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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 March 2024

Published 01 March 2024

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-03-01.190
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत

11 फा(cid:227)गुन 1945 (श0)

(सं0 पटना 190) पटना, शु(cid:272)वार, 01 माच(cid:91) 2024 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 29 फरवरी, 2024

सं॰ वि॰स॰वि॰-05/2024-1107/वि॰स॰--''बिहार कराधान विवादों का समाधान विधेयक, 2024'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक-29 फरवरी, 2024 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।

आदेश से, राज कुमार, सचिव।

[2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 1 माच(cid:91), 2024

[विúसúविú-06/2024]

2024 बिहार वित्त अधिनियम, भाग I (बिहार अधिनियम 5/1981) [जो बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा 94 द्वारा निरसित किये जाने के पूर्व था।], बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005), बिहार स्थानीय क्षेत्र में उपभोग, व्यवहार अथवा बिक्री हेतु मालों के प्रवेश पर कर अधिनियम, 1993, (बिहार अधिनियम 16/1993), बिहार होटल विलास वस्तु कर अधिनियम, 1988 (बिहार अधिनियम 5/1988), बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम XXXV/1948), बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007, [जो बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (अधिनियम 12/2017) की धारा 173 द्वारा निरसित किए जाने के पूर्व थे।], बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36/1948) [जो बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 2018 (बिहार अधिनियम 4/2018) की धारा 23 द्वारा निरसित किए जाने के पूर्व था], बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 2018 (बिहार अधिनियम 4/2018) और केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (अधिनियम 74/1956) के कार्यवाहियों से उत्पन्न विवादों के समाधान हेतु विधेयक। भारत-गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

I 1.

(1) यह अधिनियम बिहार कराधान विवादों का समाधान अधिनियम, 2024 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) अन्यथा उपबंधित के सिवाय इस अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे, जो राज्य-कर आयुक्त राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा नियत करे और उक्त तिथि से छः महीने की अवधि के लिये लागू रहेगा :

परन्तु राज्य सरकार, इस प्रयोजनार्थ राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, उक्त छः माह की अवधि को, अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट अवधि तक परन्तु छः माह से अनधिक के लिए बढ़ा सकेगी। 2. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो- (क) '' '' से अभिप्रेत है बिहार कराधान विवादों का समाधान अधिनियम, 2024; (ख) '' '' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पक्षकार द्वारा दाखिल विवरणियों में स्वीकार की

गई देय कर की राशि;

(ग) '' '' से अभिप्रेत है विधि के अधीन बिहार वित्त अधिनियम, 1981 भाग 1 की धारा 9 या बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 10 के अधीन नियुक्त और क्षेत्रीय अधिकारिता वाले राज्य-कर अपर आयुक्त (अपील) के समक्ष लम्बित अपील;

(घ) ''

'' से अभिप्रेत है, - (i) निर्धारिती द्वारा विधि के अधीन कर निर्धारण, पुनर्करनिर्धारण या संवीक्षा के आदेश या पारित अथवा किये गये किसी अन्य आदेश के अनुसरण में भुगतेय कर, चाहे जिस नाम से जाना जाए, या

(ii) विधि के किसी भी प्रावधानों के तहत निर्धारिती पर आरोपित शास्ति, या (iii) विधि के किसी भी प्रावधानों के तहत निर्धारिती द्वारा भुगतेय ब्याज, या (iv) विधि के किसी भी प्रावधानों के तहत निर्धारिती द्वारा भुगतेय फाईन ;

(ड.) '' '' से अभिप्रेत है अपील, पुनरीक्षण, विविध पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन, रेफेरेंश के माध्यम से कोई कार्यवाही या विधि के अधीन कर, ब्याज, फाईन या शास्ति के उद्‌ग्रहण के संबंध में पारित किसी आदेश के अनुसरण में कोई याचिका, जो जून, 2017 के 30वें दिन या उससे पहले समाप्त होने वाली किसी भी अवधि के संबंध में विधि के अधीन नियुक्त किसी प्राधिकार या ट्रिब्यूनल या, यथा स्थिति, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष दिनांक 31 जनवरी, 2024 को लंबित हो; और इसमें शामिल हैः

(i) ऐसी कोई लेवी जिसके संबंध में सरकारी खजाने में पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया गया है, या

(ii) विधि के अधीन अथवा बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के अधीन नियुक्त अथवा विहित अथवा प्राधि—त प्राधिकारी द्वारा प्रारम्भ की गयी अथवा के समक्ष लम्बित किसी कर, ब्याज, फाईन अथवा शास्ति की वसूली हेतु कार्यवाही;

