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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 March 2024

Published 19 March 2024

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-03-19.289
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत

29 फा(cid:227)गुन 1945 (श0)

(सं0 पटना 289) पटना, मंगलवार, 19 माच(cid:91) 2024 ———

कर्मचारी राज्य बीमा योजना, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 में सन्निहित सामाजिक बीमा के लिये उठाया गया एक एकीकृत कदम है तथा यह कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 में वर्णित बीमारी की स्थिति में बीमित व्यक्ति एवं उनके परिवारों को चिकित्सा सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अद्यतन बिहार में कुल 4,11,210 संगठित क्षेत्र के कर्मियों (बीमित व्यक्तियों) एवं उनके आश्रितों को राज्य के 17 कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालयों द्वारा बाह्‌य चिकित्सा, 02 ESIC आदर्श अस्पताल, फुलवारीशरीफ तथा बिहटा अस्पताल, पटना द्वारा अन्तर्वासी (Indoor) चिकित्सा एवं लगभग 50 टाई-अप चिकित्सा संस्थानों द्वारा विशिष्ट/अतिविशिष्ट चिकित्सा उपलब्ध करायी जा रही है। इसके अलावे ESIC द्वारा नगद हितलाभ, बीमारी (वर्धित व विस्तरित) हितलाभ, अपंगता हितलाभ, आश्रितजन हितलाभ, प्रसूति हितलाभ, प्रसव व्यय ( 7,500/-), अन्तयेष्टि लाभ ( 15,000/-) तथा व्यवसायिक पुनर्वास भत्ता (रोजगार चोट के कारण अपंगता की स्थिति में) आदि लाभ प्रदान किये जाते हैं। र्वामान में कर्मचारी राज्य बीमा योजना का संचालन राज्य बजट से प्राप्त राशि से किया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा योजना, बिहार के कुल खर्च का 87.5% केन्द्र सरकार द्वारा तथा 12.5% खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार द्वारा प्राप्त राशि को राज्य सरकार के कोष में चालान के माध्यम से कोषागार के द्वारा जमा कराया जाता है। बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 की धारा 58 (5) के प्रावधानों के अन्तर्गत चिकित्सा लाभ तथा चिकित्सा स्थापना के प्रशासन तथा प्रबंधन के लिए प्रबंधकीय और स्वास्थ्य देखभाल निकाय के रूप में कार्य करेगी। सोसाईटी समय-समय पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम के निदेशों तथा अधीक्षण के अध्यधीन संगम ज्ञापन के अनुसार अन्य सभी उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी के गठन से लाभः- (i) वित्तीय शक्ति की स्वायत्तता उपलब्ध रहेगी। कर्मचारी राज्य बीमा योजना के उपयोग के लिए समुचित बजट के अनुरूप राशि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (भारत सरकार) द्वारा प्रदान किया जायेगा।

(ii) आवश्यकतानुसार चिकित्सा पदाधिकारी एवं पारा मेडिकल कर्मियों की बहाली संविदा के आधार पर की जा सकेगी, जिससे चिकित्सालय/अस्पताल का चिकित्सा कार्य सुचारू रूप से संचालित हो पायेगा।

(iii) बीमित व्यक्तियों के औषधि खर्च प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान यथा समय दिया जा सकेगा। (iv) राशि के उपलब्धता के पश्चात्‌ विभिन्न स्तर माध्यमों से जागरूकता उत्पन्न कर योग्य श्रमिकों के निबंधन की प्रक्रिया में तीव्रता लायी जायेगी। इससे अधिकाधिक बिहार राज्य के श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना से जोड़ा जा सकेगा एवं बीमित व्यक्तियों तथा उनके आश्रितों को समुचित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सकेगी।

(v) सोसाईटी के गठन से शीघ्र निर्णय ले कर जनोपयोगी मामले का निति निर्धारण किया जा सकेगा।

बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी की स्थापना हेतु श्रम संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा स्थान, आधारभूत संरचना एवं आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी। बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी का नियमावली और विनियमावली एवं संगम ज्ञापन परिशिष्ट-'क' एवं परिशिष्ट-'ख' के रूप में संलग्न है। बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी के संचालन, प्रबंधन एवं नीतिगत निर्णय हेतु शासी निकाय एवं कार्यकाारिणी समिति का गठन निम्नरूपेण किया जाना है। शासी निकायः

क्रमांक विवरण पदनाम
1. मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार उपाध्यक्ष
3. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
4. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
5. निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाइटी, बिहार मुख्य कार्यपालक पदा०/सदस्य सचिव
6. इ एस आई सी नामिती सदस्य
7. से 9. नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण सदस्य
10. से 12. कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण सदस्य
13. क्षेत्रीय निदेशक, ई एस आई सी, बिहार सदस्य
14. राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, ई एस आई सी, बिहार सदस्य
1 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार अध्यक्ष
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
4 निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा योजना, बिहार मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी/सदस्य सचिव
5 निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बिहार सरकार सदस्य
6 नियोक्ताओं के प्रतिनिधि (1)-शासी निकाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नियोक्ताओें के सदस्यों में से शासी निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा सदस्य
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधि (1)-शासी निकाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कर्मचारियों के सदस्यों में से शासी निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा सदस्य
8 क्षेत्रीय निदेशक, इ एस आई सी, बिहार सदस्य
9 राज्य चिकित्सा पदा०, इ एस आई सी, बिहार सदस्य
3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024

विभाग की सहमति प्राप्त है।

बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी के नियमावली और विनियमावली एवं संगम ज्ञापन के प्रारूप पर दिनांक-15.03.2024 को सम्पन्न राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक की मद संख्या-55 के रूप में स्वीकृति प्राप्त है। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रतिलिपि सरकार के सभी विभागों एवं महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 होगा जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ सोसाईटी का नाम ''सोसाईटी'' कहा जाएगा। सोसाईटी का संचालन क्षेत्र सम्पूर्ण बिहार राज्य होगा। सोसाईटी 5-बी, में अवस्थित इ एस आई स्कीम निदेशालय के परिसर में स्थित होगा। यदि अपेक्षित हो तो उसे राज्य में दूसरी जगह एक या अधिक सहायक कार्यालय या बिक्री केन्द्र (आउटलेट) स्थापित करने की स्वतंत्रता होगी। इस ज्ञापन और इसके अधीन बनी नियमावली के निर्वचन में निम्नलिखित अभिव्यक्तियों से निम्नलिखित अभिप्रेत होंगे जब तक कि ये विषय या संदर्भ के असंगत न हो :

(क) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 जिसके निबंधनों के अनुसार बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी गठित की गयी है और सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 जैसा लागू हो;

(ख) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी;

(ग) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा सोसाईटी के शासी निकाय का

अध्यक्ष;

(घ) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा भारत सरकार; (ङ)

से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा, यथास्थिति शासी निकाय का सीइओ-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या सोसाईटी की कार्यकारिणी समिति;

(च)

से अभिप्रेत होगा कर्मचारी

राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन गठित कर्मचारी राज्य बीमा निगम;

(छ) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा इस विनियमावली द्वारा गठित कार्यकारिणी समिति और यह इन सदस्यों से मिलकर बनेगा जो समय-समय पर शासी निकाय द्वारा यथाविहित वित्तीय सीमाओं के अन्तर्गत संचालन और प्रबंधन निर्णयों को लेने में सशक्त हो;

(ज) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा बिहार कर्मचारी राज्य

बीमा सोसाईटी;

(झ) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा सोसाईटी का शासी निकाय

जो समय-समय पर गठित किया जाय;

() से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा शासी निकाय के सदस्य सहित

सोसाईटी का सदस्य

(ट)

से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा महानिदेशक, इ एस आई सी द्वारा यथा नामनिर्दिष्ट इ एस आई सी का प्रतिनिधि;

(ठ) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा महानिदेशक, इ एस आई सी द्वारा शासी निकाय या कार्यकारिणी समिति के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट व्यक्ति या नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधि;

(ड) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा सोसाईटी के सदस्य के

रूप में नियुक्त राज्य सरकार/केन्द्र सरकार का पदाधिकारी

(ढ) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा शासी निकाय द्वारा विरचित

नियमावली और विनियमावली;

(ण)

से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा। इस संगम ज्ञापन के अधीन विरचित और राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित नियमावली और विनियमावली;

(त) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा बिहार सरकार;

5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024

(थ)

