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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 13 September 2023

Published 13 September 2023

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-09-13.37
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 22 भाद्र 1945 (श0) सं(cid:201)या 37 पटना, बुधवार, ———————— 13 सितम्बर 2023 (ई0) विषय-सूची पृष्ठ भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-5 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। ---

भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 6-7 पूरक

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पूरक-क 8-162 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचना

28 अप्रील 2023

सं0 निग/सारा-04(पथ) आरोप-52/2021-2390(एस)--पथ, प्रमंडल, पूर्णिया अन्तर्गत CMBD योजना के तहत धमदाहा-बनमनखी पथ के कि0मी0 0.00 से 25.50 कि0मी तक के उन्नयन कार्य (वर्ष 2014-15) का निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार पटना के पत्रांक-565 अनु0 दिनांक-27.10.2016 एवं 04 अनु0 दिनांक-02.01.2017 द्वारा समर्पित प्रारंभिक एवं अंतिम /गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के क्रम मे पायी गयी निम्न त्रुटियों/अनियमितताओंं के लिए विभागीय पत्रांक-6521(S)We दिनांक-24.08.2018 द्वारा श्री प्रभाशंकर कोकिल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता,पथ प्रमंंडल पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत प्रभारी अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण की मांग की गयी :-

(i) आलोच्य पथ कार्य के बगल में फ्लैंक में मिट्‌टी कार्य नहीं किये जाने के कारण अधिकांश भाग में असुरक्षित Edge Drop पाया गया ।

(ii) आलोच्य पथ के कि0मी0 5.500 के मध्य भाग में खोदे गये पिट में GSB के परत में पुरानी Bituminous Mix के अवशेष पाये गये ।

(iii) आलोच्य पथ के कि0मी0 6 में कराये गये GSB परत की औसत मुटाई 115 mm पायी गयी , जबकि प्रावधान 125mm है।

(iv) आलोच्य पथ के कि0मी0 6 में कराये गये WMM कार्य मेें EI +FI का औसत मान 41.29% पायी गयी, जो टॉलरेन्स लिमिट से अधिक है ।

2. वर्णित पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री कोकिल से पूछे गये स्पष्टीकरण के अनुपालन में उनके पत्रांक-2061(अनु0) दिनांक-18.09.2018 द्वारा अपना उत्तर समर्पित किया गया । श्री कोकिल द्वारा अपने आवेदन में निम्न तथ्यों /तर्कों का उल्लेख किया गया :-

(i) त्रुटि संख्या-(i) के संदर्भ मे स्पष्ट किया गया है कि उक्त पथांश में Bituminous कार्य 2016 के बरसात के बाद माह अक्टूबर -2016 में कराया गया । बरसात में पथ Flank के क्षतिग्रस्त होने एवं बरसात के बाद पथ में उपरी परतों का कार्य होने पर पथ का लेवल उँचा हो जाने से Edge Drop पाया गया, जबकि श्री कोकिल दिनांक 08.07.2016 तक ही कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल पूर्णियाँ के पद पर पदस्थापित थे । अतः Edge Drop संबंधित त्रुटि से अपना कोई संबंध नहीं होने की बात की है । (ii) त्रुटि संख्या-(ii ) के संदर्भ में स्पष्ट किया हे कि जाँच पदाधिकारी ,द्वारा जाँच में नौ बिन्दुओं पर खेादे गये Pits में मात्र 1 बिन्दु पर Bituminous Mix के अवशेष GSB परत में पाये जाना, पथ का ग्रामीण कार्य विभाग से हस्तांतरित किये जाने के पश्चात्‌ पथ निर्माण विभाग ,द्वारा प्रथम बार इसका निर्माण कार्य कराया जाना तथा कार्यपालक अभियंता का मात्र 10% Checking का जिम्मेदारी होने की बात कही गयी है ।

(iii) त्रुटि संख्या-(iii) के संदर्भ में स्पष्ट किया हे कि ग्रामीण कार्य विभाग से हस्तांतरित पथ का प्रत्येक 30 मी0 की दूरी पर पथ का Existing Levels लेकर L/S एवं C/S तैयार कर OGL के आधार पर FRL (Finished Road Level) निर्धारित किया गया है । पथ के Profile को सही रखने हेतु प्रस्तावित FRL के अनुसार पथ क्रस्ट की मुटाई जगह-जगह पर Very करने की बात कही गयी है । इनहोंने Morth के Specification 4th (Revision) के Clause 902.3 में Sub Base के लिए Surface Levels में Flexible Pavement के लिए Tolerance Limit +10mm एवं - 20mm है, जबकि विभाग इन्हीं विचलन को आधार मानते हुए Base/Sub Base Course में 4% तक के विचलन का प्रावधान रखा है ।

(iv) त्रुटि संख्या-(iv) के संदर्भ में स्पष्ट किया हे कि MORTH Table 900-3 Sr No-4(iii) अनुसार EI +FI के लिए Stone Aggregate का 1(one)Test कार्य के प्रयोग के पूर्व 500 cum of Aggregate पर किया जाना है । पुनः इसे 100 cum पर किया जाना है । EI +FI की जाँच3 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 कार्यपालक अभियंता के अधीनस्थ पथ कार्य से जुड़े संबंधित पदाधिकारी के दायित्व में होना, 13 जून 2006 को CRRI, नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में विभन्न शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त तकनीकी अभिमतों में EI +FI का मान 40% रहने पर भी Structure के स्थायित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़ना इत्यादि बात की गयी है ।

3. श्री कोकिल द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी । समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री कोकिल द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में जिन व्यवहारिक एवं तकनीकी कारणों का संदर्भ दिया गया है वस्तुतः इन्हीं व्यवहारिक एवं तकनीकी कठिनाईयों के मद्‌देनजर रखते हुए विभागीय मार्गदर्शिका के तहत्‌ टॉलरेन्स अनुमान्य किया गया है। परन्तु प्रस्तुत मामले में पायी गयी त्रुटि का मान टॉलरेनस लिमिट के प्रतिकूल है । इसके अतिरिक्त श्री कोकिल के द्वारा अपने बचाव में कोई ठोस एवं प्रमाणित तथ्य /तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है ।

तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा में पाया गया कि श्री कोकिल के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में कोई ऐसा ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर युक्तिसंगत ढ़ग से विचार किया जा सकें जिसके फलस्वरूप उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोेई अवसर प्रतीत नहीं होता है ।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरांत वर्णित त्रुटि संख्या-(iii) को प्रमाणित पाये जाने के लिए श्री कोकिल के पत्रांक-2061 अनु0 दिनांक-18.09.2018 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम -14 के उपनियम-(i) के तहत्‌ विभागीय अधिसूचना संख्या-5551(एस) सहपठित ज्ञापांक-5552(एस) दिनांक 17.11.2021 के द्वारा निम्न शास्ति अधिरोपित किया गया हैः-

(i) ''निन्दन (आरोप वर्ष 2015-16)''

4. उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कोकिल ने पत्रांक-शून्य दिनांक-23.09.2022 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया, जिसके विभगीय समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कोकिल के द्वारा पथ के दो परतों यथा-WMM+GSB की मुटाई का औसत निकालकर विभागीय मार्गदर्शिकानुसार निर्धारित विचलन 4% के अनुरूप पाये जाने का दिया गया तर्क यथोचित प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि पथ के उक्त दोनों परतों (WMM+GSB) की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है और विभाग द्वारा मात्र GSB परत की मुटाई कम पाये जाने के संबंध में आरोप गठित किया गया है । इसलिए श्री कोकिल के द्वारा उक्त दोनों परतों की मुटाई का औसत गणना कर 4% विचलन के अनुरूप पाये जाने का दिया गया तर्क युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है । पथ के कि0मी0 06 में कराये गये GSB परत की प्रावधानित मुटाई 125mm से 8% कम अर्थात 115mm पाया गया, जबकि विभागीय तकनीकी समिति की समीक्षा में यह स्पष्ट किया गया है कि मार्गदर्शिकानुसार 4% का विचलन निर्धारित है । उपर्युक्त समीक्ष के आधार पर श्री कोकिल के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन संतोषजनक नहीं पाये जाने के आलोक में सम्यक विचारोपरांत उनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-23.09.2022 को अस्वीकृत किया जाता है।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, संयुक्त सचिव।

