(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 19 अ(cid:274)हायण 1946 (श0)
(सं0 पटना 1172) पटना, मंगलवार, 10 (cid:465)दस(cid:224)बर 2024 ——— vf/klwpuk 10 fnlEcj 2024 The Bihar
Special Survey-Settlement and Revenue Guidelines
राज्य के नागरिकों एवं भू-धारियों के भूमि संबंधी मामलों का त्वरित तथा गुणवत्ता एवं पारदर्शितापूर्ण निराकरण किया जाना राज्य सरकार का अभीष्ट उद्देश्य है। बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त अधिनियम 2011 (यथा संशोधित 2012 एवं 2017) तथा बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त नियमावली 2012 (यथा संशोधित 2019 एवं 2024) के प्रावधानों के तहत राज्य में विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यक्रम संचालित कर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित रैयती एवं अन्य भूमि/भू-खण्डाें का नया अधिकार अभिलेख (खतियान) तथा भू-मानचित्र (नक्शा) का निर्माण किया जा रहा है। राज्य स्तर पर भूमि/भू-खण्डों का अधिकार अभिलेख (खतियान) एवं राजस्व ग्रामों के भू-मानचित्र (नक्शा) का निर्माण सर्वप्रथम कैडेस्ट्रल सर्वे (सन् ई0-1892-1920) के तहत राज्य के सभी जिलों में किया गया था। तद्ोपरान्त, रिविजनल सर्वे (सन् ई0-1952-1990) संचालित किया गया था। 2. कैडेस्ट्रल सर्वे अन्र्तगत राज्य के सभी जिलों के राजस्व ग्राम का खतियान एवं राजस्व ग्रामवार भू-मानचित्र निर्मित कर प्रकाशित किया गया, जबकि रिविजनल सर्वे की प्रक्रियान्र्तगत राज्य के 12 जिलों में सर्वे एवं बन्दोबस्त की कार्रवाई पूर्ण हुई, तथापि कुछ जिलों के अधिकांश भू-भाग में विभिन्न कारणो से सर्वे एवं बन्दोबस्त का कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका। इस प्रकार, राज्य के अधिकतर ग्रामों का वर्तमान समय में उपलब्ध अधिकार अभिलेख (खतियान) एवं भू-मानचित्र (नक्शा) लगभग 100 वर्षो से अधिक अथवा 50 वर्षो से भी अधिक अवधि का है। इतनी लंबी अवधि तक किसी राजस्व कागजात/अभिलेख का यथावत् मूल एवं वास्तविक स्थिति तथा स्वरूप में बने रहना संभव प्रतीत नहीं होता है। इसके अतिरिक्त राज्य का एक बड़ा भू-भाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र (Flood Prone Zone) है, जहाँ समय-समय पर बाढ़ की विभीषिका से घर-मकान ध्वस्त एवं बर्बाद हो जाते हैं, जिसके कारण रैयत/भू-धारकों के पास उपलब्ध राजस्व कागजात/अभिलेख भी विनष्ट हो जाते है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अगलगी की भी घटनाएँ होती है, जिसमें घर-मकान, साज-सामान, कागजात-अभिलेख, इत्यादि नष्ट हो जाते हैं। राज्य सरकार के जिला2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 (cid:464)दस(cid:224)बर 2024 अभिलेखागार से भी, कतिपय मामलों में, राजस्व अभिलेख/कागजात सड़ जाने अथवा विनष्ट हो जाने या जीर्ण-शीर्ण अवस्था में रहने की सूचनाएँ प्राप्त होती है। 