िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 25 श्रावण 1945 (श0) सं(cid:201)या 33 पटना, बुधवार, ———————— 16 अगस्त 2023 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-10 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---
भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।
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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 11-59 पूरक
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पूरक-क 60-642 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।
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सामान्य प्रशासन विभाग
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अधिसूचनाएं
22 जून 2023
सं0 7/शक्ति प्र0-13-02/2022 सा0प्र0 11986--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरणी के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। उक्त कार्मिकों को औरंगाबाद जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला निर्वाचन पदाधिकारी (न0)-सह-जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के पत्रांक-4511 दिनांक 08.06.2023 के संलग्न सूची मं अंकित कार्मिक। े | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 09.06.2023 | नगरपालिका आम निर्वाचन, 2023 | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | औरंगाबाद |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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7 जुलाई 2023
सं0 7/शक्ति प्र0-13-04/2022 सा0प्र0 12866--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरणी के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। उक्त कार्मिकों को मधुबनी जिला में दण्ड प्रक्रिया3 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला दण्डाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक-1909 दिनांक 26.06.2023 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 28.06.2023 के अपराह्न से 30.06. 2023 तक | ईद-उल-जोहा (बकरीद) पर्व, 2023 | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | मधुबनी |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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4 अगस्त 2023
सं0 7/शक्ति प्र0-13-04/2022 सा0प्र0 14989--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिकों को सम्मुख स्तम्भ में अंकित विवरणी के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं। उक्त कार्मिकों को मधुबनी जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।
| क्र0 स0 | कार्मिक का नाम एवं पद नाम | द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है | तिथि/ अवधि | प्रयोजन | दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) | जिला का नाम |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 1 | जिला दण्डाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक-2276 दिनांक 27.07.2023 के संलग्न सूची में अंकित कार्मिक। | द0प्र0सं0 1973 की धारा-21 | 27.07.2023 के अपराह्न से 29.07. 2023 तक | मुहर्रम त्योहार 2023 | विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी | मधुबनी |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचना
11 अगस्त 2023
सं0 कौन/भी-127/2022-208/सी॰--बिहार वित्त सेवा के पदाधिकारी श्री पूर्णेन्दु कुमार झा, राज्य कर संयुक्त आयुक्त द्वारा राज्य कर संयुक्त आयुक्त (प्रभारी), बाढ़ अंचल, बाढ़ के पदस्थापन काल में कई रिफण्ड आदेश पारित किये गये। इनके द्वारा पारित किये गये रिफण्ड आदेशों की जाँच राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पटना पूर्वी प्रमण्डल, पटना से करायी गयी। जाँच में यह पाया गया कि रिफण्ड आदेश पारित करने से पूर्व श्री झा द्वारा सभी आवश्यक बिन्दुओं एवं तथ्यों की सम्यक् एवं समुचित जाँच नहीं की गयी तथा संगत परिपत्रों की अनदेखी करते हुए अनेकों Erroneous Refund स्वीकृत किये गये।4 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 (i) राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पटना पूर्वी प्रमण्डल, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री झा द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 में Refund of ITC on export of goods and services without payment of Tax मद में सर्वश्री टूना इन्टरप्राईजेज, मोकामा, GSTIN-10JAPPK7975C1ZE एवं सर्वश्री सुरभि इन्टरप्राईजेज GSTIN- 10IQUPK2953N1Z6 को क्रमशः दिनांक-06.04.2022 को रू॰ 53,83,362.00 एवं दिनांक-30.05.2022 को रू॰ 83,98,804.00 के दो Erroneous Refund स्वीकृत किये गये। जिसके आलोक में श्री झा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण से सम्यक समीक्षोपरान्त असहमत होते हुये श्री झा के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर उनसे बचाव अभिकथन की मांग की गयी। श्री झा से प्राप्त बचाव अभिकथन को समीक्षोपरान्त अस्वीकृत करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है।
(ii) राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पटना पूर्वी प्रमण्डल, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री झा द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में Refund of ITC on export of goods and services without payment of Tax मद में M/s Maa Mansa Trading, मोकामा GSTIN-10AMHPK518IDIZI को दिनांक-02.03.2022 को रू0 42,74,375.00 एवं दिनांक-25.09.2021 को रू0 12,17,843.00 के दो Erroneous Refund स्वीकृत किया गया। इसके आलोक में श्री झा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री झा से प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक् समीक्षोपरान्त असहमत होते हुये इनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर लिखित बचाव अभिकथन की मांग की गयी है।
(iii) राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पटना पूर्वी प्रमण्डल, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री झा द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में Refund of unutilized ITC on export of goods and services without payment of Tax मद में सर्वश्री NITYA ENTERPRISES, मोकामा GSTIN 10BIVPG4585Q1ZI को दिनांक-20.10.2020 को रू॰ 51,48,000.00 के Erroneous Refund स्वीकृत किये गये। जिसके आलोक में श्री झा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री झा से प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक् समीक्षोपरान्त असहमत होते हुये पाया गया है कि श्री झा द्वारा उक्त रिफंड स्वीकृत करने के क्रम में कई स्तरो पर लापरवाही बरती गयी है। जिसके आलोक में कार्रवाई की जा रही है।
(iv) राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पटना पूर्वी प्रमण्डल, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री झा द्वारा Refund of ITC on export without payment of Tax मद में M/s Evergreen Corporation, GSTIN 10BLTPK2433G1ZC, M/s Santosh Kumar, GSTIN 10EGVPK5645G1Z6 तथा M/s Nr & Company, GSTIN 10CAEPK4040C4ZI को क्रमशः रू॰ 1,29,77,039.00 व रू॰ 72,93,436.00 व रू॰ 42,75,847. 00 के Erroneous Refund स्वीकृत किये गये। जिसके आलोक में श्री झा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री झा द्वारा रिफण्ड स्वीकृत करने के मामले में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गयी जिससे राजकीय राजस्व की एक बड़ी राशि की क्षति हुई है जो कि राजकीय राजस्व के दृष्टिकोण से एक गंभीर प्रकृति का एवं अति संवेदनशील मामला है। श्री झा का उक्त कृत्य उनके कर्त्तव्य के प्रति सत्यनिष्ठा व सजगता के अभाव तथा कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही का परिचायक है।
उपर्युक्त वर्णित स्थिति में अनुशासनिक/सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री पूर्णेन्दु कुमार झा, राज्य कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के तहत् निलंबित किये जाने का निर्णय लिया गया है।
उक्त लिये गये निर्णय के आलोक में- 1. श्री पूर्णेन्दु कुमार झा, राज्य कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के तहत् अगले आदेश तक के लिये आदेश निर्गत की तिथि से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में श्री झा का मुख्यालय राज्य कर अपर आयुक्त (प्रशासन), मगध प्रमण्डल, गया में निर्धारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री झा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के तहत् अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रूबी, संयुक्त सचिव।
------ वैशाली समाहरणालय, हाजीपुर (जिला स्थापना प्रशाखा) ------ आदेश 14 जून 2023
सं0 562--श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर द्वारा वर्ष 1993-94 में बिना अंचल अधिकारी के आदेश से मौजा जुड़ावनपुर करारी अन्तर्गत भूमि जिसका खाता नं0 964, खेसरा नं0 3001, रकवा 0.50 डी0 एवं5 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 खाता नं0 413, खेसरा नं0 3002 रकवा 0.10 डी0 का भूमि चन्द्रदीप राय पिता श्री राम भरोष राय के नाम जमाबंदी नं0 1495 कायम किये जाने के कारण उनके विरूद्ध अंचल अधिकारी, राघोपुर द्वारा गठित आरोप पत्र अनुमंडल पदाधिकारी, हाजीपुर के पत्रांक 25 दिनांक 09.01.2020 द्वारा उपलब्ध कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, हाजीपुर से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन करने हेतु इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक 249/जि0स्था0, दिनांक 31.03.2021 द्वारा उप समाहर्त्ता भूमि सुधार, हाजीपुर को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी, राघोपुर को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी-सह- उप समाहर्त्ता भूमि सुधार, हाजीपुर के पत्रांक 31 दिनांक 21.01.2022 के द्वारा श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई का संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है।
श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर के विरूद्ध गठित आरोप पत्र आरोपी कर्मी का स्पष्टीकरण उपस्थापन पदाधिकारी का मंतव्य, संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/ मंतव्य एवं द्वितीय कारणपृच्छा का जबाब निम्नवत हैः- 1. आरोप पत्र एवं आरोपी कर्मी का स्पष्टीकरणः-
| आरोप | आरोपीकर्मी का स्पष्टीकरण |
| श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी जुड़ावनपुर करारी हल्का नं0 07 मे कार्यरत थे। वर्ष 1993-94 ं में बिना अंचल अधिकारी के आदेश से मौजा जुड़ावनपुर करारी अन्तर्गत भूमि जिसका खाता नं0 964, खेसरा नं0 3001, रकवा 0.50 डी0 एवं खाता नं0 413, खेसरा नं0 3002 रकवा 0.10 डी0 का भूमि चन्द्रदीप राय पिता श्री राम भरोष राय के नाम जमाबंदी कायम किया गया है। जिसका जमाबंदी नं0 1495 है। वर्तमान हल्का राजस्व कर्मचारी के प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार अवैध है। उक्त से स्पष्ट है कि श्री ज्योतिन्द्र चौहान द्वारा बिना अंचल अधिकारी के आदेश से जमाबंदी कायम किया गया उनका आचरण बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 9(1) का उल्लंघन है। | अनुमंडल भूमि सुधार कार्यालय, हाजीपुर के पत्रांक 568 दिनांक 05.08. 2021, पत्रांक 589 दिनांक 17.08.2021, पत्रांक 623 दिनांक 28.08. 2021 से श्री ज्योतिन्द्र चौहान राजस्व कर्मचारी को उपस्थित होकर आरोप पत्र पर अपना पक्ष रखने हेतु निदेश दिया गया। श्री चौहान दिनांक 27.08.2021 एवं दिनांक 09.09.2021 को उपस्थित होकर अपने प्रत्युत्तर में अंकित किया कि वर्ष 1993-94 में जुड़ावनपुर करारी उच्च विद्यालय में लगे राजस्व शिविर में अंचल अधिकारी, राघोपुर के मौखिक निर्देश के आधार पर चन्द्रदीप राय के नाम निर्गत लगान रसीद निर्गत किया तथा लगान रसीद की छायाप्रति संलग्न किया है। |
उपस्थापन पदाधिकारी अंचल अधिकारी राघोपुर उपस्थित होकर अपने पत्रांक कैम्प 01(हाजीपुर) दिनांक 09.07.2021 द्वारा दिनांक 09.07.2021 को प्रेषित प्रपत्र 'क' के अतिरिक्त कुछ भी उल्लेखित नहीं किया गया है। 3. संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन, मंतव्य/निष्कर्ष :-
संचालन पदाधिकारी-सह-उप समाहर्त्ता, भूमि सुधार, हाजीपुर के पत्रांक 31 दिनांक 21.01.2022
के द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है। प्रतिवेदन के अनुसार उपस्थापन पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राघोपुर उपस्थित होकर अपने पत्रांक कैम्प 01 (हाजीपुर) दिनांक 09.07.2021 द्वारा दिनांक 09.07.2021 द्वारा प्रेषित प्रपत्र-क के अतिरिक्त कुछ भी उल्लेखित नहीं किया है।
गठित आरोप प्रपत्र-क के साथ संलग्न साक्ष्य के आधार पर अनुमंडल भूमि सुधार कार्यालय, हाजीपुर के पत्रांक 965 दिनांक 17.12.2021 के द्वारा जमाबंदी रद्दीकरण अभिलेख संख्या 02/2019-20 अपर समाहर्त्ता, वैशाली को श्री चौहान द्वारा कायम फर्जी जमाबंदी संख्या 1495 एवं 1580 निरस्त करने हेतु प्रेषित किया गया है।
अतः गठित आरोप के विरूद्ध श्री चौहान का प्रत्युत्तर एवं अपर समाहर्त्ता, वैशाली के न्यायालय के जमाबंदी रद्दीकरण हेतु अभिलेख का प्रेषण श्री ज्योतिन्द्र चौहान के भ्रष्ट आचरण को सत्यापित करता है एवं इनका यह आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली का उल्लंघन है। 4. आरोपी कर्मी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जबाब :-
संचालन पदाधिकारी-सह-उप समाहर्त्ता, भूमि सुधार, हाजीपुर के पत्रांक 31 दिनांक 21.01.2022 के द्वारा प्राप्त संचालन प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए जिला स्थापना प्रशाखा, वैशाली के ज्ञापांक 273/जि0स्था0, दिनांक 25.03. 2022 द्वारा आरोपी कर्मी से द्वितीय कारणपृच्छा की मांग की गयी थी। राजस्व कर्मचारी के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा दाखिल किया गया है कि - ''जुड़ावनपुर करारी में शिविर आयोजन किया गया था जिसमें लगान वसुली कार्य किया जाना था। अंचलाधिकारी, राघोपुर द्वारा मौखिक निदेशित किया गया कि जो स्वामित्व पूर्व का रसीद लेकर आता है उसी के आधार पर लगान वसूली कर लेना है। पदाधिकारी के आदेश के अनुपालन अक्षरशः मेरे द्वारा किया गया। मैंने जानबुझकर गलती नहीं किया गया हूँ यदि भवदीय के संज्ञान में मुझसे गलती हुई है तो भूल समझकर क्षमा कर देने एवं मुझ पर लगा आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाए।''6 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 5. अनुशासनिक प्राधिकार का निष्कर्ष :-
उपरोक्त विभागीय कार्यवाही में आरोपी कर्मी श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य/निष्कर्ष एवं आरोपी कर्मी का द्वितीय कारण पृच्छा का अवलोकन एवं अनुशीलन किया।
श्री चौहान द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में मूल आरोप से हटकर अन्य बातों का जिक्र किया गया है। इनके विरूद्ध आरोप है कि बिना अंचल अधिकारी के आदेश के मौजा जुड़ावनपुर करारी अन्तर्गत भूमि जिसका खाता नं0 964, खेसरा नं0 3001, रकवा 0.50 डी0 एवं खाता नं0 413, खेसरा नं0 3002 रकवा 0.10 डी0 का भूमि चन्द्रदीप राय पिता श्री राम भरोष राय के नाम जमाबंदी कायम किया गया है। जिसका जमाबंदी नं0 1495 है। जबकि द्वितीय कारण पृच्छा में लिखा गया है कि जुड़ावनपुर करारी में आयोजित शिविर में अंचल अधिकारी, राघोपुर द्वारा मौखिक निदेश दिया गया कि जो स्वामित्व पूर्व का रसीद लेकर आता है, उसी के आधार पर लगान वसूली कर लेना है। इस प्रकार आरोप के बिन्दु पर उनके द्वारा कुछ नहीं लिखा गया है। आरोप के बिन्दु पर कुछ नहीं लिखना अपने आप में आरोप को प्रमाणित करता है। अतः द्वितीय कारण पृच्छा द्वारा आरोप मुक्त करने का अनुरोध स्वीकार योग्य नहीं है।
श्री चौहान के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोप के संबंध में प्राप्त संचालन पदाधिकारी के जॉंच प्रतिवेदन एवं आरोपी कर्मी के द्वितीय कारण पृच्छा जवाब के विश्लेषण से यह समाधान हो जाता है कि श्री चौहान द्वारा कर्तव्य निर्वहन में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 की धारा- 3 के संगत प्रावधानो का उल्लंघन किया गया है जो एक सरकारी सेवक के कर्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं मनमानेपन का द्योतक है। ऐसे सरकारी कर्मी को यदि दंडित नहीं किया गया तो इसका अनुसरण अन्य कर्मी भी करने लगेंगे। अतः प्रतिवेदित आरोप की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें प्रशासनिक दृष्टिकोण से दण्डित किया जाना आवश्यक है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 केे नियम के तहत इनके विरूद्ध वृहत दण्ड अधिरोपित करने का पर्याप्त साक्ष्य एवं आधार है।
अतएव संचालन पदाधिकारी के जांॅंच प्रतिवेदन, निष्कर्ष, आरोपी राजस्व कर्मचारी के स्पष्टीकरण एवं सम्यक विचारोपरांत श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी से प्राप्त बचाव अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध लगाए गए आरोप संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन में प्रमाणित होने के आलोक मेंं मैं यशपाल मीणा भा0प्र0से0 जिला पदाधिकारी-सह-दण्डाधिकारी, वैशाली बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(IX) में निहित वृहत शास्तियों के तहत श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, राघोपुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को निष्पादित करते हुए श्री चौहान को आदेश निर्गत की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शास्ति अधिरोपित करता हॅूं। दण्ड की प्रविष्टि इनके सेवा पुस्त में की जाए।
श्री ज्योतिन्द्र चौहान, राजस्व कर्मचारी से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार हैः- नाम- श्री ज्योतिन्द्र चौहान पिता- सूर्य नारायण सिंह पदनाम- राजस्व कर्मचारी जन्म तिथि- 29.05.1964 नियुक्ति की तिथि- 17.01.1987 वेतनमान- 5200-20200 स्थायी पता- ग्राम-मउ, पो0-मउ, थाना-विद्यापतिनगर,
जिला समस्तीपुर
आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी।
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14 जून 2023
सं0 564--श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, पातेपुर द्वारा राजस्व कर्मचारी के पद पर रहते हुए अवैध रूप से अपनी बीबी शाहीना खातुन, ग्राम-विशंभरपुर एलोथ, थाना- मुसरीघरारी, जिला-समस्तीपुर के नाम से ग्राम-झील बरैला, खाता संख्या- 336, खेसरा संख्या 823 रकवा 83.32 एकड़ जमाबंदी रैयत गैर मजरूआ, बिहार सरकार की भूमि का जमाबंदी कायम करने एवं राजस्व कर्मचारी के पद पर रहते हुए अपने पद का दुरूपयोग करने एवं सरकार को धोखा देने के कारण उनके विरूद्ध अंचल अधिकारी, पातेपुर द्वारा गठित आरोप पत्र अनुमंडल पदाधिकारी, महुआ के पत्रांक 742 दिनांक 29.08.2017 द्वारा उपलब्ध कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, महुआ से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, पातेपुर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन करने हेतु इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक 825/जि0स्था0, दिनांक 31.07.2017 द्वारा उप समाहर्त्ता भूमि सुधार, महुआ को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी, पातेपुर को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। पुनः इनके विरूद्ध गठित आरोप की गंभीरता को देखते हुए इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक 1117 दिनांक 03.10.2017 द्वारा इन्हें निलंबित कर दिया गया।
विभागीय कार्यवाही संचालनोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ के द्वारा पत्रांक 130 दिनांक 12.03.2018 से संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें इनके विरूद्ध प्रपत्र-क में लगाये गये आरोप प्रमाणित पाये गये। श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, पातेपुर के विरूद्ध गठित आरोप पत्र आरोपी कर्मी का स्पष्टीकरण उपस्थापन पदाधिकारी का मंतव्य, संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मंतव्य एवं द्वितीय कारणपृच्छा का जबाब निम्नवत हैः-7 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023
| आरोप | आरोपीकर्मी का स्पष्टीकरण |