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(cid:274)ामीण (cid:874)वकास (cid:874)वभाग -------

अ(cid:876)धसूचना

11 सितम्बर 2023

सं0 (cid:274)ा0(cid:874)व0-14(द0) दर0-04/2021-2066034---(cid:302)ी भगवान झा, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:274)ामीण (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547)- सह-(cid:292)भार(cid:547) (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), बहेड़ी, दरभंगा के विरुद्ध मु(cid:201)यमं(cid:287)ी सात (cid:467)न(cid:230)चय योजना अंतग(cid:91)त हर-घर नल का जल एवं गल(cid:547) नाल(cid:547) प(cid:200)क(cid:551)करण (cid:467)न (cid:230)चय योजना म(cid:581) (cid:229)यापक पैमाने पर अ(cid:467)नय(cid:871)मतता बरतने, (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) अंतग(cid:91)त सरकार द्वारा गृह (cid:874)वह(cid:547)न प(cid:464)रवार(cid:585) को (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना का लाभ देने के संबंध म(cid:581) बार-बार (cid:467)नदेश देने के बावजूद PWL म(cid:581) अवशेष कु ल 770 लाभुक(cid:585) को आवास से वं(cid:876)चत रखने आ(cid:465)द काय(cid:91) के (cid:292)(cid:467)त उदासीनता एवं (cid:232)वे(cid:205)छाचा(cid:464)रता के आरोप(cid:585) पर िजला पदा(cid:876)धकार(cid:547), दरभंगा के प(cid:287)ांक- 290/िज0पं0 (cid:465)दनांक- 02.02.2021 द्वारा (cid:874)वभाग को (cid:874)व(cid:465)हत (cid:292)प(cid:287) म(cid:581) आरोप प(cid:287) ग(cid:465)ठत कर उपल(cid:222)ध कराया गया।

उ(cid:200)त आरोप प(cid:287) म(cid:581) व(cid:872)ण(cid:91)त आरोप(cid:585) पर (cid:302)ी झा से (cid:292)ा(cid:220)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण के समी(cid:162)ोपरा(cid:219)त यह पाया गया (cid:873)क इनके द्वारा योजनाओं के (cid:873)(cid:272)या(cid:219)वयन म(cid:581) अ(cid:467)नय(cid:871)मतता/लापरवाह(cid:547) बरती गयी एवं (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक आचार4 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 (cid:467)नयमावल(cid:547)- 1976 के (cid:467)नयम- 03(1) का उ(cid:227)लंघन (cid:873)कया गया। (cid:302)ी झा के द्वारा बरती गयी उ(cid:200)त अ(cid:467)नय(cid:871)मतताओं के (cid:871)लए (cid:874)वभागीय अ(cid:876)धसूचना (cid:163)ापांक-1711806 (cid:465)दनांक-20.04.2023 द्वारा इ(cid:219)ह(cid:581) ''असंचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अ(cid:876)धरो(cid:874)पत (cid:873)कया गया।

(cid:302)ी झा के प(cid:287)ांक-807 (cid:465)दनांक-31.05.2023 द्वारा उ(cid:200)त अ(cid:876)धरो(cid:874)पत शाि(cid:232)त के विरुद्ध स(cid:162)म (cid:292)ा(cid:876)धकार के सम(cid:162) पुन(cid:874)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन सम(cid:874)प(cid:91)त (cid:873)कया गया ।

उ(cid:200)त पुन(cid:874)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा के (cid:272)म म(cid:581) पाया गया (cid:873)क उसम(cid:581) कोई ऐसा मह(cid:215)वपूण(cid:91) सा(cid:234)य या त(cid:216)य नह(cid:547)ं है, िजससे (cid:873)क पूव(cid:91) म(cid:581) पा(cid:464)रत आदेश को संशो(cid:876)धत (cid:873)कया जाय ।

अतएव स(cid:224)यक (cid:874)वचारोपरांत (cid:302)ी भगवान झा, त(cid:215)काल(cid:547)न (cid:274)ामीण (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547)-सह-(cid:292)भार(cid:547) (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), बहेड़ी, दरभंगा स(cid:224)(cid:292)(cid:467)त (cid:292)खंड (cid:874)वकास पदा(cid:876)धकार(cid:547), त(cid:464)रयानी, (cid:871)शवहर के पुन(cid:874)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन को अ(cid:232)वीकृ त (cid:873)कया जाता है।

उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ा(cid:876)धकार का अनुमोदन प्राप्त है।

(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,

न(cid:219)द (cid:873)कशोर साह, संयु(cid:200)त स(cid:876)चव।

------- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (भू-अर्जन निदेशालय) ------- अधिसूचना 11 सितम्बर 2023

सं0 14/डी0एल0ए0 -(प्राधिकार)-नियुक्ति-01/2022-1239/रा0--श्री परशुराम सिंह यादव, पीठासीन पदाधिकारी, भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकार, दरभंगा द्वारा अपने पद से त्याग-पत्र दिये जाने से संबंधित आवेदन (पत्रांक-275, दिनांक-24.08.2023 द्वारा) के आलोक में श्री परशुराम सिंह यादव, पीठासीन पदाधिकारी, भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकार, दरभंगा का त्याग-पत्र दिनांक-24.08.2023 के प्रभाव से स्वीकृत किया जाता है। 2. श्री रंजीत कुमार सिंह, पीठासीन पदाधिकारी, भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकार, मुजफ्फरपुर को अपने कार्यों के अतिरिक्त पीठासीन पदाधिकारी, भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकार, दरभंगा का अतिरिक्त प्रभार अगले आदेश तक के लिए सौंपा जाता है।

3. उक्त पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशील कुमार, निदेशक।

------- Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------- Office Order The 26th August 2023

No. XI-K-रा0-03/2023-3701--In the light of proposal received from District Magistrate, Arwal vide letter no.- 111, dated- 02.08-2023 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Sri Sanjay Kumar Additional Collector-cum- Additional District Magistrate, Arwal District Level

By Order,

Sd/. Illegible, Secretary to Commissioner.

5 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023

The 8th September 2023

No.XI-K-रा0-01/2019-3867--In the light of proposal received from District Magistrate, Gaya vide letter no.- 1710, dated 16.08.2023 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Sri Anjani Kumar ADM, Gaya District Level
2 Sri Ravindra Ram DALO, Gaya District Level

By Order,

Sd/. Illegible, Secretary to Commissioner.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 26—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

6 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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lwpuk

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सं0 1049--मैं विजय कुमार (Vijay Kumar) पुत्र स्व0 तुलसी राम अग्रवाल, निवास-तुलसी भवन, प्रथम मंजील, रोड नं0-8/A राजेन्द्रनगर, संपतचक, पटना-800016 शपथ पत्र सं0-4867 तारीख 01.07.2023 द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि अब मैं विजय अग्रवाल (Vijay Agarwal) के नाम से जाना एवं पहचाना जाउंगा।

विजय कुमार (Vijay Kumar).

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सं0 1050--मैं, अंजलि, पुत्री श्री प्रमोद कुमार, निवासी-न्यू एतवारपुर, पोस्ट-कुर्थौल, थाना-परसा बाजार पटना- 804453 बिहार। शपथ पत्र सं. 427, ति. 11.08.2023 के द्वारा अब मैं अंजलि आत्रेई (ANJALI ATREYI) के नाम से जानी जाऊॅंगी।

अंजलि। No. 1050--I, Anjali D/o Sri Pramod Kumar R/o New Etwarpur, P.O.- Kurthaul, P.S.- Parsa Bazar, Distt.- Patna- 804453 Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit No.- 427 dated 11.08.2023 that now I will be known as ANJALI ATREYI.

Anjali.

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No. 1068--I, Anshu Kumar s/o Binod Kumar R/o Chanwati Mube Lal, Balaji Complex, Ashok Nagar, Road No, 1/F Kankarbagh Patna declare vide affidavit No.534 dated 11-07-2023 that I will be known as Aanshu Kumar Shah for all purpose.

Anshu Kumar.

