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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 27 November 2024

Published 27 November 2024

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1127
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 6 अ(cid:274)हायण 1946 (श0)

(सं0 पटना 1127) पटना, बुधवार, 27 नव(cid:224)बर 2024 ———

सं॰ वि॰स॰वि॰-22/2024- /वि॰स॰--''बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाला विधेयक, 2024'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक-26 नवम्बर, 2024 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024

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जबकि, पूर्ववर्ती बेतिया राज बिहार राज्य में स्थित है, जबकि, अंतिम ज्ञात राजा हरेन्द्र किशोर सिंह की निर्वसीयत मृत्यु हो गई, जबकि, बेतिया राज के पूर्ववर्ती अंतिम राजा की मृत्यु के बाद, उनकी उत्तरजीवी पत्नी जानकी कुँवर को बेतिया राज की संपत्ति और मामलों का प्रबंधन करने के लिए अक्षम घोषित किया गया था,

जबकि, पूर्ववर्ती सरकार ने दिनांक-01 अप्रैल, 1897 की अधिसूचना द्वारा बेतिया राज का प्रबंधन अपने हाथ में लिया और प्रतिपाल्य अधिकरण अधिनियम (कोर्ट ऑफ वार्ड्‌स एक्ट), 1879 के अधीन न्यायालयाें की अभिरक्षा में रखा,

जबकि, दिनांक-01 अप्रैल 1897 की अधिसूचना के बाद, बिहार राज्य के भीतर बेतिया राज की हुई संपत्तियों और प्रबंधन को प्रतिपाल्य अधिकरण, बिहार राज्य के राजस्व बोर्ड द्वारा अपने कब्जे में ले लिया गया था,

जबकि, उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों को उत्तर प्रदेश राज्य के राजस्व बोर्ड द्वारा प्रबंधित करने का निदेश दिया गया था,

जबकि, उत्तर प्रदेश कोर्ट ऑफ वाडर््‌स एक्ट, 1912 को संयुक्त प्रांत कोर्ट ऑफ वार्ड्‌स (निरसन) अधिनियम, 1967 द्वारा 15 सितम्बर 1969 से निरसित कर दिया गया है,

जबकि, निरसन के परिणामस्वरूप, प्रबंधन आदि सहित कोर्ट ऑफ वार्ड्‌स के कृत्य उत्तर प्रदेश राज्य के राजस्व बोर्ड में निहित किये गये है,

जबकि, बेतिया राज के अंतिम राजा का कोई ज्ञात विधिक उत्तराधिकारी नहीं है, जबकि, कई दावेदारों ने अपना दावा रखा है जो अंततः बिहार राज्य एवं अन्य बनाम राधा कृष्ण सिंह एवं अन्य के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किया गया था,

जबकि, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय के बाद, बिहार राज्य और उत्तर प्रदेश राज्य दोनों में कई मुकदमे दायर किए गए हैं, जिनमें से कुछ में विरासत के संबंध में दावा किया गया है,

जबकि, समय के साथ बिहार राज्य और उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर स्थित बेतिया राज की संपत्ति कई मुकदमेबाजी, अतिक्रमण, अनाधिकृत कब्जे आदि के अधीन है,

जबकि, बेतिया राज की चल और अचल संपत्ति, बहुत व्यापक है और कई हजार करोड़ रूपये मूल्य की है, जबकि, यह देखा गया है कि बेतिया राज के प्रबंधक संपत्ति की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में सक्षम नहीं है,

जबकि, संपत्ति में बड़े पैमाने पर भूमि और अनुलग्नक शामिल हैं जिनका उपयोग राज्य के बड़े लोकहित के लिए किया जा सकता है,

जबकि, बिहार राज्य और उत्तर प्रदेश राज्य और सत्यापन के अधीन किसी अन्य राज्य में चल और अचल दोनों संपत्तियों की अभिरक्षा, हक, कब्जा और प्रबंधन के लिए एक कानून बनाना समीचीन माना जाता है, अतः अब भारत गणराज्य के 75वें वर्ष में बिहार राज्य विधान-मंडल एक विधेयक निम्नलिखित रूप में अधिनियमित करता हैः-3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 I -(1) इस अधिनियम को

