असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
7 पौष 1945 (श0)
(सं0 पटना 1034) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 28 (cid:464)दस(cid:224)बर 2023
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श्रीमती श्वेता मिश्रा, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1312/11 तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, छपरा के विरूद्ध विवाहित रहते हुए दूसरे विवाहित व्यक्ति से शादी करने एवं सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-23 का उल्लंघन करने संबंधी प्रतिवेदित आरोपों की जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) में निहित प्रावधानों के तहत संकल्प ज्ञापांक-18117, दिनांक 27.11.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-2163 दिनांक 11.10.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1403 दिनांक 28.01.2016 द्वारा श्रीमती श्वेता मिश्रा, बि॰प्र॰से॰ को संबंधी दंड संसूचित किया गया।
2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 28 (cid:465)दस(cid:224)बर 2023सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-5779/16 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2379 दिनांक 20.02.2018 द्वारा श्रीमती श्वेता मिश्रा के सेवा से बर्खास्तगी संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1403 दिनांक 28.01.2016 को निरस्त करते हुए सेवा में पुनः पदस्थापित करने तथा निलंबन एवं बर्खास्तगी अवधि को सभी प्रयोजनों हेतु कर्त्तव्य अवधि के रूप में परिगणित करने का निर्णय लिया गया। सम्यक विचारोपरांत सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-5779/2016 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित न्यायादेश दिनांक 06.09.2017 के विरूद्ध विभाग द्वारा एल॰पी॰ए॰ सं॰-687/2018 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20.07.2023 को न्यायादेश पारित करते हुए विभाग द्वारा दायर उक्त एल॰पी॰ए॰ को अस्वी—त (Reject) कर दिया गया। तदुपरांत मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-5779/2016 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में श्रीमती श्वेता मिश्रा, बि॰प्र॰से॰ को सेवा में पुनः स्थापित करते हुए पूर्ण परिणामी लाभ का भुगतान पूर्व में ही किया जा चुका है। अतएव वर्णित स्थिति में मामले को समाप्त किया जाता है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,