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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 25 December 2024

Published 25 December 2024

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2024-12-25.52
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 4 पौष 1946 (श0) सं(cid:201)या 52 पटना, बुधवार, ———————— 25 दिसम्बर 2024 (ई0) भाग-1— नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 02-22 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 23-23 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 24-25 पूरक

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पूरक-क

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2 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत

सूचनाएं। —————

सामान्य प्रशासन विभाग

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अधिसूचनाएं

1 नवम्बर 2024

सं0 1/पी0-1001/2024-सा0प्र0-17686--श्री नन्द किशोर, भा0व0से0 (2006), प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पटना अगले आदेश तक पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधीन गठित ईको पर्यटन संभाग के नोडल पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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2 नवम्बर 2024

सं0 1/पी0-1004/2024-सा0प्र0-17692--श्री रवि प्रकाश, भा0प्र0से0 (2016), संयुक्त सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित कर अगले आदेश तक समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, नवादा के पद पर पदस्थापित करते हुए उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (एक्ट-46, 2023) की धारा-14 के अधीन संबंधित जिला का जिला दण्डाधिकारी भी नियुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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4 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-21/2009-सा0प्र0-17772--श्री विनोद सिंह गुंजियाल, भा0प्र0से0(बी एचः2007), सचिव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर महानिदेशक, (बिपार्ड), पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना) को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-5, 10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 02-03 नवम्बर, 2024 के साप्ताहिक अवकाशों का पूर्व लग्न (प्री-फिक्स) के रूप में एवं दिनांक 16-17 नवम्बर, 2024 के साप्ताहिक अवकाशों का पश्च लग्न (सफिक्स) के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 04.11.2024 से 15.11.2024 तक कुल 12 (बारह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री गुंजियाल की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पदों/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री रजनीश कुमार सिंह, भा0प्र0से0(2014), निबंधन महानिरीक्षक-सह-उत्पाद आयुक्त, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना {अतिरिक्त प्रभार- अपर निदेशक (कार्यक्रम अनुश्रवण), बिहार विकास मिशन, पटना} रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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11 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1031/2024-सा0प्र0-18029--श्री प्रवीण कुमार, भा0प्र0से0 (2014), अपर सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-12,13 एवं 20 के अधीन दिनांक 29.07.2024 से 06.10.2024 तक कुल 70 (सत्तर) दिनों की चिकित्सा/रुपान्तरित छुट्टी (140 दिनों की अर्द्धवैतनिक छुट्टी के बदले) की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।3 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

14 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1014/2022-सा0प्र0-18169--श्रीमती अलंकृता पाण्डेय, भा.प्र.से. (बीएचः2016), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक-21.11.2024 से 04.12.2024 तक कुल 14 (चौदह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्रीमती पाण्डेय की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री धनन्जय कुमार, उप विकास आयुक्त, जहानाबाद रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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18 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1030/2024-सा0प्र0-18419--श्री उज्जवल कुमार सिंह, भा.प्र.से. (बी एचः2011), विशेष सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के तहत दिनांक 11.09.2024 से 26.09.2024 तक कुल 16 (सोलह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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18 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1004/2021-सा0प्र0-18427--श्री यतेन्द्र कुमार पाल, भा.प्र.से. (बीएचः2019), उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, सारण, छपरा को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक -15.11.2024 से 25.11.2024 तक कुल 11(ग्यारह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री पाल की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री मुकेश कुमार, अपर समाहर्त्ता, सारण, छपरा रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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26 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1036/2024-सा0प्र0-18947--श्री आकाश चौधरी, भा.प्र.से. (बीएचः2021), अनुमंडल पदाधिकारी, रोसड़ा, समस्तीपुर को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक-01.12.2024 से 25.12.2024 तक कुल 25(पच्चीस) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री चौधरी की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री अमित कुमार, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, रोसड़ा, समस्तीपुर रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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26 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1035/2024-सा0प्र0-18948--श्री संजय कुमार, भा.प्र.से. (बीएचः2013), अपर सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक-26.11.2024 से 10.12.2024 तक कुल 15 (पन्द्रह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री कुमार की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों हेतु प्रभार की व्यवस्था संबंधित विभाग (शिक्षा विभाग, बिहार, पटना) द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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26 नवम्बर 2024

सं0 1/अ0-1034/2024-सा0प्र0-18949--श्री सूर्य प्रताप सिंह, भा0प्र0से0 (बी एचः2021), अनुमंडल पदाधिकारी, डेहरी ऑन सोन, रोहतास को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं4 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 20 के तहत दिनांक 28.11.2024 से 18.12.2024 तक कुल 21(इक्कीस) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

साथ ही, आलोच्य छुट्टी अवधि (दिनांक 11.12.2024 से 17.12.2024) के दौरान वैयक्तिक व्यय पर इंडोनेशिया की निजी विदेश यात्रा हेतु एक्स-इंडिया लीव की अनुमति भी प्रदान की जाती है।

2. श्री सूर्य प्रताप सिंह की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में भूमि सुधार उप-समाहर्त्ता, डेहरी (रोहतास) रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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2 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0प्र0 - 1002/2023-सा0प्र0-19233--विभागीय पत्रांक-1/अ0प्र0-1002/2023-सा0प्र0- 19049 दिनांक 28.11.2024 द्वारा श्री मनेश कुमार मीणा, भा0प्र0से0(2015), समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, कटिहार को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी मंें दिनांक 02.12.2024 से 27.12.2024 तक प्रस्तावित अनिवार्य मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण चरण-III में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गयी है।

क्र.सं. प्रशिक्षण के लिए नामित पदाधिकारी एवं पदनाम जिनके लिए प्रभार की संदर्भित व्यवस्था की गयी है प्रशिक्षण से संबंधित अनुपस्थिति अवधि में स्तंभ-02 के पदों के प्रभार के संबंध में व्यवस्था
1 2 3
1 श्री मनेश कुमार मीणा, भा0प्र0से0 (2015), जिला पदाधिकारी, कटिहार। जिला के अपर समाहर्त्ता अथवा उप विकास आयुक्त (जो वरीय हों) प्रभार में रहेंगे। तत्संबंधी आदेश जिला पदाधिकारी, कटिहार द्वारा निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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2 दिसम्बर 2024

सं0 1/सी0-1015/2024-सा0प्र0-19271--श्रीमती प्रतीक्षा सिंह, परीक्ष्यमान भा0प्र0से0 (बी एचः 2023), सहायक समाहर्त्ता-सह-सहायक दण्डाधिकारी, बक्सर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली की अधिसूचना संख्या -13017/30/2024-AIS-I (S.II&III) दिनांक 21.11.2024 द्वारा बिहार संवर्ग से उत्तर प्रदेश संवर्ग में स्थानांतरित किए जाने के फलस्वरूप, वर्तमान धारित पद का प्रभार त्याग करने की तिथि से उन्हें उत्तर प्रदेश संवर्ग में योगदान देने हेतु विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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3 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-1002/2016-सा0प्र0-19376--श्री आनन्द शर्मा, भा0प्र0से0 (बी एचः2013), निदेशक, पंचायती राज, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य महाप्रबंधक, बिहार विकास मिशन, मंत्रिामंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना) को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-5, 10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 14-15 दिसम्बर, 2024 के साप्ताहिक अवकाशों का पश्च लग्न (सफिक्स) के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 06.12.2024 से 13.12.2024 तक कुल 8 (आठ) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री शर्मा की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों हेतु प्रभार की व्यवस्था संबंधित विभाग/कार्यालय द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-418/07-सा0प्र0-19533--श्री सरवणन एम., भा.प्र.से.(बी एचः 2002), आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 16.12.2024 से 24.12.2024 तक कुल 09 (नौ) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।5 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 2. श्री सरवणन एम. की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-1005/2015-सा0प्र0-19534--श्री चैतन्य प्रसाद, भा.प्र.से.(बी एचः 1990), मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को दिनांक 17.12.2024 के अपराह्‌न से मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के साथ अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 18.12.2024 से 01.01.2025 तक कुल 15 (पन्द्रह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-1007/2015-सा0प्र0-19535--श्री नवदीप शुक्ला, भा.प्र.से.(बी एचः 2013), निदेशक, पशुपालन, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 09.12.2024 से 20.12.2024 तक कुल 12 (बारह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री शुक्ला की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में श्री रजनी रमन श्रीवास्तव, अपर निदेशक (दुग्ध उत्पाद), पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/एल0-28/2001-सा0प्र0-19536--श्री संतोष कुमार मल्ल, भा0प्र0से0 (बी एचः97), प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/विशेष कार्य पदाधिकारी, स्थानिक आयुक्त का कार्यालय, बिहार भवन, नई दिल्ली) को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-05,10,11 एवं 20 के तहत दिनांक 07-08 दिसम्बर, 2024 के सार्वजनिक अवकाशों का पूर्व लग्न (प्रिफिक्स) एवं दिनांक 14 दिसम्बर, 2024 के सार्वजनिक अवकाश का पश्च लग्न (सफिक्स) के रूप में उपभोग की अनुमति के साथ दिनांक 09.12.2024 से 13.12.2024 तक कुल 05(पांच) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री मल्ल की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों हेतु प्रभार की व्यवस्था संबंधित विभागों/कार्यालयों द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-1021/2018-सा0प्र0-19537--श्री महेन्द्र कुमार, भा.प्र.से. (2011), प्रबंध निदेशक, साउथ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड, पटना (अतिरिक्त प्रभार-निदेशक, खेल, बिहार, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य जल विद्युत निगम, पटना/निदेशक, ब्रेडा/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पॉवर जेनेरेशन कम्पनी लिमिटेड, पटना/विशेष कार्य पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग) को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अधीन वैयक्तिक व्यय पर ऑस्ट्रेलिया की निजी विदेश यात्रा हेतु दिनांक 12.12.2024 से 25.12.2024 तक कुल 14 (चौदह) दिनों की उपार्जित छुट्टी का एक्स-इंडिया लीव के रुप मेंं उपभोग करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री कुमार की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पदों/दायित्वों का प्रभार संबंधित विभाग/कार्यालय द्वारा आंतरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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5 दिसम्बर 2024

सं0 1/अ0-1029/2013-सा0प्र0-19538--श्री दिनेश कुमार., भा.प्र.से.(बी एचः 2007), आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर (अतिरिक्त प्रभार-आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा) को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी)6 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के तहत दिनांक 17.12.2024 से 27.12.2024 तक कुल 11 (ग्यारह) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री कुमार की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि के लिए उनके द्वारा धारित पद/दायित्वों के अतिरिक्त प्रभार में संबंधित जिलों (भागलपुर एवं सहरसा) के जिला पदाधिकारी रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

4 सितम्बर 2024

सं॰ 1/स्था॰-13/2002 (खण्ड-II)-4300(s)--बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के आर्टिकल ऑफ एशोसिएशन में निहित प्रावधान के अनुसार श्री सुनील कुमार सिन्हा, अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के निदेशक मंडल में पदेन सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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10 सितम्बर 2024

सं॰ 1/याँ॰-प्रो॰-01/2023-4414(s)--एल॰पी॰ए॰ संख्या-1761/2010 राजीव कुमार व अन्य बिहार सरकार व अन्य में दिनांक 15.07.2016 को पारित आदेश के अनुपालन में विजय कुमार-1 एवं श्री अनिल कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता (यांत्रिक) सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) कार्यकारी प्रभार की प्रोन्नति हेतु वित्त विभाग की सहमति के उपरान्त मंत्रिपरिषद्‌ से छायापद की स्वीकृति प्राप्त किया गया एवं दिनांक 23.07.2024 को प्रोन्नति समिति द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में श्री विजय कुमार-1, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) एवं श्री अनिल कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) को दिनांक 25.02.2013 के भूतलक्षी प्रभाव से आर्थिक लाभ सहित कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) के पद पर प्रोन्नति दी जाती है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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12 सितम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-04 (पथ)-आरोप-70/2018-4471(s)--पथ प्रमंडल, मोतिहारी अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा पथ परियोजना के तहत्‌ धूतहा नदी पुल से गोबरी फुलवरिया घाट ललबकिया नदी तक (77.242 कि॰मी॰) पथ निर्माण एवं उन्नयन कार्य में संवेदक को "Irregular grant of mobilization advance" के संबंध में महालेखाकार (लेखा परीक्षा), बिहार द्वारा उठाये गये आपत्तियों की विभागीय समीक्षा के उपरान्त श्री मुनीश्रवा श्री, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक-4217(एस) अनु॰ दिनांक-23.08.2021 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139(सी) के तहत्‌ निम्न आरोप के लिये कारण पृच्छा की गयीः-

