(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 11 भा(cid:289) 1946 (श0)
(सं0 पटना 875) पटना, सोमवार, 2 िसत(cid:224)बर 2024 ———
श्री देवेन्द्र कुमार दर्द (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1103/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर के विरूद्ध पुलिस अधीक्षक, निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना के ज्ञापांक 3346 दिनांक 22.11.2017 द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 082/2017 दिनांक 31.10.2017 की प्राथमिकी की छायाप्रति संलग्न करते हुए सूचित किया गया, जिसमें श्री दर्द के विरूद्ध निम्नलिखित आरोप है :-
1. पुलिस अधीक्षक, निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना के ज्ञापांक 3346 दिनांक 22.11.2017 द्वारा श्री देवेन्द्र कुमार दर्द (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1103/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर के विरूद्ध 77,85,546/-(सत्हार लाख पचासी हजार पाँच सौ छियालिस) रूपये के आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप में निगरानी थाना कांड संख्या 082/17 दिनांक 31.10.2017 धारा-13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(ई) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज है।
2. श्री दर्द के तत्कालीन पदस्थापन अवधि तक उनके आय एवं व्यय की गणना के अनुसार उनकी कुल सम्पाि 1,91,07,546/-रू0 आंकी गयी है। श्री दर्द द्वारा अर्जित की गई कुल राशि (1,91,07,546/-रू0) में से उनकी अनुमानित बचत 1,13,22,000/-रू0 है। इस प्रकार श्री दर्द की कुल सम्पाि में उनके ज्ञात वैध स्रोतों से कुल 77,85,546/-(सत्हार लाख पचासी हजार पाँच सौ छियालिस) रूपये की अधिक सम्पाि पाई गई है।
3. श्री दर्द द्वारा समर्पित वर्ष 2016-17 की सम्पाि विवरणी में अपने एवं अपनी पत्नी के नाम से खरीदी गई अचल सम्पाि का पूर्ण विवरण नहीं दिया गया है, जो नजायज एवं अवैध रूप से अर्जित सम्पाि को छुपाने की मंशा से प्रेरित है।
उक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2601 दिनांक 25.02.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। मुख्य जाँच आयुक्त कार्यालय के पत्रांक 197 दिनांक 28.03.2022 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री दर्द के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 प्रतिवेदित आरोप के आलोक में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा असहमति व्यक्त की गयी :-
''बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-19(1)(क) एवं उक्त नियमावली के तहत सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 946 दिनांक 24.01.2011 द्वारा राज्य सरकार के सभी पदाधिकारी/कर्मियों को विहित प्रपत्र में चल एवं अचल सम्पाि तथा दायित्वों की विवरणी प्रत्येक वर्ष के फरवरी माह तक सार्वजनिक किये जाने का आदेश दिया गया है। उपस्थापित मामले में संचालन पदाधिकारी महोदय द्वारा आरोपी के कथन को उल्लेखित करते हुए आरोप को प्रमाणित प्रतीत नहीं होता बताया गया है। आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि वे अपना या अपनी पत्नी की सम्पत्तियों का पूर्ण विवरण 2016-17 के लिये समर्पित सम्पत्ति विवरणी में किया है और उनकी पत्नी जो सम्पाि निजी स्रोत एवं विरासत से अर्जित की है, उसका ब्योरा उसमें नहीं दिया गया है।''
इस प्रकार श्री दर्द द्वारा वर्ष 2016-17 में अपनी पत्नी के नाम पर आय से कम सम्पाि का उल्लेख किया गया है एवं शेष सम्पाि के संबंध में उनकी निजी अर्जित सम्पाि बताया गया है। अगर श्री दर्द की पत्नी के सम्पाि का निजी स्रोत है तो फिर उनके सम्पाि ब्योरा में रू0 3,92,000/- की जमा राशि एवं अन्य सम्पाि दर्शाया जाना उनके गलत मंशा को दर्शाता है। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया है। उनके द्वारा केवल श्री दर्द के तर्क के आधार पर आरोप को ै, बताया जाना तर्क संगत प्रतीत नहीं होता है।'' असहमति के बिन्दु पर श्री दर्द से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री दर्द का लिखित अभिकथन दिनांक 22.06.2022 द्वारा समर्पित किया गया। प्रतिवेदित आरोप एवं जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु पर श्री दर्द से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि :-
1. श्री दर्द के विरूद्ध मुख्यतः 77,85,546/-(सत्हार लाख पचासी हजार पाँच सौ छियालिस) रूपये के आय से अधिक सम्पत्ति का आरोप प्रतिवेदित है। विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में श्री दर्द का कहना है कि उनकी पत्नी प्रारंभ से ही व्यवसायिक क्रियाकलाप एवं जमीन की खरीद-बिक्री से जुुड़ी रह कर स्वतंत्र रूप से आय का स्रोत विकसित की है। आय से अधिक पाये गये सम्पाि उनकी पत्नी द्वारा अर्जित की गयी है। उल्लेखनीय है कि श्री दर्द के द्वारा वर्ष 2016-17 में समर्पित सम्पाि ब्योरा में अपनी पत्नी के नाम पर उक्त पूरी राशि को नहीं दर्शाया गया है। शेष राशि के संबंध में श्री दर्द का कहना है कि उनकी पत्नी की निजी अर्जित राशि है। श्री दर्द के इस कथन का कोई आधार स्पष्ट नहीं है एवं इस संबंध में उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष आधारित कारणों को स्पष्ट नहीं किया गया है।
2. असहमति के बिन्दु पर अपने लिखित अभिकथन में वर्ष 2016-17 की सम्पाि विवरणी के संबंध में श्री दर्द का कहना है कि वर्ष 2016-17 में पत्नी के नाम से मात्र दो जमीन शेष बचे हुए थे, जिसका बिक्री से संबंधित निबंधन का निष्पादन नहीं की गयी थी, यथा मौजा रामपुर में 59 डी0 जमीन एवं गया में 16 कट्ठा जमीन जिसे वर्ष 2016-17 की सम्पति विवरणी में दर्शाया गया है। शेष अन्य जमीन पत्नी के द्वारा अपने व्यवसायिक क्रियाकलाप के क्रम में पूर्व में ही बिक्री की जा चुकी है, ऐसी स्थिति में विक्रय की जा चुकी जमीन को सम्पति विवरणी में दर्शाये जाने का कोई औचित्य नहीं है।
3. यहाँ उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी के समक्ष जाँच के क्रम में श्री दर्द के द्वारा अब प्रस्तुत किये जा रहे इन तथ्यों को नहीं रखा गया है। उनके द्वारा जाँच के क्रम में बिहार सरकारी आचार नियमावली, 1976 के नियम-19 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उनकी पत्नी की निजी स्रोत एवं विरासत से अर्जित सम्पाि का उल्लेख नहीं किये जाने का नियम का उल्लेख किया गया है। इस प्रकार श्री दर्द के द्वारा जाँच के क्रम में एवं लिखित अभिकथन में अलग-अलग तथ्यों को उपस्थापित किया गया है।
