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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 14 February 2024

Published 14 February 2024

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-02-14.7
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 25 1945 (श0) सं(cid:201)या 07 पटना, बुधवार, ————————

14 2024 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-70 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 71-72 पूरक

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पूरक-क 73-822 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत

सूचनाएं। —————

शिक्षा विभाग

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अधिसूचना

25 जनवरी 2024

सं0 15/ए 7-01/2015-407--डॉ सरोज कुमार द्विवेदी, तत्कालीन रजिस्ट्रार-सह-निदेशक, जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवंं राजनीतिक शोध संस्थान, पटना के विरूद्ध निदेशक, जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान, पटना से प्रतिवेदित आरोपाें के आलोक में विभागीय ज्ञापांक 1496 दिनांक 30.07.2015 के द्वारा आरोप पत्र (प्रपत्र-'क') गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। तदोपरांत विभागीय ज्ञापांक 2317 दिनांक 04.12.2015 के द्वारा श्री द्विवेदी को निलंबित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय ज्ञापांक 611 दिनांक 31. 03.2017 के द्वारा डॉ0 सरोज कुमार द्विवेदी को निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त किया गयाः- (i) श्री द्विवेदी की एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। (ii) विभागीय पत्रांक 2487 दिनांक 29.12.2015 एवं विभागीय पत्रांक 289 दिनांक 17.02.16 में वर्णित आरोपों में अंकित अनाधिकृत भुगतान की गई राशि श्री द्विवेदी के वेतन अथवा अन्य भुगतेय पावनाओं से वसूली की जाएगी। श्री द्विवेदी दण्ड अधिरोपण की तिथि (दिनांक 31.03.2017) को सेवानिवृत हुए, जिसके कारण उनके विरूद्ध अधिरोपित एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दण्ड प्रभावी नहीं हो सका। दण्ड को प्रभावी करने के बिन्दु पर सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग एवं विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया। विधि विभाग के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता, बिहार से प्राप्त परामर्श के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली, 2005 के नियम-11 के तहत विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए निम्न निर्णय संसूचित किया जाता है :- (i) श्री द्विवेदी का निलंबन अवधि (दिनांक 04.12.2015 से दिनांक 31.03.2017 तक) को कर्तव्य पर बिताई गयी अवधि नहीं मानी जाएगी। (ii) श्री द्विवेदी को निलंबन अवधि के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजय कुमार, संयुक्त सचिव।

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सं0 05/पी0-01-10-05/2023-75--जल संसाधन विभाग, बिहार के अधीन सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 19300 दिनांक 13.10.2023 से निर्गत अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के क्रम में गठित विभागीय स्क्रीनिंग समिति की दिनांक 29.12.2023 को आयोजित बैठक की अनुशंसा के आलोक में पूर्णतः अस्थाई व्यवस्था के अंतर्गत निम्नलिखित सहायक अभियंता (असै॰)(वेतन स्तर-09) को कार्यपालक अभियंता (असै॰) के पद पर विहित वेतनमान (वेतन स्तर-11) सहित के उच्चतर पद पर उत्क्रमित करते हुए अस्थाई स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार प्रदान किया जाता हैः-

क्र0 सं0 पदाधिकारी का नाम/ आई0 डी0 संख्या मूल कोटि वरीयता (विभागीय पत्राक-5194 दिनांक 09.10.2023) कोटि मूल पद
1 2 3 4 5
1 श्री राजीव कुमार सिंह 5172/बेगुसराय 233 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
3 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
2 श्री राजेश कुमार आर्या 5183/पटना 258 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
3 श्री अमोद कुमार 5336/मुजफ्फरपुर 427 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
4 मो0 ओसामा आलम वारसी 5368/नालंदा 456 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
5 श्री विकास कुमार 5380/मधेपुरा 468 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
6 श्री विक्रम दास 5392/जमुई 479 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
7 श्री प्रफुल्ल कुमार 5393/भागलपुर 480 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
8 श्री अनिल कुमार 5402/सहरसा 488 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
9 श्री अभिषेक कुमार 5403/पटना 489 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
10 श्री नवीन कुमार रजक 5404/सहरसा 490 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
11 श्री अमरेन्द्र कुमार 5405/बेगूसराय 491 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
12 श्री कमलेश कुमार भंडारी 5411/मधुबनी 497 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
13 श्री बिमलेन्द्र कुमार 5414/बेगूसराय 500 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
14 श्री विवेक कुमार 5423/पटना 506 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
15 श्री धर्मेन्द्र कुमार भारती 5426/औरंगाबाद 509 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
16 श्री राजीव कुमार 5442/मुजफ्फरपुर 524 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
17 श्री मिथलेश कुमार 5443/लखीसराय 525 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
18 श्री अभिषेक कुमार 5448/जहानाबाद 530 सामान्य सहायक अभियन्ता (असै०)
19 श्री युवराज अमन 5452/रोहतास 534 अनुसूचित जाति सहायक अभियन्ता (असै०)
4 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

2. उपर्युक्त पदाधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की तिथि से अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार का आर्थिक लाभ देय होगा। 3. संबंधित पदाधिकारी पदस्थापन होने तक वर्तमान धारित पदस्थापन पर हीं उत्क्रमित पद का प्रभार ग्रहण करेंगे। 4. अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानों के आलोक में उच्चतर पद का प्रभार प्राप्त करने वाले पदाधिकारियों के संबंध में भविष्य में अर्हत्ता को प्रभावित करने वाले किसी प्रकार की त्रुटि/विसंगति पाए जाने पर संबंधित कर्मियों को प्रदत्त प्रभार आदेश को रद्‌द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा भुगतान की गई अन्तर राशि की भी वसूली कर ली जाएगी। 5. सारणी में उल्लेखित कतिपय पदाधिकारियों को इस नियमावली के अंतर्गत भी स्थानापन्न के रूप में विहित वेतनमान में उच्चतर पद पर उत्क्रमित करते हुए प्रभार दिया गया है। उनसे वरीय पदाधिकारी जिनका निष्कर्ष मुहरबंद लिफाफा में रक्षित है, के आरोप मुक्त होने की स्थिति में कनीयतम्‌ पदाधिकारी जिसको विहित वेतनमान में उच्चतर पद पर उत्क्रमित करते हुए कार्यकारी प्रभार प्रदान किया गया है, का कार्यकारी प्रभार तत्समय उपलब्ध रिक्ति की उपलब्धता के आलोक में समाप्त करते हुए आरोप मुक्त पदाधिकारी को उच्चतर पद पर उत्क्रमित करते हुए कार्यकारी प्रभार मुहरबंद लिफाफा मेें रखी गई अनुषंसा के आलोक में प्रदान किया जाएगा। 6. कार्यकारी व्यवस्था के तहत्‌ विहित वेतनमान में उच्चतर पद पर उत्क्रमित करते हुए दिया गया कार्यकारी प्रभार माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील संख्या-4880/2017 बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य तथा अन्य सम्बद्ध वादों में पारित होने वाले अंतिम आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा। 7. उपर्युक्त अनुषंसा सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार की अधिसूचना संख्या-19300 दिनांक 13.10.2023 से निर्गत अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानोें के आलोक में की गई है, जो इस नियमावली में किसी भी परिवर्तन के फलाफल से प्रभावित होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार मंडल, स्ांयुक्त सचिव (प्रबंधन)। सं0 05/निजी0-40-253/2023-120--श्री संजय सिंह (आई0 डी0 संख्या-3927), निदेशक (अधीक्षण अभियंता) (कार्यकारी प्रभार), राज्य बाँध सुरक्षा संगठन, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-74 (ख) में निहित प्रावधानों के आलोक में दिनांक 31.01.2024 के अपराह्‌न से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार मंडल, स्ांयुक्त सचिव (प्रबंधन)। निर्वाचन विभाग ------- अधिसूचना 6 फरवरी 2024

सं0 ई2-2-02/2024-03--बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 67वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार निर्वाचन सेवा के अवर निर्वाचन पदाधिकारी के पदों पर नियुक्ति हेतु बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का पत्रांक- 7ए/67वीं संयुक्त (मुख्य) प्रति. परीक्षा-01-04/2022 (64) लो॰से॰आ॰/गो॰ दिनांक 21.12.2023द्वारा की गई अनुषंसा के आलोक में निम्नलिखित अनुषंसित अभ्यर्थियों को बिहार निर्वाचन सेवा के अवर निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर वेतनमान्‌ लेवल-9 (रु0 53,100-रु0 1,67,800/-)में औपबंधिक रूप से नियुक्त करते हुए उनके नाम के सम्मुख स्तंभ-8 में अंकित कार्यालय में अवर निर्वाचन पदाधिकारी (परीक्ष्यमान) के रूप में पदभार ग्रहण की तिथि से निम्नांकित शर्त्तों के साथ पदस्थापित किया जाता है-

क्र ॰ ं सं॰ अभ्यर्थी का नाम एवं मेधा क्रमांक आरक्षण कोटि आवंटित आरक्षण कोटि गृह जिला जन्म तिथि स्थायी पता प्रस्तावित पदस्थापन कार्यालय फोटो
1 2 3 4 5 6 7 8 9
1 श्री राजेष कुमार, 113 पिछड़ा वर्ग (05) अनारक्षित (01) नवादा 07.12.1996 पिता-श्री उमेष प्रसाद यादव, ग्रामथानापोस्ट- गोविन्दपुर, जिला-नवादा, बिहार, पिन-805102, मोबाईल नं॰-8271868855 मुख्यालय
5 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
2 श्री अविनाष कुमार, 146 पिछड़ा वर्ग (05) अनारक्षित (01) ब गूसराय े 03.04.1987 पिता-श्री कामदेव यादव, ग्रामपो॰-पपरौर, थाना-बरौनी, जिला-बेगूसराय, पिन-851210, मोबाईल नं॰-8409182588 मुख्यालय
3 सुश्री नेहा कुमारी, 225 पिछड़ा वर्ग (05) पिछड़ों वर्गों की महिला (06) मुंगेर 13.12.1990 पिता-श्री षिव कुमार मंडल, वेटनरी हॉस्पीटल के पीछे, मोहल्ला-छोटी दौलतपुर, पो॰था॰-जमालपुर, जिला-मं गेर, ं ु पिन-811214, मोबाईल नं॰-9341846505 मुख्यालय
4 सुश्री काजल राज, 1183 अनुसूचित जाति (02) अनुसूचित जाति (02) पष्चिम चम्पारण 28.02.1997 पिता-श्री प्रेम कुमार रजक, मोहल्ला-मिर्जा टोला, वाार्ड संख्या-5, पो॰था॰-बेतिया, जिला-पष्चिम चम्पारण, पिन-845438, मोबाईल नं॰-9113716023 मुख्यालय

2. यह नियुक्ति इस शर्त्त के साथ की जाती है कि अभ्यर्थियों द्वारा समर्पित पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन में यदि कोई प्रतिकूल प्रतिवेदन प्राप्त होता है, तब नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों की सेवा तत्काल प्रभाव से रद्‌द कर दी जायेगी एवं उनके विरूद्ध आवष्यक विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी।

3. यह नियुक्ति अभ्यर्थियों द्वारा समर्पित शपथ-पत्र के आधार पर शैक्षणिक एवं अन्य संगत प्रमाण-पत्रों को सही मानकर इस शर्त्त पर की जा रही है कि भविश्य में शैक्षणिक प्रमाण-पत्र/अभिलेखों के संबंध में गलत सूचना पाये जाने की स्थिति में इनकी सेवा कभी भी बिना किसी पूर्व सूचना के समाप्त कर दी जायेगी एवं आवष्यक कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी।

4. वैसे अभ्यर्थी, जो वर्तमान में किसी सरकारी संस्थान/निजी संस्थान में कार्यरत है, उन्हें योगदान करने के समय वर्तमान नियोक्ता का विरमन पत्र समर्पित किये जाने की स्थिति में ही उनका योगदान स्वीकार किया जायेगा।

5. योगदान के समय अभ्यर्थियों को असैनिक शल्य-चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवष्यक होगा।

6. योगदान के समय अभ्यर्थियों को दहेज नहीं लेने एवं देने संबंधी घोशणा-पत्र प्रस्तुत करना आवष्यक होगा। 7. योगदान के समय अभ्यर्थियों को शराब का सेवन नही करने, साथ ही दूसरे लोगों को भी शराब से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का शपथ-पत्र विहित प्रपत्र में समर्पित करना आवष्यक होगा।

8. बिहार पेंषन (संषोधन) नियमावली 2005 द्वारा प्रतिपादित वित्त विभाग के संकल्प सं0-1964 दिनांक-31.08.2005 के अनुसार नवनियुक्त पदाधिकारियों पर नयी अंषदायी पेंषन योजना लागू होगी।

9. अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्राप्त करने/योगदान करने हेतु पदस्थापित स्थान पर आने-जाने के लिए कोई यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

10. अभिप्रमाणित फोटोंयुक्त नियुक्ति पत्र प्रस्तुत नहीं किये जाने पर योगदान स्वीकृत नहीं किया जायेगा। योगदान के समय अभ्यर्थी को आयोग में आवेदन पत्र में दिये गये फोटो की प्रति समर्पित करना अनिवार्य होगा अन्यथा ऐसे अभ्यर्थी का योगदान स्वीकार नहीं किया जायेगा। 11. नवनियुक्त पदाधिकारी को पदस्थापित कार्यालय का प्रभार ग्रहण करने के समय संबंधित कार्यालय को विहित प्रपत्र में चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा निष्चित रूप से समर्पित करना होगा।

12. इनकी पारस्परिक वरीयता बिहार लोक सेवा द्वारा अनुषंसित मेधा क्रमानुसार होगी। 13. सभी नवनियुक्त अवर निर्वाचन पदाधिकारी (परीक्ष्यमान) दिनांक 23.02.2024 तक विभागीय मुख्यालय में प्रभार ग्रहण/योगदान करना सुनिष्चित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, एच॰ आर॰ श्रीनिवास, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार- सह-प्रधान सचिव।6 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निम्नांकित व्यक्तियों को संगत अधिसूचनाओं द्वारा राज्य अनुसूचित जाति आयोग, बिहार, पटना में उनके नाम के सम्मुख अंकित पदों पर नियुक्त किया गया थाः-

1. श्री राजेन्द्र कुमार अध्यक्ष 14144/25.07.2023
2. श्री ललन राम उपाध्यक्ष 14145/25.07.2023
3. श्री श्याम बिहारी राम सदस्य 14146/25.07.2023
4. श्री अशोक पासवान सदस्य 14147/25.07.2023
5. श्री जगदीश चौधरी सदस्य 14148/25.07.2023

2. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-5614, दिनांक-18.11.2009 की कंडिका-4 (ग) में विहित प्रावधान के तहत, लोकहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से उपर्युक्त व्यक्तियों को तत्कालिक प्रभाव से अपने पद से विमुक्त किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, --सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निम्नांकित व्यक्तियों को संगत अधिसूचनाओं द्वारा राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, बिहार, पटना में उनके नाम के सम्मुख अंकित पदों पर नियुक्त किया गया थाः-

1. श्री शम्भू कुमार 'सुमन' अध्यक्ष 14140/25.07.2023
2. श्रीमती स्वीटी सीमा हेम्ब्रम उपाध्यक्ष 14141/25.07.2023
3. श्री केदार मुर्मु सदस्य 14142/25.07.2023
4. श्री महेश्वर काजी सदस्य 14143/25.07.2023

--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निम्नांकित व्यक्तियों को संगत अधिसूचनाओं द्वारा महादलित आयोग, बिहार, पटना में उनके नाम के सम्मुख अंकित पदों पर नियुक्त किया गया थाः-

1. श्री संतोष कुमार निराला अध्यक्ष 14135/25.07.2023
2. श्री अरूण मांझी सदस्य 14136/25.07.2023
3. श्री निर्भय कुमार प्रेमी सदस्य 14137/25.07.2023
4. श्री रामनरेश कुमार सदस्य 14138/25.07.2023
5. श्री कंत लाल शर्मा सदस्य 14139/25.07.2023

21/अ0पि0व0आ0-13/2012,सा0प्र0- --सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निम्नांकित व्यक्तियों को संगत अधिसूचनाओं द्वारा अति पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग, बिहार, पटना में उनके नाम के सम्मुख अंकित पदों पर नियुक्त किया गया थाः-7 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

1. डॉ नवीन कुमार आर्य अध्यक्ष 18744/18.10.2022
2. श्री अरविन्द कुमार सदस्य 18745/18.10.2022
3. श्री विनोद भगत सदस्य 18745/18.10.2022
4. श्री तारकेश्वर ठाकुर सदस्य 18745/18.10.2022
5. श्री ज्ञानचंद पटेल सदस्य 18745/18.10.2022

लघु जल संसाधन विभाग

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अधिसूचना

6 फरवरी 2024

सं0 प्र0-01/ल0ज0सं0/स्था0(राज0)-08/2016-665--वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-7566 दिनांक-14.07.2010 द्वारा बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त ''रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना, 2010'', दिनांक-01-01-2009 से प्रभावी किया गया है । इस योजना के प्रावधान के अनुसार 10/20/30 वर्षों की नियमित सेवा के उपरांत तीन वित्तीय उन्नयन वेतन बैंड/ग्रेड वेतन के सोपान में अनुमान्य है । 2. उक्त प्रावधानों के आलोक में लघु जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा के निम्नलिखित सेवानिवृत्त/कार्यरत पदाधिकारी को 10 एवं 20 वर्षो की नियमित एवं संतोषजनक सेवा पूरी करने पर कालावधि के अनुसार उनके नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित वेतन बैंड एवं ग्रेड वेतन/वेतन स्तर में अंकित तिथि से वितीय उन्नयन(एम0ए0सी0पी0) की स्वीकृति प्रदान की जाती है-

क्र0 सं0 पदा0 का नाम/पदनाम/ आई0 डी0/गृह जिला/ वरीयता क्रमांक/ल0ज0सं0 विभाग का संयुक्त वरीयता क्रमांक जन्म तिथि/ प्रथम योगदान की तिथि/ से0नि0 तिथि स्वीकृत वितीय उन्नयन (ACP/MACP) वेतनमान/वेतन बैंड/ग्रेड वेतन/वेतन स्तर एवं देय तिथि अभ्युक्ति
1 2 3 4 5
1. श्री गिरधारी/से0नि0 सहायक अभियन्ता/ असैनिक-जे0- 9057/संत कबीर नगर (उ0प्र0)/ (8004 ज0सं0वि0)/ (79/16 ल0ज0सं0वि0) 26.08.1961 11.08.1989 31.08.2021 MACP-2 दिनांक-25.01.2013 से पे बैण्ड-3 (15600-39100/-) ग्रेड पे-6600/- में स्वीकृत ।
2. श्री राजेश कुमार/सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक /44/जे0-19MWRD /नालंदा 20.01.1970 31.07.2012 31.01.2030 MACP-1 दिनांक-31.07.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
3. श्री गंगाई सिंह/ सहायक अभियन्ता (कार्यकारी प्रभार)/असैनिक /45/जे0-20MWRD/मधुबनी 04.03.1970 01.08.2012 31.03.2030 MACP-1 दिनांक-01.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
4. श्री ओम प्रकाश सिंह/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/37/जे0-12 MWRD/रोहतास 20.12.1983 01.08.2012 31.12.2043 MACP-1 दिनांक-01.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
5. श्री कौशल किशोर प्रसाद /सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/33/जे0-08 MWRD/नालंदा 09.02.1968 02.08.2012 29.02.2028 MACP-1 दिनांक-02.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
8 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
6. श्री संजय कुमार सिंह /सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार/असैनिक/34/जे0-09 MWRD/पटना 06.06.1971 02.08.2012 30.06.2031 MACP-1 दिनांक-02.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
7. श्री जय प्रकाश प्रसाद /सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/59/जे0-34 MWRD/पटना 05.01.1977 01.08.2012 31.01.2037 MACP-1 दिनांक-01.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
8. श्री कुमार वैद्यनाथ/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/35/जे0-10 MWRD/नालंदा 02.11.1981 31.07.2012 30.11.2041 MACP-1 दिनांक-31.07.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
9. श्री अभिषेक कुमार/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार/असैनिक/77/जे0-52 MWRD/गोपालगंज 13.09.1982 01.08.2012 30.09.2042 MACP-1 दिनांक-01.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
10. श्री संजय कुमार/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/55/जे0-30 MWRD/बेगूसराय 31.05.1975 06.08.2012 31.05.2035 MACP-1 दिनांक-06.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
11. श्री संजीव कुमार/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/50/जे0-25 MWRD /शिवहर 01.03.1979 07.08.2012 28.02.2039 MACP-1 दिनांक-07.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
12. श्री रंजन कुमार/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/60/जे0-35 MWRD /वैशाली 17.04.1984 31.07.2012 30.04.2044 MACP-1 दिनांक-31.07.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
13. श्री सरोज कुमार/ सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/54/जे0-29 MWRD/मधुबनी 01.02.1982 01.08.2012 31.01.2042 MACP-1 दिनांक-01.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
14. श्री नागेन्द्र कुमार रंजन /सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/43/जे0-18 MWRD/गया 03.02.1983 07.08.2012 28.02.2043 MACP-1 दिनांक-07.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं
15. श्री शशि भूषण/सहायक अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/28/जे0-03 MWRD/मुजफ्फरपुर 03.02.1985 09.08.2012 29.02.2045 MACP-1 दिनांक-09.08.2022 से वेतन स्तर-08 मे स्वीकृत । ं

3. उपर्युक्त वितीय उन्नयन व्यक्तिगत है, जिसका पारस्परिक वरीयता से कोई संबंध नहीं है । 4. उपर्युक्त कंडिका-2 में उल्लिखित पदाधिकारी को आर्थिक लाभ स्वीकृत करने एवं वेतन पूर्जा निर्गत करने के पूर्व संबंधित कार्यालय प्रधान/निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी/प्रभारी पदाधिकारी, वित(वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना/महालेखाकार, बिहार अपने स्तर से संबंधित अभियंताओं के प्रथम योगदान की तिथि, सेवा में टूट, दंडादेश आदि के संबंध में यथा आवश्यक जाँचकर तद्‌नुसार अग्रेत्तर कार्रवाई करेंगे ।

5. रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना के अन्तर्गत उत्क्रमित ग्रेड वेतन/वेतन स्तर में वेतन का निर्धारण वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-7566 दिनांक-14.07.2010 एवं 630 दिनांक-9 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 21.01.2010 के आलोक में मौलिक नियमवाली के नियम-22(l)(ए)(l) के प्रावधानों के अनुसार वेतन निर्धारण हेतु संबंधित कर्मी द्वारा यह विकल्प प्रयोग किया जाना है कि वे प्रोन्नति/वित्तीय उन्नयन की तिथि को वेतन निर्धारण करायेगें अथवा अगले वेतनवृद्धि की तिथि से ।

अधिसूचना निर्गत होने के एक माह के अन्दर यह विकल्प लिखित रूप से संबंधित पदाधिकारी द्वारा कार्यालय प्रधान/महालेखाकार/वित्त वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग को देना है ।

6. उपर्युक्त कंडिका-2 में वर्णित अभियन्ताओं के संबंध में वित्तीय उन्नयन स्वीकृति संबंधी पात्रता में किसी प्रकार की त्रुटि/पार्थक्य पाये जाने पर उन्हें प्रदत्त वितीय उन्नयन योजना के लाभ से संबंधित अधिसूचना को संशेधित/रद्द कर दिया जायेगा तथा उन्हें भुगतान की गई राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जाएगी ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, तारिक इकबाल, विशेष सचिव। --भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 के नियम-3(I)(B)(ii) तथा भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पत्रांक-20019/01/2000 आई॰एफ॰एस॰-II, दिनांक-22.12.2000 द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश के आलोक में भारतीय वन सेवा के वरीय वेतनमान में प्रोन्नत निम्नांकित पदाधिकारियों को उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से भारतीय वन सेवा के कनिष्ठ प्रशासनिक कोटि (Junior Administrative Grade) वेतन स्तर-12 में प्रोन्नति दी जाती है :-

01. श्री अम्बरीष कुमार मल्ल, भा.व.से. वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना 2015 01.01.2024
02. श्री अभिषेक कुमार सिंह, भा.व.से. वन प्रमंडल पदाधिकारी, बाँका 2015 01.01.2024

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चितरंजन शर्मा, संयुक्त सचिव। --श्री अभय कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:2001), क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, भागलपुर वन संरक्षक, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए निदेशक, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री अभय कुमार, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक वन संरक्षक-सह-अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना/मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कोष, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --श्री सुरेन्द्र सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:2001), निदेशक, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, पटना मुख्य वन संरक्षक-सह-राज्य नोडल पदाधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार, पटना/मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कोष, पटना को स्थानांतरित करते हुए मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री सुरेन्द्र सिंह, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक मुख्य वन संरक्षक (आई.टी.), बिहार/मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, हरियाली मिशन, बिहार, पटना/वन संरक्षक, कार्य नियोजना अंचल, पटना/वन संरक्षक (मुख्यालय) कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक बिहार के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। श्री कमलजीत सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:2004), मुख्य वन संरक्षक (आई.टी.), बिहार, पटना मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना/वन संरक्षक, कार्य नियोजना अंचल, पटना/वन संरक्षक (मुख्यालय) कार्यालय :

10 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

प्रधान मुख्य वन संरक्षक बिहार को स्थानांतरित करते हुए निदेशक, सामाजिक वानिकी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री कमलजीत सिंह, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे। --श्री सुधीर कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:2004), मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास, बिहार, पटना मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, हरियाली मिशन, बिहार, पटना/मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधन, बिहार, पटना/वन संरक्षक-सह-अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, भागलपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री सुधीर कुमार, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक वन संरक्षक, भागलपुर के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --डॉ. एस. कुमारा सामी, भा॰व॰से॰, (BH:2006), वन संरक्षक, पूर्णियाँ अँचल, पूर्णिया को स्थानांतरित करते हुए मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधन, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

डॉ. एस. कुमारा सामी, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक वन संरक्षक, वन्य प्राणी अँचल, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य वानिकी विकास निगम लि., पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य वन विकास निगम लि., पटना एवं अनुषंंगी इकाई/वन संरक्षक-सह-अपर निदेशक, हरियाली मिशन, उत्तर एवं दक्षिण बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --डॉ. के. गणेश कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:2006), वन संरक्षक, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना सचिव, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद, पटना को स्थानांतरित करते हुए मुख्य वन संरक्षक-सह-राज्य नोडल पदाधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

डॉ. के. गणेश कुमार, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक वन संरक्षक, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना/सचिव, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --श्री संजय प्रकाश, भा॰व॰से॰, (BH:2008), वन संरक्षक, वन्य प्राणी अँचल, पटना वन संरक्षक-सह-अपर निदेशक, हरियाली मिशन, उत्तर एवं दक्षिण बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, पूर्णियाँ अँचल, पूर्णियाँ के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री नीरज नारायण, भा॰व॰से॰, (BH:2011), वन प्रमंडल पदाधिकारी- सह-उप निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष प्रमंडल-2, बेतिया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, बाँका के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री गौरव ओझा, भा॰व॰से॰, (BH:2013), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुँगेर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री गौरव ओझा, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक वन प्रमंडल पदाधिकारी, शोध प्रशिक्षण एवं जन सम्पर्क प्रमंडल, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --श्री शशिकांत कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:2013), वन प्रमंडल पदाधिकारी, शोध प्रशिक्षण एवं जन सम्पर्क प्रमंडल, पटना वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना पार्क प्रमंडल, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, गया के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री शशिकांत कुमार, भा॰व॰से॰ अगले आदेश तक निदेशक, राज्य वन प्रशिक्षण संस्थान, गया के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --श्री ए.के. मल्ल, भा॰व॰से॰, (BH:2015), वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुँगेर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री अभिषेक कुमार सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:2015), वन प्रमंडल पदाधिकारी, बाँका को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, बेगूसराय के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री भाष्कर चन्द्र भारती, भा॰व॰से॰, (BH:2016), वन प्रमंडल पदाधिकारी, पूर्णियाँ को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

--श्री राजीव रंजन, भा॰व॰से॰, (BH:2016), वन प्रमंडल पदाधिकारी, गया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, पूर्णियाँ के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।11 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 --श्रीमती रूचि सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:2017), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री तेजस जायसवाल, भा॰व॰से॰, (BH:2018), वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री पियूष वरनवाल, भा॰व॰से॰, (BH:2018), वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष प्रमंडल-2, बेतिया के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री भरत चिन्तपल्ली, भा॰व॰से॰, (BH:2018), वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री सुबोध कुमार गुप्ता, बि॰व॰से॰, वन प्रमंडल पदाधिकारी, समस्तीपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना पार्क प्रमंडल, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री रविन्द्र कुमार रवि, बि॰व॰से॰, वन प्रमंडल पदाधिकारी, बेगूसराय को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, समस्तीपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --सुश्री श्वेता कुमारी, बि॰व॰से॰, उप वन संरक्षक, कार्यालय : क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। --श्री प्रतीक आनन्द, बि॰व॰से॰, वन प्रमंडल पदाधिकारी, सुपौल दिनांक-01.02.2024 के प्रभाव से अगले आदेश तक वन प्रमंडल पदाधिकारी, सहरसा के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। --श्री डी.के. दास, बि॰व॰से॰ (संविदा), निदेशक, राज्य वन प्रशिक्षण संस्थान, गया को स्थानांतरित करते हुए उप वन संरक्षक, कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चितरंजन शर्मा, संयुक्त सचिव। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ------ अधिसूचना 30 जनवरी 2024

सं0 1/स्था.1-11/2023-160--श्री राहुल कुमार, भा॰प्र॰से॰, निदेशक, संग्रहालय, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त कार्यहित में अगले आदेश तक के लिए निदेशक, पुरातत्व, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना के पद का प्रभार सौंपा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, सुरेन्द्र कुमार चौधरी, अवर सचिव। श्री प्रवीण कुमार (आई0डी0-5066) तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0-002/2014-12 दिनांक 25.03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-71, दिनांक 18.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा में प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (कोर्स एग्रीगेट) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है जो कोर्स एग्रीगेट की12 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत्य के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- (एक करोड़ निन्यानवे लाख इकहत्तर हजार सात सौ सतहत्तर) रूपये मात्र बताया गया। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान करने के लिए वे दोषी है।

(2) इस योजना के तहत एस0एल0आर0 ब्रिज एवं स्नान घाट के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमूनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि स्नान घाट के निर्माण कार्य में प्रावधानित पी0सी0सी0 में सीमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में पी0सी0सी0 में सीमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। पी0सी0सी0 में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है, जिसके लिए वे दोषी हैं। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1327, दिनांक 16.08.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री कुमार से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) के समीक्षोपरांत लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त मामले में श्री प्रवीण कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक-09.05.2022 को पारित न्यायनिर्णय के कंडिका-3,4,5 एवं 6 में अंकित न्याय निर्णय का Operative Part निम्नवत्‌ है :-

"3. Petitioner was subjected to disciplinary proceedings in framing charges on 18.01.2017 based on certain investigation report or preliminary report. Such initiation was not only against petitioner who is holding the post of Assistant Engineer and it was initiated against other officials like Arjun Prasad, Junior Engineer. Ultimately petitioner was punished with major penalty of dismissal from service on 22.08.2019 during pendency of the present petition. Thus, the petitioner has filed interlocutory application and it was allowed in respect of challenge to the dismissal order dated 22.08.2019 (as contained in Annexure 7). 4. Learned Counsel for the petitioner submitted that the present matter is covered by earlier decision rendered in the case of Arjun Prasad in CWJC NO.-10733 of 2019 decided on 16.12.2021. 5. Learned counsel for the state has not disputed that the present petition is covered by the earlier decision passed in CWJC No.-10733 of 2019. In the light of the aforesaid submission on behalf of the respondents counsel the present matter stands disposed of in terms of the order dated 16.12.2021 passed in CWJC No.-10733 of 2019 read with CWJC No. 16258 of 2017 and LPA No.-1161 of 2019. Whatever directions given in the aforesaid matter, it is applicable to the present case. 6. Accordingly order dated 22.08.2019 stands set aside. The concerned authority shall take note of earlier decisions before taking any further action in the matter." सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-09.05.2022 के विरूद्ध एल०पी०ए० दायर किये जाने के बिंदु पर विधि विभाग के माध्यम से विद्धान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श निम्नवत्‌ है :-

"Earlier the undersigned has opined for filing of appeal against order dt. 09.05.2022 passed by Hon'ble court in CWJC No. 21850/2018 (Pravin kumar Vrs. State of Bihar and ors.) In light of opinion of Learned Advocate General, in the matter of Arjun Prasad (Judgement dt. 16.12.2021 passed in CWJC 10733/2019) for the sake of consistency the13 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 Administrative Department may proceed afresh by the enquiry officer as per the provisions of CCA Rules."

सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-10733/2019 (अर्जुन प्रसाद बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-16.12.2021 के विरूद्ध एल०पी०ए० दायर किये जाने के संदर्भ में विधि विभाग के माध्यम से विद्धान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श निम्नवत्‌ है-

"Form the record it appears that C.W.J.C. No. 16258 of 2017 dated 04.12.2018, which has been referred to in the judgment, the Hon'ble Court had quashed the enquiry report as well as the order passed thereafter dated 26.09.2017 with a direction to conduct enquiry as per the law explained in the said judgment. The aforesaid decision was rendered by the Hon'ble High Court on the ground inter alia that the author of the enquiry report of the Vigilance which has been relied upon by the Inquiry Officer, in disciplinary proceeding, the authority thereof has not been examined nor witnesses have been produced for examination and cross examination. Thus on technical ground came to be quashed.

Now a days the law has been settled that if the provisions with respect to conduct of disciplinary proceeding as stipulated under Bihar Civil Services (Classification, Control & Appeals) Rules 2005, if has not been complied with, as in the instant case, matter is remanded back for initiation of fresh proceeding from the stage such illegality has cropped up and if liberty has been granted to proceed afresh after remanding back the matter, then there is precedent of awarding cost after challenging such order.

In view of the above the undersigned is of the view that in this case also L.P.A. ought not to be filed and the enquiry be proceeded afresh by the Inquiry Officer as per CCA rules.

I opine accordingly."

सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 09.05.2022 को पारित आदेश के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किया जाना संभव नहीं होने के कारण मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक 20.11.2018 के आलोक में वित्त विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग के परामर्श/सहमति के उपरांत उक्त न्यायादेश का अनुपालन किये जाने के संबंध में विधि विभाग के माध्यम से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के विचारार्थ मामले को रखा गया।

सी०डब्लू०जे०सी० संख्या-21850/2018 (प्रवीण कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-09.05.2022 को पारित न्यायादेश एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक विभागीय अधिसूचना सं0-2202 दिनांक-13.09.2022 द्वारा निम्नलिखित निर्णय लिया गया :-

श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-1780, दिनाक-22.08.2019 द्वारा के अधिरोपित दण्ड को निरस्त करते हुए उक्त अधिसूचना निर्गत करने की तिथि अर्थात दिनांक 22.08.2019 से उनको सेवा में पुनः बहाल करते हुए उनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को सुनवाई हेतु, संपूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी को Remand Back किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 को नियम-9(5) में वर्णित प्रावधान के आलोक में श्री कुमार को " की तिथि 22.08.2019 से निलंबित समझे जाने एवं अगले आदेश तक निलंबित करते हुए उक्त निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता का कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में पूर्व से नियुक्त संचालन पदाधिकारी श्री राजेश कुमार, अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना के सेवानिवृत हो जाने को कारण मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, नालन्दा बिहारशरीफ को संचालन पदाधिकारी एवं पूर्व के प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने के कारण श्री बिजेन्द्र कुमार (आई०डी०-5122) कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार), बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, एकंगरसराय को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

तत्पश्चात उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, नालंदा, बिहारशरीफ के पत्रांक-733 दिनांक 20.03.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-1 को आंशिक प्रमाणित एवं आरोप सं0-02 को अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। मामले के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री कुमार को उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक-963 दिनांक 12.06.2023 द्वारा उनसे लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई।14 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 उक्त आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) का मुख्य अंश15 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 khola With lead 15 km का प्रावधान है इस प्रकार कार्यस्थल पर सीमित मात्रा में स्थानीय का दिखना एकरारनामा के अनुरूप था। बिहार लेखा संहिता 6A(1) के अनुसार सहायक अभियंता को 50% मापी चेक कर लेना आवश्यक है संचालन पदाधिकारी को दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया है कि इनके द्वारा 58% चेक किया गया था। जिसमें सड़क को छोड़कर 2 बाथिंग घाट, SLR ब्रिज चेक किया गया था, वे 4.12.11 से 1.03.12 तक अन्य अवर प्रमंडल (शीर्ष कार्य अवर प्रमंडल संख्या 1) के अतिरिक्त प्रभार में भी था, इस प्रकार व्यवहारिकता के तौर पर बिहार लेखा संहिता के अनुसार 50% से ज्यादा चेक किया गया था, संचालन पदाधिकारी के द्वारा व्यावहारिक तथा लेखा संहिता के पहलुओं पर विचार आवश्यक था। नेपाल में कराए गए कार्य नक्सलवादी गतिविधि के कारण अभियंताओं को कार्यबंदी तथा झड़प का सामना करना पड़ता था, इस कारण शेखपुरा से लाए गए मटेरियल वाल्मीकिनगर अतिथि भवन के बगल में इकट्ठा किया जाता था, क्योंकि नेपाल स्थित त्रिवेणी स्थल पर नक्सलवादी के द्वारा चोरी की जाती थी तथा आगे चोरी की भी संभावना बनी रहती थी, मटेरियल को आवश्यकता अनुसार ठेला पर कार्यस्थल भेजा जाता था इस प्रकार आँख से देख कर भौतिक आधार था, यहाँ तक की कार्यपालक अभियंता के द्वारा फॉर्म M तथा N का सत्यापन भी कराया जा चुका था। :- श्री प्रवीण कुमार, निलंबित सहायक अभियंता द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा बाथिंग घाट तथा एसएलआर पर लगाए गए आरोप को अप्रमाणित पाया गया है जबकि अन्य कार्यों के लिए दिए गए तथ्य को बिना तर्क पूर्ण तरीके से विचार किए हुए ही अपना मंतव्य दिया गया है। इस संदर्भ में संयुक्त सचिव, अभियंत्रण, जल संसाधन विभाग, बिहार के पत्रांक 124 दिनांक 09.03.2017 के अनुसार पथ निर्माण जाँच के लिए 9 नमूने के कलेक्शन का जिक्र है, इस नोटिफिकेशन से पहले पथ निर्माण विभाग के समरूप नोटिफिकेशन के द्वारा जांच की क्रिया संपादित की जाती रही है जो कि पारदर्शिता तथा एकरूपता के लिए आवश्यक भी है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 8 में मात्र 3 नमूने का प्रतिशतता का जिक्र WMMGSB किया गया है, इस प्रकार नमूना आवश्यक मात्रा से लगभग 67% कम है इतने कम मात्रा में क्रशिंग स्ट्रैंथ, सीव एनालिसिस, इंपैक्ट वैल्यू, स्पेसिफिक ग्रेविटी इत्यादि आवश्यक जाँच को पूरा कर पाना बहुत ही मुश्किल है। इस प्रकार उड़नदस्ता नियम के अनुसार इसे वैध नहीं माना जा सकता है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कोर्स एग्रीगेट के shape तथा Texture की जांच के लिए IS Code में सैंपल की मात्रा का कोई गाइडलाइन नहीं है जबकि आईएस 2386 में shape टेस्ट के लिए Angularity टेस्ट आवश्यक है, कंडिका 6.4 में 4.75mm से 20mm Size के लिए कम से कम 10 KG का प्रावधान है। इस प्रकार shape test के लिए Angularity no. का मान अभियंत्रण नियम के अनुसार Rounded के लिए 0 Rounded Angular के लिए 1-5 तथा Angular के लिए 6-11 का प्रावधान है। इनके द्वारा कहा गया है कि उड़नदस्ता लैब रिपोर्ट में आईएस 2386 के विरुद्ध आँख से देख कर लैब रिपोर्ट तैयार किया गया है, पुनः उड़नदस्ता के द्वारा मटेरियल का फोटोग्राफिक साक्ष्य भी उपलब्ध कराना आवश्यक था, आंख से देख कर Manipulated रिपोर्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। कार्य के दौरान भी same लैब, शोध प्रशिक्षण प्रमंडल-2 खगौल के द्वारा 7.05.12 को कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई थी। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि लैब टेक्नीशियन श्री जयप्रकाश का दोनों में हस्ताक्षर भी है, वह अपने कार्य के दौरान की रिपोर्ट के ठीक पलट कर प्रतिकूल रिपोर्ट देते हैं जो कि विरोधाभास है। उक्त के आलोेक में श्री कुमार द्वारा लैब टेक्नीशियन श्री जयप्रकाश को आंशिक रूप से दोषी माने जाने की बात कही गयी है। इस संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उल्लेखित किया गया है कि, ''IS Code 2386 Part I में Coarse Aggregate के लिए Seive Analysis के लिए Sample की मात्रा का निर्धारण किया गया है। Seive Analysis द्वारा Coarse Aggregate में विद्यमान इसके Graded Size के प्रतिशत की गणना की जाती है जिसके आधार पर कार्य विशेष के लिए प्रयुक्त Coarse Aggregate के उपयुक्तता संबंधी निष्कर्ष प्राप्त होता है। वर्तमान मामला में Coarse Aggregate के उपयुक्तता के संबंध में कोई विवाद नहीं है एवं आरोप मूलतः Lead में बदलाव के कारण अनियमित भुगतान से संबंधित है, अतः Coarse Aggregate का स्थानीय River Bed Material का होना अथवा एकरारनामा के अन्तर्गत निर्धारित Quarry Site से Crushed Coarse Aggregate Material के होने संबंधी जाँचफल को प्राप्त करना जाँच का मुख्य उद्देश्य रहा है। चूँकि Coarse Aggregate के Shape and Texture के जाँच हेतु IS Code में Sample की मात्रा संबंधी कोई Guideline नहीं है, अतः Shape and Texture संबंधी जाँच के लिए जाँचफल को संग्रहित मात्रा के आधार पर अमान्य करना उचित नही होगा।'' वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के उक्त मंतव्य से सहमत होते हुए प्रस्तुत मामले में परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग के पत्रांक-129(गो0) दिनांक-11.09. 2014 से प्राप्त जाँचफल को अमान्य नहीं किया जा सकता है।

