Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 April 2024

Published 17 April 2024

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-04-17.16
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 28 1946 (श0) सं(cid:201)या 16 पटना, बुधवार, ————————

17 2024 (ई0) विषय-सूची i`"B भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-32 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

---

भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 33-33 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 34-92 पूरक

---

पूरक-क 93-942 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत

सूचनाएं। —————

एस॰ओ॰ 160, दिनांक 17 अप्रील 2024 बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के भंग होने के पश्चात्‌ बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2024 (बिहार अधिनियम-07/2024) की धारा 3 की उपधारा (7क)(2) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग के मामलों के प्रबंधन हेतु प्रधान सचिव, श्रम संसाधन विभाग को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। (सं0 1/CLC-10-03/2024, श्र॰सं॰-1953) बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव। बिहार विधन सभा सचिवालय

-------

अध्सिूचनाएं

12 मार्च 2024

सं0 02स्था0-98/2023-913/वि0स0।--श्री शिवांशु आनंद, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-459(22), दिनांक-23.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248 (क) के अनुसरण में दिनांक-18.12.2023 से 05.01.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है। साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-06.01.2024 तथा 07.01.2024 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-53 दिनों का अवकाश शेष है।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

12 मार्च 2024

सं0 02स्था0-240/2021-908/वि0स0।--श्रीमती पूनम कुमारी, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-442(22), दिनांक-22.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248(क) के अनुसरण में दिनांक-22.01.2024 से 25.01.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है। साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-26.01.2024 से 28.01.2024 तक सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-59 दिनों का अवकाश शेष है।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

7 मार्च 2024

सं0 02स्था0-215/2021-878/वि0स0।--श्री पूर्णेंदु शेखर दास, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-441(22), दिनांक-22.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248 (क) के अनुसरण में दिनांक-05.02.2024 से 09.02.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-10.02.2024 तथा 11.02.2024 को सार्वजनिक अवकाश3 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-72 दिनों का अवकाश शेष है।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

--------

7 मार्च 2024

सं0 02स्था0-59/2022-873/वि0स0।--श्री सुधांशु राय, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-447(22), दिनांक-22.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248(क) के अनुसरण में दिनांक-29.01.2024 से 09.02.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है। साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-10.02.2024 तथा 11.02.2024 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-64 दिनों का अवकाश शेष है।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

7 मार्च 2024

सं0 02स्था0-218/2021-863/वि0स0।--श्रीमती कनुप्रिया मिश्रा, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-443(22), दिनांक-22.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248(क) के अनुसरण में दिनांक-08.01.2024 से 24.01.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है। इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-49 दिनों का अवकाश शेष है।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

7 मार्च 2024

सं0 02स्था0-62/2022-858/वि0स0।--सुश्री नेहा भारती, प्रशाखा पदाधिकारी, बिहार विधान सभा सचिवालय, पटना को वित्त (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार सरकार, पटना के पत्रांक-429(22), दिनांक-21.02.2024 तथा बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248(क) के अनुसरण में दिनांक-03.01.2024 से 05.01.2024 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है। साथ ही उक्त संहिता के नियम-159 के तहत दिनांक-06.01.2024 एवं 07.01.2024 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है । इसके पश्चात्‌ इनके उपार्जित अवकाश कोष में कुल-52 दिनों का अवकाश शेष है ।

आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

4 मार्च 2024

सं0 1स्था0-31/2024-798/वि0स0।--मंत्रिामंडल ;संसदीय कार्यद्ध सचिवालय विभाग की अध्सिूचना सं-928, दिनांक 23.09.2006 द्वारा अध्सिूचित बिहार विधन मंडल के पदाध्किारी ;वेतन एवं भत्तेद्ध नियमावली, 2006 के नियम-3;खद्ध सहपठित बिहार के मंत्राी ;वेतन एवं भत्तेद्ध नियमावली-2006 के निजी कर्मियों के सुविध संबंध्ति नियम में दिये गये अनुसूची-1 के नोट-III में निहित प्रावधन के अध्ीन माननीय उपाध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आप्त सचिव ;वाह्‌यद्ध के पद पर श्री पुलेन्दु कुमार, पिता-स्व महावीर प्रसाद यादव, ग्राम-डुमरैल, पोस्टथाना-पुरैनी, जिला-मध्ेपुरा, पिन-852116 को वेतन स्तर-9 में अंके-53,100/- प्रतिमाह नियम वेतन एवं समय-समय पर स्वीकृत अन्य अनुमान्य भत्ता के साथ दिनांक 23.02.2024 के पूर्वाह्‌न से वर्त्तमान माननीय उपाध्यक्ष महोदय के कार्यकाल या उनके प्रसाद पर्यान्त जो भी पहले हो, तक अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाता है । आदेश से, संजय कुमार, अवर सचिव।

-------

1 मार्च 2024

सं0 शून्यकाल-14/2020-240/विस।--सभा सचिवालय के पूर्व में निर्गत अध्सिूचना संख्या-851, दिनांक-03.04.2023 के क्रम में सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने श्री रत्नेश सादा, सविस, क्षेत्रा सं-74, श्रीमती अनिता देवी, सविस, क्षेत्रा सं-211 एवं श्रीमती शीला कुमारी, सविस, क्षेत्रा4 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं-39 को अध्सिूचना निर्गत होने की तिथि से वित्तीय वर्ष 2023-2024 की शेष अवध् िके लिए गठित बिहार विधन सभा की शून्यकाल समिति का सदस्य मनोनीत किया है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

राज कुमार, सचिव।

-------

1 मार्च 2024

सं0 बिविविस-01/2020-97/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि सभा सचिवालय के अध्सिूचना संख्या-575, दिनांक-03.04.2023 के क्रम में माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने श्री ललित कुमार यादव, सविस ;क्षेत्रा संख्या-82, दरभंगा ग्रामीणद्ध, श्री चन्द्रशेखर, सविस ;क्षेत्रा संख्या-73, मध्ेपुराद्ध, श्री जितेन्द्र कुमार राय, सविस ;क्षेत्रा संख्या-117, मढ़ौराद्ध एवं श्री सुरेन्द्र राम, सविस ;क्षेत्रा संख्या-119, गरखा ;अजाद्धद्ध को वर्ष 2023-2024 के लिए गठित बिहार विधन सभा की बिहार विरासत विकास समिति की शेष अवध् िके लिए सदस्य मनोनीत किया है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

राज कुमार, सचिव। अधिसूचना 29 जनवरी 2024

सं॰ सि॰वि॰वि॰ (स्था॰)-02-28/2006 (खण्ड)-21--कै॰ निर्मला पुन्जाराम खल्ले (Capt. Nirmala Punjaram Khale)को सिविल विमानन निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना अन्तर्गत बिहार उड्डयन संस्थान में ग्राउण्ड इन्स्ट्रक्टर के पद पर संविदा के आधार पर एक वर्ष के लिए 89,000/- (नवासी हजार रुपये) मात्र प्रतिमाह नियतमानदेय पर योगदान की तिथि से नियोजित किया जाता है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प संख्या-2401, दिनांक 18.07.2007 के कंडिका-10 के आलोक में कै॰ निर्मला पुन्जाराम खल्ले (Capt. Nirmala Punjaram Khale) सरकारी सेवक नहीं मानी जायेंगी और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगी तथा सरकारी सेवा में नियमितीकरण का कोई दावा नहीं करेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

संयुक्त सचिव। -------

सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-04/2024-137--श्री लाल कृष्ण राय, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, खगड़िया की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से विभागीय अधिसूचना संख्या-5321 दिनांक-25.06.2019 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा के अंतर्गत परीक्ष्यमान प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति की गई थी तथा विभागीय अधिसूचना संख्या-122 दिनांक-17.05.2022 द्वारा श्री राय की सेवा सम्पुष्टि की गयी है। 2. श्री राय को बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा के पद हेतु अनुशंसित किया गया है। समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या-676 दिनांक-08.02.2024 द्वारा अस्थायी रूप से नियुक्त करते हुए सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, सीतामढ़ी (वेतन स्तर-9) के पद पर अधिसूचना निर्गत की तिथि से 15 दिनों के अन्दर जिला मुख्यालय में योगदान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। उक्त के आलोक में श्री राय द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा से 'ग्रहणाधिकार' प्रदान करते हुए विरमित करने का अनुरोध किया गया है। 3. विभागीय आदेश ज्ञापांक-30 दिनांक-24.01.2024 द्वारा श्री लाल कृष्ण राय को बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गयी है।5 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 4. अतः श्री लाल कृष्ण राय, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, खगड़िया को बिहार सेवा संहिता के नियम 28, 69, 70 (क) (2), 70 (ख) एवं 71 (क) के आलोक में सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, सीतामढ़ी (वेतन स्तर-9) के पद पर योगदान करने हेतु 'ग्रहणाधिकार' प्रदान करते हुए तकनीकी त्याग पत्र स्वीकृत किया जाता है तथा पदभार त्याग की तिथि से विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

अपर सचिव-सह-निदेशक (प्र0)। सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-05/2024-138--श्रीमती पिंकी कुमारी, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, समस्तीपुर की 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से विभागीय अधिसूचना संख्या-10333 दिनांक-16.12.2021 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा के अंतर्गत परीक्ष्यमान प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति की गई थी। 2. श्रीमती कुमारी को बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार पुलिस सेवा (पुलिस उपाधीक्षक) हेतु अनुशंसित किया गया है। गृह विभाग आरक्षी शाखा के अधिसूचना संख्या-2215 दिनांक-21.02.2024 द्वारा परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक (वेतन स्तर-9) के पद पर अधिसूचना निर्गत की तिथि से 15 दिनों के अन्दर पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना में योगदान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। उक्त के आलोक में श्रीमती कुमारी द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा से विरमित करने का अनुरोध किया गया है। 3. विभागीय आदेश ज्ञापांक-356 दिनांक-06.12.2022 द्वारा श्रीमती पिंकी कुमारी को बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गयी है। 4. अतः श्रीमती पिंकी कुमारी, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, समस्तीपुर को परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक (वेतन स्तर-9) के पद पर योगदान करने हेतु पदभार त्याग की तिथि से विरमित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

अपर सचिव-सह-निदेशक (प्र0)। सेवा में, महालेखाकार (ले0 एवं ह0) वीरचन्द पटेल पथ, बिहार, पटना।

पटना, दिनांक

विषयः-आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण पाने, विधि-व्यवस्था के संधारण एवं सुरक्षा हेतु राज्य के विभिन्न जिलों में अधिसूचित/गैर अधिसूचित किन्तु कार्यरत राज्य के 84 (चौरासी) ओ0पी0 को थाना के रूप में एवं 24 (चौबीस) रेल पी0पी0 को रेल थाना में उत्क्रमित करने की स्वीकृति। आदेषः- स्वीकृत।

वर्तमान में राज्य के विभिन्न जिलों में अधिसूचित/गैर अधिसूचित ओ0पी0 कार्यरत हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र, अपराध नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था के दृष्टिकोण से यह ओ0पी0 एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करते हैं। सभी ओ0पी0 अपने पैतृक थाना के अन्तर्गत कार्य करते हैं, जिसके कारण ओ0पी0 स्थायी एवं स्वतंत्र रूप से कार्य करने में असमर्थ होते हैं। ओ0पी0 की प्राथमिकी उनके पैतृक थाना में दर्ज होती है। ओ0पी0 क्षेत्र में विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने पर पैतृक थाना से दूरी होने के कारण उस क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल को पहुँचने में काफी समय लग जाता है, जिससे अपराधियों पर अंकुष रखने एवं अपराध नियंत्रण में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। अपराधियों एवं अपराध पर नियंत्रण, विधि-व्यवस्था के संधारण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से अधिसूचित/गैर अधिसूचित किन्तु कार्यरत ओ0पी0 को स्थायी एवं स्वतंत्र रूप से कार्य करने हेतु थाना के रूप में उत्क्रमित किया जा रहा है।

2. अतएव राज्य के विभिन्न जिलों में अधिसूचित/गैर अधिसूचित किन्तु कार्यरत राज्य के 84 (चौरासी) ओ0पी0 को

क्र0 जिला का नाम थाना का नाम क्र0 जिला का नाम थाना का नाम
1 बेगूसराय एफ0सी0आई0 9 गया मउ
2 मंझौल 10 चेरकी
3 गरहरा 11 मोहनपुर
4 चकिया 12 बहेरा
5 खगड़िया मुफ्फसिल 13 नवादा मेसकौर
6 चित्रगुप्त नगर 14 औरंगाबाद बड़ेम
7 जहानाबाद सिकरिया
6 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
8 भेलावर
15 अररिया कुआंड़ी 49 रोहतास डालमियानगर
16 महलगांव 50 बड़हरी
17 मदनपुर 51 भानस
18 बसमतिया 52 धर्मपुरा
19 सिमराहा 53 दरिगाँव
20 बैरगाछी 54 परसथुआ
21 कटिहार सुधानी 55 अमझौर
22 सेमापुर 56 इन्द्रपुरी
23 भागलपुर बबरगंज 57 करबंदिया
24 बरारी 58 कैमूर बेलॉव
25 नवगछिया कदवा 59 सोनहन
26 रंगरा 60 नुआँव
27 झंडापुर 61 बक्सर चक्की
28 बांका आनंदपुर 62 नया भोजपुर
29 खेसर 63 वासुदेवा
30 दरभंगा भालपट्‌टी 64 नैनीजोर
31 सोनकी 65 तिलक राय का हाता
32 मब्बी 66 कृष्णाब्रहम
33 पतौर 67 रामदास राय का डेरा
34 बे ं ता 68 सोनवर्षा
35 कोतवाली 69 भोजपुर ख्वासपुर
36 तिलकेश्वर 70 बहोरनपुर
37 सारण नगरा 71 करनामेपुर
38 सहरसा डरहार 72 पूर्वी चम्पारण पचपकड़ी
39 कनरिया 73 नकरदेई
40 पस्तपार 74 हरैया
41 पटना मैनपुरा 75 जितना
42 गाँधीघाट 76 झरोखर
43 नालंदा चेरो 77 भोपतपुर
44 पावापुरी 78 मलाही
45 पीर बिगहा 79 शिकारगंज
46 कतरीसराय 80 महुआवा
47 भागन बिगहा 81 बिजधरी
48 बेना 82 पश्चिमी चम्पारण बानूछापर
83 वैषाली बेलसर
84 सीतामढ़ी मेहसौल
क्र0 रेल जिला का नाम रेल थाना का नाम क्र0 रेल जिला का नाम रेल थाना का नाम
1 जमालपुर बड़हिया 13 पटना पटना साहिब
2 जमुई 14 हाथीदह
3 शेखपुरा 15 बाढ़
4 नवादा 16 तारेगना
5 कटिहार मनिहारी 17 डिहरी ऑन-सोन
6 बनमनखी 18 मुजफ्फरपुर हाजीपुर
7 महेशखुँट 19 थावे
8 ठाकुरगंज 20 छपरा कचहरी
9 पटना फतुहा 21 हसनपुर
10 राजगीर 22 बेतिया
11 भभुआ 23 जयनगर
7 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
12 बिहटा 24 सीतामढी

लघुषीर्ष-109-जिला पुलिस, उपषीर्ष-0001-जिला कार्यकारी दल के विभिन्न विषय शीर्षो एवं विपत्र कोड-22-2055.00.109. 0001 के अंतर्गत उपबंधित राषि से विकलनीय होगा। इसके निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक होंगे तथा राशि की निकासी संबंधित जिला कोषागार से की जाएगी।

5. नवसृजित थानों के लिए अतिरिक्त पदों के सृजन एवं क्षेत्राधिकार निर्धारण की कार्रवाई अलग से की जायेगी। 6. नवसृजित थानों के सृजन में मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति प्राप्त है। 7. स्वीकृत्यादेष पर विभागीय संयुक्त आयुक्त-सह-वरीय आंतरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति प्राप्त है।

विश्वासभाजन, विनोद कुमार दास, उप-सचिव। लघु जल संसाधन विभाग ------- अधिसूचनाएं 13 फरवरी 2024

सं0 प्र0-01/ल0ज0सं0/स्था0(राज0)-02/2024-822--वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-7566 दिनांक-14.07.2010 द्वारा बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त ''रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना, 2010'' दिनांक-01-01-2009 से प्रभावी किया गया है । इस योजना के प्रावधान के अनुसार 10/20/30 वर्षों की नियमित सेवा के उपरांत तीन वित्तीय उन्नयन वेतन बैंड/ग्रेड वेतन के सोपान में अनुमान्य है । 2. उक्त प्रावधानों के आलोक में लघु जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा के निम्नलिखित पदाधिकारी को नियमित एवं संतोषजनक सेवा पूरी करने पर कालावधि/दंड के कुप्रभाव के अनुसार उनके नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित वेतन बैंड एवं ग्रेड वेतन/वेतन स्तर में अंकित तिथि से वितीय उन्नयन(एम0ए0सी0पी0) की स्वीकृति प्रदान की जाती है-

क्र0 सं0 पदा0 का नाम/पदनाम/आई0 डी0/गृह जिला/जल सं0 वि0 का वरीयता क्रमांक/ल0ज0सं0 विभाग का संयुक्त वरीयता क्रमांक जन्म तिथि/ प्रथम योगदान की तिथि/ से0नि0 तिथि स्वीकृत वितीय उन्नयन MACP) वेतनमान/वेतन बैंड/ग्रेड वेतन/वेतन स्तर एवं द य तिथि े अभ्युक्ति
1 2 3 4 5
1. श्री सुनील कुमार/ मुख्य अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/ असैनिक/3872/ मुजफ्फरपुर/(35/2014 ज0सं0वि0)(MWRD-26/2016) 08.11.1966 10.04.1989 30.11.2026 MACP-3 दिनांक-01.07.2021 से वेतन स्तर-13A में स्वीकृत ।
2. श्री सुनील कुमार/ मुख्य अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/ असैनिक/4442/ मधेपुरा/(5016/2001 ज0सं0वि0)(MWRD-47/2016) 06.04.1968 17.05.1995 30.04.2028 MACP-2 दिनांक-17.05.2015 से पी0बी0-3 (15600-39100/-) ग्रेड-पे-7600/- मे स्वीकृत । ं
3. श्री सर्वेश कुमार चौधरी/ अधीक्षण अभियन्ता(कार्यकारी प्रभार)/असैनिक/5110 / नालन्दा/)(MWRD-57/2016) 31.03.1973 08.09.2008 31.03.2033 MACP-1 दिनांक-08.09.2018 से वेतन स्तर-11 मे स्वीकृत । ं
4. श्री आलोक कुमार सिंह/ अधीक्षण अभियन्ता (कार्यकारी प्रभार)/ असैनिक/5143/खगड़िया/)(MWR D-61/2016) 14.06.1971 26.09.2008 30.06.2031 MACP-1 दिनांक-01.07.2023 से वेतन स्तर-11 मे स्वीकृत । ं
8 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

4. उपर्युक्त कंडिका-2 में उल्लिखित पदाधिकारी को आर्थिक लाभ स्वीकृत करने एवं वेतन पूर्जा निर्गत करने के पूर्व संबंधित कार्यालय प्रधान/निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी/प्रभारी पदाधिकारी, वित(वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना/महालेखाकार, बिहार अपने स्तर से संबंधित अभियंताओं के प्रथम योगदान की तिथि, सेवा में टूट, दंडादेश आदि के संबंध में यथा आवश्यक जाँचकर तद्‌नुसार अग्रेत्तर कार्रवाई करेंगे । 5. रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना के अन्तर्गत उत्क्रमित ग्रेड वेतन/वेतन स्तर में वेतन का निर्धारण वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं0-7566 दिनांक-14.07.2010 एवं 630 दिनांक- 21.01.2010 के आलोक में मौलिक नियमवाली के नियम-22(l)(ए)(l) के प्रावधानों के अनुसार वेतन निर्धारण हेतु संबंधित कर्मी द्वारा यह विकल्प प्रयोग किया जाना है कि वे प्रोन्नति/वित्तीय उन्नयन की तिथि को वेतन निर्धारण करायेगें अथवा अगले वेतनवृद्धि की तिथि से ।

अधिसूचना निर्गत होने के एक माह के अन्दर यह विकल्प लिखित रूप से संबंधित पदाधिकारी द्वारा कार्यालय प्रधान/महालेखाकार/वित्त वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग को देना है ।

6. उपर्युक्त कंडिका-2 में वर्णित अभियन्ता के संबंध में वित्तीय उन्नयन स्वीकृति संबंधी पात्रता में किसी प्रकार की त्रुटि/पार्थक्य पाये जाने पर उन्हें प्रदत्त वितीय उन्नयन योजना के लाभ से संबंधित अधिसूचना को संशेधित/रद्द कर दिया जायेगा तथा उन्हें भुगतान की गई राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जाएगी ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, प्रवीण कुमार, अपर सचिव।

-------

2 मार्च 2024

सं0 प्र॰-01/ल॰ज॰सं॰/स्था॰(राज॰)-कोर्ट केश-05/2023-1127--विभागीय अधिसूचना सं0-6748 दिनांक-10.11.2023 के द्वारा विभागान्तर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा के कतिपय पदाधिकारियों का स्थानान्तण/पदस्थापन किया गया है ।

क्र0 सं0 अभियन्ता का नाम/पदनाम/ आई0डी0/ गृह जिला वर्तमान पदस्थापन एवं अतिरिक्त प्रभार नव पदस्थापन नव अतिरिक्त प्रभार
1 2 3 4 5
1. श्री सुरेश कुमार/कार्यपालक अभियन्ता (असैनिक)/4558/खगड़िया तकनीकी सलाहकार, लघु सिंचाई अंचल, मुंगेर कार्यपालक अभियन्ता, लघु सिंचाई प्रमण्डल, गोपालगंज

श्री कुमार का पदस्थापन तकनीकी सलाहकार, लघु सिंचाई अंचल, मुंगेर के पद पर पूर्ववत्‌ बना रहेगा । 4. उक्त अधिसूचना की शेष कंडिकाएँ यथावत रहेगी । 5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव कुमार झा, अवर सचिव।

-------

5 मार्च 2024

सं0 प्र॰-01/ल॰ज॰सं॰/स्था॰(राज॰)-04/2018-1158--श्री सुभाष चन्द्र सिंह (पदनाम-अधीक्षण अभियन्ता, आई0डी0-3895/गृह जिला-भागलपुर), अधीक्षण अभियन्ता(मु0), योजना एवं स्थापना, लघु जल संसाधन विभाग, पटना के द्वारा स्वयं की चिकित्सा निमित्त दिनांक-30.11.2023 से 25.12.2023 तक कुल-26(छब्बीस) दिनों की उपभोग की गयी छुट्टी को बिहार सेवा संहिता के नियम-232 के तहत कुल-52(बाबन) दिनों की अर्द्धवैतनिक छुट्टी स्वीकृत करते हुए बिहार सेवा संहिता के नियम-234 के तहत पूर्ण वेतन पर कुल-26(छब्बीस) दिनों की रूपांतरित छुट्टी की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है ।

2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव कुमार झा, अवर सचिव।9 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

5 मार्च 2024

सं0 प्र0-01/ल0ज0सं0/स्था0(राज0)-21/2023-1165--विज्ञापन सं0-03/2019 के अन्तर्गत बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-7ए/स0 अभि0(असैनिक)-01-06/2020{47}लो0से0आ0/गो0, दिनांक- 14.11.2023 द्वारा लघु जल संसाधन विभाग को अंतिम रूप से अनुशंसित 15(पन्द्रह) अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध करायी गयी । अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों की जांच दिनांक-12.12.2023 को आयोजित की गई, जिसमें 11(ग्यारह) अभ्यर्थी उपस्थित हुए । उपस्थित 06(छः) अभ्यर्थी जिनके द्वारा वांछित कागजात उपलब्ध कराया गया है, उनकी नियुक्ति-सह-पदस्थापन विभागीय अधिसूचना सं0-7422 दिनांक-29.12.2023 द्वारा की गई।

क्र0 स 0 ं म धा क्रमांक े /अनुक्रमांक अनुशंसित/ आबंटित अभ्यर्थी का नाम/जन्म तिथि/गृह जिला पिता का नाम/स्थायी पता आरक्षण कोटि अनुशंसित कोटि पदस्थापित कार्यालय का नाम फोटो
1 2 3 4 5 6 7 8
1. 01/303890 मन्टु कुमार सिंह/ 02.05.1993/ गोपालगंज त्रिलोकी सिंह, ग्राम-सिंगहा टोला, बसडीला, वार्ड सं0-13,पो0- हथुआ, थाना-मीरगंज, जिला-गोपालगंज (बिहार)पिन कोड- 841436 पिछड़ा वर्ग अनारक्षित प्राक्कलन पदाधिकारी -सह-सहायक अभियन्ता, लघु सिंचाई प्रमण्डल, सुपौल
2. 12/302626 मो0 मुज़म्मिल/ 10.03.1995/ अररिया मो0 कामिल, ग्राम- खलीलाबाद, वार्ड सं0-01, पोस्ट-वीरनगर, थाना-भरगामा, जिला- अररिया (बिहार) पिन कोड-854102 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, लघु सिंचाई अनुमण्डल, रफीगंज (औरंगाबाद)
3. 40/302350 अंजली/ 26.02.1998/ पटना इन्द्रजीत सिंह, मो0- संजय नगर, रोड न 0-10, वार्ड ं सं0-45, पोस्ट-लोहिया नगर, थाना-पत्रकार नगर, जिला-पटना (बिहार) पिन कोड-800026 पिछड़ा वर्ग अनारक्षित अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, लघु सिंचाई अनुमण्डल, शेरघाटी(गया)

पुनः 04(चार) अभ्यर्थियों द्वारा वांछित कागजात उपलब्ध कराया गया है, को बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-02 में सहायक अभियन्ता(असैनिक)के पद पर पुनरीक्षित वेतन स्तर-9(53,100-1,67,800) में समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत आदेय भत्तों के साथ लघु जल संसाधन विभाग, बिहार के अधीन सहायक अभियन्ता(असैनिक) के रिक्त पदों के विरूद्ध निम्नांकित शर्त्तों के साथ प्रभार ग्रहण करने की तिथि से औपबंधिक रूप से अस्थायी नियुक्ति करते हुए उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-7 में अंकित कार्यालय में पदस्थापित किया जाता है । मेधा क्रमांक /अनुक्रमांक

10 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
4. 148/ 301587 बिन्नी कुमारी/ 04.08. 1995/ पटना परमेश्वर कुमार, मो0-न्यू एरिया हरनीचक, वशिष्ठ कॉलोनी, अनिसाबाद, पटना, वार्ड सं0-11, पोस्ट-अनिसाबाद, थाना- फुलवारीशरीफ, जिला-पटना (बिहार), पिन कोड-800002 पिछड़ा वर्ग पिछड़ा वर्ग अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, लघु सिंचाई अनुमण्डल, महाराजगंज (सीवान)

2. इन्हें वेतनादि एवं अन्य देय वित्तीय लाभ सहायक अभियन्ता(असैनिक) के पद पर वास्तविक कार्यभार/प्रभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। प्रथम नियुक्ति होने के कारण प्रभार ग्रहण करने के लिए कोई यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा ।

3. पूर्व वृत सत्यापन(Police Verification) प्रतिकूल रहने पर अस्थायी नियुक्ति तुरन्त समाप्त कर दी जायेगी ।

4. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा उपलब्ध कराये गये बायोमैट्रिक डाटा(Biometric Data) का मिलान भविष्य में किये जाने की स्थिति में डाटा मिलान नहीं होने पर अस्थायी नियुक्ति तुरन्त समाप्त कर दी जायेगी ।

5. यह नियुक्ति औपबंधिक रूप से इस शर्त्त के साथ की जाती है कि इनसे संबंधित सभी प्रमाण पत्र एवं चारित्री सत्यापन के क्रम में किसी प्रकार का दोष या फर्जी पाये जाने पर इनकी नियुक्ति को रद्द करते हुए संबंधित अभ्यर्थी के विरूद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी ।

6. सभी नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) को नियुक्ति संबंधित अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से एक माह के अन्दर पदस्थापन स्थान पर योगदान देना अनिवार्य होगा । साथ ही नवपदस्थापित पद का प्रभार ग्रहण कर विभाग को दो प्रतियों में प्रभार प्रतिवेदन अपने नियंत्री पदाधिकारी के प्रतिहस्ताक्षर के उपरान्त निश्चित रूप से विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे । यदि वे निर्धारित अवधि में पदस्थापन कार्यालय में योगदान समर्पित नहीं करते हैं तो उनकी नियुक्ति स्वतः रद्द समझी जायेगी ।

7. नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) की सेवा दो वर्षो तक परीक्ष्यमान अवधि में रहेगी । इस अवधि में इनकी सेवा असंतोषप्रद्र होने पर सेवा से विमुक्त किया जा सकेगा ।

8. सेवा में योगदान की तिथि से दो वर्षो के बाद सेवा संतोषप्रद रहने पर नियमानुसार नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) की सेवा संपुष्ट की जायेगी ।

9. नवनियुक्त वैसे सहायक अभियन्ता(असैनिक) जो वर्तमान में यदि किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/सरकारी उपक्रम में कार्यरत है, उन्हें योगदान के समय संबंधित विभाग/संस्थान का विरमन आदेश/स्वीकृत त्याग-पत्र समर्पित करना अनिवार्य होगा ।

10. वैसे अनुशंसित अभ्यर्थी जो वर्तमान में यदि किसी राज्य सरकार/भारत सरकार/सरकारी उपक्रम में कार्यरत है, वैसे अभ्यर्थी का बिहार सरकार में नयी नियमित नियुक्ति के क्रम में बॉन्ड लिये जाने का प्रावधान नहीं है और बॉन्ड हस्तांतरण का भी कोई प्रावधान नहीं है । संबंधित अभ्यर्थी पूर्व नियोक्ता से बॉन्ड का निपटारा कर ही एवं विधिवत विरमित/तकनीकी त्याग-पत्र स्वीकृत/त्याग-पत्र स्वीकृत कराकर योगदान समर्पित करेंगे ।

11. वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-31.08.2005 एवं 768 पे0को0 दिनांक-03.07.2007 के अनुसार उक्त नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) पर नयी अंशदायी पेंशन योजना लागू होगी । 12.सभी संबंधित नियंत्री पदाधिकारी को निदेशित किया जाता है कि नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों/स्वास्थ्य प्रमाण पत्र/चरित्र प्रमाण पत्र/जाति प्रमाण पत्र एवं पूर्व नियोक्ता से निर्गत विरमण प्रमाण पत्र/स्वीकृत त्याग पत्र आदि की जाँच कर एवं स्वयं संतुष्ट होने के उपरान्त हीं उनका योगदान स्वीकृत करेंगे ।11 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 13. यह नियुक्ति औपबंधिक है तथा माननीय न्यायालय के समक्ष इस संदर्भ में किसी भी विचाराधीन वाद में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा ।

14. उक्त सभी नवनियुक्त सहायक अभियन्ता(असैनिक) द्वारा राज्य सरकार एवं लघु जल संसाधन विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों का पालन किया जायेगा ।

15. इनके पारस्परिक वरीयता बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित मेधा क्रमानुसार होगी । 16. यदि अधिसूचना में कोई भूल अथवा टंकण आदि की त्रुटि परिलक्षित होती है तो इसे तद्‌नुसार संशोधित किया जायेगा ।

17. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 तारिक इकबाल, विशेष सचिव।

------ Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------- Office Order The 14th March 2024

No.XI-K-रा0-01/2024-1230--In the light of proposal received from District Magistrate, Aurangabad vide letter no.- 45, dated- 19.02.2024 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Smt. Sweta Priyadarshi SDC, Aurangabad District Level
2 Sri Miraj Jameel SDC, Aurangabad District Level
3 Sri Alok Kumar SDC, Aurangabad District Level
4 Sri Praveen Kumar CO, Aurangabad Circle Aurangabad Level
5 Sri Manjesh Kumar CO, Barun Circle Barun Level
6 Miss. Nikhat Praween CO, Navinagar Circle Navinagar Level
7 Sri Chandra Prakash CO, Kutumba Circle Kutumba Level
8 Sri Deepak Kumar CO, Dev Circle Dev Level
9 Sri Mohammad Akbar Hussain CO, Madanpur Circle Madanpur Level
10 Sri Bharatendu CO, Rafiganj Circle Rafiganj Level
11 Smt. Sonam Raj CO, Goh Circle Goh Level
12 Miss Kaushalya CO, Haspura Circle Haspura Level
13 Sri Shailendra Kumar Yadav CO, Daudnagar Circle Daudnagar Level
14 Sri Harihar Nath Pathak CO, Obra Circle Obra Level

By Order, Sd./Illegible, Secretary to Commissioner.

