित ज्ञापांक-983 दिनांक 02.09. 2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। समीक्षोपरान्त उनसे संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक-997 दिनांक 03.09.2021 द्वारा निदेशित किया गया। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) प्राप्त कराया गया, जिसकी समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं॰-1 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा अन्तर्गत दरियापुर वीयर एवं उससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य का एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11 में Price Escalation मद में Clause 10CA के बजाय 10CC के तहत किये गये 104.27989 लाख रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्पश्चात उक्त राशि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। आरोप सं॰-2 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में दरियापुर वीयर एवं उससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण काय का एकरारनामा सं॰ SBD-01/2010-11 के अन्तर्गत संवेदक को दिये गये प्रथम एवं द्वितीय Secure Advance क्रमशः रू॰ 1639861/- एवं रू॰ 2484491/- की वसूली एकरारनामा के Clause 10B के तहत ससमय नहीं किये जाने के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। बचाव बयान :-
40(cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा प्रमाणित आरोप सं॰-1 एवं 2 के संबंध में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उल्लेख किया है कि -
(1) कृपया संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें उनके द्वारा मेरे विरूद्ध गठित तीन आरोपों में से आरोप सं॰-1 एवं 2 प्रमाणित एवं आरोप सं॰-3 प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है। (2) मेरे द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष आरोपवार साक्ष्य आधारित समर्पित बचाव बयान पर अपना समीक्षा/मंतव्य एवं निष्कर्ष अंकित किया गया है। मेरे द्वारा आरोप सं॰-1 के संबंध में यह कहा गया कि -
(क) संबंधित कार्य का एकरारनामा 10.05.2010 को किया गया था, जिसके अनुरूप कार्य आरंभ करने की तिथि 10.
05.2010 एवं कार्य समाप्ति 09.11.2011 थी।
(ख) एकरारनामित मदों की मात्रा में वृद्धि की स्वीृति अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग के पत्रांक 463 दिनांक 30.03.2012 द्वारा दी गयी, जिसमें मार्च 2013 तक कार्य समाप्ति की तिथि निर्धारित की गयी।
(ग) संवेदक द्वारा दिये गये पत्रांक SKCPI/2012-13/54 दिनांक 13.05.2013 द्वारा अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल सं॰-2, जमुई को दिया गया। अधीक्षण अभियंता द्वारा पत्रांक 391 दिनांक 15.05.2013 द्वारा यह निर्देश दिया गया कि कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा एकरारनामा के एस॰बी॰डी॰ के क्लाउज 10 सी॰ के अनुसार संवेदक को Price Escalation विपत्र का नियमानुसार जाँच कर भुगतान किया जाय।
(घ) संवेदक द्वारा अपने पत्रांक SKCPI/2012-13/54 दिनांक 13.05.2013 द्वारा Undertaking दिया गया कि उनके द्वारा समर्पित Price Escalation के विपत्र में विवाद होने पर पूरी जबावदेही मेरी होगी।
(ड़) संबंधित विपत्र हेतु सहायक अभियंता को निर्देशित किया गया। संबंधित विपत्र को मापी पुस्तिका अंकित करते हुए सहायक अभियंता को दिनांक 26.07.2013 को उपस्थापित किया गया, जिसे सहायक अभियंता द्वारा प्रमंडल में समर्पित किया गया ।
उपरोक्त वर्णित कंडिकाओं से स्पष्ट होगा कि संबंधित कार्य वर्ष 2010 में आरंभ हुआ था एवं इसके प्रथम Price Escalation का विपत्र संवेदक द्वारा समर्पित एवं Undertaking के आधार पर वर्ष 2013 में मापी पुस्तिका में विपत्र प्रविष्टि किया गया।
(च) विदित हो कि एस॰बी॰डी॰ के क्लाउज के अधीन 18 महीने से अधिक कार्य वाले निविदाओं में 10सी॰सी॰ क्लाउज का समावेश किया जाना है। चूँकि इस मामले में प्रथम विपत्र वर्ष 2013 में संवेदक द्वारा समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा 10सी॰ के प्रावधानों के अनुरूप विपत्र समर्पित करने का उल्लेख किया गया था।
(3) उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं॰ 1 को प्रमाणित होने के संबंध में अपने समीक्षा में अंकित किया है कि - "एकरारनामा में Price Escalation के लिए Clause 10C का प्रावधान है, परन्तु Clause 10CA एवं 10CC का प्रावधान नहीं है, किन्तु एकरारनामा के Schedule-F में स्पष्ट रूप से अंकित है कि विषयांकित कार्य हेतु Clause 10CC applicable नहीं है।" अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 463 दिनांक 30.03.2012 द्वारा उक्त कार्य के लिए मार्च, 2013 तक की अवधि विस्तार की स्वीकृति इस शर्त्त के साथ दी गयी कि अवधि विस्तार के कारण संवेदक को कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ देय नहीं होगा। पुनः कार्य की समाप्ति हेतु अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 104 दिनांक 21.01.2014 द्वारा द्वितीय अवधि विस्तार की स्वीकृति दिनांक 31.03.2015 तक इस शर्त के साथ दी गयी कि संवेदक को मूल एकरारनामा में दर सामंजन संबंधी कंडिका 10CA के प्रावधान अतिरिक्त कोई अन्य दावा मान्य नहीं होगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा SBD के Clause-10CC के तहत Price Escalation Bill का अनियमित भुगतान किया गया, जबकि एकरारनामा के इतर किसी भी तरह का भुगतान नियमानुकूल नहीं माना जा सकता है। उक्त अनियमित भुगतान की वसूली किये जाने के कारण विवाद उत्पन्न हुआ और संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में CWJC दायर किया गया । संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष में यह कहा गया कि एकरारनामा सं॰ SBD01/10-11 में Price Escalation मद में Clause 10CA के बजाय 10CC के तहत किये गये 104.27989 रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्तपश्चात उक्त राशि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए मुझे जिम्मेवार माना गया है, के संबंध में कहना है कि - (i) मेरे द्वारा समर्पित बचाव बयान के अनुरूप नहीं है, क्योंकि मैंने अपने बचाव बयान में स्पष्ट किया था कि संवेदक द्वारा यह अंडरटेकिंग दिया गया था कि Price Escalation के विपत्र में विवाद होने पर पूरी जिम्मेवारी उनकी होगी। वैसी स्थिति में मापी पुस्तिका में दर्ज मापी जिसकी जाँच सहायक अभियंता द्वारा की गयी थी के साथ-साथ संवेदक द्वारा दिये गये अंडरटेकिंग के आलोक में यह आरोप मुझपर नहीं बनता है। जहाँ तक CWJC दायर किये जाने का प्रश्न है, इसके लिए कोई भी व्यक्ति अपने हक के लिए वाद दायर करने हेतु स्वतंत्र हैं।
(4) आरोप सं॰ 2 के संबंध में मेरे द्वारा यह कहा गया था कि बिहार लोक निर्माण विभागीय संहिता के कंडिका 39 का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें अंकित है कि - The Divisional Accountant is responsible to the Divisional Officer for the correct compilation of the accounts of the division for the date41 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 supplied of him the relative position of a Divisional Accountant to the Executive Engineer in respect of accounts." जिसके आलोक में प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी का दायित्व है कि कार्यपालक अभियंता के समक्ष पूर्ण रूप से जाँचोपरान्त मापी पुस्तिका को उपस्थापित करें। इसी क्रम में मैं आपका ध्यान बिहार लोक निर्माण संहिता के कंडिका 21 से 23 की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिसमें लेखा पदाधिकारी की भूमिका का उल्लेख किया गया है, जिसके कंडिका-23 में अंकित है कि - "The Divisional Accountant is expected to see that the rules and orders in force are observed in respect of all the transations of the division which come within his sphere of duties."
(5) मेरे द्वारा दिये गये तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं॰ 2 के मंतव्य में अंकित किया है कि-"कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि प्रमंडलीय लेखापाल से यह अपेक्षा की जाती है कि वे नियमानुार प्रमंडल के transactions में कार्यपालक अभियंता को परामर्श दें।" संवेदक को दिये गये Secured Advance की वसूल का दायित्व प्रमंडलीय लेखापाल का भी है। कार्यपालक अभियंता की यह जिम्मेवारी एवं दायित्व है कि उनके समक्ष प्रस्तुत किये गये विपत्र से सभी प्रकार के कटौतियाँ (Secure Advance, Mobilization Advance & Other Standard deduction) कर ली गयी है। प्रमंडलीय लेखापाल द्वारा सम्यक जानकारी कार्यपालक अभियंता को नहीं दिये जाने के कारण ससमय कटौती नहीं किये जाने के आरोप से कार्यपालक अभियंता बरी नहीं हो सकते है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष में कहा है कि एकरारनामा सं॰ SBD01/2010-11 के अन्तर्गत संवेदक को दिये गये प्रथम एवं द्वितीय Secured Advance क्रमशः रू॰ 1639861/- एवं रू॰ 2484491/- की वसूली एकरारनामा के Clause 10 B के तहत ससमय नहीं किये जाने के लिए मैं जिम्मेवार हूँ, के संबंध में कहना है कि - (i) संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष में स्वतः स्पष्ट है कि एकरारनामा के क्लाउज 10B के तहत ससमय वसूली नहीं किये जाने के लिए मुझे दोषी माना गया है यह भी अभिमत नियमानुसार नहीं है, क्योंकि किसी प्रकार की नियमानुसार वसूली हेतु प्रमंडलीय लेखापाल जो कि महालेखाकार कार्यालय द्वारा प्रतिनियुक्त पदाधिकारी होते है, कि अनुशंसा के आलोक में किया जाना है, उनके स्तर में संचिका उपस्थापित की जाती थी, तो मेरे स्तर उक्त कार्रवाई की गयी है। इसमें उक्त कार्रवाई विलम्ब से ही सही परन्तु इसमें सरकारी राजस्व की हानि नहीं हुई है। इसे प्रक्रियात्मक विलम्ब कहा जा सकता है, जिसमें मेरा कोई दोष नहीं है।
(6) इस संबंध में यह भी कहना आवश्यक है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन दिनांक 19.12.2019 को समर्पित किया गया था एवं उक्त प्रतिवेदन के आलोक में लगभग एक वर्ष 9 महीने बाद एवं मेरे सेवानिवृति के बाद द्वितीय कारण पृच्छा की गयी है। इस संबंध में मैं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 2763 दिनांक 26.02.2014 की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ, जो कि विभागीय कार्यवाही का कालबद्ध निष्पादन एवं उसे ससमय तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद दो माह में निर्णय लिया जाना अपेक्षित है। इस विलम्ब में मेरा कोई दोष नहीं है। चूँकि मैं दिनांक 31.12.2019 को सेवानिवृत भी हो चुका हूँ, तो मेरे उपरोक्त तथ्यों पर सहानुभूमि पूर्वक विचार करते हुए आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- आरोप सं॰-1 :- एकरारनामा में Price Escalation के लिए Clause 10C का प्रावधान है। जबकि Clause 10CA एवं 10CC का प्रावधान नहीं है। एकरारनामा के Schedule-F में स्पष्ट रूप से अंकित है कि विषयांकित कार्य हेतु Clause 10CC applicable नहीं है। अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 463 दिनांक 30.03.2012 द्वारा उक्त कार्य के लिए मार्च, 2013 तक की अवधि विस्तार की स्वीकृति इस शर्त के साथ दी गयी कि अवधि विस्तार के कारण संवेदक को कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ देय नहीं होगा। पुनः कार्य की समाप्ति हेतु अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 104 दिनांक 21.01.2014 द्वारा द्वितीय अवधि विस्तार की स्वीकृति दिनांक 31.03.2015 तक इस शर्त के साथ दी गयी कि संवेदक को मूल एकरारनामा में दर सामंजन संबंधी कंडिका 10CA के प्रावधान अतिरिक्त कोई अन्य दावा मान्य नहीं होगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा SBD के Clause 10CC के तहत Price Escalation Bill का अनियमित भुगतान किया गया, जबकि एकरारनामा के इतर किसी भी तरह का भुगतान नियमानुकूल नहीं माना जा सकता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेख किया है कि संवेदक को Contract of Clause 10 CC के तहत Price Escalation Bill का भुगतान उनके द्वारा दिये गये Undertaking (Price escalation के विपत्र में विवाद होने पर पूरी जिम्मेवारी उनकी होगी) के पश्चात किया गया। किन्तु, श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का उक्त बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि कार्यपालक अभियंता को विभागीय नियमानुसार एवं एकरारनामा में निहित शर्त्तो के आलोक में कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। श्री प्रसाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पदीय दायित्व का निर्वहन उक्त के संदर्भ में नहीं किया गया। इस प्रकार एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11 में Price Escalation मद में42 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 Clause 10CA के बजाय 10CC के तहत किये गये 104.27989 रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्पश्चात उक्त राशि की वसूली के कारण हुए उत्पन्न विवाद के लिए श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता दोषी हैं। आरोप सं॰-2 :- उपरोक्त आरोप के संदर्भ में श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि प्रमंडलीय लेखापाल से यह अपेक्षा की जाती है कि वे नियमानुसार प्रमंडल के transactions में कार्यपालक अभियंता को परामर्श दे। संवेदक को दिये गये Secured Advance की वसूली का दायित्व प्रमंडलीय लेखापाल का भी है। कार्यपालक अभियंता की यह जिम्मेवारी एवं दायित्व है कि उनके समक्ष प्रस्तुत किये गये विपत्र से सभी प्रकार की कटौतियाँ (Secured Advance, Mobilization Advance & Other Standard deductions) कर ली गई है। इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिहार लोक निर्माण संहिता के कंडिका 39 एवं 21 से 23 का जिक्र किया गया है। परन्तु, प्रमंडलीय लेखापाल द्वारा सम्यक जानकारी कार्यपालक अभियंता को नहीं दिये जाने के कारण उनके द्वारा ससमय कटौती नहीं किये जाने के आरोप से कार्यपालक अभियंता बरी नहीं हो सकते है। इस प्रकार, एकरारनामा सं॰ SBD-01/201-11 के अन्तर्गत संवेदक को दिये गये प्रथम एवं द्वितीय Secured Advance क्रमशः रू॰ 1639861/- एवं रू॰ 2484491/- की वसूली एकरारनामा के Clause 10B के तहत ससमय नहीं किये जाने के लिए श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता दोषी हैं।
निष्कर्ष :- आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर के समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत पर आरोप सं॰ 1 एवं 2 प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अरविन्द प्रसाद (ID-3442), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की स्थायी रूप से रोक'। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1318 दिनांक 03.06.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2323 दिनांक 23.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति में श्री अरविन्द प्रसाद (ID-3442), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है। '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की स्थायी रूप से रोक'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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7 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-01/2014-2382--श्री सुन्दर साहु (ID-J7498), तत्कालीन सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध दरियापुर वीयर एवं इससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य में प्रमंडलीय लेखापाल के अभ्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं पर विभागीय निदेश के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच कराया गया। उक्त के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री साहु के विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। तत्पश्चात सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1042 दिनांक 23.05.2019 द्वारा श्री साहु के विरूद्ध आरोप पत्र में वर्णित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा की गई। श्री साहु के दिनांक 31.01.2020 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-65 सहपठित ज्ञापांक-982 दिनांक 02.09. 2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। समीक्षोपरान्त उनसे संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोप के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक-996 दिनांक 03.09.2021 द्वारा निदेशित किया गया। उक्त के आलोक में श्री साहु द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) प्राप्त कराया गया, जिसकी समीक्षा निम्नवत है :- आरोप सं॰-1 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा अन्तर्गत दरियापुर वीयर एवं उससे निस्तृत प्रणाली के निर्माण कार्य का एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11 में Price Escalation मद में Clause 10CA के बजाय 10CC के तहत किये गये 104.27989 लाख रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्पश्चात उक्त राशि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। बचाव बयान :- (i) श्री सुन्दर साहू, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उल्लेख किया गया है कि - संवेदक द्वारा दिनांक 23.11.2012 को कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, शेखपुरा से Escalation Bill भुगतान हेतु अनुरोध किया गया है (छायाप्रति संलग्न-ANX-I) लेकिन 10C Clause अस्पष्ट रहने के कारण ही भुगतान नहीं किया गया। एकरारनामा में अस्पष्टता के कारण ही प्रमंडल से भुगतान नहीं होने पर संवेदक43 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल सं॰-2, जमुई को अपना अभ्यावेदन दिनांक 13.05.2013 संबंधित Undertaking लेकर एवं उसे सत्यापित करते हुए अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल सं॰-2, जमुई अपने पत्रांक 391 दिनांक 15.05. 2013 (छायाप्रति संलग्न ANX-III) द्वारा कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, शेखपुरा को भुगतान हेतु निदेशित किया गया एवं उस निदेश के आलोक में ही कनीय अभियंता ने संवेदक के द्वारा समर्पित Escalation विपत्र को ही हू-ब-हू M.B में अंकित किया गया जिसका मेरे द्वारा कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, शेखपुरा को अग्रसारण किया गया है, क्योंकि संवेदक को Conditional Payment किया जाना था एवं हमारे द्वारा कोई तकनीकी जाँच करने की आवश्यकता नहीं थी। अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल सं॰-02, जमुई द्वारा एकरारनामा में अस्पष्टता (10C) के कारण ही संवेदक का पत्र कि किसी प्रकार की विसंगति होने पर वे जबावदेह होंगे प्राप्त कर Escalation Bill भुगतान का आदेश दिया गया था।
इस संबंध में यह भी कहना आवश्यक है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना प्रतिवेदन दिनांक 19.12.2019 को समर्पित किया गया था एवं उक्त प्रतिवेदन के आलोक में लगभग 21 महीने बाद एवं मेरे सेवानिवृति के 20 माह पश्चात द्वितीय कारण पृच्छा की गयी है। इस संबंध में मैं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 2763 दिनांक 26.02.2014 की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ, जो कि विभागीय कार्यवाही का कालबद्ध निष्पादन एवं उसे ससमय तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद दो माह में निर्णय लिया जाना अपेक्षित है। इस विलम्ब में मेरा कोई दोष नहीं है।
इस संबंध में यह भी स्पष्ट करना है कि उक्त संबंधित मामला माननीय न्यायालय में लंबित है एवं संवेदक का Security Money एवं Earnest Money प्रमंडल द्वारा आजतक रोक रखा गया है जो उनके Undertaking (Conditional Payment) के अनुसार फलाफल के आधार पर वसूलनीय है।
चूँकि मैं दिनांक 31.01.2020 को सेवानिवृत हो चुका हूँ और मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। वैसी स्थिति में उपरोक्त तथ्यों पर सहानूभूतिपूर्वक विचार करते हुए आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- श्री सुन्दर साहु, सेवानिवृत सहायक अभियंता पर आरोप है कि एकरारनामा सं॰ SBD-01/2010-11 में Price Escalation मद में Clause 10CA के तहत 104.27898 लाख रूपये का अनियमित भुगतान किया गया। अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल-2, जमुई के पत्रांक 391 दिनांक 15.05.2013 में कहा गया है कि SBD के Clause 10C के अनुसार संवेदक को Escalation देय है। संवेदक द्वारा प्रस्तुत Escalation का विपत्र नियमानुसार जाँच कर संवेदक को Escalation का भुगतान की कार्रवाई की जाय। उल्लेखनीय है कि Price Escalation के लिए Clause 10C का प्रावधान है परन्तु Clause 10CA एवं 10CC का प्रावधान नहीं है। एकरारनामा के Schedule-F में स्पष्ट रूप में अंकित है कि विषयांकित कार्य हेतु Clause 10CC applicable नहीं है। अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 463 दिनांक 30.03.2012 द्वारा उक्त कार्य के लिए मार्च 2013 तक की अवधि विस्तार की स्वीकृति इस शर्त्त के साथ दी गयी कि अवधि विस्तार के कारण संवेदक को कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ देय नहीं होगा। पुनः कार्य की समाप्ति हेतु अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना के पत्रांक 104 दिनांक 21.01.2014 द्वारा वित्तीय अवधि विस्तार की स्वीकृति दिनांक 31.03.2015 तक इस शर्त के साथ दी गयी कि संवेदक को मूल एकरारनामा के अतिरिक्त कोई अन्य दावा मान्य नहीं होगा। इससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा SBD के Clause 10CC के तहत Price Escalation Bill का अनियमित भुगतान किया गया जबकि एकरारनामा के इतर किसी भी तरह का भुगतान नियमानुकूल नहीं माना जा सकता है। उक्त अनियमित भुगतान की वसूली किये जाने के कारण विवाद उत्पन्न हुआ और संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में CWJC दायर किया गया।
अतएव श्री सुन्दर साहु, सेवानिवृत सहायक अभियंता उक्त अनियमित भुगतान संवेदक को करने एवं उससे उत्पन्न विवाद के लिए दोषी हैं। निष्कर्ष :- श्री सुन्दर साहु, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत पर आरोप सं॰-(1) प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोप के लिए श्री सुन्दर साहु (ID-J7498), तत्कालीन सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की 10 (दस) वर्षों तक रोक'। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1319 दिनांक 03.06.2022 तथा पत्रांक-1993 दिनांक-18.08. 2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2449 दिनांक 28.09.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति मे श्री सुन्दर साहु (ID-J7498), तत्कालीन सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।44 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 '50% (पचास प्रतिशत) पेंशन की 10 (दस) वर्षों तक रोक'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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10 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-06/2019-2391--श्री श्याम कुमार यादव (आई0डी0-4046) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बाढ़ 2019 की अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अन्तर्गत तीन (03) अदद कटान/टूटान बिन्दुओं यथा नरूआर, गोपलखा एवं रखवाड़ी स्थल का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशाें का उल्लंघन करने तथा कर्त्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1731 दिनांक 13.08.2019 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1223 दिनांक 16.10.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
1. अभियंता प्रमुख के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक 26.07.2019 में अंकित है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या-2 झंझारपुर के अंतर्गत बाढ़ अवधि 2019 में विभिन्न कटान/टुटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंता द्वारा कटान वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्यवाही नहीं की जा रही थी। न ही, इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी ही देखी गयी, जबकि विभागीय वेतार सं0 129 दिनांक 14.07.2019 के द्वारा सभी कटाव बिन्दुओं की बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने का निदेश क्षेत्रीय पदाधिकारी को दिया गया था।
2. बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किया गया। 3. आप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अंतर्गत तटबंधों की सुरक्षा हेतु जिम्मेवार पदाधिकारी रहने के बावजूद इसमें न केवल विफल रहे बल्कि बाढ़ तटबंधों के कई स्थलों पर टुटने के पश्चात जब विभाग की ओर से तटबंधों को हर हाल में सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये, उसके उपरांत भी आपके द्वारा इस ओर आवश्यक ध्यान न देकर आदेश की अवहेलना की गयी। इसके फलस्वरूप अभियंता प्रमुख द्वारा जब दिनांक 22.07.2019 को नेरूआर कटाव स्थल का निरीक्षण किया गया तो यह पाया गया कि रात 9.30 बजे के बाद कार्य बन्द था, जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीन पालियों में) तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था. जो नहीं किया गया। इस प्रकार यह न केवल विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन है वरन बाढ़ जैसी विभीषिका में प्रभावित होने वाले जन मानस की कठिनाईयों के प्रति आपकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित की गई। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री यादव के विरूद्ध आरोप सं0-01 को प्रमाणित, आरोप सं0-02 को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं आरोप सं0-03 का प्रथम अंश को अप्रमाणित एवं द्वितीय अंश को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। तत्पश्चात मामले की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत आरोप सं0-01 को प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से सहमत होते हुए, आरोप सं0-02 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से असहमत होते हुए तथा आरोप सं0-03 के प्रथम अंश को अप्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से असहमत होते हुए एवं आरोप सं0-03 के द्वितीय अंश को प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से सहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री यादव को प्रेषित करते हुए विभागीय पत्रांक-502 दिनांक 07.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। विभागीय कार्यवाही संचालन के कालक्रम में श्री यादव के दिनांक 28.02.2022 को सेवानिवृत होने के कारण सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-59 सहपठित ज्ञापांक-759 दिनांक 04.04.2022 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया।
श्री यादव द्वारा अपना लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) विभाग को समर्पित की गई। जिसमें उनके द्वारा निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
Regarding charge no.1, the undersigned is to state and submit that due to unexpected discharge in Kamla Balan River from dated 13.07.2019 to 14.07.2019, under this division, left embankment at km 7.0 and right embankment at km 40.60, km 47.30, km 55.80, km 57.30, km 71.40&km 79.60 damaged. The effect of maximum discharge flowing on Kamla Weir at Jainagar site on 13.07.2019 remained till 14.07.2019 up to the end of Kamla Balan River, due to which flood fighting work had to be done at many points of right embankment and Compliance of departmental wireless narrated report no.129, dated 14.07.2019 was possible only from 15.07.2019 in the lower parts. It may be noted that since 12.07.2019, the Chief Engineer and the Chairman, Flood Fighting Force were camping in Jhanjharpur and all the flood fighting work were being done under their directions. The works/actions of cut-end protection at all cut-points except the cut-point at km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha were started from the date 14.07.2019 and 15.07.2019 itself. It has also been mentioned by the Central Flood45 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 Control Cell, Sinchai Bhawan, Patna in its daily flood report dated 14.07.2019 that action is being taken to secure and hold the cut ends of the above sites by conducting flood fighting works. From 15.07.2019 itself, the work of constructing a hutment has been started at Km 47.30 Naruar site. Immediately after constructing a hutment with polythene sheets and bamboos, the banner of Water Resources Department was also put up. But the farmers whose houses were damaged by the breach of embankment near Naruar village (km 47.30) were bent on not allowing to start the work till adequate compensation was received. For this reason, as soon as the banner of the Water Resources Department was put up by making a hutment, it was demolished by the local people and thrown into the river and the working labourers were also driven away. The flood victims of Km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha had encroached upon the top of the embankment (the only escape route for the movement of materials) and started living in hutments with cattle, which made it impossible to carry construction materials. Due to non-availability of local sand within 3 km due to excessive waterlogging and water-logging in the river side and country side around the breached site, it was not possible to start the sand filling work around the breach site Naruar and Gopalkha. Due to nonavailability of sand nearby, the contractor was expressing inability to start the work at these breach sites as only 3 km lead has been provided for transportation of local sand in the scheduled rate book. The need for departmental instructions was also felt by the Chief Engineer, samastipur in making provision for more leads. From the date 15.07.2019 itself, the traffic was blocked by the villagers by putting a barrier on the embankment near Naruar, due to which the sand filled cement bags after filling the already available sand were tried to start the work at the site, but had to unload near the barrier due to traffic blockade. In order to start the work by removing the encroachment on the embankment near village Gopalkha and Naruar, the undersigned requested the District Magistrate, Madhubani vide letter no. 01 Camp Thengha dated 16.07.2019, in addition to the telephone. On 15.07.2019, with the help of some local people, transportion of empty Cement Bags at Km 40.60 Gopalkha, sand filling at source point and carrying bamboo for making temporary hutment from polythene sheets were started. On 16.07.2019 all detailed information about sites before site inspection was given to Engineer-In- Chief (Flood). It was also informed that the work of cut end protection has been started at all the breached sites except Naruar and Gopalkha. But flood victims of Naruar and Gopalkha are not allowing to take action till they get adequate compensation and the road has been blocked by barriers. After giving such information, site inspection was done by him on motor cycle itself. There was no success in getting the work done by the end of 18.07.2019 before noon even after joints efforts made by SDM, Jhanjharpur and SDPO, Jhanjharpur. On 18.07.2019 after noon it was decided to start the work in Naruar and Gopalkha from 19.07.2019 after meeting with the District Magistrate, Madhubani /Superintendent of Police, Madhubani / Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur/Chief Engineer, Samastipur and other senior regional engineers including the undersigned. Again on 19.07.2019, during the deliberations to start the work in the divisional office, Jhanjharpur, the engineers and administrative officers were assaulted by the local people, whose FIR was also registered in the local police station. In the afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also tried to start the work by coming to the said place, but the result was zero. An allegation has been made by the department for not taking action to safeguard all the three places mentioned in the inspection report by the Engineer-in-Chief, Flood namely Naruar Cut Point, Gopalkha Cut Point (under undersigned jurisdiction, Flood Control Division-02, Jhanjharpur) and Rakhwari Cut Point (under Flood Control Division-01, Jhanjharpur). but in similar circumstances, only the officials related to Naruar and Gopalkha cut point have been accused, but the officials of Flood Control Division- 01, Jhanjharpur have not been accused of not taking action to protect the cut-point. It is clear that the department also considers this allegation to be baseless. On 16.07.2019, the Engineer-in-46 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 Chief, Flood determined the nature & scope of work at all the cut points and handed over the same to the Chief Engineer. The reason for not taking action to secure the above said breach part by the field engineers and not showing any preparation in this regard has been given itself by the Engineer-in-Chief, Flood such as encroachment by the displaced villagers at the work site, after removal of the encroachment to use that place for material storage or other work, to get help from the district administration to remove encroachment on the site, not to get sand nearby to fill the local sand in empty cement bags, to get the work done by bringing it from wherever local sand is available and directing the approval to be given to the Chief Engineer. Apart from this, it is clear from the perusal of the above paragraphs that the then unforeseen circumstances such as the local people breaking the hutment and throwing it in the river, the villagers blocking the traffic by putting a barrier to the embankment, the tractor laden with sand filled cement bags is not permitted to move on the site, thrashing the labourers away by the villagers, beating up the engineers/administrative officials in the divisional office (with whose cooperation the Engineer- In-Chief's direction to remove the encroachment on the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done) etc. In spite of this, apart from other cut points, the work of Naruar and Gopalkha cut end protection was done by trying as much as possible. However, due to public protest and law and order situation till 19.07.2019 afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also did not get success in starting the work. C. When such submissions were made then the Respected inquiry officer in his report dated 24.02.2021 held the charges not proved with the reasoning that on the basis of site inspection report of Engineer-In-Chief, Flood dated 16.07.2019, it has been alleged by the Department against the undersigned that no action was being taken and no preparation was seen in this regard to secure the erosion part by the regional engineers at various cutting/breach points under Flood Control Division-2, Jhanjharpur. It is clear from the perusal of the Appendix and Khairiyat reports attached with the defence statement that in the working area of the accused officer, apart from only two cut/breach points, Km 47.3 Naruar of right embankment and Km 40.6 Gopalkha of right embankment, cut end protection at remaining cut/breach points was started from 14.07.2019 and 15.07.2019 itself. In the order of inspection on 16.07.2019, it has been mentioned by the Engineer-In-Chief in the same inspection report regarding not initiating the action to secure the cut-end points at the two cutting/breach points mentioned in the working area of the accused officer, Naruar and Gopalkha that flood victims have encroached on the embankment by making temporary camps and in the course of inspection dated 21.07.2019, the Chief Engineer was also told that there is no public protest now. Apart from this, it also appears from the perusal of the appendices attached by the undersigned that in the then relevant circumstances like breaking the hutment built on date 15.07.2019 at Naruar site by the local people and throwing it in the river, the villagers blocked the traffic by putting barriers to the embankment, not allowing tractor laden with sand filled cement bags to go to the site, villagers beat up the labourers and drive them away,to beating up the engineers and administrative officers in the divisional office (with whose co-operation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment at the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done), public protest and law and order situation till 21.07.2019 before noon. Despite the efforts made by the District Magistrate, Madhubani and the Superintendent of Police, Madhubani, the reasons for not getting success in starting the work, etc., can be considered as a hindrance in the progress of the work. It is worth mentioning that apart from this, cut-end protection work had started at other cut-end points, which is also clear from the khairiyat report issued by the departmental flood control. It is clear only from the observation of the inspection report of the Engineer-in-Chief that from 16.07.2019 to 21.07.2019, despite camping at the site by the Engineer-in-Chief and getting the meeting/co-operation with the District Magistrate/Superintendent of Police, the action to secure the above two cuts/breach points, Naruar and Gopalkha could not be started till the47 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 forenoon of 21.07.2019. D. Thereafter, as per dictates and orders of the superior authority, the witness was examined by the Respected inquiry officer himself and on the basis of such deposition, the Respected inquiry officer in his inquiry report dated 17.09.2021 held the said charge proved. The undersigned is shocked to understand the change in the finding by the Inquiry Officer. In fact, Sri Rajesh Kumar, Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna, appeared on 18.08.2021. The witness was examined by the Respected inquiry officer himself whereby the witness stated that what he wrote in writing is true Since Sri Rajesh Kumar is the highest posted engineer in the department, it is not considered appropriate to answer any question asked by the undersigned, thereby the undersigned was denied the opportunity to cross examine the said witness. The examination of the said witness was neither immediately recorded on the hearing record by the Respected inquiry officer as he was busy in asking question which is the role of the Presenting Officer. The Respected inquiry officer acted as Presenting Officer. E. It is humbly submitted that Engineer-in-chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna inspected the breach sites of the embankment which breached due to unexpected discharge flowing in Kamla Balan River on 13.07.2019/14.07.2019 and submitted the inspection report to the department vide his letter no.142 dated 26.07.2019. In the first part of the inspection report, along with the list of those breached sites, the details of the jurisdictions are also mentioned. From the observation of which it will be clear that the jurisdiction of the undersigned is only village Naruar and village Gopalkha under Flood Control Division-2, Jhanjharpur in the inspection done on 16.07.2019, and Village Rakhwari under other Executive Engineer i.e., under Flood Control Division-1, Jhanjharpur, jurisdiction of another Executive Engineer. It has also been mentioned by the Engineer-inChief that the situation was the same at all the three sites, but in the information received under the Right to Information Act, it is mentioned in the first paragraph of note sheet page no.-02 of the file that the three sites of breaches i. e. village -Naruar, Gopalkha and Rakhwari are located under the working area of the undersigned (Executive Engineer, Flood Control Division-2, Jhanjharpur). In this way, departmental proceedings were initiated against the undersigned only after obtaining approval from the competent administrative authority by recording the incorrect facts on the note sheet while others like Executive Engineer, Flood Control Division-1, Jhanjharpur were deliberately kept free from these charges. It is mentioned in paragraph nos. 1 and 2 of the report sent by the Respected inquiry officer that the inquiry report submitted earlier was submitted on the basis of review of the defence statement of the undersigned and the records which were obtained from the Central Flood Control Cell in which this allegation was found to be unproved. Again, in the light of the examination of the witness by the inquiry officer, the same allegation has been substantiated without checking the veracity of the statement of the witness from any other records. Considering the statement of the Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna as factual in his report by the Respected inquiry officer, is contradictory in itself. The reply of the witness has not been verified by the Respected inquiry officer from the records which have already been attached as annexure by the undersigned. Hence, in view of such submission, the undersigned may kindly be exonerated from the said charge. As regards charge no.2, it is humbly stated and submitted that the undersigned was continuously monitoring the embankment since 10.07.2019 on getting information about increase in discharge of the river. This is confirmed in the morning of 13.07.2019 between 1:00 to 1:30, when the deputed home guards were not found on their duty in order to patrol between km 52.00 and 58.00, then it is also informed by giving information to the District Magistrate, Darbhanga through N.R. No.50. In the morning of 13.07.2019, District Disaster Management, Madhubani and thereafter the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna instructed to go at Jaynagar on the mobile with the information of storm (wave) discharge in Kamla Balan river, Assistant Engineer Jaynagar48 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 Immediately to reach Jainagar Weir, the undersigned left for Jainagar after instructing the Subordinate Assistant Engineers/Junior Engineers to stay on the embankment with contractors, labourers, sand filled bags, geo bags, GT Filters etc. to deal with any odd situation. Shortly after this, water started coming out from the top of the weir, breaking the guide bundh/marginal bundh (under irrigation division, Jainagar) of Kamla weir located in Jainagar due to unexpected discharge in the Kamla Balan River. Shortly after that, after getting the information of uncontrolled seepage near village Sukki (10.50km), informing the Superintending Engineer/Chief Engineer over the phone, reaching Sukki site and getting the seepage controlled, by the Junior Engineer at Village Terha (LKBE 7.50 km) was reported to have seepage. Due to the breaking of the guide bundh of Jainagar weir, the traffic on the left embankment from Jainagar was stopped and the assistant engineer in charge got stuck on the weir itself. The seepage could be controlled immediately by sending the contractor of that area to the Terha site through mobile. The entire embankment came into a state of super sensitivity from around 2.00 o'clock in the day itself and as per the departmental instructions, the superintending engineer in Jaynagar, the undersigned in Sukki, the assistant engineer, Naruar and chairman, FFF at village Kaithwar (Km 55.60 sluice) started flood fighting work at different sites. In the meanwhile, there are many places in the D/S of Sukki village, mainly Km 16-17 (Chatra Kanhauli), Km 32.00 (Tilay Dhala), Km 32.60, Km 36.0 (Khaira Dhala), Km 36.50.37.40 (Banaur) and Km 38.00 (Ram khetari) started getting information of seepage/piping which were controlled successfully. It is noteworthy that only one Junior Engineer was working under Flood Control Sub Division, Jhanjharpur (working area from km 14 to 44), while the strength of four Junior Engineers is approved. Timely information about the terrestrial situation was being given on mobile and on FCD-1&2, Jhanjharpur whatsapp Group. At around 6.00 pm, the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna, gave instructions to control the continuous piping near Km 55.80 (Kaithwar Sluice) on the mobile. Chief Engineer and his Technical Secretary had reached Sukki site, the undersigned left for Kaithwar.By this time, in addition to the places mentioned in para-5, seepage has also started at Km 43.02 (MehathDhala), Km 44.20 (Samiya Dhala), Km 45.80 (Gadia), Km 48.10 (Naruar), Km 49.80 to Km 50.00 and as per the instructions, the site was completely controlled by conducting flood fighting work. Before reaching Km 55.60, the information about the damage to the embankment at Km 7.50 (Terha) of LKBE was given to the Chief Engineer, Department and Madhubani Administration. Also, by the concerned Assistant Engineer it was posted at 7:58 pm in the FCD-2, Jhanjharpur WhatsApp Group. Here continuous piping was going on from the sluice located at KM 55.80, which tractor etc. At around 