(च) '' '', किसी विवाद के संबंध में, से अभिप्रेत है कोई कर, ब्याज, फाईन अथवा शास्ति की राशि जो विधि के अधीन कर निर्धारण, पुनर्करनिर्धारण या संवीक्षा के आदेश या पारित3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 1 माच(cid:91), 2024 अथवा किये गये किसी अन्य आदेश के अनुसरण में पक्षकार के पास भुगतेय के रूप में निर्धारित किया गया है;

(छ) '' '' से अभिप्रेत है बिहार वित्त अधिनियम, भाग I (बिहार अधिनियम 5/1981) [जो बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा 94 द्वारा निरसित किये जाने के पूर्व था।], बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005), बिहार स्थानीय क्षेत्र में उपभोग, व्यवहार अथवा बिक्री हेतु मालों के प्रवेश पर कर अधिनियम, 1993 (बिहार अधिनियम 16/1993), बिहार होटल विलास वस्तु कर अधिनियम, 1988 (बिहार अधिनियम 5/1988), बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम XXXV/1948), बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007, [जो बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (अधिनियम 12/2017) की धारा 173 द्वारा निरसित किए जाने के पूर्व थे।], बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36/1948) [जो बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 2018 (बिहार अधिनियम 4/2018) की धारा 23 द्वारा निरसित किए जाने के पूर्व था], बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 2018 (बिहार अधिनियम 4/2018) और केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (अधिनियम 74/1956)

(ज) '' '' से अभिप्रेत है कोई व्यक्ति जो विधि के अधीन विवाद का एक पक्षकार हो और इस अधिनियम के अधीन किसी विवाद के समाधान हेतु आवेदन दाखिल करता हो;

(झ) '' '' से अभिप्रेत जो इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली में विहित है; (ञ) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ ''

'' से अभिप्रेत है वैसे पदाधिकारी जो बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 10 में वर्णित हैं;

(ट) '' '' से अभिप्रेत है विधि के अधीन पुनरीक्षण के लिए आवेदन, जो बिहार वित्त अधिनियम, 1981 भाग I की धारा 9 या बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 10 के अधीन नियुक्त राज्य कर आयुक्त अथवा विधि के अधीन गठित न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित हो; (ठ) किसी विवाद के संदर्भ में '' '' से अभिप्रेत है ऐसे विवाद से संबंधित कार्यवाही का निपटारा और समापन;

(ढ़) ''समाधान-राशि'' से अभिप्रेत है वह राशि जिसका भुगतान करने पर विवाद का समाधान हो जायेगा;

(ण) इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ से अभिप्रेत है वैसे घोषणा पत्र/प्रमाण पत्र जिसका उल्लेख केन्द्रीय बिक्री-कर (रजिस्ट्रेशन एवं सकलावर्त) नियमावली, 1957 के नियम 12 में है; और इसमें विधि के अधीन बनाये गये किसी अन्य नियम के अन्तर्गत विहित कोई घोषणा-पत्र भी शामिल है;

(त) '' '' से अभिप्रेत है बिहार वित्त अधिनियम, 1981, भाग I की धारा 8 या बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 9 के अधीन गठित न्यायाधिकरण;

(थ) शब्द या अभिव्यक्तियाँ जो इसमें परिभाषित नहीं हैं, के वही अर्थ होंगे जो विधि या उसके अधीन बनाये गये नियमों में क्रमशः उनके प्रति समनुदेशित किए गए हों।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 1 माच(cid:91), 2024 II 3. (1) इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन विधि के तहत्‌ लंबित विवाद का समाधान पक्षकार के द्वारा इस निमित्त दिए गए आवेदन पर नीचे संलग्न तालिका के कॉलम-3 में विनिर्दिष्ट समाधान राशि के भुगतान पर किया जा सकेगा।

क्रम सं0 विवाद की प्रकृति समाधान राशि
1 2 3
1. किसी वैधानिक घोषणा-पत्र/प्रमाण-पत्र को प्रस्तुत या उपस्थापित करने में विफलता के कारण सृजित बकाया कर आवेदन करने की तारीख तक आवेदक के पास उपलब्ध वैधानिक प्रपत्रों में सन्निहित कर राशि के समायोजन के पश्चात्‌ विवाद के बकाया राशि की शेष राशि का 100% या ऐसी बकाया राशि के मद में पूर्व से भुगतान की गई राशि, जो भी अधिक हो;
2. अन्य बकाया कर विवाद में बकाया कर राशि का 35% या ऐसी बकाया राशि के मद मे ं पूर्व से भुगतान की गई राशि, जो भी अधिक हो;
3. विधि के अधीन किसी आदेश के माध्यम से अधिरोपित शास्ति या ब्याज या फाईन से उत्पन्न विवाद विवादित शास्ति या ब्याज या फाईन, यथास्थिति, की राशि का पूर्व से भुगतान की गई ं 10% या ऐसे बकाया राशि के मद मे राशि, जो भी अधिक हो;

