(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 14 अ(cid:274)हायण 1946 (श0)
(सं0 पटना 1152) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 5 (cid:465)दस(cid:224)बर 2024 सं॰सं॰-एम-4-53/2007/12888/वि॰ ———
3 fnlEcj 2024
विषयः-स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों के प्रत्यायोजन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश। दिनांक 01.04.2017 से योजना एवं गैर योजना के विलय के फलस्वरूप मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की अधिसूचना सं॰-306 दिनांक 17.03.2017 द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियाें के अनुपालन में विभागीय संकल्प सं0-2199 दिनांक-24.03.2017 द्वारा स्कीमों की स्वीकृति हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश संसूचित किये गये। कालांतर में कतिपय संशोधन के साथ विभागीय संकल्प सं0-3758 दिनांक-31.05. 2017 द्वारा स्कीमों की स्वीकृति के संबंध में समेकित रूप से दिशा-निर्देश निर्गत किया गया। इस क्रम में वित्त विभागीय संकल्प सं0-4573 दिनांक-04.07.2017, 8236 दिनांक-17.10.2017, 4443 दिनांक-14.06.2018, 6439 दिनांक-28.08.2018, 7730 दिनांक-15.10.2018 तथा पत्रांक-528 दिनांक-17.01.2020, पत्रांक-2629 दिनांक-14.03.2023, पत्रांक-8423 दिनांक-22.09.2023 एवं पत्रांक-8424 दिनांक-22.09.2023 द्वारा भी कतिपय बिंदुओं पर संशोधन/स्पष्टीकरण जारी हुए। संदर्भित दिशा-निर्देश/संशोधन/स्पष्टीकरण के बावजूद कतिपय प्रशासी विभागों के स्तर से स्कीमों की स्वीकृति से संबंधित बिंदुओं पर परामर्श/मार्गदर्शन की अपेक्षा की जाती रही है।
सम्यक विचारोपरांत स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों के प्रत्यायोजन के संबंध में कतिपय संशोधनाें के साथ कंडिकावार निम्नवत् समेकित प्रावधान किये जाते हैंः-2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 1. स्कीमों की समीक्षा समितियों(Appraisal Committees) का स्वरूप निम्नवत होगा :-
(क) विभागीय स्थायी वित्त समितिः-
विभाग में स्कीमों की समीक्षा हेतु विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव की अध्यक्षता में विभागीय स्थायी वित्त समिति निम्नवत होगी :-
| (i) | विभाग के प्रभारी अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | v/;{k |
| (ii) विभागीय आन्तरिक वित्तीय सलाहकार | सदस्य | |
| (iii) विषय से संबंधित प्रभारी विशेष सचिव/संयुक्त सचिव/उप सचिव | सदस्य |
यदि आवश्यक हो तो प्रशासी विभाग उक्त समिति के सदस्यों के अतिरिक्त योजना एवं विकास विभाग, वित्त विभाग अथवा किसी अन्य विभाग के प्रतिनिधि को भी आमंत्रित कर सकते हैं । लोक वित्त समिति Public Finance Committee
स्कीमों की समीक्षा के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में लोक वित्त समिति
| (i) विकास आयुक्त | अध्यक्ष | |
| (ii) | वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य |
| (iii) | योजना एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/ सचिव, (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य सचिव |
| (iv) | सम्बन्धित प्रशासी विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य |
| (i) मुख्य सचिव | अध्यक्ष | |
| (ii) विकास आयुक्त | सदस्य | |
| (iii) | वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य |
| (iv) सचिव, वित्त विभाग | सदस्य सचिव | |
| (v) | सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य |
| (vi) | सम्बन्धित प्रशासी विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (अर्थात् अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के रूप में विभाग के जो भी वरीयतम प्रभारी पद धारक हो) | सदस्य |
समीक्षा एवं स्वीकृति की शक्त्तियाँः-
| क्र॰ | नई स्कीम | समीक्षा प्राधिकार | स्वीकृति प्राधिकार |
