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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 April 2023

Published 19 April 2023

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-04-19.16
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 29 चैत्र 1945 (श0) सं(cid:201)या 16 पटना, बुधवार, ———————— 19 अप्रील 2023 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-7 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---

भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 8-9 पूरक

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पूरक-क 10-232 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।

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गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

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अधिसूचना

10 अप्रील 2023

सं0 4/पी.3-10-03-2016/गृ0आ0-4488--बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग अधिनियम, 2016 (बिहार अधिनियम 6, 2016) की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल ने श्री के0 एस0 द्विवेदी, सेवानिवृत्त, भा0पु0से0 (1984), पूर्व पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने की कृपा की है।

आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल अधिनियम की धारा 4 के प्रावधानों के अन्तर्गत विनियमित होगी। अध्यक्ष का कार्यकाल पदभार-ग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा उनके अड़सठ वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, के लिए होगी, परंतु राज्य सरकार विशेष परिस्थिति में उनके कार्यकाल का विस्तार किसी विशिष्ट अवधि के लिए कर सकेगी अथवा विनिश्चित कार्यकाल पूर्ण होने के पूर्व पद से हटा सकेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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गृह विभाग

(विशेेष शाखा)

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अधिसूचनाएं

10 अप्रील 2023

सं॰ एल/एच॰जी॰-14-05/2021-4318--विा विभाग के संकल्प ज्ञापांक- 7566 दिनांक-14.07.2010 के आलोक में बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा के निम्नांकित पदाधिकारी को रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना, 2010 के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से एवं स्तंभ-5 में अंकित वेतन स्तर में तृतीय एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-

क्र॰ पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/कोटि क्रमांक नियुक्ति तिथि देय तिथि वेतन स्तर
1 2 3 4 5
1 श्री अनिल कुमार सिंह, जिला समादेष्टा, 04/2017 30.04.1992 30.04.2022 वेतन स्तर-13

2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 3. स्वीकृत एम॰ए॰सी॰पी॰ में किसी प्रकार की त्रुटि या पार्थक्य पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदा एम॰ए॰सी॰पी॰ योजना के लाभ संबंधी आदेश को रद्‌द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा उन्हें भुगतान की गयी राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।

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10 अप्रील 2023

सं॰ एल/एच॰जी॰-14-05/2021-4319--विा विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7566 दिनांक-14.07.2010 एवं पत्रांक-8928, दिनांक-15.11.2017 की कंडिका-2(ii) के आलोक में बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा के निम्नांकित पदाधिकारी को रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना, 2010 के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से एवं स्तंभ-5 में अंकित वेतन स्तर में प्रथम एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-3 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023

क्र॰ पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/कोटि क्रमांक नियुक्ति तिथि देय तिथि वेतन स्तर
1 2 3 4 5
1 श्री मनोज कुमार नट, जिला समादेष्टा, 11/2017 02.05.1997 16.11.2017 वेतन स्तर-11

3. स्वीकृत एम॰ए॰सी॰पी॰ में किसी प्रकार की त्रुटि या पार्थक्य पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदा एम॰ए॰सी॰पी॰ योजना के लाभ संबंधी आदेश को रद्‌द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा उन्हें भुगतान की गयी राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।

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10 अप्रील 2023

क्र॰ पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/कोटि क्रमांक नियुक्ति तिथि देय तिथि ग्रेड पे/वेतन स्तर
1 2 3 4 5
1 श्री हरेन्द्र कुमार सिंह, वरीय जिला समादेष्टा, 06/2017 24.11.1992 24.11.2012 7600
2 श्री जयंत प्रताप सिंह, जिला समादेष्टा, 08/2017 02.05.1997 01.04.2019 वेतन स्तर-12
3 श्री अनुज कुमार, जिला समादेष्टा, 10/2017 02.05.1997 02.05.2017 वेतन स्तर-12
4 श्री संदीप कुमार, वरीय जिला समादेष्टा, 12/2017 16.08.2001 16.08.2021 वेतन स्तर-12

सं॰-एल/एच॰जी॰-14-05/2021-.4320--विा विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7566 दिनांक-14.07.2010 के आलोक में बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना, 2010 के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से एवं स्तंभ-5 में अंकित ग्रेड पे/वेतन स्तर में द्वितीय एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः- पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/कोटि क्रमांक

2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 3. स्वीकृत एम॰ए॰सी॰पी॰ में किसी प्रकार की त्रुटि या पार्थक्य पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदा एम॰ए॰सी॰पी॰ योजना के लाभ संबंधी आदेश को रद्‌द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा उन्हें भुगतान की गयी राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिमेश पाण्डेय, संयुक्त सचिव।

------ उद्योग विभाग ------ अधिसूचनाएं 3 मार्च 2023 सं0 3(स०)/उ0स्था0(आरोप)02/2023-1520--उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3063 दिनांक 18.07.2022 एवं पत्रांक-3404 दिनांक 11.08.2022 द्वारा श्री राजेश्वर राम, तत्कालीन प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, औरंगाबाद सम्प्रति जिला उद्योग केन्द्र, नवादा से इस आशय का स्पष्टीकरण की मांग की गयी कि दिनांक 17.05.2022 को सभी विभागों की समीक्षात्मक बैठक में उद्योग विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों की समीक्षा के क्रम में जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा खोजे जाने पर अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाये गये। श्री राम की अनाधिकृत अनुपस्थिति के कारण अनावश्यक रूप से कार्य निष्पादन में अवरोध उत्पन्न हुआ तथा मुख्यालय छोड़ने के संबंध में किसी प्रकार की कोई सूचना नियंत्री प्राधिकार को नहीं दी गयी। उक्त के संबंध में श्री राम अपने पत्रांक-1022 दिनांक 25.08.2022 द्वारा स्पष्टीकरण में प्रतिवेदित किया गया कि दिनांक 17.05.2022 को घर से जरूरी फोन आ जाने के कारण मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के बिना घर चला गया जिसके कारण जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद की अध्यक्षता में आहूत समीक्षात्मक बैठक में भाग नहीं ले सका।

उनसे प्राप्त उक्त स्पष्टीकरण की समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा अपने ऊपर लगाये गये आरोप को स्वीकार किया गया है। जिससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा दिनांक 17.05.2022 को जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा आयोजित4 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 समीक्षात्मक बैठक भाग नहीं लेना, नियंत्री प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त किये बिना मुख्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थिति विभागीय योजनाओं के प्रति उदासीनता एवं वरीय पदाधिकारी के आदेशों की अवहेलना एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही है। अतः निदेशानुसार इस कृत्य के लिए श्री राजेश्वर राम, तत्कालीन प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, औरंगाबाद सम्प्रति जिला उद्योग केन्द्र, नवादा को आरोप वर्ष 2022-23 के लिए निन्दन की शास्ति अधिरोपित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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16 मार्च 2023 सं0 3(स०)/उ0स्था0(आरोप)01/2023-1830--विभागीय पत्रांक-491 दिनांक 20.01.2023 द्वारा श्री अशोक कुमार, परियोजना प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, गोपालगंज से प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना अंतर्गत गोपालगंज जिला में अग्रसारित आवेदनों तथा स्वीकृति में उपलब्धि संतोषजनक नहीं पाये जाने के कारण स्पष्टीकरण किया गया।

उक्त के अनुपालन में श्री अशोक कुमार, परियोजना प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, गोपालगंज के पत्रांक-64 दिनांक 25.01.2023 द्वारा विभाग को अपना स्पष्टीकरण उपलब्ध कराया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी जो संतोषजनक नहीं पाया गया। प्रत्येक मासिक बैठक में पदाधिकारियों द्वारा श्री कुमार को निदेश देने के बावजूद भी असंतोषजनक उपलब्धि वरीय पदाधिकारी के आदेशों की अवहेलना एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही है। इस कृत्य के लिए श्री अशोक कुमार, परियोजना प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, गोपालगंज को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(v) के तहत दो वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने की शास्ति अधिरोपित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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16 मार्च 2023 सं0 3(स०)/उ०स्था०(आरोप)04/23-1826--श्री सुशील कुमार, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, पूर्णियाँ द्वारा जिले में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री खाद्य सूक्ष्म उन्नयन उद्यम योजना(PMFME) एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (PMEGP) के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब एवं गलत मंशा के कारण लक्ष्य से काफी कम उपलब्धि पायी गयी।

उक्त से स्पष्ट है कि श्री कुमार का उक्त आचरण विभाग की योजनाओं के प्रति उदासीनता, वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही का द्योतक है।

श्री कुमार का यह आचरण प्रथम दृष्टया बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।

अतएव श्री सुशील कुमार, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, पूर्णियाँ को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के भाग-4 के नियम-9(1) (क) के आलोक में तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है। निलम्बन अवधि में इनका मुख्यालय-उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के तहत निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान उद्योग निदेशालय द्वारा किया जायेगा।

विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अलग से संकल्प निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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स्वास्थ्य विभाग

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अधिसूचना

13 अप्रील 2023

सं0 15/ख॰-15-02/2016 -125(खाद्‌य)/स्वा॰--स्वास्थ्य विभागीय अधिसूचना संख्या-47(खाद्‌य), दिनांक- 17.02.2023 के द्वारा चार खाद्य विश्लेषकों को नवनियुक्त करते हुये संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, पटना-07 के रिक्त पदों के विरूद्ध पदस्थापित किया गया है। खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (2006 का संख्याक-34) की धारा-10 की उप-धारा-5 के साथ पठित धारा-45 में प्रदा शक्तियों का प्रयोग करते हुये संपूर्ण बिहार राज्य क्षेत्र से संग्रहित किये जाने वाले सभी प्रकार के खाद्य नमूनों की जाँच/विश्लेषण हेतु निम्न खाद्य विश्लेषकों को प्राधिकृत किया जाता है -