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सं0 1069--मैं संजीत दुबे पिता कपिल देव दुबे ग्राम-बलौरा पो0-उपहारा थाना (वंषी सोनभद्र सुर्यपुर) जिला अरवल बिहार रिलायंस लाईफ इनषुरेंस में मेरा नाम संजीत कुमार द्विवेदी है जो गलत है मेरा आधार, मेरा पैन, मेरा बैंक पासबुक सभी में मेरा नाम संजीत दुबे है वह सही है। मैं संजीत दुबे के नाम से जाने जाते हैं। षपथ पत्र संख्या-09 दिनांक 19.4.2023.

संजीत दुबे।

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सं0 1070-- मैं निभा चौधरी (Niva Choudhary) पिता (cid:7088)ी प्रियरंजन चौधरी पति (cid:7088)ी दीपक कु मार, कोशी चौक, वार्ड नं. – 17 (नया) एवं पुराना वार्ड नं. 13 गौतम नगर प्रकाश पाठक हाउस के पास, गंगजला अंचल कहरा सहरसा जिला- सहरसा राज्य बिहार शपथ पूर्वक घोषणा करती (cid:7264)ँ कि मेरा आधार नं.-3870 1663 0457 है आधार कार्ड में मेरा नाम निभा चौधरी (Niva Chaudhary) अंकित है जो कि अशु(cid:7373) है एवं मेरा सही नाम निभा चौधरी (Niva Choudhary) है I शपथ पत्र संख्या–2783, दिनांक- 24.03.2023.

निभा चौधरी (Niva Choudhary). No. 1070--I Niva Choudhary,W/O Deepak Kumar at–Koshi Chowk,Ward no. 17 (New) Gautam Nagar Gangjala, Circle–kahra,Dist.–Saharsa (Bihar) declare that in my Adhar no. 387016630457 my name Niva Chaudhary is wrong, My correct name is Niva Choudhary, Affidavit no. 2783/24.03.23.

Niva Choudhary.

7 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023

No. 1071--I Shatrudhan Ray S/o Vindhyachal Ray, R/o Vill- Samhariya, P.O.- Chauri, P.S.- Kaler, Dist.- Arwal, Bihar - 824127, declare vide affidavit No.-910, date- 16.06.23 that in my aadhar no.-4070 6244 1665 my name is wrongly mentioned as SHATRUDHNA RAY instead of SHATRUDHAN RAY. I shall be known as SHATRUDHAN RAY for all future purposes.

Shatrudhan Ray.

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सं0 1072-- म(cid:583) (cid:466)बटू कु मार, (cid:874)पता ददन गु(cid:220)ता, (cid:274)ाम-क(cid:465)टयारा पो(cid:232)ट-डढावं, थाना-(cid:465)दनारा, िजला-रोहतास का ं। मेरे आधार काड(cid:91) नंबर:- 913024 521848 है, मे मेरा नाम (cid:466)बटू कु मार गु(cid:220)ता दज(cid:91) है। जब(cid:873)क दसवीं क(cid:551) ं (cid:467)नवासी हू यो(cid:202)यता (cid:292)माण-प(cid:287) म(cid:581) मेरा नाम (cid:466)बटू कु मार दज(cid:91) है। शपथ-प(cid:287) सं(cid:201)या:-22, (cid:465)दनांक 01/08/2023 से बयान करता हू (cid:873)क मेरा सह(cid:547) नाम (cid:466)बटू कु मार है। अब से म(cid:583) के वल (cid:466)बटू कु मार के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाऊं गा।

(cid:466)बटू कु मार। No. 1072--I Bittu kumar s/o Dadangupta R/o vill- katiyara, P.O- Dadhawan, P.S- Dinara, dist-Rohtas, in my Aadhar card no. 9130 24521848 my name Bittu kumar gupta mentioned. But in 10th certificate Bittu kumar mentioned. Affidavit no. 22, Dated – 01/08/2023 I state that my correct name is Bittu kumar.

Bittu kumar.

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सं0 1074--मैं नीरू देवी, पति हरेन्द्र कुमार सिंह, पता- नयका बड़का बैजू टोला, था॰+पो॰- रिविलगंज, जिला-सारण निवासी घोषणा करती हूँ कि मेरा आः न॰ 8872 5769 3439 हैं मेरा नाम नीरू देवी है, मेरा बेटा किसलय कुमार सिंह के 10th के सर्टिफिकेट/मार्कशीट में मेरा नाम नीरू सिंह है। मैं अब से नीरू देवी के नाम से पहचानी जाऊँगी। शपथ पत्र सं॰ 15539/16.08.23.

नीरू देवी।

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No. 1076--I, Archana, D/o Pramod Kumar Chaudhary, R/o-Rajiv Nagar, Road No. 16, Keshri Nagar, Patna-800024, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per Affidavit No. 54 dated 29/03/2023 that my name Archana and Archana Chaudhary both are same and one person. In future for all official and non official purposes I will be known as Archana Chaudhary. My Aadhar No. is 5218 5633 9978.

Archana.

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No. 1078--I, ARCHANA KUMARI, D/O Rajesh Kumar Jha, R/o Near Talab, Dakshinwari, Koilakh, Madhubani, Bihar, –847236. That in my Aadhar my name has been wrongly mentioned as ARCHANA JHA. I shall be known as ARCHANA KUMARI for all future purposes. Vide Affidavit No. 1923, Date- 20.07.2023.

ARCHANA KUMARI.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 26—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

8 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-09/2017--7913 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 5 सितम्बर 2023

श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन उप महानिरीक्षक (प्र0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-13(2) सहपठित धारा-13(1)(e) के अंतर्गत थाना काण्ड संख्या-02/2017, दिनांक 04.05.2017 दर्ज किया गया।

2. इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना के पत्रांक 576 दिनांक 04.05.2017 से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2535 दिनांक 19.05.2017 द्वारा श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी, तत्कालीन उप महानिरीक्षक (प्र0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना को निलंबित करते हुए निलंबनावस्था में उनका मुख्यालय शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया।

3. विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना द्वारा श्री शिवेन्द्र प्रियदर्शी के विरूद्ध भ्रष्ट आचरण, पद के दुरूपयोग एवं आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में कुल दो (02) आरोप गठित किये गये, जो निम्नवत्‌ है :-

आरोप संख्या 01-(i) श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी के द्वारा प्राप्त वेतन, इनकी पत्नी की आय, आय के ज्ञात अन्य स्रोतों से अर्जित राषि तथा बैंक एवं संबंधियों से प्राप्त लोन सहित कुल आय 1,01,26,580.00 (एक करोड़, एक लाख, छब्बीस हजार, पाँच सौ अस्सी रूपये) है।

(ii) विषेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना ने इनके सेवाकाल में कुल खर्च 39,79,381.00 (उनचालीस लाख, उन्नासी हजार एवं तीन सौ इक्कासी रूपये) का आकलन करते हुए कुल बचत 61,47,199.00 (इकसठ लाख, सैंतालीस हजार, एक सौ निन्यानवे रूपये) बताया गया है। प्राथमिकी के अनुसार इनके और इनकी पत्नी के नाम से विभिन्न बैंकों में जमा राषि, अपार्टमेंट, मकान, सोना एवं दो वाहनों पर कुल खर्च राषि 1,20,09,463.48 (एक करोड़, बीस लाख, नौ हजार, चार सौ तिरेसठ रूपये एवं अड़तालीस पैसे) का आकलन करते हुए उसे इनके द्वारा धारित (Possess) करना उल्लेखित किया गया है।

(iii) प्राथमिकी के अनुसार इस तरह कुल 58,62,264.00 (अन्ठावन लाख, बासठ हजार, दो सौ चौसठ रूपये) की राषि आय के विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राषि से अधिक पाई गई है।

आरोप संख्या 02- वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी के द्वारा विभाग में जमा की गई सम्पत्ति विवरणी निम्नवत्‌ है :- (i) नकद, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में जमा राषि- 51,98,500/-

(ii) सोना का अनुमानित मूल्य- 5,25,000/- (iii) दो अपार्टमेन्ट का घोषित मूल्य- 33,00,000/-

(iv) एक मकान-मूल्य अघोषित (v) दो वाहन-मूल्य अघोषित। (vi) संबंधियों से लिया गया ऋण- 18,50,000/-9 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 इस प्रकार दर्ज प्राथमिकी में अंकित विवरणी एवं इनके द्वारा विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी में काफी अन्तर है। इससे स्पष्ट होता है कि श्री प्रियदर्षी के द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित किया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(6) के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है तथा एक सरकारी सेवक के रूप में इनके नैतिक कदाचार एवं पद के दुरूपयोग को दर्षाता है।

