िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40
(cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 10 आश्विन 1946 (श0) सं(cid:201)या 40 पटना, बुधवार, ———————— 2 अक्तूबर 2024 (ई0) भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 02-14 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
---
भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 15-15 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची पृष्ठ
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन
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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 16-103 पूरक
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पूरक-क 104-1052 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024
भाग-1
िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत
सूचनाएं। —————
(cid:274)ामीण (cid:466)वकास (cid:466)वभाग
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अधिसूचनाएं
12 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-504/25/2022-SECTION 14-RDD-RDD (COM-210098)-3171818--(cid:302)ी (cid:466)ब(cid:219)दु कु मार, त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), संदेश (भोजपुर) स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), महराजगंज (िसवान) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) अपने पद(cid:232)थापन काल 2019-20 म(cid:581) शौचालय िनमा(cid:91)ण म(cid:581) (cid:229)यापक (cid:510)प से बरती गयी अिनयिमतता, फज(cid:568) लाभुक(cid:585) के नाम पर सरकार(cid:547) रािश क(cid:551) िनकासी एवं सरकार(cid:547) रािश के दु(cid:510)पयोग के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर के प(cid:287)ांक-73 (cid:465)दनांक-14.02.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ । (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी कु मार (cid:430)ारा काया(cid:91)लय (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), घोड़ासाहन, पूव(cid:568) च(cid:224)पारण के प(cid:287)ांक-276 (cid:465)दनांक- 14.05.2023 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:465)कया गया ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप एवं (cid:302)ी कु मार (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत आरोप गंभीर (cid:292)कृ ित के होने के कारण वृहत जांच हेतु संक(cid:227)प सं(cid:201)या- 1950305 (cid:465)दनांक-31.07.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी (cid:466)ब(cid:219)दु कु मार के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गयी । उप (cid:466)वकास आयु(cid:200)त-सह-संचालन पदािधकार(cid:547), पूव(cid:568) च(cid:224)पारण (मोितहार(cid:547)) के प(cid:287)ांक-48 (cid:465)दनांक-20.02.2024 (cid:430)ारा जांच (cid:292)ितवेदन (cid:292)ा(cid:220)त है । (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन पर (cid:302)ी कु मार से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-2662091 (cid:465)दनांक-18.03.2024 (cid:430)ारा िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी, उ(cid:200)त पर (cid:302)ी कु मार का िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन (cid:292)ा(cid:220)त है ।
(cid:302)ी कु मार के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन एवं (cid:302)ी कु मार से (cid:292)ा(cid:220)त िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क संचालन पदािधकार(cid:547) के (cid:430)ारा सभी आरोप(cid:585) को (cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है ।
अतएव समयक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी (cid:466)ब(cid:219)दु कु मार, त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), संदेश (भोजपुर) स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), महराजगंज (िसवान) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) असंचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से एक वेतन वृ(cid:466)(cid:424) पर रोक का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी (cid:466)ब(cid:219)दु कु मार क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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12 सितम्बर 2024
3 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024पटना के प(cid:287)ांक-766 (cid:465)दनांक-19.06.2019 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ। उ(cid:200)त आरोप प(cid:287) म(cid:581) व(cid:468)ण(cid:91)त आरोप(cid:585) पर (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) के संचालनोपरांत (cid:466)वभागीय अिधसूचना (cid:163)ापांक-2557563 (cid:465)दनांक-12.02.2024 (cid:430)ारा 'संचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से एक वेतन वृ(cid:466)(cid:424) अव(cid:510)(cid:424) करने' का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया गया है।
उ(cid:200)त अिधरो(cid:466)पत दंड के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), जाले (दरभंगा) के प(cid:287)ांक-515 (cid:465)दनांक- 09.03.2024 के (cid:430)ारा पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन (cid:292)(cid:232)तुत (cid:465)कया गया । (cid:466)वभाग (cid:430)ारा पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क (cid:302)ी द(cid:547)नबंधु (cid:465)दवाकर के पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन म(cid:581) कोई ऐसा मह(cid:215)वपूण(cid:91) सा(cid:234)य या त(cid:216)य नह(cid:547)ं है, (cid:468)जससे (cid:465)क पूव(cid:91) म(cid:581) पा(cid:464)रत आदेश को संशोिधत (cid:465)कया जाय ।
अत: समी(cid:162)ोपरांत (cid:302)ी द(cid:547)नबंधु (cid:465)दवाकर के पुन(cid:466)व(cid:91)लोकन अ(cid:223)यावेदन को अ(cid:232)वीकृ त (cid:465)कया जाता है । उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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18 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-503/95/2022-SECTION 14-RDD-RDD (COM NO-184328)-3185973--(cid:302)ी शिश (cid:292)काश, (cid:274)ा०(cid:466)व०से० (अनु(cid:272)मांक-228773), त(cid:215)कालीन सहायक प(cid:464)रयोजना पदािधकार(cid:547), (cid:468)जला (cid:274)ामीण (cid:466)वकास अिभकरण, मधेपुरा स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटरा (मुज(cid:221)फरपुर) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) जैसे मह(cid:215)वपूण(cid:91) काय(cid:607) के (cid:292)ित उदासीनता, (cid:232)वे(cid:205)छाचा(cid:464)रता, लापरवाह(cid:547), अनुशासनह(cid:547)नता एवं काया(cid:91)लय से अनािधकृ त (cid:510)प से अनुप(cid:468)(cid:232)थत रहने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), मधेपुरा के प(cid:287)ांक-627 (cid:465)दनांक-08.05.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), मधेपुरा (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी (cid:292)काश से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-1973411 (cid:465)दनांक- 08.08.2023 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । (cid:292)खंड काया(cid:91)लय, कटरा (मुज(cid:221)फरपुर) के प(cid:287)ांक-115 (cid:465)दनांक- 18.09.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी (cid:292)काश का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराया गया, (cid:468)जसम(cid:581) (cid:302)ी (cid:292)काश के (cid:430)ारा (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पटना (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप से इंकार (cid:465)कया गया है ।
(cid:302)ी (cid:292)काश के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), मधेपुरा (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप एवं (cid:302)ी (cid:292)काश (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण के समी(cid:162)ोपरांत (cid:466)वषय क(cid:551) गंभीरता को देखते हुए संक(cid:227)प सं(cid:201)या-2345502 (cid:465)दनांक-05.12.2023 (cid:430)ारा (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गयी । (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचालनोपरांत संचालन पदािधकार(cid:547) के (cid:465)दनांक- 26.06.2024 (cid:430)ारा जांच (cid:292)ितवेदन उपल(cid:222)ध कराया गया, (cid:468)जसम(cid:581) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), मधेपुरा (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप(cid:585) को अ(cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है ।
संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क आरोपी पदािधकार(cid:547) (cid:302)ी शिश (cid:292)काश, त(cid:215)कालीन सहायक प(cid:464)रयोजना पदािधकार(cid:547), (cid:468)जला (cid:274)ामीण (cid:466)वकास अिभकरण, मधेपुरा स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटरा (मुज(cid:221)फरपुर) (cid:466)बना अवकाश (cid:232)वीकृ ित कराये ह(cid:547) अनिधकृ त (cid:510)प से लगभग 04 (चार) माह से अिधक समय तक काया(cid:91)लय से अनुप(cid:468)(cid:232)थत रहे (cid:468)जससे (cid:274)ामीण (cid:466)वकास (cid:466)वभाग क(cid:551) योजनाओं के अनु(cid:302)वण म(cid:581) बाधा आई । (cid:302)ी (cid:292)काश का कृ (cid:215)य काय(cid:607) के (cid:292)ित उदासीनता, (cid:232)वे(cid:205)छाचा(cid:464)रता, लापरवाह(cid:547) एवं उ(cid:205)चािधकार(cid:547) के आदेश क(cid:551) अवहेलना का (cid:429)ोतक है । पूव(cid:91) म(cid:581) भी इनके उपर कई बार द(cid:214)ड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया गया, (cid:465)क(cid:219)तु इनके काय(cid:91)कलाप म(cid:581) कोई सुधार प(cid:464)रल(cid:468)(cid:162)त नह(cid:547)ं होता है ।4 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी शिश (cid:292)काश, (cid:274)ा०(cid:466)व०से० (अनु(cid:272)मांक-228773), त(cid:215)कालीन सहायक प(cid:464)रयोजना पदािधकार(cid:547), (cid:468)जला (cid:274)ामीण (cid:466)वकास अिभकरण, मधेपुरा स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटरा (मुज(cid:221)फरपुर) को'िन(cid:219)दन'(आरोप वष(cid:91)-2022) क(cid:551) शा(cid:468)(cid:232)त अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी शिश (cid:292)काश क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)पु(cid:232)त म(cid:581) इसक(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय।
उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से, र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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18 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-14 (पटना) ब(cid:200)सर-03/2018-3186059--सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना, ((cid:274)ा०(cid:466)व०से०, अनु(cid:272)मांक-289122), त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), िसमर(cid:547) (ब(cid:200)सर) स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटैया (गोपालगंज) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)बहार लोक िशकायत िनवारण वाद सं(cid:201)या-145/2018 (cid:302)ी मनीराम िसंह, संदभ(cid:91) सं(cid:201)या- 999960127091701829/2A म(cid:581) पा(cid:464)रत आदेश का अनुपालन नह(cid:547)ं करने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), ब(cid:200)सर के प(cid:287)ांक-01-1591 (cid:465)दनांक-19.09.2018 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ । (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), ब(cid:200)सर (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:292)खंड काया(cid:91)लय, (cid:464)र(cid:466)वलगंज, सारण, छपरा के प(cid:287)ांक-31 (cid:465)दनांक-12.01.2019 सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), ब(cid:200)सर (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप एवं सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत आरोप(cid:585) क(cid:551) वृहत जांच हेतु संक(cid:227)प सं(cid:201)या-367331 (cid:465)दनांक-22.01.2021 (cid:430)ारा सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गयी । संचालन पदािधकार(cid:547) के प(cid:287)ांक-1002(JJHM) (cid:465)दनांक- 30.10.2023 (cid:430)ारा जांच (cid:292)ितवेदन (cid:292)ा(cid:220)त है । (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन पर सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-2349872 (cid:465)दनांक-06.12.2023 (cid:430)ारा िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । (cid:292)खंड (cid:466)वकास काया(cid:91)लय, नौतन, िसवान के प(cid:287)ांक-12 (cid:465)दनांक- 05.01.2024 (cid:430)ारा सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना का िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन (cid:292)ा(cid:220)त है ।
सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन एवं सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना से (cid:292)ाप ्त िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), िसमर(cid:547) (ब(cid:200)सर) स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटैया (गोपालगंज) के (cid:430)ारा 14वीं (cid:466)व(cid:215)त योजना म(cid:581) (cid:292)ा(cid:200)कलन के अनु(cid:510)प काय(cid:91) नह(cid:547)ं करने, दोषी (cid:229)य(cid:466)(cid:416)य(cid:585) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) शी(cid:275) िनयमानुकू ल (cid:292)शासिनक एवं कानूनी कार(cid:91)वाई न करने के साथ ह(cid:547) दो(cid:466)षय(cid:585) को बचाने का (cid:292)यास करने के अित(cid:464)र(cid:200)त वर(cid:547)य पदािधकार(cid:547) के आदेश के अवहेलना तथा पद(cid:547)य दािय(cid:215)व(cid:585) के िनव(cid:91)हन म(cid:581) िशिथलता एवं लापरवाह(cid:547) बरतने क(cid:551) पु(cid:466)(cid:436) होती है । इनके कृ (cid:215)य से सरकार(cid:547) रािश क(cid:551) (cid:162)ित क(cid:551) पु(cid:466)(cid:436) होती है ।
अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना, ((cid:274)ा०(cid:466)व०से०, अनु(cid:272)मांक-289122), त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), िसमर(cid:547) (ब(cid:200)सर) स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कटैया (गोपालगंज) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) संचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से तीन वेतन वृ(cid:466)(cid:424) पर रोक क(cid:551) शा(cid:468)(cid:232)त अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क सु(cid:302)ी अच(cid:91)ना क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय।
उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।5 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024
20 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-504/95/2023-SECTION 14 RDD-RDD (COM NO-343248)-3192145--(cid:302)ी सुरे(cid:219)(cid:289) तांती, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), बहादुगंज, (cid:465)कशनगंज के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) समाज क(cid:227)याण (cid:466)वभाग के आदेश के आलोक म(cid:581) (cid:466)वभागीय जांच दल (cid:430)ारा (cid:465)दनांक-19.04.2023 को समे(cid:465)कत बाल (cid:466)वकास प(cid:464)रयोजना काया(cid:91)लय, बहादुरगंज एवं 5 आंगनबाड़(cid:547) के (cid:219)(cid:289) क(cid:551) जांच क(cid:551) गयी, (cid:468)जसम(cid:581) काया(cid:91)लय कम(cid:91)चा(cid:464)रय(cid:585) क(cid:551) लॉगबुक संधा(cid:464)रत नह(cid:547)ं होने, लोकायु(cid:200)त के मामल(cid:585) से संबंिधत पंजी संधा(cid:464)रत नह(cid:547)ं होने, रोकड़पंजी म(cid:581) अि(cid:274)म के (cid:510)प म(cid:581) 2,64,57,165.00/- (cid:510)पये का समायोजन नह(cid:547)ं होने स(cid:465)हत अ(cid:219)य आरोप अिनयिमतता के आरोप पर समाज क(cid:227)याण (cid:466)वभाग, (cid:466)बहार, पटना के प(cid:287)ांक-6320 (cid:465)दनांक-18.12.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त है ।
(cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) पर (cid:302)ी तांती से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-102415/2024 (cid:465)दनांक-05.01.2024 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), बहादुरगंज ((cid:465)कशनगंज) के प(cid:287)ांक-79 (cid:465)दनांक-22.01.2024 (cid:430)ारा (cid:302)ी तांती का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराया गया । (cid:468)जसम(cid:581) (cid:302)ी तांती के (cid:430)ारा समाज क(cid:227)याण (cid:466)वभाग, (cid:466)बहार, पटना से (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप से इंकार (cid:465)कया गया है ।
(cid:302)ी सुरे(cid:219)(cid:289) तांती के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) समाज क(cid:227)याण (cid:466)वभाग, (cid:466)बहार, पटना से (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप प(cid:287) एवं (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क समाज क(cid:227)याण (cid:466)वभाग (cid:430)ारा चलाया जा रहा आंगनबाड़(cid:547) के (cid:219)(cid:289) ठ(cid:548)क (cid:468)(cid:232)थित म(cid:581) नह(cid:547)ं चल रहा था । उप(cid:468)(cid:232)थत ब(cid:205)च(cid:585) क(cid:551) सं(cid:201)या पंजीकृ त सं(cid:201)या से काफ(cid:551) कम थी, जो ब(cid:205)चे उप(cid:468)(cid:232)थत थे वे भी (cid:466)बना (cid:284)ेस के थे । पढ़ाई एवं अ(cid:219)य गित(cid:466)विध नह(cid:547)ं हो रह(cid:547) थी । ब(cid:205)च(cid:585) को ना(cid:232)ता भी नह(cid:547)ं (cid:465)दया गया था । (cid:468)जसका िनर(cid:547)(cid:162)ण एवं अनु(cid:302)वण (cid:465)कया जाना चा(cid:465)हए था जो (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547) के (cid:430)ारा नह(cid:547)ं (cid:465)कया गया है ।
अतएव (cid:302)ी सुरे(cid:219)(cid:289) तांती, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), बहादुगंज, (cid:465)कशनगंज को (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली, 2005 (तृतीय संशोधन िनयमावली, 2010) के िनयम-3 के तहत चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी सुरे(cid:219)(cid:289) तांती क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
------
20 सितम्बर 2024
6 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024(cid:302)ी झा के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), सहरसा से (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप प(cid:287) एवं (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी। समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क (cid:302)ी पीयूष राज (cid:430)ारा नामांकन-प(cid:287) म(cid:581) अपनी ज(cid:219)म ितिथ-09.02.2021 (cid:232)वयं अं(cid:465)कत क(cid:551) गई है, अथा(cid:91)त (cid:292)ितवाद(cid:547) (cid:430)ारा (cid:219)यूनतम आयु पूर(cid:547) नह(cid:547)ं करने क(cid:551) सूचना (cid:232)वयं नामांकन-प(cid:287) म(cid:581) अं(cid:465)कत क(cid:551) गई है । इसके बावजूद त(cid:215)कालीन िनवा(cid:91)ची पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा नामांकन-प(cid:287) को (cid:232)वीकृ त (cid:465)कया गया है, जब(cid:465)क संवी(cid:162)ा क(cid:551) ितिथ को उनक(cid:551) आयु िनवा(cid:91)चन म(cid:581) भाग लेने हेतु िनधा(cid:91)(cid:464)रत (cid:219)यूनतम आयु 21 वष(cid:91) से कम थी । इस (cid:292)कार िनवा(cid:91)ची पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा नामांकन-प(cid:287) का यु(cid:466)(cid:416)यु(cid:200)त पर(cid:547)(cid:162)ण (cid:465)कए (cid:466)बना (cid:302)ी पीयूष राज का नामांकन (cid:232)वीकार कर अपने मूल क(cid:215)त(cid:91)(cid:229)य(cid:585) का िनव(cid:91)हन नह(cid:547)ं (cid:465)कया गया है, (cid:468)जसके कारण उ(cid:200)त (cid:292)ादेिशक िनवा(cid:91)चन (cid:162)े(cid:287) म(cid:581) पुन: चुनाव कराने क(cid:551) (cid:468)(cid:232)थित उ(cid:215)प(cid:219)न हो गई, ऐसा होने से न के वल अयो(cid:202)य (cid:229)य(cid:466)(cid:416) (cid:430)ारा पद धारण (cid:465)कया गया, ब(cid:468)(cid:227)क समय, (cid:302)म एवं राज(cid:232)व का अप(cid:229)यय हुआ ।
अतएव (cid:302)ी (cid:466)वनय मोहन झा, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), म(cid:465)हषी, सहरसा स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), शा(cid:224)हो अकहा कु रहा (बेगूसराय) को (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली, 2005 (तृतीय संशोधन िनयमावली, 2010) के िनयम-3 के तहत चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है । आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी (cid:466)वनय मोहन झा क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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20 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-H-/356/1/2023-SECTION 14-RDD-RDD (COM NO-238813)-3192278--(cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), मनेर (पटना) स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), नरपतगंज (अर(cid:464)रया) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) के कु ल 138 वा(cid:232)त(cid:466)वक लाभुक(cid:585) को योजना का लाभ न देकर अ(cid:219)य अयो(cid:202)य (cid:229)य(cid:465)क(cid:215)य(cid:585) को योजना क(cid:551) रािश िनग(cid:91)त (cid:465)कये जाने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पटना के प(cid:287)ांक-2189 (cid:465)दनांक-27.12.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पटना (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-24486101 (cid:465)दनांक-08.01.2024 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), नरपतगंज (अर(cid:464)रया) के प(cid:287)ांक-231 (cid:465)दनांक-25.03.2024 (cid:430)ारा (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराया गया, (cid:468)जसम(cid:581) (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद के (cid:430)ारा (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पटना (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप से इ(cid:219)कार (cid:465)कया गया है ।
(cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पटना से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप एवं (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क दोन(cid:585) पंचायत(cid:585) के सभी अयो(cid:202)य लाभुक(cid:585) से रािश वसूली क(cid:551) जाय एवं (cid:274)ामीण आवास सहायक स(cid:465)हत अयो(cid:202)य लाभुक(cid:585) तथा संबंिधत ब(cid:583)क कम(cid:568) पर िनयमानुसार (cid:292)ाथिमक(cid:551) दज(cid:91) कराई जाय । परंतु त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), मनेर (cid:430)ारा (cid:465)कता चौह(cid:215)तर पूव(cid:568) के सभी अयो(cid:202)य लाभुक(cid:585) से के वल रािश वसूली कर (cid:232)टेट नोडल खाते म(cid:581) जमा करवाया गया । इस पंचायत के संदभ(cid:91) म(cid:581) (cid:292)ाथिमक(cid:551) दज(cid:91) नह(cid:547)ं करवाई गई । जब(cid:465)क बांक पंचायत म(cid:581) के वल अयो(cid:202)य प(cid:200)का मकान वाले लोग(cid:585) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) मनेर थाना कांड सं(cid:201)या-147/22 (cid:430)ारा (cid:292)ाथिमक(cid:551) दज(cid:91) करवाई गई । (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण) वष(cid:91) 2016-17 से 2021-22 म(cid:581) मनेर (cid:292)खंड अंतग(cid:91)त कु ल (cid:232)वीकृ त आवास(cid:585) म(cid:581) से (cid:465)दनांक-26.05.2022 तक कु ल 1618 आवास अपूण(cid:91) थे।7 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), मनेर (पटना) स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), नरपतगंज (अर(cid:464)रया) को'िन(cid:219)दन'(वष(cid:91)-2023) का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है । आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी च(cid:219)दन (cid:292)साद क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)पु(cid:232)त म(cid:581) इसक(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय।
उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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20 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-504/87/2023-SECTION 14 RDD-RDD (COM NO-333391)-3194313--(cid:302)ी (cid:468)जयाउल हक, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), बारसोई, क(cid:465)टहार स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कु था(cid:91) (अरवल) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) पंचम (cid:466)व(cid:215)त आयोग क(cid:551) रािश से (cid:292)खंड प(cid:464)रसर (cid:468)(cid:232)थत (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547) के आवासीय भवन के चाहर (cid:465)दवार(cid:547) का िनमा(cid:91)ण कराने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), क(cid:465)टहार के प(cid:287)ांक-2076 (cid:465)दनांक-27.11.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त है ।
(cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) पर (cid:302)ी हक से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-99831/2023 (cid:465)दनांक-28.12.2023 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कु था(cid:91) के प(cid:287)ांक-330 (cid:465)दनांक-24.03.2024 (cid:430)ारा (cid:302)ी हक का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराया गया । (cid:468)जसम(cid:581) (cid:302)ी हक के (cid:430)ारा (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), क(cid:465)टहार से (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप से इंकार (cid:465)कया गया है ।
(cid:302)ी (cid:468)जयाउल हक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), क(cid:465)टहार से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) एवं (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क संबंिधत िनमा(cid:91)ण काय(cid:91), मु(cid:201)य काय(cid:91)पालक पदािधकार(cid:547) एवं अ(cid:218)य(cid:162) पंचायत सिमित, बारसोई, क(cid:465)टहार क(cid:551) सहमित एवं काय(cid:91)वाह(cid:547) म(cid:581) िलए गए िनण(cid:91)य मु(cid:201)य काय(cid:91)पालक पदािधकार(cid:547), (cid:468)जलाप(cid:464)रषद, क(cid:465)टहार को भी संसूिचत है । साथ ह(cid:547) साथ इसम(cid:581) (cid:465)कसी (cid:292)कार का गबन क(cid:551) सूचना भी नह(cid:547)ं है । अ(cid:218)य(cid:162) पंचायत सिमित, बारसोई एवं मु(cid:201)य काय(cid:91)पालक पदािधकार(cid:547), क(cid:465)टहार से भी कोई (cid:292)ितकू ल (cid:292)ितवेदन संसूिचत नह(cid:547)ं है । अतएव (cid:302)ी (cid:468)जयाउल हक, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), बारसोई, क(cid:465)टहार स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कु था(cid:91) (अरवल) को (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली, 2005 (तृतीय संशोधन िनयमावली, 2010) के िनयम-3 के तहत चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी (cid:468)जयाउल हक क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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23 सितम्बर 2024
8 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024एवं िनवा(cid:91)चन जैसे मह(cid:215)वपूण(cid:91) काय(cid:91) के (cid:292)ित गंभीर कत(cid:91)(cid:229)यह(cid:547)नता एवं अनुशासनह(cid:547)नता के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया के प(cid:287)ांक-2167 (cid:465)दनांक-06.11.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त है ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी पं(cid:465)डत से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-99886/2023 (cid:465)दनांक-28.12.2023 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), गोगर(cid:547) (खग(cid:468)़डया) के प(cid:287)ांक-471 (cid:465)दनांक-22.02.2024 (cid:430)ारा (cid:302)ी पं(cid:465)डत का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण उपल(cid:222)ध कराया गया, (cid:468)जसम(cid:581) (cid:302)ी पं(cid:465)डत के (cid:430)ारा मतदाता सूची के िनमा(cid:91)ण म(cid:581) तकनीक(cid:551) कारण(cid:585) से प(cid:464)र(cid:468)(cid:232)थितवश हुई (cid:287)ु(cid:465)ट का सहानुभूितपूव(cid:91)क (cid:466)वचार करने का अनुरोध (cid:465)कया गया है ।
(cid:302)ी राजाराम पं(cid:465)डत के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप एवं (cid:302)ी पं(cid:465)डत (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क खग(cid:468)़डया (cid:468)जला(cid:219)तग(cid:91)त (cid:468)झक(cid:465)टया पंचायत के मतदाता सूची के िनमा(cid:91)ण म(cid:581) हुई (cid:287)ु(cid:465)ट का आरोप अधीन(cid:232)थ पंचायत सिचव(cid:585) के उपर मढ़ा गया है ।
अतएव (cid:302)ी राजाराम पं(cid:465)डत, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), गोगर(cid:547) (खग(cid:468)़डया) को (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) िनयमावली, 2005 (तृतीय संशोधन िनयमावली, 2010) के िनयम-3 के तहत चेतावनी का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी राजाराम पं(cid:465)डत क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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24 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-14(सा0)गो0-01/2017-3205454--(cid:302)ी (cid:506)(cid:466)(cid:436) पाठक, त(cid:215)कालीन (cid:274)ामीण (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547)-सह- (cid:292)भार(cid:547) (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कु चायकोट, गोपालगंज स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), रामपुर, कै मूर के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) िश(cid:162)क िनयोजन, 2008 के अ(cid:219)तग(cid:91)त अिनयिमत एवं अवैधािनक ढंग से िनयोजन करने संबंधी आरोप(cid:585) के िलये (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), गोपालगंज के प(cid:287)ांक 579/(cid:232)था0 (cid:465)दनांक 17.08.2021 (cid:430)ारा (cid:466)व(cid:465)हत (cid:292)प(cid:287) म(cid:581) आरोप प(cid:287) उपल(cid:222)ध कराया गया।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), पूव(cid:568) च(cid:224)पारण (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप(cid:585) पर (cid:302)ी पाठक से (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) माँग क(cid:551) गई । (cid:302)ी पाठक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) आरोप एवं इनके (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) (cid:466)वभाग (cid:430)ारा समी(cid:162)ोपरा(cid:219)त आरोप क(cid:551) वृहत जॉंच हेतु (cid:466)वभागीय संक(cid:227)प सं0- 598208 (cid:465)दनांक- 11.10.2021 (cid:430)ारा (cid:302)ी पाठक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गई ।
उ(cid:200)त (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) म(cid:581) संचालन पदािधकार(cid:547) के प(cid:287)ांक- 2023444 (cid:465)दनांक- 25.08.2023 से सम(cid:466)प(cid:91)त जाँच (cid:292)ितवेदन म(cid:581) (cid:302)ी पाठक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) धा(cid:464)रत सभी आरोप(cid:585) को स(cid:162)म सा(cid:234)य के अभाव म(cid:581) अ(cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है ।
(cid:466)वभाग (cid:430)ारा (cid:302)ी पाठक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) आरोप, (cid:302)ी पाठक के (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण एवं संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जाँच (cid:292)ितवेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गई । समी(cid:162)ोपरांत संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जाँच (cid:292)ितवेदन के िन(cid:231)कष(cid:91) से अ(cid:274)ां(cid:465)कत (cid:466)ब(cid:219)दुओं पर असहमत होते हुए (cid:302)ी पाठक को जाँच (cid:292)ितवेदन क(cid:551) छाया (cid:292)ित एवं उस पर असहमित के (cid:466)ब(cid:219)दु का उ(cid:227)लेख करते हुए उ(cid:219)ह(cid:581) उपल(cid:222)ध कराते हुए उनसे (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) माँग क(cid:551) गई ।9 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 असहमित के (cid:466)ब(cid:219)दु :-
संचालन पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त जाँच (cid:292)ितवेदन म(cid:581) संचालन पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) सभी आरोप(cid:585) को सा(cid:234)य के अभाव म(cid:581) अ(cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है । संचालन पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) Criminal Proceeding लं(cid:466)बत रहने का आधार बनाया गया है एवं इस मामले म(cid:581) (cid:466)वभागीय अनुमित के (cid:466)बना ह(cid:547) इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)ाथिमक(cid:551) दज(cid:91) होने क(cid:551) बात अं(cid:465)कत क(cid:551) गई है ।
संचालन पदािधकार(cid:547) से (cid:292)ा(cid:220)त जाँच (cid:292)ितवेदन एवं इनसे (cid:292)ा(cid:220)त िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा से (cid:232)प(cid:231)ट होता है (cid:465)क संचालन पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा सा(cid:234)य का अभाव बताया गया है पर(cid:219)तु जाँच (cid:292)ितवेदन म(cid:581) संचालन पदािधकार(cid:547) को उप(cid:232)थापन पदािधकार(cid:547) के (cid:232)तर से अपे(cid:468)(cid:162)त सहयोग नह(cid:547)ं िमलने का कह(cid:547)ं भी (cid:468)ज(cid:272) नह(cid:547)ं है । साथ ह(cid:547) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) एवं आपरािधक मामले दोन(cid:585) अलग-अलग (cid:466)वषय ह(cid:583) । इसके अलावा (cid:466)वषयगत मामले म(cid:581) (cid:466)बना (cid:466)वभागीय अनुमित के आरो(cid:466)पत पदािधकार(cid:547) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)ाथिमक(cid:551) दज(cid:91) होना आरोप को (cid:292)मा(cid:468)णत/ अ(cid:292)मा(cid:468)णत करने के िलए (cid:292)ासंिगक नह(cid:547)ं है ।
(cid:232)प(cid:231)टत: इनके (cid:430)ारा िश(cid:162)क िनयोजन के मामले म(cid:581) गंभीर लापरवाह(cid:547) बरती गई है एवं अपने पद का दु(cid:510)पयोग (cid:465)कया गया है ।
(cid:466)वभाग (cid:430)ारा (cid:302)ी पाठक के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) आरोप, संचालन पदािधकार(cid:547) का िन(cid:231)कष(cid:91)/जाँच (cid:292)ितवेदन, जाँच (cid:292)ितवेदन पर असहमित के (cid:466)ब(cid:219)दु एवं उस पर (cid:302)ी पाठक से (cid:292)ा(cid:220)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गई ।
संचालन पदािधकार(cid:547) के जाँच (cid:292)ितवेदन पर असहमित के (cid:466)ब(cid:219)दु पर (cid:302)ी पाठक (cid:430)ारा त(cid:216)या(cid:215)मक बात नह(cid:547)ं कह(cid:547) गई है । इनके (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:232)वीकार यो(cid:202)य नह(cid:547)ं पाया गया।
अतएव (cid:466)वभाग (cid:430)ारा स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी (cid:506)(cid:466)(cid:436) पाठक, त(cid:215)कालीन (cid:274)ामीण (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547)-सह- (cid:292)भार(cid:547) (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), कु चायकोट, गोपालगंज स(cid:224)(cid:292)ित (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), रामपुर, कै मूर (cid:430)ारा बरती गई उ(cid:200)त अिनयिमतता के िलए इनके (cid:466)व(cid:510)(cid:424)'संचया(cid:215)मक (cid:292)भाव से तीन वेतन वृ(cid:466)(cid:424) पर रोक'क(cid:551) शा(cid:468)(cid:232)त अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है ।
आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क उ(cid:200)त शा(cid:468)(cid:232)त क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) उनक(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी/सेवा पु(cid:232)त म(cid:581) क(cid:551) जाय।
उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है ।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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27 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-503/271/2023-SECTION 14-RDD-RDD (COM-245904)-3215223--(cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार, (cid:274)ा०(cid:466)व०से० (अनु(cid:272)मांक-276937), त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), चे(cid:464)रया ब(cid:464)रयारपुर (बेगूसराय) स(cid:224)(cid:292)ित सहायक प(cid:464)रयोजना पदािधकार(cid:547), (मु ंगेर) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:292)धानमं(cid:287)ी आवास योजना ((cid:274)ामीण), SBM-G/(cid:466)विध के काया(cid:91)(cid:219)वयन म(cid:581) उदासीनता बरतने तथा (cid:466)वभागीय िनदेश(cid:585) का अनुपालन नह(cid:547)ं करने का आरोप (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), बेगूसराय के प(cid:287)ांक-392 (cid:465)दनांक-27.03.2023 (cid:430)ारा (cid:466)व(cid:465)हत (cid:292)प(cid:287) म(cid:581) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ । उ(cid:200)त आरोप पर (cid:302)ी कु मार का (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण (cid:292)खंड काया(cid:91)लय, चे(cid:464)रया ब(cid:464)रयारपुर के प(cid:287)ांक-614 (cid:465)दनांक-18.05.2023 (cid:430)ारा (cid:292)ा(cid:220)त है ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), बेगूसराय (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप एवं (cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत आरोप गंभीर (cid:292)कृ ित के होने के कारण वृहत जांच हेतु संक(cid:227)प सं(cid:201)या- 1916332 (cid:465)दनांक-18.07.2023 (cid:430)ारा (cid:302)ी कु मार के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) गयी । संचालन पदािधकार(cid:547) के प(cid:287)ांक-2474270 (cid:465)दनांक- 15.01.2024 (cid:430)ारा जांच (cid:292)ितवेदन (cid:292)ा(cid:220)त है । (cid:292)ा(cid:220)त जांच (cid:292)ितवेदन पर (cid:302)ी10 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 कु (cid:219)दन कु मार से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-2514226 (cid:465)दनांक-30.01.2024 (cid:430)ारा िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । (cid:465)दनांक-09.03.2024 (cid:430)ारा (cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार का िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन (cid:292)ा(cid:220)त है ।
संचालन पदािधकार(cid:547) के जांच (cid:292)ितवेदन एवं (cid:302)ी कु मार से (cid:292)ा(cid:220)त िल(cid:468)खत अ(cid:223)यावेदन क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी । संचालन पदािधकार(cid:547) (cid:430)ारा (cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) अिधकतर आरोप(cid:585) को (cid:292)मा(cid:468)णत (cid:292)ितवे(cid:465)दत (cid:465)कया गया है ।
अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार, त(cid:215)कालीन (cid:292)ख(cid:214)ड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), चे(cid:464)रया ब(cid:464)रयारपुर (बेगूसराय) स(cid:224)(cid:292)ित सहायक प(cid:464)रयोजना पदािधकार(cid:547), (मु ंगेर) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) (तृतीय संशोधन) िनयमावली, 2010 के िनयम-3 के तहत'चेतावनी' का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है । आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी कु (cid:219)दन कु मार क(cid:551) चा(cid:464)र(cid:287)ी पु(cid:468)(cid:232)तका म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय। उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:- आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
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27 सितम्बर 2024
सं0 (cid:274)ा0(cid:466)व0-R-504/47/2023-SECTION 14-RDD-RDD (COM NO-264282)-3215284--(cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार, (cid:274)ा०(cid:466)व०से० (अनु(cid:272)मांक-167849), त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), परब(cid:215)ता (खग(cid:468)़डया) स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), पहाड़पुर (पूव(cid:568) च(cid:224)पारण) के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) पंचायत उप चुनाव, 2023 म(cid:581) लगार पंचायत के (cid:292)ादेिशक िनवा(cid:91)चन (cid:162)े(cid:287) सं(cid:201)या-04 एवं 08 के मतदाता सूची के िनमा(cid:91)ण म(cid:581) यूजर मैनुअल म(cid:581) (cid:292)(cid:465)(cid:272)या का पालन करते हुए (cid:466)बना जांच के वेब पोट(cid:91)ल पर मतदाताओं क(cid:551) सं(cid:201)या शू(cid:219)य दशा(cid:91)या तथा आयोग के पोट(cid:91)ल पर (cid:466)बना जांच के ह(cid:547) (cid:287)ु(cid:465)ट र(cid:465)हत मतदाता सूची के िनमा(cid:91)ण का (cid:292)माण प(cid:287) अपलोड करने के आरोप पर (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया के प(cid:287)ांक-2168 (cid:465)दनांक- 06.11.2023 (cid:430)ारा आरोप प(cid:287) (cid:292)ा(cid:220)त हुआ ।
(cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया (cid:430)ारा (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप पर (cid:302)ी कु मार से (cid:466)वभागीय प(cid:287)ांक-101839 (cid:465)दनांक- 04.01.2024 (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) मांग क(cid:551) गयी । काया(cid:91)लय, (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), परब(cid:215)ता (खग(cid:468)़डया) के प(cid:287)ांक-96/िनवा(cid:91)० (cid:465)दनांक-24.05.2024 के मा(cid:218)यम से (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार (cid:430)ारा (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:465)कया गया । (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), खग(cid:468)़डया से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप एवं (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार (cid:430)ारा सम(cid:466)प(cid:91)त (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा क(cid:551) गयी । समी(cid:162)ोपरांत पाया गया (cid:465)क रा(cid:207)य िनवा(cid:91)चन आयोग के प(cid:287)ांक- 1113 (cid:465)दनांक-12.04.2023 म(cid:581) अं(cid:465)कत है (cid:465)क (cid:466)वगत आम चुनाव म(cid:581) पाया गया (cid:465)क मतदाता सूची के िनमा(cid:91)ण के (cid:272)म म(cid:581) (cid:466)वखंड(cid:547)करण एवं दावा आप(cid:466)(cid:419) के िन(cid:231)पादन म(cid:581) पया(cid:91)(cid:220)त अनु(cid:302)वण नह(cid:547)ं होने के कारण कु छ (cid:287)ु(cid:465)टयां प(cid:464)रल(cid:468)(cid:162)त हुई । उ(cid:200)त प(cid:287) म(cid:581) यह भी अं(cid:465)कत है (cid:465)क इस (cid:292)कार क(cid:551) (cid:287)ु(cid:465)ट दुहराई नह(cid:547) जाए तथा एक भी सह(cid:547) मतदाता का नाम मतदाता सूची म(cid:581) छू ट नह(cid:547)ं जाए । (cid:287)ु(cid:465)ट (cid:292)काश म(cid:581) आने पर इसे मानवीय भूल के (cid:510)प म(cid:581) (cid:232)वीकार नह(cid:547)ं (cid:465)कया जाएगा तथा इसक(cid:551) (cid:468)ज(cid:224)मेदार(cid:547) िनधा(cid:91)(cid:464)रत क(cid:551) जाएगी । इसी (cid:272)म म(cid:581) (cid:287)ु(cid:465)ट र(cid:465)हत मतदाता सूची का िनमा(cid:91)ण काय(cid:91) पूण(cid:91) होने का (cid:292)माण प(cid:287) भी आयोग के वेबसाईट पर अपलोड करने का िनदेश (cid:465)दया गया था । उपयु (cid:91)(cid:200)त त(cid:216)य(cid:585) से (cid:232)प(cid:231)ट होता है (cid:465)क (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार (cid:430)ारा िनवा(cid:91)चन आयोग के (cid:465)दशा-िनद(cid:566)श के बावजूद िनवा(cid:91)चन जैसे मह(cid:215)वपूण(cid:91) काय(cid:91) म(cid:581) उपे(cid:162)ा एवं मतदाता सूची के (cid:466)वखंड(cid:547)करण एवं िनमा(cid:91)ण म(cid:581) उदासीनता बरती गयी है ।11 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतएव स(cid:224)यक (cid:466)वचारोपरांत (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार, त(cid:215)कालीन (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), परब(cid:215)ता (खग(cid:468)़डया) स(cid:224)(cid:292)ित- (cid:292)खंड (cid:466)वकास पदािधकार(cid:547), पहाड़पुर (पूव(cid:568) च(cid:224)पारण) को (cid:466)बहार सरकार(cid:547) सेवक (वग(cid:568)करण, िनयं(cid:287)ण एवं अपील) (तृतीय संशोधन) िनयमावली, 2010 के िनयम-3 के तहत चेतावनी'का दंड अिधरो(cid:466)पत (cid:465)कया जाता है । आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क (cid:302)ी अ(cid:468)खलेश कु मार क(cid:551) च(cid:464)र(cid:287)पु(cid:232)त म(cid:581) इस दंड क(cid:551) (cid:292)(cid:466)व(cid:466)(cid:436) क(cid:551) जाय।
उ(cid:200)त आदेश पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का अनुमोदन (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क अिधसूचना क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।
------ श्रम संसाधन विभाग ----- अधिसूचनाएं 17 सितम्बर 2024 सं0 1/प्रषि॰निजी-06/2019-58--श्री पंकज कुमार, प्राचार्य, औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान, जमुई अतिरिक्त प्रभार प्राचार्य, महिला औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान, जमुई के दिनांक 16.07.2024 से 12.10.2024 तक के उपार्जित अवकाश में रहने के कारण उनकी अवकाश अवधि में श्री श्याम नन्दन प्रसाद देव, उप प्राचार्य, महिला औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान (LWE), गिद्धौर, जमुई को अपने कार्यों के अतिरिक्त औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान, जमुई एवं महिला औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान, जमुई के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
-----
18 सितम्बर 2024
सं॰ 1/श्रम वि॰स्था॰(1)10-46/2016-59/श्र॰सं॰--श्री संजय कुमार पाल, उप मुख्य कारखाना निरीक्षक, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम 227 एवं 230 में निहित प्रावधान के तहत दिनांक 12.06.2024 से 25.06.2024 तक कुल 14 दिनों के उपभोगित उपार्जित अवकाश की स्वी—ति दी जाती है। 2. इसके उपरान्त श्री संजय कुमार पाल के पक्ष में दिनांक 26.06.2024 तक कुल 286 दिनों का उपार्जित अवकाश आदेय रह जायेगा।
आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
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19 सितम्बर 2024
सं0 1/नियो॰निजी-26/2024 श्र॰सं॰-62--सुश्री आ—ति, नियोजन पदाधिकारी, अवर प्रादेशिक नियोजनालय, गया (अतिरिक्त प्रभार- विश्वविद्यालय नियोजन सूचना एवं मार्गदर्शन केन्द्र, बोधगया एवं जिला नियोजन पदाधिकारी, जहानाबाद) के दिनांक 15.09.2024 से 29.09.2024 तक उपार्जित अवकाश में रहने के कारण उनकी अवकाश अवधि में श्री दिनेश तिवारी, जिला नियोजन पदाधिकारी, औरंगाबाद को अपने कार्याें के अतिरिक्त नियोजन पदाधिकारी, अवर प्रादेशिक नियोजनालय, गया, विश्वविद्यालय नियोजन सूचना एवं मार्गदर्शन केन्द्र, बोधगया तथा जिला नियोजन पदाधिकारी, जहानाबाद का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
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19 सितम्बर 2024
सं0 1/श्रम वि॰स्था॰1(10)-34/2017-63/श्र॰सं॰--बिहार श्रम सेवा (सामान्य) संवर्ग के पदाधिकारी श्री जगन्नाथ पासवान, श्रम अधीक्षक (बोर्ड), पूर्णियाँ जिनकी श्रम अधीक्षक के पद पर योगदान की तिथि 10.08.2019 है, का दिनांक 20.01. 2024 के प्रभाव से श्रम अधीक्षक के पद पर सेवा सम्पुष्ट किया जाता है।
आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।12 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 19 सितम्बर 2024 सं0 1/नियो॰ नियुक्ति-17/2023 श्र॰सं॰-64--बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित 67वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर श्रम संसाधन विभाग, बिहार, पटना के नियंत्रणाधीन बिहार नियोजन सेवा के नियोजन पदाधिकारी/जिला नियोजन पदाधिकारी के पदों पर नियुक्ति हेतु अनुशंसा प्राप्ति के उपरान्त विभागीय अधिसूचना सं॰ 119 दिनांक 09.02.2024 द्वारा श्री सुनील कुमार सुमन का पदस्थापन जिला नियोजनालय, नवादा में हुआ था तथा पदभार ग्रहण की अंतिम तिथि 11.02.2024 निर्धारित की गई थी। श्री सुनील कुमार सुमन, जिला नियोजन पदाधिकारी, नवादा पूर्व से Technical Resignation मिलने में विलंब होने के कारण विलंब से दिनांक 17.02.2024 को पदभार ग्रहण किये हैं। इस विलंब को परिस्थितिजन्य मानते हुए श्री सुनील कुमार सुमन द्वारा विभागीय अधिसूचना सं॰ 119 दिनांक 09.02.2024 द्वारा निर्गत नियुक्ति पत्र में प्रभार ग्रहण हेतु निर्धारित तिथि 11.02.2024 के बाद दिनांक 17.02.2024 को पदभार ग्रहण किए जाने को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
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23 सितम्बर 2024
सं॰ 1/नियो॰ सम्पुष्टि-01/18 श्र॰सं॰-66--बिहार नियोजन सेवा के मो॰ आकिफ वक्कास, नियोजन पदाधिकारी/जिला नियोजन पदाधिकारी जिनकी नियुक्ति की तिथि 06.06.2022 है, की सेवा दिनांक 13.05.2024 के प्रभाव से सम्पुष्ट की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
----- 23 सितम्बर 2024 सं॰सं॰-1/श्रम वि॰स्था॰(1)10-42/2016-67/श्र॰सं॰--श्री कुमार आलोक रंजन, तत्कालीन श्रम अधीक्षक, छपरा-02 सम्प्रति प्रबंधक, बिहार भोजशाला, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम 227 एवं 230 में निहित प्रावधान के तहत के दिनांक 08.06.2024 से 28.06.2024 तक कुल 21 दिनों के उपभोगित उपार्जित अवकाश की स्वी—ति दी जाती है। 2. इसके उपरान्त श्री कुमार आलोक रंजन के पक्ष में दिनांक 29.06.2024 तक कुल 234 दिनों का उपार्जित अवकाश आदेय रह जायेगा।
आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
----- गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------ अधिसूचना 27 सितम्बर 2024 सं0 7/सी0सी0ए0-10-04/2024 गृ0आ0-11492--बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024 (बिहार अधिनियम 12/2024) के अध्याय-2 की धारा-12 (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल, राज्य के सभी जिला दण्डाधिकारियों को उपर्युक्त अधिनियम की धारा-12 (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का अपने-अपने जिला के क्षेत्राधिकार के अंतर्गतगृह विभाग (आरक्षी शाखा) के एतद् विषयक अधिसूचना संख्या-3592 दिनांक-25.03.2024 के क्रम में अगले छः महीनों के लिए अर्थात दिनांक 25.09.2024 से 24.03.2025 (पच्चीस सितम्बर दो हजार चौबीस से चौबीस मार्च दो हजार पच्चीस) तक प्रयोग करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, प्रकाश रंजन, उप सचिव।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचनाएं
27 सितम्बर 2024
सं0 कौन/भी-130/2024-308/सी--महालेखाकार (लेखापरीक्षा), बिहार, पटना के लेखापरीक्षा दल द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में अभिलेखों का परफॉरमेंस ऑडिट करने के क्रम में कुल-28 मामलों में अंकेक्षण आपत्ति दर्ज की गयी, जिसपर श्री गोपी चन्द सिंह, तत्कालीन राज्य कर अपर आयुक्त (अन्वेषण ब्यूरो), वाणिज्य कर विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति राज्य कर अपर आयुक्त (अंकेक्षण), सारण प्रमण्डल, छपरा द्वारा बिना सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के लेखा परीक्षा दल को जवाब उपलब्ध कराया गया है।13 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 इस संबंध में सक्षम प्राधिकार के आदेश से श्री सिंह से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त इसे स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। तदालोक में कर्त्तव्य में लापरवाही के लिए श्री गोपी चन्द सिंह, तत्कालीन राज्य कर अपर आयुक्त (अन्वेषण ब्यूरो), वाणिज्य कर विभाग, बिहार, पटना को ''चेतावनी'' संसूचित की जाती है। (2) प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ह0/-अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।
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27 सितम्बर 2024
सं0 6/सं0-04-01/2021-4233/(वा0कर)-बिहार वित्त सेवा के 56वीं से 59वीं बैच के अधोलिखित पदाधिकारियों को राज्य-कर सहायक आयुक्त (पुनरीक्षित वेतनमान लेवल-09 रू0-53,100-1,67,800) के पद पर उनके नाम के सामने कॉलम-5 में अंकित तिथि से सेवा सम्पुष्ट किया जाता हैः-
| क्र0 | पदाधिकारी का नाम/वर्त्तमान पदस्थापन | ग ह जिला ृ | जन्म तिथि/ योगदान की तिथि | सम्पुष्टि की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1 | श्री विभांशु कौशल चौधरी, राज्य-कर सहायक आयुक्त, खगड़िया अंचल, खगड़िया। | मुजफ्फरपुर | 18.11.1987/ 26.12.2018 (पूर्वाह्न) | 26.12.2020 |
| 2 | श्रीमती इन्दु चौहान, राज्य-कर सहायक आयुक्त, सहरसा अंचल, सहरसा। | सुपौल | 15.08.1986/ 26.12.2018 (पूर्वाह्न) | 10.02.2024 |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ज्योति प्रकाश, अवर सचिव।
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27 सितम्बर 2024
सं0 6/सं0-04-02/2021-4234/(वा॰कर)-बिहार वित्त सेवा के 60-62वीं बैच के अधोलिखित पदाधिकारी को राज्य-कर सहायक आयुक्त (पुनरीक्षित वेतनमान लेवल-09 रू0-53,100-1,67,800) के पद पर उनके नाम के सामने कॉलम-05 में अंकित तिथि से सेवा संपुष्ट किया जाता है :-
| क्र0 स0 | पदाधिकारी का नाम/ वर्तमान पदस्थापन | गृह जिला | जन्म तिथि/ योगदान की तिथि | संपुष्टि की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1 | म धा श्रेयसी, े राज्य-कर सहायक आयुक्त, बेगूसराय अंचल, बेगूसराय। | मुंगेर | 15.09.1984/ 22.06.2019 (पूर्वाह्न) | 04.07.2024 |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ज्योति प्रकाश, अवर सचिव।
------ कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ अधिसूचना 24 सितम्बर 2024
सं0 कारा/स्था0 (अधी0) 01-16/2023-7528--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या-19300 दिनांक-13.10.2023 में निहित अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था के तहत बिहार कारा सेवा के निम्नांकित मूल कोटि (अधीक्षक, उपकारा) के पदाधिकारियों को अधीक्षक, मंडल कारा (वेतन स्तर-11), में उसके विहित वेतनमान सहित, अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार दिया जाता है :-
14 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024| क्र0 | पदाधिकारी का नाम एवं पदनाम/वर्तमान पदस्थापन | सिविल लिस्ट क्रमांक (ज्ञा0-9526 दि0- 17.11.2021 के अनुसार) | वर्तमान कोटि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1. | श्री विधु कुमार, अधीक्षक, आदर्श केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना | 13 | अधीक्षक, उपकारा (वेतन स्तर-09) |
| 2. | श्री राकेश कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, शिवहर | 14 | अधीक्षक, उपकारा (वेतन स्तर-09) |
| 3. | श्री राधेश्याम सुमन, अधीक्षक, मंडल कारा, छपरा | 16 | अधीक्षक, उपकारा (वेतन स्तर-09) |
| 4. | श्री मनोज कुमार सिन्हा, अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी | 28 | अधीक्षक, उपकारा (वेतन स्तर-09) |
निहित शर्तों के अध्यधीन है।
3. उपर्युक्त पदाधिकारियों द्वारा वर्तमान में धारित पद उनके प्रभार लिये जाने की तिथि से अगले आदेश तक वेतन स्तर-11 का माना जायेगा।
4. उपर्युक्त पदाधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधीक्षक, मंडल कारा (L-11) के पद का अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार का आर्थिक लाभ देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रजनीश कुमार सिंह, अपर सचिव-सह-निदेशक (प्र0)।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 28—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
15 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024भाग-2
बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं
और नियम आदि।
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श्रम संसाधन विभाग
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शुद्धि-पत्र
19 सितम्बर 2024
सं0 1/प्रषि॰निजी-06/2019 श्र॰सं॰-65--विभागीय अधिसूचना संख्या-58, दिनांक-17.09.2024 में "महिला औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान (LWE), गिद्धौर, जमुई" के स्थान पर "औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान (LWE), गिद्धौर, जमुई" पढ़ा जाय। 2. उक्त अधिसूचना की शेष बातें यथावत रहेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 28—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
16 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024भाग-9-ख
िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण
सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।
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सूचना -------
No. 965--I, Rinki Devi W/o Raju Kumar R/ O Durga Asharm Gali, Sheikhpura. Phulwari, Patna. Bihar-800014 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 7241 dt. 25.06.24 that my name is written in my son Sagar's 10th CBSE all documents as Rinky Dev and 12th BSEB all documents as Rinky Devi which is wrong. As per Aadhar Card my correct name is Rinki Devi and from now I will be known as Rinki Devi from all future, and legal purposes.
Rinki Devi.
-------
सं0 966--म(cid:583), द(cid:547)पक कु मार साहनी, (cid:466)पता-राम बाबू राम, िनवासी-रहमतगंज, पो0 थाना मसौढ़(cid:547), (cid:468)जला-पटना (cid:466)बहार।
ं (cid:465)क वष(cid:91) 2014, रौल नं. -7634234 म(cid:581) इंटर उ(cid:419)ीण(cid:91) (cid:292)माण प(cid:287) म(cid:581) भूलवश शपथ प(cid:287) सं.-15635 (cid:465)द. 28.8.24 (cid:430)ारा सूिचत करता हू
मेरा नाम Deepak Kumar Sahani दज(cid:91) हो 'गया है, जो गलत है। वष(cid:91) 2012 रौल नं-7147835 म(cid:581) मै(cid:465)(cid:282)क उ(cid:419)ीण(cid:91) (cid:292)माण प(cid:287) के अनुसार मेरा सह(cid:547) नाम Deepak Kumar Shahni है। भ(cid:466)व(cid:231)य म(cid:581) सभी काय(cid:607) एवं उ(cid:423)े(cid:230)य(cid:585) हेतु Deepak Kumar Shahni के नाम से जाना जाऊं गा।
द(cid:547)पक कु मार साहनी।
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सं0 967--मैं यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) पिता-सुभाष प्रसाद सिंह, साकिन-तोप, थाना-शाहजहांपुर, जिला-पटना बिहार 801304 शपथ पत्र सं0 1381 दिनांक 25.07.24 द्वारा सूचित करता हूं कि मैं आधार कार्ड, पैन कार्ड में मेरा नाम यशवंत सिन्हा (Yaswant Sinha) दर्ज है जो गलत है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा निर्गत शैक्षणिक प्रमाण पत्र में मेरा नाम यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) दर्ज है जो सही है। आगे सभी कार्यों एवं उद्देश्यों हेतु मैं यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) के नाम से जाना व पहचाना जाऊंगा।.
यशवंत सिन्हा।
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No. 968--I Sushila Devi Choudhary W/o Ramesh Chandra Choudhary residing at Pani Tanki Chowk, Gami Tola ; Katihar 854105 (Bihar) do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit no. 07 dated 10/08/2024 . That in my voter Id card my name is incorrectly mentioned as Sushila Devi. I shall be known as Sushila Devi Choudhary instead of Sushila Devi. Hence I shall be known as SUSHILA DEVI CHOUDHARY for all purposes .
Sushila Devi Choudhary.
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No. 969--I, ANVESHA RAZ, D/o Sanjay Kumar Mandal, R/o Naya Tola, Bara Bazar,Ward No. 34, Katihar -854105 ( Bihar ) do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit No. 04 Dated 17/08/2024, that I have changed my name ANVESHA RAZ to ANVESHA ANAND, from now on I shall be known and recorded as ANVESHA ANAND, for all purposes.
ANVESHA RAZ.
17 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024No. 975--I, Ruby Kumari W/o Sanjit Kumar Sinha R/o B1/203, Jagmano Kutir Appt. Near Passport Office, Khajpura, Patna, Bihar-800025 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 69 dt. 16.05.24 that my name is written in my son's Shreyash Sinha CBSE 10th - 8822 marksheet and all educational docuements as Ruby Sinha which is wrong. As per Aadhar Card my true/correct name is Ruby Kumari. From now I will be known as Ruby Kumari for all future and legal purposes.
Ruby Kumari.
------ बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद् विद्यापति मार्ग, पटना - 800001 ------- अधिसूचनाएं 4 जनवरी 2024
सं0 3301--श्री कपिलेश्वर स्थान मंदिर एवं धर्मशाला, कपिलेश्वर स्थान, अंचलथाना-रहिका, जिला-मधुबनी, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3161 है।
उक्त मंदिर में भगवान कपिलेश्वर शिवलिंग, माता पार्वती, हनुमान जी, बटूक भैरव, नंदी जी और विष्णु जी की मूर्तिया स्थापित है तथा 01 धर्मशाला और तालाब है, जो थाना सं0-8, खाता सं0-745, खेसरा सं0-8827, के 22 डी0 पर अवस्थित है तथा खाता सं0-1970, खेसरा सं0-8856 पर 6 डी0 में पार्वती मंदिर स्थित है, परन्तु उक्त मंदिर पर पडाें का अधिपत्य है, मंदिर में काफी राशि चंदा-चढ़ावा आदि से आती है, परन्तु उचित व्यवस्था ना होने के कारण उसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।
उक्त मंदिर की भूमि दरभंगा राजा द्वारा समर्पित की गयी थी, जिसके प्रधान पूजारी कामेश्वर सिंह थे और उनके परिवार द्वारा ही मंदिर की भूमि पर बने दुकानों से वसूली कर निजी कार्य में प्रयोग किया जाता है तथा मंदिर की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक होने बावजूद भी अच्छी नहीं है। उक्त रिपोर्ट पर्षद के आदेश के आलोक में पर्षद निरीक्षक द्वारा दिनांक-26.03.2018 को समर्पित की गयी तथा अपने रिपोर्ट के साथ मंदिर के कुछ फोटोग्राफ भी दाखिल किए गए। मंदिर की दुव्र्यवस्था को लेकर ताराकिंत प्रश्न भी विधान सभा में पूछा गया था।
अतः उक्त मंदिर की उचित व्यवस्था हेतु न्यास समिति का गठन किया जाना आवश्यक समझा गया और इस संबंध में जिला पदाधिकारी से लगातार वर्ष 2018 से पत्र भेजकर 11 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की जाती रहीं। जिला पदाधिकारी द्वारा पर्षद के विभिन्न पत्रों के आलोक में तथा विधान सभा में प्रशासन एवं पर्षद द्वारा दी गयी आवश्वासन के आलोक में अपने पत्रांक-514, दिनांक-03.03.2022 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को दिया गया। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन भी संबंधित थानें से पर्षद में दिनांक-23.09.2023 को प्राप्त हो चुका है। स्वंम्भू न्यास समिति को भी इस बात का संज्ञान हुआ तो, उनके द्वारा भी दिनांक-05.04.2018 को वर्ष 2009-10 से 2017-18 तक के फॉर्मल रूप में आय-विवरणी दाखिल की गयी, जिसमें मंदिर में एक मात्र आय का साधन चढ़ावा दिखाते हुए, 2000-2500/-रु0 प्रति वर्ष की आय दिखायी गयी, जो स्पष्ट करता था कि उक्त श्री गंगा नंद झा द्वारा दाखिल आय-विवरणी पूर्ण रूप से असत्य और अपारदर्शी है, जबकि उक्त मंदिर की भूमि पर लगभग 100 से अधिक दुकानों की बात पर्षद के संज्ञान में लायी गयी है, जिसके किराया मात्र से ही लाखों रुपए कि प्रति माह की आय है और मंदिर में काफी श्रद्धालु की भीड़ रहती है और उक्त गंगा नंद झा द्वारा दाखिल आय-विवरणी, जिसमें अपने को सचिव के रूप में अंकित किया है, उनकी नियुक्ति किसके द्वारा की गयी है, क्या उनको किसी पदाधिकारी के द्वारा मान्यता प्राप्त है? ऐसा कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया है।
उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक-14.11.2023 में यह निर्णय लिया गया की मंदिर की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहें, इसके लिए एक योजना का निरूपण करते हुए, जिला पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति का गठन किया जाए।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री कपिलेश्वर स्थान धर्मशाला, रहिका, जिला-मधुबनी,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कपिलेश्वर स्थान धर्मशाला, रहिका, जिला-मधुबनी,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कपिलेश्वर स्थान धर्मशाला, रहिका, जिला-मधुबनी,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।18 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- न्यास समिति निम्न प्रकार है -
01. अचंल पदाधिकारी, रहिका, - अध्यक्ष
02. श्री गजेन्द्र कुमार मिश्र, पिता- स्व0 शिव कुमार भगत - उपाध्यक्ष 03. श्री विजय कुमार मिश्र, पिता- पलटु मिश्र, - सचिव 04. श्री प्रभात रंजन, पिता- श्री कुलानंद यादव, - कोषाध्यक्ष 05. श्री राज किशोरी साफी, पिता- श्री शनिचर साफी, - सदस्य 06. श्रीमती पूनम चौरसिया, पति- श्री नरेन्द्र कुमार चौरसिया, - सदस्य 07. श्री नारायण झा, (पंडा),पिता- श्री कलिग चन्द्र झा, - सदस्य 08. श्री मनोज मिश्र, पिता- स्व0 अवध मिश्र, - सदस्य 09. श्री मुन्ना पंडा (मुन्नु झा), पिता- श्री विजेन्द्र पंडा, - सदस्य 10. श्री गणेश साह, पिता- श्री शंकर साह, - सदस्य 11. श्री संतोष कुमार झा,(पंडा), पिता- श्री गुणेश्वर झा - सदस्य सभी ग्राम- कपिलेश्वर स्थान, अंचलथाना- रहिका, जिला- मधुबनी।
न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। न्यास समिति को यह स्पष्ट निर्देष दिया जाता है कि उक्त गठित न्यास समिति को ही मंदिर कि19 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 व्यवस्था, प्रबंधन, दुकानदारों से किराया आदि वसूली और मंदिर के विकास हेतु कार्य करने का अधिकार रहेगा। यदि किसी व्यक्ति/संस्था द्वारा समिति के कार्यो में अवरोध उत्पन्न किया जाता है तो समिति उनके विरूद्ध प्रषासन से सहयोग प्राप्त करके सख्त कार्यवाही कर सकेगी।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा।
अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी सरकारी कर्मी है, अतः उनकी अनुपस्थिति में बैठक आदि का आयोजन करने का अधिकार उपाध्यक्ष को रहेगा, परन्तु शर्त यह रहेगी कि बैठक की पूर्व सूचना अनुमंडल पदाधिकारी, अध्यक्ष को अवष्य दे देंगें तथा बैठक के उपरान्त जो प्रस्ताव पर निर्णय लिया जायेगा, उसकी भी प्रति अनुमंडल पदाधिकारी को अवष्य उपलब्ध करा देंगे।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि '' श्री कपिलेश्वर स्थान मंदिर एवं धर्मशाला, कपिलेश्वर स्थान धर्मशाला, रहिका, जिला-मधुबनी,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------ 20 दिसम्बर 2023 सं0 3156--श्री प्रमोद वन बिहारी ट्रस्ट, अमरपुर, जिला-बांका, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3898 है।
उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु दिनांक-08.06.2009 को 11 सदस्यीय न्यास समिति श्री छेदी साह की अध्यता में बनायी गयी थी। समिति द्वारा पर्षद के बार-बार पत्र लिखे जाने के उपरांत दिनांक-13.01.2016, को वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 (05 वर्षो) की आय-विवरणी दाखिल कर पर्षद शुल्क दिया गया और कार्यकाल समाप्त होने एवं नई न्यास समिति गठन किए जाने हेतु अंचल पदाधिकारी को पर्षद के पत्रांक-1077, दिनांक-04.07.2016 द्वारा पत्र लिखा गया। दूसरी तरफ न्यास समिति द्वारा एक बैठक दिनांक-10.12.2016 को करके 11 व्यक्तियाें के नामों का प्रस्ताव दिया गया। अंचल पदाधिकारी द्वारा दिये गये पत्र दिनांक-13.12.2016 द्वारा प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन हेतु संंबंधित थाने को बार-बार पत्र लिखा गया। इसके संबंध में संबंधित थाने द्वारा दिनांक-13.09.2019 को अपना रिपोर्ट समर्पित की गयी, परन्तु न्यास समिति द्वारा पिछले कुछ वर्षो का आय-विवरणी, बजट, पर्षद शुल्क जमा ना करने के कारण उनसे बार-बार स्पष्टीकरण की मांग की गयी और चूॅकि प्रस्तावित नामों में भी पुराने न्यास समिति के सदस्याें का नाम था, इसलिए समिति गठित नहीं की गयी। अतः पर्षद के पत्र के आलोक में न्यास समिति द्वारा वर्ष 2016-17, 2019-20, (04 वर्षो) की आय-विवरणी दाखिल की गयी तथा यह भी सूचना दी गयी कि समिति के अध्यक्ष, छेदी साह का स्वर्गवास हो चुका है। अतः नई न्यास समिति गठन किए जाने तक अनुमंडल पदाधिकारी को समिति के अध्यक्ष के रूप में मान्यता पर्षद के पत्र दिनांक-09.10.2020 द्वारा की गयी तथा प्रस्तावित नामों पर उनके मतंव्य तथा कुछ नए नामों को जोड़ने या हटाने के संंबंध में पत्र लिखा गया। पर्षद के उक्त पत्रों के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा दिनांक-10.02.2022 को 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया है, जिसका चरित्र सत्यापन भी दिनांक-04.03.2023 को प्राप्त हो गया।
पर्षद की सुनवाई दिनांक-07.11.2023 को उक्त सभी परिस्थितियों पर विचारोपरान्त यह निर्णय लिया गया कि श्री शंकर प्रसाद साह जो पूर्व समिति के कोषाध्यक्ष थे, उनकी जिम्मेदारी बनती है कि न्यास की वार्षिक आय-विवरणी, जो भी हो निश्चित रूप से पर्षद में दाखिल करेंगे और चूॅकि उनके नाम का भी प्रस्ताव सचिव के रूप में दिया गया है। अतः उन्हें इस शर्त के साथ मान्यता दी जाती है कि भविष्य में पूर्व में किए गए क्रियाकलापों की तरह कार्य ना करते हुए, अधिनियम के प्रावधानों का पालन समय-समय पर आवश्य करेंगे, पूर्व सचिव एवं कोषाध्यक्ष को निर्देश दिया जाता है कि 01 माह के अदंर बकाया पर्षद शुल्क, आय-व्यय, विवरणी, बैंक पासबुक की फोटोप्रति पर्षद में दाखिल करेंगे, तथा अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचारोपरान्त मंदिर की सुव्यवस्था, सम्पतियों की सुरक्षा एवं प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए न्यास समिति का गठन किया जाय।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री प्रमोद बिहार (श्री राम जानकी मंदिर), अमरपुर, जिला-बांका, ''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।20 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री प्रमोद वन बिहारी ट्रस्ट, अमरपुर, जिला-बांका,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री प्रमोद वन बिहारी ट्रस्ट, अमरपुर, जिला-बांका,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अंचल पदाधिकारी, अमरपुर - पदेन अध्यक्ष 02. श्रीमती नीलम सिंह, पति रोहित साह - कार्यवाहक अध्यक्ष 03. श्री सुजीत गौय, पिता स्व0 मोहन गौय - उपाध्यक्ष 04. श्री शंकर प्रसाद साह, पिता स्व0 मोहन साह - सचिव सभी साकिन- अमरपुर, वार्ड0 नं0- 08
05. श्री सुमिरन साह, पिता-स्व0 धनी साह - कोषाध्यक्ष सा0- रघुनाथपुर,
06. श्री रमेश मंडल, पिता-स्व0 छेदी मंडल - सह-कोषाध्यक्ष सा0- अमरपुर, वार्ड नं0- 821 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 07. श्री सर्वोत्तम कुमार शर्मा, पिता-श्री गणेश शर्मा - सदस्य सा0- गोपालपुर। 08. श्री सुबोध यादव, पिता-स्व0 चुल्लाही यादव - सदस्य सा0- अमरपुर, वार्ड नं0- 07 09. श्री लाल मोहन महतो, पिता-स्व0 जगदीश महतो - सदस्य 10. श्री सुरेश राम, पिता-स्व0 रामजी राम- सदस्य - सदस्य 11. श्री अधीक लाल मंडल, पिता-श्री गोविन्द मंडल - सदस्य सभी सा0- अमरपुर, वार्ड नं0- 08, थाना- अमरपुर, जिला- बांका।
न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री प्रमोद वन बिहारी ट्रस्ट, अमरपुर, जिला-बांका,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2024
सं0 3770--कबीरपंथी मठ, दौलतपुर चोंदी, काजीचक, बाढ़, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-682 है।
उक्त मठ के न्यासधारी के रूप में श्री रामानंद दास को मान्यता प्रदान की गयी है। महंत श्री रामानंद दास जी द्वारा पर्षद में प्रार्थना-पत्र दिया गया है कि कुछ दबंग व्यक्तियों द्वारा मठ की भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण करने का प्रयास किया जा रहा है एवं महंतजी को धमकी भी दी जाती है। इस कारण उनके द्वारा 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु दिया गया, जिसपर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा-43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए किया जाता है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-09/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए कबीरपंथी मठ, दौलतपुर चोंदी, काजीचक, बाढ़, जिला-पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीरपंथी मठ न्यास योजना, दौलतपुर चोंदी, काजीचक, बाढ़, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कबीरपंथी मठ न्यास समिति, दौलतपुर चोंदी, काजीचक, बाढ़, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोल कर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।22 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा-59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
18. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होनेवाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है और कार्य संतोषजनक पाये जानेपर न्यास समिति के कार्यकाल-विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।
1. अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़, पटना - अध्यक्ष 2. श्री नवीन कुमार पिता-स्व॰ रामेष्वर प्रसाद, गोला रोड, वार्ड- 13, बाढ़, पटना -उपाध्यक्ष 3. महंत रामानंद दास, कबीर मठ, काजीचक, वार्ड- 09, बाढ़, जिला-पटना -सचिव-सह-प्रबंधक 4. श्री विजय कुमार पिता-स्व॰ बालेष्वर प्रसाद, पंचषीलनगर, वार्ड- 8, बाढ़, पटना -सदस्य 5. श्री राजेष कुमार पिता-स्व॰ महेष प्रसाद, सलेमपुर, पक्का कुआं, वार्ड- 20, बाढ़, पटना-सदस्य 6. श्री देवेन्द्र प्रसाद पिता-रामचन्द्र यादव, ढ़ेलवा गोसाईं, वार्ड- 24, बाढ़, जिला-पटना -सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''कबीरपंथी मठ, दौलतपुर चोंदी, काजीचक, बाढ़, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2024
सं0 3772--श्री राम जानकी मंदिर (चौहट्टा ठाकुरबाड़ी), अषोक राजपथ, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-45 है। उक्त मंदिर में लगभग तीस से अधिक किरायेदार हैं। मंदिर के म्यूनिसिपल खतियान 1932-33 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्लॉट- 256, 258, 259, 260 श्री सीता रामजी भगवान के नाम से इन्द्राज है, जिसमें मनमोकिर के रूप में महंत गोविन्द दास जी के नाम का उल्लेख है। उक्त खतियान से स्पष्ट होता है कि प्लॉट- 258 में ठाकुरबाड़ी पोख्ता का उल्लेख है, जिसका वार्ड- 7, शीट- 83 अंकित है। पूर्व मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यासधारी के रूप में श्री रघुवीर दास तत्पश्चात श्री गोविन्द दास, उनके उपरांत श्री रामकिषोर दास को पर्षद द्वारा मान्यता प्रदान की गयी थी। परंतु रामकिषोर23 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 दास के विरूद्ध काफी गंभीर आरोप प्राप्त हुये, जिस पर उनसे अधिनियम की धारा- 28 (2) (h) के तहत स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाते हुये, पर्षदीय आदेष दिनांक- 26/08/2006 द्वारा न्यासधारी पद से विमुक्त कर दिया गया एवं मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा हेतु 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया।
न्यास समिति के सचिव- श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव द्वारा तीस किरायेदारों के विरूद्ध अतिक्रमण वाद बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास न्यायाधिकरण में प्रस्तुत किया गया, जो अभी विचाराधीन है। इस बीच न्यास समिति के सचिव- अरूण कुमार श्रीवास्तव के स्वर्गवास की सूचना, उनके नाती द्वारा पर्षद को दी गयी। न्यास समिति के अभाव में न्यायाधिकरण एवं अन्य विचाराधीन कई वादों में आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस कारण पर्षदीय आदेष दिनांक- 11/10/2023 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, पटना को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त करते हुये, उनसे न्यास समिति गठन हेतु स्थानीय 11 व्यक्तियों के नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी, जो अप्राप्त रही। इस बीच कार्यालय को निर्देष दिया गया की मंदिर प्रांगण में एक नोटिस चस्पा किया जाय कि उक्त मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था के उद्देष्य से जो मंदिर में योगदान देना चाहते हों, वे अपने आवेदन पत्र के साथ पर्षद में उपस्थित हों।
उपरोक्त के उपरांत पर्षद को स्थानीय जनता की ओर से तीन प्रस्ताव प्राप्त हुआ। जिस पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से एक योजना का निरूपण करते हुये निम्न न्यास समिति उपरोक्त तीनों सूचियों से किया जाता है।
समिति के सदस्यों को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र एक बैठक कर न्यायाधिकरण में अपना वकालतनामा प्रस्तुत कर कार्रवाई को आगे बढ़ायें एवं यह भी निर्देष दिया जाता है कि वर्तमान में मंदिर तथा इसके प्रांगण में जो निवास करने वाले व्यक्ति हैं, उनका विस्तृत विवरण, कि किस व्यक्ति के कब्जा में कितना कमरा है, उनके नाम आदि का उल्लेख करते हुये पर्षद में शीघ्र समर्पित करें।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-09/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर (चौहट्टा ठाकुरबाड़ी), अषोक राजपथ, जिला-पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री राम जानकी मंदिर (चौहट्टा ठाकुरबाड़ी) न्यास योजना, अषोक राजपथ, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर (चौहट्टा ठाकुरबाड़ी) न्यास समिति, अषोक राजपथ, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।24 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा।
1. अंचलाधिकारी, सदर, पटना - अध्यक्ष 2. श्री अमित कुमार राय पिता- श्री नवल किषोर (9334157487) -उपाध्यक्ष पता-नया टोला, काजीपुर, पटना- 800004 3. श्री षिवजी कुंवर (9835046968) - सचिव पता-सैदपुर, खटाल गली, कुंवर सदन, जिला- पटना। 4. श्री रत्नेष नारायण सिंह ''अधिवक्ता'' (9934927392) - सह-सचिव पता- राजेन्द्र नगर, मैला टंकी के सामने, सेंट कासिंस विद्यालय, पटना- 16 5. श्री राजेष कुमार, छाया सदन, चौधरी टोला, पटना (6200905498) - कोषाध्यक्ष 6. श्री करण कुमार पिता- श्री गणेष प्रसाद (7004504476) - सदस्य पता-बाजार समिति, बहादुरपुर, पटना- 16 7. श्री शंभूनाथ चौधरी पिता- दषई चौधरी - सदस्य पता- परमेष्वरी दयाल लेन, पो॰- महेन्द्रु, पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी मंदिर (चौहट्टा ठाकुरबाड़ी), अषोक राजपथ, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2024
सं0 3774--श्री दुर्गा मंदिर, हार्डिंग रोड, जिला-पटना, बि॰हि॰धा॰ न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के तहत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4756/24 है।
उक्त मंदिर लगभग 15 क भूमि पर अवस्थित है। मंदिर में श्री षिवजी, हनुमान जी एवं माता दुर्गा की विषाल प्रतिमाएँ स्थापित हैं। साथ ही अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमायेें भी हैं। मंदिर की व्यवस्था हेतु स्थानीय नागरिकों द्वारा एक आम सभा द्वारा दिनांक-30/10/2023 को आहुत कर 09 व्यक्तियों के नामोें का चयन कर न्यास समिति गठन हेतु प्रस्तावित किया गया है। उक्त प्रस्ताव के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति पर्षद में प्राप्त नहीं है।
उपरोक्त परिस्थिति में अधिनियम की धारा-83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा-43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से एक योजना का निरूपण करते हुये निम्न न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष हेतु गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक प्राप्त होने पर अवधि-विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-05/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग25 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 करते हुए श्री दुर्गा मंदिर, हार्डिंग रोड, जिला-पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री दुर्गा मंदिर न्यास योजना, हार्डिंग रोड, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री दुर्गा मंदिर न्यास समिति, हार्डिंग रोड, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्जकर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा-59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होनेवाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष हेतु गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक प्राप्त होने पर अवधि-विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा। 1. श्री मुकेष कु॰ सिंह पिता-स्व॰ राम पुनीत सिंह, बैक हार्डिंग रोड, पटना - अध्यक्ष 2. श्री मनोज कु॰राय पिता-स्व॰ अनिरूद्ध राय, ब॰हा॰कॉलोनी, पटना -उपाध्यक्ष 3. श्री राजेष सिंह पिता-श्री जंगबहादुर सिंह, -सचिव पता-वरूणा कॉलोनी, रामजयपाल रोड, गोला रोड, पटना26 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 4. श्री विजय कु॰ सिंह ''अधिवक्ता'' पिता-स्व॰ पषुराम सिंह -कोषाध्यक्ष
पता-103, मातेष्वरी कुटीर, आर॰पी॰एस॰ मोड़, पटना। 5. श्री रामनाथ पाठक पिता-श्री विष्णुदेव पाठक, हार्डिंग रोड, पटना -सदस्य-सह-पुजारी 6. श्रीमति बेबी देवी पिता-श्री तुंग नाथ पाठक, हार्डिंग रोड, पटना -सदस्य 7. श्री अरविंद कु॰ सिंह पिता-स्व॰ राजेष्वर नारायण राय, - -सदस्य पता-नारियल घाट, तकियापर, दानापुर, पटना। 8. श्री प्रषांत कु॰ सिंह पिता-स्व॰ रामजन्म सिंह -सदस्य पता-रामायण अपार्टमेंट, एग्जीविषन रोड, पटना। 9. श्री ललन मंडल पिता-श्री देवी मंडल, हार्डिंग रोड, पटना। -सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री दुर्गा मंदिर, हार्डिंग रोड, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 फरवरी 2024
सं0 3752--श्री षिव मंदिर, काजीबाग, नया टोला, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4362 है।
उक्त मंदिर प्लॉट- 1050, होल्डींग- 172, क्षेत्रफल- 25 डीसमिल में अवस्थित है तथा मंदिर के मुतंजिमकार देवनंदन सहाय पिता- घसीटन लाल का उल्लेख दस्तावेजों में आता है। पुर्व में कुछ दस्तावेज समर्पित कर श्री रजनीष गौतम द्वारा मंदिर के निजी होने के दावा किया गया था, परंतु इस संबंध मेें पर्याप्त साक्ष्य उनके द्वारा समर्पित नहीं किया गया तथा उनके प्रार्थना-पत्र का निरस्त किया गया। इस बीच रजनीष गौतम के निधन की सूचना उनकी पत्नी मो॰ सिम्मी गौतम ने पर्षद को दी। उनका कहना था कि उन्हें मंदिर में प्रबंधनकर्त्ता के रूप में स्थान दिया जाय, चुंकि उनके पुर्वज मंदिर के प्रबंधनकर्त्ता थे। मो॰ सिम्मी गौतम एवं स्थानीय जनता को विभिन्न तिथियों पर विस्तारपुर्वक सुना गया। तब सिम्मी गौतम द्वारा निवेदन किया गया कि मंदिर की व्यवस्था हेतु जो समिति गठित की जाय, उसमें प्रार्थी को भी स्थान दिया जाय। सुनवायी के उपरांत दिनांक- 11/04/2023 को उनसे दो अन्य नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी।
उपरोक्त के आलोक में लिखित रूप से दो अन्य सदस्यों का नाम क्रमषः श्री अमिताभ सिन्हा एवं श्री संदीप राय के नाम का प्रस्ताव दिया गया। उपरोक्त परिस्थिति उक्त मंदिर की व्यवस्था एक योजना का निरूपण करते हुये अस्थायी रूप से प्रस्तावित तीन सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया जाता है और आवष्यकता पड़ने पर भविष्य में इसमें संषोधन करने पर विचार किया जा सकता है।
न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि मंदिर के नाम से शीघ्र बैंक खाता खोला जाय। समिति के किसी भी सदस्य को मंदिर की भूमि का किसी प्रकार से बंधक, रेहन, विक्रय करने का कोई अधिकार नहीं रहेगा, जबतक की बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 44 के अन्तर्गत पर्षद से कोई पुर्व अनुमति प्राप्त कर ली जाय। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-03/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री षिव मंदिर, काजीबाग, नया टोला, जिला- पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री षिव मंदिर न्यास योजना, काजीबाग, नया टोला, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री षिव मंदिर न्यास समिति, काजीबाग, नया टोला, जिला- पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।27 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी रूप से प्रस्तावित तीन सदस्यीय न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर निर्णय लिया जायेगा और आवष्यकता पड़ने पर भविष्य में इसमें संषोधन करने पर विचार किया जा सकता है-
- अध्यक्ष
-सचिव
-कोषाध्यक्ष
