(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 11 भा(cid:289) 1946 (श0)
(सं0 पटना 871) पटना, सोमवार, 2 िसत(cid:224)बर 2024 ———
W.P.(C) No. 643/2015 (All India Judges Association Vs. Union of India and Ors.) स्वास्थ्य विभागीय संकल्प संख्या-1150(14), दिनांक-10.10.2014 द्वारा बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत और सेवानिवृत पदाधिकारियों को चिकित्सा की स्वीकृति एवं चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति संबंधी प्रक्रिया का सरलीकरण करने के संबंध में विस्तृत दिशा- निर्देश निर्गत किया गया है। र्वामान में द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की अनुशंसा एवं W.P.(C) No. 643/2015 (All India Judges Association Vs. Union of India and Ors.) के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा दिनांक- 04.01.2024 को पारित न्यायादेश के आलोक में बिहार यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों [ ] को प्रदा चिकित्सा सुविधा एवं चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति संबंधी प्रक्रिया का सरलीकरण करने के लिए पूर्व के प्रावधानों में संशोधन किया जाना आवश्यक है। स्वास्थ्य विभागीय संकल्प संख्या-611(14), दिनांक-01.06.2009 के आलोक में ''राज्य के न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों एवं उनके पति/पत्नी को राज्य के विधान मंडल के सदस्यों को प्राप्त चिकित्सा सुविधा के समकक्ष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।''2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों को राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर के सरकारी एवं सी0जी0एच0एस0 मान्यता प्राप्त अस्पतालाें एवं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अस्पतालों/गैर सी0जी0एच0एस0 मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा करायेे जाने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्गत संकल्प सं0-946(14), दिनांक-14.08.2015 की कंडिका-3(क) एवं (ख) में किये गये प्रावधान प्रभावी होगा जो निम्नवत् होगी :- (क) बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों को राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर के सरकारी/सी0जी0एच0एस0 मान्यता प्राप्त एवं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अस्पताल में चिकित्सा करायेे जाने की स्थिति में सम्पूर्ण वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति की जायेगी।
(ख) राज्य से बाहर एवं अंदर गैर सी०जी०एच०एस० मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा कराये जाने की स्थिति में सी०जी०एच०एस० दर पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति अनुमान्य होगी। राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विभागाध्यक्ष (संबंधित रोग के)/संबंधित जिले के सिविल सर्जन (जहाँ मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं है) की अनुशंसा पर राज्य से बाहर बहिर्वासी/ अंतर्वासी चिकित्सा कराने की अनुमति कंडिका-8 में उल्लेखित चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार द्वारा दी जा सकेगी। इसके पश्चात् प्रत्येक फॉलोअप चेकअप के लिए संबंधित चिकित्सा संस्थान के अनुशंसा पर अनुमति कंडिका-8 में उल्लेखित चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार द्वारा दी जाएगी । विा विभाग के अधिसूचना संख्या-5292, दिनांक-23.06.2014, संकल्प संख्या-8044/वि0, दिनांक 11.10.2017 एवं विा विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत अन्य प्रावधानों के आलोक में चिकित्सा के निमिा यात्रा भाा अनुमान्य की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभागीय संकल्प संख्या-611(14), दिनांक-01.06.2009 में प्रावधानित है कि ''राज्य के न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों एवं उनके पति/पत्नी को राज्य के विधान मंडल के सदस्यों को प्राप्त चिकित्सा सुविधा के समकक्ष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी ।''
स्वास्थ्य विभागीय संकल्प संख्या-478(14), दिनांक-01.03.2019 द्वारा बिहार विधान मंडल के माननीय सदस्यों को जीवन रक्षा की दृष्टिकोण से आपात स्थिति में एयर एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान की गई है।
स्वास्थ्य विभागीय संकल्प संख्या-478(14), दिनांक-01.03.2019 में किये गये प्रावधान बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों पर भी प्रभावी होगा परन्तु एयर एम्बुलेंस पर हुए व्यय राशि की प्रतिर्पूाि कंडिका-8 में उल्लेखित सक्षम प्राधिकार द्वारा किया जायेगा। राज्य के बाहर बिना पूर्वानुमति के बाध्यकारी परिस्थिति में कराये गये ईलाज की घटनोत्तर स्वी—ति कंडिका-8 में उल्लेखित चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार द्वारा प्रदान किया जायेगा। (क) बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों के चिकित्सा पर हुए व्यय की प्रतिपूर्ति निम्नवत् की जायेगी :-
