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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 October 2023

Published 04 October 2023

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-10-04.40
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 12 1945 (श0) सं(cid:201)या 40 पटना, बुधवार, ————————

4 2023 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-113 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

---

भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 114-115 पूरक

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पूरक-क

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2 (cid:464)बहार गजट, 4 2023

भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं। —————

-1332--श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5302), तत्कालीन सहायक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, मुँगेर के विरूद्ध मुँगेर जिलान्तर्गत पहाड़ियों से निस्सृत झरनो, जलस्त्रोताें एवं नाला पर आधारित विभिन्न सिंचाई योजनाओं का जीर्णाेद्धार एवं इन्द्ररूख ग्राम के निकट डकरानाला पर चेक डैम निर्माण (एकरारनामा सं॰-01SBD/2016-17) में अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना से कराने के उपरांत, विभागीय समीक्षोपरांत कतिपय आरोपों केे लिए स्पष्टीकरण किया गया। उक्त कार्य की उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के पत्रांक 629 दिनांक 01.04.2021 के द्वारा मांगे गये मंतव्य की प्रति उपलब्ध कराई गयी जिसके समीक्षोपरांत श्री रंजन के विरूद्ध आरोप सं॰ 1, 2 एवं 3 को अप्रमाणित पाया गया। परन्तु विषयांकित कार्य में ही स्वीकृत प्राक्कलन के कंडिका 16(C) में प्रावधानित लौह छड़ तथा कंडिका 20 में प्रावधानित शटरिंग की मात्रा से अधिक कार्य में प्रयुक्त किये जाने के कारण विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति के पूर्व ही संवेदक को भुगतान किया गया। हालांकि, उक्त भुगतान के बाद विषयांकित कार्य में विचलन की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त कर ली गई। इस प्रकार, उपर्युक्त विचलन की सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति के पूर्व ही संवेदक को भुगतान किये जाने के फलस्वरूप, उक्त आरोप के लिए आरोप पत्र का गठन कर श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5302), तत्कालीन सहायक अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री रंजन, सहायक अभियंता से प्राप्त बचाव बयान की समीक्षा की गई। विभागीय समीक्षोपरान्त आरोपित पदाधिकारी श्री राजीव रंजन, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये जाने के कारण, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँचोपरान्त, आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराये जाने के फलस्वरूप, तकनीकी समीक्षोपरांत, जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री रंजन द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर) उपलब्ध कराया गया है जिसकी समीक्षा निम्नवत है :-

3 (cid:464)बहार गजट, 4 2023

द्वारा कार्यालय आदेश सं0-1/1-10164/2021-863 दिनांक 29.04.2022 द्वारा उनके पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के आरोप में निंदित किया गया है।

ऐसी परिस्थिति में विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वी—ति के पूर्व संवेदक को भुगतान किये जाने के प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिये मैं जिम्मेवार नहीं हूँ।

(iii) संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में विश्लेशित किया गया है कि- यदि एकरारनामा के अनुरूप ही विपत्र तैयार किया जाता तथा विचलन की मात्रा को स्वी—ति हेतु रोक कर रखा जाता तो प्रक्रियात्मक त्रुटि से बचा जा सकता था। इस संदर्भ में निवेदन पूर्वक कहना है कि - कनीय अभियंता द्वारा कराए गए कार्यों के वास्तविक मात्रा के अनुरूप तैयार विपत्र जाँच हेतु सहायक अभियंता को उपस्थापित की जाती है जिनके द्वारा कार्य की मात्रा एवं मद के जाँचोपरांत मापी पुस्तिका एवं विपत्र को जाँच एवं भुगतान हेतु प्रमंडल कार्यालय में समर्पित किया जाता है जहाँ पुनः लेखा शाखा एवं प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी (केन्द्र सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त स्वायत्त पदाधिकारी) द्वारा जाँचोपरान्त विधिवत कार्यपालक अभियंता द्वारा भुगतान की जाती है। उल्लेखनीय है कि सहायक अभियंता द्वारा विपत्र का भुगतान नहीं किया जाता है।

ऐसी परिस्थिति में विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वी—ति के पूर्व संवेदक को भुगतान किये जाने के प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिये मैं जिम्मेवार नहीं हूँ।

(iv) आपके द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होने का एक अन्य कारण बचाव बयान के साथ मेरे द्वारा बिचलन की स्वी—त प्रतिसंलग्न नहीं किया जाना भी है। इस संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका- 6 के अंतिम पारा का अवलोकन कराना चाहेंगे जिसमें अंकित है कि- कंडिका-16(ब) एवं 20 से संबंधित विचलनों की स्वी—ति विभागीय निविदा समिति द्वारा दिनांक-06.07.2018 का प्रदान किया गया। इस कारण बचाव बयान से असहमति व्यक्त करना उचित नहीं है।

ऐसी परिस्थिति में विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वी—ति के पूर्व संवेदक को भुगतान किये जाने के प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिये मैं जिम्मेवार नहीं हूँ ।

(v) इसी क्रम में मैं आपका ध्यान मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक 2347 दिनांक 31.12. 1983 की कंडिका-1 (ङ) की ओर पुनः आ—ष्ट करना चाहता हूँ, जिसमें अंकित है कि- "प्रत्येक कार्य की मापी माह में एक बार अवश्य ली जायेगी । ली गई नई मापी की जाँच भी सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा निगरानी विभाग की पत्र संख्या-1/ स्था-108/81-462, दिनांक 30 मार्च 1982 में निर्गत आदेश के अनुसार की जायेगी। नापी लेने के 15 दिनों के अन्दर कनीय अभियंता मापी पुस्तिका एवं विपत्र सामग्री विवरणी के साथ सहायक अभियंता को उपस्थापित करेंगे और सहायक अभियंता अगले 15 दिनांक के अन्दर मापी पुस्तिका जांचोपरान्त कार्यपालक अभियंता को उपस्थापित करेंगे। कार्यो की मापी को दर्ज करना, उसकी जाँच करना अथवा विपत्र बनाना लम्बित नहीं रखा जाये, चाहे किसी कारणवश इस मापी से संबंधित विपत्र के भुगतान की कठिनाई क्यों न हो।"

(vi) इसी क्रम में विभागीय पत्रांक 1239 दिनांक 06.07.2018 के द्वारा सक्षम प्राधिकार से विचलन की स्वी—ति हो जाने से विभाग को किसी भी प्रकार की वित्तीय क्षति/राजस्व की क्षति नहीं हुई है। विपत्र को विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वी—ति के पूर्व संवेदक को भुगतान किये जाने में मेरे स्तर से किसी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि आंशिक रूप से भी नहीं हुई है। अतः करबद्ध प्रार्थना है कि उपरोक्त साक्ष्य समर्थित बचाव बयान पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए आरोप से मुक्त करने की —पा की जाय। इस हेतु मैं सदा आभारी रहूँगा । आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के Appendix-6 के आलोक में प्रतिवेदित किया गया है कि माप पुस्त में मापी, कनीय अभियंता द्वारा दर्ज होने के उपरान्त जाँच हेतु सहायक अभियंता को उपस्थापित किया जाता है। जिनके द्वारा कार्य की मात्रा एवं मद के जाँचोपरान्त मापी पुस्त की जाँच एवं भुगतान हेतु प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित किया जाता है। जहाँ, पुनः लेखा शाखा एवं प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी द्वारा जाँचोपरान्त विधिवत्‌ रूप से कार्यपालक अभियंता द्वारा भुगतान की जाती है। ऐसी स्थिति में, विचलन का सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति के पूर्व संवेदक को भुगतान किये जाने के प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेवार नहीं है। साथ ही, आरोपी पदाधिकारी द्वारा मंत्रीमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक 2347 दिनांक 31.12.1983 के कंडिका-8 (ड़) का उल्लेख करते हुए "जिसमें कार्यो की मात्रा को दर्ज करना, उसकी जाँच करना अथवा विपत्र बनाना लंबित नहीं रखा जाए, चाहे किसी कारणवष इस मापी से संबंधित विपत्र के भुगतान में कठिनाई क्यों न हो" अपने आप को उक्त वर्णित आरोप के लिए जिम्मेवार नहीं माना गया है। आरोपी पदाधिकारी के उक्त कथन से सहमत नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि कराये गये कार्यो की मापी (कार्यमद एवं मात्रा सहित) माप पुस्त में ससमय प्रविष्टि कर कनीय अभियंता के द्वारा कर लेना चाहिए। तत्‌पष्चात्‌ उसकी जाँच सहायक अभियंता के द्वारा किया जाना चाहिए। कराये गये कार्यो की मापी की रिकार्ड इंट्री मापपुस्त में ससमय किया जाना नियमानुकूल है। परन्तु, संवेदक को भुगतान हेतु कनीय अभियंता द्वारा विपत्र तैयार करते समय यह जाँच कर लेनी चाहिए कि एकरारनामा में अंकित कार्यमद की मात्रा से अधिक या अतिरिक्त कार्यमद तो नहीं है क्योंकि कार्यमद की एकरारित मात्रा से अधिक कार्य की मात्रा/अतिरिक्त कार्यमद की मात्रा का भुगतान सक्षम प्राधिकार के द्वारा स्वीकृत विचलन प्रस्ताव के बाद ही किया जाना नियमानुकूल है। यहाँ पर आरोपी पदाधिकारी द्वारा कनीय अभियंता के द्वारा तैयार किये गये छठा चालू विपत्र4 5 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 (1) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, बौंसी के पद पर इनका पदस्थापन वर्ष 2018 में विभागीय स्तर से किया गया एवं बाढ़ अवधि 2018 तथा कटाव निरोधक कार्य वर्ष 2018-19 पूर्णतः इनके देख-रेख में चारों अवर प्रमंडल का कार्य सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया गया। (2) इनके द्वारा कहा गया है कि, इनके पदस्थापन काल में कुल 4 कार्यपालक अभियंताओं के अधीनस्थ इनके द्वारा अवर प्रमंडल पदाधिकारी के रूप में कार्य संपादित किया गया, जिसमें श्री गोपाल चन्द्र मिश्र, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता द्वारा निर्गत लिखित आदेश के आलोक में बाढ़ (SOP की कंडिका 4.4 के अनुरूप) 2019 में तथा पूर्व के अवधि में अवर प्रमंडल में कर्मचारियों के पदस्थापन के अभाव में ई-मेल के माध्यम (SOP की कंडिका 4.10) का संप्रेषण इनके स्तर से किया जाता रहा। (3) इनका कहना है कि, 01SBD/2012-13 जो वर्ष 2014 से लंबित था, इनके पदस्थापन काल में कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-593 दिनांक 25.10.18 के आदेश से कार्रवाई की गई (पत्रांक-331 दिनांक 02.05.19) एवं इनके द्वारा यह भी उल्लेखित किया गया है कि विपत्र बनाने की जिम्मेवारी कनीय अभियंताआें की होती है, अवर प्रमंडल पदाधिकारी के स्तर से प्रमंडल में जाँचोपरांत विपत्र प्रस्तुत किया जाता है। अतः इस संबंध में मुख्यतः कार्रवाई पूर्व में पदस्थापित पदाधिकारियों अन्यथा संबंधित कनीय अभियंताओं पर किये जाने की अपेक्षा विभाग से की जाती है। (4) इनके द्वारा कहा गया है कि, पूर्व में भी विभागीय स्तर से पूछे गये स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर द्वारा स्पष्ट किया गया था कि, प्रमंडल तथा संबंधित वरीय कार्यालय के भ्रामक कार्यशैली को इंगित करने के फलस्वरूप मेरा वेतनादि भुगतान रोकते हुए आरोप बनाने की कोशिश की गई, जिस पर विभागीय स्तर से जाँच करने के बजाय वरीय कार्यालय द्वारा ही पुनः मंतव्य की मांग कर आरोपों को सिद्ध किया गया। इसी क्रम में श्री कुमार के द्वारा कहा गया है कि पुरे पदस्थापन काल में अवर प्रमंडल पदाधिकारी के कार्यालय को स्थापित तथा संचालन हेतु राशि तथा कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराये गये, जिससे की निजी व्यय पर श्री कुमार के स्तर से कार्य संपादित किया गया, जो सरकारी राशि में लूट तथा विभागीय आदेश का स्पष्टतः अवहेलना को प्रमंडल स्तर पर स्वतः सिद्ध करता है। श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, बौंसी सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-02 (मु0) बेतिया द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों के पुनरावृत्ति की गयी है, जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण के माध्यम से प्रतिवेदित किया जा चुका है। श्री कुमार द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि विभागीय निदेश दिये जाने के बावजूद अंतिम विपत्र तैयार कर समर्पित किये जाने हेतु इनके स्तर से कोई सार्थक प्रयास किया गया हो। श्री कुमार के द्वारा अपने पदस्थापन स्थल पर सदैव अनुपस्थित रहने, अनुपस्थिति विवरणी ई-मेल के माध्यम से भेजे जाने के संदर्भ में कोई स्पष्ट प्रतिवेदन समर्पित नहीं किया गया है। इनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में SOP के अनुपान के संदर्भ में पुनः इनके स्तर से ई-मेल द्वारा सूचना प्रेषित किये जाने का उल्लेख किया गया है। अतएव वर्णित स्थिति में श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोपों के खंडन हेतु उनके द्वारा कोई नया साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाने से इनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-1 से 4 तक यथावत प्रमाणित प्रतीत होता है। उपरोक्त समीक्षा से स्पष्ट है कि, श्री संदीप कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में उन्हीं बाताें की पुनरावृत्ति की गयी है, जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर में किया गया है तथा उक्त पर पूर्व में सम्यक विचार किये जाने के उपरांत लघु दण्ड अधिरोपण की कार्रवाई की गयी है। श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोपों के खंडन हेतु उनके द्वारा कोई नया साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण इनका पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतएव श्री संदीप कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य परिलक्षित नहीं रहने के कारण अस्वीकृत करने एवं पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-2459 दिनांक 18.10.2022 द्वारा अधिरोपित दण्डादेश को यथावत रखने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संदीप कुमार (आई0डी0-5324) सहायक अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से अधिरोपित दण्ड को यथावत रखते हुए उक्त आदेश श्री कुमार को संसूचित किया जाता है। श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी (आई0डी0-3511), तत0 कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद के पद पर पदस्थापित थें, तो उनके विरूद्ध जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद के अंतर्गत एकरारनामा सं0-01SBD/2013-14 के तहत पटना जिला के दरधा नदी पर ग्राम-लवाईच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग करने एवं घटिया तरीके से निर्माण कार्य कराये जाने संबंधी आरोप के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-क के साथ विभागीय पत्रांक-858 दिनांक-05.04.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। स्पष्टीकरण का प्रत्युार अप्राप्त रहने की स्थिति में श्री चौधरी को स्मारित किया गया। फिर भी जवाब अप्राप्त रहने पर श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।6 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2004 दिनांक-11.09.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

(1) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण में तीन विपत्रों के माध्यम से Price Escalation मद में कुल रू॰ 104,40,736/- का भुगतान किया गया है जो 1st Escalation Bill से भिन्न विभिन्न अवयवों यथा मजदूर, सिमेंट, स्टील र्इंधन एवं अन्य का प्रतिशत 2nd एवं 3rd Escalation Bill के आधार पर भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। SBD के General Conditions of Contract के कंडिका 10cc के तहत कार्य के सभी मदों में सम्मिलित विभिन्न अवयवों का वास्तविकता के अनुसार प्रतिशत का आकलन कर सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के उपरान्त निविदा कागजात के साथ संलग्न Contract Data के Schedule E, जो एकरारनामा का अंग एवं Escalation भुगतान का आधार होता है, में अंकित करते हुए Price Escalation का भुगतान किये जाने का प्रावधान है जो किया गया परिलक्षित नहीं होता है। इस प्रकार Contract Data के Clause 10cc के अवयवों के निर्धारित प्रतिशत के बिना सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति प्राप्त किये Price Escalation मद में किया गया भुगतान नियम के प्रतिकूल एवं अनियमित श्रेणी में होना परिलक्षित होता है। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(2) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण में व्यवहार किये जाने वाले 11889.19 घन मी॰ बोल्डर का शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं॰-3, खगौल के गुणवत्ता जाँचफल पत्रांक QC-26 दि॰ 22.02.16 एवं QC-104 दि॰ 27.07.15 में 8 प्रतिशत अंडर साईज (By Weight) एवं 9.5 प्रतिशत ओभर साईज (By Weight) पाया गया है जिसका व्यवहार उक्त योजना में किया गया परिलक्षित है जो GFCC द्वारा निर्गत दिशा-निदेश के अनुसार, निर्धारित मान्य सीमा 5 प्रतिशत से अधिक परिलक्षित है। इस प्रकार विषयांकित कार्य में 11889.19 घन मीटर बोल्डर के वजन के आधार पर GFCC द्वारा निर्गत दिशा निदेश के अनुसार निर्धारित मान्य सीमा से अधिक का व्यवहार किया जाना परिलक्षित होता है जिससे न्यून विशिष्टि का बोल्डर व्यवहार कर कार्य कराते हुए स्वीकृत दर पर भुगतान किये जाने से सरकारी राजस्व की क्षति का ममाला बनता प्रतीत होता है। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

(3) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण में व्यवहृत लघु खनिज यथा बालू, चिप्स, बोल्डर से संबंधित प्रपत्र एम॰ एवं एन॰ का सत्यापन, संबंधित खनन कार्यालय से संवेदक को भुगतान किये जाने के बाद, कराया जाना परिलक्षित होता है जबकि कार्य में व्यवहृत लघु खनिजों से संबंधित कार्य मदों का भुगतान उसका सम्बद्ध खनन कार्यालयों से सत्यापन के बाद ही किये जाने का विभागीय निदेश है। इस प्रकार विषयांकित कार्य में प्रत्युक्त लघु खनिज से संबंधित प्रपत्र एम॰ एवं एन॰ का सत्यापन विपत्रों के भुगतान के बाद कराये जाने से प्रक्रियात्मक त्रुटि का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव उक्त प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। (4) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण के अन्तर्गत रामपुर ग्राम की सुरक्षा के लिये बनाये गये दायाँ एवं बायाँ Afflux बाँध के चेनेज 30m, 90m एवं 150m पर प्रावधानित Formation level क्रमशः 58.00 m एवं 56.5 m में औसतन क्रमशः 0.265 m एवं 0.781 m की कमी जाँच में पाया गया जिससे ग्राम सुरक्षा के लिए निर्मित बाँध का निर्माण प्राक्कलन में प्रावधानित तल (लेवल) तक नहीं कराये जाने का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप बाँध का कार्य नहीं कराने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। (5) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में बराज के Under Sluice Spillway भाग के Pier के U/S end हेतु Front Face के उपरी भाग का ढलाई उभरा Buldge किया हुआ जाँच में पाया गया जिससे पियर का उपरी भाग एक सीध में दिखाई नहीं देता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण निर्माण के लिए Poor Workmanship, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में कमी का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव उक्त त्रुटिपूर्ण कार्य के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(6) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में बराज का दायाँ एवं बायाँ Afflux Bund दसई पइन एवं कोसुत पईन से निस्तृत वितरणी के विभिन्न चेनेज पर यांत्रिक विधि से क्रमशः 1395.0 घन मीटर, 25035.0 घन मीटर, 9067.50 घन मीटर एवं 5546.10 घन मी॰ कुल 41043.60 घन मीटर मिट्‌टी का भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। मापी पुस्त सं॰ 2021 में अंकित उक्त मिट्‌टी कार्य की मापी से Settlement Allowance मद में कटौती किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। जबकि याँत्रिक साधन से मिट्‌टी ढुलाई मद में (1/9th of Work7 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 done Quantity) की कटौती के उपरान्त Net Quantity का भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जिसके कारण 4560.4 घन मीटर अधिक मिट्‌टी की मात्रा संवेदक को भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार Settlement Allowance की कटौती नहीं किये जाने के कारण 4560.4 घन मीटर मिट्‌टी के लिए एकरारित दर पर रू॰ 6,77,675/- संवेदक को अधिकाई भुगतान तद्‌नुसार सरकार को राजस्व क्षति का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव मिट्‌टी भराई मद में नियमानुसार Settlement Allowance की कटौती नहीं किये जाने के कारण रू॰ 6,77,675/- की हुई राजस्व क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

इसी क्रम में उड़नदस्ता अंचल-02, जल संसाधन विभाग का पत्रांक-17 दिनांक-27.03.2019 द्वारा पूरक जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया, जिसके समीक्षोपरांत श्री चौधरी के विरूद्ध पूरक आरोप पत्र गठित कर समेकित जाँच हेतु विभागीय पत्रांक-1737 दिनांक-19.08.2019 द्वारा संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया। पूरक आरोप पत्र में वर्णित आरोप के बिंदु निम्नवत्‌ है :-

-जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/2013-14 के तहत धनरूआ प्रखंड के रामपुर लवाईच ग्राम के समीप बराज निर्माण में कार्य के दौरान एकरारनामा के Contract data के Clause 10CC के विभिन्न अवयवों के प्रतिशत निर्धारण की सक्षम प्राधिकार से बिना स्वीकृति प्राप्त किये तृतीय Escalation Bill तक रू॰ 10440736/- का भुगतान किया गया था। पुनः चौथे Escalation Bill से रू॰ 2592993/- का भुगतान करते हुए चार विपत्रों के माध्यम से Price Escalation मद में कुल रू॰ 13033729/- का भुगतान किया गया। अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, नालंदा, बिहारशरीफ के पत्रांक 968 दिनांक 06.10.2018 द्वारा समर्पित किये गये विषयांकित कार्य का Price Escalation की गणना से संबंधित विभिन्न अवयवों का प्रतिशत निर्धारण की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से अबतक प्राप्त नहीं होने से चौथे escalation विपत्र के माध्यम से रू॰ 2592993/- सहित कुल रू॰ 13033729/- का भुगतान नियम के प्रतिकूल एवं अनियमित परिलक्षित होने से आप दोषी प्रतीत होते है।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी का पत्रांक-298 दिनांक 11.4.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई, जो निम्नवत्‌ है :-

श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के विरूद्ध विभागीय संकल्प 2004 दि॰ 11.09.2018 द्वारा गठित मूल आरोप पत्र के क्रम में संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान श्री चौधरी ने नये प्रपत्रों (चार भाग) में आरोप पत्र गठित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। विभागीय पत्रांक 463 दि॰ 01.03.2019 द्वारा पूर्व से गठित आरोप पत्र के अनुरूप ही कार्यवाही संचालित किये जाने का निदेश दिया गया जिसके फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री चौधरी को बचाव बयान के साथ संचालित विभागीय कार्यवाही में उपस्थित होने का निदेश दिया गया। संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि श्री चौधरी द्वारा कोई तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया एवं उड़नदस्ता को संबोधित पत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए कहा गया है इसी पूरे कार्य के विरूद्ध एक अन्य परिवाद की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की जा रही है। श्री चौधरी द्वारा पूरे कार्य की अद्ययतन जाँच कराने एवं जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने संबंधी अनुरोध का उल्लेख भी संचालन पदाधिकारी की कार्यवाही में किया गया है। उक्त जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध होने तक एवं चुनाव अवधि तक समय देने का अनुरोध करते हुए श्री चौधरी विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी ने श्री चौधरी द्वारा अपने उपर लगे आरोपों से बचाव में बचाव बयान एवं साक्ष्य जानबूझ कर समर्पित नहीं करने के फलस्वरूप आरोप सं॰ 1 से 6 तक प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि इन आरोपों की तथ्यपरक जाँच नहीं की जा सकी है जिसके फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इन पर कोई मंतव्य गठित करना संभव प्रतीत नहीं होता है। परन्तु श्री चौधरी द्वारा समर्पित पत्र में उल्लेखित बिन्दुओं एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्यों के आधार पर समीक्षा की गई है जो निम्नवत है :-

जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम रामपुर के पास बराज योजना निर्माण में तीन विपत्रों के माध्यम से Price Escalation मद में कुल रू॰ 104,40,736/- का भुगतान किया गया। SBD के General Condition of Contract के कंडिका 10CC के तहत कार्य के सभी मदों में सम्मिलित विभिन्न अवयवों का वास्तविकता के अनुसार प्रतिशत का आकलन कर सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के उपरान्त भुगतान किया जाना चाहिए था जो कि किया गया परिलक्षित नहीं होता है। परन्तु इसकी स्वीकृति मुख्य अभियंता, बिहारशरीफ के पत्रांक 727 दि॰ 28.06.2019 द्वारा प्रदान कर दी गयी थी। इस प्रकार Price Escalation मद की स्वीकृति भुगतान के बाद प्राप्त कर लेने के कारण इसे प्रक्रियात्मक त्रुटि माना जा सकता है लेकिन कोई वित्तीय क्षति का मामला नहीं बनता है। अतः Price Escalation मद में किया गया भुगतान नियम के प्रतिकूल एवं अनियमित श्रेणी में होने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है जैसा कि पूरक आरोप के लिए संचालित विभागीय कार्रवाई में संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उल्लेखित है। उक्त योजना में GFCC द्वारा निर्गत दिशा-निदेश के अनुसार निर्धारित मान्य सीमा 5 प्रतिशत से अधिक अंडरसाईज (By weight) एवं ओभर साईज (By weight) बोल्डर पाये जाने के संबंध में शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं॰-3, खगौल के गुणवत्ता जाँचफल पत्रांक QC-26 दि॰ 22.02.2016 एवं QC-104 दि॰ 27.07.15 का उल्लेख किया गया8 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 है। पुनः उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.1.11 में गुणवत्ता जाँचफल पत्रांक QC-19 दि॰ 13.02.2018 का उल्लेख किया गया है जिसमें 5.5 प्रतिशत Boulder are undersize and 6.00% of Boulder are over size by weight (Approx) उल्लेखित है जिसे कंडिका 8.5.0 में GFCC के Guide line के अनुसार over size एवं under size की allowable मान्य सीमा (5 प्रतिशत) के सन्निकट अंकित किया गया है। इस प्रकार न्यून विशिष्टि का बोल्डर व्यवहार कर कार्य कराने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

के संदर्भ में श्री चौधरी द्वारा न तो कोई तथ्य प्रस्तुत किया गया न ही कोई साक्ष्य संलग्न किया गया है।

के संदर्भ में श्री चौधरी द्वारा अपने प्रत्युत्तर में Under Sluice Spillway भाग के Pier के उपरी भाग में Bulge की बात से इंकार किया गया है लेकिन इस संदर्भ में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।

में उल्लेखित मिट्‌टी कार्य के संदर्भ में कोई भी स्पष्टीकरण/तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। श्री चौधरी द्वारा अपने विरूद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई में संचालन पदाधिकारी के समक्ष बचाव बयान एवं साक्ष्य समर्पित नहीं करने के फलस्वरूप आरोप सं॰ 1 से 6 तक की तथ्यपरक जाँच नहीं किये जाने के चलते संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर कोई मंतव्य गठित नहीं किया जा सका। परन्तु पूर्व में की गयी उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा एवं उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोप सं॰ 1 एवं 2 अप्रमाणित तथा आरोप सं॰ 3 से 6 प्रमाणित होता है। श्री चौधरी के विरूद्ध पूरक आरोप पत्र के अनुसार प्रश्नगत कार्य का Price escalation की गणना से संबंधित अवयवों का प्रतिशत निर्धारण की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त नहीं होने से escalation विपत्र के माध्यम से किया गया भुगतान नियम के प्रतिकूल होने का उल्लेख है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य में उल्लेखित है कि श्री चौधरी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रश्नगत कार्य का Price escalation की गणना से संबंधित विभिन्न अवयवों का प्रतिशत निर्धारण मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, बिहारशरीफ की अध्यक्षता में गठित समिति को प्रदान कर दी गयी थी। इस प्रकार अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, नालन्दा, बिहारशरीफ के पत्रांक 968 दिनांक 06.10.2018 द्वारा समर्पित किये गये विषयांकित कार्य का Price escalation की गणना से संबंधित विभिन्न अवयवों का प्रतिशत निर्धारण की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त थी। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए चौथे escalation विपत्र के माध्यम से रू॰ 2592993/- सहित कुल रू॰ 13033729/- का भुगतान नियम के प्रतिकूल एवं अनियमित होने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। उक्त समीक्षा एवं तथ्यों के आलोक में चौथे escalation विपत्र के माध्यम से रू॰ 2592993/- सहित कुल रू॰ 13033729/- का भुगतान नियम के प्रतिकूल एवं अनियमित होने का आरोप प्रमाणित नहीं होने के मंतव्य से सहमत हुआ जा सकता है। श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के विरूद्ध आरोप सं॰ 1 एवं 2 अप्रमाणित तथा आरोप सं॰ 3 से 6 प्रमाणित होता है। श्री चौधरी के विरूद्ध पूरक आरोप सं॰ 1 प्रमाणित नहीं होता है।

उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक 381 दिनांक-24.

02.2022 द्वारा प्रमाणित आरोपों (आरोप सं0-3 से 6) के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया। जिसके आलोक में श्री चौधरी द्वारा पत्रांक-270 दिनांक-29.03.2022 द्वारा अपना प्रत्युार विभाग को समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। श्री चौधरी द्वारा अपने बचाव बयान में जिला खनन कार्यालय, गया का पत्रांक 1151 दिनांक 18.16.

2010 के कंडिका-3 का उल्लेख करते हुए प्रतिवेदित किया है कि दरधा नदी पर लवाईच रामपुर के पास बराज निर्माण में व्यवहृत लघु खनिजों से संबंधित प्रपत्र M एवं N का सत्यापन सक्षम प्राधिकार से कराये बगैर किये भुगतान में किसी प्रकार की कोई प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री चौधरी का पदस्थापन दिनांक-21.10.2014 से जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद में होने के पश्चात्‌ एकरारनामा सं० 01SBD/2013-14 के तहत कराये गये कार्य में प्रयुक्त लघु खनिजों यथा बोल्डर, बालू, चिप्स आदि से संबंधित एम० एवं एन० प्रपत्र का सक्षम प्राधिकार से सत्यापन के पश्चात्‌ उक्त समय बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली 1972 के नियम-40(10) के अनुसार ही संवेदक को भुगतान किया जाना नियमसंगत था। जिसका अनुपालन इनके द्वारा नहीं किया गया। अतएव, उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, तत0 कार्यपालक अभियंता पर आरोप संख्या-3 प्रमाणित होता है। श्री चौधरी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उल्लेख किया गया है कि उड़नदस्ता संगठन द्वारा कार्यस्थल पर जाँच दिसम्बर 2016 में किया गया था, उस समय कार्य प्रगति में था। एफलक्स बाँध के दोनों तरफ से सामग्री के ढोने एवं गाड़ी के परिचालन के मद्‌देनजर एफलक्स बाँध के उपरी तल को नीचा (low) रखा गया था ताकि गाड़ियों के परिचालन में सुगमता हो सके। माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इसके उद्‌घाटन के पूर्व एफलक्स बाँध को रूपांकित9 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 सेक्सन में पूरा कर लिया गया जिसकी पुष्टि Afflux Bandh के मापपुस्त संख्या-22 के पृ० 01 से 11 तक अंकित Formation level (Top level) से होती है। उक्त के संबंध में माप पुस्त संख्या-22 के पृष्ठ 01 से 11 तक के अवलोकन करने एवं उड़नदस्ता संगठन द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में उक्त आरोप के संबंध में अनियमितता/कमी नहीं पाये जाने के कारण आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार किया जा सकता है, जिसके फलस्वरूप आरोप संख्या-4 अप्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 05.12.2014 तक Pier का कार्य किया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में बराज के Under sluice spillway भाग के Pier के U/S end हेतु front face के उपरी भाग का ढ़लाई Bulge किया हुआ उल्लेखित है, जिसके कारण Pier का उपरी भाग एक सीध में दिखायी नहीं देने का उल्लेख है। इस प्रकार के त्रुटिपूर्ण निर्माण के लिए Poor Workmanship, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में कमी के लिए श्री चौधरी को आरोपित किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री चौधरी द्वारा कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद का पदभार दिनांक 21.10.2014 को ग्रहण किया गया जबकि Pier के कार्य को दिनांक-05.12.2014 तक कराये जाने का उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया है। इस परिस्थिति में Pier ढ़लाई के कार्य में पायी जानेवाली त्रुटियों के लिए श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी है। अतएव श्री चौधरी पर आरोप संख्या-5 प्रमाणित होता है।10 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1117 दिनांक-09.09.2020 द्वारा श्री सिन्हा से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा की गयी जिसमें श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए इनके विरूद्ध अग्रेत्तर जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार सिन्हा(आई0डी0-4019), तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियामवली-2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सहपठित ज्ञापांक-549 दिनांक-11.03.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। :- ः-बलवाघाट बराज-सह-सिंचाई योजना के कार्यान्वयन से संबंधित चतुर्थ विपत्र की जाँच के क्रम में दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता /लापरवाही बरतते हुए सही ढंग से विपत्र की जाँच नहीं करने एवं बरती गयी अनियमितता के कारण संवेदक को कुल 1,89,06,337/- रूपये की अधिकाई भुगतान किया जाना परिलक्षित है। उक्त से स्पष्ट है कि श्री अरूण कुमार सिन्हा के द्वारा बलवाघाट बराज-सह-सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के कारण सरकार को तत्काल वही राशि की अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है। जो बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 का उल्लंघन है। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का उल्लंधन है।

ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री अरूण कुमार सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी, जिसमें संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिंदु पर विभागीय पत्रांक-193 दिनांक-02.02.2023 द्वारा श्री सिन्हा से अभ्यावेदन की मांग की गयी। दिनांक-14.03.2018 को पारित, तृतीय चालू विपत्र में रुपये 1,89,06,337/- के अधिकाई भुगतान की वसूली हेतु, कार्यपालक अभियंता श्री अरूण कुमार सिन्हा के स्तर से, उड़नदस्ता जाँच के क्रम में संज्ञान में लाये गये अधिकाई भुगतान के मामले के पूर्व वसूली हेतु आवश्यक कार्रवाई किये जाने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने से तथा तृतीय पारित विपत्र की तिथि-14.03.2018 से लगभग सतरह (17) माह पश्चात्‌ दिनांक-14.08.2019 को अधीक्षण अभियंता को संबोधित पत्र में 8 वें चालू विपत्र से उक्त अधिकाई भुगतान रुपये 1,89,06,337/- की वसूली किये जाने से यह परिलक्षित है कि, अधिकाई भुगतान की त्रुटि स्वतः शूद्धेय प्रकृति की नहीं थी। इससे स्पष्ट होता है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा यदि जाँच नहीं किया जाता तो संवेदक को हुए रुपये 189,06,337/- के अधिकाई भुगतान का समायोजन संभव नहीं होता, जिससे सरकार को रुपये 1,89,06,337/- की वित्तीय क्षति होती। श्री सिन्हा द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिंदु पर अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। मामले के सम्यक्‌ समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिन्हा द्वारा दिनांक 14.03. 2018 को पारित विपत्र के बाद दिनांक 25.06.2018 को विरमित होने के बीच आवंटन प्राप्त नहीं रहने के कारण अगले विपत्र तैयार करने की स्थिति नहीं बन पाने से संवेदक के पूर्व लंबित दायित्व के विरूद्ध अधिकाई भुगतान की राशि का समायोजन नहीं हो पाया तथा इनके स्थानांतरण के पश्चात उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में अधिकाई भुगतान संज्ञान में आया। जिसके कारण श्री सिन्हा के कार्यकाल में अधिकाई भुगतान की राशि का समायोजन/वसूली हेतु Negative Bill पारित करने की स्थिति नहीं बन पायी। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा द्वारा सूचित किया गया कि श्री सिन्हा द्वारा पारित विपत्रों के ठीक बाद के विपत्रों से अधिकाई भुगतान की राशि समायोजित की गयी। इसमें किसी प्रकार की राजस्व की हानि परिलक्षित नहीं है। इस प्रकार श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप अप्रमाणित पाया गया। उक्त समीक्षा के आलोक में श्री अरूण कुमार सिन्हा (आई0डी0-4019), तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपटटी को आरोप मुक्त किया जाता हैं। प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सरकार का उक्त निर्णय श्री अरूण कुमार सिन्हा(आई0डी0-4019), तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपटटी को संसूचित किया जाता है। श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5375), तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी द्वारा अपने पदस्थापन के दौरान बलवा घाट बराज-सह-सिंचाई परियोजन के अंतर्गत कार्यों की गुणवत्ता, मापपुस्त में छेड़-छाड़ एवं अन्य आरोप के संबंध में मामले की जाँच मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा द्वारा की गयी। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा द्वारा श्री रंजन के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर साक्ष्य सहित विभाग में समर्पित किया गया। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1118 दिनांक-09.09.2020 द्वारा श्री रंजन से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया एवं बेनीपट्‌टी थाना कांड सं0-159/2018 दिनांक-14.08.2018 दर्ज किया गया। श्री रंजन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा की गयी11 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 जिसमें श्री रंजन के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए इनके विरूद्ध अग्रेत्तर जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5375), तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियामवली-2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सहपठित ज्ञापांक-549 दिनांक-11.03.2022 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। :-

अधीक्षण अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी के पत्रांक-233 दिनांक 22.02.2018 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि मापपुस्त संख्या-362 के सं॰ पृष्ठ-2, 3 एवं 14 से 18 बदले हुए पाये गये है। चूँकि प्रतिस्थापित पृष्ठ श्री रंजन द्वारा हस्ताक्षरित है, अतः इस कार्य में इनकी संलिप्तता स्पष्ट है।

बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम 230 एवं 231 के अनुसार माप-पुस्त एक बहुत ही महत्वपूर्ण लेखा अभिलेख है एवं इसके पृष्ठों को फाड़ना/नष्ट करना वर्जित है, जिसका श्री रंजन द्वारा उल्लंघन किया गया है। ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राजीव रंजन, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को अंशतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी, जिसमें संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में विभागीय पत्रांक-192 दिनांक-02.02.2023 द्वारा श्री रंजन से अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री रंजन द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में अपना अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें, मुख्यतः निम्न बातों का उल्लेख किया गया :- Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायदेश के पारा-4 पृष्ठ 2/2 का उल्लेख करते हुए कहा है कि, उक्त न्ययादेश में निष्कर्षित है कि "Gone through the order Passed by the coordinate bench while granting anticipatory bail to Rajeev Ranjan under criminal Miscellaneous No- 68651 same, it is evident that these petitioners were the person who of 2018 from perusal of the have complained against Rajeev Ranjan on 02.02.2018 regarding interpolation committed by Rajeev Ranjan in the measurement book and later on 03.02.2018 they themselves signed over the aforesaid measurement book that is indicative of the fact that activity having so alleged against Rajeev Ranjan was false as the aforesaid measurement book appear to be in their custody and that happen to be finding during course of investigation". उक्त परिप्रेक्ष्य में संचालन पदाधिकारी द्वारा यह कहा जाना कि Miscellaneous No 80561 of 2019 में APP द्वारा मो० रहमान तथा श्री प्रमोद कुमार कनीय अभियंता के anticipatory bail में किए गए विरोध बयान को उद्धत किया गया है उचित नहीं है। जबकि, तथ्य यह है कि Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 के पारा-4 पृष्ठ 2/2 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश उद्धत है तथा APP द्वारा विरोध बयान Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 के पारा-3 पृष्ठ सं0-1/1 पर उद्धृत है।

इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, संचालन पदाधिकारी द्वारा यह कहा जाना कि "इसका साक्ष्य कहीं से नहीं दिया गया है कि, माप पुस्त संख्या 362 दिनांक 03.02.2018 को उन्ही कनीय अभियंता के पास था। यद्यपि दिनांक 03.02. 2018 को उन कनीय अभियंताओं द्वारा माप पुस्त संख्या-364 (Abstract) पर हस्ताक्षर किया गया, उचित नहीं है। इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य यह है कि दिनांक-03.02.2018 को कनीय अभियंताओ द्वारा माप पुस्त संख्या-364 (Abstract) पर हस्ताक्षर किया गया है। इस आशय का प्रमाण Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 को पारित न्यायादेश के पारा 4 पृष्ठ 2/2 से भी होता है। विदित हो कि माप पुस्त संख्या-364 एंव 362 एक ही विपत्र के अंग है जिस पर इन्हीं कनीय अभियंताओ ने अभ्यावेदन सर्मपित करने के एक दिन बाद दिनांक 03.02.2018 को विपत्र में सम्मलित माप पुस्त संख्या-364 (Abstract) पर हस्ताक्षर किया, जिससे यह पूर्णतः स्थापित हो जाता है कि माप पुस्त संख्या 362 दिनांक 03.02.2018 को उन्ही कनीय अभियंता के पास था तथा स्वंय किए गये गलती को छुपाने के उद्देश्य से इन्हें आरोपित करने का काम कनीय अभियंताओं के द्वारा किया गया है।

इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, कार्यपालक अभियंता पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल बेनीपट्टी के पत्रांक-314 दिनांक 26.04.2023 द्वारा प्रेषित पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि M.B Movement पंजी का उपयोग उक्त अवधि में नही किया गया है, जिससे यह स्थापित होता है कि उक्त माप पुस्त पुस्त इनके पास होने का कोई साक्ष्य नही है। उक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप सं०-01 में अंकित लांछन किसी भी रूप में इनके विरूद्ध प्रमाणित नही होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित अधिगम के कंडिका-7 पर निष्कर्ष में आरोप सं०-02 के संदर्भ में श्री रंजन द्वारा कहा गया है कि :-

बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम 230 एवं 231 का अवलोकन करना चाहेंगे :-

(क) कंडिका 230 में मापी पुस्त के निर्गत के संबध में दिशा-निर्देश है।12 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 (ख) कंडिका 231 में मापी पुस्त में मापी दर्ज करने का तरीका अंकित है। श्री राजीव रंजन द्वारा अपने अभ्यावेदन में Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायादेश के पारा-4 पृष्ठ 2/2 का उल्लेख करते हुए कहा है कि, उक्त न्ययादेश में निष्कर्षित है कि "Gone through the order Passed by the coordinate bench while granting anticipatory bail to Rajeev Ranjan under criminal Miscellaneous No- 68651 same, it is evident that these petitioners were the person who of 2018 from perusal of the have complained against Rajeev Ranjan on 02.02.2018 regarding interpolation committed by Rajeev Ranjan in the measurement book and later on 03.02.2018 they themselves signed over the aforesaid measurement book that is indicative of the fact that activity having so alleged against Rajeev Ranjan was false as the aforesaid measurement book appear to be in their custody and that happen to be finding during course of investigation". । उक्त परिप्रेक्ष्य में संचालन पदाधिकारी द्वारा यह कहा जाना कि Miscellaneous No 80561 of 2019 में APP द्वारा मो० रहमान तथा श्री प्रमोद कुमार कनीय अभियंता के anticipatory bail में किए गए विरोध बयान को उद्धत किया गया है, उचित नहीं है क्योंकि तथ्य यह है कि Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 के पारा-4 पृष्ठ 2/2 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश उद्धत है तथा APP द्वारा विरोध बयान Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 के पारा-3 पृष्ठ सं0-1/1 पर उद्धत है। इस संदर्भ में Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 के पारा-4 पृष्ठ 2/2 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के अवलोकन से श्री रंजन का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, माप पुस्त संख्या 362 दिनांक 03.02.2018 को उन्ही कनीय अभियंता के पास था, के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य यह है कि, दिनांक-03.02.2018 को कनीय अभियंताओ द्वारा माप पुस्त संख्या-364 (Abstract) पर हस्ताक्षर किया गया है। इस आशय का प्रमाण Miscellaneous No 80561 of 2019 dt. 29.06.2020 को पारित न्यायादेश के पारा 4 पृष्ठ 2/2 से भी होता है। विदित हो कि माप पुस्त संख्या-364 एंव 362 एक ही विपत्र के अंग है जिस पर इन्हीं कनीय अभियंताओ ने अभ्यावेदन सर्मपित करने के एक दिन बाद दिनांक 03.02.2018 को विपत्र में सम्मलित माप पुस्त संख्या-364 (Abstract) पर हस्ताक्षर किया, जिससे यह पूर्णतः स्थापित हो जाता है कि, माप पुस्त संख्या 362 दिनांक 03.02.2018 को उन्ही कनीय अभियंता के पास था तथा स्वंय किए गये गलती को छुपाने के उद्देश्य से इन्हें आरोपित करने का काम कनीय अभियंताओं के द्वारा किया गया है। इसी संदर्भ में कार्यपालक अभियंता पश्चिमी कोशी नहर प्रमण्डल बेनीपट्टी के पत्रांक-314 दिनांक 26.04.2023 द्वारा समर्पित पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि M.B Movement पंजी का उपयोग उक्त अवधि (दिनांक-15.01.2018 से दिनांक-28.02.2018 तक) में नही किया गया है, जिससे यह स्थापित नहीं किया जा सकता है कि उक्त माप पुस्त श्री रंजन के पास था। इसी मामले के संदर्भ में यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि, पुलिस अधीक्षक, मधुबनी के विशेष प्रतिवेदन-02 में दिनांक-19.02.2019, (बेनीपट्टी थाना कांड सं॰-159/18, दिनांक-14.08.2018, धारा-420/467/468/34 भा॰द॰वि॰) में उल्लिखित है कि, श्री रंजन द्वारा दोनों अभियंताओं के द्वारा किये गये कार्याें के मूल्यांकन के क्रम में मापी पुस्तिका में जहाँ-तहाँ किये गये कटिंग को देखकर दोनों कनीय अभियंता, जो संविदा पर बहाल है, के द्वारा मापपुस्त में छेड़-छाड़ किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति एवं व्यक्तिगत किसी को लाभ नहीं होते देख उनके द्वारा प्रमंडल को सूचित नहीं किया गया। जिससे स्पष्ट है कि उक्त मापीपुस्त के पृष्ठ बदले जाने का कृत्य श्री राजीव रंजन के संज्ञान में था। बावजूद इसके श्री रंजन द्वारा उक्त कृत्य की सूचना प्रमंडलीय कार्यालय को नहीं दिये जाने से तथा श्री रंजन द्वारा माप पुस्त के पृष्ठों को हस्ताक्षरित कर अग्रसारित किये जाने से, इस कृत्य में परोक्ष रूप से इनकी संलिप्तता परिलक्षित होती है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में स्पष्ट है कि, श्री राजीव रंजन के अभ्यावेदन में संलग्न माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्ययादेश में, मो० फजलूर रहमान तथा श्री प्रमोद कुमार, कनीय अभियंता (संविदा) के anticipatory bail प्राप्त करने हेतु दायर याचिका को इनके इस आरोप में मुख्य रूप से दोषी होने के तथ्यों के आलोक में खारिज कर दिया गया है तथा श्री रंजन के पूर्व के बचाव-बयान में संलग्न पुलिस अधीक्षक, मधुबनी के विशेष प्रतिवेदन, जिसमें यह अंकित है कि ''श्री रंजन द्वारा दोनों कनीय अभियंताओं के मूल्यांकन के क्रम में मापपुस्त में जहाँ-तहाँ कटिंग को देखकर, तथा उक्त मापपुस्त मे छेड़-छेाड़ किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति एवं किसी को व्यक्तिगत लाभ नहीं होता देख, मापपुस्त के पृष्ठों के बदले जाने के मामले को प्रमंडलीय कार्यालय के संज्ञान में नहीं लाया गया''। अतएव उक्त कृत्य का मामला श्री रंजन के संज्ञान में रहने के बावजूद श्री रंजन द्वारा उक्त कृत्य की सूचना प्रमंडलीय कार्यालय को नहीं दिये जाने तथा श्री रंजन द्वारा माप पुस्त के पृष्ठों को हस्ताक्षरित कर अग्रसारित किये जाने से, इस कृत्य में परोक्ष रूप से इनकी संलिप्तता परिलक्षित होती है। जिससे श्री राजीव रंजन, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, बेनीपट्टी के विरूद्ध गठित आरोप सं॰-01 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य से सहमत होते हुए श्री रंजन के विरूद्ध आरोप सं॰-01 प्रमाणित पाया गया।13 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 आरोप सं॰-01 अन्तर्गत किये गये समीक्षा से स्पष्ट है कि मापपुस्त जैसे अति महत्वपूर्ण लेखा अभिलेख में छेड़-छाड़ तथा मापपुस्त के पृष्ठों के बदले जाने के कृत्य की जानकारी रहने के बावजूद भी श्री रंजन द्वारा उक्त कृत्य के आलोक में आवश्यक कार्रवाई यथा उक्त कृत्य की सूचना प्रमंडलीय कार्यालय को नहीं दिया गया। उक्त से बिहार लोक लेखा निर्माण संहिता के नियम-230 एवं 231 जिसके अनुसार मापपुस्त एक बहुत ही महत्वपूर्ण लेखा अभिलेख है, जिसके पृष्ठों को फाड़ना/नष्ट करना वर्जित है के नियम का उल्लंघन भी श्री रंजन के द्वारा किया जाना परिलक्षित होता है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री राजीव रंजन के द्वारा मापपुस्त के पृष्ठो में छेड़-छाड़ तथा पृष्ठों के बदले जाने का कृत्य संज्ञान में रहने के बावजूद प्रमंडलीय कार्यालय को इसकी सूचना नहीं दिये जाने से उक्त कृत्य में श्री रंजन का परोक्ष रूप से संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अतएव श्री राजीव रंजन, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, बेनीपट्टी के विरूद्ध गठित आरोप सं॰-02 प्रमाणित पाया गया।

उक्त समीक्षा के आलोक में श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5375), तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गयाः- (i) (ii) श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5375), तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित किया जाता हैः- (i) (ii) 02 प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

सरकार का उक्त निर्णय श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5375), तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर, प्रमंडल, बेनीपट्‌टी को संसूचित किया जाता है। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन हथुआ शाखा नहर के वि0दू0 87.00 (दायाँ भाग) पर दिनांक 10.08.2021 में हुए टूटान के संबंध में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी अनियमितता के लिए के विरूद्ध विभागीय स्तर पर आरोप पत्र का गठन किया गया। श्री दिनकर के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-14 दिनांक 05. 01.2022 द्वारा उनसे आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री दिनकर के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के अवचार या कदाचार के लांछन का सार निम्नवत है :-

दिनांक 04.08.2021 को हथुआ शाखा नहर के बि॰दू॰-87.00 (दायाँ भाग) के निकट टूटान स्थल के पास बाँध के टो मे सीपेज हुआ था, जिसकी सतत निगरानी एवं चौकसी की जानी थी। परन्तु सतत निगरानी एवं चौकसी की कमी के कारण दिनांक 10.08.2021 की रात्रि में हथुआ शाखा नहर के वि०दू0 87.00 (दायाँ) भाग पर पाईपिंग के कारण नहर बांध टूट गया। हथुआ शाखा नहर जैसे महत्वपूर्ण नहर का नियमित रूप से निरीक्षण किया गया होता तो उक्त स्थल पर Piping/seepage की समस्या ससमय उजागर हो जाती तथा संभावित Rat holes इत्यादि detect कर बांध की मरम्मति कराकर इसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो पाती। परन्तु इनके द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण नहीं कर अपने supervisory दायित्व के प्रति लापरवाही बरती गयी है। उक्त से स्पष्ट है कि, श्री दिनकर द्वारा कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरती गयी। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है। उक्त के आलोक में श्री दिनकर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प सं0-1157 दिनांक 19.05.2022 द्वारा इनके विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-96 दिनांक 09.01.2023 द्वारा समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित मंतव्य निम्नवत है :-

आरोपित पदाधिकारी श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, अधीक्षण अभियंता दिनांक-15.06.2021 से 15.10.2021 तक मुख्य अभियंता, गोपालगंज के अन्तर्गत पी.पी. तटबंध के कि॰मी॰ 0.00 से कि॰मी॰ 35.00 एवं जी०एच० प्रभाग कि॰मी॰ 0.00 से कि॰मी॰ 6.68 के संवेदनशील/अतिसंवेदनशील स्थलों की सुरक्षा हेतु प्रतिनियुक्त किया गया था एवं मुख्यालय भितहाँ कैम्प में निर्धारित था। वर्ष-2021 बाढ़ अवधि में हो रही लगातार वर्षा के फलस्वरूप गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण संवेदनशील/अतिसंवेदनशील स्थलों/तटबंधों की सुरक्षा हेतु आरोपित पदाधिकारी द्वारा लगातार प्रतिनियुक्त स्थल पर रहकर14 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 कार्य किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा बतलाया गया कि दिनांक 14.07.2021 एवं 30.07.2021 को हथुआ शाखा नहर का निरीक्षण किया गया है। अतः श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तकनीकी सलाहकार, सारण नहर अंचल, सिवान-सह-उच्चतर प्रभार अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, सिवान का निरीक्षण एवं Supervisory दायित्व तथा कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही परिलक्षित नहीं होता है। आरोपित पदाधिकारी श्री मिथिलेश कुमार दिनकर द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित अपने बचाव बयान में उल्लेखित किया गया है कि, जल संसाधन विभाग पटना के पत्रांक-2238, दिनांक-02.06.2021 द्वारा बाढ़ अवधि 2021 में दिनांक-15.06.2021 से दिनांक-15.10.2021 तक अतिसंवेदनशील स्थलों/तटबंधों के सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपने कार्य के अतिरक्त पी॰पी॰ तटबंध के कि०मी० 0.00 से कि०मी० 35.00 एवं जी० एच० प्रभाग की कि०मी० 0.00 से कि०मी० 6.68 मुख्यालय मितहाँ कैम्प पर प्रतिनियुक्त किया गया। उक्त आदेश के अनुपालन में वे, दिनांक 15.06.2021 को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज को अपना योगदान समर्पित कर प्रतिनियुक्त मुख्यालय भितहाँ कैम्प (पश्चिमी चम्पारण) पहुँच गये, तब से प्रतिनियुक्ति अवधि तक मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के निदेशानुसार उनके द्वारा कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान के द्वारा दिये गये निदेशों के आलोक में मूल पदस्थापित अंचलीय कार्य को भी भलिभांति सम्पन्न करते रहे, जबकि सिवान से प्रतिनियुक्त स्थल की दूरी 100 कि॰मी॰ से भी अधिक थी।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में आरोपित पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि, नहर क्षतिग्रस्त होने के पूर्व उनके द्वारा दिनांक 14.07.2021 एवं दिनांक 30.07.2021 को हथुआ शाखा नहर का निरीक्षण किया गया है। इनके द्वारा अपने बचाव बयान में उल्लेख किया गया है कि, दिनांक 03.08. 2021 से 09.08.2021 के बीच हथुआ शाखा नहर में किसी प्रकार की विशेष समस्या (सीपेज आदि) की सूचना नहीं दी गई और हथुआ शाखा नहर पूरी तरह सुरक्षित बताया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेखित किया गया है कि, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान के पत्रांक-1167 दिनांक-13.08.2021 द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री दिनकर, अधीक्षण अभियंता के संबंध में कोई तथ्य अथवा आरोप उल्लेखित नहीं किया गया है। परीक्षण के दौरान भी द्वितीय गवाह मो॰ सफदर आलम, मुख्य अभियंता द्वारा अपने पूर्व के पत्रांक-1167, दिनांक-13.08.2021 में अंकित तथ्यों के अलावा कुछ भी नहीं कहे जाने का उल्लेख किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा किये गये प्रतिपरीक्षण के क्रम में गवाह मो० सफदर आलम, मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया है कि, अपने प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री दिनकर के विरूद्ध निरीक्षण एवं Supervisory दायित्व के संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेखित किया गया है कि, दिनांक-21.12.2022 को प्रथम गवाह श्री अशोक कुमार चौधरी, अभियंता प्रमुख (सेवानिवृत) से किये गये परीक्षण/प्रतिपरीक्षण के क्रम में उनके द्वारा भी आरोपित पदाधिकारी के निरीक्षण एवं Supervisory दायित्व के संबंध कोई उल्लेख नहीं किया गया है। उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि, श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, अधीक्षण अभियंता को बाढ़ नियंत्रण अंचल, पडरौना में दिनांक 15.06.2021 से ही प्रतिनियुक्ति की गई थी, इस तथ्य का उल्लेख मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान द्वारा अपने प्रतिवेदन में नहीं किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा परीक्षण/प्रतिपरीक्षण के क्रम में उक्त दोनों साक्षियों के द्वारा आरोपित पदाधिकारी, श्री दिनकर के विरूद्ध गठित आरोप के संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने का उल्लेख करते हुए श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तकनीकी सलाहकार, सारण नहर अंचल, सिवान-सह-उच्चतर प्रभार अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, सिवान के विरूद्ध निरीक्षण एवं Supervisory दायित्व तथा कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही परिलक्षित नहीं होता है, का मंतव्य अंकित किया है।

उपरोक्त के संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि, श्री दिनकर द्वारा किये गये उल्लेख कि, ''दिनांक 03.08.2021 से 09.08.2021 के बीच हथुआ शाखा नहर में किसी प्रकार की विशेष समस्या (सीपेज आदि) की सूचना इन्हें संबंधित कार्यपालक अभियंता/सहायक अभियंता के द्वारा नही दी गई और हथुआ शाखा नहर को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया। दिनांक 10.08. 2021 को हुए टूटान के बाद इनके स्थल पर पहुँचने पर संबंधित सहायक अभियंता द्वारा बताया गया कि दिनांक 04.08.2021 को उस स्थल के कुछ उपर (लगभग 50 फीट अपस्ट्रीम में) सीपेज/पाईपिंग देखा गया था, जिसे उसी समय पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। साथ ही सहायक अभियंता द्वारा यह भी बताया गया कि, उक्त सीपेज/पाईपिंग बहुत ही मामूली थी और उक्त स्थल पर संबंधित सहायक अभियंता द्वारा डेली रूटीन गश्ती के दरम्यान हीं आवश्यक मरम्मति कार्य पूरी कर नहर बांध की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली गई थी।"

उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि, विभागीय आदेश द्वारा श्री दिनकर की प्रतिनियुक्ति बाढ़ अवधि 2021 में दिनांक 15.06.2021 से दिनांक 15.10.2021 तक के लिए पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 0.00 से कि0मी0 35.00 एवं जी0एच0 प्रभाग कि0मी0 0.00 से कि0मी0 6.68 (मुख्यालय-भितहाँ कैम्प) पर की गयी थी तथा उक्त निदेश का अनुपालन करते हुए श्री दिनकर द्वारा नियमित रूप से विस्तृत कार्यक्षेत्र अन्तर्गत सभी नहरों का निरीक्षण किया जाना संभव नहीं था। वर्णित स्थिति में अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों यथा कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता का यह दायित्व था कि, ससमय15 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 इन्हें सूचना उपलब्ध कराते, जिससे इनके स्तर से आवश्यक कार्रवाई हेतु उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए बाँध के सुरक्षार्थ आवश्यक कार्य कराया जाता । :- संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिाकरी श्री दिनकर द्वारा समर्पित बचाव बयान तथा साक्षियों से किये गये परीक्षण/प्रतिपरीक्षण से उद्धृत तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि, श्री दिनकर के विस्तृत कार्यक्षेत्र के मद्देनजर प्रमंडल स्तर से क्षेत्रीय पदाधिकारियों यथा कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा नहर बाँध से संबंधित सूचना ससमय श्री दिनकर को उपलब्ध कराने का दायित्व था, जिसका अनुपालन प्रमंडलीय पदाधिकारियों के द्वारा नहीं किया गया। यदि इस संबंध में कोई सूचना इनके (कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता) द्वारा श्री दिनकर को दी गयी होती तो श्री दिनकर द्वारा ससमय स्थल पर सीपेज की समस्या के निदान एवं बाँध के सूरक्षार्थ आवश्यक कार्रवाई की जा सकती थी। अतएव श्री दिनकर के विरुद्ध supervisory दायित्व के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप की पुष्टि हेतु साक्षियों के द्वारा अपने प्रतिवेदन में किसी प्रकार का प्रतिकूल टिप्पणी अंकित नहीं किये जाने से तथा उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री मिथिलेश कुमार दिनकर (आई॰डी॰-3300), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता,सारण नहर अंचल, सिवान के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य यथा "निरीक्षण एवं Supervisory दायित्व तथा कर्तव्यों के प्रति लापरवाही परिलक्षित नहीं होता है" से सहमत होते हुए श्री मिथिलेश कुमार दिनकर (ID-3300) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, सीवान को आरोप मुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार को आरोप मुक्त किया जाता है। श्री शम्भु पासवान (आई0डी0-जे 9052), सहायक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया, के विरूद्ध मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर परिक्षेत्राधीन जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के प्रमंडलीय गोदाम से सरकारी सामग्रियाें (ई0सी0 बैग-एन0सी0) का गलत नियत एवं मंशा से दुष्प्रेरित होकर हेरा-फेरी करने संबंधी कतिपय अनियमितताआें के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के कारण सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री शम्भु पासवान, सहायक अभियंता का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री पासवान को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। श्री लक्ष्मी नारायण (आई0डी0-4548), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के पत्रांक-3210 दिनांक 01.12.2018 एवं 147 दिनांक 11.01.2019 द्वारा सरकारी कार्यों में लापरवाही, उदासीनता एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने आदि आरोपों के लिए अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गयी। मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-482 दिनांक 06. 03.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री नारायण से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1316 दिनांक 18.10.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से करना, जिसके क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर स्पष्टीकरण का जवाब उपलब्ध नहीं कराना। वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रमंडल को शीर्ष 2700 में प्राप्त आवंटन रू० 80.00 लाख कार्यक्रम एवं श्रमशक्ति की स्वी— ति के पश्चात्‌ भी कार्य नहीं कराना एवं दि० 20.11.2018 तक व्यय शून्य रखना जबकि इस वित्तीय वर्ष में मात्र तीन माह शेष रहने से स्पष्ट है कि उनके द्वारा कार्य में रूचि नहीं लिया गया ।16 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 सरकारी कार्यों के निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा अनेक पत्रों के माध्यम से निदेश देने के बावजूद कार्यों का निष्पादन नहीं करना स्थापित करता है कि उनके द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना/कार्य के प्रति निष्क्रियता, लापरवाही, उदासीनता बरती गयी है। आवश्यक कार्यों के त्वरित निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा सरकारी/निजी मोबाईल पर संवाद करने पर फोन रिसीभ नहीं करना, उनकी उदासीनता, लापरवाही, दायित्वों का निर्वहन नहीं करना दर्शाता है। गंडक शिविर सं0-03, मोतिहारी स्थित आवासों में अवैध कब्जाधारियों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के पत्रांक-2553, दिनांक 10.09.2018 द्वारा दिये गये निदेश के बावजूद भी उनके द्वारा आवश्यक कार्रवाई काफी विलम्ब से दिनांक 24.05.2019 से प्रारंभ की गयी। मुख्य अभियंता कार्यालय/आवास तथा गंडक कॉलोनी सं०-3 का देखभाल एवं अनुरक्षण का कार्य करने हेतु मुख्य अभियंता स्तर से पीत पत्र देने के बावजूद कार्य काफी विलम्ब से किया गया। मुख्य अभियंता के आदेश के बावजूद पूर्वी गंडक नहर प्रणालियों के पुनस्र्थापन कार्य का अंतिम विपत्र की गणना का कार्य काफी विलम्ब से किया गया। खरीफ अवधि 2018 में नियोजित दैनिक श्रमिकों का भुगतान काफी विलम्ब से मार्च 2019 में किया गया जबकि उक्त कार्य के लिए प्राप्त आवंटन के विरूद्ध वार्षिक कार्यक्रम की स्वी—त्ति मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक 10.07.2018 को प्रदान कर दी गयी थी। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-739 दिनांक 07.07.2022 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य उपलब्ध कराया गयाः-

1. सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से करना जिसके क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर स्पष्टीकरण का जवाब उपलब्ध नहीं कराने का आरोप आंशिक रुप से प्रमाणित होता है।

2. वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रमंडल को शीर्ष 2700 में प्राप्त आवंटन रू० 80.00 लाख कार्यक्रम एवं श्रमशक्ति की स्वी—ति के पश्चात्‌ भी कार्य नहीं कराना एवं दिनांक20.11.218 तक व्यय शून्य रखना जबकि इस वित्तीय वर्ष में मात्र तीन माह शेष रहने से स्पष्ट है कि उनके द्वारा कार्य में रूचि नहीं लिये जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

3. सरकारी कार्यों के निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा अनेक पत्रों के माध्यम से निदेश देने के बावजूद कार्यों का निष्पादन नहीं करना स्थापित करता है कि उनके द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना/कार्य के प्रति निष्क्रियता, लापरवाही, उदासीनता बरती गयी है, का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।

4. आवश्यक कार्यों के त्वरित निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा सरकारी/निजी मोबाईल पर संवाद करने पर फोन रिसीभ नहीं करना, उनकी उदासीनता, लापरवाही, दायित्वों का निर्वहन नहीं करना दर्शाता है, से सम्बंधित आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

5. गंडक शिविर सं0-3 मोतिहारी स्थित आवासों में अवैध कब्जाधारियों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी के पत्रांक-2553 दिनांक 10.09.2018 द्वारा दिये गये निदेश के बावजूद भी आपके द्वारा आवश्यक कार्रवाई काफी विलम्ब से दिनांक 24.05.2019 से आरम्भ की गयी, का आरोप प्रमाणित होता है।

6. मुख्य अभियंता कार्यालय/आवास तथा गंडक कॉलोनी सं0-03 का देखभाल एव अनुरक्षण का कार्य करने हेतु मुख्य अभियंता स्तर से पीत पत्र देने के बावजूद कार्य काफी विलम्ब से किया गया, सम्बंधित आरोप प्रमाणित नहीं होता है। 7. मुख्य अभियंता के आदेश के बावजूद पूर्वी गंडक नहर प्रणालियों के पुनस्र्थापन कार्य का अंतिम विपत्र की गणना का कार्य काफी विलम्ब से किया जाने से सम्बंधित आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

8. खरीफ अवधि 2018 में नियोजित दैनिक श्रमिकों का भुगतान काफी विलम्ब से मार्च 2019 में किया जाना जबकि उक्त कार्य के लिये प्राप्त आवंटन के विरुद्ध वार्षिक कार्यक्रम की स्वी—ति मुख्य अभियंता द्वारा दि0 10.07.2018 को प्रदान की गयी थी, का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री नारायण को उपलब्ध कराते हुए उक्त जाँच प्रतिवेदन के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-2470 दिनांक 19.10. 2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी :-

उक्त आलोक में श्री नारायण से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :- विभागीय अधिसूचना संख्या-2231, पटना, दिनांक-15.06.2018 के आलोक में दिनांक-30.06.2018 के अपराह्न में तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के कार्यपालक अभियंता का प्रभार प्राप्त करने के पश्चात्‌ उनके द्वारा सदैव मुख्यालय एवं कार्यक्षेत्र में उपस्थित रहकर अपने पदीय कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन किया गया। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी एवं जल संसाधन विभाग, पटना के उच्चाधिकारियों के द्वारा विभिन्न पत्रों के माध्यम से निर्गत निदेशों का अनुपालन तत्परता, सक्रियता, एकाग्रता एवं पूर्ण रूचि के साथ सुनिश्चित किया गया तथा उनके द्वारा माँगे गये सभी स्पष्टीकरणों का जवाब समर्पित किया गया। उनके द्वारा हमेशा तथ्यपूर्ण, सारगर्भित एवं स्पष्ट प्रतिवेदन समर्पित किया गया। अपने अधीनस्थ कर्मियों को उत्साहित करते हुए तथा उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करते हुए उनसे सरकारी कार्यों का निष्पादन कराया गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत विभाग के17 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 द्वारा इस प्रमण्डल को माह मई 2018 में विभागीय पत्रांक-01/पी०एम०सी०/बजट/42/2018-30 दिनांक-10.05.2018 के द्वारा 80.00 लाख रूपये आवंटित किया गया था। इस आवंटन के विरूद्ध दिनांक 04.06.2018 को श्री ब्रज किशोर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) तैयार किया गया था। अधीक्षण अभियंता के अनुशंसा के आलोक में इस वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को मुख्य अभियंता, मोतिहारी के द्वारा एक माह के विलम्ब से पत्रांक-1881 दिनांक- 10.07. 2018 के द्वारा अनुमोदित किया गया था। दिनांक 30.06.2018 के अपराहन में कार्यपालक अभियंता का प्रभार ग्रहण करने के पश्चात्‌ प्रमण्डल के अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित विभिन्न संपोषण एवं मरम्मति से सम्बन्धित कार्यों के निष्पादन में उनके द्वारा मितव्ययिता एवं पारदर्शिता पर बल दिया गया। प्रमण्डल में सहायक अभियंताओं की भारी कमी रहने के बावजूद भी उपलब्ध संसाधनों के सहयोग से दिनांक 01.07.2018 से दिनांक 15.10.2018 तक खरीफ सिंचाई (2018-19) के लिए प्रमण्डलाधीन नहरों का संचालन कराकर विभाग के द्वारा निर्धारित 44514.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 में रब्बी सिंचाई (2018-19) के लिए भी दिनांक 05.01.2019 से दिनांक 15.03. 2019 तक नहरों का संचालन कराकर विभाग के द्वारा निर्धारित 19500.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया। नहरों एवं गेटों के संचालन में संलग्न मौसमी मजदूरों के नकद भुगतान का विरोध किया गया तथा सभी कुशल एवं अकुशल मजदूरों को बैंक खाता के माध्यम से भुगतान किया गया। आवश्यकता के अनुरूप प्रमण्डल के निरीक्षण वाहनों को उपयोग में लाया गया। उनके —त्य से न तो सरकारी राशि का दुरूपयोग हुआ है और न ही सरकारी राशि की क्षति हुई है। गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत प्रमण्डलीय प्रकीर्ण कार्यों के निष्पादन में उनके द्वारा सरकारी राशि के दुरूपयोग, अपव्ययिता एवं लूट-खसोट का हर स्तर पर विरोध किया गया, जिसके फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2018-19 में मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित 68.77242 लाख रूपये के लागत वाले विभिन्न सम्पोषण एवं मरम्मति से सम्बन्धित कार्यों के निष्पादन में उनके द्वारा 44.89277 लाख रूपये का व्यय किया गया तथा 23.87965 लाख रूपये की बचत की गयी। श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एवं श्री —ष्ण चन्द्र मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता के इच्छानुकूल एवं मनोनुकूल निजी लाभ के लिए उनके निकटतम संवेदकों को कोई भी सम्पोषण कार्य आवंटित नहीं किया गया, जिसके कारण वे उनसे नाराज हो गए तथा उनके द्वारा दुर्भावना की मंशा से येन-केन उनको विभाग से दंडित कराने का षड्यंत्र रचा गया। यह सर्वविदित है कि गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत प्राप्त आवंटन को स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम के आलोक में निष्पादित कार्यों के लिए कार्यपालक अभियंता के द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के समाप्त की तिथि (31 मार्च) तक व्यय किया जा सकता है, परन्तु, वित्तीय वर्ष 2018-19 के समाप्त होने के पूर्व ही श्री मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा पत्रांक-3210 दिनांक–01.12.2018 एवं पत्रांक-147 दिनांक-11.01.2019 के माध्यम से उन के विरूद्ध मनगढ़ंत एवं असत्य आरोप लगाकर आरोप-पत्र विभाग में समर्पित किया गया तथा विभाग के उच्चाधिकारियों को गुमराह किया गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के पत्रांक-2917 दिनांक-09.11.2019 के माध्यम से विभाग के निगरानी कोषांग का पत्रांक-22/नि॰सिं०(मोति०)08-12/2018-482(अनु०), पटना, दिनांक-06.03.2019 उनको तामिला कराया गया। उनके द्वारा तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के पत्रांक- 1248 दिनांक-28.11.2019 के माध्यम से साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण का जवाब निगरानी कोषांग, सिंचाई भवन, पटना को समर्पित किया गया। विभागीय संकल्प संख्या-22/नि॰सिं०(मोति॰)08-12/ 2018-1316(अनु0), पटना, दिनांक-18.10.2021 के द्वारा उनको संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निदेश निर्गत किया गया। उनके द्वारा अपने पत्रांक-71, पटना दिनांक-01.02.2022, पत्रांक-209, पटना दिनांक-12.03.2022 तथा पत्रांक-248, पटना दिनांक-30.03.2022 के माध्यम अपना बचाव-बयान संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित किया गया। पुनः भवदीय के कार्यालय के पत्रांक-22/नि॰सिं०(मोति०)08-12/2008 -2470(अनु०) पटना, दिनांक-19.10.2022 के माध्यम से संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर उनसे लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा निर्गत जाँच प्रतिवेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-02,04, 06, 07 एवं 08 को अप्रमाणित होने, आरोप संख्या-01 एवं 03 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने तथा आरोप संख्या-05 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोप संख्या-02, 04, 06, 07 एवं 08 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से वे भी सहमत हैं, परन्तु, आरोप संख्या-01, 03 एवं 05 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से वे सहमत नहीं हैं तथा इन आरोपों के संबंध में उनका लिखित अभ्यावेदन निम्नलिखित है :-

संचालन पदाधिकरी का यह मंतव्य कि आरोप संख्या-01 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है, न तो न्यायसंगत है और न ही स्वीकार करने योग्य ही है। यह आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।

उनके द्वारा कभी भी सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से नहीं किया गया। इसके बावजूद भी श्री ब्रजकिशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी तो उनके द्वारा तत्कालीन प्रमण्डल के पत्रांक-980 दिनांक-30.08.2019 एवं पत्रांक-537 दिनांक 24.05.2019 के माध्यम से स्पष्टीकरण का जवाब अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया।

विभागीय कार्रवाई के दौरान विभिन्न आरोपों के संबंध में उनके द्वारा अपने पत्रांक-71 दिनांक-01.02.2022, पत्रांक-209 दिनांक-12.03.2022 तथा पत्रांक-248 दिनांक-30.03.2022 के माध्यम से अपना बचाव बयान संचालन पदाधिकारी को समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में भी पृष्ठ संख्या-03 से पृष्ठ संख्या-05 तक तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के तृतीय वर्ग के कुछ कर्मियों के द्वारा मनमाने ढंग से कार्य करने के साक्ष्य स्वरूप उनके बचाव अभिकथन में वर्णित निम्न घटनाओं का उल्लेख किया गया है :-

(i) श्री रणधीर कुमार श्रीवास्तव, कार्यकारी प्रधान लिपिक एवं श्री अनुराग मिश्र, कार्यकारी विपत्र लिपिक के द्वारा श्री योगेन्द्र मिश्र, सेवानिवृत्त जंजीरवाहक को प्रथम ए०सी०पी० के बकाये का भुगतान समय पर नहीं करना तथा अनुपस्थिति18 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 विवरणी उपलब्ध रहने के बावजूद भी स्थानांतरित कनीय अभियंताओं श्री ओम प्रकाश कुमार एवं मो० जफर कमाल के माह नवम्बर 2018 का वेतन विपत्र तैयार नहीं किया जाना।

(ii)श्री रविशंकर, भंडारपाल को न्यायालय सम्बन्धित कार्य आवंटित किया गया था। उनको सी॰डब्लू॰जे॰सी॰-17388/2018 लाल बहादुर प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य तथा सी॰डब्लू॰जे॰सी॰-........../2018 रत्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य मामले में तथ्यात्मक विवरणी तैयार कराने हेतु प्रमण्डल की संचिकाएँ श्री हर्षवर्द्‌धन, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, पटना को उपलब्ध कराने का निदेश नवम्बर 2018 में दिया गया था, जिसका अनुपालन श्री रविशंकर कुमार के द्वारा नहीं किया गया।

(iii) इन कर्मियों को सरकारी कार्य ससमय नहीं करने के कारण श्री नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा उनमें सुधार लाने के उद्देश्य से चेतावनी दी गयी तथा सरकारी कार्यों के ससमय पारदर्शिता से निष्पादन करने हेतु निदेश दिया गया। आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधीनस्थ कर्मचारियों के द्वारा एक शिकायत पत्र सीधे श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को दी गयी, जिसे अधीक्षण अभियंता के द्वारा स्वीकार कर लिया गया।

(iv) श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता का यह मानना है कि इन कर्मियों को सर्वप्रथम शिकायत पत्र अपने नियंत्री पदाधिकारी अर्थात्‌ कार्यपालक अभियंता को देना चाहिए था। अपने नियंत्री पदाधिकारी के निर्णय से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में वे उच्चाधिकारी यानि अधीक्षण अभियंता से शिकायत कर सकते थे।

(v) बिहार सेवा संहिता के अनुसार शिकायतकर्ता कर्मियों को शिकायत पत्र सर्वप्रथम शिकायत से सम्बन्धित पदाधिकारी को समर्पित करना चाहिए। बिना जाँच-पड़ताल किये ही तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा तृतीय वर्ग के कर्मियों के शिकायत को तथ्य मानते हुए उनके द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण को श्री नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने बिहार सेवा संहिता का उल्लंघन बताते हुए इसे न्यायसंगत नहीं माना है।

(vi) श्री नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के अनुसार दिनांक 24.12.2018 के लिए मुख्य अभियंता के द्वारा उनके स्वी—त आकस्मिक अवकाश से दिनांक 26.12.2018 को लौटकर प्रमण्डल कार्यालय में आकर उनके द्वारा वित्तीय बिड खोलने के बाद भी उनको मुख्यालय से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा अनुपस्थित करते हुए स्पष्टीकरण पूछा गया। (vii) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1416 दिनांक-04.12.2018 द्वारा माँगे गए स्पष्टीकरण का जवाब श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-980 दिनांक-30.08.2019 एवं उन्हीं अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1495 दिनांक-6. 12.2018 द्वारा माँगे गए स्पष्टीकरण का जवाब श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-537 दिनांक-24.05.2019 के द्वारा समर्पित किया जाना बताया गया है।

पूर्व में इस आरोप के लिए उनके द्वारा अपने पत्रांक-248 दिनांक-30.03.2022 के माध्यम से संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में अंकित इस तथ्य कि दो स्पष्टीकरणों का जवाब प्राप्त करने के लिए श्री रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा न तो उनको स्मारित किया गया और न ही पर्याप्त समय दिया गया, परन्तु दुर्भावना की मंशा से उनके द्वारा उनके विरूद्ध आरोप गठित कर दिया गया, को संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख नहीं किया गया, जो न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता है।

—पया उपर्युक्त वर्णित साक्ष्यों का अवलोकन करना चाहेंगे। उपर्युक्त साक्ष्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रमण्डल के तृतीय वर्ग के उक्त कर्मियों के द्वारा मनमाने ढंग से सरकारी कार्यों का निष्पादन किया जा रहा था तथा उन कर्मियों के द्वारा इस प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता के कई निदेशों का अनुपालन नहीं किया जाता था। श्री रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा बिना जाँच पड़ताल किये तथा बिना सच्चाई का पता लगाए ही उनके विरूद्ध उक्त कर्मियों के शिकायत को तथ्य मान लिया गया तथा पत्रांक-1416 दिनांक-04.12.2018 के माध्यम से उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जो न्याय संगत नहीं है। स्पष्टीकरण सम्बन्धी इस पत्र को उनके द्वारा सीधे उनको नहीं उपलब्ध कराया गया। यदि स्पष्टीकरण के सम्बन्ध में उनका जवाब उन्हें उपलब्ध नहीं हुआ तो उन्हें स्पष्टीकरण के सम्बन्ध में उनको स्मारित करना चाहिए था, परन्तु उनके द्वारा स्पष्टीकरण के जवाब के लिए उनको स्मारित नहीं किया गया।

दिनांक 24.12.2018 के लिए आकस्मिक अवकाश की स्वी—ति हेतु अपने पत्रांक-1528 दिनांक-22.12.2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता को सूचना देकर मुख्य अभियंता से अनुरोध किया गया तथा दिनांक 22.12.2018 को 5ः30 अपराह्न में मुख्यालय से प्रस्थान किया गया। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1492 दिनांक-24.12.2018 के द्वारा अनुशंसा के आलोक में दिनांक 24.12.2018 के लिए उनके आकस्मिक अवकाश को मुख्य अभियंता के द्वारा स्वी—ति प्रदान की गयी। दिनांक 25.12. 2018 को क्रिसमस का राजपत्रित अवकाश था। दिनांक 26.12.2018 को लगभग 4ः00 बजे अपराह्न वे अपने कर्त्तव्य पर मुख्यालय लौट आए तथा प्रमण्डलीय कार्यालय में अल्पकालीन निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-01 वर्ष 2018-19 से सम्बन्धित वित्तीय बिड को खोला गया। इस निविदा से सम्बन्धित प्रमण्डलीय नहर के सी०डी० के मरम्मति कार्य को श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के इच्छानुकूल संवेदक को आवंटित नहीं करने के कारण वे उनसे नाराज हो गए। दिनांक-26.12.2018 को उनके मुख्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद भी उनके द्वारा दुर्भावना की मंशा से उनको मुख्यालय से अनुपस्थित करते हुए अंचल के पत्रांक-1495 दिनांक-26.12.2018 के माध्यम से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जो न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता है। यदि स्पष्टीकरण के सम्बन्ध में उनका जवाब उन्हें उपलब्ध नहीं हुआ तो उनको स्मारित करना चाहिए था। परन्तु, स्पष्टीकरण के जवाब के लिए उनके द्वारा उनको स्मारित नहीं किया गया।

कार्यपालक अभियंता का क्षेत्राधिकार वृहद रहने के फलस्वरूप उन्हें अपने प्रमण्डलाधीन स्थापना, वित्तीय, तकनीकी, न्यायिक मामले आदि कार्यों के निष्पादन के साथ-साथ जिलाधिकारी के विभिन्न निदेशों का भी अनुपालन करना पड़ता है। नहर प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता को प्रमण्डलीय कार्यालय से बाहर कमाण्ड क्षेत्र में भी विभिन्न नहरों की भौतिक स्थिति19 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 एवं नहरों के अंतिम छोर तक जलश्राव पहुँचने की अद्यतन स्थिति के लिए निरीक्षण, भ्रमण एवं अनुश्रवण करना पड़ता है। न्यायिक मामलों के लिए माननीय उच्च न्यायालय, पटना में भी कार्यपालक अभियंता को शपथ पत्र दायर करना पड़ता है। पर्व-त्योहारों के अवसर पर भी विधि-व्यवस्था के संधारण के लिए जिलाधिकारी के निदेश के आलोक में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के कर्त्तव्य एवं दायित्व का निर्वहन करना पड़ता है। जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के द्वारा प्रत्येक सप्ताह में दो विभिन्न तिथियों में —षि टास्क फोर्स तथा आपदा प्रबन्धन के लिए दो बैठकें आहुत की जाती थीं जिसमें जल संसाधन विभाग के सभी कार्यपालक अभियंताओं को सम्मिलित होना पड़ता था।

दिनांक 04.12.2018 को जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के द्वारा —षि टास्क फोर्स की बैठक आहुत की गयी थी, जिसमें वे भी उपस्थित हुए थे। इस बैठक में पूर्वी चम्पारण के किसान प्रतिनिधियों के द्वारा वर्ष 2009-10 से वर्ष 2015-16 तक पूर्वी गंडक नहर प्रणालियों के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितताओं की जाँच कराने के लिए जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया। जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के ज्ञापांक-5444/गो०, मोतिहारी दिनांक-13.12.2018 के द्वारा पूर्वी गंडक नहरं प्रणालियों के उक्त पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितताओं के आलोक में सिंचाई व्यवस्था को प्रभावित करने वाले दुष्परिणाम, नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुँच रहा है या नहीं, आदि की जाँच के लिए जिला —षि पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी तथा कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी को प्रतिनियुक्त किया गया था। जिलाधिकारी के उक्त निदेश के अनुपालन में उनको जिला —षि पदाधिकारी के साथ विभिन्न नहरों की भौतिक स्थिति एवं नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुँचने के तथ्य के सम्बन्ध में दिसंबर, 2018 तथा जनवरी, 2019 में कई बार प्रमण्डलाधीन नहरों का संयुक्त निरीक्षण करना पड़ा। प्रमण्डलाधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्य के सम्बन्ध में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-26 दिनांक-08.01.2019 के माध्यम से एक प्रतिवेदन जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी को समर्पित किया गया था।

अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1241 दिनांक-12.11.2018 तथा पत्रांक- 1360 दिनांक-20.11.2018 के द्वारा सी॰डब्लू॰जे॰सी॰-............../2018 रत्नेश कुमार तिवारी बनाम बिहार सरकार एवं अन्य तथा सी॰डब्लू॰जे॰सी०-17388/2018 लाल बहादुर प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य मामले में तथ्यात्मक विवरणी की माँग की गयी थी। उक्त मामले में तथ्यात्मक विवरणी तैयार कराने के लिए श्री हर्षवर्द्‌धन शिवसुन्दरम, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, पटना को प्रमण्डलीय संचिकाएँ उपलब्ध कराने हेतु श्री रविशंकर, प्रमण्डलीय भंडारपाल को निदेशित किया गया, परन्तु, उनके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में उनको स्वयं संचिकाओं के साथ पटना जाना पड़ा। अधिवक्ता से तथ्यात्मक विवरणी प्राप्त होने पर सी॰डब्लू॰जे॰सी॰-17388/2018 लाल बहादुर प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में प्राप्त तथ्यात्मक विवरणी को प्रमण्डल के पत्रांक-1539 दिनांक-27.12.2018 के माध्यम से तथा सी0डब्लू०जे०सी०-......./2018 रत्नेश कुमार तिवारी बनाम बिहार सरकार एवं अन्य मामले में प्राप्त तथ्यात्मक विवरणी को प्रमण्डल के पत्रांक-363 दिनांक-25.03.2019 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया।

मुख्य अभियंता के पीत पत्र (पत्रांक-2053 मोतिहारी, दिनांक- 24.07.2018) के द्वारा मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के कार्यालय के इनभर्टर एवं बैट्री की मरम्मति तथा आवासीय कार्यालय के सर्विस वायर को बदलवाने का निदेश दिया गया था। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के पत्रांक-1350 दिनांक-19.11.2018 तथा पत्रांक-1359 दिनांक-20.11.2018 के द्वारा तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के अंतर्गत रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर स्थित एक्वाडक्ट एवं इस्केप चैनल के नीचे से हो रहे नहर के पानी के रिसाव के जाँच एवं समाधान के सम्बन्ध में निदेश दिया गया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित प्रमण्डल के वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में उक्त कार्यों के लिए प्रावधान नहीं किया गया था। मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के उक्त निदेशों का अनुपालन चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में सुनिश्चित कराने के लिए उनके द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को पुनरीक्षित किया गया तथा पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) के क्रमांक- C/10 पर रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर स्थित इस्केप चैनल के नीचे से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए आवश्यक कार्य को, क्रमांक-D/16 पर मुख्य अभियंता के कम्प्यूटर कक्ष के छत के सिलिंग के मरम्मति कार्य को तथा क्रमांक-E/3 पर मुख्य अभियंता के कार्यालय के कम्प्यूटर कक्ष हेतु दो अदद बैट्री एवं एक अदद इनभर्टर के क्रय के कार्य को सम्मिलित करते हुए इस पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को प्रमण्डल के पत्रांक-1452 दिनांक-08.12.2018 के माध्यम से अनुशंसा के लिए अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के द्वारा न तो इस पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को अनुशंसित किया गया और न ही इस कार्यक्रम को मुख्य अभियंता को भेजा गया तथा व्यय सम्बन्धी पृच्छा लगाकर पत्रांक-178 दिनांक-05.01.2019 के माध्यम से लौटा दिया गया।

अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1491 दिनांक-24.12.2018 के अनुपालन में रब्बी सिंचाई (2018-19) हेतु प्रमण्डलाधीन नहरों में जलश्राव प्रवाहित कराने के लिए जल व्यादेश के संबंध में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-16 दिनांक-04.01.2019 (छाया प्रति संलग्न) के माध्यम से अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया से अनुरोध किया गया तथा प्रतिलिपि के माध्यम से अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी एवं मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी को सूचित किया गया। रब्बी सिंचाई (2018-19) के लिए दिनांक 05.01.2019 से दिनांक-15.03.2019 तक प्रमण्डलाधीन विभिन्न नहरों एवं गेटों का संचालन कराकर तथा विभिन्न नहरों में अधिकतम जलश्राव प्रवाहित कराकर विभाग के द्वारा निर्धारित 19500.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया तथा प्रमण्डल के पत्रांक-333 दिनांक-13.03.2019 के माध्यम से इसकी सूचना अधीक्षण अभियंता को दी गयी।20 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 लोक सभा निर्वाचन, 2019 के कार्य हेतु समाहरणालय, पूर्वी चम्पारण के EVM and VVPAT Cell के पत्रांक-01 दिनांक-24.01.2019 तथा पत्रांक-04 दिनांक-14.03.2019 के आलोक में उनके द्वारा जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया गया तथा EVM and VVPAT Cell में 15 मई, 2019 तक प्रतिनियुक्त रहा।

जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के पत्रांक-56/जि०नजा०, मोतिहारी, दिनांक 30.01.2019 के अनुपालन में प्रमण्डल के पत्रांक-226 दिनांक-22.02.2019 एवं पत्रांक-225 दिनांक-22.02.2019 के माध्यम से वांछित प्रतिवेदन जिलाधिकारी को समर्पित किया गया।

जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के ज्ञापांक-323/गो०, मोतिहारी, दिनांक-04. 02.2019 तथा पत्रांक-370/गो०, मोतिहारी, दिनांक-07.02.2019 के द्वारा क्रमशः इन्टरमीडिएट वार्षिक परीक्षा, 2018 तथा सरस्वती पूजा, 2019 के लिए निर्गत निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी के कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित किया गया। जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के ज्ञापांक- 660/गो०, मोतिहारी, दिनांक-17.03.2019 के द्वारा होली पर्व, 2019 के अवसर पर भी विधि व्यवस्था संधारण हेतु निर्गत निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी के रूप में कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्वहन किया गया।

यह सर्वविदित है कि जल संसाधन विभाग, पटना के उच्चाधिकारियों के द्वारा भी वांछित प्रतिवेदन/स्पष्टीकरण के जवाब के लिए अधीनस्थ पदाधिकारियों को स्मारित किया जाता है। गठित आरोपों के विरूद्ध स्पष्टीकरण का जवाब प्राप्त नहीं होने पर स्पष्टीकरण के जवाब के लिए विभाग के निगरानी कोषांग के पदाधिकारियों के द्वारा भी आरोपित कर्मियों/पदाधिकारियों को दो-तीन बार स्मारित किया जाता है। परन्तु, श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा उक्त दो स्पष्टीकरणों का जवाब के लिए उनको कम से कम एक बार भी स्मारित नहीं किया गया। स्पष्टीकरण के जवाब के लिए उनको स्मारित करने के सम्बन्ध में अधीक्षण अभियंता के द्वारा साक्ष्य के रूप में एक भी पत्र संलग्न नहीं किया गया है। दुर्भावना से ग्रसित होकर येन-केन उनको दण्डित कराने की मंशा से श्री रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा उन पर मनगढ़ंत एवं असत्य आरोप लगाकर पत्रांक-18 दिनांक-05.01.2019 के माध्यम से आरोप पत्र मुख्य अभियंता, मोतिहारी को समर्पित किया गया, जो न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता है। अधीक्षण अभियंता के उक्त आरोप पत्र के अवलोकन से स्वतः स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा आरोप पत्र समर्पित करने के पूर्व ही आरोप पत्र में वर्णित उनके कई निदेशों के अनुपालन के लिए उनके द्वारा अनुपालन समर्पित किया जा चुका था।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में पृष्ठ संख्या-13 से पृष्ठ संख्या-16 तक आरोप संख्या-01 के विरूद्ध उनके बचाव अभिकथन की समीक्षा की गयी है। समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-1168 दिनांक-01.10.2018 तथा पत्रांक- 1338 दिनांक-06.11.2018 के माध्यम से स्पष्टीकरण का जवाब मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। पुनः संचालन पदाधिकारी के द्वारा यह भी स्वीकार किया गया है कि अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1416 दिनांक-04.12.2018 के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-980 दिनांक-30.08.2019 के माध्यम से स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित किया गया तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1495 दिनांक-26.12.2018 के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-537 दिनांक-24.05.2019 के माध्यम से स्पष्टीकरण का जवाब अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में पृष्ठ संख्या-16 पर अंतिम दो कंडिकाओं मे अंकित है कि :- उपरोक्त के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा मनमाने ढंग से कार्य कराये जाने के प्रमाण नहीं मिलते हैं। स्पष्टीकरणों के जवाब दिये जाने के भी साक्ष्य मिलते हैं लेकिन कतिपय स्पष्टीकरणों का जवाब विलम्ब से दिया गया है। अतएव सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से करने एवं स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। लेकिन दो स्पष्टीकरणों के जवाब विलम्ब से दिये जाने के प्रमाण मिलते हैं।

संचालन पदाधिकारी के उक्त टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से नहीं किया गया तथा मुख्य अभियंता के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर उनके द्वारा सभी स्पष्टीकरणों का जवाब मुख्य अभियंता को ससमय समर्पित किया गया है। अधीक्षण अभियंता के द्वारा माँगे गये स्पष्टीकरण के लिए श्री नारायण, कार्यपालक अभियंता के द्वारा स्पष्टीकरणों का जवाब विलम्ब से दिया गया, परन्तु उनके निदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया। उनका कहना है कि आरोप संख्या-01 का सार स्पष्टीकरण का जवाब विलम्ब से दिये जाने से सम्बन्धित नहीं है। स्पष्टीकरणों के जवाब के लिए यदि श्री रजक, अधीक्षण अभियंता के द्वारा उनको स्मारित किया जाता तथा पर्याप्त समय दिया जाता तो उनके द्वारा स्पष्टीकरणों का जवाब ससमय उपलब्ध करा दिया जाता, परन्तु स्पष्टीकरणों के जवाब के लिए उनके द्वारा उनको एक बार भी स्मारित नहीं किया गया। इस प्रकार स्पष्टीकरणों का जवाब नहीं देने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। अतएव दो स्पष्टीकरणों का जवाब विलम्ब से अधीक्षण अभियंता को समर्पित किये जाने के आधार पर संचालन पदाधिकारी के द्वारा उनके विरूद्ध इस आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित मानना न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता है।

उपर्युक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि दिसंबर 2018 से मई 2019 तक उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के निदेशों के अनुपालन के साथ-साथ जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के द्वारा निर्गत निदेशों के अनुपालन में भी सक्रिय रहे। प्रमण्डलाधीन स्थापना, वित्तीय, तकनीकी, न्यायिक मामले आदि से सम्बन्धित कार्यों में21 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 व्यस्त रहने के साथ-साथ पर्व-त्योहार के अवसर पर जिलाधिकारी के द्वारा विधि-व्यवस्था के संधारण के लिए प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी के रूप में तथा लोक सभा निर्वाचन, 2019 के अवसर पर जिलाधिकारी-सह- जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के निदेश के अनुपालन में उन को अपने कर्तव्य एवं दायित्वों के निर्वहन में व्यस्त रहना पड़ा, जिसके कारण अधीक्षण अभियंता के उक्त दो स्पष्टीकरणों के लिए भूलवश उनके द्वारा विलम्ब से दो स्पष्टीकरणों का जवाब उन्हें समर्पित किया गया। विलम्ब से ही सही, अधीक्षण अभियंता के निदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया। अतएव अधीक्षण अभियंता के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित किया गया तथा अधीक्षण अभियंता के निदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया, के आधार पर संचालन पदाधिकारी को उनके बचाव-बयान/अभिकथन की समीक्षा करना चाहिए तथा स्पष्टीकरण का जवाब उपलब्ध नहीं कराने के आरोप से उनको पूर्णतः विमुक्त करना चाहिए था। जब संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-01 के लिए उनके बचाव बयान की समीक्षा के क्रम में पृष्ठ संख्या-16 पर यह अंकित किया गया है कि अतएव सरकारी कार्यों का निष्पादन मनमाने ढंग से करने एवं स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है, ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी का यह मंतव्य कि आरोप संख्या-01 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है, न तो न्यायसंगत है और न ही स्वीकार करने योग्य ही हैं। यह आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।

अतः उपर्युक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों के आलोक में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनको स्पष्टीकरण का जवाब उपलब्ध नहीं कराने से सम्बन्धित आरोप संख्या-01 से पूर्णतः विमुक्त करना चाहेंगे। संचालन पदाधिकारी का यह मंतव्य न्यायसंगत नहीं है। उनके द्वारा इस आरोप के लिए उनके बचाव बयान, जो उनके पत्रांक-248 दिनांक-30.03.2022 के द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित किया गया था, को निष्पक्षता के साथ समीक्षा नहीं किया गया है। अतएव इस आरोप के आंशिक रूप से प्रमाणित होने के उनके मंतव्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। यह आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।

सरकारी कार्यों के निष्पादन हेतु अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा अनेक पत्रों के माध्यम से निर्गत निदेशों के अनुपालन में उनके द्वारा अधिकांश कार्यों का निष्पादन कराया गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत विभाग से प्राप्त 80.00 लाख रूपये के आवंटन के विरूद्ध मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित 68.77242 लाख रूपये के लागत वाले विभिन्न सम्पोषण एवं मरम्मति कार्यों का निष्पादन उनके द्वारा पारदर्शिता एवं मितव्ययिता के साथ पूर्ण कराया गया जिसमें 44.89244 लाख रूपये का व्यय हुआ तथा 23.87965 लाख रूपये की बचत हुई। साक्ष्य के लिए माह मार्च 2019 के लिए इस प्रमण्डल के मासिक लेखा फार्म 63 की छाया प्रति संलग्न है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) के अनुमोदन हो जाने के पश्चात्‌ अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा अपने पत्रों के माध्यम से कुछ ऐसे कार्यों यथा मुख्य अभियंता कार्यालय के कम्प्यूटर कक्ष के लिए दो अदद बैट्री एवं एक अदद इनभर्टर का क्रय करना, इस प्रमण्डल के रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर स्थित एक्वाडक्ट एवं इसके इस्केप चैनल के नीचे से हो रहे नहर के पानी के रिसाव को रोकने के लिए आवश्यक कार्य, मुख्य अभियंता के आवासीय कार्यालय के सर्विस वायर को बदलने का कार्य आदि के निष्पादन हेतु निदेश दिये गए। इन कार्यों के लिए मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में कोई भी प्रावधान नहीं था । वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में बिना प्रावधान वाले सरकारी कार्यों का निष्पादन विभागीय कोडल प्रावधानों का उल्लंघन माना जाता तथा निष्पादित कार्यों का भुगतान बाधित हो सकता था, जो दायित्व सृजन का मामला भी बन सकता था।

ज्ञातव्य है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत जल संसाधन विभाग के पत्रांक-01/पी०एम०सी०/बजट/42/2018-30 दिनांक-10.05.2018 के द्वारा इस प्रमण्डल को 80.00 लाख रूपये आवंटित किये गए थे। इस आवंटन के विरूद्ध प्रमण्डलाधीन सम्पोषण कार्यों के लिए श्री ब्रज किशोर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा दिनांक 04.06.2018 को वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) तैयार किया गया तथा अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया, परन्तु उनके द्वारा इस वार्षिक कार्यक्रम में प्रावधानित विभिन्न सम्पोषण कार्यों के निष्पादन के लिए विभिन्न सम्पोषण कार्यों के प्राक्कलनों को तकनीकी स्वी—ति हेतु अधीक्षण अभियंता को नहीं समर्पित किया गया। इस वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में कई महत्वपूर्ण कार्यों के निष्पादन के लिए प्रावधान नहीं किया गया था तथा कई कार्यों के लिए बढ़ा-चढ़ाकर राशि का प्रावधान किया गया था दिनांक 06.06.2018 को इस वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा अनुशंसित किये जाने के आलोक में बिना जाँच-पड़ताल किये ही एक माह के विलम्ब से इस वार्षिक कार्यक्रम को श्री —ष्णचन्द्र मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता के पत्रांक-1881 दिनांक-10.07.2018 (आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-01 पर अंकित है) के द्वारा अनुमोदित किया गया। यह अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम इस प्रमण्डल में दिनांक 11.07.2018 को उपलब्ध हुआ। श्री ब्रज किशोर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा दिनांक 30.06. 2018 के अपराह्न में उनको इस प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता का प्रभार सौंपा गया था।

दिनांक 30.06.2018 के अपराह्न में कार्यपालक अभियंता का प्रभार प्राप्त करने के पश्चात्‌ उन के द्वारा दिनांक 01.07. 2018 से दिनांक 15.10.2018 तक खरीफ सिंचाई (2018-19) के लिए प्रमण्डलाधीन नहरों एवं गेटों का संचालन कराया गया। 30 जून, 2018 को इस प्रमण्डल में सहायक अभियंताओं के लिए स्वी—त सभी छः पद तथा कनीय अभियंताओं का अधिकांश पद रिक्त थे। खरीफ सिंचाई (2018-19) के आरम्भ में सम्पूर्ण बिहार राज्य सुखाड़ की समस्या से ग्रस्त था। नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुँचाने के विभागीय निदेश को सुनिश्चित करने के लिए उनको कमाण्ड क्षेत्र में बार-बार भ्रमण22 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 तथा निरीक्षण करना पड़ता था, जिसकी पुष्टि मुख्य अभियंता के द्वारा विभिन्न तिथियों में निर्गत निरीक्षण प्रतिवेदनों से की जा सकती है। उपलब्ध संसाधनों के सहयोग से प्रमण्डलाधीन नहरों में अधिकतम जलश्राव प्रवाहित कराकर खरीफ सिंचाई (2018-19) के लिए विभाग के द्वारा निर्धारित 44514.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया तथा इसकी सूचना प्रमण्डल के पत्रांक-1308 दिनांक-31.10.2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता को समर्पित की गयी। खरीफ सिंचाई (2018-19) के लिए नहरों एवं गेटों के संचालन में पारदर्शिता एवं मितव्ययिता पर बल दिया गया तथा नहरों एवं गेटों के संचालन में संलग्न मौसमी मजदूरों को बैंक खाता के माध्यम से भुगतान किया गया, जिसके फलस्वरूप अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में खरीफ सिंचाई (2018-19) के लिए नहरों के संचालन के लिए प्रावधानित 30.16758 लाख रूपये के विरूद्ध मात्र 28.53944 लाख रूपये का व्यय करते हुए प्रमण्डल के लिए निर्धारित 44514.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को पूर्णतः प्राप्त किया गया तथा 1.62814 रूपये की बचत भी की गई।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के जलापूर्ति एवं आर0ओ0 के वार्षिक सम्पोषण, उक्त शिविर के विद्युतीय सम्पोषण, मुख्य अभियंता के कार्यालय परिसर में अधिष्ठापित जेनरेटर के वार्षिक सम्पोषण तथा प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता के निरीक्षण वाहन BHRO5P-0822 के वार्षिक सम्पोषण हेतु चार प्राक्कलनों को उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1180 दिनांक 04.10.2018 के माध्यम से तकनीकी स्वी—ति हेतु अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1218 दिनांक-10. 10.2018 (आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-3 पर अंकित) के माध्यम से उक्त तीन कार्यों के प्राक्कलनों को तकनीकी स्वी—ति प्रदान की गयी, परन्तु, प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता के निरीक्षण वाहन के प्राक्कलन को तकनीकी स्वी—ति नहीं प्रदान की गयी। प्रमण्डल के पत्रांक-1322 दिनांक-02.11.2018 तथा पत्रांक-1340 दिनांक-08.11.2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता को स्मारित करने के पश्चात्‌ भी उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के निरीक्षण वाहन के प्राक्कलन को तकनीकी स्वी—ति नहीं प्रदान की गयी। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1327 दिनांक-08.11.2018 (आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-06 के अधीन अंकित है) के माध्यम से प्रमण्डलाधीन अन्य चार सरकारी निरीक्षण वाहनों के प्राक्कलन की माँग की गयी तथा इस पत्र के माध्यम से यह आश्वस्त किया गया कि प्रमण्डल के सभी निरीक्षण वाहनों का प्राक्कलन प्राप्त होने पर सभी निरीक्षण वाहनों के प्राक्कलनों को एक साथ तकनीकी स्वी—ति प्रदान की जायेगी। —पया अधीक्षण अभियंता के उक्त पत्र का अवलोकन करना चाहेंगे। उक्त पत्र के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि श्री रजक, अधीक्षण अभियंता के द्वारा उन पर दबाव डालकर अन्य चार निरीक्षण वाहनों के प्राक्कलन की माँग की गयी तथा उन के साथ भयादोहन किया गया। सरकारी कार्यों के निष्पादन में उनके द्वारा सरकारी राशि के दुरूपयोग का विरोध किया गया तथा मितव्ययितां पर बल दिया गया। इस प्रमण्डल में सहायक अभियंता के सभी पदों के रिक्त रहने के कारण प्रमण्डल में प्रतिनियुक्त दो सहायक अभियंताओं श्री अजीत कुमार (I.D.-5340) तथा श्री पंकज कुमार (I.D.-5350) के लिए दो निरीक्षण वाहनों के प्राक्कलनों को अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। श्री रजक, अधीक्षण अभियंता के द्वारा उक्त दो सहायक अभियंताओं के लिए क्रमशः तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, अरेराज तथा तिरहुत नहर प्रमण्डल, हरसिद्धि के निरीक्षण वाहनों के प्राक्कलनों को तकनीकी स्वी—ति प्रदान की गयी। परन्तु, वित्तीय वर्ष 2018-19 के समाप्त होने तक भी उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के निरीक्षण वाहन BHRO5P-0822 के वार्षिक सम्पोषण (2018-19) के प्राक्कलन (1,23,580.00 रूपये) को तकनीकी स्वी—ति नहीं प्रदान की गयी, जिसके कारण इस वित्तीय वर्ष 2018-19 में उक्त वाहन के वार्षिक सम्पोषण मद में किये गये व्यय के लिए भुगतान करना बाधित रहा। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में उक्त प्रमण्डलीय निरीक्षण वाहन BHRO5P-0822 के वार्षिक सम्पोषण (2017-18) के प्राक्कलन (1,30,894.00 रूपये) को श्री रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा तकनीकी स्वी— ति प्रदान की गयी थी। इस प्रकार उन के द्वारा अधीक्षण अभियंता के निदेश का अनुपालन किया गया, परन्तु अधीक्षण अभियंता द्वारा उनके साथ पक्षपात एवं प्रताड़न किया गया तथा उनके विरूद्ध उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना, निष्क्रियता एवं उदासीनता का असत्य आरोप लगाकर विभाग को गुमराह किया गया।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रमण्डलीय निरीक्षण वाहनों के संचालन एवं सम्पोषण मद में 8.84880 लाख रूपये का प्रावधान किया गया था। उनके द्वारा मितव्ययिता एवं पारदर्शिता पर बल दिया गया तथा आवश्यकतानुसार निरीक्षण वाहनों को उपयोग में लाया गया जिसके फलस्वरूप उक्त तीन निरीक्षण वाहनों के संचालन एवं वार्षिक संपोषण मद में मात्र 2.32759 लाख रूपये का व्यय किया गया तथा 6.52121 लाख रूपये की बचत की गयी। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2018-19 में रब्बी सिंचाई (2018-19) के लिए प्रमण्डलीय नहरों का ससमय संचालन कराकर तथा नहरों में अधिकतम जलश्राव प्रवाहित कराकर विभाग के द्वारा निर्धारित 19500.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया तथा इसकी सूचना प्रमण्डल के पत्रांक-333 दिनांक-13.03.2019 के द्वारा अधीक्षण अभियंता को समर्पित की गयी। उनके द्वारा नहरों के संचालन में पारदर्शिता एवं मितव्ययिता पर बल दिया गया तथा नहरों के संचालन में संलग्न मौसमी मजदूरों को बैंक खाता के माध्यम से भुगतान किया गया जिसके फलस्वरूप स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में रब्बी सिंचाई के लिए नहरों के संचालन के लिए प्रावधानित 19.11604 लाख रूपये के विरूद्ध मात्र 12.59300 रूपये का व्यय करते हुए विभाग के द्वारा निर्धारित 19500.00 हेक्टेयर के लक्ष्य को भौतिक रूप से पूर्णतः प्राप्त किया गया तथा 6.52304 लाख रूपये की बचत की गयी।

पूर्वी चम्पारण जिले का मुख्यालय मोतिहारी में स्थित है। मोतिहारी में लगभग 24.00 घंटे विद्युत आपूर्ति रहने के फलस्वरूप मुख्य अभियंता परिसर स्थित जेनरेटर को चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के निदेश के अनुपालन में जलापूर्ति हेतु उनके कार्यालय में स्थापित आर0ओ0 की भी मरम्मति करायी गयी, मुख्य अभियंता के कार्यालय कक्ष में अधिष्ठापित ए०सी० कूलर की भी मरम्मति करायी गयी तथा23 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 प्रमण्डलीय गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के जलापूर्ति हेतु अधिष्ठापित पम्प के विद्युतीय सम्पोषण हेतु 240A/415V के किटकैट का क्रय भी कराया गया।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित अधिकांश संपोषण एवं मरम्मति कार्यों का निष्पादन ससमय चालू वित्तीय वर्ष (2018-19) में ही सुनिश्चित किया गया जिसके फलस्वरूप किसी भी दायित्व का सृजन नहीं हो सका। वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत अनुमोदित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में प्रावधानित 68.77242 लाख रूपये के लागत वाले विभिन्न संपोषण एवं मरम्मति कार्यों का निष्पादन उनके द्वारा मितव्ययिता एवं पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया गया जिससे 44.89277 लाख रूपये का व्यय हुआ तथा 23.87965 लाख रूपये की बचत हुई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत प्राप्त 80.00 लाख रूपये के आवंटन के विरूद्ध किये गये व्यय का विवरण निम्न है :-

A निरीक्षण वाहनों का संचालन एवं संपोषण 8,84,880 2,32,759 6,52,121
B नहरो का संचालन (खरीफ एवं रब्बी) ं 49,28,362 41,13,244 8,15,118
C नहरो ं का संपोषण एवं मरम्मति कार्य 11,22,758 0.00,000 11,22,758
D सामान्य एवं शिविर संपोषण 10,00,000 1,25,660 8,83,340
E अन्यान्य कार्य 00,55,000 00,17,614 00,37,386

वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत इस प्रमण्डल को निर्गत 80.00 रूपये के आवंटन के विरूद्ध समानुपातिक रूप से व्यय सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में मुख्य अभियंता के द्वारा पत्रांक-3096 दिनांक-10.11.2018, पत्रांक-3004 दिनांक-27.10.2018, पत्रांक- 2720 दिनांक-27.09.2018 तथा पत्रांक-2367 दिनांक-23.08.2018 तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1209 दिनांक-09.10.2018 (आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-04 पर अंकित है) के माध्यम से दिये गये निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1168 दिनांक-01.10.2018 के माध्यम से समानुपातिक रूप से व्यय करने में हो रही कठिनाइयों से मुख्य अभियंता को एवं अधीक्षण अभियंता को अवगत कराया गया था। इस प्रमण्डल में सहायक अभियंताओं के सभी छः पदों के रिक्त रहने के कारण तिरहुत नहर प्रमण्डल, चकिया के दो सहायक अभियंताओं को इस प्रमण्डल मे प्रतिनियुक्त किया गया था, परन्तु उनके प्रभार में दो विभिन्न प्रमण्डलों के कई अवर प्रमण्डलों का अतिरिक्त प्रभार रहने के कारण तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के अंतर्गत सहायक अभियंता के सक्षमता के अंतर्गत नहरों के संपोषण एवं मरम्मति से सम्बन्धित कार्यों का निष्पादन कराना संभव नहीं हो सका।

पूर्व में मुख्य अभियंता के पत्रांक-2121 दिनांक-28.07.2018 तथा अधीक्षण अभियंता के पृष्ठांकित पत्रांक-910 दिनांक-31.07.2018 के द्वारा प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में प्रतिवेदन की माँग की गयी थी। उनके द्वारा दिनांक-30.06.2018 के अपराहन में तिरहुत नहर प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता का प्रभार ग्रहण करने के पश्चात मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के निदेश के आलोक में प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित आवासों में अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध प्रमण्डल के पत्रांक-882 दिनांक-09.08.2018 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करते हुए गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के प्रभारी अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा से उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के प्रतिवेदन की माँग की गयी। उक्त शिविर के प्रभारी अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा अवैध कब्जाधारियों की सूची उपलब्ध कराने के पश्चात्‌ उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-988 दिनांक-30.08.2018 के माध्यम से अवैध आवासितों की सूची अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। उनके द्वारा की गयी इस कार्रवाई से अधीक्षण अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-1045. दिनांक-01.09.2018 के माध्यम से अवैध आवासित व्यक्तियों की इस सूची को मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1045 दिनांक-01.09.2018 के प्रसंग में मुख्य अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के माध्यम से अवैध आवासित व्यक्तियों की उपलब्ध सूची के आलोक में अधीक्षण अभियंता-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी को नियामानुकूल कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। परन्तु, अधीक्षण अभियंता-सह- अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी के द्वारा मुख्य अभियंता के उक्त निदेश के आलोक में कोई कार्रवाई नहीं की गयी । आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-06 के अधीन अंकित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1339 दिनांक-19.11.2018 तथा पत्रांक-1362 दिनांक-20.11.2018 के माध्यम से मुख्य अभियंता के कार्यालय में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था के लिए बैट्री एवं इनभर्टर के क्रय करने का निर्देश दिया गया था। मुख्य अभियंता के द्वारा स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में बैट्री एवं इनभर्टर के क्रय करने का प्रावधान नहीं रहने के कारण बैट्री एवं इनभर्टर का क्रय करना बाधित था। इस संबंध में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1390 दिनांक-22.11.2018 के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया था।24 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-06 के अधीन अंकित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1350 दिनांक-19.11.2018 तथा पत्रांक-1359 दिनांक-20.11.2018 के माध्यम से प्रमण्डलाधीन रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर स्थित एक्वाडक्ट के प्रथम पीयर के दाँये भाग तथा इस्केप गेट के बाँये भाग से नहर के पानी के रिसाव के कारणों की जाँच एवं समाधान के संबंध में निदेश दिया गया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर हो रहे उक्त रिसाव की जाँच एवं समाधान के लिए कोई भी प्रावधान नहीं था जिसके कारण अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के निदेशों का अनुपालन करना संभव नहीं हो रहा था।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में गैर योजना शीर्ष "2700" के अंतर्गत प्राप्त आवंटन के विरूद्ध श्री ब्रज किशोर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) तैयार किया गया था जिसमें कई आवश्यक कार्यों यथा मुख्य अभियंता के कार्यालय के कम्प्यूटर कक्ष हेतु इनभर्टर/बैट्री के क्रय, रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर नहर के पानी के रिसाव की जाँच एवं समाधान के लिए आवश्यक कार्य, मुख्य अभियंता के आवासीय कार्यालय के सर्विस वायर को बदलने का कार्य, मुख्य अभियंता के कार्यालय के संयुक्त भवन, अधीक्षण अभियंताओं के अंचल कार्यालय भवनों तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डलों के कार्यालय भवनों के वार्षिक सम्पोषण के लिए कोई भी प्रावधान नहीं किया गया था जिसके कारण वित्तीय वर्ष 2018-19 में उक्त कार्यों का निष्पादन करना संभव नहीं हो रहा था।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में कई अनावश्यक कार्यों यथा प्रमण्डल में सहायक अभियंतओं का सभी पद रिक्त रहने के बावजूद भी उनके लिए चार निरीक्षण वाहनों के संचालन एवं वार्षिक संपोषण का प्रावधान तथा तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, हरसिद्धि के फतुहा उप वितरणी को पी०आई०एम० (सहभागिता सिंचाई प्रबंधन) के अंतर्गत —षकं समिति को स्थानांतरित किये जाने के बावजूद भी इसके वार्षिक संपोषण के लिए वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में किये गये प्रावधान को अधीक्षण अभियंता के अनुशंसा के आलोक में मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित किया गया था जो विभाग के कोडल प्रावधानों का उल्लंघन है।

अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के उक्त निदेशों के अनुपालन में तथा कार्यहित में वित्तीय वर्ष 2018-19 में मुख्य अभियंता के कार्यालय के लिए दो अदद बैट्री एवं एक अदद इनभर्टर के क्रय करने के लिए, रूलही वितरणी के वि०दू0 16.90 पर नहर के पानी के रिसाव की जाँच एवं समाधान के लिए आवश्यक कार्य तथा मुख्य अभियंता के कार्यालय के कम्प्यूटर कक्ष के छत के सिलिंग के मरम्मति कार्य को सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को पुनरीक्षित किया गया तथा उक्त कार्यों को पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में क्रमशः क्रमांक-E/3, D/16 एवं C/10 पर सम्मिलित करते हुए इस पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को प्रमण्डल के पत्रांक-1452 दिनांक-08.12.2018 के माध्यम से आवश्यक अनुशंसा के लिए अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के द्वारा इस पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को न तो अनुशंसित किया गया और न ही अग्रेतर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया, परन्तु, व्यय संबंधी पृच्छा लगाकर अंचल कार्यालय के पत्रांक-178 दिनांक- 05.01.2019 के माध्यम से प्रमण्डल को लौटा दिया गया। मुख्य अभियंता के पत्रांक-3010 दिनांक-29.10.2018 के अवलोकन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को अनुमादित करने का आवश्वासन दिया गया था, परन्तु, अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा उनके साथ पक्षपात किया गया तथा उनके द्वारा पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को अनुमोदित नहीं किया गया जिसके कारण वित्तीय वर्ष 2018-19 में उक्त कार्यों का निष्पादन करना संभव नहीं हो सका। दुर्भावना की मंशा से उनके द्वारा उन पर उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना, कार्य के प्रति निष्क्रियता, लापरवाही, उदासीनता आदि बरतने का मनगढ़ंत एवं असत्य आरोप लगाकर विभाग को गुमराह किया गया तथा अक्टूबर 2018 से 28 मार्च, 2019 तक वेतन बाधित कर उनको प्रताड़ित किया गया।

आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में क्रमांक-06 के अधीन अंकित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1360 दिनांक-20.11.2018 के माध्यम से इस सी0डब्लू0जे०सी०-........../2018 रत्नेश कुमार तिवारी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य तथा इस प्रमण्डल से सम्बन्धित सी0डब्लू0जे0सी0-17388/2018 लाल बहादुर प्रसाद बनाम राज्य सरकार एवं अन्य मामलों में तथ्यात्मक विवरणी की माँग की गयी। उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक- 1539 दिनांक-27.12.2018 के माध्यम से सी0डब्लू0जे0सी0-17388/2018 लाल बहादुर प्रसाद बनाम राज्य सरकार एवं अन्य मामले में तथा पत्रांक-363 दिनांक-25. 03.2019 के माध्यम से सी0डब्लू0जे0सी0............./2018 रत्नेश कुमार तिवारी एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य मामले में तथ्यात्मक विवरणी अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया।

उपर्युक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि सरकारी कार्यों के निष्पादन के लिए अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा विभिन्न पत्रों के माध्यम से निर्गत निदेशों का उनके द्वारा पूर्णतः अनुपालन किया गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) में जिन कार्यों के निष्पादन के लिए प्रावधान नहीं था, उन कार्यों के निष्पादन को वित्तीय वर्ष 2018-19 में सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा स्वी—त वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को पुनरीक्षित किया गया, परन्तु पुनरीक्षित वार्षिक कार्यक्रम (2018-19) को अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा अनुमोदित नहीं किये जाने के कारण कुछ कार्यों का निष्पादन संभव नहीं हो सका। ज्ञातव्य है कि आरोप संख्या-03 का सम्बन्ध निदेश देने के बावजूद सरकारी कार्यों का निष्पादन नहीं कराने तथा आरोप संख्या-01 का सम्बन्ध स्पष्टीकरण की माँग करने पर स्पष्टीकरण का जवाब उपलब्ध नहीं कराने से है। उक्त दोनों आरोपों का सार भिन्न-भिन्न है। परन्तु, संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के पृष्ठ संख्या-17 एवं पृष्ठ संख्या-18 पर आरोप संख्या-03 के लिए उनके बचाव बयान/अभिकथन की समीक्षा के क्रम में आरोप संख्या-01 के विरूद्ध बचाव के लिए उनके द्वारा स्पष्टीकरणों का जवाब विलम्ब से अधीक्षण अभियंता को समर्पित किये जाने का उल्लेख करते हुए आरोप संख्या-03 के लिए आंशिक रूप से25 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया, जो न्यायसंगत एवं निष्पक्ष नहीं प्रतीत होता है। आरोप संख्या-01 एवं आरोप संख्या-03 के लिए उनके द्वारा अपना बचाव बयान/अभिकथन अलग-अलग. अंकित किया गया है तथा दोनों आरोपों के विरूद्ध बचाव के लिए उनके द्वारा भिन्न-भिन्न साक्ष्य एवं तर्क समर्पित किये गये हैं। आरोप संख्या-03 के विरूद्ध उनके द्वारा समर्पित किये गये बचाव बयान, साक्ष्य एवं तर्क के आधार पर ही संचालन पदाधिकारी को आरोप संख्या-03 के लिए मंतव्य देना चाहिए अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा विभिन्न पत्रों के माध्यम से निर्गत निदेशों के अनुपालन में वित्तीय वर्ष 2018-19 में उनके द्वारा पारदर्शिता एवं मितव्ययिता के साथ गैर योजना शीर्ष 2700 के अंतर्गत 68.77242 लाख रूपये के लागत वाले विभिन्न सरकारी कार्यों का निष्पादन कराया गया जिसके फलस्वरूप 44.89277 लाख रूपये का व्यय हुआ तथा 23.87965 लाख रूपये की बचत हुई है। अतएव संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप संख्या-03 के सम्बन्ध में इस आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य देना न्यायसंगत नहीं है तथा इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता है। यह आरोप भी पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।

अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनको आरोप संख्या-03 से सम्बन्धित उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना/कार्य के प्रति निष्क्रियता, लापरवाही, उदासीनता बरतने के आरोप से पूर्णतः विमुक्त करना चाहेंगे। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य न्यायसंगत नहीं है। उनके द्वारा इस आरोप के सार को तथा इस सार में अंकित मुख्य अभियंता के पत्रांक-2553 दिनांक- 10.09.2018 को गहराई के साथ अध्ययन नहीं किया गया है। इस आरोप के विरूद्ध उनके पत्रांक-248 दिनांक-30.03.2022 के माध्यम से संचालन पदाधिकारी को समर्पित किये गये बचाव बयान/अभिकथन को संचालन पदाधिकारी के द्वारा निष्पक्षता एवं सम्पूर्णता के साथ समीक्षा नहीं किया गया है। अतएव उनके मंतव्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उनके विरूद्ध यह आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है ।

आरोप संख्या-05 के सार को तथा इस सार में अंकित मुख्य अभियंता कें पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 का अवलोकन करना चाहेंगे। उक्त पत्र के अवलोकन से यह स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि श्री —ष्णचन्द्र मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के द्वारा यह पत्र अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी को सम्बोधित एवं निर्गत किया गया था तथा इस पत्र के माध्यम से यह निदेश दिया गया था कि गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की उपलब्ध सूची के आलोक में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों पर नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित किया जाय तथा यह स्पष्ट किया जाय कि से सभी व्यक्ति कब से उक्त शिविर में आवासित हैं तथा इन पर ससमय कार्रवाई क्यों नहीं की गयी ? इस पत्र के अवलोकन से यह भी स्पष्ट है कि श्री मिश्रा, मुख्य अभियंता के द्वारा यह पत्र उनको निर्गत नहीं किया गया था। मुख्य अभियंता के उक्त पत्र में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की जिस सूची का वर्णन किया गया है, उस सूची कों उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-988 दिनांक-30.08. 2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया था। इस सूची को मूल में अधीक्षण अभियंता के द्वारा पत्रांक-1045 दिनांक- 01.09.2018 के माध्यम से मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन मोतिहारी को समर्पित किया गया था। अतएव उनके विरूद्ध यह आरोप लगाना कि अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के द्वारा उनको निदेश दिया गया था, पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।

वस्तुस्थिति यह है कि पूर्व में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के पत्रांक-2121 दिनांक-28.07.2018 के माध्यम से गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी से प्रतिवेदन की माँग की गयी थी। अधीक्षण अभियंता के द्वारा पृष्ठांकित पत्रांक-910 दिनांक-31.07.2018 के माध्यम से अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी से प्रतिवेदन की माँग की गयी। मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के उक्त निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक- 822 दिनांक-09.08.2018 के माध्यम से उक्त शिविर के प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा से अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में प्रतिवेदन की माँग की गयी तथा अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1045 दिनांक-01.09. 2018 (आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में संलग्न) के प्रसंग में मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक- 2121 दिनांक-28.07.2018 का उल्लेख है।

ज्ञातव्य है कि दिनांक 30.06.2018 के अपराह्न में उनके द्वारा इस प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता का प्रभार प्राप्त करने के पूर्व के वर्षों में ही प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित कई खाली आवासों को मोतिहारी स्थित जल संसाधन विभाग के कई अन्य प्रमण्डलों के कर्मियों के द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध रूप से कब्जा करने वालों में कई कर्मी बिहार पुलिस एवं सी०आर०पी०एफ० में भी कार्यरत थे तथा कुछ अज्ञात लोग भी अवैध रूप से आवासित थे। उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में उनके पूर्व के कार्यपालक अभियंता के द्वारा भी अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी को प्रतिवेदन समर्पित किया गया था, जिसकी पुष्टि अधीक्षण अभियंता के पत्रांक- 1045 दिनांक-01.09.2018 पर पृष्ठांकित प्रतिलिपि से की जा सकती है। अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई नहीं करने के कारण अधीक्षण अभियंता के निदेश के अनुपालन में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन शिविर प्रभारी कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा का वेतन अगले आदेश तक बाधित कर दिया गया था। उनके द्वारा प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित खाली आवासों पर कड़ी निगरानी एवं चौकसी बरती गयी जिसके फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2018-19 में अवैध रूप से आवासित होने की एक भी घटना नहीं हुई।26 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 वर्ष 2017 से ही तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी में गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा का पद रिक्त था। तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के अंतर्गत नहरों का देखभाल एवं वार्षिक संपोषण के साथ-साथ मोतिहारी स्थित जल संसाधन विभाग के अधीन विभिन्न प्रमण्डलों, अंचलों तथा मुख्य अभियंता के कार्यालय भवनों का देखभाल एवं वार्षिक संपोषण का कार्य भी आवंटित था। कार्यहित में मुख्य अभियंता के द्वारा तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के सहायक अभियंता के रिक्त पद पर तिरहुत नहर प्रमण्डल, चकिया के सहायक अभियंता को प्रतिनियुक्त किया जाता था। श्री पंकज कुमार, प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की सूची उपलब्ध कराने के पश्चात्‌ उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-988 दिनांक-30.08.2018 के माध्यम से अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की सूची को अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। श्री पंकज, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा तथा श्री ओम प्रकाश, शिविर प्रभारी कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा संयुक्त निरीक्षण के आधार पर यह सूची तैयार की गयी थी जिसमें अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों का नाम, पदनाम एवं कार्यालय का नाम अंकित है तथा कुछ व्यक्तियों को बाहरी के रूप में दर्शाया गया है। उक्त सूची के अवलोकन से यह ज्ञात होता है कि गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के खाली आवासों को अवैध रूप से कब्जा करने वालों में अधिकांश मोतिहारी स्थित जल संसाधन विभाग के अधीन विभिन्न प्रमण्डलों में पदस्थापित एवं कार्यरत कर्मी सम्मिलित थे। अवैध कब्जाधारियों में कुछ बिहार पुलिस एवं सी०आर०पी०एफ० के कर्मियों के साथ-साथ कुछ बाहरी अज्ञात लोग भी सम्मिलित थे। इस सूची में अवैध कब्जाधारियों की संख्या ब्यालिस (42) थी। उनके द्वारा समर्पित किये गये अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की इस सूची को अधीक्षण अभियंता के द्वारा पत्रांक-1045 दिनांक-01.09.2018 के माध्यम से मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के उक्त पत्रांक- 1045 दिनांक 01.09.2018 के प्रसंग में श्री —ष्णचन्द्र मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी को उक्त उपलब्ध सूची के आलोक में निदेश दिया गया कि अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित किया जाय तथा यह स्पष्ट किया जाय कि ये सभी व्यक्ति कब से अवैध रूप से आवासित हैं तथा इन पर ससमय कार्रवाई क्यों नहीं की गयी ?

मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 का अवलोकन करना चाहेंगे। उक्त पत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि श्री —ष्णचन्द्र मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के माध्यम से अवैध आवांसित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध सूची के आलोक में श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता-सह- अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति को अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। जल संसाधन विभाग के कोडल प्रावधान के अनुसार अधीक्षण अभियंता, आवास आवंटन समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं। मुख्य अभियंता के उक्त निदेश के अनुपालन में अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने के लिए श्री ब्रज किशोर रजक, अधीक्षण अभियंता-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी के द्वारा आवास आवंटन समिति की बैठक आहुत की जा सकती थी। इस बैठक में आवास आवंटन समिति के सदस्यों से परस्पर विचार-विमर्श किया जा सकता था तथा गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित खाली आवासों को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराने के लिए कोई सर्वमान्य हल निकाला जा सकता था। परन्तु, श्री रजक, अधीक्षण अभियंता-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी के द्वारा न तो वर्ष 2018 में आवास आवंटन समिति की बैठक आहुत की गयी और न ही अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई की गयी। मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 पर पृष्ठांकित पत्रांक-1094 दिनांक-13.09.2018 के माध्यम से श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के पत्रांक-1045 दिनांक 01.09.2018 तथा पत्रांक-1070 दिनांक-10.09.018 के प्रसंग में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी को उक्त शिविर में डोर टु डोर भौतिक सत्यापन के आधार पर पुनः प्रत्येक आवासवार अवैध आवासितों के लिए प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया।

इस प्रकार मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1094 दिनांक-13.09.2018 के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पत्रों के माध्यम से निर्गत निदेशों में भारी विरोधाभाष है। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1045 दिनांक-01.09.2018 पर पृष्ठांकित प्रतिलिपि के अवलोकन से यह भी ज्ञात होता है कि इस प्रमण्डल में उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता का प्रभार प्राप्त करने के पूर्व भी तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वारा उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में अधीक्षण अभियंता को प्रतिवेदन समर्पित किया गया था। विदित है कि बिहार सरकार, जल संसाधन विभाग, पटना की अधिसूचना संख्या-2859 दिनांक-27.06.2014 के माध्यम से श्री ब्रज किशोर रजक (I.D.-3866) को तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के अधीक्षण अभियंता के पद पर पदस्थापित किया गया था तथा अगस्त, 2014 से लगातार विगत चार वर्षों से श्री रजक, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत थे। इसके बावजूद भी श्री रजक, अधीक्षण अभियंता के द्वारा तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी में पदस्थापित विभिन्न कार्यपालक अभियंताओं से बार-बार उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में मात्र प्रतिवेदन की माँग की गयी, परन्तु मुख्य अभियंता के पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के अनुपालन में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध अधीक्षण अभियंता के द्वारा कोई भी नियमानुकूल कार्रवाई नहीं की गयी। विगत चार वर्षों में विभाग के द्वारा इस प्रमण्डल में चार विभिन्न कार्यपालक अभियंताओं को पदस्थापित एवं स्थानांतरित किया गया। गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित खाली आवासों के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने तथा प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु प्रमण्डल के विभिन्न पत्रों के माध्यम से उनके द्वारा श्री पंकज कुमार, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा को निदेशित किया गया। श्री पंकज, प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता27 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 एवं शिविर प्रभारी के द्वारा अपने पत्रांक-278 दिनांक-16.11.2018 के माध्यम से सूचित किया गया कि श्री ओम प्रकाश, शिविर प्रभारी कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध टाल-मटोल की नीति अपनाई जा रही है। चूँकि प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03. मोतिहारी के विभिन्न आवासों का देखभाल एवं वार्षिक संपोषण का कार्य सीधे शिविर प्रभारी कनीय अभियंता के प्रभार में रहता है तथा इस प्रमण्डल के शिविर प्रभारी कनीय अभियंता श्री ओम प्रकाश के द्वारा उक्त शिविर के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई नहीं की गयी तथा प्राथमिकी दर्ज भी नहीं करायी गयी। ऐसी स्थिति में श्री ओम प्रकाश, शिविर प्रभारी कनीय अभियंता को प्रमण्डल से स्थानांतरित रहने के कारण उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1380 दिनांक-20.11.2018 के माध्यम से श्री ओम प्रकाश, शिविर प्रभारी कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा को इस प्रमण्डल से दिनांक 20.11.2018 के प्रभाव से विरमित कर दिया गया तथा श्री सुरेन्द्र सिंह, कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा को उनसे प्रभार प्राप्त करने का निदेश दिया गया। प्रमण्डल के पत्रांक-1490 दिनांक-17.12.2018 एवं पत्रांक-140 दिनांक-02.02.2019 के माध्यम से स्मारित करने के बावजूद भी सुरेन्द्र सिंह, कनीय अभियंता के द्वारा शिविर प्रभारी कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा का प्रभार श्री ओम प्रकाश, कनीय अभियंता से नहीं प्राप्त किया गया तथा उनके द्वारा उक्त शिविर के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी गयी। श्री सिंह, कनीय अभियंता के द्वारा उक्त शिविर के प्रभारी कनीय अभियंता का प्रभार प्राप्त नहीं करने के संबंध में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-12 दिनांक-04.01. 2019 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को अवगत कराया गया। परन्तु अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के स्तर से श्री ओम प्रकाश, कनीय अभियंता एवं श्री सुरेन्द्र सिंह, कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के विरूद्ध कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निदेश नहीं दिया गया जो खेदजनक है।

बिहार सरकार, जल संसाधन विभाग की अधिसूचना संख्या-4632 दिनांक-12.12.2018 के द्वारा इस प्रमण्डल में तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के सहायक अभियंता के रिक्त पद पर श्री अनीश रंजन (I.D.-5184) को पदस्थापित किया गया। प्रमण्डल के कई पत्रों के माध्यम से उनके द्वारा अवैध रूप से आवांसित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु श्री रंजन, सहायक अभियंता को निदेशित किया गया। श्री रंजन, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता के द्वारा अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध न तो नियमानुकूल कार्रवाई की गयी और न प्राथमिकी दर्ज करायी गयी।

उनके द्वारा उक्त शिविर के खाली आवासों को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराने हेतु उक्त शिविर के प्रभारी सहायक अभियंता, प्रभारी कनीय अभियंता एवं चौकीदार पर दबाव बनाया गया तथा वेतन भुगतान बाधित किया गया जिसके फलस्वरूप शिविर के स्टाफ होस्टल के आवास संख्या-15, सिकरहना III टाइप आवास संख्या-01 एवं 12 तथा एफ टाइप आवास संख्या-3, 5, 11 एवं 43 को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराया गया।

पुनः उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-539 दिनांक-24.05.2019 के माध्यम से उक्त शिविर के खाली आवासों को अवैध कब्जाधारियों से विमुक्त कराने हेतु श्री अनीश रंजन, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा को निदेशित किया गया, परन्तु इस संबंध में उनके द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी। अधीक्षण अभियंता के निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के आवासों का डोर-टु-डोर निरीक्षण किया गया तथा प्रमण्डल के पत्रांक-619 दिनांक-14, 06.2019 के माध्यम से अवैध आवासित व्यक्तियों की अद्यतन सूची अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की इस अद्ययतन सूची पर श्री अनीश रंजन, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा हस्ताक्षर नहीं किया गया जिससे प्रमाणित होता है कि वे अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते थे। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी की अध्यक्षता में दिनांक-15.06.2019 को आवास आवंटन समिति की बैठक आयोजित की गयी जिसमें कई अवैध कब्जाधारियों (जल संसाधन विभाग के अधीन विभिन्न प्रमण्डलों में कार्यरत कर्मी) को उनके द्वारा अतिक्रमित आवासों को अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति के द्वारा आवंटित किया गया। तत्पश्चात्‌ शेष अतिक्रमित आवासों को विमुक्त कराने हेतु उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-661 दिनांक 26.06.2019 के माध्यम से कार्यालय आदेश निर्गत किया गया। अवैध कब्जाधारियों के द्वारा 72 घंटे के अंदर अतिक्रमित आवासों को खाली नहीं करने के पश्चात्‌ उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-929 दिनांक-14.08.2019 के माध्यम से आरक्षी अधीक्षक, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से अनुरोध किया गया। पुनः प्रमण्डल के पत्रांक-1125 दिनांक-11.10.2019 के माध्यम से गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के आवासों को अवैध कब्जाधारियों से विमुक्त कराने हेतु उनके द्वारा जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण से अनुरोध किया गया। परन्तु आरक्षी अधीक्षक, पूर्वी चम्पारण एवं जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के स्तर से उक्त शिविर के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी ।

खरीफ सिंचाई (2018-19) के अवधि में प्रमण्डलाधीन नहरों के संचालन के क्रम में प्रमण्डलाधीन तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, पहाड़पुर के अंतर्गत स्थानीय अज्ञात लोगों के द्वारा नहर के संरचनाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस सम्बन्ध में श्री मधुकान्त, कनीय अभियंता के द्वारा लिखित शिकायत करने पर भी थानाध्यक्ष, मलाही के द्वारा अज्ञात लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1159 दिनांक-29.09.2018 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण से अनुरोध किया गया। पुनः प्रमण्डलाधीन तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, अरेराज के अंतर्गत प्रशाखा शिविर, ओल्हा-1 एवं ओल्हा-2 के चहारदिवारी को तोड़कर पक्की सड़क का निर्माण करने वालों के विरूद्ध कनीय अभियंता के द्वारा लिखित शिकायत करने पर थानाध्यक्ष, हरसिद्धि के द्वारा प्राथमिकी नहीं किया गया। ऐसी28 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 स्थिति में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-1113 दिनांक-22.09.2018 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण से अनुरोध किया गया।

गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी में आवासित सरकारी कर्मियों के सेवानिवृत्त एवं स्थानांतरण होने के पश्चात्‌ उनके द्वारा धारित आवासों को विलम्ब से खाली करने के लिए उनके द्वारा उनलोगों से मानक दंड किराया की वसूली की गयी जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि हुई है। सुलभ प्रसंग हेतु प्रमण्डल के पत्रांक-258 दिनांक-28.02.2019, पत्रांक-457 दिनांक-29.04.2019 एवं पत्रांक-471 दिनांक-04.05.2019 की छाया प्रति संलग्न की गयी है।

उल्लेखनीय है कि उक्त शिविर में बिना विद्युत मीटर स्थापित कराये विद्युत उपभोग करने वाले इस प्रमण्डल के कर्मियों को प्रमण्डल के पत्रांक-1028 दिनांक-13.09.2019 के माध्यम से आवंटित आवासों में विद्युत मीटर स्थापित कराने का निदेश निर्गत किया गया जिसके अनुपालन से सरकारी राजस्व में वृद्धि हुई है तथा सरकार के विद्युत उर्जा के दुरूपयोग को रोका गया।

विदित है कि अभियंत्रण कार्य विभागों में योजना के निरूपण से कार्यान्वयन तक विभिन्न चरणों में कार्य सम्पादन के लिए प्रशासनिक एवं कार्य इकाई में पदस्थापित सभी पदाधिकारियों की भूमिका एवं दायित्व निर्धारित है। इसलिए सभी कार्य प्रमण्डलों के अधीन विभिन्न कार्यों के निष्पादन के लिए लिपिकीय कर्मी, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता अपने-अपने चरणवार भूमिका एवं दायित्वों के निर्वहन के लिए उत्तरदायी हैं। कार्यपालक अभियंता का क्षेत्राधिकार वृहद होता है, उन्हें प्रमण्डलीय कार्यालय से लेकर क्षेत्र में भी अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है, जिलाधिकारी के निदेश का अनुपालन करना पड़ता है तथा न्यायिक मामलों के निष्पादन के लिए माननीय उच्च न्यायालय में प्रतिशपथ दायर करना पड़ता है।

कोडल प्रावधान के अनुसार प्रमण्डलाधीन कार्यालय भवनों एवं आवासीय भवनों का देखभाल एवं वार्षिक संपोषण का कार्य कनीय अभियंता (मुख्यालय) के प्रभार में रहता है। तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी के अधीन कार्यालय भवनों तथा आवासीय भवनों का प्रभार श्री ओम प्रकाश कुमार, कनीय अभियंता (मुख्यालय), तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के अधीन था। प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के खाली आवासों के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने के लिए श्री ओम प्रकाश कुमार, कनीय अभियंता (मुख्यालय), तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा ही जिम्मेवार थे, परन्तु उनके द्वारा अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध कोई भी नियमानुकूल कार्रवाई नहीं की गयी। श्री पंकज कुमार, शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, जीवधारा के द्वारा पत्रांक-278 दिनांक-16.11.2018 के माध्यम से सूचित किया गया कि श्री ओम प्रकाश कुमार, प्रभारी कनीय अभियंता के द्वारा उक्त शिविर के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने के लिए टाल-मटोल किया जा रहा है।

उपर्युक्त कंडिकाओं में वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित आवासों में अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के पत्रांक-2553 दिनांक-10. 09.2018 कें माध्यम से अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी को निदेश दिया गया था। मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के द्वारा उनको निदेश नहीं दिया गया था। पूर्व में मुख्य अभियंता के पत्रांक-2121 दिनांक-28.07.2018 के द्वारा उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के संबंध में अधीक्षण अभियंता से प्रतिवेदन की माँग की गयी। मुख्य अभियंता के पत्रांक-2121 दिनांक-28.07.2018 के आलोक में अधीक्षण अभियंता के द्वारा पृष्ठांकित पत्रांक-910 दिनांक-31.07.2018 के द्वारा उनसे अवैध आवासित व्यक्तियों के संबंध में प्रतिवेदन की माँग की गयी। अधीक्षण अभियंता के निदेश के अनुपालन में उनके द्वारा प्रमण्डल के पत्रांक-988 दिनांक-30.08. 2018 के माध्यम से प्रमण्डलाधीन गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी के आवासों के अवैध कब्जाधारियों के संबंध में प्रतिवेदन उन्हें समर्पित किया गया। उन के इस प्रतिवेदन को अधीक्षण अभियं के द्वारा पत्रांक-1045 दिनांक-01.09.2018 के माध्यम से मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। उक्त शिविर के आवासों के अवैध रूप से कब्जाधारियों के संबंध में प्रतिवेदन प्राप्त होने पर मुख्य अभियंता के द्वारा पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 के माध्यम से अधीक्षण अभियंता-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी को अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने का निदेश दिया गया। परन्तु, मुख्य अभियंता के उक्त निदेश के. अनुपालन में श्री ब्रज किशोर रजक, अधीक्षण अभियंता-सह-अध्यक्ष, आवास आवंटन समिति, मोतिहारी के द्वारा न तो वर्ष 2018 में आवास आवंटन समिति की बैठक आहुत की गयी और न ही नियमानुकूल कार्रवाई की गयी। उनके द्वारा अवैध आवासित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध करायी गयी सूची में अधिकांश मोतिहारी स्थित जल संसाधन विभाग के अधीन विभिन्न प्रमण्डलों में पदस्थापित एवं कार्यरत कर्मी सम्मिलित थे। अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों में विभिन्न मुख्य अभियंता के परिक्षेत्रों के अधीन विभिन्न प्रमण्डलों के सरकारी कर्मियों के सम्मिलित रहने के कारण उनके विरूद्ध अधीक्षण अभियंता के स्तर से ही नियमानुकूल कार्रवाई की जा सकती थी। उक्त शिविर में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की पहचान कराकर तथा इसे सूचीबद्ध करके प्रमण्डल के पत्रांक-988 दिनांक-30.08.2018 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई हेतु इस सूची को अधीक्षण अभियंता को समर्पित करना, अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध उनके स्तर से प्रथम नियमानुकूल कार्रवाई थी जिसको संचालन पदाधिकारी के द्वारा नजर-अंदाज कर दिया गया। यह कहना कि अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध उनके द्वारा दिनांक 24.05. 2019 से आवश्यक कार्रवाई आरम्भ किया गया, उचित नहीं प्रतीत होता है। उक्त शिविर के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करना तथा प्राथमिकी दर्ज कराना शिविर के प्रभारी श्री ओम प्रकाश कुमार (ID-J10144), कनीय अभियंता तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल जीवधारा की जिम्मेवारी थी। अतएव मुख्य अभियंता के निदेश के आलोक में अवैध कब्जाधारियों पर आवश्यक कार्रवाई काफी विलम्ब से दिनांक-24.05.2019 से आरम्भ करने के संबंध में उन पर लगाया गया यह आरोप न तो न्यायसंगत है और न ही स्वीकार करने योग्य है। यह आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।29 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा उपरोक्त आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। आरोपित पदाधिकारी श्री नारायण द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन में आरोप सं॰-01 के संदर्भ में उल्लेखित किया गया है कि श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा उनके पत्रांक-1416 दिनांक-04.12. 2018 एवं पत्रांक-1495 दिनांक-26.12.2018 द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण हेतु अधीक्षण अभियंता श्री ब्रज किशोर रजक द्वारा एक भी स्मार पत्र आरोपित पदाधिकारी को नहीं दिया गया है। श्री नारायण द्वारा श्री रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता पर यह भी लांछन लगाया गया है कि श्री रजक द्वारा दुर्भावना से ग्रसित होकर श्री नारायण को किसी भी प्रकार से दण्डित करने की मंशा से श्री नारायण पर मनगढ़ंत एवं असत्य आरोप लगाकर उनके (अधीक्षण अभियंता के) पत्रांक-18 दिनांक-05.01.2019 के माध्यम से आरोप-पत्र मुख्य अभियंता, मोतिहारी को समर्पित कर दिया गया। इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है, जो श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध दुर्भावना से ग्रसित होने की मंशा को प्रमाणित करता हो। आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा दिये निदेशों के अपुनालन के साथ-साथ जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण के द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन भी सक्रिय रहते हुए किया है, तथा प्रमंडलाधीन विभागीय कार्याें के निष्पादन में व्यस्त रहने के कारण एवं जिला प्रशासन द्वारा दिये गये निदेशों के अनुपालन में व्यस्त रहने के कारण अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये उक्त दो स्पष्टीकरणों का भूलवश विलम्ब से जवाब समर्पित कर उनके निदेश का अनुपालन भी किया है। श्री नारायण के उक्त स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है कि श्री नारायण द्वारा अधीक्षण अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरणों का जवाब दिनांक-05.01.2019 के पश्चात्‌ काफी विलम्ब से समर्पित किया गया, जिसका प्रमाण निम्नवत्‌ है :- (i) अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1416 दिनांक-04.12.2018 द्वारा माँगे गये स्पष्टीकरण का जवाब कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-980 दिनांक-30.08.2019 द्वारा एवं (ii) अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1495 दिनांक-26.12.2018 द्वारा माँगे गये स्पष्टीकरण का जवाब कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-537 दिनांक-24.05.2019 द्वारा दिया गया। आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप संख्या-01 के संदर्भ में बिना किसी साक्ष्य/अभिलेख के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री ब्रज किशोर रजक के विरूद्ध दुर्भावना से ग्रसित होने का लांछण लगाते हुए यह स्वीकार भी किया गया है कि विभागीय कार्यों के निष्पादन के साथ-साथ जिला प्रशासन से प्राप्त निदेशों के अनुपालन में संलग्न रहने के कारण भूलवश अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये स्पष्टकरणों का विलम्ब से जवाब समर्पित किया गया। अतएव श्री नारायण द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में श्री नारायण के उक्त स्वीकारोक्ति की भूलवश अधीक्षण अभियंता के द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरणों का विलम्ब से जवाब समर्पित किया गया से, उनके विरूद्ध गठित यह आरोप यथावत आंशिक रूप से प्रमाणित होता है तथा श्री नारायण द्वारा समर्पित अभ्यावेदन मे कोई भी नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने से श्री नारायण द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी श्री नारायण द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-03 के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप सं॰-03 के लिए श्री नारायण द्वारा समर्पित बचाव-बयान/अभिकथन में आरोप सं॰-01 के संदर्भ में श्री नारायण द्वारा विलंब से समर्पित स्पष्टीकरणों के आलोक में आरोप सं॰-03 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है, जो न्यायोचित नहीं है। श्री नारायण द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन करते हुए स्वीकृत वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न कार्याें का निष्पादन किये जाने का उल्लेख किया गया है। श्री नारायण द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त करते हुए दोनों आरोपों के लिए दिये गये अलग-अलग जवाबों के आलोक में मंतव्य अंकित किया जाना चाहिए था, का उल्लेख किया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये दो स्पष्टीकरणों यथा (i) अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1416 दिनांक-04.12.2018 से पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब श्री लक्ष्मी नारायण, कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रमंडलीय पत्रांक-980 दिनांक- 30.08.2019 से, अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रेषित पत्र के आठ माह से भी अधिक विलम्ब के पश्चात्‌ तथा (ii) अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1495 दिनांक-26.12.2018 से पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब श्री लक्ष्मी नारायण, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-537 दिनांक-24. 05.2019 से, अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रेषित पत्र के लगभग पाँच माह के विलम्ब के पश्चात्‌ समर्पित किया गया। उक्त स्पष्टीकरणों का अत्यंत विलम्ब से दिये गये जवाबों से स्पष्ट है कि, श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कलीन कार्यपालक अभियंता द्वारा उच्चाधिकारियों के द्वारा दिये गये आदेश की अवहेलना के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही तथा उदासीनता बरती गयी है। चूँकि उच्चाधिकारी द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन श्री नारायण द्वारा ससमय नहीं किया गया है, अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री नारायण के विरूद्ध गठित इस आरोप के संदर्भ में आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का दिये गये मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप सं॰-03 यथावत्‌ आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।30 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप सं॰-03 के संदर्भ में यह उललेख किया गया है कि, आरोपित पदाधिकारी श्री नारायण से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये दो स्पष्टीकरणों का जवाब दिनांक-05.01.2019 के पश्चात्‌ भी काफी विलम्ब से दिया गया है, जिसका उल्लेख उपरोक्त समीक्षा में किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त विलम्ब के आधार पर आरोपित पदाधिकारी श्री नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निदेश का ससमय अनुपालन नहीं करने तथा उक्त की अवहेलना करते हुए अत्यंत विलम्ब से जवाब समर्पित करने के उक्त कृत्य के आलोक में श्री नारायण द्वारा कर्तव्यों के प्रति लापरवाही तथा उदासीनता बरते जाने के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जिससे सहमत होते हुए आरोप संख्या-03 यथावत आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। साथ हीं आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में किये गये स्वीकारोक्ति कि, विभिन्न कार्याें के निष्पादन में संलग्न रहने के कारण भूलवश अधीक्षण अभियंता द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरणों का जवाब विलम्ब से समर्पित किया गया है से आरोप प्रमाणित रहने की स्थिति स्पष्ट है तथा उक्त के आलोक में श्री नारायण द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन सहित सम्बंधित अभिलेखों एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन के अवलोकन से परिलक्षित होता है कि तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के गंडक शिविर सं0-3, मोतिहारी में बिना सक्षम पदाधिकारी के अनुमति प्राप्त किये ही कई व्यक्ति अवैध रूप से आवासित हो गये जिनसे सरकारी आवासों को मुक्त कराये जाने हेतु कार्रवाई आरोपित पदाधिकारी के स्तर से अपेक्षित थी। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी का प्रभार दिनांक 30-06-2018 को लेने के बाद प्रमंडलीय पत्रांक-988, दिनांक 30.08.2018 से गंडक शिविर सं0-3, मोतिहारी में अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की सूची अधीक्षण अभि0 को समर्पित कर दिया जाना परिलक्षित होता है। उक्त के क्रम में अग्रेत्तर कार्रवाई करते हुये अधीक्षण अभि0 ने अपने पत्रांक 1045 दि0 01.09.2018 से मुख्य अभि0 को सूचित किया। तदोपरान्त मुख्य अभियंता के पत्रांक 2553 दि0 10.09.2018' से अवैध रुप से आवासित कब्जाधारियों पर नियमानुकूल कार्रवाई करने का निदेश दिया। मुख्य अभियंता के उक्त पत्रांक-2553 दिनांक-10.09.2018 पर पृष्ठांकित पत्रांक-1094 दिनांक-13.09.2018 के माध्यम से श्री ब्रज किशोर रजक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के पत्रांक-1045 दिनांक 01.09.2018 तथा पत्रांक-1070 दिनांक-10.09.018 के प्रसंग में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमण्डल, मोतिहारी को उक्त शिविर में डोर टु डोर भौतिक सत्यापन के आधार पर पुनः प्रत्येक आवासवार अवैध आवासितों के लिए प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि गंडक शिविर संख्या-03, मोतिहारी स्थित खाली आवासों के अवैध कब्जाधारियों के विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने तथा प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु प्रमंडल के विभिन्न पत्रों के माध्यम से आरोपित पदाधिकारी के शिविर प्रभारी सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, जीवधारा को निदेशित किया गया था, जिसके अनुपालन में सहायक अभियंता द्वारा अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों के विरूद्ध कोई नियमानुकूल कार्रवाई नहीं की गयी और ना हीं प्राथमिकी दर्ज किया गया। इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा कोई अभिलेख/साक्ष्य अपने अभ्यावेदन में समर्पित नहीं किया गया है। उक्त परिप्रेक्ष्य में श्री नारायण का उक्त बयान स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। श्री नारायण द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में प्रस्तुत किये गये अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट है कि अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-1094 दिनांक-13.09.2018 के अनुपालन में श्री नारायण कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रथम कार्रवाई के रूप में प्रमंडलीय पत्रांक-539 दिनांक-24.05.2019 से उक्त शिविर के खाली आवासों को अवैध कब्जाधारियों से विमुक्त करने हेतु पत्राचार किया गया है। तदोपरांत प्रमंडलीय पत्रांक-619 दिनांक-14.06.2019 के माध्यम से अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों की अद्यतन सूची अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया है। तत्पश्चात्‌ कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-661, दिनांक 26.06. 2019 के द्वारा अवैध रूप से आवासित व्यक्तियों को आवास खाली करने हेतु नोटिस दिया गया। इस प्रकार उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि गंडक शिविर-3, मोतिहारी के अवैध आवासितों की पहचान दिनांक 30.08.2018 तक कर लिये जाने के बावजूद इन अवैध आवासित कब्जाधारियों से आवास खाली कराने हेतु आरोपित पदाधिकारी श्री नारायण द्वारा लगभग छः माह व्यतीत होने के उपरांत विलम्ब से कार्रवाई किया जाना परिलक्षित होता है। आरोपित पदाधिकरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में प्रस्तुत किये गये अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट है कि गंडक शिविर सं0-3 मोतिहारी स्थित आवासों में अवैध कब्जाधारियों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी के पत्रांक-2553 दिनांक 10.09.2018 द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी के पत्रांक-1094 दिनांक- 13.09.2018 से कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी को दिये गये निदेश के बावजूद भी आरोपित पदाधिकारी द्वारा आवश्यक कार्रवाई काफी विलम्ब से दिनांक 24.05.2019 से प्रारम्भ किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है, जो उनके विरूद्ध गठित उक्त आरोप को अप्रमाणित सिद्ध कर सके। अतएव आरोपित पदाधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-05 यथावत प्रमाणित होता है तथा श्री नारायण द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री लक्ष्मी नारायण, तत0 कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध गठित आरोप सं0-01, 03 को आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं0-05 को प्रमाणित पाया गया है।

मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री लक्ष्मी नारायण (आई0डी0-4548), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, कमाण्ड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन प्रमंडल-02, सोन भवन, पटना के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया है :-

31 (cid:464)बहार गजट, 4 2023

उक्त निर्णय के आलोक में श्री लक्ष्मी नारायण (आई0डी0-4548), तत0 कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, कमाण्ड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन प्रमंडल-02, सोन भवन, पटना के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

दोन नहर प्रमंडल, राम नगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ एवं दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 एवं अन्य वांछित अभिलेख लगभग तीन वर्ष बाद अत्यन्त विलम्ब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी अनियमितता के लिए श्री राज नन्दन प्रसाद (आई0डी0-जे 7530), तत्कालीन कनीय अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-824 दिनांक 25.04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-662 दिनांक 23.07.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. बाढ़ 2013 मेंं दिनांक 01.07.13 से 15.07.2013 तक की अवधि में गनौली बायाँ एवं दायाँ तथा हथुवनवा बाँध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का तीन वर्षो बाद अत्यन्त विलम्ब से प्रपत्र 24 की स्वीकृति हेतु अधीक्षण अभियंता को उपलब्ध कराया गया, जिसके कारण विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.13 से निर्गत निदेश का अवहेलना होना परिलक्षित है। उक्त निदेश की कंडिका-03 में स्पष्ट उल्लेख है कि बाढ़ के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु संवेदकों का नामांकन 15-15 दिनों के लिए किया जाना है। 15 दिनों तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का पूर्ण विवरणी नामांकन प्रस्ताव के साथ अगले एक सप्ताह के अन्दर क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाय। साथ ही निर्गत निदेश में यह भी अंकित है कि पत्र में वर्णित कंडिकाओं में से कोई भी कंडिका में शिथिलता बरतने पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो को अनियमित माना जायेगा एवं स्वीकृति नहीं दी जायेगी एवं यदि कोई न्यायिक एवं अन्य प्रक्रिया में भुगतान के लिये बाध्य किया जाता है तो राजकोष से की गयी भुगतान के उक्त राशि के लिये सम्पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता की होगी। इस भुगतान के लिए उनके विरूद्ध नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जायेगी।

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.13 से 15.07.13 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अपने पदस्थापन की तिथि दिनांक 04.07.14 से लगभग 6 माह की अवधि बीत जाने के बाद दिनांक 10.12.14 को अधीक्षण अभियंता को उपलब्ध करायी गयी। जो निर्गत विभागीय निदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है तथा प्रपत्र 24 विलम्ब से उपलब्ध कराने के कारण भुगतान हेतु संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी। जिसके कारण विभाग को अनावश्यक उलझन झेलना पड़ा। उनका उक्त कृत्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्य के प्रति घोर लापरवाही कर्त्तव्य एवं दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

2. श्री प्रसाद, तत0 कनीय अभियंता द्वारा उपयुक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता करते हुए विभागीय निर्देशों के विपरीत मनमाने ढंग से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य का वांछित अभिलेख यथा प्रपत्र-24 समय पर नहीं भेजना, कार्य के प्रति घोर उदासीनता तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने एवं दायित्वों का समय पर निर्वहन नहीं किया जाना दर्शाता है तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना परिलक्षित करता है।

3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री प्रसाद के अनियमित —त निजी स्वार्थवश विभागीय निदेशों का उल्लंघन करते हुए, कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का वांछित कागजात समय पर नहीं भेजना परिलक्षित करता है कि उनके द्वारा कार्य के प्रति घोर उदासीनता बरती गयी तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना प्रतीत होता है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का भी उल्लंघन है।

उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-24 दिनांक 25.01.2022 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप के बिन्दु 1, 2 एवं 3 प्रमाणित नहीं पाये जाने का मंतव्य दिया गया।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1067 दिनांक 11.05. 2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री प्रसाद को उपलब्ध कराते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी :-

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के अन्तर्गत दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। विभागीय पत्रांक-964 दिनांक 09.05.2013 के आलोक में उक्त कार्य का पूर्ण विवरणी (परिमाण विपत्र सहित) नामांकन प्रस्ताव प्रपत्र-24 अगले एक सप्ताह के अन्दर विभाग को अनुमोदन हेतु उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु संबंधित32 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 प्रपत्र-24 विभाग को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा पत्रांक-2787 दिनांक 31.12.2015 से उपलब्ध कराया गया। विभाग द्वारा विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 की कंडिका-3 के आलोक में कराये गये आलोच्य कार्य को अनियमित मानते हुए अस्वीकृत कर दिया गया।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक-01.07.2013 से 15.07. 2013 तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र-24 तैयार कर विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 के आलोक में दिनांक-20.07.2013 को कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को समर्पित कर दिया गया था, जिसकी पुष्टि प्रपत्र-24 में अंकित आपके हस्ताक्षर से होती है जिसमें तिथि-20.07.2013 अंकित है। प्रपत्र-24 पर सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक-20.07.2013 एवं कार्यपालक अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक-21.08.2013 को अंकित है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 द्वारा प्रपत्र आवश्यक सुधारोपरांत अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया को भेजा गया था। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेखित है कि कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा प्रपत्र-24 में सुधार करने, विलंब के लिए जिम्मेवारी निर्धारित करने एवं अन्य बिन्दुओं पर मतभेद होने के कारण प्रपत्र 24 को बार-बार वापस करने के कारण विभाग को ससमय अभिलेख समर्पित नहीं किया जा सका।

उक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनको दोषी प्रतीत नहीं होने का मंतव्य अंकित किया गया, परन्तु सुधार हेतु मुख्य अभियंता के पत्रांक-781 दिनांक-31.03.2014 द्वारा अंचलीय कार्यालय में लौटाया गया। प्रपत्र-24 कार्यपालक अभियंता को अंचलीय पत्रांक-319 दिनांक 29.04.2014 द्वारा भेजा गया, जिसे सुधारोपरांत कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1216 दिनांक 21.11.2014 द्वारा पुनः अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। प्रमंडलीय कार्यालय में लगभग 07 माह हुए इस विलंब के लिए जाँच प्रतिवेदन में कोई साक्ष्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतएव इस विलंब के लिए उनको जिम्मेवार माना जा सकता है।

उक्त आलोक में श्री प्रसाद से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बांध में कराये जा रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को कनीय अभियंता, सहायक अभियन्ता, कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा पूरा कराया गया था। कार्य का एन॰/आर॰, प्रपत्र-24 एवं अन्य अभिलेख भी समय पर उनके द्वारा दिनांक-20.07.2013 को सहायक अभियंता के माध्यम से प्रमण्डल में भेजा गया तथा कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल रामनगर द्वारा पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 द्वारा अंचल कार्यालय तिरहुत नहर अंचल बेतिया को समर्पित किया गया, जिसकी पुष्टि अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 से होती है। इसी पत्रांक-257 दिनांक- 31.03.2015 में वर्णित है कि कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013, अंचल में दिनांक-20.03. 2014 को पुनः (दोबारा) प्राप्त हुआ, जबकि प्रमण्डलीय कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के निर्गत बही पर सिर्फ एक बार ही पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 दर्ज है।

सम्बन्धित प्रपत्र-24 अंचल कार्यालय में उन्हीं के अनुसार दिनांक-20.03.2014 को प्राप्त होता है तो भी इस वित्तीय वर्ष में 12 दिन शेष था। अगर उच्चाधिकारी चाहते तो कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को कैम्प करा कर निदान निकाला जा सकता था, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 से स्पष्ट है कि, मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रपत्र-24 का सुधार करने में विलंब के लिए जिम्मेवारी निर्धारित करने एवं अन्य बिन्दुओ पर मतभेद होने के कारण भुगतान कराने पर ध्यान नहीं दिया गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2013-2014 खत्म हो रहा था तब भी उच्चाधिकारी प्रपत्र-24 सुधार करने मे लगे थे। मुख्य अभियंता के पत्रांक-781 दिनांक-31.03.2014 द्वारा वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन अंचल कार्यालय को प्रपत्र-24 लौटाया गया। अधीक्षण अभियंता भी इसे पत्रांक-319 दिनांक-29.04.2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता को वित्तीय वर्ष खत्म होने के एक महीना बाद लौटाते है। इस प्रकार उच्चाधिकारी द्वारा, कराये गये कार्य के भुगतान पर ध्यान नहीं दिया गया। जहाँ तक प्रमण्डलीय कार्यालय में सात माह विलंब की बात है तो इस सम्बंध में उन्हेें किसी प्रकार की जानकारी प्रमण्डल से नहीं दी गई और न कोई पत्राचार ही हुआ। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल बेतिया के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 द्वारा उक्त प्रपत्र-24 समर्पित करने में कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल रामनगर को ही विलंब का कारण बताया गया है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.2013 से दिनांक 15.07.2013 तक गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में कराये जा रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य अवधि के दौरान वर्णित कार्य का एन॰/आर॰, प्रपत्र 24 एवं अन्य अभिलेख कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 20. 07.2013 को प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित किया गया। उनके उक्त कथन की पुष्टि (प्रपत्र-24) के अभिलेख से होती है जिस पर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा एक माह के उपरान्त दिनांक 21.08.2013 में हस्ताक्षर अंकित कर अपने पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 द्वारा अंचलीय कार्यालय को समर्पित किया गया है। उक्त पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 अंचलीय कार्यालय को दिनांक 20.03.2014 को प्राप्त हुआ जैसा कि तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री उमानाथ राम के पत्रांक 243 दिनांक 21.03.2014 जो कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को संबोधित है से स्पष्ट है। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त पत्रांक 243 दिनांक 21.03.14 द्वारा प्रपत्र 24 में पायी गयी कतिपय त्रुटियों तथा कतिपय तिथियों का एन॰आर॰ अंचल कार्यालय को पूर्व से सम्प्रेषित नहीं रहने के कारण प्र"नगत प्रपत्र-24 को प्रमंडलीय कार्यालय को आवश्यक सुधार कर पुनः समर्पित करने के निदेश के साथ लौटा दिया गया। प्रपत्र-24 में कतिपय त्रुटियों के सुधारोपरांत तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर द्वारा प्रश्नगत प्रपत्र-24 अपने पत्रांक 326 दिनांक 26.03.201433 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 द्वारा अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया को समर्पित कर दिया गया। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया द्वारा उनके पत्रांक 269 दिनांक 29.03.2014 से मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर षिविर मोतिहारी को समर्पित किया गया। तत्प"चात्‌ तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) द्वारा अपने पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को प्रष्नगत प्रपत्र 24 वित्तीय वर्ष 2013-14 के समाप्ति के उपरान्त मुख्य अभियंता कार्यालय को उपलब्ध कराये जाने में, किस परिस्थिति में विलम्ब हुआ, के कारण सहित दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित्‌ कर मुख्य अभियंता कार्यालय को सूचित करने का निदेष दिया गया।

यहाँ यह तथ्य उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 द्वारा लौटाये गये प्रपत्र 24 में विलम्ब के लिए दोषी पदाधिकारियों को चिन्हि्‌त कर सूचित किये जाने का निदेष है परन्तु प्रपत्र 24 में किसी प्रकार की त्रुटि का उल्लेख नहीं किया गया है। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा मुख्य अभियंता के पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 को प्रमंडलीय कार्यालय दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को, अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 319 दिनांक 29.04.2014 द्वारा (दिनांक 31. 03.2014 से लगभग एक माह के पष्चात्‌) उक्त प्रपत्र-24 लौटाया गया। पुनः उक्त प्रपत्र 24 जिस पर श्री प्रसाद के साथ तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक 25.03.2014 को अंकित है तथा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता का हस्ताक्षर 28.03.2014 को अंकित है को कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर द्वारा अपने पत्रांक 1313 दिनांक 10.12.2014 द्वारा अंचलीय कार्यालय को दिनांक 14.12.2014 को उपलब्ध कराया गया। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त प्रपत्र 24, सभी तथ्यों के उल्लेख के साथ अपने पत्रांक 257 दिनांक 31.03.2015 द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय को समर्पित किया गया जिसे तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक 2787 दिनांक 31.12.2015 द्वारा काफी विलम्ब से विभाग को समर्पित किया गया।

साथ ही यह तथ्य उल्लेखनीय है कि प्र"नगत प्रपत्र-24 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक के बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का) प्रपत्र-24 के अवलोकन से दोनों प्रपत्रों में बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें की मात्रा और राशि में भिन्नता प्रकट होती है, जिससे स्पष्ट है कि आरोपित अभियंताओं के स्तर से त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 तैयार कर समर्पित किया गया। तदोपरांत उक्त प्रपत्र-24 का सुधार काफी विलम्ब से करते हुए इनके द्वारा माह नवम्बर 2014 के अंत में प्रमंडल में समर्पित किया जाना परिलक्षित होता है। अतएव उक्त रक्षित प्रपत्र-24 से श्री राज नन्दन प्रसाद, तत0 कनीय अभियंता के विरूद्ध विलम्ब से प्रपत्र-24 समर्पित करने का आरोप प्रमाणित परिलक्षित है।

प्रष्नगत प्रपत्र 24 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013) के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री प्रसाद के द्वारा बार-बार त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 तैयार कर समर्पित किये जाने तथा उसके सुधार में अनावश्यक विलम्ब किये जाने के कारण श्री राज नन्दन प्रसाद, तत्कालीन कनीय अभियंता सम्प्रति सहायक अभियंता द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध आरोप के बिन्दु (1), (2) एवं (3) यथावत प्रमाणित पाया गया है।

मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री राज नन्दन प्रसाद (आई0डी0-जे 7530), तत्कालीन कनीय अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सहायक अभियंता, पुनपुन बराज प्रमंडल-1, गोह के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया :-

उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-722 दिनांक 04.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1402 दिनांक 12.07.2023 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

अतएव वर्णित तथ्याें के आलोक में श्री राज नन्दन प्रसाद (आई0डी0-जे 7530), तत्कालीन कनीय अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सहायक अभियंता, पुनपुन बराज प्रमंडल-1, गोह के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री प्रसून कुमार, आई0डी0-3405, तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध अवैध रूप से विभागीय नहर चाअ भूमि की लगान रसीद काटने संबंधी आरोप के लिए आरोप पत्र गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-739, दिनांक-02. 08.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के विहीत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इसी क्रम में दिनांक-30.11.2022 को श्री प्रसून कुमार सेवानिवृत्त हो गए। अतएव श्री प्रसून कुमार, सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के दिनांक-30.11.2022 को सेवानिवृत्त होने के कारण पूर्व से संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता हैं।34 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की जाँच Central Soil Material Research Station, New Delhi से कराये जाने के उपरांत नमूनों के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा में कमी का आकलन करते हुए एवं संपादित मिट्टी कार्य की गुणवत्ता एवं मात्रात्मक जाँच किये जाने के उपरांत विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित किये गये पूरक जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए ID-4372 को विभागीय अधिसूचना सं0-1610 दिनांक 25.07.2018 द्वारा निलंबित किया गया एवं विभागीय पत्रांक-2147 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री चौधरी से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-768 दिनांक 05.04.2022 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में उल्लेखित है कि आरोपित पदाधिकारी श्री चौधरी द्वारा समर्पित बचाव बयान में उल्लेख किया गया है कि आलोच्य कार्य इनके पदस्थापन काल से पूर्व निर्मित हो गया था एवं इसके कुछ मदो का भुगतान उनके कार्यकाल में हुआ, परन्तु उनके द्वारा पी0सी0सी0 मद का भुगतान नहीं किया गया है साथ ही श्री चौधरी द्वारा बचाव बयान के साथ संलग्न कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा के पत्रांक-651 दिनांक 22.06.2022 जो संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग को संबोधित है से सूचित किया गया है कि मापीपुस्त में आलोच्य कार्य के PCC (1:2:4) मद का मापी दर्ज नहीं है एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि श्री चौधरी द्वारा पारित विपत्रों के अवलोकन से प्रतीत होता है कि इस मद का भुगतान भी उनके द्वारा नहीं किया गया है। उक्त के आलेाक में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित नहीं पाते हुए कार्यपालक अभियंता, बथनाहा से निर्गत पत्रांक-651 दिनांक 22. 06.2022 का सत्यापन कराने का मंतव्य दिया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-145 दिनांक 24.01.2023 द्वारा कार्यपालक अभियंता, बथनाहा से प्रतिवेदन की मांग की गयी, तदालोक में कार्यपालक अभियंता, बथनाहा द्वारा पत्रांक-567 दिनांक 28.04.2023 द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेखित है कि श्री चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता इस प्रमंडल (सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा) में दिनांक 08.03.2023 से दिनांक 15.07.2023 तक पदस्थापित थे। उनके द्वारा पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के भुगतान से संबंधित मापपुस्त संख्या-2805 के अवलोकन से पता चलता है कि उक्त कार्य से संबंधित PCC (1:2:4) का मापी अंकित नहीं है। पुनः विभागीय पत्रांक-893 दिनांक 01.06.2023 द्वारा कार्यपालक अभियंता, बथनाहा से स्पष्ट प्रतिवेदन की मांग की गयी, तदालोक में कार्यपालक अभियंता, बथनाहा द्वारा पत्रांक-859 दिनांक 16.06. 2023 द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के कार्यान्वयन अन्तर्गत इस प्रमंडलाधीन श्रीनगर वितरणी के वि0दू0 1.50 (वास्तविक रूप से वि0दू0 2.20) पर निर्मित आउटलेट के PCC कार्य (1:2:4) एवं उक्त आउटलेट से संबंधित अन्य कार्य मापपुस्त सं0-2805 में दर्ज किया गया है इस मापपुस्त सं0-2805 के पृ0 24 के अवलोकन से द्रष्टव्य है कि पी0सी0सी0 कार्य की प्रविष्टि उक्त मापपुस्त में नहीं की गयी है, साथ ही इस कार्य से संबंधित अन्य मापपुस्तों का भी गहन अवलोकन किया गया है तथा किसी भी मापपुस्त में श्रीनगर वितरणी के वि0दू0 2.20 पर अवस्थित आउटलेट के पी0सी0सी0 कार्य की मापी दर्ज नहीं किया गया है। जब कार्य की मापी की प्रविष्टि मापपुस्त में नहीं की गयी है तो स्पष्टतः इसका भुगतान भी नहीं किया गया है।

