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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 27 November 2024

Published 27 November 2024

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1126
Languages
English, Hindi

(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 ;बपकरू464द्ध

;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध

6 ;बपकरू274द्ध 1946 ;0द्ध

(0 1126) , , 27 ;बपकरू224द्ध 2024

बिहार विधान सभा सचिवालय

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अधिसूचना

26 नवम्बर 2024

सं॰ विसवि-26/2024- 4206/ विस—''बिहार सरकारी परिसर ;आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखलीद्ध ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2024'', जो बिहार विधन सभा में दिनांक-27 नवम्बर, 2024 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।

आदेष से, ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव।2 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू224द्ध 2024

[विसवि-22/2024]

बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) विधेयक, 2024

बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) अधिनियम, 1956 (अधिनियम 20, 1956)

(समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन हेतु विधेयक।

प्रस्तावनाः-

चूँकि, सरकारी परिसरों के अधिभोगी व्यक्तियों से किराए के संग्रह और कतिपय परिस्थितियों में ऐसे परिसरों से व्यक्तियों को बेदखल करने का उपबंध करने के लिए अधिनियम वर्ष 1956 में अधिनियमित किया गया है ;

चूँकि, समय के साथ अनुक्रम में कई नए आयाम और मुद्‌दे उत्पन्न हुए हैं, जिन्हें वर्तमान अधिनियम में शामिल नहीं किए गए हैं ;

चूँकि, राज्य के परिसंपाियों में उसके कब्जे में निहित भूमि एवं भूमि-सह-भवन शामिल हैं ; चूँकि, मौजूदा अधिनियम में कर उद्‌ग्रहण, किराए के संग्रहण को विनियमित करने एवं अनधिकृत अधिभोगियों को बेदखल करने के लिए पर्याप्त उपबंध नहीं किए गए हैं जिससे सरकारी हित प्रभावित होता है। चूँकि, अनधिकृत अधिभोगी कानूनी अधिकार के बिना भूमि या भूमि सहित भवन पर दखल करना जारी रखते हैं ;

चूँकि, करों के निर्धारण, उद्‌ग्रहण किराए का संग्रहण, आवंटन का प्रक्रिया एवं अनधिकृत अधिभोगियों को बेदखल करने हेतु प्रभावी उपबंध करना आवश्यक महसूूूस किया गया है ;

इसलिए, भारत-गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।- (1) यह अधिनियम बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली और बेदखली) (संशोधन) अधिनियम, 2024 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन से तुरंत लागू होगा।

2. धारा 2 का संशोधन।-

(1) धारा-(2) की उप धारा (क) को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः- ''आवंटन'' से अभिप्रेत है कि राज्य सरकार या राज्य सरकार की ओर से लिखित आदेश द्वारा किसी भी व्यक्ति को किसी भी सरकारी परिसर के उपयोग और अधिभोग के अधिकार का आदेश, पट्टे की मंजूरी, बंदोबस्ती, अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) या किसी अन्य तरीके द्वारा किया गया आवंटन ।

(2) धारा-2 की उप धारा (ख) को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः-

राज्य सरकार के सक्षम विभाग द्वारा अधिसूचित उप समाहर्त्ता से अन्यून राजपत्रित पदाधिकारी, इस अधिनियम के अंतर्गत निर्दिष्ट क्षेत्र के अधीन सभी या कोई भी कार्य निष्पादन हेतु ''सक्षम प्राधिकार'' होंगे। (3) धारा-2 की उप धारा (घ) को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः- (i) ''सरकारी परिसर'' में राज्य सरकार की या राज्य सरकार में निहित या उसके ओर से पट्टे पर ली गयी या अधिगृहित कोई भी भूमि या भवन शामिल होगा और निम्नलिखित प्राधिकार की या उसकी ओर से पट्टे पर लिया गया या उसका स्वामित्व वाला कोई परिसर भी शामिल होगा, (क) किसी सरकारी कंपनी (ख) कोई स्थानीय प्राधिकार (ग) राज्य सरकार द्वारा कानून या कार्यकारी आदेश द्वारा बनाया गया कोई भी

