(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
1 ;बपकरू287द्ध 1946 ;0द्ध
(0 333) ए ;बपकरू232द्धए 21 ;बपकरू91द्ध 2024
सामान्य प्रषासन विभाग
————
आदेश
5 जनवरी 2024
सं0 7/मुक0-08-57/2023सा0प्र0/437—बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-8/वि0प्र0-02-10/ 2019(40)लो0से0आ0/गो0 दिनांक 14.11.2022 द्वारा 31वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा (वि0सं0-04/2020) के आधार पर अनारक्षित कोटि के रोहित कुमार त्रिपाठी, अनुक्रमांक-121995, संयुक्त मेधा क्रमांक-35 की अनुषंसा असैनिक न्यायाधीष (कनीय कोटि) के पद पर नियुक्ति हेतु की गयी। उक्त अनुषंसा के साथ श्री त्रिपाठी के विरूद्ध अपराधिक मामले के दर्ज रहने की सूचना भी संलग्न की गयी थी, इनके विरूद्ध आरोप की स्थिति निम्नवत् हैः- श्री रोहित कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध उनकी भाभी शालिनी तिवारी की दिनांक 20.04.2022 को हुई हत्या को लेकर उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ उनके विरूद्ध ''दहेज हत्या'' से संबंधित खगौल थाना कांड संख्या-109/2022 धारा-304बी/34 IPC के तहत दर्ज रहने की सूचना प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त इनके विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय एवं विभाग को प्राप्त परिवाद पत्रों की विवरणी निम्नवत् हैः-
(i) बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त अनुषंसा में श्री ओम प्रकाष तिवारी द्वारा दिनांक 18.08.2022 एवं दिनांक 07.11.2022 के हस्ताक्षर से परिवाद/आवेदन दिया गया है, जिसमें श्री रोहित कुमार त्रिपाठी पर दहेज हत्या का आरोप लगाया गया। (ii) श्री ओम प्रकाष तिवारी, 27 बी, न्यू चाणक्यापुरी, राजा बाजार, पटना द्वारा दिनांक 07.11.2022 को मुख्य सचिव, बिहार को सम्बोधित परिवाद पत्र, जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री शालिनी तिवारी की दहेज हत्या में अनुषंसित अभ्यर्थी रोहित त्रिपाठी के विरुद्ध खगौल थाना कांड संख्या-109/2022, धारा-304बी/34 IPC समर्पित किया गया।
(iii) महानिबंधक, उच्च न्यायालय, पटना के पत्रांक 1318-1319 दिनांक 07.01.2023 एवं पत्रांक 77637-77638 दिनांक 22.12.2022 द्वारा शषि देवी एवं ओम प्रकाष तिवारी का उक्त सदृष्य मामले का प्राप्त परिवाद पत्र।
श्री त्रिपाठी के विरूद्ध उक्त अपराधिक मामले की अद्यतन स्थिति निम्नवत् हैः-;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू91द्ध 2024 2 विभाग द्वारा परिवाद पत्रों को वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना को भेजते हुए प्रतिवेदन की मांग की गयी। पुलिस उप-महानिरीक्षक-सह-वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना के पत्रांक 552 दिनांक 04.02.2023 द्वारा प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उल्लेख है कि-
''खगौल थाना कांड संख्या-109/2022 दिनांक 21.04.2022 की धारा-304बी/34 IPC वादी ओम प्रकाष तिवारी द्वारा उनकी पुत्री शालिनी तिवारी की मृत्यु कारित का आरोप अंकित हुआ है ।
उक्त दर्ज F.I.R. पर अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण में धारा-304बी/34 IPC के तहत प्राथमिक अभियुक्त-1. पति-राहुल कुमार त्रिपाठी, 2. देवर-रोहित त्रिपाठी, 3. ससुर-विमल कुमार त्रिपाठी एवं 4. सास-ममता देवी के विरूद्ध सत्य मानकर अनुसंधान किया जाना श्रेयस्कर पाया गया।
(क) वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना के प्रतिवेदन के आलोक में श्री रोहित कुमार त्रिपाठी की नियुक्ति तत्काल रोके रखे जाने के संबंध मे विद्वान महाधिवक्ता, बिहार का परामर्श प्राप्त किया गया तथा उक्त अभ्यर्थी की नियुक्ति तत्काल स्थगित रखने का निर्णय विभागीय आदेश संख्या 9135 दिनांक 16.05.2023 द्वारा लिया गया।
(ख) पुनः वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना से अद्यतन प्रतिवेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा निम्नांकित प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया हैः-
''प्राथमिकी अभियुक्त के विरूद्ध धारा-304(बी)/34 भा0दं0वि0 के तहत सत्य पाया गया है तथा अभ्यर्थी रोहित कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध माननीय न्यायालय में आरोप पत्र संख्या-191/2023 दिनांक 26.05.2023 समर्पित किया गया है। वर्तमान में पूरक अनुसंधान जारी है।''
इस प्रकार श्री रोहित कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध उक्त मामले में अनुसंधान के पश्चात् सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। अपराधिक वाद दर्ज रहने के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेष समय-समय पर पारित किये गये हैं, न्यायादेष का कार्यकारी अंष निम्नवत् है।
➢ In a judgement reported as (1995) 5 SCC 457 (C). Ravichandran Iyer vs. Justice A.M. Bhattacharjee and others)
"it has been held by the Supreme W.P. No. 5865/2016 Court that Judicial officer is essentially a public trust. Society is, therefore, entitled to expect that a Judge must be a man of high integrity, honesty and required to have moral vigour, ethical firmness and impervious to corrupt or venial influences.