इनके द्वारा कहा गया है कि चूँकि वर्ष 2012 में प्राप्त जाँचफल Coarse Aggregate के Seive Analysis जाँच से संबंधित है, जबकि शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं०-02, खगौल के पत्रांक एम०टी०/55/खगौल दिनांक 26.03.2014 तथा परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक 129 (गो०) दिनांक 11.09.2014 से प्राप्त सभी जाँच प्रतिवेदन Coarse Aggregate की प्र—ति को स्पष्ट करते हुये उसमें विद्यमान River Bed Material के प्रतिशत को बताता है। इस प्रकार उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 8.0.0 एवं शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं०-02, खगौल के पत्रांक16 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 एम०टी०/55/खगौल दिनांक 26.03.2014 तथा परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक 129 (गो०) दिनांक 11.09.2014 से प्राप्त सभी जाँच प्रतिवेदन से इस तथ्य की संपुष्टि होती है कि :-

WMM एवं GSB (Sample Code A3, B3 एवं C3) में प्रयुक्त Coarse Aggregate 100% River Bed Material है।

B.M. एवं Premix (Sample Code A1, B1, C1, A2, B2 एवं C2) में प्रयुक्त Coarse Aggregate में Average 9.33% River Bed Material है। इस मामले में जमानत की राशि रू॰ 6705470.00 जब्त किये जाने संबंधी श्री कुमार का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है पंरतु तत्कालीन कार्यपालक अभियंता शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-732, दिनांक-18.09.2018 के अवलोकन से इस पत्र के माध्यम से कार्यपालक अभियंता मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर को नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक योजना के अंतर्गत हुई अनियमितता से संबंधित तकनीकी परीक्षण कोषांग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती किये जाने हेतु निदेशित किया जाना परिलक्षित होता है। इनके द्वारा कहा गया गया है कि तत्कालीन मुख्य अभियंता श्री रामपुकार रंजन के द्वारा लिखे गए निरीक्षण प्रतिवेदन सीधे कार्यपालक अभियंता को संबोधित था, किसी भी अनुपालन के लिए कार्यपालक अभियंता प्राधि—त थे, उन्हें कनीय अधिकारी के अनुमति की जरूरत नहीं थी। मुख्य अभियंता का निरीक्षण प्रतिवेदन श्री वीरेंद्र कुमार, सहायक अभियंता के तरह उनको भी प्राप्त नहीं हुआ था, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री —ष्ण देव सिंह के तरफ से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं था तथा कार्य के दौरान शोध प्रशिक्षण प्रमंडल-2 खगौल के द्वारा प्रतिकूल टिप्पणी नहीं होने के कारण मापी को रोकना बहुत मुश्किल था। इस संदर्भ में श्री कुमार द्वारा अपने कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। इनके द्वारा द्वारा कहा गया है कि नेपाल हितकारी कार्य मे Stone boulder = 4184 m3 from Raipur khola With lead 15 km का प्रावधान है इस प्रकार कार्यस्थल पर सीमित मात्रा में स्थानीय सामग्री का दिखना एकरारनामा के अनुरूप था। उक्त कथन के प्रमाण में श्री कुमार द्वारा कोई साक्ष्य/अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है।17 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 श्री कुमार के विरूद्ध उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना सं0-9794 दिनांक-22.07.2019 के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से पुनः परामर्श/सहमति अपेक्षित नहीं है। श्री प्रवीण कुमार (आई॰डी॰-5066), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमण्डल वाल्मीकिनगर, सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध अधिरोपित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद (बैठक दिनांक-26.12.2023 में मद सं0-07) की स्वीकृति प्राप्त है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री प्रवीण कुमार (आई॰डी॰-5066), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमण्डल वाल्मीकिनगर, सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-मुख्य अभियंता का कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 (Xi) के तहत का दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है। श्री रत्नेश कुमार (आई0डी0-3985) तत0 कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा कोे सोन नहर अंचल, आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्य में बरती गई गंभीर अनियमितता आदि कतिपय प्रतिवेदित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-2054 दिनांक 23.09.2019 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। उक्त मामले में विभागीय पत्रांक-2506 दिनांक 03.12.2019 द्वारा श्री रत्नेश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया।

श्री रत्नेश कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप निम्नवत्‌ है :-

वित्तीय वर्ष 2016-17 में धुनधुहॉ फीडर के 0.0 से 3.5 कि॰मी॰ के बीच सफाई एवं मरम्मति कार्य निविदा के आधार पर कराया गया, जिसका प्रथम चालू विपत्र की मापी पुस्त में दर्ज है। लम्बे समय से अंतिम विपत्र मापी पुस्त में दर्ज न होना लेखा संधारण में अनियमितता का द्योतक है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में एकवारी वितरणी के 0.020 से 4.00 कि॰मी॰ के बीच विभिन्न बिन्दुओं पर बाँध मरम्मति का कार्य का कार्यान्वयन निविदा पर कराया गया जिसमें केवल प्रथम चालू विपत्र ही मापपुस्त में दर्ज है। लम्बे समय से अंतिम विपत्र मापपुस्त पर दर्ज न होना लेखा संधारण में अनियमितता का द्योतक है। i रामनगर स्थित निरीक्षण भवन एवं कार्यालय भवन का जीर्णोद्धार कार्य, पहुँचपथ का निर्माण, चहारदिवारी का उच्चीकरण एवं परिसर का सौंन्दर्यीकरण काय के मूल प्राक्कलन की अनुपलब्धता, योजना की प्रशासनिक स्वी—ति का प्रदत्त न होना, बिहार सरकार के अन्य विभागों के अनुसूचित दर में मद रहते हुए दूकानदारों से दर लेकर स्वी— त कराना, विद्युत अभियंता द्वारा विद्युतीय कार्यों का तकनीकी स्वी—ति प्रदत्त न कराना, पोर्टिको निर्माण से संबंधित स्वी—त निरूपण/आरेखन न होना, कैश के रूप में एक दिन में अनकों प्रमाणकों के विरुद्ध एक दूकानदार/अभिकर्ता को लाखों रूपये नगद भुगतान करना, सभी क्रय किये गये सामग्रियों को Direct issued to Work करना, विभागीय कार्य के बावजूद दर विश्लेषण में Labour cess मद में सी0पी0 जोड़कर दर का निर्धारण करना, रू0 166.3953 लाख के कार्य को निविदा न कर विभागीय रूप से कार्य कराना तथा विभागीय कार्य हेतु किसी भी उच्च पदाधकारी का स्पष्ट आदेश न होना इत्यादि जो लोक निर्माण विभाग संहिता की विभिन्न कंडिकाओं के अनुरूप नहीं है। इस प्रकार माननीय मुख्यमंत्री के संभावित आगमन के नाम पर कार्य प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई (जाँच प्रतिवेदन कंडिका 4.1.5)।

iii Barbed Wire का क्रय स्वीकृत प्राक्कलन की दर 62.62 रूपये प्रति किलोग्राम से अधिक दर यानी 74.58 रूपये प्रति किलोग्राम पर किया गया, जो वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है। i एकरारनामा सं॰ 01SBD/2017-18 अन्तर्गत दनवार झील जल निकासी योजना एवं सिंचाई योजना का कराये गये कार्य के द्वितीय चालू विपत्र द्वारा सामग्रियों के विरूद्ध किये गये अग्रिम भुगतान रू॰ 2045175/- पर किसी प्रकार की कटौती तथा SD, IT Labour Cess इत्यादि नहीं कर संवेदकों को लाभ पहुँचाया गया। i DLR Bridge के Wing Wall, Return Wall, Weep Holes, Pier का नोज Finishing Work एवं एप्रोच स्लैब का कार्य स्वीकृत प्राक्कलन/आरेखन के अनुरूप नहीं है। ब्रीज के लिए निर्मित Approach Slab Loose earth पर Brick on edge Solding कर कंक्रीटिंग किये जाने के कारण सेटेल पाया गया। जिससे सही ढंग से कार्य नहीं कराने एवं पर्यवेक्षण का घोर कमी परिलक्षित होता है। ii DLR Bridge के Wing Wall, से संग्रहित प्लास्टर कार्य के सीमेंट मोर्टार के नमूनों की प्रयोगषाला जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट एवं सैंड का अनुपात प्रावधानित अनुपात 1ः4 के विरूद्ध 1ः6.84 पाये जाने से प्लास्टर कार्य न्यून विषिष्टि का कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है।

iii मापपुस्त में दर्ज विपत्र में सभी मदों की मात्रा प्राक्कलन के अनुरूप है, परन्तु कुछ मेटेरियल के ढुलाई की मात्रा कार्य में उपयोग की गयी मात्रा से कम है, यह विरोधाभाषी है।18 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 योजना की प्रषासनिक स्वीकृति से संबंधित अभिलेख जाँच दल को उपलब्ध नहीं कराया गया एवं डी॰एल॰आर॰ ब्रीज के पियर नोज अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम दोनों में स्वीकृत आरेखन के अनुरूप नहीं है। श्री रत्नेश कुमार द्वारा उपर्युक्त वर्णित आरोपों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर विभाग को समर्पित किया गया। विभागीय स्तर पर श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प-639 दिनांक 20.07.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 (1) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। श्री रत्नेश कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-138 दिनांक 08.09.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री रत्नेश कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों में से आरोप सं0-ग(iii) प्रमाणित तथा आरोप सं0-क, ख, ग(i) तथा च(iii) आंशिक प्रमाणित पाया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए श्री रत्नेश कुमार से विभागीय पत्रांक-2807 दिनांक 15.12.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) विभाग को समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की विभागीय समीक्षा की गयी।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर के आलोक में आरोपवार समीक्षा निम्न प्रकार से है - आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि उक्त कार्य वित्तीय वर्ष 2016-17 में नहर का सम्पोषण एवं मरम्मति में तत्कालीन पदाधिकारियों द्वारा कराया गया था। उक्त कार्य पूर्ण कर भुगतान भी किया जा चुका है। संवेदक के द्वारा अंतिम विपत्र बनाने या जमानत की राषि वापस करने हेतु कोई आवेदन भी नहीं दिया गया। विभाग को कोई वित्तीय क्षति भी नहीं हुई। प्रमंडल द्वारा संधारित किये जाने वाले लेखाओं में भी संवेदक के अंतिम विपत्र पारित कर समावेष करने का कोई प्रावधान नहीं रहता है। उल्लेखनीय है कि धनछुआ वितरणी में सफाई एवं मरम्मति कार्य निविदा के आधार पर कराया गया एवं संवेदक को भुगतान किया गया। यह कार्य दि॰ 05.12.2016 को निर्धारित समय पर पूर्ण किया गया। यद्यपि उक्त कार्य समय पर पूर्ण कर लिया गया तथा भुगतान भी संवेदक को कर दिया गया। संवेदक द्वारा जमानत की राि"ा लौटाने/अंतिम विपत्र पारित करने हेतु आवेदन भी नहीं दिया गया। फिर भी, कार्यपालक अभियंता का यह कर्त्तव्य है कि कार्य पूर्ण होने के बाद नियमानुसार अवधि के उपरान्त कार्य का अंतिम विपत्र पारित कर उसे Close कर दे ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि उक्त कार्य एवं संवेदक को कराये गये कार्य में पूर्ण भुगतान किया जा चुका है। परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अतः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'क' आंषिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि उक्त कार्य वित्तीय वर्ष 2016-17 में नहर का सम्पोषण एवं मरम्मति में तत्कालीन पदाधिकारियों द्वारा कराया गया था। उक्त कार्य पूर्ण कर भुगतान भी किया जा चुका है। संवेदक के द्वारा अंतिम विपत्र बनाने या जमानत की राषि वापस करने हेतु कोई आवेदन भी नहीं दिया गया। विभाग को कोई वित्तीय क्षति भी नहीं हुई। प्रमंडल द्वारा संधारित किये जाने वाले लेखाओं में भी संवेदक के अंतिम विपत्र पारित कर समावेष करने का कोई प्रावधान नहीं रहता है। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में एकबारी वितरणी के विभिन्न बिन्दुओं पर मरम्मति कार्य कराया गया जो दिनांक 14.11.2016 को पूर्ण हो गया। यद्यपि उक्त कार्य समय पर पूर्ण कर लिया गया तथा भुगतान भी संवेदक को कर दिया गया। संवेदक द्वारा जमानत की राषि लौटाने/अंतिम विपत्र पारित करने हेतु आवेदन भी नहीं दिया गया। फिर भी, कार्यपालक अभियंता का यह कर्त्तव्य है कि कार्य पूर्ण नहीं होने के बाद नियमानुसार अवधि के उपरान्त कार्य का अंतिम विपत्र पारित कर उसे Close कर दे ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि उक्त कार्य एवं संवेदक को कराये गये कार्य में पूर्ण भुगतान किया जा चुका है। परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अतः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'ख' आंषिक रूप से प्रमाणित होता है। i आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में आरोप 'ग' (i) के संबंध में प्रतिवेदित किया है कि प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति प्राप्त थी। ऐसे में छोटे-मोटे अतिआवष्यक कार्य की अलग से नक्षा अनुमोदित करना अप्रासंगिक प्रतीत होता है। क्रय किये गये सामानों को लेखा में प्रविष्टि किया गया है केवल वैसी निर्माण सामग्री जिनका उपयोग मरम्मति कार्य के लिए किया गया है, को नियमानुसार ही direct issued to work किया गया है। विभागीय रूप से कराये जाने वाले कार्यो के लिए क्रय किये गये सामानों का लेखा में प्रविष्टि कर कार्य में निर्गत करने का प्रावधान है परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा क्रय किये गये सामग्रियों को direct issued to work किया गया जो नियमानुकूल नहीं है। साथ ही, पोर्टिको का नक्षा भी मुख्य अभियंता से अनुमोदित नहीं किया गया था। विदित हो कि माननीय मुख्यमंत्री के आगमन के आलोक में विषयांकित कार्य विभागीय रूप से कराये जाने का औचित्य स्पष्ट होता है। अतएव, उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोपी पदाधिकारी पर आरोप (ग)(i) आंषिक रूप से प्रमाणित होता है। iii आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया है कि Barbed Wire का दर स्वीकृत प्राक्कलन में 62.20 रू॰ प्रति कि॰ग्रा॰ था। बाजार से क्रय कर लाया गया Barbed Wire का वास्तविक दर 74.58 रू॰ प्रति कि॰ग्रा॰ था। जिसे भुगतान के समय स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार दर सिमित कर 62.2019 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 रू॰ प्रति कि॰ग्रा॰ की दर पारित करने में मानवीय भूल हुई। आरोपी पदाधिकारी का अधिकाई भुगतान करने का Intention नहीं था।

उपरोक्त से स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा अधिकाई भुगतान की राषि 5584.17 रूपये किया जाना स्वीकार किया गया है। अतएव, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'ग' (iii) प्रमाणित होता है। i आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक को Non Penishable Material के विरूद्ध दी जाने वाली Secured Advance के भुगतान में किसी प्रकार की कटौति यथा SD, IT, Labour Cess etc. करने का कहीं भी निर्दे"ा नहीं है। साथ ही, यह कोई सम्पादित कार्य का विपत्र नहीं है जिससे कि सभी प्रकार की कटौती होनी चाहिए। Secured Advance का किया गया भुगतान SBD Clause 10B (1) के अनुरूप है। आरोपी के उक्त कथन से सहमत हुआ जा सकता है। अतएव, उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'घ' (i) अप्रमाणित होता है। i आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि आरा मुख्य नहर के 24.40 कि॰मी॰ पर ओसावाँ D.L.R. ब्रीज के निर्माण में उसके सभी अवयवों का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन एवं आरेखन के अनुरूप कनीय अभियंता/सहायक अभियंता के सघन पर्यवेक्षण में कराया गया है। Approach Slab का निर्माण Brick on Edge Soling पर ढाला गया है जो कहीं से Settled एवं क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान के साथ विभागीय आदेष सं॰ 2370 दि॰ 30.09.2020 की प्रति संलग्न करते हुए प्रतिवेदित किया गया है कि उक्त आरोप से संबंधित संवेदक को कालीकारण से मुक्त किया गया है। उक्त आदेष में वर्णित है कि DLR Bridge का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन/आरेखन के अनुरूप नहीं होने के संदर्भ में संवेदक का कहना है कि संरचना निर्माण के समय कोई षिकायत नहीं पाया गया तथा आज भी यह प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन में संरचना के निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन/आरेखन के अनुरूप नहीं होने का आरोप स्पष्ट नहीं है। अतएव, उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पर आरोप 'च' (i) अप्रमाणित होता है। ii आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि कार्य निर्माण के दौरान विभागीय गुणवत्ता प्रमंडल से जाँचोपरान्त जाँच प्रतिवेदन विषिष्टि के अनुरूप पाये जाने पर ही भुगतान की कार्रवाई की गई है। साथ ही, आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा जाँच हेतु विंग वाल से प्लास्टर का नमूना एकत्र करने में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में विभागीय पत्रांक 2370 दिनांक 30.09.2020 का उल्लेख करते हुए प्रतिवेदित किया है कि आरोप के मुख्य बिन्दु प्लास्टर वर्क में मोर्टार का आयतनिक अनुपात में कमी के संदर्भ में संवेदक का कहना है कि कार्य के दौरान गुण नियंत्रण प्रमंडल, डिहरी द्वारा लगातार जाँच किया जाता रहा है एवं किये गये जाँच में बालू एवं सिमेंट का अनुपात 1ः4.31 प्रतिवेदित है, जो कि अनुमान्य सीमा के अन्तर्गत है। साथ ही संवेदक का कहना है कि निगरानी विभाग के द्वारा नमूने लिये जाने की कार्रवाई उनके अनुपस्थिति में किया गया एवं इस आषय की कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई। संवेदक द्वारा यह भी कहा गया कि सोन नदी के पानी के साथ बालू भी बहता रहता है और हो सकता है कि जाँच के दौरान विंग वॉल के सतह पर नहर का बालू जमा होने के कारण निगरानी विभाग के द्वारा उक्त स्थल से लिये गये नमूने में बालू की मात्रा अधिक पाई गई हो। इस संदर्भ में संवेदक का कथन स्वीकार योग्य है।

अतः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप (च)(ii) अप्रमाणित होता है। iii आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि सामग्री की ढुलाई की मात्रा एवं सामग्री की आपूर्ति की मात्रा का अंतर मूलतः स्टोन एग्रीगेट की गणना में हुई चुक के कारण ही ऐसा हुआ है। अभी अंतिम विपत्र का भुगतान होना शेष है उसमें सुधार कर लिया जाएगा। आरोपी पदाधिकारी के उक्त कथन से स्पष्ट है कि Material की गणना में चूक हुई है। अतएव, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'च' (iii) आंषिक रूप से प्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि बिहिंया षाखा नहर के 14.28 कि॰मी॰ पर सेंदहा ग्राम के पास DLR BRidge के Pier का Nose (U/S & D/S) का निर्माण स्वीकृत आरेखन के अनुरूप कराया गया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में विभागीय आदेष सं॰ 09 दि॰ 03.01.2022 की प्रति संलग्न करते हुए प्रतिवेदित किया है कि उपरोक्त आरोप में संवेदक को कालीकरण से विभाग द्वारा मुक्त किया गया है। उक्त पत्र में संवेदक के विरूद्ध आरोप का मुख्य बिन्दु DLR Bridge का स्वीकृत आरेखन के अनुरूप नहीं होना वर्णित है। संवेदक द्वारा अपने दावे के समर्थन में कहा गया है कि उनके द्वारा संरचना का निर्माण स्वीकृत आरेखन के अनुरूप Pier Nose में U/S में Semi Circular एवं D/S में Triangular स्वरूप में किया गया है। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी द्वारा स्थल निरीक्षणोपरान्त अपने पत्रांक 2759 दि॰ 21.12.21 द्वारा स्वीकृत आलेख एवं माप पुस्त के आधार पर प्रतिवेदित किया गया है कि -20 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 (क) स्थल निरीक्षण में पाया गया कि स्थल पर निर्मित DLR Bridge के Pier Nose U/S Semi Circular तथा D/S में Triangular आकार का नहर के Bed level के उपर बना है। वर्तमान में वेड का समतल ढलाई है। (ख) नहर के वेड लेवल के नीचे Pier का आधार माप पुस्त सं॰ 477 में दर्ज Dimension के अनुसार भी Pier का Shape Semi Circular एवं Triangular आकार का नोज है। अतएव, उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपी पदाधिकारी पर आरोप 'छ' अप्रमाणित होता है। उपर्युक्त विभागीय समीक्षा के आलोक में श्री रत्नेश कुमार (आई0डी0-3985), तत0 कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों में से आरोप सं0-क, ख, ग(i) तथा च(iii) आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं0-ग(iii) प्रमाणित होता है। इसी क्रम में विभागीय पत्रांक-1448 दिनांक-12.09.2023 द्वारा श्री कुमार को निलंबनमुक्त किया गया है। अतः विभागीय समीक्षोपरांत श्री रत्नेश कुमार से प्राप्त प्रत्युत्तर को अस्वीकृत करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है, जिसपर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3502 दिनांक-20.12.2023 द्वारा सहमति प्राप्त है :-

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री रत्नेश कुमार (आई0डी0-3985) तत0 कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री रविन्द्रनाथ कुँवर (आई0डी0-जे 5842), तत0 सहायक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पदस्थापन के दौरान वान्दू-अमरखा (एजेण्डा सं0-137/351) तथा महावीर बिगहा (एजेण्डा सं0-137/361) कार्यस्थल पर किये गये कटाव निरोधक कार्य के भुगतान में अधिकाई भुगतान संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-86 दिनांक-23.01.2020 द्वारा श्री कुँवर से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया।

2. श्री रविन्द्रनाथ कुँवर (आई0डी0-जे 5842) के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप निम्नवत है :- (i) वान्दू-अमरखा (एजेण्डा सं0-137/351) कार्यस्थल पर वर्ष 2017-18 में किये गये कटाव निरोधक कार्य में किये गये भुगतान की उड़नदस्ता जाँच के दरम्यान पाये गये पी0पी0 रोप गबियन एवं जिओ बैग में क्रमशः 59 (उनसठ) अदद एवं 418 (चार सौ अठारह) अदद की कमी पायी गयी। इस प्रकार अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है, जिसके लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।

(ii) महावीर बिगहा (एजेण्डा सं0-137/361) कार्यस्थल पर किये गये कटाव निरोधक कार्य में किये गये भुगतान की उड़नदस्ता जाँच के दरम्यान पाये गये जिओ बैग से मिलान के आधार पर जिओ बैग में 1407 (एक हजार चार सौ सात) अदद की कमी पायी गयी। इस प्रकार अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत होता है, जिसके लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।

3. श्री रविन्द्रनाथ कुँवर द्वारा अपना स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर (दिनांक 15.10.2020) विभाग को समर्पित किया गया, जिसकी विभागीय समीक्षा की गई। श्री कुँवर से प्राप्त स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर के विभागीय समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुँवर को आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उक्त प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 4. सरकार के उक्त निर्णय से श्री रविन्द्रनाथ कुँवर (आई0डी0-जे 5842), तत0 सहायक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है। श्री सुखदेव राम (आई0डी0-4483), तत0 कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर, सुपौल के विरूद्ध वर्ष 2008-09 में कोशी बाँध कटान मामले में कोशी कटान न्यायिक जाँच आयोग की अनुशंसा पर गठित तकनीकी जाँच समिति द्वारा उपलब्ध कराये गये गठित आरोप पत्र के आलोक में निम्न आरोप के लिए विभागीय संकल्प सं0-1928 दिनांक 31.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन के दरम्यान श्री सुखदेव राम दिनांक 31.07.2022 को सेवानिवृत हो गये। फलतः सरकार के स्तर पर समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-49 दिनांक 31.05.2023 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। i21 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 पूर्वी एफलक्स बाँध के 12.90 कि॰मी॰ पर स्पर पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य प्रारंभ होने में विलम्ब होना। ii स्थल के वास्तविक स्थिति का गलत आकलन किया गया। स्थल पर बाढ़ संघर्षात्म सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं थे एवं सामग्रियों को स्थल पर ससमय पहुँचाने की व्यवस्था नहीं की गयी। iii स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों को समय पर पहुँचाने के लिये परिवहन व्यवस्था पर्याप्त नहीं थे। iv रात्रि पाली में बाढ़ सघर्षात्मक कार्य के लिये पर्याप्त मात्रा में सामग्री एवं मजदूर नहीं थे। फलतः कार्य अनियमित रूप से हुए एवं रात्रि में भी टुटान हुआ। v संभावित खतरा के संबंध में जनता को पहले चेतावनी नहीं दिया गया एवं इस तरह संवेदनहिनता का परिचय दिया गया।

vi बाढ़ जैसे आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिये बिहार P.W.D Code एवं बिहार वित्तीय नियमावली में कार्यपालक अभियंता को पर्याप्त शक्ति प्रदान किये गये है, जिनका उपयोग नहीं किया गया और इस तरह जानबुझ कर लापरवाही बरती गयी। आपके उक्त कृत से जानमाल की व्यापक क्षति हुई।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। I प्रमंडल के स्टोर में भी सामग्री उपलब्ध नहीं था तो बिना सामग्री कार्य कैसे प्रारंभ कर दिया जाता। उसके लिये मुख्य अभियंता का आदेश जरूरी था। किसी भी प्रदत शक्ति का प्रयोग व्यवस्था उपलब्ध रहने के उपरांत ही संभव है। समस्याए ऐसी थी कि दूसरे देश के कारण मजदूरों, वाहनों की अनुपलब्धता, डीजल का अभाव, नेपाली कैम्प में अनावश्यक देर करना इत्यादि अनेको कारण था। फिर भी स्थल को जाँचोपरांत मुख्य अभियंता से कार्य कराने का आग्रह किया था। पुनः दूसरे दिन मुख्य अभियंता से मुलाकात किया एवं स्थिति स अवगत कराया तब अपने तकनीकी सलाहकार को स्थल पर भेजा गया। उनके द्वारा स्थल पर पाँच रिथ बनाने का आदेश प्राप्त हुआ। दूसरे दिन दूसरे प्रमंडल के भंडार से EC bags लाया गया। पुनः 5.8.08 को गाड़ी पर सामान लोड कर भेजा गया तो नेपाल की दुरूह नियम कानुन एवं कस्टम अधिकारी की मनमानी के कारण सामान शाम तक पहुँचा। तब दिनांक-06.08.08 से कार्य प्रारंभ कराया गया। यही प्रक्रिया में विलम्ब हुआ, बिना सामग्री के कोई भी शक्ति प्राप्त हो कार्य नहीं कराया जा सकता है। अतः विलम्ब के लिए इन्हें दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। II स्थल की स्थिति से मुझे लगा कि यदि इस पर कार्य नहीं होगा तो स्थिति और खराब हो सकती है। यही दूरदर्शिता है। मुख्य अभियंता को जब इनके द्वारा कहा गया कि स्थिति बिगड़ रहा है। दिनांक-31.07.2008 को ही तो उन्होने कहा कि तुम अनुभवी नहीं हो। बाढ़ को तुमने देखा नहीं है। पुनः दूसरे दिन स्थल पर घुमने के बाद आकर वस्तुस्थिति की जानकारी दिया तो उनको मुझपर विश्वास नहीं हुआ एवं दूसरे दिन अपने तकनीकी सलाहाकर को भेजा। चुकि वे अपने अनुभव के अनुसार उन्होने पाँच रिथ बनाने का आदेश निर्गत कराया। सामान हेतु आदेश दिया गया तथा सामान लोड कर पाँच को कार्य स्थल पर नेपाल सरकार के दुरूह नियम के कारण शाम में पहुँचा उसके बाद कार्य प्रारंभ करा दिया गाया। III कोई जानबुझकर विलम्ब नहीं किया था। परिस्थिति के कारण विलम्ब हुआ परिस्थितियों का जिक्र इनके द्वारा किया गया था। विभाग के वरीय पदाधिकारी भी इससे अवगत थे। नेपाल में जब चाहे गाड़ी बन्द करा देता है, डिजल नहीं मिलता था। नेपाल की वैसी स्थिति के कारण गाड़ी मालिक अधिक गाड़ी उपलब्ध नहीं कराते थे। यही सब समस्या था। इसमें इनका कोई दोष नहीं है। IV रात्रि पाली में कार्य का अनियमित होना नेपाल की कानुन व्यवस्था रही। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। जहाँतक रात्रि में टुटान की बात कही गयी है। इनके क्षेत्राधीन टुटान नहीं हुआ था। दिनांक-17.08.2008 के रात्रि तक यह स्पर 52मी॰ बचा हुआ था एवं इनके क्षेत्राधीन बाँध सुरक्षित था। दिनांक-18.08.2008 को सुबह में शीर्ष कार्य प्रमंडल के द्वारा 08-10 गाड़ी पर सामान लाद कर बराज से 11 बजे जिले के सभी पदाधिकारी DM, SP सर भी साथ में थे, वे SDPO की गाड़ी में था क्याेंकि DM ने कहा कि आप भी साथ में चले 12.55PM के लगभग यदुपुर तरफ से मोटर साईकिल से एक व्यक्ति आ रहा था। वही सभी गाड़ी को रोका एवं कहा कि बाँध टुट गया है। सभी पदाधिकारी वही से लाट गये। भीमनगर में मुख्य अभियंता की गाड़ी पर पथराव भी हुआ। वे दिन रात स्थल पर रहा करते थे एवं हमेशा समस्याओं से जुझता रहता था।22 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 V नेपाल के सभी संबंधित पदाधिकारी से सम्पर्क किया, लिखित सूचना दिया। तभी सुपौल के जिला पदाधिकारी एवं पुलीस अधीक्षक के साथ दिनांक-15.08.2008 को नेपाली कैम्प में एक बैठक आहुत की गयी एवं वहाँ की समस्या के बारे में प्रशासनिक पदाधिकारी के बीच वार्त्ता किया गया था। मुख्य अभियंता को इनके द्वारा दिनांक-15.08. 2008 को 2.35Am त्राहिमाम संदेश भेजा था। मुख्य अभियंता के द्वारा जिला पदाधिकारी को भी इसकी सूचना दी गयी थी (प्रति संलग्न) बेतार संवाद दिनांक-17.08.2008 तक विभाग के द्वारा भी प्राप्त किया गया है। जनता को सूचना प्रशासनिक स्तर पर देने की उम्मीद की जाती है। यदि इनके द्वारा दिया जाता तो फिर अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो जाता, जो कि इनके अधिकार से भी बाहर की बात हो जाता। इसलिये इस तरह सभी को जानकारी थी। चाहे वह विभाग हो या अभियंत्रण संवर्ग या प्रशासनिक संवर्ग हो इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी थी। VI वरीय पदाधिकारी को स्थल की स्थिति से अवगत करा रहा था। उनको इनके उपर विस्वास नहीं हुआ कि स्थिति का अवलोकन इसके द्वारा सही किया जा रहा है कि नहीं। उनके द्वारा यह मानना कि वे बाढ़ का अनुभव नहीं है। तभी तो तत्काल आदेश नहीं देकर अपने तकनीकी सलाहकार को भेजा गया। तथा उनके द्वारा सिर्फ पाँच रिथ बनाने का आदेश दिये, ये रही स्थानीय पदाधिकारी की बात, पुनः आग्रह पूर्वक कहना चाहता हुँ। गंभीर स्थिति के लिये बेतार संवाद 59 दिनांक-06.08.2008, 07.08.2008, 08.08.2008 द्वारा सूचित किया गया। कार्यपालक अभियंता की शक्ति के बारे में तो विभाग को चाहिए था कि यदि इतना गंभीर स्थिति उनके प्रमंडल की लगी तो मुझे भी एक बेतार संवाद भेज दिया जाता कि आप इसके अनुरूप तत्कालीन कार्य करें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। स्थल पर रिस्क श्रेणी का भी गठन 09.08.2008 से हुआ था। 10.08.2008 से 13.08.2008 तक विभाग के वरीय पदाधिकारी स्थल पर थे एवं स्थल निरीक्षण किया गया था किसी ने इस शक्ति का उपयोग उचित नहीं समझा। i बाढ़ संघर्षात्मक कार्य प्रारंभ करने में विलम्ब करने से संबंधित है। इस आरोप के संदर्भ में श्री राम द्वारा कहा गया है कि स्थल पर कोई सामग्री नहीं थी। तथा प्रमंडलीय स्टोर में भी सामग्री की व्यवस्था नहीं थी। उसके लिये मुख्य अभियंता का आदेश जरूरी था। दूसरे देश में स्थल होने के कारण, मजदूरों, वाहनों की उपलब्धता, डीजल का अभाव आदि अनेको कारण से कार्य विलम्ब से प्रारंभ हुआ। सामग्री हेतु मुख्य अभियंता से अनुरोध किया गया, परन्तु इन्हें अनुभवहीन समझ कर आदेश नहीं दिया गया। पुनः आग्रह करने पर मुख्य अभियंता अपने तकनीकी सलाहकार को स्थल निरीक्षण हेतु भेजा गया। स्थल निरीक्षण के पश्चात 5 अदद रिथ बनाने की अनुशंसा की गयी, तत्पश्चात दुसरे प्रमंडल के भंडार से EC bags लिया गया, जो विभिन्न कारण से दिनांक-05.08.2008 के शाम में स्थल पर पहुँच सका तथा दिनांक-06.08.2008 से कार्य प्रारंभ कराया गया। इसी प्रक्रिया में विलम्ब हुआ है। इनके द्वारा उपरोक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जबकि संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया है।

(क) दिनांक-31.07.2008 से ही स्पर के नोभ पर पानी का दवाब बन गया था। दिनांक-03.08.2008 को प्रेषित संवाद में स्पर सं॰-12.90 के नोज के एप्रोच में 1.5 मी॰ से 2 मी॰ का धसान होने का उल्लेख है, जो दिनांक-06.08.2008 तक लगातार कटाव जारी रहा, परन्तु इनके द्वारा दिनांक-06.08.2008 के पूर्व इसे रोकने के लिये उच्च पदाधिकारी से मात्र निदेश माँगकर आदेश की प्रतिक्षा की जाती रही।

(ख) विभागीय अधिसूचना सं॰-408 दिनांक-25.04.2003 की कंडिका-4.1.2 में सुरक्षा के दृष्टिकोण से तटबंधों को रिस्क क्षेणी 'ए' रिस्क श्रेणी 'बी' एवं रिस्क श्रेणी 'सी' में विभाजित किया गया है, इसके अन्तर्गत किसी संवेदनशील स्थल पर नदी का दबाव बढ़ने पर कार्यपालक अभियंता को छोटे पैमाने पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने संबंधी शक्ति प्रदत्त है। चूकि स्थल की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी एवं कार्यपालक अभियंता इससे अवगत थे। अतएव अविलम्ब बाढ़ संघर्षातम्क कार्य प्रारंभ करने की अपेक्षा थी जो इनके द्वारा नहीं की गयी। ii स्थल की वास्तविक स्थिति का गलत आकलन एवं दूरदर्शिता का अभाव से संबंधित है। श्री राम द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता महोदय को जब इनके द्वारा कहा गया कि स्थिति बिगड़ रहा है। दिनांक-31.07.2008 को ही तो उन्होने कहा था की तुम अभी अनुभवी नहीं हो। पुनः दूसरे दिन स्थल से घुमने के बाद आकर वस्तुस्थिति की जानकारी दिया तो उनको विश्वास नहीं हुआ तथा दूसरे दिन अपने तकनीकी पदाधिकारी को भेजा तथा उनके द्वारा पाँच रिथ बनाने का आदेश निर्गत किया गया। सामान हेतु आदेश दिया गया तथा सामान लोड कराकर 5.08.2008 को कार्य स्थल पर नेपाल सरकार की दुरूह नियम कानुन के कारण शाम मेें पहुँचा। उसके बाद कार्य प्रारंभ करा दिया गया। इनके द्वारा उपरोक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। संचालन पदाधिकारी के निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप आंशिक प्रामाणित होने का मंतव्य दिया गया है। भेजे गये दैनिक प्रतिवेदनों से स्पष्ट है कि दिनांक-01.08.2008 से स्पर 12.90 पर दवाब था एवं दिनांक-03.08. 2008 को स्पर में खिसकाव का होना भी प्रतिवेदित किया गया है कोशी बाँध का टुटान इसी स्पर के निम्न धार में हुआ। इस खतरे का आकलन नहीं किया गया। तत्काल ही बाढ़ संघर्षात्मक कार्य नहीं किया जाना एवं दिनांक-06.08.2008 से कार्य प्रारंभ किया जाना, दिनांक-06.08.2008 से कार्य कराने के बावजूद स्पर में क्षरण जारी रहना, बाढ़ सामग्री के अपर्याप्त होने का संकेत है। चुँकि प्रमंडल में पूर्व की व्यवस्था के अनुसार सुरक्षा की दृष्टि से वीरपुर एवं बराज स्थल पर भंडार एकत्रित रहा करता था।23 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 iii अपर्याप्त परिवहन सुविधा के कारण बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों पर कुप्रभाव पड़ने से संबंधित है। श्री राम द्वारा कहा गया है कि इनके द्वारा जानबुझ कर विलम्ब नहीं किया गया। परिस्थिति के कारण कार्य कराने में विलम्ब हुआ। विभाग के वरीय पदाधिकारी भी इससे वगत थे। नेपाल में जब चाहे गड़ी बंद करा देता था, डिजल नहीं मिलता था। नेपाल की वैसी स्थिति के कारण गाड़ी मालिक गाड़ी उपलब्ध नहीं कराते थे। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि उपरोक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप को आंशिक प्रमाणित माना गया है। आरोपित पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-756 दिनांक-10.08.2008 द्वारा प्रेषित NR सं॰-95 में नेपाल में श्रमिकों के हड़ताल, डीजल की कमी, सुरक्षित वनक्षेत्र आदि के कारण सामग्री ढ़ुलाई में कठिनाई का जिक्र किया गया है उन्होने पत्रांक-242 दिनांक-09.08.2008 द्वारा सम्पर्क पदाधिकारी विराटनगर नेपाल को भी समस्याओं से अवगत कराते हुए इसके निदान के अनुरोध करने का जिक्र किया है। iv रात्रि पाली में अनियमित रूप से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य किये जाने से संबंधित है। श्री राम द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि रात्रि पाली में कार्य अनियमित होना नेपाल की कानुन व्यवस्था रही। इनके कार्यक्षेत्र में टुटान नहीं हुआ है। दिनांक-18.08.2008 को शीर्ष कार्य प्रमंडल के द्वारा आठ-दस गाड़ी पर सामान लादकर बराज से 11ः00 बजे रात्रि में सभी प्रशासनिक पदाधिकारी को साथ लेकर चले। करीब 12.55 बजे रात्रि में एक व्यक्ति द्वारा कहा गया की तटबंध टुट गया है। सभी पदाधिकारी वही से लौट गये। इनका उपरोक्त कथन आरोप के संदर्भ में तार्किक प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा स्वतः माना गया है कि रात्रिकालीन बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, जिसके पृष्ठभूमि में सुरक्षित वन क्षेत्र में वाहन के प्रवेश की अनुमति लेन में आने वाली कठिनाई, नेपाली मजदूरों द्वारा असहियोगात्मक रवैया, विभिन्न बिन्दुओं पर वाहन चंकिंग के कारण ढ़ुलाई में बाधा आदि का कारण बताया गया है। v संभावित खतरा के बावजूद जनता को आगाह नहीं किया जाना इस तरह संवेदनहिनता का परिचय देने से संबंधित है। श्री राम द्वारा कहा गया है कि ़मुख्य अभियंता महोदय को इनके द्वारा दिनांक-15.08.2008 को 2ः35 AM त्राहिमाम संदेश भेजा गया था, जिसे मुख्य अभियंता के द्वारा जिला पदाधिकारी सुपौल को भी इसकी सूचना दी गयी थी। बतार संवाद 17.08.2008 तक विभाग के द्वारा भी प्राप्त किया गया है। जनता को सूचना प्रशासनिक स्तर से देने की उम्मीद की जाती है ताकि अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न नहीं हो सके। इनके स्तर से जनता को आगाह करने का अधिकार से भी बाहर की बात हो जाती। उक्त कथन की पूष्टि पृष्ठ-490-489/ पर रक्षित मुख्य अभियंता के बेतार संवाद से होती है कि इनके द्वारा दिनांक-15.08.2008 को मुख्य अभियंता को त्राहिमाम संदेश दिया गया है जिसकी सूचना विभाग एवं जिला पदाधिकारी सुपौल को दी गयी है। परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। बिहार सिंचाई प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 के कंडिका-4.8.5 में किसी तटबंध की सुरक्षा पर गंभीर खतरा होने पर मुख्य अभियंता तथा उनके अधीनस्थ कार्यपालक अभियंता स्तर के पदाधिकारी को स्थिति कीसूचना तुरन्त जिला पदाधिकारी एवं बाढ़ नियंत्रण कोषांग को प्रभावित क्षेत्र के आकलन के साथ भेजने का प्रावधान है। vi बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के लिये आपातकालीन शक्ति का उपयोग नहीं किये जाने एवं जानबूझ कर लापरवाही बरतना। श्री राम के द्वारा कहा गया कि मुख्य अभियंता द्वारा इनके उपर विश्वास नहीं किया गया एवं अपने तकनीकी सलाहकार को स्थल निरीक्षण हतु भेजा गया। स्थल निरीक्षण के पश्चात पाँच रिथ बनाने का आदेश दिये। गंभीर स्थिति के लिये बेतार संवाद 59 दिनांक-06.08.2008, 07.08.2008, 08.08.2008 द्वारा सूचित किया गया। कार्यपालक अभियंता की शक्ति के बारे में तो विभाग को चाहिए था कि यदि इतनी गंभीर स्थिति इनके प्रमंडल की लगी तो इन्हें भी बेतार संवाद भेज दिया जाता कि आप इसके अनुरूप तत्काल कार्य करें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। स्थल पर रिस्क श्रेणी का भी गठन 09.08. 2008 से ही हुआ था। दिनांक-10.08.2008 से 13.08.2008 तक वरीय पदाधिकारी स्थल पर थे। किसी ने इस शक्ति का उपयोग उचित नहीं समझा।24 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 (i) बिहार लोक निर्माण विभागीय संहिता की कंडिका-130(b) में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि महालेखाकार को सूचित करते हुए उक्त कार्याें को विनियमितिकरण कराना है। श्री राम पर यह आरोप विशेष रूप से इसलिये लगाया गया प्रतीत होता है कि 12.90 कि॰मी॰ स्पर पर क्षरण दिनांक-03.08.2008 से ही प्रारंभ हो गया था। जैसा की बेतार संवाद द्वारा सूचित किया गया है परन्तु ततक्षण ही बाढ़ संघार्षात्मक कार्य नहीं कराया गया एवं दिनांक-06.08.2008 को कार्य कराये जाने की सूचना प्रेषित की गयी है। स्थल पर जब स्थिति इतना गंभीर था तो कार्यपालक अभियंता प्रदत्त शक्ति का उपयोग कर सकते थे। (ii) बिहार वित्त नियमावली खंड-1 के नियम 205-2 में वर्णित है कि अत्यावश्यकता या अन्यथा के आधार पर यदि कोई कार्य कराया गया या दायित्व ग्रहण करना परिस्थितियों के अन्दर आवश्यक हो जाने और जब 205 के उप नियम-(i) के अन्तर्गत तय किये गये प्रावधानों का अनुपालन न किया जा सके तो संबंधित कार्यपालक अभियंता अपने स्वयं के निर्णय एवं उत्तरदायित्व पर ऐसा कर सकता है तथा सक्षम पदाधिकारी का अनुमोदन प्राप्त करने की कार्रवाई प्रारंभ कर देनी चाहिए थी। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री सुखदेव राम के विरूद्ध उक्त प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में अंकित निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया :-

50% उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना का सहमति प्राप्त है। अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में अंकित निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

50% श्री सुनील कुमार (आई0डी0-2315) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा गलत प्रमाण पत्र देकर एवं फर्जीवाड़ा कर रूपये 9,30,000/- की निकासी करने से संबंधित श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी द्वारा समर्पित परिवाद पत्र के आलोक में मामले की जाँच मुख्य अभियंता, भागलपुर से करायी गयी। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर स्पष्टीकरण की मांग की गई। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय संकल्प-810 दिनांक 18.04.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत, मामले में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन से मंतव्य की मांग की गई। अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन द्वारा दिया गया मंतव्य एवं उक्त के आलोक में मामले की तकनीकी समीक्षा के संदर्भ में वस्तुस्थिति निम्नवत है :-

प्रस्तुत मामले में अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा दिये गये मंतव्य में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी को दोषमुक्त करने का मंतव्य अंकित किया गया है। इन्होंने अपने मंतव्य में उल्लेख किया है कि "अनुमंडलीय लेखा में यदि Arrow Mark कर Misc. P.W. Advance लिखा गया है तो तत्कालीन जाँच पदाधिकारी द्वारा इसकी जाँच किया जाना चाहिए था।"

उक्त वर्णित मंतव्य के आलोक में निम्न बिन्दुओं का अवलोकन किया जा सकता है :-

(1) विषयांकित मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि जहाँ तक Misc. P.W. Advance में अस्थायी अग्रिम रखने का प्र"न है। इस संबंध में कोई भी साक्ष्य या अभिलेख उपलब्ध नहीं है। आरोप में Arrow Mark कर Misc. P.W. Advance अंकित करने का सवाल है तो इसका हस्तलिपि एवं स्याही भिन्न है तथा किसी का Initials भी नहीं है जिससे यह नहीं कहा जा सकता है कि श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा ही यह कृत्य किया गया है। यह अलग से जाँच का विषय है।

(2) प्रष्नगत मामले में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर द्वारा स्वयं तथा इनके द्वारा गठित त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गई जाँच से संबंधित जाँच प्रतिवेदन संक्षेप में निम्नवत्‌ है :-

i (क) विभागीय पत्रांक 143 दिनांक 29.01.2014 द्वारा इस मामले के संचालन पदाधिकारी श्री प्रकाश चन्द्र दास, सचिव प्रावैधिक, मुख्य अभियंत, कार्यालय, पटना को श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी के नाम पर लंबित मिसलेनियस पी॰डब्लू॰ अग्रिम राशि 921408/- तथा सरकारी राजस्व की राशि 8592/- रूपये सरकारी खजाना25 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 में जमा किया गया है, उनसे वसुलनीय है अथवा नहीं ताकि एम॰जे॰सी॰ संख्या 6008/2013 शैलेन्द्र कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य के मामले में दिनांक 08.01.2014 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके, संबंधी लिखे गये पत्र की प्रति मुख्य अभियंता, भागलपुर को भी उपलब्ध कराया गया था।

(ख) श्री दास संचालन पदाधिकारी द्वारा कृत कार्रवाई की सूचना इन्हें नहीं रहने एवं इनके द्वारा मामले की जाँच श्री रामेश्वर चौधरी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल संख्या 02 जमूई की अध्यक्षता में कराकर अपने पत्रांक 1032 दिनांक 29.03.2014 से विभाग को भी उपलब्ध कराया गया।

(ग) मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वं दिनांक 05.04.2014 को सिंचाई प्रमंडल, बौंसी के कार्यालय जाकर मामले की जाँच में पाया कि मापपुस्त संख्या 1873 में दर्ज कुल राशि 933608/- रूपये का प्रमाणक दिनांक 31.03.2011 को पारित किया गया, उसी दिन श्री शैलेन्द्र कुमार को 933608/- रूपये के पारित प्रमाणक के विरूद्ध 930000/- का अग्रिम दिया गया जिसे उसी दिन संबंधित कनीय अभियंता को हस्तरसीद पर 930000/- रूपये अग्रिम कर दिया गया।

(घ) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा 31.03.2011 को पारित भाउचर से स्पष्ट होता है कि कार्यपालक अभियंता कराये गये कार्य तथा उपस्थापित विपत्र भाउचर से पूर्णरूपेण संतुष्ट थे।

(च) कार्य कराने तथा विपत्र/भाउचर पारित करने के पश्चात 2 वर्षाें के बाद श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता अपने पत्र द्वारा प्रतिवेदित किया कि ''समर्पित लेखा के साथ वर्क ग्राफ उपलब्ध नहीं कराने के कारण मिसलेनियस में डाल दिया गया''। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी कार्यपालक अभियंता द्वारा एक गलती को छुपाने के लिए दूसरे गलती का सहारा लिया गया है।

(छ) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा 921408 रूपये का लेखा दिनांक 31.03.2011 को समायोजित कर लिये जाने के बाद Miscellaneous P.W. Advance में डालने का प्रश्न ही कहाँ उठता है।

(ज) इसके अतिरिक्त 921408/- रूपये का लेखा दिनांक 20.04.2011 की तिथि में पारित करते हुए दिनांक 05.05.2011 को उक्त लेखा महालेखार को हस्तगत कराने तथा लंबित राजस्व की राशि 8592/- रूपये प्रमंडलीय कार्यालय में जमा कर दिये जाने से स्पष्ट हेता है कि पारित प्रमाणक के विरूद्ध आरोपी द्वारा अग्रिम देकर उसे Adjust करने के बाद भी Misc. P.W. Advance में लंबित रखने की कार्रवाई बिल्कूल ही नियम के विरूद्ध तथा सोची समझी साजिश के तहत की गई कार्रवाई तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ का मामला प्रतीत होता है।

:-

ii (क) मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा उक्त मामले में गठित त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा पत्रांक 252 दिनांक 28.03.2014 से समर्पित जाँच प्रतिवेदन के मंंतव्य में उल्लेख है कि ''जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा कराये गये कार्य के विरूद्ध अग्रिम किया गया है। इसका मतलब है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा कराये गये कार्य तथा उपस्थापित प्रमाणकों से संतुष्ट होकर ही प्रमाणकों को पारित किया गया है। अतः प्रमाणक पारित करने के बाद तथा 31.03.2011 को अग्रिम समायोजित करने के उपरांत श्री शैलेन्द्र कुमार के नाम अग्रिम राशि को मिसलेनियस पी॰डब्लू॰ अग्रिम में डालना नियम के विरूद्ध तथा किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर की गई कार्रवाई प्रतीत होता है।

(ख)(i) उक्त मामले में त्रिसदस्यीय जाँच समिति के प्रतिवेदन में भी पारित प्रमाणकों के विरूद्ध दिनांक- 31.03.2011 को 930000/- रूपये दिये गये अग्रिम में 921408/- का प्रमाणक द्वारा लेखा समायोजित किये जाने का उल्लेख है। परन्तु तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का पत्रांक 307 दिनांक 20.04.2011 द्वारा मार्च 2011 में महालेखाकार को भेजे गये प्रमंडलीय लेखा में 921408/- रूपये को Misc. P.W. Advance में अंकित कर दिये जाने जबकि उसकी सूचना ससमय श्री शैलेन्द्र कुमार को नहीं दिये जाने को बिहार लोक सेवा संहिता के नियम 100 के प्रावधान एवं निगरानी विभाग का पत्र सं॰ 4053(s) अनु॰ दिनांक 31.07.1992 के पारा 3 का निदेश सं॰- 6 के प्रावधान के अनुरूप कार्रवाई नहीं किये जाने का उल्लेख है। (ii) रॉयल्टी मद का 8592 रूपये जमा कराने का उल्लेख है। (iii) जाँच समिति द्वारा अनुमंडलीय लेखा के अवलोकन से पाया कि लेखा पारित करते हुए राशि 921408/- रूपये को समायोजित किया गया परन्तु Arrow Mark करके Misc. P.W. Advance अंकित किया गया जिसमें हस्तलिपि एवं स्याही भी भिन्न पाया गया जबकि परिवादी श्री शैलेन्द्र कुमार का आरोप है कि इसकी सूचना नियमतः संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं रोकड़पाल द्वारा नहीं दी गई।

(iv) महालेखाकार को समर्पित किये गये फॉर्म 64 जिसपर प्रमंडलीय लेखापाल का भी हस्ताक्षर है, में व्यय 921408/- रूपये दर्शाया गया तथा Misc P.W. Advance शून्य है।

(v) एक अन्य प्रतिवेदन में मार्च 2011 में 9.30 लाख रूपये व्यय दर्शाया गया है जबकि Misc P.W. Advance प्रपत्र पर केवल कार्यपालक अभियंता का हस्ताक्षर है परन्तु लेखापाल का हस्ताक्षर नहीं है।26 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 (vi) त्रिसदस्यीय जाँच समिति द्वारा भी आरोपी पदाधिकारी श्री सुनील कुमार का पत्रांक 01 कैम्प पटना दिनांक 11.06. 2013 का जिक्र करते हुए वर्क ग्राफ उपलब्ध नहीं कराने के कारण Misc. P.W. Advance में डालने संबंधी आरोपी पदाधिकारी की स्वीकारोकित का उल्लेख किया गया है। उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध श्री शैलेन्द्र कुमार तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी को पारित प्रमाणकों के विरूद्ध दिनांक 31.03.2011 को अस्थाई अग्रिम दिया गया। तत्‌पष्चात अस्थाई अग्रिम की राषि 921408/- रू॰ को समायोजित करने के बाद भी Misc P.W. Advance लंबित रखने की कार्रवाई में आरोपी पदाधिकारी श्री कुमार द्वारा अपने बचाव बयान में प्रतिवेदित किया गया कि पारित विपत्रों के विरूद्ध दिनांक 31.03.2011 को अस्थायी अग्रिम देकर 921408/- रूपये को समायोजित कर लिये जाने के तथ्य को स्वीकार किये जाने तथा Misc P.W. Advance में डाले जाने के संबंध में कुछ भी नहीं कहे जाने का उल्लेख किया गया है। आरोपी पदाधिकारी श्री कुमार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक 01 दिनांक 11.06.2013 द्वारा की गई स्वीकारोक्ति, संलग्न अभिलेखों में Misc P.W. Advance अंकित रहने के परिप्रेक्ष्य में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा 921408/- रूपये का लेखा समायोजित कर लिये जाने तथा शेष 8592/- रूपये प्रमंडल में जमा हो जाने के बावजूद भी Misc. P.W. Advance में लंबित रखने की कार्रवाई नियम विरूद्ध एवं सोची समझी साजिष के तहत की गई कार्रवाई के मंतव्य से सहमत होते हुए वर्णित मामले में आरोपी पदाधिकारी की सहमति परिलक्षित होती है, जिसके लिये श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता दोषी हैं। विषयांकित मामले के विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित पदाधिकारी श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को उपरोक्त वर्णित आरोप के संबंध में अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है, क्योंकि श्री शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता को दिये गये अस्थायी अग्रिम के संबंध में Arrow Mark कर Misc. P.W. Advance जहाँ पर अंकित किया गया है वहाँ पर हस्तलिपि एवं स्याही भिन्न होने के साथ-साथ किसी का Initials भी नहीं किया हुआ है। असमायोजित अग्रिम लंबित रहने का एकमात्र अभिलेख प्रमंडलीय रोकड़वही होता है, न कि Misc. P.W. एडवांस। श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक 1 कैम्प पटना दिनांक 11.06.13 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि सिंचाई प्रमंडल, बौंसी अन्तर्गत श्री शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित पारित भाउचर के विरूद्ध निकासी की गई राषि के विरूद्ध की गई अग्रिम के विरूद्ध प्राप्त लेखा को पारित किया गया। परन्तु समर्पित लेखा के साथ वर्क ग्राफ उपलब्ध नहीं करा पाने के फलस्वरूप Misc. P.W. Advance में डाल दिया गया। अतः वर्क ग्राफ उपलब्ध होने पर यह स्वतः समायोजित हो जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के इषारों पर कार्य के वर्क ग्राफ श्री शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित नहीं किये जाने के कारण उक्त अस्थायी अग्रिम की राि"ा को Misc. P.W. Advance में Arrow से द"ाार्या गया है जो कि नियमानुकूल नहीं है। स्पष्ट है उक्त के संबंध में कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पदीय दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया परिलक्षित होता है। जहाँ तक Misc. P.W. Advance में हस्तलिपी एवं स्याही के साथ-साथ किसी का भी Initial नहीं अंकित रहने का प्र"न है और यदि कार्यपालक अभियंता इसमें संलिप्त नहीं है तो कार्यपालक अभियंता को इसकी जाँच करनी चाहिए थी कि उक्त कृत्य किसके द्वारा किया गया है। उसे चिन्हि्‌त कर नियमानुकूल दोषी पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। परन्तु कार्यपालक अभियंता के द्वारा ऐसा नहीं किया गया। स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पदीय दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया जिसके लिए कार्यपालक अभियंता दोषी हैं। उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री सुनील कुमार (आई0डी0-2315) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु के आधार पर विभागीय पत्रांक-1125 दिनांक 13.05.2022 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। श्री कुमार से लिखित अभ्यावेदन अप्राप्त रहने की स्थिति में पुनः विभागीय पत्रांक-1639 दिनांक 12.07.2022 द्वारा उन्हें लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने हेतु अंतिम रूप से स्मारित किया गया। श्री सुनील कुमार सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से लिखित अभ्यावेदन/द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर अप्राप्त रहने की स्थिति में मामले की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सुनील कुमार द्वारा असहमति के निर्धारित बिन्दु पर अंतिम रूप से स्मारित किये जाने के बावजूद जवाब नहीं देने के कारण उनके विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है। पुनः एक अंतिम अवसर देते हुए विभागीय पत्रांक-222 दिनांक 03.02.2023 द्वारा असहमति के बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने हेतु श्री सुनील कुमार, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया गया परन्तु भेजे गये पत्र को प्राप्त करने के बाद भी उनके द्वारा कोई जवाब समर्पित नहीं किया गया। उक्त मामले में उनके द्वारा किये गये वित्तीय अनियमितता/राजस्व की क्षति का आकलन तकनीकी पदाधिकारी से करायी गयी। तकनीकी पदाधिकारी द्वारा की गयी समीक्षा निम्नवत है :-

विषयांकित मामले में कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी को दिनांक 26.02.2011 से 21.03.2011 के बीच कराये गये कार्यो से संबंधित माप पुस्त संख्या-1873 तथा 1880 के कुल 188 (एक सौ अठासी) प्रमाणकों जिसकी कुल राशि 9,33,608.00 रूपये थी, को पारित करने हेतु समर्पित किया गया, जिसको कार्यपालक अभियंता के द्वारा इसे पारित करते हुए पारित प्रमाणकों के विरूद्ध 9,30,000.00 (नौ लाख तीस हजार) रूपये मात्र की राषि को अस्थायी अग्रिम के रूप में श्री शैलेन्द्र कुमार, तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी को दिनांक 31.03.2011 को दिया गया जिसे श्री शैलेन्द्र कुमार,27 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी के द्वारा उक्त कार्य को कराने के लिए प्राधिकृत कनीय अभियंता श्री सुधांशु शेखर सिंह को कुल 9,30,000.00 (नौ लाख तीस हजार) रूपये का अस्थायी अग्रिम दिया गया। उल्लेखनीय है कि सिंचाई प्रमंडल, बौंसी के रोकड़वही में माह मार्च 2011 के दिनांक 31.03.2011 को अंकित किया गया है कि "श्री शैलेन्द्र कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी के नाम मात्र लंबित अस्थायी राशि 9,30,000.00 (नौ लाख तीस हजार) रूपये की राशि से प्रमाणक संख्या 1 से 188 तक कुल राशि 9,21,408.00 (नौ लाख इक्कीस हजार चौर सौ आठ) रूपये समायोजन के उपरान्त शेष राशि 8,592.00 (आठ हजार पाँच सौ बानवे) हो गया" तथा दिनांक 31.03. 2011 को मासिक लेख बंदी के उपरान्त अंतशेष में भी असमायोजित राशि 8,592.00 (आठ हजार पाँच सौ बानवे) रूपये अंकित है।

कार्यपालक अभियंता के द्वारा अस्थायी अग्रिम 9,30,000/- रूपये के विरूद्ध समर्पित 921408/- रूपये का लेखा दिनांक 31.03.2011 को पारित करते हुए दिनांक 05.05.2011 को उपरोक्त लेखा महालेखाकार, पटना को हस्तगत कराने तथा शेष राषि 8592/- रूपये प्रमंडलीय कार्यालय में जमा कर दिये जाने से स्पष्ट है कि प्रमंडल द्वारा दिये गये कुल अस्थायी अग्रिम 9,30,000/- रूपये का समायोजन कार्यपालक अभियंता के द्वारा कर लिया गया। अतः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, विषयांकित मामले में श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी द्वारा वित्तीय अनियमितता किया परिलक्षित नहीं होता है। श्री सुनील कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पारित प्रमाणक के विरूद्ध अग्रिम देकर उसे समायोजित करने के बाद भी Misc. P.W. Advance में लंबित रखने की कार्रवाई, बिल्कुल ही नियमविरूद्ध एवं सोची समझी साजिश के तहत की गयी कार्रवाई परिलक्षित होती है। उनके द्वारा यह कहना कि समर्पित लेखा के साथ वर्क ग्राफ उपलब्ध नहीं करा पाने के फलस्वरूप राशि Misc. P.W. Advance में डाल दी गयी एवं वर्क ग्राफ उपलब्ध होने पर यह स्वतः समायोजित हो जायेगा, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता। यह स्वतः स्पष्ट है कि श्री सुनील कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता के इशारों पर कार्य के वर्क ग्राफ श्री शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित नहीं किये जाने के कारण उक्त अस्थायी अग्रिम की राशि को Misc. P.W. Advance में Arrow से दर्शाया गया है, जो नियमानुकूल नहीं है। उक्त के आलोक में कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जाना परिलक्षित होता है। जहाँ तक Misc. P.W. Advance में हस्तलिपि एवं स्याही के साथ-साथ किसी का भी Initial नहीं अंकित करने का प्रश्न है तथा यदि कार्यपालक अभियंता इसमें संलिप्त नहीं हैं तो कार्यपालक अभियंता को इसकी जाँच करनी चाहिए थी कि उक्त कृत्य किसके द्वारा किया गया है। उसे चिन्हित कर नियमानुकूल कार्रवाई करनी चाहिए थी, परन्तु कार्यपालक अभियंता श्री सुनील कुमार के द्वारा ऐसा नहीं किये जाने से वे पदीय दायित्वों के निर्वहन के लिए दोषी हैं। उपर्युक्त समीक्षा एवं निष्कर्ष के आलोक में श्री सुनील कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है :-

10% उपर्युक्त निर्णित विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2756 दिनांक 03.11.2023 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री सुनील कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, बौंसी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-

10% चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी (सम्प्रति परिवर्तित नाम बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी) के अन्तर्गत बाढ़ 2013 के दौरान घोड़हिया स्थल पर कराए गए बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो में बरती गई अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उक्त उड़नदस्ता जाँँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कार्य में हुई अनियमितता के लिए के विरूद्ध निम्नांकित आरोप के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-212, दिनांक 01.02.2022 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गई :-

प्रश्नगत स्थल पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की जाँच में निर्धारित आकार के B.A. Wire Crate की बुनाई नहीं पाये जाने के संबंध में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर/वाल्मीकिनगर द्वारा समानुपातिक कटौती कर विपत्र पारित करने हेतु भुगतान का आदेश निर्गत किया गया है। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में प्रयुक्त B.A. Wire Crate की आपूर्ति प्रमंडलीय स्टोर से की गयी थी। प्रमंडलीय स्टोर के प्रभारी के रूप में इनके द्वारा न्यून विशिष्टि का B.A. Wire Crate बुनाई करा कर कार्य में प्रयोग हेतु आपूर्ति की गयी। इससे स्पष्ट है कि इनकी लापरवाही/उदासीनता के कारण B.A. Wire Crate की बुनाई प्रावधानित आकार में नहीं हो पाया जिसके कारण कार्य में विशिष्टि के अनुरूप B.A. Wire Crate का उपयोग नहीं हो28 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 पाया। अतएव न्यून विशिष्टि के B.A. Wire Crate की बुनाई कराकर कार्य में उपयोग करने हेतु आपूर्ति करने, प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने एवं गलत ढंग से विभागीय सामग्री का दुरूपयोग करने के लिए वे दोषी है।

उक्त आलोक में श्री आर्य द्वारा समर्पित बचाव-बयान का मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- वे दिनांक 25.04.2013 से 09.07.2014 तक सहायक अभियंता, यांत्रिक अवर प्रमंडल, मोतिहारी के प्रभार में थें। उनके उपर लगाये गये आरोपों को प्रमाणित करने के लिए उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन को संलग्न किया गया है। —पया उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें उड़नदस्ता कार्यों की आकस्मिकता की स्थिति में कराये जाने की परिस्थिति के आलोक में ही जाँच करें। इसी क्रम में उड़नदस्ता दल द्वारा जाँच की गयी है, जिसके विभिन्न कंडिकाओं में जाँच प्रतिवेदन अंकित है। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-3 (ग) में कार्यपालक अभियंता, चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा घोड़हिया स्थल पर बाढ़ वर्ष 2013 में संलग्न पदाधिकारियों की सूची संलग्न किया गया है। —पया उक्त सूची का अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें उनका नाम अंकित नहीं है, जो जाँच प्रतिवेदन के पृष्ठ-9 है।

आरोप पत्र में वर्णित आरोप न्यून विशिष्टि के B.A. Wire Crate बुनाई से संबंधित है एवं यह कहा गया है कि प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने एवं गलत ढंग से विभागीय सामग्री का दुरूपयोग करने के लिए वे दोषी हैं, परन्तु जाँच प्रतिवेदन में इस तरह का कोई युक्ति या कटिंग या B.A. wire Crate के संबंध में अंकित नहीं है, जिससे कि वे स्थिति स्पष्ट कर सकें।

इस संबंध में कहना है कि उड़नदस्ता द्वारा ग्रेडिंग के संबंध में जो टिप्पणी अंकित की गयी है, वह कंडिका-5 (ख) (b) है, जिसमें अंकित है कि-चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी के अभियंता नियमानुकूल बोल्डर क्रेटिंग की मापी एवं तद्‌नुसार Void की कटौती न किये जाने हेतु उत्तरदायी है। फिलहाल संवेदकों को क्रेटिंग कार्य एवं ढ़ुलाई मद का भुगतान नहीं किया गया है, वांछित सुधारात्मक कार्रवाई किये जाने के उपरान्त विभाग को वित्तीय हानि नहीं हो सकेगी। अतएव भविष्य में मापी में सचेत रहने के –ष्टिकोण से संबंधित पदाधिकारियों को निदेशित किया जाना उचित प्रतीत होता है। जिसमें क्रेटिंग के गुणवत्ता पर कोई आरोप नहीं है।

इस संबंध में यह कहना है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा उन्हें पत्रांक 79 दिनांक 01.02.2023 द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु B.A. Wire Crate से संबंधित कागजात उपलब्ध कराया है। पत्र के साथ उपलब्ध कराये गये मापी पुस्तिका जो First-Final Bill से संबंधित है का अवलोकन करना चाहेंगे, उक्त विपत्र में मापी कनीय अभियंता द्वारा दर्ज की गयी है, जिसे कार्यपालक अभियंता के जाँचोपरान्त भुगतान की कार्रवाई की गयी है, जिससे स्वतः स्पष्ट होगा कि इस क्रेट बुनाई से संबंधित कार्य में वे संलग्न नहीं रहे हैं।

इनके द्वारा पुनः समर्पित बचाव-बयान में कहा गया है कि, संबंधित कार्य परिमाप पत्र का अवलोकन करना चाहेगें जो दिनांक 16.07.2013 से 31.07.2013, 01.08.2013 से 15.08.2013 एवं 01.09.2013 से 15.09.2013 के बीच संपादित कार्याे के संबंध में है एवं क्रेट बुनाई का कार्य मद है के परिमाप पत्र पर उनका हस्ताक्षर नहीं है। सुलभ प्रसंग हेतु एकरारनामा संख्या-98F2/2013-14, 99F2/2013-14, 100F2/2013-14, 101F2/2013-14, 102F2/2013-14, 103F2/2013-14, 104F2/2013-14, को संलग्न कर रहा हूँ, जो F.F-2013 (Weaving of B.A wire crate) से संबंधित है। साथ ही साथ कार्य के स्वी—त प्राक्कलन 16.07.2013 से 31.07.2013, 01.08.2013 से 15.08.2013 को भी संलग्न कर रहा हूँ। उक्त प्राक्कलन पर भी उनका हस्ताक्षर नहीं है।

श्री आर्य, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा समर्पित बचाव-बयान में कहा गया है कि, वे दिनांक-25.

04.2013 से दिनांक-09.07.2014 तक सहायक अभियंता याँत्रिक अवर प्रमंडल, मोतिहारी के प्रभार में थे। आरोप पत्र में वर्णित आरोप न्यून विशिष्टि के B.A Wire Crate बुनाई से संबंधित है तथा प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने एवं गलत ढंग से विभागीय सामग्री का दुरूपयोग करने के लिए उन्हें दोषी प्रतिवेदित किया गया है। पंरतु जाँच प्रतिवेदन में इस तरह का कोई युक्ति B.A Wire Crate के संबंध में अंकित नहीं है।

उड़नदस्ता द्वारा ग्रेडिंग के संबंध में जो टिप्पणी अंकित की गयी है, वह कंडिका-5 (ख) (b) है, जिसमें अंकित है कि-चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी के अभियंता नियमानुकूल बोल्डर क्रेटिंग की मापी एवं तद्‌नुसार Void की कटौती न किये जाने हेतु उत्तरदायी है। फिलहाल संवेदकों को क्रेटिंग कार्य एवं ढुलाई मद का भुगतान नहीं किया गया है, वांछित सुधारात्मक कार्रवाई किये जाने के उपरान्त विभाग को वित्तीय हानि नहीं हो सकेगी। अतएव भविष्य में मापी में सचेत रहने के –ष्टिकोण से संबंधित पदाधिकारियों को निदेशित किया जाना उचित प्रतीत होता है। जिसमें क्रेटिंग के गुणवत्ता पर कोई आरोप नहीं है। इस संबंध में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि, न्यून विशिष्टि के B.A Wire Crate के बुनाई का आरोप उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रश्नगत स्थल पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की जाँच में निर्धारित आकार के B.A Wire Crate की बुनाई नहीं पाये जाने के संबंध में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर/वाल्मीकिनगर द्वारा समानुपातिक कटौती कर विपत्र पारित करने हेतु भुगतान का आदेश निर्गत किया गया है। कार्य में संलग्न पदाधिकारियों द्वारा उल्लेखित किया गया है कि, B.A Wire Crate की आपूर्ति प्रमंडलीय स्टोर से की गयी थी, जिसके आलोक में इस आरोप का गठन हुआ है।

इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के पत्रांक-79, दिनांक-01.02.2023 द्वारा विषयांकित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में प्रयुक्त B.A Wire Crate से संबंधित अभिलेख उपलब्ध29 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 कराया गया है। उपलब्ध कराये गये अभिलेख अंतर्गत मापी पुस्तिका जो First-Final Bill से संबंधित है, में अंकित विपत्र में मापी कनीय अभियंता द्वारा दर्ज की गयी है, जिसे कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँचोपरांत भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। उक्त विपत्र श्री आर्य द्वारा तैयार किया जाना वर्णित साक्ष्यों के आलोक में प्रमाणित नहीं होता है।

इनके द्वारा बाढ़ अवधि 2013 के दिनांक-16.07.2013 से 31.07.2013, 01.08.2013 से 15.08.2013 एवं 01.09.2013 से 15.09.2013 के बीच क्रेट बुनाई के संपादित कार्यों से संबंधित परिमाण विपत्र (Bill of Quantity) से संबंधित एकरारनामाओं की छायाप्रति संलग्न किया गया है, जिसमें परिमाण विपत्र पर सहायक अभियंता का हस्ताक्षर अंकित नहीं है। श्री आर्य द्वारा उक्त साक्ष्यों/अभिलेखों के आधार पर यह कहा गया है कि, उक्त क्रेट बुनाई से संबंधित कार्य में वे संलग्न नहीं रहे है। श्री आर्य द्वारा समर्पित साक्ष्यों/अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि, उक्त क्रेट बुनाई के संपादित कार्य से संबंधित प्राक्कलन, परिमाण-विपत्र (Bill of Quantity) एवं माप-पुस्त में अंकित/पारित विपत्रों में उनका हस्ताक्षर अंकित नहीं है, जिससे इनके विरूद्ध अनियमित भुगतान में संलग्नता का आरोप प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंपारण प्रमंडल, मोतिहारी के पत्रांक-391, दिनांक-25.04.2013 द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश में श्री राजेश कुमार आर्य, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, चंपारण तटबंध अवर प्रमंडल, मोतिहारी को अपने कार्य के अतिरिक्त सहायक अभियंता, याँत्रिक, चंपारण प्रमंडल, मोतिहारी का कार्य संपादन करने हेतु प्रतिनियुक्त किया गया है। चूँकि विषयांकित B.A Wire crate की बुनाई कार्य से संबंधित प्राक्कलन, परिमाण विपत्र तथा पारित विपत्रों के माप-पुस्त में श्री आर्य का हस्ताक्षर सहायक अभियंता के रूप में अंकित नहीं है। पंरतु तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा श्री आर्य को याँत्रिक चंपारण प्रमंडल, मोतिहारी का कार्य संपादन हेतु अपने कार्यों के अतिरिक्त प्रतिनियुक्त किया गया था, जिसे श्री आर्य द्वारा भी अपने बचाव बयान में स्वीकार किया गया है। अतएव वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राजेश कुमार आर्य, तत्कालीन सहायक अभियंता, के विरूद्ध गठित यह आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।

मामले के समीक्षोपरांत उक्त आंशिक प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राजेश कुमार आर्य (आई0डी0-5183), तत0 सहायक अभियंता, याँत्रिक अवर प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया है :-

उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश कुमार आर्य (आई0डी0-5183), तत0 सहायक अभियंता, याँत्रिक अवर प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (कार्यकारी प्रभार) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, हाजीपुर के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं0-144/124 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्य की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराये जाने के उपरांत पायी गयी अनियमितता के लिए से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया, जिसके अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत्‌ है :- श्री सत्येन्द्र कुमार, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के पदस्थापन अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के अन्तर्गत एजेण्डा संख्या-144/124 के तहत्‌ बाढ़ 2018 पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में निम्न अनियमितताएँ बरती गयी है :-

(1) प्रश्नगत स्थल पर अनावश्यक रूप से नॉयलन क्रेटिंग कार्य कराकर कार्य की लागत राशि में बढ़ोतरी करना एवं नॉयलन क्रेटिंग का कार्य विशिष्टि के अनुसार नहीं कराया जाना। (2) प्रश्नगत कार्य के तहत जियो बैग रिभेटमेंट कार्य में जियो बैग में बालू के स्थान पर मिट्टी का प्रयोग करना तथा प्रावधानित वजन 126 कि० ग्रा० से कम वजन पाया जाना तथा चार कतार में सिलाई किये जाने के स्थान पर तीन कतार पर सिलाई कर न्यून विशिष्टि के जियो बैग पिचिंग कार्य करने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करना।

उक्त से स्पष्ट है कि श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता के द्वारा उपर्युक्त कंडिका में बरती गयी अनियमितता यथा निम्न विशिष्टि के एन0सी0 एवं जियो बैग का कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है तथा भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से अधिकाई भुगतान का मामला बनता है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2381 दिनांक 20.11.2019 द्वारा उनसे आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। लेकिन श्री कुमार द्वारा आरोप पत्र के संदर्भ में पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित नहीं किया गया। मामले की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प सं0-734 दिनांक 02.08.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित30 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 की गयी, जिसमें मुख्य अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1152 दिनांक 23.12.2022 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर से की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने का निर्णय लिया गया :-

संचालन पदाधिकारी के द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-12 दिनांक-08.08.2018) की कंडिका-7.2.0 के अनुसार रिभेटमेन्ट कार्य के नीचे कराये गए नायलन क्रेटिंग कार्य में प्रयुक्त बालू भरे बोरे के औसत वजन में पायी गयी कमी के आलोक में, विभागीय निदेशानुसार की गई अनुवर्ती कार्रवाई के क्रम में नायलन क्रेटिंग कार्य के भुगतान में किये गये अनुमान्य कटौती तथा बालू में Clay मिश्रित रहने की संभावना के आलोक में उक्त गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है, जबकि उड़नदस्ता जाँच के क्रम में बालू भरे बोरे का औसत वजन 47.2kg पाया गया, जो मानक वजन 50kg से कम है। उक्त के आलोक में हीं Nylon Crating कार्य अन्तर्गत अनुवर्ती कार्रवाई हेतु विभागीय निदेशानुसार एक NC में 25 EC Bags के स्थान पर 18 EC Bags का प्रयोग किये जाने के कारण, दर विश्लेषण करते हुए, अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया गया, जिससे स्पष्ट है कि कार्य के दौरान आरोपित पदाधिकारी के द्वारा न्यून विशिष्टि का Nylon Crating कार्य कराया गया। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-01 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-12 दिनांक-08.08.2018) की कंडिका-7.2.0 के अनुसार जियो बैग में भरे गये बालू का औसत वजन मानक के अनुसार नहीं पाये जाने के उपरांत विभागीय निदेशानुसार अनुवर्ती कार्रवाई के क्रम में जियो बैग की मात्रा में की गई कटौती तथा जियो बैग पिचिंग कार्य में जियो बैग की सिलाई चार कतार के स्थान पर तीन कतार में पाये जाने के संदर्भ में कतिपय संभावनाओं का उल्लेख करते हुए आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित इस आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7.2.0 के अनुसार प्रस्तुत मामले में जियो बैग का वजन नदी साइड में 113.15 kg, 104.30 kg, 120.34 kg, 119.55 kg, 125.70 kg, 132.35 kg, 115.65 kg, 124.30 kg, 129.50 kg, 127.55 kg प्रतिवेदित किया गया है। जिसका औसतन वजन 121.239 kg है, जो प्रावधानित वजन 126.0 kg से 4.76 kg कम पाया गया तथा उक्त के आलोक में हीं जियो बैग की मात्रा में अनुमान्य कटौती करते हुए भुगतान किया गया है। जियो बैग की सिलाई प्रावधानित चार कतार में किये जाने के स्थान पर कृत सिलाई तीन कतार में पाया जाना प्रमाणित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कराया गया जियो बैग पिचिंग कार्य न्यून विशिष्टि का प्रतीत होता है, जिससे आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-02 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-493 दिनांक 24.03.2023 द्वारा श्री कुमार को भेजते हुए उनसे उक्त असहमति के बिन्दुओं पर अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन (दिनांक 13.06.2023) समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-

(1) आरोप संख्या-1 के लिए असहमति के बिन्दु के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है कि :- (क) विभाग में किये गए विश्लेषण में यह कहा गया है कि एक एन0सी0 मे 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग के प्रयोग किये जाने के कारण दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि कार्य के दौरान आरोपित पदाधिकारीं के द्वारा न्यून विशिष्टि के नायलॉन क्रेटिंग कार्य कराये गये है। यह कहा जाना किसी भी –ष्टिकोण से मान्य नहीं है क्योकि, 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग का प्रयोग किया गया जिसमें बैग की मात्रा की कमी होती है ना की आयतन की, जिसकी सम्पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक 954 दिनांक 23.04.2018 के पत्र से भी की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि "जब नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाला गया तो अधिकांश 18 से 19 बैग से नाइलोन क्रेट भर गया"। जबकि यह कार्य 18 ई०सी० बैग से किया जाता है तो 25 ई०सी० बैग अर्थात 7 बैग अधिक की कटौती किया जाना सरकार के हित में और राजस्व की बचत हुई है। साथ ही साथ प्रसंगिक पत्र न्यून विशिष्टि के नायलॉन क्रेटिंग शब्द का उपयोग किया गया जबकि नायलॉन क्रेटिंग उसमें उपयोग होने वाले बोरा एवं उसमें रक्षित बालू के विशिष्टि पर कोई भी आरोप गठित नहीं है मात्र मात्रा का उल्लेख किया गया है जिसकी कटौती की जा सकती है।

स्थानीय बालू के विशिष्टि में इसके विभिन्न अवयवों की मात्रा का विवरणी स्पष्ट रूप से अंकित नहीं रहता है। स्थानीय बालू में मिट्टी/Clay की मात्रा का कितना प्रतिशत मान्य होगा स्पष्ट नहीं रहता है। उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा भी Clay का प्रतिशत का कोई जिक्र नहीं है। स्थानीय बालू से भरे बोरे को पानी में डालने पर Clay का बाहर आना स्वभाविक है, जिसके कारण स्थानीय बालू भरे ई०सी० बैग के वजन में कमी आ सकती है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसका कितना वजन होना चाहिए इस संबंध में कहीं कोई जिक्र या Specification नहीं है। नॉयलान क्रेटिंग का कार्य जॉचित प्रभाग में दिनांक 20.03.2018 को कराया गया है जबकि उड़नदस्ता जॉच दल के द्वारा दिनांक 15.06. 2018 को Geo bag Revetment कार्य के नीचे से 01 N.C को खोदकर निकाल कर उसकी जाँच की गई है। जाँचित31 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 स्थानीय बालू से भरे बैग को पानी के नीचे किए गए नाइलॉन क्रेट को खोलकर वजन किया गया है। अतः इस पर मानक वजन लागू नहीं होना चाहिए। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का मानक वजन 50 किलोग्राम भराई के समय निर्धारित है, अन्य परिस्थितियों में इसका कोई जिक्र नही है।

गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाया गया है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का निर्धारित मानक वजन 50Kg है। अतः भराई का कार्य सही पाया गया है एवं कार्य विशिष्टि के अनुरूप है।