-------

सामान्य प्रशासन विभाग

-----

अधिसूचनाएं

19 जनवरी 2024

सं0 1/सी0-1017/2023-सा0प्र0-1169--श्रीमती अपूर्वा त्रिापाठी, भा0प्र0से0 (बी एच ः 2021), अनुमण्डल पदाधिकारी, महुआ, वैशाली का संवर्ग परिवर्तित करते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत12 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सरकार, नई दिल्ली की अधिसूचना संख्या-13017/42/2023-ए आई एस-1 दिनांक 12.01.2024 द्वारा उन्हें बिहार के स्थान पर केरल संवर्ग आवंटित किया गया है।

2. भारत सरकार की आलोच्य अधिसूचना दिनांक 12.01.2024 के आलोक में श्रीमती अपूर्वा त्रिापाठी, भा0प्र0से0 (बी एच : 2021) को दिनांक 22.01.2024 के प्रभाव से केरल संवर्ग में योगदान करने हेतु विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

रचना पाटिल, विशेष सचिव।

-------

23 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1271--श्री सुरेश चौधरी, भा0प्र0से0 (2008), बंदोबस्त पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1272--श्री किशोरी चौधरी, भा0प्र0से0 (2011), अपर समाहर्त्ता (लोक शिकायत निवारण)-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1273--श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2013), संयुक्त सचिव, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक नगर आयुक्त, बेगूसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1274--श्रीमती उदिता सिंह, भा0प्र0से0 (2014) (मातृत्व छुट्टी के उपरान्त दिनांक 16.01.2024 से पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, नालन्दा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1275--श्री तरनजोत सिंह, भा0प्र0से0 (2017), नगर आयुक्त, नालन्दा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक निदेशक, मत्स्य, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1276--श्री विशाल राज, भा0प्र0से0 (2017), उप विकास आयुक्त, मधुबनी को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक निदेशक, तकनीकी विकास, उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1277--श्री आरिफ अहसन, भा0प्र0से0 (2017), नगर आयुक्त, पूर्णिया को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री विवेक रंजन मैत्रोय, भा0प्र0से0 (2017), निदेशक, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय, बिहार, पटना(अतिरिक्त प्रभार-संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना), संयुक्त सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1278--श्री योगेश कुमार सागर, भा0प्र0से0 (2017), नगर आयुक्त, भागलपुर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।13 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1279--श्री अनिल कुमार, भा0प्र0से0 (2017), उप विकास आयुक्त, पश्चिम चम्पारण, बेतिया को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्रीमती अलंकृता पांडे, भा0प्र0से0 (2016), संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना(अतिरिक्त प्रभार-परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना/अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना/कार्यपालक निदेशक, बिहार राज्य महिला विकास निगम, पटना), परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1280--श्री शेखर आनन्द, भा0प्र0से0 (2018), उप विकास आयुक्त, रोहतास, सासाराम को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक नगर आयुक्त, नालन्दा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1281--श्री नितिन कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2018), उप विकास आयुक्त, मधेपुरा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक नगर आयुक्त, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1282--श्रीमती प्रतिभा रानी, भा0प्र0से0 (2018), उप विकास आयुक्त, दरभंगा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त, पश्चिम चम्पारण, बेतिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1283--सुश्री चन्द्रिमा अत्राी, भा0प्र0से0 (2020), अनुमण्डल पदाधिकारी, दरभंगा सदर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, महुआ, वैशाली के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1003/2024-सा0प्र0-1284--श्री दीपेश कुमार, भा0प्र0से0 (नवनियुक्त) (नॉन-एस सी एस से भा0प्र0से0 में नियुक्ति के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त, मधुबनी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

23 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1285--श्री उज्ज्वल कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2011), अपर समाहर्त्ता-सह-अपर जिला दण्डाधिकारी, नवादा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1286--श्री नरेश झा, भा0प्र0से0 (2011), अपर समाहर्त्ता-सह-अपर जिला दण्डाधिकारी, मधुबनी को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, कटिहार के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1287--श्री शशांक शेखर सिन्हा, भा0प्र0से0 (2011), माननीय मंत्राी, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव(सरकारी), को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।14 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1288--श्री शिव कुमार शैव, भा0प्र0से0 (2011), माननीय मंत्राी, खान एवं भू-तत्व विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, किशनगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री तुषार सिंगला, भा0प्र0से0 (2015), जिला पदाधिकारी, किशनगंज (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, किशनगंज), बंदोबस्त पदाधिकारी, किशनगंज के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1289--श्री विश्वनाथ चौधरी, भा0प्र0से0 (2011), आयुक्त के सचिव, सारण प्रमण्डल, छपरा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, सहरसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1290--श्री ब्रजेश कुमार,भा0प्र0से0 (2011), अपर जिला दण्डाधिकारी, आपूर्ति, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, मधेपुरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1291--श्री नवीन,भा0प्र0से0(2013),माननीय मंत्राी, वित्त विभाग, वाणिज्य-कर विभाग एवं संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव, को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1292--श्रीमती गीता सिंह, भा0प्र0से0 (2013), संयुक्त सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1293--श्री अरुण कुमार झा,भा0प्र0से0 (2013), उप विकास आयुक्त, शेखपुरा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, खगड़िया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1294--श्री कमलेश कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2013), आप्त सचिव, श्री मुहम्मद इजहार असफी, माननीय सचेतक, सत्तारुढ़ दल, बिहार विधान सभा, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, पूर्णिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1295--श्री सुनील कुमार-1, भा0प्र0से0 (2013), अपर समाहर्त्ता (लोक शिकायत निवारण)-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सहरसा को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, मुंगेर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1296--श्री पवन कुमार सिन्हा, भा0प्र0से0 (2013), अपर समाहर्त्ता-सह-अपर जिला दण्डाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, जमुई के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1297--श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0 (2013), माननीय मंत्राी, परिवहन विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री आशुतोष कुमार वर्मा, भा0प्र0से0 (2010), जिला पदाधिकारी,नवादा(अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा), बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1298--श्रीमती अंजुला प्रसाद, भा0प्र0से0 (2013), विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना (सम्बद्ध-खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण15 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1299--श्रीमती संगीता सिंह, भा0प्र0से0 (2014), विशेष कार्य पदाधिकारी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2023-सा0प्र0-1300--श्री मुकेश कुमार, भा0प्र0से0 (2014), उप विकास आयुक्त, सुपौल को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री त्यागराजन एस.एम., भा0प्र0से0 (2011), जिला पदाधिकारी, गया (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, गया), बंदोबस्त पदाधिकारी, गया के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

25 जनवरी 2024

सं0 1/अ0-07/2011-सा0प्र0-1546--श्रीमती रचना पाटिल, भा0प्र0से0 (बी एचः 2010), विशेष सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-5, 10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 26,27 एवं 28 जनवरी, 2024 के राजपत्रिात /सार्वजनिक अवकाशों का पश्च्‌ लग्न(सफिक्स) के रुप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 22.01.2024 से 25.01.2024 तक कुल 04 (चार) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्रीमती पाटिल की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए प्रभार की व्यवस्था विभाग द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

25 जनवरी 2024

सं0 1/अ0-1003/2024-सा0प्र0-1547--श्री धीरेन्द्र पासवान, भा0प्र0से0 (बी एचः 2011), संयुक्त सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-5, 10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 10 एवं 11 फरवरी, 2024 के साप्ताहिक/सार्वजनिक अवकाश का पूर्व लग्न (प्री-फिक्स) के रूप में तथा 17 एवं 18 फरवरी, 2024 के साप्ताहिक/सार्वजनिक अवकाश का पश्च्‌ लग्न के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 12.02.2024 से 16.02.02.2024 तक कुल 05 (पांच) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री पासवान, भा0प्र0से0 की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों हेतु प्रभार की व्यवस्था संबंधित विभाग (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।16 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

26 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1549--श्री अरविन्द कुमार चौधरी, भा0प्र0से0 (1995), प्रधान सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, निगरानी विभाग/परीक्षा नियंत्राक, बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद, पटना/जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग/प्रधान सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना/सचिव, बिहार राज्य योजना पर्षद, पटना/परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी, पटना) अगले आदेश तक प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1550--श्री के. सेंथिल कुमार, भा0प्र0से0 (1996), प्रधान सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री के. सेंथिल कुमार अगले आदेश तक सचिव, बिहार राज्य योजना पर्षद, पटना/परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

3. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री अरविन्द कुमार चौधरी, भा0प्र0से0 (1995), प्रधान सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना- प्रधान सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना/सचिव, बिहार राज्य योजना पर्षद, पटना/परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण सोसाइटी, पटना के अतिरिक्त प्रभारों से मुक्त हो जाएंगे तथा उनके शेष अतिरिक्त प्रभार यथावत रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1551--श्री पंकज कुमार, भा0प्र0से0(1997), प्रधान सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्राण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री पंकज कुमार अगले आदेश तक जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में पूर्ववत बने रहेंगे।

3. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री संजीव हंस, भा0प्र0से0 (1997), प्रधान सचिव, ऊजार् विभाग, बिहार, पटना { अतिरिक्त प्रभार-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट पॉवर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड, पटना/प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्राण विभाग, बिहार, पटना}-प्रधान सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्राण विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1552--श्रीमती सफीना ए. एन., भा0प्र0से0 (1997), प्रधान सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर सदस्य, राजस्व पर्षद, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्रीमती सफीना ए. एन. अगले आदेश तक जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में पूर्ववत बनी रहेंगी।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1553--श्री एन0 सरवन कुमार, भा0प्र0से0 (2000), सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अध्यक्ष, बिहार तकनीकी सेवा आयोग, पटना/जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/ सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।17 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 2. श्री एन0 सरवन कुमार अगले आदेश तक अध्यक्ष, बिहार तकनीकी सेवा आयोग, पटना/जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम, पटना के अतिरिक्त प्रभार में पूर्ववत बने रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1554--श्री दयानिधान पाण्डेय, भा0प्र0से0 (2006), निदेशक, निदेशक, चकबंदी, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक, सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग. बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री दयानिधान पाण्डेय अगले आदेश तक निदेशक, चकबंदी, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगें। सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1555--श्री दीपक आनन्द, भा0प्र0से0 (2007), निदेशक, उपभोक्ता संरक्षण, खाद्य एव उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक, सचिव (व्यय), वित्त विभाग.बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1556--श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0 (2007), आयुक्त, पूर्णिया प्रमण्डल, पूर्णिया (अतिरिक्त प्रभार-आयुक्त, कोसी प्रमण्डल, सहरसा) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग.बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1557--मो0 सोहैल, भा0प्र0से0 (2007), सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/अध्यक्ष, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक, सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग.बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. मो0 सोहैल अगले आदेश तक जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/अध्यक्ष, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, पटना के साथ-साथ सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/ के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1558--श्री प्रणव कुमार, भा0प्र0से0 (2008), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक, सचिव, गृह विभाग. बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री प्रणव कुमार अगले आदेश तक महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1559--श्रीमती नीलम चौधरी, भा0प्र0से0 (2008), निदेशक, भविष्य निधि निदेशालय, वित्त विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रमण्डलीय आयुक्त, कोसी प्रमण्डल, सहरसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1560--श्री संजय दूबे, भा0प्र0से0(2008), सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार सड़क विकास अभिकरण, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रमण्डलीय आयुक्त, पूर्णिया प्रमण्डल, पूर्णिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1561--श्री हिमांशु कुमार राय, भा0प्र0से0 (2010), विशेष सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विशेष सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-1562--श्री राहुल कुमार, भा0प्र0से0(2011), मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार ग्रामीण जीवकोपार्जन (जीविका) प्रोत्साहन सोसाइटी-सह-राज्य मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण जीवकोपार्जन-सह-आयुक्त -स्व-रोजगार, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त18 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 प्रभार-मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार,पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक निदेशक, बिहार संग्रहालय, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1563--श्री जय प्रकाश सिंह, भा0प्र0से0 (2013), उप निदेशक, मुख्य मंत्राी के परामर्शी कोषांग, मंत्रिामंडल सचिवालय, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक निदेशक, भविष्य निधि निदेशालय, वित्त विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1564--श्री विशाल राज, भा0प्र0से0 (2017), निदेशक, तकनीकी विकास, उद्योग विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

2. उपर्युक्त के आलोक में डॉ0 आशिमा जैन, भा0प्र0से0 (2008), सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना)-राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी।

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1565--श्री अनिल कुमार, भा0प्र0से0 (2017), परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना अगले आदेश तक मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

26 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1566--श्री चन्द्रशेखर सिंह, भा0प्र0से0 (2010), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, पटना (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विशेष सचिव, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। 2. श्री चन्द्रशेखर सिंह अगले आदेश तक मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार ग्रामीण जीवकोपार्जन (जीविका) प्रोत्साहन सोसाइटी-सह-राज्य मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण जीवकोपार्जन-सह- आयुक्त-स्व-रोजगार, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना / प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पथ विकास निगम, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1567--श्री शीर्षत कपिल अशोक, भा0प्र0से0 (2011), महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, पटना) को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, पटना केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें पटना जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है। 2. श्री अशोक अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1568--श्री रजनीकान्त, भा0प्र0से0(2011), मुख्य महाप्रबंधक, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम, पटना को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, लखीसराय केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें लखीसराय जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है। 2. यह अधिसूचना दिनांक 31.01.2024 के अपराह्‌न से प्रभावी होगी।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1569--श्री नवल किशोर चौधरी, भा0प्र0से0 (2013), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, गोपालगंज) को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, भागलपुर केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया19 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें भागलपुर जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

2. श्री नवल किशोर चौधरी अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, भागलपुर के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1570--श्री सुब्रत कुमार सेन, भा0प्र0से0 (2013), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, भागलपुर (अतिरिक्त प्रभार-बंदोबस्त पदाधिकारी, भागलपुर) को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें मुजफ्फरपुर जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

2. श्री सुब्रत कुमार सेन अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-1571--मो0 मकसूद आलम, भा0प्र0से0(2013), माननीय मुख्य मंत्राी के आप्त सचिव को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें गोपालगंज जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

2. मो0 मकसूद आलम अगले आदेश तक बंदोबस्त पदाधिकारी, गोपालगंज के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

------

30 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-1761--श्री(डॉ0) वीरेन्द्र प्रसाद यादव, भा0प्र0से0 (2004), विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विशेष सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-1762--श्री अनिल कुमार ठाकुर, भा0प्र0से0 (2014), संयुक्त निदेशक(प्रशासन), कृषि विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रचना पाटिल, विशेष सचिव।

------

2 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-1002/2024-सा0प्र0-2083--श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0 (बी एचः 2013), माननीय मंत्राी परिवहन विभाग के तदेन आप्त सचिव, सम्प्रति बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-5, 10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 04 फरवरी, 2024 के साप्ताहिक/रविवारीय अवकाश का पूर्व लग्न (प्री-फिक्स) के रूप में तथा दिनांक 03 मार्च, 2024 के साप्ताहिक/ रविवारीय अवकाश का पश्च्‌ लग्न के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 05.02.2024 से 02.03.2024 तक कुल 27 (सत्ताइस) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री कुमार की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद (बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा) हेतु प्रभार की व्यवस्था जिला पदाधिकारी, नवादा द्वारा की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

-------

2 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-07/2011-सा0प्र0-2084--श्रीमती रचना पाटिल, भा0प्र0से0 (बी एचः 2010), विशेष सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1955 के20 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नियम-18(डी) के तहत दिनांक 05.02.2024 से 31.03.2024 तक कुल-56 (छप्पन) दिनों के शिशु देखभाल छुट्टी (Child Care Leave) की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्रीमती पाटिल की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए प्रभार की व्यवस्था विभाग द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो0 सोहैल, सचिव।

------

5 फरवरी 2024

सं0 1/सी0-1019/2023-सा0प्र0-2166--राज्य असैनिक सेवाओं से प्रोन्नति/चयन द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (बिहार संवर्ग) में वर्ष,2023 में नियुक्त निम्नांकित पदाधिकारियों (जिन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष, 2011, 2012, 2013 एवं 2014 का बैच आवंटित है) को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार,नई दिल्ली के पत्राांक-20011/02/2022-ए आई एस-।। दिनांक 07.10.2023 में निहित मार्गदर्शन के तहत उनके नाम के सामने अंकित भा0प्र0से0 में प्रभार ग्रहण की तिथि से कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (अपर सचिव स्तर, वेतनमान-लेवल-12 -रु0 78,800-2,09,200/-) में प्रोन्नति प्रदान की जाती हैः-

क्र. पदाधिकारी का नाम एवं बैच वर्तमान पदस्थापन/पूर्व धारित पद भा0प्र0से0 का प्रभार ग्रहण किए जाने की तिथि
1 श्री सुशील कुमार(2011) निदेशक-सह-संयुक्त सचिव, भू-अर्जन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
2 श्री किशोरी चौधरी (2011) संयुक्त सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
3 श्री पुरुषोत्तम पासवान (2011) सचिव, राज्य निर्वाचन प्राधिकार, बिहार, पटना 13.12.2023
4 श्री उज्ज्वल कुमार सिंह (2011) संयुक्त सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
5 श्री विनय कुमार राय(2011) निदेशक, पर्यटन, पर्यटन निदेशालय, बिहार,पटना(अतिरिक्त प्रभार-संयुक्त सचिव,पथ निर्माण विभाग,बिहार, पटना) 13.12.2023
6 श्री नरेश झा(2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, कटिहार 14.12.2023
7 श्री रंजनी कान्त (2011) समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, लखीसराय 13.12.2023
8 श्री संजय कुमार (2011) विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना 13.12.2023
9 श्री शशांक शेखर सिन्हा(2011) संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
10 श्री मुकेश कुमार सिन्हा (2011) सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना 13.12.2023
11 श्री निर्मल कुमार(2011) संयुक्त सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्राण विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
12 श्री शिव कुमार शैव (2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, किशनगंज 13.12.2023
21 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
13 श्री धीरेन्द्र पासवान (2011) संयुक्त सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
14 श्री अरविन्द मंडल (2011) संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
15 श्री अनिल चौधरी (2011) नगर आयुक्त, मधुबनी नगर निगम 13.12.2023
16 श्री विश्वनाथ चौधरी(2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, सहरसा 13.12.2023
17 श्री ब्रजेश कुमार (2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, मधेपुरा 13.12.2023
18 श्री अरुण कुमार सिंह(2012) संयुक्त सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
19 श्री विभूति रंजन चौधरी (2012) नगर आयुक्त, समस्तीपुर नगर निगम 13.12.2023
20 श्री अनिल कुमार झा(2012) सचिव, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना 15.02.2023
21 श्री नवीन (2013) संयुक्त सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
22 श्री जय प्रकाश सिंह (2013) निदेशक, भविष्य निधि निदेशालय, वित्त विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
23 श्री आलोक कुमार (2013) उप मिशन निदेशक, बिहार विकास मिशन, मंत्रिामंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
24 श्री मो0 मकसूद आलम (2013) समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज (अतिरिक्त प्रभार -बंदोबस्त पदाधिकारी, गोपालगंज) 13.12.2023
25 श्री अनिमेष पाण्डेय (2013) संयुक्त सचिव,गृह विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
26 श्री सत्य प्रकाश शर्मा(2013) संयुक्त सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग, पटना 13.12.2023
27 उपेन्द्र प्रसाद (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, जहानाबाद 13.12.2023
28 श्री अरुणाभ चन्द्र वर्मा (2013) संयुक्त सचिव, बिहार तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग, पटना 13.12.2023
29 श्रीमती गीता सिंह (2013) संयुक्त सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
30 श्री अरुण कुमार झा (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, खगड़िया 13.12.2023
31 श्री संजय कुमार (2013) संयुक्त सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
32 श्री नन्द किशोर साह (2013) संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
33 श्री निशीथ वर्मा (2013) संयुक्त सचिव, म ंत्रिामंडल सचिवालय, विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
34 श्री सुधांशु कुमार सिंह (2013) उप निदेशक, ब्रेडा, पटना 13.12.2023
35 श्री संजीव कुमार सिन्हा(2013) संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
22 (cid:464)बहार गजट, 17 2024
36 श्री नवीन कुमार सिंह (2013) उप मिशन निदेशक, बिहार विकास मिशन, मंत्रिामंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
37 श्री कमलेश कुमार सिंह (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, पूर्णिया 13.12.2023
38 श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव (2013) महाप्रबंधक, बेल्ट्रॉन, पटना 13.12.2023
39 डॉ0 विद्या नन्द सिंह (2013) उप निदेशक, पंचायती राज, पटना प्रमण्डल, पटना 13.12.2023
40 श्री शैलेन्द्र कुमार (2013) संयुक्त सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
41 श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह (2013) नगर आयुक्त, बेगूसराय 13.12.2023
42 श्री सुनील कुमार-1 (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, मुंगेर 13.12.2023
43 श्री पवन कुमार सिन्हा (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, जमुई 13.12.2023
44 श्री महाबीर प्रसाद शर्मा (2013) विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना 13.12.2023
45 श्री मनोज कुमार (2013) बंदोबस्त पदाधिकारी, नवादा 13.12.2023
46 श्री मो0 इबरार आलम (2013) संयुक्त सचिव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
47 श्रीमती अंजुला प्रसाद (2013) संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
48 श्री संजय कुमार (2014) विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना 13.12.2023
49 श्रीमती संगीता सिंह (2014) संयुक्त सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
50 श्री अनिल कुमार ठाकुर (2014) संयुक्त सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
51 श्री मुकेश कुमार (2014) बंदोबस्त पदाधिकारी, गया 13.12.2023
52 श्री गौतम पासवान (2014) मिशन निदेशक, बिहार महादलित विकास मिशन, पटना (अतिरिक्त प्रभार -सचिव, महादलित आयोग, बिहार, पटना/संयुक्त सचिव, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, बिहार, पटना) 13.12.2023
53 श्री रणजीत कुमार (2014) संयुक्त सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
54 श्रीमती कल्पना कुमारी (2014) अनुश्रवण पदाधिकारी, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना 13.12.2023
55 श्री प्रवीन कुमार (2014) संयुक्त सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना(अतिरिक्त प्रभार- संयुक्त सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना) 13.12.2023

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।23 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

5 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-1005/2024-सा0प्र0-2171--श्री विक्रम विरकर, भा0प्र0से0 (बी एचः 2019), उप विकास आयुक्त, भोजपुर, आरा को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं 20 के तहत दिनांक 12.02.2024 से 19.02.2024 तक कुल 08 (आठ) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री विक्रम विरकर, भा0प्र0से0 की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद उप विकास आयुक्त, भोजपुर, आरा के अतिरिक्त प्रभार में निदेशक, लोक प्रशासन एवं स्वनियोजन, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, भोजपुर रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

7 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-417/2007-सा0प्र0-2327--श्री संदीप कुमार आर0 पुडकलकट्टी, भा0प्र0से0 (2006), सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम-12,13 एवं 20 के अधीन दिनांक-14.12.2023 से 14.01.2024 तक कुल 32 (बत्तीस) दिनों की चिकित्सा/रूपांतरित छुट्टी (64 दिनों के अर्द्धवैतनिक छुट्टी के बदले) की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

9 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-1009/2020-सा0प्र0-2481--श्री दीपक कुमार मिश्रा, भा0प्र0से0 (बी एचः 2019), उप विकास आयुक्त, नवादा को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 07.02.2024 से 16.02.2024 तक कुल 10 (दस) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री मिश्रा की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद उप विकास आयुक्त, नवादा के अतिरिक्त प्रभार में निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, डी0आर0डी0ए0, नवादा रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

11 फरवरी 2024

सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-2487--श्री रॉबर्ट एल. चोंग्थू, भा0प्र0से0 (1997),राज्यपाल के प्रधान सचिव, बिहार, पटना की दिनांक 10.02.2024 से 14.02.2024 तक आवश्यक कार्यवश मुख्यालय से बाहर रहने की अवधि में श्री ब्रजेश मेहरोत्राा, भा0प्र0से0(89) (अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना/ अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य सचिव, संसदीय कार्य विभाग/ मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग), राज्यपाल के प्रधान सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।24 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

13 फरवरी 2024

सं0 1/अ0-1010/2020-सा0प्र0-2685--विभागीय अधिसूचना संख्या -851 दिनांक 15.01.2024 द्वारा श्री अनिल कुमार, भा0प्र0से0 (बी एच ः 2017), तदेन उप विकास आयुक्त, पश्चिम चम्पारण, बेतिया (सम्प्रति, परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना (अतिरिक्त प्रभार- मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना) को वैयक्तिक व्यय पर पेरिस की निजी विदेश यात्राा हेतु दिनांक 14.02.2024 से 21.02.2024 तक कुल 08 (आठ) दिनों की उपार्जित छुट्टी एक्स-इंडिया लीव के रूप में स्वीकृत की गई है।

2. श्री कुमार की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित वर्तमान पदों/दायित्वों हेतु प्रभार की व्यवस्था संबंधित विभागों द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

14 फरवरी 2024

सं0 1/पी-1001/2019-सा0प्र0-2722--श्री आलोक रंजन घोष, भा0प्र0से0 (2011), निदेशक, कृषि, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विशेष सचिव-सह-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री आलोेक रंजन घोष अगले आदेश तक निदेशक, कृषि, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1001/2019-सा0प्र0-2723--श्री आनन्द शर्मा, भा0प्र0से0 (2013), निदेशक, पंचायती राज (अतिरिक्त प्रभार-अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर सचिव-सह-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री आनन्द शर्मा अगले आदेश तक निदेशक, पंचायती राज, बिहार, पटना/अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

रजनीश कुमार, संयुक्त सचिव ।

------

14 फरवरी 2024

सं0 1/पी-2005/2019-सा0प्र0-2724--बिहार संवर्ग की अंतःसंवर्गीय प्रतिनियुक्ति के तहत सेवारत पदाधिकारी- श्री प्रभाकर, भा0प्र0से0 (एस के ः 2007) द्वारा धारित पद (प्रबंध निदेशक, कम्फेड, बिहार, पटना) का परित्याग दिनांक 12.02.2024 के पूर्वाह्‌न में किया गया है। फलतः, श्री प्रभाकर दिनांक 12.

02.2024 के पूर्वाह्‌न से पैतृक संवर्ग (सिक्किम संवर्ग) मंें योगदान देने हेतु विरमित माने जाएंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

रजनीश कुमार, संयुक्त सचिव ।

------

22 फरवरी 2024

सं0 1/सी0-1013/2023-सा0प्र0-3185--राज्य असैनिक सेवा से प्रोन्नति द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (बिहार संवर्ग) में वर्ष, 2023 में नियुक्त बैच वर्ष, 2011 के निम्नांकित पदाधिकारियों को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार,नई दिल्ली के पत्राांक -20011/02/2022-ए आई एस-।। दिनांक 07.10.2023 में निहित मार्गदर्शन के आलोक में चयन ग्रेड (विशेष सचिव स्तर, वेतनमान-लेवल-13- रु0 1,23,100-2,15,900/-) में प्रोन्नति प्रदान की जाती हैः-25 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

क्र. पदाधिकारी का नाम एवं बैच पदनाम प्रोन्नति प्रदान किए जाने की प्रभावी तिथि
1 श्री सुशील कुमार(2011) निदेशक-सह-अपर सचिव, भू-अर्जन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना भा0प्र0से0 में योगदान की तिथि अथवा दिनांक 01.01.2024, जो बाद में हो भा0प्र0से0 में योगदान की तिथि अथवा दिनांक 01.01.2024, जो बाद में हो
2 श्री किशोरी चौधरी (2011) अपर सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना
3 श्री पुरुषोत्तम पासवान (2011) सचिव, राज्य निर्वाचन प्राधिकार, बिहार, पटना
4 श्री उज्ज्वल कुमार सिंह (2011) अपर सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना
5 श्री विनय कुमार राय(2011) निदेशक, पर्यटन, पर्यटन निदेशालय, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- अपर सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना)
6 श्री नरेश झा(2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, कटिहार
7 श्री रंजनी कान्त (2011) समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, लखीसराय
8 श्री संजय कुमार (2011) विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना
9 श्री शशांक शेखर सिन्हा (2011) अपर सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना
10 श्री मुकेश कुमार सिन्हा (2011) सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना
11 श्री निर्मल कुमार(2011) अपर सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्राण विभाग, बिहार, पटना
12 श्री शिव कुमार शैव (2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, किशनगंज
13 श्री धीरेन्द्र पासवान (2011) अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना
14 श्री अरविन्द मंडल (2011) अपर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना
15 श्री अनिल चौधरी (2011) नगर आयुक्त, मधुबनी नगर निगम
16 श्री विश्वनाथ चौधरी(2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, सहरसा
17 श्री ब्रजेश कुमार (2011) बंदोबस्त पदाधिकारी, मधेपुरा

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।26 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

1 मार्च 2024

सं0 1/पी-1004/2024-सा0प्र0-3668--डॉ0 गोपाल सिंह, भा0व0से0 (2003), मुख्य मंत्राी के विशेष कार्य पदाधिकारी, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-क्षेत्राीय मुख्य वन संरक्षक, पटना एवं वन संरक्षक, पटना अंचल, पटना) अगले आदेश तक स्थानिक आयुक्त, बिहार भवन का कार्यालय, नई दिल्ली के विशेष कार्य पदाधिकारी के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो0 सोहैल, सचिव ।

------

2 मार्च 2024

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-3669--श्री ब्रजेश मेहरोत्राा, भा0प्र0से0 (बी एच : 89), अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य सचिव, संसदीय कार्य विभाग/मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए मुख्य सचिव, बिहार के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. यह व्यवस्था दिनांक 04.03.2024 से प्रभावी होगी।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-3670--श्री चैतन्य प्रसाद, भा0प्र0से0 (बी एच : 90), अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार , पटना (अतिरिक्त प्रभार- अपर मुख्य सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विकास आयुक्त, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री प्रसाद अगले आदेश तक अध्यक्ष-सह-सदस्य, राजस्व पर्षद्‌, बिहार, पटना और अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

3. यह व्यवस्था दिनांक 04.03.2024 से प्रभावी होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो0 सोहैल, सचिव ।

------

4 मार्च 2024

सं0 1/सी0-1006/2024-सा0प्र0-3701--श्री आमिर सुबहानी, भा0प्र0से0(बी एच -1987), मुख्य सचिव, बिहार द्वारा दिनांक 04.03.2024 के प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ग्रहण किए जाने हेतु समर्पित आवेदन दिनांक 03.03.2024 के आलोक में आलोच्य प्रयोजन से कम-से-कम तीन माह पूर्व आवेदन समर्पित करने की शर्त को अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम-16(2) के द्वितीय परन्तुक के अधीन क्षांत करते हुए 1958 की आलोच्य नियमावली के नियम-16(2) के प्रावधान के तहत श्री आमिर सुबहानी को दिनांक 04.03.2024 के प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो0 सोहैल, सचिव ।

------

4 मार्च 2024

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3780--श्री विभूति रंजन चौधरी, भा0प्र0से0 (2012), नगर आयुक्त, समस्तीपुर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक निदेशक, उपभोक्ता संरक्षण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।27 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3781--श्रीमती शैलजा शर्मा, भा0प्र0से0 (2013), अपर सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना) को प्रदत्त अपर सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3782--श्री प्रवीण कुमार, भा0प्र0से0 (2014), अपर सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना) को प्रदत्त अपर सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3783--श्री विशाल राज, भा0प्र0से0 (2017), निदेशक, तकनीकी विकास, उद्योग विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3784--श्री सौरव सुमन यादव, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में), को अगले आदेश तक नगर आयुक्त, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3785--सुश्री प्रीति, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में), को अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त, खगड़िया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3786--श्री नन्द किशोर, भा0व0से0 (2006), विशेष सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेशन लिमिटेड, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. साथ ही, डॉ0 वीरेन्द्र प्रसाद यादव, भा0प्र0से0 (2004), विशेष सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेशन लिमिटेड, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

5 मार्च 2024

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-3812--डॉ0 आशिमा जैन, भा0प्र0से0 (2008), सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के सम्पूर्ण प्रभार में रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

6 मार्च 2024

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3965--श्री दीपक कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (1992), अपर मुख्य सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।28 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3966--श्री परमार रवि मनुभाई, भा0प्र0से0 (1992), अपर मुख्य सचिव-सह-खान आयुक्त, खान एवं भू-तत्व विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड, पटना / प्रंबंध निदेशक, बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड, पटना) अगले आदेश तक मुख्य जांच आयुक्त, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे ।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3967--श्री आनन्द किशोर, भा0प्र0से0 (1996), अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना (अतिरिक्त प्रभार- मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं प्रशिक्षण बोर्ड, पटना-वित्तीय प्रभार सहित) अगले आदेश तक प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना एवं प्रबंध निदेशक, पटना मेट्रो रेल निगम लिमिटेड, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे ।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री आनन्द किशोर, मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं प्रशिक्षण बोर्ड, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे और उक्त पद के प्रभार की वैकल्पिक व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3968--श्री संतोष कुमार मल्ल, भा0प्र0से0 (1997), प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना(अतिरिक्त प्रभार- प्रबंध निदेशक, पटना मेट्रो रेल निगम लिमिटेड, पटना/जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग/विशेष कार्य पदाधिकारी, स्थानिक आयुक्त का कार्यालय, बिहार भवन, नई दिल्ली) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री संतोष कुमार मल्ल अगले आदेश तक जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/ विशेष कार्य पदाधिकारी, स्थानिक आयुक्त का कार्यालय, बिहार भवन, नई दिल्ली के साथ-साथ प्रधान सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3969--श्री अनुपम कुमार, भा0प्र0से0 (2003), सचिव, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- सचिव, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बिहार, पटना/मिशन निदेशक, बिहार विकास मिशन, पटना) अगले आदेश तक सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे ।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3970--श्री धर्मेन्द्र सिंह, भा0प्र0से0 (2006), प्रबंध निदेशक, बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, पटना(अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य आवास बोर्ड, पटना/जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/सचिव, खान एवं भू-तत्व विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, खान एवं भू-तत्व विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री धर्मेन्द्र सिंह अगले आदेश तक जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3971--श्री संजय कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2007), सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना) अगले आदेश तक सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे ।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री संजय कुमार सिंह, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे और उक्त पद के प्रभार की वैकल्पिक व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी।29 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3972--श्री दिनेश कुमार, भा0प्र0से0 (2007), प्रबंध निदेशक, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रमण्डलीय आयुक्त, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3973--श्री धर्मेन्द्र कुमार, भा0प्र0से0 (2013), अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3974--श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव, भा0प्र0से0 (2013), महाप्रबंधक, बेल्ट्रॉन, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य आवास बोर्ड, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3975--श्री मनेश कुमार मीणा, भा0प्र0से0 (2015), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, कटिहार केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें कटिहार जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3976--श्री रिची पाण्डेय, भा0प्र0से0 (2016), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें सीतामढ़ी जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3977--श्री रवि प्रकाश, भा0प्र0से0 (2016), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, कटिहार को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक संयुक्त सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3978--श्रीमती अलंकृता पांडे, भा0प्र0से0(2016), संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना/कार्यपालक निदेशक, बिहार राज्य महिला विकास निगम, पटना) को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद केे पद पर पदस्थापित करते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत उन्हें जहानाबाद जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-3979--श्री योगेश कुमार सागर, भा0प्र0से0 (2017), संयुक्त सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो0 सोहैल, सचिव ।

-----

6 मार्च 2024

सं0 1/सी0-1020/2023-सा0प्र0-3980--लाल बहादुर शास्त्राी राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में व्यावसायिक पाठ्‌यक्रम चरण-1 का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बैच वर्ष, 2023 के भा0प्र0से0 (बिहार संवर्ग) के परिवीक्षाधीन पदाधिकारी उक्त प्रशिक्षण की समाप्ति के बाद जिला प्रशिक्षण हेतु राज्य में योगदान के लिए दिनांक 05.04.2024 के अपराह्‌न में अकादमी से विरमित होंगे।

2. संबंधित सभी पदाधिकारियों को सहायक समाहर्त्ता-सह-सहायक दण्डाधिकारी के रुप में उनके नाम के सामने अंकित जिला से सम्बद्ध किया जाता हैः-30 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

क्र. पदाधिकारी का नाम पदस्थापन से संबंधित जिला
1 सुश्री गरिमा लोहिया भागलपुर
2 श्री तुषार कुमार नालन्दा
3 सुश्री प्रतीक्षा सिंह बक्सर
4 श्री अनिरूद्ध पाण्डेय बांका
5 सुश्री कृतिका मिश्रा मधेपुरा
6 सुश्री अकांक्षा आनंद मुजफ्फरपुर
7 श्री प्रधुम्न सिह यादव किशनगंज
8 सुश्री अंजली शर्मा पटना
9 श्री रोहित कर्दम पूर्णिया
10 सुश्री शिप्रा विजयकुमार चौधरी सारण, छपरा
11 सुश्री नेहा कुमारी सिवान

