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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 January 2025

Published 01 January 2025

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2025-01-01.1
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 11 पौष 1946 (श0) सं(cid:201)या 01 पटना, बुधवार, ———————— 1 जनवरी 2025 (ई0) भाग-1— नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 02-26 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 27-27 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 28-161 पूरक

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पूरक-क

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(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 2

भाग-1 िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं। —————

श्रम संसाधन विभाग

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अधिसूचनाएं

20 दिसम्बर 2024

एस॰ओ॰ 01 दिनांक 1 जनवरी 2025--कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 66 की उपधारा (1)(b) के परन्तुक के प्रयोजनार्थ श्रम संसाधन विभाग को राज्य सरकार के रूप में प्राधिकृत किया जाता है।

(स्ां0सं0 1/एफ1-117/2016, श्र0सं0--15) बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपक आनन्द, सचिव।

20 दिसम्बर 2024

एस॰ओ॰ 02, एस॰ओ॰ 01 दिनांक 1 जनवरी 2025 का अँग्रेजी भाषा में निम्नलिखित अनुवाद बिहार-राज्यपाल के प्राधिकार से इसके द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड(3) के अधीन अँग्रेजी भाषा में उसका प्राधि—त पाठ समझा जायेगा।

(स्ां0सं0 1/एफ1-117/2016, श्र0सं0--16) बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपक आनन्द, सचिव।

The 20th December 2024

S.O. 01 dated 1st January 2025---For the purpose of proviso of sub section (1)(b) of section 66 of the Factories Act, 1948 Labour Resources Department is authorized as State Government.

(File No.-1/F1-117/2016, LRD- -15) By the Order of Governor of Bihar, Deepak Anand, Secretary.

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

21 नवम्बर 2024

सं॰ निग/सारा (एन॰एच॰) आरोप-42/2017-5793(S)--श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा के पदस्थापन काल मे राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 45.00 से 65.00 पथांश में (Job No.-101-BR-2016-17-1547) कराये गये BC कार्य एवं कि॰मी॰ 1.10.से 1.11 में ROB के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता एवं विलम्ब के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-418 (एस) अनु॰ दिनांक-19.01.2021 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत कुल-02 (दो) आरोप निम्नवत गठित किये गये :-

(i) राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 45.00 से 65.00 पथांश में Job No.-101-BR-2016-17-1547 के तहत स्वी—त PR कार्य जून 2017 में पूर्ण कराया गया। परन्तु इस पथांश में कराया गया BC कार्य जून 2017 में ही अधिकांश भागों में क्षतिग्रस्त हो गया। BC का कार्य तुरन्त उखड़ जाना काफी खराब गुणवत्ता का साक्ष्य है। Centre Line Marking का कार्य भी विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराया गया।

(ii) राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-101 के कि॰मी॰ 1.10 से 1.11 पथांश में स्वी—त RoB के निर्माण कार्य का एकरारनामा दिनांक-25.05.2017 को कर लिया गया, परन्तु जमीन के अभाव में निरीक्षण की तिथि दिनांक-19.09.2017 तक Appointed Date नहीं दिया गया, जिसके कारण कार्य अत्यधिक Delayed हुआ, जो कार्य के प्रति लापरवाही एवं जिम्मेदारी के बोध की कमी है।3 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 2. मुख्य अभियंता (अनुश्रवण)-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-32 अनु॰ दिनांक-04.04.2022 द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के तहत निष्कर्ष के रूप में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' के तहत गठित दोनों आरोपों को अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरान्त आरोप संख्या-(ii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष सहमति योग्य पाया गया एवं आरोप संख्या-(i) के संबंध में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष असहमति योग्य पाया गया। इस प्रकार आरोप संख्या-01 के संबंध में उत्पन्न असहमति के बिन्दुओं के परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-5392(एस) अनु॰ दिनांक-26.10.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

3. श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-11.11.2022 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत्‌ मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य/तर्क अंकित किये गये :-

(i) जून, 2017 में प्री मॉनसून मूसलाधार वर्षा होने के कारण घनी बसावट वाले गाँवों के पास ग्रामीणों द्वारा अपने घर का नाला सीधे सड़क पर लाकर छोड़ देने के कारण तत्कालिक दो तीन पॉट हो गये थे, जिसे मरम्मति करा दिया गया था। ग्रामीणों द्वारा सड़क किनारे चापाकल लगाने से उसका पानी सड़क पर आ जा रहा था, जिसे फ्लैंक किनारे कच्चा नाला बनाकर जल-जमाव की समस्या को दूर किया गया था।

(ii) यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त आलोच्य पथांश का उड़नदस्ता द्वारा दो बार जाँच किया गया था उनके द्वारा पथ की भौतिक स्थिति के बारे में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई तथा उपयोग में लाई गई निर्माण सामग्रियों को मानक के अनुरूप बताया गया।

4. श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोप संख्या-(i) के संबंध में उत्पन्न असहमति के बिन्दुओं के परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत्‌ BC कार्य के क्षतिग्रस्त होने के लिए पथ परत पर बरसात के पानी का जमाव होना एवं स्थानीय लोगों द्वारा चापाकल का पानी पथ परत पर गिराने का कारण बताया गया है, जिसे अधीक्षण अभियंता के निरीक्षण के बाद संवेदक के व्यय पर ठीक करा दिया गया। इनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव-बयान से ही इस बात की पुष्टि होती है कि बाढ़ अगस्त, 2017 में आया था, जबकि इससे पूर्व ही अधीक्षण अभियंता के द्वारा जून-जुलाई माह में पथ के निरीक्षण के समय ही BC कार्य में काफी पॉट्‌स पाये गये। इससे स्पष्ट होता है कि जून माह में कराये गये BC कार्य जून माह में ही क्षतिग्रस्त हो गया। हालाँकि कालांतर में क्षतिग्रस्त पथांश को संवेदक के व्यय पर ठीक कराया गया है , परन्तु इससे आरोप की गंभीरता को कम करके आंका नहीं जा सकता है। इस प्रकार विभाग द्वारा इनके विरूद्ध गठित किये गये आरोप इस हद तक प्रमाणित होता है।

5. उपर्युक्त के आलोक में समीक्षोपरान्त पाया गया है कि श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल, शेखपुरा के द्वारा अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में अनियमितता एवं चूक बरती गयी है, जो कदाचार के श्रेणी में आता है। इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वी—त करते हुए सम्यक विचारोपरान्त उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(v) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-5393(एस) सहपठित ज्ञापांक-5394(एस) दिनांक-05.09.2023 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) ''दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' 6. उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री कुमार के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन-शून्य दिनांक-21.09.2023 समर्पित किया गया, जिसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्य एवं तर्क अंकित किये गये :-

(i) श्री कुमार द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान बचाव-बयान एवं द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में यह तथ्य समर्पित किया था कि जून माह में प्रीमॉनसून भारी वर्षा के कारण घनी वसावट वाले एक गाँव में जल-जमाव तथा ग्रामीणों द्वारा घर का नाला सड़क तक लाकर छोड़ने एवं सड़क किनारे समुदायिक चापाकल का पानी सीधे सड़क पर आने के कारण एक-दो जगहों पर पॉट्‌स हो गये थे, जिसे ससमय मरम्मति करा दिया गया था एवं चापाकल के पानी को फ्लैंक किनारे कच्चा ड्रेन बनाकर हटाया गया। पथांश DLP में होने के कारण संवेदक द्वारा उनके खर्च पर ही मरम्मति कार्य कराया गया जो कि DLP का असल मतलब है। साथ ही संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किये जाने का भी संदर्भ दिया गया है।

(ii) साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि आलोच्य पथांश का कार्य के दौरान दो बार उड़नदस्ता प्रमण्डल द्वारा जाँच की गयी थी, जिसमें कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गयी थी।

7. इसके अतिरिक्त, श्री कुमार द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन के रूप में एक अन्य अभ्यावेदन-शून्य दिनांक-03.04.2024 भी समर्पित किया गया, जिसके तहत मुख्य रूप से विषयांकित मामले के संवेदक द्वारा दायर CWJC No.-7782/2021 मे पारित आदेश एवं इसके विरूद्ध विभाग द्वारा दायर LPA No.-108/2022 में पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक-1196 दिनांक-01.03.2024 के द्वारा संवेदक को आरोप मुक्त कर दिये जाने का संदर्भ देते हुए उन्हें भी आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया।4 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 8. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री देवकान्त कुमार के द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री कुमार द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान समर्पित बचाव-बयान में मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया था कि वर्ष, 2017 में प्रीमॉनसून की लगातार भारी वारिस होने के कारण गोपालगंज जिला अन्तर्गत गंडकी बाँध माह अगस्त, 2017 में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके फलस्वरूप आलोच्य पथांश में दिनांक-18.08.2017 से 23.08.2017 तक भीषण बाढ़ आ गया था, और कई जगह पर पथ परत के उपर छः इंच से डेढ़ फीट तक पानी का बहाव हो रहा था, जिसकी पुष्टि संचालन प्रतिवेदन से होती है। इस प्रकार, श्री कुमार पूर्व में बचाव-बयान के दौरान आलोच्य पथ के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण अगस्त, 2017 में आये बाढ़ को बताया गया था, जबकि वर्त्तमान पुनर्विचार अभ्यावेदन में पथ के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण जून माह में भारी वर्षा के कारण घनी बसावट वाले एक गाँव में जल-जमाव तथा ग्रामीणों द्वारा घर का नाला सड़क तक लाकर छोड़ने, चापालकल का पानी सड़क पर छोड़ने आदि को बताया गया। इस प्रकार, श्री कुमार द्वारा पथ के क्षतिग्रस्त होने के संबंध में भिन्न-भिन्न अवसरों पर भिन्न-भिन्न तर्क दिये गये, जिसे विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। बचाव-बयान में श्री कुमार द्वारा अगस्त माह में भारी वर्षा होने की बात कही गयी, जबकि वर्त्तमान पुनर्विचार अभ्यावेदन में जून माह में भारी वर्षा होने की बात कही गयी, जिसे तर्कसंगत नहीं माना जा सकता है, जबकि वास्तविक तथ्य यह है कि अगस्त माह में बाढ़ आयी थी और इससे पूर्व ही अधीक्षण अभियंता के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार जून-जुलाई माह में पथ के निरीक्षण के समय ही BC कार्य में काफी पॉट्‌स पाये गये। इससे स्पष्ट होता है कि जून माह में कराये गये BC कार्य जून माह में ही क्षतिग्रस्त पाया गया था। अतएव श्री कुमार का उक्त तथ्य एवं तर्क संतोषजनक प्रतीत नहीं होता है।

9. जहाँ तक विषयांकित मामले में ही संबंधित संवेदक द्वारा दायर CWJC No.-7782/2021 में पारित आदेश एवं इसके विरूद्ध विभाग द्वारा दायर LPA No.-108/2022 में पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक-1196 दिनांक-01.03.2024 के द्वारा संवेदक को आरोप मुक्त कर दिये जाने का प्रश्न है तो निम्न तथ्यों के आधार पर श्री कुमार का तर्क मानने योग्य प्रतीत नहीं होता है :-

(i) ज्ञात हो कि अभियंता के विरूद्ध Bihar CCA Rules, 2005, में वर्णित प्रावधान के अनुरूप कार्रवाई की जाती है, जबकि संवेदक के विरूद्ध बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली के तहत कार्रवाई की जाती है। इस प्रकार, अभियंता एवं संवेदक के विरूद्ध भिन्न-भिन्न नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

(ii) वर्णित CWJC No.-7782/2021 में पारित आदेश एवं इसके विरूद्ध विभाग द्वारा दायर LPA No.- 108/2022 में पारित आदेश के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मेरिट के आधार पर संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को quashed नहीं किया गया है, बल्कि प्रक्रियात्मक चूक होने के परिस्थितिजन्य कारण से संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा quashed किया गया है। ऐसी स्थिति में श्री कुमार द्वारा दिये गये तर्क को स्वीकार किये जाने का युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है।

(iii) यह भी उल्लेखनीय है कि विभागीय आदेश संख्या-1196 दिनांक-01.03.2024, जिसके द्वारा संवेदक के विरूद्ध निर्गत दण्डादेश को रद्‌द किया गया है, में स्पष्ट रूप से यह उल्लिखित है कि ''संवेदक द्वारा फर्जी चालान जमा किया जाना एक आपराधिक —त्य है, जिसके विरूद्ध विधिवत प्राथमिकी दर्ज है'' इससे भी स्पष्ट होता है कि संवेदक के विरूद्ध विषयांकित मामले को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं किया गया है। अतएव श्री कुमार का कथन विचारण योग्य प्रतीत नहीं होता है। 10. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री देवकान्त कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल, शेखपुरा के द्वारा विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध समर्पित अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक-21.09.2023 एवं अभ्यावेदन दिनांक-03.04.2024 को संतोषजनक नहीं पाये जाने की स्थिति में इसे अस्वी—त किया जाता है। 11. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पूनम कुमारी, संयुक्त सचिव।

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29 नवम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-36/2021 -6064(S)--श्री विजय कुमार यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण ईकाई, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, फारबिसगंज, पथ प्रमंडल, अररिया के पथ प्रमंडल, जमुई पदस्थापन काल में नाबार्ड योजनान्तर्गत लक्ष्मीपुर-जिनहारा-धमना-झाझा पथ के निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता संबंधी एकमात्र आरोप के लिए विभागीय पत्राक-6869 (एस) दिनांक 06.09.2018 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उन्होंने पत्रांक-73, दिनांक 06.10.2018 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत इसे संतोषजनक नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5048 (एस) दिनांक 06.10.2021 के द्वारा श्री यादव के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आरोप का एकमात्र बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

5 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

'' पथ के 10वें एवं 21वें कि॰मी॰ में कराये गये BM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा के औसत मान क्रमशः 2.57% एवं 2.54% पायी गयी है। पूरे पथ के लिए अलकतरा की औसत मान BM Gr.-II 2.56% पायी गयी है, जो प्राक्कलन में प्रावधानित अलकतरा की मात्रा 3.3% के लिए विभागीय Tolerance Limit (2.94) से कम है।'' 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1410 अनु॰, दिनांक 29.06.2022 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री यादव के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने संबंधी मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-6241 (एस) दिनांक 17.10.2023 के द्वारा उनसे लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री यादव ने पत्रांक-197 अनु॰, दिनांक 16.12.2023 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया।

3. श्री यादव ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में पथ की गुणवत्ता जाँच में TRI द्वारा गलत विधि का प्रयोग किये जाने को मुख्य आधार बनाया है, साथ ही उन्होंने अंकित किया है कि अगर TRI द्वारा गुणवत्ता की जाँच सही विधि से की गयी होती तो जाँच प्रतिफल Tolerance Limit से अधिक आता। श्री यादव के उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति के मंतव्य की मांग की गयी, जिसमें उनके Testing के Method संबंधी तर्क को समिति के द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता जाँच में स्पष्ट रूप से अलकतरा का औसत मान निर्धारित Tolerance Limit से कम पायी गयी है, जिसके संबंध में श्री यादव ने कोई ठोस साक्ष्यगत बचाव का तर्क प्रस्तुत नहीं किया है। अतः उनके द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को स्वीकृत किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है।

4. उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री विजय कुमार यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण ईकाई, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, फारबिसगंज, पथ प्रमंडल, अररिया के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध प्रमाणित पाये गये एकमात्र आरोप के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (v) के तहत निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया जाता हैः-

(i) संचयी प्रभाव के बिना 02 (दो) वेतन वृद्धियों पर रोक। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

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29 नवम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-36/2021 -6059(S)--श्री सुनील कुमार, तत्कालीन सहायक शोध पदाधिकारी, गुण नियंत्रण ईकाई, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, सुपौल के पथ प्रमंडल, जमुई पदस्थापन काल में नाबार्ड योजनान्तर्गत लक्ष्मीपुर-जिनहारा-धमना-झाझा पथ के निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता संबंधी एकमात्र आरोप के लिए विभागीय पत्राक-6868 (एस) दिनांक 06.09.2018 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उन्होंने पत्रांक-136, दिनांक 29.12.2018 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत इसे संतोषजनक नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5056 (एस) दिनांक 06.10.2021 के द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आरोप का एकमात्र बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

'' पथ के 10वें एवं 21वें कि॰मी॰ में कराये गये BM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा के औसत मान क्रमशः 2.57% एवं 2.54% पायी गयी है। पूरे पथ के लिए अलकतरा की औसत मान BM Gr.-II 2.56% पायी गयी है, जो प्राक्कलन में प्रावधानित अलकतरा की मात्रा 3.3% के लिए विभागीय Tolerance Limit (2.94) से कम है।'' 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1412 अनु॰, दिनांक 29.06.2022 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने संबंधी मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-6240(एस) दिनांक 17.10.2023 के द्वारा उनसे लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार ने पत्रांक-शून्य, दिनांक 09.12.2023 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया।

3. श्री कुमार ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में पथ की गुणवत्ता जाँच में TRI द्वारा गलत विधि का प्रयोग किये जाने को मुख्य आधार बनाया है, साथ ही उन्होंने अंकित किया है कि अगर TRI द्वारा गुणवत्ता की जाँच सही विधि से की गयी होती तो जाँच प्रतिफल Tolerance Limit से अधिक आता। श्री कुमार के उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति के मंतव्य की मांग की गयी, जिसमें उनके Testing के Method संबंधी तर्क को समिति के द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता जाँच में स्पष्ट रूप से अलकतरा का औसत मान निर्धारित Tolerance Limit से कम पायी गयी है, जिसके संबंध में श्री कुमार ने कोई ठोस साक्ष्यगत बचाव का तर्क प्रस्तुत नहीं किया है। अतः उनके द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को स्वीकृत किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है।6 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 4. उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री सुनील कुमार, तत्कालीन सहायक शोध पदाधिकारी, गुण नियंत्रण ईकाई, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, सुपौल के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध प्रमाणित पाये गये एकमात्र आरोप के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम क्रमशः 14 (v) एवं 14 (i) के तहत निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया जाता है :-

(i) संचयी प्रभाव के बिना 01 (एक) वेतन वृद्धि पर रोक। (ii) आरोप वर्ष 2015 के लिए ''निन्दन''। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

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29 नवम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-01 (पथ) आरोप-36/2021 -6062(S)--श्री अनिल कुमार यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (निलंबित) के उक्त पदस्थापन काल में नाबार्ड योजनान्तर्गत लक्ष्मीपुर-जिनहारा-धमना-झाझा पथ के निर्माण कार्य में पायी गयी अनियमितता संबंधी एकमात्र आरोप के लिए विभागीय पत्राक-452 (एस) दिनांक 15.01.2018 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उन्होंने पत्र दिनांक 21.07.2018 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत इसे संतोषजनक नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5071 (एस) दिनांक 07.10.2021 के द्वारा श्री यादव के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आरोप का एकमात्र बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

'' पथ के 10वें एवं 21वें कि॰मी॰ में कराये गये BM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा के औसत मान क्रमशः 2.57% एवं 2.54% पायी गयी है। पूरे पथ के लिए अलकतरा की औसत मान BM Gr.-II 2.56% पायी गयी है, जो प्राक्कलन में प्रावधानित अलकतरा की मात्रा 3.3% के लिए विभागीय Tolerance Limit (2.94) से कम है।'' 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1406, दिनांक 29.06.2022 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री यादव के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने संबंधी मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-6242 (एस) दिनांक 17.10.2023 के द्वारा उनसे लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री यादव ने पत्रांक-06, दिनांक 13.12.2023 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया।

3. श्री यादव ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में पथ की गुणवत्ता जाँच में TRI द्वारा गलत विधि का प्रयोग किये जाने को मुख्य आधार बनाया है, साथ ही उन्होंने अंकित किया है कि अगर TRI द्वारा गुणवत्ता की जाँच सही विधि से की गयी होती तो जाँच प्रतिफल Tolerance Limit से अधिक आता। श्री यादव के उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति के मंतव्य की मांग की गयी, जिसमें उनके Testing के Method संबंधी तर्क को समिति के द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि उड़नदस्ता जाँच में स्पष्ट रूप से अलकतरा का औसत मान निर्धारित Tolerance Limit से कम पायी गयी है, जिसके संबंध में श्री यादव ने कोई ठोस साक्ष्यगत बचाव का तर्क प्रस्तुत नहीं किया है। अतः उनके द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को स्वीकृत किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है।

4. उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री अनिल कुमार यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (निलंबित) के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध प्रमाणित पाये गये एकमात्र आरोप के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (v) के तहत निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया जाता है :- (i) संचयी प्रभाव के बिना 02 (दो) वेतन वृद्धियों पर रोक। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

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11 दिसम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-1 (NH)-47/2014-6274(S)--श्री अजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (योजना अनुश्रवण एवं गुण नियंत्रण)-3, मुख्य अभियंता, उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पदस्थापन काल के दौरान एन0एच0-98 के जसोईया मोड़ से दाउदनगर पथ में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा की गयी तथा पत्रांक-299 अनु0 दिनांक-22.12.10 द्वारा समर्पित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-136 अनु0 दिनांक-28.06.11 द्वारा समर्पित अन्तिम (गुणवत्ता) जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये SDBC कार्य7 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 का औसत FDD प्रावधानित 2.30gm/cc के विरूद्ध 1.95gm/cc पाया गया। पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये BUSG (in pot repair) कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 21.23 प्रतिशत ओभर साईज पाया गया। BUSG कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 1.73 प्रतिशत पायी गयी जबकि प्रावधान 1.93 प्रतिशत का है। पथ के 106 वें कि0मी0 में कराये गये BUSG (in pot repair) कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 13.73 प्रतिशत ओभर साईज एवं 7.93 प्रतिशत अंडर साईज पाया गया।

2. उपर्युक्त पायी गयी अनियमितता के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-4479 (ई) अनु0 दिनांक-28.08.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

3. श्री कुमार के पत्रांक-112 अनु0 दिनांक-13.10.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा SDBC कार्य का औसत FDD प्रावधान से कम पाये जाने के संबंध में स्पष्ट किया गया कि एकरारनामा में कहीं भी यह अंकित नहीं है कि Field Density क्या होना चाहिए तथा कार्य के दौरान मना करने पर भी नये सतह पर गाड़ियों के आवागमन के कारण FDD का औसत कम हो गया। BUSG कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट ओभर साईज पाये जाने के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि मजदूरों द्वारा जानकारी के आभाव में कुछ Pots में ओभर साईज मेटेरियल द्वारा कार्य किया गया होगा। इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिहार राज्य में स्टोन मेटल सधारणतः Hand Broken हीं होते हैं जिससे की ओभर साईज पत्थरों की संख्या कुछ अधिक हो जाती है, क्योंकि मजदूरों द्वारा Eye Estimation द्वारा पत्थर तोड़ा जाता है। यह भी उल्लेख किया गया कि कार्य पूर्ण होने के छः माह बाद जाँच कराया गया। BUSG कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधान से कम पाये जाने के संबंध में स्पष्ट किया गया कि यह आरोप सही प्रतीत नहीं होता है। पथ के 106 वें कि0मी0 में कराये गये BUSG (in pot repair) कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 13.73 प्रतिशत ओभर साईज एवं 7.93 प्रतिशत अन्डर साईज पाये जाने के संबंध में स्पष्ट किया गया कि 106 वें कि0मी0 इनके कार्यक्षेत्र में नहीं पड़ता है।

4. श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि SDBC कार्य का औसत FDD 2.16gm/cc तक पाये जाने पर टोलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है। इस मामले में SDBC कार्य का औसत FDD 1.95gm/cc है जो उक्त निर्धारित टोलरेन्स से काफी कम है। इस कारण इस बिन्दु पर प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। BUSG कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के ग्रेडिंग में भिन्नता 7.50 प्रतिशत तक पाये जाने पर टोलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है। इस मामले में पायी गयी भिन्नता 12.13 प्रतिशत है जो उक्त निर्धारित टोलरेन्स से अधिक है।

अतएव विभागीय अधिसूचना संख्या-11957 (एस) दिनांक 11.12.2024 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक''। 5. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार ने अपने पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-04 (अनु0) दिनांक-22.01.15 विभाग को समर्पित किया। अपने पुनर्विलोकन अर्जी में श्री कुमार ने मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया है :-

(i) TRI ने अपने जाँचफल में अंकित किया है कि 'sample is not sufficient for this work' इससे स्पष्ट हो जाता है कि TRI द्वारा प्रतिवेदित जाँचफल विश्वसनीय नहीं है।

(ii) पथ के 106 वें कि0मी0 तथा 103-120 वें कि0मी0 तक BUSG का कार्य श्री विनय कुमार, सहायक अभियंता द्वारा कराया गया था। इस कार्य से उनका कोई संबंध नहीं रहा है।

(iii) BUSG कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 1.73 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान न्यूनतम 1.4 प्रतिशत से अधिक है।

(iv) कार्य में प्रयुक्त होने वाली निर्माण सामग्रियों की जाँच गुण नियंत्रण से कराने के पश्चात ही कार्य में लगाया जाता हैं बिहार एवं झारखंड के किसी भी खदान पर सही मानक का पत्थर उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण Aggrigate औसत में विचलन की संभावना बनी रहती है।

6. श्री कुमार के पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-04 (अनु0) दिनांक-22.01.15 के विभागीय समीक्षोपरांत निम्न कारणों से स्वीकार योग्य नहीं है :-

(क) पथ के 106 वें कि0मी0 प्रथम एच0पी0 पुलिया से 121 मी0 पहले तक संग्रहित जाँचफल से संबंधित है जिसका संबंध श्री कुमार से नहीं रहा है। इसलिए पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका-(i) मान्य नहीं है। (ख) यह सत्य है कि पथ के 106 वें कि0मी0 एवं 103-120 वें कि0मी0 तक के कार्यों की संबद्धता श्री कुमार से नहीं रही। इन पथांशों में पायी गयी अनियमितताओं के लिए इन्हें नहीं बल्कि पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये कार्यों में पायी गयी अनियमितताओं के लिए इन्हें दंडित किया गया है। क्योंकि पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये कार्यों की संबद्धता श्री कुमार से रही है। इसलिए पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका-(ii) मान्य नहीं है।

(ग) BUSG कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की प्रावधानित मात्रा 1.93 प्रतिशत है न कि 1.4 प्रतिशत। अतः श्री कुमार के पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका-(iii) स्वीकार योग्य नहीं है।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 8 (घ) श्री कुमार ने कार्य में प्रयुक्त होने वाले Aggrigate को मानक के अनुरूप उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया है। पथ कार्य में प्रयुक्त होने वाले Aggrigate को हर हालत में मानक के अनुरूप व्यवहृत किया जाना है, इसलिए श्री कुमार का पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका-(iv) भी मान्य नहीं है। 7. उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री कुमार ने अपना पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-04 अनु॰ दिनांक 22.01.2015 विभाग को समर्पित किया था, जिसे सम्यक विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-6153 (एस) दिनांक 08.07. 2015 द्वारा पूर्व में अस्वीकृत कर दिया गया था।

8. श्री अजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (योजना अनुश्रवण एवं गुण नियंत्रण)-3, मुख्य अभियंता, उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा उक्त दण्डादेश के विरूद्ध लगभग 08 वर्ष के अतिशय विलम्ब के पश्चात पत्रांक-शून्य, दिनांक 24.09.2022 द्वारा पुनरीक्षण अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसे सम्यक विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

9. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

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11 दिसम्बर 2024

सं॰ निग/सारा-(एन॰एच॰)-आरोप-30/2022-6259 (S)--श्री लोकेश नाथ मिश्र, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर सम्प्रति विभाग में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर के पदस्थापन काल में उमगाँव-बासोपट्‌टी-कलुआही पथ (एन॰एच॰-227 L) के कि॰मी॰ 0 से 20.50 के IRQP कार्य की स्वी—ति वर्ष 2020-21 में हो जाने तथा मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर) उपभाग के पत्रांक-2245 अनु॰ दिनांक-24.09.2020 द्वारा निविदा स्वी—ति से संबंधित पत्र के अनुसार कार्य को कार्यादेश निर्गत की तिथि से 10 माह के अन्दर पूर्ण करने तथा अगले 05 वर्षों के लिए इसके रख-रखाव का आदेश के बावजूद दिनांक-24.06.2022 में कार्य सिर्फ अधूरा ही नहीं बल्कि इस सड़क की स्थिति दयनीय थी। इस संबंध में तस्वीर राष्ट्रीय स्तर पर भी वायरल हुआ है। इससे स्पष्ट है कि तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक अभियंता के रूप में श्री मिश्र के द्वारा कार्य में घोर अकर्मण्यता एवं लापरवाही बरती जाने के लिये इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-3195(एस) दिनांक-24.06.2022 के द्वारा निलंबित किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3601(एस) दिनांक- 11. 07.2022 द्वारा इनकें विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ गठित कुल-03 (तीन) आरोप निम्नवत्‌ हैः-

(i) राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर अन्तर्गत उमगाँव-बासोपट्‌टी-कलुआही पथ NH-227 L के कि॰मी॰ 0.00 से 20.50 के IRQP कार्य की स्वी—ति वर्ष 2020-21 में हुयी थी। मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर) उपभाग के पत्रांक-2245 अनु॰ दिनांक-24.09.2020 द्वारा निर्गत निविदा की स्वी—ति अनुसार संवेदक श्री रविन्द्र कुमार को आलोच्य कार्य को कार्यादेश निर्गत की तिथि से 10 माह के अन्तर्गत पूरा करना था तथा अगले 05 वर्षों के लिए इसका रख-रखाव भी संवेदक को करना था, जो नहीं किया गया। आलोच्य पथ की स्थिति अत्यंत ही खराब रहने के बावजूद श्री लोकेश नाथ मिश्र के द्वारा संवेदक के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं किया जाना संवेदक के साथ अन्यथा मंशा से मिली-भगत को दर्शाता है। (ii) आलोच्य कार्य आज की तिथि में सिर्फ अधूरा ही नहीं है बल्कि इस सड़क की बदहाल एवं अत्यन्त दयनीय तस्वीर राष्ट्रीय स्तर पर वायरल है। यह स्पष्ट रूप से श्री मिश्र की अकर्मण्यता तथा घोर लापरवाही का परिचायक है। मुख्य अभियंता, उत्तर राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1002 दिनांक-06.05.2022 द्वारा इस संबंध में दिये गये निदेश के बावजूद भी श्री मिश्र के स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी, जबकि इसी पत्र में अंकित किया गया कि इस पथ के दयनीय स्थिति के संबंध में माननीय सदस्य बिहार विधान सभा श्री अरूण शंकर प्रसाद के द्वारा भी बिहार विधान सभा के सत्र में प्रश्न किया गया था।

(iii) पथ को मोटेरेवुल बनाये रखने की जिम्मेवारी कार्य अभियंताओं की होती है, जिसमें कार्यपालक अभियंता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आलोच्य योजना कार्य का अनुश्रवण नहीं करने के फलस्वरूप योजना को पूर्ण कराने का कार्य बाधित तो हुआ ही, आलोच्य पथ की बदतर स्थिति के कारण सरकार की छवि भी धूमिल हुई है। स्पष्टतः श्री मिश्र द्वारा कर्त्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती गयी है।

2. मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ संधारण, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-215 अनु॰ दिनांक-09.12.2022 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ गठित तीनों आरोपों की समेकित रूप से समीक्षा करते हुए आरोप को प्रमाणित पाये जाने का निष्कर्ष दिया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के लिए विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री मिश्र से विभागीय पत्रांक-3774(एस) अनु॰, दिनांक-06.08.2024 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी।9 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 3. श्री लोकेश नाथ मिश्र, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर सम्प्रति विभाग में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-23.09.2024 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित की गयी है, जिसमें अंकित तथ्यों/तर्कों की समीक्षा निम्नवत्‌ है :-

(i) राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर अन्तर्गत उमगाँव-बासोपट्टी-कलुआही पथ एन॰एच॰-227L के कि॰मी॰ 0.00 से 20.50 के IRQP कार्य की स्वी—ति वर्ष 2020-21 में हुई थी। जिसमे कार्य आरंभ की तिथि-23.11.2020 एवं कार्य समाप्ति की तिथि-22.09.2021 थी।

(ii) इनके द्वारा दिनांक-05.07.2021 को प्रभारी कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल, जयनगर के रूप में पदभार ग्रहण किया गया। श्री मिश्र को यह ज्ञात था की उनके पदभार ग्रहण के पूर्व आलोच्य पथ की स्थिति काफी दयनीय होने एवं संवेदक के द्वारा पथ कार्य कराए जाने में अभिरूचि नहीं लिए जाने को लेकर दिनांक- 09.03.2021 को संवेदक को Debar किए जाने एवं दिनांक-15.04.2021 को 0.05% प्रतिदिन के हिसाब से एकरारनामा के अनुसार LD की कटौती किए जाने के संबंध में निर्णय लिया जा चुका है। इसके बाबजूद श्री मिश्र द्वारा अपने पदस्थापन काल में दिनांक-30.03.2022 तक (लगभग 09 महीने) पथ कार्य करवाने एवं सड़क को मोटेरेबुल बनाने हेतु संवेदक को मात्र पत्राचार/स्मारित किया जाता रहा, दूरभाष पर मात्र संवेदक से लेबर-सामग्री मशीनरी आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती रही, जबकि पथ की बदहाल स्थिति एवं इसके Motorable बनाये रखे जाने मे यथोचित प्रगति नहीं लाने की स्थिति में संवेदक के विरूद्ध ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए थी, यथा एकरारनामा को विखंडित किए जाने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी। जबकि इस बीच संवेदक द्वारा पथ कार्य को कुछ महीने के लिए बंद भी कर दिया गया था।

(iii) दिनांक-05.04.2022 को अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमण्डल की परियोजनाओं की हुई समीक्षात्मक बैठक में आलोच्य पथ कार्य के संबंध में अपर मुख्य सचिव द्वारा यह निदेश दिया गया कि ''यदि 15 दिनों के अन्दर संवेदक Work Programme के अनुसार कार्य नहीं करता है तो कार्यपालक अभियंता संवेदक पर नियमानुसार कार्रवाई करे।'' उक्त बैठक में श्री मिश्र भी उपस्थित थे, जैसा कि उन्होंने अपने उत्तर में भी स्पष्ट किया है, और यह भी उल्लेख किया है कि बैठक में दिए गए निर्देशो और सहमति देने के वाबजूद संवेदक द्वारा न तो पथ को Motorable बनाने का कार्य किया और न हीं अन्य कार्य में कोई प्रगति की, ऐसी स्थिति में जबकि कार्यपालक अभियंता को निदेश भी था, संवेदक के विरूद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया। काफी समय बाद अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, दरभंगा के कार्यालय आदेश संख्या-36 सह-पठित ज्ञापांक-255 दिनांक-20.06.2022 द्वारा एकरारनामा को विखंडित किया गया एवं सुरक्षित जमा राशि सहित सभी पावनाओं को जब्त किया गया। उसके बाद कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-317 दिनांक-21.06.2022 द्वारा संवेदक के बैंक गारंटी को जब्त किया गया। अगर संवेदक के विरूद्ध आरोपी श्री मिश्र के द्वारा कार्यपालक अभियंता के रूप में इस तरह की कार्रवाई पूर्व में ही कर ली जाती तो ससमय आलोच्य पथ को मोटरेबुल कराया जा सकता है। और इस तरह विभाग की छवि धूमिल नहीं होती।

4. उपर्युक्त के आलोक में समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री मिश्र के द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कोई नया तथ्य/तर्क अंकित नहीं किया गया, बल्कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान अपने बचाव-बयान के रूप में रखे तथ्यों को ही द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में लगभग दुहराया गया है। अतः इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को सम्यक्‌ विचारोपरांत अस्वी—त करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :-

(i) ''दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर अंसचयात्मक प्रभाव से रोक।'' (ii) निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में नियमानुसार अलग से कारण पृच्छा कर निर्णय लिया जायेगा। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

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श्रम संसाधन विभाग

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अधिसूचनाएं

27 दिसम्बर 2024

सं0 1/नियो॰नियुक्ति-03/2024-94/श्र॰सं॰--बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास विभाग (बिपार्ड), गया द्वारा आयोजित 3rd प्रवेशकालीन प्रशिक्षण में दिनांक 01.01.2025 से सम्मिलित होने वाले बिहार नियोजन सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों के प्रशिक्षण अवधि तक उनके द्वारा धारित पद का अतिरिक्त प्रभार उनके नाम के सामने कॉलम-03 में अंकित पदाधिकारी को दिया जाता है :-

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 10
क्र॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम अतिरिक्त प्रभार हेतु प्राधि—त पदाधिकारी का नाम एवं पदनाम
1 2 3
1 सुश्री राजवी प्रभाकर, नियोजन पदाधिकारी, विश्वविद्यालय नियोजन सूचना एवं मार्गदर्शन केन्द्र, मुजफ्फरपुर। सुश्री श्वेता वशिष्ठ नियोजन पदाधिकारी, अवर प्रादेशिक नियोजनालय, मुजफ्फरपुर।
2 श्रीमती भावना, नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, अरवल। श्री दिनेश तिवारी, जिला नियोजन पदाधिकारी, औरंगाबाद

आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

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26 दिसम्बर 2024

सं0 1/नियो॰विविध-09/2023-92--बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास विभाग (बिपार्ड), गया द्वारा आयोजित 2nd Combined Foundation Course/ Combined Induction Training में दिनांक 12.01.2025 से सम्मिलित होने वाले बिहार नियोजन सेवा एवं बिहार श्रम सेवा (सामान्य) के निम्नांकित पदाधिकारियों के प्रशिक्षण अवधि तक उनके द्वारा धारित पद का अतिरिक्त प्रभार उनके नाम के सामने कॉलम 03 में अंकित पदाधिकारी को दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम अतिरिक्त प्रभार हेतु प्राधिकृत पदाधिकारी का नाम एवं पदनाम
01 02 03
01 श्री सुनील कुमार सुमन, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, नवादा। श्री अंकित राज-02, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, नालंदा।
02 श्री लरवीन कुमार, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, मधेपुरा। श्री आकिफ वक्कास, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, अररिया।
03 श्री निशांत रंजन, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, विश्वविद्यालय नियोजन सूचना एवं मार्गदर्शन केन्द्र, दरभंगा। श्री सुमित कुमार सिंह, नियोजन/जिला नियोजन पदाधिकारी, जिला नियोजनालय, समस्तीपुर।
04 श्री रतीश कुमार, श्रम अधीक्षक, जमुई। श्री सुनील कुमार - 02, श्रम अधीक्षक, नवादा।
05 श्री अमित कुमार, श्रम अधीक्षक, अररिया। श्री रामविलास राम, श्रम अधीक्षक, किशनगंज।

2. उक्त के प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

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23 दिसम्बर 2024

सं॰ 1/श्रम वि॰स्था॰(1)10-76/2024 श्रं॰सं॰-91--वित्त विभाग के संकल्प सं॰-7566 दिनांक-14.7.2010 द्वारा संसूचित रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना-2010 के प्रावधानों के आलोक में श्रम संसाधन विभाग, बिहार, पटना के अधीनस्थ बिहार श्रम सेवा (तकनीकी- कारखाना निरीक्षक) के निम्नांकित पदाधिकारी को उनके नाम के समक्ष स्तंभ-4 में अंकित तिथि से वेतनमान वेतनस्तर-11 में प्रथम रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन (एम॰ए॰सी॰पी॰) की स्वी—ति प्रदान की जाती हैः-11 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

क्र॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम एवं वेतनमान योगदान की तिथि/ संपुष्टि की तिथि प्रथम एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वी—ति की तिथि एवं वेतनमान
1. 2. 3. 4.
1 श्री मनोज कुमार चौधरी कारखाना निरीक्षक Level-09 04-09-2014 04-09-2016 1st MACP 04-09-2024 Level-11

2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप संबंधित पदाधिकारी का वेतन नियतिकरण "रूपान्तरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना-2010" के परिषिष्ट-1 के नियम-4 के अनुसार किया जाएगा। 3. भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि या पार्थक्य पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदत्त एम॰ए॰सी॰पी॰ के लाभ से संबंधित आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा उन्हें भुगतान की गयी राशि की वसूली/प्रतिपूर्त्ति कर ली जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

------- श्रम संसाधन विभाग (श्रम पक्ष) ------ अधिसूचनाएं 10 दिसम्बर 2024

सं0 4/M.w-40-10/2024 श्र॰सं॰-6870--न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की धारा 27(B) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल, सहायक श्रमायुक्त-सह-अपीलीय प्राधिकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत सहायक श्रमायुक्त,-सह-अपीलीय प्राधिकारी, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत पटना प्रमंडल, पटना में दायर 27 (सताईस) वादों को श्रम न्यायालय, पटना को स्थान्तरित किया जाता हैः-

क्र॰ सं0 वादी का नाम एवं पता प्रतिवादी/नियोजक का नाम एवं पता वाद संख्या कामगार का नाम एवं पता
01. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री रवि कुमार, (प्रबंधक) मेसर्स-महादेव क ैरियर प्राईवेट लिमिटेड, पता-सी0/01, पाटलीपुत्रा कॉलनी पटना-800013 M.W- 01/2024 श्री सुकाश क ुमार सिन्हा, पिता-स्व0 ए0पी0 सिन्हा, पता- स्व0 पहाडी. लाल के सामने मीठापुर बी0 एरिया पटना-800001
02. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री रवि कुमार, (प्रबंधक) मेसर्स-महादेव क ैरियर प्राईवेट लिमिटेड, पता-सी0/01, पाटलीपुत्रा कॉलनी पटना-800013 M.W- 02/2024 श्री रंजीत कुमार, पिता-वीरेन प्रसाद गुप्ता, पता-रोड नं0-03, संजय नगर, बिगरहपुर, पटना-800001
03. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री राजीव शर्मा (मैनेजिंग डायरेक्टर) G4 सिक्योर सोल्यूसन्स (इंडिया) प्रा0 लिमिटेड, ग्राउण्ड फ्लोर, विद्या भवन, बसंत बिहार कॉलनी, बोरिंग रोड, पटना। M.W- 26/2022 श्री विनोद दास, पिता-स्व0 परमेश्वर दास, पता-महादेव नगर, पोस्टथानाजिला-शेखपुरा।
04. श्रम अधीक्षक, पटना। (1.) श्री रंजीत कुमार, पता-आकांक्षा अपार्टमेंट,रोड नं0-वकील लेन,मंदिर मार्ग, महावीर कॉलनी, राजीवनगर, पटना-25 (2.) श्री वरुण कुमार, पता-प्रेमादित्य आर्शीवाद इन्क्लेव के पास, न्यू सरस्वती चंद्र मार्केट, साईकिल फैक्ट्री मोड के नजदीक, कुर्जी,पटना। M.W- 45/2024 श्री रवि रंजन कुमार युनियन द्वारा श्री जय प्रकाश मिश्रा महासचिव, श्री रामलखन यादव, उप महा सचिव, पता-रधुमणी भवन, बी0-17 बैंकमेंस कॉलनी, चित्रगुप्त नगर, कंंकडबाग, पटना।
05. श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Nikhil Kumar Sinha (Owner/Director) Hip Hop Media House Pvt.Ltd. 2nd Floor, Malit Niwas, Near Sichai Bhawan, Anisabad, p.s- Gardanibag, patna- 800002 M.W- 47/2024 मो0 खालिद कमाल, पता-राजीवनगर, रोड नं0-13, जिला-पटना।
06. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री मिथलेश कुमार/मुकूल, प्रसाद ट्रेडस हाथीया मार्केट, खेतान माके र्ट के पीछे, गोरिया टोली, पटना। M.W- 50/2024 श्री सिन्धु शर्मा, पिता-मदन शर्मा, ग्राम-ठेरा सराय, पो0-जलालपुर, थाना-वारिसलीगंज, जिला-नवादा।
07. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Sri Vijay Kumar Kashayp, (b)Sri Asutosh Kashyap, (c)Smt. Puja Bharadwaj M/S- Sparkle Life Science Pvt.Ltd. M.W- 55/2024 सुश्री आकृति सिंह, पिता-श्री संजीव कुमार सिंह, ट्रस्ट कॉलनी नियर रेलवे स्टेशन, मालेयपुर, पो0थाना-मालेयपुर जिला-जमुई।
08. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director) (b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 58/2024 श्री शंकर मंडल, पता-बैण्ड बाजा बारात, महेशनगर, रोड नं0-03 बी0, पटेल चौक, पटना-800024
09. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director) (b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 57/2024 श्री अरुण कुमार, पिता-होरी लाल, पता-28 नारायण डीह, सोहंसा, जॉनपुर, सोहंसा, जिला-उत्तर प्रदेश।
10. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director) (b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 56/2024 श्री मनोज कुमार, पिता-रामचन्द्र यादव, पता-बजौरा, रामपुर, डोभी, जिला-गया।
10.A श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director) (b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 51/2024 श्री वरुण कुमार, C/0- बलराम जी, पता-आकाशवाणी रोड, दूरदर्शन बिहार अपार्टमेंट पटना के पीछे, पटना-14
11. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director)(b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 59/2024 श्री अंकुर प ्रकाश, पता-91 सकु र्लर रोड, आनन्द बाजार, दानापुर कैण्ट, पटना।
12. श्रम अधीक्षक, पटना। (a) Mr. Rajesh Panday (Director) (b) Mr. umeshchand Chaudhary (Director), IHT NETWORK, LIMITED 3852/9, 2nd Floor, opp-Metro Pillar no.-231 Tri Nagar, Kanhiya Nagar, Delhi-110035 M.W- 60/2024 श्री अनिल क ुमार पाण्डेय, पता-बैंक कॉलनी, गोला रोड, दानापुर, पटना।
13. श्रम अधीक्षक, पटना। Sri Vineet Kumar Gupta Benchmark infotech Services Pvt. Ltd. P-118, CIT Road Phool bagan, 4th Floor, Schem vi-m Kolkata-700054 M.W- 43/2024 श्री शांति प्रसाद सिंह, पिता-शिवमुनी सिंह, ग्रामपोस्ट-आलमपुर, थाना-शिवसागर, जिला-रोहतास।
14. श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Ankesh Ranjan (Director) Nestiva Medicare Pvt. Ltd. Gardanibagh, Road no.- 01 Yarpur Patna-800001 M.W- 49/2024 श्रीमती सिम्पल क ुमारी, पता-भिखनापहाडी, नियर दादी अम्मा होटल, जिला-पटना।
15. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री रामाशंकर सिंह (निदेशक), श्री विनोद कुमार सिंह (निदेशक) The Frontier Guarding and Facility Service Pvt.Ltd 301-B Bhuvneshwar Plaza, 3rd floor Budh Marg, patna-01 M.W- 54/2024 हालिमा खातुन, पति-स्व0 मोहम्मद शरीफ, ग्राम-पुलेन्द्रपुर गुवरटोली, पो0-जी0पी0ओ0, थाना-जक्कनपुर, जिला-पटना।
16. श्रम अधीक्षक, पटना। Sri N.K Singh, S.N.S Security Ambika Market, 2nd Floor Near of Peter England Show Room, opp. of Bikaner Sweets Kankarbagh Main Road, Patna M.W- 52/2024 श्री स तोष ं कुमार सिंह, पता-ए0एन0कॉलेज, सोनकुंज अपार्टमेन्ट, नार्थ कृष्णापुरी, विवेकानन्द मार्ग, जिला-पटना।
17. श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Vikash Kumar (M.D& C.E.O) Fillip Technologies Pvt.Ltd. S.STower, 3rd Floor, M.W- 53/2024 श्री अभिषेक कुमार, पिता-श्री जयदेव प्रसाद, पता-सस्तिाबाद, पश्चिमी टोला, पोस्ट-अनिशाबाद, गर्दनीबाग,
Opposite-Kankarbagh, Patna-20 जिला-पटना
18. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री अनिल कुमार (प्रबंधन निदेशक) सुपर सिटी बिल्डर्स प्रा0लि0, 101 सुपर सिटी प्लाजा, प्लाट नं0-एम-26 रोड नं0-26 कृष्णानगर, पटना। M.W- 46/2024 श्री धीरज कुमार सिंह, पिता-रौशन सिंह ग्राम-टाउन अनाईठ, अंचल-आरा, जिला-भोजपुर।
19. श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Indrajit Kumar, Tour And Travels, House No.-257 Rampur Road Tapoban Colony, Near Ashirwad Nursing Home, mahendru-06 M.W- 44/2024 श्री सुरेन्द्र राय, पिता-मल्लिका राय, ग्राम-कुर्जी विकास नगर, रोड़ नं0-04, पोस्ट-सदाकत आश्रम, जिला-पटना
20. श्रम अधीक्षक, पटना। ब्याहुत प्लास्टिक एण्ड हार्डवेयर। देवसिद्वि प्लाजा, मेनरोड, कंकडबाग, पटना-20 M.W- 79/2017 श्री चंद्रिका सिंह, श्री गोवर्द्वन सिंह, ग्रामपोस्ट-फुहा, थाना-बड़हरा, जिला-भोजपुर।
21. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री अंकेश रंजन (डायरेक्टर) नेशटिवा मेडिकेयर प्रा0 लिमिटेड गर्दनीबाग, रोड नं0-01, यारपुर, पटना। M.W- 27/2022 Sajina v s, Koovakkada House, Pongamthanam P.O-Vakathanam, Kottyam-686538
22. श्रम अधीक्षक, पटना। रजिस्ट्रार, बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल, बी0एम0दास रोड,पटना-80004 M.W- 28/2022 श्रीमती मंजु देवी (सहायक) एवं श्रीमती उषा देवी (चपरासी) रजिस्ट्रार, बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल, बी0एम0दास रोड,पटना-80004
23. श्रम अधीक्षक, पटना। श्री अंकेश रंजन (डायरेक्टर) नेशटिवा मेडिकेयर प्रा0 लिमिटेड गर्दनीबाग, रोड नं0-01, यारपुर, पटना। M.W- 24/2022 मे0 रफी, एस0आर0 Shejina Manzil punnapra, P.o- Alappuzha, pin- 688004
24. श्रम अधीक्षक, पटना। 1.श्री पंकज कुमार,(डायरेक्टर) 2.श्रीमती रागिनी कुमारी,(डायरेक्टर) Sri Krishna Pharma, Bhagwatnagar, Near NRL Petrol Pump, Patna-26 M.W- 48/2024 सुश्री स्वेता गुप्ता, Icon Apartment Mohini Street, near-Pillar No.- 70, Shekhpura, Patna
25. श्रम अधीक्षक, पटना। मेजर आषुतोष झा (डायरेक्टर) मेसर्स Orion Security Solution Pvt. Ltd., Plot No.-5 E, First Floor Shahpur Jat New Delhi-110049 1. निदेशक, इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान, शेखपुरा, पटना। M.W- 35/2022 श्री अशोक कुमार सिंह एवं अन्य 81 (इक्कासी) कामगार
26. श्रम अधीक्षक, पटना। Intelligents Security India Pvt. Ltd. Add.- Gita menshan Parvati Len Kesri Nagar Patna-800024 - श्री कृष्णा प्रसाद, पिता-स्व0 राम नारायण प ्रसाद, पता-बाँकीपुर गोरख, पो0-फतुहा, जिला-पटना।
26.A श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Karunesh Awasthi (Managing Director) Sahara Credit Cooperative Society Ltd. Regd. Office- Sahara India Bhawan, 1 kapoorthala Complex, Aliganj, Lucknow- 226024 - मो0 अफताब आलम, Sattar, Colony Oposite- Gate No.-97 Bash Kothi Digha, Patna-800011
27. श्रम अधीक्षक, पटना। Mr. Dwarka Prasad Singh (Niyojak) S/o-Late radhuraj Singh, Add,- Om Nirmal Apartment, (B) block, flat No,-102, parmanand Path, Boring road, Patna - श्री रामानुज सिंह, पता-जमालपुर, पो0-अख्तियारपुर, थाना-बिक्रम, जिला-पटना।
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 12 13 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 14 15 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

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10 दिसम्बर 2024

सं0 4/M.w-40-10/2024 श्र॰सं॰-6872--उप श्रमायुक्त का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फपुर के पत्रांक-1751 दिनांक-31.08.2024 के आलोक में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की धारा 27(B) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल, सहायक श्रमायुक्त-सह-प्राधिकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत उप श्रमायुक्त, मुजफ्फपुर के न्यायालय में दायर कुल 03 (तीन) अपील वाद को श्रम न्यायालय, मुजफ्फरपुर को स्थान्तरित किया जाता हैः-

अनूसूची-1

क्र॰ सं॰ वर्ष अपील वाद सं॰ नियोजक का नाम एवं पता उत्तरवादीगण का नाम अभ्युक्ति
1 2022 03/2022 1. उप महाप्रबंधक (प्रशासनिक), राज्य खाद्य निगम, खाद्य भवन दरोगा राय पथ आर0 ब्लॉक, रोड नं0-02, पटना-800001 2. जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मुजफ्फरपुर। 1. श्री सुनील कुमार तिवारी (नियोजक), मेसर्स कोबरा इंडस्ट्रीयल सेक्यूरिटी फोर्स (1) लि0, तिवारी मैदान कमला नगर, आकाश ट्रेनिंग के निकट, पटना।
2 04/2022 1. उप महाप्रबंधक (प्रशासनिक), राज्य खाद्य निगम, खाद्य भवन दरोगा राय पथ आर0 ब्लॉक, रोड नं0-02, पटना-800001 2. जिला प ्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मुजफ्फरपुर। 1. श्री सुनील कुमार तिवारी (नियोजक), मेसर्स कोबरा इंडस्ट्रीयल सेक्यूरिटी फोर्स (1) लि0, तिवारी मैदान कमला नगर, आकाश ट्रेनिंग के निकट, पटना।
3 2022 10/2022 1. श्री गजेन्द्र पटेल, पिता-स्व0 रामाधार पटेल, ग्राम-गुरमिया, पो0-धरहारा, थाना-करताहाँ, जिला-वैशाली 1. श्री रघु कुमार उर्फ राघवेन्द्र कुमार, पिता-गौरीशंकर पटेल, ग्राम-नोनियडीह, पोस्ट-मईमादा, थाना-बरूराज, जिला-मुजफ्फरपुर। 2. श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, साहेबगंज, मुजफ्फरपुर।
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 16

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

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10 दिसम्बर 2024

सं0 4/M.w-40-10/2024 श्र॰सं॰-6871--उप श्रमायुक्त का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर उप श्रमायुक्त कापत्रांक-1752 दिनांक-31.08.2024 के आलोक में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की धारा 27(B) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल, सहायक श्रमायुक्त-सह-प्राधिकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत उप श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर के न्यायालय में दायर कुल नौ (09) अपील वाद को श्रम न्यायालय, मोतिहारी को स्थान्तरित किया जाता हैः-

अनूसूची-1

क्र॰सं॰ वर्ष वाद सं॰ नियोजक का नाम एवं पता उत्तरवादीगण का नाम अभ्युक्ति
1 2023 01/2023 1. मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण। 2. कार्यपालक अभियंता तिरहुत नहर प्रमंडल 01 बेतिया प0 चम्पारण। 3. कनीय अभियंता तिरहुत नहर प्रमंडल 01 बेतिया प0 चम्पारण। 1. श्री राम प ्रवेश प्रसाद, पिता-धनेश प्रसाद, ग्रामपोस्ट-अवहर शेख, थाना-मझौलिया, जिला-प0 चम्पारण एवं अन्य (03)
2 02/2023 1. मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण। 2. कार्यपालक अभियंता तिरहुत नहर प्रमंडल 01 बेतिया प0 चम्पारण। 3. कनिय अभियंता तिरहुत नहर प्रमंडल 01 बेतिया प0 चम्पारण। 1. श्री छबिला यादव, पिता-स्व0 रूदल यादव, ग्राम-फुलवारी, पोस्ट-अमवाझार, थाना-बेतिया मुफ्फसिल, जिला-प0 चम्पारण एवं अन्य (08)
3 2022 02/2022 1. मुखलाल कुशवाहा, पिता-रामधनी कुशवाहा, ग ्राम-आनंद नगर, पोस्ट-मंगलपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 2. महनथ शर्मा, पिता-छागलो शर्मा, ग्रामपोस्ट-मंगलपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 3. मुमताज मियां, पिता-स्व0 छेदी मियां, ग्राम-आनंद नगर पोस्ट-मंगलपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 4. दिलीप साह, पिता-स्व0 दुर्गा साह, ग्राम-आनंद नगर अवसानी, पोस्ट-मंगलपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 1. सहायक श्रम आयुक्त, बेतिया, पश्चिम चम्पारण। 2. गिरिराज सिंह, पिता-राम नरेश सिंह, ग्रामपोस्ट-बलकुड़िया, जिला-कुशीनगर (उ0प्र0)
4 05/2022 1. शशि शेखर मिश्र उर्फ लल्लू मिश्र, पिता-स्व0 नन्दकिशोर मिश्र उर्फ दरोगा मिश्र, ग्रामपोस्ट-गोवरौरा, थानाअंचल-लौरिया, जिला-प0 चम्पारण। 1. मदन पटेल, पिता-भरम पटेल, ग्रामपोस्ट-लौरिया, जिला-प0 चम्पारण। 2. शत्रुधन पटेल, पिता-झपसी पटेल, निवासी ग्राम-पुरैनीया, पोस्ट-नरकटियागंज, थाना-शिकारपुर, जिला-प0 चम्पारण एवं अन्य
5 07/2022 1. श्री शिवेन्दु भूषण सिंह, भेंडर सुक्युरिटी एवं इ टेलिजेंस ं सर्विस (इंडिया) लिमिटेड, 199बी, प्रथम तल्ला, सहदेव महतो मार्ग, बोरिंग रोड, पटना। 1. श्री अजय क ुमार, पिता-स्व0 बच्चा सिंह, ग्रामपोस्ट-रूपहारा, थाना-शिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण एवं अन्य (31)
6 08/2022 1. श्री करी महतो, पिता-शिव शंकर महतो, ग्राम-मोहची सुगर, पोस्ट-घोघा, थाना-गोपालपुर, जिला-बेतिया, पश्चिम चम्पारण। 1. श्री रविन्द्र महतो, पिता-स्व0 महेन्द्र महतो, ग्राम-मोहची सुगर, पोस्ट-घोघा, थाना-गोपालपुर, जिला-बेतिया, पश्चिम चम्पारण।
7 09/2022 1. मकसूदन प्रसाद, पिता-स्व0 रामशरण प्रसाद, ग्राम-दिउलिया, पोस्टथाना-जगदीशपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 1. कान्हा मियां, पिता-स्व0 मुल्तान मियां, ग्राम-वृति टोला, पोस्टथाना-जगदीशपुर, जिला-पश्चिम चम्पारण।
8 11/2022 1. अंगुर अंसारी, वल्द हकीम अंसारी, साकिन-सोहसा फुजवरिया, पोस्ट-मेघवल मठिया, थाना-रामनगर, जिला-पश्चिम चम्पारण। 1. समीर अ सारी, ं वल्द मुगलेआजम अ सारी, ं साकिन-सोहसा फ ुजवरिया, पोस्ट-मेघवल मठिया, थाना-रामनगर, जिला-पश्चिम चम्पारण।
9 02/2021 1. Shir Manhar Krishna, Director, Aparna Detective and Security Service Pvt. Ltd Janani Mata Mandir, Rajendra Path Primuhani, Patna 1. Md. Alamdi S/O Late Sadik Main, Vill- Pipra Kuti, P.O & P.S- Balmiki Nagar, Dist- West Champaran 2. Shambhu Bhagat S/O Late Sukdeo Bhagat, Vill- Charchharia, P.O & P.S-Balmiki Nagar, Dist-West Champaran 3. Project Manager, Bihar State Hydro- electri power Corporation, Balmiki Nagar Dist- West Champaran 4. Assistant Labour Commissioner, Bettiah Dist-West Champaran.
17 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 18