क्रम सं॰ खाद्य विश्लेषक का नाम पदस्थापन स्थल कार्यक्षेत्र का आवंटन
01. श्री महेन्द्र प्रताप सिंह सयुंक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, संपूर्ण बिहार राज्य क्षेत्र
02. श्रीमती (डॉ॰) सुमन सोनी
03. सुश्री श्वेता मिश्रा पटना-07
04. श्री महेन्द्र कुमार सैनी
5 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, के॰ सेंथिल कुमार, खाद्य संरक्षा आयुक्त।

------ समाज क(cid:227)याण (cid:874)वभाग (समाज क(cid:227)याण (cid:467)नदेशालय) ------ अ(cid:876)धसूचना 13 अप्रील 2023

सं0 05/र0बा0सं0स0(CNCP)-01/2022 (अंश-2)-257--ब(cid:205)च(cid:585) एवं उनके अ(cid:876)धकार को सुर(cid:879)(cid:162)त, संर(cid:879)(cid:162)त एवं (cid:292)(cid:467)त(cid:232)था(cid:874)पत करने के (cid:874)वषय पर भारत स(cid:465)हत (cid:874)व(cid:230)व के सभी देश(cid:585) ने सतत (cid:292)यास (cid:873)कए ह(cid:583)। United Nations Convention on the Rights of the Child (UNCRC),1989 के समझौता प(cid:287) के आलोक म(cid:581) अलग-अलग (cid:232)तर पर ब(cid:205)च(cid:585) के सम(cid:274) (cid:874)वकास क(cid:551) अवधारणा को (cid:292)ायो(cid:876)गक (cid:510)प (cid:465)दया जा रहा है। इन (cid:292)यास(cid:585) के बावजूद बालक(cid:585) क(cid:551) बड़ी सं(cid:201)या गर(cid:547)बी, अ(cid:871)श(cid:162)ा, सामािजक एवं पा(cid:464)रवा(cid:464)रक संरचना, आव(cid:230)यक 'संसाधन(cid:585)' आ(cid:465)द क(cid:551) कमी के कारण सड़क पर या सड़क क(cid:551) ि(cid:232)थ(cid:467)त म(cid:581) (cid:466)बना (cid:873)कसी सुर(cid:162)ा च(cid:272) के रहने को मजबूर ह(cid:583)। माननीय सव(cid:574)(cid:205)च (cid:219)यायालय द्वारा अ(cid:200)टू बर, 2021 म(cid:581) ब(cid:205)च(cid:585) से संबं(cid:876)धत एक वाद Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 6 of 2021 & Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 4 of 2020 In Re: Children in Street Situations म(cid:581) क(cid:551) गई सुनवाई के दौरान इस (cid:292)कार के ब(cid:205)च(cid:585) क(cid:551) (cid:302)ेणी, उनक(cid:551) सम(cid:232)या एवं उपाय के बारे म(cid:581) वृह(cid:622) चचा(cid:91) क(cid:551) गई।

रा(cid:231)(cid:282)(cid:547)य बाल अ(cid:876)धकार संर(cid:162)ण आयोग (NCPCR) द्वारा इस (cid:292)कार के ब(cid:205)च(cid:585) के संदभ(cid:91) म(cid:581) तैयार क(cid:551) गई Standard Operating Procedure (SOP 2.0) के तज(cid:91) पर रा(cid:207)य (cid:232)तर पर एक 'पुनवा(cid:91)स नी(cid:467)त' तैयार करने के संबंध म(cid:581) माननीय सव(cid:574)(cid:205)च (cid:219)यायालय द्वारा आदेश एवं (cid:465)दशा-(cid:467)नद(cid:566)श जार(cid:547) (cid:873)कए गए ह(cid:583)।

उ(cid:200)त के आलोक म(cid:581) रा(cid:207)य द्वारा तैयार क(cid:551) गई सड़क क(cid:551) प(cid:464)रि(cid:232)थ(cid:467)त म(cid:581) रहने वाले ब(cid:205)च(cid:585) "Children in Street Situations"(CiSS) के पुनवा(cid:91)स हेतु नी(cid:467)त को लागू करने का (cid:467)नण(cid:91)य (cid:871)लया जाता है जो CiSS के संदभ(cid:91) म(cid:581) एक माग(cid:91)द(cid:871)श(cid:91)का के (cid:510)प म(cid:581) काय(cid:91) करेगी।

यह अ(cid:876)धसूचना त(cid:215)काल (cid:292)भाव से (cid:292)वृ(cid:215)त होगी।

(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से, कु मार(cid:547) सीमा, उप-स(cid:876)चव।

------ कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ------ अधिसूचना 17 अप्रील 2023

सं0 1/स्था01-05/2023-245--श्रीमती सीमा त्रिपाठी, भा0प्र0से0, विशेष सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना को निदेशक, छात्र एवं युवा कल्याण निदेशालय, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना के पद का प्रभार सौंपा जाता है। 2. प्रस्ताव पर माननीय मंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 तारिक इकबाल, संयुक्त सचिव।

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सहकारिता विभाग

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अधिसूचनाएं

2 मार्च 2023

सं० 01-रा०स्था० निजी-16/2023 सह०/627--श्री अमर कुमार झा, प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0, औरंगाबाद (बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग) की सेवा श्री अशोक चौधरी, माननीय मंत्री, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव के रूप में कार्य करने हेतु दिनांक-02.03.2023 के अपराह्‌न से मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना को सौंपी जाती है।

2. इसमे सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।6 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 7 मार्च 2023 सं० 01/रा०स्था०(निजी)-04/2023 सह०/680--श्रीमती कुमारी आरती, विशेष कार्य पदाधिकारी, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना को प्रथम संतान के जन्म हेतु बिहार सेवा सहिता के नियम 220 एवं वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-640 दिनांक-19.01.2015 में वर्णित प्रावधानानुसार दिनांक-13.03.2023 से 08.09.2023 तक कुल 180 दिनों का मातृत्व अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. इसमे सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नन्द किशोर, विशेष सचिव।

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3 अप्रील 2023

सं० 01/रा॰स्था॰(स्थानान्तरण)- 66/2022 सह॰ -960--(cid:7088)ी विधाभूषण मि(cid:7088), जिला सहकारिता पदाधिकारी, गया (अतिरिक्त प्रभार- सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, गया⁄शेरघाटी) को प्रबंध निदेशक, मगध के न्(cid:7076)ीय सहकारी बैंक लि0, गया एवं (cid:7088)ी सत्येन्(cid:7076) कु मार प्रसाद, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जहानाबाद (अतिरिक्त प्रभार- सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, जहानाबाद⁄महाप्रबंधक, समेकित सहकारी विकास परियोजना, जहानाबाद) को प्रबंध निदेशक, जिला के न्(cid:7076)ीय सहकारी बैंक लि0, औरंगाबाद का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है।

2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

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सामान्य प्रषासन विभाग

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आदेष

2 मार्च 2023

सं0 2/आरोप-01-25/2015-सा0प्र0-4216--श्री ज्ञान शंकर दास (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 393/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, पारू, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध आरोप है कि श्री रामजी सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी अंचल कार्यालय, पारू, मुजफ्फरपुर को दिनांक 09.12.1999 से द्वितीय ACP की स्वी—ति दिये जाने के उपरांत ए0सी0पी0 का भुगतान दिनांक 16.08.2011 को किया गया। श्री दास दिनांक 03.05.2005 से 12.18.2006 तक पारू में अंचलाधिकारी के पद पर पदस्थापित थे परंतु श्री सिंह के ACP के भुगतान में इनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी, फलतः श्री सिंह को बकाया राशि का भुगतान समय पर नहीं हो सका। श्री दास के कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही के कारण श्री सिंह को माननीय लोकायुक्त के समक्ष परिवाद पत्र दायर करना पड़ा। प्रतिवेदित आरोप के आलोक में श्री दास द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर से मंतव्य प्राप्त की गयी।

प्रतिवेदित आरोप, श्री दास के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी के मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री दास के विरूद्ध अंचल कार्यालय में श्री रामजी प्रसाद सिंह को ACP दिये जाने वाला आदेश पत्र को प्रविष्टि अंचल कार्यालय के आगत पंजी में दर्ज नहीं है। स्वयं श्री ज्ञान शंकर दास ने भी अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि उनके कार्य अवधि में उक्त प्रासंगिक पत्र कार्यालय में प्राप्त नहीं हुआ तो उस पर कार्रवाई करने का प्रश्न हीं नहीं उठता। तत्कालीन अंचल अधिकारी, पारू ने भी अपने पत्रांक 136 दिनांक 29.01.2016 से इस तथ्य की पुष्टि की है। जाँच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया की श्री रामजी प्रसाद सिंह कभी भी वस्तुस्थिति की जानकारी श्री दास को उपलब्ध नहीं कराई। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रामजी प्रसाद सिंह को द्वितीय ए0सी0पी0 का लाभ दिये जाने हेतु कोई कागजात पत्र कार्यालय में श्री दास के कार्यवधि में उपलब्ध नहीं पायी गई है। ऐसे में उक्त प्रासंगिक पत्र पर कार्रवाई किये जाने का आरोप सम्पुष्ट नहीं होता है।7 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 उल्लेखनीय है कि श्री दास दिनांक 30.04.2015 को सेवानिवृा हो चुके हैं। श्री दास के विरूद्ध कोई वित्तीय अनियमितता एवं गंभीर प्रषासनिक चूक का आरोप नहीं है। श्री दास के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा उपलब्ध कागजातों/दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया है।

अतः श्री ज्ञान शंकर दास (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 393/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, पारू, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को संचिकास्त किया जाता है।

आदेश से,

शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 5—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

8 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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सूचना

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No. 442-- I, Sarita Kumari W/o Sanjay Kumar R/o Naktakua Bihta Patna Bihar 801103 do hereby solemnly affirm as per aff. No 2351/23-03-23 that from now I will be known as Sarita Singh for all future purposes.