3. यह सर्वविदित है कि वर्तमान समय में राज्य में परिलक्षित भू-विवादो का एक प्रमुख कारण भूमि पर स्वामित्व एवं अधिकारिता की स्थिति का निर्विवाद निर्धारण नहीं होना पाया गया है। अतएव भू-विवादो को नियंत्रित कर इसे न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए यह आवश्यक है कि अभिलेखों एवं स्थलीय जाँच के आधार पर भूमि/भू-खण्डों के वास्तविक एवं वैध दखलकारों की स्थिति ज्ञात कर भू-सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त की प्रक्रिया के तहत प्रत्येक खेसरा के स्वामित्व एवं अधिकारिता का निर्धारण कर इसे विनिश्चित किया जाय। एतदर्थ, यह आवश्यक है कि प्रत्येक खेसरा में सन्निहित भूमि/भू-खण्डों के संबंध में रैयतोंं के पास उपलब्ध राजस्व संबंधी साक्ष्य, खेसरों के विभाजन की स्थिति, क्रय-विक्रय, दान अथवा अन्य किसी भी प्रकार से हुए अंतरण की स्थिति ज्ञात की जाए। 4. इसके अतिरिक्त, भू-सर्वेक्षण की प्रक्रियान्र्तगत विगत खतियान में खेसरों के संबंध में संधारित स्वामित्व एवं अधिकारिता के अनुसार वास्तविक दखल में परस्पर विरोधाभास की स्थिति, रैयती भूमि के मौखिक बॅटवारा, राजस्व अभिलेखों का अभाव, इत्यादि से उद्भूत मामलों को भी संज्ञान में लेते हुए वास्तविक दखल कब्जा के अनुरूप संशय की स्थिति को दूर करने के लिए क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारियों को सरकार के स्तर से स्पष्ट मार्गदर्शन निर्गत किया जाय। उक्त सभी बिन्दुओं एवं मामलों के संदर्भ में सर्वे एवं बन्दोबस्त कार्य में संलग्न क्षेत्रीय पदाधिकारियों को सरकार के स्तर से एक स्पष्ट मार्गदर्शन संसूचित किये जाने के पश्चात् गुणवत्ता एवं पारिदर्शितापूर्ण नव अधिकार अभिलेख (खतियान) का निर्माण किया जाना संभव होगा। 5. राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यक्रम अन्र्तगत प्रथम चरण में प्रारम्भ किए गए कार्य में राज्य के 20 जिलो के 89 अंचलो में रैयतों के अधिकार अभिलेख (खतियान) एवं भू-मानचित्र (नक्शा) का कार्य प्रगति पर है तथा वर्तमान में राज्य के अन्य शेष सभी जिलो के सभी राजस्व ग्रामों में अधिकार अभिलेख एवं भू-मानचित्र निर्माण के लिए सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त की गतिविधियों को प्रारम्भ किया गया है। 6. उक्त तथ्यों की पृष्ठभूमि में The Bihar
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| रैयत का रैयती खेसरा पर शांतिपूर्ण दखल-कब्जा है, परन्तु रैयत के पास भूमि के स्वामित्व से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं है एवं स्वामित्व संबंधी साक्ष्य के नाम पर केवल लगान रसीद है। विशेष सर्वे में किस प्रकार का खाता खोला जाएगा। | रैयत के पास स्वामित्व का साक्ष्य नहीं है, केवल राजस्व रसीद है तो विशेष सर्वेक्षण के खानापुरी प्रक्रम में याद्ाशत पंजी संधारित करने के लिए निम्नलिखित आधार का पालन किया जायेगा :- (i) जमाबंदी कायम है एवं लगान रसीद कट रही हो और भू-खण्डों पर शांतिपूर्ण दखल कब्जा हो, अथवा (ii) भू-खण्डों पर शांतिपूर्ण दखल कब्जा के संदर्भ में खेसरा के चौहद्दीदारों का बयान (Statement) का एक ज्ञाप (Memo of Inspection) प्रतिवेदन हो, अथवा (iii) उक्त खेसरा के चौहद्दी में जमीन की बिक्री/ दान/ विनिमय/ निबंधित बटँवारा हुआ हो तो चौहद्दी में उक्त खेसरा के स्वामित्वधारी का नाम दर्ज हो | वैसे रैयत जिनके स्वामित्व संबंधी साक्ष्य प्राकृतिक आपदा अथवा लंबी अवधि (50 वर्ष या अधिक) में रख रखाव के क्रम में नष्ट हो गए है उनके शान्तिपूर्ण दखल, न्यूनतम साक्ष्य एवं सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वामित्व का निर्धारण किया जा सकेगा। |