3. साथ ही, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों के अधीन उपर्युक्त पदाधिकारियों को उनके नाम के समक्ष अंकित जिला का कार्यपालक दण्डाधिकारी नियुक्त किया जाता है। इन सभी पदाधिकारियों को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 के अन्तर्गत भी शक्तियॉंं प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

7 मार्च 2024

सं0 1/अ0-1025/2013-सा0प्र0-4111--श्रीमती सीमा त्रिापाठी, भा0प्र0से0 (बी एचः 2009), विशेष सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-1/अ0-1025/2013-सा0प्र0-19141 दिनांक 11.10.2023 द्वारा दिनांक 25.10.2023 से 22.12.2023 तक कुल 59 (उनसठ) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की गई थी। तत्पश्चात, विभागीय अधिसूचना संख्या-22889 दिनांक 18.12.2023 द्वारा उक्त छुट्टी दिनांक 23.12.2023 से 23.02.2024 तक कुल 63(तिरसठ) दिनों के लिए विस्तारित की गई है।

2. श्रीमती सीमा त्रिापाठी से प्राप्त अद्यतन आवेदन के आलोक में आलोच्य अधिसूचना दिनांक 18.12.2023 द्वारा दिनांक 23.02.2024 तक विस्तारित रूप में स्वीकृत उपार्जित छुट्टी को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली,1955 के संगत नियमों के तहत दिनांक 13 एवं 14 अप्रैल, 2024 के सार्वजनिक / राजपत्रिात अवकाशों का पश्च्‌ लग्न (सफिक्स) के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 24.02.2024 से 12.04.2024 तक कुल 49 (उनचास) दिनों तक के लिए विस्तारित की जाती है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

------

7 मार्च 2024

सं0 1/अ0-1011/2017-सा0प्र0-4112--श्री धर्मेन्द्र कुमार, भा0प्र0से0(2013) तदेन, अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति प्रबंध निदेशक, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 09.12.2023 से 16.12.2023 तक कुल 08 (आठ) दिनों की उपार्जित छुट्टी की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

------

7 मार्च 2024

सं0 1/एल0-43/2003-सा0प्र0-4113--श्री मिहिर कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (बी एचः 93), अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 04.03.2024 से 07.03.2024 तक कुल 04 (चार) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।31 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 2. श्री मिहिर कुमार सिंह, भा0प्र0से0 की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री सुरेश चौधरी, भा0प्र0से0 (2008), सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना रहेंगे। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

------

15 मार्च 2024

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-4536--श्री संजय कुमार, भा0प्र0से0 (2011), विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक विशेष सचिव, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-4537--श्री महाबीर प्रसाद शर्मा, भा0प्र0से0 (2013), विशेष कार्य पदाधिकारी, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर सचिव, राज्यपाल सचिवालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-4538--श्रीमती अमृषा बैन्स, भा0प्र0से0 (2018), (शिशु पोषण छुट्टी के उपरान्त पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक विशेष कार्य पदाधिकारी, ऊर्जा विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-4539--श्री हिमांशु कुमार राय, भा0प्र0से0 (2010), विशेष सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक निदेशक, पंचायती राज, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री आनन्द शर्मा, भा0प्र0से0(2013), अपर सचिव-सह-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- निदेशक, पंचायती राज, बिहार, पटना/अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना) निदेशक, पंचायती राज, बिहार, पटना/अपर सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे । सं0 1/पी-1002/2024-सा0प्र0-4540--श्री मुकेश कुमार लाल, आई.ए.ए.एस., विशेष सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक निदेशक, कृषि, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। 2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री आलोक रंजन घोष, भा0प्र0से0(2011), विशेष सचिव-सह-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- निदेशक, कृषि, बिहार, पटना) निदेशक, कृषि, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

16 मार्च 2024

सं0 1/सी0-1010/2024-सा0प्र0-4609--श्री परमार रवि मनुभाई, भा0प्र0से0 (बी एच -1992), अपर मुख्य सचिव-सह-खान आयुक्त, खान एवं भू-तत्व विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड, पटना/मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) द्वारा दिनांक 16.03.2024 के प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ग्रहण किए जाने हेतु समर्पित आवेदन दिनांक 15.03.2024 के आलोक में आलोच्य प्रयोजन से कम-से-कम तीन माह पूर्व आवेदन समर्पित करने की शर्त को अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम-16(2) के द्वितीय परन्तुक के अधीन क्षांत करते हुए 1958 की आलोच्य नियमावली के नियम-16(2) के प्रावधान के तहत श्री परमार रवि मनुभाई को दिनांक 16.03.2024 के प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सोहैल, सचिव ।

------

16 मार्च 2024

सं0 1/पी-1001/2024-सा0प्र0-4610--श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा, भा0प्र0से0 (2014), अपर सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सोहैल, सचिव ।

------

18 मार्च 2024

सं0 1/पी-1005/2024-सा0प्र0-4716--भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली से प्राप्त निदेश के आलोक में डॉ0 एस0 सिद्धार्थ, भा0प्र0से0 (1991), अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- मुख्य मंत्राी के प्रधान सचिव, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना/अपर मुख्य सचिव, मंत्रिामंडिल सचिवालय विभाग, बिहार , पटना) को गृह विभाग, बिहार, पटना के प्रभार से मुक्त करते हुए अगले आदेश32 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 तक उन्हें मुख्य मंत्राी के प्रधान सचिव, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार , पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. डॉ0 सिद्धार्थ अगले आदेश तक अपर मुख्य सचिव, मंत्रिामंडिल सचिवालय विभाग, बिहार , पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे और अगली व्यवस्था होने तक श्री प्रणव कुमार, भा0प्र0से0 (2008), सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार -महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं) गृह विभाग के प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप-सचिव।

------

19 मार्च 2024

सं0 1/पी-1005/2024-सा0प्र0-4828--भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के निदेश के आलोक में श्री प्रत्यय अमृत, भा0प्र0से0 (1991) को अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जगदीश कुमार, उप सचिव ।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 4—571+25-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

33 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

भाग-2

बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं

और नियम आदि। —————

सामान्य प्रशासन विभाग

------

अधिसूचनाएं

(शुद्धि-पत्रा)

26 जनवरी 2024

सं0 1/पी-1002/2023-सा0प्र0-1573--विभागीय अधिसूचना संख्या-1/पी.-1001/ 2024-सा0प्र0-1562-सह-पठित ज्ञापांक-1/पी0-1002/2023-1565 दिनांक 26.01.2024 द्वारा श्री राहुल कुमार, भा0प्र0से0(2011) के पदस्थापन के संबंध में अधिसूचित पदनाम 'निदेशक, बिहार संग्रहालय, पटना' को 'निदेशक, संग्रहालय, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना' पढ़ा जाए।

साथ ही, अधिसूचना संख्या-1562 के साथ अंकित संचिका संख्या,'1/पी.-1001/2024' को '1/पी.

-1002/2023' पढ़ा जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

------

9 फरवरी 2024

सं0 1/ अ0-1010/2020 -सा0प्र0-2450--विभागीय अधिसूचना संख्या-851 दिनांक 15.01.2024 द्वारा श्री अनिल कुमार, भा0प्र0से0 (बी एच ः 2017), तदेन उप विकास आयुक्त, पश्चिम चम्पारण, बेतिया (सम्प्रति, परियोजना निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसाइटी, पटना (अतिरिक्त प्रभार- मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना) को वैयक्तिक व्यय पर पेरिस की निजी विदेश यात्राा हेतु 08 दिनों की उपार्जित छुट्टी एक्स-इंडिया लीव के रूप में स्वीकृत किया गया है। 2. श्री अनिल कुमार के पक्ष में स्वीकृत 08 दिनों के आलोच्य एक्स-इंडिया लीव से संबंधित अधिसूचना में उक्त अवधि दिनांक 14.02.2024 से 21.02.2024 के बदले दिनांक 14.02.2023 से 21.02.2024 अंकित हो गई है। अतएव, आलोच्य अवधि को दिनांक 14.02.2024 से 21.02.2024 समझा जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जगदीश कुमार, उप-सचिव ।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 4—571+25-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

34 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण सूचनाएं । —————

सूचना -------

सं0 389--मैं सिंधु कुमारी भगत उर्फ सिंधु साहु, पति-रंजन कुमार साहु, पिता-शंकर भगत, पता-मुहल्ला सुधाकर लेन, जवाहरलाल रोड, डाक-प्रधान डाकघर, थाना-नगर जिला-मुजफ्फरपुर। मेरे पुत्र ऋत्विक रंजन (Hritwik Ranjan) के शैक्षणिक प्रमाण-पत्र में मेरा नाम सिंधु साहु दर्ज है जबकि मेरे आधार कार्ड एवम पैन कार्ड में सिंधु कुमारी भगत दर्ज है। अतः सिंधु कुमारी भगत एवम सिंधु साहु दोनो नामों से जानी जाती हूं। शपथ पत्र सं0 38016 दिनांक 18.12.2023 द्वारा मैं अब सिंधु कुमारी भगत के नाम से सभी कार्य हेतु जानी एवं पहचानी जाऊँगी।

सिंधु कुमारी भगत। No. 389--I, Sindhu Kumari Bhagat alias Sindhu Sahu, W/o Ranjan Kumar Sahu, D/o Shankar Bhagat, R/o Sudhakar Lane Jawahar Lal Road PO-GPO, PS-Nagar, Dist.-Muzaffarpur- 842001 in my Son's Hritwik Ranjan Educational certificate my name written as Sindhu Sahu but in my Aadhar Card and Pan Card name written as Sindhu Kumari Bhagat. So Sindhu Kumari Bhagat and Sindhu Sahu both are same and One Person vide Affidavit No. 38016 dated 18.12.2023, I shall be known as Sindhu Kumari Bhagat for all future purposes.

Sindhu Kumari Bhagat.

------ Bihar Electricity Regulatory Commission Vidyut Bhawan-II, J.L. Nehru Marg, Patna 800 021 ------ NOTIFICATION The 19th March 2024 Bihar Electricity Regulatory Commission (Multi Year Distribution Tariff) (First amendment) Regulations, 2023 No. 01--In exercise of powers conferred by sub section (1) of section 181 and clauses (zd), (ze) and (zf) of sub section (2) of section 181, read with sections 61, 62, and 86, of the Electricity Act, 2003 (36 of 2003) and all other powers enabling it in that behalf, the Bihar Electricity Regulatory Commission hereby makes the following Regulations, to amend Bihar Electricity Regulatory Commission (Multi Year Distribution Tariff) Regulations, 2021 (hereinafter referred to as "the Principal Regulations"), namely: 1.Short Title, Commencement and Extent. -

1.1 These Regulations shall be called the Bihar Electricity Regulatory Commission (Multi Year Distribution Tariff) (First amendment) Regulations, 2023.

1.2 These Regulations shall come into force from the date of their notification in the Official Gazette.

1.3 These Regulations shall extend to the whole of the State of Bihar 2. Amendment of Clause 20-Clause 20 of the Principal Regulation shall be substituted namely: -

"20. FUEL AND POWER PURCHASE ADJUSTMENT SURCHARGE (FPPAS)35 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 20.1 "Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge" (FPPAS) means the increase in cost of power, supplied to consumers, due to change in Fuel cost, power purchase cost and transmission charges with reference to cost of supply approved by the State Commission.

20.2 Fuel and Power Purchase adjustment surcharge shall be calculated by the DISCOMs on monthly basis and shall be billed to the consumers automatically without going through regulatory approval process according to the formula prescribed by the Commission subject to true-up on an annual basis. Automatic pass through shall be adjusted for monthly billing in accordance with these regulations.

The petition for true-up of FPPAs for a financial year shall be submitted by the DISCOMs to the Commission by 31st May of the next financial year and the true-up shall be completed by 30 th June of next Financial Year.

20.3 Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge shall be computed and charged by the distribution licensee, in (n+2)th month, on the basis of actual variation, in cost of fuel and power purchase for the power procured during the nth month. For example, the fuel and power purchase adjustment surcharge on account of changes in tariff for power supplied during the month of April of any financial year shall be computed and billed in the month of June of the same financial year:

Provided that in case the distribution licensee fails to compute and charge fuel and power purchase adjustment surcharge within this time line, except in case of any force majeure condition, its right for recovery of costs on account of fuel and power purchase adjustment surcharge shall be forfeited and in such cases, the right to recovery the fuel and power purchase adjustment surcharge determined during true-up shall also be forfeited.

20.4 The distribution licensee may decide, fuel and power purchase adjustment surcharge or a part thereof, to be carried forward to the subsequent month in order to avoid any tariff shock to consumers, but the carry forward of fuel and power purchase adjustment surcharge shall not exceed a maximum duration of two months and such carry forward shall only be applicable, if the total fuel and power purchase adjustment surcharge for a Billing Month, including any carry forward of fuel and power purchase adjustment surcharge over the previous month exceeds twenty per cent of the variable component of approved tariff.

20.5 The carry forward shall be recovered within one year or before the next tariff cycle whichever is earlier and the money recovered through fuel and power purchase adjustment surcharge shall first be accounted towards the oldest carry forward portion of the fuel and power purchase adjustment surcharge followed by the subsequent month.

20.6 In case of carry forward of fuel and power purchase adjustment surcharge, the carrying cost at the rate of State Bank of India Marginal Cost of Funds-based Lending Rate plus one hundred and fifty basis points shall be allowed till the same is recovered through tariff and this carrying cost shall be trued up in the year under consideration.

20.7 Depending upon quantum of fuel and power purchase adjustment surcharge, the automatic pass through shall be adjusted in such a manner that,36 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (i) If fuel and power purchase adjustment surcharge ≤5%, 100% cost recoverable of computed fuel and power purchase adjustment surcharge by distribution licensee shall be levied automatically using the formula.

(ii) If fuel and power purchase adjustment surcharge>5%, 5% fuel and power purchase adjustment surcharge shall be recoverable automatically as per 20.7(i) above. 90% of the balance fuel and power purchase adjustment surcharge shall be recoverable automatically using the formula and the differential claim shall be recoverable after approval by the State Commission during true up.

20.8 The revenue recovered on account of pass-through fuel and power purchase adjustment surcharge by the distribution licensee, shall be trued up later for the year under consideration and the true up for any financial Year shall be completed as per extant rule/ regulation.

20.9 In case of excess revenue recovered for the year against the fuel and power purchase adjustment surcharge, the same shall be recovered from the licensee at the time of true up along with its carrying cost to be charged at the rate approved by the Commission for working capital in the ARR determination of the relevant financial year and the under recovery of fuel and power purchase adjustment surcharge shall be allowed during true up, to be billed along with the automatic Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge amount.

20.10 The distribution licensee shall submit such details, in the stipulated formats, of the variation between expenses incurred and the fuel and power purchase adjustment surcharge recovered, and the detailed computations and supporting documents, as required by the State Commission, during true up of the normal tariff.

20.11 To ensure smooth implementation of the fuel and power purchase adjustment surcharge mechanism and its recovery, the distribution licensee shall ensure that the licensee billing system is updated to take this into account and a unified billing system shall be implemented to ensure that there is a uniform billing system irrespective of the billing and metering vendor through interoperability or use of open source software as available.

20.12 The licensee shall publish all details including the fuel and power purchase adjustment surcharge formula, calculation of monthly fuel and power purchase adjustment surcharge and recovery of fuel and power purchase adjustment surcharge (separately for automatic and approved portions) on its website and archive the same through a dedicated web address.

20.13 Computation of Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge:

Formula:

( A-B)*C + (D-E)

Monthly FPPAS for nth Month (%) =

{Z * (1- Distribution losses in%/100)} * ABR

Where, nth month means the month in which billing of fuel and power purchase adjustment surcharge component is done. This fuel and power purchase adjustment surcharge is due to changes in tariff for the power supplied in (n-2)th month.

A is Total units procured in (n-2)th Month (in kWh) from all Sources including Long-term, Medium –term and Short-term Power purchases (To be taken from the bills issued to distribution licensees).

37 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

B is bulk sale of power from all Sources in (n-2)th Month. (in kWh) = (to be taken from provisional accounts to be issued by State Load Dispatch Centre by the 10th day of each month). C is incremental Average Power Purchase Cost= Actual average Power Purchase Cost (PPC) from all Sources in (n-2) month (Rs./ kWh) ( computed) - Projected average Power Purchase Cost (PPC) from all Sources (Rs./ kWh)- (from tariff order)

D = Actual inter-state and intra-state Transmission Charges in the (n-2)th Month, (From the bills by Transcos to Discom) (in Rs)

E = Base Cost of Transmission Charges for (n-2)th Month. = (Approved Transmission Charges/12) (in Rs)

Z = [{Actual Power purchased from all the sources outside the State in (n-2) th Month. (in kWh)* (1 – Interstate transmission losses in % /100 ) + Power purchased from all the sources within the State(in kWh)}*(1 – Intra state losses in %/100) – B] in kWh

ABR = Average Billing Rate for the year (to be taken from the Tariff Order in Rs/kWh) Distribution Losses (in %) = Target Distribution Losses (from Tariff Order) Inter-state transmission Losses (in %) = As per Tariff Order 20.14 The Power Purchase Cost shall exclude any charges on account of Deviation Settlement Mechanism.

20.15 Other charges which include Ancillary Services and Security Constrained Economic Despatch shall not be included in Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge and adjusted though the true-up approved by the Commission.

By order of, Sd/-Illegible, Secretary.

------- बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद्‌ विद्यापति मार्ग, पटना - 800001 ------- अधिसूचनाएं 30 अक्तूबर 2023

सं0 2803--श्री हनुमान मंदिर, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4443 है।

उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन दिनांक- 03/05/2017 को किया गया था। न्यास समिति की अध्यक्षा, श्रीमति शारदा देवी द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया कि न्यास समिति द्वारा समय-समय पर आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क दिया जाता रहा है। न्यास समिति ने अपने प्रयास से मंदिर में व्याप्त अतिक्रमण को हटा कर माँ काली, शनि देव, साईं बाबा की नयी प्रतिमायें स्थापित की है। मंदिर में नियमित रंग-रोगन का कार्य किया गया है। इससे संबंधित फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किया गया हैै। पुर्व न्यास समिति के सदस्य श्री रामा मंडल, श्री अरूण साह, श्री शीनाथ साह, श्री शंकर पासवान एवं श्री केष्वर पासवान का सरकार द्वारा अवैध अतिक्रमण में झोपड़ी हटा दी गयी है, इसलिए वे लोग कहीं अन्यत्र निवास कर रहे हैं। उनके स्थान पर श्री पवन कुमार मंडल, श्री रवि कुमार एवं श्री कैलाष राम के नाम का प्रस्ताव देने हुये उक्त सदस्यों को समिति में स्थान दिये जाने का प्रस्ताव आम सभा की बैठक दिनांक- 22/05/2023 में निर्णय लिया गया। उपरोक्त परिस्थिति पर विचारोपरांत इस मंदिर की व्यवस्था एवं देखभाल हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये न्यास समिति का गठन अगले पांच वर्षों के लिए किया जाता है।

उपरोक्त न्यास समिति में दो उपाध्यक्ष नियुक्त किये जाने की आवष्यकता इस कारण हुयी कि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, दोनों सरकारी कर्मी हैं। समय-समय पर बैठक सरकारी कार्यों में व्यस्त होने के कारण संभावना नहीं रह जाती है। इसलिए दुसरे उपाध्यक्ष, श्री अनिल कुमार विषम परिस्थितियोें में बैठक की अध्यक्षता करने के लिए अधिकृत रहेंगे।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-27/09/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री हनुमान मंदिर, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।

योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री हनुमान मंदिर न्यास योजना, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री हनुमान मंदिर38 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 न्यास समिति, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्रीमति शारदा देवी - अध्यक्ष

2. श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह -सचिव

3. श्री अजय सिन्हा - कोषाध्यक्ष

4. श्री पवन कुमार मंडल - सदस्य

5. श्री रवि कुमार - सदस्य

6. श्री पांचु साह - सदस्य

7. श्री कैलाष राम - सदस्य

सभी का पता-श्री हनुमान मंदिर, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला- पटना।39 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री हनुमान मंदिर, महेंदु्र घाट, बांकीपुर, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

25 सितम्बर 2023

स्ं0 2336--मारंगी षिव मंदिर, ग्राम- घासी टोला, पो0थाना-मनषाही, जिला-कटिहार जो पर्षद में वर्ष 1962 से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है जिसकी निबंधन संख्या-1013 है। उक्त मंदिर मौजा घासी टोला में स्थित है और उक्त मंदिर से संबंधित भूमि घासी टोला खेसरा सं0-25/26 एवं मौजा नारायणपुर में खाता सं0-35, खेसरा सं0-172 जो षिवजी के नाम पर राजस्व अभिलेख में इन्द्राज है। उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं है। इस मंदिर से संबंधित कुछ भूमि मौजा-एकौना चकवन जिसका खाता सं0-12, 13, 79, 49 है के संबंध में ह0वाद सं0-01/89 चला, जिसके विरूद्ध एक मिस0 अपील नं0-493/13 मा0 उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया और उक्त भूमि के संबंध में ही मा0 उच्च न्यायालय पटना के द्वारा अपने आदेष दिनांक-27.07.2017 को सभी पक्षों को अपील का निस्तारण तकयथास्थिति बनाये रखने का निर्देष दिया गया और उक्त दावा मीरा देवी के पति ब्रãानंद गोस्वामी द्वारा पुजारी आदि के संबंध में किया गया था, जिससे प्रतिवादी सं0-17 ब्रãानंद गोस्वामी द्वारा पुजारी आदि के संबंध में किया गया था, जिसके विरूद्ध ही मा0 उच्च न्यायालय में उक्त अपील दाखिल की गयी है।

मंदिर की व्यवस्था हेतु 11 सदस्यीय न्यास समिति के गठन किये जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी, कटिहार से पर्षदीय पत्रांक-604 दिनांक-21.8.18 द्वारा नामों की मांग की गयी जिसके आलोक में अंचल अधिकारी, मनसाही ने दिनांक-22.01.19 को एक बैठक का आयोजन किया। उक्त दोनों आदेष के विरूद्ध मीरा देवी द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-5714/19 दाखिल कर प्रष्नगत किया गया, जो दिनांक-21.11.2019 को निस्तारित हुआ। जिसमें यचिकाकर्त्ता को यह निर्देष दिया गया कि पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर अपना अभ्यावेदन दाखिल करेंं और पर्षद उनके अभ्यावेदन पर निर्णय के उपरांत समिति गठन आदि के संबंध में कार्यवाही करें, जिसपरदिनांक-11.12.2020 को सुनवाई में यह उल्लेख किया गया कि किसी भी पक्ष के द्वारा मंदिर के व्यक्तिगत होने के संबंध में कोई भी दस्तावेज नहीं दाखिल किया गया, एकमात्र दस्तावेज जिस पर दोनों पक्ष दावा करते है, वह दानकर्त्ता बाबुलाल द्वारा जो खरपोस भूमि सेवायत को मंदिर की व्यवस्था, देखभाल, भरण-पोषण हेतु किया गया था, उसी के संबंध में है, अतः दावाकर्त्ता के निजी के दावे को निरस्त करते हुए मौजा नाराणपुर थाना सं0-105, खाता सं0-35, खेसरा सं0-172, एरिया-2.16 एकड़ एवं मौजा घासी टोला खाता सं0-19, रकवा-48 डी0 जो राजस्व अभिलेख में श्री षिवजी के नाम से इन्द्राज है, के संबंध में किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही किसी भी अधिकारी या न्यायालय में प्रष्नगत नहीं किया गया और न ही प्रष्नगत भूमि के बारे में कोई तथ्य रखा गया । उक्त तिथि को मौजा नारायणपुर एवं घासी टोला की उपरोक्त भूमि पर निर्माण पर रोक लगाते हुए भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराये जाने का निर्देष दिया गया एवं मंदिर के जीर्णाेद्धार, मरम्मति विकास आदि के लिए 07 सदस्यी न्यास समिति गठन किये जाने का निर्णय लिया गया। पर्षद के उक्त आदेष के विरूद्ध श्रीमती मीरा देवी द्वारा पुनः मा0 उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-5129/21 दाखिल किया गया ओर उसमें सुनवाई के उपरांत मा0 उच्च न्यायालय ने अपने आदेष दिनांक-04.03.2023 द्वारा यह निर्देष दिया कि याची जहॉनिवास करती है, उसमें किसी भी प्रकार से अवरोध नहीं किया जाए।

उपरोक्त तथ्य यह स्पष्ट करतेहैं कि ब्रãानंद गोस्वामी गोस्वामी द्वारा दाखिल मिस0 अपील 493/13 का संबंध भूमि मौजा एकौना चकवन की 10 बीघा 01 क0 07 धुर से संबंधित है। उक्त वाद का मौजा-घासी टोला एवं नारायणपुर की भूमि से कोई संबंध नहीं है और न ही वो विवादित है और घासी टोला की भूमि जहां पर षिव मंदिर स्थित है, उसमें याची द्वारा दाखिल एक अन्य याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-5129/21 में केवल याची के निवास स्थान पर सभी प्रकार के अवरोध पर रोक लगायी गयी है।

इस संंबंध में उक्त मीरा देवी को अपना पक्ष रखने हेतु पर्षदीय पत्रांक-1226 दिनांक-14.07.2023 द्वारा नोटिस निर्गत किया गया तथा उनके द्वारा दिनांक-03.08.2023 को डाक के माध्यम से अपना प्रति उत्तर दाखिल किया है, उसमें केवल यह उल्लेख है किया है कि मिस0 अपील 493/13 में दिनांक-27.07.2017 में यथास्थिति रखने का आदेष पारित किया गया है तथा एक अन्य याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-5129/21 विचाराधिन हैजबकि उपरोक्त मिस0 अपील का संबंध में वर्तमान भूमि से नहीं है। दीवानी न्यायालय द्वारा नियुक्त पुजारी श्री दिनेष गोस्वामी की ओर से 02 फोटोग्राफ दाखिल किया गया है जिसमें मीरा देवी के मकान जहां वह निवास जो हरे रंग से दिखाया गया है तथा उसके कुछ दूरी पर ही लगभग 10 से 15 फिट की दूरी पर षिव मंदिर है। मंदिर में एक विषाल गुम्बज है। फोटोग्राफ से यह स्पष्ट होता है कि उसके उपर की दीवारे टूट रही है, जिसका भविष्य में भी मरम्मति किया जाना आवष्यक है।

अतः उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु आम सभा दिनांक-30.05.2023 द्वारा प्रस्तावित है (प्रस्ताव पर किसी प्रकार का आपत्ति प्राप्त नहीं) के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-40 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 09.08.2023 द्वारा ''मारंगी षिव मंदिर, घासी टोला, पो0थाना-मनसाही, जिला-कटिहार''में सम्यक्‌ रूप से पूजा-पाठ, राग-भोगइसकी सम्पत्तियोंं कीे सुरक्षा, सम्यक प्रबंधन के लिए एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता हैै।

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''मारंगी षिव मंदिर, घासी टोला, पो0थाना-मनसाही, जिला-कटिहार, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''मारंगी षिव मंदिर, घासी टोला, पो0थाना-मनसाही, जिला-कटिहार, न्यास समिति''होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।

02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि का न्यास केबचत खाता में जमा की जायेगी। न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌, संधारण किया जायेगाऔर समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा और आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा।

04. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव में से एक एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। न्यास की समग्र आय इस बचत खाता में जमा की जायेगी।

05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाय। 06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जोगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

11. कार्यकारणी समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13.गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है :-

01.श्री बब्बन कुमार सिंह, पिता- श्री बलदेव प्रसाद सिंह - अध्यक्ष ग्राम- घासी टोला 02. श्री जयकिषोर सिंह, पिता-स्व0 कृत्यानंद सिंह - उपाध्यक्ष ग्राम- घासी टोला 03. श्री दिलारचंद पासवान, पिता-स्व0 महावीर पासवान - सचिव ग्राम- मनसाही 04. श्री विपीन कुमार सिंह, पिता-स्व0 बालेष्वर प्र0 सिंह - कोषाध्यक्ष ग्राम-घासीटोला 05. श्री संजीव कुमार सिंह, पिता-सुषील कुमार सिंह - सदस्य ग्राम- घासी टोला मारंगी

06. श्री नटवर लाल पासवान, पिता-श्री धनेष्वर पासवान - सदस्य41 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 ग्राम-मनसाही

07. श्री संत लाल परिहार, पिता-स्व0 देवी परिहार ग्राम-मनसाही - सदस्य 08. श्री रंजीत कुमार सिंह, पिता-स्व0 वषिष्ठ ना0 सिंह - सदस्य ग्राम-फुलहारा 09. श्री सुधीर सिंह, पिता-स्व0 अयोध्या प्रसाद सिंह ग्राम-घासी टोला - सदस्य 10. श्री आदर्ष राठौड़, पिता-श्री संजीव कुमार सिंह ग्राम-घासीटोला - सदस्य 11. श्री यषमिन्द कुमार सिंह, पिता-श्री निर्मल कुमार सिंह - सदस्य ग्राम-घासीटोला सभी पो0थाना-मनसाही, जिला-कटिहार, पिनकोड-854103. नोटः-1.न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

10 अक्तूबर 2023

सं0 2521--मॉ पूरण देवी मंदिर, ग्रामपो0थाना-पूर्णियॉ सिटी, जिला-पूर्णियॉ जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या-3741/07 है। इस मंदिर में 56 बीघा 18 कट्‌ठा 08 धुर जमीन है जिसमें 47 बीघा जमीन मंदिर के अधिपत्य में खेती की है और उसपर खेती की जाती है। लगभग 05 बीघा में मंदिर, धर्मषाला आदि स्थित है, 02 बीघा में नदी और श्मषान आदि है।

समय-समय पर मंदिर और उसकी सम्पत्ति की सुरक्षा-व्यवस्था हेतु अधिनियम की धारा 32 के अंतर्गत न्यास समिति का गठन किया जाता रहा है। अधिसूचना ज्ञापांक-2353 दिनांक-30.12.1995 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। न्यास समिति ने अपने 18 वर्ष के कार्यकाल में किसी प्रकार का विकास का कार्य नहीं किया गया, न ही अधिनियम की धारा 59, 60, 70 का अनुपालन किया गया।न्यास समिति के कार्यकलाप को असंतोषजनक पाते हुए अधिनियम की धारा 29(2) के अंतर्गत इसे विघटित कर दिया गया तथा अनुमंंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ के पत्रांक-92/गो0 दिनांक-07.02.2014 द्वारा प्रस्तावित नामों की ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन अधिसूचना ज्ञापांक-454 दिनांक-12. 07.2014 द्वारा किया गया।

वर्ष 2014 में गठित न्यास समिति ने भी अधिनियम की धारा 59, 60 एवं 70 के अंतर्गत न तो आय-व्यय विवरणी दाखिल की, न ही कोई शुल्क दाखिल किया और न ही बैठकों का कार्यवृत्त का प्रेषण किया और न्यास समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका था। उक्त के आलोक में आदेष ज्ञापांक-2112 दिनांक-15.09.2022 द्वारा अधिनियम की धारा 33 के तहत अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ को न्यास का अस्थायी न्यासधारी बनाया गया। साथ ही पर्षदीय पत्रांक-2113 दिनांक-15. 09.2022 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ से नवीन न्यास समिति गठन हेतु 11 सज्जन व्यक्तियों के नामाें की मांग की गयी।

मंदिर की 47 बीघा भूमि मेे से 30 बीघा भूमि 03 फरिकेन के द्वारा क्रमषः(1) श्री विनोद मिश्र (2) श्री गिरीष चंद्र मिश्र अपने भाई श्री मनोज मिश्र तथा (03) श्री संतोष मिश्र द्वारा 10-10 बीघा भूमि पर खेती की जाती थी और उसका कोई हिसाब नहीं दिया जाता था। वर्ष 2019 में समिति के अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा बैठक में लिए गये निर्णय के आलोक में 25-25 हजार रूपया तीनांें व्यक्तियों को बंदोबस्ती की राषि निर्धारित की गयी, जिसका समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा था।

पर्षद द्वारा कराये गये जांच में पर्षद निरीक्षक ने जांच प्रतिवेदन दिनांक-09.06.2016 में प्रतिवेदित किया है कि ''मंदिर की खेती के अतिरिक्त जो चढ़ावा आदि से आय प्राप्त होती है, उसपर भी तीनों मिश्रा परिवार(श्री संतोष मिश्र, पिता- श्री परमांनद मिश्र-पुजारी, श्री विनोद मिश्र, श्री गिरीष मिश्र) के द्वारा पूर्ण रूप से नियंत्रण कर अपने अधिपत्य में लिया जा रहा है और इस संबंध में पूर्व न्यास समिति के सदस्य सह पुजारी (स्व0 राकेष मिश्र) की पत्नी पूनम झा द्वारा लिखित रूप में षिकायत पर्षद से किया है कि विभिन्न प्रकार के पूजा, वाहन पूजा आदि से होनेवाली आय का केवल 20 प्रतिषत ही रसीद काटी जाती है, शेष राषि उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा रख लिया जाता है और इन सब का लेखा-जोखा नहीं है। इस मंदिर में सोना-चांदी आदि धातुओं के चढ़ावे को भी इन्हींलोगो के द्वारा रख लिया जाता है। मंदिर में छोटी-बड़ी मिलाकर 04 धर्मषालाएं हैं, परंतु इसकी प्रबंधन में भी बंदरबांट चल रहा है।

उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर सभी पक्षों का नोटिस भेजकर उन्हें विस्तार पूर्वक दिनांक-07.09.2022, 04.11.2022, 08.02. 2023, 17.03.2023, 19.05.2023 एवं 24.06.2023 को सुना गया । अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में मिश्रा परिवार जमा करने को कहा गया। जिसका अनुपालन करते उपरोक्त व्यक्तियों के द्वारा वर्ष 2023 तक की राषि जमा करने की बात बतायी गयी है, मात्र 3000/-रूपये शेष राषि श्री विनोद मिश्र के विरूद्ध निकलते हैं।

पूर्व सदस्य सह-पुजारी की पत्नी श्रीमति पूनम झा द्वारा मंदिर की आय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2013-2014 से 2018-19 तक की छायाप्रति दाखिल की गयी, जबकि समिति के अध्यक्ष व सचिव द्वारा इस संदर्भ में किसी प्रकार की कोई42 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 जानकारी या पहल नहीं की गयी। जबकि उक्त कार्य करने की जिम्मेदारी अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष की होती है। कोषाध्यक्ष श्री महाराणा प्रताप द्वारा भी अव्यवस्था के कारण अपना त्याग-पत्र दिया जा चुका है।

दिनांक-24.08.2023को सुनवाई के दौरान श्रीमति पूनम झा द्वारा पासबुक की छायाप्रति प्रस्तुत की गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि मंदिर (मॉ पूरण देवी विकास क्लव)के नाम से संचालित बैंक खाता(बैंक ऑफ बड़ौदा, गुलाब बाग) खाता सं0-00130100014719 में आज की तिथि में 43,60,368/-रू0 दर्षित हो रहा है।