Sarita Kumari.

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No. 443-- I Abhay Kumar S/o Kamleshwar Prasad Sharma R/o Ahmadpur Samsatipur Bihar 848505 do hereby declare and affirm as per aff. No 2128 dt. 21-03-23 That my name is written in my daughter Hari Priya's senior secondary CBSE all documents as Abhay Kumar Sharma which is wrong. My correct name is Abhay Kumar and from now I will be known by this name for all future purposes.

Abhay Kumar.

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सं0 444--मैं कृति (KRITI) पिता-भरत राय, पता वाजिदपुर कोदरिया, मुजफ्फरपुर बिहार-843113 शपथ पत्र सं0-2179 तिथि 21.02.2023 द्वारा सूचित करती हूँ कि मेरे सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों एवं आधार में मेरा नाम कृति (KRITI) है। अब से मैं कृति राय (KRITI RAI) के नाम से जानी व पहचानी जाउंगी।

कृति।

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No. 445--I, Tushar S/o Sri Birendra Kumar Sinha, R/o Goodman house Bari path, chik toli, P.S.-Kadamkuan Patna 800004, Bihar do hereby solemnly affirm and state as per aff. no 1520 dated 20-02-2023 That now l will be known as Tushar Kumar Sinha.

Tushar.

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No. 491--After declaration by me vide Affidavit no.995 dated 20/01/2023 I, Saleem ahmad, son of Atique Ahmad of Village Nasirganj Nista, p.s-Singhwara, Dist. Darbhanga, Bihar, India, Shall be known as by my Name as "Saleem Ahmad Nasri," in place of Saleem Ahmad for all purposes and documents also.

Saleem Ahmad.

9 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023

No. 496--I, RAKESH Raushan S/o Jitendra Bhatt R/o Anand Vihar Comp. New P.P. Colony, Patna-13 declare vide affidavit no. 11481 dated 10.8.22 shall be known as Rakesh Bhatt.

RAKESH Raushan.

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No. 498-- I, Kishor Kunal S/o Dilip Kumar R/o New Area Piparpati, Uttari House P.O- station P.S- kotwali Distt-.- gaya-823002 Bihar do hereby Solemnly affirm and declare as per aff. No-396/21-03-2023 that after Pursuing my PHD ( Doctorate ) I will be known as Dr. Kishor Kunal for all future purposes.

Kishor Kunal.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 5—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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10 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-26/2021--3083 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 17 अप्रील 2023

श्री राजीव कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, मोतिहारी के विरूद्ध उनके उपकारा, वीरपुर में पदस्थापन के दौरान बंदी अनिल कुमार सिंह, पे0-उमेष प्रसाद सिंह को बिना विभागीय आदेष के उपकारा, वीरपुर से मंडल कारा, सुपौल स्थानांतरित करने, उपकारा, वीरपुर में संसीमित बंदियों को डायट चार्ट के अनुसार भोजन नहीं देने, बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव एवं अन्य सहयोगी बंदियों द्वारा कारा प्रषासन के संरक्षण में कारा के अन्दर सभी प्रकार का अवैध कार्य, बंदियों से जबरन वसूली एवं मारपीट करने तथा दबंग बंदियों से आपराधिक साठ-गाँठ रखने, कर्त्तव्य के प्रति बरती गई गंभीर लापरवाही, अनुषासनहीनता, प्रषासनिक विफलता तथा अवैध अनाचार में गहरी संलिप्तता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9233 दिनांक 29.10.2021 द्वारा उन्हें निलंबित किया गया तथा निलंबनावस्था में उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, मोतिहारी निर्धारित किया गया। उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4613 दिनांक 20.04.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, कोषी प्रमण्डल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कया गया। 2. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, कोषी प्रमण्डल, सहरसा के पत्रांक-3067/विधि, दिनांक-22.10.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री राजीव कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर (सम्प्रति निलंबित) के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल 05 आरोपों में से आरोप संख्या-01 एवं 05 को पूर्णतः प्रमाणित तथा आरोप संख्या-02, 03 एवं 04 को अंषतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 11844 दिनांक 24.11.2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए आरोपित पदाधिकारी श्री राजीव कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

4. तद्‌आलोक में श्री राजीव कुमार द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन दिनांक 20.12. 2022 समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही एवं जाँच के क्रम में उभय पक्षों यथा उनके (आरोपित पदाधिकारी) एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का सुअवसर प्रदान किया गया एवं उभय पक्षों ने अपना पक्ष भी रखा, लेकिन संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य गठित करने के क्रम में उनके (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा प्रस्तुत पक्ष का अवलोकन एवं विष्लेषण किए बिना ही एकतरफा अर्थात्‌ केवल प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के पक्ष को स्वीकार करते हुए मंतव्य गठित कर लिया। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि वास्तव में बंदी अनिल कुमार सिंह का स्थानांतरण किया जाना कारा सुरक्षा हेतु नितांत आवष्यक था, चूंकि अधीक्षक के कंधों पर कारा की सुरक्षा की भी जिम्मेवारी होती है, जिसे सुनिष्चित करने एवं कारा सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु घटनोत्तर स्वीकृति की प्रत्याषा में उक्त बंदी का स्थानान्तरण किया गया। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि आरोप सं0-02, 03 और 04 एक परिवाद पत्र पर अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के जाँच प्रतिवेदन पर आधारित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि तीनों आरोपों के संबंध में संचालन पदाधिकारी ने एकतरफा पुनरावृत्ति करते हुए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के पक्ष पर ही केवल विचार किया, जबकि उनके (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा साक्ष्य उपलब्ध कराते हुए जाँच प्रतिवेदन को पूर्णतः असत्य प्रमाणित किया गया। यदि संचालन11 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 पदाधिकारी उनके पक्ष एवं साक्ष्यों पर अपनी दृष्टि डालते तो तीनों आरोपों को अंषतः प्रमाणित नहीं करते हुए पूर्णतः अप्रमाणित करते, परन्तु ऐसा हुआ नहीं। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि वे पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन किये हैं। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनकी निष्ठा एवं कर्त्तव्यपरायणता पर सिर्फ इसलिए आरोप लगा, क्योंकि विभाग इस विष्वास के साथ अधीक्षक, केन्द्रीय कारा पूर्णियाँ को परिवाद पत्र पर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देष दिया था कि सत्य प्रत्यक्ष हो सके, परन्तु ऐसा हो न सका, वरन्‌ अधीक्षक, केन्द्रीय कारा पूर्णियाँ की निष्ठा विचलित हो गई, जिसके फलस्वरूप वे स्वयं कर्त्तव्यपरायणता के मार्ग से पृथक्‌ होकर ऐसा कार्य संपादित किये, जिससे कि विभाग द्वारा उन पर किए गए विष्वास को ठेस पहुँचा एवं एक कर्त्तव्यनिष्ठ समर्पित लोक सेवक को लंबी अवधि हेतु निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही का दंष झेलना पड़ा। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि परिवादकर्त्ता कभी उपकारा, वीरपुर में संसीमित बंदी नहीं रहा। परिवादी जाँच पदाधिकारी के गृह जिले का था, जिससे यह प्रकट होता है कि परिवादी अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ का कोई संबंधी या फिर इष्ट-मित्र हो। यह भी हो सकता है कि उन्होंने परिवादी से कोई उत्कोच अथवा प्रलोभन प्राप्त किया हो। अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के जाँच रिपोर्ट को देखकर तनिक भी संषय नहीं रह जाता कि परिवादी ने अपने परिवाद पत्र में जिन शब्दों का उपयोग किया है, अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ ने उन समस्त षब्दाें को अपना शपथ मानकर उन्हें स्थापित करने का प्रबल उद्यम एवं यत्न किया है। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि बंदी अनिल कुमार सिंह का स्थानान्तरण कारा सुरक्षा के हित में घटनोत्तर स्वीकृति की प्रत्याशा में किया गया था, परन्तु विभागीय कार्यवाही की जाँच में संचालन पदाधिकारी द्वारा पाया गया है कि बंदी अनिल कुमार सिंह का स्थानान्तरण दिनांक-19.02.2021 को उपकारा, वीरपुर से मंडल कारा, सुपौल किया गया था, जबकि बंदी अनिल कुमार सिंह के स्थानान्तरण का आदेश महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना के आदेश ज्ञापांक-1819 दिनांक-24.02.2021 के द्वारा दिया गया था। इस प्रकार दिनांक-24.02.2021 को निर्गत विभागीय आदेश का अनुपालन आरोपित पदाधिकारी द्वारा तीन दिन पूर्व ही दिनांक-19.02.2021 को कर दिया गया, जिससे स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिना विभागीय आदेश के मनमाने ढंग से उक्त बंदी का स्थानान्तरण किया गया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी द्वारा भी प्रतिवेदित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा गलत ढंग से बंदी अनिल कुमार सिंह का स्थानान्तरण किया गया है। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभागीय आदेश की अवहेलना करते हुए गंभीर अनुशासनहीनता एवं कर्त्तव्योपेक्षा की गई है। आरोप संख्या 02, 03 एवं 04 को संचालन पदाधिकारी द्वारा आंशिक प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त तीनों आरोपों के संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में समेकित रूप से उल्लिखित किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा केवल प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के पक्ष पर ही विचार किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में उपर्युक्त तीनों आरोपों के संबंध में अपने बचाव में कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। जाँच पदाधिकारी अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ द्वारा उपकारा, वीरपुर का किये गये निरीक्षण में यह तथ्य प्रकाश में आया कि उपकारा, वीरपुर में कुख्यात बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव एवं उसके सहयोगी बंदियों द्वारा कारा प्रशासन के संरक्षण में कारा के अन्दर सभी प्रकार के अवैध कार्य, बंदियों से जबरन वसूली एवं मारपीट की जा रही थी। जाँच में पाया गया कि उपकारा, वीरपुर की सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है एवं दबंग बंदियों द्वारा कारा का संचालन किया जा रहा था। दिनांक 13.11.2020 को बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव को कोरेन्टाईन अवधि पूर्ण करने के उपरान्त उपकारा, वीरपुर से मंडल कारा, सुपौल स्थानांतरित किया गया तथा दिनांक 14.11.2020 को मात्र एक दिन की अल्प अवधि में उक्त बंदी को मंडल कारा, सुपौल से पुनः उपकारा, वीरपुर स्थानांतरित किया गया। जाँच में पाया गया कि उपकारा, वीरपुर में बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव एवं उसके अन्य सहयोगी बंदियों द्वारा कोरेन्टाईन अवधि में संसीमित बंदियों को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा कारा प्रशासन द्वारा बंदियों को डायट चार्ट के अनुसार भोजन भी उपलब्ध नहीं कराया गया। जाँच में वार्ड ईंचार्ज द्वारा बंदियों को प्रताड़ित करने, जबरन पैसे की वसूली करने तथा भोजन में कटौती संबंधी आरोपों की पुष्टि हुई है। जाँच के क्रम में वृत्ताधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ को अनेक बंदियों ने बताया कि बंदियों से मार-पीट करना, उनसे पैसा छीन लेना, मूल्यवान वस्तु यथा अंगुठी आदि जबरन रख लेना एवं इसे पंजी में दर्ज नहीं करना तथा उसे वापस नहीं करना कारा में सामान्य परिपाटी है एवं इन सब में बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव एवं उसके सहयोगी बंदी तथा उपकारा, वीरपुर के पदाधिकारी एवं कर्मी भी संलिप्त हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि उपकारा, वीरपुर में कतिपय कुख्यात बंदियों द्वारा अन्य बंदियों को प्रताड़ित किया जा रहा था एवं अवैध वसूली की जा रही थी, जिसमें आरोपित पदाधिकारी की सहभागिता थी। कारा के मुख्य नियंत्री पदाधिकारी के रूप में आरोपित पदाधिकारी का यह कृत्य गंभीर प्रशासनिक विफलता तथा इस अवैध अनाचार में उनकी गहरी संलिप्तता का परिचायक है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में जाँच पदाधिकारी अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के जाँच प्रतिवेदन पर ही प्रश्नचिन्ह लगाया गया है, जबकि जाँच पदाधिकारी अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ द्वारा उपकारा, वीरपुर, उपकारा, उदाकिशुनगंज, मंडल कारा, मधेपुरा जाकर पीड़ित बंदियों से पूछताछ एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्यात्मक जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उपकारा, वीरपुर में कोरेन्टाईन अवधि में संसीमित बंदियों को कुछ दबंग बंदियों द्वारा शारीरिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाना तथा बंदियों को डायट चार्ट के अनुसार भोजन नहीं12 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 दिया जाना पाया गया है। कोरेन्टाईन कारा उपकारा, वीरपुर से मंडल कारा, मधेपुरा, मंडल कारा, सुपौल, उपकारा, उदाकिशुनगंज में स्थानान्तरित बंदियों द्वारा जाँचकर्त्ता अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के समक्ष उनके साथ मारपीट किये जाने एवं पैसा तथा मूल्यवान वस्तु अंगुठी आदि जबरन रख लेने जैसे अत्यंत ही गंभीर तथ्य उजागर किये गये हैं। इस मामले में दोषी बंदी सुभाष यादव उर्फ निर्दोष यादव एवं उसके सहयोगी बंदियों को आरोपित पदाधिकारी का संरक्षण प्राप्त था। उक्त दबंग बंदियों द्वारा कारा का संचालन किया जा रहा था तथा अन्य बंदियाें को तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा था। इस प्रकार कारा में व्याप्त कुव्यवस्था एवं अराजकता के लिए कारा के मुख्य नियंत्री पदाधिकारी के रूप में आरोपित पदाधिकारी पूर्णतः दोषी हैं तथा इस अवैध अनाचार में उनकी गहरी संलिप्तता परिलक्षित होती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने कर्त्तव्यों/दायित्वों के सम्यक्‌ निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता बरती गई है तथा उनका दबंग बंदियों से आपराधिक साठ-गाँठ भी परिलक्षित होता है।

इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-351, 352, 796 (i), (ii) एवं 797 (xiv) का स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया गया है। उनका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1),(2) के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है।

6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राजीव कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, मोतिहारी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए तथा प्रमाणित पाये गये आरोपों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(vi) के प्रावधानों के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त करने का विनिष्चय किया गया :- '' संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''। 7. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 753 दिनांक 24.01.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 5119 दिनांक 24.03.2023 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री राजीव कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, मोतिहारी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए उन्हें निलंबन से मुक्त किया जाता है :- ''संचयी प्रभाव से पाँच (05) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

------ सं0 2/आरोप-01-30/2011-सा0प्र0--1147 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 16 जनवरी 2023

डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम, दरभंगा के विरूद्ध शौचालय बंदोबस्त में व्याप्त अनियमितता बरतने संबंधी आरोपाें के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2068 दिनांक 03.08.2022 द्वारा गठित आरोप-पत्र उपलब्ध कराया गया।

2. नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों पर विभागीय पत्रांक 17141 दिनांक 20.09.2022 एवं पत्रांक 19771 दिनांक 12.12.2022 द्वारा डॉ0 नाथ से स्पष्टीकरण की गयी, इसके आलोक में डॉ0 नाथ द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

3. डॉ0 नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा डॉ0 नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए डॉ0 नाथ के स्पष्टीकरण को अस्वी—त करते हुए आरोपों की सम्यक्‌ जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

4. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री नाथ के विरूद्ध आरोपों की सम्यक्‌ जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।13 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 5. प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर उक्त आशय की सूचना संचालन पदाधिकारी तथा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देने की —पा करेंगे।

6. डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम, दरभंगा को निदेश है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-14/2021-सा0प्र0--4977

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14 मार्च 2023

श्री अजीमुल्लाह अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1280/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, शिवहर के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप-पत्र में गठित आरोप यथा-खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 के अन्तर्गत अधिप्राप्ति धान के मिलिंग हेतु संबंधित मिलरों के साथ किये जानेवाले एकरानामा के साथ Deed of Pledge प्राप्त नहीं करने के कारण निगम को कुल 7277.480 एम0टी0 चावल/सी0एम0आर0 की राशि मो0 15,75,98,239.20/- (पन्द्रह करोड़ पचहत्तर लाख अन्ठानवे हजार दौ सौ उनचालीस रूपये एवं बीस पैसे) रूपये आर्थिक क्षति पहुंचाने इत्यादि आरोप के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के लिए श्री अंसारी से स्पष्टीकरण की गयी।

उक्त के आलोक में श्री अंसारी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 11.10.2022 पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 373 दिनांक 27.01.2023 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण को अस्वी—त किया गया है।

श्री अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ विचारोपरान्त इनके विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

विभागीय कार्यवाही में मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जाय। श्री अंसारी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-19/2021-सा0प्र0--5357

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20 मार्च 2023

श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1148/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य निगम, बक्सर सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत्त के विरूद्ध खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 के अन्तर्गत अधिप्राप्ति धान के मिलिंग हेतु संबंद्ध मिलरों के साथ किये जाने वाले एकरारनामा के साथ नियमानुकूल Deed of Pledge प्राप्त नहीं करने के कारण निगम को 37,41,45,564.94 (सैतीस करोड़ एकतालिस लाख पैतालिस हजार पाँच सौ चौसठ एवं चौरान्वे पैसे) रू0 की आर्थिक क्षति पहुंचाने संबंधी आरोप के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र पुनर्गठित किया गया।

विभागीय पत्रांक 8728 दिनांक 01.06.2022 एवं स्मार पत्रांक 10835 दिनांक 30.06.2022 द्वारा आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों पर श्री कुमार से स्पष्टीकरण की गयी। श्री कुमार के पत्र दिनांक 09.08.2021 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।14 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 विभागीय पत्रांक 16590 दिनांक 13.09.2022 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 491 दिनांक 03.02.2023 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त विभागीय मंतव्य की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 अन्तर्गत निगम मुख्यालय के कार्ययोजना एवं मार्ग निर्देश के आलोक में कार्य नहीं किया गया। श्री कुमार के पदस्थापन काल में कुल 53 मिलरों से एकरारनामा किया गया, परन्तु सरकार के निदेशिका के अनुसार कार्य नहीं किये जाने के कारण मिलरों द्वारा ससमय चावल/सी0एम0आर0 वापस नहीं किया गया। इस प्रकार निगम को 37,41,45,564.94 (सैंतीस करोड़ एकतालिस लाख पैंतालिस हजार पाँच सौ चौसठ रूपये एवं चौरान्वे पैसे) की अर्थिक क्षति हुई है।

उल्लेखनीय है कि श्री कुमार को जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगमम, बक्सर के पदस्थापन काल के एक अन्य गंभीर आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6374 दिनांक 30.06.2020 द्वारा ''अनिर्वाय सेवानिवृाि'' की शास्ति अधिरोपित की गयी है। इसके अतिरिक्त श्री कुमार के विरूद्ध बक्सर (मुफ्फसिल) थाना कांड संख्या 306/2015 दिनांक 03.11.2015 में विधि विभाग के आदेश संख्या-एस0पी0-26/2019-137/जे0 दिनांक 18.02.2021 द्वारा अभियोजन स्वी—त है। बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139(ग) निम्न प्रकार है :- ''अधीनस्थ पदाधिकारियों द्वारा अपने नियंत्रणधीन पारित पेंशन स्वी—ति संबंधित आदेश को पुनरीक्षण करने की शक्ति राज्य सरकार को है यदि सरकार का यह समाधान हो जाए की सम्बद्ध सरकारी सेवक के विरूद्ध कार्यरत अवधि में घोर कदाचार का पर्याप्त सबूत है तथा उसका कार्य पूर्ण असंतोषप्रद रहा है। लेकिन इस शक्ति का प्रयोग सिर्फ संबंधित पेंशनर को उचित जवाब देने का अवसर प्रदान करने और उससे जवाब प्राप्त करने के पश्चात ही किया जाना चाहिए, पर इस शक्ति का प्रयोग प्रथम पेंशन स्वी—ति की तिथि से तीन साल के बाद नहीं की जाएगी।''

