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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 August 2023

Published 17 August 2023

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-08-17.682
Languages
English, Hindi

(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध

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26 ;बपकरू302द्ध 1945 ;0द्ध

(0 682) ए ;बपकरू232द्धए 17 ;बपकरू232द्ध 2023

वित्त विभाग

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vf/klwpuk

10 vxLr 2023

सं॰ 11/निगरानी-06/2023/7070—वि0/श्री राजीव कुमार गुप्ता, तत्कालीन कोषागार पदाधिकारी, सारण (छपरा) द्वारा जे0 जे0 परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, मशरक के शिक्षकों के भुगतान से संबंधित छः विपत्रों को पारित करने में अपेक्षित सतर्कता एवं उत्तरदायित्व का पालन नहीं करने तथा अनावश्यक विलंब करने से संबंधित प्राप्त शिकायत की जाँच हेतु विशेष जाँच दल का गठन किया गया। जाँच दल द्वारा कोषागार के निरीक्षण के उपरांत श्री गुप्ता के विरूद्ध की गई शिकायत को सही पाया गया। आरोपों के प्रथम दृष्टया सही पाये जाने के कारण विभागीय पत्रांक-7298 दिनांक-14.09.2016 द्वारा इनसे एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण की माँग की गई। स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण विभागीय पत्रांक-7867 दिनांक-03.10.2016 द्वारा पुनः स्मारित किया गया। यह पत्र ई-मेल द्वारा भी प्रेषित किया गया। निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने पर विभागीय अधिसूचना सं0-8227 दिनांक-19.10. 2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील)नियमावली-2005 के नियम-9(1)(क) के अंतर्गत इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय वित्त विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया गया।

2. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) के अनुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8821 दिनांक-18.11.2016 द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध आरोप-पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। इस हेतु श्री शिवशंकर मिश्र, तत्कालीन अपर सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं तत्कालीन अवर सचिव, प्रशाखा-01, वित्त विभाग, बिहार, पटना को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. श्री गुप्ता के विरूद्ध निम्न आरोप है :- ''जे0जे0 परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, मशरक डी0डी0ओ0 कोड-HRD 015 के द्वारा दिनांक- 16.08.2016 को कोषागार में प्रस्तुत किये गये विपत्रों को पारित करने में अनावश्यक विलंब एवं विपत्रों को पारित करने में अपेक्षित सतर्कता एवं उत्तरदायित्व का पालन नहीं करना।''

4. आरोपित पदाधिकारी के बचाव-बयान एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य की समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी ने जाँच प्रतिवेदन में अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया कि ''वित्त विभाग के पत्र सं0-11889 दिनांक-29.02.2011 द्वारा विहित प्रावधानों के अनुसार कोषागार में विपत्रों के उपस्थापन से अधिकतम पाँच दिनों के अंदर निष्पादन किया जाना है। जिला पदाधिकारी, सारण के पत्रांक-979 दिनांक-22.09.2015 द्वारा भी विपत्रों को पाँच दिनों में निष्पादित करने का निदेश संसूचित है। संबंधित कोषागार में दिनांक-16.08.2016 (मंगलवार) को जे0 जे0 परियोजना उच्च2 ;बपकरू464द्ध ;द्ध 17 ;बपकरू232द्ध 2023 विद्यालय, मशरक के शिक्षकों के भुगतान से संबंधित छः विपत्र प्राप्त कराये गये। तीन विपत्रों को पारित करने में 14 दिनों का समय लिया गया, जबकि इन्हें नियमानुसार दिनांक-20.08.2016 (शनिवार) तक पारित कर बैंक भेज दिया जाना चाहिए था। विपत्रों को पारित करने में निर्धारित अवधि से अधिक समय लिया जाना गलत मंशा को परिलक्षित करता है। यह वित्त विभाग के पत्रांक-11889 दिनांक-29.02.2011 एवं जिला पदाधिकारी, सारण के आदेश सं0-979 दिनांक-22.09.2015 द्वारा निर्गत निदेश का उल्लंघन है। दिनांक-20.08.2016 से 25.08.2016 तक लिंक बाधित होना, कर्मियों की कमी एवं लिपिक का एक दिन अवकाश में रहना, ये सभी कारण सामान्य कार्य में बाधक प्रतीत नहीं होते हैं। अतः कोषागार पदाधिकारी द्वारा उक्त विपत्रों को पारित करने में अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई तथा उत्तरदायित्व का सही रूप से निर्वहन नहीं किया गया। विपत्र सं0-06/2016-17 को अनावश्यक आपत्ति लगाकर लंबित रखा गया। जाँच दल गठित होने की सूचना प्राप्त होने पर इसे दिनांक-06.09.2016 को पारित किया गया। विपत्र सं0-07/2016-17 एवं 08/2016-17 पर CTMIS में दिनांक-06.09.2016 को आपत्ति दर्ज करते हुए विपत्र पर आपत्ति की तिथि 27.08.2016 अंकित की गई। तथ्यों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि गलत मंशा के कारण इन विपत्रों के निष्पादन में जान बूझकर विलंब किया गया, जिससे श्री गुप्ता की संलिप्तता प्रमाणित होती है। स्पष्ट होता है कि ये अपने कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व के निर्वहन में विफल रहे तथा इनके विरूद्ध गठित आरोप पूर्णतः प्रमाणित होता है।''

5. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुये विभागीय पत्रांक-3321 दिनांक-15.05.2017 द्वारा श्री गुप्ता से द्वितीय कारण पृच्छा हेतु निदेशित किया गया।

6. श्री गुप्ता ने दिनांक-18.05.2017 को अपनी द्वितीय कारण पृच्छा का अभिकथन समर्पित किया, जिसमें विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में प्रस्तुत किये गये साक्ष्यों के अतिरिक्त अपने बचाव-बयान के समर्थन में निम्न तथ्य भी प्रस्तुत किए गये :-

(1) जे0जे0 परियोजना उच्च विद्यालय, मशरक के तत्कालीन डी0डी0ओ0 श्री रजनीकान्त प्रसाद सिंह का लिखित बयान प्रस्तुत किया गया जिसमें उल्लेखित है कि ''उक्त विपत्रों को पारित करने में तकनीकी कारणो से विलंब हुआ है तथा इसमें किसी प्रकार का व्यवधान एवं परेशान किसी के द्वारा नहीं किया गया है तथा कोषागार में किसी भी स्तर पर न तो राशि की माँग की गई, न ही राशि का लेन-देन हुआ है। कोषागार का कार्य सहयोगात्मक एवं सराहनीय है।''

(2) पौप रूम के प्रभारी का लिखित बयान प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि ''दिनांक-20.08.2016 से दिनांक-25.08.2016 तक बाढ़ के कारण लिंक बाधित था।''

(3) कोषागार संदेशवाहक का लिखित बयान, जिसमें आपत्तियुक्त विपत्र को समयाभाव के कारण दिनांक-06.09.2016 तक कोषागार से प्राप्त नहीं कर सकने का तथ्य अंकित है।

8. आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त शास्ति को CWJC No-1308/2018 दायर कर माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। उक्त वाद में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक- 16.01.2023 को पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"8. ….this Court is of the view that the Disciplinary Authority has passed order of punishment in violation of law laid down by this Court as well as disciplinary rules, as such, the impugned order of punishment dated 07.07.2017 as well as consequential review orders are hereby quashed."

"9. Since this Court has quashed the impugned order only on the ground of there being no reasoned order and its being in violation of the principle of natural justice, liberty is given to the respondents to pass a fresh order after taking into account the defence of the petitioner disclosed in the second show cause reply within a period of four months from the date of receipt/production of a copy of this order, in accordance with law by a speaking and reasoned order.''

9. माननीय न्यायालय के उपर्युक्त आदेश के आलोक में द्वितीय कारण-पृच्छा के अभिकथन एवं साक्ष्यों की पुनर्समीक्षा की गई, जिसका बिन्दुवार विवरण निम्नवत्‌ है :-

;बपकरू464द्ध ;द्ध 17 ;बपकरू232द्ध 2023 3

(1) अभिकथन के साथ साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत जे0जे0 परियोजना उच्च विद्यालय, मशरक के तत्कालीन डी0डी0ओ के मंतव्य के अनुसार उक्त विपत्रों के निष्पादन में विलंब तकनीकी कारणों से हुआ। कोषागार संदेशवाहक के लिखित बयान के अनुसार आपत्तियुक्त विपत्रों को समयाभाव के कारण दिनांक-06.09.2016 तक कोषागार से प्राप्त नहीं किया जा सका।