े कहा जा सकेगा। (2) इसमें बेतिया राज की सभी संपत्तियाँ शामिल हैं। (3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन के दिन से लागू होगा।

ः-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (1) '' '' से बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाला अधिनियम (2024 का अधिनियम ----- ) अभिप्रेत है;

(2) ''

'' से अभिप्रेत है और इसमें शामिल है बेतिया के पूर्ववर्ती राजा की सभी चल और अचल संपत्तियाँ;

(3) '' '' से बिहार और उड़ीसा राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1913 द्वारा गठित बोर्ड अभिप्रेत है;

(4) ''

'' में अधिनियम के तहत सभी या किसी भी कार्य का निर्वहन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस रूप में नियुक्त एक पदाधिकारी शामिल है;

(5) '' '' से कोर्ट ऑफ वार्डस अधिनियम, 1879 की धारा 5 के अधीन गठित प्रतिपाल्य अधिकरण अभिप्रेत है;

(6) '' '' से अधिनियम की धारा 3 के अधीन जारी अधिसूचना अभिप्रेत है; (7) '' '' से इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा विहित अभिप्रेत है; (8) '' '' से बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (1914 का अधिनियम 4) के अधीन यथापरिभाषित लोक मांग अभिप्रेत है;

(9) '' '' से इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए वास्तविक संपत्ति, भूमि और उस पर सुधार, भवन, भंडार (स्टोर), दुकान, होटल, रेस्तरां या ऐसी अन्य संरचना अभिप्रेत है;

(10) ''

'' से ऐसा पदाधिकारी अभिप्रेत है जो राज्य सरकार द्वारा उस रूप में नियुक्त अपर समाहर्त्ता के पद से नीचे का न हो; (11) '' '' से बिहार राज्य सरकार अभिप्रेत है; (12) '' '' से ऐसी कोई संरचना अभिप्रेत है जिसके लिए नींव रखने की आवश्यकता नहीं हो और संरचना के विन्यास को बदलने के लिए बहुत आसान हो, और जिसे इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए पूरी तरह से सीलबंद नहीं किया जा सकता हो। (13) ''

'' से बेतिया राज की संपत्तियों के संरक्षक के साथ पट्टे या करार के किसी भी वैध लिखत के बिना संपत्तियों के कब्जे में करनेवाला कोई भी व्यक्ति अभिप्रेत है;

(14) '' े'' से हक और कब्जे का निहित होना अभिप्रेत है। इसमें वहाँ से जाने वाले सभी अनुरूप अधिकार और हित शामिल है और इसमें सुविधाधिकार, लेखांश आदि शामिल है।

II -(1) बेतिया राज की बिहार राज्य के अंदर या बाहर स्थित सभी मौजूदा संपत्तियाँ, न्यायालय की जानकारी में और जो न्यायालय द्वारा देखभाल की जा रही है, चाहे वह चल या अचल हो, उस तारीख से जिस दिन यह अधिनियम लागू होता है, राज्य सरकार में निहित होगी।

(2) राज्य सरकार, निहित होने के परिणामस्वरूप, इस आशय की एक अधिसूचना जारी करेगी, जो राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी,

परन्तु, राज्य सरकार अधिसूचना में इस प्रकार निहित ऐसी सभी भूमि और संपत्तियों का विवरण देगी।

(3) एक बार राज्य सरकार के पास निहित संपत्तियां किसी भी कानून के तहत किसी भी उत्तराधिकार के अधीन नहीं हो सकती हैं और इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित उत्तराधिकार से संबंधित सभी चल रहे विवाद, मुकदमे या कार्यवाही समाप्त हो जाएंगी।