उपरोक्त तथ्यों से यह ज्ञात होता है कि श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बथनाहा द्वारा पी0सी0सी0 कार्य मद की प्रविष्टि किसी मापपुस्त में नहीं की गयी है एवं कार्य मद का भुगतान नहीं किया गया है। सम्यक समीक्षोपरांत श्री महेन्द्र चौधरी (ID-4372), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में अंकित किये गये मंतव्य यथा "आरोप श्री चौधरी पर प्रमाणित नहीं होता है", से सहमत होते हुए आरोप मुक्त करते हुए निलंबन मुक्त करने एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(3) के प्रावधान के तहत निलंबन अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भत्ते का भुगतान (पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्ता का समायोजन करते हुए) करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेन्द्र चौधरी (ID-4372), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता को आदेश निर्गत तिथि से आरोप मुक्त करते हुए निलंबनमुक्त किया जाता है एवं निलंबन अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भत्ता का भुगतान (पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्ता का समायोजन करते हुए) किया जाएगा।35 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर, संप्रति सेवा से बर्खास्त, के विरूद्ध बाढ़ 2019 के अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर के अंतर्गत 03 (तीन) अद्‌द कटाव/टूटान बिन्दुओं यथा-नरूआर, गोपलखा एवं रखवाड़ी स्थल का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशों का उल्लंघन करने तथा कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1617 दिनांक-30.07.2019 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1222 दिनांक-16.10.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-01 को प्रमाणित, आरोप सं0-02 को आंशिक प्रमाणित, आरोप सं0-03 के प्रथम अंश के अप्रमाणित एवं आरोप सं0-03 के द्वितीय अंश को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य में उपरोक्त प्रमाणित आरोपों से सहमत होते हुए एवं आंशिक प्रमाणित व अप्रमाणित आरोपों से असहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों एवं असहमति के बिन्दु पर श्री प्रकाश से विभागीय पत्रांक-503 दिनांक 07.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। उपर्युक्त के आलोक में श्री प्रकाश के पत्रांक-शून्य दिनांक 30.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) विभाग में समर्पित किया गया, जिसके समीक्षोपरांत श्री प्रकाश के द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया एवं सभी (तीनों) आरोपों को प्रमाणित पाया गया। तदालोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत बाढ़ 2019 की अवधि में 03 (तीन) अदद कटाव/टूटान बिन्दुओं का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशों का उल्लंघन करने संबंधी आरोपों के लिए श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर को विभागीय अधिसूचना सं0-2698 दिनांक 02.12.2022 द्वारा "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री प्रकाश द्वारा विभाग में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया; जिसमें उनके द्वारा निम्न बचाव बयान दिया गया :- " Most Respectfully Sheweth:- 1. The present Review in the Form of Memorial under Rule-24(2) of Bihar Government Servants (Classification, Control & Appeal) Rules, 2005 (as amended up to date) for setting aside Notification as contained in Memo No.- 2698 dated 02.12.2022 issued under the signature of the Deputy Secretary of Government of Bihar, Water Resources Department, Patna is being preferred by the undersigned including setting aside of Prapatra-Ka and Inquiry Report on the ground that the entire disciplinary proceeding is contrary to the provisions contained in Bihar CCA Rules, 2005, and in teeth of law laid down by Hon'ble Supreme Court and Hon'ble Patna High Court and also the entire proceeding is in blatant violation of principles of natural justice. 2. The Department vide Letter no.- 2229 (Anu) dated 18.10.2019, issued Prapatra-Ka along with Imputation of Charges, Inspection Report dated 26.07.2019 issued by Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Patna, Directions dated 16.07.2019 issued jointly by Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Patna and Chairman, Flood Fighting Force, Darbhanga and copy of Standard Operating Procedure (SOP). (Photocopy of letter dated 18.10.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-1). The undersigned vide letter dated 10.12.2019 asked for certain documents which are mentioned in the said letter. (Photocopy of letter dated 10.12.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-2). Instead of supplying documents as asked for by the undersigned, the Department vide letter no.317 dated 25.02.2020 sent reminder to the undersigned for submitting the explanation. (Photocopy of letter dated 25.02.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-3). 3. The undersigned vide letter dated 12.03.2020 submitted detailed explanation to the memo of charge. (Photocopy of letter dated 12.03.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-4). 4. The Government vide Resolution bearing no.- 1222 dated 16.10.2020 decided to initiate departmental proceeding against the undersigned under provisions of Rule-17 of CCA Rules,36 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 2005. Accordingly, Inquiry officer and Presenting officer were appointed. (Photocopy of letter dated 16.10.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-5). 5. The Inquiry officer vide letter no.- 172 dated 04.12.2020 and vide memo no.- 181 dated 16.12.2020 conducted the proceeding. The undersigned vide letter dated 24.12.2020 filed his response. (Photocopies of letters dated 04.12.2020/16.12.2020/24.12.2020 are annexed herewith and marked as Annexure-6/7/8). The Inquiry officer on the same date i.e. 24.12.2020 accepted the reply and stated that the next date would be fixed as and when required. (Photocopy of letter dated 24.12.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-9). 6. The undersigned waited for the outcome of the proceeding which took place before the Inquiry Officer. No second show cause notice nor any inquiry report was served upon the undersigned even after lapse of around 6 months. The undersigned through some sources, received information about the pending proceeding through RTI vide letter no.- 614 (Anu) dated 16.07.2021. (Photocopy of letter dated 16.07.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-10). The undersigned came to know that the Inquiry officer has already submitted the inquiry report dated 24.02.2021 but same was not found palatable to the authorities. The Hon'ble Minister directed the course of action to be adopted by the Inquiry officer and sent back for further inquiry. 7. The Inquiry officer vide letter no.- 132 dated 09.08.2021 has asked the undersigned to appear on 16.08.2021 for examination and cross examination of witnesses on the basis of inspection report of the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage. (Photocopy of letter dated 09.08.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-11). 8. Instead of holding examination and cross examination of witness on 16.08.2021, the said examination of the witness took place on 18.08.2021. It is to mention here that instead of Presenting Officer asking any question from the witness i.e. the Engineer-In-Chief, Flood, the Inquiry officer himself asked the question and examined the witness. The undersigned was not allowed to cross examine the witness as the said witness told that, "I don't have to say anything. I have already mentioned in the report", therefore, the undersigned was prohibited from cross examining him. In this light, the undersigned vide letter dated 13.12.2021 has requested (i) to cross examine the said witness, (ii) to examine Sri Satish Kumar, the then Chief Engineer, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Samastipur. (Photocopy of letter dated 13.12.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-12). The said request of the undersigned was not accepted on various grounds as mentioned in the letter no.- 42 dated 11.02.2022. (Photocopy of letter dated 11.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-13). The undersigned vide letter dated 15.02.2022 has again requested for bringing the said witness for examination and cross examination and requested to cross examine the earlier witness as well as pointed out certain discrepancies. (Photocopy of letter dated 15.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-14). The undersigned also requested the Secretary of the Department vide letter dated 21.02.2022 for the needful. (Photocopy of letter dated 21.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-15). The Inquiry officer vide letter no.58 dated 28.02.2022 has reiterated the stand taken in letter no.- 42 dated 11.02.2022. (Photocopy of letter dated 28.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-16). 9. The Deputy Secretary to the Government, Government of Bihar vide letter bearing no.- 503 (Anu) dated 07.03.2022 asked for explanation from the undersigned. The Inquiry report dated 17.09.2021 is also enclosed with the said letter. (Photocopy of letter dated 07.03.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-17). 10. The undersigned has submitted humble reply / representation on 30.03.2022 in response to the explanation asked for vide letter dated 07.03.2022. Thereafter, the Department vide Notification as contained in Memo No.-2698 dated 02.12.2022 has dismissed the undersigned37 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 from services under the provisions of Rule-14 (xi) of CCA Rules. The said order of dismissal has approval of cabinet. 11. The undersigned is raising issues for kind consideration in the present Memorial which are as follows:- A. The disciplinary authority has disagreed with the particular finding of the inquiry officer whereby the inquiry officer arrived at the finding that the reason for damage of embankment is the discharge of the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, whereas, the Chief Engineer while presiding the committee of Central Design, Research and Quality Control, in his report stated that the design discharge is of Kamla structure and not of Kamla river, therefore, it is clear that design discharge is of Kamla structure and not of the river. Therefore, the reason that the water discharge in the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, is not acceptable. It is made clear that the disciplinary authority, erroneously and under errors of facts, has not accepted the reason cited by the Inquiry Officer. Further, the disciplinary authority has disregarded the earlier reports in this regard. It is to mention here that the reason for differing with the conclusion of the Inquiry officer is factually incorrect. In fact, the Chief Engineer-cum- Chairperson, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department in his report dated 18.09.2019 in paragraph no.2 under the head "recommendation of committee" has conclusively held, "वर्ष 2019 का बाढ़ का केन्द्रीय जल आयोग द्वारा प्रतिवेदित अधिकतम जलश्राव 6223.94 क्यूमेक है जो पिछले 40 वर्षो के अधिकतम जलश्राव 3747 क्यूमेक से 166 प्रतिशत अधिक एक अप्रत्याशित हाईड्रोलॉजिकल event के तरफ इंगित कर रहा हैं। इसका समुचित अध्ययन जल विज्ञान निदेशालय एवं FMISC के अधीन कार्यरत MMC के द्वारा किया जाना उचित होगा ताकि भविष्य में नदी के ऊपर पड़नेवाले Morphological प्रभाव का अध्ययन किया जा सके।" Therefore, incorrect factual statement has been given whereas, the findings of the Inquiry officer is in consonance with the view point taken in paragraph no.2 of the report dated 18.09.2019. Further, in this regard, report of Chief Engineer, Water Resources Department, Samastipur in his detailed project report and estimate, has conclusively held in his technical note whereby it is clear that the discharge is decided by the course of river and not by structure of the river. It is mentioned in the technical report dated 18.08.2012 that, State Discharge Curve has been plotted at Jainagar and Jhanjharpur gauge sites as per CWC data. Design HFL has been assessed corresponding to Design discharge. This comes out to be as 70m at Jainagar and 54.10m at Jhanjharpur (Stage-Discharge Curves attached) Design discharge (4000 Cumecs) has been fixed by the point committee of CWC, Bihar Government & Nepal Government. It is also to mention here that vide letter no. 3731-33 dated 14.08.2019, the Central Water Commission, Lower Ganga Division-1, has written letter to the Chief Engineer, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Samastipur wherein it is made clear that the water discharge at the river gauge at Kamla weir at Jainagar CWC site at Kamla river is around 6223.94 Cumecs which is approximately more than 1.5. It is also to mention here that the office of Joint Director, Flood Management Improvement Support Centre, WRD, Bihar vide report dated September 2019 has categorically mentioned that design water levels for discharge of 6240 m3/s at Jainagar weir on the Kamla river has been generated for the sole purpose of the preparation of detailed project report. (Photocopies of the reports are annexed herewith and marked as Annexure-18/19/20/21). From perusal of above reports, it is crystal clear that the findings of the inquiry officer regarding increase of discharge is more than 1.5 times. It has incorrectly been held that the discharge is of weir and not of river. Such erroneous view point is totally demolished by the various reports as stated above. In the context of departmental proceedings under the subject, along with the above related letter as archival evidences, only the inspection report issued by letter no. 142, dated 26.07.2019 by the Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna after the site inspection between 16.07.2019 to 23.07.2019, and copy of a part of SOP has been given. Apart from this, on the basis of other38 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 relevant records which I myself have been able to obtain, immediately this defence statement is being given. The hard copies of some of the annexures which were posted on Whatsapp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur from time to time are being attached with the defence statement. From Junior Engineer to the Chief Engineer/ District Magistrate, Darbhanga/District Disaster Management Cell, Madhubani/ Sub-Divisional Magistrate, Biraul/ Flood Control, Planning and Monitoring Circle, Patna etc. are associated with in these groups. According to the prevailing method in the department, there is a general practice to use Whatsapp Groups to give quick information and to get instructions from the departmental/ senior officials. It has also been mentioned in Annexure-N-2(Ja) of the inspection report issued by the Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Patna's letter no. 142, dated 26.07.2019. (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-22). B. Hence, the reason for disagreement with the findings arrived at by the inquiry officer is not tenable in view of above stated paragraph. Therefore, the undersigned humbly prays to accept the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charge not proved. Further, the undersigned is giving response here in below to the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charges proved and partly proved. The undersigned is humbly praying to consider the responses to all the charges. C. Regarding charge no.1, the undersigned is to state and submit that due to unexpected discharge in Kamla Balan River from dated 13.07.2019 to 14.07.2019, under this sub-division, right embankment at km 47.30, km 55.60, km 57.30 & km 71.4 damaged. The effect of maximum discharge flowing on Kamla Weir at Jainagar site on 13.07.2019 remained till 14.07.2019 upto the end of Kamla Balan river, due to which flood fighting work had to be done at many points under this sub-division and Compliance of departmental wireless narrated report no.129, dated 14.07.2019 was possible only from 15.07.2019. It may be noted that since 12.07.2019, the Chief Engineer and the Chairman, Flood Fighting Force were camping in Jhanjharpur and all the flood fighting work were being done under their directions. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-23). The works/actions of cut-end protection at all cut-points except the cut-point at km 47.30 village Naruar was started from the date 15.07.2019 itself. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-24) It has also been mentioned by the Central Flood Control Cell, Sinchai Bhawan, Patna in its daily flood report dated 14.07.2019 that action is being taken to secure and hold the cut ends of the above sites by conducting flood fighting works. (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-25). From 15.07.2019 itself, the work of constructing a hutment has been started at Km 47.30 Naruar site. Immediately after constructing a hutment with polythene sheets and bamboos, the banner of Water Resources Department was also put up. But the farmers whose houses were damaged by the breach of embankment near Naruar village (km 47.30) were bent on not allowing to start the work till adequate compensation was received. For this reason, as soon as the banner of the Water Resources Department was put up by making a hutment, it was demolished by the local people and thrown into the river and the working labourers were also driven away. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-26). The flood victims of Km 47.30 village Naruar had encroached upon the top of the embankment (the only escape route for the movement of materials) and started living in hutments with cattle, which made it impossible to carry construction materials. Due to non-availability of local sand within 3 km due to excessive waterlogging and water-logging in the river side and country side around the breached site, it was not possible to start the sand filling work around the breach site Naruar. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-27). Due to non-availability of sand nearby, the contractor was expressing his inability to start the work at the breach site as only 3 km lead has been provided for the transportation of local sand in the scheduled rate book. The need for departmental instructions39 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 was also felt by the Chief Engineer in making provision for more leads. (Photocopy of the report of Engineer-In Chief, Flood is annexed herewith and marked as Annexure-28). From the date 15.07.2019 itself, the traffic was blocked by the villagers by putting a barrier on the embankment near Naruar, due to which the sand filled cement bags after filling the already available sand were tried to start the work at the site, but had to unload near the barrier due to traffic blockade. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure- 29). On 16.07.2019 all detailed information about sites before site inspection was given to Engineer-In-Chief (Flood) through executive engineer. It was also informed that the work of cut end protection has been started at all the breached sites except Naruar. But flood victims of Naruar are not allowing to take action till they get adequate compensation and the road has been blocked by barriers. After giving such information, site inspection was done by him on motor cycle itself. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-30). There was no success in getting the work done by the end of 18.07.2019 before noon even after joints efforts made by SDM, Jhanjharpur and SDPO, Jhanjharpur. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-31). On 18.07.2019 after noon it was decided to start the work in Naruar from 19.07.2019 after meeting with the District Magistrate, Madhubani/ Superintendent of Police, Madhubani/ Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur / Chief Engineer, Samastipur and other senior regional engineers including the undersigned. Again on 19.07.2019, during the deliberations to start the work in the divisional office, Jhanjharpur, the engineers/administrative officers were assaulted by the local people, whose FIR was also registered in the local police station. In the afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also tried to start the work by coming to the said place, but the result was zero. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure- 32). On 16.07.2019, the Engineer-In-Chief, Flood, determined the nature & scope of work of all the cut points and handed over the same to the Chief Engineer. The reason for not taking action to secure the above said erosion part by the field engineers and not showing any preparation in this regard has been given by the Engineer-In-Chief, such as encroachment by the displaced at the work site, after removal of the encroachment to use that place for material storage or other work, to get help from the district administration to remove encroachment on the site, not to get sand nearby to fill the local sand in empty cement bags, to get the work done by bringing it from wherever local sand is available and directing the approval to be given to the Chief Engineer. Apart from this, it is clear from the perusal of the above paragraphs that the then unforeseen circumstances such as the local people breaking the hutment and throwing it in the river, the villagers blocking the traffic by putting a barrier to the embankment, the tractor laden with sand filled cement bags is not permitted to move on the site, thrashing the labourers away by the villagers, beating up the engineers/administrative officials in the divisional office (with whose cooperation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment on the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done) etc. In spite of this, apart from other cut points, the work of Naruar cut end protection was done by trying as much as possible. Due to public protest and law and order situation till 19.07.2019 afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also did not get success in starting the work. D. When such submissions were made then the inquiry officer in his report dated 24.02.2021 held the charges not proved with the reasoning that on the basis of site inspection report of Engineer-In-Chief, Flood dated 16.07.2019, it has been alleged by the Department against the undersigned that no action was being taken and no preparation was seen in this regard to secure the erosion part by the regional engineers at various cutting/breach points under Flood Control Sub-Division, Naruar. It is clear from the perusal of the Appendix and Khairiyat reports attached with the defence statement that in the working area of the accused officer, apart from only one40 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 cut/breach point, Km 47.3 Naruar of right embankment, cut end protection at remaining cut/breach points was started from 15.07.2019 itself. In the order of inspection on 16.07.2019, it has been mentioned by the Engineer-In-Chief in the same inspection report regarding not initiating the action to secure the cut-end point at the one cutting/breach point mentioned in the working area of the accused officer, Naruar, that flood victims have encroached on the embankment by making temporary camps and in the course of inspection dated 21.07.2019, the Chief Engineer was also told that there is no public protest now. Apart from this, it also appears from the perusal of the appendices attached by the undersigned that in the then relevant circumstances like breaking the hutment built on date 15.07.2019 at Naruar site by the local people and throwing it in the river, the villagers blocked the traffic by putting barriers to the embankment, not allowing tractor laden with sand filled cement bags to go to the site, villagers beat up the labourers and drive them away, to beating up the engineers/administrative officers in the divisional office (with whose cooperation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment at the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done), public protest and law and order situation till 19.07.2019 afternoon. Despite the efforts made by the District Magistrate, Madhubani and the Superintendent of Police, Madhubani, the reasons for not getting success in starting the work, etc., can be considered as a hindrance in the progress of the work. It is worth mentioning that apart from this, cut-end protection work had started at other cut-end points, which is also clear from the Khairiyat report issued by the departmental flood control. It is clear only from the observation of the inspection report of the Engineer-in-Chief that from 16.07.2019 to 21.07.2019, despite camping at the site by the Engineer-in-Chief and getting the meeting/co-operation with the District Magistrate/Superintendent of Police, the action to secure the above two cuts/breach points, Naruar and Gopalkha could not be started till the forenoon of 21.07.2019. E. Thereafter, as per dictates and orders of the superior authority, the witness was examined by the inquiry officer himself and on the basis of such deposition, the inquiry officer in his inquiry report dated 17.09.2021 held the said charge proved. The undersigned is shocked to understand the change in the finding by the Inquiry Officer. In fact, Sri Rajesh Kumar, Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna, appeared on 18.08.2021. The witness was examined by the inquiry officer himself whereby the witness stated that what he wrote in writing is true. Since Sri Rajesh Kumar is the highest posted engineer in the department, it is not considered appropriate to answer any question asked by the undersigned, thereby the undersigned was denied the opportunity to cross examine the said witness. The examination of the said witness was neither immediately recorded on the hearing record by the inquiry officer as he was busy in asking question which is the role of the Presenting Officer. The inquiry officer acted as Presenting Officer. F. It is humbly submitted that Engineer-in-chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna inspected the breach sites of the embankment which breached due to unexpected discharge flowing in Kamla Balan River on 13.07.2019/14.07.2019 and submitted the inspection report to the department vide his letter no.142 dated 26.07.2019. In the first part of the inspection report, along with the list of those breached sites, the details of the jurisdictions are also mentioned. From the observation of which it will be clear that the jurisdiction of the undersigned is only village Naruar, under Flood Control Division-2, Jhanjharpur in the inspection done on 16.07.2019, Village Gopalkha under Flood Control Division-2, Jhanjharpur, jurisdiction of other Assistant Engineer (Flood Control Sub-Division, Jhanjharpur) and Village Rakhwari under other Executive Engineer i.e., under Flood Control Division-1, Jhanjharpur, jurisdiction of other Assistant Engineer (Flood Control Sub-Division-1, Jhanjharpur) are of other assistant engineers. It has also been mentioned by the Engineer-in-Chief that the situation was the same at all the three sites, but in the information received under the Right to Information Act,41 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 it is mentioned in the first paragraph of note sheet page no.-02 of the file that the three sites of breaches i..e. village -Naruar, Gopalkha and Rakhwari are located under the working area of the undersigned (Assistant Engineer, Flood Control Sub-Division, Naruar, under Flood Control Division-2, Jhanjharpur). In this way, departmental proceedings were initiated against me only after obtaining approval from the competent administrative authority by recording the wrong facts on the note sheet, while others like Assistant Engineer, Flood Control Sub-Division, Jhanjharpur, under Flood Control Division-2, Jhanjharpur and Assistant Engineer, Flood Control Sub-Division-1, Jhanjharpur, under Flood Control Division-1, Jhanjharpur were deliberately kept free from these charges. It is mentioned in paragraph nos. 1 and 2 of the report sent by the inquiry officer that the inquiry report submitted earlier was submitted on the basis of review of the defence statement of the undersigned and the records which were obtained from the Central Flood Control Cell in which this allegation was found to be unproved. Again in the light of the examination of the witness by the inquiry officer, the same allegation has been substantiated without checking the veracity of the statement of the witness from any other records. Considering the statement of the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna as factual in his report by the inquiry officer, is contradictory in itself. The reply of the witness has not been verified by the inquiry officer from the records which have already been attached as annexure by the undersigned. Hence, in view of such submission, the undersigned may kindly be exonerated from the said charge. G. As regards charge no.2, it is humbly stated and submitted that the undersigned was continuously monitoring the embankment since 10.07.2019, the increase of water flow in Kamla Balan river was being recorded continuously. Simultaneously, it was raining continuously in the catchment area of Kamla Balan river. All the subordinate junior engineers were ordered to be vigilant and alert in their respective areas. Simultaneously, information about all these things was being given on Whatsapp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur. It is humble information that Chief Engineer, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Samastipur, Executive Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Division, Sinchai Bhawan, Patna, Chairman, Flood Fighting Force, Darbhanga, Superintending Engineer, Flood Control Circle, Darbhanga, Executive Engineer, Flood Control Division-2, Jhanjharpur, District Disaster Cell, Madhubani, District Magistrate, Darbhanga/Madhubani, S.D.M. Biraul along with all concerned Assistant Engineers/Juniors Engineers are connected, who were getting the information of the area up to date and the department was constantly being informed about the information which is available even today, which can be observed and confirmed by the concerned officials. (Photographs of the Whatsapp Group is annexed herewith and marked as Annexure-33). Due to excessive rainfall in the catchment area of Kamla river on 12.07.2019 and 13.07.2019, there was a sudden increase in the discharge of the river. Due to the unexpected increase in discharge, the information about the water flowing over the structure (bridge) built on the weir of Jaynagar was given by the Executive Engineer and directed to be ready with the labour and departmental materials to deal with any odd situation. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-34). On 13.07.2019, the water level in the river was continuously rising, so it was directed by the Superintending Engineer, Flood Control Circle, Darbhanga that the embankment should be kept motorable under any circumstances. As per his instructions, between km 68.00 to km72.00 the embankment was being made motorable by brick bats. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-35). At about 2:30 in the afternoon, the Junior Engineer, Sri Ranjit Kumar informed over the phone that there was leakage from the side of the wing wall of sluice located at Km 55.600. Immediately giving necessary directions to the contractor, I reached Km 55.600 and started flood fighting work for seepage control. Only one home guard Sri Mishri Lal Yadav was present at the site and there was no information about any other home guard. Chairman, flood fighting force, Darbhanga was42 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 informed by me about the seepage. As per the advice given by him, the work of loading N.C. over G.T. Filter was started under the supervision of me and the Junior Engineer. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-36). In the meantime, the Chief Engineer and the Executive Engineer were talked to over the phone and after giving necessary instructions they told to reach there. The Executive Engineer also reached the site at around 7:30 pm and as per his direction, work was done to stop the seepage on the country side also. On 13.07.2019 at around 2.00pm, the entire embankment came into a state of sensitivity and after 08:00 pm, the water level of the river reached the free board above the embankment HFL. The free board of the embankment is 1.80 m above the HFL, whereas in the said period the water level of the river reached within 0.75 m to 1.00 m from the top of the embankment, Due to which simultaneous leakage and piping started at different points between km 44.20 (Samiya), km 45.80 (Gadiya Basti), km 48.10 (Naruar), between km 49.80 to km 50.00 of the embankment. As the water level in the river went to the free board, the embankment's H.G.Line failed and almost the entire embankment was covered with seepage and piping, which at many places also started outside the embankment's C/S toe. (Photographs of the site are annexed herewith and marked as Annexure-37). On 13.07.2019 at 11:40 pm, the junior engineer, Shri Yogendra Kumar informed about the labourers who ran away from piping at Naruar site. As per the direction of the Executive Engineer, I left from Km 55.600 (Kaithwar) to Km 47.300 (Naruar) with 20 labourers. At around 12.30 am, when I reached near Naruar (Km 47.30), I was informed by the Junior Engineer about damage to the embankment at Km 47.300 (Naruar). No home guard was present at the site. Reached the Divisional Office (Km 48.500) with the Junior Engineer at around 1:00 am and found that the water of the river was flowing on the road by over topping the dowel. Immediately it was controlled by sand filled bags. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-38). Dated 14.07.2019 at around 1:30 am, the slope started to sink in the up-stream of the sluice located at Km 48.500. I, along with the Junior Engineer, got the slope pitching done with sand filled bags on top of the slope. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-39). At 3:20 am, information was received that water is leaking from the house of Shri Budhan Mukhiya (Km 48.10). Immediately after getting the slope pitching done in the up-stream of the sluice located at km 48.500, I and the Junior Engineer reached the house of Sri Budhan Mukhiya located at km 48.10 and got the work done to stop the seepage by making a well, but at about 4:00 am in the morning, the water from breached site Km 47.30 reached there and we came over the embankment. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-40). Dated 14.07.2019 at around 4:30 am, the Executive Engineer ordered to reach at Km 55.60, saying that the situation was critical at Km 55.60. As directed, when I was going from Km 48.10 to Km 55.60, on reaching Km 48.50 in the middle, the Junior Engineer informed about damage to the embankment between Km 57.300 to Km 57.500 (Kakodha). Again, after about 15 minutes, the information about damage to the embankment at Km 55.600 (Kaithwar) was given by the Junior Engineer. Surrounded by water everywhere, I reached Kaithinia Gumti on foot and left for Thengha (Km 64.00). Meanwhile, Junior Engineer Mr. Manoj Kumar informed about piping and seepage at various points from Km 58.200 to Km. 58.400, Km. 59.050 to Km. 59.300 and at Km. 61.00 and informed about damage of Wing Wall of sluice located at Km. 58.200. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-41). After I gave the necessary directions on the phone, I told reaching the place while being Thengha. On reaching Thengha (Km 64.00), I was instructed by the Executive Engineer to go to Rasiyari when the situation came under control between Km 58.00 to 66.00. As the highest discharge continued to travel in the D/S part, there were many places where seepage were happening together between Parri located at Km 66.50 of right embankment and Km 75.00 Rasiyari like Km. 66.50 Parri, Km. 71.40 Kumraul, Km. 73.40 Baur, Km.74.20 Camp etc., Km. 74.90 Rasiyari etc. but the embankment at Km 71.40 Kumraul could43 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 not be saved despite tireless efforts to control the seepage/piping that were clinging together. I started trying to get the seepages happening from Column of the camp situated at km 74.200 to be stopped by the available labourers there. Here, as soon as the seepage was stopped, the Executive Engineer directed to stop the piping at Km 74.900 without delay. I and the Junior Engineer reached Rasiyari located at km 74.900 and started getting necessary work done to stop the piping. Necessary guidelines were given by the Executive Engineer at Km 74.900 Rasiyari site, according to which the work was done and the piping was stopped. The piping being stopped here was covered by G.T. Filter and loaded by N.C. by filling sand in empty cement bags. (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-42). It is clear from the above sequence of events that between date 13.07.2019 to 14.07.2019 , during the unexpected discharge in Kamla Balan, I have strictly followed the standard operating procedure (SOP) laid down by the department under the direction of my senior officers/Chairman, flood fighting force. There has been no lapse or negligence in this, but the Standard Operating Procedure (SOP) has been followed promptly. H. The inquiry officer in his inquiry report dated 24.02.2021 held the said charge not proved against the undersigned on the grounds that in Paragraph 4.4 of the Standard Operating Procedure, mainly the following instructions are mentioned for the Executive Engineer, as soon as the sensitivity of the site from any source is known, reaching the site within two hours and ensuring the implementation of the desired work for its safety and in this regard the Superintending Engineer / Chief Engineer / Chairman, Flood Fighting Force / Informing the concerned District Officer, enrolling any of the listed contractors for emergency work and getting the work implemented, the water level of the river above the warning level or the river water in the toe of the embankment then from the Executive Engineer to the Junior Engineer, patrolling night and day, reporting the absence of home guards to the district administration, etc. On the basis of the continuous rain since 12.07.2019 and the information given by the Meteorological Department, on 13.07.2019, in the light of the warning of heavy rain by the District Disaster Management, Madhubani, in addition to the accused officer, the Superintending Engineer / Chief Engineer / The Chairman, Flood Fighting Force were camping on the embankment since 12.07.2019, which is also confirmed by the perusal of attached documents. By camping at the site of all the senior officials, it can be assumed that all the concerned were informed. There is no reporting by the senior officials for not being present at the place of the undersigned. The wireless communication made by the undersigned to the district officer and the department regarding the absence from the home guard's place shows that action was being taken by the undersigned. Compliance of the instruction mentioned in Para 4.4 of the Standard Operating Procedure may not be possible for all the cut points in case the river flow exceeds 1.66 times the designed water flow and flows in free-board where almost the entire embankment is in a state of incombustibility. The flood fighting works were being done under the direction of the department and senior officials and at different places by various level officials (including Chief Engineer/ Technical Secretary/ Chairman, Flood Fighting Force). I. When the witness was examined and questions were asked by the inquiry officer himself and not by the Presenting Officer, the said witness merely tendered that with regard to the point of allegation by the Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, he said that this is true. This allegation has not been proved by the inquiry officer in earlier inquiry report, whereas at the time of examination of the witness, without any additional record or evidence, it is partially proved which is impermissible both in law and on facts. J. Regarding charge no.3, it is humbly stated and submitted that the details of the actual condition of the site due to discharge in Kamla Balan River on 13.07.2019 and 14.07.2019 are mentioned in the defence statement of charge no. 2. The preparation made on the embankments / the status of the structures located on it and the report of the high level committee in which the44 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 reasons for the damage to the embankment are mentioned as follows:-Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna himself has mentioned in his inspection report that due to the excessive discharge in the river, there was continuous seepage / piping on the embankment (Please see Photocopy of the inspection report of Engineer-In- Chief, Flood annexed as Annexure-22). In fact, before 13.07.2019, it was raining continuously in the catchment of Kamla Balan river. In this sequence, on the basis of the experience of the last year, adequate quantity of construction materials such as sand-filled bags and contractors were engaged in the work along with the labourers at all the identified sites (Photograph of the site is annexed herewith and marked as Annexure-43). Along with me, all the junior engineers were continuously patrolling in their respective areas. Updated information of all the above mentioned things was being given continuously on Whatsapp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur, due to which all the senior officials as well as departmental level officers were aware. K. On 13.07.2019, water started coming out from the top of the weir due to unexpected discharge in the Kamla Balan river, breaking the guide bund/marginal Bund of Kamla weir located at Jaynagar (Please see Photograph of the site attached earlier as Annexure-34). This maximum discharge was found to be 6223.94 Cumec (219705 cusec) which is more than the design discharge 3966 Cumec (140000 cusec) of Kamla Balan river and the gauge reading of Jainagar weir was recorded as 69.90 m in D/S. This is corroborated by the discharge provided by CWC, Patna vide letter no.- 33 dated 14.08.2019 (Please see Photocopy of the report attached earlier as Annexure-20). Due to this unexpected discharge in the Kamla river, the level of water first started flowing in the free board of the embankment. In the places where the village is settled in the C/S, the villagers encroach on the embankment and damage its C/S slope and use it for private use. In this regard, an infringement case has also been filed with the CO. (Please see Photocopy of the report attached earlier as Annexure-44). In this situation, the seepage / piping started simultaneously at many places of the embankment and as much as possible those seepage / piping were closed. (Please see Photographs of the site attached earlier as Annexures-36/37/38/39/40/41/42). In the evening of 13.07.2019 at crossing of NH-57, which is situated at Km 44.00 of the right embankment and D/S of it near Jhanjharpur Railway Bridge (Km 49.30), discharge of water started decreasing in the D/S due to low effective waterway and the water level started increasing due to afflux in the U/S. Sakri Jhanjharpur railway line, which was earlier meter gauge, along with Broad Gauge conversion, the level of rail was raised by more than 3.5 meters. (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-45) but no provision of additional waterway for smooth water flow was made but between both the embankments, waterway were jacketed. Similarly, due to the bridge constructed on the right Kamla Balan embankment at Km 44.00, NH-57 crosses the embankment and staying the approach road within the embankment on both the sides, due to the reduction of the effective waterway of the river, there is a lack of drainage water in the D/S section of the river. Similarly, as a result of the road bridge constructed in Km 59.50 of Sutharia and Km 74.80 of Rasiyari, due to the less effective waterway, the water level of the river in U/S of bridges continued to flow for a long time within the free board of the embankment and to create pressure on the embankment due to failure in HG Line, Simultaneous piping started happening at many places due to failure in the embankment section. In most of them, the seepage/piping was closed on a war footing by carrying out flood fighting works, but at four places under this sub-division, the embankment was damaged due to the occurrence of unforeseen discharge in the river due to the concentrated and uncontrolled flow condition. Right embankment was damaged at 4 places in my jurisdiction due to unexpected discharge in Kamla river. In the light of the above, a committee was constituted by departmental letter no.- 2605 dated 02.08.2019 under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Patna, by which45 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 the maximum discharge which flowed from Jainagar weir on 13.07.2019 was calculated. After that 6223.94 Cumecs was found which was 1.66 times more than the maximum 3966 Cumecs (140000 cusec) designed for the last 40 years. It has also been mentioned by him in Para-10 that in the year 2019, more than 40 years of discharge and HFL were recorded in the Kamla river. Along with this, due to large scale drainage congestion from Koshi, Kareh and Kamla Balan river below Phuhiya site of right embankment of Kamla Balan river, due to maximum discharge in entire Kamla river channel, Jainagar weir site has the maximum discharge so far. The water level of the entire channel has been raised due to ingress, resulting in sudden increase in pressure on the embankment, which has led to breaches at many places on the embankments. (Please see Photocopy of the report attached earlier as Annexure-18). Apart from this, committee also studied the condition of impact on the condition of the highest water level of the embankments as a result of bridges built at many places between the two embankments of Kamla Balan river which is attached in Appendix-3, from the observation of which it is clear that the effective waterway between the embankments was found to be less than 106 m to 214.87 m from Lacey's waterway of the embankment, creating additional afflux in the embankment in U/S of those structures and forcing the flowing discharge to go into the free board of the embankment. Agreeing with the above recommended suggestions, the departmental letter number-3092 dated 13.09.2019 requested all the concerned departments to make provision for additional waterways as per rules (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-46). CENTRE FOR TRANSPORTATION SYSTEM (CTRANS) INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY, ROORKEE Prof. Nayan Sharma presented an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan river embankment. Against the finding, it was found that the current constriction in Kamla Balan river is in the range of 17.6 percent to 70.00 percent. According to the report, the distressing outcome of acute waterway obstructions (of the order of 50% to 70% constriction, imposed by bridges across the Kamla Balan River could be recognised to be the prime contributing factor in creating very high Afflux HFLs in an anticipated range of 2m to 3m over natural flood levels In his report, he has mentioned the following in causes of embankment breach:-"continuing rise of HFLs due to acute constriction by the bridges has very adversely affected the safety of the vital flood embankments in the form of –(i)progressive free board encroachments due to soaring high Afflux HFLs, and (ii)enhanced level of the saturation line of seepage causing its dangerous divergence much beyond toe of flood dykes, besides setting off piping as well as suffusion failures." (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-47). Earlier, in the course of the study of unexpected discharge in Kamla Balan by FMISC, Patna, it was found that the right Kamla Balan would have to raise the upper surface due to new HFL in its almost entire length. It is clear from the above report that on 13.07.2019, almost in the entire length of the river, the discharge flowing from Jaynagar has created the new HFL, due to which outside the C/S slope of the embankment, it has passed outside saturation line through several places simultaneously and some places due to piping outside the toe. But the embankment was damaged which could not be saved as the situation was out of control. (Please see Photocopy of the report attached earlier as Annexure-21). Referring to the reasons for the breach in Kamla Balan embankment by the Hon'ble Chief Minister, Bihar, it was told in the Legislative Council that on 12th and 13th July, 2019, the situation of a flash flood arose in Nepal due to heavy rainfall. Due to excessive waterlogging, Kamla Balan right embankment got damaged at six places and Kamla Balan left embankment at two places. It can be seen at Sl. no.- 87 of the Departmental website's Videos Gallery. Information has also been given to the media by the Hon'ble Minister, Water Resources Department, Patna regarding the reasons for the damage to the Kamla embankment, which can be seen on the Sl. no.-86 of the Departmental website's Videos Gallery.

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(cid:464)बहार गजट, 4 2023 L. The inquiry officer has exonerated the undersigned from the charges on the ground that in the facts given by the undersigned in his defence statement, the following reasons have been mentioned in relation to the damage of the embankment, such as, during the flood, under the direction of the senior officials, the flood fighting work was done, the unexpected discharge in the Kamla Balan river 6223.94 cumec (2,19,705 cusec) which is 1.66 times more than that of Kamla Balan's design discharge 3966 cumec (1,40,000 cusec), the water level entering the free board of the embankment due to unexpected discharge in the Kamla river, continuous seepage/piping due to excessive water discharge (inspection report of Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna), dedicated report by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna, for reasons of breach, Centre for Transportation System, IIT Roorkee Prof. Nayan Sharma submitted an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan river embankment, On the basis of the report submitted to the department by FMISC, Patna of unexpected discharge in Kamla Balan, it can be assumed that the cause of damage to the embankment was the unexpected discharge in the river. M. Now in view of present inquiry report along with letter dated 07.03.2022, it is stated and submitted that in respect of charge no.2 and charge no.3 (first part), disagreement has been expressed with the opinion of the inquiry officer by stating that the design discharge in the report of the committee constituted under the chairmanship of the Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department, Patna is of Kamla Weir and not of the river. Under the head 'recommendation of the committee' part of the report mentioned above, it is mentioned in paragraph-1 that "due to the flow of maximum discharge and the flow of previously designed discharge, the assessment of newly design discharge and HFL has to be done". There is a need to go and accordingly the need to determine the formation level and section of the embankments was found. It is mentioned in paragraph-3 of the said report, "The maximum discharge reported by the Central Water Commission for the year 2019 is 6223.94 Cumecs, which is pointing towards an unexpected hydrological event, 166 percent more than the 3747 Cumecs of the last 40 years". It is clearly mentioned in the annexure to the said report that the peak discharge of 2019 is 6223.94 Cumecs. Please be aware that the Kamla river, entering the Indian land in the U/S part of Jainagar, flows through D/S of Jainagar weir and joins the Balan river near Km 26.0 of the left embankment, thus in the Balan river, it contributes its discharge. It is clear from the annexure attached with the letter that in the year 2012, the designed discharge of Kamla Balan River increased to 4000 Cumecs, which increased to 6223 Cumecs in the year 2019, which is more than one and a half times the designed discharge of the river. The design discharge of the year 2012 was decided jointly by the CWC, Government of Bihar and Government of Nepal. (Please see photocopy of the report attached earlier as Annexure-19). In the light of the above, it is clear that on the day of embankment breach in Kamla Balan River, maximum discharge flow occurred in the last 40 years, which was more than one and a half times more than the designed discharge. It should be known that the water flow in the river on the date of breach is more than one and a half times the design discharge of the river, not an argument, it is a fact based on records. N. It is further stated and submitted that after the co-operation of the local people and the tireless efforts of the administrative officials, it was possible to start the slope cutting work in the up-stream part from 2.00 pm on the date of 21.7.2019. (Photographs of the site is annexed herewith and marked as Annexure-48). It is to mention that the Engineer-in-Chief has said in his inspection report that in the afternoon of 21.07.2019, he inspected the Naruar site and as a result of the end of the public protest, he himself in his presence started the work at that site & directed to complete the flood fighting work by working day and night. It is not mentioned in his47 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. He had received information from some source that on 21.07.2019 at 9:30 pm in the night, the work was not done due to generator failure. But the reality is that due to generator failure at 9:30 pm, the work was interrupted for some time, which was started again by making alternate arrangements and by installing another generator and working till 1:00 am. An engineer deputed from outside has made a remarks of getting nylon crating work done by 1:00 am on the laying register, which certifies that the work is going on even after 9.30 pm. The work was interrupted only for a short while. After that the slope cutting work was done by JCB. It is noteworthy that the work of soil cutting / slope cutting is not recorded in the laying register. (Photocopy of the report is annexed herewith and marked as Annexure-49). It is clear in the light of the above that due to the unexpected water discharge, the water level encroached at all the places of Kamla Balan embankment & started flowing in free board, which led to simultaneous piping/seepage at many places. In those places where piping started happening at many places and it was not possible to control it by well or other method, the embankment got damaged which resulted from the natural disaster of unexpected flood which can be confirmed by the reports of committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Patna and detailed marking in the report of IIT Roorkee and the information given by the Hon'ble Chief Minister / Hon'ble Minister's address to media. For this it is not fair to allege that the undersigned has failed despite being the responsible officer because the undersigned was constantly on the lookout and present on my duty. O. The Inquiry report dated 24.02.2021 exonerated the undersigned from the charges on the ground that it has been accepted by the undersigned that after starting the work at Naruar site from the afternoon of 21.07.2019, the work was stopped for some time due to generator failure at around 9.30 pm, but after making alternate arrangements, the work was started again. As evidence, a photocopy of the laying register has been attached by the undersigned, in which the nylon crating work done by the engineer of the unattached division deputed in shift has been recorded in the laying register till 1.00 am, which can be validated. The site was not inspected by the Engineer-In-Chief on 22.07.2019 because it is not mentioned in the inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019 rather it is mentioned that on 22.07.2019 he departed for Araria and Purnia to participate in the tour of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. But now the charge is proved in the inquiry report dated 17.09.2021. It is humbly stated and submitted that the deposition by the witness that the undersigned was negligent in repairing the breach of the embankment till date 21.07.2019, the inspection report submitted by the witness in the past to the department, on the basis of which the charge has been framed against me, is completely contradictory. It will be clear from the observation of the facts mentioned in the inspection report that the then District Magistrate, Madhubani, Superintendent of Police, Madhubani, Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur, Sub-Divisional Police Officer, Jhanjharpur, Engineer-In-Chief himself, Chief Engineer, Superintending Engineer, Executive Engineer, Junior Engineer and despite my tireless efforts, the work could not be started at the breach site of village Naruar. It should be noted that the work could be started only after the consent of the local people from the afternoon of 21.07.2019. The site requires extensive slope cutting before the actual crating can be done. In the light of the instructions of the Engineer-In- Chief present at the site, immediately after cutting a part of the embankment, the crating work was started which is also mentioned in his inspection report. It may be known that the embankment was not encroachment-free even after 21.07.2019 by the flood victims, but after talks with the then District Magistrate, Madhubani, with the flood victims, only way was given to get the work done in the embankment until alternative arrangements were made. The Naruar48 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Office Campus was being treated as a base camp for additional construction material, backup tools plant and labour etc. which is about 1.0 km away in d/s from breach site of the embankment. The width of the embankment at the said site is only 5 m. It was not practical to store additional construction materials and tools plant at the site after hutment, storage of construction materials as per requirement, at least one earth cutting plant like JCB, one generator etc. at the work site. Slope cutting at work site was the requirement of the site which was done. There was absolutely no negligence in doing the work in this way. All the records related to this have already been attached with the defence statement to the Inquiry officer, on the basis of which this allegation was disproved by the inquiry officer in the past. It is not mentioned in his inspection report that Engineer-in-chief inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. On the basis of false fact, this charge has been framed against me. P. That it is respectfully stated and submitted that many discrepancies have occurred in the proceeding, by which the undersigned is prejudiced on account of such blatant violation of principles of natural justice and depart from the provisions contained in Bihar CCA Rules, 2005. It is shocking to understand that the inquiry officer in his earlier inquiry report, has held all the charges not proved whereas, in the present inquiry report, has held charge no.1 as proved whereas, charge no.2 has been partly proved and the second part of the charge no.3 has been proved. The inquiry officer has mentioned earlier in his inquiry report dated 24.02.2021 wherein all the charges were held as not proved. Now as per the present inquiry report dated 17.09.2021, the inquiry officer has departed from the provisions of the Rule-17 of CCA Rules. Such course of action adopted by the inquiry officer is not permissible both in law and facts. The undersigned is prejudiced on account of non incorporation of defence and assessment of evidence in respect of each article of charge as well as there is total lack of finding on each article of charge and reason thereof. It is strange and shocking to learn the Inquiry Officer has relied upon earlier inquiry report dated 24.02.2021 in the present inquiry report dated 27.09.2021 in order to prove the charges. In earlier inquiry report, upon documentary evidences, the charges were held not to be proved whereas, in the present inquiry report, the all charges except one have been held to be proved on the basis of witness deposition. The Inquiry Officer has conducted inquiry in piecemeal method which is not permissible. The undersigned is at loss to understand as to how the charges earlier not proved, have been held to be proved which is a mechanical exercise of power and without application on mind and as such same is fit to be set aside. Q. The disciplinary authority has disagreed with the certain findings of the inquiry officer whereby he has partly proved the charge no.2 and has not proved part one of charge no.3. It is respectfully submitted that the inquiry report is itself vitiated in law in view of non prescription of the provisions of Rule-17 of CCA Rules then consequential disagreement with the findings of the inquiry officer is of no consequences. When the structure is itself faulty then the entire edifice cannot stand. There is inherent discrepancy in the inquiry report dated 27.09.2021 then any further consequential action cannot be held tenable. R. It is to further mention here that the charges framed against the undersigned are not distinct and definite article of charge. The substance of imputation of misconduct is neither definite nor distinct. The charges have been framed on the basis of report of the Engineer-in- Chief, Flood. The said report is full of factual errors, thereby resulting into erroneous charge based on factually incorrect statement. The charges leveled and the initiation of departmental proceeding have been done in most pick and choose and selective manner. The higher authorities such as the Chief Engineer and the Superintending Engineer have been let off as no allegation of alleged dereliction of duty has been leveled against these higher authorities. Much to dismay of the undersigned, even Executive Engineer of Rakhwari site belonging under Flood Control49 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Division -1, Jhanjharpur was not also proceeded against whereas the inspection report also mentions the said site. There cannot be varying standard in initiation of departmental proceeding. When the substance of charge is of dereliction of duty in controlling the flood damages then letting off the Chief Engineer, Superintending Engineer who were camping there on the date of occurrence and thereafter also. Letting off the Executive Engineer of Flood Control Division-1, Jhanjharpur is evident of the fact that the initiation of departmental proceeding against the undersigned is colourable exercise of power which is impermissible in law and on facts as well. The undersigned is prejudiced on account of such selective and pick and choose manner of initiation and continuation of departmental proceeding. From perusal of information under RTI, it is clear that the inquiry officer has exonerated the undersigned from all the charges as not proved. The said findings were considered by the Secretary of the Department. The said file was sent to the Minister of the Department who directed to return the file to the inquiry officer for detailed inquiry into the matter after perusing the available documents in the Flood Control Cell and examination and cross examination of the witness. Such mode of action is impermissible under Rules of Executive Business, 1979. Rule-18 (1) of CCA Rules, 2005 casts duty upon the disciplinary authority to remit the case for further inquiry after recording the reasons. From perusal of information supplied under RTI, it is clear that when the inquiry officer exonerated the undersigned from all the charges as not proved then the Hon'ble Minister directed for further inquiry. The Hon'ble Minister has directed the course of action to be followed by the inquiry officer in his further inquiry. Such course of action is not permissible both in law and on facts. The inquiry officer on the same set of facts barring the examination of the witness i.e. the Engineer-in-Chief, Flood, held some charges proved and some charges not proved. If the deposition of said witness is perused then it is evident that nothing substantial has been stated or deposed. Further, during the examination of the said witness, he told that the inspection report is the basis and he has nothing to state more. It is to mention that the said inspection report was already considered by the inquiry officer in his earlier inquiry report whereby all the charges have been held not proved. Now, without any significant development which could change the gravity of the alleged misconduct, the undersigned is shocked to understand as to what transpired in the mind of the inquiry officer which compelled him to change the entire decision and to depart from his earlier findings when substantially the evidences are same and similar. It is matter of grave concern that whether the deposition of the Engineer-in-Chief, Flood can be of such magnitude that could convert the not proved charges as proved and partly proved charges. Such deposition was not held in the manner prescribed under Rule-17 of CCA Rules, thereby prejudicing the undersigned in many respects, primarily action being violative of principles of natural justice. The inquiry officer as acted at the behest and dictates of the higher authorities by which he was forced to change his findings. The independence of the inquiry officer is questionable in such circumstances, therefore, the charges which have been held to be proved and partly proved are required to be set aside. S. Misconduct has been defined in Black's Law Dictionary, Sixth Edition at page 999 thus: "A transgression of some established and definite rule of action, a forbidden act, a dereliction from duty, unlawful behavior, willful in character, improper or wrong behavior, its synonyms are misdemeanor, misdeed, misbehavior, delinquency, impropriety, mismanagement, offense, but not negligence or carelessness." Misconduct in office has been defined as: "Any unlawful behavior by a public officer in relation to the duties of his office, willful in character. Term embraces acts which the office holder had no right to perform, acts performed improperly, and failure to act in the face of an affirmative duty to act." P. Ramanatha Aiyar's Law Lexicon, Reprint Edition 1987 at page 821 defines 'misconduct' thus: "The term misconduct implies a wrongful intention, and not a mere error of judgment. Misconduct is not necessarily the same thing as conduct involving moral turpitude. The word misconduct is a relative term, and has to be50 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 construed with reference to the subject matter and the context wherein the term occurs, having regard to the scope of the Act or statute which is being construed. Misconduct literally means wrong conduct or improper conduct. In usual parlance, misconduct means a transgression of some established and definite rule of action, where no discretion is left, except what necessity may demand and carelessness, negligence and unskilfulness are transgressions of some established, but indefinite, rule of action, where some discretion is necessarily left to the actor. Misconduct is a violation of definite law; carelessness or abuse of discretion under an indefinite law. Misconduct is a forbidden act; carelessness, a forbidden quality of an act, and is necessarily indefinite. Misconduct in office may be defined as unlawful behaviour or neglect by a public officer, by which the rights of a party have been affected." Thus it could be seen that the word 'misconduct' though not capable of precise definition, on reflection receives its connotation from the context, the delinquency in its performance and its effect on the discipline and the nature of the duty. It may involve moral turpitude, it must be improper or wrong behaviour; unlawful behaviour, willful in character; forbidden act, a transgression of established and definite rule of action or code of conduct but not mere error of judgment, carelessness or negligence in performance of the duty; the act complained of bears forbidden quality or character. It is also held that an error of judgment per se is not a misconduct and a negligence simpliciter also would not be a misconduct. T. In order to make submissions profound, the undersigned is reiterating the humble submissions qua the line of disagreement viewed by the disciplinary authority. The disciplinary authority has disagreed with the particular finding of the inquiry officer whereby the inquiry officer arrived at the finding that the reason for damage of embankment is the discharge of the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, whereas, the Chief Engineer while presiding the committee of Central Design, Research and Quality Control, in his report stated that the design discharge is of Kamla structure and not of Kamla river, therefore, it is clear that design discharge is of Kamla structure and not of the river. Therefore, the reason that the water discharge in the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, is not acceptable. It is made clear that the disciplinary authority, erroneously and under errors of facts, has not accepted the reason cited by the inquiry officer. Further, the disciplinary authority has disregarded the earlier reports in this regard. It is to mention here that the reason for differing with the conclusion of the inquiry officer is factually incorrect. In fact, the Chief Engineer-cum- Chairperson, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department in his report dated 18.09.2019 in paragraph no.2 under the head "recommendation of committee" has conclusively held, "वर्ष 2019 का बाढ़ का केन्द्रीय जल आयोग द्वारा प्रतिवेदित अधिकतम जलश्राव 6223.94 क्यूमेक है जो पिछले 40 वर्षो के अधिकतम जलश्राव 3747 क्यूमेक से 166 प्रतिशत अधिक एक अप्रत्याशित हाईड्रोलॉजिकल event के तरफ इंगित कर रहा हैं। इसका समुचित अध्ययन जल विज्ञान निदेशालय एवं FMISC के अधीन कार्यरत MMC के द्वारा किया जाना उचित होगा ताकि भविष्य में नदी के ऊपर पड़नेवाले Morphological प्रभाव का अध्ययन किया जा सके।" Therefore, incorrect factual statement has been given whereas, the findings of the inquiry officer is in consonance with the view point taken in paragraph no.2 of the report dated 18.09.2019. Further, in this regard, report of Chief Engineer, Water Resources Department, Samastipur in his detailed project report and estimate, has conclusively held in his technical note whereby it is clear that the discharge is decided by the course of river and not by structure of the river. It is mentioned in the technical report dated 18.08.2012 that, State Discharge Curve has been plotted at Jainagar and Jhanjharpur gauge sites as per CWC data. Design HFL has been assessed corresponding to Design discharge. This comes out to be as 70m at Jainagar and 54.10m at Jhanjharpur (Stage-Discharge Curves attached) Design discharge (4000 Cumecs) has been fixed by the Joint committee of CWC, Bihar Government & Nepal Government. It is also to mention here that vide letter no. 3731-33 dated 14.08.2019, the Central Water Commission, Lower Ganga Division -1, has written letter to the Chief Engineer, Flood Control and Drainage,51 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Water Resources Department, Samastipur wherein it is made clear that the water discharge at the river gauge at Kamla weir at Jainagar CWC site at Kamla river is around 6223.94 Cumecs which is approximately more than 1.5. It is also to mention here that the office of Joint Director, Flood Management Improvement Support Centre, WRD, Bihar vide report dated September 2019 has categorically mentioned that design water levels for discharge of 6240 m3 /s at Jainagar weir on the Kamla river has been generated for the sole purpose of the preparation of detailed project report. (Please see photocopies of the reports attached earlier as Annexures-18/19/20/21). From perusal of above reports, it is crystal clear that the findings of the inquiry officer regarding increase of discharge is more than 1.5 times. It has incorrectly been held that the discharge is of weir and not of river. Such erroneous view point is totally demolished by the various reports as stated above. In the context of departmental proceedings under the subject, along with the above related letter as archival evidences, only the inspection report issued by letter no. 142, dated 26.07.2019 by the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna after the site inspection between 16.07.2019 to 23.07.2019, and copy of a part of SOP has been given. Apart from this, on the basis of other relevant records which I myself have been able to obtain, immediately this defence statement is being given. Some of the annexures which were posted on Whatsapp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur from time to time, the hard copies of that some of the annexures (in the form of photographs and messages of work) are being attached with the defence statement. From Junior Engineer to the Chief Engineer/ District Magistrate, Darbhanga / District Disaster Management Cell, Madhubani/ Sub-Divisional Magistrate, Biraul/ Flood Control, Planning and Monitoring circle, Patna etc. are associated with in these groups. According to the prevailing method in the department, there is a general practice to use Whatsapp Groups to give quick information and to get instructions from the departmental/senior officials. It has also been mentioned in Annexure-N-2(Ja) of the inspection report issued by the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna's letter no. 142, dated 26.07.2019. Hence, the reason for disagreement with the findings arrived at by the inquiry officer is not tenable in view of above stated paragraph. Therefore, the undersigned humbly prays to accept the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charge not proved. Further, the undersigned is giving response here in below to the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charges proved and partly proved. The undersigned is humbly praying to consider the responses to all the charges. U. It is humbly submitted that the Bihar Government vide letter no.- 2178 dated 28.02.2007 has issued guidelines for timely disposal of departmental proceeding. Stipulated time period has been mentioned in the said guidelines whereby considering different stages of proceeding, time period of one year (12 months) has been given for conclusion of the departmental proceeding which has been prolonged for more than 40 months which clearly shows that instead of arriving at fair decision, the authority concerned was trying to find some ploy to incriminate the undersigned anyhow and same has produced cascading effect of imposing maximum punishment upon the undersigned which is impermissible both in law and on facts. The undersigned has severely been prejudiced on account of such delayed conclusion of departmental proceeding.

V. That the Disciplinary Authority has not acted properly and has not applied his mind to the charges vis-à-vis the representative given by the undersigned. The reply to the 2nd show cause notice/representation submitted by the undersigned was not at all considered by the Disciplinary Authority. The Disciplinary Authority has not at all considered the reply to the 2nd show cause notice/representation and has mechanically and without application of independent mind, passed the impugned order. (Photocopy of the reply to the 2nd show cause notice/representation is annexed herewith and marked as Annexure-50).

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(cid:464)बहार गजट, 4 2023 W. That from perusal of punishment order dated 02.12.2022, it is apparent that the disciplinary authority has not recorded his findings on the articles of charge, hence, decision to punish the undersigned has already been taken and only a pretence of the departmental proceeding has been given which is not permissible. It is pertinent to mention here that in terms of Rule-18(6), it is obligatory and mandatory upon the disciplinary authority to arrive at findings on articles of charge and must opine on the basis of evidence adduced during the inquiry. In the present case, the disciplinary authority had abdicated his responsibilities and has punished the undersigned without discussing any issue raised by the undersigned. X. That the requirement of reasons to be assigned for arriving to a conclusion have been judicially settled for the purpose that while making judicial review of the findings of the original authority in decision making process can well be assessed on the basis of application of mind which given by the authority at the time of taking such decision and therefore, it has been made obligatory upon the authorities passing any order that the order must reflect the mind of the authority when such decisions are said to have been taken. Y. That from perusal of impugned order, it is apparent that there is no finding arrived at by the disciplinary authority in order to impose punishment upon the undersigned. The punishment order is based on no evidence. The Enquiry Officer has not allowed to cross examine any witnesses nor the Presenting Officer has produced such witnesses, resultantly same has adversely affected the right of the undersigned of not cross examining the witnesses. The guilt of the undersigned has been assumed and on the basis of assumption and presumption, the undersigned has been held guilty. Therefore, a cosmetic and sham departmental proceeding was initiated which ultimately led to imposition of penalty upon the undersigned without proving any evidence which clearly shows that the punishment meted out with the undersigned is based on no evidence. Z. That the explanations submitted by the undersigned before initiation of framing of Charges, before the Enquiry Officer and before the Disciplinary Authority, were not at all looked into by the above authorities much less the consideration of the same. There is no whisper of the explanations submitted by the undersigned in the impugned dismissal order which clearly shows mechanical and non application of mind. The Disciplinary Authority has reproduced the averments of the undersigned without considering the same which clearly establishes that the punishment meted out against the undersigned is based on no evidence and same is perverse. AA. That the disciplinary authority without having regard to the findings on all or any of the articles of charge and without having regard to the basis of evidence adduced during the enquiry, has mechanically and illegally passed an order imposing penalty which shows callous and arbitrary attitude and hence, such order is fit to be set aside in view of the fact that the same is contrary to the provisions of CCA Rules, violative of principles of natural justice and against the law laid down by Hon'ble Supreme Court and Hon'ble Patna High Court. BB. That the word "consider", in Sub-Rule (4) of Rule 18, is of much significance, which casts a duty on the disciplinary authority "to apply his mind". Whether the representation or submissions made by the Government servant has been considered or not should be apparent from the order itself. In the present case, the final order passed by the disciplinary authority imposing punishment, does not contain any reason as to why the explanation/reply of the undersigned to the notice given by the disciplinary authority, was not acceptable. It is submitted that Rule 18(4) casts an obligation on the disciplinary authority to consider the representation/ submission, made by a Government servant, in response to the findings recorded by the disciplinary authority. CC. That it is apparent that the disciplinary authority has not recorded his findings on the articles of charge and on the basis of evidence adduced during the inquiry. The disciplinary authority has merely reproduced the explanation submitted by the undersigned, hence, decision53 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 to punish has been taken against the undersigned. It is pertinent to mention here that in terms of Rule-18(6), it is obligatory and mandatory upon the disciplinary authority to arrive at findings on article of charge and must opine on the basis of evidence adduced during the inquiry. In the present case, the disciplinary authority had abdicated his responsibilities. DD. That the disciplinary authority is required in law to consider the findings on the articles of charge and must have opinion that such penalties should be imposed on the undersigned then only the disciplinary authority can impose the penalties that too, after having regard to its finding on the articles of charge and on the basis of evidence adduced and must come to a reason for imposing such penalty. From perusal of impugned order by which the punishment has been given, it is evident that the disciplinary authority has not given any findings on the articles of charge and there is no basis of evidences adduced and nothing has been discussed in the order. Further, the disciplinary authority has not cited the reasons or the materials which formed his opinion to arrive at such finding that punishment be imposed upon the undersigned. EE. That Rule-18(4) of Bihar Government Servants CCA Rules, 2005 states, the disciplinary authority shall consider the representative or submission, if any, submitted by the Government Servant before proceeding further in the manner specified in sub rules (5) and (6). FF. That Rule-18(6) of Bihar Government Servants CCA Rules, 2005 states, if the disciplinary authority, having regard to its findings on all or any of the articles of charge and on the basis of the evidence adduced during the inquiry is of the opinion that any of the penalties specified in clauses [(vi) to (xi)] of Rule 14 should be imposed on the Government Servant, it shall make an order imposing such penalty and it shall not be necessary to give the Government Servant any opportunity of making representation on the penalty proposed to be imposed. GG. That the disciplinary authority has neither considered the representation nor considered the submission which is mandatory upon the disciplinary authority in terms of the said Rule. HH. That absence of reasons in an order, exercising quasi-judicial function, amounts to non- application of mind and, therefore, not sustainable, being violative of the principles of natural justice. II. That the legal position on the onus to be discharged by authority performing quasi judicial functions as well as the manner of disposal stands discussed in the judgment of the Supreme Court rendered in the case of Travancore Rayone Ltd. versus The Union of India and ors. The duty cast on the quasi judicial authority as well as the importance of assigning reasons while adjudicating on inter party rights having been settled, and followed until date, yet has evaded the wisdom of the authorities performing such quasi judicial functions, as often seen. JJ. That Quasi-judicial and even administrative orders are required to be speaking orders. In Kranti Associates Private Ltd. & Anr. Vs. Masood Ahmed Khan & Ors., reported in (2010) 9 SCC 496, Hon'ble Supreme Court, has summarized the importance of any order to be a speaking one. Hon'ble Supreme Court in paragraph 47 of Kranti Associates Private Ltd. has stated thus:- (a) In India the judicial trend has always been to record reasons, even in administrative decisions, if such decisions affect anyone prejudicially. (b) A quasi-judicial authority must record reasons in support of its conclusions. (c) Insistence on recording of reasons is meant to serve the wider principle of justice that justice must not only be done it must also appear to be done as well. (d) Recording of reasons also operates as a valid restrain on any possible arbitrary exercise of judicial and quasi-judicial or even administrative power. (e) Reasons reassure that discretion has been exercised by the decision-maker on relevant grounds and by disregarding extraneous considerations. (f) Reasons have virtually become as indispensable a component of a decision- making process as observing principles of natural justice by judicial, quasi-judicial and even by administrative bodies. (g) Reasons facilitate the process of judicial review by superior courts. (h) The ongoing judicial trend in all countries committed to rule of law and constitutional governance is in favour of reasoned decisions based on relevant facts. This is virtually the54 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 lifeblood of judicial decision-making justifying the principle that reason is the soul of justice. (i) Judicial or even quasi judicial opinions these days can be as different as the judges and authorities who deliver them. All these decisions serve one common purpose which is to demonstrate by reason that the relevant factors have been objectively considered. This is important for sustaining the litigants' faith in the justice delivery system. (j) Insistence on reason is a requirement for both judicial accountability and transparency. (k) If a judge or a quasi judicial authority is not candid enough about his/her decision-making process then it is impossible to know whether the person deciding is faithful to the doctrine of precedent or to principles of incrementalism. (l) Reasons in support of decisions must be cogent, clear and succinct. A pretence reasons or "rubber-stamp reasons" is not to be equated with a valid decision-making process. (m) It cannot be doubted that transparency is the sine qua non of restraint on abuse of judicial powers. Transparency in decision-making not only makes the judges and decision makers less prone to errors but also makes them subject to broader scrutiny. (n) Since the requirement to record reasons emanates from the broad doctrine of fairness in decision making, the said requirement is now virtually a component of human rights. (o) In all common law jurisdictions judgments play a vital role in setting up precedents for the future. Therefore, for development of law, requirement of giving reasons for the decision is of the essence and is virtually a part of "due Process". Tested on the aforesaid score, the order of the disciplinary authority is not a speaking order. KK. That order of punishment apparently is mechanical bereft of discussion and expresses no reasons for imposing the severe penalty which has been passed without considering objectively the explanation of the undersigned or expressing any opinion thereon. LL. In the light of above paragraphs, it is submitted by the undersigned that the enquiry was not held in accordance with prescribed procedure. Further, there is violation of principles of natural justice. Both the Inquiry Officer and the Disciplinary Authority have disabled themselves from reaching a fair conclusion by not considering relevant materials and by being influenced by irrelevant materials. The conclusions arrived at by the Inquiry Officer and the Disciplinary Authority are arbitrary as no reasonable person could ever have arrived at such conclusion. The Disciplinary Authority has failed to consider material facts. In fact, the finding of fact is not based on any evidence rather present is the case of no evidence. The undersigned has been a victim of mala fide action on the part of the Government. All procedural fairness has been given a go bye with the sole view to dismiss the undersigned anyhow. Therefore, the earlier penalty was revisited. In fact, both the earlier and the present penalties are non est in the eyes of law and both are based on no evidence. MM. In the light of above principles, the charges leveled against the undersigned is not misconduct, therefore, the undersigned may kindly be exonerated from all the charges and consequently, the order of dismissal being Notification as contained in Memo No.- 2698 dated 02.12.2022 is fit to be set aside in view of the above submissions and facts.(Photocopy of the Notification no.-2698 dated 02.12.2022 is annexed herewith and marked as Annexure- 51).The undersigned humbly prays for setting aside of the order of dismissal and allow the undersigned to be reinstated in the services with all admissible and monetary benefits." यह आरोप अभियंता प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक 26.