उपरोक्त परिस्थितियॉ स्पष्ट करती है कि मिश्रा परिवार द्वारा मंदिर को पूर्ण रूप से अपने नियंत्रण में रखकर मंदिर की सभी प्रकार की आय, चढ़ावा(नगद, धातु) आदि सहित अपने पास रखकर उसको निजी प्रयोग में लिया जा रहा है और न्यास समिति भी प्रभावी नहीं थी। पर्षद द्वारा न्यास समिति गठन किये जाने हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ को पत्राचार करने एवं दूरभाष पर सम्पर्क किये जाने के उपरांत उनके द्वारा पत्रांक-1670/गो0 दिनांक-01.08.2023 द्वारा 14 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया। इन नामों के संबंध में उपस्थित व्यक्तियों द्वारा सूचना दी गयी कि श्री संजय कुमार राय एवं श्री राकेष राय सहोदर भाई है और पूर्व की समिति में भी श्री संजय राय रह चुके है परंतु इनका कार्य भी संतोषजनक नहीं रहा है।

अतः उपरोक्त वर्णित तथ्याें के आलोक मेें बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-24.08.2023 द्वारा ''मॉ पूरण देवी मंदिर, ग्रामपो0थाना- पूर्णियॉ सिटी, जिला- पूर्णियॉ''के सम्यक्‌ रूप से राग-भोग, पूजा-पाठ, उसकी आय का प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''मॉ पूरण देवी मंदिर, ग्रामपो0थाना- पूर्णियॉ सिटी, जिला- पूर्णियॉ,न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''मॉ पूरण देवी मंदिर, ग्रामपो0थाना- पूर्णियॉ सिटी, जिला- पूर्णियॉ, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।

02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और धर्मषाला, किराये आदि मद से प्राप्त सभी प्रकार की राषि (न्यास की समग्र आय) को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।

04. मंदिर में स्थित चारों धर्मषाला की पूरी व्यवस्था न्यास समिति द्वारा की जायेगी। मंदिर प्रांगण में जो 04 दुकानें हैं, उनको एक जगह व्यवस्थित करने की व्यवस्था की जाये। सभी दुकानों के संबंध में न्यास समिति को नये सिरे से अधिनियम की धारा-51 के तहत वर्तमान बाजार दर के समतुल्य किराया निर्धारित करने का अधिकार होगा। यदि कोई पूर्व से व्यवसाय कर रहें हैं तो उन्हें कुछ प्रतिषत की छूट देते हुए उन दुकानों की बंदोबस्ती अधिक से अधिक 03 वर्ष के लिए अधिनियम की धारा 44 के अंतर्गत की जायेगी। किराया आदि से प्राप्त सभी राषि न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगाी और उसकी रसीद न्यास समिति को दिया जायेगा।

05. मंदिर की 30 बीघा भूमि की बंदोबस्ती पूर्व से मिश्रा परिवार द्वारा किया जा रहा है, उसे उस क्षेत्र में प्रचलित बंदोबस्ती दर से अधिकतम 20 प्रतिषत की छूट देते हुए, यदि वे लोग लेने को इच्छुक हो, तो प्रतिवर्ष के दर पर दी जा सकती है। अन्यथा खुली डाक द्वारा बोली लगाकर उसकी बंदोबस्ती की जायेगी। बंदोबस्ती की राषि सीघे मंदिर के नाम से खोले गये बचत खाता में जमा किया जायेगा और उसके रसीद की छायाप्रति न्यास के अध्यक्ष/सचिव/कोषाध्यक्ष को उपलब्ध कराया जायेगा।

06. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिवएवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी मंदिर के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।

08. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि से संबंधित कोई कार्य करते हो और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान होतो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी । 09. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 10. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद कोप्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

11. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 13. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।43 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 14. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 15. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने के उपरांत सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता समाप्त की जा सकती है।

16. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता हैतथा कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा। 01. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर पूर्णियॉ - पदेन अध्यक्ष [email protected] 02. अंचल अधिकारी, पूर्णियॉ पूर्व - पदेन उपाध्यक्ष [email protected] 03. श्री मृगेंद्र देव, रामबाग - उपाध्यक्ष-II 04. श्रीमति पूनम झा, पति स्व0 राकेष कु0 मिश्र - सचिव 05.श्री राजेन्द्र संचेती, संचेती हाउस, चांदनी चौक - कोषाध्यक्ष 06. श्री मनोज सिंह सिनियर, गोकुल कृष्ण आश्रम - सदस्य 07. श्री विजय शंकर सिंह, जिला स्कूल मार्ग, खीरू चौक - सदस्य 08. श्री आतिष कुमार सनातनी, वार्ड नं0-23 - सदस्य 09. डॉ0 सत्यप्रकाष, मधुबनी, कृष्णापुरी यादव टोला - सदस्य 10. डॉ0 आलोक कुमार हाउस नं0-46, जिला स्कूल रोड - सदस्य 11. श्री राजकुमार यादव, वार्ड नं0-40, सुभाष नगर, खुष्की बाग - सदस्य सभी का पता- पूरण देवी मंदिर, ग्रामपो0- पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, जिला- पूर्णियॉ, पिनकोड-854302. पूर्व से ही पुजारी का कार्य कर रहें श्री परमानंद मिश्र को मंदिर में केवल पूजा-पाठ करने के लिए अधिकृत किया जाता है। न्यास समिति परमानंद मिश्र को पूजा-पाठ, राग-भोग करने के लिए एक निर्धारित भत्ता देने पर विचार कर सकती है, परंतु पुजारी को मंदिर की भूमि खेती, चढ़ावा, सोना-चांदी धातु, दान-पेटी या किराया, धर्मषाला आदि के संबंध में किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं रहेगा।

न्यास समिति यदि कुछ अन्य पुजारी को पूजा-पाठ के उद्‌देष्य से रखना चाहती है तो उसकी नियुक्ति के लिए स्वतंत्र होगी।

न्यास समिति मंदिर की व्यवस्था/साफ-सफाई आदि के लिए यदि आवष्यक समझें जो कुछ व्यक्तियों को पारदर्षिता का पालन करते हुए मासिक राषि पर पूर्णतया अस्थायी रूप से नियुक्त कर सकती है।

न्यास समिति को यह निर्देष दिया जाता है कि मंदिर के खाता में जमा राषि की सुरक्षा हेतु कुल राषि में से 25 लाख रूपयें का फिक्स डिपोजिटमंदिर के नाम से 01 वर्ष के लिए करेंं और आवष्यकता पड़ने पर पर्षद से अनुमति प्राप्त कर उस एफ0डी0 से राषि की निकासी की जा सकती है।

नोट :-1.न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

21 सितम्बर 2023

सं0 2245--श्री लक्ष्मीनारायण देव ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-दिलारपुर, थानाअंचल-मनिहारी, जिला-कटिहार पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-4703/2023 है। इसमें थाना सं0-300, खाता सं0-507, खेसरा सं0-1350, 1346, 1348 कुल रकबा-1.67 ए0 भूमि है जो क्रमिक एवं सर्वे खतियान में ''श्री लक्ष्मी नारायण देव'' के नाम से इन्द्राज है।

उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार, व्यवस्था, संचालन हेतु ग्रामीणों द्वारा आम सभा करके दिनांक- 18.10.2022 को 13 व्यक्तियों के न्यास समिति बनाए जाने का प्रस्ताव पारित कर पर्षद को उपलब्ध कराया गया है। खतियान से भी स्पष्ट होता है कि उक्त मंदिर की देखभाल हेतु में श्री हरि प्रसाद पाण्डेय, कृष्ण प्रसाद पाण्डेय एवं गोविन्द प्रसाद पाण्डेय सेवायत के रूप44 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 में इन्द्राज थे, परंतु तीनों व्यक्तियों का देहांत हो चुका है और ऐसा कोई दस्तावेज पर्षद के समक्ष किसी भी व्यक्ति द्वारा दाखिल नहीं किया गया है कि उपरोक्त सेवायतों द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को सेवायत नियुक्त किया गया हो, या मंदिर के देखभाल हेतु किसी अन्य व्यक्ति को सेवायत किस तरह नियुक्त किये जाएगे, ऐसा कोई विलेख नहीं है।

दिनांक-09.08.2023 को श्री उमानाथ पाण्डेय एवं श्री दिवाकर पाण्डेय पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर कथन करते हैं कि ''कुछ भू-माफियाओं द्वारा मंदिर की भूमि को हड़पने के उद्‌देष्य से फर्जी व्यक्तियों को खड़ा करके न्यास भूमि को क्रय-विक्रय किया जा रहा है और उक्त के संबंध में दिनांक-24.05.2023 को कुछ व्यक्तियों द्वारा मंदिर की उपरोक्त भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के उद्‌देष्य से टै्रक्टर बगैरह चला रहें थे, जिसपर मना करने पर कुछ ग्रामीणों के साथ मारपीट की गयी। इस संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट मनिहारी केस सं0-108/2023 दर्ज करायी गयी, जिसकी छायाप्रति संलग्न की गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त केस में 06 व्यक्ति नामित किए गये हैं।''

अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-09.08.2023 द्वारा ''श्री लक्षमीनारायण देव ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-दिलारपुर, थानाअंचल-मनिहारी, जिला-कटिहार''के जीर्णोद्धार, सम्यक्‌ रूप से राग-भोग, पूजा-पाठ, उसकी आय का प्रबंधन एवं सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है ।

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री लक्षमीनारायण देव ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-दिलारपुर, थानाअंचल-मनिहारी, जिला-कटिहार''न्यास योजना होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित समिति का नाम ''श्री लक्षमीनारायण देव ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-दिलारपुर, थानाअंचल-मनिहारी, जिला-कटिहार न्यास समिति''होगी। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा। 02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि का न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी। न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌, संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा और आवष्यकतानुसार राषि की निकासी कर व्यय किया जायेगा।

04. न्यास के खाता का संचालन अध्यक्ष/सचिवएवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। न्यास की समग्र आय इस बचत खाता में जमा की जायेगी। 05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कोई भी कार्य करता है और उसमें 05 लाखसे अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी।

06. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को भूमि के किसी भी प्रकार से क्रय-विक्रय, बंधक रखने का अधिकार नहीं होगा और अधिकतम 02 वर्ष के लिए बंदोबस्ती की जा सकती है। बंदोबस्ती के संबंध में नियमित रूप से एक रजिस्टर का संधारण किया जायेगा।न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष न्यास समिति की बैठक करेंगे।

08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

11. न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13.गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाताहै।

01. अंचल अधिकारी, मनिहारी - पदेन अध्यक्ष45 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 02. श्री उमानाथ पाण्डेय - सचिव

पिता-स्व0 गोविन्द प्रसाद पाण्डेय 03. श्री संजीव कुमार पाण्डेय - कोषाध्यक्ष पिता- स्व0 रामानाथ पाण्डेय 04. श्री दिवाकर पाण्डेय - सदस्य पिता-स्व0 गोपाल चन्द पाण्डेय 05. श्री प्रद्ययुम्न पाण्डेय - सदस्य पिता-स्व0 गोपीनाथ पाण्डेय 06.श्री पंकज पाण्डेय - सदस्य पिता- स्व0 गोपाल चन्द्र पाण्डेय 07. श्री चन्द्रभूषण पाण्डेय - सदस्य पिता-स्व0 बलराम पाण्डेय 08. श्री विमल पाण्डेय - सदस्य पिता-स्व0 गोपाल चन्द्र पाण्डेय 09. श्री राजीव रंजन पाण्डेय - सदस्य पिता- स्व0 गोपीनाथ पाण्डेय 10. श्री रवि पाण्डेय - सदस्य पिता- स्व0 बलराम पाण्डेय 11. श्री अभिषेक पाण्डेय - सदस्य पिता- श्री उमानाथ पाण्डेय

सभी ग्रामपो0-दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला- कटिहार, पिनकोड-854113.

उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि ''श्री लक्ष्मी नारायण देव''के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-1.न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

25 सितम्बर 2023

सं0 2339--श्रीश्री 108 कष्टहरण नाथ षिव मंदिर (गौरी शंकर मंदिर), अमला टोला, मंगल बाजार,पुराना बाटा चौक, राजेन्द्र पथ, जिला-कटिहार पर्षद के अंतर्गत एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या-4729 है। यह मंदिर कटिहार नगर निगम, वार्ड सं0-07 नया वार्ड सं0-30 के अंतर्गत जिसकी खाता सं0-105, खेसरा सं0-10 एवं 11 क ख ग घ च छ रकवा-0.15.70 हे0 यानी 39.85 डी0 है, पर स्थित है। जिसकी जमाबंदी सं0-105 हैै। मंदिर परिसर में तीस दुकानें एवं एक विवाह भवन है।

विवाह भवन बनाए जाने का प्रस्ताव तत्कालीन अंचल अधिकारी, कटिहार (अस्थायी न्यासधारी) ने पत्रांक-312 दिनांक-23.03.2010 को 46x38में विवाह भवन बनाने की अनुमति हेतु प्रस्ताव दिया गया। तत्कालीन प्रषासक द्वारा पर्षदीय पत्रांक-114 दिनांक-26.04.2010 इस षर्त्त पर विवाह भवन निर्माण करने की अनुमति दी कि इसपर मंदिर का अधिकार अक्षुण्ण रहेगा। उक्त आदेष के आलोक में दिनांक-07.07.2012 को साधारण 100/-रू0 के स्टाम्प पर दोनों पक्षों के बीच एकरारनामा किया गया। जिसमें किराये की राषि 29,040/-रू0 प्रतिवर्ष निर्धारित की गयी। विवाह भवन 02 मंजिला होगा, यदि मंदिर के विस्तार की आवष्यकता होगी तो द्वितीय पक्षकार उक्त भूमि पर कोई दावा नहीं करेंगे।

उक्त एकरारनामा आज से लगभग 11 वर्ष पूर्व किया गया, जिसमें आज तक किसी किराये में कोई वृद्धि नहीं की गयी है, उपस्थित श्री हेमचन्द्र भारती एवं उनके पुत्र श्री टीपू भारती का कथन है कि एक शादी में लगभग 11,000/-रू0 लेते है और गरीब व्यक्तियों से राषि कम ली जाती है। हेमचन्द्र भारती का मंदिर में पुजारी है और इन्हें 2100/- प्रतिमाह मिलता है।

मंदिर की दान-पेटी या चढ़ावा से उनका कोई संबंध नहीं है। अंचल अधिकारी, कटिहार ने पत्रांक-2695 दिनांक-22.

6.2023 द्वारा प्रतिवेदित किया है कि मंदिर में 30 दुकानें है और सभी दुकानदारों से 7/- प्रति वर्ग फिट की दर से किराया की वसूली की जा रही है। दुकानदारों द्वारा किराया अंचल कार्यालय में जमा कर नाजीर से रसीद प्राप्त किया जाता है। श्री दयाकांत झा केयर टेकर द्वारा मंदिर की साफ-सफाई में कोई दिलचस्पी नहीं ली जाती है। अपने प्रतिवेदन में अंचल अधिकारी द्वारा तीस दुकादारों के नाम एवं बकाया किराया राषि का उल्लेख किया है। साथ ही न्यास समिति गठन हेतु अपनी अध्यक्षता में दस लोगों के नामों का प्रस्ताव भी दिया है।46 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 प्रस्तावित नामों में क्रम सं0-15 पर श्री शुभम सौरभ पिता-श्री ब्रजेष चौधरी मंदिर प्रांगण में व्यवसाय करने वाले है, जिनके विरूद्ध वर्ष 2013 से किराया की राषि बकाया है। श्री रमण कुमार बाल एवं श्री संजीव कुमार यादव के बारें में उपस्थित श्री हेमचन्द्र भारती को कोई जानकारी नहीं है।

अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-24.08.23 द्वारा ''श्रीश्री 108 कष्टहरण नाथ षिव मंदिर (गौरी शंकर मंदिर), अमला टोला, मंगल बाजार, पुराना बाटा चौक, राजेन्द्र पथ, जिला-कटिहार''के सम्यक्‌ रूप से राग-भोग, पूजा-पाठ, उसकी आय का प्रबंधन एवं सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्रीश्री 108 कष्टहरण नाथ षिव मंदिर (गौरी शंकर मंदिर), अमला टोला, मंगल बाजार, पुराना बाटा चौक, राजेन्द्र पथ, जिला-कटिहार,न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''''श्रीश्री 108 कष्टहरण नाथ षिव मंदिर (गौरी शंकर मंदिर), अमला टोला, मंगल बाजार, पुराना बाटा चौक, राजेन्द्र पथ, जिला-कटिहार, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।

02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और किराये आदि मद से प्राप्त सभी प्रकार की राषि (न्यास की समग्र आय) को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।

04. न्यास समिति मंदिर केप्रांगण में जो विवाह भवन संचालित हो रहा है, उस संबंध में किराये के मूल्यांकन बाजार दर परनिर्धारित करें और यदि बाजार मूल्य 20/- प्रति वर्गफिट या शादी, तिलक आदि आयोजनों में जो बुकिंग की जाती है, उसका 15 से 20 प्रतिषत के बीच रखकर, प्रस्ताव पास का पर्षद को अनुमोदन हेतु भेजें।

05. दुकानदारों का किराया भी स्कायर फिट पर निर्धारित का अनुमोदन हेतु पर्षद को भेजें। अंचल अधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि बाजार मूल्य 20/-वर्ग फिट है। दुकानदार एवं मंदिर न्यास समिति के बीच किराया बढ़ोतरी को लेकर कोई विवाद उत्पन्न न हो, इस लिए बढ़ोतरी की राषि अधिकतम 5-10 प्रतिषत के बीच रखी जा सकती है। यह भी सुनिष्चित किया जाये कि किराये की राषि में प्रति वर्ष बढ़ोतरी होती रहेगी।

06. न्यास समिति इस बात पर भी प्रस्ताव पास करें कि श्री हेमचन्द्र भारती द्वारा मंदिर में पूजा-पाठ किया जाता है और मासिक भुगतान के रूप में जो राषि दी जा रही है, उस पर विचार कर पुनः राषि निर्धारित करें।

07. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी मंदिर के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।

08. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।

09. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 10. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

11. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 13. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

14. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

15. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य,47 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है :-

1. अंचल अधिकारी, कटिहार - पदेन अध्यक्ष 2. श्री अभय कुमार, - उपाध्यक्ष पिता-स्व0 बासदेव मेहता, कालोनी नं0-01, कटिहार। 3. श्री शंकर प्रसाद गुप्ता - सचिव पिता-स्व0 मोहन प्रसाद गुप्ता, दुर्गा स्थान, कटिहार 4. श्री नंद कुमार गुप्ता - कोषाध्यक्ष पे0-स्व0 लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता मंगल बाजार, कटिहार। 5. श्री विजय भगत - सदस्य पे0-श्री सदानंद भगत ललीयाही, कटिहार। 6. श्री दीपक कुमार - सदस्य पे0-ध्रुव प्रसाद गुप्ता, मंगल बाजार, कटिहार। 7. श्री राजेष कुमार केषरी - सदस्य पिता-ताराकिषोर प्र0 केषरी, न्यू मार्केट, कटिहार। 8. श्री रामलखन साह - सदस्य पे0-स्व0 गंगा प्रसाद मनिया, कटिहार। नोटः-1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2.न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

7 अक्तूबर 2023

सं0 2492--श्री रामजानकी, लक्ष्मण जी, राधा कृष्ण जी मंदिर, ग्राम-सठमा, जिला-खगड़िया, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4038 है।

संचिका से स्पष्ट होता है कि वर्ष 1988 से श्री राजेन्द्र प्रसाद राय एवं लक्ष्मी प्रसाद राय से मंदिर में होने वाली आय के संबंध में विवरणी की मांग की जाती रही, परन्तु कोई प्रति-उत्तर प्राप्त नहीं होने पर राजेन्द्र प्र0 राय को पुनः पर्षद के पत्रांक 2816 दिनांक 16/03/1994 द्वारा अधिनियम की धारा 28(2)H के तहत क्यों नहीं न्यासधारी के पद से अपसारित करने हेतु स्पष्टीकरण की मांग की गयी, साथ हीं अंचलाधिकारी से उक्त मठ की जांच करने और यदि संतोषप्रद व्यवस्था नहीं हो तो न्यास समिति गठन करने हेतु 07 अच्छे एवं धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग पर्षद के पत्रांक 2815 दिनांक 16/03/1994 द्वारा की गयी।

उपरोक्त पत्र के आलोक में अंचलाधिकारी के द्वारा अपनी रिपोर्ट पत्रांक 746 नवम्बर 1996 को प्राप्त हुई, जिसमें उल्लेख किया गया है कि राजेन्द्र प्र0 राय के दरवाजे पर ईंट, फुस निर्मित मंदिर है और कागजी जांच में पाया गया कि मौजा-खगरैठा, थाना नं0-359, तौजी नं0-2991 खाता नं0-89, खसरा 43 मी0 में 03 बी0 18 क0 05 धु0 जमीन है। आस-पास के ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मौजा बेलदौर अंचल के सठमा मौजा में लगभग 200 बीघा जमीन मंदिर के नाम है, परन्तु उसकी व्यवस्था कर रहे श्री राजेन्द्र प्र0 राय न तो कभी पर्षद में उपस्थित हुए और न हीं उनके द्वारा कोई स्पष्टीकरण दाखिल किया गया।

इसी बीच निकेष कुमार व कुछ अन्य लोगों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुआ कि मंदिर की भूमि को अवैध रूप से बेचा जा रहा है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि खाता सं0-08, खेसरा सं0-416/583 एवं खाता सं0-107, खेसरा सं0-533 का अवैध रूप से विक्रय किया जा चुका है और खेसरा सं0-382 की भूमि को बेचने हेतु एकरारनामा चल रहा है। कुल 200 बी0 भूमि भगवान के नाम से है, अतः निबंधन को रद्द किये जाने तथा विक्रय पर रोक लगाये जाने की प्रार्थना की गयी। पुनः दिनांक 06/07/2009 को प्रार्थना-पत्र दिया गया कि जमाबंदी सं0-53 श्री जानकी जी कुल भूमि48 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 (58.12.17) बीघा, जमाबंदी सं0-72 श्री नारायण जी कुल भूमि (47.19.13) बी0 जमाबंदी सं0-109 श्री महारानी जी कुल भूमि (53.12.05) बी0 जमाबंदी सं0-122 श्री रामचंद्र जी कुल भूमि (111.02.07) बी0 जमाबंदी सं0-123 रामलला कुल भूमि (43.05. 14) बी0 जमाबंदी सं0-139 श्री लक्ष्मण जी कुल भूमि (47.18.13) बी0 जमाबंदी सं0-140 लक्ष्मण जी कुल भूमि (37.08.18) तथा जमाबंदी सं0-157 भगवान कुल भूमि (33.18.13) बी0 उक्त सभी भूमि पर सेवायत के रूप में छेदीलाल के नाम का इन्द्राज है। उक्त भूमि को सेवायत के द्वारा बिना पर्षद की अनुमति के विक्रय किया जा रहा है। उपरोक्त षिकायत-पत्र के आलोक में अवर निबंधक से उपरोक्त जमाबंदी की भूमि को निबंधन नहीं किये जाने हेतु पत्र दिनांक 07/07/2009 को लिखा गया तथा उक्त सेवायत छेदीलाल के सभी 05 पुत्रों को भी पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर अपना प्रति-उत्तर दाखिल करने का निर्देष दिया गया। पुनः दिनांक 27/07/2009 को उपरोक्त सभी जमाबंदी की भ्ूामि पर विक्रय पर रोक लगाये जाने संबंधी तथा अपने स्तर से सक्षम अधिकारी से जांच कराने हेतु पर्षद के पत्रांक 880 द्वारा जिला पदा0 को लिखा गया के आलोक में राजस्व कर्मचारी द्वारा अपने 11 पृष्ठों की रिपोर्ट दिनांक 03/09/2009 अंचलाधिकारी को समर्पित की है, जिसकी एक प्रति पर्षद को भी उपलब्ध करायी गयी, जिसमें उल्लेख किया गया है कि उपरोक्त जमाबंदी की भ्ूामि पर विभिन्न भगवानों के नाम रैयत के रूप में इन्द्राज है तथा सेवायत के रूप में छेदीलाल का उल्लेख है और भू हदबंदी कार्यवाई (433. 11.01) में से (65.01.09) बी0 भूमि सीलिंग कार्यवाही में अधिग्रहित की गयी। कुल शेष भूमि (368.02.00) बची, जिसे उक्त सेवायत छेदीलाल के पुत्रों द्वारा बंटवारा दाखिल-खारिज वाद सं0-238/2000-01 दाखिल है, जिसमें तत्कालिन अंचलाधिकारी द्वारा 126.63 ए0 भूमि दाखिल-खारिज भिन्न-भिन्न रैयत एवं केवालादार के नाम कर दिया। शेष एराजी 222. 81 ए0 पर सीलिंग गजट के आदेष की प्रति उपलब्ध नहीं है। बंटवारा दाखिल-खारिज के बाद धरल्लेसे भूमि का विक्रय होने लगा। अंचलाधिकारी को दिनांक 07/12/2010 को पत्र लिखा गया कि खगरैठा मंदिर के न्यास से सठवा मौजा स्थित मंदिर की भ्ूामि का कोई संबंध नहीं है और वह भूमि विभिन्न देवी-देवताओं के नाम है जो सार्वजनिक धार्मिक न्यास की सम्पति है और न्यास समिति गठन हेतु कुछ स्वच्छ चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी।

इसी बीच ग्रामीणों द्वारा 11 सदस्यों के नामों का प्रस्ताव शपथ-पत्र के साथ पर्षद में निकेष कुमार द्वारा दिनांक 06/09/2011 को प्रार्थना-पत्र दिया गया कि सठवा मौजा में लगभग 04 बी0 जमीन खेसरा सं0-427, 421, 420, 419 एवं 418 प्रार्थी के कब्जे में है और आपराधिक तत्व उन्हें बेदखल करना चाहते हैं, जबकि लगतार जिला पदा0, अनुमंडल पदा0 तथा अंचलाधिकारी को उक्त मंदिर की संम्पति का विक्रय पर रोक लगाये जाने तथा न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों के मांग के संबंध में बार-बार पत्राचार किया गया, परन्तु किसी प्रकार का कोई प्रति-उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। संचिका पर दाखिल-खारिज वाद सं0-238/2000-01 में अंचलाधिकारी के द्वारा पारित आदेष दिनांक 01/12/2020 की प्रति भी उपलब्ध है, जिसमें भी उपरोक्त सभी जमाबंदी की भ्ूामि विभिन्न भगवान और देवी-देवताओं के नाम से इन्द्राज तथा सेवायत के रूप में छेदीलाल का उल्लेख है और अंचलाधिकारी के द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर उपरोक्त सभी भूमि को छेदीलाल के पुत्र और भतीजा को प्रत्येक को 43.68 एकड़ भूमि केवल हल्का कर्मचारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर दाखिल-खारिज किये जाने का आदेष पारित कर दिया गया, जबकि कागजात अवलोकन से स्पष्ट है कि देवी-देवताओं के नाम से जमाबंदी चल रही है भू-हदबंदी वाद सं0-157/73-74 जिला गजट में 01/07/1985 को भूधारी के नाम बना ह,ै 78.79 एकड़ जमीन अधिषेष किया गया है। आगे उल्लेख किया हेै कि आवेदकगण के बीच रसीद काटने में काफी कठिनाई होती है, अतः लगान वसूली की दृष्टि में शेष भूमि को 08 भाईयों में अलग-अलग जमाबंदी श्रृजित की जाए। संचिका पर षिकायतकर्तागण द्वारा कुछ विक्रय-पत्र की फोटोप्रति भी दाखिल की गयी।

श्री निकेष कुमार द्वारा दिनांक 25/02/2021 को पुनः पर्षद में प्रार्थना-पत्र दिया गया कि थाना सं0-145 बेलदौर मौजा में 253 बी0 भूमि न्यास की है, जिसकी निबंधन सं0-4038 है, जिस पर कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा करना चाहते हैं तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ पर्षद द्वारा पूर्व में जारी जिला पदा0, अंचलाधिकारी को भेजे गये पत्र तथा अंचलाधिकारी की रिपोर्ट दिनांक 15/09/2020 भू हदबंदी वाद में निर्णय उपरान्त गजट प्रकाषन दिनांक 01/07/1985 की प्रति दाखिल की।

ग्रामीणों द्वारा न्यास समिति गठन हेतु दिनांक 08/01/2021 को एक आम बैठक करके 14 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराते हुए न्यास समिति गठन किये जाने की प्रार्थना की गयी। प्रस्तावति नामों को अंचलाधिकारी तथा थानाध्यक्ष के यहां भेज कर उनसे क्रमषः मंतव्य व चरित्र सत्यापन रिपोर्ट की मांग की गयी, परन्तु उक्त रिपोर्ट आज तक प्राप्त नहीं है।

कुछ आरोप स्थानीय श्री विकास कुमार के विरूद्ध भी लगाये गये थे, जिस संबंध में उनसे प्रति-उत्तर की मांग की गयी थी। उनके द्वारा दाखिल अपने प्रति-उत्तर दिनांक 11/03/2022 में उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त भूमि उनकी पैत्रृक भूमि है और असमाजिक तत्वों द्वारा विभिन्न तरीको से परेषान किया जा रहा है, उस जमीन के संबंध में कोई अर्पणनामा या दान-पत्र नहीं है तथा भू हदबंदी कार्यवाही चली थी, जिसमें देवी देवताओं के नाम पर एक एकड़ जमीन भी नहीं दी गयी और न हीं कोई युनिट निर्धारित की गयी। 8.79 एकडत्र जमीन अधिषेष घोषित की गयी और दाखिल-खारिज वाद सं0-238/2000-01 की उपरोक्त जमाबंदी हमलोगों के बीच आपस में बंटवारा करके प्राप्त हुआ।

जिला पदा0 के पत्रांक 1281 दिनांक 13/04/2023 द्वारा एक पत्र पर्षद में प्राप्त हुआ कि पर्षद के पत्रांक 880 दिनांक 27/07/2009 के आलोक में मंदिर की भूमि का निबंधन नहीं होेने के संबंध में अनुमंडल पदा0 की जांच प्रतिवेदन दिनांक 12/06/2010 भेजी गयी है, जिसमें जांच में यह पाया गया कि भूधारियों के वंषजों द्वारा निर्मित है, व्यक्तिगत रूप से परिवार द्वारा पूजा-पाठ किया जाता है। उक्त मंदिर के अलावा सठमा मौजा के मंदिर से इन लोगों का कोई मतलब नहीं है और भूधारी द्वारा बार-बार निबंधन पर लगी रोक हटाने का भी आग्रह किया जा रहा है। उक्त पत्र के साथ पंकज कुमार राय द्वारा दिया गया प्रार्थना-पत्र तथा पर्षद द्वारा जारी पत्र दिनांक 27/07/2009 एवं जिला पदा0 द्वारा भेजे गये पत्र49 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 दिनांक 12/06/2010 की प्रति संलग्न की है। जिला पदा0 के उपरोक्त पत्रांक 1028 दिनांक 12/06/2010 में हीं उल्लेखित है कि मंदिर के अलावा सठमा मौजा के मंदिर से इनलोगों का कोई मतलब नहीं है। जबकि सठमा मौजा स्थित उपरोक्त भूमि में अवैध रूप से दाखिल-खारिज जो पूर्व में जमाबंदी विभिन्न देवी-देवताओं के नाम से चली आ रही है, को अंचलाधिकारी के द्वारा एक षड्‌यंत्र के तहत बिना पर्षद को सुनवाई का अवसर दिये या उस बिन्दू पर कोई जांच किये सभी भ्ूामि को 08 व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कायम करने का आदेष पारित किया गया, जो मुख्य विवाद का जड़ है, जबकि किसी धार्मिक न्यास की सम्पति के संबंध में अधिनियम की धारा 50 एवं 52 में स्पष्ट प्रावधान है कि बिना पर्षद को नोटिस दिये या सुनवाई का अवसर दिये किसी भी पदाधिकारी या न्यायालय को किसी भी कार्यवाई में यदि कोई डिग्री आदेष पारित किया जाता है तो वह अप्रभावी और शुन्य होगा और अधिनियम की धारा 44 के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को स्थानान्तरण करने का भी कोई अधिकार नहीं है। जब उपरोक्त भूमि राजस्व विलेख तथा खतियान (आर0 एस और सी0 एस0) में भगवान के नाम से इन्द्राज है तो किस अधिकार के तहत अंचलाधिकारी के द्वारा व्यक्तिगत नाम से जमाबंदी काटने का आदेष पारित किया गया है जो स्वंय उनके अवैध कार्य का प्रमाण है। इस संबंध में जिला पदा0 को पत्र लिखा जाए कि उपरोक्त सभी परिस्थितियां स्पष्ट करती है कि प्रषासन के विभिन्न पदा0 पर्षद द्वारा बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद भी न्यास समिति बनाये जाने हेतु कोई रिपोर्ट नहीं दाखिल करते हैं।

ऐसी परिस्थिति में पर्षद के पास एकमात्र उपाय ग्रामीणों की आम सभा द्वारा दिनांक 08/01/2021 को प्रस्तावित नामों की न्यास समिति बनाया जाना रह जाता है

अतः पर्षद के आदेष दिनांक- 31.08.2023 के आलोक में उक्त मंदिर की भ्ूामि को सुरक्षित रखने के उद्देष्य से एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है।

मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री रामजानकी, लक्ष्मण जी, राधा कृष्ण जी मंदिर, ग्राम-सठमा, जिला-खगड़िया,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामजानकी, लक्ष्मण जी, राधा कृष्ण जी मंदिर, ग्राम-सठमा, जिला-खगड़िया,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री रामजानकी, लक्ष्मण जी, राधा कृष्ण जी मंदिर, ग्राम-सठमा, जिला-खगड़िया,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।50 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति 01 वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, गोगरी, जिला- खगड़िया - अध्यक्ष 2. श्री गोपाल कुमार यादव, पिता-स्व0 जयकिषोर यादव - उपाध्यक्ष 3. श्री निकेष कुमार, पिता-राधेष्याम प्र0 यादव - सचिव 4. श्री गुरूदेव कुमार सिंह, पिता-राजो सिंह - कोषाध्यक्ष 5. श्री रणधीर कुमार, पिता-मुरलीधर प्र0 यादव - सदस्य 6. श्री राहुल कुमार, पिता-राजकिषोर प्र0 यादव - सदस्य 7. श्री सुबोध राम, पिता-स्व0 भूमि राम - सदस्य 8. श्री उदय राम, पिता-वासुदेव राम - सदस्य 9. श्री फैनी यादव, पिता-स्व0 सुमैर यादव - सदस्य 10. श्री रणवीर कुमार, पिता-प्रभु भरत - सदस्य 11. श्री करूण शर्मा, पिता-योगेन्द्र शर्मा - सदस्य सभी का पता- ग्राम- सठमा, पो0- कुर्बन, थाना- गोगरी, जिला- खगड़िया। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि श्री रामजानकी, लक्ष्मण जी, राधा कृष्ण जी मंदिर, ग्राम-सठमा, जिला-खगड़िया,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-(1) न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। (2) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगातथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