| (i) | ₹5.00 करोड़ तक | विभागीय स्थायी वित्त समिति | अपर मुख्य सचिव/ प्रधान सचिव/सचिव (विभाग के उच्चतम प्रभारी) |
| (ii) | ₹5.00 करोड़ से अधिक एवं ₹15.00 करोड़ तक | विभागीय स्थायी वित्त समिति | विभागीय मंत्री |
| (iii) ₹15.00 करोड़ से अधिक एवं ₹30.00 करोड़ तक | विभागीय स्थायी वित्त समिति | विभागीय मंत्री एवं वित्त मंत्री | |
| (iv) | ₹30.00 करोड़ से अधिक | लोक वित्त समिति | मंत्रिपरिषद् |
| (v) | नये स्वायत संगठन की स्थापना के सम्बन्ध में | लोक वित्त समिति | मंत्रिपरिषद् |
(ख) नई स्कीम :- नई स्कीम से तात्पर्य है ऐसा कार्य/परियोजना जो पहली बार आरंभ हो रहा हो अर्थात ऐसा कार्य/परियोजना जो पूर्व में स्वीकृत नहीं है ।
(ग) नामांकन (Nomination) के आधार पर सामग्री एवं सेवाओं की अधिप्राप्ति के मामले में नामांकन के बिंदु पर वित्त विभागीय सहमति के पश्चात सभी मामलों में स्कीम की स्वीकृति हेतु कंडिका-2(क) में विहित समीक्षा प्राधिकार की स्वीकृति आवश्यक होगी । इस क्रम में नामांकन(Nomination) के आधार पर सामग्री एवं सेवाओं की अधिप्राप्ति हेतु ₹25.00 लाख से अधिक ₹1.00 करोड़ तक की राशि के मामलों में स्वीकृति प्राधिकार वित्त विभाग एवं ₹1.00 करोड़ से अधिक के मामलों में स्वीकृति प्राधिकार राज्य मंत्रिपरिषद होगा। राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में उक्त दोनों बिंदुओं (यथा, नामांकन के आधार पर प्राप्ति एवं स्कीम की स्वीकृति) का समावेश रहेगा ।
3. चालू स्कीम ।- चालू स्कीम से तात्पर्य है ऐसा व्यय जो पूर्व से स्वीकृत हो और उस स्वीकृत कार्य/परियोजना/मद के लिए पूर्व से व्यय किया जा रहा हो । किसी भी स्कीम को उसकी प्रशासनिक स्वीकृति की लागत के आधार पर स्वीकृत राशि के अन्तर्गत ही चालू स्कीम माना जायेगा । इसके लिए पुनः स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी । इसी प्रकार यदि किसी स्कीम की स्वीकृति नीतिगत आधार पर अथवा दर के आधार पर या दोनों आधार पर की गयी है (जैसे छात्रवृति की दर/पेंशन दर) तो ऐसी स्कीम के आवर्ती व्यय हेतु पुनः स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते कि बजटीय प्रावधान हो, परंतु ऐसी स्वीकृत/चालू स्कीम के ढ़ाँचा (यथा, दर अवयव अथवा अन्य कोई महत्वपूर्ण बिंदु) में परिवर्तन होने की स्थिति में पुनः प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता कंडिका-2(क) के अनुसार होगी । स्कीम अंतर्गत सहायक अनुदान वेतन, गैर वेतन एवं परिसम्पतियों के निर्माण, सब्सिडी, अंशदान आदि के मामलों में भी यही प्रावधान लागू होगा। आवर्ती व्यय से संबंधित स्कीम ।- यदि कोई स्कीम आवर्ती व्यय की प्रकृति का है अर्थात् वह साल-दर-साल चलने वाला है, तो ऐसी स्कीमों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति कंडिका-2(क) के अनुसार तभी दी जायेगी जब स्कीम की स्वीकृति के प्रस्ताव में योजना अवधि में होने वाले सम्पूर्ण व्यय का उल्लेख हो । यदि ऐसी स्कीम के योजना अवधि में होने वाले सम्पूर्ण व्यय का उल्लेख किया जाना संभव नहीं है और यह संभावना बनती हो कि यह साल-दर-साल चलने वाली स्कीम है तो ऐसे स्कीम की स्वीकृति लोक वित्त समिति के माध्यम से मंत्रिपरिषद् द्वारा दी जायेगी । मंत्रिपरिषद् से स्वीकृति के उपरान्त इस पर पुनः स्वीकृति की आवश्यकता तब तक नही होगी जब तक इसके मूल ढ़ाचें (यथा, दर अवयव अथवा अन्य कोई महत्वपूर्ण बिंदु) में परिवर्तन नहीं किया जा रहा हो ।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 5. स्कीम व्यय के अन्तर्गत स्कीमों की स्वीकृतिः-
(क) केन्द्रीय प्रायोजित, केन्द्रीय क्षेत्र एवं वाह्य सम्पोषित प्रक्षेत्र में चालू तथा नई स्कीमेंः- (i) केन्द्रीय प्रायोजित अथवा केन्द्रीय क्षेत्र की नई स्कीमेंः-ऐसे किसी भी नई स्कीमों की स्वीकृति/क्रियान्वयन एवं उनके लिए केन्द्रांश एवं राज्यांश की विमुक्ति संबंधी निर्णय हेतु समीक्षा प्राधिकार लोक वित्त समिति एवं स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद् होगा ।
