िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 22 चैत्र 1945 (श0) सं(cid:201)या 15 पटना, बुधवार, ———————— 12 अप्रील 2023 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-82 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।
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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 83-83 पूरक
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पूरक-क 84-862 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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बिहार विधन सभा सचिवालय
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अध्सिूचनाएं
24 मार्च 2023
सं0 2स्था-03/2021-793/विस।--महालेखाकार ;लेखा एवं हकदारीद्ध का कार्यालय, बिहार से प्राप्त पत्राांक-LR: 230220231201711, LR NO: 0856/2022-2023 के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, वरीय प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248 ;कद्ध के तहत दिनांक-06.02.2023 से 10.02.2023 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-11.02.2023 एवं 12.02.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति दी जाती है । अवकाश उपभोग के उपरांत इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-295 दिनों का अवकाश शेष है ।
आदेश से,
अनुपमा प्रसाद, उप-सचिव।
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27 मार्च 2023
सं0 2स्था-15/2023-817/विस।--वित्त ;वैदानिकोद्ध विभाग, बिहार सरकार, पटना से प्राप्त पत्राांक-630;22द्ध, दिनांक-24.02.2023 के आलोक में श्री राहुल कुमार यादव, प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-240 एवं 248 ;कद्ध के तहत दिनांक- 26.12.2022 से 30.12.2022 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-31.12.2022 एवं 01.01.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग की अनुमति दी जाती है । अवकाश उपभोग के उपरांत इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-06 दिनों का अवकाश शेष है ।
आदेश से,
अनुपमा प्रसाद, उप-सचिव।
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13 मार्च 2023
सं0 2स्था-32/2022-716/विस।--श्री हर्ष प्रताप सिंह, प्रशाखा पदाध्किारी, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को वित्त ;वैदानिकोद्ध विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्राांक-562;22द्ध, दिनांक-20.02.2023 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230, 240 ;कद्ध एवं 248;कद्ध के अनुसरण में दिनांक-20.02.2023 से दिनांक-24.02.2023 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-25.02.2023 एवं 26.02.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । इसके पश्चात् इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-40 दिनों का अवकाश शेष है।
आदेश से,
अनुपमा प्रसाद, उप-सचिव।
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3 मार्च 2023
सं0 खंड-2स्था-135/2021-672/विस।--श्री अभिनीत कुमार, प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को वित्त ;वैदानिकोद्ध विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त पत्राांक-391;22द्ध, दिनांक-03.02.2023 के आलोक में बिहार सेवा संहिता के नियम-240 एवं 248;कद्ध के तहत दिनांक-23.01.2023 से दिनांक-03.02.2023 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है ।3 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-04.02.2023 एवं 05.02.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की भी अनुमति दी जाती है । इनके उपार्जित अवकाश कोष में 53 दिनों का अवकाश शेष रहेगा ।
आदेश से,
अनुपमा प्रसाद, उप-सचिव।
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4 मार्च 2023
सं0 2स्था-181/2018-679/विस।--श्री अनिल कुमार जायसवाल, उप सचिव सम्प्रति निदेशक, बिहार विधन सभा, जो वेतन स्तर-12 में प्रति माह अंके-1,09,100/-रफपये वेतन पाते हैं, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एलटीसी नियमावली, 1986 तथा इस संबंध् में वित्त विभाग, बिहार सरकार के संकल्प संख्या-8043, दिनांक-11.10.2017 की कंडिका-G के अंतर्गत ब्लॉक वर्ष 2022-25 में एलटीसी सुविध के तहत दिनांक-06.04.2023 से 12.04.2023 तक पटना से पोर्टब्लेयर ;अण्डमान और निकोबारद्ध एवं पोर्टब्लेयर ;अण्डमान और निकोबारद्ध से पटना तक की यात्राा के लिए दिनांक-10.04.2023 से 12.04.2023 तक आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है तथा दिनांक-07.04.2023 से 09.04.2023 तक सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । साथ ही दिनांक-06.04.2023 के अप से 12.04.2023 तक मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति प्रदान की जाती है ।
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
अनुपमा प्रसाद, उप-सचिव।
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अधिसूचनाएं
9 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-02/2021-गृ0आ0-9232--श्री अमित लोढ़ा, भा0पु0से0 (1998), पुलिस महानिरीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम- 10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक-09.09.2022 से 23.09.2022 तक कुल-15 (पन्द्रह) दिनों का उपार्जित अवकाश (दिनांक-24/25.09.2022 शनिवार/रविवार को Suffix सहित), की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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5 अगस्त 2022
सं0 1/एल01-10-04/2012-गृ0आ0-7890--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक-22.08.2022 से 26.08.2022 तक कुल 05 (पाँच) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति एवं दिनांक-20, 21.08.2022 को Prefix तथा दिनांक-27, 28.08.2022 को Suffix के रूप में अवकाश उपभोग करने की अनुमति के साथ उक्त अवकाश अवधि में राज्य से बाहर जाने की अनुमति प्रदान की जाती है।
2. श्रीमती ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), के उक्त अवकाश अवधि में श्री अरविन्द ठाकुर, पुलिस उप-महानिरीक्षक-सह-उप-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना उनके दैनिक र्काव्यों के प्रभार में रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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26 अगस्त 2022
सं0 1/एल01-10-04/2012-गृ0आ0-8556--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना को दिनांक-12.09.2022 से 23.09.2022 तक 12 (बारह) दिनों का Ex-India leave उपार्जित अवकाश के रूप में एवं दिनांक 10, 11.09.2022 को Prefix तथा दिनांक-24, 25.09.2022 को Suffix के रूप में अवकाश उपभोग करने की स्वीकृति तथा निजी खर्च पर कनाडा के निजी विदेश यात्रा की अनुमति प्रदान की जाती है।4 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 2. श्रीमती ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), के उक्त अवकाश अवधि में श्री अरविन्द ठाकुर, पुलिस उप-महानिरीक्षक- सह-उप-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना उनके दैनिक र्काव्यों के प्रभार में रहेंगे। बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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8 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-04/2012-गृ0आ0-9147--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएँ, बिहार, पटना को विभागीय अधिसूचना संख्या-7890, दिनांक-05.08.2022 द्वारा स्वीकृत अवकाश को दिनांक 20, 21.08.2022 को Prefix के रूप में तथा दिनांक-22.08.2022 से 29.08.2022 तक 08 (आठ) दिनों के उपार्जित अवकाश के रूप में संशोधित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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31 अगस्त 2022
सं0 1/एल01-10-05/2011-गृ0आ0-8765--श्री विकास वैभव, भा0पु0से0 (2003), विशेष सचिव, गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक- 12.09.2022 से 21.09.2022 तक कुल 10 (दस) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति के साथ दिनांक-10, 11.09.2022 (शनिवार, रविवार) को Prefix के रूप में अवकाश उपभोग करने एवं उक्त अवधि में मुख्यालय से बाहर जाने की अनुमति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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1 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-13/2009-गृ0आ0-8829--श्रीमती गरिमा मलिक, भा0पु0से0 (2006), पुलिस उप-महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-12 एवं 13 के अन्र्तगत दिनांक 04.07.2022 से 17.07.2022 तक 14 (चौदह) दिनों का रूपांतरित अवकाश (14 x 2 = 28 दिनों के अर्धवैतनिक अवकाश के समतुल्य) की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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31 अगस्त 2022
सं0 1/एल01-10-13/2022-गृ0आ0-8785--श्री हरि मोहन शुक्ल, भा0पु0से0 (2014), पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा), विशेष शाखा, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक 08.01.2022 से 24.01.2022 तक कुल 17 (सत्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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8 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-14/2022-गृ0आ0-9146--श्री अजय कुमार पाण्डेय, भा0पु0से0 (2012), पुलिस अधीक्षक-सह- सहायक निदेशक (प्रशासन), बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक-15.09.2022 से 04.10.2022 तक कुल-20 (बीस) दिनों का उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री पाण्डेय, भा0पु0से0 (2012), के उक्त अवकाश अवधि में पुलिस अधीक्षक-सह- सहायक निदेशक (प्रशासन), बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के दैनिक कार्यों के अतिरिक्त प्रभार में श्री अरविन्द कुमार गुप्ता, भा0पु0से0 (2010), पुलिस अधीक्षक-सह-सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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3 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-15/2016-गृ0आ0-8921--श्री संतोष कुमार, भा0पु0से0 (2014), पुलिस अधीक्षक, सारण को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत दिनांक-01.09.2022 से 21.09.2022 तक 21 (इक्कीस) दिनों का उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।5 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 2. श्री संतोष कुमार, भा0पु0से0 (2014), के उक्त अवकाश अवधि में पुलिस अधीक्षक, सारण के अतिरिक्त प्रभार में सुश्री धुरत सायली सावलाराम, भा0पु0से0 (2010), समादेष्टा, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-05, पटना रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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21 सितम्बर 2022
सं0 1/एल1-10-08/2015-गृ0आ0-9576--श्री अमरकेश डी0, भा0पु0से0 (2013), तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, यातायात, पटना सम्प्रति पुलिस अधीक्षक, सुपौल को विभागीय अधिसूचना संख्या-7949, दिनांक-07.10.2021 द्वारा दिनांक 03.12.2021 से 01.01.2022 तक कुल 30 (तीस) दिनों के स्वीकृत उपार्जित अवकाश में से दिनांक-31.12.2021 एवं 01.01.2022 को कुल-02 दिनों के उपार्जित अवकाश को रद्द किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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15 सितम्बर 2022
सं0 1/एल01-10-03/2014-गृ0आ0-9359--श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007), समादेष्टा, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-01, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अंतर्गत पूर्व में स्वीकृत अवकाश के स्थान पर दिनांक-06.08.2022 से 20.08.2022 तक कुल-15 (पन्द्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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12 अक्तूबर 2022
सं0 1/एल1-10-15/2022-गृ0आ0-10293--श्री अरविन्द ठाकुर, भा0पु0से0 (2008), पुलिस उप-महानिरीक्षक- सह-उप-महासमादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना को ब्लॉक वर्ष 2018-21 के अन्तर्गत छुट्टी यात्रा सुविधा (एल0टी0सी0) उपभोग करने हेतु दिनांक-10.10.2022 से 19.10.2022 तक कुल 10 (दस) दिनों का उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. उक्त अवकाश अवधि के दौरान श्री ठाकुर के दैनिक कार्यों के प्रभार में श्री विकास कुमार, भा0पु0से0 (2008), पुलिस उप-महानिरीक्षक-सह-उप-महासमादेष्टा, अग्निशाम सेवाएँ, मुख्यालय, पटना रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरिश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग
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अधिसूचनाएं
1 मार्च 2023
सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-11/2023-1243--श्री अहमद हुसैन, अवर निबंधक, पकड़ीदयाल (पूर्वी चम्पारण) से विभागीय बैठक का विडियो रिकॉडिंग कर वायरल करने के संबंध में विभागीय पत्रांक-852 दिनांक-10.02.2023 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। अवर निबंधक, पकड़ीदयाल के पत्रांक-44 दिनांक-13.02.2023 द्वारा स्पष्टीकरण विभाग में समर्पित किया गया। श्री हुसैन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाये जाने एवं उल्लिखित बिन्दु संदेहात्मक पाये जाने की स्थिति में विभागीय जॉच दल गठित कर दिनांक-10.02.2023 को उनके कार्यालय का निरीक्षण कराया गया। कार्यालय निरीक्षण और उनसे बात-चीत के पश्चात् जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि श्री अहमद हुसैन द्वारा विभागीय बैठक में समनपुरा स्थित अपने आवास से भी भाग लिया जाता है और संदेह से बचने के लिये घर पर ही कार्यालय के अनुरूप साज-सज्जा तैयार किया गया है। अतएव श्री हुसैन द्वारा विडियो रिकॉडिंग किये जाने की पूरी संभावना है। श्री हुसैन द्वारा बिना अनुमति का विभागीय बैठक का विडियो रिकॉडिंग कर वायरल कराया जाना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-7, 8, 10 एवं 12 का उल्लंघन, के साथ-साथ उन्होंने Official Secret Act, 1923 तथा IT Act 2000 के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया है। श्री हुसैन का यह कृत्य सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल है। अतः श्री अहमद हुसैन, अवर निबंधक, पकड़ीदयाल (पूर्वी चम्पारण) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के अधीन तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री हुसैन का मुख्यालय-जिला अवर निबंधन कार्यालय, बांका निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री हुसैन को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के तहत् अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता भुगतेय होगा।
4. जिला स्तर से अवर निबंधक, पकड़ीदयाल का प्रभार किसी सक्षम पदाधिकारी को सौंपे जाने का आदेश निर्गत किया जाएगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, निरंजन कुमार, उप-सचिव।6 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 24 फरवरी 2023 सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-11/2023-1128--श्री प्रणव शेखर, अवर निबंधक, बाबूबरही (मधुबनी) से विभागीय बैठक का विडियो रिकॉडिंग कर वायरल करने के संबंध में विभागीय पत्रांक-917 दिनांक-16.02.2023 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। अवर निबंधक, बाबूबरही के पत्रांक-41 दिनांक-17.02.2023 द्वारा स्पष्टीकरण विभाग में समर्पित किया गया। श्री प्रणव शेखर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाये जाने एवं उल्लिखित बिन्दु संदेहात्मक पाये जाने की स्थिति में विभागीय जॉच दल गठित कर दिनांक-20.02.2023 को उनके कार्यालय का निरीक्षण कराया गया। कार्यालय निरीक्षण और उनसे बात-चीत के पश्चात् जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि श्री प्रणव शेखर द्वारा विडियो रिकॉडिंग किये जाने की पूरी संभावना है। श्री शेखर द्वारा बिना अनुमति का विभागीय बैठक का विडियो रिकॉडिंग कर वायरल कराया जाना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली,1976 के नियम-7, 8, 10 एवं 12 का उल्लंघन, के साथ-साथ उन्होंने Official Secret Act, 1923 तथा IT Act 2000 के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया है। श्री शेखर का यह कृत्य सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल है।
अतः श्री प्रणव शेखर, अवर निबंधक, बाबूबरही (मधुबनी) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के अधीन तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री शेखर का मुख्यालय-जिला निबंधन कार्यालय, जमुई निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री शेखर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के तहत् अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता भुगतेय होगा।
4. जिला स्तर से अवर निबंधक, बाबूबरही का प्रभार किसी सक्षम पदाधिकारी को सौंपे जाने का आदेश निर्गत किया जाएगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, निरंजन कुमार, उप-सचिव।
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
27 मार्च 2023
सं0 22/नि0सि0(मुक0)पू0)-19-33/2011(पार्ट)/501--श्री शंभु शरण सिन्हा (आई०डी०-3192), तत्कालीन (प्रभारी उप समाहर्ता) सहायक अभियंता, राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँ के विरूद्ध रोकड़ वही में हेरफेर कर सरकारी राशि का गबन करने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 811 दिनांक 16.07.2005 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0 1052 दिनांक 12.10.2009 द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड दिया गया। दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा CWJC No-11259/2010 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 01.12.2011 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में उक्त विभागीय अधिसूचना को निरस्त करते हुए श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं गबन के आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0 356 दिनांक 15.03.2013 द्वारा पुनः सेवा से बर्खास्त किया गया। उक्त दण्डादेश के विरुद्ध श्री सिन्हा द्वारा पुनः माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-8280/2014 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 13.04.2018 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-356 दिनांक 15.03.2013 को निरस्त करते हुए श्री सिन्हा के विरूद्ध नये सिरे से विभागीय संकल्प सं०-2076 दिनांक 14.09.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिये श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक 814 दिनांक 10.08.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना-सह-ज्ञापांक-238, दिनांक-08.02.2022 द्वारा श्री शम्भु शरण सिन्हा (आई॰डी॰-3192), तत्कालीन सहायक अभियंता (प्रभारी उप समाहर्ता) सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध ''शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा पुनर्विचार याचिका समर्पित किया गया है। श्री शम्भु शरण सिन्हा (आई॰डी॰-3192), तत्कालीन सहायक अभियंता (प्रभारी उप समाहर्ता) सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित आरोप, आरोप संख्या-01, 02, 03, 04,05, 07, 09 एवं 10 निम्नवत् हैंः- 1. जलकर रोकड़ बही (Work cash book) एवं हस्त पावती पत्र संधारण राजस्व प्रमंडल, पूर्णिया में कार्य अवधि में नहीं किया, जाना हर माह प्राप्ति एवं व्यय मद में शून्य दर्शाया जाना, व्यवहारिक तथा वैधानिक (निर्धारित) प्रक्रिया का पूर्णतः अनदेखी व अवहेलना प्रभारी रोकड़पाल एवं आपके द्वारा किया जाना, जिसके चलते विभिन्न कपटपूर्ण तरीके से रोकड़ बही के अंतशेष में हेरफेर कर कुल रू0 48,97,656/- (अड़तालिस लाख सनतानवे हजार छः सौ छप्पन रूपये) मात्र का गवन के लिए आप दोषी है।
2. वित्तीय प्रावधानानुसार एक अस्थायी अग्रिम के रहते बिना समायोजन के दूसरा अग्रिम देय नहीं है। जिस माह अस्थायी अग्रिम दिया गया हो, उसी माह उसका समायोजन हो जाने के पश्चात ही दूसरा अग्रिम दिया जाना है। परन्तु आपके द्वारा ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी और अंचल कार्यालय को अग्रिम रखते हुए भी अन्य अग्रिम दिया गया। उक्त7 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अग्रिम के समायोजन हेतु कभी प्रयास आपके द्वारा नहीं किया गया। इस बात पर भी ध्यान नहीं रखा गया कि प्रमंडल द्वारा दिये गये अग्रिमों को अंचल कार्यालय के रोकड़ बही में दर्ज किया गया अथवा नहीं। वित्त विभाग के अंकेक्षण जाँच दल द्वारा नमूना जाँच के क्रम में पाया गया कि प्रमंडल द्वारा हस्त पावती के माध्यम से भिन्न-भिन्न अंचलों का अस्थायी अग्रिम दिया गया किन्तु उक्त अग्रिम अंचल के रोकड़बही में दर्ज नहीं था। कुछ अग्रिम अंचल कार्यालय के रोकड़ बही में दर्ज था किन्तु प्रमंडलीय रोकड़बही में दर्ज नहीं था। इस प्रकार रू० 24,76,421/- (चौबिस लाख छिहत्तर हजार चार सौ एक्कीस रूपये) प्रमंडल द्वारा हस्त पावती पर अंचल कार्यालय का उपलब्ध कराया गया जो अंचल कार्यालय के रोकड़बही में दर्ज नहीं होने एवं अंचल कार्यालय द्वारा उक्त राशि को अस्वीकार करने से स्पष्ट है कि रू० 24,76,421/- (चौबिस लाख छिहत्तर हजार चार सौ एक्कीस रूपये) का गवन एवं वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन के लिए आप दोषी है।
3. दिनांक-02.05.2002 को प्रमंडल द्वारा कुल बीस विपत्रों के माध्यम से 16,84,941/- (सोलह लाख चौरासी हजार नौ सौ एक्तालीस रूपये) की निकासी की गई किन्तु उक्त तिथि को रोकड़बही के प्राप्त भाग में मात्र रू० 16,29,661/- (सोलह लाख उन्तीस हजार छः सौ इकसठ रूपये) दर्शाया गया। रू० 55,280/-रोकड़बही में कम राशि प्राप्ति दिखाकर रू० 55,280/- (पचपन हजार दो सौ अस्सी रूपये) का गवन के लिए आप दोषी है।
4. श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह, प्रभारी उप समाहर्त्ता राजस्व प्रमंडल, सहरसा के नेतृत्व में एक जाँच दल द्वारा आपके कार्यालय में हुई वित्तीय अनियमितता की जाँच की गई जिसमें रू० (एक करोड़ चालीस लाख चौहत्तर हजार चार सौ तिड़सठ रूपये) के गवन का मामला प्रतिवेदित किया गया। जाँच दल द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त (वित्तीय अनियमितता के लिए आपको तथा तत्कालीन रोकड़पाल श्री शहिद लतीफ अंसारी तमन्ना (से.नि.) पर स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गई। जिसका केश नं०-104/104 दिनांक 08.04.2004 है, जिसमें आई.पी.सी. धारा 409/420/467/471/120 लगयाया गया। जिसका अनुसंधान जारी है। अतः रू० 1,40,74,463/- (एक करोड़ चालीस लाख चौहत्तर हजार चार सौ तिरसठ रूपये) के गवन के लिए आप दोषी है।
5. उप समाहर्त्ता, राजस्व प्रमंडल, पूर्णिया के वर्ष 2003-04 के रोकड़ बही में पाया गया कि 31.03.2003 के कुल अन्त शेष की राशि रू० 1,29,24,184.44/- (एक करोड़ उन्तीस लाख चौबीस हजार एक सौ चौरासी रूपये चौआलीस पैसे) मात्र को रोकड़बही संख्या-59 से रोकड़बही संख्या-60 में 7,42,004/- (सात लाख बेयालीस हजार चार रूपये) को आरम्भ शेष के रूप में बिना यह सत्यापित किये दिनांक-01.04.2004 से 06.04.2004 तक कोई लेनदेन नहीं हुआ/ किया गया। दिनांक-29.04.2003 को नये समाहर्त्ता प्रभार ग्रहण किये एवं उक्त तिथि को अंतशेष के रूप में रू० 83,38,955.44 (तेरासी लाख अड़तीस हजार नौ सौ पचपन रूपये चौवालीस पैसे मात्र) था।
7. सिंचाई राजस्व प्रमंडल, पूर्णिया द्वारा दिनांक- 07.04.2003 से 30.04.2003 तक के लिए संधारित रोकड़बही के नमूना जाँच (लेखा परीक्षा समिति) के क्रम में पाया गया कि दिनांक- 07.04.2003 को विभिन्न अंचलाधिकारियों के यहाँ लंबित अग्रिम में से 1,45,91,294/- (एक करोड़ पैतालीस लाख एकानवे हजार दो सौ चौरानवे रूपये) के अग्रिम का समायोजन लूज एरौल के माध्यम से किया गया है। परन्तु लेखा परीक्षा को इन समायोजनों के लिए किए गए भुगतान से संबंधित लूज ए रौल/प्रमाणिक नहीं दिखलाया गया। किस परिस्थिति में बिना प्रमाणक के उक्त राशि का समायोजन किया गया के लिए आप दोषी है।
9. कोषागार से निकासी की गई राशि को रोकड़बही संख्या-59 के पृष्ठ संख्या-07 पर दिनांक-02.05.2002 को कुल 20 अदद् विपत्रों में सन्निहित राशि रू० 16,84,941/- (सोलह लाख चौरासी हजार नौ सौ एकतालीस रूपये) मात्र की जगह रू० 16,29,661/- (सोलह लाख उनतीस हजार छः सौ एकसठ रूपये) दर्ज किया गया है। इस प्रकार रू० 55,280/- (पचपन हजार दौ सौ अस्सी रूपये) को रोकड़बही में दर्ज नहीं किया, जो वित्तीय विपत्रों की धज्जियाँ उड़ाने जैसा है। चेक पंजी, विपत्र पंजी (जो बाद में तैयार किया गया) का संधारण प्रमंडल में नहीं किया गया, के लिए आपको जिम्मेवार ठहराया जा सकता है।
10. जाँच दल द्वारा जाँचित उपसंहार में मुख्य रूप से संवा निवृत रोकड़पाल श्री शहिद लतीफ अंसारी, तमन्ना ही रहे हैं, जो सरकारी रोकड़ को निजी जागीर समझ कर सरकारी पैसे का निजी लाभ/व्यापार में उपयोग करते रहे है। उन्होंने अपने पदाधिकारी को भ्रम में रखकर अपना स्वार्थ साधा है। परन्तु आप कार्यालय प्रधान होने के नाते इतनी बड़ी-बड़ी गलतियों को नजर अंदाज किया है, जिसके लिए आपको क्यों न जिम्मेवार ठहराया जाय। पुनर्विचार याचिका :-
श्री सिन्हा द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा आरोपों को अप्रमाणित करने के समर्थन में दिये गये साक्ष्यों/अभिलेखों को किस आधार पर अमान्य किया गया है, उसका प्रमाण नहीं दिया गया है। साथ हीं उनके द्वारा समर्पित साक्ष्यों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया है। उक्त के आलोक में उनके द्वारा पुनर्विचार याचिका समर्पित की गई है, जिसके मुख्य अंश निम्नवत् है :- आरोप सं॰-01 एवं 02 के संदर्भ मेंः-श्री सिन्हा द्वारा उल्लेख किया गया है कि "उनके प्रतिस्थानी पदाधिकारी (Predecessor Officer) द्वारा, प्रभार में, उन्हें दिनांक 19.8.1998 को Rs. 62,69,469 = 79 का प्रभार सौंपा गया था, जिसमें विभिन्न अंचलाधिकारियों के यहाँ अस्थायी अग्रिम का कुल राशि Rs. 58, 28, 905 = 93 शामिल था, जिससे स्पष्ट है कि अस्थायी अग्रिम लम्बित रहते हुए, समायोजन किये बिना, अस्थायी अग्रिम दिये जाने का व्यवहारिक प्रक्रिया पूर्व से ही चला आ रहा था। श्री सिन्हा के कार्यकाल के प्रत्येक वित्तीय वर्ष का नियमित अंकेक्षण, महालेखाकार के अंकेक्षण दल द्वारा, प्रत्येक वर्ष किया जाता रहा था। किसी भी अंकेक्षण में कभी कोई वित्तीय अनियमितता का कोई प्रश्न कभी नहीं उठाया गया। इनके8 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 कार्यकाल के अन्तिम वित्तीय वर्ष 2002-03 का अंकेक्षण, महालेखाकार, पटना के अकेक्षण दल द्वारा किया गया था जिसका अंकेक्षण प्रतिवेदन की छाया प्रति संग्लग्न है, जिसके अवलोकन से उपरोक्त तथ्यों की पुष्टि होती है।
श्री सिन्हा ने उल्लेख किया है कि दिनांक 29.04.2003 को उन्होनें अपने Successor officer को विधिवत् अपना सम्पूर्ण प्रभार सौंप दिया था। उनके प्रभार सौंपने के महीनों बाद अगर किसी अंकेक्षण दल ने किसी अनियमितता की संभावना व्यक्त की है तो यह गौर करने की बात है कि संभावना व्यक्त की गयी है न कि प्रमाणित पाया गया है। इस अंकेक्षण का अनुपालन प्रतिवेदन में भी उसे अनियमितता नहीं बताया गया है जिसे इनके प्रतिस्थानी पदाधिकारी द्वारा समर्पित किया गया था। इस अनुपालन प्रतिवेदन को महालेखाकार, पटना को भेजा भी नहीं गया है। श्री सिन्हा द्वारा महालेखाकार, पटना द्वारा प्राप्त सूचना का छायाप्रति संग्लग्न किया जाता है। ये दोनों ही आरोप उलझाने हेतु सृजित है एवं निराधार हैं, का उल्लेख श्री सिन्हा द्वारा किया गया है। इसमें किसी भी तरह से उन्हेें दोषी ठहराना, बिल्कुल गलत है।
आरोप सं०-3 एवं 4 के संदर्भ में :- दोनों आरोप न्यायालय में विचाराधीन लम्बित हैं। आरोप सं०-5 के संदर्भ में :- दिनांक-01.04.2003 से दिनांक-06.04.2003 के बीच कोई Transacation नहीं हुआ था। इस तरह के Transacation हेतु सिर्फ Nil दर्ज कर Initial करना ही व्यवहार में था जो किया गया। इस तरह के Nil Transacation के अवधि हेतु सत्यापन को कोई प्रमाण- पत्र दर्ज की प्रक्रिया व्यवहार में नहीं है। दिनांक 31.03.2003 के अन्तशेष की राशि का सत्यापन AG Bihar के अंकेक्षण दल द्वारा दिनांक-17.12.2003 को सम्पन्न अंकेक्षण में किया गया। दिनांक-07.04.2003 रू० 1,44,45,105.00 रूपये लेखा का सामन्जस्य किया गया। जाँच दल का जाँच प्रतिवेदन का पृष्ठ-4 –ष्टव्य छाया-प्रति संलग्न श्री सिन्हा द्वारा किया गया है। तदुपरानत अस्थायी अग्रिम सहित Balance रू० 84,79,079.44 ही बनता है (दिनांक 07.04.03 का Balance)। तदुपरान्त दिनांक-07.04.03 से दिनांक-29.04.03 के बीच प्राप्त अन्य लेखा का सामन्जस करते हुए अस्थायी अग्रिम सहित Balance रू० 83,38,955.44 का प्रभार इन्होंने अपने प्रतिस्थानी पदाधिकारी को विधिवत् सौपा जिसे उन्होंने विधिवत् प्राप्त किया, परन्तु इनके प्रतिस्थानी पदाधिकारी द्वारा अलग से रोकड़बही खोलकर शून्य से आरम्भ कर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसे अंकेक्षण द्वारा दिनांक-15.09.2004 को सम्पन्न अंकेक्षण प्रतिवेदन 47/04-05 के पृष्ठ-05 प० पर दर्ज आदेश द्वारा अमान्य कर दिया गया तथा प्रभार में प्राप्त राशि को हीं मान्यता देते हुए आगे की प्रक्रिया करने का आदेश दिया। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त अंकेक्षण प्रतिवेदन 47/04-05 का पृष्ठ-05 –ष्टव्य, छाया प्रति श्री सिन्हा द्वारा संलग्न किया गया है। श्री सिनहा द्वारा उल्लेख किया गया है कि आरोप के विवरण के अवलोकन से भी स्पष्ट है कि यह केवल एक विवरणी है, न कि आरोप।
आरोप सं०-7 के संदर्भ में :- श्री सिन्हा ने उल्लेख किया है कि विभिन्न अंचलाधिकारियों के यहाँ अग्रिमों में से रू० 1,44,45,105.00 के अग्रिम का समायोजन, लूज A-Roll (ए रौल/प्रमाणक) के माध्यम से दिनांक 07.04.2003 को किया गया। (जाँच दल का जाँच प्रतिवेदन का पृष्ठ संख्या-04 –ष्टव्य)। पुष्टि जाँच दल ने अपने प्रतिवेदन में किया है। जाँच प्रतिवेदन श्री सिन्हा के प्रभार सौंपने की तिथि के महीनों बाद, दिनांक-25.12.2003 को विभाग को समर्पित है। श्री सिन्हा ने उल्लेख किया है कि श्री सिन्हा के प्रभार सौंपने के बाद तक ये दस्तावेज कार्यालय में सुरक्षित थे। 25.12.2003 के बाद इनके प्रतिस्थानी के काल में गुम हो गये, जो कि रू० 1,45,91,294.00 रूपये का था, का आरोप है। इसी कारण दिनांक- 25.12.2003 बाद आये दिनांक-15.09.2004 अंकेक्षण दल को ये दस्तावेज नहीं दिया जा सका। अंकेक्षण दल के जाने के बाद इन दस्तावेजों की पुनः खोजबीन की गई और खोली गई जिसे अगले अंकेक्षण दल को उपस्थित कर देने की स्वीकारोक्ति मेरे प्रतिस्थानी पदाधिकारी द्वारा की गई थी। (सूचना के अधिकार के तहत अंकेक्षण दल के अंकेक्षण 47/04-05 का अनुपालन प्रतिवेदन का पृष्ठ-04 –ष्टव्य)। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा ने उल्लेख किया है कि उनके कार्यकाल में 1,45,91,294/- (एक करोड़ पैतालीस लाख एकानवे हजार दो सौ चौरानवे रूपये) का समायोजन A-Roll (ए रौल/प्रमाणक) के माध्यम से विधिवत् ही किया गया था।, जो प्रमाणक उनके प्रभार सौंपने के बाद जाँच दल के जाँच के समय तक सुरक्षित थे, उसके बाद दिनांक-15.09.2004 को आये अंकेक्षण दल के समक्ष यदि प्रमाणक उपस्थापित नहीं किया जा सका, तो उस समय कार्यरत पदाधिकारी/कर्मचारी/ रोकड़पाल की लापरवाही थी। स्पष्ट है कि यह अंकेक्षण के समय कार्यरत पदाधिकारी के कार्य से संबंधित है। श्री सिन्हा पर यह आरोप बेबुनियाद है। श्री सिन्हा के प्रतिस्थानी पदाधिकारी द्वारा उन्हीं के कार्यकाल में गुम हुए, आरोप में वर्णित प्रमाणकों को ढूँढ (अंकेक्षण 47/04-05) के अनुपालन प्रतिवेदन केस संख्या-04 –ष्टव्य) की स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है, कि यह आरोप ही नही बनता है। किसी भी स्थिति मे उनपर पर लगाया गया यह आरोप झुठ है, का उल्लेख श्री सिन्हा द्वारा किया गया है।
आरोप सं०-9 के संदर्भ में :- यह आरोप, आरोप संख्या-03 का पुनरावृत्ति है, जो कि माननीय न्यायालय में विचाराधीन/लंबित है।
आरोप सं०-10 के संदर्भ में :- इस आरोप को विभागीय पत्रांक-1052 दिनांक-12.10.2009 में प्रमाणित आरोपों में शामिल नहीं किया गया है। अतः यह आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है।
समीक्षा :- आरोपित पदाधिकारियों द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया में उनके द्वारा आरोपों को अप्रमाणित करने से संबंधित समर्पित साक्ष्यों/अभिलेखों को अमान्य करने के आधार का प्रमाण नहीं दिया गया। अतः उनके द्वारा पुनः उक्त साक्ष्यों/अभिलेखों को संलग्न कर पुनर्विचार याचिका समर्पित की गयी है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 का अनुपालन करते हुए सुस्पष्ट जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप सं॰- 01, 02, 03,9 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 04, 05, 07, 09 एवं 10 को प्रमाणित तथा आरोप सं॰-06 एवं 08 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित आरोपवार समीक्षा के मुख्य अंश निम्नवत् है :-
समीक्षा आरोप- 01 :- यह आरोप वर्णित आरोप पत्र का रोकड़ बही एवं हस्त पावती के नियमानुकूल संधारण नहीं किये जाने के संबंध में है। इस संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह उल्लेखित है कि पूर्व के वर्षाे में (प्रथम सौपने तक) हुए अंकेक्षण में कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी। इनके द्वारा उप समाहर्त्ता, राजस्व प्रमंडल, पूर्णिया के लेखा 04/2003-03/2004 की लेखा परीक्षा से संबंधित निरीक्षण प्रतिवेदन संख्या-47/2004-05 की प्रति संलग्न की गयी है, जिसमें रोकड़बही एवं हस्तपावती रसीद का संधारण एवं उपयोग वित्तीय नियमों के अनुकूल नहीं किये जाने का उल्लेख है। साथ हीं श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह, उप समाहर्त्ता, राजस्व प्रमंडल, कोशी के जाँच प्रतिवेदन में भी अभिलेखों के संधारण के संबंध में अनियमितता होने का स्पष्ट उल्लेख है।
आरोपी पदाधिकारी का यह कथन कि पूर्व के अंकेक्षण में अनियमितता नहीं पायी गयी थी, किसी अनियमितता को खारिज करने हेतु स्वीकार योग्य नहीं है।
समीक्षा आरोप-02 ः- वर्णित आरोप अग्रिम देने एवं बिना समीक्षोपरान्त पुनः अग्रिम निर्गत करने से संबंधित है। अग्रिम की राशि प्रमंडल एवं अंचल के रोकड़बही में मौजूद नहीं होने संबंधी तथ्य आरोप में निहित है। साथ ही रू० 24,76,421.00 प्रमंडल द्वारा हस्तपावती पर अंचल कार्यालय को उपलब्ध कराये जाने एवं अंचलीय रोकड़बही में अंकित नहीं होने के क्रम में अस्वीकार करने के कारण हुए गबन से संबंधित भी है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा पूर्व की प्रचलित प्रक्रिया का उदाहरण दिया गया है। इनके द्वारा अस्थायी अग्रिम वेतनादि के लिए दिये जाने एवं कर्मियों का राजस्व संग्रह कार्य लंबित रहने पर वेतन भुगतान नहीं होने के कारण समायोजन संभव नहीं होने की जानकारी दी गई है। साथ ही अंकेक्षण में कोई अनियमितता नहीं पाये जाने का उल्लेख है। अंचल स्तर पर रोकड़बही संधारित नहीं होने एवं अंचल स्तर पर लिपा पोती का भी उल्लेख किया गया है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी पदाधिकारी का यह कथन कि राजस्व वसूली हित में राजस्व संग्रहण कार्य लंबित रहने वाले कर्मियों का वेतन लंबित रहने के कारण अथवा पूर्व से प्रचलित प्रक्रिया के कारण उनके द्वारा बिना समायोजन के अग्रिम किया गया, अस्वीकारणीय है। वित्तीय प्रावधानों का अनुपालन अनिवार्य है। श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह के जाँच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट तौर पर प्रदर्शित होता है कि इनके कार्याकाल में कुल रू० 5,40,41,064.00 का अग्रिम दिया गया था, जिसमें से रू० 4,54,35,530.00 हस्तपावती से दिया गया। अवशेष रू० 25,61,498.00 का अग्रिम रोकड़बही में अंकित है, परन्तु हस्तपावती अप्राप्त है। इसी प्रकार रू० 60,44,035.00 के अग्रिम को अंचलाधिकारियों द्वारा रोकड़बही में प्रविष्ट नहीं लिया है, मतलब अस्वीकार किया गया है। इस संबंध में तत्कालीन उपसमाहर्त्ता के स्तर से लेखा-जोखा कर सत्यापन कर लेना आवश्यक बताया गया है। इसके अतिरिक्त उल्लेख है कि अंचल में रू० 14,32,397.00 का अग्रिम अंचल में पाया गया, जिसका उल्लेख प्रमंडल में नहीं है। उक्त राशि का उल्लेख एफ0आई0आर0 में भी है ।
अंकेक्षण प्रतिवेदन में बिना अग्रिम के समायोजन के अग्रिम देने एवं प्रमंडल से हस्तपावती के माध्यम से अंचल को दिये गये अग्रिम को रू० 24,76,421.00 को अंकित नहीं रहने का उल्लेख है। अंचल द्वारा अस्वीकार किये जाने के क्रम में इसे गबन बताया गया है। साथ ही कसबा एवं मुरलीगंज का रोकड़बही रद्दी होने के कारण इसके सम्मिलित नहीं होने संबंधी तथा अंकित है।
संभवतः इसी कारण श्री देवेन्द्र प्रसाद सिंह एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन में प्रमंडल द्वारा दिये गये एवं अंचल के रोकड़बही में अंकित नहीं रहने वाली राशि में अंतर है। स्पष्ट होता है कि इस मामले से वित्तीय प्रावधानों का अनुपालन नहीं हुआ है। समीक्षा आरोप- 03, 04 एवं 09 :- रुपये 1,40,74,463.00 के गबन संबंधी आरोप सं॰-04 के संदर्भ में F.I.R. दर्ज रहने के फलस्वरूप मामला न्यायालीय होने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गयी है। उक्त से स्पष्ट होता है कि आरोप सं॰-03 एवं आरोप सं॰-09 दोनों से संबंधित राशि F.I.R. से संबंधित आरोप सं॰-4 के F.I.R. की राशि में शामिल है, जिससे उक्त आरोपों में अनियमितता परिलक्षित होती है।
समीक्षा आरोप- 05 :- दिनांक 31.03.2003 को कुल अन्तशेष की राशि रू0 1,29,24,184.44 (एक करोड़ उन्नतिस लाख चौबीस हजार एक सौ चौरासी रू० चौवालीस पैसे) था तथा दिनांक 29.04.2003 को अंतशेष के रूप में 83,38,955.44 रू0 नये उपसमाहर्त्ता द्वारा ग्रहण किया गया जिसमें अंचल पदाधिकारियों के पास अग्रिम की राशि कुल 75,03,708. 28 रू० तथा कर्मचारी के पास अग्रिम 87,542.00 रू० शामिल है। दिनांक 07.04.2003 को लेखा का सामन्जस्य रुपये 1,45,91,294.00 के अग्रिम का समायोजन लूज ए-रौल के माध्यम से किया गया दर्शाया गया, परन्तु लेखा परीक्षा को इन समायोजनाें के लिए किये गये भुगतान से संबंधित मूल ए-रौल/प्रमाणक नहीं दिखाया गया। समायोजन से संबंधित अतिआवश्यक कागजातों को लापरवाही से संधारण के लिए दोषी है।
समीक्षा आरोप- 07 ः- जब दिनांक-07.04.2003 को विभिन्न अंचलाधिकारियों के यहाँ लंबित अग्रिम मे से 145,91,294,00 (एक करोड़ पैतालिस लाख एकानवे हजार दो सौ चौरानवे रू०) के अग्रिम का समायोजन लूज एरौल के माध्यम से किया गया तो इससे संबंधित सभी कागजातों को सही ढंग से संधारित कर दिनांक 29.04.2003 को नये उपसमाहर्त्ता के प्रभार के समय ही दे देना चाहिए था, परन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा ऐसा नही किया गया, जो पूर्ण रूप से आरोपित पदाधिकारी के लापरवाही को दर्शाता है। अतः आरोपी पदाधिकारी बिना प्रमाणक के उक्त राशि का समायोजन के लिए दोषी है।
समीक्षा आरोप- 09 :- रुपये 1,40,74,463.00 के गबन संबंधी आरोप सं॰-04 के संदर्भ में F.I.R. दर्ज रहने के फलस्वरूप मामला न्यायालीय होने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गयी है। उक्त से स्पष्ट होता10 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 है कि आरोप सं॰-03 एवं आरोप सं॰-09 दोनों से संबंधित राशि F.I.R. से संबंधित आरोप सं॰-4 के F.I.R. की राशि में शामिल है, जिससे उक्त आरोपों में अनियमितता परिलक्षित होती है।
समीक्षा आरोप- 10 :- रोकड़पाल द्वारा विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन करते हुए कर्त्तव्य का निर्वहन नहीं किया जा रहा था। इस संबंध में इनके विरूद्ध कार्रवाई अपेक्षित थी, परन्तु आरोपी पदाधिकारी खुद ही अनभिज्ञ बने रहे, जिसके कारण इनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अतः इस आरोप के लिए आरोपी पदाधिकारी दोषी है।
निष्कर्ष :- उपरोक्त समीक्षा से यह स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका में आरोपित द्वारा उन्हीं तथ्यों/अभिलेखों का उल्लेख किया गया है, जो आरोपित पदाधिकारी के द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के अभ्यावेदन में तथा संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित बचाव-बयान में दिया गया था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोपों के अप्रमाणित करने के समर्थन में कोई नया तथ्य/अभिलेख समर्पित नहीं किये जाने से आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका विचार करने योग्य नहीं है। अतएव श्री शम्भु शरण सिन्हा, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता (प्रभारी उपसमाहर्ता सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता) के विरूद्ध गठित आरोप सं॰-01, 02, 03, 04, 05, 07, 09 एवं 10 यथावत् प्रमाणित होते है। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री शंभु शरण सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-238 दिनांक 08.02.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" को यथावत रखने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री शंभु शरण सिन्हा (आई0डी0-3192) तत्कालीन सहायक अभियंता (प्रभारी समाहर्त्ता) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-238 दिनांक 08.02.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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21 मार्च 2023
सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-01/2016/473--श्री अनिल कुमार शर्मा (आई0डी0-3301) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध चाट भूमि बन्दोबस्ती नियमावली, 2007 के विरूद्ध चाटभूमि बन्दोबस्ती की अनुशंसा करने एवं अनियमित रूप से 2002-03 से 2009-10 तक का रसीद काटने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-325 दिनांक 22.02.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप -
(1) बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली, 2007 दिनांक 05.07.2007 से दिनांक 12.07.2010 तक लागू था। इस नियमावली के प्रावधानो के विरूद्ध अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम, पटना के पत्रांक-139 दिनांक 28.06.2009 द्वारा व्यक्ति विशेष को अनियमित रूप से चाट बन्दोबस्ती करने की अनुशंसा कार्यपालक अभियंता से की गई एवं अनियमित रूप से श्री सत्यनारायण शर्मा के नाम चाट बन्दोबस्ती के लिए वर्ष 2002-2003 से 2009-2010 के लिए रसीद काटा गया जिसके लिए दोषी है।
(2) बिहार नहर चाट/भूमि नियमावली 2010 दिनांक 13.07.2010 से प्रभावी था, परन्तु इसके प्रावधान के विरूद्ध अवैध बन्दोबस्ती धारी श्री सत्यनारायण शर्मा को वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के लिए दिनांक 02.02.2012 को अनियमित रूप से रसीद काटा गया जिसके लिए दोषी है।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में अभियंता प्रमुख -सह- संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-93/सि0, दिनांक 09.05.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें आरोप सं0-1 को अप्रमाणित एवं आरोप सं0-2 को अंशतः प्रमाणित माना गया है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप सं0-01 से संदर्भित संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए निम्न असहमति के बिन्दु निर्धारित किया गया - असहमति के बिन्दु - श्री सत्यनारायण शर्मा के चाट बन्दोबस्ती आवेदन पर कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल द्वारा प्रतिवेदन की मांग किए जाने पर श्री शर्मा के पत्रांक-139 दिनांक 28.06.2009 से श्री शर्मा के नाम चाट बन्दोस्ती पत्र पत्रांक-834 दिनांक 07.07.2009 निर्गत किया गया जबकि नहर चाट बन्दोबस्ती नियमावली, 2007 के कंडिका-2 के अनुसार चाट बन्दोबस्ती खुली निलामी से किया जाना है। साथ ही कंडिका-3 के अनुसार चाट बन्दोबस्ती मात्र 09 माह के लिए किया जाना है। जबकि इनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के आदेश को विधिसम्मत नहीं मानते हुए श्री शर्मा के साथ वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक बन्दोबस्ती अभिलेख हस्ताक्षरित करते हुए उक्त अवधि का रसीद काटा गया है। इस प्रकार इनके विरूद्ध नहर चाट बन्दोबस्ती नियमावली, 2007 के कंडिका-2 एवं 3 का उल्लंघन करते हुए किसी व्यक्ति विशेष को अनुशंसा करने एवं अनियमित रूप से वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक रसीद काटने का मामला बनता है। उक्त असहमति के बिन्दु एवं आरोप सं0-2 के प्रमाणित होने पर विभागीय पत्रांक-1848 दिनांक 12.10.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत/असहमत होने की स्थिति में द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री अनिल कुमार शर्मा द्वारा अपने पत्रांक-530 दिनांक 02.11.2017 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जवाब की तकनकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई।11 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 विभागीय समीक्षा-बिहार नहर चाट बन्दोस्ती नियमावली 2007 एवं 2010 प्रभावी रहने के बावजूद अनुपालन बगैर सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम अन्तर्गत पुराना रेवा जलवाहा के प्लॉट नं0-226 का वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक रसीद काटे जाने की अनियमितता मामले में की गई कार्रवाई के क्रम में श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया जिसमें उन्होंने अपने विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री अनिल कुमार शर्मा द्वारा कार्यपालक अभियंता, खगौल का पत्रांक-834 दिनांक 07.07.2009 एवं विभागीय पत्रांक-548 दिनांक 06.06.2008 जिसके अनुसार वर्ष 2007-08 में बन्दोबस्ती प्राप्तकर्त्ता को वर्ष 2008-09 में भी बन्दोबस्ती किया जाना है में निहित निदेशों के अनुसार वर्ष 2009-10 की बन्दोबस्ती एवं अनधिकृत रूप से प्रयोग की जा रही चाट भूमि के लिए वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक के लिए रसीद काटा गया एवं प्राप्ति राशि सरकारी खजाने में जमा की गई। साथ ही कहना है कि विक्रम जैसे छोटे जगह में इंटरनेट की सुविधा नहीं होने से चाट नियमावली 2007 की जानकारी नहीं थी एवं कार्यपालक अभियंता के पृच्छा के क्रम में श्री सत्यनारायण शर्मा के अभ्यावेदन पर मांग कर स्थल स्थिति देते हुए इन्हें बन्दोबस्ती हेतु अनुशंसा की गई थी। बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली, 2007 दिनांक 05.07.2007 से प्रभावी है। श्री सत्यनारायण शर्मा, भूतपूर्व सैनिक के चाट बन्दोबस्ती संबंधी अभ्यावेदन दिनांक 02.05.2009 के संबंध में आरोपित पदाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की गई। आरोपित पदाधिकारी श्री शर्मा ने अधीनस्थ पदाधिकारियों से स्थल जाँच कराकर पुराना रेवा जलवाहा के प्लॉट नं0-226 में 16.48 डि0 भूखंड पर अवैध कब्जा होने एवं शेष 89 डि0 भूखंड श्री सत्यनारायण शर्मा को बन्दोबस्त किए जाने की अनुशंसा अपने पत्रांक-139 दिनांक 28.06.2009 से की गई। कार्यपालक अभियंता, खगौल द्वारा आरोपित पदाधिकारी के उक्त पत्र को प्रसंगित करते हुए निम्न नियमाधीन शर्त के तहत अन्य के साथ श्री शर्मा के पक्ष में बन्दोबस्ती आदेश पत्रांक-834 दिनांक 07.07.2009 निर्गत किया गया। कंडिका-2 - संबंधित अवर प्रमंडल पदाधिकारी को निदेश दिया जाता है कि उक्त बन्दोबस्त जमीन का रसीद काटकर सरकारी जमीन का राजस्व जमा कर दें। कंडिका-3 - चाट नियमावली प्रक्रिया को अक्षरशः पालन करना सुनिश्चित किया जाए। कंडिका-4 - संबंधित चाट भूमि का बकाया लंबित लगान भी जमा करना सुनिश्चित किया जाए। बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2007 के कंडिका-2(1) के अनुसार कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रकाशित निलामी सूचना के आलोक में खुली बोली के आधार पर बन्दोबस्ती किया जाना है। कार्यपालक अभियंता, खगौल के उक्त कार्यालय आदेश कंडिका-3 में चाट नियमावली प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने का निदेश है। स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा बन्दोबस्ती प्रक्रिया 2(1) का उल्लंघन करते हुए बन्दोबस्ती प्रक्रिया का अनुपालन करनेा निदेश दिया गया है। आरोपित पदाधिकारी श्री शर्मा द्वारा उक्त त्रुटिपूर्ण आदेश पर पुनर्विचार हेतु कार्यपालक अभियंता से अनुरोध किया जाना चाहिए था जो उनके द्वारा किया गया परिलक्षित नहीं होता है। आरोपित पदाधिकारी के जुलाई 2007 में निर्गत नियमावली दो वर्ष बाद अगस्त 2009 तक के अनभिज्ञ रहने का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। इसी प्रकार नियमावली कंडिका-3 के अनुसार बन्दोबस्ती प्रत्येक वर्ष 09 माह के लिए किया जाना है। कार्यपालक अभियंता के कार्यालय आदेश के कंडिका-4 में बकाया लंबित लगान जमा करने का निदेश है। परन्तु स्पष्ट नहीं किया गया है कि बिना बन्दोबस्ती के बकाया लगान किस बन्दोबस्तधारी से किया जाना है। उक्त अस्पष्ट निदेश के क्रम में आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिना स्थिति स्पष्ट कराए ही श्री सत्यनारायण शर्मा से बकाया वष्र्ज्ञ 2002-03 से 2008-09 एवं चालू वर्ष 2009-10 तक कुल रू0 5696.00 का रसीद काटकर राशि जमा करा दी गई है। उपरोक्त से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंता के कार्यालय आदेश-834 दिनांक 07.07.2009 में अंकित नियमाधीन शर्त का गंभीरता से नहीं लेते हुए उनके त्रुटिपूर्ण आदेश को बिना स्पष्ट कराए वर्ष 2002-03 से वर्ष 2009-10 तक श्री सत्यनारायण शर्मा के पक्ष में बन्दोबस्ती करते हुए रू0 5696.00 की रसीद काटकर प्राप्त राशि जमा कराई गई। इस प्रकार कार्यपालक अभियंता, खगौल त्रुटिपूर्ण आदेश का अनुपालन किए जाने से बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2007 का प्रावधानों का उल्लंघन आरोपित पदाधिकारी द्वारा किया जाना स्पष्ट होता है। यद्यपि इससे सरकारी राजस्व की प्राप्ति ही हुई है। निष्कर्ष :- उपरोक्त वर्णित तथ्यों बचाव-बयान के आलोक में श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम द्वारा बिहार नहर चाट/भूमि बन्दोबस्त नियमावली, 2007 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल के त्रुटिपूर्ण/अस्पष्ट आदेश का अनुपालन कर अनियमित तरीके से श्री सत्यनारायण शर्मा को बन्दोबस्ती हेतु अनुशंसा करने एवं वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक रू0 5696.00 का रसीद काटे जाने का मामला प्रमाणित है। हालांकि उनके उक्त कृत्य से सरकारी राशि की क्षति नहीं होना एवं बन्दोबस्त सरकारी चाट भूमि पर अवैध कब्जा नहीं होना परिलक्षित होता है। आरोप सं0-2 - प्रस्तुत आरोप बिहार नहर चाट बन्दोबस्त नियमावली, 2010 के प्रावधान के विरूद्ध अवैध बन्दोबस्तधारी श्री सत्यनारायण शर्मा के पक्ष में वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 को अनियमित रूप से रसीद काटे जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय बचाव बयान में मुख्य रूप से नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2010 की जानकारी नहीं होने, उच्चाधिकारियों द्वारा इसे निदेशानुसार प्रचालित नहीं किए जाने एवं कार्यपलाक अभियंता, खगौल के पत्रांक-183 दिनांक 28.01.2011 में निहित निदेश के अनुपालन में वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 की बन्दोबस्ती किए जाने को12 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही नियमावली की जानकारी प्रथमवार वर्ष 2012 में प्रकाशित निलामी सूचना से होने को प्रतिवेदित किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य के रूप में संलग्न पत्रांक-183 दिनांक 28.01.2011 से बन्दोबस्त नियमावली, 2007 में संशोधन की कार्रवाई स्थगित रहने तथा वर्ष 2007-2008 एवं 2008-09 के बन्दोबस्तधारी के पक्ष में बन्दोबस्ती कायम रहना कार्यपालक अभियंता द्वारा अंकित किया जाना स्पष्ट होता है। उक्त पत्र को आधार बनाकर आरोपित पदाधिकारी द्वारा श्री सत्यनारायण शर्मा के पक्ष में वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के लिए बन्दोबस्ती करते हुए रू0 1424/- का रसीद काटकर राजस्व जमा कराया गया है। जबकि नहर चाट/भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2010 दिनांक 13.07.2010 से प्रभावी है एवं निलामी की सूचना प्रकाशित करते हुए एक समिति द्वारा लॉटरी के आधार पर 03 वर्षों के लिए बन्दोबस्ती किया जाना है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में कार्यपालक अभियंता, खगौल के उक्त गलत संसूचन एवं दोषपूर्ण आदेश का अनुपालन आरोपित पदाधिकारी द्वारा पुनर्विचार हेतु बिना उपस्थापित किए वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 की बन्दोबस्ती किया जाना स्पष्टतः बन्दोबस्ती नियमावली के प्रावधानों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। यद्यपि इनके उक्त कृत्य से सरकारी राजस्व की क्षति का मामला नहीं बनता है। निष्कर्ष :- उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम के विरूद्ध बिहार चाट/भूमि बन्दोबस्त नियमावली 2010 के प्रावधानों के विपरीत कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल के निदेशानुसार वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के लिए श्री सत्यनारायण शर्मा, भू0पू0 सैनिक के पक्ष में बंदोबस्ती किए जाने का आरोप प्रमाणित होता है। हालांकि उनके उक्त कृत्य से सरकारी राजस्व की क्षति होने का मामला परिलक्षित नहीं होता है। इसी क्रम में श्री अनिल कुमार शर्मा (आई0डी0-3301), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम दिनांक 30.04.2018 को सेवानिवृत होने के उपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-1723 दिनांक 08.08.2018 द्वारा सम्परिवर्तित किया गया।
श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव के उक्त तकनीकी समीक्षोपरांत स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1208 दिनांक 27.05.2022 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया गया - "05% (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री शर्मा द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-5ए0/2022 दिनांक 11.07.2022 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया है। जिसका बिन्दुवार समीक्षा की गई।
श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि विभाग द्वारा निर्गत दण्डादेश के निष्कर्ष (आरोप सं0-1 एवं 2) में किसी भी सरकारी राजस्व की राशि की क्षति नहीं होने का उल्लेख है तो फिर पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए काटा जाना कानून अनुचित दण्ड दिया गया है। साथ ही आरोप सं०-1 के संबंध में श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी का कहना है कि जब बिहार नहर चाट भूमि बंदोबस्ती नियमावली, 2007 को विभागीय पत्रांक-169 दिनांक 26.03.2009 द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया तो निष्प्रभावी हो चुके नियम का उल्लंघन का आरोप इनके विरूद्ध लगाना गलत था। श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-2 के संबंध में प्रतिवेदित किया है कि कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना ने अपने सभी अधीनस्थ अवर प्रमंडल पदाधिकारी को कार्यालय आदेश सं0-183 दिनांक 28.01.2011 द्वारा दिग्भ्रमित एवं Misguide किया गया।