(4) प्रतिपाल्य अधिकरण (कोट ऑफ वार्ड्‌स) निहित होने के परिणामस्वरूप, सभी कागजात, दस्तावेज, रिकॉर्ड, मानचित्र और सभी सुसंगत जानकारी उन जिलों के संबंधित समाहर्त्ता को सौंपेगा, जहां बेतिया राज की संपत्तियाँ स्थित है।

-बेतिया राज की भूमि और संपत्तियों पर सभी मौजूदा पट्टे या मौजूदा विशेषाधिकार

ऐसी अधिसूचना की तारीख से समाप्त हो जाएंगे।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 -(1) इस अधिनियम के अधीन राज्य में निहित सभी बेतिया राज की संपत्तियाँ सभी ऋण भारग्रस्तता से मुक्त होंगी और सिविल कोर्ट की डिक्री या किसी अन्य प्राधिकार के आदेश के निष्पादन में कुर्की, जब्ती या बिक्री से मुक्त हाेंगी और इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित कोई भी कार्यवाही या मुकदमा समाप्त हो जाएगा। (2) बेतिया राज की संपत्तियाँ या कार्यकाल, जिसके अंतर्गत मालिक के हित हैं, चाहे जो भी हो, ऐसी संपत्तियों या कार्यकाल में, जिसमें मुख्य रूप से ऐसी संपत्तियों या कार्यकाल के किराए के संग्रह के लिए कार्यालय के रूप में उपयोग किए जाने वाले परिसर शामिल हैं, और पेड़, जंगल, मत्स्य पालन, जलकर, हाट, बाजार, मेला और फेरी और अन्य सभी सैराती हितों में उनके हित, अवमृदा में उनके हित, खास कब्जे में रखी गई भूमि (रैयती या रैयतों के अधीन रहनेवाले के हितों को छोड़कर) और वासभूमि, निहित होने की तारीख से, पूरी तरह से राज्य में निहित हो जाएंगे और सभी ऋण भारग्रस्तता से मुक्त होंगे;

(3) निहित होने की तारीख को या उसके बाद बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल में शामिल भूमि के संबंध में सभी सलामी, किराया, उपकर, रॉयल्टी और राजस्व राज्य को देय होंगे और अन्यथा किया गया कोई भी भुगतान राज्य पर बाध्यकारी नहीं होगा;

(4) बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल के संंबंध में कानूनी रूप से देय सभी बकाया या राजस्व और उपकर और बेतिया राज की संपत्तियों के पट्टेदार, अंतरिती, बसनेवाले, अधिभोगी से वसूली योग्य अन्य सभी राशि, निहित होने की तारीख से राज्य सरकार द्वारा वसूली योग्य होगी;

(5) बेतिया राज की संपत्तियों के पट्टेदार, अंतरिती, बसनेवाले, अधिभोगी से एकत्र या वसूल की गई सभी राशि, राज्य सरकार द्वारा वसूली योग्य होगी;

(6) बेतिया राज की संपत्तियों के ऐसे पट्टेदार, अंतरिती, बसनेवाले, अधिभोगी से देय किसी भी राशि की वसूली के लिए किसी भी सिविल कोर्ट में कोई मुकदमा नहीं होगा, जिसका भुगतान बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल के बंधक द्वारा सुरक्षित है या उस पर एक शुल्क है, और ऐसे किसी भी धन की वसूली के लिए सभी वाद और कार्यवाही, जो निहित होने की तारीख पर लंबित हो सकती है, समाप्त हो जाएगी;

(7) बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल का कोई भी हिस्सा किसी भी न्यायालय की प्रक्रियाओं के तहत कुर्की या बिक्री का भागी नहीं होगा और ऐसी संपत्तियों या कार्यकाल के संबंध में पारित कुर्की का कोई भी आदेश निहित होने की तारीख से पहले लागू नहीं होगा;