(ii) केन्द्रीय प्रायोजित अथवा केन्द्रीय क्षेत्र की चालू स्कीमेंः- यदि ऐसी स्कीम में केन्द्रांश एवं राज्यांश के लिए उद्व्यय एवं बजट में उपबंध हो, तो प्रत्येक वर्ष अलग से प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी । यह प्रक्रिया सभी रूप में व्यय की जानेवाली राशि के संबंध में भी प्रभावी होगी। प्रशासी विभाग केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इन स्कीमों का क्रियान्वयन करेगा तथा उद्व्यय एवं बजट उपबंध के अन्तर्गत भारत सरकार से प्राप्त राशि की समानुपातिक राशि विमुक्त करने के लिए सक्षम होगा। केन्द्रांश की राशि उपलब्ध होने के उपरांत ही समानुपातिक राज्यांश की राशि विमुक्त की जायेगी । विशेष परिस्थिति में केन्द्र प्रायोजित स्कीमो के लिए केन्द्रांश की प्रत्याशा में समानुपातिक राज्यांश अथवा केन्द्रांश की प्रत्याशा में केन्द्रांश की विमुक्ति वित्त विभाग एवं मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के उपरांत ही की जा सकेगी।
(iii) केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम के लिए योजना एवं विकास विभाग से उद्व्यय की आवश्यकता नहीं है । केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम के चालू स्कीम पर व्यय केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत सरकार से राशि प्राप्ति एवं बजट उपबंध के अन्तर्गत किया जायेगा ।
(ख) राज्य प्रायोजित स्कीमों की स्वीकृतिः-
(i) राज्य प्रायोजित नई स्कीमेंः-राज्य प्रायोजित नई स्कीमों की समीक्षा एवं स्वीकृति उपर्युक्त कंडिका 2(क) के अनुसार की जायेगी ।
(ii) राज्य प्रायोजित चालू स्कीमेंः- राज्य क्षेत्र की चालू स्कीमों के लिये प्रत्येक वर्ष स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, चाहे राशि का व्यय अनुदान के रूप में किया जा रहा हो । ऐसी स्कीम की प्रशासनिक स्वीकृति की राशि के अन्तर्गत उस वित्तीय वर्ष में उद्व्यय तथा बजट उपबंध के अन्तर्गत राशि विमुक्त करने के लिए प्रशासी विभाग सक्षम होगा । स्कीमों का क्रियान्वयन एवं राशि की विमुक्ति प्रशासी विभाग द्वारा सरकार की मूल स्वीकृति एवं अनुमोदित दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा सकेगा । उदाहरण के तौर पर यदि छात्रवृत्ति की दर में कोई परिवर्तन नहीं है, तो प्रतिवर्ष स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी और इसे चालू स्कीम की श्रेणी मेें ही मानते हुए बजट उपबंध के अन्तर्गत राशि विमुक्त की जा सकेगी ।
(ग) स्कीम (राज्य स्कीम, केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम एवं केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम) अंतर्गत किसी नये पद के सृजन एवं पद के उत्क्रमण के मामले लोक वित्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे एवं इसकी स्वीकृति मंत्रिपरिषद् द्वारा की जायेगी । नये वाहन के क्रय संबंधी मामले लोक वित्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे एवं इसकी स्वीकृति कंडिका-2(क) के अनुसार निर्धारित होगी ।
(घ) स्कीम (राज्य स्कीम, केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम एवं केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम) अन्तर्गत संविदागत मानव बल की समीक्षा हेतु प्रस्ताव लोक वित्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा एवं इसकी स्वीकृति मंत्रिपरिषद् द्वारा की जायेगी । मानदेय का निर्धारण स्कीम के दिशा-निर्देश के अनुरूप लोक वित्त समिति की अनुशंसा पर मंत्रिपरिषद् द्वारा किया जायेगा। कोई दिशा-निर्देश नहीं होने पर सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-1003 दिनांक-22.01.2021 (समय-समय पर यथा संशोधित) द्वारा निरूपित मार्गदर्शक सिद्धांत लागू होंगे। किन्तु आगे के वर्षों में संविदागत स्वीकृत मानव बल की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि नहीं होने की स्थिति में इसके अवधि5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 विस्तार की शक्ति विभाग की होगी बशर्ते इस मद में व्यय हेतु पर्याप्त बजट उपबंध हो ।