(i) पथ प्रमंडल, मोतिहारी अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा पथ परियोजना के तहत्‌ धूतहा नदी पुल से गोबरी फुलवरिया घाट के ललबकिया नदी तक (77.242 कि॰मी॰ तक) पथ निर्माण एवं उन्नयन कार्य में संवेदक JKM Infra Projects Limited, New Delhi को प्रथम Mobilization Advance (MA) रू॰ 10,85,99,000,00 की उपयोगिता सुनिश्चित कराये बिना श्री मुनीश्रवा द्वारा बिना काम कराये अक्टूबर-2013 में Measurement Book भरा गया। तद्‌ालोक में संवेदक को द्वितीय MA रू॰ 10,85,99,000,00 दिया गया, जिससे स्पष्ट है कि मुनीश्रवा द्वारा बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता के नियम-207 read with clause 10B (ii) of Standard Bigging Document का उल्लंघन किया गया है।

2. उक्त के संबंध में श्री मुनीश्रवा श्री द्वारा पत्रांक-10 दिनांक-30.08.2022 द्वारा अपना कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्य/तर्क अंकित किया गयाः-

(i) प्रथम Mobilization Advance की उपयोगिता सुनिश्चित करने के बाद ही द्वितीय Mobilization advance SBD की कंडिका-10B(ii) के अनुसार किया गया।7 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 (ii) भू-अर्जन न हो पाने के परिणामस्वरूप कार्य बन्द होने की स्थिति में संवेदक द्वारा लिया गया कुल Mobilization Advance कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी को D.D. बनाकर जमा कर दिया गया।

(iii) SBD के पृष्ठ-59 की कंडिका-10B(ii) के पाँचवे एवं छठे लाइन में स्पष्ट इंगित है कि "Such advance shall be in two or more instalment to be determined by the Engineer-in-Charge at his absolute discretion" अर्थात्‌ Mobilization Advance केवल Engineer-in-Charge (Executive Engineer) के इच्छा एवं संतुष्टि पर ही देय होगा। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा स्थल पर संतुष्ट होने के बाद ही पत्रांक-1467 दिनांक-03.10.2013 के द्वारा 2nd Installment of Mobilization का विपत्र उपस्थापित करने का आदेश उनको एवं कनीय अभियंता को स्थल पर ही दिया गया।

(iv) स्ंवेदक द्वारा किये गये भौतिक कार्यों का जैसे-जैसे विपत्र आ रहा था वैसे-वैसे विपत्र से मोबलाइजेशन अग्रिम की कटौती की जा रही थी। इस प्रकार स्पष्ट है कि 2nd Mobilization Advance देने में किसी प्रकार से लापरवाही एवं वित्तीय अनियमितता नहीं किया गया।

3. मामला तकनीकी प्रकृति का होने के आलोक में श्री मुनीश्रवा श्री के कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति का मंतव्य/अनुशंसा प्राप्त किया गया। समिति द्वारा मुख्य रूप से इस आधार पर श्री मुनीश्रवा के उत्तर को अस्वीकार करने की अनुशंसा की गयी कि उनके द्वारा 1st Mobilization Advance के Utilization से संबंधित अभिलेख, जिसे स्पष्टीकरण उत्तर के साथ संलग्न किया गया है, उसे Utilization का Proof नहीं माना जा सकता है।

4. विभागीय तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य/अनुशंसा की विभागीय समीक्षा के क्रम में पाया गया कि समिति द्वारा श्री मुनीश्रवा के उत्तर को तर्कसंगत ढं़ग से खण्डन किये बगैर ही अस्वीकार करने की अनुशंसा की गयी है। तद्‌ोपरान्त समिति के उक्त मंतव्य/अनुशंसा को निदेशक, TTRI से तर्कसंगत ढ़ंग से स्पष्ट करायी गयी। इस क्रम में निदेशक, TTRI द्वारा स्पष्ट किया गया कि-

(i) श्री मुनीश्रवा श्री द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर के साथ संवेदक से प्राप्त Mobilization Advance के 1st instalment के Utilization का विवरण एवं 2nd instalment के Release करने से संबंधित मांग पत्र संलग्न किया गया है। Mobilization Advance के 2nd instalment के 1st instalment के Utilization के उक्त विवरण में मदवार राशि अंकित है। किन्तु समर्पित अभिलेख में नये Equipment/Machinery/Plants के Purchase एवं Camp तथा Laboratory के Establishment से संबंधित Expenditure का Invoice संलग्न नहीं है।

(ii) स्पष्टीकरण उत्तर के साथ उक्त Purchase/Expenditure से संबंधित Invoice संलग्न नहीं रहने के कारण समर्पित अभिलेख को विभागीय तकनीकी समिति द्वारा उक्त Mobilization Advance के 1st Installment के Utilization का Proof नहीं माना गया है।

5. तद्‌ालोक में श्री मुनीश्रवा श्री द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा उत्तर एवं विभागीय तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य/अनुशंसा की समेकित रूप से विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री मुनीश्रवा के द्वारा 1st Mobilization Advance के Utilization के संबंध में संलग्न किये गये अभिलेख को Utilization का Proof नहीं माना जा सकता है। तद्‌नुसार श्री मुनीश्रवा श्री का कारण-पृच्छा उत्तर स्वकार योग्य नहीं पाया गया।

6. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री मुनीश्रवा श्री, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-10 दिनांक-30.08.2022 को अस्वीकृत करते हुए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139(सी) के तहत्‌ निम्न दंड अधिरोपित किया गया हैः-

(i) ''5% (पाँच प्रतिशत) पेंशन की 05 (पाँच) वर्षों तक कटौती''। 6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पुनम कुमारी, उप सचिव।

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18 सितम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-33/2019-4555(s)--श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ओन-सोन सम्प्रति निलंबित के उक्त पदस्थापन अवधि में अकबरपुर-यदुनाथपुर पथ के कि॰मी॰ 24.50 से 45. 60 (कुल 21.10 कि॰मी॰) में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के प्राक्कलन गठन में पायी गयी अनियमितता के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-9658 (एस) दिनांक 06.11.2019 द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित8 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 करते हुए संकल्प ज्ञापांक-9839 (एस) दिनांक 13.11.2019 के द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री प्रकाश के विरूद्ध गठित किये गये आरोप के बिन्दु निम्नवत्‌ है :- (i) पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन, के अन्तर्गत अकबरपुर-यदुनाथपुर पथ के कि॰मी॰ 24.50 से कि॰मी॰ 45.60 (कुल 21.10 कि॰मी॰) में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के प्राक्कलन गठन में अनियमितता बरती गयी।

(ii) निविदा निष्पादन के उपरांत मेसर्स बीरेन्द्र प्रसाद सिंह का परिवाद पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें शिकायत की गयी कि इस कार्य के लिए जो प्राक्कलन गठित किया गया, उसमें सरजमीन की आवश्यकता से अधिक मात्रा में सामग्री का प्रावधान कर दिया गया है, ताकि संवेदक एवं अभियंता के द्वारा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जा सके।

(iii) उक्त शिकायत पत्र के आलोक में आलोच्य पथ की जाँच उड़दस्ता प्रमंडल, संख्या-4 से करायी गयी, जिसके जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-192, दिनांक-11.08.2017 से निम्न त्रुटियाँ परिलक्षित होता हैः-

(a) कि॰मी॰ 33.00 से 45.60 के बीच existingनन बिटुमिनस लेयर 373.21mm पाया गया है, जबकि प्राक्कलन में 200mmदिखाया गया है।

(b) उक्त आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 33.0 से 45.6 हेतु प्राक्कलन में प्रावधानित Existing Crust के तुलना में स्थल पर उड़नदस्ता दल द्वारा Crust Thickness अधिक पाया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि Exaggerated प्राक्कलन का गठन किया गया है।

(c) तथ्यों से विदित होता है कि तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ओन-सोन ने बिना कार्यस्थल का भ्रमण किये हुए प्राक्कलन बनाया है।

उपर्युक्त पायी गयी त्रुटियाँ यह सिद्ध करता है कि आलोच्य कार्य के लिए गठित प्राक्कलन Exaggerated था, ताकि सरकारी राशि का गबन किया जा सके। इसके लिए श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन दोषी प्रतीत होते है। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-147 अनु॰, दिनाक 31.03.2023 के द्वारा एतद संबंधी जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री प्रकाश के विरूद्ध गठित सभी चार आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित होने संबंधी मंतव्य प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होकर इसकी प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्राक-3766 (एस) दिनांक 03.07.2023 के द्वारा श्री प्रकाश से लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रकाश ने पत्रांक-30 अनु॰, दिनांक 14.07.2023 के द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया। 3. श्री प्रकाश ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से अंकित किया है कि उड़नदस्ता जाँच दल के द्वारा निर्धारित पद्धति के अनुरूप तीन चैनेज पर तीन स्थान (Left, Right एवं Middle) में पथ कटिंग कर Thickness की जाँच नहीं की गयी है। उपर्युक्त के संबंध में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न Thickness Chart से स्पष्ट होता है कि आलोच्य पथ के जिन पथांशों के संबंध में आरोप लगाया गया था, उनमें से 02 कि॰मी॰ यथा-37वे एवं 42वें कि॰मी॰ का चयन कर निर्धारित पद्धति के अनुरूप तीन चैनेज पर तीन स्थान (Left, Right एवं Middle) में पथ की कटिंग कर Thickness की जाँच की गयी है। इस प्रकार श्री प्रकाश का यह कहा जाना कि पथ की जाँच निर्धारित पद्धति के अनुरूप नहीं की गयी है, तथ्यगत नहीं है। विभागीय तकनीकी समति द्वारा भी इस तथ्य को संपुष्ट किया गया है। 4. श्री प्रकाश के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में यह उल्लेख किया गया है कि पथ में पाये गये अवयवों की ग्रेडिंग एवं गुणवत्ता की जाँच नहीं की गयी, जबकि तथ्य यह है कि आरोप का बिन्दु अवयवों की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है, बल्कि प्राक्कलन बनाने में Existing crust की मुटाई को वास्तविकता से कम दर्शाये जाने से संबंधित है। अतः आरोपी का उक्त कथन तथ्यगत नहीं है। 5. उपर्युक्त के अतिरिक्त श्री प्रकाश ने अपने उत्तर में यह भी अंकित किया है कि उनके द्वारा विषयांकित उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन को मान्‌नीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है एवं उक्त वाद में I.A भी दायर किया गया है। इस संबंध में तथ्य यह है कि श्री प्रकाश के द्वारा मान्‌नीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-25450/2019 दायर किया गया था, जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि इनके द्वारा I.A भी दायर किया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त वाद को दिनांक 20.06.2023 को पारित न्यायादेश के तहत वादी के याचिका को Disposed of कर दिया गया है। इस न्यायादेश में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के संबंध में कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया गया है। अतः आरोपी द्वारा मान्‌नीय उच्च न्यायालय में वाद दायर किये जाने संबंधी संदर्भ दिये जाने का कोई औचित्य नहीं है। 6. मामले की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ओन-सोन सम्प्रति निलंबित के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-30 अनु॰, दिनांक 14.07. 2023 को अस्वीकृत करते हुए निम्नलिखित निर्णय लिये जाते है :-

9 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

(i) श्री प्रकाश के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (iv) के तहत इनको 02 (दो) वर्षो की अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड। (ii) इनको तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। इनके निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में अलग से नियमानुसार कारण-पृच्छा करके निर्णय लिया जायेगा। 7. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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25 सितम्बर 2024