से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा एक लोक न्यास जो राज्य सरकार पर लागू हो;

(द) से अभिप्रेत होगा और इसके अंतर्गत होगा, सोसाईटी का सचिवालय; (ध) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा सरकार के सचिव और इसके अन्तर्गत कोई ऐसा पदाधिकारी होगा जो सचिव, अपर सचिव या आयुक्त का पद ग्रहण करता हो या ऐसा पदाधिकारी जो सचिव के वेतनमान के समतुल्य श्रेणी का हो;

(न) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा सोसाईटी के शासी निकाय का उपाध्यक्ष;

(प) से अभिप्रेत होगा और इसके अन्तर्गत होगा 1ली अप्रैल से प्रारंभ होकर 31 मार्च को समाप्त होनेवाले बारह माह या आयकर अधिनियम, 1960 के अनुसार कोई अन्य वर्ष जो लागू हो। (क) पुलिंग बतानेवाले शब्द में स्त्रीलिंग तथा इसका उल्टा भी शामिल होगा; (ख) एकवचन बतानेवाले शब्द में बहुवचन तथा इसका उल्टा भी शामिल होगा। सोसाईटी, इ एस आई अधिनियम 1948 की धारा 58 (5) के निबंधनों के अनुसार कर्मचारी राज्य बीमा निगम की चिकित्सा लाभ तथा चिकित्सा स्थापन के प्रशासन तथा प्रबंधन जो फिलहाल कर्मचारी राज्य बीमा योजना (स्कीम) के अन्तर्गत है, के लिए प्रबंधकीय और स्वास्थ्य देखभाल निकाय के रूप में कार्य करेगी। सोसाईटी समय-समय पर ई एस आई सी के निदेशों तथा अधीक्षण के अध्यधीन संगम ज्ञापन के अनुसार अन्य सभी उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा। (क) उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सोसाईटी अपने संसाधनों को निम्नलिखित प्रमुख कार्यों को करने में लगाएगी :

क.1 ई एस आई निगम से प्राप्त निधि को प्राप्त करना, खर्च करना, वितरण करना तथा लेखा रखना।

क.2 राज्य सरकार/किसी अन्य स्रोत से निधि प्राप्त करना। क.3 वांछित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य स्थापनाओं का प्रशासन और प्रबंधन। क.4 चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए ऐसे अन्य क्रियाकलापों का जिम्मा लेना जो ई एस आई सी द्वारा समय-समय पर निदेशित और चिह्नित किए जायें। (ख) उपर्युक्त कार्यों के निष्पादन के लिए सोसाईटी :

ख.1 ई एस आई सी या राज्य सरकार के दिशा निर्देशों तथा इसकी वस्तु और सेवा अधिप्राप्ति प्रक्रिया का पालन करेगी।

ख.2 सोसाईटी और इसके सचिवालय के क्रियाकलापों के संचालन के लिए नियमों और उप-विधियों को बनाना और समय-समय पर इनमें परिवर्धन, विखंडन या परिवर्तन करना।

(ग) इ एस आई योजना के लाभार्थियों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए संबंधित नियमों और विनियमों के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (आई टी) संबंधित सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, तकनीकी वेंडर उपाप्त करना ताकि प्रौद्योगिकी में परिवर्तन के कारण उत्पन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

(घ) निधि प्राप्त करना, प्रबंधन करना (अपनी शक्तियों के अन्तर्गत समुचित प्राधिकार द्वारा यथा अनुमोदित कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अन्य कार्यान्वयन भागीदारों को निधि के वितरण सहित) तथा प्राप्त निधि का लेखा रखना।

(ङ) सोसाईटी की निधियों का उपयोग केवल इसके उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और राज्य सरकार के किसी अन्य कार्यक्रमों के लिए इन्हें नहीं लगाया जाएगा।

(च) इ एस आई योजना को पूरा करने और बढ़ाने के लिए वित्तीय और गैर वित्तीय संसाधनों को लगाना।

(छ) बेहतर कार्यान्वयन के लिए निवेश (इनपुट) प्राप्त करने हेतु प्रशिक्षण, बैठक, सम्मेलन, नीति और कार्यक्रम समीक्षा, अध्ययन/सर्वेक्षण, कार्यशाला, नवाचार तथा अन्तर-राज्य विनिमय दौरा, आदि आयोजित करना।

(ज) इ एस आई योजना से संबंधित विषयों के लिए प्रलेखीकरण, जागरूकता बढ़ाने हेतु सभी आवश्यक कार्रवाइयों का जिम्मा लेना।

(झ) सोसाईटी के सचिवालय को स्थापित करना तथा इसके प्रशासन और प्रबंधन को चलाना जो सोसाईटी के कार्यान्वयन के साधन के रूप में कार्य करेगा।6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 () सोसाईटी के सचिवालय में प्रशासनिक, तकनीकी तथा अन्य पदों को सृजित करना या उत्क्रमित करना जो आवश्यक समझा जाय।

(ट) सोसाईटी और इसके सचिवालय के क्रियाकलापों के संचालन के लिए नियमों, उप-विधियों और संचालन मार्गदर्शिका बनाना तथा उन्हें समय-समय पर उपांतरित या परिवर्तित करना जो आवश्यक समझे जायें। 7.1 सोसाईटी के शासी निकाय का पहला सदस्य निम्नलिखित होगा :

(क) मुख्य सचिव, बिहार (ख) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (श्रम), बिहार सरकार (ग) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार (घ) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार (ङ) मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, निदेशक, इ एस आई एस, बिहार (च) इ एस आई सी नामिती (छ) नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण- (गैर सरकारी सदस्य) (ज) कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण- (गैर सरकारी सदस्य) (झ) क्षेत्रीय निदेशक, इ एस आई सी, बिहार () राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, इ एस आई सी, बिहार

7.2 सोसाईटी और शासी निकाय के सरकारी सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाएगी जब वह उस पद पर, जिसके कारण वह सदस्य बना था, नहीं रह जाता है और उस पद का उत्तराधिकारी, ऐसा सदस्य बन जाएगा।

7.3 सोसाईटी के गैर सरकारी सदस्य इ एस आई सी द्वारा नियुक्त किए जायेंगे। नामनिर्दिष्ट सदस्य अपने नामनिर्देशन की तिथि से दो वर्ष के लिए पद धारण करेगा। ऐसे सदस्य अधिकतम दो वर्ष की एक अतिरिक्त पदावधि के लिए पुनः नामनिर्देशन के पात्र होंगे।

7.4 सोसाईटी अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में सदस्यों की नामावली संधारित करेगी और प्रत्येक सदस्य नामावली में हस्ताक्षर करेगा तथा उसमें अपना पदनाम या पेशा तथा पता अंकित करेगा। सदस्य के अधिकारों और विशेषाधिकारों के प्रयोग का हकदार तबतक कोई सदस्य नहीं होगा जबतक वह पूर्व उल्लिखित नामावली में हस्ताक्षर न कर दिया हो।

7.5 शासी निकाय का कोई सदस्य, सदस्य नहीं रह जाएगा यदि वह त्याग पत्र दे, पागल हो जाय, दिवालिया हो जाय या नैतिक अधमता से अंतगर््रस्त दांडिक अपराध में दोषसिद्ध हो या जिस पद के कारण वह सदस्यता ग्रहण किया हो, उससे हटा दिया जाय।

7.6 सदस्यता से त्यागपत्र अपने मुख्य कार्यपालक को स्वयं दिया जाएगा और अध्यक्ष द्वारा इसे स्वीकार करने तक यह प्रभावी नहीं होगा।

7.7 यदि सोसाईटी का कोई सदस्य अपना पता/सम्पर्क ब्योरा परिवर्तित करता है तो वह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को अपना नया पता/सम्पर्क ब्योरा सूचित करेगा जो तब सदस्यों की नामावली में उसका नया पता दर्ज करेगा।

7.8 सोसाईटी या शासी निकाय में कोई रिक्ति ऐसी नियुक्ति करने के लिए हकदार प्राधिकार द्वारा भरी जाएगी।

7.9 शासी निकाय का कोई सदस्य किसी नियत पारिश्रमिक का हकदार नहीं होगा। 7.10 सदस्यता की पंजी सोसाईटी अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में सदस्यों की नामावली संधारित करेगी और प्रत्येक नामनिर्दिष्ट सदस्य नामावली में हस्ताक्षर करेगा तथा उसमें अपना पदनाम या पेशा तथा पता/सम्पर्क ब्योरा अंकित करेगा। ऐसा सदस्य, सदस्य के अधिकारों और विशेषाधिकारों के प्रयोग का हकदार तब तक नहीं होगा जबतक वह यथा उपर्युक्त नामावली में हस्ताक्षर न कर दिया हो। सोसाईटी के निम्नलिखित निकाय और प्राधिकार होंगे :

