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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 18 October 2023

Published 18 October 2023

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-10-18.42
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 26 1945 (श0) सं(cid:201)या 42 पटना, बुधवार, ————————

18 2023 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-28 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

---

भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 29-29 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 30-31 पूरक

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पूरक-क 32-372 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं। —————

सं0 1/मुक॰-13/2021-4350(s)--सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰संख्या-9248/2021 (राजेन्द्र प्रसाद राजन बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) से उत्पन्न एम॰जे॰सी॰ संख्या-1422/2022 में दिनांक 12.07.2023 को माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में श्री राजेन्द्र प्रसाद राजन, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता (असैनिक) को दिनांक 27.11.2017 के भूतलक्षी प्रभाव से आर्थिक लाभ सहित अधीक्षण अभियंता (असैनिक) के पद पर प्रोन्नति दी जाती है। सं0 01/BSRDC-21-01/2018-4274(s)--बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट लिमिटेड, पटना के आर्टिकल ऑफ एशोसिएशन में निहित प्रावधान के अनुसार श्री सोहैल अख्तर, अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट लिमिटेड, पटना के निदेशक मंडल में पदेन सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 1/स्था॰-13/2002/(खण्ड-II))-4272(s)--बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के Clause 81 of Articles of Association of Bihar Rajya Pul Nirman Nigam Limited & The New Companies ACT 2013 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री अभय कुमार सिंह, भा॰प्र॰से॰, अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को उक्त निगम के निदेशक के रूप में मनोनित किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। '' सं0 -4367(s)--कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल, डेहरी-ओन-सोन के पदस्थापन अवधि में OPRMC (Output & Performance Based Road Assets Maintenance Contract) के अंतर्गत पैकेज संख्या-58 में आरा-सासाराम राज्य उच्च पथ के दीर्घकालीन पथ संधारण में पायी गयी गंभीर अनियमितता के लिए श्री तालकेश्वर कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सोनपुर को विभागीय अधिसूचना संख्या-9683 (एस), दिनांक 20.12.2018 के द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9954 (एस) दिनांक 31.12.2018 के द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-4676 (एस), दिनांक 16.09.2021 के द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त विभागीय अधिसूचना संख्या-2865 (एस) दिनांक- 20.06.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध निम्नलिखित दंड संसूचित किया गयाः- '' 2. सक्षम प्राधिकार के द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि दिनांक 20.12.2018 से 15.09.2021 में मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होने एवं उक्त अवधि को अन्य प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि के रूप में परिगणित किये जाने के रूप में विनियमित करने का निर्णय लिया गया । 3.़ सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-7876 दिनांक- 20.05.2013 में अंतर्निहित प्रावधान के आलोक में सक्षम प्राधिकार द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में लिए गए उक्त निर्णय के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-5014 (एस)3 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 दिनांक 29.09.2022 द्वारा श्री कुमार से लिखित अभिकथन की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री कुमार द्वारा पत्रांक-शून्य, दिनांक 05.12.2022 के माध्यम से अपना लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया। 4. श्री कुमार ने अपने लिखित अभ्यावेदन में मुख्य रूप से उल्लेखित किया है कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा दिनांक 22.04.2019 को ही जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध करा दिया गया था। इस प्रकार विभागीय कार्यवाही पूर्ण हो जाने के बावजूद लगभग 29 महीने तक उन्हें निलंबित रखा गया, जिसके लिए वे जिम्मेवार नहीं है। निलंबन से मुक्त करने हेतु उनके द्वारा कई बार अनुरोध किया गया, परन्तु विभाग द्वारा तत्समय निलंबन से मुक्त नही किया गया एवं जाँच प्रतिवेदन पर निर्णय भी नहीं लिया गया। इस प्रकार विभाग द्वारा एक लम्बी अवधि तक अनावश्यक रूप से उन्हें निलंबित रखा गया, जो अनुचित है। इसके अतिरिक्त श्री कुमार ने सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-9180, दिनांक 03.07.1986 एवं पत्रांक-107, दिनांक 06.11.1993 में अंकित दिशा निदेशों का संदर्भ देते हुए उल्लेख किया है कि विभागीय कार्यवाही दो वर्ष तक पूर्ण नहीं होने की स्थिति में आरोपी पदाधिकारी को निलंबन से मुक्त कर दिया जाना है, परन्तु विभाग द्वारा उन्हें लगभग 02 वर्ष 09 महीना तक अनावश्यक रूप से निलंबित रखा गया, जिसके लिए वे जिम्मेवार नहीं हैै, इसलिए निलंबन अवधि को पूर्ण वेतन भत्तों के साथ विनियमित किया जाय। 5. श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा यह कहा जाना कि -जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बावजूद लगभग 29 महीने तक उन्हें निलंबित रखा गया, तथ्यगत सही है, परन्तु दूसरी ओर महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि श्री कुमार के निलंबन अवधि के 12 माह के पश्चात बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के 10 (1) (i) में अन्तर्निहित प्रावधान के आलोक में श्री कुमार को देय जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 75 प्रतिशत भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गयी। इस प्रकार निलंबन मुक्त करने में हुए विलम्ब के लिए विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की गयी। साथ ही चूंकि प्रश्नगत मामले में श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये गये, जिसके लिए उनके विरूद्ध दण्ड भी संसूचित किया गया है। ऐसी स्थिति में निलंबन अवधि को पूर्ण वेतन-भत्तो के साथ विनियमित करने का श्री कुमार का दावा नियमानुकूल नहीं है। अतः श्री तालकेश्वर कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सोनपुर के निलंबन अवधि (20.12.2018 से 15.09.2021 तक) को मात्र जीवन निर्वाह भत्ता भुगतान करने एवं इस अवधि को अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि के रूप में विनियमित किया जाता है। 6. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 -3773(s)--पथ प्रमंडल भागलपुर अंतर्गत विभिन्न तीन पथों-यथा-भागलपुर-अगरपुर कोतवाली पथ, त्रिमुहान-एकचारी-धनौरा-महगाँवा पथ एवं नवगछिया-तीनटंगा पथ में कराये जा रहे कार्यो की तकनीकी परीक्षण कोषांग, निगरानी विभाग के द्वारा जाँचोपरांत पत्रांक-1248 दिनांक-21.02.2012 द्वारा समर्पित तत्‌संबंधी जाँच प्रतिवेदन एवं निगरानी विभाग के ही पत्रांक-1392 दिनांक-29.02.2012 के आलोक में श्री जनार्दन प्रसाद सिंह कश्यप, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता से उनके दायित्वों के अनुरूप विभागीय पत्रांक 5849 (एस) दिनांक 28.05.2012, पत्रांक 6754 (एस) दिनांक 14.06.2012 एवं स्मार पत्रांक 11048 (एस) दिनांक 08.10.2012 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री कश्यप ने पत्रांक 1608 दिनांक 06.10.2012 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया। श्री कश्यप द्वरा समर्पित स्पष्टीकरण के विभागीय समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप का दोषी पाते हुए उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत कर विभागीय अधिसूचना संख्या-2298 (एस) दिनांक 05.03.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

2. उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री कश्यप के पत्रांक-01, दिनांक 11.06.2019 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया। 3. श्री कश्यप द्वारा आरोप के बिन्दु (i) यथा-कराये गये मिट्‌टी कार्य का Proper slope एवं compaction नहीं पाया जाने के बिन्दु पर मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया है कि चूंकि प्रश्नगत कार्य तत्समय प्रगति पर था और यह प्रावैधिक रूप से स्थापित है कि जब तक मिट्‌टी का कार्य पूर्ण रूप से सम्पन्न नहीं हो जाता है तब तक Proper slope एवं compaction कार्य कराये जाने की गुंजाईश बनी रहती है। ऐसी स्थिति में ही जाँच दल द्वारा भी मिट्‌टी कार्य के Proper sloping एवं compection को सुधार कराये जाने का सुझाव निरीक्षण के समय दिया गया था, जिसे मिट्‌टी कार्य के पूर्ण रूप से सम्पन्न होने के पूर्व सुधार कर दिया गया था। इसी प्रकार आरोप के बिन्दु (ii) यथा- Price Neutralization Formula के अनुरूप Difference Cost of Bitumen तथा Difference Cost of emulsion की राशि के भुगतान के क्रम में त्रुटिपूर्ण गणना किये जाने के बिन्दु पर श्री कश्यप के द्वारा मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि Price Neutralization Formula एक जटिल Formula था, और इन्हीं कारणों से विभागीय पत्रांक-6818 दिनांक-31.10.2013, ज्ञापांक-3943, दिनांक 18.03.2008 एवं पत्रांक-3376, दिनांक 17.08.2010 के द्वारा उक्त Formula में अनेक संशोधन में Clarification निर्गत किये गये है। इन्हीं परिस्थितिजन्य कारणों से तत्समय त्रुटिपूर्ण गणना हो गयी थी,4 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 इसमें कोई अन्यथा मंशा नहीं थी। साथ ही यह भी कहा गया कि बिहार लोक लेखा संहिता की कंडिका-247 (बी) एवं एकरारनामा के Clause 07 के तहत संवेदक को किये गये अतिरिक्त भुगतान को समायोजित कर लिया गया है। 4. श्री कश्यप के पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरांत पाया गया कि चूंकि पथ में विभिन्न कार्य कराये जाने के दौरान कार्य स्थल पर विभिन्न प्रकार के भारी वाहनों जैसे-ट्रक, ट्रैक्टर, जे॰सी॰बी॰ आदि का लगातार स्वाभाविक रूप से Movement होता रहता है, जिसके कारण कराये गये मिट्‌टी कार्य में Proper sloping एवं compection जैसे त्रुटियाँ उत्पन्न होने से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए इस बिन्दु पर आरोपी श्री कश्यप द्वारा अंकित किया गया कथन तर्कसंगत प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त यह भी पाया गया कि Price Neutralization Formula के त्रुटिपूर्ण गणना के कारण संवेदक को किये गये अधिक राशि के भुगतान का नियमानुसार समायोजन कर लिया गया है। यद्यपि Price Neutralization Formula विभाग के लिए नया होेने के कारण गणना किये जाने में कतिपय कठिनाईयाँ उत्पन्न होती होंगी, परन्तु यह इतना भी जटिल नहीं है कि इसकी गणना पूर्ण शुद्धता के साथ नहीं किया जा सके। चूंकि मामला भुगतान से संबंधित था। इसलिए Engineer-in charge के रूप में आरोपी श्री कश्यप से यह आपेक्षित था कि इस बिन्दु पर अतिरेक सावधानी एवं सतर्कता बरतते हुए Price Neutralization Formula की गणना की जाय ताकि त्रुटिपूर्ण गणना से बचा जा सके। इस प्रकार आरोपी श्री कश्यप का पुनर्विचार अभ्यावेदन इस हद तक स्वीकार योग्य नहीं है। अतः सम्यक विचारोपरांत श्री जनार्दन प्रसाद सिंह कश्यप, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या- 2298 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-2299 (एस), दिनांक 05.03.2019 द्वारा संसूचित के दण्डादेश को प्रमाणित लापरवाही के समानुपातिक आरोप वर्ष-2012 के लिए के रूप में दण्ड पुनरीक्षित किया जाता है। सं0 निग/सारा-(निगम) नि0वि0था0कां0-33/2023-5955(s)--प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक-2703 (अनु0) दिनांक-05.08.2023 के साथ संलग्न पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक-1484 दिनांक-02.08.2023 के द्वारा श्री श्रीकान्त शर्मा, सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर (कार्यपालक अभियंता) बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध 1,47,41,569/- (एक करोड़ सैतालीस लाख इकतालीस हजार पाँच सौ उनहतर रूपये) के प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में निगरानी थाना कांड सं0-028/2023, दिनांक-24.07.2023 धारा-13 (2) सहपठित धारा-13(1)(बी), भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित अधिनियम-2018) दर्ज किये जाने की सूचना दी गई। इसके साथ ही प्रतिवेदित किया गया है कि श्री शर्मा के हनुमान नगर, भागलपुर स्थित आवास पर तलाशी के क्रम में नगद 97,80,000/- (सन्तानवे लाख अस्सी हजार रूपये) नगद 24 कैरेट सोना के 08 बिस्कुट मूल्य-34,53,975/-(चौतीस लाख तीरपन हजार नौ सौ पचहत्तर रुपये) एवं 18 कैरेट सोने का आभूषण मूल्य-31,63,210/- (इकतीस लाख तीरसठ हजार दो सौ दस रुपये) एवं चॉदी का आभूषण मूल्य-1,33,237/- (एक लाख तैतीस हजार दो सौ सैतीस रुपये), जमीन संबंधी 25 दस्तावेज, विभिन्न बैंकों में संधारित 28 बैंक खाते, जीवन बीमा में निवेश संबंधी 15 दस्तावेज एवं अन्य वित्तीय संस्थानों में निवेश से संबंधित कुल 10 दस्तावेज बरामद किये गये हैं।

2. प्रश्नगत मामले में समीक्षोपरान्त श्री श्रीकान्त शर्मा, सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर (कार्यपालक अभियंता) बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, भागलपुर को बिहार सरकारी सेवक (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(ग) में निहित प्रावधान के तहत तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री शर्मा का मुख्यालय अधीक्षण अभियंता, पूर्व बिहार अंचल का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, भागलपुर निर्धारित किया जाता है।

4. श्री शर्मा को निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्त्तों के तहत अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 5904(s)--श्री राजेन्द्र कुमार राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अरवल सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पूर्व बिहार अंचल, भागलपुर के पथ प्रमंडल, अरवल के पदस्थापन अवधि में जिला पदाधिकारी, अरवल के पत्रांक-1125 दिनांक 05.10.2020 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि उनके द्वारा दिनांक 04.10. 2020 को पथ प्रमंडल, अरवल अन्तर्गत मानिकपुर-बिथरा-सेनारी पथ का अवलोकन किया गया एवं पथ की स्थिति ठीक नहीं पायी गयी । जिला पदाधिकारी, अरवल से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-272 (गो॰), दिनांक 06.10.2020 द्वारा निम्नलिखित अनियमिताओं के लिए श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।5 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 (i) उक्त पथ के मजबूतीकरण कार्य का एकरारनामा दिनांक 27.05.2020 को किया गया है, इसके बावजूद दिनांक 04.10.2020 तक पथ Restoration नहीं कराना, कार्य के दायित्व के निर्वहन में गंभीर चूक है। (ii) विभाग का स्पष्ट निदेश रहा है कि चुनाव के मद्‌देनजर सभी पथों का उत्कृष्ट रख-रखाव किया जाय। अपने विभाग के इस निदेश का पालन नहीं किया है।

2. उक्त के संदर्भ में श्री राय के पत्रांक-840 अनु॰, दिनांक 12.10.2020 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया। श्री राय से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-3018 (एस) अनु॰ दिनांक 29.06.2021 द्वारा श्री राय के स्पष्टीकरण के आलोक में अधीक्षण अभियंता, मगध अंचल गया से स्थल जाँच कर जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। अधीक्षण अभियंता, मगध अंचल, गया द्वारा पत्रांक-966 अनु॰, दिनांक 17.08.2021 द्वारा स्थल जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। अधीक्षण अभिंयता के प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रतिवेदित किये जाने की तिथि दिनांक 17.08.2021 तक विभिन्न 09 कार्य मदो में से अधिकार कार्य मद की प्रगति Nil है। तत्पश्चात उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी श्री राय के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-733 (एस) अनु॰, दिनांक 04. 02.2023 के द्वारा श्री राय से नये सिरे से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री राय द्वारा पत्रांक-01 (आवास) कोचस, दिनांक 25.02.2023 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया।

3. श्री राय द्वारा अपने स्पष्टीकरण में मुख्य रूप से आलोच्य पथ की स्थिति खराब पाये जाने एवं संवेदक द्वारा कार्य नहीं किये जाने के लिए संबंधित संवेदक को जवाबदेह बताया गया है। यह भी अंकित किया गया है कि दिनांक 17.08.2021 से 13.02.2023 तक (लगभग 18 माह) भी अधिकांश कार्य मदों की स्थिति शून्य है, जिसके फलस्वरूप एकरारनामा को विखंडित भी किया जा सकता है।

4. श्री राय प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि आलोच्य पथ कार्य हेतु दिनांक 27.05.2020 को एकरारनामा किया गया और आरोपी के स्पष्टीकरण के अनुसार वे दिनांक 24.05.2021 तक पथ प्रमंडल, अरवल में पदस्थापित रहे। इस प्रकार लगभग 11 माह श्री राय उक्त प्रमंडल में पदस्थापित रहे, किन्तु संवेदक के द्वारा आलोच्य कार्य में अपेक्षित रूचि नहीं लिये जाने की स्थिति में उनके विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी। आरोपी श्री राय के द्वारा अपने कार्यकाल में संवेदक को डिबार किये जाने की कार्रवाई की गयी, जबकि इनके बाद के कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक के एकरारनामा को विखंडित किये जाने की बात कही गयी। इससे प्रतीत होता है कि आरोपी श्री राय के द्वारा आलोच्य पथ कार्य की प्रगति धीमी रहने के संबंध में जवाबदेह संवेदक के विरूद्ध अपेक्षित कार्रवाई नही की गयी। इस हद तक आरोपी श्री राय का स्पष्टीकरण उत्तर स्वीकारयोग्य प्रतीत नहीं होता है।

अतः सम्यक विचारोपरांत श्री राय के स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :-

सं0 3771(s)--श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति : तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम के पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमिततओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4394 (एस), दिनांक 04. 06.2013 द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6064 (एस) दिनांक 26.07.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। 2. संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त-सह- संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-319 अनु॰, दिनांक 28.03.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ मेे श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-2928 (एस) दिनांक 12.04.2018 द्वारा लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी, जिसके आलोक में इनके पत्रांक-शून्य,दिनांक 12.06.2018 द्वारा विभाग में द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गय। 5. श्री प्रसाद के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा गठित आरोपों के संदर्भ में समीक्षोपरांत प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित का प्रतिवेदित निष्कर्ष के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर बचाव बयान में कोई ठोस खण्डनयुक्त तर्क अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, तद्‌ालोक में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक- शून्य दिनांक 12.06.2018 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-6131 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-6132 (एस), दिनांक 15.12.2022 द्वारा श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति ः तकनीकी सलाहकार, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना को प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (viii) के तहत निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया गया :-

