िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 8 चैत्र 1945 (श0) सं(cid:201)या 13 पटना, बुधवार, ———————— 29 मार्च 2023 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-38 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 39-39 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 40-40 पूरक
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पूरक-क 41-432 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचनाएं
14 मार्च 2023
सं0 6/प0सृ0-19-01/2019-985--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 द्वारा संविदा के आधार पर सेवा निवृत्त कर्मियों की सेवा लेने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत किया गया है। उक्त संकल्प की कंडिका-3(3)(क) के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय चयन समिति की दिनांक 06.03.2023 की सम्पन्न बैठक में श्री संजय कुमार मावंडिया, (जन्म तिथि-21.01.1963 सेवानिवृति की तिथि-31.01.2023) सेवानिवृत्त राज्य-कर विशेष आयुक्त को वाणिज्य-कर विभाग के स्वीकृत्यादेश संख्या-213 दिनांक 17.01.2023 के प्रावधानों के अन्तर्गत अंकेक्षण विशेषज्ञ के रिक्त पद के विरूद्ध संविदा के आधार पर नियोजित किया जाता है। यह पद स्थायी स्थापना का भाग नहीं होगा।
2. संविदा पर नियोजित होने वाले अंकेक्षण विशेषज्ञ श्री मावंडिया का मासिक मानदेय सेवानिवृत्ति की तिथि को प्राप्त मूल वेतनसेवानिवृत्ति के समय अंतिम वेतन पर प्राप्त महँगाई भत्ता के योगफल की राशि में से पेंशन की राशिसेवानिवृत्ति के समय पेंशन की राशि पर प्राप्त महँगाई भत्ता की राशि को घटाने के बाद जो राशि प्राप्त होगी वही होगा परन्तु पेंशन पर महँगाई राहत का भुगतान होता रहेगा। मासिक मानदेय की यह राशि उक्त सेवानिवृत्त सरकारी सेवक के संविदा अवधि में कार्यरत रहने की तिथि तक स्थिर रहेगी। नियोजन की अवधि में सरकारी कार्यवश यात्रा किए जाने की स्थिति में यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ता उस दर से अनुमान्य होगा जो उनके धारित पद के लिए एक नियमित सरकारी सेवक को अनुमान्य है। 3. मानदेय का भुगतान स्थापना शाखा की बजट शीर्ष मुख्य शीर्ष 2043-राज्य वस्तु एवं सेवा कर अंतर्गत संग्रहण प्रभार उप-मुख्य शीर्ष-00, लघु शीर्ष-001 निदेशन और प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-17-2043000010001 विषय शीर्ष-2802 संविदा सेवाएँ इकाई मतदेय में उपबंधित राशि से किया जायेगा।
4. सामान्य प्रशासन विभाग का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 के कंडिका-7 (5) के अनुसार श्री मावंडिया को आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त क्षतिपूर्ति अवकाश भी अनुमान्य होगा।
5. यह नियोजन योगदान की तिथि से दो वर्षों के लिए होगा। 6. इनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा समय-समय पर की जायेगी और कार्य संतोषजनक नहीं होने पर इनकी संविदा रद्द की जायेगी।
7. श्री मावंडिया के विरूद्ध किसी प्रकार के आरोप की सूचना प्राप्त होने पर नियोजन रद्द हो जायेगा। 8. श्री मावंडिया अधिसूचना निर्गमन की तिथि से एक सप्ताह के अन्दर अपना योगदान समर्पित करना सुनिश्चित करेंगे। योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रूबी, संयुक्त सचिव।
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14 मार्च 2023
सं0 6/प0सृ0-19-01/2019-986--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 द्वारा संविदा के आधार पर सेवा निवृत्त कर्मियों की सेवा लेने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत किया गया है। उक्त संकल्प की कंडिका-3(3)(क) के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय चयन समिति की दिनांक 06.03.2023 की सम्पन्न बैठक में श्री रामाधार सिंह, (जन्म तिथि-01.12.1962 सेवानिवृति की तिथि-30.11.2022) सेवानिवृत्त राज्य-कर अपर आयुक्त को वाणिज्य-कर विभाग के स्वीकृत्यादेश संख्या-213 दिनांक 17.01.2023 के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रशिक्षण विशेषज्ञ के रिक्त पद के विरूद्ध संविदा के आधार पर नियोजित किया जाता है। यह पद स्थायी स्थापना का भाग नहीं होगा।
2. संविदा पर नियोजित होने वाले अंकेक्षण विशेषज्ञ श्री सिंह का मासिक मानदेय सेवानिवृत्ति की तिथि को प्राप्त मूल वेतनसेवानिवृत्ति के समय अंतिम वेतन पर प्राप्त महँगाई भत्ता के योगफल की राशि में से पेंशन की राशिसेवानिवृत्ति के समय पेंशन की राशि पर प्राप्त महँगाई भत्ता की राशि को घटाने के बाद जो राशि प्राप्त होगी वही होगा परन्तु पेंशन पर महँगाई राहत का भुगतान होता रहेगा। मासिक मानदेय की यह राशि उक्त सेवानिवृत्त सरकारी सेवक के संविदा अवधि में कार्यरत रहने की तिथि तक स्थिर रहेगी। नियोजन की अवधि में सरकारी कार्यवश यात्रा किए जाने की स्थिति में यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ता उस दर से अनुमान्य होगा जो उनके धारित पद के लिए एक नियमित सरकारी सेवक को अनुमान्य है।3 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 3. मानदेय का भुगतान स्थापना शाखा की बजट शीर्ष मुख्य शीर्ष 2043-राज्य वस्तु एवं सेवा कर अंतर्गत संग्रहण प्रभार उप-मुख्य शीर्ष-00, लघु शीर्ष-001 निदेशन और प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-17-2043000010001 विषय शीर्ष-2802 संविदा सेवाएँ इकाई मतदेय में उपबंधित राशि से किया जायेगा।
4. सामान्य प्रशासन विभाग का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 के कंडिका-7 (5) के अनुसार श्री सिंह को आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त क्षतिपूर्ति अवकाश भी अनुमान्य होगा।
5. यह नियोजन योगदान की तिथि से दो वर्षों के लिए होगा। 6. इनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा समय-समय पर की जायेगी और कार्य संतोषजनक नहीं होने पर इनकी संविदा रद्द की जायेगी।
7. श्री सिंह के विरूद्ध किसी प्रकार के आरोप की सूचना प्राप्त होने पर नियोजन रद्द हो जायेगा। 8. श्री सिंह अधिसूचना निर्गमन की तिथि से एक सप्ताह के अन्दर अपना योगदान समर्पित करना सुनिश्चित करेंगे। योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रूबी, संयुक्त सचिव।
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सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग
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अधिसूचनाएं
20 मार्च 2023
सं॰ 01/स्था॰(मु॰)15-01/2018-51/सू॰ज॰स॰वि॰--श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, बक्सर सम्प्रति सेवानिवृत्त जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, अरवल द्वारा जिला जन सम्पर्क इकाई, बक्सर में पदस्थापन के दौरान होर्डिंग/फ्लैक्स के संस्थापन में वित्तीय नियमों का अवहेलना कर कोषागार कार्यालय, बक्सर से अवैध राशि की निकासी तथा एजेन्सी द्वारा होर्डिंग संस्थापन के संबंध में समर्पित फर्जी सत्यापन प्रमाण पत्र की बिना जाँच किये भुगतान किये जाने तथा होर्डिंग/फ्लैक्स से संबंधित विपत्रों पर जिला पदाधिकारी बक्सर की स्वीकृति का गलत हवाला देकर कोषागार कार्यालय, बक्सर से अवैध राशि निकासी के संबंध में श्री मनोज कुमार तिवारी, ग्राम पोस्ट-नेनुऑ, थाना-डुमरॉव, जिला-बक्सर से परिवाद पत्र प्राप्त हुआ।
परिवाद पत्र प्राप्त होने के आलोक में विभागीय पत्र संख्या-1255, दिनांक-26.09.2018 के द्वारा जिला पदाधिकारी, बक्सर से श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, बक्सर के विरुद्ध प्राप्त परिवाद की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन, मंतव्य के साथ, उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया।
जिला पदाधिकारी, बक्सर के पत्र संख्या-10.0354, दिनांक-30.01.2019 के द्वारा आरोपी पदाधिकारी के विरुद्ध प्राप्त परिवाद पत्र की जाँच कर, जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध करायी गयी। जिला पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपी पदाधिकारी, श्री सिंह के विरुद्ध प्राप्त परिवाद में लगाये गये आरोप जाँचोपरान्त सत्य प्रतिवेदित किया गया।
जिला पदाधिकारी, बक्सर से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-304, दिनांक-15.03.2019 के द्वारा आरोपी पदाधिकारी, श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, सेवानिवृत्त जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, अरवल से जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए स्पष्टीकरण पूछा गया। आरोपी पदाधिकारी, श्री सिंह द्वारा समाहरणालय, अरवल के पत्र संख्या-144, दिनांक- 26.03.2019 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित किया गया।
विभाग द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण, आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित जवाब एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोप तथा आरोपों की गंभीरता के आलोक में समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प संख्या-125, दिनांक-09.07.2021 के द्वारा श्री सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र गठित कर बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम 43 (बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालन का निर्णय लिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु श्री संजय कृष्ण, उप सचिव, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं श्री विनोद कुमार पाठक, प्रशाखा पदाधिकारी, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप के बिन्दु, आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले की जाँच कर पत्र संख्या-583, दिनांक-24.05.2022 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन मंतव्य सहित उपलब्ध कराया गया। आरोप, आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण तथा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन निम्नवत् हैः-
आरोप के बिन्दु 1- जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी, बक्सर में पदस्थापन के दौरान भंडार पंजी का संधारण नहीं किये जाने के लिए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह दोषी हैं।
आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन- आरोपी पदाधिकारी द्वारा भंडार पंजी संधारित नहीं होने लिए कहा गया कि उन्होंने इकाई लिपिक एवं प्रभारी इकाई लिपिक को बराबर भंडार पंजी संधारित करने हेतु कहा गया परन्तु प्रभारी इकाई लिपिक एवं इकाई लिपिक द्वारा भंडार पंजी का संधारण नहीं किया गया। इकाई लिपिक तथा प्रभारी इकाई लिपिक के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई की अनुशंसा भी आरोपी पदाधिकारी द्वारा नहीं की गयी।
जांच पदाधिकारी का मंतव्य- आरोप प्रमाणित है।4 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 आरोप के बिन्दु 2- जिला जन सम्पर्क इकाई, बक्सर में पदस्थापन के दौरान होर्डिंग/फ्लैक्स एवं प्रचार-प्रसार के भुगतान में वित्तीय नियमों का अवहेलना करने के लिए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह दोषी हैं।
आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन- आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव में कहा गया कि विभागीय आदेश एवं अन्य स्थानीय कार्यों को संपन्न कराने के लिए संचिका को जिला पदाधिकारी से स्थल चयन करने के समय ही कार्यादेश निर्गत करने एवं एजेन्सी द्वारा कार्य करने के बाद प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर निर्धारित राशि के भुगतान का अनुमोदन प्राप्त कर लिया जाता था। विभागीय पत्रांक-763, दिनांक-18.12.2007 में स्पष्ट रूप से निदेश दिया गया है कि जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी से स्थल का अनुमोदन प्राप्त करके ही कार्यों को सम्पन्न करायेंगे तथा भुगतान के पूर्व यह सुनिश्चित कर लेंगे कि कार्यों का संपादन निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हुआ है कि नहीं। अतः उनके द्वारा कोई वित्तीय नियम की अवहेलना नहीं की गयी है।
जांच पदाधिकारी का मंतव्य- उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय पत्रांक-763, दिनांक-18.12.2007 की प्रति उपलब्ध कराया गया, जिसमें यह अंकित है कि होर्डिंग अधिष्ठापन के लिए प्रमण्डल स्तर पर उप जन सम्पर्क निदेशक एवं जिला स्तर पर जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी और अपर जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी को आवंटन सुलभ कराया जायेगा। उप जन सम्पर्क निदेशक, प्रमण्डलीय आयुक्त तथा जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी जिला पदाधिकारी से स्थल का अनुमोदन प्राप्त करते हुए अपने देख-रेख में शीघ्र होर्डिंग अधिष्ठापन का कार्य संपन्न करायेंगे। भुगतान के पूर्व यह सुनिश्चित कर लेना आवश्यक होगा कि होर्डिंग मापदण्ड के अनुरूप अधिष्ठापित हुआ है या नहीं। इस पत्र में जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी को कितनी राशि के व्यय की वित्तीय शक्ति प्रदत्त है, यह अंकित नहीं है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा संचिका संख्या-(viii)/2016-17 की टिप्पणी भाग की छायाप्रति उपलब्ध करायी है, जिसमें उनके द्वारा कई स्थलों पर फ्लैक्स लगाने एवं लगाने के बाद प्रमाण के रूप में फोटो प्राप्त किये जाने के उपरान्त भुगतान करने की अनुमति का प्रस्ताव जिला पदाधिकारी को उपस्थापित किया था। जिस पर जिला पदाधिकारी ने मात्र निर्धारित स्थलों पर खाली होर्डिंग्स पर फ्लैक्स लगाने की अनुमति दी है किन्तु भुगतान के प्रस्ताव का अनुमोदन नहीं किया है, बावजूद आरोपी पदाधिकारी द्वारा जिला पदाधिकारी के द्वारा भुगतान किये जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन मांगते हुए एजेन्सी को 2,57,200/- (दो लाख संतावन हजार दो सौ) रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह आरोप भी प्रमाणित है।
आरोप के बिन्दु 3- जिला जन सम्पर्क इकाई, बक्सर में पदस्थापन के दौरान होर्डिंग/फ्लैक्स से संबंधित विपत्रों पर जिला पदाधिकारी, बक्सर द्वारा भुगतान स्वीकृति की गलत हवाला देकर कोषागार कार्यालय, बक्सर से राशि की अवैध निकासी करने के लिए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह दोषी हैं।
आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन- आरोपी पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-2 में प्रस्तुत अपने बचाव को दोहराते हुए कहा गया कि विभागीय बैठकों में यह निर्देश दिया जाता रहा था कि विभागीय आदेश सर्वोपरि है। अतः विभागीय आदेश के आलोक में कराये गये कार्य हेतु राशि का भुगतान इसलिए किया गया कि राशि का व्यय ससमय हो सके।
जांच पदाधिकारी का मंतव्य- आरोपी पदाधिकारी का बचाव मान्य नहीं है। आरोप प्रमाणित है। आरोप के बिन्दु 4- जिला जन सम्पर्क इकाई, बक्सर में पदस्थापन के दौरान वित्तीय मामलों से संबंधित संचिकाओं का संधारण गलत तरीके से करने के लिए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह दोषी हैं।
आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन- दिनांक-23.09.2021 को समर्पित अपने बचाव बयान में आरोपी पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-4 एवं 5 के संबंध में अपना लिखित अभिकथन प्रस्तुत किया गया। साथ में कुछ अभिलेखों की छायाप्रति भी संलग्न की गयी है। अपने बचाव बयान में आरोपी पदाधिकारी ने अपने विरुद्ध लगाये गये सभी आरोपों को गलत बताया गया है।
जांच पदाधिकारी का मंतव्य- संचिका संख्या-(viii)/2016-17 की छायाप्रति आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित किया गया, तथा यह दावा किया गया कि उनके द्वारा एजेन्सी को 2,57,200/- रुपये का भुगतान जिला पदाधिकारी के अनुमोदन के उपरान्त किया गया है। परन्तु अभिलेख के अवलोकन से यह ज्ञात है कि जिला पदाधिकारी ने दिनांक 31.07.2016 को मात्र प्रस्तावित स्थलों पर खाली होर्डिंग्स पर फ्लैक्स लगाने की अनुमति दी है न कि भुगतान किये जाने की। आरोप प्रमाणित है।
संचिका संख्या-(xiii)/2018-19 के संबंध में आरोपी पदाधिकारी पर आरोप गठित किया गया है कि तत्कालीन जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी द्वारा संचिका को उप विकास आयुक्त को अग्रसारित नहीं कर अपने स्तर से संचिकास्त करने की टिप्पणी अंकित की गयी है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा इस संचिका की छायाप्रति उपलब्ध करायी गयी है, जिसमें संचिकास्त करने की कोई टिप्पणी अंकित नहीं पायी गयी। इसलिए अपने स्तर से संचिकास्त करने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। अन्य आरोपों के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। आरोप के बिन्दु 5- जिला जन सम्पर्क इकाई, बक्सर में पदस्थापन के दौरान होर्डिंग/फ्लैक्स से संबंधित एजेंसी द्वारा समर्पित फर्जी सत्यापन प्रमाण पत्र का बिना जांच किये राशि का भुगतान करने के लिए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह दोषी हैं। आरोपी पदाधिकारी का अभिकथन- दिनांक-23.09.2021 को समर्पित अपने लिखित अभिकथन में आरोपी पदाधिकारी ने फर्जी फोटो के आधार पर विभिन्न संचिकाओं में भुगतान किये जाने के आरोप को गलत बताया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके कार्यालय में कार्यरत कर्मी श्री सतीरंजन कुमार, जो प्रभारी इकाई लिपिक के रूप में कार्यरत थे, उन्होंने फोटो आदि में छेड़छाड़ कर उन्हें फंसाने का काम किया है।
जांच पदाधिकारी का मंतव्य- आरोपी पदाधिकारी ने अपने पक्ष में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। उनके द्वारा मात्र कार्यालय के कर्मी श्री सतीरंजन कुमार पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा अपने5 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 बचाव में प्रस्तुत कुछ फोटोग्राफ्स की छायाप्रति प्रस्तुत किया गया है, जिससे किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुँचना संभव नहीं है। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा जिला पदाधिकारी, बक्सर से आरोपी पदाधिकारी के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर दोबारा मंतव्य मांगकर उपस्थापित किया गया है, जिसमें जिला पदाधिकारी ने सभी आरोपों पर श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह का स्पष्टीकरण नहीं मानने की अनुशंसा की है। चूंकि अभिलेख आदि सभी जिला जन सम्पर्क कार्यालय के पास है। जिला पदाधिकारी के द्वारा भेजा गया मंतव्य स्वीकार्य योग्य प्रतीत होता है। अतः गलत सत्यापन प्रमाण पत्र के जांच किये बिना राशि के भुगतान करने का आरोप प्रमाणित है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्र संख्या-658, दिनांक-07.06.2022 के द्वारा आरोपी पदाधिकारी को उपलब्ध कराते हुए कारण पृच्छा की गयी। आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिनांक-13.06.2022 को अपना जवाब विभाग में समर्पित किया गया।
आरोपी पदाधिकारी, श्री सिंह से प्राप्त कारण पृच्छा का उत्तर में कोई नया तथ्य अंकित नहीं किये जाने के कारण जाँच पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन/अभिलेखों के विभागीय स्तर पर इसके गुण-दोष के आधार पर सम्यक् जाँच एवं समीक्षा की गई। आरोपों की प्रकृति एवं गंभीरता को देखते हुए श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, बक्सर सम्प्रति सेवानिवृत्त जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, अरवल के विरुद्ध पेंशन नियमावली के नियम-1950 के नियम 43 (बी) के तहत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गयाः-
दण्ड :-(i) 10 प्रतिशत पेंशन कटौती स्थायी तौर पर किये जाने का दण्ड।
2. उपर्युक्त 10 प्रतिशत पेंशन कटौती स्थायी तौर पर किये जाने का विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। 3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनोद कुमार पाठक, अवर सचिव।
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23 मार्च 2023
सं॰ 01/स्था॰(मु॰)3-07/2020-84/सू॰ज॰स॰वि॰--श्री अनिल कुमार चौधरी, तत्कालीन उप निदेशक-सह- माननीय मुख्यमंत्री के जन सम्पर्क पदाधिकारी सम्प्रति सेवानिवृत्त उप निदेशक के जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, पटना का वर्ष-2019 में प्रभार में रहने के क्रम में पटना शहर में अतिवृष्टि से उत्पन्न जल-जमाव की समस्या एवं आपदा तथा विजयादशमी के अवसर पर रावण-वध कार्यक्रम के समय कार्यालय से अनुपस्थित रहने के फलस्वरुप जन संवाद एवं मीडिया कर्मियों के बीच समन्वय स्थापित करने में जिला प्रशासन को हुए कठिनाईयों के लिए विभागीय पत्र संख्या-1161, दिनांक 22.11.19 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। साथ ही, पटना नगर निगम क्षेत्र में संस्थापित विभागीय होर्डिंग्स एवं उनपर प्रचार-प्रसार हेतु लगाये गये फ्लैक्स कम गुणवत्ता एवं फटे हुए पाये जाने के कारण पत्र संख्या-755, दिनांक-08.06.2018 से स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री चौधरी से प्राप्त दोनों स्पष्टीकरण का जवाब के समीक्षोपरान्त आरोप पत्र गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 में निहित प्रावधानों के आलोक में विभागीय संकल्प संख्या-45, दिनांक-25.01.2022 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन का निर्णय लिया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री चौधरी के विरुद्ध अधिरोपित कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है।
आरोपाें, आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण तथा जाँच पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन निम्नवत् हैः- आरोप के बिन्दु :- (1) वर्ष-2019 में पटना शहर में अतिवृष्टि से उत्पन्न जल जमाव की समस्या एवं उत्पन्न आपदा की स्थिति के समय कार्यालय से अनुपस्थित रहने के फलस्वरूप जन संवाद एवं मीडिया कर्मियों के बीच समन्वय स्थापित करने में जिला प्रशासन को कठिनाई का सामना करना पड़ा। साथ ही विजयदशमी के अवसर पर रावण वध कार्यक्रम के समय भी अचानक अनुपस्थित रहनेे एवं इनका मोबाईल भी लगातार बन्द पाये जाने के कारण मीडिया कर्मियों के बीच समन्वय स्थापित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। गांधी मैदान में अधिष्ठापित Public address system का भी प्रमाण पत्र इनके द्वारा नहीं दिया गया जो गंभीर चूक है।
साक्ष्यः- जिला पदाधिकारी, पटना का पत्रांक-11407, दिनांक-11.10.2019 आरोपी पदाधिकारी का अभिकथनः- जिला पदाधिकारी, पटना के पत्रांक- 11407, दिनांक-11.10.2019 के आलोक में विभागीय पत्रांक-916, दिनांक-22.06.2020 द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में पत्रांक-56, दिनांक-23.06.2020 के द्वारा सभी साक्ष्यों के साथ उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। पटना शहर में अतिवृष्टि से उत्पन्न जल-जमाव की समस्या एवं आपदा की स्थिति में सुबह सात बजे से रात्रि 10.00 बजे तक नियमित रूप से जिला जन सम्पर्क कार्यालय एवं प्रमण्डलीय कार्यालय में उपस्थित रहे हैं। जिला पदाधिकारी के अनुमोदन के पश्चात् प्रतिदिन जिला प्रशासन द्वारा चलाये गये राहत एवं बचाव कार्य से संबंधित कार्यों के संबंध में नियमित प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रेस प्रतिनिधियों एवं प्रभावित लोगों के बीच आवश्यक संवाद प्रेषित किया गया है। राहत एवं बचाव कार्य से संबंधित प्रेस विज्ञप्ति की प्रति प्रत्येक दिन तत्कालीन6 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग को Whatsapp के माध्यम से प्रेषित किया गया तथा माननीय मंत्री महोदय को भी ससमय सूचना दी गयी।
विजयादशमी के अवसर पर रावण वध कार्यक्रम के समय तेज बुखार एवं बदन दर्द के कारण आरोपी पदाधिकारी दिनांक-07.10.2019 के अपराह्न से 08.10.2019 तक नियंत्री पदाधिकारी-सह-आयुक्त पटना प्रमण्डल, पटना द्वारा Whatsapp पर दी गयी स्वीकृति से अवकाश पर थे, जिसकी सूचना जिलाधिकारी पटना को भी चिकित्सक के प्रमाण पत्र के साथ दी गयी थी।