1. सिम्मी गौतम पति- स्व॰ रजनीष गौतम पता- (इंदू-प्रभा) राजेंद्र नगर, महमूदी चक, देवी स्थान, फ्लैट- 281, पटना- 16 2. श्री अमिताभ सिन्हा पता- पिता- स्व॰ कमलेष्वरी प्रसाद सिन्हा, नया टोला, काजीपुर, पटना। 3. श्री संदीप राय पिता- सिद्धनाथ राय पता- नया टोला, काजीपुर, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री षिव मंदिर, काजीबाग, नया टोला, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।28 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 28 फरवरी 2024 सं0 3936--श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपोस्ट-सिकरौल, थाना-राजपुर, जिला-बक्सर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4401 है।दिनांक- 02/05/1979 को मंदिर की व्यवस्था हेतु अंचलाधिकारी को अधिनियम की धारा- 33 के तहत अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। वर्ष 2015 में पर्षद में संज्ञान में आया कि मंदिर की कुछ भूमि पावर प्लांट, चौसा में अधिगृहित की गयी, जिसमें लगभग 01 करोड़ रू॰ मुआवजा भुगतान प्राप्त करने हेतु मंदिर के पुजारी एवं रिष्तेदारों द्वारा दावा किया जा रहा है। इस मुआवजा राषि के भुगतान पर पर्षद द्वारा रोक लगायी गयी है। दिनांक- 15/01/2016 को ग्रामीणों द्वारा पुजारी रामानुज जी के विरूद्ध गंभीर आरोप, मंदिर में व्याप्त अव्यवस्था आदि के संबंध में लगाया गया है। उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। स्मार-पत्र प्रेषित किया गया, परंतु वे उपस्थित नहीं हुये। इसी बीच पर्षद को सूचना प्राप्त हुयी कि पुजारी रामानुज दासजी का स्वर्गवास वर्ष 2019 में हो गया। अतएव एक नवीन न्यास समिति के गठन का निर्णय पर्षदीय आदेष दिनांक- 17/07/2023 को लिया गया तथा स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 01/07/2023 को बैठक कर 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया। जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी को पर्षद के पत्र दिनांक- 07/08/2023 द्वारा मंतव्य की मांग की गयी। पर्षद के उक्त पत्र के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी ने पत्रांक- 717, दिनांक- 02/11/2023 उपलब्ध कराया, जिसमें प्रस्तावित नामों के साथ अंचलाधिकारी को भी जोड़ने का प्रस्ताव दिया। उपरोक्त परिस्थिति में विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये 05 वर्षों के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता है।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-11/01/24 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपोस्ट-सिकरौल, थाना-राजपुर, जिला-बक्सर के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाता है। योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- सिकरौल, थाना- राजपुर, जिला- बक्सर''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- सिकरौल, थाना- राजपुर, जिला- बक्सर''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।29 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिए किया जाता है-
1. अंचलाधिकारी, चौसा, जिला- बक्सर - अध्यक्ष 2. श्री संजय राय पिता- स्व॰ रूप नारायण राय, सिकरौल, था॰- राजपुर, बक्सर -उपाध्यक्ष 3. श्री राजीव कुमार चौबे पिता- कामता चौबे, सिकरौल, था॰- राजपुर, बक्सर- - सचिव 4. श्री विनोद कुमार राय पिता- देव नारायण राय, पो॰- डिहरी, था॰- राजपुर, बक्सर - कोषाध्यक्ष 5. श्री सुनील कुमार चौबे पिता- ललन चौबे, सिकरौल, था॰- राजपुर, बक्सर -सदस्य 6. श्री देवेन्द्र कुमार राय पिता- राम प्रताप राय, सिकरौल, था॰- राजपुर, बक्सर - सदस्य 7. श्री समीर कुमार चौबे पिता-बैकुंठनाथ चौबे, सिकरौल, था॰- राजपुर, बक्सर - सदस्य 8. श्री श्रीमन नारायण पिता- दिनेष चौबे, खजरा, था॰- मोहनियां, कैमूर (भभुआ) - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, ग्रामपोस्ट-सिकरौल, थाना- राजपुर, जिला- बक्सर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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22 फरवरी 2024
सं0 3882--बड़ी दुर्गा मंदिर, मसूद बिगहा, पोस्टथानाअंचल-बाढ़, जिला-पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-4332 है। यह मंदिर वार्ड-10, होल्डिंग-0232/72, क्षेत्रफल-15 धूर में अवस्थित है। मंदिर में 07 दुकान एवं दुकानों के उपर एक सामुदायिक भवन निर्मित है, जो शादी-विवाह एवं छोटे कार्यक्रमों में किराया पर दिया जाता है। निबंधन के उपरांत मंदिर की व्यवस्था ग्रामीणों द्वारा स्वयंभू न्यास समिति गठित कर की जाती रही, जिसका लेखा-जोखा पर्षद को नहीं उपलब्ध कराया गया। जिसे लेकर तरह-तरह की षिकायतें पर्षद को प्राप्त होती रही। दुसरी ओर अषोक दास नामक व्यक्ति ने भी स्वयं को महंत बताते हुये न्यास समिति गठत हेतु 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया। एक प्रस्ताव श्री दामोदर प्रसाद सिंह द्वारा स्वयं को संयोजक बताते हुये उपलब्ध कराया गया। दोनों सूचियों को अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ को प्रेषित कर, उसमें से 11 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव मांगा गया। चुंंकि दुर्गा पुजा निकट थी। इस कारण अनुमंडल पदाधिकारी के अपने नियंत्रण में दुर्गा पुजा का आयोजन करने एवं दोनों सूचियों में से कुछ व्यक्तियों की समिति गठित कर कार्य करने का निर्देष प्रदान किया गया। पुनः न्यास की व्यवस्था हेतु 11 सदस्यीय न्यास समिति अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ की अध्यक्षता में गठित की गयी। मंदिर की व्यवस्था हेतु दिषा-निर्देष भी जारी किये गये, परंतु न्यास समिति के गठन के उपरांत अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन नहीं किया गया। कुछ आरोप-प्रत्यारोप न्यास समिति एवं ग्रामीणों के विरूद्ध पर्षद को उपलब्ध कराया गया, जिस पर पर्षद द्वारा सुनवायी की गयी। सुनवायी के क्रम में यह तथ्य प्रकाष में आया कि गठित न्यास समिति पुर्ण रूप से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी रही। ऐसी परिस्थिति में नवीन न्यास समिति के गठन हेतु पर्षद द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ से नामों की मांग की गयी। इसके आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ ने पत्रांक- 2681, दिनांक- 07/10/2023 द्वारा 10 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया। ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 27/08/2023 को एक बैठक ग्यारह व्यक्तियों का नाम प्रस्तावित किया गया।30 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 श्री जगदीष प्रसाद का एक शपथ-पत्र समर्पित किया गया, जिसमें यह बात प्रकाष में आयी की वे मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले छक्कन साह के वंषज हैं। उन्हें भी न्यास समिति में स्थान दिया जाय। एक अन्य सूची श्री दीपक कुमार मल्लिक के हस्ताक्षर से प्राप्त हुयी, जिसमें बैठक की तिथि दिनांक- 08/10/2023 दिखायी गयी है।
उपरोक्त सभी सूचियों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से एक योजना का निरूपण करते हुये निम्न न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिये किया जाता है।
श्री रविषंकर, पुजारी पर्षद के समक्ष उपस्थित थे। पर्षद द्वारा उन्हें प्रस्ताव दिया गया कि आप समिति में रहना चाहते हैं या पुजारी के रूप में कार्य करना चाहते हैं, तो उनके द्वारा स्पष्ट कथन किया गया कि उन्हें पुजारी के रूप में मान्यता दी जाय। तदनुसार उन्हें बड़ी दुर्गा मंदिर के पुजारी के रूप में मान्यता प्रदान की जाती है तथा गठित न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि एक बैठक कर पुजारी के रूप मेंं श्री रविषंकर, पुजारी जी को मासिक मानदेय तथा पुजा-पाठ, राग-भोग हेतु राषि निर्धारित करें, जो प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में उन्हें देकर उनका पंजी पर हस्ताक्षर प्राप्त किया जायेगा और साक्ष्य के रूप में रखें।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-08/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए बड़ी दुर्गा मंदिर, मसूद बिगहा, पोस्टथानाअंचल-बाढ़, जिला- पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बड़ी दुर्गा मंदिर न्यास योजना, मसूद बिगहा, पोस्टथानाअंचल- बाढ़, जिला- पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बड़ी दुर्गा मंदिर न्यास समिति, मसूद बिगहा, पोस्टथानाअंचल- बाढ़, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।31 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर न्यास समिति के कार्यकाल विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।
1. अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़, जिला- पटना - अध्यक्ष 2. श्री उमेष कुमार पिता- स्व॰ वीरेन्द्र प्र॰, मसूद बिगहा -उपाध्यक्ष 3. श्री अभिमन्यू कुमार पिता- श्री लाल नारायण सिंह, मसूद बिगहा - सचिव 4. श्री अजय कुमार चौधरी पिता- स्व॰ जागो राम चौधरी, मसूद बिगहा - कोषाध्यक्ष 5. श्री अमरजीत कुमार उर्फ अजीत पिता- स्व॰ सियाराम सिंह - सदस्य 6. श्री मुनील कुमार पिता- स्व॰ रामचंद्र प्रसाद, मसूद बिगहा - सदस्य 7. श्री देवेन्द्र कुमार पिता- द्वारिका प्रसाद, मसूद बिगहा - सदस्य 8. श्री प्रमोद कुमार पिता-स्व॰ बनारसी दास, मसूद बिगहा - सदस्य 9. श्री साधुषरण सिंह पिता- स्व॰ चांदो सिंह, लंगरपुर, बाढ़, पटना - सदस्य 10. श्री संजय कुमार पिता- स्व॰ महावीर साव, गया चक स्टेषन, बाढ़ - सदस्य 11. श्री जगदीष प्रसाद पिता- स्व॰ बुढ़न साव, बाढ़ बाजार, पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''बड़ी दुर्गा मंदिर, मसूद बिगहा, पोस्टथानाअंचल- बाढ़, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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11 मार्च 2024
सं0 4085--कसेरा धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना-राजगीर, जिला-नालंदा,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950
(cid:2869)(cid:2869)(cid:2871)(cid:2868)
की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- है।
(cid:2869)(cid:2877)(cid:2874)(cid:2868)
उक्त मंदिर के संबंध में श्री संजय कुमार, श्री रामअवतार प्रसाद, श्री बालेष्वर प्रसाद, श्री राजेष कुमार एवं श्री अरूण कुमार द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिनांक- 22/11/2023 को दिया गया गया कि राजगीर अवस्थित ''कसेरा धर्मषाला'' जो कसेरा समाज द्वारा ही संचालित व लाभार्थ निर्मित है, जो पर्षद में निबंधित है, परंतु निबंधन के समय ''कसेरा धर्मषाला'' के स्थान पर ''ठठेरा धर्मषाला'' भुलवष या टंकण गलती के कारण अंकित हो गया है।
उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा अनुरोध किया गया है कि कसेरा धर्मषाला के नाम में सुधार किया जाय। इस संबंध में आवेदन के साथ अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा धर्मषाला प्रबंधक को प्रेषित पत्र वर्ष 2007, बिजल का बिल जो ''कसेरा धर्मषाला'' के नाम से है तथा नगर पंचायत, राजगीर की रसीद जो दिनांक- 24/06/2022 को निर्गत किया गया है तथा वर्ष 2012 में राष्ट्रीय सेवा दल के तत्वाधान मेें विद्यालय के बच्चों, युवक एवं युवतियों को ठहरने आदि संलग्न है। संचिका पर पुर्व में पर्षद के आदेष को मा॰ उच्च न्यायालय में याचिका CWJC No.- 3933/2003 प्रस्तुत कर प्रष्नगत किया गया था, उसमें भी याची के रूप में ''कसेरा धर्मषाला'', राजगीर का उल्लेख है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में कार्यालय को निर्देष दिया जाता है कि ''ठठेरा धर्मषाला'' के स्थान पर ''कसेरा धर्मषाला'' के नाम से सुधार कर प्रमाण-पत्र दिया जाय। साथ ही उपस्थित सदस्यों द्वारा दिनांक- 21/08/2023 को आम सभा दिनांक- 09/08/2023 को समाज के सभी व्यक्तियों की उपस्थिति में प्रस्ताव पारित कर 11 सदस्यों का चयन किया गया, जिसके अध्यक्ष के रूप में श्री बालेष्वर प्रसाद कसेरा, सचिव के रूप में श्री संजय कुमार एवं कोषाध्यक्ष के रूप में श्री32 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 षिव कुमार प्रसाद को नामित किया गया है। 02 महिला सदस्यों को भी स्थान दिया गया है। उक्त प्रस्ताव के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति भी नहीं प्राप्त है।
उपरोक्त परिस्थिति में प्राप्त प्रस्तावों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्यधार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा- 43 के तहत उक्त धर्मषाला की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति गठित की जाती है।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-01/02/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए कसेरा धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना- राजगीर, जिला-नालंदा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कसेरा धर्मषाला न्यास योजना, ग्रामपोस्टथाना- राजगीर, जिला- नालंदा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कसेरा धर्मषाला न्यास समिति, ग्रामपोस्टथाना- राजगीर, जिला- नालंदा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति गठित की जाती हैः-33 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 1. श्री बालेष्वर प्रसाद पिता- स्व॰ नथु साव- अध्यक्ष
2. श्री अरूण कुमार- उपाध्यक्ष 3. श्री सुदर्षन कुमार पिता- स्व॰ तुलसी साव- सचिव 4. श्री षिव कुमार पिता- स्व॰ सुन्दर साव- कोषाध्यक्ष 5. श्री संजय कुमार पिता-स्व॰ रामजी साव- सदस्य 6. श्री तुलसी प्रसाद पिता-स्व॰ राम प्रसाद साव- सदस्य 7. श्री अषोक कुमार- सदस्य 8. श्री रंजीत कुमार- सदस्य 9. श्री राजेष कुमार- सदस्य 10. श्री विजय कुमार पिता- स्व॰ जानकी साव- सदस्य 11. श्री रविन्द्र प्रसाद पिता- स्व॰ राम स्वरूप साव- सदस्य सभी निवासी-ग्रामपोस्टथाना- राजगीर, जिला- नालंदा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''कसेरा धर्मषाला, ग्रामपोस्टथाना- राजगीर, जिला- नालंदा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। उक्त अधिसूचना / आदेष माननीय सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------ 11 मार्च 2024 सं0 4069--दरिया पंथी मठ, ग्राम-हसनपुर, पो0-वाहूव, थाना-राजगीर, जिला-नालन्दा पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-3405 है। यह न्यास बैरागी साधूओं का मठ है। पर्षद के आदेष दिनांक-12.12.2013 द्वारा मठ के संचालन हेतु 03 सदस्यीय साधू की समिति जिसके अध्यक्ष, बिक्रमा दास तथा सहयोगी के रूप में लक्ष्मण दास व लालू दास थे, को मान्यता प्रदान की गयी। परन्तु कुछ वर्ष के पष्चात् तीनों साधु आपस में एक-दुसरे के विरूद्ध आरोप-प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिये। इसी बीच लक्ष्मण दास जो नेत्रहीन थे, एक महिला अहिल्या देवी को मठ लाकर रखने लगे और अपना नाम भी बदलकर विमल दासिनी रख लिया। उक्त महिला विरूद्ध नेत्रहीन साधू लक्ष्मण दास द्वारा भी उसके व्यवहार को लेकर अपनी जान का खतरा समझकर पुलिस अधीक्षक, राजगीर को प्रार्थना-पत्र दिया जिसप राजगीर थाना काण्ड संख्या-344/2020 अन्तर्गत धारा-420/341/342/307/34 में दर्ज की गयी। उक्त महिला को पर्षद द्वारा न तो कभी किसी प्रकार की कोई मान्यता दी गयी है और न उस महिला के बारे में उसके द्वारा स्वयं या उपरोक्त तीनों सदस्यों ने कोई जानकारी नहीं दी है। इसी बीच समिति के अध्यक्ष बिक्रमा दास द्वारा पर्षद में यह सूचना दी गयी कि उक्त महिला भू-माफिया से मिलकर मठ की भूमि को अवैध रूप से बिक्रय पत्र दिनांक-17. 06.2021 द्वारा मठ की भूमि का अवैध रूप से बिना किसी स्वामित्व और अधिकार के निष्पादन किया। एक अन्य बिक्रय विलेख दिनांक-7.09.2023 को राजेन्द्र प्रसाद के पक्ष में मठ की भूमि के संबंध में किया गया है। चूंकि विमला दासी न तो पर्षद द्वारा कभी नियुक्त की गयी है, न कोई मान्यता प्राप्त है, न उन्हें मठ की भूमि बेचने का कोई अधिकार है और न इस मठ की भूमि का स्वामिनी है। अतः उनके द्वारा किया गया उपरोक्त बिक्रय-पत्र या अन्य कोई बिक्रय-पत्र जो उनके द्वारा तैयार किया गया है जो प्रारम्भ से ही शुन्य, अप्रभावी अधिनियम की धारा-44 के तहत है और उस महिला का कथन है कि वह लक्ष्मण दास की षिष्या पत्नी है। जबकि लक्ष्मण दास द्वारा ही उस महिला के विरूद्ध अपने जान का खतरा, जान मारने की धमकी दी गयी, उस संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज कराया है तथा ऐसी महिला को वीरक्त साधु के मठ में रहने का न तो कोई अधिकार है और न कोई मान्यता। उपरोक्त षिकायत पर विमला दासी को पर्ष के पत्रांक-3127, दिनांक-11.12.2023 द्वारा पर्षद के समक्ष उपस्थित होने और अपने स्वामित्व के संबंध में कोई दस्तावेज दाखिल करने का निर्देष दिया और एक अन्य नोटिस उन्हें थाना के माध्यम से भेजी गयी थी। जिस संबंध में उनके द्वारा 29.12.2023 को डाक के माध्यम से पत्र भेजा गया कि विमला दासी अत्यंत सरल शांत स्वभाव की महिला है और इनका आपके न्यास पर्षद से न तो किसी प्रकार का संबंध था और आजतक नहीं है और वह बीमार रहती है। आगे उल्लेख किया की अंधे व्यक्ति को नकली महंत बनाकर लालू प्रसाद को नकली साधू बनाकर भू-माफिया और अपराधी व्यक्ति विमला दासी की निजी सम्पत्ति को हड़पने की कार्रवाई की जा रही है।जबकि उनके प्रार्थना-पत्र के साथ भूमि निजी होने के संबंध में किसी प्रकार का कोई दस्तावेज नहीं दाखिल किया है, साथ ही केवल दाखिल-खारिज केष जिसमें बिक्रेता साध्वी विमला दासी और रैयत का नाम वसंती दास का उल्लेख है। जो बिक्रयनामा दिनांक-05.10.2020 के आधार पर है। रैयती खाता का खतियान है, जो स्पष्ट करता है कि उनके स्वयं का कथन के आधार पर पर्षद द्वारा कभी उन्हें कोई मान्यता नहीं प्राप्त है और न ही किसी भूमि के वह स्वामिनी है।34 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 लक्ष्मण दास के बारे में यह जानकारी प्राप्त हुई है कि वह विमल दासी व उनके सहयोगियों द्वारा जान से मारने की धमकी के कारण मठ छोड़कर किसी अन्यत्र रह रहे है। मठ के संचालन हेतु पर्षद के आदेष दिनांक-27.10.2023 द्वारा बिक्रमा दास को 05 अन्य साधुओं के नामों की मांग की गयी थी। इस संबंध में बिक्रमा दास द्वारा दिनांक-08.11.2023 को 05 विरक्त साधुओं के नाम का प्रस्ताव दिया, साथ में उनके आधार कार्ड संलग्न किया, जिसमें से आज व्यक्तिगत रूप से बिक्रमा दास एवं अषोक दास उपस्थित भी है।
अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि, 1955 की धारा 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-01.2.2024 द्वारा ''दरियापंथी मठ, ग्राम-हसनपुर,पो0-वाहूव, थाना-राजगीर, जिला-नालन्दा'' के सम्यक् रूप से विकास, जीर्णोद्धार, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों के संरक्षण, एवं अतिक्रमण मुक्त रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है ।
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''दरियापंथी मठ, ग्राम-हसनपुर, पो0-वाहूव, थाना-राजगीर, जिला-नालन्दा, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''दरियापंथी मठ, ग्राम-हसनपुर, पो0-वाहूव, थाना-राजगीर, जिला-नालन्दा, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास जीर्णोद्धार, विकास एवं प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करना होगा। 03. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष/सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी न्यास के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
04. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
05. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 06. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी।
07. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
08. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 09. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
10. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
12. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः धर्मषाला परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए श्री विक्रमा दास द्वारा दिये गये 05 विरक्त साधुओं कीे न्यास समिति अस्थायी रूप 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है।
1. श्री बिक्रमा दास, मो0नं0-9431474160, 6205379707 - अध्यक्ष बड़ा तेलपा मठिया, छपरा, पिनकोड-841301, , 2. सन्त मिथिलेष दास - सदस्य पिता-बृजबिहारी दास, ग्राम-सुरवनिया, पो0-पचफेरा, जिला-गोपालगंज, पिनकोड- 841243. 3. सन्त अषोक दास - सदस्य द्वारा-श्री सुदामा दास, ग्रा0-मसाहा, जिला-सारण, पिनकोड-841443 4. सन्त परमहंस दास - सदस्य पिता-श्री केषव दास, ग्रा0-षिवरलपुर, पो0-खजुरी, समासुआ, जिला-गोपालगंज, पिनकोड-84150535 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. श्री रामाश्रय दास - सदस्य पिता-बांके दास, सवरूपुर, रामपुर, बलिया, उत्तर प्रदेष, पिनकोड-221712 6. श्री चन्द्रभान दास - सदस्य पिता-श्री सत्यदेव दास, ग्रा0-दगसी, विषुनपुरा,गोपालगंल,पिनकोड-841407
नोटः- 1.न्यास समिति आपस में बैठक कर सचिव और कोषाध्यक्ष का चुनाव कर इसकी सूचना पर्षद को देंगे। उपरोक्त 06 सदस्यों को ही उक्त मठ की व्यवस्था और संचालन का एक मात्र अधिकार रहेगा तथा किसी अन्य व्यक्ति या महिला द्वारा हस्तक्षेप किया जाता है तो उसके विरूद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करें, क्योंकि किसी व्यक्ति को इस मठ के संबंध में कोई मान्यता नहीं दी गयी है।
2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 मार्च 2024
सं0 4019--पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनोरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, थाना वो जिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित सर्वाधिक प्राचीन सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-05 है। पूर्व में उक्त स्थल की देख-भाल महंत राजेष्वर दास द्वारा की जाती थी, जिन्हे पर्षद द्वारा अस्थायी रूप से न्यासधारी नियुक्त किया गया था। परन्तु नियुक्ति के पष्चात् वर्ष 1967-68 से उनके द्वारा अधिनियम की धारा-59, 60, 70 का कोई पालन नहीं किया गया जाता रहा है और लगातार पत्र भेजने के पष्चात् भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। अतः पर्षद के आदेष ज्ञापांक-4968, दिनांक-28.12.1987 द्वारा उन्हें विरमित करते हुए धारा-33 के अन्तर्गत अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। तदोपरान्त अस्थायी न्यासी राजेष्वर दास द्वारा पर्षद में दिनांक-29.01.1991 को प्रार्थना-पत्र दिया कि वह नियमानुकूल रिटर्न, बजट दाखिल करने को तैयार है। मठ में कुल 12 ए0 86 डी0 जमीन है। जिसपर शुल्क निर्धारित किया जाए। जिसपर विचारोपरान्त शुल्क जमा करने पर उन्हें पुनः न्यासधारी की मान्यता पर्षद के पत्रांक-3792, दिनांक-3101.1991 द्वारा दे दी गयी तथा उनके द्वारा वर्ष 1991-92 में आय-व्यय विवरण भी दाखिल की गयी। जिसके साथ खतियान की प्रति दाखिल की गयी, जिसमें खाता संख्या-1280 के 15 खेसराओं पर स्वामी के रूप में श्री राम जानकी जी जन्मभूमि स्थान के नाम का इन्द्राज तथा महंत के रूप में राम खेलावन दास जाती-वैष्णव का उल्लेख है। एक अन्य खतियान खाता संख्या-1277 खेसरा नं0-5177 पर भी रैयत के रूप में श्री श्री 108 राम जानकी जी एरिया-94 डी0 थाना नं0-260 एवं खाता संख्या-1278 की 06 खेसराओं जिका कुल रकबा 1.55 ए0 भी रैयत के रूप में रामजानकी जन्म स्थान एवं खाता संख्या-1279 के 04 खेसरा जिसका कुल रकबा 1.02 ए0 भूमि है, जिसमें भी रैयत के रूप में श्री हनुमान जी सेवायत रामलखन दास चेला-रघुनंदन दास का उल्लेख दिखलाया गया है तथा संचिका पर पर्षद के निरीक्षक द्वारा की गयी स्थल निरीक्षण रिपोर्ट दिनांक-28.07.1995 भी उपलब्ध है, जिसमें उल्लेख है कि निरीक्षण के समय महंत कौषल किषोर दास द्वारा स्वयं को न्यासधारी के रूप में बतलाया गया तथा मन्दिर में 4.96 ए0 जमीन का उल्लेख किया। आगे यह सूचित किया गया कि जमीन में सरकार द्वारा पर्यटक भवन और पार्क बना लिया गया है, जिससे मन्दिर की व्यवस्था चलाना मुष्किल हो गया है और उनके द्वारा बतलाया गया कि पूर्व महंत रामखेलावन दास की मृत्यु के पष्चात स्व0 राजेष्वर दास महंथ थे और पूजा-पाठ, राग-भोग व्यवस्था करते थे और वर्त्तमान में वह इस मन्दिर की व्यवस्था कर रहे है तथा निरीक्षण के समय निबंधित सेवायतनामा दिनांक-24.01.1990 की फोटोप्रति दी गयी, जिसमें पूर्व न्यासधारी रामेष्वर दास द्वारा कौषल किषोर दास को अपना चेला के रूप में मन्दिर की व्यवस्था हेतु सेवायत नियुक्त किया गया, जिसमें उल्लेख है कि लेख्यकारी काफी बुजुर्ग हो गये है। उनसे अब पूजा-पाठ, राग-भोग नहीं हो पाता है। इसलिए अपना चेला कौषल किषोर के पक्ष में विलेख तैयार किया है कि उनके स्वर्गवास के पष्चात् श्री राम जानकी जी व लक्ष्मण जी आदि की पूजा-पाठ ढंग से हो, इसलिए सेवायत नियुक्त करते है और जो सेवायत का उन्हें अधिकार था वही अधिकार कौषल किषोर दास को रहेगा और उन्हें भी अपना चेला बनाने का अधिकार रहेगा। इस प्रकार हमेषा जबतक पृथ्वी कायम रहेगा यह सिलसिला सदा के लिए कायम रहेगा। कौषल किषोर द्वारा दिनांक-30.11.2005 को उक्त सेवायतनामा की प्रति दाखिल करते हुए आय-व्यय विवरण भी दाखिल की गयी और उसी समय से वह न्यासी के रूप में मन्दिर की व्यवस्था कर रहे है। परन्तु उनके द्वारा जो आय-व्यय दाखिल की जाती रही है, उसमें भूमि को अलग-अलग दिखलाया गया है। वर्ष 2003 से 06 तक की विवरणी में 09 ए0 जबकि निरीक्षण के समय उनके द्वारा 04 ए0 जमीन बतलायी गयी थी। तथा पर्षद द्वारा मठ की सम्पुर्ण भूमि का स्पष्ट विवरण की मांग करने पर उनके द्वारा दिनांक-21.11.2006 को भूमि का विस्तृत विवरण दाखिल करते हुए थाना नं0-260 का खाता संख्या-1280, 1278, 1277, 1289 का कुल एरिया 13.15 ए0 भूमि का उल्लेख किया है। जो श्री राम जानकी व हनुमान36 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 जी के नाम से रैयत के रूप में इन्द्राज है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि खाता संख्या-1280 के खेसरा सं0-5241 पर धर्मषाला, गायत्री मन्दिर खेसरा सं0-5211 पर सीताकुण्ड खेसरा सं0-5212 पर समाधी खेसरा सं0-1214 पर षिव स्थान तथा खाता संख्या-1278 के खेसरा सं0-5218 पर मन्दिर जानकी जी भूमि किस्म के रूप में है। उक्त स्थल के विकास हेतु सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाओं हेतु लगभग 167 करोड़ रुपये स्वीकृति की गयी। जिसकी सूचना पर्षद को जिला पदाधिकारी के पत्र दिनांक-01 फरवरी, 2007 द्वारा दी गयी। जबकि इसके पूर्व ही एक स्वयं-भू समिति द्वारा माँ जानकी जन्मभूमि जीर्णोद्धार एवं अन्तराष्ट्रीय स्थल विकास समिति न्यास, सीतामढ़ी नामक संस्था का गठन कर जिला निबंधन कार्यालय में निबंधन करा लिया गया, जिसमें 09 व्यक्तियों को सदस्य के रूप में रखा गया तथा 05 व्यक्तियों को (संरक्षक, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के रूप में भी रखा गया और उक्त दस्तावेज के कंडिका-2 माँ जानकी जन्मभूमि मन्दिर की सारी सम्पत्ति को उस न्यास में रखे जाने का उल्लेख किया गया। जबकि इस संबंध में किसी प्रकार की कोई मान्यता पर्षद के द्वारा कभी नहीं ली गयी। इस संबंध में पर्षद द्वारा जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी को पत्रांक-3783, दिनांक-15.02.2007 द्वारा पत्र लिखकर स्पष्ट किया गया कि महंत कौषल किषोर दास मन्दिर के न्यासधारी है और बिना पर्षद की अनुमति के उन्हें सम्पत्ति को संक्रमण करने या ट्र्रस्ट डीड बनाने का अधिकार नहीं है। आगे उल्लेख किया गया कि विकास संबंधी जो योजनाएँ बतलायी गयी, उनके क्रियान्वयन के लिए मन्दिर के भूखण्ड का स्थानांतरण नहीं किया जाता है तो पर्षद को कोई आपत्ति नहीं है और सरकारी कोष से जो विकास कार्य किया जाता है, वह स्वागत योग्य है तथा मार्केट कम्पलेक्स के निर्माण के प्रस्ताव को अस्वीकृत किया गया। जिसमें स्पष्ट किया गया कि यदि कोई आवष्यकता होगी तो न्यास समिति स्वयं बनायेगी। इसी बीच महंत कौषल किषोर दास द्वारा पर्षद में दिनांक-03.03.2007 को प्रार्थना-पत्र दिया गया कि दिनांक-10. 12.2004 को जो ट्र्रस्टनामा बनाया गया है, वह तत्कालीन जिला पदाधिकारी के द्वारा दबाब देकर मुझसे बना लिया गया है, जो नाजाएज एवं गलत है और उक्त विलेख में बनायी गयी नियमावली के संबंध में आरोप लगाया गया कि समिति में काफी प्रभावषील सदस्यगण है, उसके सामने वह कुछ नहीं बोल पा रहे है और उक्त प्रस्तावित व्यक्ति के द्वारा एक मकाड़जाल रचा गया है। अंत में प्रार्थना की कि या उक्त मन्दिर पर्षद के अधीन न्यास है तथा अलग से किसी व्यक्ति के द्वारा न्यास गठन करने का बिना पर्षद की अनुमति के उसे अधिकार नहीं है। लेकिन उक्त लोगों के द्वारा हस्तक्षेप जारी है। महंत जी के उपरोकत पत्र के संबंध में जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी को पत्र लिखा गया कि वर्ष 2004 में बनाया गया ट्र्रस्टीनामा नाजाएज व गलत है तथा कुछ स्थानीय लोगों द्वारा भी समिति उक्त स्वयं-भू समिति के विरूद्ध षिकायत की गयी और उक्त समिति को कभी पर्षद द्वारा भी कभी मान्यता नहीं दी गयी है। विवाद होने पर पर्षद के निरीक्षक द्वारा स्थल निरीक्षण आदेष दिनांक-09.06.2010 के आलोक में दिनांक-15.06.2010 को किया गया। जिसमें यह रिपोर्ट किया गया कि मन्दिर परिसर में दो धर्मषाला है। एक धर्मषाला 30-40 वर्ष पुराना है तथा दुसरा 6-7 वर्ष पूर्व बनाया गया है तथा मन्दिर के सटे उत्तर दो मंजिला यात्री निवास तथा मन्दिर परिसर है। आगे गेट के पास 20-22 छोटी-बड़ी दुकाने मुख्य मार्ग पर है। दो दानपात्र है। महंत कौषल किषोर दास द्वारा पूजा-पाठ, राग-भोग किया जाता है। आय का स्त्रोंत दान, धर्मषाला का किराया, दुकान किराया, मेला, गाड़ी पार्किग व अन्य स्त्रोंतों से है। खेती और दान पात्र पर महंत जी का नियंत्रण है और स्वयं-भू समिति द्वारा 02 व्यक्ति अनील कुमार और धनुषधारी महतो को मैनेजर बनाया गया है, जो अन्य कार्य करते है। महंत जी द्वारा आरोप लगाया गया कि दिनांक-17.03.2007 को न कोई बैठक हुआ और न कोई दावा हुआ। ट्र्रस्टीनामा दिनांक-10.02.2004 अनिबंधित है, तत्कालीन जिला पदाधिकारी अरूण भूषण द्वारा दबाब बनाकर उनका हस्ताक्षर कराया गया है। समिति की कभी कोई बैठक नहीं होती है, न महंत जी को बुलाया जाता है और उनके द्वारा 05 साधु-संतो के नामों का उल्लेख करते हुए जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में प्रस्तावित नामों की समिति बनाये जाने का अनुरोध किया। उपरोक्त रिपोर्ट के उपरान्त पर्षद के पत्र दिनांक-15.07.2010 द्वारा ट्रस्टीनामा के आधार पर गठित न्यास समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखा गया कि आपके द्वारा बनाया/गठित ट्र्रस्टीनामा अवैध है, यथाषीघ्र उसे रद्द कराये, क्योंकि सोसायटी रजिस्टे्र्रषन एक्ट में मन्दिर का निबंधन नहीं किया जाता है और आपकी समिति द्वारा मन्दिर में लगे दान पात्र आदि पर कब्जा जारी है। अन्य आय पर भी आधिपत्य किया गया है। उसे शीघ्र हटा लें और आप स्वयं सेवानिवृत प्रषासनिक पदाधिकारी है, ऐसे दस्तावेज आपके द्वारा बनाया जाना शोभा नहीं देता है। महंथ कौषल किषोर दास द्वारा नियमित रूप से अपने जो खेती दुकान से आय थी उसका विवरण दाखिल की जाती रही है और गठित न्यास समिति के अवैध कार्य की भी लगातार षिकायत की जा रही है। इस संबंध में पुनः उक्त ट्रस्टीनामा के आधार पर नियुक्त अध्यक्ष को पत्र दिनांक-19.04.2012 को लिखा गया। तत्कालीन अध्यक्ष (सेवानिवृत्त, जिला पदाधिकारी) द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक-21.05.2012 को दाखिल किया गया, जिसमें उल्लेख किया कि न्यास समिति ने दिनांक-01.09.2010 को वर्ष 2004 से 2010 तक की आय-व्यय विवरणी पर्षद में जमा कर दी है और सार्वजनिक न्यास की सम्पत्ति पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। आगे उल्लेख किया कि पर्यटन भवन लीज पर दिया गया है, उसे थोड़ी सी आय होती है। वर्त्तमान में समिति के खाते में 13 लाख रुपये जमा है। मन्दिर की साफ-सफाई जेनरेटर आदि की व्यवस्था समिति द्वारा की जाती है और न्यास की सम्पत्ति से कोई लेना-देना समिति का नहीं है। उपरोक्त सभी तथ्यों पर विचारोपरान्त पर्षद की अधिसूचना दिनांक-01.11.2012 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन श्री मिहिर सिंह, आयुक्त तिरहुत प्रमण्डल की अध्यक्षता में किया गया। इसी बीच दिनांक-12.04.2013 को तत्कालीन माननीय मंत्री पर्यटन विभाग की अध्यक्षता व स्वयं-भू समिति ने एक बैठक कर मन्दिर के विकास के संबंध में कुछ कार्य किये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया और यह भी प्रस्ताव लिया गया कि पर्यटन भवन यात्री निवास से प्राप्त आय का37 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 40 प्रतिषत एवं 10 प्रतिषत पुजारी को देय होगा तथा केयर टेकर को 2 प्रतिषत का भुगतान किया जायेगा। परन्तु पुजारी जी को कभी कोई भुगतान नहीं किया गया न बैठक की गई न पर्षद में कभी आय-व्यय विवरण अन्र्तगत धारा-59, 60, एवं 70 का पालन किया गया। इसी बीच महंत कौषल किषोर दास द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में 10098/13 दाखिल की गयी। (ट्र्रस्टीनामा द्वारा गठित न्यास समिति को प्रष्नगत किया गया था) और चूंकि पर्षद द्वारा उक्त समिति के स्थान पर एक नयी समिति का गठन किया जा चुका था। इसलिए वह याचिका दिनांक-28.07.2015 को नोट प्रेस के आधार पर निरस्त की गयी। पुनः महंत कौषल किषोर दास द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका सी0 डब्लु0 जे0 सी0 संख्या-22037/2019 दाखिल किया गया। जिसमें उल्लेख किया गया कि खाता संख्या-1276 का खेसरा सं0-5209, 5223 महंत रामखेलावन दास के नाम इन्द्राज है और उक्त भूमि पर टुरिज्म विभाग के द्वारा बिना पर्षद की अनुमति से निर्माण किया जा रहा है। जबकि उक्त मन्दिर पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है। जिसपर सुनवाई उपरान्त माननीय न्यायालय ने याची महंत को निर्देष दिया कि पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर अधिनियम की धारा 43 के तहत अभ्यावेदन देने के लिए स्वतंत्र है। आगे निर्देष दिया कि यदि प्रार्थी द्वारा कोई अभ्यावेदन दाखिल किया जाता है तो 08 सप्ताह के अन्दर उसका निस्तारण करें। जिस पर सभी पक्षों को नोटिस और उनके द्वारा दाखिल प्रत्योत्तर, स्पष्टीकरण आदि पर अंतिम रूप से सुनवाई दिनांक-05.01.2021 को की गयी। जिसमें स्वयं-भू कमिटी के अध्यक्ष द्वारा यह स्वीकार किया कि उसकी व्यवस्था दो केयर टेकर द्वारा की जाती है। एक केयर टेकर श्री अनील कुमार है जो उपस्थित थे और सुनवाई में यह पाया गया कि पर्यटन विभाग द्वारा दो भवन का निर्माण किया है, जिसे न तो पर्षद से मान्यता ली गयी है, न कोई सूचना दी गयी है और इससे होने वाली आय अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा संधारित की जाती है तथा पर्यटन विभाग द्वारा सीता पृच्छागृह का निर्माण किया गया। जिसकी आय को भी अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा संग्रहित किया जाता है। जिला विकास योजना द्वारा एक गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया, उसकी आय जिला विकास पदाधिकारी द्वारा अपने पास रखा जाता है। रीगा चीनी मील द्वारा एक गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया है, जिसकी राषि को स्वयं-भू समिति द्वारा अपने पास रखा जाता है और उपरोक्त आय का किसी प्रकार का कोई आय-व्यय विवरण, बजट, पर्षद शुल्क अधिनियम की धारा 59, 60, 70 के तहत कभी जमा नहीं किया गया है। केयर टेकर अनील कुमार द्वारा पर्षद के संज्ञान में लाया गया कि चंदा से प्राप्त 13,28,364/- रुपये प्राप्त हुआ था, जिसमें से लगभग 14 लाख 50 हजार रुपये खर्च किया गया है। परन्तु आय खर्च की किसी प्रकार की न तो कोई रजिस्टर है और न कोई रसीद और उक्त अलग-अलग संस्था के द्वारा 03 खाता स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया तथा ईलाहाबाद बैंक में खोला गया है तथा सभी स्वयं-भू समिति जो विभिन्न प्रकार के आय को अपने पास रखते थे, अतः उक्त सभी व्यक्तियों से पिछले 05 वर्षो की आय-व्यय विवरण, पासबुक आदि की मांग करते हुए, सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देष दिया गया। पुनः दिनांक-24.03.2021 को सुनवाई की गयी। जिसमें स्वयं-भू न्यास समिति के सचिव डॉ0 पी0 एन0 सिंह, पर्यटन विभाग के कनीय अभियंता देवेन्द्र मिश्र तथा महंत कौषल किषोर दस तथा अनुमण्डल पदाधिकारी उपस्थित थें और सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि उक्त मन्दिर की सम्पत्ति पर बने भवनों के लिए अलग-अलग समिति बनाकर अलग-अलग व्यक्तियों के द्वारा राषि एकत्रित की जा रही है। जिसका कभी किसी प्रकार से कोई बजट, विवरण, शुल्क की न तो पर्षद में जानकारी दी गयी है, न ही जमा किया गया और लगभग 04 से अधिक बैंक में खाता खोलकर अलग-अलग समिति द्वारा खोलकर चलाया जा रहा था। जो स्पष्ट करता था कि उक्त मन्दिर के प्रांगण में स्थित भवनों से होने वाली आय में न तो किसी प्रकार की कोई पारदर्षिता थी और न ही माननीय मंत्री की अध्यक्षता में जो शर्त निर्धारित की गयी थी, उसका कभी पालन किया गया। नहीं न्यासधारी महंत कौषल किषोर को कोई भुगतान शर्तानुसार किया जाता है। अतः सभी पक्षों की सहमति से कार्यरत सभी समिति को समाप्त कर पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक 834, दिनांक 17.06. 2021 द्वारा एक 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया गया। जिसमें महंत जी को कार्यकारी अध्यक्ष तथा अपर समाहर्त्ता, राजस्व को अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी को सचिव के रूप में नामित किया गया है और यह स्पष्ट निर्देष दिया गया कि सभी खाता को बंद करके एक खाता खोला जाए और सभी राषि उसमें जमा की जाए और मन्दिर के प्रांगण में पार्किंग, दुकान, पोखरा तथा विभिन्न भवनों से जो आय होती है, उन सब की आय-व्यय विवरण बजट प्रतिवर्ष पर्षद में उपस्थापित करेंगे तथा समिति आपस में बैठक करके दो अन्य नामों की समिति में रखने हेतु प्रस्ताव कर सकती है, परन्तु पर्षद द्वारा दिये गये आदेष दिनांक-05.01.2021 एवं 24.03.2021 के संबंध में कोई संतोषजनक कार्यवाई नहीं की गयी, न उसकी जानकारी पर्षद को दी गयी। अतः पर्षद द्वारा पुनः 29.09.2023 को जिला पदाधिकारी को नये सिरे से न्यास समिति गठन करने के संबंध में नामों की मांग की गयी, क्योंकि वर्ष 2021 में गठित न्यास समिति पर्षद के आदेष का न तो पालन किया गया और न कार्य पुर्ण रूप से असंतोषजनक रहा है, परन्तु जिला पदाधिकारी के यहाँ से किसी प्रकार की कोई सूचना पर्षद को नहीं दी गयी, न्यास समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।
इसी बीच पर्षद के माननीय सदस्य द्वारा पर्षद को संज्ञान में लाया गया कि उक्त मन्दिर की भूमि पर राज्य सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार के विकास योजना किये जाने के संबंध में लगभग 72 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गयी है। अतः उनका प्रस्ताव है कि उक्त योजना का नियमपूर्वक पालन करने हेतु सर्वप्रथम नयी न्यास समिति का गठन किया जाए और उनके द्वारा कुछ नामों का भी प्रस्ताव समिति गठन हेतु दिया गया। जिसपर पर्षद के एक अन्य सदस्य महंत शुकदेव दास, बगही मठ, सीतामढ़ी द्वारा भी राम जानकी पुनौरा धाम के महंत कौषल किषोर दास न्यासधारी/कार्यवाहक अध्यक्ष से सम्पर्क किया गया। तद्नुसार पर्षद के माननीय दो सदस्य एवं मठ के महंत कौषल किषोर दास द्वारा वार्ता, विचारोपरान्त38 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 निम्न न्यास समिति के गठन किये जाने का प्रस्ताव दिया गया। चूंकि पर्षद द्वारा वर्ष 2021 में गठित न्यास समिति पर्षद द्वारा दिये गये निर्देषों का पालन करने में पुर्ण रूप से विफल रही है।
अतः उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।
उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनोरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, थाना वो जिला-सीतामढ़ी'' की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के आदेष दिनांक-02.09.2022 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनोरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, थाना वो जिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनोरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, थाना वो जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 428 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।39 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतः पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नांकित न्यास समिति का गठन पाँच वर्ष के लिए की जाती है :-
1. महंथ कौषल किषोर दास - पदेन अध्यक्ष 2. न्यायमूर्त्ति श्री धरनीधर झा (से0 नि0) - कार्यवाहक अध्यक्ष 3. न्यायमूर्त्ति श्री प्रभात कुमार झा - उपाध्यक्ष 4. महावीर मन्दिर द्वारा नामित सदस्य - उपाध्यक्ष 5. जिला पदाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी - सचिव 6. प्रो0 उमेष चन्द्र झा - सह-सचिव 7. श्री मनमोहन कौषिक - कोषाध्यक्ष 8. श्री मुकेष कुमार - सदस्य 9. श्री रामषंकर शास्त्री - सदस्य 10. श्री रघुनाथ प्रसाद - सदस्य 11. श्री श्रवण कुमार - सदस्य न्यास समिति शीघ्र एक बैठक करके जो सरकार के द्वारा विकास संबंधी योजना बनायी गयी है, उस संबंध में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदनार्थ शीघ्र भेजेगी तथा गठन के पष्चात् से उक्त मन्दिर के प्रांगण में स्थित सभी प्रकार के भवन पर पुर्ण रूप से व्यवस्था, प्रबंधन का अधिकार वर्त्तमान न्यास समिति का रहेगा और मन्दिर स्थित दानपात्र व दुकान तथा खेती की भूमि से होने वाली आय महंत जी के व्यवस्था में रहेगी, जिसका पूर्व की भांति विवरणी देगें। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि पुनोरा धाम मंदिर) ग्राम-पुनौरा, थाना वो जिला-सीतामढ़ी) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। नोटः-यह अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------ 9 नवम्बर 2023 सं0 2858--बाबा भुनेष्वर नाथ मंदिर, देकुली धाम, ग्राम-देकुली धर्मपुर, डाकघर-कमरौली, थाना-पिपराही, जिला- षिवहर पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-4737/2023 है। न्यास के निबंधन किये जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी, षिवहर के पत्रांक-1473 दिनांक-22.09.2023 द्वारा कुछ ग्रामीणों के हस्ताक्षर तथा उक्त मंदिर के भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेख एवं मंदिर व उसकी भूमि का प्रबंधन/व्यवस्था कर रहें भारती परिवार के सदस्यों का सहमति पत्र जिसपर उस परिवार के लगभग 19 व्यक्तियों के हस्ताक्षर तथा अंचल अधिकारी के प्रतिवेदन पत्रांक-1243 दिनांक-20.09.2023, भूमि से संबंधित मैप तथा 15 फोटोग्राफ संलग्न करते हुए दाखिल किये गये। दिनांक-27.09.2023 को जिला पदाधिकारी, षिवहर का पत्रांक-1491 दिनांक-26.09.2023 के साथ राजस्व अभिलेखों में लक्ष्मी भारती, वगैरह इन्द्राज है एवं उनके वषंजो द्वारा तैयार एम0ओ0यू0 दाखिल किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि आर0एस0खाता सं0-770, आर0एस0 प्लॉट नं0-4734 कुल एरिया-92 डी0 है, पर भगवान षिवजी, श्री गणेषजी एवं पार्वती माता का मंदिर है, जिसे पर्षद से निबंधित किये जाने की प्रार्थना की गयी। साथ ही उक्त एम0ओ0यू0 में मंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भी दिया गया है। उक्त के संबंध में दिनांक-27.09.2023 को श्री सुरेष चन्द्र भारती, श्री संदीप भारती, श्री राजन भारती, श्री संजय भारती एवं अनुमंडल पदाधिकारी, षिवहर पर्षद के समक्ष उपस्थित हुए। पर्षद को प्राप्त उपरोक्त दस्तावेजों तथा संलग्न फोटोग्राफ से यह स्पष्ट होता है कि एक विषाल षिवजी गुम्बजनुमा मंदिर में विराजमान है, जिसमें उक्त जन द्वारा चढ़ाये गये सैकड़ों की संख्या धातु के घंटे लगे है, बाहर प्रांगण में नंदी की मूर्ति है, जिसमें कुछ महिलायें पूजा कर रहीहैं तथा भीड़ को नियंत्रित करने हेतु पाईप की बैरेकेटिंग है। कुछ फोटोग्राफ में सैकड़ों की संख्या में भक्त, दर्षनार्थी मंदिर के प्रांगण में मौजूद है। चूंकि सभी पक्षों की सहमति है, इस मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित कर प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति का गठन किया जाए, जिससे की मंदिर का विकास किया जा सके। मंदिर के इतिहास के संबंध में उपस्थित भारती परिवार का कथन है कि किवदंती के अनुसार मंदिर की स्थापना परषुराम जी के द्वारा की गयी थी, जो सैकड़ो वर्ष पुराना है। पक्षों द्वारा दाखिल एम0ओ0यू0 में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त मंदिर और उसके प्रांगण तथा व्यवस्था से होने वाली आय का 40 प्रतिषत भारती परिवार के सदस्य प्राप्त करने के हकदार होंगे और 60 प्रतिषत आय मंदिर के राग-भोग, पूजा-पाठ, वार्षिक उत्सव, जीर्णोद्धार व बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के तहत शुल्क आदि के संबंध में खर्च की जा सकेगी।40 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उक्त मंदिर के प्रबंधन हेतु न्यास समिति बनाये जाने के जिला पदाधिकारी, षिवहर का पत्रांक-1491 दिनांक-26.09.