क्र॰ सहायक अभियंता का नाम वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक जन्म तिथि / सेवा निवृत्ति की तिथि प्रथम योगदान की तिथि/ सेवा सम्पुष्टि की तिथि प्रथम सुनिश्चित/ रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन द्वितीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन अभ्युक्ति
द य तिथि एवं े वेतनमान द य तिथि एवं े वेतनमान द य तिथि एवं े वेतनमान
1 2 3 4 5 6 7 8 9
1. श्री ब्रज किशोर प्रसाद 74 AE 20-01-1960 31-01-2020 26-10-1996 11-08-2010 26-10-2008 PB-3+Grade Pay-6600/- - -
2. श्री रामचन्द्र भगत 941 (2000) 05-09-1942 30-09-2000 22-10-1974 कार्यपालक अभियंता मे ं प्रोन्नत। - 09-08-1999 14,300-400- 18,300/- -
3. श्री ईश्वरी प्रसाद सिंह 55 SE 04-01-1964 31-01-2024 25-07-1989 22-02-2008 25-07-2001 10,000-325- 15200/- - -

सं॰ प्र॰2/स्था॰-वृ॰उ॰-21-01/2020-4738(s)--राज्य कर्मियों को सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन का लाभ प्रदान करने संबंधी वित्त विभाग के अधिसूचना संख्या-3/एम॰-2-5-वे॰पु॰-28/99/4685 (वि॰)-2, दिनांक 25.03.2003 द्वारा अधिसूचित "बिहार राज्य कर्मचारी सेवाशर्त्त (सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना) नियमावली-2003" दिनांक 09.08.1999 के प्रभाव से प्रवृत किया गया। जिसके प्रावधान के अनुसार 12/24 वर्ष की लगातार संतोषप्रद सेवा पूर्व होने पर देा वित्तीय उन्नयन प्रोन्नति के पदसोपान में अनुमान्य है। वित्त विभाग के अधिसूचना संख्या-6068, दिनांक 16.06.2013 द्वारा सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन येाजना दिनांक 12.07.2010 तक प्रभावी किया गया। षष्टम्‌ केन्द्रीय वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में केन्द्रीय प्रावधान को अपनाते हुये वित्त विभाग के संकल्प संख्या-7566 दिनांक 14.07.2010 द्वारा राज्य के कर्मचारियों के लिए रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन, 2010 दिनांक 01.01.2009 से प्रभावी किया गया। इस योजना के प्रावधान के अनुसार तीन (क्रमशः 10, 20 और 30 वर्षों की सेवा पुरी करने पर) वित्तीय उन्नयन वेतन-बैंड/ग्रेड पे के सोपान में अनुमान्य है। सप्तम वेतन पुनरीक्षण के उपरान्त वित्त विभाग के पत्रांक-3ए-2-वे॰पु॰-08/2017-8928/वि॰, दिनांक 15.11.2017 के कंडिका-2 (ii) द्वारा यह प्रावधान किया गया है, कि वैसे राज्य सेवा के पदाधिकारी, जिनका मूल कोटिय वेतनमान PB- 2+4800/- अथवा PB-2+5400/- स्वीकृत रहा तथा उन्हें चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर in-situ उत्क्रमण के तहत PB-3+5400/- का वेतनमान अनुमान्य किया गया है, को दिनांक 01.01.2016 के प्रभाव के वेतन स्तर-9 में वेतन पुनरीक्षण किया जायेगा। चार वर्ष की सेवा पूरी होने तथा सेवा सम्पुष्टि के उपरान्त PB-3+5400/- में in-situ उत्क्रमण, जिसे पूर्व में एम॰ए॰सी॰पी॰ के तहत एक वित्तीय उन्नयन माना गया था, को अनदेखी की जायेगी तथा ऐसे पदाधिकारी को नियुक्ति की तिथि से 10 वर्ष अथवा दिनांक 01.01.2016, जो बाद मेें हो, से प्रथम एम॰ए॰सी॰पी॰ वेतन स्तर-11 के अनुमान्य होगा। 2. उपरोक्त प्रावधानों तथा इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत परिपत्रों के आलोक में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत बिहार अभियंत्रण सेवा संवर्ग-2 के अन्तर्गत सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर सीधे नियुक्त निम्नलिखित पदाधिकारियों को सम्यक विचारोपरान्त कालावधि के अनुसार उनके नाम के सामने कॉलम-6 में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान्‌ में प्रथम सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन/रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन, कॉलम-7 में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान्‌ में द्वितीय सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन/रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन एवं कॉलम-8 में अंकित तिथि से उक्त कॉलम में अंकित वेतनमान्‌ में तृतीय रूपान्तरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन स्वीकृत किया जाता हैः- क्र॰ सहायक अभियंता का नाम

10 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024
क्र॰ सहायक अभियंता का नाम वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक जन्म तिथि / सेवा निवृत्ति की तिथि प्रथम योगदान की तिथि/ सेवा सम्पुष्टि की तिथि प्रथम सुनिश्चित/ रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन द्वितीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन अभ्युक्ति
द य तिथि एवं े वेतनमान द य तिथि एवं े वेतनमान द य तिथि एवं े वेतनमान
1 2 3 4 5 6 7 8 9
4. श्री नलिन विलोचन 135 AE 13-10-1963 31-10-2023 01-05-1995 19-05-2009 01-05-2007 PB-3+Grade Pay-6600/- 01-05-2015 PB-3+ Grade Pay- 7600/- -

3. स्कीम के अधीन वित्तीय उन्नयन होने पर कर्मचारी का वेतन निर्धारण वित्त विभाग के संकल्प संख्या-630, दिनांक 21.01.2010 के कंडिका-12 में अथवा वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-3ए॰-2-वे॰पु॰-09/2016-3590, दिनांक 24.05.2017 की कंडिका-11 एवं वित्त विभाग के पत्रांक-3ए॰-2-वे॰पु॰-08/2017-8928/वि॰, दिनांक 15.11.2017 में निहित प्रावधान के अनुसार किया जायेगा।

4. यह वित्तीय उन्नयन, व्यक्तिगत होगा जिसका पारस्परिक वरीयता से कोई संबंध नहीं होगा। 5. यदि पूर्व में सामान ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति दी गयी हो तो उसे इस हद तक संशोधित समझा जाय। (उदाहरण के रूप में यदि किसी अभियंता को प्रथम ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति पूर्व में दी गयी है तथा इस अधिसूचना में भी प्रथम ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ स्वीकृत की गयी है तो इस अधिसूचना के हद तक उक्त ए॰सी॰पी॰/ एम॰ए॰सी॰पी॰ संशोधित समझी जायेगी)

6. उपर्युक्त किसी भी पदाधिकारी के संबंध में भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर उन्हें प्रदत्त वृत्ति उन्नयन योजना के लाभ से संबंधित ओदश को रद्द/संशोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हें भुगतान की गई राशि की वसूली उनसे कर ली जायेगी। प्रस्ताव पर विभागीय स्क्रींनिग समिति के अनुशंसा के उपरान्त सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुमित वत्स, अवर सचिव (प्र॰को)।

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27 सितम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-(एन0एच0) आरोप-13/2024 -4818(s)--श्री धर्मेन्द्र कुमार धर्मकान्त, तत्कालीन कनीय अभियंता (सहायक अभियंता के पद पर अधिसूचित), राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, प्रशाखा-02, पटना सम्प्रति निलंबित, अभियंता प्रमुख (मु॰) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के अन्तर्गत निरीक्षण भवन के कमरों का आरक्षण विहित प्रक्रिया के तहत्‌ नहीं कराये जाने, सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं कर्त्तव्यों का निर्वहन नियमानुसार नहीं किये जाने के आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-2830(एस) दिनांक 21.06.2024 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 (1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। 2. उक्त के संबंध में श्री धर्मकान्त के पत्रांक-शून्य दिनांक-01.08.2024 एवं अन्य द्वारा निलंबन से मुक्त किये जाने हेतु अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसपर विभागीय समीक्षा के उपरान्त सम्यक्‌ रूप से विचार कर निम्न निर्णय लिया गया हैः-

(i) इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। (ii) इनके निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निर्णय इनके विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्रवाई के फलाफल के उपरान्त नियमानुसार लिया जायेगा।

3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पूनम कुमारी, उप सचिव।

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27 सितम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-(एन0एच0) आरोप-13/2024 -4816(s)--श्री उमेश कुमार राय, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ कार्य अंचल, पटना सम्प्रति निलंबित, अभियंता प्रमुख (मु॰) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के अन्तर्गत निरीक्षण भवन के कमरों का आरक्षण विहित प्रक्रिया के तहत्‌ नहीं कराये जाने, सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं कर्त्तव्यों का निर्वहन नियमानुसार नहीं किये जाने के आरोप के लिए11 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 विभागीय अधिसूचना संख्या-2828(एस) दिनांक-21.06.2024 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 (1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। 2. उक्त के संबंध में श्री राय के पत्रांक-16 दिनांक-25.06.2024 एवं अन्य द्वारा निलंबन से मुक्त किये जाने हेतु अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसपर विभागीय समीक्षा के उपरान्त सम्यक्‌ रूप से विचार कर निम्न निर्णय लिया गया हैः- (i) इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। (ii) इनके निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निर्णय इनके विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्रवाई के फलाफल के उपरान्त नियमानुसार लिया जायेगा।

3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पूनम कुमारी, उप सचिव।

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30 सितम्बर 2024

सं॰ 1/स्था॰-13/2002 (खण्ड-II)-4849(s)--श्री सुनील कुमार सिन्हा, अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड में अंशधारी के रूप में मनोनीत किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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30 सितम्बर 2024

सं॰ 1/स्था॰-13/2002 (खण्ड-II))-4846(s)--श्री शीर्षत कपिल अशोक, भा॰प्र॰से॰, अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड में निदेशक एवं अंशधारी के रूप में मनोनीत किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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8 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा (एन॰एच॰) आरोप-11/2017-4963(s)--श्री शम्भु कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-80 के कि॰मी॰ 129 से 135 पथांश में चौड़ीकरण, मजबूतीकरण एवं सीमेंट क्रंकीट पेभमेंट के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के आरोप के लिए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2664 (एस) अनु॰ दिनांक-06.05.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत कुल-05 आरोप निम्नवत गठित किये गये हैं-

(i) कि0मी0 129 एवं 130 के बीच दो कि0मी0 की लंबाई में जल निकासी हेतु प्राक्कलन/एकरारनामा में प्रावधानित नाला का निर्माण एवं Extention of Culverts का कार्य नहीं कराया गया है।

(ii) प्राक्कलन/एकरारनामा में कि0मी0 129 एवं 130 के बीच आवश्यकतानुसार सड़क के दोनों ओर दो कि0मी0 की लंबाई में जल निकासी हेतु प्रावधानित Drain एवं Extention of Culverts का कार्य से संबंधित 11 मदों का कार्य संवेदक के द्वारा नहीं कराया गया है।

(iii) आलोच्य पथ में ईंट सोलिंग का कार्य कहीं पर पाया गया है और कहीं पर नहीं पाया गया है। (iv) पी0सी0सी0 के अधिकांश भाग के उपरी सतह का लेवल सड़क के दोनों ओर बने आवासीय भवनों/दुकानों के प्लिंथ लेवल से कहीं-कहीं सड़क के एक तरफ तो कहीं-कहीं दोनों तरफ औसतन एक फीट से दो फीट तक ऊँचा पाया गया। इस प्रकार, माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-4839/2010 में दिनांक-19.04.10 को पारित आदेश की अवहेलना की गयी।

(v) क्षेत्रीय पदाधिकारी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, बिहार, पटना को दिनांक-28.06.14 को 10th & final bill समर्पित किया गया, जबकि कार्य अपूर्ण था। इस तरह श्री कुमार के द्वारा इसका गलत विपत्र समर्पित किया गया।

2. सचिव-सह-जाँच आयुक्त, बिहार मानवाधिकार आयोग, बिहार, पटना के द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-19187 अनु॰, दिनांक- 24.12.2020 द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के तहत निष्कर्ष के रूप में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र-क के तहत गठित कुल 0512 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 (पाँच) आरोपों में से आरोप संख्या-(i), (ii), (iii) एवं (iv) को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-(v) को अप्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-2720 (एस) अनु॰, दिनांक 16.06.2021 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी।