गाँधी मैदान में अधिष्ठापित पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रमाण-पत्र भी अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि-व्यवस्था, प्रभारी पदाधिकारी, जिला नियंत्रण कक्ष एवं समाहर्त्ता के विशेष कार्य पदाधिकारी, गोपनीय शाखा को Whatsapp के माध्यम से तत्काल उपलब्ध करा दिया गया था।
मंतव्य :- आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध वर्ष 2019 में पटना शहर के अंतर्गत अतिवृष्टि से उत्पन्न जल जमाव की समस्या एवं उत्पन्न आपदा के समय कार्यालय से अनुपस्थित रहने संबंधी आरोप के विरूद्ध साक्ष्य के रूप में उक्त अवधि में जारी प्रेस विज्ञप्ति की छायाप्रति संलग्न किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा कार्यालय में उपस्थित रहकर समय-समय पर प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया। विजयादशमी के अवसर पर रावण वध कार्यक्रम से अचानक अनुपस्थित रहने के आरोप के विरूद्ध आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने नियंत्री पदाधिकारी आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को Whatsapp के माध्यम से अवकाश स्वीकृति का साक्ष्य समर्पित किया गया है। आरोपी पदाधिकारी, प्रमण्डलीय उप जन सम्पर्क निदेशक, पटना प्रमंडल, पटना के अतिरिक्त जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी, पटना के प्रभार में भी थे। गांधी मैदान में अधिष्ठापित पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रमाण पत्र भी अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि व्यवस्था, प्रभारी पदाधिकारी, जिला नियंत्रण कक्ष एवं समाहर्त्ता के विशेष कार्य पदाधिकारी, गोपनीय शाखा को Whatsapp के माध्यम से तत्काल उपलब्ध कराने संबंधी साक्ष्य के रूप में इसकी छायाप्रति संलग्न किया गया है।
उपरोक्त आरोपों के विरूद्ध आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित साक्ष्य के आधार पर आरोप संख्या-1 प्रमाणित नहीं होता है।
आरोप के बिन्दु :- (2) वर्ष-2018 में जांच के क्रम में पाया गया कि पटना नगर निगम क्षेत्र में संस्थापित विभागीय होर्र्डिंग्स एवं उनपर प्रचार-प्रसार हेतु लगाये जा रहे फ्लैक्स कम गुणवाा एवं फटे हुए पाये गये। साथ ही होर्र्डिंग्स पर लगे फ्लैक्स काफी पुराने पाये गये। जिसे आम नागरिकों को नई योजनाओं की जानकारी सुलभ नहीं हो सकी। फलस्वरूप योजनाओं के प्रचार-प्रसार प्रभावित होने के साथ-साथ विभाग की छवि भी धूमिल हुई है।
साक्ष्यः- क्षतिग्रस्त होर्डिग्स/फ्लैक्स की छायाप्रति, जिला पदाधिकारी, पटना का आदेश ज्ञापांक-7312, दिनांक 10.07.2019 एवं जिला पदाधिकारी का पत्रांक-9701, दिनांक-01.09.2019
आरोपी पदाधिकारी का अभिकथनः- आरोप संख्या-2 के संदर्भ में वस्तुस्थिति यह है कि तत्कालीन जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, पटना द्वारा दिनांक-24.03.2017 को शहरी क्षेत्रों में 112 अद्द नये होर्डिंग के संस्थापन का कार्यादेश मे॰, वत्स इनोवेशन प्रा॰ लि॰ को दिया गया। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि उसके आठ माह के पश्चात् दिनांक-01.12.2017 को उप निदेशक का पदभार ग्रहण किया गया है। साथ ही, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, पटना का अतिरिक्त प्रभार दिनांक-02.01.2018 को ग्रहण किया गया है। उक्त एजेन्सी को उपरोक्त किये गये कार्य हेतु पूर्ववर्त्ती पदाधिकारी द्वारा दिनांक-31.03.2017 को भुगतान किया गया था। दिनांक-02.01.2018 को जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, पटना के पद का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने के पश्चात् जाँच के क्रम में उक्त एजेन्सी द्वारा अधिष्ठापित होर्डिंग्स को कतिपय स्थलों पर क्षतिग्रस्त पाया गया। चूंकि कार्यादेश के अनुसार उपरोक्त होर्डिंग का रख-रखाव तीन वर्षों तक उक्त एजेन्सी को ही करना था। अतएव समय-समय पर उक्त एजेन्सी को क्षतिग्रस्त होर्डिंग की मरम्मत हेतु निदेश दिया गया।
सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार फ्लैक्स संस्थापन के माध्यम से करने हेतु मे॰, एन॰आर॰एस॰ मैनुफैक्चरर एण्ड डेवलपर्स प्रा॰ लि॰ को गाँधी मैदान, पटना के आस-पास सरकारी होर्डिंग्स पर फ्लैक्स संस्थापन हेतु ज्ञापांक-207, दिनांक- 06.07.2019 द्वारा आदेश दिया गया है तथा मे॰, स्पेक्ट्रा को कोतवाली थाना से पटना एयरपोर्ट तक एवं समाहरणालय परिसर में सरकारी होर्डिंग्स पर फ्लैक्स संस्थापन हेतु ज्ञापांक-208, दिनांक-06.07.2019 द्वारा आदेश दिया गया है।
जिलाधिकारी, पटना के आदेश ज्ञापांक-7312, दिनांक-10.07.2019 के अनुपालन में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, पटना सदर ने गाँधी मैदान के चारों ओर सरकारी होर्डिंग्स पर संस्थापित फ्लैक्स की गुणवत्ता की जाँच की और दिनांक 11.07.2019 को जिलाधिकारी के समक्ष जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें फ्लैक्स की गुणवत्ता को विभागीय विशिष्टियों के अनुरूप प्रतिवेदित किया गया है। जबकि इसके विपरीत जिलाधिकारी के पत्रांक-9701, दिनांक-01.09.2019 में उल्लेख किया गया है कि दोनों एजेन्सियों द्वारा लगाये गये अधिकांश फ्लैक्स विभागीय विशिष्टियों के अनुरूप नहीं पाये गये हैं एवं इनकी गुणवत्ता एवं अधिष्ठापन भी सही नहीं है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त मद में आवंटन नहीं रहने के कारण आरोपी पदाधिकारी के पदस्थापन अवधि में किसी भी एजेन्सी को किसी भी प्रकार की राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
इस प्रकार क्षतिग्रस्त होर्डिंग्स की मरम्मति एवं फ्लैक्स के विभागीय विशिष्टियों एवं गुणवत्ता के अनुरूप संस्थापन हेतु उनके स्तर से यथेष्ट कार्रवाई की गयी और इस संबंध में जिला पदाधिकारी द्वारा समय-समय पर दिये गये निदेशों का भी अक्षरशः अनुपालन किया गया है। यहाँ तक कि होर्डिंग्स एवं फ्लैक्स की सुरक्षा के लिए गाँधी मैदान थाना को निदेश देने हेतु पत्रांक-393, दिनांक-09.12.2019 द्वारा वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना से भी अनुरोध किया गया है।7 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 मंतव्य :- पटना नगर निगम क्षेत्र में संस्थापित विभागीय होर्डिंग एवं उन पर प्रचार-प्रसार हेतु लगाये गये फ्लैक्स कम गुणवत्ता एवं फटे हुए पाये जाने संबंधी आरोप के विरूद्ध आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन के अनुसार उक्त सभी होर्डिंग संस्थापन का कार्यादेश मे॰ वत्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। उक्त एजेंसी ने 112 अदद होर्डिंग का संस्थापन कर तत्कालीन जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी को भुगतान हेतु दिनांक-28.03.2017 को विपत्र समर्पित किया गया, जबकि आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिनांक-02.01.2018 को जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी, पटना का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया गया। जिला पदाधिकारी, पटना के आदेश ज्ञापांक-7313, दिनांक-10.07.2009 के अनुपालन में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, पटना सदर में गांधी मैदान के चारों ओर अधिष्ठापित सरकारी होर्डिंग के फ्लैक्स की गुणवत्ता की जांच की गयी एवं दिनांक-11.07.2019 को समर्पित जांच प्रतिवेदन में फ्लैक्स की गुणवत्ता विभागीय विशिष्टियों के अनुरूप प्रतिवेदित किया गया।
उक्त आरोपोंं के विरूद्ध आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित साक्ष्यों से आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन/अभिलेखों को विभागीय स्तर पर इसके गुण-दोष के आधार पर सम्यक् जाँच एवं समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त श्री अनिल कुमार चौधरी, तत्कालीन उप निदेशक-सह-माननीय मुख्यमंत्री के जन सम्पर्क पदाधिकारी सम्प्रति सेवानिवृत्त उप निदेशक को दोनो आरोपों से मुक्त किया जाता है।
2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनोद कुमार पाठक, अवर सचिव।
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(cid:274)ामीण (cid:874)वकास (cid:874)वभाग
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अधिसूचनाएं
14 मार्च 2023
सं0 (cid:274)ा0(cid:874)व0- 14(को0)सु0-03/2020-1632329--(cid:302)ी अर(cid:874)व(cid:219)द कु मार, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547)- सह- (cid:292)भार(cid:547) बाल (cid:874)वकास प(cid:464)रयोजना पदा(cid:876)धकार(cid:547), सरायगढ़ सुपौल स(cid:224)(cid:292)(cid:467)त (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), सतरकटैया (सहरसा) के विरुद्ध समाज क(cid:227)याण (cid:874)वभाग के प(cid:287)ांक-2373 (cid:465)दनांक-22.06.2021 द्वारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ, िजसपर (cid:302)ी कु मार का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण अ(cid:292)ा(cid:220)त है ।
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20 मार्च 2023
सं0 (cid:274)ा0(cid:874)व0-14 (द0) द0-रा0सू0आ0-02/2018-1648776--(cid:302)ी अ(cid:874)वनाश कु मार, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), बहादुरपुर, दरभंगा स(cid:224)(cid:292)(cid:467)त (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), हुलासगंज, जहानाबाद के विरुद्ध रा(cid:207)य सूचना आयोग, (cid:466)बहार, पटना के (cid:163)ापांक- 1594 (cid:465)दनांक- 13.06.2018 से (cid:292)ा(cid:220)त वाद सं(cid:201)या- ए-05/2018 म(cid:581) रा(cid:207)य सूचना आयु(cid:200)त के आदेश (cid:465)दनांक- 10.05.2018 म(cid:581) (cid:467)नदेश (cid:465)दया गया (cid:873)क ''आवेदक ने सूचना क(cid:551) मांग (cid:465)दनांक- 20.07.2017 को (cid:873)कया था तथा लोक सूचना पदा(cid:876)धकार(cid:547) ने इस संबंध म(cid:581) कोई (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण नह(cid:547)ं (cid:465)दया है (cid:873)क सूचना आवेदन (cid:292)ा(cid:220)त8 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 करने के बाद से (cid:465)दस(cid:224)बर 2017 तक उनके द्वारा आवेदक को सूचना देने के (cid:874)वषय म(cid:581) (cid:200)या कार(cid:91)वाई क(cid:551) गयी थी तथा (cid:200)य(cid:585) (cid:874)वलंब हुआ । उ(cid:200)त प(cid:464)रि(cid:232)थ(cid:467)त म(cid:581) रा(cid:207)य सूचना आयु(cid:200)त द्वारा अनुमंडल पदा(cid:876)धकार(cid:547), सदर दरभंगा को अनुशं(cid:871)सत (cid:873)कया गया है (cid:873)क हुए इस बाद म(cid:581) सूचना देने म(cid:581) (cid:874)वलंब के (cid:871)लए संबं(cid:876)धत (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547) से कारण पृ(cid:205)छा करते हुए उनके विरुद्ध आव(cid:230)यक (cid:874)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) के (cid:871)लए स(cid:162)म पदा(cid:876)धकार(cid:547) को अनुशंसा कर(cid:581)।'' उ(cid:200)त के आलोक म(cid:581) (cid:874)वभागीय प(cid:287)ांक- 380548 (cid:465)दनांक- 24.07.2018 द्वारा अनुमंडल पदा(cid:876)धकार(cid:547), दरभंगा सदर, दरभंगा से रा(cid:207)य सूचना आयोग का वाद सं(cid:201)या- ए-05/2018 म(cid:581) पा(cid:464)रत (cid:219)यायादेश (cid:465)दनांक- 10.05.2018 अनुपालन से संबं(cid:876)धत (cid:292)(cid:467)तवेदन उपल(cid:222)ध कराने हेतु उपल(cid:222)ध कराया गया ।
अनुमंडल पदा(cid:876)धकार(cid:547), दरभंगा सदर, दरभंगा के प(cid:287)ांक-2305 (cid:465)दनांक-25.10.2022 द्वारा उप (cid:874)वकास आयु(cid:200)त, दरभंगा के (cid:163)ापांक-777 (cid:465)दनांक-18.05.2021 एवं (cid:302)ी अ(cid:874)वनाश कु मार, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), बहादुरपुर के (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) छाया(cid:292)(cid:467)त संल(cid:202)न करते हुए उ(cid:200)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण पर सहानुभू(cid:467)तपूव(cid:91)क (cid:874)वचार करते हुए यथो(cid:876)चत (cid:467)नण(cid:91)य लेने का अनुरोध (cid:873)कया गया।
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(cid:874)वभाग द्वारा (cid:302)ी कु मार के विरुद्ध (cid:292)(cid:467)तवे(cid:465)दत आरोप, उ(cid:200)त आरोप पर (cid:302)ी कु मार का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण, उप (cid:874)वकास आयु(cid:200)त, दरभंगा एवं अनुमंडल पदा(cid:876)धकार(cid:547), सदर दरभंगा से (cid:292)ा(cid:220)त (cid:292)(cid:467)तवेदन क(cid:551) (cid:874)वभाग द्वारा समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरा(cid:219)त पाया गया (cid:873)क (cid:302)ी कु मार द्वारा आवेदक को यद्यपि सूचना उपल(cid:222)ध करा द(cid:547) गयी तथा(cid:874)प इ(cid:219)ह(cid:585)ने अपने (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण म(cid:581) यह अं(cid:873)कत (cid:873)कया है (cid:873)क उ(cid:219)ह(cid:585)ने पणन पदा(cid:876)धकार(cid:547), बहादुरपुर को उनके (cid:292)खंड काया(cid:91)लय के प(cid:287)ांक-1944 (cid:465)दनांक-11.09.2017 से सूचना उपल(cid:222)ध कराने हेतु प(cid:287) (cid:465)दया जब(cid:873)क आवेदक ने सूचना क(cid:551) मांग (cid:465)दनांक-20.07.2017 को (cid:873)कया था। (cid:232)प(cid:231)टत: इनके द्वारा सूचना हेतु आवेदन का ह(cid:232)तानांतरण पणन पदा(cid:876)धकार(cid:547) को दो माह प(cid:230)चात ् (cid:873)कया गया ।
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उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ा(cid:876)धकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:--आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:873)क अ(cid:876)धसूचना क(cid:551) (cid:292)(cid:467)त सभी संबं(cid:876)धत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय।
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पथ निर्माण विभाग
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अधिसूचनाएं
3 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-08/2016-05 (S)--श्री राम प्रकाश राम, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के पथ प्रमंडल, मधेपुरा के पदस्थापन काल में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के नाम पर बरती गयी अनियमितता के संबंध में श्री चन्द्रशेखर एवं अन्य माननीय स0वि0स0 द्वारा ध्यानाकर्षण सूचना के क्रम में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित विभागीय जाँच दल द्वारा दिनांक-27.01.2016 को जाँच किया गया तथा पत्रांक-1408 दिनांक 01.04.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराये गये जाँच9 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 प्रतिवेदन की समीक्षोंपरांत निम्नलिखित त्रुटियों के लिए आरोप-पत्र गठित करते हुए श्री राम से विभागीय पत्रांक-3818 (एस) अनु॰, दिनांक 28.04.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत कारण-पृच्छा की मांग की गयी :-
(i) पथ प्रमंडल, मधेपुरा के आलमनगर, सपरदह पथ में कि0मी0 5 में पुनस्र्थापन कार्य अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक के बीच एकरारनामा दिनांक-19.12.2008 को सम्पन्न किया गया, परन्तु अधीक्षण अभियंता द्वारा कार्यादेश दिनांक-09.12.2008 को ही निर्गत किया गया और कनीय अभियंता को मापी पुस्त दिनाक 18.11.2008 को ही निर्गत किया गया है।
(ii) उपर्युक्त से स्पष्ट होता है कि कार्यादेश एवं एकरारनामा के पूर्व ही संवेदक द्वारा सम्पूर्ण योजना कार्य पूरी कर दी गयी और कनीय अभियंता द्वारा मापी भी कर दी गयी। इससे यह भी परिलक्षित होता है कि कार्यपालक अभियंता जो योजनाओं के प्रभारी अभियंता भी थे, द्वारा किसी योजना की कोई जाँच नहीं की गयी। संवेदकों द्वारा एकरारनामा की तिथि के पूर्व ही तथाकथित कार्य पूर्ण किये जा चुके थे। (iii) एकरारनामा के नियम-18 के अनुपालन में संवेदक ''मास्टर रौल एवं अभिश्रव'' उपलब्ध कराने हेतु बाध्य था, परन्तु जाँच में पाया गया कि संवेदक द्वारा मास्टर रौल समर्पित नहीं किया गया था।
(iv) संवेदक से सामग्री की आपूर्त्ति के फर्म M एवं N से सामग्री सप्लाई ढुलाई का चालान/अभिश्रव भी सहायक अभिंयता को प्राप्त करना था। जाँच में पाया गया कि संवेदक से सामग्री ढुलाई का चालान/अभिश्रव प्राप्त नहीं किया गया है।
2. उक्त के आलोक में श्री राम के पत्रांक-शून्य, दिनांक 18.05.2017 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों/तर्को को रखा गया है :- (a) पथ प्रमंडल, मधेपुरा के आलमनगर, सपरदह पथ में कि॰मी॰ 5 में पुनस्र्थापन कार्य अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक के बीच एकरारनामा दिनांक 19.12.2008 को सम्पन्न किया गया। इसके पूर्व अधीक्षण अभियंता द्वारा पत्र संख्या-1849 (अनु॰) दिनांक 09.12.2008 द्वारा उन्हेंं प्राप्त प्राक्कलन पर सहमति (Approaval) दी गयी। मापी पुस्तिका में जैसा कि उल्लेखित है, कार्यपालक अभियंता द्वारा जारी कार्यादेश की तिथि 19.12.2008 है। सहायक अभियंता द्वारा कनीय अभियंता को मापी पुस्तिका पुनः निर्गत (Re-issued) करने की तिथि 18.11.2008 अंकित है। यह कृत कार्यपालक अभियंता तथा सहायक अभियंता द्वारा किया गया है। अतः इस संबंध में उनके द्वारा ही स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। मेरी समझ में बाढ़ के पश्चात चूंकि सड़क पुनस्र्थापन का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा था। इसी के लिए टास्कफोर्स का गठन भी किया गया था। अतः कार्यहित में ही उच्च अधिकारियों द्वारा सुविधानुसार पूर्व में ही मापी पुस्तिका निर्गत किया जा रहा था ताकि पुनस्र्थापन कार्य में वेवजह प्रक्रियात्मक विलम्ब नहीं हो। (b) कार्यादेश एवं एकरारनामा के पश्चात ही दिनांक 19.12.2008 को कार्य प्रारंभ हुआ था, जैसा कि मापी पुस्तिका में भी अंकित है। संवेदक द्वारा दिनांक 23.12.2008 तक जो भी कार्य किया गया उसे मापी पुस्तका में अंकित करते हुए कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्तिका तैयार की गयी और सहायक अभिंयता द्वारा इसकी जाँच की गयी। भुगतान से पूर्व कार्यपालक अभियंता द्वारा भी दिनांक 06.01.2009 को इसकी जाँच की गयी, जो मापी पुस्तिका पर अंकित उनके हस्ताक्षर एवं तिथि से स्पष्ट होता है। (c) संवेदक द्वारा मास्टर रौल एवं अभिश्रव उपलब्ध कराया गया होगा। मामला काफी पुराना है, इस संबंध में संवेदक से स्थिति स्पष्ट कराना उचित प्रतीत होता है, क्योंकि यह बिन्दु संवेदक से संबंधित है। अगर संवेदक द्वारा कोई लिखित बयान दिया गया हो कि उन्होंने मास्टर रौल एवं अभिश्रव उपलब्ध नहीं कराया था, तो उसकी प्रति मुझे उपलब्ध कराया जाय। ताकि मैं स्थिति स्पष्ट कर सकूँ। (d) पुनस्र्थापन कार्य के दौरान मैं कनीय अभियंत के रूप में कार्यरत हूँ। अतः यह आरोप मुझसे संबंधित नहीं है। 3. श्री राम प्रकाश राम, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में रखे गये तथ्यों/तर्को की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि विषयांकित कार्यो के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न प्रावधानगत प्रक्रियाओं यथा-निविदा, एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये जाने में तत्समय क्रमबद्ध कार्रवाई नहीं की गयी, अतएव श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों/त्रुटियों को इस हद तक प्रमाणित मानते हुए समानुपातिक रूप से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत उनके पेंशन से 05 (पाँच) प्रतिशत की राशि की कटौती 01 (एक) वर्ष तक किये जाने का निर्णय लिया जाता है। प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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3 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-08/2016-7 (S)--श्री रविशंकर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पथ प्रमंडल, मधेपुरा के पदस्थापन काल में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के नाम पर बरती गयी अनियमितता के संबंध में श्री चन्द्रशेखर एवं अन्य माननीय स0वि0स0 द्वारा ध्यानाकर्षण सूचना के क्रम में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित विभागीय जाँच10 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 दल द्वारा दिनांक-27.01.2016 को जाँच किया गया। उनके पत्रांक-1408 दिनांक 01.04.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। उक्त के विभागीय समीक्षोंपरांत निम्नलिखित त्रुटियाँ पायी गयी :-
(i) पथ प्रमंडल, मधेपुरा के मीरगंज-वृन्दावन विधिनिया मार्ग में यातायात पुर्नस्थापन कार्य के अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक के साथ एकरारनामा दिनांक 31.01.2009 को किया गया, जबकि मापी पुस्त पर कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 28.01.2009 एवं 29.01.2009 को ही 12,22,956/-रुपये की राशि के लिए मापी दर्ज कर सम्पूर्ण कार्य पूरा कर दिया गया।
(ii) उपर्युक्त से स्पष्ट होता है कि कार्यादेश एवं एकरारनामा के पूर्व ही संवेदक द्वारा सम्पूर्ण योजना कार्य पूरी कर दी गयी और कनीय अभियंता द्वारा मापी भी कर दी गयी। इससे यह भी परिलक्षित होता है कि कार्यपालक अभियंता जो योजनाओं के प्रभारी अभियंता भी थे, द्वारा किसी योजना की कोई जाँच नहीं की गयी। संवेदकों द्वारा एकरारनामा की तिथि के पूर्व ही तथाकथित कार्य पूर्ण किये जा चुके थे। (iii) एकरारनामा के नियम-18 के अनुपालन में संवेदक ''मास्टर रौल एवं अभिश्रव'' उपलब्ध कराने हेतु बाध्य था, परन्तु जाँच में पाया गया कि संवेदक द्वारा मास्टर रौल समर्पित नहीं किया गया था।
(iv) संवेदक से सामग्री की आपूर्त्ति के फर्म M एवं N से सामग्री सप्लाई ढुलाई का चालान/अभिश्रव भी सहायक अभिंयता को प्राप्त करना था। जाँच में पाया गया कि संवेदक से सामग्री ढुलाई का चालान/अभिश्रव प्राप्त नहीं किया गया है।
2. उक्त पायी गयी त्रुटियों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3815 (एस) अनु0 दिनांक-28.04.2017 द्वारा श्री रविशंकर प्रसाद के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचलित की गयी। संचालन पदाधिकारी-सह-मुख्य अभियंता, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-910 अनु0 दिनांक-02.12.2019 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध विरूद्ध गठित 4 (चार) आरोपों को अप्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया है। समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरांत गठित आरोप संख्या-(i) एवं (ii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा गठित मंतव्य से सहमत नहीं होते हुये विभागीय प्रत्रांक-880 (एस0) अनु0 दिनांक-11.02.2021 के द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री प्रसाद द्वारा विभाग को उत्तर उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-3174 (एस0) दिनांक-06.07.2021 एवं पत्रांक-3843 (एस0) दिनांक 05.08.2021 से स्मारित किया गया, इसके बावजूद श्री प्रसाद द्वारा उत्तर प्रतिवेदन विभाग को समर्पित नहीं किया गया। 3. श्री प्रसाद का द्वितीय कारण पृच्छा अप्राप्त रहने की स्थिति में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से उत्पन्न असहमति के बिन्दु के संदर्भ में विभागीय समीक्षा की गइर््र। समीक्षोपरांत पाया गया कि विषयांकित कार्यो के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न प्रावधानगत प्रक्रियाओं यथा-निविदा, एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये जाने में तत्समय श्री प्रसाद के द्वारा क्रमबद्ध कार्रवाई नहीं की गयी।