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| उपरोक्त कंडिका-(i), (ii) अथवा (iii) में से कम से कम कोई एक विकल्प से खेसरा के स्वामित्वधारी आच्छादित होते हं ै, तो रैयत के नाम से खाता खोला जाएगा। | |||
| रैयत का रैयती खेसरा पर दखल कब्जा है परंतु न ही जमाबंदी कायम है एवं न ही रसीद कट रही है तो किस प्रकार खाता खोला जायेगा। | केवल भू-खण्डों पर दखल कब्जा है परन्तु न हीं जमाबंदी कायम है एवं न ही रसीद कट रही है तब अनाबाद बिहार सरकार के नाम से खाता खोला जायेगा, केवल अभ्युक्ति कॉलम मे अवैध दखलकार का नाम ं दर्ज होगा। खेसरा पंजी (प्रपत्र-6) के कॉलम 10 से 24 तक तकनीकी मार्गदर्शिका में वर्णित प्रावधान के अनुसार दर्ज होगा। | विगत सवे र्क्षण के अनुसार रैयती प्रकृति की भूमि पर यदि कोई व्यक्ति बिना किसी साक्ष्य के दखल मे है तो स्वामित्व की ं स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। | |
| (क) कैडेस्ट्रल सवे र् खतियान / रिविजनल सर्वे खतियान में गैर-मजरूआ मालिक/ अनाबाद बिहार सरकार खाते की भूमि है, किस्म भूमि मकानमय सहन दर्ज है तथा अभ्युक्ति के कॉलम में दखलकार का नाम दर्ज है। अ थवा (ख) कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान/ रिविजनल सर्वे खतियान में गैर - मजरूआ मालिक/ अनाबाद बिहार सरकार खाते की भूमि है, किस्म भूमि मकानमय सहन दर्ज है, परन्तु अभ्युक्ति कॉलम मे ं कुछ भी दर्ज नहीं है। (ग) कैडेस्ट्रल खतियान में गैरमजरूआ मालिक /अनाबाद बिहार सरकार के खाते की भूमि है। किस्म भूमि डीह वासगीत है, अभ्युक्ति कॉलम में दखलकार का नाम दर्ज है अथवा कुछ भी दर्ज नहीं है। | (क) कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान / रिविजनल सर्वे खतियान में गैर- मजरूआ मालिक/ अनाबाद बिहार सरकार के खाते की भूमि में किस्म भूमि, मकानमय सहन दर्ज है एवं अभ्युक्ति कॉलम में दखलकार का नाम दर्ज है अथवा कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान /रिविजनल सर्वे खतियान में गैर - मजरूआ मालिक / अनाबाद बिहार सरकार खाते की भूमि है, किस्म भूमि मकानमय सहन दर्ज है परन्तु अभ्युक्ति कॉलम में कुछ भी दर्ज नहीं है। खतियान के अनुसार दखलकार के वंशज या क्रेता दखलकार के रूप में काबिज है या दखलकार अथवा दखलकार के व शज ं द्वारा बिक्री किया गया है और क्रेता का दखल है। उपरोक्त सभी परिस्थितियों में विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त अधिनियम/नियमावली अंतर्गत दखलकार के वंशज जो वर्तमान में काबिज हो अथवा उनसे क्रय करने वाले रैयत जो वर्तमान में काबिज हो उनके नाम स े नियमावली क े नियम-9 के अंतर्गत खानापुरी प्रक्रम में रैयती खाता खोला जाएगा। (ख) कैडेस्ट्रल / रिविजनल सवे र् गैरमजरूआ मालिक/ गैरमजरूआ खाता के अंतर्गत किसी खेसरा की भूमि डीह वासगीत के रूप में दर्ज है तब खानापुरी प्रक्रम में नियमावली के नियम 9 के अंतर्गत उक्त खेसरा की भूमि रैयती खाता के अंतर्गत दर्ज होगा। | विगत सर्वे के खतियान के समय से ही जो रैयत गैर मजरूआ मालिक /अनाबाद बिहार सरकार की भूमि पर आवासीय दखलकार के रूप में अवस्थित हैं उन्हें दखल के आधार पर स्वामित्व दिया जा सकेगा। |