3. श्री कुमार के पत्रांक-शून्य, दिनांक 29.06.2021 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। जिसमें श्री कुमार द्वारा मुख्य रूप से कार्य पूर्णता की तिथि 22.05.2014 से पूर्व दिनांक 29.08.2013 को स्थानान्तरण हो जाने के कारण निर्माण कार्य में भूमिका नहीं होने का तर्क दिया गया है। ईट सोलिंग का कार्य उनके स्थानान्तरण तिथि 29.08.2013 के बाद दिनांक 16.05.2014 एवं 19.05.2014 को कराया गया। इसी प्रकार पी0सी0सी0 का कार्य उनके स्थानान्तरण तिथि 29.08.2013 के बाद प्रतिस्थानी सहायक अभियंता श्री अजय कुमार पाण्डेय द्वारा कराया गया।

4.़ श्री कुमार के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा उक्त तथ्य जाँच आयुक्त के समक्ष भी रखा गया था, जिसकी समीक्षा करते हुए जाँच आयुक्त के द्वारा यह निष्कर्ष गठित किया गया कि इनका तथ्य तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। इनके पदस्थापन अवधि में ही गलत प्राक्कलन तैयार किया गया, जिसके आधार पर कालांतर में त्रुटिपूर्ण निर्माण कार्य हुआ। त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन तैयार करने के लिए आरोपित पदाधिकारी सहायक अभियंता के रूप में पूर्णतः जिम्मेवार थे। जाँच में यह भी स्पष्ट होता है कि इनके पदस्थापन अवधि में ही कार्य प्रारंभ हुआ तथा आंशिक कार्यान्वयन भी किया गया। इनका इस आशय का दावा कि-उनके पदस्थापन अवधि में मात्र बिटुमीनस रोड का आंशिक कार्य कराया गया तथा मात्र 03 चलता विपत्र जारी किये गये थे- वस्तुतः आरोपों की पुष्टि ही करते है। जाँच आयुक्त द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि-जाँचोपरांत ऐसा मानने का पर्याप्त आधार है कि प्राक्कलन में जान-बुझकर नाला का निर्माण एवं Extention of Culverts का कार्य शामिल किया गया था, जबकि उक्त हेतु Utility Shifting (विद्युत पोल, ट्रांसफर्मर आदि) का प्रावधान प्राक्कलन में नहीं किया गया था तथा कालान्तर में Utility Shifting में होने वाली कठिनाई को इंगित करते हुए कार्य नहीं करने का कारण बनाया गया, जो गलत मंशा का परिचायक है । त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन गठन के कारण ही अधिकाश्ां सड़क के दोनों तरफ बने आवासीय/दुकान के प्लीन्थ लेवल से एक-दो फीट ऊंचा हो गया, जो रिट याचिका सं॰-4839/2010 मेें माननीय उच्च न्यायालय, पटना के आदेश दिनांक 19.04.2010 की अवहेलना थी। 5. उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में आलोच्य मामले की सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार के लिखित अभिकथन के रूप में समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में प्रमाणित आरोप के मदों के संबंध में उनके द्वारा कोई ठोस तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। वर्णित स्थिति में द्वितीय कारण-पृच्छा स्वीकार किये जाने का कोई युक्तिसंगत कारण नहीं पाया गया। विभागीय समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1315 (एस) दिनांक 03.03.2023 द्वारा श्री शम्भु कुमार के विरूद्ध ''दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर अंसचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दंड संसूचित किया गया। 6. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री कुमार ने पत्रांक-शून्य, दिनांक 06.03.2023 द्वारा पुनर्विचार/अपील अभ्यावेदन समर्पित किया, जिसके तहत श्री कुमार के द्वारा आरोप संख्या-(v) के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए इस आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है, जबकि इस संबंध में तथ्य यह है कि आरोप संख्या-(v) इनके विरूद्ध न तो प्रमाणित किया गया है और न ही इसके लिए इनके विरूद्ध दण्ड ही अधिरोपित किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री कुमार के विरूद्ध आरोप संख्या-(i), (ii), (iii) एवं (iv) को प्रमाणित पाते हुए दण्ड अधिरोपित किया गया है। 7. श्री कुमार द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मूल प्राक्कलन में Utility Shifting का प्रावधान नहीं होने के कारण विभाग द्वारा दण्डात्मक कार्रवाई की गयी है, परन्तु CWJC No-17571/2014, जो इस विभागीय कार्यवाही से संबंधित है, में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 23.11.2020 को पारित आदेश में प्रथम द्रष्टया Utility Shifting का प्रावधान tender में नहीं किये जाने को कोई गलती नहीं माना है। उल्लेखनीय है कि श्री कुमार द्वारा उक्त बातें विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान जाँच आयुक्त के समक्ष भी कही गयी थी, जिसके संबंध में जाँच प्रतिवेदन में यह उल्लिखित है कि-''आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने अंतिम बचाव-बयान (दिनांक 16.12.2020) में रिट याचिका सं॰-17571/2014 में दिनांक 23.11.2020 को पारित आदेश के आधार पर इस आशय का दावा किया गया है कि प्राक्कलन में कोई त्रुटि नहीं थी। जबकि उक्त न्यायादेश के अवलोकनोपरांत यह स्पष्ट होता है कि उक्त न्यायादेश में ऐसा कोई बिन्दु अंकित नहीं है।''

8. इस प्रकार, श्री कुमार के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा के क्रम में पाया गया कि उनके द्वारा अपने समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में अपने पूर्व में समर्पित बचाव-बयान में अंकित तथ्यों को ही नये सिरे से अंकित किया है। इसमें कोई नया तथ्य/तर्क अथवा खण्डन युक्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। फलतः सम्यक विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री शम्भु कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय के पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य, दिनांंक 06.03.2023 को अस्वीकृत किया जाता है। 9. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।13 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

1 अक्तूबर 2024

सं॰ प्र0 2/12 विविध-84/10-4879(s)--श्री आलोक कुमार, तत्कालीन सहायक अािभयंता (असैनिक) वरीयता क्रमांक-1124/2018 सम्प्रति महाप्रबंधक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नई दिल्ली को वित्त विभाग के संकल्प ज्ञापांक-363 दिनांक 17.01.2009 एवं संकल्प ज्ञापांक-3623 दिरनांक 31.03.2010 के आलोक में दिनांक 01.01.2006 के प्रभाव से वेतनमान्‌ पे बैण्ड-3ग्रेड पे 5400/- में वेतन उत्क्रमित किया जाता है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुमित वत्स, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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1 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा-(एन॰एच॰)-आरोप-71/2020-4876(s)--श्री अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-80 में एकरारनामा संख्या-50F2 of 2016-17 से 59F2 of 2016-2017 के अन्तर्गत कराये गये कार्य से संबंधित संवेदक द्वारा समर्पित बिटुमेन एवं इमल्शन के चालानों का सत्यापन किये बिना ही मापी पुस्तिका में फर्जी चालानों की प्रविष्टि कर अंकित विपत्र के विरूद्ध आंशिक भुगतान करने संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी॰) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7209 (एस) अनु॰ दिनांक-30.12.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ निम्नवत आरोप गठित किये गये है :-

(i) राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के अन्तर्गत एन॰एच॰-80 के कि॰मी॰ 136 से कि॰मी॰ 158 में एकरारनामा संख्या-50F2 of 2016-17 से 59F2 of 2016-17 के अन्तर्गत आकस्मिक मरम्मति कार्य कराया गया। उक्त कराये गये आकस्मिक मरम्मति कार्य से संंबंधित कुल 10 (दस) अद्‌द F2 Agreements के तहत्‌ प्रत्येक एकरारनामा के विरूद्ध विपत्रों की कुल राशि रू॰ 78,05,154/- को मापी पुस्त में प्रविष्ट किया गया है, जिसमें समेकित रूप से रू॰ 3,00,000/- का भुगतान किया गया है।

(ii) कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, भागलपुर के पत्रांक-201 दिनांक-06.02.2018 द्वारा संवेदक श्रीमती नेहा सिंह द्वारा समर्पित 20 अदद्‌ बिटुमेन एवं इमल्शन के चालान को सत्यापित करने हेतु IOCL को भेजा गया। IOCL द्वारा संवेदक श्रीमती नेहा सिंह के द्वारा समर्पित चालान का सत्यापन कर दिनांक-27.03.2018 को कार्यपालक अभियंता को प्रतिवेदन दिया गया, जिसके अनुसार 20 चालान में से 19 चालान को अवैध पाया गया। मात्र एक चालान DOC No.- 694411743 Dt.- 22.02.2017 में VG-30 बिटुमेन की मात्रा 13.416 M.T. को वैध बताया गया। पुनः कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के पत्रांक-1228 अनु॰ दिनांक- 25.09.2019 द्वारा बिटुमेन एवं इमल्शन के क्रय से संबंधित श्रीमती नेहा सिंह को निर्गत आपूर्ति आदेश संख्या के विरूद्ध वास्तविक उठाव की सूचना उपलब्ध कराने हेतु IOCL/HPCL को पत्र लिखा गया। इस संदर्भ में IOCL के पत्रांक-शून्य दिनांक-14.10.2019 द्वारा कुल 18.720 MT (13.416 + 5.304) MT VG-30 बिटुमेन को सत्यापित किया गया। इस प्रकार IOCL के द्वारा कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर द्वारा निर्गत आपूर्ति आदेश संख्या क्रमशः 158 दिनांक-09.02.2017 के विरूद्ध 13.416 MT VG-30 एवं आपूर्ति आदेश संख्या-184 दिनांक-09.02.2017 के विरूद्ध 5.304 MT VG-30 बिटुमेन के उठाव को सत्यापित किया गया है।

IOCL के पत्रांक-शून्य दिनांक-14.10.2019 द्वारा कुल 18.720 MT (13.416 + 5.304) MT VG-30 को ही सत्यापित किया गया है, जो एकरारनामा संख्या-50F2 of 2016-17 एवं 55F2 of 2016-17 से संबंधित है। IOCL के द्वारा शेष एकरारनामाओं के अन्तर्गत आपूर्ति किये गये बिटुमेन एवं इमल्शन की आपूर्ति को सत्यापित नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि एन॰एच॰-80 में एकरारनामा संख्या-50F2 of 2016-17 से 59F2 of 2016-17 के अन्तर्गत संवेदक के द्वारा समर्पित बिटुमेन एवं इमल्शन के चालानों का सत्यापन किये बिना ही मापी पुस्तिका में फर्जी चालानों के आधार पर अंकित विपत्र के विरूद्ध आंशिक भुगतान कर दिया गया।

2. मुख्य अभियंता, उत्तर सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-163 अनु॰ दिनांक-23.01.2023 द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में समर्पित गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत इससे सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए श्री पाण्डेय से विभागीय पत्रांक-2932 (एस) अनु॰ दिनांक-29.05.2023 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी।