7 अक्तूबर 2023

सं0 2494--

जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-3791 है।

इस गाँँव में लगभग 20 बी0 में बहुत बड़ा तालाब था, जो वर्ष 1992 से सुखा पड़ने, के कारण सुख गया और ग्रामीणों को उस तालाब में एक विषालकाय लगभग 07-08 फीट बड़ा भगवान विष्णु की मूर्ति का पता लगा और ग्रामीणों के द्वारा कुछ सहयोग करके मूर्ति की स्थापना करके पूजा-पाठ प्रारंभ किया गया। इसी बीच तत्‌कालीन पर्षद के अध्यक्ष द्वारा उक्त गाँँव के भ्रमण के दौरान कुछ पौराणिक एवं ऐतिहासिक मूर्ति शोधकर्त्ता एवं विद्यवानो के द्वारा निरीक्षण उपरांत पाये जाने पर पर्षद के द्वारा वहाँ एक विषाल मंदिर बनाए जाने हेतु ग्रामीणों को प्रेरणा दी गयी और इस संबंध में वर्ष 2008 से 2018 के बीच लगभग 76,00,000/-रु0 सहयोग राषि के रूप में उक्त मंदिर की समिति को दिया गया। अतः उक्त मंदिर की निर्माण व्यवस्था हेतु ग्र्रामीणों की एक समिति डॉ0 कृष्ण मुरारी सिंह की अध्यक्षता में दिनांक-15.10.2007 को गठित की गयी तथा समिति के कार्य को संतोषजनक पाते हुए, पर्षद के ज्ञापांक-2270, दिनांक-04.03.2014 पुनः 05 वर्षाे कार्यकाल को विस्तार किया गया, तभी समिति के द्वारा जनसहयोग चंदा व अपने प्रयास से लगभग 140 फीट लम्बा, 80 फीट चौड़ा विषाल मंदिर51 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 का निर्माण किया जा रहा है, साथ में मंदिर से लगभग 110 फीट का पुल तब मंदिर का गेट का प्रस्ताव है। चूॅकि उक्त मंदिर का निर्माण पूर्व में तालाब के बीच में किया जा रहा है।

वर्ष 2021-22 तक उक्त मंदिर में कुल 1,81,00,000/-रु0 की राशि खर्च की जा चुकी है। उक्त कार्य के संबंध में अंचल पदाधिकारी के द्वारा वर्ष 2008-09 से 2019-20 तक में लगभग 1,08,00,000/-रु0 तक राषि का उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है। यद्यपि की मंदिर निर्माण के संबंध में कुछ व्यक्तियों के द्वारा षिकायत प्राप्त हुयी थी, परन्तु षिकायत में कोई तथ्यात्मक विवरण या साक्ष्य पर्षद के समक्ष नहीं प्राप्त हुयी। चूॅकि अभी मंदिर का निर्माण कार्य जारी है और कार्यरत न्यास समिति के द्वारा कार्यरत न्यास समिति 02 सदस्य क्रमषः मेदनी महतो एवं सिद्धेष्वर सिंह की अधिक आयु एवं शारीरिक अक्षमता के कारण समिति की तथा ग्रामीणों कि एक बैठक दिनांक-03.05.2022 को की गयी। 11 व्यक्तियों का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें 08 व्यक्ति पूर्व न्यास समिति के हैं और 03 व्यक्ति क्रमशः अरविंद कुमार कौषिक, श्रीमती बेबी देवी और मिथिलेष सिंह को समिति के साथ जोड़ा जाए। पर्षद द्वारा पृच्छा किए जाने पर कि पूर्व कार्यरत न्यास समिति के 02 व्यक्ति क्रमषः मेदनी महतो, रामेष्वर सिंह अधिक वृद्ध होने तथा शारीरिक रूप कमजोर होने के कारण उनको समिति में नहीं रखा गया है तथा एक सदस्य श्री महेष्वर सिंह का स्वर्गवास लगभग 02 वर्ष पूर्व हो चुका है। उक्त 03 व्यक्तियों के स्थान पर उपरोक्त 03 व्यक्तियों को रखे जाने का प्रस्ताव दिया है, जिसपर चरित्र सत्यापन रिपोर्ट थाने से प्राप्त की गयी, थाने ने अपनी रिपोर्ट दिनांक-23.04.2023 द्वारा मिथिलेष सिंह और बेबी देवी के विरूद्ध किसी प्रकार का आपराधिक प्रविष्टी नहीं है। अरविंद कुमार कौषिक के संबंध में बताया गया कि बरबीघा थाना काण्ड सं0-354/2022, आम्र्स एक्ट के अन्र्तगत दर्ज है। इस संबंध में आज उपस्थित श्री अरविंद कुमार कौषिक द्वारा उपरोक्त कांड में एस0डी0पी0ओ0 तथा एस0पी0 को प्रवेक्षण टिप्पणी रिपोर्ट जो केस डायरी में पैरा 63 एवं 53 में उल्लेख है, जिसमें उपरोक्त दोनो वरीय पदाधिकारियों के द्वारा अरविंद कुमार कौषिक के घर में लगे सी0सी0टी0वी0 कैमरे के अवलोकन से यह पाया गया कि इनके विरूद्ध लगाए गए आरोप गलत है और इनकी संद्धिगता उस कांड में नहीं है तथा संबंधित प्राथमिकीकर्त्ता एस0आई0 के विरूद्ध कार्यवाई किए जाने का भी प्रस्ताव दिया गया। अतः उपरोक्त प्रवेक्षण टिप्पणी के आधार पर यह माना जा सकता है कि उपरोक्त थाना कांड में प्रार्थी अरविंद कुमार कौषिक की प्रथम दृष्टया कोई संद्धिगता प्रदर्षित नहीं है।

अतः पर्षद के आदेष दिनांक- 30.09.2023 के आलोक में प्रस्तावित न्यास समिति का गठन योजना का निरूपण करते हुए, 05 वर्ष के लिए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है। मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए '' ''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' ,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का '' '' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।52 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. समिति अपनी प्रथम बैठक में गठित न्यास समिति से किसी को कोषाध्यक्ष हेतु प्रस्ताव पासकर आनुमोदन हेतु पर्षद में भेजेगी।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. डॉ0 कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह - अध्यक्ष 02. श्री अरविंद मानव - सचिव 03. श्री क्षत्रपति सिंह - कोषाध्यक्ष 04. श्री विपीन सिंह - सह-कोषाध्यक्ष 05. श्री अरविंद कुमार कौषिक - लेखापाल 06. श्री अमोद प्रसाद सिंह - सदस्य 07. श्री राजवल्लभ रविदास - सदस्य 08. श्रीमती बेबी देवी - सदस्य 09. श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह - सदस्य 10. श्री सिद्धेष्वर प्रसाद सिंह - सदस्य 11. श्री मिथिलेष सिंह - सदस्य न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

''के उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-(1) न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। (2) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगातथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

9 अक्तूबर 2023

सं0 2502--बाबा दुखहरण नाथ महादेव मंदिर, वसवुटी, जिला- जमुई, जो पर्षद में वर्ष 1952 से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0- 157 है।

सिलिंग कार्रवाई के पश्चात्‌ लगभग 12.5 ए0 भूमि मंदिर को प्राप्त हुयी और मंदिर की व्यवस्था हेतु समय-समय पर न्यास समिति का गठन किया जाता रहा। यह सही है कि समिति के विरूद्ध मंदिर की भूमि का किसी प्रकार का क्रय-विक्रय का कोई आरोप नहीं है, परन्तु समिति द्वारा अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 के प्रावधानों का पालन नियमित रूप से नहीं किया जा रहा है तथा वर्ष 2017-18, 2018-19 में जो आय-विवरणी दाखिल की गयी वह भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि53 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 आय मात्र 70 हजार रू0 दिखाया गया है और खर्च 02 लाख रू0 दिखाया गया और यह कभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अतिरिक्त 1,20,000/-रू0 कहां से प्राप्त हुई तथा वर्ष 2018-19 के बाद बार-बार पत्र दिए जाने के पश्चात्‌ जब समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया, तो वर्ष 2018-19, 2019-20 की आय-विवरणी मकेष्वर यादव द्वारा डाक के माध्यम से दिनांक- 02.03.2022 को भेजी गयी, परन्तु पिछले 05 वर्षो से किसी प्रकार का पर्षद शुल्क अधिनियम की धारा 70 का पालन नहीं किया गया। बड़ी विडम्बना है कि नए न्यास समिति के लिए अंचल पदाधिकारी से नामों की मांग की गयी। अंचल पदाधिकारी के द्वारा पुनः उसी कार्यरत न्यास समिति के नामों को पुनः भेज दिया।

उपस्थित महंत रामानंद शास्त्री जो पूर्व में भी न्यास समिति के सदस्य के रूप में है, उनका कथन है कि चूंकि सचिव मकेष्वर यादव मा0 उच्च न्यायालय में एक याचिका 21196/2013 दाखिल किया है, जो मंदिर के नाम से है, परन्त मारफत के रूप में सचिव का ही नाम है। प्रस्तावित नामों की न्यास समिति की यद्यपि की कार्य संतोषजनक नहीं है। अतः इस निर्देष के साथ की भविष्य में अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 का पालन नियमित रूप से करेंगे, एक वर्ष के लिए इन्हें अवसर देते हुए, अस्थायी रूप से मान्यता दी जाती है। पिछले वर्ष 2011 से आजतक की जो आय-विवरणी दाखिल की गयी है, उसके हिसाब से पर्षद शुल्क जमा करेंगे और आगे के वर्षो में भी समय-समय पर आय-विवरणी, बजट, पर्षद शुल्क देंगे। अतः उपरोक्त निदेष के साथ प्रस्तावित नामों का एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है।

मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''वैषाली जिलान्तर्गत कबीर पंथी मठ, प्राणपुर, थाना- तिसिऔंता,जिला- वैषाली,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा दुखहरण नाथ महादेव मंदिर, वसवुटी, जिला- जमुई,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''बाबा दुखहरण नाथ महादेव मंदिर, वसवुटी, जिला- जमुई,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।54 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. समिति अपनी प्रथम बैठक में गठित न्यास समिति से किसी को कोषाध्यक्ष हेतु प्रस्ताव पासकर आनुमोदन हेतु पर्षद में भेजेगी।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. स्वामी केषवानंद जी - अध्यक्ष। 2. श्री मकेष्वर यादव - सचिव। 3. श्री रामानंद शास्त्री - सदस्य। 4. श्री अजीत कुमार - सदस्य। 5. श्री विपीन सिंह - सदस्य। 6. श्री षिवेन्दु कुमार - सदस्य। 7. श्री जयप्रकाष सिंह - सदस्य। 8. श्री विजय तौती - सदस्य। 9. श्री अवधेष यादव - सदस्य। 10. श्री नारायण चौधरी - सदस्य। 11. श्री अरविंद कुमार यादव - सदस्य। पता-दुख हरण नाथ महादेव मठ, ग्रामपो0थाना-वसवुटी, जिला- वैषाली। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''बाबा दुखहरण नाथ महादेव मंदिर, वसवुटी, जिला- जमुई,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

12 दिसम्बर 2023

सं0 3137--विजय आश्रम (धर्मषाला), लक्ष्मीपुर चौक, पो0थानाअंचल-मधेपुर, जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकीं निबंधन सं0-4471 है।

उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु श्री विजय कुमार झा द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में CWJC No- 5405/99 दाखिल किया गया था, जिसमें खाता सं0-5765 जो केषरे हिन्द भूमि है, उस पर उक्त आश्रम काफी पुराने समय से बना हुआ है, जिस पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर उसे नष्ट किये जाने पर रोक लगाये जाने हेतु दाखिल की गयी थी, जिसमें मा0 न्यायालय ने अपने आदेष दिनांक 29/04/2015 द्वारा यह मत व्यक्त किया कि उक्त भूमि पर निर्मित भवन किसी व्यक्ति विषेष के अधिपत्य में नहीं रहेगा और न हीं इस पर किसी व्यक्ति का स्वामित्व होगा और यह बिहार सरकार/केन्द्र सरकार की होगी, जिसका प्रषासन एवं व्यवस्था बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास के तहत की जायेगी तथा पर्षद को यह स्वतंत्रता दी गयी कि उसकी व्यवस्था हेतु जिला पदा0 या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को अध्यक्ष के रूप में शामिल करते हुए एक न्यास समिति का गठन किया जाए।

मा0 उच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेष के आलोक में जिला पदा0 को दिनांक 22.09.2016, 06.12.2016, 26.05.2017, 08.09.2017, 05.12.2017, 27.01.2018, 05.11.2018, एवं 25.8.2022 कुल 08 पत्र जारी किये जा चुके हैं, परन्तु उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई प्रति-उत्तर/प्रस्ताव न्यास समिति गठन किये जाने हेतु आज तक पर्षद को उपलब्ध नहीं करायी गयी।

जबकि पर्षद के आदेष दिनांक 09.08.2017 के द्वारा पर्षद के निरीक्षक द्वारा इस का स्थल निरीक्षण भी किया गया। जांच के क्रम में पर्षद निरीक्षक को श्री विजय कुमार झा द्वारा अंचलाधिकारी का पत्रांक 589, दिनांक 25.04.2017 जो55 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 अनुमंडल पदा0 को प्रेषित की गयी थी, की प्रति उपलब्ध करायी गयी, जिसमें 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन किये जाने हेतु प्रस्तावित था। यहां यह स्पष्ट करना आवष्यक है कि उक्त प्रस्ताव अंचलाधिकारी, अनुमंडल पदा0, जिला पदाधिकारी द्वारा कभी भी पर्षद को न तो भेजागया और न हीं उपलब्ध कराया गया।

मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा दिये गयेनिर्देष दिनांक 29.04.2015 तथा पर्षद द्वारा कराये गये स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट पर विचारोपरान्त सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में उक्त धर्मषाला का निबंधन करते हुए जिला पदा0 को अस्थायी रूप से धारा 33 के अन्तर्गत न्यास धारी नियुक्त किया गया था तथा लगातारस्मार-पत्र न्यास समिति गठित किये जाने हेतु नामों की मांग संबंधी प्रस्ताव हेतु भी पत्र लिखा जा रहा था, जो अभी तक अप्राप्त है।

इसी बीच याची, श्री विजय कुमार झा द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में MJC No-2247/17 दाखिल कर अवैध रूप से मंदिर के निर्माण को क्षति पहुंचाये जाने तथा न्यायालय के आदेष के आलोक में समिति बनाये जाने के संबंध में कभी कोई कार्यवाई नहीं की गयी, दाखिल किया गया। चूंकि मा0 उच्च न्यायालय द्वारा CWJC No-5405/99 में पारित आदेष दिनांक 29.04.2015 में निर्देष दिया गया था कि पर्षद, जिला पदाधिकारी या उनके द्वारा नामित व्यक्तियों को समिति में अध्यक्ष बनायेगी और समिति का गठन करे, जिस संबंध में जिला पदा0 से लगातार पत्राचार के माध्यम से नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी, परन्तु आज तक कोई प्रस्ताव पर्षद में प्राप्त नहीं हुआ है और जिला पदा0 को अस्थायी न्यासधारी बनाये जाने की समय-सीमा भी समाप्त हो गयी है।

पर्षद की सूनवाई दिनांक-14.11.2023 को उक्त सभी परिस्थितियों पर विचारोपरान्त यह निर्णय लिया गया कि पर्षद के निरीक्षक द्वारा (निरीक्षण दिनांक 19.08.2017 को) में प्राप्त पत्र जो अंचलाधिकारी द्वारा अनुमंडल पदा0 को दिनांक 25.04. 2017 को भेजी गयी थी, उस पर विचार करते हुए उक्त धर्मषाला की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए न्यास समिति का गठन किया जाय।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''विजय आश्रम धर्मषाला, लक्ष्मीपुर चौक, मधेपुर, जिला-मधुबनी,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''विजय आश्रम धर्मषाला, लक्ष्मीपुर चौक, मधेपुर, जिला-मधुबनी,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम'' विजय आश्रम धर्मषाला, लक्ष्मीपुर चौक, मधेपुर, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर/धर्मषाला परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. धर्मषाला परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और धर्मषाला/मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर/धर्मषाला के पुजारी/सेवक की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर/धर्मषाला परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।56 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. जिला पदाधिकारी मधुबनी या उनके द्वारा नामित कोई पदाधिकारी - पदेन अध्यक्ष 2. प्रखंड विकास पदाधिकारी, मधेपुर, जिला-मधुबनी - उपाध्यक्ष 3. श्री विजय कुमार झा, पिता-स्व0 दिनेष झा - सचिव ग्रामपो0- भखराईन, मो0- 9534490702 4. श्री कौषल कुमार दास, पिता-श्री विजय कुमार लाल दास - कोषाध्यक्ष ग्राम- लक्ष्मीपुर, पो0- मधेपुर, मो0- 9801246233 5. श्रीमती मीरा देवी, पति-श्री नुनु मंडल - सदस्य ग्राम- लक्ष्मीपुर, पो0- मधेपुर, मो0- 8969003250 6. श्री चन्द्रशेखर महतो, पिता-श्री सिंहेष्वर महतो - सदस्य ग्राम- प्रसाद, पो0- बांकी, मो0- 9934873248 7. थानाध्यक्ष, मधेपुर, जिला-मधुबनी - सदस्य सभी थाना- मधेपुर, जिला- मधुबनी। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

27 सितम्बर 2023

सं0 2368--

, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4713 है।

इस न्यास के लिए निबंधित समर्पणनामा दिनांक-10.07.1931 के द्वारा श्री रामेश्वर पाण्डेय ने अपनी सम्पति को भगवान के नाम समर्पित कर दी और न्यासी के रूप में नियुक्त किया, परन्तु कालातंर में उक्त सभी नामित 09 व्यक्तियों का स्वर्गवास हो गया, उनके द्वारा किसी प्रकार के अन्य व्यक्ति को न्यासधारी नहीं बनाया गया।

अतः मंदिर की व्यवस्था हेतु भोलानाथ पाण्डेय के द्वारा एक विविध वाद संंं0-27/1998 जिला न्यायालय में दाखिल किया गया, जो पक्षकारो के सहमति के आधार पर दिनांक-30.11.1999 को स्वीकार करते हुए, 09 व्यक्तियों की नई न्यास समिति बनायी गयी। उक्त 09 व्यक्तियों को पर्षद के द्वारा नोटिस जारी की गयी, जिसमें 05 व्यक्ति क्रमशः के स्वर्गवास होने की रिपोर्टीगं के साथ पत्र वापस प्राप्त हुआ, परन्तु जो व्यक्ति अभी भी जीवित हैं, नोटिस प्राप्त होने के पश्चात्‌ भी वह पर्षद में उपस्थित नहीं हुए। पुनः दिनांक-08.04.2022 को जीवित न्यासियों को सूचना भेजी गयी कि पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर के मंदिर की व्यवस्था आदि के संबंध में अपना तथ्य रखें। पुनः स्मार पत्र दिनांक-05.07.2022 को भेजा गया, परन्तु उक्त लोग उपस्थित नहीं हुए। अंचल पदाधिकारी द्वारा भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता को भेजी गयी, रिपोर्ट की प्रति स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा दाखिल की गयी, जिसमें उक्त मंदिर की भूमि का उल्लेख किया गया है। उपरोक्त तथ्य स्पष्ट करते हैं कि न्यायालय के आदेश के आलोक में जो 09 सदस्यीय न्यास समिति बनी थी, उसमें से उक्त 05 लोगो का स्वर्गवास हो गया है, जीवित 04 सदस्यों को भी 03 बार नोटिस भेजने के पश्चात्‌ भी ना तो किसी प्रकार प्रतिउत्तर दाखिल किया गया, ना पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए। इसी बीच स्थानीय लोगो के द्वारा दिनांक-30.07.2023 को एक आम सभा की बैठक कर 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव समिति बनाए जाने हेतु दिया गया।57 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 और कुछ फर्जी तरीके से क्रय-विक्रय भी करना चाहते है तथा मंदिर की भूमि पर निर्माण करने को प्रयासरत हैं, एवं मंदिर की भूमि जो अधिग्रहण राज्य सरकार द्वारा की गयी है, उसका मुआवजे की राषि को भी प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं।

उपरोक्त आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सूनवाई आदेष दिनांक- 11.08.2023 में 01 वर्ष के लिए अस्थायी न्यास समिति बनाये जाने का निर्णय लिया गया। तदनुसार प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष या अग्रीम आदेश तक के लिए जो भी पूर्व हो बनायी जाती है, जिसका चरित्र सत्यापन प्राप्त होने या अन्य प्रकार की कोई आपत्ति प्राप्त होने पर विचारोपरान्त समय विस्तार पर विचार किया जाएगा तथा उपरोक्त नामों के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी को भेजकर के उनसे भी मतंव्य या कुछ नए नामों को जोड़ने या हटाने के संबंध में प्रस्ताव पत्र भेजकर रिपोर्ट प्राप्त किया जाएगा। अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का ''के प्रयोग करते हुए'' सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' ''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' '' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन उपाध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11.न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के58 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अंलच अधिकारी, सुलतानगंज - अध्यक्ष 02. श्री अंशु कुमार पाण्डयेय, पिता- स्व0 अरूण कुमार पाण्डेय - उपाध्यक्ष गोपाल रोड, सुलतानगंज। 03. श्री पंकज कुमार मिश्र, पिता- षिरोमणि मिश्र, - कोषाध्यक्ष गोपाल रोड, सुलतानगंज। 04. श्री केषव कुमार, पिता- राजकिषोर पाण्डेय - सचिव स्टेषन रोड, सुलतानगंज। 05. श्री वीरेन्द्र कुमार यादव, पिता- स्व0 छेदी प्रसाद यादव - सदस्य गोपाल रोड, सुलतानगंज। 06. श्री असीमानंद पाठक, पिता- स्व0 जगत नारायण पाठक - सदस्य महिला अस्पताल चौक बाजार, सुलतानगंज। 07. श्री देवेष कुमार पोद्यार, पिता- श्री महेष पौद्दार - सदस्य महिला अस्पताल चौक बाजार, सुलतानगंज। 08. श्री विनय शर्मा, पिता-श्री माधव शर्मा - सदस्य चौक बाजार,स्टेषन रोड, सुलतानगंज। 09. श्री उदय चन्द्र झा, पिता- स्व0 लक्ष्मी कान्त झा - सदस्य ध्वजागली, सुलतानगंज। सभी पो0थाना- सुलतानगंज, जिला- भागलपुर। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' '' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

27 सितम्बर 2023

सं0 2370--श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-गढ़िया, पो0-बिठुआर, थानाअंचल-पंडौल जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4367 है।

उक्त न्यास की भूमि के संबंध में श्री विनोद चौधरी के द्वारा अपना निजी का दावा किया गया था, जिस पर सभी पक्षों को पूर्ण अवसर देते सूनवाई की गई। उनके द्वारा दाखिल सभी दस्तावेजों पर विचारोपरान्त विस्तारपूर्वक पर्षद के आदेष दिनांक 21/01/2023 द्वारा श्री विनोद चौधरी के दावे को निरस्त किया जा चुका है तथा उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यास समिति का गठन किये जाने के संबंध में अंचलाधिकारी से नामों की मांग पर्षद के पत्रांक-140, दिनांक 13/04/2023 द्वारा की गयी, जिसके संबंध में अंचलाधिकारी ने अपने पत्रांक-1100, दिनांक- 19/06/2023 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया है। प्रस्ताव के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति प्राप्त नहीं है।

अतः इस न्यास की सुव्यवस्था, सम्पतियों की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था की तत्काल आवष्यकता को ध्यान में रखते हुए पर्षद की सूनवाई दिनांक-21.08.2023 में हुए निर्णय के आलोक में प्रस्तावित नामों की सूची पर विचार करते हुए एक अस्थायी न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए किया जाता है, प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने तथा कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए '' श्री राम जानकी मंदिर, गढ़िया, जिला-मधुबनी,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, गढ़िया, जिला-मधुबनी,'' होगा और59 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, गढ़िया, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, पंडौल - अध्यक्ष 2. श्री मनोज कुमार चौधरी, पिता-स्व0 बालेष्वर चौधरी - सचिव 3. भी भगवान सिंह, पिता-गंगेष्वर सिंह - कोषाध्यक्ष 4. श्री राम नारायण चौधरी, पिता-स्व0 बासुदेव चौधरी - सदस्य 5. श्री शरनेन्द्र्रु मोहन शर्मा, पिता-राम सुन्दर शर्मा - सदस्य 6. श्री नवीन कुमार चौधरी, पिता-चन्द्र मोहन प्रसाद - सदस्य 7. श्री षिव कुमार चौधरी, पिता-विमल किषोर चौधरी - सदस्य 8. श्री भवन प्रसाद चौधरी, पिता-स्व0 कपिल देव चौधरी - सदस्य 9. श्री दिनेष्वर ठाकुर, पिता-स्व0 तृप्ति नारायण ठाकुर - सदस्य 10. श्री राम नरेष चौधरी, पिता-स्व0 दिनेष्वर चौधरी - सदस्य 11. थाना प्रभारी, पंडौल - सदस्य न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।60 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 न्यास समिति शीघ्र मंदिर के नाम से खाता खोले और मंदिर की सभी भूमि का खुले डाक द्वारा बंदोबस्ती अध्यक्ष के सहयोग से की जाए तथा बंदोबस्ती, किराये की राषि तथा जो भूमि अतिक्रमण में है, उस संबंध में खाता, खेसरा अवैध कब्जाधारी के नाम का उल्लेख करते हुए विवरण की मांग अंचलाधिकारी से की जाए तथा ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध बिहार हिन्दू धार्मिक न्यायाधिकरण में वाद दाखिल करने की भी न्यास समिति को अनुमति दी जाती है।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल को विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''''श्री राम जानकी मंदिर, गढ़िया, जिला-मधुबनी,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

27 सितम्बर 2023

सं0 2372--श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मंदार, बौसी, जिला- बाँका, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4363 है।

मंदार पर्वत के नीचे दक्षिण की ओर पापहरिणी नामक सरोबर के मध्य मे यह मंदिर स्थित है, जहाँ शेषनाग की शयया पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित है। उक्त न्यास की सुव्यवस्था एवं विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 1464, दिनांक- 03.02.2015 द्वारा अनुमंडलाधिकारी बाँका की अध्यक्षता में एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया, जिसमें अंचलाधिकारी बौसी, ''उपाध्यक्ष'' के रूप में रखें गए। समिति के सचिव श्री उदय शंकर झा चंचल द्वारा दिनांक- 06.08.2016 को एक आवेदन पत्र दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि स्थानीय प्रषासन द्वारा समिति को महत्व नहीं दिया जा रहा है, एवं उन्हें सचिव के पद से हटा दिया है। उक्त आरोप के संबंध में पर्षदीय पत्र- 2033, दिनांक- 15.10.2016 द्वारा अनुमंडलाधिकारी से मंतव्य माँगा गया। दिनांक- 19.12.2019 को समिति के तीन सदस्यों द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया कि न्यास समिति की आय यूको बैंक बौसी में है, जिसका संचलान अंचलाधिकारी बौसी द्वारा किया जाता है, जिसकी कोई जानकारी सदस्यों को नहीं हो पाती है। समिति द्वारा अधिनियम की धारा 59, 60, 70 का अनुपालन नहीं करने के संबंध में पर्षद द्वारा लगातार पत्र भेजा गया, परन्तु अंचलाधिकारी द्वारा किसी पत्र का जबाव नहीं दिया गया। पर्षद के आदेष दिनांक- 14.02.2022 द्वारा व्यक्तिगत रूप से पर्षद में उपस्थित होकर अंचलाधिकारी एवं अनुमंडलाधिकारी को यह स्पष्ट करने का आदेष दिया गया कि मंदिर की वर्ष 2015 से 2021 तक की आय का स्पष्ट उल्लेख तथा पैसा कहाँ है करें। पर्षद की सूरवाई दिनांक- 17.05.2022 में अंचल कार्यालय के नाजीर श्री ललीतेष्वर कुमार उपस्थित हुए, जिनके द्वारा वर्ष 2015-16 से 2021-22 तक का संक्षिप्त आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया, परन्तु वह संदेहास्पद प्रतीत हुआ। जिसका विस्तृत उल्लेख उक्त आदेष में है। पिछले 05 वर्षो में किसी भी प्रकार की बैठक की कार्रवाई भी पर्षद को उपलब्ध नहीं करायी गयी, जो स्पष्ट करता है कि अधिकांष संख्या में न्यास समिति में प्राषनिक पदाधिकारी होने के कारण न्यास समिति का कार्य लापरवाहीपूर्ण रहा है। समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष क्रमषः अनुमंडलाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को निर्देष दिया गया कि शीघ्र पर्षद शुल्क जमा करायें तथा आम सभा कर नई न्यास समिति के लिए प्रस्ताव भेजें और कार्यरत न्यास समिति में जिन लोगों का कार्य संतोषजनक रहा है, उनके नामों पर भी विचार करें। अंचलाधिकारी बौसी द्वारा अपने पत्रांक- 460, दिनांक- 27.05.2023 द्वारा शुल्क मद में 1,60,135=00 (एक लाख साठ हजार एक सौ पैतीस)रू0 मात्र का चेक जमा किया गया एवं आर्थिक वर्ष 2015-16 से 2022-23 तक का 08 वर्षो का एक साथ दिनांक- 29.05.2023 को आय-व्यय का विवरण एवं मंदिर में चढ़ाये जानेवाले जेवर की सूचि दिया है। पर्षद के पत्र पत्रांक- 3594, दिनांक- 19.01.2023 के आलोक में अंचलाधिकारी बौसी द्वारा अपने पत्र पत्रांक- 255, दिनांक- 23.03.2023 द्वारा नई न्यास समिति के गठन हेतु 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया है। वर्तमान न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।

अतः सूनवाई आदेष दिनांक- 14.08.2023 में हुए निर्णय के आलोक में इस न्यास कीसुव्यवस्था एवं विकास हेतु प्रस्तुत नामों पर विचारोपरान्त एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मंदार, बौसी, जिला- बाँका,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मंदार, बौसी, जिला- बाँका,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम'' श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मंदार, बौसी, जिला- बाँका,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।61 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडलाधिकारी, बाँका - अध्यक्ष। 2. नगर पंचायत अध्यक्ष, बौसी - उपाध्यक्ष। 3. श्री शंकर प्रसाद सिंह, - सचिव। पता- ग्राम-झपनियाँ, 4. श्री राजीव कुमार सिंह, सबलपुर, - कोषाध्यक्ष। 5. श्री देवाशीष पाण्डेय उर्फ विष्णु पाण्डेय, ललमटिया - सदस्य। 6. श्री उदयेष रवि, गुड़िया - सदस्य। 7. श्री राजाराम अग्रवाल, डैम रोड, दलिया - सदस्य। 8. श्री द्वारिका प्रसाद मिश्र, सरैया - सदस्य। 9. थाना अध्यक्ष, बौसी - सदस्य। सभी पो0-बौसी, जिला- बाँका, पिन- 813104 । न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मंदार, बौसी, जिला- बाँका,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।62 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

27 सितम्बर 2023

सं0 2366--

पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3188 है।

इस न्यास के संचालन हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1460, दिनांक- 06.08.2015 द्वारा एक न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। पर्षद की सूनवाई दिनांक- 30.05.2023 में हुए आदेष के आलोक में अंचल पदाधिकारी सदर मुंगेर को पर्षदीय आदेष ज्ञापांक- 1045, दिनांक- 03.07.2023 द्वारा इस न्यास का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया एवं उन्हें यह निर्देष दिया गया की धार्मिक चरित्र के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु भेजें। पूर्व न्यास समिति में अध्यक्ष, अंचल पदाधिकारी और संचिव, प्रभाकर कृष्ण सिंन्हा थे। पिछले कई वर्षो से समिति के विरूद्ध लगातार शिकायत प्राप्त हो रही थी कि मात्र 12 ए0 भूमि की बंदोस्ती अपने ही व्यक्ति को दे दी जाती है, जबकि खुली डाक कराए जाने से उससे बहुत अधिक राषि प्राप्त हो सकती है और 08 ए0 भूमि की खेती उपाध्यक्ष, श्री उमाकांत सिंह एवं सचिव द्वारा कराकर उसे निजी प्रयोग में लिया जाता है। समिति द्वारा मात्र 40-45 हजार रु0 की वार्षिक आय दिखाया जाता है, जबकि स्थानीय ग्रामीण इन्द्रजीत प्रसाद द्वारा शपथ-पत्र दिया गया कि उक्त 20 ए0 भूमि का 2,00,000/-रु0 वह स्वयं बंदोबस्ती लेने को तैयार है, जबकि खुली डाक द्वारा बोली लगायी जाए, तो उससे भी अधिक राषि आ सकती है। अंचल पदाधिकारी मुंगेर, के द्वारा उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक आम सभा करके 10 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिनांक-09.08.2023 को दिया गया है।

उक्त प्रस्ताव के संदर्भ में स्थानीय नागरिक इन्द्रजीत सिंह, उदय मोहन एवं श्री कौषलेन्द्र प्रसाद सिंह उपस्थित है और इनके द्वारा एक लिखित षिकायत पत्र दिया गया कि प्रस्तावित नामों में से अनितेष कुमार के विरूद्ध आपराधिक मुकदमें है। मुफसिल थाना काण्ड सं0-02/2020 में चार्जशिट भी दाखिल किया जा चुका है और न्यायायल द्वारा संज्ञान भी लिया जा चुका है। इस संबंध में आदेष की प्रति एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति संलग्न है तथा कथन करते है कि एक अन्य परिवाद पत्र 97 सी0/20 में भी अनितेष कुमार अभियुक्त है। श्री कुमार पर यह भी आरोप लगाया गया की पूर्व उपाध्यक्ष जिनके उपर गम्भीर आरोप थे कि लगभग 08 ए0 भूमि को सचिव के साथ मिलकर उसकी आय को निजी लाभ में लेते हैं, यह उनके भतीजे है, प्रार्थना पत्र के साथ सेवई सिंह उर्फ षिव शंकर सिंह जिनके नाम का भी प्रस्ताव दिया गया है, उनके विरूद्ध कथन करते है कि उन्हे फास्ट ट्र्रैक कोर्ट IIमुगेंर द्वारा सेसन ट्र्रायल नं0-128/07 में दिनांक-18.01.