(2) आरोप संख्या-2 के लिए असहमति के बिन्दु के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है किः- (क) कटाव निरोधक कार्य आपदा से संबंधित होता है जिसे बहुत ही सीमित समय अवधि में (15 मई तक) पूर्ण करना होता है। जियो बैग भराई का कार्य अकुशल मजदूरों के द्वारा किया जाता है, जिसके कारण भरे हुए जियो बैग का वजन मानक निर्धारित वजन से कम या अधिक होना स्वाभाविक है। उड़नदस्ता जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित जॉच प्रतिवेदन से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है- रिभर साईड में दस Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त दस Geo-bags में से तीन का वजन क्रमशः 127.55Kg, 129.50Kg एवं 132.35Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

कन्ट्री साईड मे 5 अदद स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 124.064Kg पाया गया है। यहाँ भी एक Geo-bag का वजन 126.80Kg पाया गया है जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

(ख) अधिक भराई होने के स्थिति में या जियो बैग के पानी से भीग जाने/जियो बैग में बालू के चिपक जाने से सिलाई करने के क्रम में धागा या सिलाई स्लीप कर जाता है। जिसके कारण जॉच के क्रम में कुछ Geo-bags में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया गया है। विदित हो कि जियो बैग की सिलाई मशीन द्वारा की जाती है एवं एक बार में दो कतार में सिलाई होता है। तीन कतार में सिलाई पाये जाने से स्पष्ट है कि सिलाई मशीन दो बार चलाया गया है। तीन कतार होने का कारण जियो बैग का भींगा होना या बालू का चिपक जाना हो सकता है। कम सिलाई करने का किसी की गलत मंशा नही दर्शाता है।

स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का वजन मूल रूप से जियो बैग का सामग्री भरने की क्षमता (आयतन) एवं इसमें भरे गए स्थानीय बालू का घनत्व (Density) पर निर्भर करेगा ।

Mass=volume x density नये जियो बैग का filling capacity=0.07 cum है, परन्तु इसमें भरे गए स्थानीय बालू का घनत्व (Density) का कही स्पष्ट जिक्र नही है। घनत्व के संबंध में भी यह निर्धारित नही है कि भरे गए स्थानीय बालू का Dry Density कितना होगा एवं Bulk Density कितना होगा अर्थात कितना प्रतिशत moisture content प्रावधानित (permitted) है। स्थानीय बालू का Density place एवं climate पर भी निर्भर करेगा, क्योंकि Geo-bags का लेइंग दिनांक 01.05. 2018 से 14.05.2018 के बीच कराया गया तथा उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा दिनांक 15.06.2018 को इसकी वजन की जाँच की गई। अतः माह जून में अधिक गर्मी के कारण Moisture content में भिन्नता आने के कारण वजन में कमी संभावित है। Geo-bags के वजन में कमी एवं कराये गये कार्य के विरूद्ध भुगतान में कटौती का विश्लेषण निम्न प्रकार किया जाता हैः-

(i) रिभर साईड में स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से 4.76Kg कम है अर्थात्‌ 3.77% कम है।

(ii) कन्ट्री साईड में स्थानीय बालू से भरे Geo bag का वजन 124.064Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से 1.936Kg कम है, अर्थात्‌ 1.53% कम है।

(iii) Geo-bags के कराये गये कार्य का कुल मात्रा 8541 अदद है, जबकि किए गए कार्य के विरूद्ध भुगतान किए गए मात्रा 8065 अदद है। इस प्रकार कराये गए कार्य के विरूद्ध भुगतान की मात्रा (8541-8065)= 476 अदद कम है, जो किए गए कार्य से 5.58% कम है।

वजन एवं सिलाई में कमी हेतु समग्र रूप से कराये गए कार्य के विरूद्ध की गई अनुमान्य कटौती 5.58% है। जबकि वजन मे कमी 1.53% से 3.77% है, अतः भुगतान में की गई विपत्र से कटौती अधिक ही की गई है।

(ग) इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, इनके मामले में संचालन पदाधिकारी मुख्य अभियंता थे। बिहार लोक निर्माण विभागीय सहिता की कंडिका 15 से 17 में मुख्य अभियंता की भूमिका अंकित है, जिसके कंडिका 15A का अवलोकन करना चाहेंगे जिसमें यह अंकित है कि "The Chief Engineer- The administrative and professional head of that zone of the Public Works Department of which be is in charge and is responsible and answerable to Engineer in Chief for the proper and efficient working of that zone. Each Chief Engineer is also responsible Professional adviser of Engineer– in– Chief in all matters relating to his branch."32 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 ऐसी परिस्थिति में मुख्य अभियंता, जो कि सरकार के Professional Head है उनके द्वारा जब आरोप को अप्रमाणित किया गया है, से हटकर किसी भी सेवा के पदाधिकारी के मंतव्य एवं उनसे कनीय पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य के आधार पर असहमति का बिन्दु गठित किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।

श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गया :-

आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने अभ्यावेदन में आरोप संख्या 01 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के प्रत्युत्तर में मुख्य रूप से कहा गया है कि एक एन0सी0 में 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग के प्रयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य किये जाने के कारण दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किये जाने के संबंध में इस तथ्य का उल्लेख किया है कि, 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग का प्रयोग किया गया जिसमे बैग की मात्रा की कमी होती है ना की आयतन की, जिसकी सम्पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक 954 दिनांक 23. 04.2018 के पत्र से भी की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि "जब नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाला गया तो अधिकांश 18 से 19 बैग से नाइलॉन क्रेट भर गया"। जबकि यह कार्य 18 ई०सी० बैग से किया जाता है तो 25 ई०सी० बैग अर्थात 7 बैग अधिक की कटौती किया जाना सरकार के हित में और राजस्व की बचत हुई है। उक्त वर्णित तथ्य के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि, संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा भी स्थल निरीक्षण के क्रम में नाइलॉन क्रेटिंग कार्य अंतर्गत 01 नाइलॉन क्रेट में नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाले जाने के फलस्वरूप अधिकांश नाइलोन क्रेट को 18 से 19 ई०सी० बैग से भर जाने की पुष्टि की गई है, जिसके आलोक में विभागीय निदेशानुसार दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया जाना परिलक्षित होता है तथा न्यून विशिष्टि के नाइलॉन क्रेटिंग कार्य कराये जाने के आरोप को अप्रमाणित माना जा सकता है।

उड़नदस्ता जाँच के क्रम में बालू भरे बोरे का औसत वजन 47.2Kg पाया गया, जो मानक वजन 50Kg से कम है, के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि, स्थानीय बालू में Clay(मिट्‌टी) के प्रतिशत की स्थिति स्पष्ट नहीं है तथा उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा भी Clay के प्रतिशत का कोई जिक्र नहीं किया गया है। स्थानीय बालू से भरे बोरे को पानी में डालने पर Clay का बाहर आना स्वभाविक है, जिसके कारण ई०सी० बैग के वजन में कमी आ सकती है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसका कितना वजन होना चाहिए, इस संबंध में कहीं कोई जिक्र या Specification नहीं है। नॉयलान क्रेटिंग का कार्य जॉचित प्रभाग में दिनांक 20.03.2018 को कराया गया है, जबकि उड़नदस्ता जॉच दल के द्वारा दिनांक 15.06.2018 को Geo bag Revetment कार्य के नीचे से 01 N.C को खोदकर निकाल कर उसकी जाँच की गई है। जाँचित स्थानीय बालू से भरे बैग को पानी के नीचे किए गए नाइलॉन क्रेट को खोलकर वजन किया गया है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का मानक वजन 50 किलोग्राम, भराई के समय निर्धारित है, अन्य परिस्थितियों में इसका कोई जिक्र नही है। इसी संदर्भ में इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाया गया है। अतएव स्थानीय बालू में Clay(मिट्‌टी) के प्रतिशत की स्थिति स्पष्ट नहीं रहने, स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसके वजन के संदर्भ में कहीं कोई Specification नहीं रहने तथा गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाये जाने के तथ्य के आलोक में इस आरोप के संदर्भ में समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या 02 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के अभ्यावेदन में मुख्य रूप से कहा गया है कि, कटाव निरोधक कार्य आपदा से संबंधित होता है जिसे बहुत ही सीमित समय अवधि (15 मई तक) पूर्ण करना होता है। जियो बैग भराई का कार्य अकुशल मजदूरों के द्वारा किया जाता है, जिसके कारण भरे हुए जियो बैग का वजन मानक निर्धारित वजन से कम या अधिक होना स्वाभाविक है। उड़नदस्ता जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित जॉच प्रतिवेदन से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है- रिभर साईड में दस Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त दस Geo-bags में से तीन का वजन क्रमशः 127.55Kg, 129.50Kg एवं 132.35Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

इसी प्रकार कन्ट्री साईड में 5 अदद स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 124.064Kg पाया गया है। यहाँ भी एक Geo-bag का वजन 126.80Kg पाया गया है जो मानक वजन 126Kg से अधिक है। अधिक भराई होने के स्थिति में या जियो बैग के पानी से भीग जाने/जियो बैग में बालू के चिपक जाने से सिलाई करने के क्रम में धागा या सिलाई स्लीप कर जाता है। जिसके कारण जॉच के क्रम में कुछ Geo-bags में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया गया है। जियो बैग की सिलाई मशीन द्वारा की जाती है एवं एक बार में दो कतार में सिलाई होता है। इस प्रकार तीन कतार में सिलाई पाये जाने से स्पष्ट है कि सिलाई मशीन दो बार चलाया गया है। तीन कतार होने का कारण जियो बैग का भीगा होना या बालू का चिपक जाना हो सकता है, जो कम सिलाई करने की किसी की गलत मंशा नही दर्शाता है। साथ ही Geo-bags के कराये गये कार्य का कुल मात्रा 8541 अदद है, जबकि किए गए कार्य के विरूद्ध भुगतान किए गए मात्रा 8065 अदद है। इस प्रकार कराये गए कार्य के विरूद्ध भुगतान की मात्रा (8541-8065)=476 अदद33 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 कम है, जो किए गए कार्य से 5.58% कम है। जबकि, वजन मे कमी 1.53% से 3.77% है, अतः भुगतान में की गई विपत्र से कटौती अधिक ही की गई है।

आरोपित पदाधिकारी के उपरोक्त कथन के संदर्भ में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-7.2.0 के अवलोकन से स्पष्ट है कि, जाँच दल द्वारा स्थल जाँच के क्रम में नदी साईड में 10 अदद जियो बैग की जाँच की गयी है, जिसमें सात अदद जियो बैग का मानक वजन 126Kg से कम पाया गया है तथा कुछ Geo-bags की सिलाई में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया जाना प्रमाणित है। उक्त न्यून विशिष्टि के जियो बैग के कार्य होने के परिपे्रक्ष्य में हीं माप पुस्त में Improper filling तथा less stitching अंकित कर संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती की गयी है, अर्थात माना जा सकता है कि, संवेदक द्वारा जियो बैग कार्य मद में कराये गये कार्य न्यून विशिष्टि के थे। चूँकि संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती कर ली गयी है, अतः आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है परंतु न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है। उक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित यह आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित माना जा सकता है। उपरोक्त समीक्षा में वर्णित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-01 के संदर्भ में असहमति के बिंदु हेतु समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत होने से आरोप संख्या-01 अप्रमाणित माना जा सकता है। परंतु आरोप संख्या-02 यथा न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना जिसमें अक्रमतः चयनित कतिपय जियो बैग का वजन मानक वजन से कम पाये जाने तथा कुछ Geo-bags की सिलाई में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया जाना प्रमाणित होने के फलस्वरूप संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती कर लिये जाने से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है परंतु न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है, जिससे आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-02 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध उक्त प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया :-

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सत्येन्द्र कुमार (आई0डी0-3911), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं0-144/124 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्य की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराये जाने के उपरांत पायी गयी अनियमितता के लिए से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया, जिसके अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत्‌ है :- श्री सचिन कुमार, सहायक अभियंता द्वारा अपने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के पदस्थापन अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज के अन्तर्गत एजेण्डा संख्या-144/124 के तहत्‌ बाढ़ 2018 पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में निम्न अनियमितताएँ बरती गयी है :-

(1) प्रश्नगत स्थल पर अनावश्यक रूप से नॉयलन क्रेटिंग कार्य कराकर कार्य की लागत राशि में बढ़ोतरी करना एवं नॉयलन क्रेटिंग का कार्य विशिष्टि के अनुसार नहीं कराया जाना। (2) प्रश्नगत कार्य के तहत जियो बैग रिभेटमेंट कार्य में जियो बैग में बालू के स्थान पर मिट्टी का प्रयोग करना तथा प्रावधानित वजन 126 कि० ग्रा० से कम वजन पाया जाना तथा चार कतार में सिलाई किये जाने के स्थान पर तीन कतार पर सिलाई कर न्यून विशिष्टि के जियो बैग पिचिंग कार्य करने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप भुगतान करना।

उक्त से स्पष्ट है कि श्री कुमार, सहायक अभियंता के द्वारा उपर्युक्त कंडिका में बरती गयी अनियमितता यथा निम्न विशिष्टि के एन0सी0 एवं जियो बैग का कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है तथा भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से अधिकाई भुगतान का मामला बनता है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम-34 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2383 दिनांक 20.11.2019 द्वारा उनसे आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाते हुए इनके विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प सं0-733 दिनांक 02.08.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की34 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 गयी, जिसमें मुख्य अभियंता, समग्र योजना अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1152 दिनांक 23.12.2022 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर से की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने का निर्णय लिया गया :-

संचालन पदाधिकारी के द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-12 दिनांक-08.08.2018) की कंडिका-7.2.0 के अनुसार रिभेटमेन्ट कार्य के नीचे कराये गए नायलन क्रेटिंग कार्य में प्रयुक्त बालू भरे बोरे के औसत वजन में पायी गयी कमी के आलोक में, विभागीय निदेशानुसार की गई अनुवर्ती कार्रवाई के क्रम में नायलन क्रेटिंग कार्य के भुगतान में किये गये अनुमान्य कटौती तथा बालू में Clay मिश्रित रहने की संभावना के आलोक में उक्त गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है, जबकि उड़नदस्ता जाँच के क्रम में बालू भरे बोरे का औसत वजन 47.2kg पाया गया, जो मानक वजन 50kg से कम है। उक्त के आलोक में हीं Nylon Crating कार्य अन्तर्गत अनुवर्ती कार्रवाई हेतु विभागीय निदेशानुसार एक NC में 25 EC Bags के स्थान पर 18 EC Bags का प्रयोग किये जाने के कारण, दर विश्लेषण करते हुए, अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया गया, जिससे स्पष्ट है कि कार्य के दौरान आरोपित पदाधिकारी के द्वारा न्यून विशिष्टि का Nylon Crating कार्य कराया गया। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-01 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-12 दिनांक-08.08.2018) की कंडिका-7.2.0 के अनुसार जियो बैग में भरे गये बालू का औसत वजन मानक के अनुसार नहीं पाये जाने के उपरांत विभागीय निदेशानुसार अनुवर्ती कार्रवाई के क्रम में जियो बैग की मात्रा में की गई कटौती तथा जियो बैग पिचिंग कार्य में जियो बैग की सिलाई चार कतार के स्थान पर तीन कतार में पाये जाने के संदर्भ में कतिपय संभावनाओं का उल्लेख करते हुए आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित इस आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-7.2.0 के अनुसार प्रस्तुत मामले में जियो बैग का वजन नदी साइड में 113.15 kg, 104.30 kg, 120.34 kg, 119.55 kg, 125.70 kg, 132.35 kg, 115.65 kg, 124.30 kg, 129.50 kg, 127.55 kg प्रतिवेदित किया गया है। जिसका औसतन वजन 121.239 kg है, जो प्रावधानित वजन 126.0 kg से 4.76 kg कम पाया गया तथा उक्त के आलोक में हीं जियो बैग की मात्रा में अनुमान्य कटौती करते हुए भुगतान किया गया है। जियो बैग की सिलाई प्रावधानित चार कतार में किये जाने के स्थान पर कृत सिलाई तीन कतार में पाया जाना प्रमाणित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कराया गया जियो बैग पिचिंग कार्य न्यून विशिष्टि का प्रतीत होता है, जिससे आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप-02 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-494 दिनांक 24.03.2023 द्वारा श्री कुमार को भेजते हुए उनसे उक्त असहमति के बिन्दुओं पर अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री कुमार द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 12.06.2023 के माध्यम से अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-

(1) आरोप संख्या-1 के लिए असहमति के बिन्दु के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है कि :- (क) विभाग में किये गए विश्लेषण में यह कहा गया है कि एक एन0सी0 मे 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग के प्रयोग किये जाने के कारण दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि कार्य के दौरान आरोपित पदाधिकारीं के द्वारा न्यून विशिष्टि के नायलॉन क्रेटिंग कार्य कराये गये है। यह कहा जाना किसी भी –ष्टिकोण से मान्य नहीं है क्योकि, 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग का प्रयोग किया गया जिसमें बैग की मात्रा की कमी होती है ना की आयतन की, जिसकी सम्पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक 954 दिनांक 23.04.2018 के पत्र से भी की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि "जब नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाला गया तो अधिकांश 18 से 19 बैग से नाइलोन क्रेट भर गया"। जबकि यह कार्य 18 ई०सी० बैग से किया जाता है तो 25 ई०सी० बैग अर्थात 7 बैग अधिक की कटौती किया जाना सरकार के हित में और राजस्व की बचत हुई है। साथ ही साथ प्रसंगिक पत्र न्यून विशिष्टि के नायलॉन क्रेटिंग शब्द का उपयोग किया गया जबकि नायलॉन क्रेटिंग उसमें उपयोग होने वाले बोरा एवं उसमें रक्षित बालू के विशिष्टि पर कोई भी आरोप गठित नहीं है मात्र मात्रा का उल्लेख किया गया है जिसकी कटौती की जा सकती है।

स्थानीय बालू के विशिष्टि में इसके विभिन्न अवयवों की मात्रा का विवरणी स्पष्ट रूप से अंकित नहीं रहता है। स्थानीय बालू में मिट्टी/Clay की मात्रा का कितना प्रतिशत मान्य होगा स्पष्ट नहीं रहता है। उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा भी Clay का प्रतिशत का कोई जिक्र नहीं है। स्थानीय बालू से भरे बोरे को पानी में डालने पर Clay का बाहर आना स्वभाविक है, जिसके कारण स्थानीय बालू भरे ई०सी० बैग के वजन में कमी आ सकती है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसका कितना वजन होना चाहिए इस संबंध में कहीं कोई जिक्र या Specification नहीं है। नॉयलान क्रेटिंग का कार्य जॉचित प्रभाग में दिनांक 20.03.2018 को कराया गया है जबकि उड़नदस्ता जॉच दल के द्वारा दिनांक 15.06. 2018 को Geo bag Revetment कार्य के नीचे से 01 N.C को खोदकर निकाल कर उसकी जाँच की गई है। जाँचित35 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 स्थानीय बालू से भरे बैग को पानी के नीचे किए गए नाइलॉन क्रेट को खोलकर वजन किया गया है। अतः इस पर मानक वजन लागू नहीं होना चाहिए। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का मानक वजन 50 किलोग्राम भराई के समय निर्धारित है, अन्य परिस्थितियों में इसका कोई जिक्र नही है।

गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाया गया है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का निर्धारित मानक वजन 50Kg है। अतः भराई का कार्य सही पाया गया है एवं कार्य विशिष्टि के अनुरूप है।

(2) आरोप संख्या-2 के लिए असहमति के बिन्दु के संबंध में इनके द्वारा कहा गया है किः- (क) कटाव निरोधक कार्य आपदा से संबंधित होता है जिसे बहुत ही सीमित समय अवधि में (15 मई तक) पूर्ण करना होता है। जियो बैग भराई का कार्य अकुशल मजदूरों के द्वारा किया जाता है, जिसके कारण भरे हुए जियो बैग का वजन मानक निर्धारित वजन से कम या अधिक होना स्वाभाविक है। उड़नदस्ता जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित जॉच प्रतिवेदन से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है- रिभर साईड में दस Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त दस Geo-bags में से तीन का वजन क्रमशः 127.55Kg, 129.50Kg एवं 132.35Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

कन्ट्री साईड मे 5 अदद स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 124.064Kg पाया गया है। यहाँ भी एक Geo-bag का वजन 126.80Kg पाया गया है जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

(ख) अधिक भराई होने के स्थिति में या जियो बैग के पानी से भीग जाने/जियो बैग में बालू के चिपक जाने से सिलाई करने के क्रम में धागा या सिलाई स्लीप कर जाता है। जिसके कारण जॉच के क्रम में कुछ Geo-bags में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया गया है। विदित हो कि जियो बैग की सिलाई मशीन द्वारा की जाती है एवं एक बार में दो कतार में सिलाई होता है। तीन कतार में सिलाई पाये जाने से स्पष्ट है कि सिलाई मशीन दो बार चलाया गया है। तीन कतार होने का कारण जियो बैग का भींगा होना या बालू का चिपक जाना हो सकता है। कम सिलाई करने का किसी की गलत मंशा नही दर्शाता है।

स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का वजन मूल रूप से जियो बैग का सामग्री भरने की क्षमता (आयतन) एवं इसमें भरे गए स्थानीय बालू का घनत्व (Density) पर निर्भर करेगा ।

Mass=volume x density नये जियो बैग का filling capacity=0.07 cum है, परन्तु इसमें भरे गए स्थानीय बालू का घनत्व (Density) का कही स्पष्ट जिक्र नही है। घनत्व के संबंध में भी यह निर्धारित नही है कि भरे गए स्थानीय बालू का Dry Density कितना होगा एवं Bulk Density कितना होगा अर्थात कितना प्रतिशत moisture content प्रावधानित (permitted) है। स्थानीय बालू का Density place एवं climate पर भी निर्भर करेगा, क्योंकि Geo-bags का लेइंग दिनांक 01.05. 2018 से 14.05.2018 के बीच कराया गया तथा उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा दिनांक 15.06.2018 को इसकी वजन की जाँच की गई। अतः माह जून में अधिक गर्मी के कारण Moisture content में भिन्नता आने के कारण वजन में कमी संभावित है। Geo-bags के वजन में कमी एवं कराये गये कार्य के विरूद्ध भुगतान में कटौती का विश्लेषण निम्न प्रकार किया जाता हैः-

(i) रिभर साईड में स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से 4.76Kg कम है अर्थात्‌ 3.77% कम है।

(ii) कन्ट्री साईड में स्थानीय बालू से भरे Geo bag का वजन 124.064Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से 1.936Kg कम है, अर्थात्‌ 1.53% कम है।

(iii) Geo-bags के कराये गये कार्य का कुल मात्रा 8541 अदद है, जबकि किए गए कार्य के विरूद्ध भुगतान किए गए मात्रा 8065 अदद है। इस प्रकार कराये गए कार्य के विरूद्ध भुगतान की मात्रा (8541-8065)= 476 अदद कम है, जो किए गए कार्य से 5.58% कम है।

वजन एवं सिलाई में कमी हेतु समग्र रूप से कराये गए कार्य के विरूद्ध की गई अनुमान्य कटौती 5.58% है। जबकि वजन मे कमी 1.53% से 3.77% है, अतः भुगतान में की गई विपत्र से कटौती अधिक ही की गई है।

(ग) इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि, इनके मामले में संचालन पदाधिकारी मुख्य अभियंता थे। बिहार लोक निर्माण विभागीय सहिता की कंडिका 15 से 17 में मुख्य अभियंता की भूमिका अंकित है, जिसके कंडिका 15A का अवलोकन करना चाहेंगे जिसमें यह अंकित है कि "The Chief Engineer - the administrative and professional head of that zone of the Public Works Department of which be is in charge and is responsible and answerable to Engineer in Chief for the proper and efficient working of that zone. Each Chief Engineer is also responsible Professional adviser of Engineer– in– Chief in all matters relating to his branch."36 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 ऐसी परिस्थिति में मुख्य अभियंता, जो कि सरकार के Professional Head है उनके द्वारा जब आरोप को अप्रमाणित किया गया है, से हटकर किसी भी सेवा के पदाधिकारी के मंतव्य एवं उनसे कनीय पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य के आधार पर असहमति का बिन्दु गठित किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।

श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गया :-

आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने अभ्यावेदन में आरोप संख्या 01 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के प्रत्युत्तर में मुख्य रूप से कहा गया है कि एक एन0सी0 में 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग के प्रयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य किये जाने के कारण दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किये जाने के संबंध में इस तथ्य का उल्लेख किया है कि, 25 ई0सी0 बैग के स्थान पर 18 ई०सी० बैग का प्रयोग किया गया जिसमे बैग की मात्रा की कमी होती है ना की आयतन की, जिसकी सम्पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक 954 दिनांक 23. 04.2018 के पत्र से भी की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि "जब नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाला गया तो अधिकांश 18 से 19 बैग से नाइलॉन क्रेट भर गया"। जबकि यह कार्य 18 ई०सी० बैग से किया जाता है तो 25 ई०सी० बैग अर्थात 7 बैग अधिक की कटौती किया जाना सरकार के हित में और राजस्व की बचत हुई है। उक्त वर्णित तथ्य के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि, संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा भी स्थल निरीक्षण के क्रम में नाइलॉन क्रेटिंग कार्य अंतर्गत 01 नाइलॉन क्रेट में नये बालू भरे ई०सी० बैग को विशिष्टि के अनुरूप डाले जाने के फलस्वरूप अधिकांश नाइलोन क्रेट को 18 से 19 ई०सी० बैग से भर जाने की पुष्टि की गई है, जिसके आलोक में विभागीय निदेशानुसार दर विश्लेषण कर अनुमान्य कटौती करते हुए विपत्र पारित किया जाना परिलक्षित होता है तथा न्यून विशिष्टि के नाइलॉन क्रेटिंग कार्य कराये जाने के आरोप को अप्रमाणित माना जा सकता है।

उड़नदस्ता जाँच के क्रम में बालू भरे बोरे का औसत वजन 47.2Kg पाया गया, जो मानक वजन 50Kg से कम है, के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि, स्थानीय बालू में Clay(मिट्‌टी) के प्रतिशत की स्थिति स्पष्ट नहीं है तथा उड़नदस्ता जाँचदल द्वारा भी Clay के प्रतिशत का कोई जिक्र नहीं किया गया है। स्थानीय बालू से भरे बोरे को पानी में डालने पर Clay का बाहर आना स्वभाविक है, जिसके कारण ई०सी० बैग के वजन में कमी आ सकती है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसका कितना वजन होना चाहिए, इस संबंध में कहीं कोई जिक्र या Specification नहीं है। नॉयलान क्रेटिंग का कार्य जॉचित प्रभाग में दिनांक 20.03.2018 को कराया गया है, जबकि उड़नदस्ता जॉच दल के द्वारा दिनांक 15.06.2018 को Geo bag Revetment कार्य के नीचे से 01 N.C को खोदकर निकाल कर उसकी जाँच की गई है। जाँचित स्थानीय बालू से भरे बैग को पानी के नीचे किए गए नाइलॉन क्रेट को खोलकर वजन किया गया है। स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का मानक वजन 50 किलोग्राम, भराई के समय निर्धारित है, अन्य परिस्थितियों में इसका कोई जिक्र नही है। इसी संदर्भ में इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाया गया है। अतएव स्थानीय बालू में Clay(मिट्‌टी) के प्रतिशत की स्थिति स्पष्ट नहीं रहने, स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग को पानी में डालने के बाद इसके वजन के संदर्भ में कहीं कोई Specification नहीं रहने तथा गुण नियंत्रण प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा स्थानीय बालू से ई०सी० बैग भराई कार्य के दौरान, स्थल पर जाँच के क्रम में स्थानीय बालू से भरे ई०सी० बैग का औसत वजन 49.92Kg पाये जाने के तथ्य के आलोक में इस आरोप के संदर्भ में समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या 02 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के अभ्यावेदन में मुख्य रूप से कहा गया है कि, कटाव निरोधक कार्य आपदा से संबंधित होता है जिसे बहुत ही सीमित समय अवधि (15 मई तक) पूर्ण करना होता है। जियो बैग भराई का कार्य अकुशल मजदूरों के द्वारा किया जाता है, जिसके कारण भरे हुए जियो बैग का वजन मानक निर्धारित वजन से कम या अधिक होना स्वाभाविक है। उड़नदस्ता जॉच दल द्वारा प्रतिवेदित जॉच प्रतिवेदन से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है- रिभर साईड में दस Geo-bags का औसत वजन 121.239Kg दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त दस Geo-bags में से तीन का वजन क्रमशः 127.55Kg, 129.50Kg एवं 132.35Kg पाया गया है, जो मानक वजन 126Kg से अधिक है।

इसी प्रकार कन्ट्री साईड में 5 अदद स्थानीय बालू से भरे Geo-bags का औसत वजन 124.064Kg पाया गया है। यहाँ भी एक Geo-bag का वजन 126.80Kg पाया गया है जो मानक वजन 126Kg से अधिक है। अधिक भराई होने के स्थिति में या जियो बैग के पानी से भीग जाने/जियो बैग में बालू के चिपक जाने से सिलाई करने के क्रम में धागा या सिलाई स्लीप कर जाता है। जिसके कारण जॉच के क्रम में कुछ Geo-bags में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया गया है। जियो बैग की सिलाई मशीन द्वारा की जाती है एवं एक बार में दो कतार में सिलाई होता है। इस प्रकार तीन कतार में सिलाई पाये जाने से स्पष्ट है कि सिलाई मशीन दो बार चलाया गया है। तीन कतार होने का कारण जियो बैग का भीगा होना या बालू का चिपक जाना हो सकता है, जो कम सिलाई करने की किसी की गलत मंशा नही दर्शाता है। साथ ही Geo-bags के कराये गये कार्य का कुल मात्रा 8541 अदद है, जबकि किए गए कार्य के विरूद्ध भुगतान किए गए मात्रा 8065 अदद है। इस प्रकार कराये गए कार्य के विरूद्ध भुगतान की मात्रा (8541-8065)=476 अदद37 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 कम है, जो किए गए कार्य से 5.58% कम है। जबकि, वजन मे कमी 1.53% से 3.77% है, अतः भुगतान में की गई विपत्र से कटौती अधिक ही की गई है।

आरोपित पदाधिकारी के उपरोक्त कथन के संदर्भ में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-7.2.0 के अवलोकन से स्पष्ट है कि, जाँच दल द्वारा स्थल जाँच के क्रम में नदी साईड में 10 अदद जियो बैग की जाँच की गयी है, जिसमें सात अदद जियो बैग का मानक वजन 126Kg से कम पाया गया है तथा कुछ Geo-bags की सिलाई में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया जाना प्रमाणित है। उक्त न्यून विशिष्टि के जियो बैग के कार्य होने के परिपे्रक्ष्य में हीं माप पुस्त में Improper filling तथा less stitching अंकित कर संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती की गयी है, अर्थात माना जा सकता है कि, संवेदक द्वारा जियो बैग कार्य मद में कराये गये कार्य न्यून विशिष्टि के थे। चूँकि संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती कर ली गयी है, अतः आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है परंतु न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है। उक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित यह आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित माना जा सकता है। उपरोक्त समीक्षा में वर्णित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-01 के संदर्भ में असहमति के बिंदु हेतु समर्पित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य प्रतीत होने से आरोप संख्या-01 अप्रमाणित माना जा सकता है। परंतु आरोप संख्या-02 यथा न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना जिसमें अक्रमतः चयनित कतिपय जियो बैग का वजन मानक वजन से कम पाये जाने तथा कुछ Geo-bags की सिलाई में निर्धारित चार कतार के जगह तीन कतार में सिलाई पाया जाना प्रमाणित होने के फलस्वरूप संवेदक के विपत्र से आवश्यक कटौती कर लिये जाने से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिकाई भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है परंतु न्यून विशिष्टि के जियो बैग कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है, जिससे आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-02 आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध उक्त प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्न दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया :-

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्नांकित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री सुनील कुमार वैश्य (आई0डी0-3809), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब उनके विरूद्ध अवैध रूप से विभागीय नहर चाट भूमि की लगान रसीद काटने का आरोप प्रतिवेदित किया गया। उक्त आरोप के लिए श्री वैश्य के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-742, दिनांक 02.08.2021 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री वैश्य दिनांक 31.07.2023 को वार्द्धक्य सेवानिवृत हो चुके हैं।

अतएव श्री सुनील कुमार वैश्य (आई0डी0-3809), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया जाता है। श्री सतीश कुमार वर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, सुपौल के पद पर पदस्थापित थे, तब इनके विरूद्ध योजना एवं विकास विभाग द्वारा अपने पत्रांक-474 दिनांक 03.02.2021 द्वारा निम्न आरोप प्रतिवेदित किया गया - "श्री मनीष कुमार, तत0 कनीय अभियंता (संविदा) को बसंतपुर प्रखंड के कार्यों से मुक्त कर विभाग में योगदान देने हेतु निदेशित करने के लिए आप सक्षम प्राधिकार नहीं थे। फलतः आपका यह कृत्य नियम विरूद्ध है तथा स्वेच्छाचारिता को परिलक्षित करता है। इस कृत्य के लिए योजना एवं विकास विभाग द्वारा अपने पत्रांक-472 दिनांक 30.01.2018 द्वारा आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। लगातार सात स्मार देने के बाद भी आपके द्वारा जवाब समर्पित नहीं किया गया" उक्त के समीक्षोपरांत इनसे विभागीय पत्रांक-345 दिनांक 23.03.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इनके द्वारा जवाब न प्रस्तुत कर, जवाब देने हेतु बार-बार अभिलेख की माँग की जा रही है। उक्त की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध मामले को जान बूझकर विलंबित रखने आदि के आरोप (जो घोर कदाचार है) परिलक्षित38 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 पाते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139(सी) के तहत विभागीय पत्रांक-2301 दिनांक 22.09.2022 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री वर्मा से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री वर्मा के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाते हुए प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139(सी) के तहत निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

उक्त विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री सतीश कुमार वर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है - दिनांक-06.09.2021 को विभागीय GSM Based Closed User Group मोबाईल नंबर 7463889600 के टै्रकिंग के क्रम में अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित/अन्यत्र पाये जाने के मामले में " ID-3939 से विभागीय पत्रांक-1225, दिनांक-04.10.2021 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। उक्त के क्रम में श्री सिन्हा द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरांत उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया। श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप पत्र का द्वितीय भाग - अवचार या कदाचार के लांछन का सार निम्नवत है :- GSM Based Closed User Group के तहत विभाग द्वारा आवंटित मोबाईल नंबर 7463889600 का मोबाईल टै्रकिंग दिनांक-06.09.2021 को किया गया, जिसमें श्री सिन्हा अपने कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित पाये गये, जिससे अनधिकृत रूप से मुख्यालय से अनुपस्थित रहने के लिए वे दोषी प्रतीत होते हैं। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन है।

श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-1110 दिनांक 30.06.2023 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण पूछा गया। उक्त के क्रम में अधीक्षण अभियंता का कार्यालय, सिंचाई अंचल, जमुई का पत्रांक-1347 दिनांक 12.07.2023 के माध्यम से उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें कहा गया है कि योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-02 में प्रमंडल सं0-07 में उक्त तिथि को सहायक अभियंता के अनुरोध पर उनसे विभागीय कार्य के निष्पादन के क्रम में मिलने गये थे एवं उसी दिन वापस मुख्यालय मढौरा लौट गये। जल्दबाजी में वे अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, छपरा को सूचित नहीं कर पाये। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में वे बिना उच्चाधिकारी से अनुमति लिये मुख्यालय से बाहर नहीं जायेंगे।

श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा में पाया गया कि श्री सिन्हा ने अपने स्पष्टीकरण में यह स्वीकार किया है कि वे अपने नियंत्री पदाधिकारी से अनुमति प्राप्त किये बगैर ही मुख्यालय से बाहर रहे हैं। उनका यह आचरण एक सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के संगत प्रावधानों के तहत "निन्दन (आरोप वर्ष 2021-22)" का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया। अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार " ID-3939

बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई॰डी॰-3611), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त के पदस्थापन अवधि में वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान कमला बलान नदी के दायाँ तटबंध के स्थल 73.50 कि॰मी॰ एवं 74.60 कि॰मी॰ पर मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद भी टूटान का कट ईण्ड होल्ड करने में आवश्यकतानुरूप अभिरूचि नहीं लेने, उच्चाधिकारियों के निदेशों की अवहेलना करने जैसे आरोपों के लिए श्री सिंह को विभागीय अधिसूचना सं0-1613 दिनांक-14.09.2017 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प-सह-पठित ज्ञापांक-1678 दिनांक-20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।39 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गई एवं समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1111 दिनांक-22.05.2018 द्वारा श्री सिंह से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) अप्राप्त रहने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-1252 दिनांक-08.06.2018 द्वारा स्मारित किया गया। अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) का जवाब विभाग को प्राप्त नहीं होने के कारण आरोपों को सही मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं॰-1538 दिनांक-19.07.2018 द्वारा श्री मिथिलेश कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध का दण्ड अधिरोपित करते हुए संसूचित किया गया। उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह, तत्कालीन, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.-17810/2018 दायर किया गया, जिसमें दिनांक-12.11.2020 को न्याय निर्णय पारित किया गया जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

I find that enquiry report of the enquiry conducting authority is based on no evidence and no punishment can be inflicted on such report of the Enquiry Officer based on no evidence on the proceedee. The Disciplinary Authority on the basis of such enquiry report dismissed the petitioner from service, therefore, I find that order of dismissal from service of the petitioner is not sustainable in the eye of law. In the result, this writ petition is allowed and the impugned letter No.1538 dated 19.07.2018 (Annexure-1) is set aside. The matter is remitted to the Enquiry Officer to hold the enquiry afresh in accordance with law and submits its report within six months. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय-निर्णय के संदर्भ में विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार सिंह के विरूद्ध अधिरोपित के दण्ड को निरस्त करते हुए नियमानुसार Afresh enquiry हेतु, श्री सिंह के सेवानिवृत्त होने के कारण पूर्व में संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना संख्या-1190 दिनांक-30.09.2021 द्वारा उनके विरूद्ध पुनः विभागीय कार्यवाही (Afresh enquiry) संचालित करने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु अधीक्षण अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण अंचल, खगौल, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं मो0 साजिद इकबाल (आई0डी0-5274), सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-1, खगौल, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को तीन भागों में विभक्त कर निम्न मंतव्य दिया गया :-

कमला बलान दाँया तटबन्ध के टूटान स्थल 73.50 कि॰मी॰ एवं 74.60 कि॰मी॰ पर कट ईण्ड को होल्ड करने हेतु मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के द्वारा दिये गये आवश्यक निदेशों की आरोपी पदाधिकारी श्री मिथिलेश कुमार सिंह द्वारा की गई अनदेखी से संबंधित आरोप का यह भाग कि आप दिनांक-13.08.2017 से ही अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित थे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री और मानव बल की व्यवस्था नहीं की गयी थी। बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आपके द्वारा लापरवाही बरते जाने के कारण जान-माल की व्यापक क्षति हुयी, का संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप के प्रथम भाग एवं तीसरा भाग को आंशिक प्रमाणित एवं आरोप के दूसरे भाग को प्रमाणित नहीं पाया गया। तदालोक में श्री मिथिलेश कुमार सिंह से विभागीय पत्रांक-2804 दिनांक-15.12.2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन को संलग्न करते हुए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तत्पश्चात्‌ श्री सिंह द्वारा जबाव समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी एवं समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाया गया। उल्लेखनीय है कि संबंधित मामला वर्ष 2017 बाढ़ के दौरान कमला दायां तटबंध के टूटान से संबंधित है, जिससे स्पष्ट होता है कि तटबंध के टूटने के कारण टूटान मरम्मति हेतु उक्त स्थलों पर कटाव निरोधक कार्य कराया गया जिससे सरकार को काफी राजस्व की क्षति/वित्तीय हानि हुई। इस प्रकार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री और मानव बल की व्यवस्था नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में श्री सिंह द्वारा लापरवाही बरती गयी जिसके कारण सरकार को काफी वित्तीय हानि हुयी। इस प्रकार प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई0डी0-3611), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली,1950 के नियम-43(बी) के तहत % दण्ड देने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया है।40 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 अतएव वर्णित तथ्यों के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई0डी0-3611), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली,1950 के नियम-43(बी) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :-

%

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ( ) श्री तारकेश्वर प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, कोनार सिंचाई प्रमण्डल, बगोदर सम्प्रति सेवानिवृत्त सहायक अभियंता के विरूद्ध घोर अनियमितता बरतने, अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, कदाचार, अनुशासनहीनता एवं उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने एवं इनके प्रभार में सामानों की कमी पाये जाने आदि आरोपों के लिए विभागीय आदेश संख्या-3132 दिनांक-29.10.1985 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प-2196 दिनांक-05.11.1985 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाहीं चलायी गयी। तत्पश्चात्‌ उनके मामले पर विचार करते हुए विभगीय आदेश संख्या-120 दिनांक-09.05. 1991 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए विभागीय कार्यवाही जारी रखी गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत, संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-853 दिनांक-20.06.1992 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को प्राप्त कराया गया, जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी एवं समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय आदेश संख्या-585 दिनांक-05.12.1994 (ज्ञापांक-3402 दिनांक-05.12.1994) द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) श्री सिंह को विशेष परिस्थिति मेंं दिनांक-01.07.91 से सेवा में वापस लेते हुए योगदान करने की स्वीकृति दी जाती है।