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| खतियान में दखलकार दर्ज होने अथवा नहीं होने, दोनों मामले में क्रमशः उनके वंशज अथवा वर्तमान दखलकार क्रेता के दखल के आधार पर उनके नाम से खाता खोली जायेगी। रैयत द्वारा उक्त खेसरा की बिक्री कर दी गई है तब क्रेता के दखल के आधार पर उसके नाम से खाता खोला जाएगा। | |||
| कतिपय जिलों में वंशावली को लेकर रैयतों में भ्रम की स्थिति है। उनके द्वारा यह पृच्छा किया जा रहा है कि स्वंय एवं उनके फरीकैन के द्वारा स्व घोषित वंशावली दी जाय या दण्डाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र के रूप में वंशावली दिया जाय। | रैयत द्वारा स्वयं वंशावली समर्पित किया जाएगा। नोटरी पब्लिक / कार्यपालक द डाधिकारी के समक्ष ं किये गये शपथ-पत्र आवश्यक नहीं है। | बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त नियमावली में प्रावधानित नियम के अनुसार रैयतों ं को वंशावली स्वहस्ताक्षरित कर समर्पित की जानी है। अतः प्रस्तावित समाधान से रैयतों को अनावश्यक परेशानी से बचाव प्राप्त होगा। | |
| आपसी बॅटबारा- विशेष सर्वेक्षण के क्रम में यह बात प्रकाश में आई है कि स युक्त ं जमाबंदीदारों/ खतियानी रैयतों ं का पूर्व में मौखिक आपसी बॅटबारा हो चुका है तथा इसी आधार पर उनके द्वारा अपने अपने दखल कब्जा की भूमि का जोत आबाद किया जा रहा है। अतः मौखिक बॅटबारा को आपसी सहमति के आधार पर मान्यता देने का प्रश्न विचारणीय है । ै | (i) आपसी सहमति पर आधारित सभी पक्षों के द्वारा हस्ताक्षरित बंटवारा के आधार पर सभी पक्षों यानि हिस्सेदारो ं का खाता अलग-अलग खुलेगा। (ii) हिस्सेदारों की असहमति होने पर संयुक्त खाता खुलेगा। (iii) अगर बॅटवारा निबंधित हो अथवा सक्षम न्यायालय द्वारा बॅटवारा किया गया हो तो उसके आधार पर हिस्सेदारो ं का अलग-अलग खाता खोला जायेगा। | रैयतों द्वारा आपसी सहमति के आधार पर किए गए बॅटवारा के आधार पर किसी भी वंशानुगत भूमि पर उसके वर्तमान उत्तराधिकारियों के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। | |
| संयुक्त परिवार में अलग-अलग व्यक्ति के नाम से खतियान था परन्तु वर्तमान हिस्सा मौखिक बॅटबारा के अनुसार है। आपसी सहमति से जोत आबाद करने वाले रैयत या हिस्सेदार के नाम से सर्वेक्षण किया जा सकता है। | आपसी सहमति के आधार पर खानापुरी प्रक्रम में अलग-अलग खाता खोला जाएगा। | सहमति के आधार पर किए गए बॅटवारा स े वर्तमान दखलकारों के नाम पर अलग-अलग खेसरो के स्वामित्व ं की स्थिति स्पष्ट होगी। | |
| सी0एस0 खतियान में रैयती एवं आर0एस0 खतियान में अनाबाद बिहार सरकार होने के चलते सवे र्क्षण म समस्या- ं े दरभंगा समेत कई जिले में बहुत सारे मामले ऐसे पाये जा रहें है जिनमें सी0एस0 खतियान में भूमि रैयती है किन्तु आर0एस0 खतियान में अनाबाद बिहार सरकार एवं अनावाद सर्व साधारण खातें में दर्ज हो गई | (i) यदि कोई खेसरा कैडेस्ट्रल सवे र् म े ं रैयती है और रिविजनल सर्वे में अनाबाद बिहार सरकार या अनाबाद सर्व साधारण खाते में दर्ज हो गया है तथा उक्त खेसरे से संबंधित सिविल सूट में रैयत के पक्ष में निर्णय हुआ है तो खेसरा रैयती माना जाएगा। | विगत विधिमान्य प्रक्रिया के पश्चात् प्रकाशित खतियान की प्रविष्टियों में सक्षम प्राधिकार के स्तर से निर्गत निर्णय के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। |