6

(cid:464)बहार गजट, 18 2023 श्री प्रसाद के विरूद्ध संसूचित उक्त दण्डादेश के आलोक में महालेखाकार कार्यालय के पत्र द्वारा श्री प्रसाद के सेवानिवृति की तिथि 31.01.2024 होने का संदर्भ देते हुए सूचित किया गया कि श्री प्रसाद के दिनांक 01.07.2023 का वेतनवृद्धि रोकने के पश्चात शेष 02 वेतनवृद्धि रोका जाना संभव नहीं हो पा रहा है, अतः इस बिन्दु पर विभागीय मंतव्य से अवगत कराया जाय।

7. महालेखाकार कार्यालय से प्राप्त पत्र के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत श्री प्रसाद के दिनांक 31.01.2024 को सेवानिवृत हो जाने की स्थिति में उनके विरूद्ध संसूचित दण्डादेश को पुनरीक्षित करने की आवश्यकता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 28 के तहत करते हुए निम्नलिखित दण्ड संसूचित किये जाते हैः- 8. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 3889(s)--श्री बिन्दा सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता जिला शहरी विकास अभिकरण, मुजफ्फरपुर-सह-नगर निगम मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक 31.03.2021) के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-4683, दिनांक 29.08.2018 के द्वारा नगर निगम मुजफ्फरपुर द्वारा

2. श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :- (i) श्री बिन्दा सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जिला शहरी विकास अभिकरण-सह-नगर निगम मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के उक्त पदस्थापन अवधि में नगर निगम, मुजफ्फरपुर द्वारा NIT No-03/2017-18 अन्तर्गत 50 अद्‌द ऑटो टीपर के क्रय हेतु ई॰ निविदा प्रकाशित की गई। उक्त प्रकाशित निविदा में 3 (तीन) निविदादाताओं द्वारा निविदा में भाग लिया गया। तीनों निविदादाता तकनीकी बीड में योग्य पाये गये। तदोपरांत इनका वित्तीय बीड खोला गया। इसमें न्यूनतम दर में तिरहुत ऑटोमोबाईल्स का रु0 7,65,999/- प्रति टिपर (with AMC) था, परन्तु क्रय समिति की दिनांक 17.10.2017 की बैठक में न्यूनतम दर वाले निविदा दाता मेसर्स तिरहुत ऑटोमोबाईल्स से दर वार्ता नहीं कर, L-2फॉर्म वाले मेसर्स मौर्या मोटर्स, पटना से जिनका रु0 7,70,000/-प्रति टिपर दर था, वार्ता की गई, तद्‌नुसार आपूर्त्ति आदेश दिया गया। (ii) उल्लेखनीय है कि पी॰डब्लू॰डी॰ कोड के कंडिका-164 में यह प्रावधान है कि न्यूनतम दर देने वाले निविदाकार से ही दर वार्ता किया जा सकता है, परन्तु क्रय समिति द्वारा पी॰डब्लू॰डी॰ कोड का अनुपालन नहीं कर एल॰-2 फॉर्म मेसर्स मौर्या मोटर्स, पटना से दर वार्ता कर आपूर्त्ति आदेश दिये जाने का निर्णय लिया गया। समिति का यह निर्णय नियम विरूद्ध है तथा निविदा के निष्पक्षता को समिति द्वारा प्रभावित किया गया। समिति का कृत्य जान-बूझकर सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबॉँट को प्रमाणित करता है। (iii) श्री बिन्दा सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नगर निगम, मुजफ्फरपुर उक्त समिति के सदस्य थे तथा जिम्मेवार एवं तकनीकी पदाधिकारी के हैसियत से इस प्रकार का अनियमित निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था, परन्तु इनके द्वारा समिति के सदस्य के रूप में नियम विरूद्ध निर्णय पर सहमति दी गई। श्री सिंह का यह कृत्य सरकारी दिशा निदेशों का उल्लंघन करने एवं जान-बूझकर वित्तीय अनियमितता होने तथा सरकारी राशि का अपव्यय एवं बंदरबाँट को प्रमाणित करता है।''

3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक- 1523 अनु॰ दिनांक 03.08.2022 के द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री सिंह द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में अपने बचाव बयान में मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया है कि L1 निविदादाता निगम द्वारा दिये गये Technical Specification के अनुरूप अर्हता नहीं रखते थे, जिसके कारण L2 निविदादाता से दर वार्ता कर L1 द्वारा उद्धृत दर रुपये 7,65,999/-टीपर से कम अर्थात 7,65,000/- टीपर पर L2 को टीपर आर्पूर्ति हेतु आदेश निर्गत करने का आदेश समिति द्वारा लिया गया, जो सरकार के हित में श्रेयस्कर था। इसमें सरकारी राशि का अपव्यय नहीं हुआ है। श्री सिंह के बचाव-बयान की समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा करते हुए मुख्य रूप से यह कहा गया है कि -(i) नियमानुसार दो बीड प्रणाली (तकनीकी बीड एवं वित्तीय बीड) अन्तर्गत प्राप्त निविदा में निविदा के निष्पादन हेतु तकनीकी बीड मूल्यांकन समिति द्वारा प्रथम तकनीकी बीड को खोलकर निविदा शर्त्तो के अनुसार सभी निविदादाताओं द्वारा संलग्न कागजातों एवं तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। तकनीकी बीड मूल्यांकन में सफल निविदादाताओं का ही वित्तीय बीड खोला जाता है एवं वित्तीय बीड में निविदित7 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 दर के आधार पर L-1 एवं L-2 का निर्धारण किया जाता है। समिति द्वारा दिनांक 17.10.2017 को उक्त निविदा के मूल्यांकन हेतु आहूत बैठक की कार्यवाही से स्पष्ट है कि सभी निविदादाताओं के द्वारा संलग्न कागजातों के आधार पर ही उन्हें तकनीकी रूप से सफल मानकर उनके वित्तीय बीड को खेाला गया है तथा वित्तीय बीड में L-1, L-2 एवं L-3 के निर्धारण के पश्चात निविदादाताओं के Technical specification की समीक्षा की गई, जो नियमानुकूल नहीं है। तकनीकी बीड में L-1, L-2 को सफल घोषित किया गया जबकि L-1 निगम द्वारा निर्धारित technica Specification के अनुसार खरा नहीं उतर रहा था, फिर भी L-1 को असफल घोषित नहीं किया गया, जो नियम विरूद्ध है। आरोपित पदाधिकारी समिति में तकनीकी पदाधिकारियों में सबसे वरीय पदाधिकारी थे, उन्हें निविदा के नियमों का ध्यान रखना चाहिए था, लेकिन वह इसमें असफल रहे। (ii) आरोपित पदाधिकारी द्वारा L-2 से दर वार्ता करने का कारण L-1 द्वारा Technical Specification के अनुरूप अर्हता नहीं रखना बताया गया है, जबकि नियमानुसार L-1 द्वारा Technical Specification की अर्हता नहीं रखने पर उसे तकनीकी बीड में ही असफल घोषित कर दिया जाना चाहिए था। उपर्युक्त विवेचना के उपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध गठित सभी 03 (तीन) आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया। विभागीय समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक- 5216 (एस) दिनांक 14.10.2022 के द्वारा श्री सिंह से लिखित अभिकथन के रूप द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिंह ने पत्रांक- शून्य (अनु॰) दिनांक 04.11.2022 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया। 4. श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से यह तथ्य अंकित किया गया कि L1 निविदादाता निगम द्वारा दिये गये Technical Specification के अनुरूप अर्हता नहीं रखते थे, जिसके कारण L2 निविदादाता से दर वार्ता कर L1 द्वारा उद्धृत दर रुपये 7,65,999/- टीपर से कम अर्थात्‌ 7,65,000/- टीपर पर L2 को टीपर आपूर्त्ति हेतु आदेश निर्गत करने का निर्णय समिति द्वारा लिया गया, जो सरकार के हित में श्रेयस्कर था, इससे सरकारी राशि का अपव्यय्‌ नहीं हुआ है। 5. श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा के तहत कोई नया तथ्य/तर्क नहीं रखा गया है, बल्कि इनके द्वारा पूर्व में संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव-बयान में अंकित तथ्य/तर्को को मात्र नये सिरे से दोहराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के बचाव बयान में अंकित तथ्यों/तर्को को समुचित विवेचना के उपरांत ही गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया है, जिसका तथ्यात्मक खण्डन आरोपी श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में नहीं किया गया है। इस प्रकार आरोपी श्री सिंह का द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया। अतः श्री सिंह के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य, दिनांक 14.11.2022 को अस्वीकृत करते हुए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत श्री सिंह के पेंशन से 05% की कटौती 02 वर्षो तक किये जाने के दंड प्रस्ताव पर मान्‌्‌नीय उप मुख्य (पथ निर्माण) मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णित दंड पर विभागीय पत्रांक-2120 (एस) दिनांक-13.04. 2023 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। 6. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-738 दिनांक-23.05.2023 के द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध उक्त वर्णित दंड पर सहमति व्यक्त किया गया। % सं0 4365(s)--श्री तालकेश्वर कुमार , तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ओन-सोन सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सोनपुर के पथ प्रमंडल, डेहरी-ओन-सोन के पदस्थापन अवधि में OPRMC (Output & Performance Based Road Assets Maintenance Contract) के अंतर्गत पैकेज संख्या-58 में आरा-सासाराम राज्य उच्च पथ के दीर्घकालीन पथ संधारण में पायी गयी गंभीर अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-9683 (एस), दिनांक 20.12.2018 के द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9954 (एस) दिनांक 31.12.2018 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री कुमार को विभागीय अधिसूचना संख्या-4676 (एस), दिनांक 16.09.2021 के द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। 2. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1272 अनु॰ दिनांक 22.04.2019 से प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी के द्वारा उक्त सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-4960 (एस), दिनांक 31.08.2020 के द्वारा श्री कुमार से लिखित अभिकथन के रूप में अभ्यावेदन की मांग की गई।8 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 3. श्री कुमार ने पत्र दिनांक 16.04.2021 के द्वारा अपना अभ्यावेदन समर्पित किया। संचिका में उपलब्ध अभिलेखों से एवं श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-03 यथा-पथ में बडे़ पैमाने पर पाये गये Pot Holes/Defects के कारण उत्पन्न Hazards को समय-सीमा के अन्दर ठीक नहीं कराये जाने एवं आरोप संख्या-05 यथा-पथ का दीर्घकालीन संधारण में पाये गये त्रुटियों का न तो सुधार कराया गया और न ही संवेदक के विरूद्ध अन्य कोई प्रशासनिक कार्रवाई (अर्थात्‌ डिबार करने/कालीसूची में डालने आदि) की ही कार्रवाई की गयी, के आरोप प्रमाणित पाये गये है। 4. सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 यथा संशोधित नियम-2007 के नियम 14 (vi) के तहत लगाये जाने के निर्णित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-4723 (एस) दिनांक 17.09.2021 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3882, दिनांक 16.03.2022 के द्वारा उक्त निर्णित दण्ड पर सहमति व्यक्त की गयी। तदोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-2865 (एस) दिनांक 20.06.2022 द्वारा श्री तालकेश्वर कुमार, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया गया :- ( . उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री कुमार के पत्रांक-शून्य, दिनांक 03.08.2022 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्य रूप से आरोप संख्या-02 एवं 04 के प्रमाणित नहीं पाये जाने का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि आलोच्य पथ का Riding Quality पूर्णरूपेण संतोषजनक था एवं पथ का रख-रखाव दयनीय नहीं था। पथ में न तो Hazards की स्थिति उत्पन्न हुई और न ही इसे ठीक कराने की आवश्यकता पड़ी। पथ की स्थिति संतोषजनक थी, इसलिए संबंधित संवेदक के विरूद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में डिबार करने अथवा काली सूची में डाले जाने की कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं था। पथ में बड़े पैमाने पर Irregular Rough Surface/Pot holes/patches नहीं पाये गये।

6. श्री कुमार के पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा यह कहा जाना कि आलोच्य पथ की स्थिति अच्छी थी एवं पथ में Irregular Rough Surface/Pot holes/patches नहीं पाये गये-यह तथ्यगत नहीं है। वास्तविक तथ्य यह है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान आरोपी का साक्ष्य के रूप में आलोच्य पथ से संबंधित videography report उपलब्ध कराया गया था, जिसमें पथ के कि॰मी॰ 89 से 57 में 50 pot holes तथा 23 Long patch/pot होने का उल्लेख है। साथ ही OPRMC Cell का Officer designationwise report में भी अनेकानेक त्रुटियॉ होने का उल्लेख है, जिसके समक्ष अंकित है कि ''Not rectified in response time" चूंकि पथ की स्थिति दयनीय होने अथवा pot holes/patches पाये जाने का मुख्य आधार videography है, इसलिए इस ठोस साक्ष्य को झूठलाया नहीं जा सकता है।

अतः सम्यक समीक्षोपरांत श्री तालकेश्वर कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ओन-सोन सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सोनपुर के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है। 7. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 3743(s)--पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत कार्यरत निम्नलिखित सहायक अभियंताओं/कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंताओं को कार्यहित में उनके नाम के आगे अंकित स्थान पर अगले आदेश तक के लिए निम्नरूपेण पदस्थापित किया जाता हैः-

1 श्री अरूण कुमार, सहायक अभियंता (संविदा)। सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल सं॰-2, भभुआ।
2 श्री ददन प्रसाद गुप्ता, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, भभुआ अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल सं॰-2, भभुआ, पथ प्रमंडल, भभुआ। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना।
9 (cid:464)बहार गजट, 18 2023
3 श्री तारकेश्वर दासिल, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर अतिरिक्त प्रभार प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, सोनपुर। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (स्वास्थ्य विभाग)।
4 श्री रंजन किशोर, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता (अनुश्रवण)-1, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना। बिहार स्टेट रोड डेवलपमे ट ं कॉरपोरेशन लिमिटेड।
5 सुश्री दीप्ती झा, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता (अनुश्रवण)-2, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड।
6 श्री दीपक कुमार मिश्रा, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल सं0-3, समस्तीपुर। सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ अवर प्रमंडल सं॰-2, पटना।
7 श्री सुखेन्द्र रविदास, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार, पथ अवर प्रमंडल, दाउदनगर। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, गया।
8 श्री प्रतीक कुमार, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, गया। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, दाउदनगर।
9 श्री कुमार अभिषेक, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, वारिसलिगंज, पथ प्रमंडल, नवादा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमे ट ं कॉरपोरेशन लिमिटेड।
10 श्री नौशाद अंसारी, सहायक अभियंता (संविदा)। प्राक्कलन पदाधिकारी, भोजपुर पथ अंचल, आरा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमे ट ं कॉरपोरेशन लिमिटेड।
11 मो॰ इरफान अहमद, सहायक अभियंता (संविदा)। सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ प्रमंडल, सीवान। प्राक्कलन पदाधिकारी, भोजपुर पथ अंचल, आरा।
12 मो॰ वाहिद अंसारी, सहायक अभियंता। प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, छपरा सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, हथुआ, पथ प्रमंडल, गोपालगंज।
13 श्री राज नारायण साहू, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, रा0उ0प0 अवर प्रमंडल, गुलजारबाग-2 सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पटना।
14 श्रीमती अनामिका, सहायक अभियंता। प्राक्कलन पदाधिकारी, रा0उ0प0 अवर प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन। सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, गुलजारबाग-2
15 श्री विकास कुमार, सहायक अभियंता (संविदा)। सहायक अभियंता, उच्च पथ योजना एवं अन्वेषण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सिकन्दा, पथ प्रमंडल, जमुई।
16 श्री सिकन्दर पासवान, सहायक अभियंता। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड। सहायक अभियंता, (NH, RoB- 2)-2, मुख्य अभियंता (बजट एवं योजन) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना।
17 सुश्री खुशबू सिंह सहायक अभियंता, सहायक अभियंता, (NH.RoB-2)-2, मुख्य अभियंता (बजट एवं योजन) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना। सहायक अभियंता (गुण नियंत्रण)-4, मुख्य अभियंता, दक्षिण का कार्यालय, मुख्य अभियंता, पटना।
18 श्री अनिल कुमार, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, ढाका अतिरिक्त प्रभार, सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण पथ अवर प्रमंडल, ढ़ाका। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता पथ अवर प्रमंडल, पिपराडीह, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन -सोन।
10 (cid:464)बहार गजट, 18 2023
19 श्री सुबेदार प्रजापति, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता पथ अवर प्रमंडल, पिपराडीह, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन -सोन। सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण पथ अवर प्रमंडल, ढ़ाका।
20 सुश्री अनुराधा कुमारी, सहायक अभिंयता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, औरंगाबाद-2, पथ प्रमंडल, औरंगाबाद। सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना।
21 मो॰ फरीद अहमद, सहायक अभियंता (संविदा) सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ प्रमंडल, किशनगंज सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, धमदाहा, पूर्णियाँ।
22 श्री कृष्ण कुमार, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, हिलसा। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, विक्रमगंज, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन।
23 श्री विनय किशोर सिंह, कनीय अभियंता, अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पटना सिटी पथ प्रमंडल, अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ प्रमंडल, पटना सिटी। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता पथ अवर प्रमंडल, मैरवा, पथ प्रमंडल, सीवान।
24 श्री अखिलेश कुमार, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता (अनुश्रवण) सारण पथ अंचल, हाजीपुर। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड।
25 श्रीमति सृष्टि सारिका, सहायक अभियंता। पदस्थापन की प्रतीक्षा में। सहायक अभियंता (उत्तर)-1, मुख्य अभियंता,उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना।
26 श्री प्रिंस कुमार, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, शेरघाटी। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सकरी, पथ प्रमंडल, दरभंगा।
27 श्री अखिलेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सकरी, पथ प्रमंडल, दरभंगा। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, रोसड़ा, पथ प्रमंडल, रोसड़ा।
28 श्री नागेन्द्र पासवान, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, गया अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ प्रमंडल, गया। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, शेरघाटी।
29 श्री राम प्रकाश ठाकुर, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, झंझारपुर अतिरिक्त प्रभार, प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, झंझारपुर। कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ मेंसहायक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1, पथ निर्माण विभाग, पटना।
30 श्री मनीष कुमार वर्मा, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, मोकामा। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, जहानाबाद, पथ प्रमंडल, जहानाबाद।
31 श्री राजीव लोचन शुक्ला, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, जहानाबाद, पथ प्रमंडल, जहानाबाद। सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, मोकामा।
32 श्री अतुल कुमार पाण्डेय, सहायक अभियंता। सहायक अभियंता (अनुश्रवण), अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर पथ अवर प्रमंडल संख्या-1, दरभंगा, पथ प्रमंडल, दरभंगा।
33 श्री रविश कुमार रंजन, सहायक अभियंता। पथ अवर प्रमंडल संख्या-1, दरभंगा, पथ प्रमंडल, दरभंगा। पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, दरभंगा, पथ प्रमंडल, दरभंगा।
34 श्री उपेन्द्र कुमार, कनीय अभियंता अतिरिक्त प्रभार सहायक अभियंता। कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, झंझारपुर अतिरिक्त प्रभार, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, झंझारपुर। कार्यकारी व्यवस्था के अन्तर्गत अपने ही वेतनमान्‌ में सहायक अभियंता, रा0उ0प0 अवर प्रमंडल, जन्दाहा, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग।
11 (cid:464)बहार गजट, 18 2023