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव रंजन, संयुक्त सचिव।

------- गृह विभाग अभियोजन निदेशालय मुख्य सचिवालय, ब्लॉक-2, द्वितीय तल, पटना-15 ------- अधिसूचना 24 दिसम्बर 2024

सं0 अ0नि0 (01) 59/2023 स्था0(खण्ड)-2900--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 19300 दिनांक 13.10.2023 में निहित अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था के तहत बिहार अभियोजन सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को जिला अभियोजन पदाधिकारी/समकक्ष स्तर में उसके विहित वेतनमान (वेतन स्तर-13) सहित अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार दिया जाता हैः-

क्रमांक पदाधिकारी का नाम एवं गृह जिला वरीयता क्रमांक 2007 के अनुसार वर्तमान कोटि
1. 2. 3. 4.
1 श्री मनोज सिंह पटना 224 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
2 श्री सुरेश कुमार भोजपुर (आरा) 227 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
3 श्री विजय कान्त ठाकुर मुजफ्फरपुर 228 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
4 श्री उमेश कुमार नालंदा 230 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
5 श्री रविशंकर दूबे कैमूर(भभुआ) 231 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
6 श्री सोमांशु शंकर पटना 232 अनु0 अभि0 पदा0, से0ग्रे0/अपर लोक अभियोजक, से0ग्रे0
19 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

शर्तो के अधीन है।

3. उपर्युक्त पदाधिकारियोें द्वारा वर्तमान में धारित पद को अगले आदेश तक जिला अभियोजन पदाधिकारी/समकक्ष स्तर (विहित वेतनमान-वेतन स्तर-13) में उत्क्रमित किया जाता है।

4. उपर्युक्त पदाधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की तिथि से जिला अभियोजन पदाधिकारी/समकक्ष स्तर के पद पर अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार का आर्थिक लाभ देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुधांशु कुमार चौबे, अपर सचिव-सह-प्रभारी निदेशक।

------- कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग ------- अधिसूचनाएं 20 दिसम्बर 2024 सं0 कारा/प्रो0(स्था0)-10-40/14-457--श्री अरूण कुमार-1, प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, हाजीपुर की नियुक्ति 53-55वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से विभागीय अधिसूचना संख्या-219 दिनांक-29.10.2013 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा के अंतर्गत परीक्ष्यमान प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर की गई थी तथा उनकी सेवा सम्पुष्टि विभागीय अधिसूचना संख्या-84 दिनांक-23.03.2018 द्वारा की गयी है। 2. श्री कुमार को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना के विज्ञापन सं0-AP-GEOG-12/20-21, अंतर्गत आयोग द्वारा निर्गत चयनित अभ्यार्थियों की सूचना सं0-B.S.U.S.c/ विज्ञा0-17/2023 (खण्ड-11)-1981 दिनांक-28.10. 2024 (क्रम सं0-13 पर) द्वारा श्री अरूण कुमार-1, प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, हाजीपुर को भूगोल विषय के सहायक प्राध्यापक (L-10) के पद पर अंतिम रूप से चयन के उपरांत वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा आवंटित किया गया है। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा से विरमित करने का अनुरोध किया गया है। 3. विभागीय आदेश ज्ञापांक-289 दिनांक-24.12.2020 द्वारा श्री अरूण कुमार-1 को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित परीक्षा/साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गयी है। 4. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री अरूण कुमार-1, प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, हाजीपुर को बिहार सेवा संहिता में वर्णित प्रावधानों के आलोक में सहायक प्राध्यापक (L-10) के पद पर योगदान करने हेतु पदभार त्याग की तिथि से विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव सह-निदेशक (प्र0)।

------ 10 दिसम्बर 2024 सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-07/2024-432--श्री निशांत, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, बेतिया की नियुक्ति 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से विभागीय अधिसूचना संख्या-10333 दिनांक-16.12.2021 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा के अंतर्गत परीक्ष्यमान प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर की गई थी तथा उनकी सेवा सम्पुष्टि विभागीय अधिसूचना संख्या-276 दिनांक-30.07.2024 द्वारा की गयी है। 2. श्री निशांत को बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नगर कार्यपालक पदाधिकारी के पद हेतु अनुशंसित किया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना सं0-1000 दिनांक-07.02.2024 द्वारा औपबंधिक रूप से नियुक्त करते हुए नगर कार्यपालक पदाधिकारी (वेतन स्तर-7) के पद पर अधिसूचना निर्गत की तिथि से 05 कार्य दिवसों के अन्दर पदस्थापन स्थल पर योगदान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। उक्त के आलोक में श्री निशांत द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा से विरमित करने का अनुरोध किया गया है। 3. विभागीय आदेश ज्ञापांक-356 दिनांक-06.12.2022 द्वारा श्री निशांत को बिहार लोक सेवा आयोग, पटना द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गयी है। 4. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री निशांत, प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, बेतिया को बिहार सेवा संहिता में वर्णित प्रावधानों के आलोक में नगर कार्यपालक पदाधिकारी (वेतन स्तर-7) के पद पर योगदान करने हेतु पदभार त्याग की तिथि से विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव सह-निदेशक (प्र0)।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 20 27 नवम्बर 2024 सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-09/2023-417--बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 66वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर सुश्री अल्पना पाण्डेय, प्रशिक्षु प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, मोतिहारी को विभागीय अधिसूचना संख्या-13258 दिनांक-08.12.2022 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा अंतर्गत परीक्ष्यमान प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति किया गया।

2. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षण और विभागाध्यक्ष उत्तर प्रदेश, लखनऊ के वनादेश संख्या-ई-128/10-4-4(2021), लखनऊ दिनांक-09.03.2023 द्वारा क्षेत्रीय वन अधिकारी परीक्षा-2021 के अन्तर्गत क्षेत्रीय वन अधिकारी के पद (वेतनमान रूपये 47,600-1,51,100/- पे लेवल-08) पर योगदान समर्पित करने हेतु सुश्री अल्पना पाण्डेय दिनांक-11.03.2023 के प्रभाव से प्रशिक्षण अवधि में त्याग-पत्र स्वीकृत करने का अनुरोध कर प्रस्थान कर गई। 3. तदोपरान्त सुश्री पाण्डेय द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से प्रतिवेदित किया गया कि वे बिना किसी दवाब में स्वेच्छा से त्याग पत्र समर्पित कर रही है तथा भविष्य में प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर किसी तरह का दावा नहीं करेगी और विभाग के सभी नियमों का पालन करेगी। 4. अतः सुश्री अल्पना पाण्डेय, तत्कालीन प्रशिक्षु प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, मोतिहारी से प्राप्त अभ्यावेदन के आलोक में उनके द्वारा समर्पित त्याग पत्र दिनांक- 11.03.2023 के प्रभाव से स्वीकृत किया जाता है। भविष्य में इस पद पर नियुक्ति हेतु इनका कोई दावा मान्य नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव।

------ 20 नवम्बर 2024 सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-16/2021(पार्ट-3)-405--बिहार प्रोबेशन सेवा के निम्नांकित प्रोबेशन पदाधिकारियों को निर्धारित अहर्त्ता पूर्ण करने के फलस्वरुप उनके नाम के सामने स्तम्भ-5 (पाँच) में अंकित तिथि से सेवा संपुष्ट की जाती हैः-

क्र पदाधिकारी का नाम प्रोबेशन पदाधिकारी के पद पर योगदान की तिथि नियुक्ति का श्रोत सेवा सम्पुष्टि की तिथि
1 2 3 4 5
1 श्री सौरभ सेतु 19.12.2022 सीधी भर्त्ती 27.07.2024
2 श्री श्याम कमार 10.10.2020 सीधी भर्त्ती 01.07.2023
3 सुश्री रूचि कुमारी 20.12.2022 सीधी भर्त्ती 23.02.2024
4 श्री अतुल रंजन 02.07.2019 सीधी भर्त्ती 26.06.2023
5 सुश्री श्रेया सुमन 16.12.2022 सीधी भर्त्ती 18.07.2024
6 श्री आदित्य सौरभ 21.12.2022 सीधी भर्त्ती 21.12.2023
7 श्री अविनाश कुमार चौधरी 26.12.2021 सीधी भर्त्ती 20.05.2024
8 मो0 सद्दाम हुसैन 09.01.2023 सीधी भर्त्ती 30.07.2024
9 सुश्री श्रेयसी 16.12.2022 सीधी भर्त्ती 30.07.2024
10 श्री अमरदीप कुमार 21.01.2023 सीधी भर्त्ती 21.01.2024
11 श्री ऐश्वर्य रंजन 16.12.2022 सीधी भर्त्ती 16.12.2023
12 श्रीमती स्मृति कुमारी 22.12.2021 सीधी भर्त्ती 18.07.2024
13 श्रीमती श्रद्धा सुमन 15.12.2022 सीधी भर्त्ती 27.04.2024
14 श्रीमती सीमा कुमारी, 15.12.2022 सीधी भर्त्ती 15.12.2023
15 सुश्री स्नेहा साल्वी 19.12.2022 सीधी भर्त्ती 19.12.2023
16 श्री चन्द्रशेखर सिंह 19.12.2022 सीधी भर्त्ती 22.06.2024
17 श्री शोभित श्रीवास्तव 27.01.2023 सीधी भर्त्ती 27.01.2024

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव।21 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

परिवहन विभाग

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अधिसूचना

26 दिसम्बर 2024

सं0 02/शमन-03/2016, परि0-14783--पटना शहरी क्षेत्र में तिपहिया वाहनों का अव्यवस्थित परिचालन एवं शहर के मुख्य मार्गों पर जहाँ-तहाँ वाहनों के ठहराव के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है, जिसके कारण सुचारु रुप से वाहनों के परिचालन एवं पैदल यात्रियों को आवागमन में अत्यधिक कठिनाई होती है तथा ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। इस हेतु आवश्यक है कि तिपहिया वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने हेतु परमिट की जाँच की जाय, ताकि सभी तिपहिया वाहन अपने निर्धारित मार्ग पर ही परिचालित हाें, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाया जा सके।

उपर्युक्त पर सम्यक्‌ विचारोपरांत पटना नगर निगम क्षेत्र में पदस्थापित सभी पुलिस अवर निरीक्षकों एवं उनसे वरीय पुलिस पदाधिकारियों को बिना वैध परमिट के तिपहिया वाहनों का परिचालन किये जाने की जाँच करने एवं तद्‌नुरुप नियमानुसार उनपर शास्ति अधिरोपित करने हेतु मोटरयान अधिनियम, 1988-सहपठित-मोटरयान (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा-192A के तहत्‌ विनिर्दिष्ट दण्डनीय अपराधों के लिए शमन की शक्ति प्रदान की जाती है। 2. यह अधिसूचना इसके निर्गमन की तिथि से अगले आदेश तक के लिए प्रभावी होगी।

बिहार के राज्यपाल के आदेश से, संजय कुमार अग्रवाल, सचिव।

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योजना एवं विकास विभाग

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अधिसूचना

27 दिसम्बर 2024

सं0 यो0स्था04/2-09/2021 7278 /यो0वि0--श्री कृष्णनन्दन प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, सुपौल के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सुपौल के पत्रांक 180-1/गो0 दिनांक 18.06.2021 द्वारा विहित प्रपत्र में आरोप पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया। श्री सिंह के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सुपौल द्वारा मुख्यतः बिना अवकाश आवेदन दिये एवं बिना जिला पदाधिकारी की पूर्वानुमति के मुख्यालय से बाहर रहने, सरकारी मोबाईल बंद रखने एवं विभागीय कार्यों के प्रति अभिरूचि नहीं लेने से संबंधित आरोप प्रतिवेदित किये गये, जिसके आलोक में श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 9(1)(क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या- 2047 दिनांक 02.07.2021 द्वारा निलंबित करते हुए नियम-17(3) के तहत आरोप पत्र गठित किया गया तथा इन आरोपों के लिए समर्पित स्पष्टीकरण संतोषप्रद नहीं पाये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना संख्या-772 दिनांक-21.02.2022 द्वारा श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) निमयावली, 2005 के नियम-14(i) के तहत निन्दन एवं 14(v) के तहत संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतन वृद्धियों पर रोक का लघु दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है। 2. ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-5760 दिनांक-26.09.2024 द्वारा श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता की सेवानिवृति की तिथि दिनांक-31.10.2023 होने के कारण विभागीय अधिसूचना संख्या-772 दिनांक-21.02.2022 द्वारा दिये गये दंड असंचयी प्रभाव से 03 वेतन वृद्धि पर रोक का अनुपालन नहीं होने की सूचना देते हुए स्पष्ट मंतव्य की अपेक्षा की गयी तथा मंतव्य से सीधे महालेखाकार, बिहार, पटना को उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है। चूँकि श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के सेवानिवृति की तिथि-31.10.2023 होने के कारण उक्त दण्ड के आलोक में उनके वेतन वृद्धि से दो वेतन वृद्धि की कटौती ही संभव हो पायी और तीसरे की कटौती संभव नहीं हो पायी। उक्त के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य प्राप्त किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त दण्ड के फलस्वरूप श्री सिंह के वेतन वृद्धि रोके जाने की अवधि (दिनांक-21.02.2022 से दिनांक-30.06.2024) के पूर्व ही दिनांक-31.10.2023 को सेवानिवृत होने के कारण असंचयी प्रभाव से वेतन वृद्धि रोके जाने के लघु दण्ड का श्री सिंह पर दुष्प्रभाव संचयी प्रभाव से वेतन वृद्धि रोके जाने के वृहद दण्ड के समान हो रहा है। अतएव बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-28 में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दंड के पुनरीक्षण का प्रावधान है तथा नियम-29 के प्रावधान के तहत पुनरीक्षण हेतु निर्धारित समय-सीमा को शिथिल करने तथा विलंब को माफ करने की शक्ति भी अनुशासनिक प्राधिकार में है, वर्णित प्रावधानों का उपयोग करते हुए दंडादेश का पुनरीक्षण कर प्रतिस्थानी (Substituted) दंडादेश निर्गत किये जाने का परामर्श दिया गया है। निर्गत प्रतिस्थानी (Substituted) दंडादेश उसी तिथि से प्रभावी होगा जिस तिथि को मूल दंडादेश निर्गत किया गया है। अतएव सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिये गये परामर्श के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-28 एवं 29 में वर्णित प्रावधानों के तहत विलंब को माफ22 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 कर विभागीय अधिसूचना संख्या-772 दिनांक-21.02.2022 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दण्ड को शिथिल एवं पुनरीक्षित करते हुए श्री सिंह के विरूद्ध एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दण्ड में परिवर्तित किया जाता है। 3. इस पुनरीक्षण का प्रभाव पूर्व में अधिसूचित दंड की तिथि से प्रभावी होगा। 4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रणजीत कुमार, अपर सचिव ।

------ Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------ Office Order The 17th December 2024

No. XI-K-रा0-02/2024-301---In the light of proposal received from District Magistrate, Gaya vide letter no.-1085, dated- 13.12.2024 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
01 Sri Ajay Kumar Singh DAO, Gaya District Level
02 Sri Rajeev Kumar Singh DMSFC, Gaya District Level
03 Sri Avneet kumar Sinha ADPRO, Gaya District Level
04 Smt Rashmi Verma DPO, (ICDS), Gaya District Level
05 Sri Shivnath Thakur Deputy Muncipal Commissioner, Gaya District Level
06 Sri Sanjay Kumar DWO, Gaya District Level
07 Sri Abhay Kumar Singh District Planning Officer, Gaya District Level
08 Sri Jitendra Kumar DSO, Gaya District LeveL
09 Sri Nikesh Kumar DCO, Gaya District LeveL
10 Sri Avinash Kumar Incharge Assistant Director Social Security Cell, Gaya District LeveL
11 Sri Ravi Kumar District Provident Fund Officer, Gaya District LeveL
12 Sri Rajnikant Kumar District National Saving Officer, Gaya District LeveL
13 Sri Naresh Kumar Chauhan District Sports Officer, Gaya District LeveL
14 Smt Priya Bharti DPO, Education, Gaya District LeveL
15 Sri Mahesh Chandra Jha Lebour Suprintendent, Gaya District LeveL
16 Sri Rahul Kumar Assistant Director, Minirioty Welfare, Gaya District LeveL
17 Sri Kartik Kumar Mining Development Officer, Gaya District LeveL
18 Miss Bandana Kumari GM, DIC, Gaya District LeveL
19 Smt Bandana Kumari State tax Assistant Commissioner, Gaya District Level
20 Sri (Dr.) Om Prakash DEO, Gaya District Level
21 Sri Durga Yadav DPO, SSA, Gaya District Level
22 Sri Mukesh Kumar District Settlement Officer, Gaya District Level
23 Smt. Aakriti Dev District Employment Officer, Gaya District LeveL
24 Sri Dipak Chandra Dev DPRO, Gaya Sub Divisional Level
25 Sri Santosh Kumar Sub Planning Officer, Gaya Sub Divisional Level
26 Sri Abhishek Kumar Sub Planning Officer, Gaya Sub Divisional Level
27 Sri Sambhu Mandal Executive Magistrate, Sadar Sub Divisional Level
28 Sri Ranjit Kumar Ranjan DCLR, Sherghati Sherghati Sub Divisional Level
29 Sri Amit Vikram Bainami DCLR, Tikari Tikari Sub Divisional Level
30 Sri Pravin Chandan DCLR, Neemchak Bathani Neemchak Bathani Sub Divisional Level
31 Sri Nirmal Kumar Executive Magistrate, Sherghati Sherghati Sub Divisional Level
32 Sri Abhishek Anand Executive Officer, Nagar Prishad, Bodhgaya Sadar Sub Divisional Level
33 Sri Suraj Prakash Block Panchayat Raj Officer Amas Block Level
34 Sri Aditya Anand Block Panchayat Raj Officer Atri Block Level
35 Sri Naresh Kumar Block Panchayat Raj Officer Barachati Block Level
36 Smita Verma Block Panchayat Raj Officer Belaganj Block Level
37 Sri Nikhil Raj Block Panchayat Raj Officer Bankebazar Block Level
38 Smt Anju Kumari Block Panchayat Raj Officer Bodhgaya Block Level
39 Sobha Kumari Block Panchayat Raj Officer Dumariya Block Level
40 Sri Amitesh Kumar Block Panchayat Raj Officer Dobhi Block Level
41 Sri Pramod Kumar Saw Block Panchayat Raj Officer Fatehpur Block Level
42 Sri Ranjit Swastha Block Panchayat Raj Officer Nagar Block Level
43 Sri Agrasar Raj Block Panchayat Raj Officer Guraru Block Level
44 Sri Agrasar Raj Block Panchayat Raj Officer Gurua Block Level
45 Sobha Kumari Block Panchayat Raj Officer Imamganj Block Level
46 Sri Amardeep Chaudhary Block Panchayat Raj Officer Khizarsarai Block Level
47 Sri Lucky Singh Block Panchayat Raj Officer Konch Block Level
48 Sri Ranjit Swastha Block Panchayat Raj Officer Manpur Block Level
49 Sri Vijay Kumar Block Panchayat Raj Officer Mohanpur Block Level
50 Sri Vikash Kumar Block Panchayat Raj Officer Mohara Block Level
51 Sri Vikash Kumar Block Panchayat Raj Officer Neemchak Bathani Block Level
52 Sri Vijay Kumar Block Panchayat Raj Officer Paraiya Block Level
53 Sri Vijay Kumar Block Panchayat Raj Officer Sherghati Block Level
54 Sri Pramod Kumar Saw Block Panchayat Raj Officer Tankuppa Block Level
55 Sri Saurabh Kumar Block Panchayat Raj Officer Tikari Block Level
56 Sri Kumar Gaurav Block Panchayat Raj Officer Wazirganj Block Level
57 Smt Khusboo Shri Block Co-oprative Officer Paraiya Block Level
58 Sri Raju Sharma Block Co-oprative Officer Atri Block Level
59 Sri Priyeranjan Kumar Block Co-oprative Officer Belaganj Block Level
60 Sri Lalmani Block Co-oprative Officer Bodhgaya Block Level
61 Sri Dilip Joshi Block Co-oprative Officer Fatehpur Block Level
62 Sri Vikash Kumar Block Co-oprative Officer Manpur Block Level
63 Sri Suraj Kumar Block Co-oprative Officer Tankuppa Block Level
64 Sri Shashikant Kumar Block Co-oprative Officer Neemchak Bathani Block Level
65 Sri Amit Kumar Block Co-oprative Officer Konch Block Level
66 Sri Raj Raushan Block Co-oprative Officer Nagar Block Level
67 Sri Amit Ranjan Block Co-oprative Officer Konch Block Level
68 Sri Vicky Kumar Block Co-oprative Officer Wazirganj Block Level
69 Sri Munindra kumar Block Co-oprative Officer Amas Block Level
70 Sri Mrityunjay Pandey Block Co-oprative Officer Barachati Block Level
71 Sri Kunal Kumar Block Co-oprative Officer Bankebajar Block Level
72 Sri Vipin Kumar Block Co-oprative Officer Dobhi Block Level
73 Md. Sajid Block Co-oprative Officer Dumriya Block Level
74 Sri Shankar Kumar Block Co-oprative Officer Mohanpur Block Level
75 Sri Vikash Singh Block Co-oprative Officer Sherghati Block Level
76 Tushar Anal Chandra Block Co-oprative Officer Sherghati Block Level
77 Sri Mahesh Kumar Gupta Block Co-oprative Officer Dumriya Block Level
23 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 24 25 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

Order of Commissioner, Magadh Division, Gaya dt. 17.12.2024

Sd/-Illegible, Secretary to Commissioner.

Magadh Division, Gaya

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The 17th December 2024

No. XI-K-रा0-03/2024-302---In the light of proposal received from District Magistrate, Jehanabad vide letter no.-471, dated- 27.11.2024 the power of certificate officer has been delegated to following officers for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914.

Sl. No. Officers Name Designation Remarks
1 Sri Sharad Chandra Jhunjhunwala ATO, Jehanabad District Level
2 Sri Dinanath Singh Executive Officer, Nagar Parishad, Jehanabad District Level
3 Sri Nityanand Kumar Excise Suprintendent, Jehanabad District Level
4 Sri Ahmad Ali Raza District Fishries Officer, Jehanabad District Level
5 Sri Yaduwans Joint Commissioner, State Tax, Jehanabad District Level
6 Miss. Puja Kumari GM-cum-Project Manager DIC, Jahanabad District Level
7 Sri Rajendra Kumar Das DM SFC, Jehanabad District Level
8 Smt Rachana DPO, ICDS, Jehanabad District Level
9 Smt Rashmi Rekha DEO, Jehanabad District Level
10 Smt Srishti Singh District Planning Officer, Jehanabad District Level
11 Smt Sweta Priya Assistant Director (Chem.), Soil Testing Laboratory, Jehanabad District Level
12 Sri Rakesh Kumar Deputy Project Director (ATMA), Jehanabad District Level
13 Sri Rajanikant Subdivisional Welfare Officer, Jehanabad Jehanabad Subdivisional Level
14 Sri Mukesh Kumar Assistant Supply Officer, Subdivision, Jehanabad Jehanabad Subdivisional Level
15 Smt. Neha Subdivisional Agriculture Officer, Jehanabad Jehanabad Subdivisional Level
16 Sri Vinit Kumar Subdivisional Welfare Officer (SC/ST), Jehanabad Jehanabad Subdivisional Level
17 Sri Rahul Kumar Sub Election Officer, Jehanabad Jehanabad Subdivisional Level
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 26

Sd/-Illegible, Secretary to Commissioner.

Magadh Division, Gaya

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 41—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

27 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

भाग-2

बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम

आदि।

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कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग -------

अधिसूचना (श्ुाद्धि पत्र) 3 दिसम्बर 2024 सं0 कारा/स्था0(प्रो0)-01-16/2021(पार्ट-3)-423--अधिसूचना संख्या कारा/स्था0(प्रो0)-01-16/2021 (पार्ट-3) -405 दिनांक-20.11.2024 द्वारा बिहार प्रोबेशन सेवा के प्रोबेशन पदाधिकारियों की सेवा संपुष्टि की गई है। उक्त अधिसूचना के क्रमांक-02 के कॉलम-02 में अंकित नाम श्री श्याम कमार के स्थान पर श्री श्याम कुमार एवं क्रमांक-07 के कॉलम-03 में अंकित योगदान की तिथि दिनांक-26.12.2021 के स्थान पर 26.12.2022 पढ़ा जाये। 2. शेष सभी यथावत्‌ समझा जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 41—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 28

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द । ————— सूचना -------

No. 1210--I, Ravi Ranjan Kumar S/o Sri Bhagwat Bhagat, R/o Village Maina Mahpura, P.S.-Mahishi. Distt.-Saharsa, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-17060 dt. 18.07.24 that I have passed the examination for degree of Doctor of Philosophy in law faculty from Patna University in the year 2017 As per guideline 2009 Degree arwarded to me the title of Doctor to be written before my name. Now I will be known as Dr. Ravi Ranjan Kumar for all future pruposes.

Ravi Ranjan Kumar.

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No. 1215--I, Sanyukta Kumari W/o Ajay Kumar R/o D.S. Central Shcool, Son Nagar Barun, Aurangabad Bihar 824112 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 10823 dt. 14.11.24 that my name is written in my Son's Aditya Prakash 10th educational documents as Sanyukta Devi which is wrong. As per Aadhar Card my correct name is Sanyukta Kumari. Sanyukta Devi and Sanyukta Kumari both are same and one person. From now I will be konwn as Sanyukta Kumari for all purposes.

Sanyukta Kumari.

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No. 1216--I, Shachi W/o Ramit Gunjan R/o Flat No.-203 Parvati Anand Apartment Road No.-01, Near Pani Tanki, West Shivpuri, Boring Road, Phulwari, Patna, Bihar-800023, do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-696 dt. 5.10.24 that my name is written in my son Divyansh Gunjan's Class Xth all educational documents as Shachi Gunjan which is worng. As per aadhar Card my correct name is Shachi, Shachi Gunjan and Shachi both are same and one person. From now I will be known as Shachi for all purposes.

Shachi.

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सं0 1217--मैं विश्वजीत कुमार सिंह, पिता-सन्त प्रसाद सिंह, ग्राम-माधोपुर, अमनार, पो0-नारायणपुर, थाना-एकंगरसराय, जिला-नालंदा, बिहार शपथ पत्र संख्या 3057 दिनांक 10.09.2024 के द्वारा घोषणा करता हूँ कि मेरा पुत्र अमित कुमार सिंह अब अमित कुमार के नाम से जाना जायेगा।

विश्वजीत कुमार सिंह। No. 1217--I, VISHVAJIT Kumar Singh S/o Sant Prasad Singh R/o Vill.-Madhopur Amnar, PO-Narayanpur, PS-Ekanagarsarai Dist.-Nalanda, Bihar declare vide affidavit no. 3057 dated 10.9.24 my son Amit Kumar Singh will be known as Amit Kumar.

VISHVAJIT Kumar Singh.

29 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ------- अधिसूचना 1 अगस्त 2024 बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2024

सं0 01-बिहार रेरा, सामान्य विनियमावली, 2024 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 85 के अधीन, प्रदत्त शक्तियों के अन्तर्गत बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, एतद्‌ द्वारा निम्नलिखित विनियमावली बनाती हैः- 1 संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और अनुप्रयोगः (1) यह विनियमावली बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2024 कही जा सकेगी। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा।

(3) यह विनियमावली तत्काल प्रभाव से लागू होगी। (4) यह विनियमावली बिहार राज्य में भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मामलों के संबंध में लागू होगी।

2 परिभाषाएँ-

(1) इस विनियमावली में, जबतक कि संदर्भ में अन्यथा आवश्यक न हो-

(i) ''अधिनियम''से तात्पर्य है भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016(समय-समय पर यथा संशोधित);

(ii) ''आवेदन पत्र'' प्राधिकरण के समक्ष भू-सम्पदा परियोजना के पंजीकरण के लिए आवेदन-पत्र का अर्थ है रेरा अधिनियम, 2016 बिहार रेरा नियमावली, 2017 के अनुसार और इसके अधीन बनाए गये विनियम तथा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर इस संबंध में निर्गत आदेश/निदेश के अनुसार सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन तथा सभी अपेक्षित दस्तावेज एवं निर्धारित शुल्क/विलम्ब प्रभार या अतिरिक्त शुल्क के साथ आवेदन करना।

(iii) ''न्याय निर्णय' से तात्पर्य है, अधिनियम की धारा 31 के अन्तर्गत या अधिनियम की धारा 71 के साथ पठित धारा 31 के अन्तर्गत, प्राधिकरण द्वारा प्राप्त शिकायतों पर न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा प्राप्त निर्णय लेने की प्रक्रिया।

(iv) ''प्राधिकार" से तात्पर्य है बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण। (v) ''अध्यक्ष'' से अभिप्रेत है प्राधिकरण का अध्यक्ष। (vi) ''परामर्शी'' से अभिप्रेत है, अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों एवं विनियमों के अंतर्गत प्राधिकरण द्वारा निपटाए जाने वाले अपेक्षित मामलों पर प्राधिकरण को अल्पकालिक आधार पर सहायता प्रदान करना। इसमें कोई भी व्यक्ति या कोई संगठन शामिल है (जो प्राधिकरण के नियमित रोजगार में नहीं है) नियुक्त हो सकता है,

(vii) ''प्रपत्र'' इसका तात्पर्य रेरा अधिनियम, 2016 के नियमों और विनियमों में विनिर्दिष्ट प्रपत्र और प्रपत्रों से है।;

(viii) ''सदस्य'' से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 21 के अन्तर्गत अधिसूचित सदस्य, जिन्हें अधिनियम या नियमों के तहत किसी भी जिम्मेवारी या अधिकार का प्रयोग करने के उद्देश्य से नियुक्त किया गया हो;

(ix) ''अधिकारी'' से अभिप्रेत है प्राधिकरण का कोई अधिकारी; (x) ''कार्यवाही'' से तात्पर्य है अधिनियम एवं नियमों तथा विनियमों के तहत प्राधिकरण द्वारा बनाये गये अपने कार्यों के निर्वहन के क्रम में सभी प्रकार की कार्यवाहियों से है।

(xi) ''विनियमन'' से तात्पर्य है बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2024 (xii) ''नियम'' सेतात्पर्य है बिहार सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत बनाई गई बिहार भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2017 (समय समय पर संशोधित)। (xiii) ''सचिव'' से अभिप्रेत है प्राधिकरण का सचिव। (xiv) ''धारा'' से तात्पर्य है भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा। (xv) ''संपति'' से तात्पर्य है किसी भी प्रकार की संपति, चाहे वह चल या अचल हो और ऐसी संपति में जिसमें कोई अधिकार या हित शामिल हो।

(xvi) ''विलम्ब शुल्क''ः- यथास्थिति, संप्रवर्तक या एजेंट को प्राधिकरण को विलम्ब शुल्क उन दरों पर देना होगा, जैसा कि प्राधिकरण के विनियमों, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्धारित किया जा सकता है, जिसे समय-समय पर प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 30 (xvii) ''अतिरिक्त प्रभार''ः- यथास्थिति, संप्रवर्तक या एजेंट को प्राधिकरण को उन दरों पर अतिरिक्त प्रभार का भुगतान करना होगा, जैसा कि प्राधिकरण के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्धारित किया जा सकता है तथा समय-समय पर प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

(xviii) ''बुकिंग राशि'' का अर्थ है फ्लैट/भू-खंड/घर खरीद्‌दार द्वारा फ्लैट/भू-खंड/घर की बुकिंग के समय प्रोमोटर को रेरा अधिनियम की धारा- 13(1) के अनुसार तय कीमत पर इसे खरीदने के उद्देश्य से अग्रिम भुगतान या आवेदन शुल्क या किसी भी नाम की कोई राशि के रूप में भुगतान की गयी हो। (2) इन विनियमों में आने वाले तथा इसमें परिभाषित नहीं किये गये किन्तु अधिनियम या नियमों में परिभाषित शब्दों या अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो अधिनियम और उसके अधीन बनाये गये नियमों में दिया गया है।

3 वास्तुविद, अभियंता और चार्टड एकाउन्टेंट के प्रमाण-पत्रोें के प्रपत्र-धारा 4(2)(एल)(डी) के तहत संधारित किये गये खाते से पैसे निकालने के लिए परियोजना वास्तुकार, परियोजना अभियंता और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्र क्रमशः प्रपत्र 1, 2 और 3 में होंगे और साथ ही चल रही परियोजनाओं के पंजीकरण के आवेदन के साथ और विनियमन 9(3) के तहत निर्दिष्ट प्रपत्र-7 के साथ प्रस्तुत किए जाएंगे।

स्पष्टीकरण 1. भू-सम्पदा परियोजना हेतु खोले गये खाते से राशि की निकासी हेतु परियोजना की प्रगति को सत्यापित करने वाला चार्टर्ड अकाउंटेंट तथा वह चार्टर्ड अकाउंटेंट जो प्रोमोटर के उद्यम का सांविधिक लेखा परीक्षक हो दोनों भिन्न होने चाहिए।

स्पष्टीकरण 2. यदि व्यवसायरत्‌ चार्टर्ड अकाउंटेंट, जो प्रोमोटर के उद्‌यम का सांविधिक लेखा परीक्षक नहीं है, द्वारा जारी प्रपत्र संख्या 4 से पता चलता है कि परियोजना वास्तुकार, इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा पृथक बैंक खाते से निधियों की निकासी के लिए जारी किए गए किसी प्रमाण पत्र में गलत या असत्य है और किसी विशेष परियोजना के लिए एकत्रित राशि का उपयोग उसी परियोजना के लिए नहीं किया गया है और राशि की निकासी परियोजना कार्य के पूरा होने के प्रतिशत के अनुपात के अनुपालन में नहीं की गई है, तो प्राधिकरण अधिनियम और नियमों में विनिहित दंडात्मक कार्रवाई करने के अतिरिक्त, अपने विवेकानुसार, वास्तुकार, इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट, जैसा भी मामला हो, सेे संबं धित नियामक निकाय के पास उक्त पेशेवरों के विरूद्ध आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई के लिए मामला उठा सकता है, जिसमें व्यवसाय के लिए सदस्यता का पंजीकरण रद्‌द करना भी शामिल हो सकता है।

4 भू-खंड विकास परियोजनाओं में विभिन्न प्रमाण पत्रों के प्रपत्र-भू-खंड विकास परियोजनाओं के मामले में धारा 4(2)(एल)(डी) के तहत बनाए गए अलग खाते से पैसे निकालने के लिए विभिन्न प्रमाण पत्र भू-खंड विकास परियोजना के विवरण के अनुसार लागू संदर्भ संशोधन के साथ प्रपत्र 1, 2 और 3 में होंगे।

5 अधिनियम की धारा 4 या धारा 6 या धारा 9 के अंतर्गत प्रस्तुत प्रत्येक आवेदन को सभी विवरण, प्रासंगिक दस्तावेजों और निर्धारित शुल्क के साथ-साथ अतिरिक्त प्रभार, विलंब प्रभार, यदि कोई हो, के साथ प्राधिकरण को ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाएगा।

(1) प्रोमोटर को पंजीकरण के लिए आवेदन-पत्र एक शपथ-पत्र के साथ प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह उल्लेख होगा कि फ्लैटों, दुकानों, अपार्टमेंटाें, पार्किंंग/गैरेज सहित टावरों, अन्य यदि कोई हो, और भूखंडों का शेयर विशेष रूप से विपणन के लिए इसके हिस्से में उपलब्ध है और इसका उल्लेख प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले पंजीकरण प्रमाण-पत्र में किया जाएगा।

(2) यदि कोई प्रोमोटर या एजेंट, जैसा भी मामला हो, योग्यता के आधार पर प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट अवधि के भीतर उनके द्वारा समर्पित आवेदन में पाई गई कमी को दूर करने का अवसर दिए जाने के बाद भी अधिनियम, नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अनुसार सभी अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफलरहता है या पंजीकरण की अन्य आवश्यकताओं का पालन नहीं करता है, तो उसे अपूर्ण माना जाएगा और ऐसे आवेदन अस्वीकार करने योग्य होंगे।

(3)यदि आवेदन में त्रुटि बनी रहती है और आवेदन अधिनियम एवं उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अनुसार पूर्ण नहीं है, तो आवेदक को नोटिस जारी करने की तिथि से 7 दिनों की अवधि का अग्रिम नोटिस दिए जाने के पष्चात्‌ तथा मामले में सुनवाई का अवसर देने के प्श्चात्‌ अधिनियम की धारा 5(1)(ख) के प्रावधानों के अनुसार इसे अस्वीकार किया जा सकेगा।

(4) यदि उपर्युक्त विनियमन 5(3) के अन्तर्गत, प्रोमोटर या एजेंट, जैसा भी मामला हो यदि किसी आवेदन को नियमानुसार अस्वीकृत कर दिया जाता है तो वह शुल्क/विलंब शुल्क/अतिरिक्त शुल्क, जैसा भी मामला हो, के साथ प्राधिकरण को नया आवेदन कर सकता है, मानो यह पंजीकरण प्राप्ति के लिए एक नया आवेदन है।

(5) परियोजना के पूर्ण होने की चरणबद्ध समय-सारिणी, निर्माण कार्य के विकास की विभिन्न चरणों का माइल स्टोन चार्ट के रूप में विवरण देते हुए परियोजना के भवन/टावर/ब्लॉक-वार प्रमोटर द्वारा रेरा, बिहार के वेबसाइट पर परियोजना के वेबपेज पर पंजीकरण के 30 दिनों के अन्दर अपलोड किया जाएगा।

(6) प्रोमोटर को बिहार भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) नियमावली 2017 में विनिर्दिष्ट प्रपत्र 'इ' में परियोजना के पंजीकरण के विस्तार के लिए आवेदन के साथ संशोधित समापन तिथि के भीतर पूरा किए जाने वाले परियोजना के विकास कार्यों के विभिन्न चरणों का संशोधित माईल स्टोन चार्ट का विवरण प्रस्तुत करना होगा और इसे रेरा, बिहार पर उपलब्ध परियोजना के वेबसाइट पर परियोजना के वेबपेज पर अपलोड करना होगा।31 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 6 भू-स्वामी को प्रोमोटर या आवंटी माना जाएगा-(1) प्राधिकरण या न्याय निर्णायक अधिकारी, अधिनियम की धारा 31(1) के तहत उसके समक्ष रखी गयी शिकायत के निष्पादन के क्रम में तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह तय करेगा कि भू-स्वामी, जिसने प्रोमोटर के साथ विकास समझौता किया है, उसे आवंटी या प्रोमोटर के रूप में माना जायेगा। स्पष्टीकरण 1 अधिनियम की धारा-2 (जेड के) में उल्लिखित परिभाषा के अनुसार चूँकि भूमि मालिक ''उस परियोजना के निर्माण कराने का कारक है।'' अतः वह भी प्रोमोटर के साथ बिक्री हेतु किये गये एकरारनामें में आवंटियों हेतु उल्लिखित दायित्वों को पूरा करने के लिए निम्नलिखित सभी रीति से संयुक्त रूप से जिम्मेवार होगा।

(क) विकास समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो कि भूमि मालिक को प्रोमोटर के साथ परियोजना के निर्माण या विकास में सक्रिय रूप से भाग लेना होगा।

(ख) विकास समझौता में प्रोमोटर एवं भू-स्वामी के मध्य फ्लैटों या विकसित के हिस्से के अतिरिक्त लाभ और राजस्व के हिस्से का वितरण बताया गया हो।

(ग) भू-स्वामी परियोजना पूरी होने से पहले अपने हिस्से के अपार्टमेंट का विपणन, विज्ञापन या बिक्री करता हो। स्पष्टीकरण 2. अधिनियम की धारा 18(2) में उल्लिखित भूमि, जिस पर परियोजना विकसित की जा रही है, उस भूमि के त्रुटिपूर्ण स्वामित्व के मुआवजे के लिए दायर मामलों में न्याय निर्णायक पदाधिकारी द्वारा तय किए गये मुआवजे के लिए भू-स्वामी भी संयुक्त रूप से जिम्मेवार होगा।

7 अन्य शुल्क- (1) यथास्थिति, प्रोमोटर या एजेंट, जैसा भी हो, को निम्नलिखित मामलों में प्राधिकरण के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा विनिर्धारित दरों पर अतिरिक्त शुल्क/विलम्ब शुल्क, जिसे समय-समय पर प्राधिकरण के वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, के अनुसार, राशि का भुगतान प्राधिकरण को करना होगा :- (i) वेबसाइट के आवधिक अद्यतन के लिए शुल्क/विलंब शुल्क/अतिरिक्त शुल्क

(ii) विलम्ब से प्रस्तुत किए गए आवेदनों के लिए तथा पंजीकरण से पहले या बाद में पंजीकरण के लिए आवेदन में किए जाने वाले आवश्यक संशोधनों की अनुमति के लिएशुल्क/विलंब शुल्क/अतिरिक्त शुल्क।

(iii) किसी अन्य मामले के लिए,शुल्क/विलंब शुल्क/अतिरिक्त शुल्क। 8. डिस्प्ले बोर्ड-(1) प्रोमोटर को परियोजना स्थल पर न्यूनतम 5'X4' आकार का पर्यावरण रोधी जियो टैग्ड (परियोजना के अक्षांश और देशांतर का उल्लेख करते हुए) डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा जिस पर परियोजना का नाम और पंजीकरण संख्या के साथ प्राधिकरण द्वारा जारी क्यूआर कोड, पंजीकरण की तिथि, परियोजना के चरण, टावरों की संख्या, मंजिलों की संख्या (टावर के अनुसार) आदि की जानकारी मोटे अक्षरों और सुपाठ्‌य भाषा में लिखी होगी, ताकि परियोजना के पूरा होने तक सभी ऋतुओं/पूरे वर्ष के दौरान जानकारी दिखाई दे सके।

(2) भूखंड विकास के मामले में, प्रोमोटर अनुमोदित साइट प्लान के संबंध में उप-विनियमन (1) में उल्लिखित के अनुसार डिस्प्ले बोर्ड लगाएगा, जिसमें परियोजनाओं का संपूर्ण क्षेत्र अर्थात्‌ सड़कें, जलापूर्ति, बाहरी सेवाएं, परियोजना की भूमि का राजस्व विवरण अर्थात प्लॉट संख्या, खाता संख्या, थाना संख्या और ले-आऊट योजना राजस्व मानचित्र पर मोटे और सुपाठ्‌य अक्षरों में अंकित होगी ताकि परियोजना के पूरा होने तक जानकारी प्रदर्शित रहे।

(3) जैसा कि उप विनियमन (1) में उल्लिखित है प्रोमोटर की वेबसाइट सहित प्र्रोमोटर के अधिकृत प्रतिनिधि का नाम और संपर्क विवरण भी बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा।

9 प्रोमोटर द्वारा परियोजना के वेब पेज पर अपलोड की जाने वाली सूचना/दस्तावेज जो प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे-

(1) प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर उत्तरवर्ती वर्ष का लेखा चार्टड एकाउन्टेट द्वारा प्रमाणित होकर छः माह के बाद प्रोमोटर को प्राप्त हो जाता है, जिसे रेरा नियमावली के नियम 4(2)(एल)(डी) के प्रावधानों के अनुसार रेरा बिहार के वेबसाइट पर 31 अक्टूबर तक अपलोड किया जाना है और जो प्रोमोटर के संस्थान में कार्यरत अंकेक्षक का नहीं हो, प्रोमोटर उत्तरवर्त्ती वित्तीय वर्ष का लेखा जो चार्टड एकाउटेंट के हस्ताक्षर के बाद प्राप्त होता है, उसे वैधानिक लेखा परीक्षा के रूप में रेरा नियमावली के नियम 4(2)(एल)(डी) के निमित्त निर्गत फारम-4 में रेरा वेबसाइट पर 31 अक्टूबर तक अपलोड करेंगे। (2) भू-सम्पदा परियोजना के सभी प्रोमोटर/डेवलपर्स को रेरा, बिहार की वेबसाइट पर परियोजना की कंपनी के निदेशक मंडल/फर्म के साझेदारों में किसी भी परिवर्तन (जोड़ना/हटाना) के बारे में घटना के एक महीने के भीतर अपलोड करना होगा।

(3) प्रोमोटर को अपनी परियोजना का त्रैमासिक प्रगति प्रतिवेदन प्रत्येक त्रैमास की समाप्ति के पन्द्रह दिनों के अंदर प्राधिकरण की वेबसाइट पर परियोजना के वेबपेज पर फॉर्म 7 के साथ फॉर्म 1, 2 एवं 3 विनियम 8(1) के अनुसार डिस्प्ले बोर्ड फोटो जिसमें उसके लेने की तिथि अंकित हो तथा परियोजना का QR कोड अपलोड करना होगा।

(4) प्रोमोटर को प्राधिकरण की वेबसाइट पर परियोजना के वेबपेज पर निम्न भी अपलोड करना होगा कि निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध हैः-

(क) किसी सिविल इंजीनियर, वास्तुकार और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र की त्रैमास के अंत तक बैंक से निकासी की गई राशि परियोजना की भौतिक प्रगति के अनुरूप है।32 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (ख) वास्तुविद एवं असैनिक अभियंता द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र कि परियोजना की प्रगति प्रोमोटर द्वारा समर्पित माइलस्टोन चार्ट के अनुरूप है।

(ग) माइलस्टोन चार्ट/बार चार्ट/गैन्ट चार्ट जिसमें भवन ब्लॉक/टावर/भवन वार निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों की प्रगति को दर्शाया गया होतथा जिसमें यह इंगित किया गया हो कि परियोजना का कार्य समय सारणी के अनुसार चल रहा है या पीछे है।

(5). यदि कोई प्रोमोटर विनियम-9 के उप-विनियमन (3) एवं (4) में निर्धारित तिमाही विवरण/रिपोर्ट अपलोड करने में विफल रहता है या निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो उसे जुर्माना देना होगा जो अधिनियम की धारा 61 के प्रावधान के तहत प्राधिकरण द्वारा निर्धारित भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 5%तक हो सकता है। हालाँकि वह नीचे दिए गए विलंब शुल्क का भुगतान करने के बाद तिमाही विवरण और रिपोर्ट अपलोड करने का विकल्प चुन सकता हैः-

क्रम संख्या विलम्ब विलम्ब से भुगतान का शुल्क
1 1 दिन से 15 दिन तक के विलम्ब के लिए रू0 25,000/- (पच्चीस हजार रूपये)
2 16 दिन से 30 दिन तक के विलंब के लिए रू0 50,000/- (पचास हजार रूपये)
3 31 दिन से 60 दिन तक के विलंब के लिए रू0 1,25,000/- (एक लाख पच्चीस हजार रूपये)
4 60 दिनों से अधिक विलंब के लिए रू0 3,00,000/- (तीन लाख रूपये)

(6) यदि प्रोमोटर विनियम 9 के उप-विनियमन (3) एवं (4) के अनुसार त्रैमासिक विवरण/त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट में अपूर्ण जानकारी या तथ्य प्रदान करता है या प्रस्तुत करता है तो वह 50,000- रूपये (पचास हजार रूपये) का शुल्क देने के लिए उत्तरदायी होगा।

(7) यदि प्रोमोटर विनियम 9 के उप-विनियम (3)एवं (4) में गलत जानकारी और या गलत तथ्यों के साथ त्रैमासिक विवरण/त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट प्रदान करता है तो वह अतिरिक्त शुल्क के रूप में रू01,00,000/-रूपये (एक लाख रूपये) का भुगतान करने हेतु उत्तरदायी होगा।

(8) यदि प्रोमोटर निर्धारित समय के भीतर त्रैमासिक विवरण/त्रैमासिक प्रगति में विनियम 8(1) के अनुसार डिस्प्ले बोर्ड की जियो टैग दिनांकित तस्वीर अपलोड करने में विफल रहता है तो वह निम्नांकित निर्धारित विलंब शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगाः-

क्र0 सं0 विलम्ब विलम्ब भुगतान का शुल्क
1 1 दिन से 15 दिन तक के विलम्ब के लिए रू0 10,000/- (दस हजार रूपये)
2 16 दिन से 30 दिन तक के विलम्ब के लिए रू0 30,000/- (तीस हजार रूपये)
3 31 दिन से 60 दिन तक के विलम्ब के लिए रू0 75,000/- (पचहत्तर हजार रूपये)
4 60 दिनों से अधिक का विलंब के लिए रू0 2,00,000/- (दो लाख रूपये)

10 धारा 6 के तहत पंजीकरण के विस्तार के लिए आवेदन शुल्क-बिहार रेरा, नियमावली, 2017 के नियम 6 (2) के साथ पठित रेरा, अधिनियम, 2016 की धारा 6 के अनुसार प्रोमोटर द्वारा परियोजना के पंजीकरण के विस्तार हेतु समर्पित आवेदन के साथ निम्नांकित रूप से विनिर्धारित अतिरिक्त शुल्क आवेदन के साथ भी भुगतान करना होगा।

क्र0 सं0 विस्तार की अवधि अतिरिक्त प्रभार
1 6 महीने तक का विस्तार रू0 4,00,000/- (चार लाख रूपये)
2 6 महीने से अधिक किन्तु 12 महीने तक का विस्तार रू0 10,00,000/- (दस लाख रूपये)
3 विशेष मामलों में यदि 12 महीने से अधिक हो रू0 20,00,000/- (बीस लाख रूपये)

11 धारा 6 के तहत विलम्ब शुल्क के साथ पंजीकरण विस्तार के लिए आवेदनः-पंजीकृत भू-सम्पदा परियोजना के पंजीकरण के विस्तार हेतु पंजीकरण समाप्ति के 3 (तीन) महीना पहले रेरा अधिनियम की धारा 6 सहपठित बिहार रेरा नियमावली, 2017 के नियम 6(2) के अनुसार पूर्ण आवेदन के साथ बहुमत आवंटियों की सहमति एवं उनके आवंटन पत्रों के साथ आवेदन समर्पित करना आवश्यक है। इसमें उक्त निर्धारित समय के बाद पंजीकरण विस्तार हेतु आवेदन जमा करने पर नीचे निर्धारित विलम्ब शुल्क का भुगतान करना होगाः-

क्र0 सं0 विलम्ब के दिन विलम्ब भुगतान का शुल्क
1 पंजीकरण की समाप्ति के बाद 3 महीने तक। रू0 2,00,000/- (दो लाख रूपये)
2 पंजीकरण की समाप्ति के 3 महीने बाद लेकिन 6 महीने तक। रू0 5,00,000/- (पाँच लाख रूपये)
3 पंजीकरण की समाप्ति के 6 महीने के बाद रू0 10,00,000/- (दस लाख रूपये)
33 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

प्रस्तुत करने पर देरी के प्रत्येक माह या उसके भाग के लिए 50,000/- रूपये का विलम्ब शुल्क देना होगा।

13. प्रोमोटर को रेरा अधिनियम की धारा-4 सहपठित बिहार रेरा नियमावली 2017 के नियम 3 और 4 के तहत विनिहित दस्तावेजों के अतिरिक्त निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगेः-

(क) परियोजना की प्रारंभिक लागत को पूरा करने के निमित्त परियोजना की अनुमानित विकास लागत के कम से कम दस प्रतिशत को पूरा करने हेतु प्रोमोटर की वितीय सक्षमता को दर्शाने के लिए आवेदन जमा करने की तिथि पर प्रोमोटर के संगठन और उनके निदेशक(ओं)/साझेदार(ओं)/मालिक(ओ)/अन्य इकाई जैसे की संपत्ति और देनदारियों का विवरण, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा विधिवत्‌ प्रमाणितहो, को समर्पित करना होगा।

(ख) पिछले पाँच वर्षो के दौरान कंपनी के निदेशकों/भागीदारों/मालिकों/फर्म/एलएलपी/अन्य इकाई द्वारा व्यक्तिगत रूप से अथवा अन्य संस्थाओं के भाग के रूप में या अन्य क्षमता में गत्‌ पांच वर्षों में ली गई सभी परियोजनाओं के विवरण के साथ परियोजनाओं में दर्ज वादों का ब्यौरा तथा पारित आदेशों का ब्यौरा समर्पित करना होगा।

(ग) प्र्रोमोटर और भूमि मालिक के बीच विपणन और बिक्री के लिए उपलब्ध शेयर के विभाजन का ज्ञापन, निर्धारित प्रारूप में प्रोमोटर और भूमि मालिक(ओं) द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित कर शपथ पत्र सह घोषणा के रूप में समर्पित करना होगा। (घ) प्रोमोटर को अपनी संस्था तथा उसके निदेशक/साझेदार/मालिक/अन्य जो भी हो, के अपनी संपत्तियों के विवरण के साथ चल एवं अचल संपत्ति का पूर्ण विवरण शपथ पत्र के रूप में देना होगा।

14. परियोजना के बैंक खाते में परिवर्त्तन हेतु आवेदन शुल्क-प्रोमोटर द्वारा परियोजना के निबंधन के समय खोले गये बैंक खाते में परिवर्त्तन हेतु प्राप्त आवेदन को प्रोमोटर के द्वारा रू0 50,000/-(रूपये पचास हजार) मात्र के आवेदन शुल्क एवं अन्य वांछित दस्तावेजों एवं प्रमाण पत्रों के समर्पित करने पर बशर्त्ते कि धारा 4(2)(एल)(डी), धारा 11(4)(जी) एवं धारा 11(4)(एच) के प्रावधानों का पालन हो रहा हो, स्वीकृत किया जा सकेगा।

15. प्रोमोटर को प्रोमोटर और आवंटी के बीच निष्पादित बिक्री समझौते के बुकिंग राशि का विशिष्ट रूप से उल्लेख करना होगा।

16. प्राधिकरण का कार्यालय, कार्यालय समय और बैठक। (1) प्राधिकरण का मुख्यालय पटना में होगा। (2) प्राधिकरण, आदेश द्वारा राज्य में अन्य स्थानों पर पीठ और अपने कार्यालय स्थापित कर सकेगा। (3) प्राधिकरण अपनी कार्यवाहियों का संचालन मुख्यालय अथवा अध्यक्ष द्वारा यथा निदेशित किसी अन्य स्थान पर जो उसके अधिकारिता क्षेत्र में हो, किसी निश्चित दिन एवं समय पर कर सकेगा।

17. प्राधिकरण की भाषा -(1) प्राधिकरण की कार्यवाही अंग्रेजी या हिंदी में संचालित की जाएगी। (2) प्राधिकरण अपने विवेकानुसार अंग्रेजी या हिन्दी में की गई शिकायत याचिकाएं स्वीकार कर सकेगा। (3) प्राधिकरण, समुचित मामलों में याचिकाओं तथा संलग्न दस्तावेजों का अंगे्रजी या हिन्दी में अनुवाद कराने का निर्देश दे सकेगा।

18. प्राधिकरण की मुहर-कोई दस्तावेज, जिस पर प्राधिकरण द्वारा प्रमाणीकरण की आवश्यकता है, सचिव, विशेष कार्य पदाधिकारी या प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत अन्य पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा और प्राधिकरण के मुहर के अधीन जारी किया जाएगा।

19. सचिव के कार्यः- (1) सचिव प्राधिकरण का प्रधान कार्यपालक अधिकारी होंगे और प्राधिकरण के नियंत्रण के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग तथा अपने कर्तव्यों का निर्वह्‌न करेंगे।

(2) विशेषतः, इस विनियम के उप-विनियम (3) के प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सचिव को निम्नलिखित कर्तव्यों का निर्वह्‌न करने के लिए शक्तियां होंगी, यथाः-

(क) वह प्राधिकरण के अभिलेखों और मुहर का अभिरक्षक होगा। (ख) वह प्राधिकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों को अन्य बातों के साथ-साथ सभी शिकायतों, आवेदनों या प्राधिकरण से संबंधित संदर्भों को प्राप्त करेगा या प्राप्त करवायेगा।

(ग) वह शिकायतों, आवेदनों अथवा निर्देशों सहित अन्य बातों के साथ- साथ दस्तावेजों की समीक्षा करेगा और उस पर स्पष्टीकरण या सुधार की मांग तथा ऐसे दस्तावेजों की स्वीकृति या अस्वीकृति के संबंध में उचित निर्देश जारी करने का हकदार होगा।

(घ) वह प्राधिकरण के समक्ष दायर मामलों में विभिन्न पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत किए गये अभिवचनों का संक्षिप्त विवरण तथा सारांश तैयार करेगा या तैयार करवाएगा।

(ङ) वह अधिनियम तथा नियमावली के अधीन वैसे कृत्यों को क्रियान्वित करेगा, जो उसे प्राधिकरण द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा प्रत्यायोजित किये जाएं।