स्पष्टतया श्री दर्द के द्वारा आय से अधिक सम्पाि के संबंध में विरोधाभाषी तथ्यों का उल्लेख किया जाना उनके गलत मंशा को दर्शाता है। श्री दर्द द्वारा बिहार आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के संगत प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है, जो एक सरकारी सेवक के र्काव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारित का द्योतक है। श्री दर्द के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18714 दिनांक 18.10.2022 द्वारा की शास्ति अधिरोपित की गयी। उक्त दंडादेश के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री दर्द के समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 469 दिनांक 06.01.2023 द्वारा निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित किया गया :-
i3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 ii श्री दर्द द्वारा उक्त दंडादेश को निरस्त करने हेतु माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 9282/2023 दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 22.01.2024 को आदेश पारित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत् है :-
"11. Now, coming to the order of punishment dated 18.10.2022, this Court finds that admittedly no detail/description of the immovable properties alleged to have been acquired by the petitioner and his wife save and accept the aforesaid three properties declared by the petitioner in the asset declaration form for the year 2016-17, has been mentioned either in the 2nd show cause notice dated 10.06.2022 or in the order of punishment dated 18.10.2022 and merely a bald statement, not supported by any evidence, whatsoever, has been made in the order of punishment dated 18.10.2022, to the effect that in the asset declaration form of the year 2016-17, the petitioner has not disclosed the income derived by his wife from the properties sold in the past, which should have also been mentioned in the asset and liability declaration form, a statement/ allegation which does not form part of the charges levelled against the petitioner vide chargesheet dated 03.04.2018, apart from the fact that even Rule-19 of the Rules, 1976 does not provide for furnishing such details. In such view of the matter, this Court holds that the order of punishment dated 18.10.2022, being based on no evidence, is perverse, has taken into account extraneous materials, has levelled new allegations, again based on no evidence, which were never part of the chargesheet dated 03.04.2018 and in fact the same would further depict that the charges levelled vide the chargesheet dated 03.04.2018 have actually been abandoned, hence the order of punishment dated 18.10.2022 is not sustainable in the eyes of law, thus is accordingly quashed. Consequently, the revisional order dated 06.01.2023, passed by the Under Secretary, to the Government, General Administration Department, Government of Bihar, Patna has got no legs to stand, hence is also set aside. 12. The writ petition stands allowed."
श्री दर्द के विरूद्ध निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज आय से अधिक सम्पाि से संबंधित प्राथमिकी के आलोक में निगरानी न्यायालय का आदेश अनुशासनिक कार्रवाई के तहत् संचालित विभागीय कार्यवाही, अधिरोपित शास्ति एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि :-
1. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा प्राथमिकी अभियुक्त (1) श्री देवेन्द्र कुमार दर्द, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर एवं उनकी पत्नी (2) श्रीमती छाया दर्द के विरूद्ध धारा-13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(ई) भ्र0नि0अधि0, 1988 के अन्तर्गत ''साक्ष्य की कमी'' संबंधी अंतिम प्रतिवेदन संख्या 04/2021 दिनांक 04.02.2021 के आलोक में माननीय विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा निम्नलिखित आदेश पारित किया गया :-
"In view of the above facts and circumstances the final form submitted by the I.O. is accepted and this case is accordingly disposed off. Let the record of this case be deposited in this record room as per rule."
2. श्री दर्द के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के प्रतिवेदन के आधार पर प्रतिवेदित आरोपों को अप्रमाणित पाया गया।
3. संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री दर्द के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 469 दिनांक 06.01.2023 द्वारा शास्ति अधिरोपित की गयी।
4. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 22.01.2024 को पारित आदेश में अधिरोपित शास्ति को रद्द कर दिया गया।
वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री दर्द के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 469 दिनांक 06.01.2023 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंडादेश को समाप्त किये जाने का निर्णय लिया गया।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 2 िसत(cid:224)बर 2024 अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री देवेन्द्र कुमार दर्द (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1103/11, तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, भागलपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 469 दिनांक 06.01.2023 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंडादेश को किया जाता है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,