(8) समाहर्त्ता के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल का कार्यभार ग्रहण कर लिया है, जिसके अन्तर्गत उसके सभी हितों के साथ किसी न्यास की कोई संस्था, धार्मिक या धर्म निरपेक्ष या भवन है; परन्तु यह और कि समाहर्त्ता अधिभोगी को लिखित आदेश देने के बाद किसी भी संपत्ति का प्रत्यक्ष कब्जा ले सकता है, जिसमें उसे उपरोक्त आदेश में विनिर्दिष्ट समय के भीतर कब्जा देने या कारण दिखाने की आवश्यकता होती है। यदि ऐसा व्यक्ति कब्जा देने या कारण बताने में विफल रहता है या यदि समाहर्त्ता द्वारा कारण को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो ऐसे व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, समाहर्त्ता, लिखित रूप में कारणों को दर्ज कर सम्बद्ध संपत्ति का कब्जा लेने के लिए ऐसे कदम उठाएगा या उठवाएगा या ऐसे बल का प्रयोग करेगा या करवाएगा जो आवश्यक समझा जाय। (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त करने और इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों में इंगित विभिन्न कार्याें को करने में समाहर्त्ता की सहायता करने के लिए बिहार के प्रत्येक जिले में विशेष पदाधिकारी नियुक्त कर सकेगी। (2) विशेष पदाधिकारी इस अधिनियम में उल्लिखित ऐसे कार्यों का निर्वहन करेगा और समाहर्त्ता के प्रत्यक्ष नियंत्रण और पर्यवेक्षण के तहत कार्य करेगा।

-(1) कोई भी व्यक्ति, धारा 3 के अधीन उक्त अधिसूचना के परिणामस्वरूप, 60 दिनों के भीतर विशेष पदाधिकारी के समक्ष आपत्ति दाखिल कर सकेगा। (2) विशेष पदाधिकारी आपत्ति की सुनवाई करेगा और इस तरह के दाखिल होने के 90 दिनों के भीतर इसका निपटान करेगा।

(3) विशेष पदाधिकारी, ऐसी आपत्ति की सुनवाई करते समय, सभी संबंधितों को नोटिस जारी करेगा और आपत्ति को अस्वीकार करने या अनुमति देने के लिए एक तर्कपूर्ण आदेश पारित करेगा।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 (4) यदि विशेष पदाधिकारी द्वारा आपत्ति की अनुमति दी जाती है, तो आपत्ति के तहत संपत्तियों को ऐसी अधिसूचना से बाहर रखा गया माना जाएगा। यदि विशेष पदाधिकारी द्वारा आपत्ति को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो संपत्तियां अधिसूचना का हिस्सा बनी रहेंगी।

(5) विशेष पदाधिकारी द्वारा पारित प्रत्येक आदेश को इस अधिनियम में उल्लिखित आगे की कार्रवाई करने के लिए समाहर्त्ता के समक्ष रखा जाएगा। यदि विशेष पदाधिकारी द्वारा आपत्तियों को खारिज कर दिया जाता है, तो वह समाहर्त्ता से ऐसी संपत्ति पर कब्जा करने का अनुरोध करेगा।

III (1) राज्य सरकार, किसी भी समय, स्वयं या किसी भी जानकारी की प्राप्ति पर या अन्यथा, न्यायालय से छिपी किसी अन्य बेतिया राज की अचल या चल संपत्तियों की पहचान करने के लिए कदम उठा सकेगी, और इस उद्देश्य के लिए ऐसे व्यापक सर्वेक्षण करने के लिए सक्षम होगी। (2) राज्य सरकार ऐसी प्रक्रियाएँ तैयार कर सकेगी जो बेतिया राज संपत्तियों की सही और उचित पहचान के लिए अपेक्षित हो।

(3) राज्य सरकार, उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद, इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन यथापेक्षित ऐसी पूरक अधिसूचना जारी करने के लिए सक्षम होगी।

IV निहित होने के परिणामस्वरूप समाहर्त्ता के पास बेतिया राज की ऐसी भूमि और संपत्तियों पर कब्जा करने की शक्ति होगी।