(ii) दिनांक-01.06.77 से 28.10.85 तक की अवधि कर्त्तव्य अवधि पर बितायी गयी अवधि मानी जाएगी। (iii) निलंबन अवधि दिनांक-29.10.85 से 05.08.91 तक में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा। (iv) 2,28,505/- रू0 की वसूली। (v) उन्हें जो वेतनवृद्धि नहीं दी गयी है, उसे प्रदान की जायेगी।

श्री सिंह के अभ्यावेदन के क्रम में वसूली के दंड को स्थगित कर पुनः जाँच कराया गया। जल संसाधन विभाग, झारखंड द्वारा पुनर्जांच प्रतिवेदन भेजने पर समीक्षोपरांत पाया गया कि झारखंड सरकार, जल संसाधन विभाग, राँची द्वारा 2,28,505/- रू0 के सामानों की कमी को सही माना गया। उक्त स्थिति में आदेश सं0-54 दिनांक-18.03.2009 द्वारा श्री सिंह को 2,28,505/- रू0 की वसूली के दण्ड को संसूचित किया गया। उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा अपील अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया जिसकी समीक्षोपरांत विभागीय आदेश सं0-178 दिनांक-06.10.2009 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। विभाग द्वारा संसूचित दण्डादेश एवं अपील अस्वीकृति आदेश के विरूद्ध श्री द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC सं0-8618/2011, तारकेश्वर प्रसाद सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया, जिसमें दिनांक-13.02.2020 द्वारा न्याय निर्णय की तिथि से एक माह के अंदर याचिकाकर्त्ता को सभी परिणामी लाभ देने का आदेश पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध विद्वान महाधिवक्ता के परामर्श के आलोक में विभाग की तरफ से LPA सं0-183/2021 माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर किया गया जिसमें दिनांक-13.03.2023 को न्याय निर्णय पारित किया गया है, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :- For these reasons, the learned Single Judge found the order impugned in the writ petition to be unsustainable in the eyes of law and set aside the same. A reason also has been given for not remanding the matter back for taking any fresh decision. The respondent no. 1 had retired in the year 2007, and the proceeding was initiated against him in the year 1985. This, to our mind is a good ground for not remanding the matter for any fresh decision by the authorities. We do not find any reason to interfere with the order passed by the learned Single Judge. For the afore-noted reason, we dismiss this appeal but without any order as to costs. Interlocutory Application/s, if any, are also stand disposed of. उक्त न्यायनिर्णय के विरूद्ध SLP दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता का परामर्श प्राप्त किया गया जो निम्नवत्‌ हैः-41 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 Having persued order dated 13.02.2020 in CWJC-8618/2011 and order dated 13.03.2023 in L.P.A-183/2021, I don not find any legal infirmity in the order so to advise for filing SLP before hon'ble Supreme Court. The order complied for with. उक्त विद्वान महाधिवक्ता के परांमर्श के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा CWJC-8618/2011 में दिनांक-13.02.2020 में पारित न्याय निर्णय के अनुपालनार्थ विभागीय आदेश संख्या-54 दिनांक-18.03.2009 द्वारा निर्गत दंड एवं आदेश संख्या-178-सह पठित ज्ञापांक-1008, दिनांक-06.10.2009 द्वारा निर्गत अपील अस्वीकृति संबंधी आदेश को निरस्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया। अतएव वर्णित स्थिति में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा CWJC सं0-8618/2011 में दिनांक-18.03.2009 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री तारकेश्वर प्रसाद सिंह के विरूद्ध विभागीय आदेश सं0-54 दिनांक-18.03.2009 द्वारा निर्गत दण्ड एवं आदेश सं0-178 सहपठित ज्ञापांक-1008 दिनांक-06.10.2009 द्वारा निर्गत अपील अस्वीकृति संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए श्री प्रसाद के सभी परिणामी लाभ देने का निर्णय संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी (आई0डी0-3511), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमण्डल, वजीरगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-1332 दिनांक-18.10.2021 द्वारा निम्न आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः-

(i). दिनांक-27.11.2018 को मोबाईल ट्रैकिंग के क्रम में श्री चौधरी को विभाग द्वारा आवंटित CUG Mobil No- 7463889886 स्वीच ऑफ पाए जाने का आरोप।

(ii). मोबाईल ट्रैकिंग के क्रम में पूछे गये स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर मे श्री चौधरी द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत किया जाना। विभागीय कार्यवाही के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन मे आरोप सं0-01 यथा CUG Mobil No-

को पाया गया है एवं आरोप सं0-02 यथा

को संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित पाया गया। दिनांक-27.11.2018 को जिला पदाधिकारी, जहानाबाद की अध्यक्षता में कृषि टास्क फोर्स की बैठक बुलाई गयी थी, जिसमें भाग लेने के लिए वह निर्धारित समय पर उपस्थित हुए। बैठक मेें प्रवेश करने के साथ ही सरकारी CUG Mobile No-7463889886 उनके द्वारा बंद कर दिया गया। बैठक प्रारंभ होने के साथ ही जिला पदाधिकारी किसी आवश्यक कार्य से चले गए एवं उनकी अनुपस्थिति में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बैठक संचालित किया गया। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा गत खरीफ सिंचाई के अंतिम प्रतिवेदन की एक प्रति की माँग की गयी। बैठक की समाप्ति के पश्चात्‌ वह अपने कार्यालय कक्ष सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद वापस आ गये। उल्लेखनीय है कि सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद का कार्यालय जहानाबाद समाहरणालय से लगभग 300 मीटर की दूरी पर ही हैं। कार्यालय से उन्होने श्री नीरज कुमार, कनीय अभियंता को सिंचाई प्रतिवेदन की एक प्रति जिला कृषि पदाधिकारी को हाथो-हाथ देने हेतु भेजा एवं स्वयं सरकारी कार्य में व्यस्त हो गए। इसी बीच बहुत देर तक उनका सरकारी CUG मोबाईल बंद था। साथ ही उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि बैठक में उन्हें हस्ताक्षर हेतु उपस्थिति पंजी प्रस्तुत नहीं किया गया एवं स्वयं भी उपस्थिति पंजी खोज कर हस्ताक्षर करना भूल गए । इसके साथ ही नीरज कुमार, कनीय अभियंता, जब प्रतिवेदन देने बैठक स्थल पर गए तब जिला कृषि पदाधिकारी के कर्मी द्वारा उनसे श्री चौधरी के जगह पर उपस्थिति पंजी मे हस्ताक्षर कराया गया । श्री चौधरी द्वारा बचाव बयान में यह कहा गया हैं कि बैठक मे उन्हें हस्ताक्षर हेतु उपस्थिति पंजी प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि उसी बैठक में उपस्थित अन्य पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किया गया है । जबकि उनके द्वारा बचाव बयान में यह स्वीकार किया गया है कि बैठक समाप्ति के पश्चात्‌ वह अपने कार्यालय वापस आ गये । ऐसे में उन्हें उपस्थिति पंजी उपलब्ध नहीं कराया जाना एवं अन्य पदाधिकारियों को हस्ताक्षर हेतु उपस्थिति पंजी उपलब्ध कराया जाना स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में अंकित आंशिक प्रमाणित आरोप सं0-01 एवं उक्त असहमति के बिंदु पर श्री चौधरी से विभागीय पत्रांक-1859 दिनांक-29.07.2022 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में यह तथ्य प्रस्तुत किया गया है कि बैठक समाप्ति के उपरांत वह अपने कार्यालय चले गए एवं कार्यालय से बैठक में मांगे गए अंतिम खरीफ सिंचाई प्रतिवेदन कनीय अभियंता श्री नीरज कुमार द्वारा भेजवाया गया। श्री नीरज कुमार द्वारा जाँच पदाधिकारी के समक्ष दिए बयान मे उद्धत किया गया है कि जब वह प्रतिवेदन देने कृषि पदाधिकारी के कर्मी के पास गया तो उनके द्वारा उस समय उससे उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर यह कहकर लिया गया कि आपके कार्यपालक अभियंता बैठक उपस्थिति पंजी में बिना हस्ताक्षर के चले गये है। अतः श्री नीरज द्वारा हस्ताक्षर किया42 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 गया। तथ्य से स्पष्ट है कि श्री चौधरी के जाने के बाद उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर लिया जा रहा था। उसी कारण उपस्थिति पंजी पर क्रमांक-14 एवं 15 के सामने श्री नीरज कुमार का हस्ताक्षर है। हस्ताक्षर पंजी में श्री नीरज कुमार के आलावा कुल 13 पदाधिकारी का हस्ताक्षर है। उक्त मे से 09 व्यक्ति कृषि विभाग से संबंधित है, जिसके हेड जिला कृषि पदाधिकारी हैं एवं प्रायः सभी उन्हीं के साथ आते है एवं जाते है। उपस्थिति पंजी में जिला पदाधिकारी का भी हस्ताक्षर नहीं है, जबकि बैठक के शुरू मे वह भी थे। कुल 23 पदाधिकारी मे से सिर्फ 13 पदाधिकारी का हस्ताक्षर है, जिसमें से 09 कृषि विभाग के है। इस प्रकार यह कहना सही नहीं है कि बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किया गया और उनके द्वारा नहीं किया गया, जबकि सच्चाई यह है कि बैठक समाप्ति के उपरांत बचे पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपित पदाधिकारी श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) के उपरोक्त समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप सं0-01 आंशिक प्रमाणित जबकि आरोप सं0-02 को अप्रमाणित पाया गया है। चूँकि श्री चौधरी का सेवानिवृति की तिथि -31.01.2024 है एवं इनके विरूद्ध एक अन्य मामले मे विभागीय अधिसूचना सं0-1314 दिनांक-09.08.2023 द्वारा का दण्ड संसूचित किया गया है। अतः उक्त वर्णित परिपेक्ष्य में श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी (आई0डी0-3511), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमण्डल, वजीरगंज के विरूद्ध आंशिक प्रमाणित आरोप सं0-01 के लिए का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिए गए उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री अमरेन्द्र कुमार चौधरी (आई0डी0-3511), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तिलैया नहर प्रमण्डल, वजीरगंज के विरूद्ध निम्न अनुमोदित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री नव प्रकाश भारती (आई0डी0-5410), तत0 सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, आरा के पद पर पदस्थापित थें, तो उनके विरूद्ध मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-1920 दिनांक 14.09.2020 द्वारा कर्त्तव्यहीनता, आदेशोल्लंघन तथा अनुशासनहीनता के प्रतिवेदित निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-525 दिनांक-25.06.2021 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया :-

बिना सूचना मुख्यालय से अनुपस्थित रहना- उच्चाधिकारियों द्वारा प्रतिवेदित है कि आप अपने मुख्यालय से बिना सूचना के अनुपस्थित रहते है। इसके लिए आपको चेतावनी के साथ निर्देश दिया जाता रहा है। फिर भी आप स्वेच्छा से अनुपस्थित रहने के दोषी पाये गये है।

सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतना- उच्चाधिकारियों द्वारा प्रतिवेदित है कि आप अपने कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता के फलस्वरूप निम्न महत्वपूर्ण कार्यों को लंबित रखने के लिए दोषी पाये गये है :-

(1) सोन नहर अवर प्रमंडल, आरा अन्तर्गत चकबंदी वाद में हो रहे कार्यवाही की देख-रेख न करना। (2) सोन नहर अवर प्रमंडल, सहार के प्रभार हस्तांतरण हेतु हुये आदेश की अवहेलना करना। (3) गैर योजना मद के अन्तर्गत कराये गये विभागीय कार्य का प्राक्कलन एवं M.R. ससमय समर्पित नहीं करना।

(4) आपके अधीन संदेश स्थित/आई0बी0 को अज्ञात लोगों द्वारा ध्वस्त कर के उस पर किये गये अतिक्रमण को संज्ञान में नहीं लेना।

(5) कोईलवर वितरणी के आउटलेट से हो रहे रिसाव को रोकने का प्रयास न करना।

उदंडता एवं अनुशासनहीनता- उच्चाधिकारियों द्वारा सूचित करने के बावजूद सहार अवर प्रमंडल अन्तर्गत रब्बी सिंचाई 2020 में आ रहे व्यवधान के लिए उपस्थित नहीं होना। उच्चाधिकारियों द्वारा दिनांक 06.03. 2020 से दिनांक 09.03.2020 तक खोज करने पर भी अनुपस्थित पाया जाना। उच्चाधिकारियों द्वारा विभिन्न उप वितरणी के स्थल निरीक्षण के दौरान बिना सूचना अनुपस्थित रहें। ़श्री नव प्रकाश भारती द्वारा इस मामले में अपना स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित किया गया। श्री भारती द्वारा समर्पित किये गये स्पष्टीकरण में निम्नलिखित प्रमुख तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

(i) आरोप की मदों को सिद्ध करनेवाला साक्ष्य मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी का पत्रांक-1920 दिनांक 14.09.2020 उपलब्ध नहीं कराने का उल्लेख है। (ii) आरोप सं0-01 में बिना सूचना के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने का लांछन किस तिथि के लिए की गई, स्पष्ट नहीं है।43 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 (iii) उच्चाधिकारियों द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण पृच्छा का समर्पित उत्तर प्रतिवेदन की प्रति संलग्न नहीं होने की बात कही गई है।

(iv) इनके द्वारा समर्पित सभी उत्तर प्रतिवेदन सोन नहर अवर प्रमंडल, आरा के विभिन्न पत्रांकों के माध्यम से संबंधित उच्चाधिकारियों को उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

(v) इनकी पूर्णकालिक प्रतिनियुक्ति अवर प्रमंडल पदाधिकारी , पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली के पद पर होने के कारण वहाँ कार्यरत हैं। (i) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, आरा के पत्रांक-249 दिनांक 07.11.2019 के अवलोकन से स्पष्ट है कि चकबंदी वाद सं0-5/2018 से संबंधित आदेश की प्रति प्राप्त कर कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध करायी गई। (ii) चकबंदी वाद सं0-5/2018 से संबंधित निर्गत आदेश की प्रति का अवलोकन से उप निदेशक, चकबंदी भोजपुर, आरा के द्वारा संबंधित आदेश की प्रति चकबंदी पदाधिकारी, उदवन्तर नगर को आवश्यक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया है।

(iii) सहार अवर प्रमंडलान्तर्गत कोईलवर वितरणी के 12.5 कि0मी0 पर अवस्थित क्षतिग्रस्त आउटलेट जहाँ से अत्यधिक रिसाव हो रहा है, के जलश्राव नियंत्रण करने हेतु कनीय अभियंता को सुझाव देकर तुरंत आवश्यक उपाय करने का निदेश दिया गया है। (i) अनुपस्थिति के संबंध में आरोप-1 में वस्तुस्थिति स्पष्ट की गई है। (ii) मेरे द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण से संतुष्ट होने के उपरांत उल्लेखित अवधि 06.03.2020 से 09.03.2020 का वेतन निर्गत किया जा चुका है।

(iii) उदण्डता का आरोप अस्पष्ट प्रकृति का है। विभागीय पत्रांक-1056 दिनांक 11.05.2022 द्वारा श्री भारती से प्राप्त स्पष्टीकरण की प्रति मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी को उपलब्ध कराते हुए इस स्पष्टीकरण के संबंध में मंतव्य उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक-4309 दिनांक 19.12.2022 द्वारा इस संबंध में मंतव्य उपलब्ध कराया गया है, जिसके अनुसार आरोप प्रमाणित पाये गये।

श्री नव प्रकाश भारती से प्राप्त स्पष्टीकरण तथा इस स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी से प्राप्त मंतव्य की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत श्री नव प्रकाश भारती से प्राप्त स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए श्री भारती को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में अंकित निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर से लिया गया है :-

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री नव प्रकाश भारती (आई0डी0-5410), तत0 सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

श्री महेश प्रसाद सिंह (आई0डी0-जे 7703), तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी तटबंध निर्मली के विरूद्ध मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण जल संसाधन विभाग, वीरपुर परिक्षेत्राधीन पश्चिमी तटबंध प्रमंडल निर्मली के अंतर्गत दिनांक -22.07.2021 के रात्रि में डगमारा मार्जिनल बाँध के कि०मी० 1.50 के समीप (स्पर S-1 एवं S-2 के बीच ) हुए टुटान संबंधी आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-679 दिनांक 28.07.2021 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय अधिसूचना सं0-2347 दिनांक-29.09.2022 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री सिंह दिनांक-31.03.2023 को सेवानिवृत्त हो गये। फलस्वरूप इनके मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत सेवानिवृत्ति की तिथि से इन्हें निलंबन मुक्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी तटबंध निर्मली को सेवानिवृत्ति की तिथि 31.03.2023 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। श्री महेन्द्र चौधरी, तत0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) को शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर में दिनांक 23.07.2002 को एफलक्स बाँध टूटने तथा बाद में किये गये मरम्मति कार्य में हुई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-859 दिनांक 31.01.2003 द्वारा आदेश निर्गत44 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 की तिथि से निलंबित किया गया। श्री चौधरी के दिनांक 31.01.2003 को सेवानिवृत होने के कारण, विभागीय आदेश ज्ञापांक-861 दिनांक 31.01.2003 द्वारा उनको तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए संकल्प सं0-863 दिनांक 31.01.2003 द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 1950 के नियम-55 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप सं0-02, 14 को प्रमाणित तथा आरोप सं0-05 को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं शेष आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रतिवेदन में अंकित छः बिन्दुओं पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-655 दिनांक 21.06.2005 द्वारा श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

उक्त आलोक में प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी), सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1242 दिनांक 28.09.2005 के द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए संसूचित किया गया :-

"देय पेंशन से 25% की राशि पर सदा के लिए रोक"। उक्त अधिरोपित एवं संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा समर्पित पुनर्विचार/अपील अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-417 दिनांक 06.04.2011 द्वारा उनके अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उन्हें सूचित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड एवं पुनर्विचार/अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-9459/2011 (महेन्द्र चौधरी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 06.09.2017 को पारित न्याय निर्णय में दण्डादेश एवं पुनर्विचार/अपील अभ्यावेदन अस्वीकृत किये जाने संबंधी विभागीय आदेश को निरस्त किया गया।

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 06.09.2017 को पारित उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एल0पी0ए0 सं0-684/2018 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम महेन्द्र चौधरी) दायर किया गया। उक्त वाद में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 17.03.2023 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"4. No doubt, it is a case for remand for consideration of respondent's explanation afresh by the disciplinary authority, however, we have noticed already two decades have passed and respondent had attained age of superannuation and retired from service in the year 2003. Further, we noticed that financial loss has not been determined by the disciplinary authority while framing charges.

5. In the light of these facts and circumstances we are of the view that it is not a case for remand to the disciplinary authority to continue the disciplinary proceedings from the defective stage. Moreover, respondent has already undergone pain and suffered mentally in facing departmental enquiry and also litigation for the last two decades. Hence, the appellants have not made out a case so as to interfere with the order of learned Single Judge. Accordingly, order of the learned Single Judge is affirmed.

6. Concerned respondent is hereby directed to settle the monetary benefits of the respondent pursuant to the order of imposition of penalty and quashing of the same, including the appellate authority order, and pay the arrears of pension within a period of four months from the date of receipt of this order." वर्णित स्थिति में एल0पी0ए0 सं0-684/2018 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम महेन्द्र चौधरी) में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 17.03.2023 को पारित आदेश के आलोक में श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1242 दिनांक 28.09.2005 द्वारा संसूचित दण्ड 25% को निरस्त करते हुए उनके पेंशन को Restore करते हुए बकाये अंतर राशि का भुगतान किये जाने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) सम्प्रति मृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1242 दिनांक 28.09.2005 द्वारा संसूचित दण्ड 25% को निरस्त करते हुए उनके पेंशन को Restore करते हुए बकाये अंतर राशि का भुगतान किये जाने का आदेश संसूचित किया जाता है।45 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 दोन नहर प्रमंडल, राम नगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ एवं दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 एवं अन्य वांछित अभिलेख लगभग तीन वर्ष बाद अत्यन्त विलम्ब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी अनियमितता के लिए के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-828 दिनांक 25.04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री वर्मा से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-666 दिनांक 23.07.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. बाढ़ 2013 मेंं दिनांक 01.07.13 से 15.07.2013 तक की अवधि में गनौली बायाँ एवं दायाँ तथा हथुवनवा बाँध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का तीन वर्षो बाद अत्यन्त विलम्ब से प्रपत्र 24 की स्वीकृति हेतु अधीक्षण अभियंता को उपलब्ध कराया गया, जिसके कारण विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.13 से निर्गत निदेश का अवहेलना होना परिलक्षित है। उक्त निदेश की कंडिका-03 में स्पष्ट उल्लेख है कि बाढ़ के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु संवेदकों का नामांकन 15-15 दिनों के लिए किया जाना है। 15 दिनों तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का पूर्ण विवरणी नामांकन प्रस्ताव के साथ अगले एक सप्ताह के अन्दर क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाय। साथ ही निर्गत निदेश में यह भी अंकित है कि पत्र में वर्णित कंडिकाओं में से कोई भी कंडिका में शिथिलता बरतने पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो को अनियमित माना जायेगा एवं स्वीकृति नहीं दी जायेगी एवं यदि कोई न्यायिक एवं अन्य प्रक्रिया में भुगतान के लिये बाध्य किया जाता है तो राजकोष से की गयी भुगतान के उक्त राशि के लिये सम्पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता की होगी। इस भुगतान के लिए उनके विरूद्ध नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जायेगी।

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.13 से 15.07.13 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अपने पदस्थापन की तिथि दिनांक 04.07.14 से लगभग 6 माह की अवधि बीत जाने के बाद दिनांक 10.12.14 को अधीक्षण अभियंता को उपलब्ध करायी गयी। जो निर्गत विभागीय निदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है तथा प्रपत्र 24 विलम्ब से उपलब्ध कराने के कारण भुगतान हेतु संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी। जिसके कारण विभाग को अनावश्यक उलझन झेलना पड़ा। उनका उक्त कृत्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्य के प्रति घोर लापरवाही कर्त्तव्य एवं दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

2. श्री वर्मा, तत0 सहायक अभियंता द्वारा उपर्युक्त कंडिका में वर्णित अनियमितता करते हुए विभागीय निर्देशों के विपरीत मनमाने ढंग से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य का वांछित अभिलेख यथा प्रपत्र-24 समय पर नहीं भेजना, कार्य के प्रति घोर उदासीनता तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने एवं दायित्वों का समय पर निर्वहन नहीं किया जाना दर्शाता है तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना परिलक्षित करता है।

3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री वर्मा के अनियमित —त्य निजी स्वार्थवश विभागीय निदेशों का उल्लंघन करते हुए, कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का वांछित कागजात समय पर नहीं भेजना, परिलक्षित करता है कि उनके द्वारा कार्य के प्रति घोर उदासीनता तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जाना प्रतीत होता है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का भी उल्लंघन है। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-25 दिनांक 25.01.2022 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री वर्मा के विरूद्ध गठित आरोप के बिन्दु 1, 2 एवं 3 प्रमाणित नहीं पाये जाने का मंतव्य दिया गया।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1068 दिनांक 11.05. 2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री वर्मा को उपलब्ध कराते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी :-

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के अन्तर्गत दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। विभागीय पत्रांक-964 दिनांक 09.05.2013 के आलोक में उक्त कार्य का पूर्ण विवरणी (परिमाण विपत्र सहित) नामांकन प्रस्ताव प्रपत्र-24 अगले एक सप्ताह के अन्दर विभाग को अनुमोदन हेतु उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु संबंधित प्रपत्र-24 विभाग को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा पत्रांक-2787 दिनांक 31.12.2015 से उपलब्ध कराया गया। विभाग द्वारा विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 की कंडिका-3 के आलोक में कराये गये आलोच्य कार्य को अनियमित मानते हुए अस्वीकृत कर दिया गया।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक-01.07.2013 से 15.07. 2013 तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र-24 तैयार कर विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 के आलोक में दिनांक-20.07.2013 को कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को समर्पित कर दिया गया था, जिसकी पुष्टि प्रपत्र-24 में अंकित उनके हस्ताक्षर से होती है जिसमें तिथि-20.07.2013 अंकित है। प्रपत्र-24 पर सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक-20.07.2013 एवं कार्यपालक अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक-21.08.2013 को अंकित है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 द्वारा प्रपत्र आवश्यक सुधारोपरांत अधीक्षण अभियंता,46 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 तिरहुत नहर अंचल, बेतिया को भेजा गया था। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेखित है कि कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के द्वारा प्रपत्र-24 में सुधार करने, विलंब के लिए जिम्मेवारी निर्धारित करने एवं अन्य बिन्दुओं पर मतभेद होने के कारण प्रपत्र 24 को बार-बार वापस करने के कारण विभाग को ससमय अभिलेख समर्पित नहीं किया जा सका।

उक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनको दोषी प्रतीत नहीं होने का मंतव्य अंकित किया गया, परन्तु सुधार हेतु मुख्य अभियंता के पत्रांक-781 दिनांक-31.03.2014 द्वारा अंचलीय कार्यालय में लौटाया गया। प्रपत्र-24 कार्यपालक अभियंता को अंचलीय पत्रांक-319 दिनांक 29.04.2014 द्वारा भेजा गया, जिसे सुधारोपरांत कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1216 दिनांक 21.11.2014 द्वारा पुनः अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। प्रमंडलीय कार्यालय में लगभग 07 माह हुए इस विलंब के लिए जाँच प्रतिवेदन में कोई साक्ष्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतएव इस विलंब के लिए उनको जिम्मेवार माना जा सकता है।

उक्त आलोक में श्री वर्मा से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बांध में कराये जा रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को कनीय अभियंता, सहायक अभियन्ता, कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा पूरा कराया गया था। कार्य का एन॰/आर॰, प्रपत्र-24 एवं अन्य अभिलेख भी समय पर कनीय अभियंता, सहायक अभियंता द्वारा दिनांक-20.07.2013 को प्रमण्डल में भेजा गया तथा कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल रामनगर द्वारा पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 द्वारा अंचल कार्यालय तिरहुत नहर अंचल बेतिया को समर्पित किया गया, जिसकी पुष्टि अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 से होती है। इसी पत्रांक-257 दिनांक- 31.03.2015 में वर्णित है कि कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013, अंचल में दिनांक-20.03. 2014 को पुनः (दोबारा) प्राप्त हुआ, जबकि प्रमण्डलीय कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के निर्गत बही पर सिर्फ एक बार ही पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 दर्ज है।

सम्बन्धित प्रपत्र-24 अंचल कार्यालय में उन्हीं के अनुसार दिनांक-20.03.2014 को प्राप्त होता है तो भी इस वित्तीय वर्ष में 12 दिन शेष था। अगर उच्चाधिकारी चाहते तो कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को कैम्प करा कर भुगतान कराया जा सकता था, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। इसी पत्र पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 से स्पष्ट है कि, मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रपत्र-24 का सुधार करने में विलंब के लिए जिम्मेवारी निर्धारित करने एवं अन्य बिन्दुओ पर मतभेद होने के कारण भुगतान कराने पर ध्यान नहीं दिया गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2013-2014 खत्म हो रहा था तब भी उच्चाधिकारी प्रपत्र-24 सुधार करने मे लगे थे। मुख्य अभियंता के पत्रांक-781 दिनांक-31.03.2014 द्वारा वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन अंचल कार्यालय को प्रपत्र-24 लौटाया गया। अधीक्षण अभियंता भी इसे पत्रांक-319 दिनांक-29.04.2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता को वित्तीय वर्ष खत्म होने के एक महीना बाद लौटाते है। इस प्रकार उच्चाधिकारी द्वारा, कराये गये कार्य के भुगतान कराने की मंशा स्पष्ट होती है। जहाँ तक प्रमण्डलीय कार्यालय में सात माह विलंब की बात है तो इस सम्बंध में उन्हेें किसी प्रकार की जानकारी प्रमण्डल से नहीं दी गई और न कोई पत्राचार ही हुआ। इस संबंध में कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर से जानकारी ली जा सकती है। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल बेतिया के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 द्वारा उक्त प्रपत्र-24 समर्पित करने में कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल रामनगर को ही विलंब का कारण बताया गया है।

इस प्रकार प्रपत्र-24 एवं अन्य अभिलेख के विलंब से उपलब्ध कराये जाने में सहायक अभियंता दोषी नहीं हैं। श्री वर्मा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.2013 से दिनांक 15.07.2013 तक गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में कराये जा रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य अवधि के दौरान वर्णित कार्य का एन॰/आर॰, प्रपत्र 24 एवं अन्य अभिलेख कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 20.07.2013 को प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित किया गया। उनके उक्त कथन की पुष्टि (प्रपत्र-24) के अभिलेख से होती है जिस पर तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा एक माह के उपरान्त दिनांक 21.08.2013 में हस्ताक्षर अंकित कर अपने पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 द्वारा अंचलीय कार्यालय को समर्पित किया गया है। उक्त पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 अंचलीय कार्यालय को दिनांक 20.03.2014 को प्राप्त हुआ जैसा कि तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री उमानाथ राम के पत्रांक 243 दिनांक 21.03.2014 जो कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को संबोधित है, से स्पष्ट है। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त पत्रांक 243 दिनांक 21.03.14 द्वारा प्रपत्र 24 में पायी गयी कतिपय त्रुटियों तथा कतिपय तिथियों का एन॰आर॰ अंचल कार्यालय को पूर्व से सम्प्रेषित नहीं रहने के कारण प्रष्नगत प्रपत्र-24 को प्रमंडलीय कार्यालय को आवश्यक सुधार कर पुनः समर्पित करने के निदेश के साथ लौटा दिया गया। प्रपत्र-24 में कतिपय त्रुटियों के सुधारोपरांत तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर द्वारा प्रश्नगत प्रपत्र-24 अपने पत्रांक 326 दिनांक 26.03.2014 द्वारा अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया को समर्पित कर दिया गया। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया द्वारा उनके पत्रांक 269 दिनांक 29.03.2014 से मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर षिविर मोतिहारी को समर्पित किया गया। तत्पष्चात्‌ तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) द्वारा अपने पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को प्रष्नगत प्रपत्र 24 वित्तीय वर्ष 2013-14 के समाप्ति के उपरान्त मुख्य अभियंता कार्यालय को उपलब्ध कराये जाने में, किस परिस्थिति में विलम्ब हुआ, के कारण सहित दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित्‌ कर मुख्य अभियंता कार्यालय को सूचित करने का निदेष दिया गया।47 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 यहाँ यह तथ्य उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 द्वारा लौटाये गये प्रपत्र 24 में विलम्ब के लिए दोषी पदाधिकारियों को चिन्हि्‌त कर सूचित किये जाने का निदेष है परन्तु प्रपत्र 24 में किसी प्रकार की त्रुटि का उल्लेख नहीं किया गया है। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा मुख्य अभियंता के पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 को प्रमंडलीय कार्यालय दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को, अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 319 दिनांक 29.04.2014 द्वारा (दिनांक 31. 03.2014 से लगभग एक माह के पष्चात्‌) उक्त प्रपत्र-24 लौटाया गया। पुनः उक्त प्रपत्र 24 जिस पर श्री वर्मा के साथ तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का हस्ताक्षर दिनांक 25.03.2014 को अंकित है तथा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता का हस्ताक्षर 28.03.2014 को अंकित है को कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर द्वारा अपने पत्रांक 1313 दिनांक 10.12.2014 द्वारा अंचलीय कार्यालय को दिनांक 14.12.2014 को उपलब्ध कराया गया। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त प्रपत्र 24, सभी तथ्यों के उल्लेख के साथ अपने पत्रांक 257 दिनांक 31.03.2015 द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय को समर्पित किया गया जिसे तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक 2787 दिनांक 31.12.2015 द्वारा काफी विलम्ब से विभाग को समर्पित किया गया।

साथ ही यह तथ्य उल्लेखनीय है कि प्रष्नगत प्रपत्र-24 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक के बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का) प्रपत्र-24 के अवलोकन से दोनों प्रपत्रों में बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें की मात्रा और राशि में भिन्नता प्रकट होती है, जिससे स्पष्ट है कि उनके स्तर से त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 तैयार कर समर्पित किया गया। तदोपरांत उक्त प्रपत्र-24 का सुधार काफी विलम्ब से करते हुए इनके द्वारा माह नवम्बर 2014 के अंत में प्रमंडल में समर्पित किया जाना परिलक्षित होता है। अतएव उक्त रक्षित प्रपत्र-24 से श्री मुनीदेव वर्मा, तत0 सहायक अभियंता के विरूद्ध विलम्ब से प्रपत्र-24 समर्पित करने का आरोप प्रमाणित परिलक्षित है।

प्रष्नगत प्रपत्र 24 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013) के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री वर्मा के द्वारा बार-बार त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 तैयार कर समर्पित किये जाने तथा उसके सुधार में अनावश्यक विलम्ब किये जाने के कारण श्री मुनीदेव वर्मा, तत्कालीन सहायक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध आरोप के बिन्दु (1), (2) एवं (3) यथावत प्रमाणित पाया गया। मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री मुनीदेव वर्मा, तत्कालीन सहायक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया :-

% उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-723 दिनांक 04.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1936 दिनांक 25.08.2023 द्वारा श्री वर्मा के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

अतएव वर्णित तथ्याें के आलोक में श्री मुनीदेव वर्मा (आई0डी0-4668), तत्कालीन सहायक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

% दोन नहर प्रमंडल, राम नगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ एवं दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 एवं अन्य वांछित अभिलेख अत्यन्त विलम्ब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी अनियमितता के लिए के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-831 दिनांक 25.04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री उमानाथ राम से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-663 दिनांक 23.07.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. दोन नहर प्रमंडल, रामनगर जिसका कार्यक्षेत्र वर्तमान में जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के अन्तर्गत है, में बाढ़ 2013 मेंं दिनांक 01.07.13 से 15.07.2013 तक की अवधि में गनौली बायाँ एवं दायाँ तथा हथुवनवा बाँध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का तीन वर्षो बाद अत्यन्त ही विलम्ब से वांछित अभिलेख यथा प्रपत्र 24, नामांकन प्रस्ताव स्वीकृति हेतु विभाग में उपलब्ध कराया गया, जिसके कारण संवेदक द्वारा पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर किया गया। विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.13 से निर्गत निदेश का अवहेलना परिलक्षित है। उक्त निदेश की कंडिका-03 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि बाढ़ के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु संवेदकों का नामांकन 15-15 दिनों के लिए किया जाय तथा 15 दिनों तक कराये गये कार्यों का पूर्ण विवरणी नामांकन प्रस्ताव के साथ अगले एक सप्ताह के अन्दर विभाग को क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाय। निर्गत निदेश में यह भी है कि पत्र में वर्णित कंडिकाओं में से कोई भी कंडिका में शिथिलता बरतने पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो को अनियमित माना जायेगा एवं स्वीकृति नहीं दी जायेगी एवं यदि कोई न्यायिक एवं अन्य प्रक्रिया में भुगतान के लिये बाध्य किया जाता है तो48 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 राजकोष से की गयी भुगतान के उक्त राशि के लिये सम्पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता की होगी तथा इस भुगतान के लिए उनके विरूद्ध अलग से कार्रवाई नियमानुसार की जायेगी। प्रस्तुत मामले में वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.13 से 15.07.13 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अपने पदस्थापन अवधि से दिनांक 31.03.2015 तक उनके द्वारा मुख्य अभियंता को उपलब्ध नहीं कराया जाना विभागीय निदेशों का उल्लंघन है। उस अवधि में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 विलंब से प्राप्त होने पर उनके द्वारा अधीनस्थों के उपर विभागीय निदेश का उल्लंघन करने एवं अनावश्यक रूप से मामले को उलझाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी। उनका यह कृत्य बाढ़ जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्य में, सरकारी कार्य के निष्पादन के प्रति घोर लापरवाही, कर्त्तव्य एवं दायित्व के प्रति उनकी उदासीनता दर्शाता है।

2. श्री उमानाथ राम, तत0 अधीक्षण अभियंता द्वारा उपरोक्त कंडिका-01 में वर्णित अनियमितता करते हुए मनमाने ढंग से, विभागीय निदेशों के विपरीत बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य का वांछित अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं कराना, कार्य के प्रति घोर लापरवाही तथा दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री उमानाथ राम के उक्त अनियमित —त्य निजी स्वार्थवश विभागीय निदेश का उल्लंघन किया गया परिलक्षित करता है, जो एक गंभीर मामला है। इनके उक्त अनियमित कृत्य के कारण अनावश्यक रूप से विभाग में उलझन पैदा हुआ है एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित होता है। उनका यह कृत्य बिहार वित्त नियमावली के नियम में निहित प्रावधान का उल्लंघन है तथा उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

श्री उमानाथ राम (आई0डी0-3868) तत0 अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के दिनांक 31.10.2022 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय आदेश सं0-148 सहपठित ज्ञापांक-2890 दिनांक 27.12.2022 द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-26 दिनांक 25.01.2022 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री उमानाथ राम के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1065 दिनांक 11.05.2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री उमानाथ राम को उपलब्ध कराते हुए उक्त के संदर्भ में लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी।

उक्त आलोक में श्री उमानाथ राम से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन के अनुसार कार्यपालक अभियंता, रामनगर के पत्रांक 1110 दिनांक 21.08. 2013 से प्राप्त प्रपत्र-24 को अंचलीय कार्यालय में लगभग 7(सात) महीना तक लंबित रखा गया, उसके उपरान्त पुनः उसमें सुधार करने हेतु कार्यपालक अभियंता को भेजा गया। यह बात सत्य से परे है, बल्कि सत्य यह है कि कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 के द्वारा जो प्रपत्र-24 प्राप्त हुआ था वह प्रपत्र-24 दिनांक 16.06.2013 से 30.06.2013 तक की अवधि का था जिसे अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 922 दिनांक 27.08.2013 द्वारा मुख्य अभियंता को भेजा गया था जिसे संचालन पदाधिकारी ने भी अपने जाँच प्रतिवेदन में लिखा है। अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 922 दिनांक 27.08.2013 द्वारा समर्पित प्रपत्र-24 मुख्य अभियंता के पत्रांक 1880 दिनांक 03.09.2013 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया था। साथ ही कार्यपालक अभियंता, रामनगर के पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 के द्वारा हीं दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक की अवधि का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में दिनांक 20.03.2014 को प्राप्त कराया गया। स्पष्टतः एक हीं पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 से अलग-अलग अवधि को प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में समर्पित करने के लिये कार्यपालक अभियंता दोषी हैं।

इस सम्बंध में श्री उमानाथ राम द्वारा उनके उत्तरवर्ती अधीक्षण अभियंता जो विषयांकित मामले में आरोपी हैं, के द्वारा उनके पत्रांक 520 दिनांक 13.06.2019 द्वारा विभाग में समर्पित स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए अंकित किया गया है कि, उनके उत्तरवर्ती अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के उत्तर के पृष्ठ सं॰-2 में स्पष्ट उल्लेख है कि, कार्यपालक अभियंता, रामनगर के द्वारा उनके पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 द्वारा दिनांक 16.06.2013 से 30.06.2013 के बीच का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में समर्पित किया गया। उसी पत्रांक अर्थात्‌ 1110 दिनांक 21.8.2013 द्वारा दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक के बीच का भी प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में समर्पित किया गया। एक ही पत्रांक एवं दिनांक से दो अलग-अलग अवधि का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में समर्पित करने के लिये कार्यपालक अभियंता ही जिम्मेवार है। उक्त पत्र अंचलीय कार्यालय में दिनांक 20.3.2014 को प्राप्त कराया गया, इसका प्रमाण है कि उक्त पत्र पर अंचलीय कार्यालय के लिपिक का हस्ताक्षर दिनांक 20.03.2014 को अंकित है तथा उनका हस्ताक्षर भी दिनांक 21.03.2014 में अंकित है। दिनांक 01.07.2013 से दिनांक 15.07.2013 तक के अवधि का प्रपत्र-24 दिनांक-20.03.2014 को प्राप्त होने पर प्रपत्र-24 का समीक्षा किया गया। समीक्षा में प्रपत्र-24 में त्रुटि पाया गया। जिसे अंचलीय कार्यालय के पत्रांक-243 दिनांक-21.03.2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता को प्रपत्र-24 में पाये गये त्रुटि के सुधार हेतु वापस किया गया।

कार्यपालक अभियंता द्वारा उनके पत्रांक 326 दिनांक 26.3.2014 द्वारा सुधार कर प्रपत्र-24 दिनांक-28.03.2014 को अंचलीय कार्यालय को प्राप्त कराया गया। दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक की अवधि का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 269 दिनांक 29.03.2014 द्वारा मुख्य अभियंता को समर्पित कर दिया गया। प्रपत्र-24 समर्पित करने के क्रम में ही प्रपत्र-24 पर उनके द्वारा दिनांक 28.03.2014 को हस्ताक्षर किया गया। मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग,49 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 वाल्मीकिनगर ने अपने पत्रांक 781 दिनांक-31.3.2014 द्वारा दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 के बीच की अवधि का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में वापस करते हुए पृच्छा किये कि किस परिस्थिति में विलम्ब हुआ एवं दोषी पदाधिकारी को चिन्हित कर मुख्य अभियंता कार्यालय को सूचित किया जाय। उनके द्वारा अंचलीय कार्यालय के पत्रांक-319 दिनांक-29.04. 2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता से मुख्य अभियंता के पृच्छा का जवाब मांगा गया, परन्तु कार्यपालक अभियंता द्वारा उनके कार्यरत अवधि अर्थात दिनांक-08.07.2014 तक मुख्य अभियंता के पृच्छा का जवाब प्राप्त नहीं कराया जा सका था, कार्यपालक अभियंता त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय में समर्पित करने के लिये दोषी हैं, क्योंकि बार-बार त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 समर्पित करने के कारण ही प्रपत्र-24 के सुधार में अपेक्षा—त अधिक विलम्ब हुआ, का उल्लेख श्री उमानाथ राम द्वारा अपने लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में किया गया है। श्री उमानाथ राम द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में प्रष्नगत अवधि का प्रपत्र-24 श्री उमानाथ राम के स्तर पर लगभग 07 माह रखा रहा, जो विभागीय प्रक्रिया में विलम्ब का कारण हुआ, सत्य से परे है। साथ ही उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 के द्वारा जो प्रपत्र 24 प्राप्त हुआ था, वह प्रपत्र 24 दिनांक 16.06. 2013 से 30.06.2013 तक की अवधि का था जिसे उनके द्वारा अंचलीय पत्रांक 922 दिनांक 21.08.2013 द्वारा मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया, जिसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में किया गया है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के पत्रांक 1880 दिनांक 03.09.2013 द्वारा उक्त प्रपत्र-24 (दिनांक-16.06.2013 से 30.06.2013 तक का) विभाग को समर्पित किया गया।

श्री उमानाथ राम ने उल्लेख किया है कि, कार्यपालक अभियंता, रामनगर के पत्रांक 1110 दिनांक 21.08.2013 के द्वारा ही दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक की अवधि का प्रपत्र 24 अंचलीय कार्यालय में दिनांक 20.03.2014 को प्राप्त कराया गया। श्री उमानाथ राम के उक्त कथन को संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए श्री उमानाथ राम के द्वारा प्रष्नगत अवधि का प्रपत्र 24 अनावष्यक रूप से लगभग 07 माह तक लंबित रखते हुए अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 269 दिनांक 29.03.2014 से मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया जिससे विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.2013 से निर्गत निदेष की अवहेलना हुयी तथा संबंधित संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में भुगतान हेतु याचिका दायर किया गया। फलस्वरूप अनावष्यक रूप से विभागीय प्रक्रिया जटिल हुई।

श्री उमानाथ राम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कार्यपालक अभियंता, रामनगर के पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 से ही दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 के अवधि का प्रपत्र 24 अंचलीय कार्यालय को दिनांक-20.03.2014 को प्राप्त किये जाने का उल्लेख किया है, जिसपर श्री उमानाथ राम के द्वारा दिनांक-21.03.2014 की तिथि में हस्ताक्षर अंकित है। उक्त पत्र को श्री उमानाथ राम द्वारा साक्ष्य स्वरूप संलग्न किया गया है। उक्त पत्र के अवलोकन से, उक्त पत्र के माध्यम से समर्पित प्रपत्र-24 किस अवधि यथा दिनांक 16.06.2013 से दिनांक-30.06.2013 तक के कार्यो का प्रपत्र 24 अथवा दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 के कार्यों का प्रपत्र-24 था या दोनों अवधि का प्रपत्र-24 था, यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही यदि उक्त प्रपत्र-24 दिनांक-20.03.2014 को अंचलीय कार्यालय को प्राप्त हुआ था, तो लगभग छः माह (दिनांक-15.07.2013 से 20.03.2014 तक) तक दोषी प्रमंडलीय अभियंताओं के विरूद्ध कोई आवष्यक कार्रवाई नहीं किये जाने, तथा बाढ़ अवधि के कार्याें के प्रपत्र-24 को ससमय समर्पित नहीं किये जाने से श्री उमानाथ राम के द्वारा अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति लापरवाही तथा उदासीनता बरता जाना प्रमाणित होता है।

वर्णित स्थिति में श्री उमानाथ राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में उनके द्वारा प्रष्नगत प्रपत्र 24 के प्राप्ति हेतु प्रमंडलीय कार्यालय से आवष्यक पत्राचार किये जाने, तथा दोषी अभियंताओं के विरूद्ध आवष्यक कार्रवाई किये जाने संबंधी कोई साक्ष्य/अभिलेख तथा प्रपत्र-24 को विलम्ब से समर्पित किये जाने के कारणो को स्पष्ट करने हेतु कोई भी नया तथ्य लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण उनका लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध गठित आरोप के बिन्दु (1), (2) एवं (3) यथावत प्रमाणित पाया गया है।

मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री उमानाथ राम (आई0डी0-3868), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया :-

उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-725 दिनांक 04.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1938 दिनांक 25.08.2023 द्वारा श्री उमानाथ राम के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

अतएव वर्णित तथ्याें के आलोक में श्री उमानाथ राम (आई0डी0-3868), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

50 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

दोन नहर प्रमंडल, राम नगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ एवं दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 एवं अन्य वांछित अभिलेख लगभग तीन वर्ष बाद अत्यन्त विलम्ब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी अनियमितता के लिए के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-830 दिनांक 25.

