(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
1 ;बपकरू287द्ध 1946 ;0द्ध
(0 319) ए ;बपकरू232द्धए 21 ;बपकरू91द्ध 2024
सं॰ 27/आरोप-01-07/2023,सा॰प्र॰-3195
सामान्य प्रषासन विभाग
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संकल्प
22 फरवरी 2024
मो. शमीम अख्तर, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-575/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्लासी, अररिया के पद पर पदस्थापन अवधि के दौरान इंदिरा आवास योजना में अनियमितता बरतने आदि आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1524, दिनांक-12.03.2009 द्वारा इन्हें निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9523, दिनांक-23.09.2009 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। मो अख्तर द्वारा उक्त निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 14911/2010 में दिनांक 14.09.2010 को पारित न्यायादेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1030, दिनांक-27.01.2011 द्वारा मो0 अख्तर को आदेश निर्गत की तिथि से निलंबन से मुक्त किया गया एवं मो0 अख्तर की निलंबन अवधि (दिनांक-12.03.2009 से 26.01.2011 तक) के विनियमन एवं वेतन के संबंध में इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही एवं फौजदारी मुकदमे के फलाफल के आलोक में विचार करने का निर्णय लिया गया।
आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पत्रांक-730 दिनांक-26.03.2011 द्वारा जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें मो0 अख्तर के विरूद्ध जांचाधीन आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त जांच प्रतिवेदन पर सम्यक् विचारोपरांत इन्हें ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन तथा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड पर मो.
अख्तर से अभ्यावेेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा विहित समय के भीतर अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया।;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू91द्ध 2024 2 तदुपरान्त विनिश्चित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 1525 दिनांक 14.09.2011 द्वारा उक्त विनिश्चित दंड पर आयोग की सहमति संसूचित की गयी।
उक्त सहमति के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2765, दिनांक-21.02.2012 द्वारा मो. अख्तर के विरूद्ध 'सेवा से बर्खास्तगी' एवं निलंबन अवधि में जीवन भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने का दंड संसूचित किया गया।
'सेवा से बर्खास्तगी' आदेश के विरूद्ध मो. अख्तर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-723/2013 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-15.03.2016 को पारित आदेश में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2765, दिनांक-21.02.2012 को निरस्त कर दिया गया।
माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-15.03.2016 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् है :-
In the result, this writ application is allowed. The enquiry report, the findings of guilty recorded by the disciplinary authority, dated 26.3.2011 as well as consequential order of punishment dated 21.2.2012, as contained in memo No. 2765 are accordingly quashed.
The petitioner would be reinstated in service forthwith with all consequential benefits
including entire back wages right from the date of dismissal.
सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-723/2013 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-15.03.2016 को पारित आदेश के विरूद्ध सरकार द्वारा एल.पी.ए. संख्या-1653/2016 माननीय उच्च न्यायालय में दायर किया गया।
इसी बीच सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-723/2013 में पारित आदेश का अनुपालन नहीं होने के आधार पर मो.
अख्तर द्वारा एम.जे.सी. संख्या-2743/2016 दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा उक्त अवमाननावाद में दिनांक-15.03.2017 को सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-723/2013 में दिनांक-15.03.2016 के आदेश का अनुपालन करने का निदेश दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय के उक्त न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5371 दिनांक-05.05.2017 द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2765, दिनांक-21.02.2012 से संसूचित दंडादेश, सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं, को निरस्त करते हुए मो. अख्तर को सेवा में पुनः स्थापित किये जाने का निर्णय इस शर्त के साथ लिया गया कि उक्त आदेश एल.पी.ए. संख्या-1653/2016 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के फलाफल से आच्छादित होगा।
माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.01.2023 को पारित न्यायादेश में एल.पी.ए.
संख्या-1653/2016 को रद्द कर दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-19.01.2023 को पारित न्यायादेश के विरूद्ध माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में एस0एल0पी0 (सिविल) डायरी नं0-48195/2023 दायर किया गया, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा दिनांक-05.02.2024 को पारित आदेश निम्नवत् है :-
1. Delay condoned.
2. Heard learned counsel for the petitioners.
3. We are not inclined to interfere with the impugned order passed by the High Court.
4. The Special Leave Petition is, accordingly, dismissed.
5. Pending applications, if any, shall stand disposed of.
;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू91द्ध 2024 3 मो0 अख्तर द्वारा अपने निलंबन अवधि एवं बर्खास्तगी की अवधि को विनियमित कर वेतनादि भुगतान करनेतथा अन्य सभी अनुमान्य लाभ स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों की समीक्षा सक्षम प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा एस0एल0पी0 (सिविल) डायरी नं0-48195/2023 में दिनांक-05.02.2024 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में मो0 अख्तर की निलंबन अवधि दिनांक-12.03.2009 से दिनांक-26.01.2011 एवं बर्खास्तगी अवधि दिनांक-21.02.2012 से दिनांक-04.05.2017 तक की अवधि को सभी प्रयोजनो के लिए विनियमित करने, निलंबन अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए र्काव्य पर माने जाने और उस अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भो का भुगतान किये जाने का निर्णय लिया गया, जिसके लिए वह निलंबित नहीं होने पर हकदार होते। ऐसा भुगतान करने के क्रम में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भाा, अन्य भो एवं सरकारी बकाया का समायोजन कर लिया जायेगा तथा प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर लिया जायेगा।
निर्णयानुसार मो0 अख्तर की निलंबन अवधि दिनांक-12.03.2009 से दिनांक-26.01.2011 एवं बर्खास्तगी अवधि दिनांक-21.02.2012 से दिनांक-04.05.2017 तक की सेवा को सभी प्रयोजनो के लिए विनियमित किया जाता है। उक्त निलंबन अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए र्काव्य पर मानी जायेगी और उस अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भो का भुगतान किया जायेगा, जिसके लिए वह निलंबित नहीं होने पर हकदार होते। ऐसा भुगतान करने के क्रम में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भाा, अन्य भो एवं सरकारी बकाया का समायोजन कर लिया जायेगा तथा प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर लिया जायेगा।