(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
22 पौष 1944 (श0)
(सं0 पटना 54) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 12 जनवर(cid:547) 2023
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अधिसूचना
21 दिसम्बर 2022
श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 971/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, बोधगया के विरूद्ध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1292 दिनांक 04.11.2015 द्वारा आरोप-पत्र गठित कर उपलब्ध कराया गया।
श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :-
जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 1902/भू0सु0 दिनांक 10.08.1994 एवं पत्रांक 1636/भू0सु0 दिनांक 30.08.1994 द्वारा कुल-07 फर्जी विदेषी संस्थाओं का निबंधन एवं दाखिल खारिज पर रोक लगाते हुए सृजित जमाबंदी को रद्द करने का आदेष दिया गया था। साथ ही तत्कालीन जिला पदाधिकारी, गया के उक्त निदेष के आलोक में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सदर गया के ज्ञापांक 971 दिनांक 15.07.2003 एवं अंचल अधिकारी के ज्ञापांक 479 दिनांक 16.07.2003 द्वारा उक्त जमाबंदी रद्द किया गया।
परंतु उक्त आदेषों के द्वारा फर्जी संस्थाओं के नाम से दाखिल खारिज पर रोक लगाने के बावजूद भी श्री कुमार, तत्कालीन अंचलाधिकारी, बोधगया द्वारा अपने पत्रांक 496 दिनांक 30.11.2007 द्वारा उक्त आदेषाें की समीक्षा किए बिना रद्द किये जमाबंदी को पुनः कायम करने का निदेष संबंधित राजस्व कर्मचारी को दिया गया, जिसके आलोक में संबंधित राजस्व कर्मचारी द्वारा पुनः रद्द जमाबंदी को कायम किया गया।
श्री कुमार के विरूद्ध आरोप एवं इससे संबंधित सम्पूर्ण वस्तुस्थिति के समीक्षोपरांत आरोप की वृहत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16736 दिनांक 10.12.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 12 जनवर(cid:547) 2023 आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1017/विधि दिनांक 13.03.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें साक्ष्य के अभाव में आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 6888 दिनांक 09.07.2021 द्वारा संचालन पदाधिकारी को अग्रेतर जाँच करने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1767/विधि दिनांक 09.05.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें साक्ष्य के अभाव में आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 10591 दिनांक 28.06.2022 द्वारा श्री कुमार से असहमति के बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री कुमार के पत्रांक 843/आ0प्र0 दिनांक 09.07.2022 द्वारा लिखित अभिकथन समर्पित किया गया।
अपने लिखित अभिकथन में श्री कुमार का कहना है कि इनकेे द्वारा रूट इन्स्टीट्यूट के आवेदन पर तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा रसीद निर्गत करने के दिए गए निर्देष, CWJC No. 4235@2001 में पारित आदेश, उक्त भूमि का अपील या पुर्नरीक्षण में जमाबंदी रद्द नहीं होने, भूमि का रैयती होने, संस्था का उक्त भूमि पर दखल कब्जा एवं भूमि का बाउण्ड्री वाल के रूप में संस्था का कब्जा रहने तथा संस्था का पूर्णतः भारतीय एवं फर्जी नहीं रहने के आधार पर पूर्णतः समीक्षा कर केवल राजस्व हित में रसीद निर्गत करने का निर्देष दिया गया था। यह इनके पत्र से भी स्पष्ट है। रूट इन्स्टीट्यूट, बोधगया की भूमि का तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता द्वारा अपील वाद सं0 3/88-89 एवं तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा विविध वाद सं0&11@2002&03 द्वारा जमाबंदी कायम करने का आदेष दिया गया तथा उक्त आदेष के विरूद्ध राजस्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत जमाबंदी रद्द करने का कोई भी आदेष सक्षम प्राधिकार द्वारा पारित नहीं किया गया है। यही कारण है कि उक्त भूमि का जमाबंदी आज भी कायम है तथा लगान रसिद निर्गत हो रहा है। इन्होंने जांच के दौरान साक्ष्य परीक्षण हेतु विविध वाद सं0-11/2002-03 एवं इनके द्वारा दिये गये आदेष की मूल संचिका की मांग की गई, जो नैसर्गिक न्याय के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, लेकिन उसे नहीं उपलब्ध कराया गया। इनका 2009 में उक्त अंचल से स्थानान्तरण के बहुत दिन बाद 2015 में इन पर इस मामले में आरोप लगाया गया है। इनके स्थानान्तरण के समय तक उक्त अभिलेख/संचिका कार्यालय में मौजूद थी, लेकिन इसमें SDO ;k CO द्वारा रद्दीकरण का कोई भी आदेष उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में आज की तिथि में मूल अभिलेख अंचल कार्यालय में नहीं होने पर ये जवाबदेह नहीं है।