राज्य सरकार द्वारा गठित Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations, बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि अंतर्गत संविदा आधारित पद की आवश्यकता किसी निश्चित प्रयोजन एवं किसी निश्चित अवधि के लिए हो तो उस स्थिति में संबंधित शासी निकाय/निदेशक मंडल/समकक्ष निकाय द्वारा इसकी स्वीकृति दी जा सकेगी बशर्ते इस हेतु राशि उपलब्ध हो ।
(ङ) स्कीम के अंतर्गत आउट-सोर्सिंग (Out Sourcing) द्वारा वाहन, कम्प्यूटर ऑपरेटर, मानव बल की सेवा का आकलन एक वर्ष की अवधि पर करते हुए प्रथम बार समीक्षा एवं स्वीकृति की शक्तियाँ कंडिका 2(क) के अनुरूप होंगे । इसके लिए पद सृजन की आवश्यकता नहीं होगी। आगे के वर्षों में संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि नहीं होने की स्थिति में इसका अवधि विस्तार विभाग द्वारा किया जा सकेगा, बशर्ते इस मद में व्यय हेतु पर्याप्त बजट उपबंध हो ।
6. स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अन्तर्गत स्कीमों की स्वीकृति ।- स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मद में नई स्कीम की समीक्षा एवं स्वीकृति की शक्तियाँ उपरोक्त कंडिका 2(क) के अनुरूप होगी। स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मद में स्कीमों की स्वीकृति के क्रम में निम्न तथ्यों का ध्यान रखा जायेगाः- (क) स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय का तात्पर्य वैसे व्यय से है जो आवर्ती प्रकृति का हो, जैसे राजस्व व्यय अन्तर्गत वेतन, पेंशन, सब्सिडी, अंशदान, Operation and Maintenance, ब्याज एवं अन्य आवर्ती प्रकृति के प्रतिबद्ध व्यय, जिनके लिए राशि का व्यय स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय शीर्ष से किया जाना हो । लोक ऋण के अन्तर्गत मूलधन की अदायगी को स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय की श्रेणी में रखा जाता है।
(ख) स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय अन्तर्गत किसी भी स्कीम का तात्पर्य वैसे राजस्व व्यय से है, जो अल्प एवं निश्चित अवधि का हो ।
(ग) स्थापना एवं अन्य प्रतिबद्ध व्यय में पदों के सृजन अथवा उत्क्रमण संबंधी प्रस्ताव जो पूर्व में गैर योजना व्यय से सम्बन्धित थे, के संदर्भ में राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा गठित Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations, बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मद में पदों के सृजन की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित प्रशासी पदवर्ग समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा एवं इसकी स्वीकृति मंत्रिपरिषद द्वारा दी जाएगी । राज्य सरकार के सभी विभागाें हेतु नये वाहन के क्रय संबंधी मामलों की स्वीकृति प्रशासी पदवर्ग समिति की अनुशंसा से वित्त मंत्री के स्तर से अपेक्षित होगी । राज्य सरकार द्वारा गठित Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations, बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि उक्त के अनुसार अपने-अपने बायलॉज में संशोधन अथवा निर्माण करेंगे। परंतु निष्प्रयोजित किये गए वाहन के विरूद्ध निर्धारित मूल्य की अधिसीमा के अन्तर्गत नये वाहन क्रय का प्रस्ताव प्रशासी पदवर्ग समिति के समक्ष रखने की आवश्यकता नहीं है । ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासी विभाग के स्तर से स्वीकृति प्रदान की जायेगी। बगैर निष्प्रयोजन के वाहन क्रय, अतिरिक्त नया वाहन क्रय एवं नये पद के पदधारक के लिए वाहन क्रय से संबंधित प्रस्ताव ही प्रशासी पदवर्ग समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे। Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि में वाहन की स्वीकृति संबंधित शासी निकाय/निदेशक मंडल/समकक्ष निकाय द्वारा दी जा सकेगी, बशर्ते इस हेतु राशि उपलब्ध हो ।6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 (घ) स्थापना एवं अन्य प्रतिबद्ध व्यय अन्तर्गत संविदागत मानव बल के सृजन एवं स्वीकृति हेतु प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रशासी पदवर्ग समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। प्रशासी पदवर्ग समिति की अनुशंसा पर मंत्रिपरिषद् की सहमति के पश्चात ही उपरोक्त श्रेणी के पदों का सृजन किया जायेगा। संविदा पर कार्यरत/प्रस्तावित पद के लिए मानदेय का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-1003 दिनांक-22.01.2021 (समय-समय पर यथा संशोधित) के आलोक में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जायेगा । किन्तु आगे के वर्षों में संविदागत स्वीकृत मानव बल की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि नहीं होने की स्थिति में इसका अवधि विस्तार विभाग द्वारा किया जा सकेगा, बशर्ते इस मद में व्यय हेतु पर्याप्त बजट उपबंध हो एवं पद स्वीकृत हो ।
यदि राज्य सरकार द्वारा गठित Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations, बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि अंतर्गत संविदा आधारित पद की आवश्यकता किसी निश्चित प्रयोजन एवं किसी निश्चित अवधि के लिए हो तो उस स्थिति में भी संबंधित शासी निकाय/निदेशक मंडल/समकक्ष निकाय द्वारा इसकी स्वीकृति दी जा सकेगी, बशर्ते इस हेतु राशि उपलब्ध हो ।
(ङ) आउट-सोर्सिंग (Out Sourcing) द्वारा वाहन, कम्प्यूटर ऑपरेटर, मानव बल इत्यादि की सेवा का आकलन एक वर्ष की अवधि पर करते हुए प्रथम बार समीक्षा एवं स्वीकृति की शक्तियाँ कंडिका 2(क) के अनुरूप होगी । इसके लिए पद सृजन की आवश्यकता नहीं होगी। आगे के वर्षों में संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि नहीं होने की स्थिति में इसका अवधि विस्तार विभाग द्वारा किया जा सकेगा, बशर्ते इस मद में व्यय हेतु पर्याप्त बजट उपबंध हो ।
राज्य सरकार द्वारा गठित Special Purpose Vehicles, Non Profitable Organisations, बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि अंतर्गत आउट-सोर्सिंग द्वारा वाहन, कंप्यूटर ऑपरेटर, मानव बल इत्यादि हेतु स्वीकृति संबंधित शासी निकाय/निदेशक मंडल/समकक्ष निकाय द्वारा दी जा सकेगी, बशर्ते इस हेतु राशि उपलब्ध हो ।
(च) स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मद में स्कीमों के लिए उक्त कंडिका-2(क) के अनुरूप (छ) स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय (पूर्व में गैर योजना) मद में सहायक अनुदान वेतन, गैर वेतन एवं परिसम्पतियों के निर्माण (विवेकानुदान सहित), सब्सिडी, अंशदान आदि से संबंधित चालू स्कीमों के मामलों में पुनः सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति अपेक्षित नहीं होगी, बशर्ते पूर्व से स्वीकृत स्कीम के ढ़ाँचा (यथा, दर अथवा अन्य कोई महत्वपूर्ण बिंदु) में परिवर्तन नहीं हुआ हो । किन्तु स्थानीय निकायों (शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं), राज्य सरकार के अधीन गठित स्वशासी निकाय, विश्वविद्यालय आदि में सहायक अनुदान वेतन, सहायक अनुदान गैर वेतन (पेंशन) की स्वीकृति वित्त विभाग की सहमति से प्रशासी विभाग दे सकेगा, बशर्त्ते कि बजट में राशि प्रावधानित हो।