07.2019 में उल्लेखित तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अन्तर्गत हुए विभिन्न कटान/टूटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं किये जाने एवं न ही इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी किये जाने से संबंधित है।

इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी श्री प्रेम प्रकाश के द्वारा उल्लेख किया गया है कि ग्रामीणों के विरोध के कारण कुछ स्थलों को छोड़कर शेष पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। अभियंता प्रमुख बाढ़ द्वारा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक-16.07.2019 को किये गये स्थल निरीक्षण के क्रम में किसी भी कटान बिन्दु पर क्षेत्रीय55 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी और न ही इस संबंध में किसी भी प्रकार की तैयारी ही देखी गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग द्वारा बतलाया गया कि उनका प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण के उपरान्त दिया गया है एवं यह तथ्यात्मक है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में उक्त कटाव की सुरक्षा हेतु किये गये आवश्यक कार्रवाई के निमित्त बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के समुचित भंडारण से संबंधित कोई अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। बाढ़ अवधि में बाँध के सतत्‌ निगरानी एवं चौकसी हेतु विभाग के स्तर पर कई आदेश संसूचित है, जिसके आलोक में क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा बाँध का सतत्‌ निरीक्षण कर अक्राम्य स्थलों को चिन्हित करते हुए आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का यथोचित मात्रा में भण्डारण सुनिश्चित किया जाता है, तथा हर स्थिति में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराते हुए बाँध को सुरक्षित रखना उनका दायित्व होता है, वर्णित मामले में आरोपित पदाधिकारी श्री प्रकाश के द्वारा समुचित कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण बाँध को क्षतिग्रस्त होने/टुटने से नहीं बचाया जा सका।

यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कंडिका-4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने से संबंधित है।

यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद विफल रहने से संबंधित है।

इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी श्री प्रकाश के द्वारा उल्लेखित है कि "उनके द्वारा SOP के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई की गयी एवं इससे संबंधित अभिलेख विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित भी किए गए हैं। नदी का जलश्राव रूपांकित जलश्राव से डेढ गुणा से अधिक बढ़ जाने के कारण पुरा तटबंध ही आक्रम्यता की स्थिति में आ गयी तो उनके लिए सभी विन्दुओं पर SOP का अनुपालन करना संभव नहीं था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बताया गया है कि आरोपी पदाधिकारियों के द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने का आरोप सही है। जबकि आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) के संबंध में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण ने बताया कि तटबंधो का कई स्थलों पर टूट जाना ही बताता है कि ये संचालन प्रक्रिया के अनुपालन में विफल रहे। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा विभागीय SOP का अनुपालन नहीं किया जाना इस तथ्य से भी प्रमाणित होता है कि "अभियंता प्रमुख (बाढ़) द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में कटाव स्थल पर क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भंडारण के संबंध में कोई तैयारी दृष्टिगोचर नहीं हुआ" तथा यह भी परिलक्षित होता है कि संबंधित क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा पूर्व से अक्राम्य स्थलों का भ्रमण नहीं किया गया तथा किसी प्रकार की बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु तैयारी नहीं की गई। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में अपने बचाव के समर्थन में कोई नया तथ्य/अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। अतः पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। यह आरोप अभियंता प्रमुख द्वारा दिनांक 22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल के निरीक्षण के दौरान रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाये जाने से संबंधित है जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया।

इस आरोप के संबंध में आरोपित पदाधिकारी श्री प्रकाश के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि "दिनांक-21.07.2019 के अपराह्‌न से नरूआर कार्य स्थल पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था परन्तु रात्रि में 9ः30 बजे जेनरेटर खराब हो जाने के कारण कार्य कुछ देर के लिए बाधित जरूर हुआ, जिसे शीघ्र ही दूसरा जेनरेटर लगाकर पुनः प्रारंभ किया गया एवं रात्रि 01ः00 बजे तक नायलन क्रेटिंग का कार्य किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य के पश्चात्‌ स्लोप कटाई का कार्य जे०सी०बी० से किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य लेईग रजिस्टर में समय के साथ अंकित है।" परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा कहा गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 13.07.2019 एवं 14.07.2019 को तटबंध के टूटने के पश्चात्‌ दिनांक 21.07.2019 तक तटबंधों की सुरक्षा हेतु बिल्कुल ही लापरवाह रहे। यहाँ तक कि दिनांक 21.07.2019 को भी रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाया गया जबकि इस हालात में युद्ध स्तर पर 24 घंटे कार्य चलना चाहिए था। आकस्मिकता की इस स्थिति में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का बीच में हीं बंद हो जाना लापरवाही का द्योतक है। उक्त परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया को CCA Rules-2005 में प्रावधानित नियमों के विपरीत बताया है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-172 दिनांक-04.12.2020 एवं पत्रांक-181 दिनांक-24.02.2020 द्वारा श्री प्रेम प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा दिनांक-24.12.2020 को अपना जवाब समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त बचाव-बयान दिनांक-24.12.2020 को हीं प्राप्त किया गया एवं कार्यवाही की अगली तिथि तय की जायेगी का उल्लेख आरोपित पदाधिकारी के आवश्यकतानुसार किया गया है।56 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 आरोपित पदाधिकारी के द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्कर्ष/फलाफल का छः माह तक इन्तजार किया गया तथा इस क्रम में आरोपी पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा भी नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा RTI के तहत विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की सूचना की माँग किये जाने के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की सूचना उपलब्ध कराई गई। सूचना से आरोपित पदाधिकारी को यह ज्ञात हुआ कि संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया पूर्ण कर जाँच प्रतिवेदन दिनांक-24.02.2021 को हीं विभाग को समर्पित कर दिया गया है। विभाग द्वारा उक्त संचालन प्रतिवेदन को प्रावधान के अनुसार नहीं पाया गया। तत्पश्चात्‌ संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-133 दिनांक-09.08.2021 से आरोपित पदाधिकारियों को साक्षियों के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु दिनांक-16.08.2021 की तिथि निर्धारित की गयी। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि उनको साक्षियों का प्रतिपरीक्षण नहीं करने दिया गया, जिसके लिए इनके द्वारा दिनांक-13.12. 2021 को लिखे गये अनुरोध पत्र में श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर से प्रतिपरीक्षण करने हेतु अनुरोध किया गया था। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि, आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण कराये जाने के, उक्त अनुरोध के आलोक में संचालन पदाधिकारी का पत्रांक-42 दिनांक-11.02.2022 जो श्री प्रेम प्रकाश को संबोधित है, में स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए उन्हें संसूचित किया गया है कि दिनांक-18.08.2021 को विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में वर्णित साक्षियों का आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोपों के बिन्दुओं पर परीक्षण/प्रतिपरीक्षण किया गया। तदोपरांत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में कभी भी आरोपित पदाधिकारी के द्वारा परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु किसी अन्य को बुलाने का आग्रह नहीं किया गया था। चुंकि आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में अंकित साक्षियों के सूची में श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का नाम अंकित नहीं है। अतः श्री सतीश कुमार का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण संचालन पदाधिकारी के स्तर से किया जाना उचित नहीं है, का उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया है।

अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित उपरोक्त वर्णित पत्रों के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी के द्वारा श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण कराये जाने के संदर्भ में कार्यवाही संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी से अनुरोध नहीं किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होते हुए मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, पटना द्वारा उनके प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि रूपांकित जलश्राव (Design Discharge) कमला वियर का है न कि कमला नदी का।

अतः टूटान की तिथि को कमला नदी में प्रवाहित जलश्राव, कमला नदी के जलश्राव के 1.5 गुणा से अधिक होने का तर्क स्वीकार योग्य नहीं है।

इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में अपने बचाव के समर्थन में कोई नया तथ्य/अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। अतः उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री प्रेम प्रकाश (आई॰डी॰-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

इस प्रकार उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारी श्री प्रेम प्रकाश, तत0 सहायक अभियंता, सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरुद्ध बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद बाँध के सुरक्षार्थ बाढ़ अवधि में आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई नहीं किये जाने से, बाँध को क्षतिग्रस्त होने से रोकने में विफल रहने एवं आकस्मिकता की परिस्थिति में भी युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास नहीं करने तथा 22.07.2019 को अभियंता प्रमुख के स्थल निरीक्षण के क्रम में नरूआर कटाव स्थल पर रात 9ः30 बजे कार्य बन्द पाये जाने के दृष्टांत के परिप्रेक्ष्य में इनके विरूद्ध गठित आरोप सं॰-01, 02 एवं 03 यथावत्‌ प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोपित पदाधिकारी श्री प्रेम प्रकाश के द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया को CCA Rules 2005 में प्रावधानित नियमों के विपरीत बताया है, जबकि इस संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में साक्षियों के अलावा किसी अन्य पदाधिकारी के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु संचालन पदाधिकारी से कोई आग्रह नहीं किया गया था, जिसकी पुष्टि संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-42 दिनांक-11.02.2022 के अवलोकन से होता है। उक्त से आरोपित पदाधिकारी के द्वारा प्रतिपरीक्षण नहीं करने दिये जाने से संबंधित आरोप, तथ्यों के विपरीत प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी श्री प्रकाश के द्वारा उनपर गठित आरोपों के संदर्भ में अपने पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके परिप्रेक्ष्य में श्री प्रकाश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के कारण पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-2698 दिनांक 02.12.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखते हुए उनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है, जिसपर सक्षम प्राधिकार के रूप में मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री प्रेम प्रकाश, (आई0डी0-5277), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर, संप्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-2698 दिनांक 02.12. 2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखते हुए पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।57 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 श्री गोविन्द प्रसाद (आई0डी0-3948), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, सिवान को गंडक नदी का सर्वेक्षण कार्य के संबंध उच्चाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेश के बावजूद भुगतान नहीं करने, अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, स्वेच्छाचारिता पूर्वक कार्य करने तथा अनुशासनहीनता पूर्वक व्यवहार करने संबंधी आरोपों के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(i) के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-299 दिनांक 10.02.2022 द्वारा निलंबित किया गया। श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-323 दिनांक 15.02.2022 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपने निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध CWJC No- 3754/2023 दायर किया गया। जिसमें दिनांक 28.04.2023 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्याय निर्णय पारित किया गया - "Having regard to the reliefs prayed on behalf of the petitioner at this stage, this court directs the disiciplinary authority to ensure completion of the DP against the petitioner within a period of six months from the date of recepit/production of a copy of this order. If the disciplinary proceeding is not concluded within a period of six months, for no fault on the part of petitioner, the respondents shall consider the desirablity of revoking the order of suspension of the petitioner. The petitioner must cooperate in court of departmental proceeding. this writ application stands disposed of accordingly." उल्लेखनीय है कि श्री गोविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से जीवन निर्वाह भत्ता बढ़ाने संबंधी प्राप्त आवेदन पर विचार करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-853 दिनांक 26.05.2023 द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता मूल वेतन का 62.5% दिनांक 09.02.2023 के प्रभाव से वृद्धि करने का निर्णय लिया गया।

इसी क्रम में श्री गोविन्द प्रसाद दिनांक 31.05.2023 को सेवानिवृत हो गए।

CWJC No-3754/2023 गोविन्द प्रसाद बनाम अन्य में दिनांक 28.04.2023 को पारित न्यायादेश एवं श्री प्रसाद के दिनांक 31.05.2023 को सेवानिवृत होने के कारण सरकार के स्तर से समीक्षोपरांत श्री गोविन्द्र प्रसाद (आई0डी0-3948), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, सिवान सम्प्रति सेवानिवृत को सेवानिवृति की तिथि दिनांक-31.05.2023 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 09.05.2023 को LPA-1443/2018 (बिहार सरकार बनाम मुकेश कुमार सिंह) में निम्न आदेश पारित किया गया - "Principle laid down by the Apex Court in the aforementioned decisions is that in the event of quashing of any penalty order on technical ground, in that even matter is to be remanded to the Disciplinary Authority to commence the inquiry from the defective stage. Further, Disciplinary Authority is required to examine as to whether the concerned Government servant/employee was required to be placed under suspension till a fresh inquiry is concluded or he shall be taken back to duty or not? In this regard, Disciplinary Authority is hereby directed to take decision within a period of two months from the date of receipt of this order. Further, the Inquiry shall be completed within a period of six months from the date of receipt of this order from the defective stage of the inquiry proceedings. For the intervening period from the date of dismissal dated 10.07.2015 to till passing of a fresh order in a departmental inquiry is required to be regulated in accordance with law. Such decision shall be taken by the disciplinary authority after passing of final order in the departmental proceedings within a period of two months. To the above extent, order of the learned Single Judge is modified and L.P.A. stands allowed in Part."58 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उल्लेखनीय है कि श्री मुकेश कुमार सिंह (आई0डी0-4499), तत्कालीन सहायक अभियंता, चन्द्रदेई अनुमंडल, अररिया सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध गलत तरीके से आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में आर्थिक अपराध थाना कांड सं०-24/13 दिनांक 27.06.2013 धारा-13(2) पठित धारा-13(1) (ई0) भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 दर्ज किया गया। उक्त मामले में श्री मुकेश कुमार सिंह को विभागीय अधिसूचना सं०-948 दिनांक 13.08.2013 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1072 दिनांक 06.09.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई एवं विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1559 दिनांक 10.07.2015 द्वारा "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर CWJC– 17665/15 (मुकेश कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में दिनांक 08.03.2018 को पारित आदेश के विरूद्ध विभाग द्वारा LPA- 1443/2018 दायर किया गया। इसी क्रम में श्री सिंह द्वारा CWJC-17665/2015 में दिनांक 08.03.2018 को पारित न्यायादेश के अनुपालन हेतु माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अवमाननावाद MJC No-2068/2018 (मुकेश कुमार सिंह बनाम बिहार सरकार एवं अन्य) दायर किया गया। MJC No-2068/2018 मेंं दिनांक 08.03.2018 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं०-1709 दिनांक 08.08.2019 द्वारा पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं०-1559 दिनांक 10.07. 2015 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध अधिरोपित एवं संसूचित दण्ड "सेवा से बर्खास्तगी" के दण्ड को निरस्त करते हुए उन्हें इस शर्त्त के साथ सेवा में पुनस्र्थापित किया गया कि सेवा में पुनस्र्थापन संबंधी वर्तमान आदेश माननीय उच्च न्यायालय, पटना में लंबित LPA-1443/2018 में पारित आदेश के फलाफल से आच्छादित होगा। उल्लेखनीय है कि श्री मुकेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता को दिनांक 08.08.2019 को सेवा में पुनस्र्थापित करने के साथ-साथ एक अन्य मामला जो पूर्वी कोशी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में अनियमितता बरते जाने से संबंधित है, में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1730 दिनांक 09.08.2019 द्वारा निलंबित किया गया है। CWJC No- 17665/2015 में दिनांक 08.03.2018 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह को सेवा में पुनस्र्थापित किये जाने के उपरांत विभागीय संकल्प सं0-2011 दिनांक 18.09. 2019 द्वारा पूर्व से गठित आरोप पत्र (आर्थिक अपराध इकाई के पत्रांक-176 दिनांक 28.06.2013 से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आर्थिक अपराध थाना कांड सं0-24/2013 के प्राथमिकी के आधार पर गठित) के आधार पर ही नए सिरे से CCA Rules, 2005 के नियम-17 के तहत पुनः विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री मुकेश कुमार सिंह के विरूद्ध अधिरोपित "सेवा से बर्खास्तगी" के दण्ड को माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा CCA Rules, 2005 के नियम-17(14) का अनुपालन नहीं किए जाने तथा गवाहों का परीक्षण नहीं करने के कारण निरस्त किया गया। चूँकि तकनीकी आधार पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सेवा से बर्खास्तगी संबंधी दण्डादेश को निरस्त किया गया है। अतएव CCA Rules, 2005 के नियम-9(5) के प्रावधान के तहत "सेवा से बर्खास्तगी" के दण्ड को निरस्त किये जाने पर "सेवा से बर्खास्तगी" की मूल आदेश की तिथि (दिनांक 10.07.2015) से श्री मुकेश कुमार सिंह निलंबित समझे जाएगे। उक्त के संदर्भ में विभागीय स्तर पर की गई समीक्षा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्न निर्णय लिया गया - "बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(5) के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह "सेवा से बर्खास्तगी" के मूल आदेश की तिथि 10.07.2015 से निलंबित समझे जायेंगे एवं अगले आदेश तक निलंबनाधीन रहेंगे तथा निलंबन अवधि के लिए नियमानुकूल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा"। उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुकेश कुमार सिंह "सेवा से बर्खास्तगी" के मूल आदेश की तिथि 10.07.2015 से निलंबित समझे जायेंगे एवं अगले आदेश तक निलंबनाधीन रहेंगे तथा निलंबन अवधि के लिए नियमानुकूल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा"। श्री रवि शास्त्री (आई0डी0-5397), तत0 सहायक अभियंता (अवर प्रमंडल पदाधिकारी), पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सुपौल के विरूद्ध मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, वीरपुर के पत्रांक-1669 दिनांक 31.05.2023 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि इनके विरूद्ध सुपौल थाना कांड सं0-346/23 दिनांक 11.05.2023 दर्ज की गयी। सुपौल थाना कांड सं0-346/23 दिनांक 11.05.2023 दर्ज होने के पश्चात श्री शास्त्री, तत0 सहायक अभियंता दिनांक 13.05.2023 से न्यायिक अभिरक्षा में हैं।

सरकार के स्तर पर उक्त की पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(2) में निहित प्रावधानों के तहत श्री शास्त्री को न्यायिक अभिरक्षा में लिये जाने की तिथि 13.05.2023 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।59 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 निलंबन अवधि में श्री रवि शास्त्री (आई0डी0-5397), तत0 सहायक अभियंता (अवर प्रमंडल पदाधिकारी), पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल, सुपौल को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली, 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। श्री सुन्दर साहु (आई0डी0-जे 7498), तत्कालीन सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा, सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध दरियापुर वियर एवं इससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य में प्रमंडलीय लेखापाल के अभ्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं पर विभागीय निदेश के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच कराया गया। विभागीय उड़नदस्ता द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी से करायी गई। समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर आरोप पत्र में उल्लिखित बिन्दुओं की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। इसी बीच श्री साहु सेवानिवृत्त हो गये। फलस्वरूप, उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 'बी' के तहत्‌ समपरिवर्तित किया गया। समीक्षोपरांत संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) किया गया। श्री साहु द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षोपरांत - उपर्युक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सुन्दर साहु, तत्कालीन सहायक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसकी समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा निम्न प्रकार से की गयी :-

उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जल पथ प्रमंडल, षेखपुरा अन्तर्गत दरियापुर वीयर एवं उससे निस्तृत प्रणाली के निर्माण कार्य का एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11में Price Escalationमद में Clause 10CAके बजाय 10CCके तहत किये गये 104.27989 लाख रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्पष्चात उक्त राषि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए आप दोषी प्रतीत होते है।

आरोपी पदाधिकारी आरोप सं॰(1) के लिए दोषी पाये जाने के आलोक में विभाग द्वारा दिये गये दण्ड के विरूद्ध अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि -

''जल पथ प्रमंडल शेखपुरा के कार्यकाल में निदेशानुसार मेरे द्वारा अधीक्षण अभियंता के माध्यम से संवेदक द्वारा प्राप्त एस्केलेशन बिल पर भुगतान मेरे द्वारा किया गया। इस विपत्र के भुगतान से उत्पन्न विवाद हेतु विभाग द्वारा मुझे दोषी मानते हुए स्थाई रूप से '50%पेंशन 10 वर्षों तक रोक' का दंड विभागीय अधिसूचना संख्या-2381, दिनांक-7/10/2022 के द्वारा संसूचित किया गया है। उपरोक्त के संबंध में स्पष्ट करना है की संवेदक द्वारा 23/11/12 को एकरनामा में वर्णित क्लॉज 10C के तहत एस्केलेशन विपत्र प्रमंडल में समर्पित किया गया था परंतु उक्त क्लॉज से भुगतान की प्रक्रिया अस्पष्ट होने के कारण प्रमंडल से भुगतान नहीं किया जा सका। तत्पश्चात, संवेदक के द्वारा अधीक्षण अभियंता, सिचाई अंचल स०-2 जमुई के कार्यालय में भुगतान हेतु पुनः संवेदक द्वारा एकरनामा के क्लॉज 10C के तहत अपना विपत्र भुगतान हेतु आवेदन समर्पित किया गया। गौरतलब है की एस्केलेशन विपत्र भुगतान के लिए लागू कलौज 10C की अस्पष्टता को मानते हुए तथा संवेदक के वितीय स्थिती को ध्यान में रखते हुए अधीक्षण अभियंता द्वारा संवेदक से एक स्व घोषणा पत्र लिया गया जिसमे सशर्त भुगतान करने तथा किसी प्रकार की विसंगति उत्पन होने की स्थिति में सम्पूर्ण जवाबदेही संवेदक द्वारा खुद पर लेने की बात कही गयी है। तदोपरांत अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रतिहस्तारित घोषणा पत्र के आलोक में जलपथ प्रमंडल शेखपुरा को शीघ्र विपत्र भुगतान, हेतु निर्देशित किया गया ताकि संवेदक को कोई आर्थिक संकट पैदा न हो। अधीक्षण अभियंता सिंचाई अंचल संख्या-2 जमुई में पत्रांक 391 दिनांक-15/05/2013 के निदेशानुसार प्रमंडलीय लेखापाल को भुगतान करने सम्बंधित कारवाई का निर्देश दिया गया एवं उनके जाँच उपरांत सयुंक्त हस्ताक्षर विपत्र का भुगतान किया गया। भुगतान के कुछ दिनों बाद उनके द्वारा अनियमित भुगतान सम्बन्धी अन्य कई विन्दुओ को उठाते हुए हमपर आरोप लगाया गया। विभागीय निदेशानुसार मुख्य अभियंता भागलपुर के पत्रांक-3807 दिनांक-12.12.2014 द्वारा प्राप्त निदेश एवं संवेदक के Undertaking के आलोक में भुगतान की गयी राशि की वसूली की गयी। माननीय उच्च न्यायालय में पारित न्याय निर्णय के तहत वसूल की गयी राशि संवेदक को कारवाई गयी है। भुगतान होने के पश्चात एस्केलेशन के यथार्तता पर विगत 8-10 वर्षो से विभाग एवं संवेदक के बीच माननीय उच्च न्यायालय में CWJC-5892/2014 दायर किया गया जो सुनवाई के उपरांत संवेदक के पक्ष में आदेश पारित किया गया। इस आदेश के विरुद्ध सरकार द्वारा L.P.A No-1255/17 दायर किया गया जिसे दिनांक 17.01.2018 को सुनवाई के उपरांत CWJC 5892/14 के आदेश दिनांक 18.04.2017 को निरस्त करते हुए संवेदक कोWork Tribunal जाने की Liberty प्रदान की गई। उक्त के आलोक में ट्रिबुनल में मामला विचाराधीन है। संवेदक का अंतिम विपत्र अभी तक60 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 पारित नहीं हुआ है और उसकाSD+EMD के रूप में जमा राशि जो 10CC के अंतर्गत कतिपय अधिकेय भुगतान से अधिक है, प्रमंडल द्वारा रोक रखा गया है जो Tribunal/न्यायालय के निर्णय के बाद ही या तो Adjust किया जायेगा अथवा लौटाया जायेगा। उसी संवेदक को पुनः अवशेष कार्य नयी निविदा के अनुसार दिनांक-18/12/2017 को कलौज 10CCके तहत आवंटित किया गया। शेष कार्य को पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया एवं पूर्ण कार्य को करने के लिए 2015 तक समयवृद्धि की गयी। महोदय द्वाराC.C.A rules 2005 के तहत विभागीय कार्यवाही सम्पादित की गई एवं मेरा सेवा निवृति दिनांक 31.12. 2019 के उपरांत दिनांक 02.09.2021 को इसे 43 'B' Bihar Pension Rules में संपरिवर्तित किया गया एवं मेरे विरुद्ध विभागीय कारवाई U/R17 संचालित कर विभाग एवं संवेदक के बीच एस्केलेशन से उत्पन्न विवाद के लिए मुझे दोषी ठहराते मेरे पेंशन का 50% राशि को 10 वर्षों तक रोक लगाने का हुए अत्यंत कठोर दंड दिनांक 07.10.2022 को दिया गया है। अतः अनुरोध है कि उपर्युक्त कंडिकाओ तथा उच्चाधिकारी के निर्देश के अनुपालन में मेरे द्वारा भुगतान किया गया है। मै विभाग एवं न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए कार्य किया हूँ। अतः मेरे दंड आदेश पर सहानुभूति पूर्वक पुनर्विचार करते हुए मुझे विभागीय दंड से मुक्त करने की —पा की जाय। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य साक्ष्य सहित उपलब्ध नहीं कराया गया है जिस पर विचार किया जा सके। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC-5892/2014 दायर किया गया जो सुनवाई के उपरांत संवेदक के पक्ष में आदेष पारित किया गया। इस आदेष के विरूद्ध सरकार द्वारा LPA No.- 1255/17दायर किया गया जिसे दिनांक 17.01.2018 को सुनवाई के उपरांत CWJC- 5892/14 के आदेष (दिनांक 18.04.2017) को निरस्त करते हुए संवेदक को Work Tribunalजाने की Liberty प्रदान की गई। वर्तमान में उक्त मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है तथा उक्त कार्य का अंतिम विपत्र अभी पारित नहीं किया गया है। विदित हो कि आरोपी पदाधिकारी आरोप सं॰-(1) में दोषी पाये गये है। आरोपी पदाधिकारी एकरारनामा सं॰ 01SBD/2010-11में निहित षर्त्तो एवं विभागीय नियम के इतर जाकर संवेदक को SBDके Clause 10CCके तहत Price Escalation Billका किये गये अनियमित भुगतान में संलग्न रहे है। अतएव, आरोपी पदाधिकारी का पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। ष् ष् अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर श्री सुन्दर साहु द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से संसूचित दण्ड "50 प्रतिशत पेंशन की 10 वर्षों तक रोक" को यथावत रखे जाने का निर्णय लिया गया है। अतएव उक्त निर्णय के आलेाक में श्री सुन्दर साहु (आई0डी0-जे 7498), तत0 सहायक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2382 दिनांक 07.10.2022 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखते हुए उनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है। श्री श्याम कुमार यादव (आई0डी0-4046) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बाढ़ 2019 की अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अन्तर्गत तीन (03) अदद कटान/टूटान बिन्दुओं यथा नरूआर, गोपलखा एवं रखवाड़ी स्थल का पूर्व निरीक्षण नहीं करने, किसी भी टूटान बिन्दु पर कटाव वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्रवाई नहीं करने, विभागीय बेतार संवाद द्वारा कटाव बिन्दुओं को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने संबंधी दिये गये निदेशाें का उल्लंघन करने तथा कर्त्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1731 दिनांक 13.08.2019 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1223 दिनांक 16.10.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- 1. अभियंता प्रमुख के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक 26.07.2019 में अंकित है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या-2 झंझारपुर के अंतर्गत बाढ़ अवधि 2019 में विभिन्न कटान/टुटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंता द्वारा कटान वाले भाग को सुरक्षित रखने की कार्यवाही नहीं की जा रही थी। न ही, इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी ही देखी गयी, जबकि विभागीय वेतार सं0 129 दिनांक 14.07.2019 के द्वारा सभी कटाव बिन्दुओं की बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने का निदेश क्षेत्रीय पदाधिकारी को दिया गया था। 2. बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किया गया। 3. आप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अंतर्गत तटबंधों की सुरक्षा हेतु जिम्मेवार पदाधिकारी रहने के बावजूद इसमें न केवल विफल रहे बल्कि बाढ़ तटबंधों के कई स्थलों पर टुटने के पश्चात जब विभाग की ओर से तटबंधों को हर हाल में सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये, उसके उपरांत भी आपके द्वारा इस ओर आवश्यक ध्यान न देकर आदेश की अवहेलना की गयी। इसके फलस्वरूप अभियंता प्रमुख द्वारा जब दिनांक 22.07.2019 को नेरूआर कटाव स्थल का61 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 निरीक्षण किया गया तो यह पाया गया कि रात 9.30 बजे के बाद कार्य बन्द था, जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीन पालियों में) तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था. जो नहीं किया गया। इस प्रकार यह न केवल विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन है वरन बाढ़ जैसी विभीषिका में प्रभावित होने वाले जन मानस की कठिनाईयों के प्रति आपकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।

का दण्ड संसूचित गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित की गई। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री यादव के विरूद्ध आरोप सं0-01 को प्रमाणित, आरोप सं0-02 को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं आरोप सं0-03 का प्रथम अंश को अप्रमाणित एवं द्वितीय अंश को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। तत्पश्चात मामले की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत आरोप सं0-01 को प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से सहमत होते हुए, आरोप सं0-02 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से असहमत होते हुए तथा आरोप सं0-03 के प्रथम अंश को अप्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से असहमत होते हुए एवं आरोप सं0-03 के द्वितीय अंश को प्रमाणित पाये जाने संबंधी मंतव्य से सहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री यादव को प्रेषित करते हुए विभागीय पत्रांक-502 दिनांक 07.03.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। विभागीय कार्यवाही संचालन के कालक्रम में श्री यादव के दिनांक 28.02.2022 को सेवानिवृत होने के कारण सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-59 सहपठित ज्ञापांक-759 दिनांक 04.04.2022 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। श्री यादव द्वारा अपना लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) विभाग को समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी एवं समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री यादव द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में कोई नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है बल्कि पूर्व में तीनों आरोपों के संबंध में पूछे गये स्पष्टीकरण के संदर्भ में इनके द्वारा समर्पित किये गये बचाव बयान जैसा ही लगभग समरूप/सदृष बचाव-बयान दिया गया है। अतएव, इनके विरूद्ध आरोप पत्र में गठित सभी आरोप को प्रमाणित पाते हुए इनके द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर को अस्वीकार किया जाता है एवं प्रमाणित आरोप के लिए श्री यादव को विभागीय अधिसूचना सं0-2391 दिनांक 10.10.2022 द्वारा दिनांक 28.02.2022 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री श्याम कुमार यादव, सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा विभाग में पुर्नविलोपन अर्जी समर्पित किया गया है, जिसमे उनके द्वारा निम्न तथ्य उल्लेखित की गयी है :- " Most Respectfully Sheweth:- 1. The present Review in the Form of Memorial under Rule-24(2) of Bihar Government Servants (Classification, Control & Appeal) Rules, 2005 (as amended up to date) for setting aside Notification as contained in Memo No.2391 dated 10.10.2022 issued under the signature of the Deputy Secretary of Government of Bihar, Water Resources Department, Patna is being preferred by the undersigned including setting aside of Prapatra-Ka and Inquiry Report on the ground that the entire disciplinary proceeding is contrary to the provisions contained in Bihar CCA Rules, 2005, and in teeth of law laid down by Hon'ble Supreme Court and Hon'ble Patna High Court and also the entire proceeding is in blatant violation of principles of natural justice. 2. The Department vide Letter no.2570 (Anu) dated 11.12.2019, issued Prapatra-Ka along with Imputation of Charges, Inspection Report dated 26.07.2019 issued by Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Patna, Directions dated 16.07.2019 issued jointly by Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Patna and Chairman, Flood Fighting Force, Darbhanga and copy of Standard Operating Procedure (SOP). (Photocopy of letter dated 11.12.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-1). The undersigned vide letter dated 27.12.2019 asked for certain documents which are mentioned in the said letter. (Photocopy of letter dated 27.12.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-2). Instead of supplying documents as asked for by the undersigned, the Department vide letter no.319 dated 25.02.2020 sent reminder to the undersigned for submitting the explanation. (Photocopy of letter dated 25.02.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-3). 3. The undersigned vide letter dated 20.04.2020 submitted detailed explanation to the memo of charge. (Photocopy of letter dated 20.04.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-4). 4. The Government vide Resolution bearing no.1223 dated 16.10.2020 decided to initiate departmental proceeding against the undersigned under provisions of Rule-17 of CCA Rules,62 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 2005. Accordingly, inquiry officer and Presenting Officer were appointed. (Photocopy of letter dated 16.10.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-5). 5. The inquiry officer vide letter no.171 dated 04.12.2020 and vide memo no.180 dated 16.12.2020 conducted the proceeding. The undersigned vide letter dated 24.12.2020 filed his response. (Photocopies of letters dated 04.12.2020/16.12.2020/24.12.2020 are annexed herewith and marked as Annexure-6/7/8). The inquiry officer on the same date i.e., 24.12.2020 accepted the reply and stated that the next date would be fixed as and when required. (Photocopy of letter dated 24.12.2020 is annexed herewith and marked as Annexure-9). 6. The undersigned waited for the outcome of the proceeding which took place before the Inquiry Officer. No second show cause notice nor any inquiry report was served upon the undersigned even after lapse of around 6 months. The undersigned through some sources, received information about the pending proceeding through RTI vide letter no.614 (Anu) dated 16.07.2021. (Photocopy of letter dated 16.07.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-10). The undersigned came to know that the inquiry officer has already submitted the inquiry report dated 24.02.2021 but same was not found palatable to the authorities. The Hon'ble Minister directed the course of action to be adopted by the inquiry officer and sent for further inquiry. 7. The inquiry officer vide letter no. 131 dated 09.08.2021 has asked the undersigned to appear on 16.08.2021 for examination and cross examination of witnesses on the basis of inspection report of the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage. (Photocopy of letter dated 09.08.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-11). 8. Instead of holding examination and cross examination of witness on 16.08.2021, the said examination of the witness took place on 18.08.2021. It is to mention here that instead of Presenting Officer asking any question from the witness i.e., the Engineer-in-Chief, Flood, the inquiry officer himself asked the question and examined the witness. The undersigned was not allowed to cross examine the witness as the said witness told that, " I don't have to say anything. I have already mentioned in the report", therefore, the undersigned was prohibited from cross examining him. In this light, the undersigned vide letter dated 13.12.2021 has requested (i) to cross examine the said witness, (ii) to examine Sri Satish Kumar, the then Chief Engineer, Flood Control & Drainage, Water Resources Department, Samastipur. (Photocopy of letter dated 13.12.2021 is annexed herewith and marked as Annexure-12). The said request of the undersigned was not accepted on various grounds as mentioned in the letter no. 43 dated 11.02.2022.(Photocopy of letter dated 11.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-13). The undersigned vide letter dated 15.02.2022 has again requested for bringing the said witness for examination and cross examination and requested to cross examine the earlier witness as well as pointed out certain discrepancies. (Photocopy of letter dated 15.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-14). The undersigned also requested the Secretary of the Department vide letter dated 25.02.2022 for the needful. (Photocopy of letter dated 25.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-15). The inquiry officer vide letter no.59 dated 28.02.2022 has reiterated the stand taken in letter no.43 dated 11.02.2022. (Photocopy of letter dated 28.02.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-16). 9. The Deputy Secretary to the Government, Government of Bihar vide letter bearing no.502 (Anu) dated 07.03.2022 asked for explanation from the undersigned. The Inquiry report dated 17.09.2021 is also enclosed with the said letter. (Photocopy of letter dated 07.03.2022 is annexed herewith and marked as Annexure-17). 10. The undersigned has submitted humble reply / representation on 30.03.2022 in response to the explanation asked for vide letter dated 07.03.2022. Thereafter, the Department vide Notification as contained in Memo No.2391 dated 10.10.2022 has imposed penalty of63 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 permanent stoppage of 100% pension and the said order of punishment has approval from competent authority. 11. The undersigned is raising issues for kind consideration in the present Memorial which are as follows:- A. The disciplinary authority has disagreed with the particular finding of the inquiry officer whereby the inquiry officer arrived at the finding that the reason for damage of embankment is the discharge of the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, whereas, the Chief Engineer while presiding the committee of Central Design, Research and Quality Control, in his report stated that the design discharge is of Kamla weir and not of Kamla river, therefore, it is clear that design discharge is of Kamla weir and not of the river. Therefore, the reason that the discharge in the Kamla River is more than 1.5 times of the design discharge, is not acceptable. It is made clear that the disciplinary authority, erroneously and under errors of facts, has not accepted the reason cited by the Inquiry Officer. Further, the disciplinary authority has disregarded the earlier reports in this regard. It is to mention here that the reason for differing with the conclusion of the inquiry officer is factually incorrect. In fact, the Chief Engineer-cum- Chairperson, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department in his report dated 18.09.2019 in paragraph no.2 under the head" recommendation of committee" has conclusively held, "वर्ष 2019 का बाढ़ को केन्द्रीय जल आयोग द्वारा प्रतिवेदित अधिकतम जलश्राव 6223.94 क्युमेक है जो पिछले 40 वर्षो के अधिकतम जलश्राव 3747 क्यूमेक से 166 प्रतिशत अधिक एक अप्रत्याशित हाईड्रोलोजिकल event की तरफ इंगित कर रहा हैं। इसका समूचित अध्ययन जल विज्ञान निदेशालय एव ंFMISC के अधीन कार्यरत MMC के द्वारा किया जाना उचित होगा ताकि भविष्य मे नदी के उपर पड़ने वाले Morphological प्रभाव का अध्ययन किया जा सके" Therefore, incorrect factual statement has been given whereas, the findings of the inquiry officer is in consonance with the view point taken in paragraph no.2 of the report dated 18.09.2019. Further, in this regard, report of Chief Engineer, Water Resources Department, Samastipur in his detailed project report and estimate, has conclusively held in his technical note whereby it is clear that the design discharge is decided by the course of river and not by structure of the river. It is mentioned in the technical report dated 18.08.2012 that, "State Discharge Curve has been plotted at Jainagar and Jhanjharpur gauge sites as per CWC data. Design HFL has been assessed corresponding to Design discharge. This comes out to be as 70m at Jainagar and 54.10m at Jhanjharpur. Design discharge (4000 Cumecs) has been fixed by the joint committee of CWC, Bihar Government & Nepal Government." On the basis of this design discharge (4000cumecs), Kamla Balan Embankment has been constructed. when unprecedented discharge crossed through Kamla Balan River on 13.07.2019/14.07.2019, existing embankments were the same which was constructed on design discharge 4000cumecs.It is also to mention here that vide letter no. 3731-33 dated 14.08.2019, the Central Water Commission, Lower Ganga Division -1, has written letter to the Chief Engineer, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Samastipur where in it is made clear that the discharge at the river gauge at Kamla weir at Jainagar CWC site at Kamla River is around 6223.94 Cumec which is approximately more than 1.5times of design discharge. It is also to mention here that the office of Joint Director, Flood Management Improvement Support Centre, WRD, Bihar vide report dated September 2019 has categorically mentioned that design water levels for discharge of 6240 m3 /s at Jainagar weir on the Kamla River has been generated for the sole purpose of the preparation of detailed project report. (Photocopies of the reports are annexed herewith and marked as Annexure-18/19/20/21). From perusal of above reports, it is crystal clear that the findings of the inquiry officer regarding increase of discharge is more than 1.5 times of design discharge. It has incorrectly been held that the discharge is of weir and not of river. Such erroneous view point is totally demolished by the various reports as stated above. In the context of departmental proceedings under the subject, along with the above related letter as archival evidences, only the64 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 inspection report issued by letter no. 142, dated 26.07.2019 by the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna after the site inspection between 16.07.2019 to 23.07.2019, and copy of a part of SOP has been given. Apart from this, on the basis of other relevant records which I myself have been able to obtain, immediately this defence statement is being given. Some of the annexures which were posted on WhatsApp Group FCD-1 & 2 Jhanjharpur and FCD-2 Jhanjharpur from time to time, the hard copies of that some of the annexures (in the form of photographs and messages of work) are being attached with the defence statement. From Junior Engineer to the Chief Engineer/ District Magistrate, Darbhanga / District Disaster Management Cell, Madhubani/ Sub-Divisional Magistrate, Biraul/ Flood Control, Planning and Monitoring circle, Patna etc. are associated with in these groups. According to the prevailing method in the department, there is a general practice to use WhatsApp Groups to give quick information and to get instructions from the departmental/ senior officials. It has also been mentioned in Annexure-N-2(Ja) of the inspection report issued by the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna's letter no. 142, dated 26.07.2019. (Photocopies of the reports and photograph are annexed herewith and marked as Annexure-22). B. Hence, the reason for disagreement with the findings arrived at by the inquiry officer is not tenable in view of above stated paragraph. Therefore, the undersigned humbly prays to accept the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charge not proved. Further, the undersigned is giving response here in below to the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charges proved and partly proved. The undersigned is humbly praying to consider the responses to all the charges. C. Regarding charge no.1, the undersigned is to state and submit that due to unexpected discharge in Kamla Balan River from dated 13.07.2019 to 14.07.2019, under this division, left embankment at km 7.0 and right embankment at km 40.60, km 47.30, km 55.80, km 57.30, km 71.40&km 79.60 damaged. The effect of maximum discharge flowing on Kamla Weir at Jainagar site on 13.07.2019 remained till 14.07.2019 up to the end of Kamla Balan River, due to which flood fighting work had to be done at many points of right embankment and Compliance of departmental wireless narrated report no.129, dated 14.07.2019 was possible only from 15.07.2019 in the lower parts. It may be noted that since 12.07.2019, the Chief Engineer and the Chairman, Flood Fighting Force were camping in Jhanjharpur and all the flood fighting work were being done under their directions (photographs are annexed herewith and marked as Annexure-23). The works/actions of cut-end protection at all cut-points except the cut-point at km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha were started from the date 14.07.2019 and 15.07.2019 itself (photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure- 24 ). It has also been mentioned by the Central Flood Control Cell, Sinchai Bhawan, Patna in its daily flood report dated 14.07.2019 that action is being taken to secure and hold the cut ends of the above sites by conducting flood fighting works (photo copy of report is annexed herewith and marked as Annexure-25). From 15.07.2019 itself, the work of constructing a hutment has been started at Km 47.30 Naruar site. Immediately after constructing a hutment with polythene sheets and bamboos, the banner of Water Resources Department was also put up. But the farmers whose houses were damaged by the breach of embankment near Naruar village (km 47.30) were bent on not allowing to start the work till adequate compensation was received. For this reason, as soon as the banner of the Water Resources Department was put up by making a hutment, it was demolished by the local people and thrown into the river and the working labourers were also driven away (Photocopies of the reports and photograph are annexed herewith and marked as Annexure-26). The flood victims of Km 47.30 village Naruar and Km 40.60 village Gopalkha had encroached upon the top of the embankment (the only escape route for the movement of materials) and started living in hutments with cattle, which made it impossible to carry construction materials. Due to non-availability of local sand within 3 km due to excessive65 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 waterlogging and water-logging in the river side and country side around the breached site, it was not possible to start the sand filling work around the breach site Naruar and Gopalkha (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-27). Due to non- availability of sand nearby, the contractor was expressing inability to start the work at these breach sites as only 3 km lead has been provided for transportation of local sand in the scheduled rate book. The need for departmental instructions was also felt by the Chief Engineer, Samastipur in making provision for more leads (Photocopy of letter of Engineer-in-chief dated 26.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-28). From the date 15.07.2019 itself, the traffic was blocked by the villagers by putting a barrier on the embankment near Naruar, due to which the sand filled cement bags after filling the already available sand were tried to start the work at the site, but had to unload near the barrier due to traffic blockade (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-29). In order to start the work by removing the encroachment on the embankment near village Gopalkha and Naruar, the undersigned requested the District Magistrate, Madhubani vide letter no. 01 Camp Thengha dated 16.07.2019, in addition to the telephone (Photocopy of letter dated 16.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-30). On 15.07.2019, with the help of some local people, transportation of empty Cement Bags at Km 40.60 Gopalkha, sand filling at source point and carrying bamboo for making temporary hutment from polythene sheets were started (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-31). On 16.07.2019 all detailed information about sites before site inspection was given to Engineer-In-Chief (Flood). It was also informed that the work of cut end protection has been started at all the breached sites except Naruar and Gopalkha. But flood victims of Naruar and Gopalkha are not allowing to take action till they get adequate compensation and the road has been blocked by barriers. After giving such information, site inspection was done by him on motor cycle itself (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-32). There was no success in getting the work done by the end of 18.07.2019 before noon even after joints efforts made by SDM, Jhanjharpur and SDPO, Jhanjharpur (Photographs of sites are annexed herewith and marked as Annexure-33). On 18.07.2019 after noon it was decided to start the work in Naruar and Gopalkha from 19.07.2019 after meeting with the District Magistrate, Madhubani / Superintendent of Police, Madhubani / Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur / Chief Engineer, Samastipur and other senior regional engineers including the undersigned (In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). Again on 19.07.2019, during the deliberations to start the work in the divisional office, Jhanjharpur, the engineers and administrative officers were assaulted by the local people, whose FIR was also registered in the local police station (Photocopy of newspaper cutting and FIR dated 19.07.2019/20.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-34 and-35). In the afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also tried to start the work by coming to the said place, but the result was zero. An allegation has been made by the department for not taking action to safeguard all the three places mentioned in the inspection report by the Engineer- in-Chief, Flood namely Naruar Cut Point, Gopalkha Cut Point (under undersigned jurisdiction, Flood Control Division-02, Jhanjharpur) and Rakhwari Cut Point (under Flood Control Division- 01, Jhanjharpur). but in similar circumstances, only the officials related to Naruar and Gopalkha cut point have been accused, but the officials of Flood Control Division-01, Jhanjharpur have not been accused of not taking action to protect the cut-point. It is clear that the department also considers this allegation to be baseless. On 16.07.2019, the Engineer-in-Chief, Flood determined the nature & scope of work at all the cut points and handed over the same to the Chief Engineer. ((In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). The reason for not taking action to secure the above said breach part by the field engineers and not showing any preparation in this regard has been given itself by the Engineer-in-Chief, Flood such as66 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 encroachment by the displaced villagers at the work site, after removal of the encroachment to use that place for material storage or other work, to get help from the district administration to remove encroachment on the site, not to get sand nearby to fill the local sand in empty cement bags, to get the work done by bringing it from wherever local sand is available and directing the approval to be given to the Chief Engineer. Apart from this, it is clear from the perusal of the above paragraphs that the then unforeseen circumstances such as the local people breaking the hutment and throwing it in the river, the villagers blocking the traffic by putting a barrier to the embankment, the tractor laden with sand filled cement bags is not permitted to move on the site, thrashing the labourers away by the villagers, beating up the engineers/administrative officials in the divisional office (with whose cooperation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment on the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done) etc. In spite of this, apart from other cut points, the work of Naruar and Gopalkha cut end protection was done by trying as much as possible. However, due to public protest and law and order situation till 19.07.2019 afternoon, District Magistrate, Madhubani and Superintendent of Police, Madhubani also did not get success in starting the work. D. When such submissions were made then the inquiry officer in his report dated 24.02.2021 held the charges not proved with the reasoning that on the basis of site inspection report of Engineer-In-Chief, Flood dated 16.07.2019, it has been alleged by the Department against the undersigned that no action was being taken and no preparation was seen in this regard to secure the erosion part by the regional engineers at various cutting/breach points under Flood Control Division-2, Jhanjharpur. It is clear from the perusal of the Appendix and Khairiyat reports attached with the defence statement that in the working area of the accused officer, apart from only two cut/breach points, Km 47.3 Naruar of right embankment and Km 40.6 Gopalkha of right embankment, cut end protection at remaining cut/breach points was started from 14.07.2019 and 15.07.2019 itself. In the order of inspection on 16.07.2019, it has been mentioned by the Engineer-In-Chief in the same inspection report regarding not initiating the action to secure the cut-end points at the two cutting/breach points mentioned in the working area of the accused officer, Naruar and Gopalkha that flood victims have encroached on the embankment by making temporary camps and in the course of inspection dated 21.07.2019, the Chief Engineer was also told that there is no public protest now. Apart from this, it also appears from the perusal of the appendices attached by the undersigned that in the then relevant circumstances like breaking the hutment built on date 15.07.2019 at Naruar site by the local people and throwing it in the river, the villagers blocked the traffic by putting barriers to the embankment, not allowing tractor laden with sand filled cement bags to go to the site, villagers beat up the labourers and drive them away,to beating up the engineers and administrative officers in the divisional office (with whose co-operation the Engineer-In-Chief's direction to remove the encroachment at the site is inscribed so that there is no obstacle in getting the work done), public protest and law and order situation till 21.07.2019 before noon. Despite the efforts made by the District Magistrate, Madhubani and the Superintendent of Police, Madhubani, the reasons for not getting success in starting the work, etc., can be considered as a hindrance in the progress of the work. It is worth mentioning that apart from this, cut-end protection work had started at other cut-end points, which is also clear from the khairiyat report issued by the departmental flood control. It is clear only from the observation of the inspection report of the Engineer-in-Chief that from 16.07.2019 to 21.07.2019, despite camping at the site by the Engineer-in-Chief and getting the meeting/co-operation with the District Magistrate/Superintendent of Police, the action to secure the above two cuts/breach points, Naruar and Gopalkha could not be started till the forenoon of 21.07.2019. E. Thereafter, as per dictates and orders of the superior authority, the witness was examined by the inquiry officer himself and on the basis of such deposition, the inquiry officer in his67 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 inquiry report dated 17.09.2021 held the said charge proved. The undersigned is shocked to understand the change in the finding by the Inquiry Officer. In fact, Sri Rajesh Kumar, Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna, appeared on 18.08.2021. The witness was examined by the inquiry officer himself whereby the witness stated that what he wrote in writing is true Since Sri Rajesh Kumar is the highest posted engineer in the department, it is not considered appropriate to answer any question asked by the undersigned, thereby the undersigned was denied the opportunity to cross examine the said witness. The examination of the said witness was neither immediately recorded on the hearing record by the inquiry officer as he was busy in asking question which is the role of the Presenting Officer. The inquiry officer acted as Presenting Officer. F. It is humbly submitted that Engineer-in-chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna inspected the breach sites of the embankment which breached due to unexpected discharge flowing in Kamla Balan River on 13.07.2019/14.07.2019 and submitted the inspection report to the department vide his letter no.142 dated 26.07.2019. In the first part of the inspection report, along with the list of those breached sites, the details of the jurisdictions are also mentioned. From the observation of which it will be clear that the jurisdiction of the undersigned is only village Naruar and village Gopalkha under Flood Control Division-2, Jhanjharpur in the inspection done on 16.07.2019, and Village Rakhwari under other Executive Engineer i.e., under Flood Control Division-1, Jhanjharpur, jurisdiction of another Executive Engineer. It has also been mentioned by the Engineer-in-Chief that the situation was the same at all the three sites, but in the information received under the Right to Information Act, it is mentioned in the first paragraph of note sheet page no.-02 of the file that the three sites of breaches i. e. village -Naruar, Gopalkha and Rakhwari are located under the working area of the undersigned (Executive Engineer, Flood Control Division-2, Jhanjharpur). In this way, departmental proceedings were initiated against the undersigned only after obtaining approval from the competent administrative authority by recording the incorrect facts on the note sheet while others like Executive Engineer, Flood Control Division-1, Jhanjharpur were deliberately kept free from these charges. It is mentioned in paragraph nos. 1 and 2 of the report sent by the inquiry officer that the inquiry report submitted earlier was submitted on the basis of review of the defence statement of the undersigned and the records which were obtained from the Central Flood Control Cell in which this allegation was found to be unproved. Again, in the light of the examination of the witness by the inquiry officer, the same allegation has been substantiated without checking the veracity of the statement of the witness from any other records. Considering the statement of the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna as factual in his report by the inquiry officer, is contradictory in itself. The reply of the witness has not been verified by the inquiry officer from the records which have already been attached as annexure by the undersigned. Hence, in view of such submission, the undersigned may kindly be exonerated from the said charge. G. As regards charge no.2, it is humbly stated and submitted that the undersigned was continuously monitoring the embankment since 10.07.2019 on getting information about increase in discharge of the river. This is confirmed in the morning of 13.07.2019 between 1:00 to 1:30, when the deputed home guards were not found on their duty in order to patrol between km 52.00 and 58.00, then it is also informed by giving information to the District Magistrate, Darbhanga through N.R. No.50 (Photo copy of NR no. 50 dated 13.07.2019is annexed herewith and marked as Annexure-36). In the morning of 13.07.2019, District Disaster Management, Madhubani and thereafter the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna instructed to go at Jaynagar on the mobile with the information of storm (wave) discharge in Kamla Balan river, Assistant Engineer Jaynagar Immediately to reach Jainagar Weir, the undersigned left for Jainagar after instructing the Subordinate Assistant68 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Engineers/Junior Engineers to stay on the embankment with contractors, labourers, sand filled bags, geo bags, GT Filters etc. to deal with any odd situation (Photo copies of reports and photos are annexed herewith and marked as Annexure-37). Shortly after this, water started coming out from the top of the weir, breaking the guide bundh/marginal bundh (under irrigation division, Jainagar) of Kamla weir located in Jainagar due to unexpected discharge in the Kamla Balan River (photos are annexed herewith and marked as Annexure-38). Shortly after that, after getting the information of uncontrolled seepage near village Sukki (10.50km), informing the Superintending Engineer/Chief Engineer over the phone, reaching Sukki site and getting the seepage controlled, by the Junior Engineer at Village Terha (LKBE 7.50 km) was reported to have seepage. Due to the breaking of the guide bundh of Jainagar weir, the traffic on the left embankment from Jainagar was stopped and the assistant engineer in charge got stuck on the weir itself (photos are annexed herewith and marked as Annexure-39). The seepage could be controlled immediately by sending the contractor of that area to the Terha site through mobile. The entire embankment came into a state of super sensitivity from around 2.00 o'clock in the day itself and as per the departmental instructions, the superintending engineer in Jaynagar, the undersigned in Sukki, the assistant engineer, Naruar and chairman, FFF at village Kaithwar (Km 55.60 sluice) started flood fighting work at different sites (photos are annexed herewith and marked as Annexure-40). In the meanwhile, there are many places in the D/S of Sukki village, mainly Km 16-17 (Chatra Kanhauli), Km 32.00 (Tilay Dhala), Km 32.60, Km 36.0 (Khaira Dhala), Km 36.50.37.40 (Banaur) and Km 38.00 (Ram khetari) started getting information of seepage/piping which were controlled successfully (photos are annexed herewith and marked as Annexure-41). It is noteworthy that only one Junior Engineer was working under Flood Control Sub Division, Jhanjharpur (working area from km 14 to 44), while the strength of four Junior Engineers is approved. Timely information about the terrestrial situation was being given on mobile and on FCD-1&2, Jhanjharpur whatsapp Group. At around 6.00 pm, the Superintending Engineer, Flood Control Planning and Monitoring Circle, Patna, gave instructions to control the continuous piping near Km 55.80 (Kaithwar Sluice) on the mobile. Chief Engineer and his Technical Secretary had reached Sukki site, the undersigned left for Kaithwar.By this time, in addition to the places mentioned in para-5, seepage has also started at Km 43.02 (MehathDhala), Km 44.20 (Samiya Dhala), Km 45.80 (Gadia), Km 48.10 (Naruar), Km 49.80 to Km 50.00 and as per the instructions, the site was completely controlled by conducting flood fighting work (photos are annexed herewith and marked as Annexure-42). Before reaching Km 55.60, the information about the damage to the embankment at Km 7.50 (Terha) of LKBE was given to the Chief Engineer, Department and Madhubani Administration. Also, by the concerned Assistant Engineer it was posted at 7:58 pm in the FCD-2, Jhanjharpur WhatsApp Group (Instructions with photo are annexed herewith and marked as Annexure- 43).Here continuous piping was going on from the sluice located at KM 55.80, which was being controlled with adequate labour with geo filters, sand bags, JCB, tractor etc. At around 11.45 pm, it was informed by Sri Yogendra Kumar, Junior Engineer in-charge of Naruar village site that uncontrolled piping has started suddenly at four places around 47.30 km and seeing this scene, the workers have fled from there (Instructions with photo are annexed herewith and marked as Annexure-44).According to the advice of the Chairman, Flood Fighting Force and the Chief Engineer present at Km 55.80, the Assistant Engineer was sent to the site with sufficient labourers and sand bags. Simultaneously, the Junior Engineer was directed that immediate action should be taken to secure the embankment by taking labourers from the adjacent site. At around 12.30 night, the Assistant Engineer informed about the damage to the embankment at km 47.30, which was informed to the Department and District Magistrate, Madhubani through mobile. In spite of tireless efforts to control the simultaneous seepage/piping at several sites between Km 58.00 to 90.00 of the right embankment as the highest water flow continued to travel D/S69 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 (Instructions with photos and messages are annexed herewith and marked as Annexure- 45).Kaithwar (Km. 55.80), The embankments at Kakodha (Km 57.30 to 57.50), Kumraul (Km 71.40) and Mansara (Km 79.60) could not be saved. The information about the damage to the embankment was given to the concerned district magistrate along with the department. The details of the work done every day have been given to the Superintending Engineer/Chief Engineer/Central Flood Control Cell in the form of progress report (Photo copy of letter dated 20.07.2019 and reports dated 14-15-16.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-46 and 47). It is necessary to mention here that the Chief Engineer was continuously camping in Jhanjharpur and all the flood fighting works have been done only on the advice of his direction and chairman, Flood Fighting Force. It is clear from the above sequence of events that between date 13.07.2019 to 14.07.2019, during the unexpected discharge in Kamla Balan, I have strictly followed the standard operating procedure (SOP) laid down by the department under the direction of my senior officers/Chairman, flood fighting force. There has been no lapse or negligence in this, but the Standard Operating Procedure (SOP) has been followed promptly. H. The inquiry officer in his inquiry report dated 24.02.2021 held the said charge not proved against the undersigned on the grounds that in Paragraph 4.4 of the Standard Operating Procedure, mainly the following instructions are mentioned for the Executive Engineer, as soon as the sensitivity of the site from any source is known, reaching the site within two hours and ensuring the implementation of the desired work for its safety and in this regard the Superintending Engineer / Chief Engineer / Chairman, Flood Fighting Force / Informing the concerned District Officer, enrolling any of the listed contractors for emergency work and getting the work implemented, the water level of the river above the warning level or the river water in the toe of the embankment then from the Executive Engineer to the Junior Engineer, patrolling day and night, reporting the absence of home guards to the district administration, etc. On the basis of the continuous rain since 12.07.2019 and the information given by the Meteorological Department, on 13.07.2019, in the light of the warning of heavy rain by the District Disaster Management, Madhubani, in addition to the accused officer, the Superintending Engineer / Chief Engineer / The Chairman, Flood Fighting Force were camping on the embankment since 12.07.2019, which is also confirmed by the perusal of attached documents. By camping at the site of all the senior officials, it can be assumed that all the concerned were informed. There is no reporting by the senior officials for not being present at the place of the undersigned. The wireless communication made by the undersigned to the district magistrate and the department regarding the absence from the home guard's place shows that action was being taken by the undersigned. Compliance of the instruction mentioned in Para 4.4 of the Standard Operating Procedure may not be possible for all the cut points in case the river flow exceeds 1.66 times the designed water flow and flows in free-board where almost the entire embankment is in a state of incombustibility. The flood fighting works were being done under the direction of the department and senior officials and at different places by various level officials (including Chief Engineer/Technical Secretary/ Chairman, Flood Fighting Force). I. When the witness was examined and questions were asked by the inquiry officer himself and not by the Presenting Officer, the said witness merely tendered that with regard to the point of allegation by the Engineer-in-Chief, Flood Control & Drainage, he said that this is true. This allegation has not been proved by the inquiry officer in earlier inquiry report, whereas at the time of examination of the witness, without any additional record or evidence, it is partially proved which is impermissible both in law and on facts. J. Regarding charge no.3, it is humbly stated and submitted that the details of the actual condition of the site due to discharge in Kamla Balan River on 13.07.2019 and 14.07.2019 are mentioned in the defence statement of charge no. 2. The preparation made on the embankments / the status of the structures located on it and the report of the high level committee in which the70 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 reasons for the damage to the embankment are mentioned as follows:-On the basis of the experience of the last years, adequate quantity of construction materials such as sand-filled bags and contractors were engaged in the work along with the labourers at all the identified sites (Photo copy of reports dated 22.06.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-48). Due to continuous rainfall in the catchment area of Kamla Balan River, increase in discharge was being recorded from 10.07.2019. All the subordinate assistant engineers/junior engineers were being instructed to be alert and vigilant in their respective areas through the WhatsApp Group FCD-1&2, Jhanjharpur and FCD-2, Jhanjharpur. In this group, moment to moment information was being given about the status of the river/embankments and the department was constantly being aware of this information, which can be confirmed even today by observing the above WhatsApp group and can also be confirmed by other concerned officials (Photo copy of Instructions and conversations from dated 10.07.2019 to 14.07.2019 are annexed herewith and marked as Annexure-49). Unexpected discharge 6223.94 cusec (2,19,705 cusec) in Kamla Balan River as on 13.07.2019 which was much higher than the design discharge of 3747cumec (1,40,000 cusec) in Kamla Balan River. This is confirmed by the discharge report made available vide letter number 33 dated 14.08.2019 of CWC Patna (In this regard, kindly refer to Annexure-18 already annexed) Due to unexpected discharge in the Kamla River, the water level started flowing in the free board of the embankment as prima facie. In places where the village are situated in C/S, the villagers have encroached on the embankment and also damaged its toe/slope and use it for private use, due to which the encroachment case was filed with the concerned circle officer in the past. (Photo copy of reports dated 01.06.2018 is annexed herewith and marked as Annexure-50).In such a situation, seepage / piping started simultaneously at many places of the embankment, which is also confirmed by the inspection report of the Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna (In this regard, kindly refer to Annexure-28 already annexed). On reaching the discharge near Jhanjharpur rail bridge in the evening of 13.07.2019, the water level started increasing due to afflux in the U/S. Sakri Jhanjharpur railway line, which was earlier Meter Gauge, along with Broad Gauge conversion, the level of rail was raised by more than 3.5 meters, information provided by east Central Railway but no provision of additional waterway for smooth flow was made rather between both the embankments, waterway was jacketed (Photo copy of report dated 10.08.2019 is annexed herewith and marked as Annexure- 51).Similarly, NH.57 which passes through km 44.00 of the right embankment of Kamla Balan River, due to the low effective waterway of the river, there was difficulty in getting discharge in d/s section. Similarly, as a result of the road bridge constructed in Km 59.50 of Sutharia and Km. 74.80 of Rasiyari, due to the less effective waterway, the water level of the river in U/S of bridges continued to flow for a long time within the free board of the embankment and to create pressure on the embankment due to failure in HG Line. Some of the reasons for the damage to the embankments have been mentioned by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna from departmental letter number 2605 dated 02.08.2019:-(a) The maximum discharge from Jaynagar weir on 13.07.2019 was 6223.94 cumec which was 1.66 times more than the maximum of 40 years discharge of 3966 cumec (1,40,000 cusec). Along with this, due to large scale congestion from the discharge of Koshi, Kareh and Kamala Balan river below the Phuhiya site of right embankment of Kamla Balan River, the Jayanagar weir site will have maximum discharge due to water logging in the entire Kamla River channel. The water level of the entire channel has been raised due to ingress, resulting in sudden increase in pressure on the embankment, which has led to breaches at many places on the embankments (In this regard, kindly refer to Annexure-18 already annexed). (b) Effective waterway between the embankments was found to be less than 106 m to 214.87 m from Lacey's waterway of the embankment, creating additional afflux in the71 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 embankment in U/S of those structures and forcing the flowing discharge to go into the free board of the embankment. (c) Agreeing with the above recommended suggestions in para-5, the departmental letter number-3092 dated 13.09.2019 requested all the concerned departments to make provision for additional waterways as per rules (Photo copy of letter of secretary wrd patna dated 13.09.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-52).CENTRE FOR TRANSPORTATION SYSTEM (CTRANS) INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY, ROORKEE Prof. Nayan Sharma presented an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan River embankment. Against the finding, it was found that the current constriction in Kamla Balan River is in the range of 17.6 percent to 70.00 percent. According to the report, the distressing outcome of acute waterway obstructions (of the order of 50% to 70% constriction, imposed by bridges across the Kamla Balan River could be recognized to be the prime contributing factor in creating very high Afflux HFLs in an anticipated range of 2m to 3m over natural flood levels (Photo copy of reports dated 05.12.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-53). Earlier, in the course of the study of unexpected discharge in Kamala Balan by FMISC, Patna, it was found that the right Kamla Balan Embankment would have to raise the upper surface due to new HFL in its almost entire length. It is clear from the above report that on 13.07.2019, almost in the entire length of the river, the discharge flowing from Jainagar has created the new HFL, due to which outside the C/S slope of the embankment, it has passed outside saturation line through several places simultaneously and some places due to piping outside the toe.But the embankment was damaged which could not be saved (In this regard, kindly refer to Annexure-21already annexed). Referring to the reasons for the breach in Kamla Balan embankment by the Hon'ble Chief Minister, Bihar, it was told in the Legislative Council that on 12th and 13th July, 2019, the situation of a flash flood arose in Nepal due to heavy rainfall. Due to excessive discharge, Kamla Balan right embankment got damaged at six places and Kamla Balan left embankment at two places. It can be seen at Sl. no. 87 of the Departmental website's Videos Gallery. Information has also been given to the media by the Hon'ble Minister, Water Resources Department, Patna regarding the reasons for the damage to the Kamla embankment, which can be seen on the Sl. no.86 of the Departmental website's Videos Gallery. K. The inquiry officer has exonerated the undersigned from the charges on the ground that in the facts given by the undersigned in his defence statement, the following reasons have been mentioned in relation to the damage of the embankment, such as, during the flood, under the direction of the senior officials, the flood fighting work was done, the unexpected discharge in the Kamla Balan river 6223.94 cumec (2,19,705 cusec) which is 1.66 times more than that of Kamla Balan's design discharge 3966 cumec (1,40,000 cusec), the water level entering the free board of the embankment due to unexpected discharge in the Kamla river, continuous seepage/piping due to excessive discharge (inspection report of Engineer-In-Chief, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Patna), dedicated report by the committee constituted under the chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Anisabad, Patna, for reasons of breach, Centre for Transportation System, IIT Roorkee Prof. Nayan Sharma submitted an interim report on report/suggestions on flood management/ waterway/protection of embankment with reasons of breach of Kamla Balan river embankment, On the basis of the report submitted to the department by FMISC, Patna of unexpected discharge in Kamla Balan, it can be assumed that the cause of damage to the embankment was the unexpected discharge in the river. L. Now in view of present inquiry report along with letter dated 07.03.2022, it is stated and submitted that in respect of charge no.2 and charge no.3 (first part), disagreement has been expressed with the opinion of the inquiry officer by stating that the design discharge in the report of the committee constituted under the chairmanship of the Chief Engineer, Central Design,72 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Research and Quality Control, Water Resources Department, Patna is of Kamla Weir and not of the river. Under the head 'recommendation of the committee' part of the report mentioned above, it is mentioned in paragraph-1 that "due to the flow of maximum discharge and the flow of previously designed discharge, the assessment of newly design discharge and HFL has to be done". There is a need to go and accordingly the need to determine the formation level and section of the embankments was found. It is mentioned in paragraph-3 of the said report, "The maximum discharge reported by the Central Water Commission for the year 2019 is 6223.94 cumec, which is pointing towards an unexpected hydrological event, 166 percent more than the 3747 cumec of the last 40 years." It is clearly mentioned in the annexure to the said report that the peak discharge of 2019 is 6223.94 cumec. Please be aware that the Kamla River, entering the Indian land in the U/S part of Jainagar, flows through D/S of Jainagar weir and joins the Balan river near Km 26.0 of the left embankment, thus in the Balan river, it contributes its discharge. It is clear from the annexure attached with the letter that in the year 2012, the designed discharge of Kamla Balan River increased to 4000 cumec, which increased to 6223 cumec in the year 2019, which is more than one and a half times the designed discharge of the river. The design discharge of the year 2012 was decided jointly by the CWC, Government of Bihar and Government of Nepal. ((In this regard, kindly refer to Annexure-19 already annexed). In the light of the above, it is clear that on the day of embankment breach in Kamla Balan River, maximum discharge flow occurred in the last 40 years, which was more than one and a half times more than the designed discharge. It should be known that the water flow in the river on the date of breach is more than one and a half times the design discharge of the river, not an argument, it is a fact based on records. M. It is further stated and submitted that after the co-operation of the local people and the tireless efforts of the administrative officials, it was possible to start the slope cutting work in the up-stream part from 2.00 pm on the date of 21.7.2019 can be started (Photographs of site dated 21.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-54) It is to mention that the Engineer-in-Chief has said in his inspection report that in the afternoon of 21.07.2019, he inspected the Naruar site and as a result of the end of the public protest, he himself started the work at that site in his presence & directed to complete the flood fighting work by working day and night. It is not mentioned in his inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. On 21.07.2019 at 9:30 in the night, on receiving information about generator failure/non-functioning from some unknown source, Engineer-In-Chief from Inspection Bunglow, Jhanjharpur on 22.07.2019 morning, asked on the telephone in this regard from me. He was informed that due to generator failure at 9:30 P.M., the work was interrupted for some time, which was started again by installing a second generator under alternative arrangement and nylon crating work was done till 1:00 pm. After that the slope cutting work was done by JCB which is confirmed by the engineer deputed from outside division has made a remark of getting nylon crating work done by 1:00 am on the laying register, which certifies that the work is going on even after 9.30 pm. The work was interrupted only for a short while. After that the slope cutting work was done by JCB. It is noteworthy that the work of soil cutting / slope cutting is not recorded in the laying register (Photo copy of laying register recorded from dated 21.07.2019 is annexed herewith and marked as Annexure-55).It is clear in the light of the above that due to the unexpected discharge, the water level encroached at all the places of Kamla Balan embankment started flowing in free board, which led to simultaneous piping/seepage at many places. In those places where piping started happening at many places and it was not possible to control it by well or other method, the embankment got damaged which resulted from the natural disaster of unexpected flood which can be confirmed by the reports of committee constituted under the73 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 chairmanship of Chief Engineer, Central Design, Research and Quality Control, Patna and detailed marking in the report of IIT Roorkee and the information given by the Hon'ble Chief Minister / Hon'ble Minister's address to media. For this it is not fair to allege that the undersigned has failed despite being the responsible officer because the undersigned was constantly on the lookout and present on my duty. N. The Inquiry report dated 24.02.2021 exonerated the undersigned from the charges on the ground that it has been accepted by the undersigned that after starting the work at Naruar site from the afternoon of 21.07.2019, the work was stopped for some time due to generator failure at around 9.30 pm, but after making alternate arrangements, the work was started again. As evidence, a photocopy of the laying register has been attached by the undersigned, in which the nylon crating work done by the engineer of the unattached division deputed in shift has been recorded in the laying register till 1.00 am, which can be validated. The site was not inspected by the Engineer-In-Chief on 22.07.2019 because it is not mentioned in the inspection report that he inspected the Naruar site on 22.07.2019 rather it is mentioned that on 22.07.2019 he departed for Araria and Purnia to participate in the tour of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. But now the charge is proved in the inquiry report dated 17.09.2021. It is humbly stated and submitted that the deposition by the witness that the undersigned was negligent in repairing the breach of the embankment till date 21.07.2019, the inspection report submitted by the witness in the past to the department, on the basis of which the charge has been framed against me, is completely contradictory. It will be clear from the observation of the facts mentioned in the inspection report that the then District Magistrate, Madhubani, Superintendent of Police, Madhubani, Sub-Divisional Magistrate, Jhanjharpur, Sub-Divisional Police Officer, Jhanjharpur, Engineer-In-Chief himself, Chief Engineer, Superintending Engineer, Executive Engineer, Junior Engineer and despite my tireless efforts, the work could not be started at the breach site of village Naruar. It should be noted that the work could be started only after the consent of the local people from the afternoon of 21.07.2019. The site requires extensive slope cutting before the actual crating can be done. In the light of the instructions of the Engineer-In- Chief present at the site, immediately after cutting a part of the embankment, the crating work was started which is also mentioned in his inspection report. It may be known that the embankment was not encroachment-free even after 21.07.2019 by the flood victims, but after talks with the then District Magistrate, Madhubani, with the flood victims, only way was given to get the work done in the embankment until alternative arrangements were made. The Naruar Office Campus was being treated as a base camp for additional construction material, backup tools plant and labour etc. which is about 1.0 km away in d/s from breach site of the embankment. The width of the embankment at the said site is only 5 m. It was not practical to store additional construction materials and tools plant at the site after hutment, storage of construction materials as per requirement, at least one earth cutting plant like JCB, one generator etc. at the work site. Slope cutting at work site was the requirement of the site which was done. There was absolutely no negligence in doing the work in this way. All the records related to this have already been attached with the defence statement to the Inquiry officer, on the basis of which this allegation was disproved by the inquiry officer in the past. It is not mentioned in his inspection report that Engineer-in-chief inspected the Naruar site on 22.07.2019, but it is mentioned that on 22.07.2019, he departed to participate in the tour program of Araria and Purnia of the Hon'ble Minister, Water Resources Department. On the basis of false fact, this charge has been framed against me. O. That it is respectfully stated and submitted that many discrepancies have occurred in the proceeding, by which the undersigned is prejudiced on account of such blatant violation of principles of natural justice and depart from the provisions contained in Bihar CCA Rules, 2005. It is shocking to understand that the inquiry officer in his earlier inquiry report, has held all the74 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 charges not proved whereas, in the present inquiry report, has held charge no.1 as proved whereas, charge no.2 has been partly proved and the second part of the charge no.3 has been proved. The inquiry officer has mentioned earlier in his inquiry report dated 24.02.2021 wherein all the charges were held as not proved. Now as per the present inquiry report dated 17.09.2021, the inquiry officer has departed from the provisions of the Rule-17 of CCA Rules. Such course of action adopted by the inquiry officer is not permissible both in law and facts. The undersigned is prejudiced on account of non-incorporation of defence and assessment of evidence in respect of each article of charge as well as there is total lack of finding on each article of charge and reason thereof. It is strange and shocking to learn the Inquiry Officer has relied upon earlier inquiry report dated 24.02.2021 in the present inquiry report dated 27.09.2021 in order to prove the charges. In earlier inquiry report, upon documentary evidences, the charges were held not to be proved whereas, in the present inquiry report, the all charges except one have been held to be proved on the basis of witness deposition. The Inquiry Officer has conducted inquiry in piecemeal method which is not permissible. The undersigned is at loss to understand as to how the charges earlier not proved, have been held to be proved which is a mechanical exercise of power and without application on mind and as such same is fit to be set aside. P. The disciplinary authority has disagreed with the certain findings of the inquiry officer whereby he has partly proved the charge no.2 and has not proved part one of charge no.3. It is respectfully submitted that the inquiry report is itself vitiated in law in view of non-prescription of the provisions of Rule-17 of CCA Rules then consequential disagreement with the findings of the inquiry officer is of no consequences. When the structure is itself faulty then the entire edifice cannot stand. There is inherent discrepancy in the inquiry report dated 27.09.2021 then any further consequential action cannot be held tenable. Q. It is to further mention here that the charges framed against the undersigned are not distinct and definite article of charge. The substance of imputation of misconduct is neither definite nor distinct. The charges have been framed on the basis of report of the Engineer-in- Chief, Flood. The said report is full of factual errors, thereby resulting into erroneous charge based on factually incorrect statement. The charges leveled and the initiation of departmental proceeding have been done in most pick and choose and selective manner. The higher authorities such as the Chief Engineer and the Superintending Engineer have been let off as no allegation of alleged dereliction of duty has been leveled against these higher authorities. Much to dismay of the undersigned, even Executive Engineer of Rakhwari site belonging under Flood Control Division -1, Jhanjharpur was not also proceeded against whereas the inspection report also mentions the said site. There cannot be varying standard in initiation of departmental proceeding. When the substance of charge is of dereliction of duty in controlling the flood damages then letting off the Chief Engineer, Superintending Engineer who were camping there on the date of occurrence and thereafter also. Letting off the Executive Engineer of Flood Control Division-1, Jhanjharpur is evident of the fact that the initiation of departmental proceeding against the undersigned is colourable exercise of power which is impermissible in law and on facts as well. The undersigned is prejudiced on account of such selective and pick and choose manner of initiation and continuation of departmental proceeding. From perusal of information under RTI, it is clear that the inquiry officer has exonerated the undersigned from all the charges as not proved. The said findings were considered by the Secretary of the Department. The said file was sent to the Minister of the Department who directed to return the file to the inquiry officer for detailed inquiry into the matter after perusing the available documents in the Flood Control Cell and examination and cross examination of the witness. Such mode of action is impermissible under Rules of Executive Business, 1979. Rule-18 (1) of CCA Rules, 2005 casts duty upon the disciplinary authority to remit the case for further inquiry after recording the reasons. From perusal of information supplied under RTI, it is clear that when the inquiry officer exonerated the75 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 undersigned from all the charges as not proved then the Hon'ble Minister directed for further inquiry. The Hon'ble Minister has directed the course of action to be followed by the inquiry officer in his further inquiry. Such course of action is not permissible both in law and on facts. The inquiry officer on the same set of facts barring the examination of the witness i.e., the Engineer-in-Chief, Flood, held some charges proved and some charges not proved. If the deposition of said witness is perused then it is evident that nothing substantial has been stated or deposed. Further, during the examination of the said witness, he said that the inspection report is the basis and he has nothing to state more. It is to mention that the said inspection report was already considered by the inquiry officer in his earlier inquiry report whereby all the charges have been held not proved. Now, without any significant development which could change the gravity of the alleged misconduct, the undersigned is shocked to understand as to what transpired in the mind of the inquiry officer which compelled him to change the entire decision and to depart from his earlier findings when substantially the evidences are same and similar. It is matter of grave concern that whether the deposition of the Engineer-in-Chief, Flood can be of such magnitude that could convert the not proved charges as proved and partly proved charges. Such deposition was not held in the manner prescribed under Rule-17 of CCA Rules, thereby prejudicing the undersigned in many respects, primarily action being violative of principles of natural justice. The inquiry officer as acted at the behest and dictates of the higher authorities by which he was forced to change his findings. The independence of the inquiry officer is questionable in such circumstances, therefore, the charges which have been held to be proved and partly proved are required to be set aside. R. Misconduct has been defined in Black's Law Dictionary, Sixth Edition at page 999 thus: "A transgression of some established and definite rule of action, a forbidden act, a dereliction from duty, unlawful behaviour, willful in character, improper or wrong behavior, its synonyms are misdemeanor, misdeed, misbehavior, delinquency, impropriety, mismanagement, offense, but not negligence or carelessness." Misconduct in office has been defined as: "Any unlawful behavior by a public officer in relation to the duties of his office, willful in character. Term embraces acts which the office holder had no right to perform, acts performed improperly, and failure to act in the face of an affirmative duty to act." P. Ramanatha Aiyar's Law Lexicon, Reprint Edition 1987 at page 821 defines 'misconduct' thus: "The term misconduct implies a wrongful intention, and not a mere error of judgment. Misconduct is not necessarily the same thing as conduct involving moral turpitude. The word misconduct is a relative term, and has to be construed with reference to the subject matter and the context wherein the term occurs, having regard to the scope of the Act or statute which is being construed. Misconduct literally means wrong conduct or improper conduct. In usual parlance, misconduct means a transgression of some established and definite rule of action, where no discretion is left, except what necessity may demand and carelessness, negligence and unskillfulness are transgressions of some established, but indefinite, rule of action, where some discretion is necessarily left to the actor. Misconduct is a violation of definite law; carelessness or abuse of discretion under an indefinite law. Misconduct is a forbidden act; carelessness, a forbidden quality of an act, and is necessarily indefinite. Misconduct in office may be defined as unlawful behaviors or neglect by a public officer, by which the rights of a party have been affected." Thus it could be seen that the word 'misconduct' though not capable of precise definition, on reflection receives its connotation from the context, the delinquency in its performance and its effect on the discipline and the nature of the duty. It may involve moral turpitude, it must be improper or wrong behaviour; unlawful behaviour, willful in character; forbidden act, a transgression of established and definite rule of action or code of conduct but not mere error of judgment, carelessness or negligence in performance of the duty; the act complained of bears forbidden quality or character. It is also76 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 held that an error of judgment per se is not a misconduct and a negligence simpliciter also would not be a misconduct. S. In order to make submissions profound, the undersigned is reiterating the humble submissions qua the line of disagreement viewed by the disciplinary authority. The disciplinary authority has disagreed with the particular finding of the inquiry officer whereby the inquiry officer arrived at the finding that the reason for damage of embankment is the discharge of the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, whereas, the Chief Engineer while presiding the committee of Central Design, Research and Quality Control, in his report stated that the design discharge is of Kamla structure and not of Kamla river, therefore, it is clear that design discharge is of Kamla structure and not of the river. Therefore, the reason that the water discharge in the Kamla river is more than 1.5 times of the design discharge, is not acceptable. It is made clear that the disciplinary authority, erroneously and under errors of facts, has not accepted the reason cited by the Inquiry Officer. Further, the disciplinary authority has disregarded the earlier reports in this regard. It is to mention here that the reason for differing with the conclusion of the inquiry officer is factually incorrect. In fact, the Chief Engineer-cum- Chairperson, Central Design, Research and Quality Control, Water Resources Department in his report dated 18.09.2019 in paragraph no.2 under the head" recommendation of committee" has conclusively held, " वर्ष 2019 का बाढ़ को केन्द्रीय जल आयोग द्वारा प्रतिवेदित अधिकतम जलस्त्राव 6223.94 क्युमेक है जो पिछले 40वर्षो के अधिकतम जलश्राव 3747 क्यूमेक से 166 प्रतिशत अधिक एक अप्रत्याशित हाईड्रोलोजिकल event की तरफ इंगित कर रहा हैं। इसका समूचित अध्ययन जल विज्ञान निदेशालय एव ंFMISC के अधीन कार्यरत MMC के द्वारा किया जाना उचित होगा ताकि भविष्य मे नदी के उपर पड़ने वाले Morphological प्रभाव का अध्ययन किया जा सके" Therefore, incorrect factual statement has been given whereas, the findings of the inquiry officer is in consonance with the view point taken in paragraph no.2 of the report dated 18.09.2019. Further, in this regard, report of Chief Engineer, Water Resources Department, Samastipur in his detailed project report and estimate, has conclusively held in his technical note whereby it is clear that the discharge is decided by the course of river and not by structure of the river. It is mentioned in the technical report dated 18.08.2012 that, State Discharge Curve has been plotted at Jainagar and Jhanjharpur gauge sites as per CWC data. Design HFL has been assessed corresponding to Design discharge. This comes out to be as 70m at Jainagar and 54.10m at Jhanjharpur Design discharge (4000 cumecs) has been fixed by the joint committee of CWC, Bihar Government & Nepal Government. It is also to mention here that vide letter no. 3731-33 dated 14.08.2019, the Central Water Commission, Lower Ganga Division -1, has written letter to the Chief Engineer, Flood Control and Drainage, Water Resources Department, Samastipur wherein it is made clear that the water discharge at the river gauge at Kamla weir at Jainagar CWC site at Kamla River is around 6223.94 cumec which is approximately more than 1.5 times of design discharge of river. It is also to mention here that the office of Joint Director, Flood Management Improvement Support Centre, WRD, Bihar vide report dated September 2019 has categorically mentioned that design water levels for discharge of 6240 m3 /s at Jainagar weir on the Kamla river has been generated for the sole purpose of the preparation of detailed project report. (In this regard, kindly refer to Annexure-18/19/20/21 already annexed). From perusal of above reports, it is crystal clear that the findings of the inquiry officer regarding increase of discharge is more than 1.5 times. It has incorrectly been held that the discharge is of weir and not of river. Such erroneous view point is totally demolished by the various reports as stated above. In the context of departmental proceedings under the subject, along with the above related letter as archival evidences, only the inspection report issued by letter no. 142, dated 26.07.2019 by the Engineer-in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna after the site inspection between 16.07.2019 to 23.07.2019, and copy of a part of SOP has been given. Apart from this, on the basis of other relevant records which I myself have been able to obtain, immediately this defence statement is being given. Some of the annexures which were posted on WhatsApp77 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 Group FCD-1 & 2 Jhanjharpur and FCD-2 Jhanjharpur from time to time, the hard copies of that some of the annexures (in the form of photographs and messages of work) are being attached with the defence statement. From Junior Engineer to the Chief Engineer/ District Magistrate, Darbhanga / District Disaster Management Cell, Madhubani/ Sub-Divisional Magistrate, Biraul/ Flood Control, Planning and Monitoring circle, Patna etc. are associated with in these groups. According to the prevailing method in the department, there is a general practice to use whatsapp Groups to give quick information and to get instructions from the departmental/ senior officials. It has also been mentioned in Annexure-N-2(Ja) of the inspection report issued by the Engineer- in-Chief, Flood Control and Drainage, Patna's letter no. 142, dated 26.07.2019. Hence, the reason for disagreement with the findings arrived at by the inquiry officer is not tenable in view of above stated paragraph. Therefore, the undersigned humbly prays to accept the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry officer has held the charge not proved. Further, the undersigned is giving response here in below to the findings arrived at by the inquiry officer to the extent the inquiry Officer has held the charges proved and partly proved. The undersigned is humbly praying to consider the responses to all the charges. T. It is humbly submitted that the Bihar Government vide letter no.2178 dated 28.02.2007 has issued guidelines for timely disposal of departmental proceeding. Stipulated time period has been mentioned in the said guidelines whereby considering different stages of proceeding, time period of one year (12 months) has been given for conclusion of the departmental proceeding which has been prolonged for more than 38 months which clearly shows that instead of arriving at fair decision, the authority concerned was trying to find some ploy to incriminate the undersigned anyhow and same has produced cascading effect of imposing maximum punishment upon the undersigned which is impermissible both in law and on facts The undersigned has severely been prejudiced on account of such delayed conclusion of departmental proceeding. U. That the Disciplinary Authority has not acted properly and has not applied his mind to the charges vis-à-vis the representative given by the undersigned. The reply to the 2nd show cause notice/representation submitted by the undersigned was not at all considered by the Disciplinary Authority. The Disciplinary Authority has not at all considered the reply to the 2nd show cause notice/representation and has mechanically and without application of independent mind, passed the impugned order. (Photo copy of reply to the 2nd show cause notice/representation is annexed herewith and marked as Annexure-56). V. That from perusal of punishment order dated 10.10.2022, it is apparent that the disciplinary authority has not recorded his findings on the articles of charge, hence, decision to punish the undersigned has already been taken and only a pretence of the departmental proceeding has been given which is not permissible. It is pertinent to mention here that in terms of Rule-18(6), it is obligatory and mandatory upon the disciplinary authority to arrive at findings on articles of charge and must opine on the basis of evidence adduced during the inquiry. In the present case, the disciplinary authority had abdicated his responsibilities and has punished the undersigned without discussing any issue raised by the undersigned. W. That the requirement of reasons to be assigned for arriving to a conclusion have been judicially settled for the purpose that while making judicial review of the findings of the original authority in decision making process can well be assessed on the basis of application of mind which given by the authority at the time of taking such decision and therefore, it has been made obligatory upon the authorities passing any order that the order must reflect the mind of the authority when such decisions are said to have been taken. X. That from perusal of impugned order, it is apparent that there is no finding arrived at by the disciplinary authority in order to impose punishment upon the undersigned. The punishment order is based on no evidence. The Enquiry Officer has not allowed to cross examine any witnesses nor the Presenting Officer has produced such witnesses, resultantly same has adversely78 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 affected the right of the undersigned of not cross examining the witnesses. The guilt of the undersigned has been assumed and on the basis of assumption and presumption, the undersigned has been held guilty. Therefore, a cosmetic and sham departmental proceeding was initiated which ultimately led to imposition of penalty upon the undersigned without proving any evidence which clearly shows that the punishment meted out with the undersigned is based on no evidence. Y. That the explanations submitted by the undersigned before initiation of framing of Charges, before the Enquiry Officer and before the Disciplinary Authority, were not at all looked into by the above authorities much less the consideration of the same. There is no whisper of the explanations submitted by the undersigned in the impugned dismissal order which clearly shows mechanical and non application of mind. The Disciplinary Authority has reproduced the averments of the undersigned without considering the same which clearly establishes that the punishment meted out against the undersigned is based on no evidence and same is perverse. Z. That the disciplinary authority without having regard to the findings on all or any of the articles of charge and without having regard to the basis of evidence adduced during the enquiry, has mechanically and illegally passed an order imposing penalty which shows callous and arbitrary attitude and hence, such order is fit to be set aside in view of the fact that the same is contrary to the provisions of CCA Rules, violative of principles of natural justice and against the law laid down by Hon'ble Supreme Court and Hon'ble Patna High Court. AA. That the word "consider", in Sub-Rule (4) of Rule 18, is of much significance, which casts a duty on the disciplinary authority "to apply his mind". Whether the representation or submissions made by the Government servant has been considered or not should be apparent from the order itself. In the present case, the final order passed by the disciplinary authority imposing punishment, does not contain any reason as to why the explanation/reply of the undersigned to the notice given by the disciplinary authority, was not acceptable. It is submitted that Rule 18(4) casts an obligation on the disciplinary authority to consider the representation/submission, made by a Government servant, in response to the findings recorded by the disciplinary authority. BB. That it is apparent that the disciplinary authority has not recorded his findings on the articles of charge and on the basis of evidence adduced during the inquiry. The disciplinary authority has merely reproduced the explanation submitted by the undersigned, hence, decision to punish has been taken against the undersigned. It is pertinent to mention here that in terms of Rule-18(6), it is obligatory and mandatory upon the disciplinary authority to arrive at findings on article of charge and must opine on the basis of evidence adduced during the inquiry. In the present case, the disciplinary authority had abdicated his responsibilities. CC. That the disciplinary authority is required in law to consider the findings on the articles of charge and must have opinion that such penalties should be imposed on the undersigned then only the disciplinary authority can impose the penalties that too, after having regard to its finding on the articles of charge and on the basis of evidence adduced and must come to a reason for imposing such penalty. From perusal of impugned order by which the punishment has been given, it is evident that the disciplinary authority has not given any findings on the articles of charge and there is no basis of evidences adduced and nothing has been discussed in the order. Further, the disciplinary authority has not cited the reasons or the materials which formed his opinion to arrive at such finding that punishment be imposed upon the undersigned. DD. That Rule-18(4) of Bihar Government Servants CCA Rules, 2005 states, the disciplinary authority shall consider the representative or submission, if any, submitted by the Government Servant before proceeding further in the manner specified in sub rules (5) and (6). EE. That Rule-18(6) of Bihar Government Servants CCA Rules, 2005 states, if the disciplinary authority, having regard to its findings on all or any of the articles of charge and on79 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 the basis of the evidence adduced during the inquiry is of the opinion that any of the penalties specified in clauses [(vi) to (xi)] of Rule 14 should be imposed on the Government Servant, it shall make an order imposing such penalty and it shall not be necessary to give the Government Servant any opportunity of making representation on the penalty proposed to be imposed. FF. That the disciplinary authority has neither considered the representation nor considered the submission which is mandatory upon the disciplinary authority in terms of the said Rule. GG. That absence of reasons in an order, exercising quasi-judicial function, amounts to non- application of mind and, therefore, not sustainable, being violative of the principles of natural justice. HH. That the legal position on the onus to be discharged by authority performing quasi judicial functions as well as the manner of disposal stands discussed in the judgment of the Supreme Court rendered in the case of Travancore Rayone Ltd. versus The Union of India and ors. The duty cast on the quasi judicial authority as well as the importance of assigning reasons while adjudicating on inter party rights having been settled, and followed until date, yet has evaded the wisdom of the authorities performing such quasi judicial functions, as often seen. II. That Quasi-judicial and even administrative orders are required to be speaking orders. In Kranti Associates Private Ltd. & Anr. Vs. Masood Ahmed Khan & Ors., reported in (2010) 9 SCC 496, Hon'ble Supreme Court, has summarized the importance of any order to be a speaking one. Hon'ble Supreme Court in paragraph 47 of Kranti Associates Private Ltd. has stated thus:- (a) In India the judicial trend has always been to record reasons, even in administrative decisions, if such decisions affect anyone prejudicially. (b) A quasi-judicial authority must record reasons in support of its conclusions. (c) Insistence on recording of reasons is meant to serve the wider principle of justice that justice must not only be done it must also appear to be done as well. (d) Recording of reasons also operates as a valid restrain on any possible arbitrary exercise of judicial and quasi-judicial or even administrative power. (e) Reasons reassure that discretion has been exercised by the decision-maker on relevant grounds and by disregarding extraneous considerations. (f) Reasons have virtually become as indispensable a component of a decision- making process as observing principles of natural justice by judicial, quasi-judicial and even by administrative bodies. (g) Reasons facilitate the process of judicial review by superior courts. (h) The ongoing judicial trend in all countries committed to rule of law and constitutional governance is in favour of reasoned decisions based on relevant facts. This is virtually the lifeblood of judicial decision-making justifying the principle that reason is the soul of justice. (i) Judicial or even quasi judicial opinions these days can be as different as the judges and authorities who deliver them. All these decisions serve one common purpose which is to demonstrate by reason that the relevant factors have been objectively considered. This is important for sustaining the litigants' faith in the justice delivery system. (j) Insistence on reason is a requirement for both judicial accountability and transparency. (k) If a judge or a quasi judicial authority is not candid enough about his/her decision-making process then it is impossible to know whether the person deciding is faithful to the doctrine of precedent or to principles of incrementalism. (l) Reasons in support of decisions must be cogent, clear and succinct. A pretence reasons or "rubber-stamp reasons" is not to be equated with a valid decision-making process. (m) It cannot be doubted that transparency is the sine qua non of restraint on abuse of judicial powers. Transparency in decision-making not only makes the judges and decision makers less prone to errors but also makes them subject to broader scrutiny. (n) Since the requirement to record reasons emanates from the broad doctrine of fairness in decision making, the said requirement is now virtually a component of human rights. (o) In all common law jurisdictions judgments play a vital role in setting up precedents for the future. Therefore, for development of law, requirement of giving reasons for the decision is of the80 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 essence and is virtually a part of "due Process". Tested on the aforesaid score, the order of the disciplinary authority is not a speaking order. JJ. That order of punishment apparently is mechanical bereft of discussion and expresses no reasons for imposing the severe penalty which has been passed without considering objectively the explanation of the undersigned or expressing any opinion thereon. KK. In the light of above paragraphs, it is submitted by the undersigned that the enquiry was not held in accordance with prescribed procedure. Further, there is violation of principles of natural justice. Both the Inquiry Officer and the Disciplinary Authority have disabled themselves from reaching a fair conclusion by not considering relevant materials and by being influenced by irrelevant materials. The conclusions arrived at by the Inquiry Officer and the Disciplinary Authority are arbitrary as no reasonable person could ever have arrived at such conclusion. The Disciplinary Authority has failed to consider material facts. In fact, the finding of fact is not based on any evidence rather present is the case of no evidence. The undersigned has been a victim of mala fide action on the part of the Government. All procedural fairness has been given a go bye with the sole view to dismiss the undersigned anyhow. Therefore, the earlier penalty was revisited. In fact, both the earlier and the present penalties are non est in the eyes of law and both are based on no evidence. In the light of above principles, the charges leveled against the undersigned is not misconduct, therefore, the undersigned may kindly be exonerated from all the charges and consequently, the order of permanent stoppage of 100% pension being Notification as contained in Memo No.2391 dated 10.10.2022 is fit to be set aside in view of the above submissions and facts. (Photo copy of Notification no.-2391 dated 10.10.22 is annexed herewith and marked as Annexure-57). The undersigned humbly prays for setting aside of the order of permanent stoppage of 100% pension and allow the undersigned to get all admissible and monetary benefits."