प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार के लिखित अभिकथन की सम्यक् समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि जहाँ तक आरोपी के द्वारा अंचल अधिकारी के रूप में समाहर्त्ता, गया के द्वारा जमाबंदी रद्द किये जाने से संबंधित आदेष की समीक्षा किये जाने प्रष्न है, इस प्रकार की शक्ति अंचल अधिकारी को प्रदत्त नहीं है। वर्ष 1994 में तत्कालीन समाहर्त्ता, गया द्वारा रद्द की गयी जमाबंदियों को वर्ष 2007 में अंचल अधिकारी के द्वारा बिना किसी तार्किक आदेष के बहाल किया जाना सही नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जमाबंदी को रद्द किये जाने से संबंधित प्रदत्त शक्ति की समीक्षा अपने प्रतिवेदन में नहीं की गयी है। दूसरी तरफ आरोपी पदाधिकारी के द्वारा समाहर्त्ता, गया के वर्ष 1994 में दिये गये आदेष की समीक्षा किया जाना एवं उसे गलत प्रमाणित करने का प्रयास किया जाना गलत है। Root Institute के रद्द जमाबंदी को प्रारंभ करने में भी आरोपी पदाधिकारी श्री अनिल कुमार के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इसके साथ ही किसी आवेदन-पत्र पर पृष्टांकित आदेष के आलोक में रद्द की गयी जमाबंदी को प्रारंभ किया जाना भी गलत है। यदि इस प्रकार का कोई आदेष अंचल अधिकारी को प्राप्त हुआ, तो वैसी स्थिति में उन्हें अभिलेख संधारित कर रद्द जमाबंदी को पुनर्जीवित किये जाने हेतु प्रस्ताव समाहर्त्ता को भेजा जाना अपेक्षित था। रद्द की गयी जमाबंदी को प्रारंभ करने में आरोपित पदाधिकारी श्री अनिल कुमार के द्वारा विहित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इन्होंने इस —त्य का औचित्य तत्कालीन समाहर्त्ता के द्वारा Root Institute के आवेदन पर अंकित पृष्ठांकित आदेष को बताया है। अब इस मामले में की गयी अनियमितता और भी गंभीर प्रतीत होती है, क्योंकि Root Institute का वह कथित आवेदन एवं उस पर समाहर्त्ता का पृष्ठांकित आदेष अंचल कार्यालय की संचिका में उपलब्ध ही नहीं है, जिसके कारण आरोपित पदाधिकारी का —त्य और भी संदेहास्पद कहा जा3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 12 जनवर(cid:547) 2023 सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि यदि उपर्युक्त आवेदन समाहर्त्ता के पृष्ठांकित आदेष सहित उपलब्ध हो भी जाये तो आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उसके आधार पर जमाबंदी पुनर्जीवित करने हेतु की गयी कार्रवाई फिर भी नियमानुकूल नहीं कही जा सकती है। श्री कुमार का यह आचरण उनके अनुषासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं उच्चाधिकारियों के आदेष का अवहेलना को प्रदर्शित करता है। श्री कुमार का यह —त्य आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
समीक्षोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली
के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् i fuUnu ¼vkjksi o"kZ 2017&18½ ,oa ii संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।
विभागीय पत्रांक 17176 दिनांक 14.12.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति/परामर्ष की मांग की गई। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक 3568/लो0से0आ0 दिनांक 14.12.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है।
अतएव अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 971/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, बोधगया सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नलिखित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। i
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,