(च) वह अध्यक्ष द्वारा यथानिदेशित प्राधिकरण में प्रयोग की जाने वाली शक्तियों से संबंधित कार्यवाहियों में प्राधिकरण की सहायता करेगा।34 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (छ) वह प्राधिकरण की बैठकों के लिए सूचना उपलब्ध कराएगा, बैठकों के लिए कार्यावली तैयार करेगा, तथा कार्यवाहियों का कार्यवृत्त अभिलिखित करेगा।

(ज) वह प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों को अभिप्रमाणित करेगा। (झ) वह, जहां तक संभव हो, प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन का अनुश्रवण करेगा एवं किसी भी तरह के गैर-अनुपालन को तुरंत प्राधिकरण के संज्ञान में लाएगा।

() जैसा कि प्राधिकरण द्वारा आदेश दिया जाए उसे राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारों अथवा अन्य कार्यालयों, कम्पनियों एवं फर्मों या किसी अन्य पक्षकार से वैसी जानकारी एवं अभिलेख प्रतिवेदन या दस्तावेजों इत्यादि को प्राप्त करने का अधिकार होगा, जो अधिनियम या नियमावली के अधीन प्राधिकरण के कृत्यों की दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजनार्थ आवश्यक समझा जाए तथा उसे प्राधिकरण के समक्ष रखेगा।

(3) सचिव की अनुपस्थिति में, इस निमित्त अध्यक्ष द्वारा अभिहित प्राधिकरण का कोई अधिकारी सचिव की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करेगा।

(4) अधिनियम की धारा 25 और नियम 21 के तहत प्रदत शक्तियों के अतिरिक्त, अध्यक्ष को किसी भी समय, किसी भी हितबद्ध या प्रभावित पक्ष द्वारा किए गए आवेदन पर या स्वप्रेरणा से प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी द्वारा जारी किए गए किसी भी आदेश या की गई कार्रवाई की समीक्षा करने, उसे रद्‌द करने, संशोघित करने, पुनरीक्षित करने, संशोधित करने या अन्यथा बदलने की शक्ति होगी, यदि वह उचित समझे।

(5) सदस्य, अध्यक्ष के लिखित अनुमोदन से, प्राधिकरण के किसी अधिकारी को इन विनियमों द्वारा अपेक्षित या अन्यथा सचिव द्वारा निष्पादित किए जाने वाले किसी कार्य को सौंप सकते हैं।

20. प्राधिकरण की बैठकें-(1) नीचे उप-विनियम (2), (3), (4), (5), (6), (7) और (8) में निहित प्रावधान प्राधिकरण की न्यायिक कार्यवाहियों के अलावा प्राधिकरण की बैठकों पर लागू होंगे।

(2) प्राधिकरण की बैठकों के लिए गणपूर्ति दो सदस्यों की होगी। (3) यदि प्राधिकरण की विधिवत्‌ बुलाई गई किसी बैठक में गणपूर्ति पूरी नहीं होती है तो बैठक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित अगली उपयुक्त तिथि, समय और स्थान के लिए स्थगित कर दी जाएगी।

(4) अध्यक्ष बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और कार्यवाही का संचालन करेंगे। पटना के बाहर पीठ में बैठे सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से बैठकों में भाग ले सकते हैं। यदि अध्यक्ष किसी कारण से बैठकों में उपस्थित होने में असमर्थ हैं, या जहां कोई अध्यक्ष नहीं है, तो उपस्थित वरिष्ठ सदस्य बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

(5) प्राधिकरण की किसी भी बैठक में आने वाले सभी प्रश्नों का निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा। मतों के बराबर होने की स्थिति में, अध्यक्ष या उनकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले सदस्य को दूसरा या निर्णायक मत देने का अधिकार होगा।

(6) इन विनियमों में अन्यथा प्रावधान के सिवाय, प्रत्येक सदस्य के पास एक वोट होगा। (7) सचिव या उनकी अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा नामित प्राधिकरण का कोई अधिकारी बैठकों के कार्यवृत रिकॉर्ड करेगा और एक रजिस्टर बनाए रखेगा जिसमें अन्य बातों के अलावा बैठक में उपस्थित सदस्यों और आमंत्रित व्यक्तियों के नाम और पदनाम, कार्यवाही का रिकार्ड और असहमति के नोट, यदि कोई हो, दर्ज होंगे। असहमति की स्थिति में, कार्यवृत यथाशीध्र अध्यक्ष को भेजा जाएगा।

(8) प्राधिकरण की बैठक में लिए गए निर्णय को कारणों सहित स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से कार्यवृत में दर्ज किया जाएगा और अनुमोदित कार्यवृत की एक प्रति सभी सदस्यों को भेजी जाएगी। यदि कार्यवृत में किसी आमंत्रित व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई कथन/प्रस्तुति दर्ज है, तो कार्यवृत की एक प्रति ऐसे आमंत्रित व्यक्ति को भेजी जाएगी।

21. प्राधिकरण के समक्ष न्याय निर्णयन कार्यवाही :- अधिनियम की धारा 31 के तहत प्राधिकरण में दायर शिकायतों के संबंध में न्याय निर्णयन कार्यवाही के लिए, बिहार रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) नियमावली, 2017 के नियम 36 के साथ पठित और अधिनियम की धारा 3 के तहत स्वप्रेरणा मामलों के लिए, अध्यक्ष सामान्य आदेश या विशिष्ट आदेश द्वारा निर्देश दे सकते हैं कि विशिष्ट मामले या मुद्‌दों की सुनवाई और निर्णय अध्यक्ष या सदस्य की एकल पीठ या अध्यक्ष या प्राधिकरण के किसी सदस्य या सदस्यों की डबल बेंच द्वारा किया जाएगा।

22 प्राधिकृत प्रतिनिधि- कोई व्यक्ति जो प्राधिकरण के समक्ष किसी कार्यवाही में पक्षकार है, वह प्राधिकरण के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने तथा इस प्रयोजन के लिए सभी या कोई कार्य करने के लिए या तो स्वयं उपस्थित हो सकेगा या अधिनियम की धारा 56 के अंतर्गत निर्दिष्ट किसी अन्य व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगा।

बशर्ते कि प्राधिकरण के समक्ष किसी कार्यवाही में किसी व्यक्ति की ओर से उपस्थित होने वाला व्यक्ति यहां (प्रपत्र 5) में प्राधिकरण ज्ञापन/वकालतनामा दाखिल करेगा।

बशर्ते कि प्राधिकरण समय-समय पर उन नियमों और शर्तो को निर्धारित कर सकता है जिनके अधीन आवंटी अपने प्रतिनिधि(यों) को उनकी ओर से दलील देने के लिए अधिकृत कर सकते हैं। ऐसे मामलों में प्राधिकरण के पास रियल एस्टेट परियोजना से संबंधित सभी व्यक्तियों को बुलाने और उनकी उपस्थिति को लागू करने का अधिकार होगा, जिसमें संयुक्त उद्‌यम या विकास समझौते के मामले में ऋणदाता, भू-स्वामी और साथ ही रियल एस्टेट परियोजना को अनुमति देने वाले व्यक्ति शामिल हैं, जो सक्षम प्राधिकारी हैं।35 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 23. प्राधिकरण के आदेशः- (1) प्राधिकरण, अध्यक्ष, सदस्यगण, न्यायनिर्णयन अधिकारी और प्राधिकरण के कोई अधिकारी, जिसे प्राधिकरण द्वारा शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया हो, जैसा भी मामला हो, किसी कार्यवाही की सुनवाई के बाद ससमय ऐसी कार्यवाहियों में आदेश पारित करेगा और ऐसे आदेशों पर या यथास्थिति, प्राधिकरण के अध्यक्ष, सदस्यगण, न्याय निर्णायक पदाधिकारी या किसी अधिकारी या ऐसी कार्यवाही की सुनवाई करने वाले प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।

(2) सभी आदेश और निर्णय अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए जाएंगे तथा उन पर प्राधिकरण की आधिकारिक मुहर के साथ उन्हें प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

24. प्राधिकरण के अभिलेख :- (1) प्राधिकरण अपने अभिलेखों का एक अनुक्रमित डाटाबेस बनाए रखेगा, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ दायर की गई शिकायतें, आयोजित की गई सुनवाई का विवरण, समय-समय पर जारी किए गए आदेश/दस्तावेज शामिल होंगे। (2) अध्यक्ष ऐसे नियमों और शर्तों पर जिन्हें वह उचित समझे, प्राधिकरण के पास उपलब्ध आदेशों, दस्तावेजों और कागजों की प्रमाणित प्रतियों की आपूर्ति किसी भी व्यक्ति के संशोधित प्रपत्र 6 में आवेदन करने पर प्रदान करेगा, जो कि अध्यक्ष द्वारा समय-समय पर तय किए जाने वाले अपेक्षित शुल्क के भुगतान के अधीन होगा और अध्यक्ष द्वारा निर्देषित शर्तों का पालन करेगा। अध्यक्ष अनुरोध प्राप्त होने की तारीख से 14 (चौदह) कार्य दिवसों की अवधि के भीतर दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों की आपूर्ति के लिए प्राप्त अनुरोधों पर समय पर प्रतिक्रिया सुनिष्चित करने के लिए एक अधिकारी को नामित करेगा।

(3) अध्यक्ष आदेश द्वारा निर्देश दे सकते हैं कि प्राधिकरण द्वारा रखी गई कोई भी सूचना, दस्तावेज और कागजात/सामग्री गोपनीय या विशेषाधिकार प्राप्त होगी तथा निरीक्षण या प्रमाणित प्रतियों की आपूर्ति के लिए उपलब्ध नहीं होगी, और अध्यक्ष यह भी निर्देश दे सकते हैं कि ऐसे दस्तावेज, कागजात या सामग्री का किसी भी तरीके से उपयोग नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि अध्यक्ष द्वारा विशेष रूप से अधिकृत किया गया हो।

(4) प्राधिकरण अपनी वेबसाइट के माध्यम से जनहित से जुड़ी जानकारी को जनता के लिए सुलभ और उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

(5) अध्यक्ष, प्राधिकरण के एक अधिकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सूचना अधिकारी के रूप में तथा प्राधिकरण की किसी अन्य अधिकारी को उक्त आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।

25. अंतरिम आदेश, अनुसंधान, जाँच-पड़ताल,सूचना संग्रहण आदि- (1) प्राधिकरण मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान रखते हुए वैसे अंतःकालीन या अंतरिम आदेशों को पारित कर सकेगा जिसे प्राधिकरण किसी कार्यवाही के किसी चरण पर समुचित समझे।

(2) प्राधिकरण ऐसा निदेश या आदेश, जैसा वह किसी जानकारी, जाँच, अनुसंधान के संग्रहण के लिए उचित समझे तथा अपनी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित सम्मिलित कर सकेगा :-

(क) प्राधिकरण, किसी भी समय, सचिव या किसी एक या एक से अधिक अधिकारियों को या किसी अन्य व्यक्ति को, जिसे प्राधिकरण उचित समझे, अधिनियम और नियमावली की अधिकारिता के भीतर किसी मामले के संबंध में अध्ययन करने, अनुसंधान करने या जानकारी देने हेतु निदेश दे सकेगा।

(ख) प्राधिकरण, उपर्युक्त के प्रयोजनार्थ, ऐसे अन्य निदेश दे सकेगा जिसे उचित समझे तथा उस अवधि को अभिकथित कर सकेगा जिसके भीतर प्रतिवेदन सुपुर्द करना अथवा जानकारी भेजी जानी हो।

(ग) प्राधिकरण किसी व्यक्ति को अपने समक्ष पुस्त,लेखा आदि उपस्थापित करने और इस निमित्त निदेशित प्राधिकरण के सचिव या किसी अधिकारी को परीक्षण करने तथा रखे जाने हेतु स्वीकृति दे सकेगा या कोई जानकारी पदाभिहित अधिकारी को देने का निदेश जारी कर सकेगा।

(घ) प्राधिकरण किसी जानकारी, विवरण या दस्तावेजों के संग्रहण के प्रयोजनार्थ ऐसे निदेश जारी कर सकेगा जिन्हें प्राधिकरण अधिनियम तथा नियमावली के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के संबंध में आवश्यक समझे।

(ङ) अगर ऐसा प्राप्त प्रतिवेदन या जानकारी,प्राधिकरण को कम या अपर्याप्त प्रतीत हो, तो प्राधिकरण या सचिव अथवा इस प्रयोजनार्थ अधिकृत कोई अधिकारी आगे जॉंच-पड़ताल करने, प्रतिवेदन और जानकारी देने के लिए निदेश दे सकेगा। (च) प्राधिकरण, ऐसे उपस्थापित किए जाने वाले आनुशंगिक, क्रमिक तथा पूरक मामलों को प्राप्त कर सकेगा जिन्हें उपर्युक्त के संबंध में सुसंगत समझे।

(छ) प्राधिकरण, उपर्युक्त के प्रयोजनार्थ पुलिस अथवा ऐसे अन्य प्राधिकारियों की सहायता ले सकेगा, जिन्हें आवश्यक तथा समीचीन समझे।

3. यदि उपर्युक्त विनियम 25(2) के अनुसार प्राप्त प्रतिवेदन या जानकारी या उनका अंश किसी कार्यवाही में गठित करने के लिए प्राधिकरण द्वारा विचार किए जाने हेतु प्रस्तावित हो तो कार्यवाही के पक्षकारों को उस प्रतिवेदन या जानकारी पर आपत्ति दाखिल करने तथा अपना पक्ष समर्पित करने हेतु युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 36 26. गोपनीयताः-

(1) मामले की सुनवाई करने वाली पीठ को किसी पक्षकार द्वारा उसको उपलब्ध कराया गया कोई दस्तावेज या साक्ष्य जिसके, उस पक्षकार द्वारा गोपनीय प्रकृति होने का दावा किया जा रहा है, और गोपनीय होने के कारण इसे अन्य पक्षकारों के समक्ष उसके प्रकटीकरण को नहीं करने हेतु कहता है, तो संक्षिप्त कारण लिखित रूप में अंकित करते हुए पीठ अपने अंतिम निर्णय पर पहुँचेगी।

(2) यदि पीठ का विचार बनता हो कि गोपनीयता का दावा न्यायसंगत है तो पीठ यह निदेश दे सकेगी कि उन पक्षकारों को, जिन्हें पीठ उपयुक्त समझे, उसे उपलब्ध न कराया जाय। फिर भी गोपनीयता का दावा करने वाला पक्षकार गोपनीय पाए जाने वाले दस्तावेजों का एक गैर-गोपनीय सार उपलब्ध करायेंगें, जिसे उद्‌धृत किया जा सके।

(3) उपर्युक्त के होने पर भी पीठ अपने विनिश्चय पर पहुँचने हेतु गोपनीय पाए जाने वाले अंतर्वस्तुओं को विचारण में लेने हेतु, स्वतंत्र होगी।

27. आदेश में सुधार- कोई भी व्यक्ति अधिनियम की धारा 39 में दिए गए प्रावधान के अनुसार अधिनियम की धारा 31 के तहत पारित आदेशों के संदर्भ में 250/- रूपये (दो सौ पचास रूपये मात्र) के शुल्क के साथ सुधार याचिका दायर कर सकता है।

28. मृत्यु आदि के बाद कार्यवाही जारी रखना। (1) जहाँ कार्यवाही में, कार्यवाही के किसी पक्षकार की मृत्यु हो जाती है या वह दिवालिया न्यायनिर्णीत हो जाता है या समापन/परिसमापन के अधीन कंपनी की दशा में कार्यवाही यथास्थिति भागीदारों, हित-उत्तराधिकारियों, निष्पादक, प्रशासक, रिसिभर, समापक अथवा संबंधित पक्षकार के अन्य विधिक प्रतिनिधियोें के साथ जारी रहेगी।

(2) प्राधिकरण, अभिलिखित किए जानेवाले कारणों से, किसी कार्यवाही को, समाप्त किया गया समझ सकता है यदि प्राधिकरण हित-उत्तराधिकारियों को मामले के अभिलेख पर लाने से मुक्त्त करता है।

(3) यदि कोई व्यक्ति हित-उत्तराधिकारियों, आदि को अभिलेख पर लाना चाहता है तो, इस प्रयोजनार्थ, अभिलेख पर हित-उत्तराधिकारियों को लाए जाने की जरूरत समझे जाने की घटना से 90 (नब्बे) दिनाें के भीतर आवेदन दाखिल किया जाएगा। यदि कोई विलंब हो तो प्राधिकरण पर्याप्त कारणों से इस विलम्ब को माफ कर सकेगा।

29. आदेश एवं निर्देश जारी करनाः-अधिनियम, नियम एवं विनियम के अधीन रहते हुए, प्राधिकरण, समय-समय पर, विनियमनों और पालन की जानेवाली प्रक्रिया, जिसे वह उपयुक्त समझे, के क्रियान्वयन के संबंध में आदेश एवं निदेश जारी कर सकेगा।

30. (1) परियोजना के पूरा होने पर प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज। परियोजना के पूरा होने पर प्रोमोटर को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगेः-

i यदि संबंधित सक्षम प्राधिकार द्वारा अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया है, तो प्रमाणितकृत वास्तुकार द्वारा अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष समर्पित पूर्णता प्रमाण पत्र और इसके अन्तर्गत दिये जाने वाली नोटिस की प्रमाणीकृत प्रतियाँ उपलब्ध करायी जाएगी।

ii चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाण पत्र जिसमें परियोजना पर खर्च की गई कुल धनराशि का स्पष्ट विवरण। iii परियोजना का वर्तमान फोटो जिसमें भवन के सामने, बगल और पीछे का उन्नयन दर्शाया गया है। iv प्रोमोटर के शेयर से निष्पादित बिक्री विलेखों की संख्या।

v एक हलफनामा जिसमें कहा गयाहो किः-

(क) प्रोमोटर ने बिक्री अनुबंध, प्रॉस्पेक्टस और ब्रोशर के अनुसार सभी सेवाएं प्रदान की हैं। (ख) प्रोमोटर के विरूद्ध लंबित शिकायत मामलों की संख्या।

(2) प्राधिकरण ऐसे दस्तावेजों के आधार पर संतुष्ट होने के बाद कि परियोजना पूरी हो गई है, प्रोमोटर को उनके लिखित अनुरोध पर एक पत्र जारी कर उन्हें धारा 4(2)(एल)(डी) के अनुसार सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर सकेगा तथा संबंधित बैंक को सूचित किया जाएगा जहां परियोजना का अलग खाता रखा जा रहा है।

31. प्राधिकरण की अंतर्निहित शक्ति की व्यावृत्तिः- (1) विनियमावली में कोई बात, प्राधिकरण की अंतर्निहित शक्तियों को सीमित अथवा अन्यथा प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी जो न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने अथवा प्राधिकरण की प्रक्रिया के दुरूपयोग को रोकने हेतु आदेशित की गई होे।

(2) इस विनियमावली की कोई बात अधिनियम या नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित किसी प्रक्रिया को सारांश (Summary)प्रक्रियाओं सहित जो इस विनियमावली के किसी प्रावधान से असंगत हो, यदि प्राधिकरण,मामले की विशेष परिस्थितियों या मामलों के वर्ग के आलोक में तथा कारण अभिलिखित करते हुए किसी मामले या मामलों के वर्ग का निपटारा करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझता है, प्राधिकरण को विवर्जित नहीं करेगी।37 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (3)इस नियमावली की कोई बातप्राधिकरण को,अधिनियम या नियमावली के अधीन किसी मामले को निपटाने या किसी शक्ति का प्रयोग करने से विवर्जित नहीं करेगी जिसके लिए कोई विनियम नही बनाया गया हो और प्राधिकरण उस रीति, से जिसे उपयुक्त समझे ऐसे मामलों का निपटारा, शक्तियों का प्रयोग एवं कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा।

32. आदेशों का क्रियान्वयन-प्राधिकरण, अध्यक्ष, सदस्य, न्यायनिर्णयन अधिकारी और प्राधिकरण का कोई भी अधिकारी जिसे प्राधिकरण की ओर से प्रत्यायोजित शक्तियाँ प्राप्त हों, जैसा भी मामला हो, द्वारा पारित कोई भी आदेश निर्धारित समय के भीतर अनुपालन किया जाना चाहिए और यदि प्रतिवादी/प्रोमोटर ऐसे समय के भीतर आदेश का अनुपालन करने में विफल रहता है तो शिकायतकर्त्ता रूपये 100/- (एक सौ रूपये) के शुल्क या समय-समय पर निर्धारित शुल्क के साथ विनियमन के साथ संलग्न प्रपत्र 8 में क्रियान्वयन याचिका दायर कर सकता हैै।

33. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि विनियमावली के किसी प्रावधान को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो प्राधिकरण सामान्य या विशेष आदेश द्वारा जो अधिनियम या नियमावली के प्रावधानों से असंगत न हो, और जो कठिनाइयों को दूर करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक एवं समीचीन हो, उन कठिनाइयों को दूर कर सकेगा।

34. विहित समय का विस्तार-अधिनियम या नियमावली के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, विनियमों द्वारा अथवा प्राधिकरण के आदेश द्वारा किसी कार्य को करने के लिए विहित समय का विस्तार (चाहे वह पहले समाप्त हो गया है या नहीं) पर्याप्त कारणों से,प्राधिकरण किसी आदेश द्वारा कर सकेगा।

35. गैर अनुपालन का प्रभाव-विनियमों की किसी अपेक्षा को पूरा करने में विफलता किसी कार्यवाही को, केवल ऐसी विफलता के कारण, तबतक अविधिमान्य नहीं करेगी जबतक कि प्राधिकरण का यह विचार न हो कि ऐसी विफलता से न्याय की विफलता हो गई है।

36 खर्च-(1) उन शर्तों और परिसीमन के अधीन रहते हुए जैसा कि प्राधिकरण/न्यायपीठद्वारा निदेशित किया जाय, सभी कार्यवाहियों के खर्च एवं इसके आनुषंगिक खर्च, प्राधिकरण/पीठ के विवेक से अवार्ड किए जाएंगें और उपर्युक्त के प्रयोजनार्थ, प्राधिकरण/पीठ को इस खर्च की वसूली किससे और किस निधि से और किस हद तक की जाएगी, को विनिश्चित कर सभी आवश्यक निदेश देने की पूर्ण शक्ति होगी।

(2) खर्च का भुगतान आदेश की तिथि से साठ (60) दिनों के भीतर अथवा उस समय के भीतर किया जाएगा जो प्राधिकरण/पीठ, आदेश द्वारा, निदेशित किया जाए। यदि कोई पक्षकार नियत अवधि के भीतर खर्च के आदेश का अनुपालन करने में विफल होता है तो खर्च अवार्ड करने वाला प्राधिकरण/पीठ, आदेश का क्रियान्वयन तुरंत उस रीति से करेगी जिस रीति से किसी सिविल न्यायालय की डिक्री/आदेश का निष्पादन किया जाता है।

37. प्रशासनिक प्रभार एवं मानक शुल्क-प्राधिकरण, आदेश द्वारा शिकायतकर्ता, पक्षकारों, प्रोमोटर्स अथवा भू-सम्पदा एजेंट अथवा आवंटियों पर दस्तावेजों के निरीक्षण, दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों, वेबसाईट के अद्यतन, वेबसाईट के डाटाबेस प्रबंधन और संधारण के लिए उद्‌ग्रहण की जाने वाले मानक शुल्क नियत कर सकेगा।

38. कार्मिक नीतिः रेरा, बिहार की कार्मिक नीतियां समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा जारी मानव संसाधन मैनुअल/विनियमों के अनुरूप होगी।

39. कानूनी मानदंडों का पालनः- अधिनियम या नियमों में विशेष रूप से उल्लिखित किसी बात के अभाव में, प्राधिकरण विद्‌यमान कानूनों और नियमों के अनुरूप पालन करेगा।

40. निरसनः- बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2021 और बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) (संशोधन) विनियम, 2022 इसके द्वारा निरस्त किया जाता है।

अन्यान्य-उपर्युक्त वर्णित बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियमावली, 2024 के हिन्दी संस्करण के शब्दों/वाक्यों में यदि कोई विभ्रांति उत्पन्न हो तो उक्त विनियमावली, 2024 के अंग्रेजी संस्करण के शब्दों/वाक्यों को मान्य समझा जाएगा।

प्राधिकरण के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, सचिव।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 38

प्रपत्र-1

(देंखें विनियम 3)

वास्तुविद्‌ का प्रमाणपत्र

(चालू परियोजना के निबंधन के समय प्रस्तुत करने और अभिहित खाते से धनराशि निकालने हेतु)

दिनांकः...................................

सेवा में,

---------------------------------------- (प्रोमोटर का नाम और पता) -------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------

विषयः- सी0एन0संख्या/सी0टी0एस0 संख्या--------------सर्वे संख्या---------अंतिम प्लाट संख्या ------------जिसकी चौहद्‌दी (क्षेत्र के अंतिम बिन्दुओं का अक्षांश और देशांतर) उत्तर--------------दक्षिण-----------------पूर्व-------------------- पश्चिम--------------------------गाँव--------------------ब्लॉक----------- -----------------जिला-------------------------पिन------------------ -----प्लॉट पर अवस्थित--------वर्ग मी0 मापवाले क्षेत्र पर (प्रोमोटर का नाम)--------------------------- द्वारा विकसित की जा रही (बिहार रेरा निबंधन संख्या) परियोजना के फेज-------के विंग संख्या---------- के निर्माण कार्य की पूर्णता का प्रतिशत प्रमाण पत्र। महाशय,

मैंने/हमने ----------------------(प्रोमोटर का नाम) द्वारासी0एन0संख्या/सी0टी0एस0/ सर्वे प्लाट संख्या/अंतिम संख्या-----------डिविजन----------ग्राम---------------प्रखंड------------जिला------- ------------पिन---------------(प्रमोटर का नाम)------------------ द्वारा विकसित किया जा रहा--------------वर्गमीटर मापवाले क्षेत्र पर अवस्थित प्रोजेक्ट के फेज--------------- भवन/विंग------------के निर्माण कार्य की पूर्णता का प्रतिशत प्रमाणित करने वाले वास्तुविद/अनुज्ञप्ति प्राप्त सर्वेयर के रूप में समानुदेशन का जिम्मा लिया है। स्वामी/प्रोमोटर द्वारा निम्नलिखित तकनीकी व्यावसायिकों को नियुक्त किया गया हैः-

(i) एल. एस./वास्तुविद के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती----------------------------

(ii) संरचना सलाहकार के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती----------------------------- (iii) एम.ई.पी. सलाहकार के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती--------------------------- (iv) स्थल पर्यवेक्षक के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती------------------------------

उपर्युक्त भू-सम्पदा के प्रत्येक भवन/विंग के संबंध में स्थल निरीक्षण के आधार पर मैं आज दिनांक ---------को यह प्रमाण पत्र प्रमाणित करता हूँ कि बिहार भू-सम्पदा अधिनियम के अधीन संख्या------------ द्वारा यथानिबंधित भू-सम्पदा परियोजना के प्रत्येक भवन/विंग के लिए किए गए कार्य का प्रतिशत उसमें नीचे दी गई सारणी 'क' के अनुसार है। पूरे फेज के प्रत्येक कार्यकलाप के संबंध में विस्तृत ब्यौरा सारणी 'ख' में दिया गया हैः-

सारणी-क

भवन/विंग संख्या ----------------------- (परियोजना प्रत्येक भवन/परियोजना के विंग के लिये अलग से तैयार किया जानेवाला)

क्रम संख्या टास्क/एक्टीविटी हुये कार्य का प्रतिशत
1. खुदाई
2. बेसमेंट/बेसमेंटो और प्लिंथ की संख्या
3. पोडियमो की संख्या ं
4. प्लींथ
5. स्टिल्ट फर्श
6. सुपर संरचना के स्लैबों की संख्या
7. आंतरिक दीवारो ,आंतरिक प्लास्टर, फ्लैट/परिसर के भीतर ं फ्लोरिंग,प्रत्येक फ्लैट/परिसर के दरवाजे एवं खिड़कियाँ
8. फ्लैट/परिसर के भीतर सैनेटरी फिटिंग्स, फ्लैट/परिसर के भीतर इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स,
9. सीढ़ी,लिफ्ट वेल्स और सीढ़ी और लिफ्ट को जोड़ने वाली प्रत्येक की लॉबी, ओवर हेड पानी टंकी/भू-गर्भ पानी टंकी
10. भवन/विंग के बाहरी प्लंबिंग और बाहरी प्लास्टर, एलीवेशन, टेरेस की जलरोधन के साथ पूर्णता
11. लिफ्ट, वाटर पम्प, सी.एफ.ओ. एन.ओ.सी. के अनुसार अग्नि रोधक फिटिंग और उपकरण,सामान्य क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स, सी.आर.जेड. एन.ओ.सी./वातावरण के अनुरूप एलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण, प्रवेश लॉबी की फिनीशिंग कम्पाउण्ड वाले भवन/विंग पर पहुँच के लिए लघु पथ, प्लिंथ सुरक्षा, भवन/विंग का पक्कीकरण और अन्य आवश्यकताएँ जो अधिभोग या पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये आवश्यक हों,का प्रतिष्ठापन,
क्रम संख्या कॉमन क्षेत्र और सुविधायें,सुख सुविधाएँ प्रस्तावित हांँ/ना किये गये कार्य का प्रतिशत विवरण
1. आंतरिक रोड और फुटपाथ
2. जल आपूर्ति
3. सिवरेज (चैम्बर, लाईन, सेप्टिक टैंक,एस. टी.पी.)
4. स्टॉर्म वाटर डे्रन्स
5. लैंडस्केपिंग/वृक्षारोपण
6. गली-प्रकाश(Street Lighting)
7. सामुदायिक भवन
8. सीवेज और सल्लेज वाटर का उपचार और निपटारा
9. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और निपटारा
10. जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग
11. उर्जा प्रबंधन
12. अग्नि सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा उपकरण
13. बिजली मीटर कक्ष,सब स्टेशन,रिसिविंग
स्टेशन
14. अन्य (अन्य जोड़ने का विकल्प)
39 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 40

विश्वासभाजन

एल.एस./वास्तुविद्‌ का नाम और हस्ताक्षर (निबंधन संख्या/अनुज्ञप्ति संख्याः------)

प्रपत्र-2 (देखें विनियम 3) अभियंता का प्रमाणपत्र (चालू परियोजना के निबंधन के समय प्रस्तुत करने और अभिहित खाते से धनराशि निकालने के लिए प्रत्येक परियोजना हेतु)

दिनांकः--------

सेवा में, ------------------------------------------- (प्रोमोटर का नाम और पता) ----------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------- विषयः-सी.एन.संख्या/सी.टी.एस. संख्या-----------------सर्वे प्लॉट संख्या-------------अंतिम प्लॉट संख्या------------जिसकी चौहद्‌दी (क्षेत्र के अंतिम बिन्दुओं के अक्षांश एवं देशान्तर) उत्तर--------------दक्षिण---------पूर्व------------------------पश्चिम------------- -------गाँव-----------------ब्लॉक------------------जिला------------------- ----पिन-----------------प्लॉट पर अवस्थित----------------------- वर्ग मी0 मापवाले क्षेत्र(प्रोमोटर का नाम)--------------------------- द्वारा विकसित की जा रही (बिहार रेरा निबंधन संख्या) परियोजना के फेज-------के विंग संख्या----------के निर्माण कार्य की विकास का प्रतिशत प्रमाण पत्र। संदर्भः- बिहार रेरा निबंधन संख्याः------------------------------- महाशय,

मैंने/हमने--------------------------------------(प्रोमोटर का नाम) द्वारा सी.एन. संख्या/सी.टी.एस./अंतिम प्लॉट संख्या -----------डिवीजन----------ग्राम------------ प्रखंड------------ जिला-------------पिन-------------(प्रोमोटर का नाम)-------------------------------------- द्वारा विकसित किया जा रहा--------------वर्गमीटर मापवाले क्षेत्र पर अवस्थित प्रोजेक्ट के फेज--------------- भवन/विंग------------के निर्माण कार्य की पूर्णता की प्रतिशत प्रमाणित करने वाले वास्तुविद/अनुज्ञप्तिप्राप्त सर्वेयर के रूप में समानुदेशन का जिम्मा लिया है।

1. स्वामी/प्रोमोटर द्वारा उक्त कार्य के लिये निम्नलिखित तकनीकी व्यावसायिकों को नियुक्त किया गया है। (i) एल. एस./वास्तुविद्‌ केरूप में सुश्री/श्री/श्रीमती------------------------- (ii) संरचना सलाहकार के रूपमें सुश्री/श्री/श्रीमती------------------------ (iii) एम.ई.पी. सलाहकार के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती------------------------- (iv) क्वांटिटी सर्वेयर के रूप में सुश्री/श्री/श्रीमती--------------------------

2. हमने अधिभोग प्रमाण पत्र/पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु परियोजना के भवन (भवनों) और संलग्न कार्यों के सिविल, एम.ई.पी.और संबध कार्यो की पूर्णता हेतु व्यय का आकलन किया है। हमारे द्वारा प्राक्कलित व्यय की गणना डेवलपर/अभियंता द्वारा नियुक्त श्री--------------------------------क्वांटिटी सर्वेयर द्वारा की गई गणना, डेवलपर/सलाहकार द्वारा उपलब्ध करायी गईसंपूर्ण परियोजना के ड्राईंग/प्लान वस्तुओं की सूची और मात्रा और हमारे द्वारा साईट निरीक्षण के दौरान डेवलपर द्वारा उपलब्ध किये गये मटेरियल/श्रमिक/अन्य इनपुट पर आधारित है।

3. उक्त संदर्भित भवन (भवनों) की परियोजना की पूर्णता के लिए हमने रू. ------------ (सारणी 'क' एवं 'ख' का जोड़) प्राक्कलित राशि का आकलन किया है। इस प्राक्कलित कुल लागत को -----------योजना प्राधिकार जिसके क्षेत्राधिकार अन्तर्गत यह परियोजना क्रियान्वित की जाएगी, से अधिभोग प्रमाण पत्र/पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक सिविल, एम.ई.पी.एवं संलग्न कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है।41 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 4. अब तक उपगत्‌ प्राक्कलित लागत की गणना रू-----------------की गई है (टेबल क एवं ख का योग)। कुल प्राक्कलित लागत की राशि के आधार पर, उपगत्‌ प्राक्कलित लागत की राशि की गणना की गई है। 5. अधिभोग प्रमाण पत्र/पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु (योजना प्राधिकार से) विषयांकित परियोजना के भवनों केसिविल/एम.ई.पी. और अन्य संलग्न कार्याें की पूर्णता का अतिशेष व्यय का लागतरू. ----------------------------(कुल सारणी'क' एवं 'ख'का योग)आकलित है।

6. मै प्रमाणित करता हूँ कि यह प्रमाण पत्र की तिथि यथा पूर्ण हुई उपर्युक्त परियोजना के लिए सिविल/एम.ई.पी. और अन्य कार्यों की लागत टेबल 'क' और 'ख' मेें नीचे दी गयी हैः-

सारणी-क भवन/विंग जिसकी संख्याः----------------या जिसे-------- कहा गया (भू-सम्पदा परियोजना के प्रत्येक भवन/विंग के लिये अलग-अलग तैयार किया जानेवाला)

क्रम संख्या विवरण राशि
1. निबंधन की तिथि,दिनांकः---------- तक भवन/विंग की कुुल प्राक्कलित लागत है रू --------------------
2. दिनांकः------------- तक हुआ कुल व्ययित लागत (प्राक्कलित लागत के आधार पर) रू --------------------
3. किए गए कार्य का प्रतिशत (प्राक्कलित लागतके प्रतिशत के रूप में) - --------------------%
4. शेष व्यय योग्य लागत (प्राक्कलित लागत के आधार पर) रू ------------------
5. दिनांक तक---------प्राक्कलित लागत में शामिल नहींकिया गया अतिरिक्त व्यय (अनुलग्नक-क के अनुसार) किया गया व्यय रू ------------------

सारणी ख

क्रम संख्या विवरण राशि
1. निबंधन की तिथि,दिनांकः-----------कोआंतरिक और बाह्‌य विकास कार्य,ले-आउट में सुख सुविधाओं और सुविधाओं सहित की कुल प्राक्कलित लागत है। रू------------------
2. दिनांकः------------- तक उपगत व्यय(प्राक्कलित लागत के आधार पर) रू------------------
3. किए गए कार्य का प्रतिशत (प्राक्कलित लागत के प्रतिशत के रूप में) ---------------------%
4. उपगत किया जानेवाला अतिशेष व्यय (प्राक्कलित लागत के आधार पर) रू------------------
5. दिनांक तक---------प्राक्कलित व्यय में शामिल नहीं किया गया (अनुलग्नक-क के अनुसार) अतिरिक्त/अधिक मदों पर उपगत व्यय रू------------------

अभियंता का हस्ताक्षर (अनुज्ञप्ति संख्याः-------------) * नोटः

1. स्कोप ऑफ वर्क के अनुसार समय-समय पर अनुमोदित ड्रार्ईंग के अनुसार पूरी भू-सम्पदा परियोजना को पूर्ण किया जाना है ताकि अधिभोग प्रमाण-पत्र/पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सके।

2. मात्रा सर्वे अभियंता के कार्यालय द्वारा किया जा सकता है अथवा वैसे स्वतंत्र मात्रा सर्वेयर द्वारा किया जा सकता है, जिसके द्वारा संगणित मात्रा प्रमाण-पत्र पर अभियंताको भरोसा हो। डेवलपर द्वारा नियुक्त होने वाले स्वतंत्र मात्रा सर्वेयर की दशा में, उसका नाम चिन्हित स्थान (*) पर उल्लिखित करना है और यदि अभियंता कार्यालय द्वारा मात्रा की संगणना की जाती है तो अभियंता के कार्यालय में उस व्यक्ति का नाम, जो मात्रा के संगणन के लिए ज़िम्मेवार हो, का चिन्हित स्थान (*) पर उल्लिखित होना चाहिए।42 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 3. प्राक्कलित लागत में पूरे कार्य को क्रियान्वित करने हेतु अपेक्षित सभी श्रम,सामग्री,उपकरण और मशीनरी शामिल हैं।

4. चूँकि यह एक प्राक्कलित लागतहै इसलिए भू-सम्पदा परियोजना के विकास के लिए अपेक्षित मात्रा में किसी विचलन से उपगत/उपगत किए जाने वाले लागत में संशोधन हो जाएगा।

5. विशिष्टियों सहित कार्य के सभी घटक मात्र सूचक है और निःशोषित नहीं हैं।

अनुसूची-क क्रियान्वित किए गए अधिक/अतिरिक्त कार्यों की लागत सहित सूची (जो मूल प्राक्कलित लागत में शामिल नहीं है) प्रपत्र-3 (देंखें विनियम 3) चार्टर्ड एकाउन्टेंट का प्रमाणपत्र (लेटर हेड पर) (परियोजना के निबंधन और उसके बाद निकासी की गई धनराशि के लिए ) भू-सम्पदा परियोजना की लागत---------- बिहार रेरा निबंधन संख्या---------------

क्रम संख्या विवरण राशि (रू में) प्राक्कलित व्यय
1 (i) भूमि लागतः- (क) भूमि के अधिग्रहण की राशि या विकास अधिकार,लीज प्रीमियम, लीज किराया, ब्याज, विधिक खर्च/ भू-खर्च पर भुगतेय या उपगत लागत। (ख) विकास का अधिकार प्राप्त करने, एफ.एस.आई.अतिरिक्त एफ.एस. आई.,फंजीबुल एरिया प्राप्त करने हेतु भुगतेय प्रीमियम की राशि तथा स्थानीय प्राधिकरण या राज्य सरकार या किसी वैधानिक प्राधिकार से डी.सी.आर. के अधीन प्राप्त कोई प्रोत्साहन। (ग) टी.डी.आर. (यदि कोई हो) की अधिग्रहण लागत। (घ) स्टाम्प शुल्क, स्थानांतरण चार्ज, निबंधन फीस आदि के मद मे राज्य ं या केन्द्र सरकार या किसी अन्य वैधानिक प्राधिकार को भुगतेय राशि; (ङ) लोक प्राधिकारोंके स्वामित्व वाली भूमि के पुनः विकास के लिए वार्षिक विवरणी दर (ए.एस.आर.) के अनुसार भुगतेय भूमि का प्रीमियम। (च) पुनर्वास योजना के अधीनः (i) अभियंता द्वारा यथा प्रमाणित स्थल विकास और इसके लिए आधारभूत संरचना सहित पुनर्वास की प्राक्कलित निर्माण लागत। (ii) चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा यथाप्रमाणित लेखापुस्त के अनुसार उपगत पुनर्वास भवन के निर्माण की वास्तविक लागत। नोटः-(उपगत निर्माण के कुल लागत के लिए(i) या (ii) मेंजो कम हो,विचारणीय होगा) (iii) अस्थायी बाधा वास सुविधा अथवा अवभार वास सुविधा के बदले किराया, उपरि व्यय (ओवर हेड) उपलब्ध करने के लिए लागत, वैध/अवैध अधिभोगियों को हटाने के व्यय सहित सभी या किसी अधिभारमदमे व्यय। ं (iv) ऐसी लागत जो ए.एस.आर. संबंधितप्रीमियम, फीस, भार और सुरक्षा-जमा या रख-रखाव जमा, या अन्य राशि जो किसी प्राधिकार को परियोजना के पुनर्वास हेतु भुगतेय हो। भूमि लागत का उप-योग - ------------- --------------
(ii) विकास लागत/निर्माण लागत। (क)(i) अभियंता द्वारा यथा प्रमाणित निर्माण की प्राक्कलित लागत। (ii) चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा यथासत्यापित लेखा पुस्त के अनुसार उपगत निर्माण की वास्तविक लागत। राशि (रू में) प्राक्कलित राशि
नोटः- (उपगत कुल निर्माण लागत में जोड़ने हेतु उक्त (i) या (ii)में से जो कम हो,न्यूनतम पर विचार किया जाएगा)। (iii) उपर्युक्त (i) या (ii) के अनुसार कुल निर्माण लागत यथा-वेतन, सलाहकार फीस, स्थल अधिव्यय विकास कार्य, सेवा खर्च(जिसमें जल, विद्युत, सिवरेज, ड्रेनेज, रोड, ले आउट आदि शामिल है) मशीनरी और उपकरण का खर्च जिसमें उसका भाड़ा और रख-रखाव खर्च, कंज्यूमेबुल सामग्री इत्यादि शामिल है, को अपवर्जित करते हुए पूरी परियोजना के विकास के लिए स्थल पर व्यय/निबंधित परियोजना का सभी फेजों का निर्माण पूरा करने हेतु सीधे उपगत लागतः (ख) किसी वैधानिक प्राधिकार को टैक्स,सेस, फीस, चार्ज, प्रीमियम, ब्याज आदि का भुगतानः (ग) वित्तीय संस्थानों, अनुुसूचित बै क, गैर बैंकिग वित्तीय संस्थान,(एन.बी. ं एफ.सी) को भुगतेय अथवा निर्माण निवेश पर ऋणदाताओं या निर्माण के लिए उधार लिए गए धन पर मूल धनराशि और ब्याज। ि वकास लागत का उप-योग - -------------- - --------------
2 कुल प्राक्कलित कॉलम की भू-सम्पदा परियोजना [1(i)+1(ii)] की कुल प्राक्कलित लागत-
3 भू-सम्पदा परियोजना उपगत कॉलम [1(i)+1(ii)]की उपगत कुल लागत
4 निर्माण कार्य की पूर्णता प्रतिशत (%) में (परियोजना वास्तुविद के प्रमाणपत्र के अनुसार)
5 कुल प्राक्कलित लागत (3/2) में भूमि लागत और निर्माण लागत पर उपगत लागत का अनुपात।
6 राशि जिसकी निकासी अभिहित लेखा से की जा सकती हो। कुल प्राक्कलित लागत एवं प्राक्कलित लागत का अनुपात (क्रमांक 2एवं क्रमांक 5)
7 घटावः- लेखा पुस्त के आधार पर दिये गए प्रमाण पत्र और बैंक विवरणी के अनुसार इस प्रमाण पत्र की तिथि तक निकासी की गई राशि।
8 शुद्ध राशि जिसकी निकासी इस प्रमाण पत्र के अधीन अभिहित बै क से ं की जा सकती हो।
43 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

यह प्रमाण पत्र रेरा अनुपालन के लिए (प्रोमोटर का नाम)---------------------- कंपनी के लिए निर्गत किया जाता है यह अभिलेखाें और दस्तावेजों तथा मुझे उपलब्ध कराये गए तथा कंपनी के प्रबंधन द्वारा दिये गये स्पष्टीकरणों पर आधारित है।

विश्वासभाजन

चार्टर्ड एकाउन्टेंट का हस्ताक्षर

सदस्यता संख्या----------- नाम-----------------

क्रमांक विवरण राशि प्राक्कलित व्यय
1. भू-सम्पदा परियोजना को पूरा करने हेतु प्राक्कलित अतिशेष लागत (कुल प्राक्कलित परियोजना लागत घटाव उपगत लागत का अंतर(प्रपत्र-4 के अनुसार संगणित)
2 विक्रय किए गए अपार्टमेंट से प्राप्त होने योग्य का अतिशेष राशि (चार्टर्ड एकाउन्टेट द्वारा अभिलेखो और लेखा पुस्त से यथा प्रमाणित प्रमाण पत्र ं अनुसूची 'क' के अनुसार)
3 (i) विक्रय नहीं किए गए क्षेत्र का अतिशेष (प्रबंधन द्वारा प्रमाणित, तत्पश्चात्‌ चार्टर्ड एकाउन्टे ट द्वारा अभिलेखों एवं लेखा पुस्त के आधार पर ं सत्यापित) (ii) विक्रय नहीं किए गए अपार्टमेंट के संबंध मे ं विक्रय उत्पाद की प्राक्कलित राशि ( प्रमाण पत्र की तिथि को (ए.एस.आर. से विक्रय न किए क्षेत्र में गुणा करके संगणित प्रमाणपत्र की तिथि अनुसूची 'क' के अनुसार चार्टर्ड एकाउन्टे ट द्वारा संगणित तथा प्रमाणित किया जाने ं वाला।)
4 चालू परियोजना का प्राप्त होने योग्य धनराशि, 2+3(ii) का योगः
5 अभिहित लेखा में जमा की जाने वाली राशि-70% या 100%, यदि उपर्युक्त 1 से उपर्युक्त-4 अधिक हो, तो चालू परियोजना के प्राप्त होने योग्य अतिशेष का 70% अभिहित खाते में जमा किया जाएगा। यदि उपर्युक्त 4, उपर्युक्त 1 से कम हो तो चालू परियोजना हेतु अतिशेष प्राप्त होने वाली राशि का 100% अभिहित खाते में जमा किया जाएगा।
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 44

यह प्रमाणपत्र (प्रोमोटर का नाम)-------------------------- के लिए रेरा अनुपालन के लिए निर्गत किया जाता है तथा यह मेरे समक्ष उपस्थापित अभिलेखों और दस्तावेजों तथा कंपनी के प्रबंधन द्वारा मुझे दिये गए स्पष्टीकरणों पर आधारित है।

विश्वासभाजन

चार्टर्ड एकाउन्टेंट का हस्ताक्षर सदस्यता संख्या----------- नाम-------------------

परिशिष्ट-क चालूभू-सम्पदा परियोजना के विक्रय से प्राप्त होने योग्य के संगणन की विवरणी बिक्रित इन्वेन्टरी

क्रमांक संख्या फ्लैट संख्या कारपेट एरिया (वर्ग मीटर में) यूनिट, एकरारनामा आवंटन पत्र के अनुसार क्रय मूल्य प्राप्त राशि अतिशेष प्राप्त होने योग्य
(1) (2) (3) (4) (5) (6)

(अबिक्रित इन्वेन्टरी का मूल्यांकन) आवासीय/व्यावसायिक परिसर के प्रमाणन की तिथि को दर संगणन तालिका के अनुसार दर रू-------------वर्ग.मी.

क्रम संख्या फ्लैट संख्या कारपेट एरिया (वर्ग मीटर में ) दर संगणन तालिका के अनुसार इकाई का निर्धारण
01 02 03 04
45 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

प्रपत्र-4

(देंखें विनियम-9(1))

चार्टर्ड अकाउंटेंट के लेटर हेड पर, व्यवहार में, (जो वैधानिक लेखा परीक्षक हो) खातों के विवरण पर वार्षिक रिपोर्ट सेवा में,

-------------------(प्रोमोटर का नाम और पता) ------------------------------------------------------------ --------------------------------------------

विषयः- (प्रोमोटर का नाम) बिहार रेरा निबंधन संख्या-------------- के संबंध में दिनांक ------------ से ------------की अवधि के लिए प्रोमोटर द्वारा परियोजना निधि की उपयोगिता और निकासी की लेखा विवरणी पर प्रतिवेदन।

1. यह प्रमाण पत्र बिहार भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 सह पठित बिहार भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2017 के प्रावधानों के अनुसार जारी किया जा रहा है।

2. मैंने/हमने कम्पनी की लेखा परीक्षा के दौरान कम्पनी की सभी आवश्यक जानकारी और स्पष्टीकरण जो मेरी/हमारी राय में उस प्रमाणपत्र के प्रयोजनार्थ आवश्यक है, प्राप्त कर ली है।

3. मैं/हम एतद्‌द्वारा संपुष्ट करते हैं कि मैंने/हमने-----------------को समाप्त कालावधि के लिए---------------(प्रोमोटर) के विहित पंजी,पुस्त और दस्तावेजों तथा सुसंगत, अभिलेखों का परीक्षण कर लिया/लिए हैं और एतद्‌ द्वारा प्रमाणित करते हैं किः-

(i) मेसर्स------------------------------------------(प्रोमोटर) ने परियोजना का नाम -----------------------------जिसका बिहार रेरा निबंधन संख्या---------------जो-------------------------- पर स्थित है का ---------प्रतिशत काम पूर्ण कर लिया है।

(ii) इस परियोजनाके लिए इस वर्ष के दौरान संग्रहित राशि रू-------है तथा अभी तक रू--------------संग्रहित है।

(iii) इस परियोजना के लिए इस वर्ष के दौरान निकासी की गई राशि रू------------है तथा अभी तक रू------------की राशि की निकासी की जा चुकी है।

4. मैं/हम प्रमाणित करते हैं कि ---------------------------(प्रोमोटर का नाम और पता)द्वारा संग्रहित राशि का उपयोग केवल इस परियोजना----------------------के लिए किया गया है और इस परियोजना के अभिहित बैंक खाते से की गई निकासी प्रोजेक्ट की पूर्णता के अनुपात के अनुसार है।

(यदि नहीं, तो अर्हक राशि से अधिक निकासी की गई राशि अथवा किसी अन्य कोई अपवाद हो तो विनिर्दिष्ट किया जाय)

(सी.ए. का हस्ताक्षर और हस्ताक्षरी सी.ए.स्टांप/मुहर) हस्ताक्षरी का नामः------------------- ------------------------------ पूरा पताः------------------------- ------------------------------ ------------------------------ ------------------------------ सदस्यता संख्याः--------------------- स्थानः-------------- संपर्क न.ः------------------------ दिनांकः------------- ई. मेलः-------------------------

प्रपत्र-5

(देंखें विनियम-22)

समक्ष,

बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण,पटना प्राधिकृति/वकालतनामा प्रपत्र(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 46 रेरा/शिकायत संख्या/स्वतः संज्ञान/इजरायवाद संख्या/-------

-----------------------------------------------------वादी

बनाम

----------------------------------------प्रतिवादीगण के मामले में। प्राधिकृति का ज्ञापन

मैं/हम---------------------------------------------------- उपर्युक्त वर्णित नामों के वादी/प्रतिवादी उक्त वाद/विषय की कार्यवाही में मेरे/हमारे वास्ते कार्रवाई/बहस/ उपस्थित होने हेतु एतद्‌ द्वारा अधिवक्ता/अधिवक्ताओं, जिनका निबंधन संख्या------ बैठक का स्थान और मोबाईल संख्या------------------है, को नामित/नियुक्त/गठित करते हैं।

साक्ष्य के रूप में, मैं/हम स्वेच्छा से आज दिनांक------------को हस्ताक्षर करता/करते हूँ/हैं। स्थानः-------

(वादी/प्रतिवादी) (अधिवक्ता का नाम एवं हस्ताक्षर) दिनांक------- स्थानः

दिनांकः

प्रपत्र-6 (देंखें विनियम-24(2)) बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण दस्तावेजों/अभिलेखों के निरीक्षण/प्रतियों को प्राप्त करने हेतु आवेदन। मैं एतद्‌द्वारा उपर्युक्त मामले में निम्नलिखित दस्तावेजों/अभिलेेखों केनिरीक्षण/प्रतियाें कोप्राप्त करने हेतु अनुमति प्राप्त करने का आवेदन देता हूँ। विवरण निम्नांकित हैः-

1. दस्तावेजों/अभिलेखों का निरीक्षण करने/प्रतियों को प्राप्त करने की मांग करने वाले व्यक्ति का नाम और पता ः-------------------------------------------------- -------------------------------------------------------

2. क्या वह वाद का पक्षकार है अथवा वह किसी पक्षकार का प्राधिकृत प्रतिनिधि है (आवश्यक विवरण दें)------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------

3. निरीक्षण/अपेक्षितप्रतियों की मांग किए जाने वाले कागजातों/दस्तावेजों का ब्यौराः---------

-------------------------------------------------------- 4. निरीक्षण हेतु याचित तिथि एवं अवधिः----------------------------------- 5. भुगतेय फीस की राशि (सुसंगत विनियम के अनुसार) और भुगतान की विधिः------------- --------------------------------------------------------

हस्ताक्षर स्थानः नामः-

दिनांकः पताः-

कार्यालय उपयोग मो.नं.- दिनांक-----------को निरीक्षण की अनुमति------------------/अस्वीकृति दिनांक-----------को अभिलेखाें की प्रतिलिपि की अनुमति----------/अस्वीकृति

सचिव/अधिकारी/प्राधिकरण द्वारा नामित

अध्यक्ष, भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकार, बिहार के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, सचिव।47 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 FORM-7 [REGULATION-9] Quarterly Progress Reportfor t h e Quarter ending 3 1 s t March/30th

I. PARTICULARS OF PROMOTERS
Promoter's RegistrationNumber/CIN No/ Registration no. of the Partnership firm/LLP Identification number/Any other Name of the Promoter's Entity Remarks
Address of the Promoter's Entity :
Total Experience of the Promoter in Real Estate Sector (In completed years)
Total Experience in Real Estate Sector after commencement of RERA. (In completed years)
No. of Projects done before commencement of RERA 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum Commercial 4. Plotted project
No. of Project done after commencement of RERA II. PARTICULARS OF PROJECT 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum Commercial 4. Plotted project
Project Registration Number Name of Project
Name of Promoter Project Address
Project Registration is valid upto
Starting date of Project
Type of Project 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum-Commercial 4, Plotted project
Name of the Competent Authority which sanctioned the project map
Period of validity of map as granted by the Competent Authority concerned
III. DISCLOSURE OF BOOKED INVENTORY OF APARTMENTS
Building/Block Number Apartment/ Unit Type Carpet Area Total Number of sanctioned apartments/ unit-wise Total Number of Apartments in Promoter's share – Total Number of Apartments in Promoter's share – Total Number of Apartments in Landowner's share Total Number of Apartments in Landowner's share
Booked Agreement for sale Executed Booked Agreement for sale Executed
1-BHK
2-BHK
3-BHK
4-BHK and over
shop
Office Space
Bunglow
Plots (In case of plots specific area of plot must be mentioned )
Total Carpet Area % of total units % of total units % of total units % of total units
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 48

IV. DETAILS OF ASSOCIATION OF ALLOTTEES : Mandatory in case the booking percentage exceeds 50% of the total sanctioned

flats/plots/buildings/commercial space49 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 The details of the Association of Allottees need to be provided in the proforma of Association of Allottees attached with this Form.

V. CANCELLATION OF FLAT ALLOTMENT, IF ANY WITH FLAT NUMBER/BUNGALOW /PLOT NO. /OFFICE SPACE/SHOP/ETC.
(A) Cancelled by Allotees Flat No./Plot no. /Shop No./Etc. : *whether notice and reminder of cancellation was served to the Promoter by Allottee/s Yes/No VI. DISCLOSURE OF BOOKED INVENTORY OF GARAGES/PARKING SPACE (B) Cancelled by Promoters Flat No. /Plot no. /Shop No./Etc. : *Whether notices and reminder of cancellation has been served to the Allottees by serving Yes/No
Building Wise /Block Number Total Number of Sanctioned Garages/ Parking Space
VII. DETAILS OF BUILDING APPROVALS
S.No. Name of the Approval/ N.O.C./Permission/ Certificate Issuing Authority Validity up to Attach Copy
1. Environment Clearance
2. Fire N.O.C.
3. Airport Authority of India N.O.C.
4. Water Supply Permission
5. Other Approval(s), if any, Required for the Project.
VIII. PROGRESS OF THE PROJECT – INTERNAL INFRASTRUCTURE DEVELOPMENT In case of more than one Block/Building/Apartments/Plots/Bungalow, the details have to be filled for each Block separately
S.No. (1) Tasks/Activity (2) Percentage of Actual Work Done (As on date of the Certificate) (3) Expected Completion date in (dd/mm/yy) Format
1. Excavation (if any)
2. Basements (if any)
3. Podiums (if any)
4. Plinth
5. Stilt Floor
6. Slabs of Super Structure
7. Internal walls, Internal Plaster, Floorings, Doors and Windows within Flats /Premises.
8. Sanitary Fittings within the Flat/Premises, Electrical Fittings within the Flat/Premises
9. Staircases, Lifts Wells and Lobbies at each Floor level, Overhead and Underground Water Tanks.
10. External plumbing and external plaster, elevation, completion of terraces with water proofing of theBuilding/Wing.
11. Installation of Lifts, water pumps, Fire Fighting Fittings and Equipment as per prescribed norms.
12. N.O.C, Electrical fittings, Mechanical Equipment, compliance to conditions of environment as per prescribed norms
13. Finishing to entrance lobby/s plinth protection, paving of areas appurtenant to Building/Wing, Compound Wall and all other requirements as may be required to complete project as per Specifications in Agreement of Sale. Any other activities.
14. Overall Percentage of Actual Work Done and final completion date
IX. EXTERNALINFRASTRUCTURE DEVELOPMENTWORKS - PROGRESS RELATED TO AMENITIESANDCOMMONAREA
S. No. Common Areas and Facilities Proposed(Yes/No) Percentage of actual Work Done (As on date of the Certificate) Expected Completion date in (dd/mm/ yy) Format
(1) (2) (3) (4) (5)
1. Internal Roads & Footpaths
2. Water Supply
3. Sewerage (Chamber, Line, Septic Tank, STP)
4. Storm Water Drains
5. Landscaping & Tree Planting
6. Street Lighting
7. CommunityBuildings
8. Treatment and Disposal of Sewage and Sullage Water
9. Solid Waste Management & Disposal
10. Water Conservation/Rain Water Harvesting
11. Energy Management
12. Fire Protection and Fire Safety Requirements
13. Closed Parking
14. Open Parking
15. Electrical Meter Room, Sub- Station, Receiving Station
16. Others (Option to Add More)
17 Overall Percentage of Actual Work Done and final completion date
EXTERNAL AND INTERNAL DEVELOPMENT WORKS IN CASE OF X. PLOTTED DEVELOPMENT
PROPOSED YES/NO. PERCENTAGE OF ACTUALWORK DONE (As on date of certificate) Expected Completion date in (dd/mm/yy) Format
1. Internal Roads and foot paths
2. Water Supply
3. Sewerage Chambers Septic Tank
4. Drains
5. Parks, Land Scaping and Tree Planting
6. StreetLighting
7. Disposalofsewage&sullag e water
8. Water conservation/Rain Water Harvesting
9. EnergyManagement
XI. FINANCIAL PROGRESS OF THE PROJECT
Particulars Amount (In Rs.)
Project Account No.
Estimated Cost of the Project including Land Cost at the start of the Project
Estimated Development Cost of the Project at the start of the Project.(Excluding Land Cost)
Any Variation in Development Cost which is declared at thestartoftheProject.
Amount received during the Quarter
Actual Cost Incurred during the Quarter
Net amount at end of the Quarter
Total expenditure on Project till date
Cumulative fund collected till the end of Quarter in question
Cumulative expenditure done till the end of Quarterin question
Percentage of Expenditure incurred of the total Estimated development cost of the project.
DETAILS OF MORTGAGE OR CHARGE IF ANY CREATED/DETAILS OF XII. LOAN TAKEN BY PROMOTERS AGAINST THE PROJECT, If any
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 50 51 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 52 53 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 54

(A) By Bank (B) By Lenders/etc.