क. शासी निकाय ख. कार्यकारिणी समिति ग. मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी 9.1 खंड 7.1 में यथानिर्दिष्ट सोसाईटी के सभी सदस्यों से सोसाईटी के शासी निकाय का गठन होगा। ई एस आई सी के पूर्व अनुमोदन के अधीन राज्य सरकार शासी निकाय का पुनर्गठन कर सकेगी।7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 9.2 नियोक्ता और कर्मचारी का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की पदावधि नियुक्ति की तिथि से प्रारंभ होकर दो वर्षों के लिए होगी। नामनिर्दिष्ट सदस्यों की रिक्तियाँ मौजूदा सदस्यों की पदावधि की समाप्ति पर तुरत भरी जाएगी।

9.3 शासी निकाय में न्यूनतम नौ सदस्य और अधिकतम नौ सदस्य होंगे। 9.4 शासी निकाय का निम्नरूप में होगा और इन नियमों के अनुसार वे नये शासी

1 मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार उपाध्यक्ष
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
5 निदेशक, इ एस आई एस, बिहार मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-सदस्य सचिव
6 नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण सदस्य
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण सदस्य
8 क्षेत्रीय निदेशक, इ एस आई सी सदस्य
9 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, इ एस आई सी, बिहार सदस्य
1 मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार उपाध्यक्ष
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
5 निदेशक, इ एस आई एस, बिहार मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-सदस्य सचिव
6 इ एस आई सी नामिती सदस्य
7 से 9 नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण सदस्य
10 से 12 कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण सदस्य
13 क्षेत्रीय निदेशक, इ एस आई सी, बिहार सदस्य
14 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, इ एस आई सी, बिहार सदस्य

9.6 सोसाईटी के कार्यों का प्रबंधन शासी निकाय को सौंपा जाएगा और सोसाईटी की संपत्ति शासी निकाय में निहित होगी और सोसाईटी के कब्जे वाली तथा शासी निकाय को सौंपी गयी/उसमें निहित संपत्ति की मरम्मती और रखरखाव के लिए सोसाईटी जवाबदेह होगी।

9.7 सोसाईटी, सोसाईटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या ऐसे अन्य सदस्य जो संबंधित विषय के प्रसंग में इस अवसर के लिए शासी निकाय द्वारा नियुक्त किए जायें के नाम से वाद चला सकेगा या उस पर वाद चलाया जा सकेेगा। 10.1 शासी निकाय की बैठक प्रत्येक छह माह में कम से कम एक बार ऐसे स्थान और समय पर होगी जो अध्यक्ष विनिश्चित करे। यदि अध्यक्ष शासी निकाय के एक-तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर से बैठक बुलाने की अध्यपेक्षा प्राप्त करता है तो अध्यक्ष यथाशीघ्र ऐसी बैठक ऐसे स्थान पर बुलाएगा जो वह उचित समझे।

10.2 इस प्रयोजनार्थ उपस्थापित कार्यसूची पर विचार करने/अनुमोदित करने के लिए शासी निकाय की बैठक प्रत्येक वर्ष 10 दिसम्बर एवं 10 जून के बाद नहीं आयोजित की जाएगी।

• 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए वित्तीय विवरण (प्राप्ति एवं भुगतान लेखा, आय एवं व्यय लेखा और तुलन पत्र) 31 मई तक तैयार किया जाएगा और 10 जून से पहले8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 इसे शासी निकाय की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। अनुमोदित लेखा, लेखापरीक्षा के लिए नियंत्रक और महालेखापरीक्षक पैनलित चार्टर्ड एकाउंटेंट को भेजी जाएगी।

• लेखापरीक्षा प्रतिवेदन के साथ संपरीक्षित लेखा, शासी निकाय की 10 दिसम्बर से पूर्व आयोजित होनेवाली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।

• चालू वर्ष का बजट प्राक्कलन और अगले वर्ष का बजट प्राक्कलन तथा वार्षिक कार्य योजना 10 दिसम्बर से पूर्व आयोजित होनेवाली शासी निकाय की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।

• अध्यक्ष की अनुमति से लाए जानेवाले अन्य कार्य आय एवं व्यय लेखा तथा बजट प्रस्ताव के साथ बैठक का अनुमोदित कार्यवृत्त विहित तिथि तक ई एस आई सी को समर्पित की जाएगी।

10.3 शासी निकाय की वार्षिक बैठक में निम्नलिखित विषय लाये जायेंगे और निपटाए जायेंगे :

क. सोसाईटी का वार्षिक भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रतिवेदन; ख. पिछले वर्ष का आय और व्यय लेखा और तुलन पत्र; ग. अगले वर्ष के लिए वार्षिक कार्ययोजना; घ. अगले वर्ष का बजट; ङ नीति और परियोजना की समीक्षा, टिप्पणियाँ एवं अनुशंसाएँ, यदि कोई हो; च. कार्यकारिणी समिति और अन्य समितियों के लिए नियुक्तियाँ छ. अध्यक्ष की अनुमति से लाए गए अन्य कार्य।

10.4 शासी निकाय की बैठक बुलाने की प्रत्येक नोटिस में समय, तिथि और स्थान जहाँ ऐसी बैठक होगी, का उल्लेख होगा और शासी निकाय के प्रत्येक सदस्य को बैठक की नियत तिथि से कम से कम दस दिन पूर्व इसे तामील करायी जाएगी। ऐसी नोटिस मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के हस्ताक्षर से निर्गत की जाएगी जिसके साथ बैठक में रखी जानेवाली कार्यसूची संलग्न होगी, परन्तु किसी सदस्य को ऐसी नोटिस देने में आकस्मिक लोप हो जाता है तो ऐसी बैठक में पारित कोई संकल्प अविधिमान्य नहीं होगा।

किसी अत्यावश्यक कार्य की दशा में अध्यक्ष, शासी निकाय की बैठक स्पष्ट सात दिनों की नोटिस पर बुला सकेगा। छह माह में कम से कम एक बैठक आयोजित की जानी चाहिए। तथापि, यदि शासी निकाय या अध्यक्ष सोसाईटी की बेहतर कार्यव्यवस्था या सुधार के कारण अधिक बैठकें बुलाना चाहता हो तो वे सभी सम्बद्ध को सूचित करके ऐसा कर सकेंगे।

10.5 अध्यक्ष शासी निकाय की बैठकों की अध्यक्षता करेगा। उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगा, विफल होने पर शासी निकाय उपस्थित सदस्यों में से किसी एक सदस्य को बैठक के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित करेगा।

10.6 शासी निकाय के सदस्यों के पदों में से भरे हुए सदस्यों के एक तिहाई या कम से कम तीन सदस्यों से शासी निकाय के प्रत्येक बैठक की गणपूर्ति (कोरम) होगी।

10.7 शासी निकाय की बैठक में सभी विवादित प्रश्न मतों के बहुमत से अवधारित किए जायेंगे। शासी निकाय के प्रत्येक सदस्य को एक मत होगा और मतों के बराबर होने की दशा में अध्यक्ष के पास एक निर्णायक मत होगा।

10.8 शासी निकाय की बैठक में किसी संकल्प को लाने का इच्छुक कोई सदस्य इसकी लिखित सूचना क्रमशः ऐसी बैठक की तिथि से कम से कम दस दिन पूर्व तथा अत्यावश्यक बैठक की दशा में सात दिन पूर्व मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित में देगा।

10.9 शासी निकाय के लिए निष्पादन हेतु जो कोई आवश्यक कार्य हो, इसकी वार्षिक बैठक में रखे जाने वाले कार्य को छोड़कर, इसके सभी सदस्यों के बीच परिचालित कर कार्यान्वित किए जा सकेंगे और इस प्रकार परिचालित और सदस्यों के बहुमत के हस्ताक्षर से अनुमोदित कोई संकल्प इतना ही प्रभावी और बाध्यकारी होगा मानो कि ऐसा संकल्प शासी निकाय की बैठक में पारित किया गया था बशर्तें कि शासी निकाय के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ने ऐसे संकल्प पर अपनी सहमति अभिलिखित की हो।