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| है। बहुत सारे रैयतों द्वारा बी0टी0एक्ट की धारा 106 के अन्र्तगत उनके पक्ष में आदेश भी प्राप्त किया गया है। किन्तु इसके आधार पर खतियान का तरमीम या जमाबंदी कायम नहीं हुआ है। | (ii) बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा 106 के अंतर्गत रैयत के पक्ष में सक्षम प्राधिकार के द्वारा आदेश पारित है और जिला अभिलेखागार क े खतियान में तरमीम है या जिला अभिलेखागार कार्यालय से बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा 106 अंतर्गत किसी खेसरा की भूमि को रैयत खाते में दर्ज किये संबंधी सक्षम प्राधिकार के आदेश की संपुष्टि कर दी जाती है तब वह खेसरा रैयती माना जायेगा। (iii) धारा-106 में पारित आदेश के सत्यापन के पश्चात् ही रैयती माना जायेगा अन्यथा की स्थिति में अनावाद बिहार सरकार या सर्व साधारण खाते की भूमि माना जायेगा। | ||
| यदि रैयत द्वारा आपसी बंटबारा पंचनामा के आधार पर किया गया है एवं स्टॉप पेपर पर शिड्यूल तैयार कर सभी हिस्सेदार के हस्ताक्षर के साथ प्रस्तुत किया गया है तो वह मान्य होगा या नहीं एवं उस आधार पर शिड्यूल में प्रदर्शित प्रत्येक रैयत का खाता अलग खोला जाएगा अथवा नहीं ? | रैयत द्वारा प चनामा ं बॅटबारा प्रस्तुत किया जाता है और उक्त पंचनामा ब टवारा के ं शिड्यूल के अनुसार रैयतगण का जमीन पर शांतिपूर्ण दखल भी है एवं बंटबारा में सम्मिलित सभी पक्षकारों द्वारा पीठासीन पदाधिकारी क े समक्ष उपस्थित होकर लिखित सहमति दी जाती है तो शिड्यूल के अनुसार खेसरा पंजी में अलग- अलग खाता खोलकर हिस्से की भूमि दर्ज किया जायेगा। | कंडिका - 5 एवं 6 के अनुरूप | |
| यदि कोई व्यक्ति खतियानी रैयत या जमाबन्दी रैयत से निबंधित दस्तावेज /केवाला के माध्यम से जमीन क्रय कर दखलकार है परन्तु केवाला का दाखिल खारिज नहीं हुआ है तो खाता किसके नाम खुलेगा। | यदि क्रेता का भूमि पर शांतिपूर्ण दखल कब्जा है तो प्रस्तुत केवाला का निबंधन कार्यालय से सत्यापन कराने के पश्चात् क्रेता के नाम से खाता खोला जायेगा। | बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यक्रम अन्र्तगत निबन्धित केवाला के उपरान्त दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूर्ण किए जाने के पश्चात् स्वामित्व निर्धारण किए जाने की वाध्यता निर्धारित नहीं है। | |
| यदि खानापुरी के समय आपसी बॅटबारा एवं सभी हिस्सेदारों का हस्ताक्षरित शिड्यूल के अनुसार अलग -अलग खाता खुल जाता है और अगले प्रक्रम में कोई एक हिस्सेदार पूर्व में किये गये बॅटबारे पर असहमति देते हुए प्रपत्र-8 या प्रपत्र-14 में आपत्ति | विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त के किसी प्रक्रम में कोई एक हिस्सेदार पूर्व मे ं किये गये बॅटवारे पर असहमति देते है तो वापस सयुक्त खाता खोलेगा। | रैयतों की पैतृक भूमि के संबंध मे वर्तमान उत्तराधिकारियों ं के मध्य असहमति की स्थिति रहने पर एकल खाता के स्थान पर संयुक्त खाता खोलने की कार्रवाई से विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। |
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| दायर कर संयुक्त खाता खोलने का अनुरोध करता है तो इस स्थिति में पूर्व का आपसी बंटबारा का आदेश मान्य होगा या नहीं। | |||
