(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
8 1945 ;0द्ध
(0 1039) ए ;बपकरू272द्धए 29 ;बपकरू464द्ध;बपकरू224द्ध 2023
पषु एवं मत्स्य संसाधन विभाग
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अधिसूचना
28 दिसम्बर 2023
स्ां॰ 5 नि॰गो॰वि॰ (5) 32/2013- 406 नि॰गो॰—डा॰ राकेश कुमार पंजियार, तत्कालीन प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, फतुहा, बिहार पशुपालन सेवा, वर्ग-2 (मूल स्तर), जन्मतिथि 24.08.1965, नियुक्ति तिथि 05.05.1995, सेवा निवृति तिथि 31.08.2025 को रिश्वत लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार करने के आरोप के लिए निगरानी थाना कांड संख्या-082/2006 दिनांक 23.11.2006 दर्ज किया गया। डा॰ पंजियार को दिनांक 23.11.2006 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया फलस्वरूप विभागीय आदेश 44 नि॰गो॰, दिनांक 18.01.2007 के द्वारा डा॰ पंंिजयार को हिरासत अवधि के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9(2) के अन्तर्गत निलम्बित किया गया। दिनांक 17.10.2007 को जमानत पर जेल से रिहा होने के पश्चात्
डा॰ पंजियार द्वारा दिनांक 18.10.2007 को प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, फतुहा के पद पर योगदान किया गया। उक्त आलोक में विभागीय आदेश 334 नि॰गो॰, दिनांक 26.12.2007 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम (3) (i) उपनियम (2) के अन्तर्गत डा॰ पंजियार को योगदान की तिथि 18.10.2007 से निलंबन मुक्त मानते हुए योगदान स्वीकार किया गया।
2- डा॰ पंजियार के विरूद्ध अपराधिक मामला जाँच/विचारण रहने कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (1) (ग) के अन्तर्गत विभागीय आदेश 333 नि॰गो॰, दिनांक 26.12.2007 के द्वारा डा॰ पंजियार को तत्काल प्रभाव से पुनः निलम्बित किया गया तथा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर C.W.J.C. No. 13355/09 दिनांक 14.10.2009 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश 150 नि॰गो॰, द्वारा 05.03.2010 द्वारा डा॰ पंजियार को विभागीय कार्यवाही के अधीन रखते हुए निलंबन से मुक्त किया गया।;बपकरू464द्ध ;द्ध 29 ;बपकरू464द्ध;बपकरू224द्ध 2023 2 3. उक्त आरोपों के लिए डा॰ पंजियार के विरूद्ध आरोप-पत्रा गठित करते हुए विभागीय पत्राांक 76 नि॰गो॰, दिनांक 14.03.2008 के द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त आलोक में डा॰ पंजीयार द्वारा गठित आरोपों के लिए कोई समुचित बचाव-बयान समर्पित नहीं किया गया, अतएव सरकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त विभागीय पत्राांक 48 नि॰गो॰, दिनांक 24.01.2014 के द्वारा डा॰ पंजियार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के कारण विभागीय आदेश 141 नि॰गो॰, दिनांक 05.03.2014 के द्वारा डा॰ पंजियार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (1) 'क' के तहत तत्काल प्रभाव से पुनः निलम्बित किया गया।
4- विभागीय कार्यवाही में जाँच पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किये जाने के आलोक में डा॰ पंजियार से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी तथा समीक्षोपरांत उनके लिखित अभिकथन को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (xi) के अन्तर्गत डा॰ पंजियार को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया ।
सरकार द्वारा उक्त लिये गये निर्णय के आलोक में मंत्रिापरिषद के अनुमोदनोपरांत विभागीय संकल्प-243 नि॰गो॰ दिनांक 30.06.2015 द्वारा डा॰ राकेश कुमार पंजियार तत्कालीन प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, फतुहा को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया गया है।
5- उक्त बर्खास्तगी आदेश के विरूद्ध डा॰ पंजियार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में C.W.J.C. No.- 16204/2016 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 06.10.2021 को पारित न्याय निर्णय में माननीय न्यायालय द्वारा विभागीय दण्डादेश को खारिज कर दिया गया। न्याय निर्णय का प्रभावी अंश निम्नवत है :-
Accordingly, the impugned order of dismissal dated 30.06.2015 (Annexure35) and
subsequent order dated 05.05.2016 rejecting the petitioner's review applications are
hereby set aside. Consequences of setting aside of the impugned orders shall follow. The
petitioner shall be required to be reinstated in service forthwith.