श्री श्याम कुमार यादव द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाया गया :-

यह आरोप अभियंता प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक 142 दिनांक 26.

07.2019 में उल्लेखित तथा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, झंझारपुर के अन्तर्गत हुए विभिन्न कटान/टूटान बिन्दुओं पर क्षेत्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं किये जाने एवं न ही इस संबंध में किसी प्रकार की तैयारी किये जाने से संबंधित है।

इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि ग्रामीणों के विरोध के कारण कुछ स्थलों को छोड़कर शेष पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। अभियंता प्रमुख बाढ़ द्वारा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक-16.07.2019 को किये गये स्थल निरीक्षण के क्रम में किसी भी कटान बिन्दु पर क्षेत्रीय अभियंताओं द्वारा कटाव वाले भाग को सुरक्षित करने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी और न ही इस संबंध में किसी भी प्रकार की तैयारी ही देखी गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण (पृष्ठ-481-480/प॰ भाग-i) के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग द्वारा बतलाया गया कि उनका प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण के उपरान्त दिया गया है एवं यह तथ्यात्मक है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में उक्त कटाव की सुरक्षा हेतु किये गये आवश्यक कार्रवाई के निमित्त बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के समुचित भंडारण से संबंधित कोई अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। बाढ़ अवधि में बाँध के सतत्‌ निगरानी एवं चौकसी हेतु विभाग के स्तर पर कई आदेश संसूचित है, जिसके आलोक में क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा बाँध का सतत्‌ निरीक्षण कर अक्राम्य स्थलों को चिन्हित करते हुए आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का यथोचित मात्रा में भण्डारण सुनिश्चित किया जाता है, तथा हर स्थिति में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराते हुए बाँध को सुरक्षित रखना उनका दायित्व होता है, वर्णित मामले में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समुचित कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण बाँध को क्षतिग्रस्त होने/टुटने से नहीं बचाया जा सका।

यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कंडिका-4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने से संबंधित है।

यह आरोप बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद विफल रहने से संबंधित है।

इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा उल्लेखित है कि "उनके द्वारा SOP के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई की गयी एवं इससे संबंधित अभिलेख विभागीय कार्यवाही के दौरान समर्पित भी किए गए हैं। नदी का जलश्राव रूपांकित81 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 जलश्राव से डेढ गुणा से अधिक बढ़ जाने के कारण पुरा तटबंध ही आक्रम्यता की स्थिति में आ गयी तो उनके लिए सभी विन्दुओं पर SOP का अनुपालन करना संभव नहीं था। परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा बताया गया है कि आरोपी पदाधिकारी के द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में उल्लेखित निदेशों का उल्लंघन किये जाने का आरोप सही है। जबकि आरोप सं॰ 3 (प्रथम भाग) के संबंध में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण ने बताया कि तटबंधो का कई स्थलों पर टूट जाना ही बताता है कि ये संचालन प्रक्रिया के अनुपालन में विफल रहे। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा विभागीय SOP का अनुपालन नहीं किया जाना इस तथ्य से भी प्रमाणित होता है कि "अभियंता प्रमुख (बाढ़) द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में कटाव स्थल पर क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों के भंडारण के संबंध में कोई तैयारी दृष्टिगोचर नहीं हुआ" तथा यह भी परिलक्षित होता है कि संबंधित क्षेत्रीय पदाधिकारियों के द्वारा पूर्व से अक्राम्य स्थलों का भ्रमण नहीं किया गया तथा किसी प्रकार की बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु तैयारी नहीं की गई। आरोपित पदाधिकारी श्री श्याम कुमार यादव के द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन में अपने बचाव के समर्थन में कोई नया तथ्य/अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। अतः पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। यह आरोप अभियंता प्रमुख द्वारा दिनांक 22.07.2019 को नरूआर कटाव स्थल के निरीक्षण के दौरान रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाये जाने से संबंधित है जबकि आकस्मिकता की ऐसी हालत में युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया।

इस आरोप के संबंध में आरोपित पदाधिकारी श्री श्याम कुमार यादव के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि "दिनांक-21.07.2019 के अपराह्‌न से नरूआर कार्य स्थल पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था परन्तु रात्रि में 9ः30 बजे जेनरेटर खराब हो जाने के कारण कार्य कुछ देर के लिए बाधित जरूर हुआ, जिसे शीघ्र ही दुसरा जेनरेटर लगाकर पुनः प्रारंभ किया गया एवं रात्रि 01ः00 बजे तक नायलन क्रेटिंग का कार्य किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य के पश्चात्‌ स्लोप कटाई का कार्य जे०सी०बी० से किया गया। नायलन क्रेटिंग कार्य लेईग रजिस्टर में समय के साथ अंकित है।" परन्तु साक्षियों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के क्रम में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण द्वारा कहा गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 13.07.2019 एवं 14.07.2019 को तटबंध के टूटने के पश्चात्‌ दिनांक 21.07.2019 तक तटबंधों की सुरक्षा हेतु बिल्कुल ही लापरवाह रहे। यहाँ तक कि दिनांक 21.07.2019 को भी रात 9ः30 बजे के बाद कार्य बंद पाया गया जबकि इस हालात में युद्ध स्तर पर 24 घंटे कार्य चलना चाहिए था। आकस्मिकता की इस स्थिति में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का बीच में हीं बंद हो जाना लापरवाही का द्योतक है। उक्त परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी पदाधिकारी के द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया को CCA Rules-2005 में प्रावधानित नियमों के विपरीत बताया है। आरोपी पदाधिकारियों के द्वारा उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके पत्रांक-171 दिनांंक-04.12.2020 एवं पत्रांक-180 दिनांक-16.12.2020 द्वारा श्री श्याम कुमार यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध तथा पत्रांक-172 दिनांक-04.12.2020 एवं पत्रांक-181 दिनांक-24.02.2020 द्वारा श्री प्रेम प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा दिनांक-24.12.2020 को अपना जवाब समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपित पदाधिकारियों से प्राप्त बचाव-बयान दिनांक-24.12.2020 को हीं प्राप्त किया गया एवं कार्यवाही की अगली तिथि तय की जायेगी का उल्लेख आरोपित पदाधिकारियों के आवश्यकतानुसार किया गया है।

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा पुनर्विलाकन अर्जी में उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्कर्ष/फलाफल का छः माह तक इन्तजार किया गया तथा इस क्रम में आरोपी पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा भी नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया है। आरोपी पदाधिकारी के द्वारा RTI के तहत विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की सूचना की माँग किये जाने के फलस्वरूप विभागीय पत्रांक-614(अनु॰) दिनांक-16.07.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की सूचना उपलब्ध कराई गई। सूचना से आरोपित पदाधिकारियों को यह ज्ञात हुआ कि संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया पूर्ण कर जाँच प्रतिवेदन दिनांक-24.02.2021 को हीं विभाग को समर्पित कर दिया गया है। विभाग द्वारा उक्त संचालन प्रतिवेदन को प्रावधान के अनुसार नहीं पाया गया। तत्पश्चात्‌ संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-133 दिनांक-09.08.2021 से आरोपित पदाधिकारियों को साक्षियों के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु दिनांक-16.08.2021 की तिथि निर्धारित की गयी। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि उनको साक्षियों का प्रतिपरीक्षण नहीं करने दिया गया, जिसके लिए इनके द्वारा दिनांक-13.12.2021 को लिखे गये अनुरोध पत्र में श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर से प्रतिपरीक्षण करने हेतु अनुरोध किया गया था। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि, आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण कराये जाने के, उक्त अनुरोध के आलोक में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उनके पत्रांक-43 दिनांक-11.02.2022, जो श्री श्याम कुमार यादव को संबोधित है, में स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए उन्हें संसूचित किया गया है कि दिनांक-18.08.2021 को विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में वर्णित साक्षियों का आरोपित पदाधिकारियों के विरूद्ध गठित आरोपों के बिन्दुओं पर परीक्षण/प्रतिपरीक्षण किया गया। तदोपरांत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में कभी भी आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु किसी अन्य को बुलाने का आग्रह नहीं किया गया था। चुंकि आरोप पत्र के चतुर्थ भाग में अंकित साक्षियों के सूची में श्री82 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का नाम अंकित नहीं है। अतः श्री सतीश कुमार का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण संचालन पदाधिकारी के स्तर से किया जाना उचित नहीं है, का उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित उपरोक्त वर्णित पत्रों के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा श्री सतीश कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियंता का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण कराये जाने के संदर्भ में कार्यवाही संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी से अनुरोध नहीं किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होते हुए मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, पटना द्वारा उनके प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि रूपांकित जलश्राव (Design Discharge) कमला वियर का है न कि कमला नदी का।

अतः टूटान की तिथि को कमला नदी में प्रवाहित जलश्राव, कमला नदी के जलश्राव के 1.5 गुणा से अधिक होने का तर्क स्वीकार योग्य नहीं है।

इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में अपने बचाव के समर्थन में कोई नया तथ्य/अभिलेख/साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है। अतः उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री श्याम कुमार यादव, आई॰डी॰-4046, तत्कालीन कार्यपालक अकभियंता का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

इस प्रकार उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारियों यथा श्री श्याम कुमार यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त एवं श्री प्रेम प्रकाश, सहायक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरुद्ध बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया अन्तर्गत तटबंधो के सुरक्षा हेतु जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के बावजूद बाँध के सुरक्षार्थ बाढ़ अवधि में आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई नहीं किये जाने से, बाँध को क्षतिग्रस्त होने से रोकने में विफल रहने एवं आकस्मिकता की परिस्थिति में भी युद्ध स्तर पर 24 घंटे (तीनों पालियों) में तटबंध की सुरक्षा हेतु प्रयास नहीं करने तथा आरोपित पदाधिकारी श्री श्याम कुमार यादव के द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया को CCA Rules 2005 में प्रावधानित नियमों के विपरीत बताया है, जबकि इस संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में साक्षियों के अलावा किसी अन्य पदाधिकारी के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु संचालन पदाधिकारी से कोई आग्रह नहीं किया गया था, जिसकी पुष्टि संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-42 एवं 43 दिनांक-11.02.2022 के अवलोकन से होता है। उक्त से आरोपित पदाधिकारियों के द्वारा प्रतिपरीक्षण नहीं करने दिये जाने से संबंधित आरोप, तथ्यों के विपरीत प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी श्री यादव के द्वारा उनपर गठित आरोपों के संदर्भ में अपने अपील अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके परिप्रेक्ष्य में श्री यादव द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के कारण पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है, जिसपर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री श्याम कुमार यादव (आई0डी0-4046), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है। श्री गोविन्द प्रसाद (आई0डी0-3948), तत0 कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, सिवान को गंडक नदी का सर्वेक्षण कार्य के संबंध में उच्चाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेश के बावजूद भुगतान नहीं करने, अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, स्वेच्छाचारित पूर्वक कार्य करने तथा अनुशासनहीनता पूर्वक व्यवहार करने संबंधी आरोपों के मामले में सरकार के स्तर से पूर्ण समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-299 दिनांक 10.02.2022 द्वारा निलंबित किया गया। 2. निलंबन अवधि में श्री प्रसाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के प्रावधानों के तहत जीवन निर्वाह भत्ता अनुमान्य किया गया।

3. श्री प्रसाद द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता बढ़ाने संबंधी पत्र मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सहरसा का पत्रांक-401 दिनांक 15.02.2023 में संलग्न कर विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसमें श्री प्रसाद द्वारा अपने मूल वेतन का 62.5% जीवन निर्वाह भत्ता एवं तदनुसार महंगाई भत्ता भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 (i) में वर्णित है कि यदि प्राधिकार की राय में निलंबन की अवधि लंबे समय तक रही हो इसके लिए अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से, सरकारी सेवक उत्तरदायी नहीं हो तो जीवन निर्वाह भत्ता की रकम एक ऐसी समुचित रकम द्वारा बढायी जा सकेगी जो प्रथम 12 महीने की अवधि के दौरान अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता के 50% से अधिक नहीं होगा।83 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 5. श्री प्रसाद द्वारा प्राप्त पत्र के सम्यक समीक्षोपरांत उक्त नियम के आलोक में सक्षम प्राधिकार द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता मूल वेतन का 62.5% दिनांक 09.02.2023 के प्रभाव से वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है।

6. उक्त निर्णय श्री गोविन्द प्रसाद, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, सिवान सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सहरसा को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री विनय कुमार (आई0डी0-5389), तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, पुसा (समस्तीपुर) को गौरीचक (फुलवारीशरीफ) थाना कांड सं०-444/2001 में दिनांक 07.03. 2022 से 04.03.2023 तक जेल में कैद (हिरासत) में रहने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-09(2) के तहत विभागीय आदेश सं0-71 सहपठित ज्ञापांक-1117 दिनांक 12.05.2022 द्वारा हिरासत की तिथि दिनांक 07.03.2022 के भूतलक्षी प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित किया गया।

श्री कुमार, सहायक अभियंता (निलंबित) के दिनांक 28.02.2023 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा जमानत पर रिहा किये जाने के फलस्वरूप उनके द्वारा दिनांक 06.03.2023 को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर में योगदान किया गया।

मुख्य अभियंता, समस्तीपुर द्वारा प्रेषित पत्र एवं श्री कुमार के अभ्यावेदन के आलोक में मामले की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत श्री विनय कुमार, सहायक अभियंता (निलंबित) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(3)(i) के आलोक में निलंबन की तिथि 07.03.2022 से 05.03.2023 तक निलंबित रखते हुए कर्त्तव्य पर योगदान की तिथि 06.03.2023 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं0-144/100 के तहत सारण तटबंध के कि0मी0 76.0-77.0 के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराये जाने के उपरांत पायी गयी अनियमितता के लिए से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया, जिसके अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत है :-

प्रमंडलान्तर्गत बाढ़ 2018 के पूर्व एजेण्डा सं0-144/100 के तहत सारण तटबंध के कि0मी0 76.0-77.0 के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य में निम्न अनियमितताओं को पाया गया है :-

(क) प्रश्नगत कार्य के तहत बोल्डर क्रेटिंग कार्य में अनुमान्य सीमा 20 प्रतिशत से अधिक Voids 25.98 प्रतिशत पाया जाना, क्रेट में प्रयुक्त बोल्डर का साईज प्रावधान के अनुरूप नहीं पाया जाना तथा क्रेट के विशिष्टि के अनुरूप GI Wire से भली भांति बाँधा हुआ नहीं पाये जाने के आलोक में न्यून विशिष्टि के कार्य कराया जाना परिलक्षित है। (ख) प्रश्नगत कार्य के तहत लेवर सह गोदाम का निर्माण कार्य Lintel तक ही कराया हुआ पाया गया। तटबंध के Back Shifting के कार्य में स्लोप निर्माण कार्य रूपांकित सेक्सन में संपीडन के साथ पूर्ण नहीं पाया गया। साथ ही टरफिंग का कार्य भी प्रारंभ नहीं हो पाया है अर्थात जाँच की तिथि तक कार्य अपूर्ण रहने के बावजूद उनके द्वारा दिनांक 06. 06.2018 को कार्य पूर्णता होने का प्रमाण-पत्र दिया जाना गलत मंशा परिलक्षित करता है।

(ग) प्रावधान के अनुरूप पाईलेट चैनल की खुदाई LWL से 1 मी० नीचे तक नहीं किया गया है। (घ) स्टड निर्माण कार्य में प्रयुक्त जियो बैग में प्रावधानित से कम बालू भरा गया है तथा जियो बैग के सिलाई भी मानक के अनुरूप नहीं किया गया है।

(ड) परक्युपाईन लेईंग/निर्माण कार्य में R.C.C. में सिमेंट की मात्रा में 53 से 60 प्रतिशत तक की कमी पायी गयी है। साथ ही परक्युपाईन लेग मे honey combed, bulged, deshaped तथा छड़ Exposed पाया गया। (च) नाईलन क्रेटिंग कार्य में प्रावधान के अनुरूप एक नाईलन क्रेट में 25 अदद बालू भरे EC bag के प्रयोग करने के स्थान पर मात्र 18–19 अदद EC bag का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। मुख्य अभियंता के निर्देश के बावजूद वास्तविक रूप से कराये गये कार्य के अनुरूप बिना कटौती किये ही 7th A/c Bill तक प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान किया जाना परिलक्षित है। इस प्रकार इनके द्वारा मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद मनमाने ढंग से भुगतान कर राशि का दुरुपयोग किये जाने का मामला बनता है।

(2) श्री अमित कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा उपरोक्त वर्णित अनियमितता से स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा मनमाने ढंग से प्रावधान के विपरीत न्यून विशिष्टि का कार्य कराया जाना परिलक्षित है एवं 7th A/c Bill तक अनियमित ढंग84 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 से भुगतान किया जाना प्रतीत होता है तथा उड़नदस्ता जाँच के बाद 8th A/c Bill में उपरोक्त अनियमितता के तहत समायोजन कर लिये जाने से अनियमित भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है, परन्तु न्यून विशिष्टि का कार्य कराया जाना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2567 दिनांक 11.12.2019 द्वारा उनसे आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प सं0-57 दिनांक 18.01.2021 द्वारा इनके विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें श्री अशोक कुमार चौधरी, अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर से की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने का निर्णय लिया गया :-

मात्र एक नमूने की voids की जाँच किये जाने को आधार बनाकर तथा जाँच में प्रयुक्त बॉक्स के लकड़ी से निर्मित होने या टीन का होने पर प्रश्न उठाते हुये आरोप के अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया है, परन्तु उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा की गयी गणना के संबंध में कोई प्रतिकूल तर्क नहीं दिया गया है। अगर उड़नदस्ता द्वारा की गयी गणना पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं है तो बॉक्स के सामग्री से कोई फर्क नहीं पड़ता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में क्रेट में प्रयुक्त बोल्डर का साईज प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने तथा क्रेट के विशिष्टि के अनुरूप GI Wire से भली भांति बाँधा हुआ नहीं पाये जाने के संबंध में कोई मंतव्य नही दिया गया है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया मंतव्य तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये आरोप (क) प्रमाणित प्रतीत होता है। कार्य में संलग्न मिस्त्री एवं मजदूर द्वारा समर्पित पत्र के आलोक में लेवर सह गोदाम का निर्माण कार्य दिनांक 05.06.2018 को पूर्ण परिलक्षित होता है। परन्तु आरोप के अन्य बिन्दु यथा तटबंध के Back Shifting के कार्य में स्लोप निर्माण कार्य तथा टरफिंग का कार्य के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी ने बिना कोई तथ्य/साक्ष्य अंकित किये ही आरोप अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया है जिसे मान्य नहीं किया जा सकता है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये जाँच की तिथि तक प्रश्नगत कार्य के तहत तटबंध के Back Shifting के कार्य में स्लोप निर्माण कार्य रूपांकित सेक्सन में संपीडन के साथ पूर्ण नहीं पाये जाने तथा टरफिंग का कार्य भी प्रारंभ नहीं हो पाने के बावजूद दिनांक 06.06.2018 को कार्य पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिये जाने का आरोप प्रमाणित होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये आरोप (ख) आंशिक रुप से प्रमाणित प्रतीत होता है। : अधीक्षण अभियंता रूपांकण आयोजन एवं मोनेटरिंग अंचल, गोपालगंज की अध्यक्षता में जाँच दल द्वारा दिनांक 10.05.2018 से 11.05.2018 के बीच लिये गये लेवेल एवं प्रमंडल द्वारा दिनांक 14.05.2018 को लिये गये लेवेल में अंतर पाये जाने की बात को कुछ हद तक स्वीकार किया जा सकता है। परन्तु प्रमण्डल द्वारा लिये गये लेवेल की जाँच न तो किसी असम्बद्ध समिति द्वारा की गयी है और न ही इससे संदर्भित कोई साक्ष्य दिया गया है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये आरोप (ग) आंशिक रुप से प्रमाणित प्रतीत होता है। योजना में प्रयुक्त लगभग 10 हजार जियो बैग में से मात्र 5 नमूनों की जाँच किये जाने तथा लेईंग के बाद ग्रामीणों एवं बच्चों द्वारा उक्त सिलाई को खोल दिये जाने के संभावना के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप के अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया है। परन्तु जाँच दल द्वारा अक्रमतः चयनित भरे हुए जियो बैग के पाँच नमूनों का वजन लिया गया जो क्रमशः 95.230 कि0ग्रा0, 90.040 कि0ग्रा0, 78.420 कि0ग्रा0, 102.040 कि0ग्रा0 एवं 89.560 कि0ग्रा0 पाया गया। भरे हुए जियो बैग में चार कतार में सिलाई के स्थान पर तीन एवं दो कतार में भी सिलाई पायी गयी। गौरतलब है कि सभी नमूनों में अनुमान्यता से कम वजन पाया गया तथा सिलाई भी प्रावधान के अनुरुप नहीं पाया गया। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये आरोप (घ) प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप परक्युपाईन कार्य में सीमेंट की मात्रा में 53 से 60 प्रतिशत तक की कमी पाये जाने तथा परक्युपाईन लेग में honey combed, bulged, deshaped तथा छड़ Exposed पाये जाने से संबंधित है, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया मंतव्य इसके कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ के सन्दर्भ में दिया गया है। आर०सी०सी० के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ की जाँच तथा आर0सी0सी0 में सीमेंट की मात्रा का आँकलन दो अलग प्रकार का जाँच है एवं दोनों की प्रक्रिया अलग-अलग है। अतः संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया मंतव्य आरोप के बिन्दु से संदर्भित नहीं है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप (ड़) प्रमाणित प्रतीत होता है। आरोप का बिन्दु एक नाईलन क्रेट में 25 अदद बालू भरे EC bag के प्रयोग करने के स्थान पर मात्र 18-19 अदद EC bag का उपयोग किये जाने तथा मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद वास्तविक रूप से कराये गये कार्य के अनुरूप बिना कटौती किये ही 7th A/c Bill तक प्रावधान के अनुरूप अनियमित ढंग से भुगतान किये जाने से संबंधित85 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 है। उड़नदस्ता जाँच के बाद 8th A/c bill तैयार किया गया है, जिसमें एक NC में 18 अदद बालू भरे EC bags के आधार पर विपत्र तैयार किया गया है। परन्तु इस परिप्रेक्ष्य में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच न करते हुये किसी नायलन क्रेट में वांछित से अधिक संख्या में तथा किसी में कम बालू के बोरे रक्षित होने तथा ई0सी0 बैग की गणना व्यवहृत क्रेट के आधार पर किये जाने को आधार मानकर आरोप अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया है जो तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुये आरोप (च) प्रमाणित प्रतीत होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-670 दिनांक 25.03.2022 द्वारा श्री कुमार को भेजते हुए उनसे उक्त असहमति के बिन्दुओं पर अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार के पत्रांक-01 दिनांक 19.05.2022 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गया :-

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन का मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- आरोपित पदाधिकारी के द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि किसी प्रकार की कोई गणना स्थल पर रक्षित लकड़ी से निर्मित बॉक्स/टीन में एकत्रित किये गये बोल्डर में लोकल सैंड को भरकर Voids की गणना की गयी थी, जिससे वह गणना हीं त्रुटिपूर्ण है तथा उक्त त्रुटिपूर्ण एकत्रित किये गये नमूने के आधार पर Voids पर कोई भी प्रतिवेदन दिया जाना तकनीकी दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा यह भी कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि ''Voids के संबंध में विभिन्न स्तर पर जाँच के क्रम में विभिन्न तरह के प्रतिवेदन प्राप्त हुए है और उक्त के आलोक में जाँच में ही विरोधाभाष की स्थिति है। इसी मामले में आरोप को प्रमाणित करने हेतु उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के मुख्य गवाह श्री राजेश कुमार ठाकुर से आरोपित के द्वारा विभागीय कार्यवाही के प्रतिपरीक्षण के क्रम में पूछे गये प्रश्नों के संदर्भ में जाँचकर्ता द्वारा कोई टिप्पणी नहीं कहे जाने से पूछे गये प्रश्न तकनीकी दृष्टिकोण से उचित बताते हुए, संचालन पदाधिकारी के द्वारा मान्य किये जाने का उल्लेख करते हुए आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उक्त असहमति के बिन्दु को आधारहीन बताया गया है।

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा बोल्डर के साईज तथा क्रेट के विशिष्टि के अनुरूप GI Wire से भलिंभाँति नहीं बांधे जाने के संदर्भ में यह तर्क दिया गया है कि संबंधित कार्य वर्ष 2018 के बाढ़ के समय कराया गया था, जिसकी जाँच उड़नदस्ता द्वारा कार्य सम्पादन के बाद किया गया था। साथ हीं कार्य के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न स्तरों पर उच्चाधिकारियों के द्वारा जाँच की गयी थी एवं किसी प्रकार की त्रुटि का उल्लेख किसी स्तर से नहीं किया गया था। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा यह उल्लेख किया गया है किसी प्रकार की कोई गणना स्थल पर रक्षित लकड़ी से निर्मित बॉक्स/टीन में एकत्रित किये गये बोल्डर में लोकल सैंड को भरकर Voids की गणना की गयी थी, जिससे वह गणना ही त्रुटिपूर्ण है तथा उक्त त्रुटिपूर्ण एकत्रित किये गये नमूने के आधार पर Voids पर कोई भी प्रतिवेदन दिया जाना तकनीकी दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य कि ''Voids के जाँच के क्रम में विभिन्न स्तर से विभिन्न प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं और उक्त के आलोक में जाँच में ही विरोधाभाष की स्थिति है''। इसी मामले में आरोप के प्रमाणित करने हेतु उड़नदस्ता द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के मुख्य गवाह श्री राजेश कुमार ठाकुर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से आरोपित पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही के प्रतिपरीक्षण के क्रम में पूछे गये प्रश्नों को तकनीकी दृष्टिकोण से उचित बताते हुए, संचालन पदाधिकारी के द्वारा मान्य किये जाने का उल्लेख करते हुए असहमति के बिन्दु को आधारहीन बताया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा मात्र एक नमूने की Voids की जाँच को आधार बनाकर तथा जाँच में प्रयुक्त बॉक्स के लकड़ी से निर्मित होने या टीन के होने पर प्रश्न उठाते हुए आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, परन्तु उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा की गयी गणना के संबंध में कोई प्रतिकूल तर्क नहीं दिया गया है, जिससे की गयी गणना में प्रयुक्त बॉक्स के सामग्रियाें से फर्क नहीं पड़ता है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में भी उक्त गणना के त्रुटिपूर्ण होने के किसी प्रकार के साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किये गये हैं।

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा बोल्डर के साईज तथा क्रेट के विशिष्टि के अनुरूप GI Wire से भलिंभाँति नहीं बांधे जाने के संदर्भ में यह तर्क प्रतिवेदित किया है कि संबंधित कार्य वर्ष 2018 मेें बाढ़ के समय कराया गया था, जिसकी जाँच उड़नदस्ता द्वारा कार्य सम्पादन के बाद किया गया था। साथ ही कार्य के क्रियान्वयन के क्रम में विभिन्न स्तरों पर जाँच की गयी थी एवं किसी प्रकार की त्रुटि का उल्लेख किसी स्तर से नहीं किया गया था। यहाँ यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता द्वारा कार्य स्थल के निरीक्षण के क्रम में क्रेट को विशिष्टि के अनुरूप GI Wire से भलिभाँति बांधा हुआ नहीं पाया गया। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में कोई मंतव्य अंकित नहीं किया गया है। आरेापित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में बोल्डर के Size प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने तथा Crate को GI Wire से विशिष्टि के अनुरूप बाँधे नहीं पाये जाने के समुचित कारणों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा Voids की गणना में प्रयुक्त BOX के आधार पर उड़नदस्ता द्वारा प्रतिवेदित गणना को त्रुटिपूर्ण होने के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। साथ ही Crate में प्रयुक्त बोल्डर के Size को प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने तथा Crates को GI Wire से विशिष्टि के अनुरूप नहीं86 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 बाँधा हुआ पाये जाने के कारणों के समर्थन में समुचित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने से आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरेाप ''क'' यथावत्‌ प्रमाणित होता है।

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त असहमति का बिन्दु साक्ष्य आधारित नहीं है, क्योंकि इनके स्तर से समर्पित साक्ष्य आधारित अभिलेख एवं कागजात तथा अपने बचाव-बयान के रूप में समर्पित साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण के अवलोकनोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपना अभिमत गठित किया गया था, तो ऐसी स्थिति में साक्ष्य आधारित तथ्यों जिसपर संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्ण रूपेण विचार किया गया है, पर असहमति का कोई बिन्दु विधिसंगत नहीं है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उक्त असहमति के बिन्दु को साक्ष्य आधारित नहीं होने के उदाहरण स्वरूप उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण के विचारोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपों को अप्रमाणित किये जाने के मंतव्य का उल्लेख करते हुए उक्त असहमति के बिन्दु को विधिसंगत नहीं होने का उल्लेख किया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में जाँच की तिथि तक तटबंध के Back Shifting के कार्य में Slope निर्माण कार्य रूपांकित सेक्शन में संपीडन के साथ पूर्ण नहीं पाया गया तथा टरफिंग का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाने के बावजूद दिनांक-06.06.2018 तक कार्य के पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिये जाने के समुचित कारणों के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के द्वारा कोई साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में भी उक्त अपूर्ण कार्य के संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में जाँच की तिथि तक तटबंध के Back Shifting कार्य में Slope निर्माण कार्य रूपांकित सेक्शन में संपीड़न के साथ पूर्ण नहीं पाये जाने तथा टरफिंग का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाने के बावजूद दिनांक-06.06.2018 तक कार्य के पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिये जाने के आरोप को अप्रमाणित करने के समर्थन में कोई भी साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाने से समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप (ख) यथावत्‌ आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।

आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त असहमति का बिन्दु साक्ष्य आधारित नहीं है, क्योंकि आरोप पत्र में यह आरोप नहीं था कि लेवल की जाँच असम्बद्ध समिति द्वारा नहीं कराया गया। जहाँ तक उक्त लेवेल का प्रश्न है, के क्रम में साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित किया गया था एवं प्रतिपरीक्षण के क्रम में भी जाँचकर्ता द्वारा कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी, जिसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी के अभिमत में है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा प्रतिपरीक्षण के क्रम में जाँचकर्ता के द्वारा की गयी जाँच की पद्धति पर प्रश्न उठाया गया था, जिसपर जाँचकर्ता द्वारा कोई भी अभिमत गठित नही किया गया, तो ऐसी परिस्थिति में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ये मंतव्य दिया गया था कि जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्य एक भूल है एवं इसी आधार पर आरोप को अप्रमाणित माना गया था, तो ऐसी स्थिति में साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण पर विचार नहीं किये जाने का कोई औचित्य नहीं है, का उल्लेख भी आरोपित पदाधिकारी के द्वारा किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि असहमति के बिन्दु साक्ष्य आधारित नहीं है तथा आरोप पत्र में यह आरोप नहीं था कि लेवेल की जाँच असंबद्ध समिति द्वारा नहीं किया गया। उक्त लेवेल के संदर्भ में साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित किये जाने का उल्लेख किया गया है। साथ ही प्रतिपरीक्षण के क्रम में जाँचकर्ता द्वारा की गयी जाँच की पद्धति पर उठाये गये प्रश्न पर जाँचकर्ता द्वारा कोई अभिमत गठित नहीं किये जाने के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्य एक भूल है, का मंतव्य दिया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि असहमति के बिन्दु के अन्तर्गत अधीक्षण अभियंता, रूपांकन आयोजन एवं मोनिटरिंग अंचल, गोपालगंज की अध्यक्षता में जाँचदल द्वारा दिनांक-10.05.2018 से 11.05.2018 के बीच लिये गये लेवल एवं प्रमंडल द्वारा दिनांक-14.05.2018 को लिये गये लेवल की जाँच न तो किसी असम्बद्ध समिति द्वारा की गयी है, न हीं इससे संदर्भित कोई साक्ष्य दिया गया है। उक्त वर्णित लेवेल पर असंबद्ध समिति द्वारा किये गये जाँच को प्रमाणित करने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कोई साक्ष्य/अभिलेख अपने अभ्योवदन में प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा अधीक्षण अभियंता, मोनिटरिंग अंचल, गोपालगंज की अध्यक्षता में जाँच दल द्वारा दिनांक-10.05.2018 से दिनांक-11.05.2018 के बीच लिये गये लेवेल एवं प्रमंडल द्वारा दिनांक-14.05.2018 को लिये गये लेवल की जाँच किसी असंबद्ध समिति द्वारा किये जाने के कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जाने से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप (ग) आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त कार्य एकरारनामा के कार्यमद में नहीं था तथा यह कार्य उच्चाधिकारी के दिये गये निर्देश के आलोक में कराया गया था, जिसका भुगतान भी संवेदक को नहीं किया गया है। कार्य में प्रयुक्त जियो बैग के गुणवत्ता संबंधी प्रतिवेदन विशिष्टि के अनुरूप है। संबंधित योजना में लगभग 10 हजार जियो बैग का उपयोग हुआ था, जबकि जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-8.0.0 में अंकित है कि 5 नमूनों की जाँच की गयी थी, जिसमें जियो बैग में बालू की मात्रा कम पायी गयी तथा सिलाई विशिष्टि के87 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 अनुरूप चार कतार में नहीं पाये गये। कम बालू भरे जाने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि 10 हजार अदद्‌ Geo Bags में से हर बैग को अपनी उपस्थिति में उनके स्तर से बालू भरवाने का कार्य नहीं कराया जा सकता है, तथा Geo Bags की लेईंग के उपरांत ग्रामीणों एवं बच्चों के द्वारा उक्त सिलाई खोल दिया जाता था एवं उक्त Geo Bags की सतत्‌ निगरानी किया जाना संभव नहीं था। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उक्त के संदर्भ में विभागीय प्रतिपरीक्षण के क्रम में जाँचकर्त्ता से पूछे जाने पर कि क्या संभावना के आधार पर आरोप गठित किया जा सकता है तो इसके संदर्भ में जाँचकर्ता द्वारा कोई अभिमत नहीं दिया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचार करते हुए आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया था, का उल्लेख आरोपित पदाधिकारी के द्वारा किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त कार्य एकरारनामा के कार्यमद में नहीं था तथा यह कार्य उच्चाधिकारी के दिये गये निर्देश के आलोक में कराया गया, जिसका भुगतान भी संवेदक को नहीं किया गया है। जियो बैग के गुणवत्ता संबंधी प्रतिवेदन विशिष्टि के अनुरूप हैं। संबंधित योजना में लगभग 10 हजार जियो बैग का उपयोग हुआ था, जबकि जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-8.0.0 में 5 नमूनों की जाँच की गयी थी, जिसमें जियो बैग में बालू की मात्रा कम पायी गयी तथा सिलाई विशिष्टि के अनुरूप चार कतार में नहीं पाये गये। कम बालू भरे जाने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि 10 हजार अदद्‌ Geo Bags में से हर बैग को अपनी उपस्थिति में उनके स्तर से बालू भरवाने का कार्य नहीं किया जा सकता है, तथा Geo Bags की लेईंग के उपरांत ग्रामीणों एवं बच्चों के द्वारा उक्त सिलाई खोल दिया जाता था, जिसकी सतत्‌ निगरानी किया जाना संभव नहीं था। यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि जाँचदल द्वारा अक्रमतः चयनित भरे हुए जियो बैग के 05 नमूनों का वजन लिया गया, जो क्रमशः 95.230 कि॰ग्रा॰, 90.40 कि॰ग्रा॰, 78.42 कि॰ग्रा॰, 102.040 कि॰ग्रा॰ तथा 89.560 कि॰ग्रा॰ पाया गया, जो प्रावधानित वजन 126 कि॰ग्रा॰ से बहुत ही कम पाया गया। साथ ही भरे हुए जियो बैग में प्रावधानित चार कतार में सिंलाई के स्थान पर तीन एवं दो कतार में सिलाई पायी गयी। अतः सभी नमूनों में अनुमान्यता से कम वजन पाया गया तथा सिलाई भी प्रावधान के अनुरूप नहीं पाया गया। चूँकि जाँचदल द्वारा अक्रमतः चयनित भरे हुए Geo bags का ही मापी किया जाता है, जो प्रावधानित नियमों के अनुकूल है, जिसके आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में समुचित साक्ष्यों/अभिलेखों के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में स्थल निरीक्षण के क्रम में जाँचदल द्वारा अक्रमतः चयनित बालू भरे हुए जियो बैग में अनुमान्यता से कम वजन पाया गया तथा सिलाई भी प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने के कारणों के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कोई साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाने से समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित उक्त आरोप 'घ' यथावत्‌ प्रमाणित होता है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित प्रतिवेदन से असहमत होने का कोई प्रश्न ही नहीं है, क्योंकि किसी भी कंक्रीट कार्य की जाँच उसके कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ से की जा सकती है न कि सीमेन्ट बालू के मिश्रण से। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना अभिमत इस प्रकार गठित किया है :- प्रतिपरीक्षण के क्रम में आरोपित पदाधिकारी द्वारा जाँचकर्ता से यह पूछे जाने पर कि कंक्रीट कार्य के स्ट्रेन्थ नापने की क्या पद्धति है ? क्या परक्यूपाईन कार्य के स्ट्रेन्थ की जाँच सिमेन्ट कंक्रीट के मिश्रण से की जा सकती है ? स्थल जाँच के क्रम में परक्यूपाईन के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ की जाँच की गयी थी, के संबंध में जाँचकर्ता द्वारा अपना कोई अभिमत नहीं बतलाया गया। मात्र जाँच प्रतिवेदन को ही आधार बनाया गया। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा यह तथ्य प्रतिवेदित किया गया है कि कंक्रीट कार्य की जाँच परक्यूपाईन के आधार पर हीं की जा सकती है। परक्यूपाईन के एक नमूनों को लेकर उसकी कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ का जाँच किया जाता है। जबकि इस मामले में कंक्रीट मिक्स को तोड़कर सीमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात निकाला गया है, जिसके आधार पर उक्त कार्य का कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ का निर्धारिण नहीं किया जा सकता है। उक्त परिप्रेक्ष्य में आरोप प्रमाणित नहीं होने का उल्लेख आरोपित पदाधिकारी के द्वारा किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि किसी भी कंक्रीट कार्य की जाँच उसके कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ से की जा सकती है न कि सीमेंट बालू के मिश्रण से। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय प्रतिपरीक्षण के क्रम में जाँचकर्ता से पारक्यूपाईन कार्य के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ की जाँच क्या सीमेंट कंक्रीट के मिश्रण से की जा सकती है ?, के प्रश्न पर जाँचकर्ता द्वारा कोई अभिमत नहीं दिया गया है। यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि आरोप का बिन्दु परक्यूपाईन कार्य में सीमेंट की मात्रा में 53 से 60 प्रतिशत तक की कमी पाये जाने तथा परक्यूपाईन leg में Honey Combed, Bulged, deshaped तथा छड़ exposed पाये जाने से संबधित है। परन्तु आरोपित पदाधिकारी के द्वारा आर॰सी॰सी॰ के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ के संदर्भ में उल्लेख किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा आरोप को अप्रमाणित करने के संदर्भ में कोई साक्ष्य/तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा सीमेंट की मात्रा में 53 से 60 प्रतिशत की कमी पाये जाने तथा परक्यूपाईन leg में Honey Combed Bulged, deshaped तथा छड़ exposed पाये जाने के आरोप के अप्रमाणित करने हेतु कोई साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतएव आरेापित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप 'ड़' यथावत प्रमाणित होता है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि मुख्य अभियंता के निर्देश के आलोक में वास्तविक रूप से कराये गये कार्य का ही भुगतान किया गया है। एक एन॰सी॰ में 18 अदद ई॰सी॰ बैग के आधार पर ही लगभग 11 (ग्यारह) लाख EC Bags जो 42564 नायलॉन क्रेट में डाले जाने के आधार88 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 पर ही विपत्र तैयार किया गया है। संभावना है कि किसी NC में वांछित से अधिक संख्या में तथा किसी में कम बालू के बोरे रक्षित हो। भुगतान के क्रम में बालू भरे इ॰सी॰ बैग्स की गणना व्यवहृत क्रेट के आधार को मानकर किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख किया गया है कि मुख्य अभियंता के निर्देश के आलोक में वास्तविक रूप से कराये गये कार्य का ही भुगतान किया गया है। एक एन॰सी॰ में 18 अदद ई॰सी॰ बैग को आधार बनाकर कार्रवाई की गई है। चूँकि विषयक कार्य में लगभग 11 लाख EC Bags जो 42564 नायलॉन क्रेट में भरा जाना था, का कार्य कराया गया था। उक्त कराये गये कार्य में यह संभावना है कि किसी नायलॉन क्रेट में वाँछित से अधिक बालू भरे बोरे रक्षित होंगे तथा किसी में कम बालू भरे बोरे रक्षित होंगे। भुगतान के क्रम में बालू भरे ई॰सी॰ बैग्स की गणना व्यवहृत क्रेट के आधार को मानकर किया गया है। यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक-954 दिनांक-23.04.2018 से एक NC में 18-19 बोरे का उपयोग किये जाने की पुष्टि होती है। मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद 7th A/C Bill तक प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। उड़नदस्ता जाँच के बाद 8th A/C bill तैयार किया गया जिसमें एक NC में 18 अदद्‌ बालू भरे EC bags के आधार पर विपत्र तैयार किया गया। यदि उड़नदस्ता जाँच नहीं होती तो संभावना थी कि इस मद में अधिकाई भुगतान होता। चूँकि आरोपित पदाधिकारी के द्वारा 8th A/C विपत्र को 18 अदद्‌ EC bags के आधार पर तैयार किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि कराये गये कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं थे। उपरोक्त समीक्षा एवं मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के पत्रांक-954 दिनांक-23.04.2018 के आलोक में यह स्पष्ट है कि कार्य स्थल पर प्रयुक्त NC में प्रावधानित 25 अदद्‌ बालू भरे बोरे के स्थान पर 18-19 अदद्‌ बालू भरे बोरों के आधार पर विपत्र तैयार किया गया, जिससे कराये गये कार्य विशिष्टि के अनुरूप कराया जाना प्रमाणित नहीं होने से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप 'च' यथावत्‌ प्रमाणित प्रतीत होता है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) को अस्वीकार योग्य पाते हुए उनके विरूद्ध उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया - अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अमित कुमार (आई0डी0-5301), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री सुदामा राय (आई0डी0-3273), तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, वीरपुर के पत्रांक-2375 दिनांक 17.12.2019 से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता को विभागीय अधिसूचना सं0-51 दिनांक 16.01.2020 द्वारा निलंबित करते हुए श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप पत्र की मांग, मुख्य अभियंता, वीरपुर से की गई। मुख्य अभियंता, वीरपुर से प्राप्त आरोप पत्र की समीक्षोपरांत निम्न आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-941 दिनांक 03.07.2020 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई -

(1) श्री सुदामा राय, तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली द्वारा बिहार सरकारी सेवक हेतु निर्धारित आचरण एवं व्यवहार के विपरीत अपने अधीनस्थ पदाधिकारी यथा श्री राजेश कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली सम्प्रति निलंबित को लेन देन हेतु आवास पर बुलाकर अमर्यादित व्यवहार करते हुए बंधक बनाने का प्रयास किया गया। आपके उक्त कृत्य के कारण सरकारी कार्य बाधित हुआ। साथ ही कार्यालय का श्रमबल एवं समय का अपत्यय हुआ, तथा अधीनस्थ कर्मी के मनोबल एवं कार्य क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

(2) श्री संजय कुमार, प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली द्वारा आपके विरूद्ध गलत निर्णय लेने का शिकायत मुख्य अभियंता, वीरपुर से किया गया था। जाँच समिति के रिपोर्ट में यह सत्य पाया गया। (3) पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली में कार्यरत लेखा लिपिक, श्री संजय लाल दास की पत्नी श्रीमती रूपा कुमारी द्वारा भी अपने पति पर आपके द्वारा मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है।

श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जवाब के समीक्षोपरांत इनकी सेवानिवृति दिनांक 30.12.2020 को हो जाने पर विभागीय अधिसूचना सं0-404 दिनांक 08.04.2021 द्वारा इन्हें निलंबन मुक्त करते हुए श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।89 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-2680 दिनांक 25.11.2022 द्वारा अभ्यावेदन की माँग की गई।

श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में मुख्य रूप से निम्न तथ्य पाये गये :-

संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सुदामा राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से संबंधित जाँच प्रतिवेदन में अंकित किया गया कि "पुलिस अधीक्षक, सुपौल/समाहरणालय, सुपौल के जाँच प्रतिवेदन से आरोपी पदाधिकारी द्वारा निर्मली थाना में दर्ज कांड-206/19 में श्री राजेश कुमार, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध मामला बढ़ा चढ़ा कर दर्ज कराना परिलक्षित है। उक्त बिन्दु पर विभाग द्वारा श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से अभ्यावेदन की मांग की गई। श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित जवाब की विभाग के स्तर पर समीक्षा की गई जिनमें पाया गया कि श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के तीन बिन्दु में उक्त बिन्दु नहीं (जिस बिन्दु पर श्री राय से अभ्यावेदन की मांग की गई है, आरोप पत्र में गठित आरोप का हिस्सा नहीं है) है।

उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री सुदामा राय, तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली सम्प्रति सेवानिवृत के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0 एक के अन्तर्गत अंकित मंतव्य यथा "पुलिस अधीक्षक सुपौल/समाहरणालय, सुपौल के जाँच प्रतिवेदन से आरोपी पदाधिकारी द्वारा निर्मली थाना में दर्ज थाना कांड-206/19 में श्री राजेश कुमार के विरूद्ध बढ़ा चढ़ाकर मामला दर्ज कराना परिलक्षित होता है" आरोप पत्र में आरोप सं0- एक अन्तर्गत उनके विरूद्ध गठित मूल आरोप से भिन्न होने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(15) के तहत विधि सम्मत नहीं होने के कारण, कारण पृच्छा से संबंधित उक्त बिन्दु से संबंधित मामला, न्यायालय में विचाराधीन रहने के आलोक में श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। अतएव विभाग के स्तर पर गठित आरोप सं0- 01, 02 एवं 03 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के द्वारा अंकित किया गया मंतव्य के आलोक में आरोप सं0-01, 02 एवं 03 को अप्रमाणित पाये जाने के परिप्रेक्ष्य में श्री राय, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त अभ्यावेदन को स्वीकार करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है। अतः श्री सुदामा राय, तत0 कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप सं0-01, 02 एवं 03 को अप्रमाणित पाये जाने के परिप्रेक्ष्य में इनके अभ्यावेदन को स्वीकार करते हुए इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है। श्री शमीमुल हक (आई॰डी॰-3363) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल मुरलीगंज -सह-बनमनखी को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-2398 दिनांक 22.11.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री हक से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प सं0-2471 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री हक के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री हक से विभागीय पत्रांक-1490 दिनांक 22.06.2022 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी थी। श्री हक से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी - उड़नदस्ता के पत्रांक 11 दि॰ 21.03.2017 के कंडिका 5.00 (2) एवं 6.0.0 (ii) से स्पष्ट है कि सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अधीन खुरहान वितरणी के वि॰दू॰ 6.50 पर अवस्थित SLR Bridge एवं वि॰दू॰ 4.0 पर अवस्थित सी॰डी॰ संरचनास तथा आलमनगर वितरणी के वि॰दू॰ 10.0 पर अवस्थित SLR Bridge के पुनस्र्थापन कार्य के तहत विभिन्न अवयवों से एकत्रित पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार के नमूनों की जाँच Central Soil and Materials Reasearch Station, New Delhi से करायी गयी। प्राप्त जाँचफल के अनुसार पी॰सी॰सी॰ एवं मोर्टार में पायी गयी सीमेंट की कमी निम्नवत्‌ रूप से है :-

90 (cid:464)बहार गजट, 4 2023
1. खुरहान वितरणी के R.D 6.5 पर अवस्थित SLR Bridge RCC from Approach Slab 1ः2ः4 1ः13.39 61.95 प्रतिषत
सीमेंट मोर्टार ब्रीक वर्क से 1ः4 1ः18.01 73.70 प्रतिषत
2. खुरहान वितरणी के R.D 4.0 पर अवस्थित CD संरचना PCC from Return wall on D/S Side 1ः2ः4 1ः6.09 36.92 प्रतिषत
आलमनगर वितरणी RD 10.0 पर अवस्थित SLR Bridge Cement/Mortar from U/S slope pitching 1ः4 1ः8.63 48.08 प्रतिषत

उपरोक्त विवरणी से स्पष्ट है कि तीनों संरचना के पुनस्र्थापन कार्य में सिमेंट की कमी 36.92 प्रतिषत से 73.701 प्रतिषत पाया गया है जो काफी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा प्रष्नगत तीनों संरचनाओं के पुनस्र्थापन कार्य में न्यून विषिष्टि के पी॰सी॰सी॰ एवं सीमेंट मोर्टार का उपयोग कर प्रावधान के विपरीत कार्य कराया गया है। इसके बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करने के कारण अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है। फलतः सरकारी राषि का दुरूपयोग होना परिलक्षित होता है। श्री हक द्वारा अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि प्रासंगिक विषयक अनुलग्न अभियंता प्रमुख (मुख्यालय)-सह- संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा एवं मंतव्य में जाँच एवं नमूना एकत्रित करने की प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित प्रतीत होता है, लेकिन CSMRS की जाँच में सिंमेंट की मात्रा में 36.92% की कमी पायी गयी है। अतएव आरोपी पदाधिकारी पर आरोप सं॰-1(ख) आंशिक रूप से प्रमाणित माना है, के संदर्भ में श्री हक द्वारा उल्लेख किया गया है कि विभागीय आदेश के अनुसार गुणवत्ता जाँच खगौल से कराना था, जिसने संरचना के Material की गुणवत्ता O.K माना था तभी भुगतान किया गया था। The goverment order stood that day followed by me. Then How charge is proven even Partially ? श्री हक द्वारा उल्लेख किया गया है कि उड़नदस्ता द्वारा Prescribed जाँच एवं Sample Collection की प्रक्रिया नहीं अपनायी गई, जैसा मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 एवं कोड IS: 1199-1959 द्वारा Sample Collection की Prescribed प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया गया कि 03 जगह से Material लेना था, जो मात्र 01 जगह से लिया गया और वजन का भी Criteria पूरा नहीं किया गया। उस पर जाँच Structure की Photo भी संलग्न किया गया था कि Structure safe, Sound and Secure है। ई॰ शमीमुल हक, (आई॰डी॰-3363) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में अभियंता प्रमुख (मुख्यालय)-सह- संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच एवं नमूना एकत्रित करने की प्रक्रिया पर संदेह किया जाना उचित है का उल्लेख किया गया है। श्री हक द्वारा मंत्रीमंडल (निगरानी) विभाग, पटना के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07. 1992 एवं IS Code: 1199-1959 द्वारा Sample Collection की Prescribed प्रक्रिया के आधार पर उड़नदस्ता द्वारा लिये गये Sample की प्रक्रिया को उचित नहीं बताया है। श्री हक द्वारा उल्लेख किया गया है कि जाँच हेतु 3 जगह से Sample लेने के प्रावधान के स्थान पर 01 जगह से लिया गया गया और वजन का भी Criteria पूरा नहीं किया गया है तथा जाँच Structure निर्माण के 4.5 वर्ष बाद कराया गया जबकि Structure का Photo भी संलग्न किया गया था कि Structure Safe Sound and Secure है। चूँकि CSMRS के जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 36.92% की कमी पायी गयी है तथा उक्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर हीं गुणवत्ता में प्रतिशत कमी के मद्देनजर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। अतः आरोप यथावत प्रमाणित होता है।

श्री हक द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान लिखित बचाव-बयान में दिया गया था। श्री हक द्वारा समर्पित अभ्योवदन में कोई नया तथ्य/अभिलेख समर्पित नहीं किये जाने से तथा CSMRS द्वारा जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 36.92% की कमी प्रतिवेदित किये जाने से श्री हक के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होते है।

समीक्षोपरांत श्री शमीमुल हक (आई॰डी॰-3363) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल मुरलीगंज के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है -

%91 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री शमीमुल हक (आई॰डी॰-3363) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल मुरलीगंज को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -

% श्री अवधेश कुमार (आई0डी0-2150), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-2397 दिनांक 22.11.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प सं0-2463 दिनांक 28. 11.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति देते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1489 दिनांक 22.06.2022 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी थी। श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा निम्नरूपेण की गयी - सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अन्तर्गत मुरलीगंज वितरणी के वि॰दू॰ 1.80 पर निर्मित सी॰डी॰ संरचना से एकत्रित पी॰सी॰सी॰ (From D/S Right wing wall) नमूनों की जाँच शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल से करायी गयी एवं प्राप्त जाँचफल में सीमेंट एवं बालू का प्रावधानित अनुपात 1ः2 के बदले 1ः4.6 पाया गया। उक्त से स्पष्ट है कि न्यून विशिष्टि का कार्य कराया गया है। जबकि भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने के कारण सरकारी राशि की क्षति होना परिलक्षित होता है, जो एक गंभीर मामला है, जिसके लिए आप दोषी हैं। श्री कुमार के द्वारा अपने अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि उनके पदस्थापन काल में उनके द्वारा विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया गया था, जिसमें लगातार लगभग 11-12 वर्षाें से नहरों में पानी चलाया जा रहा है। अभी तक सभी संरचनाएँ निर्वाध रूप से पानी प्रवाहित कर रही हैं। जाँच दल द्वारा ठीक से सैम्पल नहीं कलेक्ट करने के कारण थोड़ा बहुत सीमेंट की मात्रा में कमी आ सकती है। अभियंता प्रमुख के द्वारा भी यह उल्लेख किया गया है कि इसमें आंशिक कमी पाई गई है। उत्तर विलम्ब से समर्पित करने के संबंध में यह स्पष्ट करते हुए श्री कुमार द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री कुमार की पत्नी के दाहिने कमर में बॉल एवं कप बदला गया है, जिसका Operation मई 2022 में मनीपाल हॉस्पीटल, बंगलोर में हुआ है, जिसके कारण इन्हेें देर से पत्र के संबंध में पता चला। श्री कुमार द्वारा अनुरोध किया गया है कि पूर्व में उनके द्वारा समर्पित किये गए साक्ष्य को आधार मानकर आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। श्री अवधेश कुमार, (आई॰डी॰-2150) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के अभ्यावेदन में श्री कुमार के द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री कुमार के पदस्थापन काल में विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कार्य कराया गया है, जिसमें लगातार लगभग 11-12 वर्षाें से नहरों में पानी चलाया जा रहा है। इस संबंध में श्री कुमार द्वारा कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। श्री कुमार के द्वारा उल्लेख किया गया है कि अभियंता प्रमुख (मुख्यालय)-सह- संचालन पदाधिकारी द्वारा सीमेंट की मात्रा में आंशिक कमी का उल्लेख किया गया है। जबकि अभियंता प्रमुख (मुख्यालय)-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 27% की कमी का उल्लेख किया गया है।

श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) में आरोप मुक्त करने के संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख/अन्य तथ्य समर्पित नहीं किये जाने से उनका अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट की मात्रा में 27% की कमी होने के आधार पर उनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत श्री अवधेश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है -

% उक्त प्रस्तावित दण्ड पर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अवधेश कुमार (आई0डी0-2150) सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है -92 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 % श्री इन्द्रदेव प्रसाद मंडल (जे 9027), तत0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, सासाराम के पदस्थापन अवधि में उन्हें नशे की हालत में दिनांक-06.11. 2017 को हिरासत में लिया गया और वे दिनांक-16.11.2017 तक हिरासत में रहें। श्री मंडल का पैतृक विभाग जल संसाधन विभााग होने के कारण योजना एवं विकास विभाग द्वारा श्री मंडल को निलंबित करने एवं उनके विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करने का अनुशंसा किया गया। योजना एवं विकास विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-511 दिनांक-23.02.2018 द्वारा दिनांक 06.11.2017 से 16.11.2017 (हिरासत की अवधि) के लिए श्री मंडल को निलंबित किया गया।

योजना एवं विकास विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर विाीय अनियमितता एवं शराब सेवन संबंधी गठित आरोप के लिए विभागीय समीक्षोपरांत अधिसूचना सं0-1734 दिनांक-13.08.2018 द्वारा पुनः निलंबित किया गया एवं उक्त गठित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री मंडल, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युार के समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-61 दिनांक-18.01.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा दोनों आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जबकि संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि श्री मंडल द्वारा पत्नी के इलाज में जो सरकारी राशि रु0 3,34,559/- खर्च किया गया था। उसे बैंक ड्राफ्ट द्वारा कार्यालय में समर्पित कर दिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री मंडल, सहायक अभियंता की को हो जाने की सूचना मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1787 दिनांक-09.06.2022 द्वारा विभाग को दी गई।

ऐसी स्थिति में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811 दिनांक-18.07.2017 के अनुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के कंडिका-11(2) में निलंबन अवधि में सरकारी सेवक की मृत्यु हो जाने की स्थिति में सरकारी सेवक के निलंबन अवधि के विनियमन संबंधी प्रावधान निम्नवत्‌ है :- ''इस नियमावली के नियम-10 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ किसी निलंबित सरकारी सेवक के विरूद्ध शुरू की गई अनुशासनिक एवं न्यायालीय कार्यवाही पूरी होने के पहले उसकी मृत्यु हो गई हो, वहाँ निलंबन की तिथि तथा मृत्यु के बीच की अवधि सभी प्रयोजनो के लिए कर्तव्य पर मानी जायेगी और उसके परिवार को उस अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भाा का भुगतान किया जायेगा, जिसके लिए वह निलंबित नहीं होने पर हकदार होता। ऐसा भुगतान करने के क्रम में पूर्व में दिए गये जीवन निर्वाह भाा तथा अन्य भो एवं सरकारी बकाया या ऋणों का समायोजन कर लिया जायेगा।'' साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811 दिनांक-18.07.2017 के कंडिका-4 के अनुसार सरकारी सेवक की मृत्यु होने पर संचालित विभागीय कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जायेगी तथा मृत्यु की सूचना का उल्लेख करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त कर दिया जायेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग के उक्त पत्र के आलोक में स्व0 इन्द्रदेव प्रसाद मंडल (आई0डी0-जे 9027) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त करते हुए निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि मानते हुए पूर्ण वेतन एवं भत्ते का भुगतान करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में स्व0 इन्द्रदेव प्रसाद मंडल (आई0डी0-जे 9027) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त करते हुए निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि मानते हुए पूर्ण वेतन एवं भत्ते का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री रंजन प्रसाद समैयार (आई0डी0-3223), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0-002/2014-12, दिनांक 25.03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-72, दिनांक 18.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री समैयार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-653 दिनांक 13.03.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री समैयार से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री समैयार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये93 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1779 दिनांक 22.08.2019 द्वारा उनके विरूद्ध का दण्ड अधिरोपित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री समैयार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-2695/2020 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक-14.12.2021 को पारित न्याय निर्णय की कंडिका-03, 04, 05, 06 एवं 07 मेें निम्नवत आदेश पारित है :-

3. Learned counsel for the State submitted that the enquiring officer has not maintained day to day order-sheet in respect of holding enquiry against the petitioner. Therefore, it is crystal clear that the presenting officer has not presented the case on behalf of the department against the petitioner.

4. In the light of these facts and circumstances, there is a procedural lapses. In other words, there is non-compliance of Rule 17 of Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules 2005. Accordingly, petitioner has made out a prima facie case so as to interfere with the impugned orders. Thus, the impugned orders dated 18.01.2018 and 22.08.2019 are set aside. The matter is remanded to the disciplinary authority/enquiry authority to commence the enquiry from the defective stage and complete the enquiry proceedings within a period of three months from the date of receipt of this order, in accordance with relevant rules.

5. The monetary benefits for the intervening period is required to be examined by the disciplinary authority in the light of Apex Court's decision rendered in case of Managing Director, ECIL V. B. Karunakar reported in (1993) 4 SCC 727 read with Chairman-cum-Managing Director, Coal India Limited & Ors. V. Ananta Saha & Ors. reported in (2011) 5 SCC 142 para 46 to 50 as mentioned in the order.

6. Aforesaid decision shall be taken into consideration for the purpose of extending monetary benefit, if any to the petitioner.

7. With the above observations, the instant petitioner stands disposed of. नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना में मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अंतर्गत बरती गयी अनियमितता की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग द्वारा किये जाने के उपरांत समर्पित किये गये जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री दिलीप कुमार, तत्‌कालीन कार्यपालक अभिंयता, मुख्य पश्चिमी नहर, प्रमंडल वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालनोपरांत ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री दिलीप कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर CWJC No-14895/2017 में दिनांक-16.03.2021 को पारित आदेश में श्री दिलीप कुमार के विरूद्ध संसूचित दंडादेश को एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन को प्रक्रियात्मक त्रुटि के कारण निरस्त करते हुए संपूर्ण मामले को संचालन पदधिकारी को Remand Back किया गया। उक्त मामले में संबंधित संचिका संख्या-22/नि0सि0(मोति)-08-03/2013 (अंश 1)(खंड क) में विधि विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से महाधिवक्ता, बिहार का परामर्श प्राप्त किया गया, जो निम्नवत हैः-

"Bihar State Litigation Policy, clearly suggests of same and similar action if cases are identical in nature and here is the case wherein various other cases of other delinquent are pending consideration before the disciplinary authority, hence in my view it may not be a fit case for L.P.A. and the opportunity granted by the Hon'ble Court be used to fill up the irregularity which have occurred in course of conduct of departmental proceeding so that in future such delinquent may not derive benefits there of.

I opine accordingly."

श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्‌कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर CWJC NO-2695/2020 में दिनांक-14.12.2021 को पारित न्याय निर्णय में भी प्रक्रियात्मक त्रुटि के कारण उनके विरूद्ध संसूचित दंडादेश एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन को निरस्त करते हुए सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया गया है।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक-20.11.2018 द्वारा बिहार कार्यपालिका नियमावली, 1979 (समय-समय पर यथा संशोधित) की चतुर्थ अनुसूची के भाग (घ) में संशोधन करते हुए कंडिका-4 जोड़ी गई है, जिसके अनुसार ऐसे मामलों का अनुपालन जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय/माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अंतिम94 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 रूप से न्यायादेश पारित किये गये हों, एवं उनके विरूद्ध कोई अपील/पुनर्विचार याचिका दायर करना संभव नहीं हो, तो ऐसे मामलों को वित्त विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग एवं विधि विभाग की सहमति के पश्चात मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष प्रशासी विभाग मामले को विचारार्थ प्रस्तुत करेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा को ध्यान में रखते हुए प्रशासी विभाग प्रभारी मंत्री का आदेश प्राप्त कर कार्यान्वयन आदेश ससमय निर्गत करना सुनिश्चित करेगा। सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-2695/2020 (रंजन प्रसाद समैयार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 14.12.2021 को पारित आदेश के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किया जाना संभव नहीं होने के कारण मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक 20.11.2018 के आलोक में वित्त विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग के परामर्श/सहमति के उपरांत उक्त न्यायादेश का अनुपालन किये जाने के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के विचारार्थ मामले को रखा गया। विधि विभाग के ज्ञापांक-4480A दिनांक 17.05.2022 द्वारा संसूचित, बैठक की कार्यवाही में समिति द्वारा सम्यक विचारोेपरांत सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-2695/2020 (रंजन प्रसाद समैयार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 14.12.2021 को पारित न्यायादेश का अनुपालन करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1779 दिनांक 22.08.2019 द्वारा श्री समैयार के विरूद्ध के अधिरोपित दण्ड को निरस्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सुनवाई हेतु सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किये जाने तथा प्रशासी विभाग को श्री समैयार के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर नियमानुसार Examine कर विचार किये जाने की अनुशंसा की गई।

सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-2695/2020 (रंजन प्रसाद समैयार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-14.12.2021 को पारित न्यायादेश एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1209 दिनांक 27.05.2022 द्वारा निम्नलिखित निर्णय लिया गया :-

(1) श्री रंजन प्रसाद समैयार, (आई०डी०-3223), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-1779 दिनांक-22.08.2019 द्वारा " के अधिरोपित दंड को निरस्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को सुनवाई हेतु, संपूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया गया।

(2) श्री समैयार के दिनांक-31.03.2021 को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण उनके विरूद्ध CCA Rules 2005 के नियम-17 के तहत संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।

(3) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(5) में वर्णित प्रावधान के आलोक में श्री समैयार, की तिथि 22.08.2019 से दिनांक-30.03.2021 (सेवानिवृति की तिथि-31.03. 2021 से एक दिन पूर्व) तक निलंबित समझे जायेंगे। उक्त निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण जल संसाधन विभाग, पटना निर्धारित मानते हुए, सेवानिवृति की तिथि दिनांक-31.03. 2021 से निलंबन मुक्त किया गया।

(4) श्री रंजन प्रसाद समैयार के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही में पूर्व से नियुक्त संचालन पदाधिकारी श्री राजेश कुमार, अभियंता प्रमुख (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), जल संसाधन विभाग, पटना के सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके स्थान पर मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, नालंदा, बिहारशरीफ को संचालन पदाधिकारी एवं पूर्व के प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने के कारण श्री अरूण कुमार सिन्हा (आई0डी0-4019) कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बिहारशरीफ को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी-सह-मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन जल संसाधन विभाग, नालन्दा (बिहारशरीफ) के द्वारा श्री समैयार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उनके पत्रांक-594 दिनांक-07. 03.2023 से उपलब्ध कराया गया। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी के द्वारा अंकित निष्कर्ष/मंतव्य निम्नवत्‌ है :-

(i) आरोप संख्या-1 आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है। (ii) आरोप संख्या-2 अप्रमाणित माना जा सकता है। (iii) आरोप संख्या-3 प्रमाणित माना जा सकता है। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-461 दिनांक 18.03.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री समैयार को उपलब्घ कराते हुए प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में उनसे लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने से संबंधित विभागीय पत्रांक-461 दिनांक-18.03.2023 के क्रम में श्री समैयार द्वारा एक आपत्ति आवेदन (दिनांक-21.03.2023) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा इस बात का उल्लेख किया गया कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-18 का प्रयोग अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा किया जाना है ना कि उप सचिव के स्तर से किया जाना है।95 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 श्री समैयार से प्राप्त उक्त आपत्ति आवेदन में उठाये गये बिन्दुओं के संबंध में विभागीय पत्रांक-465 दिनांक- 20.03.2023 द्वारा आपत्ति के बिन्दुओं पर वस्तुस्थिति यथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 के तहत उनसे लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) प्राप्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार (अनुशासनिक प्राधिकार) द्वारा लिया गया है, से उनको अवगत कराते हुए विहित समयावधि में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के संदर्भ में लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने का पुनः अनुरोध किया गया। लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने से संबंधित विभागीय पत्रांक-461 दिनांक-18.03.2023 एवं विभागीय पत्रांक-465 दिनांक 20.03.2023 श्री समैयार को उनके आवासीय पता पर भी दिनांक-21.03.2023 को प्राप्त कराया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के आलोक में, लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने हेतु श्री समैयार को दिये गये समय (पत्र प्राप्ति की तिथि से 15 (पन्द्रह) दिन) की अवधि समाप्त होने के पश्चात्‌ भी उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के संदर्भ में, अपने बचाव में लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित नहीं किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में पाया गया कि CWJC संख्या-2695/2020 (रंजन प्रसाद समैयार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में दिनांक-14.12. 2021 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायादेश में विभागीय कार्यवाही को Defective Stage से तीन माह के अन्दर Complete किये जाने का आदेश दिया गया है, परन्तु श्री समैयार के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन में अपेक्षित सहयोग नहीं दिये जाने के कारण एवं लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने हेतु विहित 15 दिनों की अवधि समाप्त होने के पश्चात्‌ भी (द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित पत्र के विधिवत तामिला के उपरांत) उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर समर्पित नहीं किया जाना, विभागीय कार्यवाही को जानबूझ कर विलम्बित किये जाने का प्रयास है।

बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के आलोक में, लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने हेतु निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के पश्चात्‌ भी (द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित पत्र के विधिवत तामिला के उपरांत) श्री समैयार के स्तर से, संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के संदर्भ में लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित नहीं किये जाने की स्थिति में यह स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में उन्हें अपने बचाव बयान में कुछ नहीं कहना है, जिससे संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित आरोप श्री समैयार के विरूद्ध प्रमाणित होता है। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री समैयार के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है - उक्त निर्णय के आलोक में श्री रंजन प्रसाद समैयार (आई0डी0-3223), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है- श्री जितेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 7535), तत0 कनीय अभियंता कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी, रोहतास के विरूद्ध ग्रामीण कार्य विभाग के पदस्थापन अवधि में कार्य के विरूद्ध लिये गये अग्रिम के अनुरूप कार्य नहीं कराने तथा अग्रिम राशि ग्रामीण कार्य विभाग से स्थानांतरण के 10-11 माह बाद वापस लौटाने से संबंधित लापरवाही का आरोप प्रतिवेदित किया गया। उक्त प्रतिवेदन की विभागीय तकनीकी पदाधिकारी से समीक्षा करायी गयी। तदुपरांत, श्री जितेन्द्र कुमार तत्कालीन कनीय अभियंता, सम्प्रति सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर आरोप पत्र में उल्लेखित बिंदुओं पर विभागीय पत्रांक-2270 दिनांक-20.09.2022 द्वारा निम्नांकित आरोप के लिये स्पष्टीकरण पूछा गया :-

"भागलपुर शहर के वार्ड सं0-46 में मोहन दारोगा के घर के पास पुलिया निर्माण कार्य कराने के विरूद्ध अग्रिम रू0 49,500/लिया गया। परंतु इनके द्वारा उक्त कार्य के विरूद्ध लिये गये अग्रिम के बावजूद ससमय कार्य नहीं कराया गया एवं अग्रिम की राशि भी समय पर नहीं लौटाया गया"।

उक्त पूछे गये स्पष्टीकरण का प्रत्युत्तर, श्री जितेन्द्र कुमार, तत0 कनीय अभियंता सम्प्रति सहायक अभियंता द्वारा समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा बताया गया है कि कार्य प्रारंभ करने के लिये दिनांक-08.02.2010 को प्रथम अग्रिम रू0 7500/- दी गई। उक्त राशि से स्थल पर सामग्री लाया गया। दिनांक-13.05.2010 को द्वितीय अग्रिम रू0 4200/- दी गई। कुल मिलाकर रू0 49,500/- का अग्रिम दिया गया। उक्त राशि से लाये गये सामग्री को मापपुस्त में दर्ज किया गया है, परंतु विपत्र समर्पित नहीं किया गया।96 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिया के निर्माण कार्य स्थल से होकर शहर का गंदा पानी काफी मात्रा में तेज रफ्तार से लगातार बहता रहता था। नीव की खुदाई के पश्चात्‌ तुरंत गंदा पानी भर जाता था। गंदा पानी भर जाने के कारण कार्य बाधित होता रहा, जिसकी सूचना कार्यपालक अभियंता को देता रहा। इसी बीच पैतृक विभाग से वापसी हेतु आदेश निर्गत हुआ। तदोपरांत कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर द्वारा दिनांक-27.12.2010 को विरमित कर दिया गया। विरमित होने के पश्चात्‌ जल संसाधन विभाग में कार्यरत्‌ हूँ।

श्री जितेन्द्र कुमार द्वारा अपने स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर में, परिस्थितिजन्य कारणों की वजह से ससमय निर्माण कार्य पुरा नहीं कराने के लिये क्षमा माँगते हुये आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

श्री जितेन्द्र कुमार, तत0 कनीय अभियंता, कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर द्वारा दिनांक-08.02.2010 एवं दिनांक-13.

05.2010 को कुल रू0 49,500/- का अग्रिम लिया गया। उनका स्थानांतरण जल संसाधन विभाग (पैतृक विभाग) में होने के फलस्वरूप दिनांक-27.12.2010 को विरमित कर दिया गया। श्री जितेन्द्र कुमार द्वारा ग्रामीण कार्य विभाग से विरमित होकर, जल संसाधन विभाग में पदस्थापित होने के तुरंत बाद अग्रिम राशि को ग्रामीण कार्य विभाग में नहीं लौटाया गया, बल्कि ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर के पत्रांक-1435 दिनांक-25.08.2011 एवं पत्रांक-1804 दिनांक-13.10. 2011 द्वारा अग्रिम लौटाने के निदेश के उपरांत, उनके द्वारा दिनांक-14.11.2021 अग्रिम राशि ग्रामीण कार्य विभाग को वापस लौटाया गया।

श्री जितेन्द्र कुमार के स्पष्टीकरण पर ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में भी अंकित किया गया है कि श्री कुमार द्वारा भले ही अग्रिम की राशि लौटा दी गयी है, लेकिन उनकी लापरवाही के कारण योजना लंबित रही। श्री कुमार अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही के दोषी प्रतीत होते है।

मामले से संबंधित अभिलेखो/साक्ष्यों के अवलोकन से परिलक्षित होता है कि अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में, सम्यक समीक्षोपरांत श्री जितेन्द्र कुमार, तत0 कनीय अभियंता, कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी, रोहतास के विरूद्ध उनकी को दृष्टिगत रखते हुये निम्नांकित लघु दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-

उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री जितेन्द्र कुमार, तत0 कनीय अभियंता, कार्य प्रमंडल सं0-02, भागलपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी, रोहतास को निम्नांकित दण्ड अधिरोपित कर, संसूचित किया जाता है - बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री शिवरतन प्रसाद यादव (आई0डी0-3556), तत0 सहायक अभियंता, उड़नदस्ता अंचल, बिहार के पद पर पदस्थापित थे तब इनके विरूद्ध कोशी कटान मामले में बरती गई लापरवाही के लिए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प-1931 दिनांक 31.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षा के क्रम में इनकी मृत्यु की सूचना (दिनांक 10.01.2020 को) प्राप्त होने के उपरांत सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत श्री शिवरतन प्रसाद यादव, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। अतः श्री शिवरतन प्रसाद यादव, तत0 सहायक अभियंता सम्प्रति मृत के विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-जे 5519), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नौबतपुर के विरूद्ध जल संसाधन विभाग की बहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन का अतिक्रमण करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2004-05 से वर्ष 2012 तक रसीद काटने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1109 दिनांक-11.10.2012 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प97 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 ज्ञापांक-16 दिनांक-07.01.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री सिंह के दिनांक 28.02.2013 को सेवानिवृत होने के उपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-912 दिनांक-02.08.2013 द्वारा श्री सिंह को दिनांक-28.02.2013 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए पूर्व से नियम-17 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिंह से प्राप्त जवाब के विभागीय स्तर पर समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1771, दिनांक-10.08.2015 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गयाः- (i) पाँच प्रतिशत पेंशन पर पाँच वर्षों के लिए रोक। श्री सिंह के निलंबन अवधि (दिनांक-11.10.2012 से 28.02.2013 तक) को विभागीय अधिसूचना संख्या-1775, दिनांक-19.08.2016 द्वारा निम्न रूप से विनियमित किया गया :- "निलंबन अवधि दिनांक-11.10.2012 से दिनांक-28.02.2013 तक में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। परंतु उक्त अवधि को पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि मानी जाएगी।" उक्त विभागीय अधिसूचना के विरूद्ध CWJC-2624/2017 सुरेन्द्र प्रसाद सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया। इस वाद में दिनांक-28.04.2021 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्यायादेश पारित किया गया कि "Accordingly, Annexures- 5 and 9 are hereby quashed. The respondents are directed to restore not only 5% pension to the petitioner forthwith, but also directed to pay salary for the period the petitioner was put under suspension. Necessary corrective measures must be taken by the office of Accountant General, Bihar within a period of two months from the date of receipt of a copy of this order. In the event, the benefit is not restored in terms of the direction issued by this Court, the petitioner shall be entitled for interest at the rate of 12% per annum from the date of retirement till the date of actual payment, which shall be borne out by the disciplinary authority from his own pocket." उक्त आदेश के विरूद्ध विभाग द्वारा LPA-506/2021 बिहार राज्य एवं अन्य बनाम सुरेन्द्र प्रसाद सिंह दायर किया गया। इसी क्रम में श्री सिंह द्वारा MJC-1846/2021 श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया। MJC-1846/2021 में IA-2022 दायर किया गया जिसमें कहा गया कि- (i) श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह की मृत्यु दिनांक-14.09.2022 को हो गई। (ii) स्व0 सुरेन्द्र प्रसाद सिंह के Legal heirs निम्नवत्‌ है-

(क) श्रीमती शारदा सिन्हा 58 वर्ष पत्नी
(ख) श्री उत्तम कुमार 42 वर्ष पुत्र
(ग) श्री हरिशंकर 40 वर्ष पुत्र
(घ) श्रीमती निशा 30 वर्ष पुत्री
(ड.) श्रीमती अर्चना 34 वर्ष पुत्री

उक्त Legal heirs के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में Substitution Petition दायर किया गया, जिसे विभाग द्वारा Allow किया गया है। दिनांक-12.05.2023 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा LPA-506 of 2021 में निम्न आदेश पारित किया गया :- "We direct the State Government to pay the principal amount immediately within a period of one month from today to the legal heirs, the additional respondents. We also direct the Government Pleader to inform us as to whether any proceeding has been taken to recover the land on which there was an allegation against the delinquent employee who is no more and who was a petitioner that rent receipts were issued without looking into whether the lease was proper or not. We keep the matter pending only to have better understanding of the further proceedings taken when a poor pensioner was mulcted with such liability which proceedings also is concerned just prior to his retirement. The interest and cost will depend upon what the Government tells us about the above aspects." Post on 28.06.2023.

98

(cid:464)बहार गजट, 4 2023 CWJC-2624/2017 सुरेन्द्र प्रसाद सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक-28.04.2021 एवं LPA- 506/2021 बिहार राज्य एवं अन्य बनाम सुरेन्द्र प्रसाद सिंह में दिनांक-12.05.2023 को पारित आदेश की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत LPA-506/2021 में पारित न्यायादेश के अनुपालनार्थ CWJC-2624/2017 में पारित न्यायादेश के आलोक में निम्न निर्णय लिया गया है :-

उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त है। उक्त निर्णय के आलोक में श्रीमती शारदा सिन्हा, पति-स्व0 सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, प्रभु कुंज, गंगा वैली स्कूल के नजदीक, गौतम बुद्ध कॉलोनी, अगमकुँआ, पटना, पिन-800007 एवं अन्य Legal heir को निम्न आदेश संसूचित किया जाता है :-

Legal Heir

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री अवधेश प्रसाद (आई0डी0-जे 7497), तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध नगर विकास योजना 2008-09 के अन्तर्गत पटना जिला के कंकडबाग से योगीपुर संप हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ के निर्माण में अनियमितता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-892 दिनांक 12.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। नगर विकास योजना 2008-09 के अन्तर्गत पटना जिला के कंकडबाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण में अनियमितता की जाँच संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना तथा कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता-सह-एम0क्यू0एम0यू0-08 द्वारा की गई, जिसके आधार पर दोषी माना गया है - इस योजना का कार्य दिनांक 01.12.2009 से प्रारंभ किया गया तथा पूर्ण करने की अवधि 01.08.2010 थी किन्तु यह कार्य अभी तक अपूर्ण है, क्योंकि पी0सी0सी0 पथ के दोनों तरफ फ्लैंक का कार्य अधूरा है, तथा जाँच के दौरान कोई कार्य नहीं होता हुआ पाया गया। नाले के दोनों तरफ पी0सी0सी0 की मुटाई 8 इंच है, परन्तु पथ के बीच भाग में औसतन मोटाई 6 इंच पाई गई, जो प्राक्कलन तथा मापीपुस्त की प्रविष्टि से 2 इंच कम है। पी0सी0सी0 कार्य में ढलाई के पश्चात पानी की क्योरिंग भी ठीक से नहीं किया गया है।

उक्त विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-60/AS दिनांक 17.10.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंकित मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2129 दिनांक 05.12.17 द्वारा श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, दानापुर से प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री अवधेश प्रसाद के अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 28.05.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त प्रत्युत्तर की तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-633 दिनांक 27.03.2019 द्वारा निम्न बिन्दु पर ग्रामीण कार्य विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया -

"श्री अवधेश प्रसाद तदेन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना के विरूद्ध 2008-09 में नगर विकास योजना अन्तर्गत पटना जिला के कंकड़बाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण में अनियमितता संबंधी आरोप सं0-2 में पी0सी0सी0 सड़क की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर 6 इंच पाए जाने एवं माप पुस्त में 8 इंच का भुगतान किए जाने से संवेदक को हुए अधिकाई भुगतान की वसूली की अद्यतन स्थिति एवं 2 इंच कम ढलाई से पी0सी0सी0 सड़क की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव"।

इसी क्रम में श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता दिनांक 31.01.2020 को सेवानिवृत्त हो गए। जिसके कारण विभागीय अधिसूचना सं0-248 दिनांक 12.02.2020 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी के तहत सम्परिवर्तित किया जा चुका है।99 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 ग्रामीण कार्य विभाग का पत्रांक-676 दिनांक 09.04.2021 द्वारा उक्त बिन्दु के संदर्भ में वांछित मंतव्य उपलब्ध कराया गया।

"ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य में पी0सी0सी0 सड़क की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि किसी भी योजना के कार्यान्वयन में उसके Components के design dimension का ही अनुपालन किया जाता है। निरूपण में alteration बिना सक्षम पदाधिकारी का आदेश प्राप्त किए, नहीं किए जा सकते हैं। निःसंदेह 2 इंच कम ढलाई करना design dimension के साथ छेड-छाड़ करना है। पथ क्रस्ट की निरूपित मुटाई Traffic Volume एवं CBR Value पर आधारित होती है। इन दोनों Parameters में CBR Value Constant रहता है परन्तु Traffic volume में बढोतरी की ही संभावना रहती है। अतः Execution के दौरान Pavement की निरूपित मुटाई में की गई कमी Structure की Stability को प्रभावित करेगी जो किसी भी स्थिति में मान्य नहीं है। साथ ही सड़क की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर 6 इंच पाए जाने एवं मापपुस्त में 8 इंच का भुगतान किए जाने से संवेदक को हुई अधिकाई भुगतान के संदर्भ में कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, दानापुर के पत्रांक-352 दिनांक 02.03. 2021 से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार भुगतान की गई अधिकाई राशि 19,07,912 रूपये होता है, जिसमें संवेदक का एस0डी0 एवं एन0एस0डी0 के रूप में कुल राशि 9,67,869 (नौ लाख सड़सठ हजार आठ सौ उनहतर रूपये) रोक कर रखी गई तथा शेष राशि ₹ 9,40,043 (नौ लाख चालीस हजार तैतालिस) रूपये की वसूली करनी होगी।

उक्त मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा की गई। तकनीकी समीक्षोपरांत निम्न बिन्दु निष्कर्षित किया गया -

1. पटना जिला अन्तर्गत कंकडबाग से योगीपुर सम्प हाउस के दोनों तरफ पी0सी0सी0 पथ निर्माण कार्य के ससमय पूर्ण नहीं होने में श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना की लापरवाही परिलक्षित होती है।

2. उक्त योजना में पी0सी0सी0 की प्रावधानित मुटाई 8 इंच के स्थान पर औसत मुटाई 7.33 इंच यानि 8.37% कम मुटाई का पी0सी0सी0 कार्य कराकर अनियमित/अधिकाई ढंग से भुगतान करने के लिए श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता (सेवानिवृत) दोषी हैं।

अतएव ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्राप्त मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त मंतव्य के तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप सं0-1 एवं 2 प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अवधेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अभियंता (आई0डी0-जे 7497) सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न दण्ड विभागीय अधिसूचना सं०-119 दिनांक 21.01.2022 द्वारा अधिसूचित एवं अधिरोपित किया गया - %

श्री अवधेश प्रसाद, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा अपने विरूद्ध अधिसूचित दण्ड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अर्जी विभाग को समर्पित किया गया। श्री प्रसाद द्वारा प्राप्त अर्जी की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा अपने विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में कुछ भी नहीं कहा गया है। जबकि इन्हें आरोप के प्रमाणित होने के कारण दंड अधिरोपित किया गया। इस प्रकार श्री प्रसाद द्वारा दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री अवधेश प्रसाद (आई0डी0-जे 7497), तत0 सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को विभागीय अधिसूचना संख्या-119 दिनांक 21.01.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड "20% पेंशन की कटौती 05 (पाँच) वर्षों के लिए"को यथावत रखते हुए पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकार किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री बिजेन्द्र कुमार सिंह, तत0 सहायक अभियंता (याँ0), लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत, जल संसाधन विभाग के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर, लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी अन्तर्गत उद्‌वह सिंचाई योजना के जीर्णोद्धार एवं पुनस्र्थापन कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए लघु जल संसाधन विभागीय संकल्प सं0-4808 दिनांक 21.11.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर -सह- संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-122 दिनांक 11.01.2019 द्वारा लघु जल संसाधन विभाग को प्रेषित जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-1 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-2 को अप्रमाणित पाया गया है। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षा के क्रम में, यह पाये जाने पर कि, श्री सिंह संवर्ग विभाजन से पूर्व सेवानिवृत हो चुके है, इसलिए उनका संंवर्ग जल संसाधन विभाग है, उनके सम्पूर्ण मामले को अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु इस विभाग को प्रेषित किया गया।

सम्पूर्ण मामले की तकनीकी समीक्षोपरांत, अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विभागीय पत्रांक-1016 दिनांक 07.09.2021 के द्वारा श्री बिजेन्द्र कुमार सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता (याँ0) से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री सिंह को स्पीड पोस्ट से भेजा गया पत्र "प्राप्त कर्त्ता का स्वर्गवास हो गया है, अतः वापस" लिखकर डाक विभाग द्वारा वापस कर दिया गया।100 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 तत्पश्चात प्रबंधन कोषांग से श्री सिंह की मृत्यु की सम्पुष्टि करने का अनुरोध किया गया। अवर सचिव, प्रबंधन(याँ0) द्वारा उपलब्ध कराये गये मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार, श्री बिजेन्द्र कुमार सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता की मृत्यु दिनांक 02.09. 2018 को हो गयी है।

श्री सिंह की मृत्यु दिनांक 02.09.2018 को हो जाने की सूचना की सम्पुष्टि के उपरांत, उनके विरूद्ध वित्तीय क्षति से संबंधित प्रमाणित आरोप (न्यून विशिष्टि के प्लेटों से निर्मित सर्ज टैंक हेतु किये गये भुगतान से सरकार को 4,31,404/- रूपये की क्षति परिलक्षित होती है) के कारण, सरकारी राजस्व की क्षति की वसूली कैसे होगी, के बिन्दु पर परामर्श हेतु संचिका सामान्य प्रशासन विभाग पृष्ठांकित की गयी।

इस संदर्भ में सामान्य प्रशासन विभाग का परामर्श निम्नवत प्राप्त है :- "5. विदित हो कि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811 दिनांक 18.07.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में दण्ड संसूचन के पूर्व ही आरोपित सरकारी सेवक की मृत्यु होने के उपरांत विभागीय कार्यवाही के निष्कर्ष के संबंध में स्पष्टीकरण परिचारित किया गया है। उक्त पत्रांक के कंडिका-4 में यह उल्लिखित है कि 'विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में, विचारण के किसी चरण में, आरोपित सरकारी सेवक की मृत्यु हो जाने की स्थिति में संबंधित सरकारी सेवक के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जायेगी तथा मृत्यु की सूचना का उल्लेख करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त कर दिया जायेगा'।

6. उक्त वर्णित तथ्यों से यह स्पष्ट है कि स्वर्गीय सिंह की मृत्यु के उपरांत आरोप प्रकरण ही संचिकास्त हो चुका है। साथ ही मृत सरकारी सेवक से वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राजस्व की क्षति के रूप में राशि की वसूली किया जाना भी संभव नहीं है। परन्तु प्रशासी विभाग, यदि उचित समझे तो, वसूली के प्रसंग में विद्वान महाधिवक्ता का परामर्श भी प्राप्त किया जा सकता है"।

सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त उक्त परामर्श के आलोक में, सरकारी राजस्व की क्षति के आरोप में मृत सरकारी सेवक से राशि की वसूली के बिन्दु पर विद्वान महाधिवक्ता से परामर्श प्राप्त करने हेतु संचिका विधि विभाग को पृष्ठांकित की गयी। विधि विभाग द्वारा इस मामले में विद्वान महाधिवक्ता का परामर्श उपलब्ध कराया गया है, जो निम्नवत है :-

"factual and legal aspect has been dealt in note on page 41-42N with reference to policy of the government circulated by GAD. I do not understand why file has been sent for legal opinion. what issue remains to be answered. At least in some matters decision should be taken in the department itself.

The file needs to be consigned in view of clear enunciation by GAD in the event of death of public servant during pendency of disciplinary proceeding."