10.10 किसी अत्यावश्यक कार्य की दशा में सोसाईटी का अध्यक्ष शासी निकाय की ओर से निर्णय ले सकेगा। ऐसा निर्णय शासी निकाय की अगली बैठक में अनुसमर्थन के लिए प्रतिवेदित की जाएगी।

10.11 प्रत्येक बैठक की कार्यवाही के कार्यवृत्त की एक प्रति शासी निकाय के सदस्यों को बैठक की समाप्ति के पश्चात्‌ यथासंभव शीघ्र दी जाएगी।9 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 11.1 सोसाईटी के कार्यों पर शासी निकाय का पूरा नियंत्रण होगा और सोसाईटी के उद्देश्यों और लक्ष्यों के संगत सभी शक्तियों, कार्यों तथा कृत्यों के प्रयोग और निष्पादन का उसे प्राधिकार होगा।

11.2 विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना शासी निकाय :

क. इ एस आई अधिनियम, 1948 और/या सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 और/या इ एस आई सी निदेश, यदि कोई हो, में यथाअन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुपालन के अधीन सोसाईटी के कार्यों के प्रबंधन और प्रशासन से संबंधित किसी उप-विधियों को बना सकेगा, संशोधित कर सकेगा या निरसित कर सकेगा।

ख. वार्षिक बजट और वार्षिक कार्य योजना, इसके पश्चात्‌वर्ती परिवर्तन जो मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा इसे समय-समय पर प्रस्तुत किए जाते हैं पर विचार कर सकेगा और इसे ऐसे उपांतरणों के साथ पारित कर सकेगा जो शासी निकाय उचित समझे।

ग. आय के निर्विघ्न प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए और वार्षिक संपरीक्षित लेखा की समीक्षा करने के लिए सोसाईटी की वित्तीय स्थिति का अनुश्रवण कर सकेगा

घ. शासी निकाय के अनुमोदन से दान और अक्षय निधि स्वीकार कर सकेगा। ङ. अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या सोसाईटी के अन्य प्राधिकारियों, जो वह उचित समझे, को अपनी शक्तियाँ प्रत्यायोजित कर सकेगा।

च. ऐसे प्रयोजन और ऐसे निबंधनों पर जो वह उचित समझे, समितियों या उप समितियों को नियुक्त कर सकेगी और इनमें से किसी को विघटित कर सकेगी/हटा सकेगी।

छ. बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी के कार्यों को निष्पादित करने के लिए ई एस आई योजना निदेशालय, बिहार सरकार के अधीन वर्तमान में कार्यरत स्टाफ जिसमें विशेषज्ञ, चिकित्सक पदाधिकारी, नर्सिंग, पैरामेडिकल कर्मचारी और विद्यमान अन्य वर्गों के कर्मचारी शामिल है को अभिनियोजित कर सकेगा।

ज. इ एस आई सी/राज्य सरकार के दिशानिर्देशों तथा इसकी वस्तु और सेवा की अधिप्राप्ति प्रक्रियाओं का अनुपालन कर सकेगा।

झ. इ एस आई अधिनियम 1948 और इसके अधीन बने नियमों और विनियमों के उपबंधों के अनुसार सोसाईटी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सोसाईटी संगम ज्ञापन के खंड 3 में यथा अन्तर्विष्ट कार्यों को निष्पादित करेगी।

. राज्य सरकार के मानकों के अधीन सोसाईटी के कार्यों को संचालित करने में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को सोसाईटी की ओर से ऐसी संविदा करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा जो यह उचित समझे।

ट. सामान्यतया ऐसे सभी कार्यों और चीजों को कर सकेगा जो सोसाईटी के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने में आवश्यक या आनुषंगिक हो। परन्तु इसमें अन्तर्विष्ट कोई बात शासी निकाय को कोई कार्य करने अथवा कोई उपविधि पारित करने जो इसके उपबंधों, शासी निकाय और अन्य प्राधिकारों को एतद्‌द्वारा प्रदत्त शक्तियों के विरूद्ध हो या जो सोसाईटी के उद्देश्यों के असंगत हो, को प्राधिकृत नहीं करेगा। 12.1 अध्यक्ष को शासी निकाय की सभी बैठकों को बुलाने और अध्यक्षता करने की शक्तियाँ होंगी। 12.2 अध्यक्ष स्वयं अथवा उसके लिखित हस्ताक्षर से अध्यपेक्षा द्वारा मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी किसी भी समय शासी निकाय की बैठक बुला सकेगा और ऐसी अध्यपेक्षा की प्राप्ति पर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी तुरत ऐसी बैठक बुलाएगा।

12.3 अध्यक्ष ऐसी शक्तियों का उपभोग करेगा जो शासी निकाय द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जायें। 12.4 अध्यक्ष को सोसाईटी के कार्य और प्रगति की आवधिक रूप से समीक्षा करने और सोसाईटी के कार्यों की जाँच का आदेश देने तथा समीक्षा या जाँच समिति की अनुशंसाओं पर आदेश पारित करने का प्राधिकार होगा।

12.5 आपात स्थिति में सोसाईटी के उद्देश्यों को अग्रसर करने में शासी निकाय की किसी या सभी शक्तियों का प्रयोग करने में इस नियमावली की कोई बात अध्यक्ष को निवारित नहीं करेगी। तथापि, ऐसे अवसरों पर अध्यक्ष द्वारा की गयी कार्रवाई शासी निकाय को अनुसमर्थन के लिए तत्पश्चात्‌ सूचित की जायेगी। 13.1 शासी निकाय एक कार्यकारिणी समिति का गठन करेगा जो शासी निकाय की ओर से कार्याें के करने के लिए जिम्मेदार होगी। यह निर्णय लेगी तथा दैनंदिन निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए शक्तियों का प्रयोग करेगी और शासी निकाय द्वारा यथा अनुमोदित योजनाओं और स्कीमों10 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 को कार्यान्वित करेगी। यह वार्षिक बजट, वार्षिक कार्य योजना और वार्षिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करेगी और उन्हें शासी निकाय को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी। शासी निकाय को कार्यकारिणी समिति के किसी कार्य या शक्ति को बनाने, बदलने, घटाने या बढ़ाने का अधिकार होगा।

1 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार अध्यक्ष
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार सी ई ओ-सह-सदस्य सचिव
5 निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय सदस्य
6 नियोक्ता के प्रतिनिधि (1) - शासी निकाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नियोक्ताओं के सदस्यों में से शासी निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा सदस्य
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधि (1) - शासी निकाय प्रतिनिधित्व करने वाले कर्मचारियों के सदस्यों मे से शासी निकाय ं द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा सदस्य
8 क्षेत्रीय निदेशक, इ एस आई सी, बिहार सदस्य
9 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, इ एस आई सी, बिहार सदस्य

और/या विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर सकेगी।

13.4 कार्यकारिणी समिति के गैर सरकारी सदस्य का कार्यकाल 2 वर्षों का होगा। कार्यकारिणी सदस्य का कार्यकाल शासी निकाय में उसके कार्यकाल के साथ-साथ समाप्त होगा।

13.5 कार्यकारिणी समिति की बैठकें मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा बैठक की तिथि, समय और स्थान, कार्य को विनिर्दिष्ट करने वाली कार्य सूची के साथ लिखित में स्पष्ट सात दिनों की सूचना देते हुए बुलायी जाएगी। बैठक कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष द्वारा एक संक्षिप्त सूचना पर बुलायी जा सकेगी।

13.6 कार्यकारिणी समिति की बैठक 3 महीने में कम से कम एक बार या अधिक बार जो भी आवश्यक हो, होगी।

13.7 कार्यकारिणी समिति की प्रत्येक बैठक में कार्यकारिणी समिति के सदस्यों के भरे गए पदों के एक तिहाई या कम से कम तीन, जो भी अधिक हो, से गणपूर्ति होगी।

13.8 कार्यकारिणी समिति के बैठकों का कार्यवृा शासी निकाय की इसकी अगली बैठक में रखा जाएगा।

13.9 शासी निकाय द्वारा गठित विभिन्न समिति कार्यकारिणी समिति को अपना रिपोर्ट समर्पित करेगी, जो शासी निकाय के अनुमोदन के साथ अपनी अनुशंसा पर निर्णय लेने के लिए सशक्त होगी। 13.10 सचिवालय की तकनीकी/प्रबंधन इकाइयों के कार्यों के पर्यवेक्षण, सचिवालय के माध्यम से कार्यान्वयन को निदेशित करने और देख-रेख करने के लिए सचिवालय के कार्यों की योजना तथा कार्यान्वयन की संपूर्ण जिम्मेदारी सोसाईटी की कार्यकारिणी समिति की होगी। 14.1 सोसाईटी की कार्यान्वयन शाखा के रूप में सेवा देने के लिए सोसाईटी सचिवालय की स्थापना करेगी जिसमें तकनीकी, विाीय तथा प्रबंधन वृािक होंगे।