2023 के साथ एम0ओ0यू0 दाखिल किया गया, जिसमें मंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भी दिया गया हैदिनांक-27.09.2023 को पर्षद को प्राप्त हुआ और सभी का चरित्र सत्यापन पुलिस अधीक्षक के कार्यालय, षिवहर से प्राप्त हो चुका है। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-06.10.23 द्वारा ''बाबा भुनेष्वर नाथ मंदिर (देकुली धाम), ग्राम-देकुली धर्मपुर, पो0-कमरौली, थानाअंचल-पिपराही, जिला-षिवहर''के सम्यक् रूप से राग-भोग, पूजा-पाठ, उसकी आय का प्रबंधन एवं सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा भुनेष्वर नाथ मंदिर (देकुली धाम), ग्राम-देकुली धर्मपुर, पो0-कमरौली, थानाअंचल-पिपराही, जिला-षिवहर,न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बाबा भुनेष्वर नाथ मंदिर (देकुली धाम), ग्राम-देकुली धर्मपुर, पो0-कमरौली, थानाअंचल-पिपराही, जिला-षिवहर, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
03. मंदिर और उसके प्रांगण तथा व्यवस्था से होने वाली आय का 40 प्रतिषत भारती परिवार के सदस्य प्राप्त करने के हकदार होंगे और 60 प्रतिषत आय से मंदिर के राग-भोग, पूजा-पाठ, वार्षिक उत्सव, जीर्णोद्धार व बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के तहत शुल्क आदि के संबंध में खर्च की जा सकेगी (एम0ओ0यू0 के अनुसार) । 04 न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और किराये आदि मद से प्राप्त सभी प्रकार की राषि (न्यास की समग्र आय) को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।
05. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिवएवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी मंदिर के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
06. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
07. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 08. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद कोप्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
09. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
10. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 11. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
12. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
13. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
14. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की यास समितिका गठन 05 वर्ष के लिए किया जाता है :-
41 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 202401. अनुमंडल पदाधिकारी, षिवहर - पदेन अध्यक्ष
02. श्री सुरेष चन्द्र भारती, पिता-स्व0 रामजनम भारती - कार्यवाहक अध्यक्ष 03. श्री अनिल कुमार भारती, पिता-श्री सुभाष चन्द्र भारती - उपाध्यक्ष 04. श्री संदीप भारती, पिता-श्री योगेन्द्र भारती - सचिव 05. श्री अमरीष कुमार, पिता-श्री प्रकाष चन्द्र भारती - कोषाध्यक्ष 06. श्री संजय भारती, पिता-श्री हरिनारायण भारती - सदस्य 07. श्री पारस नाथ भारती, पिता-श्री शंकर भारती - सदस्य 08. श्री राजन भारती, पिता-श्री शंभू भारती - सदस्य 09. श्री साहिल भारती, पिता-श्री उमेष भारती - सदस्य 10. श्री देवेन्द्र भारती, पिता-श्री रामचन्द्र भारती - सदस्य 11. श्री पवन कुमार भारती, पिता-स्व0 भोला भारती - सदस्य सभी ग्राम- देकुली धर्मपुर, डाकघर-कमरौली, थाना-पिपराही, जिला-षिवहर, पिनकोड-843329. मो0 नं0-7903987237।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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7 नवम्बर 2023
सं0 2854--श्री श्री 108 मनोहर दास का मठ, मोहल्लापो0अंचल-बैरगनिया, जिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3933 है।
उक्त न्यास के निबंधन के पश्चात श्री किषोरी दास द्वारा निजी होने का दावा किया गया, जिससे कई तिथियों पर दोनों पक्षों को सुनने के उपरान्त तथा पर्षद के निरीक्षक द्वारा निरक्षण रिपोर्ट पर विचार करते हुए तथा दिनांक 23.05.2011 को सुनवाई के दौरान निजी का दावा करने वाले की किषोरी दास द्वारा स्वयं उपस्थित होकर मंदिर को सार्वजनिक का कथन किया गया। अतः उनके दावे को निरस्त करते हुए पर्षद के आदेष दिनांक 23.05.2011 द्वारा इसे पुनः सार्वजनिक घोषित किया गया और उसके संचालन हेतु स्थानीय नागरिकों से मंतव्य की मांग की गयी और जो प्राईवेट स्कूल मंदिर की उक्त भूमि पर चल रहा था, उसे भी निरस्त किया गया, परन्तु समय-सीमा के अन्तर्गत कोई मंतव्य प्राप्त होने पर उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अनुमंडल पदाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु नामों की मांग की गयी और उस आलोक में स्मार-पत्र भी भेजा जाता रहा, परन्तु कोई प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुआ।
ग्रामीण, श्री दीपक कुमार द्वारा एक लिखित षिकायत की गयी कि मंदिर के 10 ए0 भूमि पर लगभग 2.5 एकड़ भूमि में तालाब है और 05 एकड़ में खेती की भूमि है और 02 क0 भूमि अवैध रूप से दीनानाथ राजगढ़िया तथा राम जानकी राजगढ़िया द्वारा स्कूल अभी भी चलाया जा रहा है और उक्त बात की पुष्टि, स्थल निरीक्षक के समय भी ग्रामीणों द्वारा निरीक्षक को की गयी, जैसा कि रिपोर्ट में उल्लेख है तथा मंदिर की लगभग 03 डी0 भूमि जो अब्बाज अंसारी द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है, जिस पर गाँव की पंचायत ने उक्त 03 डी0 भूमि के स्थान पर 09 डी0 जमीन तथा कुछ राषि भुगतान करने का निर्देष अब्बास अंसारी को दिया और अब्बास अंसारी द्वारा 09 डी0 जमीन मंदिर को दिया गया, परन्तु उसे राम जानकी राजगढ़िया द्वारा कब्जा कर विक्रय कर दिया गया और उक्त पुजारी किषोरी दास द्वारा पर्षद के समक्ष कभी भी किसी प्रकार की कोई आय-व्यय विवरणी, बजट, शुल्क नहीं जमा किया गया।
उक्त ह0 वाद सं0-73/89 वादी विरूद्ध निर्णित हुआ और उपरोक्त अपील में भी मो0 अब्बास अंसारी को केवल खेसरा सं0-656 की 01 डी0 जमीन पर उनका स्वामित्व घोषित किया गया और खेसरा सं0-656 का 06 डी0 जमीन पर श्री श्री 108 बाबा मनोहर दास का स्वामित्व और कब्जा घोषित किया गया। संचिका पर उपलब्ध ह0 अपील 06/83 में उपरोक्त निर्णय दिनांक 16.08.2000 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि बच्चा सिंह व अन्य द्वारा सी0एस0 प्लॉट नं0-1031 पर अपना दावा किया था, जिस पर अपीलीय न्यायालय ने उनके दावे को निरस्त करते हुए उक्त खेसरा 103 में जो पोखड़ है, श्री श्री 108 बाबा मनोहर दास की सम्पत्ति घोषित की गयी और किषोरी दास द्वारा यह स्वीकार किया गया कि वह तालाब और मंदिर आदि की भूमि पर बंदोबस्ती करते है,ं परन्तु उनके द्वारा अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 का पालन आज तक नहीं किया गया। अतः पर्षद द्वारा न्यास समिति बनाये जाने का निर्णय लिया गया जो पूर्व से ही वर्ष 2013 से चली आ रही है। पर्षद के विभिन्न पत्रों के आलोक में अंचल अधिकारी के द्वारा अपने ज्ञापांक 15, दिनांक 15.07.2023 द्वारा 10 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति बनाये जाने हेतु दिया गया।
अतः उक्त मामला को और अधिक लंबित रखना उचित नहीं है, चूंकि न्यास समिति गठन नहीं होने के कारण इसकी प्रक्रिया वर्ष 2011 से चली आ रही है और मंदिर उसकी भूमि की व्यवस्था अस्त-व्यस्त है। अतएव दोनों सूची में से एक न्यास समिति का गठन उचित प्रतीत होता है42 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री श्री 108 मनोहर दास का मठ, मोहल्लापो0अंचल-बैरगनिया, जिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के आदेष दिनांक-13. 09.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 मनोहर दास का मठ, मोहल्लापो0अंचल-बैरगनिया, जिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 मनोहर दास का मठ, मोहल्लापो0अंचल-बैरगनिया, जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी। अतः उपरोक्त दोनों प्रस्तावित सूची में से मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपन करते हुए प्रस्तावित नामों पर विचार करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है। न्यास समिति निम्न प्रकार हैं :-
43 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 20241. अंचल अधिकारी, बैरगनिया, - अध्यक्ष
2. श्री राजहरण प्रसाद स्वर्णकार पिता वासदेव साह - उपाध्यक्ष 3. श्री संतोष साह पिता स्व0 षिवषंकर साह - सचिव ़ 4. श्री बबलू प्रसाद पिता स्व0 सोनेलाल साह - कोषाध्यक्ष 5. श्रीमति कामिनी पटेल पति श्री दिलीप कुमार - सदस्य 6. श्री सुषील कुमार पिता स्व0 देवेन्द्र प्रसाद - सदस्य 7. श्री धिरेन्द्र कुमार सोनी पिता श्री दीपक कुमार दीप - सदस्य 8. श्री विष्वनाथ पाठक पिता स्व0 बैद्यनाथ पाठक - सदस्य 9. श्री किषोरी दास - सदस्य सह पुजारी न्यास स्मिति मंदिर को निर्देष दिया जाता है कि अपनी देख-रेख में खुली डाक के द्वारा तालाब व मंदिर की अन्य भूमि की बंदोबस्ती अधिकतम 03 वर्ष तक करने के लिए (सक्षम रहेंगे) और करायी जाय। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री श्री 108 मनोहर दास का मठ, मोहल्लापो0अंचल-बैरगनिया, जिला-सीतामढ़ी न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 अगस्त 2023
सं0 1801--श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-मानिकपुर, पो0-आवापुर, जिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3947 है।
ग्रामीणों के द्वारा उक्त मंदिर से संबंधित निबंधित समर्पणनामा वर्ष 1983 के आलोक में ग्रामीणों के प्रार्थना पत्र पर उसका निबंधन सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में वर्ष 2009 में किया गया। उक्त मंदिर में कुल 84 डी0 भूमि है। ग्रामीण श्री अजय कुमार द्वारा वर्ष 2019 में यह षिकायत की गयी कि मंदिर की भूमि खाता सं0-478, खेसरा सं0-734, 735 को अवैध रूप से भोला सिंह व भैरव सिंह द्वारा विवाद उत्पन्न किया जाता है।
जिस संबंध में श्री भोला सिंह को नोटिस जारी की गयी कि अपने दावे के संबंध में सभी कागजात के साथ पर्षद के समक्ष उपस्थित हाें, जिसके आलोक में उनके द्वारा उपस्थित होकर कुछ कागजात दाखिल किया गया तथा दोनों पक्षों को विस्तारपूर्वक सुनवाई के उपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक-08.06.2022 द्वारा श्री भोला सिंह के दावे को निरस्त किया गया तथा मंदिर की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन किये जाने का निर्णय लिया गया, जिसमें ग्रामीणों ने उपस्थित होकर दिनांक-23.05.2022 को एक बैठक करके न्यास समिति बनाये जाने हेतु कुछ नामों का प्रस्ताव दिया, जिसे अंचलाधिकारी के पास भेजकर यदि कुछ नामों को जोड़ना या हटना चाहते हों तो उस पर उनसे मंतव्य की मांग की गयी, परन्तु कोई प्रति-उत्तर नहीं प्राप्त होने पर पुनः पर्षद के आदेष दिनांक-01.09.2022 द्वारा अंचलाधिकारी को पांच पत्र क्रमषः दिनांक- 10.02.2022, दिनांक-27.04.2022, दिनांक-23.11.2022 दिनांक-14.02.2023 एवं दिनांक-23.05.2023 को लिखा जा चुका है, परन्तु उनका कोई प्रति-उत्तर नहीं प्राप्त हुआ है।
अतः केवल उनके मंतव्य के आधार पर आगे न्यास समिति का गठन नहीं किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-मानिकपुर, पो0-आवापुर, जिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के आदेष दिनांक-28.06.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-मानिकपुर, पो0-आवापुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-मानिकपुर, पो0-आवापुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।44 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी।
अतः उपरोक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपन करते हुए प्रस्तावित नामों पर विचार करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है तथा समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर तथा संबंधित थाने से चरित्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने पर आगे कार्यकाल विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा। 1. अंचल अधिकारी, पुपरी - पदेन अध्यक्ष
2. श्री अजय सिंह पिता स्व0 ब्रजकिषोर सिंह - कार्यपालक अध्यक्ष
3. श्री मुन्द्रिका सिंह पिता स्व0 जमुना सिंह - उपाध्यक्ष
4. श्री षिवषंकर सिंह पिता स्व0 गंगाविषुण सिंह - सचिव ़
5. श्री पच्चु मुखिया पिता स्व0 जगमोहन मुखिया - कोषाध्यक्ष
6. श्री श्री उपेन्द्र राम पिता स्व0 नारायण राम - सदस्य
7. श्री भूपनेष्वर सिंह पिता स्व0 रामएकबाल सिंह - सदस्य
8. श्री उपेन्द्र राम - सदस्य
9. श्री हरिचन्द्र पासवान - सदस्य
10. थानाध्यक्ष, पुपरी - सदस्य45 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 समिति मंदिर की भूमि से संबंधित सभी प्रकार की बंदोबस्ती व अन्य कार्य करने के लिए प्राधिकृत रहेगी, कोई अन्य व्यक्ति यदि किसी प्रकार का कोई अवरोध करता है तो उसके विरूद्ध सख्त कार्यवाई की जाए तथा अंचल अधिकारी को निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की भूमि नापी करा कर के समिति के कब्जे में करायी जाय। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-मानिकपुर, पो0-आवापुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 अगस्त 2023
सं0 1806--श्री राधा कृष्ण जी महराज, ग्रामपो0-ससौला सभा, थानाअंचल-सुप्पी, जिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3637 है।
पर्षद द्वारा दोनों पक्षों से तथा ग्रामीणों से उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु सहमति पूर्वक न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में नामों की मांग की गयी, जिसमें ग्रामीणों की तरफ से 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ, जिसमे ंदानदाता परिवार के सोमेष्वरनाथ मिश्र भी प्रस्तावित किये गये हैं, दूसरा प्रस्ताव मुरलीधर मिश्र के द्वारा दिनांक-17.04.2023 को दिया गया, जिसमें उन्होंने स्वयं मुरलीघर मिश्र के नाम का प्रस्ताव दिया। उक्त तीनों नाम वही है जो वर्त्तमान में उक्त मंदिर की भूमि को अवैध रूप से कब्जा करके पिछले कई वर्षो से निजी प्रयोग में ले रहे हैं और इस संबंध में उनका कथन है कि वह दाता परिवार से आते है, जबकि दानदाता जनार्दन व गजाधर मिश्र द्वारा समर्पणनामा में अपने किसी भी पुत्र, पौत्र या वंषज को मंदिर के संबंध में किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं दिया है और उक्त तीनों व्यक्तियों के कारण ही आज मंदिर की दुर्दषा हो गयी है।
अतः उक्त तीनों व्यक्तियों को मंदिर की व्यवस्था में रखना उचित नहीं होगा, चूंकि पर्षद द्वारा काफी समझाये जाने पर भी तीनों व्यक्ति सगे भाई होने के बावजूद भी एक-दूसरे के उपर आरोप-प्रत्यारोप तथा अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राधा कृष्ण जी महराज, ग्रामपो0-ससौला सभा, थानाअंचल-सुप्पी, जिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक-28.06.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधा कृष्ण जी महराज, ग्रामपो0-ससौला सभा, थानाअंचल-सुप्पी, जिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधा कृष्ण जी महराज, ग्रामपो0-ससौला सभा, थानाअंचल-सुप्पी, जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।46 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी। अतः उपरोक्त विचारोपरान्त उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु मंदिर की देखभाल हेतु अंचलाधिकारी की अध्यक्षता में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है :-
1. श्री कुमार राघवेन्द्र सिंह (आई0एफ0एस0 रिटायर्ड), पिता स्व0 कुमार सुरेन्द्र सिंह - अध्यक्ष 2. श्री हेमन्त कुमार मिश्र - उपाध्यक्ष 3. अंचल अधिकारी - पदेन सचिव 4. श्री कृष्णचंद्र पाठक पिता स्व0 राम अयोध्या पाठक - कोषाध्यक्ष ़ 5. डाँ0 त्रिपुरारी प्रसाद पिता स्व0 रामविलास सिंह - सदस्य 6. श्री राजेष मिश्र पंजीकार - सदस्य 7. श्री विकास कुमार झा पिता उदयकांत झा - सदस्य 8. श्री अजय झा पिता स्व0 अनन्त लाल झा - सदस्य 9. श्री नचिकेता ठाकुर पिता स्व0 जितेन्द्र ना0 ठाकुर - सदस्य 10. श्री षिवेन्द्र सिंह पिता स्व0 राजीनन्दन सिंह - सदस्य 11. श्री श्याम किषोर मिश्र पिता सरयुग मिश्र - सदस्य उपरोक्त न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है और कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति का कार्यकाल आगे विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा। न्यास समिति मंदिर में पूजा-पाठ राग-भोग आदि करने के लिए पुजारी रखने हेतु स्वतंत्र रहेगी। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राधा कृष्ण जी महराज, ग्रामपो0-ससौला सभा, थानाअंचल-सुप्पी, जिला-सीतामढ़ी न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 जनवरी 2024
सं0 3440--धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4764 है।47 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उक्त न्यास के संबंध में श्री सत्य किरण पुत्र स्व0 युगल किषोर सिंह द्वारा प्रार्थना पत्र पर्षद में दिनांक-07.10.2023 को धरफरी रामलीला कमिटी के निबंधन हेतु दिया गया। अपने प्रार्थना पत्र में यह उल्लेख किया है कि उक्त रामलीला कमिटी की स्थापना वर्ष 1964 में प्रार्थी के पिता व अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर किया गया था। स्वयंभू न्यास समिति मेें प्रार्थी के पिता सचिव के रूप में कार्यरत थें और उनका स्वर्गवास दिनांक-31.07.2008 को हो गया, तदोपरान्त प्रार्थी की माता व भाई के द्वारा उक्त समिति की देखभाल की जा रही थी, परन्तु उनके भाई और व स्वयं भी अधिकांष समय में शहर में नौकरी व व्यापार के सिलसिले में रहते हैं तथा प्रार्थी के भाई श्री षिषिर किरण एवं माताजी का भी स्वर्गवास हो गया है और उक्त भूमि पर भगवान, बजरंगबली, भगवान शंकर पार्वती, श्री राम जानकी जी गुम्बजनुमा छोटा-छोटा मंदिर भी है और शेष भूमि खाली पड़ी हुई है, जिसमें समय-समय पर रामलीला आदि का वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जाता है। स्थानीय नागरिकों के द्वारा स्वयंभू समिति बनाकर उसका संचालन किया जाता रहा। प्रार्थी ने अपने प्रार्थना पत्र में न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भी दिया गया है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के आदेष दिनांक-07.10.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।48 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिया जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले वध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी। श्री अरूण सहनी को सेवक एवं श्री सुजीत कुमार ओझा को पुजारी के रूप में नामित किया गया है, उक्त दोनों व्यक्तियों को प्रस्तावित पद हेतु मान्यता दी जाती है तथा न्यास समिति हेतु प्रस्तावित नामों को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता है तथा अनुमंडल पदाधिकारी से उनका मंतव्य प्राप्त होने तक यह समिति कार्य करती रहेगी। न्यास समिति निम्न प्रकार हैं :-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पष्चिम - पदेन अध्यक्ष 2. श्री सत्य किरण - उपाध्यक्ष 3. प्रो0 अरूण कुमार सिंह - सचिव ़ 4. श्री उमेष कुमार प्रभाकर - कोषाध्यक्ष 5. श्री हरेन्द्र प्रसाद सिंह - सदस्य 6. श्री अवधेष प्रसाद यावव - सदस्य 7. श्री धिरेन्द्र प्रसाद - सदस्य 8. श्री रामानन्द प्रसाद साह - सदस्य पता :- धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर। उपरोक्त मंदिर का संचालन उक्त मंदिर और विभिन्न श्रोतों से प्राप्त होने वाली आय दुकानों आदि के किराये आदि को वसूलने का एकमात्र अधिकार न्यास समिति को होगा, जिसे न्यास समिति के सचिव या बैठक में प्रस्ताव पारित कर किसी सदस्य को अधिकृत करके निर्णय लिया जाये। खाते का संचालन उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में से कम से कम दो व्यक्तियों के हस्ताक्षर से निकासी की जायेगी। प्रार्थी द्वारा आज पर्षद में उक्त मंदिर की भूमि पर दुकान कर व्यवसाय कर रहे 90 व्यवसायियों के नामों की सूची दाखिल की है, जिसमें उनके द्वारा किराये की राषि तथा सभी दुकानदारों के विरूद्ध दिसम्बर 2022 तक बड़ी-बड़ी राषि बकाया है, अतः न्यास समिति उन सभी व्यक्तियों को नोटिस जारी करें कि निर्धारित समय सीमा (एक से दो माह के अन्दर) जितना बकाया राषि है, उसे जमा करें और नये सिरे से किराये की राषि स्का0 फिट के हिसाब से जो बाजार दर है, उससे 20-25 प्रतिषत छुट देते हुए निर्धारित करें। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (धरफरी रामलीला कमिटी, ग्राम-परमानन्दपुर, पो0-धरफरी, थाना-देवरिया, अंचल-पारू, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। NOTE:- यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मती अनुमोदित है।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 अगस्त 2023
सं0 1803--ध्यान योग विद्यापीठ (सनातन धर्म संस्थान) एवं षिव मंदिर, प्रेमनगर बरौली, पो0-बरौली, जिला-गोपालगंज पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-2629 है। मठ के न्यासधारी श्री स्वरूपानन्द परमहंस व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं और उनकी शारीरिक स्थिति से ज्ञात होता है कि वह काफी वृद्ध हो गये हैं और स्वयं उक्त मठ का संचालन करने में सार्वजनिक रूप से असमर्थ हैं, तथा प्रस्तावित समिति के संबंध में उनकी भी सहमति है।
अतः आमसभा की बैठक दिनांक-13.11.2022 में लिये गये निर्णय के आलोक में उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु निम्न न्यास समिति में कुछ संषोधन करके निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है। न्यासधारी स्वरूपानन्द के साथ श्री कृष्ण यादव पुत्र गुलाबचंद यादव भी उपस्थित हैं तथा अन्य सदस्य श्री षिवेन्द्र सिंह, श्री अजय लाल सोनी तथा न्यासधारी स्वरूपानन्द जी द्वारा यह स्वीकार किया गया है और इनका कार्य भी संतोषजनक है और चूंकि उक्त व्यक्ति 24 घंटे मठ में रहते हैं, लिहाजा उनको भी न्यास समिति मे स्थान दिया जाय।
उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का49 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 प्रयोग करते हुए ध्यान योग विद्यापीठ (सनातन धर्म संस्थान) एवं षिव मंदिर, प्रेमनगर बरौली, पो0-बरौली, जिला-गोपालगंज की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक-05.07.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''ध्यान योग विद्यापीठ (सनातन धर्म संस्थान) एवं षिव मंदिर, प्रेमनगर बरौली, पो0-बरौली, जिला-गोपालगंज न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''ध्यान योग विद्यापीठ (सनातन धर्म संस्थान) एवं षिव मंदिर, प्रेमनगर बरौली, पो0-बरौली, जिला-गोपालगंज न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से कम दिया जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 4298 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी। अतः उपरोक्त विचारोपरान्त उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए की जाती है, कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आय-व्यय आदि में पारदर्षिता रखे जाने पर समिति के कार्यकाल को बढ़ाने जाने पर विचार किया जाएगा, न्यास समिति निम्न है :-
50 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 20241. श्री स्वामी स्वरूपानन्द जी परमहंस चेला स्वामी आत्मानन्द परमहंस - अध्यक्ष 2. श्री उमा कांत पिता स्व0 बाल्मिकी प्रसाद - उपाध्यक्ष 3. श्री षिवेन्द्र सिंह पिता स्व0 पारस सिंह - सचिव 4. श्री अजय कुमार सोनी पिता श्री छोटेलाल प्रसाद - उप-सचिव 5. श्री अच्छेलाल सोनी (स्वर्णकार) पिता श्री हरिहर साह - कोषाध्यक्ष ़ 6. श्री डाँ0 रामेष्वर प्र0 सिंह पिता स्व0 कामेष्वर सिंह - सदस्य 7. श्री गणेष सिंह पिता स्व0 बद्री सिंह - सदस्य 8. श्री नगनारायण सिंह पिता स्व0 रामाज्ञा सिंह - सदस्य 9. श्री श्रवण कुमार पिता स्व0 ठाकुर प्रसाद - सदस्य 10. श्री संजय कुमार पिता स्व0 चन्द्रदेव प्रसाद - सदस्य 11. श्री कृष्ण यादव पुत्र श्री गुलाबचंद यादव - सदस्य श्री अच्छेलाल सोनी जो पूर्व में स्वयभू कमिटि में कोषाध्यक्ष के रूप में थें उनको निर्देष दिया जाता है कि पिछले 05 वर्षो की मंदिर की आय-व्यय विवरणी के संबंध में जो भी पंजी/ दस्तावेज या कोई नोटिंग डायरी हो तो उसकी फोटोप्रति अपने हस्ताक्षर के साथ अवष्य दाखिल करें तथा मंदिर के नाम से शीघ्र बैंक में खाता खोली जाय और सभी प्रकार का संचालन मंदिर से प्राप्त आय को बैंक खाते में जमा कर, तदोपरान्त वहां से राषि निकासी कर की जाय। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (ध्यान योग विद्यापीठ (सनातन धर्म संस्थान) एवं षिव मंदिर, प्रेमनगर बरौली, पो0-बरौली, जिला-गोपालगंज न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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27 जुलाई 2023
सं0 1459--श्री राम लक्ष्मण जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-दाउद छपरा, थानाअंचल-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3432 है। इस मंदिर की न्यास समिति बनाए जाने के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी से नामों की मांग की गयी, जो अभी तक अप्राप्त है। पर्षद के पत्र दिनांक- 19.06.2021 के आलोक में अंचल पदाधिकारी के द्वारा 11 नामों का प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें कुछ ऐसे व्यक्तियों को रखा गया है, जो मंदिर की भूमि पर अपना निजी होने का दावा करते है और अपना नाम चढ़ाने का प्रयास किया गया है। इस बीच दिनांक-28.09.2022 को ग्रामीणों के हस्ताक्षर से 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ।
उक्त न्यास समिति के गठन में आगे और विलम्ब किया जाना नए वाद, अप्रिय घटना तथा दुकानदारों से बलपूर्वक अवैध रूप से राषि की वसूली की पूरी संभावना बनी हुयी है और कार्यरत दुकानदारों के द्वारा भी पर्षद में षिकायत की गयी है।
उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम लक्ष्मण जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-दाउद छपरा, थानाअंचल-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक 26.04.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम लक्ष्मण जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-दाउद छपरा, थानाअंचल-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम लक्ष्मण जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-दाउद छपरा, थानाअंचल-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।51 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 4298 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी। अतः उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर विचार करते हुए तथा दोनों सूची में से विचारोपरान्त उक्त मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए से गठित की जाती है, कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आय-व्यय आदि में पारदर्षिता रखे जाने पर समिति के कार्यकाल को बढ़ाने जाने पर विचार किया जाएगा, जो न्यास समिति निम्न है :-
1. अंचल पदाधिकारी, मीनापुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री अवध बिहारी गुप्ता - उपाध्यक्ष 3. श्री विरेन्द्र कुमार पुत्र स्व0 केदार साह - सचिव 4. श्री संजय साह पुत्र श्री बद्री साह - कोषाध्यक्ष 5. श्री प्रेमलाल भगत - सदस्य ़ 6. श्री राजा बाबु राय - सदस्य 7. श्री राज कुमार साह - सदस्य 8. श्री राज कुमार पुत्र स्व0 लक्ष्मण साह - सदस्य 9. श्री गरीब नाथ - सदस्य प्रकाशन के तद्ोपरान्त न्यास समिति शीघ्र मंदिर के नाम से खाता खोलेगी, जिसका संचलान कोषाध्यक्ष एवं (सचिव या अध्यक्ष) में से किसी एक के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा।
सचिव को निर्देष दिया जाता है कि 15 दिन के अन्दर मंदिर के प्रांगण में जितने दुकानदार है, उनकी सूची क्या व्यवसाय करते है, कितनी बडी दुकान है, उसका साईज और क्या किराया आदि मिलती है, इन चारों चीजों का उल्लेख करते हुए दाखिल करें, जिससे भी उनके किराया आदि के संबंध में भी अधिनियम की धारा 55 के अन्तर्गत कोई निर्णय लिया जा सके।52 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम लक्ष्मण जानकी ठाकुरवाड़ी, ग्रामपो0-दाउद छपरा, थानाअंचल-मीनापुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
भवदीय आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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28 दिसम्बर 2023
सं0 3236--श्री राम जानकी स्थान, ग्राम-रसलपुर आधार, पोस्ट-विषुन्दत्तपुर पताही, अंचल-मड़वन, थाना-करजा, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 2536 है।
इस न्यास की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक 2957, दिनांक 29.11.2022 द्वारा एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए निम्नांकित व्यक्तियों की एक न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया गया था।
1. अनुमंडल पदाधिकारी, पष्चिमी, मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री नर्मदा शंकर पुत्र स्व0 श्यामदेव प्रसाद - कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री मदन मोहन दूबे पुत्र स्व0 राधेष्याम दुबे - उपाध्यक्ष 4. श्री अजय कुमार ठाकुर पुत्र स्व0 चन्देष्वर ठाकुर - सचिव 5. श्री दिनेष कुमार ठाकुर पुत्र स्व0 रामलखन ठाकुर - कोषाध्यक्ष 6. श्री राजु पासवान पुत्र स्व0 हरिहर पासवान - सदस्य 7. श्री मुकुन्द कुमार पुत्र बद्री नारायण ठाकुर - सदस्य 8. श्री हरिओम प्रसाद ठाकुर पुत्र श्री नारायण ठाकुर - सदस्य 9. श्री महेष कुमार ठाकुर पुत्र स्व0 राम भजन ठाकुर - सदस्य 10.श्री द्वारिका साह पुत्र स्व0 फकीरा साह - सदस्य 11.श्री राधेष्याम पटेल, पुत्र स्व0 राम जीवन पटेल - सदस्य न्यास समिति के अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी है और उनके द्वारा की गयी बैठक से स्पष्ट होता है कि उक्त मंदिर और मंदिर की भूमि की व्यवस्था हेतु सुचारू रूप से कार्य किया जा रहा है तथा न्यास समिति द्वारा न्यास के विकास हेतु आवष्यक कार्रवाई की जा रही है, जो संतोषजनक प्रतीत होता है।
अतः पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक 06.12.2023 के आलोक में न्यास समिति का कार्यकाल न्यास समिति के अधिसूचना की तिथि 29.11.2022 से पाँच वर्ष (दिनांक 28.11.2027) के लिए बढ़ाया जाता है। न्यास समिति अधिसूचना ज्ञापांक 2957, दिनांक 29.11.2022 में वर्णित शर्तो का पालन करेगी। साथ हीं न्यास समिति के सदस्य द्वारिका साह के निधन हो जाने के कारण रिक्त हुए पद पर न्यास समिति की बैठक दिनांक 08.04.2023 द्वारा प्रस्तावित श्री मुकेष कुमार ठाकुर को सदस्य के रूप में मनोनित किया जाता है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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2 फरवरी 2024
सं0 3663--श्री सूरजमल माड़वारी धर्मशाला न्यास (सूरजमल संथालिया धर्मशाला), ग्रामपो0-नरकटियागंज, थाना-शिकारपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण, जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-3460/2001 है। उक्त धर्मशाला हेतु भूमि रजिस्र्टड विलेख दिनांक-06.12.1944 को राय बहादुर रामेश्वर सिंह, मैनेजर ऑफ कोर्ट वार्ड बेतिया राज स्टेट, द्वारा बाबु सूरजमल S/O स्व0 भीमराज को 1/-रु0 लीज पर कुल 03 क0 14 धूर जमीन खाता सं0-4, खेसरा सं0-565-570 एवं 502, 510, 511, 578 दी थी। उक्त विलेख में स्पष्ट उल्लेख है कि लीजधारी भूमि पर पक्का भवन धर्मषाला के रूप में बनायेंगे और धर्मषाला के रूप में उसका प्रयोग किया जाएगा और वह धर्मषाला आम जनता के प्रयोग में लायी जाएगी। पर्षद द्वारा धर्मषाला की व्यवस्था हेतु वर्ष 2000 में 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी के रिपोर्ट दिनांक-11.08.2000 जो अपर समहर्त्ता को समर्पित की गयी थी, जिसमें प्रतिवेदित किया गया कि धर्मषाला का निरीक्षण किया गया जिसके अंतर्गत आभी जीर्णषीर्ण अवस्था में 07 कमरें, 02 हॉल और शौचालय बना हुआ है। धर्मषाला के अंदर कोई सम्पत्ति नहीं थी।
यह धर्मषाला निबंधित है और इसकी सूचना जिला पदाधिकारी को भी दी गयी। इसके आलोक में राज्य सरकार द्वारा चहारदीवारी निर्माण योजना के तहत उक्त धर्मषाला का भी चयन किया गया और चहारदीवारी का कार्य प्रारंभ हुआ, परन्तु एक षड्यंत्र के तहत लगभग 1/3 प्रतिषत धर्मषाला कि भूमि का अचंल पदाधिकारी के द्वारा चहारदीवारी से बाहर छोड़कर जा रहा था, जिसपर समिति द्वारा आपत्ति करने पर तथा मा0 उच्च न्यायालय में याचिका सी0डब्लू0जे0सी053 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 नं0-2850/23 दाखिल की गयी, जिसे दिनांक-26.09.2023 को निष्तारित करते हुए, कुछ निर्देष जिला पदाधिकारी को दिया गया। पर्षद द्वारा भी जिला पदाधिकारी को धर्मषाला की पूरी भूमि का विवरण देते हुए, धर्मषाला की सारी भूमि को शामिल करते हुए, चहारदीवारी निर्माण करने का आदेष पर्षददीय पत्रांक-891 दिनांक-05.10.2018, पत्रांक-996 दिनांक-31.08. 2020,पत्रांक-1552दिनांक-31.07.2023को दिया गया था। दिनांक-19.12.2023 को न्यास समिति के उपस्थित सदस्य, कन्हैया अग्रवाल, हरिषंकर शर्मा द्वारा कथन किया जा रहा है, धर्मषाला की कुल भूमि 03 क0 14 धूर पर चहारदीवारी निर्माण करने निर्णय प्रषासन द्वारा लिया जा चुका है। अंचल पदाधिकारी की रिपोर्ट पत्रांक-431, दिनांक-09.09.2023 में भी स्पष्ट किया है। उपस्थित सदस्यों का यह भी कथन है कि पूर्व न्यास समिति के श्री बृजेष कुमार, श्री षिवजी अग्रवाल काफी उम्रदराज और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं। केषव प्रसाद टेकरीवाल का स्वर्गवास हो चुका है। सुनील केडीया द्वारा त्याग-पत्र दिया जा चुका है। श्री गोविन्द केजरीवाल, श्री राजकुमार चोखानी द्वारा धर्मषाले के संबंध में कोई लगाव नहीं रखते है और नहीं कभी उपस्थित होते हैं और श्री पवन कुमार बाहर व्यवसाय करते हैं।यह भी कथन करते हैं कि दिनांक-05.01.2023 को मारवाड़ी समाज की एक बैठक आयोजित की गयी और बैठक में काफी लोगों की उपस्थिति में दिनांक-05.01.2023, 07.04. 2023, 04.06.2023 को धर्मषाला की व्यवस्था में सुधार करने, जीर्णोद्धार करने तथा धर्मषाला प्रागंण में विद्युत विभाग द्वारा लगाये गये ट्र्रासंफर वहा से स्थानान्तरित करने तथा उस धर्मषाला में एक छोटा सा मंदिर भी बनाए जाने का निर्णय लिया गया। इस कार्य हेतु दिनांक-15.07.2023 को बैठक करके 15 व्यक्तियों का चयन किया गया है। पर्षद में उक्त प्रस्ताव के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति प्राप्त नहीं है। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि, 1955 की धारा 43 के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-19. 12.23 द्वारा ''श्री सूरजमल माड़वारी धर्मशाला न्यास (सूरजमल संथालिया धर्मशाला),'' ग्रामपो0-नरकटियागंज, थाना-षिकारपुर, जिला-पष्चिम चम्पारणके सम्यक् रूप सम्यक् विकास, जीर्णोद्धार, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है :- योजना
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सूरजमल माड़वारी धर्मषाला न्यास (सूरजमल संथालिया धर्मषाला), ग्रामपो0-नरकटियागंज, थाना-शिकारपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री सूरजमल माड़वारी धर्मशाला न्यास (सूरजमल संथालिया धर्मशाला), ग्रामपो0-नरकटियागंज, थाना-शिकारपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास जीर्णोद्धार, विकास एवं प्रबंधनकी समुचित व्यवस्था करना होगा। 03. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी धर्मषाला के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
04. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
05. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 06. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद कोप्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
07. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
08. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 09. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
10. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
12. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः धर्मषाला परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष54 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए प्रस्तावित नामों में से 11 व्यक्तियों का न्यास समिति अस्थायी रूप 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है।
01. श्री कन्हैया अग्रवाल, पिता-स्व0 प्रहलाद अग्रवाल - अध्यक्ष 02. श्री सुषील केजरीवाल, पिता- श्री ब्रृजेष केजरीवाल - उपाध्यक्ष 03. श्री हरिषंकर शर्मा, पिता-स्व0 राधेष्याम शर्मा - सचिव 04. श्री सुमित कुमार केडिया, पिता-श्री शंकर केडिया - कोषाध्यक्ष 05. श्री कृष्णा केडिया , पिता- स्व0 बुद्धिचंद केडिया - सदस्य 06. श्री कन्हैया टिकरेवाल, पिता-स्व0 केषर टिकरेवाल - सदस्य 07. श्री पषुपति सरार्फ, पिता-स्व0 झावरमल सर्राफ - सदस्य 08. श्री राजु कन्दोई, स्व0 रामेष्वर प्रसाद - सदस्य 09. श्री अजय राजगढ़िया, स्व0 तुलसी राजगढ़िया - सदस्य 10. श्री प्रमोद पोद्दार, पिता- श्री जगदीष पोद्दार - सदस्य 11. श्री गोपाल पोद्दार, स्व0 जयनारायण पोद्दार - सदस्य सभी श्री सूरजमल माड़वारी धर्मशाला, ग्रामपो0-नरकटियागंज, थाना-शिकारपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण, पिनकोड-845455.