परन्तु, समाहर्त्ता अधिभोगियों की संपत्तियों को खाली करने और उनकी व्यक्तिगत वस्तुओं को हटाने के लिए 15 दिनों का नोटिस देगा। -(1) समाहर्त्ता के पास बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के अनुसार अधिसूचना में उल्लिखित संपत्तियों पर किसी भी अतिक्रमण, चाहे स्थायी या अस्थायी संरचना हो, को हटाने की शक्ति होगी, (2) समाहर्त्ता के पास बेतिया राज की संपत्ति के किसी अधिभोगी को बेदखल करने और यदि वह चाहे तो परिसर को सीलबंद करने की शक्ति होगी।

इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार में निहित बेतिया राज की संपत्तियों के संबंध में, समाहर्त्ताः- (i) ऐसे उपाय करने के लिए विशेष पदाधिकारी को ले सकेगा या अधिकृत कर सकेगा जो वह ऐसी संपत्तियों को संरक्षित करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझे;

(ii) समाहर्त्ता की सभी या किसी भी शक्ति का प्रयोग करने के लिए विशेष पदाधिकारी को अधिकृत कर सकेगा;

(iii) उसे देय धन की वसूली के लिए ऐसी कार्रवाई कर सकेगा जिसमें सार्वजनिक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के तहत इसे वसूली करने के लिए कदम शामिल हैं;

(iv) बेतिया राज की संपत्तियों के रखरखाव और संरक्षण के लिए अपेक्षित ऐसी संविदा/करार कर सकेगा;

(v) संपत्तियों में से कोई व्यय कर सकेगा जिसमें सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी को किसी कर, शुल्क उपकरों और दरों का भुगतान और बेतिया राज के किसी कर्मचारी को या उसके संबंध में कोई मजदूरी, वेतन, पेंशन, भविष्य निधि अंशदान शामिल है;

(vi) राज्य सरकार के निर्देशों के अधीन समग्र निधि (कॉर्पस फंड) का प्रबंधन कर सकेगा; (vii) बेतिया राज की निधियों में से ऐसे अन्य भुगतान कर सकेगा जो राज्य सरकार द्वारा निर्देशित किया जाय।

(viii) बेतिया राज की संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति किराया, मानक किराया, पट्टा किराया, अनुज्ञप्ति (लाईसेंस) फीस या उपयोगकर्ता प्रभार, तय कर सकेगा और एकत्र कर सकेगा;

(ix) अनधिकृत या अवैध अधिभोगी या अतिचारी को बेदखल करके बेतिया राज की संपत्तियों का खाली कब्जा सुरक्षित कर सकेगा और अनधिकृत या अवैध निर्माण, यदि कोई हो, को हटा सकेगा;

(x) निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए किसी भी संपत्ति में प्रवेश कर सकेगा;

6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024

(xi) किसी भी बेतिया राज की संपत्तियों को अपने से खाली करने के लिए रहने वाले को उचित अवसर देने के बाद सीलबन्द कर सकेगा;

(xii) लिखित नोटिस द्वारा, किसी भी व्यक्ति से, जिसे वह मानता है कि वह किसी बेतिया राज की संपत्तियों से संबंधित जानकारी देने में सक्षम है, ऐसे समय और स्थान पर अपने समक्ष उपस्थित होने के लिए बुला सकेगा, जैसा कि नोटिस में विनिर्दिष्ट किया जाय और उसी से संबंधित किसी भी व्यक्ति की जांच कर सकेगा, लिखित रूप में उसके बयान को कम कर सकेगा और उसे उस पर हस्ताक्षर करना अपेक्षित होगा;