श्री गुप्ता द्वारा विपत्र सं0-07/2016-17 एवं 08/2016-17 में आपत्ति दर्ज करने एवं इसे वापस करने के मध्य विलंबित अवधि के लिए कोषागार संदेशवाहक की व्यस्तता को उत्तरदायी बताया गया, जबकि स्वयं इन्हाेंने दिनांक-06.09.2016 को CTMIS में आपत्ति दर्ज की। इससे यह स्पष्ट है कि विपत्रों को जान बूझकर लंबित रखा गया तथा जाँच दल का संज्ञान होने पर दिनांक-06.09.2016 को CTMIS में आपत्ति दर्ज करते हुए विपत्र पर Back dated आपत्ति अंकित कर वापस किया गया। विभागीय कार्यवाही के दौरान पर्याप्त समय मिलने के बावजूद संचालन पदाधिकारी के समक्ष इन साक्ष्यों को प्रस्तुत नहीं किया जाना, यह संशय उत्पन्न करता है कि श्री गुप्ता द्वारा ये सभी साक्ष्य संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी तथा कोषागार संदेशवाहक को बाद में प्रभावित कर अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठलाने हेतु लिखवाये गये थे। (2) श्री गुप्ता ने विपत्रों के निष्पादन में विलंब का एक कारण चालू माह के विपत्रों को प्राथमिकता दिया जाना भी बताया है।

यह तथ्य सही है कि जिला पदाधिकारी, सारण द्वारा चालू माह के विपत्रों को दिनांक-26.08.2016 से 06.09.2016 तक निष्पादित करने का निदेश था। तथापि पूर्व से प्राप्त/जमा विपत्रों को निष्पादित करना निषिद्ध नहीं किया गया था।

(3) पौप रूप के प्रभारी के अनुसार दिनांक-20.08.2016 से 25.08.2016 तक बाढ़ के कारण लिंक बाधित था।

यद्यपि संदर्भित अवधि में सर्वर का लिंक बाधित होना संभावित है, तथापि वित्त विभाग एवं जिला पदाधिकारी, सारण द्वारा निर्धारित समयानुसार संबंधित विपत्रों को दिनांक-20.08.2016 के पूर्व हीं निष्पादित कर दिया जाना अपेक्षित था, परंतु श्री गुप्ता द्वारा इन्हें 14 से 21 दिनों तक लंबित रखा गया। विपत्र सं0-06/2016-17 में अनावश्यक आपत्ति दर्ज करना तथा जाँच दल गठित होने का संज्ञान होने पर उक्त आपत्ति को वापस लेते हुये तत्काल विपत्र पारित करना, उनकी गतल मंशा को प्रदर्शित करता है। आपत्तिजनक विपत्रों को तीन दिनों के भीतर आपत्ति के साथ वापस कर दिया जाना चाहिये था, जो कि नहीं किया गया। किसी भी परिस्थति में विपत्र में विधिवत आपत्ति दर्ज करने में 21 दिनों का समय लगना स्वीकार योग्य नहीं है। इनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने में विलंब का कारण विधि एवं व्यवस्था संबंधित ड्‌यूटी में प्रतिनियुक्त रहना बताया गया है, जबकि स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु ड्‌यूटी/प्रतिनियुक्ति बाधक नहीं हो सकता है। उक्त तथ्यों से श्री गुप्ता के मनमानी कार्य-शैली एवं सरकारी निदेशों की अवहेलना प्रमाणित होती है। 10. संचालन पदाधिकारी के अभिमत एवं द्वितीय कारण-पृच्छा के अभिकथन पर समयक्‌ विचारोपरांत श्री गुप्ता के विरूद्ध लगाये गये आरोप पूर्णतः प्रमाणित होते हैं। अतएव बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली-2005 के नियम-14 के अधीन निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित की जाती है :-

(1) इन्हें तीन वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड दिया जाता है। (2) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता देय नहीं होगा। श्री गुप्ता वित्त विभागीय ज्ञापांक-4696 दिनांक-07.07.2017 के निर्गत होने की तिथि दिनांक-07.07.2017 से निलंबन से मुक्त रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

अरविन्द कुमार चौधरी,

प्रधान सचिव।

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;बपकरू464द्ध ;द्ध 682.571़10.0;बपकरू547द्ध00

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 17 August 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-08-17.682/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-08-17.682.