11.45 pm, it was informed by Sri Yogendra Kumar, Junior Engineer in-charge of Naruar village site that uncontrolled piping has started suddenly at four places around 47.30 km and seeing this scene, the workers have fled from there. According to the advice of the Chairman, Flood Fighting Force and the Chief Engineer present at Km 55.80, the Assistant Engineer was sent to the site with sufficient labourers and sand bags. Simultaneously, the Junior Engineer was directed that immediate action should be taken to secure the embankment by taking labourers from the adjacent site. At around 12.30 night, the Assistant Engineer informed about the damage to the embankment at km 47.30, which was informed to the Department and District Magistrate, Madhubani through mobile. In spite of tireless efforts to control the simultaneous seepage/piping at several sites between Km 58.00 to 90.00 of the right embankment as the highest water flow continued to travel D/S. Kaithwar (Km. 55.80), The embankments at Kakodha (Km 57.30 to 57.50), Kumraul (Km 71.40) and Mansara (Km 79.60) could not be saved. The information about the damage to the embankment was given to the concerned district magistrate along with the department. The details of the work done every day have been given to the Superintending Engineer/Chief Engineer/Central Flood Control Cell in the form of progress report. It is necessary to mention here that the Chief Engineer was49 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 continuously camping in Jhanjharpur and all the flood fighting works have been done only on the advice of his direction and chairman, Flood Fighting Force. It is clear from the above sequence of events that between date 13.07.2019 to 14.07.2019, during the unexpected discharge in Kamla Balan, I have strictly followed the standard operating procedure (SOP) laid down by the department under the direction of my senior officers/Chairman, flood fighting force. There has been no lapse or negligence in this, but the Standard Operating Procedure (SOP) has been followed promptly. J. The Respected inquiry officer in his inquiry report dated 24.02.2021 held the said charge not proved against the undersigned on the grounds that in Paragraph 4.4 of the Standard Operating Procedure, mainly the following instructions are mentioned for the Executive Engineer, as soon as the sensitivity of the site from any source is known, reaching the site within two hours and ensuring the implementation of the desired work for its safety and in this regard the Superintending Engineer / Chief Engineer / Chairman, Flood Fighting Force / Informing the concerned District Officer, enrolling any of the listed contractors for emergency work and getting the work implemented, the water level of the river above the warning level or the river water in the toe of the embankment then from the Executive Engineer to the Junior Engineer, patrolling day and night, reporting the absence of home guards to the district administration, etc. On the basis of the continuous rain since 12.07.2019 and the information given by the Meteorological Department, on 13.07.2019, in the light of the warning of heavy rain by the District Disaster Management, Madhubani, in addition to the accused officer, the Superintending Engineer / Chief Engineer / The Chairman, Flood Fighting Force were camping on the embankment since 12.07.2019, which is also confirmed by the perusal of attached documents. By camping at the site of all the senior officials, it can be assumed that all the concerned were informed. There is no reporting by the senior officials for not being present at the place of the undersigned. The wireless communication made by the undersigned to the district magistrate and the department regarding the absence from the home guard's place shows that action was being taken by the undersigned. Compliance of the instruction mentioned in Para 4.4 of the Standard Operating Procedure may not be possible for all the cut points in case the river flow exceeds 1.66 times the designed water flow and flows in free-board where almost the entire embankment is in a state of incombustibility. The flood fighting works were being done under the direction of the department and senior officials and at different places by various level officials (including Chief Engineer/Technical Secretary/ Chairman, Flood Fighting Force). When the witness was examined and questions were asked by the Respected inquiry officer himself and not by the Presenting Officer, the said witness merely tendered that with regard to the point of allegation by the Engineerin-Chief, Flood Control & Drainage, he said that this is true. This allegation has not been proved by the Respected inquiry officer in earlier inquiry report, whereas at the time of examination of the witness, without any additional record or evidence, it is partially proved which is impermissible both in law and on facts. Regarding charge no.3, it is humbly stated and submitted that the details of the actual condition of the site due to discharge in Kamla Balan River on 13.07.2019 and 14.07.2019 are mentioned in the defence statement of charge no. 2. The preparation made on the embankments / the status of the structures located on it and the report of the high level committee in which the reasons for the damage to the embankment are mentioned as follows:On the basis of the experience of the last years, adequate quantity of construction materials such as sand-filled bags and contractors were engaged in the work along with the labourers at all the identified sites. Due to continuous rainfall in the catchment area of Kamla Balan River, increase in discharge was being recorded from 10.07.2019. All the subordinate assistant engineers/junior engineers were being instructed to be alert and vigilant in their respective areas through the WhatsApp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur. In this group, moment to moment information was being given about the status of the river/embankments and the department was constantly being aware of this information, which50 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 can be confirmed even today by observing the above WhatsApp group and can also be confirmed by other concerned officials. Unexpected discharge 6223.94 cusec (2,19,705 cusec) in Kamla Balan River as on 13.07.2019 which was much higher than the design discharge of 3747cumec (1,40,000 cusec) in Kamla Balan River. This is confirmed by the discharge report made available vide letter number 33 dated 14.08.2019 of CWC Patna. Due to unexpected discharge in the Kamla River, the water level started flowing in the free board of the embankment as prima facie. In places where the village are situated in C/S, the villagers have encroached on the embankment and also damaged its toe/slope and use it for private use, due to which the encroachment case was filed with the concerned circle officer in the past. In such a situation, seepage / piping started simultaneously at many places of the embankment, which is also confirmed by the inspection report of the Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna. On reaching the discharge near Jhanjharpur rail bridge in the evening of 13.07.2019, the water level started increasing due to afflux in the U/S. Sakri Jhanjharpur railway line, which was earlier Meter Gauge, along with Broad Gauge conversion, the level of rail was raised by more than 3.5 meters, information provided by east Central Railway but no provision of additional waterway for smooth flow was made rather between both the embankments, waterway was jacketed. Similarly, NH.57 which passes through km 44.00 of the right embankment of Kamla Balan River, due to the low effective waterway of the river, there was difficulty in getting discharge in d/s section. Similarly, as a result of the road bridge constructed in Km 59.50 of Sutharia and Km. 74.80 of Rasiyari, due to the less effective waterway, the water level of the river in U/S of bridges continued to flow for a long time within the free board of the embankment and to create pressure on the embankment due to failure in HG Line. Some of the reasons for the damage to the embankments have been mentioned by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna from departmental letter number 2605 dated 02.08.2019:-(a) The maximum discharge from Jaynagar weir on 13.07.2019 was 6223.94 cumec which was 1.66 times more than the maximum of 40 years discharge of 3966 cumec (1,40,000 cusec). Along with this, due to large scale congestion from the discharge of Koshi, Kareh and Kamala Balan river below the Phuhiya site of right embankment of Kamla Balan River, the Jayanagar weir site will have maximum discharge due to water logging in the entire Kamla River channel. The water level of the entire channel has been raised due to ingress, resulting in sudden increase in pressure on the embankment, which has led to breaches at many places on the embankments. (b) Effective waterway between the embankments was found to be less than 106 m to 214.87 m from Lacey's waterway of the embankment, creating additional afflux in the embankment in U/S of those structures and forcing the flowing discharge to go into the free board of the embankment. (c) Agreeing with the above recommended suggestions in para-5, the departmental letter number- 3092 dated 13.09.2019 requested all the concerned departments to make provision for additional waterways as per rules. CENTRE FOR TRANSPORTATION SYSTEM (CTRANS) INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY, ROORKEE Prof. Nayan Sharma presented an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan River embankment. Against the finding, it was found that the current constriction in Kamla Balan River is in the range of 17.6 percent to 70.00 percent. According to the report, the distressing outcome of acute waterway obstructions (of the order of 50% to 70% constriction, imposed by bridges across the Kamla Balan River could be recognized to be the prime contributing factor in creating very high Afflux HFLs in an anticipated range of 2m to 3m over natural flood levels. Earlier, in the course of the study of unexpected discharge in Kamala Balan by FMISC, Patna, it was found that the right Kamla Balan Embankment would have to raise the upper surface due to new HFL in its almost entire length. It is clear from the above report that on 13.07.2019, almost in the entire length of the river, the discharge flowing from51 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 Jainagar has created the new HFL, due to which outside the C/S slope of the embankment, it has passed outside saturation line through several places simultaneously and some places due to piping outside the toe.But the embankment was damaged which could not be saved. Referring to the reasons for the breach in Kamla Balan embankment by the Hon'ble Chief Minister, Bihar, it was told in the Legislative Council that on 12th and 13th July, 2019, the situation of a flash flood arose in Nepal due to heavy rainfall. Due to excessive discharge, Kamla Balan right embankment got damaged at six places and Kamla Balan left embankment at two places. It can be seen at Sl. no. 87 of the Departmental website's Videos Gallery. Information has also been given to the media by the Hon'ble Minister, Water Resources Department, Patna regarding the reasons for the damage to the Kamla embankment, which can be seen on the Sl. no.86 of the Departmental website's Videos Gallery. J. The Respected inquiry officer has exonerated the undersigned from the charges on the ground that in the facts given by the undersigned in his defence statement, the following reasons have been mentioned in relation to the damage of the embankment, such as, during the flood, under the direction of the senior officials, the flood fighting work was done, the unexpected discharge in the Kamla Balan river 6223.94 cumec (2,19,705 cusec) which is 1.66 times more than that of Kamla Balan's design discharge 3966 cumec (1,40,000 cusec), the water level entering the free board of the embankment due to unexpected discharge in the Kamla river, continuous seepage/piping due to excessive discharge (inspection report of Engineer-InChief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna), dedicated report by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna, for reasons of breach, Centre for Transportation System, IIT Roorkee Prof. Nayan Sharma submitted an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan river embankment, On the basis of the report submitted to the department by FMISC, Patna of unexpected discharge in Kamla Balan, it can be assumed that the cause of damage to the embankment was the unexpected discharge in the river. K. Now in view of present inquiry report along with letter dated 07.03.2022, it is stated and submitted that in respect of charge no.2 and charge no.3 (first part), disagreement has been expressed with the opinion of the Respected inquiry officer by stating that the design discharge in the report of the committee constituted under the chairmanship of the Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department, Patna is of Kamla Weir and not of the river. Under the head 'recommendation of the committee' part of the report mentioned above, it is mentioned in paragraph-1 that "due to the flow of maximum discharge and the flow of previously designed discharge, the assessment of newly design discharge and HFL has to be done". There is a need to go and accordingly the need to determine the formation level and section of the embankments was found. It is mentioned in paragraph-3 of the said report, "The maximum discharge reported by the Central Water Commission for the year 2019 is 6223.94 cumec, which is pointing towards an unexpected hydrological event, 166 percent more than the 3747 cumec of the last 40 years." It is clearly mentioned in the annexure to the said report that the peak discharge of 2019 is 6223.94 cumec. Please be aware that the Kamla River, entering the Indian land in the U/S part of Jainagar, flows through D/S of Jainagar weir and joins the Balan river near Km 26.0 of the left embankment, thus in the Balan river, it contributes its discharge. It is clear from the annexure attached with the letter that in the year 2012, the designed discharge of Kamla Balan River increased to 4000 сumec, which increased to 6223 cumec in the year 2019, which is more than one and a half times the designed discharge of the river. The design discharge of the year 2012 was decided jointly by the CWC, Government of Bihar and Government of Nepal. In the light of the above, it is clear that on the day of embankment breach in Kamla Balan River, maximum discharge flow occurred in the last 40 years, which was more than one and a half times more than the designed discharge. It should be known that the water flow in the river on the date of52 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 breach is more than one and a half times the design discharge of the river, not an argument, it is a fact based on records. It is further stated and submitted that after the co-operation of the local people and the tireless efforts of the administrative officials, it was possible to start the slope cutting work in the up-stream part from 2.00 pm on the date of 21.7.2019 can be started. It is to mention that the Engineer-in-Chief has said in his inspection report that in the afternoon of 21.07.2019, he inspected the Naruar site and as a result of the end of the public protest, he himself started the work at that site in his presence & directed to complete the flood fighting work by working day and night. It is not mentioned in his inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. On 21.07.2019 at 9:30 in the night, on receiving information about generator failure/non-functioning from some unknown source, Engineer-In-Chief from Inspection Bunglow, Jhanjharpur on 22.07.2019 morning, asked on the telephone in this regard from me. He was informed that due to generator failure at 9:30 P.M., the work was interrupted for some time, which was started again by installing a second generator under alternative arrangement and nylon crating work was done till 1:00 pm. After that the slope cutting work was done by JCB which is confirmed by the engineer deputed from outside division has made a remark of getting nylon crating work done by 1:00 am on the laying register, which certifies that the work is going on even after 9.30 pm. The work was interrupted only for a short while. After that the slope cutting work was done by JCB. It is noteworthy that the work of soil cutting / slope cutting is not recorded in the laying register. It is clear in the light of the above that due to the unexpected discharge, the water level encroached at all the places of Kamla Balan embankment started flowing in free board, which led to simultaneous piping/seepage at many places. In those places where piping started happening at many places and it was not possible to control it by well or other method, the embankment got damaged which resulted from the natural disaster of unexpected flood which can be confirmed by the reports of committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Patna and detailed marking in the report of IIT Roorkee and the information given by the Hon'ble Chief Minister / Hon'ble Minister's address to media. For this it is not fair to allege that the undersigned has failed despite being the responsible officer because the undersigned was constantly on the lookout and present on my duty.
श्री यादव से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाया गया :- आरोप सं०-1 :- यह आरोप अभियंता प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक 26. 07.2019 में उल्लेखित तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अन्तर्गत हुए विभिन्न कटान/टूटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं किये जाने एवं न ही इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी किये जाने से संबंधित है। इस संदर्भ में श्री यादव द्वारा बताया गया कि ग्रामीणों के विरोध के कारण कुछ स्थलों पर छोड़कर शेष पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बतलाया गया कि उनका प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण के उपरान्त दिया गया है एवं यह तथ्यात्मक है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है जिससे विभाग सहमत है। आरोप सं०-2 :- यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने से संबंधित है। आरोप सं०-3 (प्रथम भाग) :- यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद विफल रहने से संबंधित है।
इस संदर्भ में श्री यादव द्वारा बताया गया, कि उनके द्वारा SOP के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई की गयी एवं इससे संबंधित अभिलेख विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित भी किए गए हैं। नदी का जलश्राव रूपांकित जलश्राव से डेढ गुणा से अधिक बढ़ जाने के कारण पुरा तटबंध ही आक्रम्यता की स्थिति के आ गयी तो उनके लिए सभी विन्दुओं पर SOP का अनुपालन करना संभव नहीं था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बतलाया गया कि श्री यादव द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने का आरोप सही है। जबकि आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) के संबंध में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं53 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 जल निस्सरण ने बताया कि तटबंधो का कई स्थलों पर टूट जाना ही बताता है कि ये संचालन प्रक्रिया के अनुपालन में विफल रहे। परन्तु इस संदर्भ में श्री यादव द्वारा कतिपय अभिलेखों यथा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, पटना की अध्यक्षता में गठित समिति का प्रतिवेदन, IIT Roorkee के प्रो० नयन शर्मा का प्रतिवेदन एवं FMISC के Report के आधार पर बतलाया गया है कि तटबंध टूटने का कारण अत्यधिक जलश्राव का प्रवाहित होना था न कि इनका विफल रहना। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं॰ 2 कोे आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया है तथा आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) के अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। उपरोक्त दोनों आरोपों के संदर्भ में पुनर्समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के पूर्व के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि दिनांक 13.07.2019 को कमला बलान नदी में अप्रत्याशित जलश्राव 6223.94 क्यूसेक कमला नदी के रूपांकित जलश्राव 3966 क्यूसेक से काफी अधिक था। मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना की अध्यक्षता में गठित समिति के प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि कमला वीयर (संरचना) का रूपांकित जलश्राव 3966 क्यूसेक है, जिसकी पुष्टि भी Hdyrology Directorate से कराया जाना अपेक्षित बतलाया गया है। उक्त के आलोक में उल्लेखित रूपांकित जलश्राव कमला वीयर (संरचना) का परिलक्षित होता है न कि नदी का। प्रचलित कार्य प्रणाली के अनुसार तटबंध का निर्माण नदी के जल वहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है तथा समय-समय पर तटबंध का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य भी नदी के जल वहन क्षमता में परिवर्तन के मद्देनजर किया जाता है। अतएव तकनीकी दृष्टिकोण से संरचना के रूपांकित जलश्राव के आधार पर नदी के जल वहन क्षमता की तुलना किया जाना समीचीन नहीं है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में टूटान की तिथि को नदी में प्रवाहित जलश्राव का नदी के रूपांकित जलश्राव से डेढ़ गुणा से अधिक होने का तर्क स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव, श्री यादव के विरूद्ध आरोप सं॰ 2 एवं आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप सं0-02 एवं 03 का प्रथम भाग पूर्णतः प्रमाणित होता है। आरोप सं०-3 (द्वितीय भाग) :- यह आरोप अभियंता प्रमुख द्वारा दिनांक 22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल के निरीक्षण के दौरान रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाये जाने से संबंधित है जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया।