(xiii) लिखित नोटिस द्वारा, किसी भी व्यक्ति से, जिसे वह मानता है, कि वह किसी भी बेतिया राज की संपत्तियों से संबंधित किसी भी प्रकृति की किसी भी खाता बही, पत्र बही, चालान, रसीद या अन्य दस्तावेज को अपने कब्जे या नियंत्रण में रखता है, ऐसे समय और स्थान पर जो नोटिस में विनिर्दिष्ट किया जाय, अपने समक्ष प्रस्तुत करने या प्रस्तुत करवाने के लिए अपेक्षा कर सकेगा और उसे उसकी जॉच/परीक्षण में प्रस्तुत करने के लिए अपेक्षा कर सकेगा और उसमें या उसके किसी भाग की प्रतियों को उसके द्वारा लेने की अनुमति दे सकेगा;

(xiv) किसी भी विधि फर्म, विधि पदाधिकारियों, विधिक पेशेवरों या वकीलों को मामलों, मुकदमों, कार्यवाहियों की रक्षा करने, प्रतिनिधित्व करने और लड़ने के लिए ऐसे पारिश्रमिक पर किराए पर रख सकेगा, जो राज्य सरकार द्वारा नियत किया जाय;

(xv) अमीन, सर्वेक्षक, फील्ड रिटेनर, लेखा पेशेवर, चार्टर्ड एकाउंटेंट और इस तरह के अन्य कौशल-आधारित जनशक्ति को किराए पर रख सकेगा जो इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हो;

(xvi) बेतिया राज की सभी चल और अचल संपत्तियों की तालिका (इन्वेंट्री) प्रबंधन और संरक्षण के प्रयोजनों के लिए अपने कार्यालय में एक परिसंपत्ति प्रबंधन इकाई स्थापित कर सकेगा।

समाहर्त्ता के लिए ऐसी संपत्तियों से भी धन एकत्र करना या वसूल करना वैध होगा जो विवाद के अधीन हैं या जो न्यायालय में न्यायाधीन है।

V (1) राज्य सरकार ऐसे कदम उठाएगी जो इसमें निहित बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए आवश्यक हो। (2) राज्य सरकार ऐसे नियम और प्रक्रियाएँ तैयार कर सकेगी जो बेतिया राज की संपत्तियों के उचित प्रबंधन और संरक्षण के लिए आवश्यक हों।

(3) राज्य सरकार, समाहर्त्ता को बेतिया राज की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के हित में और ऐसी अवधि के लिए, जो वह उचित समझे, अपनी सभी या कोई शक्ति दे सकेगी। (4) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले बेतिया राज के पट्टेदारों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा न्यायालय या समाहर्त्ता केा देय किसी भी धन का भुगतान समाहर्त्ता को किसी भी अधिनियम/नियमावली की समाप्ति की परवाह किए बिना किया जाएगा, जिसके तहत ऐसी धनराशि देय थी।

(5) बेतिया राज की संपत्तियों से इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले और बाद की सभी आय, लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (1914 का अधिनियम 4) के तहत लोक माँगों के रूप में वसूली योग्य है।

(6) समाहर्त्ता बेतिया राज की संपत्तियों से प्राप्त सभी आय को राज्य सरकार द्वारा निदेशित खाते में जमा करेगा। तथापि, राज्य सरकार, एक विशेष आदेश द्वारा, उसे प्राप्त आय का एक विशिष्ट प्रतिशत बनाए रखने की अनुमति दे सकेगी और बेतिया राज की संपत्तियों/संरचनाओं विशेष रूप से जिनका ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है, के प्रबंधन और संरक्षण के लिए इसे एक समग्र निधि में रखी जा सकेगी।

परन्तु समाहर्त्ता राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी नियमावली के अनुसार समग्र निधि से सभी व्यय करेगा। राज्य सरकार, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के तहत इसमें निहित किसी भी या सभी बेतिया राज की संपत्तियों को इस तरह से प्रबंधित, विक्रय, जब्त, लिया या निपटाया जाएगा जो विहित किया जाय।7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 VI (1) धारा-7 के अधीन विशेष पदाधिकारी द्वारा पारित सभी आदेश समहर्त्ता के समक्ष आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपील योग्य होंगे। समाहर्त्ता ऐसी अपीलों का निपटान अगले 30 दिनों के भीतर करेगा।