4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(4) के विहित प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 3711 दिनांक 13.07.2017 द्वारा श्री प्रियदर्षी से प्रपत्र 'क' में गठित उपर्युक्त आरोपों के आलोक में लिखित बचाव अभिकथन की मांग की गई। तद्‌आलोक में श्री प्रियदर्षी द्वारा अपना लिखित बचाव अभिकथन दिनांक 30.08. 2017 समर्पित किया गया।

5. श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में उनके द्वारा समर्पित लिखित बचाव अभिकथन को सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5603 दिनांक 26.09.2017 द्वारा श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई तथा विभागीय जाँच आयुक्त (सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त), बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

6. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 691 अनु0, दिनांक 12.10.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित सभी दोनों आरोपों को संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-01 के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में अंकित किया गया है कि यह आरोप शत-प्रतिशत विशेष निगरानी इकाई, पटना के द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर है। उक्त प्राथमिकी में कुल आय का आँकड़ा और कुल बचत की राशि की गणना समर्पित नहीं है। इस आरोप में जो आँकड़े प्राथमिकी में अंकित किये गये हैं, वह किस अवधि के लिए calculate किये गये हैं, यह स्पष्ट नहीं है। इस आरोप में विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी को साक्ष्य बनाया गया है। प्राथमिकी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। ऐसी परिस्थिति में बिना साक्ष्य के आरोप को गठित किया गया है, जिसके कारण प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी आरोपों को स्थापित नहीं कर पाये। इसके लिए उन्हें कई बार मौका दिया गया और वे निगरानी विभाग के संबंधित पदाधिकारी को भी सुनवाई के दौरान अपने समर्थन में उपस्थित कराये, परन्तु संबंधित निगरानी के पदाधिकारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चूँकि यह मामला अभी अनुसंधान में है, इसलिए Indian Evidence Act के तहत कोई भी बात वे Disclose नहीं कर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में न तो कागजातों के आधार पर और न ही Oral Evidence के आधार पर आरोपों को स्थापित किया जा सका। इस मामले में निगरानी विभाग के श्री अमर कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना का दिनांक 03.12.2018 को परीक्षण/प्रतिपरीक्षण किया गया था, जिसमें उन्होंने बताया कि वेतन का 2/3 बचत माना जाता है और 1/3 किचेन खर्च माना जाता है। इसके लिए उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में कोई पत्र या अधिनियम नहीं है, परन्तु यही परिपाटी रही है। यदि गवाह के इस तथ्य को ध्यान में रखा जाता है तो बचत आरोपित पदाधिकारी के आय का 2/3 होता है। आरोपित पदाधिकारी की कितनी आय हुई, इसके बारे में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। आरोप पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि निगरानी के द्वारा दायर प्राथमिकी की तिथि को 1/3 व्यय, आरोपित पदाधिकारी का विभिन्न माहों की बचत की राशि का वर्तमान मूल्य (present value) क्या था, क्योंकि कोई भी राशि जो बचत की है, उसे कोई भी व्यक्ति निश्चित रूप से कहीं निवेश (invest) करेगा और उस पर समय-समय पर ब्याज प्राप्त होते रहेंगे, इसलिए उस राशि के वर्तमान मूल्य (present value) की गणना जाँच हेतु महत्वपूर्ण है, जो कि कहीं भी उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसके कारण भी आरोप स्थापित नहीं होता है। विभागीय मंतव्य में आरोप से भिन्न तथ्यों को लाया जाना अनुचित है और उसे आरोप को स्थापित करने में सुसंगत नहीं माना जाता है। ऐसी परिस्थिति में विभागीय मंतव्य स्वीकार करने योग्य नहीं है। उपरोक्त परिस्थिति में आरोप संख्या-1 प्रमाणित नहीं होता है।

श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-02 के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में अंकित किया गया है कि आरोप संख्या-1 के प्रसंग में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई, पटना के द्वारा दर्ज प्राथमिकी को ही साक्ष्य बनाया गया है, जिसे साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। इससे स्पष्ट होता है कि बिना साक्ष्य के आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध यह आरोप गठित किया गया है और आरोपित पदाधिकारी को साक्ष्य नहीं दिये जाने के कारण उनको अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिला है। सम्पत्ति विवरणी के संदर्भ में विभागीय मंतव्य में मुख्य रूप से आरोपित पदाधिकारी की पत्नी के नाम पर NSC तथा KVP का कागजात प्राप्त होने के बारे में उल्लेख किया गया है, परन्तु तत्संबंधी साक्ष्य/विवरण नहीं देने के कारण विभागीय मंतव्य को मानने का कोई आधार नहीं रह जाता है, क्योंकि प्राथमिकी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है और यदि प्राथमिकी के बाद किसी और कार्रवाई के दौरान SVU के द्वारा अनुसंधान के क्रम में कोई तथ्य पाये गये हैं, तो उस तथ्य के आधार पर पूर्व के गठित आरोप को प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त परिस्थिति में आरोप संख्या-2 प्रमाणित नहीं होता है।

7. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 (2) के विहित प्रावधान के तहत संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के निम्नांकित बिन्दु अभिलेखित किये गये :-

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(cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 आरोप संख्या 01 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दु- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में उल्लिखित किया गया है कि यह आरोप विषेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें कुल आय का आँकड़ा और कुल बचत की राषि की गणना नहीं की गई है, जबकि विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी के साथ संलग्न सम्पत्ति विवरण में स्पष्ट रूप से आरोपित पदाधिकारी की वेतन से प्राप्त आय, ज्ञात अन्य स्रोतों से अर्जित राषि तथा बैंक एवं संबंधियों से प्राप्त कुल आय 1,01,26,580/- (एक करोड़, एक लाख, छब्बीस हजार, पाँच सौ अस्सी रूपये) कर्णांकित की गई है। विषेष निगरानी इकाई के उक्त विवरण में आरोपित पदाधिकारी और उनकी पत्नी के नाम से विभिन्न बैंकों में जमा राषि, अपार्टमेंट, मकान, गहने एवं दो वाहनों के कुल खर्च सहित कुल राषि 1,20,09,463.48 (एक करोड़, बीस लाख, नौ हजार, चार सौ तिरेसठ रूपये अड़तालिस पैसे) की सम्पत्ति धारित (possess) बतायी गई है। विषेष निगरानी इकाई द्वारा इनके सेवाकाल में 39,79,381.00 (उनचालीस लाख, उन्नासी हजार तीन सौ इक्कासी रूपये) खर्च का आकलन करते हुए कुल बचत 61,47,199.00 (इकसठ लाख, सैंतालीस हजार, एक सौ निन्यानवे रूपये) प्रतिवेदित किया गया है। इस प्रकार विषेष निगरानी इकाई द्वारा आरोपित पदाधिकारी की कुल 58,62,264.00 (अन्ठावन लाख, बासठ हजार, दो सौ चौसठ रूपये) की सम्पत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई गई है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में उल्लिखित किया गया है कि विषेष निगरानी इकाई द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी को साक्ष्य बनाया गया है तथा प्राथमिकी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसी परिस्थिति में बिना साक्ष्य के आरोप को गठित किया गया है, जबकि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के साथ साक्ष्य के रूप में सिर्फ विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा दर्ज प्राथमिकी को ही आधार नहीं बनाया गया है, बल्कि दर्ज प्राथमिकी के साथ विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा उपलब्ध करायी गई सूचना विवरणी एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए विभाग को समर्पित सम्पत्ति का ब्योरा भी साक्ष्य के रूप में संलग्न है। विशेष निगरानी इकाई द्वारा उपलब्ध कराये गये सूचना विवरणी में श्री प्रियदर्शी द्वारा धारित सम्पत्ति का आकलन तत्कालीन छापेमारी के समय के निवर्तमान मूल्य पर आधारित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में यह कहा गया है कि बचत की राषि निष्चित रूप से कहीं निवेष (invest) की जायेगी तथा उस पर समय-समय पर ब्याज प्राप्त होंगे, जबकि निवेष पर प्राप्त ब्याज की राषि पर आयकर भी देना होता है तथा इसकी सूचना अपनी वार्षिक सम्पत्ति विवरणी (Declaration of Assets & Liabilities) में अंकित कर विभाग को भी देना है, किन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित सम्पत्ति विवरण में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा तथ्य को छुपाया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमवाली, 1976 के नियम-19 (6) के प्रतिकूल है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की गई है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा अपने आकलन के आधार पर दी गयी आय, व्यय, बचत एवं परिसम्पत्तियों की विवरणी निगरानी विभाग के प्रतिवेदन से भिन्न है। विषेष निगरानी इकाई के द्वारा विष्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी एवं पर्याप्त जाँच-पड़ताल के आधार पर ही आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज किया गया है। विषेष निगरानी इकाई के द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि खुली जाँच में श्री प्रियदर्षी का और अधिक चल-अचल सम्पत्ति पाया जा सकता है, इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की गई है।