| अधिकार अभिलेख निर्माण हेतु जमाबंदी एवं अद्यतन लगान रसीद का होना वाध्यकारी किये जाने से रैयतों को समस्या हो रही है। यदि रैयत के पास विक्रय पत्र जिसमे अधिकार, ं स्वत्व एवं हितबद्वता (Right, Title and Interest) समाहित हो एवं भूमि पर दखल कब्जा हो तो खाता दर्ज किया जाना चाहिए। | यदि भूमि खतियान में रैयती है एवं पंजीकृत बिक्रय विलेख से भूमि प्राप्त है तथा र ैयत के शांतिपूर्ण दखल मे है तो उसके आधार पर ं बिक्रय विलेख के अन्र्तगत खेसरा की भूमि की प्रविष्टि खेसरा पंजी मे की ं जायेगी। | रैयतों द्वारा विभिन्न कारणो से यदि जमाबंदी अथवा लगान रसीद को अद्यतन नहीं कराया जाता है तो इस परिस्थिति में नवनिर्मित खतियान में स्वामित्व की स्थिति प्रभावित नहीं होगी एवं भूमि के वर्तमान वास्तविक दखल के अनुरूप ही खतियान निर्मित होगा। | |
| R.S Final है, अंचल का कार्य R.S के आधार पर हो रहा है। निबंधन R.S के आधार पर हो रहा है। रैयत चाहते है कि सर्वे C.S के आधार पर हो। | यदि रिविजनल सर्वे प्रकाशित है, अंचल कार्यालय से राजस्व प्रशासन का कार्य रिविजनल सर्वे के आधार हो रहा है तब विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त रिविजनल सर्वे के आधार पर किया जायेगा। | विधि मान्य प्रक्रिया से प्रकाशित एवं वर्तमान में प्रचलित विगत सर्वे खतियान के अनुरूप विशेष सर्वेक्षण का कार्य नहीं करने की स्थिति प्रचलित राजस्व से संबंधित कार्यो में परस्पर विरोधाभास उत्पन्न होगा जो अनेक वैधानिक समस्याओं को उत्पन्न कर सकता है। | |
| R.S Final है, तथा चकबंदी फाइनल नहीं है। रैयत चकबंदी के आधार पर सर्वे की मांग कर रहे है। | रिविजनल सर्वे के आधार पर सवे र्क्षण होगा। | विधि मान्य प्रक्रिया से प्रकाशित एवं वर्तमान में प्रचलित विगत सवे र् खतियान के अनुरूप विशेष सवे र्क्षण का कार्य नहीं करने की स्थिति में प्रचलित राजस्व से संबंधित कार्यो में परस्पर विरोधाभास उत्पन्न होगा जो अनेक वैधानिक समस्याओं को उत्पन्न करेगा। | |
| सरकारी/खतियानी रैयती भूमि पर रैयत बन्दोबस्त भूमि प्राप्त कर बसे हुए है। बन्दोबस्तधारी/ पर्चाधारी के पास का कागजात नष्ट हो गया या गुम हो गया अथवा उसके घर में आगजनी से रिकार्ड नष्ट हो गया। ऐसे परिवारों ने अशिक्षा के अभाव में दोबारा कागजात नहीं हासिल किया क्योंकि जमीन उसके कब्जे में रही। ऐसे भी गांव-टोले से जानकारी आई है जहां के लोग सवे र् टीम को गांव मे प्रवेश पर ं पाबंदी लगाने को तैयार है क्योंकि वे नहीं चाहते कि सवे र् | अगर गैरमजरूआ भूमि की बन्दोबस्ती रैयतों के साथ सक्षम प्राधिकार के द्वारा की गई है तथा उस पर रैयतों का दखल कब्जा है एवं मकान है तब उक्त स्थिति मे ं अंचलाधिकारी, अंचल में संधारित विविध वाद पंजी, जमाबंदी पंजी, ऑपरे"ान दखलदेहानी प्रपत्र इत्यादि के आधार पर सत्यापन कर प्रतिवेदन देगे एवं उन रैयतों के नाम की ं प्रविष्टि भूमि की दखल के अनुसार खेसरा पंजी में की जायेगी। अगर आलोच्य ग्राम के संबंधित सभी रैयत भूमिहीन है तथा रैयती भूमि पर उनका मकान जाँच के बाद पाया जाता ह ै तो अंचलधिकारी | पूर्व में गैरमजरूआ प्रकृति की भूमि की बन्दोबस्ती के आलोक में रैयतों के पास विविध कारणो से अनुपलब्ध कागजातो के अभाव में अ चलस्तरीय ं अभिलेख के आधार पर खतियान का निर्माण करने से वैसे सभी भूमिहीन श्रेणी के रैयत लाभान्वित होगे जिनके कागजात विविध कारणों से नष्ट हो गए है। साथ ही वैसे स ुयोग्य श्र णी े भी लाभान्वित होगे जो रैयती भूमि पर दखल में है। उन्हें बी0पी0 पी0 एच0 टी0 एक्ट के तहत वासगीत पर्चा निर्गत करने से राज्य के भूमिहीन सुयोग्य श्रेणी |