आरोपी पदाधिकारी श्री शर्मा द्वारा आरोप सं0-1 के संबंध में प्रतिवेदित कथन से सहमत नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि विभागीय पत्रांक-169 दिनांक 26.03.2009 में स्पष्ट उल्लेख है कि -
"बिहार नहर चाट भूमि बंदोबस्ती नियमावली, 2007 में संशोधन से संबंधित कार्रवाई अभी पूर्ण नहीं हो सकी है तथा इसमें अभी भी कुछ समय लगने की संभावना है। अतः पूर्व में बंदोबस्तदारों के साथ ही पूर्व दरों एवं शर्त्तों पर ही बंदोबस्ती वर्ष 2009-10 के लिए भी कायम रखी जाय। ताकि विलंब की इस स्थिति में सरकार को राजस्व की हानि न होने पाय। अर्थात बिहार नहर चाट भूमि बन्दोबस्ती से संबंधित नये नियमावली निर्गत होने तक पूर्व के नियमावली यानि बिहार नहर चाट भूमि बन्दोबस्ती नियमावली 2007 के अनुसार ही बन्दोबस्ती करने हेतु उक्त विभागीय पत्र द्वारा संसूचित किया गया है।
प्रस्तुत मामले में नहर चाट/भूमि बंदोबस्ती नियमावली के कंडिका 2 के अनुसार पात्रता प्राप्त व्यक्तियों को खुली बोली के आधार पर निलामी द्वारा नहर चाट बंदोबस्ती किया जाना है। आरोपी पदाधिकारी श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-139 दिनांक 28.06.2009 से नहर चाट बंदोबस्ती हेतु आवेदक श्री सत्यनारायण शर्मा से प्राप्त आवेदन को अनुशंसा करते हुए कार्यपालक अभियंता को भेजा गया तथा कार्यपालक अभियंता द्वारा श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा के आलोक में उक्त नियमावली, 2007 के कंडिका-2 में प्रावधानित नियम के विरूद्ध नहर चाट बंदोबस्ती किया गया। आरोपी पदाधिकारी श्री शर्मा द्वारा कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-834 दिनांक 07.07.2009 के कंडिका-4 (संबंधित चाट भूमि का बकाया लंबित लगान भी जमा कराना सुनिश्चित किया जाय) के क्रम में बंदोबस्तधारी श्री सत्यनारायण शर्मा को वर्ष 2002-03 से वर्ष 2009-10 तक बंदोबस्ती कागजात पर हस्ताक्षर करते हुए उक्त वर्षों का रसीद13 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 काटा गया जबकि उक्त नियमावली 2007 के कंडिका-3 के अनुसार मात्र 9 माह (25 जून से 25 मार्च तक) के लिए बंदोबस्ती किये जाने का प्रावधान है।
अतः उक्त परिप्रेक्ष्य में आरोपी पर उक्त नियमावली 2007 के कंडिका 2 एवं 3 का उल्लंघन करते हुए किसी व्यक्ति विशेष को अनुशंसा करने एवं वर्ष 2002-03 से वर्ष 2009-10 तक रसीद काटने का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा बंदोबस्तधारी श्री सत्यनारायण शर्मा को वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के लिए दिनांक 02.02.2012 को अनियमित रूप से कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-183 दिनांक 28.01.2011 के आलोक में (जो नियम के विपरीत आदेश था) रसीद काटा गया जिसका अनुपालन आरोपी पदाधिकारी को नहीं करना चाहिए था जबकि बिहार नहर चाट/भूमि बंदोबस्ती नियमावली, 2010 दिनांक 13.07.2010 से ही प्रभावी था।
अतः आरोपी श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंता के नियम विपरीत दिया गया आदेश का अनुपालन करने के कारण आरोप सं0-2 प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपी पदाधिकारी पर आरोप सं0 (1) एवं (2) अन्तर्गत सरकारी राजस्व की क्षति का मामला नहीं बनता प्रतीत होता है।
अतः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में श्री शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा दिया गया पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
अतएव श्री अनिल कुमार शर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को सक्षम प्राधिकार स्तर पर समीक्षोपरांत अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री अनिल कुमार शर्मा (आई0डी0-3301) तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, विक्रम सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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18 मार्च 2023
सं0 22/नि0सि0(मोति0)08-03/2013(अंश-1)-462--मो0 सादिक हुसैन (आई0डी0-5135), तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामाग्री का उपयोग करने संबंधी विाीय अनियमितता एवं जानबुझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग करने संबंधी आरोेप लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-133 दिनांक 24.01.2014 द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-293, दिनांक 12.03.2014 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकार सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य मे एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है। तकनीकी परीक्षण कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। फलस्वरूप सिर्फ सामग्री ढुलाई मद में 24.65 करोड़ का अनियमित भुगतान हुआ है। जो एक गंभीर विाीय अनियमितता है एवं जानबुझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग किया गया परिलक्षित होता है जिसके लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) द्वारा मो0 सादिक हुसैन के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति मो0 सादिक हुसैन को उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक-2407 दिनांक 09.11.2016 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। उक्त आलोक में मो0 सादिक हुसैन से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-1925 दिनांक 02.11.2017 द्वारा ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध मो0 सादिक हुसैन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-2406/2018 दायर किया गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 06.05.2019 को पारित न्याय निर्णय का मुख्य अंश निम्नवत है :-
3. Apart from the petitioner, another person viz. Dinesh Kumar Chaudhary was also subjected to the same departmental proceeding who was served with a penalty of reversion from the post of Chief Engineer to Superintending Engineer. A Bench of this Court in case of Dinesh Kumar Chaudhary vs. State of Bihar and Ors. (C.W.J.C. No. 16258 of 2017) by order dated 04.12.2018 found that the decision of the disciplinary authority could be faulted on the sole ground of the enquiry officer not being produced for him to be cross-examined. Relying upon Roop Singh Vs. Punjab National Bank & Ors., reported in (2009) 2 SCC 570, the Bench held that the enquiry proceedings and the report cannot stand the scrutiny of fairness as the order14 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 of punishment in that case and similarly in the present case, is based upon the report of the enquiry officer and the concerned employee was not given an opportunity to cross-examine him.
4. Under the aforesaid circumstances, in the aforesaid case viz. Dinesh Kumar Chaudhary vs. State of Bihar and Ors. (C.W.J.C. No. 16258 of 2017) the enquiry report as well as the order of punishment were set aside and the matter was remanded to the enquiry officer to conduct a de novo enquiry as per the law which was explained in the order.
5. The case of the petitioner, though the nature of punishment given to him is harsher than the employee whose case has been referred to above, is identical and similar. The same enquiry officer who reported against the petitioner and which report was the basis of the disciplinary authority passing an order of punishment of dismissal was not produced for him to be cross-examined by the petitioner.
6. For the aforesaid reasons, the enquiry report as communicated vide Letter No. 2407 dated 09.11.2016 and the order of dismissal from service vide Notification No. 1925 dated 02.11.2017 are set aside.
7. The case is remitted to the enquiry officer for holding a fresh enquiry, providing an opportunity to the petitioner to question/cross-examine the maker of the enquiry report, if so advised, and then submit a report accordingly.
8. Since it would be a de novo enquiry, it would be open to the petitioner to raise other points also which shall be considered in correct perspective.
9. Needless to state that since the order of dismissal has been set aside, necessary consequential order shall also be passed in the meanwhile, as has been passed with respect to other employee who also was subjected to the punishment. 10. With the aforesaid direction/observation, the writ petition is disposed of. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित उक्त न्यायादेश के विरूद्ध विभाग द्वारा एल0पी0ए0 सं0-1161/2019 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम मो0 सादिक हुसैन) दायर किया गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 12.12.2022 को पारित आदेश का मुख्य अंश निम्नवत है :-
"In the present case the respondent has not yet attained the age of superannuation and retirement from service therefore, the Disciplinary Authority is hereby directed to examine as to whether the respondent should be reinstated or placed under suspension. Such a decision shall be taken within a period of one month from the date of receipt of this order in the light of the observation made by the Apex Court cited supra. In the light of the aforesaid judicial pronouncements, the Disciplinary Authority is hereby directed to conclude the departmental inquiry from the defective stage and complete the inquiry within a period of three months from the date of receipt of this order. The intervening period from the date of punishment till passing of afresh order in the disciplinary proceedings be regulated within one month from the date of afresh order to be passed in the disciplinary proceedings, in accordance with relevant provisions of Bihar Service Code. Accordingly, writ petition stands disposed of. Pending I.As., if any, stands disposed of." एल0पी0ए0 सं0-1161/2019 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम मो0 सादिक हुसैन) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 12.12.2022 को पारित आदेश के पश्चात मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक 20.11.2018 में वर्णित प्रावधान के आलोक में वित्त विभाग, बिहार, पटना; सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना एवं विधि विभाग, बिहार, पटना के परामर्श/सहमति के उपरांत उक्त न्यायादेश का अनुपालन किये जाने के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के विचारार्थ मामले को रखा गया।
विधि विभाग द्वारा मुख्य सचिव, बिहार कीे अध्यक्षता में गठित समिति की दिनांक 13.03.2023 को आयोजित बैठक की कार्यवाही ज्ञापांक सं0-2068 दिनांक 14.03.2023 द्वारा एल0पी0ए0 सं0-1161 /2019 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम मो015 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 सादिक हुसैन) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-12.12.2022 को पारित न्यायादेश का अनुपालन किये जाने को दृष्टिपथ में रखते हुए समिति द्वारा सम्यक् विचारोपरांत निम्न अनुशंसा की गई :-
(i) मो0 सादिक हुसैन के विरूद्ध ''सेवा से बर्खास्तगी'' संबंधी प्रशासी विभाग के दंडादेश एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन को निरस्त कर उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को सुनवाई हेतु संपूर्ण मामले को Defective Stage से पूर्ण किये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी (मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) को Remand back किया जाय।
(ii) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) मे वर्णित प्रावधान के आलोक में बर्खास्तगी की तिथि से निलंबित समझे जाएगे एवं अगले आदेश तक निलंबनाधीन रहेगे तथा निलंबन अवधि के लिए नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जाय।
अतएव वर्णित स्थिति में एल0पी0ए0 संख्या-1161/2019 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम मो0 सादिक हुसैन) में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक-12.12.2022 को पारित न्यायादेश के अनुपालन हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की दिनांक 13.03.2023 को आयोजित बैठक की कार्रवाई की अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित निर्णय लिया जाता है :-
(i) मो0 सादिक हुसैन (आई0डी0-5135), तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-1925, दिनाक-02.11.2017 द्वारा ''सेवा से बर्खास्तगी'' के अधिरोपित दण्ड एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन को निरस्त करते हुए उनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई के निमित्त संपूर्ण मामले को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में अंकित Defective stage से पूर्ण किये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी, (मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) को Remand Back किया जाता है। (ii) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 को नियम-9(5) में वर्णित प्रावधान के आलोक में मो0 सादिक हुसैन, सेवा से बर्खास्तगी की तिथि 02.11.2017 से निलंबित समझे जायेंगे एवं अगले आदेश तक निलंबनाधीन रहेंगे। उक्त निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय पूर्ववत (अधीक्षण अभियंता का कार्यालय, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी) निर्धारित किया जाता है।
(iii) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के तहत निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
(iv) मो0 सादिक हुसैन के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही में पूर्व से नामित प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के सम्प्रति सेवानिवृत हो जाने के कारण श्री प्रशांत कुमार, (आई०डी०-5082) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार), योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल-06, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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16 मार्च 2023
सं0 22/नि0सि0(मुक0)सम0-19-09/2021/452--श्री संजय कुमार सुमन (आई॰डी॰-5089), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल, मनेर (सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल के अन्तर्गत) के विरूद्ध बाढ़ संघर्षात्मक कार्य संबंधी विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने, संवेदनशील कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के बेतार संदेश के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1614 दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1679 दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1460 दिनांक 12.07.2019 द्वारा "08 (आठ) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।
उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री संजय कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.-2975/2021 दायर किया गया। जिसमें दिनांक-01.07.2021 को न्याय-निर्णय पारित किया गया जिसका कार्यकारी अंश (Operative Part) निम्नवत् है -
"The matter is remanded back to the respondants to examine the witnessess, if any, in support of the charges and thereafter complete the enquiry on the basis of evidence and record finding after opportunity to the petitioner to cross examine the witnessess and hearing the petitioner." उक्त न्याय-निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1248 दिनांक 05.10.2021 द्वारा पूर्व के दण्ड को निरस्त करते हुए श्री संजय कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर के विरूद्ध A fresh enquiry शुरू की गयी।16 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को निम्नरूपेण 03 (तीन) भागों में विभक्त किया गया- पहला भाग :- कमला बलान दायाँ तटबन्ध के टूटान स्थल 73.50 कि॰मी॰ एवं 74.60 कि॰मी॰ पर कट एण्ड को होल्ड करने हेतु आपको आवश्यक निदेश मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के द्वारा दिया गया था, किन्तु आपके द्वारा निदेशों की अनदेखी की गयी। दूसरा भाग :- आप दिनांक-13.08.2017 से ही अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित थे। तीसरा भाग ः- बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री और मानव बल की व्यवस्था नहीं की गयी थी। बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आपके द्वारा लापरवाही बरते जाने के कारण जान-माल की व्यापक क्षति हुयी। आपका यह —त्य संवेदनशील कार्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता का परिचायक है।
उपर्युक्त वर्णित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य गठित कर जाँच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया - पहला भाग :- कमला बलान दाँया तटबन्ध के टूटान स्थल 73.50 कि॰मी॰ एवं 74.60 कि॰मी॰ पर कट एण्ड को होल्ड करने हेतु मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के द्वारा दिये गये आवश्यक निदेशों का आरोपी पदाधिकारी श्री संजय कुमार सुमन द्वारा की गई अनदेखी से संबंधित आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। दूसरा भाग :- आरोप का यह भाग कि आप दिनांक-13.08.2017 से ही अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित थे ''प्रमाणित नहीं होता है''। तीसरा भाग ः- बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री और मानव बल की व्यवस्था नहीं की गयी थी। बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आपके द्वारा लापरवाही बरते जाने के कारण जान-माल की व्यापक क्षति हुयी। आपका यह कृत्य ''उच्चाधिकारियोें के निदेश की अवहेलना, संवेदनशील कार्याें के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचरिता का परिचायक है'', का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए श्री संजय कुमार सुमन से विभागीय पत्रांक-2899 दिनांक 30.12.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री सुमन द्वारा अपने पत्रांक-25 दिनांक 10.02.2023 द्वारा लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसमें श्री सुमन द्वारा निम्न बचाव बयान अंकित की गयी -
(1) मेरे विरूद्ध गठित आरोप विभागीय संकल्प संख्या-1679 दिनांक-29.09.2017 द्वारा निर्गत किया गया था, जिसमें आरोप पत्र प्रपत्र 'क' संलग्न किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय, पटना में मेरे द्वारा दायर CWJC-No-2975/2021 में पारित आदेश के आलोक में पुनः विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 दिनांक-05.01.2021 द्वारा मुझे पूर्व संसूचित दंड को निरस्त करते हुए Fresh Enquiry हेतु संचालन पदाधिकारी एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया । (2) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा नये सिरे से जाँच करने का आदेश दिया गया था। उक्त के आलोक में विभाग के स्तर से यह अपेक्षित था कि आरोप पत्र गठन नियमावली-2017 जो कि सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना सं0-15983 दिनांक-14.12.2017 द्वारा निर्गत है, के आलोक में आरोप पत्र का गठन करते हुए अग्रेतर कार्रवाई करते, परन्तु विभाग द्वारा पुनः उस आरोप पत्र प्रपत्र 'क' के आधार पर विभागीय कार्यवाही आरंभ की गयी एवं मेरे द्वारा समय-समय पर संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना बचाव बयान समर्पित किया जाता रहा। परन्तु मेरे द्वारा समर्पित साक्ष्य आधारित बचाव बयान पर बिना विचार किये ही संचालन पदाधिकारी द्वारा मुझपर आंशिक रूप से आरोप प्रमाणित होने का अभिमत दिया गया, जो नियमों के आलोक में उचित नहीं है ।
(3) संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष के कंडिका-1 में आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य देने से संबंधित विश्लेषण का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें उन्होंने अंकित किया है कि- "मुख्य अभियंता बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, कि0मी0 74.60 पर हुए टूटान के कट एण्ड को होल्ड करने के निदेश का केवल एन0आर0-56 दिनांक- 14.08.2017 में अंकित होने के अलावा कोई और अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। उक्त मौखिक आदेश की सम्पुष्टि करने/लेने हेतु किसी स्तर से कार्रवाई होने का कोई अभिलेख साक्ष्य सुनवाई के दौरान प्रस्तुत नहीं किया गया है।"
संचालन पदाधिकारी का यह मंतव्य कार्यस्थल की स्थिति उस (Force-Majeure) प्रा—तिक आपदा के आलोक में उचित नहीं है, क्योंकि बाढ़ की अवधि में दूरभाष/मोबाईल पर वरीय पदाधिकारियों से लिये गये निर्देश के आलोक में कार्रवाई की जाती है और उनसे मौखिक आदेश की सम्पुष्टि लिखित रूप से नहीं प्राप्त किया जाता है। इसकी सम्पुष्टि संचालन पदाधिकारी के विभागीय अभिलेखों की समीक्षा से भी की जा सकती है, जिसमें यह अंकित है कि, कमला बलान के टूटान स्थल कि०मी० 73.50 एवं कि०मी० 74.60 के कट एण्ड को होल्ड करने का निदेश श्री मिथिलेश कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता एवं श्री राजीव कुमार चौरसिया, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा को दिया गया था एवं यह भी अंकित है कि टूटान स्थल पर दिनांक-13.08.2017 को मुझे नहीं देखा गया। अर्थात् वह निर्देश कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को था न कि मुझे।
(4) जहाँ तक मुझे नहीं देखा गया का प्रश्न है, वह आरोप निराधार था, क्योंकि संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वयं अपने विश्लेषण में इस बात का उल्लेख किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी श्री संजय कुमार सुमन, सहायक अभियंता के17 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 द्वारा उपलब्ध कराये गये सरकारी मोबाईल के कॉल डिटेल के आधार पर यह पाया गया कि श्री सुमन अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित थे।
उक्त परिप्रेक्ष्य में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के कंडिका-1 कि संबंधित आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है, साक्ष्य एवं अभिलेख आधारित नहीं है।
(5) जहाँ तक निष्कर्ष के क्रमांक-3 का प्रश्न है, जो बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री एवं मानव बल से संबंधित है, में भी मेरे द्वारा समर्पित बयान एवं गवाहों के बयानों का अवलोकन करना चाहेंगे। साथ ही साथ, संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने विश्लेषण में यह अंकित किया है कि बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की सामग्रियों का भण्डारण मेरे द्वारा किया गया था, जिसकी सम्पुष्टि बेतार संवाद से होती है। संचालन पदाधिकारी का यह मंतव्य की बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में की गयी आलोच्य टूटान बिन्दुओं के कट इण्ड पर प्रश्नगत अवधि में कार्य की संवेदनशीलता के अनुरूप अपेक्षित मात्रा में कार्य नहीं कराया गया, कहा जाना भी साक्ष्य आधारित एवं स्थिति के अनुरूप नहीं है, क्योंकि मेरे द्वारा अपने बचाव बयान में स्थिति स्पष्ट की गयी थी, जिसमें यह बतलाया गया था कि अप्रत्याशित एवं अत्याधिक बाढ़ आने के कारण उत्पन्न परिस्थितिजन्य स्थिति के फलस्वरूप ऐसी दुविधा उत्पन्न हुई थी, जो कि मेरे वश में नहीं था। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल-2 द्वारा N.R-56 दिनांक-14.08.2017 के प्रेषित संवाद के क्रमांक-12, क्रमांक-14, क्रमांक-19 एवं क्रमांक-20 में अंकित संवेदकों द्वारा उल्लेखित प्रश्नगत टूटान स्थलों पर भी बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया था। (सुलभ प्रसंग हेतु छायाप्रति संलग्न, पृ0सं0-6 से 8)
(6) जहाँ तक श्री सत्यम सहाय, वरीय उप समाहर्ता, दरभंगा एवं तत्कालीन जिला पदाधिकारी, दरभंगा के पत्र का संदर्भ देते हुए यह कहा गया है कि अगर तटबंध की मरम्मति के समय स्थल पर पर्याप्त मात्रा में सामग्री एवं मानव बल उपलब्ध रहता तो उक्त स्थल को टूटने से बचाया जा सकता था, के संबंध में कहना है कि यह कहा जाना तकनीकी – ष्टिकोण से मान्य नहीं है, क्योंकि विभाग द्वारा निर्गत SOP के तहत सारी कार्रवाई की गयी थी, जिसकी सम्पुष्टि अभिलेखों से भी की जा सकती है। इस संबंध में मेरे द्वारा पूर्व में अपने पूरक बचाव बयान के कंडिका-5 में उल्लेखित किया है कि कमला बलान तटबंध के विभिन्न वि॰दू॰ पर आदेशानुसार सामग्रियों का भण्डारण एवं मानव बल की समुचित व्यवस्था किया गया था, तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया था। जिसमें मैंने यह भी तथ्य रखा था कि सामग्रियों का भण्डारण (E.C Bag, Geo Bag, N.C इत्यादि) की व्यवस्था का आदेश कार्यपालक अभियंता एवं उच्चाधिकारियों के निर्णयार्थ होता है, न कि मेरे (सहायक अभियंता के) आदेश पर (मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, ज०स०वि०, समस्तीपुर के पत्रांक-1684 दिनांक-14.07.2017) ।
आरोपित पदाधिकारी श्री सुमन द्वारा उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में उनके विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप को समाप्त करते हुए उन्हें आरोप मुक्त किये जाने हेतु अनुरोध किया गया।
श्री सुमन से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी जो निम्नवत है - आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन में यह उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय, पटना में उनके द्वारा दायर CWJC No. 2975/2021 में पारित आदेश के आलोक में मामले को नये सिरे से जाँच करने का आदेश पारित किया गया था। उक्त आदेश के आलोक में विभाग के स्तर से आरोप-पत्र का गठन सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या-15983 दिनांक-14.12.2017 के अनुपालन में नहीं किया गया है। श्री सुमन द्वारा इस संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है, जिससे श्री सुमन का यह कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। साथ हीं माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा दिनांक- 01.07.2021 को पारित आदेश में, आरोपों के संदर्भ में Witnessess का Examination तथा Cross Examination कर, Petitioner के पक्ष को सुनते हुए साक्ष्यों के आधार पर विभागीय कार्यवाही को पूर्ण किये जाने का निदेश है।
श्री सुमन द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में श्री सुमन द्वारा समय-समय पर समर्पित अपने बचाव-बयान के माध्यम से समुचित साक्ष्य/अभिलेख समर्पित कर दिया गया था, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा उन साक्ष्य आधारित बचाव-बयान पर बिना विचार किये आंशिक रूप से आरोप को प्रमाणित होने का अभिमत दिया गया, जो नियमों के आलोक में उचित नहीं है। श्री सुमन द्वारा अपने बचाव-बयान में उल्लेख किया गया है कि कमला बलान नदी के दायाँ तटबंध के कि॰मी॰ 73.50 एवं कि॰मी॰ 74.60 पर हुए टुटान के कट इण्ड को होल्ड करने का निदेश तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री मिथिलेश कुमार सिंह एवं तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, श्री राजीव कुमार चौरसिया को दिया गया था तथा दिनांक-13.08.2017 से श्री सुमन को टुटान स्थल पर (बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा) नहीं देखा गया है, का उल्लेख मुख्य अभियंता, समस्तीपुर के NR सं॰-56 में किया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि प्रस्तुत मामले में विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में दिनांक-12.03.2022 को हुए परीक्षण/प्रतिपरीक्षण के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के दिये गये बयान में यह उल्लेख है कि "उनके द्वारा श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को टूटान स्थल के उक्त बिन्दुओं के कट एण्ड को होल्ड करने के लिये मौखिक निदेश दिया गया था, परंतु उक्त निदेश का समसय अनुपालन नहीं किया गया। साथ ही दिनांक-25.06.2022 को विभागीय कार्यवाही के क्रम में प्रतिपरीक्षण के दौरान श्री राजीव कुमार चौरसिया, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा, द्वारा कहा गया है कि, S.O.P. के प्रावधन के अनुरूप Cut End Hold करने हेतु कार्रवाई की गई थी, किन्तु ग्रामीणों के अवरोध के कारण कार्य विलम्ब से किया जा सका।" आरोपित पदाधिकारी श्री सुमन द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाग द्वारा निर्गत SOP के तहत सारी कार्रवई की18 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 गई थी परन्तु अप्रत्याशित एवं अत्यधिक बाढ़ आने के कारण परिस्थिति उनके नियंत्रण में नहीं था। श्री सुमन द्वारा साक्ष्य स्वरूप समर्पित दैनिक प्रगति प्रतिवेदन के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि कमला बलान नदी के दायाँ बाँध के कि॰मी॰ 70.00 से कि॰मी॰ 75.00 के बीच बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराये गये हैं। परन्तु आलोच्य टुटान बिन्दु के कि॰मी॰ 73.50 एवं कि॰मी॰ 74.60 के सुरक्षा के निमित्त समुचित बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भण्डारण सहित मानव बल के उपलब्धता तथा युद्धस्तर पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराये जाने के कोई साक्ष्य आरोपित पदाधिकारी द्वारा संलग्न नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारी श्री सुमन द्वारा अपने लिखित अभ्यावेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कमला बलान नदी के तटबंध पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भण्डारण मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के निदेश के आलोक में किया गया था। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर द्वारा दिये गये उक्त निदेश के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि क्षेत्रीय अभियंताओं के द्वारा कमला बलान नदी के दायाँ तटबंध के कि॰मी॰ 70.00 से कि॰मी॰ 75.00 के बीच के भाग को अति संवेदनशील/अतिक्राम्य स्थल की श्रेणी में नहीं रखते हुए अल्प मात्रा में बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भण्डारण किया गया था।
मुख्य अभियंता के उक्त प्रतिवेदन में यह भी अंकित है कि जरूरत पड़ने पर आवश्यकतानुसार बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भण्डारण किया जा सकेगा। उक्त से स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर द्वारा स्थलीय स्थिति के आलोक में आवश्यकतानुसार बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भण्डारण हेतु क्षेत्रीय अभियंता को आदेश निर्गत है, जिसका अनुपालन नहीं किये जाने से प्रश्नगत बिन्दुओं पर टुटान हुआ, जो उच्चाधिकारियों के निदेश की अवहेलना, बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भण्डारण सहित मानव बल के समुचित प्रबंधन के अभाव को परिलक्षित करने के साथ-साथ संवेदनशील कार्याें के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। उक्त की पुष्टि प्रस्तुत मामले में गवाह श्री सत्यम सहाय, वरीय उपसमाहर्ता, दरभंगा द्वारा तत्कालीन जिला पदाधिकारी, दरभंगा के पत्र का संदर्भ करते हुए दिये गये बयान से होती है।
इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिना किसी साक्ष्य/अभिलेख के यह उल्लेख किया जाना कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही नियमानुसार संचालित नहीं की गयी है, स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन में ऐसा कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है, जो यह सिद्ध कर सके कि आलोच्य टुटान बिन्दुओं यथा कमला बलान नदी के दायाँ तटबंध के कि॰मी॰ 73.50 एवं कि॰मी॰ 74.60 पर हुए टुटान के सुरक्षार्थ बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भण्डारण के साथ-साथ मानव बल की उपलब्धता सुनिश्चित् करते हुए युद्धस्तर पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के समुचित भण्डारण के अभाव के साथ-साथ मानव बल की उपलब्धता के अभाव की पुष्टि संचालन पदाधिकारी के समक्ष हुए परीक्षण/प्रतिपरीक्षण में उपस्थित गवाह श्री सत्यम सहाय, वरीय उपसमाहर्ता, दरभंगा द्वारा दिये गये बयान में किया गया है। अतएव आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित बचाव-बयान, साक्षियों के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण में दिये गये बयानों तथा आलोच्य टुटान के सुरक्षार्थ समुचित बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भण्डारण नहीं किये जाने से ससमय बाढ़ संघर्षात्मक कार्य नहीं कराया जाना परिलक्षित होने के आलोक में मामले का विश्लेषण करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित इस आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है, जिससे सहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित यह आरोप आंशिक रूप से यथावत् प्रमाणित प्रतीत होता है तथा इनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उक्त टुटान स्थल के सुरक्षार्थ कराये गये आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक कार्य से संबंधित समुचित साक्ष्य के अभाव में श्री संजय कुमार सुमन, अवर प्रमंडल, पदाधिकारी, सोन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल, मनेर के द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। फलस्वरूप श्री संजय कुमार सुमन, तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-2 झंझारपुर सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल, मनेर (सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल के अन्तर्गत) के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया, जिस पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है -
(1) निन्दन। (2) 05 (पाँच) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) भावी प्रोन्नति पर रोक। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार सुमन, तत0 सहायक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-2 झंझारपुर सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन बाढ़ सुरक्षा अवर प्रमंडल, मनेर (सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल के अन्तर्गत) को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।
(1) निन्दन। (2) 05 (पाँच) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) भावी प्रोन्नति पर रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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20 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(डि0)14-01/2020-348--श्री रामेश्वर चौधरी (आई0डी0-3495) तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध पदस्थापन अवधि में सरकारी नियमों का अनुपालन ससमय न करने, कर्त्तव्य में लापरवाही, पद का दुरूपयोग तथा विभागीय आदेशों का उल्लंघन कर अपने अधीनस्थ वर्ग-3 एवं 4 के कर्मियों को लंबे समय तक प्रोन्नति नहीं दिए जाने तथा इस मामले में माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना में दर्ज किए19 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 गए मामले में माननीय लोकायुक्त (न्यायिक सदस्य) द्वारा पारित न्यायादेश के संदर्भ में विभागीय समीक्षोपरांत गठित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' के तहत संकल्प ज्ञापांक-691 दिनांक 28.07.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप निम्नांकित है - (1) विभागीय ज्ञापांक-786 दिनांक 14.07.2016 द्वारा जल संसाधन विभाग, क्षेत्रीय लिपीकीय संवर्ग (भर्ती एवं सेवा शर्त) नियमावली, 2014 की कंडिका-13(2) के प्रावधान के तहत वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति देने हेतु प्रोन्नति समिति का गठन विभागीय स्तर पर की गई थी। उक्त विभागीय आदेश के अनुपालन के क्रम में जल संसाधन विभागान्तर्गत मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा एवं मुख्य अभियंता, पटना द्वारा अपने परिक्षेत्रान्तर्गत कर्मियों को प्रोन्नति का लाभ दिया गया। परन्तु श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी द्वारा विलंब से की गई। (2) श्री फकरूधीन अली अहमद, महासचिव, बिहार राज्य पथ एवं भवन निर्माण विभाग, कर्मचारी यूनियन द्वारा श्री रामेश्वर चौधरी के विरूद्ध सरकारी नियमों के अनुपालन ससमय न करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही, पद का दुरूपयोग के संबंध में माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना में मामला दर्ज किया गया, जिसमें दिनांक 16.12.2019 को माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा आदेश पारित किया गया। उक्त आदेश में प्रोन्नति संबंधी विभागीय आदेश के अनुपालन ससमय नहीं करने के लिए श्री चौधरी उत्तरदायी पाए गए है। (3) वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री चौधरी द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन एवं अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया, जिसके लिए वे दोषी हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-01, 02 एवं 03 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-626 दिनांक 23.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन की माँग की गई। श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा-लिखित अभ्यावेदन में श्री रामेश्वर चौधरी द्वारा उल्लेख किया गया है कि विलंब से प्रोन्नति देने का कारण वरीयता सूची का प्रकाशन दो बार करना, प्रकाशन के पश्चात 83 आपत्तियों का प्राप्त होना, इसके निष्पादन में समय लगना, गोपनीय चारित्र अभ्युक्ति प्राप्त होने में समय लगना, कर्मियों का इतिहास विहित प्रपत्र में प्राप्त करने में समय लगना को कारण बताया गया। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा औपबंधिक वरीयता सूची का प्रकाशन दिनांक 03.08.2017 को किया गया था एवं दिनांक 21.08.2018 को अंतिम वरीयता सूची के प्रकाशन में काफी समय लगाया गया। जबकि स्थिति यह थी कि मात्र एक कार्यालय को छोड़कर शेष 23 कार्यालयों के अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन पूर्व में हो चुका था। आरोपी पदाधिकारी के स्वयं के अभ्यावेदन से यह भी पता चल रहा है कि गोपनीय चारित्री अभ्युक्ति एवं सेवा इतिहास प्राप्त करने में भी बहुत अधिक समय लगाया गया। दिनांक 21.04.2018 को अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन हुआ तुरंत उसके तुरंत बाद प्रोन्नति समिति की बैठक नहीं बुलाई गई बल्कि जून माह में प्रोन्नति समिति की बैठक की गयी और तब वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति प्रदान किया गया। अतएव आरोपी पदाधिकारी श्री रामेश्वर चौधरी का यह कहना कि प्रोन्नति संबंधी कार्रवाई में मात्र प्रक्रियात्मक विलंब हुआ है, यह पूरी तरह सही नहीं है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि 20 मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र में से 9 प्रक्षेत्र में वर्ग-3 एवं वर्ग-4 के कर्मियों को प्रोन्नति नहीं मिली। जिन-जिन मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र में प्रोन्नति दी गयी उनमें औसतन एक समान समय लगा। प्रशासी विभाग के पत्रांक-2427 दिनांक 13.12.2019 के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि प्रोन्नति देने में सबसे ज्यादा विलंब करीब 1 वर्ष 11 माह का समय आरोपी पदाधिकारी के द्वारा लिया गया है, जिसके लिए आरोपी पदाधिकारी को माननीय लोकायुक्त द्वारा भी दोषी माना गया है। श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रोन्नति में अधिक समय लगा है, को स्वयं स्वीकार किया गया है। श्री रामेश्वर चौधरी द्वारा लिखित अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों को दोहराया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के दौरान बचाव बयान में समर्पित किया गया था, जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा की गयी तथा आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित बताया गया। अतएव-श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन की उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए उनके विरूद्ध गठित तीनों आरोप सं0-1, आरोप सं0-2 एवं आरोप सं0-3 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चौधरी को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है - "पेंशन से 10% की कटौती 8 वर्षों के लिए।" उक्त निर्णय/सहमति के आलोक में श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत्त को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2403 दिनांक 14.10.2022 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -
"पेंशन से 10% की कटौती 8 वर्षों के लिए।" उक्त निर्णय दण्डादेश के विरुद्ध श्री चौधरी के पत्रांक-शून्य दिनांक 14.11.2022 द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन समर्पित किया गया। पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा उन्हीं20 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 बातों को दुहराया गया है जो लिखित अभ्यावेदन के प्रत्युत्तर में उल्लेख किया गया है। इस प्रकार पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है।
उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रामेश्वर चौधरी, तत0 मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय सक्षम प्राघिकार द्वारा लिया गया है।
अतएव उकत निर्णय के आलोक में श्री रामेश्वर चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए अधिसूचना सं0-2403 दिनांक 14.10.2022 द्वारा संसूचित दण्ड ''पेंशन से 10% की कटौती 8 वर्षों के लिए'' को यथावत रखा जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
----- 16 फरवरी 2023 सं॰ 22/नि॰सि॰(वीर॰)07-06/2013/327--श्री जुनैद अहमद (ID-J 7869), तत्कालीन कनीय अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय आदेश सं0-74 सह-पठित ज्ञापांक-1564 दिनांक-08.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आरोप निम्न है :-
1. पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं विटुमिनस सड़क निर्माण कार्य (एकरारनामा सं0-01SBD/2010) के लिए निरीक्षण भवन, भपटियाही के प्रागन में अवस्थित जी0टी0एस0 बेंच मार्क के आधार पर पूर्वी कोशी तटबंध के 40 कि0मी0 के पास मंदिर के स्लैब के टॉप पर टी0बी0एम0 60.341 मी0 उड़नदस्ता जाँच में सही पाया गया जबकि पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा निर्धारित टी0बी0एम0 57.925 मी0 जाँच में सही नहीं पाया गया। तटबंध के कि0मी0 52.00 पर दो अवर प्रमंडलों के मिलान बिन्दु पर प्री-लेवल में अंतर पाया गया है जिससे त्रुटिपूर्ण लेवल लिया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण लेवल लिये जाने के कारण पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल सुपौल के अंतर्गत रू0 5,32,38,572.70 अधिकाई भुगतान त्रिसदस्यीय समिति के जाँच में पाया गया है। उच्चाधिकारियों द्वारा जी0टी0एस0 बेंच मार्क के आधार पर लेवल सुधार हेतु पत्राचार किये जाने के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं किए जाने से अधिकाई भुगतान की स्थिति बनी रही। पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल सुपौल के अंतर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 तक प्री-लेवल लेने एवं जाँच करने में आपकी सहभागिता-संलिप्तता परिलक्षित है। जिससे उक्त विषयक कार्य का त्रुटिपूर्ण टी0बी0एम0 Carry करने एवं प्री-लेवल लेने/जाँच के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
2. पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण सुदृढ़ीकरण एवं विटुमिनस सड़क निर्माण में पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अंतर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 के बीच कुल 54,29,152.02 घनमी0 मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया है जबकि त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा कुल 50,82,823.303 घनमी0 मिट्टी कार्य पाया गया है। इस प्रकार कुल 34,63,34.717 घनमी0 के लिए एकरारित दर पर कुल राशि रू0 53,23,85,72.70 (रॉयल्टी राशि को छोड़कर) संवेदक को अधिक भुगतान होना परिलक्षित होता है। उक्त कार्य में अपने कार्यक्षेत्र अंतर्गत कार्य के क्रियान्वयन एवं विपत्र तैयार करने से आप संबंधित रहे हैं। अधीक्षण अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा द्वारा लेवल में विसंगति निराकरण हेतु कई पत्राचार किये जाने के बाद भी जी0टी0एस0 मार्क के आधार पर लेवल की जाँच नहीं किये जाने से संवेदक को अधिकाई भुगतान होने की स्थिति बनी रही। इस प्रकार उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं करते हुए त्रुटिपूर्ण प्री-लेवल के आधार पर कार्य कराने एवं विपत्र तैयार किये जाने से रू0 5,32,38,572.70 संवेदक को अधिकाई भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री जुनैद अहमद, तत्कालीन कनीय अभियंता से विभागीय पत्रांक-1103 दिनांक- 08.09.2020 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गयी।
श्री अहमद, तत्कालीन कनीय अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री अहमद, तत0 कनीय अभियंता द्वारा अपने अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-
श्री अहमद, तत0 कनीय अभियंता द्वारा कहा गया है कि कि0मी0 52.00 से कि0मी0 64.00 के बीच प्री-लेवल लेने का कार्य इनके द्वारा नहीं किया गया है। कार्य का एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10 के अनुसार कार्य प्रारंभ करने की तिथि 05.11.2009 है। उक्त एकरारनामा के अंतर्गत पूर्वी कोशी तटबंध के कि0मी0 52.00 से कि0मी0 64.00 के बीच उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व असम्बद्ध प्रमंडल से प्री-लेवल की जाँच दिनांक-24.12.2009 से दिनांक- 17.01.2010 के बीच की गयी है। इस रीच (कि0मी0 52.00 से 56.00 तक) का अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के पत्रांक-401 दिनांक-20.02.2010 के आलोक में इनके द्वारा दिनांक-20.02.2010 के बाद लिया गया हैं इस रीच का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने के समय इस भाग में मिट्टी भराई का कार्य प्रगति में था।
श्री अहमद द्वारा कहा गया है कि मेरे अतिरिक्त प्रभार में आने के पूर्व से ही संबंधित प्रमंडल द्वारा संवेदक के साथ साझा रूप से प्री-लेवल लेकर लेवल पंजी को असम्बद्ध प्रमंडल (मुख्य अभियंता द्वारा नामित असम्बद्ध प्रमंडल) द्वारा प्री-लेवल की जाँच करा ली गयी थी और इस रीच में वास्तविक रूप से मिट्टी भराई का कार्य प्रारंभ हो चुका था। अतः ऐसी परिस्थिति21 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 में अधोहस्ताक्षरी द्वारा प्री-लेवल की पुनः जाँच किया जाना नियमानुकूल एवं व्यवहारिक नहीं था। अंत में श्री अहमद, तत्कालीन कनीय अभियंता द्वारा आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
श्री अहमद, तत्कालीन कनीय अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में मुख्य22 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 कारण अधिकाई भुगतान कोई मामला प्रतिवेदित नहीं किया गया है, से सहमत हुआ जा सकता है परन्तु श्री अहमद भी कार्य के प्री-लेवल लेने में संलग्न रहे है, तथा जाँच दल द्वारा जाँच के क्रम में उजागर किये गये त्रुटि के संदर्भ में श्री अहमद द्वारा उक्त जाँच के पूर्व कार्य के दौरान प्री-लेवल की त्रुटि उजागर नहीं कर पाने के लिए ये आंशिक रूप से दोषी पाये गये है। वर्णित स्थिति में उक्त के आलेाक में श्री जुनैद अहमद, तत0 कनीय अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकार करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।
अतः श्री जुनैद अहमद, त00 कनीय अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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16 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(वीर0)-07-06/2013/326--श्री अशोक कुमार शर्मा (आई0डी0-4488), तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के द्वारा अपने पदस्थापन अवधि में बरती गयी निम्न अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प सं0-1549 दिनांक 06.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
आरोप निम्न है :- (1) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं बिटुमिनस सड़क निर्माण कार्य (एकरारनामा सं0-01SBD/2010) के लिए निरीक्षण भवन, भपटियाही के प्रांगन में अवस्थित जी0टी0एस0 बेंच मार्क के आधार पर पूर्वी कोशी तटबंध के 40कि0मी0 के पास मंदिर के स्लैव के टॉप पर टी0बी0एम0 60.341मी0 उड़नदस्ता जाँच में सही पाया गया जबकि पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा निर्धारित टी0बी0एम0 57.925मी0 जाँच में सही नही ंपाया गया। तटबंध के कि0मी0 52.00 पर दो अवर प्रमंडलों के मिलान बिन्दु पर प्री-लेवल में अंतर पाया गया है, जिससे त्रुटिपूर्ण लेवल लिया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण लेवल लिये जाने के कारण पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत रू0 5,32,38,572.70 अधिकाई भुगतान त्रिसदस्यीय समिति के जाँच में पाया गया है।
उच्चाधिकारियों द्वारा GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल सुधार हेतु पत्राचार किये जाने के बाद भी प्री-लेवल मेें सुधार नहीं किये जाने से अधिकाई भुगतान की स्थिति बनी रही। पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 तक प्री-लेवल लेने एवं जाँच करने में आपकी सहभागिता-संलिप्तता परिलक्षित है। जिससे उक्त विषयक कार्य का त्रुटिपूर्ण टी0बी0एम0 Carry करने एवं प्री-लेवल लेने/जाँच के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। (2) पूर्वी कोशी तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं बिटुमिनस सड़क निर्माण में पूर्व कोशी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के अन्तर्गत कि0मी0 40.00 से 84.00 के बीच कुल 54,29,152.02 घन मी0 मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया है। जबकि त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा कुल 50,82,823.303 घन मी0 मिट्टी कार्य पाया गया है। इस प्रकार कुल 346334.717 घन मी0 के लिए एकरारित दर पर कुल राशि रू0 53238572.70 (रॉयल्टी राशि को छोड़कर) संवेदक को अधिक भुगतान होना परिलक्षित होता है। उक्त कार्य में अपने कार्यक्षेत्र अन्तर्गत कार्य के क्रियान्वयन एवं विपत्र तैयार करने से आप संबंधित रहे है। अधीक्षण अभियंता पूर्वी कोशी तटबंध अंचल, सहरसा द्वारा लेवल में विसंगति के निराकरण हेतु कई पत्राचार किये जाने के बाद भी GTS बेंच मार्क के आधार पर लेवल की जाँच नहीं किये जाने से संवेदक को अधिकाई भुगतान होने की स्थिति बनी रही। इस प्रकार उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी प्री-लेवल में सुधार नहीं करते हुए त्रुटिपूर्ण प्री-लेवल के आधार पर कार्य कराने एवं विपत्र तैयार किये जाने से रू0 53238572.70 संवेदक को अधिकाई भुगतान के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1102 दिनांक 08.09.2020 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गयी।
श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा अपने अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-
श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि ये किसी भी तरह की TBM CARRY करने या फिक्स करने में शामिल नहीं थे। स्वीकृत DPR में बराज के Left side के Permanent/ GTS B.M से ही डाउन स्ट्रीम में लेवल लेने का निर्देश था। लेवल लिया गया था, जिसके कारण दूसरे बेंच मार्क की जानकारी लेने की आवश्यकता महसूस नहीं की गयी। मेरे द्वारा कार्य क्षेत्र 52-64 कि0मी0 के बीच उच्चाधिकारी के प्री-लेवल मेें हुई त्रुटि संबंधी विवाद की जानकारी देने के पहले ही (दिनांक 14.06.2011) तक मिट्टी कार्य करा दिया गया था, उसके बाद मिट्टी कार्य की मात्रा का कोई भुगतान नहीं किया गया है।
संवेदक के अंतिम विपत्र से कुल रूपये 5,32,38,572.70 की वसूली अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग के पत्रांक-1642/पटना, दिनांक 14.11.2016 के आदेश पर कर ली गयी है। स्वीकृत DPR में GFCC23 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 RECOMMENDED डिजायन H.F.L., F.R.L. इत्यादि संलग्न था तथा स्थल स्थिति के अनुसार डिजायन DISCHARGE (9.0-9.50 लाख) के लिए तटबंध के टॉप पर मिट्टी की भराई आवश्यक था।
मेरे पदस्थापन के समय वर्ष 2005 से कई जगहों पर तटबंध के उच्चीकरण के पहले तक 3.5 लाख CUSECS डिस्जार्च पर ही तटबंध के कई बिन्दुओं पर तथा स्पर से पानी Overtop करते हुए देखा गया है। मेरे कार्य क्षेत्र 52-64 कि0मी0 के बीच तटबंध को डिजायन फार्मेशन लेवल के अनुसार उच्चीकरण एवं सुदृढीकरण का कार्य कर दिया गया था जिसके कारण तटबंध से पानी Overtop नहीं होता पाया गया और सुपौल जिला मुख्यालय काफी सुरक्षित हो गया था। जहाँ तक मिट्टी की मात्रा में 26.78% कि बढ़ोतरी का प्रश्न है, यह एकरारनामा के दृष्टि से तर्क संगत सही नहीं है। एकरारनामा 0 से 123.772कि0मी0 के लिए की गयी थी न कि 52-64 कि0मी0 के बीच के कार्य के लिए। अतः मिट्टी की मात्रा की बढ़ोतरी या घटोतरी एकरारित मात्रा पर कि जानी है न कि अवर प्रमंडल वाइज मिट्टी की मात्रा पर की जानी है। अंतिम विपत्र भी 0-123.772 कि0मी0 के लिए ही तैयार कर निदेशानुसार अधिकाई मिट्टी के समतुल्य राशि की कटौती संवेदक के अंतिम विपत्र से कर ली गयी है।
मेरे द्वारा क्षेत्र 52-64कि0मी0 में लगभग पाँच सालों के बाद जाँचने पर Country साईड स्लोप में Encroachment कर झुग्गी झोपड़ी का निर्माण कुछ ग्रामीणों द्वारा कर ली गयी और स्लोप क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। रिवर साईड का भी Toe, Slope बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण पाँच सालों बाद स्थल पर पूर्व के कराये गये मिट्टी की मात्रा से कम मात्रा आया और अधिकाई भुगतान की स्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसे निर्देशानुसार संवेदक के अंतिम विपत्र से वसूली कर ली गयी है।
श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :-
आरोप सं0-1 के संदर्भ में श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि स्वीकृत DPR में बराज के Left साइड के Permanent/GTS B.M से ही डाउनस्ट्रीम में लेवल लेने का निर्देश था जिसके कारण दूसरे बेंच मार्क की जानकारी लेने की आवश्यकता महसूस नहीं की गयी। इनके इस कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। जैसा कि संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उल्लेख किया गया है कि एक जिम्मेदार पदाधिकारी होने के नाते इनके द्वारा GTS Bench Mark से TBM Carry संबंधी तथ्य की जाँच कर GTS Bench Mark की जानकारी प्राप्त करने संबंधी प्रयास किया जाना चाहिए था। इनके द्वारा FFF Chairman के प्रतिवेदन का उल्लेख किया गया है जिसमें 2.5लाख क्यूसेक डिस्चार्ज पर पानी फ्री बोर्ड में Encroach करने का उल्लेख है परन्तु उक्त प्रतिवेदन में यह बात कि0मी0 10.00 से कि0मी0 16.64 के संदर्भ में कही गयी है। जो आलोच्य कार्यक्षेत्र से अलग है। इस प्रकार इनके कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। अतः संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री शर्मा के विरूद्ध त्रुटिपूर्ण लेवल लिये जाने संबंधी आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।