(2) समाहर्त्ता द्वारा पारित ऐसे सभी आदेश राजस्व बोर्ड के समक्ष आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर किसी भी समय पुनरीक्षण के अधीन होंगे।

(3) राजस्व बोर्ड ऐसे पुनरीक्षण आवेदन का निपटान इसके दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर करेगा।

(1) इस अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त करने और बेतिया राज की संपत्तियों के उचित प्रबंधन/निगरानी के लिए, बोर्ड के भीतर एक समिति का गठन निम्नानुसार किया जाएगाः- (i) अध्यक्ष-सह-सदस्य, राजस्व बोर्ड- (ii) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग- (iii) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, वित्त विभाग- (iv) उन जिलों के समाहर्त्ता जहाँ बेतिया राज की संपत्तियों स्थित हैं- (v) सचिव, राजस्व बोर्ड- अध्यक्ष इस समिति में किसी अन्य व्यक्ति या पदाधिकारी को आमंत्रित करने के लिए सक्षम होगा। समिति की बैठक तीन महीने में कम से कम एक बार होगी। (2) उपरोक्त समिति के पास ये शक्तियाँ भी होंगी।-

(क) इस अधिनियम के अधीन देय पट्टे या अनुज्ञप्ति प्रभार या कोई अन्य फीस/शुल्क/शास्ति या इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व की बकाया राशि को कम या माफ करना;

(ख) पट्टे के अधीन या अन्यथा सभी प्रकार की प्राप्तियों को उद्‌गृहीत करना, बढ़ाना, कम करना, नियत करना;

(ग) उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों के संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य के राजस्व बोर्ड के साथ संपर्क स्थापित करना।

(3) समिति ऐसी अन्य शक्तियों और जिम्मेदारियों का प्रयोग करेगी जो उसे राज्य सरकार द्वारा सौंपी गई है। -राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, ऐसे नियम बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों। इस अधिनियम के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने या किन्हीं कृत्यों का पालन करने के लिए सशक्त सभी पदाधिकारी और व्यक्ति भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का अधिनियम 45) की धारा 2 की उपधारा 28 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएँगे। इस अधिनियम के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए राज्य सरकार, न्यायालय या समाहर्त्ता या राज्य सरकार या समाहर्त्ता की ओर से कार्य करने वाले किसी अन्य पदाधिकारी के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।

-इस अधिनियम के अधीन किसी भी न्यायालय को राज्य सरकार से उसमें निहित बेतिया राज की संपत्तियों को विनिवेश करने का आदेश देने की अधिकारिता नहीं होगा। -इस अधिनियम के अधीन अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है, के सिवाय इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार, बोर्ड, न्यायालय या समाहर्त्ता, इस अधिनियम के तहत विशेष पदाधिकारी द्वारा दिया गया प्रत्येक आदेश अंतिम होगा और किसी भी मूल वाद, आवेदन या कार्यवाही निष्पादन में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा और इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त किसी भी शक्ति के अनुसरण में की गई या की जाने वाली किसी भी कार्रवाई के संबंध में किसी भी न्यायालय द्वारा कोई व्यादेश नहीं दिया जाएगा।

-(1) इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे।

(2) बेतिया राज की संपत्तियों का सभी प्रकार से संरक्षण और प्रबंधन केवल इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा शासित होगा और भू-राजस्व या किराया नियंत्रण मामलों से संबंधित किसी अन्य राज्य अधिनियम द्वारा शासित नहीं होगा। -इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, जनहित में, अधिनियम के उपबंधों को लागू करने के लिए राजस्व बोर्ड, न्यायालय या समाहर्त्ता या उसके अधीनस्थ पदाधिकारियों को कोई निदेश जारी कर सकेगी।8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 -(1) प्रतिपाल्य अधिकरण अधिनियम, 1879 (1879 का बंगाल अधिनियम 9) या बिहार एवं उड़ीसा राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1913 (1913 का बिहार और उड़ीसा अधिनियम 1) या राज्य सरकार द्वारा या बोर्ड द्वारा या न्यायालय द्वारा या समाहर्त्ता द्वारा बेतिया राज की संपत्तियों से संबंधित दिया गया प्रत्येक आदेश, अधिसूचना, नियम, विनियम या प्रक्रिया और जो उसके समाप्त होने से तुरंत पहले लागू थी, जहाँ तक ऐसा आदेश इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत नहीं हो, इस अधिनियम के अधीन लगातार प्रवृत्त और किया गया माना जाएगा।