3. श्री अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-09.06.2023 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया, जिसमें मुख्य रूप से विभागीय पत्रांक-8320 दिनांक-21. 07.2011 का संदर्भ देते हुए उल्लेख किया गया कि चालान का सत्यापन एवं विपत्र का भुगतान संबंधी कार्य दायित्व उनसे संबंधित नहीं है, बल्कि कार्यपालक अभियंता से संबंधित है। साथ ही इनके द्वारा यह उल्लेख किया गया कि बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही तभी संचालित की जा सकती है, जब राज्य सरकार को आर्थिक14 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 हानि पहुँची हो तो राज्य सरकार उस सरकारी सेवक के पेंशन से उस हानि की पूरी या आंशिक क्षति की राशि वसूलनीय हो। इस प्रकार उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही नियम के प्रतिकूल होने का उल्लेख किया गया है। 4. श्री अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा जिन तथ्यों के आधार पर इनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया, उसका युक्तिसंगत खण्डन इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में नहीं किया जा सका है। संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में यह मंतव्य गठित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा पथ मरम्मति कार्य में बिटुमेन का प्रयोग करते समय चालान के सत्यपान के संदर्भ में प्रमण्डल कार्यालय से वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त कर लिया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा यह प्रक्रियात्मक चूक हुई है। 5. विभागीय पत्रांक-8320 दिनांक-21.07.2011 के अनुसार यद्यपि चालान की शुद्धता की जाँच करने का दायित्व कार्यपालक अभियंता की होती है तथापि चालान के सत्यापन के संबंध में प्रमण्डल कार्यालय से वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद ही इनके द्वारा विपत्र समर्पित किया जाना अपेक्षित था, जैसा की संचालन पदाधिकारी के द्वारा भी मंतव्य गठित किया गया है। यदि इनके द्वारा विपत्र समर्पित नहीं किया जाता तो विषयांकित मामले में संवेदक को आंशिक रूप से भुगतान नहीं हो पाती। इससे स्पष्ट है कि इनके स्तर पर प्रक्रियात्मक चूक हुई है। 6. श्री पाण्डेय के द्वारा जहाँ तक बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को नियम विरूद्ध बताये जाने का प्रश्न है तो इस संबंध में स्पष्ट करना है कि वित्त विभाग के शुद्धि पत्र ज्ञापांक-296, दिनांक-13.05.2020 के अनुसार सरकार को हुई वित्तीय क्षति मात्र के लिए ही नियम-43(बी) के तहत कार्रवाई नहीं किया जाता है, बल्कि गंभीर कदाचार के मामलों में भी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि गठित आरोप से ही स्पष्ट होता है कि विषयांकित मामले में संवेदक को आंशिक रूप से भुगतान की गयी है, इससे वित्तीय क्षति की भी पुष्टि होती है। 7. उपर्युक्त समीक्षा के आधार पर श्री अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। अतः इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वी—त करते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत इनके पेंशन से 05 (पाँच) प्रतिशत राशि की कटौती 02 (दो) वर्षों तक किये जाने संबंधी निर्णित दंड पर विभागीय पत्रांक-2932 (एस) दिनांक 29.05.2023 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-986/लो॰से॰आ॰, दिनांक 20.06.2024 के द्वारा उक्त निर्णित दण्ड पर सहमति व्यक्त की गयी। 8. उपर्युक्त के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली 1950 के विहित प्रावधान अन्तर्गत निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया जाता है :- (क) पेंशन से 02 वर्षो तक 05% की कटौती। 9. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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15 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा (एन॰एच॰) आरोप-23/2020-5018(s)--श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल, शेखपुरा के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 45.00 से 65.00 पथांश में (Job No.-101-BR- 2016-17-1547) कराये गये PR कार्य में बिटुमिन की जाँच कराये बगैर ही कार्य में उपयोग की अनुमति देने एवं कार्य से संबंधित प्रथम एवं द्वितीय विपत्र पारित कर भुगतान हेतु प्रस्तुत करने संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5512 (एस) अनु॰ दिनांक-16.11.2021 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ कुल 03 (तीन) आरोप निम्नवत गठित किये गये :-

(i) मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-532 अनु॰ सहपठित ज्ञापांक-532 दिनांक-23.02.2017 की कंडिका-10 से अंकित है कि कार्य से संबंधित सामग्रियों की आपूर्त्ति/कार्य की गुणवत्ता से संबंधित जाँच में किसी तरह के त्रुटि/त्रुटियों के लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता दोषी होंगे।

विभागीय निदेश के बावजूद सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा के रूप में श्री कुमार द्वारा संवेदक के समर्पित पेपर की जाँच किये बगैर संवेदक के प्रथम एवं द्वितीय विपत्र को पारित कर भुगतान हेतु प्रस्तुत किया गया। (ii) कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-896 दिनांक- 04.12.2017 एवं पत्रांक-812 दिनांक-28.11.2019 के परिप्रेक्ष्य में बिटुमिन चालानों का सत्यापन कराये जाने के क्रम में IOCL, Patna के पत्रांक-शून्य दिनांक-08.12.2017 एवं पत्रांक-शून्य दिनांक-29.11.2019 द्वारा बिटुमिन उठाव के संबंध में संवेदक के 31 चालानों में से15 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 सिर्फ 10 चालानों को ही सही पाया गया एवं शेष 21 चालानों को फर्जी पाया गया। इससे स्पष्ट है कि बिना बिटुमिन Procurement की जाँच कराये फर्जी चालानों पर किये गये बिटुमिन उठाव को कार्य में लाया गया।

(iii) Procured Bitumen की प्राप्ति के 07 दिनों के अन्दर I.S.-73 के अनुसार जाँच से संतुष्ट होने के उपरान्त ही बिटुमिन को व्यवहार में लाने का निर्देश है, जिसका अनुपालन श्री कुमार के द्वारा नहीं किया गया तथा Bituminous कार्य कराया गया।