आरोप संख्या 02 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दु- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में उल्लिखित किया गया है कि बिना साक्ष्य के आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध यह आरोप गठित किया गया है और आरोपित पदाधिकारी को साक्ष्य नहीं दिये जाने के कारण उनको अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला है, जबकि उल्लेखनीय है कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित यह आरोप विषेष निगरानी इकाई द्वारा उपलब्ध कराये गये सूचना विवरण में अंकित तथ्यों पर आधारित है, जिसमें आरोपित पदाधिकारी द्वारा अर्जित सम्पत्ति एवं निवर्तमान में उनके धारित सम्पत्ति का स्पष्ट उल्लेख है, जिसमें काफी अंतर पाया गया है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की गई है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी (Declaration of Assets & Liabilities) में पत्नी श्रीमती रूबी प्रियदर्षी के नाम पर अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा राषि 7,85,000/- दर्षाया गया है, जबकि विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा विभाग को संसूचित किया गया कि श्रीमती रूबी प्रियदर्षी के लॉकर की तलाषी में इनके नाम पर 31,40,000/- का NSC तथा KVP खरीदा हुआ पाया गया। स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी में उक्त तथ्य को छुपाया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(6) के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है। साथ ही उनका यह कृत्य सरकारी सेवक के रूप में उनके कदाचार को परिलक्षित करता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित अपने स्पष्टीकरण में सम्पत्ति का जो विवरण दिया गया है, वह पूर्व में विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी से भिन्न है। विषेष निगरानी इकाई से प्राप्त प्रतिवेदन में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि श्री प्रियदर्षी के द्वारा अपने प्रषासी विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी में स्वयं एवं पत्नी के वृहत्‌ बैंक बैलेंस का उल्लेख नहीं किया गया है। चूँकि विषेष निगरानी इकाई के द्वारा अपने स्तर से समुचित छान-बीन एवं विष्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर श्री प्रियदर्षी के विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज किया गया है। इस प्रकार विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा उपलब्ध कराई गई विवरणी एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभाग को11 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 उपलब्ध कराई गई सम्पत्ति विवरणी में काफी अन्तर है, जिससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप के इस बिन्दु कि, दर्ज प्राथमिकी में अंकित विवरणी एवं श्री प्रियदर्शी द्वारा विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी में काफी अंतर है, के संबंध में कोई मंतव्य नहीं दिया गया है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की गई है।

8. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के विहित प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक 9009 दिनांक 22.10.2021 द्वारा श्री प्रियदर्षी को संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के अभिलेखित उपर्युक्त बिन्दुओं के आलोक में उनसे पन्द्रह दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

9. तद्‌आलोक में श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन दिनांक 23.

12.2021 समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त करते हुए प्रशासी विभाग का यह अभिमत कि सिर्फ विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा दर्ज प्राथमिकी को ही आधार नहीं बनाया गया है, बल्कि दर्ज प्राथमिकी के साथ विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना विवरणी एवं आरोपित पदाधिकारी के द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए विभाग को समर्पित सम्पत्ति ब्योरा भी साक्ष्य के रूप में संलग्न है, पूर्णतः भ्रामक एवं निराधार है, कारण कि ये दोनों कागजात मूल प्राथमिकी के अनुलग्नक एवं आधार है और इन्हें प्रशासी विभाग के द्वारा पृथक्‌ एवं स्वतंत्र साक्ष्य माना जाना पूर्णतः निराधार है। प्रशासी विभाग का यह अभिमत कि विषेष निगरानी इकाई द्वारा उपलब्ध कराये गये सूचना विवरणी में धारित सम्पत्ति का आकलन निवर्तमान मूल्य पर आधारित है, सहज स्वीकार्य एवं मान्य नहीं है। उनका कहना है कि सर्वप्रथम तो मामला अभी अनुसंधान अंतर्गत है और प्रशासी विभाग के पास अभी अंतिम निष्कर्ष/मंतव्य गठन का कोई भी स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(6) में कहीं भी आयकर भुगतान का विवरण वार्षिक सम्पत्ति ब्योरा में अंकित करने का प्रावधान नहीं है। तद्‌नुसार इस नियम के उल्लंघन का प्रश्न ही नहीं उठता। आयकर संबंधी यह बिन्दु मूल आरोप पत्र का भी अंश नहीं था। वस्तुतः प्रथम दृष्टया असहमति शीर्ष के अंतर्गत आयकर भुगतान का बिन्दु भी अप्रासंगिक है, कारण कि समीक्षाधीन मामला न तो आयकर अधिनियम के उल्लंघन का है और न ही कभी मूल विभागीय कार्यवाही का अंश रहा तथापि स्पष्ट करना उचित होगा कि उनके द्वारा समर्पित वर्ष 2016-17 के वार्षिक सम्पत्ति ब्योरा में Assessment Year 2016-17 के लिए आयकर मद में 1,16,403/- का भुगतान किये जाने की सूचना का स्पष्ट उल्लेख है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त करते हुए उल्लेख किया गया है कि विशेष निगरानी इकाई द्वारा उपलब्ध कराये गये सूचना विवरणी में वर्णित अर्जित सम्पत्ति एवं वर्तमान में उनके द्वारा धारित सम्पत्ति में काफी अंतर है। इसके प्रतिउत्तर स्वरूप आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि असहमति का यह बिन्दु पूर्णतः अनिर्दिष्ट एवं भ्रामक (Not specific & Vague) है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि जो सम्पत्ति उनके द्वारा अपनी आय से अर्जित अथवा उनके द्वारा क्रय नहीं किये गये हैं, बल्कि उपहार स्वरूप अथवा पारिवारिक समझौते (Family Settlement) से प्राप्त हुए हैं, उन्हें भी उनके द्वारा purchased अधिष्ठापित करने का प्रयास किया गया है, जो किसी भी दृष्टिकोण से विधिसम्मत्‌ नहीं है। उनके द्वारा घोषित सम्पत्ति ब्योरा में जयप्रकाश नगर अवस्थित ''आलिंगन'' नामक मकान के सामने स्पष्ट रूप से अंकित है कि यह उनकी पत्नी श्रीमती रूबी प्रियदर्शी को पारिवारिक समझौता के अंतर्गत स्नेहवश उपहार स्वरूप स्वर्गीय पिता एवं भाईयों की ओर से प्राप्त हुआ है, तथापि पता नहीं किस आधार पर इसका मूल्य Assets शीर्ष के अंतर्गत 7,00,000/- दर्शा दिया गया है, जो पूर्णतः निराधार एवं त्रुटिपूर्ण है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में उल्लेख किया गया है कि जब निगरानी विभाग ही अभी कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सका है, तो विभागीय कार्यवाही के इस स्तर पर प्रशासी विभाग के द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति के अर्जन का निष्कर्ष कैसे निकाला जा सकता है, जबकि प्रशासी विभाग के द्वारा न तो कोई स्वतंत्र जाँच की गई है और न तो कोई स्वतंत्र साक्ष्य है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनकी पत्नी के नाम NSC/KVP वाले बिन्दु पर उन्हें अपना बचाव का कोई अवसर प्रदान नहीं किया गया और न ही उन्हें तत्संबंधी कोई साक्ष्य/कागजात उपलब्ध कराये गये, जो स्पष्टतः Violation of Natural Justice है।

10. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के अभिलेखित बिन्दु के आलोक में श्री प्रियदर्षी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि प्रस्तुत मामला अभी अनुसंधान अंतर्गत है और प्रशासी विभाग के पास अंतिम निष्कर्ष/मंतव्य गठित करने का कोई भी स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है, किन्तु विषेष निगरानी इकाई, पटना के द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी की वेतन से प्राप्त आय, ज्ञात अन्य स्रोतों से अर्जित राषि तथा बैंक एवं संबंधियों से प्राप्त कुल आय 1,01,26,580/- (एक करोड़, एक लाख, छब्बीस हजार, पाँच सौ अस्सी रूपये) कर्णांकित की गई है। विषेष निगरानी इकाई के उक्त विवरण में आरोपित पदाधिकारी और उनकी पत्नी के नाम से विभिन्न बैंकों में जमा राषि, अपार्टमेंट, मकान, गहने एवं दो वाहनों के कुल खर्च सहित कुल राषि 1,20,09,463.48 (एक करोड़, बीस लाख, नौ हजार, चार सौ तिरेसठ रूपये अड़तालिस पैसे) की सम्पत्ति धारित (possess)12 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 बतायी गई है। विषेष निगरानी इकाई द्वारा इनके सेवाकाल में खर्च 39,79,381.00 (उनचालीस लाख, उन्नासी हजार तीन सौ इक्कासी रूपये) का आकलन करते हुए कुल बचत 61,47,199.00 (इकसठ लाख, सैंतालीस हजार, एक सौ निन्यानवे रूपये) प्रतिवेदित किया गया है। इस प्रकार विषेष निगरानी इकाई द्वारा आरोपित पदाधिकारी की कुल 58,62,264.00 (अन्ठावन लाख, बासठ हजार, दो सौ चौसठ रूपये) की सम्पत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई गई है। इस प्रकार आय से अधिक पायी गई इस अंतर राशि के संबंध में श्री प्रियदर्षी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई संतोषप्रद उत्तर नहीं दिया गया है। अतएव बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(6) के प्रावधान के आलोक में श्री प्रियदर्षी गंभीर कदाचार के दोषी हैं। श्री प्रियदर्षी द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए विभाग को समर्पित सम्पत्ति विवरणी (Declaration of Assets & Liabilities) में पत्नी श्रीमती रूबी प्रियदर्षी के नाम पर अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा राषि 7,85,000/- दर्षायी गयी है, जबकि विषेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा विभाग को संसूचित किया गया कि उनकी पत्नी श्रीमती रूबी प्रियदर्षी के लॉकर की तलाषी में इनके नाम पर 31,40,000/- का NSC तथा KVP खरीदा हुआ पाया गया। वर्ष 2016-17 के लिए श्री प्रियदर्षी द्वारा विभाग में समर्पित सम्पत्ति विवरणी (Declaration of Assets & Liabilities) में दर्शायी गई परिसम्पत्तियों एवं इनके विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अंकित विवरणी में काफी अंतर पाई गई है। विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार श्री प्रियदर्षी की कुल 58,62,264/- (अन्ठावन लाख, बासठ हजार, दो सौ चौसठ रूपये) की राशि आय के ज्ञात विभिन्न स्रोतों से अर्जित राशि से अधिक की पायी गई है। इस संबंध में श्री प्रियदर्षी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में संतोषजनक उत्तर/तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित किया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(6) के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है तथा एक सरकारी सेवक के रूप में इनके नैतिक कदाचार एवं पद के दुरूपयोग तथा भ्रष्टाचार का द्योतक है। अतः श्री प्रियदर्षी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है।

11. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी, तत्कालीन उप महानिरीक्षक (प्र0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना (सम्प्रति निलंबित) के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए तथा उनके विरूद्ध गठित आरोपों की प्रकृति एवं गम्भीरता को दृष्टिगत रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(xi) के प्रावधान के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- ''सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड (Dismissal from service)''। 12. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 3526 दिनांक 27.04.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 1404 दिनांक 12.07.2023 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 13. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री षिवेन्द्र प्रियदर्षी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन उप महानिरीक्षक (प्र0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(xi) के प्रावधान के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड (Dismissal from service) ''। 14. उपर्युक्त दण्ड प्रस्ताव राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक दिनांक 05.09.2023 के मद संख्या-09 में स्वीकृत है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-05/2018--7771

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1 सितम्बर 2023

श्री सत्येन्द्र कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, बाढ़ के शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन के दौरान कारा के गेट पंजी/मुलाकाती पंजी पर हस्ताक्षर नहीं किये जाने, वार्ड इंचार्ज द्वारा बंदियों से अवैध राषि की वसूली किये जाने, छोटे-मोटे कारणों से भी कैदियों को लम्बे-लम्बे समय तक एवं बार-बार कारा अस्पताल में नियम विरूद्ध रखे जाने तथा कारा में कतिपय स्तरों पर व्याप्त अनियमितता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8991 दिनांक 18.10.2019 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी तथा सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र) को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।13 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 2. विभागीय कार्यवाही के जांचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-918 दिनांक-03.03.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल सात (07) आरोपों में से आरोप संख्या-01, 02, 04, 05 एवं 07 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-03 एवं 06 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक-2941 दिनांक-11.04.2023 द्वारा श्री सत्येन्द्र कुमार को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