आरोप सं0-2 के संदर्भ में श्री शर्मा द्वारा कहा गया है कि प्री लेवल में हुई त्रुटि संबंधी विवाद की जानकारी देने के पूर्व ही (दिनांक 14.06.11) तक मिट्टी कार्य करा दिया गया था। उसके बाद मिट्टी कार्य का कोई भुगतान नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि प्री-लेवल में यह त्रुटि उजागर होने के बाद कोशी बराज से कि0मी0 40.00 तक फ्लाई लेवल हेतु गठित दल द्वारा दिनांक 10.10.11 को लेवल लिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि मिट्टी कार्य के भुगतान कि तिथि तक प्री लेवल की त्रुटि उजागर नहीं हो पायी थी। परन्तु यह भी सही है कि प्री-लेवल में त्रुटि के कारण ही अधिकाई भुगतान की स्थिति उत्पन्न हुई जिसके लिए श्री शर्मा दोषी पाये गये है।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के आरोप सं0-1 एवं 2 प्रमाणित पाया गया है।
वर्णित स्थिति में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल के विरूद्ध प्रमाणित आरोप सं0-1 एवं 2 के लिए सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1206 दिनांक 26.05.2022 द्वारा निम्न दण्ड दिया गया -
"तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री शर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया है :-
श्री शर्मा द्वारा उल्लेखित है कि संचालन पदाधिकारी के प्रासंगिक पत्र द्वारा लगाया गया आरोप बेबुनियाद/निराधार है। इनके द्वारा लिये गये T.B.M. 57.925 मी0 की जाँच अधीक्षण अभियंता, सहरसा द्वारा कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं0-2, वीरपुर एवं कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल एवं अनुसंधान एवं शोध प्रमंडल, वीरपुर द्वारा संयुक्त रूप से की गयी और सही पाया गया था, जिसमें वे शामिल नहीं थे। इनके विरूद्ध त्रुटिपूर्ण T.B.M. Carry करने/जाँच करने का आरोप बिल्कुल ही मनगढंत है।24 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 दो अवर प्रमंडलों के मिलान बिन्दु पर PRE LEVEL में अंतर पर श्री शर्मा द्वारा उल्लेखित किया गया है कि अलग-अलग टीम द्वारा प्री-लेवल अलग-अलग दिनों में लेने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। अलग-अलग टीमों द्वारा लगातार लेवल नहीं लेने तथा तटबंध के कन्ट्री साइड TOE में नाला रहने के कारण यह उत्पन्न हुआ।
श्री शर्मा ने उल्लेख किया है कि मिट्टी कार्य करने के पूर्व भपटियाही प्रांगन में निर्धारित G.T.S बेंच मार्क की जानकारी किसी भी स्तर से श्री शर्मा को प्राप्त नहीं थी। कार्य के स्वीकृत D.P.R में बराज के पास निर्धारित T.B.M. 78.70 मी0 से ही PRE LEVEL/ T.B.M निर्धारित किया गया था। निर्धारित करने का निर्देश था। किसी जिम्मेदार उच्च पदाधिकारी द्वारा G.T.S BENCH MARK की जानकारी प्राप्त करने का आदेश नहीं दिये जाने का उल्लेख किया गया है। श्री शर्मा द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष ई0 सतीश कुमार का यह obse VATION तकनीकी रूप से पुरे तटबंध के लिए लागु होता है, क्योंकि जल का प्रवाह एक Natural Gradient में ही होता है, तदनुसार तटबंध का Gradient भी निर्धारित होता है, जो सर्वमान्य है, एवं तकनीकी रूप से सही है। श्री शर्मा ने यह उल्लेख किया है कि इनके द्वारा सरकार को कोई भी वित्तीय क्षति नहीं पहुँचायी गयी है, फिर भी सरकार द्वारा उनके तीन संचयात्मक वेतन वृद्धि पर रोक का दण्ड दिया गया है। साथ ही इनके द्वारा संसूचित दण्ड निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।
विभागीय समीक्षा - आरोप सं0-01 के संदर्भ में - श्री शर्मा द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के अभ्यावेदन में दिया गया था। श्री शर्मा ने उल्लेख किया है कि कार्य करने के पूर्व भपटियाही प्रांगन में निर्धारित G.T.S बेंच मार्क की जानकारी किसी स्तर से उन्हें प्राप्त नहीं थी। साथ ही कार्य के स्वीकृत D.P.R में बराज के पास निर्धारित T.B.M से ही PRE LEVEL/T.B.M निर्धारित किया गया था।
निर्धारित करने का निदेश था तथा किसी भी उच्च पदाधिकारी द्वारा GTS BENCH MARK की जानकारी प्राप्त करने का कोई आदेश भी नहीं दिया गया था। इस संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि जिम्मेवार पदाधिकारी होने के नाते श्री शर्मा के द्वारा GTS BENCH MARK से T.B.M Carry करने संबंधी तथ्यों की जाँच कर GTS BENCH MARK की जानकारी प्राप्त करने संबंधी प्रयास किया जाना चाहिए था। श्री शर्मा द्वारा दो अवर प्रमंडलों के मिलन बिन्दु पर PRE LEVEL में आये अंतर का कारण स्थलीय स्थिति को तथा अलग-अलग समय में एक ही बिन्दु पर LEVEL लिये जाने को बताया है। यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि चूँकि PRE LEVEL लेने हेतु निर्धारित TBM ही त्रुटिपूर्ण था, जिसके फलस्वरूप लिये गये LEVEL में अंतर आया। अतएव स्थलीय स्थिति के कारण LEVEL में अंतर की बात स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। इसके अतिरिक्त श्री शर्मा द्वारा पूर्व में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के अभ्यावेदन में समर्पित तथ्यों का उल्लेख पुनः किया गया है, जिस पर पूर्व में विचार किया जा चुका है।
आरोप सं0-02 के संदर्भ में - श्री शर्मा द्वारा उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा कराये गये मिट्टी कार्य का चालू विपत्र TBM विवाद आने के पूर्व समर्पित कर दिया गया था। उसके बाद मिट्टी कार्य का कोई भुगतान नहीं किया गया है। साथ ही त्रिसदस्यीय कमिटि द्वारा अधिकाई भुगतान की राशि की वसूली कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा कर लिये जाने से उनके विरूद्ध संवेदक को अधिकाई भुगतान किये जाने का आरोप बनता ही नहीं है, का उल्लेख श्री शर्मा द्वारा किया गया है। यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि प्री-लेवल में यह त्रुटि उजागर होने के बाद कोशी बराज से कि0मी0 40.00 तक फ्लाई लेवल हेतु गठित दल द्वारा दिनांक 11.10.11 को लेवल लिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि मिट्टी कार्य के भुगतान की तिथि तक प्री-लेवल की त्रुटि उजागर नहीं हो पायी थी। परन्तु यह भी सत्य है कि प्री-लेवल में त्रुटि के कारण ही अधिकाई भुगतान की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसका समायोजन त्रुटिपूर्ण TBM के जाँच के बाद हुआ, जिसको उजागर करने का कोई प्रयास श्री शर्मा के स्तर से नहीं किया गया। अतएव श्री शर्मा से प्राप्त अपील अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
वर्णित स्थिति में उक्त के आलोक में श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकार करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।
अतः श्री अशोक कुमार शर्मा, तत0 सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, सुपौल द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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7 फरवरी 2023
सं0 22/नि॰सि॰ (पट॰)03-20/2018-239--श्री जीवनेश्वर रजक (आई0डी0-4569), तत्कालीन उप सचिव-1(प्र0), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पदस्थापन अवधि में विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद बिना स्वच्छता देखे बगैर कनीय अभियंता से सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति दिए जाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया। आरोप पत्र में वर्णित आरोपाें की जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-551 दिनांक 12.03.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।25 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 आरोप :-
1. श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1 (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग में पदस्थापन अवधि में श्री सुरेश नारायण, तत्का॰ कनीय अभियंता को विभागीय आदेश संख्या-223-सह पठित-ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद बिना स्वच्छता को देखे बगैर कनीय अभियंता (असै॰) से सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति दिए जाने के लिए दोषी हैं।
2. श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा, प्रशाखा-22, निगरानी प्रशाखा से निगरानी स्वच्छता की गहन छानबीन नहीं किए जाने के कारण श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को सहायक अभियंता के पद पर दिनांक-09.08.2016 को आयोजित प्रोन्नति समिति की बैठक में प्रोन्नति योग्य मानते हुए अनुशंसित किया गया जिसके आलोक में प्रोन्नति दिया गया। प्रशाखा-7 के वरीय पदाधिकारी होने के नाते दिनांक-15.09.2016 को औपबंधिक प्रोन्नति अधिसूचित करने के पूर्व प्रशाखा-22 (निगरानी) से प्रोन्नति योग्य की अनुशंसा प्राप्त अभियंताओं के संबंध में स्वच्छता की अद्यतन सूचना नहीं प्राप्त करने के लिए दोषी हैं।
विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य अंकित किया गया कि- "विभागीय कार्यवाही के दौरान बहस, आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित साक्ष्य सहित मौखिक/ लिखित बचाव बयान, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा रखे गए विभागीय पक्ष, विभाग द्वारा आरोप पत्र के साथ संलग्न सभी अभिलेखों, विभागीय पत्रांक-22/नि॰सि॰(पट॰) 03-20/2018-1342 (अनु॰) दिनांक-04.07.2019 एवं पत्रांक सं॰-7/विविध 12-1004/2018-1310 दिनांक-05.07.2019 द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी साक्ष्यों/अभिलेखों की सम्यक् विवेचना की गई, जिससे प्रतीत होता है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधित आदेश सं॰-223-सह पठित ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 उनको या उनके प्रशाखा में उपलब्ध नहीं कराया गया तथा सरकार के संयुक्त सचिव, निगरानी कोषांग का गैर सरकारी प्रेषण सं॰-20(अनु॰), दि॰-17.01.2018 द्वारा प्राप्त सूचना के अनुपालन में उनके द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रोन्नति अधिसूचना सं॰-874, दि॰-15.07.2016 के कंडिका-5 में निहित प्रावधान के तहत् श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को दी गई प्रोन्नति विभागीय अधिसूचना सं॰-7/प्रो॰-03-1003/10-138 दिनांक-19.01.2018 द्वारा रद्द कर दी गई।" उक्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य के आलोक में श्री जीवनेश्वर रजक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित माना गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-441, दि॰-04.03.2020 द्वारा असहमति के निम्न बिंदुओं पर कारण पृच्छा की गई- 1. विभागीय पत्रांक-7/प्रो 03-1002/13-58/DS, दिनांक-09.08.2016 द्वारा श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1(प्र॰), जल संसाधन विभाग द्वारा अध्यक्ष, बिहार लोक सेवा आयोग, पटना एवं अन्य को जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता (असै॰) को 28% कोटा के तहत् सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति हेतु अद्यतन बैठक सामग्री एवं अद्यतन स्वच्छता के आधार पर प्रोन्नति समिति की बैठक में विचार करने हेतु अनुरोध किया गया है। 2. उक्त पत्र के कंडिका-2 में स्पष्ट उल्लेखित है कि आज की तिथि तक अद्यतन निगरानी स्वच्छता (विभागीय कार्यवाही रूल-17,रूल-19, प्रपत्र-क, स्पष्टीकरण, निलंबन) आदि की जाँच की गई है। अद्यतन स्वच्छता विवरणी भी संलग्न की जा रही है।
3. उल्लेखनीय है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का आदेश दिनांक- 18.07.2016 को निर्गत किया गया। जिससे परिलक्षित होता है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को बिना स्वच्छता देखे बगैर प्रोन्नति दी गई है।
उक्त बिंदुओं के संदर्भ में श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा अपने पत्रांक-747, दि॰-03.08.2021 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया है। जो निम्न है -
1. जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता को 28% कोटा अंतर्गत प्रोन्नति हेतु आकलित रिक्ति-272 के विरूद्ध 427 कनीय अभियंता के नामों को प्रोन्नति हेतु विचारण सूची में समाहित किया गया था, जिसमें से एक श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता का नाम भी समाहित था।
बिहार लोक सेवा आयोग, पटना को विभागीय सहमति के पश्चात् अंतिम रूप से प्रोन्नति की बैठक हेतु भेजे गए अद्यतन बैठक सामग्री के भेजने के पूर्व प्रशाखा-07 एवं उपसचिव-01, प्रबंधन कोषांग को प्राप्त सभी निगरानी स्वच्छता को समाहित कर ही आयोग को भेजी गई थी।
2. B.P.S.C को बैठक हेतु भेजी गई बैठक सामग्री प्रेषण तिथि तक प्रशाखा-7 एवं उपसचिव-01 प्रबंधन कोषांग को प्राप्त सभी निगरानी स्वच्छता आदि की जाँच की गई थी। तदनुसार अद्यतन स्वच्छता विवरणी संलग्न की गई थी। 3. श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की तथा कथित निर्गत आदेश दिनांक-18.07.2016 प्रशाखा-07 एवं उपसचिव-1 (प्रबंधन) कोषांग को प्रोन्नति की अधिसूचना निर्गत तिथि 15.09.2016 तक अप्राप्त थी।
उक्त प्रोन्नति वाली अधिसूचना सक्षमता अंतर्गत हर स्तर पर छानबीन कर निर्गत की गई थी। जिसकी प्रति प्रशाखा-07, 08, 12 एवं 22 सहित अन्य संबंधित पदाधिकारियों को प्रेषित की गई थी। परन्तु श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधित तथा कथित आदेश की जानकारी अथवा आदेश की प्रति किसी भी स्तर से प्राप्त26 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 नहीं हो सका था। इस संबंध में सर्वप्रथम निगरानी कोषांग के गैर सरकारी प्रेषण सं॰-20, दिनांक-17.01.2018 द्वारा प्रोन्नति की वर्णित अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से लगभग-16 माह बाद प्राप्त हुई। जिसके आलोक में त्वरित कार्रवाई करते हुए श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता को दी गई प्रोन्नति निदेशानुसार प्रोन्नति की अधिसूचना के कंडिका-05 में निहित प्रावधान के आलोक में प्रोन्नति को रद्द कर दिया गया था।
चूँकि प्रोन्नति का मामला काफी दिनों से प्रक्रियाधीन होने के कारण एवं विभागीय एवं बाह्य निगरानी स्वच्छता तथा चारित्री आदि प्राप्त होने में काफी समय लगने तथा इस दौरान भी कोई नया कार्यवाही चलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है तथा उसकी सूचना ससमय संबंधित पटल को प्राप्त नहीं हो सकती है। इसे स्वीकार करते हुए प्रोन्नति की अधिसूचना निर्गत करने के समय विभागीय सक्षम प्राधिकार की सहमति से कंडिका-05 को समाहित कर ही प्रोन्नति अधिसूचना निर्गत की जाती थी।
श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता, जो 427 कनीय अभियंता की सूची में एक थे के ही विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चल रही की जानकारी प्राप्त करना श्री जीवनेश्वर रजक के सक्षमता से बाहर की बात थी क्योंकि जबतक संबंधित पटल द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराया जाता है तबतक इसकी जानकारी होना संभव नहीं है। प्रशाखा-07 के माध्यम से बार-बार स्वच्छता की माँग करके ही प्रोन्नति हेतु कार्रवाई की गई थी जिसकी सम्पुष्टि प्रोन्नति की संचिका में हुए पत्राचार से किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता की प्रोन्नति प्राप्त निगरानी स्वच्छता की सूची में उनके विरूद्ध संबंधित विभागीय कार्यवाही की प्रति प्राप्त नहीं होने के कारण हुआ है।
श्री जीवनेश्वर रजक के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के संदर्भ में समर्पित जवाब की समीक्षा विभाग स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत निम्न बिन्दु निष्कर्षित किया गया कि -
"श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा बिना अद्यतन निगरानी स्वच्छता देखे बगैर जल संसाधन विभाग अंतर्गत कनीय अभियंता (असै॰) को 28% कोटा के तहत सहायक अभियंता (असै॰) के पद पर प्रोन्नति हेतु अद्यतन बैठक सामग्री बिहार लोक सेवा आयोग, पटना को प्रोन्नति समिति की बैठक में विचार करने हेतु अनुरोध किया गया। इसी क्रम में श्री सुरेश नारायण, कनीय अभियंता के विरूद्ध विभागीय आ॰ सं॰-223-सह ज्ञापांक-1413, दि॰-18.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के बावजूद श्री नारायण को प्रोन्नति दी गई। जो श्री जीवनेश्वर रजक, तत्का॰ उपसचिव-1 (प्र॰) के लापरवाही एवं कार्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।"
अतएव श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा समर्पित प्रत्युत्तर को अस्वीकृत करते हुए उसके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित मानते हुए विभगाीय अधिसूचना सं0-1548 दिनांक 30.06.2022 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया गया- "कालमान वेतनमान में दो वेतन प्रक्रम पर सदा के लिए अवनति।" श्री जीवनेश्वर रजक, तत्कालीन उप सचिव -1 (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, भोरे (गोपालगंज) द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-1548 दिनांक 30.06.2022 के माध्यम से संसूचित दण्ड के विरूद्ध पुनर्विचार याचिका विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त पुनर्विचार याचिका में श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा अपने आरोपों के संदर्भ में उन्हीं बिन्दुओं का संभवतः उल्लेख किया गया है जो अपने प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में विभाग द्वारा मांग गए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) के प्रत्युत्तर में अंकित है।
उल्लेखनीय है कि श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा प्राप्त प्रत्युत्तर को समीक्षोपरांत अस्वीकृत कर उक्त दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है।
साथ ही श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा अपने पुनर्विचार याचिका में व्यक्तिगत सुनवाई (Hearing in person) का अवसर प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
उल्लेखनीय है कि उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र में वर्णित साक्ष्य इनके उप सचिव-1 (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पदस्थापन काल में इन्हीं के द्वारा हस्ताक्षरित है। जो विभागीय कार्यवाही के क्रम में इन्हें उपलब्ध करा दिया गया था। साथ ही इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा विभागीय कार्यवाही से संबंधित साक्ष्य के तौर पर किसी अन्य कागजात की मांग नहीं की गई और गवाही के लिए किन्ही को बुलाने की प्रार्थना भी नहीं की गई।
श्री जीवनेश्वर रजक, तत्कालीन उप सचिव-1 (प्रबंधन) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में इनके द्वारा गवाही के लिए न तो किन्ही को बुलाने का अनुरोध किया गया और न ही किसी अन्य साक्ष्य के तौर पर कागजात की मांग की गई। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने के विभागीय निदेश के आलोक में इनके द्वारा असहमति के बिन्दु पर प्रत्युत्तर समर्पित करने के समय किसी भी प्रकार के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण कराने का अनुरोध नहीं किया गया। दण्ड निर्गत होने के उपरांत पुनर्विचार याचिका में व्यक्तिगत सुनवाई का प्रश्न उठाना यथोचित नहीं है। इसके अलावा इनके द्वारा अपने प्रत्युत्तर में किसी नये तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया है।
अतएव श्री जीवनेश्वर रजक, तत0 उप सचिव-1(प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका को विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत श्री जीवनेश्वर रजक द्वारा समर्पित पुनर्विचार याचिका को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।27 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अतएव उक्त निर्णय श्री जीवनेश्वर रजक, तत0 उप सचिव-1(प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, भोरे को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-21/2011-190--श्री सुदामा राय (आई0डी0-3273) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में वर्ष 2011 में सारण तटबंध के 117.05 कि0मी0 से 124.25 कि0मी0 के बीच गंडक नदी में पायलट चैनल का निर्माण कार्य में अनियमितता बरतने संबंधी कतिपय आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1434 दिनांक 22.11.2011 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानो के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। साथ ही, उक्त मामले में विभागीय अधिसूचना सं0-1532 दिनांक 15.12.2011 द्वारा श्री सुदामा राय को निलंबित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सुदामा राय को विभागीय अधिसूचना सं0-541 दिनांक 27.02.2015 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1812 दिनांक 17.08.2015 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया :-
(क) "पाँच वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।" (ख) "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सुदामा राय द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में श्री राय द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त विभागीय अधिसूचना सं0-1812 दिनांक 17.08.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-707 दिनांक 30.07.2021 द्वारा निरस्त किया गया है।
श्री राय से निलंबन अवधि के संबंध में प्राप्त आवेदन पर सम्यक विचारोपरांत उनके निलंबन अवधि (दिनांक 15.12.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत् किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।" उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुदामा राय (आई0डी0-3273) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि (दिनांक 15.12.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत किया जाता है -
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-21/2011-189--श्री मृत्युंजय प्रसाद सिंह (आई0डी0-जे 5215) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा, शिविर-गोपालगंज को विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में वर्ष 2011 में सारण तटबंध के 117.05 कि0मी0 से 124.25 कि0मी0 के बीच गंडक नदी में पायलट चैनल का निर्माण कार्य में कतिपय अनियमितता बरतने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1350 दिनांक 03.11.2011 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1436 दिनांक 22.11.2011 द्वारा कतिपय आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानो के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मृत्युंजय प्रसाद सिंह को विभागीय अधिसूचना सं0-537 दिनांक 27.02.2015 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1870 दिनांक 20.08.2015 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया :- (क) "कालमान वेतन के पाँच वेतन प्रक्रम नीचे पाँच वर्षों के लिए अवनति।" (ख) "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"28 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री मृत्युंजय प्रसाद सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में श्री मृत्युंजय प्रसाद सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त विभागीय अधिसूचना सं0-1870 दिनांक 20.08.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-712 दिनांक 30.07.2021 द्वारा निरस्त किया गया।
श्री सिंह से निलंबन अवधि के संबंध में प्राप्त आवेदन पर सम्यक विचारोपरांत उनके निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत् किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।" उक्त निर्णय के आलोक में श्री मृत्युंजय प्रसाद सिंह (आई0डी0-जे 5215) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा, शिविर-गोपालगंज के निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत किया जाता है -
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-21/2011-188--श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह (आई0डी0-जे 4612) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज (प्रतिनियुक्त) सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में वर्ष 2011 में सारण तटबंध के 142.70 कि0मी0 से 152.00 कि0मी0 के बीच गंडक नदी में पायलट चैनल का निर्माण कार्य में कतिपय अनियमितता बरतने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1347 दिनांक 03.11.2011 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1438 दिनांक 22.11.2011 द्वारा कतिपय आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानो के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह के दिनांक 31.12.2011 को सेवानिवृत हो जाने की स्थिति में विभागीय अधिसूचना सं0-230 दिनांक 29.02.2012 द्वारा उन्हें दिनांक 31.12.2011 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के अन्तर्गत सम्परिवर्तित किया गया।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत सक्षम प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1884 दिनांक 21.08.2015 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया :-
(क) "दस प्रतिशत पेंशन की तीन वर्षों तक कटौती।" (ख) "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त विभागीय अधिसूचना सं०-1884 दिनांक 21.08.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-713 दिनांक 30.07.2021 द्वारा निरस्त किया गया।
श्री सिंह से निलंबन अवधि के संबंध में प्राप्त आवेदन पर सम्यक विचारोपरांत उनके निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 30.12.2011 तक) का विनियमन निम्नवत् किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।" उक्त निर्णय के आलोक में श्री रत्नेश्वर कुमार सिंह (आई0डी0-जे 4612) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज (प्रतिनियुक्त) सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 30.12.2011 तक) का विनियमन निम्नवत किया जाता है -
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-21/2011-187--श्री जनार्दन प्रसाद (आई0डी0-2007) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज (प्रतिनियुक्त) सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में वर्ष 2011 में सारण तटबंध के 142.70 कि0मी0 से 152.00 कि0मी0 के बीच गंडक नदी में29 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 पायलट चैनल का निर्माण कार्य में कतिपय अनियमितता बरतने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1348 दिनांक 03.11.2011 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1437 दिनांक 22.11.2011 द्वारा कतिपय आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानो के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
श्री जनार्दन प्रसाद के दिनांक 30.06.2012 को सेवानिवृत हो जाने की स्थिति में विभागीय अधिसूचना सं0-958 दिनांक 05.09.2012 द्वारा दिनांक 30.06.2012 के प्रभाव से उन्हें निलंबन मुक्त करते हुए उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के अन्तर्गत सम्परिवर्तित किया गया।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत सक्षम प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री जनार्दन प्रसाद के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1852 दिनांक 19.08.2015 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया :-
(क) "दस प्रतिशत पेंशन की तीन वर्षों तक कटौती।" (ख) "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री जनार्दन प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री जनार्दन प्रसाद (आई0डी0-2007) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज (प्रतिनियुक्त) द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त विभागीय अधिसूचना सं0-1852 दिनांक 19.08.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-705 दिनांक 30.07.2021 द्वारा निरस्त किया गया है।
श्री जर्नादन प्रसाद से निलंबन अवधि के संबंध में प्राप्त आवेदन पर सम्यक विचारोपरांत उनके निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 29.06.2012 तक) का विनियमन निम्नवत् किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।" उक्त निर्णय के आलोक में श्री जनार्दन प्रसाद (आई0डी0-2007) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज (प्रतिनियुक्त) सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 29.06.2012 तक) का विनियमन निम्नवत किया जाता है -
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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1 फरवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-21/2011-186--श्री रवीन्द्र कुमार जायसवाल (आई0डी0-2012) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज को विभागीय उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में वर्ष 2011 में सारण तटबंध के 117.05 कि0मी0 से 124.25 कि0मी0 के बीच गंडक नदी में पायलट चैनल का निर्माण कार्य में कतिपय अनियमितता बरतने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1346 दिनांक 03.11.2011 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1435 दिनांक 22.11.2011 द्वारा कतिपय आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानो के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री रवीन्द्र कुमार जायसवाल को विभागीय अधिसूचना सं0-536 दिनांक 27.02.2015 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1853 दिनांक 19.08.2015 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया :- (क) "कालमान वेतन के पाँच वेतन प्रक्रम नीचे पाँच वर्षों के लिए अवनति। (ख) "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"
उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री जायसवाल द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में श्री रवीन्द्र कुमार जायसवाल द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त विभागीय अधिसूचना सं०-1853 दिनांक 19.08.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-706 दिनांक 30.07.2021 द्वारा निरस्त किया गया।
श्री जायसवाल से निलंबन अवधि के संबंध में प्राप्त आवेदन पर सम्यक विचारोपरांत उनके निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत् किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"30 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उक्त निर्णय के आलोक में श्री रवीन्द्र कुमार जायसवाल (आई0डी0-2012) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर-गोपालगंज के निलंबन अवधि (दिनांक 03.11.2011 से दिनांक 26.02.2015 तक) का विनियमन निम्नवत किया जाता है -
"निलंबन अवधि में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर पूर्ण वेतन भत्ता का भुगतान किया जायेगा एवं निलंबन की अवधि सभी प्रयोजनों के लिए कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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24 जनवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-03/2015/148--श्री धनंजय कुमार (आई0डी0-4052) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1845 दिनांक 28.08.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प सं0-769 दिनांक 05.04.2022 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री धनंजय कुमार, सहायक अभियंता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में अपने निलंबन के विरूद्ध CWJC No-7727/2022 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 11.11.2022 को आदेश पारित किया गया।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री धनंजय कुमार के मामले की समीक्षा की गयी, समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति के परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करने एवं संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री कुमार की भूमिका को देखते हुए उनके निलंबन के 12 माह के पश्चात निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% वृद्धि (अर्थात कुल 62.5%) किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री धनंजय कुमार (आई0डी0-4052) निलंबित कार्यपालक अभियंता को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं इनके निलंबन के 12 माह के पश्चात के निलंबन अवधि के लिए CCA Rules 2005 के नियम-10(1) के आलोक में इन्हें प्रथम 12 माह के निलंबन अवधि में अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता में 25% की वृद्धि की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 जनवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-07/2015/78--श्री कृष्ण कुमार (आई0डी0-2133), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के कार्यपालक अभियंता, गंडक कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, गाडा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन अवधि 03.07.2008 से 08.07.2014 एवं अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, समस्तीपुर में पदस्थापन अवधि जुलाई 2014 से जुलाई 2015 तक सरकारी कार्य किये जाने के बावजूद वेतन प्राप्त नहीं करने एवं विभागीय निदेशों का उल्लंघन करने के लिए प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2604 दिनांक 30.11.2015 द्वारा निम्नांकित आरोप के लिए आरोप प्रपत्र-'क' गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- आरोप- कार्यपालक अभियंता, गंडक कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, गाडा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन अवधि 03.07.2008 से 08.07.2014 एवं अधीक्षण अभियंता के रूप में बाढ़ नियंत्रण अंचल, समस्तीपुर में पदस्थापन अवधि जुलाई 2014 से जुलाई 2015 तक सरकारी कार्य किये जाने के बावजूद श्री कुमार द्वारा वेतनादि का भुगतान नहीं लिये जाने के कारण क्षेत्रीय विकास अभिकरण, गाडा मुजफ्फरपुर के ज्ञापांक-728 दिनांक 15.07.2014 के आलोक में विभागीय पत्रांक-4168 दिनांक 26.08.2014 तथा इसके क्रम में अनवरत स्मार देते हुए वेतनादि प्राप्त नहीं करने के निमित्त स्थिति स्पष्ट करने तथा सेवा में प्रवेश के उपरांत निर्गत वेतन पुर्जा, अंतिम निर्गत वेतन पुर्जा, पैन कार्ड की छायाप्रति आदि उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। उक्त के संबंध में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर द्वारा भी अनेकों स्मार दिया गया परन्तु आपके द्वारा मात्र मैट्रिक का प्रमाण पत्र की छायाप्रति के अतिरिक्त न तो कोई कागजात दिया गया और न ही किसी प्रकार का सकरात्मक उत्तर समर्पित किया गया। पुनः विभागीय पत्रांक-1008 दिनांक 11.06.2015 के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा मात्र यह सूचित किया गया कि अगस्त 1999 से दिनांक 31.07.2015 तक का वेतनादि का भुगतान कतिपय कारणवश प्राप्त नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि बारम्बार निदेश एवं स्मार के बावजूद भी किस परिस्थिति में एक लंबी अवधि लगभग 16 (सोलह) वर्षों से वेतनादि का भुगतान प्राप्त नही करने का कोई सकरात्मक उत्तर नहीं दिया जाना तथा अपेक्षित कागजात उपलब्ध नहीं कराना, उच्चाधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन है, जिसके लिए श्री कुमार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।31 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उपर्युक्त वर्णित आरोप के लिए श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-229 दिनांक 28.03.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप के प्रमाणित होने के संबंध में निम्न मंतव्य दिया गया :- "आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने लिखित बचाव-बयान में उन पर लगाये गये आरोप के संदर्भ में सकारात्मक जवाब समर्पित नहीं किया गया है और न ही कोई साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है, जबकि आरोपित पदाधिकारी को उनके अनुरोध पर अतिरिक्त समय भी दिया गया। अतएव आरोपित पदाधिकारी पर लगाये गये आरोप सही प्रतीत होते है।" विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान श्री कुमार के दिनांक 31.01.2016 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-26 दिनांक 16.03.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित करते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-740 दिनांक 05.05.2016 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया, परन्तु इसमें कोई स्वीकार योग्य तथ्य अंकित न करते हुए विभागीय कार्यवाही की संचालन प्रक्रिया को गलत/दूषित बतलाया गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी, जो निम्नवत है :- सरकारी कार्य करते रहने के बावजूद भी 16 (सोलह) वर्षों तक श्री कुमार के द्वारा वेतनादि प्राप्त नहीं किये जाने, नियंत्री पदाधिकारी द्वारा नियुक्ति संबंधी कागजात मांगे जाने पर मात्र मैट्रिक के प्रमाण पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराया जाना इनके आचरण को संदिग्ध बनाता है। सरकारी कर्मचारी होने के नाते इनका दायित्व था कि वैध वेतनादि प्राप्त कर नियमानुसार आयकर देते, किन्तु इनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया, जो कदाचार की श्रेणी में आता है। उक्त के आलोक में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से श्री कृष्ण कुमार, तत0 अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, जिसके अनुपालन में श्री कुमार द्वारा उपस्थित होकर अपना बचाव-बयान/पक्ष रखा गया। उनके लिखित बचाव-बयान के समीक्षा के क्रम में श्री कुमार से हाई स्कूल का मूल प्रमाण पत्र एवं बी-टेक प्रमाण पत्र अवलोकन हेतु माँग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा उक्त प्रमाण पत्र को उपलब्ध कराया गया, जिसके क्रम में बी-टेक प्रमाण पत्र की सम्पुष्टि संबंधित संस्थान से करायी गयी है। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री कृष्ण कुमार, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के सेवा इतिहास के संदर्भ में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-3217 दिनांक 31.12.2001 द्वारा श्री कुमार का स्थानांतरण सारण नहर अंचल, सिवान से मुख्य अभियंता, डिहरी परिक्षेत्र के अन्तर्गत किया गया। उक्त के आलोक में नवपदस्थापित पद पर योगदान करने हेतु सारण नहर अंचल, गंडक योजना, सिवान के पत्रांक-676 दिनांक 20.03.2002 द्वारा दिनांक 20.03.2002 (पूर्वाह्न) के प्रभाव से विरमित किया गया। उक्त अधिसूचना के 06 (छह) वर्ष बाद की अवधि में श्री कुमार द्वारा दिनांक 03.07.2008 को गंडक काडा प्रमंडल, मुजफ्फरपुर में योगदान का साक्ष्य मौजूद है। परन्तु दिनांक 20.03.2002 से 02.07.2008 तक के अवधि में इनके पदस्थापन/स्थिति के संबंध में अवर सचिव (प्रबंधन) के गै0स0प्रे0 सं0-659 दिनांक 22.09.2021 एवं गै0स0प्रे0 सं0-25 दिनांक 07.02.2022 द्वारा सूचना उपलब्ध करायी गयी जिसमें उल्लेखित है कि "श्री कृष्ण कुमार, तत0 सहायक अभियंता (असै0) सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता (असै0) का वर्ष 2002 से 2008 तक के पदस्थापन विवरणी के संबंध में खोजबीन की गयी। प्राप्त अभिलेख से यह प्रतीत होता है कि श्री कुमार का स्थानांतरण विभागीय अधिसूचना सं0-3217 दिनांक 22.12.2001/31.12.2001 द्वारा मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्र से मुख्य अभियंता, डिहरी परिक्षेत्राधीन किया गया। उक्त विभागीय अधिसूचना के अनुपालन में सारण नहर अंचल, गंडक योजना, सिवान के पत्रांक-676 दिनांक 20.03.2002 द्वारा श्री कुमार को दिनांक 20.03.2002 (पूर्वाह्न) के प्रभाव से नवपदस्थापन स्थान पर योगदान करने हेतु विरमित किया गया।" परन्तु उक्त अवधि में श्री कृष्ण कुमार द्वारा नवपदस्थापित स्थान पर योगदान करने तथा उक्त अवधि में पदस्थापित स्थान पर कार्यरत रहने के संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख विभागीय प्रबंधन द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा सका। वर्णित स्थिति में, विभागीय पत्रांक-983 दिनांक 28.04.2022 द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी से वर्ष 2002 से वर्ष 2008 तक उनके परिक्षेत्राधीन योगदान/कार्यरत रहे सहायक अभियंताओं की सूची की माँग की गयी। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी द्वारा पत्रांक-1638 दिनांक 28.05.2022 से उक्त अवधि में उनके परिक्षेत्राधीन कार्यरत/योगदान करने वाले सभी सहायक अभियंताओं की सूची उपलब्ध करायी गयी। मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूची के अनुसार श्री कृष्ण कुमार उक्त अवधि में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी परिक्षेत्र में कार्यरत नहीं थे। अतएव वर्णित तथ्यों के संदर्भ में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप मुख्य रूप से विभाग द्वारा बारम्बार निदेश एवं स्मार के बावजूद लंबी अवधि लगभग 16 (सोलह) वर्षों से वेतनादि का भुगतान नहीं लेने एवं उच्चाधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन करने से संबंधित है, जिसके लिए संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में उक्त आरोपों के संबंध में कुछ भी उल्लेख नहीं करते हुए, अनावश्यक रूप से विभागीय कार्यवाही के संचालन की प्रक्रिया को ही दूषित बताया गया है। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि दिनांक 20.03.2002 से 02.07.2008 तक ये अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहे, जिसकी सूचना श्री कुमार द्वारा विभाग को नहीं दी गयी, जो इनके आचारण को और संदिग्ध बनाता है। सरकारी कर्मी होने के नाते इनका कर्त्तव्य था कि उक्त सभी आशय की सूचना ससमय विभाग को देकर वैध वेतनादि प्राप्त करते एवं नियमानुसार आयकर देते, किन्तु इनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। इस प्रकार श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित पाया गया एवं उनके द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।32 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अतएव वर्णित तथ्यों के संदर्भ में श्री कृष्ण कुमार (आई0डी0-2133) तत0 अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत "पेंशन से 75% (पचहत्तर प्रतिशत) की स्थायी कटौती" करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है, जिस पर बिहार लोक सेवा आयोग का सहमति प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री कृष्ण कुमार (आई0डी0-2133) सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 75% (पचहत्तर प्रतिशत) की स्थायी कटौती"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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10 जनवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2021-73--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-4029), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा को गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा के अधीन केन्द्रीय भंडार एवं प्रमंडलीय भंडार में भौतिक सत्यापन के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों की कमी पाये जाने एवं सुनियोजित ढंग से इस अपराधिक कृत्य को करने के आरोप के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना सं0-39 दिनांक 11.01.2022 द्वारा निलंबित किया गया।
श्री राजेश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा दिनांक 31.07.2022 को वार्धक्य सेवानिवृत हो गये हैं। उनको वार्धक्य सेवानिवृति की तिथि 31.07.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करने के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निर्णय लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा वार्धक्य सेवानिवृति की तिथि 31.07.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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6 जनवरी 2023
सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-28/2022/44--मो0 अब्दुल रकीब (आई0डी0-5479), तत0 सहायक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के विरूद्ध बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना का पत्रांक-3696 दिनांक 21.12.2022 में संलग्न विशेष निगरानी इकाई, पटना का पत्रांक-1608 दिनांक 12.12.2022 के माध्यम से सूचित किया गया कि मो रकीब को 50,000/- रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ विशेष निगरानी इकाई धावा दल द्वारा दिनांक 18.10.2022 गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली 2005 के नियम-9 में निहित प्रावधानों के तहत मो0 रकीब को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की तिथि 18.10.2022 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में मो0 अब्दुल रकीब (आई0डी0-5479), तत0 सहायक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली, 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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26 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(भाग0)09-09/2014-2887--श्री भुवनेश्वर प्रसाद (ID-4610), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, मलयपुर संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल सं॰-2, जमुई के अधीन लोअर किऊल नदी घाटी योजनान्तर्गत दायाँ मुख्य नहर में कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय निदेश के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल से जाँच कराया गया। उक्त के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत, श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र का गठन किया गया। तत्पश्चात् सम्यक समीक्षोपरांत, विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2620 दिनांक 18.12.2019 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र में वर्णित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत उनसे, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित/आंशिक प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा का प्रत्युार) समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक-1409 दिनांक- 05.11.2021 द्वारा निदेशित किया गया। आरोपित पदाधिकारी श्री भुवनेश्वर प्रसाद, सहायक अभियंता (सेवानिवृत) द्वारा द्वितीय33 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया है। फलस्वरूप, श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र में वर्णित आरोपों, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन तथा उनसे प्राप्त लिखित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत वस्तुस्थिति निम्नवत् है :- आरोप सं॰-1 :- अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल-2, जमुई का पत्रांक-660 दिनांक 12.07.2011 एवं कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल-02, जमूई का पृष्ठांकित पत्रांक 745 दिनांक 13.07.2011 द्वारा माह जुलाई में स्थानीय समाचार पत्र ''हिन्दुस्तान'' में अनियमितता के संबंध में प्रकाशित खबर के आलोक में त्रुटिपूर्ण कार्य के Proper rectification किये बिना तथा कराये गये कार्य की गुणवत्ता से संतुष्ट हुए बिना भुगतान नहीं करने के रोक के बावजूद उक्त पत्र का अनुपालन प्रतिवेदन दिये बिना भुगतान किये जाने के कारण वरीय पदाधिकारी का निर्देश का अनुपालन नहीं किये जाने का, दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं॰-2 :- आपके द्वारा मार्च 2012 में छुट्टी में जाने के पूर्व वित्तीय वर्ष 2011-12 में कराये गये कार्यों को माप पुस्त में Record entry ससमय नहीं करने के दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं॰-3 :- उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा दिनांक 22.02.2014 को स्थलीय जाँच के क्रम के वर्ष 2011-12 में निर्मित Toe Wall एवं मलियानाला (मननपुर नाला) के कार्यों में से क्षेत्रीय अभियंताओं के समक्ष कंक्रीट ईट, मोर्टार एवं सिमेन्ट प्लास्टर का लिए गये नमूने को सीलबंद कर सिंचाई गवेषण संस्थान, खगौल से कराये गये गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार मलियानाला (मननपुर नाला) में कराये गये कार्यों की सीमेन्ट की मात्रा में प्रतिशत कमी P.C.C. Coping में 48.48%, सीमेन्ट मोर्टार में 41.00% एवं प्लास्टर में 37.00% पायी गई तथा Toe Wall निर्माण कार्य में सीमेन्ट की मात्रा में प्रतिशत कमी सीमेन्ट मोर्टार में 28.50% तथा प्लास्टर में 22.00% पायी गई जो मान्य सीमा से काफी ज्यादा रहने के फलस्वरूप प्रावधानित विशिष्ट की तुलना में न्यून विशिष्टि के कार्य सम्पादित किये जाने से वर्ष 2011-12 में कराये गये संरचना कार्यों को अपव्यय की श्रेणी मे माना गया। जिसके लिए आप दोषी परिलक्षित होते हैं। आरोपी पदाधिकारी का बचाव-बयान :- आरोपी पदाधिकारी श्री भुवनेश्वर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में अंकित किया गया है कि लोअर किउल नदी घाटी योजनान्तर्गत नहर में कराये गये पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितताओं रिकार्ड इंट्री कार्य के पश्चात् कनीय अभियंता द्वारा किया जाता है। ससमय रिकार्ड इंट्री कर प्रस्तुत नहीं किया गया, क्योंकि कार्य नहीं हुआ था। रिकार्ड इंट्री कनीय अभियंता द्वारा किया जाता है। रिकार्ड इंट्री सहायक अभियंता द्वारा नहीं होता है। गुणवत्ता का जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता, निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी का होता है। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। मेरा अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इससे मुझे दोष मुक्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- आरोपी पदाधिकारी श्री भुवनेश्वर प्रसाद तत्कालीन सहायक अभियंता से संबंधित संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित/आंशिक प्रमाणित आरोपों के लिए पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा अपने प्रत्युत्तर में अंकित किया गया है कि Record Entry का कार्य कनीय अभियंता द्वारा किया जाता है, जो ससमय मेरे समक्ष Record Entry मापपुस्त में अंकित कर प्रस्तुत नहीं किया गया। जबकि कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की होती है। इसके अलावा आरोपी पदाधिकारी के द्वारा अपने बचाव-बयान में कुछ भी नया तथ्य/अभिलेख का जिक्र नहीं किया गया है और ना ही अपने बचाव-बयान के साथ कोई साक्ष्य ही संलग्न किया गया है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत निम्नांकित तथ्य पाये गये - उड़नदस्ता जाँच दल के प्रतिवेदन की कंडिका 6.5.0 में प्रतिवेदित है कि माह-मई 2011 में Toe Wall में 60 मीटर की लम्बाई में प्रगति हुई है जबकि मलियानाला के अवशेष कार्य 98.84 मीटर में से मई 2011 में 80.00 मीटर एवं शेष 18.84 मीटर 15 जून' 2011 तक सम्पादित कराये गये है''। शेष सभी कार्य 2010-11 तक समाप्त प्रतिवेदित किये गये हैं। अतः प्रतिवेदित कार्य आरोपी पदाधिकारी के पदस्थापन अवधि में कराये गये हैं। चूंकि कार्य श्री प्रसाद द्वारा ही कराया गया है इसलिए वरीय पदाधिकारी के निदेशानुसार त्रुटिपूर्ण कार्य का Proper rectification इनके द्वारा कराया जाना चाहिए था, पर ऐसा नहीं करने के कारण त्रुटिपूर्ण कार्य का Proper rectification नहीं करने का आरोप बनता प्रतीत होता है। आरोपी पदाधिकारी ने बचाव बयान में प्रतिवेदित किया है कि दिनांक 05.03.2012 से दिनांक 10.09.2012 तक वे छुट्टी में थे। 24 वें चालू विपत्र मार्च 2012 के अन्त में दिनांक 28.03.2012 को कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्त में दर्ज किया गया है। स्पष्ट है कि उक्त तिथि को श्री प्रसाद छुट्टी पर थे। उक्त विपत्र पर श्री प्रसाद का हस्ताक्षर भी नहीं है अर्थात् 24 वें चालू विपत्र श्री प्रसाद द्वारा नहीं बनाया गया है। इस कारण उच्चाधिकारी द्वारा भुगतान नहीं करने के रोक के बावजूद उक्त पत्र का प्रतिवेदन दिये बिना भुगतान किये जाने के कारण वरीय पदाधिकारी का निर्देश का अनुपालन नहीं किये जाने का दोष प्रमाणित नहीं होता हैं।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा मार्च 2012 में छुट्टी में जाने के पूर्व वर्ष 2011-12 में कराये गयें कार्यों को माप पुस्त में Record entry ससमय नहीं करने का है। चूंकि आरोपी पदाधिकारी दिनांक 05.03.2012 से दिनांक 10.09.2012 तक छुट्टी पर थे और कार्य इनके पदस्थापन अवधि वर्ष 2011-12 में कराया गया था अतः श्री प्रसाद को कराये गये कार्यों को माप पुस्त में Record entry ससमय कराना चाहिए था। इस आरोप के लिए इन्हें दोषी माना जा सकता हैं।
उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा दिनांक 22.02.2014 को स्थलीय जाँच के क्रम के वर्ष 2011-12 में निर्मित Toe Wall एवं मलियानाला (मननपुर नाला) के कार्यों में प्रावधानित विशिष्टि की तुलना में न्यून विशिष्टि का कार्य किये जाने से कराये गये संरचना कार्यों को अपव्यय की श्रेणी में माना गया। वर्ष 2011-12 में निर्मित संरचना के कार्यों में से क्षेत्रीय अभियंताओं के समक्ष कंक्रीट, ईंट, मोर्टार एवं सीमेन्ट प्लास्टर का लिये गये नमूने को सीलबंद कर सिंचाई गवेषण संस्थान, खगौल से जाँच34 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 कराया गया था। इस जाँच प्रतिवेदन के अनुसार मलियानाला में कराये गये कार्यों में सीमेन्ट की मात्रा में प्रतिशत कमी P.C.C. Coping में 48.48%, सीमेन्ट मोर्टार में 41.00%, प्लास्टर में 37.00% पायी गई तथा Toe Wall निर्माण कार्य में सीमेन्ट की मात्रा में प्रतिशत कमी सीमेन्ट मोर्टार में 28.50% तथा प्लास्टर में 22% पायी गयी। सीमेन्ट की मात्रा में कमी मान्य सीमा से काफी ज्यादा रहने के फलस्वरूप प्रावधानित विशिष्टि की तुलना में न्यून विशिष्टि का कार्य माना जा सकता है। परन्तु श्री प्रसाद द्वारा 24 वें चालू विपत्र का भुगतान नहीं किया गया है, इसे अपव्यय नहीं माना जा सकता है, पर कार्य के दौरान कार्य की गुणवत्ता पर नियंत्रण नहीं रख पाने के लिए श्री प्रसाद पर आंशिक आरोप बनता हैं।
उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। जिसके कारण श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत पर लगाया गया आरोप सं॰-1 एवं 3 आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं॰-2 प्रमाणित होता है।
