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ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध
;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू12द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू13द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू14द्ध
21 ;बपकरू20द्ध;बपकरू21द्ध 1;बपकरू22द्ध45 ;बपकरू25द्ध;बपकरू26द्ध;बपकरू27द्ध
;बपकरू25द्ध;बपकरू28द्ध;बपकरू26द्ध ;बपकरू4द्ध 3;बपकरू26द्ध5;बपकरू27द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू28द्ध;बपकरू4द्ध 11 ख्;बपकरू13द्ध 2;बपकरू26द्ध23
सं॰ 08/आरोप-01-170/2014 सा॰प्र॰ 4251सं॰ 08/आरोप-01-170/2014 सा॰प्र॰ 4251सं॰ 08/आरोप-01-170/2014 सा॰प्र॰ 4251सं॰ 08/आरोप-01-170/2014 सा॰प्र॰ 4251 सामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 02020202 मार्च, 2023मार्च, 2023मार्च, 2023मार्च, 2023
श्री उपेन्द्र प्रसाद, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-634/2011 तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3627 दिनांक 20.06.2014 तथा प्रबंधक निदेशक, बिहार राज्य खाद्य एवं आपूर्ति असैनिक निगम, पटना का पत्रांक 4430 दिनांक 17.04.2015 एवं पत्रांक 11896 दिनांक 20.11.2014 द्वारा आरोप पत्र/पूरक आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गयी। प्राप्त आरोप पत्र में श्री प्रसाद के विरूद्ध मुख्य रूप से खाद्यानों के आवंटन के विरूद्ध उठाव की मात्रा कम होने के कारण निगम को अर्थिक क्षति पहुँचाने, खाद्यानों के उठाव अंतिम तिथि तक सम्पूर्ण मात्रा में नहीं किये जाने के कारण निगम को मिलने वाले मार्जिन मनी की आर्थिक हानि पहुँचाने तथा विभागीय आदेश की अवहेलना एवं पूछे गये स्पष्टीकरण का ससमय प्रत्युत्तर नहीं देने का आरोप प्रतिवेदित किया गया (जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है)। 2. प्राप्त आरोप पत्र के आधार पर समेकित रूप से विभागीय स्तर पर आरोप पत्र पुनर्गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 13871 दिनांक 14.09.2015 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद ने अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक 886 दिनांक 06.10.2015) समर्पित किया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 9686 दिनांक 13.07.2016 द्वारा प्रधान सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 441 दिनांक 24.01.2020 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ। जिसमें श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं बताया गया। 2 ;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू2द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू3द्ध;बपकरू4द्ध 11 ख्;बपकरू13द्धश् 2;बपकरू26द्ध23 देव प्रसाद भट्टाचार्या, निगम कर्मी भागलपुर का भारतीय बीमा निगम से प्राप्त सामूहिक बीमा राशि के भुगतान में हुए विलम्ब (आरोप संख्या-06) के लिए दोषी पाते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। 5. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 2431 दिनांक 06.02.2023 द्वारा श्री प्रसाद से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री प्रसाद का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (पत्रांक 127 दिनांक 07.02.2023) प्राप्त हुआ। जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि निगम द्वारा भेजे गये त्रुटिपूर्ण पत्र एवं चेक काफी विलम्ब से माह जून, 2014 में राज्य खाद्य निगम कार्यालय, भागलपुर को प्राप्त हुआ। त्रुटिपूर्ण चेक के सुधार कार्य के क्रम में निगम मुख्यालय स्तर, संबंधित बैक स्तर एवं राज्य खाद्य निगम, भागलपुर स्तर पर अलग-अलग परिस्थितियों के कारण कार्रवाई में विलम्ब हुआ। इस कार्य में उनके स्तर से यथाशीघ्र त्रुटिपूर्ण चेक का सुधार करवाकर भुगतान की प्रक्रिया में सहयोगात्मक एवं सकारात्मक भावना से लगातार प्रयास किया गया था। भुगतान करने में उनके द्वारा जान बुझकर विलम्ब करने की मंशा नहीं थी। सुधारोपरांत चेक प्राप्त होने पर संबंधित कर्मी को भुगतान कर दिया गया।
6. श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं जांच प्रतिवेदन पर श्री प्रसाद से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक पदाधिकार के स्तर पर की गयी एवं पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा लिखित अभिकथन में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत बचाव बयान में भी किया गया था, जिसके विश्लेषणोपरांत ही संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-06 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है।
जांच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया है कि निगम द्वारा भेजे गये चेक की तिथि और पत्र में अंकित चेक की तिथि में अंतर संबंधी त्रुटि के सुधार हेतु निगम को जिला प्रबंधक द्वारा उनके पत्रांक 2664 दिनांक 08.10.2014 को भेजा गया जिसमें लगभग 07 (सात) माह का समय लगा। स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई में विलम्ब किया गया।
7. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री उपेन्द्र प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-634/2011) तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर सम्प्रति बंदोबस्त पदाधिकारी, जहानाबाद का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुए सामूहिक बीमा राशि का चेक त्रुटि सुधार में विलम्ब करने संबंधी प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में उल्लिखित निम्न दंड उन्हें अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः-
(क) निन्दन (वर्ष-2014-15)
आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधाराजपत्र के अगले असाधाराजपत्र के अगले असाधाराजपत्र के अगले असाधारण अंक ण अंक ण अंक ण अंक में प्रकाशित में प्रकाशित में प्रकाशित में प्रकाशित आदेश :- आदेश :- आदेश :- आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार र आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार र आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार र किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-बहार-बहार-बहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारीमो0 सिराजुद्दीन अंसारीमो0 सिराजुद्दीन अंसारीमो0 सिराजुद्दीन अंसारी,,,, सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।