निगम/स्वायत निकाय

(घ) सोसाईटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई भी सोसाईटी या बिहार सहकारी समिति अधिनियम 1935 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई भी सहकारी समिति जिसके शासी निकाय में अन्य बातों के साथ-साथ राज्य सरकार के सरकारी पदाधिकारी या नामित व्यक्ति या दोनों शामिल है या जहाँ राज्य सरकार ने सोसाईटी या सहकारी समिति के शेयरों में योगदान दिया है।

(ii) सरकारी परिसर में भी शामिल होगें

(क) ऐसे भवन या भवन के भाग से संबंधित बगीचा मैदान और बाहरी मकान यदि कोई

हों

(ख) ऐसे भवन या भवन के भाग में उपयोग के लिए राज्य सरकार के द्वारा आपूर्ति किये

गये कोई भी फर्निचर और

(ग) ऐसे भवन या भवन के किसी भाग में उसके फायदेमंद उपभोग के लिए लगायी गई

कोई फिटिंग

(iii) ''सक्षम विभाग'' से अभिप्रेत उस विभाग से है जो राज्य सरकार से संबंधित भूमि या भवन का प्रशासन कर रहा है या धारा-2 घ(i)(क) से (घ) के मामले में वह विभाग जो प्रशासी विभाग है।;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू224द्ध 2024 3

(4) धारा-2 की उप धारा (च) को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः-

''किराये'' से वही अभिप्रेत होगा, जो अंतरण अधिनियम 1882 में दिया गया है और इसमें सरकार या भूमि या भवन या दोनो के लिए एक अधिकार प्राप्त प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किराया शामिल होगा। इसमें जमीनी किराया, नगरपालिका कर या कोई अन्य कर या परिसर के उपयोग और अधिभोग के लिए आवंटी द्वारा देय कोई अन्य राशि शामिल है।

(5) धारा-2 की उप धारा (छ) को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः-

किसी भी सरकारी परिसर के संबंध में ''अनाधिकृत अधिभोग'' से अभिप्रेत है ऐसे अधिभोग के लिए सरकारी परिसर या किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना प्राधिकार का अधिभोग और इसमें प्राधिकार (चाहे अनुदान/पट्‌टे/आवंटन/लाइसेंस या अंतरण के किसी अन्य तरीके अथवा माध्यम से जिसके अधीन या जिस क्षमता में उसे परिसर को रखने या अधिभोग करने की अनुमति दी गई थी) की समाप्ति या किसी भी कारण से निर्धारण के बाद सरकारी परिसर का किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिभोग को जारी रखना शामिल है और इसमें इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में अधिभोग को जारी रखना भी शामिल है और कोई व्यक्ति केवल इस तथ्य के कारण की उसने किराए के रूप में किसी भी राशि का भुगतान किया था, प्राधिकृत अधिभोग में नहीं समझा जायेगा।

(6) धारा-2क के बाद नई धारा-2ख को जोड़नाः- एक नई धारा-2ख को निम्नलिखित रूप

में जोड़ा जाएगाः-

2ख. किराया निर्धारण की शक्ति।- सक्षम प्राधिकार किसी भी तरीके से परिसर का आवंटन करते समय वैधानिक करों सहित देय किराए का निर्धारण करेगा।

किराया निर्धारित करते समय सक्षम प्राधिकार आस-पास के समान प्रकार के परिसरों के लिए देय बाजार किराए को ध्यान में रखेगा।

परन्तु किसी लोक सेवक को आवंटित किये जाने वाले परिसर का किराया ऐसे वर्ग के लोेक सेवक के लिए अनुमान्य मकान किराया भत्ता के अनुसार निर्धारित किया जायेगा।