| राजस्व कर्मचारी के पद पर रहते हुए अवैध रूप से अपनी बीबी शाहीना खातुन, ग्राम- विशंभरपुर एलोथ, थाना- मुसरीघरारी, जिला-समस्तीपुर के नाम से ग्राम-झील बरैला, खाता संख्या- 336, खेसरा संख्या 823 रकवा 83.32 एकड़ जमाबंदी रैयत गैर मजरूआ, बिहार सरकार की भूमि जमाबंदी कायम कर दिया। राजस्व कर्मचारी के पद पर रहते हुए अपने पद का दुरूपयोग किया और सरकार को धोखा दिया, जिसके लिए दोषी है। | ➢ श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, पातेपुर का कहना है कि मुझ पर लगाये गये आरोप की ''मैंने अवैध रूप से अपनी बीबी शाहीना खातुन, ग्राम- विशंभरपुर एलोथ, थाना-मुसरीघरारी, जिला-समस्तीपुर के नाम से ग्राम-झील बरैला, खाता संख्या-336, खेसरा संख्या 823, रकवा 83.32 एकड़ जमाबंदी रैयत गैरमजरूआ, बिहार सरकार की भूमि जमाबंदी कायम कर दिया है'' सरासर वेबुनियाद एवं गलत है वैसे किसी प्रकार जमाबंदी मैंने अपनी पत्नी के नाम से न तो किया हूँ और न करने की आवश्यकता मुझे है। ➢ अंचल अधिकारी, पातेपुर के पत्रांक 821 दिनांक 22.08.2016 एवं पत्रांक 708 दिनांक 01.09.2016 से भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ को मुझे तंग एवं तबाह करने की नियत पत्र निर्गत किया गया। जिसके संदर्भ में मैंने श्रीमान् को दिनांक 05.09.2016 को एक लिखित आवेदन देकर आरोप को बेबुनियाद घोषित किया था, जिस पर भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ द्वारा सुनवाई करते हुए अंचल अधिकारी द्वारा लगाये गये सभी आरोप से मुक्त कर दिया गया। ➢ अंचल अधिकारी, पातेपुर ने निजी स्वार्थ साधने वास्ते माह जून 2016 से वेतन का भुगतान एल0पी0सी0 एवं सेवापुस्त के अभाव में भुगतान नहीं किया। जिसके वजह से मैं सपरिवार भुखों मरने को मजबुर हूँ। इस संदर्भ मे मैंने अपर समाहर्त्ता, ं वैशाली एवं जिला पदाधिकारी, वैशाली को एक आवेदन दिया कि किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने पर मैंने माननीय उच्च न्यायालय, पटना मे ं सिविल याचिका टाईटल संख्या 74136/2017 अधिवक्ता श्री मुकेश कुमार सिंह के माध्यम से दाखिल किया है। जिसकी छायाप्रति संलग्न है। ➢ श्री शाह मोहम्मद का पूरक पक्ष - अंचल पातेपुर अन्तर्गत हल्का संख्या 05 का प्रभार मैंने दिनांक 06.06.2014 को ग्रहण किया था। दिनांक 26.06.2016 को खाता संख्या 336, खेसरा संख्या 823 एवं रकवा 83.32 एकड़ भूमि की रसीद पर मेरा हस्ताक्षर है। इस रसीद पर सिर्फ शाहीना खातुन महिला का नाम दर्ज है एवं रसीद पर कथित पूरी लिखावट किसी अन्य व्यक्ति की है। ➢ श्री मोहम्मद का कहना है कि दिनांक 26.06.2016 को उनके कार्यालय कक्ष में शाहीना खातुन नाम की एक महिला खाता संख्या 336, खेसरा संख्या 823 एवं रकवा 83.32 एकड़ भूमि से संबंधित कागजात देते हुए रसीद काटने को कही। मै ने ं रसीद काटने से इनकार कर दिया तत्पश्चात वो चली गई। कुछ देर बाद मुझे अंचल अधिकारी, पातेपुर के द्वारा सूचना के माध्यम से रसीद बुक लेकर बुलाया गया। मैंने आदेेश का अनुपालन करते हुए कार्यालय मे श्रीमान् के समक्ष पहुँचा तो ं उक्त महिला कार्यालय में बैठी हई थी। अंचलाधिकारी ने मुझसे उस महिला का रसीद नहीं काटने की वजह पूछा तो मै ने का कि इनके पास मूल रसीद नहीं है, ं रसीद की छायाप्रति अस्पष्ट है, इसलिए उनके द्वारा रसीद नहीं काटा गया। इसके बाद अंचलाधिकारी द्वारा मुझे डांटते हुए उक्त खाता, खेसरा एवं रकवा की भूमि का रसीद काटने का आदेश दिया गया। मैंने कहा कि मैं इस रसीद पर हस्ताक्षर कर देता हूँ। आप लगान शुल्क भरते हुए खाता, खेसरा एवं रकवा लिख दिजिए। महोदय के बगल मैं बैठे व्यक्ति से रसीद भरवाने के उपरान्त मुझे हस्ताक्षर करने को बोला तो वरीय पदाधिकारी का आदेश के प्रति विवश होकर मैंने हस्ताक्षर कर दिया एवं सोचा कि लगान का पैसा सरकार के ट्रेजरी में ही जाएगा और इससे सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा। ➢ इनका आगे कहना है कि मेरी पत्नी शाहीना खातुन का जन्म तिथि 05.01.1978 है तथा जिस शाहीना खातुन का रसीद काटा गया है उसकी प्रविष्टी रजिस्टर-II (द्वितीय) में भी 1978 ही अंकित है एवं इस प्रविष्टी की लिखावट मेरी नहीं है। इस तथ्य की जाँच एवं रसीद पर मेरे हस्ताक्षर को छोड़कर अन्य की जाँच FSL से कराने की कृपा की जाए। मैं इस बात से पूर्णतः वाकिफ हूं कि लगान रसीद कट जाने से स्वत्व (Title) स्थानान्तरित नहीं होता है राज्य सरकार को लगान रसीद कट जाने से किसी भी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। ➢ श्रीमान् अंचलाधिकारी, पातेपुर से मेरा पूर्व से विवाद चल रहा था, उनके विरूद्ध मैंने समाहर्त्ता, वैशाली को 08 आवेदन दे चुका हूँ। साथ ही अंचलाधिकारी ने भी |
| मेरे विरूद्ध इस विवाद के पूर्व में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ को पत्र दिया है लेकिन उनके द्वारा मेरे पत्र के आलोक में जबाब दिया गया है। संबंधित विवाद अंचलाधिकारी द्वारा मेरे विरूद्ध रची गई साजिश है। मैंने अपनी पत्नी शाहीना खातुन के नाम से कोई भी लगान रसीद नहीं काटा है न अपने पद का दुरूपयोग किया है। श्री मोहम्मद ने दावा किया है कि अंचलाधिकारी, पातेपुर ने पूर्व से चल रहे विवादों के कारण एक अपराधिक षडयंत्र रचकर एवं दबाब देकर लगान रसीद पर हस्ताक्षर कराया एवं मेरे पद का दुरूपयोग करने के आशय से एक सोची समझी साजिश के तहत आरोप गठित किये है। |
अंचल अधिकारी-सह-उपस्थापन पदाधिकारी, पातेपुर का कहना है कि श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी अंचल पातेपुर में पदस्थापित अवधि में हल्का संख्या 05 में प्रतिनियुक्त थे। उक्त अवधि में उनके द्वारा गलत ढंग से सरकारी भूमि हड़पने हेतु छद्मपूर्ण अपने पत्नी शाहीना खातुन, पति शाह मोहम्मद के नाम से कायम कर लगान रसीद निर्गत किया गया है। मो0 शाह मोहम्म्द द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण मनगढ़न्त एवं भ्रामक है। इसलिए उनपर सख्त कार्रवाई करने की अनुशंसा की जाती है। 3. संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन, मंतव्य/निष्कर्ष :-
श्री शाह मोहम्मद के स्पष्टीकरण एवं अंचल अधिकारी, पातेपुर के द्वारा प्राप्त मंतव्य एवं साक्ष्य के द्वारा आरोपित कर्मी पर अपनी पत्नी के नाम से सरकारी भूमि का रसीद निर्गत करना प्रमाणित होता है। 4. आरोपी कर्मी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जबाब :-
संचालन पदाधिकारी-सह-भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ के पत्रांक 130 दिनांक 12.03.2018 के द्वारा प्राप्त संचालन प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए जिला स्थापना प्रशाखा, वैशाली के ज्ञापांक 242 दिनांक 15.03.2022 के द्वारा आरोपी कर्मी से द्वितीय कारणपृच्छा की मांग की गयी। उनके द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा का जबाब दिया गया कि- मैं दिनांक 02.07.2016 को पातेपुर अंचल से स्थानान्तरण के पश्चात विरमित होकर 06.07.2016 को महुआ अंचल में अपना योगदान दिया। योगदान देने के पश्चात मैं पातेपुर अंचल कार्यालय में श्री अभय कुमार सिंह वो सुभाष कुमार को दिनांक 19.07.2016 को अपना प्रभार देते हुए हल्का की वसूली को अंचल नजारत में जमा कर दोनों कर्मचारी के द्वारा यह वर्णित बातें की गयी कि मेरे जिम्मे कार्यालय संबंधित कोई कागजात वो राशि बाकी नहीं है साथ ही साथ अंचल निरीक्षक द्वारा भी यह वर्णित किया गया कि मेरे उपस्थिति में मेरे द्वारा भू-राजस्व कर्मचारी को प्रभार की राशि सौंपा गया है एवं अंचल नाजिर द्वारा भी वर्णित किया गया कि मेरे द्वारा वसूल की गयी राशि का सम्पूर्ण भाग अंचल नजारत में जमा किया जा चुका है।
श्रीमा्न विदित हो कि तात्कालिक अंचलाधिकारी श्री पंकज कुमार से जब मैं स्थानान्तरण पश्चात अपना एल0पी0सी0 की मांग किया तो अंचल अधिकारी द्वारा पहले तो कई महिने तक आज कल बहाना बनाकर टहलाया गया। जब मैं आजिज आकर उनसे दो टुक बात करना चाहा तो उनके द्वारा मुझे खुले रूप से एल0पी0सी0 देने के बदले मो0 40000.00 रूपये घुस के रूप में मांग किया गया। जब मैं अपना पक्ष रखते हुए उनसे यह बोला कि मैंने पातेपुर अंचल में कही कोई नाजायज काम से नाजायज उगाही नहीं किया है इसलिए श्रीमान् द्वारा मेरी ईमानदारी का पारितोषित इस रूप में दिया जा रहा है, मेरे इस बात पर श्री पंकज कुमार द्वारा अपने प्रकोष्ठ में मुझे खुलेआम यह धमकी दी गई कि पैसा दो तो काम होगा नहीं तो जहाँ जाना है जाओ। मैं अपने जीवन भर के मेहनत के बदले मिले इस तरह के व्यवहार से काफी मायुस हो गया तो श्रीमान् को लगभग 8-9 आवेदन समर्पित करते हुए श्री पंकज कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत प्रस्तुत किया जिस पर क्रमशः जब विभागीय जांच पड़ताल शुरू हुई तो श्री पंकज कुमार द्वारा खीज कर मुझे फंसाने के उद्धेश्य से पहले विभिन्न नौ लोगों को बिना कोई वरीय पदाधिकारी के निदेश प्राप्ति के जमाबन्दी कायम करने का आरोप लगाया गया और जब मैं श्री कुमार के उन आरोपों का खण्डन करते हुए श्रीमान् अपर समाहर्त्ता महोदय के न्यायालय में वाद संख्या 01/17-18 के तहत निर्दोष साबित हो गया तो पुनः अपनी गलत मंसुबे के तहत श्री कुमार द्वारा मुझ पर पातेपुर में कार्यरत रहते हुए पातेपुर अंचल अन्तर्गत राजस्व ग्राम झील बरैला में खाता संख्या 336 खेसरा 823 रकवा 83.32 एकड़ भूमि जो गैरमजरूआ बिहार सरकार की भूमि है को अपनी पत्नी शाहीना खातुन के नाम गैरकानूनी ढंग से दर्ज करवाने का आरोप लगाते हुए अपने वरीय पदाधिकारी श्रीमान् भूमि सुधार उप समाहर्त्ता को प्रेषित किये जिस पर श्रीमान् भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ द्वारा अपने ज्ञापांक 708 दिनांक 01.09.2016 द्वारा मुझसे कारणपृच्छा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण की मांग की गयी जिसका मैं पूर्ण विवरणी एवं अपने द्वारा जमाबंदी कायम नहीं करने की बात को लिखित रूप से श्रीमान् भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, महुआ को समर्पित किया।
श्रीमान् मैं अपने इस स्पष्टीकरण में मालगुजारी पंजी-2 की अंचलाधिकारी द्वारा सत्यापित छायाप्रति श्रीमान् को समर्पित कर रहा हूँ जिसके अवलोकन से यह साफ स्पष्ट है कि जमाबंदी संख्या 464 से 1225 तक की सम्पूर्ण जमाबंदी सिलींग द्वारा अर्जित कर भूहदबंदी कर विभिन्न भूमिहीन रैयतों के बीच वितरित किया गया है जिसका वाद संख्या 01/76-77 है तथा जमाबंदी संख्या 971 जो शोभित राम पे0 रामेश्वर राम सा0 तिसिऔता के नाम दर्ज है तथा साक्ष्य से छेड़छाड़ करते हुए तत्कालिन अंचलाधिकारी द्वारा जमाबंदी सं0 971 मेरी पत्नी के नाम दर्ज बताया गया है जो सरासर नाजायज वो गैर कानूनी है।
अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि उपरोक्त वर्णित कथनों तथा स्पष्टीकरण के साथ समर्पित कागजी सबुतों को अपने संज्ञान में लेकर मुझे कारण पृच्छा नोटिस में वर्णित आरोपों से मुक्त करने की कृपा किया जाये।9 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 5. अनुशासनिक प्राधिकार का निष्कर्ष :-
उपरोक्त विभागीय कार्यवाही में आरोपी कर्मी श्री शाह मोहम्मद, निलंबित राजस्व कर्मचारी, तत्कालीन अंचल कार्यालय, पातेपुर वर्तमान अंचल कार्यालय, महुआ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य/निष्कर्ष एवं आरोपी कर्मी का द्वितीय कारण पृच्छा का अवलोकन एवं परिशीलन किया। श्री शाह मोहम्मद द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में मूल आरोप से हटकर अन्य बातों का जिक्र किया गया है, जैसे उनके द्वारा आरोप लगाया गया है कि अंतिम वेतन प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में अंचल अधिकारी द्वारा 40,000.00 रूपये की मांग की गयी। यदि ऐसा था तो इसकी सूचना भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता को देना चाहिए था, परन्तु ऐसी सूचना देने का कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। इस प्रकार की बेबुनियाद बातों का उल्लेख कर सिर्फ मुद्दे को भटकाने की कोशीश किये है। जमाबदी पंजी की जो छायाप्रति संलग्न किये है वो संदेहास्पद है क्योंकि होल्डिंग संख्या पर ओवरराईटिंग है। ऐसा लगता है कि होल्डिंग संख्या 871 को 971 उनके द्वारा बनाया गया है। अतः इनका द्वितीय कारण पृच्छा स्वीकार योग्य नहीं है। श्री शाह मोहम्मद के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोप के संबंध में प्राप्त उपस्थापन पदाधिकारी, संचालन पदाधिकारी के जॉंच प्रतिवेदन एवं आरोपी कर्मी के द्वितीय कारण पृच्छा जवाब के विश्लेषण से यह समाधान हो जाता है कि श्री शाह मोहम्मद द्वारा कर्तव्य निर्वहन में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 की धारा- 3 के संगत प्रावधानो का उल्लंघन किया गया है जो एक सरकारी सेवक के कर्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं मनमानेपन का द्योतक है। अतः प्रतिवेदित आरोप की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें प्रशासनिक दृष्टिकोण से दण्डित किया जाना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार की गलती किसी अन्य कर्मी द्वारा नहीं किया जा सके। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 केे नियम के तहत इनके विरूद्ध वृहत दण्ड अधिरोपित करने का पर्याप्त साक्ष्य/आधार है।
अतएव संचालन पदाधिकारी के जांॅंच प्रतिवेदन, निष्कर्ष, आरोपी राजस्व कर्मचारी के स्पष्टीकरण पर सम्यक विचारोपरांत श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी से प्राप्त बचाव अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध लगाए गए आरोप, संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन में प्रमाणित होने के आलोक मेंं मैं यशपाल मीणा भा0प्र0से0 जिला पदाधिकारी-सह-दण्डाधिकारी, वैशाली बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(IX) में निहित वृहत शास्तियों के तहत श्री शाह मोहम्मद, निलंबित राजस्व कर्मचारी, तत्कालीन अंचल कार्यालय, पातेपुर वर्तमान पदस्थापन अंचल कार्यालय, महुआ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को निष्पादित करते हुए श्री शाह मोहम्मद को आदेश निर्गत की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शास्ति अधिरोपित करता हॅूं। दण्ड की प्रविष्टि इनके सेवा पुस्त में की जाए।
श्री शाह मोहम्मद, राजस्व कर्मचारी से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार हैः- 8. नाम- श्री शाह मोहम्मद 9. पिता- स्व0 मोहम्मद सुबहान 10. पदनाम- राजस्व कर्मचारी 11. जन्म तिथि- 05.01.1965 12. नियुक्ति की तिथि- 18.02.1987 13. वेतनमान- 5200-20200 14. स्थायी पता- ग्रामपो0-विशम्भरपुर एलौथ,
जिला समस्तीपुर
आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी।
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वित्त विभाग
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अधिसूचना
11 अगस्त 2023
सं0 1/स्था॰(ले॰से॰)-04/2021-7094/वि॰--बिहार वित्तीय प्रशासन सेवा के निम्नांकित 02 (दो) पदाधिकारियों
| क्र | पदाधिकारी का नाम/पदनाम/पदस्थापन स्थान | मेधा क्रमांक | सेवा संपुष्टि की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1. | श्री चितरंजन प्रभाकर, सहायक कोषागार पदाधिकारी, शिवहर। | 154 | 14.09.2022 |
| 2. | श्री पुनीत कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सुपौल। | 193 | 21.02.2021 |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मृणायक दास, उप-सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 22—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
11 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द । ————— सूचना -------
सं0 940--मैं प्रभात कुमार, पिता-स्व0 मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह, ग्राम-बड़हिया वाहा पर पो0-जलालपुर पंचायत- जलालपुर नौरंगा, थाना बड़हिया, जिला पटना, बिहार शपथ पत्र संख्या-05 दिनांक 02/06/23 द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि मेरे पुत्र आदित्य आकाश के शैक्षणिक प्रमाण पत्र में मेरा नाम भूलवश प्रभात सिंह दर्ज हो गया है जो गलत है मेरा सही नाम प्रभात कुमार है। भविष्य में सभी कार्यो हेतु मैं प्रभात कुमार के नाम से ही जाना एवं पहचाना जाउंगा।
प्रभात कुमार।
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No. 941--I, Vipin Kumar S/o Satyanarayan Singh, R/o Sharma Niwas Near Jakkanpur Chowki Purandarpur, Patna Bihar 800001 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No- 239/03-07-2023 that my name is written in my son's Tejaswi Kumar CBSE class 10tn all educational documents and BSEB class 12th all educational documents as Bipin Sharma which is Wrong As per my Aadhar No-8832 9169 2592 My Correct Name is Vipin Kumar and from now, I will be known as Vipin Kumar for All Future Purposes.
Vipin Kumar.
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No. 942-- I, Pramod Kumar S/o Bhuneshwar Singh, R/o Bagodar Nawada, Hisua, Bihar 805103 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No- 240 dt.03-07-2023 that my name is written in my son's Jayant Kumar CBSE class 10tn all educational documents as Pramod Singh, which is Wrong As per my Aadhar No-2616 5212 0362 the Correct Name is Pramod Kumar and from now, I will be known as Pramod Kumar for All Future Purposes.
Pramod Kumar.
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No. 943-- I, DIPTI D/o UPENDRA SAHU R/o Flat no. 101, Om Nilay Apartment, Khaitan Gali, Behind Petrol Pump, West Boring Canal Road, Patna-1 declare Vide Affidavit No.- 215, Dt.-04/07/2023. That now onwards I shall be known as DIPTI ARYA for all future purposes.
DIPTI.
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सं0 956--मैं मो0 इमरान शेक पिता अब्दुल हक मुहल्ला टिकरी रोड, वार्ड सं0-14, औरंगाबाद, पो0+थाना+जिला-औरगांबाद (बिहार) सत्य एवं निष्ठा के साथ व्यान करता हूँ यह कि मैं उपरोक्त पते का स्थायी निवासी हूँ यह कि मेरा आधार कार्ड संख्या 8919 0005 1084 में मेरा नाम मो0 इमरान शेख MD IMRAN SAIHKH अंकित है जो सरनेम गलत है यह कि मेरा सही नाम मो0 इमरान शेक MD IMRAN SHEK है यह कि मैं अपना आधार कार्ड में नाम MD IMRAN SHEK सुधार करने हेतु उक्त आषय का शपथ पत्र दे रहा हूँ। एफडिविट नंबर- 5423 दिनांक 24/04/2023.
मो0 इमरान शेक।12 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 No. 957--I, Madhumita Verma, D/o Janardan Prasad, W/o- Kishor Kumar, R/o Village + P.O.–Usari, P.S.-Baikunthpur, Dist.-Gopalganj, Bihar–841409, Present Address-C/o srimati Asha Devi, East Indra Nagar, Road No.-5, P.O.-Lohiya nagar, P.S.-Kankarbagh, Patna-800020 vide Affidavit No.-176, dated-16.06.23 shall be known as Madhumita Kumari for all future purposes. Madhumita Verma.
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No. 958--I ANUGYA D/o Kameshwar Prasad Srivastava, R/o-A/98, Road No.-07, Kali Mandir Road, Sanjay Gandhi Nagar, Patna-800026 by declare vide affidavit no. 1441 dated 25.05.23 that I am adding surname SRIVASTAVA in my name. Hence I shall be known as Anugya Srivastava instead of Anugya for all purposes.
ANUGYA.
------- बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद विद्यापति मार्ग, पटना-800001 ------ अधिसूचनाएं 30 जून 2022
सं0 1157--सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है, कि श्री श्रृंगी ऋषि धाम मंदिर, ग्राम-बुधौली वनकर (मननपुर) थाना-कजरा, जिला-लखीसराय पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी नि0 सं0-4083 है। इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1950, दिनांक-01.10.2016 द्वारा एक न्यास समिति का गठन अनुमण्डल पदाधिकारी, लखीसराय की अध्यक्षता में 05 वर्ष के लिये किया गया था। न्यास समिति द्वारा मंदिर के श्रीणोद्वार तथा एक महिला कुण्ड निर्माण हेतु 05 लाख रूपयें का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त कराया था, जिसमें 2.5 लाख रूपयें का भुगतान पर्षद द्वारा वर्ष 2017 में किया गया है। न्यास समिति के गठन से अबतक न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का आय-व्यय विवरण पर्षद शुल्क आदि दाखिल नहीं की गयी। पर्षद द्वारा पत्र लिखे जाने पर समिति द्वारा यह जबाब दिया जाता रहा है, कि वह नक्सली बहुल क्षेत्र है, और वहाँ के लोकल व्यक्ति सभी प्रकार की राषि बसूल लेते है, इस बिन्दु पर भी प्रषासन को कई बार पत्र लिखा गया, परन्तु प्रषासन द्वारा भी कोई सहयोग नहीं प्राप्त हुआ हैं, जिस कारण न्यास समिति को किसी भी प्रकार की कोई आय नहीं होती है। समय-समय पर पर्षद द्वारा भी स्थानीय प्रषासन को पत्र दिया जाता रहा है। न्यास समिति के सचिव एवं कोषाध्यक्ष के विरूद्ध भी स्थानीय लोगों द्वारा पर्षद में आवेदन दिया गया एवं नई न्यास समिति गठन करने का आग्रह किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा दिनांक- 02.03.2021 को एक रिपोर्ट दिया गया जिसमें उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में बैंक खाता में 4,400/- रूपयें है। कुण्ड के निमार्ण का प्राक्कलन भेजा गया जिसमें 02 लाख 61 हजार स0 मापी पुस्तिका के आधार पर बताया जाता है, परन्तु उस पर कनीय अभियंता का हस्ताक्षर नहीं है। दिनांक-18.05.2022 को सभी बिन्दुओं पर पर्षद द्वारा उभय पक्ष को सुना गया जिससें स्पष्ट होता है, कि न्यास समिति अपना कार्य करने में असफल रही है। नई समिति गठन हेतु अनुमंडल पदाधिकारी से नामों का प्रस्ताव मांगा गया, जिसके आलोक में उनके द्वारा पत्रांक- 183, दिनांक 03.03.2022 द्वारा नामों का प्रस्ताव चरित्र सत्यापन कराने के पश्चात भेजा गया है। चूंकि पूर्व गठित न्यास समिति का कार्य-काल भी समाप्त हो चुका है, और वह समिति कार्य करने में पूर्ण रूप से असफल रही है। अतः ऐसी परिस्थिति में दिनांक- 18.05.2022 को पर्षद द्वारा यह निर्णय लिया गया कि अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाय समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विस्तार किया जायेगा।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्रृंगी ऋषि धाम मंदिर, ग्राम- बुधौली वनकर (मननपुर) थाना- कजरा, जिला- लखीसराय''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्रृंगी ऋषि धाम मंदिर, ग्राम- बुधौली वनकर (मननपुर) थाना- कजरा, जिला- लखीसराय'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्रृंगी ऋषि धाम मंदिर, ग्राम- बुधौली वनकर (मननपुर) थाना-कजरा, जिला- लखीसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।13 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, लखीसराय - अध्यक्ष 2. श्री महावीर कोड़ा, पिता-मंगल कोड़ा, सा0-घोघरघाटी बुधोली बनकर - उपाध्यक्ष 3. श्री महेष्वर मंडल, पिता-तीलो मंडल, सा0-षिवडिह, कजरा - उपाध्यक्ष 4. श्री सुबोध कुमार, पिता-कार्यानन्द सिंह, सा0-नर्रात्तमपुर - सचिव 5. श्री रोहित दास, पिता-गणेष दास, सा0-बिक्रमपुर,कजरा - कोषाध्यक्ष 6. श्री संजीव कुमार, पिता-राजेष्वर मंडल, सा0-षिवडीह,पो0थाना-कजरा - सदस्य 7. श्री लुटन महतों, पिता-सरयुग महतों, सा0- माधोपुर, कजरा - सदस्य 8. श्री सुरेष यादव, पिता-लुखी यादव, सा0- चम्पानगर लई - सदस्य 9. श्री मुनेष्वर कोड़ा, पिता-उगन कोड़ा, सा0-श्री किषुन कोडासी - सदस्य 10. श्री मनोज कोड़ा, पिता-कार्तिक कोड़ा, सा0- श्री किषुन कोडासी - सदस्य 11. श्री गणेष सोरेन, पिता-सीताराम सोरेन, सा0- काषिटोला, कोरासी - सदस्य सभी पो0थाना- कजरा, जिला लखीसराय। उपरोक्त वर्णित अस्थायी न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विस्तार किया जायेगा।
यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित कर कार्रवाई की जायेगी तथा मन्दिर की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में मन्दिर के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्रृंगी ऋषि धाम मंदिर, ग्राम-बुधौली वनकर (मननपुर) थाना-कजरा, जिला-लखीसराय'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।14 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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30 जून 2022
सं0 1159--सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है, कि माँ जलप्पा मंदिर, ग्राम- रामसीर, सिंह चक, थाना- चानन, जिला-लखीसराय पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी नि0 सं0-4211 है।