निष्कर्ष :- उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में श्री भुवनेश्वर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता पर लगाया गया आरोप संख्या-1 एव 3 आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप संख्या-2 प्रमाणित होता है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित/आंशिक प्रमाणित आरोपों के लिए श्री भुवनेश्वर प्रसाद (ID-4610), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, मलयपुर संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड देने का निर्णय लिया गया है - '20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए'। उपर्युक्त विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-2361 दिनांक 29.09.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3573 दिनांक 14.12.2022 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है। वर्णित स्थिति मे श्री भुवनेश्वर प्रसाद (ID-4610), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, मलयपुर संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है। '20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए'।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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23 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(कटि0)25-08/2018-2875--श्री रमेश कुमार (आई0डी0-3829) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध एजेण्डा सं०-147/11 के तहत बाढ़ 2018 के पूर्व ग्राम सुरजीचक में कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता के संदर्भ में ग्रामीणों द्वारा दिये गये परिवाद के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण की माँग की गयी :- आरोप - (i) एजेण्डा सं0 147/11 के तहत बाढ़ 2018 के पूर्व सुरजीचक ग्राम के पास कराये गये कटाव निरोधक कार्य के पश्चात बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु संग्रहित स्थानीय बालू भरे EC Bags में मानक वजन 50kg से काफी कम मात्रा में बालू भरकर न्यून विशिष्टि का कार्य कराना। (ii) एजेण्डा सं0 147/11 के तहत बाढ़ 2018 के पूर्व सुरजीचक ग्राम के पास कराये गये क्रेटिंग कार्य में से 40मी0 की लम्बाई में पाये गये धसान के संदर्भ में स्थल से अनभिज्ञ रहने एवं उच्चाधिकारी एवं विभाग को गलत सूचना देकर भ्रमित करने का प्रयास करना। उपरोक्त कंडिका में बरती गयी अनियमितता से स्पष्ट है कि इनके द्वारा बिना स्थल पर गये एवं स्थल की स्थिति अनभिज्ञ रहकर गलत सूचना देकर विभाग एवं उच्च पदाधिकारियों को दिग्भ्रमित किया गया है। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है।
श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त उनके विरूद्ध गठित आरोप सं0-(i) को स्वीकार योग्य पाया गया एवं आरोप सं0-(ii) को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही संचालित रहने के क्रम में ही दिनांक- 31.10.2021 को श्री रमेश कुमार (आई०डी०-3829) के सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43 (बी) में, सम्परिवर्तित किया गया है। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध अधिरोपित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर श्री कुमार से लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई। असहमति के बिन्दु - संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में, श्री रमेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता स्थल से अनभिज्ञ नहीं थें और न ही उनके द्वारा गलत सूचना देकर विभाग एवं उच्च पदाधिकारियों को दिग्भ्रमित किया गया से सहमति व्यक्त की गयी, परन्तु कटाव निरोधक कार्य के दौरान श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण35 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 प्रमंडल, भागलपुर के द्वारा कतिपय बिन्दुओं पर रिवर बेड का दलदली होना देखा गया था, जिसके संदर्भ में विशेष जाँच दल के अध्यक्ष से स्थल निरीक्षण के दौरान इस स्थल विशेष पर मौखिक चर्चा किये जाने का उल्लेख है, परन्तु इसकी सूचना श्री कुमार के स्तर से विभाग को नहीं दी गयी। श्री कुमार का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर - श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि -
1. कार्य के दौरान गरही विशनपुर एवं सुरजीचक के प्रभावित क्रमशः 50 मीटर एवं 40 मीटर की लंबाई में एज क्रेटिंग हो जाने के बाद Differential Settlement देखा गया था। यह Differential Settlement इतना कम था कि इसके चलते कार्य में कोई क्षति उस समय नहीं हुआ था। अतः मरम्मति या अन्य उपाय करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इस कारण इसकी सूचना विभाग/वरीय पदाधिकारी को देने की आवश्यकता नहीं थी। इस partial Differential Settlement इसके base का अपेक्षा—त कम bearing capacity होने की पुष्टि करता है। इसी आधार पर बाढ़ के समय इस भाग में कार्य को सिंक करने के कारण को वितंतु संवाद में उल्लेख किया गया है, जिसकी समीक्षा की गई कि कार्य के प्रारम्भ में स्थल की दलदली होने की जानकारी अधोहस्ताक्षरी को थी, तथा यदि इसकी जानकारी वरीय पदाधिकारी को दी जाती तो तद्नुसार कार्य करा लिया जाता और sinking से बचा जा सकता था।
2. मेरे द्वारा प्रेषित वितंतु संवाद 685 दिनांक 30.07.2018 में दी गई सूचना की उपरोक्त समीक्षा से लगाया गया आरोप इसलिए भी त्रुटिपूर्ण है कि कटाव निरोधक कार्य में रिवर बेड का Bearing Capacity नहीं मापा जाता है, तो कार्य के प्रारंभ में इसके दलदली होने की जानकारी होना संभव नहीं हो सकता है।
3. प्रभावित भाग में किया हुआ एज क्रेटिंग कार्य बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसे ससमय विभाग को वितंतु संवाद के द्वारा सूचित किया गया है। उड़नदस्ता जाँच में भी इसी तथ्य की पुष्टि की गई है।
इस प्रकार अधोहस्ताक्षरी के वितंतु संवाद के त्रुटिपूर्ण समीक्षा कर आरोप गठित किया गया है, जो काल्पनिक एवं बिना आधार का है। अतः अनुरोध है कि मुझे इस आरोप से मुक्त करने की —पा की जाय। समीक्षा - श्री कुमार द्वारा आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के संदर्भ में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उन्होने अपने लिखित बचाव बयान में दिया था। आरोपों के लिए किसी नये तथ्य/अभिलेख का उल्लेख नहीं किया गया और न ही कोई साक्ष्य ही बचाव बयान में संलग्न किया गया है। अतएव श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रमाणित होता है। प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री रमेश कुमार (आई0डी0-3829) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है - " 20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3570 दिनांक-14.12.2022 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्राप्त है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री रमेश कुमार (आई0डी0-3829), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को "20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए" का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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23 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-06/2018/2873--ग्रामीण कार्य विभाग का पत्रांक-496 दिनांक-09.03.2018 द्वारा लोकायुक्त परिवाद सं0-05/लोक(शिक्षा)08/2017 कमलदह जैन मंदिर के विकास एवं संवर्द्धन से संबंधित योजना में अनियमितता हेतु माननीय सदस्य (न्यायिक), लोकायुक्त, बिहार द्वारा पारित आदेश के अनुपालन के आलोक में श्री अवधेश प्रसाद (ID-J 7497), तत0 सहायक अभियंता, कार्यप्रमंडल, दानापुर के विरूद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा के साथ जल संसाधन विभाग से अनुरोध किया गया। ग्रामीण कार्य विभाग का पत्रांक-309 दिनांक-06.02.2019 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया जिसे विभाग के स्तर पर ग्रहण करते हुए आरोप पत्र गठित किया गया, जो निम्न है :- आरोप- ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, दानापुर अन्तर्गत कमलदह जैन मंदिर के विकास एवं संवर्द्धन के कार्य में निम्न त्रुटियाँ पाई गई :-
1. योजना के कार्यान्वयन के पश्चात् बेंच मार्क, लेवलिंग एवं ग्राफ के आधार पर मिट्टी भराई की गणना नहीं की गई है।
2. योजना की प्राक्कलित राशि 118.938 लाख रूपया रहने के बावजूद 15000/-रूपया से कम के अभिश्रवों के माध्यम से पूरे योजना के कार्यान्वयन का भुगतान किया गया। श्री प्रसाद द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठापूर्वक नहीं किया गया है। इनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंघन है।36 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उक्त आरोप के विस्तृत जाँच हेतु सक्षम प्राधिकार के आदेशोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-601 दिनांक- 19.03.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1106 दिनांक-23.09.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित अंकित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-2272 दिनांक-30.10.2019 द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा श्री प्रसाद से किया गया। इसी क्रम में श्री प्रसाद दिनांक-31.01.2020 को वार्द्धक्य सेवानिवृत्त हो गए। तदोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-249 दिनांक-12.02.2020 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित कर दिया गया।
श्री प्रसाद के सेवानिवृत्ति के उपरांत विभागीय पत्रांक-483 दिनांक-12.03.2020 द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की गई। इसके आलोक में श्री प्रसाद के पत्रांक-शून्य दिनांक-08.03.2021 द्वारा जवाब विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जवाब की समीक्षा विभागीय स्तर पर तकनीकी पदाधिकारी द्वारा कराई गई। समीक्षा :- आरोप सं0-01 :- मुख्य आरोप योजना के कार्यान्वयन के पश्चात बेंच मार्क, लेवलिंग एवं ग्राफ के आधार पर मिट्टी भराई कार्य की गणना नहीं करने का है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि कार्य स्थल के चारो तरफ जलमग्न होने के कारण बेंच मार्क मंदिर के बरामदे के सतह को माना गया व कार्य चालू अवस्था में रहने के कारण ग्राफ प्लॉट नहीं किया गया है। यह तथ्य विधि सम्मत् नहीं माना जा सकता है। लेवेल, बेंचमार्क तथा ग्राफ प्लॉट नहीं करने के जो कारण दिए गए है वह अभियांत्रिक सिद्धांतों/नियमों के विपरीत जुगाड़ विधि अपनाकर कार्य करने तथा सुसंगत नियमों के विपरीत है। अतः आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-02 ः- मुख्य आरोप योजना की प्राक्कलित राशि 118.938 लाख रूपये रहने के बावजूद 15000/- रूपये से कम के अभिश्रवों के माध्यम से पूरे योजना के कार्यान्वयन का भुगतान करने का है। इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदन दिया गया है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा दिए गए निदेश के आलोक में ही रूपये 15000/- से कम अभिश्रवों द्वारा भुगतान किया गया तथा अभिश्रवों को उन्हीं के द्वारा पारित किया गया। इसके समर्थन में कोई साक्ष्य, सक्षम प्राधिकार का आदेश संलग्न नहीं किया गया। अतः आरोप प्रमाणित होता है। अतएव श्री अवधेश प्रसाद, तत0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं तकनीकी समीक्षा के आलोक में प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दंड प्रस्तावित किया गया। "20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दस वर्षों के लिए" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का पत्रांक-3569 दिनांक-14.12.2022 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्राप्त है। अतः श्री अवधेश प्रसाद (ID-J 7497), तत0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, दानापुर सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध निम्न अनुमोदित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :- "20% (बीस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दस वर्षों के लिए"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संतोष कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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20 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(गोपा0)27-03/2019-2851--श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0-3911), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के नव निर्मित सरकारी आवास पर दिनांक 29.08.2019 को घटित घटना के संदर्भ में मुख्य अभियंता, गोपालगंज आवास निर्माण योजना के अद्यतन भुगतान एवं लंबित भुगतान से संबंधित, उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-18 दिनांक 31.08.2019 से प्राप्त प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी कतिपय अनियमितता के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1888 दिनांक 01.09.2019 द्वारा निलंबित किया गया। उक्त मामले में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2543 दिनांक 09.12.2019 द्वारा श्री कुमार से आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के द्वितीय भाग-अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत है :-
स्व0 रामाशंकर सिंह, संवेदक, राजेन्द्र नगर, वार्ड नं0-22, गोपालगंज की मृत्यु दिनांक 29.08.2019 को संदिग्ध परिस्थिति में मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के गोपालगंज स्थित सरकारी आवास पर हुयी। इस संबंध में दिनांक 29.08.2019 को नगर थाना गोपालगंज में प्राथमिकी कांड सं0-423/2019 अन्तर्गत धारा-302/34 भा0द0वि0 दर्ज किया गया। घटना के संदर्भ में मुख्य अभियंता, गोपालगंज आवास निर्माण योजना के अद्यतन37 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 एवं लंबित भुगतान की जाँच उड़नदस्ता अंचल-1, पटना से करायी गयी। जाँच प्रतिवेदन में वर्णित तथ्यों के आलोक में कार्य में बरती गयी निम्न अनियमितताओं के लिये श्री सत्येन्द्र कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज दोषी प्रतीत होते हैं।
(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.0.1 से स्पष्ट है कि गोपालगंज अवस्थित मुख्य अभियंता के आवास निर्माण में एकरारित दर पर अनुमानित कुल रु 167.30 लाख का कार्य कराया जाना परिलक्षित है। जिसमें एकरारित मदों में रु 153.687 लाख, अतिरिक्त कार्य मद में Schedule Item के मदों में रु 7.576 लाख तथा Non Schedule Item के मदों में अनुमानित रु 6.037 लाख का कार्य कराया गया है। संवेदक को अबतक एकरारित मदों में रु 126.919 लाख का भुगतान किया गया है। स्थल आदेश पंजी पर विचलन/अतिरिक्त कार्य कराने संबंधी न तो कोई प्रस्ताव ही अंकित है और न ही कोई आदेश ही अंकित है, जिससे स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किसके आदेश से अतिरिक्त कार्य कराया गया है। जहाँ तक कि कराये गये कार्यों से संबंधित विचलन/अतिरिक्त मदों के प्रस्ताव की स्वीकृति के अभाव में शेष राशि 40.381 लाख का भुगतान लंबित है। लंबित भुगतान के दिशा में आपके स्तर से कोई कार्रवाई किया जाना परिलक्षित नहीं होता है, जो कार्य के प्रति उदासीनता एवं कर्तव्यहीनता को दर्शाता है।
(2) दिनांक-29.08.2019 को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के नव निर्मित सरकारी आवास पर घटित घटना के पश्चात आप अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाये गये।
उक्त से स्पष्ट है कि आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंघन है। श्री कुमार द्वारा उक्त के क्रम में स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया तथा निलंबन अवधि में तत्समय निर्धारित मुख्यालय से अनुपस्थित रहने के कारण मामले के समीक्षोपरांत, अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप के विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-996 दिनांक 12.08.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-20 दिनांक 18.01.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में, अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक-600 दिनांक 16.03.2022 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी।
उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा अपने पत्र दिनांक 28.03.2022 के माध्यम से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित किया गया, जिसमें निम्नांंिकत बातें कही गयी है :-
(क) मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण गोपालगंज के नव-निर्मित आवास के निर्माण हेतु मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण गोपालगंज द्वारा निविदा के आधार पर संवेदक आशियाना कान्ट्रैक्ट प्राइवेट लिमिटेड (प्रो0 श्री रामाशंकर सिंह) को कार्य आबंटित किया गया था। यह कार्य अनुसूचित दर से 10% (दस प्रतिशत) कम पर रू0-185.032 लाख का था। कार्य आवंटन के उपरान्त संवेदक आशियाना कान्ट्रैक्ट प्रा0 लि0 एवं कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के बीच एकरारनामा किया गया, जिसका एकरारनामा सं0-1SBD/2018-19 दिनांक- 11.09.2018 था, जिसमें निर्धारित एकरारित राशि रू0-185.032 लाख एवं कार्य समाप्ति की तिथि-31.03.2019 थी। (ख) उल्लेखित किया गया है कि विभागीय कार्य प्रणाली अंतर्गत कोई भी कार्य कराने से पूर्व कार्य स्थल आदेश पंजी कार्यपालक अभियंता के स्तर से निर्गत किया जाता है, जिसमें एकरारित मदों में बढ़ोतरी या अतिरक्ति मदों का कार्य कराने का आदेश अपने पदक्रम के प्रथम पद के नीचे के पदाधिकारी को देने का प्रावधान है, जैसे मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता को, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता को, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता को, सहायक अभियंता कनीय अभियंता को तथा कनीय अभियंता के द्वारा संवेदक को आदेश के अनुसार निदेश देते है। कार्य कराने के पूर्व संवेदक अथवा संवेदक के प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा स्थल आदेश पंजी पर अपना हस्ताक्षर करते हुए सहमति दी जाती है एवं दिये गये दिशा-निर्देश का अनुपालन किया जाता है। कार्यमदों में या मात्रा में बढ़ोतरी या किसी प्रकार का परिवर्तन की आवश्यकता रहने पर नीचे के पदाधिकारी द्वारा अपने पदक्रम से एक पद उपर के पदाधिकारी को उक्त कार्य के आवश्यकता की अनुशंसा भेजी जाती है, जिसे क्रमबद्ध अनुशंसा के साथ अग्रसारित किया जाता है, जिसपर आवश्यकतानुसार वरीय पदाधिकारी द्वारा अनुशंसा अपने मंतव्य के साथ सक्षम प्राधिकार को अनुमोदन हेतु समर्पित किया जाता है। कार्य की पूर्णता पर अनुपालन से संबंधित सूचना भी स्थल आदेश पंजी पर अंकित किया जाता है।
(ग) उल्लेखित किया गया है कि मुख्य अभियंता, निर्माणाधीन आवास में गुणवत्ता वाली सामग्री लगवाना चाहते थे तथा आवास की भव्यता में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देना चाहते थे, जिससे कि गोपालगंज में निर्मित्त आवास एक नमूना के तौर पर तैयार हो। इच्छानुसार भवन के विभिन्न अवयवों के निर्माण कार्य में बहुत सारे अतिरिक्त कार्य मद होने की संभावना को मुख्य अभियंता जानते थे। अतः विभागीय प्रक्रिया अन्तर्गत नीचले पद से उपर के पदक्रम में अनुशंसा तथा आदेश पारित एवं अनुपालन में काफी समय व्यतीत होने की संभावना पर मौखिक आदेश पर कार्य मात्र साढ़े नौ माह में दो मंजिल भवन का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया। मुख्य अभियंता द्वारा कार्य पूर्ण होने पर समेकित रूप से घटनोत्तर आदेश उनके स्तर से दे दिया जायेगा (जिससे सभी पदाधिकारी के साथ-साथ संवेदक भी अवगत थे।) का उल्लेख श्री कुमार द्वारा किया गया है।38 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 (घ) उल्लेखित किया गया है कि संवेदक द्वारा दिनांक-11.09.2018 को कार्य प्रारंभ करते हुए दिनांक-25.06.2019 को कार्य पूर्ण कर लिया गया, जिसमें संवेदक द्वारा कराये गये कार्य में 55 एकरारित मदों के मात्रा में बढ़ोतरी के साथ 05 अदद Sechdule Extra Item of work है एवं 44 अदद Non Schedule Extra Item of work शामिल है। (ड़) उल्लेखित किया गया है कि संवेदक द्वारा कराये गये कुल कार्याें की विवरणी निम्न प्रकार है :- (i) एकरारित मदों में (मदों की मात्रा में बढ़ोतरी सहित) 153.687 लाख (ii) अतिरिक्त मद :- (a) Scheduled Item - 7.576 लाख। (b) Non Scheduled Item - 7.037 लाख। एकरारित मदों में (बढ़ोतरी सहित) रु॰ 153.687 लाख में से एकरारनामों के शर्ताें के अनुरूप एकरारित मदों में (बढ़ोतरी को छोड़कर) रु॰ 126.919 लाख रुपये का भुगतान दिनांक-17.08.2019 तक संवेदक को कर दिये जाने का उल्लेख श्री कुमार द्वारा किया गया है। SBD के क्लाउज 12.2 के तहत कार्य में अतिरिक्त मद या क्लेम (Claim) की स्थिति में संवेदक द्वारा बाजार के दर पर विभिन्न मदों के दर विश्लेषण का प्रस्ताव विभाग को समर्पित किया जाता है, एवं यह एक मुख्य प्रक्रिया है, जो संवेदक द्वारा समर्पित नहीं किया गया।
(च) श्री कुमार के द्वारा उल्लेख किया गया है कि मुख्य अभियंता के नवनिर्मित आवास का निर्माण कार्य प्राक्कलन से अतिरिक्त कार्य तत्कालीन मुख्य अभियंता के मौखिक आदेश पर किया गया है तथा इस योजना के एकरारित मद एवं अतिरिक्त मद को मिलाकर कुल रुपये 1,67,30,018/- के कराये गये कार्य के विरूद्ध मापपुस्त में अंकित विपत्र के जाँचोपरांत रुपये 1,26,91,885/- का भुगतान किया गया है। श्री कुमार के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि संवेदक द्वारा Clause 12.2 के अनुसार अतिरिक्त मदों के विश्लेषण के साथ दर का प्रस्ताव समर्पित नहीं किया गया, जिसके कारण अग्रेत्तर कार्रवाई पूर्ण नहीं हो सका।
श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री कुमार द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये -
कार्यपालक अभियंता का यह प्रत्युत्तर कि मुख्य अभियंता के मौखिक निदेश के आलोक में कार्य में बढ़ोत्तरी एवं विचलन किया गया जिसके लिए वह जिम्मेवार नहीं है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। कार्यपालक अभियंता को मुख्य अभियंता के मौखिक निदेश द्वारा कार्य में की गयी बढ़ोत्तरी एवं विचलन को पंजी में दर्ज कराना चाहिए था जो उनके द्वारा नहीं कराया गया। कार्यपालक अभियंता का यह भी दायित्व था कि निर्माण कार्य से संबंधित सम्पूर्ण वस्तुस्थिति, कार्य में बढ़ोत्तरी एवं विचलन की जानकारी ससमय अपने वरीय/कनीय पदाधिकारी को दिया जाय तथा इसे अभिलेखित कर दिया जाय जो उनके द्वारा नहीं किया गया। स्पष्ट है कि मौखिक आदेश द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन से अतिरेक कार्य कराने के लिए कार्यपालक अभियंता भी जिम्मेवार हैं जो अनुशासनहीनता एवं वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। आरोपी पदाधिकारी के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोपों के संबंध में श्री कुमार द्वारा विभाग को कोई प्रत्युत्तर समर्पित नहीं किया गया है। अतः आरोप स्वतः प्रमाणित हो जाता है। अतएव श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है। उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0-3911), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए उन्हें निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किये जाने का विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
1. कालमान वेतन में चार वेतन प्रक्रम पर स्थायी अवनति। 2. देय प्रोन्नति पर स्थायी रोक। उक्त के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0-3911), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2480 दिनांक 20.10.2022 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया एवं उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-2482 दिनांक 20.10.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3571 दिनांक 14.12.2022 द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध (1) कालमान वेतन में चार वेतन प्रक्रम पर स्थायी अवनति किये जाने संबंधी दण्ड प्रस्ताव के बिन्दु पर सहमति व्यक्त की गयी है। आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध विनिश्चित (2) देय प्रोन्नति पर स्थायी रोक का दण्ड लघु दण्ड की श्रेणी में रहने के कारण, इस पर आयोग का परामर्श आवश्यक नहीं है।
अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0-3911), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-
1. कालमान वेतन में चार वेतन प्रक्रम पर स्थायी अवनति। 2. देय प्रोन्नति पर स्थायी रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।39 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023
20 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(गोपा0)27-03/2019-2850--श्री मुरलीधर सिंह (आई0डी0-3177), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के नव निर्मित सरकारी आवास पर दिनांक 29.08.2019 को घटित घटना के संदर्भ में मुख्य अभियंता, गोपालगंज आवास निर्माण योजना के अद्यतन भुगतान एवं लंबित भुगतान से संबंधित, उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-18 दिनांक 31.08.2019 से प्राप्त प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी कतिपय अनियमितता के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1886 दिनांक 01.09.2019 द्वारा निलंबित किया गया। उक्त मामले में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2541 दिनांक 09.12.2019 द्वारा श्री सिंह से आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के द्वितीय भाग-अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत है :-
स्व0 रामाशंकर सिंह, संवेदक, राजेन्द्र नगर, वार्ड नं0-22, गोपालगंज की मृत्यु दिनांक 29.08.2019 को संदिग्ध परिस्थिति में मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के गोपालगंज स्थित सरकारी आवास पर हुयी। इस संबंध में दिनांक 29.08.2019 को नगर थाना गोपालगंज में प्राथमिकी कांड सं0-423/2019 अन्तर्गत धारा-302/34 भा0द0वि0 दर्ज किया गया। घटना के संदर्भ में मुख्य अभियंता, गोपालगंज आवास निर्माण योजना के अद्यतन एवं लंबित भुगतान की जाँच उड़नदस्ता अंचल-1, पटना से करायी गयी। जाँच प्रतिवेदन में वर्णित तथ्यों के आलोक में कार्य में बरती गयी निम्न अनियमितताओं के लिये श्री मुरलीधर सिंह, तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज दोषी प्रतीत होते हैं।
(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.0.1 से स्पष्ट है कि गोपालगंज अवस्थित मुख्य अभियंता के आवास निर्माण में एकरारित दर पर अनुमानित कुल रु 167.30 लाख का कार्य कराया जाना परिलक्षित है। जिसमें एकरारित मदों में रु 153.687 लाख, अतिरिक्त कार्य मद में Schedule Item के मदों में रु 7.576 लाख तथा Non Schedule Item के मदों में अनुमानित रु 6.037 लाख का कार्य कराया गया है। संवेदक को अबतक एकरारित मदों में रु0 126.919 लाख का भुगतान किया गया है। स्थल आदेश पंजी पर विचलन/अतिरिक्त कार्य कराने संबंधी न तो कोई प्रस्ताव ही अंकित है और न ही कोई आदेश ही अंकित है, जिससे स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किसके आदेश से अतिरिक्त कार्य कराया गया है। जहाँ तक कि कराये गये कार्यों से संबंधित विचलन/अतिरिक्त मदों के प्रस्ताव की स्वीकृति के अभाव में शेष राशि रू0 40.381 लाख का भुगतान लंबित है। लंबित भुगतान के दिशा में आपके स्तर से कोई कार्रवाई किया जाना परिलक्षित नहीं होता है, जो कार्य के प्रति उदासीनता एवं कर्तव्यहीनता को दर्शाता है।
(2) दिनांक-29.08.2019 को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के नव निर्मित सरकारी आवास पर घटित घटना के पश्चात आप अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाये गये।
उक्त से स्पष्ट है कि आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।
उक्त के आलोक में श्री सिंह के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरांत, अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सिंह की वार्धक्य सेवानिवृति (दिनांक 31.01.2020) को दृष्टिपथ में रखते हुए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-995 दिनांक 12.08.2020 द्वारा उन्हें दिनांक 31.01.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-997 दिनांक 12.08.2020 द्वारा उनके विरूद्ध उक्त आरोप के विस्तृत जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-19 दिनांक 18.01.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में, अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक-599 दिनांक 16.03.2022 द्वारा श्री सिंह से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी।
उक्त के क्रम में श्री सिंह द्वारा अपने पत्रांक-101 दिनांक 19.04.2022 के माध्यम से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा कहा गया कि उन पर लगाये गये आरोप तथ्य आधारित नहीं है तथा वस्तुस्थिति के संबंध में निम्नांंिकत बातें कही गयी है :-
(क) आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा अपने पत्रांक-47 दिनांक-06.04.2021 के माध्यम से संचालन पदाधिकारी को समर्पित पत्र, जिसके अनुलग्नक पत्रांक-कैम्प-01 गोपालगंज दिनांक-29.08.2019, जिसमें उनके द्वारा ई-मेल के माध्यम से अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को रात 10ः35 बजे घटित घटना की सारी सूचना एवं जान की सुरक्षा हेतु मुख्यालय छोड़ने की सूचना तथा ई-मेल के माध्यम से ही जिला पदाधिकारी, गोपालगंज, आरक्षी अधीक्षक, गोपालगंज एवं अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना को भेजी गयी सूचना को संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन पत्रांक-95 पटना दिनांक-06.04.2021 में जिक्र नहीं किया गया।
(ख) आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा समर्पित अभिलेख एवं अन्य कागजातों में वर्णित तथ्यों के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विश्लेषण नहीं किया गया है। आरोप पत्र में वर्णित गवाह श्री संजय40 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 कुमार सिंह के प्रतिपरीक्षण के क्रम में दिये गये बयान यथा अतिरिक्त कार्य कराने हेतु मुख्य अभियंता सक्षम प्राधिकार होते है एवं उनके स्तर पर कोई प्रस्ताव समर्पित नहीं है का उल्लेख किया गया है।
(ग) आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि अन्य गवाह श्री नवीन कुमार द्वारा प्रतिपरीक्षण में दिये गये उत्तर के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि SBD के क्लाउज-12.2 के अनुसार अधीक्षण अभियंता द्वारा ही दर की स्वीकृति देने का प्रावधान है।
(घ) आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि गवाह श्री राकेश कुमार के द्वारा कहा गया है कि उनके चिकीत्सीय अवकाश हेतु दिनांक-30.08.2019 को समर्पित आवेदन को विभागीय पत्रांक-1719 दिनांक-18.10.2019 द्वारा अस्वीकृत किया गया, जिसकी सम्पुष्टि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7 एवं 8 से की जा सकती है।
(ड़) आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि विभाग द्वारा संभावना के आधार पर लगाये गये आरोप को प्रमाणित किया गया है, जबकि संभावना के आधार पर आरोप को प्रमाणित किया जाना विधिसंगत नहीं है तथा समर्पित बचाव-बयान पर विभाग द्वारा विचार नहीं किया गया है।
(च) आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये अभिमत, साक्षियों एवं गवाहों के प्रतिपरीक्षण के क्रम में उभरे तथ्यों एवं नियमों के आलोक में उचित नहीं है। अतः सामानय प्रशासन विभाग के पत्रांक-9407 दिनांक-02.07.2012 द्वारा दिये गये मार्गदर्शन के आलोक में कार्रवाई की जाय, जिससे उन्हें न्याय मिल सके। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री सिंह द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये -
श्री मुरलीधर सिंह के द्वारा किसी भी प्रकार का निदेश दिये जाने अथवा कोई भी प्रस्ताव प्राप्त होने संबंधी प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने का उल्लेख किया गया है जो स्वीकार किए जाने योग्य प्रतीत नहीं होता है। वस्तुस्थिति यह है कि मुख्य अभियंता के मौखिक निदेश के आलोक में एकरारित मदों के अतिरिक्त कुछ मदों का कार्य कराया गया है तथा इन्हीं के निदेश के आलोक में कई मदों में बढ़ोत्तरी भी की गयी है परन्तु इनके द्वारा उक्त कराए गये अतिरिक्त कार्य मदों का आदेश न तो स्थल पंजी पर ही दिया गया है न ही पत्र के माध्यम से अधीनस्थ पदाधिकारी को संसूचित किया गया। संभवतः इन्हीं कारणों से अधीनस्थ पदाधिकारियों द्वारा तुलनात्मक विवरणी एवं विचलन प्रस्ताव समय पर समर्पित नहीं किया गया है। अतएव प्रश्नगत कार्य के कार्यान्वयन के पश्चात् भी कराये गये कार्यों का भुगतान लंबित रहने में इनकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। अतः स्वीकृत प्राक्कलन से विचलन कर मौखिक आदेश पर कार्य कराना तथा कार्य किए जाने के पश्चात् कार्य का भुगतान नहीं करना गम्भीर वित्तीय अनियमितता एवं अनुशासनहीनता का द्योतक है एवं मुख्य अभियंता इस हेतु पूर्णतः जिम्मेवार एवं दोषी हैं।
श्री सिंह ने अपने स्पष्टीकरण में यह स्वीकार किया है कि वे ईलाज कराने के लिए मुख्यालय से बाहर चले गए परन्तु वास्तविकता यह प्रतीत होता है कि श्री सिंह के विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी के कारण गिरफ्तारी से बचने के लिए ईलाज कराने का बहाना बनाकर अनधिकृत रूप से मुख्यालय से अनुपस्थित हो गए। इसलिए इनके स्पष्टीकरण का यह अंश भी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अतएव श्री मुरलीधर सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, गोपालगंज के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होते हैं।
उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत श्री मुरलीधर सिंह (आई0डी0-3177), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत "पेंशन से 75% (पचहत्तर प्रतिशत) की कटौती स्थायी रूप से" करने का विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-2483 दिनांक 20.10.2022 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3572 दिनांक 14.12.2022 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है।
अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुरलीधर सिंह (आई0डी0-3177), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 75% (पचहत्तर प्रतिशत) की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2765--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक41 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री चकलेश्वर खरवार (आई॰डी॰-जे 9042), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, कटिहार से विभागीय पत्रांक-2165 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री खरवार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2464 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री खरवार के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री खरवार से विभागीय पत्रांक-1485 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री खरवार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- उड़नदस्ता अंचल-01, पटना के पत्रांक-11 दिनांक-21.03.2017 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 5.0.0(2) से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के तहत खुरहान वितरणी के वि॰दू॰ 6.50 पर अवस्थित SLR Bridge के अप्रोच स्लैव से RCC तथा ब्रीक वर्क में सीमेंट मोर्टार खुरहान वितरणी के वि॰दू॰ 4.0 पर अवस्थित CD संरचना के D/S Return wall से PCC तथा आलमनगर वितरणी के वि॰दू॰ 10.0 पर अवस्थित SLR Bridge के U/S बाँया स्लोप पिचिंग के प्लास्टर से सीमेंट मोर्टार का नमूना संग्रह कर केन्द्रीय मुद्रा एवं सामग्री अनुसंधानशाला, नई दिल्ली से विशिष्टि की जाँच करायी गयी। जाँचफल के अनुसार संरचना के पुनस्र्थापन कार्य में प्रयुक्त PCC में क्रमशः सीमेंट की मात्रा में 61.95 प्रतिशत एवं 36.92 प्रतिशत तथा सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की मात्रा क्रमशः 48.08 प्रतिशत एवं 73.70 प्रतिशत की कमी पायी गयी है। उक्त से स्पष्ट है कि तीनों संरचनाओं में पुनस्र्थापन कार्य में प्रावधान के विपरीत न्यून विशिष्टि के PCC सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया गया है, जिसके कारण उक्त संरचना के स्थायित्व पर भी खतरा उत्पन्न होना स्वाभाविक है। तथा न्यून विशिष्टि के कार्य कराये जाने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान होने के कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग होना भी स्थापित होता है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :-
1. यह कि उपरोक्त आरोप में संरचना के D/S Return wall से PCC में सीमेंट की मात्रा में जो प्रतिशत भिन्नता पाई गयी है, वह निःसंदेह उड़नदस्ता अंचल-01, पटना द्वारा Sample Collect करते समय मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना का पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं कोड IS:1199-1959 में Sample Collect करने हेतु दिये गये प्रावधान का पालन नहीं करने के कारण सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी में अप्रत्याशित रूप से भिन्नता है। 2. यह कि कोड IS:1199-1959 एवं मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक- 06.07.1992 के अनुसार Sample, Drilling कर एवं आरी (Saw) का प्रयोग कर संग्रह करना है, परन्तु उड़नदस्ता दल द्वारा हथौड़ी (Hammer) एवं छेनी (Chiesel) से तोड़कर Collect किया गया है, जो IS:1199-1959 कोड के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। Sample Collect करने हेतु विधि का वर्णन उपरोक्त IS:1199-1959 कोड के कंडिका- 3.2, 3.3, 3.5, 4.1, 4.2 एवं 9.3 में वर्णित है। कंडिका 4.1 में यह वर्णित है कि Defective Sample का इस्तेमाल नहीं करना है, जबकि CSMRS नई दिल्ली द्वारा प्रतिवेदित जाँचफल की कंडिका-1 Introduction में यह अंकित है कि सीमेंट कंक्रीट एवं सीमेंट मोर्टार के सैम्पल चूर्ण रूप (Broken) अवस्था में थे।
3. यह कि IS:1199-1959 कोड के कंडिका-9.0 में जमे हुए (Hardened) सीमेंट मोर्टार एवं Cement Concrete में सीमेंट की मात्रा ज्ञात करने की विधि वर्णित है। कंडिका-9.0 में यह स्पष्ट रूप से वर्णित है कि संरचना के किसी भाग से जब नमूना (Sample) संग्रहण किया जाए, तो कम से कम विभिन्न भागों (Several Portions) से कम से कम तीन नमूने लिए जाए एवं प्रत्येक नमूने का वजन (Weight) कम से कम 5kg होना है। इसमें यह भी वर्णित है कि Sample Collect करते समय अत्यनत सावधानी बरती जाए, ताकि महीन Particles जो कि Cement में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, वह किसी भी तरह से बर्बाद या छूटना नहीं चाहिए। अन्यथा जाँचफल प्रभावित होना स्वाभाविक है। 4. इस संबंध में यह भी कहना है कि दल द्वारा Cement Concrete एवं Cement Mortar का केवल एक (1) Sample ही Collect किया गया है, जो कि अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-214 दिनांक-16.09.2016 के द्वारा CSMRS नई दिल्ली को भेजे गये नमूना (Sample Code FSCC-1, Cement Concrete) से स्पष्ट है। जिसमें उन्होने क्रमांक-9 में भेजे गये नमूना में वजन का जिक्र नहीं किया गया है एवं नमूना संग्रह भी एक अदद लिया गया है।
इस प्रकार मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं IS:1199-1959 कोड में दिये गये दिशा-निर्देश का पालन किए बिना यादृच्छिक (Randomly) तरीके से सैम्पल संग्रहण कर CSMRS नई दिल्ली को भेजे गये नमूनों के त्रुटिपूर्ण जाँचफल के आधार पर आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित माना जाना नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध है। समीक्षा :-
42(cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि खुरहान वितरणी के वि॰दू॰ 6.50 पर उपस्थित SLR Bridge एवं आलमनगर वितरणी के बिन्दु दूरी 10.0 पर अवस्थित SLR Bridge का मरम्मति कार्य श्री खरवार के द्वारा नहीं किया गया है। खुरहान वितरणी के वि॰दू॰ 4.00 पर अवस्थित CD संरचना के D/S Return wall से पी॰सी॰सी॰ में सिमेंट की मात्रा में 36.92 प्रतिशत की कमी पायी गयी। श्री खरवार द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेखित तथ्यों, प्रस्तुत फोटोग्राफ, उड़नदस्ता के प्रतिवेदन में सिंचाई सुविधा किसानों को मिलते रहना, सिमेंट की मात्रा की 36.92 प्रतिशत की कमी रहने के बावजूद सात वर्षो से अधिक अवधि तक उपयोग में बने रहने को देखते हुए आरोपित पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रक्रिया पर संदेह करना उचित प्रतीत होता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा यह कहना है कि गुण नियंत्रण प्रतिवेदन के आधार पर ही संरचना कार्य का भुगतान किया गया है। चुंकि श्री खरवार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध उड़नदस्ता/CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में गुणवत्ता की कमी यथा सीमेंट की मात्रा में अनुमान्य सीमा से ज्यादा की कमी के कारण संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री खरवार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है।
श्री खरवार द्वारा आरोप के संदर्भ में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर, विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में उनके द्वारा समर्पित लिखित बचाव-बयान के समरूप है। इसके अतिरिक्त श्री खरवार द्वारा कोई नया तथ्य/अभिलेख साक्ष्य के रूप में संलग्न नहीं किये जाने के फलस्वरूप उक्त आरोप आरोपी पदाधिकारी पर आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री चकलेश्वर खरवार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"कालमान वेतनमान में पाँच वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री चकलेश्वर खरवार (ID-J 9042), सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"कालमान वेतनमान में पाँच वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2764--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री अरूण कुमार पाण्डेय (आई॰डी॰-जे 8134), तत्कालीन कनीय अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2152 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री पाण्डेय से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2466 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। जिसे श्री पाण्डेय के सेवानिवृति के उपरांत बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री पाण्डेय के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री पाण्डेय से विभागीय पत्रांक-1499 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री पाण्डेय से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप सं॰-1 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक 9 दिनांक 03.02.2016) के साथ संलग्न शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल के स्तर से विभिन्न तिथियों में निर्गत गुणवत्ता जाँचफल प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट है कि आपके स्तर से ERM योजना के तहत विभिन्न प्रमंडलों के अधीन कराये गये संरचना के निर्माण एवं पुनस्र्थापन कार्य के कार्यान्वयन के दौरान गुणवत्ता से संबंधित कई जाँचफल निर्गत करते हुए संबंधित प्रमंडल को उपलब्ध कराया गया है। उक्त किसी भी जाँचफल में कार्य की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। तथा उक्त गुणवत्ता जाँचफल के आधार पर विभिन्न प्रमंडलों द्वारा कराये गये कार्यो का भुगतान भी किया जाता रहा है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच के क्रम में उपरोक्त सभी प्रमंडलों के अधीन कराये गये विभिन्न स्थलाें पर संरचना के कार्य से PCC एवं सिमेंट मोर्टार के नमूना एकत्रित कर शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल तथा Central Soil and Material Research Station, New Delhi से जाँच करायी गयी। जाँचफल से स्पष्ट है कि विभिन्न संरचनाओं में प्रत्युक्त पी॰सी॰सी॰ एवं सिमेंट मोर्टार में सिमेंट की कमी मात्र कुछ ही नमूनों में 20 प्रतिशत से कम पायी गयी है शेष अधिकांश नमूनों में 20 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है। जो स्थापित करता है कि संरचना निर्माण/पुनस्र्थापन कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए न्यून विशिष्टि के कार्य कराये गये है। जबकि आपके स्तर43 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 से निर्गत किसी भी जाँचफल में सिमेंट की कमी होने का उल्लेख नहीं रहने के कारण प्रमंडल द्वारा न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद उक्त जाँचफल के आधार पर अनियमित ढंग से भुगतान कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाया जाना परिलक्षित है। जिसमें आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। आरोप सं॰-2 (संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु के आलोक में) :- अभिलेखों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, अररिया के अन्तर्गत मिट्टी भराई कार्य में Watering and Consolidation का अलग से कार्य मद सम्मिलित है। जिसके अनुसार 85 प्रतिशत कॉम्पैक्शन प्राप्त करना था। तद्नुसार कार्य के कार्यान्वयन के दौरान Watering and Consolidation का कार्य कराया जाना संभावित है। परन्तु आपके स्तर से जाँचोपरान्त कॉम्पैक्शन का रिपोर्ट निर्गत नहीं किये जाने के कारण प्रमंडल द्वारा प्रावधान के अनुरूप इस कार्य मद का भुगतान किया गया है जिसे नियमित नहीं माना जा सकता है। उक्त के आलोक में कराये गये मिट्टी भराई कार्य का कॉम्पैक्शन का जाँच नहीं करने के लिये आप दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप संख्या-01, आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं॰-02, अप्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- सी॰एस॰एम॰आर॰ एवं उड़नदस्ता जाँच में सीमेंट की मात्रा में 20 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत की कमी को देखते हुए मुझ पर आरोप सं॰-1 आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।
उक्त आरोप एवं समीक्षा/मंतव्य के संबंध में कहना है कि -
1. मैं शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1 में कनीय अभियंता के रूप में कार्यरत था एवं वरीय पदाधिकारी के मार्गदर्शन में अपना कार्य संपादित करता था। 2. विभिन्न प्रमंडलों में चल रह कार्यो की गुंणवत्ता जाँच हेतु क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा जब अनुरोध किया जाता था, तब उच्चाधिकारी के निर्देश पर स्थल पर जाँच दल द्वारा चल रहे कार्यो की गुणवत्ता जाँच की जाती थी एवं जाँचफल कार्यपालक अभियंता द्वारा क्षेत्रीय कार्यलयों को उपलब्ध कराया जाता था। 3. जाँच के दौरान संरचनाओं में प्रयुक्त होने वाले सामग्रियों यथा ईंट बालू, स्टोन चिप्स का नमूना संबंधित स्टैक से लेकर जाँच की जाती थी। संरचना में कंक्रीट के लिये ढलाई का कार्य , जिस दिन होता था, क्षेत्रीय पदाधिकारी के समक्ष क्यूब की ढलाई की जाती थी क्यूब के स्टै्रथ की जाँच 28 दिनों के उपरान्त कर जाँफल कार्यपालक अभियंता द्वारा संबंधित प्रमंडलों को उपलब्ध कराया जाता था। 4. जहाँ तक संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा का प्रश्न है, मेरे जाँचदल द्वारा पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार की जाँच नहीं की गई। इसकी जाँच की माँग न तो क्षेत्रीय पदाधिकारी और ना तो उस संबंध में मेरे उच्चाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया था। 5. क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा प्रायः संरचनाओं में प्रयुक्त होने वाले सामग्रियों एवं यदा कदा कंक्रीट कार्य का कम्प्रेसिव स्ट्रैन्थ की ही माँग की जाती थी। (सुलभ प्रसंग हेतु कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज का पत्रांक 1182 दिनांक 16.12.2014 द्रष्टव्य)। 6. संचालन पदाधिकारी ने मुझे संरचनाओं में सीमेंट की कमी के लिये दोषी माना है, जबकि मेरे द्वारा केवल ईंट, बालू, स्टोन चिप्स एवं यदा कदा कंक्रीट क्यूब का जाँचफल दिया गया है। न तो पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार के जाँच की माँग क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा की गई न तो मेरे कार्यपालक अभियंता द्वारा इस संबंध में निर्देश दिया गया। 7. यदि किसी संरचना में सीमेंट की मात्रा 20 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत कम पाई गई है तो संबंधित प्रमंडल से उक्त संरचना की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है। समीक्षा 1ः- आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान (दि॰ 21.01.2021) में प्रतिवेदित किया है कि कार्य संपादन के दौरान उनके द्वारा गुणवत्ता जाँच नियमानुसार की गयी थी एवं कोई कमी नहीं पाये जाने के कारण ही प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी थी, पूर्व के संपादित कार्यो की गुणवत्ता वर्षो बाद प्राप्त किया जाना ही तकनीकी दृष्टिकोण से व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि वर्षो बाद जाँच किए जाने हेतु कोई मार्गदर्शन निर्गत नहीं है, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्र में दिए गए निदेशों का अनुपालन बाद के जाँचों एवं नमूना एकत्रित करने में नहीं किया गया है। CSMRS एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 20 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत की कमी पाये जाने के मद्देनजर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर आरोप सं॰-1 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में अपना बचाव बयान में प्रतिवेदित किया है कि उनके जाँच दल द्वारा पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार की जाँच नहीं की गई है। तथा इस संबंध में उनको उच्चाधिकारी द्वारा निर्देश ही नहीं दिया गया था।
लेकिन, आरोपी पदाधिकारी द्वारा उक्त के संबंध में पुष्टि हेतु साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है जिससे यह पता चले कि क्षेत्रीय पदाधिकारी के द्वारा पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार की जाँच की माँग नहीं की गई है। अतएव, उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, श्री अरूण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन कनीय अभियंता पर आरोप सं॰-1 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। समीक्षा- 2 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में कहा है कि क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा कभी भी कॉम्पैक्शन का रिपोर्ट देने हेतु नहीं कहा गया, परन्तु इसकी पुष्टि हेतु आरोपी पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर में आरोप सं॰-2 के संबंध में उल्लेख किया गया है कि सिंचाई प्रमंडल, अररिया में मिट्टी का कार्य कब कराया गया इसकी44 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 सूचना शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल को नहीं दी गई। यदि मिट्टी कार्य के संबंध में जानकारी दी जाती तो जाँच कार्य अवश्य किया जाता। वैसे, गुण नियंत्रण कार्यालय के पदाधिकारी को गुणवत्ता जाँच से संबंधित नियमों की जानकारी होनी चाहिए।
उपरोक्त समीक्षा से स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा कॉम्पैक्शन की जाँच के संबंध में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया। वैसे भी, गुण नियंत्रण कार्यालय के पदाधिकारी को गुणवत्ता जाँच से संबंधित नियमों की जानकारी होनी चाहिए। तथा प्रमंडलों के अधीन चल रहे कार्यो की जाँच हेतु अद्यतन प्रगति की जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी श्री अरूण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन कनीय अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल के विरूद्ध आरोप सं॰-1 एवं 2 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत श्री अरूण कुमार पाण्डेय के विरूद्ध प्रतिवेदित प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार पाण्डेय (ID-J 8134), तत्कालीन कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2763--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री राजीव रंजन प्रसाद (आई॰डी॰-2138), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी से विभागीय पत्रांक-2392 दिनांक 22.11.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2472 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-1493 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री प्रसाद से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- उड़नदस्ता के पत्रांक-33 दिनांक-22.12.2017 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कडिका-9.00(ix) तथा कंडिका-10.00(5) एवं मापपुस्त संख्या-2571, 2554 एवं 2547 से स्पष्ट है कि प्रमंडलाधीन ERM के तहत नहरों के पुर्नस्थापन के तहत कराये गये मिट्टी भराई कार्य की मात्रा की गणना में एकरारनामा के अनुरूप सेटलमेंट मद में कटौती नहीं किया जाना परिलक्षित है। इस प्रकार नियम के विरूद्ध बिना सेटलमेंट की कटौती किये ही भुगतान करने के कारण वास्तविक रूप से भराई गयी मिट्टी की मात्रा से अधिक मात्रा के भुगतान होने के कारण, अधिकाई भुगतान होने का मामला बनता प्रतीत होता है। फलतः सरकारी राशि का क्षति होना भी परिलक्षित है, जो एक जानबूझ कर की गयी अनियमितता प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के लिए लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने के संबंध में कहना है कि मैं, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी में दिनांक-12.07.2008 से 18.04.2012 तक पदस्थापित रहा था। (प्रभार सौंपने के छायाप्रति संलग्न) प्रभार सौंपने दिनांक-18.04.2012 के 05 वर्ष 08 महीने बाद मेरे उपर उक्त आरोप लगाया गया है। जहाँ तक मेरे जानकारी में है कि पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के अन्तर्गत ''कार्यवाही संस्थित करने की तिथि से 04 वर्ष पहले का है तो ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही नहीं चल सकती''। पूर्वी कोशी नहर प्रणाली पुर्नस्थापन कार्य के पूर्व जानकी नगर शाखा नहर (RD 112.50 से RD 200.10) एवं इससे निःसृत सभी नहर प्रणाली पूर्व से ही निर्मित है, और कोशी नदी के पानी से नहर प्रणाली से सिंचाई कार्य खरीफ एवं रब्बी अवधि मे किया जा रहा था। कोशी नदी का पानी हरेक बार नहर तल में काफी सिल्ट (गाद) जमा कर देता है। सभी नहर प्रणाली में वर्षाें से सिल्ट जमा हो जाने के कारण नहर का तल (Bed level) उपर हो गया। और नहर तल के चौड़ाई कम हो गया। फलतः नहर में जलश्राव काफी कम हो जाने के कारण पटवन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता। सभी नहर प्रणाली के नहर तल (bed level) एवं तल की चौड़ाई (bed width) मे भरे सिल्ट को काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting का कार्य का प्रावधान नहर के पुर्नस्थापन के प्राक्कलन में दिया45 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 गया था। प्राक्कलन के अनुरूप सिर्फ नहर के bed में भरे सिल्ट को काट कर हटाने (Earth work in cutting) का कार्य किया गया। उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा कराये गए नहर पुर्नस्थापन कार्य की जाँच तीन बार कराया गया। उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना के जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-9 दिनांक-03.02.2016, पत्रांक-11 दिनांक-21.03.2017 एवं पत्रांक-33 दिनांक-22.12.2017 द्वारा विभाग को भेजा गया। जाँच प्रतिवेदन प्रथम पत्रांक-9 दिनांक- 03.02.2016 एवं द्वितीय पत्रांक-11 दिनांक-21.03.2017 में मेरे विरूद्ध कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन तृतीय जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-33 दिनांक-22.12.2017 द्वारा नहर के पुर्नस्थापन के तहत कराए कए मिट्टी भराई कार्य (Earth work in filling) में सेटलमेंट मद में कटौती नहीं किया गया। उड़नदस्ता अंचल-1 के पत्रांक-33 दिनांक-22.12.2017 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 9.00(ix), 10.00(5) एवं माप पुस्त संख्या-2571, 2254 एवं 2547 से स्पष्ट है कि प्रमंडलाधीन ई॰एम॰आर॰ के तहत नहरों के पुर्नस्थापन के तहत कराए गए कार्य नहर में भरा हुआ सिल्ट को काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting का कार्य किया गया, जो मिट्टी की मात्रा स्पष्ट रूप से मिट्टी कटिंग का ही है, जिसमें सेटलमेंट मद में कटौती करना औचित्य नहीं है। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-9.00(ix) :- जाँच प्रतिवेदन में निम्नलिखित नहर :-