| [ 3 ( ) ] | ||
| (i) रु0 1,00,000 (एक लाख रूपये) तक- | संबंधित सिविल सर्जन । | 1). क). संबंधित जिले के न्यायमंडल में पदस्थापित बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश। ख). बिहार न्यायिक अकादमी मे ं पदस्थापित न्यायिक सेवा के सेवारत्/ सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके |
| [ 3 ( ) ] | ||
| परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनरों के लिए अकादमी के निदेशक। ं ग). बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार में पदस्थापित न्यायिक सेवा क े सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनर के लिए सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार हो गे। ं घ). बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में पदस्थापित न्यायिक सेवा क े सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनर के लिए विधि सचिव होंगे । च).पटना उच्च न्यायालय, पटना मे ं पदस्थापित बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक प शनर ं े के लिए महानिबंधक, पटना उच्च न्यायालय, पटना/उनके द्वारा नामित सक्षम प्राधिकार। 2). क). चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि हेतु बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/ सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनर को घोषणा पत्र देना होगा कि ं वे किस सक्षम प्राधिकार के समक्ष दावा विपत्र समर्पित करेंगे। ख). चिकित्सा प्रतिर्पूाि हेतु प्रथम विपत्र की स्वीकृति के बाद न्यायमंडल में बदलाव (सिर्फ बिहार के अंदर अपने निवास स्थान अथवा सेवानिवृाि स्थल) हेतु महानिबंधक, पटना उच्च न्यायालय से अनुमति प्राप्त करना होगा। | ||
| (ii) रु0 1,00,001 (एक लाख एक रूपये) से रु0 10,00,000 लाख (दस लाख रुपये) तक - | संबंधित मेडिकल कॉलेज/ अस्पतालों के अधीक्षक की अध्यक्षता में गठित त्रि-सदस्यीय समिति। | 1). क). संबंधित जिले के न्यायमंडल में पदस्थापित बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा |
| [ 3 ( ) ] | ||
| (i) पटना प्रमंडल का सिर्फ पटना जिला। (ii) - पटना प्रमंडल के भोजपुर, बक्सर, रोहतास एवं कैमूर जिला। (iii) - पटना प्रमंडल अंतर्गत नालन्दा जिला एवं मगध प्रमंडल अन्तर्गत नवादा जिला। (iv) - मगध प्रमंडल अन्तर्गत गया, जहानाबाद, अरवल एवं औरंगाबाद जिला। (v) - भागलपुर एवं मुंगेर प्रमंडल के सभी जिले। vi) - दरभंगा प्रमंडल के सभी जिले। vii तिरहुत प्रमंडल के वैशाली, | पारिवारिक पेंशनर के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश। ख). बिहार न्यायिक अकादमी मे ं पदस्थापित न्यायिक सेवा के सेवारत्/ सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनर के लिए अकादमी के निदेशक। ं ग). बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार में पदस्थापित न्यायिक सेवा क े सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनर के लिए सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार हो गे। ं घ). बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में पदस्थापित न्यायिक सेवा क े सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनर के लिए विधि सचिव होंगे । च). पटना उच्च न्यायालय, पटना में पदस्थापित बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार क े सदस्यों तथा पारिवारिकपेंशनर के लिए महानिबंधक, पटना उच्च न्यायालय, पटना/उनके द्वारा नामित सक्षम प्राधिकार। 2.क) चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि हेतु बिहार न्यायिक सेवा के सेवानिवृा पदाधिकारियों/ पारिवारिक पेंशनरों को घोषणा पत्र देना होगा कि वे किस सक्षम प्राधिकार के समक्ष दावा विपत्र समर्पित करेंगे। ख). चिकित्सा प्रतिर्पूाि हेतु प्रथम विपत्र की स्वीकृति के बाद न्यायमंडल में बदलाव (सिर्फ बिहार के अंदर अपने निवास स्थान अथवा सेवानिवृाि स्थल) हेतु महानिबंधक, पटना उच्च न्यायालय से अनुमति प्राप्त करना होगा। |
| [ 3 ( ) ] | ||
| मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी एवं शिवहर जिला तथा सारण प्रमंडल। viii प णियाँ ू प्रमंडल के सभी जिले। ix कोशी प्रमंडल के सभी जिले। (x ) तिरहुत प्रमंडल के पूर्वी चम्पारण एवं पश्चिमी चम्पारण जिला। | ||
| (iii) रु0 10,00,000 लाख (दस लाख रुपये) से ऊपर | संबंधित मेडिकल कॉलेज/ अस्पतालों के अधीक्षक की अध्यक्षता में गठित त्रि-सदस्यीय समिति। | मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय द्वारा नामित सक्षम प्राधिकार। |
