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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 10 November 2023

Published 10 November 2023

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2023-11-10.954
Languages
English, Hindi

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(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 19 काित(cid:91)क 1945 (श0)

(सं0 पटना 954) पटना, शु(cid:272)वार, 10 नव(cid:224)बर 2023 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 9 नवम्बर 2023

सं॰ वि॰स॰वि॰-15/2023-3406/वि॰स॰।—''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) (संशोधन) विधेयक, 2023'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक 9 नवम्बर 2023 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।

आदेष से, राज कुमार, सचिव।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 नव(cid:224)बर 2023

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बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम, 1991 (बिहार अधिनियम 03, 1992) (समय-समय पर यथा संशोधित) को संशोधित करने के लिए विधेयक। जहाँ कि भारत के संविधान द्वारा सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक समेत सभी पहलुओं में न्याय की व्यवस्था लागू की गयी है।

जहाँ कि, राज्य सरकार के स्तर से स्थिति और अवसर की समानता प्राप्त करने और इन सभी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाना है।

जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा व्यक्तियों और व्यक्तियों के समूह बीच आय के असमानताओं, प्रयास के अवसर, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं कोे कम करने का प्रयास किया जाना है।

जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा दिया जाना है।

जहाँ कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में सकारात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम प्रावधान किए गये हैं।

जहाँ कि इस हद तक संविधान के भाग- IX-(A) में आदेश दिया गया है कि, प्रत्येक पंचायत और नगर निकायों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी और इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या लगभग उसी अनुपात में होगी। उस पंचायत/शहरी स्थानीय निकायों में सीधे चुनाव द्वारा भरी जाने वाली सीटों की कुल संख्या, क्योंकि उस क्षेत्र में अनुसूचित जाति या उस क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से मेल खाती है।

जहाँ कि राज्य का अनिवार्य रूप से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय सुरक्षित करना वैध उद्देश्य होना चाहिए।

जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा अन्य तथ्यों के साथ-साथ राज्य के निवासियों के स्थान की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति सर्वेक्षण कराया गया है।

जहाँ कि जाति सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि अवसर और स्थिति में समानता के संविधान में पोषित लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बड़े हिस्से को बढ़ावा देने की आवश्यकता प्रतीत होती है।

जहाँ कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्य सदियों से वंचित और हाशिये पर रहे हैं। यद्यपि संविधान के अंतर्गत साकारात्मक उपाय एवं अनेक कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा इनके जीवन मेें उत्थान के लिये कुछ हद तक प्रयास किये गये हैं, हालांकि अभी तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। तथ्य इस धारणा को मजबूत करते हैं कि राज्य सरकार को पहले से मौजूद उपायाें के अतिरिक्त अनुपातिक समानता के अंतिम उदेश्य में तेजी लाने के लिये और अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

जहाँ कि भारतीय संविधान में एक संशोधन के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

जहाँ कि जाति सर्वेक्षण के क्रम में पता चला है कि अनारक्षित वर्ग की आबादी, अल्पसंख्यक समुदाय सहित, राज्य की कुल आबादी में लगभग 15 प्रतिशत है।

जहाँ कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण राज्य में उनकी आबादी-प्रतिशत के संदर्भ में 64.5 प्रतिशत हिस्सेदारी दिखलाता है।

जहाँ कि आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य सरकार की सेवाओं में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गोें के सदस्यों का प्रतिनिधित्व अनुपातिक रूप से कम है।

जहाँ कि अनुपातिक समानता को प्राप्त करने के लिये उपायों एवं साधनों को प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। जहाँ कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गोें के उत्थान एवं राज्य की प्रगति के लिये इनके वर्तमान आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है।3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 नव(cid:224)बर 2023 इसलिये सम्प्रति राज्य सरकार ऐसे हाशिये पर रहने वाले वर्गों के लाभ पहुँचाने की दृष्टि से नियमानुसार अधिनियमित किया जाए।

भारत-गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-

(1) यह अधिनियम ''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) (संशोधन) अधिनियम, 2023'' कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।

(क) उक्त अधिनियम की धारा-4(1), 4(2) एवं 4(3) निम्न से प्रतिस्थापित किया जाएगा-

4.