14.2 सचिवालय में ऐसे सभी तकनीकी/प्रबंधन इकाइयाँ एक साथ होंगी जो संगम ज्ञापन के अनुच्छेद 3 में दिये गये कार्यों के विस्तार को ध्यान में रखते हुए शासी निकाय द्वारा निर्धारित किया जाय।

14.3 सचिवालय के माध्यम से सोसाईटी के कार्यों की योजना बनाने और निष्पादित करने, सोसाईटी की तकनीकी/प्रबंधन इकाइयों के कार्यों के पर्यवेक्षण, सोसाईटी के कार्यान्वयन को निदेशित करने और उसकी निगरानी करने की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सोसाईटी की कार्यकारिणी समिति की होगी।11 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 15.1 सोसाईटी के कार्यान्वयन शाखा के रूप में सचिवालय सोसाईटी की गतिविधियों के दैनिक प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगा। विशेष रूप से, यह सोसाईटी के सभी कृत्यों को करने के लिए जिम्मेदार होगा, जैसा कि संगम ज्ञापन के खंड 3 में बताया गया है।

15.2 सोसाईटी के सचिवालय में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी तथा सोसाईटी के कर्मचारी होंगे जिसमें शासी निकाय के अनुमोदन से काम पर रखे गए विशेषज्ञ और सलाहकार और उनकी कालावधि और पारिश्रमिक शामिल होंगे।

तथापि, सोसाईटी की अपनी श्रमशक्ति नहीं होगी। ई एस आई योजना को क्रियान्वित करने में लगी हुई सभी श्रमशक्ति में संबंधित राज्य सरकार, या पी एस यू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) या केन्द्र सरकार/ई एस आई सी के कर्मचारी होंगे। तथापि, जबतक नियमित कर्मचारियों नहीं आ जाते यह अल्प अवधि के आधार पर संविदा कर्मियों की नियुक्ति को प्राधिकृत/अनुमोदित कर सकता है और सोसाईटी की निधि से भुगतान की अनुमति देगा।

आगे, लेखा, विा, प्रशासन, चिकित्सा तथा संबद्ध सेवाओं के क्षेत्र में अतिरिक्त कार्यभार के लिए श्रमशक्ति सेवाओं को आउटसोर्स किया जा सकेगा।

15.3 चिकित्सा प्रतिष्ठान के चिकित्सा लाभों तथा प्रबंधन के सुचारू वितरण के लिए एक आधार संरचना के रूप में, सचिवालय :

(क) अपने विशेषज्ञों और कर्मचारियों को सोसाईटी के साथ ऐसी संचालन व्यवस्था (बैठने ओर रिपोर्टिंग व्यवस्था सहित) के अधीन करवाएगा जिससे सहयोग बने।

(ख) अपने परिसर में बाहरी विशेषज्ञ की मेजबानी करेगा, तथा (ग) सोसाईटी के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसा संभार तंत्र सहायता प्रदान करेगा जो शासी निकाय द्वारा निर्धारित किया जाय।

15.4 सोसाईटी के कर्मचारी राज्य सरकार या पी एस यू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) या केन्द्र सरकार या ई एस आई सी से मानित प्रतिनियुक्ति पर होते हैं और उनकी पेंशन देयता संबंधित नियुक्ति प्राधिकार पर निर्भर होता है। सोसाईटी के पास कोई कर्मचारी अपने नामावली (रॉल) पर नहीं होता सिवाय सौंपे गये कार्य के पूरा होने तक प्रतिनियुक्ति या अस्थायी संविदा/वचनबंध के। प्रतिनियुक्ति पर सभी कर्मचारी संबंधित राज्य सरकार की सेवा नियमावली और विनियमावली द्वारा शासित किये जाएँगे और तदनुसार वेतन और भो तथा अन्य लाभ जो बिहार के राज्य सरकार के कर्मचारियों पर लागू हैं, प्राप्त करेंगे।

15.5 किसी भी कर्मचारी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ई एस आई सी के कर्मचारी होने के दावे का अधिकार नहीं होगा। उपयुक्त भर्ती प्रक्रिया को छोड़कर सोसाईटी का कोई भी कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से इ एस आई सी द्वारा शामिल नहीं किया जा सकता है। वार्षिक बजट पी आई पी (कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना) मॉडल पर विहित उच्चतम सीमा के अंदर तैयार किया जाना चाहिए। पी आई पी के अनुरूप शासी निकाय द्वारा विधिवत अनुमोदित चालू वर्ष का पुनरीक्षित प्राक्कलन और अगले वर्ष के लिए प्रस्तावित बजट प्राक्कलन ई एस आई निगम को प्रत्येक वर्ष के 10 दिसंबर से पहले प्रस्तुत किया जाएगा।

अधिकथित उच्चतम सीमा से बाहर प्रस्तावित पूँजी या राजस्व प्रकृति का व्यय यदि कोई हो, बजट में इसके समावेशन के लिए पूर्ण औचित्य द्वारा समर्थित होना चाहिए। ई एस आई सी सोसाईटी के कार्य और प्रगति की समीक्षा के लिए एक या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगा तथा उसके मामलों की जाँच कर सकेगा एवं इ एस आई सी द्वारा अनुबंधित तरीके से रिपोर्ट कर सकेगी। किसी भी रिपोर्ट के प्राप्त होने पर : इ एस आई सी संयुक्त रूप से ऐसी कार्रवाई कर सकेगा और ऐसे दिशानिर्देश जारी कर सके जैसा कि रिपोर्ट में निपटाए गए किसी भी मामले के संबंध में वे आवश्यक समझे तथा सोसाईटी ऐसे दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगी। इसके अतिरिक्त, ई एस आई सी किसी भी समय, सोसाईटी के लिए योजना के मामले पर निदेशों या अनुदेशों को जारी कर सकेगा तथा सोसाईटी ऐसे निदेशों तथा अनुदेशों को तुरंत अनुपालन के लिए बाध्य होगा। 18.1 सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 के अनुपालन में सोसाईटी निम्नलिखित उचित लेखा बहियों को रखेगा : क. सभी प्राप्त धनराशि और उसके स्रोत तथा सोसाईटी द्वारा खर्च की गयी समस्त धन राशि एवं उद्देश्य या प्रयोजन जिसके लिए राशि खर्च की गयी है; और

ख. सोसाईटी की आस्तियाँ और दायित्व12 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 18.2 कार्यकारिणी समिति अपने नाम से ऐसे बैंक खातों को रख सकेगी जो शासी निकाय के अनुमोदन से सोसाईटी के लिए आवश्यक हो।

18.3 सोसाईटी का विाीय वर्ष 1ली अप्रैल से 31 मार्च तक होगा। 18.4 सोसाईटी के खाते का अतिशेष प्रति वर्ष 31 मार्च को निकाला जाएगा तथा वार्षिक लेखा तैयार किए जाएँगे।

18.5 सोसाईटी विाीय वर्ष की समाप्ति के छः महीने के अंदर सामान्यतया इसके काम-काज पर वार्षिक प्रतिवेदन और लेखापरीक्षा प्रतिवेदन पर विचार के लिए शासी निकाय की एक बैठक आयोजित करेगी।

18.6 लेखांकन की सटीक प्रणाली का पालन करते हुए ई एस आई सी द्वारा यथाविनिर्दिष्ट तरीके और ढंग तथा प्रारूप में सोसाईटी लेखा का अनुरक्षण करेगी।

18.7 सोसाईटी के काम-काज पर वार्षिक लेखा और प्रतिवेदन में वर्ष के दौरान सोसाईटी की प्रगति और क्रियाकलाप शामिल होते हैं तथा इसकी वैधानिक आवश्यकताओं और अच्छे लेखांकन अभ्यास के अनुरूप एक प्रारूप में संपरीक्षित वार्षिक लेखा शामिल होगा।

18.8 सोसाईटी, सोसाईटी के मामलों के संबंध में अपनी सभी धनराशियों और संपाियों का नियमित लेखा रखवाएगी/सोसाईटी लेखा की लेखापरीक्षा और आंतरिक लेखा परीक्षा के लिए एक पेशेवर कंपनी (फर्म) को कार्य में लगा सकती है।