इस आरोप के संबंध में श्री यादव द्वारा बताया गया कि दिनांक 21.07.2019 के अपराह्न से नरूआर कार्य स्थल पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था परन्तु रात्रि में 9ः30 बजे जेनरेटर खराब हो जाने के कारण कार्य कुछ देर के लिए बाधित जरूर हुआ लेकिन शीघ्र ही दुसरा जेनरेटर लगाकर कार्य पुनः प्रारंभ किया गया एवं रात्रि 01ः00 बजे तक नायलन क्रेटिंग का कार्य किया गया एवं उसके पश्चात् स्लोप कटाई का कार्य जे०सी०बी० से किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य लेईग रजिस्टर में समय के साथ अंकित है। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा कहा गया कि श्री यादव द्वारा दिनांक 13.07.2019 एवं 14.07.2019 को तटबंध के टूटने के पश्चात् दिनांक 21. 07.2019 तक तटबंधों की सुरक्षा हेतु बिल्कुल ही लापरवाह रहे। यहाँ तक कि दिनांक 21.07.2019 को भी रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाया गया जबकि इस हालात में युद्ध स्तर पर 24 घंटे कार्य चलना चाहिए था। आकस्मिकता की इस स्थिति में कार्य का बीच में बंद हो जाना लापरवाही का घोतक है। उपर्युक्त परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है जिससे सहमत हुआ जा सकता है।
इस प्रकार श्री श्याम कुमार यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद विफल रहने एवं आकस्मिकता की परिस्थिति में भी युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास नहीं करने तथा 22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल पर रात 9ः30 बजे कार्य बन्द पाये जाने का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। श्री यादव द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में कोई नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है बल्कि पूर्व में तीनों आरोपों के संबंध में पूछे गये स्पष्टीकरण के संदर्भ में इनके द्वारा समर्पित किये गये बचाव बयान जैसा ही लगभग समरूप/सदृश बचाव-बयान दिया गया है। अतएव, इनके विरूद्ध आरोप पत्र में गठित सभी आरोप को प्रमाणित पाते हुए इनके द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर को अस्वीकार किया जाता है एवं प्रमाणित आरोप के लिए श्री यादव को दिनांक 28.02. 2022 को सेवानिवृत होने के कारण दिनांक 28.02.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" के दण्ड का निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री श्याम कुमार यादव (आई0डी0-4046), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर को दिनांक 28.02.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है :- "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(गया)24-02/2018-2398--श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3320), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध मनमाने ढंग से एवं नियम विरूद्ध कार्य करने54 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 से हुई वित्तीय अनियमितता के मामले में निम्नलिखित आरोपों की जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2375 दिनांक 18.11. 2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43बी के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। 1. श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया द्वारा माह सितम्बर' 2018 में सिंचाई प्रमंडल, गया में कार्यरत श्री अखिलेश शर्मा, मोहर्रिर का प्रमंडल में पदस्थापन के पूर्व का दूसरे प्रमंडल के अवधि दिनांक 10.01.1999 से वर्ष 2012 तक के वर्षो का अपने स्तर से विभिन्न छुट्टियाँ पूर्ण वेतन पर (उपार्जित अवकाश, अर्द्ध वेतन पर अवकाश एवं असाधारण अवैतनिक अवकाश एवं अन्य) की स्वीकृति प्रमंडलीय आदेश पत्रांक 580 दिनांक 24.07.2018 द्वारा दी गई। उस प्रमंडल द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित प्रतिवेदित किये जाने की स्थिति में बिना साक्ष्य/प्रमाण पत्र प्राप्त किये सीधे विभिन्न अवधियों का कुल 430 दिनों का अवकाश की स्वीकृति प्रदान कर दी गई, जबकि बिहार सेवा संहिता भाग-2 परि॰-1 में यह प्रावधान है कि कार्यपालक अभियंता यदि किसी कर्मचारी की छुट्टी बाकी हो तो अधिक से अधिक 4 महीने तक की छुट्टी दे सकते है। इस प्रकार आप बिहार सेवा संहिता भाग-2 परि॰-1 के नियमों का उल्लंघन कर छुट्टी स्वीकृति के लिए दोषी है। 2. श्री सिंह द्वारा उपर्युक्त कंडिका-1 में वर्णित अनियमितता करते हुए श्री अखिलेश शर्मा मोहर्रिर कोे नियम के विरूद्ध दी गयी छुट्टी की स्वीकृति के पश्चात वेतन निर्धारण कर बकाया राशि 10,70,838/- रूपये का भुगतान वित्तीय वर्ष 2018-19 में पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतनादि मद के लिए उपलब्ध आवंटन से भुगतान कर देना जबकि आवंटन पत्र में यह उल्लिखित है कि वेतनादि हेतु प्राप्त आवंटन से (बकाया) का भुगतान नहीं करना है। बकाये राशि के भुगतान के लिए कर्णांकित आवंटन अलग से प्राप्त करना होता है। श्री शर्मा को बकाया के रूप में 10,70,838/- (दस लाख सत्तर हजार आठ सौ अड़तीस रूपये) का कार्यपालक अभियंता द्वारा वेतन मद की राशि से किया गया भुगतान गलत है, इससे अन्य कर्मियों का वेतन अवरूद्ध हो जाएगा। इसमें वित्तीय अनियमितता का आरोप बनता है।
3. प्रमंडल में एकरारनामा क्लोज किये बिना ही संवेदक की जमानत राशि/अग्रधन राशि कार्यपालक अभियंता द्वारा लौटा दिया जाना, जो नियम के विरूद्ध है।
4. विभागीय निदेश के आलोक में मुख्य अभियंता द्वारा निदेश दिया गया था कि खरीफ सिंचाई के पूर्व सभी नहरों के तटबंधो के क्षतिग्रस्त भाग की मरम्मति करा लेना है तथा नहर में उगे हुए जंगल (थेथर) को साफ करा लिया जाना है। दिनांक 28.08.2018 को मुख्य अभियंता द्वारा लोअर मोरहर सिंचाई योजना का किये गये निरीक्षण में मुख्य नहर के 0.00 कि॰मी॰ से 10.00 कि॰मी॰ तक नहर में उगे जंगल (थेथर) को मौसमी मजदूरों से साफ कराने का निदेश पत्रांक 731 दिनांक 29.09.2018 द्वारा दिये जाने के बाद भी कार्य नहीं कराना एवं अनुपालन प्रतिवेदन नहीं भेजना। इसी प्रकार दिनांक 28.09.2018 को अपर यमुना सिंचाई योजना के मुख्य नहर में काफी जंगल (थेथर) उगे रहने के कारण नहर तल नहीं दिखाई पड़ रहा था।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया नहरों का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण सही ढंग से नहीं करने के लिए दोषी है।
5. मुख्य अभियंता, गया के कार्यालय के पत्रांक 730 दिनांक 29.08.2018 से कार्यपालक अभियंता को आदेश दिया गया कि सिंचाई शिविर, गया में अनाधिकृत रूप से रह रहे व्यक्तियों को तुरन्त हटाया जाय। शिविर के प्रभारी कनीय अभियंता, श्री अजित कुमार ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 30.08.2018 द्वारा सूचना दी कि शिविर में कई व्यक्ति अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित किये हैं। मुख्य अभियंता, गया के कार्यालय के पत्रांक 748 दिनांक 30.08.2018 द्वारा कार्यपालक अभियंता से पृच्छा की गई कि आपने अपने पत्रांक 613 दिनांक 17.07.2017 द्वारा प्रतिवेदित किया कि आपके प्रमंडल के अन्तर्गत कोई अतिक्रमण का मामला नहीं है, जो विरोधाभाषी है। इस प्रकार वरीय पदाधिकारी का आदेश का ठोस रूप से अनुपालन नहीं कर अतिक्रमण पर विरोधाभाषी प्रतिवेदन देने के लिए आप दोषी परिलक्षित होते है। श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-33 दिनांक 08.01. 2020 द्वारा विभाग में समर्पित किया, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01 एवं 02 प्रमाणित, आरोप सं0-03 एवं 04 आंशिक प्रमाणित एवं आरोप सं0-05 अप्रमाणित होने का मंतव्य संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया। उक्त के क्रम में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-309 दिनांक 24.02.2020 द्वारा श्री सिंह से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गई। आरोपी पदाधिकारी श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 03.07.2020 द्वारा विभाग में समर्पित किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरांत आरोप सं0-3 के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-422 दिनांक 13.04.2021 द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया से श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया के पदस्थापन काल में किन-किन कार्यों का एकरारनामा क्लोज किये बिना संवेदक को जमानत राशि/अग्रधन राशि लौटायी गयी है, से संबंधित प्रतिवेदन की मांग की गई। तदालोक में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया द्वारा पत्रांक-883 दिनांक 01.09.2021 से वांछित प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। तत्पश्चात प्राप्त वांछित प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की पुनः समीक्षा की गयी, आरोपवार निम्नवत है :-
55 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022(1) आरोपी पदाधिकारी श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया द्वारा अपने कार्यालय आदेश ज्ञापांक 580 दिनांक 24.07.2018 द्वारा श्री अखिलेश शर्मा, मुहर्रिर का कुल 430 दिनों के अवकाश की स्वीकृति प्रदान की गयी। मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना सं॰-मं॰मं॰-01/आर-0-02/2007-602 दिनांक 20.03.2007 की कंडिका 'ख' (2) (ii) के अनुसार क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत वर्ग-'ग' एवं 'घ' के कर्मियों की आकस्मिक एवं प्रतिबंधित अवकाश से भिन्न अन्य अवकाशें की स्वीकृति (अध्ययन अवकाश को छोड़कर) के लिए सक्षम प्राधिकार उनके नियुक्ति पदाधिकारी होते है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री सिंह द्वारा श्री शर्मा, मोहर्रिर का अवकाश उप समाहर्त्ता की हैसियत से किया गया है। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में बिहार सेवा संहिता के भाग-2 (परिशिष्ट-1) के आलोक में छुट्टी स्वीकृत किये जाने का उल्लेख किया है। जबकि उल्लेखित अंश में विघटित राजस्व प्रमंडल के कर्मियों के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया के पत्रांक 925 दिनांक 24.10.2018 की कंडिका- 6 में उल्लेखित है कि जिस अवधि का अवकाश स्वीकृत किया गया है, उस अवधि में श्री शर्मा, मोहर्रिर सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, खगौल में कार्यरत थे एवं कार्यपालक अभियंता, सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, खगौल ने अपने पत्रांक 1762 दिनांक 19.12. 2017 द्वारा आरोपी पदाधिकारी के कार्यालय को सूचित किया था कि श्री शर्मा मनमाने ढंग से बिना किसी पूर्व सूचना के स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहे है। इस परिस्थिति में पूरी जाँच-पड़ताल किये बिना एवं श्री शर्मा से साक्ष्य/प्रमाण पत्र प्राप्त किये बिना विभिन्न अवधियों का कुल 430 दिनों का अवकाश नियुक्ति पदाधिकारी (उप समाहर्त्ता) की हैसियत से स्वीकृत करना नियमानुकूल नहीं है। अतः श्री अखिलेश शर्मा, मोहर्रिर का विभिन्न अवधियों का कुल 430 दिनों का अवकाश अनियमित रूप से स्वीकृत करने के लिए श्री सिंह दोषी है।
(2) उपुर्यक्त समीक्षा कंडिका 01 के आलोक में अवकाश की स्वीकृति ही अनियमित है, जिसके फलस्वरूप वेतन निर्धारण कर बकाया राशि 10,70,838/- रूपये का भुगतान वित्तीय वर्ष 2018-19 में किया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में भी उल्लेखित है कि उपार्जित अवकाश हेतु वेतनादि का भुगतान उपार्जित अवकाश की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त करने के उपरान्त किया जाय। परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा इसका अनुपालन नहीं किये जाने के कारण भुगतान नियमानुकूल नहीं है। अतः उपार्जित अवकाश की स्वीकृति विधिवत नहीं होने के कारण किये गये वेतन निर्धारण एवं तद्नुसार किये गये बकाये भुगतान के लिए श्री सिंह दोषी हैं।
(3) प्रमंडल में एकरारनामा क्लोज किये बिना ही संवेदक की जमानत राशि/अग्रधन की राशि कार्यपालक अभियंता द्वारा लौटा दिये जाने के संबंध में न तो मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप पत्र में किसी एकरारनामा का जिक्र किया गया है और न ही आरोपी पदाधिकारी श्री सिंह द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया कि उनके द्वारा किन प्रावधानों के अनुरूप जमानत राशि/अग्रधन की राशि लौटायी गयी। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में भी इन बातों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। उक्त परिस्थिति में विभागीय पत्रांक-422 दिनांक 13.04.2021 द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया से श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया के पदस्थापन काल में किन-किन कार्यों का एकरारनामा क्लोज किये बिना संवेदक को जमानत राशि/अग्रधन राशि लौटायी गयी है, से संबंधित प्रतिवेदन की मांग की गई। तदालोक में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया द्वारा अपने पत्रांक-883 दिनांक 01.09.2021 से वांछित प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसके अवलोकन से ज्ञात हुआ कि श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया के द्वारा चार अद्द कार्यों को एकरारनामा क्लोज किये बिना ही संवेदक को जमानत राशि/अग्रधन राशि लौटायी गई है जो विभागीय नियम के विरूद्ध है। अतः आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह द्वारा एकरारनामा क्लोज किये बिना ही संवेदक को जमानत राशि/अग्रधन राशि लौटायी गई है जो नियमानुकूल नहीं है। उक्त आरोप के लिए श्री सिंह दोषी हैं।
(4) विभागीय निदेश एवं मुख्य अभियंता, गया के पत्रांक 731 दि॰ 29.08.2018 में दिये गये निदेश के बावजूद नहरों के तटबंध मरम्मति एवं नहरों में उगे जंगल सफाई का कार्य नहीं कराने संबंधी आरोप के प्रत्युत्तर में श्री सिंह द्वारा पत्रांक 740 दिनांक 24.09.2018 से नहरों के बाँध को मरम्मति कराने एवं नहर में उगे जंगल को साफ करा लेने की सूचना अधीक्षण अभियंता को प्रतिवेदित किये जाने का उल्लेख किया है। परन्तु कराये गये कार्य से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, गया द्वारा उल्लेखित किया गया है कि श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा नहरों का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण सही ढंग से नहीं किया जाता है। इस संदर्भ में श्री सिंह द्वारा उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 में निर्धारित लक्ष्य 32418 हे॰ के विरूद्ध 32418 हे॰ पटवन की उपलब्धि हुई है परन्तु नहरों का समुचित निरीक्षण/पर्यवेक्षण संबंधी कोई अभिलेख/साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। उक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी श्री सिंह के विरूद्ध नहरों का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण सही ढंग से नहीं करने का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, मुख्य अभियंता, गया से प्राप्त वांछित प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा का बचाव-बयान के समीक्षोपरांत श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्व आरोप सं0-1, 2 एवं 3 प्रमाणित होता है, जबकि आरोप सं0-4 अंशतः प्रमाणित होता है। अतएव अंशतः या पूर्ण रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया :- "10 (दस) प्रतिशत पेंशन पर कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।56 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1249 दिनांक 31.05.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2396 दिनांक 26.09.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है। अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3320), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"10 (दस) प्रतिशत पेंशन पर कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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13 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-14/2010/2399--श्री गुंजालाल राम (आई०डी०-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त को उनके उक्त पदस्थापन अवधि के दौरान बागमती बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत बागमती प्रमंडल, शिवहर के अधीन बागमती दायाँ एवं बायाँ तटबंध में कराये गये उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प सं0-2721 दिनांक 30.12.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' में निहित प्रावधानानुसार निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः-
1. बागमती बाढ़ प्रबंधन योजना के कार्यान्वयन से संबंधित अभिलेखों यथा वर्षवार स्वी—त प्राक्कलन, स्वी—त कार्यक्रम के विरूद्ध उपलब्धी एवं स्लीपेज, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिवेदन, स्वी—त लीड प्लान इत्यादि का विधिवत संधारण नहीं किया गया, जो एक गंभीर मामला है।
2. कार्यों का कार्यान्वयन के दौरान ससमय स्थल निरीक्षण पर्यवेक्षण तथा कार्यों का सघन समीक्षा कर अधीनस्थों को आवश्यक दिशा निर्देश नहीं देने के कारण कार्य ससमय पूर्ण नहीं हो सका एवं इनके स्तर से दिये जाने वाले आवश्यक स्वी—त्यादेश (यथा प्राक्कलन, लीड प्लान की स्वी—ति तथा कार्यक्रम की स्वी—ति) ससमय प्रदान नहीं करने के कारण क्षेत्रीय पदाधिकारियों में अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। साथ ही उड़नदस्ता जाँच कार्य में असहयोगात्मक रवैया अपनाया गया।
3. राज्यादेश के कंडिका 9 के अनुरूप प्रश्नगत कार्य का औपचारिक एकरारनामा नहीं होने के कारण संवेदक द्वारा कार्य विलम्ब से पूरा कराने के बावजूद भी MOU के कंडिका 11 के तहत दण्डात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी एवं सरकार को अधिक भुगतान करने की नौबत उत्पन्न हुई। जो एक वित्तीय अनियमितता का मामला है। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग में जाँच प्रतिवेदन समर्पित की गई। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राम के विरूद्ध आरोप सं0-01 से 03 तक प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य दिया गया।
उक्त के क्रम में संचलान पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुये जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर विभागीय पत्रांक-521, दिनांक-23.06.2021 द्वारा श्री गुंजालाल राम से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी, जिसके अनुपालन में श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर निम्नवत समर्पित किया गया :-
श्री राम द्वारा आरोप कंडिका (1) एवं (2) अभिलेखों के विधिवत संधारण एवं ससमय स्थल निरीक्षण/पर्यवेक्षण न करने के संबंध में कहा गया है कि आरोप के उक्त दोनों कंडिकाओं में सरकार के राजस्व की क्षति होने जैसी किसी स्थिति का उल्लेख नहीं है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र सं०-3/आर०-1-108/89 का0-20233 दिनांक 08.11. 1978 के आलोक में "सेवाकाल में ऐसे आरोपों के संबंध में प्रारंभ की गयी विभागीय कार्रवाई उनके सेवा निवृति के बाद चालू रखी जाय जो प्रथम द्रष्टया घोर कदाचार की कोटि में आते हैं अथवा यह विश्वास करने का यथेष्ट कारण हो कि उन्होंने अपने कदाचार अथवा लापरवाही द्वारा सरकार को वित्तीय क्षति पहुंचाई है जिसके लिये बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के अधीन कार्रवाई की जानी है।" इनके द्वारा सेवानिवृति के उपरान्त आरोप के इन दो कंडिकाओं पर विभागीय कार्रवाई को चालू रखना उपर्युक्त पत्र में अंकित दिशा-निदेश का उल्लंघन बतलाया गया है।
श्री राम द्वारा आरोप कंडिका (3) में वित्तीय अनियमितता के उल्लेख के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य विलम्ब से कराने के लिये कार्यपालक अभियंयता द्वारा पेनल्टी लगाया गया है परन्तु नियमानुसार औपचारिक एकरारनामा नहीं किया गया है। अतः ऐसा माना जा सकता है कि आरोप कंडिका (3) में जिस वित्तीय क्षति होने का उल्लेख है, वो क्षति सरकार को हुई ही नही। अतः आरोप कंडिका में वित्तीय क्षति पहुँचाने के बिन्दु को भ्रामक माना जा सकता है। जहाँ तक विधिवत एकरारनामा किये जाने का प्रश्न है, पूर्व में कई अवसरों पर इनके द्वारा स्पष्ट किये जाने का उल्लेख किया गया है कि विधिवत एकरारनामा किये जाने की कार्रवाई मुख्य अभियंता स्तर से की ही नहीं जानी थी। इनके द्वारा इस आरोप को प्रक्रियात्मक त्रुटि बतलाते हुये इसे कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र संख्या-20233 दिनांक-08.11.1978 में निहित निदेश के आलोक में निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
श्री गुंजालाल राम (आई०डी०-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
57 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022आरोप 1 एवं 2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि HSCL से प्राप्त कार्यक्रम की प्रति के साथ अभियन्ता प्रमुख (उत्तर) के पत्रांक 1242 दिनांक 06.05.2011 द्वारा श्री गुंजालाल राम, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता को कार्य के प्रगति का अनुश्रवण करते हुये कार्य की साप्ताहिक प्रगति से मुख्यालय को अवगत कराने का निदेश दिया गया था। उड़नदस्ता जांच के दौरान जांचदल द्वारा कई बार अभिलेखों की मांग किये जाने के बावजूद भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने का उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है। उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि संबंधित अभिलेख बाढ नियन्त्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना द्वारा उपलब्ध कराया गया। उड़नदस्ता जांचदल द्वारा यह भी कहा गया है कि श्री राम द्वारा अपने स्तर से कार्य का Work Programme, मिट्टी ढुलाई का लीड, पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वी—ति ससमय नहीं दिया गया। इनके द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी कहा गया है कि श्री गुंजालाल राम ने न तो उक्त बातों का खंडन किया और न हीं निरीक्षण प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराया। उड़नदस्ता जांचदल को अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने के संबंध में श्री राम द्वारा कहा गया है कि अभिलेख उपलब्ध कराना मुख्य अभियन्ता कार्यालय का दायित्व था। उक्त के आलोक में अभिलेखों का विधिवत संधारण नहीं करने एवं उड़नदस्ता जांचदल के जांच कार्य में श्री राम द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं किये जाने का आरोप प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया है।
