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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 January 2024

Published 17 January 2024

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-01-17.3
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 27 1945 (श0) सं(cid:201)या 03 पटना, बुधवार, ————————

17 2024 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-33 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 34-85 पूरक

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पूरक-क 86-922 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत

सूचनाएं। —————

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सं0 2स्था0-213/2021- /वि0स0।--श्री शशि भूषण कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना जो वेतन स्तर-09 में प्रतिमाह अंके-54,700/- रूपये वेतन पाते हैं को सभा सचिवालय के ज्ञापांक-1697, दिनांक-28.09.2007 द्वारा प्रवृत्त बिहार सरकार के वित्त विभागीय संकल्प संख्या-2498, दिनांक-12.04.2007 एवं सभा सचिवालय के ज्ञापांक-591, दिनांक-19.04.2012 द्वारा प्रवृत्त बिहार सरकार के वित्त विभागीय संकल्प संख्या-1187, दिनांक-10.02.2011 के आलोक में दिनांक 27.11.2023 से 11.12.2023 तक पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया जाता है ।

आदेश से,

अवर सचिव। ------

सं0 2स्था0-220/2021- /वि0स0।--श्रीमती रूशदा रहमान, प्रशाखा पदाध्किारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना जो वेतन स्तर-09 में प्रतिमाह अंके-54,700/-रूपये वेतन पाती हैं को बिहार सेवा संहिता के नियम-220 के उपनियम (ख) के तहत दिनांक-04.12.2023 से 31.05.2024 तक (कुल-180 दिन) मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया जाता है। साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-01.06.2024 एवं 02.06.2024 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग की अनुमति दी जाती है ।

आदेश से,

अवर सचिव। ------

सं0 2स्था0-240/2021- /वि0स0--श्रीमती पूनम कुमारी, प्रशाखा पदाध्किारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना जो वेतन स्तर-09 में प्रतिमाह अंके-54,700/- रूपये वेतन पाती हैं को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-2895(22), दिनांक-23.11.2023 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230, 240(क) एवं 248(क) के अनुसरण में दिनांक-16.10.2023 से 18.10.2023 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । इसके पश्चात इनके उपर्जित अवकाश कोष में कुल-54 दिनों का अवकाश शेष है ।

आदेश से,

अवर सचिव। ------

सं0 2स्था0-173/2022- /वि0स0--श्री मधुप कुमार, वरीय प्रतिवेदक, बिहार विधान सभा सचिवालय, जो वेतन स्तर-13 में प्रतिमाह अंके-1,34,500/- रूपये वेतन पाते है, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एल0टी0सी0 नियामवली, 1986 तथा इस संबंध में वित्त विभाग, बिहार सरकार के संकल्प संख्या-8043, दिनांक-11.10.2017 की कांडिका-G केे अंतर्गत ब्लॉक वर्ष 2022-25 में एल0टी0सी0 सुविधा के तहत दिनांक-23.12.2023 से 31.12.2023 तक पटना से तिरूपति (आन्ध््रा प्रदेश) एवं तिरूपति (आन्ध््रा प्रदेश) से पटना तक की यात्रा के निमित्त दिनांक-26.12.2023से 29.12.2023 तक आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है तथा दिनांक-23.12.2023, 24.12.2023, 25.12.2023, 30.12.2023 एवं 31.12.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभेाग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । साथ ही दिनांक-23.12.2023 से 31.12.2023 तक मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति प्रदान की जाती है ।

अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से,

अवर सचिव।3 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 2स्था0-132/2018- /वि0स0।--श्री प्रवीन कुमार श्रीवास्तव, अवर सचिव, बिहार विधान सभा सचिवालय, जो वेतन स्तर-11 में प्रतिमाह अंके-80,900/-रूपये वेतन पाते है, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एल0टी0सी0 नियामावली, 1986 तथा इस संबंध् में वित्त विभाग, बिहार सरकार के संकल्प-8043, दिनांक 11.10.2017 की कांडिका-ळ के अंतर्गत ब्लॉक वर्ष 2022-25 में एल0टी0सी0 सुविध के तहत दिनांक-01.12.2023 से 04.12.2023 तक देश के अन्दर पटना से नई दिल्ली एवं नई दिल्ली से पटना वापसी की यात्राा के निमित्त दिनांक-01.12.2023 एवं 04.12.2023 को आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है तथा दिनांक-02.12.2023 एवं 03.12.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । साथ ही दिनांक-01.12.2023 से 04.12.2023 तक मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति प्रदान की जाती है ।

अध्यक्ष, बिहार विधान-सभा के आदेश से,

अवर सचिव। ------

सं0 2स्था0-84/2023- /वि0स0।--महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) का कार्यालय, बिहार से प्राप्त पत्रांक-LR:311020231200887, LR No. : 0444/2023-24 के आलोक में श्री श्रीरमण सिंह, मुख्य प्रतिवेदक, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-234 के तहत दिनांक-04.09.2023 से 08.09.2023 तक रूपान्तरित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-09.09.2023 एवं 10.09.2023 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति दी जाती है । अवकाश उपभोग के उपरांत इनके अर्ध्वैतनिक अवकाश कोष में कुल-456 दिनों की अवकाश शेष है ।

आदेश से,

अवर सचिव। ------

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सं0 3(स०)/उ०स्था०(नियुक्ति)15/2023 --बिहार लोक सेवा आयोग के विज्ञापन सं0-02/2020 द्वारा उद्योग विभाग अन्तर्गत परियोजना प्रबंधक के पद पर नियुक्ति हेतु अनुशंसित निम्नलिखित परियोजना प्रबंधकों को कॉलम-5 में अंकित तिथि से योगदान स्वीकृत करते हुए कॉलम-6 में अंकित कार्यालयों में पदस्थापित किया जाता है :-

क्रमांक नाम गृह जिला रौल नं0 योगदान की तिथि पदस्थापन का स्थान
1 2 3 4 5 6
1. श्री प्रणय कश्यप दरभंगा 203191 21.08.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, शिवहर
2. श्री विवेक कुमार अरवल 209235 21.08.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, सिवान
3. श्री सुजात सिवान 221256 21.08.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, शेखपुरा
4. श्री भावेश कुमार तिवारी गोपालगंज 226306 27.09.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, वैशाली
5. श्री अंकित कुमार सीतामढ़ी 202332 27.09.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, पटना
6. श्री अमन दीप नालन्दा 215035 27.09.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, पटना
7. श्री हर्षवर्द्धन लाल पटना 222566 27.09.2023 परियोजना प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, मधेपुरा

का अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दिलीप कुमार, विशेष सचिव।

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सं0 3(स0)/उ0स्था0(प्रोन्नति)07/2023-6164--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-19300 दिनांक 13.10.2023 में निहित अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था के तहत बिहार उद्योग सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों4 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 को महाप्रबंधक/उप उद्योग निदेशक स्तर में, उसके विहित वेतनमान (वेतन स्तर-12) सहित, अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी

श्री कृष्ण कुमार राय, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जि0उ0के0, पटना। 11 कार्यकारी प्रबंधक
श्री रंजन कुमार सिन्हा, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी उप निदेशक(तक0), तकनीकी विकास निदेशालय, बिहार, पटना। 11 कार्यकारी प्रबंधक
श्री विनय कुमार मल्लिक, कार्यकारी प्रबंधक-सह- प्रभारी सलाहकार, खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय। 11 कार्यकारी प्रबंधक
श्री विशेश्वर प्रसाद, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नालन्दा। 11 कार्यकारी प्रबंधक
श्री अनिल कुमार मंडल, कार्यकारी प्रबंधक सह प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, किशनगंज। 11 कार्यकारी प्रबंधक

निहित शर्तों के अध्यधीन है।

3. उपर्युक्त पदाधिकारियों द्वारा वर्त्तमान में धारित पद को अगले आदेश तक महाप्रबंधक/ उप उद्योग निदेशक स्तर (विहित वेतनमान-वेतन स्तर-12) में उच्चतर पद का प्रभार दिया जाता है।

4. उपर्युक्त पदाधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की तिथि से महाप्रबंधक/उप उद्योग निदेशक स्तर के पद पर अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार का आर्थिक लाभ देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बृज किशोर चौधरी, उप-सचिव।

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सं0 7/ए॰-01-1001/2023-2154--बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 7ए/स॰अभि॰(असै॰)- 01-11/2019 (49) लो॰से॰आ॰/गो॰ दिनांक-14.11.2023 द्वारा अनुशंसित एवं जल संसाधन विभाग, बिहार को अंतिम रूप से आवंटित 182 (एक सौ बयासी) अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध करायी गयी। अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जाँच दिनांक-12.12.2023 एवं 13.12.2023 को आयोजित की गई, जिसमें कुल-172 (एक सौ बहत्तर) अभ्यर्थी उपस्थित हुये। उपस्थित अभ्यर्थी जिनके द्वारा वांछित कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया है, को छोड़कर निम्नलिखित 145 (एक सौ पैतालीस) अभ्यर्थियों को बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-2 में सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर पुनरीक्षित वेतन स्तर-9 (53,100-1,67,800) में समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा स्वी—त आदेय भत्तों के साथ जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अधीन रिक्त पदों के विरुद्ध कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से औपबंधिक रूप से नियुक्त करते हुए उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-8 में अंकित कार्यालय में पदस्थापित किया जाता है :-

(1) (2) (3) (4) (5) (6) (7) (8) (9)
1 13 अचिन्त रंजन/ समस्तीपुर 12.10.1989 पिता-दिनेश प्रसाद शर्मा, पता-18, भागवत भवन, ग्रामपो0-सुपौल, जिला-समस्तीपुर, बिहार पिन-844501 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, जमसड़ (सारण नहर प्रमंडल, भोरे के अंतर्गत)/सिवान
5 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
2 15 मो0 हारिस/ अंबेडकर नगर (उ.प्र.) 16.08.1993 पिता- मेराज अहमद, पता- ग्रामपो0-हंसवर, हिसवार अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश, पिन-224143 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, पिपरा (तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
3 16 हर्ष कुमार सिंह/ बलिया (उ.प्र.) 30.03.1997 पिता-नरेन्द्र कुमार सिंह, पता-हाउस नं0-205, प्रोफसर कॉलोनी, रामपुर उदयभान, बलिया, उत्तर प्रदेश, पिन-277001 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, महुआ (तिरहुत नहर प्रमंडल, हाजीपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी
4 19 सौरव/ पटना 03.02.1997 पिता- जितेन्द्र प्रसाद सिंह, पता-न्यू ब्रह्‌मपुर, आर्दश कॉलोनी रोड नं0-01, नीयर मंगल चौक, कुसुमपूरी कॉलोनी, खेमनीचक, पटना, पो0-रामकृष्णानगर, बिहार, पिन-800027 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, राघोपुर (सिंचाई प्रमंडल, राघोपुर के अंतर्गत)/सहरसा
5 20 मनोज कुमार/ गया 12.12.1995 पिता- मुनारीक यादव, पता-ग्राम-बतसपुर, पो0-कुजापी, थाना-चंदौती, जिला-गया, बिहार-823002 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, बौंसी (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बौंसी के अंतर्गत)/कटिहार
6 22 सिद्धार्थ कुमार/ पटना 05.09.1991 पिता-करुणेश कुमार, पता-1170/एच, राजीव नगर नियर शिव मंदिर, कांटी फ ैक्टरी रोड, महात्मा गाँधी नगर, कंकड़बाग, पटना, बिहार-800026 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन उच्चस्तरीय नहर अवर प्रमंडल, भगवानपुर (सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, भभुआ के अंतर्गत)/डिहरी
7 23 राहुल कुमार पोद्‌दार/ समस्तीपुर 15.03.1993 पिता-अजय कुमार पोद्‌दार, पता-ग्राम-मोरवा, खेदुटार, पो0-मोरवा, थाना-ताजपुर, समस्तीपुर, बिहार-848121 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, घोसी (सिंचाई प्रमंडल, घोसी के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
8 24 रौशन कुमार/ सुपौल 25.01.1994 पिता-खगेश्वर प्रसाद यादव, पता- वार्ड नं0-04, पिपरा रोड, गौरवगढ़ सुपौल, नियर रॉयल ईनफिल्ड शोरुम, जिला-सुपौल बिहार-852131 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, खड़गपुर (सिंचाई प्रमंडल, तारापुर के अंतर्गत)/भागलपुर

  1. {{^{{FOOTNOTE 02}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1997}}}} पिता- जितेन्द्र प्रसाद ↩
6 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
9 25 केशरी गौरव/ जहानाबाद 12.03.1995 पिता-ओम प्रकाश केशरी, पता-नियर उपेन्द्र ईलेक्ट्रॉनिक्स पुरानी हास्पीटल रोड, जहानाबाद, पो0-जहानाबाद, थाना-जहानाबाद टाउन थाना, बिहार-804408 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, सिकन्दरा (सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा के अंतर्गत)/भागलपुर
10 26 विकास कुमार/ समस्तीपुर 17.08.1995 पिता- रंजीत प्रसाद, पता-नियर मस्जिद, ग्रामपो0थाना- बिठान, जिला-समस्तीुपर, बिहार, पिन-848207 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती बायाँ तट नहर अवर प्रमंडल, बेलाँव (दुर्गावती बायाँ तट नहर प्रमंडल, भीतरीबाँध के अंतर्गत)/डिहरी
11 30 अनीश ं कुमार पटेल/ रोहतास 08.05.1996 पिता-जगनारायण सिंह पटेल, पता-गली नं0-4, वार्ड नं0-11, दक्षिणि पटेल नगर, नगर पंचायतथाना पो0- कोचक, रोहतास, बिहार-821112 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मांझी (सारण नहर प्रमंडल, एकमा के अंतर्गत)/सिवान
12 32 रवि कुमार ठकुराई/ पश्चिम चम्पारण 27.05.1991 पिता-द्वारिका ठकुराई, पता-ग्राम- विश्वम्भरपुर, पो0-मेहुड़ा, थाना-भौरोगंज, जिला- पश्चिम चम्पारण, बिहार पिन-845101 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, जन्दाहा, शिविर-महुआ (तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल के अंतर्गत)/मोतिहारी
13 37 हिमांशु शेखर/ पटना 25.06.1996 पिता-राजीव कुमार, पता-ग्राम-मिठापुर, पो0-लई, थाना-बिहटा, जिला-पटना, बिहार, पिन-801112 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-4, गया (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, गया के अंतर्गत)/गया
14 40 धर्मवीर कुमार/ पटना 02.11.1993 पिता-सत्येन्द्र प्रसाद गुप्ता, पता-ग्राम-चतुर्भुजपुर, पो0-सरहान, थाना-पंडारक, जिला-पटना, बिहार, पिन-803214 EBC सामान्य सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद

  1. {{^{{FOOTNOTE 08}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता- रंजीत प्रसाद, ↩
7 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
15 41 रोशन कुमार/ अररिया 02.01.1994 पिता-अवधेश नायक, पता-कलावती नगर (छर्रापट्‌टी), वार्ड नं0-6, हसनपुर, पो0-मेरीगंज, थाना-रानीगंज, जिला-अररिया, बिहार, पिन-854334 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-2, खुटौना (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, अन्धराठाढ़ी के अंतर्गत)/दरभंगा
16 43 निशांत नयन/गया 03.10.1994 पिता-शशि भूषण शर्मा, पता-एकौना हाउस, न्यू गोडाउन रोड, तुतवारी, जिला-गया, बिहार, पिन-823001 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती दायाँ तट नहर अवर प्रमंडल-1, चेनारी (दुर्गावती दायाँ तट नहर प्रमंडल, चेनारी के अंतर्गत)/डिहरी
17 44 अजीत भारती/ नालंदा 05.04.1995 पिता-रमेश प्रसाद, पता-ग्राम-उस्मानपुर, पो0-कोशियावॉ थाना-एकंगरसराय, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-801301 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, घोड़ासहन नहर अवर प्रमंडल, सिकटा (घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल के अंतर्गत)/मोतिहारी
18 45 प्रभात कुमार साह/ सारण 16.10.1995 पिता-शंकर साह, पता-ग्राम-जगदीशपुर पो0-कैतुका लच्छी, थाना-मकेर, जिला-सारण, बिहार, पिन-841460 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-1, पुनपुन (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, नवीनगर के अंतर्गत)/औरंगाबाद
19 46 नीरज कुमार/ मुजफ्फरपुर 17.12.1996 पिता-विजय कुमार गुप्ता, पता-माखन स्वीट्‌स, माखन साह चौक, पुरानी बाजार, पो0-हेड पोस्ट ऑफिस, थाना-टाउन थाना, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-842001 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पूर्वी तटबंध अवर प्रमंडल-2, कोपरिया (पूर्वी तटबंध प्रमंडल, कोपरिया के अंतर्गत)/वीरपुर
20 47 आयुष कुमार/ लखीसराय 31.01.1997 पिता-मुकेश कुमार यादव, पता-ग्राम-बसौनी, थाना-पीरीबाजार, जिला-लखीसराय, बिहार, पिन-811212 BC सामान्य सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर

  1. {{^{{FOOTNOTE 10}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1994}}}} पिता-शशि भूषण ↩
8 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
21 48 आदित्य राज/ मुजफ्फरपुर 17.04.1994 पिता-अरुण कुमार, पता-श्रीचण लेन, साहु रोड, नियर दीपक सिनेमा, छोटी कल्याणी, मुसहरी, पो0-रमना, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-842002 EWS सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल, टेकारी (सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, कुर्था के अंतर्गत)/गया
22 49 मो0 अशफाक आलम/ पटना 12.07.1994 पिता-मो0 अशरफ, पता-ईशापुर रहमतनगर, पो0थाना- फ लवारीशरीफ, ु जिला- पटना, बिहार, पिन-801505 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, कपिलेश्वर स्थान (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, केवटी के अंतर्गत)/दरभंगा
23 50 मंजीत राज/ सुपौल 22.07.1994 पिता-राज कुमार राय, पता-वार्ड नं0-07, चकला निर्मली, सुपौल, बिहार, पिन-852131 EWS सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, पूसा (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर के अंतर्गत)/समस्तीपुर
24 53 शमशेर आलम/ पश्चिमी चम्पारण 05.06.1996 पिता-मो0 अमील, पता- ग्राम-मंशाटोला, पो0-बरवत पसरायन, थाना- मुफस्सिल बेतिया, जिला- पश्चिमी चम्पारण, बिहार, पिन-845438 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-2, गया (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, गया के अंतर्गत)/गया
25 55 प्रशांत कुमार/ बेगुसराय 03.01.1991 पिता-संजय कुमार पोद्‌दार, पता- ग्राम-टेघरा पुरानी बाजार भागिरथि रोड, नियर हनुमान मंदिर, पो0थाना- तेघरा, जिला-बेगुसराय, बिहार, पिन-851133 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, बनमनखी (सिंचाई प्रमंडल, बनमनखी के अंतर्गत)/सहरसा
26 56 कुमार रणविवेक/ पटना 13.10.1991 पिता-रणविभोर सिंह, पता-के/ओ0 स्व0 काली सिंह, पूर्वी लोहनीपुर, रेलवे हनडर रोड, कदमकुऑ, जिला-पटना, बिहार, पिन-800003 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, ढाका (जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर

  1. {{^{{FOOTNOTE 07}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1994}}}} पिता-मो0 अशरफ, पता-ईशापुर रहमतनगर, पो0थाना- फुलवारीशरीफ, जिला- पटना, बिहार, पिन-801505 ↩
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27 57 राजीव नयन/ नवादा 18.12.1992 पिता-सुरेश चन्द्रा, पता-द्वारा सिया शरण यादव, ग्राम-भरसंडा, पो0थाना-सिरदला, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805127 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, नीमा चाँदपुरा (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगूसराय के अंतर्गत)/समस्तीपुर
28 58 प्रणव कुमार/ गया 12.09.1993 पिता-विक्रमादित्य सिंह, पता-आर0डी0 पब्लिक स्कूल, विक्रम विहार, पो0थाना-टेकारी, जिला-गया, बिहार, पिन-824236 UR सामान्य सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, भागलपुर
29 59 बादल कुमार मंडल/ धनबाद (झारखण्ड) 24.08.1994 पिता-धिरेन मंडल, पता- ग्राम-कोलाकुसमा मझलाडीह पो0-के0जी0 आशरम, थाना-सरायढ़ ला, े जिला-धनबाद, झारखण्ड, पिन-828109 UR सामान्य सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), जल संसाधन विभाग, वीरपुर
30 60 रमण कुमार/ कटिहार 21.05.1995 पिता-वैद्य नाथ झा, पता-ग्राम -नुनगरा, पो0थाना-कदवा, जिला-कटिहार, बिहार, पिन-855114 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, सराय (तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल के अंतर्गत)/मोतिहारी
31 61 मो0 शालिक फरीदी/ भागलपुर 05.07.1995 पिता-अहमद कमाल फरीदी, पता- हाउस नं0-बी0एस0-018-0 082, गुलाम रसूल लेन, गुरहट्टा, मोजाहिदपुर, पो0-भागलपुर सिटी , थाना-मोजाहिदपुर, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-812002 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, बगहा (तिरहुत नहर प्रमंडल-1, बेतिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
32 65 चन्दन कुमार/ नालंदा 03.02.1997 पिता-भोला पंडित, पता-ग्रामपो0- बकरा, थाना-बिन्द, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803110 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन उच्चस्तरीय नहर अवर प्रमंडल, नरौला (सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, औरंगाबाद के अंतर्गत)/औरंगाबाद

  1. {{^{{FOOTNOTE 09}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1993}}}} पिता-विक्रमादित्य ↩
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33 66 गौरव/ पटना 05.12.1987 पिता-लाल बाबू ठाकुर, पता- मॉ लक्ष्मी कॅाम्पलेक्स फ ैल्ट नं0-403, बलॉक-बी0, आई0ए0एस0 कॉलोनी, रुपसपुर बेली रोड, दानापुर, जिला-पटना, बिहार, पिन-801503 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, रघुनाथपुर (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बक्सर के अंतर्गत)/पटना
34 67 अजीत कुमार भारती/ भागलपुर 02.01.1991 पिता-ओम प्रकाश यादव, पता-ग्राम-राघोपुर टिकर, पो0-नाथनगर, थाना-मधुसुदनपुर ओ0पी0, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-812006 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-5, घोषी (सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
35 68 कृष्ण कुमार केशव/ दरभंगा 26.05.1991 पिता-श्याम नारायण यादव, पता-नयाटोला, सुंदरपुर, नियर एम0जी0 कॉलेज,पो0-लालबाग, थाना- एल0एन0एम0यू0, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846004 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, सुरजपुरा (मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अंतर्गत)/सिवान
36 69 समीर रंजन/ जमुई 23.01.1994 पिता-नोखेलाल सिंह, पता- ग्रामपो0-पिरहिण्डा, सिकन्दरा, जिला-जमुई, बिहार, पिन-811315 UR सामान्य सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर
37 70 प्रवीण कुमार झा/ सीतामढ़ी 23.02.1994 पिता-मनोज कुमार झा, पता-वार्ड नं0-05, नियर महादेव स्थान , पो0-बनगॉव, थाना-बाजपट्टी, जिला-सीतामढ़ी, बिहार, पिन-843314 EWS सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-2, अम्बा (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, अम्बा के अंतर्गत)/औरंगाबाद
38 72 दिव्यान्शु/ पटना 17.08.1994 पिता-उमेश कुमार, पता-बी 44 जयप्रकाश नगर, पो0-अशियाना नगर, थाना-शास्त्रीनगर थाना, जिला-पटना, बिहार, पिन-800025 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती बाँध अवर प्रमंडल-3, भीतरीबाँध (दुर्गावती बाँध प्रमंडल-1, भीतरीबाँध के अंतर्गत)/डिहरी

  1. {{^{{FOOTNOTE 05}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1991}}}} पिता-श्याम नारायण यादव, पता-नयाटोला, सुंदरपुर, नियर एम0जी0 कॉलेज,पो0-लालबाग, थाना- एल0एन0एम0यू0, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846004 ↩
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39 74 प्रभात रंजन प्रभात/ सुपौल 10.05.1995 पिता-अमरनाथ प्रसाद, पता-ग्राम-टोलापट्टी, पो0-परसा, थाना- किशनपुर, जिला-सुपौल, बिहार, पिन-852218 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, नौतन (तिरहुत नहर प्रमंडल-2, बेतिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
40 75 सौरव कुमार/ मुजफ्फरपुर 16.08.1995 पिता-राजू कुमार, पता-कलामबाग रोड, पंजाबी कॉलोनी, गन्नीपुर, नियर आई0टी0आई0 मुजफ्फरपुर, पो0-रमना, थाना-काजी मोहम्मदपुर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-842002 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, रहिका (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा के अंतर्गत)/दरभंगा
41 76 रोहन राज/ गोपालगंज 06.09.1995 पिता-अरविन्द कुमार सिंह, पता-ग्राम-बरईपट्टी, पो0-छाप मठिया, थाना-मीरगंज, जिला-गोपालगंज, बिहार, पिन-841227 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, आरा (सोन नहर प्रमंडल, आरा के अंतर्गत)/डिहरी
42 78 चन्द्रमणी कुमार/ नालंदा 05.12.1995 पिता-विनोद प्रसाद, पता-ग्रामपो0- नेकपुर, थाना-छबिलापुर, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803116 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, ढाका (तिरहुत नहर प्रमंडल, ढाका के अंतर्गत)/मोतिहारी
43 79 प्रशान्त शेखर/ भागलपुर 05.01.1996 पिता-चन्द्रशेखर झा, पता-मोहदीनगर, गुलोबाड़ी, पो0-मिरजानहाट, थाना-मोजाहिदपुर, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-812005 EWS सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मैरवा (सारण नहर प्रमंडल, मैरवा के अंतर्गत)/सिवान
44 82 अभिनव कुमार/ नालंदा 26.07.1991 पिता-रंजीत प्रसाद, पता-द्वारा- स्व0 हरिनारायण प्रसाद, ग्रामपो0-सरबहदी, थाना-मानपुर, प्रखंड-बिहारशरीफ, जिला-नालंदा,बिहार, पिन-803107 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, वरूराज (तिरहुत नहर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी

  1. {{^{{FOOTNOTE 08}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-राजू कुमार, ↩
12 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
45 84 नीरज कुमार भारती/ पटना 22.11.1993 पिता-विजय प्रसाद गुप्ता, पता-ग्रामपो0- लहसुना, थानाप्रखंड-मसौढ़ी, भाया-मसौढ़ी, जिला-पटना, बिहार, पिन-804452 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-1, कलुआही (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा के अंतर्गत)/दरभंगा
46 85 विकास कुमार/ गया 08.01.1994 पिता- राजेन्द्र प्रसाद गुुप्ता, पता-ग्राम- सिंदुआर, पो0-डंगरा, थाना-मोहनपुर, जिला-गया, बिहार, पिन-824201 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, कमला नहर अवर प्रमंडल, जयनगर (कमला नहर प्रमंडल, जयनगर के अंतर्गत)/दरभंगा
47 86 सौरभ कुमार/ पटना 09.02.1994 पिता-फुलेन्द्र प्रसाद राय, पता-ग्राम-मुस्तफापुर कैन्ट रोड (नियर पप्पू मुखिया), पो0थाना-खगौल , जिला-पटना, बिहार, पिन-801105 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पुनपुन बराज अवर प्रमंडल-1, गोह (पुनपुन बराज प्रमंडल-1, गोह के अंतर्गत)/औरंगाबाद
48 88 रत्नेश कुमार/ शिवहर 05.04.1994 पिता-बासकित साह, पता-ग्राम-रेजमा, वार्ड नं0-07, पो0थाना-शिवहर, जिला-शिवहर, बिहार, पिन-843329 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, दाउदपुर (सारण नहर प्रमंडल, एकमा के अंतर्गत)/सिवान
49 89 तौसीफ रजा/ मधुबनी 15-04-1994 पिता-अहमद रजा, पता-ग्राम-महिसाम लाईन टोला, पो0थाना-मधेपुर, जिला-मधुबनी, बिहार, पिन-847408 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, गंगा पम्प नहर अवर प्रमंडल-2, कहलगाँव (गंगा पम्प नहर प्रमंडल, शिवनारायणपुर के अंतर्गत)/भागलपुर
50 90 मोहम्मद जीशान अली/ बलिया (उत्तर प्रदेश) 13.07.1994 पिता-मोहम्मद रफीउल्‌लाह, पता-परमंदापुर, निरालानगर, गरवाड़ रोड, जिला-बलिया, उत्तर प्रदेश, पिन-277001 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-1, रतवारा, मुख्यालय, मोतिपुर (तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा, मुजफ्फरपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी

  1. {{^{{FOOTNOTE 02}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1994}}}} पिता-फुलेन्द्र प्रसाद राय, पता-ग्राम-मुस्तफापुर कैन्ट रोड (नियर पप्पू मुखिया), पो0थाना-खगौल , जिला-पटना, बिहार, पिन-801105 ↩
13 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
51 92 अंशु अभिषेक/ पटना 23.01.1995 पिता-अनुपम कुमार, पता- शांति निवासा, कॉलोनी-चाणक्यनगर , कुम्हरार, पो0-बी0एच0 कॉलोनी, थाना-अगमकुऑ, जिला-पटना, बिहार, पिन-800026 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, त्रिवेणी नहर अवर प्रमंडल, सुगौली (त्रिवेणी नहर प्रमंडल, रक्सौल के अंतर्गत)/मोतिहारी
52 93 यश सुराना/ सुपौल 31.03.1995 पिता-जितेन्द्र सुराना, पता-द्वारा-निर्भय कुमार जैन, साजन सजनी महावीर चौक, थाना रोड सुपौल, जिला-सुपौल, बिहार, पिन-852131 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन उच्चस्तरीय नहर अवर प्रमंडल-2, गोह (सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, टेकारी के अंतर्गत)/औरंगाबाद
53 95 प्रितम कुमार/ सहरसा 10.08.1995 पिता-संजय कुमार, पता-ग्राम-कचौत, पो0थाना-सलखुआ बाजार, जिला-सहरसा, बिहार, पिन-852126 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, शिविर एवं मार्ग अवर प्रमंडल, बथनाहा (सिंचाई प्रमंडल, वीरपुर के अंतर्गत)/सहरसा
54 96 रणवीर कुमार/ गया 15.06.1996 पिता-उमेश राम, पता- मानपुर, पेहानी, पुरानी मदरसा, थानापो0-बुनियादगं ज, जिला-गया, बिहार, पिन-823003 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, जलालगढ़ (सिंचाई प्रमंडल, अररिया के अंतर्गत)/सहरसा
55 98 कुंदन कमार/ पटना 08.10.1996 पिता-विनय कुमार सिंह, पता-पश्चिमी बोरिंग कैनाल रोड, नियर द्वारिका मंदिर, अपोजिट शुभम कॉमपलेक्स, पो0-जी0पी0ओ0, थाना-एस0के0पुरी जिला-पटना, बिहार, पिन-800001 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, बिसुनपुर (सिंचाई प्रमंडल, बिजीखोरवा के अंतर्गत)/भागलपुर
56 102 युसुफ जमील अकबर/ दरभंगा 05.12.1990 पिता-मो0 मुमताज, पता-मोहल्ला/ग्राम- सराय सत्तार खाँ, पो0थाना-लहेरियास राय, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846001 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-4, घोसी (सिंचाई प्रमंडल, घोसी के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
57 104 विकास रंजन/ नालंदा 11.03.1991 पिता-रामसेवक प्रसाद, पता-ग्रामपो0 थाना-तेल्हाड़ा, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-801306 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल-3, शिवहर (बागमती प्रमंडल, शिवहर के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर

  1. {{^{{FOOTNOTE 03}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-जितेन्द्र सुराना, ↩
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58 195 कौशल कुमार / जहानाबाद 11.04.1996 पिता-महेश दास, पता-ग्राम-बिलासपुर, पो0-नेर, थाना-मखदुमपुर, जिला-जहानाबाद, बिहार, पिन-804422 SC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, गंगा पम्प नहर अवर प्रमंडल-4, सूर्यगढ़ा, शिविर-मुंगेर (गंगा पम्प नहर प्रमंडल, मुंगेर के अंतर्गत)/भागलपुर
59 295 अनिमेष कुमार/ नालंदा 01.03.1993 पिता-मनोज कुमार सिंह, पता-ग्राम-ढकनियॉ, पो0-तुलसी, थाना-चण्डी, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803108 UR सामान्य (FFD) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणी (मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अंतर्गत)/सिवान
60 443 प्रेरणा प्रिया/ नालंदा 05.02.1997 पिता-रामवृक्ष प्रसाद, पता-ग्राम-दशरथपुर, पो0-पावापूरी, थाना-गिरियक, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803115 BC सामान्य प्राक्कलन पदाधिकारी, दुर्गावती बाँध प्रमंडल-2, भीतरीबाँध/डिहरी
61 547 रश्मि जायसवाल /चन्दौली (उत्तर प्रदेश) 26.01.1996 पिता-धर्मेन्द्र जयसवाल, पता-द्वारा-प्रदीप कुमार, मं0नं0-56/ए अलीनगर, मानसरोवर अस्पताल के पास, मुगलसराय, जिला-चन्दौली, उत्तर प्रदेश, पिन-232101 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, जहानाबाद ( सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
62 591 दिव्यांगना / मुजफ्फरपुर 13.03.1995 पिता-जे0एन0 चौधरी, पता-हाउस नं0-2ई/3, रोड नं0-02, तिरहुत कॉलोनी, अहियापुर, न्यू जिरोमाईल, थाना-अहियापुर, पो0-एच0पी0ओ0 मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-842001 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दोन नहर अवर प्रमंडल, रामनगर (दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के अंतर्गत)/मोतिहारी
63 604 ज्योति यादव/ बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) 24.04.1996 पिता-रमेश चन्द्र, पता-मं0नं0-114, ग्राम-ओदार, पो0-निन्दूरा, जिला-बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, पिन-225302 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, हाजीपुर ( तिरहुत नहर प्रमंडल, हाजीपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी

  1. {{^{{FOOTNOTE 01}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1996}}}} पिता-धर्मेन्द्र ↩
15 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
64 608 नीतू सिंह/ कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) 21-11-1996 पिता-शारदा प्रसाद सिंह, पता-बेलवा बुजुर्ग, पो0-महुअवा कारखाना, जिला-कुशीनगर, उत्तर प्रदेश, पिन-274402 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बटाने शीर्ष कार्य अवर प्रमंडल-2, हरिहरगंज, शिविर-अम्बा ( बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल, अम्बा के अंतर्गत)/औरंगाबाद
65 659 आकांक्षा/ प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) 18.04.1996 पिता-जय प्रकाश मौर्या, पता-ग्राम-नवाबगंज, अतरामपुर, जिला-प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, पिन-229412 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, बौंसी ( सिंचाई प्रमंडल, बौ सी ं के अंतर्गत)/भागलपुर
66 726 दीप शिखा/ पटना 06.11.1995 पिता-देव कुमार सिंह, पता-मोहल्ला- चान्दपुर बेला, नियर पानी टंकी, थाना-जकनपुर, पो0-पटना जी0पी0ओ0, बिहार, पिन-800001 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, हथौड़ी (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, हथौड़ी के अंतर्गत)/समस्तीपुर
67 745 प्रियंका चक/ लखनऊ (उत्तर प्रदेश) 03.08.1992 पिता-महेश चन्द्र चक, पता- 03, संगम विहार, सेक्टर-एच0, अशियाना एल0डी0ए0 कॉलोनी, जिला-लखनऊ, उत्तर प्रदेश, पिन-226012 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, नवादा ( सिंचाई प्रमंडल, नवादा के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
68 777 रीतेश कुमार सिंह/ भोजपुर 29.05.1995 पिता-सत्येन्द्र नारायण सिंह, पता-ग्रामपो0- कुरमुरी, थाना-सिकरहटा, जिला-भोजपुर, आरा, बिहार, पिन-802207 UR सामान्य (FFD) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, सुगौली (तिरहुत नहर प्रमंडल-1, बेतिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
69 791 बिनीता/ नवादा 29.07.1996 पिता-बिमल कुमार, पता-द्वारा श्री अर्जुन प्रसाद, ग्रामपो0-विशुनपुर, थाना-गोविंदपुर, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805102 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-5, मदनपुर, शिविर-औरंगाबाद (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, औरंगाबाद के अंतर्गत)/औरंगाबाद

