असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
14 पौष 1945 (श0)
(सं0 पटना 17) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 4 जनवर(cid:547) 2024
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श्री चितरंजन प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1075/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, अस्थावाँ प्रखंड, नालन्दा के पदस्थापन अवधि में जन प्रतिनिधियों एवं कार्यालय कर्मियों के साथ सम्मानपूर्वक मर्यादित व्यवहार नहीं करने, प्रमुख की सहमति के बिना पंचायत सचिव की बैठक निर्धारित करने एवं तानाशाही रवैया अपनाने के आरोपों के लिए ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 10774 दिनांक 25.11. 2009 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, नालन्दा के पत्रांक 4851 दिनांक 16.10.2009 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' विभाग को उपलब्ध कराया गया।
विभागीय पत्रांक 13431 दिनांक 08.10.2018 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद के पत्रांक 1123 दिनांक 31.10.2018 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण विभागीय पत्रांक 6560 दिनांक 06.07.2020 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 303739 दिनांक 12.10.2020 द्वारा श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण पर मंतव्य उपलब्ध कराया गया।
श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनके स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, नालंदा से प्राप्त प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7923 दिनांक 02.08.2021 द्वारा का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। साथ ही यह संसूचित किया गया है कि श्री प्रसाद भविष्य में माननीय सांसदों/विधायकों/पार्षदों के साथ शिष्टाचार एवं सम्मानपूर्वक व्यवहार हेतु पूर्व से निर्गत दिशा-निर्देश का अनुपालन करेंगे। 2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण) 4 जनवर(cid:547) 2024 श्री प्रसाद द्वारा मुख्यतया उल्लेख किया गया है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा उनके स्पष्टीकरण पर मंतव्य में स्पष्ट रूप से अंकित है कि जाँच दल द्वारा अपना प्रतिवेदन मौखिक बयान के आधार पर तैयार किया गया है। इसके सम्पुष्टि हेतु न तो किसी साक्षी का लिखित कथन संलग्न है और ना ही हस्ताक्षर अंकित है। फलतः इसकी प्रमाणिकता सम्पुष्ट नहीं होती है। इसके अतिरिक्त श्री प्रसाद का कहना है कि उनके विरूद्ध अधिरोपित निन्दन की शास्ति में आरोप वर्ष 2012-13 अंकित किया गया है, जबकि घटना वर्ष के अनुसार आरोप वर्ष 2007-08 अंकित होना चाहिए था।
श्री प्रसाद के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा प्रतिवेदित आरोपों एवं अन्य अभिलेखों के आधार पर की गयी। श्री प्रसाद, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह- अंचलाधिकारी, अस्थावाँ, नालन्दा के विरूद्ध माननीय विधायक श्री जितेन्द्र कुमार द्वारा आरोप लगाया गया कि वे मामले के निष्पादन में व्यक्तिगत रूचि नहीं लेते थे, जनप्रतिनिधियों के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते थे और कार्यालय कर्मियों के साथ उनका व्यवहार ठीक नहीं था। जिला पदाधिकारी, नालन्दा ने प्रतिवेदित किया कि श्री प्रसाद जन प्रतिनिधियों को सहयोग नहीं करते थे, जनता के लाभकारी योजनाओं की सूचना उन्हें नहीं देते थे, बिना प्रमुख की सहमति के पंचायत सचिव की बैठक करते थे और उनका व्यवहार अमर्यादित था। श्री प्रसाद का जनप्रतिनिधियों के साथ सहयोग नहीं करना एवं शिष्टपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार हेतु निर्गत दिशा-निर्देश का अनुपालन नहीं करना उनके र्काव्यहीनता को दर्शाता है। साथ ही संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकनोपरान्त पाया गया है कि इनके विरूद्ध आरोप की घटना का वर्ष 2007-08 है।
वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक् विचारोपरान्त आरोप की घटना वर्ष 2012-13 में संशोधित करते हुए श्री प्रसाद के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करने का निर्णय लिया गया।
अतः श्री चितरंजन प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1075/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, अस्थावाँ प्रखंड, नालन्दा सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7923 दिनांक 02.08.2021 द्वारा संसूचित दंड में अंकित निन्दन का आरोप वर्ष को संशोधित करते हुए
विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7923 दिनांक 02.08.2021 द्वारा पूर्वव्त बरकरार रखा जाता है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,