(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 19 काित(cid:91)क 1945 (श0)
(सं0 पटना 955) पटना, शु(cid:272)वार, 10 नव(cid:224)बर 2023 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 9 नवम्बर 2023 सं॰ वि॰स॰वि॰-16/2023-3409/वि॰स॰।—''
'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक 9 नवम्बर 2023 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।
आदेष से, राज कुमार, सचिव।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 नव(cid:224)बर 2023
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बिहार (शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में) आरक्षण अधिनियम, 2003 (बिहार अधिनियम 16, 2003) (समय समय पर यथा संशोधित) को संशोधित करने के लिए विधेयक। जहाँ कि भारत के संविधान द्वारा सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक समेत सभी पहलुओं में न्याय की व्यवस्था लागू की गयी है। जहाँ कि, राज्य सरकार के स्तर से स्थिति और अवसर की समानता प्राप्त करने और इन सभी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाना है। जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा व्यक्तियों और व्यक्तियों के समूह बीच आय के असमानताओं, प्रयास के अवसर, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं कोे कम करने का प्रयास किया जाना है। जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा दिया जाना है। जहाँ कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में सकारात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम प्रावधान किए गये हैं। जहाँ कि इस हद तक संविधान के भाग- IX-(A) में आदेश दिया गया है कि, प्रत्येक पंचायत और नगर निकायों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी और इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या लगभग उसी अनुपात में होगी। उस पंचायत/शहरी स्थानीय निकायों में सीधे चुनाव द्वारा भरी जाने वाली सीटों की कुल संख्या, क्योंकि उस क्षेत्र में अनुसूचित जाति या उस क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से मेल खाती है। जहाँ कि राज्य का अनिवार्य रूप से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय सुरक्षित करना वैध उद्देश्य होना चाहिए। जहाँ कि राज्य सरकार द्वारा अन्य तथ्यों के साथ-साथ राज्य के निवासियों के स्थान की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति सर्वेक्षण कराया गया है। जहाँ कि जाति सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि अवसर और स्थिति में समानता के संविधान में पोषित लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बड़े हिस्से को बढ़ावा देने की आवश्यकता प्रतीत होती है। जहाँ कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्य सदियों से वंचित और हाशिये पर रहे हैं। यद्यपि संविधान के अंतर्गत साकारात्मक उपाय एवं अनेक कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा इनके जीवन मेें उत्थान के लिये कुछ हद तक प्रयास किये गये हैं, हालांकि अभी तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। तथ्य इस धारणा को मजबूत करते हैं कि राज्य सरकार को पहले से मौजूद उपायाें के अतिरिक्त अनुपातिक समानता के अंतिम उदेश्य में तेजी लाने के लिये और अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता है। जहाँ कि भारतीय संविधान में एक संशोधन के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। जहाँ कि जाति सर्वेक्षण के क्रम में पता चला है कि अनारक्षित वर्ग की आबादी, अल्पसंख्यक समुदाय सहित, राज्य की कुल आबादी में लगभग 15 प्रतिशत है। जहाँ कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण राज्य में उनकी आबादी-प्रतिशत के संदर्भ में 64.5 प्रतिशत हिस्सेदारी दिखलाता है। जहाँ कि आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य सरकार की सेवाओं में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गोें के सदस्यों का प्रतिनिधित्व अनुपातिक रूप से कम है। जहाँ कि अनुपातिक समानता को प्राप्त करने के लिये उपायों एवं साधनों को प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। जहाँ कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गोें के उत्थान एवं राज्य की प्रगति के लिये इनके वर्तमान आरक्षण पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। इसलिये सम्प्रति राज्य सरकार ऐसे हाशिये पर रहने वाले वर्गों के लाभ पहुँचाने की दृष्टि से नियमानुसार अधिनियमित किया जाए। भारत-गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-
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(1) यह अधिनियम ''बिहार (शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में) आरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2023'' कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 नव(cid:224)बर 2023 (क) उक्त अधिनियम की धारा-2(1), 2(2) एवं 2(3) निम्न से प्रतिस्थापित किया जाएगा-
- (1) पूर्णतः या अंशतः सहायता प्राप्त किसी शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन निम्नलिखित रीति से विनियमित किया जा सकेगा, यथा।
(क) खुली गुणागुण कोटि से - 35 प्रतिशत (ख) आरक्षित कोटि से - 65 प्रतिशत
(2) आरक्षित कोटि की 65 प्रतिशत रिक्तियों में से आरक्षित उम्मीदवारों की विभिन्न कोटियों की रिक्तियों, इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अध्यधीन निम्नलिखित रूप में होगी :-
(क) अनुसूचित जातियां - 20 प्रतिशत (ख) अनुसूचित जन जातियां - 02 प्रतिशत (ग) अत्यंत पिछड़ा वर्ग - 25 प्रतिशत (घ) पिछड़ा वर्ग - 18 प्रतिशत
(3) आरक्षित कोटि के उम्मीदवार की गणना, जो अपने गुणागुण के आधार पर चुने जाते हैं, खुली गुणागुण कोटि की 35 प्रतिशत रिक्तियों के विरुद्ध की जायेगी न कि आरक्षित कोटि की रिक्तियों के विरुद्ध।
(ख) उक्त अधिनियम की धारा- 2(2)(ड़) को विलोपित किया जाएगा। (ग) उक्त अधिनियम की धारा- 2(2)(4) को विलोपित किया जाएगा। (घ) उक्त अधिनियम की धारा- 2(6)(ग) को विलोपित किया जाएगा। (ड़) उक्त अधिनियम की धारा- 3 में अंकित ''/पिछड़े वर्ग की महिलाओं'' को विलोपित किया जाएगा।
एतद्संबंधी पूर्व में निर्गत ऐसे सभी आदेश/संकल्प/ परिपत्र/अधिनियम आदि, जो
इस संशोधन अधिनियम से असंगत हो, इस हद तक संशोधित समझे जाएंगे।
ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त संशोधन द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया निर्णय/कार्रवाई वर्त्तमान संशोधन अधिनियम के अधीन की गयी समझी जाएगी।
भारत के संविधान द्वारा सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक समेत सभी पहलुओं में न्याय की व्यवस्था की गई है, जिसके आलोक में राज्य के स्तर से स्थिति और अवसर की समानता प्राप्त करने हेतु सभी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाना है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को भी शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों को बढ़ावा दिया जाना राज्य का दायित्व है, साथ ही सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय सुरक्षित कराना राज्य सरकार का उद्देश्य है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बिहार (शैक्षणिक संस्थानों में) आरक्षण अधिनियम-16/2003 को संशोधित करते हुए इन्हें वर्तमान में देय आरक्षण अनुपात में वृद्धि कराया जाना है। इसलिए राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अत्यन्त पिछड़ा वर्ग को बिहार के शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में निम्न रूप से आरक्षण अनुमान्य कराया जाना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है और इसे अधिनियमित कराना ही विधेयक का अभीष्ट है :-
अनुसूचित जातियां - 20 प्रतिशत। अनुसूचित जनजातियां - 2 प्रतिशत। पिछड़ा वर्ग - 18 प्रतिशत। अत्यन्त पिछड़ा वर्ग - 25 प्रतिशत।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,