  1. {{^{{FOOTNOTE 04}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1996}}}} पिता-जय प्रकाश ↩
16 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
70 802 प्रतिमा कुमारी/ नालंदा 28.04.1987 पिता-अखिला नन्दसिंह, पता-ग्रामपो0- कोबिल, थाना-इसलामपुर, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-801303 UR सामान्य सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, जयनगर/दरभंगा
71 853 वर्षा सिंह/ रोहतास 23.09.1995 पिता-अनिल सिंह, पता-मोती भवन, डी0एम0 कॉलोनी के सामने, फजलगंज, सासाराम, जिला-रोहतास, बिहार, पिन-821115 EWS सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-4, उदेरास्थान (सिंचाई प्रमंडल, उदेरास्थान के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
72 939 मोना कुमारी/ पटना 05.02.1990 पिता-विजय कुमार चौधरी, पता-वीणा चौधरी, जय अनुप हेरिटेज-301, नियर बी0आर0ए0 डेन्टल कॉलेज, रामजयपाल नगर, थाना-रुपसपुर, दानापुर, जिला-पटना, बिहार, पिन-801503 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन उच्चस्तरीय नहर अवर प्रमंडल-1, गोह ( सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, टेकारी के अंतर्गत)/औरंगाबाद
73 987 अंकिता गुप्ता/ बेगूसराय 29.09.1995 पिता-प्रमोद कुमार गुप्ता, पता-द्वारा - स्व0 मदन साहु, मोहल्ला- अब्बूपुर, नियर शिवालय, ग्रामपो0-छतौना, थाना-नावकोठी, जिला-बेगूसराय, बिहार, पिन-851130 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, रामनगर (सोन नहर प्रमंडल, आरा के अंतर्गत)/डिहरी
74 1054 खुशबू कुमारी/ जहानाबाद 28.12.1995 पिता-देश बंधु अजय कुमार, पता-ग्रामपो0- भरथुआ, थाना-काको, जिला-जहानाबाद, बिहार, पिन-804417 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, बेलहर (सिंचाई प्रमंडल, तारापुर के अंतर्गत)/भागलपुर
75 1056 स्वाती कुमारी/ पटना 04.01.1996 पिता-प्रेम कुमार, पता-ग्राम-सरफाबाद, पो0-नन्दलालाबाद, थाना-गौरीचक, जिला-पटना, बिहार, पिन-803201 BC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-2, मदनपुर, शिविर-औरंगाबाद (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, मदनपुर, शिविर-औरंगाबाद के अंतर्गत)/गया

  1. {{^{{FOOTNOTE 09}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-प्रमोद कुमार ↩
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76 1114 संगीता कुमारी/ समस्तीपुर 06.01.1995 पिता-सत्य नारायण सहनी, पता-ग्राम- हनुमाननगर, पो0-नन्देनगर, थाना-रोसडा, जिला-समस्तीपुर, बिहार, पिन-848117 EBC सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अवर प्रमंडल-2, अररिया (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, किशनगंज के अंतर्गत)/कटिहार
77 1141 रुनी विशैण/ पटना 23.12.1990 पिता-रणविभोर सिंह, पता-द्वारा-अखिलेश सिंह, पूर्वी शिवाजी पथ यारपुर राजपुताना, पो0-जी0पी0ओ0, थाना-गर्दनीबाग, जिला-पटना, बिहार, पिन-800001 UR सामान्य अवर प्रमंडल पदाधिकारी, त्रिवेणी नहर अवर प्रमंडल, कोरैना (त्रिवेणी नहर प्रमंडल, नरकटियागंज के अंतर्गत)/मोतिहारी
78 2366 सरफराज अहमद/ गोपालगंज 15.10.1995 पिता-शाहनवाज अहमद, पता-पश्चिमी सरकारी स्कूल के समीप, वार्ड नं0-14, मीरअलीपुर, पो0-भी0एस0मिल, थाना-थावें, जिला-गोपालगंज, बिहार, पिन-841428 UR सामान्य DISABLED (VI) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-1, खजौली ( पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, खजौली के अंतर्गत)/दरभंगा
79 113 बबलू कुमार मिश्रा/ दरभंगा 20.12.1994 पिता- बद्री नारायण मिश्रा, पता- ग्रामपोस्ट-कोर्थू, थाना- घनश्यामपुर, भाया- बेनीपुर, जिला- दरभंगा, बिहार, पिन- 847103 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन उच्चस्तरीय नहर अवर प्रमंडल, दादर (सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल, टेकारी के अंतर्गत)/औरंगाबाद
80 118 मयंक/ वैशाली 25.12.1995 पिता- रघु वंश प्रसाद सिंह, पता- वार्ड नं0- 01, ग्रामपोस्ट- वीरपुर, थाना- जूरावनपुर, जिला- वैशाली, बिहार, पिन-844508 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, मोतिहारी (तिरहुत नहर प्रमंडल, ढाका के अंतर्गत)/मोतिहारी
81 151 शांतनु कुमार/ समस्तीपुर 18.01.1 995 पिता- विनय कुमार, पता-ग्राम-दूधपुरा, वार्ड नं0- 6, पो0- मंगलगढ़, थाना- हसनपुर, जिला- पिन- 848208 EWS समस्तीपुर, बिहार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, कृष्णापुर (गंगा पम्प नहर प्रमंडल, चौसा के अंतर्गत)/डिहरी

  1. {{^{{FOOTNOTE 10}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-शाहनवाज ↩
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82 165 प्रभात कुमार/ बेगुसराय 15.04.1989 पिता- हरिकान्त मिश्र, पता-ग्राम- पहसारा, पोस्ट- पहसारा, थाना- नावकोठी, जिला- बेगुसराय, बिहार, पिन- 851127 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, जैतपुर (तिरहुत नहर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी
83 172 अनूप कुमार शर्मा /सारण 01-07- 1993 पिता- रामाश्रय शर्मा, पता-द्वारा- डॉ0 आलोक कुमार शर्मा, ग्राम-श्रीपुर, पोस्ट-मरीचा, थाना- सहाजितपुर, जिला- सारण, बिहार, पिन- 841411 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, बिहारशरीफ (सिंचाई प्रमंडल, बिहारशरीफ के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
84 270 चन्दन कुमार/ पूर्वी चम्पारण 15.03.1995 पिता- अजय कुमार श्रीवास्तव, पता-बड़हरवा महानंद पो0-बखरी महेश, थाना-कल्याणपुर, जिला-पूर्वी चम्पारण, बिहार, पिन-845413 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, मुरलीगंज (सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अंतर्गत)/सहरसा
85 275 मो0 सनाउल्लाह / गया 20.09.1995 पिता-मो0 शोहरत हुसैन, पता-दरामपुर, पो0-समसपुुर, थाना-बेलागंज, जिला-गया, बिहार, पिन-804403 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, वाजितपुर (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दलसिंहसराय के अंतर्गत)/समस्तीपुर
86 302 धीरज कुमार/ नालंदा 17.07.1994 पिता-सतेन्द्र दुबे , ं पता-कोठरी, पो0-कन्हैयागंज, थाना-तेलहारा, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-801306 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, सरैया (तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया, मुजफ्फरपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी
87 346 सुरजभान कुमार सिंह/पूर्वी चम्पारण 14.07.1993 पिता-स्व0 सुभाष सिंह, पता- टोला- तुलसी पट्टी, पो0थाना- कल्याणपुर, जिला-पूर्वी चम्पारण, बिहार, पिन-845413 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, गिद्धेश्वर, शिविर-जमुई (सिंचाई प्रमंडल, जमुई के अंतर्गत)/भागलपुर
88 360 कमलेश सिंह/ जहानाबाद 30.03.1994 पिता-हरवंश सिंह, पता-ग्राम-महमदपुर, पो0-सुरंगापुर, थाना-पारसबिगहा, जिला-जहानाबाद, बिहार, पिन-804429 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सहायक अभियंता, आयोजन एवं मोनिटरिंग प्रमंडल, दरभंगा/दरभंगा

  1. {{^{{FOOTNOTE 03}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता- अजय कुमार ↩
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89 2887 किरण कुमारी/ बेगुसराय 01.01.1996 पिता-हरिकान्त सिंह, पता-आदर्श नगर , उलाओ, मुफसिल, पी0सी0, जिला-बेगुसराय, बिहार, पिन-851134 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, जल निस्सरण अवर प्रमंडल, पिपराकोठी ( जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर
90 3326 नेहा कुमारी/ वैशाली 12.12.1995 पिता-बिनोद कुमार सिंन्हा, पता-मोहल्ला-खाता जंगी वागमली, पो0-हाजीपुर, थाना-नगर हाजीपुर, जिला-वैशाली, बिहार, पिन-844101 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, अरेराज ( तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मोतिहारी
91 4214 सिया वर्मा/ पश्चिम चम्पारण 09.04.1995 पिता-दिलीप कुमार वर्मा, पता-रोड नं0-8ए0, जयप्रकाश नगर, आई0टी0आई0 कॉलोनी, बेतिया, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार, पिन-845438 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, लक्ष्मीपुर (सिंचाई प्रमंडल, बौ सी ं के अंतर्गत)/भागलपुर
92 4413 संजीता राज/ मुजफ्फरपुर 13.03.1992 पिता-दिनेश्वर लाल कर्ण, पता-ग्रामपो0- श्रीदासपुर, थाना-कटरा, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-843321 EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, प्रतापगंज (सिंचाई प्रमंडल, त्रिवेणीगंज के अंतर्गत)/सहरसा
93 199 कुणाल कुमार /कटिहार 05.02.1993 पिता-लक्ष्मण शर्मा, पता-ग्र्राम मौैलानगर चकला, पो0-मौलानगर, थाना-फलका, जिला-कटिहार, बिहार पिन-854101 SC अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेलसन्ड (बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर
94 242 बिपिन कुमार / सहरसा 09.01.1990 पिता-स्व0 शिवेन्द्र प्रसाद चौधरी, पता- हटिया गाछी, पॉलिटेकनिक रोड, वार्ड-32, पो0थाना-सहरसा जिला-सहरसा, बिहार पिन-852201 SC अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, महथावां (सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अंतर्गत)/सहरसा

  1. {{^{{FOOTNOTE 01}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1996}}}} पिता-हरिकान्त सिंह, ↩
20 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
95 278 रुपेश कुमार/ सारण 31.12.1995 पता- ग्राम- मशरक तख्त, पो0थाना-मशरक जिला-सारण, बिहार पिन-841417 SC पिता-कामेश्वर बैठा अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-1, समस्तीपुर (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर के अंतर्गत)/समस्तीपुर
96 363 विष्णु कुमार / औरंगााबाद 02.08.1994 पिता-लक्ष्मी प्रसाद ताँती पता- ग्राम- पटवा टोली नियर पंचायत गली, वार्ड नं0-19 पो0थाना- दाऊदनगर जिला-औरंगाबाद, बिहार पिन-824143 SC अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, मटकोटा ( तिरहुत नहर प्रमंडल-2, बेतिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
97 2375 बन्दना कुमारी /पश्चिम चम्पारण 15.08.1996 पिता-अजय कुमार राम पता- ग्राम-मडुआहा, हरजन टोली, वार्ड- नं0-12, पोस्ट-बन्हौरा बाजार, थाना-नौतन, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार पिन-845438 SC अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, अगनूर ( सिंचाई प्रमंडल, दाउदनगर के अंतर्गत)/औरंगाबाद
98 2510 शशि प्रभा / मुजफ्फरपुर 15.07.1995 पिता-जिन्दालाल महतोे पता-ग्राम-माधोपुर, पो0-अजना कोट, थाना-मोतीपुर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-843111 SC अनुसूचित जाति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, त्रिवेणी नहर अवर प्रमंडल, रामनगर (त्रिवेणी नहर प्रमंडल, नरकटियागंज के अंतर्गत)/मोतिहारी
99 108 मोहम्मद रौशन/ मधुबनी 23.11.1992 पिता-मोहम्मद सफीक, पता-ग्रामपो0-परसा ही सिरसिया, थाना-खुटौना, जिला-मधुबनी, बिहार, पिन-847421 EBC अत्यंत पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, रामगढ़ (सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा के अंतर्गत)/भागलपुर
100 128 अनुराग कुमार/ पटना 20.12.1994 पिता-रघुवीर प्रसाद, पता- हाउस नं0-21सी0 जगदेवपुरी, जगदेवपथ बेली रोड, पो0-बी0भी0 कॉलेज, थाना-एयरपोर्ट थाना, जिला-पटना, (पिलर नं0-15 के दक्षिण), बिहार, पिन-800014 EBC अत्यंत पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-4, बेनीपट्‌टी (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के अंतर्गत)/दरभंगा

  1. {{^{{FOOTNOTE 08}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1996}}}} पिता-अजय कुमार राम पता- ग्राम-मडुआहा, हरजन टोली, वार्ड- नं0-12, पोस्ट-बन्हौरा बाजार, थाना-नौतन, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार पिन-845438 ↩
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101 628 दिवाकर कुमार/ भागलपुर 25.11.1993 पिता-शुबालक मंडल, पता-ग्राम-बंगडिहा, पो0-कासिपुर, थाना-गौराडीह, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-813105 EBC अत्यंत पिछड़ा वर्ग Disabled (OH) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, गोपालगंज (सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज के अंतर्गत)/सिवान
102 1332 सौरभ सुमन/ अररिया 22.02.1996 पिता-राम कृष्ण परमहंस, पता-द्वारा-गोपाल कृष्ण परमहंस, वार्ड नं0-09, बिजली ऑफिस रोड, शिवपुरी, जिला-अररिया, बिहार, पिन-854311 EBC अत्यंत पिछड़ा वर्ग FFD अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती बाँध अवर प्रमंडल-5, भीतरीबाँध ( दुर्गावती बाँध प्रमंडल-2, भीतरीबाँध के अंतर्गत)/डिहरी
103 1341 पलक कुमारी/ पश्चिम चम्पारण 16.12.1996 पिता-शत्रुधन ्रप्रसाद, पता-ग्रामपो0-सरि सवा बजार, वार्ड नं0-10, थाना-माझौलियॉ, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार, पिन-845454 EBC अत्यंत पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-3, लक्ष्मीपुर ( सिंचाई प्रमंडल, लक्ष्मीपुर, जमुई के अंतर्गत)/भागलपुर
104 105 कृष्ण कुणाल कुमार/ औरंगाबाद 01.04.1992 पिता-अशोक कुमार रंजन, पता-ग्रामपो0- जाखिम, थाना-रफिगंज, जिला-औरंगाबाद, बिहार, पिन-824122 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, मुख्यालय, बेतिया (तिरहुत नहर प्रमंडल-1, बेतिया के अंतर्गत)/मोतिहारी
105 109 अभिलाष कुमार/ बेगुसराय 12.12.1992 पिता-लक्ष्मी नारायण सिंह, पता-ग्राम-हरपुर, वार्ड नं0-11 पो0-तीलरथ, थाना-बरौनी, जिला-बेगूसराय, बिहार, पिन-851122 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-1, राजविराज (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, कुनौली के अंतर्गत)/दरभंगा
106 110 निशांत कुमार सिन्हा/ पूर्वी चम्पारण 15.06.1994 पिता-मनोज कुमार सिन्हा, पता-ग्राम-भटीनिया, पो0-भेलवा सर्किल, थाना-घोड़ासान, जिला-पूर्वी चम्पारण, बिहार, पिन-845315 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-3, रजौली (सिंचाई प्रमंडल, रजौली के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)

  1. {{^{{FOOTNOTE 12}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1996}}}} पिता-शत्रुधन ्रप्रसाद, ↩
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107 112 पियूष राज / पूर्वी चम्पारण 30.11.1994 पिता-नवल किशोर विद्यार्थी, पता-ग्राम-पो0- बिश्म्भरपुर, थाना-कल्याणपुर, बकारपुर जगत, जिला-पूर्वी चम्पारण, बिहार, पिन-845413 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, थुमहाँ (सिंचाई प्रमंडल, राघोपुर के अंतर्गत)/सहरसा
108 114 नितेश कुमार/ मधुबनी 25.03.1995 पिता-श्रवण कुमार, पता-ग्राम- नवटोली (महिनाथपुर), पो0-रामपट्टी, थाना-राजनगर, जिला-मधुबनी, बिहार, पिन-847236 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, गंगा पम्प नहर अवर प्रमंडल, जमरोढ़ (गंगा पम्प नहर प्रमंडल, चौसा के अंतर्गत)/डिहरी
109 117 विवेक कुमार/ नवादा 08.10.1995 पिता-नित्यानंद प्रसाद पता-ग्राम काजीपुर, पो0-छोटा शेखपुरा, थाना-नरहट, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805103 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, झंझारपुर/दरभंगा
110 123 अजीत कुमार/ सारण 10.01.1993 पिता-शम्भू प्रसाद, पता- सैदपुर दिघवारा, पो0थाना-दिघवारा, जिला-सारण, बिहार, पिन-841207 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, गंगा पम्प नहर अवर प्रमंडल-3, सूर्यगढ़ा, शिविर-मुंगेर (गंगा पम्प नहर प्रमंडल, मुंगेर के अंतर्गत)/भागलपुर
111 125 प्रशांत कुमार/ औरंगाबाद 04.09.1993 पिता-चन्दन कुमार, पता-ग्राम-बाहुरिया वर्मा, पो0-मुझरा, थाना-गोह, जिला-औरंगाबाद, बिहार, पिन-824203 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, मलियाबाग (सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के अंतर्गत)/डिहरी
112 126 राहुल कुमार/ सारण 06.12.1993 पिता-लक्ष्मण प्रसाद यादव, पता-ग्रामपो0- शिल्हौड़ी, थाना-मढ़ौरा, जिला-सारण, बिहार, पिन-841418 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-2, बेनीपट्‌टी (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, बेनीपट्‌टी के अंतर्गत)/दरभंगा
113 127 रमन रणधीर वर्मा/ नवादा 18.02.1994 पिता-गोपाल प्रसाद वर्मा, पता-ग्रामपो0- लौन्द, थाना-सिरदला, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805122 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, जामों (सारण नहर प्रमंडल, महाराजगंज के अंतर्गत)/सिवान

  1. {{^{{FOOTNOTE 10}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-नित्यानंद प्रसाद ↩
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114 131 कुमार स्वस्तिक तुषार/ औरंगाबाद 05.08.1996 पिता-रविन्द्र कुमार, पता-भाव बिगहा, पो0-कनाप, थाना-दाउदनगर, जिला-औरंगाबाद, बिहार, पिन-824120 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-5, उदेरास्थान (सिंचाई प्रमंडल, उदेरास्थान के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
115 135 केशव कुमार/ पश्चिम चम्पारण 15.01.1992 पिता-नंदू प्रसाद, पता-ग्रामपोे0 थाना- इनरवा, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार, पिन-845306 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), जल संसाधन विभाग, पटना
116 140 मनिष कुमार चौधरी/ भागलपुर 01.03.1993 पिता-सिकन्दर प्रसाद चौधरी, पता- मुहल्ला-नदिया टोला, वार्ड नं0-10, पो0थाना-कहलगाँव, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-813203 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल-5, मोतिहारी (सिकरहना तटबन्ध प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर
117 141 अजय कुमार/ शेखपुरा 07.05.1993 पिता-सीताराम महतो, पता-ग्राम-चॉदी, पो0-वृन्दावन, थाना-अरियरी, जिला-शेखपुरा, बिहार, पिन-811105 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल-5, राजनगर (पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, सकरी के अंतर्गत)/दरभंगा
118 142 ओम प्रकाश सिंह/ पटना 15.12.1993 पिता-स्व0 राजेन्द्र प्रसाद, पता-ग्राम- दिलावरपुर, पो0थाना-बिहटा, जिला-पटना, बिहार, पिन-801103 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, हरसिद्धि (तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मोतिहारी
119 145 रोहित अभिषेक/ सारण 26.01.1994 पिता-ऋषि देव सिन्हा, पता-द्वारा-बिरेन्द्र सिंह, ग्रामपो0-मुजौना, थाना-दरियापुर, जिला-सारण, बिहार, पिन-841207 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-3, मलियाबाग (सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के अंतर्गत)/डिहरी

  1. {{^{{FOOTNOTE 03}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1993}}}} पिता-सिकन्दर प्रसाद ↩
24 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
120 150 अविनाश चन्द्र राजन/ समस्तीपुर 02.01.1995 पिता-विजय कुमार, पता-द्वारा-साधु शरण सिंह, ग्रामपो0-लदौरा, थाना-कल्याणपुर, जिला-समस्तीपुर, बिहार, पिन-848302 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, बरहट, जमुई (सिंचाई प्रमंडल, लक्ष्मीपुर, जमुई के अंतर्गत)/भागलपुर
121 155 अभिषेक कुमार/ पूर्णियाँ 10.10.1995 पिता-अवधेश प्रसाद मेहता, पता-एस0बी0आई0 रोड, शिवाजी कॉलोनी, पो0-मधुबनी, थाना-के0हाट, जिला-पूर्णियाँ, बिहार, पिन-854301 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, सहरसा
122 158 विजय कुमार/ समस्तीपुर 10.09.1996 पिता-गुणेश्वर महतो, पता-ग्राम-सहियार बुर्ज, वार्ड नं0-03, पो0थाना-रोसड़ा, जिला-समस्तीपुर, बिहार, पिन-848210 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, सिवान
123 164 मनीष कुमार/ पटना 31.01.1987 पिता-जगदीश प्रसाद केशरी, पता-ग्राम- कुम्हारटोली, पो0थाना-मसौढ़ी, जिला-पटना, बिहार, पिन-804452 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, सहरसा (सिंचाई प्रमंडल, सहरसा के अंतर्गत)/सहरसा
124 166 ं अनिल कुमार/ जहानाबाद 02.02.1990 पिता-संजय कुमार, पता-ग्राम-जेैतिया पोेस्ट- जगपुरा, थाना-मखदुमपुर, जिला-जहानाबाद, बिहार, पिन-804424 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल, दरभंगा/दरभंगा
125 179 नवनीत कुमार/ पटना 21.03.1994 पिता- अजीत कुमार सिंह, पता- 80 श्यामा सदन, चश्मा सेन्टर गली, मगध कालोनी, कुर्जी, पोस्ट-सदाकत आश्रम, थाना-दीघा, जिला- पटना, बिहार, पिन- 800010 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल-3, मोतिहारी (सिकरहना तटबन्ध प्रमंडल, मोतिहारी के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर

  1. {{^{{FOOTNOTE 10}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-अवधेश प्रसाद मेहता, पता-एस0बी0आई0 रोड, शिवाजी कॉलोनी, पो0-मधुबनी, थाना-के0हाट, जिला-पूर्णियाँ, बिहार, पिन-854301 ↩
25 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
126 182 अभिषेक कुमार/ सीतामढ़ी 24.09.1994 पिता- मुकेश चौधरी, पता- ग्राम- कोैड़िया रायपुर, पोस्ट- रायपुर, थाना- ननपुर, जिला- सीतामढ़ी, बिहार, पिन- 843326 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, मदारपुर (सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा के अंतर्गत)/सिवान
127 187 जितेन्द्र कुमार/ वैशाली 05.06.1995 पिता- लाल बहादुर सिंह, पता- ग्राम- चांदपुरा सैदाबाद, पोस्ट- मोहनपुर, थाना- बिदुपुर, जिला- वैशाली, बिहार, पिन-844115 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, दरियापुर (सिंचाई प्रमंडल, शेखपुरा के अंतर्गत)/नालंदा (बिहारशरीफ)
128 190 मनीष कुमार/ नवादा 26.08.1995 पिता-केदार ग्राँय, पता-ग्रामपो0- लालबिघा, थाना-काशीचक, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805108 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, देवरिया (तिरहुत नहर प्रमंडल, सरैया, मुजफ्फरपुर के अंतर्गत)/मोतिहारी
129 193 पीयूष कुमार/ बांका 20.12.1995 पिता-राम विलास यादव, पता-ग्राम-लोहियॉ नगर, साउथ ऑफ आर0एम0के0 स्कूल, नियर अमित शॉप, पो0थाना-बांका, जिला-बांका, बिहार, पिन-813102 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, एकमा (सारण नहर प्रमंडल, एकमा के अंतर्गत)/सिवान
130 202 रोहित कुमार/ नालंदा 05.01.1990 पिता-सत्ये द्र प्रसाद, ं पता-ग्राम- नारायणपुर, पो0-धोबडीहा, थाना-खुदागंज, जिला-पटना, बिहार, पिन-801303 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती बायाँ तट नहर अवर प्रमंडल-1, भीतरीबाँध (दुर्गावती बायाँ तट नहर प्रमंडल, भीतरीबाँध के अंतर्गत)/डिहरी
131 203 संतोष कुमार/ नालंदा 10.02.1990 पिता-अरविन्द्र कुमार, पता-ग्राम-रतनपुरा, पो0-दरुआरा, थाना-नूरसराय, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803101 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, दाउदनगर (सिंचाई प्रमंडल, दाउदनगर के अंतर्गत)/औरंगाबाद

  1. {{^{{FOOTNOTE 08}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1995}}}} पिता-केदार ग्राँय, ↩
26 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
132 204 विक्रम कुमार/ समस्तीपुर 18.12.1990 पिता-शत्रुघ्न प्रसाद, पता-ग्राम-सुदामापुर, पो0-बिथान, वार्ड नं0-14, थाना-बिथान, जिला-समस्तीपुर, बिहार, पिन-848207 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, कटैया (सारण नहर प्रमंडल, भोरे के अंतर्गत)/सिवान
133 207 चंदन कुमार/ मुजफ्फरपुर 16.06.1992 पिता-ब्रजमोहन प्रसाद कुशवाहा, पता-ग्रामपो0-परसौ नी नाथ, थाना-बरुराज, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार, पिन-843127 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, फारबिसगंज (सिंचाई प्रमंडल, अररिया के अंतर्गत)/सहरसा
134 209 उदय कुमार/ समस्तीपुर 20.02.1993 पिता-आनंद बिहारी सिंह, पता-ग्राम-शहरु, पो0-रन्ना, थाना-हथौड़ी, भाया-बहेड़ी, जिला-समस्तीपुर, बिहार, पिन-847105 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-1, मोहनियाँ (सिंचाई प्रमंडल, भभुआ के अंतर्गत)/डिहरी
135 210 अमृत राज/ खगड़िया 17.07.1993 पिता-त्रिभुवन कुमार, पता-वार्ड नं0-30, जय प्रकाश नगर, खगड़िया, पो0थानाजिला-ख गड़िया, बिहार, पिन-851204 BC पिछड़ा वर्ग (FFD) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, नरपतगंज (सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अंतर्गत)/सहरसा
136 212 कुमार विवेक/ बक्सर 19.12.1993 पिता-विनोद कुमार, पता-ग्रामपो0- भतोली, थाना-नावानगर, जिला-बक्सर, बिहार, पिन-802129 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल-2, पारू (तिरहुत नहर प्रमंडल, लालगंज के अंतर्गत)/मोतिहारी
137 671 नीलमणी/ पश्चिम चम्पारण 10.06.1991 पिता-चिन्तामणी प्रसाद, पता-ग्रामपो0-हरना टाँड, थाना-लौकरीया, जिला-पश्चिम चम्पारण, बिहार, पिन-845105 BC पिछड़ा वर्ग Disabled (OH) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल, तरवारा (सारण नहर प्रमंडल, महाराजगंज के अंतर्गत)/सिवान

  1. {{^{{FOOTNOTE 07}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1993}}}} पिता-त्रिभुवन कुमार, ↩
27 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
138 789 हरि ओम/ औरंगाबाद 05.04.1996 पिता-बैद्यनाथ सिंह, पता-ग्रापो0-तरारी, थाना-दाउदनगर, जिला-औरंगाबाद, बिहार, पिन-824143 BC पिछड़ा वर्ग Disabled (VI) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, जल निस्सरण अवर प्रमंडल, उदाकिशुनगंज ( जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा के अंतर्गत)/वीरपुर
139 1200 आर्चि गुप्ता/ दरभंगा 26.05.1997 पिता-राजकुमार गुप्ता, पता-शिवाजीनगर सौदागर मोहल्ला, पो0-लालबाघ, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846004 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती कार्य अवर प्रमंडल-1, चेनारी (दुर्गावती कार्य प्रमंडल, चेनारी के अंतर्गत)/डिहरी
140 1261 अपूर्वा ं कुमारी/ नालंदा 20.12.1995 पिता-अशोक कुमार, पता- ग्रामपोस्ट- बराह(पूरब टोला), थाना- हरनौत, जिला- नालन्दा, बिहार, पिन-803123 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सारण नहर अवर प्रमंडल-1, सिवान (सारण नहर प्रमंडल, सिवान के अंतर्गत)/सिवान
141 1433 अनामिका सिन्हा/ पटना 26.08.1990 पिता- अनिल कुमार सिन्हा, पता- ग्राम-सरैयां, पोस्ट- मरांची, थाना- पुनपुन, जिला- पटना, बिहार, पिन-804453 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, डिहरी
142 1651 काजल रंजन/ पटना 02.12.1994 ा- द्वारा- धनंजय कुमार, ग्राम-चान्देडीह, पोस्ट- जट डूमरी, थाना- पुनपुन, जिला- पटना, बिहार पिन- 804453, - ग्रामपोस्ट- घोरहुऑं, थाना- मसौढ़ी, जिला- पटना, बिहार, पिन- 804452 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पुनपुन बराज अवर प्रमंडल-8, गोह (पुनपुन बराज प्रमंडल-2, गोह के अंतर्गत)/औरंगाबाद

  1. {{^{{FOOTNOTE 05}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1997}}}} पिता-राजकुमार ↩
28 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
143 1743 अंजली शाह/ मुंगेर 29.09.1994 पिता का नाम- सत्यनारायण साह, पता-ग्रामपोस्ट- दादरी जाला, थाना- संग्रामपुर, जिला- मुंगेर, बिहार, पिन-813212 BC पिछड़ा वर्ग अवर प्रमंडल पदाधिकारी, जल निस्सरण अवर प्रमंडल-2, चन्द्रावत, शिविर-बेतिया (जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के अंतर्गत)/मुजफ्फरपुर
144 1907 मधु रानी/ सीतामढ़ी 05.02.1994 पिता-विजय पूर्वे, ग्रामपो0थाना- पुरौना, जिला-सीतामढ़ी, बिहार, पिन-843302 BC पिछड़ा वर्ग सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता का कार्यालय (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, नालंदा (बिहारशरीफ)
145 1667 निमिषा प्रिया/ मधुबनी 19.02.1996 पिता-मनोज कुमार, पता-सुरतगंज, वार्ड नं0-17, ग्रामपो0थाना-मधु बनी, जिला-मधुबनी, बिहार, पिन-847211 EBC पिछड़़ा वर्ग की महिला अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, रामगढ़ (सिंचाई प्रमंडल, भभुआ के अंतर्गत)/डिहरी

2. चयनित नवनियुक्त सहायक अभियंताओं (असैनिक) को मासिक वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभ सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर वास्तविक कार्यभार/पदभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। प्रथम नियुक्ति होने के कारण प्रभार ग्रहण करने के लिए कोई यात्रा भत्ता अनुमान्य नही होगा।

3. पूर्व-वृत सत्यापन (Police Verification) प्रतिकूल रहने पर अस्थायी नियुक्ति तुरन्त समाप्त कर दी जायेगी। 4. यह नियुक्ति औपबंधिक रूप से इस शर्त के साथ की जाती है कि इनसे संबंधित सभी प्रमाण पत्र एवं चारित्री सत्यापन के क्रम में किसी प्रकार का दोष या फर्जी पाये जाने पर इनकी नियुक्ति को रद्‌द करते हुए उनके विरूद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी।

5. सभी नवनियुक्त सहायक अभियंता (असैनिक) को नियुक्ति आदेश निर्गत होने की तिथि से 30 (तीस) दिनों के अंदर पदस्थापन स्थान पर योगदान देना अनिवार्य होगा। साथ ही नवपदस्थापित पद का प्रभार ग्रहण कर विभाग को दो प्रतियों में प्रभार प्रतिवेदन अपने नियंत्री पदाधिकारी के माध्यम से विभाग को हार्ड कॉपी में एवं अवर सचिव प्रबंधन के विभागीय ई-मेल आई॰डी॰- [email protected] पर निश्चित रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। यदि वे निर्धारित अवधि में नवपदस्थापित कार्यालय में योगदान समर्पित नहीं करते है तो उनकी नियुक्ति स्वतः रदद्‌ समझी जायेगी।

6. नवनियुक्त सहायक अभियंता (असैनिक) की सेवा 02 (दो) वर्षो तक परीक्ष्यमान अवधि में रहेगी । इस अवधि में इनकी सेवा संतोषप्रद नहीं होने पर सेवा से विमुक्त किया जा सकता है।

7. वैसे नवनियुक्त सहायक अभियंता (असैनिक) जो वर्त्तमान में किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/सरकारी उपक्रम में कार्यरत है, उन्हें योगदान के समय संबंधित विभाग/संस्थान का विरमन आदेश/स्वीकृत त्याग पत्र समर्पित करना अनिवार्य होगा।

8. दहेज नही लेने-देने संबंधी शपथ पत्र यदि समर्पित नही किया गया है, उन्हें तत्संबंधी शपथ पत्र समर्पित करना होगा।

9. वैसे अनुशंसित अभ्यर्थी जो वर्त्तमान में यदि किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/भारत सरकार के उपक्रम में कार्यरत है, वैसे अभ्यर्थी का बिहार सरकार में नयी नियमित नियुक्ति के क्रम में बॉन्ड लिये जाने का प्रावधान नहीं है और बॉन्ड हस्तांतरण का भी कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित अभ्यर्थी पूर्व नियोक्ता से बॉन्ड का निपटारा कर पूर्व नियोक्ता से विधिवत विरमित/तकनीकी त्यागपत्र स्वीकृत/त्यागपत्र स्वीकृत कराकर विभाग में योगदान समर्पित करेंगें।

10. वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-31.08.2005 एवं 768 पे0को0 दिनांक-03.07.2007 के अनुसार उक्त नवनियुक्त सहायक अभियंताओं (असैनिक) पर नयी अंशदायी पेंशन योजना लागू होगी।


  1. {{^{{FOOTNOTE 02}}}}.{{^{{FOOTNOTE 1994}}}} पिता-विजय पूर्वे, ग्रामपो0थाना- पुरौना, जिला-सीतामढ़ी, बिहार, पिन-843302 ↩

11. सभी संबंधित नियंत्री पदाधिकारी को निदेशित किया जाता है कि नवनियुक्त सहायक अभियंताओं (असैनिक) के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों/स्वास्थ्य प्रमाण पत्र/चरित्र प्रमाण पत्र/जाति प्रमाण पत्र/क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र/आर्थिक रुप से29 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 कमजोर वर्ग प्रमाण पत्र/अनुभव प्रमाण पत्र एवं विकलांगता/स्वतंत्रता सेनानी के नाती/नतिनी/पोता/पोती होने का साक्ष्य/पूर्व नियोक्ता से निर्गत विरमण प्रमाण पत्र/स्वीकृत त्याग पत्र आदि की जाँच कर एवं स्वंय संतुष्ट होने के उपरान्त ही उनका योगदान स्वीकृत करेंंगें। 12. भविष्य में विभाग द्वारा नामित/प्राधिकृत Agency द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा उपलब्ध कराये गये Biometric Data को सत्यापन कराये जाने के क्रम में Data Mismatch होने की स्थिति में उनकी नियुक्ति रदद्‌ कर दी जायेगी।

13. यह नियुक्ति औपबंधिक है तथा माननीय न्यायालय के समक्ष इस संदर्भ में किसी भी विचाराधीन वाद में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा।

14. यदि इस अधिसूचना में कोई टंकण आदि की त्रुटि परिलक्षित होती है तो इस तदनुसार संशोधित कर दिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शैलेष कुमार, उप सचिव-01(प्र॰)।

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सं0 6/नि0प्रति0नियु0-01-01/2020-138--विभागीय अधिसूचना संख्या-950, दिनांक-04.06.2020 एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-1231, दिनांक-03.07.2020 द्वारा 63वीं बैच के क्रमशः 115 एवं 04 पदाधिकारियों काचरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन अप्राप्त रहने के कारण औपबंधिक रूप से नियुक्ति की गयी। उक्त परीक्ष्यमान पदाधिकारियों में से निम्नांकित 12 पदाधिकारियों का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है, जो अनुकूल हैः-

1 श्री आशीष सौरभ आशुतोष 23 पटना 30.12.1994 मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-1
2 सुश्री मनीषा सिंह 30 पटना 26.06.1991 पाटलीपुत्रा अंचल
3 श्री प्रेमांशु 63 बेगुसराय 19.01.1995 समस्तीपुर अंचल
4 श्री अमित कुमार 78 लखीसराय 25.04.1986 पटना मध्य अंचल-1
5 श्री अंकित कुमार 88 भोजपुर 27.02.1988 भभुआ अंचल
6 श्री चन्दन कुमार 104 खगड़िया 28.02.1987 कटिहार अंचल
7 श्री रोहित कुमार शर्मा 142 भागलपुर 27.10.1988 सहरसा अंचल
8 सुश्री अनिशा 153 पटना 21.05.1995 केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, पटना
9 श्री सुजय कुमार 186 पूर्णिया 10.12.1986 गया अंचल-2
10 श्री राज किशोर राम 259 सिवान 04.10.1989 मोतिहारी अंचल
11 श्री अश्विनी कुमार 324 पश्चिमी चम्पारण 05.12.1987 पूर्णिया अंचल-2
12 श्रीमती अनिशा 498 मुजफ्फरपुर 12.08.1993 अन्वेषण ब्यूरो, पटना पश्चिमी प्रमण्डल, पटना।

अधिसूचना संख्या-1231, दिनांक-03.07.2020 के द्वारा की गयी औपबंधिक नियुक्ति को नियमित किया जाता है।

बिहार राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार, संयुक्त सचिव।

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सं0 6/नि0प्रति0नियु0-01-01/2022-वा0-कर0-139--विभागीय अधिसूचना संख्या-3218, दिनांक-28.11.2022 द्वारा 66वीं बैच के 09 पदाधिकारियों की चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन अप्राप्त रहने के कारण औपबंधिक रूप से नियुक्ति की गयी। उक्त नवनियुक्त पदाधिकारियों में से निम्नांकित 01 पदाधिकारी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है, जो अनुकूल हैः-30 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 II अतः उपर्युक्त एक (01) परीक्ष्यमान पदाधिकारी की विभागीय अधिसूचना संख्या-3218, दिनांक-28.11.2022 के द्वारा की गयी औपबंधिक नियुक्ति को नियमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार, संयुक्त सचिव।

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सं0 6/गो0-34-01/2022-160--वाणिज्य-कर विभाग की अधिसूचना संख्या-4126 दिनांक 13.11.2023 द्वारा 63वीं बैच के निम्नलिखित पदाधिकारियों को वाणिज्य-कर विभाग, मुख्यालय के आई0टी0 शाखा में गहन प्रषिक्षण हेतु दिनांक 01.12.2023 से 28.02.2024 तक प्रतिनियुक्त किया गया था :-

1 2 3 5
1 शोभना जहानाबाद पटना दक्षिणी अंचल-2
2 श्री आषुतोष कुमार वैषाली अन्वेषण ब्यूरो, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर
3 ह ुमा अख्तर पटना कदम कुआँ अंचल, पटना
4 श्री सुजय कुमार पूर्णियॉ गया अंचल-2
5 श्री राहुल कुमार भागलपुर कटिहार अंचल, कटिहार
6 संगीता गुर्जर बक्सर केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, मुख्यालय, बिहार, पटना
7 श्री अविनाष कुमार अररिया बेगुसराय अंचल
8 श्री सितेष कुमार खगड़िया पूर्णिया अंचल-1
9 स्मृति संजयम जमुई पटना सिटी पष्चिमी अंचल
10 श्री हर्ष रंजन कुमार पटना अन्वेषण ब्यूरो, पटना पूर्वी प्रमंडल
11 श्री राज किषोर राम सिवान मोतिहारी अंचल
12 अनुपम कुमारी मुजफ्फरपुर दरभंगा अंचल-2
13 रीना राय पटना जहानाबाद अंचल
14 कौषिकी कौषल पटना मुजफ्फरपुर पष्चिमी अंचल-1
15 प्राची प्रिया वैषाली दरभंगा अंचल-1

में प्रतिनियुक्ति को अधिसूचना निर्गमन की तिथि से 31.03.2024 तक स्थगित किया जाता है। 3. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार, संयुक्त सचिव।

------ Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------ Office Order The 5th December 2023

No.XI-C-रा0-06/2019-5206--In the light of proposal received from District Magistrate, Jehanabad vide letter no.- 686, dated- 07.11.2023 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

31 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Miss Chandani Kumari DCLR, Jehanabad District Level

(Sd.) Illegible,

Secretary to Commissioner.

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(cid:274)ामीण (cid:466)वकास (cid:466)वभाग

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अधिसूचनाएं

21 दिसम्बर 2023

सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-14(सा0)सा0-05/2021-2399023--(cid:302)ी मनोज कु मार अ(cid:274)वाल, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), मढ़ौरा, सारण सं(cid:292)ित िनलं(cid:466)बत, मु(cid:201)यालय (cid:468)जला (cid:274)ामीण (cid:466)वकास अिभकरण, पटना के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) पंचायत आम िनवा(cid:91)चन 2021 म(cid:581) आदश(cid:91) आचार सं(cid:465)हता के (cid:292)वृ(cid:215)त होने के दौरान राजनैितक मंच साझा करने, (cid:465)दनांक- 15.10.2021 को (cid:274)ाम कण(cid:91)पुरा (cid:468)(cid:232)थत रावण वध के आयोजन (cid:232)थल के मंच पर संबोधन म(cid:581) मु(cid:201)य (cid:510)प से के (cid:219)(cid:289) एवं रा(cid:207)य सरकार (cid:430)ारा संचािलत योजनाओं के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) कटा(cid:162) करने, (cid:465)दनांक 26.10.2021 को मढ़ौरा (cid:292)खंड म(cid:581) चुनाव (cid:292)खंड म(cid:581) चुनाव हेतु नामांकन के दौरान (cid:292)खंड काया(cid:91)लय के बाहर तरैया (cid:292)खंड म(cid:581) पद(cid:232)था(cid:466)पत िल(cid:466)पक (cid:302)ी मंजू आलम को मामूली (cid:466)ववाद म(cid:581) सड़क पर थ(cid:220)पड़ मारने व फलत: (cid:466)विध (cid:229)यव(cid:232)था क(cid:551) सम(cid:232)या उ(cid:215)प(cid:219)न होने, (cid:466)बहार पंचायती राज अिधिनयम- 2006 (यथा अ(cid:429)तन संशोिधत) क(cid:551) सुसंगत धाराओं एवं रा(cid:207)य िनवा(cid:91)चन आयोग, (cid:466)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:465)दये गये िनदेश(cid:585) के आलोक म(cid:581) िनवा(cid:91)ची पदािधकार(cid:547) (पं0) के कत(cid:91)(cid:229)य(cid:585) को स(cid:224)यक् िनव(cid:91)हन नह(cid:547)ं कराने आ(cid:465)द आरोप(cid:585) पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), सारण, छपरा के प(cid:287)ांक- 51/पं0 (cid:465)दनांक- 10.01.2022 से (cid:466)व(cid:465)हत (cid:292)प(cid:287) म(cid:581) आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।

उ(cid:200)त आरोप प(cid:287) म(cid:581) व(cid:468)ण(cid:91)त आरोप(cid:585) पर (cid:302)ी अ(cid:274)वाल से (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । (cid:232)मारोपरा(cid:219)त भी उनके (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त नह(cid:547)ं (cid:465)कया गया ।

(cid:302)ी अ(cid:274)वाल के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) धा(cid:464)रत आरोप गंभीर (cid:292)कृ ित के होने के कारण उसक(cid:551) गहन जाँच के िलए (cid:466)वभागीय संक(cid:227)प (cid:163)ापांक- 1431595 (cid:465)दनांक- 12.12.2022 (cid:430)ारा इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गई । उ(cid:200)त (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) म(cid:581) संचालन पदािधकार(cid:547) के प(cid:287)ांक- 1960065 (cid:465)दनांक- 03.08.2023 से (cid:292)ा(cid:220)त जाँच (cid:292)ितवेदन म(cid:581) (cid:302)ी अ(cid:274)वाल के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) धा(cid:464)रत सभी आरोप(cid:585) को (cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है ।

(cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली 2005 के िनयम 18(3) के तहत (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक- 2015314 (cid:465)दनांक- 23.08.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी अ(cid:274)वाल को जाँच (cid:292)ितवेदन क(cid:551) (cid:292)ित उपल(cid:222)ध कराते हुए उनसे िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) माँग क(cid:551) गई ।

(cid:302)ी अ(cid:274)वाल (cid:430)ारा काया(cid:91)लय (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), भभुआ के प(cid:287)ांक- 1541 (cid:465)दनांक- 29.08.2023 से सम(cid:466)प(cid:91)त िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन के समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क इनके (cid:430)ारा िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन म(cid:581) आरोप के संबंध म(cid:581) न ह(cid:547) कोई ठोस सा(cid:234)य और न ह(cid:547) कोई ठोस (cid:466)ब(cid:219)दु (cid:292)(cid:232)तुत (cid:465)कया गया है।

अतएव (cid:466)वभाग (cid:430)ारा स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी मनोज कु मार अ(cid:274)वाल, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), मढ़ौरा, सारण सं(cid:292)ित िनलं(cid:466)बत, मु(cid:201)यालय (cid:468)जला (cid:274)ामीण (cid:466)वकास अिभकरण, पटना को उनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)मा(cid:468)णत आरोप(cid:585) के िलए '' संचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से एक वेतन वृ(cid:466)(cid:424) पर रोक'' का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।

आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क उ(cid:200)त शा(cid:468)(cid:232)त क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) इनक(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी/ सेवा पु(cid:232)त म(cid:581) क(cid:551) जाय।

उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।32 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 आदेश:- आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।

(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,

न(cid:219)द (cid:465)कशोर साह, संयु(cid:200)त सिचव।

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12 जनवरी 2024

सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-503/60/2022-SECTION 14-RDD-RDD (COM NO-171556)-2466136--(cid:302)ी राजेश कु मार, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), जगद(cid:547)शपुर (भोजपुर) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) के काया(cid:91)(cid:219)वयन म(cid:581) िशिथलता बरतने एवं वर(cid:547)य पदािधकार(cid:547) के आदेश क(cid:551) अवहेलना के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर के प(cid:287)ांक- 138 (cid:465)दनांक- 05.04.2022 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) उपल(cid:222)ध कराया गया ।

आरोप प(cid:287) म(cid:581) ग(cid:465)ठत आरोप एवं (cid:302)ी कु मार से (cid:292)ा(cid:220)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण के समी(cid:162)ोपरांत अिधसूचना सं(cid:201)या- 2195057 (cid:465)दनांक-18.10.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी राजेश कु मार, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), जगद(cid:547)शपुर (भोजपुर) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया गया ।

अिधरो(cid:466)पत दंड के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), जगद(cid:547)शपुर, भोजपुर के प(cid:287)ांक-1859 (cid:465)दनांक- 25.10.2023 (cid:430)ारा पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन आवेदन सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:465)कया गया । पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क (cid:302)ी कु मार (cid:430)ारा अपने पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन म(cid:581) कोई नया त(cid:216)य या सा(cid:234)य का उ(cid:227)लेख नह(cid:547)ं (cid:465)कया गया है (cid:468)जसके आलोक म(cid:581) पूव(cid:91) म(cid:581) िनग(cid:91)त आदेश को संशोिधत (cid:465)कया जाए ।

अत: समी(cid:162)ोपरांत (cid:302)ी राजेश कु मार के पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन आवेदन को अ(cid:232)वीकृ त (cid:465)कया जाता है ।

उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।

आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।

(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,

न(cid:219)द (cid:465)कशोर साह, संयु(cid:200)त सिचव।

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9 जनवरी 2024

सं0 R-503/272/2023-SECTION 14-RDD-RDD-2451808--(cid:302)ीमती गौर(cid:547) कु मार(cid:547) त(cid:215)कालीन (cid:274)ामीण (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547)-सह-(cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), खानपुर, सम(cid:232)तीपुर स(cid:224)(cid:292)ित (cid:274)ामीण (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547)-सह-(cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), थरथर(cid:547), नाल(cid:219)दा के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:302)ी सुरेश चौधर(cid:547), (cid:466)पता- (cid:302)ी रामबहादुर चौधर(cid:547) को पांच कमरा के प(cid:200)का मकान रहने के बावजूद (cid:232)थायी (cid:292)ती(cid:162)ा सूची से उनका नाम (cid:466)वलो(cid:466)पत नह(cid:547)ं करने एवं उसके (cid:232)थान पर गलत लाभुक (cid:302)ी सुरेश चौधर(cid:547), (cid:466)पता-(cid:232)व0 दामोदर चौधर(cid:547) को (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) अंतग(cid:91)त लाभ (cid:292)दान करने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), सम(cid:232)तीपुर के प(cid:287)ांक-189 (cid:465)दनांक-25.03.2023 (cid:430)ारा (cid:466)व(cid:465)हत (cid:292)प(cid:287) म(cid:581) आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।

आरोप प(cid:287) म(cid:581) व(cid:468)ण(cid:91)त आरोप(cid:585) पर (cid:302)ीमती गौर(cid:547) कु मार(cid:547) से (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)ा(cid:220)त (cid:465)कया गया।

(cid:302)ीमती कु मार(cid:547) (cid:430)ारा काया(cid:91)लय (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), थरथर(cid:547), नाल(cid:219)दा के प(cid:287)ांक-1073 (cid:465)दनांक- 11.09.2023 (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण म(cid:581) अं(cid:465)कत (cid:465)कया गया है (cid:465)क (cid:292)ासंिगक सूची म(cid:581) लाभाथ(cid:568) का इनके पद(cid:232)थापन अविध से पूव(cid:91) म(cid:581) ह(cid:547) जॉंच करते हुए िनबंधन एवं (cid:468)जओ टैिगंग (cid:465)दनांक-27.04.2020 को (cid:465)कया जा चुका था। लाभाथ(cid:568) को तीन(cid:585) (cid:465)क(cid:232)त क(cid:551) रािश भुगतान क(cid:551) गयी एवं आवास पूण(cid:91) कराया गया । (cid:465)दनांक-01.10.2021 को लाभुक ((cid:302)ी सुरेश चौधर(cid:547), (cid:466)पता-(cid:302)ी रामबहादुर चौधर(cid:547)) के (cid:430)ारा (cid:292)ा(cid:220)त िशकायत से मामला सं(cid:163)ान म(cid:581) आते ह(cid:547) पूण(cid:91) रािश क(cid:551) वसूली कर ली गयी है। उ(cid:200)त रािश को (cid:232)टेट नोडल एकाउं ट म(cid:581) वापस कर (cid:465)दया गया है तथा एम0आई0एस0 पर (cid:464)रफं ड भी (cid:292)दिश(cid:91)त हो रहा है। अिभलेख/सा(cid:234)य के अवलोकन से (cid:466)व(cid:465)दत होता है (cid:465)क (cid:292)ासंिगक लाभाथ(cid:568) का Administrative Sanction (cid:465)दनांक-09.08.2020 (2019-20) म(cid:581) (cid:465)कया गया जो इनके काय(cid:91)काल का है।33 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (cid:302)ीमती कु मार(cid:547) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप एवं (cid:302)ीमती कु मार(cid:547) (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण के (cid:466)वभाग (cid:430)ारा समी(cid:162)ोपरांत इ(cid:219)ह(cid:581) चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है। उ(cid:200)त दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) इनक(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी म(cid:581) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।/-

आदेश से,

न(cid:219)द (cid:465)कशोर साह, संयु(cid:200)त सिचव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 44—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

34 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद्‌ विद्यापति मार्ग, पटना - 800001 ------- अधिसूचनाएं 21 अगस्त 2023

सं0 1877--श्री ठाकुरजी महाराज राधाकृष्ण मंदिर, दानापुर, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4587/21 है।

उक्त न्यास के संबंध में मो॰ बेचन कुंवर द्वारा दिनांक-02/11/1938 को समर्पणनामा लिखा गया, जिसको निरस्त करके पुनः दिनांक-14/03/940 को एक समर्पणनामा लिखा गया, जिसमें 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। उक्त न्यास समिति में विभिन्न संप्रदाय एवं जाति के सदस्य थे। यथा-1. बाबू चंदभान साह 2. बाबू विजय रतन लाल 3. बाबू अनंत लाल 4. रघुनाथ प्रसाद 5. मदन प्रसाद 6. राम वृक्ष लाल एवं 7. राम भवन मिश्र। मो॰ बेचन कुंवर धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। इनके पिता श्री मेवा साह को एकमात्र पुत्र, बिहारी लाल, जिनकी तीन पुत्रियां थी, परंतु वर्तमान में सभी भाई-बहन का स्वर्गवास हो गया। इस कारण उन्होंने ठाकुर जी महाराज मंदिर की स्थापना की तथा स्थापित मंदिर-मकान एवं उससे संबंधित संपत्तियों का समर्पण करके अपने सभी अधिकार को भूमि से हटा लिया। साथ ही 2,500/- रू॰ भी मंदिर की पुजा-पाठ हेतु प्रदान किया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह स्वयं एवं उनके परिवार का कोई व्यक्ति वर्तमान या भविष्य कभी भी दान की गयी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकता हैै तथा मंदिर की व्यवस्था न्यासधारी के नियंत्रण में रहेगी। तदोपरांत न्यास समिति की बैठक समय-समय पर निष्पादित की जाती रही तथा विभिन्न व्यक्तियोें की नियुक्ति होती रही। बैठक संबंधी जो पंजी, पर्षद में प्रस्तुत की गयी, उसमें दिनांक-18/04/1941 से अंतिम बैठक दिनांक- 26/10/1975 की कार्रवाई अंकित है, किंतु उसके उपरांत, किसी भी कार्रवाई, न्यासी की मृत्यु, नये न्यासी की नियुक्ति आदि की कार्रवाई जैसी कोई दस्तावेज किसी भी पक्ष द्वारा पर्षद के समक्ष नहीं प्रस्तुत किया गया। धीरे-धीरे मंदिर की स्थिति जर्जर होती गयी। मंदिर के प्रथम तल पर भगवान की प्रतिमायें स्थापित थी। वहां तक जाने का मार्ग भी चलने योग्य नहीं रह गया था। पर्षद द्वारा सर्वप्रथम उन ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व की प्रतिमाओं को सावधानीपुर्वक नीचे उतरवाया गया।

इस न्यास की व्यवस्था के बिंदु पर सभी पक्षकारों को समुचित अवसर प्रदान करते हुये पर्षद में सुनवायी की गयी। सुनवायी के क्रम में श्री गुप्ता द्वारा स्वयं एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त करके 51 लाख रू॰ व्यय करके मंदिर का जीर्णोद्धार करने का प्रस्ताव दिया गया। उनके द्वारा प्रस्तावित नामों को संलग्न करते हुये एवं कुछ लोगों को सम्मिलित करते हुये मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठनअस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-13/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री ठाकुरजी महाराज राधाकृष्ण मंदिर, दानापुर, जिला- पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री ठाकुरजी महाराज राधाकृष्ण मंदिर न्यास योजना, दानापुर, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री ठाकुरजी महाराज राधाकृष्ण मंदिर न्यास समिति, दानापुर, जिला- पटना''होगी,जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।35 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 5. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी तथा उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, दानापुर, जिला- पटना - अध्यक्ष 2. श्री प्रियरंजन कुमार पिता- श्री मनोहर लाल गुप्ता, छोटी खगौल, महादेव स्थान, दानापुर कैंट, पटना- 801105 -उपाध्यक्ष

3. श्री कार्तिक चंद्र गुप्ता पिता- श्री रतन प्रसाद गुप्ता, छोटी खगौल, महादेव स्थान, दानापुर कैंट, पटना- 801105 -सचिव

4. श्री दीपक कुमार पिता- प्रकाष कुमार गुप्ता, हाउस नं॰- 78, सदर बाजार, थाना पर, दानापुर कैंट, पटना- 801503 -कोषाध्यक्ष

5. श्री बटुकनाथ मिश्र, श्री ठाकुरजी राधाकृष्ण मंदिर, दानापुर थाना के सामने, पटना-पुजारी-सह-सदस्य 6. श्री नागेन्द्र जी पिता- स्व॰ सीताराम, भट्‌टा पर, दानापुर, पटना- 9304296995- सदस्य 7. श्रीमति मीनाक्षी कुमार पति- स्व॰ वैद्यनाथ प्रसाद, फ्लैट- 105, यषवंती पैलेस, सगुना मोड़, दानापुर, नियर केषव हॉस्पीटल, दानापुर कैंट, पटना- 801503 - सदस्य

8. श्री शंकर सिंह पिता- स्व॰ महावीर सिंह, मैनपुरा, डी॰एस॰पी॰, कार्यालय के निकट, पटना- 933470774 - सदस्य

उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री ठाकुरजी महाराज राधाकृष्ण मंदिर, दानापुर, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।36 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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14 जुलाई 2023

सं0 1203--सार्वजनिक श्री दुर्गा मंदिर, दुर्गा स्थान, पो0थानाजिला-कटिहार पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या- 3685/2006 है। पूर्व से ही उक्त मंदिर में पूजा-पाठ, प्रबंधन आदि का कार्य न्यास समिति द्वारा किया जाता रहा है। विगत 10 वर्षो से पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति ने स्थानीय लोगों के सहयोग से एक विषाल मंदिर का निर्माण किया गया जिसका कुछ कार्य अभी बाकी है। न्यास समिति के कार्य के संदर्भ में श्री कामेष्वर प्रसाद सिंह द्वारा दिनांक-10.02.2021, न्यास समिति के सदस्य श्री शंकर गुप्ता द्वारा दिनांक-20.10.2022 एवं स्थानीय विपल्व सिंह उर्फ विप्लव अर्पण, पेषे से अधिवक्ता ने दिनांक-7.02.2023 द्वारा समिति पर कुछ गंभीर आरोप लगाया गया है। मुख्य आरोप है कि मंदिर में अनावष्यक रूप से बाजार मूल्य से अधिक दर पर सामाग्री खरीद कर प्रयोग किया जा रहा है तथा न्यास समिति के कुछ सदस्य काफी समय से लगातार अपने पद पर आसीन हैं। इनलोगों के द्वारा पर्षद को समूचे निर्माण का खर्च की राषि लगभग 2.5 करोड़ रूपयें बताया गया है, लेकिन उतनी राषि खर्च नहीं की गयी है। उक्त मंदिर के प्रांगण में संगमरमर का कार्य कराने हेेतु प्रस्ताव पास किया गया था, परंतु कुछ सदस्यों के द्वारा स्वयं निर्णय लेकर निजी हित में मार्बल के स्थान पर टाइल्स का प्रयोग व स्थानीय बाजार में महंगे दामों पर खरीद कर किया गया है। उपरोक्त सभी आरोप-प्रत्यारोप पर न्यास समिति के सचिव, कोषाध्यक्ष, सदस्य के अधिवक्ता तथा तीनाेंं षिकायतकर्त्ता को काफी विस्तार पूर्वक सुना गया। पर्षद द्वारा उपरोक्त सभी व्यक्तियों से आषा की गयी कि उक्त मंदिर स्थानीय श्रद्धा और प्रतिष्ठा का केन्द्र बना रहें। अतः आपसी वैमनस्य को भूल कर करके सभी एकजुट होकर मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण करवाये, जिससे न केवल मंदिर की ऐतिहासिकता बनेगी, बल्कि उस क्षेत्र के लोगों का विकास भी निष्चित संभव है। न्यास समिति के गठन हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, कटिहार से पर्षदीय पत्रांक-843 दिनांक-31.05.2022 द्वारा न्यास समिति गठन हेतु नामों की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी, कटिहार ने पत्रांक-371/गो0, दिनांक-03.04.2023 एवं पत्रांक-380/गो0 दिनांक-08.04.2023 तथा एक आम सभा दिनांक- 31.01.2023 एवं कार्यरत न्यास समिति सचिव ने दिनांक- 21.04.2023 द्वारा 11 नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट दिनांक-03.04.2023 में उल्लेख किया कि ''वर्तमान सचिव का उम्र अधिक हो जाने तथा स्वास्थ्य खराब रहने के कारण मंदिर में अपना समय नहीं दे पाते है साथ ही ईलाज हेेतु ज्यादातर समय कटिहार से बाहर रहते हैं।'' अतः उपरोक्त वर्णित बिन्दुओं पर विचार करते हुए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक- 22.05.2023 द्वारा मंदिर का प्रबंधन, उसकी सम्पत्तियों सुरक्षा और समुचित विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''सार्वजनिक श्री दुर्गा मंदिर, दुर्गा स्थान, कटिहार'' न्यास योजना होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''सार्वजनिक श्री दुर्गा मंदिर, दुर्गा स्थान, कटिहार''होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।

02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और किराये आदि से प्राप्त सभी राषि को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।

04. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। न्यास की समग्र आय इस बचत खाता में जमा की जायेगी।

05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख या उससे अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च

करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।

06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का बजट, आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी।37 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जोगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी। 09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने एवं चरित्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात्‌ अवधि विस्तार पर विचार किया जायेगा। :-

01. अुनमंडल पदाधिकारी,कटिहार - पदेन अध्यक्ष 02. डॉ0 डी0एल मंडल - उपाध्यक्ष 03. श्री षिव प्रकाष गाड़ोड़िया - सचिव 04. श्री नवीन चंद्र गुप्ता(निवर्तमान) - कोषाध्यक्ष 05. श्री राणा मनोज सिंह (निवर्तमान) - सदस्य 06. श्री शंकर गुप्ता (निवर्तमान) - सदस्य 07. श्री कामेष्वर सिंह - सदस्य 08. श्री नीरज कुमार उर्फ मंटू - सदस्य 09. श्री विप्लव प्रवीण - सदस्य 10. श्री प्रभाकर झा - सदस्य 11. श्री संजय कुमार गुप्ता - सदस्य नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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14 जुलाई 2023

सं0 1201--श्री भगवती मंदिर, ग्रामथाना-बरारी, पो0- गुरूबाजार, जिला- कटिहार पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या 2107/1969 है। उक्त मंदिर में मौजा-कोढ़ा में खाता सं0-283, 284, 285, 286, 287, 288 में कुल 09.75 ए0 जमीन है।

दिनांक- 22.05.2023 को श्री विवेकानंद झा, श्री विष्वदीपक भगवती एवं धनजीत यादव जो पूर्व न्यास समिति में सदस्य थे, द्वारा कथन किया गया कि मंदिर की कुछ भूमि आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व रामचरित नौनिया से तत्कालीन स्वयंभू न्यास समिति द्वारा बदलैन किया गया और मंदिर को बदलैन के द्वारा, जिसका खाता सं0-539, खेसरा सं0-915 रकवा-0.43 डी0 भूमि प्राप्त हुयी परंतु उक्त खाता सं0- 539 पर अभी तक मंदिर के नाम से इन्द्राज नहीं हुआ है। कार्यरत न्यास समिति ने मंदिर की भूमि जिसका खाता सं0- 283, खेसरा सं0-854 पर 52x30 फीट पर 09 दुकानों का निर्माण कराया है। प्रत्येक दुकानदारों से 02 लाख रूपयें पगड़ी प्राप्त की गई, जिसमें लगभग 16 लाख रूपये उक्त निर्माण पर खर्च किये गए और उक्त दुुकानों को विभिन्न व्यक्तियों को 1000 रू0 से 1500 रू0 प्रतिमाह की दर पर किराया पर दिया गया है। यह भी कथन करते हैं कि किसी भी सदस्य द्वारा उक्त दुकान नहीं ली गयी है। साथ ही विकास के कार्य के रूप में मंदिर की छत ढलाई, मंदिर का जीर्णोद्धार, पेड़ के पास भूमि सुरक्षित करने के लिए ग्रील लगाए गये हैं। मंदिर में वर्तमान में 5238 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 दुकानें है। समिति द्वारा मंदिर के नाम से संधारित खाता का एकाउंट स्टेटमेन्ट दाखिल किया गया जिसमें कुल 29000/- रूपयें जमा है।

न्यास समिति का गठन वर्ष 2017 में किया गया था जिसका कार्यकाल पूर्ण हो चुका है और स्थानीय लोगों ने आम सभा दिनांक- 20.11.2022 द्वारा 10 लोगों के नामों का प्रस्ताव पारित कर न्यास समिति गठन हेतु दिनांक- 03.12.2022 को पर्षद को उपलब्ध कराया है।

उक्त प्रस्ताव में पूर्व न्यास समिति के 05 सदस्यों को भी रखा गया है। प्राप्त नामों की सूची को अंचल अधिकारी, बरारी को भेजते हुए उनसे मंतव्य की मांग की गई तथा वर्णित नामों में कुछ नये नाम जोड़ने या हटाने के संबंध में पर्षदीय पत्रांक-4182 दिनांक-10.03.2023 प्रेषित किया गया। उपरोक्त परिस्थितियॉ यह स्पष्ट करती है कि पूर्व न्यास न्यास समिति कार्यकाल संतोषजनक रहा और प्रस्तावित न्यास समिति में सचिव, कोषाध्यक्ष के नाम का भी प्रस्ताव है और उपरोक्त प्रस्ताव पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। अतः न्यास समिति को एक और अवसर प्रदान करते हुए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक- 22.05.2023 द्वारामंदिर का प्रबंधन, उसकी सम्पत्तियों सुरक्षा और समुचित विकास हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री भगवती मंदिर, ग्रामथाना- बरारी, पो0- गुरूबाजार, जिला- कटिहार न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्रीभगवती मंदिर, ग्रामथाना- बरारी, पो0- गुरूबाजार, जिला- कटिहार न्यास समिति''होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा। 2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और किराये आदि से प्राप्त सभी राषि को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।

4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिवएवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। न्यास की समग्र आय इस बचत खाता में जमा की जायेगी।

5. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषिनिर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।

06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जोगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है :-

39 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

01. अंचल अधिकारी, बरारी - पदेन अध्यक्ष 02. श्री कौषल किषोर यादव पिता- स्व0 भुपेन्द्र यादव - उपाध्यक्ष 03. श्री विष्वदीपक भगवती उर्फ पंकज यादव पिता- श्री हरिमोहन भगवती (निवर्तमान) - सचिव 04. श्री धनजीत कुमार, पिता-श्री महेष प्र0 यादव (निवर्तमान) - उप-सचिव 05. श्री मुकेष कुमार झा, पिता- श्री अरूण झा - कोषाध्यक्ष 06. श्री श्यामल किषोर यादव, पिता- स्व0 कृष्ण कुमार यादव (निवर्तमान) - सदस्य 07. श्री विनोद भारती, पिता-स्व0 रामाज्ञयास भारती (निवर्तमान) - सदस्य 08. श्री संदीप कुमार, पिता- स्व0 चंद्रकिषोर यादव - सदस्य 09. श्री विवेकानंद झा, पिता- स्व0 शोभानंद झा (निवर्तमान) - सदस्य 10. श्री सदरी यादव, पिता- स्व0 मुन्नी यादव - सदस्य 11. श्री दिवाकर ठाकुर, पिता- स्व0 अभिनंदन ठाकुर - सदस्य सभी ग्रामथाना-बरारी, पो0- गुरूबाजार, जिला- कटिहार।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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21 जुलाई 2023

