असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
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(सं0 पटना 898) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 12 िसत(cid:224)बर 2024
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श्री तारानंद महतो वियोगी, बि0प्र0से0, को0क्र0-166/2019 तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, कैमूर के विरूद्ध राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित शेल्टर होम में अनियमितता से संबंधित सी0बी0आई0 से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3634 दिनांक 23.09.2020 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया। आरोप पत्र में श्री वियोगी के विरूद्ध प्रतिवेदित किया गया है कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, कैमूर के रूप में अपने पदस्थापन अवधि दिनांक 30.07.2011 से 13.10.2012 के बीच इनके द्वारा अल्पावास गृह, कैमूर का एक बार भी समीक्षा, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण नहीं किया गया, जिससे अल्पावास गृह में कई प्रकार की अनियमितताएं प्रकाश में नहीं आ सकीं।
शेल्टर होम में अनियमितता से संबंधित सी0बी0आई0 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु राज्य स्तर गठित त्रिसदस्यी समिति की दिनांक 01.04.2022 को सम्पन्न बैठक में श्री वियोगी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा की गयी।
तदुपरांत त्रिसदस्यीय समिति से प्राप्त अनुशंसा एवं समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रतिवेदित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 6215 दिनांक 25.04.2022 द्वारा श्री वियोगी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री वियोगी द्वारा अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-752 दिनांक-26.08.2022) विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री वियोगी द्वारा मुख्य रूप से कहा गया कि वर्णित घटना की तिथि/अवधि वर्ष 2013 से अक्टूबर, 2017 है, जबकि उक्त जिले में उनका पदस्थापन/प्रभार की अवधि दिनांक 30.07.2011 से 30.10.2012 है, जो आरोपित घटना के समयकाल से पूर्णतः बाहर है। साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया कि संवासिनों के साथ गलत हरकत एवं अन्य अनियमितताएं वर्ष 2013 से 2017 की बीच हुई तथा इस कांड के मुख्य अभियुक्त पिन्टू पाल की नियुक्ति उनके कार्यकाल के समय तक नहीं हुई थी। 2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 12 िसत(cid:224)बर 2024 श्री वियोगी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, समर्पित स्पष्टीकरण एवं समाज कल्याण विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8152 दिनांक 28.04.2023 द्वारा निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण में बरती गयी लापरवाही के लिए श्री तारानंद महतो वियोगी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित) के नियम 14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्न दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गयाः-
(1) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (2) दो वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध का दंड।
उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री वियोगी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या-8970/2023 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 25.07.2024 को न्यायादेश पारित करते हुए माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा श्री वियोगी के विरूद्ध संसूचित दंडादेश को निरस्त कर दिया गया। माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत हैः-
.....26. On careful perusal of the entire material on record, this Court finds that no regular disciplinary proceedings was initiated against the petitioner. As such the principles of natural justice was blatantly violated by the Department.
27. The petitioner was not given an opportunity of hearing in any stage of disciplinary proceeding. On the other hand, he was put under disciplinary proceeding, though, there is no allegation of irregularity in the Shelter Home in the year 2011- 2012.
28. On perusal of the documents annexed with the instant writ petition, I find that first complaint with regard to sexual abuse was made against one Pintu Pal, a Security Guard of the Shelter Home at Bhabhua, committed in the year 2015.
Admittedly, the petitioner was not posted as District Programme Officer, Kaimur on the date of lodging complaint against the said Pintu Pal.
29. For the reasons stated above, I have no other alternative but to hold that the order of imposition of punishment cannot be sustained. Accordingly, the order of punishment dated 28th April, 2023 against the petitioner is quashed and set aside.
30. The instant writ petition is accordingly allowed on contest.
31. There shall be however, no order as to costs.
माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया।
माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित उक्त आदेश एवं विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री वियोगी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8152 दिनांक 28.04.2023 द्वारा संसूचित दंडादेश यथा ''निन्दन (आरोप वर्ष 2011-12) एवं दो वेतनवृद्धि को असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध'' को वापस लिया जाता है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,