(2) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, सिविल न्यायालय की डिक्री के या किसी अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के आदेशों के निष्पादन में कुर्की, अभिग्रहण या विक्रय के किसी आदेश के आधार पर राज्य सरकार में निहित बेतिया राज की किसी संपत्तियों का कोई अंतरण, अकृत और शून्य समझा जाएगा और ऐसे अंतरण के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार में निहित रहेगा। -(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, कठिनाई को दूर करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे प्रावधान कर सकेगी जो वह आवश्यक या समीचीन समझे।

(2) इस धारा के अधीन निर्गत प्रत्येक अधिसूचना, निर्गत किए जाने के पश्चात्‌ यथाशीघ्र राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।9 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 27 नव(cid:224)बर, 2024 बेतिया राज की परिसम्पत्तियों पर प्रभावी नियंत्रण इसको अतिक्रमण मुक्त रखने तथा राज्य सरकार की प्राथमिकता के अनुसार लोकहित में बेतिया राज की जमीन, भवन तथा मंदिर आदि का उपयोग हेतु बेतिया राज की सम्पत्ति को राज्य सरकार में निहित करने के उद्देश्य से प्रारूप का गठन किया गया है। यह विधेयक बेतिया राज की बिहार राज्य के अंदर या बाहर स्थित सभी मौजूदा सम्पत्तियों, जो प्रतिपाल्य अधिकरण (कोर्ट ऑफ वार्ड्‌स) के रूप में राजस्व पर्षद, बिहार की जानकारी में और जो प्रतिपाल्य अधिकरण द्वारा देखभाल की जा रही है, चाहे वह चल या अचल हो, राज्य सरकार में निहित करने हेतु गठित है। इस विधेयक के प्रावधान के अधीन एक बार राज्य सरकार के पास निहित सम्पत्तियां किसी भी कानून के तहत किसी भी उत्तराधिकारी के अधीन नहीं हो सकती है और इस अधिनियम के प्रभावी होने की तारीख से किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित उत्तराधिकार से संबंधित सभी चल रहे विवाद, मुकदमे या कार्यवाही समाप्त हो जाऐगी। इस विधेयक के प्रभावी होने के उपरान्त प्रतिपाल्य अधिकरण (कोर्ट ऑफ वाडर््‌स) निहित होने के परिणामस्वरूप, सभी कागजात, दस्तावेज, रिकॉर्ड, मानचित्र और सभी सुसंगत जानकारी उन जिलों के संबंधित समाहर्त्ता को सौंप देंगे, जहां बेतिया राज की संपत्तियाँ स्थित है। इस विधेयक के अधिनिममित हो जाने के पश्चात बेतिया राज की संपत्तियों या कार्यकाल के संबंध में कानूनी रूप से देय बकाया या राजस्व और उपकर और बेतिया राज की संपत्तियों के पट्टेदार, अंतरिती, बसनेवाले, अधिभोगी से वसूली योग्य अन्य सभी राशि, निहित होने की तारीख से राज्य सरकार द्वारा वसूली योग्य होगी। यही इस विधेयक का उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:466)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:465)(cid:289)त ।

(cid:466)बहार गजट (असाधारण) 1127-571+10-ड(cid:547)0ट(cid:547)0पी0 ।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 27 November 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1127/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-11-27.1127.