नोट :- 1. न्यास समिति को भी निर्देष दिया जाता है कि 01 वर्ष में धर्मषाला का निर्माण जीर्णोद्धार विकास के कार्य से पर्षद को अवगत करायेगी। तद्ोपरान्त समिति के कार्य को संतोषजनक पाये जाने पर उनके कार्यकाल के विस्तार पर विचार किया जाएगा। न्यास समिति शीघ्र खाता खोलेगी और खाता का संचालन अध्यक्ष और सचिव में से एक और कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर से होगा। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा स्वीकृति प्राप्त है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 दिसम्बर 2022
सं0 3202--श्री दुर्गा स्थान, ग्रामपोस्टथाना-कौआकोल, जिला-नवादा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4595/21है। पर्षद द्वारा सभी तथ्यों पर विचारोपरांत पारित आदेष दिनांक- 19/10/2022 के आलोक में निम्नांकित न्यास समिति का गठन किया जाता है।
संचिका पर खतियान की प्रति उपलब्ध है, जो थाना नं॰- 33, मौजा- कौआकोल में खाता सं॰- 33 में 10 खेसरा, जिसका कुल क्षेत्रफल- 32.14 एकड़ भूमि है। रैयत के रूप में श्री श्री 108 दुर्गा जी महारानी के नाम से इन्द्राज है, जिसमें सेवायत के रूप में अनंत नारायण सिंह, गुरू प्रसाद सिंह तथा रघुनंदन प्रसाद सिंह के नाम का उल्लेख है और उपरोक्त तीनों सेवायत का स्वर्गवास हो चुका है और उनके वंषज मदन सिंह स्वयं को सेवायत मानते हैं।
इसी बीच उपरोक्त सभी व्यक्तियों द्वारा मंदिर की अधिकांष भूमि अवैध रूप से बिना न्यायालय सक्षम प्राधिकार की अनुमति के विक्रय किया जाता रहा, जो पुर्ण रूप से अवैध हस्तान्तरण है। चूंकि मंदिर की भूमि जो खतियान में रैयत के रूप में श्री महारानी दुर्गा के नाम से इन्द्राज है और किसी भी सेवायत, महंत, साधु या सन्यासी को जमीन बेचने को कोई अधिकार नहीं है और यदि ऐसा कोई हस्तांतरण किया जाता है, तो पुर्ण रूप से शून्य और अप्रभावी होता है। इस संबंध में मदन प्रसाद सिंह को भी लगातार पत्र भेजकर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने की मांग की गयी थी, परंतु वह कोई स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रहें और षिकातयकर्त्ता द्वारा उनके तथा पुर्व सेवायातों के द्वारा विक्रय-पत्र की प्रति भी संचिका में समर्पित की गयी है।
उपरोक्त परिस्थिति में मन्दिर एवं मंदिर की व्यवस्था हेतु निर्णय लिया गया, जिस पर अंचलाधिकारी द्वारा ग्रामीणों द्वारा किये गये आम बैठक दिनांक- 07/03/2021 की प्रति संलग्न करते हुये 09 व्यक्तियों के नाम, उनका आधार कार्ड तथा सभी प्रस्तावित 09 व्यक्तियों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन दिनांक- 18/08/2022, पर्षद को प्राप्त हुआ। तदनुसार मंदिर की सुचारू व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से करने का निर्णय लिया गया।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री दुर्गा स्थान,55 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 ग्रामपोस्टथाना- कौआकोल, जिला-नवादा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री दुर्गा स्थान न्यास योजना, ग्रामपोस्टथाना- कौआकोल, जिला-नवादा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री दुर्गा स्थान न्यास समिति, ग्रामपोस्टथाना- कौआकोल, जिला-नवादा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम खाता खोलकर राषि जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
18. न्यास समिति की मंदिर की भूमि पर जिनके द्वारा अतिक्रमण किया गया है, उनके विस्तृत नाम, भूमि का खाता, खेसरा संख्या का उल्लेख करते हुये, पर्षद में समर्पित करें, ताकि उनके विरूद्ध बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास न्यायाधिकरण, पटना में अतिक्रमण वाद लाया जा सके। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, नवादा - अध्यक्ष 2. श्री योगेष्वर कुमार 'योगी' पिता-महेन्द्र सिंह (9304846471) - उपाध्यक्ष 3. श्री अजीत कुमार वर्मा पिता-श्री बीरेन्द्र प्र॰ वर्मा (6203887690) - सचिव 4. श्री बीरेन्द्र कुमार पिता-स्व॰ डोमी साव (9518722942) -कोषाध्यक्ष56 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. श्री जवाहर लाल पिता-श्री मोती लाल साहू(8210538374) - सदस्य
6. श्री कृष्णानंद सिंह पिता- श्री मदन सिंह (9304757301) -सदस्य 7. श्री देवराज कुमार 'राकेष' पिता-श्री युगल किषोर लाल (7667473697) -सदस्य 8. श्री विकास कुमार पिता-सत्येन्द्र प्रसाद (7004300887) - सदस्य 9. श्री मुकेष कुमार पिता-सुरेष प्रसाद (700420852) - सदस्य 10. श्री संदीप कुमार पिता-किषोरी सिंह (8340235717) - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, कौआकोल, जिला- नवादा - सदस्य क्रम सं॰- 2-10 का पता- ग्रामपोस्टथाना- कौआकोल, जिला- नवादा। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री दुर्गा स्थान, ग्रामपोस्टथाना- कौआकोल, जिला-नवादा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
नोटः-संरक्षक (आचार्य) के रूप में श्री धर्मेन्द्र भूषण पाठक को नियुक्त किया जाता है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
------ 11 दिसम्बर 2023 सं0 3121--श्री दुर्गा एवं विषहरी स्थान, ग्रामपो0- खुटहा बैजनाथपुर, थानाअंचल- भरगामा, अनु0-फारबिसगंज, जिला-अररिया पर्षद में लगभग 20 वर्ष पूर्व से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है जिसकी निबंधन संख्या-3551/2002 है। समय-समय पर इसकी व्यवस्था हेतु न्यास समिति का गठन किया जाता रहा है। अंतिम न्यास समिति का गठन पर्षद के ज्ञापांक 4447, दिनांक 28/09/2001 द्वारा अंचलाधिकारी की अध्यक्षता में की गयी और उक्त मठ के खाता सं0-677, खेसरा सं0-1213, 1214, 1217 कुल 01 ए0 94 डी0 जमीन है, जिसमें तालाब भी स्थित है और उक्त प्रांगण में माता दुर्गा, माता विषहरी एवं महादेव जी का भी स्थान है तथा एक बजरंग बली की मुर्ति भी स्थापित है। गठित न्यास समिति द्वारा वर्ष 2014-15 तक की आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी थी, जिसमें वर्ष 2014-15 में कुल 04 लाख रूपये मंदिर की आय दर्षित की गयी है और वर्ष 2014-15 के बाद लगातार पत्राचार किये जाने पर भी न्यास समिति द्वारा कोई आय-व्यय विवरणी नहीं दाखिल की गयी। वर्ष 2014 में अध्यक्ष, श्री कमलेष्वरी प्रसाद ने प्रार्थना पत्र पत्रांक-षून्य दिनांक-11.05.2014 द्वारा प्रर्षद को सूचना दी गयी कि वह काफी वृद्ध हो गये हैं, अतः अपने पौत्र से कार्यों में सहयोग लेते हैं। इसी बीच न्यास समिति के सदस्यों का अक्रियाषील होने का फायदा उठाते हुए मंदिर की भूमि पर स्थित तालाब तथा हाट और मंदिर की आय पर अवैध रूप से महेष्वर प्रसाद सिंह एवं नारायण प्रसाद सिंह द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इस संबंध में उपरोक्त महेष्वर प्रसाद सिंह एवं श्री नारायण प्र0 सिंह को पर्षदीय पत्रांक-1580 दिनांक-07/07/2021, पत्रांक-5330 दिनांक-25/02/2022, पत्रांक-1104 दिनांक-27/06/2022 निबंधित डाक तथा थाने के माध्यम से भेजा गया और इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु उक्त दोनों व्यक्ति न तो कभी पर्षद में उपस्थित हुए और न ही कोई स्पष्टीकरण दाखिल किया गया। न्यास समिति गठन किये जाने हेतु अंचलाधिकारी, भरगामा, से पर्षदीय पत्रांक-3353 दिनांक-08.03.2021, पत्रांक-3485 दिनांक-05. 10.2021, निबंधित डाक द्वारा एवं अनुमंडल पदा0, फारबिसगंज को पर्षदीय पत्रांक-5328 दिनांक-25.02.2022, पत्रांक-1107 दिनांक-27/06/2022, पत्रांक-2395 दिनांक-12/10/2022 एवं पत्रांक-2358 दिनांक-26/09/2023 को पत्र भेज कर उपरोक्त व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाई करने तथा न्यास समिति गठन हेतु नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी, परन्तु उपरोक्त पदाधिकारियों के द्वारा भी किसी प्रकार का कोई प्रति-उत्तर/कार्यवाई/प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध नहीं कराया, जिससे उक्त मंदिर की स्थिति दिन-प्रतिदिन क्षीण होती जा रही है और अतिक्रमणकारी उपरोक्त दोनों व्यक्तियों के द्वारा मंदिर की आय को खुलेआम निजी प्रयोग में लिया जा रहा है। इसी बीच उक्त कार्यरत समिति के अध्यक्ष श्री कमलेष्वरी प्रसाद द्वारा अपने सदस्यों की एक बैठक दिनांक-01.03. 2022 को कर नयी न्यास समिति का गठन किये जाने हेतु 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भेजा गया और उक्त आलोक में पुनः श्री कमलेष्वरी प्र0 द्वारा दिनांक 01/11/2022 को भी पर्षद में नयी न्यास समिति गठन किये जाने हेतु अनुरोध पत्र भेजा गया तथा श्री रामानंद सिंह द्वारा भी पिछले कई वर्षों से लगातार नयी न्यास समिति बनाये जाने तथा मंदिर की भूमि पर स्थित तालाब और मंदिर की दान-पेटी आदि से प्राप्त आय के दुरूपयोग को रोकने के संबंध में लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अतः उपरोक्त वर्णित बिन्दुओं पर विचार करते हुए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक- 19.10.2023 द्वारा मंदिर का प्रबंधन, उसकी सम्पत्तियों सुरक्षा और समुचित विकास हेतु एक योजना का57 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है। चूंकि प्रषासनिक पदा0 (अंचलाधिकारी तथा अनुमंडल पदा0) को लगातार पत्र लिखे जाने के बाद भी वहां से कोई प्रति-उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
योजना
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''दुर्गा एवं विषहरी स्थान, ग्रामपो0- खुटहा बैजनाथपुर, थानाअंचल- भरगामा, अनु0-फारबिसगंज, जिला-अररिया, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''दुर्गा एवं विषहरी स्थान, ग्रामपो0- खुटहा बैजनाथपुर, थानाअंचल- भरगामा, अनु0-फारबिसगंज, जिला-अररिया, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और प्राप्त राषि एवं किराये आदि से प्राप्त सभी राषि को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी और चेक के माध्यम से ही राषि की निकासी कर व्यय करेगी।
04. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। न्यास की समग्र आय इस बचत खाता में जमा की जायेगी।
05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का काई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख या उससे अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी । 06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का बजट, आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जोगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर अनुमोदन के लिए पर्षद को भेजेगी।
09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहतदंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समितिका गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है।
01. अनुमंडल पदाधिकारी, फारबिसगंज पदेन अध्यक्ष 02. श्री रामानंद सिंह, पिता-श्री कमलेष्वरी प्र0 सिंह अध्यक्ष 03. श्री संजय कुमार सिंह, पिता-श्री भवेष प्र0 सिंह उपाध्यक्ष 04. श्री संतोष कुमार सिंह, पिता-स्व0 जीवनेष्वरी प्र0 सिंह सचिव 05. श्री विपिन कुमार झा, पिता-स्व0 जर्नादन झा कोषाध्यक्ष 06. श्री बाबी झा, पिता-श्री भवदेव झा सदस्य 07. श्री सुबोध ठाकुर, पिता-स्व0 जागष्वर झा सदस्य 08. श्री नित्यानंद मंडल, पिता-स्व0 बौकु मंडल सदस्य 09. श्री रविन्द्र राम, पिता-श्री उदयषंकर राम सदस्य 10. श्री महेष्वर मंडल, पिता-स्व0 लालजी मंडल सदस्य58 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 सभी दुर्गा एवं विषहरी स्थान, खुटहा बैजनाथपुर, भरगामा, जिला- अररिया, पिनकोड-854334।
उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि ''श्री दुर्गा एवं विषहरी स्थान''के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है।
2. न्यास समिति/ पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
3. न्यास समिति को यह निर्देष दिया जाता है कि श्री महेष्वर सिंह एवं श्री नारायण सिंह द्वारा यदि न्यास समिति के कार्यो में अवरोध किया जाता है या बाहुबल का प्रयोग कर तालाब, दान-पेटी आदि को किसी प्रकार से क्षति पहुचायीं जाती है तो समिति को यह अधिकार होगा कि उनके विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी जाये।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 दिसम्बर 2023
सं0 3135--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, करहिया, डाकघर-मिर्जापुर, थाना-बसैठी, जिला-अररिया, जो पर्षद में वर्ष 1965 से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है जिसकी निबंधन संख्या-1119 है। समय-समय पर उक्त मंदिर की व्यवस्था न्यासधारी (साधु-संतो) द्वारा की जाती थी। राजस्व अभिलेखाें में सेवायत के रूप में सरयुग दास चेला परशुराम दास के नाम का इन्द्राज है। तत््पश्चात् त्रिवेणी दास न्यासधारी के रूप में इसकी व्यवस्था देखते थे। त्रिवेणी दास का स्वर्गवास दिनांक-29.04.2003 को हो गया, जिसकी सूचना सत्यनारायण दास द्वारा देते हुए स्वयं को न्यासधारी बनाए जाने हेतु प्रार्थना-पत्र दिया गया, परन्तु अपने दावे के संंबंध में किसी प्रकार का कोई दस्तावेज उनके द्वारा दाखिल नहीं किया गया। इसी बीच हरेराम दास उर्फ फलहारी बाबा द्वारा दिनांक-08.12.2022 को एक प्रार्थना पत्र दिया कि ग्रामीणों और महंतों की उपस्थिति में दिनांक-16.03.2019 को प्रार्थी को उक्त मंदिर की देखभाल, पूजा-पाठ एवं सम्पत्ति का सारा भार एवं देख-रेख का दायित्व दिया। उनके द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र में कुछ ग्रामीणों का हस्ताक्षर भी था तथा 01 अन्य दस्तावेज घनश्याम दास सिंह द्वारा बनाया गया, दाखिल किया गया, कोई अन्य व्यक्ति द्वारा ना तो कोई आपत्ति की गयी ना दावा किया गया तथा उनके प्रार्थना पत्र एवं उपरोक्त दस्तावेज के आधार पर फलहारी बाबा को पर्षद द्वारा दिनांक-07.02.2023 को न्यास समिति बनाए जाने तक पूजा-पाठ, राग-भोग के लिए अधिकृृत किया गया तथा अंचल पदाधिकारी से 07 अच्छे धार्मिक चरित्र के व्यक्तियाें के नामों की मांग समिति बनाए जाने हेतु की गयी। दिनांक-13.02.2023 को ग्रामीणों द्वारा दिनांक-22.01.2023 को की गयी, आम बैठक की फोटोप्रति दाखिल करते हुए, प्रार्थना पत्र दिया गया। इस संंबंध में अचंल पदाधिकारी को दिनांक-15.02.2023 को पत्र लिखकर मंदिर और मंदिर की सम्पत्ति की वर्तमान स्थिति और 07 व्यक्तियों के नामों की मांग पुनः की गयी। दिनांक-27.02.2023 को आवेदन पत्र (ई-मेलके माध्यम से) स्वयं-भू न्यास समिति के अध्यक्ष, वैद्यनाथ मंडल एवं दिगम्बर विश्वास, सचिव द्वारा हस्ताक्षरित पर्षद को प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया गया कि फलहारी बाबा पूजारी महंती के योग्य नहीं हैं, भ्रष्ट और लालची है और उनका भरा-पूरा परिवार है, कभी उनका ठाकुरबाड़ी में लगातार आना-जाना लगा रहता है। अतः उन्हें महंत नहीं बनाया जाए। उक्त प्रार्थना पत्र पर फलहारी बाबा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। इसी बीच पुनः लगभग 100 से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अगुंठे के निशान के साथ बैद्यनाथ मंडल द्वारा एक प्रार्थना पत्र देकर फलहारी बाबा पर उपरोक्त आरोप पुनः लगाया और प्रार्थना किया कि उनको पूजारी के पद से निष्कासित करते हुए, प्रस्तावित न्यास समिति को मान्यता दिया जाए, जिसपर आज की तिथि 19.10.2023 निर्धारित करते हुए, फलहारी बाबा एवं शिकायतकर्त्तागण को अपना पक्ष रखने हेतु सूचित किया गया। दिनांक-19.10.2023 को शिकायतकर्त्ता की तरफ से दिगम्बर विश्वास, दयानंद मंडल उपस्थित हैं, परन्तु फलहारीबाबा पूजारी, उपस्थित नहीं है, उनको भेजा गया पत्र भी डाक द्वारा पर्षद को वापस प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख किया गया है कि प्राप्तकर्त्ता नहीं रहते हैं। कार्यालय का कथन है कि फलहारी बाबा के मोबाइल पर भी सम्पर्क किया गया, उनके द्वारा कथन किया गया कि ग्रामीणों ने मार कर भगा दिया है और वह मंदिर में नहीं रहतें हैं। उपस्थित ग्रामीण का कथन है कि फलहारी बाबा परिवारिक व्यक्ति हैं और राजस्व अभिलेखों में उनके द्वारा रैयत के रूप में अपने नाम का इन्द्राज किया गया है, परन्तु उनकी बात सत्य प्रतीत नहीं होती है। उपस्थित ग्रामीण का कथन है कि वर्तमान में उक्त मंदिर के नाम लगभग 24 ए0 जमीन मौजा-करहैया, थाना सं0-41, खाता सं0-61, 159, 158, 157, 156, 155, 39, 40, 334, 729 और 54 उपरोक्त की रसीदे भी पर्षद के समक्ष उपस्थापित की गयी और मंदिर की 07 फोटोग्राफ दाखिल भी किए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि एक मंदिर तो बड़ा गुम्बजनुमा है और उसके बगल में हनुमान मंदिर तथा राल लला सीता माता का मंदिर भी है और संत निवास भी है, परन्तु उसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती और उसका रंगाई-पुताई भी 02-03 वर्ष पहले किया गया प्रतीत होता है और गुम्बज जीर्णोद्धार की मांग कर रहा है तथा उपस्थित सदस्यों का कथन है कि उक्त मंदिर से लगभग 03 लाख रु0 से अधिक की आय वार्षिक है और प्रस्तावित समिति के लोग भूमि की आय तथा समाज से चंदा आदि लेकर के उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के लिए भी तत्पर हैं। उपरोक्त सभी परिस्थितियो तथा संचिका का प्राचीन इतिहास से स्पष्ट पिछले 25 वर्षो से तत्कालीन महंतो द्वारा ना तो कोई पत्राचार किया गयाऔर ना ही आय-विवरणी, पर्षद शुल्क जमा किया गया और ना ही कोई विकास मंदिर के संबंध में किया गया है।59 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों आलोक मेें बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-19.10.2023 द्वारा ''श्री राम जानकी ठाकुररबाड़ी, ग्राम-करहिया,डाकघर-मिर्जापुर, थाना-बसैठी, जिला-अररिया,'' के सम्यक् रूप से राग-भोग, पूजा-पाठ, उसकी आय का प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों के संरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।
योजना
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुररबाड़ी, ग्राम-करहिया, डाकघर-मिर्जापुर, थाना-बसैठी, जिला-अररिया, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-करहिया, डाकघर-मिर्जापुर, थाना-बसैठी, जिला-अररिया, न्याससमिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।
02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और दान-पेटी, एवं अन्य सभी प्रकार से प्राप्त आय यथा भूमि बंदोबस्ती आदि से सभी प्रकार की राषि (न्यास की समग्र आय) को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।
04. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी मंदिर के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि से संबंधित कोई कार्य करते हो और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी । 06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का को ई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने के उपरांत सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता समाप्त की जा सकती है।
13. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/ मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए ग्रामीणों के आम सभा दिनांक-22.01.2023 द्वारा प्रस्तावित निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है तथा कार्य संतोषजनक पाये जानेएवं थाना से चरित्र सत्यापन के उपरांत पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा। 01. अंचल पदाधिकारी, रानीगंज - (पदेन) अध्यक्ष
02. श्री बैद्यनाथ मंडल - कार्यवाहक अध्यक्ष 03. श्री हरेराम दासफलहारी बाबा - पूजारी 04. श्री दिगम्बर विश्वास - सचिव 05. श्री दयानंद मडंल - कोषाध्यक्ष 06. श्री संजय विश्वास - सदस्य 07. श्री अनंत कुमार साह - सदस्य60 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 08. श्री ज्ञानचंद मंडल - सदस्य 09. श्री श्याम ठाकुर - सदस्य 10. श्री सुनील साह - सदस्य 11. श्री प्रदीप मंडल - सदस्य
सभी श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-करैहिया, पो0-मिर्जापुर, थाना-बौसी, जिला- अररिया, पिनकोड-854312। नोटः-1.न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
3.यदि फलहारी बाबा के द्वारा मंदिर में उपस्थित होकर पूजा-पाठ, राग-भोग करने में असमर्थ होते हो, तो न्यास समिति किसी अन्य व्यक्ति को पूजारी हेतु बहुमत से प्रस्ताव पारित कर नियुक्त हेतु पर्षद से अनुमोदन प्राप्त कर सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 मार्च 2024
सं0 4159--कबीर पंथी मठ एवं समाधी स्थल, ग्राम-फसीया मदारपुर, पो0-पोखरिया भाया-गुलाबबाग, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ, जो पर्षद में सार्वजनिक धामिक न्यास के रूप में निबंधन संख्या-3527 पर निबंधित है। संचिका पर दिनांक-28.08.1989 को निष्पादित निबंधित अपर्णनामा संलग्न है, जिससे स्पष्ट होता है कि मो0 यषोदा देवी एवं मो0 आरती देवी पत्नीयाँ- स्व0 अनंत लाल द्वारा अपनी कुल 06 ए0 55 डी0 जमीन थाना नं0-88 तौजी नं0-8/5 खाता नं0-09, 06, 72, 10 के कुल 09 खेसरा का समर्पणनामा किया और समर्पणनामा में यह उल्लेख है कि समर्पणकर्त्ता बहुत वृद्ध हो चुकी है और इनके पति अनंत लाल का स्वर्गवास हो चुका है, जिनकी ख्वाहिष है कि उनकी समाधी के नजदीक ही स्थान बनाने की ईच्छा है। अतः उनकी आत्मा को पुर्ण रूप से शांति मिले और प्रार्थीगण पहले से ही कबीर पंथी है। अतः उस समर्पणनामा में ही श्री हरि दास को मुख्य सचिव, श्री राम प्रसाद को सहमंत्री तथा अन्य सदस्य क्रमषः सत्य नारायण रजक, सोने लाल दास, श्री सूर्य नारायण दास, राज बल्लभ सिंह, श्री अधिक लाल दास एवं श्रीमति दौना देवी को सदस्य के रूप नामित किया गया है। जिनका चुनाव ग्रामीणों तथा महंत के षिष्य लोगों की सलाह पर किया गया, जिसमें आगे उल्लेख है कि आज के दिन से मठ की परम्परा, देख-भाल, अतिथियों की सेवा-सत्कार, साधू-संतो का भोजन आदि की व्यवस्था करेंगे तथ समर्पण शुदा जमीन का देख-भाल हरि लाल दास, राम प्रसाद साह समय-समय समय पर करते रहेगे। सदस्यगणों को आमदनी व खर्च का हिसाब-किताब देखने का अधिकार रहेगा, बाजाप्ते रजिस्टर होगा। समर्पणनामा में सम्पत्ति, दरख्तान तथा महंत जी की समाधी है जो समर्पण किया गया है। आगे उल्लेख है कि अर्पण शुदा सम्पत्ति हरि दास देख-भाल में रहकर पैदावार उसका देव स्थान में रखेगे। आगे उल्लेख किया है कि कोई सदस्य ठीक तरह से कार्य नहीं संभालेगें तो उन्हें हटाकर दुसरे आदमी को उनके स्थान पर बहाल मुख्य सचिव कर सकते है और यह समर्पणनामा सदा के लिए स्थापित रहेगा। किसी वक्त सदस्यगण जीवित नहीं रहे तो इन लोगों के स्थान पर दुसरे आदमी कार्य करेंगे व करते रहेगें। उपरोक्त समर्पणनामा के आधार पर उक्त संस्था का निबंधन किया गया है और निबंधन के पष्चात् राम प्रसाद साह द्वारा दिनांक-17.06.2002 को आय-व्यय विवरण भी दाखिल की गयी। दिनांक-11.09.2003 को राम प्रसाद द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि मठ की भूमि का अवैध रूप से असामाजिक तत्व, मुस्लिमों द्वारा सम्पत्ति को अवैध ढंग से कब्जा कर जान मारने की धमकी दी जा रही है, जिसमें 08 व्यक्तियों के नामों का उल्लेख कब्जाधारी के रूप में किया गया है। जिस संबंध में पर्षद द्वारा अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण की मांग की गयी तथा राम प्रसाद द्वारा दिनांक-16.07.2005 को उप-सचिव व अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर से प्रार्थना-पत्र दिया कि मठ में कुल 06 ए0 55 डी0 जमीन में से 03 ए0 60 डी0 जमीन खाता संख्या-09, 1548, 05 खेसरा संख्या-557 खाता संख्या-72 खेसरा संख्या-554 एवं खाता संख्या-06 में खेसरा संख्या-559 कुल 06 ए0 60 डी0 जमीन कब्जे में है तथा मठ की भूमि खाता संख्या-09, 491, 492, 557 पर नागेष्वर रजक, भगवान रजक (पिता-पुत्र), मो0 अमजद, मो0 नईम अख्तर, तथा खाता संख्या-72 पर शेख खुषहरू एवं खाता नं0-10 पर मो0 नईम, मो0 हामिद, मो0 साहिन, बीबी सहबू नीषा कुल 2.85 डी0 पर कब्जा कर लिया है। पर्षद को यह भी संज्ञान में लाया गया कि वर्ष 1989 मे ंसमर्पणनामा द्वारा गठित न्यास समिति के सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है। अतः राम दास को न्यासधारी के रूप में मठ की देख-भाल करते हुए मान्यता दी गयी और आम-सभा करके न्यास समिति गठन करने का प्रस्ताव दिया गया, परन्तु कुछ विषम परिस्थितियोंवष न्यास समिति का गठन नहीं किया गया। मठ की अद्यतन स्थिति की जानकारी अंचलाधिकारी से चाही गयी। परन्तु अंचलाधिकारी द्वारा कोई रिपोर्ट समर्पित नहीं की गयी। दिनांक-18.08.2022 एवं 14.12.2022 को ब्रजकिषोर ठाकुर व अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि रामानंद साह समिति में मुख्य सचिव बनाया गया था, उनका स्वर्गवास हो गया है तथा समिति ने प्रार्थी को मुख्य सचिव का भार सौंपा है और मेरे सहयोग महंत देवनारायण, प्रदीप वर्मा, बद्री सिंह दास वर्त्तमान में मठ की देख-भाल कर रहे61 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 है और कब्जाधारी द्वारा फर्जी दस्तावेज के आधार पर घर बनाने का प्रयास किया जा रहा है और अतिक्रमणकारियों (09) की सूची संलग्न करते हुए इनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए मठ का फोटो भी दाखिल किया। उक्त षिकायत पर सभी अतिक्रमणकारियों को पर्षद के पत्रांक-3254 दिनांक-21.12.2022 द्वारा नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने हेतु निर्देष दिया गया। जिस संबंध में दिनांक-08.02.2023 को मो0 तैयब, मो0 अमजद, नागेष्वर प्रसाद रजक, मो0 हामिद द्वारा उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दाखिल करते हुए कथन किया कि प्रार्थीगणों द्वारा मो0 आरती दासिन से निबंधित विलेख द्वारा सम्पत्ति का क्रय किया है। उनके स्पष्टीकरण का प्रत्योत्तर ब्रजकिषोर ठाकुर द्वारा दिनांक-18.05.2023 को दिया गया और कथन किया गया कि प्रार्थीगण द्वारा जो दान पत्र वर्ष 1991 की प्रति दाखिल की जा रही है, वह फर्जी और बनाबटी है। आगे कथन किया कि उपरोक्त अतिक्रमणकारियों के द्वारा दाखिल-खारिज आदेष को
(cid:2869)(cid:2877)(cid:2874)
निगरानी न्यायालय के निगरानी वाद संख्या- /02 दाखिल कर प्रष्नगत किया था। जो न्यायालय द्वारा दाखिल-खारिज
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आदेष को निरस्त करते हुए यह मत व्यक्त किया कि किसी सक्षम न्यायालय के द्वारा समर्पणनामा वर्ष 1989 को निरस्त नहीं किया गया है और न जमीन खरीदने पूर्व बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास पर्षद से किसी प्रकार की अनुमति ली गयी है। अतः निगरानी स्वीकार करते हुए दाखिल-खारिज निरस्त हुआ। श्री सुरेन्द्र प्रसाद द्वारा अपना प्रत्योत्तर दिनांक-08.08.2023 को दाखिल करने हुए उल्लेख किया कि मठ की जमीन का हस्तानान्तरण निबंधित केवाला द्वारा समर्पणनामा दिनांक-28.08.1989 को कबीर मठ के पक्ष में निष्पादित था, परन्तु दिनांक-29.01.1991 को उसे रद्दीकरण कराया जा चुका है। अतिक्रमणकारियों के द्वारा दाखिल स्पष्टीकरण पर सुनवाई हेतु दिनांक-08.08.2023 निर्धारित करते हुए सभी पक्षों को निबंधित डाक द्वारा नोटिस भेजी गयी, जो ''लेने से इन्कार'' की टिप्पणी के साथडाक विभाग द्वारा पर्षद को वापस कर दिया गया। दिनांक-29.01.2024 को श्री ब्रज किषोर ठाकुर दास पर्षद के समक्ष उपस्थित है और उनका कथन है कि उनके द्वारा पूर्व में ही संचिका में सभी दस्तावेज वर्ष 1989 में समर्पणनामा तदोपरान्त समय-समय पर कबीर मठ का आयोजन संबंधी दस्तावेज दाखिल किया है और अभी भी कबीर परम्परा के अनुसार समय-समय पर वहाँभजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। लेकिन फर्जी दस्तावेज द्वारा कुछ लोगों के द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। दिनांक-18.12.2022 को 05 व्यक्तियों की समिति गठन किये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है, उसे मान्यता दी जाए, जिससे मठ की सम्पत्ति की सुरक्षा की जा सके तथा अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध वाद दाखिल करने की मान्यता दी जाए। आगे कथन करते है कि वर्ष 1989 में समर्पणनामा में लिखित सभी व्यक्तियों का स्वर्गवास हो चुका है। मात्र सत्य नारायण रजक, सदस्य जीवित है, जो शारिरीक रूप से काफी वृद्ध और असहाय हो गये है। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि, 1955 की धारा 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-29.01.2024 द्वारा ''कबीर पंथी मठ एवं समाधि स्थल, ग्राम-फसिया मदारपुर, पो0-पोखरिया, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ'' के सम्यक् रूप से विकास, जीर्णोद्धार, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों केसंरक्षण, एवं अतिक्रमण मुक्त रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीर पंथी मठ एवं समाधि स्थल, ग्राम-फसिया मदारपुर, पो0-पोखरिया, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कबीर पंथी मठ एवं समाधि स्थल, ग्राम-फसिया मदारपुर, पो0-पोखरिया, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा। 02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास जीर्णोद्धार, विकास एवं प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करना होगा। 03. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (उपाध्यक्ष एवं सचिव) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी न्यास के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
04. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
05. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 06. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद कोप्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
07. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
08. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 09. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।62 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 10. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
12. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः धर्मषाला परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए आमसभा दिनांक-18.12.2022 जिसमें साधु-संतो तथा ग्रामीण भी उपस्थित थे, में प्रस्तावित नामों के 05 व्यक्तियों का न्यास समिति अस्थायी रूप 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है। थाना से चरित्र सत्यापन एवं कार्य-कलाप संतोषजनक पाये जाने पर न्यास समिति का कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा।
1. श्री हरिओम साह - अध्यक्ष पिता-श्री कृष्णा लाल साह ग्राम-बड़हरी, पो0-पोखरिया भाया-गुलाबबाग थाना-सदर पूर्णियॉ, पिनकोड-854326 2. श्री प्रदीप शर्मा दास -उपाध्यक्ष पिता-स्व0 उपेन्द्र नाथ शर्मा दास, ग्राम-मदारपुर, पो0-पोखरिया भाया-गुलाबबाग, थाना-सदर पूर्णिया, पिनकोड- 85436 3. श्री ब्रजकिषोर ठाकुर दास - सचिव पिता-स्व0 योगेन्द्र ठाकुर, ग्राम-विष्वासपुर, पो0थाना-डगरूआ भाया गुलाबबाग पिनकोड-854326 4. श्री उमेष सिंह - सदस्य पिता-स्व0 रामस्वरूप सिंह, ग्राम-मदारपुर, पो0-पोखरिया भाया-गुलाबबाग, थाना-सदर पूर्णियॉ, पिनकोड-854326 5. श्री महंत देव नारायण दास - सदस्य पिता-श्री उमेष शर्मा, ग्राम-मदारपुर, पो0-पोखरिया भाया गुलाबबाग, पिनकोड-854326 सभी जिला-पूर्णियॉ।
न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि मठ के नाम बैंक में खाता खोले और चूंकि निबंधित विलेख दिनांक-28. 08.1989 द्वारा कबीर सम्प्रदाय से आने वाले मो0 यषोद एवं मो0 आरती द्वारा निबंधित विलेख में 06 ए0 55 डी0 कबीर स्थान को अर्पित की गयी है और उक्त समर्पण के पष्चात् समर्पणकर्त्ता की किसी प्रकार से कोई अधिकार उस सम्पत्ति पर रह जाता है और किसी निबंधित विलेख को रद्दीकरण का एक मात्र अधिकार दिवानी न्यायालय को होता है। अतिक्रमणकारियों का कथन कि उपरोक्त सम्र्पणनामा को एक नये विलेख द्वारा कैसिंल कराया गया है, जो विधिनुसार पोषनीय नहीं है और उस आलोक में अतिक्रमणकारी द्वारा जो जमीन खरीदे किये जाने का कथन किया जा रहा है, वह न तो पर्षद की अनुमति के साथ किया गया है और न ही बिक्रेता को पुनः जमीन बिक्रय करने का अधिकार रहता है। अतः इस संबंध में न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यायाधिकरण में अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध अधिनियम की धारा-43 के तहत वाद दाखिल करें। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद से अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।63 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 12 मार्च 2024 सं0 4113--श्री श्री 108 राधा कृष्ण मंदिर, ग्रामपो0-दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला-कटिहार पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-4503/2019 है। राजस्व अभिलेख में मौजा-दिलारपुर, थाना सं0-300, खाता सं0-390, रकवा-0.04 डी0 मंदिर के नाम से है। राजस्व अभिलेख में इन्द्राज रैयतों के वंशजो के द्वारा न्यास समिति बनाये जाने हेतु दिनांक-15.05.2019 एवं 30.11.2023 को आम सभामें प्रस्ताव पारित कर,पर्षद में दाखिल किया गया। पर्षदीय पत्रांक-3394 दिनांक-10.01.2024 द्वारा प्राप्त नामों का उल्लेख करते हुए अंचल अधिकारी, मनिहारी से वर्णित नामों का अनुमोदन करते हुए कुछ नाम हटाने यह जोड़ने के संबंध में प्रतिवेदित करने का आग्रह किया गया। वांछित प्रतिवेदन अबतक अप्राप्त है। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि, 1955 की धारा 43 के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-30. 01.24 द्वारा ''श्री श्री 108 राधा कृष्ण मंदिर, ग्रामपो0-दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला-कटिहार'' के सम्यक् रूप सम्यक् विकास, जीर्णोद्धार/निर्माण, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों केसंरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है :-
योजना
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''''श्री श्री 108 राधा कृष्ण मंदिर, ग्रामपो0-दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला-कटिहार', न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 राधा कृष्ण मंदिर, ग्रामपो0-दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला-कटिहार', न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा। 02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास निर्माण/जीर्णोद्धार, विकास एवं प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करना होगा। 03. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिवएवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी धर्मषाला के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
04. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगाऔर यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
05. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 06. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद कोप्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
07. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
08. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 09. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
10. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
12. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए प्रस्तावित नामों में से निम्नलिखिल व्यक्तियों की न्यास समिति अस्थायी रूप 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है।
अंचल अधिकारी से मंतव्य, थाने से चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन एवं न्यास समिति के कार्य कलाप संतोषजनक पाये जाने पर न्यास समिति का कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा ।64 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 01. अंचल अधिकारी, मनिहारी, जिला-कटिहार - पदेन अध्यक्ष।
02. श्रीमती किरण देवी, पति-ओम प्रकाष सिंह - उपाध्यक्ष। 03. श्री मनोहर सिंह, पिता-स्व0 विन्देष्वरी सिंह - सचिव। 04. श्री भोला प्रसाद सिंह, पिता-स्व0 राधे सिंह - कोषाध्यक्ष। 05. श्री प्रमोद सिंह, पिता-स्व0 विषेष्वर सिंह - सदस्य। 06. श्री राजेन्द्र सिंह, पिता-स्व0 राधे सिंह - सदस्य। 07. श्री रंजीत पंडित, पिता-स्व0 भुनेष्वर पंडित - सदस्य। 08. श्री लखन सिंह, पिता-स्व0 धीरेन सिंह - सदस्य। 09. श्री मिथिलेष कुमार सिंह, पिता-स्व0 छेदी लाल सिंह - सदस्य। सभी ग्रामपो0- दिलारपुर, थाना-मनिहारी, जिला-कटिहार।
नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