1. जानकीनगर शाखा नहर 2. धमदाहा वितरणी 3. बनमनखी वितरणी 4. विशनपुर उप वितरणी
के मिट्टी कार्य की जाँच किया। उक्त सभी नहर में नहर तल पर भरे सिल्ट (Deposit Silt) को काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting का कार्य किया गया। नहर तल की मिट्टी कटिंग (Desilting) का कार्य राजस्थानी ट्रैक्टर से कराया गया, जो मिट्टी की मात्रा स्पष्ट रूप से Earth work in cutting मद का ही है, जिसमें सेटलमेंट कटौती का औचित्य नहीं है। उक्त सभी नहर में मेरे द्वारा earth work in filling का कार्य कराया ही नहीं गया है। अतः संवेदक को कोई अनियमित अग्रिम भुगतान नहीं किया गया; किए गए कार्य के आधार पर ही भुगतान किया गया। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-10.00(5) :- उक्त नहर में नहर तल पर भरे सिल्ट (Deposit Silt) को काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting का कार्य किया गया। प्राक्कलन के अनुरूप कार्य कराया गया। इसलिए सेटलमेंट कटौती का प्रश्न नहीं होता है, इसलिए किसी को जिम्मेवार नहीं माना जाएगा। (2) उक्त आरोप बनता ही नहीं, तो अधिक भुगतान का प्रश्न ही नहीं है। अतः सरकार के आर्थिक क्षति उठाने का प्रश्न नहीं है। (3) उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि इस संबंध में मेरे द्वारा निजी स्वार्थ या संवेदक को लाभ पहुँचाने के लिए अनियमितता नहीं बरती गयी है। आरोप के तृतीय भाग :- लगाये गये आरोप की संलग्न माप पुस्त से स्पष्ट है कि विभिन्न नहरों में कराए गए मिट्टी भराई कार्य के आकलन में सेटलमेंट नहीं काटा गया। उक्त सभी नहर में नहर तल पर भरे सिल्ट (Deposite Silt) को काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting का प्रावधान नहर के पुर्नस्थापन के प्राक्कलन में दिया गया। जिसके अनुरूप ही कार्य कराया गया और किए गए कार्य को माप पुस्त में दर्शाया गया। नहर तल मे भरे मिट्टी काट कर हटाने (Earth work in cutting) अर्थात Desilting कार्य राजस्थानी ट्रैक्टर से कराया गया, जो मिट्टी की मात्रा स्पष्ट रूप से Earth work in cutting मद का ही है, जिसमें सेटलमेंट कटौती का औचित्य नहीं है। इस प्रकार कोई अधिक भुगतान का मामला नहीं बनात है। (2) संवेदक को उसके द्वारा वास्तविक किए गए कार्य का ही भुगतान किया गया। उसके द्वारा सिर्फ Earth work in cutting (Desilting) का कार्य किया गया। जिसमें सेटलमेंट मद में कटौती का औचित्य नहीं है। इस प्रकार नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। (3) लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। अतः मेरे उपर कोई आरोप नहीं बनता है। ई॰ रवीन्द्र कुमार शंकर, अभियंता प्रमुख (मुख्यालय)-सह- संचालन पदाधिकारी, पटना के जाँच प्रतिवेदन के द्वारा किए गए समीक्षा से ये स्पष्ट होता है कि उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी द्वारा E/W Filling मद में settlement मद में कोई कटौती नहीं किए जाने का उल्लेख है, परन्तु किस MB में एवं किनके द्वारा कटौती नहीं की गयी है, इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है। यह भी उल्लेख किया गया कि श्री प्रसाद (अर्थात मेरे) द्वारा प्राक्कलन के अनुरूप सिर्फ नहर के बेड, जो silt को काट कर हटाने का कार्य किया गया है एवं इसमें settlement मद में कटौती करने का औचित्य नहीं है। उक्त नहर में मेरे द्वारा मिट्टी भराई कार्य कराया ही नहीं गया है, इसलिए मेरे उपर कोई आरोप नहीं बनता है। समीक्षा :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 9(ix) (पृ॰ 800/प॰) में सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी द्वारा E/W in filling मद में सेटलमेंट मद में कोई कटौती नहीं किये जाने का उल्लेख है। परन्तु किस MB में एवं किनके द्वारा कटौति नहीं की गई है इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में उल्लेख किया है कि प्राक्कलन के अनुरूप सिर्फ नहर के बेड से सिल्ट को काटकर हटाने (E/W in Cutting) का कार्य किया गया है एवं इसमें सेटलमेंट मद में कटौति करने का औचित्य नहीं है।46 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर पूर्व में उनके द्वारा दिये गये बचाव-बयान के समरूप है तथा संलग्न साक्ष्य अस्पष्ट एवं अपर्याप्त है। आरोपी पदाधिकारी श्री प्रसाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में इसके अतिरिक्त कोई नया तथ्य/अभिलेख साक्ष्य सहित प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतः श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत श्री राजीव रंजन प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजीव रंजन प्रसाद (ID-2138), सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2762--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री शैलेन्द्र कुमार (आई॰डी॰-3803), तत्कालीन सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशीक्षण प्रमंडल-01, खगौल, पटना को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2149 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2465 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे श्री कुमार के सेवानिवृति के उपरांत बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1491 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप संख्या-01ः- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-09 दिनांक-03.02.2016) के साथ संलग्न शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल के स्तर से विभिन्न तिथियों में निर्गत गुणवत्ता जाँचफल प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आपके स्तर से ERM योजना के तहत विभिन्न प्रमंडलों के अधीन कराये गये संरचना के निर्माण एवं पुर्नस्थापन कार्य के कार्यान्वयन के दौरान गुणवत्ता से संबंधित कई जाँचफल निर्गत करते हुए संबंधित प्रमंडल को उपलब्ध कराया गया है। उक्त किसी भी जाँचफल में कार्य की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज किया जाना परिलक्षित नहीं होता है तथा उक्त गुणवत्ता जाँचफल के आधार पर विभिन्न प्रमंडलों द्वारा कराये गये कार्याें का भुगतान भी किया जाता रहा है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच के क्रम में उपरोक्त सभी प्रमंडलों के अधीन कराये गये विभिन्न स्थलों पर संरचना के कार्य से P.C.C. एवं सिमेेंट मोर्टार के नमूना एकत्रित कर शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल तथा Central Soil and Material Research Station, New Delhi से जाँच करायी गयी। जाँचफल से स्पष्ट है कि विभिन्न संरचनाओं में प्रयुक्त P.C.C. एवं सिमेंट मोर्टार में सिमेंट की कमी मात्र कुछ ही नमूनों में 20% से कम पायी गयी है। शेष अधिकांश नमूनों में 20% से 88.65 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है, जो स्थापित करता है कि संरचना निर्माण/ पुर्नस्थापन कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए न्यून विशिष्टि के कार्य कराये गये है। जबकि आपके स्तर से निर्गत किसी भी जाँचफल में सिमेंट की कमी होने का उल्लेख नहीं रहने के कारण प्रमंडल द्वारा न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद उक्त जाँचफल के आधार पर अनियमित ढ़ंग से भुगतान कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाया जाना परिलक्षित है, जिसमें आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- 1. मैं शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-01 में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत था एवं वरीय पदाधिकारी के मार्गदर्शन में अपना कार्य संपादित करता था।47 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 2. विभिनन प्रमंडलों में चल रहे कार्याें की गुणवत्ता जाँच हेतु क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा जब अनुरोध किया जाता था, तब उच्चाधिकारी के निर्देश पर स्थल पर जाँच दल द्वारा चल रहे कार्याें की गुणवत्ता जाँच की जाती थी एवं जाँचफल कार्यपालक अभियंता द्वारा क्षेत्रीय कार्यालयों को उपलब्ध कराया जाता था। 3. जाँच के दौरान संरचनाओं में प्रयुक्त होने वाले सामग्रियों यथा ईंट, बालू, स्टोन चिप्स का नमूना संबंधित स्टैक से लेकर जाँच की जाती थी। संरचना में कंक्रीट के लिये ढ़लाई का कार्य, जिस दिन होता था, क्षेत्रीय पदाधिकारी के समक्ष क्यूब की ढ़लाई की जाती थी क्यूब के स्ट्रैंथ की जाँच 28 दिनों के उपरांत कर जाँचफल कार्यपालक अभियंता द्वारा संबंधित प्रमंडलों को उपलब्ध कराया जाता था। 4. जहाँ तक संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा का प्रश्न है, मेरे जाँच दल द्वारा पी॰सी॰सी॰ एवं मोर्टार की जाँच नहीं की गई। इसकी जाँच की माँग न तो क्षेत्रीय पदाधिकारी और न तो उस संबंध में मेरे उच्चाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया था। 5. क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा प्रायः संरचनाओं में प्रयुक्त होने वाले सामग्रियों एवं यदा कदा कंक्रीट कार्य का कम्प्रेसिव स्ट्रैन्थ की ही माँग की जाती है। 6. संचालन पदाधिकारी ने मुझे संरचनाओं में सीमेंट की कमी के लिये दोषी माना है, जबकि मेरे द्वारा केवल ईंट, बालू, स्टोन चिप्स एवं यदा कदा कंक्रीट क्यूब का जाँचफल दिया गया है। न तो पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मार्टार के जाँच की माँग क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा की गई न तो मेरे कार्यपालक अभियंता द्वारा इस संबंध में निर्देश दिया गया। 7. यदि किसी संरचना में सीमेंट की मात्रा 20% से 88.65% कम पाई गई है तो संबंधित प्रमंडल से उक्त संरचना की वर्त्तमान स्थिति का आकलन करने के बाद की किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है। समीक्षा :- संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में प्रतिवेदित किया गया है कि पूर्व के संपादित कार्यो की गुणवत्ता की जाँच वर्षो बाद किया जाना तकनीकी रूप से व्यवहारिक नहीं है क्याेंकि वर्षो बाद जाँच किये जाने हेतु कोई मार्गदर्शन निर्गत नहीं है तथा मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्र में दिये गये निदेशों का अनुपालन बाद के जाँचों एवं नमूना एकत्रित करने में नहीं किया गया है। परन्तु CSMRS एवं उड़नदस्ता जाँच में सीमेंट की मात्रा में 20 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत की कमी पाए जाने के मद्देनजर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी श्री शैलेन्द्र कुमार पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उन्होने अपने लिखित बचाव-बयान में दिया था। आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए कोई नया तथ्य/ अभिलेख का उल्लेख नहीं किया गया है। अतएव उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में की गई समीक्षा के आलोक में आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। फलस्वरूप आरोपी पदाधिकारी श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-01, खगौल, पटना पर लगाया गया आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
समीक्षोपरांत श्री शैलेन्द्र कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री शैलेन्द्र कुमार (ID-3803), तत्कानीय सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2761--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री श्रीकान्त मंडल (आई॰डी॰-जे 4679), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज से विभागीय पत्रांक-2393 दिनांक 22.11.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री मंडल से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2470 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।48 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री मंडल से विभागीय पत्रांक-1498 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री मंडल से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- परिहारी वितरणी के वि॰दू॰ 57.0 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचना के Right face Wall PCC from Coping से Cement Concrete तथा ब्रीक वर्क कार्य से सीमेंट का नमूना संग्रह कर उसकी जाँच करायी गयी। जाँच में सीमेंट की मात्रा पी॰सी॰सी॰ में 36.26 प्रतिशत तथा मोर्टार में 78.05 प्रतिशत की कमी पायी गयी। उसी प्रकार इस वितरणी के बि॰दू॰ 58.0 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचना के बायाँ फेस वॉल से सीमेंट कंक्रिट एवं सीमेंट मोर्टार में 50.84 प्रतिशत की कमी पायी गयी है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि इन दोनों संरचना के मरम्मति निर्माण कार्य में न्यून विशिष्टि के पी॰सी॰सी॰ तथा सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया गया है एवं भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने से अधिकाई भुगतान का मामला बनता है। साथ ही संरचना के स्थायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। इस प्रकार आपके द्वारा एकरारनामा/प्राक्कलन एवं नियम के विरूद्ध गलत ढ़ंग से न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना परिलक्षित होता है, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- उपरोक्त आरोप के आलोक में आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि मैं दिनांक-03.07.2022 को मोबाईल द्वारा परिहारी नहर में कार्यरत मौसमी मजदूर (Seasonal Labour) श्री प्रणय कुमार प्रियदर्शी उर्फ प्रवीण, पिता-स्व॰ कमलधारी, ग्राम-रामपुर कुशमौल, जिला- अररिया से R.D-57 एवं R.D-58 पर स्थित सी॰डी॰ संरचना के बारे में जानकारी ली तो उनके द्वारा कहा गया कि परिहारी नहर के दोनों सी॰डी॰ पूर्णरूपेण दुरूस्त है एवं पटवन भी हो रहा है, जो आज 10 वर्षाें के बाद भी मरम्मत किए गए दोनों सी॰डी॰ सरचना सुरक्षित है। इससे पूर्व भी मेरे पत्रांक-शून्य दिनांक-30.12.2019 एवं पत्रांक- शून्य दिनांक-18.01.2021 द्वारा विभागीय संचालन पदाधिकारी के कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर लिखित बचाव-बयान प्रस्तुत की गई है, दोनों बचाव-बयान की छायाप्रति संलग्न की गयी है। अतः मेरे विरूद्ध लगाये गए आरोप से मुक्त की जाय, अन्यथा संरचना में सीमेंट की मात्रा में कमी पायी गई है तो उक्त दोनों सी॰डी॰ संरचना को ध्वस्त करवाकर मुझे आरोपित की जाय।
समीक्षा :- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयानों में उल्लेखित तथ्यों, फोटोग्राफ, पी॰सी॰सी॰ का मात्र एक नमूना लिया जाना, नमूना एकत्रित करने की गलत पद्धति, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्र में दिए गए अनुदेशों का पालन जाँच के दौरान नहीं करना, संरचना का 8 वर्षो से अधिक समय से उपयोग में बने रहने को देखते हुए आरोपित पदाधिकारी द्वारा वर्षो बाद किए गए गुणवत्ता की जाँच एवं नमूना एकत्रित करने की प्रक्रिया में संदेह करना उचित प्रतीत होता है। परन्तु उड़नदस्ता/CSMRS द्वारा समर्पित गुणवत्ता जाँचफल में सीमेंट की मात्रा में 36.26 प्रतिशत से 78.50 प्रतिशत की कमी के मद्देनजर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में उनके द्वारा समर्पित लिखित बचाव-बयान के अलावा उन्हें कुछ भी नहीं कहना है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा इसके अतिरिक्त कोई नया तथ्य/ अभिलेख साक्ष्य सहित अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में संलग्न नहीं किया गया है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में आरोपी पदाधिकारी पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत श्री श्रीकान्त मंडल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीकान्त मंडल (ID-J 4679), सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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12 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2760--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल49 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री सुधीर कुमार (आई॰डी॰-4478), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2151 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2467 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1488 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- श्रीनगर वितरणी के बि॰दू॰ 95.00 पर अवस्थित CD संरचना के अपस्ट्रीम Wing wall एवं पूर्णियाँ शाखा नहर के बि॰दू॰ 83.00 पर अवस्थित SLR ब्रीज के डाउन स्ट्रीम के Wing Wall से पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार की जाँच में सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी निम्न प्रकार है :-
| क्र॰ | लोकेशन | नमूना का प्रकार | प्रावधानित विशिष्टि | उड़नदस्ता जाँच दल के अनुसार विशिष्टि | सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी प्रतिशत में |
| 1 | श्रीनगर वितरणी के बि॰दू॰ 95. 00 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचना | PCC from wing wall | 1ः2ः4 | 1ः6ः1 | 36.99 प्रतिशत |
| श्रीनगर वितरणी के बि॰दू॰ 95. 00 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचना | सीमेंट मोर्टार प्लास्टर में | 1ः4 | 1ः15.13 | 69 प्रतिशत | |
| 2 | पूर्णियाँ शाखा नहर के बि॰दू॰ पर अवस्थित | PCC from wearing coat | 1ः1.5ः3 | 1ः2.29 | 12.64 प्रतिशत |
| पूर्णियाँ शाखा नहर के बि॰दू॰ पर अवस्थित | सीमेंट मोर्टार from wing wall | 1ः4 | 1ः7.72 | 42.5 प्रतिशत |
उपरोक्त से स्पष्ट है कि दोनों संरचनाओं में प्रावधानित विशिष्टि से सीमेंट की मात्रा में 12.64 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है। इससे स्पष्ट है कि न्यून विशिष्टि के कार्य कराया गया है; जबकि भुगतान प्रावधान के अनुसार किया जाना परिलक्षित है; फलतः सरकारी राशि का दुरूपयोग होना स्थापित हेता है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :-
1. नमूना की जाँच CSMRS, नई दिल्ली के द्वारा कोड IS:1199-1959 के आधार पर की गई है, परन्तु उड़नदस्ता जाँच दल, जल संसाधन विभाग, पटना के द्वारा कोड IS:1199-1959 में वर्णित नमूना संग्रहण (Sampling) की विधि, मात्रा आदि में दिए गये दिशा-निर्देश का पालन बिलकूल ही नहीं किया गया है, जिसके कारण CSMRS, नई दिल्ली द्वारा प्रेषित जाँचफल में सीमेंट की प्रतिशत मात्रा में अप्रत्याशित रूप से कमी दर्शायी गई है, जो त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है। 2. कोड IS:1199-1959 के कंडिका-9.0 में जमे हुए (Hardened) सीमेंट मोर्टार एवं सीमेंट कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा ज्ञात करने की विधि वर्णित है। कंडिका-9.0 में यह स्पष्ट रूप से वर्णित है कि संरचना के किसी भाग से जब नमूना (Sample) संग्रहण किया जाय तो विभिन्न भागों से कम से कम तीन नमूने लिए जाए एवं प्रत्येक नमूने का वजन कम से कम पाँच kg होना है। इसमें यह भी वर्णित है कि Sample Collect करते समय अत्यंत सावधानी बरती जाए ताकि महीन Particles, जो कि सीमेंट में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, वह किसी भी तरह से बर्बाद या छुटना नहीं चाहिए अन्यथा जाँचफल प्रभावित होना स्वाभाविक है।
3. इस संबंध में यह भी कहना है कि उड़नदस्ता जाँच दल, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा सीर्मेंट मोर्टार एवं सीमेंट कंक्रीट का केवल एक (1) Sample ही Collect किया गया है, जो कि अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-01, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-214 दिनांक-16.09.2016 के द्वारा CSMRS, नई दिल्ली को भेजे गये नमूना (Sample Code FSCC-2, क्रमांक-10 एवं FSCM-12 क्रमांक-31) से स्पष्ट है कि भेजे गये नमूना में वजन का जिक्र नहीं किया गया है एवं नमूना संग्रह भी एक अदद ही लिया गया है। सुलभ प्रसंग हेतु पत्र संख्या-214 दिनांक- 16.09.2016 की अभिप्रमाणित छायाप्रति संलग्न है, जो परिशिष्ट-1 पर द्रष्टव्य है।50 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 4. मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 में जाँच विधि, नमूना संग्रहण आदि का जिक्र है। कोड IS:1199-1959 के निर्देशों का अनुपालन उड़नदस्ता दल द्वारा स्थल पर नहीं किया गया है, क्याेंकि स्थल पर संरचना के एक भाग से छेनी हथौड़ी का प्रयोग कर तोड़कर नमूना लिया गया है, जिसमें Fine Particles का बर्बाद होना स्वभाविक है। श्रीनगर वितरणी के बि॰दू॰ 95.00 पर अवस्थित संरचना से भी छेनी, हथौड़ी का प्रयोग कर तोड़कर ही नमूना लिया गया है, जिसके प्रत्यक्षदर्शी श्री राजेश कुमार, कनीय अभियंता है, जो खुद इस संरचना के पुनस्र्थापन कार्य में कनीय अभियंता के रूप में संलग्न थे।
5. कोड IS:1199-1959 एवं मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 के अनुसार Sample, Drilling कर एवं आरी (Saw) का प्रयोग कर संग्रह करना है, परन्तु उड़नदस्ता दल द्वारा हथौड़ी (Hammer) एवं छेनी (Chiesel) से तोड़कर नमूना संग्रह किया गया है, जो कोड IS:1199-1959 के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
6. नमूने की जाँच हेतु कोड IS:1199-1959 में यह भी अंकित है कि प्रत्येक नमूने का वजन कम से कम पाँच कि॰ग्रा॰ होना चाहिए, जिसका पालन उड़नदस्ता दल द्वारा नमूना संग्रहण में नहीं किया गया है।
अतः श्रीमान से विनम्र निवेदन है कि मेरे द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों यथा मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं कोड IS:1199-1959 उड़नदस्ता अंचल-1, पटना का पत्रांक-214 दिनांक- 16.09.2016 तथा CSMRS, नई दिल्ली के पत्रांक-297 दिनांक-06.12.2016 एवं संरचना के वर्तमान फोटोग्राफ (परिशिष्ट-4) के आधार पर मेरे इस द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को स्वीकार किया जाए तथा वर्णित आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय, जिसके लिए मै श्रीमान का सदा आभारी रहूँगा। समीक्षा :- कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा के पत्रांक 596 दिनांक 17.07.2018 से स्पष्ट प्रतीत होता है कि पूर्णिया शाखा नहर के वि॰दू॰ 83.00 पर अवस्थित एक पथीय सेतु संरचना का निर्माण कार्य श्री सुधीर कुमार के द्वारा नहीं कराया गया है।
श्री सुधीर कुमार द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में अवस्थित CD संरचना से संबंधित कार्य कराया गया है। इसी संरचना में प्रावधानित विशिष्टि से सीमेंट की मात्रा में 36.99 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है जिससे स्पष्ट है कि कराये गये कार्य न्यून विशिष्टि का है। परन्तु उड़नदस्ता, CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में गुणवत्ता की कमी अनुमान्य सीमा से ज्यादा होने के कारण श्री सुधीर कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में समर्पित किये गये लिखित बचाव-बयान के समरूप है। इसके अतिरिक्त आरोपी पदाधिकारी द्वारा कोई नया तथ्य/अभिलेख साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। अतः श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में श्री सुधीर कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री सुधीर कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"संचयी प्रभाव से पाँच वेतनवृद्धि पर रोक"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुधीर कुमार (ID-4478), कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"संचयी प्रभाव से पाँच वेतनवृद्धि पर रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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7 दिसम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(सिवान)11-09/2018-2733--श्री राम पदारथ नारायण (आई0डी0-4583) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, एकमा से मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान के पत्रांक-1574 दिनांक 20.08.2018 के माध्यम से सारण नहर प्रमंडल, एकमा का सरकारी वाहन सं0-BR-04Q-5365 (बोलेरो) की चोरी हो जाने के संबंध में प्राप्त प्रतिवेदन के क्रम में, स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री नारायण से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उक्त वाहन की कीमत के संबंध में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभाग स्तर से गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-1283 दिनांक 06.10.2021 द्वारा श्री नारायण से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री नारायण से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार आरोप पत्र में गठित आरोपों की जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-591 दिनांक 15.03.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।51 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 श्री नारायण के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत है -
श्री राम पदारथ नारायण, कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, एकमा द्वारा उनके उक्त पदस्थापन के दरम्यान विभागीय वाहन संख्या BR-04Q-5365 (बोलेरो) का उपयोग निजी कार्यों हेतु किया गया। साथ ही, उनके द्वारा बिना अनुमति के मुख्यालय छोड़ा गया। उक्त वाहन की चोरी होने की तिथि को हा्रसित मूल्य रु0 2,78,645/- (दो लाख अठहत्तर हजार छः सौ पैतालीस) रूपये निर्धारित की गयी है, जिसकी आर्थिक क्षति हुई है। इस प्रकार उनके द्वारा बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 का उल्लंघन किया गया है। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1) का उल्लंघन है।
मुख्य अभियंता का कार्यालय बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1534 दिनांक 19.05.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री नारायण के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-1578 दिनांक 05.07.2022 द्वारा श्री नारायण को भेजते हुए उनसे अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। उक्त के क्रम में श्री नारायण के पत्रांक-746 दिनांक 27.09.2022 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित किया गया। श्री नारायण द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में कहा गया है कि पत्नी की अचानक तबीयत खराब होने एवं भाडे़ पर वाहन नहीं मिलने के कारण आपातकालीन परिस्थिति में विवश होकर सरकारी वाहन संख्या- BR-04Q-5365 का उपयोग करना पड़ा। मुख्यालय छोडने के संबंध में उनके द्वारा कहा गया है कि वे तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, छपरा को मोबाईल पर बताकर प्रस्थान किये थे। आपातकालीन परिस्थिति में एक इंसान को जो करना चाहिए वही किया गया।
श्री नारायण के विरूद्ध गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री नारायण द्वारा समर्पित बचाव-बयान एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये -
श्री नारायण द्वारा बिना अनुमति प्राप्त किये मुख्यालय छोड़ने के संबंध में कहा गया है कि उनके द्वारा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, छपरा को मोबाईल पर सूचना दी गयी थी। परन्तु ऐसा कोई साक्ष्य या अभिलेख अपने अभ्यावेदन के साथ उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उनके इस कथन की पुष्टि की जा सके। उक्त से श्री नारायण के द्वारा बिना अनुमति प्राप्त किये मुख्यालय छोड़ने का आरोप प्रमाणित परिलक्षित होता है। साथ ही विभागीय वाहन सं० BR-04Q- 5365 का उपयोग निजी कार्य हेतु करने एवं इसी क्रम में उक्त विभागीय वाहन की चोरी हो जाने के कारण वाहन की चोरी होने की तिथि को जिला परिवहन कार्यालय, सारण, छपरा द्वारा आकलित ह्रासित मूल्य रु0 2,78,645/- (दो लाख अठहत्तर हजार छः सौ पैतालीस रूपये) की क्षति के संबंध में इनके द्वारा मात्र इतना कहा गया है कि पत्नी की अचानक अत्यधिक तबीयत खराब होने एवं भाड़े पर वाहन नहीं मिलने के कारण आपातकालीन (Emergency) परिस्थिति में विवश होकर सरकारी वाहन सं० BR-04Q-5365 का निजी रूप से उपयोग करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट है कि उनके द्वारा विभागीय वाहन के निजी कार्य में उपयोग के क्रम में उक्त विभागीय वाहन की चोरी हो जाने के कारण वाहन की चोरी होने की तिथि को ह्रासित मूल्य रु0 2,78,645/- (दो लाख अठहत्तर हजार छः सौ पैतालीस रूपये) की क्षति हुयी है। श्री नारायण के द्वारा, अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) में अपने बचाव हेतु किसी नये तथ्य को नहीं रखा गया है, जिसपर विचार किया जा सके। अतएव श्री राम पदारथ नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, एकमा द्वारा समर्पित किया गया अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं है।
उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत श्री राम पदारथ नारायण (आई0डी0-4583), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, एकमा के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
(i) सरकारी वाहन संख्या BR-04Q-5365 (बोलेरो)े के ]्रासित मूल्य रु० 2,78,645/- (दो लाख अठहत्तर हजार छः सौ पैतालीस) रूपये मात्र की सम्पूर्ण राशि की वसूली उनके वेतन से की जाए। (ii) एक वर्ष के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में दो प्रक्रम पर अवनति। अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम पदारथ नारायण (आई0डी0-4583), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, एकमा के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-
(i) सरकारी वाहन संख्या BR-04Q-5365 (बोलेरो)े के ]्रासित मूल्य रु० 2,78,645/- (दो लाख अठहत्तर हजार छः सौ पैतालीस) रूपये मात्र की सम्पूर्ण राशि की वसूली उनके वेतन से की जाए। (ii) एक वर्ष के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में दो प्रक्रम पर अवनति।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।52 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 2 दिसम्बर 2022 सं0 22/नि0सि0(सम0)02-06/2019-2698--श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर संप्रति निलंबित, मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्ध बाढ़ 2019 के अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर के अंतर्गत 03 (तीन) अद्द कटाव/टूटान बिन्दुओं यथा-नरूआर, गोपलखा एवं रखवाड़ी स्थल का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशों का उल्लंघन करने तथा कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1617 दिनांक-30.07.2019 द्वारा निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1222 दिनांक-16.10.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत आरोप-पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- 1. अभियंता प्रमुख के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक-26.07.19 में अंकित है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं॰-02, झंझारपुर के अंतर्गत हुए विभिन्न कटान-टूटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी। और न ही इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी ही देखी गयी जबकि विभागीय बेतार सं॰ 129 दिनांक 14.07.19 के द्वारा सभी कटान बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने का निदेश क्षेत्रीय पदाधिकारी को दिया गया था। 2. बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किया गया। 3. आप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अंतर्गत तटबंधों के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद इसमें न केवल विफल रहे वरन् तटबंधों के कई स्थलों पर टूटने के पश्चात् जब आपको विभाग की ओर से तटबंधों को हर हाल में सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये, उसके उपरांत भी आपके द्वारा इस ओर आवश्यक ध्यान न देकर आदेश की अवहेलना की गयी, इसके फलस्वरूप अभियंता प्रमुख द्वारा जब दिनांक-22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल का निरीक्षण किया गया एवं यह पाया गया कि रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद था जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्धस्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों में) तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था जो नही किया गया। इस प्रकार यह न केवल विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है वरन् बाढ़ जैसी विभीषिका में प्रभावित होने वाले जनमानस की कठिनाइयों के प्रति आपकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आपके द्वारा कटान-टूटान के मरम्मति जैसे अतिमहत्वपूर्ण कार्य में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, विभागीय निदेशों का अनुपालन नहीं करने, लापरवाही एवं उदासीनता बरते जाने के कारण ससमय कटान-टूटान का मरम्मति नहीं हो पाया। इस प्रकार आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3 (1) का स्पष्ट उल्लंघन है। श्री प्रकाश के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के गै0स0प्रे0 सं0-10 दिनांक-17.09.2021 द्वारा समर्पित किया गया। जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य गठित किया गयाः- आरोप सं0-1 ः- अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक-142 दिनांक- 26.07.2019 में उल्लेखित तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अंतर्गत विभिन्न कटान/टूटान बिन्दुओं पर क्षे़त्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं किये जाने एवं न ही इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी किये जाने से संबंधित हैं। उक्त के संदर्भ में आरोपित श्री प्रकाश द्वारा बताया गया कि ग्रामीण के विरोध के कारण कुछ स्थलोंं को छोड़कर शेष पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना द्वारा बतलाया गया कि उनका प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण के उपरांत दिया गया है एवं यह तथ्यात्मक है। इस प्रकार यह आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2 :- बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने से संबंधित है। उक्त के संदर्भ में श्री प्रकाश द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा संबंधित अभिलेख विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित भी किये गये है। नदी का जलश्राव रूपांकित जलश्राव से डेढ़ गुणा से अधिक बढ़ जाने के कारण पूरा तटबंध की आक्रम्यता की स्थिति आ गयी, तो उनके लिए सभी बिन्दुओं पर मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन करना संभव नहीं था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बतलाया गया कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने का आरोप आंशिक प्रमाणित होता है। आरोप सं0-3 (प्रथम भाग) :- यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद विफल रहने से संबंधित है।
इस संदर्भ में श्री प्रकाश द्वारा बताया गया कि मानक संचालन प्रक्रिया के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई की गयी एवं इससे संबंधित अभिलेख विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित किए गए हैं। नदी का जलश्राव रूपांकित जलश्राव से डेढ गुणा से अधिक बढ़ जाने के कारण पुरा तटबंध ही आक्रम्यता की स्थिति में आ गयी तो उनके लिए सभी विन्दुओं पर मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन करना संभव नहीं था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बतलाया गया कि श्री प्रकाश द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने का आरोप सही है। जबकि आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) के संबंध में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण ने बताया कि तटबंधो का कई स्थलों पर टूट जाना ही बताता है कि ये संचालन प्रक्रिया के अनुपालन में विफल रहे। परन्तु इस संदर्भ में श्री प्रकाश द्वारा कतिपय अभिलेखों यथा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय53 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 रूपांकण, पटना की अध्यक्षता में गठित समिति का प्रतिवेदन, Indian Institute of Technology, Roorkee के प्रो० नयन शर्मा का प्रतिवेदन एवं Flood Management Improvement Support Centre (FMISC) के Report के आधार पर बतलाया गया है कि तटबंध टूटने का कारण अत्यधिक जलश्राव का प्रवाहित होना था न कि इनका विफल रहना। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं॰-2 कोे आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया है तथा आरोप सं॰-3 (प्रथम भाग) के अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। उपरोक्त दोनों आरोपों के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के पूर्व के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि दिनांक 13.07.2019 को कमला बलान नदी में अप्रत्याशित जलश्राव 6223.94 क्यूसेक कमला नदी के रूपांकित जलश्राव 3966 क्यूसेक से काफी अधिक था। मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना की अध्यक्षता में गठित समिति के प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि कमला वीयर (संरचना) का रूपांकित जलश्राव 3966 क्यूसेक है, जिसकी पुष्टि भी Hdyrology Directorate से कराया जाना अपेक्षित बतलाया गया है। उक्त के आलोक में उल्लेखित रूपांकित जलश्राव कमला वीयर (संरचना) का परिलक्षित होता है, न कि नदी का। प्रचलित कार्य प्रणाली के अनुसार तटबंध का निर्माण नदी के जल वहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है तथा समय-समय पर तटबंध का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य भी नदी के जल वहन क्षमता में परिवर्तन के मद्देनजर किया जाता है। अतएव तकनीकी दृष्टिकोण से संरचना के रूपांकित जलश्राव के आधार पर नदी के जल वहन क्षमता की तुलना किया जाना समीचीन प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में टूटान की तिथि को नदी में प्रवाहित जलश्राव का नदी के रूपांकित जलश्राव से डेढ़ गुणा से अधिक होने का तर्क स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अतएव वर्णित तथ्यों के संदर्भ में श्री प्रेम प्रकाश के विरूद्ध आरोप सं॰-2 एवं आरोप सं॰-3 (प्रथम भाग), जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा क्रमशः आंशिक प्रमाणित एवं अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जिससे असहमत होते हुए पूर्णतः प्रमाणित पाया गया है। आरोप सं०-3 (द्वितीय भाग) :- यह आरोप अभियंता प्रमुख द्वारा दिनांक 22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल के निरीक्षण के दौरान रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाये जाने से संबंधित है, जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया।
इस आरोप के संबंध में श्री प्रकाश द्वारा बताया गया कि दिनांक 21.07.2019 के अपराह्न से नरूआर कार्य स्थल पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था परन्तु रात्रि में 9ः30 बजे जेनरेटर खराब हो जाने के कारण कार्य कुछ देर के लिए बाधित जरूर हुआ लेकिन शीघ्र ही दुसरा जेनरेटर लगाकर कार्य पुनः प्रारंभ किया गया एवं रात्रि 01ः00 बजे तक नायलन क्रेटिंग का कार्य किया गया एवं उसके पश्चात् स्लोप कटाई का कार्य जे०सी०बी० से किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य लेईग रजिस्टर में समय के साथ अंकित है। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा कहा गया कि श्री प्रकाश द्वारा दिनांक-13.07.2019 एवं 14.07.2019 को तटबंध के टूटने के पश्चात् दिनांक-21.07.2019 तक तटबंधों की सुरक्षा हेतु बिल्कुल ही लापरवाह रहे। यहाँ तक कि दिनांक-21.07.2019 को भी रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाया गया जबकि इस हालात में युद्ध स्तर पर 24 घंटे कार्य चलना चाहिए था। आकस्मिकता की इस स्थिति में कार्य का बीच में बंद हो जाना लापरवाही का घोतक है। उपर्युक्त परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जिससे विभाग सहमत है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-01 को प्रमाणित, आरोप सं0-02 को आंशिक प्रमाणित, आरोप सं0-03 का प्रथम अंश को अप्रमाणित एवं आरोप सं0-03 का द्वितीय अंश को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य, जिसमें आरोप सं0-01 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-03 के द्वितीय अंश को प्रमाणित पाया गया है, से सहमत होते हुए आरोप सं0-02, जिसे आंशिक प्रमाणित एवं आरोप सं0-03 के प्रथम अंश, जिसे अप्रमाणित पाया गया है, से असहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों एवं असहमति के निम्न बिन्दु पर श्री प्रकाश से विभागीय पत्रांक-503 दिनांक 07.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयीः- ''संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में तटबंध टूटने का कारण कमला नदी का जलश्राव, रूपांकित जलश्राव से डेढ़ गुना से अधिक बढ़ जाना बतलाया गया है जबकि मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति के प्रतिवेदन में रूपांकित जलश्राव कमला वियर (संरचना) का बतलाया गया है। जिससे स्पष्ट होता है कि रूपांकित जलश्राव कमला वियर (संरचना) का है न की नदी का'' अतएव टूटान की तिथि को नदी में प्रवाहित जलश्राव का नदी के रूपांकित जलश्राव से डेढ गुना से अधिक होने का तर्क स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। उपर्युक्त के आलोक में श्री प्रकाश द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 30.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) विभाग में समर्पित किया गया, जो निम्नवत् है :-
Regarding charge no.1, the undersigned is to state and submit that due to unexpected discharge in Kamla Balan River from dated 13.07.2019 to 14.07.2019, under this division, left embankment at km 7.0 and right embankment at km 40.60, km 47.30, km 55.80, km 57.30, km 71.40&km 79.60 damaged. The effect of maximum discharge flowing on Kamla Weir at54 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 Jainagar site on 13.07.2019 remained till 14.07.2019 up to the end of Kamla Balan River, due to which flood fighting work had to be done at many points of right embankment and Compliance of departmental wireless narrated report no.129, dated 14.07.2019 was possible only from 15.07.2019 in the lower parts. It may be noted that since 12.07.2019, the Chief Engineer and the Chairman, Flood Fighting Force were camping in Jhanjharpur and all the flood fighting work were being done under their directions (photographs are annexed herewith and marked as Annexure-23). The works/actions of cut-end protection at all cut-points except the cut-point at km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha were started from the date 14.07.2019 and 15.07.2019 itself (photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-24 ). It has also been mentioned by the Central Flood Control Cell, Sinchai Bhawan, Patna in its daily flood report dated 14.07.2019 that action is being taken to secure and hold the cut ends of the above sites by conducting flood fighting works (photo copy of report is annexed herewith and marked as Annexure25). From 15.07.2019 itself, the work of constructing a hutment has been started at Km 47.30 Naruar site. Immediately after constructing a hutment with polythene sheets and bamboos, the banner of Water Resources Department was also put up. But the farmers whose houses were damaged by the breach of embankment near Naruar village (km 47.30) were bent on not allowing to start the work till adequate compensation was received. For this reason, as soon as the banner of the Water Resources Department was put up by making a hutment, it was demolished by the local people and thrown into the river and the working labourers were also driven away (Photocopies of the reports and photograph are annexed herewith and marked as Annexure-26). The flood victims of Km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha had encroached upon the top of the embankment (the only escape route for the movement of materials) and started living in hutments with cattle, which made it impossible to carry construction materials. Due to non-availability of local sand within 3 km due to excessive waterlogging and water-logging in the river side and country side around the breached site, it was not possible to start the sand filling work around the breach site Naruar and Gopalkha (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-27). Due to nonavailability of sand nearby, the contractor was expressing inability to start the work at these breach sites as only 3 km lead has been provided for transportation of local sand in the scheduled rate book. The need for departmental instructions was also felt by the Chief Engineer, samastipur in making provision for more leads (Photocopy of letter of Engineer-in-chief dated 26.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-28). From the date 15.07.2019 itself, the traffic was blocked by the villagers by putting a barrier on the embankment near Naruar, due to which the sand filled cement bags after filling the already available sand were tried to start the work at the site, but had to unload near the barrier due to traffic blockade (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure29). In order to start the work by removing the encroachment on the embankment near village Gopalkha and Naruar, the undersigned requested the District Magistrate, Madhubani vide letter no. 01 Camp Thengha dated 16.07.2019, in addition to the telephone (Photocopy of letter dated 16.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure- 30). On 15.07.2019, with the help of some local people, transportion of empty Cement Bags at Km 40.60 Gopalkha, sand filling at source point and carrying bamboo for making temporary hutment from polythene sheets were started (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-31). On 16.07.2019 all detailed information about sites before site inspection was given to Engineer-In-Chief (Flood). It was also informed that the work of cut end protection has been started at all the breached sites except Naruar and Gopalkha. But flood victims of Naruar and Gopalkha are not allowing to take action till they get adequate compensation and the road has been blocked by barriers. After giving such information, site inspection was done by him on motor cycle itself (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-32). There was no success in getting the work done by the end of55 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 18.07.2019 before noon even after joints efforts made by SDM, Jhanjharpur and SDPO, Jhanjharpur (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-33). On 18.07.2019 after noon it was decided to start the work in Naruar and Gopalkha from 19.07.2019 after meeting with the District Magistrate, Madhubani / Superintendent of Police, Madhubani / Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur / Chief Engineer, Samastipur and other senior regional engineers including the undersigned (In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). Again on 19.07.2019, during the deliberations to start the work in the divisional office, Jhanjharpur, the engineers and administrative officers were assaulted by the local people, whose FIR was also registered in the local police station (Photocopy of newspaper cutting and FIR dated 19.07.2019/20.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-34 and 35). In the afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also tried to start the work by coming to the said place, but the result was zero. An allegation has been made by the department for not taking action to safeguard all the three places mentioned in the inspection report by the Engineer-in-Chief, Flood namely Naruar Cut Point, Gopalkha Cut Point (under undersigned jurisdiction, Flood Control Division-02, Jhanjharpur) and Rakhwari Cut Point (under Flood Control Division-01, Jhanjharpur). but in similar circumstances, only the officials related to Naruar and Gopalkha cut point have been accused, but the officials of Flood Control Division-01, Jhanjharpur have not been accused of not taking action to protect the cut- point. It is clear that the department also considers this allegation to be baseless. On 16.07.2019, the Engineer-in-Chief, Flood determined the nature & scope of work at all the cut points and handed over the same to the Chief Engineer. (In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). The reason for not taking action to secure the above said breach part by the field engineers and not showing any preparation in this regard has been given itself by the Engineer- in-Chief, Flood such as encroachment by the displaced villagers at the work site, after removal of the encroachment to use that place for material storage or other work, to get help from the district administration to remove encroachment on the site, not to get sand nearby to fill the local sand in empty cement bags, to get the work done by bringing it from wherever local sand is available and directing the approval to be given to the Chief Engineer. Apart from this, it is clear from the perusal of the above paragraphs that the then unforeseen circumstances such as the local people breaking the hutment and throwing it in the river, the villagers blocking the traffic by putting a barrier to the embankment, the tractor laden with sand filled cement bags is not permitted to move on the site, thrashing the labourers away by the villagers, beating up the engineers/administrative officials in the divisional office (with whose cooperation the Engineer- In-Chief's direction to remove the encroachment on the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done) etc. In spite of this, apart from other cut points, the work of Naruar and Gopalkha cut end protection was done by trying as much as possible. However, due to public protest and law and order situation till 19.07.2019 afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also did not get success in starting the work. C. When such submissions were made then the Respected inquiry officer in his report dated 24.02.2021 held the charges not proved with the reasoning that on the basis of site inspection report of Engineer-In-Chief, Flood dated 16.07.2019, it has been alleged by the Department against the undersigned that no action was being taken and no preparation was seen in this regard to secure the erosion part by the regional engineers at various cutting/breach points under Flood Control Division-2, Jhanjharpur. It is clear from the perusal of the Appendix and Khairiyat reports attached with the defence statement that in the working area of the accused officer, apart from only two cut/breach points, Km 47.3 Naruar of right embankment and Km 40.6 Gopalkha of right embankment, cut end protection at remaining cut/breach points was started from 14.07.2019 and 15.07.2019 itself. In the order of inspection on 16.07.2019, it has been mentioned by the Engineer-In-Chief in the same inspection report regarding not initiating56 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 the action to secure the cut-end points at the two cutting/breach points mentioned in the working area of the accused officer, Naruar and Gopalkha that flood victims have encroached on the embankment by making temporary camps and in the course of inspection dated 21.07.2019, the Chief Engineer was also told that there is no public protest now. Apart from this, it also appears from the perusal of the appendices attached by the undersigned that in the then relevant circumstances like breaking the hutment built on date 15.07.2019 at Naruar site by the local people and throwing it in the river, the villagers blocked the traffic by putting barriers to the embankment, not allowing tractor laden with sand filled cement bags to go to the site, villagers beat up the labourers and drive them away,to beating up the engineers and administrative officers in the divisional office (with whose co-operation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment at the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done), public protest and law and order situation till 21.07.2019 before noon. Despite the efforts made by the District Magistrate, Madhubani and the Superintendent of Police, Madhubani, the reasons for not getting success in starting the work, etc., can be considered as a hindrance in the progress of the work. It is worth mentioning that apart from this, cut-end protection work had started at other cut-end points, which is also clear from the khairiyat report issued by the departmental flood control. It is clear only from the observation of the inspection report of the Engineer-in-Chief that from 16.07.2019 to 21.07.2019, despite camping at the site by the Engineer-in-Chief and getting the meeting/co-operation with the District Magistrate/Superintendent of Police, the action to secure the above two cuts/breach points, Naruar and Gopalkha could not be started till the forenoon of 21.07.2019. D. Thereafter, as per dictates and orders of the superior authority, the witness was examined by the Respected inquiry officer himself and on the basis of such deposition, the Respected inquiry officer in his inquiry report dated 17.09.2021 held the said charge proved. The undersigned is shocked to understand the change in the finding by the Inquiry Officer. In fact, Sri Rajesh Kumar, Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna, appeared on 18.08.2021. The witness was examined by the Respected inquiry officer himself whereby the witness stated that what he wrote in writing is true Since Sri Rajesh Kumar is the highest posted engineer in the department, it is not considered appropriate to answer any question asked by the undersigned, thereby the undersigned was denied the opportunity to cross examine the said witness. The examination of the said witness was neither immediately recorded on the hearing record by the Respected inquiry officer as he was busy in asking question which is the role of the Presenting Officer. The Respected inquiry officer acted as Presenting Officer. E. It is humbly submitted that Engineer-in-chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna inspected the breach sites of the embankment which breached due to unexpected discharge flowing in Kamla Balan River on 13.07.2019/14.07.2019 and submitted the inspection report to the department vide his letter no.142 dated 26.07.2019. In the first part of the inspection report, along with the list of those breached sites, the details of the jurisdictions are also mentioned. From the observation of which it will be clear that the jurisdiction of the undersigned is only village Naruar and village Gopalkha under Flood Control Division-2, Jhanjharpur in the inspection done on 16.07.2019, and Village Rakhwari under other Executive Engineer i.e., under Flood Control Division-1, Jhanjharpur, jurisdiction of another Executive Engineer. It has also been mentioned by the Engineer-inChief that the situation was the same at all the three sites, but in the information received under the Right to Information Act, it is mentioned in the first paragraph of note sheet page no.-02 of the file that the three sites of breaches i. e. village -Naruar, Gopalkha and Rakhwari are located under the working area of the undersigned (Executive Engineer, Flood Control Division-2, Jhanjharpur). In this way, departmental proceedings were initiated against the undersigned only after obtaining approval from the competent administrative authority by recording the incorrect facts on the note sheet while others like Executive Engineer, Flood57 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 Control Division-1, Jhanjharpur were deliberately kept free from these charges. It is mentioned in paragraph nos. 1 and 2 of the report sent by the Respected inquiry officer that the inquiry report submitted earlier was submitted on the basis of review of the defence statement of the undersigned and the records which were obtained from the Central Flood Control Cell in which this allegation was found to be unproved. Again, in the light of the examination of the witness by the inquiry officer, the same allegation has been substantiated without checking the veracity of the statement of the witness from any other records. Considering the statement of the Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna as factual in his report by the Respected inquiry officer, is contradictory in itself. The reply of the witness has not been verified by the Respected inquiry officer from the records which have already been attached as annexure by the undersigned. Hence, in view of such submission, the undersigned may kindly be exonerated from the said charge. As regards charge no.2, it is humbly stated and submitted that the undersigned was continuously monitoring the embankment since 10.07.2019 on getting information about increase in discharge of the river. This is confirmed in the morning of 13.07.2019 between 1:00 to 1:30, when the deputed home guards were not found on their duty in order to patrol between km 52.00 and 58.00, then it is also informed by giving information to the District Magistrate, Darbhanga through N.R. No.50 (Photo copy of NR no. 50 dated 13.07.2019is annexed herewith and marked as Annexure-36). In the morning of 13.07.2019, District Disaster Management, Madhubani and thereafter the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna instructed to go at Jaynagar on the mobile with the information of storm (wave) discharge in Kamla Balan river, Assistant Engineer Jaynagar Immediately to reach Jainagar Weir, the undersigned left for Jainagar after instructing the Subordinate Assistant Engineers/Junior Engineers to stay on the embankment with contractors, labourers, sand filled bags, geo bags, GT Filters etc. to deal with any odd situation (Photo copies of reports and photos are annexed herewith and marked as Annexure-37). Shortly after this, water started coming out from the top of the weir, breaking the guide bundh/marginal bundh (under irrigation division, Jainagar) of Kamla weir located in Jainagar due to unexpected discharge in the Kamla Balan River (photos are annexed herewith and marked as Annexure-38). Shortly after that, after getting the information of uncontrolled seepage near village Sukki (10.50km), informing the Superintending Engineer/Chief Engineer over the phone, reaching Sukki site and getting the seepage controlled, by the Junior Engineer at Village Terha (LKBE 7.50 km) was reported to have seepage. Due to the breaking of the guide bundh of Jainagar weir, the traffic on the left embankment from Jainagar was stopped and the assistant engineer in charge got stuck on the weir itself (photos are annexed herewith and marked as Annexure-39). The seepage could be controlled immediately by sending the contractor of that area to the Terha site through mobile. The entire embankment came into a state of super sensitivity from around 2.00 o'clock in the day itself and as per the departmental instructions, the superintending engineer in Jaynagar, the undersigned in Sukki, the assistant engineer, Naruar and chairman, FFF at village Kaithwar (Km 55.60 sluice) started flood fighting work at different sites (photos are annexed herewith and marked as Annexure-40). In the meanwhile, there are many places in the D/S of Sukki village, mainly Km 16-17 (Chatra Kanhauli), Km 32.00 (Tilay Dhala), Km 32.60, Km 36.0 (Khaira Dhala), Km 36.50.37.40 (Banaur) and Km 38.00 (Ram khetari) started getting information of seepage/piping which were controlled successfully (photos are annexed herewith and marked as Annexure-41). It is noteworthy that only one Junior Engineer was working under Flood Control Sub Division, Jhanjharpur (working area from km 14 to 44), while the strength of four Junior Engineers is approved. Timely information about the terrestrial situation was being given on mobile and on FCD-1&2, Jhanjharpur whatsapp Group. At around 6.00 pm, the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna, gave instructions to control the continuous piping near Km 55.80 (Kaithwar Sluice) on the mobile.