4. तद्‌आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, बाढ़ द्वारा अपने पत्रांक-2187 दिनांक-27.05.2023 के माध्यम से अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि दिनांक-31.05.2018 को उप महानिरीक्षक (प्र0) द्वारा जब औचक निरीक्षण के क्रम में केन्द्रीय कारा में प्रवेश किया गया था, तब 9ः30 के आस-पास का समय था, जिसकी पुष्टि उनसे भी की जा सकती है, जबकि उनके (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा सामान्यतः कारा में 10 बजे के बाद ही प्रवेश किया जाता था। जब उप महानिरीक्षक (प्र0) द्वारा कारा में प्रवेश किया गया तब उन्होंने गेट रजिस्टर पर उनका (आरोपित पदाधिकारी का) हस्ताक्षर नहीं पाया। अपने पदस्थापन के दौरान उन्होंने हमेशा आते-जाते समय गेट रजिस्टर पर अपना लघु हस्ताक्षर अंकित किया है। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि वार्ड संख्या-18/1 के बंदी गनी मोहम्मद एवं सलमान साह द्वारा भी यह बयान दिया गया है कि उसने क्रमशः 500/-दिए थे, लेकिन यह किस समयावधि का है, स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वार्ड संख्या-19/1 के बंदी शम्मी अहमद द्वारा वर्तमान समय में जिस 11,00 रुपये माँगने की बात की गई है, उस समय वे वहाँ पदस्थापित नहीं थे। वार्ड संख्या-19/1 के बंदी शम्मी अहमद द्वारा यह बताया गया है कि अप्रैल 2017 में वार्ड में आने के लिए उसने 900/- रूपये दिया था, लेकिन रूपया किसे दिया था, अधीक्षक को, उपाधीक्षक को, किसी अधीनस्थ कर्मी को, किसी बंदी को या अपने किसी मित्र को। अगर ऐसा था तो उनके द्वारा या उनके परिजन द्वारा कोई लिखित शिकायत माननीय न्यायपालिका, जिला प्रशासन या अधीक्षक के पास क्यों नहीं किया गया, जबकि शम्मी अहमद इसके उपरांत अनेकों बार न्यायालय में उपस्थित हुआ था। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि अगर बंदी से रूपया लिया गया और इसकी शिकायत बंदी या उसके परिजन द्वारा कहीं नहीं किया गया, तो उन्हेें इसकी जानकारी कैसे होती और बिना जानकारी के उनसे किस प्रकार की कार्रवाई की अपेक्षा है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में उल्लेख किया गया है कि बिना किसी प्रमाण के सिर्फ संदेह के आधार पर यह कहना कि दबंग बंदियों का ही कारा के अंदर शासन चलता था, उनकी समझ से परे है। उप महानिरीक्षक (प्र0) ने आरोप पत्र में लिखा है कि जब गुमटी राईटर बब्लू पाठक से पूछ-ताछ की गई तो यह पूछ-ताछ किस संबंध में किया गया और उस पूछताछ संबंधी कोई साक्ष्य आरोप पत्र के साथ क्यों नहीं संलग्न किया गया। बिना साक्ष्य सिर्फ अनुमान या संदेह के आधार पर इस प्रकार का आरोप लगाना ही यह सिद्ध करता है कि यह सम्पूर्ण आरोप पत्र तर्कहीन एवं मनगढ़ंत है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि चिकित्सा एक विशिष्ट व्यवस्था है, जिसके सुचारू रूप से संचालन के लिए विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है, इसी कारणवश काराओं में कारा चिकित्सक की नियुक्ति की जाती है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनके द्वारा जब भी बिहार कारा हस्तक के आलोक में अस्पताल का निरीक्षण किया जाता था तो संसीमित बंदियों से आहार व दवा की उपलब्धता के साथ-साथ पेयजल, सफाई आदि बिन्दुओं पर भी निगाह रखा जाता था, लेकिन संसीमित बंदियों को वार्ड या अस्पताल में रखा जाए, के संबंध में कारा चिकित्सक द्वारा कभी भी लिखित या मौखिक रूप से उन्हें कोई अनुशंसा नहीं किया गया। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि कारा महानिरीक्षक द्वारा भी उप महानिरीक्षक (प्र0) के जेल निरीक्षण के उपरांत दिनांक-06.06.2018 को कारा का निरीक्षण किया गया था, तब उन्होंने भी यह लिखा था कि बंदी अनुशासित है। उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि उनका प्रशासन के प्रत्येक पहलू पर पकड़ था। बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-870 के उपनियम XI में अपने निजी कार्य पर या अपने निजी हित या लाभ के लिए किसी बंदी की नियुक्ति की बात है, के संबंध में उनका यह कहना है कि इसमें से कोई भी आरोप ऐसा नहीं है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है। बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3 (1) में पूर्ण शीलनिष्ठा, कर्तव्य के प्रति निष्ठा एवं सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय कार्य न करने की बात कही गई है, के संबंध में उनका कहना है कि अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में न तो कोई बंदी और न ही कोई कर्मी से किसी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त किया गया है। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में बंदी व कर्मी अनुशासित रहते हैं, जैसा कि कारा महानिरीक्षक ने भी माना है। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई, जिसमें पाया गया कि त्रिसदस्यीय जाँच दल से पूर्व उप महानिरीक्षक (प्र0) के जाँच में भी यह पाया गया कि गेट पंजी/मुलाकाती पंजी पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नहीं किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी जाँच में पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिदिन गेट पंजी पर हस्ताक्षर नहीं किया जाता था। त्रिसदस्यीय जाँच दल के प्रतिवेदन की कंडिका-9(xix) के अनुसार वार्ड संख्या-19/1 के बंदी शम्मी अहमद द्वारा बताया गया कि कारा में वे अप्रैल 2017 में आये थे, उस समय 900/- रूपये दिये थे। वार्ड में आने के लिए फिर 1100/- रूपये मांगा जा रहा है पर अभी दिए नहीं हैं। वार्ड ईन्चार्ज द्वारा धमकी दी जाती है। इसी प्रकार का बयान वार्ड संख्या-18/1 के बंदी गनी मोहम्मद एवं मो0 सलमान साह द्वारा भी दिया गया है। ये सभी14 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 बंदी आरोपित पदाधिकारी के पदस्थापन काल में ही कारा में प्रवेश पाये थे। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी इस आरोप के संबंध में प्रतिवेदित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी का कथन विचार योग्य नहीं है तथा वे इस मामले में अपने दायित्वों से मुक्त नहीं माने जा सकते हैं।

आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि बिना किसी प्रमाण के सिर्फ संदेह के आधार पर यह कहना कि दबंग बंदियों का ही कारा के अंदर शासन चलता था, उनकी समझ से परे है, जबकि भारत सरकार (CS Division) के पत्र संख्या-V-17013/27/2017-PR, दिनांक 21.05.2018 में स्पष्ट रूप से वार्ड मास्टर बब्लू पाठक को अवैध सुविधाओं के बदले में पैसा उगाही करने का मुख्य आरोपी माना गया है। उप महानिरीक्षक (प्र0) एवं त्रिसदस्यीय जाँच दल के जाँच प्रतिवेदन में बंदियों से अवैध वसूली का उदाहरण स्पष्ट रूप से वर्णित है। त्रिसदस्यीय जाँच समिति के प्रतिवेदन की कंडिका-9(xix) में वार्ड संख्या-19/1 के बंदियों द्वारा अवैध वसूली की बात कही गयी है, जो आरोपित पदाधिकारी के पदस्थापन अवधि का है। कारा में कुछ दबंग बंदियों द्वारा अन्य बंदियों से अवैध वसूली की जाती थी। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि वे अपने पदस्थापन अवधि में कारा अस्पताल का निरीक्षण करते थे, जबकि जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 3629/गो0, दिनांक 17.08.2018 से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार पिछले एक वर्ष के डाटा के विष्लेषण से स्पष्ट है कि कारा प्रषासन द्वारा कतिपय छोटे-मोटे कारणों से भी कैदियों को लम्बे-लम्बे समय तक कारा अस्पताल में अनुचित एवं नियम विरूद्ध लाभ पहुँचाकर आर्थिक उपार्जन किया जा रहा था। जिला पदाधिकारी द्वारा मेडिकल टीम गठित कर 22 बंदियों को कारा अस्पताल से डिस्चार्ज कराया गया। इनमें से अधिकांश बंदी आरोपित पदाधिकारी के पदस्थापन काल में हीं कारा अस्पताल में भर्ती कराये गये थे, जो मेडिकल टीम द्वारा उक्त बंदियों को बिना किसी गंभीर बीमारी के कारा अस्पताल में भर्ती पाया गया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि कारा के मुख्य प्रशासक के रूप में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया गया है। इस प्रकार कारा प्रषासन द्वारा कतिपय छोटे-मोटे कारणों से भी कैदियों को लम्बे-लम्बे समय तक एवं बार-बार कारा अस्पताल में रखा जा रहा था। स्पष्ट है कि इसका अनुचित एवं नियम विरूद्ध लाभ कैदियों को पहुँचाकर आर्थिक उपार्जन किया जा रहा था, जो बिना आरोपित पदाधिकारी की मिलीभगत से संभव नहीं है।

आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि उनके द्वारा बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796 (ii), (iii) एवं 870 (xi) का उल्लंघन नहीं किया गया है और न ही बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1), (2) का उल्लंघन किया गया है, जबकि त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा अपने प्रतिवेदन में गेट रजिस्टर पर कारा अधीक्षक का हस्ताक्षर नहीं होने, बंदियों से अवैध राशि की वसूली करने के आरोप के संबंध में जो तथ्य प्रस्तुत किया गया है, वे आरोपित पदाधिकारी के कार्यकाल के हैं। इसी प्रकार जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा बिना गंभीर बीमारी के अस्पताल में भर्ती जिन बंदियों को मेडिकल टीम के जाँचोपरान्त डिस्चार्ज कराया गया, उनमें से अधिकांश बंदी आरोपित पदाधिकारी के कार्यकाल में अस्पताल में भर्ती हुए थे। अतः त्रिसदस्यीय जाँच दल तथा जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के जाँच प्रतिवेदनों में कारा में कतिपय अनियमितताएं पाई गई, जिसके लिए आरोपित पदाधिकारी कारा के मुख्य प्रषासक के रूप में जिम्मेवार हैं। स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिहार कारा हस्तक के विहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गम्भीर कोताही एवं लापरवाही बरती गई, जिस कारण कारा में अराजक स्थिति विद्यमान थी। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है।

6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सत्येन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, बाढ़ के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए तथा प्रमाणित पाये गये आरोपों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(vi) के प्रावधानों के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- '' संचयी प्रभाव से दो (02) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''। 7. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 5811 दिनांक 07.07.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 1934 दिनांक 25.08.2023 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सत्येन्द्र कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, बाढ़ के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(vi) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' संचयी प्रभाव से दो (02) वेतनवृद्धियों पर रोक का दण्ड ''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।15 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-19/2020--7768