18.9 कार्यकारिणी समिति निकाय द्वारा प्रतिवर्ष लेखा परीक्षक की नियुक्ति की जाएगी और ऐसे लेखा परीक्षक की पारिश्रमिक तय की जाएगी। लेखा परीक्षक/सी एण्ड ए जी के साथ सूचीबद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट, चार्टर्ड एकाउटेंट के फर्म होंगे।

18.10 सोसाईटी संपरीक्षित लेखा की एक प्रति राज्य सरकार के साथ ई एस आई सी को प्रस्तुत करेगी। 19.1 सोसाईटी का खाता कार्यकारिणी समिति द्वारा अनुमोदित एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैेंक में बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी (बिहार इम्पालॉइज स्टेट इन्श्योरेंस सोसाईटी) के नाम से खोला जाएगा जैसा कि ई एस आई निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए। सभी निधियों का भुगतान नियत बैंक के साथ सोसाईटी के खाते में किया जाएगा तथा सोसाईटी के ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत, चेक/आर टी जी एस/नेफ्ट/इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम के अलावा नहीं निकाली जाएगी जैसा कि कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्धारित किया जाय।

19.2 जब भी ई एस आई निगम सोसाईटी को ऐसा करने का निर्देश देगा सोसाईटी ई-बैंकिंग पर ध्यान देगी।

19.3 सोसाईटी के खाते के संचालन के लिए कार्यकारिणी समिति अन्य वरीय पदाधिकारियों के संयोजन से एक पदाधिकारी को प्राधिकृत करेगी जैसा कि समिति द्वारा निर्णय लिया जाए। 20.1 सोसाईटी ऐसे रिटर्नों और दस्तावेजों को इस ढंग से दाखिल करेगी जो सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 द्वारा आवश्यक हो। 20.2 प्रत्येक वर्ष में एक बार सोसाईटी के शासी निकाय के पदधारियों और सदस्यों की सूची, सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 की धारा के अंतर्गत अपेक्षानुसार सोसाईटी के रजिस्ट्रार के पास दाखिल की जाएगी।

20.3 सोसाईटी प्रति वर्ष लेखापरीक्षा प्रतिवेदन और वार्षिक लेखा के साथ अपना वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी। सोसाईटी की निधियों की सभी धनराशि जिनका निवेश अपेक्षित है सोसाईटी के नाम पर निवेशित किए जाएँगे तथा ये इस ढंग से संचालित होंगे जैसा कि ई एस आई सी की योजनाओं के अनुरूप शासी निकाय/कार्यकारिणी समिति द्वारा अनुमोदित किया जाय। सोसाईटी की वार्षिक रिपोर्ट का प्रारूप तथा वार्षिक लेखा को विचार और अनुमोदन के लिए शासी निकाय के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा। शासी निकाय द्वारा अंतिम रूप से अनुमोदित किए गए वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षित लेखा विवरण शासी निकाय के अध्यक्ष और ई एस आई निगम को विाीय वर्ष की समाप्ति के छः महीने के अंदर अग्रसारित किया जाएगा। 23.1 अधिनियम की धारा 6 के अनुरूप सोसाईटी अपने मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के नाम से वाद चला सकेगा या उसपर वाद चलाया जा सकेगा। कोई भी वाद या कार्यवाही पदाधिकारी की नामपद्धति में किसी बदलाव या अस्थायी रिक्ति के कारण शून्य नहीं होगी।13 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 23.2 कोई भी वाद या कार्यवाही अध्यक्ष या मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या इस निमिा प्राधिकृत पदधारी की किसी रिक्ति या पदधारक में बदलाव के कारण रद्द नहीं होगा।

23.3 किसी वाद या कार्यवाही में सोसाईटी के विरूद्ध प्रत्येक डिक्री या आदेश सोसाईटी की संपाि के विरूद्ध निष्पाद्य होगा और यह सोसाईटी के किसी व्यक्ति या किसी पदधारी की संपाि के विरूद्ध नहीं होगा।

23.4 उपर्युक्त उप खंड 23.3 की कोई बात सोसाईटी के पदधारी को किसी भी आपराधिक दायित्व से छूट नहीं देगी या किसी दंड न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने पर उसके द्वारा भुगतान किए जाने वाले किसी भी जुर्माने के संबंध में सोसाईटी की संपाि से किसी भी योगदान का दावा करने के अधिकार का हकदार नहीं बनाएगी। संगम ज्ञापन और/या इस दस्तावेज के निर्वचन के संबंध में या बनाए जा सकने वाली नियमावली और विनियमावली के संबंध में किसी विवाद के उत्पन्न होने के मामले में निर्णय लेने के लिए विषय इ एस आई सी को भेजा जाएगा और ई एस आई सी का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा। शासी निकाय के सदस्य लोक न्यास के उद्देश्य के लिए अपने पद एवं पदनाम से सोसाईटी के न्यासी भी होंगे और इसलिए, सोसाईटी का राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकरण किया जाना है। कार्यकारिणी समिति के लिए यह विधियुक्त होगा कि फिलहाल इन उपहारों की स्वयं प्रतिपूर्ति करे या सोसाईटी के कार्यान्वयन में या उसके बारे में उसपर उपगत सभी लागत प्रभारों और व्ययों का सोसाईटी की निधि से भुगतान करे और चुकता करे। कार्यकारिणी समिति के लिए यह विधियुक्त होगा कि कार्यकारिणी समिति/शासी निकाय के लिए खातों का निपटारा करना और किसी भी मामले से संबंधित किसी भी कार्यवाही या विवाद, दावे, माँग या चीजों से समझौता करने, शमन करना, त्यागना या मध्यस्थता के लिए निर्देशित करना वैध होगा और ऐसे प्रयोजनों के लिए सोसाईटी को होने वाली किसी भी हानि के लिए जिम्मेदार हुए बिना अन्य सभी चीजें करना वैध होगा। 28.1 सोसाईटी को अपरिवर्तनीय रहना चाहिए, तथापि ई एस आई सी की पूर्व सहमति को प्राप्त करने के बाद सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 13 और 14 के प्रावधानों के अनुसार सोसाईटी का विघटन किया जा सकेगा। शासी निकाय सोसाईटी के विघटन के लिए इस प्रयोजन के लिए बुलाई जानेवाली एक विशेष बैठक में इस आशय का एक प्रस्ताव लाकर संकल्प ले सकेगा।

28.2 सोसाईटी/न्यास अपरिवर्तनीय है, तथापि, यदि कुछ कारण से सोसाईटी का विघटन करना है तो कोई भी आस्ति/संपाि किसी संस्थापक, सेटर, न्यासी, दानकर्ता या सदस्य आदि को नहीं जाएगी, लेकिन अपने दायित्वों को पूरा करने के बाद पूर्त आयुक्त के पूर्व अनुमति से इसे ई एस आई सी को राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम 1950 के प्रावधानों के अनुरूप सौंपी जाएगी। 29.1 सोसाईटी, उद्देश्य जिसके लिए यह स्थापित की गयी है और/या सोसाईटी की नियमावली को परिवर्तित या विस्तार कर सकेगी।

29.2 सोसाईटी के उद्देश्यों और/या नियमावली में किसी परिवर्तन या विस्तार के लिए प्रस्ताव, शासी निकाय के सभी सदस्यों को परिचालित किया जाना चाहिए तथा शासी निकाय की आगामी बैठक या शासी निकाय की विशेष बैठक की लिखित कार्यसूची में शामिल किया जाना चाहिए। 29.3 कोई भी संशोधन प्रभावी नहीं होगा जबतक इस संबंध में प्रस्ताव शासी निकाय के सदस्यों के 3/5 द्वारा पृष्ठांकित नहीं किया गया हो परन्तु ऐसा प्रस्ताव ई एस आई निगम द्वारा लिखित में या तो शासी निकाय की बैठक में या लिखित सूचना के माध्यम से पृष्ठांकित किया गया हो। 29.4 संगम ज्ञापन या नियमावली में कोई भी संशोधन सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 की धारा 12 और 12 क के अंतर्गत अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।14 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 30.1 संविदा 30.1.1 सोसाईटी के लिए एवं उसकी ओर से सभी संविदा एवं अन्य लिखत ई एस आई अधिनियम 1948 तथा सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के प्रावधानों के अधीन होगा, सोसाईटी के नाम पर किया जाना अभिव्यक्त किया जाएगा तथा शासी निकाय द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा निष्पादित किया जाएगा।