(ख) न्यायालयों के सेवारत/सेवानिवृा जिला एवं सत्र न्यायाधीश/प्रधान न्यायाधीश, निदेशक, बिहार न्यायिक अकादमी, सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार एवं उनके पारिवारिक पेंशनरों के 10 लाख रूपये तक की चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकार महानिबंधक, उच्च न्यायालय, पटना होंगे। 10 लाख से ऊपर की चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति उपरोक्त कंडिका-8 'क' (iii) के अनुरूप निर्धारित सक्षम प्राधिकार द्वारा की जायेगी।
(ग) चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की राशि, विपत्रों की अनुमान्यता एवं शुद्धता की जाँच हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत प्रावधान बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों पर भी लागू होगा।
बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों को बहिर्वासी चिकित्सा एवं उसमें इंगित किये गये जाँच पर हुए व्यय की प्रतिपूर्ति सरकारी चिकित्सक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित करने की स्थिति में सक्षम प्राधिकार द्वारा सभी रोगों में किया जा सकेगा।
दावों की प्रतिपूर्ति की स्वी—ति के लिए निम्नांकित
प्रक्रिया अपनाई जायेगी :-
(i) दावा प्रतिर्पूाि के साथ प्रतिर्पूाि प्रमाण पत्र समर्पित किया जाना आवश्यक है। (ii) क्रय किये गये औषधियों से संबंधित मूल विपत्र (Bill) संबंधित संस्थान या सरकारी/ सी0जी0एच0एस0 मान्यताप्राप्त संस्थान के चिकित्सक के द्वारा मुहर के साथ प्रतिहस्ताक्षरित रहने चाहिए।6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 (iii) प्रतिपूर्ति प्रमाण पत्र अस्पताल/संस्थान के अधीक्षक/निदेशक या Chairman/Vice Chairman/ Administrator/Registrar/Consultant Medical Officer द्वारा मुहर के साथ प्रतिहस्ताक्षरित रहने पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की स्वीकृति नियमानुसार प्रदान की जायेगी।
(iv) क्रय की गई औषधियों से संबंधित कैशमेमो/दावा से संबंधित अस्पताल का चिकित्सा पूर्जा की छायाप्राियाँं एवं अस्पताल में अन्तर्वासी रोगी का डिस्चार्ज समरी मूल रूप में प्रस्तुत की जायेगी। (i) बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों को चिकित्सा अग्रिम की अधिसीमा एवं स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकार निम्नरुपेण होंगे :-
| (a) | अधिकतम रू0 8 लाख (आठ लाख रुपया) तक | 1 ).संबंधित जिले के न्यायमंडल में बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनरों के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश। ं 2). बिहार न्यायिक अकादमी मे बिहार न्यायिक सेवा के ं सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनरों के लिए अकादमी के निदेशक। ं 3). बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार में बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों के लिए सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार हो गे। ं 4). बिहार सरकार के विभिन्न विभागाें मे बिहार न्यायिक सेवा ं के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों के लिए विधि सचिव होंगे। 5). पटना उच्च न्यायालय, पटना में बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पे शनरों के लिए महानिबंधक, पटना उच्च न्यायालय, पटना या ं उनके द्वारा नामित सक्षम प्राधिकार। 6) न्यायालयों के सेवारत/सेवानिवृा जिला एवं सत्र न्यायाधीश/प्रधान न्यायाधीश, निदेशक, बिहार न्यायिक अकादमी, सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार एवं उनके पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों के चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकार महानिबंधक, उच्च न्यायालय, पटना होंगे। |
| (b) रू0 8 लाख (आठ लाख रुपया) से ऊपर | मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय द्वारा नामित सक्षम प्राधिकार। |
80 प्रतिशत चिकित्सा अग्रिम स्वीकृत किया जाएगा। स्वीकृत चिकित्सा अग्रिम राशि का सी0जी0एच0एस0 दर पर निर्धारित समय सीमा (अधिकतम 6 माह) के भीतर समायोजन सुनिश्चित की जायेगी जिसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था कंडिका-8 में उल्लेखित चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार द्वारा की जायेगी।
