(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 21 आि(cid:435)न 1945 (श0)
(सं0 पटना 829) पटना, शु(cid:272)वार, 13 अ(cid:200)तूबर 2023 I ——— vf/klwpuk 13 vDrwcj 2023 . (i) जहाँ कि माननीय उच्च न्यायालय, पटना एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के समक्ष वादों के लंबित रहने की स्थिति में दिनांक-11.04.2019 से राज्याधीन सेवाओं में प्रोन्नति नहीं दी जा रही है।
(ii) जहाँ कि राज्याधीन सेवाओं में प्रोन्नति की प्रक्रिया विगत कई वर्षों से अवरूद्ध है एवं राज्याधीन सेवाओं में 01.04.2023 की स्थिति के अनुसार प्रोन्नति के पदों पर रिक्ति की संख्या लगभग 76,595 है।
(iii) जहाँ कि विगत कई वर्षों में बड़ी संख्या में राज्य के लोक सेवक बिना प्रोन्नति के सेवानिवृत हो चुके हैं।
(iv) जहाँ कि राज्याधीन सेवाओं के प्रोन्नति के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। (v) जहाँ कि उच्चतर पदों पर रिक्तियों की व्यापकता के कारण राज्य सरकार का कार्य प्रभावित हो रहा है।
(vi) जहाँ कि राज्य के प्रशासनिक एवं लोक हित में इस विषय से संबंधित वादों में माननीय न्यायालयों द्वारा अंतिम आदेश पारित होने तक की अवधि के लिए उच्चतर प्रोन्नत पदों के लिए कार्यकारी व्यवस्था किया जाना आवश्यक समझा जा रहा है।
अतएव अब भारतीय संविधान की अनुच्छेद-309 के परन्तुक के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के आलोक में बिहार के राज्यपाल के आदेश से निम्नलिखित नियमावली बनायी जाती है :-
(1) यह नियमावली अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 कही जा सकेगी। (2) इसका विस्तार राज्य के सभी सेवाओं/कैडर में समूह-'क', 'ख' एवं 'ग' तक सीमित रहेगा।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 13 अ(cid:200)तूबर 2023 (3) इस नियमावली का विस्तार राज्य पोषित संस्थानों, वैधानिक संकायों, समितियों एवं ऐसे संस्थानों में भी होगा, जो राज्य सरकार के वित्तीय समर्थन से संचालित एवं कार्यान्वित की जाती है।
यह नियमावली बिहार गजट में प्रकाशन के पश्चात तत्काल प्रभाव से लागू होगी। (1) से अभिप्रेत है, । (2) के पद से अभिप्रेत है, (3) से अभिप्रेत है, समूह-
(4) से अभिप्रेत है, (5) विभागीय प्रोन्नति समिति/स्क्रीनिंग समिति से अभिप्रेत है, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना एवं अन्य विभागों के अंतर्गत प्रोन्नति देने हेतु बनाई गयी समिति।
(6) से अभिप्रेत है, (7) से अभिप्रेत है,
(1) इस नियमावली का उद्देश्य राज्याधीन सेवाओं में लोक सेवकों के नियमित प्रोन्नति होने तक पूर्णतः अस्थायी व्यवस्था करना है।
(2) यह अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था किसी लोक सेवक को उच्चतर सेवा/कैडर में विहित वेतनमान सहित उच्चतर पद का प्रभार देने के लिए की गयी है। ऐसी अस्थायी व्यवस्था की समाप्ति के पश्चात उच्चतर पद का प्रभार प्राप्त करने मात्र के आधार पर ऐसे कर्मी/पदाधिकारी, उच्चतर पद पर विधिवत प्रोन्नति पाने के हकदार नहीं हाेंगे।
(i) इस नियमावली के अधीन अस्थायी कार्यकारी व्यवस्था के अंतर्गत उच्चतर पद धारित लोक सेवक को उच्चतर पद का वेतनमान एवं सभी सुविधाएँ पाने के योग्य होंगे।
(ii) भविष्य में नियमित प्रोन्नति पाने के पश्चात अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत उच्चतर पद का लाभ प्राप्त करने वाले लोक सेवक यह सुविधा लगातार प्राप्त करते रहेंगे।
(iii) नियमित प्रोन्नति की प्रक्रिया में अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत उच्चतर पद का प्रभार धारित लोक सेवक किसी कारणवश प्रोन्नति प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उच्चतर पद से उसके मूल पद पर वापस कर दिया जाएगा, यद्यपि उच्चतर पद के आधार पर प्राप्त की गयी वेतन-भत्ते एवं सुविधाओं की वसूली उनसे नहीं की जाएगी।
(iv) इस नियमावली के अधीन अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था के लिए रोस्टर क्लीयरेंस की व्यवस्था नियमित प्रोन्नति की व्यवस्था आरम्भ होने तक स्थगित रखी जाएगी।
(v) (क) अनुसूचित जाति के पदाधिकारियों/कर्मचारियों के लिए कैडर (पद) के कुल स्वीकृत पद का 16 प्रतिशत की दर से एवं अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों/कर्मचारियों के लिए कैडर (पद) का 01 प्रतिशत की दर से अर्थात कुल 17 प्रतिशत की दर से पद सुरक्षित रखे जाएंगे।
( -कोटि- स्वीकृत पद - अनुमान्यता - कार्यरत - रिक्ति, जिसे सुरक्षित रखना है)
SC 200 200 x 16% = 32 12 20 ST 200 200 x 1% = 2 0 2