यह अधिसूचना पर्षद द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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23 फरवरी 2024
सं0 3897--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम-गोढ़ियारी, पोस्ट-सिमराहा, अंचलथानाजिला-मधेपुरा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1004/60 है।
उक्त न्यास में लगभग 11-12 एकड़ भूमि थी। उक्त मंदिर की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्य्क विकास हेतु पर्षद द्वारा महंत सीताराम दास को अस्थायी न्यासधारी की मान्यता प्रदान की गयी थी, परंतु उनके द्वारा ससमय अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 के तहत आय-व्यय विवरणी, बजट, प्रगति प्रतिवेदन, पर्षद शुल्क आदि प्रस्तुत नहीं करने के कारण उन्हें नियमित रूप से नोटिस तथा स्पष्टीकरण अधिनियम की धारा- 28 (2) के तहत मांग किया गया। इसी बीच स्थानीय जनता द्वारा आरोप लगाया गया कि न्यसाधारी द्वारा काफी भूमि का स्थानांतरण कर दिया गया है और कुछ भूमि को बदलैन किया गया गया है।
उपरोक्त आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परंतु न्यासधारी सीताराम न तो उपस्थित हुये और न कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। इसी बीच दिनांक- 29/01/1992 को जुगु दास द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि न्यासधारी सीताराम दास जी का स्वर्गवास वर्ष 1987 में हो गया है और प्रार्थी के पास सम्पत्ति संबंधी कोई दस्तावेज नहीं है और प्रार्थी का भरण-पोषण भी गांव से चंदा-प्रसाद मांगकर होता है। प्रार्थी मान्यता प्राप्त ट्रस्टी नहीं है।
न्यासधारी के अभाव में अधिनियम की धारा- 32 के अन्तर्गत पर्षदीय ज्ञापांक- 1806, दिनांक- 19/10/1995 द्वारा बिन्देष्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया, परंतु उक्त न्यास समिति भी गठन के पश्चात न तो कभी अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 का पालन किया; न तो किसी प्रकार की कोई जानकारी, पत्राचार पर्षद से किया गया, जबकि पर्षद द्वारा नियमित रूप से न्यास समिति को डिमांड नोटिस भेजी जाती रही है। एक लंबे अंतराल के उपरांत वर्ष 2023 में ग्रामीण श्री दीपक कुमार, श्री अमर कुमार, श्री लक्ष्मण प्रसाद एवं अन्य द्वारा आरोप लगाया गया कि मंदिर की कुछ भूमि को चंदेष्वरी यादव व अन्य द्वारा फर्जी कागजात सचिव और अध्यक्ष की मिली-भगत से तैयार किया गया है और संपत्ति से प्राप्त होने वाली आय का गबन किया गया है।
आरोपित व्यक्ति को पर्षदीय आदेष दिनांक- 03/08/2023 के आलोक में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने तथा वर्ष 1995 में गठित न्यास समिति के सदस्यों को भी उपस्थित होने और भूमि आदि के संबंध में जानकारी हेतु नोटिस निर्गत किया गया। साथ ही नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचलाधिकारी से नामों की मांग की गयी।
पर्षद की जानकारी में यह भी आया है कि स्व॰ महंत सीताराम दास द्वारा 05 बीघा 05 कट्ठा 09 धूर भूमि भी श्री राम जानकी विद्यालय हेतु दिनांक- 10/11/1970 को दान दी गयी, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि विद्यालय नहीं संचालित होता है, तो भूमि न्यास की समझी जायेगी। ग्रामीणों का कथन किया गया कि विद्यालय 01 बीघा में एवं 01 बीघा में विद्यालय का मैदान है। शेष भूमि परती है। दिनांक- 17/10/2023 को अतिक्रमणकारियों द्वारा उपस्थित होकर कथन किया था कि पुर्व महंत सीता राम दास द्वारा निबंधित दस्तावेज दिनांक- 05/04/1982 को मठ की भूमि से उनकी व्यक्तिगत भूमि, बदलैन की गयी। तदनुसार भूमि पर कब्जा पक्षों का है।
उक्त परिस्थितयाँ यह स्पष्ट करती हैं कि मंदिर में लगभग 11-12 बीघा भूमि होने के उपरांत भी मंदिर की पूजा-पाठ, राग-भाग स्थानीय श्रद्धालु-भक्तों के सहयोग से हो रहा है, परंतु मंदिर जीर्ण-षीर्ण अवस्था में है।तदनुसार ग्रामीणों की आमसभा द्वारा नामों की मांग की गयी, जिसके आलोक में ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 10/09/2023 को बैठक करके 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया। इसी बीच अंचलाधिकारी द्वारा भी दिनांक-65 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 09/10/2023 को आयोजित आमसभा के बैठक में चयनित नामों का प्रस्ताव पत्रांक- 1521-2, दिनांक- 20/10/2023 द्वारा पर्षद को उपलब्ध कराया।दिनांक- 23/01/2024 को दोनों पक्ष पर्षद के समक्ष उपस्थित हुये। संचिका पर कंप्युटर के माध्यम से प्राप्त खतियान की प्रति से स्पष्ट होता है कि खाता- 160 की कुल खेसराओं की भूमि लगभग 06 एकड़ 54 डी॰ भूमि श्री राम जानकी के नाम से इन्द्राज है।
उपरोक्त परिस्थितियों पर विचार करते हुएउक्त न्यास की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु 11 सदस्यीय न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-22/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम- गोढ़ियारी, पोस्ट- सिमराहा, थानाजिला- मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्राम- गोढ़ियारी, पोस्ट- सिमराहा, थानाजिला- मधेपुरा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्राम- गोढ़ियारी, पोस्ट- सिमराहा, थानाजिला- मधेपुरा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।66 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति 05 वर्षों के लिएगठित की जाती हैः-
1. श्री धीरेन्द्र कुमार पिता- स्व॰ जागेष्वर यादव- अध्यक्ष 2. श्री अरविन्द कुमार पिता- स्व॰ दुखन यादव- उपाध्यक्ष 3. श्री रमण प्रकाष पिता- स्व॰ महादेव प्रसाद यादव सचिव 4. श्री रामचन्द्र कुमार यादव पिता- स्व॰ युगेष्वर यादव कोषाध्यक्ष 5. श्री विजेन्द्र पासवान पिता- स्व॰ कारी पासवान सदस्य 6. श्री पवन कुमार पिता- श्री प्रियव्रत यादव सदस्य 7. श्री नंदकिषोर यादव पिता- स्व॰ षिव प्रसाद यादव सदस्य 8. श्री संत कुमार यादव पिता- स्व॰ लक्ष्मी यादव सदस्य 9. श्री बीरेन्द्र कुमार पिता- श्री बमभोली यादव सदस्य 10. श्री मनोज कुमार पिता- स्व॰ कृष्ण कुमार यादव सदस्य 11. श्री शत्रुघ्न प्रसाद यादव पिता- स्व॰ जगदीष प्रसाद यादव सदस्य सभी निवासी-ग्राम- गोढ़ियारी, पोस्ट- सिमराहा, अंचलथानाजिला- मधेपुरा। उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्राम- गोढ़ियारी, पोस्ट- सिमराहा, थानाजिला- मधेपुरा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। उक्त आदेष / अधिसूचना माननीय सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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11 मार्च 2024
सं0 4057--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (महंत रघुवर दास स्मृति न्यास), ग्रामपोस्ट-मोरदीवा, जिला-समस्तीपुर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4771/2023 है।
उक्त मंदिर को अपीलीय न्यायालय ने दिनांक-15/09/1980 को निजी न्यास घोषित किया था, परंतु महंतजी द्वारा स्वयं 14 वर्षों के उपरांत अपनी सभी सम्पत्ति 40 एकड़ 41 डी॰ भूमि को भविष्य में व्यवस्था हेतु 20 व्यक्तियों की एक न्यास समिति गठित की, जो समाज के सभी सम्प्रदाय, जाति से आते थे, उन्हें सम्मिलित करते हुये, वर्ष 1984 में गठित की। पुनः दिनांक- 03/01/1997 को निबंधित विलेख का निष्पादन उनके द्वारा किया गया, जिसमें स्वयं को अध्यक्ष व अन्य व्यक्तियों के नामों का उल्लेख करते हुये भविष्य में किस प्रकार रिक्त पदों की नियुक्ति की जायेगी अथवा उसका उल्लेख किया। महंत रघुवर दास स्मृति न्यास के निष्पादन वर्ष 1994 एवं 1997 में निबंधित विलेख से अपनी निजी सम्पत्ति को सार्वजनिक सम्पत्ति में परिवर्तित कर, जनोपयोगी समाज के हित में कार्य के लिए समर्पित किया और अपना स्वामित्व हटा लिया। इसी बीच षिवराम दास नाम के व्यक्ति ने पुर्व महंत रघुवर दास का जाली हस्ताक्षर से स्वयं को षिष्य घोषित करते हुये एक दस्तावेज बनाया और मंदिर की काफी भूमि को हस्तान्तरण, लीज द्वारा 99 वर्षों के लिए पट्टा पर दिया गया। जिसके संबंध में ग्रामीणों द्वारा आपत्ति की गयी।
ग्रामीणों तथा श्री षिवराम दास को दिनांक- 13/10/2023 उनके द्वारा समर्पित विलेख तथा उनके कथन को सुनने के उपरांत मंदिर की वर्तमान स्थिति आदि पर विचारोपरांत इसे सार्वजनिक घोषित किया गया, जिस पर श्री षिवराम दास द्वारा कहा गया कि कुछ दस्तावेज समर्पित करना चाहते हैं, जिसमें दिनांक- 17/01/2024 की तिथि अंतिम अवसर के रूप में प्रदान की गयी, परंतु निर्धारित तिथि पर वे पर्षद के समक्ष उपस्थित नहीं हुये और न हीं उनके अधिवक्ता उपस्थित हुये। उक्त संस्था के सुचारू व्यवस्था व वसीयतकर्त्ता के उद्देष्यों को देखते हुये एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया, जैसा कि वर्ष 1997 में गठित न्यास समिति के सदस्य श्री षिवराज आनंद पिता- गणेष ठाकुर एवं उनके द्वारा कथन किया गया कि श्री षिवराज आनंद एवं गणेष ठाकुर के अतिरिक्त सभी सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है और चूंकि उक्त समर्पणनामा के आधार पर जिन सदस्यों का स्वर्गवास होता गया, उनके स्थान पर किसी अन्य सदस्य की नियुक्ति बहुमत के आधार पर नहीं की गयी है, न हीं किसी प्रकार का कोई प्रस्ताव लिया गया है।
उपरोक्त दोनों व्यक्तियों की न्यास समिति गांव के स्वच्छ धार्मिक चरित्र के व्यक्तियों का सम्मलित करते हुये प्रस्ताव देने का निर्देष दिया गया था, जिसके आलोक में षिवराज आनंद द्वारा दिनांक- 25/11/2023 एवं दिनांक- 05/12/2023 को बैठक आहुत कर स्वयं को सम्मिलित करते हुये 14 अन्य नामों का प्रस्ताव दिया गया।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त ठाकुरबाड़ी के सुचारू व्यवस्था व वसीयतकर्त्ता के उद्देष्यों के आलोक में अधिनियम की धारा- 83 एवं बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम की उपविधि 1953 की धारा- 43 के तहत अंचलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों67 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 पर विचारोपरांत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये, नवीन न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-15/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (महंत रघुवर दास स्मृति न्यास), ग्रामपोस्ट- मोरदीवा, जिला- समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (महंत रघुवर दास स्मृति न्यास) न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- मोरदीवा, जिला-समस्तीपुर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (महंत रघुवर दास स्मृति न्यास) न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- मोरदीवा, जिला- समस्तीपुर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति गठित की जाती हैः-
1. श्री षिवराज आनंद पिता- गणेष ठाकुर, ग्रा॰- रोउआ, वार्ड- 06, वारिसनगर, समस्तीपुर- अध्यक्ष68 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 2. श्री सिंहेष्वर सहनी पिता- पटेल सहनी, ग्रा॰पो॰- मोरदीवा- उपाध्यक्ष 3. श्री गणेष ठाकुर पिता- स्व॰ लक्ष्मी नारायण ठाकुर, ग्रा॰- रोउआ, वार्ड- 06, वारिसनगर- सचिव 4. श्री संजय कुमार पिता- रामचन्द्र महतो, ग्रा॰पो॰- मोरदीवा, था॰जिला- समस्तीपुर कोषाध्यक्ष 5. श्री रामराज सिंह (मुखिया, मोरदीवा), ग्रा॰- मोरदीवा, था॰अं॰जिला- समस्तीपुर- सदस्य 6. श्री धीरज कु॰ सिंह पिता- स्व॰ विनोद प्र॰ सिंह, काषीपुर, वार्ड- 34, नगर, समस्तीपुर- सदस्य 7. श्री रविन्द्र कुमार पिता- स्व॰ रामसागर राय, ग्रा॰- मोरदीवा, वार्ड- 07, समस्तीपुर- सदस्य 8. पदेन मुखिया (छतौनी), ग्रा॰- रामनाथपुर, पो॰- छतौना, समस्तीपुर- सदस्य 9. श्री रामाश्रय महतो पिता- स्व॰ षिवनंदन महतो, ग्रा॰पो॰- मोरदीवा, वार्ड- 05, समस्तीपुर- सदस्य 10. श्री जीतेन्द्र कु॰ राय पिता- स्व॰ कुषेष्वर राय, ग्रा॰- मोरदीवा, समस्तीपुर- सदस्य 11. श्री बहोरन पासवान पिता-स्व॰ राम खेलावन पासवान, ग्रा॰- मोरदीवा, वार्ड- 5, समस्तीपुर सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (महंत रघुवर दास स्मृति न्यास), ग्रामपोस्ट- मोरदीवा, जिला- समस्तीपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 मार्च 2024
सं0 4023--श्री राधाकृष्ण मंदिर, ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल-विरौल, जिला-दरभंगा,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4711/2023है। उक्त मंदिर के संबंध में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सामुहिक प्रार्थना-पत्र, फोटोग्राफ आदि पर विचारोपरांत इसका निबंधन किया गया और ग्रामीणों द्वारा ही लगभग 08 विक्रय-पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जो मठ की भूमि पर पुर्व सेवायत श्री यदुनंदन दास द्वारा बिना पर्षद की अनुमति के क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर उसका विक्रय किया गया है तथा जामुन मंडल जो उक्त मंदिर के रसोईया का कार्य करते थे, उनके द्वारा भी विक्रय किया गया है। ग्रामीणों का कथन है कि अधिकांष भूमि राजस्व विलेख में मंदिर के नाम है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अंचलाधिकारी से 11 व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी थी, जो अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 3039, दिनांक- 27/11/2023 द्वारा ग्यारह व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया है; जिस पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही अतिक्रमणकारियों को भी निबंधित डाक दिनांक- 21/09/2023 एवं दिनांक- 20/12/2023 को थाना के माध्यम से नोटिस दी गयी, जिस पर दिनांक- 10/10/2023 को अतिक्रमणकारी उपस्थित थी थे और उनका कथन था कि उन्होंने पुर्व महंत यदुनंदन दास से भूमि का क्रय किया है और तब से वह कब्जा में है। उनके द्वारा समर्पित विक्रय-पत्र अधिनियम की धारा- 44 के अन्तर्गत अप्रभावी और विधि-मान्य नहीं है, चुंकि बिना पर्षद की मंजूरी के किया गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से बनाये जाने का निर्णय लिया गया। थाना से चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर आगे विचार किया जायेगा।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-15/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राधाकृष्ण मंदिर, ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल- विरौल, जिला- दरभंगा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल- विरौल, जिला- दरभंगा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधाकृष्ण मंदिर न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल- विरौल, जिला- दरभंगा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।69 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
1. अंचलाधिकारी, बिरौल, जिला-दरभंगा अध्यक्ष
2. श्री बलराम झा उपाध्यक्ष
3. श्री अजय कुमार झा सचिव
4. श्री मुकेष चंद्र झा कोषाध्यक्ष
5. श्री अनंत यादव सदस्य
6. श्री गणेष झा सदस्य
7. श्री राणा सिंह सदस्य
8. श्री मोहन साह सदस्य
9. श्री कालीकांत चौधरी सदस्य
10. श्री ठको यादव सदस्य
11. श्री रामविलास भारती सदस्य
सभी निवासी-ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल- विरौल, जिला- दरभंगा।70 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राधाकृष्ण मंदिर, ग्रामपोस्ट- पघारी, अंचल- विरौल, जिला- दरभंगा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। उक्त आदेष/अधिसूचना मा॰ सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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23 फरवरी 2024
सं0 3899--जागृति चैरिटेबुल ट्रस्ट सार्वजनिक दुर्गा पूजा स्थान, ग्राम-जलवार, पत्रालय-कमरौली, थाना- सिमरी, जिला-दरभंगा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4772/23है।
उक्त न्यास की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्य्क विकास हेतु श्री बालमुकुन्द ठाकुर द्वारा दिनांक- 26/12/2023 को न्यास समिति गठन करने का आग्रह किया गया था, जिसके आलोक में पर्षदीय पत्रांक- 3244, दिनांक- 30/12/2023 द्वारा प्रस्तावित व्यक्तियों के चरित्र सत्यापन हेतु थानाध्यक्ष, सिमरी को पत्र निर्गत किया गया। उक्त चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन पर्षद को अबतक अप्राप्त है।
उपरोक्त प्रस्तावित व्यक्तियों के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई षिकायत प्राप्त नहीं है तथा श्री बालमुकुन्द ठाकुर द्वारा ही उक्त मंदिर का पर्षद मेें निबंधन कराया गया है।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुएउक्त न्यास की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्य्क विकास हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित करने का निर्णय लिया गया है। चरित्र-सत्यापन प्राप्त होने के उपरांत न्यास समिति के कार्यकाल विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-15/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए जागृति चैरिटेबुल ट्रस्ट सार्वजनिक दुर्गा पूजा स्थान, ग्राम- जलवार, पत्रालय- कमरौली, थाना- सिमरी, जिला- दरभंगा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''जागृति चैरिटेबुल ट्रस्ट सार्वजनिक दुर्गा पूजा स्थान न्यास योजना, ग्राम- जलवार, पत्रालय- कमरौली, थाना- सिमरी, जिला- दरभंगा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''जागृति चैरिटेबुल ट्रस्ट सार्वजनिक दुर्गा पूजा स्थान न्यास समिति, ग्राम- जलवार, पत्रालय- कमरौली, थाना- सिमरी, जिला- दरभंगा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।71 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा। 1. श्री संजीत ठाकुर पिता- श्री हरिष्चन्द्र ठाकुर- अध्यक्ष 2. श्री बालमुकुन्द ठाकुर पिता-श्री हेमचन्द्र ठाकुर सचिव 3. श्री जयनंद ठाुकर पिता- श्री दयानंद ठाकुर- कोषाध्यक्ष 4. श्री कैलाष झा पिता-श्री विषेष झा- सदस्य 5. श्री हीरा लाल ठाकुर पिता-श्री तुलापति ठाकुर- सदस्य 6. श्री ललित कुमार ठाकुर पिता- श्री जगदीष ठाकुर- सदस्य 7. श्री राहुल ठाकुर पिता-श्री मंगल ठाकुर- सदस्य 8. श्री भाष्कर कुमार ठाकुर पिता- श्री दिनेष ठाकुर- सदस्य 9. श्री राजन कुमार ठाकुर पिता- श्री षिवषंकर ठाकुर- सदस्य 10. श्री चरित्तार सहनी पिता- श्री रामऋच सहनी- सदस्य 11. श्री विकास कुमार झा पिता- श्री सूर्यकांत झा- सदस्य सभी निवासी-ग्राम- जलवार, पत्रालय- कमरौली, थाना- सिमरी, जिला- दरभंगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''जागृति चैरिटेबुल ट्रस्ट सार्वजनिक दुर्गा पूजा स्थान, ग्राम- जलवार, पत्रालय- कमरौली, थाना- सिमरी, जिला- दरभंगा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। उक्त आदेष / अधिसूचना माननीय सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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23 फरवरी 2024
सं0 3901--श्री श्री 108 राधाकृष्ण मंदिर, ग्राम-हाट गाछी, गंगदह, जिला-दरभंगा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4778/23 है। उक्त न्यास की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्य्क विकास हेतु एक न्यास समिति गठित किये जाने हेतु निर्णय लिया गया था, जिसके आलोक में दानकर्त्ता परिवार के व्यक्तियों की ओर से 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया था, परंतु पर्षद के आदेष दिनांक-15/01/2024 के आलोक में प्रस्तावित 12 नामों में 04 नामों पर सहमति के आधार पर प्रस्ताव दिया गया। ग्रामीणों की ओर से स्थानीय लोगों में दीप पाठक पिता-जोगिन्दर पाठक तथा सहदेव पासवान पिता-स्व॰ वासू पासवान के नाम का प्रस्ताव दिया गया।72 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उपरोक्त परिस्थितियों पर विचार करते हुए उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु 11 सदस्यीय न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-22/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री श्री 108 राधाकृष्ण मंदिर, ग्राम-हाट गाछी, गंगदह, जिला-दरभंगा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मंदिर न्यास योजना, ग्राम-हाट गाछी, गंगदह, जिला-दरभंगा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मंदिर न्यास समिति, ग्राम-हाट गाछी, गंगदह, जिला-दरभंगा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होनेवाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा-11, भारतीय दण्डविधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास धारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा। 1. अंचलाधिकारी, बहेड़ी, जिला-दरभंगा अध्यक्ष 2. श्री मिथिलेष कुमार मल्लिक उपाध्यक्ष (1)73 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 3. श्री दीपक पाठक उपाध्यक्ष (2) 4. श्री विजय कुमार मल्लिक सचिव 5. श्री सिद्धार्थ मल्लिक कोषाध्यक्ष 6. श्री राकेष कुमार मल्लिक सदस्य 7. श्री सहदेव पासवान पिता-स्व॰ बासू पासवान सदस्य सभी निवासी-ग्राम-अमता, पो॰-नारायण दोहट, थाना-बहेड़ी, जिला-दरभंगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मंदिर, ग्राम-हाट गाछी, गंगदह, जिला-दरभंगा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमिका हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
उक्त अधिसूचना / आदेष माननीय सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 मार्च 2024
सं0 4104--श्री सूर्य मंदिर, ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना-महिषी, जिला-सहरसा,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4297है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु पुर्व न्यास समिति का गठन पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 1319, दिनांक- 07/09/2017 द्वारा किया गया था, जिसके अध्यक्ष अंचलाधिकारी थे, परंतु उक्त समिति द्वारा अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 के आलोक में आय-व्यय विवरणी, बजट, पर्षद शुल्क के संबंध में केवल वर्ष 2016-17 में आय-व्यय विवरणी समर्पित की गयी, जबकि नियमित रूप से समिति को उपरोक्त प्रावधानों का पालन करने हेतु पत्र और स्पष्टीकरण भेजा गया। न्यास समिति के सदस्य, बुचाय राम एवं सुरेष मांझी द्वारा दिनांक- 06/05/2022 को पर्षद में लिखित षिकायत की गयी कि न्यास की भूमि, खेसरा- 321, 322, 323, 324, 394, 395 को पुर्व पुजारी द्वारा लीज पर दे दिया गया है तथा खेसरा- 190, 191, 192, 110, 119, 120,, पोखरा पर निज लाभ लेते हैं। इस संबंध में श्री हरिष्चन्द्र झा और 06 अन्य अतिक्रमणकारियों के नाम का उल्लेख किया गया, जिसमें सभी को नोटिस भेजकर के स्पष्टीकरण की मांग की गयी। अतिक्रमणकारियों की ओर से अपना प्रतिउत्तर दिनांक- 28/07/2022 को दाखिल किया गया। पुनः पूरक स्पष्टीकरण दिनांक- 02/11/2022 को कुछ दस्तावेज के साथ प्रस्तुत किया गया। दिनांक- 24/01/2024 को न्यास समिति के कोई भी सदस्य उपस्थित नहीं हुये और समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है और समिति का कार्य भी पूर्ण रूप से असंतोषजनक है। नई न्यास समिति गठन के संबंध में दिनांक- 10/03/2023 द्वारा अंचलाधिकारी से नामों का प्रस्ताव की मांग की गयी थी, जो अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन पत्रांक- 877, दिनांक- 15/05/2023 द्वारा प्राप्त हुआ है और चूंकि पूर्व न्यास समिति द्वारा अतिक्रमण संबंधी लगाए गए आरोप के संबंध में अतिक्रमणकारी द्वारा अपना पुरक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया, परंतु उसका कोई भी प्रतिउत्तर समिति की ओर से नहीं प्रस्तुत किया गया, जो कि समिति की घोर लापरवाही को दर्षित करता है और समिति का समय-सीमा भी समाप्त हो चुका है।
उपरोक्त परिस्थितियों मेें अधिनियम की धारा-32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उपविधि 1953 की धारा- 43 के तहत अंचलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये, अस्थायी रूप से नवीन न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया जाता है।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-24/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री सूर्य मंदिर, ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना- महिषी, जिला- सहरसा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री सूर्य मंदिर न्यास योजना, ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना- महिषी, जिला- सहरसा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री सूर्य मंदिर न्यास समिति, ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना- महिषी, जिला- सहरसा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।74 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाये पर कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा। 1. अंचलाधिकारी, महिषी, जिला-सहरसा अध्यक्ष 2. श्री घूरण महतो उपाध्यक्ष 3. श्री सुभंकर लाल दास सचिव 4. श्री दिपेष कुमार कोषाध्यक्ष 5. श्री राजेन्द्र राम सदस्य 6. श्री नीतीष कुमार मुखिया सदस्य 7. श्री गणेष महतो सदस्य 8. श्री राम महतो सदस्य 9. श्री नवल सादा सदस्य सभी निवासी-ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना- महिषी, जिला- सहरसा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री सूर्य मंदिर, ग्राम- कन्दाहा, अंचलथाना- महिषी, जिला- सहरसा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
उक्त आदेष / अधिसूचना मा॰ सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।75 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024
11 मार्च 2024
सं0 4059--श्री कबीरपंथी मठ, ग्रामपोस्ट-बघरा, अंचल-मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला-समस्तीपुर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-361है।
उक्त मठ में लगभग 09 बीघा भूमि है। पुर्व में कबीरपंथी मठ के साधुओं द्वारा इसकी व्यवस्था और प्रबंधन की जाती थी। तत्कालीन महंत शांति दास के विरूद्ध षिकायत प्राप्त हुयी कि महंत विवाहित हैं और उनके द्वारा लगभग 03 बीघा भूमि अपने पुत्रवधू के नाम लिख दिया गया है तथा मठ की अन्य सम्पत्ति को वह विक्रय करने की मंषा रखते हैं। उन्हें न्यासधारी पद से विरमित करते हुये पर्षद के आदेष दिनांक- 08/08/1988 द्वारा 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। समिति के अध्यक्ष श्री सुधेष्वर प्रसाद सिंह को नियुक्त किया गया। न्यास समिति द्वारा वर्ष 2002 में अर्थात 15 वर्षों बाद आय-व्यय विवरणी समर्पित की गयी। पुनः दिनांक- 20/12/2013 को आय-व्यय विवरणी समर्पित की गयी और शुल्क के रूप में वर्ष 2005, 2015 एवं 2018 में बिना किसी निर्धारण के क्रमषः 1000/-, 1000/- एवं 7000/- रू॰ भुगतान किया गया, जो स्पष्ट करता है कि न्यास समिति भी सूचारू रूप से अपना कार्य करती तो आज मठ की स्थिति यह नहीं होती। उस न्यास समिति के एकमात्र जीवित सदस्य रामानुज सिंह दिनांक- 19/01/2024 को पर्षद के समक्ष उपस्थित हुये और कथन किया कि वर्ष 2016 मेें प्राथर्ना-पत्र दिया कि नवीन न्यास समिति गठित की जाय; चूंकि अधिकांष सदस्यों का निधन हो चुका है, मुझे अधिकार देने का कष्ट करें। वर्ष 2018 के उपरांत न्यास समिति के सदस्यों को बार-बार, आय-व्यय विवरण, पर्षद शुल्क भुगतान करने हेतु पत्र निर्गत किया गया, परंतु कोई भी सदस्य उपस्थित नहीं हुये।
दिनांक- 28/07/2023 को श्री विवेक कुमार सिंह द्वारा एक प्रार्थना-पत्र देकर 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उक्त मठ की सुरक्षा हेतु न्यास समिति के गठन हेतु दिया।
इसके पुर्व अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन किये जाने हेतु लगातार पत्र लिखा जाता रहा है, लेकिन कोई प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुआ।
इसी बीच उक्त मठ की महंती का दावा करने वाले सज्जन दास उपस्थित हुये तथा कथन किया कि प्रष्नगत मठ, फतुहां कबीर मठ की शाखा है और तत्कालीन फतुहां मठ के महंत द्वारा वर्ष 2005 में उनको चादर-पगड़ी प्रदान की गयी है। उनके द्वारा दिनांक- 26/07/2011 को पर्षद में प्राप्त कराये गये पत्र की फोटोग्राफी समर्पित की गयी।
श्री सज्जन दास को एक अवसर प्रदान करते हुये चादर-पगड़ी संबंधित दस्तावेज समर्पित करते का निर्देष दिया गया है। दिनांक- 11/12/2023 को पर्षद के समक्ष श्री षिवानंद दास, जो फतुहां मठ के न्यास समिति के सह-सचिव थे, उनके द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि 05 बी॰ भूमि अतिक्रमण मुक्त कराया गया तथा बंदोवस्ती पर दी गयी, जिससे 50,000/- रू॰ प्राप्त हुआ, जिससे 03 कमरों के छत ढ़लाने में व्यय किया गया है, जिसमें ग्रामीणों द्वारा आपत्ति की गयी कि स्थल पर कोई निर्माण नहीं किया गया है। मात्र मठ के छत के उपर जीर्णोद्धार कार्य किया गया है। सज्जन दास द्वारा यह भी कथन किया गया कि खाता- 1189, खेसरा- 34, 35 पर 08 व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण करके पक्का मकान बना लिया गया, उन सभी व्यक्तियों से बैठक करके 800/- रू॰ प्रति कट्ठा किराया मठ को भुगतान करेंगे। इस संबंध में निर्णय प्रषासनिक पदाधिकारियों के समक्ष लिया गया तथा यह भी उल्लेख किया गया कि 04 व्यक्ति श्री रंजीत कुमार, श्री रघुनाथ, श्री त्रिवेणी प्रसाद और श्री संजीव कुमार सिंह द्वारा भी मठ की भूमि पर कब्जा कर रखा गया है, जिसके नामोें का प्रस्ताव दिया गया है।
दिनांक- 19/01/2024 को पर्षद मेंं दोनों पक्षों को विस्तारपुर्वक सुना गया। श्री षिवानंद दास द्वारा यह आरोप लगाया गया कि श्री रंजीत कुमार और श्री रघुनाथराय द्वारा भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। इस संबंध में ग्रामीणों का कथन है कि उक्त दोनों व्यक्तियों से श्री षिवानंद दास द्वारा वर्ष 2023 में 02-02 हजार रू॰ प्राप्त की गयी। उपस्थित श्री त्रिवेणी प्रसाद द्वारा बताया गया कि एक ईंच भूमि पर उनका कब्जा नहीं है। उनके द्वारा यह भी षिकायत की गयी कि प्रस्तावित नाम श्री विवेक सिंह पूर्व में जो यज्ञ किया गया था, उसमें 02 लाख की राषि चंदा आदि के रूप में श्री सज्जन दास से प्राप्त किया गया था, जिसे आजतक वापस नहीं किया गया है। इस संबंध में उनका कथन है कि न तो प्रार्थी का कोई भट्टा चलता है और न हीं प्रार्थी ने कोई राषि इस संबंध में श्री सज्जन दास से प्राप्त की है। इस संबंध में उपस्थित श्री त्रिवेणी प्रसाद का कथन है कि श्री भूषण साह व्यापारी के पास जमा की गयी थी, जिसे वापस लेकर त्रिवेणी प्रसाद के पास है, जिसे राषि को उपरोक्त मठ की चहारदीवारी करने में व्यय करने के लिए तैयार हैं।
उपरोक्त स्थिति स्पष्ट करती है कि श्री सज्जन दास के महंत के दावा के समर्थन में कथन किया जा रहा है, तो उससे प्रथम द्रष्टया प्रतीत होता है कि उन्हें चादर-पगड़ी प्रदान की गयी थी, परंतु वह कभी प्रभावी रूप से मठ की व्यवस्था में नहीं रह सके, जो आज पर्षद में उपस्थित हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके साधारण व्यवहार / चाल से लोगों द्वारा उन्हें पुर्ण रूप से कार्य करने का अवसर भी नहीं प्रदान किया गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में अधिनियम की धारा- 83 एवं बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम की उपविधि 1953 की धारा- 43 के तहत पर्षद उक्त मठ की व्यवस्था हेतु श्री सज्जन दास, न्यासधारी के साथ-साथ ग्रामीणों की एक न्यास समिति एक वर्ष के लिए गठन करने का निर्णय लिया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगा।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-19/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री कबीरपंथी मठ,76 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 ग्रामपोस्ट- बघरा, अंचल- मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला- समस्तीपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कबीरपंथी मठ न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- बघरा, अंचल- मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला- समस्तीपुर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कबीरपंथी मठ न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- बघरा, अंचल- मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला- समस्तीपुर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति एक वर्ष के लिए गठित किया जाता है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार करने पर विचार किया जायेगाः-
1. श्री सज्जन दास अध्यक्ष 2. श्री विवेक कुमार सिंह उपाध्यक्ष 3. श्री अनिल कुमार सिंह सचिव 4. श्री त्रिवेणी प्रसाद राय कोषाध्यक्ष 5. श्री अविनाष सिंह सदस्य 6. श्री दयाषंकर सिंह सदस्य77 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 7. श्री सुरेन्द्र राय सदस्य 8. श्री रामानुज सिंह सदस्य सभी निवासी-ग्रामपोस्ट- बघरा, अंचल- मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला- समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री कबीरपंथी मठ, ग्रामपोस्ट- बघरा, अंचल- मोहनपुर, थाना- शाहपुर पटोरी, जिला- समस्तीपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
उक्त आदेष / अधिसूचना मा॰ सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 जनवरी 2024
सं0 3299--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेवा, बरियारपुर, अंचल-बरियारपुर, जिला-मुंगेर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन सं0-4682 है।
उक्त न्यास के संबंध में अंचलाधिकारी की रिपोर्ट दिनांक 19/07/2022 तथा मंदिर की व्यवस्था कर रहे महंत राजा राम दास का आवेदन पत्र तथा मंदिर से संबंधित भूमि पर रैयत के रूप में श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेव मंदिर आदि का इन्द्राज पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक संस्था पाते हुए निबंधित किया जा चुका है, जिसकी निबंधन सं0-4682 है। उक्त मंदिर में कुल 94.25 डी0 जमीन है। उक्त मंदिर की देखभाल कर रहे महंत राजा राम दास पूर्व से क्रमषः दो मंदिर 1. श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बरियारपुर एवं 2. श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड की व्यवस्था व प्रबंधन देख रहे थें और उनकी अधिक उम्र तथा प्रभावी ढंग से दोनों मंदिर की अकेले व्यवस्था नहीं कर पाने के कारण तथा स्थानीय ग्रामीणों आदि के निवेदन पर उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों की मांग की गयी थी। अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 204, दिनांक 23/01/2023 द्वारा 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया गया। उक्त प्राप्त नामों के चरित्र सत्यापन हेतु पर्षदीय पत्रांक 3788, दिनांक 03/02/2023, 19़/09/2023 एवं 05/12/2023 को थाना प्रभारी बरियारपुर को पत्र भेजा गया है, परन्तु संबंधित थाना का कोई प्रतिवेदन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। अतः उपरोक्त परिस्थितियों पर विचार करते हुए और चूंकि अधिनियम की धारा 32 के तहत अधिकतम 11 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जा सकता है, उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक- 19.12.2023 में यह निर्णय लिया गया की अंचलाधिकारी बरियारपुर द्वारा प्रस्तावित नामों में से अनुमंडल पदा0, सदर मुंगेर की अध्यक्षता में मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से निम्न 11 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जाए।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेवा, बरियारपुर, अंचल-बरियारपुर, जिला-मुंगेर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेवा, बरियारपुर, अंचल-बरियारपुर, जिला-मुंगेर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेवा, बरियारपुर, अंचल-बरियारपुर, जिला-मुंगेर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।78 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर मुंगेर - अध्यक्ष 2. श्री राजा राम दास, - उपाध्यक्ष पता-ग्रामपो0थाना - बरियारपुर बाजार पडिया,पिन- 811211 3. श्री त्रिलोकी मंडल, पिता-स्व0 सुरज मंडल - सचिव ग्राम- मनियारचक नौवागढ़ी, बरियारपुर,