द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में भी श्री राम द्वारा इन आरोपों के संदर्भ में कोई तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि इससे सरकार को राजस्व की क्षति होने जैसी कोई स्थिति नहीं बनती है। अतः इन आरोपों के लिये इनके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जा सकती। श्री राम का यह तर्क स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अतः संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुये कार्य से संबंधित अभिलेखों का विधिवत संधारण नहीं करने, आवश्यक स्वी—त्यादेश ससमय प्रदान नहीं कर भ्रम की स्थिति पैदा करने तथा उड़नदस्ता जांच कार्य में असहयोगात्मक रवैया अपनाने का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप 3 :- संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि बाढ नियन्त्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों के आधार पर MOU में निहित प्रावधानों के आलोक में प्रासंगिक योजना के लिये F- 2/SBD एकरारनामा इस कार्य विशेष के लिये उपयुक्त नहीं होता।
परन्तु उड़नदस्ता जांच प्रतिवेदन की कंडिका 6.0.0 में उल्लेखित किया गया है कि MOU की कंडिका 11 जिसमें HSCL के स्तर से कार्य में किये गये बिलम्ब की स्थिति में दण्ड का प्रावधान किया गया है, का अनुपालन विधिवत रुप से कहीं भी लागू नहीं हो पाया। हालांकि कार्य में बिलम्ब के फलस्वरुप ंMOU की कंडिका 11 के तहत penalty लगाये जाने का भी उल्लेख किया गया है परन्तु भौतिक प्रगति का नियमित रुप से work programme के सापेक्ष अनुश्रवण नहीं किये जाने के कारण समय सीमा की बाद के अवधि में किये गये कार्य का भुगतान भी तात्कालिक दर पर किये जाने की बाध्यता के कारण वित्तीय क्षति की संभावना बनी रहती है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुये MOU की कंडिका 11 का विधिवत अनुपालन नहीं होने का आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में प्रासंगिक योजना के लिये F-2/SBD एकरारनामा उपयुक्त नहीं होना तथा ं MOU की कंडिका 11 के तहत penalty लगाया जाना परिलक्षित होता है। परन्तु कार्य की भौतिक प्रगति का नियमित अनुश्रवण work programme के सापेक्ष नहीं किये जाने के कारण MOU की कंडिका 11 का विधिवत अनुपालन नहीं होना भी परिलक्षित है। श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में इस आरोप के संदर्भ में भी वित्तीय क्षति सरकार को नहीं होने एवं प्रक्रियात्मक त्रुटि का मामला होने के कारण इसे निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है जिसे स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।
समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री गुंजालाल राम (आई०डी०-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-
"पेंशन से 10% (दस प्रतिशत) की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री गुंजालाल राम (आई०डी०-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-920 दिनांक 21.04.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2329 दिनांक 23.09.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है। अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री गुंजालाल राम (आई०डी०-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 10% (दस प्रतिशत) की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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13 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-04/2018/2400--श्री भोलानाथ राय (आई०डी०-जे 5189), तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त पदस्थापन अवधि58 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 के दौरान काँटी प्रखंड के दामोदरपुर कोल्हुआ पैगम्बरपुर साहु कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प सं0-1408 दिनांक 08.07.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' में निहित प्रावधानानुसार निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- आरोप संख्या-1- माननीय सांसद महोदय की अनुशंसा के आलोक में कॉटी प्रखंड के दामोदरपुर कोल्हा पैगम्बरपुर साहु कॉलोनी में सड़क निर्माण एवं मिट्टीकरण तथा ईटकरण कार्य जिसकी प्राक्कलित राशि रूपये 01.72 लाख की प्रशासनिक स्वी—ति प्रदान की गई थी। योजना के लिए अनुशंसा प्राप्त होने के उपरान्त सामान्य प्रक्रिया है कि योजना जिस प्रमंडल के क्षेत्र में होता है उनके द्वारा प्राक्कलन मापदण्डों के अनुरूप भूमि की उपलब्धता हो। प्रश्नगत योजना के लिए प्रस्तुत प्राक्कलन की चेक लिस्ट की कंडिका-11 में आपके द्वारा प्रतिवेदित किया गया था कि उक्त योजना हेतु सरकारी भूमि उपलब्ध है। योजना के लिए चेक लिस्ट में सरकारी भूमि की उपलब्धता से संबंधित प्रमाण पत्र में सरकारी भूमि के बिना उपलब्धता के ही पूर्णतः मनमाने तरीके से भूमि की उपलब्धता अंकित किया गया, जिस पर सांसद निधि से योजना का क्रियान्वयन करा दिया गया। अंचल अधिकारी, कॉटी के द्वारा भी प्रतिवेदित किया गया है कि कॉटी प्रखंड के दामोदरपुर कोल्हा पैगम्बरपुर में साहु कॉलोनी में सड़क निर्माण एवं मिट्टीकरण तथा ईंटकरण कार्य कराया गया जो रैयती भूमि में है। उक्त स्थल पर नक्शा में सरकारी सड़क नहीं है। उक्त से स्पष्ट हो रहा है कि आपके द्वारा बिना जाँच पड़ताल किये सरकारी भूमि की उपलब्धता होने से संबंधित गलत सूचना अंकित करते हुए योजना का प्राक्कलन तैयार कर उसकी तकनीकी स्वी—ति प्रदान करने की दिशा में कार्रवाई की गई, जो एक गंभीर वित्तीय क्षति का मामला है एवं जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है । आरोप संख्या-2- श्री भोला नाथ राय, सेवानिवृत सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल सं0-2, मुजफ्फरपुर द्वारा गलत प्रमाण पत्र अंकित कर भूमि की उपलब्धता दिखाते हुए सांसद निधि से योजना का प्राक्कलन तैयार किया गया। जिसमें सरकार को वित्तीय क्षति होना परिलक्षित है। आरोप संख्या-3- श्री भोला नाथ राय, सेवानिवृत सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल सं0-2, मुजफ्फरपुर द्वारा बिहार वित्त नियमावली के सुसंगत नियमों का अनुपालन नहीं हुआ है आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के प्रतिकूल है।
विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग में जाँच प्रतिवेदन समर्पित की गई। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राय के विरूद्ध आरोप सं0-01 से 03 तक प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य दिया गया।
उक्त के क्रम में संचलान पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुये, जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर विभागीय पत्रांक-899, दिनांक-20.04.2022 द्वारा श्री भोला नाथ राय से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी, जिसके अनुपालन में श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर निम्नवत समर्पित किया गया :- (A) योजना एवं विकास के पत्रांक-5413, दिनांक-27.12.2013 में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी भूमि उपलब्ध कराने का मौलिक दायित्व प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने वाले पदाधिकारी में निहित है, जिसके लिये योजना एवं विकास विभाग द्वारा समय-समय पर मासिक बैठक में निदेश भी दिये जाते रहे हैं। परंतु संचालन पदाधिकारी द्वारा इसकी सम्यक विवेचना नहीं की गयी है। (B) प्रसंगाधीन पथ योजना मुजफ्फरपुर जिला के काँटी प्रखंड के दामोदरपुर कोल्हुआ पैगम्बरपुर में साहु कॉलोनी में ईटकरण कार्य (लागत राशि-1,72,000) के प्राक्कलन के साथ संलग्न चेक लिस्ट के स्तंभ (ii) में विवाद रहित भूमि उपलब्धता के संबंध में 'हाँ' लिखा गया था जिसके निम्नलिखित आधार थेः-
(i) विषयाधीन सड़क निर्माण के पूर्व से ही ग्रामीण कच्चा पथ था। योजना का प्राक्कलन बनाते समय न तो किसी के द्वारा आपत्ति प्रकट की गयी और न ही किसी के निजी भूमि का दावा किया गया। आज की तिथि तक भी किसी ग्रामीण रैयत के द्वारा इस स्थल के निजी जमीन का दावा नहीं किया गया है।
(ii) माननीय सांसद की अनुशंसा के लगभग 15 वर्षो पूर्व तत्कालीन विधायक की अनुशंसा पर भी इस सड़क का कार्य हुआ था। पथ के क्षतिग्रस्त हो जाने एवं स्थानीय ग्रामीण के अनुरोध पर माननीय सांसद के द्वारा इस पथ के निर्माण की अनुशंसा की गयी थी।
(iii) स्थानीय पूछताछ एवं जाँच के क्रम में ग्रामीणों के द्वारा 1894-95 का एक सर्वे नक्शा दिखाया गया, जिसमें यह सड़क दर्शाया गया है। (C) यह भी उल्लेखनीय है कि पुराने नक्शा में सरकारी जमीन एवं चालू सड़क तथा नये सर्वे में जिस जमीन एवं नाम रैयती जमीन दर्ज हो गया है, उसके द्वारा भी अगल-बगल की रैयती जमीन की बिक्री के केवाला में इसे आम रास्ता दर्शाया गया है। श्री राय के अनुसार आरोप संख्या-2 में आरोप संख्या-1 की ही दूसरे शब्दों मे पुनरावृति है जिसमें पुनः यही बात कही गयी है कि उनके द्वारा गलत प्रमाण-पत्र दे कर भूमि की उपलब्धता दिखाते हुये प्राक्कलन तैयार किया गया एवं कार्य कराया गया जिससे सरकार को वित्तीय क्षति होना परिलक्षित है। जबकि श्री राय द्वारा अपने अभ्यावेदन मे कहा गया है कि उनके द्वारा भूमि उपलब्धता संबंधी कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। संचालन पदाधिकारी का यह निष्कर्ष कि इस कार्य को कराने से सरकार को वित्तीय क्षति हुई, पूर्णतः निराधार एवं कल्पना आधारित है। क्योंकि पथ आज भी आवागमन के लिये चालू है और कोई विवाद नहीं है, साथ ही किसी ग्रामीण के द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, लिखित अथवा मौखिक आपत्ति दर्ज नहीं की गयी है। इस संदर्भ में कहा गया है कि उसी कार्यस्थल पर मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत 6 वर्षो के बाद PCC निर्माण कार्य वर्ष-2018-19 में कराया गया जिसका योजना संख्या-01/2018-19 है।59 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 आरोप संख्या-03 में जहाँ तक बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रतिकूल कार्य किये जाने के संबंध में श्री राय का कहना है कि जल संसाधन विभाग के नियंत्रणाधीन 38 वर्षो के सेवाकाल में कोई भी कृत ऐसा नहीं किया गया है, जो आचार नियमावली के वर्णित नियमों के प्रतिकूल हो वरन् सर्वदा सरकारी सेवक के लिये परिभाषित सदाचार संबंधी नियमों का पालन किया गया है।
श्री भोलानाथ राय, तत0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
(i) माननीय सासंद डॉ० रघुवंश प्रसाद सिंह की अनुशंसा के आलोक में काँटी प्रखंड के दामोदरपुर कोल्हुआ पैगम्बरपुर साहु कॉलोनी में सड़क निर्माण एवं मिट्टीकरण व ईंटकरण कार्य जिसकी प्राक्कलित राशि 1.72 लाख रूपये की थी, की तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने के उपरांत उसपर प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। तकनीकी स्वीकृति पर श्री राय का हस्ताक्षर है। योजना के लिये अनुशंसा प्राप्त होने के उपरांत सामान्य प्रक्रिया है कि योजना जिस प्रमंडल के क्षेत्र में होता है, उनके द्वारा प्राक्कलन बनाया जाता है। कोई भी प्राक्कलन तभी बनाया जाता है, जब वहाँ सरकार द्वारा निर्घारित मापदंडों के अनुरूप भूमि की उपलब्धता हो। प्रश्नगत योजना के लिये प्रस्तुत प्राक्कलन के साथ संलग्न योजना की स्वीकृति हेतु चेकलिस्ट की कंडिका-11 में उल्लिखित है कि ''इस कार्य हेतु विवाद रहित सरकारी भूमि उपलब्ध है (हाँ या नहीं)। यदि हाँ तो संबंधित कनीय अभियंता व सहायक अभियंता का प्रमाण पत्र'' के सामने जवाब में हाँ अंकित किया गया है। (ii) प्रश्नगत योजना के लिये प्रस्तुत प्राक्कलन के चेक लिस्ट की कंडिका-11 में संबंधित अभियंतागण (कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता) द्वारा विवाद रहित सरकारी भूमि की उपलब्धता के संबंध में दिये गये प्रमाण पत्र के आधार पर ही तत्कालीन जिला योजना पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा सड़क निर्माण एवं मिट्टीकरण व ईटकरण कार्य के इस योजना की स्वीकृति दी गई।
(iii) अंचल अधिकारी काँटी के पत्रांक-212, दिनांक-06.03.2018 से वरीय उप-समाहर्त्ता, जिला गोपनीय शाखा को समर्पित किये गये प्रतिवेदन में इस सड़क की भूमि के संदर्भ में दिया गया प्रतिवेदन निम्नवत् हैः- "काँटी प्रखंड अंतर्गत दामोदरपुर कोल्हुआ पैगम्बरपुर में साहु कॉलोनी में सड़क निर्माण एवं मिट्टीकरण एवं ईटकरण कार्य सांसद निधि से स्वीकृत प्रस्तावित स्थल रैयती भूमि में अवस्थित है, सरकारी भूमि में नहीं है"
(iv) श्री भोला नाथ राय (आई०डी०-J5189) सेवानिवृत सहायक अभियंता के द्वारा अपने अभ्यावेदन में प्रश्नगत भूमि के सरकारी भूमि होने का कोई ठोस साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। उनके द्वारा अपने अभ्यावेदन में योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-5413, दिनांक-27.12.2013 से निर्गत निदेश यथा "सरकारी भूमि उपलब्ध कराने का मौलिक दायित्व प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने वाले पदाधिकारी में निहित है", का उल्लेख करते हुये यह कहा गया है कि वर्णित पत्र के आलोक में सरकारी भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के मामले में अभियंताओं की कोई भूमिका निर्धारित नहीं की गयी है, परंतु जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1098, दिनांक-08.03.2018 के कंडिका-09 में स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित है कि '' रैयती जमीन पर सासंद निधि से सड़क का निर्माण कराया गया है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभिंयता द्वारा बिना सरकारी भूमि की उपलब्धता के सरकारी भूमि उपलब्ध होने से संबंधित गलत प्रमाण पत्र अंकित करते हुये प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गयी तथा तत्कालीन जिला योजना पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के द्वारा रैयती भूमि के संबंध में बिना जाँच पड़ताल करते हुये प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी।'' उक्त से स्पष्ट है कि प्रश्नगत योजना के निर्माण हेतु सरकारी भूमि की उपलब्धता नहीं रहने के बावजूद प्राक्कलन में संलग्न योजना के स्वीकृति हेतु चेक-लिस्ट के कंडिका-11 में कार्य हेतु विवाद रहित सरकारी भूमि की उपलब्धता के संबंध में गलत प्रमाण पत्र अंकित कर प्राक्कलन तैयार किया गया एवं तकनीकी स्वीकृति देते हुये प्राक्कलन की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की गयी एवं रैयती भूमि पर कार्य कराया गया।
समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री भोलानाथ राय, तत0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया हैः-
"पेंशन से 10% (दस प्रतिशत) की कटौती 15 (पन्द्रह) वर्षों के लिए"। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री भोलानाथ राय, तत0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध उक्त प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1567 दिनांक 05.07.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की मांग की गई, जिसके आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2332 दिनांक 23.09.2022 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया है। अतएव सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री भोलानाथ राय, तत0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 10% (दस प्रतिशत) की कटौती 15 (पन्द्रह) वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।60 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 14 अक्तूबर 2022 सं0 22/नि0सि0(डि0)14-01/2020-2403--श्री रामेश्वर चौधरी (आई0डी0-3495) तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध पदस्थापन अवधि में सरकारी नियमों का अनुपालन ससमय न करने, कर्त्तव्य में लापरवाही, पद का दुरूपयोग तथा विभागीय आदेशों का उल्लंघन कर अपने अधीनस्थ वर्ग-3 एवं 4 के कर्मियों को लंबे समय तक प्रोन्नति नहीं दिए जाने तथा इस मामले में माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना में दर्ज किए गए मामले में माननीय लोकायुक्त (न्यायिक सदस्य) द्वारा पारित न्यायादेश के संदर्भ में विभागीय समीक्षोपरांत गठित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत संकल्प ज्ञापांक-691 दिनांक 28.07.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप निम्नांकित है - (1) विभागीय ज्ञापांक-786 दिनांक 14.07.2016 द्वारा जल संसाधन विभाग, क्षेत्रीय लिपीकीय संवर्ग (भर्ती एवं सेवा शर्त) नियमावली, 2014 की कंडिका-13(2) के प्रावधान के तहत वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति देने हेतु प्रोन्नति समिति का गठन विभागीय स्तर पर की गई थी। उक्त विभागीय आदेश के अनुपालन के क्रम में जल संसाधन विभागान्तर्गत मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा एवं मुख्य अभियंता, पटना द्वारा अपने परिक्षेत्रान्तर्गत कर्मियों को प्रोन्नति का लाभ दिया गया। परन्तु श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी द्वारा विलंब से की गई। (2) श्री फकरूधीन अली अहमद, महासचिव, बिहार राज्य पथ एवं भवन निर्माण विभाग, कर्मचारी यूनियन द्वारा श्री रामेश्वर चौधरी के विरूद्ध सरकारी नियमों के अनुपालन ससमय न करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही, पद का दुरूपयोग के संबंध में माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना में मामला दर्ज किया गया, जिसमें दिनांक 16.12.2019 को माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा आदेश पारित किया गया। उक्त आदेश में प्रोन्नति संबंधी विभागीय आदेश के अनुपालन ससमय नहीं करने के लिए श्री चौधरी उत्तरदायी पाए गए है। (3) वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री चौधरी द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन एवं अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया, जिसके लिए वे दोषी हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-01, 02 एवं 03 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-626 दिनांक 23.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन की माँग की गई। श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा-लिखित अभ्यावेदन में श्री रामेश्वर चौधरी द्वारा उल्लेख किया गया है कि विलंब से प्रोन्नति देने का कारण वरीयता सूची का प्रकाशन दो बार करना, प्रकाशन के पश्चात 83 आपत्तियों का प्राप्त होना, इसके निष्पादन में समय लगना, गोपनीय चारित्र अभ्युक्ति प्राप्त होने में समय लगना, कर्मियों का इतिहास विहित प्रपत्र में प्राप्त करने में समय लगना को कारण बताया गया। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा औपबंधिक वरीयता सूची का प्रकाशन दिनांक 03.08.2017 को किया गया था एवं दिनांक 21.08.2018 को अंतिम वरीयता सूची के प्रकाशन में काफी समय लगाया गया। जबकि स्थिति यह थी कि मात्र एक कार्यालय को छोड़कर शेष 23 कार्यालयों के अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन पूर्व में हो चुका था। आरोपी पदाधिकारी के स्वयं के अभ्यावेदन से यह भी पता चल रहा है कि गोपनीय चारित्री अभ्युक्ति एवं सेवा इतिहास प्राप्त करने में भी बहुत अधिक समय लगाया गया। दिनांक 21.04.2018 को अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन हुआ तुरंत उसके तुरंत बाद प्रोन्नति समिति की बैठक नहीं बुलाई गई बल्कि जून माह में प्रोन्नति समिति की बैठक की गयी और तब वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति प्रदान किया गया। अतएव आरोपी पदाधिकारी श्री रामेश्वर चौधरी का यह कहना कि प्रोन्नति संबंधी कार्रवाई में मात्र प्रक्रियात्मक विलंब हुआ है, यह पूरी तरह सही नहीं है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि 20 मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र में से 9 प्रक्षेत्र में वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति नहीं मिली। जिन-जिन मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र में प्रोन्नति दी गयी उनमें औसतन एक समान समय लगा। प्रशासी विभाग के पत्रांक-2427 दिनांक 13.12.2019 के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि प्रोन्नति देने में सबसे ज्यादा विलंब करीब 1 वर्ष 11 माह का समय आरोपी पदाधिकारी के द्वारा लिया गया है, जिसके लिए आरोपी पदाधिकारी को माननीय लोकायुक्त द्वारा भी दोषी माना गया है। श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रोन्नति में अधिक समय लगा है, को स्वयं स्वीकार किया गया है। श्री रामेश्वर चौधरी द्वारा लिखित अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों को दोहराया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के दौरान बचाव बयान में समर्पित किया गया था, जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा की गयी तथा आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित बताया गया। अतः श्री चौधरी द्वारा प्रस्तुत लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) स्वीकार योग्य नहीं है। निष्कर्ष-श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन की उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए उनके विरूद्ध गठित तीनों आरोप सं0-1, आरोप सं0-2 एवं आरोप सं0-3 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चौधरी को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है - "पेंशन से 10% की कटौती 8 वर्षों के लिए।" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।61 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 उक्त निर्णय/सहमति के आलोक में श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -
"पेंशन से 10% की कटौती 8 वर्षों के लिए।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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18 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-17/2014-2425--श्री सुनील कुमार (आई0डी0-2315), तत0 कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती बाँध प्रमंडल संख्या-1, भीतरीबाँध सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध उनके पदस्थापन अवधि में वित्तीय वर्ष 2013-14 में शीर्ष "2701" के अन्तर्गत विभिन्न कार्यों में अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प संख्या-2283 दिनांक 22.10.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप निम्नांकित है - (1) दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध के अन्तर्गत वर्ष 2013-14 में शीर्ष "2701" गैर योजना के तहत कराए गए एकरारित कार्यों के प्राक्कलन में विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हुए Contingency मद में तीन प्रतिशत राशि का प्रावधान कर प्राक्कलन का गठन एवं तकनीकी स्वीकृति दी गई है, जिससे आपकी गलत मंशा परिलक्षित होती है और इसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। (2) दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध के अन्तर्गत वर्ष 2013-14 में शीर्ष "2701" गैर योजना के तहत भीतरीबाँध शिविर अन्तर्गत चहारदिवारी का उच्चीकरण कार्य के प्राक्कलन में विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ईंट एवं स्थानीय बालू की ढुलाई में बिना सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किए 15कि0मी0 लीड का प्रावधान कर प्राक्कलन का गठन एवं तकनीकी स्वीकृति दिए जाने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। (3) दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध के अन्तर्गत वर्ष 2013-14 में शीर्ष "2701" गैर योजना के तहत निविदित कार्यों का विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हुए अनुसूचित दर से चार प्रतिशत अधिक दर पर कार्यावंटन की अनुशंसा की गई एवं तदनुसार आपके द्वारा एकरारनामा सम्पादित करते हुए भुगतान की कार्रवाई की गई जिससे सरकारी राजस्व की क्षति हुई। इसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। (4) दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध के अन्तर्गत वर्ष 2013-14 में शीर्ष "2701" गैर योजना के तहत चेनारी स्थित अस्थायी प्रमंडलीय कार्यालय का विस्तारीकरण कार्य का मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक-1922 दिनांक 22.06.2013 से कार्यक्रम में स्वीकृति राशि रू0 3.00 लाख के विरूद्ध बिना पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति कराए ही रू0 349590/- का प्राक्कलन गठन एवं तकनीकी स्वीकृति दी गई। साथ ही कुल छः एकरारित कार्यों के लिए स्वीकृति राशि रू0 7.90 लाख के विरूद्ध रू0 8.16256 लाख व्यय कर अधिक भुगतान किया गया जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-1 एवं आरोप सं0-3 को अप्रमाणित तथा आरोप सं0-02 एवं आरोप सं0-04 को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। अप्रमाणित आरोप सं0-01 एवं 03 की समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर तथा प्रमाणित आरोप सं0-02 एवं 04 के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-971 दिनांक 15.06.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री कुमार दिनांक 30.06.2017 को सेवानिवृत्त हो गए फलतः उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी के तहत सम्परिवर्तन किया गया। श्री कुमार से किए गये द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर कतिपय विभागीय पत्रों द्वारा स्मारित किये जाने के बावजूद समर्पित नहीं किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रत्युत्तर समर्पित नहीं किये जाने पर पूर्व में किये गये स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विषयांकित मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत समीक्षात्मक प्रतिवेदन के निष्कर्ष की कंडिका-(iii) में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के संकल्प सं0-948 दिनांक 16.07.1986 की कंडिका-8.1.2 में निहित प्रावधान की वैधता के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा पथ निर्माण विभाग के संकल्प सं0-2676 दिनांक 15.05.2005 की कंडिका-6 के आलोक में प्रभावी नहीं है, कि स्थिति में उक्त निर्गत संकल्प की वैधता पर मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग, पटना से मंतव्य प्राप्त किए जाने का अनुरोध तकनीकी पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया। तकनीकी पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में संचिका में वित्त विभाग का परामर्श पर मंत्रिमंडल सचिवालय का मंतव्य प्राप्त किया गया। वित्त विभाग द्वारा दिए गए परामर्श के आलोक में पथ निर्माण से प्राप्त पत्र/परामर्श के साथ सम्पूर्ण मामले की समीक्षा तकनीकी पदाधिकारी से करायी गई। अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य के आलोक में तकनीकी पदाधिकारी द्वारा तकनीकी समीक्षोपरांत स्थिति निम्नवत है - समीक्षा-01-अप्रमाणित आरोप सं0-1 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा कतिपय कार्यों के प्राक्कलनों में 3 प्रतिशत आकस्मिक मद के प्रावधान के साथ स्वीकृति दी गई है। इस मद में व्यय नहीं हुआ। अतएव गलत मंशा का मामला प्रकाश में नहीं आ रहा है। संभावित मदों को स्पष्ट कर दिया जाता तो प्राक्कलन का62 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 विनिर्दिष्ट मद होता और आकस्मिक व्यय मद से अतिरिक्त राशि विलोपित हो जाती। विविध संभावित व्यय की राशि निर्धारित नहीं रहने के कारण इस प्रकार की भूल हुई। आरोपित पदाधिकारी की मंशा यह रही है कि कार्य में निविदा आदि दस्तावेज तैयार करने वाले व्यय एक प्रतिशत राशि से पूरी नहीं होती अतएव आकस्मिक मद में 3 प्रतिशत के प्रावधान में वस्तुतः कुछ विविध कार्यमद का अघोषित प्रावधान है। राशि का व्यय भी नहीं किया गया है। अतएव आरोपित पदाधिकारी की मंशा कार्यहित में अनुकूल एवं स्वच्छ प्रतीत होती है। आरोपी पदाधिकारी अपने पूर्व के बचाव बयान में उल्लेख किया है कि संबंधित सहायक अभियंता द्वारा प्राक्कलन में प्रावधानित 3 प्रतिशत आकस्मिक व्यय भूलवश दिया गया, जिसकी स्वीकृति दी गई परन्तु बचाव बयान में स्पष्ट किया गया कि छोटे-छोटे योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक तैयारी तथा निविदा दस्तावेज, एकरारनामा दस्तावेज, टेप, चूना आदि 1 प्रतिशत आकस्मिक व्यय से पूरा करना संभव नहीं होता। अतएव 3 प्रतिशत का प्रावधान समीचीन है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं उक्त बचाव बयान की समीक्षा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर करने पर यह तथ्य परिलक्षित होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि गैर योजना मद में 3 प्रतिशत आकस्मिक मद के प्रावधानों वाले प्राक्कलन की स्वीकृति भूलवश दी गई है। सामान्यतः मरम्मति कार्य में आकस्मिक मद का प्रावधान नहीं करने का प्रचलन है। संचालन पदाधिकारी का यह मत कि संभावित निविदा मदों को स्पष्ट कर दिया जाता तो प्राक्कलन का विर्निदिष्ट होता और आकस्मिक व्यय में से अतिरिक्त राशि विलोपित हो जाती, सही प्रतीत होता है परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया एवं भूलवश किए जाने को स्वीकार किया गया है। इस मद में व्यय नहीं किये जाने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी के गलत मंशा परिलक्षित नहीं होने के मंतव्य से सहमत हुआ जा सकता है। परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा नियम के विरूद्ध तकनीकी स्वीकृति दी गई है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप सं0-1 को आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है। समीक्षा-02- आरोप सं0-2, वर्ष 2013-14 में शीर्ष 2701 गैर योजना के तहत चहारदिवारी का उच्चीकरण कार्य के प्राक्कलन में विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ईंट एवं स्थानीय बालू की ढुलाई में बिना सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त किये 15कि0मी0 लीड का प्रावधान कर प्राक्कलन का गठन एवं तकनीकी स्वीकृति दिये जाने से संबंधित है। आरोपी ने अपने पूर्व के बचाव बयान में स्पष्ट किया है कि स्थल विशेष की परिस्थिति के मद्देनजर मात्र एक कार्य हेतु वास्तविकता के आधार पर न्यूनतम 15कि0मी0 कैरेज का प्रावधान निर्माण सामग्रियों के उपलब्धता के आधार पर किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्रांक-192 दिनांक 25.01.1983 के आलोक में प्राक्कलन के गठन के लिए दोषी नहीं माना गया है परन्तु वर्तमान तकनीकी स्वीकृति के पूर्व सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन प्राप्त नहीं करने के लिए दोषी माना गया। मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्रांक-192 दिनांक 25.01.1989 में ही उल्लेख है कि विशेष परिस्थिति में अधीक्षण अभियंता 8कि0मी0 से अधिक 15कि0मी0 तक ईंट की ढुलाई की अनुमति विशेष परिस्थति का जिक्र अपने आदेश में करते हुए दिया जा सकता है। परन्तु इस मामले में आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा निर्माण सामग्रियों की अनुपलब्धता के कारण विशेष परिस्थिति के संबंध में न तो प्रतिवेदित किया गया और न ही आदेश प्राप्त किया गया। चूँकि प्राक्कलन स्वीकृति इनके सक्षमता में था, इसलिए बिना परिस्थिति विशेष से संबंधित अधीक्षण अभियंता को सूचित एवं आदेश प्राप्त किए बिना प्राक्कलन गठन कर इसकी स्वीकृति प्रदान करने से आरोप-2 प्रमाणित परिलक्षित होता है। समीक्षा-03- आरोप सं0-3 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य है कि लोक निर्माण संहिता के नियम-294 के अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता को रू0 3.50 लाख की स्वीकृति की शक्ति है एवं साधारण मरम्मति के लिए बजट उपबंध एवं इसमें अनुमान्य वृद्धि की सीमा तक स्वीकृति दी जा सकती है। 10 प्रतिशत की सीमा तक परिणाम विपत्र में वृद्धि की स्वीकृति देने की शक्ति है। प्राप्त आवंटन 10.00लाख रूपये के विरूद्ध दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध के अन्तर्गत गैर योजना मद के शीर्ष 2701 के तहत वर्ष 2013-14 के लिए कराये जाने वाले कार्यों से संबंधित वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग द्वारा दी गई। कार्यपालक अभियंता द्वारा शीर्ष 2701 अन्तर्गत संपोषण एवं मरम्मति कार्य हेतु छः अद्द निविदित कार्यों का निविदा आमंत्रित कर निविदाओं को अनुसूचित दर से 4% (चार प्रतिशत) अधिक दर पर कार्य आवंटित किया गया जो अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिए गए मंतव्य "जिस कार्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति के सक्षम प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत निर्गत होती है, वैसे सभी कार्य हेतु उक्त संकल्प सं0-948 दिनांक 16.07.1986 लागू होगा एवं Ordinary Maintenance/ Ordinary Repair (साधारण मरम्मति) जिसकी स्वीकृति सरकार के स्तर से न होकर सिर्फ तकनीकी स्वीकृति ही होती है एवं योजना केवल एक वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृति होती है, में उक्त संकल्प लागू नहीं होगा" के आलोक में कार्यपालक अभियंता द्वारा कृत कार्रवाई नियमानुकूल प्रतीत होता है। साथ ही, आरोपित पदाधिकारी द्वारा समेकित रूप से 6 अद्द कार्य के लिए कुल भुगतेय राशि रू0 816236/- को कुल निविदित राशि रू0 820860/- के अन्तर्गत रखा गया जिससे सरकार पर अतिरिक्त व्यय का भार नहीं पड़ा। अतएव आरोपित पदाधिकारी पर राजस्व की क्षति का मामला नहीं बनता प्रतीत होता है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपित पदाधिकारी पर अधिरोपित आरोप अप्रमाणित प्रतीत होता है। समीक्षा-04-आरोप सं0-4 वर्ष 2013-14 में शीर्ष कार्य 2701 गैर योजना के तहत मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी से कार्यक्रम की स्वीकृति की राशि 3.0 लाख के विरूद्ध बिना पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम कराये 3.4959 लाख का प्राक्कलन गठन कर तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने के अतिरिक्त छः एकरारित कार्यों के लिए स्वीकृति राशि रू0 7.90 लाख के विरूद्ध 8.1625 लाख व्यय पर अधिक भुगतान का मामला से संबंधित है।63 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 आरोपित पदाधिकारी अपने पूर्व के बयान में उल्लेख किया है कि प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर निविदा के माध्यम से कार्य कार्यान्वयन उपरांत वास्तविक व्यय पर आधारित Post Facto पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति हेतु उचित माध्यम से मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया परन्तु न तो आपत्ति की गई और ना ही स्वीकृति प्रदान की गई। छः एकरारित कार्यों में 7.90 लाख में मात्र 0.26256 यानि 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो नियमानुकूल 10 प्रतिशत के अन्दर है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013-14 में 10 लाख रूपये के आवंटन के तहत 11 मदों का कार्यक्रम जिसकी कुल राशि 10 लाख मात्र की है, मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा स्वीकृति किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा कतिपय कार्यों का एकरारनामा 4 प्रतिशत की अनुसूचित दर से ज्यादा दर पर किया गया जिससे कार्यक्रम की निर्धारण राशि से ज्यादा व्यय हुआ। इसी प्रकार चेनारी स्थित प्रमंडलीय कार्यालय में विस्तारीकरण कार्य पर 3.0 लाख के विरूद्ध 3.56698 लाख व्यय हुआ। संचालन पदाधिकारी का मत है कि लोक निर्माण विभाग की संहिता के नियम-294-1(iii) के आलोक में प्राक्कलन की शक्ति बजट आवंटन एवं इसके अतिरिक्त Re-appropriation की सीमा तक निविदा निस्तार की शक्ति 10 प्रतिशत ज्यादा तक प्रदत है। उक्त के आलोक में व्यय को प्राप्त आवंटन के अन्तर्गत नियंत्रित रखा गया परन्तु कार्य प्राक्कलित राशि में वृद्धि होने पर Re-appropriation की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से किये बगैर तकनीकी स्वीकृति एवं कार्यान्वयन किया गया। हालांकि आरोपी द्वारा पुनरीक्षित राशि का कार्यक्रम तैयार कर अधीक्षण अभियंता के द्वारा मुख्य अभियंता को स्वीकृति हेतु भेजा गया। अन्त में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य है कि आरोपी सक्षम प्राधिकार से बिना स्वीकृति प्राप्त किये ही किसी कार्य को अनुमान्य राशि से ज्यादा की स्वीकृति प्रदान करने के लिए दोषी है। परन्तु मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के संकल्प सं0-948 दिनांक 16.07.1986 के अनुसार मरम्मति एवं अनुरक्षण कार्यों के प्राक्कलन जो चालू अनुसूचित दर के आधार पर बनाये गये हो, उनके उपर किसी प्रकार की बढ़ोतरी अनुमान्य नहीं होगी। किसी स्तर के भी पदाधिकारी प्राक्कलित राशि से अधिक खर्च करने के लिए सक्षम नहीं होंगे। निविदा निस्तार एवं कार्य मदों की मात्रा में भी किसी प्रकार की बढोतरी अनुमान्य नहीं होगी। इसके अतिरक्त मुख्य अभियंता द्वारा प्राप्त आवंटन के विरूद्ध स्वीकृत वार्षिक कार्यक्रम से भिन्न कतिपय कार्यों के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति बिना पुनरीक्षित कार्यक्रम की स्वीकृति प्राप्त किये दिये जाने का मामला परिलक्षित होता है, जिसे आरोपी द्वारा भी स्वीकार करते हुए बयान में वास्तविक व्यय पर आधारित Post Facto पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति का अनुरोध करने का उल्लेख है। सक्षम प्राधिकार से वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृत राशि से भिन्न बिना पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम की स्वीकृति प्राप्त किए प्राक्कलन गठन एवं तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं। अतः आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं उपरोक्त समीक्षा कंडिका-01 के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, चेनारी के विरूद्ध लगाये गये आरोप सं0-1 आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है। संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं समीक्षा कंडिका-02 के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्का0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध लगाये गये आरोप सं0-02 प्रमाणित परिलक्षित होता है। संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का मंतव्य एवं उपरोक्त समीक्षा कंडिका-03 के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्का0 कार्यपालक अभियंता पर आरोप सं0-3 अप्रमाणित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं समीक्षा कंडिका-04 के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्का0 कार्यपलाक अभियंता के विरूद्ध आरोप सं0-4 प्रमाणित प्रतीत होता है। निष्कर्ष- संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध गठित आरोपों की स्थिति निम्नवत बनती है - आरोप सं0-1 - आंशिक प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप सं0-2 - प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप सं0-3 - अप्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप सं0-4 - प्रमाणित प्रतीत होता है। अतएव प्रमाणित/आंशिक प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है :- "20% पेंशन कटौती 7 वर्षों के लिए"। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। उक्त निर्णय/सहमति के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती बाँध प्रमंडल सं0-1, भीतरीबाँध सम्प्रति सेवानिवृत्त को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन कटौती 7 वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।64 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 18 अक्तूबर 2022 सं0 22/नि0सि0(कटि0)25-01/2020-2459--श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, बौंसी के विरूद्ध निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-563 दिनांक 20.04.2020 द्वारा आरोप पत्र गठित कर आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी :- आरोप सं०-1- बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बौंसी अन्तर्गत बाढ़ प्रबंधन योजना अन्तर्गत संपादित चन्दन दायाँ एवं बायाँ तटबंध निर्माण कार्य के एकरारनामा को बन्द करने का विभागीय निदेश दिये जाने के फलस्वरूप आपके द्वारा अंतिम विपत्र तैयार कर समर्पित नहीं किया गया जो आपके द्वारा अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता को दर्शाता है। आरोप सं०-2- आप अपने पदस्थापन स्थल पर सदैव अनुपस्थित रहते है। आपके द्वारा अनुपस्थिति विवरणी ई-मेल के माध्यम से भेजा जाता है, जो नियमानुकूल नहीं है। आपके मुख्यालय/कार्यालय से अनुपस्थित रहने के कारण सरकारी कार्यों का निष्पादन भी ससमय नहीं होता है एवं आपके अधीनस्थ पदस्थापित कनीय अभियंता को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। आरोप सं०-3- बाढ़ अवधि 2019 के दौरान विभागीय SOP के आलोक में निर्धारित कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करने हेतु कार्यपालक अभियंता द्वारा दूरभाष पर एवं विभागीय निदेश दिये जाने के बावजूद आपके द्वारा अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का अनुपालन नहीं किया गया, बल्कि बाढ़ अवधि में भी मुख्यालय एवं कार्यालय से अनुपस्थित पाये गये हैं, जो कि घोर कदाचार एवं अनुशासनहीनता का परिचायक है। आरोप सं०-4- बाढ़ 26.09.2019 के लगातार क्षेत्र में अत्याधिक वर्षा होने के कारण चन्दन नदी के तटबंध में कई जगह रेनकटस हो जाने एवं नदी का जलश्राव काफी बढ़ जाने के कारण आपको कार्यपालक अभियंता द्वारा तत्काल कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। साथ ही आपके दूरभाष पर भी कॉल किया गया, परन्तु आपके द्वारा न तो फोन पर बात की गयी एवं न ही दिये गये निदेश के आलोक में कार्रवाई की गयी, बल्कि प्रशासनिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में ही कार्यपालक अभियंता से अभद्रता एवं दुव्र्यवहार किया गया। श्री संदीप कुमार, सहायक अभियंता द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर में अपना बचाव बयान समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित बचाव बयान में मुख्यतः दो भाग है। प्रथम भाग में श्री कुमार द्वारा कतिपय पत्रों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा बयान से संदर्भित बताया गया है। जबकि द्वितीय अंश में कतिपय पत्रों का उल्लेख किया गया है जिसके आधार पर विभागीय निदेशों तथा बाढ़ नियंत्रण हेतु SOP के विपरीत वरीय कार्यालय के भ्रामक कार्यशैली द्वारा संचालन का आरोप लगाया गया है। श्री कुमार द्वारा समर्पित बचाव बयान में आरोपों से संदर्भित स्पष्ट रूप से कोई प्रत्युत्तर नहीं दिये जाने की स्थिति में श्री कुमार के स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, कटिहार से मंतव्य सहित प्रतिवेदन की माँग की गयी। तदालोक में मुख्य अभियंता, कटिहार द्वारा मंतव्य सहित प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित सभी आरोप 01 से 04 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर एवं मुख्य अभियंता, कटिहार से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। विभागीय निदेश के बावजूद अंतिम विपत्र तैयार कर समर्पित किये जाने के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया, पदस्थापन स्थल पर सदैव अनुपस्थित रहने, अनुपस्थिति विवरणी ई-मेल के माध्यम से भेजने के संदर्भ में भी कोई स्पष्ट प्रत्युत्तर श्री कुमार द्वारा नहीं दिया गया। आरोप सं0-3 बाढ़ अवधि 2019 के दौरान विभागीय SOP के आलोक में निर्धारित कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करने हेतु कार्यपालक अभियंता द्वारा दूरभाष पर एवं विभागीय निदेश दिये जाने के बावजूद अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन नहीं किये जाने के संदर्भ में भी श्री कुमार द्वारा अपना कोई पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। इनके द्वारा सिर्फ कार्यस्थल पर कैम्प कर सूचनाओं का प्रेषण की बात कही गयी है। श्री कुमार से प्राप्त पत्र के अवलोकन से ज्ञात होता है कि इनके द्वारा कार्यस्थल के संदर्भ में कार्यपालक अभियंता एवं कनीय अभियंता से पत्राचार किया जाता रहा है परन्तु इनके स्तर से स्थिति से निपटने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, कटिहार से प्राप्त मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री संदीप कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बौंसी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :- (i) निन्दन (ii) असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतन वृद्धि पर रोक। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) सहायक अभियंता को उपरोक्त दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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20 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(गोपा0)27-03/2019-2480--मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के नव निर्मित सरकारी आवास पर दिनांक 29.08.2019 को घटित घटना के संदर्भ में मुख्य अभियंता,65 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 गोपालगंज आवास निर्माण योजना के अद्यतन भुगतान एवं लंबित भुगतान से संबंधित अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-01 जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-18 दिनांक-31.08.2019 से प्राप्त प्रारंभिक जॉच प्रतिवेदन में मुख्य अभियंता के आवास निर्माण में प्राक्कलन से बाहर जाकर अतिरिक्त कार्य कराने, कार्य कराकर संवेदक को भुगतान नहीं करने, सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बगैर अपने मुख्यालय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने आदि कतिपय प्रतिवेदित आरोपाें के लिए श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0 सं०-3911), कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-1886 दिनांक 01. 09.2019 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं उक्त मामले में श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-996 दिनांक 12.08.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
2. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया है।
3. उक्त निर्णय के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार, कार्यपालक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है। 4. श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त होने के उपरांत दण्ड का संसूचन अलग से किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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20 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-28/2007-2484--श्री मोबिन अहसन (आई0डी0-जे 9358), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमंडल, नासरीगंज सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में डुमराँव शाखा नहर एवं भोजपुर वितरणी तथा बिहिया शाखा नहर के अन्तर्गत सेवा पथों के कार्य में अनियमितता के लिए विभागीय समीक्षोपरांत संकल्प ज्ञापांक-97 दिनांक 22.01.2008 द्वारा निम्नांकित आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -
(i) भोजपुर वितरणी के 1.30 कि0मी0 से 8.50 कि0मी0 तक नहर सेवापथ निर्माण कार्य में ओवर साईज मेटल का व्यवहार किया गया।
(ii) सेवापथ के निर्माण में प्रयुक्त ईंट का कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ (Compressive Strength) मापदण्ड से कम पाया गया।
(iii) सोल्डर का कार्य विशिष्ट के अनुरूप नहीं पाया गया। (iv) भोजपुर वितरणी पथ में अलकतरा की मात्रा विशिष्टि से कम पाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा चारों आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए न्यून विशिष्ट के ईंट का उपयोग करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-593 दिनांक 26.07.2017 द्वारा श्री अहसन से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री अहसन द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई - (1) मेरे ऊपर लगाये गये सारे आरोप गलत एवं निराधार है, जो संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट हो गई है।
(2) इसी आरोप में मेरे कार्यपालक अभियंता श्री उदयानंद राय को दोषमुक्त किया जा चुका है। तत्संबंधी अधिसूचना की प्रति संलग्न करते हुए दोषमुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
श्री उदयानंद राय, तत्कालीन कार्यपालक एवं आरोपित सहायक अभियंता श्री मोबिन अहसन के विरूद्ध आरोप पत्र से सदृश आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाना परिलक्षित होता है।