उपर्युक्त वृहत दंड एवं अभियोजन स्वी—त्यादेश से स्पष्ट है कि श्री कुमार के विरूद्ध कार्यरत अवधि में घोर कदाचार का पर्याप्त सबूत है तथा उनका कार्यकाल पूर्ण असंतोषप्रद रहा है।

समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त विभागीय मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''शत-प्रतिशत (100%) पेंशन कटौती'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतएव समीक्षोपरान्त लिए गये निर्णय के आलोक में श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1148/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य निगम, बक्सर सम्प्रति अनिवार्य सेवानिवृत्त को ''शत-प्रतिशत (100%) पेंशन कटौती'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-19/2022-सा0प्र0--5607

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23 मार्च 2023

श्री अमित कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 331/19, उप विकास आयुक्त, सारण, छपरा के विरूद्ध प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के रूप में श्री अनिल कुमार रमण (बि0प्र0से0), तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सारण, छपरा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय पक्ष नियमानुकूल नहीं रखे जाने संबंधी आरोप के लिए इनसे स्पष्टीकरण किया गया।

श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण में इनका कहना है कि उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा वांछित सभी साक्ष्य अथवा कागजात तत्काल उपलब्ध कराया गया। उनका यह भी कहना है कि आरोपी पदाधिकारी श्री रमण के पक्ष में कोई भी बयान या कागजात संचालन पदाधिकारी के समक्ष इनके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह सिद्ध होता हो कि इनके द्वारा विभागीय पक्ष नियमानुकूल नहीं रखा गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन साक्षियों/आरोपी पदाधिकारी के परीक्षण पर आधारित है। इनके द्वारा साक्षियों/आरोपी पदाधिकारी के बयान पर न तो कोई टिप्पणी की गयी है और न ही कोई मंतव्य दिया गया है।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार द्वारा विभागीय पक्ष पुरजोर ढंग से नहीं रखा गया और उनके द्वारा यह कहना कि साक्षियों/आरोपी पदाधिकारी के बयान पर इनके द्वारा कोई टिप्पणी या मंतव्य नहीं दिया गया है, उचित प्रतीत नहीं होता है। इन्हें उपस्थापन पदाधिकारी होने के नाते गठित आरोपों के आलोक में आरोपी पदाधिकारी के बयान पर सरकार का पक्ष रखते हुए तथ्यों के आधार पर आरोपों को सम्पुष्ट किया जाना चाहिए था।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध उपस्थापन पदाधिकारी के र्काव्यों एवं दायित्वों का पूर्णतया पालन नहीं किये जाने के कारण इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए15 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत ''निन्दन (आरोप वर्ष 2022-23)'' का दंड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अमित कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 331/19, उप विकास आयुक्त, सारण, छपरा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2022-23)। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-01/2020-सा0प्र0--2680

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8 फरवरी 2023

श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन उप समाहर्त्ता-सह-प्रभारी सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, मधुबनी के विरूद्ध राष्ट्रीय विकास एवं समाज कल्याण परिषद (RVESKP) द्वारा संचालित विशेष दाक ग्रहण केन्द्र मधुबनी को जून, 2017 में डॉ0 आशा दास के मकान से श्रीमती रीता झा के मकान में स्थानांतरित किया गया। TISS की टीम द्वारा विशेष दाक ग्रहण केन्द्र में दिनांक 04.11.2017 को किये गये निरीक्षण में पाया गया कि यह भवन उसमें रहने वालों के लिए खतरनाक, अनुपयुक्त तथा अस्वास्थ्यकर था। साथ हीं जाँच एजेंसी ने अपने जाँच में इस भवन को अस्वास्थ्यकर प्रतिवेदित किया। श्री झा द्वारा विशेष दाक ग्रहण संस्थान भवन को स्थानांतरित करने के पूर्व उस भवन का निरीक्षण नहीं किया गया तथा जानबूझकर गलत उद्देश्यों से 14 सूत्री जाँच प्रपत्र बिना भरे उस अनुपयुक्त भवन में विशेष दाक ग्रहण को स्थानांतरित करने की स्वी—ति दी गयी। उक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11643 दिनांक 08.12.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

श्री झा दिनांक 31.01.2023 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।

अतः श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन उप समाहर्त्ता-सह-प्रभारी सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/परि0-716/2008-सा0प्र0--5358

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20 मार्च 2023

श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध आरोप यथा-सहायक रोकड़ बही एवं सामान्य रोकड़ बही का भौतिक सत्यापन नहीं करने, दिनांक 01.07.2001 से 02.12.2001 तक सामान्य रोकड़ बही पर हस्ताक्षर नहीं करने, जिला नजारत उप समार्हाा का प्रभार सौंपने के वक्त पंचायत अग्रिम पंजी में दर्ज राशि के वास्तविक जाँचोपरान्त अन्तर पाये जाने तथा दायित्वों के निर्वहन में अक्षमता के कारण सरकारी राशि का दुर्विनियोग एवं गबन होने के लिए आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1038 दिनांक 23.09.2008 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) उपलब्ध कराया गया।

उक्त आरोपों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा 'निन्दन' (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतन वृद्धि पर रोक का दंड'' अधिरोपित किया गया। श्री त्रिपाठी द्वारा उक्त दंड के विरूद्ध माननीय न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 6689/2017 में दिनांक 07.01.2019 को पारित आदेश के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा दिये गये दंड को प्रतिस्थापित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8240 दिनांक 20.06.2019 द्वारा ''निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड'' अधिरोपित किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री त्रिपाठी के विरूद्ध एक अन्य मामले में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड'' अधिरोपित किया गया था।16 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 महालेखाकार, बिहार द्वारा दंड के क्रियान्वयन के बिन्दु पर विभाग को प्रतिवेदित किया गया कि श्री त्रिपाठी के पक्ष में तीन वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से और मात्र एक वेतनवृद्धि, जो 01.07.2020 को देय था, को असंचयात्मक प्रभाव से रोकते हुए वेतन पूर्जा निर्गत किया गया है। इस प्रकार श्री त्रिपाठी पर अधिरोपित दंड संचयात्मक हो जाता है, क्याेंकि दूसरा वेतनवृद्धि जिस आदेश के आलोक में रोका जाना था, सेवानिवृत्ति के कारण देय नहीं हो सका।

माननीय न्यायालय द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 6689/2017 में दिनांक 07.01.2019 को पारित आदेश के आलोक में श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8240 दिनांक 20.06.2019 द्वारा प्रतिस्थापित दंड के क्रियान्वयन के बिन्दु पर विधि विभाग, बिहार, पटना से विधिक राय प्राप्त की गयी।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विधि विभाग से प्राप्त विधिक राय के आलोक में मामले की समीक्षोपरान्त श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8240 दिनांक 20.06.2019 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड ''निन्दन (आरोप वर्ष 2001-02) एवं असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' के दंड को प्रतिस्थापित करते हुए (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2001-02) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड दिये जाने का निर्णय लिया गया है।

अतः श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8240 दिनांक 20.06.2019 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड को निम्नलिखित दंड से प्रतिस्थापित किया जाता है :- (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2001-02), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-08/2022-सा0प्र0--5961

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28 मार्च 2023

श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 अन्तर्गत एकरारनामा किये गये मिलरों से नियमानुसार एकरारनामा, बैंक गारंटी, रजिस्टर्ड डीड ऑफ प्लेज, प्लेज किये गये सम्पत्ति का मूल दस्तावेज इत्यादि प्राप्त नहीं किये जाने के कारण मेसर्स शांति राईस मिल, टुन्नीदिघी, पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 41,384.16 क्वींटल की राशि मो0 9,82,63,927/-रू0, मेसर्स बालाजी मिनि राईस मिल, टुन्नीदिघी, पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 11,408. 89 क्वींटल की राशि मो0 2,70,70,654/- रू0 एवं मेसर्स माँ संतोषी हसकिंग राईस मिल, टुन्नीदिघी, पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 12,249.97 क्वींटल की राशि मो0 2,90,86,738/- रू0 यानि कुल मो0 15,44,21,319/-रू0 (पन्द्रह करोड़ चौव्वालिस लाख इक्कीस हजार तीन सौ उन्नीस रूपया) की आर्थिक क्षति संबंधी आरोपों के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2365 दिनांक 26.03.2022 द्वारा गठित आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) उपलब्ध कराया गया। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र पुनर्गठित किया गया, जिसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

विभागीय पत्रांक 11700 दिनांक 13.07.2022 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के लिए श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की गयी। श्री त्रिपाठी के पत्र दिनांक 01.08.2022 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 19032 दिनांक 25.10.2022 द्वारा श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 276 दिनांक 20.01.2023 द्वारा समर्पित विभागीय मंतव्य निम्नलिखित है :-

1. श्री अशोक कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 अन्तर्गत मिलरों से नियमानुसार एकरारनामा नहीं करने एवं नियमानुसार डीड ऑफ प्लेज प्राप्त नहीं करने के कारण राशि मो0 15,44,21,319.00 (पन्द्रह करोड़ चौवालिस लाख इक्कीस हजार तीन सौ उन्नीस रू0) क्षति पहुंचाने का आरोप है। अतः बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के तहत श्री त्रिपाठी से पूछे गये स्पष्टीकरण उचित है।

2. अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 अन्तर्गत निगम के पत्रांक 9914 दिनांक 29.12.2012 के द्वारा अधिप्राप्ति धान की मिलिंग हेतु एकरारनामा करने एवं डीड ऑफ प्लेज से संबंधित दिशा-निर्देश निर्गत है, जिसका आरोपी पदाधिकारी श्री ़त्रिपाठी द्वारा अनुपालन नहीं किया गया एवं जिसके कारण निगम को 15,44,21,319.00 रू0 क्षति हुई।

3. निगम मुख्यालय के पत्रांक 1049 दिनांक 02.02.2013 के अनुसार मिलिंग क्षमता से संबंधित निदेश था कि जितनी मात्रा की बैंक गारंटी/बी0डी0/संपत्ति बंधक मिल के द्वारा दी जाती है। उतनी ही धान की मात्रा आपूर्ति करने का निदेश था, परंतु आरोपी पदाधिकारी द्वारा उक्त निदेश का अनुपालन नहीं किया गया।

4. श्री त्रिपाठी ने प्रदत्त शक्तियों का उचित प्रयोग न करते हुए सिक्युरिटी का बिना जांच किये हुए अधिप्राप्ति के मापदंडों के विपरीत अनाज को संबंधित मिलरों द्वारा क्षति/गबन होने से नहीं रोका।17 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 5. श्री त्रिपाठी द्वारा एकरारनामा किये गये मिलर से नियमानुसार एकरारनामा, बैंक गारंटी, रजिस्टर्ड डीड ऑफ प्लेज किये गये सम्पति का मूल दस्तावेज इत्यादि प्राप्त नहीं किये जाने के कारण कुल 15,44,21,319.00 रू0 (पन्द्रह करोड़ चौवालीस लाख इक्कीस हजार तीन सौ उन्नीस रूपया) की आर्थिक क्षति निगम को उठानी पड़ी।

श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त विभागीय मंतव्य की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री त्रिपाठी द्वारा अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 अन्तर्गत निगम के पत्रांक 9914 दिनांक 29.12.2012 के निदेश के आलोक में धान की मिलिंग हेतु एकरारनामा एवं डीड ऑफ प्लेज की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही पत्रांक 1049 दिनांक 02.02.2013 के आलोक में और मिलिंग क्षमता से संबंधित धान की मात्रा के अनुपात में बैंक गारंटी/बी0डी0/सम्पाि बंधक की कार्रवाई नहीं की गयी। निर्गत दिशा निर्देशों का पालन नहीं किये जाने से मेसर्स शांति राईस मिल टुन्नीदिघी पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 41384.16 क्वीं की राशि मो0 9,82,63,927.00 रू0 मेसर्स बालाजी मिल राईस मिल टुन्नीदिघी, पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 11,408.89 क्वीं की राशि मो0 2,70,70,654.00 रू0 एवं मेसर्स मांँ संतोषी हसकिंग राईस मिल टुन्नीदिघी, पश्चिम बंगाल के पास बकाया सी0एम0आर0 कुल 12,2429.97 क्वीं की राशि मो0 2,90,86,738.00 रू0 यानि कुल 15,44,21,319.00 रू0 (पन्द्रह करोड़ चौवालीस लाख इक्कीस हजार तीन सौ उन्नीस रूपया) की आर्थिक क्षति निगम को उठानी पड़ी। स्पष्टतया श्री त्रिपाठी के लापरवाही, र्काव्यहीनता एवं धान अधिप्राप्ति हेतु दिशा निर्देशों के अवहेलना के कारण से सरकार को भारी विाीय क्षति उठानी पड़ी है।

बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139(ग) निम्न प्रकार है :- ''अधीनस्थ पदाधिकारियों द्वारा अपने नियंत्रणधीन पारित पेंशन स्वी—ति संबंधित आदेश को पुनरीक्षण करने की शक्ति राज्य सरकार को है यदि सरकार का यह समाधान हो जाए की सम्बद्ध सरकारी सेवक के विरूद्ध कार्यरत अवधि में घोर कदाचार का पर्याप्त सबूत है तथा उसका कार्य पूर्ण असंतोषप्रद रहा है। लेकिन इस शक्ति का प्रयोग सिर्फ संबंधित पेंशनर को उचित जवाब देने का अवसर प्रदान करने और उससे जवाब प्राप्त करने के पश्चात ही किया जाना चाहिए, पर इस शक्ति का प्रयोग प्रथम पेंशन स्वी—ति की तिथि से तीन साल के बाद नहीं की जाएगी।''

उल्लेखनीय है कि श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 1997-98) एवं (ii) तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड दिया गया है। साथ ही इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8240 दिनांक 20.06.2019 द्वारा पूर्व में अधिरोपित दंड को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5358 दिनांक 20.03.2023 द्वारा प्रतिस्थापित करते हुए (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2001-02) एवं ( ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है।

उपर्युक्त वर्णित अधिरोपित दंडों से स्पष्ट है कि श्री त्रिपाठी के विरूद्ध कार्यरत अवधि में घोर कदाचार का पर्याप्त सबूत है तथा उनका कार्यकाल पूर्ण असंतोषप्रद रहा है।

समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त विभागीय मंतव्य से सहमत होते हुए श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विाीय अनियमितता से संबंधित आरोपों को देखते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''शत-प्रतिशत (100%) पेंशन कटौती'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृा को ''शत-प्रतिशत (100%) पेंशन कटौती'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-16/2015-सा0प्र0--2418

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3 फरवरी 2023

श्री चन्द्रशेखर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 745/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास के विरूद्ध अपने उारदायित्वों का निर्वहन नहीं करने, भ्रामक एवं अस्पष्ट प्रतिवेदन प्रेषित कर उच्चाधिकारियों को भ्रमित करने तथा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4345 दिनांक 28.04.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री झा से कारण-पृच्छा का उार प्राप्त कर उसकी समीक्षा के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18304 दिनांक 13.10.2022 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं (ii) दो वर्षों से अनाधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दंड संसूचित किया गया।18 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री झा के पत्रांक 811 दिनांक 07.11.2022 द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनका कहना है कि उक्त पद पर कार्यकाल मात्र 23.02.2014 से 16.07.2014 तक रहा, जबकि धान अधिप्राप्ति का कार्य मात्र 15.04.2014 तक ही हुआ।

धान अधिप्राप्ति अवधि की समाप्ति के बाद मई, 2015 के प्रथमार्ध में निगम मुख्यालय के माध्यम से एक परिवाद-पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें निम्न गुणवाा का धान क्रय करने का आरोप लगाया गया। श्री झा द्वारा धान की गुणवाा जाँच हेतु मार्गदर्शन की मांग की गई तथा प्रबंध निदेशक के निदेशानुसार तकनीकी सहयोग हेतु एफ0सी0आई0 से लगातार पत्राचार किया गया। एफ0सी0आई0 के असहयोगात्मक रवैये की जानकारी देने पर प्रबंध निदेशक द्वारा जिला प्रबंधक, रोहतास के कार्यालय में पदस्थापित सी0एम0आर0 के गुणवाा नियंत्रक से कराने का निदेश दिया गया। तद्‌नुसार श्री झा द्वारा जाँच करायी गई तथा पत्रांक 1337 दिनांक 13.06.2014 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति भेजते हुए अग्रेतर कार्रवाई के संबंध में निदेश मांगा गया।

निगम मुख्यालय के पत्रांक 6375 दिनांक 23.06.2014 द्वारा कम गुणवाा के धान की मात्रा आकलित कर प्रतिवेदन भेजने का निदेश दिया गया, जिसके अनुपालन में निगम कार्यालय के पत्रांक 1421 दिनांक 26.06.2014 द्वारा गुणवाा नियंत्रक को प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। अचानक स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण ये दिनांक 17.07.2014 को चिकित्सा कराने अवकाश में चले गये तथा अवकाश से लौटने पर निगम मुख्यालय, पटना में अपना योगदान दिया। यहाँ से इन्हें जिला प्रबंधक, भागलपुर के पद पर पदस्थापित कर दिया गया।

श्री झा के अनुसार इनके द्वारा 05 माह के अल्प कार्यकाल में कुल 16674.27 एम0टी0 धान की अधिप्राप्ति की गई, जिसमें से इनके द्वारा कुल 7660 एम0टी0 धान का एस0आई0ओ0 मिलरों को निर्गत किया गया। अधिरोपित दंड के संबंध में इनका कहना है कि ये दिनांक 28.02.2023 को सेवानिवृा होने वाले है। अतः अधिरोपित दंड का प्रभाव दो वर्षों तक नहीं होकर जीवन पर्यन्त हो जाएगा और अधिरोपित दंड अत्यंत वृहद दंड में परिवर्तित हो जाएगा।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में केवल आरोप संख्या 02 को अंशतः प्रमाणित बताया गया। इसमें जाँच पदाधिकारी द्वारा कम गुणवाा का धान क्रय किये जाने के संबंध में जिला प्रबंधक होने के नाते इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से उारदायी माना गया है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री झा द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन में तथ्यों को देखने से पता चलता है कि धान अधिप्राप्ति की अवधि में मात्र दो महीने से भी कम दिनों तक जिला प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे तथा इस अल्पावधि में भी उन्होंने धान की गुणवाा के संबंध में आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की थी। अतः श्री झा के अपील अभ्यावेदन पर विचार करते हुए अधिरोपित एवं संसूचित उक्त दंड को अंशतः संशोधित करते हुए (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं (ii) दिनांक 27.02. 2023 तक के लिये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री चन्द्रशेखर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 745/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, रोहतास सम्प्रति बन्दोवस्त पदाधिकारी, मधेपुरा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15), (ii) दिनांक 27.02.2023 तक के लिये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधित को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-16/2022-सा0प्र0--3862

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24 फरवरी 2023

श्री चेत नारायण राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 513/19, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सदर छपरा के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 4259 दिनांक 19.09.2022 द्वारा आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोपों पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र पुनर्गठित किया गया, जिसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