Since the order of dismissal is based on perverse finding without evidence, it is
held that the petitioner shall be entitled to all back wages for the period during which he
remained out of service by virtue of order of dismissal which has been set aside. The order
of dismissal shall have no consequence right from the date when it was passed. Payment
of back wages shall depend upon the petitioner making out a case before the authorities
that he was not gainfully employed elsewhere during the period in question.
It goes without saying that the respondents shall be at liberty to take appropriate
action in accordance with law depending on the outcome of the criminal case instituted
against the petitioner.
6- उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में एल॰पी॰ए॰ संख्या-79/2022 दायर किया गया जो सम्प्रति सुनवाई हेतु विचाराधीन है।
7- C.W.J.C. No. 16204/2016 में दिनांक 6.10.2021 को पारित न्याय निर्णय का अनुपालन नहीं होने के स्थिति में वादी डा॰ पंजियार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में M.J.C. No. 126/2022 दायर किया गया है, जिसमें दिनांक 15.12.2023 को अंतरिम आदेश पारित हुआ, जिसका प्रभावी अंश निम्नवत है :-
Apparently thus, an order passed more than two years ago, has not been
implemented so far and the State is not willing to implement the said order on the ground
of filing of a time barred Letters Patent Appeal.
In my considered opinion, a case is made out of deliberate disobedience of this
Court's order.
;बपकरू464द्ध ;द्ध 29 ;बपकरू464द्ध;बपकरू224द्ध 2023 3Let the Principal Secretary, Animal and Fisheries Resources Department,
Government of Bihar be personally present before this Court on 12.01.2024 when the
Court will consider initiation of contempt proceeding against the officials responsible for
disobedience of this Court's order, willfully.
8- अतएव M.J.C. No. 126/2022 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक15.12.2023 को पारित अंतरिम न्यायादेश के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना द्वारा C.W.J.C. No.- 16204/2016 में दिनांक 06.10.2021 को पारित न्याय निर्णय के अनुपालन हेतु डा॰ राकेश कुमार पंजियार, तत्कालीन प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, फतुहा के सेवा से बर्खास्तगी संबंधी विभागीय संकल्प सं॰ 243 नि॰गो॰, दिनांक 30.06.2015 को सरकार द्वारा इस शर्त के साथ निरस्त करते हुये सेवा में पुनर्बहाल किये जाने का निर्णय लिया गया कि उक्त आदेश LPA No. - 79/2022 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित होने वाले अंतिम न्याय निर्णय से प्रभावित होगा।
9- अतः सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में डा॰ राकेश कुमार पंजियार, तत्कालीन प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, फतुहा के सेवा से बर्खास्तगी संबंधित दंडादेश विभागीय संकल्प सं॰- 243 नि॰गो॰, दिनांक 30.06.2015 को इस शर्त के साथ निरस्त करते हुये उन्हें सेवा में पुनर्बहाल किया जाता है, कि उक्त आदेश LPA No. - 79/2022 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित होने वाले अंतिम न्याय निर्णय से प्रभावित होगा। 10- डा॰ राकेश कुमार पंजियार (पदस्थापन के प्रतीक्षा में) पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग में योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।
11. प्रस्ताव में मंत्रिापरिषद की स्वीकृति प्राप्त हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,॰/ lqeu izlkn lkg,
सरकार के उप सचिव।