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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 12 January 2024

Published 12 January 2024

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-01-12.49
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत

22 पौष 1945 (श0)

(सं0 पटना 49) पटना, शु(cid:272)वार, 12 जनवर(cid:547) 2024

सं0 08/आरोप-01-212/2014 सा0प्र0 22636 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 13 दिसम्बर 2023

श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-29/11, तत्कालीन उप विकास आयुक्त, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्राप्त आरोप पत्र/प्रपत्र-'क' में नैतिक नीचता (Moral Turpitude) प्रधान सहायक-सह-लेखापाल को प्रताड़ित करने, बिना अनुमति के मुख्यालय छोड़ने, बैठकों में भाग नहीं लेने, नरेगा की योजनाओं में बी॰आर॰जी॰एफ॰ की निधि से क्रय में अनियमितता का आरोप जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा प्रतिवेदित किये गये थे। उक्त प्रतिवेदित आरोप के लिये विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2762, दिनांक 26.03.2010 द्वारा श्री पाण्डेय को निलंबित किया गया एवं संकल्प ज्ञापांक-1973, दिनांक 04.02.2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-707, दिनांक 29.08.2012 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त सी॰डी॰ को संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-15425, दिनांक 08.11.2012 एवं विभागीय पत्रांक-15514, दिनांक 24.09.2013 के द्वारा श्री पाण्डेय से लिखित अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री पाण्डेय द्वारा दिनांक 16.11.2012 को अपना लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री पाण्डेय के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं श्री पाण्डेय द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि श्री पाण्डेय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों में से आरोप सं॰-04 का प्रथम अंश विभागीय जाँच आयुक्त के द्वारा प्रमाणित पाया गया। यौनाचार में लिप्त रहने के आरोप से संबंधित सी॰डी॰ की अनुपलब्धता के कारण संचालन पदाधिकारी के द्वारा प्रमाणित नहीं माना गया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के द्वारा सी॰डी॰ में जाँचोपरांत सी॰डी॰ C1, C2, C3 (श्री पाण्डेय के डिजिटल फोटोग्राफ) के पुरूष के समान है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के प्रतिवेदन के आधार पर श्री पाण्डेय के विरूद्ध यौनाचार में लिप्त रहने का आरोप प्रमाणित है, जो सरकारी सेवक के आचरण के विरूद्ध है, तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (i)(iii) के प्रतिकूल है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री पाण्डेय को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रंण एवं अपील) संशोधन, 2007 के नियम-14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्त किये जाने एवं निलंबन अवधि में जीवन-यापन भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई राशि का भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निरूपित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श हेतु अनुरोध किया गया। आयोग ने अपने पत्रांक-948,2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 12 जनवर(cid:547), 2024 दिनांक 18.07.2014 द्वारा परामर्श दिया कि-''सम्यक्‌ विचारोपरांत आयोग को स्पष्ट हुआ कि उपर्युक्त आरोपों के परिपेक्ष्य में प्रस्तावित दंड अनुपातिक नहीं है। अतः आयोग विभागीय दंड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त करता है।'' आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा श्री पाण्डेय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी एवं विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त जाँच प्रतिवेदनों की पुनः समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत आरोपो को प्रमाणित पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांंक 13026 दिनांक 18.06.2014 द्वारा श्री पाण्डेय को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रंण एवं अपील) संशोधन, 2007 के नियम-14(xi) के तहत निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नाकिंत शास्ति अधिरोपित किया गया :-

(1) एक वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक, (2) सेवानिवृत्ति तक स्थायी रूप से प्रोन्नति पर रोक (3) निन्दन एवं (4) निलंबन अवधि में जीवन-निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त और कुछ भी देय नहीं।

उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री पाण्डेय द्वारा मा0 उच्च न्यायालय, पटना में CWJC सं0 13854/16 दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.07.2019 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"In such view of the matter, the impugned order of punishment is set aside for the present and the matter is remanded back to the enquiry officer to hold an inquiry with regard to charge no. 1 only after giving a report of Forensic Science Laboratory to the petitioner and whatever the plea has been taken by him will be considered in accordance with law.

However, it is made clean that the petitioner has already been superannuated from service, so only the proceeding may initiated under Section 43 (B) of the Bihar Pension Rules.

With the aforesaid observations and directions, this write application stands allowed."