श्री राय के विरूद्ध जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं के द्वारा अनुदानित, खाद्यान्न के निर्धारित दर से उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसुलने, अनाज का वितरण प्रत्येक माह न कर तीन-चार माह का खाद्यान्न का वितरण नहीं किये जाने, कम वजन में खाद्यान्न का वितरण किये जाने, आधार सीडिंग का लक्ष्य न प्राप्त करने, उठाव एवं वितरण में समरूपता नहीं पाये जाने, लक्ष्य के अनुरूप निरीक्षण नहीं किये जाने संबंधित आरोप प्रतिवेदित है।

विभागीय पत्रांक 20849 दिनांक 24.11.2022 द्वारा श्री राय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री राय के पत्रांक 26(अ0) दिनांक 13.01.2023 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें प्रतिवेदित आरोपों से इंकार किया गया है।19 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री राय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप गंभीर प्र—ति का है एवं इसके आलोक में श्री राय का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है। अतः आरोपों की वृहत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ श्री राय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे। श्री राय से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/नि0था0-11-07/2017-सा0प्र0--469

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6 जनवरी 2023

श्री देवेन्द्र कुमार दर्द (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1103/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर के विरूद्ध पुलिस अधीक्षक, निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना के ज्ञापांक 3346 दिनांक 22.11.2017 द्वारा 77,85,546/-(सत्हार लाख पचासी हजार पाँच सौ छियालिस) रूपये के आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप में निगरानी थाना कांड संख्या 082/17 दिनांक 31.10.2017 धारा-13(2)सह-पठित धारा-13(1)(ई) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज किया गया। श्री दर्द के विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16459 दिनांक 26.12.2017 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से प्राप्त पत्र एवं संचिका में उपलब्ध कागजातों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 4329 दिनांक 03.04.2018 द्वारा श्री दर्द का स्पष्टीकरण की मांग की गयी एवं स्मारित किये जाने के बावजूद श्री दर्द द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। उक्त के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2601 दिनांक 25.02.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

निगरानी न्यायालय द्वारा दिनांक 24.02.2021 को पारित आदेष एवं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5091 दिनांक 22.04.2021 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया।

मुख्य जाँच आयुक्त कार्यालय के पत्रांक 197 दिनांक 28.03.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। प्रतिवेदित आरोप के आलोक में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा असहमति व्यक्त की गयी :-

''बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(1)(क) एवं उक्त नियमावली के तहत सामान्य प्रषासन विभाग के पत्रांक 946 दिनांक 24.01.2011 द्वारा राज्य सरकार के सभी पदाधिकारी/कर्मियों को विहित प्रपत्र में चल एवं अचल सम्पाि तथा दायित्वों की विवरणी प्रत्येक वर्ष के फरवरी माह तक सार्वजनिक किये जाने का आदेष दिया गया है। उपस्थापित मामले में संचालन पदाधिकारी महोदय द्वारा आरोपी के कथन को उल्लेखित करते हुए आरोप को प्रमाणित प्रतीत नहीं होता बताया गया है। आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि वे अपना या अपनी पत्नी की सम्पत्तियों का पूर्ण विवरण 2016-17 के लिये समर्पित सम्पत्ति विवरणी में किया है और उनकी पत्नी जो सम्पाि निजी स्त्रोत एवं विरासत से अर्जित की है, उसका ब्योरा उसमें नहीं दिया गया है।

इस प्रकार श्री दर्द द्वारा वर्ष 2016-17 में अपनी पत्नी के नाम पर आय से कम सम्पाि का उल्लेख किया गया है एवं शेष सम्पाि के संबंध में उनकी निजी अर्जित सम्पाि बताया गया है। अगर श्री दर्द की पत्नी के सम्पाि का निजी स्त्रोत है तो फिर उनके सम्पाि ब्योरा में रू0 3,92,000/- की जमा राषि एवं अन्य सम्पाि दर्षाया जाना उनके गलत मंषा को दर्षाता है। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया है। उनके द्वारा केवल श्री दर्द के तर्क के आधार पर आरोप को प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है, बताया जाना तर्क संगत प्रतीत नहीं होता है।''

असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 9415 दिनांक 10.06.2022 द्वारा श्री दर्द से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री दर्द के पत्रांक-मं0स0 (उप सचिव को0)-03 दिनांक 22.06.2022 द्वारा लिखित अभिकथन समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा प्रतिवेदित आरोपों से इन्कार किया गया।

प्रतिवेदित आरोप एवं जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु पर श्री दर्द से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि -20 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 श्री दर्द के विरूद्ध मुख्यतः 77,85,546/-(सत्हार लाख पचासी हजार पाँच सौ छियालिस) रूपये के आय से अधिक सम्पत्ति का आरोप प्रतिवेदित है। उल्लेखनीय है कि श्री देवेन्द्र कुमार दर्द द्वारा वर्ष 2016-17 की उद्‌घोषित सम्पति विवरणी में अपने एवं अपने पत्नी के नाम से खरीदे गये जमीनों का पूर्ण विवरण नजायज एवं अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति को छुपाने के उद्येष्य से घोषित नहीं किये गये हैं। श्री दर्द के द्वारा अपने बचाव में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के अंतिम प्रतिवेदन को आधार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि अपराधिक कार्रवाई एवं अनुषासनिक कार्रवाई अलग-अलग मामला है एवं अपराधिक मामले के फलाफल के आधार पर अनुषासनिक कार्रवाई का निर्णय नहीं किया जा सकता है।

श्री दर्द का ये कहना कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा आय से अधिक पाया गया सम्पत्ति पत्नी के द्वारा अर्जित किया गया है एवं चुंकि उनकी पत्नी के द्वारा अर्जित की गयी सम्पत्ति वर्ष 2016-17 के पहले की थी, इसलिए उनके द्वारा 2016-17 के सम्पत्ति ब्यौरा में उसे उद्‌घोषित नहीं किया गया है। वर्ष 2016-17 में पत्नी के नाम से मात्र दो जमीन शेष बचे हुए थे, जिसका बिक्री से संबंधित निबंधन का निष्पादन नहीं की गयी, यथा मौजा रामपुर में 59 डी0 जमीन एवं गया में 16 कट्‌ठा जमीन जिसे वर्ष 2016-17 की सम्पत्ति विवरणी में दर्षाया गया है। शेष अन्य जमीन पत्नी के द्वारा अपने व्यवसायिक क्रियाकलाप के क्रम में पूर्व में ही बिक्री की जा चूकी है, ऐसी स्थिति में विक्रय की जा चुकी जमीन को सम्पत्ति विवरणी में दर्षाये जाने का कोई औचित्य नहीं है। श्री दर्द का साथ में यह भी कहना है कि बिहार सरकारी आचार नियमावली, 1976 के नियम-19 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ पत्नी के निजी स्रोत एवं विरासत से अर्जित सम्पत्ति का उल्लेख नहीं किया जाना है। श्री दर्द का यह कथन पूर्णतया विरोधाभाषी है।

यदि श्री दर्द के द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के सम्पत्ति विवरणी में पत्नी के नाम पर सम्पत्ति का पूर्ण ब्योरा अंकित किया गया है, तो उनके द्वारा अब ये कहना कि वर्ष 2016-17 के पूर्व की राषि का सम्पति ब्योरा में दर्ज नहीं किया गया है एवं साथ में उनके द्वारा आचार नियमावली का हवाला देकर पत्नी के सम्पति ब्यौरा का उनके सम्पत्ति ब्यौरा के साथ अंकित किया जाना नहीं आवष्यक है, कहना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। जब श्री दर्द के द्वारा पत्नी के नाम पर सम्पति ब्यौरा का उद्‌घोषणा किया गया है, तो उन्हें कुल सम्पत्ति का भी उद्‌घोषणा किया जाना चाहिए था। विदित हो कि बिहार आचार नियमावली, 1976 के तहत्‌ सरकारी सेवक को आस्ति एवं दायित्वों (Assets and Labilities) का पूर्ण विवरण दिया जाना अनिवार्य रूप से आवष्यक है। इसके तहत्‌ सभी सरकारी सेवक को चल एवं अचल सम्पत्ति का ब्यौरा दिया जाना है। श्री दर्द द्वारा वर्ष 2016-17 में पत्नी के द्वारा बिक्रय किये गये सम्पत्ति का ब्यौरा दिया गया तो उसके पूर्व के बिक्री से प्राप्त आय का ब्यौरा भी दिया जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट होता है कि श्री दर्द द्वारा भ्रष्ट एवं नजायज तरीके से अर्जित सम्पत्ति को छुपाने के उद्येष्य से सम्पत्ति विवरणी में पूर्ण सम्पत्ति को उद्‌घोषित नहीं किया गया है।

स्पष्टतया श्री दर्द द्वारा आय से अधिक सम्पाि के संबंध में विरोधाभाषी तथ्यों का उल्लेख किया जाना उनके गलत मंशा को दर्शाता है। श्री दर्द द्वारा बिहार आचार नियमावली, 1976 के संगत प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है, जो एक सरकारी सेवक के र्काव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारित का द्योतक है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री दर्द के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके बचाव अभ्यावेदन एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त श्री दर्द के लिखित अभिकथन को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18714 दिनांक 18.10.2022 द्वारा ''संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' की शास्ति अधिरोपित की गयी।

उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री दर्द द्वारा दिनांक 01.01.2018 से 21.04.2021 तक निलंबन अवधि को विनियमित किये जाने एवं अधिरोपित शास्ति को निरस्त किये जाने का आवेदन/पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया है। अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री दर्द के समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि अपने बचाव में उन्हीें बिन्दुओं को पुनः अंकित किया गया है, जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित किया गया था। उनका कहना है कि उनकी पत्नी प्रारंभ से ही व्यवसायिक क्रियाकलाप एवं जमीन की खरीद बिक्री से जूडी रह कर स्वतंत्र रूप से आय का स्रोत विकसित की हैं। उनका यह भी कहना है कि उनकी पत्नी Income Tax Assessee हैं। इस प्रकार श्री दर्द के द्वारा उनके विरूद्ध अधिरोपित शास्ति के आधार को तर्कहीन बताने का प्रयास किया गया है। श्री दर्द के द्वारा इन बातों का पूर्व में भी अपने बचाव बयान समर्पित किया गया है। इस प्रकार श्री दर्द के द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं अंकित किया गया है।