2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 3. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 4. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार प्रदान करने की कार्रवाई विभागीय कार्यहित में इस शर्त के साथ की जा रही है कि भविष्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना में आरक्षण संबंधी मामले में पारित न्यायादेशों के फलाफल एवं तद्‌नुरूप सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार द्वारा प्रतिपादित प्रावधानों से आच्छादित होगा एवं उक्त के संबंध में सरकारी सेवक का किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप-सचिव (प्र॰को॰)। सं0 3687(s)--1. श्री कमर हासमी,योजना एवं समन्वय पदाधिकारी (कार्यपालक अभियंता)-1, मुख्य अभियंता, उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग,पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए मुख्य अभियंता, दक्षिण के सचिव (प्रावैधिकी), पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3688(s)--2. श्री ब्रजसेन, कार्यपालक अभियंता, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना (BSRDCL)में पदस्थापित किया जाता है। सं0 3689(s)--3. श्री अंजनी कुमार, कार्यपालक अभियंता,बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना की सेवा वापस लेते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए संयुक्त सचिव (प्र॰को॰), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3690(s)--4. श्री राणा प्रभाष चन्द्र, योजना एवं समन्वय पदाधिकारी (कार्यपालक अभियंता)-1, मुख्य अभियंता, दक्षिण का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। (i) यह आदेश दिनांक 01.09.2023 के प्रभाव से लागू होगा। सं0 3691(s)--5. श्री कासिम अंसारी, कार्यपालक अभियंता (भू-अर्जन एवं गुण नियंत्रण) अतिरिक्त प्रभार, मुख्य अभि॰ के सचिव (प्रा॰), राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर) उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता, सारण पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3692(s)--6. श्री बब्लू कुमार, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण) अतिरिक्त प्रभार अधीक्षण अभियंता, सारण पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, हाजीपुर को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता (योजना), मुख्य अभियंता, (बजट एवं योजना) कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3693(s)--7. श्री उदय कुमार दास, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), अतिरिक्त प्रभार अधीक्षण अभियंता पूर्व बिहार पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है। सं0 3694(s)--8. श्री राजेन्द्र कुमार राय, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, कोचस को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता पूर्व बिहार पथ अंचल, पथ निर्माण विभाग, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3695(s)--9. श्री आशुतोष कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना (BSRDCL)में पदस्थापित किया जाता है। सं0 3696(s)--10. श्री अरविन्द कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (शिक्षा विभाग)को सौंपी जाती है। सं0 3697(s)--11. श्री मुकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड, गृह (विशेष) विभाग में पदस्थापित किया जाता है।12 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 3698(s)--12. श्री अनिल कुमार मिश्रा, कार्यपालक अभियंता-1, मुख्य अभियंता (पथ संधारण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, पटनाके पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3699(s)--13. श्री इम्तियाज अहमद, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, जहानाबाद को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (स्वास्थ्य विभाग) को सौंपी जाती है। सं0 3700(s)--14. श्री भास्कर मिश्रा, कार्यपालक अभियंता, बिहार भवन, नई दिल्ली को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता या समकक्ष पद पर बिहार भवन, नई दिल्ली में पदस्थापित किया जाता है। सं0 3701(s)--15. श्री श्रीमन्‌ नारायण शर्मा, कार्यपालक अभियंता-2, मुख्यालय निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता, उच्च पथ योजना एवं अन्वेषण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3702(s)--16. श्री संजय कुमार भारती, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, लखीसराय को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता, सेतु शोध एवं विकास अंचल, सेतु प्रबंधन उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटनाके पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3703(s)--17. श्री ललित कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शेरघाटी को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता (अनुश्रवण)-3, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3704(s)--18. श्री मनोज कुमार, कार्यपालक अभियंता-4, मुख्य अभियंता (पथ संधारण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, बेनीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3705(s)--19. श्री देवकान्त कुमार, कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, लखीसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3706(s)--20. श्री बृजनन्दन कुमार, सहायक अभियंता (अनुश्रवण) अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, बांका को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभिंयता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3707(s)--21. श्री सुनील कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हाजीपुर को स्थानांतरित करते हुए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड, गृह (विशेष) विभाग को सौंपी जाती है। सं0 3708(s)--22. श्रीमती संजु कुमारी, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण)-5, मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, उच्च पथ योजना एवं अन्वेषण अंचल, केन्दीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3709(s)--23. श्री नवल किशोर सिंह, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (स्वास्थ्य विभाग)की सेवा वापस लेते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3710(s)--24. श्री अशोक कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपी जाती है। सं0 3711(s)--25. श्री राम सकल सिंह, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल सं0 2, मुजफ्फरपुर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3712(s)--26. श्री सुनील कुमार, सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ अवर प्रमंडल सं॰-2, अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता (योजना निरूपण,NHAI), मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर) का13 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटनाको स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3713(s)--27. श्री प्रभाकर, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की सेवा वापस लेते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3714(s)--28. श्री गोपाल सिंह, स॰अ॰, (अनुश्रवण), केन्द्रीय पथ अंचल, पटना अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हिलसा को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना सिटी के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3715(s)--29. श्री नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी को स्थानांतरित करते हुए कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3716(s)--30. श्री प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा को स्थानांतरित करते हुए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा योजना एवं विकास विभाग को सौंपी जाती है। सं0 3717(s)--31. श्री विजय कुमार, कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल सं॰ 1, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3718(s)--32. श्री प्रभात कुमार, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विभाग की सेवा वापस लेते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कोचस के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3719(s)--33. श्री अरूण कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधुबनी को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3720(s)--34. श्री वासुदेव नन्दन, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपी जाती है। सं0 3721(s)--35. श्री धनंजय कुमार, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम, पटना (शिक्षा विभाग) की सेवा वापस लेते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, जहानाबाद के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3722(s)--36. श्री अशोक कुमार सिंह, सहायक अभियंता-4, अधीक्षण अभियंता (पथ संधारण-1) अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता-3, मुख्य अभियंता (पथ संधारण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3723(s)--37. श्री विकास चन्द्र, सहायक अभियंता (अनुश्रवण) अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3724(s)--38. श्री विनोद बिहारी, स॰अ॰ (अनुश्रवण), मगध पथ अंचल, गया अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, नवादा को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए उप निदेशक, परीक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3725(s)--39. श्री कांति भूषण, स॰अ॰ (अनुश्रवण), पथ अंचल, दरभंगा अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, बेनीपुर को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, शेरघाटी के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3726(s)--40. श्री प्रेम कुमार, स॰अ॰ (अनुश्रवण), पथ प्रमंडल, मोतिहारी अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, ढाका को स्थानांतरित करते हुए कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अपने ही वेतनमान्‌ में कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड, गृह (विशेष) विभाग को सौंपी जाती है। सं0 3727(s)--41. श्री रणधीर कुमार, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार, कार्यपालक अभियंता (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए पथ प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, बांका के पद पर पदस्थापित किया जाता है।14 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 3728(s)--42. श्री अविनाश झा, सहायक अभियंता-1, अधीक्षण अभियंता (पथ संधारण-1) अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता-2, मुख्य अभियंता (पथ संधारण) का कार्यालय को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है। सं0 3729(s)--43. श्री गिरीश नारायण सिंह, कार्यपालक अभियंता, पटना सिटी पथ प्रमंडल को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है। सं0 3730(s)--44. श्री ज्ञानचन्द्र दास, सहायक अभियंता (अनुश्रवण) अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, रा0उ0प0 प्रमंडल, बिहारशरीफ-2 को स्थानांतरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है। सं0 3731(s)--45. श्री अरविन्द प्रसाद गुप्ता, कार्यपालक अभियंता, सेतु निरूपण पदाधिकारी-1, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है। सं0 3732(s)--46. श्री सुरेन्द्र नारायण, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की सेवा वापस लेते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु सेवा बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (स्वास्थ्य विभाग) को सौंपी जाती है। सं0 3733(s)--47. श्री भुपेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, रा0उ0प0 अवर प्रमंडल अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, रा0उ0प0 पथ प्रमंडल, औरंगाबाद को स्थानान्तरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, (NH. RoB-2), मुख्य अभियंता (बजट एवं योजना) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3734(s)--48. श्री नलिन विलोचन, सहायक अभियंता (सीमांचल)-3 मुख्य अभियंता, (सीमाचंल) उपभाग का कार्यालय को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता (योजना अनुश्रवण एवं गुण नियंत्रण)-3, मुख्य अभियंता (सीमांचल) उपभाग का कार्यालय के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3735(s)--49. श्री ओम प्रकाश, सहायक अभियंता अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक अभियंता, सेतु निरूपण पदाधिकारी-3, सेतु निरूपण अंचल को स्थानान्तरित करते हुए अपने ही वेतनमान में कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल सं॰-2, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3736(s)--50. मो॰ जियाउद्दीन, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, पथ निर्माण विभाग, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

(i) मो॰ जियाउद्दीन अपने कार्याें के अतिरिक्त उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4, पथ निर्माण विभाग, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। सं0 3737(s)--51. श्री शशिभूषण सहाय, कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना को स्थानांतरित करते हुएअगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हिलसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3738(s)--52. श्री भरत लाल, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल सं॰-1, गया को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 3739(s)--53. श्री राम सुरेश राय, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, झंझारपुर को स्थानांतरित करते हुए कार्यपालक अभियंता के समकक्ष पद पर पदस्थापन हेतु अगले आदेश तक के लिए सेवा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी जाती है।

सं0 3740(s)--54. श्री पाण्डेय धमेन्द्र किशोर, कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1, पटना अपने कार्याें के अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2, पटना के प्रभार में भी रहेंगे। सं0 3741(s)--55. श्री मिथिलेश कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 3. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।15 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 4. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार प्रदान करने की कार्रवाई विभागीय कार्यहित में इस शर्त के साथ की जा रही है कि भविष्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना में आरक्षण संबंधी मामले में पारित न्यायादेशों के फलाफल एवं तद्‌नुरूप सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार द्वारा प्रतिपादित प्रावधानों से आच्छादित होगा एवं उक्त के संबंध में सरकारी सेवक का किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपेश कुमार, उप-सचिव (प्र॰को॰)। सं0 5306(s)--पथ प्रमंडल, मोतिहारी अन्तर्गत अल्पकालीन निविदा निष्पादन में बरती गयी अनियमितता के संबंध में श्री समीर श्रीवास्तव, भवानीपुर जिरात, मोतिहारी के द्वारा परिवाद पत्र दिनांक-06.09.2019 को विभाग में प्राप्त हुआ। इस संबंध में विभागीय पत्रांक-9103(एस) अनु॰ दिनांक-11.10.2019 के द्वारा मुख्य अभियंता, उत्तर, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को आलोच्य मामले के संबंध में जाँचोपरांत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। विभागीय स्मार पत्रांक-1234 (एस) दिनांक-10.03.2022 के क्रम में मुख्य अभियंता, उत्तर, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1088 अनु॰ दिनांक-17.05.2022 के द्वारा अंचल स्तरीय गठित जाँच समिति का जाँच प्रतिवेदन मंतव्य सहित उपलब्ध कराया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि आलोच्या मामला अल्पकालीन निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-23/2018-19 दिनांक-09.03.2019 से संबंधित है। इस मामले में समीक्षोपरांत श्री अनुराधा चन्द्र, तदेन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी से विभागीय पत्रांक-255(एस) अनु॰ दिनांक-17.01.2023 के द्वारा निम्न त्रुटियों/ अनियमितताओं के लिये आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण पूछा गयाः-

(i) 12 नयी योजनाएँ, जिनकी प्राक्कलित राशि एक लाख से कम की थी, उसकी स्वीकृति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी के द्वारा अपने स्तर से दी गई थी परंतु इसकी जानकारी अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मोतिहारी को नही दी गई।

(ii) निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-23/2018-19 को स्थानीय प्रचार-प्रसार से निकालने की अनुमति अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मोतिहारी से प्राप्त नही की गई। उक्त से स्पष्ट है कि श्री अनुराधा चन्द्र, तदेन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी के द्वारा बिहार सरकार, तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग पत्र संख्या-1/स्था॰-108-81-462 त॰प॰को॰/पटना, दिनांक- 30 मार्च 1982 के अनु॰ भाग-2 (क) में निविदा कोटेशन का आमंत्रण एवं निष्पादन की प्रक्रिया के साथ BPWD Code-I (ज) नियम-159 एवं 293 का उपेक्षा किया गया तथा सक्षम स्तर यथा अधीक्षण अभियंता के स्तर से स्वीकृति/अनुमोदन प्राप्त नही किया गया, जो इनके द्वारा मूल पदीय दायित्व के निर्वहन में चूक, नियम विरुद्ध कार्य, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता को परिलक्षित करता है। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।

2. उक्त पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री चन्द्र द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक-03.02.2023 में अन्य तथ्यों/तर्कों सहित आरोप के संबंध में मुख्य रुप से कहा गया है कि BPWD Code की कंडिका-159 के अनुसार एक लाख से ऊपर के संबंध में दिशा-निर्देश है। एक लाख से नीचे के निविदा पर स्थानीय प्रचार प्रसार का ही दिशा निर्देश है। BPWD Code के कंडिका-293 की उपेक्षा के संबंध में श्री चन्द्र का यह कहना है कि उक्त कंडिका अधीक्षण अभियंता की शक्ति से संबंधित है। उक्त कंडिका कार्यपालक अभियंता से संबंधित नहीं है। 3. श्री चन्द्र के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की समीक्षा में पाया गया कि नियम-159 के अनुसार रु॰ 50,000/- से ऊपर के निविदा नोटिस को समाचार पत्र/इंटरनेट पर प्रकाशित किया जाना है। इसी प्रकार नियम-293 में BOQ के दर की स्वी—ति हेतु सक्षम प्राधिकार अधीक्षण अभियंता है न कि कार्यपालक अभियंता। इस निविदा के BOQ के दर की स्वी—ति श्री चन्द्र के द्वारा अधीक्षण अभियंता से प्राप्त नहीं किया गया है। इस प्रकार आलोच्य मामले में श्री चन्द्र के द्वारा निविदा आमंत्रण एवं निष्पादन की प्रक्रिया के क्रम में BPWD Code- I(ज) के नियम-159 एवं 293 की उपेक्षा की गयी है। तदालोक में श्री चन्द्र के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। 4. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री अनुराधा चन्द्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना प्रमंडल, पटना के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों के समानुपातिक बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14(v) के तहत निम्न लघु दण्ड अधिरोपित किया जाता हैः- (i) प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।16 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 s --श्री प्रमोद कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा के विरूद्ध योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-6471 दिनांक-04.12.2018 द्वारा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए आवश्यक कार्रवाई हेतु इस विभाग को उपलब्ध कराया गया। योजना एवं विकास विभाग के द्वारा प्रतिवेदित आरोप निम्नवत है :-

(i) श्री विजय कुमार खेमका, माननीय स॰वि॰स॰ से प्राप्त तारांकित प्रश्न संख्या-च- 10 उत्तर प्रतिवेदन में सही तथ्य को छिपाकर गलत प्रतिवेदन दिया गया यथा आई0टी0आई0 कॉलेज के छात्रों का छात्रावास निर्माण कार्य 84 प्रतिशत तथा पूर्णियाँ कॉलेज, पूर्णियाँ में छात्रों का छात्रावास निर्माण कार्य 76 प्रतिशत पूर्ण था, जबकि कार्यपालक अभियंता स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ के रूप में आपके द्वारा 90 प्रतिशत पूर्ण बताया गया था, जो गलत था। आपके द्वारा गलत सूचना उपलब्ध कराना दायित्वों के निर्वहन में बरती गयी लापरवाही का द्योतक है, तथा सदन को गुमराह करना दंडनीय अपराध है। साथ ही यह बिहार सरकारी सेवक अचार नियमावली 1976 के नियम-12 (क) का उल्लंघन है (ii) पूर्णियाँ जिला अन्तर्गत उक्त दोनों छात्रावास का निर्माण कार्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत अल्पसंख्यक बहुक्षेत्रीय विकास योजना (एम॰एस॰डी॰पी॰) मद का है। जिसका एकरारनामा कार्यपालक अभियंता, एन॰आर॰ई॰पी॰, पूर्णियाँ एवं इंडियन प्रोगेसिव कंसट्रक्सन प्रा॰लि॰, आस्थगीता देवी, कास्टर टाउन, देवघर (झारखंड) के बीच वर्ष-2011-12 में हुआ था। एन॰आर॰ई॰पी॰ विघटन के पश्चात यह कार्य स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, बनमनखी, पूर्णियाँ क्षेत्राधीन आ गया। एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 04.09.2012 में निर्धारित थी, परन्तु अभी तक कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इस प्रकार आपके द्वारा कार्यपालक अभियंता के रूप में अपने कत्तव्यों का निर्वहन नहीं किया गया है।