4. श्री अषोक मंडल, पिता-स्व0 गोगी मंडल - कोषाध्यक्ष ग्राम-बंगालीटोला, पो0- कल्याणपुर, थाना- बरियारपुर, 5. श्री सुनील मंडल, पिता-गणपति मंडल - सदस्य ग्राम- शकहरा टोला, बरियारपुर, 6. श्री राजपति मंडल, पिता-स्व0 बुद्धु मंडल - सदस्य ग्राम- कल्याणपुर टोला, बरियापुर, 7. श्री गुरू षरण, पिता-स्व0 सोहन प्र0 शर्मा - सदस्य ग्राम- कल्याणपुर टोला, बरियापुर, 8. श्री राकेष कुमार शर्मा, पिता-स्व0 पुरूषोत्तम शर्मा - सदस्य ग्राम- कल्याणपुर टोला, बरियापुर, 9. श्री राजो मंडल, पिता-स्व0 जितन मंडल - सदस्य ग्राम- कल्याणपुर टोला, बरियापुर, 10. श्री फौजदारी मंडल, पिता- स्व0 देवी मंडल - सदस्य ग्राम- कल्याणपुर टोला, बरियापुर, 11. श्री दिवाकर मंडल, पिता-स्व0 महादेव मंडल - सदस्य ग्राम- पैरू मंडल टोला, बरियारपुर, सभी थाना- बरियारपुर, जिला- मुंगेर । न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।79 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।
अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी सरकारी कर्मी है, अतः उनकी अनुपस्थिति में बैठक आदि का आयोजन करने का अधिकार उपाध्यक्ष को रहेगा, परन्तु शर्त यह रहेगी कि बैठक की पूर्व सूचना अनुमंडल पदाधिकारी, अध्यक्ष को अवष्य दे देंगें तथा बैठक के उपरान्त जो प्रस्ताव पर निर्णय लिया जायेगा, उसकी भी प्रति अनुमंडल पदाधिकारी को अवष्य उपलब्ध करा देंगे।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेवा, बरियारपुर, अंचल-बरियारपुर, जिला-मुंगेर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 जनवरी 2024
सं0 3297--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड, अंचल-हवेली खड़गपुर, जिला- मुंगेर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन सं0-4759 है।
उक्त न्यास के संबंध में अंचलाधिकारी की रिपोर्ट दिनांक 19/07/2022 तथा मंदिर की व्यवस्था कर रहे महंत राजा राम दास का आवेदन पत्र तथा मंदिर से संबंधित भूमि पर रैयत के रूप में श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी स्थान महादेव मंदिर आदि का इन्द्राज पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक संस्था पाते हुए निबंधित किया जा चुका है, जिसकी निबंधन सं0-4759 है। उक्त मंदिर में कुल 02 ए0 94 डी0 जमीन है। उक्त मंदिर की देखभाल कर रहे महंत राजा राम दास पूर्व से क्रमषः दो मंदिर 1. श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बरीयारपुर एवं 2. श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड की व्यवस्था व प्रबंधन देख रहे थें और उनकी अधिक उम्र तथा प्रभावी ढंग से दोनों मंदिर की अकेले व्यवस्था नहीं कर पाने के कारण तथा स्थानीय ग्रामीणों आदि के निवेदन पर उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन किये जाने हेतु नामों की मांग की गयी थी। अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 2387, दिनांक 13/12/2023 द्वारा 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया गया। चूंकि अधिनियम की धारा 32 के तहत अधिकतम 11 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जा सकता है। उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक- 19.12.2023 में यह निर्णय लिया गया की अंचलाधिकारी हवेली खड़गपुर द्वारा प्रस्तावित नामों में से अनुमंडल पदा0, खड़गपुर की अध्यक्षता में मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से 11 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जाए।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड, अंचल-हवेली खड़गपुर, जिला- मुंगेर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड, अंचल-हवेली खड़गपुर, जिला- मुंगेर,''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड, अंचल-हवेली खड़गपुर, जिला- मुंगेर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।80 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा-428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- न्यास समिति निम्न प्रकार है -
1. अनुमंडल पदाधिकारी, खड़गपुर - अध्यक्ष 2. श्री राजा राम दास - उपाध्यक्ष पता-ग्रामपो0थाना - बरियारपुर बाजार पडिया, पिन- 811211 3. श्री त्रिलोकी नारायण शर्मा , उर्फ त्रिलोकी मंडल - सचिव ग्राम- मनियारचक नौवागढ़ी, बरियारपुर,
4. श्री अषोक मंडल, पिता-स्व0 गोगी मंडल - कोषाध्यक्ष ग्राम-बंगाली टोला, पो0- कल्याणपुर, थाना- बरियारपुर, 5. श्री अवधेष कुमार सिंह, पिता-स्व0 रामायण सिंह - सदस्य ग्राम- संग्रामपुर, तेलियाडीह, 6. श्री राज कुमार मंडल, पिता-स्व0 अर्जुन मंडल - सदस्य ग्राम- जवायत तेलियाडीह, 7. श्री निर्भय यादव, पिता-श्री तारा यादव - सदस्य ग्राम- जवायत तेलियाडीह, 8. श्री मनोज कुमार हिमांषु, पिता-रघुवीर प्र0 सिंह - सदस्य ग्राम- पहाड़पुर, तेलियाडीह, 9. श्री राकेष रौषन, पिता-स्व0 सीताराम मंडल - सदस्य ग्रामपो0- रतनपुर, थाना- बरियारपुर, 10. श्री मिथिलेष मंडल, पिता-नागेष्वर मंडल - सदस्य ग्रामपो0- घोरघट, बरियारपुर, 11. श्री अमरजीत मंडल, पिता-श्री हरदेव प्र0 मंडल - सदस्य ग्राम-पैरूमंडल टोला, बरियारपुर, सभी थाना-बरियारपुर, जिला- मुंगेर।81 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। सदस्यों का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से प्राप्त होने पर एवं कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।
अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी सरकारी कर्मी है, अतः उनकी अनुपस्थिति में बैठक आदि का आयोजन करने का अधिकार उपाध्यक्ष को रहेगा, परन्तु शर्त यह रहेगी कि बैठक की पूर्व सूचना अनुमंडल पदाधिकारी, अध्यक्ष को अवष्य दे देंगें तथा बैठक के उपरान्त जो प्रस्ताव पर निर्णय लिया जायेगा, उसकी भी प्रति अनुमंडल पदाधिकारी को अवष्य उपलब्ध करा देंगे।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ऋषिकुंड, अंचल-हवेली खड़गपुर, जिला- मुंगेर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 मार्च 2024
सं0 4033--श्री श्री 108 जगन्नाथ जी ठाकुरबाड़ी, मु0पो0-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-4740/2023 है। राजस्व अभिलेख में खाता सं0-168 कुल रकवा-03 एकड़ 54 डी0 835 वर्गकड़ी भूमि जो श्री श्री 108 जगन्नाथ जी ठाकुरबाड़ी, पूर्णियॉ सिटी के नाम से इन्द्राज है। पूर्व में उक्त न्यास का देखभाल लक्ष्मण दास द्वारा की जाती थी, उनके स्वर्गवाष के उपरांत उनके पुत्रों के द्वारा मंदिर की सम्पत्ति को निजी प्रयोग में लिया जा रहा है और मंदिर का कोई विकास नहीं किया जा रहा है। इस परिस्थिति में स्थानीय लोगों के द्वारा एक स्वयं-भू न्यास समिति बनायी गयी और इनलोगों के द्वारा मंदिर की व्यवस्था और वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें काफी विषाल संख्या में श्रद्धालू आते हैं। इसमें स्व0 लक्ष्मण दास के पुत्रों श्री मनोज झा एवं श्री कृष्ण झा द्वारा स्थानीय समिति के कार्यो में अवरोध किया उत्पन्न किया जाता है। इस संम्बंध में श्री मनोज झा एवं श्री कृष्ण झास को पर्षदीय पत्रांक-2845 दिनांक-04.11.2023 निबंधित डाक से नोटिस प्रेषित करते हुए अपने दावे के संबंध में पर्षद के समक्ष उपस्थित होने का निर्देष दिया गया। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होते हैं तो पर्षद द्वारा न्यास समिति गठन कर दिया जायेगा। दिनांक-29.01.2024 को उक्त झा बंधु उपस्थित नहीं हुए। स्थानीय ग्रामीणों में श्री राज कुमार सिंह, श्री मंजीत सिंह, श्री घनष्याम तपाड़िया, श्री प्रदीप मित्रुका उपस्थित हैं। स्थानीय लोगों के द्वारा दिनांक-19.03.2023 को बैठक करके 09 व्यक्तियों के नामो ंका चयन किया गया और प्रस्तावित व्यक्तियों के द्वारा स्वयं-भू न्यास समिति बनाकर निबंधन कार्यालय में निबंधित भी कराया गया था, जिसकी प्रति दाखिल की गयी है। साथ ही विगत 02 वर्ष का आय-व्यय का लेखा-जोखा भी समर्पित किया । वर्ष 2021-22 में 159,000/-रू0 और वर्ष 2022-23 मे 231,000/-रू0 मंदिर की आय दर्षित की गयी। पर्षदीय पत्रांक-2844 दिनांक-04.11.2023 द्वारा प्राप्त नामों का थाना से चरित्र सत्यापन कर प्रतिवेदित करने का अनुरोध किया गया। इसके आलोक में सभी 09 व्यक्तियों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन थानाध्यक्ष, सदर थाना, पूर्णियॉ के ज्ञापांक-3671 दिनांक-12.12.2023 द्वारा प्रतिवेदित किया कि सभी व्यक्तियों के नाम पता का सत्यापन किया एवं थाना अभिलेख में इस व्यक्तियों के विरूद्ध कोई कांड दर्ज नहीं पाया गया। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में विचारोपरान्त बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि, 1955 की धारा 43 के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-29.01.2024 द्वारा ''श्री श्री 108 जगन्नाथ जी ठाकुरबाड़ी, मु0पो0-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ,'' के सम्यक् रूप से विकास, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों के संरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है :-
योजना
01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 जगन्नाथ जी ठाकुरबाड़ी, मु0पो0-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 जगन्नाथ जी ठाकुरबाड़ी, मु0पो0-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, जिला-पूर्णियॉ, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।82 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा। मंदिर के चढ़ावे या दान पर पूजारी का अधिकार नहीं होगा।
03. न्यास परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेगें और निर्धारित तिथि को न्यास समिति के सदस्यों के समक्ष दान-पेटी खोल कर राषि की गणना की जायेगी और उस राषि और अन्य मद से प्राप्त सभी प्रकार की राषि (न्यास की समग्र आय) को न्यास के बचत खाता में जमा की जायेगी।
04. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी न्यास के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।
05. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।
06. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 07. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
08. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
09. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
11. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः धर्मषाला परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहाराखुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।
अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जाता है। न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत की तिथि से 05 वर्ष के लिए होगी।
01. अंचल अधिकारी, पूर्णिया पूर्व - पदेन अध्यक्ष 02. श्री मंजीत सिंह, पिता-स्व0 राजेन्द्र सिंह - कार्यवाहक अध्यक्ष। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-8809993151 03. श्री घनष्याम तापड़िया, पिता-स्व0 छगन लाल तापड़िया - उपाध्यक्ष। पता-मु0-गुलाबबाग, थाना-सदर, पिनकोड-854306, मो0नं0-9431230229 04. श्री उमेष चौधरी, पिता-स्व0 परमेष्वर चौधरी - सचिव पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-9939403587. 05. श्री अजय चन्द्र दास, पिता-स्व0 प्रेमचन्द्र दास - कोषाध्यक्ष। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-7004520048. 06. श्री राजकुमार सिंह, पिता-स्व0 रामवृक्ष सिंह - सदस्य। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-7004334371. 07. श्री प्रदीप कुमार मित्रुका, पिता-भवानी षंकर मित्रुका - सदस्य। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-9801244220. 08. श्री गणपत मंडल, पिता-हिबुल मंडल - सदस्य। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-9471065103. 09. श्री राकेष कुमार राय, पिता-स्व0 रामबालक राय - सदस्य। पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-8002605591.
83 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 202410. श्री विजय षंकर राउत, पिता-गोरीषंकर राउत - सदस्य।
पता-पूर्णियॉ सिटी, थाना-सदर, पिनकोड-854302, मो0नं0-9931385687. सभी जिला-पूर्णियॉ।
नोट ः- 1. न्यास समिति को यह निर्देष दिया जाता है कि कि अधिसूचना प्रकषन होने के उपरांत मंदिर के नाम से बैंक खाता खोले और 10,000/-रू0 या उससे अधिक राषि का व्यय चेक के माध्यम से किया जाए तथा प्रत्येक वर्ष मंदिर में किये गये विकासात्मक कायों का ब्योरा, आय-व्यय विवरणी एवं पर्षद शुल्क अवष्य दाखिल करें। 2. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद से अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 जनवरी 2024
सं0 3539--श्री राम जानकी, (खटहा ठाकुरवाड़ी), जिला- खगड़िया, जो पर्षद में लगभग 50 वर्ष पूर्व से सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधन सं0- 2150 पर निबंधित है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यासधारी के स्वर्गवास के पश्चात् दिनांक- 20.08.2009 को अधिनियम की धारा 32 के तहत 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। जिससे न्यास की आय-व्यय की विवरणी की मांग अनेकोबार करने के पश्चात् पूर्व सचिव द्वारा दिनांक- 20.08.2015 को आवेदन दिया कि अज्ञानतावष पर्षद में जमा नहीं कर सका, अगले माह जमा कर दुंगा, परन्तु उक्त समिति द्वारा कभी कुछ नहीं जमा किया गया। उक्त न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात् पुनः वर्ष 2016 से अनुमंडल पदा0 तथा अंचलाधिकारी से उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु नामों के प्रस्ताव की मांग की जा रही है, जो अभी तक अप्राप्त है। इसी बीच ग्रामीणों के द्वारा दिनांक- 16.07.2023 को एक आमसभा करके उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव श्री सुरेन्द्र प्र0 चौरसिया की अध्यक्षता में करके पर्षद में दिया गया तथा साथ में मंदिर के 04 फोटों और जमीन का कुल विवरणी भी संलग्न किया गया है। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन भी संबंधित थाना से दिनांक 08. 09.2023 को प्राप्त हो चुका है तथा प्रस्तावित नामों के संबंध में किसी प्रकार की कोई आपत्ति भी पर्षद में प्राप्त नहीं है। अतः पर्षद के आदेष दिनांक- 21.12.2023 के आलोक में मंदिर की सुचारू व्यवस्था, प्रबंधन हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित की जाती है। जो निम्न है :-
मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी, (खटहा ठाकुरवाड़ी), जिला- खगड़िया,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी, (खटहा ठाकुरवाड़ी), जिला- खगड़िया,'' योजना होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री राम जानकी, (खटहा ठाकुरवाड़ी), जिला-खगड़िया,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।84 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति 01 वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
1. श्री सुरेन्द्र प्र0 चौरसिया, पिता- विषेष्वर प्रसाद - अध्यक्ष।
ग्राम- खटहा, पो0- गढ़मोहिनी,
2. श्री विनय कुमार 'वरूण', पिता- स्व0 सिकन्दर मंडल - सचिव।
ग्राम- गौछारी, वार्ड नं0- 06, पो0- गोपालपुर।
3. श्री रंजीत कुमार, पिता- कमलेष्वरी प्र0 चौरसिया - सह सचिव।
ग्राम- खटहा, वार्ड नं0- 13, पो0- गढ़मोहिनी।
4. श्री योगेन्द्र प्र0 चौरसिया, पिता- स्व0 सहदेव मंडल - कोषाध्यक्ष।
ग्राम-खटहा, पो0- गढ़मोहिनी।
5. श्री लुरी सदा, पिता- स्व0 सकीचन सदा - सदस्य।
ग्राम- जयन्तीग्राम औंटा, पो0- गढ़मोहिनी।
6. श्री ओमप्रकाष सिंह, पिता- स्व0 हरखीत सिंह - सदस्य।
ग्राम- जयन्तीग्राम औंटा, पो0- गढ़मोहिनी।
7. श्री महेन्द्र प्रसाद, पिता- स्व0 वासुदेव प्रसाद - सदस्य।
ग्राम- गौछारी, वार्ड नं0- 05, पो0- गढ़मोहिनी।
8. श्री भगवान दास, पिता- श्रीचन्द्र प्रसाद - सदस्य।
ग्राम- खटहा, वार्ड नं0- 4, पो0- गढ़मोहिनी।
9. श्री रंजीत कुमार शर्मा, पिता- गरीब मिस्त्री - सदस्य।
ग्राम- खटहा, पो0- गोपालपुर।
10. श्री परमानंद प्रसाद, पिता- स्व0 पंचानंद प्रसाद - सदस्य।
ग्राम- गौछारी, पो0- गोपालपुर।
11. श्री मनोज सिंह, पिता- स्व0 मुनीलाल सिंह - सदस्य।
ग्राम- जयन्तीग्राम औंटा, पो0- गढ़मोहिनी। सभी का जिला- खगड़िया।
न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।85 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा।न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी, (खटहा ठाकुरवाड़ी), जिला- खगड़िया,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-(1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। (2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 जनवरी 2024
सं0 3436--श्री बिक्रमादित्य चतुर्मुख मंदिर, कम्मन छपरा, जिला-वैषाली, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास हैं, जिसकी निबंधन सं0- 3916/09 है।
पूर्व में उक्त जगह पर कुआं की खुदाई में चतुर्भुज महादेव भगवान की मुर्ति ग्रामीणों को प्राप्त हुई थी, जिस पर पर्षद द्वारा भी लगभग 15 लाख रूपये की सहयोग राषि देते हुए एक विषाल मंदिर का निर्माण करने के उद्देष्य से पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1208, दिनांक 10/07/2015 द्वारा 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया था। जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है, समिति द्वारा अपने गठन के पष्चात समय-समय पर किये जा रहे विकासात्मक कार्यों की छायाप्रति तथा अनुमानित खर्च की सूचना भी पर्षद को दी जाती रही है और आय-व्यय विवरणी भी दाखिल की गयी, परन्तु आय-व्यय विवरणी के आलोक में पर्षद शुल्क धारा 70 के तहत जमा नहीं किया गया। जबकि मंदिर की समिति द्वारा दाखिल ऑडिट रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि लगभग 20 लाख रूपये प्रतिवर्ष मंदिर की आय है, जिसमें अधिकांष राषि निर्माण के एवज में कूपन (कूपन रसीद क्रमषः 11, 21, 31, 51 और 121 रू0) काट कर प्राप्त की जाती है। पर्षद द्वारा सूचना दिये जाने पर समिति द्वारा आंषिक रूप से पर्षद शुल्क का भुगतान किया जा चुका है, शेष राषि भी उनको 02 माह के अन्दर भुगतान किये जाने का निर्देष दिया जाता है। संचिका पर उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट, मंदिर का फोटोग्राफ आदि से स्पष्ट होता है कि न्यास समिति का कार्यकाल संतोषजनक है और न्यास समिति के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति किसी ग्रामीण या किसी अन्य द्वारा नहीं दाखिल की गयी है। कार्यरत समिति द्वारा एक आम सभा दिनांक 28/08/2021 को करके कार्यरत न्यास समिति में से ही अधिकांष सदस्यों को शामिल करते हुए 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में दाखिल किया गया है। चूंकि समिति द्वारा अधिनियम की धारा 70 का पालन नहीं किया जा रहा था, इसलिए उनके कार्य अवधि विस्तार पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। न्यास समिति द्वारा पर्षद शुल्क की अधिकांष राषि जमा कर दी गयी है, अतः उपरोक्त परिस्थितियों में प्रस्तावित नामों की न्यास समिति को हीं 05 वर्षाे के लिए मान्यता देते हुए एक योजना का निरूपण किया जाता है। नये दोनों व्यक्तियों क्रमषः डॉ0 बसंत कुमार सिंह, (सचिव), एवं श्री शंभु नाथ राम, (सदस्य) का चरित्र सत्यापन संबंधित थाने से कराये, तब तक उक्त दोनों सदस्य अस्थायी रूप से कार्यरत रहेंगे।
मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री बिक्रमादित्य चतुर्मुख मंदिर, कम्मन छपरा, जिला-वैषाली,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री बिक्रमादित्य चतुर्मुख मंदिर, कम्मन छपरा, जिला-वैषाली,'' योजना होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री बिक्रमादित्य चतुर्मुख मंदिर, कम्मन छपरा, जिला-वैषाली,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।86 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री हरिहर प्रसाद सिंह, पिता- महावीर प्र0 सिंह, - अध्यक्ष।
पता- ग्राम- कृष्णापुर, बखरा, जिला- मुजफ्फरपुर।
2. श्री लखीन्द्र प्रसाद सिंह, पिता- स्व0 सुरेन्द्र प्र0 सिंह, - उपाध्यक्ष।
पता- ग्राम- रोहना, पो0- रहीमपुर, जिला- वैषाली।
3. डॉ0 वसंत कुमार सिंह, पिता- स्व0 नितीष्वर प्र0 सिंह, - सचिव।
पता- ग्राम- जुरन छपड़ा,थाना- ब्रहम्पुरा पो0जिला- मुजफ्फरपुर।
4. श्री संजय कुमार सिंह, पिता- स्व0 ऋषिकेष प्र0 सिंह, - उपसचिव। 5. श्री राज किषोर राय, पिता- स्व0 भिखारी राय, - कोषाध्यक्ष। 6. श्री राजगीर राय, पिता-स्व0 चुल्हाई राय, - सदस्य। 7. श्री दिनेष्वर प्र0 सिंह, पिता- स्व0 राम लखन सिंह - सदस्य। 8. श्री शषि भूषण प्र0 सिंह, पिता- स्व0 जगदेवन सिंह - सदस्य। 9. श्री शम्भुनाथ राम, पिता-स्व0 राम सेवक राम - सदस्य।
सभी का पता- ग्रामपो0थाना जिला- वैषाली।
10. श्री रीत लाल राय, पिता-स्व0 महादेव - सदस्य।
पता- ग्राम- वासुदेवपट्टी, पो0-वैषाली, जिला- वैषाली।
11. श्री सुरेन्द्र प्र0 सिंह, पिता- स्व0 महेन्द्र सिंह - सदस्य।
पता- ग्राम- बासोकुंड, पो0-वैषाली, थाना- सरैया, जिला- मुजफ्फरपुर। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।87 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री बिक्रमादित्य चतुर्मुख मंदिर, कम्मन छपरा, जिला-वैषाली,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगातथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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9 जनवरी 2024
सं0 3364--बाबा धनेष्वरनाथ महादेव मंदिर, महादेव सिमरिया, जिला-जमुई, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-2082 है।
उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु कुम्हार जाति एवं ब्राह्मण जाति के लोगों में काफी विवाद था, जो पर्षद में सुनवाई उपरान्त आदेष दिनांक 28/03/2014 द्वारा यह निर्णय लिया गया कि मंदिर में कर्मकांड का कार्य रामपुर खास के पाण्डेय समाज के व्यक्ति करेंगे तथा सिमरिया गांव के कुम्हार के लोग (पंडा) का कार्य करेंगे और कोई व्यक्ति एक-दूसरे के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेगा, परन्तु दोनों पक्षों के द्वारा एक-दूसरे के उपर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए एक-दूसरे के कार्यों में अवरोध किया जाने लगा और मंदिर की स्थिति दिन-प्रतिदिन अव्यवस्थित होने लगी। पर्षद द्वारा भी दिनांक 01/03/2016 को 5,00,000/-रू0 मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु अनुदान दिया गया था, जिसकी स्वीकृति उपरान्त 3,00,000/-रू0 का चेक दिनांक 08/12/2017 को दिया गया था और मंदिर की व्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-3342 दिनांक 31/03/2017 को 11 सदस्यीय न्यास समिति का भी गठन किया गया, परन्तु गठित न्यास समिति अपने कार्यों में पूर्ण रूप से असफल रही और अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 का कभी पालन नहीं किया गया और पर्षद द्वारा बार-बार पत्र भेजे जाने के बावजूद भी कोई प्रतिउत्तर नहीं दी गयी और न हीं मंदिर की अतिक्रमित की गयी भूमि/दुकान को खाली कराया जा सका। इसी बीच न्यास समिति के सदस्य, श्री सत्य नारायण पंडा, व दो अन्य व्यक्ति क्रमषः श्री पप्पू पंडा एवं श्री जितेन्द्र पंडा के साथ पर्षद में उपस्थित होकर कथन किया गया कि असमंजस के कारण 11 माह तक उन्होंने मंदिर की व्यवस्था अपने पास रखी, जिसमें लगभग 03 लाख रूपये की आय शादी, मुंडन, गाड़ी पूजा, दान-पेटी आदि से प्राप्त हुआ और यह स्वीकार किया कि मंदिर के गर्भगृह में जो चढ़ावा आता है, वह राषि पूर्ण रूप से पंडा समाज द्वारा रख कर आपस में वितरण किया जाता है। उपरोक्त परिस्थितियों में वर्ष 2017 में गठितन्यास समिति के कार्यों को असंतोषजनक और पूर्ण रूप से असफल पाते हुए एक नयी न्यास समिति का निर्णय दिनांक 29/08/2023 को लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में अंचलाधिकारी के द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अपने पत्रांक 537, दिनांक 07/10/2023 द्वारा पर्षद को उपलब्ध करायी गयी। उक्त प्रस्ताव दिनांक 06/10/2023 को एक बैठक करके लिया गया।
इसी बीच दिनांक 11/10/2023 को श्री रण्धीर कुमार द्वारा पर्षद में वर्ष 2017-18 से वर्ष 2022-23 तक की आय-व्यय विवरणी दाखिल करते हुए पर्षद शुल्क के रूप में 54,557/-रू0 का चेक जमा किया गया। दिनांक- 28.11.2023 को दोनों पक्ष उपस्थित हुये। न्यास समिति की तरफ से कोषाध्यक्ष, श्री देवेन्द्र कुमार सिंह, मुख्य पुजारी, श्री सत्य नारायण पंडा उपस्थित हुये तथा डॉ0 रण्धीर सिंह जो अपने को नव नियुक्त सचिव के रूप में बताते हैं और कथन करते हैं कि पर्षद द्वारा गठित नामित सचिव श्री मुकेष कुमार अस्वस्थ हैं, इसीलिए इन्हें चयन किया गया। पर्षद द्वारा विभिन्न पृच्छा किये जाने पर भी कोषाध्यक्ष द्वारा कोई स्पष्ट उत्तर नहीं देकर डॉ0 रण्धीर कुमार सिंह द्वारा हीं कुछ बातों को रखा गया। दूसरी तरफ अंचलाधिकारी द्वारा न्यास समिति हेतु प्रस्तावित व्यक्ति श्री सुबोध कुमार सिंह एंव श्री प्रवीण चंद्र पाठक द्वारा कथन किया जा रहा है कि मंदिर की व्यवस्था पूर्ण रूप से चरमरा गयी और न्यास समिति के सचिव और कोषाध्यक्ष के अस्वस्थ होने के कारण पूरी समिति अक्रियाषील हो गयी है, जिसका फायदा उठाकर पंडा समाज द्वारा लगभग 03 वर्षों से मंदिर की पूरी आय (सभी श्रोतों) से अपने निजी प्रयोग में ली जा रही है, अतः ग्रामीणों की एक बैठक करके अंचलाधिकारी की देख-रेख में 11 सदस्यीय न्यास समिति का प्रस्ताव लाया गया और उक्त समिति दिनांक 07/04/2023 से 27/11/2023 तक मंदिर की पूर्ण रूप से व्यवस्था कुषलतापूर्वक संचालित कर रही है तथा अपने कथन के समर्थन में अपने प्रार्थना-पत्र के साथ लगभग 40 पृष्ठों का एक रजीस्टर की छायाप्रति दाखिल की है, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रत्येक दिन का विभिन्न श्रोतों से होने वाली आय को बडे़ हीं व्यवस्थित ढंग से अंकित किया गया है, जिसमें किस मद में कितना पैसा प्राप्त हुआ है और किस मद में खर्च किया जा रहा है, का उल्लेख है, जो उनके कार्यों में पारदर्षिता को इंगित करता है और मंदिर की कुषल व्यवस्था, प्रबंधन हेतु इसी प्रकार के कार्यों की आवष्यकता होती है।88 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 इसके विपरित वर्ष 2017 में गठित न्यास समिति के द्वारा जो आय-व्यय विवरणी दाखिल की गयी है, उसमें कुछ स्पष्ट नहीं है और प्रत्येक वर्षों में आय से अधिक खर्च दिखाया गया है।
जो मंदिर के नाम से खाता खोला गया था, उसमें आज की तिथि में मात्र 25,000/-रू0 हैं तथा पर्षद के संज्ञान में यह लाया गया कि एक प्रथम सूचना रिपोर्ट 95/23 दाखिल किया गया है, जिसमें यह कथन किया गया है कि पंडा और पंडित समाज के बीच में मंदिर की व्यवस्था को लेकर के मार-पीट की घटना भी हो चुकी है तथा वर्ष 2017 में गठित न्यास समिति द्वारा दिनांक 16/07/2023 की एक बैठक दिखाते हुए 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव समिति गठन किये जाने हेतु दिया गया है। उपरोक्त सभी तथ्यों पर विचारोपरान्त यह स्पष्ट है कि पूर्व न्यास समिति का कार्य पूर्ण रूप से असंतोषजनक और असफल रहा है, अतः मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है।
मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''बाबा धनेष्वरनाथ महादेव मंदिर, महादेव सिमरिया, जिला-जमुई,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा धनेष्वरनाथ महादेव मंदिर, महादेव सिमरिया, जिला-जमुई,''योजनाहोगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''बाबा धनेष्वरनाथ महादेव मंदिर, महादेव सिमरिया, जिला-जमुई ,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना89 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति 01 वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
- पदेन अध्यक्ष
- कोषाध्यक्ष
- सदस्य 1. अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई 2. श्रीमती सरिता सिंह (रानी), पति-श्री अजय सिंह - कार्यकारी अध्यक्ष 3. श्री प्रवीण चन्द्र पाठक, पिता-वैद्यनाथ पाठक - सचिव दोनों का पता- ग्रामपो0- महादेव सिमरिया, सिन्दरा, जिला- जमुई। 4. श्री रवि वर्मा, पिता-अषोक प्रसाद वर्मा ग्राम- चारण, पो0- धधौर, सिकन्दरा, जिला- जमुई। 5. श्री मिथलेष कुमार सिंह, पिता-दषरथ सिंह ग्राम-वसैया, पो0- पाठकचक, सिकन्दरा, जिला-जमुई। 6. श्री प्रवीण कुमार सिंह, पिता-केदार प्रसाद सिंह - सदस्य ग्राम- धनबे, पो0- महादेव सिमरिया, सिकन्दरा, जिला-जमुई। 7. श्री अवधेष कुमार सिंह, पिता-जगदम्बा सिंह - सदस्य ग्राम- रान्हन, पो0- महादेव सिमरिया, सिकन्दरा, जिला- जमुई। - सदस्य 8. श्री प्रकाष कुमार सिंह, पिता-सुधीर सिंह 9. श्री जयप्रकाष सिंह, पिता-धिरजा सिंह - सदस्य 10. श्री सुबोध कुमार सिंह, पिता-केदार प्रसाद सिंह - सदस्य 11. श्री अनिल कुमार सिंह, पिता-बैकुण्ठ सिंह - सदस्य क्रमांक 8 से 11 तक सभी का पता-ग्रामपो0- महादेव सिमरिया सिकन्दरा, जिला- जमुई। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।
न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। शेष सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''बाबा धनेष्वरनाथ महादेव मंदिर, महादेव सिमरिया, जिला-जमुई,''के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 मार्च 2024
सं0 4106--छोटी पटन देवी का मंदिर, पटना सिटी, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-710 है।पटना के प्राचीन मंदिरों में छोटी पटन देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। फ्रांसिसी लेखक बुकानन ने वर्ष 1811-12 में पटना परिभ्रमण के क्रम में अपने सर्वे में दोनों पटन देवियों की चर्चा विस्तारपुर्वक की है। डॉ॰ आर॰ डी॰ पाटील ने''ऐंटी कोरियन रिमेन इन बिहार'' में दोनों (बड़ी पटना देवी एवं छोटी पटन देवी) की चर्चा की है। यह मंदिर पटना साहिब रेलवे स्टेषन से 1.5 कि॰मी॰ उत्तर में अवस्थित है। स्वतंत्रता के उपरांत बिहार सरकार द्वारा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के अन्तर्गत इस मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक न्यास मानते हुंये वर्ष 1958 में निबंधित किया गया। सी॰एस॰ खतियान में वार्ड- 26, शीट- 244, पटना म्यूनिसपल सर्वे खेसरा- 1590 (हो॰- 76 ए), 1591, 1594 (हो॰- 84) के कॉलम- 3 में छोटी पटन देवी तथा कॉलम- 4 में छोटी पटन देवी जी मुंतजिमकार बाबू नाथ तिवारी एवं मोसमात राम दुलारी व लक्ष्मण पंडा के नाम का इन्द्राज है।ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में राज्य सरकार द्वारा मंदिर को मोबलिक 133 रू॰ 15 आना वार्षिक प्राप्त होता था, जो बंद हो गया है। मंदिर के व्यय, चढ़ावा के आश्रय वो चंदा-चिट्टा के आश्रय चला आ रहा है।इसके निबंधन के पश्चात वर्ष 1952-53 से 1956-57 तक की आय-व्यय विवरणी भी पर्षद में प्रस्तुत की गयी है। दिनांक- 25/04/1958 कोराम दुलारी90 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 द्वारा भी एक प्रार्थना-पत्र दिया गया, इस मंदिर के चढ़ावा का सिर्फ आठ आना के हिस्सेदार बाबूनाथ तिवारी हैं और आठ आना के हिस्सेदार प्रार्थीनी है। प्रार्थीनी को चढ़ावा का आठ आना, आधा हिस्सा प्राप्त भी होता है। पूजा-पाठ इंतजाम उनके हाथ में है और तदनुसार शुल्क जमा करने को तैयार है। उक्त आधार पर निवेदन करती हैं कि प्रार्थीनी का भी नाम चढ़ावा जाय। राम दुलारी द्वारा भी वर्ष 1951-52 से वर्ष 1956-57 तक की आय-व्यय विवरणी, आधा प्राप्त चढ़ावा का विवरण प्रस्तुत किया गया। उक्त प्रार्थना-पत्र पर पर्षद द्वारा उन्हें आधी आय का आय-व्यय विवरणी प्रस्तुत करने का आदेष दिनांक- 30/05/1958 को दिया गया। इसी बीच बाबूनाथ तिवारी का स्वर्गवास हो गया।
तदोनुपरांत उनकी पत्नी मोसमात राम प्यारी एवं राम दुलारी देवी द्वारा संयुक्त रूप से आय-व्यय विवरणी प्रस्तुत किया गया। इस बीच राम दुलारी देवी के स्वर्गवास के पश्चात उनके द्वारा निष्पादित वसीयत दिनांक- 28/07/1960 के आधार पर सीताराम पांडे एवं राम प्यारी द्वारा संयुक्त रूप से आय-व्यय विवरणी प्रस्तुत की गयी तथा आय-व्यय विवरणी के कॉलम- 5 में न्यासधारी और प्रबंधक के नाम के कॉलम में भी दोनों व्यक्तियों अपने नाम का उल्लेख किया गया। प्रोवेट वाद सं॰- 111/1962/13/66 आदेष दिनांक- 13/02/1967 द्वारा प्रोवेट सीताराम पांडे के पक्ष में स्वीकार किया गया। इस बीच दोनों पक्षों के मध्य, चढ़ावा के बंटवारा को लेकर विवाद हुआ, जिसके कारण दोनो पक्षों के मध्य वाद भी हुये। मंदिर की जर्जर हो रही व्यवस्था एवं प्रबंधन के बिंदु पर आपसी विवाद को ध्यान में रखते हुये अधिनियम की धारा- 33 के तहत 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी की अध्यक्षता में पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 122, दिनांक- 11/04/1994 को किया गया।
उक्त आदेष को विविध अपील वाद सं॰- 47/94 में प्रष्नगत किया गया, जो न्यायालय द्वारा विस्तारपुर्वक सुनने के उपरांत दिनांक- 06/10/2012 को निरस्त किया और स्पष्ट मत दिया ''अभिषेक अनंत द्विवेदी का प्रार्थना-पत्र पोषणीय नहीं है, क्योंकि उनके द्वारा सेवायत की मांग वसीयत के माध्यम से की जा रही है, जो अभी तक प्रोवेट नहीं हुआ है। आगे मत व्यक्त किया गया कि सेवायत का अधिकार हस्तांतरणीय नहीं होगा। यह भी मत व्यक्त किया गया कि चुंकि पुरानी समिति दिनांक- 11/04/1994 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नवीन समिति का गठन किया जा चुका है। अतः वाद पोषणीय नहीं रह जाता है। उक्त आधार पर उक्त को भी निरस्त किया।''
दीवानी न्यायालय के उक्त आदेष को CWJC No.- 811/13 प्रस्तुत कर प्रष्नगत किया, जो दिनांक- 16/05/2014 को निरस्त हुआ। उक्त निर्णय के विरूद्ध LPA No.- 1117/17 प्रस्तुत किया गया, जो दिनांक- 24/07/1917 को निरस्त हुआ।पर्षद द्वारा उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु प्रबंधक / कारिंदा / सेवायत के बिंदु पर विवाद होने के कारण समय-समय पर न्यास समिति का गठन किया गया। अंतिम रूप से न्यास समिति का गठन दिनांक- 08/07/2008 को किया गया, जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नवीन न्यास समिति गठन किये जाने के बिंदु पर अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी से ग्यारह अच्छे चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग की गयी। पर्षद में सुनवायी हेतु अभिषेक अनंत द्विवेदी एवं सीताराम पांडे को निबंधित-डाक, दिनांक- 25/11/2023 द्वारा सूचना भेज कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु सभी दस्तावेजों के साथ दिनांक- 09/01/2024 को उपस्थित होने का निर्देष दिया गया। श्री अभिषेक अनंत द्विवेदी प्रस्तुत नहीं हुये।
उनके द्वारा दिनांक- 04/12/2023 को डाक द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया। सीताराम पांडे ने पर्षद में उपस्थित होकर समिति गठित करने का आवेदन दिया और समिति में स्थान देने का भी आग्रह किया।
यहां उल्लेख करना आवष्यक है कि अभिषेक अनंत द्विवेदी न तो पर्षद द्वारा किसी प्रकार की मान्यता दी गयी है और न हीं किसी न्यायालय या किसी सक्षम प्राधिकार द्वारा उन्हें किसी भी प्रकार से किसी भी पद पर मान्यता दी गयी है।अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी द्वारा ज्ञापांक- 2544, दिनांक- 06/10/2023 द्वारा तीन सदस्यीय चयन समिति (प्रखंड विकास पदाधिकारी, कार्यपालक दण्डाधिकारी, पुलिस निरीक्षक, थानाध्यक्ष) द्वारा चयनित 15 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भेजा गया। आगे उल्लेख किया है कि मंदिर की संवेदनषीलता को ध्यान में रखते हुये, थानाध्यक्ष, चौक थाना, पटना सिटी को नामित किया जा सकता है। अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी द्वारा प्रेषित नामों पर किसी प्रकार का कोई आपत्ति प्राप्त नहीं है।
चुंकि सीताराम पांडे के पक्ष में निष्पादित वसीयतनामा दिनांक- 28/07/1960 जिसका प्रोवेट भी न्यायालय के आदेष दिनांक- 27/05/1966 को मान्यता दी जा चुकी है। तदुनसार उन्हें मंदिर कर्म-काण्ड, प्रसाद-चढ़ावा आदि कार्य करने का निर्देष प्रदान किया जाता है तथा न्यास समिति को यह अधिकार होगा कि वह आवष्यकतानुसार अन्य पुजारी, लेखाधारी, व्यवस्थापक के रूप को मानदेय पर किसी को नियुक्त भी कर सकती है।
उपरोक्त परिस्थिति में सभी तथ्यों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतुएक योजना का निरूपण करते हुये एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिए किया जाता है।
समिति के सदस्यों को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र एक बैठक कर न्यायाधिकरण में अपना वकालतनामा प्रस्तुत कर कार्रवाई को आगे बढ़ायें एवं यह भी निर्देष दिया जाता है कि वर्तमान में मंदिर तथा इसके प्रांगण में जो निवास करने वाले व्यक्ति हैं, उनका विस्तृत विवरण, कि किस व्यक्ति के कब्जा में कितना कमरा है, उनके नाम आदि का उल्लेख करते हुये पर्षद में शीघ्र समर्पित करें।91 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-09/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए छोटी पटन देवी का मंदिर, पटना सिटी, जिला- पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''छोटी पटन देवी का मंदिर न्यास योजना, पटना सिटी, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''छोटी पटन देवी का मंदिर न्यास समिति, पटना सिटी, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता सुनवायी के उपरांत समाप्त हो सकती है।