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1 सितम्बर 2023

श्री रामाधार सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति अन्य मामले में निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के मंडल कारा, बेतिया में पदस्थापन के दौरान दिनांक 22.09.2020 को मंडल कारा, बेतिया के परिसर में स्थित एक छोटे लीची के पेड़ से अपनी कमीज के माध्यम से फांसी लगाकर विचाराधीन बंदी मो0 शमषेर अंसारी, पे0-वसीर अंसारी द्वारा आत्महत्या कर लिये जाने की घटना में बरती गई गंभीर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2061 दिनांक 03.03.2022 द्वारा श्री रामाधार सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी एवं अधीक्षक, मंंडल कारा, बेतिया को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1431 दिनांक-24.04.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री रामाधार सिंह के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल पाँच (05) आरोपों में से आरोप संख्या-01 एवं 02 को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-03, 04 एवं 05 को आंषिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक-4434 दिनांक-26.05.2023 द्वारा श्री रामाधार सिंह को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

4. तद्‌आलोक में श्री रामाधार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति अन्य मामले में निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन दिनांक-23.06.2023 समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि आरोप में बंदी के मानसिक रोग में उचित चिकित्सा में बरती गयी लापरवाही के लिए यद्यपि कारा चिकित्सक को जवाबदेह माना गया है तथापि नियंत्री पदाधिकारी होने के नाते उनसे अपेक्षा की गई है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों के बारे में उन्हेें जानकारी प्राप्त कर यथोचित कार्रवाई करनी चाहिए थी। इस संबंध में उनका कहना है कि बंदी के गंभीर रूप से मानसिक रोग से पीड़ित होने की जानकारी वास्तव में उन्हें चिकित्सा पदाधिकारी/उपाधीक्षक द्वारा नहीं दी गई। उसे डिप्रेशन का शिकार बताया गया और इसकी दवाएँ दी गई। बंदी की स्थिति में कुछ सुधार भी हुआ। कहीं से भी बंदी में उत्तेजक/हिंसक व्यवहार की सूचना नहीं थी। कारा हस्तक में भी प्रावधान है कि बंदी अराजक, उत्तेजक/हिंसक व्यवहार दर्शाता है तो कारा चिकित्सक की अनुशंसा पर बंदी को प्रकोष्ठ में संसीमित कर इलाज कराया जाता है। चूँकि उस बंदी के द्वारा ऐसी हरकतें नहीं की गई तथा कारा चिकित्सक द्वारा भी उच्च स्तरीय चिकित्सा की कोई अनुशंसा नहीं की गई। फलस्वरूप उनके द्वारा बिना किसी प्रकार की सूचना के विशेष निर्देश नहीं दिया गया। बंदी के लिए चिकित्सकों द्वारा चलाई जा रही चिकित्सा को ही उचित समझा गया। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि उस समय राज्य में कोरोना का प्रकोप होने के कारण सरकार/विभाग द्वारा बंदियों को रख-रखाव हेतु गाईडलाइन (SOP) निर्गत हुआ था, जिसमें बंदियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव नहीं दिये जाने का भी निर्देश था। फलतः उनके द्वारा कोई अतिरिक्त कार्रवाई किया जाना श्रेयस्कर नहीं होता। उनका कहना है कि वे इस मामले में पूर्णतः निर्दाेष हैं। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में अंकित किया गया है कि चार माह के अंतराल में ही दो बंदियों द्वारा फाँसी लगा लिए जाने के उपरांत उनकेे (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा कारा के सुधार हेतु ठोस एवं कारगर कार्रवाई नहीं की गई, जो सत्य नहीं है। उनके द्वारा इस आरोप के संबंध में कुल पाँच मुख्य बिन्दुओं पर अपने द्वारा किये गये कार्यों का उल्लेख प्रमाण सहित उपलब्ध कराया गया है, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा दूसरे बंदी द्वारा फाँसी लगा लिये जाने की घटना को लेकर यह टिप्पणी कर दी गई कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा निष्ठापूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया। चार माह के अन्तराल पर मात्र दो बंदियों द्वारा फाँसी लगाने की घटना से इस प्रकार का आकलन उचित नहीं है।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अपने मंतव्य में इस बात की पुष्टि की गई है कि घटना की तिथि के एक दिन पूर्व से ही वे (आरोपित पदाधिकारी) सरकारी कार्य से मुख्यालय से बाहर थे तथा उपाधीक्षक प्रभारी अधीक्षक थे, परंतु अपने निष्कर्ष में इस आरोप को भी आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित कर दिया गया। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनकेे द्वारा अपने किसी भी दायित्व/र्काव्य की अवहेलना नहीं की गई है। कोरोना काल के विकट समय में सहयोगी कर्मियों की कमी तथा पदस्थापित कर्मियों की अकुशलता के बावजूद उनके द्वारा मंडल कारा, बेतिया का संचालन सही तरीके से किया गया। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि जाँच पदाधिकारी वृत्ताधीक्षक, केन्द्रीय कारा, मोतिहारी के जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि बंदी मानसिक रूप से पीड़ित था तथा उसके बेहतर इलाज हेतु कारा प्रशासन को पर्याप्त कदम उठाया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा मृतक बंदी के बेहतर इलाज हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया है, जबकि चिकित्सक द्वारा उसे एन्टी डिप्रेशन एवं नींद की दवा दी जा रही थी, जिससे स्पष्ट है कि बंदी मनोविकृति की समस्या से पीड़ित था। समुचित इलाज के अभाव में बंदी द्वारा अवसादग्रस्त होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया गया। इस प्रकार स्पष्ट है कि कारा के मुख्य पर्यवेक्षी पदाधिकारी के रूप में आरोपित पदाधिकारी अपने कर्त्तव्यों/दायित्वों के निर्वहन में विफल रहे हैं। दिनांक 11.06.2020 को एक अन्य बंदी द्वारा फाँसी लगाकर आत्महत्या किये16 (cid:464)बहार गजट, 13 सितम्बर 2023 जाने की घटना के उपरान्त पुनः दिनांक 22.09.2020 को विचाराधीन बंदी मो0 शमशेर अंसारी द्वारा कारा के अन्दर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर लिये जाने की घटना से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा इन घटनाआें की रोकथाम हेतु कोई पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई है। इस प्रकार स्पष्ट है कि इनके कार्यकाल में बंदियों द्वारा आत्महत्या किये जाने की घटनाएँ घटित होती रही है। इससे स्पष्ट होता है कि कारा की प्रषासनिक व्यवस्था लगातार गिरती गई, जिसके लिए कारा के मुख्य नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी के रूप में आरोपित पदाधिकारी की प्रषासनिक अक्षमता परिलक्षित होती है।

आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि घटना की तिथि के एक दिन पूर्व से ही वे सरकारी कार्य से मुख्यालय से बाहर थे तथा उपाधीक्षक, प्रभारी अधीक्षक के रूप में कार्यरत थेे। आरोपित पदाधिकारी का यह कथन स्वीकार करने योग्य नहीं है, क्योंकि मंडल कारा, बेतिया में बंदी द्वारा फाँसी लगाकर आत्महत्या करने की यह लगातार दूसरी घटना थी, जिससे स्पष्ट है कि कारा में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक कुव्यवस्था थी। आरोपित पदाधिकारी काराधीक्षक के रूप में कारा के मुख्य नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी थे। अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों/कर्मियों के कार्यों का सतत्‌ पर्यवेक्षण एवं निगरानी रखना उनका पदीय दायित्व था, किन्तु आरोपित पदाधिकारी अपने पदीय दायित्वाें के निर्वहन में पूर्णतः विफल साबित हुए हैं, परिणामस्वरूप मंडल कारा, बेतिया में बंदी द्वारा फाँसी लगाकर आत्महत्या किये जाने की लगातार दूसरी घटना घटित हुई। मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदी के समुचित इलाज कराने में भी आरोपित पदाधिकारी विफल रहे हैं। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है। 6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रामाधार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति अन्य मामले में निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए तथा प्रमाणित पाये गये आरोपों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vii) के प्रावधानों के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- ''वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से दो (02) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड''। 7. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 6050 दिनांक 14.07.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1933 दिनांक 25.08.2023 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8.. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री रामाधार सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति अन्य मामले में निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(vii) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- ''वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से दो (02) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 26—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 13 September 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-09-13.37/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-09-13.37.