04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री सुदेश राम से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-664 दिनांक 23.07.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. दोन नहर प्रमंडल, रामनगर जिसका कार्यक्षेत्र वर्तमान में जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के अन्तर्गत है, में बाढ़ 2013 मेंं दिनांक 01.07.13 से 15.07.2013 तक की अवधि में गनौली बायाँ एवं दायाँ तथा हथुवनवा बाँध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का तीन वर्षों बाद अत्यन्त ही विलम्ब से वांछित अभिलेख यथा प्रपत्र 24 नामांकण प्रस्ताव स्वीकृति हेतु विभाग में उपलब्ध कराया गया, जिसके कारण संवेदक द्वारा पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर किया गया, जो विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.13 केे निर्गत निदेश का अवहेलना होना परिलक्षित है। उक्त निदेश की कंडिका-03 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि बाढ़ के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु संवेदकों का नामांकन 15-15 दिनों के लिए किया जाय तथा 15 दिनों तक कराये गये कार्यों का पूर्ण विवरणी नामांकन प्रस्ताव के साथ अगले एक सप्ताह के अन्दर विभाग में क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाय। निर्गत निदेश में यह भी है कि पत्र में वर्णित कंडिकाओं में से कोई भी कंडिका में शिथिलता बरतने पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों को अनियमित माना जायेगा एवं स्वीकृति नहीं दी जायेगी एवं यदि कोई न्यायिक एवं अन्य प्रक्रिया में भुगतान के लिये बाध्य किया जाता है तो राजकोष से की गयी भुगतान के उक्त राशि के लिये सम्पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता की होगी तथा इस भुगतान के लिए उनके विरूद्ध नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जायेगी।

प्रस्तुत मामले में बाढ़ 2013 अवधि में दिनांक 01.07.13 से 15.07.13 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अपने पदस्थापन अवधि में उनके द्वारा मुख्य अभियंता को उपलब्ध नहीं कराया जाना विभागीय निदेशों का उल्लंघन है। उस अवधि में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का प्रपत्र-24 विलंब से प्राप्त होने पर उनके द्वारा अधीनस्थों के उपर विभागीय निदेश का उल्लंघन करने एवं अनावश्यक रूप से मामले को उलझाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी। उनका यह कृत्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्य में, सरकारी कार्य के निष्पादन के प्रति घोर लापरवाही, कर्त्तव्य एवं दायित्व के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

2. श्री सुदेश राम, तत0 अधीक्षण अभियंता द्वारा उपर्युक्त कंडिका-01 में वर्णित अनियमितता करते हुए मनमाने ढंग से, विभागीय निदेशों के विपरीत बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य का वांछित अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं कराना, कार्य के प्रति घोर लापरवाही तथा दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री सुदेश राम के उक्त अनियमित —त्य निजी स्वार्थवश विभागीय निदेश का उल्लंघन किया गया परिलक्षित करता है, जो एक गंभीर मामला है। इनके उक्त अनियमित कृत्य के कारण अनावश्यक रूप से विभाग में उलझन पैदा हुआ है एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित होता है। उनका यह कृत्य बिहार वित्त नियमावली के नियम में निहित प्रावधान का उल्लंघन है तथा उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

श्री सुदेश राम (आई0डी0-3850) तत0 अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के दिनांक 31.03.2022 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय आदेश सं0-82 सहपठित ज्ञापांक-1267 दिनांक 01.06.2022 द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-27 दिनांक 25.01.2022 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री सुदेश राम के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित नहीं पाये जाने का मंतव्य दिया गया।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1064 दिनांक 11.05. 2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री सुदेश राम को उपलब्ध कराते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दु पर लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी :-

वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के अन्तर्गत दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत गनौली बायाँ तथा दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 तक बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। विभागीय पत्रांक-964 दिनांक 09.05.2013 के आलोक में उक्त कार्य का पूर्ण विवरणी (परिमाण विपत्र सहित) नामांकण प्रस्ताव प्रपत्र-24 अगले एक सप्ताह के अन्दर विभाग को अनुमोदन हेतु उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु संबंधित प्रपत्र-24 विभाग को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा पत्रांक-2787 दिनांक 31.12.2015 से उपलब्ध कराया गया। विभाग द्वारा विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 की कंडिका-3 के आलोक में कराये गये आलोच्य कार्य को अनियमित मानते हुए अस्वीकृत कर दिया गया।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक-08.07.2014 को तिरहुत नहर अंचल, बेतिया का प्रभार ग्रहण किया गया। उनके पूर्व श्री उमानाथ राम दिनांक-03.07.2008 से 08.07.2014 तक51 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 अधीक्षण अभियंता के प्रभार में थें। आलोच्य कार्य पूर्व के अधीक्षण अभियंता के कार्यकाल में हुआ था। आलोच्य कार्य का प्रपत्र-24 तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-781 दिनांक-31.03.2014 द्वारा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को वापस करते हुए विलंब से प्रपत्र-24 भेजने का कारण एवं दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने का निदेश दिया गया था। पुनः तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1216 दिनांक 21.11.2014 द्वारा बिना पृच्छा का निराकरण किये प्रपत्र-24 उनको समर्पित किया गया, जिसे उनके पत्रांक-1050 दिनांक-27.11.2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता को आपाि के साथ वापस कर दिया गया। पुनः कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1313 दिनांक-10.12.2014 द्वारा प्रपत्र-24 उनको समर्पित किया गया, जिसे उनके पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 के माध्यम से विलंब का कारण एवं दोषी पदाधिकारी को चिन्हित करते हुए मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया।

उक्त से स्पष्ट है कि उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1313 दिनांक 10.12.2014 से प्राप्त प्रपत्र-24 को अपने पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 के माध्यम से मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। इस प्रकार प्रपत्र-24 लगभग साढ़े तीन माह तक अंचलीय कार्यालय में लंबित रहा, जिसका कोई कारण संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट नहीं किया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए प्रपत्र-24 समर्पित करने में हुए विलंब के लिए उनको दोषी माना जा सकता है।

उक्त आलोक में श्री सुदेश राम से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

संचालन पदाधिकारी के मंतव्य का अवलोकन करना चाहेगें जिसमें अंकित है कि "उक्त के समीक्षा से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी, पदस्थापन काल में आलोच्य कार्य नहीं किये थे। यह मामला पूर्व से लंबित था। आरोपित पदाधिकारी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक-08.07.2014 को प्रभार ग्रहण करने के पश्चात्‌ तत्कालीन कार्यपालक अभिंयता से प्राप्त प्रपत्र-24 को विलम्ब का कारण एवं दोषी पदाधिकारी को चिन्हित करते हुये, पत्रांक-257 दिनांक- 31.03. 2015 के माध्यम से तत्कालीन मुख्य अभियंता को भेज दिया गया। तत्पश्चात्‌ तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा 9 माह विलम्ब से प्रपत्र-24 विभाग में भेजा गया। जिसके निष्कर्ष के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि आरोपित पदाधिकारी दोषी प्रतीत नहीं होते है।" प्रपत्र-24 को, साढे तीन माह तक अंचलीय कार्यालय में लंबित रखने का कोई कारण स्पष्ट नहीं करने के फलस्वरूप विभाग, संचालन पदाधिकारी के अभिमत से हुआ है। इस संबंध में श्री सुदेश राम ने उल्लेख किया कि उनके संचालन पदाधिकारी, अभिंयता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना थे। जिनके द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित करते हुए उन्हें दोषी नहीं माना गया था। साथ ही उनके द्वारा सभी तथ्यों एवं उपलब्ध कागजातों को देखने के उपरान्त अपना अभिमत गठित करते हुए आरोप को अप्रमाणित माना गया था। इस संबंध में श्री सुदेश राम द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि बिहार लोक निर्माण संहिता के कंडिका-15A में यह वर्णित है कि :- "The Chief Engineer is the administrative and professional head of that zone of the Public Work Department of which he is in charge, and is responsible and answerable to Engineer-in Chief for the proper and efficient working of that zone. Each Chief Engineer is also the responsible professional advisor of Engineer-in-Chief in all matters relating to his branch."

उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि अभियंता प्रमुख, अभियंत्रण शाखा के सबसे वरीय पदाधिकारी हैं एवं सरकार के तकनीकी परामर्शी भी हैं ।

श्री सुदेश राम द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि, वे दिनांक 31.03.2022 को सेवानिवृत भी हो चुके हैं। जबकि यह मामला वर्ष-2013 बाढ़ का है। यह मामला जो दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 का है जिस पर उनके पदस्थापन के लगभग एक वर्ष पूर्व से ही कारवाई चल रहा था, जिसका निष्पादन उसी वित्तीय वर्ष 2013-14 में किया जाना था। यह मामला बाढ़ अवधि 2013 का था, जो अगला बाढ अवधि 2014 के समाप्त होने के पश्चात्‌ उनके समक्ष आया।

श्री सुदेश राम द्वारा साढ़े तीन माह प्रपत्र-24 को अंचलीय कार्यालय में लम्बित रखने के मामला के संदर्भ में निम्नलिखित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

(i) चूँकि वर्ष 2013 बाढ़ अवधि का बाढ़ संघर्षात्मक कार्य उनके कार्यकाल में नहीं कराया गया था तथा एक और बाढ़ अवधि 2014 समाप्त होने के उपरान्त इस कार्य का सत्यापन भौतिक रूप से किया जाना संभव नहीं था इसलिए इसकी तमाम अभिलेखीय जॉच इत्यादि में समय लगना स्वभाविक है।

(ii) चूँकि अप्रैल 2014 से ही यह दायित्व का मामला बन चुका था । इसलिए इस के अभिलेखों की सुक्ष्मता से जॉच किया जाना आवश्यक था ।

उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही ढ़ंग से किया गया है तथा किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। श्री सुदेश राम द्वारा उनकी सेवानिवृत्ति को ध्यान में रखते हुए, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री सुदेश राम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन का कार्य अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा किया गया जो अभियंताओं के तकनीकी पद क्रमों में सबसे वरीय पदाधिकारी होते है (लोक निर्माण संहिता की कंडिका 15A) तथा सरकार के तकनीकी परामर्ष्ीि भी होते है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री सुदेश राम के विरूद्ध संचालन के क्रम में समर्पित बचाव52 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 बयान तथा संबंधित साक्षियों के सम्पूर्ण जाँचोपरान्त अपना अभिमत गठित करते हुए उनके विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित किया था। उनके द्वारा साढ़े तीन माह तक प्रष्नगत प्रपत्र-24 को अंचलीय कार्यालय में लंबित रखने के संदर्भ में उल्लेख किया है कि उनका पदस्थापन उक्त अंचलीय कार्यालय में दिनांक 08.07.2014 को पूर्ववर्ती अधीक्षण अभियंता श्री उमानाथ राम से प्रभार ग्रहण के उपरान्त हुआ। चूँकि विषयगत मामला बाढ़ अवधि 2013 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013) का है जो श्री सुदेश राम के पदस्थापन से एक वर्ष पूर्व का है। चूँकि वर्ष 2013 बाढ़ अवधि का बाढ़ संघर्षात्मक कार्य श्री सुदेश राम के कार्यकाल में नहीं हुआ था तथा एक और बाढ़ अवधि 2014 समाप्त होने के पष्चात्‌ उक्त कार्य का भौतिक रूप से सत्यापन किया जाना संभव नहीं था। अतः अभिलेखीय जाँच इत्यादि में समय लगना स्वभाविक था। चूँकि प्रष्नगत मामला मार्च 2014 वित्तीय वर्ष 2013-14 के दिनांक 31.03.2014 तक भुगतान नहीं किये जाने से ही यह दायित्व का मामला बन चुका था जिसके लिये मामले से संंबंधित अभिलेखों का सुक्ष्मता से जाँच किया जाना आवष्यक था।

यहाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि श्री सुदेश राम का उक्त अंचलीय कार्यालय में पदस्थापन दिनांक 08.07.2014 को हुआ तथा तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर द्वारा अपने पत्रांक 1216 दिनांक 21.11.2014 द्वारा दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अंचलीय कार्यालय को दिनांक 25.11.2014 को समर्पित किया गया। उक्त पत्र को अंचलीय पत्रांक 1050 दिनांक 27.11.2014 द्वारा कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को वापस करते हुए मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के पत्रांक 781 दिनांक 31.03.2014 द्वारा दिये गये निदेषानुसार, विलम्ब का कारण स्पष्ट करते हुए दोषी पदाधिकारी को चिन्हि्‌त करते हुए प्रपत्र 24 समर्पित करने का निदेष दिया गया। श्री सुदेश राम के उक्त पत्र के आलोक में कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल, रामनगर ने अपने पत्रांक 1313 दिनांक 10.12.2014 द्वारा दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र 24 अंचलीय कार्यालय में दिनांक 14.12.2014 को प्राप्त कराया गया। प्रष्नगत प्रपत्र 24 (दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013) तक के बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का बार-बार प्रमंडलीय कार्यालय से त्रुटिपूर्ण समर्पित किये जाने के कारण तद्‌नुसार बार-बार सुधार करने के कारण ही प्रपत्र 24 में अपेक्षाकृत अधिक विलम्ब हुआ। श्री सुदेश राम द्वारा उल्लेख किया है कि, प्रष्नगत प्रपत्र 24 से संबंधित अभिलेखों की सुक्ष्मता से जाँच करने में समय लगना स्वभाविक था। चुँकि उक्त मामला दायित्व निर्धारण सहित दो बाढ़ वर्ष बीत जाने के पूर्व का था, जिसे उनके द्वारा अंचलीय कार्यालय के पत्रांक 257 दिनांक 31.03.2015 से मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) को समर्पित कर दिया गया। मुख्य अभियंता द्वारा उक्त प्रपत्र-24 को अपने पत्रांक 31.12.2015 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया।

प्रस्तुत मामले से संबंधित प्रपत्र-24 के अवलोकन से यह परिलक्षित है कि, प्रमंडल के स्तर से बार-बार त्रुटिपूर्ण प्रपत्र-24 समर्पित किया गया है, जिसके सुधार के लिए श्री सुदेश राम के द्वारा कार्रवाई करते हुए प्रपत्र-24 में सुधार हेतु इसे कार्यपालक अभियंता दोन नहर प्रमंडल, रामनगर को वापस किया गया। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पूर्व के कार्य (01.07. 2013 से 15.07.2013 के अवधि के बाढ़ संघर्षात्मक कार्य) के प्रपत्र 24 के त्रुटि के निराकरण हेतु विशेष कैंप का आयोजन न कर श्री सुदेश राम के द्वारा इसे पत्राचार कर सुधार कराने की कार्रवाई की गयी। प्रमंडलीय कार्यालय से त्रुटि निराकरण के उपरांत प्रश्नगत प्रपत्र 24 अंचलीय कार्यालय में दिनांक-14.12.2014 को प्राप्त कराये जाने के उपरांत लगभग साढ़े तीन माह विलंब से दिनांक-31.03.2015 को प्रश्नगत प्रपत्र 24 मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को समर्पित किये जाने के संदर्भ में श्री सुदेश राम के द्वारा कोई ठोस कारण अपने लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में अंकित नहीं किया गया है, न ही इस विलंब हेतु कोई साक्ष्य समर्पित किया गया है।

त्रुटि निराकरण के उपरांत प्रमंडलीय कार्यालय दोन नहर प्रमंडल, रामनगर से दिनांक 14.12.2014 को प्राप्त प्रपत्र-24 साढे तीन माह विलंब से मुख्य अभिंयता, वाल्मीकिनगर को समर्पित किये जाने के संदर्भ में श्री सुदेश राम द्वारा कोई ठोस कारण/साक्ष्य उनके अभ्यावेदन में अंकित/संलग्न नहीं किये जाने के कारण उनका लिखित अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

वर्णित स्थिति में श्री सुदेश राम द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में उनके द्वारा प्रष्नगत प्रपत्र 24 जो मार्च 2014 के समाप्ति के उपरांत (दिनांक-31.03.2014 के बाढ़) दायित्व बन चुका था, साढ़े तीन माह विलंब से मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को समर्पित किये जाने के संदर्भ में, कोई ठोस कारण/साक्ष्य अपने लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) में अंकित/संलग्न नहीं किये जाने के कारण उनके विरूद्ध गठित आरोप 01, 02 एवं 03 यथावत प्रमाणित पाया गया।

मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री सुदेश राम (आई0डी0-3850), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया :-

उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-724 दिनांक 04.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1939 दिनांक 25.08.2023 द्वारा श्री सुदेश राम के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

अतएव वर्णित तथ्याें के आलोक में श्री सुदेश राम (आई0डी0-3850), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

53 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

दोन नहर प्रमंडल, राम नगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 तक गनौली बायाँ एवं दायाँ तटबंध तथा हथुवनवा बाँध में तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें का प्रपत्र-24 एवं अन्य वांछित अभिलेख अत्यन्त विलम्ब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी अनियमितता के लिए के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-823 दिनांक 25.04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की मांग की गई। उक्त आलोक में श्री सरदार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत मामले की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-665 दिनांक 23.07.2021 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. दोन नहर प्रमंडल, रामनगर जिसका कार्यक्षेत्र वर्तमान में जल निस्सरण प्रमंडल, बेतिया के अन्तर्गत है, में बाढ़ 2013 मेंं दिनांक 01.07.13 से 15.07.2013 तक की अवधि में गनौली बायाँ एवं दायाँ तथा हथुवनवा बाँध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र 24 अत्यंत विलंब से विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसके कारण विभागीय पत्रांक 964 दिनांक 09.05.13 से निर्गत आदेश की अवहेलना हुई। उक्त निदेश की कंडिका-03 में स्पष्ट उल्लेख है कि बाढ़ के दौरान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के कार्यान्वयन हेतु संवेदकों का नामांकन 15-15 दिनों के लिए किया जाना है। 15 दिनों तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का पूर्ण विवरणी नामांकन प्रस्ताव के साथ, प्रपत्र-24 के साथ अगले एक सप्ताह के अन्दर क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाय। साथ ही निर्गत निदेश में यह भी अंकित है कि पत्र में वर्णित कंडिकाओं में से कोई भी कंडिका में शिथिलता बरतने पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो को अनियमित माना जायेगा एवं स्वीकृति नहीं दी जायेगी। यदि कोई न्यायिक एवं अन्य प्रक्रिया में भुगतान के लिये बाध्य किया जाता है तो राजकोष से की गयी भुगतान के उक्त राशि के लिये सम्पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता की होगी। इस अनियमित भुगतान के लिए उनके विरूद्ध नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जायेगी। वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.13 से 15.07.13 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 अपने पदस्थापन की तिथि दिनांक 13.10.2014 से एक वर्ष से अधिक अवधि के बाद उनके द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया, जबकि उनके कार्यालय को अधीक्षण अभियंता से दिनांक 31.03.2015 को ही प्राप्त हो चुका था तथा उक्त विलंब के लिए अधीनस्थों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं किया जाना निर्गत विभागीय निदेशों का उल्लंघन माना जा सकता है। उनका यह कृत्य बाढ़ जैसी महत्वपूर्ण सरकारी कार्य के प्रति घोर लापरवाही कर्त्तव्य एवं दायित्व के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

2. श्री सरदार, तत0 मुख्य अभियंता द्वारा उपरोक्त कंडिका में बरती गई अनियमितता से परिलक्षित होता है कि इनके द्वारा विभागीय निदेश के विपरीत मनमाने ढंग से निजी स्वार्थवश बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य का वांछित अभिलेख यथा प्रपत्र-24 समय पर उपलब्ध नहीं कराने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर किये गये याचिका के कारण अनावश्यक उलझन पैदा हुआ जो कार्य के प्रति उदासीनता, सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना दर्शाता है।

3. उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री सरदार के उक्त अनियमित —त्य निजी स्वार्थ के कारण विभागीय निदेश का उल्लंघन करते हुए, कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का वांछित कागजात समय पर नहीं भेजना परिलक्षित करता है कि उनके द्वारा कार्य के प्रति घोर उदासीनता, सरकारी राशि का दुरूपयोग किया गया है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम में निहित प्रावधान का उल्लंघन है। उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम-3(1) का भी उल्लंघन है।

उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना) के पत्रांक-184 दिनांक 30.12.2021 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री सरदार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया।

मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1066 दिनांक 11.05.2022 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री सरदार को उपलब्ध कराते हुए उक्त के संदर्भ में लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मांग की गयी।

उक्त आलोक में श्री सरदार से प्राप्त लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युत्तर) निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

1. श्री सरदार ने प्रश्नगत मामले को बाढ़ अवधि 2013 (दिनांक-01.07.2013 से 15.07.2013) का होने के कारण मामले को उनके पदस्थापन अवधि से पूर्व का बताया गया। उन्होंने अपने पदस्थापन की तिथि 13.10.2014 होने के आलोक में, वर्ष 2013 के बाढ़ के प्रपत्र-24 को ससमय उपलब्ध नहीं कराये जाने के आरोप को, विभागीय पत्रांक-964 दिनांक- 09.05.2013 द्वारा निर्गत निदेश के आलोक में अनुचित बताया गया।54 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 2. श्री सरदार के द्वारा आरोप पत्र का संदर्भ करते हुए उल्लेख किया गया कि, अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक- 31.03.2015 को वांछित प्रपत्र 24 उपलब्ध कराया गया तो उक्त तिथि के पहले का आरोप उनपर कैसे हो सकता है। 3. श्री सरदार द्वारा उक्त प्रपत्र-24 को 31.03.2015 से 31.12.2015 तक उनके स्तर से लंबित रखने के कारणों मेें, उक्त मामला दो बाढ़ वर्ष के पूर्व के होने के कारण उसकी गहन जाँच किये जाने की आवश्यकता हुई होगी, का उल्लेख करते हुए प्रतिवेदित किया गया कि, उनके स्मरण से पूर्व के मुख्य अभियंता द्वारा विलम्ब से प्रपत्र 24 भेजने हेतु संबंधित पदाधिकारियों से पृच्छा की गई थी, जिसकी सम्पुष्टि भी करायी जा सकती है।

4. साथ ही उक्त प्रासंगिक पत्र के अवलोकन से एक मामला वर्ष 2015 से 2017 तक के बीच कराये गये एकरारनामा से संबंधित है। वे मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग मोतिहारी में सितम्बर, 2014 से फरवरी 2018 तक पदस्थापित थे। जबकि आरोप पत्र के अनुसार संबंधित आरोप वर्ष 2013 के बाढ़ अवधि दिनांक 01.07.2013 से 15.07.2013 के समय काल का था।

5. वे दिनांक 28.02.2018 को सेवानिवृत भी हो चुके हैं तथा उक्त मामला वर्ष-2013 का है, जिसपर इनके पदस्थापन के पूर्व से ही उक्त प्रपत्र-24 पर कार्रवाई चल रहा था। इनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि, इनके कार्यकाल में नौ माह का विलंब होने में इनका कोई दोष नहीं है, क्योंकि प्रपत्र-24 ससमय उनके समक्ष उपस्थापित भी नहीं किया गया था, यदि प्रपत्र-24 ससमय उन्हें प्राप्त होता तो उनके द्वारा प्रपत्र-24 ससमय अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु विभाग को समर्पित किया जाता।

श्री सरदार द्वारा उनकी सेवानिवृत्ति के साथ-साथ इस मामले में सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं होने का उल्लेख करते हुए, आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया।

श्री सरदार द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) में उल्लेख किया गया है कि, चूँकि यह कार्य (आरोपित कार्य) बाढ़ अवधि 01.07.13 से 15.07.13 के बीच का होने से उनके पदस्थापन अवधि (13.10.2014 से 31.12.2015) के पूर्व का है, तथा वर्ष 2013 के बाढ़ के अवधि का वांछित प्रपत्र 24 को ससमय उपलब्ध नहीं कराये जाने का आरोप उनके विरूद्ध अनुचित है।

श्री सरदार द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि, बाढ़ अवधि 01.07.2013 से 15.07.2013 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र 24 अधीक्षण अभियंता तिरहुत नहर अंचल, बेतिया द्वारा उन्हें दिनांक 31.03.2015 को उपलब्ध कराया गया, जिसे उनके द्वारा गहन जाँच के उपरान्त दिनांक 31.12.2015 को विभाग को समर्पित कर दिया गया। दिनांक 31.03.2015 से दिनांक 31.12.2015 की अवधि में उक्त प्रपत्र 24 के संदर्भ में किये गये आवष्यक जाँच जैसा कि श्री सरदार के अभ्यावेदन में उल्लेखित है, के संदर्भ में उनके द्वारा कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। साथ हीं संचिका में रक्षित बाढ़ अवधि दिनांक 01.07.2013 से दिनांक-15.07.2013 के बीच कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के प्रपत्र 24 को जो उन्हें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री सुदेश राम द्वारा दिनांक-31.03.2015 को उपलब्ध कराया गया, को नौ माह के उपरांत दिनांक-31.12.2015 को हस्ताक्षरित कर विभाग को समर्पित कर दिया गया। श्री सरदार द्वारा उक्त प्रपत्र-24 के विलम्ब से प्राप्ति हेतु अपने अधीनस्थो के विरूद्ध किसी प्रकार का कार्रवाई किये जाने संबंधी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। उक्त कार्य को वर्ष 2013 के बाढ़ अवधि का होने के कारण तथा उक्त प्रपत्र 24 उनके समक्ष ससमय उपस्थापित नहीं किये जाने के कारण, प्रपत्र 24 ससमय विभाग को समर्पित नहीं किया जा सका, का उल्लेख श्री सरदार द्वारा किया गया है। हाँ पर यह तथ्य उल्लेखनीय है कि, अधीक्षण अभियंता से दिनांक 31.03.2015 को प्राप्त प्रष्नगत प्रपत्र 24 को विभाग में लगभग नौ माह विलम्ब से समर्पित करने के कारणो के संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख तथा कोई नया तथ्य लिखित अभ्यावेदन में श्री सरदार के द्वारा संलग्न कर समर्पित नहीं किया गया है। वर्णित स्थिति में दिनांक 31.03.2015 को प्राप्त प्रष्नगत प्रपत्र 24 को अनावष्यक रूप से अपने कार्यालय में लगभग नौ माह रखते हुए दिनांक 31.12.2015 को विभाग में समर्पित किये जाने तथा विलम्ब से प्राप्त प्रपत्र-24 के संदर्भ में दोषी अधीनस्थ अभियंताओं के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं किये जाने के आरोप के संदर्भ में, श्री कैलु सरदार, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कोई साक्ष्य/अभिलेख संलग्न नहीं किये जाने के कारण उनके द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध गठित आरोप यथावत प्रमाणित पाया गया है। मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कैलू सरदार (आई0डी0-3485), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया :-

उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-726 दिनांक 04.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1937 दिनांक 25.08.2023 द्वारा श्री सरदार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

अतएव वर्णित तथ्याें के आलोक में श्री कैलू सरदार (आई0डी0-3485), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

55 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

श्री विनय कुमार (आई0डी0-5210), तत0 प्राक्कलन पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर -सह- कार्यपालक अभियंता (उच्चतर प्रभार), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर द्वारा विपत्रों का भुगतान बाधित रखने, कार्य के प्रति लापरवाही बरतने एवं अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन नहीं करने आदि आरोप के मामले में विभागीय अधिसूचना सं0-1578 दिनांक 15.12.2021 द्वारा निलंबित किया गया। 2. श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप पत्र के आलोक में प्राप्त बचाव-बयान के सम्यक समीक्षोपरांत उन्हें निलंबन मुक्त करते हुए मामले की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। 3. उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनय कुमार (आई0डी0-5210), तत0 प्राक्कलन पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर -सह- कार्यपालक अभियंता (उच्चतर प्रभार), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, झंझारपुर को अधिसूचना निर्गत की तिथि से निलंबन मुक्त किया जाता है।

4.विभागीय कार्यवाही का संकल्प अलग से निर्गत किया जाएगा।

5. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री सुखदेव राम (आई0डी0-4483), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा (भोजपुर) के विरूद्ध पदस्थापन अवधि में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के द्वारा आरोप पत्र गठित कर पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग को समर्पित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत श्री राम से आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण किया गया। उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण जवाब पर योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की माँग की गई। योजना एवं विकास विभाग का पत्रांक-1335 दिनांक 22.04.2020 द्वारा मंतव्य समर्पित किया गया, जिसमें श्री राम द्वारा कार्य में समुचित पर्यवेक्षण नहीं करने एवं निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता को नजरअंदाज करने के दायित्वहीनता का मंतव्य प्रतिवेदित करते हुए स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। विभागीय समीक्षोपरांत उक्त आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1108 दिनांक 08.09.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत श्री सुखदेव राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। भोजपुर (आरा) जिलान्तर्गत आरा सदर प्रखंड के ग्राम जमीरा में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा में पदस्थापन काल में निर्मित पंचायत सरकार भवन की जाँच के क्रम में Plaster एवं Punning तथा Parapet कमजोर एवं Finishing Work की गुणवत्ता निम्न स्तर की पायी गई। जगह-जगह जल जमाव, दिवाल एवं अनेक स्थानों पर क्रैक दृष्टिगोचर होना, खिड़कियों में शीशे का न होना, तथा भवन के अन्य क्षतिग्रस्त भाग निर्माण कार्य में हुई अनियमितता को दर्शाते हैं। पंचायत सरकार भवन के निर्माण एवं Finishing Work में श्री राम के द्वारा समुचित ध्यान न देकर अपने कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती गई। फलतः निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए श्री राम उत्तरदायी हैं। समुचित पर्यवेक्षण एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन न किए जाने के श्री राम के इस कृत्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1)(2) एवं (3) का उल्लंघन हुआ है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1118 दिनांक 17.09.2021 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गई। श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री राम द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा /अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है - इनके द्वारा कहा गया कि उक्त वर्णित कार्य की देख रेख में कोई कमी नहीं थी। रख-रखाव के अभाव एवं पंचायतों के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। दिवाल पर गोबर पाथने का कार्य किया जाता था। इसकी चर्चा मुख्य अभियंता के प्रतिवेदन में भी गोबर गोइठा रखन की चर्चा की गई है। जिसके कारण प्लास्टर गोबर पाथने से खराब हो गया था। कार्य की क्वालिटी को आई इस्टिमिसेन से खराब नहीं कहा जा सकता है। आई इस्टिमिसेन से देखने में खराब लग सकता है। प्लास्टर की क्वालिटी की जाँच कराई गई थी; जो संतोषप्रद था। हर चीज के लिए अभियंता को दोषी ठहराना उचित प्रतीत नहीं होता है। क्योंकि स्थल पर रहकर मेरे द्वारा कार्य कराना संभव नहीं हो सकता है। प्रमंडल में योजनाओं की संख्या ज्यादा रहती है। निविदा के कार्य में संवेदक भी जिम्मेवार होता है। उसी के लिए Defect Liability Period प्रावधानित किया जाता है, जो किया गया है। मेरे द्वारा कोई भी गलती नहीं की गई है। यदि मैं Nill Bill पारित कर दिया होता तो उसके लिए दोषी माना जाता एवं तब तो संवेदक के द्वारा कार्य नहीं कराया जाता। मैं अपने कर्त्तव्यों के प्रति कृतज्ञ रहा हूँ। विभाग के हर नियम का पालन करने का प्रयास किया जाता है। जिला में अतिरिक्त कार्यों एवं कर्त्तव्यों का अनुपालन यथासंभव किया जाता था।56 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 लापरवाही नहीं की गयी थी। कार्य की क्वालिटी के प्रतिवेदन पर भी ध्यान देना चाहिए था। क्योंकि क्वालिटी के प्रतिवेदन के अनुरूप ही आगे की कार्यवाही की जाती रही है। रख-रखाव पंचायत के द्वारा नहीं करने के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के लिए मुझे दोषी मानना न्यायोचित नहीं होगा। उक्त के आलोक में श्री राम द्वारा स्थिति एवं परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए समरूप आरोप-1 एवं 2 में लगे आरोप प्रमाणिकता को समाप्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री राम से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई, जो मुख्य रूप से निम्नवत हैः- (1) श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि देख-रेख के अभाव में पंचायत सरकार भवन के दिवाल पर गोबर पाथना एवं इसमें प्लास्टर का खराब होना बताया गया है। उपरोक्त कार्य के संबंध में मुख्य अभियंता के द्वारा जिन त्रुटियों को उद्धृत किया गया है वह सामान्य त्रुटियाँ हैं, जो देख रेख के अभाव में संभव है। उक्त सभी त्रुटियों का निराकरण Defect Liability Period में संवेदक द्वारा कर दिया गया है जैसा कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है। लेकिन दिवाल एवं अन्य स्थानों पर Crack का दृष्टिगोचर होना निर्माण के समय समुचित रूप से पर्यवेक्षण नहीं किये जाने के कारण हो सकता है। फलतः निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता एवं समुचित पर्यवेक्षण नहीं करने के लिए श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी है। अतएव आरोप सं0-1 आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। (2) समुचित पर्यवेक्षण एवं सरकारी दायित्वों का निर्वहन न किए जाने से श्री राम के इस कृत्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1), (2) एवं (3) का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए श्री राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पर आरोप सं0-2, आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतीत होता है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा के विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है - i ii उक्त के आलोक में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, कैमूर (भभुआ) को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है - i ii i ii उक्त के आलोक में श्री सुखदेव राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, आरा सम्प्रति सेवानिवृत के दण्ड को पुनरीक्षित करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है - i ii श्री आरिफ अहमद (आई0डी0-4546), तत0 सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद के पद पर पदस्थापित थें, तो उनके विरूद्ध जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद के अंतर्गत एकरारनामा सं0-01/SBD/2013-14 के तहत पटना जिला के दरधा नदी पर ग्राम-लवाईच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग करने एवं घटिया तरीके से निर्माण कार्य कराये जाने संबंधी आरोप के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-क के साथ विभागीय पत्रांक-878 दिनांक-10.04.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। स्पष्टीकरण का प्रत्युार अप्राप्त रहने की स्थिति में श्री आरिफ अहमद को स्मारित किया गया। फिर भी जवाब अप्राप्त रहने पर श्री आरिफ अहमद के विरूद्ध गठित आरोप की विस्तृत जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2003 दिनांक-11.09.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के विहित प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

श्री अहमद के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

57 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

(1) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण में व्यवहार किये जाने वाले 11889.19 घन मी॰ बोल्डर का शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं॰-3, खगौल के गुणवत्ता जाँचफल पत्रांक QC-26 दि॰ 22.02.16 एवं QC-104 दि॰ 27.07.15 में 8 प्रतिशत अंडर साईज (By Weight) एवं 9.5 प्रतिशत ओभर साईज (By Weight) पाया गया है जिसका व्यवहार उक्त योजना में किया गया परिलक्षित है जो GFCC द्वारा निर्गत दिशा-निदेश के अनुसार, निर्धारित मान्य सीमा 5 प्रतिशत से अधिक परिलक्षित है। इस प्रकार विषयांकित कार्य में 11889.19 घन मीटर बोल्डर के वजन के आधार पर GFCC द्वारा निर्गत दिशा निदेश के अनुसार निर्धारित मान्य सीमा से अधिक का व्यवहार किया जाना परिलक्षित होता है जिससे न्यून विशिष्टि का बोल्डर व्यवहार कर कार्य कराते हुए स्वीकृत दर पर भुगतान किये जाने से सरकारी राजस्व की क्षति का ममाला बनता प्रतीत होता है विषयांकित कार्य में उक्त बोल्डर का व्यवहार कर कार्य कराने एवं मापी की जाँच कर पारित करने हेतु आपके द्वारा उपस्थापित किया जाना परिलक्षित होता है। जिससे न्यून विशिष्टि का कार्य कराने एवं भुगतान में आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता। अतएव उक्त कृत के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(2) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण के अन्तर्गत रामपुर ग्राम की सुरक्षा के लिये बनाये गये दायाँ एवं बायाँ Afflux बाँध के चेनेज 30m, 90m एवं 150m पर प्रावधानित Formation level क्रमशः 58.00 m एवं 56.5 m में औसतन क्रमशः 0.265 m एवं 0.781 m की कमी जाँच में पाया गया जिससे ग्राम सुरक्षा के लिए निर्मित बाँध का निर्माण प्राक्कलन में प्रावधानित तल (लेवल) तक नहीं कराये जाने का मामला बनता प्रतीत होता है। अतएव प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप बाँध का कार्य नहीं कराने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। उक्त निर्माण कार्य में आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अतएव प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप बाँध का निर्माण कार्य नहीं कराने में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(3) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में बराज के Under Sluice Spillway भाग के Pier के U/S end हेतु Front Face के उपरी भाग का ढलाई उभरा Buldge किया हुआ जाँच में पाया गया जिससे पियर का उपरी भाग एक सीध में दिखाई नहीं देता है। इस प्रकार त्रुटिपूर्ण निर्माण के लिए Poor Workmanship, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में कमी का मामला बनता प्रतीत होता है। उक्त निर्माण कार्य में आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अतएव उक्त त्रुटिपूर्ण कार्य के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है।

(4) जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद के अन्तर्गत एकरारनामा सं॰ 01SBD/13-14 के तहत दरधा नदी पर ग्राम लवाइच रामपुर के पास बराज योजना निर्माण कार्य में बराज का दायाँ एवं बायाँ Afflux Bund दसई पइन एवं कोसुत पईन से निस्तृत वितरणी के विभिन्न चेनेज पर यांत्रिक विधि से क्रमशः 1395.0 घन मीटर, 25035.0 घन मीटर, 9067.50 घन मीटर एवं 5546.10 घन मी॰ कुल 41043.60 घन मीटर मिट्‌टी का भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। मापी पुस्त सं॰ 2021 में अंकित उक्त मिट्‌टी कार्य की मापी से Settlement Allowance मद में कटौती किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। जबकि याँत्रिक साधन से मिट्‌टी ढुलाई मद में (1/9th of Work done Quantity) की कटौती के उपरान्त Net Quantity का भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जिसके कारण 4560.4 घन मीटर अधिक मिट्‌टी की मात्रा संवेदक को भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार Settlement Allowance की कटौती नहीं किये जाने के कारण 4560.4 घन मीटर मिट्‌टी के लिए एकरारित दर पर रू॰ 677675/- संवेदक को अधिकाई भुगतान तद्‌नुसार सरकार को राजस्व क्षति का मामला बनता प्रतीत होता है। उक्त कार्य कराने एवं उसकी मापी की जाँच कर उपस्थापित किये जाने में आपकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है जिससे मिट्‌टी भराई मद में नियमानुसार Settlement Allowance की कटौती किये बिना भुगतान होने से रू॰ 6,77,675/- की हुई राजस्व क्षति के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते है। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी का पत्रांक-297 दिनांक 11.4.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई, जो निम्नवत्‌ है :-

श्री आरिफ अहमद के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-2003 दि॰ 11.09.2018 द्वारा गठित आरोप पत्र के क्रम में संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान आरोपी पदाधिकारी ने नये प्रपत्रों (चार भाग) में आरोप पत्र गठित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। विभागीय पत्रांक 463 दि॰ 01.03.2019 द्वारा पूर्व से गठित आरोप पत्र के अनुरूप ही कार्यवाही संचालित किये जाने का निदेश दिया गया जिसके फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी को बचाव बयान के साथ संचालित विभागीय कार्यवाही में उपस्थित होने का निदेश दिया गया। संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि श्री अहमद द्वारा कोई तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया एवं उड़नदस्ता को संबोधित पत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए कहा गया है पूरे कार्य के विरूद्ध एक अन्य परिवाद की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की जा रही है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा पूरे कार्य की अद्यतन जाँच कराने एवं जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने संबंधी अनुरोध का उल्लेख भी संचालन पदाधिकारी की कार्यवाही में किया गया है। उक्त जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध होने तक एवं चुनाव अवधि तक समय देने का अनुरोध करते हुए आरोपी पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके। उक्त58 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 के आलोक में संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने उपर लगे आरोपों से बचाव में बचाव बयान एवं साक्ष्य जानबूझ कर समर्पित नहीं करने के फलस्वरूप आरोप सं॰ 1 से 4 तक प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि इन आरोपों की तथ्यपरक जाँच नहीं की जा सकी है जिसके फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर कोई मंतव्य गठित करना संभव प्रतीत नहीं होता है। श्री आरिफ अहमद, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा अपने विरूद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई में संचालन पदाधिकारी के समक्ष बचाव बयान एवं साक्ष्य समर्पित नहीं करने के फलस्वरूप आरोप सं॰ 1 से 4 तक की तथ्यपरक जाँच नहीं किये जाने के चलते आरोप सं॰ 1 से 4 तक कोई मंतव्य गठित कर पाना संभव प्रतीत नहीं होता है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त दोषी पदाधिकारी पर आरोप सं॰ 1 से 4 प्रमाणित पाया गया है।

उपर्युक्त समीक्षा के आलोक में श्री आरिफ अहमद, तत0 सहायक अभियंता को विभागीय पत्रांक-383 दिनांक-24.02.