सं0 1386--श्रीराम जानकी (सीताराम पंचायतन) मंदिर, सागरपुर ब्रह्मोतरा , जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1729 है। पूर्व में मंदिर की व्यवस्था हेतु पर्षद के आदेष दिनांक 10/08/2012 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, परन्तु उक्त न्यास समिति के 04 सदस्यों द्वारा यह आरोप लगाया गया कि सचिव, भारती ठाकुर द्वारा सहयोग नहीं किया जाता है, लिहाजा, उनके द्वारा सामुहिक त्याग-पत्र दिया गया है तथा उस समिति को भंग करते हुए अस्थायी न्यासधारी जिला पदाधिकारी को बनाया गया था, तदोपरान्त 05 सदस्यीय न्यास समिति का गठन दिनांक 27/08/2015 को अनुमंडल पदा0 की अध्यक्षता में किया गया था, परन्तु उक्त न्यास समिति द्वारा भी मंदिर के हित में किसी प्रकार का कोई कार्य किये जाने की कोई सूचना पर्षद में नहीं दी गयी और पूर्व न्यास समिति के कार्यों की जांच हेतु जिला पदा0 को पत्र लिखा गया, जिला पदाधिकारी ने अपने पत्र दिनांक 27/12/2019 द्वारा यह उल्लेख किया गया कि मंदिर में 110 एकड़ जमीन है और मौजा-रहिका, पंडौल, रजनगर, नदनियां, खुटौना, तारडीह अंचल में स्थित है और जमीन की बंदोबस्ती नहीं करने के कारण कोई आय नहीं प्राप्त हो रही है तथा अंचलाधिकारी को भी जिला पदा0 के द्वारा कुछ निर्देष दिये गये थें तथा मंदिर की सुचारू व्यवस्था हेतु एक बैठक करने तथा आय-व्यय विवरणी आदि दाखिल करने का भी निर्देष दिया गया था, परन्तु उक्त न्यास समिति पूर्ण रूप से निष्क्रिय रही, अतः अधिनियम की धारा 29(2) के तहत न्यास समिति को भंग कर दिया गया। भारती ठाकुर जो समर्पणकर्ता के वंषज है, उनके द्वारा एक नयी न्यास समिति बनाये जाने हेतु बार-बार प्रार्थना-पत्र पर्षद में दी जाती रही, अतः भारती ठाकुर के आवेदन और पूर्व न्यास समिति के क्रियाकलापों से जो, पूर्ण रूप से निष्क्रिय थी, एक अस्थायी न्यास समिति का गठन दिनांक 14/09/2020 को किया गया, जिसके अध्यक्ष के रूप में जिला पदाधिकारी तथा श्रीमति भारती ठाकुर को सचिव के रूप में नामित किया गया। उक्त अस्थायी न्यास समिति के द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार में 03-04 लाख रू0 में किया गया है, मंदिर के तालाब को डाक किया गया, भूमि की जानकारी नहीं होने के कारण हरिषंकर मिश्र नामक व्यक्ति को मंदिर की भूमि 01 वर्ष के लिए, इस शर्त पर दी गयी थी कि वह समर्पणनामा में उल्लिखित भूमि की खोज करके, उस पर अपना आवष्यकतानुसार खेती, उपज का कार्य करेंगे और उनका कथन है कि उक्त हरिषंकर मिश्र द्वारा मठ की भूमि की जानकारी प्राप्त करने हेतु विभिन्न पदाधिकारियों के यहां अपना दस्तावेज, प्रार्थना-पत्र देकर इस कार्य में लगे हुए हैं, जिससे कि सबसे पहले यह जानकारी प्राप्त हो जाये कि मंदिर की भूमि कहां-कहां और कितनी-कितनी है? और इस संबंध में कुछ दस्तावेज भी प्रार्थीनी सचिव को उनके द्वारा उपलब्ध करायी गयी है तथा कथन करती हैं कि हरिषंकर मिश्रा के कार्य से वह संतुष्ट हैं। आगे कथन करती हैं कि प्रार्थी स्वयं एक महिला हैं और चूंकि पूर्व में जो मंदिर की भूमि को समर्पणकर्ता परिवार के वंषजों द्वारा तथा कुछ अन्य फर्जी व्यक्तियों के द्वारा क्रय-विक्रय, विलेख, स्थानान्तरण, बंधक, करके समाप्त किया जा चुका है, अतः उसकी जानकारी प्राप्त करना और जानकारी प्राप्त करने में जो न्यास समिति का गठन किया गया है, उसमें से कुछ लोगों के द्वारा सहयोग नहीं प्राप्त हो रहा है और उपाध्यक्ष द्वारा मंदिर की सम्पति के विरूद्ध कार्य कर रहे हैं, अतः उनके द्वारा अपना प्रार्थना-पत्र दिया गया कि पूर्व न्यास समिति के 03 सदस्यों तथा 04 अन्य सदस्यों के नामों का प्रस्ताव दिया है, प्रस्तावित नामों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रस्तावित नामों में सभी व्यक्ति काफी पढ़े-लिखे, धार्मिक प्रवृति तथा सार्वजनिक कार्यों में सहयोग देने वाले हैं, जिनमें डी0एस0पी, एसोसिएट डायरेक्टर, एफ0आई0एस, वरिष्ठ पत्रकार भी हैं। चूंकि उपरोक्त प्रस्तावित समिति में कुछ अन्य नाम भी संचिका पर किसी अन्य द्वारा दाखिल नहीं किया गया है और उक्त न्यास समिति जो 01 वर्ष के लिए बनायी गयी थी, जिसकी समय-सीमा भी समाप्त हो गयी है।40 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये पर्षद की सुनवाई दिनांक- 06.06.2023 को इस न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु प्रस्तावति नामों की संषोधित न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए बनाये जाने का निर्णय लिया गया, परन्तु इस समिति को मठ की किसी भी सम्पति को क्रय-विक्रय या 01 वर्ष से अधिक की बंदोबस्ती करने का अधिकार नहीं रहेगा, जबतक कि पर्षद की पूर्व अनुमति नहीं हो।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्रीराम जानकी (सीताराम पंचायतन) मंदिर, सागरपुर ब्रह्मोतरा , जिला-मधुबनी,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्रीराम जानकी (सीताराम पंचायतन) मंदिर, सागरपुर ब्रह्मोतरा, जिला-मधुबनी''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्रीराम जानकी (सीताराम पंचायतन) मंदिर, सागरपुर ब्रह्मोतरा, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. जिला पदाधिकारी, मधुबनी - अध्यक्ष 2. श्रीमति भारती ठाकुर, पिता-स्व0 इन्द्र शेखर ठाकुर - सचिव सा0- श्रीराम जानकी मंदिर,सागरपुर ब्रह्मोतरा, अंचलथानापो0- पंडौल, जिला- मधुबनी, 84723441 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 3. श्री अंकेष ठाकुर, पिता-श्रीराम कृष्ण ठाकुर - कोषाध्यक्ष सा0- सागरपुर ब्रह्मोतरा, अंचलथानापो0- पंडौल,वार्ड नं0- 08,जिला- मधुबनी, 847234 4. श्री रंजीत पासवान, पिता-श्री भरत पासवान - सदस्य सा0-ब्रह्मोतरा भवानीपुर, पो0थाना- पंडौल, वार्ड नं0- 01 जिला- मधुबनी। 5. श्री ध्रुव कुमार, पिता-स्व0 बैजनाथ प्रसाद(वरिष्ठ पत्रकार) - सदस्य सा0-न्योभ वी0डी0 लेन, महेन्द्रू, पटना- 800006 6. श्री किसलय कुमार, पिता-स्व0 अषोक कुमार - सदस्य सा0- श्रीराम जानकी मंदिर,सागरपुर ब्रह्मोतरा, अंचलथानापो0- पंडौल, जिला- मधुबनी, 847234 7. श्री कामोद प्रसाद, पिता-स्व0 अमीर प्रसाद सिंह (से0 नि0 डी0एस0पी0) - सदस्य सा0- खवड़ा रोड, कलमबाग चौक, मुजफ्फरपुर, पिन- 842001 उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल बढ़ाये जाने पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्रीराम जानकी (सीताराम पंचायतन) मंदिर, सागरपुर ब्रह्मोतरा, जिला-मधुबनी,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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19 जुलाई 2023

सं0 1336--श्री सीताराम जी मंदिर, फुलहर, प्रखण्ड- हरलाखी, जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-2326 है।

उक्त न्यास की देखभाल पूर्व में न्यासधारी महंत श्याम सुन्दर दास द्वारा की जाती थी और समय-समय पर उनके द्वारा आय-व्यय विवरणी दाखिल की जाती थी, यद्यपि की वह नियमित रूप से दाखिल नहीं की जाती रही।

वर्ष-1994-95 से 1998-99 तक आय-विवरणी, पर्षद शुल्क न जमा करने के कारण श्री श्याम सुन्दर दास को अधिनियम की धारा-28 (2) H के तहत नोटिस भी जारी की गई। तद्‌ोपरान्त उनके द्वारा विगत वर्षों की आय-विवरणी दिनांक-10.04.2002 को दाखिल की गई। इसके बाद खेद की बात है कि संचिका भी कभी पर्षद में उपस्थापित नहीं कि गई और संचिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि दिनांक-22.08.2006 को उक्त मंदिर का वर्ष-2004-2005 की आय-विवरणी आनंद कंद दास के हस्ताक्षर से दाखिल की गई थी, जिसमें मंदिर में कुल 16.97 ए0 जमीन और आय के रूप में 12,365 रु0 दर्षित किया गया, परन्तु उक्त आय-विवरण के आलोक में न तो पर्षद शुल्क जमा किया गया और न कभी वर्ष-2006 के बाद उक्त मंदिर के संबंध में श्री दास द्वारा या किसी अन्य द्वारा कोई पत्राचार नहीं किया गया और उक्त आनंद कंद दास कौन थे, उनको क्या अधिकार था, किनके द्वारा उनकी नियुक्ति की गई, ऐसा कोई दस्तावेज संचिका पर नहीं है, न पर्षद द्वारा उनको कभी किसी पद की मान्यता दी गई है और लगभग 16 वर्ष के अंतराल के बाद ग्रामीणों द्वारा दिनांक-24.03. 2023 को श्री झब्लु यादव व कुछ अन्य के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र जिसके साथ श्री लाल बिहारी पाण्डेय, श्री संदीप कुमार का आधार कार्ड उक्त मंदिर के नाम का खतियान तथा ग्रामीणों द्वारा दिनांक-05.03.2023 को लगभग 50 व्यक्तियों के हस्ताक्षर से भेजा गया पत्र की प्रति दाखिल की गई तथा शोधकर्त्ता डॉ0 रामअवतार द्वारा प्रकाषित पुस्तक के संबंधित अंष भी दाखिल किया गया और यह भी कथन किया कि मंदिर में वर्तमान में 21 बी0 13 क0 भूमि है, जो अवैध रूप से अतिक्रमण में है, मात्र 02 बी0 जमीन मंदिर के अधिपत्य में है, जहाँँ मंदिर और बागवान स्थित है।

इस संबंध में पर्षद द्वारा उक्त आनंद कंद दास को भी निबंधित पत्र दिनांक- 28.03.2023 को जारी किया गया और उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई कि पिछले 17 वर्षो से मंदिर का विकास, आय-व्यय, मंदिर की स्थिती या विकास संबंधी कोई कार्य किये हो तो स्पष्ट करें, अन्यथा पर्षद को न्यास समिति का गठन करना पड़ेगा, क्योंकि ग्रामीणों के द्वारा जो फोटोग्राफ दिखाए गए है, उससे यह स्पष्ट है कि मंदिर किसी भी समय धरातल में समा जाएगी, जबकि यह बहुत ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर है।

पर्षद के पत्र के आलोक में उनके द्वारा दिनांक-31.05.2023 को लिखित प्रतिउत्तर प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया है कि वर्ष-2015 में इनके द्वारा व्यक्गित जवाब पर्षद को दाखिल किया गया था। आगे कथन करते है कि यह मंदिर ऐतिहासिक और पौराणिक है, इस तथ्य की जानकारी उनको उपलब्ध कराई जाए तथा ग्रामीणों के प्रस्ताव की प्रति भी उनको दी जाए और 90 दिन का समय अपना स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए मांग की गई। पर्षद की संचिका से स्पष्ट है कि श्री आनंद कंद दास किसी भी पद पर न तो नियुक्त है और न ही मनोनित किया गया है। पिछले 15-16 वर्ष से उनके द्वारा मंदिर के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई लगाव कोई कार्यवाई न तो की गई है, न कोई सूचना पर्षद को दी गई है। अतः उक्त मंदिर की सुरक्षा हेतु मंदिर में संरक्षक के रूप में श्री संजीव कुमार पुत्र करतार सिंह को रखा जाता है, यद्यपि की यह दुसरे जगह से निवास करतेे है, परन्तु उनके द्वारा उक्त मंदिर के प्रति लगाव तथा मंदिर के विकास में42 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सहयोग दिये जाने का आष्वासन पर उन्हें संरक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।श्री संजीव कुमार उक्त शोधकर्त्ता रामअवतार के षिष्य के रूप में कार्यरत हैं।

अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये पर्षद की सुनवाई दिनांक- 06.06.2023 को इस न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु प्रस्तावित ग्रामीणों की सूची को मान्यता देते हुये अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया। चरित्र सत्यापन प्राप्त होने, कार्य संतोषजनक पाये जाने एवं यदि उपरोक्त आनंद कंद दास द्वारा वर्तमान मंदिर के संबंध में यदि कोई अधिकार, हित संबंधी कोई दस्तावेज दाखिल किया जाता है, तो उसपर भी विचारोपरान्त समिति के समय विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा। मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग आदि का कार्य श्री लाल बिहारी पाण्डेय द्वारा किया जायेगा, जैसा कि उपस्थित ग्रामीणों द्वारा सहमति की गई।

समिति मंदिर की किसी भी प्रकार से भूमि को क्रय-विक्रय या 03 वर्ष से अधिक के लिए बंदोबस्ती नहीं करेंगी और मंदिर की भूमि पर जो अतिक्रमणकारी है, उनकी सूची मंदिर का खाता और खेसरा एक माह के अदंर पर्षद में दाखिल करेगी, जिससे उन व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाई करते हुए या तो बंदोबस्ती की राषि जमा किए जाने का निर्देष दिया जाए या उनसे भूमि खाली कराए जाने संबंधी कार्यवाई की जाए। समिति के सदस्यों के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को चाहे वो आनंद कंद दास हो चाहे कोई और हो मंदिर और मंदिर की सभी सम्पति के संंबंध में किसी भी प्रकार का कोई अधिकार नहीं है। यदि कोई अवरोध करते हैं, तो उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाई की जा सकती है।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री सीताराम जी मंदिर, फुलहर, प्रखण्ड- हरलाखी, जिला-मधुबनी,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सीताराम जी मंदिर, फुलहर, प्रखण्ड- हरलाखी, जिला-मधुबनी,,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री सीताराम जी मंदिर, फुलहर, प्रखण्ड- हरलाखी, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।43 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो

को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री झगंरू यादव - अध्यक्ष 02. श्री लोटन साह - उपाध्यक्ष 03. श्री जितेन्द्र कुमार साह - सचिव 04. श्री बृज मोहन यादव - कोषाध्यक्ष 05. श्री रामनरेष चौधरी - सदस्य 06. श्रीमती सिजोेतिया देवी - सदस्य 07. श्री रमेष कुमार गिरी - सदस्य 08. श्रीमती श्रीदेवी - सदस्य सभी का पता- ग्रामपो0- फुलहर, थानाअंचल- हरलाखी, जिला- मधुबनी। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री सीताराम जी मंदिर, फुलहर, प्रखण्ड- हरलाखी, जिला-मधुबनी,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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21 जुलाई 2023

सं0 1384--श्री रामलला जी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-इटौन, जिला-लखीसराय, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-2383 है।

पूर्व में उक्त मंदिर की देखभाल, व्यवस्था महंत रामरूप दास द्वारा की जाती थी। निबंधन के समय उक्त मठ में 20 बीघा जमीन का इन्द्राज किया गया है। वर्ष 1987-88 में उक्त न्यासधारी रामरूप दास द्वारा आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी थी, जिसमें कुल 22.20 एकड़ जमीन का उल्लेख किया गया है तथा कथन किया गया कि लगभग 08 एकड़ जमीन हरिजन वास के लिए गैर आबाद एवं 14 एकड़ उपजाउ है। दिनांक 14/09/1993 को किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा रामरूप दास के हस्ताक्षर से प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त मठ की 03 एकड़ भूमि ठाकुरबाड़ी से तीन मील दूर है, जो मौजा-इटौन, खाता सं0-221, खेसरा सं0-212, 203, तौजी नं0-348 है, अतः उसे विक्रय किये जाने की अनुमति मांगी गयी, जिस पर विचारोपरान्त कुछ शर्तों के साथ विक्रय किये जाने का आदेष दिनांक 30/09/1993 को दिया गया था, परन्तु मंदिर की जो फोटोग्राफ संचिका पर दाखिल की गयी है, उससे यह स्पष्ट होता है कि भूमि को विक्रय करने के बाद न्यासधारी के द्वारा उक्त राषि को अपने निजी प्रयोग में खर्च कर लिया गया, क्योंकि किसी भी प्रकार का कोई भी कार्य मंदिर के जीर्णोद्धार के संबंध में किये जाने की सूचना पर्षद में नहीं दी गयी और न हीं फोटोग्राफ से स्पष्ट होता है। ग्रामीणों के द्वारा दिनांक 15/05/2017 एवं 13/09/2021 को मंदिर की स्थिति के बारे में एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि वह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है और रामसुजस दास द्वारा अपने को चेला बताते हुए चार मंदिर क्रमषः 1. लक्ष्मण जी मंदिर, बिचली ठाकुरबाड़ी, 2. जगरनाथ मंदिर, स्टेषन रोड, बड़हिया, 3. मौनी जी ठाकुरबाड़ी, कृष्णा चौक, बड़हिया एवं 4. रामलला जी ठाकुरबाड़ी, इटौन पर अवैध रूप से अपना कब्जा बनाये हुए है, जो एक अपराधी प्रवृति के व्यक्ति हैं और कुछ दबंग व बदमाष को अपने साथ लेकर चलते हैं और ग्रामीणों द्वारा मंदिर की स्थिति के बारे में बात करने जाने पर गलत मुकदमा में फंसाने तथा जान मारने की धमकी भी देते हैं और मंदिर की कुछ सम्पति को उनके द्वारा विक्रय भी किया गया है। संचिका से स्पष्ट होता है कि पिछले कई वर्षों से मंदिर की भूमि के संबंध में उसकी आय-व्यय विवरणी, व्यवस्था अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 के प्रावधानों का पालन करने संबंधी सूचना रामरूप दास न्यासधारी को बराबर दी जाती रही, लेकिन व वर्ष 2016-17 के बाद किसी प्रकार का कोई कार्य उनके द्वारा नहीं किया गया। लिखित षिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है लगभग 10 लाख रू0 वार्षिक खेती से आय है और मंदिर हमेषा बंद रखा जाता है।44 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उपरोक्त के संबंध में रामसुजस दास द्वारा दिनांक 21/07/2017 को एक स्पष्टीकरण दाखिल किया गया कि 5.10 एकड़ जमीन स्कूल के निर्माण हेतु दान की गयी है तथा 32 कट्ठा जमीन पर्षद के आदेष के आलोक में विक्रय किया गया है (cid:2869)

और 1 एकड़ जमीन एस0 सी/एस0 टी0 के निवास हेतु दी गयी है और मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ होता है, (cid:2870)

परन्तु उनके स्पष्टीकरण में लगाये गये आरोपों का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था, इस संबंध में अंचलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी तथा अपर जिला पदाधिकारी, राजस्व को भी पत्र लिखा गया तथा पुनः पर्षद के पत्रांक 3706 दिनांक 27/10/2021 द्वारा उक्त न्यासधारी रामरूप दास एवं दावाकर्ता रामसुजस दास के पते पर निबंधित डाक द्वारा ग्रामीणों द्वारा लगाये गये आरोप, न्यास की आय-व्यय विवरणी, (पिछले वर्षों की जमा नहीं किये जान)े आदि के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। इसी बीच पर्षद को जानकारी मिली कि प्रष्नगत मठ के आचार्य गद्दी/मूल गद्दी जलगोविन्द मठ के महंत गजेन्द्र दास के नियंत्रण में है। उनको भी दिनांक 05/01/2022 को पत्र लिख कर जानकारी चाही गयी कि चारो मंदिर की देखभाल हेतु अलग-अलग महंतो की नियुक्ति की जाए, चूंकि वर्तमान न्यासधारी रामसुजस दास के संबंध में सूचना प्राप्त हुई कि वह बीमार चल रहे हैंं। पुनः ग्रामीणों द्वारा उपस्थित होकर उनके गांव में स्थित श्री रामलला जी मंदिर की व्यवस्था हेतु एक आम बैठक दिनांक 26/06/2022 को सरपंच की अध्यक्षता में की गयी और ग्रामीणों की उपस्थिति में 11 व्यक्तियों की न्यास समिति बनाये जाने का प्रस्ताव पास किया गया। उक्त बैठक की प्रति पर्षद में दिनांक 07/07/2022 को दाखिल की गयी। ग्रामीणों के उक्त प्रस्ताव को प्रष्नगत को मूल गद्दी जलगोविन्द मठ के महंत, गजेन्द्र दास, अनुमंडल पदाधिकारी, लखीसराय को भेज कर उनसे प्रस्ताव पर उनके मंतव्य की मांग की गयी, इस स्पष्ट स्पष्टीकरण के साथ कि यदि कुछ नामों को जोड़ना या हटाना चाहते हों तो इस संबंध में अपना मंतव्य पर्षद को दिनांक 15/10/2022 तक अवष्य ई-मेल, या वाट्‌स्ऐप के माध्यम से उपलब्ध करायें, परन्तु न तो जलगोविन्द मठ के महंत द्वारा और न हीं अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा कोई पत्राचार या कोई रिपोर्ट पर्षद में समर्पित की गयी। इसी बीच प्रस्तावित नामों के चरित्र सत्यापन हेतु उसे संबंधित थाने में भेजा गया, जो अभी तक अप्राप्त है। इसी बीच रामसुजस दास द्वारा दिनांक 27/12/2022 को उपरोक्त चारों मंदिर की वर्ष 2007-08 से वर्ष 2021-22 तक लगभग 15 वर्षों की आय-व्यय विवरणी, ऑडिट करा कर पर्षद में दाखिल की गयी। राजसुजस दास द्वारा दाखिल उपरोक्त ऑडिट रिपोर्ट (आय-व्यय विवरणी) के आधार पर पर्षद शुल्क जमा किये जाने का पत्रांक 435 दिनांक 04/05/2023 को जारी किया गया, परन्तु सत्यदेव दास द्वारा दिनांक 19/05/2023 को आंषिक पर्षद शुल्क बकाया की राषि जमा की गयी है और अपने प्रार्थना-पत्र के साथ दिनांक 20/04/2019 को रामसुजस दास द्वारा सत्येदव दास के पक्ष में वसीयतनामा जो आपस में पिता-पुत्र हैं, निस्पादित करते हुए विलेख दाखिल किया। यहां यह स्पष्ट करना आवष्यक है कि उपरोक्त विलेख में न तो सत्येदव दास का फोटो है और न हीं उनका कोई हस्ताक्षर है और उक्त रामसुजस दास को पर्षद के द्वारा उक्त मंदिर की देखभाल करने, व्यवस्था करने के संबंध में कभी कोई अधिकार या मान्यता नहीं दी गयी है, अतः उनके द्वारा दाखिल उक्त वसीयतनामा अधिकार क्षेत्र के बाहर होने के कारण विधि की दृष्टि में प्रभावी नहीं है। दिनांक 16/02/2023 को स्थानीय ग्रामीणों तथा उपस्थित रामसुजस दास एवं सत्यदेव दास को विस्तारपूर्वक सुनने के पष्चात न्यास समिति बनाये जाने का निर्णय लिया गया था और सभी पक्षों को दिनांक 01/06/2023 को उपस्थित होने का निर्देष दिया गया था, परन्तु न तो सत्यदेव दास और न हीं रामसुजस दास उपस्थित हुए।ग्रामीणों की तरफ से श्री सुधीर महतो एवं श्री सुबोध कुमार उपस्थित हुए। अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये मामले को और अधिक लंबित नहीं रखते हुए पर्षद की सूनवाई दिनांक- 01.06.2023 को इस न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु ग्रामीणों की बैठक दिनांक- 26.06.2022 में लाये गये प्रस्ताव के आलोक में 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लियागया। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल बढ़ाये जाने पर विचार किया जायेगा। अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री रामलला जी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-इटौन, जिला-लखीसराय,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामलला जी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-इटौन, जिला-लखीसराय,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामलला जी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-इटौन, जिला-लखीसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा45 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचल अधिकारी, चानन अध्यक्ष

2. डॉ चंचल कुमार मिश्र, पिता-स्व0 राजा मिश्र उपाध्यक्ष (1) ग्राम- इटौन, पो0- मननपुर, थानाअंचल- चानन, जिला- लखीसराय 3. रामसुजस दास उपाध्यक्ष (2) श्री लक्ष्मण जी मंदिर, ग्रामपो0थाना- बड़हिया, जिला- लखीसराय। 4. श्री सुधीर महतो, पिता-स्व0 अयोध्या महतो सचिव 5. श्री सुरेष कुमार मांझी, पिता-श्री बेचन मांझी कोषाध्यक्ष 6. श्री उमेष प्रसाद, अधिवक्ता, सदस्य 7. श्री मनोज राय, पिता-श्री विरंची राय सदस्य 8. श्री जवाहर पासवान, पिता-स्व0 रामस्वरूप पासवान सदस्य 9. श्री संजय दास, पिता-स्व0 राजेन्द्र रविदास सदस्य 10. श्री सुबोध कुमार, पिता-श्री सुधीर महतो सदस्य 11. श्री भासी रजक, पिता-स्व0 बोतल रजक सदस्य

सभी का पता- ग्राम- इटौन, पो0- मननपुर, थानाअंचल- चानन, जिला- लखीसराय। ग्रामीणों द्वारा बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में श्री गरीब सिंह को उक्त मंदिर के पुजारी के रूप में कार्य करने (पूजा-पाठ, रागभोग आदि) के लिए अनुमति दी जाती है तथा न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की भूमि की बोली खुली डाक के द्वारा लगायी जायेगी और जो राषि प्राप्त होगी, उसे मंदिर के खाते में जमा की जाये और खाते से हीं राषि निकाल कर मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में खर्च की जाए, चूंकि मंदिर की स्थिति अत्यंत दयनीय और बदत्तर हो गयी है।46 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल बढ़ाये जाने पर विचार किया जायेगा।

अध्यक्ष, अंचल पदाधिकारी सरकारी कर्मी है, अतः उनकी अनुपस्थिति में बैठक आदि का आयोजन करने का अधिकार उपाध्यक्ष को रहेगा, परन्तु शर्त यह रहेगी कि बैठक की पूर्व सूचना अंचल पदाधिकारी, अध्यक्ष को अवष्य दे देंगें तथा बैठक के उपरान्त जो प्रस्ताव पर निर्णय लिया जायेगा, उसकी भी प्रति अंचल पदाधिकारी को अवष्य उपलब्ध करा देंगे। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि श्री रामलला जी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-इटौन, जिला-लखीसराय,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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19 जुलाई 2023

सं0 1343--सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रणगाँव, जिला-बांका, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4264 है।

न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में दोनों पक्षों में विवाद के कारण अधिनियम की धारा 48 के अन्तर्गत जिला न्यायाधीष के यहां दोनों पक्षों को निर्देष प्राप्त करने हेतु निर्देष दिया गया। उपरोक्त निर्देष के आलोक में विवेकानंद सिंह तथा अन्य के द्वारा विजय कुमार सिंह व अन्य के विरूद्ध जिला न्यायालय में मिस0 केष नं0-82/13 दाखिल किया गया था। उक्त वाद में पक्षों के द्वारा दोनों पक्षों के हस्ताक्षर व उनके अधिवक्ताओं के द्वारा सत्यापन हस्ताक्षर के साथ दिनांक 02/03/2023 को एक सुलहनामा पत्र दाखिल किया गया और जिस सुलहनामा पत्र के आलोक में न्यायालय द्वारा भी दिनांक 02/03/2023 को आदेष पारित करते हुए उक्त सुलहनामा को आदेष का भाग माना, जिसमें उक्त मंदिर की देखभाल हेतु दोनों पक्षों के 04-04 व्यक्तियों को क्रमषः प्रथम पक्ष से 1. प्रद्‌योत कुमार, 2. रजनीष कुमार सिंह, 3. सन्नी कुमार, निलेष कुमार सिंह, एवं द्वितीय पक्ष से 1. विवेकानंद सिंह, 2. अच्युतानंद सिंह, 3. ब्रजेष राठौर, 4. अनुप कुमार सिंह के नाम पर सहमति बनी। न्यायालय द्वारा उपरोक्त समझौते के आधर पर पारित निर्णय के आलेाक में उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करने एवं अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन करने का निर्णय पर्षद की सूनवाई दिनांक- 30.05.2023 को लिया गया।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रणगाँव, जिला-बांका,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रणगाँव, जिला-बांका,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रणगाँव, जिला-बांका,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।47 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, बांका - अध्यक्ष

2. श्री रजनीष कुमार सिंह, पिता-सुनील प्र0 सिंह - उपाध्यक्ष (1) 3. श्री विवेकानन्द सिंह, पिता-स्व0 जयकृष्ण प्र0 सिंह - उपाध्यक्ष (2) 4. श्री प्रद्‌योत कुमार, पिता-स्व0 कृष्णानंद सिंह - सचिव 5. श्री अच्युतानंद सिंह, पिता-स्व0 जयकृष्ण प्र0 सिंह - कोषाध्यक्ष 6. श्री सन्नी कुमार, पिता-मनोज कुमार सिंह - सदस्य 7. श्री ब्रजेष राठौर, पिता-ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह - सदस्य 8. श्री निलेष कुमार सिंह, पिता-स्व0 अषोक कुमार सिंह - सदस्य 9. श्री अनुप कुमार सिंह, पिता-स्व0 गजेन्द्र प्रसाद सिंह - सदस्य

सभी का पता- ग्राम-रनगाँव, थाना- धारैया, जिला- बांका। पिन- 813110 न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि न्यास समिति शीघ्र मंदिर के नाम से बैंक में खाता खोलेगी और मंदिर के विभिन्न श्रोतों से होने वाली आय को मंदिर के खातें मे रखा जायेगा और वहीं से उस राषि को आवष्यकतानुसार खर्च की जा सकेगी। न्यास समिति एक बैठक कर सहमति के आधार पर सचिव और कोषाध्यक्ष की नियुक्ति करेगी और बैंक खाते का संचालन कोषाध्यक्ष के साथ-साथ अध्यक्ष या सचिव में से किसी एक अर्थात दो (02) व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। यहां यह भी स्पष्ट कर देना आवष्यक है कि पषु क्रुरता अधिनियम की धारा 11 एवं भा0द0स0 की धारा 428, 429 जो वर्तमान में लागू है किसी भी प्रकार से किसी भी जानवर के साथ यदि कोई प्रतारणा, अंग भंग या हत्या की जाती है तो वह उक्त अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, जो 02 वर्ष से लेकर 05 वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान है। यदि उपरोक्त कार्य मंदिर में या मंदिर के प्रांगण में किया जाता है या किसी व्यक्ति द्वारा उसकी षिकायत की जाती है तो उसके लिए पूरी न्यास समिति भागी हो सकती है, इसकी सूचना सभी पक्षों/सदस्यों को दी जाये । न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा।चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत इसकी अवधि विस्तार पर विचार किया जायेगा।

अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी सरकारी कर्मी है, अतः उनकी अनुपस्थिति में बैठक आदि का आयोजन करने का अधिकार उपाध्यक्ष को रहेगा, परन्तु शर्त यह रहेगी कि बैठक की पूर्व सूचना अनुमंडल पदाधिकारी, अध्यक्ष को अवष्य दे देंगें तथा बैठक के उपरान्त जो प्रस्ताव पर निर्णय लिया जायेगा, उसकी भी प्रति अनुमंडल पदाधिकारी को अवष्य उपलब्ध करा देंगे।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रणगाँव, जिला-बांका,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।48 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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26 जुलाई 2023

सं0 1437--श्री श्री 108 बाबा विष्वकर्मा मंदिरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4663 है।

पर्षद में दाखिल दिनांक 10/10/1937 के केवालानामा, समपर्णनामा जो दरोगा सिंह द्वारा श्री श्री 108 देव विष्वकर्मा भगवान के नाम से थाना नं0-19, तौजी नं0-358, खाता सं0-70, खेसरा सं0-947 का 19 डी0 जमीन के संबंध में है। उक्त दस्तावेज के आधार पर पूर्व में उसके मुन्तजिमकार विरंची मिस्त्री थें। विरंची मिस्त्री के तीन पुत्र क्रमषः 1. श्री भोला नाथ शर्मा, 2. श्री षिवनंदन शर्मा, एवं 3. श्री शंकर शर्मा नावल्द स्वर्गवास कर गये और भोला नाथ शर्मा उक्त मंदिर की व्यवस्था आदि करते थें और उनके स्वर्गवास के पष्चात उनके तीन पुत्र क्रमषः 1. श्री रामगुलाम शर्मा, 2. श्री गोपाल शर्मा, एवं 3. श्री मदन लाल शर्मा तथा षिवनंदन शर्मा के तीन पुत्र क्रमषः 1. श्री रामाकांत शर्मा, 2. श्री जयप्रकाष शर्मा, एवं 3. श्री श्याम शर्मा स्वर्गवास के पष्चात श्री भोलानाथ शर्मा के द्वितीय पुत्र श्री गोपाल शर्मा मंदिर की व्यवस्था, देखभाल आदि कर रहे थें। इसी बीच ग्रामीणों द्वारा उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक स्वयंभू कमिटि बनाकर के देखभाल किया जा रहा है, क्योंकि मंदिर की भूमि पर लगभग 10 अस्थायी दुकाने खोल कर लोगों के द्वारा पैसा वसूल किया जा रहा था और मंदिर की दीवार भी गिर चुकी थी, जिसे ग्रामीणों के चंदे आदि के सहयोग से निर्मित कराया गया और ग्रामीणों द्वारा दाखिल प्रार्थना-पत्र एवं दस्तावेजों पर विचार कर पर्षद में उक्त मंदिर का निबंधन किया गया। मंदिर गुम्बजनुमा है, उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु ग्रामीणों के द्वारा एक बैठक दिनांक 15/12/2022 को करके 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया। पर्षद की सूनवाई दिनांक- 15.06.2023 में श्री विरंची मिस्त्री के वंषज श्री गोपाल शर्मा तथा उनके पुत्र श्री दिलीप कुमार शर्मा भी उपस्थित हुए और सभी का एक स्वर में मंतव्य था कि मंदिर का विकास हो और मंदिर में अवैध रूप से जो अतिक्रमण है, उसे खाली करायी जाए तथा यह भी इच्छा जाहिर किया कि मंदिर में एक विवाह भवन बनायी जाए, जिससे कि समस्त ग्रामीणों को उसका लाभ मिल सके, उस संबंध में श्री गोपाल शर्मा का कथन था कि लगभग 5,00,000/-रू0 मंदिर की आय से बैंक खाते में जमा है और उक्त खाता श्री भोला शर्मा और सुजीत शर्मा द्वारा संचालित किया जाता है तथा निर्माण प्रारंभ होने पर बहुत से ग्रामीणों तथा कुछ जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी राषि प्राप्त होने की संभावना है। विरंची मिस्त्री के वंषज श्री गोपाल शर्मा का कथन है कि न्यास समिति में उनको भी स्थान दिया जाए और सभी लोग मिल कर के उक्त मंदिर का विकास आदि का कार्य करेंगे।

अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये सूनवाई दिनांक-15.06.2023 में इस न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु सभी पक्षों की सहमति तथा विचार-विमर्ष के उपरान्त अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया और समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने तथा चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर कार्यकाल का समय विस्तार किया जा सकता है। स्थानीय व्यक्ति श्री सिकन्दर कुमार, पिता- श्री बालेष्वर शर्मा, ग्राम- जकरपुरा, सूर्यगढ़ा, जिला- लखीसराय, को संरक्षक के रूप में नामित किया जाता है।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 बाबा विष्वकर्मा मंदिरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 बाबा विष्वकर्मा मंदिरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 बाबा विष्वकर्मा मंदिरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।49 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ/मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. न्यास समिति/न्यासधारी/सेवायत/महंत (जहाँ जो हो)को मंदिर/मठ/धर्मषाला/ ठाकुरवाड़ी में किसी भी व्यक्ति द्वारा सम्पन्न किये जानेवाले विवाह का विवाह प्रमाण-पत्र देने का अधिकार नहीं हैं। यदि विवाह का कोई प्रमाण-पत्र उक्त संस्था या व्यक्ति द्वारा दिया जाता है तो उनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री राजेन्द्र प्र0 वर्मा, पिता-स्व0 दरबारी प्र0 वर्मा - अध्यक्ष सा0- किरणपुर, मैदनीचौकी, सूर्यगढ़ा।