2. मुख्य अभियंता, दक्षिण सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1221 अनु॰ दिनांक-28.05.2022 द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ निष्कर्ष के रूप में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' के तहत्‌ गठित कुल 03 (तीन) आरोपों में से आरोप संख्या-(i) एवं (iii) को आंशिक रूप से तथा आरोप संख्या-(ii) को पूर्ण रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-6268 (एस) अनु॰ दिनांक-22.12. 2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी। 3. श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-27.01..2023 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत्‌ मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किये गये :- (क) आरोप संख्या-01 एवं आरोप संख्या-02 बिटुमिन की चालान (पेपर) तथा बिटुमिन के Procurement के पेपर की जाँच से संबंधित है। वस्तुतः दोनों आरोप एक ही है। अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-314 (अनु॰) दिनांक-26.03.2018 के कंडिका-02 तथा कंडिका-07 में स्पष्ट किया है कि कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा द्वारा बिना Bitumen Paper की जाँच कराये संवेदक का प्रथम एवं द्वितीय का भुगतान कर दिया गया। किसी भी कार्य के लिए सिर्फ कार्यपालक अभियंता ही Engineer-in-Charge होते हैं। किसी कार्य को कराने या रोकने का अधिकार सिर्फ कार्यपालक अभियंता में निहित है। कार्य में पदस्थापित सहायक अभियंता के रूप में मेरा यह दायित्व था कि गुणवत्तापूर्ण एवं प्राक्कलन के अनुसार किए गए कार्य का कनीय अभियंता द्वारा प्रस्तुत विपत्र को जाँचोपरान्त अग्रतेर कार्रवाई हेतु कार्यपालक अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करना, जो मेरे द्वारा किया गया। ऐसा नहीं किए जाने की स्थिति में कार्य की प्रगति बाधित होती। कार्यहित तथा जनहित में समय-समय पर विभागीय समीक्षा बैठक में कार्य जल्द पूर्ण कराने का निदेश के अनुपालन में तथा पथ की जर्जर स्थिति को देखते हुए 05 महीने की कार्य अवधि में 20 कि॰मी॰ लम्बे पथांश का कार्य वर्षा ऋतु आरम्भ होने से पहले सम्पन्न कराया जाना आवश्यक था। साथ ही साथ प्रथम विपत्र प्रस्तुत करने के पूर्व मैंने बिटुमिन पेपर के सत्यापन के लिए कार्यपालक अभियंता से अनुरोध भी किया। सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता का कार्यक्षेत्र का एक Limitation है, जो प्रमण्डल से बाहर सीधे पत्राचार नहीं कर सकता, उन्हें कार्यपालक अभियंता के माध्यम से पत्राचार करना होता है। बिटुमिन चालान (पेपर) की सत्यता की जाँच की जिम्मेवारी प्रमण्डलीय कार्यालय तथा कार्यपालक अभियंता, एकाउन्टेंट बिल कलर्क, कैशियर आदि की होती है। जैसा कि सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-09/अल॰-05-03/03-8320(एस) अनु॰ दिनांक-21.07.2011 द्वारा पूर्व में ही कार्यपालक अभियंता को पेपर इत्यादि का जाँच कराने की जिम्मेवारी दी गयी थी। उनके द्वारा सहायक अभियंता के रूप में अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन कर्त्तव्यनिष्ठा से एवं ईमानदारी पूर्वक किया है। अतः संवेदक से मिली-भगत एवं गलत मानसिकता का तथाकथित आरोप आधारहीन है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-01 को आंशिक प्रमाणित तथा आरोप संख्या-02 को पूर्ण प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। यह उनके द्वारा अतिमहत्वाकांक्षा की पूरी नहीं होने के कारण किया गया है, क्योंकि जो कार्य सहायक अभियंता के रूप में मुझसे संबंधित ही नहीं है, उस कार्य के लिए मैं कहीं से दोषी नहीं हूँ। किसी कार्यालय में पदस्थापित होने से उस कार्यालय के सभी कर्मी किसी कार्य के लिए दोषी नहीं हो सकते। (ख) उनका मूल पदस्थापन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमण्डल संख्या-03 के रूप में था। इसके अलावे उन्हें सहायक अभियंता के कमी के कारण राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमण्डल संख्या-02 एवं गुण नियंत्रण अवर प्रमण्डल का प्रभार भी दिया गया था। विदित हो कि आलोच्य कार्य का प्रारम्भ बिन्दु प्रमण्डलीय कार्यालय से लगभग 50 कि॰मी॰ तथा कार्यस्थल की औसत दूरी 60 कि॰मी॰ था। कार्य प्रारम्भ करने की तिथि-16.01.2017 एवं कार्य समाप्ति की तिथि-15.06.2017 थी। इस प्रकार 20 कि॰मी॰ लम्बाई के पथांश में मात्र पाँच महीने के अन्दर कार्य को पूर्ण कराने का अत्यधिक दबाव था। उनके अलावे गुण नियंत्रण अवर प्रमण्डल, में कोई भी पदाधिकारी अथवा कर्मचारी पदस्थापित नहीं था (यथा सहायक शोध पदाधिकारी, शोध सहायक, लैब सहायक, लैब खलासी इत्यादि)। सामग्रियों को कार्य स्थल से प्रमण्डल कार्यालय स्थित प्रयोगशाला लाने के लिए अथक प्रयास के बावजूद कोई चार चक्का वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। विषम परिस्थितियों में बस, ऑटो एवं रिक्शा से निर्माण समाग्री लाकर जो जाँच संभव हो सका उनके द्वारा किया गया यथा Gradation test, AIV, Bitumen Content Test इत्यादि, Bitumen के Quality से संबंधित जाँच यथा Viscosity, Softening Point, Fire Point, Fire Flash Point, Penetration Test., Ductility जाँच कर्मियों एवं समुचित उपकरणों के अभाव में प्रमण्डलीय प्रयोगशाला में व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। कार्य शुरू करने से पहले बिटुमीन की Solubility Test (IS :73 के अन्तर्गत शुद्धता जाँच के लिए) किया गया था, जो सही पाया गया था। अधीक्षण16 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 अभियंता महोदय द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि उपर्युक्त वर्णित कार्य का दोबारा उड़नदस्ता द्वारा जाँच की गयी थी। उक्त के आलोक में कहना है कि दोनों बार बिटुमिनस कार्य के Sample का जाँच TTRI में किया गया। उनके द्वारा बिटुमीन गुणवत्ता के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी एकबार भी नहीं किया गया है। निर्गत DO के आधार पर बिटुमीन का उठाव राष्ट्रीय—त तेल कम्पनी IOCL द्वारा किया जाना था, जो स्वंय एक ISO Certified एवं भारत सरकार का नवरत्न कम्पनी है तथा उसके प्रत्येक उत्पाद समस्त गुणवत्ता मानकों के जाँच के उपरान्त ही निर्गत किये जाते है। ऐसी प्रस्थिति में प्रमण्डल में समुचित उपकरण तथ प्रशिक्षित कर्मी नहीं होने की वजह से उक्त जाँच नहीं किये गये। अतः यह व्यवस्थाजनित दोष है। इसमें वें कहीं से दोषी नहीं हैं। संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्वाग्रह से ग्रसित, जल्दीवाजी में एकपक्षीय कार्रवाई की गयी है। संचालन पदाधिकारी द्वारा सेवानिवृति की तिथि-31.05.2022 के बाद सारी प्रक्रिया पूरी की गयी थी तथा मुख्यालय में जाँच प्रतिवेदन दिनांक-17. 06.2022 को समर्पित किया गया। अधीक्षण अभियंता के पत्र में कहा गया कि IOCL द्वारा दिनांक-08.12.2017 को अलकतरा के पेपर के संबंध में प्रतिवेदित किया गया है। कार्यहित में यदि उक्त तिथि तक कार्य नहीं कराया गया होता तो पथ की स्थिति वर्षा मौसम में अत्यंत ही जर्जर हो जाती। इस प्रकार उपलब्ध अलकतरा के साथ कार्य को पूर्ण कराया गया। अलकतरा पेपर सत्यापन में त्रुटि के कारण संवेदक का लगभग 02 (दो) करोड रूपये का भुगतान रोक दिया गया, जो आजतक लम्बित है। इस प्रकार लगभग आधे खर्च में कार्य को पूर्ण करा लिया गया। अतः संवेदक से मिलीभगत एवं गलत मानसिकता का यदि जरा भी मंशा रहता तो संवेदक का पूर्ण भुगतान होता लेकिन जैसे ही पेपर सत्यापन में त्रुटि पायी गयी संवेदक का भुगतान रोक दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-03 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जो पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर लिखा गया है। यदि उनके प्रतिवेदन को मान भी लिया जाय तो पूरे कार्य में कुल-31 बार अलकतरा की आपूर्त्ति की गयी थी। उनके अनुसार किसी दूसरे संस्थान से अलकतरा की गुणवत्ता जाँच करायी जाती, जो उनके द्वारा प्रतिवेदित किया है। इस कार्य में सामान्यतः एक बार अलकतरा के सभी जाँच के लिए कम से कम दस दिन का समय अनिवार्य रूप से लगता। इस प्रकार कुल 310 दिन अलकतरा जाँच में ही समय व्यतीत होता, जबकि इस कार्य की कार्यावधि कुल-05 माह थी। अतः यह जाँच प्रतिवेदन कहीं से व्यवहारिक एवं न्यायोचित नहीं है। 4. श्री कुमार के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर एवं समर्पित साक्ष्य के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि आरोप संख्या-01 एवं 02 के संबंध में समेकित रूप से स्पष्टीकरण उत्तर दिया गया है। विदित हो कि आरोपी के विरूद्ध आरोप का मूल बिन्दु विभागीय निदेश के बावजूद संवेदक के समर्पित बिटुमीन पेपर की जाँच किये बगैर संवेदक को प्रथम एवं द्वितीय विपत्र के भुगतान हेतु प्रस्तुत किया गया। इन दोनों आरोपों के संबंध में आरोपी द्वारा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए उल्लेखित किया है कि इसके लिए कार्यपालक अभियंता ही जिम्मेवार है। इस संबंध में आरोपी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पूर्णतः तर्कहीन है, क्योंकि मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग के पत्रांक-532, दिनांक-23.़02.2017 की कंडिका-10 में दिये गये यह निदेश कि सामग्रियों की आपूर्त्ति/कार्य की गुणवत्ता से संबंधित जाँच में किसी तरह की त्रुटि/त्रुटियों के लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता दोषी होगें- का स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया गया है। उनके द्वारा प्रस्तुत इस तरह के तर्क एक जिम्मेवार सहायक अभियंता स्तर के सरकारी पदाधिकारी से अपेक्षित नहीं है। जबकि उनके पास कोई विपत्र प्रस्तुत किया गया तो पूर्णरूपेण जाँच कर उसकी वैधता एवं सत्यता से संतुष्ट होने के पश्चात ही उन्हें वरीय पदाधिकारी के समक्ष अग्रसारित किया जाना चाहिए। इनके द्वारा यह कहना कि सत्यापन हेतु अनुरोध करने का दायित्व इनका नहीं है, ग्राह्‌य नहीं है क्योंकि आरोपी पदाधिकारियों की पदीय जिम्मेवारी थी नियमानुसार विपत्र की सत्यता एवं वैधता की पूर्णरूपेण जाँचोपरान्त ही उपस्थापित/अग्रसारित किया जाना चाहिए था। अतः इस आरोप के संबंध में इनका उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। इन आरोपों के लिए श्री कुमार दोषी है। आरोप संख्या-03 यथा- Procured bitumen की प्राप्ति के 07 दिनों के अन्दर I.S.-73 के अनुसार जाँच से संतुष्ट होने के उपरान्त ही बिटुमीन को व्यवहार में लाने का निर्देश है, जिसका अनुपालन श्री कुमार के द्वारा नहीं किया गया तथा bituminous कार्य कराया गया- के संबंध में श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव-बयान के लगभग समरूप तथ्य ही प्रस्तुत किया गया है। इसलिए यह आरोप भी श्री कुमार के विरूद्ध प्रमाणित होता है। 5. उपर्युक्त के आलोक में समीक्षोपरान्त पाया गया है कि देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल, शेखपुरा के द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कोई नया तथ्य/तर्क अंकित नहीं किया गया, बल्कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखे गये बचाव-बयान के रूप में रखे तथ्यों की पूनरावृति है। अतः इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वी—त करते हुए सम्यक विचारोपरान्त उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(v) के तहत्‌ विभागीय अधिसूचना संख्या-6271(एस)-सहपठित ज्ञापांक-6272(एस) दिनांंक-17.10.2023 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (i) ''दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''।17 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 6. उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री कुमार के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन-शून्य दिनांक-30.10.2023 समर्पित किया गया। साथ ही उक्त अभ्यावेदन पर निर्णय लिये जाने के पूर्व ही श्री कुमार द्वारा संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध CWJC No.- 12678/2024 (देवकान्त कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) दायर कर दिया गया। दायर वाद में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-27.08.2024 को पारित आदेश में श्री कुमार के समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को 04 (चार) सप्ताह के अन्दर निर्णय लेने के निदेश के साथ मामले को Disposed of कर दिया गया। श्री कुमार के पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया है कि बिटुमीन पेपर के सत्यापन कराने की जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की होती है, जबकि वे सहायक अभियंता थे। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रमण्डल में उपलब्ध संसाधन के आधार पर उनके द्वारा प्राप्त अलकतरा की गुणवत्ता की जाँच की गयी है। ज्ञातव्य हो की श्री कुमार के द्वारा पूर्व में भी संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित बचाव-बयान में एवं विभाग को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में उक्त तथ्य के लगभग समरूप तथ्य ही अंकित किया गया था, जिसकी समुचित विभागीय समीक्षा के उपरान्त उनके विरूद्ध दण्ड अधिरोपण की कार्रवाई की गयी है। अतएव श्री कुमार द्वारा वर्त्तमान में समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में अंकित किये गये उक्त तथ्य एवं तर्क मान्य प्रतीत नहीं होता है। 7. इसके अतिरिक्त उक्त क्रम में ही श्री कुमार द्वारा एक अन्य अभ्यावेदन शून्य दिनांक-03.04.2024 समर्पित किया गया है। जिसके तहत मुख्य रूप से विषयांकित मामले में संवेदक द्वारा दायर CWJC No.-7782/2021 में पारित आदेश एवं इसके विरूद्ध विभाग द्वारा दायर LPA No.-108 में पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक-1196 दिनांक-01.03.2024 द्वारा संवेदक को आरोप मुक्त कर दिये जाने का संदर्भ देते हुए उन्हें भी आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। श्री कुमार का उक्त कथन एवं तर्क निम्न तथ्यों के आधार पर मान्य प्रतीत नहीं होता है :- (i) ज्ञात हो कि अभियंता के विरूद्ध Bihar CCA Rules-2005 में वर्णित प्रावधान के अनुरूप कार्रवाई की जाती है, जबकि संवेदक के विरूद्ध बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली के तहत्‌ कार्रवाई की जाती है। इस प्रकार अभियंता एवं संवेदक के विरूद्ध भिन्न-भिन्न नियमों के तहत्‌ कार्रवाई की जाती है। (ii) वर्णित CWJC No.-7782/2021 में पारित आदेश एवं इसके विरूद्ध विभाग द्वारा दायर LPA No.- 108/2022 में पारित आदेश के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मेरिट के आधार पर संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को Quashed नहीं किया गया है, बल्कि प्रक्रियात्मक चूक होने के परिस्थितिजन्य कारक के कारण संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा Quashed किया गया है। ऐसी स्थिति में श्री कुमार द्वारा दिये गये तर्क को स्वीकार किये जाने का युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। (iii) यह भी कि विभागीय आदेश संख्या-1196 दिनांक-01.03.2024 जिसके द्वारा संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को रद्‌द किया गया है, में स्पष्ट रूप से यह उल्लिखित है कि ''संवेदक द्वार फर्जी चालान जमा किया जाना एक आपराधिक —त्य है, जिसके विरूद्ध विधिवत प्राथमिकी दर्ज है'' इससे भी स्पष्ट होता कि संवेदक के विरूद्ध विषयांकित मामले को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं किया गया है। अतएव श्री कुमार का कथन विचारण योग्य प्रतीत नहीं होता है। 8. उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में वर्णित समीक्षा के आधार पर श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल, शेखपुरा के द्वारा विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध समर्पित अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक -शून्य दिनांक-30.10.2023 एवं अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-03.04.2024 को संतोषजनक नहीं पाये जाने की स्थिति में इसे अस्वी—त किया जाता है। 9. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पूनम कुमारी, उप सचिव।

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29 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (मुख्या॰)-20/15-5326(s)--श्री सतीश चन्द्र राय, तत्कालीन सहायक, प्रशाखा-07/08 सम्प्रति अवर सचिव, मुख्य अभियंता (दक्षिण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के प्रशाखा-07/08 के पदस्थापन अवधि में M/S आर॰के॰ कन्सट्रक्शन, एम॰जी॰ रोड, बाईपास चौक, औरंगाबाद के निबंधन सं॰ क्लास-II 266/09 पथ दिनांक-02.09.08 को कालीकरण की सूची में डालने हेतु पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन के ज्ञापांक-402 दिनांक-03.04.13 द्वारा की गई अनुशंसा पर कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए विभागीय कार्यालय आदेश सं0- 82- सहपठित ज्ञापांक- 2271 (ई0) दिनांक 07.04.2015 द्वारा तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय कार्यालय आदेश सं0-87- सहपठित ज्ञापांक 2404 (ई0) दिनांक 10.04.2015 द्वारा इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में कार्यालय आदेश संख्या-203-सहपठित ज्ञापांक-4735 (ई) दिनांक-31.07.15 द्वारा उन्हें निलंबन मुक्त करते हुए निर्णय लिया गया कि इनके निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में अलग से कारण-पृच्छा पूछकर निर्णय लिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि विभागीय कार्यालय आदेश सं॰-70-सहपठित ज्ञापांक-2967, दिनांक 02.05.2016 के द्वारा श्री राय के विरूद्ध अन्तिम रूप से ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित किया गया।18 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 2. उपर्युक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक-143 (एस) दिनांक 09.01.2024 के द्वारा श्री राय के निलंबन अवधि दिनांक 07.04.2015 से 30.07.2015 तक के विनियमन के लिए उनसे लिखित अभिकथन के रूप में कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री राय का पत्रांक-शून्य, दिनांक 10.01.2024 के द्वारा एतद संबंधी कारण-पृच्छा उत्तर प्राप्त हुआ, जिसमें मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के क्रम में समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में ही अपना पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। साथ ही इस मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप को साक्ष्यगत प्रमाणित नहीं किया गया है। 3. श्री राय के कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि उनके द्वारा समर्पित पूर्व के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के आलोक में ही उनके विरूद्ध दण्ड संसूचित किया गया था, इसलिए उनके द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को पुनः समीक्षा किये जाने का कोई औचित्य नहीं है। जहाँ तक श्री राय द्वारा यह कहा जाना कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को साक्ष्यगत प्रमाणित नहीं किया गया है, यह तथ्यगत प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी के रूप में श्री राय की स्वीकारोक्ति एवं आरोप को सिद्ध किये जाने वाले साक्ष्य के आधार पर आरोप को प्रमाणित होने का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है। इस प्रकार श्री राय के द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा उत्तर को स्वीकार करने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। 4. विषयांकित मामले में श्री राय के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप को प्रमाणित पाते हुए उनके विरूद्ध दण्ड अधिरोपित किया गया है, अतः विभाग द्वारा श्री राय को निलंबित किया जाना औचित्यपूर्ण प्रतीत होता है। तदनुसार श्री सतीश चन्द्र राय, तत्कालीन सहायक, प्रशाखा-07/08 सम्प्रति अवर सचिव, मुख्य अभियंता (दक्षिण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के निलंबन अवधि दिनांक 07.04.2015 से 30.07.2015 तक को निम्नरूपेण विनियमित किये जाने का निर्णय लिया जाता है :- ''श्री राय को निलंबन अवधि (दिनांक 07.04.2015 से 30.07.2015) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा, किन्तु उक्त अवधि को अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी। '' प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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29 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-03/2022 -5328(s)--श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-31.12.2021) के उक्त पदस्थापन काल में ''Kuil-kundar- dhanwi पथ के BC Gr-II में बिटुमेन की मात्रा विभागीय मार्गदर्शिका में निहित टॉलरेन्स लिमिट 4.52% से कम मात्र 3.995%-4.143% पाये जाने संबंधी मुख्य आरोप एवं इस हेतु विभाग द्वारा मांगे स्पष्टीकरण का उत्तर नहीं दिये जाने संबंधी आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4316 (एस) दिनांक 22.08.2022 के द्वारा उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-351 अनु॰, दिनांक 30.06.2023 के द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

2. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की विभागीय स्तर पर तकनीकी समीक्षा की गयी, जिसमें पाये गये अधिगम के अनुसार संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों के संबंध में गठित मंतव्य को स्वीकार योग्य पाया गया। तदनुसार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-31.12.2021) को आरोप मुक्त किया जाता है।

3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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29 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा-04 (पथ)-आरोप-84/2019-5318(s)--श्री रविन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर सम्प्रति एक अन्य मामले में निलंबित कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-2380(एस) अनु॰ दिनांक- 28.04.2023 द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ एवं लंगड़ी-पाकड़-अम्बारा पथ कार्य में पायी गयी निम्न त्रुटियों/अनियमितताओं के लिए स्पष्टीकरण पूछा गया :-

(i) हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ के एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि दिनांक-01.03.2020 थी, जो दिनांक-14.11.2019 को निरीक्षण की तिथि तक मात्र 33 प्रतिशत कार्य कराया हुआ पाया गया। पुनः दिनांक-09.01.2021 को उड़नदस्ता जाँच में भी उक्त कार्य लगभग 67 प्रतिशत ही पूर्ण किया हुआ पाया गया। इस मामले में कार्य की समानुपातिक धीमी प्रगति के संबंध में संवेदक के विरूद्ध नियमानुसार दंडात्मक19 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 कार्रवाई नहीं की गयी, जो कमजोर पर्यवेक्षण, लापरवाही एवं पदीय दायित्वों के निर्वहन में चूक को परिलक्षित करता है।

(ii) लंगड़ी-पाकड़ अम्बारा पथ के एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 16.05.2020 थी, जो दिनांक-14.11.2019 को निरीक्षण की तिथि तक 24.56 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण कराया गया। दिनांक-09.01. 2021 को उड़नदस्ता जाँच में लगभग 62 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया हुआ पाया गया, जो समानुपातिक रूप से असंतोषजनक पाया गया। इस मामले में कार्य की धीमी प्रगति के संबंध में संवेदक के विरूद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गयी, जो कमजोर पर्यवेक्षण, लापरवाही एवं पदीय दायित्वों के निर्वहन में चूक को परिलक्षित करता है।

2. उक्त के संबंध में श्री कुमार द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक-09.06.2023 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किये गयेः-

(i) विभाग द्वारा पूर्व में समरूप आरापों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3413 दिनांक-30.06.2022 के द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है, जो सम्प्रति प्रक्रियाधीन है। उक्त विभागीय संकल्प द्वारा वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर के अंतर्गत समरूप दोनों पथ (यथा-हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ एवं लंगड़ी-पाकड़-अंबारा पथ) कार्यों की प्रगति धीमी रहने के कारण विभागीय निविदा समिति द्वारा समय वृद्धि की स्वीकृति के दौरान 05% LD जब्त करने के दिये गये निदेश के बावजूद उनके द्वारा संवेदक को समय वृद्धि मद में काटी गयी राशि को वापस कर दिये जाने के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उनके द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि कार्य की प्रगति धीमी रहने के कारण ही संवेदक के विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई के रूप में उसके विपत्र से LD की कटौती की जाती है। इस प्रकार, पूर्व में संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही एवं प्रस्तुत मामले में की जा रही कार्रवाई दोनों समरूप पथों एवं समरूप आरोपों से संबंधित है।

(ii) श्री कुमार द्वारा अपने बचाव में यह भी तर्क दिया गया कि एक ही मामले में एक समान आरोपों के लिए पृथक-पृथक रूप से दो-दो बार कार्रवाई की जा रही है, जो "Double Jeopardy" के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। एक ही मामले में दोहरी कार्रवाई किया जाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-20(2) का उल्लंघन है, जिसके तहत्‌ उल्लिखित है कि- "No Person Shall be prosecuted and punished for the same offence more than once."

3. उल्लेखनीय है कि श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प संख्या-3413(एस) अनु॰ दिनांक-30.06.2022 के द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है, जिसमें उनके विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

(i) हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ SH-74 के संदर्भ में दिनांक-04.09.2020 को समय वृद्धि की स्वीकृति के दौरान विभागीय निविदा समिति द्वारा निर्णित 5% LD जब्त करने के निदेश के बावजूद श्री कुमार द्वारा समय वृद्धि मद में काटी गयी राशि को संवेदक को वापस किया गया।

(ii) लंंगड़ी-पाकड़-अंबारा पथ के संदर्भ में दिनांक-23.11.2020 को विभागीय निविदा समिति द्वारा समय वृद्धि की स्वीकृति के दौरान 5% LD जब्त करने के दिये गये निदेश को पुनः दिनांक-12.04.2021 को विभागीय निविदा समिति द्वारा यथावत रखने के निदेश के बावजूद श्री कुमार द्वारा संवेदक को समय वृद्धि मद में काटी गयी राशि को वापस किया गया। अतः श्री कुमार के द्वारा विभागीय निदेश के अवहेलना करते हुए अन्यथा मंशा से संवेदक को लाभ पहुँचाने का —त किया गया।

4. श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर एवं प्रासंगिक विभागीय कार्यवाही में गठित आरोपों की समेकित रूप से विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि विभागीय संकल्प संख्या-3413 (एस) दिनांक-30.06.2022 के द्वारा गठित आरोप एवं प्रस्तुत मामले में गठित आरोप भिन्न-भिन्न हैं। विभागीय संकल्प संख्या-3413 (एस) दिनांक-30.06.2022 के द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में स्पष्टतः समय वृद्धि स्वीकृति के दौरान विभागीय निविदा समिति द्वारा 5% LD की राशि के जब्त करने के निदेश का अवहेलना करते हुए संवेदक को समय वृद्धि में काटी गयी राशि वापस किये जाने के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जबकि प्रस्तुत मामले में गठित आरोप उनके पदीय दायित्व के निर्वहन में चूक एवं कमजोर पर्यवेक्षण से संबंधित है। अतः दोनों आरोप को समरूप नहीं माना जा सकता है। फलतः यह Double Jeopardy का मामला नहीं बनता है। तदनुसार विभागीय समीक्षा में श्री कुमार का स्पष्टीकरण उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। 5. अतएव उपर्युक्त परिपे्रक्ष्य में श्री रविन्द्र कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, वैशाली पथ प्रमंडल, हाजीपुर सम्प्रति एक अन्य मामले में निलंबित कार्यपालक अभियंता, मुख्यालय-अभियंता प्रमुख (मु॰) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का स्पष्टीकरण उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के आलोक में उनके स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक-09.06.2023 को अस्वी—त करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली, 2005 के नियम-14(v) के तहत्‌ निम्न दंड अधिरोपित किया जाता है :-

20 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

(i) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''। 6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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30 अक्तूबर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-03/2022--5396(s)--मो॰ आरिफ जमाल, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-31.08.2022) के उक्त पदस्थापन काल में ''Kuil-kundar-dhanwi पथ के BC Gr-II में बिटुमेन की मात्रा विभागीय मार्गदर्शिका में निहित टॉलरेन्स लिमिट 4.52% से कम मात्र 3.995%- 4.143% पाये जाने संबंधी मुख्य आरोप एवं इस हेतु विभाग द्वारा मांगे स्पष्टीकरण का उत्तर नहीं दिये जाने संबंधी आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4318 (एस) दिनांक 22.08.2022 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे दिनांक 31.08.2022 को उनके सेवानिवृति के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5811 (एस) दिनांक 25.11.2022 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-350 अनु॰, दिनांक 30.06.2023 के द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें मो॰ आरिफ जमाल के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

2. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की विभागीय स्तर पर तकनीकी समीक्षा की गयी, जिसमें पाये गये अधिगम के अनुसार संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों के संबंध में गठित मंतव्य को स्वीकार योग्य पाया गया। तदनुसार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए मो॰ आरिफ जमाल, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-31.08.2022) को आरोप मुक्त किया जाता है।

3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

-------- पत्र सं0-10/पी.3-10-03/2024 गृ0आ0--14918 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) --------

सेवा में,

महालेखाकार (ले0 एवं हक0), बिहार, पटना। द्वारा :- वित्त विभाग।

अनौपचारिक रूप से परामर्शित।

पटना, दिनांक 20 दिसम्बर 2024 विषय :- पटना शहरी क्षेत्र में अंतर्गत शहरी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण हेतु पुलिस उपाधीक्षक के 03 पद, पुलिस निरीक्षक के 03 पद, पुलिस अवर निरीक्षक के 09 पद, सहायक पुलिस अवर निरीक्षक के 18 एवं सिपाही के 120 पदों सहित कुल 153 पदों की स्वीकृति।

आदेश :- स्वीकृत।

पटना जिला का शहरीकरण बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य की राजधानी होने, शहरीकरण के तीव्र विस्तार Floating Population की बड़ी संख्या जैसे कारक पटना को बिहार के अन्य जिलों से अलग श्रेणी में ले आते है।

2. उक्त –ष्टिगत जिला प्रशासन तथा जिला पुलिस की संयुक्त टीम के द्वारा शहरी अव्यवस्था के मुख्य घटक यथा-अवैध vendors, अस्थायी अतिक्रमण, खटालों आदि को हटाने तथा बडे़ नालों पर अतिक्रमण एवं सफाई निरीक्षण में पटना नगर निगम को अपेक्षित प्रशासनिक सहयोग किया जाता रहा है।

3. उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी विभागीय कार्य, पर्व-त्योहार, प्रोटोकॉल, परीक्षा, राजनैतिक कार्यक्रम धरना-प्रदर्शन आदि के निमित्त विधि-व्यवस्था संधारण में भी व्यस्त रहते हैं, जिस कारण नगर निकायों के साथ शहरी-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर नहीं हो पाता है तथा अभियान में टूट का लाभ शहर में अव्यवस्था फैलाने वाले तत्त्वों को मिलता है। इसलिए ऐसी आवश्यकता है कि पटना नगर निगम/स्थानीय नगर परिषद्‌, जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन की एकी—त टीम हो, जो आपसी समन्वय से एक उद्देश्य से शहरी-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रख सके ।

4. उक्त संदर्भ में पटना शहरी क्षेत्र के भौगोलिक विस्तार एवं जनसंख्या प्रसार को देखते हुए शहरी प्रशासनिक कार्यक्षेत्र के अनुरूप पटना को तीन प्रक्षेत्र (Zone) (पटना मध्य, पटना पूर्वी तथा पटना पश्चिमी) में बाँटने संबंधी जिलाधिकारी, पटना का प्रस्ताव निम्नवत प्राप्त है :-

21 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

(1) पटना मध्य : पटना नगर निगम के बाँकीपुर, नूतन राजधानी तथा पाटलीपुत्र अंचल (2) पटना पूर्वी : पटना नगर निगम के कंकड़वाग, अजीमाबाद तथा पटना सिटी अंचल (3) पटना पश्चिमी : दानापुर, फुलवारीशरीफ तथा खगौल नगर परिषद्‌।

5. अतएव पटना शहरी क्षेत्र के अंतर्गत शहरी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न पदों के पुलिस