XIII. GEO TAGGED PHOTOGRAPHS (EACH BLOCK/BUILDING/APARTMENTS/PLOTS/BUNGALOW) OF THE PROJECT The photograph must have date.
(A) Sr.No.
1. Photographs showing Front Elevation
2. Photographs showing Rear Elevation
3. Photographs showing Side Elevation (Both sides)
4. Photograph of each floor showing the progress of interior works
5. Photograph of Common Areas (Staircase, Lift Area, Terrace, Parking, etc.)
B. Sr No
1. Photograph of the display board set up at the project site providing requisite information along with the QR code of the project allotted by the
XIV. MISCELLANEOUS Authority
A List of Legal Cases (if any) – Against Project / Promoter
1. (a) Case No. (b) Name of Parties O rder Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No)
2. No. of Execution Cases against this project ( a) Case No. (b) Name of Parties Order Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No)
3. No. of Suo - Moto cases against this project ( a) Case No. (b) Name of Parties
O rder Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No)
4. No. of Certificate cases /PDR cases against this project (a) Case No. (b) Name of Parties Order Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No)
XV. PERCENTAGE OF WORK ALONG WITH MILESTONE CHART
a. Whether the project is in progress as per time schedule or lagging behind? Yes/No b. If yes, whether it would be completed on the completion date fixed as per RC. Yes/No c. If No, then Reason for delay:
XVI. BROCHURE /Prospectus: Copy of the brochure/prospectus to be uploaded with Form 7
XVII.Name of Grievance Redressal Officer nominated by the Promoter whom allottee can contact in case of any query or grievance
Name : Contact No : Email id : Undertaking:
55 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

I/we solemnly affirm, declare and undertake that all the details stated above are true to the best of my/our knowledge and nothing material has been concealed.I am/we are executing this undertaking to attest to the truth of all the foregoing information and to apprise the Authority of such facts as mentioned as well as for whatever other legal purposes this undertaking may serve.

Signature of Promoter Name:

Date:

(फार्म 8) [विनियमन-32] निष्पादन प्रपत्र [रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 40, सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 21 और बिहार रेरा नियमावली, 2017 का नियम 25/26 देखें। प्राधिकरण/न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष निष्पादन के लिए आवेदन नियम 25/26 के साथ धारा 40 के तहत निष्पादन मामला।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 56 विनियामक प्राधिकरण(ओं) के कार्यालय के उपयोग के लिए दाखिल करने की तिथिः____________________________________ ऑनलाइनदाखिल के माध्यम से रजिस्ट्री द्वारा प्राप्ति की तिथिः___________________________ निष्पादन मामला संख्या____________________ मूल शिकायत संख्याः____________________ हस्ताक्षरः_______________________________ रजिस्ट्रारः_______________________________ नियामक प्राधिकरण के कार्यालय में (स्थान का नाम)....................................................... ____________________________________________शिकायतकर्त्ता

बनाम

_______________________________________प्रतिवादी 1. शिकायतकर्ता(ओं) का विवरण___________________________ (i) शिकायतकर्ता का नाम__________________________ (ii) शिकायतकर्ता के वर्तमान कार्यालय/निवास का पता_________________________ (iii) सभी नोटिसों की संसूचन सर्विस के लिए पताः___________________________ (iv) संपर्क विवरण (फोन नंबर, ई-मेल, फैक्स नंबर आदि)_______________________ 2. प्रतिवादी(ओं) का विवरण_______________________________________ (i) प्रतिवादी का नाम___________________________________________ (ii) प्रतिवादी का कार्यालय/आवास का पता_____________________________ (iii) सभी नोटिसों की संसूचन सर्विस के लिए पता_________________________ (iv) संपर्क विवरण (फोन नंबर, ई-मेल, फैक्स नंबर आदि)____________________ 3. निष्पादन करने वाले जिला मजिस्ट्रेट (डीएम)/प्रधान सिविल न्यायालय का अधिकार क्षेत्र__________________________ (यदि आवश्यक हो) । शिकायतकर्ता यह घोषणा करता है कि दावे की विषय-वस्तु जिला मजिस्टे्रट (डीएम)/प्रधान सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आती है। 4. तथ्य एवं मूल आदेष की तिथि______________________________________

[आदेश का संक्षिप्त ऑपरेटिव भाग दें]__________________________________________ ____________________________________________________________________________ ____________________________________________________________________________ __________________________________________

5. मांगी गई राहतः उपरोक्त पैराग्राफ 4 में उल्लिखित तथ्यों के मद्देनजर, शिकायतकर्ता धारा/धाराओं के तहत निम्नलिखित राहत के लिए प्रार्थना करता हैः ____________________________________________________________________________ ____________________________________________________________________________ _________________________________________________________________________ 6. किसी अन्य न्यायालय में लंबित मामला निष्पादन आदिः शिकायतकर्ता यह भी घोषणा करता है कि जिस मामले के संबंध में यह निष्पादन याचिका दायर की गई है, वह किसी भी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण या किसी अन्य न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित नहीं है।

7. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियम, 2017 के 25/26 के संदर्भ में शुल्क के संबंध में कोर्ट फीस के ऑनलाइन भुगतान का विवरण

(i) राशि- रू0 (ii) देय बैंक का नाम-खाता संख्या 2968000101053609, IFSC- PUNBO296800 (iii) ऑनलाइन भुगतान विवरण (आई एफ एस सी कोड और खाता संख्या) - 8. संलग्नकों की सूचीः

क. शिकायतकर्ता की ओर से पारित अंतिम आदेश जिसे इजरायवाद में उद्यृत किया गया है। ख. दस्तावेजों की सूची/प्रदर्श।57 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 ग. इजरायवाद में प्रस्तुत अन्य दस्तावेज।

शिकायतकर्त्ता का हस्ताक्षर

वेरिफिकेशन

मैं ...................................................................................... (पूरा नाम), पिता/पति का नाम ............................................... पता गाँव ............. ....................................................... पो०- ............................................ थाना- .................................... जिला- ................................................... .............. राज्य- ............................................. पिन- ............................................. जो RERA/CC/…………./………… में शिकायतकर्त्ता के रूप में हूँ, अपनी ओर से निष्ठापूर्वक कह रहा हूँ कि उपर्युक्त अंकित विवरण मेरी जानकारी में सत्य है एवं मेरे द्वारा कोई भी सच्चाई छुपाई नहीं गई है। स्थानः- दिनांकः-

शिकायतकर्त्ता का हस्ताक्षर

1. प्रत्येक इजरायवाद हिंदी/अंग्रेजी भाषा में दायर किया जायेगा और यदि यह किसी अन्य भारतीय भाषा में हो तो इसका हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद संलग्न कर प्रस्तुत किया जायेगा, जो टंकित व पठनीय हो।

2. प्रत्येक इजरायवाद का लिफाफा संचिका इतना बड़ा लिफाफा में प्रस्तुत किया जायेगा, जिसमें प्रतिवादी का पूर्ण पता और जहाँ प्रतिवादियों की संख्या एक से अधिक हो तब पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त लिफाफा जिसपर प्रतिवादी का पूरा पता लिखा हो।

The 1st August 2024 REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY (RERA), BIHAR

No. 01---Bihar RERA/Gen.Regulations/2024. In Exercise of the powers conferred under Section 85 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016, the Bihar Real Estate Regulatory Authority, hereby makes the following Regulations.

1. Short title, extent, commencement and application: (1) These Regulations may be called the Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Regulations, 2024.

(2) It shall extend to the whole of the State of Bihar. (3) These Regulation shall come into force with immediate effect. (4) These Regulations shall apply in relation to all matters falling within the jurisdiction of the Real Estate Regulatory Authority in the State of Bihar.

2. Definitions: (1) In these Regulations, unless the context otherwise requires: -

(i) "Act" means the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (as amended from time to time);

(ii) "Application" for registration of real estate project before the Authority means an application complete in all respect and accompanied by all the requisite documents and prescribed fee/late chargeor additional charge as per the relevant provisions of RERA Act, 2016, Rules and Regulations made thereunder and orders/directions issued in this regard by the Authority from time to time.

(iii) "Adjudication" means the process of arriving at decisions on complaints received by the Authority under Section 31 of the Act orby the Adjudicating Officer under Section 31 read with Section 71 of the Act; (iv) "Authority "means the Bihar Real Estate Regulatory Authority; (v) "Chairperson" means the Chairperson of the Authority; (vi) "Consultant"includes any person or any organisation,not in the regular employment of the Authority, who/ which may be engagedon a short-term(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 58 basisto assist the Authority on the matter required to be dealt with by the Authority under the Act and the Rules and Regulations made thereunder; (vii) "Form" means the form and forms appended to the RERA Act, 2016, Rules and Regulations made there under.

(viii) "Member" means a Member of the Authority appointed under Section 21 of the Act for the purpose of exerciseof any responsibility orthe authority vested into a Member under the Act or Rules;

(ix) "Officer" means an officer of the Authority; (x) "Proceedings" means and includes proceedings of all nature that the Authority may conduct in the discharge of its functions under the Act and the Rules and Regulations made there under;

(xi) "Regulation" means the Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Regulations2024.

(xii) "Rule" means the Bihar Real Estate (Regulation and Development) Rules, 2017 made by the Government of Bihar under the Act. (as amended from time to time);

(xiii) "Secretary" means the Secretary of the Authority; (xiv) "Section" means the section of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016.

(xv) "Property" means property of any kind, whether movable or immovable and includes any right or interest in such property.

(xvi) "Late Charge": -The promoter or agent, as the case may be, shall be required to pay to the Authority the late charges at the rates, as may be determined byRegulations, general or special order of the Authority, declaredor uploaded on thewebsite of the Authority from time to time;

(xvii) "Additional Charge": -The promoter or agent, as the case may be, shall be required to pay to the Authority the additionalcharges at the rates, as may be determined by general or special order of the Authority, declared and uploaded on the website of the Authority from time to time;

(xviii) "Booking Amount" means the advance payment or an application fee or any amount howsoever named and would be the amount paid by the flat / plot / homebuyer to the promoter at the time of the booking of flat / plot / homewith an intention to purchase the same at the given cost, in accordance with Section 13(1) of the RERA Act, 2016.

(2) Words or expressions occurring in these Regulations and not defined herein but defined in the Act or the Rules shall bear the same meanings respectively assigned to them in the Act and the Rules made there under.

3. Formats of Certificates of Architect, Engineer, and Chartered Accountant: The Certificates to be issued by the project architect, project engineer, and chartered accountant in practice for withdrawal of money from the separateaccount maintained under section 4(2) (l) (D) shall be in Form 1, 2 and 3 respectively as well as shall be submitted with the application of registration of ongoing projects and along with Form 7 as specified under Regulation 9 (3). Explanation 1. The Chartered Accountant certifying the progress of the registered real estate project for the purpose of withdrawal of amounts from the separate account should be a "different entity" than the Chartered Accountant, who is the Statutory Auditor of the promoter's enterprise.

59 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

Explanation 2.-If the Form No.4 issued by the Chartered Accountant, in Practice, who is the Statutory Auditor of the promoter's enterprise reveals that any certificate issued by the project Architect, Engineer, or the Chartered Accountant for withdrawal of funds from the separate bank account has false or incorrect information and the amounts collected for a particular project have not been utilized for the project and the withdrawal has not been in compliance with the proportion to the percentage ofproject work completed, the Authorityin addition to taking penal action as contemplated in the Act and the Rules, may in its discretion also take up the matter with the regulatory body concerned of the Architect, Engineer or Chartered Accountant, as the case may be, for necessary penal action against the said professional, which may include cancellation of registration of membership for practice.

4. Formats of various Certificates in Plotted Development Project: In the case of a plotted development project, the various Certificates for withdrawal of money from the separate account maintained under Section 4 (2) (1) (D) shall be in Form 1, 2, and 3 with applicable referential modification as to the Plotted Development Project details.

5. Every application submitted under Section 4 or Section 6 or Section 9 of the Act shall be submitted to the Authority online along with all the details, relevant documents, and stipulated fees as well as additional charge/ latecharges, if any.

(1) The promoter shall submit an application for registration along with an affidavit stating therein that the share distribution of flats, shops, apartments, towers including parking/ garage, others, if any, and plots are exclusively within his/ her share available for marketing and same will be mentioned in the registration certificate to be issued by the Authority.

(2) The promoter or agent as the case may be, who fails to submit all the requisite documents or does not comply with other requirements of registration as per the provisions of the Act, Rules, and Regulations made thereunder even after an opportunity is given to the applicant to rectify the deficiency in a period as specified by the Authority depending on the merit of the case, shall be treated as incomplete and would be liable to be rejected.

(3) If the defect in application persists and the application is not complete as per the provision of the Act, Rules, and Regulations made thereunder, it shall be liable to be rejected in accordance with the provision of Section 5(1) (b) of the Act, after an opportunity is given to the applicant of being heard in the matter, after being served an advance notice of a period of 7 days from the date of the issuance of the notice.

(4) In case an application is rejected as perRegulation 5(3) above, the Promoter or Agent, as the case may be, may make a fresh application to the Authority along with the fee / late charge / additional charge as the case may be as if it is a new/fresh application for registration/extension.

(5) Stage-wise time schedule of completion of the project in the form of a milestone chart describing the important items of work, Building/Tower/Block-wise of the project shall be uploaded by the promoter on the webpage of the project on the website of RERA, Bihar, within 30 days from the date of registration of the project.

(6) The promoter shall submit details of revised milestones of the development work of the project to be completed within the revised completion date along with the application for extension of registration of the project in Form 'E' as prescribed in Bihar Real Estate (Regulation & Development) Rules 2017 and upload the same on the webpage of the projecton the website of RERA, Bihar.

6. Landowner to be treated as Promoter or Allottee - (1) The Authority or the Adjudicating Officer, as the case may be while disposing of applications under Section 31(1) of the Act, would decide whether the landowner, who has entered into aregistered Development(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 60 Agreement with the promoter, would be considered as an allottee or a promoter, depending upon the facts and circumstances of the complaint that may be placed before it.

Explanation 1 Since the landowner causes a project to be constructed as defined in Section 2(zk) of the Act, he along with the promoter would be jointly responsible for fulfilling the obligations to the allottees as mentioned in the Agreementfor sale, if;

(a) The Development Agreement specifically mentions that the landowner has to actively participate in the construction or development of the project along with the promoter, or (b) The Development Agreement, which states the distribution of share of profits and revenuesbetween promoter and landowner in addition to the share of flats or developed plots, or (c) The landowner markets, advertises, or sells his/her share of apartments before the project is completedin all respects.

Explanation 2.-In matters filed for compensation for defective title of the land, on which the project is being developed as mentioned in Section 18(2) of the Act, the landowner would be jointly responsible for the payment of compensation, as may be decided, by the Adjudicating Officer.

7. Other Fees: (1) The promoter or agent, as the case may be, shall be required to pay to the Authority the additional charge / latecharge at the rates, as may be determined by general or special order of the Authority and declared on website of the Authority from time to time in the following matters: - (i) Fee/ late charge / additional charge for the periodical updation of website; (ii) Fee/ late charge / additional charge for late submissions and for permission for changes required to be made in the application for registration, before or after registration;

(iii) Fee/ late charge / additional charge for any other matter.

8. Display Boards-(1) The promoter shall erect a weather proof geo Tagged (mentioning the latitude and longitude of the project) Display Board of a minimum size of 5'X4' at the project site with the information regarding the name and registration number of the project along with the QR Code issued by the Authority, date of registration, phases of the project, number of towers, number of stories (tower wise) etc. in bold letter and legible language, so that the information may be visible throughout the season / year, till completion of the project.

(2) In the case of plotted development, Promoter shall erect Display Board as mentioned in Sub Regulation (1) above regarding the approved Site Plan indicating the entire area of the projects i.e., roads, water supply, external services, the revenue details of the land of the project i.e., Plot Number, Khata Number, Thana Number and Lay-out Plan superimposed on the Revenue Map, in bold and legible letters so that the information remains displayed till completion of the project.

(3) Name and contact details of the authorised representative of the promoter including the website of promoter, shall also be displayed on the Board as mentioned in Sub Regulation (1) above.

9. Information/Documents to be uploaded by Promoter on the web-page of the project which remains available on the website of the Authority –

1. After the Promoter gets his accounts audited within six months after the end of every financial year by a Chartered Accountant, in practice as per Section 4(2)(l)(D), it needs to be uploaded till 31stof October of the succeeding financial year.The promoter shall upload on the website of the RERA, Bihar in the webpageof the project the statement of accounts of the project in Form 4 (issued in accordance with third proviso to section 4(2)(1)(D) of the Act,) duly certified and signed by the61 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 Chartered Accountant, in practice,who is the statutory auditor and is not auditor of the promoter enterprise by 31st of October of succeeding financial year.

2. All Promoter/Developers of a Real Estate Project shall upload on the website of RERA, Bihar in the webpageof the project about any change (addition/deletion) in the board of Directors of the company/Partners of the firm within a month of occurrence.

3. The promoter shall upload on the webpage of the project on the websiteof the Authority Quarterly progress report in Form no. - 7 along with Form no. – 1, 2, 3, dated picture of Display Board as per regulation 8(1) and QR Code of the project issued by the RERA, Bihar appended with this Regulation within 15 days of expiry of preceding quarter.

4. The promoter shall also upload on the webpage of the projectin the Authority's website the following: -

a. Certificate given by a Civil Engineer, Architect and Chartered Accountant in practice, that the amount withdrawn from the bank up to the end of the quarter in question is commensurate with the physical progress of the project.

b. Certificate given by the Architect and Civil Engineer that the progress of the project is as per the milestone chart submitted by the promoter.

c. Milestone Chart/Bar Chart/Gantt Chart depicting progress of Block/ Tower/Building-wise various level of construction clearly indicating whether the project in progress is as per time schedule or lagging behind.

5. In case any promoter fails to upload Quarterly Statements/Reports as prescribed in Sub – Regulation (3)& (4)of Regulation 9 within stipulated time, he shall be liable to pay penalty which may extend up to 5% of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority under the provision of Section 61 of the Act. However, he may opt to upload QPR and Reports after paying late charge as prescribed below: -

S.no. Delay Late Charge
1. For 1 day to 15 days of delay Rs. 25,000/- (Rupees twenty-five thousand)
2. For 16 days to 30 days of delay Rs. 50,000/- (Rupees fifty thousand)
3. For 31 days to 60 days of delay Rs. 1,25,000/- (Rupees one lakh twenty-five thousand)
4. Beyond 60 days of delay Rs. 3,00,000/- (Rupees three lakh)

(6) In case the promoter provides or submits incomplete Quarterly Statements / Quarterly Progress Report with incomplete information and/ or facts as prescribed in Sub – Regulation (3) & (4)of Regulation 9, then he shall be liable to pay a charge of Rs. 50,000/- (Rupees fifty thousand).

(7) In case the promoter provides or submits Quarterly Statements / Quarterly Progress Report with false information and/ or facts as prescribed in Sub – Regulation (3)& (4)of Regulation 9, then he shall be liable to pay additionalcharge of Rs. 1,00,000/- (Rupees one lakh).

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 62

(8) In case the promoter fails to upload geo tagged dated picture of display board as per regulation 8(1) in Quarterly Statements / Quarterly Progress as prescribed within stipulated time, he shall be liable to pay late charge as prescribed below: -

S.no. Delay Late charge
1. For 1 day to 15 days of delay Rs. 10,000/- (Rupees ten thousand)
2. For 16 days to 30 days of delay Rs. 30,000/- (Rupees thirty thousand)
3. For 31 days to 60 days of delay Rs. 75,000/- (Rupees seventy-five thousand)
4. Beyond 60 days of delay Rs. 2,00,000/- (Rupees two lakh)

required to pay additionalcharge alongwith fee for making an application for extension of registration of real estate project with the Authority as per Section 6 of the RERA Act, 2016 read with Rule 6(2) of the Bihar RERA Rules, 2017: -

S. no. Period of extension Additional Charge
1. Up to 6 months of extension Rs. 4,00,000/- (Rupees four lakh)
2. More than six months but up to 12 months of extension Rs. 10,00,000/- (Rupees ten lakh)
3. In special cases if beyond 12 months Rs. 20,00,000/- (Rupees twenty lakh)

promoter is required to pay fee as per Bihar RERA Rules 2017 for extension of registration of real estate project to the Authority complete applicationin all respect along with the consent of majority of the allottees and allotments letters thereof as per Section 6 of the RERA Act, 2016 read with Rule 6(2)of the Bihar RERA Rules, 2017 within 3 months prior to lapse of registration of project but in case of late filing of extension application, he shall be liable to pay late charge as prescribed below:-

S.No. Delay in days Late charge
Within 3 months after lapse of registration Rs. 2,00,000/- (Rupees two lakh)
After 3 months but within 6 months after lapse of registration Rs. 5,00,000/- (Rupees two lakh)
Beyond 6 months after lapse of registration Rs. 10,00,000/- (Rupees ten lakh)
63 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

12. The promoter shall pay a late charge of Rs. 50,000/- for every month of delay or part thereof for delay on the late submission of Annual Statement of Account, duly certified and signed by chartered accountant, in practice as required in Section 4(2)(l)(D) of the Act. 13. The promoter shall submit following documents in addition to documents submitted under Section 4 of RERA Act read with Rule 3 and 4 of Bihar RERA Rules 2017: -

a. To show the financial worth of the promoter to meet at least ten percent of the estimated development cost of the project to take up the initial cost of the project a statement of asset and liabilities of the Promoter's entity and itsdirector(s)/ partner(s)/ proprietor/ other entity as the case may beas on the date of submission of the application, duly certified by Chartered Accountant.

b. Details of all projects under taken by the director(s)/ partner(s)/ proprietor(s)/ firm/ LLP/ other entity of the company in other capacities, either as individual or as part of other entities, during the last five years along with the details of cases filed in the said projects as mentioned by the promoter and orders passed.

c. The memorandum of the division of share between the promoter and landowner available for marketing and selling on affidavit cum declaration in prescribed format duly signed by the promoter and landowner(s).

d. The promoter shall furnish on affidavit, with the full details of movable and immovable properties of this concernalong with details of such properties of its directors/ partners/ proprietor/ other entity, as the case may be.

14. Application fee for change in Bank Account of the project: - In case the promoter applies for change in 'Separate Account' of the project (opened during the registration of the project), it may be allowed after promoter pays an application fee of Rs. 50,000/- (Rupees fifty thousand only) along with requisite documents, and certificates subject to the fulfilment of the provisions as laid down in Section 4(2)(l)(D), Section 11(4)(g) and Section 11(4)(h) of the Act. 15. The Promoter shall specifically mention the Booking Amount in the Schedule – C of the Agreement to Sale executed between the Promoter and Allottee.

16. Authority's Office, Office Hours and Sittings. - (1) The head office of the Authority shall be at Patna. The Authority may, by order, establish benches and its offices at other places in the State.

(2) The Authority may by order establish benches and its offices at other places in the State.

(3) The Authority may conduct its proceedings at the head office or at any other place within its jurisdiction on days and time as directed by the Chairperson.

17. Language of the Authority. - (1) The proceedings of the Authority shall be conducted in English or Hindi.

(2) The Authority, at its sole discretion, may accept complaint petitions made in English or Hindi.

(3) The Authority may, in appropriate cases, direct translation of Petitions and the accompanying documents into English or Hindi.

18. Seal of the Authority. - Any document requiring authentication by the Authority shall be issued under the seal of the Authority, and shall be signed by the Secretary, Officer on Special Duty or other Officer authorized by the Authority in this behalf.

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 64

19. Functions of Secretary: - [(1) The Secretary shall be the Principal Executive Officer of the Authority and shall exercise his powers and perform his duties under the control of the Authority.

(2) In particular, and without prejudice to the generality of the provisions of sub- regulation

(3) of this regulation, the Secretary shall have the following powers to perform the following duties, viz: -

a. He shall be custodian of the records and the seal of the Authority: b. He shall receive or cause to receive all documents, including, inter alia, complaints, applications or reference pertaining to the Authority;

c. He shall scrutinize documents, including, inter alia, complaints, applications, or references, and shall be entitled to seek clarifications or rectifications upon the same and issue appropriate directions pertaining to the acceptance or rejection of such documents;

d. He shall prepare or cause to be prepared briefs and summaries of pleadings presented by various parties in cases filed before the Authority.

e. He shall carry out such functions under the Act and the Rules, as may be delegated to him by the Authority, by general or special order;

f. He shall assist the Authority in the proceedings relating to the powers exercisable by the Authority, as directed by the Chairperson,

g. He shall provide notice for meetings, prepare the agenda for meetings, and record the minutes of the proceedings of the Authority's meetings:

h. He shall authenticate the orders passed by the Authority, i. He shall, so far as it is possible, monitor compliance of the orders passed by the Authority and shall forthwith bring to the notice of the Authority any non- compliance thereof;

j. He shall have the right to collect from the State Government or local authorities or other offices, companies and firms or any other party as may be directed by the Authority, such information and record, report, documents, etc. as may be considered necessary for the purpose of efficient discharge of the functions of the Authority under the Act and the Rules and place the same before the Authority.

(4) In the absence of the Secretary, an officer of the Authority designated by the Chairperson in this behalf shall exercise the powers and discharge the functions of the Secretary.

(5) The Chairperson shall in addition to the powers vested under Section 25 of the Act and Rule 21, at all times, have the power, either on an application made by any interested or affected party or suo-moto, to review, revoke, revise, modify, amend, alter or otherwise change any order issued or action taken by any Officer of The Authority, if considered appropriate.

(6) The Members may, with the written approval of the Chairperson, delegate to any Officer of the Authority any function required by these Regulations or otherwise to be exercised by the Secretary.

20. Meetings of the Authority -(1) The provisions contained in sub regulations (2), (3), (4), (5), (6), (7) and (8) below, shall be applicable to the meetings of the Authority, other than the adjudicatory proceedings of the Authority.

(2) The quorum for the meetings of the Authority shall be two. (3) If in any meeting of the Authority duly convened, the quorum is not present, the meeting shall stand adjourned for the next suitable date & time and place as decided by the Authority.

65 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

(4) The Chairperson shall preside over the meetings and conduct the business. Members stationed at Benches, outside Patna, may participate in the meetings Through video conferencing. If the Chairperson is unable to be present in the meetings for any reason, or where there is no Chairperson, the senior Member present shall preside over at the meeting.

(5) All questions which come up before any meetings of the Authority shall be decided by a majority of votes of the Members present and voting. In the event of equality of votes, the Chairperson or in his absence, the Member presiding shall have a second or casting vote.

(6) Save as otherwise provided in these Regulations, every Member shall have one vote. (7) The Secretary or in his absence an Officer of the Authority designated by the Chairperson, shall record the minutes of the meetings and maintain a register which will, amongst other things, contain the names and designation of Members and invitees present in the meeting, a record of proceedings and notes of dissent, if any. In case of dissent, the draft minutes shall, as soon as practicable, be sent to the Chairperson.

(8) The decision taken in a meeting of the Authority shall be recorded in the minutes in a clear and concise manner, along with reasons and a copy of the approved minutes shall be sent to all the members. In case the minutes record any statement/submission made by an invitee, a copy of the minutes shall be sent to such invitee.

21. Adjudication Proceedings before the Authority.- For Adjudication Proceedings with respect to complaints filed with the Authority Under Section31 of the Act read with Rule 36 of the Bihar Real (Regulation and Development) Rules 2017, and Suo Motu Cases Under Section 3 of the Act, the Chairperson may, by general order or specific order, direct that specific matter or issues shall be heard and decided by a Single Bench of Chairperson or Member or Double Bench of either the Chairperson or any Member or Members of the Authority.

22. Authorized Representative. - A person who is a party to any proceedings before the Authority may either appear in person or authorise any other person as specified under Section 56 of the Act to present his case before the Authority and to do all or any of the acts for the purpose:

Provided that the person appearing on behalf of any person in any proceeding before the Authority shall file a Memorandum of Authorisation/Vakalatnama, in [Form 5] herein:

Provided further that the Authority may, from time to time, determine the terms and conditions subject to which the allottees may authorize representative(s) to plead on their behalf. In such cases the Authority shall have the power to summon and enforce the attendance of all persons who are concerned with the Real Estate Project, including lenders, landowners in case of joint venture or development agreement as well as the persons who have accorded permissions to the Real Estate Project, as Competent Authority.

23. Orders of the Authority. -(1) The Authority, Chairperson, Members, Adjudication Officer and any officer of the Authority with the delegated powers of the Authority as the case may be, after hearing a proceeding shall pass orders in such proceedings, and such orders shall be signed by the Chairperson, Members, Adjudicating Officer or any officer of the Authority or the Authority, as the case may be.

(2) All orders and decisions shall be certified by the Officer empowered in this behalf by the Chairperson and shall bear the official seal of the Authority and shall be uploaded on the website of the Authority.

24. Records of the Authority. - (1) The Authority shall maintain an indexed database of its records including, inter alia, complaints filed, details of hearings conducted, orders /documents issued from time to time.

(2) The Chairperson shall on such terms and conditions as he considers appropriate provide for supply of certified copies of orders, documents and papers available with the(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 66 Authority to any person, applying in Amended Form 6, subject to the payment of requisite fee as may be decided by the Chairperson from time to time and complying with such terms as the Chairperson may direct. The Chairperson shall designate an officer for ensuring timely response to requests received for supply of certified copies of documents within a period of 14 (fourteen) working days from the date of receipt of request.

(3) The Chairperson may, by order, direct that any information, documents and papers/materials maintained by the Authority shall be confidential or privileged and shall not be available for inspection or supply of certified copies, and the Chairperson may also direct that such document, papers, or materials shall not be used in any manner, except as specifically authorized by the Chairperson.

(4) The Authority shall endeavour to make information involving public interest accessible and available to the public, through its website.

(5) The Chairperson may depute an officer of the Authority, as Information Officer as provided under the Right to Information Act, 2005 and another officer of the Authority as Appellate Authority under the said RTI Act.

25. Interim Orders, Investigation, collection of Information etc.: (1) The Authority may pass such ad-interim or interim orders, as the Authority may consider appropriate at any stage of any proceedings, having regard to the facts and circumstances of the case.

(2) The Authority may make such direction or order as it thinks fit for collection of information, inquiry, investigation etc. and without prejudice to the generality of its powers, including, inter alia, the following: -

(a) The Authority may, at any time, direct the Secretary or any one or more officers or any other person as the Authority considers appropriate to study, investigate or furnish information with respect to any matter within the jurisdiction of the Authority under the Act and the Rules;

(b) The Authority may, for the above purpose, give such other directions, as it may deem fit and state the time within which the report is to be submitted or information furnished;

(c) The Authority may issue or authorise the Secretary or an officer to issue directions to any person to produce before it and allow to be examined and kept by an officer of the Authority directed in this behalf the books, accounts, etc., or to furnish any information to the designated officer;

(d) The Authority may issue such directions, for the purpose of collection of any information, particulars or documents that the Authority considers necessary in connection with the discharge of its functions under the Act and the Rules;

(e) If any such report or information obtained appears to the Authority to be insufficient or inadequate, the Authority or the Secretary or an officer authorised for the purpose may give directions for further inquiry, report and furnishing of information;

(f) The Authority may direct such incidental, consequential and supplemental matters to be attended to which may be considered relevant in connection with the above;

(g) The Authority may for the above purpose take help of police or such other authorities that may be considered necessary and expedient.

(3) If the report or information obtained in accordance with Regulation 25 (2) above or any part thereof is proposed to be relied upon by the Authority for forming its opinion or view in any67 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 proceedings, the parties to the proceedings shall be given a reasonable opportunity for filling objections and making submissions on such report or information.

26. Confidentiality: (1) The Bench hearing the matter shall appraise and determine whether any documents or evidence provided to it by any party and claimed by that party to be of a confidential nature merit being withheld from disclosure to other parties as being confidential and shall provide brief reasons in writing for arriving at its conclusion.

(2) If the Bench is of the view that the claim for confidentiality is justified the Bench may direct that the same may be not provided to such parties as the Bench may deem fit. However, the party claiming the confidentiality shall provide a brief non-confidential summary of the substance of the documents found to be confidential and the import of the same.

(3) Notwithstanding with the above it shall be open to the Bench to take into consideration the contents of documents found to be confidential in arriving as its decision.

27. Rectification of Order – Any person may file a rectification petition in reference to an order passed under Section 31 of the Act as provided in Section 39 of the Act along with a fee of Rs. 250/- (Rupees two hundred fifty only).

28. Continuance of Proceedings after Death etc. (1) Where in a proceeding, any of the parties to the proceeding dies or is adjudicated as an insolvent or in the case of a company under liquidation/winding up, the proceeding shall continue with the other partners, successors-in-interest, the executor, administrator, receiver, liquidator or other legal representative of the party concerned, as the case may be.

(2) The Authority may, for reasons to be recorded, treat the proceedings as abated in case the Authority so directs and dispense with the need to bring the successors-in-interest on the record of the case.

(3) In case any person wishes to bring on record the successors-in-interest, etc., the application for the purpose shall be filed within 90 (ninety) days from the event requiring the successors-in-interest to be brought on record. The Authority may condone the delay, if any, for sufficient reasons.

29. Issue of orders and directions: Subject to the provisions of the Act, Rules and Regulations, the Authority may, from time to time, issue orders and directions in regard to the implementation of the Regulations and procedure to be followed as it deems fit.

30. (1.) Documents to be submitted on Completion of Project. On Completion of project, the Promoter shall submit following documents: -

i. In case Occupancy Certificate is not issued by the Competent Authority concerned, the authenticated copy of Completion Certificate given by Certified Architect submitted before competent Authority for issuance of the Occupancy Certificate including the notice submitted there under.

ii. The Certificate of Chartered Accountant clearly indicating the total fund spent on the project.

iii. Current photograph of the project showing front, side and back elevation of building developed.

iv. Number of Sale Deed(s) executed from the share of the Promoter. v. An Affidavit stating

a. That the Promoter has provided all the services as per the Agreement for Sale, prospectus and brochure.

b. That the number of complaint cases pending against the promoter.

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 68

(2.) The Authority after being satisfied on the basis of such documents that the project is complete, may issue a letter to the promoter on his written request,discharging him from all the responsibilities as per Section 4(2)(1)(D) with intimation to the bank concerned where the separate account of the project is being maintained on the written request of promoter.

31. Saving of Inherent power of the Authority: (1) Nothing in the Regulations shall be deemed to limit or otherwise affect the inherent power of the Authority to make such orders as may be necessary for meeting the ends of justice or to prevent the abuse of the process of the Authority.

(2) Nothing in these Regulations shall bar the Authority from adopting in conformity with the provisions of the Act or Rules, a procedure, which is at variance with any of the provisions of these Regulations including summary procedure, if the Authority, in view of the special circumstances of a matter or class of matters and for reasons to be recorded in writing, deems it necessary or expedient for so dealing with such a matter or class of matters.

(3) Nothing in the Regulations shall bar the Authority from dealing with the matter or exercise of any power under the Act or Rules for which no regulations have been framed, and the Authority may deal with such matters, powers, and functions in a manner as it thinks fit.

32. Execution of Orders -Any Order(s) passed by The Authority, Chairperson, Members, Adjudication Officer and any officer of the Authority with the delegated powers of the Authority as the case may beneeds to be complied in stipulated times.In case the Respondent party Respondent/ Promoter fails to comply with the order, within such time, the complainant may file Execution Petition accompanied with a fee of Rs. 100/- (Rupees one hundred) or as may be prescribedfrom time to time, in Form 8 appended with the Regulation.

33. Power to Remove Difficulties: If any difficulty arises in giving effect to any of the provisions of the Regulations, the Authority may remove such difficulties, by such general or special order, which is not inconsistent with the provisions of the Act or Rules and which appears to be necessary or expedient for the purpose of removing the difficulties.

34. Extension of Time Prescribed: Subject to the provisions of the Act or the Rules, the time prescribed by the Regulations or by order of the Authority for doing any act may be extended (whether it has already expired or not) for sufficient reason by an order of the Authority.

35. Effect of non-compliance: Failure to comply with any requirement of the Regulations shall not invalidate any proceeding merely by reason of such failure unless the Authority is of the view that such failure has resulted in miscarriage of justice.

36. Costs: (1) Subject to such condition and limitation, as may be directed by the Authority/Bench, the costs of and incidental there to, all proceedings shall be awarded at the discretion of the Authority/Bench and the Authority/Bench shall have full power to determine, by whom or out of what finds and to what extent such costs are to berecovered and give all necessary directions for the aforesaid purposes.

(2) The Costs shall be paid within 60 (sixty) days from the date of the order or within such time as the Authority/Bench may, by order, direct. If a party fails to comply with an order for costs within thestipulated time, the order of the Authority/Bench awarding costs shall be executed forthwith in the same manner as a decree/order of a Civil Court.

37. Administrative Charges and Standard Fees: The Authority may, by order, fix standard fees to be levied on the litigating parties, promoters or real estate agents or allottees for inspection of documents, certified copies of documents, the updating of website, database management and maintenance of the website etc.

69 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

38. Personnel Policy: Personnel policies of RERA, Bihar will be as per to the HR Manual / Regulations issued by the Authority from time to time.

39. Adherence to legal norms: In the absence of anything specifically mentioned in the Act or Rules, the Authority may adhere to the extant statutes and rules.

40. Repeal: Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) Reg, 2021and Bihar Real Estate Regulatory Authority (General) (Amendment) Regulations, 2022 are hereby repealed.

By Order of the Authority, Sd./Illegible, Secretary, RERA Bihar.

FORM No. 1 [See Regulation 3] ARCHITECT'S CERTIFICATE (To be submitted at the time of Registration of Ongoing Project and for withdrawal of Money from Designated Account)

Date-----------------

To, The —————————— (Name & Address of Promoter), ________________________________________________ ________________________________________________

Subject: Certificate of Percentage of Completion of Construction Work of--------------- No. of Building(s)/------------------- Wing(s) of the---------------- Phase of the Project [Bihar RERA Registration Number] situated on the Plot bearing C.N. No/CTS No./Survey No./ Final Plot No. -------------------demarcated by its boundaries (latitude and longitude of the end points) -------------------- to the North ------------------- to the South -------------------to the East ------------------ to the West of Division -------------------- village ----------------Block------------ ------- District ------------------------ PIN -----------------------------admeasuring - -------------------- sq.mts. area being developed by [Promoter's Name]---------- --------------------------------

Sir, I/ We ----------------------------------------- have undertaken assignment as Architect /Licensed Surveyor of certifying Percentage of Completion of Construction Work of the ------------------------ ---------------------- Building(s)/---------------------------Wing(s) of the ------------------------ Phase of the Project, situated on the plot bearing C.N. No/CTS No./Survey No./Final Plot No. --------------- --------------------- of Division --------------------------- Village --------------------------Block ----------- ----------------- District -------------------------------- PIN ------------------------- admeasuring ---------- ---------------- sq.mts.area being developed by [Promoter's Name]--------------------------------------- ----------------------------------

1. Following technical professionals are appointed by Owner / Promoter:––

(i) M/s/Shri/Smt. ——————————————as L.S. / Architect; (ii) M/s /Shri / Smt. —————————————— as Structural Consultant (iii) M/s /Shri / Smt. —————————————— as MEP Consultant (iv) M/s /Shri / Smt. —————————————— as Site Supervisor

Based on Site Inspection, with respect to each of the Building/Wing of the aforesaid Real Estate Project, I certify that as on the date of this certificate, the Percentage of Work done for each of the building/Wing of the Real Estate Project as registered vide number under(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 70 ________________Bihar RERA is as per table A herein below. The percentage of the work executed with respect to each of the activity of the entire phase is detailed in Table B.

Table-A Building/ Wing number ……………….. (to be prepared separately for each building / wing of the project )

S.No. Task/Activity Percentage of Actual Work Done Projected date of completion (DD/MM/YYYY)
1. Excavation(ifany)
2. Basements(ifany)
3. Podiums(ifany)
4. Plinth
5. StiltFloor
6. SlabsofSuperStructure
7. Internal walls, Internal Plaster, Floorings,DoorsandWindowswith in Flats /Premises.
8. Sanitary Fittings within the Flat/Premises,ElectricalFittings within the Flat/Premises
9. Staircases, Lifts Wells and Lobbies at each Floor level, Overhead and Underground Water Tanks.
10. External plumbing and external plaster, elevation, completion of terraces with waterproofing of the Building/Wing.
11. InstallationofLifts,waterpumps, Fire Fighting Fittings and Equipment as per CFO NOC, Electrical fittings, Mechanical Equipment,compliancetoconditio ns of environment/CRZ NOC, Finishing to entrance lobby/splint protection, paving of areas appurtenant to Building/Wing, CompoundWallandallother
71 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

Yours Faithfully,

Signature & Name (IN BLOCK LETTERS) of L.S/ Architect (Registration No./License No. ………….) TABLE B Internal and External Development Works in respect of the entire Registered Phase.

S. No. Common Areas and Facilities Proposed (Yes/No) Percentage of actual Work Done (As on date of the Certificate) Projected date of completion (dd/mm/yyyy)
1. InternalRoads&Footpaths
2. WaterSupply
3. Sewerage (Chamber, Line,SepticTank,STP)
4. StormWater Drains
5. Landscaping&TreePlanting
6. StreetLighting
7. CommunityBuildings
8. Treatment and Disposal of SewageandSullageWater
9. SolidWasteManagement&Di sposal
10. WaterConservation/Rain Water Harvesting
11. EnergyManagement
12. Fire Protection and Fire Safety Requirements
13. Electric Meter Room
14. Any Other Amenities
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 72

FORM No. 2 [See Regulation 3] ENGINEER'S CERTIFICATE (To be submitted at the time of Registration of Ongoing Project and for withdrawal of Money from Designated Account- Project wise)

Date :-------------------

To, The —————————— (Name & Address of Promoter), ________________________________________________ ________________________________________________

Subject : Certificate of Cost Incurred for Development of [Project Name]_______________________________ for Construction of __________ building(s)/_______Wing(s) of the _________Phase ( Bihar RERA Registration Number) situated on the Plot bearing Khesra No/ Khata No./Thana No./ Tauzi No../C.N.No./CTSNo./SurveyNo./Final Plot No.______________ demarcated by its boundaries ( latitude and longitude of the end points) ______to the North______to the South ________to the East ________to the West of Division ______ Village________ Block__________ District __________ PIN ___________admeasuring __________sq.mts. area being developed by [Promoter]_________________________________________

Ref: Bihar RERA Registration Number _____________________

Sir,

I/ We__________________________________________ have undertaken assignment of certifying Estimated Cost for the Subject Real Estate Project proposed to be registered under Bihar RERA, being______________Building(s)/ ___________________ Wing(s) of the _______________ Phase situated on the plot bearing C.N. No./CTS No./Survey No./ Final Plot No. ______________ of Division __________ Village____________ Taluka ________________District_______________PIN _____________admeasuring __________sq.mts. area being developed by [Owner/Promoter]

1. Following technical professionals are appointed by Owner / Promoter :––

i. M/s /Shri/Smt ___________________________as L.S. / Architect ;

ii. M/s /Shri/Smt ___________________________ as Structural Consultant iii. M/s /Shri/Smt ________________________ ___as MEP Consultant iv. M/s /Shri/Smt ____________________________as Quantity Surveyor * 2. We have estimated the cost of the completion to obtain Occupancy Certificate / Completion Certificate, of the Civil, MEP and Allied works, of the Building(s) of the project. Our estimated cost calculations are based on the Drawings/plans made available to us for the project under reference by the Developer and Consultants and the Schedule of items and quantity for the entire work as calculated by ____________________ Quantity Surveyor* appointed by Developer/Engineer, and the assumption of the cost of material, labour and other inputs made by developer, and the site inspection carried out by us.

73 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

3. We estimate Total Estimated Cost of completion of the building(s) of the aforesaid project under reference as Rs. ______________________( Total of Table A and B). The estimated Total Cost of project is with reference to the Civil, MEP and allied works required to be completed for the purpose of obtaining Occupancy Certificate / Completion Certificate for the building(s) from the ____________________ being the Planning Authority under whose jurisdiction the aforesaid project is being implemented.

4. The Estimated Cost Incurred till date is calculated at Rs. _________________(Total of Table A and B). The amount of Estimated Cost incurred is calculated on the base of amount of Total Estimated Cost.

5. The Balance cost of Completion of the Civil, MEP and Allied works of the Building(s) of the subject project to obtain Occupancy Certificate / Completion Certificate from________________________ (planning Authority) is estimated at Rs. ___________________( Total of Table A and B).

6. I certify that the Cost of the Civil, MEP and allied work for the aforesaid Project as completed on the date of this certificate is as given in Table A and B below :

TABLE A Building /Wing bearing Number_____ or called ____________________ (to be prepared separately for each Building /Wing of the Real Estate Project)

Sr. No. Particulars Amounts
1 Total Estimated cost of the building/wing as on __________ date of Registration is Rs. _______________
2 Cost incurred as on ____________ (based on the Estimated cost ) Rs. _______________
3 Work done in Percentage (as Percentage of the estimated cost ) _______________ %
4 Balance Cost to be Incurred (Based on Estimated Cost) Rs. ______________
5 Cost Incurred on Additional /Extra Items as on _____________not included in the Estimated Cost (Annexure A) Rs. _______________

TABLE B (To be prepared for the entire registered phase of the Real Estate Project)

Sr. No. Particulars Amounts
1 Total Estimated cost of the Internal and External Development Works including amenities and Facilities in the layout as on __________________ date of Registration is Rs. _______________
2 Cost incurred as on ___________________ (based on the Estimated cost). Rs._______________
3 Work done in Percentage (as Percentage of the estimated cost). ______________ %
4 Balance Cost to be Incurred (Based on Estimated Cost). Rs. ______________
5 Cost Incurred on Additional /Extra Items as on _______________not included in the Estimated Cost (Annexure A). Rs. _______________
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 74

Yours Faithfully,

Signature of Engineer.

(Licence No. ………….) *Note : 1. The scope of work is to complete entire Real Estate Project as per drawings approved from time to time so as to obtain Occupancy Certificate /Completion Certificate.

2. (*) Quantity survey can be done by office of Engineer or can be done by an independent Quantity Surveyor, whose certificate of quantity calculated can be relied upon by the Engineer. In case of independent Quantity Surveyor being appointed by Developer, the name has to be mentioned at the place marked (*) and in case quantity are being calculated by office of Engineer, the name of the person in the office of Engineer, who is responsible for the quantity calculated should be mentioned at the place marked (*).

3. The estimated cost includes all labour, material, equipment and machinery required to carry out entire work.

4. As this is an estimated cost, any deviation in quantity required for development of the Real Estate Project will result in amendment of the cost incurred / to be incurred.

5. All components of work with specifications are indicative and not exhaustive

Annexure A List of Extra/Additional Items executed with Cost (which were not part of the original Estimate of Total Cost) FORM No. 3 [See Regulation 3] CHARTERED ACCOUNTANT'S CERTIFICATE (On Letter Head) (FOR REGISTRATION OF A PROJECT AND SUBSEQUENT WITHDRAWAL OF MONEY)

Cost of Real Estate Project__________________________

Bihar RERA Registration Number___________________

Particulars Amount (₹) Sr. No.

Estimated Incurred 1.i Land Cost :

a. Acquisition Cost of Land or Development Rights, lease Premium, lease rent, interest cost incurred or payable on Land Cost and legal cost.

75 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

b. Amount of Premium payable to obtain development rights, FSI, additional FSI, fungible area, and any other incentive under DCR from Local Authority or State Government or any Statutory Authority.

c. Acquisition cost of TDR (if any) d. Amounts payable to State Government or competent authority or any other statutory authority of the State or Central Government, towards stamp duty, transfer charges, registration fees etc; and

e. Land Premium payable as per annual statement of rates (ASR) for redevelopment of land owned by public authorities.

f. Under Rehabilitation Scheme:

(i) Estimated construction cost of rehab building including site development and infrastructure for the same as certified by Engineer.

(ii) Actual Cost of construction of rehab building incurred as per the books of accounts as verified by the CA.

Note :(for total cost of construction incurred, Minimum of

(i) or (ii) is to be considered). (iii) Cost towards clearance of land of all or any encumbrances including cost of removal of legal/illegal occupants, cost for providing temporary transit accommodation or rent in lieu of Transit Accommodation, overhead cost,

(iv) Cost of ASR linked premium, fees, charges and security deposits or maintenance deposit, or any amount whatsoever payable to any authorities towards and in project of rehabilitation.

Sub-Total of Land Cost

Sr.No. Particulars Amount (₹)

Estimated Incurred ii Development Cost/ Cost of Construction :

a. (i) Estimated Cost of Construction as certified by

Engineer.

(ii) Actual Cost of construction incurred as per the books

of accounts as verified by the CA.

Note : ( for adding to total cost of construction incurred, Minimum of (i) or (ii) is to be considered).

(iii) On-site expenditure for development of entire project excluding cost of construction as per (i) or (ii) above, i.e. salaries, consultants fees, site overheads, development works, cost of services (including water, electricity, sewerage, drainage, layout roads etc.), cost of machineries and equipment including its hire(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 76 and maintenance costs, consumables etc. All costs directly incurred to complete the (i) construction of the entire phase of the project registered.

(b) Payment of Taxes, cess, fees, charges, premiums,

interest etc. to any Statutory Authority.

(c) Principal sum and interest payable to financial institutions, scheduled banks, non-banking financial institution (NBFC) or money lenders on construction funding or money borrowed for construction;

Sub-Total of Development Cost

2. Total Estimated Cost of the Real Estate Project [1(i) + 1(ii)]

of Estimated Column.

3 Total Cost Incurred of the Real Estate Project [1(i) + 1(ii)]

of Incurred Column.

4 % completion of Construction Work

(as per Project Architect's Certificate) 5 Proportion of the Cost incurred on Land Cost and

Construction Cost to the Total Estimated Cost. (3/2) 6 Amount Which can be withdrawn from the Designated

Account. Total Estimated Cost * Proportion of cost incurred ( Sr. number 2 * Sr. number 5)

7 Less: Amount withdrawn till date of this certificate as per

the Books of Accounts and Bank Statement.

8 Net Amount which can be withdrawn from the Designated

Bank Account under this certificate. This certificate is being issued for RERA compliance for the Company [Promoter's Name] and is based on the records and documents produced before me and explanations provided to me by the management of the Company.

Yours Faithfully,

Signature of Chartered Accountant (Membership Number…….) Name________________________________

Sr. No. Particulars Amount (₹) Estimate Incurred
1. Estimated Balance Cost to Complete the Real Estate Project (Difference of Total Estimated Project cost less Cost incurred) (calculated as per the Form IV )
2. Balance amount of receivables from sold apartments (as per Annexure A to this certificate(as certified by Chartered Accountant as verified from the records and books of Accounts)
3. (i) Balance Unsold area (to be certified by Management and to be verified by CA from the records and books of accounts) (ii) Estimated amount of sales proceeds in respect of unsold apartments (calculated as per ASR multiplied to unsold area as on the date of certificate, to be calculated and certified by CA)as per Annexure A to this certificate
4. Estimated receivables of ongoing project. Sum of 2 + 3 (ii)
5. Amount to be deposited in Designated Account – 70% or 100% If 4 is greater than 1, then 70 % of the balance receivables of ongoing project will be deposited in designated Account If 4 is lesser than 1, then 100% of the of the balance receivables of ongoing project will be deposited in designated Account
77 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

This certificate is being issued for RERA compliance for the Company [Promoter's Name] and is based on the records and documents produced before me and explanations provided to me by the management of the Company.

Yours Faithfully,

Signature of Chartered Accountant,

(Membership Number-----------------) Name______________________(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 78 Annexure A Statement for calculation of Receivables from the Sales of the Ongoing Real Estate Project Sold Inventory

Sr. No. Flat No. Carpet Area (in sq.mts.) Unit Consideration as per Agreement/Letter of Allotment Received Amount Balance Receivable
(1) (2) (3) (4) (5) (6)

(Unsold Inventory Valuation) Ready Reckoner Rate as on the date of Certificate of the Residential/Commercial premises Rs. _________ per sq.mts.

Sr.No. Flat No. Carpet Area (in sq.mts.) Unit Consideration as per Read Reckoner
01 02 03 04
79 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

FORM No. 4

[See Regulation 9 (1)]

ON THE LETTER HEAD OF CHARTERED ACCOUNTANT, in practice, (who is the Statutory Auditor ANNUAL REPORT ON STATEMENT OF ACCOUNTS

To [NAME AND ADDRESS OF PROMOTER]

SUBJECT: Report on Statement of Accounts on project fund utilization and withdrawal by [Promoter] for the period from _______ to ______with respect to Bihar RERA Reg. Number___________________________________

1. This certificate is issued in accordance with the provisions of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 read along with the Bihar Real Estate (Regulation and Development) Rules, 2017.

2. I/We have obtained all necessary information and explanation from the Company, during the course of our audit, which in my/our opinion are necessary for the purpose of this certificate.

3. I/We hereby confirm that I/We have examined the prescribed registers, books and documents, and the relevant records of [Promoter] for the period ended ________ and hereby certify that:

i. M/s______________________ (Promoter) have completed ________% of the project titled _________________________(Name) BiharRERA Reg.

No._________________located at ________________________

ii. Amount collected during the year for this project is Rs. ___________________ and amounts collected till date is Rs. _______________________

iii. Amount withdrawn during the year for this project is Rs. _________________ and amount withdrawn till date is Rs. _____________________

4. I/We certify that the [Name of Promoter] has utilized the amounts collected for____________________________ project only for that project and the withdrawal from the designated bank account(s) of the said project has been in accordance with the proportion to the percentage of completion of the project.

(If not, please specify the amount withdrawn in excess of eligible amount or any other exceptions).

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 80

(Signature and Stamp/Seal of the Signatory CA)

Place: Name of the Signatory: Date: Full Address:

Membership No: Contact No:

Email:

FORM No. 5

[See Regulation 22]

IN,

THE BIHAR REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY, AT PATNA.