अतएव श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों/त्रुटियों को इस हद तक प्रमाणित मानते हुए समानुपातिक रूप से इनको बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (v) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- (i) ''एक वार्षिक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।'' प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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3 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-08/2016-09 (S)--श्री नन्द किशोर सिन्हा, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के पथ प्रमंडल, मधेपुरा के पदस्थापन काल में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के नाम पर बरती गयी अनियमितता के संबंध में श्री चन्द्रशेखर एवं अन्य माननीय स0वि0स0 द्वारा ध्यानाकर्षण सूचना के क्रम में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित विभागीय जाँच दल द्वारा दिनांक-27.01.2016 को जाँच किया गया तथा पत्रांक-1408 दिनांक 01.04.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत निम्नलिखित त्रुटियों के लिए आरोप-पत्र गठित करते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-3819 (एस) अनु॰, दिनांक 28.04.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत कारण-पृच्छा की मांग की गयी :-
(i) पथ प्रमंडल, मधेपुरा के मीरगंज से रतन पट्टी मार्ग (3 कि॰मी॰ से 4 कि॰मी॰ के बीच) में पुनस्र्थापन कार्य अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक के बीच दिनांक 31.01.2009 को एकरारनामा हुआ, जबकि कनीय अभियंता द्वारा कार्यादेश दिनांक 30.01.2009 को निर्गत किया गया है। संवेदक द्वारा दिनांक 31.01.2009 को एकरारनामा करने के पश्चात उसी दिन 16,80,113.00 रुपये के सम्पूर्ण कार्य की मापी कर सम्पूर्ण कार्य पूरी भी कर ली गयी।11 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 (ii) उपर्युक्त से स्पष्ट होता है कि कार्यादेश एवं एकरारनामा के पूर्व ही संवेदक द्वारा सम्पूर्ण योजना कार्य पूरी कर दी गयी और कनीय अभियंता द्वारा मापी भी कर दी गयी। इससे यह भी परिलक्षित होता है कि कार्यपालक अभियंता जो योजनाओं के प्रभारी अभियंता भी थे, द्वारा किसी योजना की कोई जाँच नहीं की गयी। संवेदकों द्वारा एकरारनामा की तिथि के पूर्व ही तथाकथित कार्य पूर्ण किये जा चुके थे। (iii) एकरारनामा के नियम-18 के अनुपालन में संवेदक ''मास्टर रौल एवं अभिश्रव'' उपलब्ध कराने हेतु बाध्य था, परन्तु जाँच में पाया गया कि संवेदक द्वारा मास्टर रौल समर्पित नहीं किया गया था।
(iv) संवेदक से सामग्री की आपूर्त्ति के फर्म M एवं N से सामग्री सप्लाई ढुलाई का चालान/अभिश्रव भी सहायक अभिंयता को प्राप्त करना था। जाँच में पाया गया कि संवेदक से सामग्री ढुलाई का चालान/अभिश्रव प्राप्त नहीं किया गया है।
2. उत्तर प्रतिवेदन अप्राप्त रहने कि स्थिति में विभागीय पत्रांक-7000 (एस0) दिनांक-04.08.2017 के द्वारा श्री सिन्हा को स्मारित किया गया। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा के पत्रांक-शून्य, दिनांक 30.08.2017 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों/तर्को को रखा गया है :- (a) पथ प्रमंडल, मधेपुरा के मीरगंज से रतनपट्टी मार्ग के 3 कि0मी0 से 4 कि0मी0 के बीच पुनस्र्थापन कार्य अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता एवं उच्चाधिकारी के द्वारा दिनांक-31.01.2009 से पहले ही कार्य आवंटन के उपरान्त संवेदक के साथ कार्य स्थल का निरीक्षण के दौरान ही मौखिक रूप से कार्यादेश दे दिया गया था। ताकि पानी के बहाव के कारण कार्य पर काम आने वाले सामग्रियों की क्षति न हो जिससे सरकारी राशि का अपव्यय को बचाया जा सके। इसलिए कार्य पूर्ण होने और यातायात चालू होने के बाद उच्चाधिकारी लोगों के निरीक्षण के उपरान्त कागजी कार्रवाई की गयी। साथ ही दिनांक 31.01.2009 को टास्क फोर्स की अवधि समाप्त हो गया। (b) प्रलयंकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच राहत पहुँचाने में पथ के कटाव के कारण अत्यधिक कठिनाईयों का सामना सरकार एवं प्रशासन को करना पड़ रहा था, जिसके कारण अविलम्ब यातायात को चालू करवाने की अत्यधिक आवश्यकता थी। आरोप में वर्णित पथ के कार्य स्थल पर पानी का वहाव तेज और ज्यादा था, जिसका निरीक्षण उच्चाधिकारियों के द्वारा अनेकों बार किया गया था, एवं निर्देश दिया गया कि किसी भी हालात में सरकारी राशि की बर्बादी को रोकने हेतु आवंटन के तुरंत बाद कार्यादेश देकर पुर्नस्थापन का कार्य पूर्ण कराया जाय और कार्य पूर्ण हाने के उपरांत स्थल को देखकर ही एकरारनामा किया जाय ताकि यदि कार्य के दौरान किसी तरह से सामग्रियों की बर्बादी हो गयी हो तो उसकी जबावदेही संबंधित संवेदक ही हो। (c) कोसी में आयी प्रलयंकारी बाढ़ के कारण हुए पथ में कटाव के चलते बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच राहत पहुँचाने में आ रही अत्यधिक कठिनाई के चलते पथ में यातायात चालू करने हेतु काफी दबाव था, जिसके कारण मुख्यालय एवं सरकार द्वारा प्रचलित नियमों को शिथिल कर यातायात को चालू करने हेतु प्राप्त मौखिक निदेश के आलोक में कनीय अभियंता के द्वारा कार्य कराया गया था। जहां तक मुझे जानकारी है कि नियम-18 के तहत F2 एकरारनामा द्वारा कार्य के संपादन में संवेदक द्वारा मास्टर रौल एवं अभिश्रव जमा करने की बाध्यता नहीं है। (d) उक्त पुनस्र्थापन कार्य के दौरान मैं कनीय अभियंता के रूप में कार्यरत था। अतः यह आरोप मुझसे संबंधित नहीं है।
3. श्री नन्द किशोर सिन्हा, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में रखे गये तथ्यों/तर्को की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि विषयांकित कार्यो के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न प्रावधानगत प्रक्रियाओं यथा-निविदा, एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये जाने में तत्समय क्रमबद्ध कार्रवाई नहीं की गयी, अतएव श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों/त्रुटियों को इस हद तक प्रमाणित मानते हुए समानुपातिक रूप से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत उनके पेंशन से 05 (पाँच) प्रतिशत की राशि की कटौती 01 (एक) वर्ष तक किये जाने का निर्णय लिया जाता है। प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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3 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-08/2016-11 (S)--श्री सुनीलधारी प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृृत्त के उक्त पदस्थापन काल में वर्ष 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के नाम पर बरती गयी अनियमितता के संबंध में श्री चन्द्रशेखर एवं अन्य माननीय स0वि0स0 द्वारा ध्यानाकर्षण सूचना के क्रम में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित विभागीय जाँच दल द्वारा दिनांक-27.01.2016 को जाँच किया गया तथा पत्रांक-1408 दिनांक 01.04.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोंपरांत निम्नलिखित त्रुटियों के लिए आरोप-पत्र गठित करते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-3814 (एस) अनु॰, दिनांक 28.04.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत कारण-पृच्छा की मांग की गयी :-
(i) पथ प्रमंडल मधेपुरा में मीरगंज से रतनपट्टी मार्ग (कि॰मी॰3 से 4 के बीच) में पुर्नस्थापन कार्य के अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक के बीच दिनांक 31.01.2009 को एकरारनामा हुआ, जबकि कनीय अभियंता12 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 द्वारा कार्यादेश दिनांक 30.01.2009 को निर्गत किया गया है। संवेदक द्वारा दिनांक 31.01.2009 को एकरारनामा करने के पश्चात् उसी दिन 16,80,113.00 रुपये के सम्पूर्ण कार्य की मापी कर सम्पूर्ण कार्य पूरी भी कर ली गई।
(ii) पथ प्रमंडल मधेपुरा में मीरगंज-वृन्दावन विधिनिया मार्ग में यातायात पुर्नस्थापन कार्य के अन्तर्गत कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक के साथ एकरारनामा दिनांक 31.01.2009 को किया गया, जबकि मापी पुस्त पर कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 28.01.2009 एवं 29.01.2009 को ही 12,22,956/-रुपये की राशि के लिए मापी दर्ज कर सम्पूर्ण कार्य पूरा कर दिया गया।
(iii) उपर्युक्त से स्पष्ट होता है कि कार्यादेश एवं एकरारनामा के पूर्व ही संवेदक द्वारा सम्पूर्ण योजना कार्य पूरी कर दी गयी और कनीय अभियंता द्वारा मापी भी कर दी गयी। इससे यह भी परिलक्षित होता है कि कार्यपालक अभियंता जो योजनाओं के प्रभारी अभियंता भी थे, द्वारा किसी योजना की कोई जाँच नहीं की गयी। संवेदकों द्वारा एकरारनामा की तिथि के पूर्व ही तथाकथित कार्य पूर्ण किये जा चुके थे।
(iv) एकरारनामा के नियम-18 के अनुपालन में संवेदक ''मास्टर रौल एवं अभिश्रव'' उपलब्ध कराने हेतु बाध्य था, परन्तु जाँच में पाया गया कि संवेदक द्वारा मास्टर रौल समर्पित नहीं किया गया था।
(v) संवेदक से सामग्री की आपूर्त्ति के फर्म M एवं N से सामग्री सप्लाई ढुलाई का चालान/अभिश्रव भी सहायक अभिंयता को प्राप्त करना था। जाँच में पाया गया कि संवेदक से सामग्री ढुलाई का चालान/अभिश्रव प्राप्त नहीं किया गया है।
2. उत्तर प्रतिवेदन अप्राप्त रहने कि स्थिति में विभागीय पत्रांक-6999(एस0) दिनांक-04.08.2017 के द्वारा श्री सिंह को स्मारित किया गया। उक्त के आलोक में श्री सिंह के पत्रांक-शून्य, दिनांक 18.08.2017 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों/तर्को को रखा गया है :-
(a) माह दिसम्बर (वस्तुतः अगस्त), 2008 में कोसी नदी में आई प्रलंयकारी बाढ़ को दृष्टिपथ में रखते हुए यातायात के पुर्नस्थापन हेतु पथ निर्माण विभाग द्वारा अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल सहरसा के प्रशासनिक नियंत्रण में टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जिसकी कार्य अवधि दिनांक 31.01.2009 तक थी तथा उन्हें कार्यपालक अभियंता, टास्क फोर्स, मुरलीगंज के रूप में नामित किया गया था।
(b) कोसी नदी में आई प्रलंयकारी बाढ़ के कारण पथाें में भारी कटाव हुआ था एवं कई जगहों पर सड़क Washout हो गया था तथा सड़क में Alignment में 20 से 25 फीट तक गड्ढ़ा हो गया था एवं उसमें पानी के बहाव की गति की तीव्रता अत्यधिक थी। सामान्यतः 3500 क्यूसेक से ज्यादा बहाव वाले स्थल (Breach) को भरना कठिन होता है तथा उसमें उपयोग में लाये जानेवाली सामग्रियों की बर्बादी की संभावना भी अत्यधिक रहती है।
(c) प्रलंयकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्रियों को पहुँचाने में पथ के कटाव के कारण अत्यधिक कठिनाई का सामना सरकार/प्रशासन को करना पड़ रहा था, जिसके कारण अविलम्ब यातायात को चालू करवाने की आवश्यकता थी।
(d) आरोप में वर्णित पथों के सभी स्थलों पर पानी का बहाव 3500 क्यूसेक से ज्यादा था, जिसका निरीक्षण तत्कालीन मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभिंयता द्वारा कई बार किया गया था एवं निदेश दिया गया कि सरकारी राशि की बर्बादी को रोकने हेतु कार्य आवंटन के तुरंत बाद कार्य आदेश निर्गत कर पथ के पुर्नस्थापन का कार्य पूर्ण कराया जाय एवं कार्य पूर्ण होने के बाद स्थल को देख कर ही एकरारनामा किया जाय ताकि यदि कार्य के दौरान किसी तरह से सामग्रियों की बर्बादी हो गयी हो तो उसकी जिम्मेवारी संबंधित संवेदक की हो।
(e) उक्त निदेश के आलोक में ही कराये गये कार्य के निरीक्षण के पश्चात कार्य की मात्रा को देख कर ही एकरारनामा किया गया था, ताकि सरकारी राजस्व के अपव्यय को रोका जा सकें।
(f) यह भी अंकित किया गया कि टास्क फोर्स के गठन एवं कार्य के लिए कई नियमों को भी शिथिल किया गया था, जिसकी मौखिक सूचना समय-समय पर टास्क फोर्स पदाधिकारी को दी जाती थी एवं उसके अनुरूप कार्य भी कराया जाता था।
3. श्री सुनीलधारी प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रति सेवानिवृृत्त द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में रखे गये तथ्यों/तर्को की विभागीय समीक्षा की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि विषयांकित कार्यो के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न प्रावधानगत प्रक्रियाओं यथा-निविदा, एकरारनामा एवं कार्यादेश निर्गत किये जाने में तत्समय क्रमबद्ध कार्रवाई नहीं की गयी। अतएव श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों/त्रुटियों को इस हद तक प्रमाणित मानते हुए समानुपातिक रूप से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत उनके पेंशन से 05 (पाँच) प्रतिशत की राशि की कटौती 01 (एक) वर्ष तक किये जाने का निर्णय लिया जाता है। प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।13 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023
5 जनवरी 2023
सं0 ई1/यांत्रिक-306/92 (खंड)-58 (S)--पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-470 (एस॰) दिनांक 12.01.2011 सह-पठित ज्ञापांक-471 (एस) दिनांक 12.01.2011 द्वारा निर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-II के सहायक अभियंता (यांत्रिक) की अन्तिम वरीयता सूची को L.P.A No. 1761/2010 राजीव कुमार एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य (सम्प्रति MJC No.188/2018 दायर) में दिनांक 15.07.2016/(संशोधित तिथि 18.07.2016) को पारित आदेश के अनुपालन में श्री विजय कुमार-1 का वरीयता क्रमांक श्री राजीव कुमार के वरीयता क्रमांक-66 से ऊपर-65A/AE एवं श्री अनिल कुमार की वरीयता श्री विजय कुमार-1 के वरीयता क्रमांक-65A/AE के नीचे वरीयता क्रमांक-65B/AE के रूप में निम्नरूपेण निर्धारित किया जाता हैः-
| क्र॰ सं॰ | आवेदक का नाम | विभागीय अधिसूचना संख्या-470 (एस) दिनांक 12.01.2011 द्वारा निर्गत वरीयता | विभागीय अधिसूचना संख्या-6906 (एस) दिनांक 16.06.2011 द्वारा निर्गत सिविल लिस्ट | ||
| वर्त्तमान वरीयता क्रमांक | संशोधित वरीयता क्रमांक | वर्त्तमान सिविल लिस्ट क्रमांक | संशोधित सिविल लिस्ट क्रमांक | ||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 | श्री विजय कुमार-1 | निर्धारित नहीं | 65A/AE | निर्धारित नहीं | 65A |
| 2. | श्री अनिल कुमार | निर्धारित नहीं | 65B/AE | निर्धारित नहीं | 65B |
आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।
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17 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-61/2020-262 (S)--श्री ओम प्रकाश पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता से पथ प्रमंडल, मोतिहारी के पदस्थापन काल में CMBD कार्य कि॰मी॰ 84.3 से 123.6(Section-Jagiraha to Pashupatinath Chowk) of SH-74 पथ में निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक- 313 अनु॰ दिनांक- 12.07.2016 एवं पत्रांक- 517 अनु॰ दिनांक- 13.10.2016 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में पायी गयी त्रुटियों हेतु विभागीय पत्रांक-9132 (एस) अनु॰, दिनांक 18.10.2017 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।
2. इसी प्रकार पथ प्रमंडल, मोतिहारी अन्तर्गत CMBDके तहत ढ़ाका से फुलवरिया रोड में IRQP कार्य की अनियमितता के मामले में कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, पथ निर्माण विभाग द्वारा दिनांक- 28.01.2015 को जाँच किया गया। निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक- 67 अनु॰ दिनांक-12.02.2015 के माध्यम से प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन तथा गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-148 अनु॰ दिनांक- 01.04.2015 एवं Supplementary Report पत्रांक-561 अनु॰ दिनांक-23.09.2015 विभाग को समर्पित किया गया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त पायी गयी त्रुटियों के लिए विभागीय पत्रांक-315 (एस) अनु॰ दिनांक-18.01.2016 द्वारा भी श्री पाण्डेय से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।
3. उपर्युक्त कंडिका 1 एवं 2 के संबंध में श्री पाण्डेय ने क्रमशः पत्रांक-शून्य, दिनांक 14.11.2017 एवं पत्रांक-शून्य, दिनांक-09.02.2016 के द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया। समर्पित स्पष्टीकरण उत्तरों की विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा में संतोषप्रद नहीं पाये जाने की स्थिति में स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए सम्यक विचारोपरांत आरोप पत्र गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4838 (एस), अनु॰ दिनांक 17.05.2019 के द्वारा श्री पाण्डेय के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत निम्न आरोपों हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-
(क) पथ प्रमंडल, मोतिहारी अन्तर्गत CMBD कार्य From Km 84.3 to 123.6 (section Jagiraha to Pashupati Nath Chowk) of SH-74 पथ में उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत आलोच्य पथ कार्य में निम्न त्रुटियाँ/अनियमितता पायी गयी हैः-
(i) पथ के 50वें से 86वें कि0मी0 एवं 122वें कि0मी0 में BCकार्य में Aggregate औसत Oversize क्रमशः 11.7468 प्रतिशत एवं 9.32 प्रतिशत तथा औसत Undersize क्रमशः 0.3387 प्रतिशत एवं 0.902 प्रतिशत पाया गया। पूरे पथ के लिए औसत Oversize-10.53 प्रतिशत औसत Undersize-0.62 प्रतिशत पाया गया, जबकि विभागीय मार्गदर्शिका के अनुसार औसत Oversize-10 प्रतिशत से अधिक पाया गया। (ii) पथ के 50वेें से 86वें कि0मी0 में BC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की मात्रा क्रमशः 4.37 प्रतिशत & 3.9 प्रतिशत पाया गया। पूरे पथ के लिए औसत अलकतरा की मात्रा 4.14 प्रतिशत पाया गया, जबकि विभागीय मार्गदर्शिका के अनुसार औसत अलकतरा की मात्रा 4.19 प्रतिशत निर्धारित है।14 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 (ख) पथ प्रमंडल मोतिहारी अंतर्गत CMBD के तहत ढाका से फुलवरीयाघाट रोड में कराये गये IRQP कार्य में उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत आलोच्य पथ कार्य में निम्न त्रुटियाँ/अनियमितता पायी गयी है :-
(i) आलोच्य पथ के 7वे, 8वे, नौवे एवं 11वे कि0मी0 में कराये गये SDBC कार्य के Top layer से Stone chips उखड़ा हुआ पाया गया।
(ii) पथ के 1ले कि0मी0 में कराये गये PQC कार्य का औसत Compressive strength 80.15315 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 6. श्री पाण्डेय द्वारा समर्पित उक्त बचाव विभागीय समीक्षा में स्वीकारयोग्य नहीं पाते हुये प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री पाण्डेय के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत इनके 05% पेंशन की कटौती 05 वर्षो तक किये जाने का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।
7. सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-4263(S)we दिनांक-25.08.
2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2745, दिनांक-24.12.2021 द्वारा उक्त निर्णीत दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया। तद्ालोक में श्री ओम प्रकाश पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 2510(एस)सह-पठित-ज्ञापांक-2511(एस) दिनांक-07.06.2022 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
(i)''05% (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षाें तक ''।
8. उक्त संसूचित दंड के विरुद्ध श्री पाण्डेय के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-04.07.2022 समर्पित किया गया। श्री पाण्डेय के पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा में पाया गया कि इन्हें ढ़ाका से फुलवरियाघाट पथ में पायी गयी त्रुटियों के लिये दंड अधिरोपित किया गया है, जिसके संबंध में कोई नया तथ्य/तर्क एवं साक्ष्य प्रस्तुत नही किया गया है, बल्कि पूर्व में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में रखे गये तथ्यों/तर्कों की ही मात्र पुनरावृत्ति की गयी है। ऐसी स्थिति में श्री पाण्डेय के द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को स्वीकार किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर नही पाया गया।
अतएव उपर्युक्त के आलोक में श्री ओम प्रकाश पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा आलोच्य मामले में समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-04.07.2022 को अस्वीकृत किया जाता है।
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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30 जनवरी 2023
सं0 निग/सारा-1 (पथ)-मुक॰-24/2018-404 (S)--श्री बेचन राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, अनुश्रवण भोजपुर पथ अंचल, आरा के विरूद्ध दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक स्वेच्छा से अपने कर्त्तव्य से अनाधिकृत अनुपस्थिति के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5046(एस) दिनांक-17.05.2006 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-10 दिनांक-12.03.2007 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को इस आधार पर प्रमाणित नहीं पाया गया कि प्रभार का आदान-प्रदान प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप नहीं किये जाने अथवा प्रभार नहीं सौपने पर पूर्व पदस्थापित पदाधिकारी को विधिवत् भारमुक्त कराकर नये पदाधिकारी को स्वतः प्रभार ग्रहण करने का आदेश नियंत्रण पदाधिकारी अथवा विभाग द्वारा नहीं दिया गया। 2. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री राम द्वारा ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना संख्या-6766 दिनांक-30.12.1996 द्वारा इनकी सेवा पथ निर्माण विभाग को सौंपी गयी थी। लेकिन उन्होंने आदेश का अनुपालन नहीं किया तथा स्वेच्छा से अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहें। उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एम॰जे॰सी॰सं॰-2527/03 दायर किया, जिसमें दिनांक-30.06.2005 को माननीय उच्च न्यायालय ने यह आदेश पारित किया कि श्री बेचन राम अपना अभ्यावेदन, सचिव, पथ निर्माण विभाग को दे तथा सचिव, पथ निर्माण विभाग इनके ओहदे के अनुसार किसी पद पर इनका पदस्थापन करें। इस आलोक में श्री राम का पदस्थापन अधिसूचना संख्या-8561(एस) दिनांक-22.11.2005 द्वारा कार्यपालक अभियंता, अनुश्रवण भोजपुर, पथ अंचल, आरा के रूप में किया गया, जहाँ श्री राम ने दिनांक-23.11.2005 को योगदान दिया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए अनाधिकृत अनुपस्थिति का आरोप प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दुओं को स्पष्ट करते हुए जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर विभागीय पत्रांक-5629(एस) दिनांक-30.04.2007 द्वारा श्री राम से दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक स्वेच्छा से अनुपस्थित रहने के लिए बिहार सेवा संहिता के नियम-76(ख) के तहत् सेवा से बर्खास्तगी के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। 3. श्री राम के पत्रांक-शुन्य दिनांक-11.05.2007 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में कहा गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया, परन्तु विभाग द्वारा इसकी समीक्षा ठीक ढ़ंग से नहीं की गयी। साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया कि माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा एम॰जे॰सी॰सं॰-1812/97 में दिनांक-01.03.2001, एम॰जे॰सी॰सं॰-2527/03 में दिनांक-30.06.2005 तथा एम॰जे॰सी॰सं॰-861/06 में पारित आदेश की अवहेलना कर द्वितीय कारण पृच्छा की मांग पूर्वाग्रह से ग्रसित है। श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा में पाया गया कि श्री राम की सेवायें ग्रामीण विकास विभाग के अधीन रहने के दौरान ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना संख्या-1061 दिनांक-16.02.1996 के आलोक में श्री राम, कार्यपालक अभियंता, एन॰आर॰आई॰पी॰, साहेबगंज का प्रभार दिनांक-02.03.1996 को स्वतः ग्रहण कर कार्यरत हुए। ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना संख्या-6766 दिनांक-30.12. 1996 द्वारा इनकी सेवा पथ निर्माण विभाग को वापस कर दी गयी, परन्तु इन्होंने न तो अपना पूर्व धारित पद का प्रभार सौंपा16 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 और न ही पथ निर्माण विभाग में योगदान समर्पित किया। ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना संख्या-6780 दिनांक-30.12.