रामसीर पहाड़ी स्थित उक्त स्थल जिले के ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। मंदिर में काले पत्थर की अष्टभूजी महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति स्थापित है। 2014 में न्यास समिति गठन हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी को पत्र लिखा गया, परन्तु कोई प्रत्योत्तर प्राप्त नहीं हुआ। ग्रामीणों एवं मुखिया श्रीमती रीता कुमारी द्वारा एक आवेदन-पत्र के माध्यम से सूचना दी गयी कि उक्त स्थल पर सप्ताह में दो दिन 05 से 10 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। यहाँ सभी श्रोतो से लगभग 10 लाख रूपयें प्रतिवर्ष आय है, परन्तु साफ-सफाई रख-रखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। तथा प्रार्थना किया कि पर्षद द्वारा समिति का गठन किया जाय। माननीय विधि मंत्री के कार्यालय से भी उपरोक्त तरह का पत्र दिसम्बर 2021 में प्राप्त हुआ, जिसके आलोक में जिला पदाधिकारी, लखीसराय एवं मुखिया से भी बैठक कर 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। जिस आलोक में मुखिया द्वारा अपने पत्र दिनांक- 04.02.2022 जो दिनांक 10.02.2022 को पर्षद में प्राप्त कराया गया, के द्वारा न्यास समिति गठन हेतु 11 व्यक्तियों का प्रस्ताव बैठक के कार्यवृत की छायाप्रति के साथ दिया गया। श्री राकेष कुमार द्वारा भी पर्षद में उपस्थित होकर प्रार्थना पत्र दिया गया एवं बताया गया कि मंदिर के पुजारी सह सेवायत प्रार्थी के पिता-गोपाल शुक्ल है, तथा निवेदन किया कि प्रार्थी को भी समिति में रखा जाए। ग्रामीणों द्वारा प्राप्त प्रस्ताव अपर समाहर्त्ता, राजस्व को भेजकर उनसें मंतव्य पर्षद के पत्र दिनांक- 04.04.2022 द्वारा माँगा गया, जो अप्राप्त है। दिनांक- 19.05.2022 को पर्षद में उपस्थित होकर श्री राकेष कुमार द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसमें 06 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास, समिति में शामिल करने हेतु दिया गया। दिनांक- 19.05.2022 को दोनों सूची एवं मंदिर संबंधी सभी तथ्यों पर पर्षद द्वारा विचार किया गया। उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुऐ उक्त मंदिर के विकास तथा उसकी सुव्यवस्था हेतु चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने या अधिकतम 01 वर्ष तक के लिये अस्थायी रूप से एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय दिनांक- 19.05.2022 लिया गया। उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए '' माँ जलप्पा मंदिर, ग्राम-रामसीर, सिंह चक, थाना-चानन, जिला-लखीसराय''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' माँ जलप्पा मंदिर, ग्राम- रामसीर, सिंह चक, थाना- चानन, जिला-लखीसराय'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' माँ जलप्पा मंदिर, ग्राम- रामसीर, सिंह चक, थाना- चानन, जिला-लखीसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।15 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्रीमती रीता कुमारी, ग्रामपो0-सिंहचक, - अध्यक्ष। 2. श्री राकेष कुमार, पिता-श्री गोपाल शुक्ल, ग्राम-रामसीर - उपाध्यक्ष। 3. श्री नरेष सिंह, पिता-श्री विन्देष्वरी सिंह, ग्रामपो0-तिलकपुर, - सचिव। 4. श्री प्रमोद कुमार उर्फ अरविन्द, ग्राम-रामसीर, सिंहचक, - सह-सचिव। 5. श्री कृष्णानंद सिंह, ,, ,, - कोषाध्यक्ष। 6. श्री हरिषचन्द्र यादव ,, ,, - सदस्य। 7. श्री शषिकान्त सिंह ,, ,, - सदस्य। 8. श्री किषोरी यादव ,, ,, - सदस्य। 9. श्री बीरेन्द्र पासवान, पिता-श्री गुलाबी पासवान ,, ,, - सदस्य। 10. श्री कमलेष्वर यादव ,, ,, - सदस्य। 11. श्री देवनन्दन यादव ,, ,, - सदस्य। सभी थाना-चानन, जिला-लखीसराय। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अधिकतम 01 वर्ष या चरित्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने तक ही प्रभावी रहेगा।
यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष यदि किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित कर कार्रवाई की जायेगी तथा मन्दिर की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में मन्दिर के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' माँ जलप्पा मंदिर, ग्राम- रामसीर, सिंह चक, थाना- चानन, जिला-लखीसराय'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। नोटः-समिति को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र मंदिर के नाम बैक में खाता खोलें और मंदिर से होने वाली सभी प्रकार की आय को बैंक खाता में जमा करें, और वही से आवष्यकतानुसार खर्च की जाएगी। खाता अध्यक्ष/सचिव/ कोषाध्यक्ष के नाम खोला जायेगा, जिसकी निकासी उपरोक्त में से कोई दो व्यक्ति करने में सक्षम है, तथा श्री गोपाल जी शुक्ला जो राजस्व अभिलेख के उक्त जलप्पा महारानी देवी के सेवायत रामजीव शुक्ल के वंषज है, जैसा कि प्रार्थी द्वारा अपने प्रार्थना-पत्र दिनांक- 21.02.2021 में वंषावली दर्षित की है। उन्हे मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग के लिए अधिकृत किया जाता है और गर्भगृह में 2, 5, 10 रूपये तथा फल-फूल मिठाई जो चढ़ेगा, उसी पर उनका अधिकार रहेगा, अन्य किसी प्रकार की राषि जो दान-पात्र में श्रद्धालुओं द्वारा या रषिद काटने के पश्चात् या किसी अन्य प्रकार यथा शादि-विवाह, आदि से जो राषि प्राप्त होगी, उसमें किसी प्रकार को उनका दावा नहीं होगा और वह राषि समिति के पास बैंक में सुरक्षित रहेगी और आवष्यकतानुसार मंदिर के विकास, जीर्णोद्धार आदि में खर्च की जायेगी और मंदिर में किसी भी श्रद्धालुओं से बलपूर्वक गर्भगृह में राषि का चढ़ावा करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा। इस संबंध में न्यास समिति शीघ्र मंदिर के अन्दर प्रर्याप्त रूप से सी0सी0टी0वी0 कैमरा लगाये जाने की व्यवस्था करें।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।16 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 30 जून 2022 सं0 1155--सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि बाबा धनकुण्डनाथ, षिव पार्वती मंदिर एवं धर्मषाला, ग्राम- धनकुण्ड, पो0- मकैता, थाना- धोरैया, जिला- बांका पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सर्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी नि0 सं0- 4301 है।
पूर्व में उक्त मंदिर की देखभाल, पूजा-पाठ पुजारी के माध्यम से होती थी, परन्तु व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण ग्रामीणों द्वारा स्वयं-भू समति बनाकर इसकी व्यवस्था की जाने लगी। समिति गठन हेतु वर्ष 2014 में कुछ व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव ग्रामीणों द्वारा दिया गया था, और इस संबंध में अंचलाधिकारी से भी नामों की मांग की गई थी, परन्तु कुछ कारण वष न्यास समिति का गठन नहीं किया जा सका। समिति गठन किये जाने के संबंध में ग्रामीणों द्वारा पुनः 11 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव पर्षद में दिनांक- 22.02.2021 को प्राप्त कराया गया। जिसके संबंध में अंचलाधिकारी से भी उनका मंतव्य माँगा गया। अंचलाधिकारी द्वारा पत्रांक- 326 दिनांक- 24.04.2021 द्वारा आंषिक संषोधन करते हुऐ नामों का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसका चरित्र सत्यापन करा लिया गया है। न्यास की सुव्यवस्था एवं समिति गठन के बिन्दु पर दिनांक- 20.05. 2022 को ग्रामीणों द्वारा भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया गया है। उपरोक्त सभी परिस्थितयों पर विचार करते हुऐ मंदिर के विकास तथा उसकी सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिये एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय दिनांक- 20.05.2022 को लिया गया। समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर उसे स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा। उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''बाबा धनकुण्डनाथ, षिव पार्वती मंदिर एवं धर्मषाला, ग्राम- धनकुण्ड, पो0-मकैता, थाना-धोरैया, जिला- बांका'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा धनकुण्डनाथ, षिव पार्वती मंदिर एवं धर्मषाला, ग्राम- धनकुण्ड, पो0-मकैता, थाना- धोरैया, जिला- बांका'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बाबा धनकुण्डनाथ, षिव पार्वती मंदिर एवं धर्मषाला, ग्राम- धनकुण्ड, पो0-मकैता, थाना-धोरैया, जिला-बांका'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।17 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
16. न्यास समिति सर्वप्रथम मंदिर के प्रांगण में विभिन्न स्थानों पर दान-पात्र लगाने तथा सी0सी0टी0वी0 कैमरें आदि लगवाकर उचित रख-रखाव करेगी।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमण्डल पदाधिकारी, बांका - अध्यक्ष 2. श्रीमति रेणु सिंह, पति- स्व0 देव कुमार सिंह - सा0-कोदरकट्टा - कार्य0 अध्यक्ष 3. श्री दिलिप कुमार सिंह, पिता-स्व0 रामजीबन सिंह, सा0- कोदरकट्टा - उपाध्यक्ष 4. श्री प्रदीप भगत, पिता- सीताराम भगत, सा0- धनकुण्ड, थाना- धनकुण्ड - सचिव 5. श्री अरूण कुमार सिंह, पिता- नेमनारायण सिंह, सा0-कोदरकट्टा,था0-कोदरकट्टा - उपसचिव 6. श्री महेन्द्र प्र0 भगत, पिता- स्व कमली भगत, सा0-कोदरकट्टा,था0-कोदरकट्टा - कोषाध्यक्ष 7. श्री उमाषंकर ठाकुर, पिता- अर्जुन ठाकुर, सा0-बबूरा, थाना- कोदरकट्टा - सदस्य 8. श्री विकास मंडल, पिता- बासुदेव मंडल, सा0-ग्राम-नन्दगोला, थाना-धोरैया - सदस्य 9. श्री मटुकी मांझी, पिता- गणपति मांझी,सा0 ग्राम- बदामीचक, थाना- धनकुण्ड - सदस्य 10. श्री रास बिहारी शर्मा, पिता- हरिषंकर शर्मा,सा0-ग्राम- हसाय, थाना- धनकुण्डा - सदस्य 11. श्री संजय यादव, ग्राम- पिता-बल्ली यादव, सा0- बबूरा, थाना-धनकुण्डा - सदस्य उक्त अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले 1 वर्ष का होगा। समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर उसे स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेेगा।
यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित कर कार्रवाई की जायेगी तथा मन्दिर की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में मन्दिर के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''बाबा धनकुण्डनाथ, षिव पार्वती मंदिर एवं धर्मषाला, ग्राम-धनकुण्ड, पो0-मकैता, थाना- धोरैया, जिला-बांका'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। नोटः-पर्षद में हुई सुनवाई दिनांक-20.05.2022 में ग्रामीणों द्वारा बतारया गया है कि उक्त मंदिर में पुजारी के रूप में मटरू बाबा काफी पूर्व समय से कार्य कर रहे है, अतः वह उक्त कार्य करते रहेगें, परन्तु उन्हें गर्भ-गृह में चढ़नेवाले फल-फूल मिठाई तथा 02,05,10 रूपयें की राषि चढावें में आयेगी, उसी पर उनका अधिकार रहेगा। वे किसी भी प्रकार से श्रद्धालुओं से जोर जबरदस्ती पैसे की उगाही आदि नहीं करेंगे। यदि उन्हें पूजा-पाठ रख-रखाव व स्वयं के खर्च में किसी प्रकार की कमी होती है, तो उस बिन्दु पर विचार कर न्यास समिति द्वारा उन्हें मासिक राषि खर्च के लिए प्रस्ताव पास कर निर्धारित करेगी।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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28 जून 2022
सं0 1128--सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है, कि श्री ठाकुर राधेष्याम, सीताराम मंदिर, ग्राम-महमदा, अंचल-जमालपुर, जिला-मुगेंर पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी नि0 सं0-4553 है।
उक्त मंदिर में हो0 ना0-118 एवं हो0 नं0-315 की कुल 07, वी0 03 क0 18 धूर भूमि है। मंदिर की सुचारू व्यवस्था हेतु न्यास समिति का गठन किये जाने की आवष्यकता को देखते हुऐ नामों के प्रस्ताव की माँँग अंचाधिकारी से की गयी। अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्र दिनांक-10.03.2022 द्वारा 15 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव दिया गया है। दिनांक- 20.05.2022 को पर्षद में उपस्थित ग्रामीणों द्वारा कथन किया गया की मंदिर की कुछ भूमि पर अवैध रूप से कुछ लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुऐ उक्त मंदिर के विकास तथा उसकी सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय दिनांक-20.05.2022 को लिया गया। चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर समिति को स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।18 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री ठाकुर राधेष्याम, सीताराम मंदिर, ग्राम-महमदा, अंचल-जमालपुर, जिला-मुगेंर ''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री ठाकुर राधेष्याम, सीताराम मंदिर, ग्राम-महमदा, अंचल-जमालपुर, जिला-मुगेंर'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री ठाकुर राधेष्याम, सीताराम मंदिर, ग्राम-महमदा, अंचल-जमालपुर, जिला-मुगेंर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंट पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, मुंगेर - अध्यक्ष 2. श्री प्रमोद कुमार साहू - कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री विनय कुमार पाल - सचिव 4. श्री सुरेन्द्र पंडीत - कोषाध्यक्ष 5. श्री इन्द्रदेव पंडीत - सदस्य 6. श्री राकेष साह - सदस्य 7. श्री मंटू पंडीत - सदस्य 8. श्रीमति रेणू देवी, पति-मुन्ना साह - सदस्य 9. श्री रामचन्द्र दास - सदस्य 10. श्री नित्यानंद साह - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, नया रामनगर, जिला-मुंगेर - सदस्य पता-सभी ग्राम-महमदा, पंचायत-पाटम पूर्वी, अंचल-जमालपुर, जिला-मुंगेर।19 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 उक्त न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले एक वर्षो का होगा।
यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता कार्यवाहक अध्यक्ष द्वारा संचालित कर कार्रवाई की जायेगी तथा मन्दिर की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में मन्दिर के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री ठाकुर राधेष्याम, सीताराम मंदिर, ग्राम-महमदा, अंचल-जमालपुर, जिला-मुगेंर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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18 मार्च 2023
सं0 4337--श्री काली मंदिर, दिघल बैंक, जिला-किषनगंज को पर्षद द्वारा सुनवाई के उपरांत सार्वजनिक धार्मिक न्यास पाते हुए इसका निबंधन किया गया है। काली मंदिर, दिघल बैंक की निबंधन संख्या-4658 है। यह मंदिर थाना नं0-308, चक खाता सं0-20 खेसरा सं0-185, एरिया-2.40डी0 जमीन एवं थाना नं0-306 खाता सं0-483 खेसरा सं0-131 कुल रकवा-5.66 एकड़ जमीन ''श्री काली मंदिर'' के नाम से राजस्व अभिलेख में इन्द्राज है।न्यास समिति गठन हेतु दिनांक-07.02.2023 को सुनवाई कर आदेष पारित किया गया है।
दिनांक-07.02.2023 को निजी का दावा करने वाले श्री जगदीष प्रसाद ंिसंह अपने सहयोगी शमीम अषरफ खान के साथ एवं सार्वजनिक की ओर से श्री मदन कुमार सिंह पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए। प्रार्थी द्वारा एक लिखित प्रार्थना पत्र तथा साथ में दिनांक-22.03.1971 एवं 25.10.1968 के विक्रयनामा की फोटो टाईप प्रति, दिनांक-21.01.2022 का अंचल अमीन का रिपोर्ट जो अंचल अधिकारी को समर्पित की गयी है, नजरी नक्षा, आयकर विभाग का कुछ फर्म तथा सोसाईटी रजिस्ट्रेषन के तहत उक्त मंदिर के संबंध में एक न्यास समिति का गठन दिनांक-27.04.2021 की फोटोप्रति तथा मंदिर की भूमि से संबंधित खतियान की प्रति तथा अंचल अधिकारी द्वारा पर्षद को भेजी गयी रिपोर्ट, सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 19131/21 में पारित आदेष दिनांक-22.6.2022 एवं 13.07.2022की छायाप्रति तथा सब-जज किषनगंज के यहॉ दाखिल स्वत्व वाद 18/2022 में दाखिल प्रार्थना पत्र जिसमें वादी काली मंदिर सेवायत जगदीष प्रसाद के नाम वाद दाखिल करने हेतु प्रतिनिधित्व (Representative) के रूप में वाद दाखिल करने की अनुमति संबंधी प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया है। जिसकी एक प्रति सार्वजनिक का दावा करने वाले मदन कुमार सिंह एवं पूनम देवी को उपलब्ध करायी गयी। श्री मदन कुमार सिंह द्वारा पर्षद के समक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज दाखिल किया गया है, जो स्पष्ट करता है कि निजी का दावा करने वाले जगदीष प्रसाद द्वारा कुछ तथ्यों को जान-बूझकर छिपाया गया है, उसमें दिनांक-30.01.1996 को मंदिर के तत्कालीन न्यास समिति द्वारा लिये गये निर्णय, प्रस्ताव एवं समिति के सदस्य रामेष्वर मिश्र एवं कुमुद चन्द सिंह द्वारा काली मंदिर समिति में व्याप्त अनियमितता के संबंध में दिया गया । समिति की बैठक दिनांक-09.01.1998 में उक्त मंदिर की न्यास समिति के संबंध में लिये गये प्रस्ताव तत्कालीन सदस्य के हस्ताक्षर की प्र्रति दाखिल की गयी है।
उपरोक्त दस्तावेज से यह स्पष्ट होता है कि दिनांक-09.01.1998 में असारू लाल सिंह की अघ्यक्षता में हुए बैठक में प्रार्थी के पिता राम नारायण (क्रम सं0-6) का भी हस्ताक्षर है। उस बैठक में निर्णय लिया गया था कि अध्यक्ष चन्द्रमोहन झा शारीरिक रूप से काफी वृद्ध हो गये है, अतः उनके स्थान पर अवध बिहारी सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया, प्रस्ताव सं0-4 में यह निर्णय लिया गया कि मंदिर की भूमि पर लगने वाले हाट की वर्ष 1996-97 से मदन सिंह द्वारा अपरिहार्य कारणों से वसूल नहीं कर पा रहें हैं, अतः उन्हें दो माह में वसूली कर घाटे की पूर्ति का प्रस्ताव पारित किया गया है। प्रस्ताव सं0-5 में उल्लेख है कि वर्ष 1994 से 1997 तक का हाट के डाक से होने वाली राषि मदन सिंह के पास 65,000/-रूपयें तथा उसका लेखा-जोखा सचिव रामनारायण सिंह (प्रार्थी के पिता) के पास है। आगे बहुत से प्रस्ताव है, जो स्पष्ट करता है कि वर्ष 1995-96 में मंदिर की देखभाल हेतु भी एक न्यास समिति कार्यरत थी और जिसके सचिव के रूप में प्रार्थी (जगदीष प्रसाद सिंह) के पिता रामनारायण सिंह थे और जिसमें चन्द्रमोहन सिंह को शारीरिक रूप से अस्वस्थता के कारण उन्हें हटाते हुए अवध बिहारी लाल को न्यास समिति के अध्यक्ष के रूप में मान्यता दी गयी। अन्य प्रार्थना पत्र दिनांक-03.02.1996 के बैठक के प्रस्ताव में उल्लेख है कि तत्कालीन सदस्य मदन सिंह के पास हाट बकाया राषि थी और मांग किये जाने के बाद भी जमा नहीं कर रहें है, उसमें कुछ राषि हाट ठेकेदार का बकाया है। यह भी उल्लेख किया गया कि समिति के सदस्य आपा में सॉठ-गॉठ कर बंदोबस्ती रकम की हेराफेरी की धारणा बनाये हुए है । उक्त के संबंध में प्रार्थना की गयी है कि अबिलम्व समिति के कार्याे पर हस्ताक्षेप किया जाए। इस प्रकार दिनांक-31.01.1996 को जो बैठक काली मंदिर के संबंध में की गयी, के द्वारा बाजार (हाट) के डाक करने की प्रारंभ की गयी। उक्त प्रार्थना-पत्र पर रामनारायण सिंह, सचिव एवं अन्य 17 व्यक्तियों के हस्ताक्षर है। इसके अतिरिक्त प्रार्थी के पिता रामनारायण सिंह के विरूद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट काण्ड सं0-393/2000 में पारित जमानत आदेष दिनांक-22.02.2000 में याची रामनारायण सिंह काली मंदिर के सचिव उल्लेख किया गया है। एक अन्य पत्र जो तत्कालीन सचिव, रामनारायण सिंह (प्रार्थी के पिता) द्वारा दुकानदार को बकाया राषि के भुगतान हेतु भेजा गया था, उसमें भी 2825/-रूपयें काली मंदिर समिति की राषि बकाया, लिखा गया है।20 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 उपरोक्त सभी तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि मंदिर की भूमि पर जो हाट लगता है, उसमें बहुत-सी दुकाने है और उन दुकानों से प्राप्त राषि का अवैध दुरूपयोग और निजी प्रयोग में प्रारम्भ से लिया जा रहा है। न्यास समिति गठन के संबंध में दिनांक-24.12.2022 को आम सभा कर 18 व्यक्तियो के नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त हुआ है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-07.02.2023 द्वारा ''काली मंदिर, दिघल बैंक, किषनगंज की सम्पत्ति को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता है और जबतक प्रार्थी के द्वारा निजी के दावे पर अंतिम निर्णय नहीं होता है, तबतक न्यास समिति मंदिर के दुकानों, किरायेदार व अन्य सभी चीजों की व्यवस्था, किराये की राषि की वसूल कर मंदिर के नाम खोली गयी बैंक खाता में जमा की जायेगी।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री काली मंदिर, दिघल बैंक, जिला-किषनगंज न्यास योजना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री काली मंदिर, दिघल बैंक, जिला-किषनगंज, न्यास समिति''होगी। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेगें, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
4. दाताओं से प्राप्त की गयी राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा और आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा।
5. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (उपाध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। जिसमें न्यास की समग्र आय जमा की जायेगी।
6. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा। इसी प्रकार न्यास समिति को मंदिर के विकास या संरचना मद में 10 लाख रूपये या उससे अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उस अनुमानित खर्च का विवरणी प्रस्तुत कर पूर्वानुमति न्यास समिति को प्राप्त करना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी।
7. न्यास समिति किसी भी सदस्य को मंदिर की भूमि बेचने या बंधक रखने का अधिकार नहीं होगा। 8. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 9. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
10. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 12. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय।
13. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से अवैध रूप से लाभ उठाते पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्ठभूमि, आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
14. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
16़. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित लोगों की न्यास समिति का गठन आमसभा दिनांक-24.12.2022 से प्राप्त 18 नामों के प्रस्ताव में से अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है :- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, किषनगंज . - अध्यक्ष।21 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 2. श्री बाबू लाल हेम्ब्रम - उपाध्यक्ष। पता-वार्ड नं0-03
3. श्री षिवषंकर चौधरी - उपाध्यक्ष
पता-वार्ड नं0-02
4. श्री गणेष कुमार सिंह - सचिव
पिता-श्री मदन कुमार सिंह
5. श्री जलेबी साह - कोषाध्यक्ष
पता-वार्ड नं0-02
6. श्री राजीव राय - सदस्य 7. श्री रविन्द्र राय - सदस्य
पता-वार्ड नं0-04, खाड़ी टोला क्रम सं0-02 से 07 तक सभी ग्रामपो0थाना-दिघल बैंक, जिला-किषनगंज, पिन कोड-855101.
