असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
18 पौष 1945 (श0)
(सं0 पटना 25) पटना, सोमवार, 8 जनवर(cid:547) 2024
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श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी सम्प्रति जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जहानाबाद के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3281 दिनांक 31.05.2016 द्वारा आरोप-पत्र (प्रपत्र 'क') एवं पत्रांक 9387 दिनांक 27.07.2016 द्वारा पूरक आरोप-पत्र (प्रपत्र 'क') विभाग को उपलब्ध कराया गया। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त आरोप-पत्र एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र पुनर्गठित किया गया, जिसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
विभागीय पत्रांक 1589 दिनांक 05.02.2019 द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री हुसैन के पत्रांक 322 दिनांक 02.03.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोपों एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक् समीक्षोपरान्त आरोपों की वृहत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2991 दिनांक 27.02.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 955 दिनांक 17.02.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त आरोप संख्या 04 के कंडिका के मंतव्य पर आरोपी पदाधिकारी से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री हुसैन के पत्रांक 160/जि0प0 दिनांक 18.01.2023 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया। 2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 8 जनवर(cid:547), 2024 ''दिनांक 12.03.2016 को कार्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप सरासर गलत है। इस प्रकार दिनांक 12.03.2016 को अनुपस्थित रहने का आरोप पर दंडित किया जाना न्यायोचित नहीं है। जहाँ तक दिनांक 13.03. 2016 (रविवार) को अनुपस्थित रहने का प्रश्न है, उन्होंने पूर्व में भी अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उन्होंने जिला पदाधिकारी, मधुबनी के मौखिक स्वी—ति के पश्चात् ही पटना के लिये प्रस्थान किया था एवं संदर्भित घटना की जानकारी प्राप्त होते ही दिनांक 13.03.2016 को 10ः30 (पूर्वाहन) में ही घटना स्थल पर पहुँच गये एवं उनके द्वारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। ऐसी स्थिति में उन्हें अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने के लिए दोषी नहीं माना जा सकता है। संचालन पदाधिकारी ने भी प्रतिवेदित किया है कि ''ऐसी स्थिति में आरोपित पदाधिकारी को अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने के लिए दोषी नहीं माना जा सकता है।'' अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप पर इनके द्वारा दिए गये स्पष्टीकरण को बिहार राज्य खाद्य निगम द्वारा भी स्वीकार योग्य पाया गया है तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा भी निगम के इस मंतव्य पर सहमति जताई गई है। सुलभ प्रसंग हेतु खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 5875 दिनांक 12.12.2019 का अवलोकन किया जा सकता है, जो इस पत्र के साथ संलग्न है। इस प्रकार जिस आरोप पर इनके स्पष्टीकरण को संबंधित विभाग द्वारा स्वीकार योग्य पाया गया है एंव संचालन पदाधिकारी द्वारा भी प्रमाणित नहीं पाया गया है, उसी आरोप पर अपने विभागीय पदाधिकारी को दंडित करना न केवल अनुचित है बल्कि नैसर्गिक न्याय के भी प्रतिकूल है एवं इस प्रकार के दंडादेश पर पदाधिकारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः अधिरोपित शास्तियों पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पर विचार करते हुए आरोप मुक्त करने की —पा की जाय।''
प्रतिवेदित आरोप एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के आलोक में श्री हुसैन के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री हुसैन द्वारा अपने आवेदन में प्रमाणित आरोपों के संबंध में पुनः अपना बचाव किया गया। इनके द्वारा मुख्य रूप से कहा गया है कि वे दिनांक 13.03.2016 को अनाधि—त रूप से अनुपस्थित नहीं थे। जिला पदाधिकारी, मधुबनी के मौखिक स्वी—ति के पश्चात् ही पटना के लिए प्रस्थान किया गया था। इनका यह भी कहना है कि संदर्भित घटना की सूचना प्राप्त होते ही इनके द्वारा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। इस संदर्भ में इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी एवं विभागीय मंतव्य का भी उल्लेख किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री हुसैन द्वारा मौखिक रूप से जिला पदाधिकारी से अनुमति लेकर मुख्यालय से निजीम कार्य हेतु बाहर थे, का दावा किया जाना एक वरीय पदाधिकारी के र्काव्यहीनता एवं लापरवाही दर्शाता है। एक वरीय पदाधिकारी द्वारा जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए बिना लिखित अनुमोदन के मुख्यालय से अनुपस्थित रहना गैर जिम्मेदाराना कथन है। श्री हुसैन के मुख्यालय से अनाधि—त अनुपस्थिति रहने की तिथि 13.03.2016 को ही भारतीय खाद्य निगम, जयनगर से पाँच ट्रकों में से एक ट्रक संख्या BR06-G1312 जिसपर 300 बोरा चावल रखा था, जयनगर गोदाम नहीं पहुंचाना उनके —त्य पर प्रश्नचिन्ह है। स्पष्टतया श्री हुसैन द्वारा अपने कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरती गयी, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के संगत प्रावधानों का उल्लंघन है।
वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री हुसैन के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4849 दिनांक 13.03.2023 द्वारा i
का संसूचित दंड को पूर्ववत् बरकरार
ii
रखने का निर्णय लिया गया। अतः श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी सम्प्रति जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4849 दिनांक 13.03.2023 द्वारा i
का दंड को पूर्वव्त बरकरार रखा जाता ii
है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सरकार के अवर सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,