2. योजना एवं विकास विभाग द्वारा उक्त प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय पत्रांक-7289 (एस) अनु0 दिनांक-07.08.2019 के द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। तदालोक में श्री कुमार के पत्रांक-01 दिनांक-20. 08.2019 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर विभाग को समर्पित किया गया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोप सं0 (i) के संबंध में इन्होने कहा है कि दो योजना का औसत प्रगति (गणना चार्ट के अनुसार) 84.33 प्रतिशत होता है, जो उनके द्वारा बताए गये 90 प्रतिशत के करीब है। समयाभाव के कारण बिना अभिलेख अवलोकन के उनके द्वारा प्रगति 90 प्रतिशत प्रतिवेदित किया गया था। श्री कुमार का उतर इस हद तक स्वीकार योग्य नही है, क्योकि विधान सभा के पटल पर माननीय स0वि0स0 के तारांकित प्रश्न का उतर बिना अभिलेखीय साक्ष्य के दिये जाने के कारण ही सभा में उतर पर प्रश्न चिन्ह लगाकर कार्य की जाँच कराने की आवश्यकता पड़ी। उप विकास आयुक्त, पूर्णियाँ की अध्यक्षता में किये गये जाँच में भी प्रतिवेदन के प्रतिकूल प्रगति मे अपेक्षाकृत कमी पायी गयी है। इसके साथ ही आरोप संख्या (ii) के संबंध में इनके द्वारा रखे गये तर्क समर्थित साक्ष्यों के आलोक में स्वीकार योग्य पाया गया।

3. उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में श्री प्रमोद कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक-01 दिनांक-20.08.2019 द्वारा आरोप सं0-(i) के संबंध में समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए बरती गई लापरवाही को दृष्टिगत रखते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-4741 (एस) दिनांक-13.09.2022 के द्वारा का दंड संसूचित किया गया। 4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार के पत्रांक-1126 दिनांक-17.09.2022 के माध्यम से पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसकी विभागीय समीक्षा के उपरांत पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन के लगभग समरूप तथ्य हीं उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण उतर में भी अंकित किया गया था, जिस पर भली भाँति विचारोपरांत हीं श्री कुमार का उतर संतोषजनक नही पाये जाने के आलोक में उनके विरूद्ध दण्ड अधिरोपण की कार्रवाई की गयी है। इस प्रकार, श्री कुमार के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में ऐसा कोई नया तथ्य/तर्क एवं गणना चार्ट से संबंधित प्रमाणित साक्ष्य यथा-मापीपुस्त, एकरारनामा आदि प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके आधार पर इनके विरूद्ध अधिरोपित दण्डादेश को क्षान्त किया जा सके।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री प्रमोद कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल संख्या-02, बनमनखी, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-1126 दिनांक-17.09.2022 को सम्यक्‌ विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।17 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 s --श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 45.00 से 65.00 पथांश में (Job No.-101-BR-2016-17-1547) कराये गये BC कार्य एवं कि॰मी॰ 1.10 से 1.11 में ROB के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता एवं विलम्ब के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-418 (एस) अनु॰ दिनांक-19.01.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ कुल 02 (दो) आरोप निम्नवत गठित किये गये है :-

(i) राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 45.00 से 65.00 पथांश में Job No.- 101-BR-2016-17- 1547 के तहत्‌ स्वी—त PR कार्य जून 2017 में पूर्ण कराया गया हैं, परन्तु इस पथांश में कराया गया BC कार्य जून 2017 में ही अधिकांश भागों में क्षतिग्रस्त हो गया। BC का कार्य तुरन्त उखड़ जाना काफी खराब गुणवत्ता का साक्ष्य है। Centre Line Marking का कार्य भी विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराया गया।

(ii) राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 1.10 से 1.11 पथांश में स्वी—त RoB के निर्माण कार्य का एकरारनामा दिनांक-25.05.2017 को कर लिया गया, परन्तु जमीन के अभाव में निरीक्षण की तिथि दिनांक-19.09.2017 तक Appointed Date नहीं दिया गया, जिसके कारण कार्य अत्यधिक Delayed हुआ, जो कार्य के प्रति लापरवाही एवं जिम्मेदारी के बोध की कमी है। 2. मुख्य अभियंता (अनुश्रवण)-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-32 अनु॰ दिनांक-04.04.2022 द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ इनके विरूद्ध गठित उक्त दोनों आरोपों को अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षा के उपरान्त आरोप संख्या-(ii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष सहमति योग्य पाया गया एवं आरोप संख्या-(i) के संबंध में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष असहमति योग्य पाया गया। 3. आरोप संख्या-(i) के संबंध में संचालन पदाधिकारी के द्वारा इस आधार पर अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया कि अगस्त, 2017 में गोपालगंज जिला अन्तर्गत भीषण बाढ़ आ जाने के कारण गंढ़की बांध टूट गया था, जिसके फलस्वरूप आलोच्य पथांश के ऊपर बाढ़ का पानी over top कर गया। फलतः परिस्थितिजन्य एवं आपदाजनित स्थिति में BC कार्य क्षतिग्रस्त हो गया था। विभागीय समीक्षा के क्रम में पाया गया कि मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग के निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक-19.09.2017 के कंडिका-05 में स्पष्ट उल्लेख है कि अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने दिनांक-08.06.2017 एवं 12.07.2017 के निरीक्षण प्रतिवेदन के माध्यम से आलोच्य पथांश को विशिष्टियों के अनुरूप ठीक कराने का निदेश दिया गया। उनके आदेश के अनुरूप कि॰मी॰ 45.00 से 55.00 के बीच-बीच कुछ सुधार करते हुए Potless कराया गया, परन्तु निरीक्षण की तिथि तक कि॰मी॰ 55.00 से 65.00 के बीच कई पॉट्‌स पाये गये है। स्पष्ट होता है कि जून, 2017 में सम्पन्न BC कार्य जून, 2017 में ही अधिकांश भागों में क्षतिग्रस्त हो गया। इस प्रकार उत्पन्न असहमति के बिन्दुओं के परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-5392(एस) अनु॰ दिनांक-26.10.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 4. श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-11.11.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत्‌ मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किये गये है :- (i) जून, 20017 में प्री मॉनसून मूलसाधार वर्षा होने के कारण घनी बसावट वाले गाँवों के पास ग्रामीणों द्वारा अपने घर का नाला सीधे सड़क पर लाकर छोड़ देने के कारण तत्कालिक दो तीन पॉट हो गये थे, जिसे मरम्मति करा दिया गया था। ग्रामीणों द्वारा सड़क किनारे चापाकल लगाने से उसका पानी सड़क पर आ जा रहा था, जिसे फ्लैंक किनारे कच्चा नाला बनाकर जल-जमाव की समस्या को दूर किया गया था। (ii) यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त आलोच्य पथांश का उड़नदस्ता द्वारा दो बार जाँच किया गया था उनके द्वारा पथ की भौतिक स्थिाति के बारे में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई तथा उपयोग में लाई गई निर्माण सामग्रियों को मानक के अनुरूप बताया गया। 5. उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोप संख्या-(i) के संबंध में उत्पन्न असहमति के बिन्दुओं के परिपे्रक्ष्य में श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत्‌ BC कार्य के क्षतिग्रस्त होने के लिए पथ परत पर बरसात के पानी का जमाव होना एवं स्थानीय लोगों द्वारा चापाकल का पानी पथ परत पर गिराने का कारण बताया गया है, जिसे अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण के बाद संवेदक के व्यय पर ठीक करा दिया गया। इनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव-बयान से ही इस बात की पुष्टि होती है कि बाढ़ अगस्त, 2017 में आया था, जबकि इससे पूर्व ही अधीक्षण अभियंता के द्वारा जून-जुलाई माह में पथ के निरीक्षण के समय ही BC कार्य में काफी पॉट्‌स पाये गये। इससे स्पष्ट होता है कि जून माह में कराये गये BC कार्य जून माह में ही क्षतिग्रस्त हो18 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 गया। हालाँकि कालांतर में क्षतिग्रस्त पथांश को संवेदक के व्यय पर ठीक कराया गया है, परन्तु इससे आरोप की गंभीरता को कम करके आंका नहीं जा सकता है। इस प्रकार विभाग द्वारा इनके विरूद्ध गठित किये गये आरोप इस हद तक प्रमाणित होता है।

6. उपर्युक्त के आलोक में समीक्षोपरान्त पाया गया है कि के द्वारा अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में अनियमितता एवं चूक बरती गयी है, जो कदाचार के श्रेणी में आता है। इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक विचारोपरांत उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (V) के तहत निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i . प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जिला शहरी विकास अभिकरण, भागलपुर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-201, दिनांक 21.01.2019 द्वारा आरोप प्रतिवेदित किया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त अनुशसां के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5949 (एस) दिनांक 28.06.2019 के द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय जाँच आयुक्त (सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त) के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

(i) नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-201, दिनांक-21.01.2019 के माध्यम से प्राप्त महालेखाकार (लेखा परीक्षा), बिहार के अर्द्ध॰स॰पत्र सं॰-नि॰ले॰प॰/एस॰ए॰आर॰ /2017-18/17 दिनांक-23.04.2018 द्वारा राज्य के तीन जिलों यथा भागलपुर, बांका एवं सहरसा अन्तर्गत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में किये गये Test-Check के उपरांत इससे संबंधित विभिन्न बैंक खातों से विभिन्न वर्षो में धोखाधड़ी कर राशि की निकासी कर सृजन के खाते में स्थानांन्तरित/जमा करने के बिन्दु Irregularities in Financial Management Involving SRIJAN पर दिनांक-23.04.2018 का निरीक्षण प्रतिवेदन पर आवश्यक कंडिकावार टिप्पणियों /अभियुक्तियों और स्पष्टीकरण से अवगत कराने के साथ-साथ विभाग से संबंधित जिला कार्यालय के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी द्वारा वित्तीय नियमों का उल्लंघन किये जाने एवं वित्तीय सम्व्यवहार पर आंतरिक नियंत्रण नहीं रखे जाने का मामला महालेखाकार (ले॰ एवं प॰) प्रतिवेदित किया गया है।

(ii) महालेखाकार (ले॰ एवं प॰), बिहार, पटना से प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन के आलोक में Irregularities in Financial Management Involving SRIJAN से संबंधित आपत्ति की कंडिका-6.3 के अनुसार चेक बाउन्स होने के कारण निदेशक, बूडा के खाते में राशि हस्तानांन्तरित नहीं होने की जानकारी दिनांक-15.09.2016 को होने के पश्चात भी बैंक के विरूद्ध 11 माह के बाद एफ॰आई॰आर॰ दर्ज करने हेतु श्री मनोज कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, डुडा, भागलपुर को दोषी माना गया है। (iii) महालेखाकार (ले॰ एवं प॰), बिहार, पटना से प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन में आपत्ति की कंडिका-6.3 के अनुसार डूडा, भागलपुर कार्यालय का 9.30 लाख रूपये (नौ लाख तीस हजार रूपये) का चेक बाउन्स होने के कारण निदेशक, बूडा के खाते में हस्तानांन्तरित नहीं होने की जानकारी श्री मनोज कुमार,तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, डूडा, भागलपुर को दिनांक-15.09.2016 को प्राप्त हो गयी थी। जानकारी प्राप्ति के तुरन्त बाद बैंक के विरुद्ध उनके द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए की किन्तु श्री कुमार द्वारा जानकारी प्राप्ति के 11 माह पश्चात बैंक के विरूद्ध एफ॰आई॰आर॰ दर्ज किया गया। उक्त कृत्य किसी को व्यक्तिगत लाभ पहुँचाने के उद्‌देश्य से किया गया कार्य है, जिसके लिए श्री कुमार दोषी है।

2. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में तत्कालीन सचिव, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग-सह-जाँच आयुक्त के पत्रांक-12516, दिनांक 09.09.2020 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें साक्ष्य की कमी होने का संदर्भ देते हुए आरोपों को अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-18 की उपकंडिका- (1) एवं (2) के तहत मामले की पुनः जाँच हेतु विभागीय पत्रांक-927 (एस) दिनांक 12.02.2021 द्वारा मुख्य जाँच आयुक्त सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को भेजा गया।

3. उक्त के आलोक में जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के द्वारा मामले की पुनर्जांच करते हुए पत्रांक-143, दिनांक 19.09.2022 से जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध19 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया। जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोंपरात जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमत होते हुए प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-635 (एस) अनु॰, दिनांक 07.02.2023 के द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा पत्रांक-शून्य, दिनांक 28.03.2023 द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया।

4. श्री कुमार ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किये गये :- 4.1 श्री कुमार के द्वारा यह उल्लेख किया गया हैं कि नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-5311 दिनांक 11.08.2016 के अनुपालन में उनके द्वारा रुपये 9,30,000/- का चेक Director, BUDA, Patna के पक्ष में चेक सं॰-665912, दिनांक 24.08.2016 पत्रांक-610, दिनांक 24.08.2016 द्वारा भेजा गया था, लेकिन उक्त चेक बैंक ऑंफ बड़ौदा, भागलपुर द्वारा निर्गत बैंक स्टेटमेन्ट के अनुसार Director, BUDA का खाता अस्तित्व में नहीं रहने के कारण वापस आ गया, न कि खाते में पर्याप्त निधि नहीं रहने के कारण। श्री कुमार का कहना है कि उन्हें किसी भी स्तर से चेक बाउन्स होने की सूचना नहीं दी गयी और उन्हें लगभग 11 महीने के बाद जानकारी प्राप्त होने पर वांछित FIR दर्ज करने की कार्रवाई की गई। इस क्रम में यह भी उल्लेख किया गया है कि Negotiable Instrument Act, 1881 के अनुसार चेक बाउन्स होने की स्थिति में Cheque Payee को जानकारी प्राप्त होने के 30 दिनों के अन्दर Cheque Drawer को नोटिस देनी है, किन्तु इस मामले में चेक बाउन्स होने की सूचना बैंक या Cheque Payee के स्तर से उन्हें नहीं दी गई। इसी क्रम में उल्लेख किया गया है कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान चेक बाउन्स होने की सूचना उन्हें दिये जाने संबंधी साक्ष्य/अभिलेख/कागजात की मांग किये जाने पर उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।

4.2 Bihar CCA Rules, 2005 के नियम-18 (2) के तहत अग्रतर जाँच (Further Inquiry) हेतु डॉ सफीना ए॰एन॰, जाँच आयुक्त को मामला भेजे जाने के संबंध में आरोपी श्री कुमार द्वारा मान्‌नीय सर्वोच्च/उच्च न्यायालय द्वारा पारित अन्य विभिन्न न्यायादेशों का संदर्भ देते हुए उल्लेख किया गया है कि यह विधि विरूद्ध एवं न्याय के विपरीत है। इस संबंध में यह भी उल्लेख किया है कि उनके द्वारा इस बिन्दु पर मान्‌नीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No- 11154/2021 दायर किया गया है, जो सम्प्रति लंबित है, इसलिए जब तक उक्त रिट याचिका का अंतिम निष्पादन नहीं हो जाता है तब तक विभागीय कार्यवाही को लंबित रखा जाय।

5. श्री कुमार के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि यद्यपि चेक बाउन्स होने की सूचना उन्हें Director, Buda अथवा बैंक द्वारा नहीं दी गई तथापि कैश बुक के छायाप्रति के अवलोकन से प्रतीत होता है कि कथित चेक के dishonour होने की सूचना उन्हें दिनांक 31.10.2016 को ही प्राप्त हो चुके थे। यदि इस समय भी आरोपी श्री कुमार द्वारा बैंक पासबुक एवं कैशबुक के संबंध में गहन समीक्षा करते हुए संबंधित बैंक से सम्पर्क स्थापित किया जाता तो मामले का उद्‌भेदन तत्समय ही हो जाता और तत्समय ही बैंक के विरूद्ध FIR दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती थी, जो नहीं किया गया। इसलिए आरोपी का कथन विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता है। 5.1 जहाँ तक Bihar CCA Rules, 2005 के नियम 18 (2) के तहत अग्रतर जाँच (Further Inquiry) हेतु डॉ॰ सफीना ए॰एन॰, जाँच आयुक्त को मामला भेजे जाने के संबंध में आरोपी श्री कुमार द्वारा मान्‌नीय सर्वोच्च/उच्च न्यायालय द्वारा पारित अन्य विभिन्न न्यायादेशों का संदर्भ दिये जाने का प्रश्न है तो इस संबंध में स्पष्ट करना है कि Bihar CCA Rules, 2005 के नियम-18 (1) एवं (2) के तहत विहित प्रावधान के आलोक में ही अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा यथोचित कारणों को अभिलिखित करते हुए ही मामले की अग्रतर जाँच हेतु मुख्य जाँच आयुक्त को वापस किया गया। साथ हीं चूंकि आरोपी श्री कुमार द्वारा दायर CWJC No-11154/2021 में अब तक किसी प्रकार का कोई न्याय निर्णय पारित नहीं हुआ है, इसलिए विभागीय कार्यवाही को लंबित रखे जाने के संबंध में आरोपी के द्वारा किया गया अनुरोध विचारणीय प्रतीत नहीं होता है।