श्री उदयानंद राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के मामले में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उक्त सभी बिन्दु प्रमाणित नहीं पाया गया परन्तु विभागीय समीक्षा में प्रयुक्त मेटल ग्रेड I, II, III के ओभरसाईज होने का आरोप प्रमाणित नहीं होने के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य को स्वीकार नहीं किया गया। इस क्रम में द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की विभागीय समीक्षा में आई0आर0 खगौल के स्थलीय जाँचफल में मेटल ग्रेड I, II, III के ओभरसाईज का आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण श्री राय के आरोप मुक्ति का प्रस्ताव दिया गया, जो माननीय मंत्री महोदय द्वारा अनुमोदित है। आरोपित पदाधिकारी श्री अहसन के मामले में संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन में सदृश रूप से आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु विभागीय समीक्षा में प्रयुक्त ईंट विशिष्ट के अनुरूप नहीं पाए जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होने के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य को स्वीकार नहीं किया गया है एवं अन्य बिन्दु i, iii एवं iv में संचालन पदाधिकारी के समीक्षा एवं मंतव्य को स्वीकार किया गया है। आरोप बिन्दु ii से असहमत होने का मुख्य कारण निम्नवत है - (i) जाँचित ईंट का भौतिक पारामीटर Non Uniform, Under burnt, Slight distorted Edge Rounded, Sound-NonUniform, Efflorescence & dull गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है, जो प्रथम श्रेणी के ईंट के लिए विशिष्ट के अनुरूप प्रतीत नहीं होता है। संचालन66 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 पदाधिकारी के दोनो जाँच प्रतिवेदनों में इस संदर्भ में कोई टिप्पणी नहीं किया जाना परिलक्षित नहीं होता है।
67 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 202221 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि0सि0(वीर0)07-08/2011-2490--श्री अशोक कुमार शर्मा (आई0डी0-4488) तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के विरूद्ध पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र में 58 से 66 कि0मी0 तटबंध के सड़क डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में सुरक्षित नहीं रखने संबंधी बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प -2652 दिनांक 27.12.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी -
"पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्राधीन पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 58.0 से 66.0 कि0मी0 तक मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वीरपुर द्वारा दिनांक 29.01.2010 को किये गये स्थल निरीक्षण के दौरान तटबंध के उपर सड़क डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर इसे सुरक्षित रखने का निदेश दिया गया, जिसका अनुपालन इनके द्वारा नहीं किया गया। इससे सरकार को वित्तीय क्षति होना परिलक्षित है। इस प्रकार वरीय पदाधिकारी के निदेश के बावजूद डिस्मेंटलिंग से प्राप्त ईंट/टुकड़ो को सरप्लस लेखा में नहीं लेने के लिए दोषी प्रतीत होते हैं।"
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1300 दिनांक 17.12.20 द्वारा श्री शर्मा से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई।
श्री शर्मा से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :- बचाव बयान- श्री शर्मा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब का मुख्य अंश निम्नवत है :- "प्रश्नगत कार्य के कार्य मद सं0-एक में Dismentling of Flexible pavement ETC के कार्य की मात्रा शून्य है। स्पष्ट है कि सड़क Dismentling से किसी भी तरह की ईंट प्राप्ति का प्रश्न ही नहीं उठता है। मुख्य अभियंता द्वारा कार्य के निरीक्षण के क्रम में तटबंध के सड़क Dismentling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर सुरक्षित रखने का निदेश था जो एक सामान्य/सभी अभियंता के लिए था न कि इनसे सीधे रूप से था। इस संबंध में तत0 मुख्य अभियंता, श्री चन्द्रशेखर पासवान से दूरभाष पर वार्ता भी की गयी थी। जिसे उनके द्वारा सामान्य निदेश की ही पुष्टि की गयी। जहाँ तक लुजनिंग कार्य से ईंट प्राप्त होने की बात कही जा रही है, वो बिल्कुल ही Non Technical है एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा तकनीकी पहलू को ध्यान में नहीं रखते हुए आरोप प्रमाणित किया गया है, क्योंकि लुजनिंग कार्य तटबंध के स्लोप में कर तटबंध का उच्चीकरण एवं सुदृढीकरण, कार्य का प्राक्कलन/एकरारनामा तैयार किया गया है। तटबंध के स्लोप में ईंट बिछाई का प्रश्न ही नहीं उठता है। मुख्य अभियंता द्वारा तटबंध के सड़क Dismentling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में लेने का निदेश है जिसका कार्यमद स्वीकृत प्राक्कलन में कही जिक्र नहीं है और न ही MB में दर्ज है। संचालन पदाधिकारी को सारे साक्ष्य यथा स्वीकृत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन अंतिम विपत्र का मापपुस्त की प्रति समर्पित कर दिया गया था। संचालन पदाधिकारी को कार्यपालक अभियंता द्वारा किसी भी तरह का ईंट, सड़क Dismentling से प्राप्त नहीं होने का पत्र समर्पित कर दिया गया था। जिसे उनसे संतुष्ट नहीं होकर बिना कारण उसे मनमाने ढंग से नकार दिया गया। इस तरह तटबंध के सड़क कार्य मद में सड़क Dismentling कार्य की मात्रा शून्य है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार की किसी तरह की वित्तीय क्षति नहीं हुई है। लुजनिंग कार्य मद में ईंट प्राप्त होने की संभावना भी शून्य है। जिससे स्पष्ट है कि सरकार का कोई वित्तीय क्षति का प्रश्न ही नहीं उठता है। इस तरह इस आधार पर आरोप प्रमाणित करना बिल्कुल ही मनगढ़त एवं Non Technical है। पूर्वी कोशी तटबंध के स्लोप में ब्रीक पिचिंग का प्रावधान इनके कार्य क्षेत्र में नहीं है। संवेदक का एकारानामा बंद कर दिया गया है। अंतिम मापी में भी किसी भी कार्य मद में ईंट की संख्या दर्ज नहीं है। विभागीय समीक्षा- संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है :-
आरोपी पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि कार्य क्षेत्र में स्वीकृत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन/एकरारनामा में Dismentling कार्य मद सम्मिलित नहीं है अर्थात Dismentling कार्य कराया नहीं नहीं गया है। पूर्वी तटबंध के कि0मी0 40 से 84 कि0मी0 के बीच कराये गये अग्रिम कार्य का अंतिम विपत्र मापपुस्त सं0-1352 के पेज सं0-09 से 15 तक में दर्ज है, जिसमें कहीं भी Dismantling कार्य मद की मापी/भुगतान अंकित नहीं है तथा कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के पत्रांक-1864 दिनांक 17.11.2011 के कंडिका सं0-1 के आधार पर दिया गया तर्क स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि यह एक सर्वविदित तथ्य है कि स्थलीय परिस्थिति के आलोक में उच्च पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है। लुजनिंग के क्रम में भी ईंट प्राप्त हो सकते है, जिसके आधार पर तत0 मुख्य अभियंता द्वारा आदेश दिया गया होगा। श्री शर्मा द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता द्वारा कार्य निरीक्षण के क्रम में सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर सुरक्षित रखने का आदेश एक सामान्य एवं सभी अभियंता के लिए था न कि सिर्फ इनके लिए था। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन में पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अधीन कि0मी0 58.0 से 66.0 तक का निरीक्षण करते हुए तटबंध के सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा से प्राप्त कर सुरक्षित करने का निदेश दिया गया है। इनके द्वारा स्वयं कहा गया है कि इनका कार्यक्षेत्र पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 58.0से 66.0 तक था।68 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि लुजनिंग कार्य मद तटबंध के स्लोप में कर तटबंध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का प्राक्कलन/एकरारनामा तैयार किया गया है और तटबंध के स्लोप में ईंट बिछाई का प्रश्न ही नहीं उठता है। तत0 मुख्य अभियंता द्वारा तटबंध के सड़क Dismantling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में लेने का निदेश है। उक्त कार्य मद का न तो अंतिम मापी ही ली गयी है एवं न ही मापपुस्त में दर्ज है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि कार्य के दौरान स्थल निरीक्षण के क्रम में स्थलीय स्थिति के अनुसार उच्च पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है। लुजनिंग सड़क Dismantling से ईंट प्राप्त हो सकते है।
इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा भी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा किसी भी तरह का ईंट, सड़क Dismantling से प्राप्त नहीं होने का पत्र संचालन पदाधिकारी को दिया गया था। परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना कारण उसे मनमाने ढंग से नकार दिया गया। जो बिल्कुल ही न्यायसंगत नहीं है। जबकि अधीक्षण अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा के जाँच प्रतिवेदन में अंकित है कि पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र कि0मी0 58 से 66 तक मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक 29.01.2010 को की गयी स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि स्थल पर ई0 अशोक कुमार शर्मा एवं कनीय अभियंता उपस्थित थे जिन्हें तटबंध के सड़क Dismnatling से प्राप्त ईंट को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर इसे सुरक्षित रखने का निदेश दिया गया। इसके बावजूद भी पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के कार्यक्षेत्र के इस भाग में ईंट/ईंट के टूकड़ों को सरप्लस लेखा में नहीं रखना संदेहात्मक प्रतीत होता है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता को प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-705 दिनांक 30.03.2022 द्वारा निम्न दण्ड दिया गया -
"तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :-
कार्य स्थल पर पूर्व से किये गये ब्रीक सोलिंग के Dismentling के उपरांत स्थल पर यत्र-तत्र बिखरे ईटों/ईटों के टुकड़ो को सरप्लस लेखा में प्राप्त कर इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उच्चाधिकारी के निदेश का अनुपालन नहीं किये जाने से वित्तीय क्षति हुई है। "वर्णित स्थिति में वित्तीय क्षति के प्रमाणित पाये गये आरोपों के विरूद्ध बचाव हेतु ठोस साक्ष्य नहीं देने के कारण श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन अस्वीकृत करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।
अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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21 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि॰सि॰(मुक0)-मोति॰-19-27/2018-2491--श्री बीरेन्द्र कुमार सिन्हा (आई0डी0-1760), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के अन्तर्गत एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री उपयोग के बावजूद ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड की बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किये जाने संबंधी निम्नांकित आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-296 दिनांक-12.03.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया। तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। कार्य के निरीक्षण के दौरान उनके द्वारा स्थानीय सामग्री के उपयोग का उद्घोषणा नहीं कर तथ्य को छिपाकर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रतिवेदित किया गया। इससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित भुगतान में उनके स्तर से सहयोग करने के आरोप के लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी है। दिनांक-31.01.2016 को श्री सिन्हा के सेवानिवृत होने के कारण उनके विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-09 सहपठित ज्ञापांक-61 दिनांक-18.01.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत् सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक-503 दिनांक-11.04.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में उनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उार (अभ्यावेदन) के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1924 दिनांक 06.11.2017 द्वारा सहमति प्राप्त होने के उपरांत श्री सिन्हा के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-44, दिनांक 05.01.2018 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- "बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"।69 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 उक्त विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-19322/2018 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक 08.08.2019 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश में इस तथ्य का उल्लेख किया गया है कि जाँच टीम के सदस्यों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण संचालन पदाधिकारी द्वारा नहीं किया गया। इसलिए जाँच प्रतिवेदन को साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं किया जा सकता। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त पारित आदेश में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं श्री सिन्हा के विरूद्ध संसूचित दण्ड को निरस्त करते हुए सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी के स्तर पर Remand Back किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा उक्त पारित आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-44, दिनांक 05. 01.2018 द्वारा श्री बीरेन्द्र कुमार सिन्हा (आई0डी0-1760), तत0 अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संसूचित "बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए" के दण्ड एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन को विभागीय अधिसूचना सं0-27 दिनांक 09.01.2020 द्वारा निरस्त करते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु सम्पूर्ण मामले को मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पास Remand Back किया गया।
उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी मुख्य जॉच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 811 दिनांक 05.10.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। उक्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप के पहले भाग अर्थात योजना के निरीक्षण के पश्चात निरीक्षण प्रतिवेदन में स्थानीय सामग्रियों को उपयोग के संबंध में कोई भी तथ्य अंकित नहीं करने को, प्रमाणित पाये जाने एवं दूसरे भाग अर्थात वास्तविक लीड के आधार पर सामग्रियों के ढुलाई मद में भुगतान न कर एकरारनामा के अनुरूप प्रावधानित दर के अनुसार अनियमित भुगतान करने में सहयोग प्रदान करने को, प्रमाणित नहीं पाये जाने का मंतव्य दिया गया।
मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-513 दिनांक 08.03.2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री सिन्हा को उपलब्ध कराते हुए उनसे उक्त के संदर्भ में अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी।
उक्त आलोक में श्री सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (दिनांक 01.04.2022) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
इनके द्वारा दिनांक 12.11.11 को स्थल भ्रमण किया गया था। इन्हें किसी भी श्रोत से सड़क में प्रयुक्त पत्थरों की अनियमितता की जानकारी ही नहीं थी। मोनिटरिंग के अभियंताओं का मुख्य कर्तव्य योजनाओं की भौतिकी/वित्तीय प्रगति की समीक्षा करना है, न कि योजनाओं में प्रयुक्त सामग्रियों की गुणवत्ता की जाँच, गुणवत्ता प्रतिवेदन देना होता है। इस संबंध में विभागीय स्थायी आदेश पत्रांक 322 दिनांक 10.06.2006 पूर्व से निर्गत है।
इनके द्वारा नहर बाँध से भ्रमण किया गया था जो कि मुख्य नहर का दांया बाँध ही था। इनके साथ बोलेरो वाहन में कार्यपालक अभियंता श्री दिलीप कुमार एवं उनके सहायक अभियंता भी साथ थे। ये दिनांक 10.11.2011 से 12.11.2011 तक गंडक परिक्षेत्राधीन मुख्य नहर/शाखा नहर का स्थल भ्रमण किये थे। निरीक्षण के दौरान संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं सहायक अभियंता इनके साथ रहते थे। कार्यपालक अभियंता द्वारा इन्हें नहर बाँध (दायां बाँधा) से भ्रमण कराया गया था। इसलिए इन्होंने नहर बाँध का उल्लेख अपने प्रतिवेदन में किया था। बाँये बाँध (सड़क बाँध) से इन्हें भ्रमण नहीं कराया गया था क्योंकि कार्यपालक अभियंता द्वारा यह बताया गया कि सड़क बाँध पर कहीं-कहीं डोजर, डम्पर, वाटर टैंकर, मशीन आदि रखे हुए हैं इसलिए बाँया बाँध से भ्रमण कराने में काफी दिक्कत होगी। चलते वाहन से 280 फीट की दूरी से ये अपने नैकेट आँख से कैसे देख पाते कि Compacted GSB एवं उसके ऊपर Compacted WMM (1st layer) में प्रयुक्त पत्थर में कितने प्रतिशत स्थानीय पत्थर है। इन्होंने अपने मन से तीन दिनों तक क्षेत्र भ्रमण किया था तथा अंतिम दिन दिनांक 12.11. 2011 को अपराह्न में मुख्य पश्चिमी नहर का भ्रमण किया था। इन्हें कोई गुणवत्ता जाँच के आदेश उच्चधिकारी से प्राप्त नहीं थे। तीन दिनों में अनेक नहरों के योजनाओं को देखा तथा तदनुसार भौतिक प्रगति प्रतिवेदन दिया गया। इन्होंने कोई विशेष जाँच के उद्देश्य से भ्रमण नहीं किया था।
मोनिटरिंग के अभियंताओं के कर्तव्य एवं दायित्व पर विभाग का स्थायी आदेश 322 दिनांक 10.06.2006 निर्गत है जिसमें मोनिटरिंग के अभियंताओं का दायित्व एवं कर्तव्य का विस्तृत व्याख्या की गयी है। इस पत्र में स्पष्ट है कि मोनिटरिंग के अलावे कोई अन्य काम सचिव या वरीय स्तर के आदेश के बिना नहीं किया जायगा। इस पत्र में कहीं भी नहीं कहा गया है कि मोनिटरिंग के अभियंताओं द्वारा निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्रियों की गुणवत्ता/विशिष्टि की भी जाँच किया जाना है। मुख्यालय स्तर एवं क्षेत्रीय स्तर पर गुण नियंत्रण संगठन बना हुआ है जो समय-समय पर निर्माण कार्यों की, विशिष्टि गुणवत्ता की जाँच करते हैं। अगर इन्हें भी स्थानीय पत्थर की उपयोग की सूचना निरीक्षण की तिथि 12.11.2011 के पूर्व किसी भी श्रोत से प्राप्त होती तो ये भी इसी –ष्टि से कार्रवाई करते। दांये बांध पर नाला निर्माण हेतु कुछ कम गुणवत्ता के ईंट देखे थे, जिसे इन्होंने अपने प्रतिवेदन में अंकित किया था। उस स्थल पर कोई पत्थर नहीं रखे थे। इन्हें 280 फीट दूर से चलते वाहन से सड़क बाँध पर संपीडित GSB एवं इसके ऊपर WMM का 1st layer को क्षेत्र के कार्यपालक अभियंता द्वारा दिखाया गया था तथा पूर्ण होने की बात कही गयी थी। नहर बाँध (दांये बाँध) से सड़क बाँध पर compacted (संपीडित) सड़क का उजला सतह दिखाई पड़ रहा था। इसी के आलोक में GSB एवं WMM 1st layer का पूर्ण होने की बात इनके द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में कही गई थी।70 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि वाहनों से हीं इन्होंने सभी स्थानों पर भ्रमण किया था। पश्चिमी मुख्य नहर नेपाल भाग में स्थित है। इसलिए नेपाल सरकार से कार्यपालक अभियंता का निबंधित वाहन (जो बोलेरो वाहन था) में कार्यपालक अभियंता श्री दिलीप कुमार एवं सहायक अभियंता के साथ 0 से 19 कि० मी० सूर्यपूरा पावर हाउस तक गया था। दोपहर में खाना खाने के पश्चात् ये श्री दिलीप कुमार कार्यपालक अभियंता एवं सहायक अभियंता के साथ नेपाल निबंधित वाहन से अपराह्न में मुख्य पश्चिमी नहर का भ्रमण किया था तथा शाम में वाल्मीकी नगर वापस आकर शाम में ही 5ः00 बजे पटना (मुख्यालय) के लिए प्रस्थान किया तथा 12ः00 रात्रि पटना वापस आया।
इन्हें किसी उच्च पदाधिकारी द्वारा कोई पश्चिमी मुख्य नहर के सड़क निर्माण के जाँच का आदेश प्राप्त नहीं था। इन्होंने अपने मन से गंडक क्षेत्र की जानकारी के लिए (बेतिया में दिनांक 9.11.2011 को माननीय मुख्य मंत्री के सेवा यात्रा में भाग लेने के पश्चात) दिनांक 10.11.2011 से 12.11.2011 तक गंडक क्षेत्र भ्रमण किया था। अगर इन्हें स्थानीय पत्थर के उपयोग की पूर्व से सूचना निरीक्षण की तिथि 12.11.2011 को रहती तो ये अवश्य कार्रवाई करते।
तकनीकी परीक्षण कोषांग के अधीक्षण अभियंताओं द्वारा दिनांक 12-13 अगस्त, 2012 को स्थानीय जनता के शिकायत पर स्थल की जाँच की गई थी। स्थल जाँच के क्रम में उनके द्वारा छेनी-हथोड़ी, कुदाल से सड़क खोदकर नमूने लेकर पटना स्थित प्रयोगशाला में जाँच करायी गयी थी। गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन मार्च 2013 में जल संसाधन विभाग को प्राप्त हुआ था। स्पष्ट है कि इनके क्षेत्र भ्रमण दिनांक 12.11.2011 के नौ महीने वाद स्थल की जाँच की गई थी। उनके जाँच के सात महीने बाद उनका जाँच प्रतिवेदन विभाग को दिया गया।
श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा अपने न्याय निर्णय (दिनांक 08.08.2019) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इनके विरूद्ध कोई Evidence नहीं है। सिर्फ इनके द्वारा दिनांक 12.11.2011 के निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित प्रगति प्रतिवेदन में "मुख्य पश्चिमी नहर के सेवा पथ पर GSB एवं WMM 1st layer के कार्य कराया गया है" के उल्लेख करने के आधार पर तकनीकी कोषांग द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध टिप्पणी दी गई है। उसी के आधार पर इन्हें दंडित किया गया, जो न्यायसंगत नहीं है। समीक्षा ः- श्री सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों का उल्लेख विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को समर्पित किये गये बचाव बयान में किया जा चुका है, जो संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन की कंडिका 7 में उद्धृत है। इन तथ्यों पर विचारोपरांत हीं संचालन पदाधिकारी, मुख्य जांच आयुक्त द्वारा श्री सिन्हा के विरुद्ध गठित आरोपों के सन्दर्भ में मंतव्य अंकित किया गया है। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युतर) में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है जिस पर विचार किया जा सके।
वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सिन्हा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युतर) स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
मामले के सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री बीरेन्द्र कुमार सिन्हा, (आई०डी०-1760) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) के तहत निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"। उक्त निर्णय के आलोक में बीरेन्द्र कुमार सिन्हा, (आई०डी०-1760) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) के तहत निम्न दंड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-
"बीस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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21 अक्तूबर 2022
सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)-03-02/2019/2492--श्री उदय कुमार (आई0डी0-3836) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, गया के पद पर पदस्थापित थे, तो उनके विरूद्ध मोबाईल ट्रैकिग के दौरान विभाग की ओर से आवंटित मोबाईल स्वीच ऑफ पाये जाने एवं बार-बार विभागीय निदेश के बावजूद जवाब न देने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया।
उक्त आरोप के लिए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1246, दिनांक 31.05.2022 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री कुमार दिनांक 30.06.2022 को सेवानिवृत हो चुके हैं।
अतएव श्री उदय कुमार (आई0डी0-3836) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।71 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 सूचना एंव जन-सम्पर्क विभाग
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अधिसूचना
25 नवम्बर 2022
सं0 विज्ञा0(04)01-01/2022-285/सू0ज0स0वि0--पूर्व निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-265 दिनांक-16.11.