19. न्यास समिति में मनोनित प्रषासनिक अधिकारी यदि हिन्दू नहीं होगा, ऐसी स्थिति में कोई दुसरा अधिकारी या व्यक्ति मनोनित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन05 वर्षों के लिए किया जाता हैः-92 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 1. अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी, पटना - अध्यक्ष
2. श्री सुरेष अरोड़ा, गंगा बाबू की ठेकी, पटना सिटी (9386378123) -कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री प्रफुल्ल कु॰ पांडे, चौक षिकारपुर (7004533911) -उपाध्यक्ष 4. श्री राजकुमार यादव, नालापर (7488480294) - सचिव 5. श्री अलोक रंजन, हाजीगंज (9905204377) -कोषाध्यक्ष 6. श्री मधुसूदन मिश्र, झाउगंज (8210661339) - सदस्य 7. श्री मानस कपुर, चौक (8789695726) - सदस्य 8. श्री दया सिंह, हरिमंदिर गली (7070703350) - सदस्य 9. श्री महादेव तिवारी, छोटी पटन देवी (6202358405) - सदस्य 10. श्री मनोज कुमार, छोटी पटन देवी (9122567087) - सदस्य 11. थानाध्यक्ष, चौक थाना, पटना सिटी, पटना। - सदस्य सभी निवासी- छोटी पटन देवी का मंदिर, पटना सिटी, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''छोटी पटन देवी का मंदिर, पटना सिटी, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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16 फरवरी 2024
सं0 3764--श्री ठाकुर गोपाल जी मंदिर (दुबे की सरैया), ग्रामपोस्ट-सरैया, थाना-चैनपुर, जिला-कैमूर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3063 है।
उक्त मंदिर की संपत्ति के संबंध में स्वत्व वाद सं॰- 231/70 एवं 123/77 दाखिल किया गया, जो दिनांक- 31/07/1974 को निरस्त हुआ और न्यायाधिकरण के आदेष के मान्यता देते हुये सार्वजनिक न्यास माना गया। इसके विरूद्ध द्वितीय अपील वाद सं॰- 154/74 मा॰ उच्च न्यायालय में लाया गया, जो समझौता के आधार पर दिनांक- 04/08/1975 को निस्तारित हुआ, जिसमें उक्त वाद में विवादित संपत्ति Schedule- A, कुल क्षेत्रफल- 25.26 एकड़ भूमि सार्वजनिक घोषित की गयी, जिसमें वादीगण को न्यासधारी (श्री बलिराम एवं श्री निवास पांडे) के रूप में रखने की मान्यता दी गयी, परंतु कालांतर में उक्त भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर बटाई वाद दाखिल किया गया, जो निरस्त हुआ और मंदिर की व्यवस्था हेतु अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में दिनांक- 19/03/2020 को 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। इसमेंं कई निर्देष प्रदान किये गये थे, परंतु न्यास समिति ने किसी का पालन नहीं किया और न हीं आज तक अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 का पालन किया। जब न्यास समिति के सदस्यों को निबंधित-डाक एवं थाना के माध्यम से सूचना दी, परंतु वे कभी उपस्थित नहीं हुये।
इसके विपरित पुर्व न्यासधारी के पुत्र श्री मृत्युंजय पांडे पिता- स्व॰ अमरनंद पांडे, जो पर्षद के समक्ष लगातार 3-4 तिथियों पर उपस्थित रहे हैं, उनके द्वारा कुछ फोटोग्राफ समर्पित किया गया, जिससे प्रतीत होता है कि मंदिर जीर्ण-षीर्ण अवस्था में है और कभी भी ध्वस्त हो सकता है। इस संबंध में जीर्णोद्धार हेतुराषि अपने स्वयं के द्वारा व्यय किये जाने संबंधी प्रार्थना-पत्र दिया, जिसे स्वीकार करते हुये, उन्हें गर्भ-गृह मरम्मति कराने की अनुमति प्रदान की गयी। साथ ही उन्होंने एक बैठक आहुत कर न्यास समिति गठित किये जाने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया। वर्ष 2020 में गठित अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल पुर्ण रूप से असंतोषजनक रहा है और पर्षद के आदेष को कोई पालन नहीं किया जा रहा है।
अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल जो एक वर्ष हेतु था, वह काफी समय पुर्व समाप्त हो चुका है। उपरोक्त विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत आम सभा की बैठक दिनांक- 10/04/2023 में प्रस्तावित नामों की न्यास समिति का गठन उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने एवं सदस्यों का चरित्र-सत्यापन प्राप्त होने के उपरांत समिति के अवधि-विस्तार पर विचार किया जायेगा। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-10/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री ठाकुर गोपाल जी मंदिर (दुबे की सरैया), ग्रामपोस्ट-सरैया, थाना-चैनपुर, जिला- कैमूरके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठनकिया जाता है।93 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री ठाकुर गोपाल जी मंदिर (दुबे की सरैया) न्यास योजना, ग्रामपोस्ट-सरैया, थाना-चैनपुर, जिला- कैमूर''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री ठाकुर गोपाल जी मंदिर (दुबे की सरैया) न्यास समिति, ग्रामपोस्ट-सरैया, थाना-चैनपुर, जिला- कैमूर''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए किया जाता है एवं न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने अवधि-विस्तार पर विचार किया जायेगा। 1. अनुमंडल पदाधिकारी - अध्यक्ष 2. श्रीषिवपुजन सिंह पिता- स्व॰ बादू कोईरी, दुबे की सरैया -उपाध्यक्ष 3. श्री मृत्युंजय पाण्डेय पिता-स्व॰ अमरनंद पाण्डेय, दुबे की सरैया - सचिव 4. श्री कमलनंद पाण्डेय पिता- स्व॰ बलिराम पाण्डेय, दुबे की सरैया - कोषाध्यक्ष 5. श्री पंचम गौण पिता- स्व॰ नमुनी गौण, दुबे की सरैया - सदस्य94 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 6. श्री राम नारायण शर्मा पिता-श्री गुलाब शर्मा, मेढ़, चैनपुर, कैमूर - सदस्य 7. श्री गोपाल उपाध्याय पिता-स्व॰ रामधार उपाध्याय, दुबे की सरैया - सदस्य 8. श्री राम दुलार खरवार पिता-राजेन्द्र प्रसाद खरवार, दुबे की सरेया - सदस्य 9. श्री पप्पु राम पिता-श्री धुरफेकन राम, दुबे की सरैया, कैमुर - सदस्य 10. श्री हीरा शर्मा पिता-स्व॰ बलदेव शर्मा, दुबे की सरैया, कैमुर - सदस्य
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री ठाकुर गोपाल जी मंदिर (दुबे की सरैया), ग्रामपोस्ट-सरैया, थाना-चैनपुर, जिला-कैमूर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 फरवरी 2024
सं0 3766--प्राचीन षिव मंदिर, फुलवारी श्री, फुलवारी ब्लॉक, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3678 है।
उक्त मंदिर के खाता- 1691, खेसरा- 387 पर अवस्थित है। मंदिर 100 वर्ष से अधिक प्राचीन है। उसी मंदिर से सटे उत्तर की ओर खेसरा- 388 पर तालाब है तथा खेसरा- 386 पर बाग है और दो कमरे थे। मंदिर की व्यवस्था हेतु 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन B.D.O.फुलवारी की अध्यक्षता में किया गया था। मंदिर स्थित भूमि पर ही कुछ लोगों द्वारा अवैध वसूली की सुचना समय-समय पर पर्षद को प्राप्त होती रही। कुछ अस्थायी रूप से दुकानें भी है, जिसकी वसूली अवैध रूप से दबंग व्यक्तियों द्वारा की जाती है। न्यास समिति का कार्यकाल पुर्ण रूप से असंतोषजनक रहा है और उनके द्वारा नियमित रूप से आय-व्यय विवरणी, बैठक आदि की सूचना पर्षद को नहीं दी जाती रही। समिति का कार्यकाल बहुत पुर्व समाप्त हो चुका है। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 19/03/2023 को एक बैठक कर 10 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया है। मंदिर के सुचारू व्यवस्था, मंदिर की आय को संगठित रूप से प्राप्त करके बैंक में रखकर मंदिर के विकास में व्यय किया जाय।
प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु अस्थायी रूप से एक योजना का निरूपण करते हुये निम्न न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिये किया जाता है। प्रस्तावित न्यास समिति खाता, खेसरा संख्या- 386, 387 पर भी जो मंदिर है, उन सभी मंदिरों की व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु अधिकृत रहेगी।
अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-03/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए प्राचीन षिव मंदिर, फुलवारी श्री, फुलवारी ब्लॉक, जिला-पटना के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है। योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''प्राचीन षिव मंदिर न्यास योजना, फुलवारी श्री, फुलवारी ब्लॉक, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''प्राचीन षिव मंदिर न्यास समिति, फुलवारी श्री, फुलवारी ब्लॉक, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।95 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिए किया जाता है-
1. श्री इन्द्रदेव पंडित पिता- स्व॰ भदई पंडित (7488061404) - अध्यक्ष
पता- उत्तरी संगत, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505
2. श्री हरेन्द्र कुमार सिंह पिता- स्व॰ अनिल कुमार सिंह (7644871933) -उपाध्यक्ष
पता- राष्ट्रीयगंज, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505
3. श्री राज लाल पंडित पिता- स्व॰ राम आषीष पंडित (8789728411) - सचिव
पता- आदर्ष नगर कॉलोनी, रोड नं॰- 2, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505
4. श्री विनोद महतो पिता- स्व॰ राज कुमार महतो (7643862637) - कोषाध्यक्ष पता- उत्तरी संगत, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 5. श्री अजीत कुमार पिता- स्व॰ रामजी सिंह(9334312941) - सदस्य पता- आदर्ष नगर कॉलोनी, रोड नं॰- 1, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 6. श्री विनय कुमार पिता- स्व॰ बसंत महतो (8507806456) - सदस्य
पता- आदर्ष नगर कॉलोनी, रोड नं॰- 5, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505
7. श्री राज कुमार विष्वकर्मा पिता- स्व॰ बासुदेव विष्वकर्मा (6207458518) - सदस्य पता- उत्तरी संगत, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 8. श्री संजय कुमार पिता- स्व॰ लाला मिस्त्री (7099645431) - सदस्य पता- राष्ट्रीयगंज, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 9. श्री अजय कुमार पिता- श्री सुरेष पासवान (7761820358) - सदस्य पता- राष्ट्रीयगंज, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 10. श्री भीम कुमार पिता- स्व॰ रामचन्द्र पंडित (8292016551) - सदस्य पता- राष्ट्रीयगंज, फुलवारी शरीफ, पटना- 801505 उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''प्राचीन षिव मंदिर, फुलवारी श्री, फुलवारी ब्लॉक, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।96 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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25 जनवरी 2024
सं0 3579--श्री दुर्गा मंदिर, खैरा, जिला-जमुई, के संबंध में स्थानीय लोगों के द्वारा दिये गये प्रर्थना-पत्र, खतियान की प्रति, मंदिर के फोटोग्राफ आदि पर विचारोपरान्त दिनांक- 02.09.2023 को उक्त मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में मान्यता देते हुए निबंधित किया जा चुका है। उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु स्थानीय लोगों के द्वारा दिनांक- 04.10. 2023 को एक आमसभा करके 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया है और प्रस्तावित नामों के संबंध में अभी तक कोई आपत्ति पर्षद को प्राप्त नहीं है। चरित्र सत्यापन हेतु दिनांक- 30.10.2023 को थानाध्यक्ष को पत्र लिखा गया है, तथा अंचलाधिकारी से भी पत्रांक- 2797, दिनांक- 30.10.2023 द्वारा एक प्रतिवेदन की मांग की गयी थी, जो कि अप्राप्त है। अतः ऐसी परिस्थिति में पर्षद के आदेष दिनांक- 21.12.2023 के आलोक में एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित की जाती है। चरित्र सतयान रिर्पोट प्राप्त होने एवं अंचलाधिकारी का प्रतिवेदन भी प्राप्त होने पर समय विस्तार व संषोधन पर विचार किया जायेगा। न्यास समिति निम्न प्रकार है। :-
मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री दुर्गा मंदिर, खैरा, जिला-जमुई,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना 1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री दुर्गा मंदिर, खैरा, जिला- जमुई,'' योजना होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का ''श्री दुर्गा मंदिर, खैरा, जिला-जमुई,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति, न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग,साधु सत्संग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति कर सकेंगे एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और दान, पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वर्ष न्यास की बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी। 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे (अध्यक्ष की अनुपतिस्थति में उपाध्यक्ष करेंगे) और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।97 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति 01 वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई। - अध्यक्ष। 2. श्री मुकेष कुमार मेहता, पिता- केदार कुमार मंडल - सचिव। 3. श्री संजीव कुमार, पिता- जयप्रकाष राव - कोषाध्यक्ष। 4. श्री ललन प्र0 मेहता, पिता- हरि प्रसाद मेहता - सदस्य। 5. श्री अनिल कुमार राय, पिता- बिरजु रावत - सदस्य। 6. श्री जयप्रकाष रावत, पिता- लक्ष्मण रावत - सदस्य। 7. श्री प्रमोद रावत, पिता- कमलेष्वरी रावत - सदस्य। 8. श्री अमित कुमार, पिता- सिद्धेष्वर रावत - सदस्य। 9. श्री मनीष कुमार, पिता- ब्रह्मदेव रावत - सदस्य। 10. श्री संतोष कुमार राव, पिता- हरिचरण प्रसाद राव - सदस्य। 11. श्री संदीप कुमार, पिता- श्री जय प्रकाष रावत - सदस्य। सभी का पता- ग्रामपो0थाना- खैरा, जिला- जमुई। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।
न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।
उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री दुर्गा मंदिर, खैरा, जिला- जमुई,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 जनवरी 2023
सं0 3438--पोता ताजपुर मठ (श्री राधाकृष्ण मंदिर) बाबा ताले दास जी का मठ, ग्रामपो0-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-409 है।
पूर्व में उक्त मठ की देखभाल साधु-संतों द्वारा की जाती थी और उक्त मठ में लगभग 17 एकड़ जमीन है। पर्षद के आदेष दिनांक-25.11.1998 द्वारा तत्कालीन न्यासधारी लक्ष्मण दास द्वारा पर्षद के आदेष की अवहेलना करने तथा अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 का पालन नहीं करने पर नोटिस के उपरान्त उन्हें विरमित करते हुए अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया।98 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 इसी बीच रामवचन दास द्वारा वर्ष 2005 में प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त लक्ष्मण दास का स्वर्गवास वर्ष 1996 में हो चुका है और रामबचन दास द्वारा अपने प्रार्थना पत्र के साथ शपथ-पत्र व कुछ दस्तावेज भी दाखिल किया गया, जिस पर विचारोपरान्त पर्षद के आदेष दिनांक-25.08.2000 द्वारा रामवचन दास का उक्त मंदिर की देखभाल करने के लिए मान्यता दी गयी। उक्त रामवचन दास का स्वर्गवास भी दिनांक-24.08.2007 को हो गया, तदोपरान्त श्री हरी राय द्वारा उक्त महंत रामवचन दास के षिष्य होने का दावा करते हुए स्वयं को उक्त मठ में न्यासधारी बनाये जाने हेतु प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिस पर विचारोपरान्त दिनांक-16.05.2008 को अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए हरी राय (हरी दास) को न्यासधारी की मान्यता दी गयी, इस शर्त्त के साथ कि कार्य संतोषजनक पाये जाने पर उनके कार्यकाल को विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा और यदि कोई अन्य दावेदार आता है तो उसे सुनकर निर्णय लिया जायेगा।
इस बीच ग्रामीणों द्वारा दिनांक-28.05.2010 को लगभग 100 से अधिक व्यक्तियों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि उक्त हरी दास गलत आचरण के व्यक्ति हैं और एक औरत को मठ रख लिया है और मंदिर की सम्पत्ति को हड़पना चाहते है, जिस पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु वह कभी पर्षद में उपस्थित नहीं हुए। ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में रामचन्द्र महतो को मंदिर में पूजा-पाठ करने हेतु रखने का उल्लेख किया है।
हरि दास द्वारा कोई स्पष्टीकरण नहीं प्राप्त होने पर उक्त रामचन्द्र महतो ने दिनांक-07.06.2018 को पर्षद में पत्र दाखिल किया कि हरी दास मठ छोड़कर फरार हैं और वह पिछले 09 वर्षो से वह मठ की देखभाल कर रहे हैं, परन्तु कुछ ग्रामीणों द्वारा स्थानीय स्वयंभू कमिटी बनाकर के प्रार्थी को धमकी और मठ से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। लगाये गये आरोपों के संबंध में अंचल अधिकारी से एक रिपोर्ट की मांग की गयी, परन्तु क्षेत्र खेद की बात है कि अंचल अधिकारी द्वारा किसी प्रकार की कोई रिपोर्ट नहीं दाखिल की गयी और मठ की भूमि 17 ए0 31 डी0 की मालगुजारी रसीद रामचंन्द्र महतो के नाम से उनके द्वारा कटाई जा रही थी और अन्य कोई दावेदार भी पर्षद में उपस्थित नहीं हुआ था, अतः रामचन्द्र महतो को न्यासधारी के रूप में कुछ शर्तो के साथ पर्षद के आदेष दिनांक-08.06.2020 द्वारा मान्यता दी गयी।
रामचन्द्र महतो द्वारा लिखित षिकायत पर संबंधित व्यक्तियों को पर्षद के समक्ष उपस्थित होने और अपने अधिकार आदि के संबंध में अपनी बात रखने हेतु नोटिस जारी किया गया तथा स्वयंभू समिति जिनके उपर भूमि की बंदोबस्ती आदि करने का आरोप था तथा पूर्व में मंदिर की कुछ भूमि को स्कूल आदि में दान किये जाने की भी षिकायत की गयी थी, अतः सभी पक्षों को नोटिस जारी कर पर्षद के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए दिनांक-15.03.2023 की तिथि निर्धारित की गयी। पुनः दिनांक-27.06.2023 को विस्तारपूर्वक दोनों पक्षों को सुना गया और स्वयंभू समिति द्वारा रामचन्द्र महतो के विरूद्ध और रामचन्द्र महतो द्वारा समिति के विरूद्ध आरोप लगाये गये।
नियमतः चूंकि रामचन्द्र महतो को पर्षद द्वारा मान्यता न्यासधारी के रूप में दी गयी थी और उन्हें मंदिर की भूमि पर बंदोबस्ती आदि करने का अधिकार था किसी और व्यक्ति को नहीं, परन्तु स्थानीय लोगों के द्वारा स्वयंभू समिति बनाकर के मंदिर की भूमि पर बंदोबस्ती आदि की जाती रही और न्यासधारी तथा उनके पुत्र द्वारा भी कुछ भूमि का प्रयोग किया जाता रहा और भूमि पर स्थित बांस का भी विक्रय का भी विक्रय किया गया।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों में मंदिर की स्थिति दिन-प्रतिदिन जीर्णषीर्ण होती जा रही थी। पर्षद द्वारा एक वैद्य न्यास समिति गठित किये जाने का निर्णय लिया गया तथा उपस्थित ग्रामीण मुखिया व सरपंच को भी निर्देष दिया गया कि एक आमसभा करके कुछ व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव समिति गठन हेतु पर्षद में उपलब्ध करायें। जिस आलोक में दिनांक-16.07.2023 को एक आमसभा करके 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया गया। उक्त प्रस्ताव के प्रस्ताव सं0-04 में मंदिर में पुजारी के रूप में रामजी दास की नियुक्ति करने और उन्हें 3000/-रु0 प्रतिमाह देने का निर्णय लिया गया।
पर्षद की संचिका से स्पष्ट होता है कि मंदिर में राजभोग, पुजा-पाठ हेतु न्यासधारी के रूप में रामचन्द्र महतो को पर्षद द्वारा मान्यता प्राप्त है और उन्हें हटाये जाने का एकमात्र अधिकार पर्षद को है और आमसभा में जो प्रस्ताव समिति गठन किये जाने का है, उस पर्षद द्वारा अभी निर्णय लिया जाना बाकी है और ऐसे प्रस्ताव द्वारा रामचन्द्र महतो के स्थान पर किसी अन्य पुजारी की नियुक्ति करना विधिनुकूल नहीं है। पर्षद द्वारा श्री रामचन्द्र महतो से पृच्छा किये जाने पर कि ग्रामीणों द्वारा निर्धारित राषि 3,000/-रु0 लेना चाहते हैं या पूर्व में जो 01 बीघा भूमि उपज, खेती के लिए दी गयी है, वह रखना चाहते हैं। उन्हें मासिक राषि का हीं भुगतान कराया जाए और न्यास समिति मंदिर में पूजा-पाठ, दिया-बाती, राग-भोग के लिए समय-समय पर पूजन सामग्री उपलब्ध कराये और प्रार्थी और उनके परिवार को मंदिर की भूमि से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं रहेगा। उपरोक्त के आलोक में श्री रामचन्द्र महतो को उक्त मंदिर में पूजा-पाठ राग-भोग करने हेतु पुजारी के रूप में मान्यता दी जाती है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए पोता ताजपुर मठ (श्री राधाकृष्ण मंदिर) बाबा ताले दास जी का मठ, ग्रामपो0-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए पर्षद के आदेष दिनांक-12.09.2023 के आलोक में न्यास समिति का गठन आमसभा की बैठक में प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है। सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने तथा समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर न्यास समिति का कार्यकाल आगे विस्तार करने पर विचार किया जायेगा।99 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 योजना 1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''पोता ताजपुर मठ (श्री राधाकृष्ण मंदिर) बाबा ताले दास जी का मठ, ग्रामपो0-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''पोता ताजपुर मठ (श्री राधाकृष्ण मंदिर) बाबा ताले दास जी का मठ, ग्रामपो0-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/ हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।
14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिया जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत् दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा। 16. सभी सदस्य एक वॉट्सएप गु्रप बनायेगें और सूचना का आदान-प्रदान उक्त वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से करेगें। 17. मंदिर परिसर में बच्चों से भीक्षाटन या किसी प्रकार का अनुचित कार्य कराने पर रोक रहेगी।
न्यास समिति मंदिर से संबंधित सभी भूमि, तालाब आदि की बंदोबस्ती बरने के लिए अधिकृत रहेगी और समिति वर्त्तमान में मंदिर का फोटोग्राफ और उनके द्वारा पिछले वर्षो में किये गये विकास कार्य आदि का फोटोग्राफ भी पर्षद में 01 माह के अन्दर दाखिल करें। समिति पुजारी श्री रामचन्द्र महतो को प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में 3,000/-रु0 मानदेय के रुप में भुगतान कर रजिस्टर पर उनका हस्ताक्षर प्राप्त करें, जिससे कि किसी तरह का कोई विवाद भविष्य में न हो। पर्षद यह उम्मीद करती है कि गठित न्यास समिति उक्त ऐतिहासिक, प्रसिद्ध मंदिर के विकास हेतु सभी का सहयोग प्राप्त करके मंदिर में विकास का कार्य करेंगी। पूर्व में 03 बीघा भूमि स्कूल के लिए दान की गयी थी, चूंकि वह दान-पत्र अधिनियम की धारा 44 के विपरित था और आज तक किसी स्कूल का निर्माण नहीं हुआ है, अतः समिति उक्त को भी अपने अधिपत्य में लेकर बंदोबस्ती करये। न्यास समिति निम्न प्रकार हैं :-
100 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 20241. श्री पंकज कुमार (मुखिया) - अध्यक्ष
2. श्री राकेष कुमार (सरपंच) - उपाध्यक्ष 3. श्री श्याम बाबू सिंह, मो0 नं0-6299498995 - सचिव 4. श्री विनय कुमार सिंह, मो0 नं0-8298318508 - सह सचिव ़ 5. श्री जयकिषोर सिंह, मो0 नं0-9631424243 - कोषाध्यक्ष 6. श्री राम एकबाल महतो, मो0 नं0-9955691715 - सदस्य 7. श्री अरूण कुमार सिंह, मो0 नं0-8873417138 - सदस्य
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (पोता ताजपुर मठ (श्री राधाकृष्ण मंदिर) बाबा ताले दास जी का मठ, ग्रामपो0-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी न्यास) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। NOTE:- यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मती अनुमोदित है।
भवदीय अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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18 मार्च 2024
सं0 4178--श्री महादेव जी स्वामी मंदिर, ग्रामपोस्ट-अगनुर, थानाअंचल- कलेर, जिला-अरवल,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन (cid:2872)(cid:2875)(cid:2874)(cid:2868)
सं0- है।
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उक्त मंदिर में कुल 11 बी॰ 11 क॰ 13 धुर भूमि है। तौजी- 241, थाना- 107, खाता- 04, 163, 164 एवं 100 की भूमि (कुल 09.50 एकड़) है। मंदिर के खाता- 164, खेसरा- 839 है। इसमें पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत खतियान के कॉलम-5 में भूमि के स्वरूप के संबंध में षिव मंदिर का उल्लेख है तथा भूमि का विस्तृत उल्लेख पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत अर्पणनामा दिनां-
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03/01/1928 में किया गया है। जमाबंदी- में श्री महादेव स्वामी, शंकर जी के नाम जमाबंदी वर्ष 1988-89 में उक्त
(cid:2870)(cid:2868)(cid:2868)(cid:2872)
भूमि पर चला आ रहा हैै। मालगुजारी रसीद भी मंदिर के नाम कटती है। मंदिर की व्यवस्था हेतु समिति गठित करने हेतु के संबंध में समर्पणकर्त्ता के वंषजों द्वारा 05 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दि॰- 30/10/2023 को दिया गया तथा ग्रामीणों द्वारा दि॰- 14/10/2023 को 11 व्यक्तियों द्वारा के नामों प्रस्ताव दिया गया। स्थानीय लोगों का कथन है कि मंदिर की भूमि पर लगभग 60 दुकान किराया पर है, जिससे 12 लाख रू॰ वार्षिक आय प्राप्त होती है तथा शेष भूमि पर भी लगभग 03 लाख की आय होती है तथा कथन करते हैं कि समर्पणनामा में लिखित शर्त्तों के अनुसार समर्पणनामा के परिवार को ही न्यास समिति में रखा जाय। संचिका पर उपलब्ध समपर्णनामा के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि समर्पणकर्त्ता व उनके वंषजों के परामर्ष के आधार पर व्यवस्था, व्यय आदि किया जाना आवष्यक है। मंदिर वर्षों से स्थापित है, परंतु इसका न तो निबंधन कराने का प्रयास किया गया और न उसका आय-व्यय का हिसाब पूर्व में दाखिल किया है।
उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये न्यास समिति का गठन किया जाता है। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-09/01/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री महादेव जी स्वामी मंदिर, ग्रामपोस्ट- अगनुर, थानाअंचल-कलेर, जिला-अरवल के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री महादेव जी स्वामी मंदिर न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- अगनुर, थानाअंचल- कलेर, जिला- अरवल''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री महादेव जी स्वामी मंदिर न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- अगनुर, थानाअंचल- कलेर, जिला- अरवल''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।101 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़ 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
18. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन किया जाता हैः-
1. अंचलाधिकारी, कलेर, जिला- अरवल - अध्यक्ष 2. श्रीदीपक कुमार पिता- श्री अनूकुल प्रसाद -उपाध्यक्ष 3. श्री संतोष कुमार पिता- श्री वीरेन्द्र प्रसाद - सचिव 4. श्री विष्वनाथ गुप्ता पिता- स्व॰ शारदा प्रसाद - सह-सचिव 5. श्री मनोज कुमार पिता- स्व॰ गया प्रसाद - कोषाध्यक्ष 6. श्री दिलीप कुमार गुप्ता पिता- स्व॰ अमरनाथ गुप्ता - सदस्य 7. श्री गजेन्द्र चौधरी पिता- स्व॰ रामचन्द्र चौधरी - सदस्य 8. श्री दुर्गा निषाद पिता-स्व॰ राम कैलाष निषाद - सदस्य 9. मो॰ सीता कुंअर पति- स्व॰ नानविदुर पाठक - सदस्य सभी निवासी- ग्रामपोस्ट- अगनुर, थानाअंचल- कलेर, जिला- अरवल। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री महादेव जी स्वामी मंदिर, ग्रामपोस्ट- अगनुर, थानाअंचल- कलेर, जिला- अरवल''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।102 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 11 मार्च 2024 सं0 4054--कबीरपंथी मठ, ग्रामपोस्ट-बौराहा,अंचल-राधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला-सुपौल,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3918/2009है।
उक्त मठ की स्थापना श्री बुधन दास द्वारा वर्ष 1938 में की गयी थी। उनके स्वर्गवास के उपरांत उनकी पत्नी रामपतिया देवी ने वर्ष 1949 में सद्गुरू कबीर के नाम से भूमि निबंधित विलेख द्वारा दान दी और 05 व्यक्तियों को न्यासधारी / सेवायत के रूप में नियुक्त किया। परंतु कुछ जाली कागजात के द्वारा श्री भगवानी दास सेवायत बनकर अधिकांष भूमि को सुदभरना पर दे दिया। अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन दिनांक- 14/03/2009 में रामपतिया देवी को निःसंतान स्वर्गवासी होने तथा भगवानी दास को सेवायत नियुक्त किये जाने की बात ग्रामीणों द्वारा बतायी गयी।
तदोपरांत उन्हें पर्षदीय आदेष दिनांक- 31/03/2009 को अस्थायी न्यासधारी के रूप में मान्यता प्रदान की गयी। इस पर ग्रामीण श्री जगेष्वर दास द्वारा भूमि को सुदभरना पर देने का आरोप लगाया गया, जबकि स्थल निरीक्षण में षिकायतकर्त्ता जगेष्वर दास का ही मठ की भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है। निरीक्षण प्रतिवेदन आदि सुनने के उपरांत उपरोक्त भगवानी दास को न्यासधारी संपुष्ट किया गया। इसी बीच थाना कांड सं॰- 41/2010, सत्र निवारण वाद- 188/10 में भगवानी दास को 10 वर्षाें का दण्ड धारा- 307 के अन्तर्गत दोषसिद्ध पाते हुये सुनाया गया।
अधिनियम की धारा- 28 (2) (ज) के तहत उनसे स्पष्टीकरण और सुनवायी के उपरांत उन्हें पद से विरमित किया गया और एक न्यास समिति गठित किये जाने का निर्णय लिया गया। इसके संबंध में अंचलाधिकारी से नामों की मांग की गयी। अंचलाधिकारी ने पत्रांक- 2054, दिनांक- 11/10/2023 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया, जिसके संंबंध में विरमित न्यासधारी तथा उनके पुत्र द्वारा लिखित षिकायत की गयी कि प्रस्तावित नामों में से 04 व्यक्ति जगेष्वर दास, जगदीष दास, पेषकार दास एवं कपिलेष्वर दास, करजाईन थाना कांड संख्या- 52/11 में धारा- 300 व अन्य में नामित अभियुक्त हैं।
इस संबंध में उनके द्वारा प्रथम सूचना रिर्पोट की प्रति तथा अन्वेषण उपरांत उपरोक्त व्यक्ति के विरूद्ध प्रस्तुत आरोप पत्र की प्रति समर्पित की गयी। आगे यह भी लिखित आरोप लगाया गया कि मठ की भूमि, खाता- 307 की 12 कट्ठा भूमि जगेष्वर दास, 05 कट्ठा भूमि परमेष्वर दास (जगेष्वर दास के भाई) तथा प्रस्तावित नाम पेषकार 05 कट्ठा भूमि पर व कुछ अन्य लोगोें के द्वारा कब्जा कर रखा गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त व्यक्तियों के नामों पर उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त होने के उपरांत विचार किया जायेगा। शेष व्यक्तियों को अंचलाधिकारी की अध्यक्षता में न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए करने का निर्णय लिया जाता है।
अतःपर्षदीय आदेष दिनांक-22/01/2024 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए कबीरपंथी मठ, ग्रामपोस्ट- बौराहा, अंचल- माधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला- सुपौल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजना 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीरपंथी मठ न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- बौराहा, अंचल- माधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला- सुपौल'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कबीरपंथी मठ न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- बौराहा, अंचल- माधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला- सुपौल'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।103 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बि॰ हि॰ धा॰ न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।
17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर निर्णय लिया जायेगा। 1. अंचलाधिकारी, राघोपुर, जिला- सुपौल अध्यक्ष 2. श्री रूद्रनारायण दास पिता- स्व॰ गुरूषरण दास सचिव 3. श्री रामजी यादव पिता- स्व॰ भटाय यादव सदस्य 4. श्री राम अधिन दास पिता- स्व॰ मौजी दास सदस्य 5. श्री उदयानंद दास पिता- स्व॰ रामकिषुन दास सदस्य 6. श्री सुरेष दास पिता- श्री ज्ञानी दास सदस्य 7. श्री गौरम दास पिता-श्री रमेष दास सदस्य 8. श्री राम स्वरूप सिंह पिता- स्व॰ महेष सिंह सदस्य सभी निवासी-ग्रामपोस्ट- बौराहा, अंचल- माधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला- सुपौल। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''कबीरपंथी मठ, ग्रामपोस्ट- बौराहा, अंचल- माधोपुर, थाना- करजाईन बाजार, जिला- सुपौल'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। उक्त आदेष/अधिसूचना मा॰ सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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104 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024बिहार गजट
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(cid:302)ी अशोक कु मार (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर से (cid:292)ा(cid:220)त आरोप प(cid:287) एवं (cid:302)ी (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण क(cid:551) समी(cid:162)ा (cid:466)वभाग (cid:430)ारा क(cid:551) गयी। समी(cid:162)ोपरा(cid:219)त पाया गया (cid:465)क पंचायत आम िनवा(cid:91)चन, 2021 के अवसर पर गलत नामांकन प(cid:287) (cid:232)वीकार करने का आरोप है (cid:468)जसके कारण एक (cid:292)ादेिशक िनवा(cid:91)चन (cid:162)े(cid:287) म(cid:581) पुन: चुनाव कराने क(cid:551) (cid:468)(cid:232)थित उ(cid:215)प(cid:219)न हो गयी, (cid:468)जससे समय, (cid:302)म एवं राज(cid:232)व का अप(cid:229)यय हुआ । रा(cid:207)य िनवा(cid:91)चन आयु(cid:200)त, (cid:466)बहार के (cid:430)ारा वाद सं(cid:201)या-37/021, (cid:302)ी द(cid:547)पक कु मार बनाम अ(cid:162)य कु मार म(cid:581) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) क(cid:551) अनुशंसा (cid:465)कया गया है । (cid:302)ी (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर से (cid:292)ितवे(cid:465)दत आरोप गंभीर (cid:292)कृ ित के ह(cid:583) (cid:468)जसक(cid:551) वृहत एवं गहण जॉंच क(cid:551) आव(cid:230)यकता है । तदालोक म(cid:581) (cid:302)ी अशोक कु मार (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत करने का िनण(cid:91)य िलया गया ।105 (cid:464)बहार गजट, 2 अक्तूबर 2024 उ(cid:200)त के आलोक म(cid:581) (cid:302)ी अशोक कु मार (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत क(cid:551) जाती है । (cid:302)ी अशोक कु मार (cid:468)ज(cid:163)ासु के (cid:466)व(cid:510)(cid:424) (cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) संचािलत करने हेतु (cid:302)ी न(cid:219)द (cid:465)कशोर साह, अपर सिचव, (cid:274)ामीण (cid:466)वकास (cid:466)वभाग, (cid:466)बहार, पटना को संचालन पदािधकार(cid:547) िनयु(cid:200)त (cid:465)कया जाता है एवं उप(cid:232)थापन पदािधकार(cid:547) िनयु(cid:200)त करने हेतु (cid:468)जला पदािधकार(cid:547), भोजपुर को िनदेश (cid:465)दया जाता है।
तदनुसार एत(cid:622) (cid:430)ारा (cid:302)ी अशोक कु मार (cid:468)ज(cid:163)ासु को आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क संक(cid:227)प क(cid:551) (cid:292)ित (cid:292)ा(cid:220)त होने पर संचालन पदािधकार(cid:547) के सम(cid:162) उप(cid:468)(cid:232)थत होकर जैसा (cid:465)क संचालन पदािधकार(cid:547) आदेश द(cid:581) अपना (cid:232)प(cid:231)ट(cid:547)करण/िल(cid:468)खत बचाव बयान (सा(cid:234)य स(cid:465)हत) उनके सम(cid:162) (cid:292)(cid:232)तुत कर(cid:581)गे ।
(cid:466)वभागीय काय(cid:91)वाह(cid:547) के संचालन के (cid:292)(cid:232)ताव पर स(cid:162)म (cid:292)ािधकार का आदेश (cid:292)ा(cid:220)त है।
आदेश:-आदेश (cid:465)दया जाता है (cid:465)क संक(cid:227)प क(cid:551) (cid:292)ित सभी संबंिधत(cid:585) को सूचनाथ(cid:91) एवं आव(cid:230)यक कार(cid:91)वाई हेतु भेज द(cid:547) जाय ।
(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल के आदेश से,
र(cid:466)व कु मार, उप-सिचव।