(iii). अग्रिम राशि का सामंजन निकासी के अधिकतम छः माह के अन्दर किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। पूर्व के अग्रिम के सामंजन नही होने पर द्वितीय अग्रिम स्वी—त नहीं किया जायेगा। निर्धारित अवधि में अग्रिम सामंजित नहीं होने पर संबंधित न्यायिक सेवा के पदाधिकारी को असामंजित अग्रिम की राशि को एक मुश्त जमा करना होगा। अग्रिम की निकासी के एक माह के भीतर चिकित्सा प्रारम्भ नहीं होने पर अथवा चिकित्सा हेतु प्रस्थान नहीं करने पर अग्रिम की सम्पूर्ण राशि एक मुश्त राजकोष में जमा कराने का दायित्व संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी एवं कंडिका-8 में उल्लेखित चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार का होगा।7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों के पति/पत्नी के अन्य सेवा में सेवारत रहने एवं उक्त सेवा में चिकित्सा सुविधा अनुमान्य रहने की दशा में, दोनों कार्यरत पदाधिकारी किसी एक संस्थान/विभाग से चिकित्सा व्यय की प्रतिर्पूाि हेतु दावा कर सकेंगे। किंतु इस बात का घोषणा-पत्र उन्हें देना पड़ेगा कि उन्होंने दूसरी जगह से प्रतिर्पूाि हेतु दावा नहीं किया है। न्यायिक सेवा के वैसे सेवारत/ सेवानिवृा पदाधिकारी/ न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी एवं पारिवारिक पेंशनर, जो बिहार राज्य से बाहर पदस्थापित/आवासित हैं या जिनके परिवार के सदस्य राज्य के बाहर निवास करते हैं, उन्हें तथा उनके परिवार के सदस्यों को राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विभागाध्यक्ष/सिविल सर्जन से रेफर कराने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे न्यायिक पदाधिकारी पदस्थापन/निवास स्थान के अस्पताल/ सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा करा लेंगे तथा इसकी सूचना अपने चिकित्सा व्यय प्रतिर्पूाि की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार को तत्काल किसी माध्यम से देंगे एवं चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति का दावा बिहार राज्य के सक्षम प्राधिकार के समक्ष करेंगे। (क) बिहार राज्य के न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों हेतु हेल्थ कार्ड पटना उच्च न्यायालय, पटना द्वारा निर्गत किया जायेगा।
(ख) स्वास्थ्य विभाग के द्वारा बिहार राज्य के सभी सरकारी एवं उपयुक्त/योग्य गैर सरकारी अस्पतालों/जाँच घरों को सूचीबद्ध (Empanelled) किया जायेगा कि उक्त हेल्थ कार्ड (चिकित्सीय ईलाज हेतु परिचय पत्र) को प्रस्तुत करने पर सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों का ईलाज किया जायेगा। उनके ईलाज एवं स्वास्थ्य जाँच के दौरान हुए व्यय का भुगतान नहीं लिया जायेगा। चिकित्सोपरान्त, चिकित्सा में खर्च हुए व्यय से संबंधित विपत्र को संबंधित अस्पताल, जाँच घर एवं चिकित्सक द्वारा संबंधित न्यायिक पदाधिकारी/सेवानिवृा पदाधिकारी/पारिवारिक पेंशनर से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर एवं Undertaking के साथ कंडिका-8 में वर्णित सक्षम प्राधिकार के समक्ष भुगतान हेतु प्रस्तुत किया जायेगा (Undertaking प्रारुप संलग्न)। उक्त विपत्र का भुगतान सक्षम प्राधिकार द्वारा संकल्प में वर्णित प्रावधान के अनुसार अधिकतम तीन माह के अंदर संबंधित अस्पताल, जाँच घर एवं चिकित्सक को किया जाएगा। अस्पतालों को सूचीबद्ध करने का मानक एवं प्रक्रिया का निर्धारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जायेगा। इस प्रावधान के अनुपालन में कठिनाई आने पर माननीय उच्च न्यायालय, पटना के परामर्श से स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किया जायेगा।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत संकल्प में वर्णित प्रावधानों के अनुसार शुद्धता एवं अनुमान्यता के जाँचोपरान्त यदि कोई अन्तर राशि देय होगी तो उसका भुगतान संबंधित न्यायिक पदाधिकारी/सेवानिवृत पदाधिकारियों/पारिवारिक पेंशनरों द्वारा संबंधित अस्पताल/जाँच घर/चिकित्सक को की जायेगी। अन्तर राशि के भुगतान को सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की स्वीकृति हेतु नामित सक्षम प्राधिकार द्वारा समुचित निर्णय लिया जा सकेगा।
(ग) स्वास्थ्य विभाग द्वारा निदेश जारी किये जाने के उपरान्त जिला एवं सत्र न्यायधीश अपने जिलों के अधीन सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों/जाँच घरों से न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों की चिकित्सा सुविधा के संबंध में एकरारनामा करेंगे, जो बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों पर समान रूप से प्रभावी होगा। बिहार न्यायिक सेवा के सेवारत्/सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी के पति/पत्नी, उनके परिवार के सदस्यों तथा पारिवारिक पेंशनरों को द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में निर्गत संकल्प के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाईयों का निराकरण स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाएगा। 16. इस संबंध में पूर्व निर्गत आदेश/संकल्प/परिपत्र इस हद तक संशोधित समझे जायेंगे। 17. यह संकल्प निर्गत होने की तिथि से प्रभावी माना जायेगा।8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024
Undertaking
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 871-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in