क्र0 पुलिस प्रतिष्ठानाें का कार्य क्षेत्र का नाम नवसृजन पद हेतु पुलिस उपाधीक्षक, विधि-व्यवस्था की संख्या नवसृजन पद हेतु पुलिस निरीक्षकों की संख्या नवसृजन पद हेतु पुलिस अवर निरीक्षकों की संख्या नवसृजन पद हेतु सहायक पुलिस अवर निरीक्षकों की संख्या नवसृजन पद हेतु सिपाहियों की संख्या
1 2 3 4 5 6 7
01 नगर पुलिस अधीक्षक, पूर्वी पटना 01 01 03 06 40
02 नगर पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी, पटना 01 01 03 06 40
03 नगर पुलिस अधीक्षक, मध्य, पटना 01 01 03 06 40
कुल 03 03 09 18 120

7. उपर्युक्त पर मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति एवं वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दु भूषण सिंह, अवर सचिव।

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सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग

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अधिसूचनाएं

19 दिसम्बर 2024

सं0 संधा(02)13-01/2024-976/सू0ज0स0वि0--सरकार के कल्याणकारी योजनाओं, गतिविधियों, नीतियों, कार्याें एवं उपलब्धियों को जनमानस तक पहुंचाने एवं आम जनता से संवाद स्थापित करने हेतु वैकल्पिक व्यवस्था के अंतगर्त जन-सम्पर्क एजेंसी (P.R Agency) के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराना एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

1. जन-सम्पर्क (PR) एजेंसी के माध्यम से सरकारी योजनाओं को जन-जन के बीच व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रसारित किये जाने का लक्ष्य है, इसमें एजेंसी के द्वारा सभी आधुनिक तकनीक एवं संचार माध्यमों का भी उपयोग किया जायेगा। योजना की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए इसमें मात्र वित्तीय आधार पर न्यूनतम दर के सिद्धांत के अनुसार एजेंसी चयन करने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अतः इस मामले में Quality & Cost Based Selection (QCBS) की पद्धति अपनाया गया है। इस पद्धति के तहत 70 प्रतिशत तकनीकी अधिमानता तथा 30 प्रतिशत वित्तीय अधिमानता रखी गयी है ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

2. उपर्युक्त कंडिका के आलोक में राज्य योजना अंतर्गत क्षेत्रीय प्रचार योजना हेतु उपलब्ध निधि से सरकारी योजनाओं के जन-जन के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु आउट सोर्सिंग के माध्यम से QCBS (Quality & Cost Based Selection) प्रणाली के तहत जन-सम्पर्क (PR) एजेंसी का चयन करने की स्वीकृति मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनुपम कुमार, सचिव।

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19 दिसम्बर 2024

सं0 विज्ञा0(4)01-02/2020 पार्ट-1-247/सू0ज0स0वि0--सरकार के कल्याणकारी योजनाओं, गतिविधियों, नीतियों, कार्याें एवं उपलब्धियों को जनमानस तक पहुंचाने एवं आम जनता से संवाद स्थापित करने हेतु वैकल्पिक व्यवस्था के अंतगर्त सोशल मीडिया एजेंसी के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराना एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

1. सोशल मीडिया एजेंसी के माध्यम से सरकारी योजनाओं को जन-जन के बीच व्यापक रूप से प्रचारित एवं प्रसारित किये जाने का लक्ष्य है, इसमें एजेंसी के द्वारा सभी आधुनिक तकनीक एवं संचार माध्यमों का भी उपयोग किया22 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024 जायेगा। योजना की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए इसमें मात्र वित्तीय आधार पर न्यूनतम दर के सिद्धांत के अनुसार एजेंसी चयन करने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अतः इस मामले में Quality & Cost Based Selection (QCBS) की पद्धति अपनाया गया है। इस पद्धति के तहत 70 प्रतिशत तकनीकी अधिमानता तथा 30 प्रतिशत वित्तीय अधिमानता रखी गयी है ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

2. उपर्युक्त कंडिका के आलोक में राज्य योजना अंतर्गत क्षेत्रीय प्रचार योजना हेतु उपलब्ध निधि से सरकारी योजनाओं के जन-जन के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु आउट सोर्सिंग के माध्यम से QCBS (Quality & Cost Based Selection) प्रणाली के तहत सोशल मीडिया एजेंसी का चयन करने की स्वीकृति मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनुपम कुमार, सचिव।

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

28 नवम्बर 2024

सं0 6/वि0पत्रा0-24-08/2018-5192/वा0कर0--श्री नन्द किशोर सिंह, सेवानिवृत राज्य-कर अपर आयुक्त (अपने वेतनमान में) को पदभार ग्रहण करने की तिथि से सदस्य (लेखा), वाणिज्य-कर न्यायाधिकरण, बिहार, पटना के पद पर नियुक्त किया जाता है। यह नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन वर्षाें के लिए या अधिकतम 65 वर्ष की आयु, दोनों में जो पहले हो, तक के लिए होगी।

2. सामान्य प्रशासन विभाग का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 की कंडिका-3(6)(i) के अनुसार श्री सिंह के वेतन का निर्धारण किया जायेगा।

3. सरकारी कार्यवश यात्रा किए जाने की स्थिति में यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ता उस दर से अनुमान्य होगा जो उनके धारित पद के लिए नियमित सरकारी सेवक को अनुमान्य है।

4. सामान्य प्रशासन विभाग का संकल्प संख्या-10000 दिनांक 10.07.2015 की कंडिका-5 के अनुसार श्री सिंह को आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त क्षतिपूर्ति अवकाश भी अनुमान्य होगा। 5. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ज्योति प्रकाश, अवर सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 40—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

23 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

भाग-2

बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और

नियम आदि।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचना

शुद्धि-पत्र

22 अक्तूबर 2024

सं0 प्र0 2/स्था0-ए0-10 विविध-101/2005-5154(s)--विभागीय अधिसूचना संख्या-2873(एस)-सह-पठित ज्ञापांक- 2874(एस) दिनांक 25.06.2024 के क्रमांक-69 पर कॉलम-4 में अंकित -''सहायक अभियंता, प्रा0पदा0, रा0उ0प0 अवर प्रमंडल, औरंगाबाद'' के स्थान पर ''सहायक अभियंता, प्राक्कलन पदाधिकारी, रा0उ0प0 प्रमंडल, औरंगाबाद'' पढ़ा जाय। शेष सभी यथावत समझा जाय ।

आदेश से, कृष्णचन्द्र्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 40—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

24 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द ।

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No. 1188--I, Pammi Kumari W/o Ajay Kumar R/o Vill.-Rastriyaganj, Shiv Mandir Railway Gumti Phulwarisharif Patna, Bihar-801505 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 405 dt. 30.11.24 that my name is written in my son Ayush Anand's CBSE class 10th all educational documents as Pammi Sharma which is wrong. As per Aadhar Card my correct name is Pammi Kumari, Pammi Kumari and Pammi Sharma both are same and one person. From now I shall be known as Pammi Kumari for all purposes.

Pammi Kumari.

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सं0 1189&&मैं पूनम लक्ष्मी देवराय, पिता स्व० रविंद्र देवराय, पति श्री सुनील कुमार देवनाथ साकिन-परसौनी कॉलोनी, थाना चौतरवा, जिला प. चम्पारण, बिहार, कार्यपालक दण्डाधिकारी, बेतिया के शपथ पत्र सं. 21602 दिनांक 04.10. 2024 द्वारा घोषणा करती हूं कि मेरे शैक्षणिक प्रमाण पत्रो में मेरा नाम पूनम लक्ष्मी देवराय दर्ज है। विवाह के पाश्चात्‌ मेरा नाम पूनम लक्ष्मी देवनाथ हो गया है। भविष्य में मैं पूनम लक्ष्मी देवनाथ के नाम से जानी व पहचानी जाऊंगी। पूनम लक्ष्मी देवराय।

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सं0 1190&&म(cid:583) अमृतेश (cid:466)पता द(cid:547)पक कु मार, िनवासी- सी 101, द ल(cid:234)मी हे(cid:464)रटेज, आनंदपुर(cid:547) (cid:465)हमिगर(cid:547) अपाट(cid:91)म(cid:581)ट के पास वे(cid:232)ट बो(cid:464)रंग कै नाल रोड, पो.-जीपीओ, थाना- (cid:302)ीकृ (cid:231)णापुर(cid:547), (cid:468)जला-पटना, (cid:466)बहार- 800001 शपथ प(cid:287) से 10 (cid:465)दनांक 28.10.24 ं (cid:465)क मेरे आधार काड(cid:91) सं. 304214992254 म(cid:581) मेरा नाम अमृतेश दज(cid:91) है। अब म(cid:583) भ(cid:466)व(cid:231)य म(cid:581) सभी काय(cid:607) हेतु (cid:430)ारा सूिचत करता हू

अमृतेश अमृत (Amritesh Amrit) के नाम से जाना व पहचाना जाऊं गा।

अमृतेश।

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सं0 1191&&म(cid:583) अिमषा (cid:466)पता द(cid:547)पक कु मार िनवासी-101 द ल(cid:234)मी हे(cid:464)रटेज, आनंदेपुर(cid:547) (cid:465)हमिगर(cid:547) अपाट(cid:91)म(cid:581)ट के पास वे(cid:232)ट बो(cid:464)रंग कै नाल रोड, पो.-जीपीओ, थाना- (cid:302)ीकृ (cid:231)णापुर(cid:547), (cid:468)जला-पटना, (cid:466)बहार- 800001 शपथ प(cid:287) सं. 09 (cid:465)दनांक 28.10.24 (cid:430)ारा ं (cid:465)क मेरे आधार काड(cid:91) सं. 609681009715 म(cid:581) मेरा नाम अिमषा है। अब म(cid:583) भ(cid:466)व(cid:231)य म(cid:581) सभी काय(cid:607) हेतु अिमषा (cid:302)ेया सूिचत करती हू

(Amisha Shreya) के नाम से जानी व पहचानी जाऊं गी।

अिमषा।

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सं0 1195--मैं शिवांग पिता श्री पंकज कुमार सिन्हा, निवास-सुभाष नगर, नजदीक कांग्रेस ऑफिस, थाना-सहायक के. हाट, जिला-पूर्णियां का स्थाई निवासी हूं। आधार नं0-243838483129 है, मैं शपथपत्र सं0 10156/2024 दिनांक 09.11.2024 के अनुसार अब मैं शिवांग के बदले शिवांग सिन्हा के नाम से जाना-पहचाना जाऊंगा।

शिवांग। No. 1195---I, SHIVANG, S/O-Pankaj Kumar Sinha, Resident-Subhash Nagar, Near Congress Office, P.S.-Sahayak K. Hat, District-Purnia. My Aadhar number is 2438 3848 3129. I state through affidavit number-10156/2024 dated 09/11/24 that from now onwards I will be known and recognized by the name of Shivang Sinha.

SHIVANG.

25 (cid:464)बहार गजट, 25 दिसम्बर 2024

No. 1196---I, Asad Hasan, S/o Late Mohammad Syed Imam R/o Manzar Manzil Dargah Road Katra Mandai, P.O.-Mahendru P.S.-Sultanganj, Distt.-Patna- 800006 (Bihar) do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-01 dated 05.09.24 that From now I will be known as Asad Imam for all purposes.

Asad Hasan.

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No. 1197---I SHWEETA Kumari, (श्वेता कुमारी) W/o Rajesh Kumar R/o 101, Surya Surojit Villa, Behind L.I.C Building, Jeevan Jyoti, Exhibition Road, Patna-800001, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as follows :-

1. That I have changed my name from Shweeta kumari to Sweta Kumari 2. That both the names are the name of same person/one person. 3. That now my name will be known and called as SWETA KUMARI (श्वेता कुमारी) vide affidavit no. 75 dated 29.11.2024.

SHWEETA Kumari, (श्वेता कुमारी).

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No. 1198---I, Vijoy Saurrav S/o Mahendra Prasad Choudhary C/o Mahendra Prasad Choudhary, 1st floor, sarda sadan, opp tapashya complex, Basant vihar colony, Patna GPO, P.O. Patna, dist. Patna, bihar- 800001. Do solemnly affirm and declare vide affidavit no. 16 dated 05.12.2024 that my name is mentioned in my aadhar card and pan card as Vijoy Saurrav and in matriculation certificate as Vijoy Kumar. That Vijoy Kumar and Vijoy Saurrav are the names of one and same person.That I shall only be known as Vijoy Saurrav for all purposes.

Vijoy Saurrav.

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 40—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 25 December 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2024-12-25.52/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2024-12-25.52.