2022 द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया। जिसके आलोक में श्री अहमद द्वारा अपना प्रत्युार विभाग को समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि कार्य के दौरान प्रारम्भ में कराये गये कार्य की पूर्व के जाँच में प्रयुक्त बोल्डर GFCC के मानक से कुछ कम एवं अधिक पाया गया जिसे कार्य समाप्ति के पूर्व सुधार कर लिया गया। कार्य समाप्ति के पश्चात्‌ कार्य में प्रयुक्त बोल्डर की साईज की जाँच किया गया जो तय मानक के सन्निकट पाया गया। जिसकी सम्पुष्टि उड़नदस्ता के द्वितीय जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 7.12.0 तथा 8.5.0 से होती है से सहमत हुआ जा सकता है और आरोपी पदाधिकारियों का द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार किया जा सकता है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में, आरोपित पदाधिकारियों पर उक्त आरोप संख्या-1 अप्रमाणित होता है। आरोपी पदाधिकारीं द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में उक्त आरोप के संबंध में प्रतिवेदित किया गया है कि उड़नदस्ता द्वारा यह जाँच दिसम्बर 2016 में किया गया. एवं कार्य मार्च 2017 में पूर्ण किया गया। जाँच के समय सामग्री ढोने एवं गाड़ी के परिचालन हेतु बाँध के उपरी तल को सुविधा के लिए कम रखा गया था। कार्य पूर्ण नहीं रहने के कारण रूपांकित लेवल से कम पाया। पाँच फरवरी 2017 को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस कार्य का उद्‌घाटन किया गया एवं उसके पूर्व रूपांकित लेवल तक कार्य पूर्ण किया गया जिसका लेवल मापी पुस्त में अंकित की गई एवं इसके मिट्टी तथा बोल्डर पिचिंग की जाँच उड़नदस्ता के द्वितीय जाँच में की गयी थी जिसकी पुष्टि माप पुस्त संख्या-22 के पृष्ठ 01 से 06 तक में अंकित है। आरोपी पदाधिकारी के उक्त कथन से सहमत हुआ जा सकता है। उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी पर आरोप संख्या-2 अप्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक-05.12.2014 तक Pier का कार्य किया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में बराज के Under sluice spillway भाग के Pier के U/S end हेतु front face के उपरी भाग का ढ़लाई Bulge किया हुआ उल्लेखित है, जिसके कारण Pier का उपरी भाग एक सीध में दिखायी नहीं देने का उल्लेख है। इस प्रकार के त्रुटिपूर्ण निर्माण के लिए Poor Workmanship, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में कमी के लिए आरोपित पदाधिकारी को उत्तरदायी माना गया है। उल्लेखनीय है कि आरोपित पदाधिकारी का Pier निर्माण कार्य के समय पदस्थापन जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद में था। अतएव, उपरोक्त स्थिति में Pier ढलाई कार्य में पायी जाने वाली त्रुटियों के लिए आरोपित पदाधिकारी उत्तरदायी है। अतएव, आरोपित पदाधिकारी पर आरोप संख्या-3 प्रमाणित होता है। उक्त आरोप के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारीं का द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि एफलक्स बाँध एवं इसके Extension में तथा अन्य मिट्टी कार्य मद में एकरारनामा के तहत ग्राफ पर चालू विपत्र में Settlement Allowance काटकर ही भुगतान किया गया था। जिसे माप पुस्त पर अंकित नहीं किया गया था। कार्य पूर्ण होने पर पूरे मिट्टी कार्य की गणना कर प्रावधानित सेटलमेंट काट कर एवं जाँचकर भुगतान किया गया है। जिसकी पुष्टि उड़नदस्ता की द्वितीय जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.11.0 में उल्लेख किया गया है। उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी पर आरोप संख्या-4 अप्रमाणित होता है। श्री आरिफ अहमद के विरूद्ध गठित आरोपों के संदर्भ में संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में प्रमाणित आरोपों के लिए लिखित अभ्यावेदन प्राप्त किया गया। जिसके समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है :-

उक्त अनुमोदित निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग का पत्रांक-1940 दिनांक 25.08.2023 द्वारा सहमति प्राप्त है। अतएव श्री आरिफ अहमद (आई0डी0-4546), तत0 सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, बेनीपट्टी को निम्न निर्णित दण्ड को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः-59 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं0-144/100 के तहत सारण तटबंध के कि0मी0 76.0-77.0 के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराये जाने के उपरांत पायी गयी अनियमितता के लिए से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित किया गया, जिसके अवचार या कदाचार के लांछनों का सार निम्नवत है :-

1. श्री मुरलीधर सिंह, मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, गोपालगंज के द्वारा अपने पदस्थापन काल में बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा के अंतर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं०-144/100 के तहत सारण तटबंध के कि०मी० 76-77 के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य के तहत वोल्डर रिभेटमेंट कार्य की लम्बाई, क्रेट बुनाई तथा बोल्डर ढुलाई कार्य में एस0आर0सी0 के अनुशंसा के विपरीत बोल्डर रिभेटमेंट की अनुशंसित लम्बाई 870 मी० की जगह 690 मी0, कार्य में प्रयुक्त होने वाले सम्पूर्ण GI Wire Crate की बुनाई मशीन से किये जाने के विपरीत 50 प्रतिशत मशीन से एवं 50 प्रतिशत मैनुअली बुनाई करने तथा सम्पूर्ण बोल्डर रेलवे से ढुलाई कार्य के जगह पर 30 प्रतिशत रेलवे से एवं 70 प्रतिशत सड़क मार्ग से कराने का प्रावधान, प्राक्कलन में किया जिसकी स्वी—ति प्रदान की गयी।

2. श्री सिंह मुख्य अभियंता द्वारा उपर्युक्त कंडिका-1 में वर्णित अनियमितताओं को करते हुए प्रश्नगत कार्य के लिए एस0आर0सी0 के अनुशंसा के विपरीत मनमाने ढंग से प्राक्कलन की तकनीकी स्वी—ति प्रदान की गई जिसके कारण राशि का अपव्यय होना परिलक्षित है, जो बिहार वित्त नियमावली के नियम 34 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है एवं उनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3 (1) का भी उल्लंघन है।

श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2566 दिनांक 11.12.2019 द्वारा उनसे आरोप पत्र में गठित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। तदालोक में श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण प्रत्युत्तर की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत इनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प सं0-56 दिनांक 18.01.2021 द्वारा इनके विरूद्ध गठित आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें श्री अशोक कुमार चौधरी, अभियंता प्रमुख, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर से की गयी एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग किये जाने का निर्णय लिया गया :-

संचालन पदाधिकारी ने श्री सिंह के विरुद्ध बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा के अंतर्गत वर्ष 2018 बाढ़ के पूर्व एजेण्डा सं0-144/100 के तहत सारण तटबंध के कि०मी० 76-77 के बीच कराये गये कटाव निरोधक कार्य के तहत बोल्डर रिभेटमेंट कार्य की लम्बाई, क्रेट बुनाई तथा बोल्डर दुलाई कार्य में एस0आर0सी0 के अनुशंसा के विपरीत स्वी—ति प्रदान किये जाने संबंधी आरोप अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य श्री सिंह को अभियन्ता प्रमुख से दूरभाष पर प्राप्त निदेश तथा स्थलीय स्थिति के अनुरुप एवं कार्यहित में परिवर्तन किये जाने के आलोक में दिया गया है। परन्तु जाँच प्रतिवेदन से अभियंता प्रमुख द्वारा दूरभाष पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि नहीं होती है और न ही ऐसा कोई साक्ष्य संलग्न किया गया है जिससे इस किये गए परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता स्पष्ट हो सके।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-667 दिनांक 25.03.2022 द्वारा श्री सिंह को भेजते हुए उनसे उक्त असहमति के बिन्दु पर अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। तदालोक में श्री सिंह द्वारा अपने पत्रांक-110 दिनांक 18.05.2022 के माध्यम से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-

(क) विभागीय असहमति का कोई आधार नहीं है। विभागीय समीक्षा में यह कहा गया है कि श्री सिंह के द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया जिसमें किये गये परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता स्पष्ट हो सके। उक्त कथन को श्री सिंह द्वारा तकनीकी –ष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है।

(ख) इनके मामले में संचालन पदाधिकारी अभिंयता प्रमुख थे जिन्होनें सारे तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर अपना मंतव्य दिया था। इनके द्वारा बिहार लोक निर्माण विभागीय संहिता के कंडिका-15A का उल्लेख कर कहा गया है कि अभियंता प्रमुख सरकार के तकनीकी मामले के मुख्य परामर्शी है। उक्त कंडिका-15A में अंकित है कि "The Chief Engineer is the administrative and professional head of that zone of the Public Works Department of which he is in charge and is responsible and answerable to Engineer-in-Chief for the proper and effcient working of that zone. Each Chief Engineer is also the responsible60 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 professional advisor of Engineer-in-Chief in all matters relating to his branch." इस स्थिति में अभिंयता प्रमुख के अभिमत से हटकर विभागीय समीक्षा कर द्वितीय कारण पृच्छा किया जाना विधि संगत नहीं है, का उल्लेख श्री सिंह द्वारा किया गया है।

(ग) इनके द्वारा अभियंता प्रमुख से दूरभाष पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि के संबंध में आवश्यकता नहीं थी, का उल्लेख किया गया हैं। इनके द्वारा उक्त के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि संबंधित कार्य के अंतिम विपत्र के साथ-साथ एकरानामा को भी बंद किया जा चुका है। अगर संबधित कार्य तकनीकी –ष्टिकोण से उचित नहीं होता तो मुख्यालय द्वारा उक्त कार्य की भुगतान एवं अन्य की स्वी—ति भी नही दी जाती, जिसकी सम्पुष्टि भी बाढ़ नियंत्रण एवं मोनिटरिंग अंचल से करायी जा सकती है, का उल्लेख भी श्री सिंह द्वारा के किया गया है। आरोपित पदाधिकारी श्री मुरलीधर सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के द्वारा अपने अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि चूँकि उनके मामले में संचालन पदाधिकारी अभियंता प्रमुख थे, जिनके द्वारा सभी तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर अपना मंतव्य दिया गया था तथा बिहार लोक निर्माण विभागीय संहिता के कंडिका 15A का संदर्भ करते हुए कहा है कि अभियंता प्रमुख सरकार के तकनीकी मामले के मुख्य परामर्शी है, जिसके आधार पर अभियंता प्रमुख के अभिमत से हटकर विभागीय समीक्षा कर द्वितीय कारण पृच्छा किया जाना विधि संगत नहीं है। इस संदर्भ में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह को अभियंता प्रमुख द्वारा दूरभाष पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि के संदर्भ में कोई साक्ष्य संलग्न नहीं रहने के साथ-साथ एस॰आर॰सी॰ के अनुशंसा के विपरीत कार्य में किये गये परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता को स्पष्ट करने संबंधी भी कोई साक्ष्य संलग्न नहीं है। इस संदर्भ में श्री सिंह द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि अभियंता प्रमुख द्वारा दूरभाष पर दिये गये निदेश की संपुष्टि की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यदि संबंधित कार्य तकनीकी दृष्टिकोण से उचित नहीं होता तो मुख्यालय द्वारा उक्त कार्य के भुगतान एवं अन्य की स्वीकृति भी नहीं दी जाती।

श्री सिंह का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु में यह अंकित है कि श्री सिंह को अभियंता प्रमुख के द्वारा दूरभाष पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि की स्पष्टता तथा प्रावधानित कार्य में किये गये परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता के संदर्भ में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर (अभ्यावेदन) में भी आरोपित पदाधिकारी श्री मुरलीधर सिंह के द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य/अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है, जिससे श्री सिंह को अभियंता प्रमुख द्वारा दिये गये निदेश की सम्पुष्टि हो सके तथा कार्य में किये गये परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता प्रमाणित हो सके।

वर्णित तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर) में, प्रश्नगत कार्य में अभियंता प्रमुख के द्वारा दूरभाष पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि तथा कार्य में किये गये परिवर्तन की आवश्यकता/बाध्यता के संदर्भ में कोई साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये जाने से श्री मुरलीधर सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के विरूद्ध गठित आरोप यथावत्‌ प्रमाणित प्रतीत होता है। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत श्री मुरलीधर सिंह (आई0डी0-3177), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत % करने का विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।

उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-737 दिनांक 08.05.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1401 दिनांक 12.07.2023 द्वारा उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दण्ड एवं उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री मुरलीधर सिंह (आई0डी0-3177), तत0 मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता हैः-

% श्री क्षितीष कुमार (आई0डी0 सं०-5090), सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को सोन नहर अंचल, आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्य में बरती गई गंभीर अनियमितता आदि कतिपय प्रतिवेदित आरोपाें के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-1672 दिनांक 06.08.2019 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं उक्त मामले में श्री61 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-638 दिनांक 20.07.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

2. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया है।

3. उक्त निर्णय के आलोक में श्री क्षितीष कुमार, सहायक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त होने के उपरांत दण्ड का संसूचन अलग से किया जायेगा। श्री रत्नेश कुमार (आई0डी0 सं०-3985), कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को सोन नहर अंचल, आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्य में बरती गई गंभीर अनियमितता आदि कतिपय प्रतिवेदित आरोपाें के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2054 दिनांक 23.09.2019 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं उक्त मामले में श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-639 दिनांक 20.07.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। 2. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया है।

3. उक्त निर्णय के आलोक में श्री रत्नेश कुमार, कार्यपालक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त होने के उपरांत दण्ड का संसूचन अलग से किया जायेगा। श्री प्रकाश कुमार (आई0डी0 सं०-5498), सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को सोन नहर अंचल, आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्यों में बरती गई गंभीर अनियमितता आदि कतिपय प्रतिवेदित आरोपाें के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1) के प्रावधानों के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2511 दिनांक 03.12.2019 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं उक्त मामले में श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-642 दिनांक 20.07.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

2. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया है।

3. उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रकाश कुमार, सहायक अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त होने के उपरांत दण्ड का संसूचन अलग से किया जायेगा। (cid:274)ामीण (cid:466)वकास (cid:466)वभाग ------ अिधसूचना 30 जनवरी 2024

सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0- R-504/8/2023-SECTION 14-RDD-RDD (COM NO-235038)-2514075--(cid:302)ी आलोक कु मार, अिधसूिचत (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), टनकु (cid:220)पा (गया) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) मु(cid:201)यालय से (cid:465)दनांक- 02.04.2019 से लगातार62 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 अनािधकृ त अनुप(cid:468)(cid:232)थत रहने के आरोप पर (cid:466)वभाग (cid:232)तर से इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) आरोप प(cid:287) ग(cid:465)ठत कर उपल(cid:222)ध कराया गया।

(cid:466)वभाग (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी कु मार से (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराने हेतु (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक- 2107387 (cid:465)दनांक- 22.09.2023 (cid:430)ारा अंितम (cid:510)प से (cid:232)मा(cid:464)रत (cid:465)कया गया। (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण अ(cid:292)ा(cid:220)त रहने के उपरांत (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक- 2379545 (cid:465)दनांक- 15.12.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी कु मार से (cid:292)ेस (cid:466)व(cid:163)ि(cid:431) के मा(cid:218)यम से (cid:465)दनांक- 29.12.2023 तक (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराने हेतु िनदेिशत (cid:465)कया गया, परंतु उनके (cid:430)ारा िनधा(cid:91)(cid:464)रत ितिथ तक (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त नह(cid:547)ं (cid:465)कया गया ।

आरोप प(cid:287) म(cid:581) संधा(cid:464)रत आरोप(cid:585) क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क (cid:302)ी आलोक कु मार, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547) के पूव(cid:91) के (cid:468)जल(cid:585) म(cid:581) पद(cid:232)थापन के दौरान (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), औरंगाबाद एवं गया से उनके अनािधकृ त अनुप(cid:468)(cid:232)थत रहने के संबंध म(cid:581) दो आरोप प(cid:287) ग(cid:465)ठत कर उपल(cid:222)ध कराया गया था, (cid:468)जसपर स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत अिधसूचना सं(cid:201)या- 287152 (cid:465)दनांक-08.09.2020 (cid:430)ारा असंचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से तीन वेतन वृ(cid:466)(cid:424) अव(cid:510)(cid:424) करने का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया गया ।

(cid:302)ी कु मार (cid:465)दनांक- 02.04.2019 से लगातर (cid:292)खंड काया(cid:91)लय, टनकु (cid:220)पा (गया) से अनुप(cid:468)(cid:232)थत रहे ह(cid:583) । (cid:466)वभाग (cid:232)तर से अिधरो(cid:466)पत आरोप प(cid:287) पर बार-बार (cid:232)मार के बावजूद इनके (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त नह(cid:547)ं (cid:465)कया जाना इनके धृ(cid:231)टता का प(cid:464)रचायक एवं (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली, 2005 का उ(cid:227)लंघन है ।

अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरा(cid:219)त (cid:302)ी आलोक कु मार, अिधसूिचत (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), टनकु (cid:220)पा (गया) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) 'संचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से तीन वेतन वृ(cid:466)(cid:424) पर रोक'का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है।

आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी आलोक कु मार क(cid:551) सेवा पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।

आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क उ(cid:200)त आदेश क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।

आदेष से,

न(cid:219)द (cid:465)कशोर साह, संयु(cid:200)त सिचव। ------

सं0 6/प0प0-30-01/2024-506--वाणिज्य-कर विभाग के विभिन्न कोटि के निम्नलिखित पदाधिकारियों को स्थानान्तरित करते हुए उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-6 में अंकित पद एवं स्थान पर अगले आदेष तक के लिए पदस्थापित किया जाता है :-

1 2 3 4 5 6
1 श्री ललित कुमार 38वीं/32 पटना राज्य-कर अपर आयुक्त अंकेक्षण मगध प्रमंडल, गया राज्य-कर अपर आयुक्त अंकेक्षण भागलपुर प्रमंडल
63 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
2 मो0 फिरोज आलम विशेष बैच/43 पूर्णियां राज्य-कर अपर आयुक्त अंकेक्षण भागलपुर प्रमंडल राज्य-कर अपर आयुक्त अंकेक्षण मगध प्रमंडल, गया
3 श्री जलेश्वर प्रसाद 39वीं/58 सारण राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रभारी बगहा अंचल राज्य कर संयुक्त आयुक्त TRU मुख्यालय, पटना
4 श्री अनिल कुमार सिंह विधार्थी 42वीं/82 रोहतास राज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रभारी) दानापुर अंचल-I राज्य कर संयुक्त आयुक्त, आर्थिक अन्वेषण इकाई मुख्यालय, पटना
5 श्री —ष्णकांत यादवे दु ं द्वितीय सीमित/92 भोजपुर राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रभारी मधेपुरा अंचल राज्य कर संयुक्त आयुक्त अंकेक्षण पटना पश्चिमी प्रमंडल
6 श्रीमती अनुुपमा कुमारी 48-52वीं/ 112 भोजपुर राज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रभारी) दानापुर अंचल-II राज्य कर संयुक्त आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय, पटना
7 श्री मनोज कुमार कर्ण तृतीय सीमित/125 कटिहार राज्य-कर उपायुक्त फारबिसगंज अंचल राज्य कर उपायुक्त प्रभारी, मधेपुरा अंचल
8 श्री अवधेश सिंह तृतीय सीमित/129 वैशाली राज्य कर उपायुक्त सारण अंचल-I राज्य कर उपायुक्त प्रभारी बगहा अंचल
9 श्री गंगा प्रसाद 53-55वीं/ 132 समस्तीपुर राज्य कर संयुक्त आयुक्त मुख्यालय पटना राज्य कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, दानापुर अंचल-I
10 श्रीमती निवेदिता 53-55वीं/ 133 पटना राज्य कर उपायुक्त प्रभारी जहानाबाद अंचल राज्य कर उपायुक्त मुख्यालय पटना
11 श्री कुशेश्वर राउत 53-55वीं/ 177 मधुबनी राज्य-कर उपायुक्त दरभंगा अंचल-II राज्य कर उपायुक्त पूर्णियां अंचल-I
12 श्री यदुवंश 53-55वीं/ 185 लखीसराय राज्य-कर उपायुक्त अंकेक्षण भागलपुर प्रमंडल राज्य-कर उपायुक्त प्रभारी, जहानाबाद अंचल
13 श्री उमेश चंद्रा तृतीय सीमित/191 नवादा राज्य-कर उपायुक्त शाहाबाद अंचल राज्य-कर उपायुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I
14 श्री मुकेश कुमार चौधरी 53-55वीं/ 208 सीतामढ़ी राज्य-कर उपायुक्त गया अंचल-II राज्य कर उपायुक्त पटना मध्य अंचल-I
15 श्री संजय कुमार 53-55वीं/ 210 मुजफ्फरपुर राज्य-कर उपायुक्त मुख्यालय पटना राज्य-कर उपायुक्त प्रभारी,दानापुर अंचल-II
16 श्री अरूण कुमार चौधरी 53-55वीं/ 213 मुंगेर राज्य-कर उपायुक्त अन्वेषण ब्यूरो भागलपुर प्रमंडल राज्य कर उपायुक्त दरभंगा अंचल-I
17 श्री समीर परिमल 56-59वीं/ 234 गोपालगंज राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण पटना पूर्वी प्रमंडल राज्य कर सहायक आयुक्त प्रशिक्षण प्रकोष्ठ मुख्यालय पटना
18 श्री संतोष कुमार 56-59वीं/ 240 मधुबनी राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना पश्चिमी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त मगध अन्वेषण ब्यूरो गया
64 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
19 शहगुफ्ता रहमान 56-59वीं/ 263 पश्चिमी चम्पारण राज्य-कर सहायक आयुक्त मोतिहारी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त गोपालगंज अचंल
20 श्री मनोज कुमार पाल 56-59वीं/ 264 कैमूर राज्य-कर सहायक आयुक्त सासाराम अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त, दानापुर अंचल-II
21 इन्दु चौहान 56-59वीं/ 266 सुपौल राज्य-कर सहायक आयुक्त मधुबनी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त, सहरसा अंचल
22 दीपक कुमार शर्मा 56-59वीं/ 268 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना पश्चिमी प्रमंडल अन्वेषण ब्यूरो पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर
23 सुधांशु कुमार 56-59वीं/ 276 बक्सर राज्य कर सहायक आयुक्त शाहाबाद अंचल राज्य कर सहायक आयुक्त दानापुर अंचल-1I
24 श्री अमित कुमार 56-59वीं/ 277 खगड़िया राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना सिटी पूर्वी अचंल राज्य-कर सहायक आयुक्त समस्तीपुर अचंल
25 श्री उमेश कुमार दास 56-59वीं/ 278 जमुई राज्य-कर सहायक आयुक्त सासाराम अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त भभुआ अंचल
26 श्री विक्रम कुमार 56-59वीं/ 279 गया राज्य-कर सहायक आयुक्त मुख्यालय पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना सिटी पश्चिमी अंचल
27 श्री ललिन्द्र कुमार 56-59वीं/ 281 नवादा राज्य-कर सहायक आयुक्त बेगुसराय अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पाटलीपुत्रा अंचल
28 श्री नागेन्द्र प्रसाद 56-59वीं/ 282 मधुबनी राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल- I राज्य-कर सहायक, अन्वेषण ब्यूरो पूर्णियां प्रमंडल
29 भावना श्री 60-62वीं/ 298 वाराणसी (उ0प्र0) राज्य-कर सहायक आयुक्त भभुआ अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल- I
30 मयंक मृणाल 60-62वीं/ 299 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त भभुआ अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त बक्सर अंचल
31 वन्दना कुमारी 60-62वीं/ 302 बेगुसराय राज्य-कर सहायक आयुक्त मुख्यालय पटना, सम्प्रति दानापुर अंचल-I में प्रतिनियुक्त राज्य-कर सहायक आयुक्त, गया अंचल-I
32 श्री सुजीत कुमार 60-62वीं/ 310 गया राज्य-कर सहायक आयुक्त मुंगेर अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त अन्वेषण ब्यूरो केन्द्रीय प्रमंडल पटना
33 सुष्मिता कुमारी 60-62वीं/ 317 अररिया राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त पूर्णियां अंचल-II
34 वन्दना भारती 60-62वीं/ 319 खगड़िया राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-I
35 पीयुष कुमार चौबे 63वींं/343 कैमुर (भभुआ) राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना विशेष अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-II
65 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
36 सुधीर कुमार पाण्डेय 63वींं/344 देवरिया (उत्तर प्रदेश) राज्य-कर सहायक आयुक्त पाटलीपुत्रा अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल
37 आशीष सौरभ आशुतोष 63वींं/345 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-II
38 जयन्ती कुमारी 63वींं/346 रोहतास राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना विशेष अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त शाहाबाद अंचल
39 मनीषा सिंह 63वींं/347 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त पाटलीपुत्रा अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-II
40 चन्दन कुमार 63वींं/348 अररिया राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-I
41 कुमार तुषारेन्द्र 63वींं/349 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-I
42 शामीन फिरदौस 63वींं/350 पश्चिमी पम्पारण राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त मोतिहारी अंचल
43 आकाश आनन्द 63वींं/351 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, पटना पश्चिमी प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-I
44 विवेक मिश्र 63वींं/352 गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-II
45 कुमार शशांक 63वींं/353 पूर्णियॉ राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त मुंगेर अंचल
46 ऋचा कुमारी 63वींं/354 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त हाजीपुर अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर
47 गौतम कुमार गोस्वामी 63वींं/356 दरभंगा राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना पश्चिमी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-II
48 रश्मि कुमारी 63वींं/357 नालंदा राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त जहानाबाद अंचल
49 संदीप कुमार 63वींं/358 रोहतास राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त पाटलीपुत्रा अंचल
50 प्रिय रंजन 63वींं/360 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त बिहारशरीफ अंचल
51 प्रेमांशु 63वींं/361 बेगुसराय राज्य-कर सहायक आयुक्त समस्तीपुर अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I
66 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
52 दिव्य प्रकाश 63वींं/362 मुजफ्फरपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त अन्वेषण ब्यूरो, पटना पूर्वी प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त समस्तीपुर अंचल
53 स्नेहा वर्मा 63वींं/363 प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल
54 श्री राहूल सिंह 63वींं/364 सारण राज्य-कर सहायक आयुक्त पाटलीपुत्रा अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-I
55 आशीष कुमार 63वींं/365 लखीसराय राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल-I
56 श्री सोनल कुमार 63वींं/366 नवादा राज्य कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-II राज्य कर सहायक आयुक्त गया अंचल-II
57 कुमार सौरभ 63वींं/367 पश्चिमी चम्पारण राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I
58 जय कुमार 63वींं/368 औरंगाबाद राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना उत्तरी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त सासाराम अंचल
59 अमित कुन्दन 63वींं/369 औरंगाबाद राज्य-कर सहायक आयुक्त जहानाबाद अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त दानापुर अंचल-II
60 अमित कुमार 63वींं/370 लखीसराय राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-I
61 पंकज कुमार 63वींं/371 धनवाद राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना विशेष अंचल
62 प्रांजल सिंह 63वींं/372 शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) राज्य-कर सहायक आयुक्त औरंगाबाद अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-II
63 सौरभ कुमार 63वींं/373 मुजफ्फरपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण मगध प्रमंडल, गया
64 गुंजन कुमार 63वींं/374 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त सारण अंचल-I
65 कुसुम कुमारी 63वींं/379 दरभंगा राज्य-कर सहायक आयुक्त दानापुर अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल
66 नूपुर सिन्हा 63वींं/381 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना उत्तरी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त शाहाबाद अंचल
67 अनिरूद्ध कुमार 63वींं/382 लखीसराय राज्य-कर सहायक आयुक्त मुंगेर अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त गांधी मैदान अंचल
67 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
68 रूपेश कुमार 63वींं/384 शेखपुरा राज्य-कर सहायक आयुक्त मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-I
69 कुमार विशाल 63वींं/385 पूर्णियॉ राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त बेतिया अंचल
70 अभिषेक आनन्द 63वींं/386 सहरसा राज्य-कर सहायक आयुक्त भागलपुर अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-I
71 अविनाश कुमार 63वींं/387 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पश्चिमी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त मधुबनी अंचल
72 गुंजन कुमार 63वींं/390 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त सिवान अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त औरंगाबाद अंचल
73 लोकेश आनंद 63वींं/392 अररिया राज्य-कर सहायक आयुक्त मधेपुरा अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त सहरसा अंचल
74 नवनीत कुमार 63वींं/393 सारण राज्य-कर सहायक आयुक्त, सिवान अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-II
75 हरेराम 63वींं/394 रॉची (झारखंड) राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण, केन्द्रीय प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त शाहाबाद अंचल
76 रोहित कुमार शर्मा 63वींं/395 भागलपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त सहरसा अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त जमुई अंचल
77 सरिता कुमारी 63वींं/396 मधुबनी राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त समस्तीपुर अंचल
78 पवन कुमार साह 63वींं/397 गोपालगंज राज्य-कर सहायक आयुक्त सारण अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त अन्वेषण ब्यूरो तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर
79 अनिशा 63वीं/398 पटना राज्य कर सहायक आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, पटना राज्य कर सहायक आयुक्त हाजीपुर अंचल
80 रवि रंजन कुमार 63वींं/399 शेखपुरा राज्य-कर सहायक आयुक्त लखीसराय अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त अन्वेषण ब्यूरो, भागलपुर प्रमंडल
81 अमत्र्य कुमार आदर्श 63वींं/400 अरवल राज्य-कर सहायक आयुक्त अन्वेषण ब्यूरो, पटना पूर्वी प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-II
82 सौम्या 63वींं/402 शेखपुरा राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना उत्तरी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ मुख्यालय, पटना
83 दिव्या प्रसन्न 63वींं/403 वैशाली राज्य-कर सहायक आयुक्त दानापुर अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-I
68 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
84 अफशा पर्वेज 63वींं/405 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पश्चिमी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय पटना
85 अजितेश कुमार सिंह 63वींं/407 शिवहर राज्य-कर सहायक आयुक्त अंकेक्षण, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना दक्षिणी अंचल-II
86 शोभना 63वींं/408 जहानाबाद राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-I
87 आशुतोष कुमार 63वींं/409 वैशाली राज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त भभुआ अंचल
88 कुमार दिवाकर 63वींं/415 मधेपुरा राज्य-कर सहायक आयुक्त, सुपौल अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना पश्चिमी अंचल
89 सितेश कुमार 63वींं/417 खगड़िया राज्य-कर सहायक आयुक्त पूर्णियॉ अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त सुपौल अंचल
90 स्मृृति संजयम 63वींं/418 जमुई राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना सिटी पश्चिमी अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय पटना
91 ऋचांशा ऋजु ़ 63वींं/419 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त बिहार शरीफ अंचल
92 अभिषेक कुमार 63वींं/420 पूर्वी चम्पारण राज्य-कर सहायक आयुक्त पूर्णियॉ अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त सीतामढ़ी अंचल
93 श्री वसुंधरा शंकर 63वींं/422 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्यालय पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, मगध प्रमंडल, गया
94 हर्ष रंजन कुमार 63वींं/423 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, पटना पूर्वी प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त हाजीपुर अंचल
95 राज किशोर राम 63वींं/424 सिवान राज्य-कर सहायक आयुक्त रक्सौल अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त बाढ़ अंचल
96 विरंजनी रानी 63वींं/425 नालंदा राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त जहानाबाद अंचल
97 ऋषि कुमार 63वींं/427 भोजपुर राज्य-कर सहायक आयुक्त पूर्णियॉ अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त सीवान अंचल
98 रीना राय 63वींं/429 पटना राज्य-कर सहायक आयुक्त जहानाबाद अंचल राज्य-कर सहायक आयुक्त लखीसराय अंचल
99 प्राची प्रिया 63वींं/431 वैशाली राज्य-कर सहायक आयुक्त दरभंगा अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त सारण अंचल-I
69 (cid:464)बहार गजट, 14 2024
100 अश्विनी कुमार 63वींं/433 पश्चिमी पम्पारण राज्य-कर सहायक आयुक्त पूर्णियॉ अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त रक्सौल अंचल
101 सौम्या 63वींं/434 नालंदा राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना मध्य अंचल-I राज्य-कर सहायक आयुक्त नवादा अंचल
102 रणधीर कुमार 63वींं/436 पूर्वी चम्पारण बेतिया अंचल/ रक्सौल अंचल(प्रति0) राज्य-कर सहायक आयुक्त सीवान अंचल
103 अनिशा 63वींं/437 मुजफ्फरपुर अन्वेषण ब्यूरो, पटना पश्चिमी प्रमंडल राज्य-कर सहायक आयुक्त गया अंचल-II
104 तनु प्रिया 63वींं/440 पटना अंकेक्षण, पश्चिमी प्रमंडल, पटना। राज्य-कर सहायक आयुक्त बक्सर अंचल
105 मनीष कुमार तरूण 63वींं/441 खगड़िया अन्वेषण ब्यूरो, पूर्णियॉ प्रमंडल, पूर्णियॉ राज्य-कर सहायक आयुक्त पटना उतरी अंचल
106 संजीव कुमार 63वींं/442 सारण पूर्णियॉ अंचल-II राज्य-कर सहायक आयुक्त मधेपुरा अंचल

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार, संयुक्त सचिव।

------ लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ------ प्रभार प्रतिवेदन 27 जनवरी 2024

सं0 46--अधोहस्ताक्षरी, संजीव हंस, भा॰प्र॰से॰ (1997), प्रधान सचिव, ऊर्जा विभाग, बिहार, पटना {अतिरिक्त प्रभार-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेषक, बिहार स्टेट पॉवर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड, पटना/प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना} सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023-सा॰प्र॰-1551 दिनांक-26.01.2024 के आलोक में दिनांक-27.01.2024 के पूर्वाह्‌न में प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार स्वतः परित्याग करता हूँ।

सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023 -सा॰प्र॰-1551 दिनांक- 26.01.2024 द्रष्टव्य।

(संजीव हंस) भारमुक्त पदाधिकारी। आदेश से, नित्यानन्द प्रसाद, संयुक्त सचिव (प्र॰को॰)।

------

29 जनवरी 2024

सं0 54--अधोहस्ताक्षरी, पंकज कुमार, भा॰प्र॰से॰ (1997), प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023-सा॰प्र॰-1551 दिनांक-26.01.2024 के आलोक में दिनांक-29.01.2024 के पूर्वाह्‌न में जांच आयुक्त, सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार स्वतः ग्रहण करता हूँ।

सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023 -सा॰प्र॰-1551 दिनांक-26.01.

2024 द्रष्टव्य।

(पंकज कुमार) भारग्राही पदाधिकारी आदेश से, नित्यानन्द प्रसाद, संयुक्त सचिव (प्र॰को॰)।70 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

प्रभार प्रतिवेदन

29 जनवरी 2024

सं0 47--अधोहस्ताक्षरी, पंकज कुमार, भा॰प्र॰से॰ (1997), प्रधान सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जांच आयुक्त, सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना) सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023-सा॰प्र॰-1551 दिनांक-26.01.2024 के आलोक में दिनांक-29.01.2024 के पूर्वाह्‌न में प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना का प्रभार स्वतः ग्रहण करता हूँ।

सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी-1002/2023 -सा॰प्र॰-1551 दिनांक- 26.01.2024 द्रष्टव्य।

(पंकज कुमार) भारग्राही पदाधिकारी आदेश से, नित्यानन्द प्रसाद, संयुक्त सचिव (प्र॰को॰)।

------ Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------ Office Order The 30th January 2024

No.XI-C-रा0-06/2019-532---In the light of proposal received from District Magistrate, Jehanabad vide letter no.-749, dated- 15.12.2023 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Smt Punam Kumari Assitant Director, District Social Security Cell, Jehanabad District Level

By Order, Sd./Illegible, Secretary to Commissioner.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 48—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

71 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण सूचनाएं । —————

सं0 116--म(cid:583), ललन (cid:292)साद, (cid:466)पता-(cid:232)वग(cid:568)य सुकल (cid:292)साद, पता-(cid:207)योित नगर, िनयर बाजार सिमित, गोला रोड दानापुर,

ं (cid:465)क थाना-दानापुर, पो(cid:232)ट-दानापुर क(cid:583) ट, (cid:468)जला-पटना का िनवासी हू ं। म(cid:583) शपथ प(cid:287) सं. -2726 (cid:465)द. 27.01.24 (cid:430)ारा घोषणा करता हू

ं। पूव(cid:91) म(cid:581) म(cid:583) ललन राम के नाम से जाना जाता था, उसे बदल कर म(cid:583)ने अपना नाम म(cid:581) के वल उपनाम ललन (cid:292)साद रख िलया हू

ं और भ(cid:466)व(cid:231)य म(cid:581) भी इसी नाम से जाना जाऊं गा।

(cid:468)जससे अब म(cid:583) ललन (cid:292)साद के नाम से जाना जाता हू

ललन (cid:292)साद।

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No. 126--I, Aishwarya, D/o-Sunil Prasad, R/o-Bhitri Begampur, Patna City, Uma Chemical works, P.O.-Begampur, P.S.-Chowk, Dist.-Patna declare that I Aishwarya will be known as Aishwarya Prasad for all future purposes as per affidavit no. 1487 dt. 16.12.2023.