अतः सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए निम्न दण्ड इस शर्त्त के साथ संसूचित किया जाता है कि-यह आदेश मान्‌नीय उच्च न्यायालय में दायर CWJC No-11154/2021 में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा :-

सं0 निग/सारा-4(पथ) आरोप-40/2017 (अंश) s --प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग के निदेशानुसार OPRMC अन्तर्गत संधारित पथों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने हेतु विभागीय पत्रांक-5033 (एस) अनु0 दिनांक-08.06.2017 द्वारा दिनांक- 15.06.2017 से दिनांक-22.06.2017 के बीच संबंधित पथों का स्वतंत्र निरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत्‌ विभाग द्वारा गठित निरीक्षण दल के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन का सत्यापन प्रमंडलीय कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों से किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरान्त निम्न त्रुटियाँ/अनियमितता पाई गई :-

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(cid:464)बहार गजट, 18 2023 (i) पथ निर्माण विभाग अन्तर्गत OPRMC के तहत्‌ पथ प्रमंडल, मधेपुरा अन्तर्गत पैकेज संख्या-27 के अन्तर्गत शामिल पथों, जिसकी सूची निम्नवत्‌ है :-

सुपौल सिंघेश्वर रोड, पुनिया-सहरसा रोड, रा0उ0प0-106 से रा0उ0प0-107 पश्चिमी बाईपास रोड, कर्पूरी चौक से पतर घाट रोड, मुरलीगंज बभनगांवा बिहारीगंज रोड, किशुनगंज-बिहारीगंज रोड, कर्मा-आलमनगर रोड, आलमनगर-बुद्धमा माली चौक रोड, किशनगंज चौसा रोड, चौसा लौआलवान विजयघाट रोड, गोवालपाड़ा-अतलख रोड, खुरहान परेल रतवाड़ा रोड का रख-रखाव/संधारण अन्य पथ प्रमंडलों की तुलना में सबसे खराब स्थिति में पायी गयी है।

2. वर्णित पायी गयी उक्त त्रुटियों के संबंध में विभागीय पत्रांक-8867 (एस) अनु॰ दिनांक- 10.10.2017 द्वारा , तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री आलम के पत्रांक-982 (अनु०) दिनांक-01.11.2017 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसको विभागीय समीक्षा में स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया। 3. तद्‌ालोक में श्री नौशाद आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रतिः कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के विरूद्ध उक्त त्रुटियों के लिए आरोप गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4509 (एस) अनु0 दिनांक-01.09.2022 के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-118 अनु० दिनांक-24.02.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री आलम के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया। 4. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि चूंकि Service Level में पाये गये Non-Compliance के लिए वांछित कटौतियाँ किये जाने की पुष्टि संचालन पदाधिकारी के द्वारा अभिलेखों के आधार पर की गयी है, साथ ही गठित आरोप की प्रकृति गुणवत्ता/विशिष्टियों से संबंधित न होकर भौतिक सत्यापन पर आधारित है, जिसकारण से संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होने का युक्तिसंगत आधार परिलक्षित नहीं होता है। 5. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में सम्य्‌क विचारोपरांत संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री नौशाद आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मधेपुरा सम्प्रतिः कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा को आरोप मुक्त किया जाता है।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक-3941 (अनु0) दिनांक-09.12.2021, पत्रांक- 70 अनु॰ दिनांक- 05.01.2022 से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिकन्दर पासवान, तत्कालीन परियोजना अभियंता (सहायक अभियंता), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लि॰, कार्य प्रमंडल, आरा के विरूद्ध नगर थाना बेगूसराय कांड संख्या-608/2021 संजु देवी बनाम सिकन्दर पासवान के तहत्‌ उन्हें दिनांक-10.11.2021 को गिरफ्तार कर दिनांक-11.11.2021 को मंडल कारा, बेगूसराय में भेजे जाने तथा दिनांक-24.12. 2021 को जिला एवं सत्र न्यायालय, बेगूसराय से जमानत मिलने के उपरान्त दिनांक-27.12.2021 को अपना योगदान समर्पित किये जाने संबंधी मामले मे समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-4324 (एस) दिनांक-22.08.2022 के द्वारा जेल अवधि के निलंबित किया गया। इसके साथ हीं उसी अधिसूचना से श्री पासवान के द्वारा दिनांक-27.12.2021 को योगदान किये जाने की तिथि से निलंबनमुक्त करते हुए उनके योगदान को स्वीकृत किया गया।

2. प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन एवं साक्ष्यो के आधार पर श्री सिकन्दर पासवान, तत्कालीन परियोजना अभियंता (सहायक अभियंता), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, आरा के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-341 (एस) अनु0 दिनांक-23.01.2023 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री पासवान के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

(i) प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक-3941 अनु0 दिनांक-09.12.2021 के माध्यम से प्राप्त अभिलेखो के अनुसार श्री सिकन्दर पासवान (सहायक अभियंता) परियोजना अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, आरा दिनांक 12.11.2021 को बिना छुट्‌टी स्वीकृत कराये अपने कर्तव्य पर अनुपस्थित रहे। वरीय परियोजना अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल, आरा के पत्रांक-651, दिनांक 16.11.2021 द्वारा श्री पासवान से उनके अनाधिकृत अनुपस्थिति हेतु स्पष्टीकरण पूछा गया। वरीय परियोजना अभियंता के पत्रांक-671, दिनांक 02.12.2021 को सूचित किया गया है कि श्रीमती संजू देवी एक आवेदन दिनांक 01.12.2021, फोटोग्राफ, प्राथमिकी संख्या-608/2021 दिनांक 06.10.2021 एवं CGM, बेगूूसराय का आदेश दिनांक 23.11.2021 संलग्न करते हुए सूचित किया गया कि श्री पासवान दिनांक 11.11.2021 से न्यायिक हिरासत में हैै, जिसमें उनका जमानत खारिज कर दिया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि श्री पासवान बिना छुट्‌टी स्वीकृत कराये अनुपस्थित रहे एवं मुख्यालय से बाहर गए। इस अवधि में उनके अनैतिक कार्य के कारण उन्हें दिनांक 11.11.2021 से न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा।21 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 (ii) श्रीमती संजू देवी ने वरीय परियोजना अभियंता बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड कार्य प्रमंडल, आरा को संबोधित अपने आवेदन दिनांक 01.12.2021 में श्री पासवान के विरूद्ध यह आरोप लगाया है कि उन्होंने उसका विधवा होने का फायदा उठाकर उसे विश्वास में लिया तथा विवाहित होने के बावजूद धोखे में रखकर उनसे 09.05.2016 को विवाह किया। तत्पश्चात अनेक अवसरों पर उससे 10,00,000/-, 10,60,000 एवं 5,00,000/- रुपये की रकम तथा एक बिगहा जमीन एवं सेाने-चाँदी का आभूषण हड़प लिया तथा यह भी सूचित किया गया है कि उनके द्वारा इस संबंध में नगर थाना कांड संख्या-608/2021 दर्ज किया गया है एवं इससे संबंधित अभिलेख भी संलग्न किया गया। प्रबंध निदेशक के पत्रांक-3941 अनु॰, दिनांक 09.12.2021 के द्वारा सम्पूर्ण अभिलेख विभाग को उपलब्ध कराया गया। प्रबंध निदेशक के पत्रांक-70 दिनांक 05.01.2022 एवं श्री पासवान का आवेदन दिनांक 28.01.2022 द्वारा जिला सत्र न्यायालय, बेगूरासय का आदेश दिनांक 24.12.2021 संलग्न करते हुए जमानत पर रिहा होने का संदर्भ देते हुए दिनांक 27.12.2021 को कार्य प्रमंडल, आरा में योगदान दिया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश का उक्त आदेश द्वारा श्री पासवान के 45 दिनों का औपबंधिक बेल स्वीकार किया गया। उक्त आदेश में अंकित है कि दोनों पक्षों के द्वारा न्यायालय में सुलहनामा प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्री पासवान के द्वारा आवेदिका से लिए गए सम्पत्ति को वापस किये जाने की बात को स्वीकार किया गया। आवेदिका/परिवादी के द्वारा सम्पति को वापस हो जाने पर श्री पासवान के साथ रहने पर सहमति व्यक्त किया गया। प्रबंध निदेशक, बिहार, राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक-2341 दिनांक 11.05.2022 के द्वारा श्री पासवान से प्राप्त अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-(ix), बेगूसराय का पारित आदेश दिनांक 09.02.2022 संलग्न कर विभाग को उपलब्ध कराया गया। उक्त पारित न्यायादेश में अंकित है कि प्रतिवादी श्री पासवान के द्वारा सुलहनामा के अनुसार अनुपालन कर दिया गया है, इसलिए औपबंधिक जमानत को confirm कर दिया गया है।

उक्त से स्पष्ट है कि परिवादी संजू देवी के विधवा होने के कारण श्री पासवान द्वारा आपराधिक षडयंत्र में शामिल होकर अपने पूर्व विवाह को छिपाकर कपटपूर्ण तरीके से झूठे आश्वासन के साथ इनसे विवाह करने, तत्‌पश्चात्‌ इनके सम्पत्ति को कपटपूर्ण तरीके से हड़पने, उनको शारीरिक एवं मानसिक यातना देने एवं जान से मारने की धमकी दिये जाने संबंधी मामले में श्री पासवान दोषी प्रतीत होते है। इस मामले में श्री पासवान के विरूद्ध संजु देवी के परिवाद संख्या- 1107सी/2021 से उद्‌भुत नगर थाना बेगूसराय कांड संख्या- 608/2021 संजु देवी बनाम सिकन्दर पासवान भा॰द॰वि॰ के धारा 382, 307, 406, 420, 493, 494, 495, 496, 498ए एवं 506 के तहत्‌ प्राथमिकी दर्ज है एवं कांड अनुसंधानरत है। श्री पासवान के इस कृृत्य से सरकार की छवि धूमिल होने के साथ ही साथ प्रतिष्ठा का भी हनन हुआ है।

3. श्री पासवान के विरूद्ध गठित आरोपों के संबंध में पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उतर में मुख्यतः निम्नांकित तथ्य रखे गये है :-

(i) श्री पासवान के द्वारा कार्यालय से अनुपस्थिति रहने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया है कि वे दिनांक-10.11.2021 एवं 11.11.2021 को छठ पूजा के राजकीय अवकाश होने के कारण संबंधित नियंत्री पदाधिकारी को मौखिक रूप से बताकर एवं मौखिक स्वीकृति प्राप्त कर मुख्यालय से बाहर अपने घर गये थे, जहा उन्हें उक्त वाद में दिनांक-10.11.2021 को गिरफ्तार कर लिया गया और दिनांक-11.11.2021 को उन्हें जेल भेज दिया गया। दिनांक-24.12. 2021 को जमानत पर मुक्त होने के उपरान्त इसकी सूचना नियंत्री पदाधिकारी को देते हुए दिनांक-27.12.2021 को योगदान किया गया। ऐसी स्थिति में न्यायिक हिरासत में रहने के कारण वे कार्यालय से अनुपस्थित थे न कि जानबूझकर। (ii) परिवादी श्रीमती संजू देवी से कपटपूर्ण तरीके से विवाह किये जाने एवं सम्पत्ति हड़पने के आरोप के संबंध में श्री पासवान के द्वारा अपने स्पष्टीकरण में सभी आरोपों को अस्वीकार करते हुए उल्लेख किया गया है कि कथित संजू देवी का पति स्व॰ प्रमोद कुमार थे, इस संबंध में संजू देवी से संबंधित 11 विभिन्न प्रमाण पत्र/शपत्र-पत्र की छायाप्रति संलग्न किया गया है।

(iii) परिवादी श्रीमती संजू देवी की जमीन एवं सम्पत्ति हड़पने के आरोप के संबंध में श्री पासवान द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्रीमती संजू देवी के पति के ननिहाल वाली —षि योग्य एक बिघा जमीन को रू॰ 8,00,000/- में श्रीमती संजू देवी ने जिला निबंधन कार्यालय में निबंधित/केवाला किया गया है। एतदसंबंधी डीड पेपर की छायाप्रति संलग्न किया गया है।

(iv) श्री पासवान द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि परिवादी श्रीमती संजू देवी एक चालाक, जालसाज, षडयंत्रकारी एवं अपराधी किस्म की महिला है, जिसकी पुष्टि हेतु खानपुर थाना काण्ड संख्या-216/2020 धारा-302, 34 भा॰द॰वि॰ में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में मंडल कारा, समस्तीपुर भेजे जाने संबंधी Web portal के News की छायाप्रति संलग्न किया गया है।

(v) श्री पासवान द्वारा भी परिवादी श्रीमती संजू देवी सहित अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध FIR दर्ज कराने का उल्लेख करते हुए एतदसंबंधी साक्ष्य की प्रति संलग्न किया गया है।

(vi) साथ ही श्री पासवान के विरूद्ध दर्ज नगर थाना काण्ड संख्या-608/2021 जिस पर माननीय व्यवहार न्यायालय, बेगूसराय द्वारा संज्ञान लिया गया है, उस संज्ञान आदेश को रद्‌द करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय, पटना में आपराधिक याचिका दायर किये जाने का भी उल्लेख किया गया।

4. उपर्युक्त वर्णित परिप्रेक्ष्य में विभाग स्तर से समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्रीमती संजू देवी द्वारा कपटपूर्ण तरीके से उसका धन, जमीन हड़पने तथा श्री पासवान से वैवाहिक स्थिति के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके साथ हीं श्री पासवान के वैधानिक पत्नी के द्वारा श्री पासवान की दूसरी शादी कर लिये जाने की कोई22 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 शिकायत नहीं की गयी है। उक्त मामले में उनके विरूद्ध दर्ज बेगूसराय नगर थाना कांड सं0-608/2021 माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। जहाँतक श्री पासवान के अनाधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने का प्रश्न है, श्री पासवान द्वारा छुट्‌टी स्वीकृत कराकर मुख्यालय से बाहर जाने से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस प्रकार उक्त आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित प्रतीत होता है।

अतः श्री सिकन्दर पासवान, तत्कालीन परियोजना अभियंता (सहायक अभियंता), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लि॰, कार्य प्रमंडल, आरा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उतर को अस्वीकृत करते हुए उनके अनाधिकृत रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने का प्रमाणित आरोप के लिए सम्यक विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के भाग-v शास्तियाँ और अनुसाशनिक प्राधिकार के नियम-14 के स्पष्टीकरण- 3 के आलोक में निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता हैः- (i) " " की शास्ति अधिरोपित किया जाता है, जिसकी प्रविष्टि उनके चरित्र पुस्त में की जायेगी तथा (ii) भविष्य में इनके विरूद्ध दर्ज बेगूसराय नगर थाना कांड सं0-608/2021 में माननीय सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किये जाने की स्थिति मे बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-20(i) के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --श्री वशिष्ठ नारायण, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सेतु प्रबंधन उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा विभागीय कार्यालय आदेश-201-सहपठित ज्ञापांक-9363 (एस) दिनांक 22.10.2019 के आलोक में (i) हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ (ii) लंगरी-पाकर अम्बारा पथ (iii) W&S Work in Old Gandak Approach Road का दिनांक- 14.11.2019 को निरीक्षण किया गया। एतद्‌संबंधी प्रतिवेदन दिनांक- 19.11.2019, श्री नारायण द्वारा समर्पित पत्रांक- 96 दिनांक- 27.04.2020 एवं संबधित अभिलेखों की विभागीय समीक्षा की गयी। उक्त के क्रम में श्री नारायण से विभागीय पत्रांक- 7078 (एस) अनु॰ दिनांक- 22.12.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके संबंध में श्री नारायण के पत्रांक- शून्य दिनांक- 11.01.2021 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। तद्‌ालोक में श्री नारायण से विभागीय पत्रांक-256(एस) अनु॰ दिनांक-17.01.2023 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत्‌ निम्न त्रुटियों/अनियमितताओं हेतु स्पष्टीकरण पूछा गयाः- (i) श्री नारायण द्वारा समर्पित निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक-19.11.2019 में पथ प्रमंडल, हाजीपुर अंतर्गत (i) हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ (ii) लंगरी-पाकर अम्बारा पथ (iii) W&S Work in Old Gandak Approach Road की गुणवत्ता जाँच हेतु संग्रहित नमूनों को बीच रास्ते में बदलने का उल्लेख किया है। उल्लेखनीय है कि श्री नारायण का यह दायित्व था कि संग्रहित नमूनों को अपने अभिरक्षण में रखकर TRI Lab में जाँच हेतु पहुँचाते परन्तु उनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वह्‌न नहीं किया गया। श्री नारायण द्वारा संग्रहित नमूनों को बदले जाने के संबंध में किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई भी नहीं की गयी तथा उनके द्वारा अपने दायित्वों को क्षेत्रीय पदाधिकारियों के ऊपर स्थानान्तरित करने का प्रयास किया गया।

(ii) दिनांक- 14.11.2019 को आलोच्य पथों के निरीक्षण के दौरान श्री नारायण के द्वारा श्री ब्रजकिशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक सम्प्रति सेवानिवृत को अनावश्यक एवं अनाधिकृत रूप से निरीक्षण में साथ रखा गया, जो श्री नारायण की अन्यथा मंशा को इंगित करता है।

2. उक्त के संबंध में श्री नारायण द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक-08.02.2023 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर एवं पत्रांक-शून्य दिनांक-16.02.2023 के द्वारा पूरक स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें आरोप के संबंध में मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किया गया हैः-