30.1.2 बिक्री, खरीद, या किसी भी वस्तु या सामग्री के वितरण के लिए कोई भी अनुबंध सोसाईटी के लिए तथा सोसाईटी के किसी सदस्य की ओर से या उसके संबंधी या कंपनी (फर्म) जिसमें ऐसा सदस्य या उसका संबंधी भागीदार हो, या शेयर धारक हो या कोई अन्य भागीदार, या फर्म का शेयर धारक हो या एक निजी कंपनी हो जिसमें कथित सदस्य एक भागीदार या निदेशक हो, नहीं की जाएगी।

सोसाईटी के लिए और उसकी ओर से सभी संविदा और अन्य लिखत अधिनियम के प्रावधानों के अधीन होगा, सोसाईटी के नाम पर किया जाना अभिव्यक्त किया जाएगा तथा शासी निकाय द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा निष्पादित किया जाएगा।

30.2 समीक्षा के लिए सरकार की शक्ति : इस नियमावली में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी संबंधित राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग/श्रम विभाग सोसाईटी के कार्य और प्रगति की समीक्षा के लिए एक या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगा और उसके मामलों की जाँच कर सकेगा तथा उसपर रिपोर्ट देगा तथा सोसाईटी के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकेगी, जो वह उचित समझें। ऐसे निदेशों का तुरंत अनुपालन करने के लिए सोसाईटी बाध्य होगी।

शासी निकाय के अध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि वह समीक्षा/जाँच में भाग लेने के लिए एक या अधिक व्यक्तियों को नामनिर्दिष्ट करेगा। हम, अनेक व्यक्ति जिनका नाम एवं पता इसके नीचे ग्राहक होने के लिए है, इस संगम ज्ञापन के विलेख और नियमावली एवं विनियमावली के अनुपालन में सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 के अधीन एक सोसाईटी निर्मित करने के इच्छुक है।

1 मुख्य सचिव, बिहार मुख्य सचिवालय, पटना
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम) बिहार सरकार 5-बी, नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800001
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम) (स्वास्थ्य) बिहार सरकार प्रथम तल, विकास भवन, बेली रोड, पटना-800015
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम) (वित्त) बिहार सरकार मुख्य सचिवालय (वित्त विभाग), पटना
5 निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, बिहार 5-बी, नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800001
6 नियोक्ताओं के प्रतिनिधि
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधि
8 क्षेत्रीय निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, पंचदीप भवन, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, पटना-800001
9 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी (ई एस आई सी), बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, पंचदीप भवन, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, पटना-800001

किया है।15 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 इस सोसाईटी का नाम 'बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी'' होगा जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ 'सोसाईटी' कहा जाएगा। यह सोसाईटी 5-बी, नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800014 स्थित इ एस आई योजना निदेशालय के परिसर में स्थित होगा। इसे, जरूरत होने पर, राज्य में कही भी एक या अधिक सहायक कार्यालय या बिक्री केन्द्र स्थापित करने की आजादी होगी। जिन उद्देश्यों के लिए सोसाईटी की स्थापना की गई है वे है :

3.1 इ एस आई अधिनियम, 1948 की धारा 58 (5) के निबंधनों के अनुसार सोसाईटी एक प्रबंधकीय तथा स्वास्थ्य देखभाल निकाय के रूप में प्रशासन तथा चिकित्सा लाभों के प्रबंधन और चिकित्सकीय संस्थाओं के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम की सेवा करेगी जो वर्तमान में निगम तथा .......................... राज्य सरकार के बीच दिनांक ............................... के समझौता ज्ञापन के अनुसार कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अधीन है।

3.2 इ एस आई एस चिकित्सालयों तथा अस्पतालों, शल्य चिकित्सा थियेटर, आपातकालीन सेवा, पुस्तकालय, रसोई, कैंटीन, आराम कक्ष, मनोरंजन, व्यायामशाला, सभा हॉल, आवासीय एवं हॉस्टल भवन जो उपस्कर, फिक्सचर, इण्टरनेट, सूचना तकनीक हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर, टेलीफोन, बिजली, परिवहन, पड़ाव, उद्यान, स्वच्छता ब्लॉक, जलशुद्धि टंकी/भण्डार, पेयजल तथा अन्य सभी उपादेयताओं से युक्त हो, को संचालित एवं संधारित करना जिससे कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना के लाभार्थियों को सुविधा प्रदान की जा सके।

3.3 नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों को ई एस आई योजना के अधीन रजिस्ट्रीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित करना;

3.4 समस्त सुविधाओं एवं उपादेयताओं सहित ई एस आई एस के कार्यान्वयन, अनुश्रवण, मरम्मती और संधारण के लिए नीति सूत्रण;

3.5 इ एस आई एस चिकित्सालयों एवं अस्पतालों के लाभार्थियों को प्रदान की जानेवाली सुविधाओं हेतु नामांकन, प्रभार एवं शुल्कों के लिए नीति सूत्रण। इ एस आई अधिनियम की धारा 73 के अधीन सोसाईटी द्वारा संगृहीत कोई उपयोक्ता प्रभार सोसाईटी द्वारा सम्यक्‌ रूप से परिकलित की जाएगी और इसे ई एस आई सी लेखा में जमा/समायोजित किया जाएगा।

3.6 इ एस आई एस चिकित्सालयों एवं अस्पतालों के निपुण प्रशासन तथा प्रबंधन के लिए समुचित निर्णय लेना, इसलिए इ एस आई एस के दैनंदिन निर्विघ्न काम-काज के लिए आचार संहिता, अनुशासनात्मक कार्रवाइयों, शिकायत निवारण तंत्र तथा अन्य नीतियों का सूत्रण।

3.7 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रशिक्षण देना, व्यवस्था करना तथा सहभागिता करना और इसलिए इ एस आई योजना के मानवशक्ति तथा लाभार्थियों की क्षमता वृद्धि के प्रयोजनार्थ सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, उत्सव गतिविधियाँ और इस प्रकार की अन्य गतिविधियों का आयोजन करना और इसलिए स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विज्ञान, इसके संधारण, विशेषज्ञ कौशलों एवं आधारभूत सुविधा के प्रशासन सृजन के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, तैनाती, शिक्षण की गतिविधियों को हाथ में लेना;

3.8 कर्मचारी राज्य बीमा योजना के लिए संबंधित स्कीमें, योजनाएँ, परियोजनाएँ तथा कार्यक्रम तैयार करना जिससे की केन्द्र एवं राज्य सरकार की स्कीमों से सहायता प्राप्त की जा सके और समुचित प्राधिकार के समक्ष प्रस्ताव समर्पित करना और समय-समय पर निधियों का लाभ उठाना;

3.9 अनुदान, अंशदान, कॉर्पस निधि के रूप में प्राप्त निधियों को प्राप्त एवं वितरित करना या सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 के उपबंधों के अधीन अनुमत वित्तीय सहायता की व्यवस्था करना और इस प्रकार उगाही गयी या इ एस आई एस के पास उपलब्ध निधियों का प्रबंधन, प्रशासन, निवेश तथा पुनर्निवेश;

3.10 इ एस आई स्कीम के उद्देश्यों, इसके प्रबंधन एवं प्रशासन को अग्रसर करने के लिए प्रमुख स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठनों, विश्वविद्यालयों, संस्थानों, निकाय कॉरपोरेट्‌स,16 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 सोसाइटियों, न्यासों, अभिकरणों, संघों और व्यक्तियों के साथ समझौता ज्ञापन, साझेदारी में प्रवेश करना या सुगम करना

3.11 ई एस आई सी की नीतियों एवं मार्गदर्शनों के अनुसार पर्यवेक्षण, अनुश्रवण, समन्वयन एवं प्रतिवेदन ढाँचा स्थापित करना तथा इ एस आई एस चिकित्सालयों तथा अस्पताल परिसर में सृजित शल्य चिकित्सा, संधारण, मरम्मती एवं सुविधाओं के पुनस्र्थापन हेतु काम लेना। 3.12 ई एस आई एस सुविधाओं का सामाजिक लेखा परीक्षा करना या हाथ में लेना और अभिलेखों, पंजियों तथा विभिन्न अन्य सूचनाओं के विश्लेषण, अध्ययन या डाटा सर्वेक्षण, प्रबंधन, प्रशासन और संधारण के माध्यम से परिणामों का मूल्यांकन करना;