58(cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 Chief Engineer and his Technical Secretary had reached Sukki site, the undersigned left for Kaithwar.By this time, in addition to the places mentioned in para-5, seepage has also started at Km 43.02 (MehathDhala), Km 44.20 (Samiya Dhala), Km 45.80 (Gadia), Km 48.10 (Naruar), Km 49.80 to Km 50.00 and as per the instructions, the site was completely controlled by conducting flood fighting work (photos are annexed herewith and marked as Annexure-42). Before reaching Km 55.60, the information about the damage to the embankment at Km 7.50 (Terha) of LKBE was given to the Chief Engineer, Department and Madhubani Administration. Also, by the concerned Assistant Engineer it was posted at 7:58 pm in the FCD-2, Jhanjharpur WhatsApp Group (Instructions with photo are annexed herewith and marked as Annexure-43). Here continuous piping was going on from the sluice located at KM 55.80, which tractor etc. At around 11.45 pm, it was informed by Sri Yogendra Kumar, Junior Engineer in-charge of Naruar village site that uncontrolled piping has started suddenly at four places around 47.30 km and seeing this scene, the workers have fled from there (Instructions with photo are annexed herewith and marked as Annexure-44).According to the advice of the Chairman, Flood Fighting Force and the Chief Engineer present at Km 55.80, the Assistant Engineer was sent to the site with sufficient labourers and sand bags. Simultaneously, the Junior Engineer was directed that immediate action should be taken to secure the embankment by taking labourers from the adjacent site. At around 12.30 night, the Assistant Engineer informed about the damage to the embankment at km 47.30, which was informed to the Department and District Magistrate, Madhubani through mobile. In spite of tireless efforts to control the simultaneous seepage/piping at several sites between Km 58.00 to 90.00 of the right embankment as the highest water flow continued to travel D/S (Instructions with photos and messages are annexed herewith and marked as Annexure-45).Kaithwar (Km. 55.80), The embankments at Kakodha (Km 57.30 to 57.50), Kumraul (Km 71.40) and Mansara (Km 79.60) could not be saved. The information about the damage to the embankment was given to the concerned district magistrate along with the department. The details of the work done every day have been given to the Superintending Engineer/Chief Engineer/Central Flood Control Cell in the form of progress report (Photo copy of letter dated 20.07.2019 and reports dated 14-15-16.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-46 and 47). It is necessary to mention here that the Chief Engineer was continuously camping in Jhanjharpur and all the flood fighting works have been done only on the advice of his direction and chairman, Flood Fighting Force. It is clear from the above sequence of events that between date 13.07.2019 to 14.07.2019, during the unexpected discharge in Kamla Balan, I have strictly followed the standard operating procedure (SOP) laid down by the department under the direction of my senior officers/Chairman, flood fighting force. There has been no lapse or negligence in this, but the Standard Operating Procedure (SOP) has been followed promptly. J. The Respected inquiry officer in his inquiry report dated 24.02.2021 held the said charge not proved against the undersigned on the grounds that in Paragraph 4.4 of the Standard Operating Procedure, mainly the following instructions are mentioned for the Executive Engineer, as soon as the sensitivity of the site from any source is known, reaching the site within two hours and ensuring the implementation of the desired work for its safety and in this regard the Superintending Engineer / Chief Engineer / Chairman, Flood Fighting Force / Informing the concerned District Officer, enrolling any of the listed contractors for emergency work and getting the work implemented, the water level of the river above the warning level or the river water in the toe of the embankment then from the Executive Engineer to the Junior Engineer, patrolling day and night, reporting the absence of home guards to the district administration, etc. On the basis of the continuous rain since 12.07.2019 and the information given by the Meteorological Department, on 13.07.2019, in the light of the warning of heavy rain by the District Disaster Management, Madhubani, in addition to the accused officer, the Superintending Engineer / Chief Engineer / The Chairman, Flood Fighting Force were camping on the59 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 embankment since 12.07.2019, which is also confirmed by the perusal of attached documents. By camping at the site of all the senior officials, it can be assumed that all the concerned were informed. There is no reporting by the senior officials for not being present at the place of the undersigned. The wireless communication made by the undersigned to the district magistrate and the department regarding the absence from the home guard's place shows that action was being taken by the undersigned. Compliance of the instruction mentioned in Para 4.4 of the Standard Operating Procedure may not be possible for all the cut points in case the river flow exceeds 1.66 times the designed water flow and flows in free-board where almost the entire embankment is in a state of incombustibility. The flood fighting works were being done under the direction of the department and senior officials and at different places by various level officials (including Chief Engineer/Technical Secretary/ Chairman, Flood Fighting Force). When the witness was examined and questions were asked by the Respected inquiry officer himself and not by the Presenting Officer, the said witness merely tendered that with regard to the point of allegation by the Engineerin-Chief, Flood Control & Drainage, he said that this is true. This allegation has not been proved by the Respected inquiry officer in earlier inquiry report, whereas at the time of examination of the witness, without any additional record or evidence, it is partially proved which is impermissible both in law and on facts. Regarding charge no.3, it is humbly stated and submitted that the details of the actual condition of the site due to discharge in Kamla Balan River on 13.07.2019 and 14.07.2019 are mentioned in the defence statement of charge no. 2. The preparation made on the embankments / the status of the structures located on it and the report of the high level committee in which the reasons for the damage to the embankment are mentioned as follows:On the basis of the experience of the last years, adequate quantity of construction materials such as sand-filled bags and contractors were engaged in the work along with the labourers at all the identified sites (Photo copy of reports dated 22.06.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-48). Due to continuous rainfall in the catchment area of Kamla Balan River, increase in discharge was being recorded from 10.07.2019. All the subordinate assistant engineers/junior engineers were being instructed to be alert and vigilant in their respective areas through the WhatsApp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur. In this group, moment to moment information was being given about the status of the river/embankments and the department was constantly being aware of this information, which can be confirmed even today by observing the above WhatsApp group and can also be confirmed by other concerned officials (Photo copy of Instructions and conversations from dated 10.07.2019 to 14.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-49). Unexpected discharge 6223.94 cusec (2,19,705 cusec) in Kamla Balan River as on 13.07.2019 which was much higher than the design discharge of 3747cumec (1,40,000 cusec) in Kamla Balan River. This is confirmed by the discharge report made available vide letter number 33 dated 14.08.2019 of CWC Patna (In this regard, kindly refer to Annexure-18 already annexed) Due to unexpected discharge in the Kamla River, the water level started flowing in the free board of the embankment as prima facie. In places where the village are situated in C/S, the villagers have encroached on the embankment and also damaged its toe/slope and use it for private use, due to which the encroachment case was filed with the concerned circle officer in the past. (Photo copy of reports dated 01.06.2018 is annexed herewith and marked as Annexure-50).In such a situation, seepage / piping started simultaneously at many places of the embankment, which is also confirmed by the inspection report of the Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna (In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). On reaching the discharge near Jhanjharpur rail bridge in the evening of 13.07.2019, the water level started increasing due to afflux in the U/S. Sakri Jhanjharpur railway line, which was earlier Meter Gauge, along with Broad Gauge conversion, the level of rail was raised by more than 3.5 meters, information provided by east Central Railway but no provision of additional waterway for smooth flow was60 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 made rather between both the embankments, waterway was jacketed (Photo copy of report dated 10.08.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-51).Similarly, NH.57 which passes through km 44.00 of the right embankment of Kamla Balan River, due to the low effective waterway of the river, there was difficulty in getting discharge in d/s section. Similarly, as a result of the road bridge constructed in Km 59.50 of Sutharia and Km. 74.80 of Rasiyari, due to the less effective waterway, the water level of the river in U/S of bridges continued to flow for a long time within the free board of the embankment and to create pressure on the embankment due to failure in HG Line. Some of the reasons for the damage to the embankments have been mentioned by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna from departmental letter number 2605 dated 02.08.2019:-(a) The maximum discharge from Jaynagar weir on 13.07.2019 was 6223.94 cumec which was 1.66 times more than the maximum of 40 years discharge of 3966 cumec (1,40,000 cusec). Along with this, due to large scale congestion from the discharge of Koshi, Kareh and Kamala Balan river below the Phuhiya site of right embankment of Kamla Balan River, the Jayanagar weir site will have maximum discharge due to water logging in the entire Kamla River channel. The water level of the entire channel has been raised due to ingress, resulting in sudden increase in pressure on the embankment, which has led to breaches at many places on the embankments (In this regard, kindly refer to Annexure-18 already annexed). (b) Effective waterway between the embankments was found to be less than 106 m to 214.87 m from Lacey's waterway of the embankment, creating additional afflux in the embankment in U/S of those structures and forcing the flowing discharge to go into the free board of the embankment. (c) Agreeing with the above recommended suggestions in para-5, the departmental letter number-3092 dated 13.09.2019 requested all the concerned departments to make provision for additional waterways as per rules (Photo copy of letter of secretary wrd patna dated 13.09.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-52).CENTRE FOR TRANSPORTATION SYSTEM (CTRANS) INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY, ROORKEE Prof. Nayan Sharma presented an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan River embankment. Against the finding, it was found that the current constriction in Kamla Balan River is in the range of 17.6 percent to 70.00 percent. According to the report, the distressing outcome of acute waterway obstructions (of the order of 50% to 70% constriction, imposed by bridges across the Kamla Balan River could be recognized to be the prime contributing factor in creating very high Afflux HFLs in an anticipated range of 2m to 3m over natural flood levels (Photo copy of reports dated 05.12.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-53). Earlier, in the course of the study of unexpected discharge in Kamala Balan by FMISC, Patna, it was found that the right Kamla Balan Embankment would have to raise the upper surface due to new HFL in its almost entire length. It is clear from the above report that on 13.07.2019, almost in the entire length of the river, the discharge flowing from Jainagar has created the new HFL, due to which outside the C/S slope of the embankment, it has passed outside saturation line through several places simultaneously and some places due to piping outside the toe.But the embankment was damaged which could not be saved (In this regard, kindly refer to Annexure-21 already annexed). Referring to the reasons for the breach in Kamla Balan embankment by the Hon'ble Chief Minister, Bihar, it was told in the Legislative Council that on 12th and 13th July, 2019, the situation of a flash flood arose in Nepal due to heavy rainfall. Due to excessive discharge, Kamla Balan right embankment got damaged at six places and Kamla Balan left embankment at two places. It can be seen at Sl. no. 87 of the Departmental website's Videos Gallery. Information has also been given to the media by the Hon'ble Minister, Water Resources Department, Patna regarding the reasons for the damage to the Kamla embankment, which can be seen on the Sl. no.86 of the Departmental website's Videos Gallery. J. The Respected inquiry61 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 officer has exonerated the undersigned from the charges on the ground that in the facts given by the undersigned in his defence statement, the following reasons have been mentioned in relation to the damage of the embankment, such as, during the flood, under the direction of the senior officials, the flood fighting work was done, the unexpected discharge in the Kamla Balan river 6223.94 cumec (2,19,705 cusec) which is 1.66 times more than that of Kamla Balan's design discharge 3966 cumec (1,40,000 cusec), the water level entering the free board of the embankment due to unexpected discharge in the Kamla river, continuous seepage/piping due to excessive discharge (inspection report of Engineer-InChief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna), dedicated report by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna, for reasons of breach, Centre for Transportation System, IIT Roorkee Prof. Nayan Sharma submitted an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan river embankment, On the basis of the report submitted to the department by FMISC, Patna of unexpected discharge in Kamla Balan, it can be assumed that the cause of damage to the embankment was the unexpected discharge in the river. K. Now in view of present inquiry report along with letter dated 07.03.2022, it is stated and submitted that in respect of charge no.2 and charge no.3 (first part), disagreement has been expressed with the opinion of the Respected inquiry officer by stating that the design discharge in the report of the committee constituted under the chairmanship of the Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department, Patna is of Kamla Weir and not of the river. Under the head 'recommendation of the committee' part of the report mentioned above, it is mentioned in paragraph-1 that "due to the flow of maximum discharge and the flow of previously designed discharge, the assessment of newly design discharge and HFL has to be done". There is a need to go and accordingly the need to determine the formation level and section of the embankments was found. It is mentioned in paragraph-3 of the said report, "The maximum discharge reported by the Central Water Commission for the year 2019 is 6223.94 cumec, which is pointing towards an unexpected hydrological event, 166 percent more than the 3747 cumec of the last 40 years." It is clearly mentioned in the annexure to the said report that the peak discharge of 2019 is 6223.94 cumec. Please be aware that the Kamla River, entering the Indian land in the U/S part of Jainagar, flows through D/S of Jainagar weir and joins the Balan river near Km 26.0 of the left embankment, thus in the Balan river, it contributes its discharge. It is clear from the annexure attached with the letter that in the year 2012, the designed discharge of Kamla Balan River increased to 4000 сumec, which increased to 6223 cumec in the year 2019, which is more than one and a half times the designed discharge of the river. The design discharge of the year 2012 was decided jointly by the CWC, Government of Bihar and Government of Nepal. ((In this regard, kindly refer to Annexure-19 already annexed). In the light of the above, it is clear that on the day of embankment breach in Kamla Balan River, maximum discharge flow occurred in the last 40 years, which was more than one and a half times more than the designed discharge. It should be known that the water flow in the river on the date of breach is more than one and a half times the design discharge of the river, not an argument, it is a fact based on records. It is further stated and submitted that after the co- operation of the local people and the tireless efforts of the administrative officials, it was possible to start the slope cutting work in the up-stream part from 2.00 pm on the date of 21.7.2019 can be started (Photographs of site dated 21.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-54) It is to mention that the Engineer-in-Chief has said in his inspection report that in the afternoon of 21.07.2019, he inspected the Naruar site and as a result of the end of the public protest, he himself started the work at that site in his presence & directed to complete the flood fighting work by working day and night. It is not mentioned in his inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in62 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. On 21.07.2019 at 9:30 in the night, on receiving information about generator failure/non-functioning from some unknown source, Engineer-In-Chief from Inspection Bunglow, Jhanjharpur on 22.07.2019 morning, asked on the telephone in this regard from me. He was informed that due to generator failure at 9:30 P.M., the work was interrupted for some time, which was started again by installing a second generator under alternative arrangement and nylon crating work was done till 1:00 pm. After that the slope cutting work was done by JCB which is confirmed by the engineer deputed from outside division has made a remark of getting nylon crating work done by 1:00 am on the laying register, which certifies that the work is going on even after 9.30 pm. The work was interrupted only for a short while. After that the slope cutting work was done by JCB. It is noteworthy that the work of soil cutting / slope cutting is not recorded in the laying register (Photo copy of laying register recorded from dated 21.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure55).It is clear in the light of the above that due to the unexpected discharge, the water level encroached at all the places of Kamla Balan embankment started flowing in free board, which led to simultaneous piping/seepage at many places. In those places where piping started happening at many places and it was not possible to control it by well or other method, the embankment got damaged which resulted from the natural disaster of unexpected flood which can be confirmed by the reports of committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Patna and detailed marking in the report of IIT Roorkee and the information given by the Hon'ble Chief Minister / Hon'ble Minister's address to media. For this it is not fair to allege that the undersigned has failed despite being the responsible officer because the undersigned was constantly on the lookout and present on my duty. श्री प्रकाश के लिखित अभ्यावेदन में दिए गये उपर्युक्त बचाव-बयान की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री प्रकाश द्वारा अपने लिखित अभ्यावेदन के प्रत्युार में कोई नया तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। बल्कि पूर्व मेंं तीनों आरोपों के संबंध में पूछे गये स्पष्टीकरण के संदर्भ में समर्पित बचाव बयान जैसा ही लगभग समरूप/सदृश्य दिया गया है। इस प्रकार श्री प्रकाश के लिखित अभ्यावेदन को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया एवं सभी (तीनों) आरोपों को प्रमाणित पाया गया। 2. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मामले की समीक्षा की गई एवं मामले की सम्यक समीक्षोपरांत बाढ़ 2019 की अवधि में 03 (तीन) अदद कटाव/टूटान बिन्दुओं का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशों का उल्लंघन करने संबंधी आरोपों के लिए श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर संप्रति निलंबित, (मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना) को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम 14(xi) के तहत "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड दिये जाने का विनिश्चय किया गया। 3. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री प्रकाश के विरूद्ध विनिश्चत दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श की मॉग की गयी जिसपर आयोग के पत्रांक 2333 दिनांक 23.09.2022 द्वारा सहमति प्रदान की गयी।
4. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005(समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 (Xl)के तहत ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। 5. श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), सहायक अभियंता, को सेवा से बर्खास्त करने के दण्ड पर मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक-29.11.2022 के मद सं0-2 के रूप में सम्मिलित किया गया, जिसपर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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24 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(मुक0)सम0-19-19/2018-2651-- वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, झंझारपुर अंतर्गत कमला बलान नदी के पश्चिमी तटबंध में रिसाव होने की स्थिति में स्थल से अनुपस्थित रहने एवं जिला पदाधिकारी, दरभंगा एवं पुलिस अधीक्षक, दरभंगा द्वारा खोजबीन करने पर कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने, कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं63 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उदासीनता बरतने, विभागीय निदेश के बावजूद आक्रम्य स्थलों पर बाढ़ सुरक्षा हेतु सामग्रियों का भंडारण नही करने, आपात स्थिति में मानव बल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करने जैसे आरोपों के लिए श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871), तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर को विभागीय अधिसूचना सं0-1615 दिनांक-14.09.2017 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1677 दिनांक-20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम के विरूद्ध गठित सभी आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में श्री राम से विभागीय पत्रांक-1031 दिनांक-11.05.2018 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। तत्पश्चात श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उार समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत श्री राम के द्वितीय कारण पृच्छा को अस्वीकार योग्य पाया गया। इस प्रकार श्री राम के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1539 दिनांक-19.07.2018 द्वारा ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री राम द्वारा माननीय पटना उच्च न्यायालय में सी0डब्लूजे0सी0 सं0-13190/2018 दायर किया गया जिसमें दिनांक-05.02.2020 को पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् है :- "In view of the aforementioned facts and circumstances and having come to the considered opinion that action of the respondents in recommending the termination of the petitioner is in gross violation of the Rules and also the principle of natural justice, this Court is but wholly inclined to quash the impugned order of punishment whereby the petitioner's services have been terminated vide Memo No. 1539 The aforementioned orders stand quashed and the petitioner is directed to be reinstated in service. The writ application is allowed with liberty to the disciplinary authority to proceed from the stage where the action impugned has been challenged i.e, after the filing of reply to the show-cause and after due consideration of all facts and circumstances and after giving clear-cut findings on the grounds furnished by the petitioner, the authorities shall pass fresh orders in accordance with law." माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री राम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा उार) की समीक्षा की गयी। श्री राम ने अपने अभ्यावेदन (पत्रांक-11 दिनांक-08.06.2018) में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया है :- आरोप संख्या (1) के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का बयान :- (i) मैं दिनांक 12.08.2017 को रात में कमला बलान R/E के 73.00 कि0मी0 कैम्प कार्यालय में रात्रि में रहकर ही कार्यो के तटबंधों की देख-रेख कर रहा था। दिनांक 13.08.2017 को प्रातः 7.30 AM तक वहॉ की स्थिति सामान्य थी। निरीक्षण के क्रम में अधीक्षण अभियंता श्री देवेन्द्र झा के साथ बाएॅ तटबंध के लिए प्रस्थान किया। वहां करीब 10AM बजे तक तटबंध निरीक्षण किया गया। स्थिति नियंत्रण में थी, पर तटबंध पर दवाब था। तटबंध पर जल स्तर काफी उपर तक आ चुका था। पुनः 11.30 AM बजे दायें तटबंध पर आ गया। फिर करीब 12.30 PM बजे बायें तटबंध पर पहुॅचा। वहॉ कई जगहों पर पानी रिसाव हो रहा था। मैं स्वयं रिसाव के मरम्मति कार्य की निगरानी कर रहा था। (ii) शाम करीब 5.00 बजे विभागीय निदेश मिला कि दायाँ तटबंध पर पहुँचे। इसके अनुपालन में दायाँ तटबंध के लिए प्रस्थान किया। पर रास्ते में आसमाँ गाँव के पास ग्रामीणों के द्वारा मेरी गाड़ी को रोक दिया गया। लोग काफी अक्रामक थे एवं दुव्र्यवहार पर उतारु थे। तुरन्त इसकी जानकारी माननीय मंत्री महोदय को दी गयी। निदेशानुसार फिर डी0एम0 से बात किया गया। मुझे एस0डी0एम0 बिरौल से बात करने को कहा गया। अन्ततः काफी मसक्कत के बाद असमाँ गाँव के ग्रामीणों को समझा बुझाकर रसियारी के 73 कि0मी0 के लिए प्रस्थान किया। इस तरह जन प्रतिरोध के चलते वहाँ पहुँचते पहुँचते लगभग 8.00 PM बजे गया। इस समय तक तटबंध करीव पूरी ऊॅचाई से भर चुका था, यानि नदीं में जलस्तर तटबंध के फॉरमेशन लेवल के आसपास पहुॅचा गया था । (iii) इसके समर्थन में अपने बचाव बयान दिनांक 17.11.2017 में मैेने अपने सरकारी एवं निजी मोबाईल का सी0डी0आर0 संलग्न किया है जिससे स्थिति सुस्पष्ट हो जाती है। इससे सत्यापित हो जाता है कि मैं बिल्कुल अपने कर्त्तव्य पर उपस्थित था। यह महज संयोग माना जा सकता है कि जब डी0एम0/एस0डी0एम0 दायें तटबंध पर थे उस समय विभागीय निदेशानुसार मैं बायें तटबंध पर हो रहे दबाव के कार्यो के निरीक्षण एवं कार्यान्यवन में संलग्न रहा, जिससे कि तटबंध को बचाया जा सका । आरोप संख्या (2) के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का बयान :- (i) कार्य स्थल चूॅकि आक्राम्य था तदनुसार सारी व्यवस्था की गयी थी। भंडारित सामग्रियों की सूची एवं मात्रा विभाग में पूर्व में उपलब्ध करायी गयी थी एव विभाग के द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी प्रतिवेदित नहीं थी ।64 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 (ii) जब पानी तटबंध पर ओभरफ्लो की स्थिति में होता है तो कोई मजदूर/संवेदक सुरक्षा कारणों से काम करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं होते हैं। उस परिस्थिति में भी मजदूरों/संवेदक को समझा बुझाकर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को सुचारु रुप से चालू रखा गया, जिसकी सम्पुष्टि जिला पदाधिकारी के पत्र जो कि आरोप पत्र का मुख्य साक्ष्य है, से भी होती है, जिसके संबंध में मैनें पत्र के अग्रभाग में स्थिति स्पष्ट की है । (iii) बाढ़ की स्थिति प्रलंयकारी थी, अतएव उस परिस्थति में कोई भी आकलित मात्रा कम पड़ जाती है। फिर भी चुनौती का साहस के साथ सामना किया गया एवं बगल के अन्य स्थल से सामग्रियों की ढुलाई सुनिश्चित करायी गयी, जिसकी सम्पुष्टि प्रमंडल स्तरीय कागजातों से भी की जा सकती है। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को गति में रखा गया। लगातार हो रही वर्षा के बीच ढुलाई में भी भिन्न-भिन्न तरह की बाधा थी पर सभी कार्य को तत्परता से सम्पन्न किया गया। परन्तु उक्त प्राकृतिक आपदा जिसपर किसी स्तर से कारवाई की जानी संभव नहीं थी, फिर भी अथक प्रयास के बाद भी सफलीभूत नहीं हो पाया । आरोप संख्या (3) के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का बयान :- (i) यह आरोप साक्ष्य विहीन है, क्योंकि मेरे उपर लगाए गए आरोप का मूल साक्ष्य जिला पदाधिकारी का पत्र 2749 दिनांक 14.07.2017 है, जिसमें यह कहीं उल्लेखित नहीं है कि मेरे द्वारा किसी दिशा-निर्देश की अवहेलना की गयी है, जिससे कि मैं अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता । (ii) मेरे द्वारा विभाग के स्तर से निर्गत बाढ प्रबंधन निर्देशिका एवं मुख्यालय द्वारा दिये गये निर्देशों के आलोक में कार्रवाई की पूर्ण दृढता एवं निष्ठापूर्वक की गयी थी, जिसमें किसी प्रकार कोई कोताही बरती नहीं गयी थी । श्री राम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) एवं उपलब्ध विभागीय अभिलेखों की विभागीय समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गया :- श्री राम के विरुद्ध आरोप पत्र के गठन का आधार जिला पदाधिकारी दरभंगा का पत्र है। इस पत्र में अंकित है कि निरीक्षण के क्रम में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग समस्तीपुर अनुपस्थित पाए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उनके द्वारा वरीय पुलिस अधीक्षक, दरभंगा के साथ 3.00 बजे अपराह्न में तटबंध का निरीक्षण किए। उस समय भी मुख्य अभियंता अनुपस्थित पाए गए। संध्या 6.30 बजे उनकी प्रतीक्षा की गई परन्तु वे उपस्थित नहीं हुए। बाद में रात्रि 8.00 बजे वहाँ पहुँचे। जिला पदाधिकारी के पत्र के आधार पर श्री राम के विरुद्ध आरोप गठित किया गया। कार्य क्षेत्र से अपनी अनुपस्थिति के संबंध में श्री राम का कहना है कि वे दिनांक 12.08.17 की रात में कमला वलान R/E 73.00 K.M.Camp कार्य में रात्रि में रह कर ही तटबंध की देख रेख कर रहे थे। दिनांक 13.08.17 को प्रातः 7.30 बजे तक वहॉ की स्थिति सामान्य थी। निरीक्षण के क्रम में अधीक्षण अभियंता श्री देवेन्द्र झा के साथ वाये तटबंध के लिए प्रस्थान किया। वहॉ करीब 10.00 A.M. तक तटबंध निरीक्षण किया गया। फिर 12.30 A.M. बजे वायॉ तटबंध पर पहुॅचे जहॉ कई जगहों पर पानी का रिसाब हो रहा था और वह स्वयं रिसाव तथा मरम्मति कार्य की निगरानी कर रहे थे। शाम करीब 5.00 बजे विभागीय निदेश प्राप्त हुआ कि दायॉ तटबंध पर पहुँचें। इसके अनुपालन में वे दायॉ तटबंध के लिए प्रस्थान किये पर रास्ते में असमा गाँव के पास ग्रामीणों के द्वारा उनकी गाड़ी को रोक लिया गया तथा उनके साथ वे लोग दुव्र्यवहार पर उतारु हो गये। इसकी सूचना उन्होंने माननीय मंत्री महोदय तथा जिला पदाधिकारी को दी। काफी मसक्कत के बाद असमा गॉव के ग्रामीणों को समझा बुझाकर रसियारी के 73.00 कि0 मि0 के लिए प्रस्थान किये। इसलिए वहॉ पहुॅचते-पहुॅचते लगभग 8 P.M. बज गया। अपने कथन के समर्थन में श्री राम ने सरकारी एवं निजी मोबाईल का C.D.R. संलग्न किया है। संलग्न C.D.R. के अवलोकन से प्रतीत होता है कि श्री राम दिनांक 12.08.17 एवं 13.08.17 को मधुबनी एवं दरभंगा जिले के विभिन्न स्थलों पर उपस्थित रहे हैं इसलिए अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने का आरोप श्री राम पर प्रमाणित नहीं होता है। दूसरे आरोप के संबंध में श्री राम का कहना है कि चूॅकि कार्य स्थल आक्राम्य था इसलिए पहले से ही सारी व्यवस्था की गई थी। भण्डारण सामग्रियों की सूची एवं मात्रा विभाग को पूर्व में ही उपलब्ध करा दी गई थी। विभाग द्वारा किसी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी प्रतिवेदित नहीं थी। चूँकि बाढ की स्थिति काफी भयावह थी इसलिए इस परिस्थिति में आकलित मात्रा का कम पडना स्वाभाविक है। फिर भी युद्वस्तर पर कार्य कराया गया तथा बगल के अन्य स्थल से सामाग्रियों की ढुलाई करायी गयी जिसकी सम्पुष्टि प्रमण्डलीय कागजात से की जा सकती है। लगातार वर्षा हो रही थी। बीच बीच में ढुलाई कार्य प्रभावित हो रहा था। उनके द्वारा कर्तव्य में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती गई है तथा तत्परतापूर्वक बाढ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। श्री राम ने अपने कथन के समर्थन में किसी प्रकार का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। इसलिए आरोप संख्या-2 आंशिक रुप से प्रमाणित पाया गया। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871), तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर के विरूद्ध 'सेवा से बर्खास्तगी' संबंधी निर्गत दण्डादेश (विभागीय अधिसूचना सं0-1539, दिनांक 19.07.18) को निरस्त करने एवं उक्त विभागीय दण्डादेश निरस्त किए जाने के पश्चात् इस मामले में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत श्री राम के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-788 दिनांक-11.06.2020 द्वारा 'दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री राम द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया कि उनके द्वारा स्थल पर उपस्थित पदाधिकारियों को लगातार निदेश भी दिया जा रहा था परंतु श्री राम के द्वारा उक्त कथन की पुष्टि हेतु कोई भी अभिलेख आधारित साक्ष्य अभ्यावेदन के साथ संलग्न नहीं किया गया है। इस प्रकार65 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 आरोप के संदर्भ में अभ्यावेदन के साथ तथ्यों की पुष्टि हेतु कोई भी साक्ष्य संलग्न नहीं रहने के कारण श्री राम का पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री राम के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत/खारिज करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में बिजेन्द्र कुमार राम (आई0डी0-3871), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के विरूद्ध अधिसूचना सं0-788 दिनांक 11.6.2020 द्वारा संसूचित दण्ड 'दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' को यथावत्/बरकरार रखते हुए श्री राम द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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22 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)05-04/2014-2639--श्री सुदर्शन सिंह (आई0डी0-1775), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध परिवादी श्री पवन कुमार से 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई की टीम द्वारा दिनांक 26.03.2014 को रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के फलस्वरूप कदाचार, भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी आदि आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग के अधिसूचना सं0-2311 दिनांक-22.05.2014 द्वारा दिनांक 26.03.2014 के प्रभाव से निलम्बित किया गया। तत्पश्चात लघु जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 6320 दिनांक 06.11.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री सिंह के सेवानिवृति दिनांक 31.12.2014 के पश्चात् संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध लघु जल संसाधन विभाग द्वारा गठित आरोप पत्र का संक्षिप्त सार निम्नवत है :- आरोप- श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान की लिखित शिकायत पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/2014 दिनांक 26.03.2014 धारा-7, भ्रा0नि0अधि0, 1988 के तहत आपके विरूद्ध कांड दर्ज किया गया है। अनुसंधान के क्रम में आपको वादी श्री पवन कुमार से 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई के टीम द्वारा रंगे हाथ दिनांक 26.03.2014 को अपराह्न में मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया गया है। आपका यह कृत्य कदाचार, भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी को प्रमाणित करता है एवं यह सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 का उल्लंघन है एवं भ्रा0नि0अधि0, 1988 की धारा-7, 8 एवं 9 के अन्तर्गत अपराध की श्रेणी में है। श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा यह पाए जाने पर कि श्री सिंह, जल संसाधन विभाग संवर्ग के अभियंता हैं, संबंधित विभागीय कार्यवाही के समस्त अभिलेखों को अग्रेतर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराया गया।
श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उार की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत निम्नांकित तथ्य पाए गए -
श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान की लिखित शिकायत पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/14 दिनांक 26.03.14 अन्तर्गत धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत संस्थित किया गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा आरोप लगाया गया था कि श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता द्वारा रिश्वत के रूप में उनसे 10,000/-रु0 की माँग की गई। इसकी शिकायत कार्यपालक अभियंता द्वारा आर्थिक अपराध इकाई से की गई। आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना ने शिकायत के जाँचोपरांत श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता को 10,000/- रु0 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध इकाई-3 बिहार, पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इस मामले में जाँच आयुक्त से विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका 10 में श्री सिंह के विरूद्ध 10,000/- रु0 रिश्वत लिये जाने के आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सिंह से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर के सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं०-1162 दिनांक 23.09.2020 द्वारा "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
उक्त पुनर्विचार अभ्यावेदन में नये तथ्यों का समावेशन नहीं रहने के कारण अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-925 दिनांक 26.08.2021 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" को यथावत रखा गया।
उपर्युक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में रिट याचिका दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर रिट याचिका सी॰डब्लू॰जे॰सी॰66 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 संख्या-7439/2021 (सुदर्शन सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में दिनांक-11.05.2022 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है :- 4. Respondent Nos. 3 and 7 filed counter affidavit. Para 9 of the counter affidavit reads as under:- "That it is made clear that in compliance of the provision made under Rule 17(3) of the Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules, 2005, a copy of the aforesaid resolution was duly communicated and served to the petitioner along with the Articles of charges and list of documents. But the list of witnesses was not prepared and served to the petitioner. However, the petitioner also did not make any request for examination of witnesses." 5. In the light of aforesaid infirmity that charge-memo was not accompanied by list of witnesses and further proceedings is vitiated due to non-compliance of Sub- rule 3 of Rule 17 of the Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules, 2005. 6. In view of aforesaid deficiency in the enquiry proceedings impugned order dated 23.09.2020 (Annexure-1) stands set aside. Reserving liberty to the disciplinary authority to initiate fresh enquiry in accordance with Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules, 2005 and complete the proceedings within a period of four months from the date of receipt of this order. The petitioner shall be taken back to duty, subject to outcome of disciplinary proceedings to be initiated and completed. 7. Petitioner is entitled to monetary benefits during the intervening period from the date of penalty order dated 23.09.2020 till reinstatement order is passed. 8. With the above observations, the present petition stands disposed of. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7439/2021 में दिनांक 11.05.2022 को पारित न्याय निर्णय में मूलतः आरोप पत्र में साक्षियों की सूची अंकित नहीं रहने एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के उप नियम-3 का पूर्णतः अनुपालन नहीं किये जाने से आगे की कार्रवाई दूषित होने के कारण मामले को निरस्त किया गया है।
उक्त मामले में आरोपी पदाधिकारी श्री सुदर्शन सिंह (आई0डी0-1775), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर किये गये रिट याचिका में पारित किये गये आदेश में श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-1162, दिनांक-23.09.2020 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड को निरस्त करते हुये, CCA Rules 2005 के प्रावधानो के तहत श्री सुदर्शन सिंह के विरूद्ध Fresh Enquiry प्रारंभ करने तथा Proceeding को चार (04) माह में Complete करने का आदेश दिया गया है। साथ ही न्यायनिर्णय के कंडिका 07 के अनुसार Petitoner को Monetary Benifts देने का आदेश दिया गया है।
वादी श्री सुदर्शन सिंह द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7439/2021 में दिनांक 11.05.2022 को पारित न्यायादेश के कुछ बिन्दुओं को परिवर्धित/संशोधित करने हेतु सिविल रिव्यू सं0-120/2022 माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर किया गया। उक्त के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 13.07.2022 सिविल रिव्यू सं0-120/2022 में न्यायादेश पारित किया गया है, जिसका प्रभावी अंश निम्नवत है :-
"Accordingly, the word in para 6 of the order dated 11.05.2022" The Petitioner shall be taken back to duty, subject to outcome of disciplinary proceedings to be initiated and completed" is deleted. Similarly in para 7 the word "till reinstatement order is passed" is deleted. Further petitioner's service benefit shall be regulated subject to outcome of fresh enquiry. In the meanwhile, concerned respondent is hereby directed to extend provisional pension is accordance with law within a period of two months from the date of receipt of this order. To the above extent, earlier order dated 11.05.2022 passed in CWJC No 7439 of 2021 stands reviewed."