1996 द्वारा कार्यपालक अभियंता, एन॰आर॰ई॰पी॰, साहेबगंज के पद पर अधिसूचित पदाधिकारी श्री नवीन कुमार द्वारा उप विकास आयुक्त, साहेबगंज के आदेश के आलोक में कार्यपालक अभियंता, एन॰आर॰ई॰पी॰, साहेबगंज के पद का प्रभार दिनांक-31.01.1997 को स्वतः ग्रहण किया गया। श्री राम, एन॰आर॰ई॰पी॰, साहेबगंज से स्थानान्तरण के उपरान्त लगातार अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। कालान्तर में पथ निर्माण विभाग की अधिसूचना संख्या-6717(एस) दिनांक-19.11.1997, 10033(एस) दिनांक-31.12.1998 एवं शुद्धि पत्र अधिसूचना संख्या-7593(एस) दिनांक-31.10.2001 द्वारा इनका पदस्थापन क्रमशः पथ निरूपण योजना प्रमंडल संख्या-1, अग्रिम योजना, पटना; तकनीकी सलाहकार, अग्रिम योजना अंचल, भागलपुर तथा तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, भागलपुर के पद पर किया गया, परन्तु इनके द्वारा किसी भी पदस्थापित पद पर योगदान नहीं किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा एम॰जे॰सी॰-2527/03 में दिनांक-30.06.2005 को पारित आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-8561(एस) दिनांक-22.11.2005 के आलोक में कार्यपालक अभियंता अनुश्रवण, भोजपुर पथ अंचल, आरा के पद पर दिनांक-23.11.2005 को उन्होंने योगदान दिया। इस प्रकार श्री राम दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक लगभग आठ वर्षों से अधिक अवधि तक स्वेच्छा से अपने पद से अनुपस्थित रहें। फलतः इस संबंध में इनका द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर असंतोषजनक पाते हुए बिहार सेवा संहिता के नियम 76(ख) के आलोक में 08 वर्षों से अधिक अवधि तक स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने के स्थापित आरोप के लिए सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरान्त विभागीय पत्रांक-7749(एस) दिनांक-28.06.2007 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श/सहमति की मांग की गयी। 4. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1731 दिनांक-28.12.2007 से प्राप्त परामर्श/सहमति में आयोग द्वारा राज्य सरकार के उक्त निर्णय से इस आधार पर असहमति जतायी गयी कि श्री राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा उन्हें पदस्थापन की प्रतीक्षा में मानते हुए स्वेच्छापूर्वक अपने पद से अनुपस्थित रहने के आरोप को प्रमाणित नहीं पाया है। वस्तुतः माननीय उच्च न्यायालय के आदेशोपरान्त श्री राम द्वारा धारित वर्त्तमान पद पर विभाग ने उनका पदस्थापन किया है और इसके पूर्व उल्लिखित आरोप में उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी। 5. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से प्राप्त परामर्श की समीक्षा के क्रम में पाया गया कि ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना संख्या-6766 दिनांक-30.12.1996 द्वारा इनकी सेवा तत्कालिक प्रभाव से पथ निर्माण विभाग को सौंप दी गयी। परन्तु श्री राम के द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया गया। इनके द्वारा न तो पूर्व धारित पद का प्रभार ही सौंपा गया और न ही पथ निर्माण विभाग में योगदान ही दिया गया। कालान्तर में विभाग की विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा इनका पदस्थापन विभिन्न पदों पर किया जाता रहा, परन्तु इनके द्वारा किसी भी अधिसूचित पद पर योगदान नहीं किया गया। कोई पदाधिकारी मुख्यालय में योगदान कर ही पदस्थापन की प्रतिक्षा में रहता है। इसलिए यह कहना कि श्री राम पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे ग्राह्य नहीं पाया गया। आयोग का दूसरा तर्क कि श्री राम के विरूद्ध वर्त्तमान पद पर पदस्थापित करने के पूर्व कोई कार्रवाई नहीं की गयी, तर्कसंगत नहीं है। जहाँतक श्री राम का योगदान स्वीकृत कर पदस्थापित करने के उपरान्त कार्रवाई का प्रश्न है यही समुचित Course of action था- विभागीय कार्यवाही उसी के विरूद्ध चलाई जा सकती है, जिसका विभाग में अस्तित्व हो। वैसे भी जबतक औपचारिक बर्खास्तगी आदेश (Formal dismissal order) पारित नहीं हो जाता तबतक श्री राम का योगदान स्वीकृत करना ही नियमसंगत था। अतः बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श मान्य नहीं पाते हुए श्री राम के दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक स्वेच्छा से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सेवा संहिता के नियम 76(ख) में निहित प्रावधान के अनुसार सेवा से बर्खास्त करने के दंड पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त विभागीय अधिसूचना संख्या-5064(एस) -सह-पठित ज्ञापांक-5065(एस) दिनांक-09.04.2008 द्वारा श्री बेचन राम, कार्यपालक अभियंता को दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक के स्वेच्छापूर्वक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के लिए इन्हें तत्कालिक प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किये जाने का दंड संसूचित किया गया। 6. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री राम द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में CWJC No.-15687/2008 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक-27.03.2018 को आदेश पारित किया गया, जिसका कार्यशील अंश निम्नवत् हैः- "The impugned order clearly appears to be based on surmises and conjectures and is without reference to any material against the petitioner, perverse and is unsustainable in law. The same is hereby quashed. As a result of quashing of the impugned order, the petitioner would be entitled for all consequential benefits in accordance with law. The writ petition is allowed to the extent indicated herein above." 7. उक्त पारित आदेश के विरूद्ध विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में LPA No.-1545/2018 दायर किया गया, जो माननीय उच्च न्यायालय में विचारण हेतु लंबित है। 8. वादी श्री राम द्वारा CWJC No.-15687/2008 में दिनांक-27.03.2018 को पारित आदेश के अनुपालन हेतु माननीय उच्च न्यायालय में MJC No.-2987/2018 दायर किया गया, जिसमें दिनांक-18.01.2023 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया, जिसका कार्यशील अंश निम्नवत् हैः- "The said order of this Court dated 27.03.2018 is not being carried out by the State on the plea that a Letters Patent Appeal has been preferred against the said order of this Court dated17 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 27.03.2018, which is pending since 2018. It is not in dispute that no interim order has been passed in the said Letters Patent Appeal preferred by the State staying any portion of the order dated 27.03.2018. In the Court's opinion, thus, the disobedience on the part of the authorities is patent and appears to be deliberate. The Court is, thus, left with no other option but to proceed against contemnors for wilful disobedience of this Court's order. Accordingly it is directed that let the Principal Secretary, Road Construction Department be personally present in the Court on 01.02.2023 for the framing of charge. He will also be required to file an affidavit giving the details of the officials who had held the post of the Principal Secretary of the said department from the date of passing of the order of this Court 27.03.2018, till date, for proceeding accordingly against them in the present contempt proceeding. List this case on 01.02.2023. If in the meanwhile the contempt is purged by the authorities, personal attendance of the Principal Secretary, Road Construction Department shall not be required, subject to filing an affidavit to this effect." 9. अतः MJC No.-2987/2018 में दिनांक-18.01.2023 को पारित आदेश के आलोक में श्री बेचन राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को दिनांक-31.01.1997 से 22.11.2005 तक स्वेच्छा से अनाधिकृत रूप से अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने के प्रमाणित आरोप के लिए बर्खास्त करने संबंधी विभागीय अधिसूचना संख्या-5064(एस)-सह-पठित ज्ञापांक-5065(एस) दिनांक-09.04.2008 को निरस्त करते हुए सभी देय अनुवर्ती लाभ दियेे जाने की स्वीकृति इस शर्त के साथ प्रदान की जाती है कि यह आदेश विभाग द्वारा दायर LPA No.-1545/2018 में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा। 10. उक्त प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-20/2019-538(S)--पथ प्रमंडल, मधेपुरा अन्तर्गत OPRMC Packag संख्या-27 के तहत सुपौल-सिंघेश्वर पथ में कराये गये SDBC Gr-II कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़दस्ता प्रमंडल संख्या-04 द्वारा दिनांक-21.01.2015 को की गयी तत्पश्चात् निदेशक, प्रशिक्षण परीक्षण एवं शोध संस्थान के पत्रांक-66 दिनांक-12.02.2015 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोंपरांत कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा टॉलरेन्स लिमिट (4.19%) से भी कम 3.84% पाये जाने संबंधी त्रुटि के लिए विभागीय पत्रांक-3055 (S) दिनांक-16.04.2018, पत्रांक-3476 (S) दिनांक-11.05.2018 एवं पत्रांक-4081 दिनांक-01.06.2018 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। तद्ालोक में श्री राजेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रतिः अधीक्षण अभियंता, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-2/आर दिनांक-14.06.2018 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया। 2. श्री कुमार के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत यह पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में जिन व्यवहारिक कठिनाईयों को दृष्टिगत कर उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उस पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है, वस्तुतः उन्ही व्यवहारिक कठिनाईयों/परिस्थितियों को दृष्टिपथ में रखते हुए विभाग द्वारा सड़क निर्माण कार्य के प्रत्येक मदो में Tolerance Limit अनुमान्य किया गया है, जबकि प्रश्नगत मामले में SDBC कार्य में अलकतरा की औसत मात्रा 5% प्रावधान के विरूद्ध Tolerance Limit (4.19%) से भी कम अर्थात 3.84% पाया गया, जिसके फलस्वरूप श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होने के कारण लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-3547 (एस), सह-पठित ज्ञाप संख्या-3548 (एस), दिनांक-19.03.2019 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गयाः- (i) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक''।
3. श्री कुमार के दिनांक-31.03.2019 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-3547 (एस) दिनांक-19.03.2019 के द्वारा ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक'' का संसूचित लघु दंड इनपर प्रभावी नहीं हो पाया है।18 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गई समीक्षा के क्रम में श्री राजेश कुमार के विरूद्ध ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक'' का संसूचित लघु दंड को मूल दण्डादेश की तिथि से पुनरीक्षित करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता है :-
(i) ''निन्दन (आरोप वर्ष 2015-2016)''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-20/2019-564 (S)--पथ प्रमंडल, मधेपुरा अन्तर्गत OPRMC Packag संख्या-27 के तहत सुपौल-सिंघेश्वर पथ में कराये गये SDBC Gr-II कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़दस्ता प्रमंडल संख्या-04 द्वारा दिनांक-21.01.2015 को की गयी। तत्पश्चात् निदेशक, प्रशिक्षण परीक्षण एवं शोध संस्थान के पत्रांक-66 दिनांक-12.02.2015 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोंपरांत कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा टॉलरेन्स लिमिट (4.19%) से भी कम 3.84% पाये जाने संबंधी त्रुटि के लिए विभागीय पत्रांक-3057 (S) दिनांक-16.04.2018, पत्रांक-3477 (S) दिनांक-11.05.2018 एवं पत्रांक-4080 (S) दिनांक-01.06.2018 एवं पत्रांक 5821 (S) दिनांक 30.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। तद्ालोक में श्री अखिलेश्वर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रतिः सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, कटोरिया, पथ प्रमंडल, बाँका द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-9 (अनु0) दिनांक-27.08.2018 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया। 2. श्री सिंह के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत यह पाया गया कि श्री सिंह के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में जिन व्यवहारिक कठिनाईयों को दृष्टिगत कर उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उस पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है, वस्तुतः उन्ही व्यवहारिक कठिनाईयों/परिस्थितियों को दृष्टिपथ में रखते हुए विभाग द्वारा सड़क निर्माण कार्य के प्रत्येक मदो में Tolerance Limit अनुमान्य किया गया है, जबकि प्रश्नगत मामले में SDBC कार्य में अलकतरा की औसत मात्रा 5% प्रावधान के विरूद्ध Tolerance Limit (4.19%) से भी कम अर्थात 3.84% पाया गया, जिसके फलस्वरूप श्री सिंह के स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई अवसर युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होने के कारण लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-3628 (एस), सह-पठित ज्ञाप संख्या- 3629 (एस), दिनांक-25.03.2019 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गयाः- (i) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक''। 3. उक्त संसूचित दंड के विरुद्ध श्री सिंह द्वारा दिनांक 22.04.2019 को पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया। जिसकी विभागीय समीक्षोंपरान्त उक्त पुनर्विचार अवेदन को सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-7451(एस), सहपठित ज्ञापांक-7452 (एस) दिनांक-14.08.2019 के द्वारा अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।
4. श्री सिंह के दिनांक-31.01.2020 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0- 3628 (एस) दिनांक-25.03.2019 के द्वारा ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक'' का संसूचित लघु दंड, वृहद दंड में परिणत होकर इनके सेवान्त लाभ पर कुप्रभाव डाल रहा है। क्योंकि श्री सिंह वेतनवृद्धि की मिथि-01.07.2020 के पूर्व ही सेवानिवृत हो जाने के कारण वेतनवृद्धि का Restoration नहीं हो पा रहा है। उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गई समीक्षा के क्रम में श्री अखिलेश्वर सिंह के विरूद्ध ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचायात्मक प्रभाव से रोक'' का संसूचित लघु दंड को मूल दण्डादेश की तिथि से पुनरीक्षित करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता है :- (i) ''निन्दन (आरोप वर्ष 2015-2016)''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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2 फरवरी 2023
सं0 निग/सारा-9(आरोप)-103/2010-590 (S)--श्री सुनील कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, सिमडेगा, सम्प्रतिः सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर, पथ प्रमंडल, हाजीपुर के ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, सिमडेगा के पदस्थापन काल में अलकतरा अधिप्राप्ति के मामले में आपराधिक षडयंत्र, जालसाजी करने इत्यादि आरोपों के लिए श्री सिन्हा के विरूद्ध दर्ज सी०बी०आई० कांड संख्या-RC-16(A)/2009 (R) दिनांक-16.09. 2009 में माननीय विशेष न्यायाधीश, सी०बी०आई०, राँची के द्वारा दिनांक-29.03.2019 को पारित आदेश में भा0द0वि0 की धारा-420, 468, 471 एवं 120बी तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम-1988 की धारा-13(2) एवं 13(1)(D) के तह्त श्री सुनील कुमार सिन्हा को दोषी मानते हुए सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड की सजा दी गई। 2. उक्त पारित आदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक-3768 (एस) दिनांक-04.08.2021 द्वारा श्री सुनील कुमार सिन्हा से इस आशय का कारण-पृच्छा की गयी कि आपराधिक वाद में सक्षम न्यायालय द्वारा दंडित कर दिये जाने के19 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 फलस्वरूप क्यों नहीं उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाय। श्री सिन्हा के पत्रांक-शून्य दिनांक-23.09.2021 के द्वारा कारण-पृच्छा उत्तर विभाग में समर्पित किया गया। श्री सिन्हा ने अपने कारण-पृच्छा उत्तर के तहत् मुख्य रूप से उक्त CBI कांड में पारित न्यायादेश के विरूद्ध झारखण्ड उच्च न्यायालय में Criminal Appeal दायर किये जाने का संदर्भ देते हुए "Appeal is continuation of trial" एवं Double Jeopardy की स्थिति उत्पन्न होने का तर्क दिया गया। 3. श्री सिन्हा द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री सिन्हा के द्वारा दायर Criminal Appeal में उन्हें मात्र औपबंधिक जमानत दी गयी, परन्तु माननीय CBI न्यायालय के द्वारा पारित दण्डादेश पर किसी प्रकार से Stay नहीं लगाया गया। साथ ही कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प पत्रांक-7820 दिनांक-28.10.2003 में निहित संशोधित प्रावधान के आलोक में भी श्री सिन्हा के उक्त तर्क को युक्तिसंगत नहीं पाया गया। 4. श्री सिन्हा के द्वारा Double Jeopardy का तर्क दिये जाने का प्रश्न है तो इस बिन्दु पर पूर्व में ही विद्वान महाधिवक्ता से दो-दो बार परामर्श प्राप्त किया गया है, जिसके तहत् मुख्यतः परामर्श दिया गया कि- "By conviction of a Government Servant by the competent Criminal Court makes him a tainted person not worth occupying a Civil post in the Government as such by operation of law he is not suitable to hold the Civil post as he was holding on the ground of conviction. Therefore by operation of law he should be dismissed without any proceeding by mere asking of show cause so that principle of natural Justice is complied and no full fledged departmental proceeding is required for the action. As such in conclusion, I opined that the question of "double jeopardy" is not involved in this case and action of dismissal is automatic by the operation of law and only a show cause is to be asked so the facts are not denied. 5. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में प्रश्नगत मामले में सम्यक विचारोपरांत श्री सिन्हा के विरूद्ध उक्त CBI कांड में भा॰द॰वि॰ एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषी सिद्ध होने के उपरांत श्री सिन्हा सम्प्रति एक सजायाफ्ता सरकारी सेवक हो जाते हैं। इस संबंध में कार्मिक वं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प पत्रांक-7820 दिनांक-28.10.2003 में निरूपित प्रावधान एवं प्राप्त विधिक परामर्श के आलोक में श्री सिन्हा का Double Jeopardy के बिन्दु पर दिया गया तर्क युक्तिसंगत नहीं पाया गया। अतएव श्री सिन्हा के द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध दर्ज CBI कांड संख्या-RC-16(A)/2009 (R) में माननीय विशेष न्यायाधीश, राँची के द्वारा दिनांक-29.03.2019 को पारित आदेश के आलोक में IPC के विभिन्न धाराओं तथा भ्र॰नि॰अ॰-1988 के सुसंगत धाराओं के तहत् दोषी पाये जाने के फलस्वरूप श्री सिन्हा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14 (xi) के तह्त सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त किया गया। 6. सरकार का उक्त निर्णय वृहद दंड की श्रेणी में होने की स्थिति में एतद् संबंधी अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-3981 (एस) अनु० दिनांक-29.07.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अपने पत्रांक-2738 दिनांक- 22.10.2022 द्वारा श्री सिन्हा को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया। 7. तद्ालोक में श्री सुनील कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, सिमडेगा, सम्प्रतिः सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर, पथ प्रमंडल, हाजीपुर के विरूद्ध दर्ज CBI कांड संख्या-RC- 16(A)/2009 (R) में माननीय विशेष न्यायाधीश, सी०बी०आई०, राँची के द्वारा दिनांक-29.03.2019 को पारित आदेश के आलोक में IPC के विभिन्न धाराओं तथा भ्र॰नि॰अ॰-1988 के सुसंगत धाराओं के तहत् दोषी पाये जाने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के अनुसार इन्हें सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त की गयी। उक्त स्वीकृति के आलोक में श्री सुनील कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, सिमडेगा, सम्प्रतिः सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर, पथ प्रमंडल, हाजीपुर के विरूद्ध दर्ज CBI कांड संख्या-RC-16(A)/2009 (R) में सक्षम न्यायालय द्वारा दोषी सिद्ध कर दिये जाने एवं सश्रम कारावास तथा अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14 (xi) के तह्त निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- (i) ''तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त''।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।20 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 6 फरवरी 2023 सं0 निग/सारा-1 (पथ)आरोप-09/2019-612 (S)--श्री नागेन्द्र भगत, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह- निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा जिला शहरी विकास अभिकरण, भागलपुर के पदस्थापन काल में बरती गयी गंभीर अनियमितताओं के लिये नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार के पत्रांक-203 दिनांक-21.01.2019 द्वारा आरोप-पत्र उपलब्ध कराते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गयी। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक- 1331 (एस) अनु॰ दिनांक- 05.02.2019 के द्वारा श्री भगत से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। इस संबंध में श्री भगत के पत्रांक- शून्य दिनांक- 23.02.2019 के माध्यम से स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया।
2. श्री भगत द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को समीक्षोपरान्त असंतोषजनक पाये जाने की स्थिति में सम्यक विचारोपरांत आरोप पत्र गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5950 (एस) दिनांक-28.06.2019 के द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत् विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन निम्न आरोपों हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
(i) नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक- 203 दिनांक- 21.01.2019 के माध्यम से प्राप्त महालेखकार (लेखा परीक्षा), बिहार के अर्द्ध॰स॰ पत्र सं॰- नि॰ले॰प॰/ एस॰ए॰आर॰/2017-18/17 दिनांक- 23.04.2018 द्वारा राज्य के तीन जिलों यथा भागलपुर, बांका एवं सहरसा अन्तर्गत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में किये गये Test-Check के उपरांत इससे संबंधित विभिन्न बैंक खातों से विभिन्न वर्षों में धोखाधड़ी कर राशि की निकासी कर सृजन के खाते में स्थानान्तरित/जमा करने के बिन्दु Irregularities in Financial Management Involving SRIJAN पर दिनांक- 23.04.2018 का निरीक्षण प्रतिवेदन पर आवश्यक कंडिकावार टिप्पणियों/अभियुक्तियों और स्पष्टीकरण से अवगत कराने के साथ-साथ विभाग से संबंधित जिला कार्यालय के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी द्वारा वित्तीय नियमों का उल्लंघन किये जाने एवं वित्तीय सम्व्यवहार पर आंतरिक नियंत्रण नहीं रखे जाने का मामला महालेखाकार (ले॰प॰) द्वारा प्रतिवेदित किया गया है।
(ii) महालेखाकार (ले॰ एवं प॰), बिहार, पटना से प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन के आलोक में Irregularities in Financial Management Involving SRIJAN से संबंधित आपत्ति की कंडिका- 3.1 के अनुसार सृजन के खाते में राशि ट्रान्सफर करने के लिए श्री नागेन्द्र भगत, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, डूडा, भागलपुर को दोषी माना गया है।
(iii) महालेखाकार (ले॰ एवं प॰), बिहार, पटना से प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन में आपत्ति की कंडिका- 3.1 के अनुसार श्री नागेन्द्र भगत द्वारा बिना विभागीय अनुमति के रू॰ 6,00,00,000/- (छः करोड़ रूपये) का अन्तर बैंकिंग स्थानांतरण किया गया, जिसके फलस्वरूप यह राशि सृजन के खाते में स्थानांतरित हुआ। उक्त कृत्य किसी व्यक्तिगत लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया कार्य है, जिसके लिए श्री भगत दोषी है।
(iv) उपर्युक्त कंडिका-3 से स्पष्ट है कि श्री भगत के द्वारा नियमों का अवहेलना करते हुए जानबुझकर किसी व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से सरकारी राशि का विचलन किया गया है। श्री भगत का यह कृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1)(i)(ii)(iii) का उल्लंघन है।
3. श्री भगत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-12515 दिनांक- 09.09.2020 के द्वारा एतद्संबंधी जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। इसी क्रम में श्री भगत के दिनांक 30.11.2020 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक-278 (एस) दिनांक-14.01.2021 द्वारा इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत् सम्परिवर्तित किया गया।
4. संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित उपर्युक्त जाँच प्रतिवेदन में श्री भगत के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षा के क्रम में उक्त जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित मंतव्य से सक्षम प्राधिकार द्वारा सहमति व्यक्त की गयी तथा विभागीय पत्रांक-2504 (एस) अनु॰ दिनांक-07.06.2022 के द्वारा श्री भगत से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। 5. श्री भगत के आवेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-18.07.2022 के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप में यह स्थापित किया गया कि वे कार्यपालक अभियंता, मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी प्राधिकृत नहीं थे और न ही जिला शहरी विकास अभिकरण भागलपुर के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में प्राधिकृत थे। इसलिए आलोच्य मामले में वे निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नहीं थे। साथ ही श्री भगत के द्वारा अंकित किया गया कि वित्त विभाग के पत्रांक-56, दिनांक 07.01.2016 के निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा बैंक ऑफ महाराष्ट, भागलपुर में पूर्व संधारित खाता में से चेक द्वारा छः करोड़ रुपये की राशि कार्यपालक अभियंता, जिला शहरी विकास अभिकरण, भागलपुर के पदनाम से बैंक ऑफ बड़ौदा, भागलपुर में खाता खोला गया। 6. श्री भगत के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि उनके द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के तहत मुख्य रूप से उन्हीं तथ्यों/तर्को का उल्लेख किया है जैसा कि उनके द्वारा विभागीय संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित बचाव-बयान में अंकित किया था, जिसका जाँच आयुक्त के द्वारा तार्किक रूप से खण्डन करते हुए गठित आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया, जिसकी विभागीय समीक्षा के उपरांत सहमत होते हुए श्री भगत से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी। अतएव श्री भगत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की21 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 विभागीय समीक्षा में कोई नया, ठोस एवं खण्डन युक्त तथ्य/साक्ष्य नहीं पाये जाने के कारण अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए सम्यक विचारोपरांत बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत इनके पेंशन से 10% की कटौती अगले 05 वर्षों के लिये करने संबंधी दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्णित दंड पर विभागीय पत्रांक-5625 (एस) दिनांक-14.11.2022 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। 7. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3767 दिनांक-27.12.2022 के द्वारा श्री भगत के विरूद्ध उक्त वर्णित दंड पर सहमति व्यक्त किया गया। तद्ालोक में श्री नागेन्द्र भगत, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरुद्ध बिहार पेंशन नियामवली के नियम 43 (बी) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- ''पेंशन से 10% की कटौती 05 (पाँच) वर्षो तक''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट,हसंयुक्त सचिव।
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6 फरवरी 2023
सं0 निग/सारा-4(पथ)-60/03-616 (S)--श्री नवल किशोर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत, उत्तरी श्री कृष्णापुरी, तिलक मार्ग, 6 बी/7, बोरिंग रोड, पटना-13 के विरूद्ध पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर निविदा करने की अनुमति, एक पथ के लिए एक प्राक्कलन तथा निविदा के प्रावधान के विपरीत खंडों में स्वीकृति देने, निविदा अभिलेखों के Proper Security के बिना निविदा स्वीकृति के आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 9566 (एस) अनु॰ दिनांक-12.08.2006 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-11 दिनांक-12.01.2010 में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित 05 आरोपों में से किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त उससे असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं को चिन्हित कर विभागीय पत्रांक- 2462 (एस) दिनांक-19.02.2010 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रसाद ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-576 दिनांक-02.03.2010 में मूल रूप में अंकित किया कि कार्यपालक अभियंता के अनुरोध पर उनके द्वारा स्थानीय प्रचार-प्रसार से निविदा आमंत्रित करने की अनुमति दी गयी। 2. श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय स्तर पर निविदा के प्रचार-प्रसार से निश्चय ही प्रतिस्पर्धा में कमी हुयी। अगर अल्पकालीन निविदा समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाती तो प्रतिस्पर्धा होती और योजना की लागत कम हो सकती थी, साथ हीं खंड-खंड में योजनाओं की स्वीकृति भी नियमानुसार सही नहीं है। इस प्रकार श्री प्रसाद को अपने अधिकार का दुरूपयोग कर सरकारी वित्तीय क्षति पहुँचाने एवं नियमों का पालन नहीं करने के कदाचार के प्रमाणित आरोपों के लिए इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती 02 वर्षों के लिए करने के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2464 (एस) अनु॰ दिनांक-21.03.2013 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी।
3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1829 दिनांक-25.11.2013 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा असहमति व्यक्त की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में पुनः समीक्षोपरान्त यह स्थापित पाया गया कि स्थानीय स्तर पर निविदा के प्रचार-प्रसार के विपरीत समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशन से प्रतिस्पर्धा होती तथा योजना की लागत भी कम हो सकती थी तथा नियम के विपरीत खंड-खंड में योजनाओं की स्वीकृति भी श्री प्रसाद के कदाचार का परिचायक है। इस तरह श्री प्रसाद सरकार को हुई वित्तीय क्षति एवं गंभीर कदाचार के लिए स्पष्टतः दोषी हैं। इस दृष्टिकोण से विभाग द्वारा प्रस्तावित दंड युक्ति-युक्त एवं समानुपातिक पाते हुए एवं आयोग की सलाह को बाध्यकारी नहीं मानते हुए श्री नवल किशोर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत, उत्तरी श्री कृष्णापुरी, तिलक मार्ग, 6 बी/7, बोरिंग रोड, पटना-13 के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-136 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-137 (एस) दिनांक-06.01.2014 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया- ''(क) इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती अगले 2 वर्ष के लिए की जाय।'' 4. उक्त के विरूद्ध श्री प्रसाद के द्वारा CWJC No.- 4175/2014 नवल किशोर प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-02.08.2017 को पारित न्यायादेश के द्वारा विभागीय दंडादेश को Set Aside कर दिया गया, जिसका कार्यशील अंश निम्नवत् हैः- "Having considered the submission of the parties, the point arose for consideration as to whether the disciplinary authority illegally come to a finding without considering the facts stated in the reply of the petitioner to second show cause notice with regard to point of difference. From the notification No. 138(s) (Annexure-8), it appears that the disciplinary authority simply stated in his order that after considering the reply of petitioner of second show cause notice it transpired that issuance of tender in local daily22 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 newspaper lessen the competition among the tenderers and caused loss to the Government but it appears that petitioner filed detailed reply of second show cause notice and there is no materials on record to show that there was no emergent situation. The Executive Engineer made requested for preparing the roads during the rainy season and on such the petitioner gave approval on the request of the Executive Engineer. During the course of enquiry no evidence was brought on record to show that no such emergent situation was existed and the Executive Engineer sent the letter for doing emergent work. Therefore, I find that non consideration of the reply of the petitioner to second show cause by the disciplinary authority is violative of principles of natural justice and the order suffers from illegality. Accordingly, the impugned order dated 06.01.2014, as contained in memo no. 136(s) (Annexure-8), is set aside and the writ petition is allowed." 5. उक्त न्यायादेश दिनांक- 02.08.2017 के विरूद्ध विभाग द्वारा मा0 उच्च न्यायालय, पटना में LPA No.- 322/2018 बिहार राज्य एवं अन्य बनाम नवल किशोर प्रसाद दायर किया गया। उक्त वाद को दिनांक- 29.08.2022 को पारित न्यायादेश के द्वारा खारिज कर दिया गया है, जिसका कार्यशील अंश निम्नवत् हैः- "From the finding of the Inquiry Officer, it is clear that the Superintending Engineer has taken decision completely in the light of the power so vested in him by virtue of Letter No. 462 dated 30.03.1982 in special circumstances. Upon perusal of the records and the documents annexed in the L.P.A., we are of the view that it need no interference in the order passed by the learned Single Judge. In the light of the reasons assigned above, the present L.P.A. is dismissed without costs. The appellants are directed to calculate the entire arrears of the respondent in compliance of the order passed by the learned Single Judge and assure payment within 90 days from the date of passing of this order."