उक्त न्यायादेश के आलोक में मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक्‌ विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12710 दिनांक 13.09.2019 द्वारा श्री पाण्डेय को संसूचित दंडादेश को वापस लेते हुए न्यायादेश के अनुरूप उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी, डॉ0 एन0 सरवण कुमार, सचिव, कृषि-सह-जांच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 44 दिनांक 03.03.2023 द्वारा जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जिसमें आरोप संख्या-01 प्रमाणित पाया गया। श्री पाण्डेय के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी का मंतव्य/निष्कर्ष निम्नवत्‌ हैः-

आरोपः- प्रमण्डलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल मुजफ्फरपुर से प्राप्त सी०डी० में श्री पाण्डेय को यौनाचार में लिप्त दिखाया गया है। यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रतिकूल है।

साक्ष्यः- निदेशक, विधिक विज्ञान प्रयोगशाला का कार्यालय, बिहार, पटना का ज्ञापांक 2705, दिनांक 26.07.2013 एवं उक्त के साथ संलग्न नगर थाना कांड संख्या-S.D.E No- 206/10 से संबंधित मूल जाँच प्रतिवेदन Office The Director, Forensic Science Laboratory, Bihar, Patna के रिपोर्ट F. I. No- 8/2010 Date 07.06.2013. संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-

(i) माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में आरोपित पदाधिकारी को उपलब्ध कराये गये F.S.L रिपोर्ट के बारे में आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस रिपोर्ट को अनाधि—त एवं अविश्वसनीय बताते हुए पूरे मामले को संदेहपूर्ण प्रतिवेदित किया गया है, इसके अलावे F.S.L रिपोर्ट के बारे में आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कुछ भी टिप्पणी नहीं है। सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त F.S.L रिपोर्ट में यह अंकित किया गया है कि "Result of examination" रिपोर्ट में तीनों छाया चित्र आरोपित पदाधिकारी श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय के ही हैं।

(ii) आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपना पक्ष रखते हुए आरोप को लगभग 10 वर्ष पुराना कहते हुए वाद को खारिज करने का अनुरोध किया गया है। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 5708, दिनांक 15.06.2020 द्वारा श्री पाण्डेय के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही जारी रखना उचित ठहराया गया है।

(iii) आरोपित पदाधिकारी द्वारा सुनवाई के दौरान अन्य कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष :- माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 12.07.2019 को पारित आदेश के आलोक में आरोपित पदाधिकारी को F.S.L रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए सुनवाई की गई साथ ही इस आरोप से संबंधित सभी कागजातों का अवलोकन भी किया। इसके आलोक में आरोपित पदाधिकारी के विरुद्ध लगाये गये आरोप संख्या-01 प्रमाणित होता है।3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 12 जनवर(cid:547), 2024 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभाग द्वारा श्री पाण्डेय से पत्रांक 5502 दिनांक 21.03. 2023 द्वारा लिखित अभिकथन की माँग की गई एवं पत्रांक 7823 दिनांक 25.04.2023 द्वारा स्मारित किया गया। श्री पाण्डेय द्वारा आवेदन समर्पित करते हुए उल्लेख किया गया कि विभागीय कार्यवाही से संबंधित CWJC NO- 13854/2016 में पारित आदेश के विरुद्ध उनके द्वारा LPA NO- 186/20 दायर किया गया है। न्याय निर्णय आने तक लिखित अभिकथन प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी जाय। तदुपरांत श्री पाण्डेय के आवेदन को अस्वी—त करते हुए पुनः उन्हें लिखित अभिकथन समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक 10005 दिनांक 29.05.2023 एवं पत्रांक 13165 दिनांक 12.07.2023 द्वारा निदेश दिया गया।

उक्त के आलोक में श्री पाण्डेय द्वारा आवेदन समर्पित करते हुए LPA NO- 186/20 में आदेश पारित होने तक लिखित अभिकथन समर्पित करने हेतु पुनः समय देने का अनुरोध किया गया। तत्पश्चात्‌ पुनः श्री पाण्डेय द्वारा आवेदन समर्पित करते हुए कतिपय जानकारी/अभिलेख की माँग की गई। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि श्री पाण्डेय द्वारा जान-बूझकर लिखित अभिकथन समर्पित नहीं किया जा रहा है। लिखित अभिकथन/स्पष्टीकरण, अप्राप्त मामलों के संबंध में प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अध्यक्षता में आहूत समीक्षा बैठक में श्री पाण्डेय द्वारा पहली बार लिखित आश्वासन एवं दूसरी बार अनुपस्थित रहे। उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर LPA में कोई स्थगन आदेश (Stay Order) अथवा कोई अन्य आदेश भी उपलब्ध नहीं कराया गया।

श्री पाण्डेय द्वारा लिखित अभिकथन समर्पित नहीं किये जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में उनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में उन्हें कुछ नहीं कहना है।

अतः संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के प्रावधानों के तहत ''

का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-18096 दिनांक 25.09.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2922 दिनांक 14.11.2023 द्वारा विभाागीय प्रस्ताव को बिना परामर्श के वापस करते हुए यह उल्लेख किया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-9794 दिनांक 22.07.20219 की कंडिका-07 में प्रावधान है किः-

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-29/11, तत्कालीन उप विकास आयुक्त, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी0) के संगत प्रावधानों के तहत उनके % का दंड अधिरोपित/संसूचित किया जाता है। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

किशोर कुमार प्रसाद, सरकार के विशेष सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त ।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 49-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0 ।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 12 January 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-01-12.49/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-01-12.49.