2012 को दोषसिद्ध किया गया है तथा षिवषंकर प्रसाद वार्ड सदस्य के चुनाव में उनके द्वारा फर्जी वोटिंग करायी गयी, इसके संबंध में भी तथ्यों को छुपाया गया, जिस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अपने पत्र दिनांक-16.02.2011 द्वारा जिला निबंधन पदाधिकारी को धारा 177, 181 के तहत कार्यवाई करने के लिए प्रस्तावति किया तथा कथन करते हैं कि दिनांक-18.12.2019 को भी मंदिर की भूमि की आय का निजी प्रयोग के संबंध में षिकायत का जाँँच करने ब्लॉक के कर्मचारी आये थे तो उनके साथ भी वहाँ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किया गया, जिस संबंध में 107 सी0आर0पी0सी की कार्यवाई भी चला। उपरोक्त षिकायत की प्रति सूनवाई दिनांक-14.08.223 में उपस्थित श्री अनितेष कुमार को उपलब्ध करायी गयी, उनको निर्देष दिया गया कि इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण दाखिल करे तथा प्रस्तावित नाम (षिवषंकर प्रसाद एवं अनितेष कुमार) उक्त दोनो व्यक्तियों के नामो पर विचार किया जाना उचित नहीं है।

अतः प्रस्तावित नामों में से मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने को भेजकर रिपोर्ट प्राप्त करें।

अतः उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक-14.08.2023 में हुए निर्णय के आलोक में न्यास की सुव्यवस्था, मंदिर की राग-भोग, पूजा-पाठ तथा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु नियुक्त अस्थायी न्यासधारी के स्थान पर प्रस्तावित नामों की अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है। अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए'' ''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' ''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण '' एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।63 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अंचल पदाधिकारी, सदर, मुंगेर - अध्यक्ष 02. श्री अमित कुमार, पिता- श्री विनय प्रसाद सिंह - उपाध्यक्ष 03. श्री कौषलेन्द्र प्रसाद सिंह, स्व0 राम सिंह शर्मा - सचिव 04. श्री अजय प्रसाद सिंह,पिता- श्री बिन्देष्वरी प्रसाद सिंह - कोषाध्यक्ष 05. श्री राजीव कुमार, पिता- स्व0 कृष्णदेव सिंह - सदस्य 06. श्री अषोक प्रसाद सिंह, पिता- स्व0 षिवगुलाम प्रसाद सिंह - सदस्य 07. श्री प्रेम कुमार, श्री रामदेव प्रसाद सिंह - सदस्य सभी ग्राम- महेषपुर, पो0- नौवागढ़ी, थाना- मुफसिल, जिला- मुंगेर, पिन-811211 न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने एवं समिति के कार्यो की समीक्षा के उपरांत कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' '' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।64 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

27 सितम्बर 2023

सं0 2374--श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरबाड़ी, बांका, जिला-बांका, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन सं0-1302 है।

निबंधन के समय उक्त मठ की देखभाल 05 सदस्यीय न्यास समिति क्रमषः (1) श्री वैद्यनाथ झा, अधिवक्ता, (2) श्री सीता प्रसाद सिंह, अधिवक्ता, (3) श्री गिरिष्वर प्रसाद सिंह, (4) श्री भूप नारायण सिंह, एवं (5) श्री रमेष कुमार सिंह द्वारा की जाती थी। पर्षद में आय-व्यय विवरणी वैद्यनाथ झा के हस्ताक्षर से दिनांक 24/09/1962 को दाखिल की गयी, जिसके साथ भूमि का विवरण दाखिल किया गया, जिसमें मौजा ताराडीह थाना सं0-33 (20.03.16 बीघा) भूमि मौजा-मुढहरा थाना सं0-101 (10.0.05), मौजा-कपेटा (0.15.14) थाना सं0-76, मौजा-वोगरिया (06.12.0 बीघा) भूमि का उल्लेख किया गया है। वर्ष 1963-64 से 1966-77 की आय-व्यय विवरणी में संलग्न (क) के रूप में उपरोक्त भूमि प्रदर्षित की गयी है। वर्ष 1976-77 की आय-व्यय विवरणी तत्कालिन मैनेजिंग ट्रस्टी मंदराज झा द्वारा दाखिल की गयी है, तदोपरान्त समय-समय पर (नियमित रूप से नहीं) आय-व्यय विवरणी दाखिल की जाती रही है।

इसी बीच दिनांक 06/11/1985 को नागेन्द्र दास तथा कुछ अन्य लोगों के द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त मंदिर जर्जर अवस्था में है, काफी सम्पति है, समिति के अधिकांष सदस्यों का स्वर्गवास हो गया है, मात्र 04 सदस्य मौजूद हैं, उसमें भी श्री रमणी सिंह काफी बुढ़े हो गये हैं और शेष तीन सदस्य अपने कामों की व्यस्तता के कारण मंदिर की देख-रेख करने में असमर्थ है, अतः जांच कर एक नयी न्यास समिति बनाये जाने का आग्रह किया गया। पुनः दिनांक 02/09/1986 को तत्कालिन मुखिया शेखर प्रसाद व कुछ अन्य लोगों के हस्ताक्षर से उपरोक्त षिकायत प्राप्त हुई तथा उक्त तिथि को हीं 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने हेतु प्राप्त हुई।

उपरोक्त सभी प्रार्थना/षिकायत-पत्र पर विचार करते हुए तथा पर्षद के नोटिस का कोई प्रति-उत्तर न्यास समिति से नहीं प्राप्त होने, तथा समिति गठन के संबंध में समाहर्ता को भेजे गये पत्र पर अनुमोदन प्राप्त हुआ, अतः पर्षद के आदेष दिनांक 14/01/1988 द्वारा समाहर्ता, भागलपुर को अस्थायी न्यासधारी के रूप में मान्यता देकर कार्य करने के लिए पत्र लिखा गया। समाहर्ता द्वारा उक्त मंदिर का प्रभार लेने के लिए अंचलाधिकारी को को अधिकृत किया गया और उसी समय से अंचलाधिकारी के द्वारा मंदिर की व्यवस्था अपने हाथ में ली गयी है, परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि बार-बार पत्र लिखे जाने के बाद भी समाहर्ता या अंचलाधिकारी के द्वारा पर्षद को किसी भी प्रकार की आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क आदि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी और न हीं राषि जमा की गयी, अतः पर्षद के आदेष दिनांक 03/01/1991 के द्वारा एक नयी न्यास समिति जो विधान सभा सदस्य के प्रस्ताव पर थी, गठित किया गया, परन्तु उक्त न्यास समिति भी कुषलतापूर्वक कार्य नहीं कर रही थी, अतः अधिनियम की धारा 29(2) के तहत स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिस पर न्यास समिति के अध्यक्ष द्वारा अपना प्रति-उत्तर दिनांक 22/01/1994 को पर्षद में दाखिल किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया था कि न्यास समिति का गठन होने के बाद से आज तक न्यास समिति को अंचलाधिकारी ने कभी प्रभार नहीं दिया और बार-बार आष्वासन देते रहते हैं और इसी कारण से मंदिर का विकास आदि नहीं हो सका है। उक्त पत्र के आलोक में समाहर्ता को एवं अंचलाधिकारी को शीघ्र न्यास समिति का कार्यभार सौंपने का निर्देष देते हुए पत्र जारी किया गया तथा पर्षद के आदेष पर पर्षद के निरीक्षक द्वारा स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति के संबंध में रिपोर्ट की मांग की गयी।

पर्षद के निरीक्षक द्वारा स्थल निरीक्षण की अपनी रिपोर्ट दिनांक 23/12/1996 को दाखिल की गयी, जिसमें उल्लेख किया गया है कि समिति तथा अंचलाधिकारी से सम्पर्क किया गया और ब्यौरा की मांग की गयी, जिस पर उनके द्वारा पूर्व नगरपालिका वार्ड नं0-1 व्यवस्थित जमीन जो खाता सं0-350 के 01 और वार्ड 07, खाता सं0-109 तथा अन्य भूमि के संबंध में तथा मौजा-मुरहरा, थाना सं0-101, मौजा-तारडीह थाना सं0-33 का उल्लेख किया गया है और कथन किया गया कि खाता में क्या राषि बची हुई है, इसकी जानकारी नजीर के आने पर हीं दी जा सकती है, चूंकि वर्तमान में नजीर का स्थानान्तरण हो गया है और उनके द्वारा मंदिर के कार्यभार को नहीं सौंपा गया है।

पर्षद द्वारा लगातार अंचलाधिकारी को उक्त मंदिर की भ्ूामि से होने वाली आय, पर्षद शुल्क आदि के संबंध में लगातार पत्र जारी किया जाता रहा, परन्तु अंचलाधिकारी के द्वारा वर्ष 1998 में मात्र 04 हजार रूपये शुल्क के रूप में जमा किया गया, परन्तु आय-व्यय विवरणी के संबंध में लगातार पत्र दिये जाने के बावजूद भी कोई प्रति-उत्तर एवं स्पष्टीकरण नहीं प्राप्त हुआ। उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 1991 में गठित न्यास समिति कभी भी पूर्ण प्रभाव में नहीं रह सकी और अंचलाधिकारी द्वारा लगातार मंदिर और मंदिर की भूमि आदि के संबंध में बंदोबस्ती, आय-व्यय आदि अपने पास रखा जाता रहा। अतः दिनांक 27/01/2015 को एक नयी न्यास समिति गठन करने का निर्णय लिया गया और जिस संबंध में जिला पदा0 से नामों की मांग की गयी, परन्तु कोई रिपोर्टप्राप्त नहीं हुई।

इसी बीच दिनांक 11/04/2018 को श्री अमर कुमार मिश्रा द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त मंदिर एक सार्वजनिक मंदिर है और प्रार्थी दानदाता परिवार से आते हैं और मंदिर की व्यवस्था को देखते हैं। प्रार्थी और स्थानीय लोगों65 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 के सहयोग से आमसभा कर 11 व्यक्तियों की न्यास समिति बनाये जाने का निर्णय लिया गया तथा प्रार्थना-पत्र के साथ आमसभा की बैठक तथा प्रस्तावित 11 नामों की सूची संलग्न की है। पुनः एक पत्र दिनांक 27/04/2018 को श्री मिश्रा द्वारा दिया गया कि कुछ दबंग किस्म के लोग अंचलाधिकारी के मेल से षड्‌यंत्र के तहत एक स्वयंभू समिति द्वारा संचालन कराया जा रहा है और जमीन पर हाट-बाजार लगाना शुरू कर दिया गया है, इस संबंध में पर्षद से किसी प्रकार का कोई आदेष नहीं प्राप्त किया गया है और अपने पत्र के साथ अंचलाधिकारी के ज्ञापांक 163 दिनांक 08/02/2018 की प्रति दाखिल की है, जिसमें लिखा है कि सभी दुकानदार निर्धारित तिथि 05/02/2018 तक एकरारनामा कराये जाने की तिथि निर्धारित की गयी थी, परन्तु आपलोगों के द्वारा कोई एकरारनामा नहीं कराया गया है, अतः दिनांक 12/02/2018 तक एक हजार बंध पत्र पर एकरारनामा अद्योहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत करें। अनुमंंडल पदा0 के द्वारा दिनांक 19/05/2018 को 11 व्यक्तियों के नामों का चयन समिति बनाये जाने हेतु पर्षद में भेजा, जिसमें 04 प्रषासनिक पदाधिकारी को अध्यक्ष, सचिव, और कोषाध्यक्ष के रूप में नामित किया गया, परन्तु वर्ष 1997 से आय-व्यय वर्तमान मंदिर एवं भूमि की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पुनः पर्षद के द्वारा पर्षद निरीक्षक को स्थल निरीक्षण करने का निर्देष दिनांक 12/07/2018 को दिया गया।

जिस आलोक में दिनांक 06/09/2018 को उसका निरीक्षण किया गया। उक्त रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि स्वयंभू न्यास समिति उसकी देखभाल कर रही है, मंदिर में लगभग 37 बीघा जमीन थी, जिस पर अतिक्रमण है, मात्र 15 कट्ठा भूमि बची है, 04 क0 में आम का बाग है, मंदिर परिसर में लगभग 11 दुकानें हैं, जिससे लगभग 2,50,000/-रू0 वार्षिक किराये के रूप में आय है और मंंदिर के प्रांगण में लगने वाली हाट, बाजार पर स्थानीय लोगों में असंतोष है और आमसभा द्वारा 11 सदस्यीय न्यास समिति जो श्री अमर कुमार मिश्रा द्वारा पर्षद में भेजी गयी है, उसे मान्यता देने के लिए स्थानीय जनता ने अनुरोध किया और यह भी पाया गया कि अंचलाधिकारी, बांका लगभग 29 वर्षों से न्यास की भूमि पर प्रभार बनाये हुए हैं और उनके द्वारा की जा रही मनमानी से स्थानीय लोगों में काफी असंतोष है।

इसी बीच अनुमंडल पदा0 ने अपने को उक्त मंदिर का अध्यक्ष दर्षित करते हुए जिला पदा0, बांका को मंदिर की भूमि वार्ड सं0-7, खाता सं0-109 के विभिन्न खेसरा, जिसका कुल 3.75 एकड़ में से 2.96 एकड़ जमीन पर ''मार्केट कम्पलेक्स'' बनाये जाने संबंधी प्रस्ताव पर स्वयंभू समिति द्वारा पास करते हुए भेज दिया और उसकी एक प्रतिलिपि पर्षद को भी भेजी गयी जो पर्षद कार्यालय में दिनांक 01/02/2022 को प्राप्त हुई।

जिस संबंध में शीघ्र जिला पदा0 को पर्षद द्वारा पत्र लिखा गया कि अंचलाधिकारी पिछले लगभग 30 वर्षों से न्यास की व्यवस्था स्वयंभू समिति बना कर कर रहे हैं, बाजार, हाट लगाये जाते हैं, न्यास की भ्ूामि पर अवैध रूप से कुछ व्यक्तियों द्वारा कब्जा किया गया, सम्पति से होने वाली आय को नजारत में रखा जाता है, जबकि न्यास के नाम से बैंक में खाता खोला जाना चाहिए और बार-बार प्रतिवेदन दिये जाने पर अंचलाधिकारी के द्वारा कोई प्रति-उत्तर नहीं दिया जाता है और यह भी स्पष्ट उल्लेख किया गया कि अधिनियम की धारा 28 एवं 44 के अन्तर्गत सम्पति का किसी भी प्रकार से स्थानान्तरण/परिवर्तन पर्षद की अनुमति के बिना अवैध है और किसी धार्मिक संस्था की भूमि पर दाता का दान देने का उद्देष्य जिसे भगवान की सेवा पूजा धार्मिक अनुष्ठान आदि कार्य के लिए है, न कि व्यवसाय करने के लिए, अतः उनसे 11 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों का नाम न्यास समिति गठन किये जाने हेतु तथा पिछले 30 वर्षों से मंदिर की आय-व्यय, बजट आदि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया।

परन्तु उपरोक्त पत्र का कोई प्रति-उत्तर नहीं देते हुए समाहर्ता, बांका द्वारा अपने पत्रांक 325 दिनांक 03/02/2022 द्वारा मंदिर मौजा वार्ड-07, खाता सं0-109 का उपरोक्त 3.75 एकड़ में मार्केट कॉम्पलेक्स बनाये जाने के संबंध में अनापत्ति प्रमाण-पत्र की मांग की। पत्र में उल्लेख किया गया कि अनुमंडल पदा0, बांका की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मार्केट कॉम्पलेक्स बनाये जाने पर समिति के सदस्यों द्वारा निर्णय लिया गया और साथ में उक्त अनुमंडल पदा0 के समिति में बैठक दिनांक 19/01/2022 की प्रति संलग्न किया गया है, जिसमें 09 व्यक्तियों का हस्ताक्षर दिखाया गया है। यहां यह भी स्पष्ट कर देना आवष्यक है कि न तो पर्षद द्वारा कोई न्यास समिति गठित की गयी है और न हीं कोई इस संबंध में अनुमति प्राप्त की गयी है। सभी तथ्यों को स्पष्ट करते हुए पुनः दिनांक 09/02/2022 को जिला पदा0 को पत्र लिखा गया एवं पर्षद द्वारा उक्त मार्केट कॉम्पलेक्स बनाये जाने संबंधी प्रस्ताव पर कोई अनुमति नहीं दी गयी, बल्कि यह स्पष्ट किया गया कि न्यास समिति गठन के पष्चात यदि मार्केट बनाये जाने का प्रस्ताव आता है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितनी दुकानों का निर्माण होगा, निर्माण हेतु राषि कहां से प्राप्त होगी, दुकानों का आवंटन किस प्रकार से किया जायेगा तथा मंदिर की भूमि पर प्रतिबंधित व्यवसाय की व्यवस्था नहीं करने हेतु दिनांक 15/03/2022 को जिला पदा0 को पत्र लिखा गया।

पर्षद के उपरोक्त पत्र के आलोक में जिला पदा0 के द्वारा अनुमंडल पदा0 से शीघ्र न्यास समिति गठन किये जाने हेतु 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी, जिसकी प्रति पर्षद को भी उपलब्ध करायी गयी, इस संबंध में जिला पदा0 को दिनांक 31/08/2022, 18/01/2023, 06/05/2023 एवं 27/07/2023 को भी पत्र लिखा गया कि न्यास समिति गठन किये जाने हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अभी तक प्राप्त नहीं है तथा पिछले 30 वर्षों से मंदिर की होने वाली आय-व्यय विवरणी, लेखा-जोखा, राषि कहां जमा है, तथा उससे संबंधित दस्तावेज पर्षद में उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया और यह भी स्पष्ट किया गया कि धार्मिक न्यास की अधिनियम की धारा 28 (2) जे0 एवं धारा 44 के अन्तर्गत किसी भी सार्वजनिक धर्मिक न्यास की भू-सम्पदा पर किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण या किसी प्रकार का अन्य संक्रमण हस्तानन्तरण या 03 वर्ष से ज्यादा की बंदोबस्ती बिना पर्षद की अनुमति के यदि की जाती है तो वह विधि विरूद्ध होगा तथा पूर्व में मांगे गये दस्तावेज को पर्षद में दाखिल करें, जिस पर विचारोपरान्त मंदिर की भूमि पर मार्केट कॉम्पलेक्स निर्माण के संबंध में पर्षद द्वारा कोई निर्णय लिया जा सके।66 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उपरोक्त सभी परिस्थितियां यह स्पष्ट करती है कि वर्ष 1989 में जिला पदा0 को अस्थायी न्यासधारी उक्त मंदिर की देख-रेख, भूमि की सुरक्षा आदि के लिए बनाया गया था और उन्होनें अपने इस कार्य के लिए अंचलाधिकारी को नामित किया और अंचलाधिकारी ने वर्ष 1989 से लगातार मंदिर की सारी भूमि से होने वाली आय को अपने पास रखते हुए इसकी कोई जानकारी पर्षद को आज तक नहीं दी गयी, लगभग 20 से ज्यादा पत्र लिखे जाने के पष्चात वर्ष 2005 में मात्र 04 हजार रूपये शुल्क के रूप में जमा किया गया, परन्तु कभी विस्तार से जानकारी नहीं दी गयी, जो स्पष्ट करता है कि मंदिर की भूमि से होने वाली आय और मंदिर के प्रांगण में व्यवसाय रहे दुकानदारों के किराये की राषि का दुरूपयोग होने की पूरी-पूरी संभावना है, चूंकि पर्षद को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दिया जाना उनके कार्यों पर प्रष्नचिन्ह लगाता है। श्री अमर कुमार मिश्रा द्वारा दाखिल मंदिर के फोटोग्राफ आदि से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा स्वयं व अन्य लोगों के सहयोग से मंदिर के प्रांगण को साफ-सुथरा और जीर्णोद्धार करके रखा गया है और उनके द्वारा प्रस्तावित न्यास समिति गठन हेतु नाम दिनांक 11/04/2018 को चरित्र सत्यापन हेतु भेजा गया है, परन्तु खेद की बात है कि वह चरित्र सत्यापन अभी तक प्रापत नहीं हुआ है और अनुमंडल पदा0 के द्वारा जो नामों का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें 04 प्रषासनिक पदा0 तथा कुछ अन्य लोगों के नाम थें, जिनका मंदिर से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। उक्त प्रस्ताव के बाद भी लगातार जिला पदा0 से न्यास समिति के गठन हेतु नामों की मांग की गयी, परन्तु किसी प्रकार का कोई नाम आज तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

अतः ऐसी परिस्थिति में पर्षद के पास एक मात्र रास्ता यही बचता है कि आमसभा के द्वारा जो प्रस्तावित नाम हैं, उनकी न्यास समिति गठित की जाए और भविष्य में यदि न्यास समिति के किसी सदस्य के विरूद्ध किसी प्रकार के आपराधिक घटना आदि के बारे में कोई सूचना प्राप्त होती है तो उसपर स्पष्टीकरण उपरान्त आदेष दिया जा सकता है और यदि रिपोर्ट प्राप्त होती है कि किसी व्यक्ति का स्वर्गवास हो गया है तो उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के चयन करने पर विचार किया जायेगा और पिछले लगभग 30 वर्षों से अधिक का इस मंदिर के संबंध में अनुभव रहा है कि किसी प्रषासनिक पदा0 को अस्थायी न्यासधारी बनाये जाने के बाद भी मंदिर की सारी सम्पति पर अतिक्रमण हो गया है या एक षड्‌यंत्र के तहत कर लिया गया है या किसी अन्य कारणों से हुई है और उक्त वर्षों में किसी प्रकार की केाई जानकारी पर्षद के बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद भी प्रति-उत्तर नहीं दिये जाने व कार्य के प्रति लापरवाही प्रतीत होती है, जबकि अंचलाधिकारी के द्वारा जारी किये गये पत्र जो संचिका पर उपलब्ध है, जिससे स्पष्ट होता है कि कुछ लोगों से राषि लेकर के किरायेदारी एकरारनामा किया गया है। मंदिर की भूमि पर हाट वगैरह का आयोजन किया जा रहा है, जिससे एक बड़ी राषि प्राप्त की जाती है। उपरोक्त सभी अवैध कार्यों में पर्षद यह उम्मीद करती है कि गठित न्यास समिति नियम प्रर्वतक कार्य करेगी और जिन व्यक्तियों द्वारा मंदिर की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है, उनके विरूद्ध भी न्यायाधिकरण व सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर भूमि को वापस लिये जाने का प्रयास करेगी।

पर्षद की जानकारी में यह तथ्य मौखिक रूप से लाया जा रहा है कि अनुमंडल पदा0 और जिला पदा0 के द्वारा जो व्यवसायिक कॉम्पलेक्स बनाये जाने के संबंध में ''अनापति प्रमाण पत्र मांगी गयी थी'', जो पर्षद द्वारा नहीं दी गयी है, परन्तु उसके बावजूद भी कुछ भूमि पर निर्माण हो रहा है या किया जा चुका है, अतः ऐसी परिस्थिति में यथास्थिति सभी पक्षों के द्वारा बनाये रखी जायेगी और न्यास समिति इस संबंध में अपनी रिपोर्ट साक्ष्य और फोटाग्राफ के साथ दाखिल करें। सूनवाई आदेष दिनांक- 14.08.2023 में मंदिर व उसकी सम्पति की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए अधिनियम की धारा 32 के अन्तर्गत एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया गया। अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरबाड़ी, बांका, जिला-बांका,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरबाड़ी, बांका, जिला-बांका,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरबाड़ी, बांका, जिला-बांका,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।67 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री नन्द किषोर सिन्हा, - अध्यक्ष 2. श्री अमर कुमार मिश्रा - सचिव 3. श्री मदन किषोर झा - कोषाध्यक्ष 4. श्री कमल घोष - सदस्य 5. श्री मनोज उपाध्याय - सदस्य 6. श्री सुदेष कुमार सिन्हा - सदस्य 7. श्री दिवाकर झा - सदस्य 8. श्री ओमप्रकाष मंडल - सदस्य 9. श्री संजय कुमार दास - सदस्य 10. श्री अरूण कुमार सिन्हा - सदस्य 11. श्री कुमार विवेक - सदस्य सभी साकिन- पुरानी ठाकुरवाड़ी, बांका, निकट- मुख्य डाकघर बांका, जिला- बांका। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री लक्ष्मी नारायण ठाकुरबाड़ी, बांका, जिला-बांका,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।68 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

4 अक्तूबर 2023

सं0 2458--श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले-सरसैया, जिला-सिवान, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है,जिसकी निबंधन सं0- 4548 है।

इस न्यास में पूर्व में अनाधिकृत रूप से श्री विजय कुमार द्वारा कब्जा कर रखा गया था। उन्हें सूनवाई का पर्याप्त अवसर देते हुए तथा दिनांक 23/02/2022 को उन्हें और उनके अधिवक्ता तथा अंचलाधिकारी की रिपोर्ट, ग्रामीणों की तरफ से उपस्थित सदस्यों को विस्तार पूर्वक सुनने के पष्चात श्री विजय कुमार मिश्रा के महंती के दावे को निरस्त किया गया और मंदिर की सुव्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया और उसी आलोक में 11 व्यक्तियों के नामों की मांग अंचलाधिकारी से की गयी।

पर्षद के पत्र के आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा एक आम सभा दिनांक 06/06/2023 को उनकी अध्यक्षता में की गयी तथा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में दिया गया, जिसमें 07 व्यक्ति एक हीं जाति से आते हैं, जो कि उचित नहीं है। अतः न्यास की सुव्यवस्था एवं सम्पतियों की सुरक्षा हेतु प्रस्तावित नामों में से केवल 07 सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए करने का निर्णय सूनवाई आदेष दिनांक- 25.08.2023 में लिया गया।

अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले-सरसैया, जिला-सिवान,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले-सरसैया, जिला-सिवान,'' होगा

और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले-सरसैया, जिला-सिवान,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष69 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, भगवानपुर हाट - अध्यक्ष 2. श्री अवधेष ठाकुर, पिता-स्व0 जमादार ठाकुर - उपाध्यक्ष 3. श्रीराम नरेष मिश्र, पिता-षिव जनक मिश्रा - सचिव 4. श्री मनु कुमार साह, पिता-स्व0 भागीरथ साह - कोषाध्यक्ष 5. श्री दिनेष साह, पिता-षिव मंगल साह - सदस्य 6. श्री अभय मिश्र, पिता-देवनंदन मिश्रा - सदस्य 7. श्री अंकुर दास, - सदस्य-सह-पुजारी पता-श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले- सरसैया। सभी ग्राम- साधर सुलतानपुर, टोले सरसैया, थानाअंचल-भगवानपुर हाट, जिला-सीवान। पिन- 841417 न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी मंदिर, साधर सुलतानपुर, टोले-सरसैया, जिला-सिवान,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

21 अगस्त 2023

सं0 1853--कबीर पंथी मठ, ग्राम-परिहारा, पो0-गैनी, अनुमंडल-दाउदनगर, अंचल-ओबरा, थाना-खुंदमा, जिला- औरंगाबाद एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है।

उक्त न्यास के संबंध में श्री भजनानंद दास पर्षद में उपस्थित होकर कथन किया है कि परिहारा कबीर मठ, जो पूर्व में फतुहा कबीर मठ की शाखा थी, परन्तु पिछले कई वर्षो से नियमित रूप से देखभाल नहीं हो रही है, जिससे सम्पति का कब्जा और बदंरबाट हो रहा है, जबकि मठ धार्मिक न्यास पर्षद में उक्त न्यास की संचिका संधारित है। पूर्व से उक्त मठ की देखभाल कबीर मठ के साधु-संतो द्वारा की जाती है।

उक्त मठ में लगभग 26 बी0 16 क0 जमीन है, प्रार्थी द्वारा अपने को महंत बनाए जाने के संबंध में चादर, पगड़ी का फोटों तथा मठ की भूमि से संबंधित विभिन्न न्यायालयों में जो मुकदमें चल रहे है, प्रार्थी पक्षकार बन चुके हैं अतः प्रार्थी, भजनानंद को उपरोक्त दस्तावेज के आलोक में अस्थायी रूप से न्यासधारी बनाया जाता है तथा निर्देष दिया जाता है कि मठ की सम्पति के संबंध में जितने भी दस्तावेज उनके पास हो तथा विभिन्न न्यायालयों में जो मुकदमें विचाराधीन है और मठ की सम्पति पर जो अवैध रूप से लोगों का अतिक्रमण है, उन सब का स्पष्ट व्यौरा 03 माह के अंदर दाखिल करेंगे, जिससे मठ की भूमि को खाली कराए जाने संबंधी कार्यवाई की जा सकें।

अतः उपरोक्त परिस्थिति को देखते हुए श्री भजनानंद दास को उक्त मठ का न्यासधारी नियुक्त किया जाता है। 1. कबीर पंथी मठए परिहारा, औरंगाबाद के नाम से राष्ट्रीयकृतबैंक में खाता खोलवाकर खाता का पासबुक पर्षद दाखिल करें तथा सारे श्रोत से प्राप्त आय को उक्त खाता में रखेंगें।

2. 10,000/- (दस हजार) रू0 से अधिक की राषि का खर्च चेक के माध्यम से करेंगे। 3. मठ में जो पीली और सफेद धातु अगर चढ़ाई जाती है तो उसको एक अलग रजिस्टर में प्रत्येक दिन अंकित करेंगे। 4. यदि कोई चल या अचल सम्पति किसी के द्वारा अधिगृहित या अतिक्रमित है, तो उसे वापस लाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे।

5. सम्पतियों का दुरूपयोग या स्वार्थवष उपयोग नहीं करेंगे। 6. किसी भी अपराधिक कृत्य में संलिप्त नहीं रहेंगे। 7. ये न्यास की सम्पति का संरक्षण करेंगे।70 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 8. ये न्यास की चल या अचल सम्पति का हस्तांतरण (विक्रय), बदलैन या लीज अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के विपरित किसी के पक्ष में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अनुमति के बिना नहीं करेंगे। अगर किसी प्रकार का हस्तांतरण बदलैन या लीज किया जाता है तो वह अवैध एवं अमान्य होगा तथा अपराधिक विचारण प्रक्रिया प्रारंम्भ की जायेगी। 9. अंचल के भूराजस्व में भूमि ''कबीर पंथी मठ'' ग्राम- परिहारा के नाम से इन्द्राज करायेंगें, अगर पहले से अंकित है तो उनमें कोई नामान्तरण या संसोधन नहीं होगा।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

20 सितम्बर 2023

सं0 2211--श्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम-महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना-महिषी, जिला-सहरसा,बिहार राज्य धार्मिक न्यास,पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1553है।

उक्त न्यास की अंतरिम व्यवस्था हेतु दिनांक-19/02/2021 को 05 व्यक्तियों की समिति गठित की गयी थी।दिनांक- 23/03/2021 को अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 10 व्यक्तियों के नामों की सूची प्राप्त हुयी थी, उसमें कुछ व्यक्तियों के विरूद्ध स्थानीय लोगों का विरोध था तथा कुछ के विरूद्ध आपराधिक इतिहास की जानकारी दी गयी। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्राप्त नामों पर विचारोपरान्त 07 सदस्यों की समिति 01 वर्ष के लिए पर्षदीय आदेष दिनांक-04/05/2022 द्वारा गठित की गयी। इसी बीच कुछ ग्रामीणों के द्वारा गठित न्यास समिति के श्री वैद्यनाथ खिरहर के विरूद्ध महिषी थाना कांड सं0-14/91, उपेन्द्र खिरहर के विरूद्ध नालसी वाद सं0-385/15, मिथिलेश खिरहर के विरूद्ध महिषी थाना कांड सं0-155/19 एवं संजीत खिरहर के विरूद्ध महिषी थाना कांड सं॰- 14/21 की शिकायत की गयी, जिसपर उक्त चारों व्यक्तियों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त व्यक्तियों के द्वारा अपने स्पष्टीकरण में वैद्यनाथ खिरहर द्वारा कथन किया गया कि महिषी थाना कांड सं0-14/91 दहेज अधिनियम के विरूद्ध वाद था, जो समाप्त हो चुका है। इसी प्रकार उपेन्द्र खिरहर के विरूद्ध नालसी वाद सं0-385/15 था, जिसपर उनके द्वारा कथन किया गया है, वाद समाप्त हो चुका है। शेष 02 व्यक्ति मिथिलेश खिरहर, संजीत खिरहर द्वारा उनके विरूद्ध मुकदमा होने की बात स्वीकार किया गया और कथन किया गया कि वह जमानत पर हैं, अभी निर्णय नहीं हुआ है।इसी बीच ग्रामीणों को बैठक करके कुछ नामों का प्रस्ताव की मांग की गयी, जिसपर ग्रामीणों द्वारा और शिकायतकर्त्तागण द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया और बैठक करके बहुत से ग्रामीणों के उपस्थिति में प्रस्तावित सं0-01 से 07 व्यक्तियों को न्यास समिति में रखे जाने प्रस्ताव दिया गया है, उन 07 प्रस्तावित नामों पर थाने को भेजकर चरित्र सत्यापन रिपोर्ट की मांग की गयी।

संबंधित थाने द्वारा अपना ज्ञापांक-349/23, दिनांक-12/04/2023 द्वारा रिपोर्ट किया है कि प्रस्तावित 07 नामों में से 02 नाम क्रमशः श्री ललन कुमार यादव एवं श्री नरेश कुमार यादव महिषी थाना कांड सं0-319/22 में अभियुक्त है।तारणी खिरहर के विरूद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज है और उपस्थित ग्रामीणों द्वारा पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि तारणी खिरहर ने समिति और पर्षद के विरूद्ध जिला न्यायालय सहरसा में वाद सं0-01/2023 दाखिल किया है, इसलिए उनके नाम पर विचार किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।

उपरोक्त परिस्थिति मेंश्री ललन कुमार एवं श्री नरेष कुमार यादव के नामों को छोड़कर के शेष 05 नामों पर विचार करते हुए तथा पूर्व न्यास समिति के मिथिलेश खिरहर, संजीत खिरहर,जिनके विरूद्ध आपराधिक वाद विचाराधीन है एवं तारिणी खिरहर को न्यास समिति से विरमित करते हुये, चूंकि न्यास समिति केएक वर्ष का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है, इस हेतु नए सिरे से योजना का निरूपण करते हुए, अग्रलिखित न्यास समिति का गठन का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-04/08/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कारू खिरहरी स्थान न्यास योजना, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कारू खिरहरी स्थान न्यास समिति, महपुरा, ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत 03 सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।71 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत, विकासात्मक कार्य की पूर्ण जानकारी आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

15. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति 01 वर्ष के लिए अस्थायी रूप सेगठित की जाती हैः-