अनुषासनिक प्राधिकारा द्वारा श्री दर्द के समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किये जाने एवं सेवा विनियम के संबंध में निम्न निर्णय लिया गया-

(i) निलंबन अवधि दिनांक 26.12.2017 से 21.04.2021 तक में उन्हें भुगतान किये गये जीवन यापन भाा के अतिरिक्त और कोई राशि देय नहीं होगी एवं निलंबन अवधि को पेंशनादि के प्रयोजनार्थ गणना की जायेगी। (ii) विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18714 दिनांक 18.10.2022 संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक की शास्ति को पूर्वव्‌त बरकरार रखा जाय।

अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री देवेन्द्र कुमार दर्द (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1103/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर सम्प्रति उप सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करने एवं सेवा विनियम के संबंध में निम्न निर्णय लिया जाता है :-

(i) निलंबन अवधि दिनांक 26.12.2017 से 21.04.2021 तक में उन्हें भुगतान किये गये जीवन यापन भाा के अतिरिक्त और कोई राशि देय नहीं होगी एवं निलंबन अवधि को पेंशनादि के प्रयोजनार्थ गणना की जायेगी।21 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 (ii) विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18714 दिनांक 18.10.2022 संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक की शास्ति को पूर्वव्‌त बरकरार रखा जाता है।

आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-23/2017-सा0प्र0--4188

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1 मार्च 2023

श्री गोपाल प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-1155/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, कुमारखंड सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध विभिन्न कर्मियों द्वारा समर्पित अभिश्रव की जाँच नहीं करने के कारण 2.16 करोड़ राशि का डी0सी0 विपत्र लंबित रहने के आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, मधेपुरा के पत्रांक 465-2 दिनांक 05.07.2017 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) गठित कर अनुशासनिक कार्रवाई हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप है कि इनके द्वारा अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, कुमारखंड के पदस्थापन अवधि में वर्ष 2008 के दौरान आयी बाढ़ के पश्चात्‌ सहाय्‌य मद में प्राप्त राशि को बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिये प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों को अग्रिम दिये जाने के फलस्वरूप कर्मियों द्वारा राशि वितरण के पश्चात अंचल कार्यालय, कुमारखंड में अभिश्रव जमा किया गया परन्तु अभिश्रव को पारित नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गयी, जिसके कारण प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों के उपर अग्रिम लंबित रहा। उनमें से कई कर्मी सेवानिवृत्त हो गये हैं। अग्रिम लंबित रहने के कारण उन्हें सेवान्त लाभ का भुगतान नहीं किया जा सका। इस संबंध में आपदा प्रबंधन शाखा समाहरणालय, मधेपुरा द्वारा जिला पदाधिकारी, जमुई से अनुरोध के उपरांत श्री प्रसाद को दो दिनों के लिए अंचल कार्यालय कुमारखण्ड में प्रतिनियुक्त भी किया गया परन्तु उनके द्वारा अभिश्रवों की जॉंच नहीं की गयी फलतः 2.16 करोड़ राशि का डी0सी0 विपत्र लंबित रहा।

विभागीय पत्रांक 1348 दिनांक 29.01.2018 द्वारा श्री प्रसाद से प्रतिवेदित आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के संबंध में श्री प्रसाद के पत्रांक 17 दिनांक 07.04.2018 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभिन्न कर्मियों द्वारा समर्पित अभिश्रव की जाँच नहीं की जा सकी, फलतः 2.16 करोड़ राशि का डी0सी0 विपत्र लंबित रहा। श्री प्रसाद का यह —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन तथा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं अनुशासनहीनता का द्योतक है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य प्रतीत नहीं होता है। श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप की स्थिति गंभीर प्र—ति का प्रतीत होता है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के गंभीरता को देखते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की वृहद्‌ जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13607 दिनांक 01.10.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें प्रमंडलीय आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक 2959 दिनांक 15.10.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री प्रसाद के विरूद्ध लगाया गया आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित पाया गया।

विभागीय पत्रांक 20731 दिनांक 22.11.2022 द्वारा आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के लिए बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद के पत्र दिनांक 12.01.2023 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री प्रसाद का कहना है कि जाँच पदाधिकारी द्वारा तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचार किये बिना आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। उनका यह भी कहना है कि अभियोजन पक्ष के द्वारा वैसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जो आरोप को प्रमाणित करता है।

श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके बचाव अभ्यावेदन एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री प्रसाद के द्वारा वर्ष 2008 के दौरान आयी बाढ़ पीड़ितों के लिए सहाय्य मद में आवंटित राशि बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए श्री प्रसाद के द्वारा प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों को अग्रिम दिया गया तथा राशि वितरण के पश्चात्‌ विभिन्न कर्मियों के द्वारा अंचल कार्यालय, कुमारखंड में अभिश्रव भी जमा किया गया, परन्तु श्री प्रसाद द्वारा उन अभिश्रव को जमा नहीं किया गया। इनके द्वारा उन अभिश्रव को पारित नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गयी, जिसके कारण प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों के उपर अग्रिम अद्यतन समय तक लंबित रहा। उनमें से कई कर्मी सेवानिवृा हो चुके है, जिस अग्रिम लंबित रहने के कारण सेवान्त लाभ का भुगतान नहीं किया जा सका।

संचालन पदाधिकारी द्वारा भी आरोप की विस्तृत जाँच एवं अभिलेखों तथा साक्ष्यों/साक्ष्यिों के आधार पर श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। श्री प्रसाद का यह आचरण लापरवाही एवं र्काव्यहीनता का द्योतक है।22 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त स्पष्टीकरण एवं प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त प्रतिवेदित आरोप पर संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य के आलोक में उनसे प्राप्त बचाव अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2016-17), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक। अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री गोपाल प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक- 1155/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी -सह- अंचल अधिकारी, कुमारखंड सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2016-17), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 3(स0)/उ0स्था0(आरोप)-12/2022--2131

उद्योग विभाग

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संकल्प

31 मार्च 2023

श्री नरेश दास तत्कालीन परियोजना प्रबंधक-सह-प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जमुई के विरूद्ध मुख्यमंत्री उद्यमी योजनान्तर्गत जिला के लाभुकों के परियोजना स्थल का निरीक्षण के क्रम में कुल 31 स्थल निरीक्षणों में से 19 स्थल निरीक्षण में अनियमितता पायी गयी। कई लाभुकों को उनके उपयोगिता का समुचित जाँच एवं स्थल निरीक्षण किये बगैर ही अगली किश्त की राशि की स्वीकृति प्रदान की गयी है। उनके कार्यालय द्वारा संचिकाओं का संधारण भी सही ढंग से नहीं किया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना अन्तर्गत दिनांक 31.08.2022 तक जमुई जिला में लक्ष्य का तीन गुणा अर्थात्‌ 537 आवेदनों को बैंकों को अग्रसारित किया जाना था। लेकिन उक्त तिथि तक मात्र 324 आवेदन ही बैंकों का अग्रसारित किये गये। इस कारण जमुई जिला में बैंकों को अग्रसारित आवेदनों तथा स्वीकृति की उपलब्धि कम पायी गयी। उक्त आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-5872, दिनांक-16.12.2022 द्वारा श्री दास को निलम्बित किया गया तथा विभागीय संकल्प सं0-648 दिनांक-31.01.2023 द्वारा विभागीय कार्रवाई संचालित की गयी। चूंकि श्री दास दिनांक-31.03.2023 को सेवानिवृति हो रहे हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई संप्रति प्रक्रियाधीन है। अतः श्री नरेश दास तत्कालीन परियोजना प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जमुई संप्रति निलम्बित को दिनांक-31.03.2023 के अपराह्‌न से निलम्बन मुक्त किया जाता है। आदेश- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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सं0 3(स0)/उ0स्था0(आरोप)-12/2022--2223

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10 अप्रील 2023

श्री नरेश दास तत्कालीन परियोजना प्रबंधक-सह-प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जमुई के विरूद्ध मुख्यमंत्री उद्यमी योजनान्तर्गत जिला के लाभुकों के परियोजना स्थल का निरीक्षण के क्रम में कुल 31 स्थल निरीक्षणों में से 19 स्थल निरीक्षण में अनियमितता पायी गयी। कई लाभुकों को उनके उपयोगिता का समुचित जाँच एवं स्थल निरीक्षण किये बगैर ही अगली किश्त की राशि की स्वीकृति प्रदान की गयी है। उनके कार्यालय द्वारा संचिकाओं का संधारण भी सही ढंग से नहीं किया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना अन्तर्गत दिनांक 31.08.2022 तक जमुई जिला में लक्ष्य का तीन गुणा अर्थात्‌ 537 आवेदनों को बैंकों को अग्रसारित किया जाना था। लेकिन उक्त तिथि तक मात्र 324 आवेदन ही बैंकों का अग्रसारित किये गये। इस कारण जमुई जिला में बैंकों को अग्रसारित आवेदनों तथा स्वीकृति की उपलब्धि कम पायी गयी।23 (cid:464)बहार गजट, 19 अप्रील 2023 उक्त आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-5872, दिनांक-16.12.2022 द्वारा श्री दास को निलम्बित करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-648 दिनांक 31.01.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री दास दिनांक-31.03.2023 को सेवानिवृत हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।

अतः श्री नरेश दास तत्कालीन परियोजना प्रबंधक-सह-प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जमुई सम्प्रति निलम्बित के विरूद्ध वर्त्तमान में संचालित विभागीय कार्रवाई को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है। आदेश-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 5—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 April 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-04-19.16/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-04-19.16.