2. श्रीमती सीता देवी, पति -स्व0 श्याम प्रकाष शर्मा - उपाध्यक्ष सा0- सलेमपुर, सूर्यगढ़ा। 3. श्री गोपाल शर्मा, पिता-स्व0 भोला शर्मा - सचिव सा0- सलेमपुर, सूर्यगढ़ा। 4. श्री भोला शर्मा, पिता-स्व0 विरंची शर्मा - कोषाध्यक्ष सा0- टाल वंषीपुर, मनिकपुर, सूर्यगढ़ा। 5. श्री राजन कुमार शर्मा, पिता- स्व0 रतन लाल शर्मा - सह कोषाध्यक्ष सा0- सलेमपुर, सूर्यगढ़ा। 6. श्री गरीबनंदन शर्मा, पिता-श्री सुकर शर्मा - सदस्य सा0- निरपुर, सूर्यगढ़ा। 7. श्री विनोद शर्मा, पिता-श्री नारायण शर्मा - सदस्य सा0-मुष्तफापुर, मानिकपुर सूर्यगढ़ा। 8. श्री संजय शर्मा, पिता-स्व0 वासुदेव शर्मा - सदस्य सा0- उरैन, कजरा, सूर्यगढा़। 9. श्री अंगद शर्मा, पिता-सुक्कर मिस्त्री सदस्य सा0- खावा, मैदनी चौकी, सूर्यगढ़ा।50 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 10. श्री जर्नादन शर्मा, पिता-श्री वालो शर्मा सदस्य

सा0- टोलरपुर, मानिकपुर, सूर्यगढ़ा। 11. श्री रामाधार शर्मा, पिता- श्याम चरन शर्मा सदस्य सा0- भवानीपुर, मानिकपुर, सूर्यगढ़ा। सभी थानाअंचल-सूर्यगढ़ा, जिला - लखीसराय। पिन- 811106

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा।न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने तथा चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर कार्यकाल बढ़ाये जाने पर विचार किया जा सकता है। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 बाबा विष्वकर्मा मंदिरा, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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19 जुलाई 2023

सं0 1341--श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-चनौरागंज, जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-264 है।

समय-समय पर उक्त मंदिर की देखभाल न्यासधारियों द्वारा की जाती रही है। पूर्व में उक्त मठ की देखभाल न्यासधारी महंत राधाचरण दास द्वारा की जाती रही, परन्तु उनके विरूद्ध ग्रामीणों द्वारा लगातार षिकायत की जा रही थी कि मठ की भूमि पर बगीचों के फलों को विक्रय कर उसको निजी लाभ में लिया जा रहा है तथा कुछ पेड़ो को काटवा कर बेच दिया है और पर्षद में नियमित आय-विवरणी न दाखिल करने के कारण उनसेे स्पष्टीकरण की मांग की गई, परन्तु कोई स्पष्टीकरण नही दिये जाने के कारण पर्षद के आदेष दिनांक-04.06.1997 द्वारा उक्त श्री राधाचरण दास को न्यासधारी के पद से हटाते हुए अधिनियम की धारा-33 के अन्र्तगत अनुमंडल पदाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। तद्‌ोपरान्त श्री राधाचरण दास द्वारा पर्षद में प्रार्थना-पत्र दिया गया कि वह पर्षद में सभी आदेषों और नियमों को पालन करने के लिए तैयार है और उन्हें पुनः उक्त मठ का न्यासधारी बनाया जाए और अनुमंडल पदाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाये जाने का निर्णय वापस लिया जाए।

उक्त आय-विवरणी बजट आदि दाखिल करने के उपरान्त तथा श्री राधाचरण दास द्वारा एक ह0 वाद 25/97 झंझारपुर न्यायालय में दाखिल किया गया, उसे पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर वापस लिये जाने का आष्वासन दिया तथा उनके द्वारा दिये गये शपथ-पत्र मुकदमा संबंधी आवेदन तथा बकाया पर्षद शुल्क आदि जमा किए जाने, पर विचार करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाये जाने संबंधी आदेष दिनांक-01.12.1998 को वापस ले लिया गया और पुनः राधाचरण दास को अस्थायी न्यासधारी के रूप में मान्यता दी गयी। तद्‌नुसार उक्त आदेष पर्षदीय पत्रांक-2533, दिनांक-08.12.1998 जारी किया गया।

उक्त आदेष को याचीगण श्री गोविन्द दास द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में CWJC NO-11484/1998 दाखिल कर प्रष्नगत किया। मा0 उच्च न्यायालय द्वारा उक्त याचिका का निष्तारण दिनांक-27.06.2000 को किया गया और यह मत व्यक्त किया कि पक्षों के बीच वाद तथ्य संंबंधी है, जो केवल दीवानी न्यायालय द्वारा साक्ष्य के आधार पर निर्णीत किया जा सकता है।

अतः याची को दीवानी न्यायालय में अपने अनुतोष की मांग हेतु दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई। इसी बीच पर्षद में राधा चरण दास द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि पर्षद के एक पत्र पत्रांक-2876, दिनांक-13.02.2009 द्वारा उन्हें न्यासधारी नियुक्त किया गया था, और उसी आधार पर अपने को न्यासधारी का दावा करते हैं, परन्तु उक्त पत्र के संबंध में न तो किसी प्रकार का कोई आदेष संचिका पर है, ना उल्लेखित धारा में किसी को न्यासधारी बनाए जाने का प्रावधान है। इसी बीच श्री चन्द्र मोहन दास द्वारा वर्ष-2010 में तत्कालीन न्यासधारी श्री राधा चरण दास पर आरोप लगाया गया कि मठ की जमीन का मुआवजा राषि प्राप्त करने का षड्‌यंत्र रच रहे हैं, जिसपर रोक लगायी जाय। इसी बीच दिनांक-02.08.2011 को महंत राधा चरण दास का स्वर्गवास हो गया। तदोपरान्त श्री गोविन्द दास द्वारा स्वयं को महंत बनाने का प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसमें श्री चन्द्र मोहन द्वारा अपनी आपत्ती दाखिल की गई और स्वयं को उपमहंत घोषित करने का प्रार्थना-पत्र दिया। दोनों पक्षों के दावे की सुनवाई लगातर पर्षद में चलती रही, सभी पक्षों को पर्याप्त रूप से सुनने का अवसर दिये जाने के पष्चात्‌ दिनांक-07.09.2017 द्वारा यह निर्णय लिया गया कि मा0 उच्च न्यायालय द्वारा लिए गये निर्णय के आलोक में याचीगण को अपने दावे के संबंध में दीवानी न्यायालय में अपना वाद दाखिल करना चाहिए।

उक्त आदेष के आलोक में श्री गोविन्द दास द्वारा दीवानी वाद-202/2018 दाखिल किया गया। वर्ष-2017 में श्री चन्द्र मोहन दास द्वारा पर्षद शुल्क के रूप में कुछ राषि जमा करने के लिए प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसमें इस शर्त को स्वीकार किया गया कि शुल्क जमा का प्रभाव पक्षों पर किसी भी प्रकार से नहीं पड़ेगा और यह भी सूचना दी गई कि कुछ व्यक्तियों द्वारा मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है।51 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 अतः पर्षद द्वारा श्री चन्द्र मोहन दास को मंदिर की सुरक्षा हेतु अतिक्रमण वाद लाने की अनुमति दी गई और उनके न्यासधारी संबंधी दावे के संबंध में यह स्पष्ट किया गया कि पर्षद के आदेष दिनांक-07.09.2017 के आलोक में सक्षम न्यायालय का निर्णय आने पर ही कोई निर्णय पारित किया जा सकेगा और पर्षद के आदेष दिनांक-25.10.2019 में यह निर्णय लिया गया कि महंत पद का विवाद का निकट भविष्य में निष्तारण की उम्मीद नहीं है।

अतः उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु 11 अच्छे चरित्र के व्यक्तियाें के नाम की मांग एक न्यास समिति गठन किये जाने हेतु की गई। पर्षद द्वारा लिए गए उपरोक्त निर्णय के आलोक में दिनांक-04.08.2021 को पुनः सुनवाई की गई। उक्त तिथि पर भी यह तथ्य पर्षद के संज्ञान में आया कि दीवानी मुकदमा अभी विचाराधीन है और श्री चन्द्रमोहन दास का स्वर्गवास भी दिनांक-20.04.2021 को हो गया है तथा श्री अरविन्द झा द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि वे श्री चन्द्रमोहन दास के उत्तराधिकारी है और प्रार्थी के पत्र में उक्त श्री चन्द्रमोहन दास द्वारा एक शपथ-पत्र दिनांक-17.02.2021 को निष्पादित दाखिल किया है तथा प्रार्थना किया कि महंती के मुकदमें में पक्षकार बनने तथा अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध मुकदमा दाखिल करने आदि का अधिकार जैसे श्री चन्द्रमोहन दास को दिया गया उन्हें भी दिया जाए।

इस संबंध में उन्हें विभिन्न पदाधिकारियों के यहाँँ प्रार्थना-पत्र देने और वाद दाखिल करने के लिए स्वीकृति किया गया, क्योंकि अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने हेतु नहीं प्राप्त हुआ तथा श्री गोविन्द दास को भी सूचना भेजकर अपना पक्ष रखने का निर्देष दिया गया।

श्री गोविन्द दास द्वारा दिनांक-16.11.2022 को उपस्थित होकर समय की मांग की गई और कथन किया गया कि उनके द्वारा जो वाद 202/2018 दाखिल किया गया, उसे वापस ले लेगें और श्री अरविन्द झा को भी अपने प्रार्थना-पत्र के दावे के संबंध में अंतिम अवसर दिया गया साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी से मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु शीघ्र नामों का प्रस्ताव की मांग हेतु स्मार पत्र लिखा गया।

पर्षद के उपरोक्त आदेष के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा उनके पत्रांक-589/2023 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और चूॅकि महंती के संंबंध में अभी कोई निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा नहीं आया है और उक्त विवाद लगभग वर्ष-2000 से विचाराधीन है, जिसका निकट भविष्य में निर्णय आने की सम्भावना भी नहीं है। अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये पर्षद की सुनवाई दिनांक- 05.06.2023 को इस न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु और मंदिर की भूमि की बंदोबस्ती तथा उसकी आय को सुरक्षित रखने हेतु प्रस्तावित नामों की अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गयाऔर गठित न्यास समिति को ही मंदिर की भूमि के संबंध में बंदोबस्ती, किराया, वसूली आदि का अधिकार रहेगा, परन्तु मंदिर की भूमि का किसी प्रकार से क्रय-विक्रय, रेहन, बंधक तथा 03 वर्ष से अधिक की बंदोबस्ती करने के लिए अधिकृत नहीं रहेगी।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-चनौरागंज, जिला-मधुबनी,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-चनौरागंज, जिला-मधुबनी,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-चनौरागंज, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।52 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अनुमंडल पदाधिकारी, झंझारपुर - अध्यक्ष (पदेन) 02. श्री राज कुमार झा - सचिव 03. श्री गंगाराम महतो - कोषाध्यक्ष 04. श्री महेन्द्र झा - सदस्य 05. श्री मुरारी कुमार - सदस्य 06. श्री चन्द्र मंडल - सदस्य 07. श्री बौएलाल मंडल - सदस्य 08. श्री राम कृष्ण मिश्र - सदस्य 09. श्री जयराम यादव - सदस्य 10. श्री इन्द्रदेव ठाकुर - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, झंझारपुर - सदस्य (पदेन) सभी का पता- ग्राम- चनौड़ा गोठ, पंचायत- चनौड़ागंज, थाना-झंझारपुर, जिला- मधुबनी। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-चनौरागंज, जिला-मधुबनी,''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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12 जुलाई 2023

सं0 1159--श्री नथूनी लाल धर्मषाला एवं शालीग्राम मंदिर, कचहरी रोड, जिला-खगड़िया, जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-3421 है।

उक्त धर्मषाला के लिए दिनांक-27.12.1943 को श्री नथूनी साह, पुत्र, होरील साह, पत्नी, दामोदरी कुमारी साह, तथा दिनांक-05.08.1947 को उक्त दामोदरी देवी, पत्नी बाबु नथूनी लाल साह द्वारा भी ठाकुरबाड़ी शालीग्राम स्थापित मंदिर के नाम सम्र्पण किया है, जिसपर सभी स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से एक धर्मषालें का निर्माण भी कराया गया। पूर्व में सम्र्पणकर्त्तागण स्व0 नथूनी साह एवं स्व0 दामोदरी देवी सेवायत के रूप में इसकी देखभाल करते थे और उनके स्वर्गवास के पष्चात्‌ अंचल पदाधिकारी खगड़िया को पर्षद के आदेष दिनांक-09.04.1988 के द्वारा अधिनियम की धारा 33 के अन्र्तगत न्यासधारी नियुक्त किया गया। इसी बीच विजय कुमार साह द्वारा एक फर्जी विलेख तैयार कर के मंदिर और53 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 धर्मषालें की सम्पति को हड़पने तथा स्थित दुकानदारों से किराए की वसूली प्रारंभ किया, जिस संबंध में मुख्य न्यायीक दण्डाधिकारी के समक्ष मंदिर के पूजारी श्री रघुनंदन दास द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट नालसी केस दर्ज कराया गया और उक्त विजय कुमार को भी पर्षद द्वारा नोटिस भेजकर उनका स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु वह कभी उपस्थित नहीं हुए। उक्त मंदिर और धर्मषालें की व्यवस्था हेतु पर्षद के आदेष दिनांक-29.11.1999 द्वारा श्री विनोद कुमार को अधिनियम की धारा 33 के अन्र्तगत अगले आदेष तक न्यासधारी नियुक्त किया गया तथा उन्हें मंदिर की भूमि, दुकानदारों से किराया, बंदोबस्ती आदि के लिए पूर्ण अधिकार दिए गए । उक्त अतिक्रमणकारी विजय कुमार द्वारा दीवानी न्यायालय में (बेदखली वाद) इवेक्षन शूट नं0-3/2001 पर्षद से नियुक्त न्यासधारी विनोद कुमार के विरूद्ध गलत तथ्यों के आधार पर दाखिल किया गया। जो सुनवाई पष्चात्‌ उक्त वाद दिनांक-20.09.2019 को खारिज करते हुए उनके सेवायत और निजी ट्र्रस्ट के दावे को भी अस्वीकार किया गया। इस बीच पर्षद द्वारा नियुक्त उक्त न्यासधारी विनोद कुमार का स्वर्गवास हो गया है और विजय कुमार साह द्वारा पुनः मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण कर विक्रय किए जाने और दुकानदारों सेवसूली प्राप्त की जा रही है कि षिकायत प्राप्त हुयी। इस संबंध में मंदिर की व्यवस्था हेतु जिला पदाधिकारी से 07 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नाम हेतु पर्षद के आदेष दिनांक-28.02.2023 के आलोक में पर्षद के पत्रांक-41, दिनांक-05.04.2023 भेजा गया, जो अभी तक अप्राप्त है। स्थानीय लोगों द्वारा दिनांक-09.04.2023 को एक आम सभा का आयोजन कर आम सभा के द्वारा 07 व्यक्तियों को न्यास समिति बनाए जाने के लिए नामों का प्रस्ताव दिया गया और प्रस्ताव के साथ सभी 07 व्यक्तियों के आधार कार्ड की प्रति भी संलग्न की गई।

अतः उक्त धर्मषाला व मंदिर की सुरक्षा हेतु मामले को और आगे लंबित रखना उचित प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि विजय कुमार साह अतिक्रमणकारी द्वारा अपने बाहू बल का प्रयोग करते हुए मंदिर और धर्मषालें पर लगातार अवैध रूप से अतिक्रमण करने तथा भूमि को बेचने और किराएदारों के किराया वसूली करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सक्षम न्यायालय के द्वारा अपने आदेष दिनांक-20.09.2019 जो बेदखली वाद-03/2001 में उक्त विजय कुमार के सभी दावे को निरस्त किया जा चुका है।

अतः इस मंदिर और धर्मषाला की सुरक्षा, व्यवस्था, प्रंबधन के लिए एक योजना का निरूपण करते हुए बैठक में प्रस्तावित नामों की निम्न न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है।

मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री नथूनी लाल धर्मषाला एवं शालीग्राम मंदिर, कचहरी रोड, जिला-खगड़िया,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री नथूनी लाल धर्मषाला एवं शालीग्राम मंदिर, कचहरी रोड, जिला-खगड़िया,'' योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री नथूनी लाल धर्मषाला एवं शालीग्राम मंदिर, कचहरी रोड, जिला-खगड़िया,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसी में) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष कम से कम संयुक्त 02 व्यक्तियों के हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों

के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा। 5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।54 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अंचल पदाधिकारी, खगड़िया - अध्यक्ष 02. श्री अरविन्द कुमार, अधिवक्ता, पिता-श्री सुरेन्द्र कुमार - उपाध्यक्ष पता- थाना रोड, पो0थानाजिला- खगड़िया। पिन-851204 03. श्री संजय कुमार गुप्ता, सेवा नि0 षिक्षक, पिता-श्री मनिक लाल गुप्ता - सचिव पता- ग्रामपो0- सन्हौली, थानाजिला- खगड़िया।पिन-851204 04. श्रीमती रेणुका देवी, पति-श्री अजित कुमार - कोषाध्यक्ष पता- वार्ड नं0- 19, हाजीपुर, पो0थानाजिला- खगड़िया। पिन- 851204 05. श्री नागेष्वर प्रसाद गुप्ता , पिता-श्री जागीष प्रसाद - सदस्य पता- पटेल नगर, हाजीपुर, दुर्गापुर, पो0थानाजिला- खगड़िया। पिन-851204 06. श्री मनोज कुमार, पिता-श्री देवनंदन प्रसाद - सदस्य पता - वार्ड नं0- 20, हाजीपुर, पो0थानाजिला- खगड़िया। पिन- 851204 07. श्री राकेष कुमार, पिता-श्री छवी चन्द्र प्रकाष - सदस्य पता- वार्ड नं0- 08, मार्रर, थानाजिला- खगड़िया। पिन- 851204 08. श्री विजय कुमार, पिता-श्री जयप्रकाष प्रसाद - सदस्य पता- ग्राम- षिवाला रोड, वार्ड नं0- 10, नगर परषिद, जिला- खगड़िया। पिन- 851204 09. थानाध्यक्ष, चित्रगुप्त नगर, जिला-खगड़िया - सदस्य न्यास समिति शीघ्र मंदिर के नाम से बैंक में एक खाता खोलेगी, जिसका संचालन अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जिसमें कम से कम 02 संयुक्त व्यक्तियों के हस्ताक्षर से होगा।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' श्री नथूनी लाल धर्मषाला एवं शालीग्राम मंदिर, कचहरी रोड, जिला-खगड़िया,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- 1. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/ विक्रय/ पट्‌टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगातथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। 2. सभी दुकानदारों को निर्देष दिया जाता है कि न्यास समिति के सचिव या कोषाध्यक्ष को किराए की राषि देकर रसीद प्राप्त करे, या बैंक खाता खुलने के पष्चात्‌ बैंक में सीधे जमा करें, किसी अन्य व्यक्तियों को यदि किराए की राषि देते है, तों वह अवैध माना जाएगा और वह दुकानदार बिना किराए का मानते हुए बेखली की कार्यवाई की जाएगी।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।55 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

19 जुलाई 2023

सं0 1332--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, रहीमपुर दियारा, जिला- खगड़िया, जो पर्षदमें निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास वर्ष 1997 से है, जिसकी निबंधन सं0- 3296 है।

उक्त मठ में लगभग 66 एकड़ भूमि है, जिसमें से लगभग 37 एकड़ जमीन उपजाउ है। पूर्व में उक्त मंदिर की व्यवस्था, देखभाल वासुदेव दास द्वारा की जाती थी, जिनका स्वर्गवास वर्ष 2014 में हो गया है। उनके स्वर्गवास के पश्चात घनष्याम दास द्वारा उक्त मंदिर के न्यासधारी बनाये जाने के संबंध में एक प्रार्थना-पत्र दिया गया तथा वर्ष 2014-15 की आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी, परन्तु उक्त आय-व्यय विवरणी में पारदर्षिता नहीं है। कुछ ग्रामीण भी उपस्थित हुए थे, उनका कथन था कि मंदिर की खेती की भूमि से 3,00,000/- रू0 से अधिक की आय है और सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया कि मंदिर की किसी भी भूमि का विक्रय किसी भी व्यक्ति के द्वारा नहीं किया गया है। अतः महंत जी के साथ एवं सहयोग हेतु एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया, जिस पर महंत जी द्वारा लिखित रूप से 04 अन्य व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया तथा ग्रामीणों द्वारा दिनांक 10.03.2023 को एक आमसभा की बैठक करके महंत जी द्वारा प्रस्तावित नामों के साथ 03 अन्य व्यक्तियों का नाम भी प्रस्तावित किया गया, जिस पर किसी की आपत्ति नहीं है, अतः महंत जी तथा ग्रामीणों द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है।

मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, रहीमपुर दियारा, जिला- खगड़िया,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, रहीमपुर दियारा, जिला- खगड़िया,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, रहीमपुर दियारा, जिला- खगड़िया,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपलब्ध करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।56 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. धनष्याम दास, चेला- बासुदेव दास, - संरक्षक सह पुजारी 2. श्री पृथ्वीराज यादव, उर्फ वल्लो, पिता- स्व0 सुखदेव यादव - अध्यक्ष 3. श्री हरीनंदन मंडल, पिता- स्व0 अनन्त मंडल, - सचिव 4. श्री जिमेदार प्र0 मंडल, पिता- स्व0 मानकी मंडल - कोषाध्यक्ष 5. श्री गौरी मंडल, पिता- स्व0 मुषो मंडल - सदस्य 6. श्री सावन कुमार - सदस्य 7. श्री सूरज कुमार - सदस्य

सभी का पता- रहीमपुर दियारा, पो0- मथार, जिला- खगड़िया।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, रहीमपुर दियारा, जिला-खगड़िया,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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14 जुलाई 2023

सं0 1209--श्री चैती दुर्गा मंदिर, बोधवन तालाब, जिला- जमुई, पर्षद से निबंधित न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4232 है। उक्त न्यास के संबंध में पर्षद द्वारा इसका निरीक्षण कराया गया है, जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि मंदिर मुख्य सड़क मार्ग के पष्चिम में अवस्थित है और उक्त मंदिर में जल की सुविधा के लिए बोरिंग, यात्री सेड, कुआं, दो पीपल का पेड़, पनषाला, एक तुलसी चौड़ा, झखराज बाबा का पिंड और जेनरेटर कक्ष निर्मित है और लगभग 35 अस्थायी रूप से दुकानें मंदिर के प्रागंण में है। उक्त मंदिर को पूर्व महाराज गिद्धौर स्व0 चन्द्रचुड़ सिंह ने खाता सं0- 01, खेसड़ा सं0- 26, रकबा- 67 डी0 जीमन श्री श्री 108 चैती दुर्गा मंदिर के नाम से बंदोबस्ती की, जिस पर एक विषाल मंदिर का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग (चंदे आदि) से कराया गया है। उक्त भूमि को कुछ फर्जी व्यक्तियों के द्वारा एक षड्‌यंत्र के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर दावा किया जाता रहा है, उस संबंध में एक स्व0 वाद सं0- 148/15 भी विचाराधीन है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मंदिर की 12 डी0 जमीन पर मसो0 कुमकुम देवी, पिता- स्व0 विजय साव, डॉ0 रामचन्द्र प्रसाद, पिता- भदेसर तांती, एवं श्रीमती उर्मिला देवी, पति- श्रीराम खेलावन तांती द्वारा लगभग 33 डी0 भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। चूंकि एक बार यदि कोई भूमि राजा-महाराजाओं द्वारा मंदिर के देवी-देवताओं के नाम दान कर दी जाती है तो उस भूमि पर उस दानकर्ता या उस परिवार के किसी व्यक्ति का किसी प्रकार का कोई भी अधिकार नहीं रह जाता है और यदि इस संबंध में कोई दस्तावेज हो तो प्रारंभ से हीं शुन्य और अप्रभावी होता है। उक्त मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु अंचलाधिकारी के माध्यम से दिनांक- 13.09.2017 को 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ जिसका चरित्र सत्यापन भी संबंधित थाने से प्राप्त हो गया है और उक्त प्रस्तावित न्यास समिति पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति या आरोप भी किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा दाखिल नहीं की गयी है। अतः ऐसी परिस्थिति में पर्षद के आदेष दिनांक- 14.06.2023 के आलोक उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए एक न्यास समिति का गठन 05 वर्ष के लिए किया जाता है।

मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री चैती दुर्गा मंदिर, बोधवन तालाब, जिला- जमुई,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।57 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री चैती दुर्गा मंदिर, बोधवन तालाब, जिला- जमुई,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री चैती दुर्गा मंदिर, बोधवन तालाब, जिला- जमुई,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री महेष प्रसाद, पिता- स्व0 शुकदेव प्र0 केषरी - अध्यक्ष।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

2. अंचलाधिकारी, जमुई, जिला- जमुई - उपाध्यक्ष। 3. श्री कृष्णा यादव, पिता- श्री गुलाम यादव - सचिव।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

4. श्री प्रमोद साह, पिता- श्री हरी साह - कोषाध्यक्ष।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

5. श्री अरविंद प्रसाद साह, पिता- श्री बालेष्वर साह - सदस्य।

पता- ग्राम- इन्द्रपे वोरार, पो0थानाजिला- जमुई।

6. श्री कैलाष साह, पिता- श्री महावीर साह - सदस्य।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।58 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 7. श्री अरूण कुमार साह, पिता- स्व0 बैद्यनाथ साह - सदस्य।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

8. श्री सिधेष्वर पाल, पिता- स्व0 ढको पाल - सदस्य।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

9. श्री शंकर विष्वकर्मा, पिता- श्री गणेष विष्वकर्मा - सदस्य।

पता- ग्रामपो0थानाजिला- जमुई।

10. श्री सतीष सिंह, पिता- स्व0 बालेष्वर सिंह - सदस्य।

पता- ग्राम- इन्द्रपे वोरार, पो0थानाजिला- जमुई।

11. श्री मनोज कुमार वर्मा, पिता- श्री राधेष्याम स्वर्णकार - सदस्य।

पता- ग्राम- इन्द्रपे वोरार, पो0थानाजिला- जमुई।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' श्री चैती दुर्गा मंदिर, बोधवन तालाब, जिला- जमुई,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- 1. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/ विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

2. इस संबंध में गठित न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि बि0 हि0 धा0 न्यायाधिकारण के समक्ष उपरोक्त व्यक्तियों के विरूद्ध अतिक्रमणवाद दाखिल करें।

3. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि अधिनियम की धारा 51 के तहत मंदिर के प्रांगण में अस्थायी रूप से दुकान कर रहे व्यक्तियों का समुचित दर पर किराया निर्धारित की जाए।

4. म्ांदिर की आय बढ़ाने हेतु समिति पर्षद से अनुमति प्राप्त कर कुछ दुकानों का निर्माण करना चाहते है तो कर सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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19 जुलाई 2023

सं0 1334--कबीर पंथी मठ, तेघरा, जिला- बेगुसराय, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 3270 है।

इस न्यास की व्यवस्था हेतु अनुमंडल पदाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी पर्षद के आदेष दिनांक- 01.03.2023 द्वारा बनाया गया था और उन्हें नये सिरे से किराया निर्धारित करने तथा खेती और मकान की भूमि की बंदोबस्ती आदि करने का निर्देष दिया गया था, इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा अपने ज्ञापांक- 401 दिनांक- 11.04.2023 के द्वारा 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में दिया गया, जिसमें 07 प्रषासनिक पदाधिकारी है। आज उपस्थित आचार्य दीप नारायण दास द्वारा सूचना दी गयी कि अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा मंदिर की भूमि पर व्यवसाय कर रहे सभी व्यक्तियों के नामों की मांग तथा क्या किराया की राषि निर्धारित है, मांगी गयी है, जो दिनांक- 19.05.2023 को उन्हें उपलब्ध करा दी गयी है तथा श्री ब्रह्मदेव महतों, पुत्र- स्व0 दीप नारायण महतों जो लगभग 02 वर्षो से उक्त कबीर मठ से जुड़े हुए है।

उपस्थित दीप नारायण द्वारा सेवादार के रूप में अंगद कुमार के नाम का प्रस्ताव दिया गया है, अतः उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण योजना करते हुए अस्थायी रूप से निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है। मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''कबीर पंथी मठ, तेघरा, जिला-बेगुसराय,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीर पंथी मठ, तेघरा, जिला- बेगुसराय, ''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कबीर पंथी मठ, तेघरा, जिला- बेगुसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।59 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपलब्ध करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, तेघरा, बेगुसराय - अध्यक्ष। 2. श्री विजय कुमार दास, चेला दीप नारायण दास - संत एवं सचिव। 3. श्री दीप नारायण दास, चेला स्व0 मं0 ठाकुर दास - कोषाध्यक्ष। 4. श्री अंगद कुमार यादव, पिता- स्व0 वैजनाथ यादव - सदस्य। 5. श्री ब्रह्मदेव महतों, पिता- स्व0 दीप नारायण महतों - सदस्य।

पता- ग्राम- हवासपुर, थाना- मंसुरचक जिला- बेगुसराय।

6. थानाध्यक्ष, तेघरा, बेगुसराय - सदस्य।

क्रमांक-2, 3, 4 का पता- कबीर मठ, ग्रामपो0- तेघड़ा, जिला- बेगुसराय।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''कबीर पंथी मठ, तेघरा, जिला- बेगुसराय,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

समिति शीघ्र मठ के नाम से एक खाता खोलेगी, जिसका संचालन अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी, तथा कोषाध्यक्ष के नाम से संचालित किया जायेगा तथा अनुमंडल पदाधिकारी को मठ की भूमि पर व्यवसाय कर रहे व्यक्तियों के साथ बैठक करके, नयी किराया राषि निर्धारित करने, जिससे कि उक्त मठ का विकास हो सकें तथा खुली डाक द्वारा मठ की भूमि की बंदोबस्ती एवं बागान की बंदोबस्ती करेंगे।60 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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24 अगस्त 2023

सं0 1959--श्री महावीर मंदिर, बर्तन चौक, के॰ पी॰ रोड, जिला-गया,एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इस मंदिर में मो॰ सहोदर कुंवर द्वारा निबंधित समपर्णनामा दिनांक- 08/03/1901 द्वारा अपनी संपत्ति को भगवान के नाम से दान किया। कालांतर में उक्त मंदिर की व्यवस्था उचित रूप से नहीं होने के कारण पर्षदीय ज्ञापांक-1957, दिनांक- 27/01/1998 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया है।

उपरोक्त न्यास समिति द्वारा समय-समय पर आय-व्यय विवरणी भी पर्षद में प्रस्तुत की जाती रही। पुनः दिनांक- 31/12/2007 को अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में 05 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। इसी बीच मंदिर की संपत्ति को हड़पने के उद्देष्य से श्री सीताराम केषरी व चार अन्य व्यक्तियों द्वारा एक स्वत्व वाद सं॰- 78/20 मा॰ न्यायालय में लाया गया। जो वादीगण के दावा को न्यायालय के आदेष दिनांक- 31/08/1985 द्वारा खारिज किया गया, जिसके विरूद्ध उक्त व्यक्तियों द्वारा स्वत्व अपील वाद सं॰- 186/1992 लाया गया। उक्त अपील वाद मा॰ न्यायालय द्वारा दिनांक- 07/07/1992 को खारिज कर दी गयी और समर्पणनामा में वर्णित भूमि, जिसपर दो कोठरी, दो तल का मकान भी मंदिर का ही भाग माना गया। पुनः सरिता देवी व उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा मा॰ उच्च न्यायालय में द्वितीय अपील वाद सं॰- 247/92 लाया गया। वह भी सुनवायी के उपरांत दिनांक- 27/10/2019 को निरस्त हो चुकी हैै।

उपरोक्त सभी निर्णयों से स्पष्ट है कि सहोदर कुंवर द्वारा पुराना हो॰ सं॰- 49, 50, नया हो॰ सं॰- 402 (क) (ख), पर मंदिर की स्थापना करके श्री राम लक्ष्मण जानकी की प्रतिमा को स्थापित किया गया। मंदिर के दक्षिण भाग में दो तल का भवन एवं कोठरी का निर्माण कर मंदिर को समर्पित कर दी। पर्षद को स्थानीय नागरिकों द्वारा दिनांक- 20/06/2023 को एक आम सभा का आयोजन कर 05 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ।

उपरोक्त परिस्थिति में मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु प्रस्तावित की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु गठित की जाती है तथा कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विस्तार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-18/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री महावीर मंदिर, बर्तन चौक, के॰ पी॰ रोड, जिला- गया के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री महावीर मंदिर न्यास योजना, बर्तन चौक, के॰ पी॰ रोड, जिला- गया''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री महावीर मंदिर न्यास समिति, बर्तन चौक, के॰ पी॰ रोड, जिला- गया''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।61 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु गठित की जाती हैः-

1. डी॰सी॰एल॰आर॰, गया - अध्यक्ष 2. श्रीमुकेष कुमार पिता- स्व॰ अजय कुमार, बर्तन चौक, गया -सचिव 3. श्री अजय कुमार केषरी पिता- स्व॰ रामेष्वर प्रसाद, बर्तन चौक, गया -कोषाध्यक्ष 4. श्री दिवाकर शर्मा पिता- श्री श्याम सुन्दर शर्मा, बर्तन चौक, गया -सदस्य 5. श्री मनोज कुमार पिता- स्व॰ रामजी प्रसाद, बर्तन चौक, गया - सदस्य 6. श्री राजीव गुप्ता पिता- श्री राजेन्द्र प्रसाद, बर्तन चौक, गया - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री महावीर मंदिर, बर्तन चौक, के॰ पी॰ रोड, जिला- गया''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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24 अगस्त 2023

सं0 1957--श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3999/09 है।

उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 854, दिनांक- 11/08/2012 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसमें एक सदस्य श्री नंदकिषोर प्रसाद के निधन के कारण श्री अषोक कुमार चंद्रवंषी को पर्षदीय आदेष दिनांक- 122, दिनांक- 13/04/2013 द्वारा सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

पर्षद को कार्यरत न्यास समिति द्वारा ग्यारह व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव दिनांक- 15/11/2019 की प्रति के साथ प्राप्त हुआ। स्थानीय नागरिकों द्वारा भी दिनांक- 17/08/2021 एक बैठक करके, ग्यारह व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया।