Authorisation/ Vakalatnama For

RERA/ Complaint/ Suo-Motu/Execution No.____________________

In the matter of..............................................................................Petitioner(s)/Complainant

V/s

...........................…………………...…Respondent(s)/ Opposite Party(s)

Memo of Authorisation

I /We------------------------------------------------------------------------------------------------------------ ------- ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ------- the petitioner/respondent above named do hereby nominate, appoint and constitute-------- --------------------------------------------------------------------------------Advocate/s bearing License No--------------------------------------------------------------------------------------,Place of sitting and Mobile No----------------Email ID:--------------------------------------------to act, plead and appear on my/our behalf in the aforesaid matter. IN WITNESS WHERE OF, I/We have set and subscribed my/ our hands to this writing on this ------------------------------------------------------------day of ------------------------------

(Signature of Advocate) (Signature of Client) Place____________Date_________81 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 FORM No. 6 [Regulation 24(2)] BEFORE THE BIHAR REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY Application for inspection/obtaining copies of documents/records

I hereby apply for grant of permission to inspect/obtain copies of the following documents / records in the above case. The details are as follows:

1. Name and Address of the person seeking permission to inspect/obtain copies of the documents/records. _____________________________________________ 2. Whether he is party to the case or he is the authorized representative of any party. [Furnish necessary particulars] _________________________________ 3. Details of papers/documents sought to be inspected/copies required.__________ 4. Date and duration of the inspection sought______________________________ 5. The amount of fee payable (as per relevant Regulations) and the mode of payment

Place : Date:

Signature Name: Address: Mob.No:

Office Use

Granted inspection on __________________ / Rejected

Granted copies of documents on __________/Rejected

Secretary / Officer/ Nominee of the Authority

—————————————————————————————————————

By order of The Chairman, RERA, Bihar Secretary, RERA, Bihar, Patna

FORM-7 [REGULATION-9] QuarterlyProgressReportfor t h e Quarterending 3 1 s t March/30th June/30th Sept. /31st Decemberof(year)

I. PARTICULARS OF PROMOTERS
Promoter's RegistrationNumber/CIN No/ Registration no. of the Partnership firm/LLP Identification number/Any other Name of the Promoter's Entity Remarks
Address of the Promoter's Entity :
Total Experience of the Promoter in Real Estate Sector (In completed years) Total Experience in Real Estate Sector after commencement of RERA. (In completed years)
No. of Projects done before commencement of RERA 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum Commercial 4. Plotted project
No. of Project done after commencement of RERA II. PARTICULARS OF PROJECT 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum Commercial 4. Plotted project
Project Registration Number Name of Project
Name of Promoter Project Address
Project Registration is valid upto
Starting date of Project
Type of Project 1. Residential 2. Commercial 3. Residential- cum-Commercial 4, Plotted project
Name of the Competent Authority which sanctioned the project map
Period of validity of map as granted by the Competent Authority concerned
III. DISCLOSURE OF BOOKED INVENTORY OF APARTMENTS
Building/Block Number Apartment/ Unit Type Carpet Area Total Number of sanctioned apartments/ unit-wise Total Number of Apartments in Promoter's share – Total Number of Apartments in Promoter's share – Total Number of Apartments in Landowner's share Total Number of Apartments in Landowner's share
Booked Agreement for sale Executed Booked Agreement for sale Executed
1-BHK
2-BHK
3-BHK
4-BHK and over
shop
Office Space
Bunglow
Plots (In case of plots specific area of plot must be mentioned )
Total Carpet Area % of total units % of total units % of total units % of total units
IV. DETAILS OF ASSOCIATION OF ALLOTTEES : Mandatory in case the booking percentage exceeds 50% of the total sanctioned flats/plots/buildings/commercial space
T he details of the Association of Allottees need to be provided in the proforma of Association of Allottees attached with this Form.
V. CANCELLATION OF FLAT ALLOTMENT, IF ANY WITH FLAT NUMBER/BUNGALOW /PLOT NO. /OFFICE SPACE/SHOP/ETC.
(A) Cancelled by Allotees Flat No./Plot no. /Shop No./Etc. : *whether notice and reminder of cancellation was served to the Promoter by Allottee/s Yes/No
VI. DISCLOSURE OF BOOKED INVENTORY OF GARAGES/PARKING SPACE
Building Wise /Block Number Total Number of Sanctioned Garages/ Parking Space Total Number of Garages/Parking Space: 1. Booked/Allotted
VII. DETAILS OF BUILDING APPROVALS
S.No. Name of the Approval/ N.O.C./Permission/ Certificate Issuing Authority Validity up to Attach Copy
1. Environment Clearance
2. Fire N.O.C.
3. Airport Authority of India N.O.C.
4. Water Supply Permission
5. Other Approval(s), if any, Required for the Project.
VIII. PROGRESS OF THE PROJECT – INTERNAL INFRASTRUCTURE DEVELOPMENT In case of more than one Block/Building/Apartments/Plots/Bungalow, the details have to be filled for each Block separately
S.No. (1) Tasks/Activity (2) Percentage of Actual Work Done (As on date of the Certificate) (3) Expected Completion date in (dd/mm/yy) Format
1. Excavation (if any)
2. Basements (if any)
3. Podiums (if any)
4. Plinth
5. Stilt Floor
6. Slabs of Super Structure
7. Internal walls, Internal Plaster, Floorings, Doors and Windows within Flats /Premises.
8. Sanitary Fittings within the Flat/Premises, Electrical Fittings within the Flat/Premises
9. Staircases, Lifts Wells and Lobbies at each Floor level, Overhead and Underground Water Tanks.
10. External plumbing and external plaster, elevation, completion of terraces with water proofing of theBuilding/Wing.
11. Installation of Lifts, water pumps, Fire Fighting Fittings and Equipment as per prescribed norms.
12. N.O.C, Electrical fittings, Mechanical Equipment, compliance
to conditions of environment as per prescribed norms
13. Finishing to entrance lobby/s plinth protection, paving of areas appurtenant to Building/Wing, Compound Wall and all other requirements as may be required to complete project as per Specifications in Agreement of Sale. Any other activities.
14. Overall Percentage of Actual Work Done and final completion date
IX. EXTERNAL INFRASTRUCTURE DEVELOPMENT WORKS - PROGRESS RELATED TO AMENITIES AND COMMON AREA
S. No. Common Areas and Facilities Proposed(Yes/No) Percentage of actual Work Done (As on date of the Certificate) Expected Completion date in (dd/mm/ yy) Format
(1) (2) (3) (4) (5)
1. Internal Roads & Footpaths
2. WaterSupply
3. Sewerage (Chamber, Line, Septic Tank, STP)
4. Storm Water Drains
5. Landscaping & Tree Planting
6. Street Lighting
7. CommunityBuildings
8. Treatment and Disposal of Sewage and Sullage Water
9. Solid Waste Management & Disposal
10. Water Conservation/Rain Water Harvesting
11. Energy Management
12. Fire Protection and Fire Safety Requirements
13. Closed Parking
14. Open Parking
15. Electrical Meter Room, Sub- Station, Receiving Station
16. Others (Option to Add More)
17 Overall Percentage of Actual Work Done and final completion date
EXTERNAL AND INTERNAL DEVELOPMENT WORKS IN CASE OF X. PLOTTED DEVELOPMENT
PROPOSED YES/NO. PERCENTAGE OF ACTUALWORK DONE (As on date of certificate) Expected Completion date in (dd/mm/yy) Format
1. Internal Roads and foot paths
2. Water Supply
3. Sewerage Chambers Septic Tank
4. Drains
5. Parks, Land Scaping and Tree Planting
6. Street Lighting
7. Disposalofsewage&sullag e water
8. Water conservation/Rain Water Harvesting
9. EnergyManagement
XI. FINANCIAL PROGRESS OF THE PROJECT NaN
Particulars Amount (In Rs.) NaN
Project Account No. NaN
Estimated Cost of the Project including Land Cost at the start of the Project NaN
Estimated Development Cost of the Project at the start of the Project.(Excluding Land Cost) NaN
Any Variation in Development Cost which is declared at thestartoftheProject. NaN
Amount received during the Quarter NaN
Actual Cost Incurred during the Quarter NaN
Net amount at end of the Quarter NaN
Total expenditure on Project till date NaN
Cumulative fund collected till the end of Quarter in question NaN
Cumulative expenditure done till the end of Quarterin question NaN
Percentage of Expenditure incurred of the total Estimated development cost of the project. NaN
XII. DETAILS OF MORTGAGE OR CHARGE IF ANY CREATED/DETAILS OF LOAN TAKEN BY PROMOTERS AGAINST THE PROJECT, If any NaN
(A) By Bank (B) By Lenders/etc. NaN
XIII. GEO TAGGED PHOTOGRAPHS (EACH BLOCK/BUILDING/APARTMENTS/PLOTS/BUNGALOW) OF THE PROJECT The photograph must have date. NaN
(A) Sr.No. NaN
1. Photographs showing Front Elevation NaN
2. Photographs showing Rear Elevation NaN
3. Photographs showing Side Elevation (Both sides) NaN
4. Photograph of each floor showing the progress of interior works NaN
5. Photograph of Common Areas (Staircase, Lift Area, Terrace, Parking, etc.) NaN
B. Sr No NaN
1. Photograph of the display board set up at the project site providing requisite information along with the QR code of the project allotted by the Authority NaN
XIV. MISCELLANEOUS NaN
A List of Legal Cases (if any) – Against Project / Promoter NaN
1. (a) Case No. (b) Name of Parties O rder Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No) NaN
2. No. of Execution Cases against this project ( a) Case No. (b) Name of Parties Order Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No) NaN
3. No. of Suo - Moto cases against this project ( a) Case No. (b) Name of Parties O rder Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No) NaN
4. No. of Certificate cases /PDR cases against this project (a) Case No. (b) Name of Parties Order Passed, if Yes , Whether complied (Yes/No)
XV. PERCENTAGE OF WORK ALONG WITH MILESTONE CHART
a. Whether the project is in progress as per time schedule or lagging behind? Yes/No b. If yes, whether it would be completed on the completion date fixed as per RC. Yes/No c. If No, then Reason for delay:
XVI. BROCHURE /Prospectus: Copy of the brochure/prospectus to be uploaded with Form 7
XVII.Name of Grievance Redressal Officer nominated by the Promoter whom allottee can contact in case of any query or grievance
(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 82 83 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 84 85 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 86 87 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 88 89 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 90

Name : Contact No : Email id : Undertaking:

I/we solemnly affirm, declare and undertake that all the details stated above are true to the best of my/our knowledge and nothing material has been concealed.I am/we are executing this undertaking to attest to the truth of all the foregoing information and to apprise the Authority of such facts as mentioned as well as for whatever other legal purposes this undertaking may serve.

Signature of Promoter Name:

Date:

91 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

(Form 8) Regulation No.32 EXECUTION FORM [See Order 21 CPC, Section 40 of RERA Act,2016& Rule 25/26 of BiharRERA Rules,2017.] APPLICATION FOR EXECUTION BEFORE AUTHORITY/ADJUDICATING OFFICER Execution Case Under Section 40 read with Rule25/26.

For use of Regulatory Authority(s) office: Date of filing:___________________________ Date of receipt by the Registry throughonline filing:__________________Execution Case No.:__________________Original ComplaintNo:_______________________Signature:____________________ Registrar:_____________________________________IN THE REGULATORY AUTHORITY'S OFFICE (Name of Place)..........................................__________________________________Complainant (s) Between_____________________________Respondent(s) 1. Particulars of the Complainant(s)____________________

(i) Name (s) of the Complainant ___________________________ (ii) Address of the existing office/residence of the Complainant__________________ (iii) Address for service of all notices:______________________________ (iv) Contact Details (Phone Number, E-mail, Fax Number etc.):_____________________ 2. Particulars of the Respondent (s) _______________________________________ (i) Name (s) of Respondent ______________________________________ (ii) Office address of the Respondent ________________________________ (iii) Address for service of all notices:____________________________________ (iv) Contact Details (Phone number, E-mail, Fax Number etc.):________________________________

3. Jurisdiction of the Executing District Magistrate (DM)/ Principal Civil Court___________________ (if required). The complainant declares that the subject matter of the claim falls within the jurisdiction of the __________________________ District Magistrate (DM)/ Principal Civil Court.

4. Facts& Date of Original Order/s._______________________________

[Give a concise operating part of the Order]__________________________

5. Relief(s) sought:

In view of the facts mentioned in paragraph 4 above, the Complainant prays for the following relief/s under Section/s___________________________

6. Execution Case pending with any other court, etc.:

The complainant further declares that the matter regarding which this execution petition has been made is not pending before any court of law or any other authority or any other tribunal(s)

7. Particulars of online payment and Court Fee in respect of the fee in terms of Rule 25/26 of the Bihar Real Estate (Regulation & Development) Rules,2017. (i) Amount-Rs. (ii) Name of the bank payable at- Account No. 296800101053609, IFSC – PUNB0296800 (iii) Online payment details (IFSC Code & Account No.)-

8. List of enclosures:

(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 92

(i) Copies of the Final Order relied upon by the Complainant and referred to in the Execution Case.

(ii) An index of documents. (iii) Other documents as annexed along with the Execution Case.

Signature of the Complainant(s).

Verification

I_________________ (name in full block letters), Son/Daughter/wife of ____________resident of village/mohalla - _________________, P.S. - ___________________, District - _____________, State - __________________, complainant in RERA/CC/.............../..........., do hereby verify and solemnly affirm that the content of the aforementioned paragraphs are true to the best of my knowledge and belief and that I have not suppressed any material fact(s).

Place:

Date:

Signature of the Complainant(s) / Executant.

Instructions:

(1) Every Execution case shall be filed in English/Hindi and in case it is in some other Indian language, it shall be accompanied by a copy translated in English/Hindi and shall be fairly and legibly type- written, lithographed or printed in double spacing on one side of standard petition paper with an inner margin of about four centimetres width on top and with a right margin on 2.5 cm, and left margin of 5 cm, duly paginated, indexed and stitched together in paper book form.

(2) Every Execution case shall be presented along with an empty file size envelope bearing full address of the respondent and where the number of respondents are more than one, then sufficient number of extra empty fill size envelope bearing full address of each respondent shall be furnished by the party preferring the execution.

-------- बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद्‌ विद्यापति मार्ग, पटना-800001 ------- अधिसूचनाएं 24 जुलाई 2024

सं0 1240--माँ काली एवं बजरंगवली मन्दिर, सोनवर्षा घाट, चौथम, जिला-खगड़िया, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में वर्ष 2016 से निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0- 4455 है।

(cid:2877)(cid:2872)(cid:2869)(cid:2869)

उक्त सोनवर्षा घाट के खाता संख्या-377, खेसरा संख्या-6598 तौजी नं0- की 06 क0 15 धुर भूमि पर स्थित

(cid:2870)

है और मन्दिर की भूमि पर लगभग 20-25 दुकाने है तथा साप्ताहिक हाट लगता है जो मन्दिर की आय का मुख्य स्त्रोत है और मन्दिर में दानपेटी भी उपस्थित है। जिसमें चढ़ावा और दान भी आता है। मन्दिर स्थित भूमि के संबंध में भूमि के क्रेता विकास कुमार द्वारा स्वत्व वाद संख्या-06/2009 दाखिल किया गया, जो अभी भी विचाराधीन है। मन्दिर की भूमि के संबंध में अंचलाधिकारी के द्वारा जो अपनी रिपोर्ट पत्रांक-446, दिनांक-11.07. 2016 अपर समाहर्त्ता को समर्पित की गयी थी, जिसमें उल्लेख किया है कि ''रजिस्टर-02 में उपरोक्त भूमि पर विकास सिंह व 05 अन्य व्यक्तियों के नामों का दाखिल-खारिज वाद 539-544 वर्ष 2005-06 में पारित आदेष के आलोक में जमाबन्दी कायम है, परन्तु उस खाता, खेसरा की जमीन पर माँ काली एवं भगवान बजरंगबली का मन्दिर स्थापित है। आगे यह भी उल्लेख93 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 किया है कि मन्दिरलगभग 30 वर्ष पूर्व बना एक सार्वजनिक मन्दिर है, जिसमें ग्रामीणों का मन्दिर के रूप में दाखिल-काबिज है और दखल-कब्जा नहीं रहने के बाबजूद 06 व्यक्तियों के नाम से वर्ष 2005-06 में जो दाखिल-खारिज वाद की स्वीकृति दी गयी है, वह विधि सम्मत नहीं है''। उपरोक्त बिक्रेतागण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में मि0 अपील 44/11 आदेष दिनांक-26.11.2015 द्वारा न्यायालय में विचाराधीन स्वत्व वाद को 01 वर्ष में निस्तारित करने का निर्देष दिया तथा यह भी निर्देष दिया कि जनसामान्य तथा परिवादीगणों को भगवान की पूजा-पाठ करने का पुर्ण अधिकार रहेगा। परन्तु कोई भी पक्ष किसी प्रकार का पक्का निर्माण नहीं करेंगे। मेला नहीं लगेगा और वर्त्तमान में जो प्रबंधन किया जा रहा है, उसमें किसी प्रकार का अवरोध या दखल-अंदाजी नहीं किया जायेगा।

पर्षद के निरीक्षक द्वारा भी निरीक्षण के समय उपरोक्त भूमि पर माँ काली मन्दिर तथा बजरंगबली मन्दिर सार्वजनिक पाया गया है। बिना किसी रोक-टोक के स्थानीय लोग को पूजा-पाठ, दान-चढ़ावा आदि करने की बात भी बतलायी गयी और मौके पर लगभग 11 दुकाने एवं मंगलवार, शुक्रवार को ग्रामीणों द्वारा हाट बाजार का आयोजन से लगभग डेढ़ लाख रुपये प्रतिवर्ष आय का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों उक्त जाँच रिपोर्ट में भी 11 व्यक्तियों की स्वयं-भू समिति कार्यरत है का उल्लेख किया गया है।

स्थानीय लोगों के द्वारा दिनांक-02.05.2018 को बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक लोग उपस्थित थे और उन सब की सहमति से 11 व्यक्तियों को न्यास समिति बनाये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। श्री सहनी द्वारा दिनांक-05.04.2024 को उक्त सूची पर्षद को उपलब्ध करायी गयी। साथ ही प्रस्तावित नामों का आधार कार्ड भी संलग्न है। तथा वर्ष 2006 में भूमि के विवाद के संबंध में थानाध्यक्ष द्वारा स्थल की जाँच पर विवादित भूमि पर लगभग 40 वर्ष पूर्व से काली मन्दिर स्थित है, जिसका निर्माण सभी ग्रामीणों के द्वारा कराया गया है। जिसे 02 वर्ष पूर्व जमीन के हिस्सेदार केवाला खरीद किया है जबकि इस जमीन पर अभी भी काली पूजा हो रहा है, नाटक वगैरह भी होत है।

अतः मन्दिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये आदेष दिनांक-11.06.2024 के आलोक में प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है। चरित्र सत्यापन के पष्चात्‌ नियमित किये जाने के संबंध मे आदेष पारित किया जायेगा।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''माँ काली एवं बजरंगवली मन्दिर, सोनवर्षा घाट, चौथम, जिला-खगड़िया,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''माँ काली एवं बजरंगवली मन्दिर, सोनवर्षा घाट, चौथम, जिला-खगड़िया,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''माँ काली एवं बजरंगवली मन्दिर, सोनवर्षा घाट, चौथम, जिला-खगड़िया,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।94 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. विजय कुमार सिंह, पिता- परमानंद सिंह, - अध्यक्ष 2. श्री दयानंद सहनी, पिता- रामोतार सहनी, - उपाध्यक्ष 3. श्री केदार पासवान, पिता- सुन्दर पासवान, - सचिव 4. श्री मोहन सहनी, पिता- भीखो सहनी, - कोषाध्यक्ष 5. श्री अवधेष सहनी, पिता- मक्खन सहनी, - सदस्य 6. श्री फुलेष्वर लाल, पिता- राम नारायण लाल, - सदस्य 7. श्री कुलदीप पासवान, पिता- देव शरण पासवान - सदस्य 8. श्री तपो सदा, पिता- सोने लाल सदा, - सदस्य 9. श्री चन्देष्वरी पासवान, पिता- मुंगो पासवान, - सदस्य 10. श्री उमेष भगत, पिता- कामेष्वर भगत, - सदस्य 11. श्री उदय कुमार सिंह, पिता- उपेन्द्र नारायण सिंह, - सदस्य सभी का पता- सोनवर्षा घाट, थाना- चौथम, जिला-खगड़िया। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''माँ काली एवं बजरंगवली मन्दिर, सोनवर्षा घाट, चौथम, जिला-खगड़िया,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। (2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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18 जुलाई 2024

सं0 1174--श्री श्री 108 हनुमान जी महाराज मन्दिर, ग्राम-करैइटांड, पो0- समसा, जिला-बेगुसराय, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4787/24 है।

उक्त मन्दिर के संबंध में एक अताएनामा (दान-पत्र) दिनांक-02.02.22 को श्री रामानंद प्रसाद महतो द्वारा निष्पादित कर मन्दिर को समर्पित की गयी तथा समर्पणनामा में ही सेवायत/न्यासधारी के रूप में 1. सुरेन्द्र महतो पुत्र-चन्द्रदेव महतो, 2. सीताराम पासवान पुत्र-दामोदर पासवान, 3. रामदेव महतो पुत्र- स्व0 सज्जन महतो, 4. रविन्द्र महतो पुत्र- खगीरस महतो, 5.

95 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

अमीत मिश्रा पुत्र-नरेष मिश्रा को नामित किया गया है। समर्पित की गयी भूमि से होने वाली आय मन्दिर के प्रयोग में ही लायी जायेगी। जैसा कि समर्पणनामा में ही स्पष्ट उल्लेख किया गया है और स्पष्ट उल्लेख किया है कि हनुमान जी महाराज का राग-भोग, सेवा-टहल के अतिरिक्त अतिथि के आवाभगत करते रहेगे। सिवाये इसके किसी अन्य खर्च में आमदनी का प्रयोग नहीं होगा, न कोई व्यवस्थापक इस जमीन को बेच सकता है और न किसी व्यक्ति को लीज कर सकता है। अतः आदेष दिनांक- 12.06.2024 के अलोक में उपरोक्त दस्तावेज के आलोक में उपरोक्त पाँचों व्यक्तियों को मन्दिर की देख-भाल, व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपन कर नामित व्यक्तियों की एक न्यास समिति का गठन किया जाता है। अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 हनुमान जी महाराज मन्दिर , ग्राम- करैइटांड, पो0- समसा, जिला- बेगुसराय,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 हनुमान जी महाराज मन्दिर, ग्राम- करैइटांड, पो0- समसा, जिला- बेगुसराय,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 हनुमान जी महाराज मन्दिर, ग्राम- करैइटांड, पो0- समसा, जिला- बेगुसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 96 उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री राजदेव महतो, पुत्र- स्व0 सज्जन महतो - अध्यक्ष 2. श्री सुरेन्द्र महतो, पुत्र-चन्द्रदेव महतो - सचिव-सह-पुजारी 3. श्री अमीत मिश्रा, पुत्र-नरेष मिश्रा - कोषाध्यक्ष 4. श्री रविन्द्र महतो पुत्र-कामता महतो - सदस्य 5. श्री सीताराम पासवान पुत्र-दामोदर पासवान - सदस्य सभी का पता -ग्राम- करैईटाड़, पो0- समसा, थाना- बखरी, जिला- बेगुसराय। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

पर्षद आषा करती है उपरोक्त सभी पाँच व्यक्ति इस न्यास समिति का कार्य संतोषजनक करेंगे, अन्यथा पर्षद यथोचित निर्णय भी ले सकती है।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 हनुमान जी महाराज मन्दिर, ग्राम- करैइटांड, पो0- समसा, जिला- बेगुसराय,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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16 जुलाई 2024

सं0 1171--श्री राम जानकी मन्दिर, ग्रामपो0-तेउस, जिला-षेखपुरा, पर्षद के अन्तर्गत अतिप्राचीन सार्वजनिक धार्मिक न्यस के रूप में लगभग 70 वर्षो से निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या-319 है।

उक्त मन्दिर में लगभग 51 बी0 13 क0 04 धुर जमीन थी। पूर्व में उक्त मन्दिर की देख-भाल महंत मसुदन दास द्वारा की जाती थी और उनके स्वर्गवास के पष्चात्‌ बाबा बलदेव दास द्वारा और उनके स्वर्गवास के पष्चात बाबा जगदेव दास द्वारा की जाती रही है। तथा पर्षद के आदेष दिनांक-03.12.1992 द्वारा बाबा जगदेव दास द्वारा नियमित रूप से पर्षद के आदेषों का पालन नहीं करने तथा अधिनियम की धारा-59, 60, 70 का पालन नहीं करने के आरोप में अपसारित कर अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया, परन्तु कालान्तर में बाबा जगदेव दास द्वारा अधिनियम की धारा- 59, 60, 70 का पालन भविष्य में नियमित रूप से करते रहने का अवेदन दिया गया तो पर्षद के आदेष दिनांक-04.10.2001 द्वारा उन्हें पुनः न्यासधारी बना दिया गया और अंचलाधिकारी के न्यासी संबंधी आदेष को वापस ले लिया गया। इसी बीच पर्षद के संज्ञान में लाया गया कि जगदेव दास का स्वर्गवास वर्ष 2008 में हो गया और कोई वैध साधू/समिति नहीं होने के कारण उसकी उचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। अतः एक न्यास समिति का गठन निर्णय दिनांक-22.06.2015 को लिया गया। इसी बीच सुरेन्द्र प्रसाद व अन्य व्यक्तियों के द्वारा एक प्रार्थना-पत्र देकर सूचना दी गयी कि मन्दिर की देख-भाल राम प्रवेष सिंह द्वारा किया जा रहा है तथा ठाकुरबाड़ी की चाहरदिवारी निर्माण किये जाने के संबंध में प्रार्थना की गयी तथा राम प्रवेष सिंह से भी पिछले वर्षो की आय-व्यय विवरणी आदि के संबंध में प्रतिवेदन की मांग की गयी। दिनांक-23.03.2019 को राम प्रवेष सिंह द्वारा पर्षद को लिखित प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त मन्दिर की देख-भाल लगभग 70 वर्षो से व्यवस्थापक कनिक सिंह पुत्र शीतल सिंह एवं सहयोगी गंगा साव के द्वारा किया जा रहा है और प्रार्थी व टुनटुन सिंह ग्रामीन होने के नाते सहयोग करते है और महंत जी के स्वर्गवास के पष्चात एक समिति का गठन किया जा चुका है। जो उसकी देख-भाल कर रहे है तथा टुनटुन सिंह द्वारा पुराने हिसाब के रूप में 70,000/- रुपये सतेन्द्र नारायण सिंह, कोषाध्यक्ष को दिया जा चुका है। तथा दिनांक-20. 05.2019 को सतेन्द्र नारायण सिंह व 04 अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि आमसभा दिनांक-14.11. 2018 के द्वारा 11 व्यक्तियों का चयन न्यास समिति हेतु किया गया है, उसे मान्यता दी जाए। जिसपर अंचलाधिकारी से मंतव्य और प्रतिवेदन की मांग की गयी। अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्र दिनांक-07.12.2019 में 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया, परन्तु उसमें प्रस्तावित नामों के पिता के नाम और पता नहीं है। पुनः पर्षद के पत्र दिनांक-23.05.2020 के आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा दिनांक-01.07.2020 को श्री सतेन्द्र नारायण सिंह द्वारा जो प्रसताव दिया गया उसमें अपनी सहमति देते हुए पर्षद को उपलब्ध कराया गया और प्रस्तावित समिति द्वारा एक दस्तावेज, जिसमें उल्लेख किया गया कि मौजा-तेउस थाना नं0-38 के विभिन्न खाता के लगभग 21.80 ए0 जमीन प्रार्थीगणों के कब्जे में है, जिससे खेती आदि का कार्य बन्दोबस्ती के माध्यम से करायी जाती है। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन रिपोर्ट संबंधी थाना का पत्र लिखा गया और बार-बार स्मार-पत्र भेजने के बाबजूद भी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। अतः चरित्र सत्यापन रिपोर्ट अप्राप्त के आधार पर मन्दिर को बिना97 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 किसी व्यवस्था के नहीं छोड़ा जा सकता है। प्रस्तावित नामों पर किसी प्रकार का कोई आपत्ति भी नहीं प्राप्त हुई है और चूंकि न्यासधारी का स्वर्गवास हो चुका है, आजतक किसी व्यक्ति के द्वारा न्यासधारी का दावा भी नहीं किया गया है। अतः पर्षद के आदेष दिनांक- 13.06.2024 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन करना आवष्यक है। अतः एक योजना का निरूपण करते हुए मन्दिर की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति का गठन निम्न लोगों को शामिल करते हुए किया जाता है :-

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी मन्दिर, ग्रामपो0-तेउस, जिला-षेखपुरा,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर, ग्रामपो0-तेउस, जिला-षेखपुरा,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर, ग्रामपो0-तेउस, जिला-षेखपुरा,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः-(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 98 1. श्री प्रियदर्षी पिता- स्व0 श्यामदर्षी प्रसाद सिंह - अध्यक्ष

2. श्री कृष्ण कन्हैया कुमार पिता- श्री मनिक प्रसाद - सचिव 3. श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह पिता- स्व0 नवल किषोर सिंह - कोषाध्यक्ष 4. श्री मुकेष कुमार अकेला, पिता- श्री जयप्रकाष सिंह - सदस्य 5. श्री रमेष प्र0 सिंह, पिता- स्व0 राजेष्वर प्र0 सिंह - सदस्य 6. श्री पंकज कुमार,़. पिता-विजय कुमार - सदस्य 7. श्री राजेष राम पिता- स्व0 बाँके राम - सदस्य सभी का पता-ग्रामपो0- तेउस, थानाअंचल- बरबीघा, जिला- शेखपुरा। गठित न्यास समिति को मन्दिर की किसी भूमि को किसी भी प्रकार से क्रय-बिक्रय, बंधक, रेहन रखने का कोई अधिकार नहीं रहेगा। भूमि की बन्दोबस्ती अधिकांष 03 वर्ष के लिए खुले डाक द्वारा की जायेगी और यदि वह बन्दोबस्ती प्रतिवर्ष की जाए तो ज्यादा उचित होगा।

न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

समिति सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने पर कार्यकाल की अवधि विस्तारित पर विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी मन्दिर, ग्रामपो0-तेउस, जिला-षेखपुरा,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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18 जुलाई 2024

सं0 1183--श्री श्री 108 राधाकृष्ण मठ, (बलहा मठ), ग्रामपो0- बलहा, थाना- विहपुर, जिला-भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3931 है। एक षड्‌यंत्र व राजस्व कार्यालय की मिलीभगत से कुछ व्यक्तियों द्वारा अपने नाम से मंदिर की भूमि का इन्द्राज करा लिया गया था। जिस संबंध में एक स्व0 वाद सं0-4/92 स्थानीय नागरिकों द्वारा दाखिल किया गया है जिसमें दोनों पक्षो द्वारा मौखिक एवं दस्तावेजो साक्ष्य दाखिल किए जा चुके हैं। उक्त वाद में दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात्‌ दिनांक-21.08.1995 को सभी पक्षो को निषेद्धाज्ञा जारी करते हुए, विवादित भूमि को स्थानान्तरण, पेड़ आदि काटने पर पूर्ण रूप से रोेक लगायी गयी, परन्तु प्रतिवादीगण द्वारा सक्षम न्यायालय के उपरोक्त अन्तरिम आदेश का अवहेलना करते हुए, बहुत से व्यक्तियों को दिनांक-27.12.2010, 22.01.2011, 12.02.2011 एवं 02.09.2011 व अन्य तिथियो पर मठ की भ्ूामि को निबंधति विक्रय-पत्र पर निस्पादित कर दिया तथा भूमि पर स्थित पेड़ो को भी अवसर पाकर कटाई कर दी जा रही है तथा कुछ भूमि की मिट्‌टी आदि की कटाई कर विक्रय कर दिया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा लगातार उक्त शिकायत पर्षद को दी जा रहीं है और पर्षद द्वारा उपरोक्त क्रेताओं को नोटिस जारी की गयी। सक्षम न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी है तो भी भूमि का विक्रय किस आधार पर किया जा रहा है? इनके द्वारा पर्षद में उपस्थित होकर समय की मांग की गयी और अपने स्पष्टीकरण में भी स्वत्व वाद विचाराधीन होने का उल्लेख किया है और उक्त स्पष्टीकरण का प्रतिउत्तर भी स्थानीय नागरिकों द्वारा दाखिल किया जा चुका है और इस संबंध में अंचल पदाधिकारी को भी पत्र दिया गया है, कि चूॅकि विवाद विचाराधीन है, किसी प्रकार की दाखिल-खारिज पर्षद को बिना सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं किया जाए। उपस्थित ग्रामीणों का कथन है कि एक प्रस्तावित नामों की समिति का गठन किया जाए जिससे प्रार्थीगणाें को उक्त न्यायालय में अपना वाद रखने तथा विभिन्न पदाधिकारियों के यहां मंदिर की भूमि को सुरक्षित रखने तथा पेड़ आदि की अवैध कटारी से सुरक्षा हेतु प्रस्तावित नामों कि समिति बनायी जाए। प्रस्तावित नामें पर मतंव्य हेतु अंचल पदाधिकारी को भी दिनांक-30.08.2023, 16.01.2024 एवं 03.05.2024 को पत्र लिखा जा चुका है, परन्तु कोई मतंव्य प्राप्त नहीं हुआ। उक्त परिस्थिति में मामले को आगे लंबित न रखते हुए, पर्षद की सूनवाई आदेश दिनांक- 24.05.2024 में यह निर्णय लिया गया कि अधिनियम की धारा 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा 43 के तहत योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति का गठन किया जाय। अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है,99 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मठ, (बलहा मठ), ग्रामपो0-बलहा, थाना-विहपुर, जिला-भागलपुर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मठ, (बलहा मठ), ग्रामपो0- बलहा, थाना- विहपुर, जिला- भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मठ, (बलहा मठ), ग्रामपो0- बलहा, थाना- विहपुर, जिला- भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री बलवीर यादव, पिता- स्व0 सहदेव यादव, - अध्यक्ष 02. श्री बासुदेव यादव, पिता- स्व0 बैजनाथ यादव, - सचिव 03. श्री सीता राम सिंह, पिता- स्व0 छोटे लाल सिंह - सदस्य 04. श्री विजय कुमार सिंह, पिता- स्व0 कुलदीप सिंह, - सदस्य 05. श्री राजेश रंजन यादव, पिता- स्व0 बिन्देश्वरी यादव - सदस्य 06. श्री नारायण सिंह, पिता- स्व0 बिदेश्वर सिंह - सदस्य(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 100 07. श्री ओम प्रकाश झा, पिता- स्व0 रामपदारथ झा - सदस्य

08. श्री वकील सिंह, पिता- स्व0 अधिकलाल सिंह - सदस्य 09. श्री सुबोध सिंह, पिता- स्व0 वीरन सिंह - सदस्य 10. श्री सुशील पंडित, पिता- स्व0 तालदेव पंडित - सदस्य 11. श्री देवेन्द्र सिंह, पिता- स्व0 सरयुग सिंह - सदस्य

सभीग्रामपो0- बलहा, थाना- भवानीपुर (बिहपुर) जिला-भागलपुर।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति के सभी सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 राधाकृष्ण मठ, (बलहा मठ), ग्रामपो0- बलहा, थाना- विहपुर, जिला- भागलपुर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। न्यास समिति को न्यायालय, प्रशासनिक पदाधिकारी या अधिकारियों के समक्ष मठ से संबंधित अपनी बातो को रखने साक्ष्य देने वाद/प्रार्थना-पत्र दाखिल करने हेतु अधिकृत किया जाता है तथा उपस्थित सदस्यो द्वारा मंदिर का वर्तमान फोटोग्राफ दाखिल किया गया जिससे भी स्पष्ट होता है कि मौके पर मंदिर है, जो जीर्ण-शीर्ण हो रहा है जिसे अवसर पाकर के नष्ट किए जाने का भी प्रयास समय-समय पर किया जा रहा है।

अतः ''यथास्थिति'' बनाए जाने का निर्देश दिया जाता है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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18 जुलाई 2024

सं0 1181--श्री श्री 108 बेलानाथ महादेव मंदिर, ग्राम- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर, अंचल- जगदीशपुर, जिला- भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4701 है। उक्त मंदिर में 03 विशाल गुम्बद है। मंदिर की भूमि के संबंध में पूर्व में एक ह0 वाद सं0-15/1945, अपील सं0-189/46, जिसका अंतिम निर्णय दिनांक-01. 03.1947 को हुआ है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह सेवायतो की व्यक्गित सम्पत्ति नहीं है। एक अन्य ह0 वाद सं0-10/89 जो सर्वे में कपिल देव गोस्वामी आदि के नाम पर इन्द्राज कर दिया गया था, जो दिनांक-22.12.2000 को निरस्त किया जा चुका है। मंदिर की व्यवस्था हेतु स्थानीय ग्रामीणो की बैठक दिनांक-18.06.2023 में 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। सूनवाई दिनांक- 24.05.2024 में उपस्थित श्री संजय कुमार झा, जिनके द्वारा मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु लगातार विभिन्न न्यायालय व पदाधिकारियों के यहाँ प्रयास किया जा रहा है, उनके द्वारा कथन किया गया कि अध्यक्ष के रूप में प्रस्तावित श्री बनारसी चन्द्र राय वृद्ध और बिमार हो गए हैं और वर्तमान में बाहर ईलाजरत है।

उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक- 24.05.2024 में श्री बनारसी चन्द्र राय के नाम को छोड़कर शेष प्रस्तावित 10 नामों की न्यास समिति श्री शषिभूषण प्रसाद को अध्यक्ष के रूप में मान्यता देते हुए, अधिनियम की धारा 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा 43 के तहत योजना का निरूपण करते हुए, अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 बेलानाथ महादेव मंदिर, ग्राम- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर, अंचल- जगदीशपुर, जिला- भागलपुर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 बेलानाथ महादेव मंदिर, ग्राम- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर, अंचल- जगदीशपुर, जिला- भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 बेलानाथ महादेव मंदिर, ग्राम- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर, अंचल- जगदीशपुर, जिला- भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।101 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री शशि भूषण प्रसाद, पिता-तारणी प्रसाद - अध्यक्ष सा0- सालेहपुर, (मौर्य नगर कॉलोनी), थाना- हबीबपुर।

02. श्री हरि किशोर सिंह, पिता-श्री राम नरेश सिंह - उपाध्यक्ष सा0-कटघर, थाना- बबरगंज। 03. श्री संजय कुमार झा, पिता-मन्दारेश्वर झा - सचिव सा0- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर। 04. श्री विकास कुमार, पिता-भरत शर्मा - कोषाध्यक्ष सा0- तकीचक, थाना- हबीबपुर। 05. श्री अनिल कुमार भगत, पिता- स्व0 वीरो भगत - सदस्य सा0- अम्बई, थाना- हबीबपुर। 06.श्री सुनील कुमार, पिता-श्री मुनीलाल पासवान - सदस्य सा0-दाउदबाट, थाना- हबीबपुर। 07. श्री राज कुमार महलदार, पिता-स्व0 नन्दू महलदार - सदस्य सा0- ऐतवारी हाट, थाना- हबीबपुर, 08. श्री नरेश प्रसाद यादव, पिता-स्व0 हरि यादव - सदस्य सा0- गंगटी, थाना- हबीबपुर। 09. श्री निखील नाथ दूबे, पिता-स्व0 बासुकी नाथ दूबे - सदस्य(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 102 सा0- सालेहपुर,(कृष्ण नगर कॉलोनी) थाना- हबीबपुर।

10. श्री गणेश राम, पिता-स्व0 महावीर राम - सदस्य सा0- सालेहपुर (कहार टोला) थाना- हबीबपुर।

सभी जिला-भागलपुर। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि, भवन, दुकान आदि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि बैक खातें का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात दो व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से ही किया जायेगा। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति के सभी सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 बेलानाथ महादेव मंदिर, ग्राम- सालेहपुर, थाना- हबीबपुर, अंचल- जगदीशपुर, जिला- भागलपुर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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12 जुलाई 2024

सं0 1144--श्री श्री 108 बाबा भदेवश्वरनाथ महादेव मंदिर, सदानंदपुर वैसा पंचायत, थानाअंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4709 है। अंचल पदाधिकारी कहलगाँव, के रिपोर्ट पत्रांक-839, दिनांक-13.04.2022 में उक्त मंदिर में थाना सं0-287, खाता सं0-490, खेसरा सं0-1029, 1030, का कुल 9.78 ए0 जमीन मंदिर के नाम से इन्द्राज है और कुल 08 मंदिर, (04 पहाड़ पर और 04 नीचे स्थित है), जो काफी सुव्यवस्थित ढ़गं से है जिसका निर्माण भी जनसहयोग, आम जनता के चंदा दान आदि से किया गया है। उक्त मंदिर की सुचारू व्यवस्था हेतु स्थानीय लोगो द्वारा दिनांक-03.03.2024 को एक बैठक करके 11 व्यक्तियों के नामो का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया। प्रस्तावित नामों और मंदिर की व्यवस्था के संबंध में किसी प्रकार की कोई आपत्ति या शिकायत पर्षद में नहीं प्राप्त है। उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त पर्षद की सूनवाई आदेश दिनांक-24.05.2024 में अधिनियम की धारा 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा 43 के तहत योजना का निरूपण करते हुए, प्रस्तावित नामों की अस्थायी न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए किये जाने का निर्णय लिया गया, तथा यह भी निर्णय लिया गया कि चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने व कार्य संतोषजनक पाए जाने पर इसका विस्तार किए जाने पर निर्णय लिया जाएगा।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री श्री 108 बाबा भदेवश्वरनाथ महादेव मंदिर, सदानंदपुर वैसा पंचायत, थानाअंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 बाबा भदेवश्वरनाथ महादेव मंदिर, सदानंदपुर वैसा पंचायत, थानाअंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 बाबा भदेवश्वरनाथ महादेव मंदिर, सदानंदपुर वैसा पंचायत, थानाअंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।103 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री प्रेम कुमार, पिता-श्री नारायण हरिजन दास - अध्यक्ष ग्राम- सदानंदपुर वैसा, वार्ड नं0- 04, पो0- अकबरपुर।

02. श्री राजहंस यादव, पिता-स्व0 प्रकाश यादव - उपाध्यक्ष ग्राम- जगरन्नाथपुर, पो0- नंदलालपुर, 03. श्री योगेश कुमार, पिता-श्री महेन्द्र मंडल - सचिव ग्राम- ग्राम- मिल्की, पो0- नंदलालपुर, 04. श्री विनोद गुप्ता, पिता-श्री किशोरी प्रसाद गुप्ता - कोषाध्यक्ष ग्राम- सुब्वाटोला वैसा, पो0- नंदलालपुर, 05. श्री संतोष कुमार मंडल, पिता-श्री रामविलाश मंडल - सदस्य ग्राम- ग्राम- मिल्की, पो0- नंदलालपुर, 06. श्री गिरधारी महतो, पिता- स्व0 जमुना महतो - सदस्य ग्राम- सुब्वाटोला वैसा, पो0- नंदलालपुर, 07. श्री मुन्ना सिंह, पिता-स्व0 सकलदीप सिंह - सदस्य ग्राम- जगरनाथपुर मिल्की, पो0- नंदलालपुर, 08. श्री शंभू महतो, पिता-श्री प्रयाग महतो - सदस्य ग्राम- जगरनाथपुर, मिल्की, पो0- नंदलालपुर, 09. श्री सोनु कुमार कुशवाहा, पिता-श्री प्रकाश मंडल - सदस्य ग्राम- सदानंदपुर वैसा, पो0-अकबरपुर, 10. श्री शिव दास, पिता-स्व0 जमीदार दास - सदस्य ग्राम- सदानंदपुर वैसा, पो0- अकबरपुर, 11. श्री प्रदीप दीक्षित, पिता-स्व0 दीनवंधू दीक्षित - सदस्य ग्राम-नारायणपुर, पो0- नंदलालपुर,

सभी जिला-भागलपुर ।104 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति के सभी सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री श्री 108 बाबा भदेवश्वरनाथ महादेव मंदिर, सदानंदपुर वैसा पंचायत, थानाअंचल- कहलगाँव, जिला-भागलपुर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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11 जुलाई 2024

सं0 1123--श्री महेन्द्रनाथ षिवालय, वफापुर, बान्थू, जिला-वैषाली, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4496/19 है।

संचिका से स्पष्ट होता है कि वर्ष 1987 के पुर्व न्यासधारी/महंत बलदेव भारती थे। अंचलाधिकारी के रिपोर्ट पत्रांक-83, दिनांक-10.01.1991 में उल्लेख किया कि महंत बलदेव भारती का स्वर्गवास लगभग 15 वर्ष पूर्व हो चुका है और जमाबन्दी मौजा-बान्थू खाता संख्या-395, 946, 993, 398 कुल 14.98 ए0 जमीन थी। जिसमें कुछ जमीन का बिक्रय कर दिया गया। षिवजी जी की मन्दिर स्थापित है, जिसमें पूजा गाँव के अवकाष प्राप्त सैनिक निवास प्रसाद करते है। उपरोक्त रिपोर्ट के आलोक में श्री निवास प्रसाद सिंह से पर्षद से पत्राचार होता था। इसी बीच श्री सुरेन्द्र सिंह व 04 अन्य व्यक्तियों के आवेदन दिनांक-09.06.2008 के अनुसार कि उक्त मन्दिर में लगभग 15 बी0 जमीन है और दिनांक-09.06.41 को तत्कालीन महंत/न्यासी बलदेव भारती के विरूद्ध महंत महिम भारती द्वारा एक निबंधित विलेख 05 ग्रामीणों की उपस्थिति में षिवालय की जमीन का पूजा-पाठ, संचालन, हेतु ट्रस्टी बनाया गया था। उपरोक्त के आलोक में श्री निवास सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। वर्तमान में अवधेष कुमार सिंह द्वारा पर्षद में प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उक्त मन्दिर की देख-भाल श्री निवास सिंह सेवायत के रूप में करते थे। उनके मरणोपरान्त प्रार्थी उनके बड़े पुत्र है, मन्दिर में पूजा-पाठ करते है। उनके द्वारा मन्दिर का जीर्णोद्धार तथा मन्दिर परिसर का पक्का चाहरदिवारी करवाये है और प्रार्थी के चचेरे भाई जो मुखिया थे, एक साजिस के तहत मन्दिर की सम्पत्ति का बिक्रय कर दिया है। उस संबंध में स्वत्व वाद संख्या-538/17 दाखिल किया गया है। जिसमें मिथलेष प्रसाद द्वारा बेचे गये 07 बिक्रय-पत्र की फोटोप्रति प्रार्थना-पत्र के साथ मन्दिर का फोटोग्राफ तथा खतियान की प्रति भी दाखिल की गयी है एवं मिथलेष प्रसाद द्वारा 07 बिक्रय-पत्र की फोटोप्रति दाखिल की गयी। उक्त मन्दिर का पर्षद द्वारा स्थल निरीक्षण में भी यह पाया गया कि मन्दिर किसी के व्यक्तिगत घर या आवास में नहीं है, बल्कि स्वतंत्र धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। निर्बाध रूप से ग्रामीण पूजा-पाठ, चंदा, चढ़ावा आदि चढ़ाते है तथा मन्दिर में दान दाता की सूची भी पाया गया। उपरोक्त परिस्थितियाँ यह स्पष्ट करती है कि मन्दिर काफी प्राचीन है और पूर्व में इसकी देख-भाल साधू-संतो द्वारा गुरू-षिष्य परम्परा के तहत की जाती थी और वर्ष 1941 में निबंधित विलेख द्वारा तत्कालीन महंत/न्यासधारी महिम भरती चेला- महंत शरद भारती, बैकुण्ठवासी के द्वारा 05 व्यक्तियों की एक न्यास समिति/प्रबंध समिति बनाते हुए उसकी व्यवस्था उनके हाथों में सौंप दिया गया, परन्तु इसी बीच श्री निवास सिंह द्वारा एक षडयंत्र के तहत उक्त भूमि का आधा-आधा जमाबन्दी अपने नाम करा लिया था। गठित न्यास समिति द्वारा उसे प्रष्नगत करते हुए सारी जमीन शंकर भगवान बाबा महेन्द्रनाथ मन्दिर सेवायत मदन प्रसाद सिंह के नाम इन्द्राज करा लिया गया। यह सही है कि प्रार्थी अवधेष प्रसाद सिंह श्री निवास सिंह के पुत्र है, परन्तु इनके द्वारा मिथलेष सिंह जो जयमंती देवी के पुत्र है, उनके द्वारा भूमि का अवैध बिक्रय किया है, उसके विरूद्ध विभिन्न पदाधिकारियों तथा न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया है और उनके द्वारा शपथ-पत्र भी दाखिल किया गया है कि उक्त सम्पत्ति भगवान की है और प्रार्थी के पिता श्री निवास सिंह या उनके खानदान की सम्पत्ति नहीं है, परन्तु विषम परिस्थितिवष जमाबन्दी कायम हुआ है। इस संबंध में प्रार्थी को जानकारी नहीं है। लेकिन वह भूमि श्री महेन्द्र नाथ शंकर भगवान के नाम इन्द्राज किये जाने में कोई आपत्ति नहीं है तथा प्रार्थना करते है कि शीघ्र उक्त मन्दिर और उसकी सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु न्यास समिति का गठन किया जाए। इस संबंध में उनके द्वारा दिनांक-26.01.2024 को एक आमसभा की प्रति भी दाखिल की गयी है, जिसमें 05 व्यक्तियों का चयन न्यास समिति गठन हेतु किया गया है। अंचलाधिकारी से भी इस संबंध में रिपोर्ट की मांग की गयी थी।

अंचलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट ज्ञापांक-88, दिनांक-13.01.2024 द्वारा मन्दिर की कुछ भूमि खाता संख्या-395, 396, 397, 398, 399 के विभिन्न खेसरा में है, अवैध रूप से क्रय किया गया है तथा दुकान का निर्माण भी करा लिया गया है,105 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पुजारी अवधेष कुमार है, उनके द्वारा भी अवैध रूप से पक्का कमरा बनाकर सपरिवार रहते है,तथा गाय को आय के स्त्रोत में रखा गया है, जिससे मन्दिर की पूजा-पाठ आदि चलत है, चूंकि मन्दिर की आय का और कोई साधन नहीं है। अतः प्रस्तावित नामों के संबंध में व्यक्तियों के द्वारा अपना शपथ-पत्र दाखिल किया गया है, कि उन्हें मन्दिर की भूमि से किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं है और न मन्दिर की भूमि उनके कब्जे में है। मन्दिर के उपरोक्त परिस्थितियाँ स्पष्ट करती है कि शीघ्र एक न्यास समिति का गठन किये जाने की आवष्यकता है। जिससे मन्दिर की नियमिति पूजा-पाठ, राग-भोग आदि की व्यवस्था पुनः सुचारू रूप से प्रारम्भ हो सके और अवैध रूप से जो मन्दिर की भूमि का बिक्रय किया गया है, वह भूमि वापस प्राप्त करने के संबंध में कोई ठोस कार्रवाई की जा सके। अतः आदेष दिनांक- 13.06.2024 के अलोक में एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है तथा चरित्र सत्यापन प्राप्त होने के उपरान्त नियमित किये जाने पर विचार किया जायेगा।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''श्री महेन्द्रनाथ षिवालय, वफापुर, बान्थू, जिला-वैषाली,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री महेन्द्रनाथ षिवालय, वफापुर, बान्थू, जिला-वैषाली,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री महेन्द्रनाथ षिवालय, वफापुर, बान्थू, जिला-वैषाली,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे106 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री गोपाल शरण सिंह, पिता-स्व0 कपिल देव सिंह - अध्यक्ष 2. श्री अवधेष कुमार सिंह, पिता- स्व0 निवास सिंह - सचिव दोनो का पता-वफापुर बान्थु, पो0- सतपुरा, थाना- भगवानपुर, जिला- वैषाली। 3. श्री पवन कुमार उपाध्याय, पिता- स्व0 गोपाल उपाध्याय - कोषाध्यक्ष ग्राम- हरिवंषपुर, पो0-वालिषपुर, थाना- भगवानपुर, जिला- वैषाली। 4. श्री मनोज द्विवेदी, पिता- स्व0 नित्यानंद द्विवेदी - सदस्य पता- वफापुर बान्थु, पो0- सतपुरा, थाना- भगवानपुर, जिला- वैषाली। 5. श्री संजय कुमार पिता- स्व0 अतेष्वर सिंह - सदस्य पता - ग्राम- पटेलीह, पो0- सेन्दुआरी, थाना-हाजीपुर, जिला- वैषाली। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

समिति को शीघ्र जमाबंदी सुधार हेतु कार्रवाई किये जाने का निर्देष दिया जाता है। न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री महेन्द्रनाथ षिवालय, वफापुर, बान्थू, जिला-वैषाली,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य या अवधेष कुमार सिंह, को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमिका विक्रय/बंधक/रेहन/हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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9 जुलाई 2024

सं0 1120--बाबा कोकिलचन्द धाम मन्दिर, ग्रामपो0- गंगरा, थाना-गिद्धौर, जिला-जमुई, पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबांधन सं0-4784/24 है। अंचलाधिकारी की रिपोर्ट पत्रांक-1228 दिनांक-16. 09.2023 जो जिला पदाधिकारी को समर्पित किया गया है उसमें उक्त मन्दिर के खाता संख्या-261, 262, खेसरा संख्या-2522, 2521 पर स्थित है और मुख्य मन्दिर के साथ 03 अन्य मन्दिर है जो षिवजी, पार्वती जी एवं अनुमान जी की स्थित है। जो गैर मजरूआ जमीन पर है । साथ ही पंजी-2 में बाबा कोकिलचन्द धाम के नाम से जमाबन्दी संख्या-650, और जमाबन्दी संख्या-563 में क्रमषः 01 ए0 75 डी0 और 10 ए0 95 डी0 जमीन का इन्द्राज है। जिसमें सेवायत के रूप में क्रमषः बिठल राव एवं रामनाथ सिंह के नाम का इन्द्राज है। उक्त दोनों सेवायत का स्वर्गवास बहुत पूर्व में हो चुका है। ग्रामीणों द्वारा दिनांक-24. 02.2024 को मन्दिर की व्यवस्था हेतु एक आमसभा का आयोजन किया गया था और जो 11 व्यक्तियों का प्रस्ताव पास दिया गया है, उसमें सेवायत बिठल राव के परिवार से हरेराम रावत को भी शामिल किया गया है, जो उक्त आमसभा में उपस्थित भी थे। प्रस्तावित नामों के चरित्र सत्यापन हेतु संबंधित थाना को दिनांक-26.04.2024 को निबंधित डाक द्वारा भेजा गया है, परन्तु अभी रिपोर्ट प्राप्त नहीं है। प्रस्तावित नामों के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई षिकायत नहीं प्राप्त है। उपस्थित चुनचुन कुमार, नीरज कुमार का कथन है कि स्वयं-भू समिति बनाकर वर्ष 2010 से अति प्राचीन कच्चे मन्दिर का जीर्णोद्धार, चंदा, जनसहयोग तथा मन्दिर में आने वाले दान, चढ़ावा से किया गया है। इस संबंध में कुछ पुराने रजिस्टर, रोकड़वही दाखिल की गयी है। जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि समाज के विभिन्न व्यक्तियों से नगद राषि या सामग्री के रूप में चंदा और सहयोग प्राप्त किया है, जिससे मन्दिर का निर्माण किया गया है तथा स्वयं-भू समिति द्वारा समय-समय परवर्ष 2010 से बैठक की जाती रही है, उसका भी रजिस्टर पर्षद के समक्ष उपस्थापित किया गया। उक्त बैठक आदि में प्रस्तावित नामों के सदस्यों द्वारा उनके हस्ताक्षर है, जो स्पष्ट करता है कि वह उपस्थित होते थे और मन्दिर के कार्यो में सभी प्रकार के सहयोग देते थे और चूंकि107 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 चरित्र सत्यापन प्राप्त नहीं है, इसलिए पर्षद के आदेष दिनांक- 07.06.2024 के आलोक में न्यास समिति 01 वर्ष के लिए गठित करते हुए एक योजना का निरूपण किया जाता है।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए '' बाबा कोकिलचन्द धाम मन्दिर, ग्रामपो0- गंगरा, थाना- गिद्धौर, जिला- जमुई,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा कोकिलचन्द धाम मन्दिर, ग्रामपो0- गंगरा, थाना- गिद्धौर, जिला- जमुई,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बाबा कोकिलचन्द धाम मन्दिर, ग्रामपो0- गंगरा, थाना- गिद्धौर, जिला- जमुई,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमण्डल पदाधिकारी, जमुई - अध्यक्ष 2. श्री गोपाल सिंह पिता-स्व0 रघुवीर सिंह - उपाध्यक्ष 3. श्री चुनचुन कुमार पिता-स्व0 कामदेव सिंह - सचिव 4. श्री निरज कुमार पिता-स्व0 नरेष सिंह - कोषाध्यक्ष(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 108 5. श्री मनोरंजन कुमार पिता- श्री सरण देव सिंह - सदस्य

6. श्री सुबोध सिंह पिता-स्व0 सिया सिंह - सदस्य 7. श्री मृत्युंजय कुमार पिता- श्री राजेन्द्र सिंह - सदस्य 8. श्री निरंजन कुमार पिता- श्री शम्भू कुमार सिंह - सदस्य 9. श्री उमा शंकर सिंह पिता- स्व0 सहदेव सिंह - सदस्य 10. श्री विजय पाण्डेय पिता-स्व0 षिरोमणि पाण्डये - सदस्य 11. श्री हरेराम रावत पिता- स्व0 धनेष्वर रावत(सेवायत परिवार से) - सदस्य सभी का पता- ग्रामपो0- गंगरा, थाना- गिद्धौर, जिला- जमुई। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''बाबा कोकिलचन्द धाम मन्दिर, ग्रामपो0- गंगरा, थाना- गिद्धौर, जिला- जमुई,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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4 जुलाई 2024