(ज) केन्द्रीय वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि पर मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति के उपरांत प्रत्येक वर्ष राशि के व्यय हेतु मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति अपेक्षित नहीं होगी । परंतु राज्य वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि का व्यय प्रत्येक वर्ष वित्त विभाग की सहमति से ही किया जायेगा ।7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 7. निवेश पूर्व कार्य Pre-investment activity आदि पर व्यय ।-स्कीमों में विस्तृत संभाव्यता/परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी, जैसे निवेश पूर्व कार्यों, के लिए शक्तियों का प्रत्यायोजन निम्नवत होगाः-
| क्र॰ | स्कीम की लागत | समीक्षा प्राधिकार | स्वीकृति प्राधिकार |
| (क) | ₹ करोड़ तक की लागत पर विस्तृत संभाव्यता/परियोजना प्रतिवदेन की तैयारी एवं निवेश पूर्व कार्यों के लिए (निवेश पूर्व कार्यों में प्रतिवेदन हेतु विस्तृत अध्ययन शामिल होगा लेकिन भूमि अधिग्रहण/अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था शामिल नहीं होगी) । | विभागीय अपर मुख्य सचिव/ प्रधान सचिव/ सचिव | विभागीय मंत्री |
| (ख) | ₹ से उपर की लागत के मामलों में | लोक वित्त समिति | मंत्रिपरिषद् |
यहाँ निवेश पूर्व कार्य का तात्पर्य, वैसे कार्य संदर्भ में है, जिसमें भविष्य में योजना/स्कीम के कार्यान्वयन की संभाव्यता एवं तद्नुसार परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी सम्मिलित हो । इसका तात्पर्य तकनीकी मानव बल की सेवा लिये जाने हेतु गठित परियोजना प्रबंधन इकाई से नहीं है । इस तरह के मामले स्कीम की स्वीकृति से संबंधित प्रावधान से शासित होंगे ।
8. पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति :-
(क) किसी भी स्वीकृत योजना के मूल प्राक्कलन में, 20 प्रतिशत से कम या 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की स्थिति में, संबंधित योजना के पुनरीक्षित प्राक्कलन के लिये पुनः प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी, किंतु राशि का व्यय वित्तीय प्रावधानो का पालन कर किया जायेगा ।
(ख) यदि स्वीकृत स्कीम के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभावित है, तो ऐसी स्कीम के पुनरीक्षित प्राक्कलन में विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए विहित स्वीकृति प्राधिकार से एक स्तर ऊपर के प्राधिकार द्वारा स्वीकृति दी जायेगी । विहित स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद् होने की स्थिति में एक स्तर उपर के प्राधिकार के रूप में मंत्रिपरिषद् ही माना जायेगा । पुनरीक्षित प्राक्कलन के आधार पर निर्धारित एक स्तर उपर का स्वीकृति प्राधिकार कंडिका-2(क) की सक्षमता तक ही राशि की स्वीकृति प्रदान करेगा ।
स्पष्टीकरण ।- किसी भी स्कीम में मूल प्राक्कलन एक ही होता है, जो मूल प्रशासनिक स्वीकृति है। पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति को मूल प्रशासनिक स्वीकृति नहीं माना जायेगा। किसी स्वीकृत स्कीम में जब भी अग्रतर पुनरीक्षण आवश्यक हो तो, उस स्कीम के मूल प्राक्कलन का संदर्भ सदैव संबंधित स्कीम के मूल (original) प्रशासनिक स्वीकृति से ही लिया जायेगा ।
तदनुसार किसी भी स्वीकृत स्कीम के प्रथम पुनरीक्षित प्राक्कलन के बाद अग्रतर पुनरीक्षण (मूल प्राक्कलन से 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की स्थिति में) हेतु उपरोक्त कंडिका(ख) के अनुरूप मंत्रिपरिषद् अथवा पूर्व में पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने वाले स्वीकृति प्राधिकार से एक स्तर ऊपर के प्राधिकार (कंडिका 2(क) में निहित वित्तीय सीमा के अन्तर्गत) का पुनः अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा ।
9. सहायक अनुदान (विवेकानुदान सहित)/सब्सिडी से सम्बन्धित नई स्कीमों की स्वीकृति :-