की गई कोई राशि शामिल नहीं होगी एवं पक्षकार स्वीकृत कर की संपूर्ण राशि जमा करेगा।

(2) जहाँ विवाद के समाधान के लिए इच्छुक किसी पक्षकार ने यदि विवाद के संदर्भ में किसी राशि को जमा कर दिया हो, तो उक्त राशि को समाधान- राशि के मद्‌ में भुगतान समझा जाएगा एवं पक्षकार को केवल अंतर- राशि का भुगतान करना होगा।

(3) जहाँ विवाद के समाधान के लिए इच्छुक किसी पक्षकार ने यदि निर्धारित कर, ब्याज, पेनाल्टी अथवा फाईन के किसी विवाद के निपटारे हेतु देय राशि चालान के द्वारा किसी भी मद में संगत अधिनियम के अन्तर्गत विवाद के संदर्भ में जमा किया हो, तो उस राशि को समाधान राशि का भुगतान माना जाएगा

(4) विवाद के समाधान के लिए विवादित राशि के मद में समाधान राशि से अधिक जमा राशि के विरूद्ध पक्षकार के रिफंड का कोई दावा मान्य नहीं होगा।

(5) तत्‌समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसे विवाद का समाधान हो चुका माना जायेगा, जिसके संबंध में उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट राशि, विनिर्दिष्ट रीति से एवं समय के भीतर सरकारी कोषागार में जमा कर दी गई है, और उसे किसी प्राधिकारी या न्यायालय के समक्ष जारी नहीं रखा जाएगा।

(6) निम्नलिखित मामलों -

(i) न्यायाधिकरण के समक्ष लम्बित पुनरीक्षण आवेदन, अथवा (ii) रेफेरेन्स, अथवा (iii) रिट पिटीशन, अथवा (iv) विशेष अनुमति याचिका (स्पेशल लीव पिटीशन)

में अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत विवाद समाधान आदेश पारित होने पर ऐसा माना जायेगा कि उक्त पुनरीक्षण, रेफेरेन्स, रिट पिटीशन अथवा विशेष अनुमति याचिका पूर्वोक्त समाधान के तहत निष्पादित कर दी गई है। III 4.

विवाद के समाधान के लिए इच्छुक कोई पक्षकार अपना आवेदन विहित प्राधिकारी के समक्ष ऐसे प्रपत्र एवं रीति और समय सीमा के अन्तर्गत प्रस्तुत करेगा जैसा कि विहित किया जाय।

5. - (1) धारा 4 एवं तदैव बनी नियमावली में वर्णित अवधि एवं आवश्यकताओं के अनुरूप जबतक आवेदन नहीं होगा तब तक किसी आवेदन पर विहित प्राधिकारी द्वारा विचार नहीं किया जायेगाः (2) धारा 4 के अन्तर्गत समर्पित आवेदन के संबंध में ऐसी रीति और समय सीमा के अन्तर्गत कार्रवाई की जायेगी जैसा कि विहित किया जाय।

6. - (1) सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 1 माच(cid:91), 2024 (2) उपधारा (1) के उपबंधों के सामान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सरकार, ऐसे सभी या किसी मामले के लिए नियम बना सकेगी जिन्हें विहित करने की अपेक्षा इस अधिनियम द्वारा की गयी है या जिनकी बावत नियम प्रावधान किये जाते हैं। बिहार वित्त अधिनियम, 1981 भाग I, बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005, बिहार प्रवेश कर अधिनियम, 1993, बिहार होटल विलासिता कर अधिनियम, 1988, बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948, बिहार विज्ञापन पर कर अधिनियम, 2007, बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 और केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत दिनांक 30 जून, 2017 तक के कार्यवाहियों से उत्पन्न कर, शास्ति एवं सूद की सृजित माँग के समाधान हेतु बिहार कराधान विवाद समाधान विधेयक को अधिनियमित करने का प्रस्ताव है।

इसी उद्देश्य से बिहार कराधान विवादों का समाधान विधेयक, 2024 को अधिनियमित कराना आवश्यक है। बिहार कराधान विवादों का समाधान विधेयक, 2024 पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है। राज्य के संसाधनों में अभिवृद्धि आवश्यक है। उपर्युक्त लक्ष्य की पूर्ति हेतु राजस्व वृद्धि के लिए उपाय चिन्हित किये गये हैं। राजस्व संग्रहण में अभिवृद्धि हेतुु चिन्हित इन उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बिहार कराधान विवादों का समाधान विधेयक, 2024 को अधिनियमित करने की आवश्यकता है। यही इस विधेयक का उद्देश्य है और इसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ठ है।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त ।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 190-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0 ।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 March 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-03-01.190/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-03-01.190.