सं0 1035--श्री बजरंग मंदिर, मथुरापुर, थाना-नाथनगर, जिला- भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3682 है। उक्त मंदिर के लिए स्थानीय 27 व्यक्तियों की विकास समिति का गठन कर ज6ु1नसहयोग से राशि प्राप्त कर 90 डी0 जमीन क्रय की गयी है और ग्रामीणो की बैठक दिनांक-30.07.2006 में उक्त भूमि पर हाट लगाए जाने का निर्णय लिया गया। परन्तु पर्षद के बार-बार नोटिस देने के बाद भी अधिनियम की धारा 59, 60 और 70 का किसी प्रकार का पालन नहीं किया गया और समिति द्वारा आय का प्रयोग निजीमद में किया जाने लगा। इसी बीच ग्रामीणों ने एक आम सभा दिनांक-25.01.2023 को की गयी जिससे यह तथ्य आया कि पूर्व 27 सदस्यों में से 09 का स्वर्गवास हो चुका है और हाट से होने वाली आय का केाई हिसाब-किताब नहीं दिया गया। अतः 11 व्यक्तियों के नामों प्रस्ताव पारित किया गया तथा यह भी उल्लेख किया गया कि उस हाट से 25,00,000/-रु0 से 30,00,000/-रु0 की प्रतिवर्ष आय होती है। इस संबंध में स्वम्ंभू कार्यरत न्यास समिति के अध्यक्ष, सचिव व सदस्यो से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। दिनांक-26.05.2023 को उक्त लोगों की तरफ से उनके अधिवक्ता श्री शत्रुघ्न कुमार उपस्थित थे, उनके द्वारा कथन किया गया कि वर्ष 2018-19 से आज तक की आय-विवरणी दाखिल करने के लिए तैयार हैं, उन्हें समय दिया जाए और दाखिल स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया गया है कि लगभग 25,00,000/-रु0 मंदिर के निर्माण में खर्च किया गया। जमीन संबंधी ह0 वाद सं0-128/08 लंबित है। स्थानीय नागरिकों द्वारा दाखिल मंदिर का फोटो एक अलग कहानी ब्यान करती है कि श्री बजरंग बली भगवान की मूर्ति खुले में बिना चबुतरे के टीन के नीचे रखा गया है, जहां कभी भी कोई व्यक्ति, जानवर और पक्षी प्रवेश कर सकते हैं और गंदगी फैला सकते हैं, बगल में कुछ निर्माण कार्य अधुरा दिखायी पड़ता है। अतः कार्यरत न्यास समिति को पर्षद के आदेश दिनांक-26.05.2023 द्वारा अंतिम अवसर देते हुए, 01 माह के अंदर वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक की आय-विवरणी, पर्षद शुल्क, बैंक पासबुक आदि दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अगली तिथि दिनांक-10.08.2023 निर्धारित थी। उक्त तिथि को ग्रामीण श्री शकल पासवान अपने अधिवक्ता के साथ उपस्थित थे और कथन किया कि उक्त भूमि पर हाट लगाने के लिए एक वर्ष का एकरारनामा 23,00,700/-रु0 प्रार्थी को दिया गया। अंतिम अवसर दिए जाने के बावजूद भी कार्यरत स्वम्ंभू समिति ने वर्ष 2018 से 23 तक का ना तो आय-विवरणी दाखिल की गयी ना पूर्व में वर्ष 2016-17 से 2017-18 की आय-विवरणी के आलोक में पर्षद शुल्क अधिनियम की धारा 70 के तहत दाखिल किया गया था, और चूॅकि अधिकांश सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका था। अतः पर्षदीय आदेश ज्ञापांक- 2170, दिनांक- 14.09.2023 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, भागलपुर, को अस्थायी न्यासधारी बनाते हुए, अंचल पदाधिकारी को हाट की बंदोबस्ती खुले डाक द्वारा किए जाने का निर्देश दिया गया तथा प्रस्तावित नामों को भी अनुमंडल पदाधिकारी को भेजकर उनका मतंव्य तथा पूर्व में स्वम्ंभू समिति के सदस्यों का कार्य संतोषजनक रहा हो, उनके नामों पर विचार करते हुए, शीघ्र प्रस्ताव पत्र भेजने का पत्र भेजा गया। साथ ही उक्त तिथि दिनांक-10.08.2023 को109 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 स्वम्ंभू समिति के भरत मंडल, (अध्यक्ष) सुदीम मंडल, (कोषाध्यक्ष) को पुनः एक अंतिम अवसर देते हुए, मंदिर और मंदिर की भूमि से होने वाली आय का पूर्व आय-विवरणी दाखिल करने का निर्देश दिया गया और इस शर्त के साथ की यदि विवरणी दाखिल नहीं की जाती है तो अपके विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट भी मंदिर की आय का दुरूपयोग करने के संबंध में दर्ज करायी जा सकती है। निर्धारित तिथि दिनांक- 03.11.2023 को वर्ष 2019-20 से 2020-21 की आय-विवरणी रजिस्टर के साथ दाखिल की गयी। संचिका सुनवाई हेतु दिनांक-09.02.2024 को निर्धारित की गयी। उक्त तिथि को समिति द्वारा मंदिर के नाम से संचालित बैंक खाते की पासबूक की फोटोप्रति दाखिल की गयी जिसमें दिनांक-30.08.2021 को 7,31,717/-रु0 का इन्द्राज है। वर्ष 2019-20 से 2020-21 एवं 2021-22 की जो रजिस्टर एवं विवरणी दाखिल की गयी, उससे स्पष्ट होता है कि लगभग 44,00,000/-रु0 की बचत समिति के पास है। उक्त राशि के संबंध में समिति से पृच्छा की गयी कि वह राशि कहां है और कहां जमा है। इस संबंध में उनके द्वारा एक समय की मांग की गयी जिसपर दिनांक- 24.05.2024 की तिथि निर्धारित थी। उक्त तिथि पर भी अध्यक्ष, सचिव अनुपस्थित थे, स्वम्ंभू समिति के सदस्य, विजेन्द्र पासवान द्वारा एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि समिति ने एक सिविल मि0 केस सं0-11/24 अंचल पदाधिकारी के द्वारा जो हाट बंदोबस्ती दिनांक-26.12.2023 को की गयी है, उसके विरूद्ध दाखिल किया गया है, परन्तु आज भी उनके द्वारा जो 44,00,000/-रु0 समिति द्वारा ही दाखिल रजिस्टर, विवरणी से बचत के रूप में समिति के पास है, उसका कोई स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया है और जहां तक स्वम्ंभू समिति द्वारा मि0 केस नं0-11/24 का प्रश्न है, वह याची द्वारा बिना किसी अधिकार के दाखिल किया गया है और अंचल पदाधिकारी द्वारा बंदोबस्ती पर्षद के आदेष ज्ञापांक-2170, दिनांक-14.09.2023 के आलोक में किया गया। उक्त आदेष के द्वारा ही स्वम्ंभू समिति के स्थान पर अनुमंडल पदाधिकारी को अधिनियम की धारा 33 के अन्तर्गत अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया है और यह स्पष्ट निर्देष दिया गया है कि मंदिर की भूमि की हाट की बदोबस्ती अंचल पदाधिकारी द्वारा या किसी अन्य अधिनस्थ कर्मचारी द्वारा करायी जाए। चूॅकि नई न्यास समिति बनाए जाने की कार्रवाई भी प्रक्रियाधीन है और प्राप्त राषि नई न्यास समिति द्वारा खाता खोले जाने परस्थानान्तरित की जाएगी। समिति गठन संबंधी प्रस्ताव दिनांक-25.01.2023 को दाखिल किया गया, जिसपर अनुमंडल पदाधिकारी को उनका मतव्ंय प्राप्त करने हेतु 04 पत्र क्रमषः पत्रांक-2187, दिनांक-18. 09.2023, पत्रांक-3337, दिनांक-09.01.2024, पत्रांक-4119, दिनांक-14.03.2024 एवं पत्रांक-413, दिनांक-06.05.2024 द्वारा जारी किया गया है तथा दुरभाष पर भी दिनांक-09.02.2024 को अद्योहस्ताक्षरी द्वारा सम्पर्क किए जाने पर 02 सप्ताह में प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया था, जो भी अप्राप्त है।

उक्त परिस्थिति में मामले को आगे लंबित न रखते हुए, पर्षद की सूनवाई आदेश दिनांक- 24.05.2024 में यह निर्णय लिया गया कि अधिनियम की धारा 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा 43 के तहत योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिये गठित किया जाय, और इस संबंध में यदि अनुमंडल पदाधिकारी का कोई पत्र प्राप्त होता है तो उसमें संशोधन किया जा सकता है।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री बजरंग मंदिर, मथुरापुर, थाना- नाथनगर, जिला- भागलपुर,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री बजरंग मंदिर, मथुरापुर, थाना- नाथनगर, जिला- भागलपुर,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री बजरंग मंदिर, मथुरापुर, थाना- नाथनगर, जिला- भागलपुर,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।110 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. अनुमंडल पदाधिकारी, भागलपुर या उनके द्वारा नामित कोई सरकार पदाधिकारी - अध्यक्ष 02. श्री अरूण कुमार मंडल, पिता-स्व0 बौकू मंडल - उपाध्यक्ष 03. श्री जवाहर मंडल, पिता- श्री महेन्द्र मंडल - सचिव 04. श्री प्रभात रंजन उर्फ प्रदीप मंडल, पिता-श्री बदरी मंडल - कोषाध्यक्ष 05. श्री अशोक मंडल, पिता-श्री बद्धू मंडल - सदस्य 06. श्री अमीर पासवान, पिता-श्री नंद किशोर पासवान - सदस्य 07. श्री सुबोध मंडल, पिता-श्री श्याम मंडल - सदस्य 08. श्री सकलदेव मंडल, पिता-स्व0 जगरनाथ मंडल - सदस्य 09. श्री सुनील मंडल, पिता-तीतू मंडल - सदस्य 10. श्री मुनीलाल पासवान, पिता-स्व0 अयोधी पासवान - सदस्य 11. श्री अशोक मंडल, पिता-स्व0 कनिकलाल मंडल - सदस्य सभी ग्राम- मथुरापुर, पो0- हरिदासपुर, थाना- नाथनगर, जिला-भागलपुर, पिन-812006 ।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति के सभी सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा। चूंकि न्यास समिति के अध्यक्ष सरकारी पदाधिकारी है, अतः अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष को बैठक करने का अधिकार रहेगा, परन्तु बैठक की सूचना एवं बैठक में लिये गये निर्णय से ससमय न्यास समिति द्वारा अध्यक्ष (अनुमंडल पदाधिकारी या उनके द्वारा नामित कोई सरकारी पदाधिकारी) को अवगत कराया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री बजरंग मंदिर, मथुरापुर, थाना- नाथनगर, जिला- भागलपुर,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।111 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

6 अप्रील 2024

सं0 68--श्री रामलला ठाकुरवाड़ी,नया बाजार, लखीसराय, जिला-लखीसराय,पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास ं निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-2607 है।

उक्त मठ के प्रागंण में पूर्व में लगभग 30 दुकानें थी, जिनमें से कुछ दुकाने ध्वस्त कर मंदिर का निर्माण किया गया। वर्तमान में 18 दुकानें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और 02 दुकाने भी लगभग 10-20 वर्ष पूर्व बनी है और 04 दुकानें वर्ष 2019 में निर्माण कराया गया। न्यास समिति के चूॅकि 06 सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है। अतः नई न्यास समिति बनाए जाने का निर्णय पर्षद द्वारा लिया गया। इस संबंध में आम सभा करके दिनांक-09.10.2023 को 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिनांक-09.11.2023 उपलब्ध कराया गया, जिसपर अनुमंडल पदाधिकारी से प्रस्तावित नामों पर उनके मंतव्य की मांग की गयी, जो दिनांक-11.12.2023 को उपलब्ध हुयी, जिसपर अनुमंडल पदाधिकारी ने अचंल पदाधिकारी को ''उपाध्यक्ष'' के रूप में रखे जाने का प्रस्ताव किया है तथा प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन रिपोर्ट भी दिनांक-16.12.2023 को प्राप्त हो गया। उपरोक्त 18 जर्जर हो गयी दुकानों के संबंध में स्थानीय कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल, लखीसराय के पत्र दिनांक-08.07.2023 जो अंचल पदाधिकारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष उपस्थापित की गयी और उक्त स्थल को Abandon (परित्याग करना) घोषित किया गया, जिस संबंध में दुकानदारों द्वारा दुकान खाली न करने के कारण द0प्र0स0 की धारा 133 के तहत विविध वाद सं0-121/23 दाखिल किया गया और सभी पक्षो को विस्तार पूर्वक सुनने के पष्चात्‌ पक्षो की सहमति के आधार पर आदेश दिनांक-02.12.2023 द्वारा 01 माह के अंदर दुकान खाली करने का निर्देश दिया गया। उक्त दुकानदारों को पर्षद के समक्ष भी बुलाकर दिनांक-09.11.2023 को सुनवाई की गयी, जिसमें सभी दुकानदारों की सहमति पर निम्न शर्ते निर्धारित की गयी कि बड़ी दुकानो से एडवांस के रूप में 1,50,000/-रु0 और छोटी दुकानो से 1,00,000/-रु0 राशि होगी और उक्त एडवांस राशि 02 माह के अदंर 50 प्रतिशत तथा अगले 02 माह के अंदर शेष 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, जिससे शीघ्र दुकानों का निर्माण किया जा सके तथा दुकानो का निर्माण 06 माह के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया गया। यह भी शर्त निर्धारित की गयी कि अनुमंडल पदाधिकारी से उक्त स्थल की बाजार किराया मूल्य प्रति स्का0 फीट प्राप्त कर, उसमें 20 प्रतिशत छुट देते हुए, किराया निर्धारित किया जाएगा, जो प्रत्येक 03 वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का किराए को लेकर विवाद ना हो। पर्षद के संज्ञान में यह भी लाया गया कि उपरोक्त दुकानदारों के द्वारा धारा 133 में पारित आदेश के विरूद्ध सत्र न्यायाधीश, लखीसराय में आपराधिक निगरानी 4/23 भी दाखिल की गयी और विस्तार पूर्वक सुनने के उपरांत दिनांक-01.02. 2024 को निरस्त कर दी गयी। उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त समिति गठन किए जाने के संबंध में प्रस्तावित नाम तथा अनुमंडल पदाधिकारी का मंतव्य एवं चरित्र सत्यापन रिपोर्ट दिनांक-16़.12.2023 के आलोक में पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक- 15.02. 2024 में यह निर्णय लिया गया की एक योजना का निरूपण करते हुए एक न्यास समिति का गठन किया जाए। अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री रामलला ठाकुरवाड़ी,नया बाजार, लखीसराय, जिला- लखीसराय,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामलला ठाकुरवाड़ी,नया बाजार, लखीसराय, जिला- लखीसराय,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामलला ठाकुरवाड़ी,नया बाजार, लखीसराय, जिला- लखीसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।112 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के

तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 01. श्री देवनंंदन प्रसाद, पिता-स्व0 मूला साव - अध्यक्ष पता- नया बाजार दालपट्टी, वार्ड नं0- 31, 02. अचंल पदाधिकारी, लखीसराय। - उपाध्यक्ष 03. श्री अनिल कुमार, पिता-स्व0 शिवनाथ साव - उपाध्यक्ष पता- नया बाजार, बड़ी दुर्गा स्थान, वार्ड नं0- 23 04. श्री मनोज कुमार, पिता-श्री साधु शरण साव - सचिव पता-नया बाजार, पेट्रोल पम्प, वार्ड नं0- 28 05. श्री राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, पिता-स्व0 देवीलाल - सहायक सचिव पता- ग्राम- कवैया रोड, वार्ड नं0- 26, 06. श्री केदार नाथ प्रसाद, पिता-स्व0 रामदयाल साव - कोषाध्यक्ष 07. श्री अनील कुमार, पिता-श्री रामसागर प्रसाद - सदस्य 08. श्री अशोक कुमार साव, पिता-स्व0 बालगोविन्द साव - सदस्य

तीनों का पता- पता- नया बाजार दालपट्टी, वार्ड नं0- 24,

09. श्री प्रकाश कुमार, पिता-स्व0 नूनू चंद साव - सदस्य

पता- पसीया गली, कवैया रोड, वार्ड नं0- 27

10. श्री उमेश प्रसाद, पिता-स्व0 धानेश्वर प्रसाद - सदस्य

पता- नया बाजार, दालपट्टी, वार्ड नं0- 24

11. श्री संतोष कुमार, पिता-स्व0 सरयुग साव - सदस्य

पता- पसीया गली, कवैया रोड, वार्ड नं0- 27

सभी थाना- कवैया, लखीसराय, जिला- लखीसराय।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष का होगा।

समिति द्वारा दुकानदारों से किराया बढ़ाए जने के दिशा-निर्देश की मांग पर उन्हें सुझाव दिया जाता है कि अधिनियम की धारा 51 के प्रावधानो के अनुसार किराएदारो का किराया बाजार दर पर होनी चाहिए। अतः समिति को निर्देश दिया जाता है कि इस संबंध में जो 02 दुकाने लगभग 10 वर्ष पूर्व से किराए पर दी गई है, की कोई राशि नहीं बढ़ायी गयी है, उनका भी बाजार मूल्य से 20 प्रतिशत कम करते हुए, किराया बढ़ाए जाने के संबंध में दुकानदार को सूचना दी जाए, जो मार्च 2024 से लागू हो तथा 04 दुकाने जो वर्ष 2018 में किराए पर दी गयी थी, उस संबंध में चूॅकि लगभग 06 वर्ष हो रहा है, लिहाजा उसे नया एकरारनामा पुनः 03 साल के लिए बनाया जाए, जिसमें 4,500/-रु0 प्रति माह एवं प्रत्येक 03 वर्ष पर यदि दोनो पक्षो के113 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 बीच संबंध अच्छा रहा, तो 10 प्रतिशत बढ़ोतरी दर की शर्ताे के साथ बनाया जाए, जो 01 जून 2024 से लागू होगा। न्यास समिति को यह निर्देश दिया जाता है कि मंदिर की भूमि पर किये जानेवाले निर्माण कार्य (दुकान निर्माण आदि) में खर्च की जानेवाली राशि का व्यौरा एवं उसका वाउचर अलग रजिस्टर पर संर्धारित करेंगे, साथ हीं इस मद में दुकानदारों से प्राप्त राशि एवं अन्य श्रोत से प्राप्त राशि का व्यौरा भी अलग रजिस्टर में दर्ज करेंगे तथा उक्त दोनों रजिस्टर मांग किये जाने पर पर्षद के समक्ष उपस्थिापित किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री रामलला ठाकुरवाड़ी,नया बाजार, लखीसराय, जिला- लखीसराय,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना का प्रारूप पर्षद के मा0 सदस्यों के अनुमोदनार्थ प्रेषित।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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संसोधित अधिसूचना

5 अप्रील 2024

सं0 66--श्री आदिषक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मन्दिर, ग्राम- ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाया-कहलगाँव, जिला-भागलपुर, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3993 है।

इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 3563, दिनांक- 26.03.2021 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगाँव की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय न्यास समित का गठन 01 वर्ष के लिये किया गया, तथा चरित्र सत्यापन की मांग थाना से की गयी। जिसपर थाना द्वारा 05 व्यक्ति क्रमषः प्रकाष मंडल, बद्री मंडल, अम्भो मंडल, सरयूग मंडल एवं गीता प्रसाद मंडल के विरूद्ध आपराधिक मामले की रिपोर्ट की गयी। जिसपर उपरोक्त पाचों व्यक्तियों से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिनके द्वारा पर्षद में उपस्थित होकर यह स्वीकार किया गया कि उनके विरूद्ध आपराधिक मामले लम्बित है और पर्षद की सुनवाई दिनांक-10.02.2022 में आपस में भी एक-दुसरे के विरूद्ध काफी अभद्रता का व्यवहार करते हुए अपने चरित्र का परिचय दिया। जो स्पष्ट करता था कि उक्त व्यक्तियों को न्यास समिति में रखे जाने पर मन्दिर का विकास और पूजा-पाठ प्रभावित हो सकता है और उनके विरूद्ध आपराधिक मामले भी विचाराधीन होने के कारण उन्हें समिति से विरमित कर दिया गया तथा 05 व्यक्तियों के नामों की मांग अनुमण्डल पदाधिकारी से की गयी। पर्षद के उपरोक्त आदेष एवं पत्र दिनांक-09.02.2023 के आलोक में अनुमण्डल पदाधिकारी द्वरा अपने पत्रांक-163, दिनांक-10.02.2023 द्वारा 05 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया, जिनका चरित्र सत्यापन थाना से दिनांक-30.01.2024 को प्राप्त हुआ, जिसमें प्रस्तावित नामों के विरूद्ध थाना ने अपनी रिपोर्ट दिनांक-30.01.2024 में उनके आचरण के सही संबंधी रिपोर्ट दी। तद्‌नुसार पर्षद की सूनवाई दिनांक- 21.02.2024 में प्रस्तावित 05 व्यक्तियों क्रमषः (1. श्री प्रदीप मंडल, 2. श्री उत्तम कुमार, 3. श्री पवन कुमार मंडल, 4. श्री गौतम कुमार एवं 5. श्री अनुज कुमार) को न्यास समिति में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया, साथ हीं न्यास समिति का गठन की तिथि से 05 वर्ष तक के लिए कार्यकाल विस्तार करने का निर्णय लिया गया यदि इस बीच में उनका कार्य संतोषजनक और मन्दिर के विकास हित में पाया जाता है। तदनुसार उक्त प्रस्तावित 05 व्यक्तियों को पर्षदीय ज्ञापांक- 3563, दिनांक- 26.03.2021 द्वारा गठित न्यास समिति में सम्मलित किया जाता है, एवं साथ हीं न्यास समिति का गठन की तिथि से 05 वर्ष तक के लिए कार्यकाल विस्तार किया जाता है, यदि इस बीच में उनका कार्य संतोषजनक और मन्दिर के विकास हित में पाया जाता है। न्यास समिति को यह निर्देष दिया जाता है कि न्यास समिति की बैठक कर सचिव, कोषाध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन कर पर्षद से शीघ्र अनुमोदन प्राप्त करें तथा अबतक न्यास में किये गये विकासात्मक कार्यो एवं आय-व्यय का ब्यौरा भी प्रस्तुत करें।

यह संशोधित अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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अधिसूचनाएं

9 अप्रील 2024

सं0 92--श्री राम जानकी मठ, नारेपुर, जिला-बेगुसराय, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 982 है।

मन्दिर की भूमि के संबंध में दिनांक-26.05.1987 को भी अपर समाहर्त्ता द्वारा अपनी रिपोर्ट दी गयी थी तथा दिनांक-01.09.1986 को न्यास समिति का गठन भी किया गया था और उस समिति के द्वारा (एक फर्जी व्यक्ति बलदेव दास द्वारा भूमि को बिक्रय किये जाने के संबंध में) स्वत्व वाद 61/88 दाखिल किया था, जो अभी तक विचाराधीन है। इसी बीच ग्रामीणों द्वारा षिकायत की गयी कि थाना नं0-43, खाता नं0-1434, 19, 357 पर सीयाराम दास द्वारा अवैध रूप से निर्माण114 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 कार्य जारी है और मकान बनाकर कुछ अवैध व्यक्तियों को दिया जा रहा है। उक्त सियाराम दास का न तो कोई मान्यता पर्षद से दी गयी और न उनके द्वारा अपने दावे के संबंध में कोई दस्तावेज दाखिल किया गया है। ग्रामीणों द्वारा एक आमसभा करके कमिटी बनाये जाने के संबंध में 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिये तथा कथन किया कि लगभग 11-12 बी0 जमीन अभी स्वयं-भू समिति के पास है, जो अभी मन्दिर की व्यवस्था कर रहे है। एक न्यास समिति बनायी जाए। उपरोक्त प्रस्ताव अंचलाधिकारी को उनके मंतव्य व कुछ अन्य व्यक्तियों के नामों को जोड़ने हटाने के संबंध में दिनांक-11.07.2023 एवं 03.10. 2023 को दिया गया है। जिस आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा 10 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया। उपस्थित ग्रामीणों द्वारा कथन किया गया कि अंचलाधिकारी द्वारा भेजे गये नाम (1) श्री शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने मिलकर अपने रिस्तेदार के नाम ठाकुरबाड़ी की जमीन खरीदा है और (2) श्री सिकन्दर कुमार क्रम संख्या-5 मन्दिर की भूमि पर व्यवसाय करते है और लगभग 2.5 वर्षो से कोई किराया नहीं देते है तथा प्रस्तावित नाम (3) अर्जून प्रसाद गुप्ता बार-बार सारी ठाकुरबाड़ी की सम्पत्ति पर अपना दावा करते रहते है। उक्त तीनों व्यक्तियों को न्यास समिति में सामिल नहीं किया जाए। उक्त तथ्यों पर विचारोपरान्त तथा ग्रामीणों द्वारा प्रस्ताव दिया गया कि धमेन्द्र कुमार दानदाता परिवार से आते हैं। उन्हें शामिल किया जाए। उपरोक्त पर विचारोपरान्त एक योजना का निरूपण करते हुए अधिनियम की धारा-32, 83 और उपविधि 45 (ZB) में दिये प्रावधानों के तहत निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है -

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0-43 (द) का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी मठ, नारेपुर, जिला-बेगुसराय,'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मठ, नारेपुर, जिला-बेगुसराय,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मठ, नारेपुर, जिला-बेगुसराय,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।115 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, बछवाड़ा, बेगुसराय। - अध्यक्ष 2. श्री धर्मेन्द्र कुमार, पिता- स्व0 विरेन्द्र कुमार शर्मा। - उपाध्यक्ष 3. श्री शषी शेखर राय, पिता - श्री भुवनेष्वर राय - सचिव 4. श्री उमेष यादव, पिता- स्व0 दोरिक राय। - कोषाध्यक्ष 5. श्री उदय कुमार राय, पिता- श्री शर्मानंद राय। - सदस्य 6. मुखिया, नारेपुर पंचायत, राज, रानी-1 - पदेन सदस्य 7. श्री अरूण कुमार राय, स्व0 रामकृपाल राय। - सदस्य 8. श्री श्याम किषोर राय, स्व0 शत्रधुन राय। - सदस्य 9. थानाध्यक्ष, बछवाड़ा, बेगुसराय - पदेन सदस्य

सभी का पता- ग्रामपो0- नारेपुर पष्चिम, थाना- बछवाड़ा, जिला- बेगुसराय।

न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। समिति का संचालन कर रहे श्री शषी शेखर राय को पिछले 05 वर्षो की मंदिर की बन्दोबस्ती आदि से होनेवाली आय-व्यय विवरण दाखिल करने का निर्देष दिया जाता है।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी मठ, नारेपुर, जिला-बेगुसराय,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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4 अप्रील 2024

सं0 34--पंचवटी धाम पतनेष्वर महादेव मन्दिर, मलयपुर, जिला-जमुई, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3587 है।

उक्त मन्दिर में 4.66 ए0 भूमि है जो पहाड़ पर स्थित है। संचिका में फोटो से स्पष्ट होता है कि लगभग 05 मन्दिर गुम्बजनुमा है, जिसमें जनसामान्य की काफी भीड़ समय-समय पर धार्मिक अवसरों पर रहता है। पूर्व में उक्त मन्दिर की व्यवस्था हेतु पर्षद के पत्रांक-2617, दिनांक-12.09.2003 द्वारा 13 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, परन्तु वह समिति पुर्ण रूप से कार्य के प्रति असफल रही है और पर्षद द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर कोई प्रत्योत्तर नहीं दाखिल किया है और न कभी उपस्थित हुए। इसी बीच कृष्णानंद भारती द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया कि उनकी अध्यक्षता में एक स्वयं-भू समिति कार्यरत है, जिसे मान्यता दी जाए। इस संबंध में उनसे भी उनकी कार्यावधि 2015 से वर्त्तमान समय तक की आय-व्यय विवरणी, बजट, विकासात्मक कार्य आदि के संबंध में प्रत्योत्तर की मांग की गयी, परन्तु उनके द्वारा भी कभी कोई प्रत्योत्तर नहीं दिया गया। इसी बीच दिनांक-21.09.2022 को बिक्रम कुमार ने प्रार्थना-पत्र देकर यह कथन किया कि निबंधन कार्यालय के द्वारा एक न्यास समिति का गठन कर निबंधन किया जा चुका है, जिसकी मान्यता दी जाए। उक्त प्रार्थना-पत्र पर कोई निर्णय लेने के पूर्व पुनः पूर्व के न्यास समिति को अंतिम अवसर देते हुए पत्र लिखा गया, परन्तु उस पत्र के उत्तर में भी कोई भी सदस्य उपस्थित नहीं हुए, जबकि स्थानीय कुछ व्यक्तियों के द्वारा उपस्थित होकर एक अन्य न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में मांग की तथा मन्दिर के कुछ फोटो भी दाखिल किया। पूर्व न्यास समिति सीमा समाप्त होने के116 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 कारण अनुमण्डल पदाधिकारी से जो न्यास विलेख में प्रस्तावित नाम पर उनका मंतव्य तथा कुछ अन्य नामों को जोड़ना घटाना का पत्र पर्षद के पत्रांक-4283, दिनांक-17.03.2023 को लिखा गया। पर्षद के पत्र के आलोक में अनुमण्डल पदाधिकारी के द्वारा अपने पत्रांक-562, दिनांक-11.11.2023 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया। इसी बीच अषोक कुमार पाण्डे द्वारा डाक के माध्यम से एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि अनुमण्डल पदाधिकारी के द्वारा पूर्व में दिनांक-21.09.2023 को बैठक करके प्रार्थी को भी न्यास समिति में स्थान दिया गया था, परन्तु पर्षद में जो पत्र भेजा गया है, उसमें प्रार्थी के नाम को बिना किसी कारण से षडयंत्र के तहत विलोपित कर दिया है। आगे उल्लेख किया है कि पहाड़ पर स्थित उक्त मन्दिर का पूजा-पाठ, विकास कार्य पूर्व में जोगा पाण्डे और उनके वंषजों द्वारा किया जाता था जो प्रार्थी के पूर्वज थे तथा इस संबंध में उनके द्वारा खतियान की प्रति भी दाखिल की गयी है तथा दिनांक-07.07.1967 एवं 02.11.1973 का केवाला वयकलामी का मात्र प्रथम पेज दाखिल किया है, उससे स्पष्ट नहीं हो रहा है कि दस्तावेज दाखिल करने का क्या आधार है और उद्‌देष्य क्या है, क्योकि उक्त पृष्ठ पर न तो किसी प्रकार की भूमि का खाता, खेसरा का उल्लेख है सिवाय क्रेता-बिक्रेता के नामों का। परन्तु आज वह व्यक्तिगत रूप से पर्षद में उपस्थित नहीं है। प्रस्तावित नाम अधिकांषतः वहीं है, जिनके द्वारा निबंधित न्यास विलेख बनाया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त लोग वर्ष 2021 से मन्दिर की देख-भाल, व्यवस्था का कार्य कर रहे थे। अतः उन्हें निर्देष दिया जाता है कि वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 में मन्दिर से होने वाली आय तथा किस मद में खर्च किया गया और इतनी अवधि में कितने विकास का कार्य किया गया, उनका फोटो तथा उसकी अनुमानित राषि के संबंध में जानकारी पर्षद को एक माह के अन्दर अवष्य दाखिल करें।

तबतक मन्दिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों में से 02 स्थानों को सुरक्षित रखते हुए 09 सदस्यीय न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है, उनका चरित्र सत्यापन तथा कार्य संतोषजनक होने पर आगे विचार किया जायेगा।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''पंचवटी धाम पतनेष्वर महादेव मन्दिर, मलयपुर, जिला- जमुई,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' पंचवटी धाम पतनेष्वर महादेव मन्दिर, मलयपुर, जिला- जमुई,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''पंचवटी धाम पतनेष्वर महादेव मन्दिर, मलयपुर, जिला- जमुई,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।117 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 ः4ः 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमण्डल पदाधिकारी, जमुई - अध्यक्ष 2. श्री प्रषांत सिन्हा, - उपाध्यक्ष पिता- श्री मुनेष्वर प्रसाद सिन्हा, ग्राम- मनियडा। 3. श्री राजीव कुमार पाण्डे - सचिव पिता-श्री श्याम देव पाण्डे, ग्रामपो0थाना- मलयपुर। 4. श्री प्रदीप कुमार सिंह - कोषाध्यक्ष पिता- स्व0 छत्रधारी प्र0 सिंह, ग्राम- टेंगहरा। 5. श्री विकास प्रसाद सिंह - सदस्य पिता - श्री दषरथ सिंह, ग्राम- अन्नपूर्णा निवास (काली मंदिर) सिरचंदनवादा। 6. श्री नारायण सिंह - सदस्य पिता- स्व0 भगवान सिंह, ग्राम- बिहारी, थाना- जमुई। 7. श्री रामानंद सिंह - सदस्य पिता - स्व0 भुवनेष्वर सिंह, ग्राम- नुमर वरहट। 8. श्री पंकज सिंह - सदस्य पिता- श्री जगरनाथ सिंह, ग्राम- मिसिर मनियडा। 9. श्री रवि सिंह - सदस्य पिता- श्री अभिनाष चन्द्र सिंह, ग्राम- नयाटोला बिहारी। सभी का जिला- जमुई। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। समिति का संचालन कर रहे श्री शशी शेखर राय को पिछले 05 वर्षों की मंदिर की बन्दोबस्ती आदि से होनेवाली आय-व्यय विवरण दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''पंचवटी धाम पतनेष्वर महादेव मन्दिर, मलयपुर, जिला- जमुई,'' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-(1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/ पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षदद्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 118

आदेश

26 जून 2024

सं0 899--लहेरी मठ, ग्राम-लहेरी, थाना-करगहर, कोचस, सासाराम, जिला-रोहतास, जो पर्षद में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप् में निबंधित है जिसकी निबंधन सं0-213 है। उक्त मठ की देखभाल एवं व्यवस्था हेतु दिनांक-02/07/2021 को बादषाह सिंह को अस्थायी रूप से 02 वर्ष के लिए न्यासधारी बनाया गया था जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। बादषाह सिंह दिनांक-14/05/2024 को पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर अपने कार्यकाल विस्तार करने का अनुरोध किया, उनका कथन है कि मठ की सारी भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है जिसके विरूद्ध वह कई न्यायालय में केस लड़ रहे हैं। न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु इनके कार्यकाल को न्यास समिति गठन किए जाने तक अस्थायी रूप से विस्तार दिया जाता है।

1. श्री बादषाह सिंह-न्यासधारी, लहेरीमठ, ग्राम-लहेरी, थाना-करगहर, कोचस, सासाराम, जिला-रोहतास, के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में 15 दिनों के अन्दर खाता खोलें तथा पास बुक दाखिल करें।

2. मंदिर में जो पीली और सफेद धातु चढ़ाई जाती है, उसको एक अलग रजिस्टर में प्रत्येक दिन के आय को अंकित करेंगे।

3. ये न्यास की सम्पत्ति का संरक्षण करेंगे। 4. यदि कोई चल या अचल सम्पत्ति किसी के द्वारा अधिगृहित या अतिक्रमित है, तो उसे, वापस लाने के लिए पर्षद की अनुमति से कानूनी कार्रवाई करेंगे।

5. ये न्यास की चल या अचल सम्पत्ति का हस्तांतरण (बिक्रय), बदलैन या लीज अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के विपरित किसी के पक्ष में नहीं करेंगे। अगर किसी प्रकार का हस्तांतरण बदलैन या लीज किया जाता है तो वह अवैध एवं अमान्य होगा तथा आपराधिक विचारण प्रक्रिया प्रारम्भ की जायेगी।

6. सम्पत्तियों का दुरूपयोग या स्वार्थवष उपयोग नहीं करेंगे। 7. किसी भी अपराधिक कृत्य में संलिप्त नहीं रहेंगे। 8. 10,000/- (दस हजार) रू0 से अधिक राषि का खर्च चेक के माध्यम से करेंगे। 9. प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरांत विगत वर्ष में प्राप्त आय-व्यय, पर्षद को देय शुल्क, विकासात्मक कार्यों (फोटो) आदि का सम्यक्‌ प्रेषण पर्षद को करेंगे।

10. अंचल के भू-राजस्व में भूमि ''लहेरी मठ, ग्राम-लहेरी, थाना-करगहर, कोचस, सासाराम, जिला-रोहतास'' के नाम का इन्द्राज लगातार रहेगा, उसमें कोई नामान्तरण व संषोधन नहीं होगा।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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अधिसूचनाएं

3 जुलाई 2024

सं0 1020--श्री श्री भारत माता मंदिर, ग्राम- लंगर टोली चौराहा, थाना- पीरबहोर, अंचल-सदर, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी (cid:2872)(cid:2875)(cid:2875)(cid:2875)

निबंधन सं0- है।

(cid:2870)(cid:2868)(cid:2870)(cid:2871)

भारत माता मंदिर, लंगर टोली चौराहा के प्लॉट संख्या- 770, शीट संख्या- 68, वार्ड- 08 (पुराना) 40 (नया), हो॰ संख्या- 02 मात्र 554 वर्ग फीट भूमि पर अवस्थित है। इसकी चौहद्दी, पुरब- बारी पथ सड़क, लंगर टोली, पष्चिम- सुभाष मार्केट, दक्षिण- गोल्ड हाउस दुकान एवं उत्तर- सब्जी बाग सड़क है। मंदिर की स्थापना वर्ष 1926 में की गयी थी। वर्तमान में मंदिर के तीन कक्ष में भगवान महादेव, देवी भारत माता एवं शनि देव की प्रतिमा स्थापित है तथा दो कमरों में किराया पर दुकान संचालित होता है। इसमें 1500/- रू॰ प्रति माह किराया प्राप्त होता है। मंदिर का दैनिक पुजा-पाठ, राग-भोग आदि चढ़ावा व किराया से प्राप्त आय से होता है। मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक न्यास घोषित किया जा चुका है। मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यास समिति के गठन किये जाने के संंबंध में दो समुहों द्वारा अपना-अपना प्रस्तुत कर तीन-चार बार कुछ व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया गया, जिसमें प्रत्येक सूची में कुछ नये व्यक्तियों का नाम जोड़ा गया तथा एक सूची दिनांक- 15/02/2024 को स्थानीय महिलाओं की बैठक, जो श्रीमति अंजू आर्या की अध्यक्षता में की गयी है, भी समर्पित की गयी है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दुसरे के विरूद्ध काफी गंभीर आरोप-प्रत्यारोप गठित किये गये, जिस पर सुनवायी दिनांक- 12/02/2024, दिनांक- 02/03/2024, दिनांक- 30/03/2024, दिनांक- 12/04/2024 को भी की गयी। दोनों पक्षों को यह भी अवसर दिया गया कि आपस विरोध-प्रतिरोध को भुलकर दोनों पक्ष मिलकर कुछ अच्छे व्यक्तियों का नाम का प्रस्ताव दें, जिससे समिति का गठन किया जा सके, परंतु पर्याप्त अवसर दिये जाने के पश्चात भी दोनों पक्षों में किसी प्रकार की सहमति नहीं बनी। प्रथम पक्ष, श्री सुनील कुमार दुबे द्वारा द्वितीय पक्ष द्वारा समर्पित प्रस्ताव पर आरोप लगाया गया कि उनके प्रस्ताव में दो सदस्य हिन्दू समुदाय से भिन्न हैं। यह भी आरोप लगाया कि मंहती का दावा करने वाले गोरखनाथ स्वयं उस मंदिर में किरायेदार हैं और वर्तमान में उनके पुत्र द्वारा दुकान संचालित किया जाता है।119 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 इस संबंध में पुर्व समिति एवं पक्षों के बीच स्वत्व वाद संख्या- 60/82 लाया गया था, जो मा॰ उच्चतम न्यायालय तक चला, जिसमें गोरखनाथ को किरायेदार के रूप मेें माना गया और मंदिर को सार्वजनिक घोषित किया गया। वहीं यह भी आरोप प्राप्त हुआ कि द्वितीय पक्ष ने अपने बाहुबल का प्रयोग करते हुये दिनांक- 02/12/2023 को मंदिर पुर्ण रूप से ताला बंद कर दिया गया, जिससे श्रद्धालु भक्तों को दर्षन अवरूद्ध हो गया। वहीं द्वितीय पक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया कि मंदिर की दीवाल तोड़ कर प्रार्थी अपने मकान का मार्ग बनाना चाहते थे। द्वितीय पक्ष का मुख्य आरोप प्रस्तावित नामों में सुनील कुमार दुबे के विरूद्ध था, जिनके विरूद्ध 10 से अधिक अपराधिक कांड विचाराधीन होने की बात और कई प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार कर समिति गठित करने हेतु समर्पित करने का आरोप है। इसी प्रकार एक अन्य प्रस्तावित नाम, अनिल सहनी उर्फ लंगड़ा के विरूद्ध तीन अपराधिक कांड विचाराधीन होने की बात कही गयी। यह भी आरोप लगाया गया कि मंदिर के उपर एक बड़ा विज्ञापन का होर्डिंग लगाया गया है। उक्त कार्य सुनील कुमार, अनिल सहनी एवं टिंकु आदि ने मिलकर किया है।

दोनों पक्षों द्वारा समर्पित दस्तोवज, अभ्यावेदन, मौखिक तर्क को विस्तारपुर्वक सुना गया। पर्याप्त अवसर आपस में सहयोग कर समिति गठित किये जाने हेतु दिया गया। परंतु आपसी सहयोग नहीं किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्षों के बीच अपने अहम्‌ एवं मंदिर में एकाधिकार के उद्देष्य से एक-दुसरे के प्रति विरोध-प्रतिरोध किया जा रहा है, जो मंदिर हित में नहीं है।

उपरोक्त परिस्थिति में किसी ऐसे व्यक्ति को जो अपराधिक पृष्टभूमि के हैं और उन्हेें एक-दुसरे के विरूद्ध आरोप-प्रत्योरोप लगाया जा रहा है, उन्हें समिति में स्थान देना उचित नहीं समझा जाता है। इस बिंदु पर पर्षद के माननीय सदस्यों के साथ भी विचारोपरांत उपरोक्त मंंदिर की व्यवस्था हेतुएक योजना का निरूपण करते हुये इसके कार्यान्वयन हेतु अधिनियम की धारा- 32, 83 एवं उपविधि की धारा- 43 के तहत न्यास समिति का गठन का निर्णय लिया गया। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-15/06/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32, 83एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री श्री भारत माता मंदिर, ग्राम- लंगर टोली चौराहा, थाना- पीरबहोर, अंचल- सदर, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री श्री भारत माता मंदिर न्यास योजना, ग्राम- लंगर टोली चौराहा, थाना- पीरबहोर, अंचल- सदर, जिला- पटना''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री श्री भारत माता मंदिर न्यास समिति, ग्राम- लंगर टोली चौराहा, थाना- पीरबहोर, अंचल- सदर, जिला- पटना''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।120 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 12. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे। 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्रस्तावित 09 व्यक्तियोंकी न्यास समिति का गठन किया जाता है-

1. श्रीमति उषा दुबे पिता- श्री देव नारायण पाण्डेय - अध्यक्ष पता- सुभाष मार्केट, था॰- पीरबहोर, लंगर टोली चौराहा, पटना- 04, 9386833923

2. श्री अनिल कुमार पाण्डेय (सेवानिवृत कार्यपालक पदाधिकारी) - उपाध्यक्ष पिता- स्व॰ नरेष पाण्डेय, दरियापुर, दुबे गली, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 7903519450

3. श्री राजीव कुमार सिन्हा पिता- स्व॰ राज कुमार प्रसाद - सचिव पता- लंगर टोली गली, संध्या निवास, था॰- कदमकुआं, पटना- 04, 9708288603

4. श्री रंधीर कुमार आर्या पिता- स्व॰ नरेष प्रसाद - कोषाध्यक्ष पता-आर्या हाउस, सब्जी बाग, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 9334505070

5. श्री सनोज कुमार पिता- स्व॰ षिव नारायण लाल -सदस्य पता- दुरूखी गली, बिहारी साव लेन, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 8709125464

6. श्री सुभाषचन्द्र खत्री पिता-श्री अषोक कुमार खत्री - सदस्य पता- दुरूखी गली, बांकीपुर, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 9431188829

7. श्री सन्नी दूबे पिता- स्व॰ गोपाल दुबे - सदस्य पता- दरियापुर, दुबे गली, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 8709833314

8. श्री पवन कुमार पाण्डेय पिता- जनार्दन पाण्डेय - सदस्य पता- दुबे मार्केट, लंगरटोली चौराहा, था॰- पीरबहोर, पटना- 04, 9709614116

9. श्री मुन्नी देव मेहता पिता- स्व॰ छोटन मेहता - सदस्य पता- लंगरटोली गली, महावीर चबुतरा, पटना- 04, 8271348373

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री श्री भारत माता मंदिर, ग्राम-लंगर टोली चौराहा, थाना-पीरबहोर, अंचल-सदर, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय /पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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29 जून 2024

सं0 959--बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर, ग्रामपोस्टथाना- ब्रह्मपुर, जिला-बक्सर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास

(cid:2872)(cid:2873)(cid:2875)(cid:2870)

पर्षद, पटना के अन्तर्गत निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या- है।

(cid:2870)(cid:2868)(cid:2870)(cid:2869)121 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-4369, दिनांक-30/12/2021 द्वारा मंदिर की आंतरिक व्यवस्था हेतु अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में व्यवस्था समिति के गठन का निर्णय लिया गया था, जिसमें पंडा समुदाय के तीनों पट्‌टी क्रमषः अष्टवक्र पट्‌टी, छटठु पट्‌टी, केसरिया पट्‌टी द्वारा प्रस्तावित नामों की समिति गठित की गयी थी। इस बीच पर्षद को समिति के विरूद्ध कुछ षिकायत प्राप्त हुयी कि समिति द्वारा चढ़ावा आदि की राषि को अवैध रूप से आपस में बांट लिया जाता है।उपरोक्त के आलोक में आंतरिक समिति के अध्यक्ष एवं सभी पक्षों को नोटिस निर्गत किया गया। इस पर आंतरिक समिति के अध्यक्ष एवं सचिव उपस्थित हुये। उनके द्वारा अवगत कराया गया कि उनके समाज के कुछ लोगों द्वारा मनमाने ढ़ंग से चढ़ावा को बांटना प्रारंभ कर दिया गया और एक समिति गठित कर एक खाता भी खोला गया है, जिसकी सूचना उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष को प्रदान की गयी, परंतु कोई कार्रवाई नहीं की गयी। पर्षदीय पत्र के आलोेक में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 787, दिनांक- 15/04/2024 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि समिति की व्यवस्था असहयोगात्मक है।किसी भी बैठक में सभी सदस्य उपस्थित नहीं हुये तथा समिति के सदस्यों का प्रभाव भी पंडा समाज पर नगण्य है।फलस्वरूप पंडा समाज द्वारा एक वैकल्पिक समिति के गठन का प्रस्ताव दिया गया है, जो विगत 06 माह से कार्यरत है। साथ ही प्रार्थना की गयी थी कि उपरोक्त वैकल्पिक न्यास समिति को मान्यता प्रदान की जाय। चुंकि पुर्व में गठित समिति अप्रभावी हो गयी थी, ऐसी स्थिति में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों की मंदिर की आंतरिक व्यवस्था हेतु समिति को मान्यता प्रदान की जाती है। समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि बैंक में जो खाता खोला गया है, उसके पासबुक की प्रति पर्षद को उपलब्ध करायें और अनुमंडल पदाधिकारी के साथ बैठक कर मंदिर के गर्भगृह में जो चढ़ावा की राषि आती है, उसे किस प्रकार तीनों पटि्‌टयों में वितरित किया जायेगा, इस संबंध में एक मार्गदर्षिका शीघ्र तैयार कर पर्षद को भी सूचित करें। उपरोक्त में राषि, दैनिक, साप्ताहिक या मासिक के रूप में भुगतान की जायेगी।

कितने प्रतिषत राषि किस पट्‌टी को दिया जायेगा और प्रत्येक पट्‌टी से आने वाले परिवार-सदस्यों का नाम भी अंकित करें। अनुमंडल पदाधिकारी यह भी जांच कर लें कि जो प्रस्तावित नाम दिया गया है, उसमें तीनों पट्‌टी आनुपातिक रूप से प्रतिनिधित्व है या नहीं।

उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित नाम एवं प्रार्थना-पत्र पर विचारोपरांत एक योजना निरूपण करते हुये इसके कार्यान्वयन हेतु अधिनियम की धारा- 32, 83 एवं उपविधि की धारा- 43 के तहत प्रस्तावित 09 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन पांच वर्ष के लिए किया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-07/10/2021 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम- ब्रह्मपुर, जिला-बक्सर''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया गया है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर न्यास योजना, ग्रामपोस्टथाना- ब्रह्मपुर, जिला-बक्सर''होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम''बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर न्यास समिति, ग्रामपोस्टथाना- ब्रह्मपुर, जिला-बक्सर''होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।122 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित 09 सदस्यों की न्यास समिति का गठन पांच वर्ष के लिएकिया जाता हैः-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, बक्सर- अध्यक्ष 2. श्री भगवती पाण्डेय- कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्रीकांत पाण्डेय- सचिव 4. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी- सह-सचिव 5. श्री रंगनाथ पाण्डेय- कोषाध्यक्ष 6. श्री चिंताहरण पाण्डेय- सदस्य 7. श्री ओमकार पाण्डेय- सदस्य 8. श्री निम गोपाल पाण्डेय- सदस्य 9. श्री अजय पाण्डेय- सदस्य 10. श्री उमाकांत पाण्डेय- सदस्य

बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर।

नोटः- उक्त आदेष के आलोक मेें ''बाबा श्री ब्रह्मेष्वरनाथ महादेव मंदिर, ग्रामपोस्टथाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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1 जुलाई 2024

सं0 964--श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ), ग्राम-ठकाईच बड़का, पोस्ट-ठकाईच, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-421 है।

उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-204़6, दिनांक-09/03/2013 द्वारा ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। न्यास समिति गठन के उपरांत न्यास समिति से पर्षद द्वारा लगातार अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 का पालन संबंधी पत्र प्रेषित किया जाता रहा, परंतु उसका कोई प्रतिउत्तर नहीं प्राप्त हुआ। इसी बीच मंदिर के पुजारी व समिति के सदस्य अभिनंदन पाण्डे द्वारा मंदिर की प्रतिमा चोरी किये जाने के संबंध में एक प्रतिवेदन दि॰- 22/01/2023 को थाना में दर्ज किया गया। सौभाग्यवष वह प्रतिमा पुलिस द्वारा बरामद कर ली गयी। इसी बीच ग्रामीणों द्वारा दि॰-25/01/2023 को एक बैठक आहुत कर 15 नामों का प्रस्ताव न्यास समिति गठन हेतु पर्षद को उपलब्ध कराया गया, जो सूची अनुमंडल पदाधिकारी को प्रेषित करते हुये प्रेषित नामों पर उनसे मंतव्य की मांग की गयी, जो अप्राप्त रहा।123 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पुर्व न्यास समिति के तीन सदस्य क्रमषः इन्द्रासन दुबे, कामता दुबे का स्वर्गवास हो गया है। योगन्द्र दुबे ने त्याग-पत्र दे दिया। अजय प्रधान 5-6 वर्षों से गांव में निवास नहीं करते हैं तथा अभिनंदन पांडे, सच्चिदानंद और प्रार्थी कन्हैया दुबे के अतिरिक्त कोई भी सदस्य न तो बैठक में सम्मिलित होते हैं और न किसी रूप से सहयोग करते हैं। उपरोक्त सभी परिस्थितियां स्पष्ट करती है कि पुर्व महंत/न्यासधारी द्वारा उचित देखभाल नहीं करने के कारण मौजा-परमेष्वरपुर की भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण हो गया है। वर्ष 2013 में गठित न्यास समिति द्वारा मौजा- ठकाईच की भूमि को सुरक्षित रखा गया, परंतु अधिनियम की धारा-59, 60 एवं 70 का पालन नहीं किये जाने, पर्षद से किसी प्रकार का पत्राचार, जानकारी नहीं दिये जाने से उनके कार्य को संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है। न्यास समिति के अधिकांष सदस्य निष्क्रिय हो चुके हैं। साथ ही न्यास समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।

ऐसी स्थिति में नवीन न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है। ग्रामीणों द्वारा आम सभ दि॰- 12/09/2023 में ग्यारह व्यक्तियोें के नामों का चयन किया गया है, जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी से मंतव्य तथा थाना से चरित्र-सत्यापन संबंधित पत्र प्रेषित किया गया, परंतु प्रतिवेदन अप्राप्त है। अतएव मामले को आगे लंबित रखना उचित नहीं प्रतीत होता है।

उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए न्यास समिति का गठन किया जाता है तथा कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल विस्तार पर विचार किया जायेगा। अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-15/04/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ), ग्राम- ठकाईच बड़का, पोस्ट- ठकाईच, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ) न्यास योजना, ग्राम-ठकाईच बड़का, पोस्ट-ठकाईच, थाना-डुमरांव, जिला-बक्सर''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम''श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ) न्यास समिति, ग्राम- ठकाईच बड़का, पोस्ट- ठकाईच, थाना- डुमरांव, जिला-बक्सर''जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे।124 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है-

1. श्री अजीत पाल - अध्यक्ष 2. श्री प्रमोद दूबे -उपाध्यक्ष 3. श्री कन्हैया दूबे पिता-सीताराम दुबे, बड़का ठकाईच, बक्सर- 802133 - सचिव 4. श्री ब्रजेष्वर दूबे पिता-गोपाल दूबे, ग्रा॰- ठकाईच, डुमरांव, बक्सर- 802133 - कोषाध्यक्ष 5. श्री षिवनारायण यादव पिता-स्व॰ गौरीषंकर सिंह, बड़हिया, पो॰- बसांव टोला -सदस्य 6. श्री विष्वेष्वर दूबे पिता- षिवधारी दूबे, बड़का ठकाईच, बक्सर - सदस्य 7. श्री अभिनंदन पाण्डे - सदस्य 8. श्री सुधीर दूबे पिता-नरेंद्र दूबे, बड़का ठकाईच, बक्सर- 802133 - सदस्य 9. श्री सुरेष यादव - सदस्य 10. श्री छप्पन गौड पिता-डोमन गौड, बड़का ठकाईच, ठकाईच, बक्सर- 802133 - सदस्य 11. श्री केदार सिंह पिता-श्री सिद्धनाथ सिंह, ग्रा॰-ओरापुर शेष सभी का पता-श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ), ग्राम- ठकाईच बड़का, पोस्ट- ठकाईच, थाना- डुमरांव, जिला- बक्सर।

उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी मंदिर (ठकाईच मठ), ग्राम- ठकाईच बड़का, पोस्ट- ठकाईच, थाना- डुमरांव, जिला-बक्सर''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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संशोधित अधिसूचना

14 नवम्बर 2023

सं0 2896--श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम-दीनादास टोला, पोस्ट-सिमराही, अंचलथाना-राघोपुर, अनुमंडल-वीरपुर, जिला-सुपौल, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4640 है।

उक्त मंदिर में 04 बिगहा 14 कट्‌ठा 15 धूर भूमि है। उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन, संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्यक्‌ विकास हेतु अंचलाधिकारी, राधोपुर के प्रतिवेदन पत्रांक-1955-2, दिनांक-02/12/2022 द्वारा प्रस्तावित 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-4030, दिनांक-27/02/2023 द्वारा अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया गया था। इसी बीच अंचलाधिकारी द्वारा पुनः 09 व्यक्तियों का प्रस्ताव अपने प्रतिवेदन पत्रांक-1488-2, दिनांक-12/07/2023 द्वारा प्रेषित किया, जिसपर दोनों पक्षों को नोटिस के माध्यम से पर्षद में दिनांक-02/08/2023 को विस्तार पुर्वक सुना गया। तदोपरांत द्वितीय प्रस्ताव में नामित सदस्यों में से 03 सदस्यों को न्यास समिति में स्थान दिये जाने का प्रस्ताव है। इस संबंध में श्री गणेष कुमार यादव द्वारा लिखित प्रार्थना दिनांक-09/10/2023 द्वारा 1. श्री गणेष कुंमार यादव 2. श्री अषर्फी मंडल एवं 3. श्री सत्यनारायण मेहता को न्यास समिति में स्थान दिये जाने का प्रस्ताव दिया, जिसपर गठित न्यास समिति का कथन है125 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 कि उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा पुर्व में इस न्यास के निजी का दावा करते थे कि इनके पुवर्जों द्वारा दान दिया गया है, परंतु उपस्थित सदस्यों का कथन है कि ऐसा कोई दावा उनके द्वारा नहीं किया गया है और न करेंगे।

अतः उपरोक्त परिस्थिति पर विचारोपरांत पर्षदीय आदेष दिनांक-16/10/2023 के आलोक में पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-4030, दिनांक-27/02/2023 को संषोधित करते हुये उपरोक्त प्रस्तावित 03 सदस्यों को समिति में सम्मिलित करते हुये उक्त अधिसूचना में वर्णित नियमों/शर्त्तों के अनुसार निम्नलिखित न्यास समिति कार्यरत रहेगी। यथा-

1. श्री घनष्याम पाण्डेय, पिता-श्री लक्ष्मी ना0 पाण्डेय अध्यक्ष 2. श्री महेष्वर पाण्डेय, पिता- स्व0 अवधलाल पा0 उपाध्यक्ष 3. श्री बबलु सदा (वार्ड पार्षद) उपाध्यक्ष 4. श्री बिन्देष्वर पाण्डेय, पिता-स्व0 राम प्र0 पाण्डेय सचिव 5. श्री विजय नन्दन पाण्डेय, पिता-स्व0 बहुरी पाण्डेय कोषाध्यक्ष 6. श्री रामफल यादव, पिता-स्व0 मुनेष्वर यादव सदस्य 7. श्री रामेष्वर पाण्डेय, पिता-स्व0 अनन्त लाल पाण्डेय सदस्य सभी का पता-ग्रा॰-दीनादास टोला, पो॰-सिमराही, अं॰था॰-राघोपुर, वीरपुर, जिला-सुपौल।

8. श्री गणेष कुमार यादव पिता-स्व॰ अषर्फी यादव सदस्य पता-ग्रा॰-सिमराही, वार्ड- 01, राघोपुर, जिला-सुपौल।

9. श्री अषर्फी मंडल पिता-स्व॰ मोतीलाल मंडल सदस्य 10. श्री सत्यनारायण मेहता पिता-स्व॰ वासुदेव मेहता सदस्य दोनों का पता-ग्रा॰- धर्मपट्‌टी, वार्ड- 01, राघोपुर, जिला-सुपौल।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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अधिसूचनाएं

24 जनवरी 2024

सं0 3554--श्री राधा सर्वेष्वर निकुंज ठाकुरबाड़ी, ग्राम-गोरपाड़ा, अंचलथाना-नवहट्‌टा, जिला-सहरसा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4491/2019 है।

उक्त न्यास के संबंध में प्रार्थी श्री मणिभूषण झा द्वारा सूचित किया गया कि खाता- 352, खेसरा- 1040, क्षेत्रफल- 07 क॰ 10 धूर भूमि दाता के पुत्री द्वारा पैसा के लालच में बेच दिया गया है, जिसके दाखिल-खारिज रोकने के लिए पर्षद द्वारा भी कई पत्र तथा स्थानीय लोगों द्वारा भी अंचलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया गया। बाबूजद अंचलाधिकारी, नवहट्‌टा द्वारा दिनांक- 08/12/2023 को क्रेता श्री नौसाद के नाम से नामांतरण कर दिया गया है, जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 44 एवं 50 का उल्लंघन है।

संचिका अवलोकन से स्पष्ट है कि पर्षदीय पत्रांक-2650, दिनांक-30/03/2019 द्वारा अंचलाधिकारी, नवहट्‌टा से न्यास की वर्तमान वस्तुस्थिति के संबंध में एक प्रतिवेदन की मांग की गयी थी। श्री मणिभूषण झा द्वारा दिनांक- 18/06/2019 को पर्षद मेें एक प्रार्थना-पत्र दिया गया, जिसमें खाता-352, खेसरा- 1040, रकबा- 07 क॰ 11 धूर भूमि मो॰ नौषाद पिता- स्व॰ याकुब को बिना क्षेत्राधिकार एवं स्वामित्व के अवैध विक्रय कर दिया है, जिससे वहां अषांति का वातावरण बना हुआ है, जिसकी सूचना जिलाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को दी गयी और निवेदन किया गया कि ठाकुरबाड़ी की भूमि का नामांतरण होने से रोका जाय, जिसके आलोक में पर्षद के पत्र दिनांक-09/08/2019 द्वारा जिलाधिकारी, सहरसा को न्यास हित में विधि-सम्मत कार्यवाई करने का कहा गया है।