(ख) उपर्युक्त कंडिका-(v) (क) में दिए गए उदाहरण के अनुसार सुरक्षित रखे जाने वाले पदों के अतिरिक्त 83% पदों को आधार मान कर उच्चतर पद का प्रभार दिए जाने के समय यदि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए क्रमशः 16% एवं 01% पद स्वतः नहीं भरे जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में Adequate Representation अर्थात 16% एवं 01% पूरा करने के लिए उतनी संख्या में रिक्तियों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए अलग से सुरक्षित रख लिया जाएगा, जिसके संबंध में भविष्य में निर्णय लिया जा सकेगा।
उदाहरणस्वरूप यदि किसी संवर्ग में 100 पद स्वीकृत हों, तो सर्वप्रथम 16 एवं 01 पद सुरक्षित रखते हुए केवल 83 पदों पर ही उच्चतर पद का प्रभार दिया जा सकेगा। उच्चतर पद का प्रभार देते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि अनुसूचित जाति को स्वतः 16 प्रतिशत एवं अनुसूचित जनजाति को 01 प्रतिशत प्रतिनिधित्व नहीं प्राप्त हो3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 13 अ(cid:200)तूबर 2023 रहा है, तो जितना शेष (Unfilled) रह जाएगा, उन पदों को भी यथास्थिति अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिसके संबंध में भविष्य में निर्णय लिया जा सकेगा।
(ग) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए विहित पदों को सुरक्षित रखने के बावजूद मूल कोटि की वरीयता के आधार पर गैर आरक्षित वर्ग सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कर्मियों को भी समान रूप से उच्चतर पद के प्रभार का लाभ प्राप्त हो सकेगा।
(घ) उच्चतर पद पर प्रभार प्राप्त कर बितायी गयी सेवा अवधि को नियमित प्रोन्नति के समय कालावधि पूरी करने हेतु नियमानुसार परिगणित किया जा सकेगा।
(vi) अस्थायी स्थानापन्न व्यवस्था के अंतर्गत विहित वेतनमान सहित उच्चतर पद का प्रभार लोक सेवकों के सेवा अथवा कैडर में मूल कोटि की वरीयता के आधार पर दी जाएगी।
(vii) इस व्यवस्था के अंतर्गत उच्चतर पद का प्रभार प्राप्त करने के लिए ऐसे लोक सेवक पात्र नहीं होंगे, जिनके विरूद्ध विभागीय कार्रवाई/आपराधिक कार्रवाई लंबित हो अथवा कोई दंड प्रभावी हो।
(viii) उक्त कार्यकारी व्यवस्था को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु न्यूनतम कालावधि को दृष्टिगत रखा जाएगा, किन्तु सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7433 दिनांक-05.06.2018 की कंडिका-3 (iv) के प्रावधानानुसार, "धारित पद पर एक वर्ष के कार्य अनुभव प्राप्त करने की शर्त में छूट दी जा सकेगी।" उदाहरणस्वरूप वेतन स्तर-11 से वेतन स्तर-12 में के लिए न्यूनतम कालावधि 05 वर्ष की है तथा वेतन स्तर-12 से वेतन स्तर-13 के लिए भी कालावधि 05 वर्ष की है, ऐसी स्थिति में वेतन स्तर-11 के पदाधिकारी के संबंध में यह देखा जाएगा कि उस पदाधिकारी द्वारा यदि 10 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूर्ण कर ली गयी हो, तो उसे वेतन स्तर-12 में एक साल के कार्यानुभव की छूट देते हुए वेतन स्तर-12 एवं इसके पश्चात वेतन स्तर-13 के उच्चतर पद का लाभ एक साथ दिया जा सकेगा। इस प्रकार दिये गये उच्चतर पद के प्रभार को Level jumping नहीं माना जाएगा। यह व्यवस्था एकबारगी उपाय (One time measure) के रूप में केवल कार्यरत कर्मचारियों/पदाधिकारियों के लिए लागू की जाएगी। (ix) आरक्षण एवं परिणामी वरीयता के आधार पर पूर्व से कार्यरत कर्मियों को निचले पद पर प्रत्यावर्तित (Revert) नहीं किया जाएगा, अपितु मूल कोटि की वरीयता के अनुसार यथा स्थिति उच्चतर पद का लाभ दिया जाएगा।
(x) कार्यकारी व्यवस्था की यह प्रक्रिया माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील संख्या-4880/2017 राज्य सरकार एवं अन्य बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य तथा अन्य संबद्ध वादों में पारित होने वाले अंतिम आदेश के फलाफल से प्रभावित होने की शर्त पर औपबंधिक रूप से की जाएगी। अतएव सभी विभागों से अपेक्षित है कि इस संकल्प के निर्गत होने के पश्चात यह प्रक्रिया अधिकतम दो माह के अंतर्गत पूर्ण कर ली जाय, अन्यथा दो माह के पश्चात उपर्युक्त कंडिका-6(viii) में दी जाने वाली छूट स्वतः समाप्त हो जाएगी।
एतद संबंधी पूर्व निर्गत आदेश/संकल्प/परिपत्र आदि के असंगत अंश इस हद तक संशोधित समझे जाएंगे।
उपर्युक्त प्रावधान संकल्प निर्गत की तिथि से प्रभावी होगा। fcgkj&jkTiky ds vkns'k ls] MkW0 ch0 jktsUnj] iz/kku lfpoA
————
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,