(क) राज्य सरकार के किसी अधिनियम/संकल्प/निर्णय इत्यादि द्वारा गठित सरकारी बोर्ड, प्राधिकार, एजेंसी, सोसाइटी अथवा किसी स्कीम विशेष के कार्यान्वयन हेतु गठित Special purpose vehicle इत्यादि के लिये अनुदानित/सहायक अनुदानित/सब्सिडी से संबंधित नई स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति उपरोक्त कंडिका-2(क) के अनुरूप दी जायेगी ।8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 (ख) राज्य सरकार के स्तर से संचालित सहायक अनुदान (विवेकानुदान सहित)/सब्सिडी से संबंधित नये स्कीमों की स्वीकृति भी कंडिका 2(क) के अनुरूप दी जायेगी। (ग) उपरोक्त कंडिका-(क) के अनुरूप ही वैसे गैर-सरकारी संस्थानों में अनुदान/सहायक अनुदान की स्वीकृति दी जा सकेंगी, जिनके नाम से बजट प्रावधान हो । (घ) जिन गैर सरकारी संस्थानों के नाम से बजट प्रावधान नहीं हो, उनके मामले में कंडिका-2(क) के अनुरूप समीक्षा प्राधिकार प्रभावी होंगे, परंतु उसमें विहित स्वीकृति प्राधिकार से एक स्तर उपर के प्राधिकार द्वारा स्वीकृति दी जायेगी । विहित स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद् होने की स्थिति में एक स्तर उपर के प्राधिकार के रूप में मंत्रिपरिषद् ही माना जायेगा ।
10. (क) विभाग एवं बोर्ड, प्राधिकार, एजेन्सी, कंपनी एवं सोसाईटी इत्यादि द्वारा ऋण पोषित किसी भी स्कीम की स्वीकृति के पूर्व वित्त विभाग की सहमति अपेक्षित होगी। (ख) प्रशासी विभाग के नियंत्रणाधीन किसी निगम/कम्पनी द्वारा राज्य सरकार की गारंटी के विरूद्ध उगाही की जाने वाली ऋण की राशि की स्वीकृति हेतु वित्त विभाग की सहमति आपेक्षित होगी ।
ऋण संबंधी प्रत्येक मामले में वित्त विभाग की सहमति के उपरांत लोक वित्त समिति की अनुशंसा से मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति अनिवार्य होगी । 11. किसी नये स्कीम अथवा चालू स्कीम में राशि की आवश्यकता के आलोक में अनुपूरक बजट के अन्तर्गत अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाता है। यह आवश्यक है कि अनुपूरक बजट के माध्यम से प्रावधानित राशि का व्यय उसी स्कीम के केन्द्रांश एवं राज्यांश मद में किया जाय, न कि पुनर्विनियोग द्वारा किसी अन्य स्कीम में।
अलग-अलग स्वीकृति प्राधिकार (यथा, मंत्रिपरिषद/वित्त मंत्री/विभागीय मंत्री/अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव) के अनुमोदन के पश्चात् प्रशासी विभाग स्कीम की स्वीकृति के सम्बन्ध में आन्तरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति से स्वीकृत्यादेश/राज्यादेश निर्गत एवं संसूचित कर सकेगा ।
स्वीकृत्यादेश/राज्यादेश में निम्न तथ्यो का अंकन आवश्यक होगा :-
i स्कीम में व्यय से संबंधित शीर्ष/उपशीर्ष, ii स्कीम के अनुमोदन से संबंधित सक्षम प्राधिकार, अनुमोदन की तिथि, एतद्संबंधी संचिका संख्या एवं उसकी पृष्ठ संख्या,
iii स्कीम के अनुमोदन के संबंध में वित्त विभाग/आन्तरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति का संदर्भ यथा, संचिका संख्या एवं उसकी पृष्ठ संख्या,
v स्वीकृत्यादेश उप सचिव से अन्यून पदाधिकारी के हस्ताक्षर से निर्गत किया जायेगा।9 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 12. जिन मामलों में उद्व्यय अथवा बजट उपबंध नहीं है, वहाँ उद्व्यय के लिए योजना एवं विकास विभाग तथा बजट उपबंध के लिए अलग से वित्त विभाग की स्वीकृति अपेक्षित होगी । उपरोक्त के आलोक में प्रशासी विभागों द्वारा स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति तो दी जा सकेगी, परंतु राशि की विमुक्ति बजट उपबंध होने के पश्चात् ही की जायेगी । 13. नई स्कीम की स्वीकृति के पूर्व यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा कि चालू/पुरानी स्कीमें अधूरी न रह जाय तथा इस हेतु आवश्यक राशि कर्णांकित कर ली गई है । 