अतएव माननीय उच्च न्यायालय द्वारा LPA No.- 322/2018 बिहार राज्य एवं अन्य बनाम नवल किशोर प्रसाद में पारित न्यायादेश दिनांक-29.08.2022 के द्वारा खारिज किये जाने के आलोक में सम्यक विचारोपरांत CWJC No.- 4175/2014 में पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना संख्या-136(एस)-सह-पठित ज्ञापांक-137(एस) दिनांक-06.01.2014 को निरस्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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16 फरवरी 2023
सं0 निग/सारा-उ0बि0 (रा0उ0प0)-106/2013-815 (S)--श्री राम प्रवेश सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति ः सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-102 के छपरा-रेवाघाट पथ में कराये गये कार्यों की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 से करायी गयी। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 द्वारा प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन क्रमशः पत्रांक-130 अनु0 दिनांक-04.10.13 एवं पत्रांक-145 अनु0 दिनांक-22.10.13 द्वारा समर्पित किया गया। 2. आलोच्य पथ के कार्य से संबंधित प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षेापरांत निम्न त्रुटियाँ पायी गयी :-
(i) पथ के कि0मी0 19 में कराये गये SDBC कार्य का औसत FDD 2.0gm/cc पाया गया, जबकि प्रावधान 2.30gm/cc का है।
(ii) पथ के कि0मी0 29 में कराये गये SDBC कार्य का औसत FDD 1.98gm/cc
पाया गया, जबकि प्रावधान 2.30gm/cc का है अर्थात SDBC कार्य का औसत FDD प्रावधान से कम पाया गया है।
(iii) पथ के कि0मी0 29 में कराये गये SDBC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.43 प्रतिशत पायी गयी, जबकि एकरारनामा के अनुसार प्रावधान न्यूनतम 4.50 प्रतिशत का है।
3. उपरोक्त पायी गयी अनियमितताओं/त्रुटियों के लिए श्री सिंह के विरूद्ध आरोप प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-9981 (एस) अनु0 दिनांक-30.12.13 से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह से किये गये स्पष्टीकरण के आलोक में इनके द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर पत्रांक-01 दिनांक-15.01.14 से समर्पित किया गया। श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण के बिन्दु (i) एवं (ii) के संदर्भ में समर्पित प्रत्युत्तर में निम्न तथ्यों को रखा गया :-
23 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023हॉट मिक्स प्लांट से बिटुमिनस मिक्स गिरने के बाद एवं टीपर से कार्य स्थल पर बिटुमिनस मिक्स ले जाकर गिराने एवं पेभर से समुचित मोटाई में बिछाने के बाद पथ बेलन (रोड रोलर) से इसकी समुचित चपाई IRC द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप समुचित चपाई पथ बेलन से की गयी थी। पथ बेलन से SDBC की चपाई तब तक चालू रखी गयी थी, जब तक पथ बेलन के चक्के का निशान SDBC के परत पर पड़ना पूर्णतः बंद नहीं हो गया था। त्रुटि संख्या-(i) एवं (ii) में अंकित अपेक्षित FDD की कोई प्रावैधिक प्रासंगिकता, आलोच्य कार्य के compaction के संदर्भ में नहीं है, क्योंकि SDBC परत की समुचित चपाई पथ बेलन से उपर्युक्त निर्धारित विधि से करायी गयी थी। त्रुटि संख्या-(iii) के संदर्भ में अंकित किया गया है कि SDBC परत का निर्माण अप्रैल, 2013 में हुआ था तथा SDBC परत के निर्माणोपरांत इस पर भारी वाहनों के यातायात चालू होने के कई महीने के बाद एवं एक बरसातझेलने के उपरांत Bitumen Content Test के लिए नमूने भेजे गये, जो प्रावधान के विपरित है। TRI जाँचफल की तुलनात्मक व्याख्या के अवलोकन से स्पष्ट है कि अलकतरा का प्रतिशत जो BM में होना चाहिए वह SDBC में तथा SDBC का अलकतरा उसी बिन्दु पर BM में प्रदर्शित हो रहा है। इससे प्रतीत होता है कि नमूने के कुछ मेटेरियल आंशिक रूप से मिश्रित हो गये हैं, जिसके कारण BM में अलकतरा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पायी गयी एवं उसी प्रकार SDBC में अलकतरा की मात्रा अपेक्षाकृत कम पायी गयी है। 4. आरोप संख्या-(iii) के संबंध में श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के तहत अंकित तथ्यों/तर्कों की तकनीकी रूप से विश्लेषण करते हुए स्वीकार योग्य पाया गया। परन्तु आरेाप संख्या-(i) एवं (ii) के संबंध में SDBC कार्य का औसत FDD प्रावधान से कम पाये जाने के बिन्दु पर श्री सिंह के द्वारा कोई ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप श्री सिंह के समर्पित स्पष्टीकरण को तकनीकी रूप से स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। उपर्युक्त वर्णित परिप्रेक्ष्य में मामले की सम्यक् रूप से समीक्षा के उपरांत श्री राम प्रवेश सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता, से प्राप्त स्पष्टीकरण उत्तर के बिन्दु (i) एवं (ii) को अस्वीकृत करते हुए अंकित त्रुटियों का दोषी पाते हुए इनके विरूद्ध सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या- 342 (एस) दिनांक-09.01.2019 द्वारा "एक (01) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक " का दंड संसूचित किया गया । 5. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिंह के पत्रांक-02 अनु० दिनांक-01.07.2021 के द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसके द्वारा सूचित किया गया कि विभागीय अधिसूचना संख्या-342(एस) दिनांक-09.01.2019 द्वारा उनके विरूद्ध "एक (01) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक "के संसूचित लघु दण्ड का प्रभाव उनके दिनांक-31.08.2019 को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण संचयात्मक प्रकृत्ति का हो जा रहा है। उक्त संदर्भ में संसूचित दण्ड से विमुक्त/परिवर्त्तन करने का अनुरोध किया है। 6. उल्लेखनीय है कि एक अन्य समरूप मामले में जहॉ संसूचित लघु दण्ड का कुप्रभाव सरकारी सेवक के सेवांत लाभ पर पड़ता है, के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग का परामर्श प्राप्त किया गया, जिसके तहत सरकारी सेवक के विरूद्ध संसूचित मूल दण्डादेश को निर्गत की तिथि से दण्ड पुनरीक्षित किये जाने का परामर्श दिया गया। 7. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में सम्यक विचारोपरान्त श्री राम प्रवेश सिंह तत्कालीन सहायक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध पूर्व में निर्गत "एक (01) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" के लघु दण्ड का प्रभाव उनके दिनांक-31.08.2019 को सेवानिवृत्त की तिथि होने के कारण वृहद दण्ड के रूप में परिणत हो जाने की स्थिति में सामान्य प्रशासन विभाग से एक अन्य समरूप मामले में प्राप्त परामर्श के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध पूर्व में संसूचित दण्डादेश को पुनरीक्षित करते हुए "आरोप वर्ष 2013-14 के लिए निन्दन की सजा" का दण्ड संसूचित किया जाता है। 8. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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16 फरवरी 2023
सं0 प्र॰2/स्था॰-विविध (असैनिक)-12-02/2023-844 (S)-- 1. श्री रामकृष्ण प्रसाद, सहायक अभियंता (अवकाश रक्षित), अभियंता प्रमुख का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त अवर सचिव (प्र॰को॰), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के कार्यों का निष्पादन हेतु अगले आदेश तक के लिए प्राधिकृत किया जाता है। सं0 प्र॰2/स्था॰-विविध (असैनिक)-12-02/2023-845 (S)--2. सुश्री संजना सिंह, सहायक अभियंता (योजना-3) मुख्य अभियंता (बजट एवं योजना) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को कार्यहित में सहायक अभियंता (उत्तर)-4, मुख्य अभियंता, उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में कार्याें के निष्पादन हेतु अगले आदेश तक के लिए प्रतिनियुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप सचिव (प्र0को0)।24 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 7 दिसम्बर 2022 सं0 निग/सारा-(एन॰एच॰)-आरोप-07/2018-5959 (S)--श्री अहमद हुसैन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना सम्प्रतिः कार्यपालक अभियंता, योजना एवं विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार अधीक्षण अभियंता, योजना एवं विकास विभाग) के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-103, राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-19 एवं राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 के विभिन्न कि॰मी॰ में कराये जा रहे कार्यो में शिथिलता बरतने, निर्माण कार्य में अत्यंत धीमी प्रगति होने तथा उत्तरोत्तर प्रगति में कोई सुधार परिलक्षित नही होने के लिए प्रपत्र-''क'' के तहत कुल चार (04) आरोप निम्नवत गठित किया गया :- (i) एन॰एच॰-103 के 12 वें कि॰मी॰ स्थित ROB में आपके द्वारा LOA दिनांक-10.03.2017 को ही निर्गत कर दिया गया है, लेकिन श्री हुसैन के द्वारा भू-अर्जन के कार्य में शिथिलता के कारण संवेदक को Appointed date नहीं दिया जा सका है। (ii) इसी प्रकार, एन॰एच॰-19 के 132 वें कि॰मी॰ स्थित ROB में श्री हुसैन के द्वारा LOA दिनांक-10.03.2017 को ही निर्गत कर दिया गया है, परन्तु भू-अर्जन के कार्य में शिथिलता के कारण संवेदक को Appointed date नहीं दिया जा सका है। (iii) एन॰एच॰-19 के 135 वें कि॰मी॰ स्थित ROB में श्री हुसैन के द्वारा LOA दिनांक-12.04.2017 को ही निर्गत कर दिया गया है, परन्तु भू-अर्जन संबंधी कार्य में शिथिलता के कारण संवेदक को Appointed date नहीं दिया जा सका है।
(iv) एन॰एच॰-30 के 119 वे कि॰मी॰ स्थित ROB में श्री हुसैन के द्वारा दिनांक 31.08.2017 को कार्यादेश दिया गया है, परन्तु Forest clearance लंबित रहने के कारण कार्य की प्रगति काफी धीमी है। वर्णित कार्यो के संबंध में प्रत्येक मासिक समीक्षात्मक बैठक में निरंतर सुधार करने का निदेश दिया जाता रहा है, परन्तु उत्तरोत्तर प्रगति में कोई सुधार परिलक्षित नहीं हो रहा है, जिसके लिए श्री हुसैन उत्तरदायी हैं। 2. उपरोक्त पायी गयी अनियमितताओं/त्रुटियों के लिए श्री हुसैन के विरूद्ध प्रपत्र-'क' के तहत आरोप गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-3413 (एस) अनु0 दिनांक-09.05.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा पत्रांक-350 (अनु॰) दिनांक 31.01.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही का संचालन प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया । उक्त आरोपो के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप संख्या- 01, 02 एवं 03, जो सदृश्य प्रकृति के हैं, के संबंध में लगभग समरूप विश्लेषण करते हुए श्री हुसैन का कार्यकाल दिनांक-18.07.2017 से दिनांक-25.06.2018 तक लगभग 11 महीनों के होने का संदर्भ दिया गया एवं प्रासंगिक LOA निर्गत होने के उपरांत श्री हुसैन द्वारा भू-अर्जन के क्रम में तिथिवार की गई कार्रवाई का भी संदर्भ दिया गया। साथ ही संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य/निष्कर्ष के तहत अंकित किया गया है कि भू-अर्जन एवं Forest Clearance के मामले में आरोपित पदाधिकारी की भूमिका अधियाची पदाधिकारी के रूप में है। भू-अर्जन एवं Forest Clearance के मामले की प्रक्रिया को समय पर निष्पादित एवं पूर्ण करने में कई अन्य विभाग एवं पदाधिकारी जुड़े रहते हैं। इन मामलों के क्रियान्वयन की सफलता इन विभागों/पदाधिकारियों पर ज्यादा निर्भर करती है। भू-अर्जन कार्य में विलंब का मुख्य कारण (i) प्रक्रियात्मक विलंब एवं (ii) भू-अर्जन की चालू प्रक्रिया के बीच में इससे संबंधित सभी प्रक्रिया Off line mode से On line mode में होने के कारण एवं नई व्यवस्था के भू-अर्जन के चालू प्रक्रिया के बीच में ही introduce होने के कारण भू-अर्जन कार्य में विलंब हुआ है। इसके अतिरिक्त, Forest Clearance लंबित रहने संबंधी आरोप संख्या-04 के बिन्दु पर अंकित किया गया है कि प्रश्नगत कार्य में Stage-I clearance प्राप्त करने में लगभग 05 महीने का समय लगा है, जो प्रक्रियात्मक विलंब के कारण ही है। इस प्रकार, संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित होने का अभिमत गठित किया गया। 3. तद्ालोक में प्रश्नगत संचालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोंपरांत पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित संचालन प्रतिवेदन में तकनीकी आधार पर श्री हुसैन को दोष मुक्त किया गया है। यह सत्य है कि श्री हुसैन द्वारा प्रभावी समन्वय नही किया गया जिसके फलस्वरूप एन॰एच॰-103, एन॰एच॰-19 एवं एन॰एच॰-30 के विभिन्न कि॰मी॰ में बनाये जाने वाली ROBs का कार्य समय पर आरंभ नहीं हो सका। श्री हुसैन द्वारा जिला भू-अर्जन कार्यालय से समन्वय करना चाहिए था ताकि समय पर भू-अर्जन हो जाता। श्री हुसैन को बार-बार बैठकों में निदेश दिया जाता रहा किन्तु श्री हुसैन ने ध्यान नहीं दिया, फलस्वरूप योजनाओं में समय पर कार्य आरंभ नहीं हुआ। श्री हुसैन द्वारा दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने संबंधी तथ्य प्रमाणित है क्योंकि तीनों परियोजनाओं में कार्यादेश निर्गत होने के 09 महीने बाद तक भी भू-अर्जन नहीं हो सका और Appointed date नहीं दिया जा सका । 4. उक्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोंपरांत जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से उत्पन्न असहमति के बिन्दुओं के संदर्भ में सक्षम प्राधिकार के आदेश के आलोक में असहमति के बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए विभागीय पत्रांक-5981 (एस) अनु॰, दिनांक 01.07.2019 द्वारा श्री हुसैन से द्वितीय कारण-पृृच्छा की गयी। श्री हुसैन के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य (कैम्प), दिनांक-13.08.2019 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर मुख्य रूप से स्पष्टीकरण/बचाव बयान के साथ संलग्न किये गये अभिलेखों/कागजातों पर ही आधारित है एवं संचालन पदाधिकारी के25 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 द्वारा अंकित किये गये मंतव्य/निष्कर्ष को ही अपने बचाव का मुख्य आधार बनाया गया है। श्री हुसैन के द्वारा असहमति के बिन्दूओं के संदर्भ में कोई ठोस तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया बल्कि उनकी पदस्थापन काल में इन तीन महत्वपूर्ण ROB का निर्माण कार्य लंबित रहा। फलस्वरूप कार्य प्रगति बाधित हुई। 5. तद््ालोक में द्वितीय कारण-पृृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों का दोषी पाते हुए श्री हुसैन के विरूद्ध संचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि अवरूद्ध किये जाने संबंधी वृृहद दंड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्णित वृृहद दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-9984 (एस) दिनांक 19.11.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के द्वारा पत्रांक 3003 दिनांक 14.02.2020 द्वारा निर्णित वृृहद दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी। तदालोक में सम्यक विचारोपरांत श्री अहमद हुसैन के विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-2047(एस) सहपठित ज्ञापांक-2048(एस) दिनांक-13.03.2022 द्वारा '' संचयात्मक प्रभाव से 02 (दो) वार्षिक वेतन वृद्धियों पर रोक का दण्ड'' का दण्ड संसूचित किया गया। 6. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री हुसैन के पत्रांक-शून्य(कैम्प), दिनांक 20.12.2021 के द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री हुसैन के द्वारा मुख्य रूप से संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन में दिये गये निष्कर्ष/मंतव्य का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया है।
7. श्री हुसैन द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि इनके द्वारा गठित आरोपों के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य अथवा खण्डनयुक्त तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया। इनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में मात्र मुख्य रूप से संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन में दिये गये निष्कर्ष/मंतव्य का उल्लेख किया गया है। उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री हुसैन के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन संतोषजनक नहीं पाये जाने के कारण इसे अस्वीकृत किया जाता है। 8. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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15 दिसम्बर 2022
सं0 निग/सारा-6 (था॰का॰)-104/10-6127 (S)--निगरानी अन्वेषण ब्यूरों के द्वारा पटना नगर निगम में व्याप्त अनियमितता की जाँच के क्रम में दर्ज किये गये निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : सेवानिवृृत्त को प्राथमिकी अभियुक्त बनाते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरों के प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-3057, दिनांक 16.04.2013 द्वारा श्री सिन्हा से कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा के पत्रांक- शून्य, दिनांक 30.04.2013 द्वारा उपलब्ध कराये गये कारण-पृच्छा उत्तर पर विभागीय पत्रांक-3413, दिनांक 30.04.2013 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-1210 दिनांक 14.05.2013 द्वारा प्राप्त मंतव्य के आलोक में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4396 (एस), दिनांक 20.06.2013 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध आरोप-पत्र गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4946 (एस) दिनांक 20.06.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री सिन्हा के विरूद्ध निम्न आरोप गठित किया गया है :- (i) ''प्रमंडल-एफ से संबंधित प्लान केस संख्या-पी/लोहानीपुर/पी॰सी॰एन॰-79/08 में स्वीकृत तल का बिना निर्माण हुए अतिरिक्त स्वीकृति, निर्मित दिखाकार दिये जाने की अनियमितता के मामले में प्रमंडल-डी के सहायक अभियंता के रूप में आपके द्वारा बिना समुचित आदेश/पृष्ठांकन के समीक्षा किया गया, जिसमें सामंजन में रू॰ 1,98,438/- और कम्पाउण्डिंग रू॰ 16,624.35 की काल्पनिक गणना की गयी। इस काल्पनिक गणना में पाँच गुणा अर्थ दण्ड रू॰ 10,65,312 को शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण नगर निगम को न्यूनतम रू॰ 10,65,312/- की आर्थिक क्षति पहुँचायी गयी, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।'' 2 संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-333 अनु॰, दिनांक 31.07.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनके विरूद्ध गठित एक मात्र आरोप को अप्रमाणित होने का अधिगम दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के रेखांकित बिन्दुओं पर श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक-11288 (एस) दिनांक 08.12.2017 द्वारा लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी, जिसके आलोक में इनके पत्रांक-शून्य, दिनांक 26.03.2018 द्वारा विभाग में द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री सिन्हा के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से निम्न तथ्य अंकित किये गयेः-
(i) असहमति का बिन्दु-(i) जो विषयांकित प्लान केस संख्या-पी॰/लोहानीपुर/पी॰सी॰एन॰-09/08 के प्रमंडल ''एफ'' से संबंधित होने के बावजूद श्री सिन्हा द्वारा बिना कोई आदेश के प्रमंडल ''डी'' के सहायक अभियंता के रूप में कार्य सम्पन्न करते हुए प्रमंडल ''एफ'' के कार्यपालक अभियंता के बजाय प्रमंडल ''बी0'' के कार्यपालक अभियंता को अपनी अनुशंसा अग्रसारित किये जाने के संबंध में श्री सिन्हा के अपने26 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में CCA नियमावली के नियम 17(3), (4) एवं (14) का अनुपालन नहीं किये जाने का संदर्भ देते हुए मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि असहमति का ये बिन्दु Vague, अस्पष्ट एवं अनिश्चित है। कार्यपालक अभियंता के द्वारा दूसरे प्रमंडल के कार्य सौंपे जाने की स्थिति में उसकी समीक्षा करते हुए सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त की गयी। अतः यह माना जायेगा कि उच्चाधिकारी के आदेशानुसार उन्होंने कार्रवाई की। साथ-हीं जब पाँच गुणा अर्थदण्ड नहीं लगाने के कारण न तो कोई अनियमितता हुयी और न ही निगम को कोई क्षति हुयी। इस दृष्टि से भी मिलीभगत कर अनियमितता करने का यह आरोप अप्रासंगिक एवं अर्थहीन हो जाता है।
(ii) असहमति का बिन्दु- (ii) जो पुनरीक्षण की कार्रवाई किये जाने के क्रम में कनीय अभियंता/अमीन का मापी प्रतिवेदन नहीं लिये जाने, स्ट्रक्चरल अभियंता का प्रमाण पत्र नहीं लिये जाने, अग्निशमन का अद्यतन प्रमाण पत्र नहीं लिये जाने सहित अपार्टमेंट एक्ट-6 का उल्लंघन किये जाने से संबंधित है- के बिन्दु पर श्री सिन्हा के द्वारा मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि मूल रूप से गठित आरोप पत्र में इसका उल्लेख नहीं होने के कारण ही संचालन पदाधिकारी के द्वारा इस पर विचार नहीं किया गया। इस संबंध में श्री सिन्हा द्वारा Narinder Mohan Arya Vrs. United India Insurance Co. Ltd. में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पारित आदेश यथा- the enquiry officer is not permitted to travel beyond the charge and any punishment imposed on the basis of a finding which was not the subject matter of the charges is wholly illegal का संदर्भ देते हुए अंकित किया गया है कि जो तथ्य आरोप में समावेशित नहीं है उन पर विचार कर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य व्यक्त किया जाना पूर्णतः अवैध है। फलतः विभाग द्वारा कोई अभिमत गठित कर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
(iii) असहमति का बिन्दु-(iii) जो प्रश्नगत केस प्लान को निगरानीवाद के अंतर्गत नहीं होने के कारण कम्पाउण्डिंग फी के रूप में पाँच गुणा अर्थ दण्ड नहीं लगाये जाने से संबंधित है- के बिन्दु पर श्री सिन्हा के द्वारा मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि मूल नक्शा की स्वीकृति 25.08.2008 को हुयी थी, दिनांक- 27.04.2008 को प्रस्तुत पुनरीक्षण समीक्षा प्रतिवेदन में Compounding अर्थदण्ड की गणना का प्रश्न नहीं उठता है। जब स्वीकृत नक्शे से भवन निर्माण में विचलन होता है तभी Condonation एवं Compounding शुल्क लागू होता है। इसलिए निगरानीवाद नहीं होने के कारण पाँच गुणा अर्थदण्ड की अतिरिक्त गणना नहीं की गयी थी। इस संबंध में श्री सिन्हा के द्वारा CWJC No.- 5393/2008 में दिनांक- 11.10.2012 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का भी संदर्भ दिया गया है। (iv) असहमति का बिन्दु-(iv) जो स्वीकृत तल के वास्तविक निर्माण नहीं होने की स्थिति को नजरअंदाज करते हुए बिना स्थल जाँच कराये ही उसे अनियमित रूप से अतिरिक्त निर्मित दिखाकर पुनरीक्षित नक्शे की स्वीकृति की अनुशंसा किये जाने एवं तदनुसार काल्पनिक गणना किये जाने से संबंधित है- के बिन्दु पर श्री सिन्हा के द्वारा मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि भवन उपविधि के अनुसार स्वीकृत नक्शे को कभी भी पुनरीक्षण हेतु भवन निर्माता प्रस्तुत कर सकता है, जिसे जाँच कर Revised नक्शे की स्वीकृति हेतु अधीनस्थों की अनुशंसा के आधार पर समीक्षोपरान्त आवश्यक शुल्क की गणना के साथ प्रस्तुत किया गया था, जिसकी स्वीकृति सक्षम प्राधिकार द्वारा दी गयी थी। सहायक अभियंता द्वारा मात्र अनुशंसा की जाती है, इसकी स्वीकृति नहीं दी जाती है।
3. जाँचाधीन मामला मूल रूप से नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्य पद्धति, उनके आंतरिक व्यवस्था से संबंधित होने केे दृष्टिपथ में रखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग से विभागीय पत्रांक-8534, दिनांक 08.11.2018 द्वारा श्री सिन्हा के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पर सुस्पष्ट एवं तथ्यात्मक मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-142, दिनांक 13.01.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा तथ्यात्मक मंतव्य उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री सिन्हा के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। 4. श्री सिन्हा के द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-
(i) असहमति के बिन्दु संख्या-(i) के संबंध में श्री सिन्हा के द्वारा यह कहा जा रहा है कि कार्यपालक अभियंता के द्वारा दूसरे प्रमंडल का कार्य किये जाने हेतु उन्हें सौंपा गया था, परन्तु उनके द्वारा इस संबंध में किसी प्रकार का कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। इस प्रकार श्री सिन्हा का उक्त कथन साक्ष्यगत नहीं पाये जाने की स्थिति में यह स्वीकार योग्य प्र्रतीत नहीं होता है। जहाँ तक श्री सिन्हा द्वारा किये गये कार्य पर सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त हो जाने के कारण दूसरे प्रमंडल को कार्य सौंपे जाने को अनुमोदित मानने का प्रश्न है तो इस संबंध में स्पष्ट करना है कि सक्षम प्राधिकार के रूप में स्वीकृति प्रदान करने वाले तत्कालीन नगर आयुक्त को भी प्रश्नगत मामले में आरोपित बनाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि निगम के अन्य कर्मियों एवं पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अनियमित रूप से कार्य27 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 किया गया, जो आरोप का मूल बिन्दु भी है। इस प्रकार असहमति का उक्त बिन्दु श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रमाणित पाया गया।
(ii) असहमति के बिन्दु संख्या-(ii) के संबंध में श्री सिन्हा के द्वारा कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि इससे इतर तथ्यों का उल्लेख कर मामले को विषयांतरित करने का प्रयास किया गया है, जबकि श्री सिन्हा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई अर्थात मामले की जाँच के समय ही विभागीय मंतव्य में उक्त सभी तथ्य पूर्व में ही अंकित किये गये थे और साक्ष्य के रूप में एतद्संबंधी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के जाँच प्रतिवेदन को भी संलग्न कर उपलब्ध कराया गया था। ऐसी स्थिति में उक्त बिन्दु पर संचालन पदाधिकारी के द्वारा अभिमत गठित किया जाना अपेक्षित प्रतीत होता है, जो नहीं किया गया और उत्पन्न असहमति के बिन्दु के उपरान्त श्री सिन्हा द्वारा भी कोई ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। इस प्रकार असहमति का उक्त बिन्दु भी प्रमाणित पाया गया। (iii) असहमति के बिन्दु संख्या-(iii) के संबंध में श्री सिन्हा के द्वारा अंकित किये गये कथन एवं तथ्य की समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि तत्कालीन नगर निगम आयुक्त के द्वारा एक संचिका में दिये गये स्पष्टीकरण (दिनांक- 27.11.2008) के आलोक में पूर्व में निर्गत कार्यालय आदेश संख्या- 96/07 दिनांक- 18.09.2007 में कोई संशोधन नहीं किया गया और कोई नया कार्यालय आदेश निर्गत नहीं किया गया और न हीं आरोपित पदाधिकारी ने अपनी अनुशंसा में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया। एक संचिका मात्र में स्पष्टीकरण कर देना पारदर्शी नहीं था, क्योंकि उससे सार्वजनिक रूप से पारदर्शी तरीके से सभी लोगों को यह जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी कि गैर-निगरानी वादों में पाँच गुणा अर्थदण्ड नहीं लेना है।