8. थानाध्यक्ष, दिघल बैंक, किषनगंज - सदस्य उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि ''श्री काली मंदिर, दिघल बैंक''के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2023
सं0 3961--हरैया मठ, ग्राम-हरैया, पोस्ट-षाखे खास, थानाअंचल-उचका गाँव, अनुमंडल-हथुआ, जिला-गोपालगंज जो पूर्व में विशनपुर मठ की शाखा के रूप में थी, परन्तु पिछले 20 वर्षो से वह मठ पूर्ण रूप से विरान था, वहां न कोई साधु और न ही कोई देखभाल करने वाला था। ग्रामीणों द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि वहां न्यास समिति का गठन किया जाय, जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी से एक रिपोर्ट की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट पत्रांक 334 दिनांक 21.02.2022़ द्वारा यह उल्लेख किया कि हरैया मठ में खाता सं0-120, 26, 27, 30 जिसका जमांबदी क्रमषः 147, 23, 24 और 25 है, जिसमें 47.5.7 भूमि है, जो पूर्व महंत पासपत भगत के नाम से इन्द्राज है।
उक्त मठ धनौती कबीर गद्दी से नियंत्रित है। कबीर मठ के आचार्य को सूचना भेजकर उनसे मंतब्य की मांग की गयी थी, उनके द्वारा एक रिपोर्ट दिया गया कि हरैया मठ की देखभाल के लिए सजीवन गोस्वामी चयनीत किये गये है और तीन माह तक कार्य को देखने के उपरान्त चादर पगड़ी सुरतेहाल आदि दिया जायेगा।
ग्रामीणों की तरफ से भज्जुराम प्रसाद के साथ लगभग 100 अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर से न्यास समिति बनाये जाने हेतु एक प्रार्थना पत्र दिया गया था और चुंकि कबीर गद्दी द्वारा भी सजीवन गोस्वामी को नामित किया गया था। अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए हरैया मठ, ग्राम-हरैया, पोस्ट-षाखे खास, थानाअंचल-उचका गाँव, अनुमंडल-हथुआ, जिला-गोपालगंज की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन हेतु अंचल अधिकारी की अध्यक्षता में 05 सदस्यीय न्यास समिति का गठन पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक 20.12.2022 के आलोक में की जाती है। योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''हरैया मठ, ग्राम-हरैया, पोस्ट-षाखे खास, थानाअंचल-उचका गाँव, अनुमंडल-हथुआ, जिला-गोपालगंज, न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''हरैया मठ, ग्राम-हरैया, पोस्ट-षाखे खास, थानाअंचल-उचका गाँव, अनुमंडल-हथुआ, जिला-गोपालगंज न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।22 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति एक वर्ष के लिए गठित की जाती है :-
1. अंचल अधिकारी - पदेन अध्यक्ष 2. श्री सजीवन गोस्वामी - सदस्य 3. श्री भज्जुराम प्रसाद - सदस्य 4. श्री उमेष साह - सदस्य 5. श्री कृष्णकांत सिंह - सदस्य इनको निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा जो भूमि का उल्लेख किया गया है कि उसमें अतिक्रमणकारियों से सम्पर्क कर भूमि को मंदिर के पक्ष में खाली करायें और उसकी नये सिरे से बंदोबस्ती अंचल पदाधिकारी अपनी देख-रेख में सुनिष्चत करें तथा की गयी कार्रवाई से पर्षद को भी अवगत करायें तथा पूर्व में यह निर्देष दिया गया था कि यदि जो व्यक्ति मठ की भूमि को खाली नहीं करते हैं या बन्दोबस्ती राषि देने से इन्कार करते हैं या कोई अन्य स्वामित्व और दावा करते है तो उनके विरूद्ध अतिक्रमणवाद शीघ्र दाखिल करें।
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (हरैया मठ, ग्राम-हरैया, पोस्ट-षाखे खास, थानाअंचल-उचका गाँव, अनुमंडल-हथुआ, जिला-गोपालगंज) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2023
सं0 3966--कबीर पंथी पठ, विशनपुरा, थानाअंचल-बरौली, जिला-गोपालगंज जो आचार्य गद्दी धनौती से नियंत्रित होता है, परन्तु पिछले 20 वर्षो से वह मठ पूर्ण रूप से विरान था, वहां न कोई साधु और न ही कोई देखभाल करने वाला था। ग्रामीणों द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि वहां न्यास समिति का गठन किया जाय, जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी से एक रिपोर्ट की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी ने अपनी रिापोर्ट पत्रांक 334 दिनांक 21.020.2022़ द्वारा यह उल्लेख किया कि हरैया मठ में खाता सं0-120, 26, 30 जिसका जमांबदी क्रमषः 147, 23, 24 औरा 25 है, जिसमें 47-5-7 भूमि है, जो पूर्व महंत पासपत भगत के नाम से इन्द्राज है तथा मौजा-विषनपुरा में थाना सं0-264, खाता सं0-193, 300, 358, 239 में कुल रकबा 32-18-4 तथा जमाबंदीदार रैयत के रूप से महंत पासपत भगत चेला महंत ईन्द्रासन भगत के नाम इन्द्राज है।
उक्त मठ धनौती कबीर गद्दी से नियंत्रित है। कबीर मठ के आचार्य को सूचना भेजकर उनसे मंतब्य की मांग की गयी थी, उनके द्वारा एक रिपोर्ट दिया गया कि विषनपुर मठ की देखभाल के लिए श्रवण गोस्वामी चयनीत किये गये हैं और तीन माह तक कार्य को देखने के उपरान्त चादर, पगड़ी सुरतेहाल आदि दिया जायेगा।
ग्रामीणों की तरफ से भज्जुराम प्रसाद के साथ लगभग 100 अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षरा से न्यास समिति बनाये जाने हेतु एक प्रार्थना पत्र दिया गया था और चुंकि कबीर गद्दी द्वारा भी श्रवण कुमार को नामित किया गया था।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए विशनपुर मठ, जिला-गोपालगंज की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।23 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीर पंथी पठ, विशनपुरा, थानाअंचल-बरौली, जिला-गोपालगंज न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कबीर पंथी पठ, विशनपुरा, थानाअंचल-बरौली, जिला-गोपालगंज न्यास समिति होगी'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष और श्रवण गोस्वामी के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
7. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
8. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
9. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है :-
1. अंचल अधिकारी - पदेन अध्यक्ष 2. श्री श्रवण गोस्वामी - सदस्य न्यास समिति को आदेष दिया जाता है कि अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा जो भूमि का उल्लेख किया गया है, उसकी प्रति प्राप्त कर उसमें अतिक्रमणकारियों से सम्पर्क कर भूमि को मंदिर के पक्ष में खाली करायें और उसकी नये सिरे से बंदोबस्ती भवदीय के अपने देख रेख में सुनिश्चित करें तथा की गयी कार्यवाई से पर्षद को अवगत कराने का कष्ट करें। जो व्यक्ति मठ की भूमि को खाली नहीं करते हैं या बंदोबस्ती राषि देने से इंकार करते है या कोई अन्य स्वामित्व और दावा किसी दस्तावेज के आधार पर करते है तो उनके विरूद्ध अतिक्रमणवाद शीघ्र दाखिल करें।
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (कबीर पंथी पठ, विशनपुरा, थानाअंचल-बरौली, जिला-गोपालगंज) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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31 जनवरी 2023
सं0 3745--श्री राधाकृष्ण मंदिर, भवदेवपुर, जिला-सीतामढ़ी पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 2535 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु निम्नांकित न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए पर्षद के अधिसूचना ज्ञापांक-3587, दिनांक 21.10.2021 द्वारा किया गया :- 1. श्री सीताराम यादव - अध्यक्ष, 2. श्री रामानंद दास - उपाध्यक्ष, 3. इं0 हरेराम यादव - उपाध्यक्ष, 4. श्री मदन प्रसाद (भगत) - सचिव,24 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 5. श्री सुरेन्द्र प्रसाद यादव - कोषाध्यक्ष,
6. श्री मुन्ना यादव - सदस्य, 7. श्री अमीरी राय - सदस्य, 8. श्री रामप्रवेष राय - सदस्य, 9. श्री विनोद राय - सदस्य, 10. श्री चितरंजन प्रसाद यादव - सदस्य, 11. श्री राजेष कुमार - सदस्य, न्यास समिति के द्वारा 01 वर्ष में धर्मशाला का पूर्ण रूप से नवीकरण पी0सी0सी0 पथ, शौचालय, मंदिर में रंगीन फोब्बारा, नाली, मंच आदि का निर्माण किया गया है और सभी कार्य जनसहयोग के माध्यम से कराया गया तथा मंदिर की आय के रूप में 01 लाख 68 हजार रुपये की राशि दर्शित की गयी जो स्पष्ट करता है कि न्यास समिति का कार्य संतोषप्रद है।
अतः उपरोक्त न्यास समिति के कार्यकाल को स्थायी करते हुए न्यास समिति गठन किये जाने से 05 वर्ष के लिए अधिसूचना ज्ञापांक-3587, दिनांक 21.10.2021 में उल्लेखित नियमों एवं शर्तो के अधीन विस्तार किया जाता है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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20 फरवरी 2023
सं0 3971--श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4212 है।
उक्त मंदिर कि देखाभाल हेतु जयराम दास को आदेश ज्ञापांक 2390, दिनांक 05.12.2016 को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया था, जो कुछ शर्तो के साथ थी, पर उन शर्तो का पालन अस्थायी न्यासधारी द्वारा नहीं किया गया और यह भी शिकायत प्राप्त हुई कि पूर्व महंत जानकी दास द्वारा जो भूमि खरीदी गयी थी, उसको जयराम दास द्वारा दिनांक 22.06.2013 और दिनांक 07.03.2014 को स्वयं विक्रय कर दिया गया है, जिसके विरूद्ध ग्रामीणों द्वारा एक ह0 वाद भी दाखिल किया गया और यह पाया कि जयराम दास द्वारा अपने पक्ष में विक्रय पत्र क्रेता के रूप में जानकी दास को दिखलाया है, दिनांक 16.05. 2011 को निष्पादित किया गया, जबकि उक्त जानकी दास जिन्हें विक्रेता के रूप में दिखलाया गया है, वर्ष 1985 में ही स्वर्गवास हो चुके है, तथा मंदिर कि भूमि को हड़पने के लिए अपनी बहन मो0 मीना देवी द्वारा एक स्व0 वाद 41/20 भी दाखिल कर दिया इन सभी आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण दाखिल करने हेतु जयराम दास को प्रयाप्त समय दिया गया जो निबंधित डाक द्वारा दिनांक 15.09.2021, 02.02.2022 एवं 11.05.2022 को भेजा गया और वे सभी डाक इस रिपोर्ट के साथ वापस प्राप्त हुए कि प्राप्तकर्त्ता के साथ मुलाकात नहीं हुई और जबकि जयराम दास को पूर्व से सूचना प्राप्त हो गयी थी, और उनकी तरफ से पर्षद के समक्ष अधिवक्ता शैलश चन्द्र झा भी उपस्थित हुए और उनकी उपस्थिति में भी सुनने के उपरान्त विस्तृत आदेश दिनांक 14.03.2022 को पारित किया गया, जिसमें लगाये गये सभी आरोपों के संबंध में अपना प्रतिउत्तर दाखिल करने तथा अधिवक्ता द्वारा समय माँगे जाने पर उन्हें पुनः समय दिया गया, परन्तु उक्त तिथि के बाद निर्धारित तिथि 10.06.2022 एवं 05.09.2022 को न तो अस्थायी न्यासधारी उपस्थित हुए और न ही उनके अधिवक्ता उपस्थित हुए और लगाये गए आरोप ''मंदिर की भूमि अवैध रूप से विक्रय करने और फर्जी व्यक्तियों को खड़ा कर मठ कि भूमि को स्वयं क्रय करने संबंधित गम्भीर आरोप थे, और चूकी अस्थायी न्यासधारी द्वारा धारा 33 के अन्तर्गत अधिकतम एक वर्ष के लिए नियुक्त किया गया था और समय सीमा भी समाप्त हो गयी थी।
अतः उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाया जाना पर्षद के आदेष दिनांक 05.09.2022 द्वारा उचित नहीं पाया गया और ग्रामीणों द्वारा आमसभा कर जो न्यास समित बनाये जाने का प्रस्ताव दिया गया है, चुकी उस प्रस्ताव में यह आया है कि महंत जी उस गाँव में नहीं रहते हैं और वर्त्तमान में ग्रामीण ही एक स्वयंभु समिति द्वारा मंदिर का पूजा-पाठ देखभाल आदि किया जा रहा है और सारी भूमि उनके अधिपत्य में है, प्रस्तावित नामों कि न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में संबंधित थानें से चरित्र सत्यपन रिपोर्ट प्राप्त करने हेतु आदेश दिनांक 05.09.2022 को दिया गया था, खेद कि बात है कि निबंधित डाक द्वारा चरित्र सत्यापन रिपोर्ट
प्राप्त करने के पश्चात उक्त रिपोर्ट आज तक प्राप्त नहीं हुयी और ग्रामीणों का कथन है, कि बिना न्यास समिति के न तो मंदिर के नाम से खाता खोला जाता रहा है और नहीं काई अन्य विधिक कार्रवायी की जा रही है।
अतः सभी परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु विचार करते हुए आम सभी द्वारा प्रस्तावित नामों को अस्थायी रूप से न्यास समिति बनायी जाती है, और चरित्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने पर तद्नुसासर स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
उपरोक्त परिस्थति में मैं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर की सम्पत्तियों की सुरक्षा,बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक-06.12.2022 के आलोक में निम्नांकित न्यास समिति का गठन किया जाता है।25 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 428 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है।
न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/ सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नांकित न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए की जाती है :-
1. श्री देवेन्द्र राय पिता स्व0 बजंरगी राय - अध्यक्ष 2. श्री शत्रुघ्न राय पिता स्व0 वासुदेव राय - सचिव 3. श्री राम राय पिता श्री महेन्द्र राय - कोषाध्यक्ष 4. श्री राम नरेष ओझा पिता श्री जगदीष ओझा - सदस्य 5. श्री अजय कुमार राय पिता स्व0 रामचन्द्र राय - सदस्य 6. श्री राम पुकार राय पिता स्व0 जगदीष राय - सदस्य 7. श्री रामानन्द राय पिता स्व0 अकलु राय - सदस्य 8. श्री भोला राय पिता स्व0 गुदर राय - सदस्य 9. श्री कपिल देव राय पिता स्व0 असर्फी राय - सदस्य26 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 10. श्री राम लाल शर्मा पिता स्व0 गोरख शर्मा - सदस्य 11. श्री बैद्यनाथ बैठा, पिता-स्व0 रघुनन बैठा - सदस्य पता :-श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री रामजानकी मठ, ग्राम-बेलाही दुल्लह, पो0-कस्तुरिया, थाना-हिरम्मा, अंचल-तरियानी, जिला-षिवहर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 सितम्बर 2022
सं0 2017--किउल धर्मषाला, ग्राम- वृन्दावन, किउल, जिला-लखीसराय पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक पूर्त न्यास है, जिसकी निबंधिन सं0-2816 है।
उक्त धर्मषाला की सुव्यवस्था हेतु पर्षद की अधिसूचना ज्ञपांक-2787, दिनांक-17.10.2000 द्वारा एक न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसके अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी थे। न्यास समिति द्वारा वर्ष 2016-17 तक आय-व्यय विवरण दिया गया है। न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
संचिका से यह भी स्पष्ट होता है कि दिनांक- 16.11.2017 को एक बैठक कर 08 व्यक्तियों की न्यास समिति बनाये जाने का प्रस्ताव ग्रामीणों द्वारा भेजा गया, जिसके आलोक में पर्षद द्वारा दिनांक- 21.03.2018 को अनुमण्डल पदाधिकारी से उक्त नामों पर उनका मंतव्य तथा न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों की मांग की गयी। बार-बार पत्र दिये जाने के उपरान्त जिला पदाधिकारी को भी दिनांक-02.02.2021 को पत्र लिखा गया। उक्त पत्र के आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-444, दिनांक-21.06.2021 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया गया। चूंकि पर्षद को वर्ष 2017 के बाद से धर्मषाला की आय-व्यय के संदर्भ में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। इस संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी को पत्र लिखा गया कि उक्त वर्षो की आय-व्यय विवरणी क्या है, इस संदर्भ में अनुमंडल पदाधिकरी द्वारा कोई प्रत्योत्तर दाखिल नहीं किया गया और चूंकि न्यास समिति के अभाव में धर्मषाला की न तो कोई व्यवस्था हो रही है और न ही जनता को उसका लाभ मिल पा रहा है।
उपरोक्त परिस्थितयों में धर्मषाला की सुव्यवस्था हेतु पर्षद की सुनवाई दिनांक 08.08.2022 को न्यास समिति गठन किये जाने की आवष्यकता के आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा जो नाम पर्षद को प्राप्त हुआ है तथा पर्षद के माननीय सदस्यों द्वारा भी एक नाम का प्रस्ताव दिया गया है, उसपर विचार करते हुए एक योजना का निरूपण किये जाने तथा एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''किउल धर्मषाला, ग्राम- वृन्दावन, किउल, जिला- लखीसराय''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''किउल धर्मषाला, ग्राम- वृन्दावन, किउल, जिला- लखीसराय,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''किउल धर्मषाला, ग्राम- वृन्दावन, किउल, जिला- लखीसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. धर्मषाला परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. धर्मषाला परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और धर्मषाला की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा।
7. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।27 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 8. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
9. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 10. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
11. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
12. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और धर्मषाला के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
13. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
14. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, लखीसराय - अध्यक्ष। 2. श्रीमति माला देवी, पति श्री दिनेष राम - उपाध्यक्ष।
वृन्दावन किउल।
3. श्री टेकचन्द्र अग्रवाल,पिता- स्व0 दुलाराम अग्रवाल - सचिव।
वृन्दावन किउल।
4. श्री विनोद कुमार, पिता- स्व0 शंकर राम - कोषाध्यक्ष।
वृन्दावन किउल।
5. श्री सुभाष यादव,पिता- स्व0 लखन यादव - सदस्य।
वृन्दावन किउल।
6. श्री हजारी पासवान, पिता- स्व0 राम पासवान - सदस्य।
वृन्दावन किउल।
7. श्री राजेष कुमार गुप्ता, पिता- श्री सत्यदेव प्रसाद गुप्ता - सदस्य।
वृन्दावन किउल।
8. श्री गणेष यादव, पिता- श्री शंकर यादव - सदस्य।
खगौर किउल।
9. श्री चन्दन मंडल, पिता- स्व0 अर्जून प्रसाद मंडल - सदस्य।
खगौर जमैया टोला किउल।
10. श्री सूमित कुमार ड्रोलिया, पिता- श्री जयप्रकाष ड्रोलिया - सदस्य।
नया बाजार, लखीसराय।
11. श्री राज कुमार पासवान, पिता- श्री संचिता पासवान - सदस्य।
वृन्दावन किउल। सभी जिला- लखीसराय । उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित इस शर्त के साथ कि कार्रवाई की लिखित सूचना शीघ्र समिति के अध्यक्ष को अवष्य दे कर कार्रवाई की जायेगी तथा धर्मषाला की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में धर्मषाला के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''किउल धर्मषाला, ग्राम- वृन्दावन, किउल, जिला- लखीसराय''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।28 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 14 दिसम्बर 2022 सं0 3158--श्री श्री 108 राम जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-अकबरपुर, अंचल-कहलगाँव, जिला-भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-892 हैं।
पूर्व में उक्त न्यास की व्यवस्था न्यास समिति द्वारा की जाती थी, परन्तु समिति का कार्यकाल संतोषप्रद नहीं पाते हुये पर्षद द्वारा पत्रांक- 728, दिनांक-29.06.1993 द्वारा न्यास समिति को समाप्त कर अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया था। तदोपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक 16.03.1994 द्वारा 03 सदस्यीय न्यास समिति क्रमषः (श्री रामेष्वर राम, विजय प्रसाद राम, एवं श्री अनिरूद्ध प्रसाद राम )को मान्यता दी गयी। परन्तु न्यास समिति द्वारा नियमानुकुल आय-व्यय विवरण नहीं दाखिल करने के कारन दिनांक 12.02.2000 को स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसपर सचिव श्री विजय प्रसाद राम द्वारा 06 माह का समय दिये जाने की मांग की लेकिन आदेष का पालन नहीं करने के कारण पुनः दिनांक-25.02.2005 को श्री राम से स्पष्टीकरण करने की मांग की गयी। पर्षद के पत्राें के आलोक में 01.09.2014 को सचिव द्वारा वर्ष 2004-05 से वर्ष 2013-14 की आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी। तदोपरान्त दिनांक- 02.05.2019 को मात्र 2018-19 की विवरणी दाखिल की गयी, जिसमें आय मात्र 5,800/- रू0 दिखया गया। दिनांक- 18.01.2021 को श्री विजय प्रसाद राम द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया जिसमें उनके द्वारा यह आग्रह किया गया कि उनके स्थान पर उनके पुत्र को सेवायत बनाया जाय। वर्ष 2019-20 की आय-व्यय विवरणी में भी आय के रूप में मात्र 8,000/- रू0 दिखलाया गया। पुनः श्री राम द्वारा दिनांक 15.05.2021 एवं दिनांक 11.02.2022 को प्रार्थना-पत्र दिया गया जिसमें मंदिर की जमीन का उल्लेख करते हुये कुछ जमीन अवैध कब्जा होने का उल्लेख किया गया, जिसमें कुछ लोगों का नाम भी अंकित किया गया। उक्त सभी व्यक्तियों को पर्षद द्वारा निबंधित-डाक से पत्र भेजकर दिनांक 08.04.2022 को अपने दावें के संबंध में उपस्थित होने का निर्देष दिया गया था, परन्तु उक्त नोटिस के उपरांत जब उक्त व्यक्ति उपस्थित नहीं हुये तो पुनः दिनांक 05.07.2022 को उक्त व्यक्तियों को निबंधित-डाक द्वारा पत्र भेजा गया, जिसमें प्रदीप दास, और कुलदीप दास
दिनांक 04.08.2022 को पर्षद में उपस्थित हुये और कथन किया कि उनके कब्जे में मंदिर की कोई जमीन नहीं है तथा उल्लेख किया की मंदिर में कुल 22 वीघा जमीन है, जिसे तार से घेरकर श्री विजय राम अपने गोतिया के माध्यम से खेती कराते है। जिससे लगभग 05 लाख की आय होती है। 02 वीघा जमीन पर बगीचा है, जिससे लगभी 02 लाख रू0 सालाना आया होती है, उक्त तिथि को श्री विजय प्रसाद राम उपस्थित नहीं हुये। श्री राम द्वारा जो पूर्व में आय-व्यय विवरणी दाखिल की जाती है वो पुर्ण रूप से सही प्रतीत नहीं होता है, क्योकि जिस मंदिर में 20 वीघा से अधिक जमीन हो उसकी आय मात्र 05 हजार/08 हजार रू0 दिखलाया गया है । उक्त तथ्यों के आलोक में पर्षद की सूनवाई दिनांक 04.08.2022 को नये सिरे से न्यास समिति गठन किये जाने का निर्णय किया गया तथा अनुमंडल पदाधिकारी से 07 अच्छें चरित्र व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 05 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव अपने पत्र पत्रांक-873, दिनांक- 17.09.2022 द्वारा भेजा गया। श्री विजय प्रसाद राम 'सचिव' द्वारा दिये गये पत्र दिनांक 22.06.2022 एवं अन्य पत्रों से भी स्पष्ट होता है कि पूर्व में इनके द्वारा आय को छुपाया जाता रहा है और सहीं आय नहीं बतलायी गयी है।
उपरोक्त परिस्थिति में अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगाँव से प्राप्त प्रस्ताव में प्रस्तावित नामों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनावाई दिनांक 09.11.2022 को इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया। अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 राम जानकी ठाकुरवाड़ी,ग्रामपो0- अकबरपुर, अंचल- कहलगाँव, जिला- भागलपुर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 राम जानकी ठाकुरवाड़ी,ग्रामपो0- अकबरपुर, अंचल- कहलगाँव, जिला- भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' श्री श्री 108 राम जानकी ठाकुरवाड़ी,ग्रामपो0- अकबरपुर, अंचल- कहलगाँव, जिला- भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।29 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. नवगठित न्यास समिति को यह निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र मंदिर के नाम से एक बैंक खाता खोले और सभी राषि को बैंक में जमा कर खर्च किया जाय और जमीन की बंदोवस्ती में पारदर्षिता रखें कि किस व्यक्ति को कितनी जमीन और किस दर पर दी जाती है इसका व्योरा भी रजिस्टर में अंकित कर रखें।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अंचलाधिकारी, कहलगाँव , भागलपुर - अध्यक्ष। (2) श्री सुधीर राम, पिता-श्री चंद्रदीप राम - उपाध्यक्ष। (3) श्री समीर कुमार सिन्हा, - सचिव। (4) श्री गोपाल पासवान, - सह सचिव
पिता- श्री अम्बिका पासवान
(5) श्री हिमांषू कुमार सिन्हा, - कोषाध्यक्ष।
पिता- श्री विभूमि प्रसाद राम
(6) श्रीमति रिंकी सिन्हा, पति-अंजन कुमार - सदस्य (7) थानाध्यक्ष, कहलगाँव - सदस्य। सभी का पता-ग्रामपो0- अकबरपुर, थाना- कहलगाँव, जिला- भागलपुर, पिन नं0- 813222 यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अंचल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित इस शर्त के साथ किया जायेगा की कृत कार्रवाई की लिखित सूचना शीघ्र समिति के अध्यक्ष को अवष्य देगें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि श्री श्री 108 राम जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0- अकबरपुर, अंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।30 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 14 दिसम्बर 2022 सं0 3156--श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी, के0बी0 लाल रोड,नाथ नगर, जिला-भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4222 हैं।
उक्त मंदिर में लगभग 03 कट्टा भूमि मूलाषय दास, पुत्र- गिरधर दास द्वारा निबंधित विलेख दिनांक- 05.02.1960 द्वारा सार्वजनिक घोषित करते हुये दान किया गया था। मंदिर के पुजारी श्री महेष मिश्र एवं अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिनांक- 29.09.2022 को दिया गया। जिसमें आरोप लगाया गया कि श्री गोपाल साह, अवैध रूप से न्यास की भूमि कब्जा करना चाहते है और जान मारने की धमकी देते है तथा फर्जी आधार पर उनके द्वारा एक मुकदमा T.S No.- 113/2013 दाखिल किया गया है, जिसमें पर्षद को पक्षकार भी नहीं बनाया गया है तथा कुछ मेली व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाकर मुकदमा दायर किया गया है। पर्षद द्वारा उपरोक्त सूचना पर श्री गोपाल साह को निबंधित पत्र पर्षदीय पत्रांक-2534, दिनांक- 22.10.2022 द्वारा सूनवाई की निर्धारित तिथि दिनांक- 09.11.2022 को पर्षद में उपस्थित होकर अपने स्पष्टीकरण के साथ अपने दावें के संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेष दिया गया था, परन्तु वे उपस्थित नहीं हुये। जबकि ग्रामीणों की तरफ से श्री विजय साह, श्री सत्यनारायण साह, पुजारी श्री महेष मिश्र, एवं अरूण महतों उपस्थित हुये और कथन किये कि दिनांक- 26.08.2012 को ग्रामीणों की बैठक में मंदिर के देखभाल, पूजा-पाठ के लिये 06 सदस्यों की जो न्यास समिति बनायी गयी उसे मान्यता दी जाय, उनका यह भी कहना है कि समय-समय पर पुलिस प्रषासन द्वारा जुलुस निकालने की अनुमति भी दी जा रही है। इस संबंध में थाना प्रभारी से रिपोर्ट की मांग की गयी थी जो नहीं प्राप्त होने के कारण समिति को मान्यता नहीं दी जा सकी। उक्त सभी परिस्थितीयों एवं निबंधित समर्पणनामा दिनांक- 05.12.1960 ग्रामीणों के आम सभा का प्रस्ताव जिसके विरूद्ध किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई भी आपत्ति दाखिल नहीं हुयी है को ध्यान में रखते हुये इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक प्रतीत होता है।
उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित नामों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनावाई दिनांक 09.11.2022 को इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिये एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी, के0बी0 लाल रोड,नाथ नगर, जिला- भागलपुर,''के सुचारूप्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी, के0बी0 लाल रोड,नाथ नगर, जिला- भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी, के0बी0 लाल रोड,नाथ नगर, जिला- भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।31 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अंचल पदाधिकारी, नाथनगर, भागलपुर - अध्यक्ष। (2) श्री ब्रह्मलाल गुप्ता, पिता- स्व0 राजेन्द्र प्रसाद - उपाध्यक्ष। (3) श्री विजय साह, पिता- स्व0 राधे साह - सचिव। (4) श्री ओम प्रकाष मोदी, पिता- स्व0 गणेष मोदी - सह सचिव (5) श्री सत्यनारायण साह, पिता- स्व0 सहदेव साह - कोषाध्यक्ष। (6) श्री शंभू गुप्ता, पिता- स्व0 भोला गुप्ता - सदस्य। (7) श्री मनोज साह, पिता- श्री विजय साह - सदस्य। (8) थानाध्यक्ष नाथनगर - सदस्य। सभी का पता- के0बी0 लाल रोड, नाथ नगर, (निकट- श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी), जिला-भागलपुर ।
यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अंचल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित इस शर्त के साथ किया जायेगा की कृत कार्रवाई की लिखित सूचना शीघ्र समिति के अध्यक्ष को अवष्य देगें।
मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग का कार्य श्री महेष मिश्र पुजारी करेंगें। उपरोक्त वर्णित अस्थायी न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने तथा न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 जगन्नाथ मंदिर नीमतल्ला ठाकुरवाड़ी, के0बी0 लाल रोड,नाथ नगर, जिला- भागलपुर,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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18 अप्रील 2022
सं0 147--श्री राम जानकी मन्दिर, माड़वारी मुहल्ला, जिला-बेगुसराय पर्षद से निबंधित न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4585/21 है।
इस न्यास में पूर्व न्यास समिति का गठन दिनांक-06.10.2004 को किया गया था। उस समिति द्वारा किये गये कार्य और अधिनियम के प्रावधान का पालन नहीं किये जाने, जमीन को अवैध अतिक्रमण आदि बिन्दु पर विचारोपरान्त कार्य असंतोषजनक पाते हुए नयी न्यास समिति के गठन का आदेष पर्षद द्वारा दिनांक-26.02.2021 को लिया गया तथा नयी न्यास समिति बनाये जाने हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी से पर्षद के पत्र दिनांक-07.07.2021, 07.10.2021 द्वारा मांग की गयी, परन्तु खेद का विषय है कि अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई, नामों का प्रस्ताव, भूमि संबंधि विवरण नहीं दाखिल की गयी। जबकि ग्रामीणों द्वारा दिनांक-07.01.2021 को एक बैठक कर 06 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पास कर अंचलाधिकारी तथा पर्षद को दिनांक-19.02.2021 को प्राप्त कराया गया और न्यास समिति के उक्त नामों का प्रस्ताव अंचलाधिकारी को भी दिनांक-18.02.2021 को भेजा गया, परन्तु पत्र के आलोक में किसी प्रकार के नामों का प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुआ। जबकि ग्रामीणों द्वारा चयनित नामों की समिति हेतु पुनः प्रार्थना पत्र दिनांक-15.03.2021 को पर्षद को प्राप्त हुआ, जिसके साथ 05 व्यक्तियों के चरित्र सत्यापन भी संलग्न है और इसी बीच यह भी सूचना प्राप्त हो रही है कि वर्ष 2004 में गठित न्यास समिति द्वारा मन्दिर की भूमि को अवैध रूप से पट्टे आदि के नाम पर दिये जाने हेतु भी कार्रवाई प्रारम्भ कर दी32 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 गयी है। अतः मामले की आवष्यक को देखते हुए ग्रामीणों द्वारा जो प्रस्ताव भेजा गया है उसे अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए 06 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जाता है तथा एक योजना का निरूपण किया जाता है।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर न्यास योजना, माड़वारी मुहल्ला, जिला-बेगुसराय'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर न्यास समिति, माड़वारी मुहल्ला जिला-बेगुसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
1. अनुमण्डल पदाधिकारी, बेगुसराय - अध्यक्ष 2. श्री अर्जून प्रसाद सिंह, पिता-गोरलाल सिंह, ग्राम-गोरेगांव, थाना-लोहियानग -उपाध्यक्ष 3. श्री चन्द्र कुमार सिंह, पिता-हरगोविन्द सिंह, लोहियानगर -सचिव 4. श्री पवन कुमार चौधरी, पिता-रामजीवन चौधरी, ग्राम-आगापुर मंसुरचक -कोषाध्यक्ष 5. श्रीमति पिंकी कुमारी, पति-विषुजीत राम, सर्वोदय नगर, विष्णुपुर -सदस्य 6. श्रीमति मिनाक्षी कुमारी, पति-सुनिल कुमार खम्हार, थाना-मुफसिल -सदस्य उपरोक्त न्यास समिति की अवधि का विस्तार अनुमण्डल पदाधिकारी से प्रस्ताव प्राप्त होने पर किया जायेगा और न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है सर्वप्रथम बैंक में खाता खोलवाये तथा उक्त मन्दिर की जितनी भी जमीन है, उसका वार्षिक बन्दोबस्ती कर पर्षद को सूचित करें। मन्दिर की भूमि की सुरक्षा हेतु कदम उठाये जाए तथा किसी भी प्रकार से बन्दोबस्ती 03 वर्ष से अधिक के लिए नहीं की जायेगी और बन्दोबस्ती की सूचना पर्षद को दी जायेगी तथा पर्षद के आदेष दिनांक-03.03.2022 के आलोक में वर्ष 2004 में गठित न्यास समिति का किसी भी प्रकार कोई अधिकार आज की तिथि से नहीं रहेगा और मन्दिर से संबंधित जो भी दस्तावेज हो वह नवगठित न्यास समिति के सचिव/उपाध्यक्ष को 15 दिनों के अन्दर शीघ्र उपलब्ध कराकर प्राप्ति ले लेंगे।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।33 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023
27 फरवरी 2023
सं0 4024--श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपोस्ट-रामपुर जलालपुर, थाना-दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-901 है।
पूर्व में इस मंदिर की देखभाल, रागभोग, पूजा-पाठ, प्रबंधन आदि स्व॰ महंत रामचन्द्र दास द्वारा किया जाता था और उनके स्वर्गवास के पष्चात गद्दीनषीं महंत हनुमानगढ़ी एवं महंत श्री संतराम दास, महंत उज्जमिना पट्टी के प्रमाण-पत्र के आधार पर महंत श्री शत्रुघ्न दास को न्यासधारी की मान्यता दिनांक- 30/01/2012 को प्रदानकी गयी। संचिका से यह स्पष्ट भी होता है कि महंत जी की नियुक्ति के पष्चात वर्ष 2012-2016 तक आय-व्यय विवरणी नहीं समर्पित की गयी, परन्तु पर्षद शुल्क के रूप में 2,000-2,500/-रू0 जमा किया गया और वर्ष 2016 के बाद से किसी प्रकार का कोई सम्पर्क नहीं किया गया और न हीं कोई आय-व्यय विवरणी समर्पित की।
इसी बीच श्री इन्द्रजीत कुमार चौधरी द्वारा मंदिर की भूमि पर विद्यालय खोलने के संबंध में लीज पर दिये जाने का प्रार्थना-पत्र दिया गया। उनके प्रार्थना-पत्र को विचारोपरान्त अस्वीकृत किया गया। इसी बीच वर्ष 2021 में शत्रुघ्न दास द्वारा एक षिकायत की गयी कि मंदिर की भूमि पर 04 पेड़ आम के, 02 कटहल के पेड़ को अवैध रूप से काट कर बिक्रय कर दिया गया है और उन्होंने उल्लेख किया कि वह अधिकांष समय अयोध्या में रह कर एक अन्य मंदिर की देखभाल करते हैं, जिससे वर्तमान मंदिर की व्यवस्था उनके द्वारा सुचारू रूप से नहीं की जा रही है और प्रार्थना किया कि एक न्यास समिति का गठन किया जाये। पुनः श्री अषोक चौधरी द्वारा लिखित प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया, जिस पर लगभग 80 व्यक्तियों के हस्ताक्षर थे, उसमें उल्लेख था कि पेड़ काटने की सूचना गलत है और महंत जी द्वारा भी यह स्वीकार किया गया कि उन्हें दूरभाष पर सूचना प्राप्त हुई थी, जिस पर उन्होंने पर्षद को पेड़ काटे जाने की बात लिखी थी, परन्तु जांच के उपरान्त यह पाया गया कि वह आरोप गलत है। पर्षदीय सुनवायी में दिनांक- 21/07/2022 को सुनवाई के समय उनके द्वारा कथन किया गया कि उनके गुरू जो अयोध्या में निवास करते हैं, उनका स्वर्गवास अप्रैल 2021 में हो गया है।
महंतजी द्वारा बताया गया कि उन्हें अधिकतर समय अयोध्या में रहना पड़ता है और इस दौरान मंदिर की भूमि पर अवैध लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। विस्तारपूर्वक सुनने के उपरान्त यह पाया गया कि महंत जी के द्वारा वर्तमान में प्रष्नगत मंदिर का प्रबंधन करने में असमर्थ हैं, क्योंकि वह अयोध्या स्थित मंदिर में वहां की व्यवस्था और प्रबंधन में व्यस्त हैं। तदनुसार एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
डॉ0 अषोक कुमार द्वारा कहा गया किया गया कि ग्रामीणों के सहयोग से लगभग 4,00,000/-रू0 एकत्रित करके मंदिर का जीर्णोद्धार विगत वर्ष कराया गया है और इस संबंध में कुछ फोटोग्राफ भी मंदिर की वर्तमान स्थिति और पूर्व की स्थिति का (फोटो) समर्पित किया है तथा कथन करते हैं कि वर्तमान में मंदिर के कब्जे में 20 बीघा भूमि है, जिससे लगभग 2.50 लाख रू0 की अधिक आय (वार्षिक) होती है। इस संबंध में अंचल अधिकारी के द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पत्रांक- 1722, दिनांक- 20/10/2022 प्राप्त हुआ, परन्तु उसमें वर्तमान न्यासधारी शत्रुघ्न दास के नाम का उल्लेख नहीं है। उपरोक्त परिस्थिति में अंचल अधिकारी से जो प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, उस पर विचारोपरान्त मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करने एवं इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-31/01/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री रामजानकी मंदिर, ग्रामपोस्ट-रामपुर जलालपुर, थाना- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामजानकी मंदिर न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-रामपुर जलालपुर, थाना- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामजानकी मंदिर न्यास समिति, ग्रामपोस्ट-रामपुर जलालपुर, थाना- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।34 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति गठित की जाती हैः-
1. श्री अषोक कुमार चौधरी पिता-स्व0 घनष्याम चौधरी अध्यक्ष 2. श्री शत्रुघ्न दास (पूर्व न्यासधारी) उपाध्यक्ष 3. श्री सुधीर चौधरी, पिता-श्री बद्री चौधरी सचिव 4. श्री संजय कुमार चौधरी, पिता-स्व0 राम निहोरा चौधरी कोषाध्यक्ष 5. श्री अजय कुमार चौधरी, पिता-स्व0 मुनेष्वर चौधरी सदस्य 6. श्री संतोष कुमार चौधरी, पिता-स्व0 तेज नारायण चौधरी सदस्य 7. श्री कान्त चौधरी, पिता-स्व0 रामजानकी चौधरी सदस्य 8. श्री गणेष प्रसाद चौधरी, पिता-स्व0 श्रीकृष्ण चौधरी सदस्य 9. श्री उमाषंकर चौधरी, पिता-स्व0 अयोध्या चौधरी सदस्य 10. श्री पवन कुमार चौधरी, पिता-स्व0 सत्यदेव चौधरी सदस्य 11. श्री सुमित भूषण चौधरी, पिता-श्री शषिभूषण चौधरी सदस्य सभी का पता- ग्रा॰पो॰-रामपुर जलालपुर, था॰-दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में श्री रामजानकी मंदिर, ग्रामपोस्ट-रामपुर जलालपुर, थाना- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 फरवरी 2023
सं0 4026--श्री ठाकुर कौषल किषोर मन्दिर, ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4633/22है।
उक्त मन्दिर में 18 बी0 09 क0 04 धुर जमीन है। स्थानीय निवासियों द्वारा लिखित प्रार्थना-पत्र दिया गया था कि मन्दिर की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने हेतु एक न्यास समिति का गठन किया गया है, जो देख-भाल कर रही है। मो0 उच्छी ठकुराईन द्वारा मन्दिर से संबंधित समर्पणनामा दिनांक- 04/09/1941 को निष्पादित किया गया। श्री ठाकुर कौषल किषोर विराजमान मन्दिर, मौजा-कलोजर, के पक्ष में निष्पादित किया है। अर्थात स्थानीय विजय कुमार ठाकुर द्वारा अपने शपथ-पत्र तथा उक्त मन्दिर की भूमि का विस्तृत उल्लेख करते हुए दिया था और उक्त भूमि का दुरूपयोग नहीं हो सका है।35 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 इस संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी, अंचलाधिकारी तथा थाना को भूमि का विस्तृत उल्लेख करते हुए तथा दिनांक-27/07/2022 को आम सभा कर मुखिया की उपस्थिति में 11 व्यक्तियों का चयन न्यास समिति हेतु कर पर्षद को भेजा गया है। जिस संबंध में मंतव्य हेतु अंचलाधिकारी को पत्र दिनांक-03/09/2022 को लिखा गया, परन्तु उनके द्वारा कोई भी न तो रिपोर्ट समर्पित की गयी और न अपना प्रस्ताव नामों का चयन के संबंध में दिया। थाना की रिपोर्ट दिनांक-07/11/2022 पर्षद को दिनांक-11/11/2022 को प्राप्त हो चुका है और प्रस्तावित नामों पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति स्थानीय लोगों द्वारा नहीं किया गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में मन्दिर की सुरक्षा, व्यवस्था हेतु एक योजना को निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से प्रस्तावित नामों की न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया जाता है और एक साल तक कार्य संतोषजनक पाये जाने पर नियमित किये जाने पर विचार किया जायेगा।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-30/01/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री ठाकुर कौषल किषोर मन्दिर, ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम श्री ठाकुर कौषल किषोर मन्दिर न्यास योजना, ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम श्री ठाकुर कौषल किषोर मन्दिर न्यास समिति, ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ/ मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य,36 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री विजय कुमार ठाकुर - अध्यक्ष 2. श्री सुरेन्द्र ठाकुर - उपाध्यक्ष 3. श्री विजय मोहन तिवारी - सचिव 4. श्री ध्रुव प्रसाद देव - कोषाध्यक्ष 5. श्री दीपन सहनी - सदस्य 6. श्री सुरेष पासवान - सदस्य 7. श्री रविन्द्र ठाकुर - सदस्य 8. श्री सविन सहनी - सदस्य 9. श्री उमाषंकर कुमार - सदस्य 10. श्री अनिल कुमार ठाकुर - सदस्य 11. श्री संतोष चौधरी - सदस्य सभी का पता-ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला- समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री ठाकुर कौषल किषोर मन्दिर, ग्राम- क्लोजर, थाना- चकमेहसी, अंचल- कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 फरवरी 2023
सं0 4032--माँ वन दुर्गा मंदिर (सती मंदिर), ग्राम-लोरिक धाम, पोस्ट-हरदी, थानाअनुमंडलजिला-सुपौल, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4638 है। उक्त मंदिर से संबंधित लगभग 08 बीघा भूमि है। मंदिर के निबंधन हेतु श्री अमन कुमार तथा तत्कालिन जिलाधिकारी के द्वारा विस्तृत रूप से योजना बनाते हुए पर्षद में निबंधन किये जाने की प्रार्थना दिनांक- 10/01/2022 की गयी गयी थी। अपने प्रार्थना-पत्र के साथ मंदिर का इतिहास, प्रस्तावित न्यास समिति के नाम का चयन तथा न्यास समिति के क्या-क्या कार्य, कर्त्तव्य होंगे का विस्तृत रूप से उल्लेख करते हुए,''लोरिक की ललकार'' नामक पुस्तक, जिसके लेखक डॉ0 अमन कुमार हैं, कि प्रति भी दाखिल की गयी, जिस पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर का निबंधन किया गया।
वर्तमान जिला पदाधिकारी के पत्रांक- 1319, दिनांक- 17/12/2022 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने हेतु उपलब्ध कराया गया, जिसमें पूर्व जिलाधिकारी द्वारा प्रेषित प्रस्ताव में 03 नये नामों का उल्लेख किया गया है और पूर्व की सूची के तीन नामों को विलोपित कर दिया गया, परन्तु उपरोक्त का कोई कारण दर्षित नहीं किया गया है। इस संबंध में श्री अमन कुमार द्वारा पर्षद में एक प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसके साथ बहुत से अनुलग्नक दाखिल किये गये हैं, जिसमें उल्लेख किया गया है कि वर्तमान अचंलाधिकारी व अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा षड्यंत्र के तहत प्रार्थी के नाम को प्रस्ताव में नहीं रखा गया है, जबकि पूर्व जिलाधिकारी द्वारा जो सूची भेजी गयी थी, उसमें प्रार्थी को सचिव के रूप में नामित किया गया था और उल्लेख किया कि उक्त कार्य जानबुझकर किया गया है, क्योंकि प्रार्थी पिछले 18 वर्षों से उक्त मंदिर तथा गांव में कला-संस्कृति आदि के विकास हेतु लगातार प्रयासरत हैं। प्रार्थी के द्वारा मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न पदाधिकारियों तक वर्तमान अंचलाधिकारी, श्री प्रिंस राज तथा अनुमंडल पदाधिकारी के काले कारनामों आदि की षिकायत की गयी है, जिसमें दुर्भावनावष प्रार्थी के नाम को वर्तमान सूची में शामिल नहीं किया गया है। वर्तमान सूची में साधु-समाज के किसी भी व्यक्ति के नाम नहीं है, जबकि पूर्व में श्री राजेन्द्र प्रसाद, जो साधु-समाज से आते हैं, उनका नाम था तथा वर्तमान कमिटि में एक ही परिवार से 04 सदस्यों के नाम भी शामिल कर दिये गये हैं, जो आपसे में गोतिया हैं।
प्रार्थी का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा एक आम सभा की बैठक कर दिनांक- 08/08/2019 को न्यास से संबंधित बायलॉज बनाया गया था, जिसमें भी प्रार्थी के हस्ताक्षर हैं।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए तथा जिला पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित सूची पत्रांक-1687-2, दिनांक- 30/12/2021 एवं पत्रांक- 1319-2, दिनांक- 17/12/2022 पर विचार करते हुए उक्त मंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु एक पूरक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-02/02/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए माँ वन दुर्गा मंदिर (सती मंदिर), ग्राम- लोरिक धाम, पोस्ट-हरदी, थानाअनुमंडलजिला-सुपौल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण37 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे पूरक योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''माँ वन दुर्गा मंदिर (सती मंदिर) न्यास योजना, ग्राम- लोरिक धाम, पोस्ट-हरदी, थानाअनुमंडलजिला-सुपौल'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''माँ वन दुर्गा मंदिर (सती मंदिर) न्यास समिति, ग्राम- लोरिक धाम, पोस्ट-हरदी, थानाअनुमंडलजिला-सुपौल'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के सरकारी कार्यों मेें व्यस्त होने पर उपाध्यक्ष को बैठक आहुत तथा बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार रहेगा, परंतु शर्त्त यह होगी कि बैठक की पुर्व सूचना अध्यक्ष को दी जायेगी एवं बैठक में लिये जाने वाले निर्णय की सूचना भी समय-समय पर अध्यक्ष को लिखित रूप से अवष्य दी जायेगी।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतुन्यास समितिगठित की जाती हैः-
1. उप विकास आयुक्त, सुपौल- संरक्षक 2. अनुमंडल पदाधिकारी, सुपौल- अध्यक्ष 3. श्री हृदय नारायण मुखिया, ग्रा॰पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- उपाध्यक्ष 4. डॉ0 दयानन्द भारती, ग्रा॰- इटहरी, पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- उपाध्यक्ष 5. श्री अमन कुमार, ग्रा॰- चौघारा, पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- सचिव38 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 6. श्री जगदीष प्रसाद यादव, ग्रा॰पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- कोषाध्यक्ष 7. श्री भगवान दत्त यादव,ग्रा॰- चौघारा, पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- सदस्य 8. श्री जीवनेष्वर पाठक,ग्रा॰पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- सदस्य 9. श्री राजेन्द्र प्रसाद, ग्रा॰पो॰- कौषलीपट्टी, था॰- पिपरा, जिला- सुपौल- सदस्य 10. श्री अरूण यादव, ग्रा॰पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- सदस्य 11. श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, ग्रा॰पो॰- हरदी, था॰जिला- सुपौल- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''माँ वन दुर्गा मंदिर (सती मंदिर), ग्राम- लोरिक धाम, पोस्ट-हरदी, थानाअनुमंडलजिला-सुपौल'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार सेबाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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संशोधित अधिसूचना
27 फरवरी 2023
सं0 4034--श्री श्री माँ श्यामा मंदिर, माधेष्वर परिसर, ग्रामपोस्टथानाजिला-दरभंगा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं॰-3813/07 है। इस मंदिर एवं इसकी संपत्ति की सुरक्षा, संरक्षण एवं सुप्रबंधन हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-2929, दिनांक-26/11/2022 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था।
पुर्व में उक्त मंदिर का निबंधन ''श्री श्री माँ श्यामा मंदिर'' के नाम से किया गया था। उक्त मंदिर एवं इसकी संपत्ति की सुरक्षा, सुव्यवस्था एवं सर्वांगीन विकास हेतु निर्गत पर्षदीय अधिसूचना दिनांक-10/08/2007 एवं दिनांक- 29/08/2012 तथा पर्षदीय आदेष दिनांक- 31/08/2017 में टंकन भुलवष न्यास का नाम ''माँ श्यामा मंदिर'' के नाम का उल्लेख किया गया है। इस कारणवष ''माँ श्यामा मंदिर'' के नाम से खाता खोला गया है।
पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 2929, दिनांक- 26/11/2022 द्वारा गठित न्यास समिति के सचिव, जिलाधिकारी, दरभंगा द्वारा अपने पत्र दिनांक- 15/01/2023 द्वारा सूचित किया गया है कि ''माँ श्यामा मंदिर'' के नाम ''श्री श्री माँ श्यामा मंदिर'' में हुये परिवर्त्तन से अनेक कठिनाईयाँ उत्पन्न हो रही है।
अतःन्यास से संबंधित खाता के संचालन में हो रही असुविधा को देखते हुये पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-2929, दिनांक-26/11/2022 में ''श्री श्री माँ श्यामा मंदिर'' में सुधार करते हुये ''श्री श्री माँ श्यामा मंदिर'' (माँ श्यामा मंदिर) के रूप में संषोधित किया जाता है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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अधिसूचनाएं
27 फरवरी 2023
सं0 4028--श्री सिवैया मठ, ग्राम-सिवैया, पोस्ट-माहे, भाया-मंगलगढ़, अंचलथाना- सिंधिया,जिला-समस्तीपुर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-1154 है। उक्त मंदिर और मंदिर की भूमि की व्यवस्थापूर्व में वेदानंद भारती द्वारा की जाती थी, जिनकी भी स्वर्गवास वर्ष 2010 में हो चुका है। तत्पष्चात श्री रामविलास भारती को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था, लेकिन वर्तमान में वह भी मठ छोड़ कर के कहीं अन्यत्र चले गये हैं, जिसकी सूचना विगत 07-08 वर्षों से नहीं है। तदुनसार उक्त मठ की सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु अचंलाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव माँगा गया।
इसी बीच मठ में रह रहे श्री रतन कुमार महतो द्वारा यह प्रार्थना की गई कि कुछ भू-माफिया व ग्रामीणों द्वारा मठ की भूमि का अवैध रूप से अतिक्रमण कर न केवल कृषि भूमि बल्कि मठ के बगीचे आदि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उक्त के आलोक में पर्षद के आदेष दिनांक- 20/01/2020 द्वारा श्री रतन कुमार महतो को मठ के पुजारी के रूप में मान्यता दी गयी। उनके द्वारा पर्षद को सूचना दी गयी कि उक्त मठ की भूमि को लेकर के भू-हदबंदी वाद सं0-17/76-77 मा0 उच्च न्यायालय के आदेष के आलोक में विचाराधीन है।उपरोक्त वाद में श्री रतन कुमार महतो को उपस्थित होने, पक्षकार बनने तथा पैरवी करने की अनुमति पर्षद द्वारा दिनांक- 24/02/2021 को दी गयी। श्री रतन महतो द्वारा पर्षद में 14 व्यक्तियों के नाम का उल्लेख करते हुए यह प्रार्थना-पत्र दिया गया कि मंदिर की भूमि खाता-2405, खेसरा-9242 (65 डी0) भूमि पर कब्जा कर रखा है।
इसी बीच अंचलाधिकारी के द्वारा न्यास समिति गठन किये जाने हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अपने पत्रांक-991, दिनांक-15/07/2022 द्वारा पर्षद को उपलब्ध कराया गया, जिस संबंध में पुजारी श्री रतन महतो का आरोप है कि प्रस्तावित नामों में 09 व्यक्ति ऐसे हैं, जिनके द्वारा मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है तथा उक्त प्रस्तावित 09 व्यक्तियों के नामों, उनके द्वारा मंदिर के किस खाता, खेसरा की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है,की39 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 विस्तृत सूची दिनांक- 24/09/2021 को समर्पित की गयी। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी को पत्र लिखा गया कि ऐसे व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अंचलाधिकारी द्वारा भेजा गया, जो स्वयं मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किये हुए हैं। पुजारी श्री रतन महतो को मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु सभी प्रकार के किसी भी न्यायालय में या किसी पदाधिकारी के यहां प्रार्थना-पत्र देने, वाद दायर आदि करने के लिए भी प्राधिकृत किया गया तथा पर्षद के आदेष दिनांक- 27/04/2022 द्वारा मंदिर की भूमि पर सभी प्रकार के स्थायी-अस्थायी निर्माण पर तथा भूमि के क्रय-बिक्रय पर रोक लगायी गयी, जिसकी सूचना अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल पदाधिकारी, तथा थाना को भी भेजी जा चुकी है और जिन 14 व्यक्तियों के नामों के संबंध में अवैध कब्जा किये जाने की सूचना हुई है, उन सभी को निबंधित डाक द्वारा नोटिस जारी की गयी तथा नये सिरे से अंचलाधिकारी से 07 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी, जो मंदिर के कार्य में सहयेाग कर सकें और मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा सकें। पर्षद के नोटिस दिनांक- 10/06/2022 के आलोक में 10 व्यक्ति पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए। उनका कथन था कि मंदिर की भूमि पर उनके पूर्वजों द्वारा पूर्व महंत वेदानंद भारती को प्रतिफल देकर कार्य किया है, चूंकि उक्त विक्रय प्रारंभतः शुन्य और अप्रभावी होता है, जैसाकि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा- 44 में स्पष्ट है कि कोई भी महंत/न्यासी/सेवायत/न्यासधारी मंदिर की सम्पति को बेचने, रेहन करने, दान करने, बदलैन का अधिकार नहीं है व अधिकतम 03 वर्ष के लिए बंदोबस्ती कर सकते हैं, यदि इसके विपरित कोई कार्य करते हैं तो ऐसा अंतरण विधिमान्य नहीं है, जबतक पर्षद की अनुमति प्राप्त नहीं हो और पर्षद द्वारा किसी भी उक्त मठ के महंत या न्यासधारी को अनुमति नहीं दी गयी है।