दोनों को सुनने के उपरांत यह परामर्ष दी गयी कि एक-दुसरे को सहयोग करते हुये मंदिर के विकास एवं जीर्णोद्धार हेतु कार्य करें, ताकि मंदिर का विकास एवं जीर्णोद्धार हो सके।

उपरोक्त परिस्थिति मेंमंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-13/04/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए62 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री महावीर मंदिर न्यास योजना, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री महावीर मंदिर न्यास समिति, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

19. उपरोक्त न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु गठित की जाती है। समिति का कार्यकाल संतोषजनक पाये जाने पर इसका अवधि विस्तार किया जायेगा।

20. न्यास स्थल पर जो सामुदायिक भवन हॉल है, उसकी व्यवस्था करने तथा विभिन्न कार्यों बुकिंग आदि का अधिकार न्यास समिति को रहेगा, जिसके रसीद एवं पंजी आदि के माध्यम से संधारित किया जायेगा। उसकी वार्षिक विवरणी भी समिति अपने समक्ष उपस्थापित करेगी।

21. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि दोनों अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध मा॰ उच्च न्यायालय में जो याचिका दाखिल की गयी है, उसमें नियमित रूप से अधिवक्ता से संपर्क कर शीघ्र निस्तारण करने का प्रयास करें,63 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 जिससे उक्त दोनों व्यक्तियों को मंदिर की भूमि पर स्थित दुकान खाली करायी जा सके और उस पर नये सिरे से अधिक-से-अधिक केवल तीन वर्ष के लिए बाजार मूल्य पर बंदोवस्ती करायी जा सके। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी, जिला- पटना - अध्यक्ष 2. श्रीउपेन्द्र कु॰ सिन्हा पिता- स्व॰ तारकेष्वर प्रसाद, हरनाहा टोला, पटना सिटी -कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री योगेष्वर त्रिवेदी पिता- गिरजा शंकर त्रिवेदी, हरनाहा टोला, पटना सिटी -उपाध्यक्ष 4. श्री अषोक कुमार, श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटना - सचिव 5. श्री उमाषंकर त्रिपाठी, श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटना - कोषाध्यक्ष 6. श्री भरत लाल पिता- स्व॰ राधे लाल, रानीपुर खिड़की, पटना सिटी, पटना - सदस्य 7. श्री प्रभात चंद्र सिंह, श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटना - सदस्य 8. श्री रंजीत प्रसाद पिता- स्व॰ लल्लू प्रसाद, हरनाहा टोला, पटना सिटी, पटना - सदस्य 9. श्रीविष्वनाथ प्रसाद, श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटना - सदस्य 10. श्री विनय कुमार पिता- योगेन्द्र प्रसाद, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला- पटना - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, खाजेकलां, जिला- पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री महावीर मंदिर, हरनाहा टोला, पटना सिटी, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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16 अगस्त 2023

सं0 1745--श्री उदासीन संगत, पोस्टथाना-फुलवारीषरीफ, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3226 है।

पुर्व में उक्त संगत की व्यवस्था स्थानीय पंचों के द्वारा की जाती थी। संगत की भूमि पर एक सरस्वती षिषु विद्या मंदिर भी संचालित होता आ रहा है। संगत में अभ्यागत, साधु-संतों का आदर-सत्कार की परम्परा रही है। पंचों की बैठक दिनांक- 11/04/1989 में संगत की आय बढ़ाने के उद्देष्य से संगत के भीतरी भाग में कटरा (दुकान) का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस न्यास के संबंध में वर्ष 1922 ई॰ में मंहत निष्चल दास एवं महंत निहाल दास ने अपनी संपुर्ण संपत्ति, संगत को समर्पित कर दी और ट्रस्ट का गठन कर इसकी रजिस्ट्री कर दी, जिससे ट्रस्ट, सक्षम रूप से संचालित होता रहे और तब से न्यासीगण नियमित रूप से इस न्यास का प्रबंधन कर रहे हैं। वर्ष 1995 में उक्त संगत को निबंधित करते हुये, न्यास समिति का गठन किया गया था। संगत की भूमि विद्यालय वर्ष 1984 से संचालित हो रहा है। समिति द्वारा जम्मू एण्ड कष्मीर बैंक में संगत के नाम से खाता का संचालन भी किया जा रहा है। संगत में हनुमानजी का मंदिर, पुर्व सटे भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी एवं माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित है।

इसी बीच श्री षिवजी प्रसाद द्वारा संगत, नानकषाही सिख सम्प्रदाय का है, ऐसा दावा प्रस्तुत किया गया। पर्षद द्वारा दोनों पक्षोें को विस्तारपुर्वक सुनने के उपरांत, दोनों पक्षों द्वारा विभिन्न दस्तावेज, ट्रस्टीनामा-डीड, वर्ष 1963, मा॰ उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णित वाद सं॰-1984 (2) एस॰सी॰सी॰, पृष्ठ संख्या-600, प्रितम दास महंत बनाम्‌ षिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंध कमिटि मेें प्रतिपादित सिद्धातों के आलोक में षिवजी प्रसाद के दावा को निरस्त करते हुये उदासीन संगत को हिन्दू धर्म के अन्तर्गत माना गया। तदोपरांत पर्षदीय अधिसूचना दिनांक-21/07/2015 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया।

न्यास समिति के अध्यक्ष ने समिति के कार्यकाल विस्तार हेतु एवं दिनांक- 06/09/2020 के आम सभा द्वारा नवीन न्यास समिति को मान्यता प्रदान करने का प्रार्थना-पत्र दिया।

दिनांक- 05/02/2021 को दयानंद मुनि द्वारा पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर कुछ दस्तावेज समर्पित किया गया। दयानंद मुनि को सुना गया। दयानंद मुनि द्वारा उदासीन अखाड़ा, भारत साधु समाज द्वारा महंत नियुक्ति पत्र, दिनांक- 01/12/2020 के चादर-पगड़ी फोटो समर्पित की गयी। दयानंद मुनि को अधिनियम की धारा- 33 के अन्तर्गत पर्षदीय आदेष दिनांक- 06/04/2021 द्वारा अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया।

नियुक्ति के पश्चात पर्षद के संज्ञान में यह तथ्य आया कि दयानंद मुनि संगत की भूमि पर संचालित सरस्वती विद्या मंदिर से 3,00,000/- रू॰ की राषि प्राप्त कर अपने व्यक्तिगत खाता में निजी उपयोग हेतु रख लिया गया। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी कि क्यों नहीं आपको न्यासधारी पद से उन्मुक्त कर दिया जाय? क्योंकि वर्ष 2020-21 की आय-व्यय विवरणी, जो पर्षद में समर्पित की गयी है, उसमें उक्त तीन लाख रू॰ की राषि का उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि उन्होंने अपने प्रार्थना-पत्र दिनांक- 28/05/2022 में स्वीकार किया है कि वर्ष 2020-21 ढ़ाई लाख रू॰ विद्यालय से प्राप्त किया है। इस बीच विद्यालय द्वारा सूचित किया गया कि दयानंद मुनि ने कुल 4,80,000/- रू॰ भुगतान प्राप्त किया64 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 है। इस राषि के संबंध में दयानंद मुनि से कि उक्त राषि कहां, जमा है, पृच्छा किये जाने पर सूचित किया है कि उक्त राषि उनके व्यक्तिगत खाता में जमा है।

श्री दयानंद मुनि द्वारा पर्षद के आदेष दिनांक- 03/02/2023 का पालन नहीं किया गया। इसी बीच पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि दयांनद द्वारा मठ का संचालन नहीं किया जा रहा है। कई-कई दिनों तक मठ बंद रहता है। इस पर दयानंद मुनि से पृच्छा की गयी। उनका कथन था कि जम्मु एण्ड कष्मीर बैंक के कर्मी हिंदी भाषा नहीं समझते हैं तथा पर्षद द्वारा 10 हजार रू॰ से अधिक की राषि की निकासी पर रोक लगायी गयी है, जिससे दिक्कत होती है। उनका स्पष्टीकरण को असंतोजनक पाते हुये निरस्त किया जाता है। दयानंद मुनि का कथन कि संगत की व्यवस्था प्रारंभ से ही साधु-संत करते हैं, यह भी संचिका पर उपलब्ध साक्ष्यों के विपरित है। संचिका पर उपलब्ध महंत आदि राम द्वारा निबंधित विलेख में स्थानीय 07 व्यक्तियों, जो विभिन्न जाति एवं संप्रदाय के थे, संगत की प्रबंधन हेतु न्यास समिति गठित की गयी। वह समिति लगातार कुछ संषोधनों के साथ कार्यरत रही। पर्षदीय ज्ञापांक-1905, दिनांक-30/06/1996 को प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में न्यास समिति का गठन किया गया। तदोपरांत दिनांक-21/07/2015 को पुर्व न्यास समिति एवं कुछ नये व्यक्तियों को सम्मिलित करते हुये ग्यारह व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया गया, जो स्पष्ट करता है कि विगत 60 वर्ष पुर्व से स्थानीय पंच न्यास समिति द्वारा संगत का प्रबंधन किया जा रहा है, न कि गुरू-षिष्य या साधु परम्परा द्वारा। उनका यह तर्क भी पोषणीय नहीें है।

दयानंद मुनि द्वारा महंत होने के संबंध में जो दस्तावेज समर्पित किये हैं, जिसमें प्रधान कार्यालय, प्रयागराज से निर्गत पत्रांक- 2322, दिनांक- 11/12/2022 को सत्यापन हेतु प्रमुख आचार्य, प्रधान कार्यालय, प्रयागराज को प्रेषित किया गया एवं पत्रांक- 2272, दिनांक- 16/11/2022 उदासीन प्रबंधन समिति, बिहार को प्रेषित किया गया था। पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि समर्पित दस्तावेज पर हस्ताक्षर संदिग्ध है। महंत विष्णु दास उुर्फ मौनी बाबा, श्री उदासीन महामण्डल प्रबंध समिति ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ऐसा कोई व्यक्ति महंत होने की अर्हता नहीं रखता है। यह भी लिखा गया कि उदासीन परम्परा में राष्ट्रीय धर्माचार्य बने बिना स्वयं को धर्माचार्य लिख रहे हैं, जो भ्रामक प्रतीत होता है। इसी प्रकार पंचायती अखाड़ा, प्रधान कार्यालय, प्रयागराज ने अपने पत्रांक- 52 में पर्षद के संदेह को सही बताया है। यह भी लिखा कि महंत महेष्वर दास व महंत रघु मुनि का हस्ताक्षर नाजायज व नकल किया गया है। मोहर भी कपट कर बनाया गया है। पत्रांक- 29/22 एवं 23/22, दिनांक- 18/20/2022 एक ही दिन में निर्गत किया गया हैै, जो अपने-आप में संदेह उत्पन्न करता है। यह भी लिखा गया कि आपके कार्यालय में जो पत्र भेजा गया है, वह पत्र बनावटी एवं जाली हैै। दयानंद मुनि का व्यवहार पर्षदीय आदेषों की जानबुझ कर अवहेलना, अध्यक्षीय कक्ष में उपस्थित होकर विडियो बनाना, अपषब्दों का प्रयोग करना, कार्यालय कर्मी के साथ बलप्रयोग करना, संचिका को अस्त-व्यस्त कर देना, ऐसे अनेंकों कार्य है, जो उनके व्यवहार पर प्रष्नचिन्ह्‌ लगाते हैं। ये परिस्थितियां स्पष्ट करती है कि ऐसे व्यक्ति को धार्मिक संस्थान में रखा जाना उचित नहीं है। उनके अस्थायी न्यासी से संबंधित कार्यकाल की समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है। अतः उन्हें उदासीन संगत, फुलवारी शरीफ, पटना के सभी कार्यों से विरमित किया जाता है।

पर्षद को मठ की व्यवस्था कर रही पुर्व न्यास समिति तथा स्थानीय लोगों द्वारा 11-11 व्यक्तियों के नामों की दो सूचियां प्राप्त है। इनमें प्रस्तावित नामों के कुछ सदस्यों का चरित्र-सत्यापन भी प्राप्त है।

उपरोक्त परिस्थिति में दोनों सूचियों में वर्णित नामों पर विचारोपरांत उदासीन संगतकी व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु एक न्यास समिति का गठनकरने का निर्णय लिया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर अवधि-विस्तार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-12/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री उदासीन संगत, पोस्टथाना- फुलवारीषरीफ, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री उदासीन संगत न्यास योजना, पोस्टथाना- फुलवारीषरीफ, जिला- पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री उदासीन संगत न्यास समिति, पोस्टथाना- फुलवारीषरीफ, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।65 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री संजीव चौरसिया पिता- श्री गंगा प्रसाद (मा॰ विधायक) - अध्यक्ष पता- मुण्दर साह कोल्ड स्टोर, खाजपुरा, पटना। (7004199740) 2. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, जिला- पटना -कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री गौरीषंकर प्रसाद पिता- स्व॰ रामकिषुन प्रसाद -उपाध्यक्ष पता- दक्षिणी संगत, फुलवारी शरीफ, पटना। (7079755369) 4. श्रीमति ममता शर्मा पति- श्री हरिराम शर्मा - उपाध्यक्ष पता- गुरहट्‌टा, खत्री लेन, पटना सिटी, पटना(7488277272) 5. श्री हरेन्द्र कुमार सिंह पिता- स्व॰ अनिल कुमार सिंह -सचिव पता-राष्ट्रीयगंज, रेलवे गुमटी के निकट, फुलवारीषरीफ, पटना। (7644871933) 6. श्री शंकर प्रसाद गुप्ता पिता- स्व॰ जगनारायण प्रसाद -कोषाध्यक्ष पता- नगीना नगर कॉलोनी, फुलवारीषरीफ, पटना। (9308373510) 7. श्री उपेन्द्र दास पिता- स्व॰ दुर्गा दास, रानीपुर पुल, फुलवारीषरीफ, पटना - सदस्य (8678838521) 8. श्री रवि प्रकाष पिता- श्री जयनंदन शर्मा , राष्ट्रीयगंज, फुलवारीषरीफ, पटना - सदस्य (7979785151) 9- श्री राजेष महतो पिता- स्व॰ योगेन्द्र महतो, संगत, फुलवारीषरीफ, पटना - सदस्य(9135232100) 10. श्री आषुतोष श्रीवास्तव, नया टोला, देवी स्थान, फुलवारीषरीफ, पटना - सदस्य (8084833491) 11. श्री तारकेष्वर उपाध्याय पिता- लक्ष्मण उपाध्याय - सदस्य पता- महावीर कैंसर संस्थान के निकट, फुलवारीषरीफ, पटना- 801505

उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री उदासीन संगत, पोस्टथाना- फुलवारीषरीफ, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।66 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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24 अगस्त 2023

सं0 1955--अटांव मठिया, ग्रामपोस्ट-अटांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3532 है।

वर्तमान में मठ की व्यवस्था श्री सुषील भारती एवं प्रबंधक श्री मनन सिंह द्वारा की जा रही है। पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि एक षडयंत्र के तहत मठ की भूमि, खाता- 169, नया खाता- 159/01 दिखाते हुये 07.05 एकड़ भूमि को अवैध रूप से मो॰ इब्राहिम के नाम से जमाबंदी कर दी गयी है। इस संबंध में अंचलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की गयी। अंचलाधिकारी ने प्रतिवेदित किया कि पंजी-II में अटांव मठिया के नाम से 35.05 एकड़ भूमि इन्द्राज है। आगे यह भी प्रतिवेदित किया कि 07.05 एकड़ भूमि की जमाबंदी मो॰ इब्राहिम के नाम से काटी गयी है, वो वैध नहीं है।

अधिनियम की धारा- 44 के अन्तर्गत पर्षद द्वारा किसी भी महंत / न्यासी को उक्त धार्मिक संस्था की भूमि को विक्रय / बंधक किये जाने की कोई अनुमति किसी को नहीं दी गयी है। उपरोक्त संपत्ति पर एकमात्र मठ का स्वामित्व है। उक्त भूमि का खाता- 169, खेसरा- 1492, 1031, 81, 259, 136, 197, 249, 1158, 7683, कुल एरिया- 7.05 एकड़ भूमि को मठ की अन्य भूमि के साथ मठ की ही भूमि है। मठ की व्यवस्था एवं प्रबंधन कर रहे एकमात्र न्यासियों को उसकी बंदोवस्ती करने का अधिकार है।

उपरोक्त परिस्थिति में मंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु सात सदस्यीय न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से करने का निर्णय लिया गया। उक्त न्यास समिति एक वर्ष या अंचलाधिकारी से नाम प्राप्त होने के उपरांत न्यास समिति गठित किये जाने तक कार्यरत रहेगी।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-13/04/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएअटांव मठिया, ग्रामपोस्ट-अटांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सरके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''अटांव मठिया न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-अटांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''अटांव मठिया न्यास समिति, ग्रामपोस्ट-अटांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।67 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचल पदाधिकारी, डुमरांव, जिला-बक्सर - अध्यक्ष 2. श्रीसुषील भारती -पुजारी / महंत 3. श्री मनन सिंह -सचिव 4. श्री ललन सिंह (से॰नि॰ भारतीय सेना) - कोषाध्यक्ष 5. श्री मनेन्द्र सिंह - सदस्य 6. श्री निवास शर्मा - सदस्य 7. श्री ज्ञान चन्द्र सिंह - सदस्य

क्रमांक- 2-7 का पता-''अटांव मठिया, ग्रामपोस्ट- अटांव, थाना- डुमरांव, जिला- बक्सर''। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''अटांव मठिया, ग्रामपोस्ट-अटांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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16 अगस्त 2023

सं0 1784--श्री बड़ी मठिया, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, जिला- बक्सर,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-238 है। उक्त न्यास के संबंध में विस्तारपुर्वक सुनवायी दिनांक-22/03/2022 एवं दिनांक- 17/08/2022 के उपरांत न्यास समिति का गठन किया गया था। उक्त आदेष के विरूद्ध माननीय जिला न्यायालय बक्सर में विविध वाद सं॰- 108/22 लाया गया, जो स्थानान्तरण के पश्चात माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीष चतुर्थ, बक्सर के समक्ष सुना गया, जिसमें माननीय न्यायालय ने दिनांक- 18/07/2023 को अपना निर्णय दिया है।

माननीय न्यायालय ने अधिनियम की धारा- 29 (1) तथा धारा- 32 (3) एवं सिविल न्यायालय की अन्र्तनिहित अधिकारिता के तहत अपने क्षेत्राधिकार को प्रयोग करते हुये माननीय उच्च न्यायालय द्वारा CWJC No.- 7303/2022 में पारित आदेष दिनांक- 24/06/2022 को उसकी मूल भावना के अनुरूप विधिक रूप से क्रियान्वित करने के लिए इस न्यास के संबंध में पर्षद द्वारा पुर्व में गठित की गयी सभी समितियों को भंग करते हुये नयी प्रबंधन समिति के गठन का आदेष दिया।

अतःमाननीय चतुर्थ जिला न्यायाधीष, बक्सर (बिहार) के द्वारा विविध वाद सं॰- 108/2022 में पारित आदेष दिनांक-18/07/2023 के आलोक मेंबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए''श्री बड़ी मठिया, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, जिला- बक्सर''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक प्रबंधन समिति का गठन किया जाता है।68 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री बड़ी मठिया प्रबंधन योजना, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, जिला- बक्सर''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित प्रबंधन समिति का नाम''श्री बड़ी मठिया प्रबंधन समिति, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, जिला- बक्सर''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. महंत श्री चन्द्रमा दास, आजीवन न्यास के एकल न्यासी बने रहेंगे। जबतक की विधिक प्रक्रिया अनुपालन करके उन्हें पर्षद या न्यायालय द्वारा उनके पद से हटाया नहीं जाय।

3. न्यास को प्राप्त होने वाली सभी आमदनी, जैसे दुकानों का किराया, कृषि भूमि की आय आदि को प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा प्राप्त करने के तीन दिनों के अंदर न्यास के नाम से किसी राष्ट्रीय बैंक में खोले गये खाता में जमा किया जायेगा। बैंक खाता का संचालन प्रबंधन समिति के सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। बैंक खाता में से निकासी करने या न्यास से संबंधित कोई नीतिगत निर्णय लेने से पहले प्रबंधन समिति द्वारा बहुमत से प्रस्ताव पारित इसे न्यास की कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज किया जायेगा। प्रबंधन समिति की समस्त कार्यवाहियां दर्ज करने के लिए एक कार्यवाही पुस्तक बनायी जायेगी, जो प्रबंधन समिति के सचिव द्वारा संधारित की जायेगी या रखी जायेगी। प्रबंधन समिति के बहुमत का आषय, समिति की बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से होगा और समिति की बैठक हेतु गणपूर्ति कम-से-कम चार सदस्यों की होगी। प्रबंधन समिति के सदस्यों के बीच ताल-मेल बनाये रखने एवं समिति की बैठकें बुलाने की जिम्मेवारी सामान्य रूप से प्रबंधन समिति की होगी। प्रत्येक तीन महिने में कम से कम एक बैठक अवष्य बुलायी जायेगी। कार्यकारी अध्यक्ष या सचिव द्वारा सभी सदस्यों को सम्य्‌क पुर्व सूचना देकर आवष्यकतानुसार कभी भी प्रबंधन समिति की आक्समिक बैठक बुलायी जायेगी। प्रत्येक बैठक की सूचना पर्षद को भी भेजी जायेगी, जिसमें पर्षद का कोई अधिकृत प्रतिनिधि भाग ले सकेगा, लेकिन उसे वोट करने का अधिकार नहीं होगा और न हीं पर्षद प्रतिनिधि की अनुपस्थिति के कारण बैठक स्थगित की जायेगी। 4. न्यास के दिन-प्रतिदिन के कार्य-कलापों के बारे में न्यास के महंत को निर्णय लेने का पुरा अधिकार होगा। इसके लिए प्रबंधन समिति की पुर्वानुमति की कोई आवष्यकता नहीं होगी। लेकिन कोई भी नीतिगत निर्णय, जैसे न्यास की कोई दुकान, या कृषि भूमि आदि को किराया पर उठाना, या न्यास की संपत्ति में से कोई निर्माण कार्य कराना, आदि के लिए प्रबंधन समिति द्वारा प्रस्ताव पारित करके ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा। न्यास की किसी संपत्ति को बेचने के लिए पर्षद की पुर्व लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा और इसके संबंध में अधिनियम के सभी प्रावधानों का अनुपालन सुनिष्चित की जायेगी।

5. न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियां, न्यास के नाम से ही धारित की जायेगी। न्यास सम्पत्तियों के स्वामित्व के संबंध में न्यास का शाष्वत उत्तराधिकार बना रहेगा। चूंकि महंत श्री चन्द्रमा दास ने न्यायालय के समक्ष स्वयं उपस्थित अपनी गवाही के क्रम में कहा है कि उनके स्वयं के नाम दर्ज संपत्तियां, जो न्यास के अधिकार में उस पर उनका कोई व्यक्तिगत दावा नहीं है। ऐसी सभी सम्पत्तियां, न्यास की सम्पत्तियां हैं। अतः इस बिंदु पर किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है। महंत श्री चन्द्रमा दास या पुर्व के महंत के नाम दर्ज सम्पत्तियाें का नामांतरण, न्यास के नाम से कराने में पर्षद द्वारा समुचित कदम उठाये जायेंगे।

6. न्यास की दुकानों एवं कृषि भूमि पर उठाये जाने के संबंध में प्रबंधन समिति द्वारा एक नियमवाली बनायी जायेगी। नियमावली बनाते समय इस बात ध्यान रखा जायेगा कि किसी एक व्यक्ति को कई-कई दुकानें किराया पर न दी जाय। दुकान किराया पर देने हेतु गरीबी रेखा के नीचे व्यक्तियों, विकलांगों, विधवा एवं बेसहारा व्यक्तियों को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। किसी भी किरायेदार को दुकान किराया पर देते समय अधिकतम छः माह के अग्रिम किराया के अतिरिक्त कोई पगड़ी की राषि नहीं वसुल की जायेगी।

7. प्रबंधन समिति इस बात का ध्यान रखेगी कि न्यास की शुद्ध आय का एक बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों की षिक्षा पर व्यय किया जाय। इस संबंध में प्रबंधन समिति एक नियमावली बनायेगी। उसी के अनुरूप हितधारियों या लाभार्थियों का चयन कर, योजनाओं को मुर्त्त रूप प्रदान किया जायेगा।

8. न्यास के महंत को उनके जीवन-निर्वाह हेतु कम से कम 20,000/- रू॰ प्रतिमाह प्रबंधन समिति द्वारा महंत जी के निजी खाता में हस्तांतरित किया जायेगा और समय-समय पर महंगाई को ध्यान में रखते हुये प्रबंधन समिति के प्रस्ताव को इस धनराषि में आवष्यकतानुसार वृद्धि की जा सकेगी। महंतजी को बीमारी की अवस्था में इलाज कराने के लिए किसी बड़ी राषि की आवष्यकता हो, तो इस संबंध में न्यास के खाता से समुचित धन राषि का भुगतान प्रबध्ांन समिति द्वारा महंतजी को किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त मंदिर में दान-चढ़ावा के रूप में प्राप्त की जाने वाली नकदी, न्यास के कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन एवं उनके प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के संबंध में, सभी निर्णय प्रबंधन समिति द्वारा प्रस्ताव पारित लिये जायेंगे। वर्तमान न्यास के कोष में जो धनराषि, महंतजी के निजी खाता में है, हस्तांतरित कराया जायेगा। इस बिंदु पर प्रबंधन समिति महंतजी से विचार-विमर्ष करेगी। प्रारंभिक स्तर पर महंतजी द्वारा जो भी धनराषि दी जायेगी, उसे प्रबंधन समिति द्वारा स्वीकार किया जायेगा और बाद में प्रबंधन समिति यदि आवष्यक समझे, तो इस बिंदु पर कोई जांच कर सकेगी।

9. प्रबंधन समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

10. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।69 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 11. प्रबंधन समिति न्यास में अवस्थित दुकानों एवं किरायेदारों से किराया वसुलने तथा मठ के अन्य कार्यों हेतु कर्मचारी की नियुक्ति विहित पारदर्षी प्रक्रिया का पालन करते हुये करेगी।

12. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को प्रबंधन समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

13. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

14. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

15. प्रबंधन समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

16. प्रबंधन समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

17. प्रबंधन समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 18. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना प्रबंधन समिति की असली कसौटी होगी। 19. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो उनके दायित्वों का निर्वहन कार्यकारी अयध्क्ष / उपाध्यक्ष करेंगे।

20. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

21. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / प्रबंधन समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

22. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

23. न्यास का संचालन बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 28 के प्रावधानों के अन्तर्गत किया जायेगा। माननीय चतुर्थ जिला न्यायाधीष, बक्सर (बिहार) के द्वारा विविध वाद सं॰- 108/2022 में पारित आदेष दिनांक- 18/07/2023 के आलोक में निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की प्रबंधन समिति गठित की जाती हैः-

1. जिला पदाधिकारी / जिला दण्डाधिकारी,बक्सर -पदेन अध्यक्ष 2. महंत श्री चन्द्रमा दास(श्री बड़ी मठिया, रामरेखा घाट, बक्सर के महंत (पदेन) -कार्यकारी अध्यक्ष (पदेन) पता-श्री बड़ी मठिया, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, बक्सर।

3. जिला विकास पदाधिकारी, बक्सर (पदेन) - उपाध्यक्ष 4. उप-मण्डल अधिकारी, बक्सर (पदेन) - सचिव 5. अंचलाधिकारी, बक्सर (पदेन) - कोषाध्यक्ष 6. लोक अभियोजक, जिला- बक्सर (पदेन) - सदस्य 7. सरकारी प्लीडर, जिला- बक्सर (पदेन) - सदस्य

उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेखों में ''श्री बड़ी मठिया, महर्षि विष्वामित्र आश्रम,रामरेखा घाट, जिला- बक्सर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-प्रबंधन समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा प्रबंधन समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।70 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

24 अगस्त 2023

सं0 1961--प्राचीन उदासीन संगत मठ, चौक षिकारपुर, पटना सिटी, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4639/22 है। उक्त न्यास के संबंध में ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 25/07/2007 को प्रार्थना-पत्र दिया गया कि यह एक प्राचीन संगत है। उसमें उनके गुरू की समाधी है। सभी ग्रामीण पुजा-आरती करते हैं। इस मठ के महंत श्री अर्पुवानंद थे, जिनका स्वर्गवास वर्ष 1992 में हो गया। उक्त स्थान पर एक फर्जी नन्दकिषोर दास स्वयं को पुर्व महंत का षिष्य बताते हुये मठ पर दावा करने लगा। पुनः स्थानीय ग्रामीणों ने दिनांक- 21/08/2012 को प्रार्थना-पत्र दिया कि नन्दकिषोर दास द्वारा फर्जी दस्तावेज के माध्यम से मठ की भूमि का विक्रय कर रहे हैं। उक्त मठ की भूमि पर एक अन्य व्यक्ति राम लगन नामक व्यक्ति स्वामित्व का दावा कर रहा है। इस संबंध में नन्दकिषोर दास को पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। नन्दकिषोर दास पर्षद में उपस्थित हुये।

संचिका विभिन्न तिथियों पर सुनी गयी तथा निबंधन समिति के समक्ष भी प्रस्तुत की गयी। निबंधन समिति ने न्यास की प्राचीनता एवं अन्य आधार पर न्यास को निबंधित किये जाने की अनुषंसा की एवं श्री राम लगन के निजी होने के दावा को निरस्त किया गया। स्थानीय लोगों द्वारा दिनांक- 08/01/2023 को एक आम सभा के माध्यम से 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु दिया गया एवं वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन भी संलग्न किया गया। किसी अन्य प्रकार का, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आरोप या दावा नहीं प्रस्तुत किया गया है।

उपरोक्त परिस्थिति में उक्त संगत की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विस्तार पर विचार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-13/04/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएप्राचीन उदासीन संगत मठ, चौक षिकारपुर, पटना सिटी, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''प्राचीन उदासीन संगत मठ न्यास योजना, चौक षिकारपुर, पटना सिटी, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''प्राचीन उदासीन संगत मठ न्यास समिति, चौक षिकारपुर, पटना सिटी, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।71 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री रमेन्द्र सिन्हा उर्फ कुन्दन कुमार सिन्हा - अध्यक्ष पिता- सच्चिदानंद सिन्हा, निवासी- बाघ साधो राम, मोटा कुआँ, चौक, पटना सिटी, पटना- 09 2. श्री संतोष सिंह -सचिव पिता- लक्ष्मी नारायण सिंह, चौक षिकारपुर, नालापुर, नयी गली, पटना सिटी, पटना- 09

3. श्री गजेन्द्र प्रसाद -कोषाध्यक्ष पिता- सुरेष प्रसाद, लाल इमली, लाल फाटक, पटना सिटी, पटना- 09

4. श्री दीपक कुमार - सदस्य पिता- गोपी कृष्ण साह, लाज इमली, गौरैया स्थान, पटना सिटी, पटना- 09

5. श्री सोनु कुमार चौधरी - सदस्य पिता- जगदीष चौधरी, चौक षिकारपुर, नालापर, पटना सिटी, पटना- 09

6. श्री प्रकाषकुमार सिन्हा - सदस्य पिता- स्व॰ अरूण कुमार सिन्हा, लाल इमली, मोटा कुआँ के पास, पटना सिटी, पटना- 09

7. श्री अजीत सिंह - सदस्य पिता- स्व॰ भागवत नारायण सिंह, चौक षिकारपुर, नालापर, नयी गली, पटना सिटी, पटना- 09 8. श्री मुन्ना कुमार - सदस्य पिता- स्व॰ सुखदेव तांती, चौक षिकारपुर, नालापर, आरा मषीन के पास, पटना सिटी, पटना- 09 9. श्री रोहन कुमार - सदस्य पिता-सिद्धु साव, दुंदी बाजार, नालापर, पटना सिटी, पटना- 09

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''प्राचीन उदासीन संगत मठ, चौक षिकारपुर, पटना सिटी, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय/ पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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17 अगस्त 2023

सं0 1808--श्री महादेव स्थान, मोहल्लापोस्टथाना-मनेर, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4527/20 है।

उक्त मंदिर मेंं थाना नं॰- 34, खाता- 496, खेसरा- 730 एवं खाता- 480, खेसरा- 731 तथा 729 पर खतियान में रैयत के रूप में रामनाथ स्वामी के नाम का इन्द्राज है। वर्ष 1972 में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया था कि यह मंदिर सार्वजनिक है। सभी ग्रामीण पुजा-पाठ करते एवं दान-चढ़ावा करते हैं। यहां व्यापार के उद्देष्य से भी जमघट होता है। इसकी व्यवस्था हेतु एक समिति गठित की जाय, परंतु परिस्थितिवष कभी न्यास समिति का गठन नहीं किया जा सकता है। इस बीच दिनांक- 27/05/2019 को श्री कौषल किषोर द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि मंदिर 120 वर्ष पुराना है। इसमें सामुदायिक भवन एवं कुछ भूमि है।उपरोक्त आवेदन के आलोक में अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी तथा चरित्र-सत्यापन के उपरांत न्यास समिति का गठन आदेष दिनांक- 14/01/2021 को किया गया।72 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 समिति गठन के कुछ ही समय पश्चात, न्यास समिति के सदस्य आपस में अभद्र व्यवहार, आर्थिक दुरूपयोग की षिकायत प्राप्त होने लगी। इस पर दोनों पक्षों को विस्तारपुर्वक दिनांक- 02/11/21 एवं दिनांक- 05/01/22 सुना गया। परंतु पर्षद के अत्यधिक प्रयास के उपरांत भी समिति के सदस्यों का आपसी व्यवहार काफी आक्रामक, अभद्र पर्षद के समक्ष प्रकट हुआ।

अतः उपरोक्त आचरणों के कारण पर्षदीय आदेष दिनांक- 05/01/2022 द्वारा न्यास समिति को भंग करते हुये अनुमंडल पदाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी से 07 अच्छे, धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी, इस स्पष्ट निर्देष के साथ कि वर्तमान न्यास समिति के किसी भी सदस्य का नाम, प्रस्ताव में नहीं होना चाहिए।

उपरोक्त आदेष के अनुपालन में पर्षदीय पत्रांक- 299, दिनांक- 26/04/22 एवं दिनांक- 14/01/2022 को पत्र लिखा गया।उक्त पत्र के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 1221 द्वारा अंचलाधिकारी, मनेर द्वारा प्रस्तावित नामों को संलग्न करते हुये भेजा, जिसमें पुनः पुरानी समिति के कुछ नामों को जोड़ दिया गया।