14. Bank of Sanction (BOS) का निर्धारण मात्र पूंजीगत परिव्यय के अन्तर्गत आने वाले स्कीमों के लिए ही किया जायेगा । पूंजीगत स्कीमाें की स्वीकृति के क्रम में Bank of Sanction (BOS) की अधिसीमा संबंधित वित्तीय वर्ष में उस स्कीम के लिए निर्धारित शीर्ष अन्तर्गत मूल बजटीय उपबंध की राशि का तीन गुणा में से उस वित्तीय वर्ष के लिए सृजित दायित्व की राशि घटाने के बाद प्राप्त राशि के बराबर होगी {यथा, BOS =(संबंधित वित्तीय वर्ष में निर्धारित शीर्ष अन्तर्गत मूल बजट उपबंध x 3) –निर्धारित शीर्ष में उक्त वित्तीय वर्ष के लिए सृजित दायित्व}। परन्तु विशेष परिस्थिति में जनोपयोगी मामलों के संदर्भ में Bank of Sanction (BOS) की उक्त अधिसीमा से ऊपर भी लोक वित्त समिति के अनुमोदन से स्कीमें स्वीकृत की जा सकेगी । स्कीम अंतर्गत राजस्व व्यय तथा स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अन्तर्गत अनुरक्षण मरम्मत से संबंधित स्कीमों पर Bank of Sanction (BOS) लागू नहीं होगा । अनुरक्षण एवं मरम्मत के मामले में प्रशासी विभाग वित्त विभाग के परामर्श से अनुपूरक में बजटीय उपबंध की प्रत्याशा में उस हद तक स्कीम की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से करा सकता है ।
अनुपूरक आगणन/पुनरीक्षित बजट प्राक्कलन से प्राप्त राशि मूल बजट के आधार पर निर्धारित Bank of Sanction (BOS) में मात्र अतिरिक्त रूप मेें निम्नवत जोड़ा जायेगा :-
"मूल बजट उपबंध के आधार पर निर्धारित BOS+अनुपूरक आगणन/पुनरीक्षित बजट प्राक्कलन से प्राप्त राशि"
15. स्कीमों की सैद्धांतिक स्वीकृति को उसकी सक्षम स्तर से प्रशासनिक स्वीकृति नही मानी जायेगी । किसी नई स्कीम विशेष के कार्यान्वयन की सैद्धांतिक स्वीकृति के उपरांत नियमानुसार स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति यथा वर्णित प्रक्रिया के अनुरूप सक्षम प्राधिकार से अपेक्षित होगी ।
16. नीतिगत निर्णय- किसी भी प्रकार के नये वित्तीय निहितार्थ वाले नीतिगत निर्णय विधि विभाग एवं वित्त विभाग की सहमति से मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन से किया जायेगा । पूर्व से स्वीकृत नीतियों के अन्तर्गत किसी स्कीम की प्रशासनिक स्वीकृति यथा वर्णित प्रक्रिया के अनुरूप सक्षम प्राधिकार से अपेक्षित होगी ।
17. किसी भी निर्माण कार्य/अनुरक्षण एवं मरम्मति से संबंधित योजना (स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय/स्कीम अन्तर्गत) की प्रशासनिक स्वीकृति में प्रशासनिक स्वीकृति की वैधता अवधि अंकित रहेगी । उक्त अवधि के अन्तर्गत कार्य प्रारंभ नहीं किये जाने की स्थिति में उसे प्रारंभ करने के पूर्व पुनः सक्षम प्राधिकार की स्वीकृृृति प्राप्त की जाायेगी (पूूर्व का स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद् होने की स्थिति में मंत्रिपरिषद्)।
18. उपर्युक्त प्रत्यायोजित शक्त्तियों का प्रयोग राज्य सरकार द्वारा निर्गत सामान्य मितव्ययिता परिपत्रों एवं सुसंगत दिशा-निर्देशों के अध्यधीन किया जायेगा । इसके साथ-साथ राशि के व्यय में वित्तीय प्रावधानाें का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होेगा । 19. स्कीमों की स्वीकृति से संबंधित पूर्व में निर्गत सभी संकल्प/दिशा-निर्देश/आदेश इस संकल्प के निर्गत की तिथि से इस हद तक संशोधित समझे जायेंगे ।10 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 20. इस संकल्प में अंकित दिशा-निर्देशाें के क्रियान्वयन/अनुपालन में किसी कठिनाई का निराकरण वित्त विभाग के स्तर से किया जा सकेगा ।
21. यह दिशा-निर्देश बिहार राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होगा ।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सरकार के सभी विभागों एवं महालेखाकार, बिहार को भेजी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,/- आनन्द किशोर, प्रधान सचिव ।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 1152-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।
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