पुजारी श्री रतन महतो को निर्देष दिया गया था कि कुछ ऐसे ग्रामीणों के नामों का प्रस्ताव दें, जो उन्हें सहयोग कर मंदिर के विकास और मंदिर की भूमि की सुरक्षा कर सकें तथा अतिक्रमण मुक्त करा सकें। उपरोक्त के संदर्भ में श्री रतन महतो द्वारा दिनांक- 19/11/2022 को एक आमसभा की बैठक (दिनांक- 08/11/2022) को आयोजित कर मंदिर के विकास हेतु 05 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया और अंचलाधिकारी के द्वारा जो 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया है, जिनमें 09 व्यक्तियों के विरूद्ध सूचना प्राप्त हुई है कि मंदिर के भिन्न-भिन्न खाता, खेसरा पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है।ऐसे व्यक्तियों की न्यास समिति गठित किया जाना उचित नहीं है। शेष 02 व्यक्ति क्रमषः हीरा दास के संबंध में श्री महतो का कथन है कि वह वर्तमान में लकवाग्रस्त हैं और एकमात्र सदस्य श्री संजय कर्ण बचते हैं, जिनके विरूद्ध मंदिर की भ्ूामि पर किसी प्रकार से अतिक्रमण करने, कब्जा करने या क्रय-बिक्रय करने का कोई आरोप नहीं है। पर्षद के मा0 सदस्य द्वारा ग्रामीणों से जानकारी प्राप्त कर तीन नामों का उल्लेख किया गया है कि उन्हें न्यास समिति में स्थान दिया जाये और उनके द्वारा मंदिर की किसी प्रकार की भूमि पर अतिक्रमण नहीं है।
उपरोक्त परिस्थिति में एक न्यास समिति का गठन एवं इसके कार्यान्वयन हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-30/01/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री सिवैया मठ, ग्राम- सिवैया, पोस्ट- माहे, भाया- मंगलगढ़, अंचलथाना- सिंधिया,जिला-समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सिवैया मठ न्यास योजना, ग्राम- सिवैया, पोस्ट- माहे, भाया- मंगलगढ़, अंचलथाना- सिंधिया,जिला-समस्तीपुर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री सिवैया मठ न्यास समिति, ग्राम- सिवैया, पोस्ट- माहे, भाया- मंगलगढ़, अंचलथाना- सिंधिया,जिला-समस्तीपुर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।40 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ/ मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति गठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, रोसड़ा, जिला- समस्तीपुर (अध्यक्ष) 2. श्री कृष्ण कुमार साह, पिता-स्व0 मदन साह (उपाध्यक्ष) 3. श्री भीखो कमती, पिता-स्व0 भोगी कमती, मो0 नं0-7763995906 (उपाध्यक्ष) 4. श्री रतन कुमार महतो, पिता-स्व0 धनेष्वर महतो (सचिव, सह-पुजारी) 5. श्री मुकेष महतो, पिता-श्री अर्जुन महतो, मो0 नं0-9931051724 (कोषाध्यक्ष) 6. श्री प्रमोद प्रसाद सिंह, पिता-आनन्द सिंह (सदस्य ) 7. श्री संजय कुमार कर्ण, पिता-स्व0 राजेष्वर लाल कर्ण (सदस्य) 8. श्री रामउदगार बैठा, पिता-स्व0 जगदीष बैठा (सदस्य) 9. श्री गोपाल कमती, पिता-स्व0 बैद्यनाथ कमती (सदस्य) 10. श्री रविंदर शर्मा, पिता-श्री कमलेष्वरी शर्मा, मो0 नं0-9507068430 (सदस्य) सभी का पता-ग्रा॰-सिवैया, पो॰-माहे, भाया-मंगलगढ़, अं॰था॰-सिंधिया, जिला-समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री सिवैया मठ, ग्राम- सिवैया, पोस्ट- माहे, भाया- मंगलगढ़, अंचलथाना- सिंधिया,जिला-समस्तीपुर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकारसे बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 फरवरी 2023
सं0 4030--श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4640 है।
उक्त मंदिर में (04-14-15) कट्ठा भूमि समर्पण नामा के आधार पर है। न्यास समिति गठन किये जाने हेतु ग्रामीणों की आम सभा, दिनांक-23/07/2022 को सम्पन्न हुई थी, जिसमें 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव किया गया था। उक्त प्रस्ताव को अंचलाधिकारी को भेजकर उनसे मंतव्य की मांग की गयी, जिसके आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्र पत्रांक-1955-2, दिनांक-02/12/2022 द्वारा 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठित किये जाने हेतु दिया गया। पर्षद में उपस्थित ग्रामीण श्री महेष्वर पांडे द्वारा बताया गया कि आरक्षित दावे से एक ग्रामीण श्री बबलु सदा, वर्तमान में वार्ड पार्षद चयनित हुए हैं, उनको भी स्थान दिया जाए, क्योंकि प्रस्तावित नामों में उस कोटि से किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं है।41 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 उपरोक्त परिस्थिति में उपरोक्त प्रस्ताव पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-02/02/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास योजना, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास समिति, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणनाकर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होनेवाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा-11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास/मठ/मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु न्यास समिति गठित की जाती हैः-
1. श्री घनष्याम पाण्डेय, पिता-श्री लक्ष्मी ना0 पाण्डेय अध्यक्ष 2. श्री महेष्वर पाण्डेय, पिता- स्व0 अवधलाल पा0 उपाध्यक्ष 3. श्री बबलु सदा (वार्ड पार्षद) उपाध्यक्ष42 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 4. श्री बिन्देष्वर पाण्डेय, पिता-स्व0 राम प्र0 पाण्डेय सचिव
5. श्री विजयनन्दन पाण्डेय, पिता-स्व0 बहुरी पाण्डेय कोषाध्यक्ष 6. श्री रामफल यादव, पिता-स्व0 मुनेष्वर यादव सदस्य 7. श्री रामेष्वर पाण्डेय, पिता-स्व0 अनन्त लाल पाण्डेय सदस्य सभी का पता-ग्रा॰-दीनादास टोला, पो॰-सिमराही, अं॰था॰-राघोपुर, वीरपुर, जिला-सुपौल। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमिका हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 फरवरी 2023
सं0 4021--श्री बालेष्वर स्थान (विद्यापति धाम), ग्रामपोस्टथाना- विद्यापतिनगर, अनुमंडल-दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-1917/67 है।
उक्त मंदिर के संबंध में राजस्व विलेख में थाना- 90, खाता- 507, खेसरा- 1259, किस्म जमीन-षिवालय, एरिया 01.13 एकड़, विद्यापति स्थान, सेवायत श्री रघुनंदन गिरि के नाम से इन्द्राज है। पूर्व में उक्त मन्दिर की देख-भाल गिरि परिवार द्वारा की जाती थी, परन्तु विगत 25 वर्षों से न्यासधारी द्वारा किसी प्रकार का कोई पत्राचार या अधिनियम की धारा- 59, 60, 70 के तहत बजट, आय-व्यय विवरण, पर्षद शुल्क आदि पर्षद में नहीं जमा किया और पर्षदीय आदेष की अवहेलना करने के आरोप में तत्कालीन न्यासधारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई। न्यासधारी के स्वर्गवास के पष्चात् पर्षदीय आदेष दिनांक- 05/11/2005 द्वारा अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। उक्त भूमि के संबंध में समय-समय पर पर्षद द्वारा जाँच भी करायी गयी। पर्षद के निरीक्षक द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन दिनांक- 21/10/2013 से स्पष्ट है कि उक्त मन्दिर को उसकी सम्पत्ति से लगभग 25-30 लाख रुपये प्रतिवर्ष की आय प्राप्त होती है। मन्दिर की व्यवस्था पुर्ण रूप से श्री गणेष गिरि द्वारा स्थानीय दबंग लोगों के साथ मिलकर मन्दिर की सम्पत्ति का दोहन तथा दुरूपयोग कर रहे है। अधिनियम की धारा- 59, 60, 70 का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
उपरोक्त रिर्पोट के आधार पर श्री गणेष गिरि से स्पष्टीकरण की मांग पर्षद के आदेष दिनांक- 28/10/2013 द्वारा की गयी। पुनः उन्हें स्मार पत्र दिनांक- 28/11/2013 के आदेष से भेजा गया। उक्त पत्र के आलोक में गणेष गिरि द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया कि वह चिकित्सा हेतु दिल्ली जा रहे है और समय की मांग की गयी। तदोपरान्त अन्य तिथि पर भी उनके द्वारा समय की मांग की जाती रही है।
मन्दिर के संबंध में पर्षदीय पत्रांक- 08/01/2014 द्वारा पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर से जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी तथा पर्षद के आदेष दिनांक- 10/05/2014 द्वारा गणेष गिरि को अंतिम अवसर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने हेतु दिया गया। पुनः उनके प्रार्थना पर अंतिम अवसर पर्षदीय आदेष दिनांक- 01/07/2014 द्वारा स्वीकार किया।
उपरोक्त पत्र के आलोक में दिनांक- 12/08/2014 गणेष गिरि द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। स्थानीय लोगों के द्वारा भी बार-बार मन्दिर की आय के व्यक्तिगत दोहन की षिकायत प्राप्त हो रही थी। अपने स्पष्टीकरण में श्री गणेष गिरि भी स्वीकार करते हैं कि श्रद्धालु के द्वारा चढ़ावा से होने वाली आय का निजी प्रयोग गोस्वामी समाज द्वारा किया जाता है। साथ ही उक्त मंदिर के संबंध में निजी मन्दिर होने की बात कही गयी।
तदुपरांत सभी पक्षों को सुनवाई हेतु नोटिस जारी की गयी, जिसपर दिनांक-08/10/2014, दिनांक-20/11/2014 को तथ्यों को विस्तारपूर्वक सुना गया। पर्षदीय आदेष दिनांक-06/05/2015 में यह पाया गया कि उक्त स्थल को सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित किया जा चुका है और गणेष गिरि पिछले कई तिथियों से अनुपस्थित है और मामले की सुनवाई समाप्त करते हुए इसे सार्वजनिक न्यास के रूप में मान्यता देने हेतु न्यासधारी हरिषचन्द्र गिरि को पिछले 48 वर्षों की आय-व्यय विवरण दाखिल करने का निर्देष दिया गया।
इसी बीच कुछ स्थानीय लोगों रामसुरेष गिरि, मैनेजर गिरि द्वारा मन्दिर की भूमि हड़पने तथा आय को निजी प्रयोग में लेने संबंधित षिकायत पत्र प्राप्त हुआ, जिसपर अनुमण्डल पदाधिकारी से जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। पर्षदीय आदेष दिनांक-13/02/2017 के आलोक में गणेष गिरि से स्पष्टीकरण की मांग की गयी कि न्यास के उचित संचालन नहीं होने के कारण क्यों न समिति गठित कर दिया जाए। कोई प्रत्योत्तर नहीं प्राप्त होने पर पर्षद द्वारा न्यास समिति गठित किये जाने के संबंध में 11 अच्छे चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी तथा उन्हें स्मार-पत्र भी लिखा गया। इसी बीच स्थानीय ग्रामीण अजय कुमार सिंह द्वारा CWJC No.- 17019/19 वाद लाया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेष दिनांक-24/02/2021 द्वारा मत व्यक्त किया गया कि पर्षद, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत शीघ्र उक्त मन्दिर को आधिपत्य में ले और नियमानुसार उसकी व्यवस्था करे या जिला पदाधिकारी को मन्दिर के प्रबंधक के रूप में अधिकृत करे। माननीय उच्च न्यायालय के आदेष के आलोक में पर्षदीय आदेष दिनांक-01/03/2021 द्वारा जिलाधिकारी, समस्तीपुर को अधिनियम की धारा-33 के तहत न्यासधारी नियुक्त किया गया तथा उक्त मन्दिर की सुचारू व्यवस्था और43 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 प्रबंधन हेतु न्यास समिति के गठन हेतु नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी। माननीय उच्च न्यायालय के आदेष एवं पर्षदीय आदेष की प्रति जिलाधिकारी तथा वरीय पुलिस अधीक्षक, समस्तीपुर को उनके सरकारी मोबाईल पर Whatsapp पर भेजकर सूचित किया गया है तथा 03 अन्य बिन्दुओं पर जिलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की गयी।जिलाधिकारी कोपत्र, डाक व ई-मेल तथा Whatsapp के माध्यम से भेजा गया, परन्तु खेद की बात है कि जिलाधिकारी द्वारा कोई प्रतिवेदन पर्षद को नहींउपलब्ध करायी गयी।
इसी बीच ग्रामीणों द्वारा एक आमसभा दिनांक-12/11/2022 को करके उक्त मन्दिर के संचालन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्तावित करते हुये न्यास समिति गठन की मांग की गयी। उक्त प्रस्ताव की प्रति भी जिलाधिकारी को भी पर्षदीय पत्र दिनांक-29/11/2022 द्वारा भेजकर प्रस्तावित नामों के संबंध में उनका मंतव्य या कुछ नये नाम जोड़ना या हटाने के संबंध में की गयी। साथ ही पर्षद द्वारा पूर्व में लिखें गये पत्र दिनांक-01/03/2021 के संबंध में प्रतिवेदन की मांग की गयी, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया था कि अपनी रिपोर्ट दिनांक-31/01/2023 के पूर्व भेजे, परन्तु जिलाधिकारी कार्यालय से पर्षद के किसी भी पत्र प्रत्योत्तर आजतक प्राप्त नहीं हुआ। मन्दिर की आय को निबंधन की तिथि से लगातार निजी प्रयोग में कुछ व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है और बार-बार पत्र दिये जाने के पष्चात् भी अधिनियम की धारा- 59, 60, 70 का पालन नहीं किया जा रहा है।
उपस्थित स्थानीय व्यक्तियों के द्वारा समर्पित पूर्व में स्वत्व वाद 223/1904 में पारित डीग्री दिनांक-14/05/1914 की छायाप्रति के अवलोकन से भी स्पष्ट होता है कि खाता-439, खेसरा-2427, एरिया- 0.17.17, चौहद्दी उत्तर-खान गिरि, पूरबपष्चिम-संतोखी गिरि की भूमि पर एक षिवालय में ठाकुर जी षिवजी एवं सहन महादेव स्थापित हैं। उक्त वाद पक्षों के बीच सुलह के आधार पर मन्दिर में प्राप्त आय को पंडा समाज के बीच किस प्रकार वितरण किया जायेगा, उस संबंध में है। एक अन्य वाद 3112/1905 में उक्त वाद में सुनवाई किया। डिक्री की प्रमाणित प्रतिलिपि तथा हिन्दी प्रति समर्पित की गयी है, जिससे स्पष्ट होता है उक्त खाता, खेसरा, कुल एरिया- 0.17.17 ठाकुर जी मैसहन महादेव स्थान स्थित है। निबंधन विलेख सुलहनामा जो षिव नारायण गिरि एवं गम्भीर गिरि के बीच में हुआ। पुनः निबंधित दस्तावेज दिनांक-09/02/1920 में सुलहनामा है।
उपरोक्त सभी दस्तावेज से स्पष्ट होता है कि खाता-439, खेसरा-2427, एरिया- 0.17.17 C.S. खतियान में उक्त खाते पर भगवान के नाम का इन्द्राज है। जैसा कि पूर्व में इंगलिष काल में 1960 से पूर्व वर्गगज का एक एकड़ होता था और वर्तमान में 1760 वर्ग गज का एकड़ है। इसलिए वर्त्तमान C.S. खतियान में उक्त एरिया 0-17-17 बढ़कर 1.13 एकड़ हो गया है।
उपरोक्त लिखित परिस्थिति से यह स्पष्ट है कि पूर्व के महंत न्यासी गिरि परिवार के द्वारा मन्दिर और उसकी सम्पत्ति से होने वाली आय का निजी प्रयोग में दोहन किया जाता रहा है और पर्षद में निबंधन होने के पष्चात् भी कभी भी अधिनियम की धारा- 59, 60, 70 के तहत बजट, आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क या किसी भी प्रकार का पत्राचार नहीं किया गया और बार-बार स्पष्टीकरण मांगने के पष्चात् भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया और यही कारण था कि पूर्व न्यासी के स्वर्गवास के पष्चात् वर्ष 2005 में अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था।
उपस्थित सदस्य मनीष कुमार गिरि का कथन है कि प्रार्थी के पिता का नाम पषुपति है, उनके पिता का नाम स्व0 गणेष गिरि है और गणेष गिरि के पिता का नाम स्व0 रघूनंदन गिरि था और उनके दो पुत्र हरिषचन्द्र गिरि और गणेष गिरि हुए। खतियान में भी उक्त खाता संख्या-507 विद्यापति स्थान, सेवायत रघूनंदन गिरि का उल्लेख है। मनीष गिरि का कथन है कि रघूनंदन गिरि के स्वर्गवास के पष्चात् हरिषचन्द्र गिरि मन्दिर की देख-भाल करते थे और उनके स्वर्गवास वर्ष 2004 में हुआ और उसके बाद गणेष गिरि उक्त मन्दिर की देख-भाल करते रहें, उनका स्वर्गवास भी वर्ष 2006 में हो गया है और इस संबंध में मृत्यु प्रमाण-पत्र की प्रति दाखिल की जा चुकी है।गाँव में गणेष गिरि उर्फ कवि नामक एक व्यक्ति भी है, जो फर्जी रूप से प्रार्थी गणेष गिरि के रूप में उपस्थित होकर गलत तथ्यों को रखकर कब्जा करना चाहता है, जबकि पूर्व सेवायत रघुनंदन से कोई संबंध नहीं है।गिरि परिवार के बीच चले वाद-223/1904 में पारित डिक्री दिनांक-14/05/1904 एवं दिनांक-18/01/1905 तदोपरान्त वर्ष 1918 और 1920 में निबंधित सुलहनामा खतियान में थाना-90, खाता-507 में''विद्यापति स्थान'' के नाम से रैयत के रूप में तथा किस्म भूमि में षिवालय का उल्लेख यह स्पष्ट करता है कि उक्त मन्दिर सैकड़ों वर्षों प्राचीन है। पूर्व न्यासधारी द्वारा अधिनियम के प्रावधान का पालन नहीं करने, पर्षद के आदेष की अवहेलना करने, आय को निजी रूप से प्रयोग मेंकरने आदि के कारण उक्त मन्दिर की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।इस संबंध में मा॰ उच्च न्यायालय द्वारा भी निर्देष दिया गया है कि पर्षद अधिनियम के तहत उक्त मन्दिर को अपने आधित्य में लेकर उसकी व्यवस्था करे या जिलाधिकारी को प्रबंधक के रूप में मन्दिर की कार्रवाई व देख-भाल करने के लिए अधिकृत करें। इस संबंध में जिला पदाधिकारी को अस्थायी रूप नियुक्त किया जा चुका है, परन्तु अधिनियम की धारा-33 के अन्तर्गत 01 वर्ष से अधिक अस्थायी रूप से न्यासधारी या प्रबंधक नहीं रखा जा सकता है। प्रस्तावित नामों जिला पदाधिकारी को भी मंतव्य हेतु भेजा गया, परन्तु कोई मंतव्य नहीं प्राप्त हुआ है।
उपरोक्त परिस्थिति में अस्थायी रूप से निम्न न्यास समिति का गठन अधिनियम की धारा-32 के तहत किया जाता है तथा कार्य संतोषप्रद पाये जाने पर, किसी प्रकार की आपत्ति नहीं मिलने पर स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा और साथ ही मन्दिर की व्यवस्था, प्रबंधन, पूजा-पाठ आदि के लिए एक योजना का निरूपण करने का निर्णय लिया गया। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-31/01/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री बालेष्वर स्थान (विद्यापति धाम), ग्रामपोस्टथाना- विद्यापतिनगर, अनुमंडल- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर की सम्पत्तियों44 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री बालेष्वर स्थान (विद्यापति धाम) न्यास योजना, ग्रामपोस्टथाना- विद्यापतिनगर, अनुमंडल- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री बालेष्वर स्थान (विद्यापति धाम) न्यास समिति, ग्रामपोस्टथाना- विद्यापतिनगर, अनुमंडल- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ/ मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समितिगठित की जाती हैः-
1. जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर अध्यक्ष 2. श्री नवल किषोर गिरि पिता- दिगम्बर गिरि उपाध्यक्ष 3. श्री सतीष कुमार गिरि पिता- स्व॰ उपेन्द्र गिरि सचिव 4. श्री सुभम कुमार गिरि पिता- श्री मनोज गिरि उप-सचिव 5. श्री मनीष कुमार गिरि पिता- श्री पषुपति गिरि कोषाध्यक्ष 6. श्री अविनाष कुमार पिता- श्री अमरनाथ गिरि सदस्य 7. श्री ललित कुमार गिरि पिता-श्री सुषील गिरि सदस्य 8. श्री गोविन्द कुमार गिरि पिता-श्री निर्मल गिरि सदस्य45 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 9. श्री नन्हे कुमार गिरि पिता-श्री मनोज गिरि सदस्य 10. श्री भरत कुमार गिरि पिता-श्री कृष्णा गिरि सदस्य 11. श्री मुकेष कुमार गिरि पिता- स्व॰विसम्बर गिरि सदस्य सभी का पता-ग्रा॰पो॰था॰- विद्यापतिनगर, अनुमंडल- दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री बालेष्वर स्थान (विद्यापति धाम), ग्रामपोस्टथाना- विद्यापतिनगर, अनुमंडल-दलसिंहसराय, जिला-समस्तीपुर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 फरवरी 2023
सं0 4015--श्री राम जानकी मन्दिर, ग्राम-रूहेलागंज,पत्रालय-लालबाग, थाना-ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय, जिला-दरभंगा, बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1977/67 है।
उक्त न्यास में पर्षद की संचिका के अनुसार 29 बीघा 16 कट्ठा 11 धुर जमीन है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु समय-समय पर न्यास समिति का गठन किया जाता रहा है। पर्षदीय अधिसूचनाज्ञापांक- 3321, दिनांक- 29/03/2017 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था।
पर्षद के संज्ञान में लाया गया कि 07 सदस्यीय न्यास समिति में अध्यक्ष द्वारा त्याग-पत्र दे दिया गया है तथा एक अन्य सदस्य डॉ0 योगेन्द्र मांझी बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं और धु्रव राउत का स्वर्गवास हो गया। उपरोक्त तीनों व्यक्तियों के स्थान पर 03 नवीन सदस्यों क्रमषः 1. प्रकाष कुमार 2. श्री राजीव कुमार पूर्वे एवं 3. श्री मनीष राउत को न्यास समिति में पर्षदीय आदेष दिनांक- 24/11/2021 द्वारा सम्मिलित किया गया था। संचिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि न्यास समिति का कार्य पूर्ण रूप से असंतोषजनक है। न्यास समिति द्वारा अपने गठन के वर्ष 2017-18 में किसी प्रकार की कोई आय-व्यय विवरणी नहीं दी गयी, वर्ष 2018-19 और 2019-20 में आय-व्यय विवरणी दी गयी। तत्पष्चात वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 की विवरणी आज तक नहीं समर्पित की गयी, जबकि पर्षद द्वारा बार-बार इनको पत्र भेजा गया कि आय-व्यय विवरणी समर्पित करें, परन्तु किसी आदेष का पालन आज तक नहीं किया गया। साथ ही दिनांक- 24/11/2021 को गठित न्यास समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है।
संचिका पर सूढ़ी समाज की आमसभा दिनांक- 15/11/2021 को की गयी,जिसकी प्रति उपलब्ध है, जिसमें 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। एक अन्य आमसभा दिनांक- 22/05/2022 को ग्रामीणों द्वारा की गयी, उसमें भी 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन किये जाने हेतु प्राप्त हुआ। उक्त दोनों सूची को अनुमंडल पदाधिकारी, दरभंगा से पर्षदीय पत्रांक- 1727, दिनांक- 23/08/2022 मंतव्य की मांग की गयी। इसके अनुपालन में अनुमंडल पदाधिकारी, दरभंगा ने अपने पत्रांक- 2624, दिनांक- 05/12/2022 द्वारा दोनों सूचियों में से 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए करनेका निर्णय लिया गया और कार्य संतोषजनक पाये जाने पर स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-30/01/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मन्दिर, ग्राम- रूहेलागंज, पत्रालय- लालबाग, थाना- ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय, जिला- दरभंगा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर न्यास योजना, ग्राम- रूहेलागंज, पत्रालय- लालबाग, थाना- ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय, जिला- दरभंगा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर न्यास समिति, ग्राम- रूहेलागंज, पत्रालय- लालबाग, थाना- ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय, जिला- दरभंगा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।46 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री रामबाबू महतो, पिता-स्व0 सोनेलाल महतो, रूहेलागंज, दरभंगा- अध्यक्ष 2. डॉ0 योगेन्द्र प्रसाद, आजमनगर, दरभंगा- उपाध्यक्ष 3. श्री विनोद महतो पिता-स्व0 महावीर महतो, बापू चौक, सुन्दरपुर, दरभंगा- सचिव 4. श्री मनीष राउत पिता-स्व0 द्वारिका राउत, रूहेलागंज, दरभंगा- कोषाध्यक्ष 5. श्री राजीव कुमार पूर्वे, पिता-राम नारायण पूर्वे, कादिराबाद, दरभंगा- सदस्य 6. श्री अभिषेक कुमार, पिता- स्व0 संजय खर्गा, रूहेलागंज, दरभंगा- सदस्य 7. श्री श्याम कुमार, पिता-राजू राउत, रूहेलागंज, दरभंगा- सदस्य 8. श्री मोनू कुमार पिता-लक्ष्मण प्रसाद, रूहेलागंज, दरभंगा- सदस्य 9. श्री दीपक खर्गा पिता-पवन खर्गा, रूहेलागंज, दरभंगा- सदस्य 10. प्रो0 राजीव कुमार, पिता-स्व0 हीरालाल हाथी, टीचर्स कॉलोनी, आजमनगर, दरभंगा- सदस्य 11. श्री प्रकाष कुमार, पिता-श्री विनोद राउत, रूहेलागंज, दरभंगा- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में श्री राम जानकी मन्दिर, ग्राम- रूहेलागंज, पत्रालय- लालबाग, थाना- ललित नारायण मिथिला विष्वविद्यालय, जिला- दरभंगाके नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।47 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023
22 नवम्बर 2022
सं0 2809--श्री राधाकृष्ण मंदिर (गुफापर ठाकुरबाड़ी), पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला-नालंदा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-939है। पर्षद द्वारा सभी तथ्यों पर विचारोपरांत पारित आदेष दिनांक-12/10/2022 के आलोक में निम्नांकित न्यास समिति का गठन किया जाता है।
उक्त न्यासकी व्यवस्था हेतु पुर्व में महंत श्री जयराम द्वारा किया जाता था और उन्होंने अपने लिखित रूप से 05 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसमें अधिकांष सदस्यों का स्वर्गवास वर्ष 2016-17 में हो गया था। इसी बीच षिकायत प्राप्त हुआ है कि श्री दिवाकर सिंह द्वारा बिना किसी अधिकार व हक के हीं पर्षद से किसी प्रकार की सूचना/जानकारी दिया गया और न हीं मान्यता प्राप्त किये, उक्त भूमि पर एक विषाल मार्केट का निर्माण कर लिया गया है। सूचना प्राप्त होने पर अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ से सभी निर्माण पर रोक लगाते हुये प्रतिवेदन की मांग की गयी और स्थायी रूप से अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ को उक्त मंदिर की भूमि पर स्थित सभी दुकानों तथा मंदिर के प्रबंधन हेतु अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया।
अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ के प्रतिवेदन पत्रांक- 337, दिनांक- 19/04/2022 को समर्पित की गयी, जिसमें उल्लेख किया कि प्रांगण में 69 दुकानें विभिन्न व्यक्तियों को किराये पर दिया गया है, जिसका मासिका किराया 2,34,500/- रू॰ है, प्राप्त हुआ है तथा यह भी उल्लेख किया कि अधिकांष दुकानदार से किये गये एकरारनामा वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 में निष्पादित किया गया है तथा मंदिर के नाम से पंजाब नेषनल बैंक में एक खाता भी खोला गया है, जिसका खाता सं॰- 1255000105249592 हैं, मेंकिराया की राषि इसी खाता में जमा की जाती है।
उक्त मंदिर एवं इसके प्रबंधन हेतु न्यास समिति गठित किये जाने के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ से नामों का प्रस्ताव मांगा गया। अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ द्वारा 09 नामों का प्रस्ताव तथा कुछ अन्य नामाें का प्रस्ताव विभिन्न स्रोतों से भी प्राप्त हुआ है।