उपरोक्त परिस्थिति में उन नामों पर विचार किया गया, जिनके उपर कोई आरोप नहीं है तथा मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठनकरने का निर्णय लिया जाता है।उक्त न्यास समिति में संरक्षक के पद पर प्रो॰ सूर्यदेव त्यागी, पुर्व विधान सभा सदस्य को मान्यता प्रदान की जाती है। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-07/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री महादेव स्थान, मोहल्लापोस्टथाना- मनेर, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री महादेव स्थान न्यास योजना, मोहल्लापोस्टथाना- मनेर, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री महादेव स्थान न्यास समिति, मोहल्लापोस्टथाना- मनेर, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास /73 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- प्रो॰ सूर्यदेव त्यागी(पुर्व विधान सभा सदस्य) - संरक्षक 1. अनुमंडल पदाधिकारी, दानापुर, जिला- पटना - अध्यक्ष 2. श्रीविद्याधर विनोद, मनेर, पटना -उपाध्यक्ष 3. श्री संजय कुमार सिंह, मनेर, पटना -सचिव 4. श्री उदय कुमार मेहता, मनेर, पटना -कोषाध्यक्ष 5. श्री अमोल बजाज, मनेर, पटना - सदस्य 6. श्री गोपाल सिंह, मनेर, पटना - सदस्य 7. श्री नागेन्द्र कुमार मेहता, मनेर, पटना - सदस्य 8. थानाध्यक्ष, मनेर, पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री महादेव स्थान, मोहल्लापोस्टथाना- मनेर, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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अधिसूचना

10 जून 2023

सं0 सं0को0-02/30/19-237--बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अधिनियम 2019 के अध्याय (vi) की धारा 33 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना एतद्‌ द्वारा प्रशासी विभाग के सम्पुष्टीकरण के अधीन रहते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (अध्यापक शिक्षा अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गमन, सम्बद्धता, मानदण्ड तथा प्रक्रिया) विनियमावली 2016 का संशोधन प्रषासी विभाग के पत्रांक-12/सम्बद्ध 12-02/2022-211, दिनांक 15.05.2023 के द्वारा प्राप्त हो चुका है। संषोधित विनियमसवली, 2023 का हिन्दी एवं अंग्रेजी वर्जन सर्वसाधारण को सूचित करने के लिए प्रकाषित किया जाता हैः-

आदेष से, (ह0 अस्पष्ट), सचिव। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अधिनियम 2019 के अध्याय (vi) की धारा 33 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना एतद्‌ द्वारा प्रशासी विभाग के सम्पुष्टीकरण के अधीन रहते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (अध्यापक शिक्षा अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गमन, सम्बद्धता, मानदण्ड तथा प्रक्रिया) विनियमावली 2016 का संशोधन करने के लिए निम्नांकित विनियमावली बनाती हैः- (i) यह विनियमावली बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (अध्यापक शिक्षा अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गमन, सम्बद्धता, मानदण्ड तथा प्रक्रिया) (संशोधन) विनियमावली 2023 कही जायेगी। (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (iii) यह अधिसूचना राजपत्र मेें प्रकाशन की तिथि से प्रवृत होगी।

(iv) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम- 3 का उपविनियम (iv) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।74 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (iv) राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ से डी0एल0एड0 कोर्स में नामांकन हेतु अतिरिक्त प्रवेश क्षमता संबंधी मान्यता प्राप्त होने के पूर्व अतिरिक्त प्रवेश क्षमता वृद्धि हेतु समिति से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना एवं मान्यता प्राप्त होने के उपरांत अतिरिक्त प्रवेश क्षमता की समिति से सम्बद्धता प्राप्त करना। अतिरिक्त प्रवेश क्षमता वृद्धि हेतु वही प्रक्रिया अपनायी जायेगी, जो नव सम्बद्धता हेतु अपनायी जाती है।

(i) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-5 का उपविनियम- (क) (i) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (क) (i) विनियम-4 के अधीन पात्र ऐसे संस्थान, जो अध्यापक शिक्षक कार्यक्रम के तहत्‌ डी0एल0एड0 कोर्स चलाने अथवा अतिरिक्त सीट वृद्धि के लिए इच्छुक है और इस हेतु उन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ से मान्यता हेतु आवेदन करना है, प्रोसेसिंग फीस और निर्धारित दस्तावेजों सहित समिति को आवेदन करेंगे।

(ii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-5 का उपविनियम-(क) (ii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (क) (ii) आवेदन में पूर्व से संचालित (यदि हो तो) कार्यक्रम/कोर्स का विवरण अन्यथा आवेदन के साथ D.El.Ed. कोर्स के अतिरिक्त किसी अन्य कोर्स हेतु मान्यता लेने संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌/विश्वविद्यालय/राज्य सरकार को समर्पित आवेदन की स्वहस्ताक्षरित छायाप्रति, भूमि एवं भवन से संबंधित अभिलेख/प्रमाण-पत्र जिससे यह सिद्ध हो सके कि भूमि का स्वामित्व संबंधित संस्था के पास है अथवा सरकार या सरकारी संस्थानों से कम से कम 30 वर्षों के निबंधित पट्‌टे (लीज) पर संस्था को शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान खोलने हेतु भूमि प्राप्त है तथा भूमि का शैक्षणिक उपयोग करने की अनुमति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त है। सक्षम प्राधिकार से संस्था के भवन का स्वीकृत नक्शा एवं प्राक्कलन आवेदन के साथ संलग्न किया जाएगा। किसी भी स्थिति में अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए कोई भी भवन पट्‌टे पर नहीं लिया जाएगा।

(v) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-5 का उपविनियम-(क) (v) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (क) (v) आवेदन-पत्र राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ द्वारा मान्यता हेतु आवेदन करने की निर्धारित समयावधि के अंदर (जिस शैक्षणिक सत्र के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ से मान्यता प्राप्त की जानी है, उसके पूर्ववर्ती सत्र के 31 जनवरी तक) एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ को मान्यता हेतु आवेदन करने के पूर्व किया जायेगा।

(i) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-5 का उपविनियम-(ख) (i) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (i) वैसे संस्थान जिन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (डी0एल0एड0 कोर्स) संचालन/अतिरिक्त सीट वृद्धि हेतु मान्यता प्राप्त हो गई है, समिति से नव सम्बद्धता/अतिरिक्त सीट वृद्धि हेतु सम्बद्धता के लिए विहित प्रपत्र में आवेदन (दो प्रतियों में सभी वांछित अभिलेखों एवं सूचीक्रम/पृष्ठ संख्या के साथ स्पाईरल बाईडिंग कराकर) समिति को समर्पित करेंगे।

(iii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-5 का उपविनियम-(ख) (iii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (iii) अपेक्षित दस्तावेजों में निम्नांकित दस्तावेज निर्धारित प्रपत्र में आवश्यक रूप से संलग्न किये जाएँगे- (क) निर्धारित कार्य दिवस अनुपालन प्रमाण-पत्र। (ख) राज्य सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण अनुपालन प्रमाण-पत्र। (ग) नामांकन शुल्क एवं अन्य शुल्क अनुपालन प्रमाण-पत्र। (घ) पाठ्‌यचर्या एवं पाठ्‌यक्रम अनुपालन प्रमाण-पत्र। (ड़) स्टाफ नियोजन, वेतन भुगतान एवं उपस्थिति प्रमाण-पत्र। (च) संस्था में कार्यरत/चयनित सभी संकाय सदस्यों की समिति द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित समेकित सूची। (छ) स्टाफ एवं संकाय सदस्यों के चयन में आरक्षण अनुपालन प्रमाण-पत्र। (ज) भू-स्वामित्व संबंधी अभिलेख+अद्यतन लगान रसीद। (झ) सक्षम प्राधिकार द्वारा भूमि के शैक्षणिक उपयोग करने हेतु निर्गत प्रमाण-पत्र। (ञ) स्टाफ एवं संकाय सदस्यों का आधार। (ट) Building Completion Certificate (मूल में), भवन का अद्यतन फोटो, जिससे भवन की बाहरी बनावट स्पष्ट हो सकें।75 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (ठ) सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र जिससे सिद्ध हो सके कि संस्था का भवन उसी भूमि पर निर्मित है, जिस भूमि के आधार पर संस्था को अनापत्ति प्रमाण-पत्र निर्गत किया गया है। (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-6 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। ( बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा आदेशिका फीस के रूप में निम्नवत्‌ राशि ली जाएगी :- i संस्थान द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र के आवेदन पत्र के साथ 15000/- (पन्द्रह हजार) रू0 ऑनलाईन सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पदनाम से जमा किया जाएगा, जो अप्रतिदेय (Non- refundable) होगी। ii संस्थान द्वारा संबद्धता हेतु आवेदन करते समय आवेदन-पत्र के साथ संबद्धता संबंधी आवेदन के प्रोसेसिंग फीस के रूप में 35,000/- (पैतीस हजार) रू0 ऑनलाईन एवं संबद्धता शुल्क के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ से प्राप्त मान्यता के अनुसार प्रति इकाई 1,00,000/- (एक लाख) रू0 ऑनलाईन सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पदनाम से जमा करना होगा, दोनों फीस की राशि अप्रतिदेय (Non -refundable) होगी।

(ii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (ii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (ii) त्रुटिपूर्ण आवेदन पत्रों को सुधारने का एक मौका संबंधित संस्थान को दिया जाएगा एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा संस्थान को सूचना प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के अंदर सुधरा हुआ आवेदन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को जमा करने की जवाबदेही संस्थान की होगी। विलम्ब होने पर समिति को सम्बद्धता/सत्र के संबंध में अंतिम निर्णय करने का अधिकार होगा।

(iv) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (iv) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (iv) आवेदन पत्र हर तरह से सही पाये जाने पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा विशेषज्ञों की चार सदस्यीय एक टीम गठित कर संस्थान की स्थलीय जाँच करायी जायेगी। विशेषज्ञों के दल द्वारा जांँच के क्रम में जांँच की विडियो रिकॉर्डिंग कराई जायेगी, जिसकी व्यवस्था जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा की जायेगी तथा इस हेतु जिला शिक्षा पदाधिकारी को समिति द्वारा प्रोसेसिंग शुल्क से 2500 (दो हजार पाँच सौ) रू0 उपलब्ध कराया जायेगा। इस विडियो रिकॉडिंग की सी0डी0 एवं पेन- ड्र्राइव पर संस्थान के प्राचार्य/सचिव के हस्ताक्षर सहित जांच दल के सभी सदस्यों का हस्ताक्षर होगा। वीडियो रिकॉर्डिंग में जाँच दल के सदस्यों के साथ संस्थान के सभी भौतिक संरचना, वर्ग कक्ष, खेल-कूद का मैदान, प्रायोगिक/कम्प्यूटर कक्ष, पुस्तकालय का समावेश अनिवार्य रूप से होगा। वीडियो रिकॉर्डिंग कम से कम 20 मिनट की और अविछिन्न होनी चाहिए।

(vi) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (vi) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (vi) जाँँच दल के संयोजक एवं सदस्यों को मानदेय के रूप में दो हजार पाँँच सौ रू0 देय होगा। इसके अतिरिक्त वाहन या नियमानुसार यात्रा-भत्ता भी देय होगा। जाँच समिति निश्चित रूप से 15 दिनों के अन्दर जाँँच प्रतिवेदन समर्पित करेंगी।

(viii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (viii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (viii) प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने से संबंधित स्क्रीनिंग समिति से अनुशंसा प्राप्त की जायेगी।

(ix) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (ix) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (ix) गैर-सरकारी संगठन द्वारा स्थापित प्रशिक्षण महाविद्यालय को सम्बद्धता देने अथवा वापस लेने के लिए अनुशंसा करने हेतु एक स्क्रीनिंग समिति निम्नलिखित रीति से गठित की जायेगीः- 1. शैक्षणिक निदेशक, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति - 2. परीक्षा नियंत्रक (विविध) - 3. शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा सक्षम प्राधिकार से मनोनित मुख्यालय में पदस्थापित दो पदाधिकारी 4. निदेशक, शोध एवं प्रशिक्षण, बिहार, पटना द्वारा मनोनित एक पदाधिकारी -76 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 5. उप सचिव/ सहायक सचिव (शिक्षक प्रशिक्षण सम्बद्धता), बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (xi) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-7 का उपविनियम-(ख) (xi) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (ख) (xi) वैसे संस्थान, जिसकी जांच में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाएगी, उन्हें त्रुटि सुधार हेतु संसूचित किया जाएगा और त्रुटि सुधारने का एक मौका संस्थान को अवश्य दिया जाएगा। संस्थानों द्वारा जब त्रुटियों को सुधार कर पुनः आवेदन दिया जायेगा तब इसकी संपुष्टि समिति द्वारा करायी जाएगी तथा इसके लिए संस्थान को पुनः प्रोसेसिंग फीस जमा करना होगा।

(iii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-9 का उपविनियम-(iii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (iii) बुनियादी यूनिट 50 विद्यार्थियों का होगा। प्रारम्भ में दो बुनियादी यूनिटों की अनुमति है, लेकिन संस्थानों को, अन्य अपेक्षाएँ/मानक पूरा करने पर, अधिकतम चार यूनिट रखने की अनुमति दी जाएगी, परन्तु सरकारी संस्थानों के लिए, उक्त बंधेज बाध्यकारी नहीं होगा।

(i) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 के उपविनियम-(i) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (i) 50-50 विद्यार्थियों के दो बुनियादी युनिटों तक की भर्त्ती के लिए संकाय सदस्यों की न्युनतम संख्या 16 होगी। प्रिंसिपल अथवा विभागाध्यक्ष को संकाय में शामिल किया जाता है। विषय क्षेत्रों में संकाय का वर्गीकरण इस प्रकार हो सकता हैः- 1. प्रिंसिपल/विभागाध्यक्ष - एक 2. शिक्षा में परिप्रेक्ष्य/शिक्षा के आधार - तीन 3. विज्ञान - दो 4. मानविकी और समाज विज्ञान - दो 5. गणित - दो 6. भाषाएँ - तीन 7. ललित कलाएँ/निष्पादक कलाएँ - दो 8. स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा - एक राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थानों को अन्य अपेक्षाओं को पूरा करने पर राज्य सरकार द्वारा सरकारी संस्थान के लिए समय-समय स्वीकृत शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की संख्या को ही मानक मानते हुए संबद्धता दी जाएगी। (1) यदि विद्यार्थियों की संख्या दो वर्षों के लिए केवल एक सौ हो अर्थात सम्बद्धता मात्र एक बेसिक यूनिट हेतु प्रदत्त हो तो संकाय के सदस्यों की संख्या को घटा कर 08 कर दिया जाएगा। विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों से और कुछ शिक्षणशास्त्रीय पाठ्‌यक्रमों में संकाय का बंटवारा अन्य अध्यापक शिक्षा कार्यक्रमों के साथ किया जा सकता है। (क) नव सम्बद्धता हेतु आवेदन देने वाले संस्थान, राष्ट्र्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌, नई दिल्ली द्वारा निर्गत आशय-पत्र (Letter of Intent) के आलोक में निदेशक (शैक्षणिक) द्वारा मनोनित प्रतिनिधि की उपस्थिति में संकाय सदस्यों का चयन कर उनकी सूची NCTE द्वारा निर्धारित विहित प्रपत्र में प्रतिहस्ताक्षरण हेतु समिति को उपलब्ध करायेंगे। (ख) सम्बद्धता प्राप्त संस्थानों को शैक्षणिक सत्र के मध्यावधि में संकाय सदस्यों की हुई रिक्ति के विरूद्ध चयन हेतु नामवार/विषयवार रिक्त एवं कार्यरत संकाय सदस्यों की समेकित सूची ERC, NCTE को प्रेषित कर उसे अपने वेबसाईट पर प्रदर्शित करते हुए समिति को अपना प्रतिनिधि सदस्य मनोनीत करने के अनुरोध के साथ आवेदन देना होगा। तत्पश्चात्‌ समीक्षोपरांत रिक्त संकाय सदस्यों के चयन में सहयोग प्रदान करने हेतु निदेशक (शैक्षणिक) द्वारा प्रतिनिधि सदस्य नामित किया जायेगा। समिति के मनोनित सदस्य को चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए संस्था 2500 (दो हजार पाँच सौ) रू0 प्रतिदिन की दर से मानदेय प्रदान करेगी। (ग) संकाय सदस्यों के चयनोपरांत संस्था, कार्यरत एवं नव चयनित संकाय सदस्यों की समेकित सूची (तीन प्रति) विहित प्रपत्र में, चयन का कार्यवाही प्रतिवेदन, संकाय सदस्यों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की स्वहस्ताक्षरित छायाप्रति, उनका नियुक्ति एवं योगदान पत्र तथा कहीं अन्यंत्र नियुक्त नहीं होने संबंधी शपथ-पत्र आदि के साथ प्रतिहस्ताक्षरण हेतु प्रेषित करेगी। (घ) संस्था द्वारा प्रेषित संकाय सदस्यों की सूची पर निदेशक (शैक्षणिक) के अनुमोदनोपरांत उप सचिव से अन्यून पदाधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरण किया जायेगा तथा प्रतिहस्ताक्षरण सूची की एक प्रति क्षेत्रीय समिति, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्‌ को प्रेषित की जायेगी।77 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (vi) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vi) (क) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vi) (क)

डी0एल0एड0 और उसके साथ बी0एड0 या बी0एस0सी0 या बी0ए0 या एम0ए0 या एम0एस0सी0 3000 3000

(i) डी0एल0एड0 के एक यूनिट की अतिरिक्त भर्ती के लिए 500 वर्ग मीटर (पाँँच सौ वर्ग मीटर) के अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र की आवश्यकता होगी। (ii) जब कभी अध्यापक शिक्षा नियमावली/विनियमावली में किसी कार्यक्रम के मानदण्डों तथा मानकों में कोई बदलाव किया जाएगा तो वैसी स्थिति में संस्थानों को प्रभावी तिथि से संशोधित मानदण्डों एवं मानकों में निर्धारित अपेक्षाओं का पालन करना होगा। उक्त स्थिति में भू-क्षेत्र संबंधी संशोधित मानदण्ड मौजूदा संस्थानों पर लागू नहीं होगें, लेकिन मौजूदा संस्थानों को संशोधित मानदण्ड का अनुपालन करने के लिए अपेक्षित निर्मित क्षेत्र को बढ़ाना होगा एवं संस्थान जिनके पास संशोधित मानदण्डों के अनुरूप भू-क्षेत्र नहीं होगा या निर्मित क्षेत्र का विस्तार नहीं कर सकेंगे, उन्हें अतिरिक्त कार्यक्रमों अथवा अतिरिक्त दाखिले की अनुमति/सम्बद्धता नहीं दी जा सकेगी।

(vi) (ii) (1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vi)(ख)(ii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vi)(ख)(ii) कुल 2000 वर्गफीट के क्षेत्रवाला एक बहुप्रयोजनी हॉल, जिसमें एक मंच के साथ 200 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता हो।

(vi) (xi) (xviii) 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vi)(ख)(xi) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vi) (ख) (xi) स्टोर के दो कमरे (2) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम (vi) (ख) (xviii) विलोपित।

(vii) (iii) 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vii)(क)(iii) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vii)(क)(iii) श्रव्य-दृश्य उपस्कर- टी॰वी॰, एल0ई0डी0 प्रोजेक्टर, प्रोजेक्टर स्क्रीन (vii) (iv) 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vii)(क)(iv) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vii)(क)(iv) श्रव्य-दृश्य उपकरण- पेन ड्राइव में शैक्षिक-प्रशिक्षण से संबंधी फिल्में

(vii) 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-10 का उपविनियम-(vii)(घ) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (vii) (घ) श्रव्य-दृश्य उपस्कर- प्रोजेक्शन और डूप्लीकेशन के लिए हार्डवेयर और शैक्षिक सॉफ्टवेयर सुविधाएँ, जिनमें टी॰वी॰, एल॰ई॰डी॰, प्रोजेक्टर, कम्प्यूटर, फिल्में, चार्ट, चित्र एवं Powerpoint Presentation शामिल है। वाई-फाई/इंटरनेट की सुविधा वांछनीय होगी। 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-13 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (13). प्रशिक्षण अवधि दो वर्षों की होगी। दो वर्षों की प्रशिक्षण अवधि में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा प्रतिवर्ष परीक्षा का आयोजन किया जायेगा। दूसरे वर्ष की परीक्षा के पश्चात्‌ प्रमाण-पत्र निर्गत किया जायेगा। संस्थानों द्वारा निर्धारित पाठ्‌यक्रम को ससमय बेहतर रूप से पूरा किया जा सके एवं समय पर परीक्षाओं का आयोजन हो इस हेतु समिति द्वारा राज्य शिक्षा-शोध एवं प्रशिक्षण परिषद्‌ के सहयोग से अकादमिक कैलेंडर भी जारी करेगा, जिसका अनुपालन अनिवार्य होगा।78 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (3) 1) उक्त विनियमावली, 2016 के विनियम-14 का उपविनियम (3) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। (3). किसी प्रशिक्षण महाविद्यालय द्वारा उक्त कंडिका-2 में वर्णित शर्त्तों का अनुपालन नहीं करने अथवा विनियमावली के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने की स्थिति में, संस्था से कारण-पृच्छा की मांग की जायेगी। संबंधित संस्था द्वारा एक माह के अंदर कारण-पृच्छा अनिवार्य रूप से देना होगा। संस्था के कारण-पृच्छा पर सम्यक्‌ विचारोपरांत संस्था को पायी गयी त्रुटियों को दूर करने हेतु अधिकतम एक वर्ष का अवसर प्रदान किया जा सकेगा। समिति के नोटिस का प्रत्युत्तर एक माह के अंदर नहीं देने अथवा पायी गयी त्रुटियों को निर्धारित अवधि में दूर करने में असफल रहने पर स्क्रिीनिंग कमिटि की अनुशंसा पर समिति, संस्था को असम्बद्ध घोषित कर सकेगी। समिति का ऐसा निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होगा।

आदेष से, (ह0 अस्पष्ट), सचिव। Bihar School Examination Board, Patna Bihar School Examination Board (Teacher Education issuance of no-objection certificate, affiliation norms and procedure) (Amendment) Regulation 2023 In exercise of the powers conferred under section - 33 of the Chapter (vi) of Bihar School Examination Board Act 2019, the Bihar School Examination Board, Patna hereby make the following regulations to amend the Bihar School Examination Board (Teacher Education issuance of no-objection certificate, affiliation norms and procedure) Regulation, 2016 under the approval of the Education Department. 1. Short title, extent and commencement- (i) These regulations shall be called Bihar School Examination Board (Teacher Education issuance of no-objection certificate, affiliation norms and procedure) (Amendment) Regulation, 2023. (ii) It shall extend to the whole of the State of Bihar. (iii) These regulation shall come into force from the date of its publication in the official gazette. 2. Amendment in sub-regulation-(iv) of Regulation-3 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (iv) of Regulation-3 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (iv) Prior to taking recognition from National Council of Teachers Education for additional intake in D. El. Ed. course, it is mandatory to an institution to obtain No-Objection Certificate from the Board and after receipt of recognition the institution will proceed for affiliation for additional intake from the Board. Procedure and norms for affiliation for Additional intake will be the same as followed for new affiliation. 3. Amendment in sub-regulation-(A)(i) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (A) (i) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (A)(i) Procedure and time frame for preparation of application form :- (i) Application for No Objection Certificate- An institution eligible under Regulation 4 desirous of running teachers Education programme D. El. Ed. Course or desirous for additional intake and for the said purpose it has to apply for grant of recognition before National Teachers Education Council, will apply to the Board along with the processing fees and prescribed documents. 4. Amendment in sub-regulation-(A)(ii) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (A) (ii) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (A) (ii) The application shall include details of programme /course (if any) being conducted from before or application which includes self-attested photo copy of application for recognition of courses other than D. El. Ed Course, submitted before National Council for Teachers Education/ University/ State Govt., Deed Document / Details of Land, Building79 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 establishing that the concerned institution has the Title and ownership of the land or details of lease deed of land of minium period of 30 years executed in favor of the concerned institution by the State Govt. or Government Institutions for running Teachers Training Institution and certificate/permission from the competent authority for utilizing the land for educational purposes only. The application shall also include estimate and sanctioned plan of the building of the institution, duly approved by the competent authority. In no case any building shall be taken on lease for conducting of Teacher Training Programme. 5. Amendment in sub-regulation-(A)(v) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (A) (v) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (A) (v) Application shall be given within the time frame prescribed for grant of recognition by the National Council of Teachers Education (i.e. the academic session for which recognition is to be obtained from the National Council of Teacher Education, its preceding session up to 31st of January) and also before submission of application to the National Council of Teachers Education. 6. Amendment in sub-regulation-(B)(i) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(i) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(i) Application for affiliation :- Institutions which have been granted recognition for offering teacher education programme (D.EL.Ed. Course)/ additional intake by National Council of Teachers Education shall submit an application for new affiliation / affiliation for additional intake in a prescribed format (in two copies in spiral binding along with all required papers and sl. No. / page no.) to the Board. 7. Amendment in sub-regulation-(B)(iii) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(iii) of Regulation-5 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(iii) The requisite documents will necessarily include the following documents to be enclosed with the prescribed application: (A) Certificate stating following of prescribed working days. (B) Certificate stating following of reservation policy in admission as prescribed by the State Govt. (C) Certificate stating following of prescribed admission fees and other fees. (D) Certificate stating following of curriculum and courses (E) Certificate stating employment of staff, payment of salary and attendance. (F) Consolidated list of all working/selected faculty members Countersigned by the competent authority of the Board. (G) Certificate stating following of Reservation Policy in selection of staff and Faculty members. (H) Deed of Title of Land and up to date Revenue receipt. (I) Certificate stating the educational use of the land, issued by the competent authority. (J) Adhar Card of staff and Faculty members. (K) Building Completion Certificate (in original), recent photos of the building with clear outward construction of the building. (L) Certificate, issued by the competent authority to establish that the building of institution is built on the same land on the basis of which no objection certificate has been issued to the institution.

80 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

8. Amendment in Regulation-6 of the said Regulation, 2016- (1) Regulation-6 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. 6. Processing Fees- The following amount will be charged /taken by Bihar School Examination Board as prescribed fee- (i) No Objection Certificate- Application for obtaining No Objection Certificate along with a sum of Rs. 15000/- shall be deposited Online by the institution, in favour of the Secretary, Bihar School Examination Board which shall be Non Refundable. (ii) Affiliation Fees- A institution while applying for affiliation shall have to deposit /pay a sum of Rs. 35,000/- online as processing fees for affiliation and as per the recognition received from National Council of Teachers Education, Rs. 1,00,000/- per unit as affiliation fee will have to be deposited online in the name of Secretary, Bihar School Examination Board. Both the fee amount shall be non refundable. 9. Amendment in sub-regulation-(B)(ii) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(ii) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(ii) Application for Affiliation—An opportunity will be given to the concerned institution to rectify the defective application forms and it will be the responsibility of the institution to submit the corrected application to the Bihar School Examination Board within 15 days from the date of receipt of such information from the Bihar School Examination Board. In case of delay the Board shall have the right to take final decision in relation to affiliation/session. 10. Amendment in sub-regulation-(B)(iv) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(iv) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(iv) If the application form is found to be appropriate and correct in all respect, an on- site inspection of the institution will be conducted by a four member team of experts, constituted by the Bihar School Examination Board and during inspection by the team of experts, video recording will be done which would be arranged by the concerned District Education Officer for which the District Education Officer shall be paid a sum of Rs. 2500/-, from the processing fee. There shall be signature of the Principal/Secretary of the Institution along with signature of all the members of inspection team on the C.D and Pen Drive of the Video Recording. The video recording shall compulsorily include all team members of Inspecting team, all Physical structures of the institution, Class Rooms, Play Grounds, Laboratory/Computer Room, Library etc. Video Recording should be of at least 20 minutes long and unbroken. 11. Amendment in sub-regulation-(B)(vi) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(vi) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(vi) Twenty Five Hundred Rupees as Honorarium will be admissible to the co- ordinator and members of the inspection team. In addition to that conveyance or Travelling allowance will also be admissible as per rule. The inspection team will positively submit inspection report within 15 days. 12. Amendment in sub-regulation-(B)(viii) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(viii) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(viii) On the basis of the inspection report received, recommendation on the point of giving affiliation will be obtained by the Bihar School Examination Board from the Screening Committee.

81 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

13. Amendment in sub-regulation-(B)(ix) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(ix) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(ix) Screening Committee- A Screening Committee will be constituted in the following manner to make recommendations for granting or withdrawing affiliation to the training college, established by Non Govt. Organizations. 1. Academic Director, Bihar School Examination Board - Co-ordinator 2. Examination Controller (Vividh) - Member 3. Two official from Headquarter, Education department, Govt. Bihar nominated by the Competent Authority - Member 4. An Official nominated by the Director, Research and Training - Member 5. Deputy Secretary/ Assistant Secretary (Teachers Training and Affiliation), Bihar School Examination Board Member – Member Secretary 14. Amendment in sub-regulation-(B)(xi) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation (B)(xi) of Regulation-7 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (B)(xi) Such Institutions in whose inquiry any kind of defect is found, they will be communicated for rectification of such defect and an opportunity will necessarily be given to concerned institution to rectify the defect. When the institution will re-apply after rectifying the defect, then it's ratification will be done by the Board and for this the concerned institution will have to again deposit processing fees is Rs. 35000/-. 15. Amendment in sub-regulation-(iii) of Regulation-9 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(iii) of Regulation-9 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (iii) Admission Capacity- The basic unit will be of 50 students. Initially two basic units are permissible but the institutions will be allowed to have a maximum of four units, on fulfilling other requirements but the above limit will not be binding for Government institutions. 16. Amendment in sub-regulation-(i) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(i) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (i). Academic Structure- Staff and Educational Body – For intake of up to two basic units of 50 students each, the minimum faculty strength shall be 16. The principal or Head of the Department is included in the faculty. The classification of faculty into subject areas can be as follows: 1.Principal/H.O.D One 2 . Perspectives in Education / basis of Education Three 3 . Science two 4 . Humanities and Social Science Two 5 . Mathematics Two 6 . Languages Three 6 . Fine Arts/ Performing Arts- Two 7 . Health and Physical Education One Note- The affiliation will be given to the institutions run by the State Govt. on fulfilling other requirements, considering the number of academic and non academic posts approved by the State Govt. from time to time for Govt. institution.

82 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

Remarks – 1 . If the strength of student for two years is 100 only ie for one basic unit, then the number of faculty shall be reduced to 08. The faculty in specialized areas and some of the pedagogic courses can be shared with the other teacher's education programmes. (A) Institutions applying for new affiliation will select the faculty members in the presence of representatives nominated by the Board in the light of the Letter of Intent, issued by the National Council for Teachers Education, New Delhi and make their list available to the Board for Counter signature. (B)The affiliated institutes for selection of the vacant faculty members, arising out of vacancy in the mid of the academic session are required to make an application to the Board with a request to nominate it's representative after having the consolidated list of vacant and working faculty members name wise / subject wise sent to ERC, NCTE and thereafter on having it displayed on it's website. Pursuant to that after review, a representative member will be nominated by the Director (Academic) to provide support in the selection of vacant Faculty members. The institution will pay an Honorarium @ of Rs. 2500/- per day to the nominated member of the Board to participate in the selection process. (C) After selection of the faculty members a consolidated list (in triplicate) of all working faculty members of the institution will be sent in the prescribed format along with selection report, self attested Educational Certificates, appointment letter, joining status and an affidavit for non joining of any other institutions for being countersigned. (D) The list of faculty members sent by the institution will be counter signed by the officer, not below the rank of Deputy Secretary level Officer after its approval by the Director, (academic) and a copy of the countersigned list will be sent to the Regional committee of National Council of Teachers Education. 17. Amendment in sub-regulation-(vi)(A) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(vi)(A) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vi)(A)

Courses Built up Area (Sq.Mtr.) Area of Land (Sq.mtr)
D.El.Ed. along with B.Ed. or B.Sc. or B.A. or M.A. or M.Sc. 3000 3000

Note: (1) Constructed area of 500 sq. mtrs. (Five Hundred Square Meter) will be additionally required for taking admission in one additional unit. (2) whenever any change will be made, in the norms and standard of any programme/rules/regulations in teacher education, the requirement so laid down in the amended norms and standard will have to be complied by the institutions with effect from the date given in such programme/rule/regulations. In such situation, though the amended land requirement will not be applicable upon the existing institutions, but the existing institutions will have to increase the required built up area, in terms of the amended requirement. Institutions not possessing landed area, as per the norms so amended or if it does not extend its built up area, in conformity with the requirement of the amended built up area, it will not be allowed for any additional programme or taking additional admission / additional affiliation. 18. Amendment in sub-regulation-(vi)(B) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016-83 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (1) Sub-regulation-(vi)(B) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vi)(B) Multipurpose Hall with Total Area of 2000 Sq. Ft. with sitting capacity of two hundred people with a dais. 19. Amendment in sub-regulation-(vi)(B)(xi) and (xviii) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(vi)(B)(xi) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vi)(B)(xi)- Two store room. (2) )(B)(xviii)- Deleted. 20. Amendment in sub-regulation-(vii)(A)(iii) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(vii)(A)(iii) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vii)(A)(iii) Audio – Visual Equipments - T.V, L.E.D Projector, Projector Screen. 21. Amendment in sub-regulation-(vii)(A)(iv) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(vii)(A)(iv) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vii)(A)(iv) Audio – Visual Equipments - Films relating to education and Training in a Pen Drive. 22. Amendment in sub-regulation-(vii)(D) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(vii)(D) of Regulation-10 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (vii)(D) Audio Visual Equipment- Hardware for projection and Duplication and educational Software facilities including T.V, L.E.D Projector, Computer, Films, Charts, Pictures and Power Point Presentation. Facility of WI-Fi / Internet would be desirable. 23. Amendment in Regulation-13 of the said Regulation, 2016- (1) Regulation-13 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (13). Academic Calendar - Training Period will be of two years. The examination will be organized every year by the Bihar School Examination Board during the training period of two years. Certificate will be issued after the second year examination. In order to ensure that the courses prescribed by the institutions can be completed within time in a better way and the examinations are conducted on time, the Bihar School Examination Board will issue an Academic Calendar in cooperation with the State Council for Education Research and Training compliance of which will be mandatory. 24. Amendment in sub-regulation-(3) of Regulation-14 of the said Regulation, 2016- (1) Sub-regulation-(3) of Regulation-14 of the said Regulation, 2016 shall be substituted by the following. (3). If a D.El.Ed. Institution dosn't follow the condition prescribed in above sub-clause- 2 or dosn't fullfill the standard define in regulation, a show-cause notice served to the institution. The institution must be reply within one month. Board shall provide maximum priod of one year for removal of defects. Failing to submite the reply of the show-cause issued by the board or failing for removal of defects within the prescribed time given by the board, the board may declared the institute de-affiliated in the light of recommendation of screening committee, which will be final and binding.

By Order, Secretary, Bihar School Examination Board.

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(cid:464)बहार गजट, 17 2024 सूचना -------

No. 24---I, Anuradha Srivastava W/o Ashish Chitranshi 2149/49 C- Block Near new Way Convent School indira nagar lucknow present residing principal quarter DAV public school cantt area P.S magadh medical college gaya ( bihar) do hereby solemnly affir and declare as per aff No 3003 dt. 30.05.23 that my name is mentioned in my son's Adhish chitranshi education documents as anuradha chitranshi which is wrong as per aadhar No 689673708766 per my name is Anuradha Srivastava and from now I will be known as Anuradha Srivastava for all future purposes.

Anuradha Srivastava.