(i) श्री नारायण के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में यह अंकित किया गया है कि उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठन करने की कार्रवाई में Bihar CCA Rules, 2005 के नियम-17(3) एवं 17(4) का अनुपालन नहीं किया गया है, जो विधि विरूद्ध है। इसी क्रम में इनका कहना है कि वे मुख्य अभियंता हैं और मुख्य अभियंता के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार/नियुक्ति प्राधिकार, जो राज्य सरकार होते हैं, वे ही आरोप गठित कर सकते हैं, अन्य कोई नहीं। इनका यह भी कहना है कि नियम-17(3) के अधीन विभागीय कार्रवाई में आरोप गठित की जाती है लेकिन उनके विरूद्ध कोई भी विभागीय कार्यवाही या अनुशासनिक कार्रवाई लंबित नहीं है, इसलिए नियम-17(4) के तहत स्पष्टीकरण किया जाना इस नियम के प्रतिकूल है। (ii) श्री नारायण द्वारा अपने पूरक स्पष्टीकरण उत्तर में गठित आरोप के बिन्दु पर मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि पथों के निरीक्षण के दौरान प्रमंडलीय कर्मी उपस्थित थे, को निदेशित किया गया कि एकत्रित नमूनों को TRI में जाँच हेतु गुण नियंत्रण के वाहन में रखकर उनके वाहन के पीछे आने को कहा गया था। वे पटना स्थित कार्यालय में सायं 4.00 बजे पहुँच गये और रात्रि 7.00 बजे तक कार्यालय में23 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 प्रतीक्षार्थ थे, लेकिन प्रमंडलीय कर्मी सायं 7.00 बजे तक उनके कार्यालय नहीं पहुँचे और न ही विलंब का कारण उन्हें संसूचित किया गया, जो उनके निरीक्षण के दौरान दिये गये निदेश का उल्लंघन था। श्री नारायण के द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि दिनांक-15.11.2019 को सुबह 9.30 बजे कार्यालय पहुँचने पर पाया कि नमूना का थैला उनके कार्यालय के कोना में रखा हुआ था, पूछने पर कोई कर्मचारी यह नहीं बता पाया कि उक्त थैला कब और कैसे उनके कार्यालय कक्ष में रखा हुआ है तथा नमूना के थैला का बन्धन टूटा हुआ था एवं संग्रहित किये गये नमूनों का मेल नहीं होने एवं समय पर नहीं पहुँचने के कारण संशय प्रतीत हुआ कि नमूना को बदल दिया गया है। (iii) श्री ब्रजकिशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को अपने निरीक्षण के साथ रखे जाने के आरोप के संबंध में श्री नारायण के द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री प्रसाद तत्समय सेतु प्रबंधन उपभाग में पदस्थापित थे, इसलिए मुख्य अभियंता को प्रदत्त शक्ति के तहत्‌ अपने अधीनस्थ पदाधिकारी को मौखिक आदेश पर निरीक्षण में साथ रखा गया।

(iv) श्री नारायण के द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका CWJC No.-634/2023 दायर किया गया है, जो लंबित है।

(v) इसके अतिरिक्त श्री नारायण के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर/पूरक स्पष्टीकरण उत्तर में और भी कई तथ्यों का अनावश्यक रूप से उल्लेख किया गया है, जो गठित आरोप के बिन्दुओं के संदर्भ में अप्रासंगिक है।

3. श्री नारायण द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी, जो निम्नवत्‌ हैः-

(i) श्री नारायण के द्वारा यह कहना कि आरोप पत्र गठन की कार्रवाई में Bihar CCA Rules, 2005 के नियम-17(3) एवं 17(4) का अनुपालन नहीं किया गया तथ्यगत नही है, चूंकि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-6968 दिनांक-12.07.2021 की कंडिका- 6(ii) में विहित प्रावधान के आलोक में विषयांकित मामले में सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार विभागीय मंत्री होते हैं। तदालोक में माननीय उप मुख्य (पथ निर्माण) मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करने के उपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17(3) एवं 17(4) के तहत्‌ आरोप पत्र गठित करते हुए श्री नारायण से विभागीय पत्रांक 256(एस)अनु॰ दिनांक-17.01.2023 द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने की कार्रवाई की गयी है।

श्री नारायण का यह कहना कि विभागीय कार्यवाही या अनुशासनिक कार्रवाई लंबित रहने पर ही नियम-17(3) के तहत्‌ आरोप पत्र गठित की जाती है, तथ्यगत नहीं है। वस्तुतः किसी भी आरोपी सरकारी सेवक के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने के पूर्व ही नियम-17(3) एवं 17(4) के तहत्‌ आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण पूछे जाने की कार्रवाई की जाती है।

(ii) श्री नारायण के द्वारा आरोप के मूल बिन्दु यथा-संग्रहित नमूनों को अपने अभिरक्षण में रखकर TRI Lab में जाँच हेतु पहुँचाने का दायित्व निरीक्षण पदाधिकारी के रूप में श्री नारायण का था- के संबंध में कोई तथ्य/तर्क नहीं दिया गया है अर्थात वे किस परिस्थिति में संग्रहित नमूनों को अपने अभिरक्षण में नहीं रखे और स्वयं की गाड़ी में नमूनों को नहीं ला सके- के बिन्दु पर कोई तथ्य अथवा तर्क नहीं दिया गया है। यह भी कि यदि कथित नमूना उनके कार्यालय कक्ष में पाये जाने पर उनके द्वारा प्रमंडलीय कर्मी (जो संग्रहित नमूना लेकर आये थे) से पूछताछ किया जाना अपेक्षित था, जबकि इनके द्वारा अपने कार्यालय कर्मी से पूछताछ की गयी। निरीक्षण के उपरांत लौटने के क्रम में श्री ब्रजकिशोर प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, जो उनके कथनानुसार निरीक्षण में उनके साथ थे, वे किस गाड़ी से अथवा कब लौटे-के संबंध में कोई तथ्य अंकित नहीं किया गया है। नमूनों के बदले जाने के बिन्दु पर इनके द्वारा श्री ब्रजकिशोर प्रसाद से पूछताछ भी नहीं की गयी, क्योंकि क्षेत्रीय अभियंताओं के द्वारा अपने-अपने स्पष्टीकरण में यह कहा गया कि उनके द्वारा निरीक्षण पदाधिकारी के निदेश के आलोक में श्री प्रसाद के आवास पर नमूनों को रख दिया गया था। श्री नारायण के सायं 4.00 बजे कार्यालय पहुँचने एवं रात्रि 7.00 बजे तक प्रमंडलीय कर्मी के द्वारा नमूनों को लेकर नही पहुँचे जाने की स्थिति में सामान्य व्यवहार में उनके द्वारा संबंधित कर्मी से मोबाईल पर वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त किया जा सकता था, जो नहीं किया गया। इसलिए श्री नारायण के द्वारा सायं 4.00 बजे कार्यालय पहुँचने एवं रात 7.00 बजे तक कार्यालय में प्रतीक्षारत रहने का कथन विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार वर्णित तथ्यों से प्रतीत होता है कि श्री नारायण के द्वारा निरीक्षण पदाधिकारी की हैसियत से अपने दायित्वों का सही ढ़ंग से निर्वहन नहीं कर क्षेत्रीय पदाधिकारियों के ऊपर दायित्व स्थानान्तरित करने का प्रयास किया गया।

(iii) श्री ब्रजकिशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को निरीक्षण के दौरान साथ रखे जाने के आरोप के संबंध में श्री नारायण के द्वारा अंकित किया गया तर्क संतोषजनक पाया गया, क्योंकि श्री प्रसाद को निरीक्षण में साथ रखे जाने से कोई नियम विशेष का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।

(iv) जहाँतक श्री नारायण से पूर्व में पूछे गये स्पष्टीकरण पत्रांक 7078(एस) दिनांक 22.12.2020, जिसके विरूद्ध वाद दायर किया गया है, का प्रश्न है तो इस संबंध में स्पष्ट करना है कि श्री नारायण से प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय समीक्षा के उपरांत स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने की स्थिति में श्री नारायण के24 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 विरूद्ध पुनः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(3) एवं 17(4) के तहत नये सिरे से आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक 256(एस)अनु॰ दिनांक- 17.01.2023 द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने की कार्रवाई की गयी है।

4. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री वशिष्ठ नारायण, तत्कालीन मुख्य अभियंता, सेतु प्रबंधन उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति मुख्य अभियंता, अग्रिम योजना उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर संतोषजनक नहीं पाये जाने के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के स्पष्टीकरण-(3) के तहत्‌ चेतावनी (जिसकी प्रविष्टि चरित्र पुस्त में की जायेगी) का दंड संसूचित किया जाता है। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के अन्तर्गत कार्यान्वित कार्य योजनाओं की दिनांक-09.06.2021 को Video Confrencing (V C) के माध्यम से विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि Strengthening work in K.M. 118 to K.M. 142.8 of NH-227A सत्तरघाट से चकिया तक कार्य की प्रगति काफी धीमी है, जिसका प्रभावकारी अनुश्रवण नहीं किया गया है। श्री रणजीत कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा एकरारनामा की शर्त्तों के अनुसार कार्य की धीमी प्रगति रहने के कारण संवेदक के विरूद्ध LD की राषि की कटौती किये जाने हेतु अनुषंसा नहीं की गयी। Video Confrencing में LD के प्रावधानों के बारे में पूछने पर श्री कुमार के द्वारा अनभिज्ञता व्यक्त की गयी। संवेदक के विरूद्ध प्रभावकारी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने के फलस्वरूप कार्य ससमय पूरा नहीं किया जा सका एवं सरकारी कार्य बाधित हुआ। उक्त आरोपों के संदर्भ में कार्य योजनाओं को ससमय सम्पन्न कराये जाने की दिषा में गंभीरता से प्रयास नहीं किये जाने, कार्य में षिथिलता एवं उदासीनता बरतने हेतु श्री रणजीत कुमार, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी से विभागीय पत्रांक-2751 (एस) दिनांक- 17.06.2021 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। 2. श्री कुमार के द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का प्रत्युत्तर पत्रांक-32 दिनांक-21.06.21 द्वारा समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर के अन्तर्गत अंकित किया गया कि आलोच्य पथ का लगातार अनुश्रवण किया जाता रहा है एवं संवेदक को कार्य में तेजी लाने हेतु हमेषा निदेषित किया जाता रहा है। संवेदक द्वारा कार्य की प्रगति धीमी होने का मुख्य कारण बिटुमिन का ससमय उपलब्ध नहीं होना, कोरोना संक्रमण में बढ़ोतरी एवं लॉक डाउन के कारण मजदूर नहीं मिलना बताया जाता रहा था। इसलिए संवेदक के विरूद्ध LD की अनुषंसा न करके संवेदक पर कार्य को ससमय पूर्ण कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। V.C. के समय संवेदक पर कोई LD नहीं लगाया गया था, इसलिए घबराहट में संवेदक पर लगाये जाने वाले LD के प्रावधानों को स्पष्ट नहीं कर सकने की बात श्री कुमार के द्वारा बतायी गयी। यह भी अंकित किया गया कि कार्य में कभी षिथिलता एवं उदासीनता नहीं बरती गयी है। संवेदक पर LD लगा दिया गया है। 3. श्री कुमार के द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण उत्तर के अन्तर्गत अंकित तथ्यों की विभागीय समीक्षा की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा यह कहा गया है कि कार्य में तेजी लाने हेतु संवेदक को हमेशा निदेशित किया जाता रहा है, परन्तु इससे संबंधित कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। कार्य की धीमी प्रगति के कारणों के बारे में संवेदक द्वारा दिए गए बचाव, जिसका इन्होंने उल्लेख किया है, का भी कोई साक्ष्य नहीं है। श्री कुमार के द्वारा स्वीकर किया गया है कि समीक्षा की तिथि तक संवेदक के विरूद्ध कोई LD नहीं लगाया गया था। बाद में LD लगाने की बात इन्होने कही है, परन्तु साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। इस प्रकार श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। 4. तद्‌नुसार श्री रणजीत कुमार, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-32 दिनांक-21.06.2021 को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के भाग-V शास्तियाँ और अनुशासनिक प्राधिकार के नियम-14 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-5427(एस) सहपठित ज्ञापांक-5428(एस) दिनांक-02.11.2021 द्वारा का दण्ड संसूचित किया गया है। 5. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री कुमार के पत्रांक-36 अनु॰ दिनांक-30.07.2022 के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर के तहत जो भी तथ्य/तर्क दिया गया था, वह सभी साक्ष्य आधारित था अर्थात उनके पास तत्समय सभी साक्ष्य/अभिलेख उपलब्ध थे, परन्तु विभाग द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित करने हेतु बहुत ही अल्प अवधि (मात्र 07 दिन) निर्धारित करने एवं जल्दबाजी में उत्तर समर्पित करने के कारण भूलवश अपने कथन के समर्थन में तत्समय साक्ष्य संलग्न नहीं कर सका था। श्री कुमार के द्वारा सम्प्रति अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन के साथ कतिपय साक्ष्य/अभिलेख संलग्न किया गया है।25 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 6. श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि सहायक अभियंता के द्वारा धीमी प्रगति के लिए संवेदक को समीक्षा की तिथि-09.06.2021 के पूर्व काफी समय अन्तराल पर दो पत्र लिखे गये थे, वह भी एक जनवरी में तथा दूसरा अप्रैल-2021 में। संवेदक के विरूद्ध LD भी समीक्षा की तिथि के ठीक दूसरे दिन लगाये जाने का पत्र संलग्न किया गया है। उपर्युक्त से यह स्पष्ट हो रहा है कि श्री रणजीत कुमार के द्वारा आलोच्य कार्य के क्रियान्वयन की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किया गया है। इस हेतु संसूचित लघु दण्ड पर पुनर्विचार का कोई यथेष्ट कारण परिलक्षित नहीं होने के कारण इनके द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-36 अनु॰ दिनांक-21.07.2022 को अस्वी—त किया जाता है। 7. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत गरखा-शाहपुर चौक भाया अख्तियारपुर-मोतिराजपुर पथ में कराये गये कार्यों की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4, पथ निर्माण विभाग, पटना के द्वारा की गयी, जिसके संबंध में जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-113 (अनु॰) (गो0) दिनांक-10.08.18 के द्वारा निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, पटना को समर्पित की गयी। निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-630 अनु0 दिनांक-13.08.18 द्वारा उक्त जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसकी विभागीय समीक्षा के उपरांत सक्षम प्राधिकार से प्राप्त आदेश के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा से विभागीय पत्रांक-599(एस) अनु0 दिनांक-03.02.2023 के द्वारा निम्न त्रुटियों/अनियमितताओं के लिये आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण पूछा गयाः-

(i) PQC कार्य के Shoulder के दोनों तरफ Brick on edge soling कार्य, Shoulder में मिट्‌टी कार्य, Km post एवं Road signage कार्य अधूरा पाया गया जबकि एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि-17.12.2017 थी।

(ii) आलोच्य पथ के 6ठें कि0मी0 में PQC कार्य के उपर 25mm SDBC एवं 7 वें कि॰मी॰ में PQC कार्य के उपर Seal Coat कार्य किया हुआ पाया गया। प्रतिवेदित किया गया कि त्रुटिपूर्ण PQC Surface के उपर संवेदक के खर्च पर 25mm SDBC कार्य कराया गया है एवं आगे भी खराब होने पर उन्हीं के द्वारा उनके खर्च पर SDBC कार्य कराया जायेगा। 4 वर्ष के उपरांत Periodic maintencace के अन्तर्गत 25mm Bituminous layer का प्रावधान है। परन्तु IRC:SP-83-2008 की कंडिका 12.6.1 के अनुसार "The use of bituminous mixes is very exceptional. Experience with bituminous binder for patching concrete slab is not satisfactory and they are generally not recommended except for use as a temporary patch in emergency conditions when other more suitable materials are not available at site." इसके अनुसार PQC कार्य की त्रुटियों को अवश्यकतानुसार Epoxy mortar/Concrete, Elastomric Concrete या Polymer modified cementitous concrete से treatment करना ज्यादा Suitable है क्योंकि PCQ Concrete pavement का life 20 से 30 वर्ष तक होता है। DLP के बाद संवेदक द्वारा कोई मरम्मति नहीं किया जायेगा एवं PQC का surface फिर खराब हो जायेगा। परन्तु इस पद्धति के अनुसार आपके द्वारा कार्य नहीं कराया गया है, जो आपकी घोर लापरवाही एवं गैर जिम्मेदार आचरण का द्योतक है।

2. उक्त के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-83 अनु0 दिनांक-15.03.2023 एवं पूरक स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक-15.05.2023 में अन्य तथ्यों/तर्कों सहित आरोप के संबंध में मुख्य रुप से अंकित किया गया कि बालू एवं अन्य निर्माण सामग्री की उपलब्धता में उत्पन्न कठिनाई के कारण कार्य बाधित हुआ, जिसके फलस्वरूप कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो सका था। निरीक्षण के समय कार्य प्रगति पर था। फलस्वरूप कहीं-कहीं कार्य आंशिक रूप से अपूर्ण था। PQC कार्य के ऊपर SDBC एवं Seal Coat कार्य कराने के संबंध में यह उल्लेख किया गया है कि पथांश में PQC कार्य की गुणवत्ता सही पाया गया था। अन्य वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण PQC Casting के तुरन्त बाद स्थानीय लोगों के आवागमन के कारण कहीं-कहीं पथ के सतह में खुरदरापन आ गया था, जैसा कि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में भी अंकित है। विभागीय आदेशानुसार इस त्रुटिपूर्ण कार्य को संवेदक के खर्च पर सुधार कर इसकी सूचना विभाग को प्रतिवेदित की जा चुकी है। श्री कुमार के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तरों में अंकित तथ्य/तर्क की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा आलोच्य मामले में त्रुटिपूर्ण कार्य कराया गया। तदालोक इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर स्वीकार योग्य नही पाया गया। 3. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गई समीक्षा के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी व्यवस्था के अधीन), नई राजधानी पथ प्रमंडल,26 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 पटना के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तरों को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए सम्यक विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14(i) के तहत निम्न लघु दण्ड अधिरोपित किया जाता हैः-