Aishwarya.

------

No. 127--I, Tripti, D/o-Sunil Prasad, R/o-Bhitri Begampur, Patna City, Uma Chemical works, P.O.-Begampur, P.S.-Chowk, Dist.-Patna declare that I Tripti will be known as Tripti Prasad for all future purposes as per affidavit no. 1488 dt. 16.12.2023.

Tripti.

------

No. 145--I Sima Shrivastav W/o Anand Shrivastav R/o Laxmipur mohalla- ward No-17 P.S+Distt.- Madhepura, Bihar 852113 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. NO- 3011 dt. 28-07-2023 that my name is written in BSEB 10th all documents as Sima Kumari which is typographical error in other documents it is written as Seema Kumari which is correct and in Aadhar No-6769 3064 9310 it is written as Sima Shrivastav, after acquired my doctorate I will be known as Dr. Seema kumari my correct name is Seema Shrivastav. Now I will be known as Dr. Seema Shrivastav for all future purposes.

Sima Shrivastav. सं0 146--मैं प्रियमाला कुमारी (PRIYAMALA KUMARI ) पति सुनील कुमार ग्राम/मोहल्ला अकबरपुर पोस्ट मथुरापुर, थाना वारिसनगर, जिला समस्तीपुर राज्य बिहार शपर्थ पत्र संख्या 1762 दिनांक 17.01.2024 द्वारा घोषणा करती हूँ कि मेरी पुत्री अनिषा प्रिया के मैट्रिकुलेषन रोल नंबर 22263400 उत्तीर्णता वर्ष 2021 के प्रमाण पत्रों में मेरा नाम प्रियमाला अंकित हो गया है जो गलत है जबकि मेरा वास्तविक और सही नाम प्रियमाला कुमारी है एवं भविष्य में भी इसी सही नाम से जानी पहचानी जाऊंगी।

प्रियमाला कुमारी। No. 146--I PRIYMALA Kumari, W/o- Sunil Kumar, Village/ Mohalla- Akbarpur, Post-Mathurapur, P.S.-Warisnagar, District- Samastipur, State-Bihar, by affidavit No.- 1762, Date-17-01-2024 declare that in Matriculation Certificate of my daughter Anisha Priya, Roll No.-22263400, Passing Year-2021, my name is wrongly mentioned as Priymala, my actual and correct name is Priymala Kumari and I will be known as Priymala Kumari in the Future.

PRIYMALA Kumari.

72 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

सं0 147--मैं प्रेमा देवी सिंह, पति-केषव प्रसाद सिंह, निवासी-अमरपुर मारवाटिया, धमार, आरा, षपथ पत्र पत्र संख्या 7412 दिनांक 02.01.2024 के द्वारा घोषणा करती हॅूं कि मेरे आधार कार्ड में मेरा नाम प्रेम कुमारी देवी अंकित है। जो गलत है। मेरा सही नाम प्रेमा देवी सिंह (Prema Devi Singh) है।

प्रेमा देवी सिंह।

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No. 157--I Raj Kumar Rajak S/o Bihari Lal Rajak, R/o-H.No. 36. Nawada, Government Middle School, P.O.-Mubarakpur, Phulwari Sharif, Patna, Bihar- 801506, do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.- 292 dt. 03.01.24 that my name is written my documents as Raj Kumar Rajak. That necessity of change in my surname. That hence forth, I will be known as Raj Kumar Rajan for all legal purposes.

Raj Kumar Rajak.

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No. 158--I, Md. Firoz Akram, (मो. (cid:465)फरोज अकरम) S/o- Md. Harun Rashid, R/o- Vill+Post- Garhbanaill, P.S- Kasba, Dist-Purnea, Pin Code- 854325, Bihar, do hereby affirm and declare as per Affidavit no- 40, Dated- 20/01/2024 that after pursuing my Ph.D. (Doctorate) I will be known as Dr. Md. Firoz Akram (Mk0. मो. (cid:465)फरोज अकरम ) for all future purposes.

Md. Firoz Akram.

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सं0 169--म(cid:583) राम (cid:292)साद राय, (cid:466)पता-शिश(cid:219)(cid:289) राय, (cid:274)ाम+पो. -कु रसाहा, थाना-मो(cid:465)हउ(cid:423)(cid:547)न नगर, (cid:468)जला-

ं (cid:465)क मेरे आधार काड(cid:91) सं.

सम(cid:232)तीपुर, (cid:466)बहार शपथ प(cid:287) सं. 6790 (cid:465)दनांक 02.09.23 (cid:430)ारा सूिचत करता हू

400166622933 म(cid:581) मेरा नाम राम(cid:292)साद राय दज(cid:91) हो गया है जो गलत है। मेरे सभी कागजात(cid:585) म(cid:581) मेरा नाम राम (cid:292)साद राय दज(cid:91) है जो सह(cid:547) है। दोन(cid:585) नाम मेरा ह(cid:547) है। आगे सभी काय(cid:607) हेतु म(cid:583) राम (cid:292)साद राय के नाम से जाना जाऊं गा।

राम (cid:292)साद राय।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 48—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

73 (cid:464)बहार गजट, 14 2024

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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श्री विवेक कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-898/11, 356/19, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी मधुबनी के विरूद्ध मधुबनी जिला अन्तर्गत भारत माला परियोजना पैकेज-I में प्रगति असंतोषजनक एवं धीमी रहने तथा भारत माला परियोजना पैकेज-II एवं पैकेज-III में भू-धारियों को अग्रिहित भूमि का मुआवजा राशि का अधिक भुगतान के साथ-साथ सरकारी भूमि को रैयती भूमि मानकर भू-धारियों को भुआवजा राशि का भुगतान कर अनियमितता बरतने संबंधी आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, मधुबनी के ज्ञापांक-1978 दिनांक 03.07.2023 द्वारा आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त प्रतिवेदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-15755 दिनांक 18.03.2023 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार का स्पष्टीकरण (दिनांक 25.09.2023 एवं दिनांक 02.12. 2023) प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा दाहिना हाथ टूट जाने के कारण मुआवजा भुगतान में रूकावट आने का उल्लेख करते हुए स्पष्टीकरण से मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-19891 दिनांक 26.10.2023 द्वारा जिला पदाधिकारी, मधुबनी से मंतव्य की माँग की गयी। जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक-3616 दिनांक 04.12.2023 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं होने एवं आरोप के संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव अभिकथन में कोई उल्लेख नहीं करने का उल्लेख किया गया है। श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी एवं पाया गया कि श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप गम्भीर प्र—ति एवं वित्तीय अनियमितता/गबन से संबंधित है। अतएव मामले की गम्भीरता को देखते हुए उक्त मामले की विस्तृत जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के संगत प्रावधानों के तहत करने का निर्णय लिया गया। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना तथा उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी होंगे। श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विशेष सचिव। ------

श्री शैलेन्द्र कुमार त्रिपाठी, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-409/11 (सेवानिवृत्त) तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, मोहनियाँ, कैमूर (भभुआ) के पद पर पदस्थापन काल में लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार एवं अनावाद बिहार सरकार की74 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 भूमि लगान निर्धारण में अनियमितता करने संबंधी आरोप के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1085 दिनांक 07.10.2016 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से प्राप्त आरोप पत्र के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-14944 दिनांक 03.11.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय कागजातो की माँग की गयी। जिला पदाधिकारी, कैमूर द्वारा पत्रांक-61 दिनांक 11.01.2019 के माध्यम से श्री त्रिपाठी द्वारा माँगे गये अधिकांश कागजातों को उपलब्ध कराया गया। श्री त्रिपाठी द्वारा पुनः कतिपय कागजात/अभिलेखों की माँग की गयी। इस प्रकार जिला पदाधिकारी, कैमूर द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेख/कागजात श्री त्रिपाठी को उपलब्ध कराये जाने के बावजूद उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित न कर बार-बार कतिपय अभिलेख कागजात की माँग की जाती रही। अतएव मामले की वृहद जाँच की आवश्यकता पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12792 दिनांक 28.10.2021 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। श्री त्रिपाठी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संयुक्त आयुक्त विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना (पत्रांक-478 दिनांक 22.07.2023 ) से प्राप्त हुआ, जिसमें आरोपाें को प्रमाणित पाया गया। संचालल पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में अंकित किया है कि ''विविध वाद सं॰-14/2002-03 में आरोपी पदाधिकारी द्वारा अमरपुरा मौजा के सर्वे खाता सं॰-230/119, खेसरा सं॰-1056/732, रकबा- 0.30 डि॰ एवं खेसरा सं॰-641/461, रकबा-0.38 डि॰ तथा खाता सं॰-231/120, खेसरा सं॰-641/537, रकबा-0.85 डि॰ के संदर्भ में आदेश पारित करते हुए 20 रूपये प्रति एकड़ लगान निर्धारण की स्वीकृति दी गई। इस प्रकार प्रश्नगत भूमि, जो अनावाद बिहार सरकार किस्म जमीन रास्ता एवं अनावाद सर्व साधारण की भूमि है, का लगान निर्धारण सक्षम न्यायालय के स्वत्व निर्धारण के संबंध में कोई आदेश के बगैर व्यक्ति विशेष के पक्ष में किया जाना उचित नहीं है अतः यह आरोप प्रमाणित होता है''। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-15789 दिनांक 18.08.2023 द्वारा श्री त्रिपाठी से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री त्रिपाठी द्वारा अपना लिखित अभिकथन (पत्रांक-05/23, दिनांक 04.09.2023) समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा प्रमाणित आरोपों के संबंध में कोई प्रत्युत्तर नहीं देते हुए उल्लेख किया गया है कि उनके विरूद्ध लगाया गया आरोप भ्रामक एवं तथ्यहीन है। उन्हें मूल अभिलेख की छायाप्रति उपलब्ध कराई गई, जो अपठनीय है। संबंधित अभिलेखों में मैनिपुलेशन किया गया है एवं साक्ष्य एवं अभिलेख से छेड़-छाड़ कर कार्यालय द्वारा गायब कर दिया गया है। पार्टी के पक्ष में जाली खतियान बनाकर अभिलख में छेड़-छाड़ कर लगान निर्धारित की गई, इसकी कोई जाँच नहीं की गई। जहाँ शब्द जोड़ा गया वहाँ उनका लघु हस्ताक्षर नहीं है। षड्‌यंत्र रचकर उन्हें फंसाने की कोशिश की गई है। उनके द्वारा इस प्रकार का कोई कार्य नहीं किया गया है। श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर श्री त्रिपाठी से प्राप्त लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि ''प्रश्नगत भूमि, जो अनावाद बिहार सरकार किस्म जमीन रास्ता एवं अनावाद सर्व साधारण की भूमि है, का लगान निर्धारण सक्षम न्यायालय के स्वत्व निर्धारण के संबंध में कोई आदेश के बगैर व्यक्ति विशेष के पक्ष में किया जाना उचित नहीं है''

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के प्रावधानों के तहत '' का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। उक्त विनिश्चत दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-19682 दिनांक 19.10.2023 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग की दिनांक 07.12.2023 को आहूत पूर्ण पीठ की बैठक में श्री त्रिपाठी के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित उक्त दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया। उक्त परामर्श/सहमति बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-3585 दिनांक 22.12.2023 द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री शैलेन्द्र कुमार त्रिपाठी, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-409/11 (सेवानिवृत्त) तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, मोहनियाँ, कैमूर (भभुआ) को संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी0) के संगत प्रावधानों के तहत का दंड अधिरोपित/संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, संयुक्त सचिव। ------

श्री विद्यानाथ पासवान, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1248/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बेतिया सदर के विरूद्ध जन वितरण प्रणाली एवं अन्य विभागीय नियमों की जानकारी नहीं रहने, अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में यथेष्ट प्रर्दशन नहीं करने एवं अनुमंडलीय आवासीय कार्यालय से गैर प्राधि—त व्यक्ति को निगरानी धावा दल द्वारा गिरफ्तार किये75 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 जाने संबंधी आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया के पत्रांक-321 दिनांक 05.12.2019 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-1363 दिनांक 27.01.2020 द्वारा श्री पासवान से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, जिसके आलोक में श्री पासवान का स्पष्टीकरण (दिनांक 15.03.2020) प्राप्त हुआ, जिसमें इनके द्वारा आरोपों से इन्कार किया गया। समीक्षोपरांत आरोपों की गम्भीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6853 दिनांक 27. 07.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1516 दिनांक 06.05.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आरोप सं॰-01 (क), 01 (ख) एवं 01 (ग) को प्रमाणित आरोप संख्या 02 (क), 02 (ख) एवं 03 (ख) को अांशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं॰-03 (क), 04 (क) एवं 04 (ख) को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-10008 दिनांक 29.05.2023 द्वारा श्री पासवान से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री पासवान का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (दिनांक 16.09.2023) प्राप्त हुआ। श्री पासवान द्वारा अपने लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन में जिन तथ्यों एवं साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है उसका उल्लेख उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत बचाव बयान में किया गया था, जिसके समीक्षोपरांत ही संचालन पदाधिकारी द्वारा सं॰-01 (क), 01 (ख) एवं 01 (ग) को प्रमाणित आरोप संख्या 02 (क), 02 (ख) एवं 03 (ख) को अांशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं॰-03 (क), 04 (क) एवं 04 (ख) को अप्रमाणित पाया गया है।

श्री पासवान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी तथा उनके लिखित अभिकथन को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। अतः इसे अस्वी—त करते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-21093 दिनांक 13.11.2023 द्वारा श्री पासवान के विरूद्ध (i) निन्दन, (आरोप वर्ष-2018-19) (ii) दो (02) वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (दिनांक 26.12.2023) समर्पित किया गया है। श्री पासवान द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में प्रतिवेदित आरोप/संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित/अंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के संबंध में कुछ नहीं कहा गया कि बल्कि उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में समर्पित बचाव बयान एवं जाँच प्रतिवेदन के आलोक में दिये गये लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की प्रति संलग्न किया गया है, जबकि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष उनके द्वारा प्रस्तुत बचाव बयान के समीक्षोपरांत ही संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है एवं आरोपों को प्रमाणित/अंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है तथा जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनके द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत ही अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री पासवान के विरूद्ध (i) निन्दन, (आरोप वर्ष-2018-19) (ii) दो (02) वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री पासवान का पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है, अतः इसे अस्वी—त किया जाता है तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-21093 दिनांक 13.11.2023 द्वारा अधिरोपित दंड (i) निन्दन, (आरोप वर्ष-2018-19) (ii) दो (02) वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, संयुक्त सचिव। ------

श्री शैलेश कुमार दास, बि0प्र0से0, को0क्र0-524/2019, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, बखरी-सह-भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बखरी के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता यथा मशीन एवं उपकरण इत्यादि का क्रय विहित प्रक्रिया के विपरीत करने एवं नियमों का उल्लंघन करने आदि के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3204 दिनांक 25.10.2021 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए निलंबन/अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त आरोप पत्र/साक्ष्य संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-13561 दिनांक 18.

11.2021 द्वारा श्री दास से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त क्रम में श्री दास से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं उक्त स्पष्टीकरण पर नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री दास के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (3) के तहत आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। तदुपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप76 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 पत्र एवं साक्ष्य की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 21208 दिनांक 14.11.2023 द्वारा श्री दास से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त क्रम में श्री दास का स्पष्टीकरण (पत्रांक 1961 दिनांक 15.12.2023) प्राप्त हुआ।

श्री दास के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि श्री दास के द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण पर नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना का मंतव्य प्राप्त है जिसमें नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा अंकित किया गया है किः-

श्री दास दिनांक 23.07.2013 से 25.10.2013 तक एवं दिनांक 06.04.2015 से 29.05.2015 तक कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत बखरी के अतिरिक्त प्रभार में रहे थे। श्री दास के स्पष्टीकरण के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि उपर्युक्त क्रमांक-(i), (ii), (iii), (iv), (v), (vi), (vii), (x), (xi), (xii), (xiii) एवं (xiv) इनके कार्यकाल से संबंधित नहीं है। उक्त अवधि में श्री अरविन्द पासवान, बि०न०से०, कार्यपालक पदाधिकारी के प्रभार में थे। श्री दास के कार्यकाल में हाई मास्ट लाईट एवं स्ट्रीट लाईट का क्रय किया गया। तकनीकी परीक्षण कोषांग, निगरानी विभाग ने इस संबंध में निम्न आपत्तियां दर्ज की हैः-

(क) पुराने दर पर (वर्ष 2014-15) पुराने ही आपूर्तिकर्त्ता से वर्ष 2015-16 में हाई मास्ट लाईट एवं स्ट्रीट लाईट का क्रय किया जाना बिहार वित्त नियमावली, 2005 के नियम-131 के विभिन्न खंडों में वर्णित बिन्दुओं के विरुद्ध है। इसके कारण सरकार को वित्तीय क्षति होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

(ख) आपूर्ति किए गये सामग्रियों की गुणवत्ता से संबंधित जाँच प्रतिवेदन तकनीकी विशेषज्ञ से प्राप्त किये बिना पूरे भुगतान आपूर्तिकर्ता को कर दिया गया।

यदि श्री दास द्वारा पुराने आपूर्तिकर्ता से पुराने दर पर सामग्रियों का क्रय किया गया है, तो इसे विभागीय निदेश के प्रतिकूल नहीं माना जा सकता है, किन्तु वे इस बात पर मौन हैं कि किन परिस्थितियों में सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच तकनीकी विशेषज्ञों से नहीं करायी गयी। स्पष्ट है कि इस बिन्दु पर श्री दास से चूक हुई है। किसी भी सामग्री के क्रय के पूर्व सामग्रियों की जांच एक अनिवार्य शर्त है।

अतः श्री शैलेश कुमार दास (बि०प्र०से०),कोटि क्र0-524/2019, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत बखरी-सह-भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बखरी से हुई चूक के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत निदंन (वर्ष-2016-17) की शास्ति अधिरोपित/संसूचित की जाती है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, संयुक्त सचिव। ------

श्री शशि भूषण प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1102/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंडौल के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी आरोप पत्र उपलब्ध कराते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया। जिला पदाधिकारी से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12393 दिनांक 26.07.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

श्री प्रसाद के विरूद्ध राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश के आलोक में संसूचित आर्थिक दंड की राशि 25,000/-रू॰ जमा करने संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने एवं वरीय पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदन की माँग करने के बावजूद प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं स्वेचछाचारिता का आरोप प्रतिवेदित है। आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक-456 दिनांक 26.08.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य निम्नवत है :-

''आरोपित पदाधिकारी कतिपय तिथियों में अधोहस्ताक्षरी के समक्ष उपस्थित हुए, परन्तु उनके द्वारा प्रतिवेदित आरोपों में कोई स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया, जबकि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियमित रूप से उपस्थित हुए।

अभिलेख पर उपलब्ध तथ्यों/साक्ष्यों/कागजातों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराये जाने के लिए राज्य सूचना आयोग, पटना द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिरोपित आर्थिक दंड की राशि उनके द्वारा अद्यतन जमा नहीं कराया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराना एवं आर्थिक दंड की राशि जमा नहीं कराया जाना आरोपित पदाधिकारी के स्वेच्छाचारिता एवं वरीय पदाधिकारी के आदेशों का स्पष्टतः उल्लंघन है।

अतः अभिलेख पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पूर्णतः प्रमाणित होता है।''

विभागीय पत्रांक-18798 दिनांक 06.10.2023 द्वारा श्री प्रसाद से लिखित अभिकथन की माँग की गयी, जो स्मारोपरांत अबतक अप्राप्त रहा।

तदुपरांत श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी एवं पाया गया कि श्री प्रसाद कि के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों77 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 को पूर्णतः प्रमाणित पाया गया है तथा जाँच प्रतिवेदन पर स्मारोपरांत भी श्री प्रसाद द्वारा लिखित अभिथन समर्पित नहीं किया गया है। अतएव ऐसा प्रतीत होता है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में उन्हें कुछ नहीं कहना है तथा वे आरोप को स्वीकार करते है।

अतः उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री शशि भूषण प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1102/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंडौल सम्प्रति परियोजना पदाधिकारी-सह-अपर निदेशक, नगर पालिका स्वच्छता एवं विकास निदेशालय, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्न शास्ति अधिरोपित/संसूचित किया जाता है :-

i बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, संयुक्त सचिव। ------

श्री विजय कुमार उपाध्याय, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-983/2008, 756/2011 तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रोह, नवादा के विरूद्ध इंदिरा आवास योजना के तहत लाभान्वितों को आवास मुहैया कराने में अनियमितता बरतने एवं इंदिरा आवास के भुगतान में नाजायज राशि की कटौती संबंधी आरोपों की जाँच हेतु संकल्प ज्ञापांक 6942 दिनांक 20.07.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए, श्री उपाध्याय से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके अनुपालन में उनका स्पष्टीकरण (दिनांक 21.02.2013) प्राप्त हुआ। समीक्षोपरांत आरोपों की प्रमाणिकता के आधार पर विभागीय संकल्प संख्या 3471 दिनांक 12.03.2014 द्वारा का दंड संसूचित किया गया। उक्त आदेश के विरूद्ध श्री उपाध्याय ने माननीय पटना उच्च न्यायालय, पटना में रीट याचिका दायर किया। एतद्‌ संबंधी सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या-12386/2014 में दिनांक 04.04.2018 को आदेश पारित हुआ, जिसमें जांच प्रतिवेदन को निरस्त करते हुए वादी को सभी लंबित/अनुसंगी लाभ अनुमान्य किया गया। उक्त आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत हैः- ''The finding of Enquiry Officer in holding that charges against the petitioner is proved is not sustainable either in fact or in law and as such, the enquiry report as well as order of Disciplinary Authority based on such perverse enquiry report is quashed. Petitioner is entitled for all consequential benefits.'' उक्त न्यायादेश के आलोक में श्री उपाध्याय ने सभी लंबित लाभ प्रदान करने हेतु अनुरोध (पटना नगर निगम, कंकड़बाग अंचल का पत्रांक 462 दिनांक 08.05.2018) किया। विभागीय स्तर पर इस मामले की समीक्षा के उपरांत सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या-12386/2014 में पारित न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर करने के निमित विधि विभाग, बिहार, पटना का परामर्श मांगा गया। विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में एल0पी0ए0 संख्या-1324/2018 दायर किया गया। इसी बीच श्री उपाध्याय द्वारा उक्त रीट याचिका में पारित न्यायादेश का अनुपालन नहीं होने के आधार पर अवमाननावाद (संख्या-1848/18) दायर कर दिया गया। दिनांक 31.10.2018 को माननीय न्यायालय द्वारा एतद्‌संबंधी अवमाननावाद सं॰-1848/18 की सुनवाई के उपरांत अंतरिम आदेश पारित किया गया जो निम्नवत हैः- "Learned counsel for the petitioner is present, however no one appears on behalf of respondent State. A show cause was filed on behalf of opposite party Nos. 3 and 4 stating therein that the against order passed by learned Single judge they have preferred an appeal before the Division Bench Being L.P.A No. 1324 of 2018 The matter is adjourned for four weeks. By that time either the order passed by this Court should be complied or any stay order from Division Bench must be produced, otherwise this Court will be constrained to ask for personal appearnce of opposite party No.3 List this matter on 28-11-2018" उक्त न्यायादेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-15342 दिनांक 27.11.2018 द्वारा श्री उपाध्याय के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3471 दिनांक 12.03.2014 द्वारा संसूचित दंड ( वापस इस शर्त्त के साथ लिया गया कि यह आदेश एल0पी0ए0 संख्या-1324/2018 में पारित होने वाले आदेश से प्रभावित होगा।78 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 07.12.2022 को पारित न्यायादेश में विभाग की ओर से दायर एल0पी0ए0 संख्या-1324/2018 को खारिज कर दिया गया है। उक्त के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-15342 दिनांक 27.11.2018 में एल॰पी॰ए॰सं॰-1324/2018 में पारित आदेश से प्रभावित होने संबंधी शर्त्त को वापस लिया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विशेष सचिव। ------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-10/2020--1026 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 5 फरवरी 2024

श्री राजीव कुमार सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना के शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन के दौरान वित्तीय वर्ष 2019-20 में वित्तीय नियमों एवं विभागीय निर्देशों का उल्लंघन करते हुए आवश्यकता से लगभग दोगुनी राशि की दवा क्रय करने में बरती गई वित्तीय अनियमितता के प्रतिवेदित आरोपोें के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7155 दिनांक 16.08.2021 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई तथा विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी एवं श्री रूपक कुमार, सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र) को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री रूपक कुमार के अन्य मामले में निलंबित हो जाने के कारण विभागीय आदेश ज्ञापांक-6138 दिनांक-01.06.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में उनके स्थान पर श्री संजय कुमार चौधरी, सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र) को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. विभागीय कार्यवाही के जांचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1422 दिनांक-21.04.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल 05 आरोपों में से आरोप संख्या-01, 02, 03 एवं 05 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-04 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

3. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय ज्ञापांक-4431 दिनांक-26.05.2023 द्वारा श्री राजीव कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई थी।

4. तद्‌आलोक में श्री राजीव कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन दिनांक-01.12.2023 समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि बिहार कारा हस्तक, 2012 के अनुसार दवा के व्ययादेष, खरीद, भंडार तथा खपत के लिए चिकित्सा पदाधिकारी उत्तरदायी है, अतः दवा की खरीद उनके (चिकित्सा पदाधिकारी) द्वारा की गई है, जिसकी पुष्टि उनके एवं चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा कारा महानिरीक्षक को समर्पित स्पष्टीकरण से होता है। जहाँ तक BMSICL का भुगतान लंबित रहने का प्रश्न है, इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि अंकेक्षण द्वारा किए गये आपत्ति के आलोक में उनके द्वारा प्रबंध निदेशक, BMSICL को बार-बार पत्राचार किया गया, लेकिन उनके द्वारा न तो राशि का समायोजन कर विपत्र ही उपलब्ध कराया गया और न ही दवा ही उपलब्ध करायी गयी। इसी प्रत्याशा में भुगतान नहीं हो सका। जहाँ तक निजी एजेंसी को भुगतान करने का प्रश्न है, इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि राशि भुगतान भारत सरकार के लोक उपक्रमों के प्राधि—त एजेंसियों को सरकारी दवा के बदले में किया गया है, न कि बाजार की दवा खरीद पर। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि BMSICL पर कुल राशि रु0 3,40,411 का बकाया था, जिसके समायोजन के लिए BMSICL को बार-बार पत्राचार किया गया, लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जिसके कारण BMSICL को राशि का भुगतान नहीं किया गया, यह विभागीय हित में किया गया, न कि किसी Motive में। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी होने के रूप में उनकी यह जिम्मेवारी थी कि अंकेक्षण में उठाई गयी आपत्तियों को दूर करें। इसके लिए यह आवश्यक था कि BMSICL पर दबाव बनाया जाए ताकि राशि का समायोजन किया जा सके। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि दवा Indent एवं खरीद के लिए कारा चिकित्सक जिम्मेवार हैं। सिर्फ भुगतान नहीं कर दवा वापस किया गया है, जिसे जिला पदाधिकारी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति ने भी माना है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि संचालन पदाधिकारी ने स्वयं माना है कि BMSICL की राशि रु0 30,40,411 घटा कर रु0 1,22,055 होता है, जबकि वास्तव में यह राशि रु0 89,343 है। समर्पित राशि रु0 73,073 है। ऐसी स्थिति में उपलब्ध आवंटन में से सरकारी कंपनियों से क्रय की गयी दवाओं का ही भुगतान किया गया है। आरोपित79 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 पदाधिकारी का कहना है कि ऐसी स्थिति में भारत सरकार के सरकारी कंपनियों से क्रय की गयी दवाओं के भुगतान में किसी तरह का Ulterior Motive नहीं है। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि दवाओं के व्ययादेश, खरीद भंडार तथा खपत के लिए चिकित्सा पदाधिकारी उत्तरदायी हैं, जबकि बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-797 (viii) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि "काराधीक्षक प्रत्येक व्यय में यथासंभव मितव्ययता करेगा तथा स्वी—ति के पूर्व या स्वी—ति हेतु सौंपे जाने के पूर्व सावधानीपूर्वक सभी मांग एवं मांग-पत्र का परीक्षण करेगा।" दवाओं का Indent चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा किया गया, किन्तु उक्त प्रावधान के आलोक में आरोपित पदाधिकारी को पूर्व के वर्षों में दवा की वास्तविक खपत के आधार पर वर्ष 2019-20 के दवा का क्रय किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। आवंटन उपलब्ध रहने के बावजूद ससमय BMSICL को भुगतान नहीं किया गया तथा आरोपित पदाधिकारी द्वारा अधिक मात्रा में दवा क्रय करने का कार्य किया गया है। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है।

6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राजीव कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005, भाग-v नियम-14(वृहत शास्तियाँ) के उपनियम-(vii) के प्रावधानों के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- ''कालमान वेतन में चार (04) वेतनवृद्धि निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड, जिसका प्रभाव/कुप्रभाव इनकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ेगा और यह इन्हें स्वतः अनुमान्य होंगी ''।

7. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 225 दिनांक 09.01.2024 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 4380 दिनांक 01.02.2024 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री राजीव कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005, भाग-v नियम-14(वृहत शास्तियाँ) के उपनियम-(vii) के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' कालमान वेतन में चार (04) वेतनवृद्धि निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड, जिसका प्रभाव/कुप्रभाव इनकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ेगा और यह इन्हें स्वतः अनुमान्य होंगी ''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीष कुमार सिंह, अपर सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

------- सं0 6/श्रम वि॰ आ॰(02)-07/2017 श्र॰सं॰-315 श्रम संसाधन विभाग ------

C.W.J.C No.-13463/2019 श्री शुभेश्वर कुमार, तत्कालीन कारखाना निरीक्षक, पटना अंचल-3, पटना सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध पटना जिला अंतर्गत खुशरूपुर की मियाँ टोली में अवस्थित मो॰ मैनुल हक उर्फ हकीम मियाँ के आवासीय घर में दिनांक-15.09. 2005 को हुए विस्फोट के कारण 35 व्यक्तियों की हुई मृत्यु एवं जन-धन की व्यापक क्षति हुई, जिसके कारण श्री शुभेश्वर कुमार के विरूद्ध कर्त्तव्य में चूक एवं लापरवाही के आरोपों के निमित्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1821 दिनांक-28.06.2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही का प्रतिवेदन दिनांक-26.12.2013 को उपलब्ध कराया गया है, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। तत्पश्चात संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-531 दिनांक-13.02.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की80 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा अपने पत्र दिनांक-19.03.2014 द्वारा प्रत्युत्तर समर्पित किया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2691 दिनांक-01.02.2016 द्वारा वृहद दंड अधिरोपित करने के संबंध में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गई। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना नेे पत्रांक-372 दिनांक-06.05.2016 द्वारा परामर्श उपलब्ध कराते हुए विभागीय दंड प्रस्ताव को समानुपातिक नहीं माना, परन्तु विभाग के द्वारा समीक्षोपरांत श्री कुमार को अपनी जिम्मेवारी के निर्वहन में पूर्णतः असफल रहने के कारण हुई घटना के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2604 दिनांक-01.09.2016 द्वारा श्री शुभेश्वर कुमार के विरूद्ध ' का दण्ड अधिरोपित किया गया। 3. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2604 दिनांक-01.09.2016 द्वारा ' दंड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन दिनांक-26.09.2016 को समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त पुनर्विलोकन आवेदन को पत्र ज्ञापांक-3342 दिनांक-06.12.2016 द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन को अस्वीकार करते हुये पूर्व में विभागीय संकल्प संख्या-2604 दिनांक-01.09.2016 द्वारा दिये गये वृहद दण्ड ''

' को यथावात्‌ रखने का निर्णय लिया गया।

4. सेवा से बर्खास्तगी दंड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में CWJC No.-4749/2017 दायर किया गया, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-04.09.2018 को न्यायादेश पारित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- "In such view of the matter, the resolution contained in memo no.2604 dated 01.09.2016 (Annexure-1) as well as the order passed in review petition containing memo no. 3342 dated 06.12.2016 (Annexure-2) are quashed. The matter is remanded back to the disciplinary authority to take decision in accordance with law after considering the explanation submitted by the petitioner. The disciplinary authority should complete the entire exercise within a period of three months from the date of receipt/production of a copy of this order. With the aforesaid observations and directions, this writ petition is allowed to the above extent."

5. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-04.09.2018 को पारित आदेश के आलोक में श्री कुमार द्वारा दिनांक-04.10.2018 को अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत अभ्यावेदन आवेदन को अस्वीकार करते हुये विभागीय संकल्प संख्या-534 दिनांक-28.02.2019 द्वारा वृहद दण्ड '' ' को यथावात्‌ रखने का निर्णय लिया गया।

6. श्री कुमार के द्वारा उक्त दंडादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.-13463/2019 दायर किया। CWJC No.-13463/2019 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.09.2023 को न्यायादेश पारित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ हैः- ''Considering the aforesaid facts, this Court comes to only one conclusion; the punishment meted out to the petitioner i.e. the dismissal from service is/was inconsistent with the charges made against him and thus it needs interference. In the circumstances, the memo no. 534 dated 28.02.2019 issued under the signature of Deputy Secretary, of 'the Department' Govt. of Bihar (Annexure-23) stands quashed. The petitioner shall be entitled to all consequential benefits. The writ petition is allowed with the aforesaid observations.'' 7. उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एल॰पी॰ए॰ दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता, बिहार, पटना का परामर्श प्राप्त किया गया। परामर्शानुसार एल॰पी॰ए॰ दायर नहीं किये जाने की स्थिति में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.09.2023 को पारित न्यायनिर्णय का अनुपालन किया जाना बाध्यकारी हो गया है। 8. विद्वान महाधिवक्ता से प्राप्त उक्त परामर्श के आलोक में CWJC No.-13463/2019 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.09.2023 को पारित न्यायादेश के अनुपालन बिन्दु पर सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार से परामर्श प्राप्त किया गया। परामर्शानुसार''प्रासंगिक मामले में प्रशासी विभाग के समक्ष CWJC No.-13463/2019 शुभेश्वर कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक-19.09.2023 को पारित न्यायादेश के अनुपालन की बाध्यकारी स्थिति है। अतः श्री कुमार के विरूद्ध अधिरोपित सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड को निरस्त करते हुए उन्हें परिणामी लाभ दिये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अधिसूचना संख्या-1093 दिनांक-20.11.2018 के अंतर्गत मुख्य सचिव के

अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष मामले को प्रस्तुत किये जाने पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त की गई। वित्त विभाग द्वारा CWJC No.-13463/2019 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के अनुपालन के बिन्दु पर सहमति व्यक्त की गई। उपरोक्त विभागों की सहमति के पश्चात मुख्य सचिव महोदय की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष मामले को समिति के नोडल विभाग विधि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई।81 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 9. CWJC No.-13463/2019 (शुभेश्वर कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.09.2023 को पारित आदेश के अनुपालन के क्रम में मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में दिनांक-09.01.2024 को आहूत गठित समिति की बैठक में श्री शुभेश्वर कुमार की सेवा से बर्खास्त किये जाने से संबंधित दण्डादेश को निरस्त करते हुए परिणामी लाभ दिये जाने की अनुशंसा की गई है।

10. अतएव श्री शुभेश्वर कुमार, तत्कालीन कारखाना निरीक्षक, पटना अंचल-3, पटना सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध विभागीय संकल्प संख्या-534, दिनांक-28.02.2019 द्वारा वृहद दण्ड '' ' को निरस्त करते हुए परिणामी लाभ दिया जाता है। 11. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति श्री शुभेश्वर कुमार, तत्कालीन कारखाना निरीक्षक, पटना अंचल-3, पटना सम्प्रति सेवा से बर्खास्त को निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट से उपलब्ध कराई जाय। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, विशेष कार्य पदाधिकारी। ------- सं0 6/श्रम वि॰ आ॰(02)-52/2023 श्र॰सं॰-325 श्रम संसाधन विभाग ------

श्री कैलाश प्रसाद सिंह, वाष्पित्र निरीक्षक, मुजफ्फरपुर-सह-मुख्य वाष्पित्र निरीक्षक, बिहार, पटना के विरूद्ध श्रमायुक्त, बिहार के पत्रांक-3086 दिनांक-30.06.2023 द्वारा आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करने हेतु उपलब्ध कराया गया। श्री सिंह के विरूद्ध यह आरोप गठित किया गया कि मेसर्स अंशुल स्नैक्स एण्ड विभरेजेज प्रा॰ लि॰, बेला इन्डस्ट्रीयल एरिया, पो॰थाना-बेला, जिला-मुजफ्फरपुर में घटित दुर्घटना, जिसमें 07 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई एवं कई व्यक्ति घायल हुए। इसके उपरांत श्री कैलाश प्रसाद सिंह द्वारा गलत धाराओं में अभियोजन दायर किया गया जो श्री सिंह का कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता का द्योतक है। श्री कैलाश प्रसाद सिंह द्वारा विभागीय पत्रांक-927 दिनांक-25.03.2022 द्वारा संशोधित धाराओं में अभियोजन दायर करने हेतु दिये गए निदेश के बावजूद भ गलत धाराओं को संशोधित कर संशोधित अभियोजन दायर न किया जाना न केवल श्री सिंह की कर्त्तव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है, बल्कि यह श्री सिंह के प्रबंधन के साथ मिली भगत से प्रबंधन को गलत लाभ पहुँचाने में श्री सिंह की संलिप्तता का का स्पष्ट प्रमाण है।

2. श्री कैलाश प्रसाद सिंह के विरूद्ध प्राप्त आरोप पत्र एवं श्री सिंह द्वारा दिनांक-03.07.2023 को श्रमायुक्त को संबोधित पत्र में श्रमायुक्त द्वारा सुझाये गए अधिनियम की धाराओं के संबंध में विधिक बिन्दु उठाये है जो प्रथम दृष्टया ये बिन्दु उचित प्रतीत होने के कारण सक्षम प्राधिकार के आदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक-2316 दिनांक- 11.08.2023 द्वारा श्रमायुक्त, बिहार से गठित आरोप की पुनः समीक्षा कर प्रतिवेदन की मांग की गई। उक्त के आलोक में संयुक्त श्रमायुक्त, बिहार के पत्रांक-6057 दिनांक-25.10.2023 द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें श्री सिंह के संबंध में समिति गठित कर श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप के संबंध में निम्नांमित मंतव्य दिया गया :- (i) आरोप संख्या-01 के संबंध में समिति ने No Comment का मंतव्य अंकित किया है। (ii) आरोप संख्या-02 के संबंध में समिति का मंतव्य यह है कि अभियोग पत्र में धारा-12 का उल्लंघन अंकित किया जाना प्रासंगिक प्रतीत नहीं होता है। अभियोजन में उल्लंघन की धारा-12 का प्रयोग किए बिना ही वाष्पित अधिनियम की धारा-24(e) का प्रयोग समीचीन प्रतीत होता है। (iii) आरोप संख्या-03 के संबंध में समिति का मंतव्य यह है कि वाष्पित्र अधिनियम, 1923 के अंतर्गत निमित प्रावधानों के तहत समिति के द्वारा मुख्य वाष्पित्र निरीक्षक के माध्यम से दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। (iv) आरोप संख्या-04 के संबंध में समिति ने No Comment का मंतव्य अंकित किया है।

3. संयुक्त श्रमायुक्त, बिहार से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार द्वारा श्रमायुक्त, बिहार से संशोधित आरोप पत्र की मांग करने हेतु आदेशित किया गया। आदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक-3406 दिनांक-09.11.2023 एवं स्मार पत्रांक-3812 दिनांक-13.12.2023 द्वारा श्रमायुक्त, बिहार से संशोधित आरोप पत्र की मांग की गई। संयुक्त श्रमायुक्त, बिहार के पत्रांक-7307 दिनांक-27.11.2023 द्वारा संशोधित आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया जिसमें यह उल्लेख है कि सभी कंडिकाओं में आरोपित पदाधिकारी के जबाव को सही पाते हुए अभियोजन में प्रयुक्त धाराओं को उचित पाया गया है। श्री कैलाश प्रसाद सिंह पर विभागीय कार्यवाही के आलोक में प्राप्त कारण पृच्छा को स्वीकृत करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है।82 (cid:464)बहार गजट, 14 2024 4. संयुक्त श्रमायुक्त, बिहार से श्री कैलाश प्रसाद सिंह के विरूद्ध प्राप्त संशोधित आरोप पत्र एवं श्री सिंह से प्राप्त कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत मामले को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया है।

5. अतएव श्री कैलाश प्रसाद सिंह के विरूद्ध गठित आरोप को संचिकास्त किया जाता है। 6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति श्री कैलाश प्रसाद सिंह, वाष्पित्र निरीक्षक, मुजफ्फरपुर-सह-मुख्य वाष्पित्र निरीक्षक, बिहार, पटना को निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट से उपलब्ध कराई जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

, विशेष कार्य पदाधिकारी। ————— अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 48—571+15-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 14 February 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-02-14.7/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-02-14.7.