3.13 सूचना-पत्र, अध्ययन प्रतिवेदन, सर्वेक्षण एवं विश्लेषण प्रतिवेदन, आई०ई०सी० सामग्री जैसी विवरण पुस्तिका आदि का हार्ड कॉपी और/या सॉफ्ट कॉपी में प्रकाशन का बोझ उठाना और इ एस आई योजना के लाभार्थियों के बीच जागरूकता सृजन के प्रयोजनार्थ सूचना एवं संपर्क गतिविधियाँ करना;

3.14 ऐसी सभी गतिविधियों का समर्थन करना जो शिक्षा, जागरूकता तथा इससे जुड़ी सुविधाओं के माध्यम से कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी के उद्देश्यों को बढ़ावा देती है।

3.15 ऐसे सारे कार्य करना तथा अन्य गतिविधियों को हाथ में लेना और समय-समय पर केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा न्यस्त किसी अन्य कार्य के लिए ऐसी आधारभूत संरचना, संस्थानों और सांगठनिक ढाँचे का सृजन करना;

3.16 इ एस आई सी द्वारा यथा विनिर्दिष्ट किसी अन्य उद्देश्य को कार्यान्वित करना। 3.17 सोसाईटी के उद्देश्यों में सहायता करने वाले सभी अन्य कार्यों एवं चीजों को करना। 4.1 सोसाईटी प्रारंभ में ृ1000/- की निधि से कार्य करेगी। 4.2 सोसाईटी की निधि निम्नांकित से मिलकर बनेगी :

(i) सोसाईटी की निधि; (ii) कर्मचारी राज्य बीमा निगम से सहायता अनुदान या कोई अन्य प्राप्ति; (iii) राज्य सरकार से और या केन्द्र सरकार से सहायता अनुदान; (iv) व्यापार, उद्योग, संस्थाओं एवं व्यक्तियों से अनुदान एवं दान (v) चल परिसंपत्तियों के निपटान से प्राप्तियाँ (vi) कोई अन्य आय जैसे बैंक ब्याज, जमा राशि, निविदा शुल्क तथा अन्य प्रकीर्ण व्यय आदि। 4.3 सोसाईटी शासी निकाय के अनुमोदन के अध्यधीन या तो भारतीय या विदेशी मुद्रा में नगद या वस्तु के रूप में अनुदान, दान, अंशदान, चंदा, वसीयत, शुल्क, ऋण या आकस्मिक निधि प्राप्त करने का हकदार होगा;

4.4 सोसाईटी की निधियों (केन्द्रीय/राज्य एवं अन्य) को किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में रखा जाना चाहिए। निधियों पर प्राप्त ब्याज सोसाईटी के स्रोतों के अंग के रूप में माना जाएगा और यह निधियों पर प्राप्त व्याज का उपयोग अतिरिक्त गतिविधियों पर कर सकेगी, फिर भी कार्यक्रम के अधीन रखी गयी वित्तीय सीमा को पार नहीं करेगी और अतिरिक्त हार्डवेयर/आधारभूत संचरना प्रदान करने के लिए उपयोग कर सकेगी।

4.5 सोसाईटी का सदस्य सचिव ृ1000/- (एक हजार रूपये मात्र) की उक्त राशि रखेगा और अपने कब्जे में रखेगा जो इसमें इसके पश्चात्‌ सोसाईटी निधि कही जाएगी जिस अभिव्यक्ति में घोषित तथा इसमें इसके पश्चात्‌ अन्तर्विष्ट शक्तियों एवं उपबंधों के अध्यधीन शामिल होंगे आगे के योग, उनके सम्परिवर्तन तथा/या उसका तत्समय निवेश और/या उक्त सोसाईटी निधि की परिलब्धियों, ब्याज और या कोई अन्य आमदनी और ऐसे संग्रहों, योगों तथा उसकी अभिवृद्धियों का निवेश या सम्परिवर्तन;

4.6 केन्द्र/राज्य सरकार/इ एस आई सी तथा/या विविध द्विपक्षीय/बहुपक्षीय अभिकरणों जैसे विश्व बैंक; ए०डी०बी०, यूनीसेफ आदि की योजनाओं/कार्यक्रमों में प्रशासनिक, संचालन एवं संधारण व्यय प्रदान किये जाएँगे।

4.7 सोसाईटी की निधि या उसका ब्याज एवं मुनाफा या उसका कोई हिस्सा हमेशा समय-समय पर शासी निकाय द्वारा निर्णीत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक या सरकारी अभिकरण में ''बिहार कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी'' के नाम से रखा जाएगा। सोसाईटी के शासी निकाय के पहले सदस्य निम्नांकित होंगे :

(क) मुख्य सचिव, बिहार17 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024 (ख) अपर सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार (ग) अपर सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार (घ) अपर सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार (ङ) मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी/सदस्य सचिव, बिहार सरकार, निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, बिहार

(च) नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण (गैर सरकारी सदस्य) (छ) कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण (गैर सरकारी सदस्य) (ज) क्षेत्रीय निदेशक, ई एस आई सी, बिहार (झ) राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, ई एस आई सी, बिहार 6.1 सोसाईटी का शासी निकाय पारा 5 में यथा निर्दिष्ट सोसाईटी के सभी सदस्यों से बनता है (इ एस आई सी के पूर्वानुमोदन के अध्यधीन)। राज्य सरकार शासी निकाय का पुनर्गठन कर सकेगी। 6.2 शासी निकाय में न्यूनतम नौ सदस्य और अधिकतम नौ सदस्य होंगे। 6.3 शासी निकाय के निम्नांकित होंगे और सोसाईटी जब तक नियमावली और विनियमावली के अनुसार एक नये शासी निकाय का गठन नहीं कर लेती तब तक वे अपने पद पर बने रहेंगे :

1 मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार उपाध्यक्ष
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार सदस्य
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार सदस्य
5 निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, बिहार मुख्य कार्यपालक पदा०/सदस्य सचिव
6 नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण सदस्य
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण सदस्य
8 क्षेत्रीय निदेशक, ई एस आई सी, बिहार सदस्य
9 राज्य चिकित्सा पदा०, ई एस आई सी, बिहार सदस्य
6 ई एस आई सी नामिती सदस्य
7 से 9 नियोक्ताओं के प्रतिनिधिगण सदस्य
10 से 12 कर्मचारियों के प्रतिनिधिगण सदस्य
13 क्षेत्रीय निदेशक, ई एस आई सी, बिहार सदस्य
14 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, ई एस आई सी, बिहार सदस्य

6.5 सोसाईटी मामलों का प्रबंधन शासी निकाय में न्यस्त होगा तथा सोसाईटी की संपत्ति शासी निकाय में निहित होगी और शासी निकाय में न्यस्त/निहित एवं सोसाईटी के कब्जे में स्थित संपत्तियों की मरम्मती तथा संधारण का उत्तरदायित्व सोसाईटी का होगा।

6.6 सोसाईटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या ऐसे अवसर के लिए शासी निकाय द्वारा नियुक्त, संबंधित मामले से संबंधित ऐसे अन्य सदस्यों द्वारा वाद लाया जा सकेगा या उस पर वाद चलाया जा सकेगा।

7. हम, अनेक व्यक्ति जिनका नाम एवं पता इसके नीेचे ग्राहक होने के लिए है, इस संगम ज्ञापन एवं नियमावली और विनियमावली के विलेख के अनुसरण में सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 तथा राज्य विनिर्दिष्ट लोक न्यास अधिनियम, 1950 के अधीन एक सोसाईटी निर्मित करने के इच्छुक है।18 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 माच(cid:91), 2024

1 मुख्य सचिव, बिहार नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800001
2 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (श्रम), बिहार सरकार 5-बी, नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800001
3 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (स्वास्थ्य), बिहार सरकार प्रथम तल, विकास भवन, बेली रोड, पटना-800015
4 अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (वित्त), बिहार सरकार मुख्य सचिवालय (वित्त विभाग), पटना
5 निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा सोसाईटी, बिहार 5-बी, नियोजन भवन, श्रम संसाधन विभाग, बेली रोड, पटना-800001
6 नियोक्ताओं के प्रतिनिधि गण
7 कर्मचारियों के प्रतिनिधि गण
8 क्षेत्रीय निदेशक, ई एस आई सी, बिहार इ एस आई सी, पंचदीप भवन, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, पटना-800001
9 राज्य चिकित्सा पदाधिकारी, ई एस आई सी, बिहार इ एस आई सी, पंचदीप भवन, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, पटना-800001

किया है। ————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त ।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 289-571+500-डी0ट(cid:547)0पी0 ।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 March 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-03-19.289/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-03-19.289.