परन्तु यह और कि सक्षम प्राधिकार को आवंटन की तारीख से पाँच साल की समाप्ति के बाद कर सहित किराए को उसी प्रकार से संशोधित करने का अधिकार होगा जिस प्रकार किराया मूलतः निर्धारित किया गया है। 3. धारा-3 का संशोधन।- धारा-3 को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः- 3. आवंटन रद्द करना।- यदि कोई सरकारी परिसर किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक होता है तो सक्षम प्राधिकार, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी भी बात के होते हुए भी, आवंटन को या तो एक आदेश, पट्टे या निपटान या लाइसेंस या किसी अन्य तरीके के माध्यम से रद्द कर सकेगा जिसके अधीन ऐसे परिसर, किसी व्यक्ति द्वारा रखा जाता है या अधिभोग किया जाता है।

परन्तु इस धारा के अधीन आवंटन को रद्द करने से पहले, सक्षम प्राधिकार ऐसे व्यक्ति से पद्रह दिनों के भीतर कारण बताने की अपेक्षा करेगा कि आवंटन रद्द क्योें नहीं कर दिया जाय। 4. धारा 4 का संशोधन।- धारा 4 को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः- 4. सरकारी परिसर को खाली कराने की शक्ति।- तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी यदि सक्षम प्राधिकार संतुष्ट हैः-

(क) कि किसी सरकारी परिसर पर दखल करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति ने इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पूर्व या उसके पश्चात्‌-

(i) राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना ऐसे परिसर को पूरे या उसके किसी भाग को उप-किराए पर दिया है या

(ii) ऐसे अपव्यय के कार्य किए हैं या कर रहे हैं जिनसे परिसर के मूल्य या उपयोगिता पर भौतिक रूप से प्रभाव पड़ने की संभावना है या

(iii) अन्यथा किसी अभिव्यक्त या अन्तर्निहित शर्त का उल्लंघन करते हुए कार्य किया है, जिसके अधीन वह ऐसे परिसर पर दखल करने के लिए प्राधिकृत है ;

(ख) कि कोई भी व्यक्ति आवंटन आदेश/पट्टा/निपटान/लाईसेंस रद्द होने के बाद भी किसी सरकारी परिसर पर अनधिकृृत दखल में हैं तो, सक्षम प्राधिकार, निबंधित डाक या किसी अन्य विहित माध्यम से नोटिस देकर आदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति और साथ ही कोई अन्य व्यक्ति जो पूरे परिसर या उसके किसी भी हिस्से पर दखल कर रहा हो, नोटिस तामील होने की तिथि से एक सप्ताह के भीतर परिसर को खाली कर देगा/हटा देगा/ध्वस्त कर देगा और यदि कोई व्यक्ति ऐसे आदेश का पालन करने से इनकार करता है या विफल रहता है, तो सक्षम प्राधिकर उस व्यक्ति को परिसर से बेदखल कर सकेगा और परिसर का दखल ले सकेगा तथा इस उद्देश्य के लिए आवश्यक बल का प्रयोग कर सकेगा।

परन्तु यदि उस पर नोटिस तामील करने के एक सप्ताह के भीतर, संबंधित व्यक्ति कारण पृच्छा दाखिल करता है तो सक्षम प्राधिकार उस पर विचार करेगा और उस पर ऐसा4 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू224द्ध 2024 आदेश पारित करेगा, जैसा वह आवश्यक समझे, और यदि कारण पृच्छा अस्वीकार कर दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति की बेदखली के लिए आवश्यक कदम उठाया जा सकेगा।

5. धारा 7क का जोड़ा जाना।- धारा 7 के बाद नई धारा 7क जोड़ा जायेगाः-

7क. वारिसों और विधिक प्रतिनिधियों का दायित्व।-

(i) जहां कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ क्षति के आकलन के लिए किराए के बकाया के निर्धारण के लिए कोई कार्यवाही की जानी है या की जा चुकी है, कार्यवाही किए जाने से पहले या उसके लंबित रहने के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति के वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों के खिलाफ, जैसा भी मामला हो, कार्यवाही की जा सकेगी या जारी रखी जा सकेगी।

(ii) किसी भी व्यक्ति से राज्य सरकार या निगमित प्राधिकरण को देय कोई भी राशि, चाहे किराए या क्षति या लागत के बकाया के रूप में हो, उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उसके वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों द्वारा देय होगी, लेकिन उनका दायित्व मृतक की उन परिसंपत्तियों की सीमा तक सीमित होगा जो उनके हाथों में आती है और जिनका निपटान नहीं किया गया है।