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सं0 25--मैं बिंदु देवी, पति अजय कुमार, साकिन नौरू कोठिया, थाना परसविघा, जिला जहानाबाद बिहार का निवासी हूँ। शपथ संख्या 2185 दिनांक 02/12/2023 द्वारा घोशणा करती हूँ कि मेरा पुत्र चंदन कुमार सौरभ के केंद्रीय माध्यमिक षिक्षा बोर्ड द्वारा निर्गत मैट्रिक के सभी मूल प्रमाण पत्र में भुलवष मेरा नाम ंिबदु कुमारी (Bindu Kumari) दर्ज है जो गलत है परंतु मेरा सही नाम बिंदु देवी (Bindu Devi) है और मैं इसी नाम से जानी व पहचानी जाती हूँ।

बिंदु देवी।

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No. 26---I Prakash Chandra Das S/o Hitendra Lal Das R/o Vill+P.O.- Nawani, P.S.- Jhanjharpur (Araria Sangrampur OP) Distt.- Madhubani, Bihar-847410 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 2180 dt. 30.11.23 that my name is written as Prakash Kumar Das in my son's Ujjawal Kumar Das CBSE Xth Marksheet (Roll No. 7161371 Year 2016) which is wrong. As per Aadhar Card 668281725871my correct name is Prakash Chandra Das. From now I will be known as Prakash Chandra Das for all future purposes.

Prakash Chandra Das.

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सं0 29--मैं अंगूरी खातून पति मो॰ शहीद (मरहूम) निवासी ग्राम-नखास चौक, पो॰-हाजीपुर, था॰-हाजीपुर नगर, जिला-वैशाली, कार्यपालक दण्डाधिकारी हाजीपुर, वैशाली के समक्ष लिए गए शपथ-पत्र सं॰-14602 दिनांक-13.12.2023 एवं समाचार-पत्र के माध्यम से शपथपूर्वक ऐलान वो पुष्टि करती हूँ कि नुसरत प्रवीन मेरी पुत्री है जिसका घर मोहल्ले का पुकारू नाम नुसरत खातून है। नुसरत प्रवीन एवं नुसरत खातून दोनों नाम मेरी पुत्री का ही है। मेरी पुत्री ये दोनों नामों से जानी वो पहचानी जाती है। अब मेरी पुत्री भविष्य में नुसरत प्रवीन के नाम से ही जानी जाएगी।

अंगूरी खातून।

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No. 31---I, SHIVENDRA KUMAR SINGH R/O VILL. MAHULI PO-KOTHIYA PS- DIDARGANĮ DIST. PATNA-9 VIDE AFD NO. 18746 DT. 29.11.2023. IN MY SON (KUMAR LAV SINGH) 12TH MARKSHEET & CERTIFICATE MY NAME WRONGLY MENTIONED AS SIVENDRA KUMAR SINGH. MY CORRECT NAME IS SHIVENDRA KUMAR SINGH. SHIVENDRA KUMAR SINGH.

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No. 32---I Jateen, S/o Gyanesh Kumar Sinha R/o Sinha Niwas church Road, Chandwara, P.S-town, P.O.- H.P.O, Muzaffarpur, Bihar. At present ICAR-CIFRI, Fishery gate Barrack Pore Monirampore Kolkata, West Bengal 700120 do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit No- 05 dt. 01-07-2022 that from now I will be known as Jateen Sinha all future purposes.

Jateen.

85 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

सं0 33--म(cid:583) एस.एम. एहसान अहमद, (cid:466)पता-(cid:232)व. एस.एम सुलतान अहमद, सा(cid:465)कन- कं ग(cid:465)हया टोला (नून का चौराहा),

ं (cid:465)क मेरे पो. - झाऊगंज, पटनािसट(cid:547), (cid:468)जला-पटना, (cid:466)बहार-800008 शपथ प(cid:287) सं. 721 (cid:465)दनांक 04.12.2023 (cid:430)ारा सूिचत करता हू आधार काड(cid:91) सं. -673035856608, पैन काड(cid:91) ADNPA5846L भारतीय (cid:232)टेट ब(cid:583)क खाता सं. 10839479733 म(cid:581) मेरा नाम सैयद एहसान अहमद दज(cid:91) है जो गलत है। मेरे सेवा पु(cid:468)(cid:232)तका, प(cid:581)शन (cid:292)ािधकार प(cid:287) एवं काया(cid:91)लय प(cid:464)रचय प(cid:287) के अनुसार मेरा सह(cid:547) नाम

ं। सभी काय(cid:91) हेतु अब म(cid:583) एस.एम. एहसान अहमद के नाम एस.एम. एहसान अहमद है। दोन(cid:585) नाम एक ह(cid:547) (cid:229)य(cid:466)(cid:416) का है जो म(cid:583) ह(cid:547) हू

से ह(cid:547) जाना जाऊं गा।

एस.एम. एहसान अहमद।

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No. 34---I, YADVENDRA Sudarshan Chakrapani S/o Ram Prasad Ray, Residence of Nayatola, Madhopur, P.O+P.S- Bakhtiarpur, Dist.- Patna, Pin-803212,At Present Residence Road no. 4A, Mahavir Colony, Saichak, PO- Anisabad, PS- Beur, Dist.– Patna, Bihar,Pin- 800002 declare vide affidavit no. 9919 dated 01.11.2023 That is YadvendraSudarshanChakrapaniAnd Y.S. Chakrapani are same and one person. My correct name is YadvendraSudarshanChakrapani.

YADVENDRA Sudarshan Chakrapani.

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No. 35---I, Shreepati Ram, S/o Hari Kishun Ram ,R/o Kamal Smriti Niketan,Vasuendra Apartment, Lane No-4,S. K. Puram,near Arya samaj Mandir R.P.S More, Patna 801503 Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit. No. 11957 dt.07-08-23 that I have changed my name from Sripati Ram to Shreepati Ram. From now in future I shall be called, known and recorded as Shreepati Ram in all respect.

Shreepati Ram.

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No. 37---I, Deepak Kumar Rajak S/o Bindeshwari Prasad, Rajak, Moh. Barah Pathar, P.O+P.S.-Dehri on Sone Distt-Rohtas, declare vide affidavit No-1173 Dtd.-03.11.23. That my daughter is passed BSEB-2023 her Roll Code 74129, Roll No. 2300048 her certificate written mentioned name Archana Kumari. While in Aadhar Card No. 211677193340 mentioned name Arachna Kumari is wrong. That school certificate names and Aadar name is mentioned spelling mistakes. That take the my daughter name is Archana Kumari, so true & correct name.

Deepak Kumar Rajak.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 44—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

86 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं0 6/श्रम वि॰ आ॰(02)-14/2020 श्र॰सं॰--96 श्रम संसाधन विभाग ------

% मो॰ जुबैर आलम, तत्कालीन प्रखण्ड पदाधिकारी-सह-प्रवर्तन पदाधिकारी, वीरपुर (बेगूसराय) सम्प्रति सेवानिवृत श्रम अधीक्षक, गया के विरूद्ध संयुक्त श्रमायुक्त के पत्रांक-1126 दिनांक-21.04.2020 के माध्यम से जिला पदाधिकारी द्वारा गठित आरोप पत्र प्राप्त हुआ। जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के ज्ञापांक-509 दिनांक-14.04.2012 द्वारा वर्ष 2012-13 में गेहूँ अधिप्राप्ति हेतु निर्गत कार्य योजना के तहत मो॰ जुबैर आलम तत्कालीन प्रखण्ड पदाधिकारी-सह-प्रवर्तन पदाधिकारी, वीरपुर (बेगूसराय) सम्प्रति सेवानिवृत श्रम अधीक्षक गया को दायित्व सौपा गया था एवं कार्य योजना के अनुरूप प्रखण्डान्तर्गत अधिप्राप्ति से प्राप्त गेहूँ को भारतीय खाद्य निगम के डिपो/गोदाम में भेजवाने की जिम्मेवारी सौपी गई थी। 111.70 क्वि॰ गेहूँ अधिप्राप्ति किये गये गेहूँ में से भारतीय खाद्य निगम के गोदाम को सुपूर्द नहीं किया गया है। जिसकी कीमत रू॰-1,60,290/- (रूपये एक लाख साठ हजार दो सौ नब्बे) होता है। अधिप्राप्ति अंतर्गत क्रय किये गये गेहूँ का सही रूप से रख रखाव करने हेतु मो॰ जुबैर आलम को रू॰-10000/- (रूपये दस हजार) उपलब्ध कराया गया था। परन्तु भारतीय खाद्य निगम, बेगूसराय द्वारा गेहूँ उपलब्ध कराने के क्रम में उक्त मात्रा में गेहूँ मानक के अनुरूप नहीं पाये जाने के कारण भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूँ प्राप्त करने से इंकार कर दिया गया। जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के द्वारा दिनांक-21.01.2013 को एक समिति का गठन कर समिति के देख-रेख में अवशेष गेहूँ को निलामी करने का प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया गया है। परन्तु निलामी के क्रम में अवशेष गेहूँ उपलब्ध नहीं पाये जाने के कारण जिला प्रबंधक राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय के पत्रांक-1086 दिनांक-01.04.2013 एवं जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बेगूसराय द्वारा अवशेष गेहूँ की राशि जमा करने हेतु मो॰ जुबैर आलम को भी स्मारित किया गया। परन्तु मो॰ जुबैर आलम द्वारा राशि जमा नहीं की गई जो अधिप्राप्ति किये गये गेहूँ के रख रखाव में कोताही एवं उदासीनता बरतने के साथ-साथ सरकारी आदेश/निदेश का स्पष्ट उल्लंघन एवं सरकार के दिशा-निर्देश की अनदेखी है। जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के पत्रांक-1725 दिनांक-21.12.2013, पत्रांक-46 दिनांक-15.01.2014 एवं पत्रांक-229 दिनांक-25.02.2014 द्वारा मो॰ आलम को अवशेष गेहूँ की मात्रा के समतुल्य राशि जमा करने का निदेश दिया गया। इस संबंध में मो॰ आलम से प्राप्त स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाये जाने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया है। इस प्रकार मो॰ आलम द्वारा अधिप्राप्ति गेहूँ के रख रखाव में कोताही एवं उदासीनता बरतने के साथ-साथ सरकार के दिशा-निर्देश की अनदेखी कर स्पष्ट उल्लंघन किया गया एवं अवशेष गेहूँ को सुरक्षित नहीं रखा गया। फलस्वरूप गेहूँ की राशि जमा करने हेतु मो॰ आलम को निदेश दिये जाने के बावजूद राशि जमा नहीं की गई है। जो इंगित करता है कि मो॰ आलम द्वारा लापरवाही बरतने के कारण अधिप्राप्ति गेहूँ की मात्रा में कमी तथा उसके समतुल्य राशि जमा नहीं हो सकी जिससे सरकार को आर्थिक क्षति हुई है।

2. प्राप्त आरोप पत्र पर समक्ष प्राधिकार द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-976 दिनांक-29.06.2020 द्वारा मो॰ जुबैर आलम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु श्रीमती रंजिता, श्रमायुक्त बिहार को संचालन पदाधिकारी एवं डॉ॰ बीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त-1 प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।87 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 3. श्रीमती रंजिता, श्रमायुक्त, बिहार-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-68 दिनांक-11.10.2021 द्वारा मो॰ जुबैर आलम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन (अधिगम) समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में निम्नांकित मंतव्य दिया गयाः-

(i) अधिप्राप्त कुल 7500 क्विं गेहूँ मे से 111.70 क्वि. गेहूँ की कमी का आरोप प्रमाणित होता है। (ii) अवशेष कुल 111.70 क्वि. गेहूँ की कुल कीमत रू॰ 1,60,290/- जमा नहीं करने का आरोप भी प्रमाणित होता है जिसे बाद में जमा किया गया।

(iii) अधिप्राप्त गेहूँ का सही ढंग से रख-रखाव नहीं करने एवं उसे सुरक्षित नहीं रखने, कार्य में कोताही एवं उदासीनता बरतने का आरोप प्रमाणित होता है। साथ ही, अवशेष गेहूँ की कीमत ससमय जमा नहीं करने से सरकारी राशि की क्षति का आरोप भी प्रमाणित होता है।

(iv) साथ ही, सरकार के आदेश/निर्देशों की अवहेलना करने एवं उसके अनुपालन नहीं करने का आरोप भी प्रमाणित होता है।

(v) परन्तु इन सबके बावजूद यह भी बात सामने आती है कि अवशेष गेहूँ की कुल कीमत रू॰ 1,60,290/- का भुगतान तत्कालीन प्रखण्ड पदाधिकारी श्री कैलाश चौधरी, जो कि क्रय-केन्द्र प्रभारी भी थे, द्वारा किया गया है जो इस बात का साक्ष्य है कि गेहूँ की अनुपलब्धता के लिए श्री जुबैर आलम सीधे रूप से और अकेले जबावदेह नहीं है।

4. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनीय प्राधिकार द्वारा की गई एवं समीक्षोपरांत मो॰ जुबैर आलम के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाये गये एवं विभागीय पत्रांक-918 दिनांक-20.04.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। विभागीय पत्रांक-918 दिनांक-20.04.2022 वापस लौट आने के उपरांत विभागीय पत्रांक-1150 दिनांक-23.05.2022 द्वारा पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। उक्त के आलोक में मो॰ जुबैर आलम के पत्रांक-शून्य दिनांक-30.05.2022 द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया। मो॰ आलम ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा में यह उल्लेख किया है कि वर्ष 2012-13 में गेहूँ अधिप्राप्ति हेतु श्री कैलाश चौधरी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, वीरपुर क्रय केन्द्र प्रभारी बनाये गये थे। क्रय केन्द्र पर गेहूँ की अधिप्राप्ति करने, उसका रख-रखाव करने एवं गेहूँ की मानक मात्रा को भारतीय खाद्य निगम द्वारा प्रदत वाह्‌न से निर्धारित गोदाम तक पहुँचाने की जिम्मेवारी क्रय केन्द्र प्रभारी की थी। क्रय केन्द्र पर 7500 क्वि॰ गेहूँ की अधिप्राप्ति हुई थी जिसमें से भारतीय खाद्य निगम के गोदाम तक उठाव कराने एवं अवशेष गेहूँ के निलामी के उपरांत 111.70 क्वि॰ गेहूँ अवशेष रह गया। उनके द्वारा क्रय केन्द्रों पर दवाई का छिडकाव करवाया गया एवं गेहूँ को सुरक्षित रखने के लिए हर सम्भव प्रयास किया गया। उनके द्वारा गेहूँ उठाव के लिए वाहन की मांग लगातार की गयी। यदि राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय द्वारा ससमय और पर्याप्त वाह्‌न उपलब्ध करा दिया जाता तो यह स्थिति नहीं आती। जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय के पत्रांक-1086 दिनांक-01.04.2013 तथा जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बेगूसराय के पत्रांक-46 दिनांक-15.01.2014 द्वारा श्री कैलाश चौधरी, क्रय केन्द्र प्रभारी, वीरपुर से अवशेष गेहूँ की कुल कीमत रू॰ 1,60,290/- का भुगतान करने का आदेश दिया गया। उनके द्वारा क्रय केन्द्र प्रभारी को मौखिक रूप से एवं फोन से बार-बार राशि जमा करने के लिए कहा गया। क्रय केन्द्र प्रभार पर देनदारी के कारण उनके द्वारा उनका अंतिम वेतन प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया तथा निलाम पात्र वाद दायर किया गया। मो॰ जुबैर आलम ने यह भी कहा है कि 111.70 क्वि॰ गेहूँ की राशि रू॰ 1,60,290/- श्री कैलाश चौधरी (क्रय केन्द्र प्रभारी) द्वारा तीन वर्ष पूर्व प्रबंधन, राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय के पक्ष में जमा किया जा चुका है। समय पर क्यों नहीं जमा किया। ये जमाकर्त्ता से पूछा जाना चाहिए।

5. मो॰ जुबैर आलम से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई एवं समीक्षोपरांत यह पाया गया कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन तथा मो॰ जुबैर आलम द्वारा दिये गये बचाव बयान से स्पष्ट है कि श्री कैलाश चौधरी, तत्कालीन प्रखंड कृषि पदाधिकारी वीरपुर-सह-क्रय केन्द्र प्रभारी द्वारा निलामवाद संख्या-03/2013-14 के विरूद्ध कुल 111.70 क्वि॰ गेहूँ की कुल कीमत रू॰ 165850/- राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय के पक्ष में जमा कर दिया गया है। यह तथ्य आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप की गम्भीरता को कम करता है। परन्तु यह आरोप प्रमाणित है कि वीरपुर क्रय केन्द्र पर क्रय किये गये गेहूँ मे 111.70 क्वि॰ गेहूँ की कमी हुई एवं राज्य खाद्य निगम द्वारा गेहूँ के रख रखाव में कोताही बरती गई। मो॰ जुबैर आलम के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' के अंतर्गत उनके पेंशन से 05% (पाँच प्रतिशत) राशि की कटौती का दण्ड छः माह तक के लिए अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

6. बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी' तथा बिहार लोक सेवा आयोग (कार्यसीमन) विनियमावली, 1957 के प्रावधानों के आलोक में ऐसे सरकारी सेवक, जिनकी नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग के अनुशंसा के आधार पर होती है, के पेंशन से कटौती का आदेश देने के पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त करते हुए प्राप्त परामर्श पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाना है। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक-2213 दिनांक-04.08.2023 एवं स्मार पत्रांक-2946 दिनांक-06.10.2023, पत्रांक-3302 दिनांक-02.11.2023 तथा पत्रांक-3709 दिनांक-06.12.2023 द्वारा मो॰ जुबैर आलम के पेंशन कटौती के संंबंध में परामर्श की मांग की गई। सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3604 दिनांक-88 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 22.12.2023 द्वारा मो॰ जुबैर आलम के विरूद्ध पेंशन से 05% (पाँच प्रतिशत) राशि की कटौती का दण्ड छः माह तक के लिए कटौती करने के विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गई।

9. अतएव मो॰ जुबैर आलम, तत्कालीन प्रखण्ड पदाधिकारी-सह-प्रवर्तन पदाधिकारी, वीरपुर (बेगूसराय) सम्प्रति सेवानिवृत श्रम अधीक्षक, गया के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43'बी'-सह-पठित नियम-139 के अंतर्गत उनकेे पेंशन से 05% (पाँच प्रतिशत) राशि की कटौती का दण्ड छः माह तक के लिए कटौती का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।

10. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति मो॰ जुबैर आलम, तत्कालीन प्रखण्ड पदाधिकारी-सह-प्रवर्तन पदाधिकारी, वीरपुर (बेगूसराय) सम्प्रति सेवानिवृत श्रम अधीक्षक, गया को निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट से उपलब्ध कराई जाय। H.N-B2

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, विशेष कार्य पदाधिकारी। ------ सं0 6/आधु0-01-07/2023गृ0आ0--417 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------ संकल्प 10 जनवरी 2024

निदेषक, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो, नई दिल्ली के अर्द्धसरकारी पत्र संख्या-ICJS (111)/ICJS- 2.0/03/2023/NCRB, दिनांक-06.09.2023 के आलोक में एक देष, एक डाटा, एक इन्ट्री प्रणाली के सिद्धांत पर Criminal Justice System के पाँचों स्तंभ (Pillars) अर्थात्‌ CCTNS (For Police), e-Forensic (for Forensic Labs), e-Courts (for Courts), e-Prosecution (for Public Prosecutors) and e-Prison (for Prisons) के बीच डाटा का निर्बाध आदान-प्रदान किए जाने हेतु Inter-Operable Criminal Justice System 2.0 (ICJS 2.0) की परिकल्पना की गयी है। इसके कार्यान्वयन, सघन अनुश्रवण तथा समीक्षा आदि हेतु State Apex Committee, State Empowered Committee, Piller Nodal Officer का गठन निम्न रूप से किया जाता है :- (A) स्टेट एपेक्स कमिटी :-

क्र0 पदनाम अध्यक्ष/सदस्य
1. मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2. पुलिस महानिदेषक, बिहार सदस्य
3. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, गृह विभाग सदस्य
4. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग सदस्य
5. सचिव, विधि विभाग सदस्य
6. सचिव, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग सदस्य
7. अपर पुलिस महानिदेषक, एस0सी0आर0बी0, बिहार, पटना {पुलिस स्तंभ (Pillar) के नोडल पदाधिकारी} सदस्य सचिव
8. राज्य सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी, एन0आई0सी0, पटना सदस्य
9. ICJS के प्रत्येक स्तंभ (Pillar) के प्रमुख (Pillar - पुलिस, कारा, न्यायालय, अभियोजन एवं फॉरेन्सिक) सदस्य

(क) राज्य में ICJS के प्रत्येक स्तंभ (Pillar) के लिए नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति। (ख) परियोजना के प्रगति की समीक्षा। (ग) निधि की उपयोगिता का अनुश्रवण। (घ) परियोजना के लिए प्रस्तावों की स्वीकृति। (ड.) परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए दिषा-निर्देष एवं मार्गदर्षन एवं कार्यकाल सुनिष्चित करना। (च) परियोजना की सफलता के लिए अनुकूल वातावरण बनाना। (छ) राज्य के विषेष आवष्यकतानुसार समिति में किसी अन्य सदस्य को नियुक्त करना। (ज) यदि आवष्यक हो तो मौजूदा स्टेट एपेक्स समिति के सदस्यों को सहयोजित (Co-opt) करना।89 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 बैठक -

(क) स्टेट एपेक्स कमिटी की प्रत्येक तिमाही बैठक आयोजित की जाएगी। (ख) पुलिस स्तंभ (Pillar) के नोडल पदाधिकारी आवधिक बैठक आयोजित कराएँगे।

क्र0 पदनाम अध्यक्ष/सदस्य
1. पुलिस महानिदेषक, बिहार, पटना अध्यक्ष
2. अपर पुलिस महानिदेषक, एस0सी0आर0बी0, बिहार, पटना {पुलिस स्तंभ (Pillar) के नोडल पदाधिकारी} सदस्य सचिव
3. प्रतिनिधि, गृह विभाग सदस्य
4. प्रतिनिधि, वित्त विभाग सदस्य
5. प्रतिनिधि, विधि विभाग सदस्य
6. प्रतिनिधि, आई0टी0 विभाग सदस्य
7. प्रतिनिधि, एन0आई0सी0 सदस्य
8. सचिव, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग सदस्य
9. आई0सी0जे0एस0 के प्रत्येक स्तंभ (Pillar) के नोडल पदाधिकारी सदस्य

स्टेट इम्पावर्ड कमिटी के दायित्व :- (क) प्रत्येक स्तंभ (Pillar) (पुलिस, फॉरेन्सिक, अभियोजन एवं कारा) के लिए प्रतिनिधि अधिकारी नियुक्त करना।

(ख) परियोजना कार्यान्वयन के प्रगति की आवधिक समीक्षा करना। (ग) परियोजना पर विचार के लिए नई व्यावसायिक प्रक्रियाओं एवं/अथवा घटकों की पहचान करना एवं उस अनुरूप प्रस्ताव तैयार करना।

(घ) निर्देष के अनुसार हॉर्डवेयर/सॉफ्टवेयर के क्रय, परियोजना के विभिन्न घटकों के लिए स्वीकृति। (ड.) उचित प्रषिक्षण की व्यवस्था, मास्टर प्रषिक्षक एवं प्रषिक्षक का चयन एवं उनकी व्यवस्था करना। (च) नीति एवं अन्य प्रक्रिया संबंधी महत्वपूर्ण मुद्दें। (छ) राज्य के विषेष आवष्यकतानुसार समिति में किसी अन्य सदस्य को नियुक्त करना। (ज) यदि आवष्यक हो तो मौजूदा स्टेट इम्पावर्ड समिति के सदस्यों को सहयोजित (Co-opt) करना। बैठक - (क) स्टेट इम्पावर्ड कमिटी की प्रत्येक माह बैठक आयोजित की जाएगी। (ख) पुलिस स्तंभ के नोडल पदाधिकारी आवधिक बैठक आयोजित कराएँगें।

(C) पीलर नोडल ऑफिसर :-

राज्य के स्टेट एपेक्स कमिटी/स्टेट इम्पावर्ड कमिटी द्वारा नियुक्त व्यक्ति। पीलर नोडल ऑफिसर के दायित्व :- (क) गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए टेम्पलेट के अनुसार राज्य कार्य परियोजना (State Action Plan) तैयार करना एवं प्रस्तुत करना।

(ख) परियोजना के अन्तर्गत deliverables को विकसित करना एवं लागू/Rollout करना। (ग) परियोजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए आवष्यकतानुसार हार्डवेयर, नेटवर्क कनेक्टिविटी, उपयोगकर्ताओं की संख्या एवं अन्य डाटा के संदर्भ में पुलिस फॉरेन्सिक, अभियोजन पदाधिकारी एवं कारा में मांगों और आवष्कताओं की परियोजनाओं को सुनिष्चित करना।

(घ) सेन्ट्रल नोडल एजेन्सी (CNA) एवं GFR 2017 के दिषा-निर्देष एवं SOP के अनुसार क्रय निष्पादित करना।

(ड.) संबंधित कार्यालय एवं स्थान पर ससमय सभी घटकों को लगाना। बैठक -

(क) परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए पीलर नोडल ऑफिसर की बैठक पाक्षिक की जाएगी। आदेष से, प्रकाष रंजन, उप सचिव।90 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-09/2022--192

कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 9 जनवरी 2024

दिनांक 06.09.2021 को मंडल कारा, नवादा के विचाराधीन बंदी गुड्‌डु कुमार, पे0-उपेन्द्र सिंह की हुई मृत्यु की घटना में बरती गई गंभीर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता तथा इस आपराधिक कृत्य में गहरी संलिप्तता के प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2185 दिनांक 07.03.2022 द्वारा श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए निलम्बनावस्था में उनका मुख्यालय विशेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर निर्धारित किया गया। 2. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9158 दिनांक-01.09.2022 द्वारा श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति निलम्बित) के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई है, जिसके संचालन हेतु आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, गया को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। 3. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी- सह-आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया के पत्रांक 820/विधि, दिनांक 21.02.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। उक्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप संख्या-01 एवं 03 को आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप संख्या-02, 04 एवं 05 के संबंध में स्पष्ट मंतव्य अंकित नहीं करते हुए अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

4. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय ज्ञापांक-3480 दिनांक-27.04.2023 द्वारा श्री पाण्डेय को संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के अभिलेखित बिन्दुओं के आलोक में श्री पाण्डेय से 15 दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई तथा विभागीय पत्रांक-3479 दिनांक-27.04.2023 द्वारा पुलिस अधीक्षक, नवादा से बंदी मृत्यु की उक्त घटना के मामले में दर्ज नवादा नगर थाना काण्ड संख्या-970/21 दिनांक-06.09.2021 में पुलिस अनुसंधान में दृष्टिगत तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में दर्ज उक्त प्राथमिकी की अद्यतन स्थिति से संबंधित सूचना/प्रतिवेदन की मांग की गई।

5. तद्‌आलोक में पुलिस अधीक्षक, नवादा के पत्रांक-1498/सी0आर0, दिनांक-15.07.2023 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि नवादा नगर थाना काण्ड संख्या-970/21, दिनांक-06.09.2021 धारा 304/202/34 भा०द०वि० के अन्तर्गत अप्राथमिकी अभियुक्त श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, जेल सुपरिटेन्डेन्ट, मंडल कारा नवादा एवं अन्य कारा कर्मियों के विरूद्ध सत्य प्रतीत होना पाया गया है।

6. अधीक्षक, विशेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर के पत्रांक-4150 दिनांक-14.05.2023 के माध्यम से श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति निलंबित) द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया है।

7. उक्त बंदी मृत्यु की घटना के संदर्भ में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, फुलवारीशरीफ, पटना के न्यायिक चिकित्सा एवं विष विज्ञान विभाग के द्वारा Medico legal opinion के तहत बताया गया है कि The Judicial magistrate has given the aforementioned opinion because she was not able to scientifically interpret the injuries and to correlate them with the history avilable especially prior to admission in the jail. उक्त प्रतिवेदन के निष्कर्ष में अंकित किया गया है कि Injures mentioned in the post-mortem report are ante-mortem in nature and caused by hard and blunt substances. Time of injuries is 3 to 5 days prior to death. Death Due to shock and hemorrhage as complications of injuries mentioned in the post-mortem report. No evidence of any medical negligence could be found from the availabel documents. Opinion regarding fixation of responsibility of administrative regaligence is kept reserved for the oral examination of officer in charge/investigating officer of police station who had arrrested the deceased.

8. ADG of Police (BHRC) के प्रतिवेदन में अंकित है कि Only one thing is certain that the deceased UTP died of serious external and internal injuries sustained by him. Since there are many contradictios between the statements of eye witnesses, statements of relatives, PM report, CCTV evidence, Enquiry reports, Forensic Expert opinion etc, no definite opinion regarding when, where and by whom these injuries were caused can be given.

9. उक्त मामले में Cr.W.J.C. No.- 1081/2022 अभिषेक कुमार पाण्डेय बनाम बिहार राज्य एवं अन्य माननीय उच्च न्यायालय, पटना में लंबित है।

10. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में मामले की समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया द्वारा आरोप संख्या 01 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। आरोप संख्या 03 में प्रस्तुतीकरण91 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 पदाधिकारी एवं जांच दल के सदस्य के द्वारा भी बताया गया कि बंदी गुड्‌डु कुमार की हत्या में अधीक्षक की संलिप्तता से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं है एवं मृत बंदी से मारपीट के संबंध में उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर इस मामले में आरोपी पदाधिकारी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं होती है, इसलिए आरोप संख्या 03 को भी आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। आरोप संख्या-02, 04 एवं 05 को अप्रमाणित पाया गया है।

11. श्री अभिषेक कुमार पाण्डेय, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, नवादा (सम्प्रति निलम्बित) संलग्न विषेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर 20 माह से निलंबित हैं। विभिन्न कारा में पदाधिकारियों की कमी है। उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में ADG (BHRC), विभाग प्रमुख, AIIMS, पटना के मंतव्य के आलोक में श्री पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। 12. Cr.W.J.C. No.- 1081/2022 के आदेष के उपरान्त एवं पुलिस अनुसंधान के उपरान्त दण्ड के ऊपर निर्णय अलग से लिया जायेगा। इनके निलंबन अवधि के संबंध में निर्णय विभागीय कार्यवाही के फलाफल के उपरान्त लिया जायेगा।

13. उपरोक्त पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-200/2022--56

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चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विष्वास करने का कारण है कि श्री काषी कुमार, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक सम्प्रति-सेवा निवृत्त के विरुद्ध ''Assemblies of God Mission" पष्चिम चम्पारण, बेतिया (निबंधन संख्या-430/2003-04) के अधीन संचालित स्कूल को NIDC Of AG के देख-रेख में संचालित करने का आदेष संख्या-340 दिनांक-08.05.2023 पूर्व के आदेष को रद्‌द किया गया, जिसपर निबंधन महानिरीक्षक का अनुमोदन प्राप्त नहीं करना। (2) सारण प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में श्रीमती बसंती देवी, ग्राम-भगवानपुर, पो0-इसुआपुर, जिला-सारण-841411 द्वारा निबंधित दस्तावेज सं0-3855/21 को भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा 47'ए' के अन्तर्गत कमी मुद्रांक को कम करने हेतु रिष्वत मांगना। (3) सारण जिला के पदस्थापन काल में दस्तावेज संख्या-(1) 3270/2013 (2) 3271/2013 (3) 4953/2013 एवं (4) 4954/2013 के निबंधन में राजस्व क्षति। श्री कुमार द्वारा वरीय पदाधिकारी के आदेष को निरस्त करते हुए क्षेत्राधिकार से हटकर निर्णय लिया गया है, जो स्थापित कानून का उल्लंघन के साथ-साथ विभागीय अधिनियमों/नियमों एवं बिहार सरकारी सेवक, आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में विनिर्दिष्ट है।

2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री काषी कुमार, सेवा निवृत्त, सहायक निबंधन महानिरीक्षक के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों की जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी0) के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए श्री मनोज कुमार संजय, सहायक निबंधन महानिरीक्षक (उत्क्रमित उप निबंधन महानिरीक्षक स्तर), बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8 (ए) को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

3. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

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बिहार राज्यपाल के आदेश से, निरंजन कुमार, उप सचिव। श्री संजीव कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-366/2023 (519/2019) तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, वैशाली के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1584 दिनांक 01.04.2022 द्वारा92 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 अधिप्राप्ति वर्ष 2012-13 में मिलरो से नियमानुसार एकरारनामा नहीं करने, बैंक गारन्टी/Deed of Pledge प्राप्त नहीं किये जाने, निगम को 3,56,20,455.65 (तीन करोड़ छप्पन लाख बीस हजार चार सौ पचपन रूपये पैंसठ पैसे) का आर्थिक क्षति पहुचाने, प्रशासनिक विफलता, निगम मुख्यालय के निदेशों की अवहेलना आदि आरोप प्रतिवेदित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में आरोप पत्र को पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक 9398 दिनांक 10.06.2022 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय अभिलेख एवं कागजात उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। विभागीय पत्रांक 11743 दिनांक 14.07.2022 द्वारा श्री सिंह का आवेदन संलग्न करते हुुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से वांछित अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया एवं पत्र की प्रतिलिपि श्री सिंह को देते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से सम्पर्क कर अभिलेख प्राप्त करते हुए शीघ्र स्पष्टीकरण समर्पित करने का अनुरोध किया गया एवं स्मार पत्र भी दिया गया।

निगम मुख्यालय, पटना के पत्रांक 923 दिनांक 02.03.2023 द्वारा सूचित किया गया कि श्री सिंह द्वारा याचित सभी अभिलेख/कागजात जिला प्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य निगम वैशाली के माध्यम से श्री सिंह को उपलब्ध करा दिया गया है। फिर भी श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। श्री सिंह द्वारा पुनः दिनांक 18.09.2023 को आवेदन समर्पित करते हुए वांछित कागजात उपलब्ध कराने हेतु खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना को निदेशित करने का अनुरोध किया गया। साथ ही अपने आवेदन में यह भी अंकित किया गया कि वांछित कागजात प्राप्त होते ही एक सप्ताह के अन्दर स्पष्टीकरण समर्पित कर दिया जाएगा।

श्री सिंह द्वारा बार-बार अभिलेख/कागजात की माँग करने से ऐसा प्रतीत होता है कि टाल-मटोल करने की नियत से उनके द्वारा अभिलेख/कागजात की मांग की जा रही है एवं प्रतिवेदित आरोप के संबंध में उन्हें कुछ नहीं कहना है। तदुपरांत पुरे मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी एवं आरोपों की गम्भीरता को देखते हुए मामले की वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी।

अतएव श्री संजीव कुमार सिंह, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-366/2023 (519/2019) तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, वैशाली के विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत कराने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना तथा प्रस्तुतीकरण/उपस्थापन पदाधिकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित कोई वरीय पदाधिकारी होगें। श्री सिंह से अपेक्षा की जाती है कि वे अपना बचाव बयान/पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित करना सुनिश्चित करेगेंं एवं जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दे, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें। बिहार राज्यपाल के आदेश से,

संयुक्त सचिव। ————— अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 44—571+15-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 17 January 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-01-17.3/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-01-17.3.