जहाँ तक श्री सिन्हा के द्वारा CWJC No.- 5393/2008 में दिनांक-11.10.2012 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का संदर्भ दिये जाने का प्रश्न है तो स्पष्ट है कि उक्त न्यायादेश पिछली तिथि से लागू नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में तत्समय पाँच गुणा अर्थ दण्ड नहीं लगाया जाना आरोपित पदाधिकारी की मंशा को स्वच्छ नहीं मानते हुए उनकी कर्तव्यहीनता माना जा सकता है, जिसके फलस्वरूप असहमति का उक्त बिन्दु भी प्रमाणित है।
(iv) असहमति के बिन्दु संख्या-(iv) के संबंध में श्री सिन्हा के द्वारा अंकित किये गये कथन एवं तथ्य की समीक्षा में पाया गया कि असहमति के उक्त बिन्दु पर उनके द्वारा कोई ठोस तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि इससे इतर तथ्यों को अंकित करते हुए मामले को विषयांतरित किया गया है। यदि यह मान भी लिया जाय कि आरोपी के द्वारा आवश्यक शुल्क की गणना की गयी है तो काल्पनिक आधार पर की गयी गणना को कैसे उचित ठहराया जा सकता है। अतएव असहमति का उक्त बिन्दु प्रमाणित है। 5. इसी बीच श्री सिन्हा के दिनांक 31.12.2017 को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक-799 (एस), दिनांक 29.01.2018 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 6. श्री अनिल कुमार सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में उनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि इससे इतर तथ्यों का उल्लेख कर मामले को विषयांतरित करने का प्रयास किया गया है। इस प्रकार श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाया गया है। साथ ही श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप से स्पष्ट होता है कि इनके इस कृत्य से पटना नगर निगम को कुल 10,65,312/-रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। तद्ालोक में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक- शून्य दिनांक 26.03.2018 को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : सेवानिवृृत्त कार्यपालक अभियंता को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत उनके पेंशन से 10% की कटौती 04 (चार) वर्षो तक किये जाने के दंड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्णित दंड पर विभागीय पत्रांक- 1843 (एस) अनु॰ दिनांक- 08.04.2022 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। 7. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2415 दिनांक-26.09.2022 के द्वारा श्री सिन्हा के विरूद्ध उक्त निर्णीत दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया। तद्ालोक में श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति ः सेवानिवृृत्त कार्यपालक अभियंता कोे उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावाली के नियम 43 (बी) के तहत् निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- ''पेंशन से 10% की कटौती 04 (चार) वर्षो तक'' 8. श्री सिन्हा के निलंबन अवधि दिनांक 04.06.2013 से 01.09.2017 के संबंध में अलग से नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।28 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 15 दिसम्बर 2022 सं0 निग/सारा-6 (था॰का॰)-104/10-6129 (S)--निगरानी अन्वेषण ब्यूरों के द्वारा पटना नगर निगम में व्याप्त अनियमितता की जाँच के क्रम में दर्ज किये गये निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री शैलेश मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति ः सेवानिवृृत्त को प्राथमिकी अभियुक्त बनाते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरों के प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-3056 दिनांक 16.04.2013 द्वारा श्री मिश्र से कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री मिश्र के पत्रांक-01,दिनांक 29.04.2013 द्वारा उपलब्ध कराये गये कारण-पृच्छा उत्तर पर विभागीय पत्रांक-3413, दिनांक 30.04.2013 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-1210 दिनांक 14.05.2013 द्वारा प्राप्त मंतव्य के आलोक में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4392 (एस), दिनांक 04.06.2013 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध आरोप-पत्र गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4949 (एस) दिनांक 20.06.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री मिश्र के विरूद्ध निम्न 05 (पाँच) आरोप गठित किया गया :- (i) आरोप संख्या-1
नगरपालिका अधिनियम-2007 के प्रभावी होने के उपरांत पटना नगर निगम के द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश संख्या-96/07, दिनांक-18.09.07 के आलोक में नक्शों में विचलन पर हुई गणना में सामंजन शूल्क और कम्पाउडिंग शूल्क पर पांच गुणा अर्थदंड के कुल शूल्क को भी सम्मिलित करना था, परन्तु प्लान केस संख्या-पी0/चांगर/पी0आर0एन0-4-35/05 एवं प्लान केस संख्या-पी0/लोहानीपुर/ पी0सी0एन0-5-82/05 में उक्त नियमों का अनुपालन नहीं करते हुए क्रमशः 349272 एवं 1033975 की आर्थिक क्षति नगर निगम को पहुंचाई गयी है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं। (ii) आरोप संख्या-2
बने हुये निवासित मकानों में अपार्टमेन्ट ऐक्ट, 2006 के नियमों का उल्लंघन कर निवासितों से बिना सहमति प्राप्त किये प्लान केस संख्या-पी॰/चांगर/पी॰ आर॰ एन॰-4-35/05 में अतिरिक्त मंजिलों/फ्लैट की स्वीकृति की कार्रवाई की गयी है जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। (iii) आरोप संख्या-3 भवन नक्शा की स्वीकृति में आवेदन मूल भू-स्वामित्वधारी, पावर ऑफ अटर्नी धारी, भूखण्ड के विकासकर्त्ता/डेवलपर (एकरारनामा में निर्धारित शर्त्त के अनुरूप) तथा नक्शा बनाकर समर्पित करने वाले नक्शा के पंजीकृत/निबंधित आर्किटेक्ट, अभियंता के द्वारा स्वीकृति की प्रक्रिया के आलोक में पत्राचार आवेदन दिये जाने पर संबंधित विषय पर कार्रवाई करनी चाहिए थी जो प्लान केस संख्या-पी॰/लोहानीपुर/पी॰सी॰एन॰-5-82/05 में नहीं किया गया जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं। (iv) आरोप संख्या-4
भवन उप विधि में ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र पूर्ण रूप से बने हुए भवनों के लिए निर्धारित न्यूनतम कागजातों के आधार पर विचारणीय है। साथ ही साथ स्थल जाँच कराने के उपरांत इससे भिन्न परिस्थिति यथा-सड़क चौड़ीकरण भूपट्टी, अपसारण योग्य अंश, लिफ्ट अधिष्ठापन, जलोदवाहन-मलोदवाहन संबंधन, अग्निशमन अधिष्ठापन इत्यादि प्रमाण-पत्र निर्गत करने से पूर्व प्राप्त करना एवं कागजातों पर संतुष्ट होना आवश्यक है, जिसका अनुपालन प्लान केस संख्या- पी॰/लोहानीपुर/पी॰सी॰एन॰-5-82/05 में नहीं किया गया है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं। (v) आरोप संख्या-5
टू वे कम्यूनिकेशन सिस्टम के परियोजना में सशक्त स्थाई समिति की अड़तीसवी बैठक दिनांक-12.06.09 को वायरलेस सेट, वॉकी-टॉकी क्रय करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान किया गया था। प्रस्ताव स्वीकृत होने से पूर्व दिनांक- 03.05.09 को Expression of Interest प्रकाशित किये जाने एवं E.O.I. में भाग लेने वाले निविदाकारों को 01.06.09 को प्रजेन्टेशन हेतु बुलाया गया। जबकि निगम के वर्ष 2009-10 के बजट में इस मद के लिये व्यय का कोई बजटीय प्रावधान नहीं था, परंतु आपके द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए सौलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अन्तर्गत प्राप्त राशि में से 8261000 का आवंटन कर निविदा में मनमानी तरीके से निर्णय कराने में वित्तीय क्षमता को अनदेखा करते हुए चेन्नई के आईकोटेक कंपनी को कार्यादेश दिलाने में सक्रिय भूमिका एवं सहयोग किया है। इस कंपनी द्वारा वायरलेस सेट का पूर्ण आपूर्ति एवं टावर अधिष्ठापन नहीं करने के बावजूद 7561000 का भुगतान करा दिया गया। उल्लेखनीय है कि नगर विकास विभाग द्वारा निगम के सभी संबंधित कर्मचारी एवं पदाधिकारियों को निःशूल्क मोबाईल फोन वर्ष 2009-10 से उपलब्ध कराया जा चुका था, फिर भी निहित स्वार्थ से निगम को इस परियोजना से 53.89 एवं 22.72 लाख रूपये का खर्च करवाया गया, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं। 2. संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-269 अनु॰, दिनांक 13.03.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-1 को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-05 को अंशतः प्रमाणित पाये जाने तथा आरोप संख्या-2, 3 एवं 4 को अप्रमाणित पाये जाने का अधिगम दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ मेे श्री मिश्र से विभागीय पत्रांक-2927 (एस) दिनांक 12.04.2018 द्वारा29 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी, जिसके आलोक में इनके पत्रांक-शून्य, दिनांक 11.06.2018 द्वारा विभाग में द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री मिश्र के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर मेंं मुख्य रूप से निम्न तथ्य अंकित किये गये :- (i) आरोप संख्या-1 के संबंध में श्री मिश्र के द्वारा मुख्य रूप से अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के साथ नगर निगम के द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश संख्या-96/07 दिनांक 18.09.07 की छायाप्रति संलग्न करते हुए अंकित किया गया है कि प्रांसगिक कार्यालय आदेश के संदर्भ (Context) को देखते हुए स्पष्ट Intent यह परिलक्षित होता है कि पूर्व से निर्धारित प्रक्रिया में संशोधन/परिवर्त्तन मात्र उन मामलों के लिए किया गया, जिसमें नगर आयुक्त के न्यायालय में निगरानी वाद चल रहा था न कि सभी मामलों में, परन्तु संचालन पदाधिकारी ने कहा है कि कार्यालय आदेश में सभी विचलन के मामलों में पाँच गुणा अर्थदण्ड लगाने की बात कही गयी है, जो गलत है, क्योंकि मूल कार्यालय आदेश में कहीं भी ''सभी'' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, संचालन पदाधिकारी का यह अभिमत गठित किया जाना कि CWJC No-5393/2008 में मान्नीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 11.10.12 को पारित आदेश पिछली तिथि से लागू नहीं हो सकता है-के बिन्दु पर श्री मिश्र के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में Rajasthan S.R.T.C. Vs. Bal Mukund Bairwa के मामले में मान्नीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश का संदर्भ देते हुए अंकित किया गया है कि जब तक किसी निरस्तीकरण संबंधी आदेश में मान्नीय न्यायालय द्वारा यह निर्दिष्ट नहीं किया जाता है कि वह आदेश अग्रगामी प्रभाव से लागू (Operative) होगा तब तक वह आदेश पूर्वगामी प्रभाव (Retrospective effect) अर्थात निरस्तीकरण आदेश के निर्गत होने की तिथि से ही प्रभाव माना जायेगा। (ii) आरोप संख्या-5 के संबंध में श्री मिश्र के द्वारा अन्य विचारणीय बिन्दुओं के अतिरिक्त मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि तत्कालीन नगर आयुक्त श्री के॰ सेंथिल कुमार द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोप पर दिये गये बचाव-बयान पर विभागीय मंतव्य गठित करने हेतु चार सदस्यीय विभागीय समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा की गई अनुशंसा पर विभाग ने सहमति व्यक्त करते हुए अपने पत्रांक-5433, दिनांक 18.08.17 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को विभागीय मंतव्य समर्पित किया था। उक्त मंतव्य में आरोप संख्या-9 पर तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा प्रस्तुत बचाव बयान एवं उस पर विभाग के गठित मंतव्य की छायाप्रति संलग्न करते हुए अपने बचाव का मुख्य आधार बनाया गया है। 3. जाँचाधीन मामला मूल रूप से नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्य पद्धति, उनके आंतरिक व्यवस्था से संबंधित होने केे दृष्टिपथ में रखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग से विभागीय पत्रांक-8534, दिनांक 08.11.2018 द्वारा सुस्पष्ट एवं तथ्यात्मक मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-142, दिनांक 13.01.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा तथ्यात्मक मंतव्य उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री मिश्र के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। 4. आरोप संख्या-1 के संबंध में श्री मिश्र के द्वारा रखे गये तथ्य/तर्क की समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि तत्कालीन नगर निगम आयुक्त के द्वारा एक संचिका में दिये गये स्पष्टीकरण (दिनांक-27.11.08) के आलोक में पूर्व में निर्गत कार्यालय आदेश संख्या-96/07 दिनांक 18.09.07 में कोई संशोधन नहीं किया गया और कोई नया कार्यालय आदेश निर्गत नहीं किया गया और न ही आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपनी अनुशंसा में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया। एक संचिका मात्र में स्पष्टीकरण कर देना पारदर्शी नहीं था, क्योंकि उससे सार्वजनिक रूप से पारदर्शी तरीके से सभी लोगों को यह जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी कि गैर निगरानी वादों में पाँच गुणा अर्थदण्ड नहीं लेना है। जहाँ तक CWJC No-5393/2008 में दिनांक 11.10.12 को मान्नीय उच्च न्यायालय द्वार पारित आदेश का संदर्भ दिये जाने का प्रश्न है तो स्पष्ट है कि उक्त न्यायादेश पिछली तिथि से लागू नहीं हो सकता है। ऐसी स्थिति में तत्समय पाँच गुणा अर्थदण्ड नहीं लगाया जाना आरोपित पदाधिकारी की मंशा को स्वच्छ नहीं मानते हुए उनकी कर्त्तव्यहीनता पायी गयी। आरोप संख्या-5 के संबंध में रखे गये तथ्य/तर्क की समीक्षा में पाया गया कि तत्कालीन नगर आयुक्त श्री के॰ संेंथिल कुमार के मामले में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराये गये विभागीय मंतव्य में अंकित किया गया है कि टू-वे-कम्युनिकेशन के तहत ही वायरलेस सेट का क्रय निविदा के तहत विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए किया गया है, जबकि वर्ष 2009-10 में बजटीय प्रावधान न रहते हुये भी बिना सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति के ही दिनांक 03.05.09 को EOI प्रकाशित कर दिया गया एवं श्री मिश्र के द्वारा तत्कालीन नगर आयुक्त के समक्ष बिना बजटीय प्रावधान के एवं बिना सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति के EOI प्रकाशित नहीं करने का लिखित अभिमत प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, जिसके संबंध में आरोपित पदाधिकारी श्री मिश्र का यह कहना कि यह सात सदस्यीय निविदा समिति के स्तर पर निगमायुक्त के हस्ताक्षर से निर्गत किया गया था-मान्य प्रतीत नहीं होता है, जिसके फलस्वरूप श्री मिश्र का इस हद तक दोष परिलक्षित होता है। इसके अतिरिक्त, Solid waste management के अन्तर्गत प्राप्त राशि में से 82.61 लाख रुपये का विचलन करने के संबंध में संचिका में छेड़छाड़ एवं कतिपय संचिकाएँ गायब होने की प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपित पदाधिकारी के स्तर से निगमायुक्त के समक्ष आत्मभारित टिप्पणी समर्पित करते हुए एक मद की राशि का दूसरे मद में विचलन नहीं किये जाने का कोई अभिमत गठित नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप इस हद तक श्री मिश्र का दोष परिलक्षित होता है।30 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 5. इसी बीच श्री मिश्र के दिनांक 31.03.2021 को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4278 (एस), दिनांक 25.08.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 6. इस प्रकार श्री मिश्र द्वारा अपने बचाव-बयान में कोई ठोस खण्डनयुक्त तर्क अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। समीक्षोपरांत आरोपी श्री शैलेश मिश्र के विरूद्ध आरोप संख्या-01 प्रमाणित एवं आरोप संख्या-05 आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। साथ ही श्री मिश्र के इस कृत्य से पटना नगर निगम को 3,49,272/- एवं 10,33,975/- रुपये की आर्थिक क्षति पहुँची है एवं आरोप संख्या-5 जो वर्ष 2009-10 में बजटीय प्रावधान में नहीं रहते हुए भी दिनांक 03.05.2009 को EOI प्रकाशित किये जाने, उसके निविदाकारों को दिनांक 01.06.2009 को Presentation के लिए बुलाये जाने तथा Solid Waste Management के तहत प्राप्त राशि में से 82.61 लाख रुपये विचलन संबंधी आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। तद्ालोक में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 11.06.2018 को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री शैलेश मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रतिः सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत उनके पेंशन से 15% की कटौती 05 (पाँच) वर्षो तक किये जाने के दंड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्णीत दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1844 (एस), अनु॰ दिनांक 08.04.2022 के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गई। 7. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2414 दिनांक-26.09.2022 के द्वारा श्री मिश्र के विरूद्ध उक्त निर्णीत दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया। तद्ालोक में श्री शैलेश मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति ः सेवानिवृृत्त को उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- '' पेंशन से 15 (पन्द्रह) प्रतिशत की कटौती 05 (पाँच) वर्षो तक'' 8. श्री मिश्र के निलंबन अवधि दिनांक 04.06.2013 से 01.09.2017 के संबंध में अलग से नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।
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15 दिसम्बर 2022
सं0 निग/सारा-6 (था॰का॰)-104/10- 6131 (S)--निगरानी अन्वेषण ब्यूरों के द्वारा पटना नगर निगम में व्याप्त अनियमितता की जाँच के क्रम में दर्ज किये गये निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना को प्राथमिकी अभियुक्त बनाते हुए नगर विकास एवं आवास के माध्यम से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरों का पत्रांक-3327, दिनांक 26.04.2013 द्वारा श्री प्रसाद से कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रसाद के पत्रांक- 02, दिनांक 29.04.2013 द्वारा उपलब्ध कराये गये कारण-पृच्छा उत्तर पर विभागीय पत्रांक-3413, दिनांक 30.04.2013 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-1210 दिनांक 14.05.2013 द्वारा प्राप्त मंतव्य के आलोक में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4394 (एस), दिनांक 04.06.2013 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6064 (एस) दिनांक 26.07.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री प्रसाद के विरूद्ध निम्न 10 (दस) बिन्दुओें पर आरोप गठित किया गया :- (1) भवनों के नक्शा पास करने में पायी गयी अनियमितता निम्नवत है :-
(i) प्लान केस संख्या-पी0/ढकनपुरा/पी0आर0 एन0-बी0जी05-648/05 में अपार्टमेन्ट ऐक्ट-06 का अनुपालन नहीं किया गया एवं पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 14,16,679.00 की आर्थिक क्षति हुयी।
(ii) प्लान केस संख्या-पी0/राजापुर/ पी0सी0एन0-4-574/09 में पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 87,870.00 की आर्थिक क्षति हुयी एवं कनीय अभियंता से नगर आयुक्त तक के द्वारा एक ही दिन दिनांक-11.06.09 को Site plan का स्थल निरीक्षण किये वगैर कार्रवाई की गयी। (iii) प्लान केस संख्या-पी0/शेखपुरा/ पी0आर0एन0-4- 1015/98 में पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 4,34,367.00 की आर्थिक क्षति हुयी। यह नक्शा बी0एस0ई0बी0 के दो फीट जमीन के अतिक्रमण पर आधारित था, जिसे आपके द्वारा avoid किया गया।
(iv) प्लान केस संख्या-पी0/राजापुर/ पी0आर0एन0-4- 1076/02 में पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 5,12,244.00 की आर्थिक क्षति हुयी एवं ऊंचाई में बढ़ोत्तरी के लिए compounding सामंजस से शुल्क की गणना में त्रुटि की गयी।
(v) प्लान केस संख्या-पी0/बोरिंग रोड/ पी0आर0एन0-4- 542/2000 में पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 8,95,796.00 की आर्थिक क्षति हुयी, ऊंचाई में बढ़ोत्तरी के लिए31 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 compounding सामंजस से शुल्क की गणना में त्रुटि, 6 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर 11 मीटर से अधिक ऊंचे भवन की स्वीकृति, स्ट्रक्चर अभियंता का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया, अपार्टमेन्ट ऐक्ट 06 का अनुपालन नहीं किया गया तथा अमीन से नगर आयुक्त तक एक ही दिन दिनांक-13.06.09 को कार्रवाई की गयी अर्थात Site plan का स्थल निरीक्षण नहीं किया गया।
(vi) लान केस संख्या-पी0/मैनपुरा/ पी0आर0एन0-4-615/06 में पांच गुणा अर्थ दंड की गणना नहीं करने के कारण कुल रूपया 3,08,385.00 की आर्थिक क्षति हुयी एवं कार्यालय आदेश संख्या-94/02 का पालन नहीं किया गया।
(vii) प्लान केस संख्या-पी॰/चित्तकोहरा/पी॰आर॰एन॰-5-853/08 में कार्यालय आदेश संख्या-94/02 का पालन नहीं किया गया, Structure अभियंता का प्रमाण-पत्र सादा हस्ताक्षरित था, सहायक अभियंता से नगर आयुक्त तक एक ही दिन दिनांक 15.06.2009 को कार्रवाई की गई।
(viii) प्लान केस संख्या-पी॰/यारपुर/पी॰आर॰एन॰-5-585/09 में कार्यालय आदेश संख्या-94/02 का पालन नहीं किया गया।
(ix) प्लान केस संख्या-पी॰/शेखपुरा/पी॰आर॰एन॰-2-491/08 में अपार्टमेन्ट एक्ट-06 का अनुपालन नहीं किया गया एवं सहायक अभिंयता से नगर आयुक्त तक एक ही दिन दिनांक 12.06.09 की सामान्य प्रक्रिया का अनुपालन नहीं करते हुए बदनीयती से कार्रवाई की गई।
(2) टू-वे-कम्यूनिकेशन सिस्टम के परियोजना में सशक्त स्थायी समिति की अड़तीसवीं बैठक दिनांक- 12.06.09 को वायरलेस सेट, वॉकीटॉकी क्रय करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान किया गया था। प्रस्ताव स्वीकृत होने से पूर्व दिनांक-03.05.09 को Expression of Interest प्रकाशित किये जाने एवं E.O.I. में भाग लेनेवाले निविदाकारों को 01.06.09 को प्रजेंटेशन हेतु बुलाया गया, जबकि निगम के वर्ष 2009-10 के बजट में इस मद के लिये व्यय का कोई बजटीय प्रावधान नहीं था, परंतु आपके द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत प्राप्त रािश में से रूपये 82,61,000/- का आवंटन कर निविदा में मनमानी तरीके से निर्णय कराने में वित्तीय क्षमता को अनदेखा करते हुए चेन्नई के आईकोटेक कंपनी को कार्यादेश दिलाने में सक्रिय भूमिका एवं सहयोग किया गया है। इस कंपनी द्वारा वायरलेस सेट का पूर्ण आपूर्ति एंव टावर अधिष्ठापन नहीं करने के बावजूद रूपये 75,61,000/- का भुगतान करा दिया गया। उल्लेखनीय है कि नगर विकास विभाग द्वारा निगम के सभी संबंधित कर्मचारी एवं पदाधिकारियों को निःशुल्क मोबाइल फोन वर्ष 2009-10 से उपलब्ध कराया जा चुका था, फिर भी निहित स्वार्थ से निगम को इस परियोजना से 53.89 एवं 22.72 लाख रूपये का खर्च करवाया गया, जिसके लिये आप दोषी प्रतीत होते हैं।
2. संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त-सह- संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-319 अनु॰, दिनांक 28.03.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनके विरूद्ध गठित कुल 10 (दस) आरोपों में से आरोप संख्या-(1)(i), (1) (ii), (1) (iii), (1) (v) एवं (1) (vii) को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-(1) (iv), (1) (vi), (1) (ix) एवं (2) को अंशतः प्रमाणित तथा आरोप संख्या-1 (viii) को अप्रमाणित पाये जाने का अधिगम दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ मेे श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-2928 (एस) दिनांक 12.04.2018 द्वारा लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी, जिसके आलोक में इनके पत्रांक-शून्य, दिनांक 12.06.2018 द्वारा विभाग में द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्य अंकित किये गये :- (i) श्री प्रसाद के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में सर्वप्रथम अंकित किया गया है कि Bihar CCA Rules, 2005 के rules 16 (1) के प्रावधानों के अनुसार सक्षम प्राधिकार (नियुक्त प्राधिकार या सरकार) ही किसी सरकारी सेवक के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर सकेगा, लेकिन उनके मामले में इस प्रावधान का उल्लंघन करते हुए सचिव स्तर से ही प्रपत्र ''क'' तथा संकल्प संख्या-6064, दिनांक 26.07.13 को अनुमोदित कर विभागीय कार्यवाही संस्थित कर दिया गया, जबकि प्रपत्र-''क'' तथा संकल्प संख्या-6064, दिनांक 26.07.13 को निर्गत करने के पूर्व सक्षम प्राधिकार से अनुमोदन होना आवश्यक था। इस संबंध में श्री प्रसाद के द्वारा Union of India & ors. Vs. B.V. Gopinath सिविल Appeal No-7761/2013 में मान्नीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का भी संदर्भ दिया गया है। (ii) इस प्रकार, प्रपत्र-''क'' तथा संकल्प संख्या-6064 दिनांक 26.07.13 दोनाें Nonest था एवं विभागीय कार्यवाही पूर्ण रूप से vitiated है अर्थात विभागीय कार्यवाही ही गलत ढंग से शुरूआत किया गया एवं इसके जाँच तथा जाँचफल का कोई मतलब नहीं रह जाने के कारण Bihar CCA Rules, 2005 के rules के प्रावधानों के अन्तर्गत किसी प्रकार का कोई दण्ड नहीं दिया जा सकता है। (iii) आरोप संख्या-1 (i) के प्रथम अंश के संबंध में आरोपित पदाधिकारी, श्री प्रसाद के द्वारा अपार्टमेन्ट एक्ट-06 की धारा-11 एवं 7.2 (i) का संदर्भ देते हुए अंकित किया गया है कि किसी अपार्टमेन्ट का स्वामित्व होने के लिए उसका32 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 भुगतान पूरा होना चाहिए एवं जब तक completion certificate निर्गत नहीं होता है तब तक उस अपार्टमेन्ट का पोजेशन भी नहीं होता है। सरकारी पक्ष द्वारा ना तो इस अपार्टमेन्ट का कोई स्वामित्व या आवंटन/बिक्री समझौता (agreement of sale) संबंधी कागजात ही प्रस्तुत किया गया और न ही किसी अपार्टमेन्ट मालिक का नक्शा revision के विरूद्ध ऑब्जेक्शन संबंधी कोई कागजात ही प्रस्तुत किये गये। सच तो यह है कि इस अपार्टमेन्ट का ऑक्यूपेेंसी/कम्प्लीशन सर्टिफिकेट निर्गत नहीं हुआ था और न ही किसी व्यक्ति ने इस संबंध में कोई ऑब्जेक्शन ही किया है। (iv) साथ ही संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप संख्या-1 (ix) के प्रथम अंश, जो अपार्टमेन्ट एक्ट-06 के अनुपालन नहीं करने से संबंधित है, को अप्रमाणित माने जाने का भी संदर्भ दिया गया है। इसके अतिकिरक्त Anant R Kulkarni Vs. Y.P. Education Society & ors. (Civil appeal No-3935/2013) में दिनांक 26.04.13 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का संदर्भ देते हूए उक्त आरोप को पूर्णरूपेण Vague होने का उल्लेख किया गया है। (v) उक्त आरोप के दूसरे खण्ड अर्थात पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना नहीं करने के संबंध में पटना नगर निगम के कार्यालय आदेश संख्या-96/07 दिनांक 18.09.07 का संदर्भ देते हुए मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना मात्र निगरानीवाद के मामले में ही किया जाना था। (vi) आरोप संख्या-1 (ii) के प्रथम खण्ड के संदर्भ में श्री प्रसाद के द्वारा अन्य तथ्यों सहित मुख्य रूप से श्री के॰ संथिल कुमार के मामले में नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य है कि भवन नक्शों को पारित करने में पाँच गुणा अर्थदण्ड वसूल करने का कोई Statutory provision नहीं है तथा इसके नहीं लगाये जाने के कारण कोई आर्थिक क्षति पटना नगर निगम को नहीं हुआ है। आरोप के दूसरे खण्ड मंें अंकित किया है कि कनीय अभियंता, अमीन, सहायक अभियंता का अलग कार्यालय नहीं होता है बल्कि सभी कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में ही कार्य करते है। सरकारी पक्ष ने back dating होने का सिर्फ संदेह व्यक्त किया, जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना जाँच किये ही आरोप को प्रमाणित मान लिया। (vii) आरोप संख्या-1 (iii) के प्रथम खण्ड के संबंध में इनके द्वारा मुख्य रूप से सामंजन एवं Compounding शुल्क की गणना करने के पश्चात उसका पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना भी की गयी थी लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार भवन उप विधि के तहत इस भवन की अनुमान्य उँचाई 11 मीटर ही निर्धारित है एवं इसके आलोक में सामंजन एवं Compounding शुल्क की गणना नहीं की गयी है। सरकारी पक्ष के द्वारा यह नहीं बताया गया कि भवन उप विधि के किस Clause केे तहत इस भवन की अनुमान्य उँचाई 11 मीटर निर्धारित है तथा सामंजन एवं Compounding शुल्क की गणना में किस प्रकार की त्रुटि की गयी है, जबकि आरोप ''पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना नहीं करने के कारण कुल रुपये 4,34,367/- की आर्थिक क्षति हुई'' मात्र है तो इसमें सामंजन एवं compounding शुल्क की गणना की त्रुटि कैसे शामिल हो गया। इस प्लान case में पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना की गई है। अतः यह आरोप बनता ही नहीं है फिर भी संचालन पदाधिकारी ने इसे प्रमाणित प्रतिवेदित किया है। आरोप संख्या-1 (i) (ख) में दिये गये तथ्यों के आधार पर इसमें भी पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना नहीं करना था। अतः किसी प्रकार की आर्थिक क्षति नहीं हुई है। (viii) उक्त आरोप के दूसरे खण्ड के संबंध में आरोपी के द्वारा तर्क दिया गया है कि निगरानीवाद सं॰-29/2001 में निगरानी न्यायालय में दिनांक 09.02.09 को पारित आदेश के आलोक में promoter के द्वारा जमीन surrender करने संबंधी शपथ पत्र देने के पश्चात समीक्षा कर निगरानी पदाधिकारी के माध्यम से ही भेजा गया था, जिसका प्रमाण संचिका में मौजूद है। (x) आरोप संख्या-1 (iv), (v), (vi), (vii), (ix) एवं आरोप संख्या-02 के संबंध में मुख्य रूप से आरोपी श्री प्रसाद के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में कोई नया तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। मात्र विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराये गये बचाव में अंकित तथ्यों को ही नये सिरे से दुहराया गया है। 3. जाँचाधीन मामला मूल रूप से नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्य पद्धति, उनके आंतरिक व्यवस्था से संबंधित होने केे दृष्टिपथ में रखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग से विभागीय पत्रांक-8534, दिनांक 08.11.2018 द्वारा सुस्पष्ट एवं तथ्यात्मक मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-142, दिनांक 13.01.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा तथ्यात्मक मंतव्य उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री प्रसाद के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। 4. श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- (i) आरोप संख्या-1 (i) के प्रथम खण्ड के संबंध रखे गये तर्क की समीक्षा में पाया गया कि विभागीय मंतव्य के अनुसार नक्शे की मूल स्वीकृति B+G+4 तल्ले के लिए दिनांक 10.10.05 को पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के तत्कालीन उपाध्यक्ष द्वारा दी गयी थी। बाद में वर्ष 2008 में पुनरीक्षण के लिए नक्शा जमा हुआ था B+G+5 तल्ले के पुरीक्षण की स्वीकृति प्राप्त हुई, किन्तु उँचाई में बढ़ोतरी के साथ एक अतिरिक्त तल्ले की स्वीकृति हेतु अनुशंसा में बिहार अपार्टमेन्ट स्वामित्व अधिनियम, 2006 की धारा-10.4 (क) में निर्देशित प्रावधान के अन्तर्गत अपार्टमेन्ट मालिकों की सहमति नहीं ली गयी, जबकि अपार्टमेन्ट एक्ट-2006 की धारा-10.01 के अनुसार आवंटन/बिक्री समझौता होते ही संबंधित क्रेता को संबंधित संपत्ति33 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 में स्वतः वैधिक स्वामित्व प्राप्त हो जाता है एवं उसका साझा हित सृजित हो जाता है। इसके अलावा अपार्टमेन्ट एक्ट-2006 के गजट प्रकाशन के उपरांत राज्य सरकार के द्वारा पटना क्षेत्रीय विकास प्राकिार के उपाध्यक्ष को प्राधिकार के सीमा क्षेत्र के लिए सक्षम प्राधिकार घोषित किया गया था एवं प्राधिकार के विघटन के बाद बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-488 के आलोक में सक्षम प्राधिकारी की जिम्मेवारी नगर आयुक्त, पटना नगर निगम में निहित हुई थी। इस प्रकार विभागीय मंतव्य की विवेचना के आधार पर आरोपित पदाधिकारी के जवाब को तर्कसंगत, तथ्यपूर्ण एवं विधिसंगत नहीं पाया गया। आरोप संख्या-1 (i) के दूसरे खण्ड के संबंध में रखे गये तर्क में आरोपी पदाधिकारी द्वारा स्वंय स्वीकार किया गया कि पटना नगर निगम के कार्यालय आदेश संख्या-96/07, दिनांक 18.09.2007 के आलोक में निगरानीवाद से आच्छादित मामलों में पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना किया जाना आवश्यक था, जबकि प्लान संख्या-पी॰/ढकनपुरा/पी॰आर॰एन॰- बी0जी05-648/05 जो निगरानीवाद से आच्छादित था, में तो निश्चित रूप से उन्हें इसमें पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना करते हुए अनुशंसा किया जाना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। इस प्रकार श्री प्रसाद के द्वारा उक्त संंबंध में यह कहा जाना कि उनके द्वारा अनुशंसा किये जाने के समय तक उन्हें यह जानकारी प्राप्त नहीं हुई थी कि उक्त प्लान संख्या-648/05 निगरानीवाद से आच्छादित है, जो स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि यदि उन्हें निगरानीवाद से आच्छादित होने की जानकारी नहीं थी तो उन्हें अनुशंसा किये जाने के पूर्व निगरानी शाखा से तत्संबंधी जानकारी प्राप्त किये जाने के उपरांत ही तत्संबंधी अनुशंसा किया जाना अपेक्षित था। इस प्रकार आरोप संख्या-1 (i) का दूसरा खण्ड भी प्रमाणित होता है। (ii) आरोप संख्या-1 (ii) के प्रथम खण्ड में रखा गया तर्क की पुनरावृत्ति किये जाने के कारण तथ्यगत नहीं पाया गया। आरोप के दूसरे खण्ड की समीक्षा के क्रम में पाया गया कि पटना नगर निगम एवं संचालन पदाधिकारी (दोनों) द्वारा इस आशय की संभावना व्यक्त किया जाना कि कनीय अभियंता/अमीन से लेकर कार्यपालक अभियंता (आरोपी तक) सभी के द्वारा back dating कर एक ही दिन हस्ताक्षर किये जाने की जल्दबाजी में की गयी कार्रवाई को विहित अल्प अवधि में अव्यवहारिक परिलक्षित होने की स्थिति में प्रथम दृष्टया आरोप की पुष्टि का संकेतक है। यह भी स्पष्ट है कि उनके प्रमंडल में प्रस्तावित नक्शे से संबंधित संचिका को दिनांक 08.06.2009 को भेजे जाने और दिनांक 10.06.2009 को ही सहायक अभियंता के पास भेज दिये जाने, जिसे कनीय अभियंता/अमीन को दिनांक 11.06.2009 को भेज दिया गया एवं फिर कनीय अभियंता/अमीन के स्तर से कार्रवाई करते हुए दिनांक 12.06.2009 को स्थल स्केच और आवश्यक प्रतिवेदन के साथ उसे सहायक अभियंता को समर्पित किया गया और उसी दिन सहायक अभियंता द्वारा समीक्षा कर कार्यपालक अभियंता को भेज दिया गया है, जिसे समिति द्वारा स्वीकृति हेतु अनुशंसा कर दिया गया -आश्चर्यजनक तथ्य प्रतीत होता है, क्योंकि एक ही दिन में कई स्तरों पर संचिका का निष्पादन करना बैक डेटिंग किये जाने संबंधी संदेह को पुख्ता करता है, जिसकी साक्ष्यगत पुष्टि मूवमेन्ट रजिस्टर में बिना किसी प्रविष्टि से भी होती है, जबकि मूवमेन्ट रजिस्टर में संचिका का मूवमेन्ट दर्ज नहीं किये जाने के संबंध में आरोपी श्री प्रसाद के द्वारा कोई ठोस एवं अकाट्य तर्क अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका है, जिसके फलस्वरूप एक ही दिन में नीचे से ऊपर तक कार्रवाई करने और बिना स्थल निरीक्षण के पुनरीक्षण की अनुशंसा किये जाने के संचालन पदाधिकारी के गठित अभिमत सहमति योग्य पाया गया। (iii) आरोप संख्या-1 (iii) के प्रथम खण्ड के संबंध में श्री प्रसाद के द्वारा द्वित्तीय कारण-पृच्छा उत्तर में अंकित तथ्यों की समीक्षा में पाया गया कि पाँच गुणा अर्थदण्ड की समीक्षा किया जाना आवश्यक था जो नहीं किया गया। इस संबंध में विभागीय मंतव्य के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रश्नगत प्लान केस निगरानीवाद से आच्छादित था। ऐसी स्थिति में प्रासंगिक मामले में निश्चित रूप से पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना किया जाना आवश्यक था। जहाँ तक आरोपी के द्वारा रखे गये तर्को का प्रश्न है तो यह परस्पर विरोधाभाषी है, क्योंकि एक तरफ जहाँ उनके द्वारा कहा जा रहा है कि ''आरोप-1 (i) (ख) में दिये गये तथ्यों के आधार पर इसमें भी पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना नहीं किया जाना था,'' तो वही दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा रहा है कि ''इस प्लान केस में पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना की गयी है।'' यह भी उल्लेखनीय है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान आरोपी के द्वारा अपने बचाव-बयान में अंकित किया गया था कि प्रासंगिक प्लान केस में पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना की गयी थी, जिसके अनुसार कुल-2,03,760/-रुपये की गणना की गयी, जबकि नगर विकास विभाग के मंतव्यानुसार पाँच गुणा अर्थदण्ड की गणना 4,34,367/- रुपये होती है, इस प्रकार स्पष्ट है कि आरोपी के द्वारा त्रुटिपूर्ण गणना किये जाने के कारण कुल-2,30,607/-रुपये की आर्थिक क्षति निगम को पहुँचायी गई है और इस हद तक उन्हें दोषी माना जा सकता है। अब आरोपी के द्वारा यह भी तर्क दिया गया है कि सरकारी पक्ष के द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भवन उप विधि के किस clause के तहत इस भवन की अनुमान्य ऊँचाई 11.00 मीटर निर्धारित है तथा सामंजन एवं compounding शुल्क की गणना में किस प्रकार की त्रुटि की गयी है, जबकि संचालन पदाधिकारी के समक्ष सुनवाई के दौरान पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद उनके द्वारा किये गये कृत्य के संबंध में अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत करने में नाकाम रहे। स्पष्ट है कि आरोपी के द्वारा अब व्यर्थ का तर्क दिया जा रहा है, जो स्वीकार योग्य नहीं है, फलतः आरोपी श्री प्रसाद इसके लिए दोषी हैं। जहाँ तक उक्त आरोप के दूसरे खण्ड के संबंध में आरोपी के द्वारा अंकित किये गये तथ्यों का प्रश्न है तो इस संंबंध में स्पष्ट करना है कि आरोपी श्री प्रसाद के द्वारा अपने तर्क के संबंध में किसी प्रकार का कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है, जिसके फलस्वरूप रखा गया तर्क साक्ष्य विहिन होने के कारण इसे स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। अतः आरोप का दूसरा खण्ड भी आरोपी के विरूद्ध प्रमाणित होता है।34 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 (iv) आरोप संख्या-1 (iv), 1 (v), 1 (vi), 1 (vii) एवं 1 (ix) में श्री प्रसाद के द्वारा मुख्य रूप से पूर्व की भाँति रखे गये तथ्यों/तर्को की पुनरावृति किये जाने के कारण विभागीय समीक्षा में स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। (v) आरोप संख्या-2 के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कोई नया तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराये गये बचाव-बयान में अंकित तथ्यों को ही नये सिरे से दुहराया गया है, और चूंकि प्रश्नगत EOI जिसे दिनांक 03.05.09 को निकाला गया-का Draft आरोपित पदाधिकारी के द्वारा ही तैयार किया गया था और वे ही इसके नोडल पदाधिकारी थे, जिसे सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति के पूर्व ही निकाल दिया गया, जबकि एक जिम्मेदार सरकारी सेवक के नाते उनका भी दायित्व बनता था कि अपनी टिप्पणी के द्वारा यह स्पष्ट तौर पर अंकित करते कि सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही EOI निकालने की कार्रवाई की जाय, जो उनके द्वारा नही किया गया-के संबंध में श्री प्रसाद के द्वारा कोई संतोषजनक तर्क प्रस्तुत नही किया जा सका, जिसके फलस्वरुप अपने दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरते जाने की हद तक श्री प्रसाद का दोष पाया गया। 5. विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा गठित आरोपों के संदर्भ में समीक्षोपरांत प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित का प्रतिवेदित निष्कर्ष के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर बचाव बयान में कोई ठोस खण्डनयुक्त तर्क अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। समीक्षोपरांत आरोपी श्री अरविन्द प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप संख्या -(1)(i), (1) (ii), (1) (iii), (1) (v) एवं (1) (vii) प्रमाणित एवं आरोप संख्या-(1) (iv), (1) (vi), (1) (ix) एवं (2) अंशतः प्रमाणित पाया गया है। साथ ही श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप से स्पष्ट होता है कि इनके इस कृत्य से पटना नगर निगम को 28,34,752/ की आर्थिक क्षति हुई है एवं 04 (चार) आरोप जो आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये है, के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि पटना नगर निगम को इसके तहत हुई आर्थिक क्षति 8,20,629/- में श्री प्रसाद की आंशिक सहभागिता रही है। तद्ालोक में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 12.06.2018 को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (viii) के तहत तीन वार्षिक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से कटौती किये जाने के दंड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्णीत दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1845 (एस) अनु॰, दिनांक 08.04.2022 के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। 6. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2444 दिनांक-27.09.2022 के द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध उक्त निर्णीत दण्ड पर सहमति व्यक्त किया गया। तद्ालोक में श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना को प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली-2005 के नियम 14 (viii) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- ''तीन वार्षिक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से कटौती'' 7. श्री प्रसाद के निलंबन अवधि दिनांक 04.06.2013 से 01.09.2017 के संबंध में अलग से नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।
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15 दिसम्बर 2022
सं0 निग/सारा-उ॰बि॰रा॰उ॰प॰-116/2013-6133 (S)--श्री तुलसी कुमार (पूर्ववर्ती नाम-श्री तुलसी राम), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-30.04.2020) कार्यपालक अभियंता द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर के पदस्थापन काल में एन॰एच॰-104 के कि॰मी॰ 153 (P), 154(P), 155(P) एवं 156(P) में कराये गये PCC एवं Black Topping कार्य में बरती गयी अनियमितता के आरोप में इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9102 (एस) अनु॰ दिनांक-30.11.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जो इनके दिनांक-30.04.2020 को सेवानिवृति के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3345 (एस) दिनांक-04.06.2020 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत कुल-05 आरोप निम्नवत गठित किये गये हैं-
(i) श्री राम द्वारा संवेदक के Qualification/Eligibility का नियमानुसार आकलन नहीं किया गया तथा अधूरे एवं अपूर्ण निविदा को मान्य करार दिया गया।
(ii) संवेदक द्वारा समर्पित प्रतिभूति के संबंध में SBD के Clause (22.4) एवं बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता-नियम 418 की पूर्णतः अवहेलना श्री राम द्वारा की गयी।35 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 (iii) संवेदक को Secured Advance देने हेतु पथ निर्माण विभाग के पत्रांक-प्र0-6/द0वि0 नियम-03-02/2004-678 (एस0) दिनांक-18.01.2007 एवं SBD के पृष्ठ 104 पर दिये गये Agreement (From 31) की भी श्री राम के द्वारा अवहेलना की गयी।
(iv) निर्माण में उपयोग के लिए ठेकेदारों को दी गयी सामग्रियों के मूल्य की वसूली नहीं की गयी, अतः बिहार वित्त नियमावली के नियम 288 के उल्लंघन के लिए भी श्री राम का सीधा दायित्व परिलक्षित होता है।
(v) इसी प्रकार वर्णित निर्माण कार्य में संवेदक को दिये गये Secured Advance मद में कुल 3,91,626 (तीन लाख, इकानवे हजार, छः सौ छब्बीस) की वसूली भी श्री राम के द्वारा नहीं की जा सकी। चूँकि श्री राम तत्समय कार्यपालक अभियंता के रूप में पदस्थापित थे, जिनके द्वारा कार्य का निरंतर अनुश्रवण किया जाना अपेक्षित होता है, परन्तु उनके द्वारा Engineer-in-Charge के रूप में अपने विहित कार्य दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया जिसके लिए श्री राम दोषी प्रतीत होते हैं। 2. मुख्य अभियंता, केन्द्रीय निरूपण संगठन-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-784 (अनु॰) दिनांक-17.10.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के तहत आरोप संख्या-(i), (ii), (iii) एवं (iv) को अप्रमाणित होने तथा मात्र आरोप संख्या-(v) को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन के अन्तर्गत अंकित तथ्यों की आरोपवार विभागीय समीक्षा में सचालन पदाधिकारी द्वारा गठित निष्कर्ष से असहमत होते हुए असहमति के रेखांकित बिन्दुओं के संबंध में विभागीय पत्रांक-4773 (एस) अनु॰ दिनांक-24.08.2020 द्वारा श्री कुमार से लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी तथा विभागीय समीक्षा के उपरांत श्री तुलसी कुमार (पूर्ववर्ती नाम-श्री तुलसी राम), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के लिखित अभिकथन रूप में समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुये सम्यक विचारोपरांत उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-3525(एस) सहपठित ज्ञापांक-3526(एस) दिनांक-06.07.2022 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली केे नियम-43(B) के तहत् निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- ( i) ''इनके पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत राशि की 05 (पाँच) वर्षो तक कटौती।'' ( ii) ''इनके सेवांत लाभ से रू॰ 30934/- (तीस हजार नौ सौ चौंतीस) की कटौती।'' 3. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री तुलसी कुमार के पत्रांक-18, दिनांक 11.07.2022 के द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उन्होंने संचालित विभागीय कार्यवाही में नियमानुसार आरोप-पत्र का गठन नहीं करने, संचालन के क्रम में इनके द्वारा समर्पित बचाव-बयान पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विचार नहीं किये जाने, विभाग द्वारा उनसे पूछे गये स्पष्टीकरण के अनुपालन में समर्पित उत्तर पर विभाग द्वारा कोई विचार नहीं किये जाने सहित अप्रांसगिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन को त्रुटिपूर्ण बताया गया है। 4. श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि इनके विरूद्ध विधिवत् साक्ष्य सहित आरोप पत्र का गठन करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन प्रतिवेदन के अवलोकन से भी स्पष्ट होता है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपी के बचाव-बयान की गुण-दोष के आधार पर गठित आरोपों को प्रमाणित/अप्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष गठित किया गया है। जहाँ तक श्री कुमार के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पर विभाग द्वारा कोई विचार नहीं किये जाने का तर्क है, दण्डादेश के अवलोकन से ही स्पष्ट है कि श्री कुमार के बचाव-बयान में रखे गये तथ्य/तर्क का विस्तृत समीक्षा एवं विश्लेषण करते हुए गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री तुलसी कुमार सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वारा प्रमाणित आरोपों के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य अथवा खण्डनयुक्त तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया, जिस पर कि विचार किया जा सके। अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन तथ्यात्मक एवं संतोषजनक नहीं पाते हुए सम्यक विचारोपरांत अस्वीकृत किया जाता है। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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15 दिसम्बर 2022
सं0 निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-6136 (S)--वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल 6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी। उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी।36 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक-12.05.2010 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ स्व॰ शेखर विश्वास, तत्कालीन कनीय अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत एवं दिनांक 28.12.2020 को मृत सहायक अभियंता, मो0-कालीबाड़ी, पो0जिला-कटिहार के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. स्व॰ विश्वास के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक-26.09.2011 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। मान्नीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-26.02.2013 में श्री शेखर विश्वास को भा0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी। 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक-27.03.2009 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए स्व॰ शेखर विश्वास से विभागीय पत्रांक-1895 (एस) अनु0 दिनांक-04.03.2014 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। स्व॰ विश्वास के पत्रांक-शून्य दिनांक-14.03.2014 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-218/2013 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। स्व॰ विश्वास से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि स्व॰ विश्वास के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक-27.03.2009 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-4568 (एस) दिनांक 03.06.2014 द्वारा स्व॰ शेखर विश्वास, तत्कालीन कनीय अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत एवं मृत्त सहायक अभियंता का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया गया। 6. उल्लेखीनय है कि इसी मामले में संलग्न श्री अवध शरण सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता का पेंशन शून्य किया गया। जिसके विरूद्ध इनके द्वारा मान्नीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-13156/2014 दायर किया गया। जिसमें दिनांक 30.09.2016 को पारित आदेश द्वारा दण्डादेश को Set aside करते हुये नियमानुसार विधि सम्मत आदेश पारित करने हेतु विभाग को Remand किया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में विस्तृत समीक्षोपरांत मुखर आदेश ज्ञापांक-8388, दिनांक 21.09.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (ए) के तहत श्री सिंह को देय पेंशन से 50% पेंशन की औपबंधिक रूप से स्वीकृति इस शर्त्त के साथ दी गई है कि यह इनके द्वारा दायर Criminal Appeal No- 204/2013 में पारित अंतिम निर्णय के फलाफल से प्रभावित होगा। 7. स्व॰ शेखर विश्वास, तत्कालीन कनीय अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत मृत्त सहायक अभियंता की पत्नी श्रीमती तनुजा विश्वास के द्वारा श्री अवध शरण सिंह के मामले में लिए गए निर्णय के समरूप ही अपने दिवंगत पति के शून्य किये गये पेंशन को चालू करने का अनुरोध किया गया है। उल्लेखनीय है कि स्व॰ शेखर विश्वास एवं अन्य अभियंताओं के द्वारा भी Criminal Appeal No-218/2013 दायर किया गया, जो सम्प्रति मान्नीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में नैसर्गिक न्याय को दृष्टिगत रखते हुए श्री अवध शरण सिंह के मामले में लिये गये निर्णय के रूप में ही स्व॰ शेखर विश्वास के मामले पर भी निर्णय लिये जाने संबंधी उनकी पत्नी श्रीमती तनुजा विश्वास से प्राप्त अभ्यावेदनों पर निर्णय लिये जाने के क्रम में सामान्य प्रशासन विभाग से इस आशय का परामर्श की मांग की गयी कि चूंकि स्व॰ शेखर विश्वास के जीवनकाल में ही विभाग द्वारा उनके विरूद्ध पेंशन शून्य किये जाने का दण्डादेश संसूचित किया गया, जबकि वर्त्तमान में शेखर विश्वास मृत्त हो चुके है, ऐसी स्थिति में आज की तिथि में शेखर विश्वास के दण्डादेश को पुनरीक्षित कर श्री अवध शरण सिंह की भांति 50% पेंशन अनुमान्य किया जा सकता है अथवा नहीं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम 28 एवं 29 के तहत अग्रतर कार्रवाई करने के लिए विभाग स्वतंत्र है। चूंकि इसी मामले में श्री अवध शरण सिंह को उनके द्वारा दायर Criminal appeal के फलाफल के शर्त्त पर 50% पेंशन अनुमान्य किया गया है, इसलिए मामले की समीक्षा के उपरांत श्रीमती तनुजा विश्वास के आवेदनों पर विचार करते हुए स्व॰ शेखर विश्वास, तदेन कनीय अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत एवं दिनांक 28.12.2020 को मृत्त सहायक अभियंता को अधिसूचना संख्या-4568 (एस) दिनांक 03.06.2014 द्वारा संसूचित दण्ड को पुनरीक्षित करते हुए इस मामले में दायर Criminal appeal No-218/2013 में पारित होने वाली न्याय निर्णय के फलाफल की शर्त्त पर 50% पेंशन औपबंधिक रूप से स्वीकृत किया जाता है। प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।37 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023