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों पर सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में, आरोपित पदाधिकारी स्वर्गीय बिजेन्द्र कुमार सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता (याँ0) की मृत्यु हो जाने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811 दिनांक 18.07.2017 के कंडिका-4 में अंकित प्रावधान एवं इस संदर्भ में सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त परामर्शानुसार, श्री बिजेन्द्र कुमार सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करते हुए संबंधित आरोप प्रकरण को संचिकास्त किया जाता है। श्री सुधाकर सिंह (आई0डी0-जे 7661), तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध बाढ़ 2021 पूर्व कोशी नदी के समीप कराए गए कटाव निरोधक कार्य में अनियमितता बरतने के प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2320 दिनांक 26.09.2022 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री सिंह दिनांक 31.01.2023 को सेवानिवृत हो गए हैं। अतएव श्री सुधाकर सिंह, तत0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित प्रावधानों के तहत पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को उनके सेवानिवृत (दिनांक-31.01.2023) होने के कारण बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया जाता है। श्री अरविन्द प्रसाद (आई0डी0-3442), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा, सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध दरियापुर वियर एवं इससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य में प्रमंडलीय लेखापाल के अभ्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं पर विभागीय निदेश के आलोक101 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 में विभागीय उड़नदस्ता से जाँच कराया गया। विभागीय उड़नदस्ता द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी से करायी गई। समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर आरोप पत्र में उल्लिखित बिन्दुओं की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। इसी बीच श्री प्रसाद सेवानिवृत्त हो गये। फलस्वरूप, उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 'बी' के तहत्‌ समपरिवर्तित किया गया। समीक्षोपरांत संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) किया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षोपरांत - उपर्युक्त दण्ड के विरूद्ध श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत्त द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसकी समीक्षा विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा निम्न प्रकार से की गयी :

उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जल पथ प्रमंडल, षेखपुरा अन्तर्गत दरियापुर वीयर एवं उससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण कार्य का एकरारनामा सं॰ SBD-01/10-11में Price Escalationमद में Clause 10CAके बजाय 10CCके तहत किये गये 104.27989 लाख रूपये के अनियमित भुगतान एवं तत्‌पष्चात उक्त राषि की वसूली के कारण उत्पन्न विवाद के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में दरियापुर वीयर एवं उससे निःसृत वितरण प्रणाली के निर्माण काय का एकरारनामा सं॰ SBD-01/2010-11के अन्तर्गत संवेदक को दिये गये प्रथम एवं द्वितीय Secure Advance क्रमषः रू॰ 1639861/- एवं रू॰ 2484491/- की वसूली एकरारनामा के Clause 10Bके तहत ससमय नहीं किये जाने के लिए आप दोषी प्रतीत होते है। उपरोक्त वर्णित आरोप सं॰ (1) एवं (2) के प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप विभाग द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रतिवेदित किया है कि जल पथ प्रमंडल शेखपुरा के कार्यकाल में निदेशानुसार मेरे द्वारा अधीक्षण अभियंता के माध्यम से संवेदक द्वारा प्राप्त एस्केलेशन बिल पर भुगतान मेरे द्वारा किया गया। इस विपत्र के भुगतान से उत्पन्न विवाद हेतु विभाग द्वारा मुझे दोषी मानते हुए स्थाई रूप से 50%पेंशन की रोक का दंड विभागीय अधिसूचना संख्या 2381, दिनांक 7/10/2022 के द्वारा संसूचित किया गया है। उपरोक्त के संबंध में स्पष्ट करना है की संवेदक द्वारा 23/11/12 को एकरनामा में वर्णित क्लॉज 10C के तहत एस्केलेशन विपत्र प्रमंडल में समर्पित किया गया था परंतु उक्त क्लॉज से भुगतान की प्रक्रिया अस्पष्ट होने के कारण प्रमंडल से भुगतान नहीं किया जा सका। तत्पश्चात, संवेदक के द्वारा अधीक्षण अभियंता, सिचाई अंचल स०-2 जमुई के कार्यालय में भुगतान हेतु पुनः संवेदक द्वारा एकरनामा के क्लॉज 10C के तहत अपना विपत्र भुगतान हेतु आवेदन समर्पित किया गया। गौरतलब है की एस्केलेशन विपत्र भुगतान के लिए लागू कलौज 10C की अस्पष्टता को मानते हुए तथा संवेदक के वितीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए अधीक्षण अभियंता द्वारा संवेदक से एक स्व घोषणा पत्र लिया गया जिसमे सशर्त भुगतान करने तथा किसी प्रकार की विसंगति उत्पन होने की स्थिति में सम्पूर्ण जवाबदेही संवेदक द्वारा खुद पर लेने की बात कही गयी है ।

तदोपरांत अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रतिहस्तारित घोषणा पत्र के आलोक में जलपथ प्रमंडल शेखपुरा को शीघ्र विपत्र भुगतान, हेतु निर्देशित किया गया ताकि संवेदक को कोई आर्थिक संकट पैदा न हो। अधीक्षण अभियंता सिंचाई अंचल संख्या 2 जमुई में पत्रांक 391 दिनांक- 15/05/2013 के निदेशानुसार प्रमंडली लेखापाल को भुगतान करने सम्बंधित कारवाई का निर्देश दिया गया एवं उनके जाँच उपरांत सयुंक्त हस्ताक्षर विपत्र का भुगतान किया गया। भुगतान के कुछ दिनों बाद उनके द्वारा अनियमित भुगतान सम्बन्धी अन्य कई विन्दुओ को उठाते हुए हमपर आरोप लगाया गया। विभागीय निदेशानुसार मुख्य अभियंता भागलपुर के पत्रांक-3807 दिनांक-12.12.2014 द्वारा प्राप्त निदेश एवं संवेदक के Undertaking के आलोक में भुगतान की गयी राशि की वसूली की गयी। माननीय उच्च न्यायालय में पारित न्याय निर्णय के तहत वसूल की गयी राशि संवेदक को भुगतान की कार्रवाई की गयी है।भुगतान होने के पश्चात एस्केलेशन के यथार्तता पर विगत 8-10 वर्षो से विभाग एवं संवेदक के बीच माननीय उच्च न्यायालय में CWJC-5892/2014 दायर किया गया जो सुनवाई के उपरांत संवेदक के पक्ष में आदेश पारित किया गया। इस आदेश के विरुद्ध सरकार द्वारा L.P.A No-1255/17 दायर किया गया जिसे दिनांक 17.01.2018 को सुनवाई के उपरांत CWJC 5892ध्14 के आदेश दिनांक 18.04.2017 को निरस्त करते हुए संवेदक कोWork Tribunal जाने की Liberty प्रदान की गई। उक्त के आलोक में ट्रिबुनल में मामला विचाराधीन है। संवेदक का अंतिम विपत्र अभी तक पारित नहीं हुआ है और उसकाSD+EMD के रूप में जमा राशि जो 10CC के अंतर्गत कतिपय अधिकेय भुगतान से अधिक है, प्रमंडल द्वारा रोक रखा गया है जो Tribunal/न्यायालय के निर्णय के बाद ही या तो Adjust किया जायेगा अथवा लौटाया जायेगा। उसी संवेदक को पुनः अवशेष कार्य नयी निविदा के अनुसार दिनांक-18/12/2017 को कलौज 10CCके तहत आवंटित किया गया। शेष कार्य को पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया एवं पूर्ण कार्य को करने के लिए 2015 तक समयवृद्धि की गयी। महोदय द्वारा C.C.ARules 2005 के तहत102 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 विभागीय कार्यवाही सम्पादित की गई एवं मेरा सेवानिवृति दिनांक-1.12.2019 के उपरांत दिनांक 02.09.2021 को इसे 43B Bihar Pension Rules में संपरिवर्तित किया गया एवं मेरे विरुद्ध विभागीय कारवाई U/R17 संचालित कर विभाग एवं संवेदक के बीच एस्केलेशन से उत्पन्न विवाद के लिए मुझे दोषी ठहराते मेरे पेंशन का 50% राशि को स्थायी रूप से रोक लगाने का हुए अत्यंत कठोर दंड दिनांक 07.10.2022 को दिया गया है।

अतः अनुरोध है कि उपर्युक्त कंडिकाओ तथा उच्चाधिकारी के निर्देश के अनुपालन में मेरे द्वारा भुगतान किया गया है यद्यपि मै विभाग एवं न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए कार्य किया हूँ। अतः मेरे दंड आदेश पर सहानुभूति पूर्वक पुनर्विचार करते हुए मुझे विभागीय दंड से मुक्त करने की —पा की जाय। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य साक्ष्य सहित उपलब्ध नहीं कराया गया है जिस पर विचार किया जा सके। आरोपी पदाधिकारी द्वारा विषयांकित मामले में प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC 5892/2014 दायर किया गया जो सुनवाई के उपरांत संवेदक के पक्ष में आदेष पारित किया गया। इस आदेष के विरूद्ध सरकार द्वारा LPA No. 1255/17 दायर किया गया जिसे दिनांक 17.01.2018 को सुनवाई के उपरांत CWJC 5892/14के आदेष (दिनांक 18.04.2017) को निरस्त करते हुए संवेदक को Work Tribunal जाने की Libertyप्रदान की गई। वर्तमान में उक्त मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है तथा उक्त कार्य का अंतिम विपत्र अभी पारित नहीं किया गया है। विदित हो कि आरोपी पदाधिकारी पर आरोप सं॰-(1) एवं (2) में दोषी पाये गये है। आरोपी पदाधिकारी श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा एकरारनामा सं॰ 01SBD/2010-11 में निहित षर्त्तो एवं विभागीय नियम के इतर जाकर SBDके Clause 10CCके तहत Price Escalation Billका अनियमित भुगतान किया गया। साथ ही, आरोपी पदाधिकारी के द्वारा दिये गये Secured Advanceका ससमय वसूली एकरारनामा के Clasue 10Bके तहत नहीं किया गया। अतएव, उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी का पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

ष् ष् अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर श्री अरविन्द प्रसाद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से संसूचित दण्ड "50 प्रतिशत पेंशन की स्थायी रूप से रोक" को यथावत रखे जाने का निर्णय लिया गया है। अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरविन्द प्रसाद (आई0डी0-3442), तत0 कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2381 दिनांक 07.10.2022 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखते हुए उनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव के विरूद्ध गंगा पम्प नहर परियोजना अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 का निर्माण एकरारनामा सं0-01SBD के तहत कराये जाने के दौरान पम्प हाउस में जमे गाद का निस्तारण नहीं होने एवं पम्प हाउस का निर्माण विशिष्टि एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं कराये जाने संबंधी आरोपाें के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए श्री अहमद से बचाव बयान प्राप्त किया गया। प्राप्त बचाव बयान के सम्यक समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सं0-1180 दिनांक-19.07.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व श्री शफी अहमद, (ID-3257) के दिनांक 31.01. 2021 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-59 सहपठित ज्ञापांक-863 दिनांक 18.08.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43'बी' में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोपों के संबंध में श्री अहमद से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन/द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा निम्नवत है :-

गंगा पम्प नहर परियोजना (01SBD/09-10) के अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 पम्प हाउस के Expansion Joints तथा दीवारों से रिसाव के कारण पम्प हाउस में जमा गाद का निस्तारण नहीं किये जाने के कारण पम्प अधिष्ठापन कार्य प्रभावित हुआ। उक्त पम्प हाउस स्टेज-1 का निर्माण गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव द्वारा कराया गया है। आपके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन के दौरान दिनांक 17.01.2015 को माननीय विभागीय मंत्री महोदय, विभागीय सचिव एवं अभियंता प्रमुख (मध्य) के स्थल निरीक्षण के दौरान विभागीय रूप से गाद सफाई कराने का निदेश दिया गया। मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 443, दिनांक- 05.02.2015 से एक माह के अंदर निर्माणकर्त्ता संवेदक से गाद सफाई एवं रिसाव बंद कराने का निदेश दिया गया। अभियंता प्रमुख (मध्य) के पत्रांक-246, दि॰ 02.02.2015 से गाद सफाई कार्य विभागीय रूप से Mannual या Mechanical Means से कराने का निदेश दिया गया। पुनः दिनांक 23.02.2015 को राज्य स्तरीय बैठक में गाद सफाई कार्य Mannual या Mechanical Means से कराने का अविलम्ब प्रस्ताव देकर कार्य प्रारम्भ103 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 कराते हुए 23 मार्च 2015 तक कार्य पूरा कराने का निदेश दिया गया। इस प्रकार उच्चाधिकारी/विभागीय निदेश के बावजूद आपके द्वारा न तो प्रस्ताव दिया गया और न कार्य प्रारम्भ कराया गया। अपितु कार्य में बाधा उत्पन्न करने के ख्याल से तरह-तरह का बहाना बनाते हुए अनावश्यक रूप से पत्राचार किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद ससमय उसका अनुपालन नहीं कर गाद सफाई कार्य नहीं कराने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव में विगत तीन वर्षो के आपके पदस्थापन अविध में पम्प हाउस स्टेज-1 एवं 2 का अधिकांश कार्य आपके द्वारा कराया गया। जिसमें Expansion Joints एवं दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है जो खराब Workmanship एवं विशिष्ट के अभाव के कारण ही संभव होना परिलक्षित होता है। कार्यपालक अभियंता के अपने पत्रांक 190 दि॰ 26.02.2015 से बिना किसी जाँच के नींव में नक्शा के अनुसार शीट पाईल नहीं होना प्रतिवेदित किया गया है जिससे इस तथ्य को छुपाये रखा जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार विशिष्ट एवं गुणवत्ता के अनुरूप पम्प हाउस का निर्माण नहीं किये जाने तथा नींव में नक्शा के अनुरूप शीट पाइल नहीं होने के तथ्य को छुपाया जाना परिलक्षित होता है जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। उक्त आरोप के संबंध में श्री अहमद द्वारा दिये गये बचाव बयान में अंकित बिन्दु इस प्रकार है। मेरा बचाव बयान प्रतिवेदन स्पष्ट है, फिर भी समीक्षा के मुख्य बिन्दु में असहमति प्रतिवेदित किया गया है। उल्लेखनीय है कि कार्य स्थल पर सुखा गाद नहीं था, गिला गाद था। गीला गाद एवं उँचाई अधिक होने के कारण विभागीय रूप से मजदुर से कार्य कराना जोखिम भरा था। फलस्वरूप उक्त कार्य पम्प हाउस के निर्माणकर्त्ता संवेदक मेसर्स रूंगटा इन्टरप्राईजेज, कहलगाँव द्वारा मशीन एवं चेन पुली से कराया गया है। विषम परिस्थिति में मेरे द्वारा किये गये प्रयास से कराये गये कार्य के बचाव ब्यान पर असहमति व्यक्त करते हुए विभागीय रूप से गाद सफाई नहीं कराने का आरोप लगाकर मुझे हतोत्साह किया जा रहा है। अतः मेरे बचाव बयान पर पुनः समीक्षा कर मुझे आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। उक्त के संबंध में भी मेरा बचाव बयान स्पष्ट है, फिर भी समीक्षा के मुख्य बिन्दु में असहमति जताया गया है। इस संदर्भ में निवेदन पूर्वक उल्लेखनीय है कि मेरे द्वारा पम्प हाउस-1 में आंशिक कार्य कराया गया है, जो मुख्यतः सुपर स्ट्रचर से संबंधित है। जनवरी-2015 में जब Entrance भाग के Expansion joint के गैप का बढ़ना दृष्टिगोचर हुआ तो नींव में कराये गये कार्य पर शंका होने के फलस्वरूप शीट पाईल के कार्य के माप-पुस्त एवं नींव के नक्शा का मिलान किया। शीट पाईल कार्य में कमी होने की जानकारी उच्चाधिकारी को तत्‌क्षण मेरे द्वारा दी गई। फिर भी विभाग द्वारा तथ्य छुपाने और समीक्षा के मुख्य बिन्दु में बचाव बयान पर असहमति इंगित किया गया है। इस प्रकार मेरे बचाव बयान पर असहमति इंगित कर मुझे हतोत्साह किया जा रहा है। आरोपी पदाधिकारी, श्री शफी अहमद द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में पूर्व से समर्पित बचाव बयान पर पुनः समीक्षा का अनुरोध किया गया है। उक्त बचाव बयान में श्री अहमद द्वारा उल्लेख किया गया है कि पम्प हाउस का फ्लोर लेवल 19.35 मीटर एवं गंगा का HFL 32.93 मीटर है। गाद सफाई के लिए इनके द्वारा भरपूर प्रयास किया गया। इस संबंध में श्री अहमद ने पत्रांक 428 दि॰ 12.06.2014 एवं पत्रांक 444 दिनांक 18.06.2014 द्वारा संवेदक को निदेशित किया। श्री अहमद द्वारा गाद सफाई हेतु कोटेशन निकाले जाने के संदर्भ में मुख्य अभियंता के पत्रांक 4021 दि॰ 31.12.2014 को उल्लेखित किया है परन्तु उक्त पत्र में एकमात्र कोटेशनदाता के चतुर्थ श्रेणी के अभिकर्त्ता होने एवं कार्य की लागत 49.994 लाख रहने के फलस्वरूप एकल कोटेशन को रद्‌द करने एवं इस कार्य हेतु पुनः कोटेशन आमंत्रित करने का निर्णय संसूचित है। परन्तु पुनः कोटेशन आमंत्रित किये जाने का कोई उल्लेख श्री अहमद द्वारा नहीं किया गया है। श्री अहमद द्वारा अपने बचाव बयान में पुनः पम्प हाउस के निर्माणकर्त्ता संवेदक मे॰ रूंगटा इन्टरप्राइजेज, कहलगाँव पर दबाव डाल कर गाद सफाई कार्य प्रारम्भ कराये जाने का उल्लेख है। विदित हो कि दिनांक 17.01.2015 को माननीय विभागीय मंत्री महोदय, सचिव एवं अभियंता प्रमुख (मध्य) के स्थल निरीक्षण के दौरान विभागीय रूप से गाद सफाई कराने का निदेश दिया गया था। कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने प्रतिवेदन पत्रांक 96 दि॰ 29.01.15 एवं पत्रांक 104 दि॰ 31.01.15 में पम्प हाउस-1 की सफाई कार्य को जोखिम भरा एवं कम्पलेक्श प्रकृति का बतलाया है। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 164 दि॰ 09.02.2015 में उल्लेखित है कि पम्प हाउस-1 की गाद सफाई कार्य हेतु संवेदक को राजी किया गया। परन्तु श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने पत्रांक 121 दि॰ 06.02.2015 द्वारा संवेदक को यह नोटिस थमा दिया कि उक्त कार्य का भुगतान सुखा गाद लीड और लीफ्ट के साथ हटाने के लिए जो राशि आकलित होगी, अधिकतम वही आपको भुगतेय होगी। जबकि यह मामला गिला गाद हटाने का था एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वयं इसे जोखिम भरा एवं कम्पलेक्श प्रकृति के कार्य के रूप में स्वीकार किया गया था। अधीक्षण अभियंता द्वारा इनके इस कृत्य को उक्त महत्ती कार्य की प्रगति में रोड़ा अटकाने की नीयत से किया जाना अंकित किया है। पुनः अधीक्षण अभियंता ने अपने पत्र में उल्लेखित किया है कि श्री अहमद द्वारा आमंत्रित कोटेशन में अनाप-शनाप दर अंकित किया गया है, जिसे अभियंता प्रमुख (मध्य) द्वारा मना कर दिया गया। उक्त के आलोक में श्री अहमद द्वारा पम्प हाउस-1 से गीला गाद हटाने हेतु उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद सार्थक प्रयास किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। उक्त समीक्षा के आलोक में उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद ससमय इसका अनुपालन नहीं कर गाद सफाई कार्य नहीं कराने के लिए श्री अहमद का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं होने के फलस्वरूप श्री अहमद इस आरोप के लिए दोषी हैं।104 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 आरोपी पदाधिकारी, श्री अहमद द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में उल्लेखित किया गया है कि इनके द्वारा पम्प हाउस-1 में आंशिक कार्य कराया गया है जो मुख्यतः सुपर स्ट्रक्चर से संबंधित है। जनवरी 2015 में जब Entrance भाग में Expansion Jointके गैप का बढ़ना दृष्टिगोचर हुआ तो नींव में कराये गये कार्य पर शंका होने के फलस्वरूप शीट पाईल के कार्य के माप पुस्त एवं नींव के नक्शा का मिलान किया गया तो ज्ञात हुआ कि नींव के शीट पाईल कार्य में कमी है। जैसे ही इस बात की जानकारी हुई श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 177 दि॰ 24.02.2015एवं पत्रांक 190 दि॰ 26.02.2015 द्वारा इसकी सूचना अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को दी गयी जिसके आलोक में मुख्य अभियंता के स्तर से एक समिति गठित कर इस मामले की जाँच की गयी जिसमें कार्यपालक अभियंता के मंतव्य से समिति द्वारा सहमति व्यक्त की गयी।

उक्त के आलोक में श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा संज्ञान में आते ही इस मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखते हुए इसकी जाँच कराया जाना परिलक्षित होता है।

उक्त समीक्षा के आलोक में श्री अहमद द्वारा संज्ञान में आते ही शीट पाईल कार्य में कमी को उच्चाधिकारियाें के समक्ष रखते हुए इसकी विधिवत्‌ जाँच कराये जाने के फलस्वरूप तथ्य को छुपाये जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। श्री शफी अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलागाँव द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरान्त आरोप सं॰-1 प्रमाणित एवं आरोप सं॰-2 अप्रमाणित है।

उपर्युक्त आरोपों के आलोक में सरकारी राजस्व की क्षति के आकलन के लिए मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, भागलपुर से निर्मित पम्प हाउस स्टेज-1 में भरे गाद की सफाई एवं भुगतान से संबंधित अभिलेख की मांग की गई। मुख्य अभियंता द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेख के आलोक में की गई तकनीकी समीक्षा निम्नवत है :-

मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के परिक्षेत्राधीन गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव अन्तर्गत बटेश्वर स्थान गंगा पम्प नहर परियोजना के अधीन पम्प हाउस स्टेज-1 के निर्माण एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10 के तहत संवेदक मे0 रूंगटा इन्टरप्राइजेज, कहलगाँव द्वारा कराये जाने के क्रम में पम्प हाउस स्टेज-1 में दीवार एवं Expansion Joint से रिसाव होने के कारण गाद जमा हो गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के पत्रांक-174 दिनांक 02.02.2022 द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों के अवलोकनोपरांत पम्प हाउस स्टेज-1 में जमा गाद को हटाने में कुल 34,95,029/- रू0 संबंधित संवेदक को कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव द्वारा 19th on A/c विपत्र के माध्यम से भुगतान किया गया।

उल्लेखनीय है कि आरोपित पदाधिकारी श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257) तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप सं0-1 में उल्लेख किया गया है कि गंगा पम्प नहर परियोजना (एकरारनामा सं0-01SBD/2009-10) के अन्तर्गत पम्प हाउस स्टेज-1 के त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण पम्प हाउस में गाद जमा हुआ। जिसके फलस्वरूप पम्प हाउस से जमा गाद हटाने में संवेदक को किया गया व्यय 34,95,029/- रूपये सरकारी राजस्व की क्षति माना जा सकता है। अतएव प्रस्तुत मामले में कुल राजस्व की क्षति 34.95029 लाख रूपये परिलक्षित होता है।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार के स्तर पर प्रमाणित आरोप एवं उक्त प्रकरण में हुए 34,95,029/- रूपये की सरकारी राजस्व की क्षति के लिए श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257) तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2377 दिनांक-07.10.2022 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए संसूचित किया गया - % श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257), तत0 कार्यपालक अभियंता,गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव, सम्प्रति सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त अधिरोपित दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अर्जी एवं पूरक पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है जिसकी समीक्षा निम्नवत है :-

पम्प हाउस स्टेज-1 का निर्माण कहलगाँव स्थित कुलकुलिया ग्र्राम में गंगा नदी के दाँये तट पर नदी में किया गया है। इसका फ्लोर लेवेल 19.35 मीटर तथा गंगा नदी का HFL 32.93 मीटर है। पम्प हाउस में दिवार एवं Expansion Jointसे रिसाव तथा त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण गाद जमा नहीं हुआ है बल्कि निर्माण के दौरान प्रत्येक वर्ष (बाढ़ 2012 एवं इसके पूर्व की बाढ़ अवधि) गंगा नदी में आयी बाढ़ के कारण पम्प हाउस के फ्लोर पर गाद जमा हुआ है। पम्प हाउस के बाढ़ के पानी में जलमग्न होने संबंधी कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल कहलगाँव का अधीक्षण अभियंता, रूपांकण अंचल, भागलपुर को सम्बोधित पत्रांक-741 दिनांक-28.06.2011 (परिशिष्ट 1), पत्रांक-608 दिनांक-02.07. 2012 (परिशिष्ट 2), तथा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर को संबोधित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-793 दिनांक-14.07.2011 (परिशिष्ट 3) की छाया प्रति संलग्न है इससे स्पष्ट है कि बाढ़ 2011 एवं बाढ़ 2012 में पम्प हाउस में बाढ़ का पानी भरने के कारण उसके फ्लोर पर गाद का जमाव हुआ है। बाढ़ अवधि में गाद का जमाव एक नेचुरल (प्राकृतिक) प्रक्रिया है। इस प्रकार पम्प हाउस मेें दिवार एवं Expansion Joint से रिसाव तथा त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण गाद जमा नहीं हुआ है बल्कि बाढ़ के कारण गाद जमा हुआ है। मेरे द्वारा त्रुटिपूर्ण कार्य नहीं कराया गया है। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर द्वारा भी उपर्युक्त तथ्यों को मानते हुए अभियंता प्रमुख (मध्य), जल संसाधन विभाग, पटना को संबोधित पत्रांक-1264 दिनांक-08.04.2015 से प्रतिवेदित किया गया है कि ''अधोहस्ताक्षरी द्वारा105 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 संवेदक को निर्देश दिया गया है कि सिक्युरिटी वापसी की शर्त को वापस लें तथा गाद सफाई कार्य एक सप्ताह के अंदर प्रारंभ करें। संवेदक द्वारा बिना शर्त गाद सफाई कार्य एक सप्ताह के अन्दर प्रारंभ का वचन दिया गया। परन्तु संवेदक द्वारा अनुरोध किया गया है कि गाद सफाई में लगभग 40.00 लाख रूपये खर्च होंगे जिसका भुगतान विभाग को सुनिश्चित करना होगा। क्योंकि पम्प हाउस में गाद प्राकृतिक कारणों से जमा है। मेरे द्वारा संवेदक को आश्वस्त किया गया है कि इस परिस्थिति में गाद सफाई कार्य में हुए व्यय का भुगतान नियमानुसार किया जायेगा '' मुख्य अभियंता का उपरोक्त कथन संविदा के SBDजो Force Majeureसे संबंधित है, के अनुरूप है जो निम्न प्रकार है " Neither party shall be liable to the other for any loss or damage occasioned by or arising out of acts of GOD such as Unprecedented flood, Volcanic eruption, Earthquake or other convulsion of nature and other acts such as general/ partial strikes by a section of government employees/ invasion, the act of foreign countries/ hostilities or war like operations before or after declaration of war, rebellion/ military or usurped power which prevent performance of the contract and which could not have been foreseen or avoided by a prudent person." अतः गाद हटाने पर हुए रू0 34,95,029/- के व्यय को सरकारी राजस्व की क्षति नहीं माना जा सकता है। इसके लिए मुझे जिम्मेवार मानना न्याय संगत नहीं है। अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में विनम्र अनुरोध है कि 25% (पच्चीस प्रतिशत) पेंशन की स्थायी रूप की कटौती के दंड से मुझे मुक्त करने की असीम कृपा प्रदान की जाए। आरोपी पदाधिकारी द्वारा उक्त दंड के विरूद्ध समर्पित अपने पुनर्विलोकन अर्जी में प्रतिवेदित किया गया है कि पम्प हाउस स्टेज-1 के निर्माण के अंतर्गत पम्प हाउस में दीवार एवं Expansion Joint से रिसाव होने तथा त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण गाद जमा होना बताया गया है। गाद हटाने रू0 34,95,029/- के व्यय की क्षति मानते हुए विभाग के द्वारा उपरोक्त दंड संसूचित किया गया है। पम्प हाउस स्टेज-1 के Floor Level 19.35 m तथा HFL 32.93 mहै। पम्प हाउस में दीवार एवं Expansion Joint से रिसाव तथा त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण गाद जमा नहीं हुआ है बल्कि पम्प हाउस निर्माण के दौरान प्रत्येक वर्ष (बाढ़ 2012 एवं इसके पूर्व की बाढ़ अवधि) गंगा नदी में आयी बाढ़ के कारण पम्प हाउस के फ्लोरपर गाद जमा हुआ। आरोपी द्वारा पुष्टि हेतु पुनर्विलोकन अर्जी के साथ संलग्न मुख्य अभियंता का पत्रांक-1264 दि0-08.04.2015 का उल्लेख किया गया है, जिसमें पम्प हाउस में गाद प्राकृतिक कारणों से जमा होना बताया गया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा उक्त के आलोक में प्रतिवेदित किया गया है कि गाद हटाने के लिए रू0 34,95,029/- का व्यय सरकारी राजस्व की क्षति नहीं है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य साक्ष्य सहित प्रतिवेदित नहीं किया गया है बल्कि पूर्व में इनके द्वारा अपने स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर तथा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान दिये गये बचाव बयान में उपरोक्त तथ्यों का उल्लेख किया गया है। आरोपी पर प्रमाणित आरोप सं0-1 के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी को पम्प हाउस में जमा गाद को हटाने हेतु उच्चाधिकारियों/विभागीय निदेश के बावजूद ससमय अनुपालन नहीं किये जाने के लिए दोषी माना गया है। अतएव, उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में, श्री शफी अहमद, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य प्रतिवेदित नहीं किये जाने के कारण उनका पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत, सक्षम प्राधिकार के स्तर पर श्री शफी अहमद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य अथवा साक्ष्य नहीं दिये जाने के कारण उनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से संसूचित दण्ड "25 प्रतिशत पेंशन की स्थायी रूप से कटौती" को यथावत रखे जाने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय के आलेाक में, श्री शफी अहमद (आई0डी0-3257), तत0 कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर प्रमंडल, कहलगाँव सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2377 दिनांक 07.10.2022 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखते हुए उनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 आफताब आलम खाँ (आई0डी0-3837), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृत के पद पर पदस्थापित थे तब उनके विरूद्ध स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया अन्तर्गत मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत बन्नी पंचायत के हाई स्कूल के चाहरदिवारी निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया।106 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उक्त आरोप के लिए मो0 खाँ के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1018, दिनांक 02.05.2022 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। मो0 खाँ दिनांक 31.12.2022 को सेवानिवृत हो चुके हैं।

अतएव मो0 आफताब आलम खाँ (आई0डी0-3837), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया जाता है। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य के लिए Deficient प्राक्कलन तैयार करने, कार्य समय-सीमा के अन्दर पूर्ण नहीं होने के कारणों एवं संपादित कार्यों की गुणवत्ता की जाँच उड़नदस्ता से कराये जाने तथा प्रश्नगत कार्य के तहत संरचनाओं के लिए गये नमूनों की Central Soil Material Research Station, New Delhi से जाँच कराये जाने के उपरांत नमूनो के जाँचफल के आधार पर विभागीय उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत बरती गयी अनियमितता के लिए श्री सुधीर कुमार (आई0डी0-4478) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बथनाहा को विभागीय अधिसूचना सं0-1605 दिनांक 25.07.2018 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय पत्रांक-2151 दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2467 दिनांक 28.11.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच-प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच-प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1488 दिनांक 22.06.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की मांग की गयी। श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2760 दिनांक 12.12.2022 द्वारा "संचयी प्रभाव से पाँच वेतनवृद्धि पर रोक" का दण्ड संसूचित किया गया। इसी क्रम में श्री कुमार द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7698/2022 में दिनांक 28.04.2023 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्याय निर्णय पारित किया गया जो निम्नवत है :- 3. At this stage, the only grievance of the petitioner is that the petitioner remained under suspension for a period of approximately four years and as per the sub-rule (1) of Rule 10 of the Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules, 2005 (hereinafter referred to as "the Service Rules"), after a period of one year, the petitioner would have been entitled for 75% of the salary as subsistence allowance which has not been paid. 4. Learned counsel for the State submits that if the petitioner files a representation in this regard, the same will be considered by the competent authority in accordance with law. 5. Having regard to the submissions noted hereinabove, this Court grants liberty to the petitioner to file a representation raising his grievance before the competent authority. If such representation is filed within a period of one month from today, the same shall be considered by the competent authority in accordance with the Service Rules and a reasoned order thereon shall be passed. 6. Needless to say that in case, the petitioner is found entitled for the enhanced amount of subsistence allowance, the same shall be made available to him within one month. श्री सुधीर कुमार द्वारा न्याय निर्णय की प्रति आवेदन के साथ संलग्न करते हुए अपने अभ्यावेदन (दिनांक 22.10. 2022 एवं 13.05.2023) के माध्यम से दिनांक 25.07.2019 से लेकर दिनांक 22.08.2022 तक के निलंबन अवधि के लिए 75% अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने का अनुरोध किया गया। उल्लेखनीय है कि निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किये जाने पर निलंबन अवधि के सेवा के निरूपण तथा वेतनभत्ता की अनुमान्यता के बिन्दु पर कार्रवाई हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 में प्रावधान निहित है। चूँकि श्री कुमार कार्यपालक अभियंता को निलंबन मुक्त करते हुए दिनांक 23.08.2022 को पुनः स्थापित किया गया है तथा विभागीय पत्रांक-2073 दिनांक 25.08.2022 द्वारा उन्हें निलंबन अवधि के विनियमन हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के प्रावधानों के तहत नोटिस निर्गत किया गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित किये जाने के पूर्व ही विभागीय पत्रांक-2073 दिनांक 25.08. 2022 द्वारा यह नोटिस श्री कुमार को निर्गत किया जा चुका है। उक्त नोटिस के क्रम में श्री कुमार ने पत्रांक-718 दिनांक 22.10.2022 द्वारा अपना अभ्यावेदन समर्पित किया है।107 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 श्री कुमार द्वारा अपने अभ्यावेदन में निम्न बातों का उल्लेख किया है :- निलंबन अवधि के 01 वर्ष के उपरांत अर्थात दिनांक 25.07.2019 के प्रभाव से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियमो के तहत विभागीय कार्यवाही में देरी के लिए सरकारी सेवक उत्तरदायी नहीं है तो जीवन निर्वाह भत्ता की रकम प्रथम 12 महीने की अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता की रकम, प्रथम 12 महीने की अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता के 50% तक बढाई जा सकती है, परन्तु अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा इस पर अभी तक विचार नहीं किया गया है। इसी तरह श्री कुमार के द्वारा उनके उक्त अभ्यावेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें आरोप मुक्त किये जाने एवं "निलंबन अवधि दिनांक 25.07.2018 से 22.08.2022 के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता देय नहीं होगा" का निर्णय बदलने का अनुरोध किया गया है। श्री सुधीर कुमार, कार्यपालक अभियंता द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन हेतु समर्पित किये गये अभ्यावेदन में पुनः उन्हीं तथ्यों की पुनरावृत्ति की गयी है, जो उनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर (अभ्यावेदन) में समर्पित किया गया है, इसके अतिरिक्त श्री कुमार द्वारा विभागीय कार्यवाही को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अनुसार संचालित नहीं होने का यह कारण बताया गया है कि इनके मामले में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित करने हेतु किसी गवाह को प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचिका में संचालन पदाधिकारी द्वारा आदेशफलक में अंकित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी से तथ्यों का परीक्षण/प्रतिपरीक्षण किया गया है। श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध गठित आरोप के संदर्भ में उनके द्वारा कोई नया तथ्य/साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को समीक्षोपरांत अस्वीकृत करते हुए उनके निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होने एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन प्रयोजनार्थ करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुधीर कुमार (आई0डी0-4478) कार्यपालक अभियंता का निलंबन अवधि (दिनांक 25.07.2018 से दिनांक 22.08.2022) के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि की गणना मात्र पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी। श्री मनोज कुमार (आई0डी0-5440), अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), बागमती अवर प्रमंडल, बेनीवाद को घरेलु विवाद में दिनांक 06.11.2022 को गिरफ्तार कर दिनांक 07.11.2022 से 15.11.2022 तक न्यायिक अभिरक्षा में रखते हुए मंडल कारा, हाजीपुर में रखा गया। तत्‌संबंधी सूचना विभाग को मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-3742 दिनांक 13.12. 2022 द्वारा प्रदत है। श्री कुमार जमानत के उपरांत दिनांक 16.11.2022 को कार्य पर योगदान दिये है।

2. उक्त वर्णित स्थिति में श्री मनोज कुमार (आई0डी0-5440), अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीवाद के हिरासत/न्यायिक अभिरक्षा की अवधि 06.11.2022 से 15.11.2022 तक के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(2)(क) के तहत निलंबित समझे जायेंगे। श्री सुभाष सिंह (आई0डी0-जे 7681), सेवानिवृत सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के विरूद्ध भोजपुर जिला के अन्तर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन बाढ़ 2016 के दौरान विभिन्न स्थलों पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों मे बरती गई अनियमितता का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र गठित किया गया :-

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के अधीन भिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्री की प्राप्ति संधारित है, परन्तु निर्गत प्रमाण में सामग्रियों के निर्गत किया जाना संधारित नहीं किए जाने के कारण जाँच किया जाना संभव नहीं हो सका है। उसी प्रकार स्थल लेखा में पाई गई त्रुटियों से स्पष्ट है कि स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया है। फलतः सामग्रियों का आदान-प्रदान पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न करता है। अतएव लेखाओं का विधिवत नहीं किए जाने क लिए दोषी है। उक्त आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1592, दिनांक-12.09.2017 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह से प्राप्त जवाब के तकनीकी समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-853, दिनांक 29.04.2019 द्वारा गठित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।108 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में अभियंता प्रमुख (सिंचाई सृजन)-सह-संचालन पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-255, दिनांक-26.12.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में निम्न मंतव्य अंकित किया गया है :- "आरोपी पदाधिकारी पर मुख्य रूप से प्रमंडलाधीन विभिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्रियों की प्राप्ति संधारित करने परन्तु निर्गत सामग्रियों का संधारण नहीं किए जाने का आरोप है। आरोपी पदाधिकारी प्रमंडलीय भंडार के प्रभारी सहायक अभियंता है। उड़नदस्ता जाँच दल को उपलब्ध कराए गए भंडार लेखा मे निर्गत सामग्री संधारित नहीं की गई थी, जिसे त्रुटिपूर्ण माना गया है। उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा लिखित में अभिलेखों की माँग किए जाने पर भंडार लेखा का मात्र Receipt भाग का हस्तलिखित ब्योरा उपलब्ध कराया गया है, जबकि उन्हें विधिवत संधारित किए गए भ्ांडार लेखा पर Receipt एवं Issue दोनाें अंकित रहता है ससमय उपलब्ध कराना चाहिए था। आरोपी पदाधिकारी प्रमंडलीय भंडार के प्रभारी सहायक अभियंता भी है। उड़नदस्ता द्वारा मांगे गए लेखाओं/अभिलेखों को पूर्णरूपेण उपलब्ध कराया जाना इनकी जिम्मेवारी थी, जिसका निर्वहन इनके द्वारा नहीं किया गया। अतः लेखाओं को विधिवत्‌ नहीं किए जाने का इन पर आरोप प्रमाणित होता है" संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-686, दिनांक-19.05.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री सिंह को उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। इसी क्रम में श्री सुभाष सिंह, दिनांक-31.12.2020 को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके फलस्वरूप उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना संख्या-217, दिनांक-18.02.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बीं) में सम्परिवर्तित कर दिया गया।

श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का समर्पित जवाब की तकनीकी समीक्षा विभाग स्तर पर की गई। श्री सिंह पर आरोप है कि भंडार लेखा एवं स्थल लेखा का विधिवत संधारण नहीं किया गया। श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि भंडार लेखा संधारण में कहीं भी गड़बड़ी नहीं की गई है। प्रत्येक माह में आगत एवं निर्गत के बाद Closing Balance किया गया है। साक्ष्य के रूप में भंडार लेखा का माह जुलाई 2016 से दिसम्बर 2017 तक की छायाप्रति संलग्न किया गया है। परन्तु स्थल लेखा के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि भंडार लेखा का विधिवत संधारण श्री सिंह द्वारा नहीं किया गया है, जिससे कि इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित होता है। अतएव श्री सुभाष सिंह, (आई0डी0-जे 7681), सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप संबंधी दिए गए मंतव्य एवं द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की तकनीकी समीक्षा के आलोक में गठित आरोप को प्रमाणित मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-2376, दिनांक-07.10.2022 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया - % उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सुभाष सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसकी विभागीय तकनीकी पदाधिकारी द्वारा समीक्षा की गई, जो निम्नवत है :-

आरोपी पदाधिकारी ने अपील अभ्यावेदन में प्रतिवेदित किया है कि मैं दिनांक 01.07.20216 से दिनांक 31.12.2020 तक बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, कारीसाथ, शिविर- आरा में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत था। मैं दिनांक 31.12. 2020 को 60 -8/10/22 (साठ) वर्ष की आयु पुरी होने पर सेवानिवृत्त हुआ हूँ।

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के प्रमंडलीय स्थल लेखा का संधारण प्रमंडलीय स्तर पर कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाता था। प्रत्येक अवर प्रमंडल के कार्यस्थल के संबंधित कनीय अभियंता द्वारा अपने-अपने स्थल लेखा पर हस्ताक्षर कर संबंधित सहायक अभियंता (अवर प्रमंडल पदाधिकारी) के हस्ताक्षर के बाद कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के कार्यालय में जमा किया जाता था जिसका संधारण प्रमंडलीय स्तर पर (कार्यपालक अभियंता के कार्यालय) द्वारा किया जाता था। श्रीमान्‌ कार्यपालक अभियंता महोदय द्वारा मुझसे सिर्फ प्रमंडलीय गोदाम के भण्डार लेखा का संधारण का काम लिया जाता था । अतः मेरे उपर लगाया गया यह आरोप पूर्णतः गलत है। बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, कारीसाथ, शिविर आरा के स्थल लेखा का छाया प्रति संलग्न।

जहाँ तक प्रमंडलीय गोदाम का प्रश्न है, प्रमंडलीय गोदाम का देखरेख बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, कारीसाथ, शिविर-आरा द्वारा किया जाता था। प्रमंडलीय गोदाम का प्रभार श्री धीरज कुमार सिन्हा, भण्डारपाल, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के पास था। श्री धीरज कुमार सिन्हा के उपर गोदाम का देखरेख श्री चौधरी कामेश्वर शर्मा, तत्कालीन कनीय अभियंता द्वारा किया जाता था। श्रीमान्‌ संतोष कुमार सिन्हा तत्कालीन अवर सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा पत्रांक-22/नि0सि0 (पट0) 03-17/2017/658, पटना दिनांक 25.03.2022 से श्री चौधरी कामेश्वर शर्मा, तत्कालीन प्रभारी कनीय अभियंता प्रमंडलीय गोदाम, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा को आरोप से मुक्त कर दिया गया है।

बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, कारीसाथ, शिविर-आरा के तत्कालीन कनीय अभियंता श्री विश्वेश्वर नाथ पाण्डेय द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया था। श्रीमान्‌ संतोष कुमार सिन्हा, तत्कालीन अवर सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा पत्रांक-22/नि0सि0 (पट0) 03-17/2017/656, पटना दिनांक 25.03.2022 से श्री विश्वेश्वर नाथ पाण्डेय, तत्कालीन कनीय अभियंता को आरोप से मुक्त कर दिया गया है।109 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री शैलेन्द्र कुमार के द्वारा आरोप सं0-3 के मामले के जवाब में लिख गया है कि भंडार लेखा में प्राप्ति तथा निर्गत सामग्रियों की विवरणी विधिवत संधारित किया गया है। उनके जवाब से संतुष्ट होकर श्रीमान्‌ संतोष कुमार सिन्हा, तत्कालीन अवर सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा पत्रांक-22/नि0सि0 (पट०) 03-17/2017/700, पटना दिनांक 30.03.2022 से आरोप से तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री शैलेन्द्र कुमार को मुक्त कर दिया गया है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, कारीसाथ, शिविर-आरा के सभी आरोपित कनीय अभियंताओं को एक हीं आरोप में आरोप से मुक्त कर दिया गया है। साथ हीं साथ उसी आरोप में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री शैलेन्द्र कुमार को भी आरोप से मुक्त कर दिया गया है परन्तु उसी आरोप में श्रीमान्‌ द्वारा मुझे दण्डित किया गया है। सहायक अभियंता का पद कनीय अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता के बीच का है, जब सभी निर्दाेष साबित किये गये हैं तो मैं भी निर्दाेष हूँ। अतः मैं भी निदोष हूँ।

दिनांक 31.12.2022 को मैं सेवानिवृत्त होने के समय अपना सम्पूर्ण प्रभार श्री तारकेश्वर धर द्विवेदी, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ, शिविर-आरा को सौंप चूका हूँ। मेरे उपर विभागीय कोई भी बकाया नहीं है।

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के प्रमंडलीय गोदाम का प्रभारी सहायक अभियंता के रुप में मैं कार्य करता था। प्रमंडलीय गोदाम के भण्डार लेखा का संधारण विधिवत्‌ किया गया है, उसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। अगर मेरे कार्यकाल में कोई भी प्रमंडलीय गोदाम का सामग्री का क्षति या कमी हुई होती तो श्रीमान्‌ कार्यपालक अभियंता द्वारा मुझसे उस सामग्री की राशि की वसूली हेतु श्रीमान्‌ को लिखा जाता, लेकिन श्रीमान्‌ कार्यपालक अभियंता द्वारा मुझे बकाया रहित प्रमाण पत्र निर्गत किया गया, जिसके बाद हीं मेरे पेंशन का भुगतान एवं अन्य पावनाओं (ग्रेच्यूटी छोड़कर) का भुगतान विभाग द्वारा किया गया है। मुझ पर लगाया गया आरोप पूर्णतः गलत है। मैं अपने कार्यकाल के अवधि में भण्डार लेखा का विधिवत्‌ संधारण किया हूँ। स्थल लेखा का संधारण कार्यपालक अभियंता के कार्यालय द्वारा मेरे कार्य अवधि तक किया जाता रहा है। अतः मुझ पर गलत अरोप प्रमाणित कर मुझे दण्डित किया गया है। प्रमंडलीय गोदाम के भण्डार लेखा रजिस्टर का छाया प्रति संलग्न ।

मेरे विरुद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई के क्रम में संसूचित दण्ड पर पुनर्विचार करते हुए मुझे अपना पक्ष मौखिक रुप से भवदीय के समक्ष रखने का अवसर प्रदान करने की —पा की जाय ।

अतः श्रीमान्‌ से नम्र आग्रह है कि मुझे दिये गये संसूचित दण्ड से मुक्त करने की —पा की जाय। इसके लिए मैं श्रीमान्‌ का सदा आभारी रहूँगा । आरोपी पदाधिकारी ने विभाग द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में प्रतिवेदित किया है कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा के प्रमंडलाधीन स्थल लेखा का संधारण प्रमंडलीय स्तर पर कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाता था। कार्यपालक अभियंता द्वारा आरोपी से सिर्फ प्रमंडलीय गोदाम के भण्डार लेखा का संधारण का काम लिया जाता था। आरोपी पदाधिकारी श्री सुभाष सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा विषयांकित मामले में आरोपित श्री विष्वेष्वर नाथ पाण्डेय, तत्कालीन कनीय अभियंता, श्री चौधरी कामेष्वर षर्मा, तत्कालीन कनीय अभियंता तथा श्री षैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के आरोप मुक्त किये जाने का उल्लेख करते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है। आरोपी पदाधिकारी दिनांक 01.07.2016 को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा में सहायक अभियंता के रूप में योगदान किया। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 5.7.0 में उल्लेख है कि प्रमंडलाधीन बाढ़ अवधि 2016 के दौरान कराये गये F.F. Works से संबंधित स्थल लेखा का विधिवत्‌ संधारण नहीं किया गया। साथ ही, संचालन पदाधिकारी अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि आरोपी पदाधिकारी पर मुख्य रूप से प्रमंडलाधीन विभिन्न स्थलों पर बाढ़ 2016 में कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित भंडार लेखा में सामग्रियों की प्राप्ति संधारित करने परन्तु निर्गत सामग्रियों का संधारण नहीं किए जाने का आरोप है। उड़नदस्ता जाँच दल को उपलब्ध कराए गए भंडार लेखा मे निर्गत सामग्री संधारित नहीं की गई थी, जिसे त्रुटिपूर्ण माना गया है। उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा लिखित में अभिलेखों की माँग किए जाने पर भंडार लेखा का मात्र Receipt भाग का हस्तलिखित ब्योरा उपलब्ध कराया गया है, जबकि उन्हें विधिवत संधारित किए गए भंडार लेखा पर Receipt एवं Issue दोनों अंकित रहता है ससमय उपलब्ध कराना चाहिए था। आरोपी पदाधिकारी प्रमंडलीय भंडार के प्रभारी सहायक अभियंता भी है। उड़नदस्ता द्वारा मांगे गए लेखाओं/अभिलेखों को पूर्णरूपेण उपलब्ध कराया जाना इनकी जिम्मेवारी थी, जिसका निर्वहन इनके द्वारा नहीं किया गया। अतः लेखाओं को विधिवत्‌ नहीं किये जाने का इन पर आरोप प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन के साथ संलग्न केन्द्रीय भंडार पंजी एवं स्थल पंजी के अवलोकनोपरान्त ज्ञात होता है कि केन्द्रीय भंडार पंजी में Opening & Closing balance की तिथि अंकित नहीं है। साथ ही, कार्यपालक अभियंता के द्वारा जाँचित भी नहीं है। जबकि स्थल लेखा पंजी को आरोपी पदाधिकारी द्वारा निर्गत किया गया है परन्तु, किस स्थल के लिए निर्गत किया गया है अंकित नहीं है। स्थल लेखा पंजी पर सिर्फ आरोपी पदाधिकारी का हस्ताक्षर अंकित है इस पर कनीय अभियंता का हस्ताक्षर अंकित नहीं है तथा कहीं भी कार्यपालक अभियंता के द्वारा जाँचित भी नहीं है। उक्त से स्पष्ट है कि भंडार लेखा एवं स्थल लेखा का विधिवत्‌ संधारण श्री सिंह द्वारा नहीं किया गया है। उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी श्री सुभाष सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता का उक्त विभागीय दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।110 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री सुभाष सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा विभागीय अधिसूचना सं०-2376 दिनांक 07.10.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड % के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को तकनीकी समीक्षा के आलोक में अस्वीकृत करते हुए उक्त दण्ड को यथावत रखने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है। श्री सुभाष सिंह (आई0डी0-जे 7681), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को निम्न अनुमोदित निर्णय संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है - श्री सुभाष सिंह, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा विभागीय अधिसूचना सं०-2376 दिनांक 07.10.2022 द्वारा अधिरोपित दण्ड % के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को तकनीकी समीक्षा के आलोक में अस्वीकृत करते हुए उक्त दण्ड को यथावत रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री रबीन्द्र ठाकुर, तत्कालीन सहायक अभियंता, समग्र योजना एवं अन्वेषण प्रमंडल, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वारा निदेशक, गृह निर्माण समिति, बेली रोड के रूप में अनियमितताएँ बरतने के कारण इनके विरूद्ध दानापुर थाना कांड सं0-336/94 दिनांक 25.11.1994 दर्ज की गई। श्री ठाकुर दिनांक 29.11.1994 से दिनांंक 05.12.1994 तक हिरासात में थे। सरकारी कार्य के साथ-साथ व्यापार में संलग्न होने, सरकारी सेवक आचार संहिता नियमावली के नियम-16 के उल्लंघन के कारण इन्हें विभागीय आदेश सं0-379 दिनांक 30.11.96 द्वारा निलंबित किया गया। श्री ठाकुर के विरूद्ध निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-981 दिनांक 03.04. 1997 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। (1) श्री ठाकुर द्वारा अभियंता गृह निर्माण समिति, बेली रोड, पटना का संचालन किया जा रहा था। इसमें गड़बड़ी के कारण श्री उमेश प्रसाद सिंह, विजय नगर, रूकनपुरा, थाना-दानापुर, जिला-पटना द्वारा दानापुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। दानापुर थाना कांड संख्या-336/94 दिनांक 25.11.1994 में धारा-406 भारतीय दण्ड संहिता के अभियुक्त बनाए गए। इसके अभियुक्त होने के कारण दिनांक 29.11.1994 से 05.12.1994 तक कारावास में रहे। (2) सरकारी कार्य के साथ-साथ अभियंता गृह निर्माण सरकारी समिति में बिना सरकार की मंजूरी के निर्वाच्य पद श्री ठाकुर द्वारा धारण किए हैं जो सरकारी आचार संहिता नियमावली 16 (3) के प्रतिकूल है। श्री ठाकुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री ठाकुर से विभागीय पत्रांक-1375 दिनांक 21.06.1999 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री ठाकुर से प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा की गई। (1) सरकारी सेवक आचार नियमावली का नियम-16(3) के अन्तर्गत अभियंता गृह निर्माण समिति लिमिटेड, बेली रोड, पटना के अध्यक्ष एवं सचिव बनने के बाद भी सरकार से परमिशन नहीं लेना (07.02.1980 से 02.07.1989) निबंधक, सहायोग समितियों, पटना के प्रतिवेदन से भी स्पष्ट है कि अभियंता गृह निर्माण सरकारी समिति का अंकेक्षण प्रतिवेदन अपूर्ण एवं समिति संचालन में अनियमितता की संभावना जैसे कि अंकेक्षण प्रतिवेदन को समर्पित नहीं करना आदि है। श्री ठाकुर का यह कथन मान्य नहीं है कि हाउसिंग कॉपरेटिव फेडरेशन का सदस्य होने के लिए विभाग की सहमति थी। यह परमिशन था हाउसिंग कॉपरेटिव फेडरेशन के सदस्य होने के लिए। (2) अभियंता गृह निर्माण समिति, बेली रोड, पटना के संचालन में गड़बड़ी के कारण दानापुर थाना कांड सं0-336/1994 में अभियुक्त के रूप में दिनांक 29.11.1994 से 05.12.1994 तक जेल में रहना, यह गड़बड़ी का संकेत है। समीक्षोपरांत उपर्युक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री ठाकुर के विरूद्ध विभागीय आदेश सं0-183 दिनांक 08.07.2000 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया गया - (i) निन्दन, जिसकी प्रवृष्टि वर्ष 1994-95 में की जाएगी। (ii) संचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक।

(iii) निलंबन मुक्त करते हुए निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, किंतु पेंशन के प्रयोजनार्थ उक्त अवधि में वेतनवृद्धि देय होगा। पदस्थापन हेतु श्री ठाकुर मुख्यालय में योगदान करेंगे।

उक्त दंडादेश की लिपिकीय भूल के कारण विभागीय आ0सं0-200, दिनांक 04.08.2000 द्वारा संशोधित किया गया :- (i) सहायक अभियंता के वेतनमान में न्यूनत्तम प्रक्रम पर रखा जाए। (ii) निलंबन मुक्त करते हुए निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, किंतु पेंशन प्रयोजनार्थ उक्त अवधि का गणना की जाएगी। शेष यथावत्‌ रहेगा।111 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना के समक्ष CWJC N0-9252 of 2000 रबीन्द्र ठाकुर बनाम बिहार राज्य एवं अन्य वाद दायर किया गया। दिनांक-28.06.2019 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा CWJC N0-9252/2000 में आदेश पारित किया, जिसकी संक्षिप्त विवरणी निम्नवत्‌ हैः- "Submissions of counsel for the State is noted only to be rejected as counsel for the petitioner has rightly submitted that order dated 04.08.2000 purporting to modify enhanced punishment is without any reason whatsoever. The order suffers from the vice of non- application of mind and also non-assigning reason. Requirement of assigning reason before issuance of such order is of utmost importance. Reasons should be assigned in support of punishment to minimize the scope of arbitrariness and allow scrutiny of decision having regard to the reasons which weighed in the mind of the authority before enhancing punishment. Importance of assigning reason has been reiterated time and again by Courts. The Apex Court in the case of Kranti Associates Private Limited and another vs. Masood Ahmed Khan and others reported in (2010) 9 Supreme Court Case page 496 has laid down various circumstances wherein importance of assigning reason has been emphasized so as to minimize arbitrariness and ensure fairness in the decision. In the opinion of this Court order dated 04.08.2000 is in violation of law laid down by the Apex Court in the case of Kranti Associates Private Limited (supra). For the reasons recorded hereinabove, this Court would therefore, quash the order dated 04.08.2000 enhancing punishment issued by Deputy Secretary to the Government of Bihar, Water Resources Department. As a result of quashing of the said order and since petitioner has retired on 31.11.2006 and would be entitled to all consequential benefit." Writ petition stands allowed. उक्त न्यायादेश के विरूद्ध द्वारा विधि विभाग के परामर्श के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, पटना के समक्ष LPA दायर किया गया। उक्त LPA-71/2021 के संदर्भ में दिनांक-25.08.2022 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा आदेश पारित किया गया, जिसकी संक्षिप्त विवरणी निम्नवत्‌ है :- 6. The disciplinary authority is exercising quasi judicial function under the Bihar Govt. Servant (Classification, control and Appeal) Rules 2005 while imposing punishment.

In such an event, order must be a reasoneld order as his or her order in respect of imposition of punishment is a subject matter of judicial review. Therefore, the disciplinary authority mind is required to be disclosed in the order how each and every contention has been considered. In the light of these facts and circumstances, the appellant has not made out a case so as to interfere with the order of the learned Single Judge dated 28.06.2019 passed in CWJC NO-9252 of 2000.

Accordingly LPA-71/2021 stands dismissed. उल्लेखनीय है कि LPA-71/2021 में पारित न्यायादेश विभाग को दिनांक-18.10.2022 को प्राप्त हुआ। पारित न्यायादेश में विभाग द्वारा दायर LPA No-71/2021 को खारिज कर दिया गया तथा CWJC No-9252/2000 रबीन्द्र ठाकुर बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में पारित न्याय निर्णय का अनुपालन करने का निदेश दिया गया। इस न्यायादेश में विभाग को दंडादेश संख्या-200 दिनांक-04.08.2000 को निरस्त कर परिणामी लाभ अनुमान्य किये जाने का आदेश दिया गया। श्री रवीन्द्र ठाकुर, तत्कालीन सहायक अभियंता, दिनांक-31.11.2006 को जल संसाधन विभाग, झारखंड से सेवानिवृत्त हुए हैं।112 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 CWJC No-9252/2000 रबीन्द्र ठाकुर बनाम बिहार राज्य एवं अन्य वाद में दिनांक 28.06.2019 को पारित न्यायादेश के अनुपालन हेतु विभागीय आदेश संख्या-200, दिनांक 04.08.2000 को निरस्त किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री रबीन्द्र ठाकुर, तत0 सहायक अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण प्रमंडल, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निर्गत दंड आदेश सं0-200 दिनांक 04.08.2000 को निरस्त एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री चंदन कुमार (आई0डी0-5081), कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया, के विरूद्ध मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर परिक्षेत्राधीन जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के प्रमंडलीय गोदाम से सरकारी सामग्रियाें (ई0सी0 बैग-एन0सी0) का गलत नियत एवं मंशा से दुष्प्रेरित होकर हेरा-फेरी करने संबंधी कतिपय अनियमितताआें के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के कारण सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री चंदन कुमार, कार्यपालक अभियंता का मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री मनोज रंजन (आई0डी0-5449), तत्कालीन सहायक अभियंता, BSEIDC LTD., PATNA द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-10648/2022 दायर वाद में दिनांक 06.04.2023 को आदेश पारित किया गया जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ है -

"This court, therefore directs respondent No-5 (Secretary, Water Resources Department) to take such appropriate decision on the appeal (Annexure-12 to IA No- 01/2022) within a period of one month from the date of receipt/production of a copy of this order.

This Court further directs the competent authority to consider the show cause reply of the petitioner and take an appropriate view there on. Petitioner will be at liberty to seek his remedy, if so advised, against the order if any passed effecting his interest.

मामला यह है कि बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड का पत्रांक-4435 दिनांक 09.06. 2022 द्वारा श्री मनोज रंजन, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर निलंबित करने की अनुशंसा के साथ विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसके आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1780 दिनांक 25.07.2022 द्वारा निलंबित करते हुए प्राप्त आरोप पत्र को ग्रहण कर विभागीय स्तर पर गठित कर विभागीय पत्रांक-1789 दिनांक 26.07.2022 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

उक्त न्यायादेश के आलोक में दिनांक 15.05.2023 को सुनवाई की गई। सुनवाई के क्रम में विभागीय पत्रांक-743 दिनांक 11.05.2023 द्वारा BSEIDC Ltd., Patna से वर्णित कार्य में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हितर कर अपने स्तर से कार्रवाई करने एवं कृत कार्रवाई संबंधी प्रतिवेदन मंतव्य सहित उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, जो अद्यतन अप्राप्त है। श्री रंजन के अपील सुनने के सक्षम प्राधिकार के प्रश्न पर सामान्य प्रशासन विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया जो निम्नवत है -

"विचाराधीन मामले में माननीय विभागीय मंत्री के अनुमोदन से श्री रंजन का निलंबन आदेश निर्गत है। नियमानुसार विचाराधीन निलंबन आदेश के विरूद्ध अपील नहीं की जा सकती है बल्कि ज्ञापन के रूप में पुनर्विलोकन अर्जी दायर की जा सकती है। वर्णित स्थिति में प्रासंगिक न्यायादेश में माननीय न्यायालय द्वारा सचिव, जल संसाधन विभाग को अपील की सुनवाई कर एक माह के अन्दर समुचित निर्णय लेने का निदेश दिया गया है। वर्णित स्थिति में व्यवहारिक रूप से यही विकल्प उपलब्ध है कि सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा न्यायादेश के अनुपालन में श्री रंजन के अभ्यावेदन की सुनवाई करते हुए समुचित निष्कर्ष पर पहुँच जाए। परन्तु निष्कर्ष संसूचित करने के पूर्व संचिका के माध्यम से निष्कर्ष पर माननीय विभागीय मंत्री का अनुमोदन भी प्राप्त कर लिया जाए। ऐसा करने से न्यायादेश का अनुपालन के साथ-साथ CCA Rules 2005 के नियम 24(2) का भी अनुपालन हो सकेगा।113 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अंकित मंतव्य के आलोक में दिनांक 23.06.2023 को श्री मनोज रंजन, निलंबित सहायक अभियंता के अपील अभ्यावेदन पर सुनवाई की गई। सुनवाई के क्रम में निम्न निर्णय लिया गया-

1. श्री मनोज रंजन (आई0डी0-5449), निलंबित सहायक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

2. श्री मनोज रंजन के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के प्रसंग में समर्पित स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर के संदर्भ में पत्रांक-743 दिनांक 11.05.2023 द्वारा BSEIDC LTD., PATNA से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में निर्णय लिया जायेगा।

उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। अतएव उक्त के आलोक में श्री मनोज रंजन (आई0डी0-5449), तत0 सहायक अभियंता BSEIDC LTD., PATNA सम्प्रति निलंबित सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, 07(A) परिवहन विभाग में नवनियुक्त अपर जिला परिवहन पदाधिकारी, मोटरयान निरीक्षक एवं प्रर्वान अवर निरीक्षक को विभिन्न जिला परिवहन कार्यालयों में नियुक्त/प्रतिनियुक्त किया गया है। उपर्युक्त नियुक्ति/प्रतिनियुक्ति की अवधि में ही विभागीय कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अतः उपर्युक्त के आलोक में सम्यक्‌ विचारोपरांत परिवहन विभाग में पदस्थापित नवनियुक्त अपर जिला परिवहन पदाधिकारी, नवनियुक्त मोटरयान निरीक्षक एवं नवनियुक्त प्रर्वान अवर निरीक्षक को A, B C D E, F, के तहत्‌ विनिर्दिष्ट दण्डनीय अपराधों के लिए शमन की शक्ति प्रदान की जाती है। 2. यह अधिसूचना इसके निर्गमन की तिथि से अगले आदेश तक के लिए प्रभावी होगी। ————— अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 29—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

114 (cid:464)बहार गजट, 4 2023

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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la0 1142&&म(cid:583), तेजश िसंह, (cid:466)पता- रमे(cid:219)(cid:289) कु मार िसंह, (cid:232)थायी पता- (cid:430)ारा रमे(cid:219)(cid:289) कु मार िसंह, (cid:163)ान गंगा भवन के सामने, गोकु ल पथ, पीओ+पीएस- एल.बी.एस. नगर, पटेल नगर, (cid:466)बहार, पटना-800023। तेजश और तेजश िसंह दोन(cid:585) एक ह(cid:547) (cid:229)य(cid:466)(cid:416) ह(cid:583) और मुझे जाना जाएगा तेजश िसंह के (cid:510)प म(cid:581) सभी उ(cid:429)े(cid:230)यो के िलए जो क(cid:551) साव(cid:91)जिनक नोटर(cid:547), पटना उ(cid:205)च (cid:219)यायालय, पटना (cid:430)ारा शपथ प(cid:287) सं(cid:201)या-3078/2023, (cid:465)दनांक-31.08.2023 के मा(cid:218)यम से स(cid:215)य और स(cid:215)या(cid:466)पत है।

तेजश िसंह। No. 1142--I, Tejash Singh S/o Ramendra Kumar Singh, Permanent Address- C/o Ramendra Kumar Singh opposite Gyan Ganga Bhawan, Gokul Path, PO+PS- L.B.S. Nagar, Patel Nagar, Bihar, Patna-800023. Tejash and Tejash Singh are mine and I will be known as Tejash Singh for all purpose which is true and verified by the public notary, Patna High Court, Patna through affidavit number-3078/2023, dated-31.08.2023.

Tejash Singh.

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la0 1143&&मैं यष्वी पिता-धीरज कुमार, राहुल नगर रो0 नं0-3 इन्डेयन गैस गोदाम के बगल में पो0- एम0आई0टी0 थाना-ब्रह्मपुरा, जिला-मुजफ्फपुर, बिहार। शपथ पत्र सं096, दिनांक 04.08.2023 के द्वारा घोषणा करती हूँ कि मैं अब अपना नाम यष्वी श्रीवास्तव करना चाहती हूँ आज के बाद मैं यष्वी श्रीवास्तव के नाम से जानी जाउंगी।

यष्वी। No. 1143--I, Yashwee D/o Dheeraj Kumar , Rahul Nagar Road no.03 Near- Indian Gas Godawn , P.o. MIT P.s Brahmpura Dist-Muzaffarpur, Bihar has been known as Yashwee Shrivastava vide affidavit no-96 Dt. 04.08.2023 I will be known by the name Yashwee Shrivastava from now on .

Yashwee.

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la0 1144&&मैं, रवि कुमार कुणाल, पिता विजय कुमार, ग्राम पो0-फुलाढ़, थाना- पारू, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार पिन कोड-843107 श0 पत्र संख्या 4470 दिनांक 17.08.2023 से घोषणा करता हूँ कि अब मैं रवि कुमार के नाम से जाना जाउंगा।

रवि कुमार कुणाल। No. 1144--I Ravi Kumar Kunal S/o Vijay Kumar Vill+Po-Phularh, P.s- Paroo Dist- Muzaffarpur , Bihar Pin-843107 by Affidavit No-4470 Date 17/08/2023 Declare that know day onward shall now by Ravi Kumar.

Ravi Kumar Kunal.

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la0 1145&&मैं, अनुपमा, पति-सुबोध कुमार, नियर डी.पी.एस. स्कुल, प्रियदर्शी नगर, पो.-दानापुर कैण्ट, थाना-रूपसपुर, जिला पटना का निवासी हूँ, शपथ पत्र सं.-15911 दिनांक-21.08.23 के द्वारा घोषणा करती हूँ कि मेरे पुत्र आदर्श के डी.पी.एस. स्कुल के पंजी में मेरा नाम अनुपमा सिंह दर्ज हो गया है जो गलत है, मेरे आधार कार्ड में मेरा नाम अनुपमा दर्ज है जो सही है, आगे सभी कार्यों हेतू मैं अनुपमा के नाम से जानी व पहचानी जाउंगी।

अनुपमा।115 (cid:464)बहार गजट, 4 2023 No. 1146--I, Ambika Kumari yadav W/o Hriday Narayan yadav, R/o Ward No-20 Chitragupta nagar Colony, Madhubani, Bihar 847211 do hereby Solemnly declare and affirm as per affidavit No-285 dt. 30-8-23 that my name is written in my son's Nirajan yadav, CBSE 10th and BSEB 12th all documents as Ambika Devi which is wrong As per my Aadhar Card (517389625325) and Pan (BPOPY9088N) my name is Ambika Kumari Yadav which is correct from now I will be known as Ambika Kumari Yadav for all future Purposes.

Ambika Kumari yadav.

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la0 1147&&मैं ज्ञान्ति देवी (GYANTI DEVI) पति-मनोज कुमार निवासी कोईली पो0-सागरपुर, थाना-मखदुमपुर जिला-जहानाबाद बिहार शपथ पत्र सं0 2792/28.08.23 द्वारा सूचित करती हूं कि मेरे पुत्र हर्षित कुमार (HARSHIT KUMAR) के केन्द्रीय माध्यमिक षिक्षा बोर्ड द्वारा निर्गत शैक्षणिक प्रमाण पत्र (अंक पत्र एवं माइग्रेसन) में मेरा नाम में मेरा नाम ज्ञान्ति कुमारी (GYANTI KUMARI) दर्ज हो गया है जो गलत है। मेरा सही नाम ज्ञान्ति देवी (GYANTI DEVI) है अब से मैं इसी नाम से जानी व पहचानी जाउंगी ।

ज्ञान्ति देवी (GYANTI DEVI).

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 29—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 October 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-10-04.40/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-10-04.40.