01. अनुमंडल पदाधिकारी, सहरसा -अध्यक्ष 02. श्री उपेन्द्र खिरहर पिता- स्व॰ रामस्वरूप खिरहर -उपाध्यक्ष 03. श्री वैद्यनाथ खिरहर पिता-स्व॰ बाबूजी खिरहर -सचिव 04. श्री हरदेव खिरहर पिता- स्व॰ गयाधर खिरहर -सह-सचिव 05. श्री संजय कुमार पिता- श्री गोपाल यादव -कोषाध्यक्ष 06. श्री अरूण सिंह पिता- स्व॰ रामनन्दन सिंह -सदस्य 07. श्री श्याम देव खिरहर पिता- स्व॰ बबुअन खिरहर -सदस्य 08. श्री रविन्द्र खिरहर पिता- स्व॰ विषेष्वर खिरहर -सदस्य 09. श्री राघवेन्द्र कुमार पिता- श्री तनुक लाल खिरहर -सदस्य क्रम सं॰- 02 से 09का पता-ग्राम- महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, सहरसा। नोटः-1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री कारू खिरहरी स्थान, महपुरा, ग्राम-महपुरा, पोस्ट- मैनाग्राम, थाना- महिषी, जिला- सहरसा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

3. न्यास समिति / पदाधिकारी /सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

20 सितम्बर 2023

सं0 2214--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना-बख्तियारपुर, जिला-सहरसा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4728/23 है।72 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 उक्त न्यास काफी प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है।श्री रघुवीर दास द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिनांक-02/05/2023 को दिया गया कि वह काफी वृद्ध हो गये है और शारीरिक रूप से कमजोर हैं। इस कारण मंदिर की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाय। इस हेतु उनके द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया है और बैठक दिनांक-14/04/2023 की प्रति भी संलग्न की गयी है।इसी तरफ संजय कुमार सिंह व कुछ अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना पत्र दिनांक-31/03/2023 को प्राप्त कराया गया कि मंदिर की 10 बी0 जमीन की आमदनी को निजी प्रयोग में न्यासधारी मंहत द्वारा लिया जा रहा है। ठाकुरबाड़ी का कोई विकास नहीं किया गया है। प्रत्येक वर्ष लगभग 4,00,000/-रु0 की आय विभिन्न स्रोतों से होेती है।फर्जी तरीके से मंदिर की भूमि का जमाबंदी भी रघुवीर दास द्वारा अपने नाम से करा लिया है। ग्रामीणों द्वारा ठाकुरबाड़ी के विकास तथा आय का हिसाब मांगने पर गलत मुकदमों में फँसाए जाने की धमकी जी जाती रही और अपशब्दों का प्रयोग किया जाता रहा। आरोप लगाया कि पिछले 40 वर्ष में लगभग 1,60,00,000/-रु0 का राजस्व गबन किया गया है।

दिनांक- 04/08/2023 को पर्षद में डॉ0 भागवत प्रसाद मेहता व कुछ स्थानीय लोग तथा श्री रघुवीर दास के साथ 03 साधु और लगभग 15 ग्रामीण उपस्थित हुये। श्री रघुवीर दास का कथन है कि लगभग 05 बी0 भूमि खेती की है, बाकी भूमि बलुई है और उसकी आय से उनके द्वारा एक गोलघर, अनाज गृह तथा साधु-संतों को रहने हेतु चबुतरा और बड़ा हॉल का निर्माण किया है। संचिका पर उपलब्ध फोटोग्राफ से स्पष्ट होता है कि मंदिर में सभी जनसामान्य दर्शन आदि करने के लिए उपस्थित होते हैं। मंदिर के विकास हेतु भी कई कार्य किए गए हैं, परन्तु न्यासधारी रघुवीर दास द्वारा नियमित रूप से पिछले कई वर्षों से अधिनियम की धारा- 59, 60 और 70 का पालन नहीं किया जा रहा है। वर्ष 2003 में अंतिम बार उनके द्वारा आय-विवरणी प्रस्तुत की गयी और लगातार पत्र लिखे जाने के उपरांत भी उपस्थित नहीं हुये। दिनांक-29/11/2013 को पर्षद कार्यालय में आकर उनके द्वारा शुल्क के रूप में 4,000/-रु0 की राषि जमा कर दी गयी। उनका स्वयं का कथन है कि वे काफी वृद्ध हो चुके हैं।

उपरोक्त परिस्थितियों में न्यास समिति का गठन किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है। उक्त मंदिर की प्रबंधन, व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए, उपरोक्त माध्यम से प्राप्त हुये नामों पर विचार व उपस्थित ग्रामीणों की सहमति से न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-04/08/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम- चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना-बख्तियारपुर, जिला- सहरसा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

4. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्राम- चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना-बख्तियारपुर, जिला- सहरसा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्राम- चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना-बख्तियारपुर, जिला- सहरसा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।73 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. महंत श्री रघुवीर दास - अध्यक्ष 02. डॉ0 भागवत प्रसाद मेहता - सचिव 03. श्री हरिनंदन प्रसाद सिंह - उपाध्यक्ष 04. श्री राजकुमार सिंह - कोषाध्यक्ष, सेवा निवृत्त भा0 सेना 05. श्री दिलीप नारायण सिंह - सदस्य 06. श्री पंकज कुमार सिंह - सदस्य 07. श्री शिवकुमार उर्फ शंकर - सदस्य 08. श्री संजय कुमार सिंह - सदस्य 09. श्री इन्दल सादा - सदस्य 10. श्री आनंद कुमार - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, बख्तियारपुर - सदस्य क्रम सं॰-1-10 का पता-ग्राम- चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना- बख्तियारपुर, जिला- सहरसा।

नोटः-1.न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम- चकभारो, पोस्ट- पहाड़पुर, अंचल- सिमरी बख्तियारपुर, थाना- बख्तियारपुर, जिला- सहरसा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

3. न्यास समिति / पदाधिकारी सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

22 सितम्बर 2023

सं0 2272--संत कबीर कुटी, ग्राम- हरिहरपट्‌टी, पोस्टथानाअंचल- पिपरा, जिला-सुपौैल, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4201 है।

पूर्व में कबीर मठ की देखभाल श्री तिलक दास द्वारा की जा रही थी। तद्‌ोपरान्त दुली दास द्वारा उसका व्यवस्था व प्रबंधन किया जाता रहा। दिनांक- 25/07/2011 को कमल दास द्वारा पर्षद में एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि ग्रामीणों की एक बैठक करके प्रार्थी को एवं वैरागीनी बुधनी दासीन को सम्पति की देखभाल करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। उनके द्वारा मंदिर के नाम से इन्द्राज खतियान की प्रति भी दाखिल की गयी, जिसमें उल्लेख है कि खाता सं0- 245, पुराना सर्वे सं0- 1051, 1052, 1171, 1172, नया सं0- 425, 426, 455, 456, रैयत के रूप में श्री श्री 108 संत कबीर दास सेवायत, दुली दास का इन्द्राज है।उक्त दोनों महंतों का स्वर्गवास लगभग 30 से 40 वर्ष पूर्व हो चुका है। पर्षदीय आदेष दिनांक- 09/04/2012 को अचंलाधिकारी द्वारा उक्त मठ का संचालन करने हेतु न्यास समिति गठन किए जाने का प्रस्ताव की मांग की गयी। पर्षदीय पत्र के आलोक में अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन दिनांक- 16/07/2012 द्वारा प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति का गठन दिनांक- 30/10/2012 को किया, जिसमें श्री षिवषंकर सिंह को अध्यक्ष नामित किया गया, परन्तु न्यास समिति द्वारा कोई प्रभावी कार्य नहीं किया गया; ना कभी पर्षद में बजट, आय-विवरणी आदि प्रस्तुत की गयी। आय-विवरणी प्रस्तुत करने का कार्य कमल दास द्वारा ही किया जाता रहा। न्यास समिति के अध्यक्ष, श्री षिवषंकर सिंह को 15 से अधिक पत्र निबंधित डाक द्वारा भेजे गए, परन्तु ना तो वह कभी उपस्थित हुए, ना कभी प्रतिउत्तर प्रस्तुत किया। चूँकि उक्त न्यास74 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उसके लगभग 04 सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है।ऐसी परिस्थति में नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचलाधिकारी से नामों की मांग की गयी है। अंचलाधिकारी के पत्रांक- 445, दिनांक- 23/03/2021 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया है, परन्तु उन्होंने श्री षिवषंकर सिंह को पुनः अध्यक्ष के रूप में नामित किया है, जबकि उक्त श्री षिवषंकर सिंह द्वारा पर्षद के द्वारा भेजे गए पत्राें का कभी कोई ना तो प्रतिउत्तर दिया, ना कभी पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए।

इस कारण ऐसे व्यक्ति को पुनः न्यास समिति में स्थान देना उचित प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त परिस्थिति में श्री षिवषंकर सिंह के स्थान पर अंचलाधिकारी को अध्यक्ष नामित करते हुये शेष प्रस्तावित नामों की न्यास समिति गठन करने का निर्णय लिया जाता है और संरक्षक-सह-प्रभारी के रूप में श्री कमल दास को अधिकृत किया जाता है, जो विगत 10-12 वर्षों से लगातार मठ में रहकर के राग-भोग, पूजा-पाठ आदि का कार्य कर रहे हैं।दिनांक- 02/08/2023 कोश्री कमल दास द्वारा ही उक्त षिवषंकर के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि लगभग 09 व्यक्तियों द्वारा मठ की भूमि पर आवास बनाकर रह रहे हैं, जबकि उनको खाली कराए जाने के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा भी आदेष पारित किया गया, परन्तु उनके द्वारा जमीन खाली नहीं की गयी। यह भी उल्लेख किया है कि कुछ जमीन पर निजी प्राथमिक विद्यालय का संचालन हो रहा है और उस विद्यालय द्वारा भी किसी प्रकार की कोई राषि नहीं दी जाती है। आगे उल्लेख किया है कि चदां-चढ़ावा आदि से एक विषाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस संबंध में पर्षद के समक्ष उपस्थित श्री कमल दास द्वारा एक फोटोग्राफ दाखिल किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि 03 गुम्बजनुमा मंदिर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। श्री कमल दास द्वारा यह भी कथन किया गया कि लगभग 10,00,000/-रु0 की राषि व्यय की गयी है।

उपरोक्त परिस्थिति में मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करने एवं इसके कार्यान्वयन हेतुअंचलाधिकारी की अध्यक्षता मेंन्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-02/08/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए संत कबीर कुटी, ग्राम- हरिहरपट्‌टी, पोस्टथानाअंचल- पिपरा, जिला-सुपौैल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

4. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''संत कबीर कुटी न्यास योजना, ग्राम- हरिहरपट्‌टी, पोस्टथानाअंचल- पिपरा, जिला-सुपौैल'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''संत कबीर कुटी न्यास समिति, ग्राम- हरिहरपट्‌टी, पोस्टथानाअंचल- पिपरा, जिला-सुपौैल'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।75 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री कमल दास, संत कबीर कुटी, हरिहरपट्‌टी, पिपरा, जिला- सुपौल - संरक्षक-सह-पूजारी 02. अंचल पदाधिकारी, पिपरा, जिला- सुपौल - अध्यक्ष 03. श्री बम मंडल पिता- स्व॰ दाहु मंडल, हरिहरपट्‌टी, पिपरा, सुपौल - उपाध्यक्ष 04. श्री बच्चा लाल साह पिता- स्व॰ रामफल साह, हरिहरपट्‌टी, पिपरा सुपौल - सचिव 05. श्री विष्वनाथ राम पिता- स्व॰ नन्देराम, हरिहरपट्‌टी, पिपरा, सुपौल - कोषाध्यक्ष 06. श्री शम्भु दास पिता- स्व॰ त्रिभुवन दास, हरिहरपट्‌टी, पिपरा, सुपौल - सदस्य 07. श्री योगेन्द्र मंडल पिता- बसंती मंडल, हरिहरपट्‌टी, जिला- सुपौल - सदस्य 08. श्री रितेष यादव पिता- परमेष्वरी प्र॰ यादव, विषनपुर, जिला- सुपौल - सदस्य 09. श्री नागेष्वर राम पिता- स्व॰ मधुकर राम, विषनुपर, सुपौल - सदस्य 10. श्री प्रभु यादव पिता- गुनी यादव, विषनुपर, जिला- सुपौल - सदस्य 11. श्री पन्ना लाल साह पिता- गोनर साह, हरिहरपट्‌टी, पिपरा, सुपौल -सदस्य नोटः-1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2 उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''संत कबीर कुटी, ग्राम- हरिहरपट्‌टी, पोस्टथानाअंचल- पिपरा, जिला-सुपौैल'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

3 न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

29 अगस्त 2023

सं0 2034--श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्रामपोस्ट-चेचाढ़ी, जिला-औरंगाबाद, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-973 है।

उक्त मंदिर में दिनांक- 16/02/1952 को दानकर्ता ने लगभग 32 बीघा जमीन निबंधित विलेख द्वारा समर्पणनामा किया और मंदिर एवं मंदिर की भूमि की व्यवस्था हेतु 18 व्यक्तियों की न्यास समिति की गठन किया गया, जिसमें से अधिकांष लेागों का स्वर्गवास हो गया है। मात्र श्री रामाश्रय दूबे और श्री ललन उपाध्याय जीवित हैं। उक्त दोनों व्यक्तियों ने अपनी शारीरिक कमजोरी और अधिक उम्र होने के कारण दिनांक- 24/05/199 को निबंधित विलेख द्वारा 05 व्यक्तियों क्रमषः 1. महेन्द्र तिवारी, 2. रामदेव त्रिवेदी, 3. प्रहलाद त्रिवेदी, 4. धनन्जय पाठक, एवं 5. शत्रुघ्न त्रिवेदी को न्यासधारी के रूप में नियुक्त किया, परन्तु कार्य का संचालन संतोषजनक नहीं होने के कारण पर्षद ने अपने अधिसूचना ज्ञापांक- 646, दिनांक- 02/05/2002 द्वारा 07 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया गया। पर्षद को यह जानकारी प्राप्त हुई कि गठित न्यास समिति के दो सदस्य श्री मनीराम दूबे एवं श्री विष्वामित्र दूबे कभी बैठक या मंदिर में उपस्थित नहीं होते हैं। एक सदस्य श्री प्रहलाद तिवारी का भी स्वर्गवास हो चुका था। इस कारण 03-04 व्यक्तियों द्वारा न्यास समिति का संचालन किया जा रहा था, परन्तु न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नियमित रूप से पर्षद में अधिनिमय की धारा- 59, 60, और 70 का पालन नहीं किया जाता रहा। बारम्बार नोटिस दिये जाने पर चार-पांच सालों के अन्तराल पर आकर आय-व्यय विवरणी प्रस्तुत कर खानापूर्ति की जाती रही। मंदिर के नाम से कोई खाता भी नहीं खोला गया।

ऐसी स्थिति में पर्षद द्वारा नयी न्यास समिति गठन किये जाने का निर्णय लेते हुए अंचलाधिकारी से नामों की मांग की गयी, परंतु बारम्बार पत्र दिये जाने के उपरान्त अंचलाधिकारी ने दिनांक' 11/01/2021 को छः वर्ष पूर्व अर्थात वर्ष 2015 में जो आमसभा द्वारा नामों का प्रस्ताव किया गया था, उसे भेजा। चूंकि उक्त प्रस्ताव में वर्णित नाम छः-सात वर्ष बाद प्राप्त हुआ। उस पर कोई निर्णय लिया जाना उचित नहीं समझ कर पुनः नये सिरे से नामों की मांग की गयी। पर्षद की जानकारी (cid:2869)

में यह भी लाया गया कि लगभग 8 बीघा जमीन राधेष्याम सिंह, ग्राम- तेन्हुआ द्वारा वर्ष 2015 से अवैध रूप से कब्जा कर (cid:2870)

किसी प्रकार की बंदोबस्ती की राषि नहीं देते हैं, जिस संबंध में पर्षद द्वारा निबंधित डाक द्वारा पुलिस के माध्यम से नोटिस76 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 और अंतिम अवसर देते हुए नोटिस जारी किया गया, परन्तु न तो उनके द्वारा कोई प्रति-उत्तर दाखिल किया गया और न हीं बंदोबस्ती की राषि जमा की गयी। इस संबंध में श्री महेन्द्र पाठक द्वारा लिखित कथन किया गया कि इस वर्ष श्री राधेष्याम सिंह ने जमीन नहीं जोता है और जमीन मंदिर के कब्जे में आ गयी है। वर्ष 2002 में गठित न्यास समिति, पर्षद के पत्रांक- 2762, दिनांक- 19/08/2005 द्वारा आय-व्यय विवरणी, बजट, दाखिल नहीं करने के कारण स्पष्टीकरण की मांग की गयी और कोई स्पष्टीकरण नहीं दिये जाने के कारण, उस समिति को भंग करके धारा- 33 के अन्तर्गत अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया, परन्तु अंचलाधिकारी द्वारा कभी भी प्रभार नहीं ग्रहण गया। अस्थायी न्यासधारी की समय-सीमा 01 वर्ष समाप्त होने के उपरान्त उक्त न्यास समिति द्वारा आय-व्यय विवरणी दाखिल कर न्यास समिति को कार्य किये जाने के संबंध में प्रार्थना-पत्र दाखिल किया, जिस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका और वह समिति कार्य करती रही। चूंकि न्यास समिति को पुनर्जीवित नहीं किया गया। पर्षद के आदेष दिनांक- 24/01/2014 को नयी न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों की मांग की अंचलाधिकारी से की गयी और नाम प्राप्त होने के संबंध में संचिका वर्ष 2014 से 2022 तक चलती रही। इसी बीच समय-समय पर षिकायत भी प्राप्त होती रही और उक्त न्यास समिति की तरफ से श्री महेन्द्र त्रिवेदी द्वारा कभी-कभी आय-व्यय विवरणी भी दाखिल की जाती रही, जिसे पर्षद द्वारा स्वीकार किया जाता रहा। पर्षद के समक्ष श्री महेन्द्र पाठक तथा स्थानीय नागरिकों की तरफ से श्री दिनेष कुमार लाल, श्री मनिराम दूबे व कुछ अन्य व्यक्ति भी उपस्थित हैं। मनीराम दूबे तथा अन्य स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से मंदिर की आय को श्री महेन्द्र पाठक द्वारा अपने निजी हित में प्रयोग किया जाता रहा है, जिसमें लगभग 03-04 लाख रूपये प्रतिवर्ष की आय है तथा कथन करते हैं कि अंचलाधिकारी के द्वारा जो नाम प्रस्तावित किया गया है, उसकी न्यास समिति बनायी जाए, जबकि महेन्द्र पाठक का कथन है कि वर्ष 2002 से लगातार न्यास समिति के सदस्यों के द्वारा मंदिर की देखभाल, पूजा-पाठ,

(cid:2869)

राग-भोग और उनकी बंदोबस्ती की जा रही है। वर्ष 2015 में राधेष्याम सिंह द्वारा 8 बीघा भूमि बलपूर्वक कब्जा कर लिया

(cid:2870)

था, जिसमें मनीराम दूबे द्वारा भी सहयोग किया गया था और उस भूमि को किसी प्रकार की आय प्रार्थी को नहीं प्राप्त होती है। शेष भूमि को प्रार्थी के द्वारा बंदोबस्ती कर, खेती करायी जाती है, जिससे इस वर्ष 1,60,000/-रू0 की बंदोबस्ती राषि प्राप्त हुई है। आगे यह भी बताया कि कुछ अपराधिक तत्वों के द्वारा मंदिर में विराजमान अष्टधातु की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था।प्रार्थी को मंदिर कीभूमि से होने वाली आय आदि से मंदिर में संगमरमर की चार प्रतिमाएँ (श्रीराम, सीताजी, लक्ष्मणजी, एवं हनुमान जी) गया जिले से क्रय कर स्थापित की है तथा स्थापना का आयोजन भी किया गया था। मंदिर की छत की रंगाई-पोताई भी करायी गयी है। छत की ढ़लाई की गयी और मंदिर का जीर्णोद्धार भी विगत 02 वर्षों में किया गया है, जिसमें लगभग 03 लाख रू0 खर्च किये गये हैं। आगे कथन करते हैं कि एक न्यास समिति गठित की जाए, उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और उनको भी न्यास समिति में स्थान दिया जाए। चूंकि प्रार्थी मंदिर में पूजा-पाठ काफी समय से करते आ रहे हैं और अन्य कोई सहायता उनके जीविकोपार्जन के लिए नहीं है। इस हेतु उन्हें निर्धारित राषि देकर न्यास समिति का गठन किया जाता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। आगे कथन करते हैं कि उनके द्वारा एक ईंच भूमि मंदिर की किसी भी व्यक्ति को विक्रय नहीं किया गया है और न हीं किसी को बंधक या रेहन किया गया है। पिछले लगभग 20 वर्षों से कोई अंतिम आदेष पारित नहीं होने के कारण मंदिर और मंदिर की भूमि का दुरूपयोग निजी लाभ में किया जाता रहा।इस कारण इस विषय को लंबित रखना उचित नहीं है और एक योजना का निरूपण करते हुए इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-24/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्रामपोस्ट-चेचाढ़ी, जिला-औरंगाबाद के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-चेचाढ़ी, जिला-औरंगाबाद''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्रामपोस्ट-चेचाढ़ी, जिला-औरंगाबाद''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।77 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, ओबरा, जिला- औरंगाबाद - अध्यक्ष 2. श्री मुनीराम दूबे पिता-स्व0 काषीनाथ दूबे, ग्रा॰पो॰-खैरदीप, था॰-दाउदनगर, औरंगाबाद - उपाध्यक्ष 3. श्री दिनेष लाल गोपाल पिता- वंषगोपाल लाल, लाला बिगहा, तेन्दुआ, औरंगाबाद - सचिव 4. श्री अविनाष कुमार, पिता-श्री परमेष्वर यादव, चेचाढ़ी, औरंगाबाद (7739254088) - कोषाध्यक्ष 5. श्री नंदालाल चौधरी, पिता-स्व0 मुनीलाल चौधरी, जमुहारा, चेचाढ़ी, ओबारा, औरंगाबाद - सह कोषाध्यक्ष 6. श्रीमति लक्ष्मी कुमारी, पति-मिथलेष पासवान, जमुहारा, चेचाढ़ी, ओबारा, औरंगाबाद - सदस्य 7. श्री राजेन्द्र सिंह, पिता-स्व0 देवकी सिंह, ग्रा॰पो॰- चेचाढ़ी, था॰- ओबरा, औरंगाबाद - सदस्य 8. श्री षिवषंकर सिंह, पिता-श्री जितेन्द्र सिंह, ग्रा॰पो॰- चेचाढ़ी, था॰- ओबरा, औरंगाबाद - सदस्य 9. श्री वीरेन्द्र कुमार तिवारी, पिता-रामदेव पाठक, ग्रा॰पो॰- चेचाढ़ी, था॰- ओबरा, औरंगाबाद - सदस्य 10. श्री महेन्द्र पाठक, श्री राम जानकी मंदिर, चेचाढ़ी, औरंगाबाद - पुजारी उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-चेचाढ़ी, जिला-औरंगाबाद''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। नोटः-न्यास समिति पुजारी, श्री महेन्द्र पाठक को 6,000/-रू0 प्रतिमाह देगी और महेन्द्र पाठक मंदिर में स्थित केवल दो कमरों में हीं अपना निवास कर सकेंगे, जबतक कि उनका खुद का मकान नहीं बन जाता है और दो अन्य कमरे न्यास समिति के कब्जे में दे और न्यास समिति को एक मात्र अधिकार मंदिर की सभी भ्ूामि को अधिक से अधिक 02 वर्ष के लिए बंदोबस्ती करने के लिए रहेगा और न्यास समिति इस संबंध में एक रजीस्टर का संधारण करेगी।

उस पंजीमें बंदोबस्ती दिये जाने वाले व्यक्ति का नाम, खाता, खेसरा और एरिया तथा प्रतिवर्ष बंदोबस्ती की राषि और कितने दिनों तक दी जायेगी, उसका विस्तृत विवरण हो। समिति शीघ्र पर्षद से प्रमाण पत्र प्राप्त करके मंदिर के नाम से खाता खोलेगी और उसी खाता में मंदिर के विभिन्न श्रोतों से प्राप्त आय को जमा करे और उसमें से निकासी कर खर्च की जायेगी।78 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः-उक्त अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

23 सितम्बर 2023

सं0 2284--माँ सतखण्डी(सत्यचण्डी) मंदिर, ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला-औरंगाबाद, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4718/23 है।

उक्त मंदिर के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी से एक प्रतिवेदन दिनांक-10/10/2022 को प्राप्त हुयी, जिसमें उल्लेख किया गया कि थाना- 260, खाता- 133, कुल रकबा- 19.53 एकड़ है, जो गैर मजरूआ मालिक पहाड़ दर्ज है, जिसमें माँ सत्यचंडी मंदिर है और पुर्व काल से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुयी है। तदनुसार मंदिर का निबंधन कर समिति गठन की कार्यवाही की जाय। स्थानीय लोगों के द्वारा दिनांक- 10/07/2022 को एक आम सभा करके 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया गया है। उक्त प्रस्ताव के संबंध में किसी प्रकार का कोई आपत्ति अभी तक नहीं प्राप्त हुयी है। मंदिर का फोटोग्राफ भी समर्पित किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंदिर काफी प्राचीन एवं ऐतिहासिक है तथा काफी वृहद क्षेत्र में विस्तृत है।

उपस्थित सदस्यों का कहना है कि साल भर में छः मेला लगता है, जिसमें काफी श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। कुछ दुकानें भी लगायी जाती है, जिससे किराये आदि की वसुली की जाती है।

उपरोक्त परिस्थिति में मंदिर के प्रबंधन एवं सुरक्षा हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-19/07/2023के आलोक मेंबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए माँ सतखण्डी (सत्यचण्डी) मंदिर, ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला-औरंगाबादके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''माँ सतखण्डी (सत्यचण्डी) मंदिर न्यास योजना, ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला-औरंगाबाद'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''माँ सतखण्डी (सत्यचण्डी) मंदिर न्यास समिति, ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला-औरंगाबाद''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।79 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति एक वर्ष के लिए अस्थायी रूप से गठित की जाती हैः-

01. श्री राम प्रवेष मिश्र रविकर - अध्यक्ष 02. श्री अरूण कुमार सिंह - उपाध्यक्ष 03. श्री अमरेष कुमार सिंह - उपाध्यक्ष 04. श्री राजेन्द्र सिंह - सचिव 05. श्री राहुल कुमार - सह-सचिव 06. श्री सुरेन्द्र सिंह - कोषाध्यक्ष 07. श्री अवध बिहारी सिंह - सदस्य 08. श्री अखिलेष पासवान - सदस्य 09. श्री रविकर संजय मिश्र - सदस्य 10. श्री षिवरक्षया सिंह - सदस्य 11. श्री विगन राम - सदस्य सभी का पता-ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला- औरंगाबाद। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''माँ सतखण्डी (सत्यचण्डी) मंदिर, ग्राम- रायपुरा, पोस्ट- राम विलास नगर, थानाजिला-औरंगाबाद''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। नोटः-न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र पर्षद से प्रमाण-पत्र प्राप्त कर मंदिर के नाम से बैंक में खाता खोलें एवं प्रत्येक प्रकार की आय के संबंध में एक पंजी (रजिस्टर) का संधारण करें, ताकि मंदिर की व्यवस्था में पारदर्षिता हो तथा पर्षद द्वारा मांगे जाने पर उपस्थापित किया जा सके।

नोटः-उक्त अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

13 दिसम्बर 2023

सं0 3141--माँ जगदम्बा मंदिर, ग्राम-नरौली, पोस्ट-करौटा, थाना-सालिमपुर, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3966 है। उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु समय-समय पर न्यास समिति गठित की जाती रही है। इसी क्रम में पर्षदीय अधिसूचना दिनांक-15/01/2020 द्वारा 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। इसमें श्री अनिल कुमार सिंह को उपाध्यक्ष के रूप में मान्यता प्रदान की गयी। श्री अनिल कुमार सिंह द्वारा विभिन्न पदाधिकारियों को एवं पर्षद मेें स्वयं को सचिव के रूप में दावा किया जाता रहा तथा विभिन्न पत्र भी उसी के आलोक में लिखे गये, जो पुर्ण रूप से पर्षद के आदेष की अवहेलना प्रतीत हो रही थी। उक्त अनिल कुमार सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका CWJC No.- 4315/20 लाया गया, जो पक्षों को सुनवायी के उपरांत दिनांक- 02/08/2023 को निरस्त हुआ और याची अनिल कुमार सिंह के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 5 हजार रू॰ अर्थ-दण्ड लगाया गया तथा पर्षद को निये सिरे से न्यास समिति गठित किये जाने का निर्देष दिया गया।

माननीय उच्च न्यायालय पटना के उपरोक्त निर्देष के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ से उक्त मंदिर के प्रबंधन एवं व्यवस्था हेतु आदेष की प्रति संलग्न करते हुये अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग पर्षदीय पत्रांक- 2281, दिनांक- 23/09/2023 द्वारा किया गया। माननीय उच्च न्यायालय पटना के निर्देष के आलोक में भेजे गये उपरोक्त पत्र के80 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 संदर्भ में अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ द्वारा अपने पत्रांक- 2753, दिनांक- 12/10/2023 को पर्षद को 10 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव न्यास समिति गठित किये जाने हेतु दिया गया। अपने पत्र के साथ प्रस्तावित नामों का आधार कार्ड तथा उनके घोषणा-पत्र, कि ''उनके विरूद्ध किसी प्रकार का कोई अपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है।'' की प्रति संलग्न करते हुये पर्षद को दिनांक 19/10/2023 को प्राप्त हुआ।

उपरोक्त परिस्थितियों पर विचारोपरांत उक्त मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु निम्न योजना का निरूपण करते हुये अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ द्वारा प्रस्तावित नामों की न्यास समिति का गठन पांच वर्ष के लिए की जाती है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-30/10/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएमाँ जगदम्बा मंदिर, ग्राम- नरौली, पोस्ट-करौटा, थाना- सालिमपुर, जिला-पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''माँ जगदम्बा मंदिर न्यास योजना, ग्राम- नरौली, पोस्ट-करौटा, थाना- सालिमपुर, जिला-पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''माँ जगदम्बा मंदिर न्यास समिति, ग्राम- नरौली, पोस्ट-करौटा, थाना- सालिमपुर, जिला-पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

6. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

7. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

18. अधिनियम की धारा- 44 के अन्तर्गत न्यासी / न्यासधारी / न्यास समिति को केवल यह अधिकार है कि संबंधित मंदिर की भूमि को अधिक-से-अधिक तीन (03) वर्ष के लिए बंदोवस्ती हेतु दे सकते हैं। मंदिर की भूमि को विक्रय81 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 करने, किसी प्रकार से बंधक, रेहन या तीन (03) से अधिक के लिए लीज पर देने का अधिकार समिति को नहीं होगा। जबतक की पर्षद से उनके प्रस्ताव को बहुमत द्वारा अनुमति नहीं प्राप्त हो जाय।

19. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति पांच वर्षों के लिए गठित की जाती हैः-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़, जिला- - अध्यक्ष 2. श्री मृत्यंजय कुमार पिता- स्व॰ हरेंद्र प्रसादसिंह - उपाध्यक्ष 3. श्री अरविन्द कुमार पिता- श्री सरयुग सिंह - सचिव 4. श्री ओम प्रकाष पिता- स्व॰ नरेंद्र प्रसाद सिंह - कोषाध्यक्ष 5. श्री राजेष्वर सिंह पिता- स्व॰ राम प्रसाद सिंह - सदस्य 6. श्री अरूण कुमार सिंह पिता- स्व॰ बृजनंदन सिंह - सदस्य 7. श्री परषुराम सिंह पिता- स्व॰ अर्जुन सिंह - सदस्य 8. श्री श्रवण सिंह पिता- स्व॰ नागो सिंह - सदस्य 9. श्रीशषि रंजन कुमार पिता- स्व॰ एतवारी मोची - सदस्य 10. श्री बैजु प्रसाद पिता- स्व॰ बद्री प्रसाद - सदस्य 11. श्रीमति गौरी देवी पति- स्व॰ मोची रजक - सदस्य सभी का पता- ग्राम- नरौली, पोस्ट- करौटा, थाना- सालिमपुर, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''माँ जगदम्बा मंदिर, ग्राम- नरौली, पोस्ट-करौटा, थाना- सालिमपुर, जिला-पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सेवायत / न्यासधारी को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

आदेश

------

6 फरवरी 2023

सं0 3838--परमहंस स्वामी परमेष्वरानंदजी महाराज आध्यात्मिक व लोक सेवा ट्रस्ट, रायपुर चोर, दक्षिण कुटिया, थानाअंचल-षिवसागर, जिला-रोहतास, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं॰-4656/22 है।

उक्त मठ के विषय में श्री ईष्वरानंदजी का कहना है कि दिनांक-17/09/2015 को स्वामी स्वरूपानंदजी का स्वर्गवास हो गया। उनके द्वारा पुर्व में हीं दिनांक-12/07/2014 को गुरू पुर्णिमा के दिन आवेदक को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की इच्छा व्यक्त की थी। उक्त के आलोक में ट्रस्ट के सदस्यों, भक्तों, षिष्यों व अन्य सहयोगियों की आपात बैठक आहुत की, जिसमें स्वामी स्वरूपानंद जी की इच्छानुसार, सर्वसम्मति से स्वामी ईष्वरानंदजी को ट्रस्ट का मुख्य ट्रस्टी नियुक्त किया गया। इससे संबंधित निबंधित विलेख दिनांक-20/10/2015 को निष्पादित किया गया, जिसमें पुर्व ट्रस्टी उपाध्यक्ष, श्री हरप्रेमानंदजी-सचिव, महात्मा ध्यानानंदजी तथा कोषाध्यक्ष, महात्मका रामांनदजी के उक्त विलेख में गवाह के रूप में हस्ताक्षर भी है। किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उक्त आश्रम के संबंध में कोई दावा भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त परिस्थितियों तथा उक्त निबंधित विलेख के आलोक में स्वामी ईष्वरानंदजी को परमहंस स्वामी परमेष्वरानंदजी महाराज आध्यात्मिक व लोक सेवा ट्रस्ट,रायपुर चोर, दक्षिण कुटिया, थानाअंचल-षिवसागर, जिला-रोहतास, का अस्थायी न्यासधारी, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-33 के तहत निम्नांकित शर्त्तों के साथ नियुक्त किया जाता है।

1. परमहंस स्वामी परमेष्वरानंदजी महाराज आध्यात्मिक व लोक सेवा ट्रस्ट, रायपुर चोर, दक्षिण कुटिया, थानाअंचल-षिवसागर, जिला-रोहतास, के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में 15 दिनों के अन्दर खाता खोलें तथा पास बुक दाखिल करें।

2. मंदिर में जो पीली और सफेद धातु चढ़ाई जाती है, उसको एक अलग रजिस्टर में प्रत्येक दिन के आय को अंकित करेंगे।