उपर्युक्त सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7439/2021 में दिनांक 11.05.2022 को पारित न्याय निर्णय एवं सिविल रिव्यू सं0-120/2022 में दिनांक 13.07.2022 को पारित न्यायनिर्णय के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किया जाय अथवा नहीं, के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता, बिहार का परामर्श प्राप्त किया गया, जो निम्नवत है :-
67 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023"It would be advisable to initiation of fresh enquiry from where fault has been found because it is a case wherein the writ petitioner has been arrested by Economic offence Unit taking bribe. In view of the fact that time bound completion of fresh enquiry is to be completed it is warranted that the authority would like to file modification petition for extension but before that notice etc is to be sent to the writ petitioner to establish the fact that the fresh enquiry has begun."
I opine accordingly. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7439/2021 में दिनांक 11.05.2022 को पारित न्याय निर्णय एवं सिविल रिव्यू सं0-120/2022 में दिनांक 13.07.2022 को पारित न्यायनिर्णय के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किया जाना संभव नहीं होने के कारण, विद्वान महाधिवक्ता, बिहार द्वारा दिये गये उपर्युक्त विधिक परामर्श के आलोक में न्याय निर्णय के अनुपालनार्थ, सक्षम प्राधिकार के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत निम्नलिखित निर्णय लिया गया है :-
1. श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध गवाहों की सूची के साथ पूरक आरोप पत्र गठित किया जाता है।
2. श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1162 दिनांक 23.09.2020 द्वारा संसूचित दण्ड "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक" एवं अधिसूचना सं0-925 दिनांक 26.08.2021 द्वारा श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के सम्पूर्ण मामले को नये सिरे से सुनवाई हेतु संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया जाता है। 3. श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही में पूर्व में संचालन पदाधिकारी रहे मुख्य जाँच आयुक्त को पुनः संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। आरोपों का संबंध लघु जल संसाधन विभाग से होने के कारण मामले में मुख्य जाँच आयुक्त के समक्ष अनुशासनिक प्राधिकार का पक्ष रखने हेतु उक्त विभाग के किसी सक्षम पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के रूप में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा नामित किया जायेगा।
4. उपर्युक्त प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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17 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(मोति0)-08-01/2021/2627--श्री विनोद कुमार भगत (आई०डी०-4021), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया के विरूद्ध मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी द्वारा प्रतिवेदित आरोप पत्र साक्ष्य सहित अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, पटना के माध्यम से प्राप्त हुआ। उक्त के आलोक में मामले के समीक्षोपरांत श्री भगत के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 523 दिनांक 25.06.2021 द्वारा उनसे आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी।
श्री भगत के विरूद्ध गठित आरोप पत्र मेें आरोप के बिन्दु निम्नवत है :-
1. दिनांक 17.01.2021 को प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना के द्वारा परिक्षेत्र अन्तर्गत कार्य स्थलों का भ्रमण कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था जिसकी सूचना मुख्य अभियंता, मोतिहारी के पत्रांक 98 दिनांक 14.01.2021 द्वारा परिक्षेत्र अन्तर्गत सभी अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को दी गयी थी तथा सभी कार्यपालक अभियंता को उनके क्षेत्राधीन नहर प्रणाली के महत्वपूर्ण विन्दु पर मौजूद रहने के लिए कहा गया था। दिनांक 17.01.2021 को प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना के द्वारा स्थल निरीक्षण के संबंध में पल-पल की जानकारी सभी पदाधिकारियों को दी जा रही थी। प्रधान सचिव, वैशाली जिलान्तर्गत विश्व शांति स्तूप के समीप वैशाली शाखा नहर से प्रेशर पाईप द्वारा अभिषेक पुष्पकरणी सरोवर में जलापूर्ति कार्य का निरीक्षण हेतु वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 155.00 पर पहुँचे। वैशाली शाखा नहर में जलश्राव नहीं होते पाया गया। वैशाली शाखा नहर के इस बिन्दु पर जलश्राव शून्य के कारण की जानकारी हेतु मुख्य अभियंता, मोतिहारी द्वारा श्री विनोद कुमार भगत, कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया को खोजा गया, वे अनुपस्थित पाये गये। जबकि उनको छोड़ कर सभी पदाधिकारी मौजूद थे। पुनः मोबाईल पर संपर्क करने के बाद वे आधे घंटे के बाद स्थल पर आये जबकि उन्हें पहले से ही स्थल पर उपस्थित रहना चाहिए था। 2. वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 155.00 पर जलश्राव शून्य रहने के संबंध में श्री भगत से पूछने पर बताया गया कि वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 55.00 (दायां) पर क्षतिग्रस्त नहर बाँध की मरम्मति नहीं हुआ है तथा रेलवे के द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 36.00 पर सेतु निर्माण का कार्य किया जा रहा है। वैशाली शाखा नहर का वि0दू0 55.00 दायाँ बाँध दिनांक 28.07. 2020 को क्षतिग्रस्त हुआ था जिसके मरम्मति के संबंध में मुख्य अभियंता, मोतिहारी के पत्रांक 1480 दिनांक 29.07.2020, पत्रांक 1529 दिनांक 07.08.2020, पत्रांक 1672 दिनांक 02.09.2020 के द्वारा मरम्मति कार्य कराने तथा अनुपालन प्रतिवेदन प्रतिवेदित करने हेतु उन्हें निदेश दिया गया। विदित है कि उनके प्रमंडल को शीर्ष 2700 में प्राप्त कुल 35.00 लाख आवंटन का स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम में रू0 10.00 लाख का आकस्मिक मद के रूप में कार्यक्रम स्वी—त है। उनका दायित्व था कि नहर संचालन हेतु वैशाली शाखा नहर के क्षतिग्रस्त भागों का आकलन कर प्राथमिकता के आधार चयन कर अधीक्षण68 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अभियंता/मुख्य अभियंता को अवगत कराते हुए कार्य को आकस्मिक मद के रूप संपादित कर रब्बी सिंचाई हेतु नहर में जलश्राव प्रवाहित करना चाहिए था। इस प्रकार उच्चाधिकारी के निदेश का अनुपालन करने में उनके स्तर से लापरवाही बरती गयी है। 3. श्री भगत द्वारा वैशाली शाखा नहर में जलश्राव प्रवाहित नहीं होने के कारण रेलवे के द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 36.00 पर सेतु निर्माण का कार्य कराया जाना भी बताया गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के ज्ञापांक 2241 दिनांक 22.12.2020 द्वारा इस बिन्दु पर उप मुख्य अभियंता (2) निर्माण पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर को निर्गत अनापत्ति प्रमाण पत्र के कंडिका सं0-03 में उल्लेखित "सिंचाई अवधि में नहर मार्ग को बिल्कुल Clear रखा जाएगा तथा सिंचाई अवधि में कार्य कराने की अनुमति नहीं होगी" के शर्त का अनुपालन कराने में उनके द्वारा लापरवाही बरती गयी है। दिनांक 18.01.2021 को उनसे वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 36.00 पर रेलवे द्वारा कराये जा रहे कार्य का निरीक्षण कर फोटोग्राफ लेकर भेजने हेतु निदेश दिया गया। श्री भगत से दिनांक 19.01.2021 को जब मोबाईल पर फोटो भेजने हेतु कहा गया तो उनके द्वारा बताया गया कि उनके कमर में दर्द है तथा ये कार्य स्थल पर नहीं जा सकेंगे। इस प्रकार उनके द्वारा उच्चाधिकारी द्वारा दिये गये निदेश की अवहेलना की गई। यदि वे अस्वस्थ थे तो इसकी सूचना उन्हें पूर्व में प्रतिवेदित करनी चाहिए थी। 4. विभागीय ज्ञापांक 102 दिनांक 18.01.2019 के द्वारा अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग पटना द्वारा दिनांक 17.01.2019 को निरीक्षण के क्रम में हाजीपुर वितरणी के वि०दू0 33.00 पर अवस्थित संरचना का पारापेट का मरम्मति कर अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया था। अनुपालन प्रतिवेदन अब तक अप्राप्त है, जो उनके द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना को दर्शाता है। 5. विभाग द्वारा उनके उपलब्ध कराये गये मोबाईल नं0 7463889900 पर संपर्क करने पर अक्सर "The Person you are calling has forwarded his call to another number" का संदेश आने के पश्चात उनके नंबर पर कॉल होता है, जिससे यह प्रतीत होता है कि श्री भगत का मोबाईल मुख्यालय के नजदीक किसी स्थान पर रख कर इस नंबर को अपने निजी मोबाईल नम्बर पर Forward कर दिया गया है। इसके कारण विभागीय कार्य को संपादित करने में अक्सर बाधा पहुँचती है। 6. विभागीय पत्रांक 1099 दिनांक 13.07.2018 से संदर्भित दिनांक 12.07.2018 को अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, पटना के द्वारा तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया अन्तर्गत विभिन्न नहर प्रणालियों के निरीक्षण के क्रम में नहरों के रख-रखाव/संपोषण तथा नहरों में निर्धारित क्षमता के अनुरूप जलश्राव प्राप्त कर अंतिम छोर तक पर्याप्त जलश्राव उपलब्ध नहीं कराया जाना, कार्य में लापरवाही बरतना, उच्चाधिकारियों को गुमराह करना, विभाग को वस्तुस्थिति प्रतिवेदित नहीं करना, विभागीय छवि को धुमिल करना तथा कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी ठहराया गया था। इसके बावजूद उनके द्वारा सिंचाई जैसे मूल कर्तव्य में लापरवाही बरती जा रही है। 7. ई० जाहिद हुसैन, अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा दिनांक 08.06.2020 को तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया के क्षेत्रान्तर्गत नहर एवं अवर प्रमंडलों का निरीक्षण किया गया था। वैशाली शाखा नहर के वि०दू0 79.30 पर अवस्थित आउटलेट का निरीक्षण के दौरान पूर्व से उनके पत्रांक 401 दिनांक 03.06.2020 द्वारा दिये गय सूचना के बावजूद भी श्री विनय कुमार सिन्हा, सहायक अभियंता, श्री अनुज कुमार, कनीय अभियंता, श्री हलघर कुमार, कनीय अभियंता एवं श्री योगेन्द्र कुमार, कनीय अभियंता अनुपस्थित थे। तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, देवरिया के कार्यालय के निरीक्षण के दौरान कार्यालय में तालाबंद पाया गया, जबकि अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के आने की सूचना पूर्व में ही कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया को दी गयी थी। तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, देवरिया में सहायक अभियंता सहित सभी लोग अनुपस्थित थे। तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, पारू कार्यालय में भी ताला बंद था। एक ग्रामीण द्वारा बताया गया कि यहाँ कोई पदाधिकारी/कर्मचारी नहीं रहते हैं। तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, देवरिया के श्री राजाराम भगत, भंडारपाल कार्यरत थे तथा वे उपस्थिति पंजी घर पर रखते हैं। तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया का निरीक्षण किया गया। कार्यालय निरीक्षण के दौरान श्री अभिनव कुमार, निम्नवर्गीय लिपिक एवं श्री अमरेश पटेल कार्यालय परिचारी समय 12ः25 अपराह्न में अनुपस्थित पाये गये। श्री विनय कुमार, सहायक अभियंता, श्री योगेन्द्र कुमार, कनीय अभियंता, श्री हलधर कुमार, कनीय अभियंता स्थल पर उपस्थित नहीं थे। वे लोग मुख्यालय में रहते हुए भी जानबूझ कर स्थल पर अनुपस्थित थे। उक्त के आलोक में अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा संबंधित अनुपस्थित सहायक अभियंता/कनीय अभियंता एवं कर्मचारियों का दिनांक 08.06.2020 का वेतन अगले आदेश तक अवरूद्ध करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त कर अपने मंतव्य के साथ समर्पित करने हेतु कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया को निदेश दिया गया। इससे संबंधित साक्ष्य भी पाये गये है।
श्री भगत से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1519, दिनांक 02.12.2021 द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी से उनके स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर बिंदुवार प्रतिवेदन/मंतव्य की माँग की गई। उक्त आलोक में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के पत्रांक-792 दिनांक 04.04.2022 से प्राप्त प्रतिवेदन में आरोपवार अंकित मंतव्य निम्नवत् है :-
1. आरोप सं0-01 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य :- श्री भगत द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर, इनके उपर लगाए गए आरोप के बिल्कुल उल्टा है। आरोप में यह कही नहीं कहा गया है कि श्री भगत प्रधान सचिव के स्थल निरीक्षण के क्रम में उपस्थित नहीं थे। आरोप में यह कहा गया है कि प्रधान सचिव के स्थल निरीक्षण के क्रम में वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 155.00 पर जलश्राव शून्य होने के कारण की जानकारी हेतु मुख्य अभियंता द्वारा श्री विनोद कुमार भगत की खोज की गई तो वे अनुपस्थित थे जबकि इनको छोड़कर निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित सभी पदाधिकारी69 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 मौजूद थे। मोबाईल पर संपर्क करने के बाद वे करीब आधे घंटे बाद वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 155.00 पर पहुँचे। प्रोटोकॉल के अनुसार जिस प्रमंडल में प्रधान सचिव का स्थल निरीक्षण हो रहा हो वहाँ उस प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को अनिवार्य रूप से रहना चाहिए। श्री भगत द्वारा अपने स्पष्टीकरण में, कक्ष में रहने के बात कही गई है न कि फील्ड में प्रधान सचिव के स्थल निरीक्षण के समय उपस्थित रहने की बात की गई है। श्री भगत का यह आचरण वरीय पदाधिकारियों की उपेक्षा को दर्शाता है।
2. आरोप सं0-02 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य :-श्री भगत द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर एवं तथ्य इनके उपर लगाए गए आरोप कि वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 155 पर जलश्राव शून्य क्यों था, के बिल्कुल परे है। प्रधान सचिव द्वारा स्थल निरीक्षण दिनांक-17.01.2021 को किया गया जबकि बाढ़ की अवधि 15 जून से 25 अक्टूबर तक रहती है। इस प्रकार श्री भगत द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 155 पर जलश्राव शून्य रहने का कारण बाढ़ की विभिषिका बताया जाना तर्क संगत नहीं है। बाढ़ अवधि की समप्ति 25 अक्टूबर को हो जाती है। 25 अक्टूबर से दिनांक-16.01.2021 तक की अवधि में श्री भगत द्वारा वि.दू 55 (दायाँ) पर क्षतिग्रस्त बाँध की मरम्मति आकस्मिक मद में बचे 10 लाख रूपये से कराई जा सकती थी और परिस्थिति भी सामान्य हो चुकी थी परंतु फिर भी श्री भगत द्वारा अपनी कार्य अक्षमता को छुपाने के लिए बाढ़ जैसे प्रा—तिक आपदा को कारण बताया जाना अशोभनीय है। दूसरा कारण इनके द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 36.00 पर रेलवे द्वारा सेतु निर्माण को बताया गया जो सर्वथा अनुचित है क्योंकि नहर पर कार्य कराने हेतु अनापति प्रमाण-पत्र इस शर्त पर दिया जाता है कि सिंचाई अवधि में नहर मार्ग को बिल्कुल Clear रखा जाएगा तथा सिंचाई अवधि में नहर में किसी भी प्रकार का कार्य कराने की अनुमति नहीं होगी।
3. आरोप सं0-03 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य :-श्री भगत द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 155 पर जलश्राव शून्य होने का कारण वैशाली शाखा नहर के वि.दू. 36.00 पर पूर्व मध्य रेलवे द्वारा सेतु निर्माण को बताया गया है। विदित हो कि मुख्य अभियंता कार्यालय द्वारा पूर्व मध्य रेलवे को सेतु निर्माण हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र पत्रांक-2241 दिनांक-22.12.2020 को दिया गया है एवं पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अपने पत्रांक-346 दिनांक-21.01.2021 द्वारा ''सिंचाई हेतु कम पानी नहर में छोड़े जाने का अनुरोध किया गया है।'' जबकि प्रधान सचिव द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि.दू, 155 का स्थल निरीक्षण दिनांक-17.01.2021 को किया गया है। इस प्रकार दिनांक-17.01.2021 को वैशाली शाखा नहर में जलश्राव तो भरपुर रहना चाहिए था जो नहीं था।
इससे स्पष्ट होता है कि श्री भगत द्वारा अपने प्रमंडलाधीन आने वाले नहरों का स्थल निरीक्षण नहीं किया जाता है बल्कि सिर्फ निदेशों को निचले स्तर तक अग्रसारित किया जाता रहा है। नहरों का नियमित रूप से स्थल निरीक्षण का दायित्व से, सेहत में आकस्मिक उतार-चढ़ाव का बहाना बनाकर बचना उचित नहीं माना जा सकता है।
आरोप सं0-04 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य :-अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग पटना द्वारा दिनांक-17.01.2019 को निरीक्षण के क्रम में हाजीपुर वितरणी के वि.दू. 33.00 पर अवस्थित संरचना का पारापेट का मरम्मति कर अनुपालन प्रदिवेदन जो अबतक मुख्य अभियंता कार्यालय को अप्राप्त है, के संबंध में श्री भगत द्वारा बताया गया है कि इस संदर्भ में साक्ष्य सहित प्रतिवेदन पूर्व में ही दिनांक-13.12.2020 को समर्पित किया जा चुका है। परंतु प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर के साथ उक्त प्रतिवेदन संलग्न नहीं है, बल्कि केवल एक फोटोग्राफ संलग्न है, जिससे यह पता नहीं चलता है कि वह फोटो किस तिथि को लिया गया है। यदि इनके द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया गया होता तो उसका पत्रांक एवं दिनांक इनके द्वारा अपने स्पष्टीकरण में अंकित किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया है ताकि विभाग को गुमराह किया जा सके। ज्ञातव्य हो कि मरम्मति का कार्य केवल किया जाना मायने नहीं रखता है बल्कि मायने रखता है की वह निर्धारित अवधि में किया गया है या नहीं।
आरोप सं0-05 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य :- श्री भगत पर आरोप पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि विभाग द्वारा उनको उपलब्ध कराये गये मोबाईल नंम्बर-7463889900 पर मुख्य अभियंता कार्यालय से कॉल करने पर अक्सर "The Person you are calling has forwarded his call to another number" का संदेश आने के पश्चात् उनके नंम्बर पर कॉल होता है। यानी कि आरोप यह है कि उनके द्वारा विभागीय मोबाईल को अपने पास नहीं रखा जाता था। वे विभागीय मोबाईल नम्बर को मुख्यालय में रखकर मुख्यालय से बाहर रहते थे ताकि विभाग द्वारा यदि मोबाईल को ट्रेस भी किया जाय तो मोबाईल मुख्यालय में होने का लाकेशन विभाग को ज्ञात होगा और श्री भगत मुख्यालय से बाहर रहकर भी अपने आप को मुख्यालय में रहने का प्रमाण देने में सफल हो जायेंगे।
श्री भगत द्वारा अपने स्पष्टीकरण में उनपर लगाए गए आरोप का जवाब नहीं दिया गया है। उनके द्वारा यह बताया गया है कि किसी भी समय उनके द्वारा दूरभाष पर संपर्क किया जाता रहा है। दूरभाष पर संपर्क तो होगा ही जब कॉल को Another call पर forward जायेगा या फिर जब वे स्वयं मुख्य अभियंता कार्यालय से संपर्क करेंगे क्योंकि कॉल तो वे कर रहे है।
आरोप सं0-06 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य ः- विभागीय पत्रांक-1099 दिनांक 13.07.2018 द्वारा मुख्य अभियंता सिंचाई सृजन जल संसाधन विभाग को दिनांक-12.07.2018 को तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया अतंर्गत विभिन्न नहर प्रणालियो के निरीक्षण के क्रम में नहरो के रख-रखाव/संपोषण तथा नहरों में निर्धारित क्षमता के अनुरूप जलश्राव प्राप्त नहीं एवं अंतिम छोर तक पर्याप्त जलश्राव उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण श्री विनोद कुमार भगत एवं अन्य अभियंताओं के विरूद्ध आरोप प्रपत्र ''क'' मे समर्पित करने का निदेश दिया गया था जो विभाग को इस कार्यालय के पत्रांक- 2884 दिनांक-12.10.2018 द्वारा समर्पित किया जा चुका है।70 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अभियंता प्रमुख द्वारा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन के कंडिका 2 में यह अंकित किया गया है कि ''इस लघु नहर का नाम पुछने पर स्थल पर उपस्थित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, एवं कनीय अभियंता द्वारा नही बताया जा सका''। इस प्रकार जब कार्यपालक अभियंता को अपने प्रमंडलाधीन नहरों का नाम मालूम नहीं है तो इनका स्पष्टीकरण कैसे स्वीकार योग्य हो सकता है।
आरोप सं0-07 के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर पर मंतव्य ः- जब कोई वरीय पदाधिकारी अपने उच्च पदाधिकारी के निदेश के आलोक में अधीनस्थ पदाधिकारियों के कार्य क्षेत्र का स्थल निरीक्षण संबंधित पदाधिकारी को सूचित करके जाते है तो अधीनस्थ क्षेत्रीय पदाधिकारियों का दायित्व होता है स्थल निरीक्षण करने वाले पदाधिकारी के साथ रहे। ई. जाहिद हुसैन अधीक्षण अभिंयता, तिरहुत नहर अंचल मुजफ्फरपुर द्वारा ई. विनोद कुमार भगत, कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया को पत्रांक-401 दिनांक-03.06.2020 द्वारा सूचित कर मुख्य अभियंता मोतिहारी के आदेशानुसार तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया के परिक्षेत्राधीन नहर एवं अवर प्रमंडलों का निरीक्षण हेतु गए थे। निरीक्षण के क्रम में सभी अभियंता एवं कर्मचारी स्थल/कार्यालय से अनुपस्थित थे। इसका मतलब यह है कि श्री विनोद कुमार भगत, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के निरीक्षण की सूचना नहीं दी गई थी अथवा वे अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियंत्रण रख पाने में अक्षम है। स्थल निरीक्षण के क्रम में यदि कार्यालय में पदाधिकारी एवं कर्मचारी अनुपस्थित पाये जाते है तो इसका मतलब यह है कार्यपालक अभियंता द्वारा केवल उपस्थिति पंजी के आधार पर वेतन भुगतान किया जाता है भौतिक रूप से वे प्रतिदिन कार्यालय में रहते हो या नहीं। श्री भगत से प्राप्त स्पष्टीकरण, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी से प्राप्त मंतव्य एवं उपलब्ध अभिलेखों के समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :- आरोप 1 :- श्री भगत पर आरोप है कि प्रधान सचिव के स्थल निरीक्षण के क्रम में वैशाली शाखा नहर के वि॰दू॰ 155.00 पर जलश्राव शून्य होने के कारण की जानकारी हेतु मुख्य अभियंता द्वारा श्री भगत की खोज किये जाने पर अनुपस्थित पाये गये। श्री भगत को छोड़कर निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित सभी पदाधिकारी मौजूद थे। मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री भगत से मोबाईल से संपर्क होने के बाद वि॰दू॰ 155.00 पर आधे घंटे बाद पहुँचे। जबकि प्रोटोकॉल के हिसाब से किसी भी वरीय पदाधिकारी के स्थल निरीक्षण के क्रम में उस प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता सहित स्थल प्रभारी सभी अभियंताओं का स्थल पर उपस्थित रहना अनिवार्य है। अतएव मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री भगत का उक्त आचरण से वरीय पदाधिकारी की उपेक्षा परिलक्षित होने से उन पर आरोप सं॰-01 प्रमाणित होता है। आरोप 2 :- प्रधान सचिव के दिनांक-17.01.2020 को वैशाली शाखा नहर के वि॰दू॰ 155.00 पर नहर में जलश्राव होने के कारणो की पृच्छा के उत्तर में कार्यपालक अभियंता द्वारा 15 जून से 25 अक्टूबर, बाढ़ अवधि में बाढ़ की विभीषिका के कारण नहर के क्षतिग्रस्त हो जाने से तथा वैशाली शाखा नहर के 155.00 पर रेलवे द्वारा सेतु निर्माण को नहर में जलश्राव शून्य होने का कारण बताया गया है। नहर पर कार्य कराने हेतु अनापति प्रमाण-पत्र इस शर्त पर दिया जाता है कि सिंचाई अवधि में नहर मार्ग को बिलकुल Clear रखा जाएगा तथा सिंचाई अवधि में नहर में किसी भी प्रकार का कार्य कराने की अनुमति नहीं होगी। जिसे मुख्य अभियंता द्वारा बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा का सहारा लेकर श्री भगत का अपनी कार्य अक्षमता को छुपाने के लिये कारण बताया जाना अशोभनीय है, का उल्लेख किया गया है। मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि आकस्मिक मद में बचे 10 लाख रूपयों से क्षतिग्रस्त बाँध की मरम्मति कराकर जलश्राव प्रवाहित किया जा सकता था। परन्तु श्री भगत द्वारा दिनांक-16.01.2021 तक स्थिति सामान्य हो जाने पर भी इस संदर्भ में कोई आवश्यक कार्रवाई नहीं किये जाने से उनके विरूद्ध मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं॰-2 प्रमाणित होता है। आरोप 3 :- श्री भगत वैशाली शाखा नहर के वि॰दू॰ 155.00 पर जलश्राव शून्य होने का एक कारण वि॰दू॰ 36.00 पर पूर्व मध्य रेलवे द्वारा सेतु निर्माण को बताया गया है। मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेखित है कि मुख्य अभियंता के कार्यालय द्वारा पूर्व मध्य रेलवे को सेतु निर्माण हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र पत्रांक-2241 दिनांक-22.12.2020 द्वारा निर्गत है तथा पूर्व मध्य रेलवे के पत्रांक-346 दिनांक-21.01.2021 द्वारा सिंचाई हेतु कम पानी नहर में छोड़े जाने का अनुरोध किया गया है। प्रधान सचिव द्वारा वैशाली शाखा नहर के वि॰दू॰ 155.00 पर का स्थल निरीक्षण दिनांक-17.01.2021 को किया गया था। इसलिए निरीक्षण की तिथि को वि॰दू॰ 155.00 पर नहर में जलश्राव भरपूर होना चाहिए था, जो नहीं था, क्योंकि जलश्राव कम करने हेतु पूर्व मध्य रेलवे द्वारा प्रतिवेदित पत्र की तिथि 21.01.2021 है। इससे स्पष्ट है कि श्री भगत द्वारा प्रमंडलाधीन नहरों का स्थल निरीक्षण नहीं किया जाता है, बल्कि निदेशों को अपने अधीनस्थों को अग्रसारित किया जाता रहा है। मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री भगत द्वारा नहरों के नियमित रूप से स्थल निरीक्षण के दायित्वों से, सेहत में आकस्मिक उतार-चढ़ाव का बहाना बनाकर बचना उचित नहीं माना जा सकता है। अतः मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं॰-3 प्रमाणित होता है। आरोप 4 :- मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा दिनांक- 17.01.2019 को स्थल निरीक्षण के क्रम में हाजीपुर वितरणी के वि॰दू॰ 22.00 पर अवस्थित संरचना का पारापेट का मरम्मति कर अनुपालन प्रतिवेदन, जो मुख्य अभियंता कार्यालय को अप्राप्त रहने के संबंध में श्री भगत द्वारा बताया गया है कि इस संदर्भ में साक्ष्य सहित प्रतिवेदन पूर्व में ही दिनांक-13.12.2020 को समर्पित किया जा चुका है। मुख्य अभियंता द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि प्राप्त स्पष्टीकरण के साथ मात्र एक फोटोग्राफ संलग्न है, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता है कि फोटो किस तिथि को लिया गया है। साथ ही उक्त अनुपालन प्रतिवेदन भी संलग्न नहीं है, जिससे स्पष्ट है कि यदि कोई प्रतिवेदन श्री भगत द्वारा समर्पित किया गया होता, तो स्पष्टीकरण में उस पत्र का पत्रांक एवं दिनांक अवश्य अंकित होता, जो नहीं है ताकि विभाग को गुमराह किया जा सके। यह सर्वविदित है कि कोई भी मरम्मति कार्य की मात्र पूर्णता महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि71 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 मरम्मति कार्य का निर्धारित अवधि में पूर्ण होना महत्वपूर्ण है। अतः मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री भगत के विरूद्ध आरोप सं॰-4 प्रमाणित होता है। आरोप 5 :- श्री भगत पर आरोप है कि मुख्य अभियंता द्वारा श्री भगत को विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये मोबाईल नम्बर 7463889900 पर मुख्य अभियंता कार्यालय से Call किये जाने पर अक्सर ''The person you are calling has forwarded his call to another number'' का संदेश के पश्चात् उनके नम्बर पर Call होता है। उक्त से स्पष्ट है कि श्री भगत के पास विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया नम्बर किसी अन्य मोबाईल में मुख्यालय में छोड़ दिया जाता था तथा Call Forwarded होने से श्री भगत से बात तो होती थी परन्तु जब उनके नम्बर को ट्रेस किया जाता, तो वह मुख्यालय के लोकेशन पर बतायेगा जिससे श्री भगत के मुख्यालय मे उपस्थिति प्रमाणित हो जायेगा। मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री भगत द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनपर लगाये गये आरोप का जवाब नहीं दिया गया है। स्पष्टीकरण में श्री भगत द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि किसी भी समय उनके द्वारा दूरभाष पर संपर्क किया जाता रहा है। इस संदर्भ में मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि दूरभाष पर संपर्क तो होगा ही क्योंकि Call को Another Number पर Forwarded किया गया है या वे जब स्वयं मुख्य अभियंता कार्यालय से संपर्क करेंगे क्याेंकि Call तो वो कर रहें है। उक्त कृत्य से श्री भगत द्वारा Technology का दुरूपयोग कर स्वेच्छा पूर्वक मुख्यालय से बाहर रहना परिलक्षित होता है। अतः मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री भगत के विरूद्ध आरोप सं॰-05 प्रमाणित होता है। आरोप 6 :- मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि विभागीय पत्रांक-1099 दिनांक-13.07.2018 द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग को दिनांक-12.07.2018 को तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया अन्तर्गत विभिन्न नहर प्रणालियों के निरीक्षण के क्रम में नहरों के रख-रखाव/संपोषण तथा नहरों में निर्धारित क्षमता के अनुरूप जलश्राव प्राप्त नहीं होने एवं अंतिम छोर तक जलश्राव उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण श्री भगत एवं अन्य अभियंताओं के विरूद्ध आरोप प्रत्र प्रपत्र ''क'' समर्पित करने के निदेश के अनुपालन में मुख्य अभियंता के पत्रांक-2884 दिनांक-12.10.2018 द्वारा समर्पित किया गया। अभियंता प्रमुख द्वारा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में यह अंकित किया गया है कि ''इस लघु नहर का नाम पूछने पर उपस्थित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा कोई उत्तर नहीं दिया जा सका। उक्त के आलोक में मुख्य अभियंता ने उल्लेख किया है कि जिस कार्यपालक अभियंता को अपने प्रमंडलाधीन नहरों का नाम मालूम नहीं है तो उनका स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य कैसे हो सकता है। अतः अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी नहीं रखने के कारण श्री भगत के विरूद्ध मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं॰-6 प्रमाणित होता है। आरोप 7 ः- मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि ई॰ जाहिद हुसैन, अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा ई॰ विनोद कुमार भगत, कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया को प्रत्रांक-401 दिनांक- 03.06.2020 द्वारा सूचित कर मुख्य अभियंता, मोतिहारी के आदेशानुसार तिरहुत नहर प्रमंडल सरैया के परिक्षेत्राधीन नहर एवं अवर प्रमंडल में निरीक्षण हेतु गये हुए थे। निरीक्षण के क्रम में सभी अभियंता एवं कर्मचारी स्थल/कार्यालय से अनुपस्थित थे। जिससे स्पष्ट है कि श्री भगत, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों/कर्मचारियों को तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के निरीक्षण की सूचना नहीं दी गई थी अथवा अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियंत्रण रख पाने में अक्षम है। अतः निरीक्षण के क्रम में पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के अनुपस्थिति से स्पष्ट होता है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा उनके उपस्थिति पंजी के आधार पर वेतन भुगतान किया जाता है तथा कार्यपालक अभियंता स्वयं अनुपस्थित रहते है, जिसके कारण पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति का भौतिक रूप से सत्यापन नहीं किया जाता है। उक्त कृत्य से श्री भगत का अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता परिलक्षित होने से आरोप सं॰-7 प्रमाणित होता है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री भगत, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी से प्राप्त मंतव्य से सहमत होते हुए श्री भगत के विरूद्ध वरीय पदाधिकारी के द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में प्रोटोकॉल का अनुपालन नहीं करते हुए अनुपस्थित रहने का आरोप, आरोप सं॰-1, आकस्मिक मद में निधि उपलब्ध रहते हुए बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए नहर प्रणालियों का मरम्मति कार्य नहीं कराने से जलश्राव शून्य होने का आरोप, आरोप संख्या-2, नहर में जलश्राव शून्य होने का कारण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा सेतु निर्माण के कारण जलश्राव कम रहने का भ्रामक उत्तर देने तथा कार्य स्थल का स्वयं निरीक्षण नहीं करते हुए मात्र अधीनस्थों को निदेश अग्रसारित करने का आरोप, आरोप सं॰-3, अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा पारापेट मरम्मति कार्य का अनुपालन प्रतिवेदन में मात्र एक फोटो संलग्न कर कोई भी प्रतिवेदन समर्पित नहीं करने से कार्य की अवधि के प्रति विभाग को गुमराह करने का आरोप, आरोप संख्या-04, विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये सरकारी मोबाईल नम्बर को किसी अन्य नम्बर पर Call Forwarded कर स्वेच्छापूर्वक मुख्यालय से अनुपस्थित रहने से, विभागीय कार्य में उत्पन्न हुई बाधा का आरोप, आरोप सं॰-5, अपने कार्यक्षेत्राधीन अवस्थित नहर प्रणालियों के अंतर्गत लघु नहर का नाम तक का ज्ञान नहीं रहने के कारण तथा नहर के रख-रखाव/संपोषण तथा निर्धारित क्षमता के अनुरूप जलश्राव प्राप्त कर अंतिम छोर तक नहीं पहुँचाये जाने का आरोप, आरोप सं-6 एवं वरीय पदाधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण की सूचना दिये जाने के उपरांत भी कार्यालय तथा स्थल से सभी अभियंता एवं कर्मचारियों की अनुपस्थिति से कार्यपालक अभियंता द्वारा मात्र उपस्थिति पंजी के आधार पर भुगतान किये जाने तथा अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण में अक्षमता का आरोप, आरोप सं॰-7 प्रमाणित होता है।
मामले के सम्यक समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिये अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री विनोद कुमार भगत, (आई०डी०-4021), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना72 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-
"संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम पर एक वर्ष के लिए अवनति।" उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनोद कुमार भगत, (आई०डी०-4021), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है -
"संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम पर एक वर्ष के लिए अवनति।"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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11 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2595--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री विमलेन्द्र कुमार (आई॰डी॰-J9419), तत्कालीन कनीय अभियंता को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2396 दिनांक 22.11.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए विभागीय आदेश सं0-156 दिनांक 02.12.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1486 दिनांक 22.06.22 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप सं॰-1 :- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक 33 दिनांक 22.12.17 से प्राप्त) के कंडिका 9.0.0 (viii) एवं 10.0.0 (5) से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, अररिया के अन्तर्गत मिट्टी भराई कार्य में Watering and consolidation कार्य मद का प्रावधान है, जिसके अनुसार 85% minimum compaction प्राप्त करना था। परन्तु जाँच के क्रम में उड़नदस्ता के द्वारा माँग करने पर वांछित कॉम्पैक्शन जाँचफल प्रमंडल के पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। फलतः स्थापित नहीं हो सका कि कार्य के कार्यान्वयन के दौरान कॉम्पैक्शन का कार्य कराया गया था अथवा नहीं। परन्तु माप पुस्त से स्पष्ट है कि इस मद में भुगतान किया गया है। जो एक गंभीर मामला है। साथ ही उक्त कंडिका से यह भी स्पष्ट है कि E/W in filling मद में कराये गये मिट्टी कार्य की मात्रा के आकलन के क्रम में सेटलमेंट मद में कोई कटौती नहीं की गई है। उक्त अनियमित कृत के कारण संवेदक को अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है। फलतः सरकारी राशि का दुरूपयोग होना स्थापित होता है, जो कि एक गंभीर लापरवाही एवं कार्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है। आरोप सं॰-2 :- उड़नदस्ता के पत्रांक 11 दिनांक 21.03.17 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 5.0.0 (3) एवं 6.0.0 (iii) से स्पष्ट है कि कसवा वितरणी के वि॰दू॰ 98.0 पर अवस्थित Fall com DLR Bridge D/S friction block से पी॰सी॰सी तथा ब्रीक फलैंक के प्लास्टर से सीमेंट मोर्टार का नमूना संग्रह का केन्द्रीय मृदा और सामग्री अनुसंधानशाला (CSMRS) से करायी गयी। प्राप्त जाँच के अनुसार पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की कमी निम्नवत् है।
| क्र॰ | लोकेशन | नमूने के प्रकार | प्राक्कलन के अनुसार विशिष्टि | नमूने का प्राप्त जाँचफल | सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी |
| 1. | कसवा वितरणी के वि॰दू॰ 98. 0 पर अवस्थित Full cum DLR Bridge | PCC from friction block | 1ः2ः4 | 1ः3.48 | 17.48 प्रतिशत |
| Cement mortar from B.B. Block | 1ः4 | 1ः26.47 | 81.80 प्रतिशत |
उपरोक्त विवरणी से स्पष्ट है कि प्रश्नगत संरचना के पुनस्र्थापन कार्य में न्यून विशिष्टि के पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया गया है। सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी काफी अधिक है, जो संरचना के स्थायित्व पर प्रश्नचिन्ह् उत्पन्न करता है। उक्त से स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा प्रश्नगत कार्य में लापरवाही बरतते हुए न्यून विशिष्टि का कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है। इसके बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने कारण अधिकाई भुगतान का मामला बनता है एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग करने का भी मामला बनता प्रतीत होता है।73 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 संचालन पदाधिकारी का मंतव्य ः- आरोप संख्या-01, अप्रमाणित तथा आरोप सं॰-02, आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर (आरोप-1) :- जलालगढ़ वितरणी नहर में कराये गये मिट्टी कार्य में Water & Consolation मद का भुगतान मेरे द्वारा नहीं की गई थी। जिस मापपुस्त में इस मद का भुगतान किया गया है वह मापपुस्त एवं विपत्र मुझसे संबंधित नहीं है। मेेरे द्वारा मिट्टी की मात्रा में Settlement कटौती किये बिना कोई भी भुगतान इस वितरणी नहर में नहीं किया गया है। जलालगढ़ वितरणी में मैने 0.00km to 8.60km तक मिट्टी कार्य कराया था, जिसका विपत्र मैने 1st on A/C Bill के रूप में मापपुस्त संख्या-1597 के पृष्ठ-1 से 29 तक दर्ज किया था। जिसमें मैने 1/9th Settlement में कटौती की थी एवं Water & Consolation का भुगतान नहीं किया था। यह तैयार किये गये विपत्र के मापपुस्त की छायाप्रति संलग्न किया जाता है, जिसका भवदीय द्वारा अवलोकन किया जा सकता है। इसके बाद मैने जलालगढ़ वितरणी के मिट्टी कार्य का कोई भी कार्य न कराया था और न कोई दूसरा विपत्र तैयार किया था। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर (आरोप-2) :- यह कार्य, वर्ष 2010 में कराई गई थी। यह कार्य नया संरचना सुरक्षा कार्य का नहीं था बल्कि क्षतिग्रस्त सुरक्षात्मक कार्याें की मरम्मति हेतु की गई थी। उड़नदस्ता द्वारा जो वर्ष 2016 में मात्र एक सैंपल लिया गया था। यह सैंपल पूर्व के Existing work का था, या नया मरम्मति कार्य का था इस पर निर्णय करना असंभव है। क्योंकि Cement Mortor (1ः26.47) में कराये गये। Cement Plaster Over B.B Pitching का कार्य का अब तक ठोस रूप से टिके रहना असंभव है। अतः जाँच प्रतिवेदन भी संदेहास्पद प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण के अलावे मुझे कुछ नहीं कहना है। मुझे सेवानिवृत्त हुए लगभग 05 वर्ष हो चुका है। मेरी अब स्मरण शक्ति एवं शारीरिक शक्ति भी क्षीण होती जा रही है। इस परिस्थिति में ज्यादा तथ्य संग्रह करना अब मेरे वश के बाहर है। अनुरोध है कि उपरोक्त एवं पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मुझे आरोप मुक्त किया जाय। समीक्षा-1 :- श्री कुमार द्वारा उल्लेखित किया गया है कि इनके द्वारा जलालगढ़ वितरणी के कि॰मी॰ 0.00 से कि॰मी॰ 8.60 तक मिट्टी का कार्य कराया गया, जिसका विपत्र 1st on A/C Bill के तहत मापपुस्त संख्या-1597 के पृष्ठ-1-29 तक दर्ज किया गया है। उक्त संलग्न मापपुस्त की छायाप्रति के अवलोकन से यह पता चलता है कि मापपुस्त संख्या-1597 के पृष्ठ संख्या-28 पर Deduction for settlement मद में 1/9th भाग की कटौती किया जाना अंकित है तथा Watering & Consolidation मद से संबंधित कोई विवरणी अंकित नहीं है। चुँकि Watering & Consolidation मद में भुगतान नहीं किया गया है। इनके द्वारा उपरोक्त के समर्थन में समर्पित साक्ष्य/अभिलेख से इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। समीक्षा-2 :- संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत किये गये तथ्यों तथा फोटोग्राफ के अलावा संरचना का कार्य जाँच की तिथि से लगभग 5-6 वर्ष पूर्व ही पूर्ण हो जाना, नहर से पटवन कार्य होते रहना, मंत्रीमंडल (निगरानी) विभाग के पत्र में दिए गए अनुदेशों का अनुपालन जाँच के दौरान नहीं किया जाना, जाँच हेतु मात्र एक नमूना लिया जाना, कार्य सम्पादन के दौरान लिये गये सामग्री के नमूनों का जाँचफल का प्रावधानित विशिष्टि के अनुरूप रहने के मद्देनजर आरोपित पदाधिकारी द्वारा गुणवत्ता की जाँच प्रक्रिया पर संदेह करना उचित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी के उक्त मंतव्य से सहमत हुआ जा सकता है। अतएव, आरोपित पदाधिकारी पर उड़नदस्ता/CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 81.80 प्रतिशत की कमी के मद्देनजर श्री कुमार पर आरोप सं॰-2, आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।
उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-9 (ix) में उल्लेख किया गया है कि सिंचाई प्रमंडल, अररिया द्वारा E/W in filling मद में सेटलमेंट मद में कोई कटौती नहीं किया गया है। प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है कि किस MB में किसके द्वारा कटौती नहीं की गई है। साथ ही, प्रतिवेदन की कंडिका-(vii) में उल्लेखित है कि 85% Compaction वाले मद का प्रावधान केवल सिंचाई प्रमंडल, अररिया के कार्यो में है, परन्तु कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँचफल उपलब्ध नहीं कराया गया है। आरोपी पदाधिकारी श्री कुमार द्वारा अपने बचाव बयान में प्रतिवेदित किया है कि उनके द्वारा तैयार किये गये विपत्र में कॉम्पैक्शन वाले मद का कोई भुगतान नहीं किया गया है तथा E/W in filling मद में सेटलमेंट की कटौती कर ली गई थी। परन्तु, उक्त से संबंधित पूर्ण साक्ष्य संलग्न नहीं होने से आरोपी पदाधिकारी के उक्त कथन की पुष्टि नहीं होती है। अतएव, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर आरोप सं॰-2 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता द्वारा प्रश्नगत स्थल पर अवस्थित fall cum SLR bridge की मरम्मति कार्य से P.C.C एवं प्लास्टर कार्य से सीमेंट मोर्टार का नमूना संग्रह कर उसकी जाँच केन्द्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला, नई दिल्ली से करायी गयी है एवं P.C.C में सीमेंट की मात्रा में 17.48 प्रतिशत एवं खासकर Cement Mortor में 81.80 प्रतिशत की कमी पायी गयी है। जो न्यून विशिष्टि का कार्य होना दर्शाता है। इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है,74 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 जिसमें परिलक्षित हो सके कि यह कार्य गुणवत्ता अनुरूप कराया गया है। इस कार्य का प्रावधान के अनुरूप नहीं होने से अधिकाई भुगतान का मामला बनता है।
इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री विमलेन्द्र कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री विमलेन्द्र कुमार (आई॰डी॰-J9419), सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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11 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2594--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री जवाहर लाल मंडल, (आई॰डी॰-4456) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2154 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री मंडल से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2469 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे श्री मंडल के सेवानिवृति के उपरांत बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री मंडल से विभागीय पत्रांक-1484 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री मंडल से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- उड़नदस्ता के पत्रांक-11 दिनांक-21.03.2017 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-5.0.0(3) एवं 6.0.0(iii) से स्पष्ट है कि कुसियार गाँव उप वितरणी के बि॰दू॰ 45.0 पर अवस्थित HP Culvert के U/S left side slope pitching एवं Canal bed floor and copying से एकत्रित PCC एवं सीमेंट मोर्टार के नमूने की जाँच केन्द्रीय मृदा और सामग्री अनुसंधानशाला (CSMRS) से करायी गयी प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार PCC एवं सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की कमी निम्नवत रूप से पायी गयी :-
| क्र॰ | लोकेशन | नमूने के प्रकार | प्राक्कलन के अनुसार विशिष्टि | नमूने का प्राप्त जाँचफल | सीमेंट की मात्रा में पायी गयी कमी |
| 1 | कुसियार गाँव उपवितरणी के बि॰दू॰ 45.0 पर अवस्थित HP Culvert (U/S left side slope pitching एवं Canal bed floor) | PCC From coping | 1ः2ः4 | 1ः7.44 | 43.77% |
| Centinotor from slope pitching | 1ः4 | 1ः10.90 | 49.23% | ||
| PCC from canal bed floor | 1ः2ः4 | 1ः8.77 | 58.00% |
उपरोक्त जाँचफल से स्पष्ट है कि HP Culvert में पुनस्र्थापन कार्य में न्यून विशिष्टि के पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया गया है, जिसमें सीमेंट की मात्रा की कमी 43.72% से 58.0% पायी गयी है, जो बहुत ही अधिक है। इससे स्पष्ट है कि इनके प्रश्नगत कार्य में लापरवाही बरती गयी है एवं न्यून विशिष्टि के कार्य होने के बावजूद भी प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने के कारण अधिकाई भुगतान का मामला बना है। उनके उक्त अनियमित कृत से सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित होता है, जिसके लिए ये दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित।75 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :-
जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-2469 दिनांक-28.11.2019 द्वारा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता को ध्यान में नहीं रखकर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप डी॰पी॰आर॰ प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के आरोप के क्रम में मेरे उपर विभागीय कार्यवाही आरंभ की गयी है, परन्तु अबतक विभागीय कार्यवाही निष्पादन नहीं हुआ है। इस संबंध में कहना है कि मेरे सेवानिवृत्ति की तिथि तक मुझे निलंबन मुक्त से संबंधित आदेश निर्गत नहीं किया गया है और ना ही मेरे सेवानिवृत्ति के उपरांत विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत समपरिवर्तित का आदेश निर्गत किया गया है।
इस संबंध में मैं आपका ध्यान सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893 दिनांक-14.06.2011 के कंडिका-15 की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिसमें यह अंकित है कि ''विभागीय कार्यवाही चलते रहने के दरम्यान आरोपित सरकारी सेवक के सेवानिवृत्त हो जाने पर विभागीय कार्यवाही चलती रहेगी। ऐसे मामलों में नियम 43(बी) के तहत कोई नया आदेश निर्गत नहीं कर कार्यवाही के नियम-43(बी) के तहत स्वतः परिवर्तन संबंधी एक आदेश निर्गत करना ही पर्याप्त होगा। ऐसे मामलों में विभागीय कार्यवाही का ताजा आदेश कदापि निर्गत नहीं किया जाय। नियम 43(बी) के तहत कोई नया (ताजा) आदेश वैसे ही मामलों में निर्गत हो सकता है, जहाँ सेवानिवृत्ति के बाद आरोप पत्र निर्गत किया गया हो।''
सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-2178 दिनांक-28.02.2007, पत्रांक-2763 दिनांक-26.02.2014 एवं पत्रांक-1893 दिनांक-14.06.2011 के कंडिका-12 के आलोक में विभागीय कार्यवाही को सम्पन्न करने की अधिकतम समय-सीमा एक वर्ष है, परन्तु मेरे विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का लगभग दो वर्ष सात माह बीतने के बावजूद भी विभागीय कार्यवाही का समापन नहीं हो सका है, जो उक्त दिशा-निर्देश के विपरीत है।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होगा कि मेरी सेवानिवृत्ति की तिथि 31.03.2022 तक मुझे निलंबन से मुक्त करने संबंधी आदेश निर्गत नहीं किया गया है और ना ही उक्त तिथि तक विभागीय कार्यवाही का समापन किया गया है, जो सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश के विपरीत है। उक्त कार्रवाई नहीं होने से मेरे पेंशन एवं सेवांत लाभों का भी भुगतान नहीं हुआ है। समीक्षा :- संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेखित तथ्यों-संरचना के कार्य समाप्ति के लगभग 6 वर्षो के बाद भी उचित ढंग से कार्यरत रहने, प्रस्तुत फोटोग्राफ नमूना एकत्र करने के तरीके तथा प्रमंडलीय स्तर पर गुण नियंत्रण कार्यालय तथा शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, खगौल से प्राप्त गुणवत्ता प्रतिवेदन के आधार पर भुगतान किये जाने को देखते हुए इनके द्वारा गुणवत्ता जाँच प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित प्रतीत होता है। परन्तु उड़नदस्ता/CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में उक्त संरचना में पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार कार्य में सीमेंट की मात्रा में 43.77 प्रतिशत से 58 प्रतिशत की कमी पाये जाने के मद्देनजर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप के संदर्भ में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। श्री मंडल द्वारा निलंबन से मुक्त करने तथा विभागीय कार्यवाही समाप्त करने हेतु पत्र लिखा गया है। अतएव श्री मंडल पर उड़नदस्ता/CSMRS के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार सीमेंट की मात्रा में अनुमान्य सीमा से ज्यादा की कमी के कारण आरोप प्रमाणित होता है।
इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री जवाहर लाल मंडल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री जवाहर लाल मंडल, (आई॰डी॰-4456) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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11 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2593--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री ललन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता,76 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2157 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2462 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे श्री सिंह के सेवानिवृति के उपरांत विभागीय आदेश सं0-35 सह ज्ञापांक-629 दिनांक 16.07.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-1494 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री सिंह से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- उड़नदस्ता के पत्रांक-11 दिनांक-21.03.2017 के कंडिका-5.0.0(2) एवं 6.0.0(ii) से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अधीन खुरहान वितरणी के बि॰दू॰ 6.50 पर अवस्थित SLR Bridge एवं बि॰दू॰ 4.0 पर अवस्थित CD संरचना पुर्नस्थापन कार्य के तहत विभिन्न अवयवों से एकत्रित पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार के नमूनों की जाँच Central soil and materials Research Station, New Delhi से करायी गयी। प्राप्त जाँचफल के अनुसार पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार में पायी गयी सीमेंट की कमी निम्नवत रूप से है :-
| क्र॰ | लोकेशन | नमूने के प्रकार | प्राक्कलन के अनुसार विशिष्टि | प्राप्त जाँचफल के अनुसार सीमेंट एवं बालू का अनुपात | सीमेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी |
| 1 | खुरहान वितरणी के RD 6.5 पर अवस्थित SLR Bridge | RCC From approach Slab | 1ः2ः4 | 1ः13.9 | 61.95% |
| सीमेंट मोटार्र ब्रीक वर्क से | 1ः4 | 1ः18.01 | 73.70% | ||
| 2 | खुरहान वितरणी के RD 4.0 पर अवस्थित CD संरचना | PCC from Return wall on D/S side | 1ः2ः4 | 1ः6.09 | 36.92% |
उपरोक्त विवरणी से स्पष्ट है कि उक्त दोनों संरचना के पुनस्र्थापन कार्य में सीमेंट की कमी 36.92 प्रतिशत से 73.70 प्रतिशत पाया गया है, जो काफी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि आपके द्वारा प्रश्नगत तीनों संरचनाओं के पुनस्र्थापन कार्य में न्यून विशिष्टि पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोटार्र का उपयोग कर प्रावधान के विपरीत कार्य कराया गया है। इसके बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने का कारण अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है। फलतः सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित होता है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- 1. उपरोक्त आरोप में खुरहान वितरणी के बिन्दु दूरी 6.50 पर अवस्थित एस॰एल॰आर॰ ब्रीज के अपरोच स्लैब से आर॰सी॰सी॰/ पी॰सी॰सी॰, ब्रीक वर्क से सीमेंट मोटार्र में क्रमशः 61.95 प्रतिशत, 73.70 प्रतिशत एवं खुरहान वितरणी के बिन्दु दूरी 4 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचना के पी॰सी॰सी॰ में 36.92 प्रतिशत की सीमेंट की मात्रा में जो प्रतिशत भिन्नता पाई गयी है, वह निःसंदेह उड़नदस्ता अंचल-01, पटना द्वारा Sample Collect करते समय मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना का पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं कोड IS:1199-1959 में Sample Collect करने हेतु दिये गये प्रावधान का पालन नहीं करने के कारण सीमेेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी में अप्रत्याशित रूप से भिन्नता है। 2. इस संबंध में कहना है कि उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा Cement Concrete एवं Cement Mortar का केवल एक ही सैम्पल संग्रहण किया गया है, जो अधीक्षण अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-01, पटना के पत्रांक-214 दिनांक- 16.09.2016 के द्वारा सी॰एस॰एम॰आर॰एस॰, नई दिल्ली को भेजे गये नमूने (Sample FSCC-1, FSCC-9) एवं सीमेंट मोर्टार का सैम्पल FSCM-5 से स्पष्ट है, जिसमें उनके द्वारा क्रमांक-9 एवं क्रमांक-24 पर अंकित है, जिसमें केवल एक सैम्पल का जिक्र है। उपरोक्त क्रमांक में भेजे गये सैम्पल की मात्रा एवं वजन का भी जिक्र नहीं है। इससे स्पष्ट है कि उड़नदस्ता द्वारा स्थल पर संरचना के मात्र एक-एक स्थान से सैम्पल कलेक्शन कर जाँचफल के लिए भेजा गया है, जो त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है। 3. CSMRS के द्वारा प्रतिवेदित पत्रांक-297 दिनांक-06.12.2016 Annexure-v के क्रमांक-1 एवं 16 में भी Cement Concrete एवं Cement Mortar का सैम्पल FSCC-1, FSCC-5 एवं FSCM-5 उल्लेखित है, जिससे77 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 स्पष्ट है कि उड़नदस्ता अंचल-01, पटना द्वारा मात्र एक सैम्पल ही जाँच के लिए भेजा गया था, जिसका जाँचफल त्रुटिपूर्ण पाया जाना स्वाभाविक है। 4. कोड IS:1199-1959 एवं मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना का पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 के कंडिका- क्रमशः 9.3 एवं 1.0 में यह वर्णित है कि Cement Concrete एवं Cement Mortar के नमूने जाँचाधीन उपांग के कम से कम तीन भागों से लिये जाये। प्रयोगशाला में भी एक प्रकार के विशिष्टि के लिए कम से कम तीन नमूनों का परीक्षण कर उनके परीक्षणफल और उसका औसत निकालकर प्रतिवेदित किया जाय। इसका पालन न तो स्थल पर उड़नदस्ता द्वारा सैम्पल संग्रहण के समय किया गया है ना ही CSMRS नई दिल्ली द्वारा ही परीक्षणफल का औसत निकालकर प्रतिवेदित किया गया है। 5. कोड IS:1199-1959 के कंडिका-9.3 में यह वर्णित है कि प्रत्येक सैम्पल का वजन कम से कम पाँच के॰जी॰ होना चाहिए, जिसका पालन उड़नदस्ता द्वारा स्थल पर सैम्पल कलेक्ट करते समय नहीं किया गया है। इस संबंध में उड़नदस्ता द्वारा CSMRS के पत्रांक-214 दिनांक-16.09.2016 से स्पष्ट होता है जिसमें क्रमांक-10 एवं 31 में भेजे गये नमूना में वजन का जिक्र नहीं किया गया है एवं नमूना संग्रह भी क्रमशः एक-एक अदद लिया गया है। 6. CSMRS के द्वारा प्रतिवेदित पत्रांक-297 दिनांक-06.12.2016 के कंडिका-1 Introduction में लिखित है कि उड़नदस्ता, अंचल-1, पटना द्वारा नमूनों का संग्रह बिना सोचे-समझे Randomly लिया गया है। इसी में आगे यह वर्णित है कि 11 अदद चूर्ण Cement Concrete सैम्पल एवं 12 अदद Cement Mortar चूर्ण सैम्पल विभिन्न संरचनाओं से लिया गया है। 7. बचाव-बयान में उल्लेखित तथ्यों, फोटोग्राफ, उड़नदस्ता के प्रतिवेदन में सिंचाई सुविधा किसानों को मिलते रहना, संरचना का कार्य जाँच की तिथि से काफी पहले कराया जाना, नहर से पटवन कार्य चालू रहना, पी॰सी॰सी॰/ आर॰सी॰सी॰/ पी॰सी॰एम॰ का मात्र एक नमूना लिया जाना, नमूना एकत्रित करने की पद्धति, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के दौरान किये गये जाँचफल का प्रावधानित विशिष्टि के अनुरूप रहने तथा उड़नदस्ता जाँच रिपोर्ट में सीमेंट की मात्रा का प्रतिशत कमी रहने के बावजूद 7 वर्षाें से अधिक अवधि तक बने रहने को देखते हुए गुणवत्ता जाँच प्रक्रिया पर संदेह किये जाने को संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने समीक्षा एवं मंतव्य में इसकी सम्पुष्टि की है। अतः स्पष्ट है कि कोड IS:1199-1959 एवं मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना का पत्रांक-1045 दिनांक- 06.07.1992 में तीन-तीन सैम्पल कलेक्ट करने के नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसी क्रम में यह भी कहना है कि कोड IS:1199-1959 की कंडिका-4.1 में यह वर्णित है कि Defective Sample का इस्तेमाल नहीं करना है। जबकि CSMRS नई दिल्ली द्वारा प्रतिवेदित जाँचफल के कंडिका-1 Introduction में यह बताया गया है कि Cement Concrete एवं Cement Mortar के सैम्पल चूर्ण रूप (Broken) अवस्था में थे। इस प्रकार मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं कोड IS:1199-1959 में दिये गये दिशा-निर्देश के पालन किये बिना Random तरीके से सैम्पल कलेक्ट कर CSMRS नई दिल्ली को भेजे गये नमूनों के त्रुटिपूर्ण जाँचफल के आधार पर आरोप संख्या-1 को आंशिक रूप से प्रमाणित माना जाना नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध है। अतः मेरे द्वारा उपरोक्त साक्ष्यों के आधार पर आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा :- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि श्री सिंह के बचाव बयानों में उल्लेखित तथ्यों, प्रस्तुत फोटोग्राफ, उड़नदस्ता के प्रतिवेदन में सिंचाई सुविधा किसानों को मिलते रहना, संरचना का कार्य जाँच की तिथि से काफी पहले कराया जाना, नहर से पटवन कार्य का चालू रहना, पी॰सी॰सी॰ का मात्र एक नमूना लिया जाना, नमूना एकत्रित करने की गलत पद्धति, मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्र में दिए गए अनुदेशों का पालन जाँच के दौरान नहीं करना, कार्य सम्पादन के दौरान किए गए जाँचफल का प्रावधानित विशिष्टि के अनुरूप रहने तथा उड़नदस्ता जाँच रिपोर्ट में सीमेंट की मात्रा की 36.92 प्रतिशत से 73.72 प्रतिशत तक कमी रहने के बावजूद सात वर्षो से अधिक अवधि तक उपयोग में बने रहने को देखते हुए आरोपित पदाधिकारी द्वारा गुणवत्ता की जाँच प्रक्रिया पर संदेह करना उचित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी के उक्त मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध उड़नदस्ता/CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में गुणवत्ता की प्रतिशत की कमी के मद्देनजर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के संदर्भ में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उन्हाेंने अपने लिखित बचाव-बयान में दिया था। आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए कोई नया तथ्य/अभिलेख का उल्लेख नहीं किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के परिप्रेक्ष्य में आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, फलस्वरूप आरोपी पदाधिकारी श्री ललन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है।
इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री ललन प्रसाद सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"78 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ललन प्रसाद सिंह (आई0डी0-जे 7512) तत्का0 कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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11 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2592--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री सुरेश मिस्त्री (आई0डी0-जे 4831), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2158 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री मिस्त्री से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2460 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री मिस्त्री के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री मिस्त्री से विभागीय पत्रांक-1496 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री मिस्त्री से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप-1 :- सपा वितरणी के वि॰दू॰ 3.80 पर निर्माणधीन एकवाडकट से एकत्रित पी॰सी॰सी॰ के नमूना के जाँचफल तथा प्रावधान से सिमेंट की मात्रा में 21.34 प्रतिशत की कमी पाया गया तथा ईंट के कम्पे्रसिव स्ट्रेन्थ औसत 85.55 Kg/Cm2 पाया गया, जो 100 A Brick के मानक 100Kg/Cm2 से काफी कम है साथ ही ईंट के अन्य पारामीटर यथा Non uniform, under burnt slightly Distorted and dull sound पाया गया है। अर्थात् कार्य में न्यून विशिष्टि के PCC तथा ईंट का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। जबकि भुगतान प्रावधान के अनुरूप किया गया है। फलतः सरकारी राशि का दुरूपयोग होना स्थापित होता है। जिसके लिये आप दोषी प्रतीत होते है। आरोप-2 :- उड़नदस्ता अंचल के पत्रांक 33 दिनांक 22.12.17 के कंडिका 9.0.0 (vii) एवं 10.0.0 (5) से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, अररिया के अन्तर्गत मिट्टी भराई कार्य में Watering and Consolidation कार्य मद प्रावधानित है, जिसके अनुसार 85% minimum compaction प्राप्त किया जाना है। परन्तु जाँच के दौरान जाँच दल के द्वारा माँग करने पर कार्यपालक अभियंता के द्वारा मिट्टी में कॉम्पैक्शन से संबंधित जाँचफल भी उपलब्ध नहीं कराया गया है जो एक गंभीर मामला है। कंडिका 9.0.0 (ix) तथा 10.0.0(5) एवं माप पुस्त से 1600, 1608 एवं 1582 से स्पष्ट है कि जाँचित कार्यो से सम्बद्ध मापी पुस्त से स्पष्ट है कि E/W in filling मद में मिट्टी कार्य के आकलन के क्रम में सेटलमेंट मद में कोई कटौती नहीं की गयी है। उक्त अनियमितता के कारण संवेदक को अनियमित भुगतान (अग्रिम) होना परिलक्षित होता है एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग होना माना जा सकता है, जिसके लिये आप दोषी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप सं॰-01 एवं 02 आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर (आरोप-1) ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा किये गये समीक्षा एवं मंतव्य से स्पष्ट है कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा उल्लेखित तथ्यों पर विचार कर उचित मानते हुए सीमेंट में कैल्सियम कॉन्टेन्ट के Variation के कारण उड़नदस्ता द्वारा प्रतिवेदित सीमेंट की मात्रा में 21.34% की कमी को उनकी मान्य सीमा के अधीन मान लिया गया है। वहीं पत्रांक-शून्य, दिनांक-30.12.2019 द्वारा समर्पित बचाव-बयान के परिशिष्ट-5-ई॰पी॰एन॰. खन्ना, एम॰आई॰ई॰ द्वारा लिखित INDIAN PRACTICAL CIVIL ENGINEER HAND BOOK, EDITION 1986 के पृष्ठ-12/4 The Strength of a brick decreases by about 25 percent when soaked in water (संलग्न परिशिष्ट-2) के प्रतिकूल कोई टिप्पणी नहीं किया गया। परन्तु उड़नदस्ता/CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में न्यून विशिष्टि के ईंट प्रयोग किये जाने को देखते हुये आरोप सं॰-1 आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने की बात कही गई है। उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-2(0)(viii) में यह अंकित किया हुआ है कि ''संरचना के निर्माण कार्य में व्यवहृत ईंट के संबंध में कहना है कि जाँच प्रतिवेदन में यह अंकित है कि कम्प्रेसिव स्टे्रन्थ 85-55 kg/cm2 पाया गया, जबकि उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के संदर्भित पृष्ठों की छायाप्रति (संलग्न परिशिष्ट-1) के अवलोकन से स्पष्ट है कि व्यवहृत ईंट का कम्प्रेसिव स्टे्रन्थ 85-55 (85 से 55) kg/cm2 को मान कर ही Hand Book के अनुसार मान्य सीमा 25% तक कम यानी 75kg/cm2 की सीमा के आंशिक रूप से बाहर होने के कारण ही आरोप को79 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 आंशिक प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जो मात्र भूलवश होना ही प्रतीत होता है। वास्तविकता यह है कि उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित ईंट का कम्प्रेसिव स्टे्रन्थ 85.55 kg/cm2 मान्य सीमा 76kg/cm2 तक से काफी अधिक है। उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोप सं॰-1 किसी भी तरह से प्रमाणित होता हुआ प्रतीत नहीं होता है। अतः इस आरोप से अधोहस्ताक्षरी को मुक्त करने की कृपा की जाय। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर (आरोप-2) ः- संचालन पदाधिकारी के समीक्षा एवं मंतव्य में उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 9(viii) के संदर्भ में अधोहस्ताक्षरी के अधीनस्थ जाँचित नहर यथा अररिया शाखा नहर एवं सपा उपवितरणी आंशिक भाग के लिए Compaction का प्रावधान नहीं होने के साक्ष्य स्वरूप सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत उपलब्ध कराये गये प्राक्कलन के सत्यापित प्रति के संदर्भित पृष्ठों कि छायाप्रति सुलभ प्रसंग हेतु संलग्न कर रहा हूँ। (संलग्न परिशिष्ट-3, Abstract of quantity of E/W of Araria Branch canal, Abstract of quantity of E/W of distributory and minors, Abstract of quantity of E/W of water course under irrigation Division, Araria) (संलग्न परिशिष्ट-4-Estimate for all work under ERM of Eastern Koshi Canal System under chief engineer. WRD, Purnea) परिशिष्ट-3 के अवलोकन से स्पष्ट है कि परिशिष्ट के पृष्ठ-3/3 से 3/5 तक अररिया शाखा नहर एवं पृष्ठ 3/6 से 3/7 में अन्य नहर के साथ सपा उप वितरणी के कार्यमदवार मात्रा अंकित है, वही पृष्ठ-3/8 में water course के कार्यमदवार मात्रा अंकित है, जो सिंचाई प्रमंडल अररिया के कार्यक्षेत्र मात्र का है। इन सभी कार्यमदवार मात्राओं को ही पूरे मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र पूर्णियाँ के अनतर्गत पूर्वी कोशी नहर प्रणाली ERM कार्य के लिए प्रमंडलवार कार्यमदों की मात्रा के रूप में समेकित कर प्राक्कलन (परिशिष्ट-4 के पृष्ठ-4/2 से 4/6) तैयार किया हुआ है। परिशिष्ट-3 एवं परिशिष्ट-4 के अवलोकन से स्पष्ट है कि Compaction कार्यमद का प्रावधान मात्र Water Course के लिये ही किया हुआ है न कि अररिया शाखा नहर एवं सपा उपवितरणी के लिये। इस संबंध में उड़नदस्ता द्वारा भी अधोहस्ताक्षरी के विरूद्ध कुछ भी प्रतिवेदित नहीं है। उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-9(ix) में सिंचाई प्रमंडल अररिया के द्वारा E/W in filling मद में Settlement मद में कोई कटौती नहीं किये जाने का उल्लेख है। परन्तु स्पष्ट रूप से इसके लिए जिम्मेवार किसी पदाधिकारी का उल्लेख नहीं किया गया है। तथापि विभाग द्वारा अधोहस्ताक्षरी को आरोपित कर अपना पक्ष रखने हेतु निदेशित किया गया। अधोहस्ताक्षरी द्वारा जहाँ E/W Filling का कार्य कराया गया, वहाँ पर नियमानुसार Settlement की कटौती कर लिये जाने के प्रमाण स्वरूप उपलब्ध कराये गये संबंधित M.B की छायाप्रति संलग्न कर स्पष्ट करने का प्रयास किया गया, जो बचाव-बयान के परिशिष्ट'8 पृष्ठ-53/56 से 56/56 के अवलोकन से स्वतः स्पष्ट है। उल्लेखनीय है कि M.B में दर्ज की गई मापी के Calculation से ही Settlement मद में की गई कटौती से संतुष्ट हुआ जा सकता है। इसके अतिरिक्त इस कटौती का उल्लेख कही नहीं रहता है। किसी भी भुगतान या कटौती के साक्ष्य के लिए M.B से अलग कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं हो सकता। अतः इसे सीमित साक्ष्य माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अधोहस्ताक्षरी द्वारा समर्पित बचाव-बयान के तथ्यों पर कोई प्रतिकूल मंतव्य अंकित नहीं किया गया है। अतः अनुरोध है कि उपर्युक्त के आलोक में अधोहस्ताक्षरी को इन आरोपों से मुक्त करने की कृपा की जाय। समीक्षा 01 :- आरोपी पदाधिकारी के द्वारा कहा गया है कि उड़नदस्ता जाँच में सीमेंट की मात्रा में कमी 21.34 प्रतिशत है, जो निर्धारित अनुज्ञेय सीमा 25 प्रतिशत के अन्तर्गत है, परन्तु अनुज्ञेय सीमा 25 प्रतिशत होने से संबंधित कोई कागजात/अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है साथ ही मंत्रिमंडल, निगरानी विभाग के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 के अनुसार उद्धिृत सीमेंट की मात्रा में भिन्नता 15-20 प्रतिशत की सीमा से अधिक 21.34 प्रतिशत पाया गया है, जो न्यून विशिष्टि का P.C.C कार्य होना दर्शाता है। ईंट के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ मानक 100kg/cm2 से 85.55 kg/cm2 पाये जाने एवं ईंट के अन्य पारामीटर मानक के अनुरूप नहीं पाये जाने के संबंध में ई॰ पी॰एन॰ खन्ना, एम॰आई॰ई॰ द्वारा लिखित INDIAN PRACTIAL CIVIL ENGINEER HAND BOOK, EDITION 1986 ''12/4, The Strength of a brick Decreases by about 25 percent when soaked in water को बचाव-बयान के रूप में आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है। उक्त साक्ष्य कोई मानक अन्तर्गत निहित साक्ष्य नहीं है। अतएव उक्त आरोप संख्या-1 हेतु दोषी होते है।'' समीक्षा 02 :- आरोपी पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य स्वरूप उपलब्ध कराये गये प्राक्कलन के सत्यापित प्रति के संदर्भित पृष्ठों की छायाप्रति यथा संलग्न परिशिष्ट-3 Abstract of Quantity of Araria Branch Canal under irrigation division Araria, Abstract of quantity of E/W of distributory division Araria, Abstract of quantity of E/W of water course under irrigation division Araria पर प्राक्कलन के आंशिक पृष्ठों के आधार पर Consolidation मद में सिर्फ water course हेतु प्रावधानित था का उल्लेख किया गया है। प्राक्कलन के आंशिक भाग के अवलोकन से निर्णय लिया जाना संभव नहीं है तथा उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा भी सिंचाई प्रमंडल अररिया अन्तर्गत कराये गये प्रश्नगत कार्य में E/W Filling मद में कोई कटौती नहीं किये जाने का उल्लेख है जबकि श्री मिस्त्री80 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 द्वारा उल्लेख किया गया है कि जहाँ E/W Filling का कार्य कराया गया है, वहाँ नियमानुकूल सेटलमेंट की कटौती की गई है। इस संबंध में श्री मिस्त्री द्वारा M.B की छायाप्रति संलग्न किया गया है, जिससे उक्त कटौती अस्पष्ट है। तथा संलग्न साक्ष्य अपर्याप्त है। अतएव साक्ष्य अस्पष्ट रहने के कारण श्री मिस्त्री पर लगाये गये आरोप प्रमाणित होते है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री सुरेश मिस्त्री के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेश मिस्त्री (आई0डी0-जे 4831), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"20% पेंशन की कटौती स्थायी रूप से"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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11 नवम्बर 2022
सं0 22/नि0सि0(पू0)01-03/2015-2591--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री अनिल कुमार (ID-5112), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, कटिहार को निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2148 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री अनिल कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2461 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1497 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी, श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :- आरोप :- इस योजना के अन्तर्गत बैजनाथपुर उप वितरणी के वि॰दू॰ 93.0 पर अवस्थित Escape के पुनस्र्थापन कार्य के U/S wing wall के सीमेंट प्लास्टर से एवं B/W में सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की कमी क्रमशः 88.65 प्रतिशत एवं 70.50 प्रतिशत पाया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि आलोच्य संरचना में न्यून विशिष्टि के सीमेंट मोर्टार का उपयोग कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराया गया है। तथा भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने के कारण अनियमित/अधिकाई भुगतान का मामला बनता है। इस प्रकार आपके द्वारा एकरारनामा प्राक्कलन में प्रावधानित विशिष्टि के विपरीत गलत ढ़ंग से न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना परिलक्षित है। साथ ही उक्त संरचना के स्थायित्व पर भी प्रश्नचिन्ह् उत्पन्न होना स्वाभाविक प्रतीत होता है। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि दोनाें संरचनाओं में प्रावधानित विशिष्टि से सीमेंट की मात्रा में 70.50 प्रतिशत से 88.65 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है। इससे स्पष्ट है कि न्यून विशिष्टि के कार्य कराया गया है। जबकि भुगतान प्रावधान के अनुसार किया जाना परिलक्षित है। फलतः सरकारी राशि का दुरूपयोग होना स्थापित होता है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित। आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर :- आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि कृपया संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसके निष्कर्ष में उन्होंने समीक्षा एवं मंतव्य अंकित किया है, जिसमें यह अंकित है कि-श्री कुमार द्वारा बचाव बयानों में उल्लेखित तथ्यों, प्रस्तुत फोटोग्राफ, सीमेंट की मात्रा में 80 प्रतिशत की कमी रहने के बावजूद संरचना के 6 वर्षो से अधिक समय से उपयोग में बने रहने एवं सिंचाई सुविधा प्रदत्त रहने को देखते हुए उनके द्वारा गुणवत्ता की जाँच प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित प्रतीत होता है। फिर भी सीमेंट की मात्रा का B/W में सीमेंट मोर्टार में सीमेंट की 70.50 प्रतिशत की कमी एवं सीमेंट प्लास्टर में 88.65 प्रतिशत की कमी को देखते हुए आरोप आंशिक प्रमाणित पाया गया है। उक्त मंतव्य के अवलोकन से स्वतः स्पष्ट होगा कि उन्होंने भी गुणवत्ता के जाँच की प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित प्रतीत होता है की संज्ञा दी ही, जिससे स्पष्ट है कि मेरे द्वारा समर्पित बचाव बयान उन्हें मान्य था। साथ ही साथ जाँच की पद्धति संदेहास्पद थे, ऐसी स्थिति में पुनः इस बात को अंकित किया जाना जाँच दल के आधार पर सीमेंट मोर्टार में एवं सीमेंट प्लास्टर में सीमेंट की कमी को देखते हुए आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है, कहना किसी भी तकनीकी81 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 दृष्टिकोण से मान्य नहीं है, जबकि संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वयं ही जाँच की पद्धति को संदेहास्पद बताया है, तो पुनः उसी जाँच प्रतिवेदन पर विचार किया जाना किस हद तक उचित है। समीक्षा ः- संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेखित तथ्यों, प्रस्तुत फोटोग्राफ, सीमेंट की मात्रा में 80 प्रतिशत की कमी रहने के बावजूद संरचना के 6 वर्षो से अधिक समय से उपयोग में बने रहने एवं सिंचाई सुविधा प्रदत्त रहने को देखते हुए उनके द्वारा गुणवत्ता की जाँच प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित प्रतीत होता है। फिर भी सिमेंट की मात्रा का B/W में सिमेंट मोर्टार में सिमेंट की 70.50 प्रतिशत की कमी एवं सिमेंट प्लास्टर में 88.65 प्रतिशत की कमी के मद्देनजर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप के संदर्भ में पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उन्हीं तथ्याें का उल्लेख किया गया है जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उन्होंने अपने लिखित बचाव बयान में दिया था। आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए कोई नया तथ्य/अभिलेख का उल्लेख नहीं किया गया और न हीं कोई साक्ष्य ही बचाव बयान में संलग्न किया गया है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में साक्षियों का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि संचालन पदाधिकारी के संचिका सं॰ 01/आ॰04-198/2019 के पृष्ठ सं॰-1 पर दिनांक 29.12.2019 को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उठाए गये बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से परीक्षण/प्रतिपरीक्षण किया गया, उल्लेखित है। अतएव उपरोक्त समीक्षा के परिप्रेक्ष्य में उड़नदस्ता/CSMRS नई दिल्ली द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर सीमेंट की मात्रा में अनुमान्य सीमा से ज्यादा की कमी पाये जाने के कारण श्री कुमार पर लगाये गये आरोप प्रमाणित होते है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री अनिल कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
"संचयी प्रभाव से पाँच वेतनवृद्धि पर रोक"। उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अनिल कुमार (ID-5112), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, कटिहार को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -
"संचयी प्रभाव से पाँच वेतनवृद्धि पर रोक"।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप-सचिव।
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(cid:274)ामीण (cid:874)वकास (cid:874)वभाग
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अ(cid:876)धसूचना
3 अप्रील 2023
सं0 (cid:274)ा0(cid:874)व0- 14(लो0(cid:871)श0)(पटना)रोहतास-02/2021-1673922--(cid:302)ी (cid:871)शवेश कु मार, (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), दावथ, रोहतास के fo#) लोक (cid:871)शकायत (cid:467)नवारण अ(cid:876)धकार अ(cid:876)ध(cid:467)नयम के अंतग(cid:91)त दायर प(cid:464)रवाद क(cid:551) सुनवाईय(cid:585) म(cid:581) अनुपि(cid:232)थत रहने के आरोप पर समाज क(cid:227)याण (cid:874)वभाग के प(cid:287)ांक-622 (cid:465)दनांक-09.02.2020 }kjk आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ, िजसपर (cid:302)ी कु मार का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)ा(cid:220)त है ।
समाज क(cid:227)याण (cid:874)वभाग से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) के समी(cid:162)ोपरांत अ(cid:876)धसूचना सं(cid:201)या-602105 (cid:465)दनांक- 20.10.2022 }kjk (cid:302)ी (cid:871)शवेश कु मार को ''कं ड़ी चेतावनी का दंड'' अ(cid:876)धरो(cid:874)पत (cid:873)कया गया ।
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अतएव समी(cid:162)ोपरांत (cid:302)ी (cid:871)शवेश कु मार से (cid:292)ा(cid:220)त पुन(cid:874)व(cid:91)चार अ(cid:223)यावेदन को अ(cid:232)वीकृ त (cid:873)कया जाता है । उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ा(cid:876)धकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:873)क अ(cid:876)धसूचना क(cid:551) (cid:292)(cid:467)त सभी संबं(cid:876)धत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
अर(cid:466)बंद मंडल, संयु(cid:200)त स(cid:876)चव।82 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 सामान्य प्रशासन विभाग ------ आदेश 16 मार्च 2023 सं0 08/आरोप-01-22/2021,सा॰प्र॰-5158--श्री विनय कुमार पाण्डेय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-225/19, (755/2011), तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, अररिया के विरूद्ध प्रमादी मिलरों से नियमानुसार बैंक गारन्टी/Deed of Pledge प्राप्त नहीं किये जाने संबंधी आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-19428 दिनांक 02.11. 2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विषयगत विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है तथा इसी बीच श्री पाण्डेय दिनांक 28.02.2023 को वाध्र्यक्य सेवानिवृत्त हो गये हैं। अतएव विभागीय पत्रांक-1893 दिनांक 14.06.2011 द्वारा निर्गत निदेशों के आलोक में उक्त विभागीय कार्यवाही बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी॰) के तहत स्वतः सम्परिवर्तित मानी जायेगी। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
----- 16 फरवरी 2023 सं0 08/आरोप-01-23/2021,सा॰प्र॰-3316--श्री विनय कुमार मंडल, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-690/11, 167/2019 तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, पटना के विरूद्ध चावल मिलर मे0 प्रिया राईस मिल से धान कुटाई हेतु एकरारनामा के क्रम में दिये गये कुल धान की राशि का बैंक गारन्टी अथव अचल सम्पत्ति का निबंधित Pledge नियमानुकूल प्राप्त नहीं करने, मात्र 5,00,000/- का बैंक गारन्टी लेने के कारण उक्त मिलर द्वारा 8040 क्वीं के स्थान पर कुछ भी चावल नहीं देने एवं 8040 क्वीं चावल जिसकी सन्निहित राशि 1,99,27,622.00/- राशि की क्षति/गबन होने के संबंधी आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-19332 दिनांक 28.10.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विषयगत विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है तथा इसी बीच श्री कुमार दिनांक 31.01.2023 को वाध्र्यक्य सेवानिवृत्त हो गये हैं। अतएव विभागीय पत्रांक-1893 दिनांक 14.06.2011 द्वारा निर्गत निदेशों के आलोक में उक्त विभागीय कार्यवाही बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी॰) के तहत स्वतः सम्परिवर्तित मानी जायेगी। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 4—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
83 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
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No. 422&&I, khushboo Kumari D/o Navin Kumar Singh R/o Mishri sadan ward No-22 Ratanpur OP P.S. Town Begusarai Bihar-851101 do hareby solemnly affirm and declare as per affidavit No-4087 dated 13-03-23 That my name is written in my intermeidiate year 2012 original certificate Mark sheet, Admit card and others as Khushbu Kumari which is wrong My correct name is Khushboo Kumari in future for all purposes. My Roll No is 030054113040 Registration No-REG 10/2480-22.
khushboo Kumari.
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No. 423&&I, Bhavishya S/o Dilip Kumar Pandey, R/o C/o Desh Gaurav sinha, Amrudl Gali, Nala Road, Arya Kumar Road, Patna Bihar 800004 do hereby declare and affirm as per affidavit No. 1580 dated 18-03-23 That my name is mentioned in my Aadhar card No- 355440345192 and all educational and other documents as Bhavishya from now I Will be known as Bhavishya Pandey for all future purposes.
Bhavishya.
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No. 424&&I, SANGEETA Kumari W/o Rajesh Kumar Singh, R/o-Pakauli, P.O.+P.S.- Punpun, Dist.-Patna-804453 in my son Apurva Singh CBSE 10th Passing certificate my name wrongly mention as Sangeeta Singh correct name Sangeeta Kumari vide Affidavit No. 4048 dated 20.02.2023.
SANGEETA Kumari.
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सं0 441--मैं, दीवान फहद खान, पिता-दीवान नुरूल होदा खान, ग्राम-सरेवा, वार्ड नं॰-02, पोस्ट-कुड़ासन, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर (बिहार) 821101, वर्तमान पता-अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, व्यवहार न्यायालय, मधेपुरा, शपथ पत्र संख्या-1262, दिनांक 23.03.2023 के द्वारा घोषणा करता हूँ कि अब के बाद डॉ॰ दीवान फहद खान के नाम से जाना/पहचाना जाउॅगा।
दीवान फहद खान। No. 441&&I Diwan Fahad Khan, S/o Diwan Nurul Hoda Khan, R/o-Village-Sarewa, ward No.-02, Post-Kudasan, P.S.-Bhabua, District-Kaimur (Bihar) 821101, present address-Sub- divisional Judicial Magistrate, Civil Court, Madhepura, declare through Affidavit No. 1262, dated 23.03.2023 that from now onwards shall be known as Dr. Diwan Fahad Khan.
Diwan Fahad Khan.
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 4—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
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84 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023बिहार गजट
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पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-01-201/2022-1370 मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ----- संकल्प 6 फरवरी 2023 चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री प्रशान्त कुमार, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति निलंबित, मुख्यालय-सहायक निबंधन महानिरीक्षक का कार्यालय, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर के विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई थाना कांड सं0-15/2022 दिनांक 09.11.2022 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-12 r/w 13 (1)(b) r/w 13 (2) एवं आई.पी.सी. की धारा-120 (b) दर्ज की गयी है। अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना के पत्रांक-1448 दिनांक-10.11.2022 द्वारा प्राथमिकी से संबंधित जब्ती सूची एवं अन्य कागजात के अनुसार श्री कुमार ने स्वयं, पत्नी एवं पुत्र के नाम पर प्लॉट की खरीद की गयी है, जिसका मूल्य लगभग रू. 1,86,05,000/- (एक करोड़ छियासी लाख पांच हजार रूपये) है। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक एवं अन्य बैंकों में 80 लाख, एन0एस0सी0 में 20 लाख, 36 लाख के गहने का निवेश तथा 02 वाहनों का क्रय किया गया है। पटना स्थित मकान की तलाशी के दौरान रु 2,40,000/- (दो लाख चालीस हजार रुपये) नगद एवं 30 लाख रुपये का जेबरात बरामद हुई है। श्री कुमार ने अपनी सेवा अवधि के दौरान आय के वैध स्रोत जैसे वेतन, बैंक ऋण और अन्य ज्ञात स्रोत से अधिक लगभग रू. 2,06,80,785/- (दो करोड़ छः लाख अस्सी हजार सात सौ पचासी रूपये) गैर कानूनी एवं नाजायज ढंग से अप्रत्यानुपातिक धर्नाजन किया गया है। श्री कुमार का आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3 के प्रावधानों के प्रतिकूल है, जैसा कि आरोप पत्र में विनिर्दिष्ट है।
2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री कुमार के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों की जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए मुख्य जॉच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं प्रशाखा पदाधिकारी, प्रशाखा-8ए को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। संचालन पदाधिकारी के नियुक्ति के प्रस्ताव में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से मुख्य सचिव का अनुमोदन प्राप्त है। 3. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप पत्र के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, निरंजन कुमार, उप-सचिव।
----- सं0 1/एम02-60-53/2022 गृ0आ0--10536 x`g foHkkx (आरक्षी शाखा) ------ संकल्प 18 अक्तूबर 2022
श्री दया शंकर, भा0पु0से0 (2014) पुलिस अधीक्षक, पूर्णियाँ के विरूद्ध विशेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(a) एवं (b) सहपठित धारा 13(2) सहपठित धारा 12 तथा आई0पी0सी085 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 की धारा 120(B) के तहत विशेष निगरानी इकाई, थाना कांड संख्या-13/2022 दिनांक 10.10.2022 के तहत कांड दर्ज किया गया है। यह कांड अप्रत्यानुपातिक धनार्जन से संबंधित है एवं मामला अनुसंधानान्तर्गत है।
2. श्री दया शंकर, भा0पु0से0 (2014) के विरूद्ध उक्त कांड दर्ज होने एवं मामला अनुसंधानान्तर्गत होने तथा उसमें निहित आरोपों की गंभीरता एवं प्रकृति पर विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(3) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत श्री शंकर को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 3. निलंबन की अवधि में श्री शंकर का मुख्यालय पुलिस महानिरीक्षक, केन्द्रीय क्षेत्र, पटना का कार्यालय होगा। 4. निलंबन अवधि में श्री शंकर को अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 4 के अधीन मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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सं0 1/एम02-60-54/2022 गृ0आ0--10537
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18 अक्तूबर 2022
श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) पुलिस महानिरीक्षक के सहायक (निरीक्षण), बिहार, पटना के विरूद्ध आर्थिक अपराध ईकाई, बिहार पटना द्वारा धारा 353/387/419/420/467/468/120(B) भा0द0वि0 तथा 66(c) एवं 66(D) IT Act, 2000 के तहत आर्थिक अपराध थाना कांड सं0 33/2022, दिनांक 15.10.2022 दर्ज किया गया है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय, पटना के नाम का छद्म दुरुपयोग कर मोबाईल नंबर 9709303397 के धारक/उपयोगकर्त्ता द्वारा पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना एवं राज्य प्रशासन के वरीय प्राधिकारों को मोबाईल कॉल एवं व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से सम्पर्क कर एक वरीय पदाधिकारी के हित में प्रशासनिक निर्णय लिए जाने हेतु दबाव बनाये जाने के मामले से संबंधित है। आर्थिक अपराध इकाई की जाँच में पुष्टि हुई कि यह कृत्य श्री आदित्य कुमार के हित में प्रशासनिक निर्णय लेने हेतु किया गया, जो उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत श्री आदित्य कुमार एवं अन्य के विरूद्ध एक संज्ञेय अपराध है। 2. श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) के विरूद्ध उक्त कांड दर्ज होने एवं मामला अनुसंधानान्तर्गत होने तथा उसमें निहित आरोपों की गंभीरता एवं प्रकृति पर विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(3) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत श्री कुमार को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
3. निलंबन की अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय पुलिस महानिरीक्षक, केन्द्रीय क्षेत्र, पटना का कार्यालय होगा। 4. निलंबन अवधि में श्री कुमार को अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 4 के अधीन मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
------ सं0 08/आरोप-01-146/2014,सा॰प्र॰-5414 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 20 मार्च 2023 श्री विश्वजीत हेनरी, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-815/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बनमनखी, पूर्णियाँ के विरूद्ध बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम एवं भू-हदबन्दी अधिनियम का घोर उल्लंघन करते हुए निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु अपने क्षेत्राधिकार से हटकर भूमि विवाद निराकरण वाद सं॰-80/11-12 में अनियमित आदेश पारित करने संबंधी आरोपों के लिए आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पत्रांक-513 दिनांक 10.07.2013 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-8418 दिनांक 13.06.2016 द्वारा श्री हेनरी से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री हेनरी से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-7724 दिनांक 23.06.2017 द्वारा जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से मंतव्य की माँग की गयी। श्री हेनरी के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ द्वारा अपने मंतव्य में यह उल्लेख किया गया है कि चूँकि मामला अपर समाहर्त्ता के न्यायालय में विचाराधीन था, अतः श्री हेनरी को भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के तहत वाद में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए था, जिसका उल्लंघन श्री हेनरी द्वारा किया गया है। अतः श्री हेनरी के विरूद्ध आरोपो को प्रमाणित पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2951 दिनांक 26.02.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 में विहित प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित निम्नांकित दंड (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक अधिरोपित एवं संसूचित किया गया।86 (cid:464)बहार गजट, 12 अप्रील 2023 उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री हेनरी द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 18.06.2020 समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री हेनरी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावदेन में कोई भी नया तथ्य एवं साक्ष्य स्वरूप कोई नया अभिलेख/कागजात संलग्न नहीं किया गया है। अतः विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9171 दिनांक 05.10.2020 द्वारा श्री हेनरी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2951 दिनांक 26.02.2020 द्वारा संसूचित दंड को पूर्ववत् बरकरार रखा गया। श्री हेनरी द्वारा उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-2446/2021 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13.10.2022 को पारित न्यायादेश में संसूचित दंडादेश को निरस्त कर दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13.10.2022 को पारित न्यायादेश का मुख्य अंश निम्नवत है :- "The order dated 26-02-2020 is hereby quashed. The order of the Revisional Authority dated 05-10-2020, being an affirmation of the illegal order, for the reasons indicated above, is consequenty held to be legally unsunstainalble and is also quashed. This writ petition is allowed with all consequential benefits." माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त न्यायादेश के आलोक में L.P.A दायर करने संचिका विधि विभाग भेजी गयी। विद्वान महाधिवक्ता द्वारा दिया गया परामर्श निम्नवत है :- I have carefully examined order dt 13-10-2022 in C.W.J.C 2446/2021. Hon'ble court, with reference to facts of the case and legal position quashed the order of punishment of (i) censure and (ii) withholding of annual increment non-cumulatively has been set aside. Petitioner was proceeded against on an allegation that while discharging the duties as D.C.L.R Bankhi, he entertained a petition vide BLDR case No 80/2011-12. He entertained the petition even though ceiling proceeding was pending before Addl Collector, Purnia, on remand for Hon'ble High Court. At this stage it would be relevant to point out that by his order D.C.L.R did not grant any relief to the petitioners. It can not also be disputed that D.C.L.R is a competent authority under B.L.D.R Act, 2009. In such situation, it is incomprehensible to hold that he was exceeding his jurisdiction. Merely because land ceiling case was pending before Addl Collector, would not denude the statutory authority under a special Act to exercise his jurisdiction. He was acting as a quasi- judicial anthority. Merely because a quasi- judicial authority's order is found to suffer from legal infirmity it can not constitue misconduct, unless it shown that such anthority has acted maliciously or for gain. In the present case when order did not result in any relief to petitioners it can not even be inferred that he acted with malice or personal gain. Moreover, th+e charge memo also does not contain such a charge. For aforesaid reasons, I do not find any infirmity in the order of writ Court. Hence no case for filing L.P.A made out. अतः विधि विभाग/विद्वान महाधिवक्ता से प्राप्त उपर्युक्त परामर्श एवं सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-2446/21 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 13.10.2022 को पारित न्यायादेश के आलोक में श्री विश्वजीत हेनरी, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-815/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बनमनखी, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2951 दिनांक 26.02.2020 द्वारा संसूचित दंड ''(i) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक'' को वापस लिया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।