अंचलाधिकारी, नवहट्‌टा ने अपने प्रतिवेदन पत्रांक-6812, दिनांक-24/07/2019 द्वारा प्रतिवेदित किया कि ठाकुरबाड़ी स्व॰ सिंहेष्वर झा उर्फ सनत कुमार दास पिता-स्व॰ विद्यानंद झा द्वारा स्थापित किया गया था। दिनांक- 15/10/1992 को श्री सिंहेष्वर झा उर्फ सनत कुमार दास ने एक अनिबंधित समर्पणनामा द्वारा अपने सहोदर भाई कपिलेष्वर झा को स्वयं के मरणोपरांत सेवायत नियुक्त करते हुये, अपने खतियान एवं केवाला द्वारा प्राप्त भूमि 03 बी॰ 02 क॰ 11 धूर (खाता- 352, खेसरा- 286, 118, 8682, 1000, 8553, 1040, 869, 871, 867) राधा सर्वेष्वर भगवान के नाम से पूजा-पाठ, राग-भोग इत्यादि हेतु अपर्ण किया।

तत्‌पष्चात कपिलेश्वर झा के मरणोपरांत मो॰ लुखिया पति- कपिलेष्वर झा ने शपथ-पत्र द्वारा जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपने छोटे पुत्र, श्री मणिभूषण झा को सम्पूर्ण उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार किये हैं।

दिनांक- 23/01/2023 को श्री मणिभूषण द्वारा सूचित किया गया कि दिनांक-18/08/2022 को ग्राम पंचायत मुखिया श्री वैद्यनाथ शाह की अध्यक्षता में आम सभा बुलाकर ठाकुरबाड़ी के प्रबंधन हेतु कमिटि का गठन किया गया एवं आग्रह किया कि उसे पर्षद द्वारा मान्यता प्रदान किया जाय। पर्षदीय पत्रांक-991, दिनांक-27/062023 के आलोक में थानाध्यक्ष, नवहट्‌टा का चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त है, जिसमें उल्लेखित है कि प्रस्तावित 07 सदस्यों के विरूद्ध कोई प्रतिकूल टिप्पणी थाना अभिलेख में अंकित नहीं है।

अतः पर्षदीयआदेष दिनांक-27/12/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास अधिनियम की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री126 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 राधा सर्वेष्वर निकुंज ठाकुरबाड़ी, ग्राम- गोरपाड़ा, अंचलथाना- नवहट्‌टा, जिला- सहरसा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधा सर्वेष्वर निकुंज ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्राम- गोरपाड़ा, अंचलथाना- नवहट्‌टा, जिला- सहरसा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधा सर्वेष्वर निकुंज ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्राम- गोरपाड़ा, अंचलथाना- नवहट्‌टा, जिला- सहरसा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के सरकारी कार्यों मेें व्यस्त होने पर उपाध्यक्ष को बैठक आहुत तथा बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार रहेगा, परंतु शर्त्त यह होगी कि बैठक की पुर्व सूचना अध्यक्ष को दी जायेगी एवं बैठक में लिये जाने वाले निर्णय की सूचना भी समय-समय पर अध्यक्ष को लिखित रूप से अवष्य दी जायेगी। 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति पांच वर्षों के लिएगठित की जाती हैः-

1. श्री सत्यनारायण झा पिता- स्व॰ फतुरी झा- अध्यक्ष 2. श्री मणिभूषणझा पिता- स्व॰ कपिलेष्वर झा- सचिव 3. श्री चन्देष्वर चौधरी पिता- स्व॰ लक्ष्मी चौधरी- सह-सचिव127 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 4. श्री राजेष चौधरी पिता- स्व॰ डोमी चौधरी- कोषाध्यक्ष

5. श्री सुनीता कुमारी पति- श्री नरेष कुमार शाह- सदस्य 6. श्री विरवल पासवान पिता- स्व॰ षिवनंदन पासवान- सदस्य 7. श्री जगन्नाथ साह पिता- शीतल शाह- सदस्य सभी निवासी-ग्राम- गोरपाड़ा, अंचलथाना- नवहट्‌टा, जिला- सहरसा। नोटः- (1) न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है। (2) उक्त आदेष के आलोक मेेंराजस्व अभिलेख में ''श्री राधा सर्वेष्वर निकुंज ठाकुरबाड़ी, ग्राम- गोरपाड़ा, अंचलथाना- नवहट्‌टा, जिला- सहरसा''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। (3) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार सेबाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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26 दिसम्बर 2023

सं0 3212--श्री कबीर पंथी मठ, ग्राम- बीड़ी रणपाल, अंचलथाना-उदाकिषुनगंज, जिला-मधेपुरा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-959/66 है।

उक्त मठ की देखभाल कबीर पंथ के साधु, महंतों द्वारा की जाती थी। प्रारंभ में उक्त मठ में 28 बी॰ 16 क॰ 06 धु॰भूमि थी, जिसमें लगभग 09 एकड़ भूमि विद्यालय के लिए दान दी गयी और 05 ए॰ भूमि पर सरकार द्वारा बासगीत पर्चा दिया गया था। अंतिम न्यासधारी के रूप में श्री नागेष्वर दास थे, परन्तु उनके द्वारा अधिनियम की धारा- 59, 60 और 70 का पालन नहीं करने के कारण, अधिनियम की धारा- 28(2) के तहत उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी और अंततः पर्षद के आदेष दिनांक- 25/01/2001 द्वारा उन्हें अपसारित करते हुए धारा- 33 के अन्तर्गत अंचलाधिकारी को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया। तदोपरान्त प्रार्थी श्री सत्यनारायण दास वास्ते महंत नागेष्वर दास द्वारा दिनांक- 24/07/2001 को एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि समय पर बजट, आय-व्यय विवरणी, दाखिल नहीं करने पर क्षमा की मांग करते हुए उल्लेख किया कि मठ में 48 बी0 17 क0 06 धु0 जमीन है, जिसमें से 05 बीघा डैम्प, 05 एकड़ में बस्ती, 11.9 एकड़ कबीर गंगा मध्य विद्यालय को दिया गया है तथा शेष जमीन पर वह शुल्क जमा करने को तैयार हैं और अस्थायी न्यासधारी का आदेष वापस लिया जाये, तदोपरान्त उनके द्वारा शुल्क जमा किये जाने पर अस्थायी न्यासधारी का आदेष वापस लिया गया, परन्तु नियमित रूप से उनके द्वारा उपरोक्त आदेष का पालन नहीं किया जाता रहा।

इसी बीच ग्रामीणों द्वारा यह षिकायत की गयी कि महंत जी के द्वारा वर्ष 2020-21 में लगभग 08 व्यक्तियों को विक्रय-पत्र द्वारा भूमि का विक्रय कर दिया गया है, जिस संबंध में महंतजी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।इस पर उनके द्वारा कथन किया गया कि चाहरदीवारी के निर्माण में राषि व्यय की गयी है, जबकि चाहरदीवारी का निर्माण लगभग 10 वर्ष पूर्व किया गया है, यह स्वीकृत तथ्य है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए उनको पर्षदीय आदेष दिनांक- 04/02/2023 द्वारा न्यासधारी पद से अपसारित कर दिया गया तथा मठ की सुरक्षा हेतु अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी एवं अंचलाधिकारी को पत्र निर्गत किया गया कि समर्पित विक्रय-पत्र अधिनियम की धारा- 44 के अन्तर्गत अवैध और अप्रभावी हैतथा उसके आधार पर किसी प्रकार की कोई दाखिल-खारिज की कार्यवाही नहीं की जाए, जबतक की पर्षद को सनुवाई का अवसर नहीं प्राप्त हो जाता है। इसके आलोक में अंचलाधिकारी के द्वारा अपने पत्रांक- 644, दिनांक- 31/07/2023 द्वारा 07 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्रेषित किया गया। ग्रामीणों द्वारा पर्षद में उपस्थित होकर अंचलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित नामों के संबंध में आपत्ति दाखिल की गयी और कथन किया कि प्रस्तावित नाम में से श्री रमेष यादव असक्षम और मानसिक रोग से पीड़ित हैं, उनके स्थान पर उनके भाई श्री षिवषंकर यादव को रखा जा सकता है तथा तीन अन्य व्यक्तियों क्रमषः श्री साधुसरण यादव, श्री नीरज कुमार एवं श्री हरिनंदन यादव को समिति में स्थान दिया जाये।उपरोक्त तीनों नामों के संबंध में अंचलाधिकारी को पत्र लिख कर उनसे मंतव्य की मांग की गयी, जिस पर अंचलाधिकारी के द्वारा अपने पत्रांक- 991, दिनांक- 14/10/2023 द्वारा पूर्व में भेजे गये नामों में से तीन व्यक्तियों के नामों को विलोपित करते हुए और शेष चार व्यक्तियों को सम्मिलित करते हुए और 05 अन्य नाम उसमें जोड़ते हुए, एक नवीन सूची पर्षद को उपलब्ध करायी गयी। उक्त प्रथम सूची में श्री कैलाष साह के नाम का प्रस्ताव दिया गया था, उसके संबंध में ग्रामीणों का कथन है कि पूर्व अपसारित महंत नागेष्वर दास के नजदीकी हैं और इनका उस मठ से कोई संबंध नहीं रहा है। उपस्थित श्री कैलाष साह द्वारा कथन किया गया कि सदस्यों द्वारा जो साधुषरण के नाम का प्रस्ताव दिया गया है, वह महंत द्वारा विक्रय की गयी भूमि में विक्रय विलेख में साक्षी के रूप में है, इस कारण उनको न्यास समिति में स्थान नहीं दिया जाये।इसी बीच कबीर पंथी मठ, परबत्ता से कुछ साधुओं के नामों की मांग की गयी, जिस पर उक्त मठ के महंत संतषरण दास द्वारा, श्री युधिष्ठिर दास के नाम का प्रस्ताव लिखित रूप दिया गया।128 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 उपरोक्त परिस्थिति में उक्त प्राप्त सभी सूची तथा आरोप-प्रत्यारोप पर विचारोपरान्त मठ के सम्यक्‌ विकास, सुचारू प्रबंधन हेतु योजना का निरूपण किया जाता है और उक्त योजना के कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल का विस्तार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-17/10/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री कबीर पंथी मठ, ग्राम-बीड़ी रणपाल, अंचलथाना- उदाकिषुनगंज, जिला-मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कबीर पंथी मठ न्यास योजना, ग्राम- बीड़ी रणपाल, अंचलथाना- उदाकिषुनगंज, जिला-मधेपुरा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कबीर पंथी मठ न्यास समिति, ग्राम-बीड़ी रणपाल, अंचलथाना- उदाकिषुनगंज, जिला-मधेपुरा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा-11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास/मठ/मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/ न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।129 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक अस्थायी रूप से न्यास समितिगठित की जाती हैः-

1. अंचलाधिकारी, उदाकिषुनगंज, जिला- मधेपुरा- अध्यक्ष 2. श्री हरिनंदन यादव, पिता-स्व0 भूमि यादव- उपाध्यक्ष 3. श्री युधिष्ठिर दास पुजारी सह महंत 4. श्री तारणी मंडल पिता-बानो मंडल सचिव 5. श्री रमेष पासवान पिता-श्री फुचो पासवान कोषाध्यक्ष 6. श्री षिवषंकर यादव पिता-स्व0 सत्यनारायण यादव सदस्य 7. श्रीमति गुड़िया देवी पति-श्री पिंटू कुमार यादव सदस्य 8. श्री छट्ठू ऋषिदेव, पिता-मंगल ऋषिदेव सदस्य 9. श्री शंभु मंडल पिता-राम मंडल सदस्य 10. श्री राकेष यादव पिता-रामचरित्र यादव सदस्य 11. श्री राजकिषोर पासवान, पिता-विन्देष्वरी पासवान सदस्य सभी निवासी-ग्राम- बीड़ी रणपाल, अंचलथाना- उदाकिषुनगंज, जिला- मधेपुरा।

नोटः- 1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है।

2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री कबीर पंथी मठ, ग्राम- बीड़ी रणपाल, अंचलथाना- उदाकिषुनगंज, जिला-मधेपुरा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

3. न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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5 दिसम्बर 2023

सं0 3091--श्री कबीरमठ, ग्राम-अंदौली, पोस्ट-वीणा, अंचलथानाजिला-सुपौल, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-4174/2022 है।

उक्त मठ के महंत श्री गरभू दास ने अपनी 16 बिगहा भूमि, समपर्णनामा दिनांक- 11/09/1989 द्वारा श्री 108 कबीरदास साहब के नाम समर्पित कर दी और अपने स्वर्गवास के उपरांत उक्त मठ के संचालन हेतु महंतों की नियुक्ति के संबंध में भी प्रावधान किया था, जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि प्रार्थी कोई महंत नहीं बना सके, तो पंचायत के मुखिया किसी विरक्त, वैरागी व्यक्ति को महंत नियुक्त करेंगे। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा लिखित कथन किया गया कि लगभग 10 वर्ष पुर्व उक्त महंत का स्वर्गवास हो गया, परंतु उनके द्वारा कोई षिष्य नहीं बनाया गया तथा हाटी कबीर मठ के महंत की अध्यक्षता में लगभग 150 ग्रामीणों की उपस्थिति में एक बैठक दिनांक-16/12/2022 को आयोजित की गयी। बैठक में 21 व्यक्तियोें को उक्त मठ की व्यवस्था हेतु चयन किया गया था। तदोपरांत उक्त समर्पणनामा में दिये गये निर्देष के आलोक में दिनांक-15/07/2022 को पुनः एक बैठक मुखियाजी के निर्देष से की गयी, जिसमें पुर्व चयनित 21 में से 11 सदस्यों का चयन किया गया और वर्तमान मुखिया श्रीमति ज्योति कुमार द्वारा उक्त प्रस्ताव पर अपनी सहमति अपने लिखित पत्र द्वारा दी गयी। प्रस्तावित नामों का चरित्र-सत्यापन हेतु थाना को पत्र प्रेषित किया गया, परंतु प्रतिवेदन अप्राप्त है। प्रस्तावित नामों की एक न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष हेतु गठित किया जाना अत्यावष्यक है, क्योंकि मंदिर की भूमि का अवैध रूप से कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है, जिसकी लिखित षिकायत ग्रामीणों द्वारा की गयी है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-16/10/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री कबीर मठ, ग्राम-अंदौली, पोस्ट-वीणा, अंचलथानाजिला-सुपौल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कबीर मठ न्यास योजना, ग्राम-अंदौली, पोस्ट-वीणा, अंचलथानाजिला-सुपौल'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कबीर मठ न्यास समिति, ग्राम-अंदौली, पोस्ट-वीणा, अंचलथानाजिला-सुपौल'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोल कर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।130 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास/मठ/मंदिर परिसर में रहनेवाले पशुओं (गोवंष/ गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक अस्थायी रूप से एक वर्ष हेतु न्यास समिति गठित की जाती हैः-

1. श्री रविभूषण कुमार पिता-स्व॰ राम किंकर मंडल अध्यक्ष 2. श्री बद्रीनारायण पिता-श्री राजेष्वर मंडल सचिव 3. श्री राम किषोर राय पिता-स्व॰ बौधी राय कोषाध्यक्ष 4. श्री मोहन लाल चौधरी पिता-स्व॰ राम प्रसाद चौधरी सदस्य 5. श्री अजय कुमार साह पिता-स्व॰ बच्चु साह सदस्य 6. श्री रूपेष मंडल पिता-श्री बिंदेष्वरी मंडल सदस्य 7. श्री बबलु मंडल पिता-स्व॰ जागेष्वर मंडल सदस्य 8. श्री सत्यनारायण राय पिता-स्व॰ भेदी राय सदस्य 9. श्री मार्कंडे चौधरी पिता-स्व॰ बिंदेष्वरी चौधरी सदस्य 10. श्री उमाषंकर मंडल पिता-श्री हरिनारायण मंडल सदस्य 11. श्री रविन्द्र मंडल पिता-स्व॰ नागेष्वर मंडल सदस्य सभी ग्रामीण-अंदौली, पो॰-वीणा, भायाथा॰जिला-सुपौल।

नोटः- 1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है।

2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री कबीर मठ, ग्राम-अंदौली, पोस्ट-वीणा, अंचलथानाजिला-सुपौल'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

3. न्याससमिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं131 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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20 दिसम्बर 2023

सं0 3179--श्री श्री 108 लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, लक्ष्मीपुर मोहल्ला, जिला-मधेपुरा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-1890/66 है।

उक्त न्यास के संबंध में श्री अषोक कुमार सिन्हा द्वारा दिनांक- 10/11/2022 को पर्षद में एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि श्री लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी की भूमि खाता- 777, खेसरा- 2163, पुराना खाता- 183, पुराना खेसरा- 4432, जो सड़क मार्ग के पष्चिम में स्थित है, उसे भू-माफियाओं द्वारा अवैध रूप से विक्रय किया जा रहा है, जिस पर जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को उक्त अवैध कार्य पर रोक लगाने हेतु पत्र प्रेषित किया गया तथा दिनांक- 30/01/2023 को पुनः श्री अषोक कुमार सिन्हा द्वारा एक पत्र पर्षद में समर्पित किया गया कि स्वयंभू समिति द्वारा उक्त ठाकुरबाड़ी का प्रबंधन किया जा रहा है। अपने प्रार्थना-पत्र के साथ दिनांक- 04/12/2022 को स्वयंभू न्यास समिति की बैठक की छायाप्रति संलग्न की है, जिसमें चार व्यक्तियों को संरक्षण समिति तथा 15 व्यक्तियों को कार्यकारिणी समिति के रूप में कार्य करने के लिए नामित किया गया है। अपने प्रार्थना-पत्र के साथ उक्त मंदिर के मौजा- तुलसीबाड़ी के खाता- 777, कुल 12 खेसरा की 09 एकड़ भूमि 18 डी॰ भूमि एवं ग्राम- टोला डिगरा में खाता- 1498 में 08 एकड़ 12 डी॰ भूमि जो श्री राम जानकी देव स्थान के नाम से इन्द्राज है, की भूमि के संबंध में नेट के माध्यम से निकाली गयी जमाबंदी की प्रति भी समर्पित की गयी तथा श्री नरेंद्र नारायण सिन्हा, श्री तौफिक आलम एवं श्री अनवर द्वारा एक विक्रय-पत्र जो मनोज कुमार यादव, पिन्टू कुमार यादव के पक्ष में दिनांक- 14/01/2021 को तुलसीबाड़ी, थाना- 61, तौजी- 461 पर जमाबंदी- 54 का खाता- 328 (पुराना) 54 (नया), पुराना खेसरा- 4432 को अतिक्रमण करने के उद्देष्य से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है, जिस पर पर्षद द्वारा स्थगन लगायी गयी। चूंकि अधिनियम की धारा- 33 के अन्तर्गत किसी भी मंदिर की व्यवस्था हेतु अधिकतम ग्यारह व्यक्तियों की न्यास समिति गठित की जा सकती है तथा पुर्व स्वयंभू समिति में से ही दिनांक- 04/12/2022 को बैठक करके 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को दिया गया, जिसका चरित्र-सत्यापन भी संबंधित थाना से दिनांक- 07/08/2023 को प्राप्त हो चुका है तथा अंचलाधिकारी द्वारा भी अपने पत्रांक- 6905, दिनांक- 28/06/2023 द्वारा उक्त बैठक में लिये गये प्रस्तावित नामों पर अपनी सहमति दे दी गयी है।

दिनांक- 17/10/2023 को पर्षद के समक्ष श्री अषोक कुमार सिन्हा, श्री राजन कुमार सिंह द्वारा उपस्थित होकर मंदिर के लगभग 12 फोटोग्राफ समर्पित किये गये, जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि मंदिर का प्रांगण काफी भव्य है। उक्त प्रांगण में कुल 04 मंदिर है तथा भगवान श्री षिवजी का एक गुंबदनुमा मंदिर भी है। मंदिर काफी व्यवस्थित रूप से काफी स्वच्छ है। मंदिर की भूमि पर कुछ जर्जर मकान हैं। श्री सिन्हा के कथनानुसार इसका जीर्णोद्धार करके इसे धर्मषाला का स्वरूप दिया जायेगा। प्रस्तावित नामों के संबंध में किसी प्रकार की कोई आपत्ति किसी अन्य के द्वारा अभी तक पर्षद में नहीं प्राप्त है। पूर्व में महंत स्व॰ रामदेव दास थे, उनका भी स्वर्गवास वर्ष 1977-78 में हो गया है। उसके पश्चात स्थानीय लोगों द्वारा पुजारी के रूप में श्री कमलाकांत झा को नियुक्त किया गया था। उनका भी स्वर्गवास लगभग 15 वर्ष पुर्व हो गया है। इसके उपरांत स्थानीय स्वयंभू समिति द्वारा समय-समय पर मंदिर एवं पूजा-पाठ आदि की व्यवस्था की जाती रही है। उपरोक्त परिस्थिति विचारोपरान्त उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 के लिएकिये जाने का निर्णय लिया गया। समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर समिति के कार्यकाल को विस्तारित किये जाने पर विचार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-17/10/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री श्री 108 लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, लक्ष्मीपुर मोहल्ला, जिला-मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री श्री 108 लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, लक्ष्मीपुर मोहल्ला, जिला-मधेपुरा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री श्री 108 लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, लक्ष्मीपुर मोहल्ला, जिला-मधेपुरा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।132 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 5. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए न्यास समिति गठित की जाती हैः-

1. प्रो॰ विजेन्द्र नारायण यादव पिता-हृदय ना॰ यादव, परसाही मठाही, वार्ड- 15, मधेपुरा- अध्यक्ष 2. श्री राजन कु॰ सिंह पिता-राधा रमण सिंह, लक्ष्मीपुर, वार्ड-16, पो॰था॰जिला-मधेपुरा- उपाध्यक्ष 3. श्री अषोक कु॰ सिन्हा पिता-गौरीषंकर प्रसाद, लक्ष्मीपुर, वार्ड-17, पो॰था॰जिला-मधेपुरा- सचिव 4. श्री दीपक कु॰ उर्फ टिंकु पिता-श्री वीरेंद्र प्र॰, लक्ष्मीपुर, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा- कोषाध्यक्ष 5. श्री रमण कु॰ वर्मा पिता- नारायण प्र॰ वर्मा, लक्ष्मीपुर वार्ड-17, पो॰था॰जिला-मधेपुरा- सदस्य 6. श्री वीरेंद्र पासवान उर्फ सदानंद पासवान पिता-कनिकलल पासवान- सदस्य पता- आजाद टोला, वार्ड- 07, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा। 7. श्री विनोद प्र॰ वर्मा पिता-त्रिभुनंदन प्र॰ वर्मा, गुलजारबाग, वार्ड-20, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा-सदस्य 8. श्री राजीव कुमार पिता-जर्नादन प्र॰ पोद्दार, लक्ष्मीपुर, वार्ड-17, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा- सदस्य 9. श्री मृत्यंजय कुमार पिता-चंद्रदेव प्र॰ सिंह, लक्ष्मीपुर, वार्ड-17, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा- सदस्य 10. श्री दुर्गेष कुमार पिता-सुरेष्वर प्र॰ श्रीवास्तव, लक्ष्मीपुर, वार्ड-17, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा- सदस्य 11. श्री सोनु कु॰ साह पिता-ओम प्रकाष साह, लक्ष्मीपुर, वार्ड-16, पो॰था॰जि॰-मधेपुरा- सदस्य नोटः- 1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है।

2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री श्री 108 लक्ष्मी-नारायण ठाकुरबाड़ी, लक्ष्मीपुर मोहल्ला, जिला-मधेपुरा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।133 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 3. न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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20 दिसम्बर 2023

सं0 3177--श्री कलासन ठाकुरबाड़ी, ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना- चौसा, जिला-मधेपुरा, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित है, जिसकी निबंधन सं0-1850/66 है। उक्त मंदिर में मंदिर सहित लगभग 07 एकड़ 10 डी॰ भूमि है, जिसमें खाता- 1526 में 06 एकड़ 11 डी॰ तथा खाता- 72 में 91 डी॰ भूमि है और लगभग 10 डी॰ में मंदिर अवस्थित है। पुर्व में उक्त मंदिर का प्रबंधन श्री गौरीषंकर जायसवाल द्वारा की जाती थी, परंतु उनके द्वारा कभी किसी प्रकार का कोई पत्राचार, आय-व्यय विवरणी समर्पित नहीं किया गया।

दिनांक- 21/09/2022 को श्री नवल किषोर जायसवाल द्वारा पर्षद में उपस्थित होकर एक प्रार्थना-पत्र समर्पित किया गया कि उनके पिता- गौरीषंकर जायसवाल का स्वर्गवास हो गया है और वर्तमान में वे स्वयं मंदिर का प्रबंधन कर रहे हैं। उन्हें पर्षद में निबंधन की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भविष्य में पर्षद के सभी निर्देषों का अनुपालन तथा मंदिर के विकास में पुर्ण सहयोग करेंगे।

उपरोक्त परिस्थिति में सभी तथ्यों पर विचारोपरांत पर्षदीय आदेष दिनांक- 24/09/2022 द्वारा श्री नवल किषोर जायसवाल को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया।

इसी बीच स्थानीय मुखिया, श्रीमति अलका रानी द्वारा कुछ व्यक्तियों के हस्ताक्षर से दिनांक- 17/07/2023 को पर्षद में एक पत्र समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया कि मंदिर पुर्ण रूप से जीर्ण-षीर्ण अवस्था मेेें है। साथ ही श्री जायसवाल के विरूद्ध मंदिर की भूमि का दुरूपयोग करने का आरोप भी लगाया।

उपरोक्त आरोपों के आलोक में श्री जायसवाल से पृच्छा किये जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि लगभग 14-15 वर्ष पुर्व मंदिर की भूमि लगभग 02 बीघा भूमि पर ईंट-भट्‌टा खोला गया था, जिससे मिट्‌टी खुदाई के कारण वहां गढ़ा हो गया है तथा यह भी आरोप लगाया है कि 51 डी॰ भूमि को 30 वर्षों के लिए लीज पर दिया गया हैै।

उभय पक्षों को सुनने के उपरांत निर्देष दिया गया कि गांव में एक आम सभा का आयोजन करके धार्मिक एवं स्वच्छ चरित्र के व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध करायें, ताकि न्यास समिति गठन किया जा सके।

दिनांक- 17/10/2023 श्री जायसवाल द्वारा पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर दिनांक- 09/08/2023 को आयोजित आम सभा की छायाप्रति समर्पित की गयी, जिसमें लगभग 71 व्यक्तियों की उपस्थिति में 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पास कर न्यास समिति गठित किये जाने हेतु दिया गया है।

उपरोक्त परिस्थिति मेंउपरोक्त प्रस्ताव पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किये जाने का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-17/10/2023 के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए का प्रयोग करते हुए श्री कलासन ठाकुरबाड़ी, ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना- चौसा, जिला-मधेपुरा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कलासन ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना- चौसा, जिला-मधेपुरा'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कलासन ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना- चौसा, जिला-मधेपुरा'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।134 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

17. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है।न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों कीएक अस्थायी रूप से न्यास समितिगठित की जाती हैः-

1. श्री नवल किषोर जायसवाल पिता-स्व॰ सरयुग प्र॰ जायसवाल- अध्यक्ष 2. श्री जयप्रकाष चौधरी पिता- स्व॰ अवध किषोर चौधरी- उपाध्यक्ष 3. श्री विमल कुमार पिता- स्व॰ नन्दलाल भगत- सचिव 4. श्री धर्मचन्द्र भगत पिता-स्व॰ सूर्य नारायण भगत- कोषाध्यक्ष 5. श्री चन्द्रीका प्रसाद जायसवाल पिता- स्व॰ रघुनाथ भगत- सदस्य 6. श्री उदय चन्द्र भगत पिता-स्व॰ दीनदयाल भगत- सदस्य 7. श्री मुकेष कुमार मंडल पिता-स्व॰श्रीलाल मंडल- सदस्य 8. श्री रवि कुमार जायसवाल पिता- स्व॰ जयप्रकाष जायसवाल- सदस्य 9. श्री सुबोध भगत पिता- स्व॰ सहदेव भगत- सदस्य 10. श्री अनिल कुमार जायसवाल पिता- स्व॰ राधा प्रसाद जायसवाल- सदस्य 11. श्री प्रेम चन्द्र भगत पिता- स्व॰ गंगा प्रसाद भगत- सदस्य सभी निवासी-ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना-चौसा, जिला-मधेपुरा।

नोटः- 1. न्यास समिति गठन हेतु उपरोक्त आदेष पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से पारित है।

2. उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री कलासन ठाकुरबाड़ी, ग्राम- कलासन बाजार, पोस्ट- धुरिया कलासन, थाना- चौसा, जिला-मधेपुरा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। 3. न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य, अप्रभावी एवं क्षेत्राधिकार से बाहर होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।135 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

2 मई 2023

सं0 396--श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट, अनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद्‌ के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4643 है। सभी पक्षों को सुनने के पश्चात पर्षद के आदेष दिनांक 25.06.2022 के द्वारा उक्त मंदिर को सार्वजनिक धार्मिक न्यास पाते हुए निबंधित किया जा चुका है। मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे श्री रामविजय चौधरी, श्री रामलला चौधरी पुत्रगण-महानंद चौधरी एवं महानंद चौधरी को भी उनके दावे के संबंध में विस्तापूर्वक दिनांक 01.12.2022 को सुना गया और उनके द्वारा दाखिल दस्तावेज से उनके दावे के संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं पाया गया और न हीं उनके पक्ष में किसी सक्षम प्राधिकार या न्यायालय का कोई निर्णय है। अतः उनके निजी होने के दावे को अस्वीकार किया जा चुका है और मंदिर की सुचारू व्यवस्था हेतु 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अंचल अधिकारी से मांगी गयी थी तथा ग्रामीणों को भी एक आम सभा की बैठक कर नामों का प्रस्ताव देने का निर्देष दिया गया था, जिस संबंध में ग्रामीणों द्वारा एक बैठक दिनांक 08.08.2022 को आयोजित कर 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद के समक्ष दिया गया। प्रस्तावित नामों को दिनांक 27.12.2022 को अंचल अधिकारी के पास उनके मंतव्य हेतु पत्र लिखा गया कि यदि कुछ नामों को हटाना या जोड़ना चाहते हो तो अपना मंतव्य दें, परन्तु अंचल अधिकारी से कोई भी प्रतिवेदन या मंतव्य प्राप्त नहीं हुआ और चूंकि मंदिर की स्थिति दिन-प्रतिदिन क्षीण होती जा रही है और अवैध रूप से कब्जा भी किया जा रहा है।

अतःउक्त मठ, मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक नवीन न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।

उपरोक्त परिस्थति में मैं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट, अनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए विस्तृत आदेष दिनांक-14.03.2023 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट, अगनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट, अनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।

6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्‌टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।

7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद्‌ को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।

8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।136 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी। 14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिया जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428 एवं 429 के तहत्‌ दंडनीय अपराध बनाया गया है।

अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्‌देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद्‌ द्वारा ग्रामीणों के प्रस्ताव पर विचारोपरान्त एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है :-

1. अंचल अधिकारी, गायघाट, मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री षिवचन्द्र राय - उपाध्यक्ष 3. श्री कमलेष प्रसाद सिंह - सचिव 4. श्री राधेष्याम सिंह - कोषाध्यक्ष 5. श्री मोहन राय - सदस्य 6. श्री वृजु साह - सदस्य 7. श्री शषि कुमार मिश्र - सदस्य 8. श्री ब्रह्मदेव बैठा - सदस्य 9. श्री संजय सहनी - सदस्य 10.श्री कृपाल राय - सदस्य 11.श्री कैलाष ठाकुर - सदस्य पता ः-श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट, अनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर।

समिति के सदस्यों का चरित्र सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने पर तथा एक (01) वर्ष के अन्तराल कार्य संतोषजनक पाये जाने पर कार्यकाल की आगे विस्तार किया जाने पर विचार किया जायेगा।

NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मठ, ग्रामपो0-लक्ष्मण नगर, थानाअंचल-गायघाट,अनुमंडल-पूर्वी मुजफ्फरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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26 अप्रील 2023

सं0 285--श्री राम जानकी मठ, ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद्‌ के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4670 है। उक्त न्यास का निबंधन पर्षद के आदेष दिनांक 15.02.2022 ग्रामीणाें द्वारा मंदिर की सुरक्षा हेतु काफी प्रयास करते हुए मंदिर की भूमि से संबंधित दस्तावेज, खाता, खेसरा भूमि का उल्लेख तथा मंदिर का फोटोग्राफ और मंदिर में पर्याप्त व्यवस्था करने हेतु एक आमसभा की बैठक दिनांक 18.07.2022 को करके 11 व्यक्तियों के नामों का चयन भी कर प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया। उक्त प्रस्ताव पर अंचलाधिकारी से उनका मंतव्य तथा यदि कोई नाम जोड़ना या हटाना चाहते हो तो उस संबंध में पत्र दिनांक 21.01.2023 को भेजा गया। जिसके आलोक में अंचलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 722 दिनांक 06.03.2022 द्वारा प्रस्तावित नाम क्रय संख्या 10 गगणदेव के स्थान पर मदन पासवान के नाम का प्रस्ताव किया गया और उक्त नामों का चरित्र सत्यापन भी संबंधित थाना द्वारा दिनांक 28.01.2023 को प्राप्त हो गया है।

संचिका पर उपलब्ध निबंधित समर्पणनामा दिनांक 04.04.1952 की प्रति संलग्न है, जिसमें श्री महंत रामषील दास द्वारा 138 बी0 15 क0 03 धुर 13 धुरकी जमीन रामचन्द्र जी महाराज व जानकी जी महारानी मौजा रामभद्र व रामचौड़ा के नाम समर्पित किया गया है और उक्त समर्पणनामा में ही भूमि का पुर्ण विवरण तथा उल्लेख है कि मनमोकिर सेवायत के रूप में केवल इन्तजाम मंदिर का करते रहेगे और अपने जीवनकाल में ईमानदार लायक चेला मिल गया तो चेला बनाकर उन्हें संचालन का मूर्त्त किया करे। आगे उल्लेख है कि अगर मनमोकिर बिना चेला मुकर्रर किए स्वर्गवास कर जाए तो ऐसे हालत में छोटे गुरूभाई मोसमा भलीराम दास चेला गुरू शुकदेव दास उक्त रामचन्द्र जी महाराज व जानकी जी महारानी का सेवईत137 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 वो मुनतजीम होंगे और इन्तेजाम पूजा-पाठ वगैरह मुन्दरजे हुआ करेगा और यदि सेवायत और मूंतजीमकार मैसुदे का बर्बाद करने व बदचलनी पाया जाए तो ऐसी स्थिति में 12 व्यक्तियों को नामित किया, जिनको अख्तियार होगा कि सेवायत और पुजारी वगैरह के श्री वैष्णव को मुकर्रर करके सेवाटहल किया करें और मेम्बरान को यह अधिकार दिया गया कि कोई पुजारी बदचलन या समर्पणनामा खुदा सम्पत्ति को नुकसान या बर्बाद करते हुए पाए तो उसे हटाकर वीरक्त वैष्णव वारदयान नियुक्त कर सकेंगे।

उपरोक्त सभी न्यासी का स्वर्गवास हो चुका है और उनके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को मेम्बारन के रूप में नियुक्ति संबंधी कार्रवाई नहीें की गयी है।

उक्त दस्तावेज से यह स्पष्ट करता है कि महंत रामषील दास ने मंदिर की व्यवस्था हेतु भलीराम दास को अपने स्वर्गवास के पष्चात देख-भाल करने हेतु सेवायत के रूप में नियुक्त किया था, परन्तु उक्त भलीराम दास द्वारा सर्वे के दौरान समर्पण की गयी सारी सम्पत्ति को अपने नाम जमाबन्दी कायम करा लिया और उनके द्वारा उक्त समर्पणनामा में लिखित शर्तो का उल्लंघन करते हुए मंदिर की भूमि दिनांक 09.02.1968 को रघुनात सिंह वो रामश्रेष्ठ सिंह बल्दान बाबू छबीला सिंह के नाम 13 बी0 08 क0 17 धुर जमीन बिक्रय कर, उस राषि को अपने निजी प्रयोग में लिया गया तथा बहुत से लोगों को अवैध रूप से भूमि बिक्रय किया गया है। उदाहरण स्वरूप 01 बिक्रय-पत्र की प्रति ग्रामीणों द्वारा पर्षद को उपलब्ध करायी गयी और इसी बीच भू-हदबन्दी में भलीराम दास की मृत्यु हो जाने के पश्चात भू-हदबन्दी में उनकी पत्नी राधिका देवी व पुत्र जगरनाथ ठाकुर के नाम से जारी हुआ, जिसमें भू-हदबन्दी में 50 ए0 जमीन 02 यूनिट के रूप में दी गयी तथा शेष में राज्य सरकार के द्वारा अधिग्रहण की गयी। इस संबंध में भू-हदबन्दी आदेष दिनांक 31.01.1987 के द्वारा आदेष पारित कर उसका प्रकाषन दिनांक 21.05.1988 को कराया और लगातार वर्त्तमान में भी अमरनाथ ठाकुर पुत्र भलीराम दास एवं मनोज ठाकुर व सरोज ठाकुर पौत्र भलीराम दास द्वारा अवैध रूप से बिक्रय किया जा रहा है तथा कब्जा दिलाया जा रहा है, जो स्पष्ट करता है कि समर्पणनामा द्वारा नियुक्त सेवायत भलीराम दास द्वारा समर्पणनामा के शर्तो को उनके और उनके पुत्र, पौत्रों द्वारा उललंघन किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में मंदिर की भूमि की सुरक्षा हेतु न्यास समिति बनाया जाना आवष्यक भी है और भूमि पर सभी प्रकार के क्रय-बिक्रय, अस्थायी/स्थायी निर्माण पर पूर्व में रोक पर्षद के आदेष दिनांक 27.08.2022 को लगाया जा चुका है, जो जारी रहेगा तथा अंचलाधिकारी द्वारा भी प्राप्त मंतव्य के आधार पर मठ, मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन व इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है। उपरोक्त परिस्थति में मैं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मठ, ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए विस्तृत आदेष दिनांक-14.03.2023 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मठ, ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजनाहोगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मठ, ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुरन्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।

6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्‌टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।

7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद्‌ को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।

8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ को अनुमोदन के लिए भेजेगी।138 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।

12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।

14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिये जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428 एवं 429 के तहत्‌ दंडनीय अपराध बनाया गया है।

अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्‌देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद्‌ द्वारा एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए किया जाता है, एक वर्ष उपरान्तकार्यकाल संतोषजनक रहने पर न्यास समिति का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार किया जाएगा :-

1. अंचलाधिकारी, मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री अखिलेष्वर शुक्ला सुपुत्र स्व0 राम सिंहासन शुक्ला - कार्यवाहक अध्यक्ष 3. श्री उमेष ठाकुर सुपुत्र स्व0 कमल ठाकुर - उपाध्यक्ष 4. श्री महावीर सिंह सुपुत्र स्व0 सीताराम सिंह - सचिव 5. श्री सौरभ कुमार सुपुत्र मोतिलाल राय - कोषाध्यक्ष 6. श्री मनोज कुमार मिश्रा सुपुत्र राधाकांन्त मिश्र - सदस्य 7. श्री अजय कुमार सुपुत्र स्व0 रामजी सिंह - सदस्य 8. श्री राधामोहन सिंह सुपुत्र सीताराम सिंह - सदस्य 9. श्री संजय कुमार सिंह सुपुत्र स्व0 रामपुकार सिंह - सदस्य 10.श्री मदन पासवान सुपुत्र रामचन्द्र पासवान - सदस्य 11.श्री पंकज कुमार पासवान सुपुत्र राजकुमार पासवान - सदस्य पता :- ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर।

न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि शीघ्र भू-हदबन्दी के पश्चात जो भूमि उक्त सेवायत की पत्नी, पुत्र को प्राप्त हुई है, उसकी सूची पर्षद में अंचलाधिकारी के यहाँ से प्राप्त कर दाखिल करेंगे, जिससे उक्त भूमि पर समर्पणनामा के आलोक में श्री रामचन्द्र जी महारााज एवं जानकी जी महारानी के नाम से दर्ज करने संबंधी प्रक्रिया की जा सके तथा न्यास समिति शीघ्र बैंक खाता खोलेगी और जितनी भी भूमि मंदिर के नाम से है, उन सभी की बन्दोबस्ती करने का एक मात्र अधिकार न्यास समिति को होगा। यदि किसी भी व्यक्ति को जो भलीराम के वंषज है, वो पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बातों को रखने के लिए स्वतंत्र है।

NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मठ, ग्राम-बोरबारा, पोस्ट-भटौना, थाना-करजा, अंचल-मड़वन, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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2 मई 2023

सं0 398--हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुर पर्षद्‌ में सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में लगभग 60 वर्ष पूर्व से निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या-200 है। उक्त मठ में लगभग 50 बीघा से अधिक भूमि थी और पूर्व में इसकी देखभाल महंत कृष्ण देवदास द्वारा की जाती रही, परन्तु उनके द्वारा139 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 भी किसी प्रकार की आय-व्यय विवरणी बजट आदि दाखिल नहीं की जाती थी। वर्ष 1992 में मठ की मरम्मती के नाम पर भूमि बेचने हेतु एक प्रार्थना-पत्र उनके द्वारा दिया गया।

इसी बीच वर्ष 1997 में राधेष्याम दास द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया कि उक्त महंत कृष्ण देवदास का स्वर्गवास हो गया है और साधु-संतो ने प्रार्थी को चादर, पगड़ी आदि देकर के न्यासधारी बनाया है। अतः उनको पर्षद के आदेष दिनांक 20.12.1997 द्वारा अस्थायी न्यासधारी बनाया गया, परन्तु उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई आय-व्यय विवरणी, बजट आदि नहीं दाखिल किया गया और ग्रामीणों द्वारा षिकायत की गयी कि मंदिर की भूमि का पूर्ण रूप से दोहन और निजी प्रयोग में उपयोग किया जा रहा है, अतः एक न्यास समिति बनायी जाये, जिस पर राधेष्याम दास से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु उनके द्वारा कोई प्रति-उत्तर नहीं देने पर उनको दिनांक 03.10.2002 को अस्थायी न्यासधारी पद से अपसारित कर दिया गया और अंचल अधिकारी को धारा-33 के अन्तर्गत अस्थायी न्यासधारी बनाया गया। अवसारित किये जाने के बाद भी उक्त राधेष्याम दास मठ में हीं थें और वहां रहकर के पुनः भूमि का अवैध रूप से स्थानान्तरण कर रहे थें, जिस संबंध में ग्रामीणों द्वारा पर्षद में वर्ष 2006-07 में उनके विरूद्ध आरोप लगाते हुए 13 सदस्यीय न्यास समिति का प्रस्ताव भेजा गया। उक्त तथ्यों पर विचार करते हुए पर्षद द्वारा दिनांक03.08.2009 को न्यास समिति का गठन कर दिया गया, परन्तु गठित न्यास समिति द्वारा भी आपस में मठ की भूमि का दुरूपयोग निजी लाभ में लेने, बंदरबांट करने के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। पुनः वर्ष 2020 में ग्रामीणों द्वारा आरोप लगाया गया कि मठ में रह रहे राध्ेाष्याम दास द्वारा बिना किसी अधिकार के मंदिर की भूमि का दुरूपयोग किया जा रहा है और पूर्व न्यास समिति के कार्य भी पूर्ण रूप से संतोषजनक नहीं थें, अतः दिनांक 08.01.2020 को पूर्व न्यास समिति को भंग करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में श्री सुरज पासवान को सचिव नियुक्ति करते हुए 01 वर्ष के लिए अस्थायी दो सदस्यी समिति बनायी गयी, जिसमें राधेष्याम दास को पुजा-पाठ, राग-भोग आदि करने के लिए अधिकृत किया गया, परन्तु पुनः राधेष्याम के विरूद्ध यह आरोप लगाया गया कि 37 व्यक्तियों को मंदिर की भूमि खाता सं0-17, 21 पर पैसे लेकर अतिक्रमण करा दिया गया है, जिस संबंध में पुजारी राधेष्याम दास से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, उनके द्वारा दाखिल स्पष्टीकरण में उनके उपर लगे आरोपों को अस्वीकार किया, परन्तु किन व्यक्तियों को जमीन उनके द्वारा दी गयी है और क्या राषि ली गयी है, इस संबंध में कुछ भी कथन नहीं किया गया है और चुंकि पूर्व न्यास समिति भंग की जा चुकी थी। अनुमंडल पदाधिकारी भी जिसमें अस्थायी न्यासधारी बनाये गये थे, सुचारू रूप से व्यवस्था करने में सफल नहीं हो पा रहे थें और मठ में रह रहे राधेष्याम दास द्वारा भी ग्रामीणों के विरूद्ध आरोप-प्रत्यारोप लगाये जाते रहे। अत एक नयी न्यास समिति बनाये जाने हेतु अनुमंडल पदाधिकारी से नामों का प्रस्ताव की मांग की गयी थी, जो अनुमंडल पदाधिकारी के पत्र दिनांक 03.12.2020 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्तााव पर्षद को उपलब्ध कराया, जिसका चरित्र सत्यापन रिपोर्ट दिनांक 18.09.2021 को प्राप्त हुआ, जिसमें राधेष्याम दास, पुजारी के विरूद्ध धारा 302 के अन्तर्गत मुकदमा विचाराधीन की बात प्रकाष में लायी गयी, जिसका थाना कांड सं0-8/2005 है, चुंकि राधेष्याम दास के विरूद्ध आपराधिक कांड होने का उल्लेख किया गया है लिहाजा उनका नाम न्यास समिति में नहीं रखा गया है, परन्तु उक्त मठ में केवल पूजा-पाठ, राग-भोग आदि का कार्य राधेष्याम दास द्वारा किया जा सकता है, जब तक कि उपरोक्त आपराधिक मुकदमें के संबंध में निर्णय यदि हो गया हो तो विचार उपरान्त असपर निर्णय लिया जायेगा।

अतःउक्त मठ, मंदिर/न्यास के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाना आवष्यक है।

उपरोक्त परिस्थति में मैं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुरकी सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु एक योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए विस्तृत आदेष दिनांक-13.03.2023 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।140 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्‌टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।

7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद्‌ को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष/उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।

8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।

12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।

14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428 एवं 429 के तहत्‌ दंडनीय अपराध बनाया गया है।

अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/ भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्‌देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद्‌ द्वारा एक योजना का निरूपण करते हुए निम्न न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए की जाता है :-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, पष्चिम, मुजफ्फरपुर - पदेन अध्यक्ष 2. डॉ0 विजय सिंह पिता स्व0 रामचन्द्र सिंह - उपाध्यक्ष 3. श्री विषंभर नाथ तिवारी पिता कैलाष तिवारी - सचिव 4. श्री अरूण साह पिता स्व0 हरदेव साह - कोषाध्यक्ष 5. श्री षिवजी चौधरी पिता स्व0 रामजन्म चौधरी - सदस्य 6. श्री राजनन्दन बैठा पिता रामाषिष बैठा - सदस्य 7. श्री श्री उमेष चौधरी पिता स्व0 प्रहलाद चौधरी - सदस्य 8. श्री कोदई भगत पिता स्व0 नारायण भगत - सदस्य 9. श्री परमेष्वर पासवान पिता स्व0 प्रकाउ पासवान - सदस्य 10.श्री दिनेष दास पिता नवाब दास - सदस्य 11.श्री उमाषंकर पटेल पिता जमुना पटेल - सदस्य पता :- हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुर। न्यास समिति को मंदिर की सभी भूमि पर खुली डाक के द्वारा बंदोबस्ती करने के लिए अधिकृत किया जाता है और जिन व्यक्तियों के द्वारा मंदिर की भूमि पर पूर्व में बंदोबस्ती ली गयी है और बंदोबस्ती की राषि का भुगतान नहीं किया जाता है उन सभी भूमि की नये सिरे से बंदोबस्ती करायी जाये।

NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (हठिलवा मठ, ग्राम-हठिलवा, पो0-कमलापुर, थाना-बरूराज, अंचल-मोतिपुर, जिला-मुजफ्फरपुर) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।141 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

28 दिसम्बर 2023

सं0 3239--मुजफ्फरपुर नगर सरैयागंज मुहल्ला स्थित सेवा संघ न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 3992 है। इस न्यास की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण, सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक 2010, दिनांक 07.10.2016 द्वारा एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए निम्नांकित व्यक्तियों की एक न्यास समिति का गठन पाँच वर्षो के लिए किया गया था, जिसके कार्यकाल समाप्ति उपरान्त पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक 3340, दिनांक 28.12.2022 द्वारा एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।

1. श्री सरेश चन्द्र पाण्डेय (अ0 प्रा0 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीष) - अध्यक्ष, 2. श्री सच्चिदानन्द प्रसाद, पुत्र स्व0 चर्तुभुज साह, -उपाध्यक्ष, 3. श्री दिलीप जालान, पुत्र स्व0 पशुपति जालान -सचिव, 4. श्री रेवती प्रसाद गोयनका, पुत्र स्व0 नन्दलाल गोयनका -कोषाध्यक्ष, 5. श्री राजेन्द्र पटेल, पुत्र स्व0 भगवान सिंह -सदस्य, 6. प्रो0 मनोज सिंह, पुत्र स्व0 षिवपूजन सिंह -सदस्य, 7. डॉ के0 सी0 सिन्हा, पुत्र डॉ0 जे0 के0 सिंह -सदस्य, 8. श्री गोनौर महतो, पुत्र स्व0 धनाई महतो -सदस्य, 9. श्री पंचम राय, पुत्र स्व0 विष्वनाथ राय -सदस्य, 10. श्री अषेष्वर राय, पुत्र स्व0 रामअवतार राय, -सदस्य, 11. श्री अनील कुमार महतो, पुत्र श्री विष्वनाथ महतो -सदस्य, न्यास समिति द्वारा मंदिर और मंदिर की भूमि की व्यवस्था हेतु सुचारू रूप से कार्य किया जा रहा है तथा न्यास के विकास हेतु आवष्यक कार्रवाई की जा रही है, जो संतोषजनक प्रतीत होता है।

अतः पर्षद के विस्तृत आदेष दिनांक 20.12.2023 के आलोक में न्यास समिति का कार्यकाल दिनांक 28.12.2023 से अगले दो वर्ष (दिनांक 27.12.2025) के लिए बढ़ाया जाता है। न्यास समिति अधिसूचना ज्ञापांक 2010, दिनांक 07.10.2016 में वर्णित शर्तो का पालन करेगी। साथ हीं न्यास समिति के सदस्य डॉ0 के0 सी0 सिन्हा जो न्यास समिति के बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं और एक अन्य सदस्य गोनौर महतो के निधन हो जाने के कारण दोनों व्यक्तियों के स्थान पर क्रमषः श्री प्रदीप कुमार केजरीवाल एवं श्री राजकुमार पासवान को सदस्य के रूप में मनोनित किया जाता है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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2 मई 2023

सं0 394--श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ी, जिसकी निबंधन संख्या-4426 है। उक्त न्यास में 12 ए0 भूमि है, जिसमें पर्षद को जानकारी प्राप्त हुयी है कि 1.16 जमीन पूर्व न्यासधारी द्वारा अवैध रूप से बिना पर्षद की अनुमति के बिक्रय कर दिया गया है और लगभग 01 बी0 जमीन पर अतिक्रमण है। श्री रामलखन द्वारा पर्षद के निबंधन आदेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-13210/15 दाखिल की गयी थी, जो दिनांक 22.04.2019 को निरस्त कर दी गयी। याची राम लखन शरण को निर्देष दिया गया कि पर्षद के समक्ष उपस्थित होकर दावे के संबंध में पक्ष रखें।

उपरोक्त आदेष के आलोक में दिनांक 15.09.2019 से रामलखन शरण को लगातार अपने दावे के संबंध में कागजात दाखिल करने, स्पष्टीकरण तथा अपना पक्ष रखने के लिए लगभग 08 तिथियों से अवसर दिया जा रहा है और वह दिनांक 17.10.2020 एवं दिनांक 05.01.2021 को उपस्थित भी हुए, परन्तु उनके द्वारा अपने दावे के संबंध में किसी प्रकार का कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया और उन्हें दिनांक 05.01.2021 को अन्तिम अवसर भी दिया गया था तथा अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन हेतु नामों का प्रस्ताव भी मांगा गया। ग्रामीणों द्वारा समिति गठन किये जाने हेतु दिनांक 08.11.2020 को आमसभा करके दिनांक 05.01.2021 को आमसभा की प्रति दाखिल की गयी।

इसी बीच ग्रामीणों द्वारा षिकायत की गयी कि निजी का दावा करने वाले पक्ष द्वारा भूमि का बिक्रय किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। अतः पर्षद के आदेष दिनांक 23.03.2021 द्वारा मंदिर की भूमि पर सभी प्रकार के क्रय-बिक्रय, स्थायी या अस्थायी निर्माण, बंधक आदि पर रोक लगा दी गयी है तथा सुनवाई हेतु दिनांक 05.12.2022 निर्धारित की गयी। परन्तु वह उक्त तिथि पर भी उपस्थित नहीं थे। संजीव कुमार वर्मा निजी का दावा किया जा रहा है, उनके तरफ से उनके अधिवक्ता शमा सिन्हा द्वारा कुछ कागजात दाखिल कर दावा किया जा रहा है, परन्तु सुनवायी की निर्धारित तिथि 05.12.2022 को संजीव कुमार वर्मा उपस्थित नहीं थे, निबंधित डाक पत्रांक 3723, दिनांक 30.01.2023 द्वारा आज की तिथि निर्धारित करते हुए सूचना दी गयी, परन्तु वह आज भी उपस्थित नहीं है और ग्रामीणों की तरफ से उपस्थित रामसकल साह एवं उनके अधिवक्ता का कथन है कि वर्ष 2020 से ग्रामीणों की समिति बनाकर मंदिर का संचालन किया जा रहा है।

उपरोक्त परिस्थितियों में यह आवष्यक है कि मंदिर और मंदिर की भूमि की सुरक्षा, राग-भोग, पूजा-पाठ हेतु अस्थायी रूप से न्यास समिति का गठन किया जाय।142 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए आदेष दिनांक-16.03.2023 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ीन्यास योजनाहोगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।

6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्‌टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।

7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद्‌ को प्रेषित की जायेगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगें।

8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।

12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।

14. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 428 के तहत्‌ दंडनीय अपराध बनाया गया है।

अतः न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्‌देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जायेगा।

अतः मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुए ग्रामीणों की आमसभा दिनांक 08.11.2020 जिसमें लगभग 200 से अधिक ग्रामीण उपस्थित थे और उनके द्वारा जिन नामों का प्रस्ताव दिया गया है, उसे अस्थायी रूप से न्यास समिति का गठन 01 वर्ष के लिए किया जाता है, जो निम्न है :-

1. श्री रामसकल साह पिता स्व0 महेष साह - अध्यक्ष 2. श्री लक्ष्मी राय पिता स्व0 सोनफी राय - उपाध्यक्ष 3. श्री सुनील ठाकुर पिता श्री निर्मल ठाकुर - सचिव143 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 4. श्री रामबाबू चौधरी पिता स्व0 रामदेव चौधरी - उप-सचिव

5. श्री लालबाबू साह पिता श्री जनक साह - कोषाध्यक्ष 6. श्री बैद्यनाथ महतो पिता स्व0 रामाश्रय महतो - सदस्य 7. श्री महेष भगत पिता स्व0 सुखा राउत - सदस्य 8. श्री मोहित सहनी पिता स्व0 डोमा सहनी - सदस्य 9. श्री रामवृक्ष पटेल पिता स्व0 सटहू महतो - सदस्य 10.श्री योगेन्द्र साह पिता स्व0 रामलखन साह - सदस्य 11.श्री संजय साह पिता श्री दीपलाल साह - सदस्य पता :-श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ी।

NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम (श्री राम जानकी मंदिर, ग्रामपो0-कंसार, थाना-बेलसण्ड, जिला-सीतामढ़ी) पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।

भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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20 जून 2024

सं0 819--कुरनिया माता का मंदिर, ग्रामपोस्टथाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण जो पर्षद के अनतर्गत सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या-4781 है।

इस मंदिर के संबंध में अंचल अधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि मंदिर बेतिया राज एवं बिहार सरकार की भूमि पर है। जिसपर किसी की जमाबंदी नहीं चलती है। इसलिए इसका निबंधन पर्षद में किया गया और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से आमसभा दिनांक 03.12.2020 को की गयी, जिसमें ग्यारह सदस्यीय स्वयं-भू न्यास समिति का गठन किया गया है। इस मंदिर के संचालन कर रही स्वयं-भू न्यास समिति को अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी द्वारा जलुस निकालने हेतु अनुमति तथा मेला आयोजन हेतु अनुमति समय-समय पर दी जाती रही है, इस संबंध में दस्तावेज भी दाखिल किया गया तथा मूर्ति विसर्जन आदि के संंबंध में स्पष्ट निर्देष जारी किया गया है, जो स्पष्ट करता है कि स्वयं-भू न्यास समिति द्वारा हीं पिछले अनेक वर्षो से उक्त मदिर की देख-भाल व्यवस्था आदि की जा रही है तथा मंदिर के संबंध में दाखिल नक्सा, मंदिर का फोटो आदि से स्पष्ट होता है कि मंदिर काफी विषाल रूप में है, जो पूर्ण रूप से व्यवस्थित और सुसज्जीत है। इसमें आम जनता का पूजा-पाठ करने का बिना किसी अवरोध के अधिकार है, इसमें दान-पेटी भी लगी हुई है और साप्ताहिक शुक्रवार और सोमवार को मेला लगता है, जिसमें काफी राषि चन्दे के रूप में प्राप्त होता है और स्वयं-भू समिति द्वारा ही उक्त चन्दे/दान, चढ़ावा आदि से मंदिर को काफी व्यवस्थित रूप में बनाकर रखा गया है। अतः उपरोक्त परिस्थति में मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए कुरनिया माता का मंदिर, ग्रामपोस्टथाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण करते हुए तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए विस्तृत आदेष दिनांक-18.03.2024 के आलोक में न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कुरनिया माता का मंदिर, ग्रामपोस्टथाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''कुरनिया माता का मंदिर, ग्रामपोस्टथाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।