2022 के क्रम संख्या-01 पर अंकित एजेन्सी M/S- Century Business Pvt.Ltd, पटना को Patna Airport पर Digital Media के माध्यम से प्रचार-प्रसार के लिए डी0ए0वी0पी0 दर पर सूचीबद्व किया गया था। बिहार विज्ञापन नियमावली, 2016 के आलोक में दिनांक- 24.11.2022 को आयोजित दर निर्धारण समिति एवं विज्ञापन प्राधिकृत समिति की बैठक में की गई अनुशंसा पर सम्य्क विचारोपरान्त M/S- Century Business Pvt.Ltd, पटना को Patna Airport पर Digital Media के माध्यम से प्रचार-प्रसार हेतु विभागीय दर को निम्नवत संशोधित किया जाता हैः-
1. M/S- Century Business Pvt.Ltd पटना को Patna Airport पर Digital Boards /LED Screens, Location-Old SHA(25 Screens of 2.22'x4') के लिए DAVP द्वारा निर्धारित दर RS.47.4/-Per 10 Second spot on all screens combined per day के स्थान पर इसी लोकेशन के लिए Rs 3,00,000/- (तीन लाख) प्रति माह अनुमान्य GST को विभागीय दर निर्धारित करते हुए प्रचार-प्रसार करने हेतु स्वीकृत सूची में सम्मलित किया जाता है।
2. इस लोकेशन/ माध्यम के अतिरिक्त Patna Airport पर अन्य लोकेशन/माध्यम पर प्रचार-प्रसार के लिए एजेन्सी को डी0ए0वी0पी0 दर ही अनुमान्य होगा।
3. उपरोक्त सूची एवं दर वर्ष 2022-23 के लिए या अगले वित्तीय वर्ष में सूचीबद्ध होने तक मान्य होगा। 4. प्रस्ताव में माननीय मंत्री, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सत्येन्द्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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(cid:274)ामीण (cid:874)वकास (cid:874)वभाग ------
अ(cid:876)धसूचना
21 दिसम्बर 2022
सं0 (cid:274)ा0(cid:874)व0-14(भा0)भा0-01/2021-1454262---(cid:302)ी च(cid:219)(cid:289)भूषण गु(cid:220)ता, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), जगद(cid:547)शपुर, भागलपुर, स(cid:224)(cid:292)(cid:467)त (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), कु टु (cid:224)बा (औरंगाबाद) के विरुद्ध बी0पी0एल0 सूची के इतर लाभुक(cid:585) को आवास का लाभ (cid:465)दये जाने के आरोप पर िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547), भागलपुर के प(cid:287)ांक-15 (cid:292)0/(cid:874)वकास (cid:465)दनांक- 23.02.2021 द्वारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त है ।
िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547), भागलपुर द्वारा (cid:292)(cid:467)तवे(cid:465)दत आरोप पर काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), कु टु (cid:224)बा (औरंगाबाद) के प(cid:287)ांक-591 (cid:465)दनांक-26.07.2021 द्वारा (cid:302)ी गु(cid:220)ता का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)ा(cid:220)त है । िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547) द्वारा (cid:292)(cid:467)तवे(cid:465)दत आरोप एवं (cid:302)ी गु(cid:220)ता के (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण के समी(cid:162)ोपरांत आरोप (cid:292)थम (cid:289)(cid:231)टया गंभीर (cid:292)कृ (cid:467)त के होने के कारण (cid:302)ी गु(cid:220)ता के विरुद्ध (cid:874)वभागीय संक(cid:227)प सं(cid:201)या-584471 (cid:465)दनांक-30.09.2021 द्वारा (cid:874)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचा(cid:871)लत क(cid:551) गयी । संचालन पदा(cid:876)धकार(cid:547) द्वारा (cid:465)दनांक-08.09.2022 को जांच (cid:292)(cid:467)तवेदन सम(cid:874)प(cid:91)त (cid:873)कया गया । सम(cid:874)प(cid:91)त जांच (cid:292)(cid:467)तवेदन पर (cid:302)ी गु(cid:220)ता से (cid:871)ल(cid:872)खत अ(cid:223)यावेदन (cid:292)ा(cid:220)त (cid:873)कया गया ।72 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547) द्वारा (cid:292)(cid:467)तवे(cid:465)दत आरोप, संचालन पदा(cid:876)धकार(cid:547) द्वारा सम(cid:874)प(cid:91)त जांच (cid:292)(cid:467)तवेदन एवं (cid:302)ी गु(cid:220)ता के (cid:871)ल(cid:872)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:874)वभाग द्वारा क(cid:551) गई । समी(cid:162)ोपरा(cid:219)त संचालन पदा(cid:876)धकार(cid:547) के (cid:292)(cid:467)तवेदन से सहमत होते हुए (cid:302)ी गु(cid:220)ता के विरुद्ध (cid:292)मा(cid:872)णत आरोप(cid:585) के आलोक म(cid:581) उ(cid:219)ह(cid:581) लघुदंड के (cid:510)प म(cid:581) (cid:467)नदंन का दंड देने का (cid:467)नण(cid:91)य (cid:871)लया गया ।
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(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
बालामु(cid:510)गन डी0, स(cid:876)चव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 41—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
73 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022भाग-2
बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और
नियम आदि।
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सामान्य प्रशासन विभाग
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शुद्धि-पत्र
20 दिसम्बर 2022
संo 21/पि॰व॰रा॰आ॰-01/2012 सा॰प्र॰-22939--सदस्य सचिव, पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-428 दिनांक 30.11.2022 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-21121 दिनांक-28.11.2022 में अंकित नाम "श्री बीरेन्द्र कुशवाहा" के स्थान पर "श्री बीरेन्द्र कुमार सिह" पढ़ा एवं समझा जाय। 2. अधिसूचना संख्या-21121 दिनांक-28.11.2022 इस हद तक संशोधित समझा जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो॰ सोहैल, विशेष सचिव।
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शुद्धि-पत्र
20 दिसम्बर 2022
संo 21/पि॰व॰रा॰आ॰-01/2012सा॰प्र॰-22938--सदस्य सचिव, पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-429 दिनांक 01.12.2022 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-21122 दिनांक-28.11.2022 में अंकित नाम "श्री देवमुनी सिंह यादव" के स्थान पर "श्री देवमुनी सिह" पढ़ा एवं समझा जाय। 2. अधिसूचना संख्या-21122 दिनांक-28.11.2022 इस हद तक संशोधित समझा जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो॰ सोहैल, विशेष सचिव।
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जल संसाधन विभाग -------
शुद्धि-पत्र
23 दिसम्बर 2022
सं0 7/ए0 01-1001/2022-2317--विभागीय अधिसूचना संख्या-7/ए0 01-1001/2022-291 दिनांक-26.02.22 के द्वारा नवनियुक्त सहायक अभियंता (असैनिक) का नियुक्ति-सह-पदस्थापन आदेश निर्गत किया गया है जिसके क्रम संख्या-132, कॉलम-3 में अनुशंसित अभ्यर्थी के नाम में टंकण भूलवश सौम्य यादव अंकित हो गया है जिसे ''सौम्या यादव'' पढ़ा जाय ।
विभागीय अधिसूचना संख्या-7/ए0 01-1001/2022-291 दिनांक-26.02.22 को इस हद तक संशोधित समझा जाय । शेष प्रविष्टियॉ यथावत रहेगी ।
आदेश से, संजीव शैलेश, उप-सचिव-1(प्रबंधन)।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 41—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
74 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-60/2022--13721 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 19 दिसम्बर 2022
दिनांक-28.11.2022 को जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा एवं पुलिस अधीक्षक, भोजपुर, आरा द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सदर आरा, सहायक पुलिस अधीक्षक-सह-अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर आरा, विभिन्न थानाध्यक्षों एवं पर्याप्त संख्या में पुलिस बल के साथ मंडल कारा, आरा में औचक छापेमारी कर सघन तलाशी ली गई। जिला प्रषासन द्वारा उक्त छापेमारी/तलाशी के क्रम में मंडल कारा, आरा में कई आपत्तिजनक/प्रतिबंधित सामग्रियाँ यथा-08 मोबाईल फोन, 04 मोबाईल चार्जर, 01 कैंची, 15,000/- नकद एवं 05 मोबाईल का सिमकार्ड तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों की बरामदगी से स्पष्ट है कि श्री संदीप कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, आरा द्वारा अपने दायित्वों/कर्त्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती गई है। साथ ही कारा में इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्रियों का बरामद होना कारा प्रशासन की संलिप्तता को परिलक्षित करता है।
2. जिला प्रशासन की उक्त छापेमारी के पूर्व वृत्ताधीक्षक, केन्द्रीय कारा, बक्सर द्वारा दिनांक-05.11.2022 को मंडल कारा, आरा का औचक निरीक्षण किया गया था। उक्त निरीक्षण के क्रम में प्राप्त आसूचना से वृत्ताधीक्षक को ज्ञात हुआ कि बंदी धनजी यादव, पे0-लाल बहादुर यादव एवं बंदी बिनोद यादव, पे0-मुन्ना यादव का कुप्रभाव कारा प्रशासन को प्रभावित करने में है, इन बंदियों का इतना दुष्प्रभाव है कि कक्षपाल संवर्ग भी कारा के अन्दर अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करने में पूर्णतः सफल नहीं होते हैं। इनके द्वारा बंदियों से कक्षों में बेड चार्ज के नाम पर अवैध वसूली, कैन्टीन के सामानों का अधिकतम दर पर बिक्री, बंदियों को प्रताड़ित करना, बंदी समूहीकरण कर कारा प्रशासन को दबाव में रखने का कार्य किया जाता है। कतिपय कक्षपालों द्वारा भी दबंग बंदियों से साठ-गांठ कर अवैध वसूली एवं बंदियों में गुटबाजी का कार्य किया जाता है।
3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि मंडल कारा, आरा की सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है एवं दबंग कैदियों द्वारा कारा का संचालन किया जा रहा है तथा अन्य बंदियों को तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस मामले में काराधीक्षक श्री संदीप कुमार एवं अन्य कारा कर्मियों की भूमिका संदेहास्पद है तथा उनका इन दबंग बंदियों से आपराधिक साठ-गांठ भी परिलक्षित होता है, जिसकी पुष्टि वृत्ताधीक्षक, केन्द्रीय कारा, बक्सर के निरीक्षण के उपरान्त जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा एवं पुलिस अधीक्षक, भोजपुर, आरा द्वारा मंडल कारा, आरा का किये गये औचक तलाशी/छापेमारी में 08 मोबाईल फोन सहित भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी से होती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है तथा इसमें श्री संदीप कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, आरा की प्रशासनिक विफलता एवं इस अनाचार में गहरी संलिप्तता का द्योतक है। 4. उपरोक्त के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत श्री संदीप कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, आरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबनावस्था में इनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, गया निर्धारित किया जाता है।
5. श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र गठित कर अलग से विभागीय कार्यवाही संस्थित करने की कार्रवाई की जायेगी।
6. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के विहित प्रावधानों के अन्तर्गत श्री कुमार को निलंबनावस्था में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता संलग्न कारा से देय होगा।
7. मंडल कारा, आरा में अधीक्षक के पद पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा को अधिकृत किया जाता है।75 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 8. उपरोक्त पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-01/2020--13781
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20 दिसम्बर 2022
श्री रमेष प्रसाद, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, दाउदनगर के विरूद्ध उनके मंडल कारा, हाजीपुर में पदस्थापन के दौरान दिनांक 03.01.2020 को विचाराधीन बंदी मनीष कुमार उर्फ तेलिया, पे0-अमरेन्द्र कुमार सिंह को कारा के अन्दर एक अन्य संसीमित बंदी द्वारा गोली मार कर हत्या कर दिये जाने की घटना एवं दिनांक 03.01.2020 तथा 05.01.2020 को जिला प्रषासन द्वारा कारा में की गई औचक छापेमारी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-357 दिनांक 14.01.2020 द्वारा श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर को निलंबित किया गया तथा निलंबनावस्था में उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया। उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6159 दिनांक 11.09.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई है। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. उक्त विभागीय कार्यवाही के फलाफल के पष्चात् प्रमाणित आरोपों के लिए अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5815 दिनांक-25.05.2022 द्वारा श्री रमेश प्रसाद के विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया :- ''संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड''। 3. उपरोक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री रमेष प्रसाद द्वारा दायर पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को सम्यक् विष्लेषणोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9156 दिनांक-01.09.2022 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। 4. श्री प्रसाद दिनांक-14.01.2020 से दिनांक-24.05.2022 तक निलंबित रहे। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रसाद के निलंबन अवधि में भुगतेय राशि के विनिश्चयन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-11 (5) के विहित प्रावधान के आलोक में विभागीय ज्ञापांक-9550 दिनांक-13.09.2022 द्वारा उनसे साठ दिनों के अन्दर अभ्यावेदन की मांग की गयी।
5. तद्आलोक में श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, दाउदनगर द्वारा पत्रांक-3395 दिनांक-21.11.2022 के माध्यम से अपना अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है उनके निलंबन अवधि दिनांक-14.01.2020 से 24.05.2022 (लगभग 2 वर्ष 6 माह) के दौरान उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया गया है, जिस कारण उन्हें एवं उनके परिवार को आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि दिनांक-03.01.2020 को मंडल कारा, हाजीपुर में घटित घटना में अन्य कारा कर्मियों के विरूद्ध भी विभागीय कार्यवाही की गई, किन्तु उन्हें छोड़कर कोई भी इतना अधिक समय तक निलंबित नहीं रहा। दोषी कारा कर्मियों को विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व ही निलंबन से मुक्त कर दिया गया था। उनका कहना है कि दण्डादेष निर्गत की तिथि 25.05.2022 के साथ ही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत उनके निलंबन अवधि के संबंध में विचार किया जाना चाहिए था। श्री प्रसाद का कहना है कि उनके निलंबन के कारण उनकी वार्षिक वेतनवृद्धियाँ 2020, 2021 एवं 2022 का भुगतान नहीं हो पाया तथा उन्हें पाँच (05) वेतनवृद्धियाँ संचयी प्रभाव से रोक का दण्ड अधिरोपित किया गया, जिस कारण वास्तव में उन्हें आठ (8) वेतनवृद्धियों का नुकसान हो रहा है। श्री प्रसाद द्वारा निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त शेष वेतन एवं भत्ते का भुगतान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
6. श्री रमेष प्रसाद के अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत स्पष्ट है कि श्री प्रसाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत् प्रक्रिया का पालन करते हुए दण्ड अधिरोपित किया गया है। श्री प्रसाद के विरूद्ध उनके मंडल कारा, हाजीपुर में पदस्थापन के दौरान दिनांक-03.01.2020 को विचाराधीन बंदी मनीष कुमार उर्फ तेलिया, पे0-अमरेन्द्र कुमार सिंह को कारा के अन्दर एक अन्य संसीमित बंदी द्वारा गोली मार कर हत्या कर दिये जाने की घटना एवं दिनांक-03.01.2020 तथा 05.01.2020 को जिला प्रषासन द्वारा कारा में की गई औचक छापेमारी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी के मामले में उनके द्वारा बरती गई गंभीर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता के आरोप प्रमाणित पाये गये हैं। इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रमेष प्रसाद को '' संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड '' अधिरोपित किया गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री रमेष प्रसाद का निलंबन औचित्यपूर्ण है। अतः उनका अभ्यावेदन अस्वी—त किया जाता है।
7. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, दाउदनगर के निलंबन अवधि दिनांक-14.01.2020 से दिनांक-24.05.2022 तक के संबंध76 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप नियम-7 एवं 8 के आलोक में निम्न आदेश पारित किया जाता है :-
''निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा तथा इस अवधि की गणना पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में की जायेगी।'' आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
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सं0 कारा/नि0को0(क)-70/12--13880
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22 दिसम्बर 2022
श्री राम सुमेर शर्मा, तत्कालीन उपाधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त काराधीक्षक) के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मधुबनी में उपाधीक्षक के पद पर पदस्थापन के दौरान कारा परिसर में मंदिर निर्माण एवं रंगाई-पुताई के लिए अवैध रूप से बंदियों को कारा से बाहर निकाल कर कार्य कराने के क्रम में मौके का लाभ उठाकर दिनांक 11.09.2012 को विचाराधीन बंदी मो0 साबीर के पलायन के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय आदेष ज्ञापांक-2404 दिनांक 08.05.2013 द्वारा श्री राम सुमेर शर्मा, तत्कालीन उपाधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई थी। उक्त विभागीय कार्यवाही के फलाफल के उपरान्त विभागीय आदेष ज्ञापांक-4794 दिनांक 03.09.2014 द्वारा उनके विरूद्ध ''निन्दन'' एवं ''दो वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड'' अधिरोपित किया गया था।
2. उक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री शर्मा द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को अपीलीय प्राधिकार- सह-प्रधान सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना द्वारा अस्वीकृत करते हुए दंड को यथावत् रखा गया, जो विभागीय ज्ञापांक 6724 दिनांक 29.12. 2014 द्वारा संसूचित है।
3. उपर्युक्त दंडादेष ज्ञापांक 4794 दिनांक 03.09.2014 एवं अपीलीय प्राधिकार द्वारा दिनांक 24.12.2014 को पारित आदेष-सह-पठित ज्ञापांक 6724 दिनांक 29.12.2014 के विरूद्ध श्री राम सुमेर शर्मा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में C.W.J.C No. 922/2015 दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 07.05.2018 को पारित न्यायादेष में विभागीय दण्डादेष ज्ञापांक-4794 दिनांक 03.09.2014 एवं अपीलीय प्राधिकार के आदेष ज्ञापांक-6724 दिनांक 29.12.2014 को निरस्त करते हुए सक्षम प्राधिकार को नये सिरे से आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही करने को स्वतंत्र रखा गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेष का कार्यषील अंष निम्नवत् है :-
"In view of the said findings, the entire proceedings arising out of such non est charge, is unsustainable and is therefore, declared illegal. This Court would therefore, quash the office order dated 03.09.2014 bearing memo no. 4794 by which the punishment has been awarded against the petitioner. In view of the entire proceedings have been declared invalid, the appellate order bearing memo no 6724 dated 29.12.2014 is also unsustainable in the eye of law and is quashed. Since the issue has been decided on the basis of charge memo being incompetent and without jurisdiction, it would be open to the respondent authorities to proceed afresh after a conscious decision of the competent authority/Disciplinary Authority in respect of the charge to be framed by the competent authority".
4. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा C.W.J.C No. 922/2015 में दिनांक 07.05.2018 को पारित उक्त न्यायादेष के आलोक में विभागीय आदेष ज्ञापांक 4794 दिनांक 03.09.2014 एवं अपीलीय प्राधिकार-सह-प्रधान सचिव, गृह द्वारा पारित आदेष-सह-ज्ञापांक 6724 दिनांक 29.12.2014 को निरस्त करते हुए विभागीय आदेष ज्ञापांक 4493 दिनांक 03.07. 2018 द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध पुनः विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया एवं उनके विरूद्ध विहित प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र गठित किया गया।
5. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7243 दिनांक 10.10.2018 द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई, जिसके संचालन हेतु आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
6. इसी बीच श्री शर्मा दिनांक 31.01.2019 को सेवानिवृत्त हो गये। फलस्वरूप विभागीय आदेष ज्ञापांक-1089 दिनांक 07.02.2019 द्वारा उनकी सेवानिवृाि की तिथि 31.01.2019 के प्रभाव से उनके विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित कर दिया गया।
7. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्रांक-2729 दिनांक 20.09.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री शर्मा के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित सभी दोनों आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
8. तदोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-18 (1) के तहत संचालन77 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 पदाधिकारी के अधिगम से असहमत होते हुए उक्त जाँच प्रतिवेदन पुनः संचालन पदाधिकारी को वापस करते हुए अग्रेतर जाँच एवं गवाही कराये जाने का आदेश अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा दिया गया। तद्आलोक में विभागीय पत्रांक-4934 दिनांक 22. 07.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ से श्री राम सुमेर शर्मा के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में पुनः अग्रेतर जाँच एवं गवाही करा कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
9. तद््आलोक में संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्रांक-156 दिनांक 20.01.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन पुनः उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोपी पदाधिकारी श्री राम सुमेर शर्मा के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप को अंषतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
10. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-18 (3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 1952 दिनांक 28.02.2022 द्वारा आरोपित पदाधिकारी श्री राम सुमेर शर्मा को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।
11. तद्आलोक में श्री राम सुमेर शर्मा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिनांक 29.03.2022 के विश्लेषणोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10600 दिनांक 14.10.2022 द्वारा उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :- ''देय पेंशन से 20% (बीस प्रतिशत) राशि की कटौती का दंड पाँच (05) वर्षों के लिए''। 12. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10600 दिनांक 14.10.2022 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री राम सुमेर शर्मा द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दायर किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि विभागीय कार्यवाही में उनके लिखित अभिकथन, उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं कथन तथा दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ द्वारा अपना जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-2729 दिनांक-20.09.2019 द्वारा समर्पित किया गया। उपरोक्त जाँच प्रतिवेदन में उनके खिलाफ प्रपत्र 'क' में गठित आरोप किसी भी स्तर से प्रमाणित नहीं पाया गया। उपरोक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-4934 दिनांक-22.07.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को वैसे गवाहों की गवाही कराने का आदेश निर्गत किया गया, जिसकी सूची प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न नहीं था। उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष इस संबंध में मौखिक रूप से आपत्ति दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बाद भी ऐसे गवाहों की गवाही करवाई गई, जिनका नाम प्रपत्र 'क' में साक्षियों की सूची में नहीं था और पत्रांक-156 दिनांक-20.01.2022 के द्वारा पुनः जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी ने अपने मंतव्य में स्पष्ट किया है कि दस दिनों से चल रहे कार्य की जानकारी उन्हें (श्री शर्मा को) थी, की संपुष्टि साक्षियों/गवाहों के द्वारा नहीं की गई है। साथ ही इसके लिए उच्च कक्षपाल और गेट पर प्रतिनियुक्त जेलकर्मी को दोषी पाया है। संचालन पदाधिकारी ने केवल पर्यवेक्षण का किंचित अभाव मानते हुए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप को अंशतः प्रमाणित कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया है। श्री राम सुमेर शर्मा का कहना है कि उपरोक्त तथ्यों से यह पूर्णतया स्पष्ट है कि उनके खिलाफ अधिरोपित दंड विधि के विरूद्ध है। उन्होंने संकल्प ज्ञापांक-10600 दिनांक-14.10.2022 द्वारा पारित दंडादेश को निरस्त करने का अनुरोध किया है। 13. श्री राम सुमेर शर्मा के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। श्री शर्मा का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को वैसे गवाहों की गवाही कराने का आदेश निर्गत किया गया, जिसकी सूची प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न नहीं था। संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्व में की गई जाँच में गवाहों की गवाही नहीं करायी गई थी, जिसकी समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि इस घटना की जाँच जिलाधिकारी, मधुबनी के साथ पुलिस अधीक्षक, मधुबनी एवं तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी तथा तत्कालीन पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा की गई थी। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-18 (1) के प्रावधान के तहत संचालन पदाधिकारी से पूर्व में प्राप्त जाँच प्रतिवेदन अग्रेतर जाँच एवं गवाही कराये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी को वापस किया गया था। तदोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले की पुनः जाँच एवं संबंधित गवाहों की गवाही कराकर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में हालाँकि साक्षियों के दर्ज बयान के आधार पर बंदी पलायन की इस घटना में श्री शर्मा की सहभागिता नहीं पायी गई है, किन्तु श्री शर्मा द्वारा कारा का सतत् निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण का किंचित अभाव परिलक्षित होना प्रतिवेदित करते हुए आरोप को अंशतः प्रमाणित पाया गया है। श्री शर्मा द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में पुनः उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जिसका उल्लेख उन्होंने पूर्व में अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में किया था। श्री शर्मा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के समीक्षोपरान्त उसे स्वीकार करने योग्य नहीं पाया गया। तदोपरान्त बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत् प्रक्रिया का पालन करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के आदेशानुसार दण्ड अधिरोपित किया गया है। 14. उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री राम सुमेर शर्मा द्वारा पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई है। परिणामस्वरूप मंडल कारा, मधुबनी के कारा परिसर में मंदिर निर्माण एवं रंगाई-पुताई के लिए अवैध रूप से बंदियों को कारा से बाहर निकाल कर कार्य कराने के क्रम में मौके का लाभ उठाकर दिनांक 11.09.2012 को विचाराधीन बंदी मो0 साबीर के पलायन की घटना घटित हुई है, जिसके पर्यवेक्षण में श्री शर्मा की लापरवाही पाई गई है। इसके लिए विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री शर्मा को ''देय पेंशन से 20% (बीस प्रतिशत) राशि की कटौती का दंड पाँच (05) वर्षों के लिए'' अधिरोपित किया गया है।78 (cid:464)बहार गजट, 28 दिसम्बर 2022 15. अतः श्री राम सुमेर शर्मा, तत्कालीन उपाधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त काराधीक्षक) के विरूद्ध गठित आरोप की प्र—ति एवं गंभीरता पर विचार करने के उपरांत बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त कर समेकित रूप से उन्हें दिया गया दण्ड न्यायोचित है एवं इसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः इनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किया जाता है।
आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।