27 दिसम्बर 2022
सं0 निग/सारा-(उ0बि0रा0उ0प0)उड़नदस्ता-94/2013-6333 (S)--राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-107 के कि॰मी॰ 121 से कि॰मी॰ 124 के पथ कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए सरकार को हुये 254.70 लाख की क्षति की वसूली संवेदक बंसल कॉन्ट्रैक्टर्स (इण्डिया) लि॰ से नहीं होने की स्थिति में कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियॉं को विभागीय पत्रांक-5406, दिनांक 22.09.2017 द्वारा उक्त संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु निदेश दिया गया। सरकार को हुये वित्तीय क्षति की राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में संवेदक के विरूद्ध स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु पूर्व में दिये गये निदेश का अनुपालन किया गया अथवा नहीं, के संबंध में विभागीय पत्रांक-5433 दिनांक 01.08.2018 द्वारा तत्समय पदस्थापित कार्यपालक अभियंता, श्री शैलेन्द्र भारती, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ से सूचना की मांग की गयी। पुनः उक्त के संबंध में मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्र प्राप्ति के साथ ही वांछित सूचना विभाग को उपलब्ध कराये जाने हेतु श्री भारती को विभागीय पत्रांक-223, दिनांक 09.01.2019 द्वारा स्मारित भी किया गया। श्री भारती से संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज किये जाने हेतु बार-बार दूरभाष पर भी अनुरोध किया जाता रहा है, जिसकी स्वीकारोक्ति भी श्री भारती के द्वारा पत्रांक-931, दिनांक 02.09.2019 के द्वारा की गयी है। श्री भारती द्वारा इतने गंभीर मामले में संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज किये जाने हेतु सहायक अभियंता को अधिकृत करते हुए बार-बार स्मारित किया गया। श्री भारती द्वारा व्यक्तिगत अभिरूचि लेकर स्थानीय थाने पर जाकर समन्वय स्थापित किये जाने का प्रयास नहीं किया गया। संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज किये जाने हेतु श्री भारती के पत्रांक-1187 अनु॰, दिनांक 01.10.2019 के द्वारा केवल पुलिस अधीक्षक, पूर्णियाँ से सहायक थाना-जानकीनगर को निदेशित किये जाने का अनुरोध किया गया। श्री भारती द्वारा वर्ष 2019 के पश्चात मामले में कोई अभिरूचि नहीं ली गयी है। पुलिस अधीक्षक, पूर्णियॉं से व्यक्तिगत रूप से मिलकर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया प्रतीत नहीं होता है, जबकि विभाग द्वारा संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाये जाने हेतु बार-बार पत्र/दूरभाष पर निदेश दिया जाता रहा है। उक्त मामले से ही संबंधित श्री सुबोध कुमार सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत एवं मो॰ गुलाम हुसैन, तदेन कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध भी निलाम पत्र वाद दायर किये जाने के संबंध में दिये गये विभागीय निदेशों के अनुपालन में श्री भारती द्वारा जिला निलाम पत्र पदाधिकारी, पूर्णियॉं को विहित प्रपत्र में अधियाचना उपलब्ध कराये जाने का उल्लेख किया गया है। उक्त वाद के संबंध में अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त किये जाने हेतु श्री भारती के स्तर से मात्र जिला निलाम पत्र पदाधिकारी, पूर्णियॉं से पत्राचार ही किया जाता रहा है। निलाम पत्र वाद की अद्यतन स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त किये जाने हेतु कभी व्यक्तिगत रूप से मिलकर जिला निलाम पत्र पदाधिकारी, पूर्ण्ाियाँ से समन्वय स्थापित किये जाने का प्रयास नहीं किया गया। 2. श्री भारती के द्वारा उक्त विभागीय निदेशों की अवहेलना किये जाने तथा इतने गंभीर मामले में व्यक्तिगत अभिरूचि नहीं लिये जाने के क्रम में विभागीय पत्रांक-4558 (एस) दिनांक 09.09.2021 द्वारा श्री भारती से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री भारती के पत्रांक-1401(अनु0) दिनांक-17.09.2021 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया है। श्री भारती के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में निम्न तथ्य रखा गया है :-
(क) श्री भारती द्वारा कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियॉ के रूप में दिनांक-02.07.2018 को प्रभार ग्रहण किया गया। तत्पश्चात कार्यालय के पत्रांक-1045 दिनांक-06.10.18 द्वारा संवेदक को निदेशित किया गया था कि उक्त राशि यथाशीघ्र कार्यालय में जमा कर दी जाय। विभागीय आदेश के आलोक में प्राथमिकी दर्ज करने हेतु श्री भारती द्वारा अनेक पत्र के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज करवाने हेतु अथक प्रयास किया जाता रहा है। सहायक अभियंता, बनमंखी के द्वारा पत्र के माध्यम से प्रतिवेदित किया गया कि थाना प्रभारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार किया गया। इसकी सूचना विभाग को भी समर्पित है।
(ख) उक्त संबंध मे श्री भारती द्वारा तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, पूर्णियॉ से व्यक्तिगत सशरीर उपस्थित होकर अनुरोध किया जाता रहा है। पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा सिर्फ आश्वासन ही प्राप्त हो पाया, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाया। तत्पश्चात कार्यालय पत्रांक-1187 अनु॰ दिनांक-16.10.19 द्वारा पुलिस अधीक्षक, पूर्णियॉ से सहायक थाना जानकीनगर को निदेशित किये जाने का अनुरोध किया गया। इसके बावजूद भी पुलिस अधीक्षक महोदय से मिलकर बराबर प्रयास किया गया था। उपरोक्त तथ्यों की सूचना विभाग को भी समर्पित किया जाता रहा है। विदित हो कि पत्रांक-1187 अनु॰ दिनांक-16.10. 2019 के आलोक में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग द्वारा भी वर्तमान पुलिस अधीक्षक, पूर्णियॉ को निदेशित करने के बावजूद भी अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी है।
(ग) श्री सुबोध कुमार सिंह, तदेन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवा निवृत एवं मो॰ गुलाम हुसैन, तदेन कनीय अभियंता के विरूद्ध भी नीलाम पत्र वाद दायर किये जाने हेतु विभागीय निदेशों के अनुपालन में श्री भारती द्वारा जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी, पूर्णियॉ से अनेक बार पत्राचार किया जाता रहा है। उक्त नीलाम पत्र वाद की अद्यतन स्थिति की सूचना विभाग को भी कार्यालय के अनेक पत्र के माध्यम से भेजी गयी है। व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी से बराबर समन्वय स्थापित किया जाता रहा है। श्री भारती द्वारा कार्यालय के कनीय लेखा लिपिक श्री दिलीप कुमार को भी कई बार जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी के कर्मचारी से मिलकर कार्य कराया जाता रहा है। श्री भारती द्वारा अथक प्रयास सरकारी कार्यहित में किया गया था। 3. श्री शैलेन्द्र भारती द्वारा आलोच्य मामले में सरकार को हुई वित्तीय क्षति के लिए संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने एवं आरोपित अभियंताओं के विरूद्ध Certificate Case दायर करने के मामले में अपने आप को मात्र पत्राचार किये जाने तक सीमित रखा। व्यक्तिगत अभिरूचि लेकर एवं जिम्मेवारी पूर्वक इस कार्य के निर्वहन में सार्थक प्रयास नहीं किया38 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 गया जिसके कारण इस दिशा में तत्समय कार्रवाई पूर्ण नहीं हो सकी, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री भारती द्वारा अपने स्तर से सार्थक प्रयास किया जाना अपेक्षित था, जो नहीं किया गया। श्री भारती के द्वारा विभागीय निदेश के अनुपालन में ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण विभाग को बाध्य होकर अपर मुख्य सचिव के स्तर से जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ एवं पुलिस अधीक्षक, पूर्णियाँ को अर्द्ध-सरकारी पत्र निर्गत किया जाना पड़ा। 4. उपर्युक्त के आलोक में श्री शैलेन्द्र भारती, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सिवान, के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक विचारोपरांत उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (i) एवं (iv) के तहत निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) "आरोप वर्ष 2018-19 के लिए निन्दन की सजा"। (ii) "दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 2—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
39 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023भाग-2
बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और
नियम आदि।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचना
शुद्धि-पत्र
15 मार्च 2023
सं0 6/प0सृ0-19-01/2019-988--संविदा पर नियोजन से संबंधित वाणिज्य-कर विभाग की अधिसूचना संख्या-986 दिनांक 14.03.2023 के कंडिका- 02 पर अंकित ''अंकेक्षण विशेषज्ञ'' के स्थान पर ''प्रशिक्षण विशेषज्ञ'' शुद्ध रूप में पढ़ा जाय। शेष यथावत् रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रूबी, संयुक्त सचिव।
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पथ निर्माण विभाग
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अधिसूचनाएं
शुद्धि-पत्र
24 जनवरी 2023
सं0 प्र॰2/स्था॰-07-03/2019-371(S)--श्री हनुमानी यादव, कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, बेनीपुर को विभागीय अधिसूचना संख्या-5619 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक 5620 (एस) दिनांक 11.11.2022 द्वारा निर्गत अधिसूचना के क्रम संख्या-6 के स्तम्भ संख्या-5 के द्वारा अतिरिक्त प्रभार, सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, बेनीपुर, पथ प्रमंडल, बेनीपुर के पद पर पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
2. शेष सभी यथावत समझा जाय।
आदेश से, अर्जुन कुमार मिश्रा, अवर सचिव (प्र॰को॰)।
------ 25 जनवरी 2023 सं0 प्र॰2/स्था॰-07-03/2019-378(S)--विभागीय अधिसूचना संख्या-5619 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-5620 (एस) दिनांक 11.11.2022 द्वारा निर्गत अधिसूचना के क्रम में क्रम संख्या-50 के स्तम्भ संख्या-2 में अंकित नाम "मो॰ अब्दुल जाहिर" के स्थान पर "अब्दुल जाहिर" पढ़ा जाय।
2. शेष सभी यथावत समझा जाय।
आदेश से, अर्जुन कुमार मिश्रा, अवर सचिव (प्र॰को॰)।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 2—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
40 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
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No. 364---I SANJAY KUMAR KUSHWAHA Son Of Late Dahari Prasad Kushwaha Resident Of Vill-Bhawanipur Chaudhur Tola, PO-Thikhan Bhawanipur, Dist-East Champaran. Bihar, 845434. Pension payment order (Name of Document) bears the name of mine as SUNJOY KUMAR KUSHWAHA (Incorrect Name). All the Document, My Correct Name is SANJAY KUMAR KUSHWAHA. Affi. No.-10758, Dated-28-11-2022.
SANJAY KUMAR KUSHWAHA.
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सं0 365--मैं नेहा (Neha) पिता बृज मोहन शर्मा पता हसनपुरा हनुमान मंदिरके पास न्यू पटना कॉलनी, अनिसाबाद, बेउर फुलवारी पटना बिहार 800002 शपथ पत्र सं0-2316 तिथि 22.02.2023 द्वारा सूचित करती हूँ कि मेरे आधार सं0-7376 1071 2527 एवं शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में मेरा नाम (Neha) नेहा दर्ज है । अब मैं नेहा शर्मा (Neha Sharma) के नाम से जानी व पहचानी जाऊँंगी।
नेहा (Neha).
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No. 366---I Satyadeo Kumar Sharma S/o Late Brijnandan Singh R/O Kodihara, Bihta Gaya, Bihar-824233 do hereby declare and affirm as per affidavit No. 185 dated 21.02.23 that my name is written in my Son Ganesh Kumar's 10th CBSE Certificate is Satyadeo Prasad Sharma. Which is Wrong and in 12th CBSE Certificate is Satyadeo Kumar Sharma which is Correct. That from now I will be known as Satyadeo Kumar Sharma for all future Purposes.
Satyadeo Kumar Sharma.
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No. 367--- I Md. Tanzil, S/O- Abdur Raqeeb, R/O- Vill- Singhia, Thathaul, PS- Dagarun, PO-Kanharia, Distt- Purnia do hereby solemnly affirm and declare as per Aff. No. 667 dated 6.1.23 that my name is written in my Aadhar card and voter ID card as Md. Tanjil which is wrong. My correct name is Md. Tanzil. Now I will be known as Md. Tanzil. My aadhar no. is 522406851891.
Md. Tanzil.
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सं0 368--म(cid:583) (cid:292)ेम चं(cid:289) शमा(cid:91) पता: (cid:274)ाम रानी पकड़ी | पो(cid:232)ट: (cid:874)पपरा पकड़ी | थाना: बे(cid:467)तया | िजला पि(cid:230)चमी चंपारण | मेरे पु(cid:287) सौरभ कु मार सी बी एस ई दसवीं पास (cid:292)माण प(cid:287) म(cid:581) मेरा नाम (cid:292)ेम चंद शमा(cid:91) गलत दज(cid:91) है | सह(cid:547) नाम (cid:292)ेम चंद्र्र शमा(cid:91) है | शपथ प(cid:287) सं(cid:201)या: 93 दिनांक 30/01/2023 |
(cid:292)ेम चं(cid:289) शमा(cid:91) |
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No. 369---I, MD TUFAIL AHMAD S/O MD KARIM BAKASH. R/o Kulharia Bhojpur Bihar-802160 Declare vide affidavit no. 9293 dated 3/3/023 that in my son MD SAHIL AHMAD matric certificate my name is wrongly mentioned as TUFAIL AHMAD.but my correct name is MD TUFAIL AHMAD for all purposes.
MD TUFAIL AHMAD.
————— अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय (cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त। (cid:464)बहार गजट, 2—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in41 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023
बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-10/2021--2343 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 17 मार्च 2023
श्री महेष रजक, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा सम्प्रति अधीक्षक उपकारा, मसौढ़ी के विरूद्ध उनके मंडल कारा, नवादा में पदस्थापन के दौरान दिनांक 03.03.2021 को जिलाधिकारी, नवादा एवं पुलिस अधीक्षक, नवादा के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, नवादा में किये गये औचक निरीक्षण/छापेमारी में प्रतिबंधित सामग्रियों यथा-09 मोबाईल फोन, 04 मोबाईल चार्जर, 03 मोबाईल बैट्री, 01 हेडफोन एवं 02 ताष गड्डी की बरामदगी एवं इसके पूर्व दिनांक 02.03.2019, दिनांक 30.05.2019 तथा दिनांक 05.01.2020 को भी जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, नवादा में की गई औचक छापेमारी में मोबाईल फोन सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2417 दिनांक 10.03.2021 द्वारा श्री महेश रजक, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, मोतिहारी निर्धारित किया गया। उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5581 दिनांक 10.07.2021 द्वारा श्री रजक के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. विभागीय कार्यवाही के फलाफल के उपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष प्राप्त कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7357 दिनांक 05.07.2022 द्वारा श्री महेष रजक, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया :- ''संचयी प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड''।
3. उपर्युक्त दंडादेष के आलोक में वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 779 (23), दिनांक 22.07.2022 द्वारा संसूचित किया गया कि श्री महेष रजक, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा के विरूद्ध अधिरोपित उपर्युक्त दण्ड के कारण प्रभावित होने वाली वार्षिक वेतनवृद्धियाँ क्रमषः 01.07.2023, 01.07.2024 तथा 01.07.2025 होंगी, जबकि श्री रजक की वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि 30.06.2025 है, जिस कारण दण्डादेष का समुचित कुप्रभाव इनके वेतन पर नहीं पड़ता है। 4. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री महेष रजक, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, मसौढ़ी) के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7357 दिनांक 05.07.2022 द्वारा अधिरोपित उपर्युक्त दण्ड को संषोधित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vii)/(vi) के प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11820 दिनांक-24.11.2022 द्वारा उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-
(i) ''वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से एक (01) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड''।
(ii) ''संचयी प्रभाव से दो (02) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड''। 5. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 के उप नियम-5 में विहित प्रावधान के आलोक में सरकारी सेवक को पूरे वेतन तथा भत्ते के इस अनुपात का, जैसा कि अनुशासनिक प्राधिकार विनिश्चित42 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 करे, भुगतान किया जायेगा, जिसके लिए वह तब हकदार होगा जब उसे निलंबित नहीं किया गया होता। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा ऐसा विनिश्चयन सरकारी सेवक को प्रस्तावित राशि की नोटिस देने के पश्चात् और सरकारी सेवक द्वारा, उक्त नोटिस के तामिला होने की तिथि से साठ दिनों के अन्दर, उस संबंध में उसके द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन, यदि कोई हो, पर विचार करने के बाद दिया जायेगा।
6. श्री रजक दिनांक 10.03.2021 से दिनांक 04.07.2022 तक निलंबित रहे। अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रजक के निलंबन अवधि में भुगतेय राषि के विनिष्चयन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-11 के उप नियम-5 में विहित प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांक-13270 दिनांक-08.12.2022 द्वारा श्री महेष रजक, अधीक्षक, उपकारा, मसौढ़ी से पत्र के तामिला होने की तिथि से साठ दिनों के अन्दर अभ्यावेदन की माँग की गई, कि क्यों नहीं इस आशय का निर्णय लिया जाय कि निलंबन अवधि के लिए उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा ?
साथ ही उक्त पत्र की प्रतिलिपि अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को भेजते हुए पत्र का तामिला श्री महेष रजक को कराकर तामिला प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निदेष दिया गया था।
7. तद्आलोक में अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना द्वारा ज्ञापांक 16082 दिनांक 10.12.2022 के माध्यम से तामिला प्रतिवेदन इस विभाग को उपलब्ध कराया गया है। अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना द्वारा उक्त पत्र का तामिला श्री महेष रजक, अधीक्षक, उपकारा, मसौढ़ी को दिनांक 12.12.2022 को कराया गया है।
8. इस प्रकार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-11 के उप नियम-5 में विहित प्रावधान के आलोक में निर्धारित अवधि (60 दिन) के बीत जाने के बावजूद श्री महेष रजक, अधीक्षक, उपकारा, मसौढ़ी का अभ्यावेदन अप्राप्त रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि इस संबंध में श्री महेष रजक को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है।
9. श्री महेष रजक के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विधिवत् प्रक्रिया का पालन करते हुए दण्ड अधिरोपित किया गया है। श्री रजक के विरूद्ध उनके मंडल कारा, नवादा में पदस्थापन के दौरान दिनांक-03.03.2021 को जिलाधिकारी, नवादा एवं पुलिस अधीक्षक, नवादा के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, नवादा में किये गये औचक निरीक्षण/छापेमारी में प्रतिबंधित सामग्रियों यथा-09 मोबाईल फोन, 04 मोबाईल चार्जर, 03 मोबाईल बैट्री, 01 हेडफोन एवं 02 ताष गड्डी की बरामदगी तथा इसके पूर्व दिनांक-02.03.2019, दिनांक-30.05.2019 एवं दिनांक-05.01.2020 को भी जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, नवादा में की गई औचक छापेमारी में मोबाईल फोन सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी के मामले में उनके द्वारा बरती गई लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता के आरोप प्रमाणित पाये गये हैं। इसके लिए विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री महेष रजक को ''वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से एक (01) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड '' एवं '' संचयी प्रभाव से दो (02) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड'' अधिरोपित किया गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री महेष रजक का निलंबन औचित्यपूर्ण है। 10. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री महेष रजक, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, मसौढ़ी के निलंबन अवधि दिनांक-10.03.2021 से दिनांक- 04.07.2022 तक के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप नियम-7 एवं 8 के आलोक में निम्न आदेश पारित किया जाता है :-
''निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा तथा इस अवधि की गणना पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में की जायेगी।'' आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)
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सं0 R-503/92/2022-SECTION 14-RDD-RDD (COM-182988)--1639162
(cid:274)ामीण (cid:874)वकास (cid:874)वभाग ------
संक(cid:227)प
16 मार्च 2023
(cid:302)ीमती च(cid:219)दा कु मार(cid:547), (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), सहार (भोजपुर) के विरुद्ध (cid:292)खंड (cid:871)श(cid:162)क (cid:467)नयोजन, 2019-20 म(cid:581) (cid:229)यापक (cid:510)प से अ(cid:467)नय(cid:871)मतता के आरोप पर िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547), भोजपुर के प(cid:287)ांक-200/(cid:874)व0 (cid:465)दनांक 02.06.2022 द्वारा आरोप प(cid:287) उपल(cid:222)ध कराया गया। िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547), भोजपुर से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) पर (cid:292)खंड काया(cid:91)लय सहार, भोजपुर के प(cid:287)ांक-936 (cid:465)दनांक-19.09.2022 द्वारा (cid:302)ीमती च(cid:219)दा कु मार(cid:547) का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)ा(cid:220)त है।43 (cid:464)बहार गजट, 29 मार्च 2023 (cid:292)ा(cid:220)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण म(cid:581) (cid:302)ीमती च(cid:219)दा कु मार(cid:547) द्वारा (cid:292)(cid:467)तवे(cid:465)दत (cid:873)कया गया है (cid:873)क (cid:464)रि(cid:200)त से (cid:207)यादा चयन क(cid:551) (cid:287)ु(cid:465)ट के सं(cid:163)ान म(cid:581) आते ह(cid:547)ं (cid:465)दनांक 04.09.2021 को सहार (cid:292)खंड (cid:467)नयोजन ईकाई क(cid:551) बैठक कर (cid:871)शकायत(cid:585) के (cid:289)(cid:231)ट(cid:229)य पुन: एक बार चय(cid:467)नत अ(cid:223)य(cid:876)थ(cid:91)य(cid:585) के (cid:292)माण प(cid:287)(cid:585)/अंक प(cid:287)(cid:585)/को(cid:465)ट के जांच(cid:585)परांत अ(cid:274)ेतर कार(cid:91)वाई हेतु िजला (cid:871)श(cid:162)ा पदा(cid:876)धकार(cid:547) को सू(cid:876)चत (cid:873)कया गया, ता(cid:873)क ऐसे अ(cid:223)य(cid:876)थ(cid:91)य(cid:585) का (cid:467)नयोजन रोका जा सके । फज(cid:568) (cid:292)माण प(cid:287) के आधार पर (cid:467)नयुि(cid:200)त के आरोप के संबंध म(cid:581) (cid:302)ीमती कु मार(cid:547) का कहना है (cid:873)क िजला काय(cid:91)(cid:272)म पदा(cid:876)धकार(cid:547) ((cid:232)थापना) भोजपुर, आरा से शै(cid:162)(cid:467)नक एवं (cid:292)शै(cid:162)(cid:467)नक ट(cid:547)0ई0ट(cid:547)0 स(cid:215)यापन हेतु सी0डी0 उपल(cid:222)ध कराने का आ(cid:274)ह (cid:873)कया गया था, परंतु उनके काया(cid:91)लय को सी0डी0 उपल(cid:222)ध नह(cid:547)ं कराया गया ।
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तदनुसार एतद्द्वारा (cid:302)ीमती च(cid:219)दा कु मार(cid:547) को आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:873)क संक(cid:227)प क(cid:551) (cid:292)(cid:467)त (cid:292)ा(cid:220)त होने पर संचालन पदा(cid:876)धकार(cid:547) के सम(cid:162) उपि(cid:232)थत होकर जैसा (cid:873)क संचालन पदा(cid:876)धकार(cid:547) आदेश द(cid:581) अपना (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण/(cid:871)ल(cid:872)खत बचाव बयान (सा(cid:234)य स(cid:465)हत) उनके सम(cid:162) (cid:292)(cid:232)तुत कर(cid:581)गे ।
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आदेश:--आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:873)क संक(cid:227)प क(cid:551) (cid:292)(cid:467)त सभी संबं(cid:876)धत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
अर(cid:466)बंद मंडल, संयु(cid:200)त स(cid:876)चव।