(i) प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं0 s --पथ प्रमंडल, लखीसराय अन्तर्गत बड़हिया-मिनी बाईपास पथ के कुल 0.80 कि0मी0 पथांश में कराये गये विविध कार्य, ड्रेन कार्य, क्रॉसड्रेन कार्य एवं साधारण मरम्मति कार्य सहित पी0सी0सी0 कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री अमित कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, लखीसराय के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5896 (एस) दिनांक 12.07.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री कुमार के विरूद्ध एकमात्र आरोप निम्नवत्‌ है :- (i) आलोच्च पथ के PQC कार्य की average equivalent cubical compressive strength of core 140.89 kg/cm2 पाया गया। 2. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही मेंं संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-828, दिनांक 14.07.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य/निष्कर्ष से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु को निम्नवत रेखांकित किया गया :- (i) Cubical strength 3. उक्त असहमति के बिन्दुओं के संदर्भ में आरोपी पदाधिकारी श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1633 (एस) अनु॰ दिनांक 20.03.2023 के द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री कुमार के पत्र दिनांक 11. 04.2023 के द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से अंकित किया गया कि-पथ प्रमंडल, लखीसराय द्वारा पथ में PQC कार्य करने के पूर्व इसका Mix Design नहीं कराया गया है, जसके फलस्वरूप उनके द्वारा Actual Cubic Strengthही जाँच में प्रतिवेदित किया गया है, जो उपलब्ध कराये गये नमूनों एवं निर्धारित अनुपात (Nominal mix on volume basis) पर आधारित है। Nominal mix on volume basis के आधार पर compressive strength को permissible सीमा के अन्तर्गत प्राप्त होने पर ही जाँचफल की अभियुक्ति में "OK" अंकित किया गया था। 4. श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि proper grade में mix design का कार्य कराकर concrete pavement का कार्य कराने की जिम्मेदारी संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं उनके अधीन कार्यरत अन्य अभियंताओं की होती है। इसलिए आरोपी पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन में Actual Cubic Strength के आधार पर ही compressive strength को permissible सीमा के अन्तर्गत पाये जाने पर "OK" अभियुक्ति दर्ज की गयी। चूंकि श्री कुमार द्वारा वर्त्तमान परिस्थिति के अनुरूप जाँच प्रतिवेदन में OK दर्ज की गयी है। इसलिए आरोपी पदाधिकारी को दोषी माने जाने का युक्तिसंगत आधार परिलक्षित नहीं होता है। अतः सम्यक विचारोपरांत श्री अमित कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सहायक अभियंता, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, पटना को आलोच्य मामले में आरोप मुक्त किया जाता है। सं0 II s --श्री सोहैल अख्तर, अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार पटना को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना में अंषधारी के रूप में मनोनित किया जाता है । 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रामकृष्ण प्रसाद, अवर सचिव, (प्र0को0)। सं0

II s --श्री अभय कुमार सिंह, भा0प्र0से0 अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को उक्त निगम के अंषधारी के रूप में मनोनित किया जाता है । 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रामकृष्ण प्रसाद, अवर सचिव, (प्र0को0)।27 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 प्र03-प्रो0-04/2014(खंड-I)-4491--वित्त विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना ज्ञापांक-4685 दिनांक-25.06.

2003 एवं संकल्प संख्या-7566 दिनांक-14.07.2010 के द्वारा परिचारित बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त (सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना) नियमावली-2003 बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त रूपांतरित सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना-2010 के आलोक में बिहार आपूर्ति सेवा संवर्ग के कार्यरत/सेवा निवृत, आपूर्ति निरीक्षक/पणन पदाधिकारी/सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकरियों को सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना/रूपांतरित सुनिश्चित वृति उन्नयन योजनान्तर्गत वित्तीय उन्नयन का लाभ की मंजूरी के मामलों पर विचारण के लिए निम्नांकित रूप से विभागीय स्क्रीनिंग/प्रोन्नति समिति गठित की जाती हैः- (1) श्री विनय कुमार (भा0प्र0से0) - अध्यक्ष

सचिव,

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना ।

(2) श्री सुबोध कुमार चौधरी, - सदस्य

निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना।

(3) श्री अशोक कुमार,, - सदस्य

आंतरिक वित्तीय सलाहकार, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना।

(4) श्री गुफरान अहमद - सदस्य

उप सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना।

(5) श्रीमती संगीता सिंह, - सदस्य

विशेष कार्य पदाधिकारी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना ।

(6) श्री विनोद कुमार तिवारी, - सदस्य

विशेष कार्य पदाधिकारी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, सचिव। सं0 4654--अधोहस्ताक्षरी मैं आलोक कुमार, पी. एण्ड टी. बी. डब्ल्यू. एस. (आई. ई. एस. - 1996) आज दिनांक- 10.08.2023 के अपराह्‌न में विशेष सचिव, उद्योग विभाग, बिहार , पटना के पद का प्रभार स्वतः त्याग करता हूँ। (सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या :1/पी॰-1025/2011 -सा॰प्र॰-8043 दिनांक-03.08.21 द्रष्टव्य)।28 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 सं0 15/ए 2-02/2016 (अंश 3)-3806--श्री डॉ0 राजवर्धन आज़ाद, अध्यक्ष, बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 13.10.2023 को व्यक्तिगत कारणों से बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से दिये गये त्यागपत्र को स्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव। ————— अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 31—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

29 (cid:464)बहार गजट, 18 2023

भाग-2

बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और

नियम आदि। —————

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग

(शुद्धि-पत्र)

अधिसूचना

18 अक्तूबर 2023

संॉ मंॉमंॉ-02/विॉ-03-4001/2022-983--विभागीय अधिसूचना संख्या-885, दिनांक-25.09.2023 कि कंडिका-01 में अभिलेख निदेशक, बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय, बिहार, पटना के पद पर नियुक्ति हेतु निर्गत नियुक्ति पत्र में ''स्वीकृत वेतन स्तर-13 (रु0 1,23,100/-)'' को ''स्वीकृत वेतन स्तर-13 (रु0 1,18,500/-)'' से प्रतिस्थापित किया जाता है।

आदेष से, निशीथ वर्मा, संयुक्त सचिव।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 31—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

30 (cid:464)बहार गजट, 18 2023

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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सं0 1186&&मै िनभ(cid:91)य कु मार मंडल (cid:466)पता–तारणी (cid:292)साद मंडल, िनवासी (cid:274)ाम (cid:466)वशाल पो0-बरमिसया, थाना –

ँ . क(cid:551)

ं . शपथ प(cid:287) सं.-790 (cid:465)दनांक 7.8.23 (cid:430)ारा घोषणा करता हू इशीपुर बाराहाट (cid:468)जला भागलपुर का िनवासी हू रॉ(cid:466)बन कु मार मंडल मेरा पु(cid:287) है . शै(cid:162)(cid:468)णक (cid:292)माण मे मेरा नाम िनभ(cid:91)य कु मार मंडल (Nirbhay kumar mandal) (cid:465)क जगह भूलवश िनभ(cid:91)य मंडल (Nirbhay mandal) अं(cid:465)कत हो गया है. यह (cid:465)क मेरे आधार काड(cid:91) एवं वोटर आई० काड(cid:91) मे भी मेरा नाम िनभ(cid:91)य कु मार मंडल अं(cid:465)कत है. मै भ(cid:466)व(cid:231)य मे िनभ(cid:91)य कु मार मंडल के नाम से ह(cid:547) जाना, पहचाना जाउं गा.

िनभ(cid:91)य कु मार मंडल.

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सं0 1187&&मैं अखिलेष कुमार यादव, पुत्र-स्व0 योगेन्द्र यादव, ग्राम-इजारा पो-हरनाथपुर, थाना-एम0एच0 नगर, जिला-सीवान (बिहार) षपथपत्र संख्या-7538 दिनांक 31/05/2023 के द्वारा घोषणा करता हूं कि मैं अखिलेष कुमार यादव मेरे स्व0 पिता के रेलवे दुर्घटना के बाद रेलवे दावा अधिकरण पटना के दावा आवेदन पत्र में अखिलेष यादव लिखा गया है। मैं अखिलेष कुमार यादव के नाम से जाना जाउं्रगा और भविष्य में भी अखिलेष कुमार यादव के नाम से जाना जाऊंगा।

अखिलेष कुमार यादव।

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सं0 1188&&मैं मुकेष कुमार यादव, पुत्र-स्व0 योगेन्द्र यादव, ग्राम-इजारा पो-हरनाथपुर, थाना-एम0एच0 नगर, जिला-सीवान (बिहार) षपथपत्र संख्या-7696 दिनांक 31/05/2023 के द्वारा घोषणा करता हूं कि मैं मुकेष कुमार यादव मेरे स्व0 पिता के रेलवे दुर्घटना के बाद रेलवे दावा अधिकरण पटना के दावा आवेदन पत्र में मुकेष यादव लिखा गया है। मैं मुकेष कुमार यादव के नाम से जाना जाउंगा और भविष्य में भी मुकेष कुमार यादव के नाम से जाना जाऊंगा।

मुकेष कुमार यादव।

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ँ। शपथ प(cid:287) सं. -5462, (cid:465)दनांक-05/09/23 द्वारा घोषणा करता हू

सं0 1189&&म(cid:583), िस(cid:424)ाथ(cid:91) शमा(cid:91), (cid:466)पता-अ(cid:509)ण कु मार, (cid:274)ाम- कौशला, थाना - नारदीगंज, (cid:468)जला- नवादा ((cid:466)बहार), का (cid:232)थायी िनवासी हू ँ , (cid:465)क मेरे सारे शै(cid:162)(cid:468)णक (cid:292)माण प(cid:287)(cid:585) तथा अ(cid:219)य द(cid:232)तावेज़(cid:585) म(cid:581) मेरा नाम ए िस(cid:424)ाथ(cid:91) शमा(cid:91) दज(cid:91) है तथा म(cid:583) अब भ(cid:466)व(cid:231)य म(cid:581) िस(cid:424)ाथ(cid:91) शमा(cid:91) (Siddharth Sharma) के नाम से जाना व पहचाना जाऊं गा ।

िस(cid:424)ाथ(cid:91) शमा(cid:91)।

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सं0 1190&&मैं रणधीर कुमार पिताः-श्री सुरेन्द्र सिंह, ग्रामपो0-फतेहपुर, थाना-दिदारगंज, जिला-पटना-803206 षपथ पत्र संख्या-2888 एवं दिनांक 26/09/2023 द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि मेरे आधार कार्ड जिसका संख्या 9994 7686 6458 मे मेरा नाम भूल वष रणधीर कुमार सिंह हो गया है। यह कि मुझे रणधीर कुमार सिंह के स्थान पर सिर्फ रणधीर कुमार के नाम से सभी कार्य हेतू जाना एवं पहचाना जाएगा।

रणधीर कुमार।

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सं0 1243&&मैं, चांदमणि कुमारी, पति-दिनेश राय, निवासी ग्राम-बोरवारा, थाना-बोचहां, जिला-मुजफ्फरपुर, मेरे आधार सं0-681889868348 में गलती से मेरा नाम चंद्रमणि देवी हो गया है, जबकि मेरा सही नाम चांदमणि कुमारी है। Affid. No. 28381/18.09.23.

चांदमणि कुमारी।31 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 No. 1243&&CHANDMANI Kumari W/o Dinesh Ray, R/O Vill.-Borbara, PS-Bochaha, Dist.- Muzaffarpur (Bihar) solemnly affirm and declare that (Affidavit No. 28381. dated 18.09.23) in my Aadhar no. 6818 8986 8348 by mistake my name "Chandramani Devi" is entered as which is incorrect. My actual name is Chandmani Kumari.

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सं0 1245&&मैं, धर्मेन्द्र कुमार साह, पिता-स्व0 रामवृक्ष साह, साकिन-बेहटा, पो0-बेनीपट्‌टी, थाना-बेनीपट्‌टी, जिला-मधुबनी बिहार। शपथ पत्र सं0-1080 दि0 11.09.23 द्वारा यह सूचित करता हूं कि केन्द्रीय माध्यमिक बोर्ड वर्ष 2017, रौल नं0-7143613 एवं इंटरमीडिएट रौल नं0-7623585 से उर्तीर्ण मेरी पुत्री काजल कुमारी के प्रमाण पत्राें में मेरा नाम धर्मेन्द्र साह दर्ज हो गया है। धर्मेन्द्र कुमार साह एवं धर्मेन्द्र साह, दोनों एक ही व्यक्ति का नाम है, जो मैं स्वयं हूँ। आगे मैं सभी कार्यो हेतु धर्मेन्द्र कुमार साह के नाम से जाना व पहचाना जाऊंगा।

धर्मेन्द्र कुमार साह।

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No. 1246&&I, Lalbabu Prasad Yadav, S/o Govind Prasad Yadav R/o Old ward No-13 New ward No-27, Maharajganj Madhubani, Distt.- Madhubani Bihar 847211 do hereby solemnly affirm and delclare as per affidavit No- 923 dt.12-10-23 that my name is written D.E.L.E.D Passing certificate and marksheet as Lalbabu Prasad which is wrong as per C.T.E.T. and Aadhar No-9073 2926 8268 my correct name is Lalbabu Prasad Yadav and now I will be known as Lalbabu Prasad Yadav for all future purposes.

Lalbabu Prasad Yadav.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 31—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

32 (cid:464)बहार गजट, 18 2023

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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श्री विनोद कुुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-615/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, किशनगंज (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध डस्टबीन क्रय में अनियमितता बरतने संंबंधी आरोपों के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-7079 दिनांक 01.11.2017 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त प्रतिवेदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-15588 दिनांक 07.12.2017 द्वारा श्री कुमार सेे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार का स्पष्टीकरण (दिनांक 20.12.2017) प्राप्त हुआ। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-573 दिनांक 11.01.2018 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से मंतव्य की माँग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-2386 दिनांक 08.07.2020 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं बताया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य के समीक्षोपरांत मामले की गम्भीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित करते हुए आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9713 दिनांक 14.10.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। मुख्य जाँच आयुक्त द्वारा इस मामले के अग्रत्तर संचालन हेतु प्रधान सचिव, सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग-सह-विभागीय जाँच आयुक्त को हस्तांतरित किया गया। इस बीच दिनांक 30.06. 2021 को श्री कुमार के वाध्र्यक्य सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं॰-5612 दिनांक 11.04.2022 द्वारा इस विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी॰) में सम्परिवर्तित किया गया।

प्रधान सचिव, सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग-सह-विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक-66 दिनांक 31.03.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप सं॰-01,05,06 एवं 07 को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा विश्लेषण एवं जाँच प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि :-

(i) आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अवचार एवं कदाचार के लांछनों के अभिकथन में पहला आरोप है कि क्रय समिति की बैठक में नगर परिषद्‌, किशनगंज में डस्टबीन क्रय हेतु निविदा सं॰-04/15-16 में छः आपूर्तिकर्ताओं का तकनीकी लिफाफा खोला गया, जिसमें पाँच निविदादाताओं को तकनीकी शर्तो को पूरा नहीं करने के कारण अयोग्य ठहराया गया एवं एकमात्र निविदाकर्त्ता का डस्टबीन क्रय किया गया। बिहार वित्त नियमावली, 2005 के अनुसार तकनीकी रूप से एकल निविदादाता के दक्ष पाये जाने पर उसका वित्तीय निविदा नहीं खोला जाना है तथा पुनर्निविदा किया जाना है, परन्तु ऐसा नहीं किया गया, जो बिहार वित्तीय नियमावली का उल्लंघन है अतः यह आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।

(ii) पाँचवा आरोप है कि डस्टबीन आपूर्ति के फलस्वरूप राशि का भुगतान स्वच्छ भारत मिशन में प्राप्त आवंटन से नहीं कर चतुर्थ वित्त मद/13वें वित्त मद (ठोस अपशिष्ट) में प्राप्त कर किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि चतुर्थ वित्त एवं तेरहवें वित्त मद्‌ में राशि रहने तथा सफाई व्यवस्था हेतु सामग्री क्रय करने का निर्देश रहने के कारण तेरहवीं33 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 एवं चतुर्थ की राशि से डस्टबीन क्रय किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये ऐसे किसी निर्देश के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। अतः यह आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।

(iii) छठा आरोप है कि प्रकाशित निविदा की शर्त में आपूर्ति की जानेवाली सामग्री की कंपनी सिन्टेक्स फायर रिसर्च लोबोरेट्री से प्रमाणित एवं महाप्रबंधक, जिला उद्योग से जाँचोपरांत ही भुगतान किया जाना था, परन्तु महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र से सत्यापन प्रतिवेदन के बिना ही भुगतान कर दिया गया। अतः यह आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।