3. ये न्यास की सम्पत्ति का संरक्षण करेंगे। 4. यदि कोई चल या अचल सम्पत्ति किसी के द्वारा अधिगृहित या अतिक्रमित है, तो उसे, वापस लाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे।82 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 5. ये न्यास की चल या अचल सम्पत्ति का हस्तांतरण (विक्रय), बदलैन या लीज अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के विपरित किसी के पक्ष में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अनुमति के बिना नहीं करेंगे। अगर किसी प्रकार का हस्तांतरण बदलैन या लीज किया जाता है तो वह अवैध एवं अमान्य होगा तथा आपराधिक विचारण प्रक्रिया प्रारम्भ की जायेगी।

6. सम्पत्तियों का दुरूपयोग या स्वार्थवष उपयोग नहीं करेंगे। 7. किसी भी अपराधिक कृत्य में संलिप्त नहीं रहेंगे। 8. 10,000/- (दस हजार) रू0 से अधिक राषि का खर्च चेक के माध्यम से करेंगे। 9. प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरांत विगत वर्ष में प्राप्त आय-व्यय, पर्षद को देय शुल्क, विकासात्मक कार्यों (फोटो) आदि का सम्यक्‌ प्रेषण पर्षद को करेंगे।

10. अंचल के भू-राजस्व में भूमि ''श्री परमहंस स्वामी परमेष्वरानंदजी महाराज आध्यात्मिक व लोक सेवा ट्रस्ट,रायपुर चोर, दक्षिण कुटिया, थानाअंचल-षिवसागर, जिला-रोहतास'' के नाम का इन्द्राज लगातार रहेगा, उसमें कोई नामान्तरण व संषोधन नहीं होगा।

11. अधिनियम की धारा- 59, 60 और 70 के तहत प्रत्येक वर्ष बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, पर्षद को देय शुल्क आदि अनिवार्य रूप से पर्षद में जमा करेंगे तथा अपनी शाखाओं में यदि किसी अन्य प्रबंधक आदि की नियुक्ति की जाती है, तो उसके भी हस्ताक्षार के साथ सूचना व जानकारी अवष्य पर्षद में समर्पित करेंगे।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

अधिसूचनाएं

29 नवम्बर 2023

सं0 3019--श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर पुल, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-535 है।

उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु पुर्व में पर्षदीय ज्ञापांक-1989, दिनांक-27/07/2005 द्वारा एक न्यास समिति गठित की गयी थी। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक नहीं पाते हुये पुनः एक न्यास समिति का गठन पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 1454, दिनांक- 13/12/2007 द्वारा किया गया। उक्त समिति का गठन 05 वर्ष हेतु किया गया था। पुनः पर्षदीय पत्रांक- 509, दिनांक 17/09/2013 द्वारा न्यायमुर्ति श्री पी॰के॰ सिन्हा (अवकाष प्राप्त, पटना उच्च न्यायालय) की अध्यक्षता में न्यास समिति का गठन किया गया। उक्त समिति में श्री राज किषोर दासजी को सचिव के रूप में मान्यता दी गयी थी। श्री राज किषोर दासजी का स्वर्गवास दिनांक- 31/10/2015 को हो गया। उनके स्वर्गवास के उपरांत श्री सुरेष चंद्र शास्त्री को सचिव के रूप में कार्य करने की अनुमति, न्यास समिति के प्रस्ताव के आलोक में दी गयी। पुर्व में उन्हें अधिनियम की धारा- 33 के अन्तर्गत अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। उक्त समय-सीमा पुर्व में समाप्त हो चुकी है। पर्षदीय पत्रांक- 1947, दिनांक- 13/02/2019 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, पटना से न्यास समिति गठन हेतु नामों की मांग की गयी। इस बीच दो वर्ष कोरोना महामारी के कारण न्यास समिति का गठन लंबित रहा और न हीं अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा नाम उपलब्ध कराया गया। महंत श्री सुरेष चंद्र शास्त्री द्वारा दिनांक- 21/10/2021 को ग्यारह व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव अपने हस्ताक्षर से दिया, जो कि किसी आम सभा द्वारा पारित नहीं था। पुनः श्री शास्त्री द्वारा एक आम सभा दिनांक- 16/10/2022 को करके अपने पत्र दिनांक- 19/10/2022 को ग्यारह व्यक्तियो के नाम का प्रस्ताव दिया। इसी बीच दिनांक- 09/01/2023 को श्री ललित कुमार झुनझुनवाला द्वारा 12 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया। उक्त दोनों सूची को चरित्र-सत्यापान हेतु भेजा गया। पुनः दिनांक- 21/01/2023 को श्री शास्त्री द्वारा एक बैठक कर ग्यारह नाम का प्रस्ताव दिनांक 10/07/2023 को दिया गया। उक्त सूची में पुर्व में उनके द्वारा जो प्रस्ताव दिनांक- 19/10/2022 को दिया गया था, उसमें से कुछ नामों में संषोधन किया गया।

पर्षद का मंतव्य है कि मंदिर एक धार्मिक स्थल होता है। उसमें भक्तों की श्रद्धा एवं विकास तभी होता है, जब उसकी व्यवस्था कर रहे लोग आपस में सामंजस्य एवं सहयोग करें। इस संबंध में दोनों पक्षों को निर्देष दिया गया कि यदि वह उचित समझे ंतो एक-दुसरे की सूची में से कुछ उचित नामों (कॉमन नाम) को चिन्हि्‌त कर पर्षद को उपलब्ध करावें, ताकि न्यास समिति का गठन किया जा सके। परंतु श्री शास्त्री जी का कथन है कि उनके द्वारा समर्पित नामों की सूची की ही समिति गठित की जाय। जबकि दुसरे पक्ष श्री झुनझुनवाला जी का कथन है कि अब विवाद के कारण वे समिति में नहीं रहना चाहते हैं, परंतु प्रमाणी संप्रदाय से आने वाले सदस्यों को ही समिति में रखा जाय।

श्री शास्त्री जी द्वारा न्यास समिति हेतु चार सूची दिनांक- 04/01/2021, दिनांक- 20/10/2021, दिनांक-19/10/2022 (बैठक दिनांक- 16/10/2022) एवं दिनांक-10/07/2023 (आम सभा की बैठक दिनांक- 21/01/2023) को प्रत्येक सूची में ग्यारह-ग्यारह नाम उपलब्ध करायी गयी। इस पर विचारोपरांत निम्न व्यक्तियों की न्यास समिति गठन करने का निर्णय लिया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-16/10/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर पुल, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।83 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर न्यास योजना, राजापुर पुल, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर न्यास समिति, राजापुर पुल, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

6. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

7. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

19. अधिनियम की धारा- 44 के अन्तर्गत न्यासी / न्यासधारी / न्यास समिति को केवल यह अधिकार है कि संबंधित मंदिर की भूमि को अधिक-से-अधिक तीन (03) वर्ष के लिए बंदोवस्ती हेतु दे सकते हैं। मंदिर की भूमि को विक्रय करने, किसी प्रकार से बंधक, रेहन या तीन (03) से अधिक के लिए लीज पर देने का अधिकार समिति को नहीं होगा। जबतक की पर्षद से उनके प्रस्ताव को बहुमत द्वारा अनुमति नहीं प्राप्त हो जाय

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री सुनील कुमार सिन्हा - अध्यक्ष 2. श्री हंसलाल यादव -उपाध्यक्ष 3. महंत श्री सुरेष चंद्र शास्त्री -सचिव 4. श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल - कोषाध्यक्ष 5. श्री अरूण कुमार सिंह - सदस्य84 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 6. श्री अरूण कुमार पांडे - सदस्य 7. श्री प्रेम कुमार सिंह - सदस्य 8. श्री सुरेंद्र राय - सदस्य 9. श्री कपिल सिंह - सदस्य 10. श्री राम प्रवेष शर्मा -सदस्य 11. श्री सुखदेव कुमार प्रणामी - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर पुल, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

29 अगस्त 2023

सं0 2031--श्री माँ दुर्गा मंदिर, ग्राम- पोगाढ़ी, पोस्ट-मेदनीपुर, थाना- दिनारा, जिला-रोहतास,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4707/2023 है।

उक्त न्यास के संबंध में दिनांक- 14/07/2022 को श्री प्रमोद कुमार एवं अन्य 400 से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिया कि पोगाढ़ी गांव में सैकड़ों वर्ष प्राचीन दुर्गा मंदिर है। पूर्व में उसकी पूजा-पाठ स्व0 रामजतन पांडे द्वारा की जाती थी। उनके स्वर्गवास के पष्चात श्री तुलसी चौधरी द्वारा मंदिर में पूजा-पाठ, रागभोग की जाती रही, जिन्हें ग्रामीणाें द्वारा नियुक्त किया गया था। इसी बीच मंदिर में लोगों की श्रद्धा और भक्तों की संख्या बढ़ने लगी। लाखों रूपये की आमदनी चढ़ावा के रूप में प्राप्त होने लगी, तो कुछ वर्ष पूर्व श्री कृष्ण पांडे द्वारा बलपूर्वक करके तुलसी चौधरी को वहां से हटा दिया। वर्तमान में मंदिर में लगभग 50 से 60 लाख रूपये प्रतिवर्ष मंदिर की आय है, जिसका दुरूपयोग और निजी हित में श्री कृष्णा पांडे द्वारा किया जा रहा है। इस संबंध में अनुमंडल पदा0 से रिपोर्ट की मांग की गयी, जिसमें उनके द्वारा भी यह उल्लेख किया गया है कि थाना नं0- 30, खाता सं0- 62, खेसरा सं0- 384, रकबा 03 डी0 किस्म जमीन भगवती अनाबाद बिहार सरकार के नाम दर्ज है। स्थल निरीक्षण में यह पाया गया कि मंदिर का गुम्बज लगभग 125 फीट उंचा है। उक्त भूमि पर धर्मषाला और सामुदायिक भवन भी जनसहयोग से निर्माण किया गया है। यहां दषहरा एवं नवरात्री में मेला लगता है। यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त भूमि में ''6.5×21.5'' में रामप्रबल सिंह द्वारा अवैध रूप से निर्माण तथा श्री श्याम बिहारी साह द्वारा भी मंदिर की भूमि पर अपना दीवार बनाया गया है, जिसकी मापी कर चिन्हि्‌त किया गया है। उपरोक्त बिन्दुओं पर विचारोपरान्त दिनांक- 03/04/2023 को उक्त मंदिर को सार्वजनिक घोषित करते हुए निबंधन किये जाने का निर्देष दिया गया। मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यास समिति के गठन के लिए स्थानीय लोगों के द्वारा दिनांक- 05/05/2023 को एक बैठक की गयी, जिसमें सरपंच, मुखिया व अधिकांष ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अंगुठे के निषान हैं। उक्त बैठक में मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु 11 व्यक्तियों की न्यास समिति के गठन का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन भी संबंधित थाना को पत्र प्रेषित कर कराया गया है। संबंधित थाना का प्रतिवेदन दिनांक- 09/07/2023 में उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित 10 नामों के विरूद्ध कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं है।

उपरोक्त परिस्थिति में मंदिर की व्यवस्था, प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए उक्त योजना के कार्यान्वयन हेतु प्रस्तावित नामों की न्यास समिति, अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित की जाती है और कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे कार्यकाल का विस्तार किया जा सकेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-24/07/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री माँ दुर्गा मंदिर, ग्राम- पोगाढ़ी, पोस्ट- मेदनीपुर, थाना- दिनारा, जिला- रोहतास के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री माँ दुर्गा मंदिर न्यास योजना, ग्राम- पोगाढ़ी, पोस्ट- मेदनीपुर, थाना- दिनारा, जिला- रोहतास''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री माँ दुर्गा मंदिर न्यास समिति, ग्राम- पोगाढ़ी, पोस्ट- मेदनीपुर, थाना- दिनारा, जिला- रोहतास'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।85 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा-11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, विक्रमगंज - पदेन अध्यक्ष 2. श्री रंजय कुमार सिंह, पिता-श्री रामजी सिंह, मेदनीपुर, रोहतास - उपाध्यक्ष 3. श्री राजवंष सिंह, पिता-किषोरी लाल साह, - सचिव पता- कुआं के नजदीक, चोरपोखर इंग्लिष, गंजभरसरा, दिनारा, नटवार खुर्द, रोहतास। 4.श्री विनोद कुमार, पिता-धरीक्षण कहार, मेदनीपुर, रोहतास - सह सचिव 5. श्री यदुवंष मिश्र, पिता-नरसिंह मिश्र, पोगाढ़ी, मेदनीपुर, रोहतास - कोषाध्यक्ष 6. श्री प्रमोद कुमार सिंह, पिता-षिव कुमार सिंह, -सदस्य पता- कुआं के नजदीक, चोरपोखर इंग्लिष, गंजभरसरा, दिनारा, नटवार खुर्द, रोहतास। 7. श्री हरेन्द्र सिंह, पिता-स्व0 षिवकुमार सिंह, मेदनीपुर, रोहतास -सदस्य 8. श्री ददन पांडे, पिता-स्व0 केदार पांडे, पोगाढ़ी, मेदनीपुर, रोहतास -सदस्य 9. श्री राकेष कुमार पांडे, पिता-रामाकांत पांड, पोगाढ़ी, मेदनीपुर, रोहतास -सदस्य 10. श्री राम कुमार सिंह, पिता-दरोगा सिंह, चोरपोखर इंग्लिष, गंजभरसरा, दिनारा, रोहतास -सदस्य 11. श्री सुनील यादव, पिता-बसवन यादव, - सदस्य पता- चोरपोखर इंग्लिष, गंजभरसरा, दिनारा, नटवार खुर्द, रोहतास। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री माँ दुर्गा मंदिर, ग्राम- पोगाढ़ी, पोस्ट- मेदनीपुर, थाना- दिनारा, जिला- रोहतास''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।86 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः- समिति को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र मंदिर के नाम से बैंक में खाता खोली जाए और मंदिर में स्थित सभी पांच-छः दानपेटी जो है, प्रत्येक माह कम से कम 03 सदस्यों की उपस्थिति में खोली जाए और दान-पेटी खोल कर 24 घंटे के अन्दर प्राप्त राषि की गिनती करके बैंक में जमा की जायेगी तथा अन्य जो आय का श्रोत है, जैसे धर्मषाला और सामुदायिक भवन या चंदे के द्वारा जो राषि प्राप्त होती है उन सबको भी बैंक में जमा की जाए और बैंक से निकासी कर ही राषि खर्च की जाए। यदि राषि 10,000/- रू0 या उससे अधिक खर्च किया जाता है तो उसे चेक के माध्यम से भुगतान किया जाए तथा उपरोक्त दोनों व्यक्ति श्री रामप्रबल सिंह एवं श्याम बिहारी साह से मंदिर की भूमि खाली कराये जाने हेतु कार्यवाही की जाए।

नोटः-उक्त अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

21 नवम्बर 2023

सं0 2915--नानकशाही उदासीन मठ (श्री बड़ी संगत), जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3594 है।

उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षदीय ज्ञापांक- 3054, दिनांक-06/11/2003 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। न्यास समिति द्वारा नियमित रूप से आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क, बजट आदि जमा नहीं किया गया। कई बार नोटिस देने के उपरांत वर्ष 2011-18 तक की आय-व्यय विवरणी समर्पित की गयी। न्यास समिति द्वारा यह भी स्वीकार किया गया कि न्यास के कोषाध्यक्ष, स्वयं न्यास की भूमि पर खेती करते हैं। वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 में कुल आय 30 हजार दर्षित की गयी। न्यास समिति ने यह भी सूचना दी गयी 13 व्यक्ति मंदिर प्रांगण में अतिक्रमण करके रखे हुये हैं। ग्रामीणों द्वारा नवीन न्यास समिति के गठन का प्रस्ताव बैठक दिनांक- 25/04/2023 के साथ समर्पित किया गया। इस पर न्यास समिति से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। न्यास समिति ने अपना स्पष्टीकरण दिनांक- 11/07/2023 पर्षद में समर्पित किया। उनका कहना था कि समिति वर्ष 2003 में गठित की गयी, उस समय मंदिर की सभी भूमि अतिक्रमित थी। समिति के प्रयास से खेती की भूमि प्राप्त हो गयी है। समिति लगातार मुकदमा लड़ रही है। दुकानदारों द्वारा भूमि अभी खाली नहीं करायी गयी है। चूंकि मंदिर की व्यवस्था हेतु गठित समिति का कार्यकाल बहुत पुर्व समाप्त हो चुकी है। अतएव एक नवीन न्यास समिति का गठन प्रस्तावित नामों तथा कार्यरत न्यास समिति के सदस्यों के नामों पर विचारोपरांत से अस्थायी रूप से एक वर्ष लिए करते हुये एक योजना का निरूपण किया जाता है। न्यास समिति का कार्यकाल संतोषजनक पाये जाने पर आगे कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-06/10/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए नानकशाही उदासीन मठ (श्री बड़ी संगत), जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सरके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''नानकशाही उदासीन मठ (श्री बड़ी संगत) न्यास योजना, जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''नानकशाही उदासीन मठ (श्री बड़ी संगत) न्यास समिति, जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।87 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, डुमरांव, जिला- बक्सर - अध्यक्ष 2. श्री अषोक कुमार पिता- स्व॰ रामाषंकर प्रसाद, षिननं मिश्रा रोड, वार्ड- 7 (वर्तमान- 19) -उपाध्यक्ष 3. श्री सुनील कुमार सिंह पिता- कपिलदेव सिंह, अक्षयवर लाल की गली, वार्ड- 9 -सचिव 4. श्री विरेन्द्र कुमार पिता- स्व॰ नथुनी यादव, साकिन- नथुनी के बाग, वार्ड-07 -कोषाध्यक्ष 5. श्री कृष्ण कुमार - सदस्य 6. श्री विकास कुमार पिता- सुरेष प्रसाद, जंगल बाजार, वार्ड- 06 - सदस्य 7. श्री भूषण गौड़ - सदस्य 8. श्री अखिलेष केषरी पिता- स्व॰ द्वारिका प्रसाद केषरी - सदस्य 9. श्री सत्यनारायण गुप्ता पिता- स्व॰ षिवदानी भगत - सदस्य 10. थानाध्यक्ष, डुमरांव थाना, जिला- बक्सर - सदस्य शेष का पता-नानकशाही उदासीन मठ, जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना- डुमरांव, बक्सर। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''नानकशाही उदासीन मठ (श्री बड़ी संगत), जंगल बाजार रोड, डुमरांव, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

31 अक्तूबर 2023

सं0 2806--श्री नरसिंह भगवान मंदिर,सकरबार टोला, मोकामा, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3743 है।

उक्त मंदिर की स्थापना श्री वासुदेव रामानुजाचार्य ने वर्ष 1938 में की थी। दिनांक- 16/02/1945 के माध्यम से 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। उक्त विलेख में उल्लेखित सभी सदस्यों का स्वर्गवास भी हो गया है, परंतु उनके स्थान पर किसी अन्य न्यासधारी की नियुक्ति नहीं की गयी है। इसी प्रकार दिनांक- 05/03/1970 को महंत मधुसूदन रामानुजाचार्य द्वारा निबंधित विलेख के माध्यम से 07 सदस्यीय गठित की गयी। उन सदस्यों का भी स्वर्गवास हो गया तथा कोई नवीन चयन नहीं किया गया। मंदिर अव्यवस्था का षिकार हो गया।

इस बीच वर्ष 1990 में मंदिर में स्थापित श्री नरसिंह भगवान की प्रतिमा भी अपराधियों द्वारा चोरी की गयी, पुलिस के प्रयास से बरामद की गयी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्व॰ अधिवक्ता, राम पदारथ सिंह के यहां रखी हुयी है। इस बीच मंदिर88 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 के जीर्णोद्धार के संबंध में दिनांक- 22/12/2014 को श्री मृत्यंजय प्रसाद की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया, परंतु उक्त समिति भी पुर्ण रूप से कार्य नहीं कर सकी। अतएव नवीन न्यास समिति के गठन का निर्णय पर्षद द्वारा दिनांक- 07/07/2023 को लिया गया तथा अंचलाधिकारी से 11 नामों की मांग की गयी। अंचलाधिकारी का पत्रांक- 2343, दिनांक- 26/09/23 पर्षद को प्राप्त हुआ। चूंकि बरामद प्रतिमा स्व॰ अधिवक्ता, राम पदारथ सिंह के स्वर्गवास के उपरांत असुरक्षित हो गयी है और उनका परिवार पटना से बाहर निवास करता है और उन लोगों द्वारा प्रतिमा हो सुरक्षित करने हेतु पर्षद मेंं प्रार्थना-पत्र समर्पित किया।

उपरोक्त परिस्थिति पर विचार करते हुय अंचलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत एक योजना का निरूपण अस्थायी रूप से एक वर्ष किया जाता है तथा संबंधित थाना चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने तथा कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा।

उपरोक्त न्यास समिति में दो उपाध्यक्ष नियुक्त किये जाने की आवष्यकता इस कारण हुयी कि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, दोनों सरकारी कर्मी हैं। समय-समय पर बैठक, सरकारी कार्यों में व्यस्त होने के कारण संभावना नहीं रह जाती है। इसलिए दुसरे उपाध्यक्ष, श्री अनिल कुमार, विषम परिस्थितियोें में बैठक की अध्यक्षता करने के लिए अधिकृत रहेंगे।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-27/09/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री नरसिंह भगवान मंदिर, सकरबार टोला, मोकामा, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री नरसिंह भगवान मंदिर न्यास योजना, सकरबार टोला, मोकामा, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री नरसिंह भगवान मंदिर न्यास समिति, सकरबार टोला, मोकामा, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य,89 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, मोकामा, पटना - अध्यक्ष 2. कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, मोकामा -उपाध्यक्ष 3. श्री अनिल कुमार पिता- स्व॰ रामोत्तर सिंह, मोलदियार टोला, वार्ड- 12, मोकामा - उपाध्यक्ष 4. श्री शैलेष कुमार पिता- स्व॰ साधु शरण सिंह, सकरबार टोला, वार्ड- 16, मोकामा - सचिव 5. श्री महेष प्रसाद पिता- स्व॰ रामदेव सिंह, सकरबार टोला, वार्ड- 15, मोकामा -कोषाध्यक्ष 6. श्री संजीव कुमार पिता- स्व॰ रामनंदन सिंह, मोलदियार टोला, वार्ड- 12, मोकामा - सदस्य 7. श्री विजय नंदन प्रसाद सिंह पिता- स्व॰ रामचंद्र सिंह, मोलदियार टोला, वार्ड- 12, मोकामा- सदस्य 8. श्री विवेक कुमार पिता- श्री षिवनंदन राम, पचमहला, वार्ड- 24, मोकामा, पटना - सदस्य 9. श्रीगौतम कुमार पिता- स्व॰ शैलेन्द्र प्रसाद सिंह, सकरबार टोला, वार्ड- 16, मोकामा - सदस्य 10. श्री जय राम प्रसाद उर्फ जयराम महतो पिता- स्व॰ राम बालक महतो - सदस्य पता- ईष्वर टोला, मोकामा घाट, वार्ड- 28, मोकामा, जिला- पटना। 11. अंचलाधिकारी, घोसवरी, पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री नरसिंह भगवान मंदिर, सकरबार टोला, मोकामा, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

21 नवम्बर 2023

सं0 2917--श्री श्री वृदावन बिहारी कन्हैया स्थान, ग्रामपोस्ट-विजयपुरा, थाना-धनरूआ, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4140/11 है।

उक्त न्यास के अधीन 04 एकड़ भूमि है। पुर्व में स्थानीय नागरिकों द्वारा मंदिर की व्यवस्था की जा रही थी। श्री कौषल किषोर मिश्र द्वारा दिनांक- 01/07/2011 को पर्षद में प्रार्थना-पत्र देकर ग्यारह व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु दिया था। उक्त प्रार्थना-पत्र पर विचारोपरांत पर्षदीय ज्ञापांक- 585, दिनांक- 06/07/2011 द्वारा प्रस्तावित न्यास समिति को मान्यता प्रदान की गयी। इस बीच न्यास समिति के विरूद्ध कुछ आरोप भी पर्षद को प्राप्त हुआ, जिस पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। वर्ष 2016 के उपरांत न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार का न तो पत्राचार किया गया और न हीं पर्षद के समक्ष उपस्थित हुये। ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 02/06/2022 को ग्यारह व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव आम सभा की बैठक दिनांक- 05/02/2022 की छायाप्रति संलग्न करते हुये समर्पित की। नवीन न्यास समिति गठित करने का अनुरोध किया, जिस पर प्रस्तावित नामों का संबंधित थाना को प्रेषित कर चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन की मांग की गयी। थानाध्यक्ष द्वारा दिनांक- 29/08/2023 को पर्षद को उपलब्ध करायी गयी और उक्त प्रतिवेदन के संबंध में ग्रामीणों द्वारा किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं की गयी।

उक्त मंदिर एवं भूमि की व्यवस्था हेतु प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत एक योजना का निरूपण करते हुये निम्नलिखित न्यास समिति गठित की जा रही है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-06/10/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएश्री श्री वृदावन बिहारी कन्हैया स्थान, ग्रामपोस्ट-विजयपुरा, थाना-धनरूआ, जिला-पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री श्री वृदावन बिहारी कन्हैया स्थान न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-विजयपुरा, थाना-धनरूआ, जिला-पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री श्री वृदावन बिहारी कन्हैया स्थान न्यास समिति, ग्रामपोस्ट-विजयपुरा, थाना-धनरूआ, जिला-पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।90 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, धनरूआ, जिला- पटना - अध्यक्ष 2. श्री कौषलेन्द्र कुमार पिता- श्री राजदेव सिंह, ग्राम- विजयपुरा -उपाध्यक्ष 3. श्री अरविंद कुमार पिता- श्री अयोध्या सिंह, ग्राम- विजयपुरा -सचिव 4. श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह पिता- स्व॰ श्रद्धानंद सिंह, ग्राम- विजयपुरा -कोषाध्यक्ष 5. श्री सुरेष शर्मा पिता- स्व॰ नेम नारायण सिंह, ग्राम- विजयपुरा - सदस्य 6. श्री शषी भूषण शर्मा पिता- श्री जनार्दन शर्मा, ग्राम- विजयपुरा - सदस्य 7. श्री अषोक कुमार शर्मा पिता- श्री श्याम नंदन शर्मा, ग्राम- विजयपुरा - सदस्य 8. श्री अरविन्द कुमार पिता- स्व॰ नेउरी मिस्त्री, ग्राम- चन्दु बिगहा - सदस्य 9. श्री अरविन्द प्रसाद पिता-श्री राजेन्द्र प्रसाद यादव, ग्राम- गढ़ पर - सदस्य 10. श्री नरेष प्रसाद पिता- श्री रामचन्द्र प्रसाद, ग्राम- विजयपुरा - सदस्य 11. श्री अभय शर्मा पिता- स्व॰ बच्चु सिंह, ग्राम- विजयपुरा - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री श्री वृदावन बिहारी कन्हैया स्थान, ग्रामपोस्ट-विजयपुरा, थाना-धनरूआ, जिला-पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।91 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

-------

21 नवम्बर 2023

सं0 2913--अधपा निजामपुर ठाकुरबाड़ी (श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी), ग्राम- अधपा निजामपुर, पोस्ट-शोरमपुर, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-1384/1963 है।

उक्त ठाकुरबाड़ी पर्षद में वर्ष 1963 से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है। पुर्व में ठाकुरबाड़़ी की देखभाल श्री नाथु दास चेला राम पवित्र दास द्वारा की जाती थी। इसके उपरांत श्री गिरधारी दास तथा उनके उपरांत उनके षिष्य, श्री भूसी दास ठाकुरबाड़ी का प्रबंधन करते रहे। वर्ष 2012 में भूसी दास कहीं चले गये। तदोपरांत स्थानीय लोगों ने एक स्वयंभू समिति का गठन किया एवं मंदिर का संचालन करने लगे। वर्ष 2019 में श्री कृपाल सिंह द्वारा स्वयंभू समिति के उपर आरोप दिया गया कि संचालन उचित ढ़ंग से नहीं की जा रही है। इसके आलोक में अंचलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की गयी, जो अप्राप्त रही। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि अंचलाधिकारी द्वारा विगत 03 वर्षों से कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है।

उपरोक्त परिस्थिति में दिनांक- 04/02/2019 को प्रस्तावित नामों में से एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए किया जाता हैै। कार्य संतोषजनक प्राप्त होने पर अवधि विस्तार का निर्णय लिया जायेगा। समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि मंदिर के नाम से संचालित बैंक खाता मेें ही बंदोवस्ती आदि से प्राप्त राषि को जमा किया जाय।

उक्त मंदिर एवं भूमि की व्यवस्था हेतु प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत एक योजना का निरूपण करते हुये निम्नलिखित न्यास समिति गठित की जा रही है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-04/10/2023 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुएअधपा निजामपुर ठाकुरबाड़ी (श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी), ग्राम- अधपा निजामपुर, पोस्ट- शोरमपुर, जिला-पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''अधपा निजामपुर ठाकुरबाड़ी (श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी) न्यास योजना, ग्राम- अधपा निजामपुर, पोस्ट- शोरमपुर, जिला-पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''अधपा निजामपुर ठाकुरबाड़ी (श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी) न्यास समिति, ग्राम- अधपा निजामपुर, पोस्ट- शोरमपुर, जिला-पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।92 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री कृपाल सिंह पिता- स्व॰ हरिहर सिंह, निजमापुर, पो॰- सोरमपुर, जानीपुर, पटना - अध्यक्ष 2. श्री देवेन्द्र प्र॰ सिन्हा पिता-स्व॰ रामचन्द्र सिंह '' -सचिव 3. श्री अजय कुमार पिता-स्व॰ देव शरण सिंह '' -कोषाध्यक्ष 4. श्री केदारनाथ सिंह पिता- स्व॰ जगरनाथ सिंह '' -सदस्य 5. श्री अजय कु॰ सिंह पिता-राज बल्लभ सिंह '' - सदस्य 6. श्री अरविंद कुमार पिता-स्व॰ यदु सिंह '' - सदस्य 7. श्री रामनाथ राम पिता-स्व॰ सखा राम '' - सदस्य 8. श्री दिनेष चौधरी पिता- स्व॰ वासुदेव चौधरी '' - सदस्य 9. श्री षिवनंदन साव पिता-स्व॰ षिव गोविंद साव '' - सदस्य 10. श्री सहजानंद प्रकाष पिता-स्व॰ मुन्दर सिंह, अधपा, पो॰- सोरमपुर, जानीपुर, पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''अधपा निजामपुर ठाकुरबाड़ी (श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी), ग्राम- अधपा निजामपुर, पोस्ट- शोरमपुर, जिला-पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेष से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 4—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

93 (cid:464)बहार गजट, 17 2024

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

—————

नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-3268 दिनांक-10.11.2022 द्वारा श्री मेधावी, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1334/11, नगर परिषद, जमुई के पदस्थापन अवधि में चापाकल गाड़े जाने में अनियमितता बरतने एवं सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना उपलब्ध नहीं कराने संबंधी आरोप गठित कर इस विभाग को उपलब्ध कराया गया। प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2660 दिनांक-13.02.2024 द्वारा श्री मेधावी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री मेधावी के पत्र दिनांक-04. 03.2024 द्वारा अपना स्पष्टीकरण इस विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री मेधावी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया किः-चापाकल गाड़े जाने में अनियमितता हुई है। GI Pipe के स्थान पर प्लास्टिक Pipe का प्रयोग किया गया है। कार्य स्वीकृत प्राक्कलन एवं मापी पुस्त में दर्ज मापी के अनुरूप नहीं हुआ तथा संवेदक को भुगतान कर दिया, जो विाीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

उक्त निविदा से संबंधित कार्यादेश के अवलोकन से ज्ञात होता है कि संबंधित कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार करवाने की जिम्मेदारी कनीय अभियंता/सहायक/ कार्यपालक अभियंता की थी।

यह भी उल्लेखनीय है कि स्वीकृत प्राक्कलन के विशिष्टियों के अनुरूप कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा मापी पुस्तिका के सत्यापनोपरांत, अभियंताओं द्वारा सभी मापदंडों को लिखित रूप से पूर्ण किये जाने एवं विपत्रों को सत्यापित किये जाने के उपरांत ही संवेदक को भुगतान किया गया है।

संबंधित तत्कालीन कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर गलत मापी, मापी-पुस्त में में दर्ज किया गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा भी लापरवाही बरती गयी। बिना गुणवाापूर्वक कार्य पूर्णता के MB एवं प्रस्तुत विपत्र को प्रतिहस्ताक्षर कर दिया गया जिस कारण त्रुटिपूर्ण भुगतान हुआ। श्री मेधावी द्वारा भी र्काव्यनिर्वहन में चूक हुई है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ श्री मेधावी को (1) निन्दन (आरोप वर्ष-2014-15) का दंड विनिश्चित किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) यथासंशोधित नियमावली 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ श्री मेधावी, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-1334/11, नगर परिषद, जमुई सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार तकनीकी सेवा आयोग, बिहार, पटना को का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, उप सचिव।94 (cid:464)बहार गजट, 17 2024 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-23/2023--2983

कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 12 अप्रील 2024

चूँकि बिहार राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना में संसीमित विचाराधीन बंदी महेन्द्र यादव, पे0-अषोक सिद्धि यादव के दिनांक 31.03.2023 को कारा परिसर से पलायन कर जाने की घटना एवं दिनांक 07.05.2023 को जिला प्रषासन द्वारा कारा में की गई औचक तलाषी में 07 मोबाईल फोन सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की बरामदगी तथा दिनांक 13.06.2023 को आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना के उच्च सुरक्षा कक्ष (जिसमें बंदी अभिषेक भोपालका संसीमित था) से बरामद मोबाईल फोन से अधीक्षक एवं उपाधीक्षक को व्हाट्‌सएप कॉल कर वरीय पदाधिकारियों के नाम पर आदेषित किये जाने की घटना में श्री जितेन्द्र कुमार, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना द्वारा गंभीर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता बरती गई है।

श्री कुमार का यह कृत्य बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-140, 492, 796 (i), (ii), 870 (iii) एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1), (2) के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।

2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री जितेन्द्र कुमार, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।

3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17(2) के तहत आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा सहायक कारा महानिरीक्षक (मु0), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

5. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। 6. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव पर माननीय मुख्य (गृह) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव।

------- सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-01-200/2022-1521 मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ------- संकल्प 8 अप्रील 2024

विभागीय संकल्प संख्या-56 दिनांक 04.01.2024 के तहत्‌ श्री काषी कुमार, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, सम्प्रति सेवा निवृत्त के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी श्री मनोज कुमार संजय, सहायक निबंधन महानिरीक्षक (उत्क्रमित उप निबंधन महानिरीक्षक स्तर) के दिनांक 29.02.2024 को सेवा निवृत्त हो जाने कारण उनके स्थान पर डॉ0 संजय कुमार, सहायक निबंधन महानिरीक्षक को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

2. संकल्प की अन्य शर्त्ते यथावत्‌ रहेगी। 3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, निरंजन कुमार, उप सचिव।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 4—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 17 April 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-04-17.16/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-04-17.16.