अतः मन्दिर की सुचारू व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राधाकृष्ण मंदिर (गुफापर ठाकुरबाड़ी), पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर (गुफापर ठाकुरबाड़ी) न्यास योजना, पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर (गुफापर ठाकुरबाड़ी) न्यास समिति, पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम खाता सं॰- 1255000105249592, पी॰एन॰बी॰, बिहार शरीफ शाखा में जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।48 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
18 मंदिर की भूमि पर अवस्थित जिन दुकानदारों के किरायानामा की अवधि समाप्त हो चुकी है एवं नवीन दुकानदारों के साथ किरायानामा की अवधि अधिकतम 03 वर्षों के लिए ही होगी। उक्त किरायानामा में तीन वर्षों के उपरांत किराया की राषि में 10 प्रतिषत की वृद्धि की शर्त्त भी निहित होगी।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति गठित की जाती हैः-
1. अनुमण्डल पदाधिकारी, बिहार शरीफ - अध्यक्ष 2. श्रीमति फुल कुमारी (पुर्व उप महापौर) पति- शंकर साहु- उपाध्यक्ष 3. श्री दिवाकर कुमार सिंह पिता- स्व॰ ब्रज भूषण सिंह, गढ़ पर, बिहार शरीफ, नालंदा - सचिव 4. श्री रामानंद पांडे पिता- श्री मुन्द्रिका पांडे, रामचन्द्रपुर, बिहार शरीफ, नालंदा-सह सचिव 5. श्री मनीष कुमार सिंह पिता- स्व॰ सुरेन्द्र सिंह, अख्तियारपुर, शाहजहांपुर, नगरनौसा, नालंदा-कोषाध्यक्ष 6. श्री अनुप कुमार मिश्र पिता-स्व॰ गंगाविष्णु प्रसाद मिश्र, गढ़पर, बिहार शरीफ, नालंदा-सदस्य 7. श्री मिथिलेष रंजन उर्फ मिथिलेष नंदन पिता-लाला महतो, षिक्षक कॉलानी, रामचंद्रपुर, नालंदा-सदस्य 8. श्री संजय सिंह, पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा- सदस्य 9. श्री नवीन चन्द्र पाठक पिता- स्व॰ राजेन्द्र प्र॰ पाठक, गढ़पर, बिहार शरीफ, नालंदा- सदस्य 10. श्री राजेष कुमार सिंह पिता- स्व॰ श्याम किषोर सिंह, गढ़पर, बिहार शरीफ, नालंदा- सदस्य 11. थानाध्यक्ष, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें''श्री राधाकृष्ण मंदिर (गुफापर ठाकुरबाड़ी), पोस्टथाना- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
नोटः-अनुमंडल पदाधिकारी, बिहार शरीफ के पत्रांक- 337/गो॰, दिनांक- 19/04/2022 में उल्लेख किया गया है कि 12 दुकानें अर्द्धनिर्मित हैं, जो अभी उसी स्थिति में रहेगी और पर्षद के आदेष के उपरांत ही उन दुकानों के बारे में स्पष्ट आदेष होने के पश्चात ही उन दुकानों के संंबंध में कोई कार्रवाई की जायेगी।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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15 मार्च 2023
सं0 4262--श्री संत आश्रम, राजाकुआँ, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4217/2012 है। उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय आदेष दिनांक-17/02/2016 द्वारा न्यास समिति का गठन किया गया था, परंतु तत्कालीन स्वयंभू न्यास समिति द्वारा अपने बाहुबल का प्रयोग करते हुये न्यास समिति को प्रभार नहीं दिया गया। मा॰ उच्च न्यायालय में CWJC No.- 11487/19 में पारित आदेष दि॰- 25/11/19 के आलोक में जिलाधिकारी द्वारा न्यास समिति को प्रभार ग्रहण कराया गया।
उपरोक्त के आलोक में न्यास समिति में सुधार करते हुए दि॰- 15/02/2021 को 08 सदस्यीय न्यास समिति को कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया, जिसमें अंचलाधिकारी तथा थानाध्यक्ष को भी सम्मिलित किया गया, उक्त न्यास समिति के चार सदस्य द्वारा त्याग-पत्र दे दिया गया, जिसे पर्षद द्वारा स्वीकार किया गया। दो सदस्य क्रमषः श्री रामचन्द्र दास एवं श्री आनन्दी यादव पिता-पुत्र हैं। परंतु इसी बीच समिति के कुछ सदस्यों के विरूद्ध भी कुछ गंभीर आरोप प्राप्त हुये। इस प्रकार न्यास समिति में सदस्यों की संख्या न्यून हो गयी।49 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 तदनुसार पर्षदीय आदेष दि॰- 18/10/2021 द्वारा समिति को भंग करते हुए जिलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया एवं उनसे न्यास समिति गठन हेतु नामों की मांग की गयी है।
वर्तमान में श्रावण मेला एवं कुछ अन्य धार्मिक आयोजन इस माह में प्रारंभ हो रहे हैं और श्रद्धालुओं की काफी भीड़ वहां होती है।
उपरोक्त परिस्थिति में श्री राजेष कुमार सिंह उर्फ राजू यादव (पूर्व विधान पार्षद), निवासी- सोहन कुआँ (मुरारपुर), थाना- लहेरी, पो॰- बिहार शरीफ, जिला- नालंदा, मो॰- 9599170165, जो उस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं धार्मिक कार्याकलापों में रूची रखने के कारण उनको मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था आदि के उद्देष्य से पर्षदीय आदेष ज्ञापांक- 1331, दिनांक- 14/07/2022 द्वारा उन्हें ''संरक्षक'' के रूप में मान्यता प्रदान की गयी थी।
तदोपरांत पर्षदीय पत्रांक- 2096, दिनांक- 15/09/2022 द्वारा ''संरक्षक'' के सहयोग हेतु चार सदस्यों को नियुक्त किया गया था। इसी बीच समाहरणालय, नालंदा का पत्रांक- 614/रा॰, दिनांक- 02/02/23 के माध्यम से पांच नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त हुआ। ''संरक्षक'' द्वारा भी श्री जोगेष्वर प्रसाद के नाम का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त हुआ।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त प्रस्तावित नामों में से 07 नामों का चयन करते हुये एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए अस्थायी रूप से करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-02/02/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री संत आश्रम, राजाकुआँ, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री संत आश्रम न्यास योजना, राजाकुआँ, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री संत आश्रम न्यास समिति, राजाकुआँ, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन तीन सदस्यों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। किन्हींदो सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किसी भी राषि की निकासी की जा सकेगी।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण प्रतिवर्ष करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में अध्यक्ष के सभी दायित्व का निर्वहन उपाध्यक्ष सम्पादित करेंगे।
14. न्यास में अवस्थित सभी दुकानों, किरायेदारों तथा शाखा मठ, विद्यालय का किराया/आय की संग्रह का दायित्व सचिव एवं सह-सचिवों का होगा। ये न्यास की आय को संकलन कर कोषाध्यक्ष को हस्तगत करायेगें तथा कोषाध्यक्ष उपरोक्त राषि को न्यास के खाते में जमा करेगें। इस कार्य में पुरी पारदर्षिता स्थापित की जायेगी।
15. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।50 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
19. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति एक वर्ष के लिए अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-
1. श्री राजेष्वर यादव, पिता- स्व0 सोमर यादव, नकटपुरा, था॰- बिहार, नालंदा- अध्यक्ष 2. श्री राजेष कुमार सिंह उर्फ राजू यादव (पुर्व विधान पार्षद्), सोहन कुआं, (मुरारपुर) लहरी, पो॰- बिहार शरीफ, जिला-नालंदा- संरक्षक 3. श्री आनंदी कुमार पिता-स्व॰ रामचन्द्र दास, सा0-ढ़िवरापर, पो0-मोर तालाब, था0-रहुई, नालंदा- सचिव 4. श्री जोगेष्वर यादव पिता- स्व0 जितु यादव, सा0- पतुआना, पो0था0-बिहार, नालंदा- कोषाध्यक्ष 5. श्री जगदीष पासवान पिता-छोटन पासवान, रामजी चक, बिहार शरीफ, नालंदा- सदस्य 6. प्रो॰ शंभू कुमार पिता-श्री रामदेव सिंह, सा0-कृष्णापुरी, सकुनत रोड, खंदक पर, नालंदा- सदस्य 7. श्री नीरज कुमार पिता- राम बालक प्रसाद, बासवन बिगहा, था0-बिहार, नालंदा- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में''श्री संत आश्रम, राजाकुआँ, बिहार शरीफ, जिला- नालंदा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन/ विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। यदि वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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18 मार्च 2023
सं0 4343--श्री हर हर महादेव धर्मषाला, हरनौत, जिला- नालंदा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं॰-2741 है।
उक्त मंदिर में मात्र 46 डीसमिल भूमि है, जिस पर धर्मषाला एवं मंदिर अवस्थित है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु दिनांक- 09/07/2015 को न्यास समिति का गठन किया गया था और नयास समिति के कार्यकाल को संतोषप्रद पाते हुये पुनः 02 वर्ष के लिए नयास समिति के कार्यकाल का विस्तार दिनांक- 27/11/2020 द्वारा किया गया था। उक्त मंदिर की आय मुख्य स्रोत मंदिर के प्रांगण में अवस्थित लगभग 23 दुकानें हैं और मंदिर में चढ़ावा, दान-पात्र से है।
न्यास समिति के निर्णय के आलोक में 02 नवीन सदस्यों को पर्षदीय आदेष दिनांक- 10/02/2022 द्वारा स्थान देते हुये 09 सदस्यीय न्यास समिति वर्तमान में कार्यरत है। उक्त न्यास समिति का 02 वर्ष का समय भी समाप्त हो चुका है और नव चयनित सदस्यों द्वारा अपना त्याग-पत्र व्यक्तिगत कारणों से समर्पित किया गया एवं पुर्व न्यास समिति के दो सदस्यों द्वारा न्यास समिति के कार्यों में पुर्ण रूप से सहयोग नहीं करने की षिकातय की गयी। तदनुसार नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचलाधिकारी से नामों की मांग की गयी, जिसके आलोक में ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 25/09/2022 को एक आम सभा की बैठक द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया और उक्त नामों को अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 117, दिनांक- 16/01/2023 द्वारा प्रस्तावित किया गया। न्यास समिति ने दिनांक- 20/07/2022 को मंदिर के संबंध में वर्ष 2020-21 में लगभग 35,00,000/- (पैंतीस लाख) रू॰ व्यय कर मंदिर के स्वरूप को भव्य एवं व्यवस्थित रूप प्रदान किया गया, जिसका विवरण भी समर्पित किया गया है। वर्ष 2018-19 से 2019-20 के बीच धर्मषाला का निर्माण करते हुये धर्मषाला के निर्माण में भी लगभग 22,00,000/- (बाईस लाख) रू॰ व्यय की गयी। 03 नवीन दुकानों का भी निर्माण किया गया, जिसमें 3,00,000/- (तीन लाख) रू॰ पगड़ी के रूप में प्राप्त की गयी और किराया की राषि भी निर्धारित की गयी, जिसमें 03 वर्ष के उपरांत 10 प्रतिषत की वृद्धि की बात कही गयी। दिनांक- 30/06/2022 को एक प्रगति पत्र भी समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया कि धर्मषाला में 10 कमरों का निर्माण किया गया।
कार्यालय कर्मचारी, अतिथि कक्ष का निर्माण, सभी कक्षों में चौकी, दरी, कुर्सी आदि की व्यवस्था, महिला एवं पुरूषों के लिए शौचालय की व्यवस्था, धर्मषाला में दक्षिण भाग में दीवार का निर्माण, श्री षिव मंदिर का जीर्णोद्धार, मंदिर का सौन्दर्यीकरण, टाईल्स और ग्रेनाईट का कार्य, मंदिर की सिढ़ियों पर स्टील रेलिंग, माता पार्वती तथा श्री नन्दीजी, श्री गणेषजी एवं श्री कार्त्तिकजी की प्रतिमा की स्थापना और अन्य भी अनेकों कार्यों का उल्लेख किया गया।51 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 न्यास समिति गठन हेतु प्रस्तावित नामों में 05 सदस्य, वर्तमान कार्यरत समिति से ही हैं तथा शेष अन्य व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भी आम सभा द्वारा किया गया।
पर्षदीय आदेष दिनांक- 02/03/2023 द्वारा पर्षद के मा॰ सदस्य के प्रस्ताव पर विमर्षाेपरांत क्रमांक- 08 पर श्री शषिभूषण कुमार के स्थान पर श्री रोहित कुमार पिता- राजन कुमार को सह-कोषाध्यक्ष तथा श्री अवधेष कुमार को ''संरक्षक'' के पद पर मान्यता दी गयी।
उपरोक्त परिस्थिति में न्यास की सुव्यवस्था एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु नवीन न्यास समिति के गठन 01 वर्ष हेतु करने का निर्णयलिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-17/01/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री हर हर महादेव धर्मषाला, हरनौत, जिला- नालंदा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री हर हर महादेव धर्मषाला न्यास योजना, हरनौत, जिला- नालंदा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री हर हर महादेव धर्मषाला न्यास समिति, हरनौत, जिला- नालंदा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन तीन सदस्यों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा, जिसमें एक सदस्य के रूप में कोषाध्यक्ष रहेगें तथा अध्यक्ष या सचिव में से कोई एक सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किसी भी राषि की निकासी की जा सकेगी।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण प्रतिवर्ष करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में अध्यक्ष के सभी दायित्व का निर्वहन उपाध्यक्ष सम्पादित करेंगे।
14. न्यास में अवस्थित सभी दुकानों, किरायेदारों तथा शाखा मठ, विद्यालय का किराया/आय की संग्रह का दायित्व सचिव एवं सह-सचिवों का होगा। ये न्यास की आय को संकलन कर कोषाध्यक्ष को हस्तगत करायेगें तथा कोषाध्यक्ष उपरोक्त राषि को न्यास के खाते में जमा करेगें। इस कार्य में पुरी पारदर्षिता स्थापित की जायेगी।
15. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।52 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीन्यास समिति एक वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
श्री अवधेष कुमार, ग्रा॰- कल्याण बिगहा, हरनौता, नालंदा- ''संरक्षक'' 1. श्री सुनील कुमार पिता- स्व॰ जागेष्वर सिंह, ग्रा॰पो॰- पओरी, हरनौत, नालंदा- अध्यक्ष 2. श्री अनिल कुमारपिता-स्व॰ भोला सिंह- सचिव 3. श्री अरूण कुमार पिता-स्व॰देवेन्द्र सिंह, ग्रा॰- लंघौरा, पो॰- पोआरी, नालंदा- कोषाध्यक्ष 4. श्री रोहित कुमार पिता-राजन कुमार, ग्रा॰-बनगच्छा, पो॰-तेलमर, था॰-हरनौत- सह- कोषाध्यक्ष 5. श्री रमेष सिंह पिता- राजवंषी सिंह, राँची रोड, हरनौत, नालंदा- सदस्य 6. श्री करूणा प्रसाद पिता-स्व॰ वासदेव महतो, ग्रा॰पो॰- पोआरी, हरनौत, नालंदा- सदस्य 7. श्री राजीव रंजन पिता-उमेष प्र॰ सिंह, ग्रा॰पो॰- पोआरी, हरनौत, नालंदा- सदस्य 8. श्रीभागीरथ पंडित पिता- हरनंदन पंडित, चंडी रोड, हरनौत, नालंदा- सदस्य 9. श्री रंजीत राम पिता- कैलाष राम, ग्रा॰- चेरन रोड, हरनौत, नालंदा- सदस्य 10. श्री अखिलेष कुमार पिता- कैलाष प्रसाद भोला, गोनावां रोड, हरनौत, नालंदा- सदस्य 11. श्री सुनील पाण्डेय पिता- नवल किषोर पाण्डेय, ग्रा॰- मुढ़ारी, हरनौत, नालंदा- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें''श्री हर हर महादेव धर्मषाला, हरनौत, जिला- नालंदा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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7 मार्च 2023
सं0 4161--श्री कल्पवृक्ष धाम, ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं॰-4574/21 है। उक्त न्यास के निबंधन एवं व्यवस्था हेतु स्थानीय लोगों द्वारा एक आम बैठक दिनांक-08/11/2021 मेें करके 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु दिया गया। उक्त प्रस्ताव को अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष उनके अनुमति तथा कुछ नये नामों को स्थान देने या हटाने के संबंध में दिनांक-25/11/2022 को भेजा गया तथा षिवपुर अंचलाधिकारी को इस संबंध में दिनांक-20/12/2022, दिनांक-12/02/2021 एवं दिनांक-07/06/2021 को उक्त प्रस्ताव पर मंतव्य और कुछ अन्य नामों को जोड़ने-हटाने के संबंध में पत्र लिखा गया, परंतु खेद की बात है कि उपरोक्त पदाधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की कोई मंतव्य प्रतिवेदन आज तक पर्षद में नहीं दी गयी। न्यास समिति के अभाव में मंदिर की व्यवस्था, अन्य भूमि के निबंधन आदि में समस्यायें आ रही है।
उपरोक्त परिस्थिति में न्यास की सुव्यवस्था एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति का गठन 01 वर्ष हेतु अस्थायी रूप से करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-20/01/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री कल्प वृक्ष धाम, ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कल्पवृक्ष धाम न्यास योजना, ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कल्पवृक्ष धाम न्यास समिति, ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन तीन सदस्यों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा, जिसमें एक सदस्य के रूप में कोषाध्यक्ष रहेगें तथा अध्यक्ष या सचिव में से कोई एक सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किसी भी राषि की निकाषी की जा सकेगी।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।53 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण प्रतिवर्ष करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में अध्यक्ष के सभी दायित्व का निर्वहन उपाध्यक्ष सम्पादित करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होनेवाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा-11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
1. श्री अषोक कुमार पिता-श्री मथुरा सिंह- अध्यक्ष 2. श्री विरेन्द्र पांडे पिता-स्व॰ हरिवंष पाण्डेय- कोषाध्यक्ष 3. श्री धर्मेन्द्र मालाकार पिता-स्व॰ परमेवर भगत- सचिव 4. श्री जितेन्द्र सिंह पिता-स्व॰ योगेष सिंह- सदस्य 5. श्री प्रमोद सिंह पिता-स्व॰ चन्द्रदेव सिंह- सदस्य 6. श्री अरूण सिंह पिता-स्व॰ दिनेष सिंह- सदस्य 7. श्री शैलेन्द्र सिंह पिता-स्व॰ अनुग्रह नारायण सिंह- सदस्य 8. श्री विजय यादव पिता-स्व॰ करिमन यादव- सदस्य 9. श्री राजेन्द्र सिंह पिता-स्व॰ लक्ष्मी सिंह- सदस्य 10. श्री रमेष पाल पिता-स्व॰ छेदी भगत- सदस्य 11. श्री अजय भुईया पिता-स्व॰ चान्हो भुईया- सदस्य सभी का पता-ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री कल्प वृक्ष धाम, ग्र्रामपोस्ट-परता, थाना-अम्बा, जिला-औरंगाबाद'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भीसम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 मार्च 2023
सं0 4269--श्री शिवजी हनुमान जी मंदिर, ग्राम-कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी, थाना-चन्दौती,पोस्टजिला-गया,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4271 है।54 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 इस न्यास के संबंध में निबंधन के लगभग 07 वर्ष के उपरांत श्री बुधन यादव द्वारा दिनांक- 07/12/2020 को एक प्रार्थना-पत्र देकर निबंधन के आदेष को वापस करने तथा मंदिर के निजी होने का दावा किया गया। पर्षदीय आदेष दिनांक- 28/01/2021 द्वारा उन्हें अपने दावा के समर्थन में उनके पास उपलब्ध दस्तावेज समर्पित करने का निर्देष दिया गया। तदोपरांत उभय पक्षों को विभिन्न तिथियों पर समुचित अवसर प्रदान करते हुये सुना गया। इसी क्रम में पर्षद को ज्ञात हुआ कि आवेदक श्री बुधन यादव का स्वर्गवास दिनांक- 04/12/2021 को हो गया। पर्षद द्वारा वैध वारिसों को पक्षकार बनाते करते हुये दिनांक- 06/07/2022 की तिथि सुनवायी हेतु निर्धारित की गयी। इसके उपरांत विभिन्न तिथियों को उभय पक्षों को विस्तारपुर्वक सुना गया।
उक्त न्यास का स्थल निरीक्षण दिनांक- 12/10/2012 को किया गया था, जिस पर निजी का दावा करने वाले पक्षकार को आपत्ति थी कि उन्हें बिना कोई सूचना दिये न्यास का निरीक्षण किया गया। ऐसी स्थिति में पर्षद द्वारा दिनांक- 04/12/2022 को उभय पक्षों की उपस्थिति में स्थल निरीक्षण का आदेष दिया गया। दोनों पक्षों द्वारा लिखित बहस और दस्तावेज समर्पित किया गया।
सभी तथ्यों का विवेचन करने के उपरांत स्व॰ बुधन यादव एवं उनके वंषज विनोद कुमार यादव एवं अन्य के निजी दावा को अस्वीकृत करते हुये, पुर्व में जो सार्वजनिक की मान्यता प्रदान की गयी थी, उसे उचित माना गया।
न्यास की सुव्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक है। इस संबंध में पर्षदीय पत्रांक- 2274, दिनांक- 10/01/2020 के आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा ग्यारह नाम प्रस्तावित किया गया था। प्रस्तावित नामों में समपर्णकर्त्ता के वंषजों को भी समुचित स्थान दिया गया है और उक्त प्रस्तावित नामों का चरित्र-सत्यापन भी थाना से प्राप्त हो चुका है। उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-10/02/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री शिवजी हनुमान जी मंदिर, ग्राम-कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी, थाना-चन्दौती,पोस्टजिला-गया के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री शिवजी हनुमान जी मंदिर न्यास योजना, ग्राम-कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी, थाना-चन्दौती,पोस्टजिला-गया''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री शिवजी हनुमान जी मंदिर न्यास समिति, ग्राम-कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी, थाना-चन्दौती,पोस्टजिला-गया''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो उनके दायित्वों का निर्वहन उपाध्यक्ष करेंगे।55 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समितिगठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, गया -अध्यक्ष 2. श्री विनोद यादव पिता-स्व॰ बुधन यादव, - उपाध्यक्ष पता-ग्राम- कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी,थाना- चन्दौती, पोस्टजिला- गया
3. श्री गनौरी यादव पिता- स्व॰ जितन यादव, गांगो बिगहा, था॰- रामपुर, गया -सचिव 4. श्री राय रंजन किषोर पिता- स्व॰ काली प्रसाद, मो॰- चुरी, था॰- चंदौती, गया -कोषाध्यक्ष 5. श्री जगदीष पाण्डेय पिता-मुन्ना पाण्डेय, ग्रा॰पो॰- रामपुर, जिला- गया -सदस्य 6. श्री विजय साव पिता-स्व॰ नन्हकु साव, मिर्जा गालिब कॉलेज, गया - सदस्य 7. श्री लाल बहादुर प्रसादपिता-घूटन महतो, कुजापी, था॰- डेल्हा, गया - सदस्य 8. श्री लीली कुमारपिता-मन्नु प्रसाद, ग्रामथाना- डेल्हा, जिला- गया - सदस्य 9. श्री अषोक सिन्हा पिता-स्व॰ राजेन्द्र प्रसाद, ग्रामथाना- डेल्हा, जिला- गया - सदस्य 10. श्री रामाश्रय प्रसाद पिता-कैलाष प्रसाद, ग्रामथाना- चंदौती, जिला- गया - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में''श्री शिवजी हनुमान जी मंदिर, ग्राम-कटारी हिल रोड, शिवपुरी कॉलोनी, थाना-चन्दौती, पोस्टजिला-गया''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन/ विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार सेबाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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9 फरवरी 2023
सं0 3908--श्री जल्ला महावीर मंदिर, बेगमपुर, पटना सिटी, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं॰-4017 है।
उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1788, दिनांक-04/09/2015 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन पांच वर्षों के लिए किया गया था। न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया था तथा पर्षद को न्यास की व्यवस्था में वित्तीय अनियमितता की षिकायत प्राप्त हो रही थी। इसके आलोक में न्यास का स्थल निरीक्षण भी कराया गया तथा स्थानीय जनता एवं पुर्व में गठित न्यास समिति के सदस्यों को विभिन्न तिथियों पर समुचित अवसर प्रदान करते हुये सुनवायी की गयी। नवीन न्यास समिति के गठन के बिन्दु पर स्थानीय जनता से प्राप्त सूची एवं पुर्व न्यास समिति द्वारा सुझायी गयी सूची में अंकित सदस्यों के नाम पर दोनों पक्षों की सहमति बनाने का अवसर प्रदान किया गया, परंतु दोनों पक्ष प्रस्तावित नामों में से संयुक्त न्यास समिति गठन हेतु तैयार नहीं हुये। चूंकि दोनों पक्ष वर्तमान में अपने-अपने द्वारा प्रस्तावित न्यास समिति गठन हेतु अडिग थे। ऐसी स्थिति में पर्षद पहुंची कि श्री जल्ला महावीर मंदिर की व्यवस्था हेतु एक वर्ष के लिए श्री महावीर स्थान न्यास समिति, पटना जंक्षन, जो पर्षद में निबंधित है तथा जिसके प्रबंधन एवं आय-व्यय में काफी पारदर्षिता रहती है। उसे एक वर्ष हेतु प्राचीन जल्ला महावीर मंदिर, पटना सिटी की व्यवस्था सौंपी जाती है, जिससे दोनों पक्षों में हो रहे विवाद से मंदिर को किसी प्रकार की क्षति नहीं हो।
पर्षद के मा॰सदस्य के प्रस्ताव पर उक्त मंदिर के संरक्षक के रूप में श्री घनष्याम दास हंस को पर्षदीय आदेष दिनांक- 30/09/22 द्वारा कार्य करने की अनुमति दी गयी थी, परंतु उनके द्वारा कई तरह की मांग एवं शर्त्त पर्षद के समक्ष रखी गयी, जिसे न्यास समिति पुरा करने में सक्षम नहीं है और न हीं पर्षद उनकी मांग पर कोई आदेष दे सकती है।56 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 अतः ऐसी परिस्थिति में उनको संरक्षक पद कार्य करने की जो अनुमति दी गयी थी, उसे वापस लिया जाता है और इस संबंध में वह स्वतंत्र होते हैं कि वर्तमान में जो प्रबंधन एक वर्ष के लिए श्री महावीर मंदिर, पटना जंक्षन को दिया गया, उनसे संपर्क करें और यदि वो उन्हें वहां रखना चाहते हों, तो इसके लिए वह भी स्वतंत्र होंगे।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 मार्च 2023
सं0 4130--श्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी, सलेमपुर टिकारी, जिला-गया, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3788/07 है।
पुर्व में इस ठाकुरबाड़ी की देखभाल, महंतों द्वारा की जाती थी। महंत द्वारा बिना पर्षद की अनुमति के ठाकुरबाड़ी की भूमि को बंधक करना प्रारंभ कर दिया गया, जिससे वर्ष 2007 में एक न्यास समिति का गठन किया गया, परंतु उक्त न्यास समिति का कार्यकाल भी संतोषजनक नहीं रहा। मंदिर की भूमि की देखभाल हेतु, अनुमंडल पदाधिकारी से न्यास समिति हेतु नामों की मांग जांचोपरांत देने का आदेष दिया गया। इस संबंध में प्रतिवेदन नहीं प्राप्त होने के कारण कई स्मार-पत्र निर्गत किये गये। तत्पश्चात अंचलाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन दिनांक- 07/08/2021 को अनुमंडल पदाधिकारी को समर्पित की, जिसमें उल्लेख किया कि मौजा- सलेमपुर, सर्वे खाता- 196, राम जानकी बेलवन बिहारी के नाम से दर्ज है। कुल रकबा- 17.47 एकड़ है, परंतु जमाबंदी पंजी में वर्तमान में 10.80 एकड़ भूमि अंकित है, जिसमें 06.67 एकड़ भूमि पर जमाबंदी संख्या- 157 के रूप में कई व्यक्तियों के नाम जमाबंदी वर्ष 2001-02 में कायम की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी, गया का पत्रांक- 357, दिनांक- 16/03/22 द्वारा ग्यारह सदस्यों का नाम प्रेषित किया गया।