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| की वजह से गांव में कोई फसाद हो या आपसी झगड़ा हो। | बी0पी0पी0एच0टी0 एक्ट के अन्र्तगत उसका वासगीत पर्चा निर्गत कर और दाखिल खारिज पश्चात् जमाबंदी सृजित कर शिविर प्रभारी को सूचित करेगें तदालोक उनके नाम एवं धारित भूमि की प्रविष्टि खेसरा पंजी में की जायेगी। | के लाभुक लाभान्वित होगे। | |
| वंशावली म ं े खतियानी रैयत/जमाबंदी रैयत क े पुत्री/बहन का नाम शामिल किये जाने के संबंध में रैयतों में भ्रम की स्थिति है। अनेक रैयतों द्वारा यह कहा जाता है कि उनके परिवार की महिलाओं को व ंशावली में उनके नाम शामिल नहीं होने पर कोई आपत्ति नहीं है। उपरोक्त स्थिति में वंशावली में पुत्री/बहन का नाम सम्मिलित नहीं किये जाने की स्थिति म ं े वंशावली को शिविर द्वारा मान्य किया जायेगा अथवा नहीं। | वंशावली मे सभी महिलाओं का ं नाम देना होगा। यदि महिला शपथ पत्र के माघ्यम से सम्पत्ति का परित्याग (RELINQUISH) करती है तब खानापुरी प्रक्रम में उसका नाम दर्ज नहीं होगा। यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा कोई बॅटवारा किया गया है तब उसके अनुरूप ही खानापुरी प्रक्रम में नाम दर्ज होगा। यदि वसीयतकर्त्ता स्वअर्जित सम्पत्ति का वसीयत केवल पुत्रों के पक्ष में किया है तो ऐसी स्थिति मे ं पुत्री/पुत्रियों के नाम से खाता नहीं खोला जाएगा। | नवनिर्मित खतियान में महिलाओं के नाम से सम्पति में स्वामित्व निर्धारण किए जाने की प्रक्रिया में केवल महिला द्वारा सम्पत्ति का परित्याग किए जाने अथवा पिता के स्वअर्जित भूमि में वसीयत में पुत्री का नाम दर्ज नहीं करने अथवा सक्षम न्यायालय से बॅटवारे में पुत्री/बहन का नाम नहीं रहने की स्थिति में महिलाओं को अपने पिता की सम्पत्ति में अपने अंश की प्राप्ति नहीं होगी, अन्य सभी दशाओ में प्रत्येक महिला को ं अपने पिता की सम्पति में नियमानुकूल अपने हिस्से की प्राप्ति होगी। | |
| गैरमजरूआ भूमि का अनिबंधित हुकुमनामा दिया गया है। जमींदारी लगान रसीद है परंतु जमीनदारी रिटर्न की कॉपी उपलब्ध नहींं है। लगान रसीद कट रही है। रैयत का दखल-कब्जा भी है। खाता किसके नाम से खुलेगा। | यदि भूतपूर्व मध्यवर्ती द्वारा सादा हुकुमनामा तथा रिटर्न में रैयत का नाम दिया गया है, हुकुमनामा 01.01.1946 के पूर्व का है और सरकारी लगान रसीद जमींदारी उन्मूलन के वर्ष से कट रही है तो यह भूमि रैयत/उनके उत्तराधिकारी की रैयती मानी जाएगी और उनके नाम से खाता खोला जाएगा। | गैरमजरूआ भूमि के हुकुमनामा क े आधार पर 01.01.46 के पूर्व से ही कट रही रसीद एवं दखल के आधार पर स्वामित्व निर्धारण किए जाने से वैसे रैयत लाभान्वित होगे जिनसे संबंधित जमींदारी रिटर्न उपलब्ध नहीं है। |
उपरोक्त सभी निर्देश उसी समय से लागू माने जायेंगे, जब से बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त नियमावली, 2012 लागू है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,