6. धारा 8 का संशोधन।- धारा 8 को निम्नलिखित रूप में प्रतिस्थापित किया जायेगाः-

8. अपील।- (1) इस अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकार के आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति ऐसे आदेश के एक सप्ताह के भीतर विभाग के सचिव को अपील कर सकेगा।

परन्तु विभाग का सचिव पर्याप्त कारणों के आधार पर उक्त अवधि (एक सप्ताह) की समाप्ति के बाद अपील दायर करने हेतु अतिरिक्त सात दिनों का समय दे सकेगा।

(2) उप-धारा (1) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, विभाग का सचिव, सक्षम प्राधिकार से रिपोर्ट प्राप्त कर एवं अपीलकर्ता को सुनने और इस तरह की आगे की जाँच यदि कोई हो, जो आवश्यक हो, करने के बाद ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जो उचित समझा जाय। विभाग के सचिव का आदेश अंतिम होगा।

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन अपील की जाती है वहां विभाग का सचिव ऐसी अवधि के लिए और ऐसी शर्तो पर, जो वह ठीक समझे, सक्षम प्राधिकार के आदेश के प्रवर्तन पर रोक लगा सकेगा।

7. धारा 12 का संशोधन।- धारा 12 की उप धारा (1) को निम्नलिखित रूप में

प्रतिस्थापित किया जायेगाः-

''कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश का उल्लंधन करता है या इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के विधिपूर्ण कार्रवाई में बाधा डालता है या जो ऐसे उल्लंधन या बाधा का दुष्प्रेरण करता है, धारा 5 के अधीन नुकसानों की वसूली पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, साधारण कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा।'';बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू224द्ध 2024 5

उद्देश्य एवं हेतु

सरकारी परिसरों के अधिभोगी व्यक्तियों से किराए के संग्रह और कतिपय परिस्थितियों में ऐसे परिसरों से व्यक्तियों को बेदखल करने का उपबंध करने के लिए बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम, 1956 (समय समय पर संशोधित) अधिनियमित किया गया है।

समय के साथ अनुक्रम में कई नए आयाम और मुद्‌दे उत्पन्न हुए हैं, जिन्हें वर्त्तमान अधिनियम में शामिल नहीं किए गए हैं। मौजूदा अधिनियम में लीज पर आवंटित सरकारी भूमि को खाली कराने, लीज किराया का पुनर्निधारण तथा बकाया लीज किराया वसूली इत्यादि से संबंधित नियम स्पश्ट नहीं है। उक्त के आलोक में विद्वान महाधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय, पटना द्वारा बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम, 1956 में आवश्यक संशोधन करने का परामर्श दिया गया है।

तद्‌नुसार बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम-1956 में आवश्यक संशोधन हेतु दिनांक-01.03.2024 को मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। विद्वान महाधिवक्ता, बिहार के परामर्श तथा संबंधित विभागों से प्राप्त मंतव्य/सुझाव के आलोक में बिहार सरकारी परिसर (आवंटन किराया वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) विधेयक, 2024 का विधेयक प्रस्तावित है।

अतः सरकारी परिसर को अवैध कब्जा की संभावना को कम से कम किया जा सके तथा आवश्यकतानुसार राज्य सरकार नियत अवधि के लिये सरकारी परिसर को सरकारी/अर्द्धसरकारी/वैधानिक संस्थाओं को आवंटित कर सके यही इस विधेयक का मुख्य उदेश्य यही है तथा इसे अधिनियमित करना ही इस विधेयक का मुख्य अभिष्ट है।

(जयंत राज)

भार-साधक सदस्य। पटना,

प्रभारी सचिव,

दिनांक-27.11.2024

बिहार विधन सभा।

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;बपकरू162द्धए ;बपकरू289द्धए

;बपकरू464द्धए ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध ;बपकरू464द्ध;बपकरू289द्ध

;बपकरू464द्ध ;द्ध 1126.571़10.0;बपकरू547द्ध00

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 27 November 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1126/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1126.