…..... It is, therefore, a basic requirement that a Judge's official and 2onourab conduct be free from impropriety; the same must be in tune with the highest standard of propriety and probity."
➢ In Shankarasan Dash v. Union of India, JT 1991 (3) SCC 47 एवं Punjab Electricity Board v. Malkiyat Singh, Civil Appeal no. 6100 of 1999 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के Constitution bench ने निम्नांकित निर्णय दिया हैः-
"…….It is settled law that mere inclusion of a name of a candidate in the select list does not confirm on such candidate any vested right to get an order of appointment. The position is made clear in para 7 of the Constituion Bench Judgement of this court.
➢ In Commissioner of Police & Ors. Vs. Mehar Singh Civil Appeal no. 4842 of 2013 The Apex Court held that:-
31. In the ultimate analysis, we are of the view that the opinion formed by the Screening Committee in both these cases which is endorsed by the Deputy Commissioner of Police (Recruitment), Delhi, that both the respondents are not suitable for being appointed in the Delhi Police Force does not merit any interference. It;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू91द्ध 2024 3 is legally sustainable. The Tribunal and the High Court, in our view, errored in setting aside the order of cancellation of the respondents' candidature. In the circumstances, the appeals are allowed. The orders of the Delhi High Court impugned in both the appeals are set aside. The cancellation of candidature of the respondents – Mehar Singh and Shani Kumar is upheld.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-3419/2020 में दिनांक 13.10.2020 को पारित न्यायादेष में मध्य प्रदेष राज्य में अपीलार्थी का ADJ Direct from Bar Examination में चयन होने के बाद चयन समिति ने अभ्यर्थी के विरूद्ध आपराधिक मामला 498ए/406/34 भा0दं0वि0 की दफा (दहेज उत्पीड़न आदि) के तहत दर्ज रहने की स्थिति में उनके अभ्यर्थित्व को चयन समिति द्वारा रद्द किये जाने के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, मध्य प्रदेष के दिनांक 06.01.2020 को पारित आदेष को बरकरार रखते हुए उनके अपील को खारिज कर दिया गया।
"13. It is thus well settled that acquittal in a criminal case does not automatically entitle him for appointment to the post. Still it is open to the employer to consider the antecedents and examine whether he is suitable for appointment to the post. From the observations of this Court in Mehar Singh, 2013 (7) SCC 685 and Parvez Khan, 2015 (2) SCC 591 cases, it is clear that a candidate to be recruited to the police service must be of impeccable character and integrity. A person having criminal antecedents will not fit in this category. Even if he is acquitted or discharged, it cannot be presumed that he was 3 onourably acquitted/completely exonerated. The decision of the Screening Committee must be taken as final unless it is shown to be malafide. The Screening Committee also must be alive to the importance of the trust reposed in it and must examine the candidate with utmost character.
28. We, thus, are of the view that the High Court did not commit any error in dismissing the writ petition. The appellant was not entitled for any relief in the writ petition. In the result, while dismissing this appeal we observe that stigma, if any, of the criminal case lodged against appellant under Section 498A/406/34 IPC is washed out due to the acquittal of the appellant vide judgement dated 18.09.2019.
श्री रोहित कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध आरोप पत्र दायर होने के बाद उनके अभ्यर्थित्व को समाप्त किये जाने के संबंध में विधिक परामर्श प्राप्त किया गया।
श्री रोहित कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध दहेज हत्या के जघन्य अपराध में आरोपी बनाये जाने, माननीय सक्षम न्यायालय में उनके विरूद्ध आरोप पत्र समर्पित किये जाने की स्थिति में तथा उनके अभ्यर्थित्व को रद्द किये जाने के बिंदु पर विधिक परामर्ष के आलोक में उनके अभ्यर्थित्व को रद्द किये जाने के बिंदु पर विधिक परामर्ष के आलोक में उनके अभ्यर्थित्व को रद्द किये जाने हेतु बिहार लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया गया। श्री रोहित कुमार त्रिपाठी की अनुषंसा रद्द किये जाने की सहमति आयोग द्वारा संसूचित की गयी है।
श्री रोहित कुमार त्रिपाठी की नियुक्ति को रद्द किये जाने पर आयोग की सहमति दी गयी है। अतएव बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-8/वि0प्र0-02-10/ 2019(40)लो0से0आ0/गो0 दिनांक 14.11.2022 द्वारा 31वीं बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि) के पद पर नियुक्ति हेतु अनुशंसित अनारक्षित कोटि के श्री रोहित कुमार त्रिपाठी, संयुक्त मेधा क्रमांक-35, अनुक्रमांक-121995 के विरूद्ध खगौल थाना कांड संख्या-109/2022 धारा-304बी/34 IPC के तहत दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराध में आरोपी बनाये जाने, वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना द्वारा संसूचित माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किये जाने;बपकरू464द्ध ;द्ध 21 ;बपकरू91द्ध 2024 4 तथा बिहार लोक सेवा आयोग से उनकी अनुशंसा रद्द किये जाने पर सषर्त सहमति के आलोक में श्री रोहित कुमार त्रिपाठी की अनुषंसा को रद्द किया जाता है।
आदेष से, षालिग्राम पाण्डेय, सरकार के अवर सचिव।