3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष या सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।

4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चत करेंगे तथा वार्षिक आय का विवरण बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।

6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय तथा पट्‌टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा।

7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद्‌ को प्रेषित की जायेगी।144 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।

10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।

12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होगें तो उनकी अर्हता के संबंध में उनका पक्ष सुनकर पर्षद फैसला लेगी।

13. न्यास समिति द्वारा किसी प्रकार कोई आयोजन किया जाता है तो जिसमें 05 लाख से अधिक की राषि खर्च का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति लेना आवष्यक होगा। इसी प्रकार यदि मंदिर के विकास या संरचना के मद में 10 लाख रूपये अधिक की राषि खर्च होने का अनुमान हो तो उसका अनुमानित खर्च विवरणी प्रस्तुत कर पूर्व अनुमति पर्षद से लेना आवष्यक है और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अन्दर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जाएगी।

14. न्यास समिति द्वारा किसी भी प्रकार का किराया/बन्दोबस्ती आदि तीन वर्ष से अधिक नहीं दिय जाएगा। 15. पशुओं के होने वाले बध और उनके प्रति होने वाली क्रुरता पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 (पी0सी0ए0) की धारा-11 भारतीय दंड संहिता (आई0पी0सी0) की धारा-428, 429 के तहत्‌ दंडनीय अपराध बनाया गया है।

न्यास/मठ/मंदिर में रहने वाल पशुओं (गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/एैसा कोई कार्य प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षताः करना जिसका उद्‌देष्य ''पशु का बध) होता हाें या उक्त कार्याे को बढ़ावा मिलता हों, एैसा कोई कार्य न्यासधारी/सेवैत/महंत/न्यास समिति के सदस्य द्वारा नहीं किया जाये।

पर्षद द्वारा 01 वर्ष के लिए निम्न न्यास समिति का गठन किया जाता है, न्यास समिति निम्न प्रकार है :- 1. श्री विनय प्रसाद यादव, पुत्र-स्व0 जईलाल प्रसाद यादव, ग्राम-भसेड्‌वा, पोस्ट-खुरहिया, थाना -घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चंपारण - अध्यक्ष

2. श्री निर्भय राज, पुत्र-श्री रवि नारायण प्रसाद यादव, ग्रामपोस्ट-कदमवा (यादव टोला), थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सचिव

3. श्री कामेष्वर गीरी, पुत्र-स्व0 विधार्थी गीरी, ग्रामपोस्ट-महदेवा, थाना-धोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - कोषाध्यक्ष

4. श्री धर्मनाथ राय, पुत्र-श्री मीठू राय, ग्रामपोस्ट-कदमवा (यादव टोला), थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

5. श्री विनय कुमार उर्फ राम विनय यादव, पुत्र-श्री षिवमंगल राय, ग्रामपोस्ट-जगीरहा, थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

6. श्री संजय सिंह, पुत्र-स्व0 बालक सिंह, ग्राम-जगीरहा कोठी, पोस्ट-पुरनहिया, थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

7. श्री उपेन्द्र सिंह, पुत्र-स्व0 राजेन्द्र सिंह, ग्रामपोस्ट-पुरनहिया, थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण, - सदस्य

8. श्री राजदेव राय, पुत्र-स्व0 षिवनाथ राय, ग्रामपोस्ट-कदमवा (गुमस्ता टोला), थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

9. श्री उपेन्द्र राय, पुत्र-श्री गोरख राय, ग्रामपोस्ट-कदमवा (यादव टोला), थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

10. श्री भरत साह, पुत्र-श्री उधो साह, ग्रामपोस्ट-लक्ष्मीपुर लौखान, थाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण - सदस्य

11. श्री रोहित कुमार, पुत्र-श्री विनय प्रसाद यादव, ग्राम-भसेड्‌वा, पोस्ट-खुरहिया, थाना -घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चंपारण - सदस्य

NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम ''कुरनिया माता का मंदिर, ग्रामपोस्टथाना-घोड़ासहन, जिला-पूर्वी चम्पारण'' पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।

NOTE:-यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मती से अनुमोदित है।

भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।145 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025

29 जून 2024

सं0 957--आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ फतुहां, दरियापुर, जिला-पटना बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-307है।

आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ, फतुहां कबीर पंथ की मुख्य शाखाओं में से एक है। कबीर पंथ के इतिहासकारों के अनुसार कबीर साहब के निर्वाण के पश्चात तत्वा और जीवा नामक संत के षिष्य, संत श्री गणेष दास द्वारा फतुहां कबीर पंथी मठ की स्थापना की गयी थी। डॉ॰ डेविड लॉरेन्सन ने अपनी पुस्तक ''Branches of Kabir Pant'' में कबीर पंथी मठ, फतुहां का उल्लेख किया है। इस न्यास की भूमि को लेकर तीन महंतों की हत्या हो चुकी है। न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षद द्वारा पारित आदेष दिनांक- 23/09/2019 दिनांक- 21/04/2022 के विरूद्ध मा॰ उच्च न्यायालय में CWJC No.- 24051/2019 एवं CWJC No.- 9415/2022 दाखिल किया गया, जिसे सुनवायी के उपरांत माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेष दिनांक- 07/08/2023 द्वारा पर्षद के उपरोक्त आदेष को निरस्त करते हुये यह निर्देष दिया कि जिलाधिकारी, पटना एवं अनुमंडल पदाधिकारी, पटना स्थानीय समाचार पत्र में आम सूचना द्वारा सम्मानित एवं महत्वपुर्ण नागरिकों के नाम का प्रस्ताव प्राप्त कर, जिनका कोई अपराधिक इतिहास न हो, एक नियमित न्यास समिति का गठन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किया जाय और किसी ऐसे व्यक्ति को भी जिनके विरूद्ध मठ की सम्पत्ति, वित्तीय अनियमितताओं का आरोप हो, न रखा जाय। उपरोक्त समिति बोर्ड के सदस्यों द्वारा सम्पुष्ट हो, प्रकाषित की जाय।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेष के आलोक में जिलाधिकारी को पर्षदीय पत्रांक- 1887, दिनांक- 22/08/2023, दिनांक- 2142, दिनांक- 12/09/2023, दिनांक- 3850, दिनांक- 21/02/2024, पत्रांक- 26, दिनांक- 03/04/2024 को निबंधित डाक द्वारा भेजा गया। इसी प्रकार अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी को पत्रांक- दिनांक- 2143, दिनांक- 12/09/2023, पत्रांक- 3849, दिनांक- 21/02/2024, पत्रांक- 27, दिनांक- 03/04/2024 भेजा गया।

पर्षद के उपरोक्त पत्र के आलोक में उप विकास आयुक्त, पटना का पत्रांक- 792, दिनांक- 10/04/2024 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी का पत्रांक- 716, दिनांक- 30/09/2024 जो प्रभारी वरीय उप समाहर्त्ता को तथा पत्रांक- 230, दिनांक- 12/03/2024 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी ने जिलाधिकारी को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देष के आलोक में प्रक्रिया का पालन करते हुये 44 व्यक्तियों की सूची उपलब्ध करायी गयी, जिसमें क्रम सं॰- 1, 39, 41, 42, 44 के विरूद्ध विभिन्न धाराओं में विचाराधीन होने का उल्लेख किया है। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्राप्त सूची में से उक्त 06 व्यक्ति, जिनके विरूद्ध अपराधिक विचारण संबंधी प्रतिवेदन दी है, उन्हेें छोड़कर शेष व्यक्तियों के नामों पर विभिन्न स्रोतोें से जानकारी प्राप्त कर उक्त मठ की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये अधिनियम की धारा- 32 के तहत स्थायी न्यास समिति का गठन किया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक- 21/04/2022 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ, फतुहां, दरियापुर, जिला-पटना की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ न्यास योजना, फतुहां, दरियापुर, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ न्यास समिति, फतुहां, दरियापुर, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन तीन सदस्यों (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा, जिसमें एक सदस्य के रूप में कोषाध्यक्ष रहेंगे तथा अध्यक्ष या सचिव में से कोई एक सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किसी भी राषि की निकाषी की जा सकेगी।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिरकी गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।146 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण प्रतिवर्ष करेगी। 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में अध्यक्ष के सभी दायित्व का निर्वहन कार्यकारी अध्यक्ष सम्पादित करेगें।

14. न्यास में अवस्थित सभी दुकानों, किरायेदारों तथा शाखा मठ, विद्यालय का किराया/आय की संग्रह का दायित्व सचिव एवं सह-सचिवों का होगा। ये न्यास की आय को संकलन कर कोषाध्यक्ष को हस्तगत करायेगें तथा कोषाध्यक्ष उपरोक्त राषि को न्यास के खाते में जमा करेगें। इस कार्य में पुरी पारदर्षिता स्थापित की जायेगी। 15. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. गोवंश एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1980 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा-428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास/मठ/मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंश/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देश्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी/सेवायत/महंत/न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति 05 (पांच) वर्ष के लिए गठित की जाती हैः-

1. जिलाधिकारी, पटना -पदेन अध्यक्ष 2. श्री बिहारी दास चेला-गुरु सहाय -उपाध्यक्ष पता-कबीर आश्रम, बखरी बाजार, तहसील-बखरी, जिला-बेगुसराय-848201 3. श्री बाल्मीकि सिंह पिता- श्री देव नारायण सिंह - सचिव पता- पटेल नगर, फतुहां, जिला- पटना। 4. श्री विनोद कुमार पिता- श्री रामचन्द्र प्रसाद यादव -कोषाध्यक्ष पता-रायपुरा, फतुहां, जिला- पटना। 5. श्री षिवानंद दास चेला महंत रामनरेष दास -सदस्य पता-कबीर मठ, फतुहां, जिला- पटना। 6. श्रीमति शारदा देवी पति-श्री हदय नारायण झा -सदस्य पता-कबीर मठ, फतुहां, जिला- पटना। 7. श्री दयानंद प्रसाद सिंह पिता- श्री रामाषिष सिंह - सदस्य मिर्जापुर नोह्‌टा, फतुहां, जिला- पटना। 8. श्री नेमन सिंह पिता- श्री मुन्नी लाल सिंह - सदस्य नोहटा, फतुहां, जिला- पटना। 9. थानाध्यक्ष, फतुहां, जिला- पटना - सदस्य

उक्त न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना प्रकाषन की तिथि से 05 (पांच) वर्ष तक होगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें ''आचार्य गद्दी कबीरपंथी मठ, फतुहां, दरियापुर, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।147 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 नोटः- न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन / विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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3 जुलाई 2024

सं0 1028--श्री शंकर भगवान मंदिर,ग्रामपोस्ट-अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला-गया,बिहार हिन्दू धार्मिक

(cid:2872)(cid:2875)(cid:2875)(cid:2871) न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0- है।

(cid:2870)(cid:2868)(cid:2870)(cid:2871) उक्त न्यास के संबंध में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा एक प्रार्थना-पत्र एवं क्रमिक खतियान, थाना- 94, खाता- 343, खेसरा- 152, रकबा- 0.24 एकड़ भूमि, जो शंकर भगवान सेवायत राम दास के नाम से राजस्व अभिलेख में इन्द्राज है। उपरोक्त भूमि के संबंध में पर्षद को आरोप प्राप्त हुआ कि एक रामचन्द्र पासवान द्वारा दिनांक- 23/10/1990 को खेसरा- 153, 152, खाता- 459 एवं 343 की भूमि को अपने नाम से ही रामचन्द्र बालिका उच्च विद्यालय के नाम दान किया। पुनः उसी भूमि में से कुछ अंष को दिनांक- 09/04/2012 को खाता- 343, खेसरा- 152, कुल रकबा- 01.24 डी॰ में 40 डीसमिल भूमि का विक्रय अवैध रूप से बिना किसी अधिकार के आदित्य कुमार के पक्ष मे ंकर दिया और उक्त भूमि पर पुनः विक्रय एवं निर्माण करना चाहते हैं।

भूमि की सुरक्षा हेतु न्यास समिति गठित किये जाने के संबंध में ग्रामीणों द्वारा दिनांक- 26/07/2023 को एक बैठक कर पांच नामों का प्रस्ताव पर्षद को उपलब्ध कराया गया, जिसके चरित्र-सत्यापन हेतु संबंधित थाना को पत्र दिया गया। उक्त अवैध विक्रय के आधार पर नामांतरण के प्रार्थना-पत्र की जांचोपरांत अंचलाधिकारी द्वारा खारिज किया जा चुका है। रामचन्द्र पासवान एवं क्रेता को भी अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु नोटिस निर्गत किया गया, परंतु उनके द्वारा कोई कथन आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया।

उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित नाम एवं प्रार्थना-पत्र पर विचारोपरांत एक योजना का निरूपण करते हुये इसके कार्यान्वयन हेतु अधिनियम की धारा- 32, 83 एवं उपविधि की धारा- 43 के तहत प्रस्तावित 07 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-18/04/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 मेंएवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री शंकर भगवान मंदिर, ग्रामपोस्ट- अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला- गयाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री शंकर भगवान मंदिर न्यास योजना, ग्रामपोस्ट- अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला- गया''होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री शंकर भगवान मंदिर न्यास समिति, ग्रामपोस्ट- अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला-गया'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।148 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे। 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रुप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है-

1. अंचलाधिकारी, खिजरसराय, जिला- गया - अध्यक्ष 2. श्री युगल यादव पिता- स्व॰ रामस्वरूप यादवलक पदाधिकारी) - उपाध्यक्ष 3. श्री रविषंकर कुमार - सचिव 4. श्री षिवजी पंडित पिता- स्व॰ रामकिषुन प्रजापत - कोषाध्यक्ष 5. श्री मुसाफिर यादव पिता- स्व॰ बंधु यादव -सदस्य 6. श्री विनोद प्रसाद यादव पिता- स्व॰ बृजनंदन यादव - सदस्य 7. श्री अरविन्द यादव पिता- स्व॰ भुई यादव - सदस्य

सभी निवासी- ग्रामपोस्ट- अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला- गया।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री शंकर भगवान मंदिर, ग्रामपोस्ट-अईमा, थानाअंचल- खिजरसराय, जिला-गया'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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1 अप्रील 2024

सं0 01--पंचरूपी हनुमान मंदिर,राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटना,बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0-3656 है।

उक्त न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षदीय पत्रांक- 1769, दिनांक- 10/11/2008 द्वारा एक न्यास समिति का गठन श्री राजेन्द्र खाँ (पुव डी॰आई॰जी॰) की अध्यक्षता में किया गया है। इस न्यास समिति में 09 सदस्य थे। शेष रिक्त दो पदों पद दिनांक- 05/05/2010 को नियुक्ति की गयी। पर्षदीय आदेष पत्रांक- 1872, दिनांक- 08/01/2014 द्वारा कार्यरत न्यास समिति के कार्यकाल को विस्तारित किया गया। वर्ष 2018-19 की जो प्रति प्रस्तुत की गयी, उससे स्पष्ट हुआ कि मात्र149 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पांच-छः सदस्य ही उपस्थित होते हैं। चुंकि समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुकी है। तदनुसार नवीन न्यास समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

पर्षद को दिनांक- 05/09/2023 को श्री सुरेन्द्र दुबे उर्फ त्यागी जी द्वारा ग्यारह नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया। स्थानीय लोगों द्वारा दिनांक- 11/12/2023 को ग्यारह नामों का प्रस्ताव दिया गया। कार्यरत न्यास समिति के अध्यक्ष श्री राजेंद्र खाँ वर्ष 2022-23 की विवरणी समर्पित करते हुये प्रस्तावित नामों के संबंध में कुछ तथ्य इंगित किया गया।पर्षद द्वारा पुर्व में गठित न्यास समिति के अध्यक्ष, सचिव तथा कोषाध्यक्ष एवं एक सदस्य का कार्य न केवल संतोषजनक रहा है, बल्कि प्रषंसनिय भी रहा है। शेष सदस्य, न तो समिति की बैठक में उपस्थित होते हैं और न मंदिर के किसी प्रकार के विकास आदि में सहयोग करते हैं। समिति के अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा शारीरिक स्थिति, अधिक आयु के कारण आगे समिति में रहने के लिए अपनी असमर्थता व्यक्त की है। कार्यरत न्यास समिति ने भी दिनांक- 28/12/2024 द्वारा 10 नामों का प्रस्ताव दिया है। स्थानीय जनता द्वारा दिनांक- 12/09/2023 द्वारा सदस्यों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ।

मंदिर में नियमित रूप पूजा-अर्चना तथा मंदिर में श्रद्धा रखने वाले पुलिस महानिरीक्षक से भी पर्षद द्वारा संपर्क कर उस मंदिर की व्यवस्था में सहयोग हेतु कुछ नामों के प्रस्ताव की मांग की गयी थी। उनके द्वारा 09 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया।

उपरोक्त सभी सूचियों में मंदिर की व्यवस्था हेतु अधिनियम की धारा- 32, 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत अन्तर्गत एक योजना का निरूपण करते हुये एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिये किया जाता है।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-02/03/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चातबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए पंचरूपी हनुमान मंदिर, राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटनाके सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम''पंचरूपी हनुमान मंदिर न्यास योजना, राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''पंचरूपी हनुमान मंदिर न्यास समिति, राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।150 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे। 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन 05 वर्षों के लिए किया जाता है-

1. श्री राजीव रंजन (पुलिस महानिरीक्षक) (9431186168) - अध्यक्ष 2. श्री राम प्रवेष चौधरी(चिकित्सा पदाधिकारी, IGIMS) -उपाध्यक्ष 3. श्री अतुल कुमार सिन्हा (सेवानिवृत विषेष सचिव, सामान्य प्रषासन) - सचिव पता- फ्लैट- 502, साकेत टॉवर, एस॰पी॰ वर्मा रोड, पटना। (9939195888)

4. अवधेष कुमार सिंह (अधिवक्ता) (9431459489) -सह-सचिव पता- अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, पटना (गांधी नगर, निकट हनुमान मंदिर), पाटलीपुत्रा, पटना।

5. श्री इन्दू भुषण कष्यप- 7296094202 - कोषाध्यक्ष पता-सारदा निवास, निकट CBSEक्षेत्रिय कार्यालय, ब्रह्म स्थान रोड, शेखपुरा, पटना। 6. श्री संजय कुमार सिंह (HCL) (9798047791) - सदस्य पता- सातवां तल, ए ब्लॉक, ज्योतिपुरम, पाया सं॰- 09, बेली रोड, पटना। 7. श्री राज किषोर सिंह (पटना विष्वविद्यालय) 8210995696 - सदस्य पता- राजेन्द्र नगर, रोड नं॰- 10, जे॰ एफ॰, ब्लॉक- 3, वार्ड- 30, पटना। 8. श्री प्रेम कुमार पिता- स्व॰ भूवन प्रताप आजाद, जगदेव पथ, पटना - सदस्य 9. श्री भगवान राम - सदस्य पता-पंचरूपी हनुमान मंदिर, राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटना।

10. श्री लाल बाबू, निदेषक, अनामिका रियल इन्फ्रा सर्विसेस प्रा॰ लि॰ - सदस्य पता- स्टील हाउस, एस॰ के॰ पुरी, पटना। 11. श्री आलोक कुमार, 9334645359, पता- गोला रोड, पटना - सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''पंचरूपी हनुमान मंदिर, राजवंशी नगर, शास्त्रीनगर मोड़, थानापोस्ट- गवर्नर हाउस, बेली रोड, जिला- पटना''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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24 जून 2024

सं0 885--श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। इसकी निबंधन सं0- 3489/2001 है।151 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 उक्त मंदिर को 12.5 बीघा भूमि रामध्यान तेली द्वारा निबंधित विलेख दिनांक- 25/06/1948 द्वारा ठाकुर जी के नाम दान की गयी और उनकी खरीदगी 25 क॰ भूमि पर मंदिर का निर्माण किया गया। उनके स्वर्गवास के पश्चात उनकी पत्नी सीता देवी और रेखा देवी ़द्वारा उसकी व्यवस्था की जा रही थी। उक्त महिलाओं द्वारा दिनांक- 29/01/1973 को षिव नारायण मिश्र, षिव जन्म मिश्र, राजेष्वर मिश्र सभी पिता- देवदत्त मिश्र को मंदिर की देखभाल हेतु सेवायत नियुक्त किया गया। कालांतर में उक्त मंदिर की भूमि को लेकर जगदीष मिश्र द्वारा स्वत्व वाद सं॰- 207/88 दाखिल कर उक्त महिला एवं उनके बच्चों में किया गया बंधकनामा के आधार पर दावा किया गया, जो दिनांक- 31/03/1994 को निरस्त करते हुये न्यायालय द्वारा यह मत दिया गया कि भूमि भगवान को समर्पित की जा चुकी है। इस प्रकार सेवायत को किसी प्रकार का बंधक या विक्रय करने का अधिकार नहीं है, जिसके विरूद्ध अपील सं॰- 185/2005 वर्ष 1972-75 दाखिल की गयी, जो दिनांक- 08/04/1975 को निरस्त हुयी। इसमें भी व्यवस्था हेतु एक नामित सेवायत के आग्रह पर एक न्यास समिति का गठन पर्षद के ज्ञापांक- 554, दिनांक- 12/05/2001 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में किया गया। पुनः पर्षदीय ज्ञापांक- 3768, दिनांक- 25/01/2005 द्वारा न्यास समिति का गठन किया गया। पर्षद को श्री कमलदेव, श्री सिद्ध मिश्र द्वारा सूचित किया गया कि तीन सेवायतों का स्वर्गवास हो चुका है। शेष करने में सक्षम नहीं हैं। पुर्व सेवायत श्री मिश्र के पुर्वजों द्वारा सम्पत्ति के निजी दावा करने के संबंध में स्वत्व वाद सं॰- 160/2003 भी दाखिल किया गया। इसी बीच दिनांक- 27/08/2023 को बैठक कर मंदिर की व्यवस्था हेतु न्यास समिति गठन करने हेतु नामों का चयन किया गया। अतएव उक्त वाद में मंदिर के पक्ष से भी साक्ष्य प्रस्तुत करना अतिआवष्यक है। इसके लिए न्यास समिति का गठन भी शीघ्र किया जाना उचित प्रतीत होता है। चुंकि न्यास की पुर्व न्यास समिति के अधिकांष सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है। प्रषासनिक पदाधिकारियों से भी समिति गठन के संबंध में नामों की मांग की गयी, परंतु कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ।

उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा- 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण करते हुये दिनांक- 28/07/2023 में प्रस्तावित नामों की अस्थायी न्यास समिति एक वर्ष के लिए गठित किया जाता है। प्रस्तावित नामों का चरित्र-सत्यापन तथा कार्य संतोषजनक पाये जाने एवं अधिनियम की धारा- 59, 60 एवं 70 का पालन करने के उपरांत स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक- 15/04/2024 द्वारा अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 में एवं धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0- 43 (द) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास योजना, ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मंदिर न्यास समिति, ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाता का संचालन न्यास समिति के दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।

5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों, धारा- 59, 60 एवं 70 का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।़152 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपलब्धता की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष करेंगे। 14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

16. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो, उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है-

1. अनुमंडल पदाधिकारी, - अध्यक्ष 2. श्री सुरेन्द्र मिश्र - उपाध्यक्ष 3. श्री कमलदेव मिश्र - सचिव 4. श्री हरेराम पाण्डे - कोषाध्यक्ष 5. श्री अभिमन्यू सिंह - सदस्य 6. श्री कमलेष यादव - सदस्य 7. श्री रमाषंकर पाण्डेय - सदस्य 8. श्री विजय कुमार मिश्र - सदस्य 9. श्री विभवषंकर पाण्डेय - सदस्य 10. श्री कन्हैया राम - सदस्य सभी का पता- ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री राम जानकी मंदिर, ग्राम- उधुरा, पोस्ट- दल्लुपुर, थाना- ब्रह्मपुर, जिला- बक्सर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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3 जुलाई 2024

सं0 1024--श्री प्राण कृष्ण मंदिर, दानापुर कैंट, अंचल- दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, जिला-पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन (cid:2872)(cid:2876)(cid:2869)(cid:2870)

सं0- है।

(cid:2870)(cid:2868)(cid:2870)(cid:2872)

उक्त न्यास के संबंध में मार्च 2021 में गोपाल दास व अन्य 50 व्यक्तियों का हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र दिया गया। इसमें श्री धीरेन्द्र कुमार पिता- नवल किषोर शर्मा द्वारा निबंधित दान-पत्र दिनांक- 22/04/1992 को जो जन कल्याण संघाश्रम धार्मिक मिषन, सिलीगुड़ी के पक्ष में हो॰- 18, महाल- 03, वार्ड- 04 स्थित मोहल्ला मार्षल बाजार, दानापुर को 17, फीट पुरब से पष्चिम गुणे 52 फीट उत्तर से दक्षिण में दो मंजिला भवन के संबंध में है। साथ ही मंदिर के स्वरूप को बदलने के संबंध में कुछ आरोप भी गठित किये गये। उक्त षिकायत-पत्र पर अंचलाधिकारी एवं थानाध्यक्ष से प्रतिवेदन की मांग की153 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 गयी। साथ ही पवन कुमार को भी नोटिस भेजकर पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। श्री पवन कुमार द्वारा अपना प्रत्युत्तर दिनांक- 07/07/2023 को समर्पित किया गया। इसके उपरांत विभिन्न तिथियों पर उभय पक्षों को पर्याप्त अवसर देने हुये सुना गया। उभय पक्षों ने अपने-अपने दावा के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किये।

उपरोक्त न्यास की जांच पर्षद एवं अंचलाधिकारी द्वारा करायी गयी। इस संबंध में दोनों पक्षों को विषेषकर पवन कुमार को पर्षद द्वारा सहमति के आधार पर उक्त मंदिर पर कोई विवाद न करने का परामर्ष दिया गया। पर्षद के उक्त प्रस्ताव के आलोक में श्री पवन कुमार द्वारा लिखित प्रार्थना-पत्र जिस पर पवन कुमार व उनके अधिवक्ता का हस्ताक्षर दिनांक- 27/04/2024 को दाखिल कर उक्त मंदिर स्थित भाग को सार्वजनिक धार्मिक स्थल के रूप में घोषणा किये जाने हेतु अपनी सहमति दी और कथन किया गया कि उक्त मंदिर के देखभाल हेतु न्यासधारी की मान्यता दी जाय। आगे कथन किया गया कि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति शेष भूमि के संबंध में कोई हक या दावा नहीं करेगा और न उनके कब्जा किसी प्रकार का प्रतिरोध करेगा तथा उनके द्वारा मंदिर स्थित नक्षा भी बना कर दिनांक- 29/04/2024 को दाखिल किया गया। इसमें उसकी पुरब-पष्चिम 11 फीट, उत्तर-दक्षिण 13 फीट और पष्चिम की ओर लगभग 03 फीट चौड़ी सिढ़ी दर्षित की गयी।

स्थानीय लोगों का कथन है कि पवन कुमार के मंदिर को सार्वजनिक घोषित किये जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और उन्हें न्यासधारी बनाया गया। साथ प्राण संप्रदाय से आने वाले कुछ लोगोें को भी कार्य करने की सहभागिता दी जाय। दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर हो॰- 18, महाल- 03, वार्ड- 04 के प्रथम मंजिल पर स्थित पष्चिम की तरफ उपरोक्त 11X13 फीट भवन जिसमें माँ काली, प्राण नाथ एवं गुरू माता की प्रतिमा विराजमान है, उसे सार्वजनिक धार्मिक न्यास की मान्यता प्रदान करते हुये निबंधित किये जाने का निर्देष दिया गया।

उपरोक्त परिस्थिति में प्राप्त प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत अधिनियम की धारा-32 एवं 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास की उपविधि 1953 की धारा- 43 के तहत उक्त मंदिर की व्यवस्था हेतु एक योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

अतः पर्षदीय आदेष दिनांक-03/05/2024 के अनुमोदन के पश्चात बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 एवं 83 एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास पर्षद की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री प्राण कृष्ण मंदिर, दानापुर कैंट, अंचल- दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, जिला-पटना की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सुप्रबंधन हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री प्राण कृष्ण मंदिर न्यास योजना, दानापुर कैंट, अंचल- दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, जिला-पटना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री प्राण कृष्ण मंदिर न्यास समिति, दानापुर कैंट, अंचल- दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, जिला-पटना'' जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष / सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

8. न्यास समिति द्वारा मठ / मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।154 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

15 गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1960 (पी॰सी॰ए॰) की धारा- 11, भारतीय दण्ड विधान (I.P.C.) की धारा- 428, 429 के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। न्यास / मठ / मंदिर परिसर में रहने वाले पशुओं (गोवंष / गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना / भोजन नहीं देना / ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः करना, जिसका उद्देष्य ''पशु की क्रुरता या वध'' होता हो या उक्त कार्यों को बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यासधारी / सेवायत / महंत / न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

17. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

18. यह अधिसूचना बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अनुमोदन के पश्चात प्रकाषित की जा रही है। पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की एक न्यास समिति गठित की जाती हैः-

1. श्री पवन कुमार- पता- अषोक नगर, दानापुर, जिला- पटना-801503- न्यासधारी 2. श्री प्रदीप कुमार पिता-स्व॰ यमुना प्रसाद सिन्हा, अभियंता नगर, बेली रोड, पटना-801503 (7488411099) 3. श्री दिलीप कुमार सिन्हा पिता-स्व॰ सुखदेव प्रसाद सिन्हा, बीबीगंज, बाटा रोड, पटना-801503 (9386277713) 4. श्री संजय कुमार पिता-स्व॰ महादेव प्रसाद, तकिया पर, निचली रोड, अवस्थी घाट, पटना-801503, मो॰- 6207024775

सभी निवासी-श्री प्राण कृष्ण मंदिर, दानापुर कैंट, अंचल-दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, पटना। उपरोक्त न्यास समिति में क्रम सं॰- 02-04 जो प्राण संप्रदाय से दीक्षित रखते हैं, को भी न्यास समिति में रखा जाता है और इस निर्देष के साथ कि मंदिर की सभी व्यवस्था एवं कार्य को बहुमत से निर्णय के आधार पर किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में ''श्री प्राण कृष्ण मंदिर, दानापुर कैंट, अंचल- दानापुर, थाना-दानापुर कैंट, जिला-पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः- न्यास समिति / पदाधिकारी / सदस्य को न्यास की किसी भी सम्पत्ति / भूमि का हस्तान्तरण / बदलैन / विक्रय / पट्‌टा / लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

उक्त अधिसूचना / आदेष माननीय सदस्यों द्वारा अनुमोदित है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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13 जून 2024

सं0 779--श्री ज्येष्ठ गौरनाथ षिव मन्दिर, (जेठौर पर्वत चानन नदी के किनारे) ग्रामपो0- जेठौर जमुआ, अंचलथाना- अमरपुर, जिला-बांका, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 3726 है। इस न्यास की व्यवस्था हेतु दिनांक-24.02.2007 को 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था। परन्तु न्यास समिति द्वारा गठन के पष्चात्‌ से अधिनियम की धारा-59, 60, 70 का किसी प्रकार का कोई पालन नहीं किया गया। समिति के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को लगातार पत्र लिखे जाने के बाबजूद भी न तो उपस्थित हुए न कोई कार्रवाई की गयी। दिनांक-01.08.2023 को पहली बार निरंजन सिंह द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया कि पिछले 15 वर्षो से वह मन्दिर की देख-भाल कर रहे है। प्रार्थी को पूर्व अध्यक्ष स्व0 नुनुमणि सिंह व न्यास समिति के अन्य सदस्यों के द्वारा देख-भाल हेतु सर्वसम्मति से रखा गया था। आगे उल्लेख किया कि स्थानीय लोगों के द्वारा मन्दिर के विकास हेतु समिति बनाकर मन्दिर का संचालन प्रारम्भ कर रहें है और आज स्थानीय मुखिया के संरक्षण में मन्दिर पर कब्जा कर लूट खसोट मचाये हुए है।अतः मन्दिर को उक्त लोगों एवं बालू माफिया से मुक्त कराया जाए। उपरोक्त पत्र पर निरंजन सिंह से उनकी स्वीकृति अनुसार 15 वर्षो की आय-व्यय विवरण, मन्दिर की भूमि का दस्तावेज, मन्दिर का फोटो तथा अंचलाधिकारी से अवैध कब्जा किये जाने के संबंध में रिपोर्ट की मांग की गयी तथा संबंधित155 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 थाना को भी जाँच कर रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देष दिया गया। जिसपर अंचलाधिकारी के द्वारा तो कोई कार्रवाई नहीं की गयी परन्तु थाना द्वारा अपनी रिपोर्ट दिनांक-30.10.2022 जो पर्षद को 30.11.2022 को प्राप्त कराया गया है, उपलब्ध करायी। जिसमें पूर्व कमिटी के द्वारा नामित निरंजन कुमार द्वारा किये गये कार्य तथा वर्त्तमान स्वयं-भू समिति के द्वारा किए गए कार्य का विस्तृत रूप से उल्लेख किया गया और अंत में उल्लेख किया कि उभय पक्षों ने किसी व्यक्ति द्वारा धमकी गुण्डागर्दी नहीं किये जाने की बात बतलाया गया और स्थानीय पुलिस द्वारा मन्दिर की निगरानी की जा रही है। इसी बीच स्थानीय लोगों द्वारा दिनांक-17.04.2022 में श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में जो बैठक कर समिति का गठन किया गया था। उसकी फोटोप्रति दाखिल की गयी तथा निरंजन कुमार द्वारा मन्दिर की भूमि से संबंधित नेट के माध्यम से निकाली गयी खतियान की प्रति दाखिल की। जिसका खाता संख्या-47, एरिया 01 ए0 26 डी0 जमीन रैयत के रूप में जैठोर नाथ महादेव मन्दिर जिसका थाना नं0-354, जमाबन्दी संख्या-164 है। तथा उनके द्वारा वर्ष 2008 से 2022 तक की वार्षिक आय-व्यय दाखिल की गयी, जिसमें उक्त लगभग 15 वर्षो में कुल 27,60,164/- रुपये की आय तथा लगभग 27 लाख रुपये खर्च दिखलाया गया और कथन किया कि 75,444/- रुपये उनके पास नगद अभी है। इस संबंध में कार्यालय को निर्देष दिया गया है कि उपरोक्त वर्षो की आय-व्यय विवरण को देखकर अधिनियम की धारा 70 के तहत्‌ जो शुल्क बनता है, उसे सूचित करें और निरंजन कुमार सिंह को निर्देष दिया गया है कि शुल्क की राषि पर्षद में डी0 डी0 या नगद के माध्यम से जमा करेंगे। स्वयं-भू समिति द्वारा भी प्रष्नगत मन्दिर के संबंध में 2 रजिस्टर उपस्थापित की गयी, जिसमें उनका कथन है कि प्रत्येक सोमवार को जो 07 दिनों की आय होती है, जो खर्च होता है, उसका संधारण किया जाता है। जो जूलाई, 2022 से जूलाई 2023 तक में कुल 02 लाख 70 हजार 60 रुपये की आय दर्षित की गयी तथा व्यय षिवरात्री सप्ताह आदि में 02,16,557/- रुपये एवं गणेष पार्वती स्थापना में 54,829 रुपये तथा कुल 55 लाख 32 हजार 616 रुपये तथा खर्च के रूप में 10 लाख 72 हजार 509 रुपये दिखलाया गया है। आगे उल्लेख किया है कि युको बैक, मकदुम में भी 42,985/- रुपये जमा है। उपरोक्त आधार पर 02 लाख 12 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च दिखलाया गया है। आगे कथन करते है कि 01 लाख 19 हजार रुपये 06 बैटरी व इन्वर्टर क्रय किया गया है, जिसमें 80,000/- रुपये का भुगतान किया जा चुका है। दोनों पक्षों को स्वीकार है कि वर्त्तमान में वर्ष 2014 से पर्यटन विभाग द्वारा 6-7 कमरों का धर्मषाला तथा संसद कोटे से एक विवाह भवन वर्ष 2015-16 में जिला परिषद से दो सामुदायिक भवन जिसमें 1-1 हॉल व रूम है। और 17 गुम्बजनुमा मन्दिर है, प्रत्येक मन्दिर में देवी-देवता की मूर्त्ति है। 05 दुकाने है, जिसमें से 03 दुकानदारों द्वारा किराया दिया जाता है और जो दो दुकान सामुदायिक भवन में है, वह कोई किराया नहीं देते है। उपरोक्त परिस्थितियाँ यह स्पष्ट करती है कि उक्त मन्दिर की आय का पर्याप्त साधन है, विवाह भवन है, 2-2 सामुदायिक भवन पर्यटन विभाग द्वारा बनाया गया विवाह भवन आदि से किराये के रूप में समुचित आय प्राप्त होती है। इस संबंध में न्यास समिति उक्त भवनों का अलग-अलग रजिस्टर संधारण करे उसमें किस दिन किस व्यक्ति को दिया गया है, उसका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। पूर्व न्यास समिति का कार्य पुर्ण रूप से असंतोषजनक रहा है। जिसमें निरंजन कुमार सिंह का कथन है कि वह पिछले 15 वर्षो से देख-भाल कर रहे है और चूंकि मन्दिर के संबंध में ही सांसद कोटा, पर्यटन विभाग जिला परिषद से दौड़धूप कर निर्माण कराया गया है। आगे उनका कथन है कि वर्ष 2007 में गठित न्यास समिति के अधिकांष व्यक्तियों का स्वर्गवास हो गया है और शेष लोगोसे मन्दिर में किसी प्रकार का सहयोग प्राप्त नहीं होता है तथा उनके द्वारा भी नयी न्यास समिति गठन कर कुछ नामों का प्रस्ताव दिया गया है। जबकि स्वयं-भू न्यास समिति द्वारा आय-व्यय का जो रजिस्टर प्रस्तुत किया गया है, वह स्पष्ट करता है कि उनके कार्य में पारदर्षिता है। यह सही है कि उनके द्वारा आय से अधिक खर्च किया गया है, जो भविष्य में नहीं होना चाहिए और किसी भी संस्था को चलाने के लिए आय से कम ही खर्च किया जाना चाहिए, अन्यथा संस्था का संचालन विवाद के घेरे में आ जाता है। इस बात का भी गठन किये जाने वाले न्यास समिति भविष्य में ध्यान रखें।

उक्त सभी परिस्थितयों पर विचारोपरान्त एवं दोनों पक्षों की उपस्थित तथा प्रस्तावानुसार पर्षद की सूनवाई आदेष दिनांक- 12.02.2024 में यह निर्णय लिया गया की एक योजना का निरूपण करते हुए एक न्यास समिति का गठन किया जाए। अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 एवं 83 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री ज्येष्ठ गौरनाथ षिव मन्दिर, (जेठौर पर्वत चानन नदी के किनारे) ग्रामपो0- जेठौर जमुआ, अंचलथाना- अमरपुर, जिला- बांका,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।

योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री ज्येष्ठ गौरनाथ षिव मन्दिर, (जेठौर पर्वत चानन नदी के किनारे) ग्रामपो0- जेठौर जमुआ, अंचलथाना- अमरपुर, जिला- बांका,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' श्री ज्येष्ठ गौरनाथ षिव मन्दिर, (जेठौर पर्वत चानन नदी के किनारे) ग्रामपो0- जेठौर जमुआ, अंचलथाना- अमरपुर, जिला- बांका,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।156 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री दुर्गा कुमार सिंह, पिता- बलराम प्रसाद सिंह, - अध्यक्ष।

पता-ग्रामपो0- जठौर, जमुआ, थाना- अमरपुर, जिला- बांका।

2. श्री अवधेष कुमार सिंह, पिता- त्रिवेणी प्रसाद सिंह, - उपाध्यक्ष।

पता- ग्राम- कठैल, थाना- अमरपुर।

3. श्री पंकज कुमार सिंह, पिता- सत्येन्द्र प्रसाद सिंह, - सचिव।

पता- ग्राम- चिलकावर, पो0 मंझोनी, थाना- रंजौन।

4. श्री सूर्यदेव सिंह, पिता- प्रदुमन सिंह, - कोषाध्यक्ष।

ग्रामपो0- जठौर जमुआ, थाना- अमरपुर।

5. श्री प्रदीप कुमार सिंह, पिता- स्व0 धीरू प्रसाद सिंह, - सदस्य।

पता-ग्रामपो0- कठेल, थाना- अमरपुर।

6. श्री प्रभाष प्रसाद सिंह, पिता-गंगा प्रसाद सिंह, - सदस्य।

पता- ग्राम- बथनियाँ, पो0- मंझोनी, थाना- रंजौन,

7. श्री कौषल किषोर सिंह, पिता- अभीराम सिंह, - सदस्य।

पता- ग्रामपो0- कठेल, थाना- अमरपुर।

8. श्री स्वराज प्रसाद सिंह, पिता- भोला प्रसार सिंह, - सदस्य।

पता- ग्राम- चिल्कावर, पो0- मंझोनी, थाना- रंजौन

9. श्री निरंजन कुमार सिंह, पिता- स्व0 अभिराम सिंह, - उपाध्यक्ष।157 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पता-ग्रामपो0- कठेल, थाना-अमरपुर।

10. श्री उपेन्द्र यादव, पिता- स्व0 जगदीष वैध, - सदस्य।

पता- ग्राम-मादाचक, पो0- कठेल,

11. श्री राजीव कुमार सिंह, पिता- रामविषाल सिंह, वार्ड सदस्य - सदस्य।

पता-ग्रामपो0- कठेल, थाना- अमरपुर।

सभी जिला- बांका ।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मंदिर की भूमि, भवन, दुकान आदि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें। न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि बैक खातें का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात दो व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से ही किया जायेगा और समिति यह प्रयास करें कि आय का अधिकांष भाग मन्दिर का जीर्णोद्धार में खर्च करें एवं अर्द्धनिर्मित कार्य को पुर्ण करने में भी खर्च किया जाये। उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति के सभी सदस्यों का चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर न्यास समिति के कार्यकाल का विस्तार किये जाने पर विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री ज्येष्ठ गौरनाथ षिव मन्दिर, (जेठौर पर्वत चानन नदी के किनारे) ग्रामपो0- जेठौर जमुआ, अंचलथाना- अमरपुर, जिला- बांका,'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना का प्रारूप पर्षद के मा0 सदस्यों के अनुमोदनार्थ प्रेषित।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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5 अप्रील 2024

सं0 60--बाबा गणीनाथ धाम, मनहार, ईषहाकपुर, जिला- वैषाली, पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4124 है। उक्त मन्दिर की व्यवस्था हेतु समय-समय पर न्यास समिति का गठन किया जा रहा है। अंतिम न्यास समिति का गठन पत्रांक-495, दिनांक-05.06.2017 द्वारा श्री रविन्द्रनाथ साह की अध्यक्षता में गठित की गयी थी। समिति द्वारा गठन के उपरान्त कोई आय-व्यय विवरणी, बजट, शुल्क नहीं जमा किया जा रहा था, जिसपर पर्षद द्वारा दिनांक-08.09.2022 को समिति के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को नोटिस जारी करके अधिनियम की धारा 59, 60, 70 का पालन करने का निर्देष दिया गया है, जिस आलोक में पर्षद द्वारा दिनांक-28.02.2023 को पर्षद शुल्क जमा किया गया। शेष बकाया राषि जमा करने का निर्देष दिया जाता है। आय-व्यय विवरणी दाखिल करने के संबंध में, समिति के कोषाध्यक्ष षिवनाथ साह द्वारा किसी प्रकार की कोई सहयोग नहीं करने के कारण बिलम्ब बतलाया गया। आमसभा दिनांक-20.09.2023 में 11 व्यक्तियों का चयन किया गया है, जिसमें पूर्व समिति के 06 व्यक्तियों को भी चयन किया गय है। पूर्व न्यास समिति के अध्यक्ष उपस्थित है और उनका कथन है कि वह शारीरिक स्वास्थ के कारण समिति में नहीं रहना चाहते है तथा दिनांक-04. 10.2019 को षिवनाथ साह द्वारा पर्षद में एक प्रार्थना-पत्र देकर समिति के सदस्य और कोषाध्यक्ष को पदमुक्त किये जाने का भी प्रार्थना-पत्र दिया गया है और उपरोक्त कारणों से वर्त्तमान न्यास समिति में उनके नाम का प्रस्ताव भी नहीं किया है। अंचलाधिकारी से न्यास समिति गठन के संबंध में नामों की मांग की गयी थी, जो अबतक अप्राप्त है। मन्दिर में मात्र 10-11 डी0 जमीन है। मन्दिर में वार्षिक 2-3 दिन का लगने वाले मेला ही आय का स्त्रोत और कुछ छोटी-मोटी राषि दैनिक दानपेटी और चंदे आदि से प्राप्त होती है, बतलायी गयी। मन्दिर के नाम से 1.5 क0 भूमि जनसामान्य के चंदे आदि से मार्फत बैधनाथ साह सेवायत अंकित करते हुए क्रय किया गया है। जिसपर उपस्थित सदस्य का कथन है कि धर्मषाला बनाये जाने का उद्‌देष्य है। पूर्व न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वर्त्तमान प्रस्ताव में किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं प्राप्त है। अतः एक योजना का निरूपण करते हुए प्रस्तावित नामों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठन किया जाता है। प्रस्तावित नामों का चरित्र सत्यापन प्राप्त होने और 01 वर्ष संतोषजनक कार्य पाये जाने परसमय विस्तार विचार किया जायेगा।

अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32, 83 में एवं उपविधि 43 (द) के तहत धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए ''बाबा गणीनाथ धाम, मनहार, ईषहाकपुर, जिला- वैषाली,''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।(cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 158 योजना

1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' बाबा गणीनाथ धाम, मनहार, ईषहाकपुर, जिला- वैषाली ,'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बाबा गणीनाथ धाम, मनहार, ईषहाकपुर, जिला- वैषाली,'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। खाते का संचालन अध्यक्ष/सचिव में से कोई एक व्यक्ति तथा कोषाध्यक्ष अर्थात 02 व्यक्तियों के संयुक्त हस्ताक्षर से हीं किया जायेगा।

4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।

5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।

7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।

8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।

9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी।

11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा बैठक की जायेगी एवं बैठक के उपरान्त बैठक में लिए गये निर्णय से न्यास समिति के अध्यक्ष को भी अवगत कराया जायेगा।

13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।

15. गोवंष एवं अन्य पशुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा-11, एवं भारतीय दंड संहिता की धारा- 428 व 429 के तहत दंडनीय अपराध है। अतः न्यास/मंदिर/मंठ आदि में रहने वाले गोवंष एवं अन्य पशुओं (गोवंष/गोधन) को बेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नहीं देना/ऐसा कोई कार्य करना जिससे किसी पशु के प्रति क्रुरता एवं परिणाम वध/मृत्यु होता हो या ऐसे कार्यो को बढ़ावा मिलता हो ऐसा कोई कार्य कोई भी न्यासधारी/सेवायत/महंत या न्यास समिति के सदस्यों द्वारा नहीं किया जायेगा।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री बैधनाथ साह, पिता-स्व0 राम बली साह - अध्यक्ष पता- ग्राम- जक्कोपुर, महनार, वार्ड नं0-22, वैषाली। 2. श्री अमरेष कुमार गुप्ता, पिता-स्व0 सूर्य देव साह - उपाध्यक्ष पता-वार्ड नं0- 20, महनार, वैषाली। 3. श्री संतोष गुप्ता, पिता-स्व0 दिनेष साह - सचिव पता-वार्ड नं0-19, महनार, वैषाली। 4. श्री मनीष कुमार साह, पिता-श्री रामप्रवेष साह - उप सचिव पता-ग्राम- लावापुर, महनार, वैषाली। 5. श्री मिथलेष कुमार गुप्ता, पिता-श्री हरिषंकर साह - कोषाध्यक्ष159 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 पता- जक्कोपुर, महनार, वार्ड नं0-22, वैषाली।

6. श्री राजकुमार साह, पिता- श्री महेष साह - सदस्य पता-ग्राम-महनार, वार्ड नं0-22, वैषाली। 7. श्री सुनील साह, पिता-स्व0 जामुन प्रसाद - सदस्य पता- ग्राम- महनार, वार्ड नं0-09, वैषाली। 8. श्री कृष्ण मोहन गुप्ता, पिता- श्री जवाहर गुप्ता - सदस्य पता-ग्राम-महनार, वार्ड नं0-06, वैषाली। 9. श्री शमषेर प्रसाद साह, पिता-स्व0 युगल प्रसाद साह - सदस्य पता-ग्राम-महनार, वार्ड नं0-11, वैषाली। 10. श्री संजय साह, पिता-स्व0 रामराजी साह - सदस्य पता- ग्राम-महनार, वार्ड नं0-18, वैषाली। 11. श्री अनील गुप्ता पिता- श्री रघुनाथ साह - सदस्य पता-ग्राम-महनार, वार्ड नं0-22, वैषाली। सभी जिला- वैषाली। न्यास समिति को ही मठ की सम्पूर्ण भूमि को बंदोबस्ती करने का अधिकार रहेगा तथा जो अतिक्रमण में भूमि है उसको मुक्त कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों और न्यायालयों में प्रार्थना-पत्र और मुकदमा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया जाता हैं।

न्यास समिति को पूर्ण रूप से अधिकार होगा की नये सिरे से मठ/मंदिर की भूमि की बन्दोबस्ती करें तथा पुराना बकाया राषि की बसूली करें।

उपरोक्त वर्णित न्यास समिति का कार्य-काल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 01 वर्ष का होगा। न्यास समिति का कार्य संतोषजनक पाये जाने पर आगे विचार किया जायेगा।

उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''बाबा गणीनाथ धाम, मनहार, ईषहाकपुर, जिला- वैषाली, '' के नाम से ही रहेगा, इसमें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-1) न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय /पट्‌टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

(2) यह अधिसूचना पर्षद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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26 जून 2024

सं0 901--श्री राम जानकी (भड़भड़वा) मठ, ग्राम-भड़भड़वा, पो0-मुरली परसौनी, थाना-पुरूषोतमपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जिसकी निबंधन संख्या-4407/2015 है। उक्त मंदिर के खाता सं0-03 की 13 खेसराओं में 07 ए0 90 डी0 भूमि न्यास के नाम इन्द्राज है। दाखिल -खारिज वाद सं0-23/69-70 द्वारा तत्कालीन न्यासधारी राधामोहन पाण्डे न्यास भूमि का इन्द्राज कराते हुए भूमि का अवैध अंतरण किया गया। कुछ वर्षो के उपरांत उक्त भूमि पर स्थानीय मुखिया पति द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया। वर्तमान में उक्त स्थान पर दो मंदिर है। एक मंदिर काफी पुराना एवं दूसरा नवनिर्मित मंदिर है। मठ की जमीन पर ही उत्तर दिषा में एक विद्यालय स्थित है। मंदिर के निबंधन के पश्चात्‌ श्री राम यादव की अध्यक्षता में एक ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति का गठन अधिसूचना ज्ञापांक-384 दिनांक-10.5.2016 द्वारा किया गया। न्यास समिति द्वारा पर्षद के आदेषो-निर्देषों एवं अधिनियम की धारा 59, 60, 70 का अनुपालन नहीं किया गया। दिनांक-09.03.2024 को श्री अनिरूद्ध प्रसाद व 10 अन्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया जिसमें उल्लेख किया गया कि समिति द्वारा मंदिर की भूमि पर कब्जा प्राप्त कर लिया गया है। मंदिर की भूमि के बटाई से कुछ राषि प्राप्त हुयी है और कुछ व्यक्तियों से चंदा/दान प्राप्त कर मंदिर का जीर्णोद्धार एवं मंदिर में गुम्बज, दीवाल व फर्ष का प्लास्टर, लोहे का गेट, खिड़की का निर्माण किया गया है।यह भी उल्लेख करते हैं कि वर्ष 2023-24 में विद्युत वाईरिंग, फर्ष पर टाईल्स लगाया गया। प्रार्थना पत्र के साथ ग्रामीणों की आम सभा दिनांक-9.10.18, 30.7.18 22.10.22, 09.03.2024 की बैठक की कार्रवाई तथा मंदिर का 04 फोटोग्राफ भी दाखिल किया गया है। नवीन न्यास समिति गठन के सम्बंध में बैठक दिनांक-09.03. 2024 को किया गया। जिसमें 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव समिति गठन हेतु दिया गया है जिमसें श्री अनिरूद्ध प्रसाद को अध्यक्ष के रूप में एवं पूर्व न्यास समिति से 03 व्यक्तियों को भी स्थान देने का आग्रह किया गया है। वर्ष 2016-17 से 2022-23 तक मंदिर की भूमि से हुये आय पर आय-व्यय विवरणी श्री भोला सिंह द्वारा दाखिल किया गया है। उपरोक्त परस्थितियॉ स्पष्ट करती है कि प्रस्तावित समिति के द्वारा संतोषजनक कार्य किया गया है और प्रस्तावित न्यास सिमति के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई आपत्ति/षिकायत भी प्राप्त नहीं हुयी है।160 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार हिन्दू धार्मिक अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं 83 एवं बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास उपविधि 1955 की धारा 43 के तहत अध्यक्ष को प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेष दिनांक-09.05.2024 द्वारा ''श्री राम जानकी (भड़भड़वा) मठ, ग्राम-भड़भड़वा, पो0-मुरली परसौनी, थाना-पुरूषोतमपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण'' के सम्यक्‌ विकास, जीर्णोद्धार, प्रबंधन एवं उसकी सम्पत्तियों के संरक्षण एवं सुरक्षित रखने हेतु एक योजन का निरूपण किया जाता है :-

योजना

01. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी (भड़भड़वा) मठ, ग्राम-भड़भड़वा, पो0-मुरली परसौनी, थाना-पुरूषोतमपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण, न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी (भड़भड़वा) मठ, ग्राम-भड़भड़वा, पो0-मुरली परसौनी, थाना-पुरूषोतमपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण, न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।

02. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास जीर्णोद्धार, विकास एवं प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करना होगा। 03. न्यास का बचत खाता राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जायेगा और खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10,000/-रूपयें या उससे अधिक का व्यय का भुगतान चेक द्वारा किया जायेगा एवं अन्य व्यय भी न्यास के खाते से निकासी कर ही किया जायेगा।

04. न्यास समिति यदि किसी प्रकार का कोई धार्मिक आयोजन/निर्माण/विकास आदि का कार्य करता है और उसमें 05 लाख से अधिक राषि व्यय होने का अनुमान हो तो खर्च करने से पूर्व पर्षद से अनुमति प्राप्त करना आवष्यक होगा और यदि उपरोक्त राषि निर्धारित सीमा के अंदर आती है तो भी उसकी सूचना पर्षद को दी जायेगी ।

05. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास का आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी। 06. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक का कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित करेगी।

07. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जाएगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

08. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 09. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

10. न्यास समिति के किसी भी सदस्य को न्यास की अचल सम्पत्ति को बिक्री करने, बदलैन करने एवं तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए किराया देने का कोई अधिकार नहीं होगा जबतक कि लिखित रूप में इस संबंध में पूर्व सहमति पर्षद से प्राप्त नहीं कर लिया जाय। साथ ही न्यास समिति के सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संंबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

11. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

12. गोवंष एवं अन्य पषुओं और उनके प्रति होने वाली क्रुरता, पषु क्रुरता निवारण अधिनियम, 1990 (पी0सी0ए0) की धारा-11, भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की धारा-428, 429के तहत दंडनीय अपराध बनाया गया है। अतः धर्मषाला परिसर में किसी भी प्रकार के पषुओं (गोवंष/गोधन) कोबेसहारा खुला छोड़ना/भोजन नही देना/ऐसा कोई कृत्य, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसका उद्‌देष्य ''पषु की क्रुरता एवं वध'' होता हो या उक्त कार्यो का बढ़ावा मिलता हो, ऐसा कोई कृत्य न्यास समिति के सदस्याें द्वारा नहीं किया जायेगा।

अतः पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए प्रस्तावित नामों में से 11 व्यक्तियों का न्यास समिति अस्थायी रूप 01 वर्ष के लिए बनायी जाती है। चरित्र सत्यापन प्राप्त होने के उपरांत न्यास समिति का अवधि विस्तार करने पर विचार किया जायेगा।

01. श्री अनिरूद्ध प्रसाद, पिता-स्व0 भरत महतो - अध्यक्ष।

02. श्री मदन यादव, पिता-श्री जगदीष महतो - सचिव।

03. श्री झुनु कुमार, पिता-श्री सुनील पाण्डेय - कोषाध्यक्ष।

04. श्री भोला सिंह, पिता-स्व0 विष्वनाथ सिंह - सदस्य।

05. श्री जितेन्द्र राय, पिता-श्री रामरेखा राय - सदस्य।

06. श्री प्रमोद प्रसाद, पिता-स्व0 भरत प्रसाद - सदस्य।

07. श्री रूपेष प्रसाद, पिता-श्री अवध किषोर साह - सदस्य।161 (cid:464)बहार गजट, 1 जनवरी 2025 08. श्री लवकुष साह, पिता-स्व0 विष्वनाथ साह - सदस्य।

09. श्री प्रवेष कुमार, पिता-श्री आषीष यादव - सदस्य।

10. श्री राम प्रवेष यादव, पिता- श्री लालदेव यादव - सदस्य।

11. श्री नागेष्वर कुषवाहा, पिता-श्री ध्रूप महतो - सदस्य।

सभी निवासी ग्राम-भड़भड़वा, पो0-मुरली परसौनी भाया-सिकटा, थाना-पुरूषोतमपुर, जिला-पष्चिम चम्पारण, पिनकोड- 845307.

नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तांतरण/बदलैन/ विक्रय/पट्‌टा/लिज आदि पर देने या किसी भी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शून्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। यह अधिसूचना पर्षद द्वारा स्वीकृत है।

आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 41—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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