:-

(1) किसी स्थापना में सेवाओं और पदों की सभी नियुक्तियाँ, जो सीधी भर्ती के द्वारा भरी जानेवाली हों, निम्नलिखित रूप में विनियमित की जायेंगी यथाः-

(क) खुली गुणागुण कोटि से - 35 प्रतिशत (ख) आरक्षित कोटि से - 65 प्रतिशत

(2) आरक्षित कोटि की 65 प्रतिशत रिक्तियों में से, आरक्षित उम्मीदवारों की विभिन्न कोटियों की रिक्तियां इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अध्यधीन निम्नलिखित रूप में होगीः-

(क) अनुसूचित जातियां - 20 प्रतिशत (ख) अनुसूचित जन जातियां - 02 प्रतिशत (ग) अत्यन्त पिछड़ा वर्ग - 25 प्रतिशत (घ) पिछड़ा वर्ग - 18 प्रतिशत

परंतु यह और कि प्रोन्नति के मामलें में केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन-जाति के लिये इस धारा में यथा उपबंधित अनुपात में आरक्षण किया जायेगा।

(3) आरक्षित कोटि के उम्मीदवार जो अपने गुणागुण के आधार पर चुने जाते हैं, की गणना खुला गुणागुण कोटि की 35 प्रतिशत रिक्तियों के विरुद्ध की जायेगी न कि आरक्षण कोटि की रिक्तियों के विरुद्ध ।

(ख) बिहार अधिनियम 11,1993 की धारा- 2(v) को विलोपित किया जाएगा। (ग) बिहार अधिनियम 11,1993 की धारा- 4(2)(ड़) को विलोपित किया जाएगा। (घ) बिहार अधिनियम 11,1993 की धारा- 4(2)(ii) को विलोपित किया जाएगा। (ड़) बिहार अधिनियम 11,1993 की धारा- 4(2)(iii) में अंकित ''तथा पिछड़े वर्ग की

महिलाओं'' को विलोपित किया जाएगा।

एतद्‌संबंधी पूर्व में निर्गत ऐसे सभी आदेश / संकल्प / परिपत्र/अधिनियम आदि,

जो इस संशोधन अधिनियम से असंगत हो, इस हद तक संशोधित समझे जाएंगे।

ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त संशोधन द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया निर्णय/कार्रवाई वर्त्तमान संशोधन अधिनियम के अधीन की गयी समझी जाएगी।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 नव(cid:224)बर 2023 भारत के संविधान द्वारा सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक समेत सभी पहलुओं में न्याय की व्यवस्था की गई है, जिसके आलोक में राज्य के स्तर से स्थिति और अवसर की समानता प्राप्त करने हेतु सभी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाना है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को भी शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों को बढ़ावा दिया जाना राज्य का दायित्व है, साथ ही सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय सुरक्षित कराना राज्य सरकार का उद्देश्य है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम, 1991 (समय-समय पर यथा संशोधित) को संशोधित करते हुए इन्हें वर्तमान में देय आरक्षण अनुपात में वृद्धि कराया जाना है। इसलिए राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अत्यन्त पिछड़ा वर्ग को बिहार पदों एवं सेवाओं की सीधी नियुक्ति निम्न रूप से आरक्षण अनुमान्य कराया जाना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है और इसे अधिनियमित कराना ही विधेयक का अभीष्ट है :-

अनुसूचित जातियां - 20 प्रतिशत। अनुसूचित जनजातियां - 2 प्रतिशत। पिछड़ा वर्ग - 18 प्रतिशत। अत्यन्त पिछड़ा वर्ग - 25 प्रतिशत। ¼ ½ Hkkj&lk/kd lnL; A iVuk fnukad 09-11-2023

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Bihar,

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण)954-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 10 November 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2023-11-10.954/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2023-11-10.954.