(iv) आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध सातवाँ आरोप है कि नगर विकास एवं आवास विभाग का संकल्प सं॰-3537 दिनांक 20.10.2014 के अनुसार एक समय में अधिक से अधिक दो या तीन योजनाएँ ही एक कनीय अभियंता को कार्यान्वयन हेतु दिया जाना था और एक स्कीम के लिए दिये गये एक अग्रिम के सामंजन के बाद ही दूसरा अग्रिम दिये जाने का निर्णय था, परन्तु उक्त संकल्प का उल्लंघन करते हुए एक कनीय अभियंता को एक समय में तीन से अधिक विभागीय कार्य कार्यान्वयन हेतु दिया गया। यह विभागीय संकल्प का स्पष्ट उल्लंघन है। अतः यह आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 7299 दिनांक 18.04.2023 द्वारा श्री कुमार से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की मांग की गई। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा लिखित अभिकथन (दिनांक 02.05.2023) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा जाँच प्रतिवेदन से असंतुष्टता व्यक्त करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा अपने लिखित अभिकथन में कोई नया तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। अतएव श्री कुमार का लिखित अभिकथन स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी॰) के संगत प्रावधानों के तहत श्री विनोद कुमार के ''पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की राशि कटौती 02 (दो) वर्षो तक करने'' का दंड विनिश्चित किया गया। उक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक-10527 दिनांक 05.06.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/मंतव्य की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग दिनांक 09.08.2023 को आहूत पूर्ण पीठ की बैठक में श्री कुमार के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित उक्त दंड प्रस्ताव (यथा पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत राशि की कटौती करने) पर सहमति व्यक्त किया गया। उक्त मंतव्य/सहमति बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1926 दिनांक 25.08.2023 द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री विनोद कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-615/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, किशनगंज (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी॰) के संगत प्रावधानों के तहत का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संयुक्त सचिव। श्री वीरेन्द्र कुमार तरूण, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1013/2011, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, बाँकीपुर अंचल, पटना नगर निगम, पटना के पदस्थापन काल वर्ष-2019 में पटना जल जमाव पर गठित जाँच समिति से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन तथा नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-734 दिनांक 10.02.2020 द्वारा निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही हेतु प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2371 दिनांक 14.02.2020 द्वारा श्री तरूण को निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-5655 दिनांक 19.02.2020 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से आरोप पत्र की माँग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-1618 दिनांक 06.05.2020 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त आरोप पत्र को पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोंपरांत विभागीय पत्रांक-4602 दिनांक 11.05.2020 द्वारा श्री तरूण से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त क्रम में श्री तरूण का स्पष्टीकरण (दिनांक 29.05.2020) प्राप्त हुआ, जिसमें इनके द्वारा आरोपों से इन्कार करते हुए स्पष्टीकरण को स्वीकार करने का अनुरोध किया गया।34 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 श्री तरूण के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पत्र, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उक्त समिति द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6545 दिनांक 06.07.2020 द्वारा आरोपों की वृहद जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के पत्रांक-102 दिनांक 19.06. 2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-12562 दिनांक 04.07.2023 द्वारा श्री तरूण से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री तरूण का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (दिनांक 07.08.2023) प्राप्त हुआ। श्री तरूण के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री तरूण द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपंरात पाया गया कि प्राकृतिक अतिवृष्टि के कारण जल जमाव की समस्या उत्पन्न हुई। अतिवृष्टि के कारण पानी के बहाव के चलते जहाँ-तहाँ पडे कचडे एवं अन्य पदार्थ प्रभावित होकर स्लोपिंग (निकास स्थल) पर रूक गये, जिसके कारण पानी का निकास अवरूद्ध हो गया और सभी जगह जल जमाव हो गया। पटना जल जमाव जांच समिति के प्रतिवेदन से भी स्पष्ट होता है कि दिनांक 28.09.2019 से 30.09.2019 के बीच की अवधि में पटना नगर क्षेत्र में औसत दैनिक वर्षापात लगभग 113.63 मि0मी0 यानी कुल 340.89 मि0मी0 वर्षा हुई। अप्रत्याशित वर्षा होने के कारण बाँकीपुर अंचल अवस्थित सम्प हाउस डूब गया था, जिस कारण जल जमाव की समस्या हुई। सम्प हाउस डूबने के कारण उसका पम्प चलने की स्थिति में नहीं था।

अतएव प्राकृतिक अतिवृष्टि एवं सदृश्य मामले में लिये गए निर्णय एवं आरोप पत्र में अंकित आरोपों की समानता होने को दृष्टिपथ में रखते हुए श्री वीरेन्द्र कुमार तरूण, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1013/2011, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, बाँकीपुर अंचल, पटना नगर निगम, पटना के विरूद्ध प्रतिवेदित उक्त मामले को संचिकास्त किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संयुक्त सचिव। श्री वीरेन्द्र कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-896/2011, (354/19), तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, बेतिया के विरूद्ध कमीशन नहीं देने के कारण पारित अभिश्रव का भुगतान रोके रखे जाने संबंधित आरोपों के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-4860 दिनांक 11.09.2018 द्वारा आरोप पत्र माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त द्वारा दिनांक 06.06.2018 को पारित आदेश की प्रति सहित अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-16768 दिनांक 21.12.2018 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार का स्पष्टीकरण (दिनांक 18.09.2019) प्राप्त हुआ। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की प्रति संलग्न करते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग से मंतव्य की माँग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग का पत्रांक-1954 दिनांक 04.06.2020 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। सम्यक विचारोपरांत आरोपों की वृहद जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6371 दिनांक 30.06.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1680 दिनांक 17. 05.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार विरूद्ध प्रतिवेदित कुल-03 आरोपों में से आरोप सं॰-02, जो माननीय लोकायुक्त कार्यालय में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने से संबंधित है, को प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-10855 दिनांक 08.06.2023 द्वारा लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (दिनांक 14.08. 2023) प्राप्त हुआ, जिसमें माननीय लोकायुक्त के न्यायालय में वाद की सुनवाई में उपस्थित होने की जानकारी नहीं होने एवं कार्यालय द्वारा भी इस संबंध में जानकारी नहीं देने की बात कही गयी है। श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं जाँच प्रतिवेदन पर आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी एवं पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अपने लिखित अभिकथन में उन्ही बातों का उल्लेख किया गया है, जो उन्होंने संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय कार्यवाही में कहीं थी। अतः इसे अस्वी—त किया जाता है।35 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री वीरेन्द्र कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-896/2011, (354/19) तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, बेतिया को संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत का शास्ति/दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संयुक्त सचिव। सं0 6/आ.-17/2022-सा.प्र.-16340 श्री अभिषेक सिंह, भा.प्र.से. (त्रिपुराः200़6) अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति के आधार पर दिनांक 11.04.2016 से राज्य में प्रतिनियुक्ति थे और इस दौरान दिनांक 03.01.2018 से 06.01.2022 तक जिला पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापित रहे हैं। श्री सिंह के जिला पदाधिकारी, गया के इस पदस्थापन काल में गया जिला पदाधिकारी के आवास परिसर से अवैध तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग करते हुए कुल 64 वृक्षों की कटाई कराकर आवासीय परिसर में फर्नीचर बनवाये जाने तथा सरकारी संसाधन का उपयोग कर लकड़ियों को निजी लाभ हेतु पटना परिवहन किये जाने के आरोप के मामले में राज्य सरकार के निर्णय के आलोक में अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 के अंतर्गत आरोप ज्ञापन संख्या-384 दिनांक 05.01.2023 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। 2. श्री सिंह के विरूद्ध निर्गत उक्त आरोप ज्ञापन संख्या-384 दिनांक 05.01.2023 के संबंध में उनके विरूद्ध गठित आरोपों पर लिखित बचाव बयान दिये जाने हेतु पर्याप्त समय दिया गया। परन्तु श्री सिंह द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोपों के संबंध में लिखित बचाव अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया है। इस विभागीय कार्यवाही से संबंधित OA No.-1471/2023 (Abhishek Singh Vrs Department of Personnel and Training, Government of India and others) में केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, मुख्य बेंच, नई दिल्ली द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में अग्रतर कार्रवाई की प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इन परिस्थितियों में राज्य सरकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध आरोपों की गहन जाँच के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8(6)(b) के अंतर्गत मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी तथा निगरानी विभाग के किसी पदाधिकारी, जो अवर सचिव से अन्यून हों, को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। तद्‌नुसार, श्री अभिषेक सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में उनके विरूद्ध गठित आरोपों की गहन जाँच हेतु मुख्य जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

3. यह भी कि श्री अभिषेक सिंह जाँच पदाधिकारी के समक्ष इस संकल्प की प्राप्ति होने की तिथि से 10 (दस) कार्य दिवसों में अथवा 10 (दस) कार्य दिवसों के बाद विहित किसी समय या उससे अनधिक दस दिनों के अंदर किसी समय जैसा जाँच पदाधिकारी आदेश दें, स्वयं या अपने द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के साथ उपस्थित होंगे। आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति सभी सुसंगत कागजातों यथाय आरोप ज्ञापन संख्या-384 दिनांक 05.01.2023 (आर्टिकल ऑफ चार्जेज, स्टेटमेंट ऑफ इम्प्यूटेशन ऑफ मिसकंडक्ट या मिसविहैवियर तथा साक्ष्य (संगत अभिलेख सहित)/साक्षियों की विवरणी) की प्रति के साथ संबंधित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव। विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा श्री दया श्ांकर, भा0पु0से0 (2014), पुलिस अधीक्षक, पूर्णियाँ के विरूद्ध अप्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(a) एवं (b) सहपठित धारा 13(2) सहपठित धारा 12 तथा आई0पी0सी0 की धारा 120(B) के तहत विशेष निगरानी इकाई, थाना कांड संख्या-13/2022 दिनांक 10.10.2022 दर्ज किया गया।

2. और चूँकि श्री शंकर के विरूद्ध दर्ज उक्त आपराधिक कांड अप्रत्यानुपातिक धनार्जन से संबंधित होने एवं मामला अनुसंधानांतर्गत होने के फलस्वरूप अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(3) में निहित36 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प सं0 10536, दिनांक 18.10.2022 के माध्यम से श्री शंकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

3. और चूँकि श्री शंकर के निलंबन की आरंभिक 60 दिनों की अवधि, जो दिनांक 16.12.2022 को पूरी हो रही थी, के आगे निलंबन के विस्तारण की आवश्यकता के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा दिनांक 16.12.2022 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 15.04.2023 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री शंकर के निलंबन अवधि को दिनांक 16.12.2022 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 15.04.2023 तक विस्तारण करने का निर्णय लिया गया तथा इसके निमित विभागीय संकल्प सं0 12737 दिनांक 15.12.2022 निर्गत किया गया।

तदुपरांत श्री शंकर के निलंबन अवधि को दिनांक 15.04.2023 के आगे विस्तारण की आवश्यकता के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा दिनांक 03.04.2023 की बैठक में सम्यक विचारोपरांत दिनांक 15.04.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात्‌ 12.10.2023 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में श्री शंकर के निलंबन अवधि को दिनांक 15.04.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात्‌ 12.10.2023 तक विस्तारण करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। इसके निमित विभागीय संकल्प सं0 4605 दिनांक 12.04.2023 निर्गत किया गया। और चूँकि श्री शंकर के विरूद्ध आय से अधिक (अप्रत्यानुपातिक धनार्जन) संबंधी विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(a) एवं (b) सहपठित धारा 13(2) सहपठित धारा 12 तथा आई0पी0सी0 की धारा 120(B) के तहत विशेष निगरानी इकाई थाना कांड संख्या-13/2022 दिनांक 10.10.2022 दर्ज की गयी तथा उक्त कांड अनुसंधानांतर्गत है। इस संबंध में विशेष निगरानी इकाई द्वारा पत्रांक 986 दिनांक 14.09.2023 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि मामले की जाँच चल रही है। जाँच अधिकारी रिकॉर्ड एकत्र करने/गवाहों की जाँच की प्रक्रिया में है। आगे की प्रगति उचित समय पर दी जायेगी।

इसके अतिरिक्त श्री शंकर के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएँ (आचरण) नियमावली, 1968 के संगत नियमों के उल्लंघन के आरोपों के लिए अनुशासनिक कार्रवाई संचालित करने के निमित प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय से प्रतीक्ष्य है। . और चूँकि श्री शंकर के निलंबन अवधि की समीक्षा हेतु दिनांक 26.09.2023 को निलंबन समीक्षा समिति की बैठक आहूत की गयी। निलंबन समीक्षा समिति द्वारा पाया गया कि श्री शंकर के विरूद्ध आय से अधिक (अप्रत्यानुपातिक धनार्जन) संबंधी विशेष निगरानी इकाई, थाना कांड संख्या-13/2022 दिनांक 10.10.2022 दर्ज है तथा उक्त कांड अनुसंधानांतर्गत है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा साक्ष्यों से छेड़-छाड़ किये जाने एवं अनुसंधान की प्रक्रिया को प्रभावित किये जाने की संभावना है। इस प्रकार श्री दया शंकर, भा0पु0से0 (2014) के निलंबन को बनाये रखने का पर्याप्त औचित्य/आधार है। और चूँकि निलंबन समीक्षा समिति सम्यक विचारोपरांत श्री दया शंकर, भा0पु0से0 (2014) के निलंबन की अवधि दिनांक 12.10.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 09.04.2024 तक विस्तारण की अनुशंसा की गयी, जिसे अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। . अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(8)(d) के तहत श्री दया शंकर, भा0पु0से0 (2014) के निलंबन अवधि को दिनांक 12.10.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 09.04.2024 तक विस्तारित की जाती है।

निलंबन अवधि में श्री शंकर को अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 4 के अधीन मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव। श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) एवं अन्य के विरूद्ध आर्थिक अपराध इकाई, बिहार द्वारा आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 33/2022, दिनांक 15.10.2022, धारा 353/387/419/420/ 467/468/120(B) भा0द0वि0 एवं 66(c) एवं 66(D) IT Act, 2000 दर्ज किया गया।

2. और चूँकि श्री कुमार के विरूद्ध उक्त थाना कांड दर्ज होने एवं मामला अनुसंधानातर्गत होने तथा उसमें निहित अरोपों की गंभीरता एवं प्रकृति पर विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(3) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प सं0 10537, दिनांक 18.10.2022 के माध्यम से श्री कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। . और चूँकि श्री कुमार के निलंबन की आरंभिक 60 दिनों की अवधि, जो दिनांक 16.12.2022 को पूरी हो रही थी, के आगे निलंबन के विस्तारण की आवश्यकता के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा दिनांक 16.12.2022 के आगे 120 दिनों तक अर्थात्‌ दिनांक 15.04.2023 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के निलंबन अवधि को दिनांक 16.12.2022 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 15.04.2023 तक विस्तारण करने का निर्णय लिया गया तथा इसके निमित विभागीय संकल्प सं0 12738 दिनांक 15.12.2022 निर्गत किया गया।37 (cid:464)बहार गजट, 18 2023 तदुपरांत श्री कुमार के निलंबन अवधि को दिनांक 15.04.2023 के आगे विस्तारण की आवश्यकता के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा दिनांक 03.04.2023 की बैठक में सम्यक विचारोपरांत दिनांक 15.04.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात्‌ 12.10.2023 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार की निलंबन अवधि को दिनांक 15.04.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात 12.10.2023 तक विस्तारण करने का निर्णय लिया गया तथा इसके निमित विभागीय संकल्प सं0 4604 दिनांक 12.04.2023 निर्गत किया गया।

4. और चूँकि श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) एवं अन्य के विरूद्ध आर्थिक अपराध इकाई, बिहार द्वारा आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 33/2022, दिनांक 15.10.2022, धारा 353/387/419/ 420/467/468/120(B) भा0द0वि0 एवं 66(c) एवं 66(D) IT Act, 2000 दर्ज किया गया है। उक्त आरोपों के मद्‌देनजर दिनांक 18.10.2022 से निलम्बित श्री कुमार अपने निर्धारित मुख्यालय-पुलिस महानिरीक्षक, केन्द्रीय क्षेत्र, पटना के कार्यालय में श्री कुमार द्वारा लगभग 8 (आठ) माह बाद दिनांक 19.06.2023 को योगदान किया गया है। श्री कुमार के विरूद्ध उक्त गंभीर आरोपों के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (आचरण) नियमावली, 1968 के संगत नियमों के उल्लंघन के आरोपों के लिए अनुशासनिक कार्रवाई संचालित करने के निमित पुलिस मुख्यालय से अनुरोध किया गया। वांछित प्रस्ताव प्रतीक्ष्य है। श्री कुमार के विरूद्ध दर्ज उक्त कांड के अनुसंधान की अद्यतन स्थिति से अवगत कराने हेतु आर्थिक अपराध इकाई, बिहार से अनुरोध किये जाने पर आर्थिक अपराध इकाई द्वारा पत्रांक 1192 दिनांक 15.09.2023 के माध्यम से प्रतिवेदित किया गया कि वर्तमान में उक्त कांड में अनुसंधान जारी है। श्री कुमार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई है, जो लंबित है। सभी बिन्दुओं पर अनुसंधान पूर्ण करते हुए सक्षम प्राधिकार से अभियोजन स्वीकृत्यादेश प्राप्त करने हेतु कार्रवाई संभावित है।

श्री कुमार के विरूद्ध एक अन्य आरोप के लिए विभागीय ज्ञापन सं0 6933 दिनांक 12.07.2022 एवं तद्‌संबंधी विभागीय संकल्प सं0 234 दिनांक 06.01.2023 के माध्यम से विभागीय कार्यवाही संचालित है।

5. और चूँकि श्री कुमार के निलंबन अवधि के समीक्षा हेतु दिनांक 26.09.2023 को निलंबन समीक्षा समिति की बैठक आहुत की गयी। निलंबन समीक्षा समिति द्वारा पाया गया कि श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) एवं अन्य के विरूद्ध आर्थिक अपराध इकाई, बिहार द्वारा आर्थिक अपराध थाना काण्ड सं0 33/2022, दिनांक 15.10.2022, धारा 353/387/419/ 420/467/468/120(B) भा0द0वि0 एवं 66(c) एवं 66(D) IT Act, 2000 दर्ज है। उनके विरूद्ध दर्ज कांड में अनुसंधान जारी है। उक्त कांड में सभी बिन्दुओं पर अनुसंधान पूर्ण करते हुए सक्षम प्राधिकार से अभियोजन स्वीकृत्यादेश प्राप्त करने हेतु कार्रवाई संभावित है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा साक्ष्यों से छेड़-छाड़ किये जाने एवं अनुसंधान की प्रक्रिया को प्रभावित किये जाने की संभावना है। इस प्रकार श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) के निलंबन को बनाये रखने का पर्याप्त औचित्य/आधार है।

6. और चूँकि निलंबन समीक्षा समिति सम्यक विचारोपरांत श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) के निलंबन की अवधि दिनांक 12.10.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 09.04.2024 तक विस्तारण की अनुशंसा की गयी, जिसे अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। . अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(8)(d) के तहत श्री आदित्य कुमार, भा0पु0से0 (2011) के निलंबन अवधि को दिनांक 12.10.2023 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 09.04.2024 तक विस्तारित की जाती है।

8. निलंबन अवधि में श्री कुमार को अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 4 के अधीन मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 31—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 18 October 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-10-18.42/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-10-18.42.