उपरोक्त परिस्थिति में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित 11 नामों में से दो नाम क्रमषः राकेष कुमार के स्थान पर शंभु नाथ केसरी तथा सुनील यादव के स्थान पर अध्यक्ष पद हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, टेकारी को नामित करते हुये न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित करने तथा इसके कार्यान्यवयन हेतु एक योजना का निरूपण करने का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-11/01/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी, सलेमपुर टिकारी, जिला- गयाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, सलेमपुर टिकारी, जिला- गया''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, सलेमपुर टिकारी, जिला- गया''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।57 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो उनके दायित्वों का निर्वहन उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ/मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु गठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी, गया -अध्यक्ष 2. श्री आषुतोष कुमार पिता- स्व॰ बलिराम शर्मा -उपाध्यक्ष 3. श्री नंदलाल पटेल पिता- स्व॰ रामदास प्रसाद -उपाध्यक्ष 4. श्री ललन सिंह पिता- स्व॰ रघुवंष सिंह -सचिव 5. श्री रामाषीष प्रजापति पिता- विकुम प्रजापति -कोषाध्यक्ष 6. श्री सुरेन्द्र रविदास पिता- रामरतन दास - सदस्य 7. श्रीमति पुष्पा चौरसिया पति- राजदेव चौरसिया - सदस्य 8. श्रीमति सिंधु जैन पति- संजय कुमार - सदस्य 9. श्री शंभुनाथ केसरी पिता- श्री नारायण प्रसाद केसरी - सदस्य 10. श्री शषि प्रियदर्षी पिता- रामदेवमाली - सदस्य 11. श्री राकेष रंजन पिता- स्व॰ बिन्दा रजक - सदस्य सभी का पता-श्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी, सलेमपुर टिकारी, जिला- गया। न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र मंदिर की भूमि जो अतिक्रमण, उसे या तो बंदोवस्ती की राषि निर्धारित करते हुये वसुल की जाय, जो व्यक्ति राषि नहीं देते हैं, उनके विरूद्ध बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास न्यायाधिकरण, पटना में वाद लाया जाय। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर एक वर्ष के उपरांत नियमित किये जाने पर विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी उर्फ बेलवन बिहारी ठाकुरबाड़ी, सलेमपुर टिकारी, जिला-गया'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 फरवरी 2023
सं0 3958--श्री रामजानकी लक्ष्मणजी महाराज मंदिर, फतेहपुर, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3164 है। जिसमें कुल भूमि 11 बीघा 15 कट्टा है जो दिनांक 13.06.1969 व अर्पणनामा दिनांक 22.02.1944 में भी उल्लेख है, जिसमें पर्षद द्वारा 2.24 एकड़, खाता सं0-84 को बेचे जाने का कुछ शतों के साथ अनुमति पूर्व महंत योगेन्द्र मिश्र को दिया गया था, परन्तु उनके द्वारा उक्त भूमि विक्रय करने के बाद शर्तो का कोई पालन नहीं किया गया और उस राषि से बंगाल में अपना मकान क्रय कर लिया और पर्षद के द्वारा अधिनियम कि धारा 59, 60, 70 के तहत बार-बार सूचना दिये जाने के पश्चात भी कोई पालन नहीं किया गया और आदेष की अवहेलना की जाती रही, पर्षद द्वारा स्पष्टीकरण पुछे जाने पर डाक के माध्यम से 8 वर्षो की आय-व्यय विवरण में आय शून्य दिखाते हुए डाक द्वारा ही भेज दी गयी और ग्रामीणों द्वारा उनके विरूद्ध अवैध रूप से भूमि बेचने के संबंध में हकियत वाद 52/21 दाखिल किया गया जो विचाराधीन है, इन सभी आरोपों के संबंध में पुनः योगेन्द्र मिश्र को निबंधित डाक द्वारा सूचना दी जाती रहीं परन्तु व उपस्थित नहीं हुए। दिनांक 05.08.2022 को उनके हस्ताक्षर से पर्षद में लिखित पत्र डाक द्वारा58 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 प्राप्त हुआ, जिसके द्वारा उन्होंने निजी मंदिर होने का दावा किया, जबकि 10 वर्षो कि आय-व्यय विवरण जिसमें कुल भूमि 6.43 एकड़ हैं, पर्षद में डाक द्वारा दाखिल किया और साथ ही अपनी पत्नी के पक्ष में एक सेवायत नामा संबंधित दस्तावेज दाखिल किया जिसमें मात्र 2.65 एक जमीन अंकित हैं। इन सभी तथ्यों पर विचारोपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक 30.08.2022 द्वारा योगेन्द्र मिश्र को न्यासधारी के पद से विरमित किया गया है।
अतः उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक नवीन न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
उपरोक्त परिस्थति में मैं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री रामजानकी लक्ष्मणजी महाराज मंदिर, फतेहपुर, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए विस्तृत आदेष दिनांक-30.11.2022 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी लक्ष्मणजी महाराज मंदिर, फतेहपुर, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी लक्ष्मणजी महाराज मंदिर, फतेहपुर, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 428 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है।
अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/ सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।59 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नांकित न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए की जाती है, जो अधिसूचना पर हस्ताक्षर की तिथि से मान्य होगी :-
1. अंचल अधिकारी, मुसहरी, मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री बच्चा सिंह पिता स्व0 राजन सिंह - उपाध्यक्ष 3. श्री संजय प्रसाद सिंह पिता श्री रामनन्दन प्रसाद सिंह - सचिव 4. श्री मनोज राय पिता श्री कैलाष राय - कोषाध्यक्ष 5. श्री लच्छी राम पिता स्व0 भजन राम - सदस्य 6. श्री नरेष कुमार पिता श्री राम चन्द्र राय - सदस्य 7. श्री मनोज कुमार भारती पिता श्री रामषुन्दर यादव - सदस्य 8. श्री विपत राम पिता स्व0 चुल्र्ह राम - सदस्य 9. श्री अरूण ठाकुर पिता ढ़ोलन ठाकुर - सदस्य 10.श्री आदित्य कुमार मिश्रा पिता महेन्द्र मिश्र - सदस्य 11. श्रीमति सुनीला कुमारी पति श्री अषोक कुमार सिंह - सदस्य सभी का पता :-ग्राम-फतेहपुर, अंचल-मुषहरी, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर।
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी लक्ष्मणजी महाराज मंदिर, फतेहपुर, थाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 22—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
60 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023बिहार गजट
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पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 27/आरोप-01-02/2020-सा0प्र0-14603
सामान्य प्रशासन विभाग
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संकल्प
1 अगस्त 2023
श्री राहुल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 913/11 तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, भोजपुर, आरा के विरूद्ध श्रीमती मधुरिमा प्रसाद, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, गड़हनी, भोजपुर से मोबाईल पर बातचीत करते हुए अवैध राशि की मांग करने तथा श्रीमती प्रसाद द्वारा अवैध राशि देने से इन्कार करने पर गलत कार्य करने के लिए दवाब देते हुए धमकी देने, उन्हें परेशान करने संबंधी समाज कल्याण विभाग से प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में श्री राहुल को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14710 दिनांक 21.11.2017 द्वारा निलंबित किया गया साथ ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16805 दिनांक 21.12.2018 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। कालांतर में श्री राहुल को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8533 दिनांक 26.06.2019 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 314 दिनांक 27.03.2021 से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में श्री राहुल से बचाव बयान की मांग की गयी। तदुपरान्त श्री राहुल के विरूद्ध गठित आरोप, उनके द्वारा समर्पित बचाव बयान, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी, समीक्षोपरान्त श्री राहुल के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11633 दिनांक 12.07.2022 द्वारा तीन वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभार से अवरूद्ध करने की शास्ति अधिरोपित की गयी। उनके पुनर्विचार अर्जी को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17358 दिनांक 22.09.2022 द्वारा खारिज करते हुए दंड को यथावत रखा गया है।
उक्त दंड के विरूद्ध श्री राहुल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लूजे0सी0 संख्या 441/2023 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 13.03.2023 को न्यायादेश पारित किया गया, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः-
In such circumstance, without going into the merit of the case, this Court is of the considered opinion that the impugned orders as contained in Annexure- '33' and Annexure- '35' respectively are liable to be set aside on the ground of violation of principles of natural justice and non-consideration of the materials available on the record. Accordingly, this Court sets aside the impugned orders of punishment vide resolution contained in memo no.11633 dated 12.07.2022 (Annexure- '33') and the resolution contained in memo no.17358 dated 22.09.2022 (Annexure- '35') and remit the matter to the disciplinary authority for passing a fresh order after considering the submissions of the petitioner as contained in Annexure- '32' to the writ application. Let a fresh order be passed within a period of four months from the date of receipt/production a copy of this order. This writ application is allowed to the extent indicated hereinabove.
2. श्री राहुल द्वारा उक्त न्यायादेश के आलोक में एक अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसके साथ उनके द्वारा पूर्व में समर्पित कारणपृच्छा के उत्तर की प्रति संलग्न की गयी है, जिसमें स्वंय पर लगे आरोपों का प्रतिवाद किया गया है। 3. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वार दिनांक 13.03.2023 को दिये गये निदेश के आलोक में श्री राहुल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं उक्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में श्री राहुल द्वारा समर्पित बचाव बयान की पुनः समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि राज्य सरकार के एक अधिकृत संस्थान,61 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा सी0डी0 की जांच कर दिये गये प्रतिवेदन को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये निष्कर्ष को अनुचित नहीं कहा जा सकता है। संचालन पदाधिकारी ने अपने जांच प्रतिवेदन में दूरभाष पर एक महिला पदाधिकारी से बातचीत के क्रम में अशोभनीय, अमर्यादित एवं धमकी भरी भाषा का प्रयोग करने संबंधी आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया है। वरीय पदाधिकारी होने के नाते श्री राहुल का आचरण सरकारी सेवक आचार नियमावली के अनुकूल नहीं है। समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राहुल के कारणपृच्छा के उत्तर को अस्वीकार करते हुए सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 441/2023 में दिनांक 13.03.2023 को पारित न्यायादेश के अनुपालन के क्रम में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11633 दिनांक 12.07.2022 एवं संकल्प ज्ञापांक 17358 दिनांक 12.09.2022 को रद्द करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथा संशोधित नियावली, 2005 के नियम-14 के अंतर्गत दो वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दण्ड विनिश्चित किया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 9599 दिनांक 23.05.2023 द्वारा सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1507 दिनांक 21.07.2023 द्वारा आयोग का अभिमत है कि इस मामले में पूर्व में आयोग का परामर्श/सहमति दी जा चुकी है, अतः सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 9794 दिनांक 22.07.2019 में निहित प्रावधान के आलोक में पुनः आयोग का परामर्श आवश्यक नहीं है।
4 वर्णित तथ्यों के आलोक में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 441/2023 में दिनांक 13.03.2023 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11633 दिनांक 12.07.2022 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17358 दिनांक 22.09.2022 को रद् करते हुए श्री राहुल बि0प्र0से0 कोटि क्रमांक 913/11 तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आई0सी0डी0एस0, भोजपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथा संशोधित नियावली, 2005 के नियम-14 के अंतर्गत दो वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रविन्द्रनाथ चौधरी, उप-सचिव।
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सं0 27/आरोप-01-97/2021-सा0प्र0-14808
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संकल्प
3 अगस्त 2023
श्री प्रमोद कुमार, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 123/19, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, सहरसा के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1585 दिनांक-01.04.2022 द्वारा पदस्थापन वर्ष 2012-13 में निगम मुख्यालय, पटना के पत्रांक-9404 दिनांक-08.12.2012 एवं पत्रांक-9914 दिनांक-29.12.2012 के निदेशानुसार खरीफ विपणन मौसम वर्ष 2012-13 के अन्तर्गत अधिप्राप्ति धान के मिलिंग हेतु सम्बद्ध मिलरों के साथ नियमानुसार एकरारनामा, बैंक गारण्टी, रजिस्टर्ड डीड ऑफ प्लेज की मूल दस्तावेज (भूमि एवं अन्य) इत्यादि प्राप्त नहीं किये जाने, जिसके कारण निगम को कुल 11789.16 एम0टी0 सी0एम0आर/चावल जिसकी समतुल्य राशि मो0-25,53,00,109.00/- (पच्चीस करोड़ तिरपन लाख एक सौ नौ रू0) की आर्थिक क्षति होने से संबंधित आरोप प्रतिवेदित किया गया।
2. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप पत्र के आधार पर इस विभाग के स्तर से आरोप गठित कर उसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। तदुपरांत विभागीय पत्रांक-9463 दिनांक-10.06.2022 द्वारा श्री प्रमोद कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार ने दिनांक-13.12.2022 को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया। विभागीय पत्रांक-960 दिनांक-13.01.2023 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना ने पत्रांक-3014 दिनांक-12.07. 2023 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया।
3. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त प्रस्तुत मामले की वृहत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) के संगत प्रावधानों के तहत श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
4. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रमोद कुमार, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 123/19, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, सहरसा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी/उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी होंगे।
5. श्री कुमार से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु संचालन पदाधिकारी के आदेशानुसार उनके समक्ष उपस्थित हाेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रविन्द्रनाथ चौधरी,उप-सचिव।62 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 सं0 27/आरोप-01-40/2020-सा0प्र0-13056
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संकल्प
11 जुलाई 2023
श्री प्रवीण कुमार, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 1164/11, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई0सी0डी0एस0, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3967 दिनांक-16.10.2020 द्वारा शेल्टर होम में हो रही अनियमितताओं के संबंध में CBI से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर आरोप पत्र प्राप्त हुआ।
2. श्री कुमार के विरूद्ध आरोप है कि :- (i) अपने प्रभार अवधि में शेल्टर होम, मोतिहारी के नोडल पदाधिकारी के रूप में कार्यरत रहने के दौरान संबंधित स्वयंसेवी संस्थान को छोटे-छोटे एवं Filmsy कारणों Funds जारी नहीं कर के खण्ड में थोड़े-थोड़े फंड जारी किये गये जिससे अल्पवास गृह (शेल्टर होम) का सही ढंग से संचालन नहीं हो सका ।
(ii) श्री कुमार के Review Committee के Chairperson के भी प्रभार में रहने के दौरान Review Committee की बैठके आयोजित नहीं हो सकी। इनकी कर्त्तव्यहीनता से न सिर्फ शेल्टर होम, मोतिहारी में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं का निराकरण नहीं हो सका बल्कि शेल्टर होम का संचालन असुरक्षित एवं अपर्याप्त भवन में होता रहा। (iii) अपने पदस्थापन के दौरान इनके द्वारा शेल्टर होम, मोतिहारी का एक बार भी निरीक्षण नहीं किया गया। इनका यह —त्य र्काव्य के प्रति घोर लापरवाही का सूचक है।
3. उपरोक्त आरोपों सहित शेल्टर होम संबंधी विभिन्न पदाधिकारियों के विरूद्ध लगे आरोपों की जांच के लिए उच्च स्तरीय त्रिसदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति द्वारा श्री कुमार के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय कार्रवाई संचालित करने की अनुशंसा की गयी है एवं समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। 4. समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के आरोप पत्र के आधार पर इस विभाग के स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।
5. विभागीय पत्रांक-9340 दिनांक-09.06.2022 द्वारा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री प्रवीण कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार केे पत्रांक-529 दिनांक-22.06.2023 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें इन्होंने कहा है कि :-
(i) पदस्थापन के पहले दिन से वे शेल्टर होम के नोडल पदाधिकारी नहीं थे उस समय नोडल पदाधिकारी जिले में पदस्थापित सहायक निदेशक, समाजिक सुरक्षा हुआ करते थे। बाद में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई०सी०डी०एस० को नोडल पदाधिकारी बनाया गया।
(ii) फंड जारी करने में देरी नहीं की गयी थी। Review Committee की बैठकें आयोजित करने का दायित्व कमेटी के संयोजक DPM-WDC की थी।
(iii) भवन का उपरी तल्ला अल्पवास गृह के लिए स्वी—त किया गया था न कि पूरा भवन। इसलिए भू-तल पर सरकार का कोई दावा नहीं बनता है। भवन ADSS, मोतिहारी के द्वारा चयनित था। भवन के चयन के समय जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई०सी०डी०एस० किसी भी प्रकार से अल्पवास गृह से जुड़ा हुआ पद नहीं था। अल्पवास गृह (शेल्टर होम) का निरीक्षण बार-बार किया गया था।
6. श्री कुमार के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा में पाया गया कि :- (i) श्री कुमार, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई०सी०डी०एस०, पूर्वी चंपारण के प्रभार में दिनांक 11.10.2012 से 24.08. 2015 तक रहे।
(ii) महिला विकास निगम, बिहार के पत्रांक-1105 दिनांक-10.10.2013 की कंडिका 6 (x) में प्रावधानित है कि अल्पावास गृह के लिए एक समीक्षा समिति होगी, जो इसमें प्रवास कर रहे संवासिनों के मामले में प्रतिमाह के. प्रथम सप्ताह में समीक्षा करेगी। समीक्षा के दौरान गत माह में संवासिनों के रख-रखाव, खान-पान, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं पुर्नवास आदि की समीक्षा की जाएगी। इस समिति के अध्यक्ष जिला प्रोग्राम पदाधिकारी होते हैं।
(iii) श्री कुमार द्वारा अपने पदस्थापन काल में नियमित रूप से अल्पावास गृह की समीक्षा नहीं की गयी। समीक्षा के अभाव के कारण अल्पावास गृह में व्याप्त त्रुटियों का निराकरण संभव नहीं हो पाया। आरोपित पदाधिकारी का यह कृत्य लापरवाही का द्योतक है। अतः श्री प्रवीण कुमार का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।
7. समीक्षोपरांत श्री प्रवीण कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-1164/11, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई0सी0डी0एस0, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत (क) निन्दन (आरोप वर्ष-2013-14), तथा (ख) 01 (एक) वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध रखने की शास्ति अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित की गयी।
8. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णायानुसार श्री प्रवीण कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-1164/11, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आई0सी0डी0एस0, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानाें के तहत् निम्न शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः- (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2013-14),63 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 (ii) 01 (एक) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रविन्द्रनाथ चौधरी, उप-सचिव।
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सं0 27/आरोप-01-63/2021-सा0प्र0-11822
------ संकल्प 21 जून 2023
श्री पंकज कुमार गुप्ता, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1111/11, तत्कालीन कार्यपालक दण्डाधिकारी, मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) के विरूद्ध मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पत्रांक-615 दिनांक-23.08.2006 द्वारा फर्जी दिहाड़ी मजदूरों के नाम पर राशि गबन, योजना संबंधी चावल की कालाबजारी एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की अवैध बहाली करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया । उक्त आरोप के विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-44/2006 दर्ज है। 2. श्री गुप्ता के विरूद्ध विधि विभाग, बिहार, पटना के आदेश संख्या एस0पी0(नि0)-09/2014/172/जे0, दिनांक-27.06.2014 द्वारा अभियोजन स्वीकृत है।
3. श्री गुप्ता के विरूद्ध इन आरोपों के लिए विभागीय स्तर पर आरोप-प्रपत्र 'क' गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त अनुमोदित आरोप-पत्र पर विभागीय पत्रांक-13597 दिनांक-18.11.2021 द्वारा श्री गुप्ता से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री गुप्ता के पत्रांक-105 दिनांक-28.11.2022 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। 4. श्री गुप्ता के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक् समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इन आरोपों की वृहद जांच के लिए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदन से विभागीय संकल्प ज्ञापांक-305 दिनांक-04.01.2023 द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें प्रमंडलीय आयुक्त, मुजफ्फरपुर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
5. प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहूत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1314 दिनांक-11.04.2023 द्वारा इस विभाग को जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। आरोपों के संबंध में जांच पदाधिकारी का निष्कर्ष निम्नवत है-
आरोप संख्या-01- को सूचना मात्र माना है।
आरोप संख्या-02- का आंशिक रूप में प्रमाणित माना है।
आरोप संख्या-03- यह आरोप, आरोप सं0-02 से ही संबंधित है (आंशिक रूप में प्रमाणित )।
6. विभागीय पत्रांक-8405 दिनांक-03.05.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन पर श्री गुप्ता से बचाव बयान की माँग की गयी। श्री गुप्ता के पत्रांक-487 दिनांक 30.05.2023 द्वारा बचाव बयान समर्पित किया गया।
7. मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा प्रतिवेदित आरोपों, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री गुप्ता के बचाव बयान की समीक्षा गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया किः-
(i) जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर एवं अनुमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी मुजफ्फरपुर के निदेशानुसार आरोपी पदाधिकारी द्वारा जिला जन शिकायत में अनियमितता से संबंधित 13 मामलों में मात्र 02 मामले की जांच की गयी शेष 11 मामले की जांच नहीं की गयी जिसमें आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका के अवैध बहाली, अनुसूचित जाति के राशि का दुरूपयोग, समाजिक सुरक्षा पेंशन में रिश्वत, योजना संबंधी चावल की कालाबाजारी जैसे मामले शामिल थे।
(ii) गंभीरतापूर्वक जांच किये बगैर जांच प्रतिवेदन में मुख्य आरोपी श्री भरत लाल चौधरी, मुखिया को इंदिरा आवास में गड़बड़ी की शिकायतों को छोड़कर अन्य आरोपों से मुक्त कर दिया गया। श्री गुप्ता द्वारा पदीय र्काव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गयी है। अतः श्री गुप्ता का बचाव-बयान स्वीकार योग्य नहीं है।
8. सम्यक् विचारोपरान्त श्री पंकज कुमार गुप्ता, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1111/11, तत्कालीन कार्यपालक दण्डाधिकारी, मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) के बचाव बयान को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् (क) निन्दन (आरोप वर्ष-2005-06) तथा (ख) 02 (दो) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध रखने की शास्ति अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित की गयी। 9. अतः श्री पंकज कुमार गुप्ता, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1111/11, तत्कालीन कार्यपालक दण्डाधिकारी, मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली, 2005 के नियम-1464 (cid:464)बहार गजट, 16 अगस्त 2023 के संगत प्रावधानो के तहत् अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा (क) निन्दन (आरोप वर्ष-2005-06) तथा (ख) 02 (दो) वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध रखने की विनिश्चत शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित की जाती है।
आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रविन्द्रनाथ चौधरी, उप-सचिव।